Crime Story: खुल गया हत्या का रहस्य

Crime Story: रात लगभग 2 बजे का समय था. घर के दरवाजे की कुंडी बजी. दरवाजा राजरानी ने खोला राजरानी ने देखा कि उस के पति मूलचंद प्रजापति को 2 लोग बाइक से घायल व अचेत अवस्था में ले कर आए थे. पति की हालत देख कर राजरानी घबरा गई.

इस से पहले कि वह उन दोनों से पति की हालत के बारे में पूछती, वे दोनों मूलचंद को बेहोशी की हालत में दरवाजे पर ही छोड़ यह कह कर चले गए कि इन्होंने ज्यादा शराब पी रखी है. दोनों व्यक्तियों के चेहरे कपड़े से ढके थे. वह अपने पति को किसी तरह घर के अंदर लाई और होश में लाने के लिए उस के चेहरे पर पानी के छींटे मारती रही, लेकिन होश नहीं आया. पति के गले और सिर पर चोट के निशान दिख रहे थे. उस ने बच्चों को जगाने की कोशिश की, लेकिन बच्चे गहरी नींद में सोए थे.

सुबह लगभग 6 बजे मूलचंद की मौत हो गई. यह घटना 7 अक्तूबर, 2020 की है. फिरोजाबाद शहर के थाना उत्तर क्षेत्र स्थित श्रीराम कालोनी निवासी 39 वर्षीय मूलचंद शटरिंग मिस्त्री था. पत्नी राजरानी घर पर ही चूडि़यों पर नग लगाने का काम करती थी. पति की मौत पर राजरानी व बच्चों की चीखपुकार सुन कर मोहल्ले में जगार हो गई थी. पड़ोसियों ने उस के घर आ कर देखा, मूलचंद की मौत हो चुकी थी. मूलचंद के बेटे राहुल ने पिता की मौत की जानकारी द्वारिकापुरी में रहने वाले अपने ताऊ रामदास को दी.

कुछ ही देर में रामदास भी वहां पहुंच गया. जैसेजैसे लोगों को इस घटना की जानकारी मिलती गई. वैसेवैसे वहां पर लोगों का जमघट लगता गया. तब तक सुबह के लगभग 7 बज गए थे. इसी बीच किसी ने थाना उत्तर में सूचना दे दी. थानाप्रभारी अनूप कुमार भारतीय सूचना मिलते ही पुलिस टीम के साथ घटनास्थल के लिए रवाना हो गए. सूचना मिलने पर सीओ (सिटी) हरिमोहन सिंह भी मौके पर पहुंच गए.घटनास्थल पर पहुंच कर पुलिस ने जांचपड़ताल की. मृतक मूलचंद के सिर से खून बह कर जम चुका था तथा गले पर भी चोट के निशान थे. मिस्त्री की मौत होने से उस के बच्चों व पत्नी का रोरो कर बुरा हाल हो रहा था.

पुलिस ने समझाबुझा कर राजरानी को शांत कराया. पूछताछ में मृतक की पत्नी राजरानी ने पुलिस को बताया कि उस के पति शटरिंग का काम करते थे. बुधवार की शाम 5 बजे बाजार से सामान लेने के लिए निकले थे. इस के बाद देर रात तक नहीं लौटे. उन के लौटने का इंतजार करतेकरते घर में सभी जने सो गए. रात 2 बजे किसी ने दरवाजा खटखटाया तो उस ने दरवाजा खोला. देखा 2 युवक बाइक से पति को बेहोशी की हालत में ले कर आए थे. वह कुछ समझ पाती, उस से पहले ही उन्होंने अधिक शराब पीने से तबीयत खराब होने की बात कह कर दरवाजे पर डाल कर भाग गए.

राजरानी ने उन युवकों पर पति की हत्या करने का आरोप लगाते हुए कहा कि दोनों के चेहरे ढके हुए थे. इसलिए वह उन्हें पहचान नहीं पाई. पुलिस ने कहा कि घायल पति को उपचार के लिए अस्पताल क्यों नहीं ले गई? इस पर राजरानी ने बताया कि पति रोज ही शराब पी कर गिरतेपड़ते घर आते थे. उस ने सोचा थोड़ी देर में उन्हें होश आ जाएगा. इसलिए वह उन्हें अस्पताल नहीं ले गई. सुबह जब वह सो कर उठी तो देखा, उन की मौत हो गई थी. पड़ोसियों से भी पुलिस ने पूछताछ की.

उन्होंने बताया कि सुबह राजरानी व बच्चों की चीख सुन कर उन्हें घटना की जानकारी हुई थी. मृतक के भाई रामदास ने पुलिस को बताया कि सुबह भतीजे राहुल का फोन आने पर उन्हें घटना की जानकारी मिली थी. जब वे घर पर पहुंचे, उन्हें भाई मृत अवस्था में मिला था.पुलिस ने शटरिंग मिस्त्री के मकान के आसपास भी पड़ताल की. उन्हें खाली पड़े प्लौट में खून के निशान मिले. पुलिस का मानना था कि मिस्त्री के साथ घर के आसपास ही मारपीट की गई थी. पुलिस ने मृतक मूलचंद के मोबाइल को कब्जे में ले लिया ताकि काल डिटेल्स के माध्यम से हत्यारों तक पहुंचा जा सके.

इंसपेक्टर भारतीय ने मौके की आवश्यक काररवाई निपटाने के साथ ही लाश को पोस्टमार्टम के लिए मोर्चरी भेज दिया और थाने लौट आए.भाई रामदास ने मृतक भाई की पत्नी राजरानी के बताए अनुसार 2 अज्ञात व्यक्तियों के खिलाफ भादंवि की धारा 302 के तहत मुकदमा दर्ज करा दिया. दूसरे दिन पोस्टमार्टम रिपोर्ट भी आ गई. रिपोर्ट में मूलचंद की गला दबा कर व सिर पर चोट पहुंचा कर हत्या किए जाने की बात कही गई थी. मुकदमा दर्ज होने के बाद पुलिस ने केस की जांच शुरू करते हुए मूलचंद के बारे में पता किया कि उस की किसी से कोई दुश्मनी तो नहीं थी. जानकारी मिली कि मूलचंद सीधासादा व्यक्ति था. शटरिंग के काम से जो आमदनी होती थी, उसी से अपने परिवार को पालता था.

हत्याकांड के खुलासे के लिए एसएसपी सचिंद्र पटेल ने जिम्मेदारी एसपी (सिटी) मुकेशचंद्र मिश्र को सौंपी. साथ ही उन्होंने उन की मदद के लिए सीओ (सिटी) हरिमोहन सिंह और थानाप्रभारी अनूप कुमार भारतीय को ले कर एक पुलिस टीम का गठन कर दिया. पुलिस ने जांच के दौरान मृतक मूलचंद और राजरानी के मोबाइल फोन नंबरों की काल डिटेल्स खंगाली. राजरानी के फोन की काल डिटेल्स में घटना वाली रात आखिरी काल गौरव चौहान को की गई थी. शक गहराने के बाद पुलिस ने गौरव के बारे में पता किया तो जानकारी मिली कि वह 26 साल का अविवाहित युवक है और मृतक के घर के पास ही रहता है.

गौरव भी चूड़ी पर मोती लगाने का काम करता था. जांच के दौरान पूछताछ में यह भी पता चला कि गौरव का राजरानी के घर काफी आनाजाना था.इस के बाद राजरानी से पूछताछ की गई. पुलिस ने उस से गौरव के बारे में पूछा तो उस ने बताया कि हमारे व गौरव के यहां चूड़ी का काम होता है. घर भी पासपास हैं इसलिए हमारा परिवार उस से परिचित है. पुलिस ने उस से पूछा कि जब पति घायल और बेहोशी की हालत में था तो अपने जेठ रामदास को फोन कर जानकारी क्यों नहीं दी? रात में तुम ने गौरव को फोन क्यों किया था? इस प्रश्न पर राजरानी ने चुप्पी साध ली.

राजरानी बारबार बयान बदलने लगी. इस से पुलिस का शक मजबूत हो गया. जब पुलिस ने सख्ती दिखाई तो उस ने प्रेमी गौरव के साथ मिल कर पति की हत्या करने का जुर्म कबूल कर लिया. पुलिस ने 8 अक्तूबर को घर से राजरानी को तथा कोटला से गौरव को गिरफ्तार कर लिया.

एसपी (सिटी) मुकेशचंद्र मिश्र ने अपने औफिस में आयोजित प्रैस कौन्फ्रैंस में शटरिंग मिस्त्री मूलचंद की हत्या का 24 घंटे में ही खुलासा करने तथा 2 हत्यारोपियों की गिरफ्तारी की जानकारी दी. इस हत्याकांड की जो कहानी सामने आई, वह इस प्रकार थी.28 वर्षीय गौरव चौहान फिरोजाबाद की श्रीराम कालोनी में मृतक मूलचंद के घर के पास रहता था. मूलचंद शराब पीने का आदी था. वह अपनी आमदनी का बड़ा हिस्सा शराब पर खर्च कर देता था. पत्नी विरोध करती तो वह नशे में उस के साथ मारपीट करता था.

लौकडाउन के दौरान मूलचंद का शटरिंग का काम बंद हो जाने से उस की माली हालत बिगड़ गई. उस के सामने 8 लोगों का पेट पालने की समस्या खड़ी हो गई.गौरव और राजरानी चूड़ी का काम अपनेअपने घरों पर ही करते थे. इस से वे एकदूसरे को जानते थे. आर्थिक संकट आने पर गौरव ने राजरानी की काफी मदद की. वह गौरव के एहसानों के तले दब गई थी. धीरेधीरे दोनों का एकदूसरे के प्रति आकर्षण बढ़ता गया.

6 बच्चों की मां बनने के बाद भी भरेपूरे बदन की 30 साल की राजरानी का जादू अविवाहित गौरव पर पूरी तरह छाने लगा था. दोनों एकदूसरे से प्यार करने लगे थे. इस बीच दोनों के अवैध संबंध भी बन गए थे.पति के काम पर जाने के बाद दोनों चोरीछिपे मिलते थे. दोनों का यह रिश्ता बिना रोकटोक के चल रहा था. एक बार मूलचंद ने दोनों को आपत्तिजनक स्थिति में देख लिया. इस पर उस का पत्नी से विवाद हो गया. गुस्से में उस ने पत्नी की पिटाई कर दी.

इस की जानकारी प्रेमी गौरव को हुई. प्रेमिका के साथ हुई मारपीट पर गौरव को बहुत गुस्सा आया. उस ने राजरानी के साथ मिल कर अपने प्यार की राह के रोड़े को हटाने की योजना बनाई.मूलचंद बुधवार 7 अक्तूबर, 2020 की शाम 5 बजे सामान लेने बाजार गया था. रात साढ़े 11 बजे मूलचंद शराब के नशे में गिरतापड़ता घर लौटा. तब तक सभी बच्चे सो चुके थे. पत्नी राजरानी पति को नशे में पकड़ कर घर की छत पर बने कमरे में ले गई थी. इस के बाद उस ने अपने प्रेमी गौरव को फोन कर घर पर बुला लिया. उस ने फोन पर कहा कि तुम यहां इस तरह चोरीछिपे आना कि कोई तुम्हें देख न सके.

गौरव दबे पांव राजरानी के घर पहुंच गया. गौरव ने देखा मूलचंद शराब के नशे में बेसुध पड़ा था.राजरानी और गौरव के लिए यह एक अच्छा मौका था. राजरानी ने पति के पैर पकड़े और गौरव ने चुनरी से मूलचंद का गला घोंट दिया. राजरानी ने तसल्ली के लिए उस के सिर पर ईंट से प्रहार भी किया. हत्या के बाद उस के शव को दोनों ने बरामदे में बिछी चारपाई पर ला कर डाल दिया. खून से सनी ईंट मकान के बगल में खाली पड़े प्लौट में फेंक दी. इस के बाद गौरव अपने घर चला गया था.प्रेमी के साथ पति की हत्या करने के बाद राजरानी ने 2 युवकों द्वारा पति को बेहोश व घायल अवस्था में बाइक से घर ला कर छोड़े जाने की कहानी बना दी. इस के साथ ही राजरानी के बताने पर जेठ रामदास ने 2 अज्ञात युवकों के खिलाफ हत्या की रिपोर्ट दर्ज करा दी थी. जबकि सच्चाई कुछ और ही थी.

पुलिस ने दोनों आरोपियों की निशानदेही पर वारदात में प्रयुक्त चुनरी (दुपट्टा) व खून सनी ईंट बरामद कर ली.इस हत्याकांड का खुलासा करने वाली पुलिस टीम में थानाप्रभारी अनूप कुमार भारतीय, एसएसआई नरेंद्र कुमार शर्मा, कांस्टेबल विनीत कुमार, तेजवीर सिंह, अजय कुमार, आशीष कुमार, मोहनश्याम, नेत्रपाल, प्रवीन कुमार, लव प्रकाश, महिला कांस्टेबल उपासना शामिल थे.

आवश्यक काररवाई करने के बाद पुलिस ने दोनों दोषियों को न्यायालय में पेश कर जेल भेज दिया. एक बेवफा पत्नी ने अपने पति से बेवफाई कर दूसरे मर्द से अवैध संबंध बना कर अपने हंसतेखेलते घर को हमेशाहमेशा के लिए उजाड़ दिया. Crime Story

True Crime Story: बदनामी का दाग

True Crime Story: शादी के बाद भी सरोज अपने प्रेमी सूरज को भुला नहीं पाई थी. फिर एक दिन वह मायके में आई तो प्रेमी के साथ भाग गई. बदनामी के इस दाग को धोने के लिए सरोज की ससुराल और मायके वालों ने ऐसी खौफनाक साजिश को अंजाम दिया कि…

उ त्तर प्रदेश के लखनऊ-हरदोई मार्ग पर थाना कस्बा मलिहाबाद बसा है, जो आमों के लिए भी मशहूर है. इसी थाने के गांव वंशीगढ़ी से थोड़ा आगे निकलते ही जंगल शुरू हो जाता है. 26 जुलाई की सुबह गांव के कुछ लोग जानवरों को चराने इसी जंगल में गए तो उन्हें वहां एक लड़के और एक लड़की की लाश पड़ी दिखाई दी. उन्होंने यह बात गांव के चौकीदार निहाल पासी को बताई तो उस ने यह सूचना थाना मलिहाबाद पुलिस को दे दी.

लाशें पड़ी होने की सूचना मिलते ही थानाप्रभारी सुधाकर पांडेय, एसएसआई अमरनाथ और कुछ सिपाहियों को साथ ले कर बंशीगढ़ी के जंगल पहुंच गए. जंगल में काफी अंदर एक जवान लड़के और लड़की की क्षतविक्षत लाश पड़ी थी. सबूत की तलाश में सुधाकर पांडेय ने आसपास की झाडि़यों में ताकझांक की तो उन्हें एक हैंडबैग मिला. उस की तलाशी ली गई तो उस में लड़की के कुछ कपड़े और एक पहचानपत्र मिला.

वह पहचानपत्र मृतक युवक का था. उस के अनुसार मृतक सूरज धानुक था, जो थाना मलिहाबाद के गांव सिरगामऊ का रहने वाला था. घर वालों से उस की पहचान हो सकती थी. इसलिए सुधाकर पांडेय ने लाशों की फोटोग्राफी करा कर मृतकों का सामान कब्जे में ले लिया और लाशों को पोस्टमार्टम के लिए लखनऊ भिजवा दिया. थाने लौट कर थानाप्रभारी ने चौकीदार निहाल की ओर से अज्ञात लोगों के खिलाफ हत्या का मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू कर दी.

सुधाकर पांडेय ने पहचानपत्र से मिले पते पर एक सिपाही को भेजा तो वहां उस की मां गुडि़या मिली. जब उस से सूरज की हत्या के बारे में बताया गया तो वह अपने देवर के बेटे के साथ रोते हुए थाना मलिहाबाद पहुंची. गुडि़या ने लाशों के फोटो देखने के बाद रोते हुए बताया कि सूरज के साथ जिस युवती की लाश मिली है, वह लड़की सरोज है. दोनों एकदूसरे को बहुत प्यार करते थे. कुछ दिनों पहले सूरज सरोज को उस की ससुराल से ले कर भाग गया था, जिस की वजह से सरोज की ससुराल तथा मायके वाले काफी नाराज थे. 18 जुलाई को सरोज के पति मंजेश ने हरदोई के थाना संडीला में सूरज और उस के दोस्त धर्मेंद्र के खिलाफ रिपोर्ट भी दर्ज कराई थी. उसे पूरा यकीन है कि दोनों की हत्या उन्हीं लोगों ने की है.

गुडि़या के बताए अनुसार, मृतका का नाम सरोज था. वह उसी के गांव के रहने वाले रामऔतार पाल की बेटी थी, जो हरदोई के थाना संडीला के गांव ककराली के रहने वाले मंजेश के साथ ब्याही थी. गुडि़या ने यह भी बताया कि थाना संडीला में सरोज को भगाने की रिपोर्ट दर्ज कराई गई थी. उन्होंने पता किया तो सचमुच वहां रिपोर्ट दर्ज थी. उन्होंने इस मामले को वहां ट्रांसफर करने की कोशिश शुरू कर दी. लेकिन अधिकारियों के आदेश के बाद मुकदमा ट्रांसफर नहीं हो सका.

पोस्टमार्टम रिपोर्ट के अनुसार, सूरज और सरोज की मौत बेरहमी से मारपीट और गला घोंटने से हुई थी. पोस्टमार्टम के बाद लाशें सौंपने की बात आई तो सूरज के घर वाले तो उस की लाश ले गए, लेकिन सरोज की लाश लेने न तो उस की ससुराल से कोई आया और न ही मायके से. काफी देर बाद उस की मां और बहनें आईं तो पुलिस ने सरोज की लाश उन के हवाले कर दी. पुरुषों के न आने से पुलिस को संदेह हुआ. सुधाकर पांडेय सरोज के पति मंजेश की तलाश में उस के घर पहुंचे तो मंजेश ही नहीं, घर के अन्य पुरुष भी गायब थे. इस से पुलिस को विश्वास हो गया कि दोनों हत्याएं इन्हीं लोगों ने की होंगी.

मंजेश की गिरफ्तारी के लिए पुलिस ने उस के सभी रिश्तेदारों के घर छापा मारा, लेकिन उस का कुछ पता नहीं चला. पुलिस ने मंजेश के नंबर की काल डिटेल्स निकलवाई तो पता चला कि सरोज जब ससुराल से भागी थी, तभी से मंजेश अपने दोनों सालों दिनेश उर्फ तिवारी और शिवकुमार के संपर्क में था. इस के बाद सुधाकर पांडेय सिरगामऊ स्थित सरोज के मायके पहुंचे तो उस के भाई दिनेश और शिवकुमार भी घर से गायब मिले.

5 अगस्त को सुधाकर पांडेय ने मुखबिर की सूचना पर दिनेश और शिवकुमार को उन के घरों से गिरफ्तार कर लिया. थाने ला कर की गई पूछताछ में दिनेश और शिवकुमार ने अपना जुर्म कबूल करते हुए इस सनसनीखेज दोहरे हत्याकांड के बारे में पुलिस के सामने जो बयान दिया, उस में औनर किलिंग की एक खौफनाक कहानी सामने आई, जो इस प्रकार थी. लखनऊ की थानाकोतवाली मलिहाबाद का एक गांव है सिरगामऊ. इसी गांव में शुकुल धानुक  अपने परिवार के साथ रहता था. उस के परिवार में पत्नी गुडि़या, 2 बेटे सूरज, रोहित और 2 बेटियां थीं. शुकुल धानुक खेतीबाड़ी कर के गुजारा करता था. घर की आर्थिक स्थिति अच्छी नहीं थी, जिस की वजह से वह बच्चों को पढ़ालिखा नहीं सका.

22 साल का सूरज खेती करने के साथसाथ आम के बागों की देखभाल करता था. बेटियां और दूसरा बेटा अभी छोटे थे. इसी गांव में रामऔतार भी परिवार के साथ रहता था. उस के परिवार में पत्नी रूपमती, 3 बेटियां तथा 2 बेटे दिनेश और शिवकुमार थे. रामऔतार लखनऊ में सिक्यूरिटी गार्ड की नौकरी करता था. बड़ा बेटा दिनेश एक स्कूल की बस चलाता था. गांव में थोड़ीबहुत जमीन थी, जिस से खानेपीने भर का अनाज पैदा हो जाता था. इस तरह परिवार का गुजारा आराम से हो रहा था. रामऔतार और शुकुल धानुक के घर अगलबगल थे. लेकिन अलगअलग जाति के होने की वजह से दोनों परिवारों में ज्यादा मेलजोल नहीं था. हां, उन के बच्चे जातिपांत को न मानते हुए आपस में मेलजोल रखते थे.

सूरज और रामऔतार की तीसरे नंबर की बेटी सरोज हमउम्र थे, इसलिए बचपन से साथसाथ खेल कर बड़े हुए थे. सूरज को सरोज बहुत अच्छी लगती थी. जब भी वह सरोज को देखता, उस की आंखों में अनोखी चमक आ जाती. इसलिए वह उसे हमेशा देखते रहना चाहता था. सरोज ने भी इस बात को महसूस किया तो उस के मन में भी सूरज के लिए कोमल भावनाएं अंगड़ाई लेने लगीं. इस का परिणाम यह निकला कि दोनों एकदूसरे को चाहने लगे.

सरोज उर्फ बउवा गोरे रंग की खूबसूरत लड़की थी. शोख, चंचल और मिलनसार स्वभाव की होने की वजह से सभी उसे प्यार करते थे. सूरज का घर बगल में ही था, इसलिए वह जैसे ही घर से बाहर निकलता, सरोज को पता चल जाता. इस के बाद किसी बहाने से वह सूरज से मिलने बागों की ओर निकल जाती, जहां दोनों घंटों अकेले में बैठ कर प्यार की मीठीमीठी बातें करते और एकदूसरे के साथ जीनेमरने की कसमें खाते. लेकिन जब शादी की बात आई तो सूरज ने कहा कि वह छोटी जाति का है, इसलिए उस के घर वाले इस शादी के लिए कभी तैयार नहीं होंगे.

इस बात से सरोज उदास हो गई. उसे उदास देख कर सूरज ने कहा कि वह उस के बिना जीने की बात सोच नहीं सकता, इसलिए गांव से भाग कर कहीं दूर चले जाएंगे, जहां उन के घर वाले उन्हें खोज नहीं पाएंगे. इस के बाद कुछ पैसे ले कर दोनों भाग गए. शाम को जब सरोज के घर से भाग जाने का पता चला तो बदनामी के डर से रामऔतार बेटों के साथ चोरीछिपे उस के बारे में पता लगाने लगा. उस ने थाने में सूरज के खिलाफ रिपोर्ट भी नहीं दर्ज कराई. उस के घर जा कर धमकी जरूर दे आए कि अगर सूरज ने सरोज को जल्दी घर ला कर नहीं छोड़ा तो इस का परिणाम बहुत भयानक होगा.

शुकुल धानुक और गुडि़या वैसे भी सीधेसादे स्वभाव के थे, उन्होंने इस मामले में चुप रहने में ही अपनी भलाई समझी. दूसरी ओर जीनेमरने की योजना बना कर भागे सूरज और सरोज के पास जब तक पैसे रहे, तब तक पतिपत्नी के रूप में अपनी ही दुनिया में डूबे रहे. लेकिन जब पैसे खत्म हो गए तो आटेदाल के भाव का पता चला. सूरज ने कामधंधे की बहुत तलाश की, लेकिन जहां भी काम मिलता, वेतन इतना कम होता कि दोनों का गुजारा होना मुश्किल था. जब उन के भूखों मरने की नौबत आ गई तो घर लौटने के अलावा उन के पास कोई उपाय नहीं बचा. आखिर हिम्मत कर के दोनों घर लौट आए. उन का सोचना था कि वे घर वालों से कह कर शादी कर लेंगे.

सरोज के लौटने पर पहले तो घर वालों ने उसे जी भर कर कोसा, उस के बाद उस के लिए लड़के की तलाश करने लगे. इसी के साथ उस के घर से बाहर निकलने पर सख्त पाबंदी लगा दी गई. सरोज समझ गई कि अब सूरज के साथ जिंदगी बिताने का उस का सपना सपना ही बन कर रह जाएगा, क्योंकि उस के घर वाले किसी भी हालत में उस की शादी सूरज के साथ नहीं करेंगे. काफी दौड़धूप के बाद रामऔतार को पड़ोस के गांव ककराली में मिश्रीलाल का बेटा मंजेश सरोज के लिए पसंद आ गया. इस के बाद मंजेश से उस की शादी हो गई. यह सन 2012 की बात है.

शादी के बाद सरोज ससुराल चली गई. मंजेश सरोज जैसी सुंदर पत्नी पा कर बेहद खुश था. यही वजह थी कि वह पत्नी की हर इच्छा का खयाल रखता था. इस के बावजूद सरोज सूरज को भुला नहीं पाई. वह जब भी अकेली होती, सूरज को याद कर के आंसू बहाती रहती. धीरेधीरे ढाई साल गुजर गए. इस बीच वह मंजेश के बेटे की मां बन गई. सूरज भी सरोज को नहीं भुला सका था. दिनरात सरोज उस के खयालों में छाई रहती. शायद वह अपनी जिंदगी सरोज की यादों में काटना चाहता था. इसीलिए अभी तक उस ने शादी नहीं की थी. उसी बीच उस के पिता की मौत हो गई तो परिवार चलाने की सारी जिम्मेदारी उसी पर आ गई.

एक दिन वह बागों से लौटा तो पता चला कि सरोज मायके आई है. उस ने मन ही मन ठान लिया कि चाहे जो भी हो, वह सरोज से जरूर मिलेगा और उस के दिल का हाल पूछेगा. अब तक सरोज के घर वालों को लगने लगा था कि सरोज सूरज को भूल चुकी होगी, इसलिए उन्होंने उसे गांव में किसी के घर आनेजाने की छूट दे दी होगी. सूरज मौके की तलाश में रहने लगा. एक दिन दोनों मिले तो एकदूसरे के मोबाइल नंबर ले लिए. सरोज ने सूरज का नंबर सहेली के नाम से सेव कर लिया. इस बीच दोनों सब की नजरें बचा कर कई बार मिले. इन मुलाकातों में जब सरोज ने बताया कि वह इस शादी से जरा भी खुश नहीं है तो सूरज चौंका. उस ने सपने में भी नहीं सोचा था कि सरोज अब भी उसे अपने दिल में बसाए है. उसे लगता था कि सरोज उसे भुला कर अपने परिवार में रम गई होगी.

सूरज ने पूछा, ‘‘क्या तुम अब भी मेरे साथ जिंदगी गुजारने को तैयार हो.’’

‘‘हां, मैं तुम्हारे लिए अपना बसा-बसाया घर छोड़ने को लिए तैयार हूं.’’

इस के बाद दोनों ने खूब सोचविचार कर योजना बना डाली. मायके से सरोज का भागना ठीक नहीं था. वैसे भी उस के घर वाले ज्यादा देर तक बाहर रहने पर चौकन्ने हो जाते थे. इसलिए उस ने कहा कि ससुराल जाने के कुछ दिनों बाद वह बच्चे को छोड़ कर अकेली सूरज के साथ भाग जाएगी. सरोज के साथ घर से भागने की योजना बनाने के बाद सूरज पैसों का इंतजाम करने लगा. कुछ दिनों बाद मंजेश आया तो सरोज ससुराल चली गई. ससुराल में किसी को भी उस के घर से भाग जाने का अंदाजा नहीं था, इसलिए उस के घर से बाहर आनेजाने की पूरी छूट थी.

16 जुलाई को सूरज सरोज से संडीला कस्बे में शीतला देवी के मेले में मिला तो कहा कि रात में वह गांव के बाहर आ कर उसे फोन कर देगा. उस के बाद वह तुरंत घर से निकल कर उस के पास आ जाए. सरोज ने हामी भर दी. रात में सूरज ने फोन किया तो अपने 8 महीने के बेटे को सोता छोड़ कर सरोज गांव के बाहर इंतजार कर रहे सूरज के पास आ गई. सूरज सरोज को साथ ले कर मन में नई जिंदगी बसाने के सतरंगी सपने देखता हुआ लखनऊ की ओर चल पड़ा. कुछ देर बाद बच्चे का रोना सुन कर उस की सास सोमा देवी ने सरोज को आवाज देते हुए बच्चे को चुप कराने को कहा. जब बच्चा चुप नहीं हुआ तो वह बहू सरोज के कमरे में गई. लेकिन वह कमरे में नहीं मिली. सोमा को चिंता हुई कि इतनी रात में बहू कहां चली गई. उस ने बेटे को जगाया. इस के बाद सभी सरोज को तलाशने लगे.

सरोज के न मिलने पर घर वालों को शक हो गया कि जरूर वह किसी के साथ भाग गई होगी. इस के बाद मंजेश ने सरोज के घर छोड़ कर कहीं जाने की बात अपने साले दिनेश को बता कर पूछा कि कहीं सरोज वहां तो नहीं गई है. दिनेश ने कह दिया कि वह यहां नहीं आई है. बहन की करतूत सुन कर दिनेश ने अपना सिर पीट लिया. उसे कतई उम्मीद नहीं थी कि शादी के ढाई, तीन साल बाद सरोज इस तरह घर छोड़ कर चली जाएगी. उन्होंने मंजेश से कहा कि वह पता लगाए कि सरोज को जाते हुए किसी ने देखा तो नहीं, वह किस के साथ गई है.

काफी खोजबीन के बाद भी जब सरोज का कुछ पता नहीं चला तो 2 दिन बाद मंजेश ससुराल आ कर गांव में हो रही अपनी बदनामी के बारे में बता कर गालीगलौच करने लगा. रामऔतार का परिवार बेटी की इस करतूत से काफी दुखी था. दामाद की पीड़ा को समझते हुए उन्होंने उसे सब कुछ बता दिया. तब 18 जुलाई को मंजेश ने संडीला कोतवाली में सूरज और उस के दोस्त धर्मेंद्र के खिलाफ अपनी पत्नी को बहलाफुसला कर भगा ले जाने की रिपोर्ट दर्ज करा दी. संडीला पुलिस ने काररवाई करते हुए सूरज के घर जा कर पूछताछ की तो वे उस के बारे में कुछ नहीं बता सके. सूरज का दोस्त धर्मेंद्र घर में ही मिल गया. पुलिस ने उस से पूछताछ की तो उस ने बताया कि वह सूरज और सरोज के प्रेमसंबंधों के बारे में तो जानता था, लेकिन वे कहां हैं, इस बात की जानकारी उसे नहीं है.

पूछताछ के बाद धर्मेंद्र को छोड़ दिया गया. इधर पुलिस ने सूरज और सरोज के मोबाइल नंबरों को सर्विलांस पर लगा दिया था. दूसरी ओर मंजेश अपने साले दिनेश, शिवकुमार तथा अन्य कुछ रिश्तेदारों के साथ सरोज की तलाश में लगा था. मंजेश के गांव ककराली में उस की पत्नी सरोज के घर से भाग जाने की बात चर्चा का विषय बनी हुई थी. लोग चटखारे लेले कर आपस में तरहतरह की बातें कर रहे थे, जिस से घर वालों का बाहर निकलना दूभर हो गया था. 26 जुलाई की शाम मंजेश अपने चचेरे चाचा राकेश के साथ अपनी ससुराल पहुंचा, तभी उस के मोबाइल पर सरोज का फोन आया कि वह इस समय दुबग्गा में है और उस के साथ घर चलना चाहती है.

सरोज का फोन सुन कर मंजेश ने दिनेश से कहा कि गांव में उस की इतनी बदनामी हो चुकी है कि अब वह सरोज को अपने घर नहीं ले सकता. दिनेश और शिवकुमार भी उसे अपने घर में नहीं रखना चाहते थे. तुरंत सभी ने सरोज की हत्या की योजना बना डाली. इस में दिनेश और शिवकुमार ने अपने चचेरे भाई हिन्ना उर्फ सुनील को भी शामिल कर लिया. वे भी चाहते थे कि किसी तरह सूरज मिल जाए तो वे उस का भी काम तमाम कर दें. मंजेश की मोटरसाइकिल पर राकेश और हिन्ना और दिनेश व शिवकुमार अपनी मोटरसाइकिल से रात 11 बजे अंधे की चौकी के पास कलामंडी होते हुए दुबग्गा में सरोज द्वारा बताए स्थान पर पहुंच गए. सरोज वहां मिल गई.

सरोज से सूरज के बारे में पूछा गया तो उस ने बताया कि अभी थोड़ी देर पहले वह उसे छोड़ कर बालागंज की ओर गया है. दिनेश के चचेरे भाई सुनील उर्फ हिन्ना ने राकेश को तुरंत अपनी मोटरसाइकिल पर बैठाया और बालागंज की ओर चल पड़ा. थोड़ी दूर जाने पर सूरज दिखाई दे गया. हिन्ना उसे गांव में पंचायत के सामने सरोज से उस की शादी करवाने का झांसा दे कर मोटरसाइकिल पर बीच में बैठा लिया और उसे भी वहां ले आया जहां मंजेश, राकेश और दिनेश सरोज को ले कर उस का इंतजार कर रहे थे.

सरोज ने डरते हुए चोर नजरों से सब की ओर देखा. उन के चेहरों के भाव देख कर वह कांप उठी. लेकिन अब बाजी उस के हाथ से निकल चुकी थी. दोनों को ले कर वे माल की ओर जाने वाली रोड पर चलते हुए वंशीगढ़ी के जंगल में पहुंचे. जंगल में सन्नाटा छाया था. राकेश सूरज को पकड़ कर एक जगह खड़ा हो गया तो मंजेश सरोज को ले कर जंगल के अंदर चला गया. उस के पीछेपीछे सरोज के दोनों भाई दिनेश और शिवकुमार भी थे. मंजेश ने सरोज को पकड़ने का इशारा किया तो दिनेश और शिवकुमार ने सरोज के हाथ और पैर कस कर पकड़ लिए. इस के बाद मंजेश ने सरोज के गले में पड़ी चुन्नी से उस का गला कस दिया. सरोज के बेहोश होने पर मंजेश ने डंडे से तो दिनेश, हिन्ना और शिवकुमार ने उसे लातघूंसों से मारना शुरू किया. थोड़ी देर में सरोज की मौत हो गई.

सरोज को मार कर वे सूरज के पास पहुंचे. सूरज अब तक समझ चुका था कि उन लोगों ने सरोज की हत्या कर दी होगी, अब उस की बारी है. सरोज को भी वे उसी जगह ले गए, जहां सरोज की लाश पड़ी थी. दिनेश ने उस के दोनों हाथ पकड़े तो राकेश ने उस का मुंह दबाया. हिन्ना और शिवकुमार ने उस के पैर पकड़ लिए. सूरज के बैग से शर्ट निकाल कर उसे वहीं झाडि़यों में फेंक दिया. शर्ट से हिन्ना और शिवकुमार ने सूरज का गला कस दिया, जिस से वह भी बेहोश हो गया. इस के बाद उसे भी डंडे और लातघूंसों से पीटपीट कर मार दिया गया.

दोनों की हत्या करने के बाद मंजेश और उस के चाचा राकेश अपने गांव ककराली चले गए तो सरोज के भाई दिनेश, शिवकुमार तथा हिन्ना अपने गांव सिरगामऊ लौट आए. हत्या के 2 दिनों बाद जब उन्हें पता चला कि मलिहाबाद पुलिस लाशों को बरामद कर के जांच कर रही है तो सभी अपनेअपने घरों से फरार हो गए. लेकिन पुलिस के हाथ उन के गिरेबान तक पहुंच ही गए. शिवकुमार की  मोटरसाइकिल यूपी32-ईएल 3768 पुलिस ने बरामद कर ली थी. सूरज एसपी था, इसलिए मुकदमे में धारा 147 और 3(2)5 एससी/एसटी एक्ट की धारा और बढ़ा दी गई थी.

6 अगस्त को इंसपेक्टर सुधाकर पांडेय ने इस दोहरे हत्याकांड के आरोपी दिनेश उर्फ तिवारी तथा शिवकुमार को सीजेएम की अदालत में पेश किया, जहां से उन्हें 14 दिनों की न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया. 7 अगस्त को सरोज के पति मंजेश ने भी न्यायालय में आत्मसमर्पण कर दिया. 11 अगस्त को सुबह 10 बजे पुलिस ने हिन्ना उर्फ सुनील को कुशनगरी गांव के पास से उस समय गिरफ्तार कर लिया, जब वह अपनी मोटरसाइकिल से कहीं जाने की फिराक में था. पुलिस ने हत्या में प्रयुक्त हिन्ना की मोटरसाइकिल यूपी32- डीएच3125 भी अपने कब्जे में ले ली. पूछताछ के बाद उसे भी जेल भेज दिया गया.

21 अगस्त को सुधाकर पांडेय ने अभियुक्तों की निशानदेही पर आलाकत्ल वे लाठीडंडे भी बरामद कर लिए गए, जिन से सूरज और सरोज की हत्या की गई थी. कथा लिखे जाने तक इस हत्याकांड का एक आरोपी राकेश फरान था. पुलिस सरगर्मी से उस की तलाश कर रही थी. True Crime Story

—कथा पुलिस सूत्रों पर आधारित

Jaunpur Crime: मुसलिम गर्लफ्रेंड के लिए मांबाप को 6 टुकड़ों में काट डाला

Jaunpur Crime: एक ऐसी शर्मनाक घटना सामने आई है जिस ने रिश्तों को तारतार कर रख दिया है. एक प्रेमी ने मुसलिम प्रेमिका के लिए अपने मांबाप को 6 टुकड़ों में काट डाला. आखिर ऐसा क्या था उस प्रेमिका में जिस से एक इंजीनियर बेटा ने मांबाप को इतनी बेरहमी से मार डाला?  क्या है इस मर्डर का पूरा सच जानने के लिए पढ़ते हैं आगे जो आप को करेगा होने वाली घटना से सचेत और सावधान?

यह दर्दनाक घटना उत्तर प्रदेश के जौनपुर से सामने आई है. यहां एक इंजीनियर बेटे अम्बेश कुमार ने अपने मांबाप की हत्या कर दी. अम्बेश ने मांबाप का सिर लोहे के खलबट्टे से कूच दिया था. फिर आरी से उन के 6 टुकडे कर डाले. इस के बाद उन टुकड़ों को बोरियों में भर कर गोमती नदी में बारीबारी से फेंक आया.

पुलिस के अनुसार, अम्बेश बीटेक की डिग्री लेने के बाद कोलकाता में एक कंपनी में बतौर क्वालिटी इंजीनियर कार्यरत था. वहां उसे 25 हजार की सैलरी मिलती थी. इसी जौब के दौरान उस की मुलाकात एक मुसलिम युवती से हुई. दोनों की नजदीकियां बढ़ी और 2019 में दोनों ने लव मैरिज शादी कर ली. दोनों के 2 बेटे हैं, जिन की उम्र 5 साल और 11 महीने है.

अम्बेश की लव मैरिज से परिवार खुश नहीं था. इसी को ले कर उस के पापा श्याम बहादुर और मम्मी बबीता के बीच बहस हो जाया करती थी. इसी बात को ले कर दोनों के बीच 8 दिसंबर, 2025 को झगड़ा हुआ  तो गुस्से में उस ने अपने मम्मीपापा की खलबट्टे से कूच कर हत्या कर दी.

हत्या करने के बाद अम्बेश ने अपनी बहन को फोन कर बताया कि मम्मी और पापा  कहीं चले गए हैं. वह इसी तरह नाटक करता रहा. 12 दिसंबर, 2025 को अचानक वह भी लापता हो गया. इस के बाद अम्बेश की बड़ी बहन वंदना ने उसे फोन मिलाया तो उस का कुछ पता नहीं चल सका. तब वंदना ने फिर अम्बेश की गुमशुदगी की सूचना दर्ज करा दी.

पुलिस को उस ने बताया कि  उस के मम्मीपापा पहले गायब हो गए, अब भाई भी लापता है. इस के बाद पुलिस ने इस मामले की गंभीरता से जांच की तो पुलिस को अम्बेश मिल गया. उस से पूछताछ की गई तो उस ने अपना जुर्म कुबूल कर लिया.

एएसपी आयुष श्रीवास्तव ने बताया कि अम्बेश ने बताया कि मम्मीपापा मेरी शादी तुड़वाना चाहते थे. वे चाहते थे कि वह दूसरी शादी कर ले. अम्बेश मुसलिम पत्नी को तलाक देने के लिए तैयार भी था, लेकिन उसे गुजारा भत्ता देना पड़ता. मम्मीपापा गुजारा भत्ता देने के लिए तैयार नहीं थे. तो उस ने पत्नी को तलाक देने से इनकार कर दिया.

इस के बाद मम्मी ने अम्बेश से घर से निकल जाने को कहा. तब अम्बेश ने कहा कि यह तो मेरी नानी का घर है. मुझे नेवासा में दिया था. इसी बात को ले कर मम्मी ने अम्बेश को धक्का मार दिया और कहा कि इसी समय घर से निकल जा. इसी बात को ले कर अम्बेश गुस्सा आ गया. पास में रखा टेबल के लोहे का खलबट्टा था. उस का मूसल उठाया और मम्मी के सिर पर मार दिया. इस के बाद पापा भी वहां आ गए.  वह पुलिस को फोन करने की धमकी देने लगे. वह पुलिस को फोन कर ही रहे थे तभी अम्बेश ने उन को भी मूसल मार दिया.

पापा और मम्मी चिल्लाए. दोनों फर्श पर जा गिरे. इस के बाद उन की सांसें थम चुकी थीं. दोनों की हत्या करने के बाद अम्बेश की समझ में नहीं  आ रहा था कि वह क्या करे.

यह अपराध छिपाने के लिए उस के दिमाग में एक आईडिया आया. वह बेसमेंट से सरिया काटने वाली इलेक्ट्रिक आरी ले आया और दोनों की लाशों के 3-3 टुकड़े कर दिए. फिर 6 को प्लास्टिक की बोरी में भर कर गोमती नदी में फेंक आया.

पुलिस ने आरोपी अम्बेश को अरेस्ट कर लिया है. पुलिस उस के खिलाफ सबूत इकट्ठे कर काररवाई कर रही है. Jaunpur Crime

Gorakhpur Crime: रिश्तों की मर्यादा टूटी, चाची की यारी में चाचा का खौफनाक कत्ल

Gorakhpur Crime: 17 अक्तूबर, 2016 की सुबह जिला गोरखपुर के चिलुआताल के महेसरा पुल के नजदीक जंगल में एक पेड़ के सहारे एक साइकिल खड़ी देखी गई, जिस के कैरियर पर एक बोरा बंधा था. बोरा खून से लथपथ था, इसलिए देखने वालों को अंदाजा लगाते देर नहीं लगी कि बोरे में लाश हो सकती है. लाश  होने की संभावना पर ही इस बात की सूचना थाना चिलुआताल पुलिस को दे दी गई थी. सूचना मिलते ही थानाप्रभारी इंसपेक्टर रामबेलास यादव पुलिस बल के साथ घटनास्थल पर आ पहुंचे थे. बोरे से उस समय भी खून टपक रहा था.

इस का मतलब था कि बोरा कुछ देर पहले ही साइकिल से वहां लाया गया था. उन्होंने बोरा खुलवाया तो उस में से एक आदमी की लाश निकली. मृतक की उम्र 35-36 साल रही होगी. उस के सिर पर किसी वजनदार चीज से वार किया गया था. वह रंगीन सैंडो बनियान और लुंगी पहने था. शायद रात को सोते समय उस की हत्या की गई थी. पुलिस को लाश की शिनाख्त कराने में जरा भी दिक्कत नहीं हुई. वहां जमा भीड़ ने मृतक की शिनाख्त प्रौपर्टी डीलर सुरेश सिंह के रूप में कर दी थी. वह चिलुआताल गांव का ही रहने वाला था.

शिनाख्त होने के बाद रामबेलास यादव ने मृतक के घर वालों को सूचना देने के लिए 2 सिपाहियों को भेजा. दोनों सिपाही मृतक के घर पहुंचे तो घर पर कोई नहीं मिला. पड़ोसियों से पता चला कि सुरेश सिंह के बिस्तर पर भारी मात्रा में खून मिलने और उस के बिस्तर से गायब होने से घर के सभी लोग उसी की खोज में निकले हुए थे. घर पर पुलिस के आने की सूचना मिलने पर मृतक सुरेश सिंह के बड़े भाई दिनेश सिंह घर आए तो जंगल में एक लाश मिलने की बात बता कर दोनों सिपाही उन्हें अपने साथ ले आए. लाश देखते ही दिनेश सिंह फफक कर रो पड़े. इस से साफ हो गया कि मृतक उन का भाई सुरेश सिंह ही था.

इस के बाद पुलिस ने घटनास्थल की सारी काररवाई निपटा कर लाश को पोस्टमार्टम के लिए बाबा राघवदास मैडिकल कालेज भिजवा दिया और उस साइकिल को जब्त कर लिया, जिस पर लाश बोरे में भर कर वहां लाई गई थी. थाने लौट कर रामबेलास यादव ने मृतक के बडे़ भाई दिनेश सिंह की तहरीर पर सुरेश सिंह की हत्या का मुकदमा अज्ञात के खिलाफ दर्ज कर लिया. मृतक सुरेश सिंह प्रौपटी डीलिंग का काम करता था. विवादित जमीनों को खरीदनाबेचना उस का मुख्य धंधा था. पुलिस ने इसी बात को ध्यान में रख कर जांच आगे बढ़ाई, लेकिन उस का ऐसा कोई दुश्मन नजर नहीं आया, जिस से लगे कि हत्या उस ने कराई है.

यह हत्याकांड अखबारों की सुर्खियां बना तो एसएसपी रामलाल वर्मा ने एसपी (सिटी) हेमराज मीणा को आदेश दिया कि वह जल्द से जल्द इस मामले का खुलासा कराएं. उन्होंने सीओ देवेंद्रनाथ शुक्ला और थानाप्रभारी रामबेलास यादव को सुरेश सिंह तथा उस के घरपरिवार के आसपास जांच का घेरा बढ़ाने को कहा. क्योंकि उन्हें लग रहा था कि यह हत्या दुश्मनी की वजह से नहीं, बल्कि अवैधसंबंधों की वजह से हुई है. क्योंकि मृतक को जिस तरह बेरहमी से मारा गया था, इस तरह लोग अवैध संबंधों में ही नफरत में मारे जाते हैं. इसी बात को ध्यान में रख कर जांच आगे बढ़ाई गई तो जल्दी ही नतीजा निकलता नजर आया.

किसी मुखबिर ने बताया कि पिछले कई सालों से सुरेश सिंह की अपनी पत्नी से पटती नहीं थी. दोनों में अकसर लड़ाईझगड़ा होता रहता था और इस की वजह सुरेश सिंह का सगा भतीजा राहुल चौधरी था. क्योंकि उस के अपनी चाची राधिका से अवैध संबंध थे. घटना से सप्ताह भर पहले भी इसी बात को ले कर सुरेश और राधिका के बीच काफी झगड़ा हुआ था. तब सुरेश ने पत्नी की पिटाई कर दी थी, जिस से नाराज हो कर वह बच्चे को ले कर मायके चली गई थी. रामबेलास यादव को हत्या की वजह का पता चल गया था. राहुल से पूछताछ करने के लिए वह उस के घर पहुंचा तो उस के पिता दिनेश सिंह ने बताया कि वह तो लखनऊ में है.

लखनऊ में राहुल गोमतीनगर में किराए का कमरा ले कर रहता है और सरकारी नौकरी के लिए तैयारी कर रहा है. पिता का कहना था कि हत्या वाले दिन के एक दिन पहले वह लखनऊ चला गया था. जबकि मुखबिर ने उन्हें बताया था कि घटना वाले दिन सुबह वह चिलुआताल में दिखाई दिया था. पिता का कहना था कि घटना से एक दिन पहले यानी 16 अक्तूबर, 2016 को राहुल लखनऊ चला गया था, जबकि मुखबिर का कहना था कि घटना वाले दिन वह चिलुआताल में दिखाई दिया था. मुखबिर की बात पर विश्वास कर के रामबेलास यादव ने राहुल को लखनऊ से लाने के लिए 2 सिपाहियों को भेज दिया.

लखनऊ पुलिस की मदद से गोरखपुर पुलिस 22 अक्तूबर, 2016 को लखनऊ के गोमतीनगर से राहुल चौधरी को गिरफ्तार कर गोरखपुर ले आई. थाने ला कर उस से सुरेश सिंह की हत्या के बारे में पूछताछ की गई तो उस ने बिना किसी हीलाहवाली के चाची से अवैध संबंधों की वजह से चाचा सुरेश सिंह की हत्या का अपना अपराध स्वीकार कर लिया. राहुल ने चाची के प्रेम में पड़ कर चाचा की हत्या की जो कहानी सुनाई, वह इस प्रकार थी—

उत्तर प्रदेश के जिला गोरखपुर के थाना चिलुआताल में सुरेश सिंह पत्नी राधिका सिंह और 6 साल के बेटे के साथ रहता था. उस का बड़ा भाई था दिनेश सिंह. राहुल उसी का बेटा था. दोनों भाइयों के परिवार भले ही अलगअलग रहते थे, लेकिन रहते एक ही मकान में थे. सुखदुख में भी एकदूसरे की मदद भी करते थे. गांव वाले भाइयों के इस प्रेम को देख मन ही मन जलते थे. सुरेश सिंह चेन्नई में किसी प्राइवेट कंपनी में नौकरी करता था. लेकिन पत्नी राधिका बेटे के साथ गांव में रहती थी. वह साल में एक या 2 बार ही घर आता था. उस के न रहने पर जरूरत पड़ने पर घर के छोटेमोटे काम उस के बड़े भाई का बेटा राहुल कर दिया करता था.

राहुल और राधिका थे तो चाचीभतीजा, लेकिन हमउम्र होने की वजह से दोनों दोस्तों की तरह रहते थे, बातचीत भी वे दोस्तों की ही तरह करते थे. इस का नतीजा यह निकला कि धीरेधीरे उन के बीच मधुर संबंध बन गए. उन के मन में एकदूसरे के लिए चाहत के फूल खिले तो एकदूसरे के स्पर्श मात्र से उन का रोमरोम खिल उठने लगा. राहुल चाची राधिका से जुनून के हद तक प्यार करने लगा तो राधिका ने भी उस के प्यार पर अपने समर्पण की मोहर लगा दी. एक बार मर्यादा टूटी तो उन्हें जब भी मौका मिलता, जिस्म की भूख मिटाने लगे. दोनों ने अपने इस अनैतिक रिश्ते पर परदा डालने की कोशिश तो बहुत की, लेकिन पाप के इस रिश्ते को वे छिपा नहीं सके.

लोग राधिका और राहुल को ले कर तरहतरह की चर्चाएं भी करने लगे, पर उन्होंने इस बात पर ध्यान नहीं दिया. जब सुरेश सिंह के किसी शुभचिंतक ने उसे फोन कर के चाचीभतीजे के बीच पक रही खिचड़ी की जानकारी दी तो वह नौकरी छोड़ कर गांव आ गया. यह सन 2014 की बात है. सुरेश ने खूब पैसे कमाए थे. उन्हीं पैसों से उस ने गांव में रह कर प्रौपर्टी का काम शुरू कर दिया, जो थोड़ी मेहनत के बाद अच्छा चल निकला. कामधंधे की वजह से अकसर उसे दिन भर घर से बाहर रहना पड़ता था, इसलिए राहुल और राधिका को मिलने में कोई परेशानी नहीं होती थी. लेकिन एक दिन अचानक वह दोपहर में घर आ गया तो उस ने दोनों को आपत्तिजनक स्थिति में पकड़ लिया.

फिर क्या था, सुरेश ने न पत्नी को छोड़ा और न भतीजे को. उस ने इस बात को ले कर भाई से बात की तो बेटे की हरकत से वह काफी शर्मिंदा हुए. समाज और रिश्तों की दुहाई दे कर उन्होंने बेटे को घर से निकाल दिया तो वह लखनऊ आ गया और गोमतीनगर में किराए पर कमरा ले कर रहने लगा. यहां वह सरकारी नौकरी की परीक्षाओं की तैयारी कर रहा था. सुरेश की वजह से गांव में राहुल और उस की चाची की काफी बदनामी हुई थी. यही नहीं, उसे घर से भी निकाल दिया गया था. राधिका की खूब थूथू हुई थी. गांव से ले कर नातेरिश्तेदारों तक ने उस की खूब फजीहत की थी.

धीरेधीरे बात थमती गई. मांबाप से मांफी मांग कर राहुल फिर घर लौट आया. मांबाप ने उसे माफ जरूर कर दिया था, लेकिन उस पर कड़ी नजर रखी जा रही थी. राधिका से उसे मिलने की सख्त मनाही थी. जबकि वह चाची से मिलने के लिए तड़प रहा था. लेकिन सख्त पहरेदारी की वजह से दोनों का मिलन संभव नहीं हो पा रहा था. चाचा सुरेश की वजह से राहुल प्रेमिका चाची से मिल नहीं पा रहा था. उसे लग रहा था कि जब तक चाचा रहेगा, वह चाची से कभी मिल नहीं पाएगा. चाचा प्यार की राह का कांटा लगा तो वह उसे हटाने के बारे में सोचने लगा. आखिर उस ने उसे हटाने का निश्चय कर लिया.

अब वह ऐसी राह खोजने लगा, जिस पर चल कर उस का काम भी हो जाए और वह फंसे भी न. काफी सोचविचार कर उस ने तय किया कि वह अपना मोबाइल फोन औन कर के बाइब्रेशन पर लखनऊ वाले कमरे पर ही छोड़ देगा और रात में गोरखपुर पहुंच कर चाचा की हत्या कर के लखनऊ अपने कमरे पर आ जाएगा. पुलिस उस पर शक करेगी तो मोबाइल लोकेशन के सहारे वह बच जाएगा. तब वह शायद यह भूल गया था कि कातिल कितना भी चालाक क्यों न हो, कानून के लंबे हाथों से उस का बचना आसान नहीं है.

राहुल जब से घर आ कर रहने लगा था, सुरेश और उस की पत्नी राधिका के बीच उसे ले कर अकसर झगड़ा होता रहता था. जबकि इस बीच राहुल एक बार भी चाची से नहीं मिला था. रोजरोज के झगड़े से परेशान हो कर राधिका नाराज हो कर बेटे को ले कर मायके चली गई थी. राधिका के चली जाने से राहुल काफी दुखी था. उस का मन घर में नहीं लगा तो 16 अक्तूबर को मांबाप से कह कर वह लखनऊ चला गया. चाची से न मिल पाने की वजह से राहुल तड़प रहा था. तड़प की वेदना से आहत हो कर उस ने योजना को अमलीजामा पहना दिया. योजना के अनुसार 17 अक्तूबर की शाम 4 बजे इंटरसिटी ट्रेन से वह गोरखपुर के लिए चल पड़ा. रात 11 बजे के करीब वह गोरखुपर पहुंचा. स्टेशन से टैंपो ले कर वह चिलुआताल के बरगदवां चौराहे पर पहुंचा और वहां से पैदल ही घर पहुंच गया.

उसे घर तो जाना नहीं था, इसलिए सब से पहले उस ने पिता के कमरे के दरवाजे की सिटकनी बाहर से बंद कर दी, ताकि शोर होने पर वह बाहर न निकल सकें. इस के बाद पीछे की दीवार के सहारे वह सुरेश सिंह के कमरे में पहुंचा, जहां वह गहरी नींद सो रहा था. उसे देखते ही नफरत से राहुल का खून खौल उठा. उसे पता था कि चाचा के घर में लोहे की रौड कहां रखी है. उस ने लोहे की रौड उठाई और पूरी ताकत से सुरेश के सिर पर 3 वार कर के उसे मौत के घाट उतर दिया.

राहुल को विश्वास हो गया कि सुरेश की मौत हो चुकी है तो उस ने घर में रखा बोरा उठाया और उसी में उस की लाश भर कर रात के 4 बजे के करीब बाहर झांक कर देखा कि कोई देख तो नहीं रहा. जब उसे लगा कि कोई नहीं देख रहा है तो उस ने सुरेश की ही साइकिल घर उस की लाश वाले बोरे को कैरियर पर रख कर जंगल की ओर चल पड़ा. लेकिन जब वह झील की ओर जा रहा था, तभी एक ट्रैक्टर आता दिखाई दिया. उसे देख कर वह घबरा गया और साइकिल को एक पेड़ से टिका कर भागा. ट्रैक्टर पर बैठे एक मजदूर ने उसे भागते देख लिया तो उस ने उस का नाम ले कर पुकारा भी, लेकिन रुकने के बजाए राहुल बरगदवां चौराहे की ओर भाग गया.

वहां से उस ने टैंपो पकड़ी और गोरखपुर रेलवे स्टेशन पहुंचा, जहां से ट्रेन पकड़ कर लखनऊ स्थित अपने कमरे पर चला गया. उस ने चालाकी तो बहुत दिखाई, लेकिन वह काम न आई और पकड़ा गया. राहुल चौधरी की निशानदेही पर पुलिस ने हत्या में प्रयुक्त लोहे की रौड बरामद कर ली थी. पूछताछ के बाद राहुल को अदालत में पेश किया गया, जहां से उसे जेल भेज दिया गया. राधिका के पति की हत्या की खबर पा कर ससुराल आ गई थी. राहुल ने जो किया था, उस से उसे काफी दुख पहुंचा. क्योंकि उस ने राहुल से कभी नहीं कहा था कि वह उस के पति की हत्या कर उसे विधवा बना दे.

राहुल के मांबाप भी काफी दुखी हैं. उन्होंने राहुल से अपना नाता तोड़ कर उसे उस के हाल पर छोड़ दिया है. Gorakhpur Crime

कथा में राधिका सिंह बदला नाम है. कथा पुलिस सूत्रों एवं राहुल के बयानों पर आधारित

Hindi Crime Story: वासना की आग – परिवार हुआ बरबाद

Hindi Crime Story:‘‘तुम्हारी बात तो कोई नहीं है, क्योंकि तुम तो कभी मेरा कहना मानती ही नहीं हो. पर कम से कम बेटियों का तो खयाल रखो. तुम्हारी आदतों का उन पर गलत प्रभाव पड़ सकता है. उन के बारे में तो सोचो.’’ राम सजीवन ने अपनी पत्नी फूलमती को समझाते हुए कहा.

‘‘हमें पता है कि हमें अपनी बेटियों को कैसे रखना है. हम कोई नासमझ नहीं हैं, जो अच्छीबुरी बात न समझें. लेकिन तुम्हें तो केवल दूसरों की बातें सुन कर हमारे ऊपर आरोप लगाने में ही मजा आता है.’’ पत्नी फूलमती ने झल्लाते हुए पति की बातों का जबाव दिया.

‘‘दूसरे की बातों में क्यों आऊंगा मैं? क्या मुझे दिखाई नहीं दे रहा कि तुम क्या करती हो. तुम्हारी बातें पूरे मोहल्ले में किसी से भी छिपी हुई नहीं हैं.’’ कहते हुए राम सजीवन घर से बाहर जाने लगा.

‘‘दरअसल, अब तुम शक्कीमिजाज के हो गए हो. हमारे पास जो भी खड़ा हो जाए. जो भी हमारे काम आ जाए. हमारे दुखदर्द में शामिल हो जाए, उसे देख कर तुम केवल यही सोचते हो कि उस के हमारे साथ संबंध बन गए हैं.’’ फूलमती बोली.

‘‘हम शक नहीं कर रहे बल्कि हकीकत है. हमें अब तुम्हारी चिंता नहीं है क्योंकि तुम मनमानी करोगी. हम तो बस बेटियों को ले कर परेशान हो रहे हैं. एक बार वे अपने घर चली जाएं. बस, उस के बाद तो हम तुम्हें कभी देखेंगे भी नहीं.’’ राम सजीवन ने कहा.

पत्नी की गलत आदतों की वजह से राम सजीवन मानसिक रूप से परेशान रहने लगा था. उस के एक बेटा और 3 बेटियां थीं. वह अपने तीनों जवान बच्चों को भी अच्छी सीख देता रहता था. जब उसे लगा कि पत्नी पर उस के कहने का कोई असर नहीं हो रहा है तो उस ने खुद को परिवार से दूर करना शुरू किया. वह स्वभाव से एकाकी रहने लगा. 38 साल की फूलमती ने 20-22 साल के कई लड़कों के साथ दोस्ती कर ली थी. वह उन लड़कों को अपने घर पर बुलाती रहती थी. यह बात मोहल्ले वालों से भला कैसे छिपी रह सकती थी. जिस से पूरे मोहल्ले में फूलमती के ही चर्चे होते रहते थे.

राम सजीवन को लगता था कि पत्नी की बुरी हरकतों का प्रभाव उस की जवान हो रही बेटियों पर पड़ेगा. इस कारण वह पत्नी को लड़कों की संगत से दूर रहने को कहता था. पति की बात को मानने के बजाय फूलमती उस से झगड़ने लगती थी. इस कारण पति और पत्नी अलगअलग रहने लगे.

राम सजीवन अपने घर से दूर अपने प्लौट पर बने मकान में रहने लगा था. जबकि फूलमती लखनऊ के ही थाना गोसाईंगंज स्थित बखारी गांव के मजरा रानीखेड़ा में एक बेटे रवि कुमार और तीनों बेटियों के साथ रह रही थी. पति के अलग रहने से फूलमती को और भी आजादी मिल गई थी. क्योंकि अब उसे कोई रोकनेटोकने वाला नहीं था. अलग मकान पर रहने के बाद भी राम सजीवन पत्नी को अकसर समझाता रहता था, जिस की वजह से दोनों में झगड़ा भी हो जाता था.

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11 मई, 2021 की बात है. लखनऊ शहर के थाना गोसाईंगंज स्थित बखारी गांव के मजरा रानी खेड़ा के रहने वाले रवि कुमार ने पुलिस को सूचना दी कि उस के पिता 40 साल के राम सजीवन की हत्या किसी ने गांव के बाहर कर दी गई है. उस के पिता अपने घर से दूर प्लौट पर रहते थे. सूचना पा कर थानाप्रभारी अमरनाथवर्मा पुलिस टीम के साथ मौके पर पहुंच गए. पुलिस ने लाश का निरीक्षण किया तो उस का चेहरा ईंट से कुचला हुआ था. खून सनी ईंट भी वहीं पड़ी थी. मृतक के घर के लोग वहां मौजूद थे. उन से प्रारंभिक पूछताछ के बाद लाश पोस्टमार्टम के लिए भेज दी. अज्ञात के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज करने के बाद पुलिस ने जांच शुरू कर दी.

राम सजीवन दलित था. गांव में उस की किसी से ऐसी कोई दुश्मनी नहीं थी जिस की वजह से हत्या की जा सके. ऐसे में पुलिस को हत्या की वजह समझ नहीं आ रही थी. लखनऊ के पुलिस कमिश्नर डी.के. ठाकुर के निर्देश पर डीसीपी (दक्षिण) डा. ख्याती गर्ग, अपर पुलिस उपायुक्त (दक्षिण) पूर्णेंदु सिंह और एसीपी स्वाति चौधरी के निर्देशन में गोसाईंगंज के थानाप्रभारी इंसपेक्टर अमरनाथ वर्मा के नेतृत्व में एक पुलिस टीम बनाई गई.

टीम में इंसपेक्टर डा. रामफल प्रजापति, एसआई फिरोज आलम सिद्दीकी, दीपक कुमार पांडेय, महिला एसआई नीरू यादव, कांस्टेबल गिरजेश यादव, रमापति पांडेय, अकबर, कुलदीप, सगीर अहमद, किशन जायसवाल, जितेंद्र भाटी को शामिल किया गया. थाना पुलिस के अलावा क्राइम ब्रांच की टीम को भी केस की जांच में लगा दिया गया. इस टीम में इंसपेक्टर तेज बहादुर सिंह, एसआई संतोष कुमार सिंह, दिलीप मिश्रा, प्रमोद कुमार सिंह कांस्टेबल विनय यादव, वीर सिंह, अजय तेवतिया, राजीव कुमार और अभिषेक कुमार शामिल थे.

राम सजीवन की हत्या की वजह जानने के लिए जब पुलिस ने उस की पत्नी फूलमती से पूछा तो वह बोली, ‘‘उन की किसी से कोई दुश्मनी नहीं थी. हमारे साथ भी कोई लड़ाईझगड़ा नहीं था. बस वह नाराज हो कर गांव के बाहर वाले मकान में रहते थे.’’

फूलमती के पति की हत्या हुई थी. इस कारण वह परेशान थी. इस वजह से पुलिस बहुत दबाव डाल कर उस से पूछताछ नहीं कर पा रही थी. फूलमती हर बार बयान बदल रही थी. एक बार उस ने कहा, ‘‘वह खराब संगत में रहता था. इस कारण कुछ नशेड़ी लोगों से उस की दोस्ती हो गई थी. हो सकता है कि उन लोगों में से किसी ने नशे में हत्या की हो.’’

पुलिस को भी राम सजीवन का शव जिस हालत में मिला था, उसे देख कर ऐसा ही लग रहा था जैसे किसी ने मारने के बाद भी अपना गुस्सा निकालने के लिए ईंट से हमला कर के मुंह को कुचल दिया हो. जिस से उस की पहचान न हो सके. पर यह मसला पहचान छिपाने का नहीं दुश्मनी का लग रहा था. पुलिस ने गांव के लोगों से भी पूछताछ शुरू की तो पता चला कि राम सजीवन और उस की पत्नी के झगड़े की वजह पत्नी का कुछ अलग लोगों से संबंध था. 4 बच्चों की मां होने के बाद भी फूलमती दूसरे लोगों से हंसीमजाक करने में आगे रहती थी.

इस जानकारी के बाद पुलिस ने फूलमती से फिर से पूछताछ शुरू की. बारबार बयान बदलने से पुलिस को भी यह विश्वास होने लगा कि हत्या की जानकारी फूलमती को जरूर होगी. पुलिस के साथ पूछताछ और सवालों में वह फंस गई. थानाप्रभारी ने पूछा, ‘‘तुम्हें यह तो पता है कि किस ने मारा है. भले ही तुम उस में शामिल न रही हो. अगर तुम सच बता दोगी तो तुम्हें कुछ नहीं होगा. जिस ने यह हत्या की है, उसी को सजा मिलेगी.’’

पुलिस से यह भरोसा पा कर फूलमती ने कहा, ‘‘गांव बखारी के ही रहने वाले कल्याण ने यह किया है. राम सजीवन उसे हमारे घर आता देख कर गुस्सा होता था. यह बात उस से सहन नहीं हुई तो उस ने राम सजीवन की हत्या कर दी.’’

अब पुलिस टीम ने बिना समय गंवाए कल्याण को पकड़ लिया. कल्याण ने खुद को फंसता देख पूरी कहानी बता दी. कल्याण ने बताया, ‘‘राम सजीवन को मेरा फूलमती से मिलनाजुलना अच्छा नहीं लगता था. इस बात से वह फूलमती से नाराज रहता था. फूलमती भी पति की रोजरोज की कलह से परेशान हो गई थी. उसी के कहने पर राम सजीवन को रास्ते से हटाया.

‘‘फूलमती के दबाव डालने के बाद मैं ने उसे रास्ते से हटाने की योजना बनाई. मैं अकेले यह काम करने की हालत में नहीं था. इसलिए मैं ने अपने साथी सतीश से बात की. सतीश आपराधिक प्रवृत्ति का था. वह सुरियामऊ गांव का रहने वाला था.

‘‘हम लोगों ने अपने 2 और साथी सूरज और नीरज को भी शामिल किया. इस के बाद 11 मई की रात को राम सजीवन के घर में घुस कर हम चारों ने उस की हत्या कर दी.’’

कल्याण ने बताया, ‘‘राम सजीवन की हत्या करने के बाद उस के शव को घर से 100 मीटर दूर गांव से बाहर वाली सड़क पर डाल दिया. इस की जानकारी फृलमती को दी तो उस ने अपने मन की भड़ास और गुस्सा निकालने के लिए ईंट से मृत पति के चेहरे पर कई वार किए. मुंह को बुरी तरह से कुचल दिया.’’

कल्याण से मिली जानकारी के आधार पर गोसाईंगंज पुलिस ने सब से पहले फूलमती को पकड़ा उस के बाद रानीखेड़ा के रहने वाले 20 साल के सूरज, सुरियामऊ के रहने वाले 22 साल के सतीश, इसी गांव के 19 साल के नीरज को भी पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया. पुलिस ने आरोपियों के पास से खून लगे कपड़े भी बरामद किए.

पुलिस ने राम सजीवन हत्याकांड में 5 अभियुक्तों राम सजीवन की पत्नी फूलमती, कल्याण, सतीश, सूरज और नीरज के खिलाफ धारा 302, 147, 149 और 201 आईपीसी के साथ 3 (2) (5) एससीएसटी ऐक्ट के तहत गिरफ्तार कर लिया. गोसाईंगंज थाना पुलिस और क्राइम टीम ने राम सजीवन की निर्मम हत्या करने वाले सभी आरोपियों को गिरफ्तारकर कोर्ट में पेश किया, जहां से उन्हें जेल भेज दिया. Hindi Crime Story

Crime Story: हवाई जहाज वाली चोरनी – पैसे की लत्त में बनी चोर

Crime Story: अप्रैल, 2019 महीने की बात है. मुंबई के लोअर परेल के एनएम जोशी मार्ग स्थित पुलिस स्टेशन में एक महिला ने रिपोर्ट दर्ज कराई कि वह परेल के ही फिनिक्स मौल के ‘जारा’ शोरूम में शादी के लिए खरीदारी करने गई थी. खरीदारी करने के बाद उस ने बिल अदा करने लिए सामान वाला अपना बैग बेटे को थमा दिया. संयोग से उसी समय बेटे के मोबाइल फोन पर किसी का फोन आ गया तो बेटा वहीं रखी कुरसी पर बैग रख कर मोबाइल फोन पर बात करने लगा.

फोन पर बात करने में उस का बेटा इस तरह मशगूल हो गया कि उसे बैग का खयाल ही नहीं रहा. फोन कटा तो उसे बैग की याद आई.पता चला कि बैग अपनी जगह पर नहीं है. वह इधरउधर देखने लगा. बैग वहां होता तब तो मिलता. जिस समय वह फोन पर बातें करने में मशगूल था, उसी बीच कोई उस का बैग उठा ले गया था. उस के बैग में 13 लाख के गहने, नकद रुपए और मोबाइल फोन मिला कर करीब 15 लाख रुपए से ज्यादा कीमत का सामान था.यह कोई छोटीमोटी चोरी नहीं थी. इसलिए एमएम जोशी मार्ग थाना पुलिस ने इस मामले की रिपोर्ट दर्ज कर मामले को गंभीरता से लेते हुए तुरंत जांच शुरू कर दी. मौल में जा कर गहन छानबीन के साथ वहां ड्यूटी पर तैनात सिक्योरिटी गार्डों के अलावा एकएक कर्मचारी से विस्तार से पूछताछ की गई.

सीसीटीवी फुटेज भी खंगाली गई, पर कोई ऐसा संदिग्ध पुलिस की नजर में नहीं आया, जिस पर उसे शक होता. पुलिस अपने हिसाब से चोरी की वारदात की जांच करती रही, पर उस चोर तक नहीं पहुंच सकी.मुंबई पुलिस का एक नियम यह है कि मुंबई में कोई भी बड़ी वारदात होती है तो थाना पुलिस के साथसाथ मुंबई पुलिस की अपराध शाखा (क्राइम ब्रांच) भी थाना पुलिस के समांतर जांच करती है. चोरी की इस वारदात की जांच कुर्ला की अपराध शाखा की यूनिट-5 को भी सौंपी गई. क्राइम ब्रांच के डीसीपी ने इस मामले की जांच सीनियर इंसपेक्टर जगदीश सईल को सौंपी. सीनियर इंसपेक्टर जगदीश सईल ने इंसपेक्टर योगेश चव्हाण, असिस्टेंट इंसपेक्टर सुरेखा जवंजाल, महेंद्र पाटिल, अमोल माली आदि को मिला कर एक टीम बनाई और चोरी की इस घटना की जांच शुरू कर दी.

अपराध शाखा की इस टीम ने भी मौके पर जा कर सभी से पूछताछ की और सीसीटीवी फुटेज ला कर अपने औफिस में ध्यान से देखनी शुरू की.सीसीटीवी फुटेज में अपराध शाखा की यह टीम उस समय की फुटेज को बड़े गौर से देख रही थी, जिस समय महिला का बैग चोरी हुआ था. काफी कोशिश के बाद उन्हें भी ऐसा कोई संदिग्ध नजर नहीं आया, जिस पर वे शक करते. सीसीटीवी फुटेज और पूछताछ में क्राइम ब्रांच को कोई कामयाबी नहीं मिली तो यह टीम चोर तक पहुंचने के अन्य विकल्पों पर विचार करने लगी.तमाम विकल्पों पर विचार करने के बाद एक विकल्प यह भी सामने आया कि मुंबई में इस के पहले तो इस तरह की कोई वारदात नहीं हुई है. जब इस बारे में पता किया गया तो पता चला कि इस के पहले सन 2016 में दादर के शिवाजी पार्क स्थित लैक्मे शोरूम में भी इसी तरह की एक वारदात हुई थी.

उस चोरी में भी कोई गहनों और रुपयों से भरा बैग इसी तरह उठा ले गया था. इसी तरह की 3 चोरियों का और पता चला. वे तीनों चोरियां भी इसी तरह से की गई थीं. इस के बाद जगदीश सईल की टीम ने जिस दिन दादर के लैक्मे शोरूम में चोरी हुई थी, उस दिन की सीसीटीवी फुटेज हासिल की और उसे ध्यान से देखना शुरू किया. यह टीम फुटेज में उस समय पर विशेष ध्यान दे रही थी, जिस समय चोरी होने की बात कही गई थी.

पुलिस टीम शोरूम में आनेजाने वाले एकएक आदमी को गौर से देख रही थी. इसी तरह ध्यान से फिनिक्स मौल के जारा शोरूम की भी सीसीटीवी फुटेज देखी गई तो इस टीम को एक ऐसी औरत दिखाई दी, जो दोनों ही फुटेज में थी. जिस समय चोरी होने की बात कही गई थी, उसी समय दोनों फुटेज में उस महिला को देख कर पुलिस की आंखों में चमक आ गई. इस से पुलिस को लगा कि चोरी की वारदातों में इसी महिला का हाथ हो सकता है. महिला की फोटो मिल गई, तो पुलिस उस का पताठिकाना तलाशने में लग गई. यह काम इतना आसान नहीं था. किसी अंजान महिला को मुंबई जैसे शहर में मात्र फोटो के सहारे ढूंढ निकालना भूसे के ढेर से सुई तलाशने जैसा था.

अखबारों में भी फोटो नहीं छपवाया जा सकता था. अपना फोटो देख कर वह महिला गायब हो सकती थी. चुनौती भरा काम करने में अलग ही मजा आता है. जगदीश सईल की टीम ने भी इस चुनौती को स्वीकार कर महिला की उसी तस्वीर के आधार पर तलाश शुरू कर दी. पहले तो इस टीम ने जहांजहां चोरी हुई थी, उन शोरूमों के मालिकों और कर्मचारियों को महिला की वह फोटो दिखाई कि कहीं यह उन के शोरूम में खरीदारी करने तो नहीं आती थी या यह उन की ग्राहक तो नहीं है. इस मामले में पुलिस टीम को तब निराश होना पड़ा, जब सभी ने कहा कि इनकार कर दिया. एक फोटो के आधार पर किसी को खोज निकालना पुलिस के लिए आसान नहीं था. लेकिन इंसपेक्टर जगदीश सइल की टीम ने इस नामुमकिन काम को मुमकिन कर दिखाया.

मोबाइल नंबर हो तो पुलिस उसे सर्विलांस पर लगा कर अपराधी तक पहुंच जाती है, पर यहां तो महिला का नंबर ही नहीं था.अब पुलिस को उस के मोबाइल नंबर पता करना था, जो बहुत मुश्किल काम था. पर पुलिस ने इस मुश्किल काम को आखिर कर ही दिखाया. जगदीश सइल की टीम ने इस के लिए चोरी के समय दोनों मौलों में जितने भी मोबाइल नंबर सक्रिय थे, सारे नंबर निकलवाए. इस के बाद पूरी टीम ने नंबर खंगालने शुरू किए. काफी मशक्कत के बाद इन नंबरों में एक नंबर ऐसा मिला, जो दोनों मौलों में चोरी होने के समय सक्रिय था. बाकी कोई भी नंबर ऐसा नहीं था, जो दोनों मौलों में चोरी के समय सक्रिय रहा हो.

पुलिस को उस नंबर पर शक हुआ तो पुलिस ने उस नंबर के बारे पता लगाना शुरू किया. नंबर मिलने के बाद पता लगाना मुश्किल नहीं था. जिस कंपनी का नंबर था, उस कंपनी से नंबर के मालिक के बारे में तो जानकारी मिल ही गई, उस का पता ठिकाना भी मिल गया. पुलिस को मिली जानकारी के अनुसार वह नंबर बेंगलुरु की रहने वाली मुनमुन हुसैन का था. मामला एक महिला से जुड़ा था, इसलिए पुलिस जल्दबाजी में कोई ऐसा कदम नहीं उठाना चाहती थी, जिस से बाद में बदनामी हो. इसलिए पुलिस पहले उस महिला के बारे में सारी जानकारी जुटा कर पूरी तरह संतुष्ट हो जाना चाहती थी कि वारदातें इसी महिला द्वारा की गई हैं या नहीं.

इस के लिए जगदीश सइल ने सीसीटीवी फुटेज में मिली फोटो, फोन नंबर और कंपनी द्वारा मिला पता बेंगलुरु पुलिस को भेज कर उस के बारे में पूरी जानकारी प्राप्त की. पता चला कि महिला संदिग्ध लगती है. इस के बाद मुंबई पुलिस ने बेंगलुरु जा कर वहां की पुलिस की मदद से उस महिला को गिरफ्तार कर लिया.  मुंबई ला कर उस महिला से विस्तार से पूछताछ की गई तो पता चला कि सारी चोरियां उसी ने की थीं. इस के बाद उस ने अपनी जो कहानी बताई, वह इस प्रकार थी.

46 वर्षीय मुनमुन हुसैन उर्फ अर्चना बरुआ उर्फ निक्की मूलरूप से मध्य कोलकाता के तालतला की रहने वाली थी. उस का असली नाम अर्चना बरुआ है. वह पढ़नेलिखने में तो ठीकठाक थी ही, साथ ही सुंदर भी थी. उस की कदकाठी जैसे सांचे में ढली हुई थी. इसलिए उस ने सोचा कि क्यों न वह मौडलिंग में अपना कैरियर बनाए. काफी कोशिश के बाद भी जब उसे मौडलिंग का कोई काम नहीं मिला तो उस ने एक ब्यटूपार्लर में काम सीखा और वहीं नौकरी करने लगी.वहां वेतन इतना नहीं मिलता था कि उस के खर्चे पूरे होते, इसलिए अपने खर्चे पूरे करने के लिए उस ने सब की नजरें बचा कर ब्यूटीपार्लर में आने वाली महिलाओं के पर्स से रुपए चोरी करने शुरू कर दिए.

इस में वह सफल रही तो उस ने बाहर चोरी करने का विचार किया. पर इस में वह पहली बार में ही पकड़ी गई. वह दक्षिण कोलकाता के भवानीपुर स्थित एल्गिन शौपिंग मौल में मोबाइल फोन और सौंदर्य प्रसाधन का सामान चोरी कर रही थी कि किसी सेल्समैन की नजर उस पर पड़ गई और वह पकड़ी गई. इस के बाद उस ने एक बार और प्रयास किया. इस बार भी वह पकड़ी गई तो अखबारों में उस की फोटो छप गई, जिस से वह काफी बदनाम हो गई थी. इस के अलावा पुलिस भी उस के पीछे पड़ गई थी, जिस से उसे कोलकाता छोड़ना पड़ा.

अर्चना कोलकाता छोड़ कर मुंबई आ गई. वह एक अच्छी मौडल बनना चाहती थी, इसलिए मुंबई आ कर एक बार फिर उस ने मौडलिंग के क्षेत्र में भाग्य आजमाने की कोशिश की. वह मौडल बन कर नाम और शोहरत कमाना चाहती थी. अपना भविष्य उज्ज्वल बनाने के लिए अर्चना मुंबई में जीजान से कोशिश करने लगी. पर मुंबई तो मायानगरी है. यह मोह तो सभी को लेती है, पर जरूरी नहीं कि यहां आने वाले हर किसी का भाग्य बदल जाए. जिस का भाग्य बदल देती है, वह तो आसमान में उड़ने लगता है, बाकी यहां तमाम लोग ऐसे भी हैं, जो स्ट्रगल करते हुए अपनी जिंदगी बरबाद कर लेते हैं.

ऐसा ही कुछ अर्चना के साथ भी हुआ. चाहती तो थी वह मौडल बनना, पर समय ने उस का साथ नहीं दिया और काम की तलाश करतेकरते एक दिन ऐसा आ गया कि उस के भूखों मरने की नौबत आ गई. उस के लिए अच्छा यह था कि उस का गला सुरीला था और वह अच्छा गा लेती थी. अर्चना को जब कहीं कोई काम नहीं मिला तो वह बीयर बार में गाने लगी. यहां उस ने अपना नाम निक्की रख लिया. निक्की के नाम से अर्चना पेट भरने के लिए बार में गाती तो थी, पर उसे यह काम पसंद नहीं आया. फिर वह अपना भाग्य आजमाने बेंगलुरु चली गई. वह गाती तो अच्छा थी ही, इसलिए वह वहां एक आर्केस्टा के साथ जुड़ गई. उसे ब्यूटीपार्लर का भी काम आता था, इसलिए एक ब्यूटीपार्लर में भी काम करने लगी. यहां उस ने अपना नाम मुनमुन हुसैन रख लिया था.

ब्यूटीपार्लर में काम करते हुए और स्टेज पर अंग प्रदर्शन करते हुए उसे लगा कि आखिर इस तरह वह कब तक भटकती रहेगी. उसे एक जीवनसाथी की जरूरत महसूस होने लगी थी, जो उसे प्यार भी करे और जीवन में ठहराव के साथ सहारा भी दे. वह अकेली अपनी जिम्मेदारी उठातेउठाते थक गई थी. अर्चना बरुआ उर्फ निक्की उर्फ मुनमुन हुसैन ने जीवनसाथी की तलाश शुरू की तो जल्दी ही उसे इस काम में सफलता मिल गई. वह सुंदर तो थी ही. आर्केस्ट्रा के किसी प्रोग्राम में उसे देख कर एक व्यवसाई का दिल उस पर आ गया.

मुनमुन को एक प्रेमी की तलाश थी ही, जो उस का जीवनसाथी बन सके. उस ने उस व्यवसाई को अपने प्रेमजाल फांस कर उस से शादी कर ली. जल्दी ही वह एक बेटी की मां भी बन गई. पर जल्दी ही बेटी और शादी, दोनोें ही मुनमुन को बोझ लगने लगी. क्योंकि इस से उस की आजादी और मौजमस्ती दोनों ही छिन गई थीं. बेटी की देखभाल करना और उस के लिए दिन भर घर में कैद रहना उस के वश में नहीं था. वह बेटी की देखभाल उस तरह नहीं कर रही थी, जिस तरह एक मां अपने बच्चे की करती है. यह बात उस के व्यवसाई पति को अच्छी नहीं लगी तो वह मुनमुन पर अंकुश लगाने लगा. मुनमुन हमेशा अपना जीवन आजादी के साथ जिया था. पति की रोकटोक उसे अच्छी नहीं लगी. एक तो बेटी के पैदा होने से वैसे ही उस की आजादी छिन गई थी, दूसरे अब पति भी उस पर रोकटोक लगाने लगा था.

उसे यह सब रास नहीं आया तो वह पति से अलग हो गई. पति से तलाक होने के बाद एक बार फिर मुनमुन रोजीरोटी के लिए ब्यूटीपार्लर में काम करने के साथ आर्केस्ट्रा में गाने लगी. मुनमुन के खर्चे भी बढ़ गए थे और आगे की जिंदगी यानी भविष्य के लिए भी वह कुछ करना चाहती थी. इन दोनों कामों से वह जो कमाती थी, इस से किसी तरह उस का खर्च ही पूरा हो पाता था. भविष्य की चिंता में उस ने एक बार फिर चोरी करनी शुरू कर दी. क्योंकि चोरी करने का उसे पहले से ही अभ्यास था.जिस ब्यूटीपार्लर में वह काम करती थी, उस ने वहीं से चोरी करना शुरू किया. उस के बाद तो मुनमुन होटल, मौल और विवाहस्थलों तथा शादी वाले घरों में जा कर चोरी करने लगी. ब्यूटीपार्लर मे चोरी करने पर वह पकड़ी नहीं गई थी, इसलिए उस का हौसला बढ़ गया था.

जैसेजैसे वह चोरी करने में सफलता प्राप्त करती गई, वैसेवैसे उस की हिम्मत बढ़ती गई. बस फिर क्या था, आर्केस्ट्रा में काम करने के साथसाथ उस ने चोरी को भी अपना व्यवसाय बना लिया. क्योंकि पहली चोरी में ही उस के हाथ 10 लाख रुपए से ज्यादा का माल लग गया गया था. कोलकाता में कई बार पकड़ी जाने की वजह से उसे कोलकता छोड़ना पड़ा था, इसलिए उस ने तय किया कि वह बेंगलुरु में चोरी नहीं करेगी. वह बेंगलुरु में चोरी करने के बजाए अन्य महानगरों में जा कर चोरी करेगी. इसी के साथ मुनमुन ने यह भी योजना बनाई कि वह सुबह जाएगी और दिन में चोरी कर के शाम तक वह शहर छोड़ देगी.

पूरी योजना बना कर मुनमन हाईप्रोफाइल महिला बन कर हवाई जहाज से अन्य शहरों में जा कर चोरियां करने लगी. वह सुबह मुंबई या हैदराबाद हवाई जहाज से जाती और किसी शोरूम या किसी बड़े होटल में किसी को अपना शिकार बना कर रात तक बेंगलुरु के अपने घर वापस आ जाती. अब तक पुलिस के सामने उस ने 9 चोरियों का खुलासा किया है. वह जब भी चोरी करती थी, कम से कम 10 लाख का माल तो होता ही था. वह 10 से 20 लाख के बीच ही चोरी करती थी. चोरी से ही उस ने करोड़ों की संपत्ति बना ली थी. मुनमुन द्वारा चोरी किए गए गहने नए होते थे, इसलिए अगर वह उन्हें बेचने जाती तो दुकानदार को उस पर शक हो सकता था. वह उस से हजार सवाल करता. संभव था पुलिस को भी सूचना दे देता.

इसलिए उस ने इस से बचने का तरीका यह निकाला कि वह गहने बेचने के बजाय अपने घर में किसी को कोई बड़ी बीमारी होने का बहाना बना कर वह उन्हें गिरवी रख कर बदले में मोटी रकम ले लेती थी. इस के बाद वह उस के पास उन्हें कभी वापस लेने नहीं जाती थी. अपराध शाखा पुलिस ने पूछताछ और साक्ष्य जुटा कर मुनमुन हुसैन उर्फ अर्चना बरुआ उर्फ निक्की को थाना एनएम जोशी मार्ग पुलिस को सौंप दिया. थाना पुलिस ने अपनी काररवाई पूरी कर मुनमुन को अदालत में पेश किया, जहां से उसे जेल भेज दिया गया. पुलिस को मुनमुन हुसैन के पास से 15 लाख रुपए के गहने भी बरामद हुए थे. Crime Story

Crime Stories: पहली ही रात भागी दुल्हन

Crime Stories: 26 साल के छत्रपति शर्मा की आंखों में नींद नहीं थी. वह लगातार अपनी नईनवेली बीवी प्रिया को निहार रहा था. जैसे ही प्रिया की नजरें उस से टकराती थीं, वह शरमा कर सिर झुका लेती थी. 20 साल की प्रिया वाकई खूबसूरती की मिसाल थी. लंबी, छरहरी और गोरे रंग की प्रिया से उस की शादी हुए अभी 2 दिन ही गुजरे थे, लेकिन शादी के रस्मोरिवाज की वजह से छत्रपति को उस से ढंग से बात करने तक का मौका नहीं मिला था.

छत्रपति मुंबई में स्कूल टीचर था. उस की शादी मध्य प्रदेश के सिंगरौली शहर के एक खातेपीते घर में तय हुई थी और शादी मुहूर्त 23 नवंबर, 2017 का निकला था. इस दिन वह मुंबई से बारात ले कर सिंगरौली पहुंचा और 24 नवंबर को प्रिया को विदा करा कर वापस मुंबई जा रहा था. सिंगरौली से जबलपुर तक बारात बस से आई थी. जबलपुर में थोड़ाबहुत वक्त उसे प्रिया से बतियाने का मिला था, लेकिन इतना भी नहीं कि वह अपने दिल की बातों का हजारवां हिस्सा भी उस के सामने बयां कर पाता.

बारात जबलपुर से ट्रेन द्वारा वापस मुंबई जानी थी, जिस के लिए छत्रपति ने पहले से ही सभी के रिजर्वेशन करा रखे थे. उस ने अपना, प्रिया और अपनी बहन का रिजर्वेशन पाटलिपुत्र एक्सप्रैस के एसी कोच में और बाकी बारातियों का स्लीपर कोच में कराया था. ट्रेन रात 2 बजे के करीब जब जबलपुर स्टेशन पर रुकी तो छत्रपति ने लंबी सांस ली कि अब वह प्रिया से खूब बतियाएगा. वजह एसी कोच में भीड़ कम रहती है और आमतौर पर मुसाफिर एकदूसरे से ज्यादा मतलब नहीं रखते. ट्रेन रुकने पर बाराती अपने स्लीपर कोच में चले गए और छत्रपति, उस की बहन और प्रिया एसी कोच में चढ़ गए. छत्रपति की बहन भी खुश थी कि उस की नई भाभी सचमुच लाखों में एक थी. उस के घर वालों ने शादी भी शान से की थी.

जब नींद टूटी तो…

कोच में पहुंचते ही छत्रपति ने तीनों के बिस्तर लगाए और सोने की तैयारी करने लगा. उस समय रात के 2 बजे थे, इसलिए डिब्बे के सारे मुसाफिर नींद में थे. जो थोड़ेबहुत लोग जाग रहे थे, वे भी जबलपुर में शोरशराबा सुन कर यहांवहां देखने के बाद फिर से कंबल ओढ़ कर सो गए थे. छत्रपति और प्रिया को 29 और 30 नंबर की बर्थ मिली थी.

जबलपुर से जैसे ही ट्रेन रवाना हुई, छत्रपति फिर प्रिया की तरफ मुखातिब हुआ. इस पर प्रिया ने आंखों ही आंखों में उसे अपनी बर्थ पर जा कर सोने का इशारा किया तो वह उस पर और निहाल हो उठा. दुलहन के शृंगार ने प्रिया की खूबसूरती में और चार चांद लगा दिए थे. थके हुए छत्रपति को कब नींद आ गई, यह उसे भी पता नहीं चला. पर सोने के पहले वह आने वाली जिंदगी के ख्वाब देखता रहा, जिस में उस के और प्रिया के अलावा कोई तीसरा नहीं था.

जबलपुर के बाद ट्रेन का अगला स्टौप इटारसी और फिर उस के बाद भुसावल जंक्शन था, इसलिए छत्रपति ने एक नींद लेना बेहतर समझा, जिस से सुबह उठ कर फ्रैश मूड में प्रिया से बातें कर सके. सुबह कोई 6 बजे ट्रेन इटारसी पहुंची तो प्लैटफार्म की रोशनी और गहमागहमी से छत्रपति की नींद टूट गई. आंखें खुलते ही कुदरती तौर पर उस ने प्रिया की तरफ देखा तो बर्थ खाली थी. छत्रपति ने सोचा कि शायद वह टायलेट गई होगी. वह उस के वापस आने का इंतजार करने लगा.

ट्रेन चलने के काफी देर बाद तक प्रिया नहीं आई तो उस ने बहन को जगाया और टायलेट जा कर प्रिया को देखने को कहा. बहन ने डिब्बे के चारों टायलेट देख डाले, पर प्रिया उन में नहीं थी. ट्रेन अब पूरी रफ्तार से चल रही थी और छत्रपति हैरानपरेशान टायलेट और दूसरे डिब्बों में प्रिया को ढूंढ रहा था. सुबह हो चुकी थी, दूसरे मुसाफिर भी उठ चुके थे. छत्रपति और उस की बहन को परेशान देख कर कुछ यात्रियों ने इस की वजह पूछी तो उन्होंने प्रिया के गायब होने की बात बताई. इस पर कुछ याद करते हुए एक मुसाफिर ने बताया कि उस ने इटारसी में एक दुलहन को उतरते देखा था.

इतना सुनते ही छत्रपति के हाथों से जैसे तोते उड़ गए. क्योंकि प्रिया के बदन पर लाखों रुपए के जेवर थे, इसलिए किसी अनहोनी की बात सोचने से भी वह खुद को नहीं रोक पा रहा था. दूसरे कई खयाल भी उस के दिमाग में आजा रहे थे. लेकिन यह बात उस की समझ में नहीं आ रही थी कि आखिरकार प्रिया बगैर बताए इटारसी में क्यों उतर गई? उस का मोबाइल फोन बर्थ पर ही पड़ा था, इसलिए उस से बात करने का कोई और जरिया भी नहीं रह गया था. एक उम्मीद उसे इस बात की तसल्ली दे रही थी कि हो सकता है, वह इटारसी में कुछ खरीदने के लिए उतरी हो और ट्रेन चल दी हो, जिस से वह पीछे के किसी डिब्बे में चढ़ गई हो. लिहाजा उस ने अपनी बहन को स्लीपर कोच में देखने के लिए भेजा. इस के बाद वह खुद भी प्रिया को ढूंढने में लग गया.

भुसावल आने पर बहन प्रिया को ढूंढती हुई उस कोच में पहुंची, जहां बाराती बैठे थे. बहू के गायब होने की बात उस ने बारातियों को बताई तो बारातियों ने स्लीपर क्लास के सारे डिब्बे छान मारे. मुसाफिरों से भी पूछताछ की, लेकिन प्रिया वहां भी नहीं मिली. प्रिया नहीं मिली तो सब ने तय किया कि वापस इटारसी जा कर देखेंगे. इस के बाद आगे के लिए कुछ तय किया जाएगा. बात हर लिहाज से चिंता और हैरानी की थी, इसलिए सभी लोगों के चेहरे उतर गए थे. शादी की उन की खुशी काफूर हो गई थी.

प्रिया मिली इलाहाबाद में, पर…

इत्तफाक से उस दिन पाटलिपुत्र एक्सप्रैस खंडवा स्टेशन पर रुक गई तो एक बार फिर सारे बारातियों ने पूरी ट्रेन छान मारी, लेकिन प्रिया नहीं मिली. इस पर छत्रपति अपने बड़े भाई और कुछ दोस्तों के साथ ट्रेन से इटारसी आया और वहां भी पूछताछ की, पर हर जगह मायूसी ही हाथ लगी. अब पुलिस के पास जाने के अलावा कोई और रास्ता नहीं था. इसी दौरान छत्रपति ने प्रिया के घर वालों और अपने कुछ रिश्तेदारों से भी मोबाइल पर प्रिया के गुम हो जाने की बात बता दी थी.

पुलिस वालों ने उस की बात सुनी और सीसीटीवी के फुटेज देखी, लेकिन उन में कहीं भी प्रिया नहीं दिखी तो उस की गुमशुदगी की सूचना दर्ज कर ली. इधर छत्रपति और उस के घर वालों का सोचसोच कर बुरा हाल था कि प्रिया नहीं मिली तो वे घर जा कर क्या बताएंगे. ऐसे में तो उन की मोहल्ले में खासी बदनामी होगी. कुछ लोगों के जेहन में यह बात बारबार आ रही थी कि कहीं ऐसा तो नहीं कि प्रिया का चक्कर किसी और से चल रहा हो और मांबाप के दबाव में आ कर उस ने शादी कर ली हो. फिर प्रेमी के साथ भाग गई हो. यह खयाल हालांकि बेहूदा था, जिसे किसी ने कहा भले नहीं, पर सच भी यही निकला.

पुलिस वालों ने वाट्सऐप पर प्रिया का फोटो उस की गुमशुदगी के मैसेज के साथ वायरल किया तो दूसरे ही दिन पता चल गया कि वह इलाहाबाद के एक होटल में अपने प्रेमी के साथ है. दरअसल, प्रिया का फोटो वायरल हुआ तो उसे वाट्सऐप पर इलाहाबाद स्टेशन के बाहर के एक होटल के उस मैनेजर ने देख लिया था, जिस में वह ठहरी हुई थी. मामला गंभीर था, इसलिए मैनेजर ने तुरंत प्रिया के अपने होटल में ठहरे होने की खबर पुलिस को दे दी.

एक कहानी कई सबक

छत्रपति एक ऐसी बाजी हार चुका था, जिस में शह और मात का खेल प्रिया और उस के घर वालों के बीच चल रहा था, पर हार उस के हिस्से में आई थी. इलाहाबाद जा कर जब पुलिस वालों ने उस के सामने प्रिया से पूछताछ की तो उस ने दिलेरी से मान लिया कि हां वह अपने प्रेमी राज सिंह के साथ अपनी मरजी से भाग कर आई है. और इतना ही नहीं, इलाहाबाद की कोर्ट में वह उस से शादी भी कर चुकी है. बकौल प्रिया, वह और राज सिंह एकदूसरे से बेइंतहा प्यार करते हैं, यह बात उस के घर वालों से छिपी नहीं थी. इस के बावजूद उन्होंने उस की शादी छत्रपति से तय कर दी थी. मांबाप ने सख्ती दिखाते हुए उसे घर में कैद कर लिया था और उस का मोबाइल फोन भी छीन लिया था, जिस से वह राज सिंह से बात न कर पाए.

4 महीने पहले उस की शादी छत्रपति से तय हुई तो घर वालों ने तभी से उस का घर से बाहर निकलना बंद कर दिया था. लेकिन छत्रपति से बात करने के लिए उसे मोबाइल दे दिया जाता था. तभी मौका मिलने पर वह राज सिंह से भी बातें कर लिया करती थी. उसी दौरान उन्होंने भाग जाने की योजना बना ली थी. प्रिया के मुताबिक राज सिंह विदाई वाले दिन ही जबलपुर पहुंच गया था. इन दोनों का इरादा पहले जबलपुर स्टेशन से ही भाग जाने का था, लेकिन बारातियों और छत्रपति के जागते रहने के चलते ऐसा नहीं हो सका. राज सिंह पाटलिपुत्र एक्सप्रैस ही दूसरे डिब्बे में बैठ कर इटारसी तक आया और यहीं प्रिया उतर कर उस के साथ इलाहाबाद आ गई थी.

पूछने पर प्रिया ने साफ कह दिया कि वह अब राज सिंह के साथ ही रहना चाहती है. राज सिंह सिंगरौली के कालेज में उस का सीनियर है और वह उसे बहुत चाहती है. घर वालों ने उस की शादी जबरदस्ती की थी. प्रिया ने बताया कि अपनी मरजी के मुताबिक शादी कर के उस ने कोई गुनाह नहीं किया है, लेकिन उस ने एक बड़ी गलती यह की कि जब ऐसी बात थी तो उसे छत्रपति को फोन पर अपने और राज सिंह के प्यार की बात बता देनी चाहिए थी.

छत्रपति ने अपनी नईनवेली बीवी की इस मोहब्बत पर कोई ऐतराज नहीं जताया और मुंहजुबानी उसे शादी के बंधन से आजाद कर दिया, जो उस की समझदारी और मजबूरी दोनों हो गए थे.

जिस ने भी यह बात सुनी, उसी ने हैरानी से कहा कि अगर उसे भागना ही था तो शादी के पहले ही भाग जाती. कम से कम छत्रपति की जिंदगी पर तो ग्रहण नहीं लगता. इस में प्रिया से बड़ी गलती उस के मांबाप की है, जो जबरन बेटी की शादी अपनी मरजी से करने पर उतारू थे. तमाम बंदिशों के बाद भी प्रिया भाग गई तो उन्हें भी कुछ हासिल नहीं हुआ. उलटे 8-10 लाख रुपए जो शादी में खर्च हुए, अब किसी के काम के नहीं रहे.

मांबाप को चाहिए कि वे बेटी के अरमानों का खयाल रखें. अब वह जमाना नहीं रहा कि जिस के पल्लू से बांध दो, बेटी गाय की तरह बंधी चली जाएगी. अगर वह किसी से प्यार करती है और उसी से शादी करने की जिद पाले बैठी है तो जबरदस्ती करने से कोई फायदा नहीं, उलटा नुकसान ज्यादा है. यदि प्रिया इटारसी से नहीं भाग पाती तो तय था कि मुंबई जा कर ससुराल से जरूर भागती. फिर तो छत्रपति की और भी ज्यादा बदनामी और जगहंसाई होती.

अब जल्द ही कानूनी तौर पर भी मसला सुलझ जाएगा, लेकिन इसे उलझाने के असली गुनहगार प्रिया के मांबाप हैं, जिन्होंने अपनी झूठी शान और दिखावे के लिए बेटी को किसी और से शादी करने के लिए मजबूर किया. इस का पछतावा उन्हें अब हो रहा है. जरूरत इस बात की है कि मांबाप जमाने के साथ चलें और जातिपांत, ऊंचनीच, गरीबअमीर का फर्क और खयाल न करें, नहीं तो अंजाम क्या होता है, यह प्रिया के मामले से समझा जा सकता है. – कथा में प्रिया परिवर्तित नाम है. Crime Stories

Crime News: जिगोलो बनने के चक्कर में हो गया अपहरण

Crime News: सोहेल हाशमी रोजाना की तरह 8 अक्तूबर, 2016 को भी अपने घर आए अखबार को पढ़ रहा था. अखबार पढ़ते पढ़ते उस की नजर एक पेज पर छपे विज्ञापन पर पड़ी. उस विज्ञापन को पढ़ कर सोहेल चौंका. लिखा था मेल एस्कौर्ट बन कर रोजाना 25 हजार रुपए कमाएं. सोहेल जानता था कि जिस तरह कालगर्ल्स होती हैं, उसी तरह का काम मेल एस्कौर्ट का होता है. विज्ञापन में जो आमदनी दी गई थी, वह उसे आकर्षित कर रही थी.

28 वर्षीय सोहेल ने उस विज्ञापन को कई बार पढ़ा. उस समय वह आर्थिक परेशानी से जूझ रहा था. अपने परिवार के साथ वह दिल्ली के शाहदरा की बिहारी कालोनी स्थित जिस 2 कमरों के मकान में रहता था, उस का किराया भी वह कई महीनों से नहीं दे पाया था. उस के दिमाग में आया कि अगर वह मेल एस्कौर्ट का काम शुरू कर दे तो उसे अलग अलग महिलाओं के साथ मौजमस्ती करने को तो मिलेगा ही, साथ ही मोटी कमाई भी होगी, इसलिए वह मानसिक रूप से यह काम करने के लिए तैयार हो गया.

विज्ञापन में जो फोन नंबर दिया गया था, सोहेल ने उस नंबर पर फोन किया. उस नंबर पर घंटी तो गई, पर किसी ने फोन नहीं उठाया. उस ने यह कोशिश कई बार की, पर किसी ने भी उस की काल रिसीव नहीं की तो वह निराश हो गया. बड़ी उम्मीद के साथ सोहेल ने फोन किया था. फोन रिसीव न होने से वह मन ही मन विज्ञापन देने वाले को कोसने लगा. अगले दिन सोहेल घर के किसी काम में व्यस्त था, तभी उस के मोबाइल की घंटी बजी. स्क्रीन पर आए नंबर को देख कर उस की आंखों में चमक आ गई. वह नंबर वही था, जिस पर उस ने एक दिन पहले फोन किया था. सोहेल ने झट से काल रिसीव कर के बात की. फोन करने वाले ने उसे मेल एस्कौर्ट अर्थात जिगोलो का मतलब समझाया तो सोहेल ने कह दिया कि वह यह काम करने को तैयार हैं.

इस के बाद फोन करने वाले ने कहा, ‘‘एक अंतरराष्ट्रीय प्रोजैक्ट के सिलसिले में विदेशी आए हैं. आप को उन के साथ जाना है. लेकिन इस से पहले इंटरव्यू देना होगा. अगर आप इंटरव्यू में पास हो गए तो समझो ऐश और कैश दोनों मिलेंगे.’’

सोहेल सिर्फ यह देख रहा था कि जिगोलो बनने से क्या क्या फायदे हैं, इसलिए वह खुश हो कर बोला, ‘‘मैं इंटरव्यू के लिए तैयार हूं, मुझे कहां आना होगा?’’

‘‘आप कल उत्तर प्रदेश के कस्बा गजरौला पहुंच जाओ. वहां पहुंच कर फोन कर देना. हमारा आदमी औफिस तक ले आएगा.’’ फोन करने वाले ने कहा.

‘‘ठीक है, मैं कल गजरौला पहुंच जाऊंगा.’’ सोहेल ने खुश हो कर कहा.

अगले दिन सोहेल इंटरव्यू देने के लिए तैयार हुआ और शाहदरा से बस द्वारा आनंद विहार पहुंच गया. वहां से उस ने गजरौला जाने वाली बस पकड़ी और ढाई घंटे में गजरौला पहुंच गया. उस ने उस नंबर पर फोन कर के अपने गजरौला पहुंचने की खबर दे दी.

कुछ देर बाद सोहेल के पास 2 मोटरसाइकिल सवार पहुंचे. उन्होंने उस का बड़ी गर्मजोशी से स्वागत किया. साथ ही खुद को एक ऐसी कंपनी का कर्मचारी बताया, जिस में विदेशी काम करते थे. दोनों युवक सोहेल को मोटरसाइकिल पर बिठा कर सूरज ढलने तक इधरउधर गांव में घुमाते रहे, अंधेरा होने पर वे उसे जंगल में ले गए. सोहेल ने जंगल में जाने के बारे में पूछा तो उन्होंने कहा कि उन का औफिस एक खेत में इसलिए बनाया गया है, ताकि आसपास के गांवों के बारे में महत्त्वपूर्ण जानकारियां मिल सकें. कुछ देर में वे उसे खेत में बने एक ट्यूबवैल के कमरे पर ले कर पहुंचे. लेकिन वहां औफिस जैसा कुछ नहीं था.

इस से पहले कि सोहेल उन दोनों से कुछ पूछता, उन्होंने उसे कमरे में धकेल कर उस की पिटाई शुरू कर दी. उन्होंने उस की कनपटी पर पिस्तौल रख कर धमकी दी कि अगर उस ने भागने की कोशिश की तो उसे गोरी मार दी जाएगी. सोहेल समझ गया कि वह गलत लोगों के बीच फंस गया है. उन के चंगुल से निकलना उसे मुश्किल लग रहा था. थोड़ी देर में 3 युवक और आ गए. उन के हाथों में तलवारें थीं. उन्हें देख कर सोहेल डर से कांपते हुए जान की भीख मांगने लगा. तभी एक युवक ने उस के गले पर तलवार रख कर उस का मोबाइल फोन छीन लिया.

इस के बाद वे उस की मां का नंबर पूछ कर चले गए. जो 2 युवक कमरे में बचे थे, वे सोहेल को रात भर तरहतरह से प्रताडि़त करते रहे. अगले दिन उन लोगों ने सोहेल की मां को फोन कर के 12 लाख रुपए की फिरौती मांगी. घर वालों को जब पता चला कि सोहेल का अपरहण हो चुका है तो वे घबरा गए. 12 लाख रुपए की फिरौती देना उन के वश की बात नहीं थी, इसलिए उन्होंने थाना शाहदरा की पुलिस को इस की सूचना दे दी. पुलिस ने वह फोन नंबर नोट कर लिया, जिस से फिरौती के लिए फोन आया था. पुलिस ने सोहेल के घर वालों से कह दिया कि वे अपहर्त्ताओं से संपर्क बनाए रखें.

थानाप्रभारी ने यह सूचना ईस्ट दिल्ली के डीसीपी ऋषिपाल को दी तो उन्होंने एक पुलिस टीम बना कर शीघ्रता से जरूरी काररवाई करने के निर्देश दिए. एसआई विजय बालियान के नेतृत्व में गठित टीम मोबाइल फोन की लोकेशन के आधार पर गजरौला पहुंच गई. अंतत: टेक्निकल सर्विलांस की मदद से दिल्ली पुलिस की टीम ने खेतों के बीच बने ट्यूबवैल के एक कमरे से सोहेल को अपहर्त्ताओं के चंगुल से सकुशल बरामद कर लिया. दोनों अपहर्त्ता भी पकड़े गए. उन की निशानदेही पर पुलिस ने उन के 3 अन्य साथियों को भी गिरफ्तार कर लिया.

जिगोलो बनने के चक्कर में सोहेल को क्या क्या यातनाएं झेलनी पड़ीं, उन्हें याद कर के वह सिहर उठता है. उस ने तौबा कर ली है कि पैसे कमाने के लिए वह इस तरह का कोई हथकंडा नहीं अपनाएगा. Crime News

UP Crime Story: वाराणसी की पौश कालोनी में सजता देह बाजार

UP Crime Story: कोरोना कर्फ्यू का वीकेंड यानी शनिवार का दिन था. चेतगंज की थानाप्रभारी इंसपेक्टर संध्या सिंह लौकडाउन के दौरान सुबहसुबह साढ़े 6 बजे के करीब चाय की चुस्कियों के साथ इलाके का एक बार मुआयना करने की योजना बना रही थीं. तभी अचानक 4 लोग थाने  में आए.

उन्हें देख कर वह बोलीं, ‘‘जी, बताइए मैं आप लोगों की क्या मदद कर सकती हूं?’’

एक आगंतुक दाएंबाएं देखता हुआ हाथ जोड़ कर बोला, ‘‘साहब, हम लोग पिशाचमोचन क्षेत्र के रहने वाले हैं. हमारे मोहल्ले के एक मकान में इन दिनों तरहतरह के लोगों का आनाजाना होने लगा है.’’

‘‘तरहतरह के लोगों से आप का क्या मतलब है?’’ संध्या सिंह ने पूछा.

‘‘हमें संदेह है कि मकान में कोई गलत काम होता है. क्योंकि वहां हमेशा नएनए लोग आतेजाते देखे गए हैं. प्लीज, आप वहां की जांच कीजिए, अपने आप पता चल जाएगा कि बात क्या है.’’

उस व्यक्ति की बात पूरी होते ही साथ में आया दूसरा व्यक्ति बोल पड़ा, ‘‘जी मैडम, वहां की संदिग्ध गतिविधियों का खुलासा हो जाएगा.’’

‘‘वे किस तरह के लोग होते  हैं?’’ संध्या को अधिक जानने की जिज्ञासा हुई.

‘‘मैडमजी, आनेजाने वाले लोग दिखने में संभ्रांत लगते हैं, वे 40-45 की उम्र के दिखते हैं. उन के हाथों में रैपर में लिपटा कोई न कोई गिफ्ट पैकेट भी होता है.’’ एक अन्य व्यक्ति बोला.

मोहल्ले के लोगों की बातों को गौर से सुनने के बाद संध्या सिंह ने शिकायत करने वालों के नाम और कौन्टैक्ट के लिए मोबाइल नंबर के साथ कुछ पौइंट नोट कर लिए और छानबीन करने का आश्वासन दे कर उन्हें जाने को कहा.

पिशाचमोचन मोहल्ले के नागरिकों द्वारा बताई गई बातों पर गौर करते हुए उन्होंने तुरंत एसीपी (चेतगंज) नितेश प्रताप सिंह को भी अवगत करवा दिया. उन्हें शिकायत संबंधी पूरी जानकारी दी. मामला उत्तर प्रदेश के पौराणिक शहर वाराणसी का था. ऊपर से यह देश के प्रधानमंत्री का संसदीय क्षेत्र है. इसे देखते हुए पुलिस ने संदिग्ध मकान में छापेमारी की योजना बना ली. संध्या सिंह सहित पुलिस टीम में कुछ और महिला पुलिसकर्मियों को शामिल किया गया.

सूचना के आधार पर एक पुलिसकर्मी ने पिशाचमोचन स्थित मकान नंबर सी 21/24 के मुख्य गेट पर दस्तक दी. उस की कोई प्रतिक्रिया नहीं हुई. कई बार आवाज लगाने और गेट पीटने के बाद तो एक उम्रदराज व्यक्ति ने मुख्य गेट का चैनल खोल कर बाहर की ओर झांकते हुए तेज आवाज में पूछा, ‘‘कौन है?’’

बाहर पुलिस टीम को देख कर उस की आवाज धीमी पड़ गई. वह धीमे से बोला, ‘‘क्या बात है भई, आप लोग यहां?’’

उस का कोई जवाब दिए बगैर पुलिस टीम गेट को एक झटके में बाहर की ओर खोलते हुए मकान के भीतर धड़धड़ाती हुई घुस गई. कुछ पल में ही पूरी पुलिस टीम एक कमरे में थी. सभी पुलिसकर्मी संदिग्ध निगाहों से कमरे में इधरउधर देखने लगे. संध्या सिंह की पैनी निगाहें कुछ तलाशने की स्थिति में थीं. पुलिस की निगाह कमरे से जुड़े एक दरवाजे की तरफ गई. वहां का परदा हटाते ही एक महिला पुलिसकर्मी अनायास बोल पड़ी, ‘‘मैडमजी, इधर देखिए… ये दुष्ट लोग.’’

जब संध्या ने उस कमरे में जा कर देखा तो उन की आंखें भी फटी की फटी रह गईं. अंदर का नजारा देख कर महिला पुलिसकर्मी शर्म से आंखें झुकाए तुरंत बाहर आ गई. जबकि एसीपी चेतगंज ने फौरन कड़क आवाज में सभी को कपड़े पहन कर बाहर आने को कहा.

एसीपी ने कमरे से बाहर आ कर पूछा, ‘‘मकान का मालिक कौन है?’’

वहीं पास खड़े व्यक्ति ने कहा, ‘‘जी मैं हूं.’’

‘‘क्या नाम है तुम्हारा?’’ एसीपी बोले.

‘‘सुरेश कुमार,’’ वह व्यक्ति बोला.

‘‘ये सब यहां क्या है? कौन हैं  ये लोग?’’

तब तक कई लड़कियां और लड़के अंदर के कमरे से बाहर आ चुके थे. उन की ओर ऊंगली उठाते हुए एसपी ने पूछा.

अब सुरेश को काटो तो खून नहीं. वह हक्काबक्का डरी जुबान में बोला, ‘‘साहब, मैं इन लोगों के बारे में कुछ नहीं जानता, केवल इतना जानता हूं कि ये लोग किसी कंपनी में काम करते हैं.’’

मकान मालिक की बात पूरी होने वाली ही थी कि तभी इंसपेक्टर संध्या सिंह एक जोरदार तमाचा जड़ते हुए बोलीं, ‘‘तुम्हारे मकान में कोई इस प्रकार से रह रहा है और तुम्हें कोई जानकारी नहीं. वह भी एकदो नहीं कई लोग.’’

‘‘…जी…जी साहब, मैं सच कह रहा हूं, मुझे कुछ नहीं पता.’’

इतना कहने पर उस के गाल पर दूसरा जोरदार तमाचा पड़ा. लेडी पुलिस से कई लोगों के सामने तमाचा खा कर वह शर्मसार हो गया.

संध्या सिंह बोलीं, ‘‘जब तुम्हें इन लोगों के बारे में कोई जानकारी नहीं थी तो फिर उन्हें कमरा किराए पर कैसे दे दिया था?’’ इस का जवाब देने के बजाय वह सिर झुकाए खड़ा रहा. पुलिस सभी को थाने ले आई. उन से अलगअलग गहन पूछताछ की जाने लगी.  इस दौरान कालोनी के कई लोग भी काफी संख्या में जमा हो गए. हर कोई जिज्ञासा भरी नजरों से देख रहा था. पूछताछ में कई बातें खुल कर सामने आईं. पुलिस टीम को मौके पर 2 युवतियां व 3 युवक बिलकुल आपत्तिजनक स्थिति में मिले थे. कमरे की तलाशी लेने के दौरान आपत्तिजनक सामग्रियों में कंडोम के पैकेट, 4 मोबाइल फोन व नशीली दवाएं बरामद हुईं.

इस तरह से शहर की पौश कालोनी में सैक्स रैकेट गिरोह का परदाफाश हो चुका था. थोड़े समय में इस की खबर पूरे शहर में फैल गई थी. जिस का असर यह हुआ था कि मीडिया के लोग और कुछ समाजसेवी संगठन भी थाने पहुंच गए. कुछ मानवाधिकार संगठन के लोगों ने चेतगंज थाने जा कर मामले की तह में जाने का दबाव बनाया. इस की सूचना काशी जोन के डीसीपी अमित कुमार को भी दी गई. वे भी चेतगंज थाने पहुंच गए.

पूछताछ के दौरान पकड़ी गई 20 से 25 साल के बीच की उम्र वाली दोनों लड़कियों ने बताया, ‘‘उन्होंने नौकरी करने वाली बता कर कमरा किराए पर लिया था.’’

वह जानबूझ कर ऐशोआराम और मौजमस्ती की जिंदगी के लिए इस धंधे में उतरी थी. उसे अपनी शानोशौकत वाली जिंदगी की जरूरतों को पूरा करने के लिए अत्यधिक पैसे की लालसा थी. पुलिस के अनुसार पढ़ाई के साथसाथ वे अन्य कामों के बहाने देह व्यापार के धंधे में उतर आई थीं. पूछताछ के दौरान 25 वर्षीय पारो (बदला हुआ नाम) ने बताया कि वह इस धंधे में पिछले 2 सालों से है. मोबाइल फोन की मदद से वह अपने इस धंधे को अंजाम देती है. इस के लिए उस ने अपना कोडवर्ड बना रखा है. उस के कोडवर्ड को ग्राहक ही समझ पाते हैं.

पारो ने अपने धंधे के बारे में आगे बताया कि उन के इस धंधे में कई लोगों का हिस्सा होता है. उन का वह नाम नहीं जानती है. हां, चेहरा देखने पर जरूर पहचान लेगी. पकड़े गए युवकों में एक रमेश 28 वर्ष, सुमित कुमार 29 वर्ष एवं राठौर 30 वर्ष ने बताया कि वे सभी वाराणसी शहर के ही निवासी हैं. पुलिस हिरासत में आने के बाद वे बारबार अपने बयानों को पलटते हुए अपना सही पताठिकाना बताने से कतराते रहे. उन का कहना था कि उन्हें वहां धोखे से लाया गया था, लेकिन जब पुलिस ने सख्ती दिखाई तब उन्होंने इस धंधे में शामिल होना स्वीकार कर लिया.

इसी प्रकार पुलिस टीम ने पकड़ी गई दूसरी लड़कियों और लड़कों से अलगअलग कमरों में पूछताछ के बाद पांचों के खिलाफ 29 मई, 2021 को देह व्यापार अधिनियम के तहत मामला दर्ज कर लिया गया. उन की डाक्टरी जांच करवाई गई. बाद में उन्हें न्यायालय में पेश कर न्यायिकहिरासत में भेज दिया गया. कथा के लिखे जाने तक किसी भी आरोपी को जमानत नहीं मिल पाई थी.

सैक्स कारोबार का गढ़ बनता जा रहा है मड़ुआडीह 

वाराणसी में सैक्स अपराध का धंधा कोई नया नहीं है. दिल्ली के जीबी रोड, इलाहाबाद, मेरठ इत्यादि शहरों की तरह वाराणसी का मड़ुआडीह इलाका सैक्स बाजार के रूप में कुख्यात बताया गया है. जानकारों की मानें तो वाराणसी में पड़ोसी देश नेपाल से ले कर देश के कई राज्यों मसलन असम, बिहार, ओडिशा, मध्य प्रदेश, पश्चिम बंगाल, महाराष्ट्र इत्यादि से कम उम्र की लड़कियां बुलाई जाती हैं. उन से सैक्स के लिए मोबाइल फोन से संपर्क साधा जाता है. उन का अपना नेटवर्क बना हुआ है.

हाल के महीनों में जिस तेजी के साथ वाराणसी में एक पर एक कई जगहों पर सैक्स रैकेट का पुलिस ने खुलासा किया है, उसे देख कर इस बात को बल मिलने लगा है कि इस गिरोह की जड़ें वाराणसी में काफी गहरी हो चुकी हैं. वाराणसी के पौश इलाकों में से जगतगंज के कैलगढ़ कालोनी में 31 मई, 2021 को एक सैक्स रैकेट का खुलासा हुआ था. तब पुलिस ने एक मकान के फर्स्ट फ्लोर पर चल रहे रैकेट का खुलासा करते हुए 3 युवतियों समेत 6 लोगों को पकड़ा था. पुलिस के अनुसार सैक्स रैकेट के लिए लड़कियां फोन द्वारा बुलाई जाती थीं. फोन पर ही ग्राहकों से सौदा तय हो जाता था.

गिरफ्तार युवतियों में एक प्रयागराज की और 2 वाराणसी की थीं. गिरफ्तार युवकों में शिवपुर के लक्ष्मणपुर निवासी सोनू पटेल, चोलापुर के अतुल सिंह और रोहनिया के राजेश सिंह शामिल थे. सैक्स रैकेट की सूचना मिलने पर रात में छापेमारी की गई थी. इस मामले में मकान मालिक ने बगैर पुलिस सत्यापन के मकान किराए पर उठा लिया गया था. एक अन्य मामला वाराणसी के नाटी इमली मोहल्ले के नई बस्ती का भी सामने आया. वहां के रिहायशी इलाके के एक मकान में जब 30 मई, 2021 को छापेमारी की गई तब सैक्स रैकेट का भंडाफोड़ हुआ.  मौके से मकान मालकिन और 2 युवतियों की गिरफ्तारी हुई. पुलिस की काररवाई के दौरान 2 युवक चकमा दे कर भाग गए.

पुलिस ने मकान से छापे के दौरान कई आपत्तिजनक सामान भी बरामद किए. महिला और दोनों युवतियों के खिलाफ जैतपुरा थाने में मुकदमा दर्ज किया गया. मौके से भागे खोजवां निवासी राकेश गुप्ता सहित 2 युवकों की तलाश में पुलिस की टीमें लगाई गईं. नाटी इमली क्षेत्र की नई बस्ती स्थित इस मकान में सैक्स रैकेट चलाए जाने की सूचना पा कर जैतपुरा थाने की पुलिस ने एसीपी (चेतगंज) नितेश प्रताप सिंह के निर्देशानुसार इंसपेक्टर (जैतपुरा) शशिभूषण राय के साथ चिह्नित मकान में छापा मारा था. मकान मालकिन और दोनों युवतियों के खिलाफ देह व्यापार अधिनियम के तहत मामले दर्ज किए गए.

इस तरह से एक सप्ताह के भीतर ही वाराणसी पुलिस ने कई सैक्स ठिकानों पर की छापेमारी की. इस में वाराणसी के चेतगंज थाना की पुलिस ने 29 मई को पिशाचमोचन स्थित कालोनी में किराए के मकान में छापेमारी के अलावा 31 मई को चेतगंज थाने की पुलिस ने लहुराबीर क्षेत्र के कैलगढ़ कालोनी स्थित अपार्टमेंट में किराए के फ्लैट में छापेमारी कर 3 युवतियों और 3 युवकों को गिरफ्तार कर लिया. इस के पहले भी वाराणसी की घनी आबादी वाले रिहायशी इलाके में देह व्यापार का धंधा बीते कुछ महीनों में काफी फलफूल गया था.

जैतपुरा, लालपुर, पांडेयपुर, और चेतगंज थाना क्षेत्रों में जो भी सैक्स रैकेट पकड़े गए, वह घनी आबादी वाले रिहायशी इलाकों में स्थित किराए के मकानों में संचालित हो रहे थे. इस संबंध में डीसीपी काशी जोन अमित कुमार ने सभी थानाप्रभारियों को किराएदारों के सत्यापन करवाने का निर्देश दिया है. UP Crime Story

—कथा में कुछ पात्रों के नाम काल्पनिक एवं पुलिस सूत्रों व समाचार पत्रों पर आधारित है

Crime Stories: औरतों के साथ घिनौनी वारदात जारी

Crime Stories: इस वारदात को अंजाम देने में गांव के वार्ड सदस्य और सरपंच भी शामिल थे. मां बेटी ने स्थानीय थाने में मामला दर्ज कराया जहां वार्ड पार्षद मोहम्मद खुर्शीद, सरपंच मोहम्मद अंसारी, मोहम्मद शकील, मोहम्मद इश्तेखार, मोहम्मद शमशुल हक, मोहम्मद कलीम के साथसाथ दशरथ ठाकुर को मुलजिम बनाया गया.

वैसे, पुलिस सुपरिंटैंडैंट मानवजीत सिंह ढिल्लों के मुताबिक मोहम्मद शकील और दशरथ ठाकुर को गिरफ्तार कर लिया गया था.

महिला आयोग की अध्यक्ष दिलमणि मिश्रा ने उस इलाके का दौरा किया और वे पीडि़ता से मिल कर उस की हरमुमकिन मदद करने और इंसाफ दिलाने की कोशिश कर रही हैं. केंद्रीय महिला आयोग को भी इस मामले की जानकारी दी गई है.

डीएम राजीव रोशन ने इस वारदात की निंदा करते हुए कहा है कि यह घिनौना अपराध है. कुसूरवारों को बख्शा नहीं जाएगा. हर हाल में कड़ी कार्यवाही होगी.

पत्थरदिल होते लोग

इस तरह की वारदातें जब कहीं होती हैं तो अच्छेखासे जागरूक लोग भी चुप्पी साध लेते हैं. अगर लोकल लोग इस का विरोध करते तो शायद इस तरह की वारदात नहीं घटती. अगर दबंगों का मनोबल इसी तरह बढ़ता गया तो वह दिन दूर नहीं जब निहायत कमजोर लोगों की जिंदगी हमआप जैसों की चुप्पी की वजह से दूभर हो जाएगी.

आज हमारे समाज में इतनी गिरावट आती जा रही है कि किसी औरत को नंगा कर के घुमाना, उस के साथ छेड़छाड़ करना और रेप तक करते हुए उस का वीडियो वायरल करना आम बात हो गई है.

समाज को धार्मिक और संस्कारी बनाने का ठेका लेने वाले साधुसंन्यासी और मौलाना इन वारदातों पर चुप्पी साधे रहते हैं. अभी हाल के दिनों में वैशाली, आरा, रोहतास, जहानाबाद, कैमूर, मधुबनी, गया और नालंदा में औरतों को नंगा कर के सरेआम सड़कोंगलियों में घुमाए, पीटे और सताए जाने की कई वारदातें हो चुकी हैं और यह सिलसिला जारी है.

अगर हम हाल के कुछ सालों की वारदातें देखें तो वर्तमान समाज की नंगी तसवीरें हमारे सामने दिखाई पड़ती हैं:

* 20 अगस्त, 2018. बिहार के आरा जिले के बिहियां इलाके में एक नौजवान की हत्या में शामिल होने के शक में उग्र भीड़ ने एक औरत को नंगा कर के उसे पीटते हुए सरेआम पूरे बाजार में घुमाया.

* 17 अगस्त, 2017. उत्तर प्रदेश के इटावा में दबंगों ने औरतों को पीटते हुए नंगा किया.

* 9 अगस्त, 2017. महाराष्ट्र में एक औरत को नंगा कर के घुमाया गया. उस औरत की गलती यह थी कि उस ने एक प्रेमी जोड़े को आपस में मिलाने का काम किया था.

* 22 अप्रैल, 2017. एक पिता ने प्रेम करने के एवज में अपनी ही बेटी को नंगा कर के घुमाया.

* 1 मई, 2014. बैतूल के चुनाहजुरि गांव में एक औरत के बाल मूंड़ कर उसे नंगा कर के पीटते हुए पूरे गांव में घुमाया. उस औरत का गुनाह यह था कि उस की छोटी बहन ने दूसरी जाति के लड़के के साथ शादी कर ली थी.

* 19 दिसंबर, 2010. पश्चिम बंगाल में एक औरत को पंचायत के फैसले के मुताबिक उस की पिटाई करते हुए नंगा कर के घुमाया गया. उस औरत पर आरोप था कि उस का किसी के साथ नाजायज रिश्ता था.

* खड़गपुर के पास मथकथ गांव में एक औरत को नाजायज रिश्ता बनाने के आरोप में उस की नंगा कर के पिटाई की गई.

इन वारदातों में ज्यादातर नौजवान शामिल रहते हैं जो औरतों के साथ बदतमीजी करने से ले कर उन के बेहूदा वीडियो बनाने तक में शामिल होते हैं. हमारे समाज के इन नौजवानों को क्या हो गया है जो ये अपने गुरु और अपने मातापिता की इज्जत तक का थोड़ा सा भी खयाल नहीं रखते हैं? मातापिता भी इस में बराबर के कुसूरवार हैं जो लड़कियों को तो बातबात पर तमीज सिखाते रहते हैं, लेकिन लड़कों को नहीं.

क्या यह सब बढ़ती धार्मिक  पाखंडीबाजी का नतीजा नहीं है जिस के मुताबिक औरतों को पैर की जूती माना गया है? राष्ट्रीय अपराध रिकौर्ड ब्यूरो के मुताबिक 2012 से 2015 तक औरतों के विरुद्ध अपराधों की तादाद में 34 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है. दुष्कर्म के मामले में मध्य प्रदेश 4,391, महाराष्ट्र 4,144, राजस्थान 3,644, उत्तर प्रदेश 3,025, ओडिशा 2,251, दिल्ली 2,199, असम 1,733, छत्तीसगढ़ 1,560, केरल 1,256, पश्चिम बंगाल 1,129 के आंकड़े चौंकाते हैं. निश्चित रूप से यह एक सभ्य समाज की तसवीर तो नहीं हो सकती.

सवाल यह है कि धर्म, नैतिकता और शर्मिंदगी क्या सिर्फ लड़कियों के लिए है? जन्म से ले कर मरने तक किसी औरत के अपने मातापिता, पति और बेटे के अधीन ही जिंदगी बिताने की परंपरा आज भी सदियों से चली आ रही है.

यह ठीक है कि अब लड़कियों की जिंदगी में बदलाव आया है. आज वे भी हर क्षेत्र में परचम लहरा रही हैं, लेकिन आज भी उन के साथ दोयम दर्जे का ही बरताव होता है. जब एक लड़की के साथ बलात्कार की वारदात होती है तो परिवार और समाज द्वारा इज्जत के नाम पर उस की चर्चा और मुकदमा तक नहीं किया जाता है, जिस की वजह से बलात्कारी का मनोबल बढ़ जाता है.

इस से दुनियाभर में हमारे देश की कैसी इमेज बन रही है, क्या हमारे नेताओं को इस पर चिंता करने की जरूरत महसूस नहीं होती है?

भारत विश्व गुरु बनने की बात करता है और ऐसा होना भी चाहिए, लेकिन क्या हम 8 साल की मासूम बच्ची के साथ रेप कर के विश्व गुरु बन जाएंगे या रेप के बाद विचारधारा और धर्म पर राजनीति कर के?

जिस देश में स्कूलों और कालेजों में टीचरों की घोर कमी हो, अस्पतालों के हालात देख कर ही लोग बीमार दिखने लगते हों, बेरोजगारों की एक लंबी भीड़ हो और क्वालिटी ऐजुकेशन के नाम पर खिचड़ी खिला कर बच्चों के भविष्य के साथ खिलवाड़ किया जाता हो, क्या हम ऐसे माहौल में विश्व गुरु बनने के हकदार हैं?

जिस देश में वोट पाने के लिए नेता हेट स्पीच देने में वर्ल्ड रिकौर्ड बना चुके हों, जिस देश के नेता धर्म के नाम पर अपनी राजनीति चमकाते हों और जरूरत पड़ने पर धर्म के नाम पर नौजवानों की बलि चढ़ा देते हों, क्या ऐसी करतूतों से भारत की छवि विश्व जगत में खराब नहीं हुई है?

भारत में हो रही बलात्कार की वारदातें, चौकचौराहे पर गुस्साई भीड़ द्वारा लगातार की जा रही हत्याएं व सुप्रीम कोर्ट के 4 जजों द्वारा प्रैस कौंफ्रैंस कर के लोकतंत्र को बचाने की गुहार लगाना, क्या संचार क्रांति के इस दौर में हमारे देश के लिए इस सब पर सोचविचार करने का यह सही समय नहीं है? कई देशों ने अपने नागरिकों को अकेले भारत आने के बारे में चेतावनी देना शुरू कर दिया है.

भीड़ आखिर इतनी अराजक क्यों हो रही है? कानून को हाथ में लेने के लिए उसे कौन बोल या उकसा रहा है? शक के आधार पर या पंचायत के फैसले पर किसी औरत को नंगा कर के उस को पीटा जाना किसी लिहाज से जायज नहीं है, क्योंकि सरकार के तथाकथित समर्थकों को सोशल मीडिया पर मांबहन की गालियां देने का जो लाइसैंस दिया गया है वह अब सड़कों पर अपना असली रंग दिखाने लगा है.

यह सब इस देश के लिए बहुत बड़ा खतरा है. ऐसी वारदातों में कभीकभार ऐसी औरतें भी निशाने पर ले ली जाती हैं, जिन का कोई कुसूर नहीं होता है. वे ऐसे लोगों के गुस्से की भेंट चढ़ जाती हैं, जो उन्हें जानते तक नहीं हैं. औरत को देवी का रूप बताने और उस की पूजा का ढोंग करने वाले इस देश के लोगों का यही चरित्र है. Crime Stories

(कहानी सौजन्य मनोहर कहानी)