Web Series: मिसेज देशपांडे – एक खूंखार सीरियल किलर

Web Series: इस वेब सीरीज में मिसेज देशपांडे का किरदार निभा रही माधुरी दीक्षित एक सीरियल किलर जीनत है, जो 25 सालों से जेल में बंद है, लेकिन इस के बाद भी शहर में पुराने तरीके से ही सीरियल मर्डर की घटनाएं हो रही हैं. इस नए सीरियल किलर को पकडऩे के लिए पुलिस जीनत को जेल से बाहर निकालती है. नकलची सीरियल किलर को पकडऩे में पुलिस कामयाब तो हो जाती है, लेकिन उस के द्वारा जीनत की ही तरह हत्याएं करने की जो कहानी सामने आती है, उसे सुन कर पुलिस अधिकारी ही नहीं, बल्कि जीनत तक चौंक जाती है, क्योंकि…

प्रोड्यूसर: एलाहा हेपतुल्ला, समीर नायर, दीपक सहगल, निर्देशक: नागेश कुकुनूर, लेखक: नागेश कुकुनूर, रोहित वनावलीकर, ओटीटी:जियो हौटस्टार

कलाकार: माधुरी दीक्षित, प्रियांशु चटर्जी, बहारुल इसलाम, सिद्धार्थ चांदेकर, दीक्षा जुनेजा, प्रदीप वेलंकर, निमिशा नायर, हार्दिक सोनी, जेबा हुसैन, जुबिन शाह, उमाकांत पाटिल, सुलक्षणा जोगलेकर, केविन दवे, जितेंद्र लाड, अंजलि जोगलेकर, असित चटर्जी, दीपाली घोरपडे, खुशी हजारे, अर्जुन पांडे, केनेथ देसाई आदि.

‘मिसेज देशपांडे’ एक मनोवैज्ञानिक क्राइम थ्रिलर सीरीज है, जिस में प्रसिद्ध फिल्म अभिनेत्री माधुरी दीक्षित मुख्य भूमिका में है. 6 एपिसोड की यह वेब सीरीज 19 दिसंबर, 2025 को जियो हौटस्टार पर प्रसारित हुई थी.

यह वेब सीरीज 1917 में आई फ्रेंच सीरीज ‘ला मांटे’ पर आधारित है. हर क्राइम थ्रिलर की ही तरह यह सीरीज भी सस्पेंस और मर्डर मिस्ट्री की परतें एकएक कर खोलती है. आखिर कैसी है इस क्राइम वेब सीरीज की कहानी और बाकी की चीजें, चलिए जानते हैं इस का सस्पेंस और इस का रिव्यू.

एपिसोड नंबर 1

पहले एपिसोड का नाम ‘टेक्स वन टू कैच वन’ रखा गया है. एपिसोड की शुरुआत में हम विराट मल्होत्रा (जुबिन शाह) को देखते हैं. उस ने किसी लड़की को अपने साथ रात बिताने के लिए फोन किया था, मगर वह नहीं आई. इस के बाद विराट अपने एक खास डीलर को फोन कर 2 रशियन लड़कियों को अपने कमरे में बुलाता है. विराट अब अपने कमरे में ड्रग्स का सेवन करने लगता है, तभी डोर बेल बजने पर जैसे ही विराट दरवाजा खोलता है तो एक नकाबपोश विराट पर हमला कर उस का गला एक चमकदार रस्सी से घोंट देता है. फिर उस की लाश शीशे के सामने रख कर वहां एक ट्रौफी रख कर भाग जाता है.

तभी वहां पर दोनों रशियन गर्ल आ जाती हैं. कमरे में विराट की लाश को देख कर वे डर जाती हैं. अब वहां पर उस केस को हैंडल करने इंसपेक्टर पल्लवी सोनवाने (सुलक्षणा जोगलेकर) आती है और पूछताछ व मौकामुआयना करने लगती है. थोड़ी ही देर में घटनास्थल पर मुंबई के पुलिस कमिश्नर अरुण खत्री (प्रियांशु चटर्जी) आ कर इंसपेक्टर पल्लवी से केस की जानकारी लेता है.

जब पुलिस कमिश्नर अरुण खत्री लाश के पास जाता है तो उसे कुछ साल पहले के केस याद आ जाते हैं, जिन में कातिल ने सभी केसों में लोगों को मार कर शीशे के सामने बिठा दिया था. उस के बाद पुलिस कमिश्नर सीधे हैदरावाद जेलर शकुंतला राव (अंजलि जोगलेकर) को फोन कर के जीनत (माधुरी दीक्षित) नामक कैदी के बारे में पूछताछ करता है तो जेलर शकुंतला बताती है कि जीनत तो जेल में ही है. अब जेलर शकुंतला जीनत को बुलाती है.

इस के बाद पुलिस कमिश्नर अरुण खत्री जीनत से मिलने हैदराबाद जेल जाता है, क्योंकि जीनत ने उन्हें मैसेज भेजा था कि वह पुलिस की मदद करना चाहती है. उन दोनों की बातचीत से पता चलता है कि आज से 25 साल पहले मिसेज सीमा देशपांडे ने पूरे 8 खून इसी पैटर्न पर किए थे. आठवें कत्ल में अरुण ने ही सीमा को गिरफ्तार किया था. बाकी 7 मर्डर स्वीकार करने के लिए सीमा ने यह शर्त रखी थी कि उस का नाम सीमा से बदल कर जीनत रख दिया जाए, जिसे स्वीकार कर उसे हैदराबाद जेल भेज दिया गया था.

अब जीनत यानी सीमा देशपांडे अरुण से कहती है कि ये नया खूनी मेरे ही पैटर्न पर मर्डर कर रहा है. यदि आप को इसे पकडऩा है तो आप को मुझे जेल से छुड़वाना होगा, तभी मैं इस नए सीरियल किलर को पकड़वा सकती हूं. पुलिस कमिश्नर अरुण खत्री डीजीपी महाराष्ट्र (शिवराज वालवेकर) को अपनी गारंटी पर सीमा को जेल से बाहर निकलवा देता है. इस के बाद हम एक आदमी को ड्रग्स माफिया से मिलते देखते हैं. तभी वहां पर पुलिस आ कर सब को गिरफ्तार कर लेती है.

असल में बौस से पैसे ले कर जाने वाला वह आदमी एसीपी तेजस फडके (सिद्धार्थ चांदेकर) था, जो वेश बदल कर ड्रग्स माफिया के ग्रुप में शामिल हो कर उन के पूरे गिरोह को पकडऩा चाहता था. पुलिस ने अभी रेड डाल कर उस के औपरेशन पर पानी फेर दिया था. इस के बाद अरुण खत्री सारी फाइलें तेजस को दे कर कहता है कि तुम ये सब ठीक तरह से पढ़ लो, आज के बाद तुम्हें ही यह केस हैंडल करना है.

अरुण एसीपी तेजस से कहता है कि अब हमें सीमा देशपांडे के साथ मिल कर इस नए सीरियल किलर को पकडऩा है, जो सीमा की तर्ज पर 3 मर्डर कर चुका है. इस के बाद हम तन्वी (दीक्षा जुनेजा) को देखते हैं, जो अपना एक सैलून अपनी बहन दिव्या (निमिशा नायर) के साथ चलाती है. तभी सैलून में तेजस आता है तो तन्वी उस से लिपट जाती है.

यहां पर अब पता चलता है कि तन्वी और तेजस पतिपत्नी हैं, लेकिन अपने पुलिस केस के सिलसिले में तेजस महीनों बाद ही अपनी पत्नी से मिल पाता है. इस के बाद अरुण खत्री के कहने पर एक घर को तैयार किया जाता है, जहां पर सीमा को रखा जा सके. सीमा ने 8 मर्डर किए थे, इसलिए उस की नई शिफ्टिंग के दौरान सभी पुलिस वाले भी काफी डरे हुए थे कि कहीं सीमा यहां से भाग न जाए.

अब सीमा देशपांडे अपने नए ठिकाने पर आ कर काफी खुश लग रही थी, साथ ही उस ने जो वस्तु जेल में पीसी थी, वह उसे अपने बैड के नीचे छिपा कर रख लेती है. अब सीमा से मिलने उस के नए ठिकाने पर कमिश्नर अरुण और जांच अधिकारी तेजस आते हैं. तेजस विराट मल्होत्रा की फोटो दिखाते हुए सीमा से पूछता है कि आप इस केस के बारे में बताइए, आप को क्या लगता है? अब अरुण और तेजस सीमा को क्राइम सीन पर ले कर आते हैं, वहां पर सीमा कहती है कि इस नए सीरियल किलर ने तो विराट मल्होत्रा के हाथ में एक ट्रौफी भी रखी है, जैसा मैं ने अपने तीसरे मर्डर में किया था.

सीमा आगे बताती है कि मेरी पूरी फाइल पढऩे के बाद ही किलर ने ये सब मर्डर करने शुरू कर दिए हैं. अरुण कहता है कि तुम्हारी वह फाइल अब तक केवल 6 लोगों ने ही पढ़ी है, इस पर सीमा कहती है कि उन्हीं 6 लोगों में से कोई अवश्य इस नए सीरियल किलर को जानता होगा. अगले दिन एसीपी तेजस कमिश्नर अरुण को बताता है कि उन 6 लोगों में से 3 लोग मर चुके हैं. एक जज है, जिन की उम्र अभी 75 साल की है.

उन्होंने बताया कि उन्होंने सीमा देशपांडे की फाइल जला ही डाली है. सर, अब आप और जेहान दारूवाला (कीनिथ देसाई) नाम का वकील बचे हैं, इसलिए अब मैं दारूवाला से पूछताछ करता हूं. अब तेजस वकील दारूवाला से मिल कर उस से इस फाइल के बारे में पूछताछ करता है तो दारूवाला अपने चैंबर में, उस फाइल को ढूंढने लगता है, लेकिन वह फाइल नहीं मिलती तो दारूवाला कहता है कि जरूर यह फाइल मेरे भांजे ने चुरा ली होगी.

वकील दारुवाला बताता है कि जब मेरी बड़ी बहन मरी थी तो मैं ने उस के बेटे होश (केविन दवे) को अपने पास रख कर उस की परवरिश करने लगा था. लेकिन होश तो हमेशा आवारा की तरह घूमता रहता था. तभी होश वकील दारूवाला के घर की तरफ आता दिखता है, उसी समय एसीपी तेजस होश को पकडऩे की कोशिश करता है तो होश भाग जाता है. यहीं पर पहला एपिसोड समाप्त हो जाता है.

पहले एपिसोड की बात करें तो इस में काफी खामियां नजर आ रही हैं. कमिश्नर अरुण अपनी गारंटी पर एक ऐसे खूनी जिस ने 8 मर्डर किए थे, उसे डीजीपी के मना करने पर भी अपनी गारंटी पर जेल से छुड़वा लेता है. यह बात कल्पना से परे है. एसीपी तेजस फडके एक ड्रग्स रैकेट के पीछे लगा हुआ था, लेकिन पुलिस कमिश्नर खुद उस के औपरेशन को फेल कर देता है. यह बात भी समझ से परे है.

एपिसोड नंबर 2

दूसरे एपिसोड का नाम ‘द सीक्रेट लैटर्स’ रखा गया है. अब अगला सीन वर्तमान में आ जाता है, जहां दूसरे दिन सीमा के घर पर आ कर एसीपी तेजस वे सभी लैटर सीमा को दिखाता है, जो उसे होश के कमरे से मिले थे. ये वही पत्र थे, जो सीमा ने होश को लिखे थे. तेजस अब सीमा से पूछता है कि तुम ने ही इतने सारे लैटर्स होश को खुद लिखे थे यानी कि तुम जानती थी कि यह नया सीरियल किलर होश ही है.

इधर हम दूसरी ओर देखते हैं कि होश ने एक व्यक्ति को कमरे में बंद कर के रखा हुआ है. तभी वह नायलौन की एक चमकदार रस्सी निकालता है. इसी तरह की रस्सी से विराट का कत्ल किया गया था. आगे हम देखते हैं कि कमिश्नर अरुण से मिलने इंसपेक्टर पल्लवी आती है और बताती है कि विराट के मर्डर से पहले ऐसे ही 4 मर्डर हुए थे. मैं ने इस में काफी रिसर्च कर ली है, इसलिए आप मुझे विराट का केस दे दें.

अरुण कहता है कि यदि तुम्हारी जरूरत पड़ेगी तो मैं जरूर इस केस में शामिल कर लूंगा, लेकिन तुम इस नए सीरियल किलर वाली बात किसी भी मत बताना. उस के बाद इंसपेक्टर पल्लवी चली जाती है. सीमा फिर फोन पर एसीपी तेजस को बताती है कि होश ने उसे 12 जुलाई तक जो लैटर लिखे थे, उस में वह नौरमल लग रहा था. उस के बाद होश का मुझे 17 अगस्त को लैटर आया, जिस में वह काफी भड़का हुआ और काफी गुस्से में था.

इस का मतलब इस दौरान किसी ने उसे जरूर भड़काया होगा, अब एसीपी तेजस वकील दारूवाला के पास आ कर उस से पूछता है कि होश जुलाई से अगस्त के बीच में कहां था. दारूवाला बताता है कि उन दिनों होश एक कंसट्रक्शन कंपनी में काम कर रहा था. बाद में उस ने वहां काम करना भी छोड़ दिया था. तेजस उस कंसट्रक्शन कंपनी के इंजीनियर से बात की तो उस ने बताया कि होश बहुत ही झगड़ालू और पागल किस्म का इंसान था. प्रोजेक्ट मैनेजर जतिन (ऋषभ ठाकुर) के कहने पर उसे काम पर रखना पड़ा था.

अगले सीन में देखते हैं कि लोनावाला के जतिन के बंगले में एक कमरे में होश ने जतिन की पत्नी और बेटी को बंधक बना कर रखा है. उन के लिए होश खाना ले कर आता है, लेकिन वे दोनों काफी डरी हुई थीं, जबकि होश ने जतिन को एक दूसरी जगह बंधक बना कर रखा हुआ था. तभी यहां पर तेजस पुलिस टीम के साथ आ कर जतिन की पत्नी और बेटी को बचा लेता है और होश को अरेस्ट कर लेता है. तेजस होश को पुलिस स्टेशन ला कर जूस पिला कर तीनों मर्डर और जतिन के बारे में पूछताछ करता है. तब होश कहता है कि कंफेस तो मैं कर लूंगा, लेकिन पहले मुझे सीमा से मुलाकात करवा दो, जिसे हैदराबाद जेल में जीनत के नाम से कैद किया गया है.

उस के बाद तेजस सीमा को ले कर होश से मिलाने आता है. पुलिस उन दोनों की अकेले में मुलाकात करवाती है. इन दोनों को देखने और उन की बात सुनने के लिए पुलिस ने साउंड और कैमरे लगा रखे थे, जहां कुछ दूरी पर कमिश्नर अरुण और तेजस उन की हर गतिविधि को देख रहे थे. सीमा होश से आराम से बातें करने लग जाती है, फिर होश सीमा से कहता है कि तुम्हारा वह सीक्रेट मेरे पास सेफ रहेगा.

यह सुनते ही सीमा के हावभाव एकदम से बदल जाते हैं, जिसे अरुण और तेजस भी भांप लेते हैं. सीमा होश से कहती है कि तुम ने ये तीनों खून नहीं किए हैं, क्योंकि तुम मारने की केवल बात कर सकते हो, तुम्हारे अंदर खून करने की हिम्मत बिलकुल भी नहीं है. यह सुन कर होश रोने लग जाता है, फिर सीमा उस से जतिन के बारे में पूछती है तो वह एड्रेस बता देता है, जिसे सुन कर तेजस तुरंत एक पुलिस टीम जतिन को तलाशने के लिए भेज देता है.

इधर सीमा अब होश को अपनी ओर खींच कर उस के कान में कुछ कहती है और माइक में हाथ लगा लेती है ताकि उस की आवाज कोई भी न सुन सके. यह सुन कर होश जोरजोर से रोने लग जाता है. तभी वहां तेजस भाग कर आता है और सीमा से पूछता है कि तुम ने होश से क्या कहा तो सीमा कुछ नहीं कहती. अब सीमा अरुण और तेजस से कहती है कि होश ने कोई मर्डर नहीं किया है. मुझे लगता है कि जो भी असली खूनी है, वह बाहर ही आराम से घूम रहा है. यह सुन कर कमिश्नर अरुण परेशान हो जाता है.

अब हम बार में एक आदमी को देखते हैं जो लड़कियों से अय्याशी कर रहा होता है, फिर वह नशे में अपनी कार की तरफ जाने लगता है तो कोई उस का पीछा करने लगता है. उधर पुलिस टीम जतिन को सुरक्षित छुड़ा कर ले आती है. सीमा तेजस से कहती है कि मैं ने केवल उन्हीं लोगों को मारा था, जो बुरे काम करते थे. फिर हम देखते हैं कि जो आदमी बार में लड़कियों के साथ अय्याशी कर रहा था, जब वह अपने घर आता है तो वहां पर कोई नायलौन की रस्सी से गला घोंट कर उस का मर्डर कर देता है.

यानी कि जो भी किलर है, वह अभी भी मर्डर किए जा रहा है. उस के बाद यहां पर दूसरा एपिसोड समाप्त हो जाता है. दूसरे एपिसोड में भी काफी खामियां नजर आ रही हैं. यहां पर जेल की एक महिला सिपाही को सीमा और होश के लैटर आपस में आदानप्रदान करते दिखाया गया है.

यानी कि जेल में जब लैटर घूस ले कर लिए दिए जा सकते हैं तो और भी कुछ घूस दे कर किया जा सकता है. अर्थात जेल में भ्रष्टाचार व्याप्त है, यह बात भी उचित नहीं लगती. एसीपी तेजस होश को जूस पिला कर पूछताछ करना भी तर्कसंगत नहीं लगता. नाटकीयता साफसाफ नजर आ रही है.

एपिसोड नंबर 3

तीसरे एपिसोड का नाम ‘ट्रुथ इन द वुड्स’ रखा गया है. एपिसोड की शुरुआत में फ्लैशबैक में सीमा देशपांडे को दिखाया जाता है. जब वह किशोरावस्था में कत्थक नृत्य की प्रैक्टिस कर रही होती है, तभी एक आदमी उस के पास आता है, जिसे देख कर वह डर जाती है. उस अय्याश आदमी के मर्डर की खबर पा कर कमिश्नर अरुण और एसीपी तेजस भी पहुंच कर लाश का निरीक्षण करने लगते हैं. अरुण कहता है कि अब यह सीरियल किलर रोज मर्डर कर के हमें चुनौती देने लगा है.

अब एक  नई पुलिस टीम बना ली जाती है, जिस में इंसपेक्टर पल्लवी को भी शामिल किया जाता है. तेजस अब पुलिस को इसे खोजने में लगा देता है कि मरे हुए लोगों का आपस में क्या कनैक्शन था. अब हम एक युवा को देखते हैं जो अपने शरीर पर मांबेटे का टैटू बनवा रहा है. यह अलैक्स (विश्वास किनी) होता है, जिस का किरदार काफी रहस्यमयी और दिलचस्प है.

अब तेजस अपने औफिस में आता है तो उस का औफिसर उसे उस दिन सीमा ने होश के कान में जो बात कही थी, वह सुनवाता है. जिस में सीमा होश से कह रही थी कि तुम्हारे जीने का कोई फायदा नहीं, तुम एक कमजोर इंसान हो, तुम्हें तो मर जाना चाहिए. फिर हम होश को देखते हैं जो हौस्पिटल की खिड़की के शीशे से अपनी गरदन काट कर मर जाता है. यह देख कर हौस्पिटल के डौक्टर और पुलिस हैरान हो कर रह जाते हैं.

तेजस अब सीमा के पास आ कर कहता है कि तुम्हारे कारण ही होश ने आत्महत्या कर अपनी जान दे डाली है. तुम यही तो चाहती थी ताकि तुम्हारा सीके्रट कभी बाहर न आ सके. इस पर सीमा ‘हां’ कहती है. तेजस अब सीमा को उस अय्याश आदमी का फोटो दिखा कर पूछता है कि ये कौन हो सकता है. इस के बाद तेजस अपनी पुलिस टीम के पास आ कर बताता है कि ऐसा लग रहा है यह सीरियल किलर पहले से ही लोगों को जानता था, जिन के उस ने खून किए हैं.

इस के बाद वकील दारुवाला का फोन तेजस के पास आता है, जिस में वह बताता है कि कुछ साल पहले सरकार ने सभी प्रमुख केसों की फाइलें डिजिटलाइज कर दी थीं, जिस में सीमा के भी सारे मर्डर की फाइल्स भी थीं. इसलिए हो सकता है कि इस सीरियल किलर ने औनलाइन इन मर्डर को देखा होगा. अब तेजस सबइंसपेक्टर हानिया (जेबा हुसैन) से कहता है कि तुम जल्दी पता करो कि सरकार ने जो मर्डर की फाइल्स औनलाइन की थी, उस का टेंडर किस को दिया गया था? अब हम अलेक्स को देखते हैं, जो अभी अपने घर पर था. उस ने जो टैटू बनवाया था, वही मांबेटे की तसवीर उस के घर पर भी थी, उस के बाद वह अपने बैग से एक फोटो निकालता है, जिस में सीमा की फोटो भी होती है.

फिर अलेक्स अपने बैग से वही नायलौन वाली रस्सी भी निकालता है, जिस से यह लगता है कि अलैक्स ही सीरियल किलर हो सकता है. फिर तेजस के नानाजी अजोवा (प्रदीप वेलेकर) एक यात्रा पर निकल जाते हैं, जब वह जाने लगते हैं तो उन पर अलैक्स नजर रखने लगता है. सीमा भी इधर रात को 3 बजे जाग रही होती है, जैसे वह किसी का इंतजार कर रही हो. यहां पर अब हमें पता चलता है कि सीमा ने जो जेल में पुडिय़ा बनाई थी, उस से ही उस ने मोदक बनाए थे और प्रसाद मिला कर वही सब पुलिस टीम को खिला दिए थे, जिस में बेहोशी की दवा मिली थी.

केवल अकेला इंसपेक्टर ओमकार ही था, जिस ने यह प्रसाद नहीं खाया था, इस को खा कर सभी पुलिस वाले बेहोश हो जाते हैं. तभी वहां इंसपेक्टर ओमकार आता है तो सीमा तबीयत खराब होने का बहाना करने लगती है. यह देख कर ओमकार जैसे ही सीमा के पास आता है तो सीमा तत्काल झपट कर उस के गले में प्रैशर डाल कर ओमकार को बेहोश कर देती है. उस के बाद सीमा उस परची वाले घर पर जाती है तो दरवाजा नहीं खुलता और वह पूरी रात घर के बाहर ही बैठी रहती है.

अगले दिन पता चलता है कि सीमा भाग चुकी है, जिस से अरुण और तेजस काफी परेशान हो जाते हैं. उधर तन्वी जब अपना सैलून सुबहसुबह खोलती है तो उस की सहेली दिव्या (निमिशा नायर) तन्वी को बताती है कि कल मेरी तो मेरे बौयफ्रेंड के साथ डेट ही खराब हो गई. ये दोनों आपस में बातें कर रहे होते हैं, तभी सैलून में सीमा आ कर तन्वी से हेयर कट करने को कहती है. तन्वी उस के हेयर कट करने लगती है तो सीमा उस से बातें करने लगती है.

इधर अरुण तेजस से पूछता है कि तुम ने सीमा को अपने परिवार के बारे में तो नहीं बताया? तेजस के ‘हां’ कहने पर अरुण कहता है कि अपने परिवार वालों से बात बात करो कि कहीं सीमा उन्हें नुकसान न पहुंचा दे. तेजस पहले अपने नानाजी को फोन करता है, वह ठीक होते हैं. फिर वह पत्नी तन्वी को फोन करता है तो तन्वी सीमा के हेयर कट करने के कारण फोन नहीं उठाती. फिर वह तन्वी के सैलून के सीसीटीवी में अपने मोबाइल पर जब सीमा को वहां देखता है तो तुरंत गाड़ी में सैलून की तरफ भागता है.

इधर सीमा सैलून में तन्वी और दिव्या से खूब बातें करती है. तन्वी सीमा को बताती है कि वह अपने पति तेजस के साथ काफी खुश है. तभी सैलून में तेजस आ कर सीमा से कहता है कि मेरे साथ तुरंत चलो. तन्वी तेजस से पूछती है कि यह महिला कौन हैं तो तेजस कहता है तुम्हें बाद में बताऊंगा और वह सीमा को अपने साथ गाड़ी में बिठा कर ले जाता है. एक सुनसान जगह पर वह गाड़ी रोक कर सीमा को गाड़ी से बाहर निकाल कर उस से कहता है कि सीमा तेरा मर जाना ही ठीक है, क्योंकि तू एक सीरियल किलर है.

इस पर सीमा कहती है कि मेरी ममता ही मुझे वहां पर खींच कर ले गई थी और वह फिर बताती है कि तेजस मैं तेरी मां हूं और तेरे परिवार से मिलने गई थी. यह सुन कर तो तेजस के होश ही उड़ जाते हैं. उस के बाद यहां पर तीसरा एपिसोड समाप्त हो जाता है. इस एपिसोड की कहानी और निर्देशन में काफी खामियां दिखाई दे रही हैं. होश एक गंभीर मुजरिम है, जिस का हौस्पिटल में इलाज चल रहा था. वह आत्महत्या कर लेता है. ऐसे गंभीर अपराधी की गतिविधि पर नजर रखने के लिए एक पुलिस वाला तक नहीं है.

एपिसोड नंबर 4

चौथे एपिसोड का नाम ‘ए किलर इज बौर्न’ रखा गया है. शुरुआत में फ्लैशबैक में दिखाया गया है कि सीमा अपने रेस्टोरेंट में या तो वहां पर तेजस (फडके तनुश पाठक) भी होता है जो काफी छोटा था. फिर सीन वर्तमान में आता है जहां तेजस सीमा के साथ गाड़ी में बैठा होता है. तेजस सीमा के साथ अरुण के पास आता है. वह अरुण से पूछता है कि सर आप को यह सच पता था कि सीमा मेरी मां है? अरुण कहता है हां, मुझे पता था. सीमा ने ही केस में तुम्हारा नाम सजेस्ट किया था. अरुण सीमा से कहता है कि अब तुम्हारा यहां पर कोई काम नहीं है, इसलिए तुम अब वापस हैदराबाद जाने के लिए रेडी हो जाओ.

इधर तेजस अपने नाना से कहता है कि तुम ने मेरी मां के बारे में झूठ कहा था कि वह मर चुकी है. नाना उसे काफी समझाने की कोशिश करते हैं. अब हम टीवी पर देखते हैं, जहां पर ऐंकर प्रतीक सूर्यवंशी (असित चटर्जी) बताता है कि अब ये मर्डर 25 साल पुराने मर्डर्स की तर्ज पर हो रहे हैं. इस के बाद इंसपेक्टर पल्लवी को जेलो नाम की उस कंपनी का पता लग जाता है, जिस ने इन सारी फाइलों को डिजिटलाइज किया था.

इस के बाद एसआई हानिया पल्लवी को बताती है कि 7 महीने पहले जेलो कंपनी में काम करने वाले सुनील गुप्ते (साहित्य पंसारे) नाम के कर्मचारी का उसी तर्ज पर मर्डर हुआ था और उस की लाश कुएं में फेंक दी गई थी और मृतक की आंखों को खुला रखने के लिए ग्लू का इस्तेमाल किया गया था. इस के बाद जब सीमा को वापस हैदराबाद ले जाया जा रहा होता है, तब कमिश्नर अरुण सीमा को सुनील गुप्ते की फोटो दिखाता है. सीमा कहती है कि यह मर्डर भी उसी सीरियल किलर ने किया है. लेकिन मैं इस की सच्चाई केवल तेजस को ही बताऊंगी, क्योंकि इसी बहाने मैं आखिरी बार अपने बेटे को देख तो सकूंगी.

अब अरुण तेजस को सीमा के पास भेजता है तो सीमा उसे बताती है कि एक रात जब वह अपना रेस्टोरेट बंद कर रही थी, तभी सीन फ्लैशबैक में जाता है, जहां जोसेफ एल्पट (शरद जाधव) नाम का एक आदमी सीमा के साथ दुष्कर्म करने के इरादे से वहां पर आ कर सीमा के प्रतिरोध करने पर उसे मारने की कोशिश करता है. अपने बचाव के लिए सीमा वहां पर पड़ी नायलौन की रस्सी से जोसेफ का गला घोंट कर उसे मार डालती है.

फिर सीन वर्तमान में आता है, जहां सीमा तेजस को बताती है कि उस के बाद मेरे पापा आए और उन्होंने जोसेफ की लाश को कुएं में फेंक दिया और कुएं को बंद कर दिया. सीमा आगे बताती है कि उस दिन रात को जोसेफ का बेटा अलेक्स (राज यादव) भी वहां पर था. हालांकि वह काफी छोटा था, लेकिन उस ने इस कत्ल को अपनी आंखों से देखा था, इसीलिए वही अब सीरियल किलर हो सकता है.

सीमा बताती है कि उस के बाद उस ने अलेक्स को अपने पास रख कर अपने बच्चे की तरह उस की परवरिश की थी, क्योंकि उस की तो मां भी नहीं थी. फिर मुझे जेल हो गई तो अलेक्स कहां गया, इस के बारे में मुझे पता नहीं चल सका था. तेजस उस समय तुम भी बहुत छोटे थे. अब तेजस अपने नाना को फोन कर के कहता है कि पहला मर्डर तो नाना आप ने ही छिपाया था. अलेक्स कहां गया बताओ, उस के नाना कहते हैं कि इस के अलावा मेरे पास और कोई आप्शन भी नहीं था. सीमा के जेल जाने के बाद मैं ने अलेक्स को एक अनाथालय में भेज दिया था.

उस के बाद तेजस अनाथालय में जा कर पूछताछ करता है तो वहां का वार्डन तेजस को बताता है कि अलेक्स के पास एक बैग था, जो भी उस को छूता था तो वह मरनेमारने पर उतारू हो जाता था. पता नहीं बैग में वह क्या रखता था? वार्डन बताता है कि फिर वह चोरियां करने लगा. इस के बाद वह कहां गया हमें पता नहीं. परंतु एक साल पहले उस का मुझे फोन आया था, जिस में उस ने बताया कि वह अब एक अच्छा इंसान बन गया है.

इधर तेजस के कहने पर कुएं को खोला जाता है तो उस के अंदर एक कंकाल मिलता है. अलेक्स तन्वी के घर आ कर बताता है कि वह तेजस का बचपन का दोस्त है. ते हैं. तभी तन्वी फोन कर बताती है कि आज उस के पास अलेक्स आया था, जो तुम्हारे और नानाजी के बारे में कुछ बातें बता रहा था. तेजस तुरंत अलेक्स का फोटो तन्वी से ले कर सभी पुलिस स्टेशनों को भेज देता है, ताकि अलेक्स को जल्द से जल्द पकड़ा जा सके.

तेजस को पता चलता है कि अलेक्स एक बार में काम करता है तो वह उस बार में जा कर अलेक्स को गिरफ्तार कर पूछताछ के लिए पुलिस स्टेशन ले आता है. अलेक्स बताता है कि जब मैं ने टीवी पर तुझे देखा तो मुझे अच्छा लगा. साथ ही तू जब अपने घर से आई (मां) को ले कर जा रहा था तो मुझे खुशी हुई कि आई तो जिंदा है, जबकि नानाजी ने मुझे बताया था कि आई मर चुकी है.

जब तेजस बैग में मिली चीजों के बारे में पूछता है तो अलेक्स बताता है कि जब नानाजी आई की मौत की खबर सुना कर मुझे अनाथालय ले जा रहे थे तो मैं ये सब चीजें आई की याद के तौर पर रख ली थीं. सीमा आई तो मेरे दिल के काफी करीब हैं. तभी वहां इंसपेक्टर पल्लवी तेजस को बताती है कि अब तक जितने भी मर्डर हुए हैं, उस में अलेक्स की लोकेशन बार की ही थी यानी कि अलेक्स ने ये खून नहीं किए थे. तेजस अब अलेक्स को रिहा कर देता है.

दूसरे दिन अलेक्स तेजस के घर खाने पर आता है तो तेजस, तन्वी और दिव्या उस से खूब दिल खोल कर बातें करते हैं. जब तन्वी अलेक्स और दिव्या को बातें करते देखती है तो काफी खुश हो जाती है, क्योंकि दिव्या अलेक्स को पसंद करने लगी थी. तभी वहां पर एक पुलिस औफिसर तेजस के लिए एक पार्सल दे कर जाता है. तेजस उसे खोलता है तो उस में एक मोबाइल था, जिस में अब तक के सारे मर्डर्स की फोटो थीं. साथ ही उस में एक परची में लिखा था कि मैं सीमा से बात करना चाहता हूं, इसलिए कल 12 बजे कौल करूंगा.

यह सब देख कर तेजस के होश उड़ जाते हैं कि यह किलर तो सब कुछ जान गया है, इस के बाद यहीं पर चौथा एपिसोड समाप्त हो जाता है. चौथे एपिसोड में भी काफी भटकाव की स्थिति दिखाई दे रही है. तेजस कुएं को खुदवा कर उस में से कंकाल बरामद करवाता है, मगर अपने नाना को गिरफ्तार नहीं करवाता. अलेक्स जब पहली बार तन्वी से मिलता है तो वह अपने मोबाइल से चुपके से अलेक्स का फोटो ले लेती है. यह कहानी भी साफसाफ, मनगढ़ंत सी दिखाई देती है.

एपिसोड नंबर 5

पांचवें एपिसोड का नाम ‘शिष्य’ रखा गया है. एपिसोड की शुरुआत में फ्लैशबैक में 1999 का सीन दिखाते हैं, जहां सुहास (कामरान शाह) नाम का एक छोटा बच्चा सीमा के रेस्टोरेंट में खाना खाने आता है. सीमा देखती है कि सुहास को उस के पिता (श्रीरंग गोखले) डांटते हुए प्रताडि़त करते हुए जबरदस्ती खाना खिला रहे हैं. जब सुहास के पेरेंट्स हाथ धोने चले जाते हैं तो सीमा सुहास से पूछती है कि मुझे बताओ क्या बात है. तब नन्हा सुहास अपने शरीर पर चोटों के निशान दिखाते हुए कहता है कि मेरे पापा बुरे हैं, मेरी बुरी तरह पिटाई करते हैं.

अब रात को सीमा अपनी एक ब्लैक ड्रेस पहनती है और सुहास के घर आ कर उस के पिता का नायलौन की रस्सी से गला घोंट कर मर्डर कर देती है और लाश को शीशे के सामने रख देती है. यही नहीं, वह करीब 2 घंटे तक लाश के पास लाश के अकडऩे का इंतजार भी करती है और फिर लाश अकडऩे पर उस की आंखें खोल कर चली जाती है. हानिया को पार्सल में जो मोबाइल मिला था, तेजस अब उस का पता करने को कहता है. दोपहर को एक बजे उसी फोन पर किलर का फोन सीमा के लिए आता है. तेजस मोबाइल का स्पीकर औन कर देता है और किलर का औन कौल ट्रैस पर लगा देता है. किलर सीमा से कहता है कि आप मेरी गुरु हैं और मैं आप का शिष्य हूं.

सीमा उस से पूछती है कि तुम 4 लोगों को तो मार ही चुके हो, अब पांचवां कौन है? इस पर किलर कहता है कि इस का आप को जल्द ही पता चल जाएगा और किलर फिर फोन काट देता है. सीमा बताती है कि मुझे ये लगता है कि यह किलर आदमी नहीं, बल्कि एक औरत हो सकती है. सीन अब चेंज होता है. किलर ने एक डेंटिस्ट महेंद्र तोपार्देकर (सुदर्शन पाटिल) को अपना नया टारगेट बना कर रस्सी से बांधा हुआ था. किलर अब उसी फोन पर वीडियो कौल कर के वही दृश्य सीमा को फोन पर दिखाते हुए कहता है कि अब आप ये मर्डर अपनी आंखों से देख पाएंगी.

तेजस जल्दी से वहां के दृश्य से उस जगह का पता लगा लेता है. वह अब अपनी टीम ले कर शौप पर निकलता है. इधर सीमा किलर को अपनी बातों में उलझा कर तरहतरह के सवाल पूछने लग जाती है. अब किलर जैसे ही उस डेंटिस्ट का नायलौन की रस्सी से गला घोंट रहा होता है, वैसे ही तेजस हाथ में पिस्टल ले कर उसी शौप पर पहुंच जाता है. तेजस को देखते ही किलर भागता है और भागते हुए तेजस पर वार कर के उसे बेहोश कर देता है, पर उस डेंटिस्ट महेंद्र की जान बच जाती है.

उस के बाद तेजस फोन कर के सीमा को बताता है कि वह सेफ है. तब सीमा कहती है कि जब किलर मुझे लाइव मर्डर दिखा रहा था तो वही गाना गुनगुना रहा था, जो मैं ने सुहास के पिता का मर्डर करते समय गुनगुनाया था. इस का मतलब यही है कि बचपन में उस समय सुहास ने ही मुझे अपने पापा का मर्डर करते देख लिया होगा. शायद यह किलर सुहास ही हो सकता है. इस के बाद तेजस उसी डेंटिस्ट महेंद्र के पास आता है, जो हौस्पिटल में भरती था, तब डेंटिस्ट महेंद्र बताता है कि वह किलर एक लड़की है. एक बार मुझे वह एक बार में मिली थी. हम ने काफी देर तक एकदूसरे से प्यार भरी बातें कीं. उस के बाद मैं उसे अपने रूम में ले कर आ गया. हम ने आपस में किस किए.

जैसे ही हम अब कुछ आगे और करना चाहते थे, मुझे ऐसा लगा उस के बौडी पार्ट कुछ अलग थे. मैं समझ गया कि उस ने सर्जरी करा रखी है तो मैं ने उसे अपने घर से जाने के लिए कह दिया. वह पहले एक लड़का था, जो बाद में सर्जरी करा कर शैफाली बन गई थी. अब तेजस पुलिस टीम के पास आ कर ये सारी बातें सीमा को बता देता है. तभी दोपहर के 12 बजे का समय हो जाता है और किलर का फोन सीमा के लिए आता है तो सीमा कहती है सुहास तुम कैसे हो?

जिस पर किलर कहता है कि अच्छा तुम अब मेरे बारे में जान गई हो, लेकिन तुम ने मुझे धोखा क्यों दिया जो पुलिस मेरे पीछे आ गई. सीमा कहती है कि तुम ऐसे किसी को जान से मत मारो, जिस की कोई गलती ही न हो. मुझे ऐसे सनकी किलर पसंद नहीं हैं. जिस पर सुहास कहता है कि मैं ने आप के लिए आज तक काफी कुछ किया है, जिस के कारण आज तुम्हारा परिवार एक हो पाया है और अब तुम्हीं मुझ से बात करने के लिए मना कर रही हो. अब आप ने मुझे गुस्सा दिला दिया है तो मैं आप के बेटे की खुशियां छीन लूंगी, यह कहते हुए सुहास फोन काट देता है.

अब सीमा सोचने लगती है कि सुहास ने अब तक तेजस के लिए क्याक्या किया होगा. उधर तेजस भी यही सोच रहा था कि आखिर ये है कौन, जो मुझे इतनी अच्छी तरह से जानता है और मेरी खुशियां छीन सकता है. यहीं पर पांचवां एपिसोड खत्म हो जाता है. पांचवें एपिसोड में भी कहानी को भटकाने की कोशिश की गई है, जिस के कारण नाटकीयता साफसाफ झलक रही है. सीमा जब सुहास के पिता का मर्डर करने आती है तो सुहास और उस की मां को कहीं भी नहीं दिखाया गया है और वह मर्डर करने के बाद पूरे 2 घंटे तक लाश के पास बैठ कर लाश के अकडऩे का इंतजार करती है. यह बात तो समझ से ही परे है.

एपिसोड नंबर 6

छठे और आखिरी एपिसोड का नाम ‘द फाइनल जजमेंट’ रखा गया है. एपिसोड की शुरुआत में हम फ्लैशबैक में देखते हैं कि सुहास जब छोटा होता है तो वह अपने पापा की मौत के बाद खुशीखुशी अपना लड़कियों की तरह होने पर लिपिस्टिक लगा कर प्रचार करता है. पर उसे जैसे ही पता चलता है कि सीमा की मौत हो गई है तो वह बहुत दुखी हो कर रोने लगता है.

बड़ा होते ही सुहास अपनी मां को वृद्धाश्रम में छोड़ कर आता है और फिर अपना घर बेच कर उस पैसे से अपना सैक्स मैडिकली चेंज करा कर लड़की बन जाता है. फिर हम दिव्या (निमिशा नायर) को देखते हैं जो सुहास नहीं बल्कि दिव्या बन चुकी थी और अब तक ये मर्डर दिव्या ही कर रही थी. इधर तेजस तन्वी को फोन कर के सेफ रहने को कहता है, तभी वहां पर दिव्या आ कर तन्वी को किडनैप कर ले जाती है. यह सारी बातें फोन पर तेजस सुन लेता है और पुलिस टीम को दिव्या के घर पूरी तहकीकात करने भेजता है. लेकिन दिव्या के घर पुलिस टीम को कुछ भी नहीं मिलता है.

सीमा दिव्या से कहती है कि तुम मेरे परिवार को नुकसान मत पहुंचाओ, मैं तुम से सीधे मिल लूंगी, लेकिन इस के बदले में तुम्हें तन्वी को रिहा करना होगा. दिव्या मान जाती है और सीमा को एक मौल का एड्रेस दे कर उसे वहां बुलाती है. तेजस कहता है कि दिव्या साइको है, तुम्हें मार भी सकती है, मगर सीमा कमिश्नर अरुण की परमिशन ले कर वहां जाने की ठान लेती है. इधर इंसपेक्टर पल्लवी को लगता है कि यहां पर सीमा दिव्या से मिली हुई हो सकती है.

तेजस भी अपनी पुलिस टीम के साथ उस मौल में पहुंचता है तो दिव्या तेजस को फोन कर के फोन सीमा को देने के लिए कहती है और कहती है कि यदि कोई भी सीमा के पीछे आएगा तो इस से तन्वी की जान जा सकती है. लेकिन तेजस खुद न जा कर अपनी पुलिस टीम के कुछ साथियों को सीमा के पीछे लगा देता है. मगर दिव्या तेजस से कई कदम आगे थी, वह सीमा को इधरउधर रास्तों से एक जगह बुला कर उस के हाथों में हथकड़ी लगा कर तन्वी को छोड़ देती है. जिस के बाद दिव्या निकल जाती है. तेजस उसे पकड़ नहीं पाता.

तन्वी को देख कर तेजस की जान में जान आ जाती है. अब दिव्या सीमा को वहीं पर ले कर आती है, जहां पर उस ने तन्वी को पहले कैद कर के रखा था. फिर तन्वी तेजस को बताती है कि दिव्या ने उसे जहां कैद किया था, वहां पर जेलो कंपनी के बौक्स रखे थे. तेजस हानिया से जेलो कंपनी के पुराने औफिस का पता करने को कहता है. इधर दिव्या सीमा को बताती है कि जब आप के मरने की खबर आई थी तो मैं बहुत रोई थी. फिर वह उसे अपना जेंडर चेंज करने की कहानी बताती है.

दूसरी ओर तेजस को दिव्या की लोकेशन पता चल जाती है तो वह दिव्या को पकडऩे आता है. लेकिन दिव्या भागने लगती है, तब तेजस दिव्या के कंधे पर गोली मार देता है. वहीं हम देखते हैं कि सीमा मौका देख कर वहां से भाग जाती है. अब हौस्पिटल में तेजस दिव्या से सीमा के बारे में पूछता है तो वह बताती है कि वह अपना एक पुराना बदला लेने गई है. अब हमें फ्लैशबैक में दिखाया जाता है कि जब सीमा छोटी थी, तब एक दिन उस के पापा दीनानाथ (प्रदीप वेलंकर) ने कमरे में ले जा कर उस के साथ दुष्कर्म किया था. यह लगभग काफी दिनों तक होता रहा.

जब सीमा की मां (वैभवी सबा) ने इस का विरोध किया तो सीमा के पापा ने मां को उस के सामने ही मार डाला था. अब सीमा वर्तमान में दीनानाथ के पास पहुंचती है तो वह अपने पापा से कहती है पहले तो मैं सब कुछ भूल गई थी, मगर काउंसलिंग के बाद मुझे सब कुछ याद आ गया है, इसलिए मैं तुम्हें ही मारने आई हूं. सीमा अपने पापा को मारने वाली होती है कि तभी वहां तेजस आ जाता है तो वह अब खुद अपने नाना को मारना चाहता था, क्योंकि उस ने भी काउंसलिंग वाली फाइल पढ़ ली थी.

तब सीमा कहती है कि तेजस, इसे तुम मत मारो, इसे तो मेरे हाथों से ही मरना चाहिए. यह सुन कर तेजस अपनी मां को सीने से लगा कर रोने लगता है. तभी उस के नाना अपनी पुरानी करतूत से आहत हो कर छत से कूद कर अपनी जान दे देते हैं. फिर यह केस बंद हो जाता है. अब सीमा को हैदराबाद जेल वापस भेजा जा रहा है, क्योंकि अब सीमा का बदला भी पूरा हो गया था और किलर भी पकड़ा जा चुका था. सीमा कमिश्नर अरुण को धन्यवाद देती है कि उन के कारण ही वह अपने बेटे तेजस से मिल पाई थी.

ये लोग अब गाड़ी में आगे जाने लगते हैं तो हम देखते हैं कि आधे रास्ते में आ कर तेजस की गाड़ी अचानक से कहीं गायब हो जाती है, तभी वहां पर इंसपेक्टर ओमकार अपनी गाड़ी से आता है तो देखता है कि तेजस अपनी गाड़ी में बंघा पड़ा था. तेजस ओमकार से कहता है कि मेरी पिस्टल सीमा ने छीन ली और मुझे यहां बांध कर न जाने कहां फरार गई, इसलिए जल्दी जा कर उसे ढूंढो. वहीं अब हम सीमा को देखते हैं जो बस में बैठ कर कहीं जा रही थी. यहां पर वेब सीरीज ‘मिसेज देशपांडे’ समाप्त हो जाती है.

छठे एपिसोड में भी लेखक ने कहानी में काफी भटकाव दिखाए हैं. सुहास को यह बात भला कैसे चली थी कि सीमा की मौत हो चुकी है. तेजस को इस बात का बिलकुल भी शक दिव्या पर नहीं होता, जबकि छठे एपिसोड तक आतेआते दर्शक समझ चुके थे कि कातिल दिव्या ही हो सकती है. यदि पूरी वेब सीरीज की बात करें तो इस के निर्माण में संदिग्धों को बड़े अजीबोगरीब तरीके से पेश किया गया है, जिस से कोई भी तुरंत समझ जाता है कि यह कहानी दर्शकों को वेवकूफ बनाने की कोशिश कर रही है.

माधुरी दीक्षित

सुप्रसिद्ध अभिनेत्री और कुशल नृत्यांगना माधुरी दीक्षित का जन्म 15 मई, 1967 को मुंबई (महाराष्ट्र) में हुआ था. पिता शंकर दीक्षित और मम्मी स्नेहलता दीक्षित की लाडली बेटी माधुरी की इच्छा बचपन से ही डौक्टर बनने की थी. शायद यही वजह रही थी कि माधुरी ने अपना जीवनसाथी डा. श्रीराम नेने को चुना. मुंबई के डिवाइन चाइल्ड हाईस्कूल से अपनी प्रारंभिक शिक्षा पूरी करने के बाद माधुरी दीक्षित ने मुंबई यूनिवर्सिटी से स्नातक की शिक्षा पूरी की.

माधुरी दीक्षित हिंदी सिनेमा की सफल अभिनेत्री रही है. माधुरी ने अपने अभिनय करिअर की शुरुआत सन 1984 में ‘अबोध’ फिल्म से की थी. किंतु माधुरी को असली पहचान वर्ष 1998 में आई प्रसिद्ध फिल्म ‘तेजाब’ से मिली, जिस के बाद उस ने मुड़ कर नहीं देखा. एक के बाद एक सुपरहिट फिल्मों के कारवां ने माधुरी को भारतीय सिनेमा की सर्वोच्च अभिनेत्री के रूप में स्थापित किया. इस की प्रमुख फिल्में ‘राम लखन’, ‘परिंदा’, ‘त्रिदेव’, ‘किशन कन्हैया’, ‘दिल’, ‘प्रहार’ आदि रही हैं.

माधुरी दीक्षित को फिल्म ‘दिल’, ‘बेटा’, ‘हम आप के हैं कौन’, ‘दिल तो पागल है’ के लिए फिल्मफेयर के सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री पुरस्कार और वर्ष 2003 में फिल्म ‘देवदास’ के लिए फिल्मफेयर सर्वश्रेष्ठ सहायक अभिनेत्री पुरस्कार से सम्मानित किया गया था. वर्ष 2008 में माधुरी दीक्षित को भारत सरकार के चौथे सर्वोच्च नागरिक सम्मान ‘पद्मश्री’ से सम्मानित किया गया.

माधुरी दीक्षित का विवाह 1999 में डा. श्रीराम माधव नेने से हुआ था. इन के 2 बेटे हैं. माधुरी दीक्षित ने वेब सीरीज ‘मिसेज देशपांडे’ से पहले वेब सीरीज ‘द फेम गेम’ (2022 नेटफ्लिक्स) और ‘मजा मां’ (2022 अमेजन प्राइम वीडियो) में काम किया है.

सिद्धार्थ चांदेकर

वेब सीरीज ‘श्रीमती देशपांडे’ में सीमा (माधुरी दीक्षित) के बेटे की भूमिका एसीपी तेजस खड़के निभाने वाले प्रसिद्ध अभिनेता सिद्धार्थ चांदेकर का जन्म 14 जून, 1991 को पुणे, महाराष्ट्र में हुआ था. सिद्धार्थ की मम्मी का नाम सीमा चांदेकर है, जो मराठी फिल्मों की अभिनेत्री रही हैं. सिद्धार्थ ने अपनी स्कूली शिक्षा पुणे के एस.डी. कटारिया हाईस्कूल से पूरी की थी. उस के बाद उस ने पुणे के सर परशुरामभाऊ कालेज से स्नातक की शिक्षा पूरी की. सिद्धार्थ के अभिनय करिअर की शुरुआत वर्ष 2007 में हिंदी फिल्म ‘हम ने जीना सीख लिया’ से हुई थी. हालांकि यह फिल्म फ्लौप रही थी, लेकिन सिद्धार्थ ने हार नहीं मानी.

इस के बाद सिद्धार्थ ने लोकप्रिय टीवी सीरियल ‘अग्निहोत्र’ से मराठी सिनेमा में पदार्पण किया. उस के बाद अवधूत गुप्ते की मराठी फिल्म ‘जैदा’ में उमेश जगताप की भूमिका निभाई, जो काफी पसंद की गई. सिद्धार्थ को ब्लौकबस्टर फिल्म ‘क्लासमेट्स’ में अनी के किरदार से सब से ज्यादा जाना जाता है. 2014 में उस ने अजय नाइक की फिल्म ‘बावरे प्रेम’ में उर्मिला कानिकटर के साथ अभिनय किया.

वर्ष 2016 में आई भारतीय मराठी भाषा की बायोपिक ‘वजंदर’, जिस का निर्देशन सचिन कुंडलकर ने किया था, में सिद्धार्थ ने आलोक का किरदार निभाया था. सिद्धार्थ ने रोमांटिक कौमेडी फिल्म ‘औनलाइन बिनलाइन’ फिल्म ‘लास्ट ऐंड फाउंड’, और ‘बसस्टौप’ में भी काम किया है.

सिद्धार्थ और मराठी फिल्मों की अभिनेत्री मिताली की शादी को मराठी सिनेमा जगत की अब तक की सब से भव्य शादी माना गया. इस जोड़े ने शाही अंदाज में अपने वैवाहिक जीवन की शुरुआत की. पुणे के पास ढेपेवाडा में हुई यह शादी बेहद खूबसूरत थी, समारोह काफी भव्य था. सिद्धार्थ वेब सीरीज ‘माया नगरी: सिटी औफ ड्रीम्स’, ‘अंधातरी’, ‘जीवलगा’ और ‘मारू कंफ्यूज्ड मैन’ नामक मराठी हिंदी वेब सीरीजों में काम कर चुका है. Web Series

 

 

Crime News: मासूम बच्चों का सीरियल किलर – पुलिस की गिरफ्त में

Crime News: सीरियल किलर रविंद्र एकएक कर के करीब 40 मासूमों के साथ कुकर्म कर उन की हत्याएं कर चुका था. निशा की हत्या करने के बाद यदि वह अपनी मां के प्रेमी सन्नी को फंसाने की कोशिश न करता तो शायद अब भी गिरफ्तार नहीं हो पाता.

बाहरी दिल्ली के कराला गांव के नजदीक जैननगर में काफी बड़ी झुग्गी बस्ती है. यह इलाका बेगमपुर थाने के अंतर्गत आता है. इसी बस्ती के रहने वाले संतोष कुमार की 6 वर्षीया बेटी निशा रोजाना की तरह 14 जुलाई को भी नित्य क्रिया के लिए सूखी नहर की तरफ गई थी. सुबह 6 बजे घर से निकली निशा जब आधापौने घंटे बाद भी घर नहीं लौटी तो मां पुष्पा देवी चिंतित हुई. चिंता की बात इसलिए थी क्योंकि निशा को तैयार हो कर 7 बजे स्कूल के लिए निकलना था. वह नजदीक के ही सरकारी स्कूल में पढ़ती थी. कुछ देर और इंतजार करने के बाद भी वह नहीं आई तो पुष्पा बेटी को देखने के लिए सूखी नहर की तरफ चली गई.

पुष्पा ने सूखी नहर की तरफ जा कर बेटी को ढूंढा, लेकिन वह नहीं मिली. उधर आनेजाने वाली महिलाओं और बच्चों से भी उस ने बेटी के बारे में पता किया, पर कोई भी उस की बच्ची के बारे में नहीं बता सका. तब परेशान हो कर वह घर लौट आई. उस ने यह बात पति संतोष को बताई तो वह भी परेशान हो गया. अब तक बेटी के स्कूल जाने का समय हो गया था. मियांबीवी एक बार फिर बेटी को ढूंढने निकल गए. उन के साथ पड़ोसी भी उन की मदद के लिए गए थे. एक, डेढ़ घंटे तक वह बेटी को इधरउधर ढूंढते रहे, लेकिन उस का पता नहीं चल सका.

बस्ती के लोग इस बात से हैरान थे कि आखिर घर और सूखी नहर के बीच से बच्ची कहां गायब हो गई? संतोष की समझ में नहीं आ रहा था कि अब वह बच्ची को कहां ढूंढे? आखिर वह पड़ोसियों को ले कर थाना बेगमपुर पहुंचा. थानाप्रभारी रमेश सिंह उस दिन छुट्टी पर थे. थाने का चार्ज अतिरिक्त थानाप्रभारी जगमंदर दहिया संभाले हुए थे. संतोष कुमार ने उन्हें बेटी के गुम होने की बात बताई.

बच्ची की उम्र 6 साल थी, इसलिए पुलिस यह भी नहीं कह सकती थी कि वह अपने किसी प्रेमी के साथ चली गई होगी. दूसरे बच्ची के पिता की आर्थिक स्थिति इतनी मजबूत नहीं थी कि किसी ने फिरौती के लिए उस का अपहरण कर लिया है. संतोष ने बताया था कि उस की किसी से कोई दुश्मनी वगैरह नहीं थी. इन सब बातों को देखते हुए पुलिस को यही लग रहा था कि या तो बच्ची खेलतेखेलते कहीं चली गई है या फिर उसे बच्चा चुराने वाला कोई गैंग उठा ले गया है.

पिछले कुछ दिनों से दिल्ली में तमाम बच्चे रहस्यमय तरीके से गायब हो रहे थे. इसी बात को ध्यान में रख कर उन्होंने उसी समय निशा के अपहरण की रिपोर्ट दर्ज करा दी और इस की जांच हेडकांस्टेबल शमशेर सिंह को सौंप दी. बच्ची के अपहरण का मुकदमा दर्ज हो जाने के बाद दिल्ली के समस्त थानों में उस का हुलिया बता कर वायरलैस से सूचना दे दी गई. इंसपेक्टर जगमंदर दहिया कुछ पुलिसकर्मियों के साथ उस जगह पर पहुंच गए, जहां से बच्ची लापता हुई थी. उन्होंने संतोष के घर से ले कर सूखी नहर तक का निरीक्षण किया. उसी दौरान उन्होंने कुछ लोगों से बात भी की, लेकिन उन्हें ऐसा कोई क्लू नहीं मिला, जिस के सहारे लापता बच्ची का पता लगाया जा सकता.

वह उधर की झाडि़यों में भी यह सोच कर खोजबीन करने लगे कि कहीं किसी बहशी दरिंदे ने उसे अपना शिकार न बना लिया हो. क्योंकि आए दिन बच्चों के साथ कुकर्म करने जैसे मामले सामने आते रहते थे. झाडि़यों में भी उन्हें कुछ नहीं मिला. संतोष के घर से करीब 50 मीटर की दूरी पर एक निर्माणाधीन इमारत दिखाई दे रही थी. इंसपेक्टर जगमंदर दहिया ने अपने आसपास खड़े बस्ती वालों से उस इमारत के बारे में पूछा तो उन्होंने बताया कि यह बिल्डिंग किसी जैन की है, लेकिन पिछले काफी दिनों से इस के निर्माण का काम रुका हुआ है.

जिज्ञासावश वह उस बिल्डिंग की तरफ चल दिए. जैननगर की गली नंबर 6 में निर्माणाधीन उस 3 मंजिला बिल्डिंग में जब वह घुसे तो एक कमरे में उन्हें एक बच्ची निर्वस्त्र हालत में पड़ी मिली. वह मृत अवस्था में थी. उन के साथ मौजूद संतोष उस बच्ची को देख कर चीख पड़ा. वह उसी की बेटी निशा थी. बच्ची का निचला हिस्सा खून से सना हुआ था. उस के कपड़े पास पड़े हुए थे. निशा की हालत देख कर इंसपेक्टर दहिया समझ गए कि यह किसी दरिंदे की शिकार बनी है. निशा की हत्या की खबर सुन कर बस्ती के सैकड़ों लोग थोड़ी देर में वहां जमा हो गए. इंसपेक्टर दहिया ने इस की सूचना अपने आला अधिकारियों के अलावा क्राइम इन्वैस्टीगेशन टीम व फोरैंसिक टीम को भी दे दी.

कुछ देर बाद बाहरी दिल्ली के डीसीपी विक्रमजीत, डीसीपी-2 श्वेता चौहान, एसीपी ऋषिदेव कराला भी जैननगर पहुंच गए. डीसीपी ने मौके पर क्राइम ब्रांच को भी बुलवा लिया. क्राइम इन्वैस्टीगेशन और फोरैंसिक टीम भी मौके से सबूत जुटाने लगी. इन टीमों का काम निपटने के बाद पुलिस अधिकारियों ने घटनास्थल का निरीक्षण किया. उसी बिल्डिंग में दूसरी मंजिल पर एक ड्राइविंग लाइसेंस और ट्रांसपोर्ट से संबंधित कुछ कागज मिले. पुलिस ने वह सब अपने कब्जे में ले लिया.

लाश का मुआयना करने पर यही लग रहा था कि किसी ने उस बच्ची के साथ गलत काम कर के उस का गला घोंट दिया है. निशा की हत्या पर बस्ती के लोगों में गुस्सा बढ़ता जा रहा था. इस से पहले कि वे कोई आक्रामक कदम उठाते, पुलिस ने उन्हें समझाबुझा कर शांत कर दिया. मौके की जरूरी काररवाई निपटाने के बाद पुलिस ने लाश को पोस्टमार्टम के लिए सुल्तानपुरी के संजय गांधी मैमोरियल अस्पताल भेज दिया.

इस मामले को सुलझाने के लिए डीसीपी विक्रमजीत ने एसीपी ऋषिदेव के नेतृत्व में एक पुलिस टीम बनाई. टीम में इंसपेक्टर जगमंदर दहिया, एएसआई सुरेंद्रपाल, हेडकांस्टेबल नरेंद्र कुमार, कांस्टेबल टी.आर. मीणा आदि को शामिल किया गया. जिस बिल्डिंग में निशा की लाश मिली थी, उसी बिल्डिंग में पुलिस को जो ड्राइविंग लाइसेंस और कागजात मिले थे, उन की जांच शुरू की गई. ड्राइविंग लाइसेंस पर सन्नी पुत्र सुरेंद्र कुमार नाम लिखा था. उस पर जो पता लिखा था, वह कराला के जैननगर का ही था. यानी यह पता वही था, जहां मरने वाली बच्ची रहती थी.

खैर, पुलिस सन्नी के घर पहुंच गई. लेकिन वह घर पर नहीं मिला. पता चला कि वह डा. अंबेडकर अस्पताल में भरती है. जब पुलिस अस्पताल पहुंची तो जानकारी मिली कि सन्नी को कुछ देर पहले ही डिस्चार्ज कर दिया गया था. लिहाजा उलटे पांव पुलिस जैननगर लौट आई. सन्नी घर पर ही मिल गया. उस के हाथपैर और शरीर के अन्य भागों पर चोट लगी हुई थी. पुलिस ने 14 जुलाई को ही सन्नी से पूछताछ की तो उस ने बताया कि कल रात पड़ोस के ही रविंद्र, उस के भाई सुनील और उस के दोस्त हिमांशु ने उस की खूब पिटाई की थी. पिटाई करने के बाद रविंद्र उस की जेब से मोबाइल, ड्राइविंग लाइसेंस, पैसे आदि निकाल कर ले गया था. मुझे उम्मीद है कि उसी ने यह सब किया होगा.

रविंद्र का घर सन्नी के घर के पास ही था. पुलिस उस के घर गई तो वह और उस के भाई में से कोई नहीं मिला. घर पर मौजूद उस के पिता ने पुलिस को बताया कि दोनों भाई अपने किसी दोस्त के यहां गए हुए हैं. पुलिस उस के पिता को हिदायत दे कर चली आई. पुलिस ने रविंद्र के बारे में छानबीन की तो जानकारी मिली कि पिछले साल उस ने बेगमपुर थानाक्षेत्र में ही एक बच्चे के साथ कुकर्म कर के उस की गला काट कर हत्या कर दी थी. इस की रिपोर्ट थाना बेगमपुर में ही भादंवि की धारा 363/307/377 के तहत लिखी गई थी. इस मामले में वह गिरफ्तार हुआ था. गिरफ्तारी के 6 महीने बाद सन्नी के पिता सुरेंद्र सिंह ने उस की जमानत कराई थी. तब वह जेल से बाहर आया था.

यह जानकारी मिलने के बाद पुलिस को रविंद्र पर शक हुआ. उस का जो मोबाइल नंबर पुलिस को मिला था, वह स्विच्ड औफ था. पुलिस टीम रविंद्र को सरगर्मी से तलाशने लगी. 2 दिन बाद एक मुखबिर की सूचना पर पुलिस ने 16 जुलाई, 2015 को उसे थाना क्षेत्र के ही सुखवीरनगर बस स्टौप से गिरफ्तार कर लिया. थाने ला कर जब रविंद्र से पूछताछ की गई तो उस ने निशा की हत्या का जुर्म तो स्वीकार कर ही लिया, इस के अलावा उस ने ऐसा खुलासा किया कि पुलिस हैरान रह गई.

उस ने बताया कि वह निशा की तरह तकरीबन 40 बच्चों की हत्या कर चुका है. पुलिस तो केवल मर्डर के एक केस को खोलने के लिए रविंद्र को तलाश रही थी, लेकिन वह इतना बड़ा सीरियल किलर निकलेगा, पता नहीं था. इंसपेक्टर जगमंदर दहिया के लिए यह बहुत बड़ी उपलब्धि थी. उन्होंने उसी समय डीसीपी विक्रमजीत को यह जानकारी दी तो आधे घंटे के अंदर वह भी बेगमपुर थाने पहुंच गए.

एक लाश और ड्राइविंग लाइसेंस ने ऐसे गुनाह से परदा उठा दिया था, जिसे सुन कर इंसानियत भी शर्मशार हो जाए. उस ने डीसीपी के सामने रोंगटे खड़ी कर देने वाली बच्चों की हत्या की जो कहानी बताई, वह नोएडा के निठारी कांड से कम नहीं थी. रविंद्र ने बताया कि वह बच्चों की हत्या करने के बाद ही उन से कुकर्म करता था. उस के खुलासे पर डीसीपी भी चौंके. 24 साल के रविंद्र ने एक के बाद एक कर के करीब 40 बच्चों की हत्या करने और सैक्स एडिक्ट बनने की जो कहानी बताई, वह दिल को झकझोरने वाली थी.

रविंद्र मूलरूप से उत्तर प्रदेश के जिला कासगंज के कस्बा गंज डुंडवारा के रहने वाले ब्रह्मानंद का बेटा था. रविंद्र के अलावा उस के 3 और बेटे थे. ब्रह्मानंद प्लंबर का काम करता था, इसलिए उस की हैसियत ऐसी नहीं थी कि वह बच्चों को पढ़ा सकता. लिहाजा जब उस के 2 बेटे बड़े हुए तो वह उन से भी मजदूरी कराने लगा. बेटे कमाने लगे तो उस के घर की माली हालत सुधरने लगी. उसी दौरान सन 1990 में गंज डुंडवारा में दंगा भड़क गया तो ब्रह्मानंद अपनी पत्नी मंजू और बच्चों को ले कर दिल्ली आ गया.

बाहरी दिल्ली के कराला गांव में उस की जानपहचान के तमाम लोग रहते थे. लिहाजा वह भी उन के साथ कराला में रहने लगा. उस समय मंजू गर्भवती थी. कुछ दिनों बाद उस ने एक बेटे को जन्म दिया, जिस का नाम रविंद्र रखा. घर में सब से छोटा होने की वजह से वह सब का प्यारा था. ब्रह्मानंद्र अपने बाकी बच्चों को तो पढ़ा नहीं सका था, लेकिन वह रविंद्र को पढ़ाना चाहता था. जब वह स्कूल जाने लायक हुआ तो उस ने उस का दाखिला सरकारी स्कूल में करा दिया. लेकिन मोहल्ले के बच्चों की संगत में पड़ कर वह पांचवीं कक्षा से आगे नहीं पढ़ सका. वह नशा करने वाले बच्चों की संगत में पड़ गया, जिस से वह भी चरस, गांजा आदि पीने लगा. घर वालों को जब पता चला तो उन्होंने उसे डांटा भी, लेकिन वह नहीं माना.

रविंद्र नहीं पढ़ा तो ब्रह्मानंद उसे अपने साथ काम पर ले जाने लगा. लेकिन उस की आदत तो दोस्तों के साथ घूमने की थी. पिता के साथ मेहनत का काम भला वह क्यों करता. इसलिए वह पिता के साथ भी ज्यादा दिन नहीं टिक सका. उसे जब खर्च के लिए पैसों की जरूरत होती, वह अपनी जानपहचान वाले ड्राइवर सन्नी के साथ हेल्परी करने चला जाता. सन्नी उसी के पड़ोस में रहता था और वह ट्रेलर चलाता था. उस का ट्रेलर मुंडका मैट्रो स्टेशन के निर्माण के कार्य में लगा हुआ था. रविंद्र वहां से जो भी कमाता, अपने नशा के शौक पर उड़ा देता था.

सन 2008 की बात है. उस समय रविंद्र करीब 17 साल का था. एक बार वह आधी रात को दोस्तों से फारिग हो कर अपने घर लौट रहा था. उस ने कराला में एक झुग्गी के बाहर मांबाप के साथ सो रही बच्ची को देखा. उस बच्ची की उम्र कोई 6 साल थी. उस बच्ची को देख कर रविंद्र की कामवासना जाग उठी. वह चुपके से गहरी नींद में सो रही उस बच्ची को उठा ले गया. बच्ची के मांबाप को पता ही नहीं चला कि उन की बेटी उन के पास से गायब हो चुकी है. रविंद्र उस बच्ची को सूखी नहर की तरफ ले गया. जैसे ही उस ने उस बच्ची को जमीन पर लिटाया वह जाग गई.

खुद को सुनसान और अंधेरे में देख कर वह डर गई. वहां उस के मांबाप की जगह एक अनजान आदमी था. वह रोने लगी तो रविंद्र ने डराधमका कर उसे चुप करा दिया. उस के बाद उस ने उस के साथ कुकर्म किया. बच्ची दर्द से चिल्लाने लगी तो उस ने उस का मुंह दबा दिया. कुछ ही देर में वह बेहोश हो गई. भेद खुलने के डर से उस ने बच्ची की  गला दबा कर हत्या कर दी और अपने घर चला गया. अगली सुबह झुग्गी के बाहर सो रहे दंपति को जब अपनी बेटी गायब मिली तो वह उसे खोजने लगे. उसी दौरान उन्हें सूखी नहर में बेटी की लाश पड़ी होने की जानकारी मिली तो वे वहां पहुंचे. इस मामले की थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई गई, लेकिन पुलिस केस को नहीं खोल सकी.

केस न खुलने से रविंद्र की हिम्मत बढ़ गई. इस के बाद सन 2009 में बाहरी दिल्ली के ही विजय विहार, रोहिणी इलाके से 6-7 साल के एक लड़के को बहलाफुसला कर वह सुनसान जगह पर ले गया और कुकर्म करने के बाद उस की हत्या कर दी. इस मामले को भी पुलिस नहीं खोल सकी. रविंद्र को अपनी कामवासना शांत करने का यह तरीका अच्छा लगा. क्योंकि वह 2 हत्याएं कर चुका था और दोनों ही मामलों में वह सुरक्षित रहा, इस से उस के मन का डर निकल गया. इस के बाद वह कंझावला इलाके में एक बच्ची को बहलाफुसला कर सुनसान जगह पर ले गया और उस के साथ कुकर्म कर के उस की हत्या कर दी.

वह कोई एक काम जम कर नहीं करता था. कभी गाड़ी पर हेल्परी का काम करता तो कभी बेलदारी करने लगता. नोएडा के सेक्टर-72 में वह एक बिल्डिंग में काम कर रहा था. वहां भी उस ने अपने साथ काम करने वाली महिला बेलदारों की 2 बच्चियों को अलगअलग समय पर अपनी हवस का शिकार बनाया. वह उन बच्चियों को चौकलेट दिलाने के लालच में गेहूं के खेत में गया. वहीं पर उस ने उन की गला दबा कर हत्या कर दी थी.

उस के पिता ब्रह्मानंद का दिल्ली आने के बाद अपने गांव जाना नहीं हो पाता था, लेकिन रविंद्र कभीकभी अपने गांव जाता रहता था. खानदान के और लोग भी दिल्ली और नोएडा चले आए थे. रविंद्र जब भी गांव जाता, गंज डुंडवारा के पास गांव नूरपुर में अपनी मौसी मुन्नी देवी के यहां ठहरता था. वहीं पास के ही बिरारपुर गांव में उस की बुआ कृपा देवी का घर था. कभीकभी वह उन के यहां भी चला जाता था. उस की हैवानियत वहां भी जाग उठी तो उस ने वहां भी अलगअलग समय पर 2 बच्चियों को अपनी हवस का शिकार बनाया.

अब तक रविंद्र सैक्स एडिक्ट हो चुका था. उस की मानसिकता ऐसी हो गई थी कि वह अपने शिकार को तलाशता रहता. बच्चे उस का शिकार आसानी से बन जाते थे, इसलिए वे उस का सौफ्ट टारगेट बन जाते थे. ज्यादातर वह झुग्गीझोपडि़यों या गरीब परिवारों के बच्चों को ही निशाना बनाता था, ताकि वे लोग ज्यादा कानूनी काररवाई न कर सकें. इस तरह उस ने दिल्ली के निहाल विहार, मुंडका, कंझावला, बादली, शालीमार बाग, नरेला, विजय विहार, अलीपुर हरियाणा के बहादुरगढ़, फरीदाबाद, उत्तर प्रदेश के सिकंदराऊ, अलीगढ़ आदि जगहों पर 6 से 9 साल के करीब 40 लड़केलड़कियों को अपना निशाना बनाया. उस की मानसिकता ऐसी हो गई थी कि वह कुकर्म के बाद हर बच्चे की हत्या कर देता था. ज्यादातर के साथ उस ने मारने के बाद कुकर्म किया था.

उस ने कई बच्चों की लाशें ऐसी जगहों पर डाली थी कि पुलिस भी उन्हें बरामद नहीं कर सकी. 4 जून, 2014 को उस ने अपने दोस्त राहुल के साथ अपनी ही बस्ती जैननगर के कृष्ण कुमार के 6 साल के बेटे शिबू को सोते हुए उठा लिया. दोनों उसे आधा किलोमीटर दूर सुनसान जगह पर ले गए और उस के साथ कुकर्म किया. राहुल नाई था. वह अपने साथ उस्तरा भी ले गया था. बाद में उस ने उसी उस्तरे से उस का गला काट कर लाश सूखी गटर में डाल दिया था. बच्चे को गटर में डालते हुए उन्हें किसी ने देख लिया था. उन दोनों ने तो यही समझा था कि शिबू मर चुका है, लेकिन वह जीवित था. अगले दिन जब खोजबीन हुई तो वह सूखी गटर में पड़ा मिला.

जिस शख्स ने रविंद्र और राहुल को देखा था, उसी ने अगले दिन पुलिस को सब बता दिया. नतीजा यह हुआ कि पुलिस ने रविंद्र और राहुल को गिरफ्तार कर के जेल भेज दिया. रविंद्र जिस सन्नी के साथ ट्रेलर पर हैल्परी करता था, उसी सन्नी के रविंद्र की मां मंजू से अवैधसंबंध थे. बेटे के जेल जाने के बाद मंजू परेशान हो गई. वह बेटे की जमानत की कोशिश में लग गई. कहसुन कर उस ने सन्नी के पिता सुरेंद्र से बेटे की जमानत करवा ली. लिहाजा 20 मई, 2015 को रविंद्र जेल से बाहर आ गया.

बात 13 जुलाई, 2015 की है. मंजू अपने घर में अकेली थी. उस ने फोन कर के अपने प्रेमी सन्नी को घर पर बुला लिया. दोनों अपनी हसरतें पूरी करते, अचानक रविंद्र घर आ गया था. सन्नी उस समय मंजू से बातें कर रहा. इसलिए रविंद्र को उस पर कोई शक वगैरह नहीं हुआ. रविंद्र के आने के बाद मंजू और सन्नी की योजना खटाई में पड़ती नजर आ रही थी. बेटे को बाहर भेजने के लिए मंजू ने घर में पड़ा टेप रिकौर्डर रविंद्र को देते हुए कहा कि वह उसे ठीक करा लाए. मां के कहने पर रविंद्र टेप रिकौर्डर ठीक कराने चला गया.

बेटे के जाते ही मंजू और सन्नी अपनी हसरतें पूरी करने लगे, लेकिन मैकेनिक की दुकान बंद होने की वजह से रविंद्र जल्द ही वापस लौट आया. घर का दरवाजा बंद था. उस ने दरवाजा खटखटाया तो दरवाजा नहीं खुला, फिर वह गली में जा कर खड़ा हो गया. उधर दरवाजा खटखटाने पर मंजू और सन्नी की कामलीला में व्यवधान पड़ गया. फटाफट दोनों ने कपड़े पहने और सन्नी दरवाजा खोल कर चला गया. सन्नी रविंद्र को नहीं देख सका. अपने घर से सन्नी को निकलता देख रविंद्र का माथा घूम गया. वह समझ गया कि उस की मां के साथ सन्नी का जरूर कोई चक्कर चल रहा है.

उस ने उसी समय तय कर लिया कि वह सन्नी को सबक सिखा कर रहेगा. उस ने यह बात अपने भाई सुनील को बताई तो सुनील का भी सन्नी के प्रति खून खौल उठा. दोनों भाइयों ने सन्नी के खिलाफ योजना बना ली. इस योजना में रविंद्र ने अपने दोस्त हिमांशु को भी शामिल कर लिया. उसी दिन शाम को रविंद्र ने सन्नी से फोन पर बात की तो उस ने बताया कि वह इस समय मुंडका में है. योजना को अंजाम देने के लिए रविंद्र, हिमांशु और सुनील को ले कर मुंडका पहुंच गया. सन्नी उन्हें वहीं मिल गया. सन्नी के साथ उन्होंने एक जगह बैठ कर शराब पी. सन्नी पर जब थोड़ा नशा चढ़ गया तो उसी दौरान तीनों ने सन्नी की जम कर पिटाई की और रविंद्र ने उस की जेब से उस का मोबाइल फोन और ड्राइविंग लाइसेंस व अन्य कागजात निकाल लिए.

रविंद्र ने सन्नी को जिंदा जलाने के लिए उसी की मोटरसाइकिल से पेट्रौल निकाल कर उसी के ऊपर छिड़क दिया. लेकिन सुनील ने उसे आग लगाने से रोक दिया. सुनील यह कहते हुए भाई को समझा दिया कि अभी इस के लिए इतनी ही सजा काफी है. अगर यह अब भी नहीं मानेगा तो इसे दुनिया से ही मिटा देंगे. उसी वक्त मौका मिलते ही सन्नी वहां से खेतों की तरफ भाग गया. सन्नी की बाइक ले कर रविंद्र, सुनील और हिमांशु अपने घर चले गए.

सन्नी रात भर खेतों में ही रहा. डर की वजह से वह घर तक नहीं गया. सुबह होने पर वह अपने घर गया और पुलिस कंट्रोल रूम को फोन कर के अपने साथ घटी घटना की जानकारी दी. तब पुलिस ने सन्नी को रोहिणी के डा. अंबेडकर अस्पताल में भरती कराया और रविंद्र, सुनील व हिमांशु के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कर ली. 14 जु़लाई को सुबह 6 बजे के करीब रविंद्र नित्य क्रिया के लिए घर से निकला, तभी उस ने रास्ते में संतोष की 6 साल की बेटी निशा को अकेली जाते हुए देखा. वह भी नित्य क्रिया के लिए जा रही थी. उसे अकेली देख कर उस का शैतानी दिमाग जाग उठा. उस ने उस बच्ची को 10 रुपए दिए और किसी बहाने से उसे वहां से 50 मीटर की दूरी पर स्थित निर्माणाधीन इमारत में ले गया.

वह इमारत खाली पड़ी थी. नादान बच्ची उस के इरादों को नहीं समझ पाई. उस ने अन्य बच्चों की तरह निशा के साथ भी कुकर्म कर के उस की गला घोंट कर हत्या कर दी. शातिर दिमाग रविंद्र ने इस बच्ची के मामले में सन्नी को फंसाने के लिए सन्नी का ड्राइविंग लाइसेंस और अन्य कागजात उसी इमारत की दूसरी मंजिल पर डाल दिए, ताकि पुलिस सन्नी को गिरफ्तार कर के जेल भेज दे. रविंद्र ने सन्नी को फंसाने का जाल तो अच्छी तरह बिछाया था, पर अपने जाल में वह खुद फंस जाएगा, ऐसा उस ने नहीं सोचा था. आखिर वह पुलिस की गिरफ्त में आ ही गया.

रविंद्र से पूछताछ के बाद डीसीपी भी हैरान रह गए कि यह एक के बाद एक 40 वारदातें करता गया और पुलिस को पता तक नहीं चला. अगर यह क्रूर हत्यारा अब भी नहीं पकड़ा जाता तो न मालूम कितने और बच्चों को अपना निशाना बनाता. बहरहाल, पुलिस ने 17 जुलाई को रविंद्र को रोहिणी जिला न्यायालय के अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश विनोद यादव के समक्ष पेश किया. रविंद्र ने पुलिस को बताया था कि वह लगभग 40 बच्चों को अपना शिकार बना कर उन की हत्या कर चुका है. ये सारी वारदातें उस ने दिल्ली के अलावा दूसरे राज्यों में भी की थीं.

घटनास्थल का सत्यापन और केस से संबंधित सबूत जुटाने के लिए उस से और ज्यादा पूछताछ करनी जरूरी थी. इसलिए पुलिस ने कोर्ट से उस का 7 दिनों का रिमांड मांगा, जिसे कोर्ट ने स्वीकार कर लिया. रिमांड मिलने के बाद पुलिस रविंद्र को उन जगहों पर ले गई, जहांजहां उस ने वारदातों को अंजाम दिया था. रविंद्र ने पुलिस को अलगअलग जगहों पर ले जा कर 27 केसों की पुष्टि करा दी. बाकी केसों के बारे में उसे खुद को ध्यान नहीं रहा कि उस ने कहां वारदात की थी. जिन जगहों पर वारदात कराने की उस ने पुष्टि कराई थी, पुलिस ने उस क्षेत्र के थाने में संपर्क किया तो पता चला कि उन में से केवल 15 केसों की ही अलगअलग थानों में रिपोर्ट दर्ज हुई थी.

पुलिस किसी और बच्चे की लाश बरामद नहीं कर पाई. इस की वजह यह थी कि उसे वारदात को अंजाम दिए काफी दिन बीत चुके थे, जिस से अनुमान यही लगाया गया कि बच्चों की लाशें जंगली जानवरों द्वारा या अन्य वजह से नष्ट हो गईं. जैसेजैसे सीरियल किलर रविंद्र की क्रूरता के खुलासे लोगों को पता लगते गए, उन का गुस्सा भी बढ़ता जा रहा था. दिल्ली और आसपास के क्षेत्र के जिन गायब हुए बच्चों का कोई सुराग नहीं लग रहा था, उन के मांबाप भी यही सोचने लगे कि कहीं उन का बच्चा भी रविंद्र का शिकार तो नहीं हो गया. वे भी थाना बेगमपुर पहुंचने लगे.

रिमांड अवधि खत्म होने से पहले पुलिस ने 23 जुलाई, 2015 को जब रविंद्र को फिर से न्यायालय में पेश किया गया तो उसे देखने के लिए कोर्ट में और कोर्ट से बाहर तमाम लोग जमा हो गए. वे सभी गुस्से से भरे थे. वे उसे जनता के सुपुर्द करने की मांग करने लगे, ताकि उस क्रूर हत्यारे को अपने हाथों से सजा दे सकें. भारी पुलिस सुरक्षा के बीच उसे कोर्ट में पेश किया गया.  अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश विनोद यादव ने रविंद्र को जेल भेजने के आदेश दिए. पुलिस जब उसे कोर्ट से बाहर ले जा रही थी, तभी वकीलों ने रविंद्र पर हमला कर उस की पिटाई शुरू कर दी. बड़ी मशक्कत से पुलिस ने उसे बचाया. इस के बाद बार एसोसिएशन के सचिन ने ऐलान कर दिया कि कोई भी वकील वहशी दरिंदे का मुकदमा नहीं लड़ेगा.

कथा संकलन तक रविंद्र जेल में बंद था. रविंद्र के घर वालों ने भी कह दिया कि वह उस की जमानत की पैरवी नहीं करेंगे. बहरहाल रविंद्र को जानने वाले सभी लोग उस के कारनामे से आश्चर्यचकित हैं. सीधासादा दिखने वाला रविंद्र इतना बड़ा सीरियल किलर निकलेगा, ऐसी उन्होंने कल्पना भी नहीं की थी. जांच अधिकारी इंसपेक्टर जगमंदर दहिया उस के केसों से संबंधित ज्यादा से ज्यादा सबूत जुटाने की कोशिश कर रहे हैं, ताकि इस सीरियल किलर को उस के गुनाहों की उसे सजा मिल सके. Crime News

—कथा पुलिस सूत्रों पर आधारित

 

Haryana Crime News: एमए बीएड टौपर बनी सीरियल किलर

Haryana Crime News: पानीपत में 4 बच्चों की हत्या के आरोप में पकड़ी गई पूनम के निशाने पर वे बच्चे होते थे, जो उस के बच्चों से ज्यादा सुंदर दिखते थे. एमए बीएड पास किलर मौम द्वारा की गईं 3 हत्याओं का किसी को शक नहीं हुआ, लेकिन चौथे बच्चे की हत्या के बाद वह इस तरह शक के दायरे में आई कि…

पानीपत के एक गांव में शादी का माहौल था, दिसंबर 2025 महीने की पहली तारीख थी. सभी शादी के जश्न में डूबे हुए थे. यह शादी पूनम के मायके में थी, इसलिए वह भी इस शादी में आई हुई थी. फेमिली में लोगों के बीच वह काफी चर्चा में थी. कारण, वह अपनी सुंदरता, चपलता और चंचलता से सब का बरबस ध्यान खींच रही थी. वैसे भी फेमिली के लोगों से वह कई सालों बाद मिली थी.

घर में चहलपहल का माहौल था. विवाह की रस्में निभाई जा रही थीं. रात होने को आई थी. घर के लोगों को रात के भोजन के लिए बुलाया जाने लगा था. इसी बीच उस की भाभी राखी ने पूछा, ”पूनम, तुम ने विधि को देखा है क्या?’’ विधि 6 साल की बच्ची थी.

”नहीं तो भाभी! क्यों, क्या हुआ?’’ पूनम अनजान बनती हुई बोली.

”कुछ नहीं, काफी देर से दिखाई नहीं पड़ रही है. सुबह का खाना खाया है, भूखी होगी!’’ राखी चिंता से बोली.

”आ जाएगी. इधर ही कहीं खेल रही होगी बच्चों के साथ.’’ पूनम बोली.

”अरे नहीं पूनम, बहुत टाइम हो गया है. इतनी देर तक मेरे बगैर नहीं रहती है, उसे ढूंढना होगा!’’ चिंता जताती हुई राखी भाभी बोली.

”जी भाभी, मैं तलाशती हूं उसे.’’

थोड़ी देर में ही यह बात पूरे घर में फैल गई कि विधि नहीं मिल रही है. पहले घर के सभी बच्चों से पूछताछ की गई, सभी ने एक ही बात कही कि उन्होंने उसे बहुत देर से नहीं देखा है.

विधि के लापता हुए कई घंटे हो गए. परिवार के सभी सदस्य उसे तलाशने में जुट गए. घर के कमरे का कोनाकोना छान मारा गया. यहां तक कि पासपड़ोस के घरों में भी उस की तलाश की गई. कई लोगों से उस के बारे में पूछताछ की गई, किंतु उस का कोई पता नहीं चल पाया था.

हर किसी के लिए शादी के काम के दिन एक नई समस्या खड़ी हो गई थी. क्या बच्चे और और क्या बड़ेबुजुर्ग, विधि की एक झलक पाने के प्रयास में थे. सभी के सामने एक ही सवाल था, ‘आखिर कहां गई होगी विधि?’

कई घंटे बीत चुके थे. विधि की मम्मी राखी का बुरा हाल हो रहा था. परेशान थी. घर के सभी कमरों में कई बार झांक चुकी थी. छत पर कई बार सीढिय़ां चढ़ चुकी थी. थक कर बरामदे में चावल की एक बोरी पर बैठ गई. उस की सांसें तेजतेज चल रही थीं. सुस्ताने के लिए आंखें मूंद ली थीं. कुछ पल में उस ने एक आवाज सुनी, ”मिल गई विधि… मिल गई.’’

”कहां? कहां है मेरी विधि?’’ राखी चौंकती हुई बोली.

”स्टोररूम में मिली…’’ किसी ने कहा.

”स्टोररूम में क्या करने चली गई थी.’’ विधि की मम्मी तेजी से उठी और स्टोररूम की ओर भागी. उसे विधि के मिलने की जानकारी जरूर मिल गई थी, लेकिन बुरी खबर भी सुनने को मिली.

विधि सोनीपत में रहती थी और अपने परिवार के साथ एक रिश्तेदार की शादी में शामिल होने पानीपत के नौल्था गांव आई थी. उस के साथ उस के दादा पाल सिंह, दादी ओमवती, पिता संदीप, मम्मी और 10 महीने का छोटा भाई भी था. दादी ओमवती और विधि की मम्मी राखी घर और आसपास की गलियों में काफी तलाश कर चुके थे. रात करीब 2 बजे जब ओमवती पहली मंजिल पर गईं, तब उन्होंने स्टोररूम का दरवाजा बाहर से बंद देखा. जब उन्होंने दरवाजा खोला तो देखा कि विधि पानी से भरे टब में मुंह के बल पड़ी थी. उसे कोई होश नहीं था.

यह देखते ही उन की चीख निकल गई. फेमिली वाले तुरंत उसे इसराना मैडिकल कालेज ले गए, जहां डौक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया. विधि नाम की जो बच्ची शादी के लिए काफी उत्साह के साथ तैयार हुई थी, पूरे दिन काफी उमंग से भरी हुई थी, वह अचानक गायब हो गई थी. उस की तलाश में सभी घंटों तक परेशान रहे. खोजबीन शुरू हुई और तब वह आधी रात को स्टोररूम में प्लास्टिक के टब में बेहोशी की हालत में मिली.

यह मामला सोनीपत के नौल्था गांव की है. सोनीपत पुलिस को इस की सूचना मिली. गहन जांचपड़ताल होने लगी. 2 दिनों तक तहकीकात होती रही. घरपरिवार के सभी सदस्यों से विधि के लापता होने से ले कर उस की मौत के बारे में पूछताछ की जाने लगी. पुलिस ने शादी में आए सभी लोगों से पूछताछ की. पुलिस अधिकारियों को जल्द ही पूनम के बयानों में अंतर दिखा और उन का शक गहरा गया. लगातार पूछताछ के दौरान वह टूट गई और उस ने न केवल विधि की हत्या करना, बल्कि इसी तरीके से पहले भी 3 हत्याएं करना कुबूल कर लिया. उसे 3 दिसंबर को पुलिस ने हिरासत में ले लिया.

उस ने पुलिस को हत्या का जो कारण बताया, वह बेहद हैरान करने वाली थी. यह भी बताया कि वह विधि से पहले और 3 बच्चों की हत्या कर चुकी है. विधि समेत वह 4 बच्चों की हत्या की आरोपी थी. इस डरावने मामले का कारण तो और भी चौंकाने वाला था. उस ने बताया कि उस ने जिन बच्चों की हत्याएं की थीं, वे बच्चे उस के बच्चों से ज्यादा सुंदर थे. इस कारण उस ने उन्हें मार डाला. चौंकाने वाली बात यह है कि मरने वालों में एक उस का अपना बेटा भी था.

उस ने पुलिस को बताया कि परिवार में कोई भी उस के बच्चों से ज्यादा सुंदर दिखा नहीं कि वह उन बच्चों को नुकसान पहुंचाने के मनोविज्ञान से ग्रसित हो जाती थी. जब भी उस के सामने सुंदर बच्चा आता था, तब वह जलन से भर जाती थी. इस कारण ही सजीसंवरी विधि पूनम की आंख की किरकिरी बन गई थी और उस ने पहली दिसंबर की रात को अपनी 6 साल की भतीजी विधि को बाथटब में डुबो कर तब मार डाला था, जब पूरा परिवार  शादी के फंक्शन में मशगूल था.

उस ने विधि को बाथटब में पानी भरने का लालच दिया था. उसे स्टोररूम में ले जाने के लिए कहा था. वहां जाते ही उस ने बच्ची को डुबो दिया था. बाहर से दरवाजा बंद कर शादी के जश्न में ऐसे वापस आ गई, जैसे कुछ हुआ ही न हो. पुलिस ने पूनम से पूछताछ में पाया कि वह एक साइको किलर है. उस ने पिछले जुर्म के बारे में भी बताया. पूनम ने सब से पहले 2023 में अपनी ननद की बेटी इशिका को टैंक में डुबो कर मार डाला था. बेटे को मारने का कारण उस के मन में छिपा भय था. उसे आशंका हो गई थी कि उस ने जो अपराध किया है, वह उस का बेटा शुभम जान गया है. वह इस बारे में सब को बता न दे. इसलिए अपने बेटे को भी मार दिया.

उस के बाद अगस्त, 2025 में पूनम अपने चचेरे भाई की 6 साल की बेटी जिया को भी इसी तरह मार डाला था. इन सभी मौतों को परिवार ने दुखद हादसा मान कर टाल दिया था. इस तरह से पूनम शुभम, इशिका, जिया और विधि की कातिल बन गई. उस की कहानी किसी फिल्म की कहानी से कम नहीं है. उस ने प्यार, सनक और दरिदंगी का जो काम किया, उसे सुन कर किसी का भी कलेजा कांप जाए. बात जनवरी, 2023 की है. पूनम की ननद पिंकी 11 जनवरी को अपनी 7 साल की बेटी इशिता के साथ मायके आई थी. सोनीपत के गोहाना के भावड़ गांव में अचानक 12 जनवरी, 2023 को हड़कंप मच गया था.

घर के बाहर बने पानी के 5 फीट गहरे स्टोरेज टैंक में पूनम के 3 साल के बेटे शुभम और उस की ननद पिंकी की 7 वर्षीय बेटी इशिता का शव मिलता है. तब परिवार के लोगों ने इसे हादसा मान लिया था. किसी ने जरा भी हत्या किए जाने की आशंका नहीं जताई. कोई पूनम के इरादे नहीं भांप नहीं पाया. जबकि हैरान करने वाली बात यह थी कि साइको पूनम ने इशिता के साथ अपने बेटे को भी टैंक में डुबो कर मार दिया था. 2 हत्याओं को अंजाम देने के बाद पूनम ने फिर अपनी सनक मिटाने के लिए करीब डेढ़ साल का वक्त लिया. इस अंतराल की वजह पूनम ने फिर से गर्भवती होना बताया. उस ने एक और बेटे को जन्म दिया, जिस का नाम अपने पहले बेटे शुभम के नाम पर ही रख लिया.

पूनम द्वारा दोहराई गई वारदात 18 अगस्त, 2025 की है. वह रात को अपने चचेरे भाई दीपक के घर रुकी थी. रात में उस ने 10 साल की जिया को अपने पास सोने के लिए मना लिया. बच्ची को प्यार और दुलार का झांसा दिया और रात के अंधेरे में उस ने जिया को घर के पीछे बने पानी के हौद में डुबो दिया. इस घटना के बाद अगले रोज जिया की मम्मी ने बताया कि 19 अगस्त की सुबह उस ने उठ कर परिवार के लोगों के साथ बच्ची की काफी तलाश की. उसे स्कूल जाने के लिए तैयार करना था, लेकिन बच्ची घर के पीछे बनी पानी की छोटी सी टंकी में मिली.

इस दौरान फेमिली वालों को लगा कि पुलिस को शिकायत दी जाए. तब पूनम ने भी कानूनी काररवाई के नाम पर सभी को डरा दिया. वह सब से ज्यादा रोती नजर आई. जिया की मम्मी ने बताया कि पानी की टंकी इतनी गहरी भी नहीं थी कि बच्ची उस में डूब जाती, लेकिन परिवार के लोग यह मान कर चुप हो गए कि शायद सोते समय उस के साथ हादसा हो गया हो और उस की मौत हो गई. हालांकि तब जिया के ताऊ सुरेंद्र ने पूनम पर ही शक किया था, लेकिन पूनम काफी रोने लगी. कहने लगी कि मैं इशिता की मौत की जिम्मेदार हूं तो अपनी जान दे दूंगी. परिवार के लोग उस की भावनात्मक धमकी से घबरा गए और लोकलाज के चलते इस मामले को शांत कर दिया और पुलिस में इस की शिकायत तक नहीं की गई.

इस तरह पूनम 2 साल के अंतराल में 3 हत्याएं कर चुकी थी, लेकिन इस की भनक  किसी को नहीं लगी. उस पर शक जरूर हो गया था, लेकिन इस की पुलिस में शिकायत किसी ने नहीं की. पूनम ने यह कुबूल किया कि वह अपने खौफनाक इरादों के साथ ही पानीपत में इसराना के नौल्था गांव गई थी. पूनम की रिश्तेदारी में जेठ लगने वाले सतीश अपने परिवार के साथ शादी में आए थे. उस ने मौका पा कर पहली दिसंबर को 6 साल की बच्ची विधि की हत्या कर दी थी. इन चारों हत्याओं में पूनम का तरीका एक जैसा था. पूनम ने विधि को भी पानी में डुबो कर मारा था और हत्या के लिए शादी वाला दिन चुना.

जब पुलिस ने इस की गहन छानबीन की, तब एक और बात का पता चला. वह अहम बात यह थी कि तीनों हत्याएं पूनम ने एकादशी के दिन की थी. एक दिसंबर को भी एकादशी थी. ऐसे में अब तंत्रमंत्र के एंगल से भी जांच की जाने लगी. मृतक बच्ची जिया के ताऊ सुरेंद्र ने बताया कि पूनम उस की चचेरी बहन थी. उन्होंने बारबार सभी पहलुओं पर विचार किया तो एक बात सामने निकल कर आई कि तीनों वारदात के दिन एकादशी थी और तीनों की हत्या करने का तरीका एक ही था तो कहीं न कहीं यह तांत्रिक क्रिया से जुड़ा होने की शंका जताई गई.

पूनम का व्यवहार भी अजीब रहता था और वह गोहाना में अपने घर के आसपास के लोगों से कहती थी कि उस में पड़ोस के युवक की आत्मा आ गई है. इसे ले कर ही पूनम के चचेरे भाई सुरेंद्र ने पुलिस प्रशासन से मांग की है कि उस की बहन को कड़ी से कड़ी सजा दी जाए. क्योंकि उम्रकैद होने के बाद वह जेल से बाहर आएगी और फिर से बच्चों की हत्या कर सकती है. परिवारजनों का कहना है कि पूनम को तांत्रिक के पास भी ले गए थे. पूनम की मम्मी सुनीता ने यह अंदेशा जताया कि उस की मानसिक स्थिति ठीक नहीं थी. हालांकि, पति ने इंकार किया है.

वैसे यह भी कुछ कम अजीब बात नहीं है कि पूनम ने जिस विधि को मौत के घाट उतारा, उस की मम्मी राखी पूनम के बेटे शुभम की देखभाल कर चुकी थी. राखी पूनम के 2 साल के बेटे शुभम को सीने से लगा कर दूध पिलाती थी. तब सोनीपत के वेस्ट रामनगर की रहने वाली विधि की मम्मी राखी पूनम के 10 माह के बच्चे को अपने साथ ले गई थी. कारण, पूनम अपने बच्चे की भी परवाह नहीं करती थी और वह ज्यादातर मायके में ही रहती थी. पानीपत के इसराना की रहने वाली पूनम की शादी सोनीपत के गोहाना में नवीन से 2019 में हुई थी. 2021 में पूनम ने पहले बेटे को जन्म दिया था. ऐसा भी नहीं है कि पूनम कोई अनपढ़ थी. वह उच्चशिक्षित थी. उस ने एमए पौलिटिकल साइंस से किया था और फिर बीएड में वह टौपर थी. पूनम का पति नवीन गाडिय़ों को धोने का वाशिंग सेंटर चलाता था.

पूनम ने गांव के देवीलाल कन्या कालेज से बीए तक की पढ़ाई की थी. उस के बाद राजकीय कालेज से राजनीति शास्त्र से एमए किया था और वह टीचर बनना चाहती थी. उस के 2 छोटे भाई हैं और वह सब से बड़ी थी. 3 बच्चों की हत्या करने के बाद तक पूनम कानून के फंदे से बच गई थी, लेकिन चौथी बच्ची की हत्या के दौरान पूनम कुछ गलतियां कर बैठी. पूनम ने जिस बाथटब में विधि को डुबो कर मारा था, वह उस की ऊंचाई से कम था. ऐसे में पुलिस को शक हुआ कि बच्ची की हत्या की गई है. इस दौरान जब पूनम ने बच्ची की हत्या की और फिर पहली मंजिल से नीचे आई तो उस के कपड़े भीगे हुए थे.

यानी उसे बच्ची को मारने के लिए संघर्ष करना पड़ा. लोगों ने पूनम को भीगी हुई हालत में देखा था. पुलिस को मामले की शिकायत दी गई और फिर जब पूछताछ हुई तो सारा मामला खुल गया. पानीपत के एसपी भूपेंद्र सिंह के अनुसार पूनम ने पूछताछ में बताया कि वह अपने मायके सिवाह में आई थी और गांव नौल्था में पति नवीन के मामा सतपाल के बेटे अमन और बेटी की शादी थी. वह 30 नवंबर को शादी में गई थी. फिर पहली दिसंबर को दोपहर बाद अमन की बारात निकली तो घर से सभी मेहमान बाहर थे. इसी दौरान उसे विधि घर पर सीढिय़ों से चढ़ते हुए दिखी.

बाद में वह उस के पीछेपीछे छत पर गई और विधि से बातचीत करने लगी, फिर इसी दौरान स्टोररूम के बाहर पानी से भरे प्लास्टिक टब को अंदर ले गई और इस में विधि की गरदन डुबो कर हत्या कर दी. हत्या करने के बाद बाहर से दरवाजे की कुंडी लगा कर नीचे आ गई थी. कथा लिखे जाने तक पूनम पर अब अपने बेटे शुभम और भतीजी इशिका की हत्या के मामले में सोनीपत के गोहाना के बरोदा पुलिस थाने में भी हत्या का मुकदमा दर्ज कर लिया गया है. Haryana Crime News

 

Crime Stories : 20 साल में एक-एक कर 5 कत्ल करने वाला कातिल

Crime Stories : उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद जिले के मुरादनगर से सटा गांव है बसंतपुर सैंथली. यहां भी तेजी से शहरीकरण के चलते जमीनों के दाम आसमान छूने लगे हैं. बिल्डर आते हैं, किसानों को लुभाते हैं और उस भाव में खेतीकिसानी की जमीनों के सौदे करते हैं, जिस की उम्मीद किसानों ने कभी सपने में भी नहीं की होती. एक बीघा के 50 लाख से ले कर एक करोड़ रुपए सुन कर किसानों का मुंह खुला का खुला रह जाता है कि इतना तो वे सौ साल खेती कर के भी नहीं कमा पाएंगे. और वैसे भी आजकल खेतीकिसानी खासतौर से छोटी जोत के किसानों के लिए घाटे का सौदा साबित होने लगी है.

लिहाजा वे एकमुश्त मिलने वाले मुंहमांगे दाम का लालच छोड़ नहीं पाते और जमीन बेच कर पास के किसी कसबे में बस जाते हैं. इसी गांव का एक ऐसा ही किसान है 48 वर्षीय लीलू त्यागी, जिस के हिस्से में पुश्तैनी 15 बीघा जमीन में से 5 बीघा जमीन आई थी. बाकी 10 बीघा 2 बड़े भाइयों सुधीर त्यागी और ब्रजेश त्यागी के हिस्से में चली गई थी. जमीन बंटबारे के बाद तीनों भाई अपनीअपनी घरगृहस्थी देखने लगे और जैसे भी हो खींचतान कर अपने घर चलाते बच्चों की परवरिश करने लगे. बंटवारे के समय लीलू की शादी नहीं हुई थी, लिहाजा उस पर घरगृहस्थी के खर्चों का भार कम था.

गांव के संयुक्त परिवारों में जैसा कि आमतौर पर होता है, दुनियादारी और रिश्तेदारी निभाने की जिम्मेदारी बड़ों पर होती है, इसलिए भी लीलू बेफिक्र रहता था और मनमरजी से जिंदगी जीता था. साल 2001 का वह दिन त्यागी परिवार पर कहर बन कर टूटा, जब सुधीर अचानक लापता हो गए. उन्हें बहुत ढूंढा गया पर पता नहीं चला कि उन्हें जमीन निगल गई या आसमान खा गया. कुछ दिनों की खोजबीन के बाद त्यागी परिवार ने तय किया कि उन की गुमशुदगी की रिपोर्ट पुलिस में दर्ज करा दी जाए. लेकिन इस पर लीलू बड़ेबूढ़ों के से अंदाज में बोला, ‘‘इस से क्या होगा. उलटे हम एक नई झंझट में और फंस जाएंगे.

पुलिस तरहतरह के सवाल कर हमें परेशान करेगी. हजार तरह की बातें समाज और रिश्तेदारी में होंगी. उस से तो अच्छा है कि उन का इंतजार किया जाए. हालांकि वह किसी बात को ले कर गुस्से में थे और मुझ से यह कह कर गए थे कि अब कभी नहीं आऊंगा.’’

परिवार वालों को लीलू की सलाह में दम लगा. वैसे भी अगर सुधीर के साथ कोई अनहोनी या हादसा हुआ होता तो उन की लाश या खबर मिल जानी चाहिए थी और वाकई पुलिस क्या कर लेती. वह कोई दूध पीते बच्चे तो थे नहीं, जो घर का रास्ता भूल जाएं.  यह सोच कर सभी ने मामला भगवान भरोसे छोड़ दिया.  उन्हें चिंता थी तो बस उन की पत्नी अनीता और 2 नन्हीं बेटियों पायल और पारुल की, जिन के सामने पहाड़ सी जिंदगी पड़ी थी. यह परेशानी भी वक्त रहते दूर हो गई, जब गांव में यह चर्चा शुरू हुई कि अब सुधीर के आने की तो कोई उम्मीद रही नहीं, अनीता कब तक उस की राह ताकती रहेगी. इसलिए अगर लीलू उस से शादी कर ले तो उन्हें सहारा और बेटियों को पिता मिल जाएगा. घर की खेती भी घर में रहेगी.

गांव और रिश्ते के बड़ेबूढ़ों का सोचना ऐसे मामले में बहुत व्यावहारिक यह रहता है कि जवान औरत कब तक बिना मर्द के रहेगी. आज नहीं तो कल उस का बहकना तय है इसलिए बेहतर है कि अगर देवरभाभी दोनों राजी हों तो उन की शादी कर दी जाए. बात निकली तो जल्द उस पर अमल भी हो गया. एक सादे समारोह में लीलू और अनीता की शादी हो गई जो कोई नई बात भी नहीं थी. क्योंकि गांवों में ऐसी शादियां होना आम बात है, जहां देवर ने विधवा भाभी से शादी की हो. इतिहास भी ऐसी शादियों से भरा पड़ा है. देखते ही देखते अपने देवर की पत्नी बन अनीता विधवा से फिर सुहागन हो गई और वाकई में पारुल और पायल को चाचा के रूप में पिता मिल गया.

इस के बाद तो बड़े भाई सुधीर की जमीन भी लीलू की हो गई. जल्द ही लीलू और अनीता के यहां बेटा पैदा हुआ, जिस का नाम विभोर रखा गया. घर में सब उसे प्यार से शैंकी कहते थे. कभीकभार जरूर गांव के कुछ लोगों में यह चर्चा हो जाती थी कि चलो जो हुआ सो अच्छा  हुआ, लेकिन कभी सुधीर अगर वापस आ गया तो क्या होगा. मुमकिन है जी उचट जाने से वह साधुसंन्यासियों की टोली में शामिल हो गया हो और वहां से भी जी उचटने के कारण कभी घर आ जाए. फिर अनीता किस की पत्नी कहलाएगी? सवाल दिलचस्प था, जिस का मुकम्मल जबाब किसी के पास नहीं था. पर एक शख्स था जो बेहतर जानता था कि सुधीर अब कभी वापस नहीं आएगा. वह शख्स था लीलू.

5 साल गुजर गए. अब सब कुछ सामान्य हो गया था, लेकिन कुछ दिनों बाद ही साल 2006 में पारुल की मृत्यु हो गई. घर और गांव वाले कुछ सोचसमझ पाते, इस के पहले ही लीलू ने कहा कि उसे किसी जहरीले कीड़े ने काट लिया था और आननफानन में उस का अंतिम संस्कार भी कर दिया. गांवों में ऐसे यानी सांप वगैरह के काटे जाने के हादसे भी आम होते हैं, इसलिए कोई यह नहीं सोच पाया कि यह कोई सामान्य मौत नहीं, बल्कि सोचसमझ कर की गई हत्या है. और आगे भी त्यागी परिवार में ऐसी हत्याएं होती रहेंगी, जो सामान्य या हादसे में हुई मौत लगेंगी और हैरानी की बात यह भी रहेगी किसी भी मामले में न तो लाश मिलेगी और न ही किसी थाने में रिपोर्ट दर्ज होगी.

इस के 3 साल बाद ही पायल भी रहस्यमय ढंग से गायब हो गई तो मानने वाले इसे होनी मानते रहे. लेकिन अनीता अपनी दोनों बेटियों की मौत का सदमा झेल नहीं पाई और बीमार रहने लगी, जिस का इलाज भी लीलू ने कराया. अब सुधीर की जमीन का कोई वारिस नहीं बचा था, सिवाय अनीता के जो अब हर तरह से लीलू और बड़े होते शैंकी की मोहताज रहने लगी थी. लीलू की तो जान ही अपने बेटे में बसती थी और वह उसे चाहता भी बहुत था. लेकिन यह नहीं देख पा रहा था कि उस के लाड़प्यार के चलते शैंकी गलत राह पर निकल पड़ा है. और देख भी कैसे पाता क्योंकि वह खुद ही एक ऐसे रास्ते पर चल रहा था, जिसे कलयुग का महाभारत कहा जा सकता है और वह उस का धृतराष्ट्र है, जो पुत्र मोह में अंधा हो गया था.

इसी अंधेपन का नतीजा था कि बीती 9  जुलाई को लीलू गाजियाबाद के सिहानी गेट थाने में पुलिस वालों के सामने खड़ा गिड़गिड़ा रहा था कि शैंकी मेरा इकलौता बेटा है, आप जितने चाहो पैसे ले लो लेकिन उसे छोड़ दो. बेटा छूट जाए, इस के लिए वह 10 लाख रुपए देने को तैयार था. लेकिन जुर्म की दुनिया में दाखिल हो चुके बिगड़ैल शैंकी ने जुर्म भी मामूली नहीं किया था, लिहाजा उस का यू छूटना तो नामुमकिन बात थी. दरअसल, शैंकी ने केन्या की एक लड़की, जिस का नाम रोजमेरी वाजनीरू है, से 7 जुलाई को 12 हजार रुपए नकद और एक मोबाइल फोन लूटा था. रोजमेरी से उस का संपर्क सोशल मीडिया के जरिए हुआ था.

जब वह दिल्ली आई तो शैंकी बहाने से उसे अपनी कार में बैठा कर गाजियाबाद ले गया और हथियार दिखा कर लूट की इस वारदात को अंजाम दिया. दूसरे दिन सुबह रोजमेरी ने सिहानी गेट थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई तो शैंकी पकड़ा गया. वारदात में उस का साथ देने वाला शुभम भी गिरफ्तार किया गया था. वह भी मुरादनगर का रहने वाला है. दोनों से वारदात में इस्तेमाल किए गए हथियार, 11 हजार रुपए नकद और वह कार भी बरामद की गई थी, जिस में बैठा कर रोजमेरी से लूट की गई थी. कुछ दिनों बाद दोनों को अदालत से जमानत मिल गई थी. लेकिन अब खुद जेल में बंद लीलू को जमानत मिल पाएगी, इस में शक है. क्योंकि उस के गुनाहों के आगे तो बेटे का गुनाह कुछ भी नहीं.

बीती 24 सितंबर को लीलू को गाजियाबाद पुलिस ने अपने भतीजे रेशू की हत्या के आरोप में गिरफ्तार किया तो सख्ती से पूछताछ में उस ने खुलासा किया कि उस ने कोई एकदो नहीं बल्कि 20 साल में एकएक कर 5 हत्याएं की हैं. और ये पांचों ही उस के खून के रिश्तेदार हैं. यह सुन कर पुलिस वालों के मुंह तो खुले के खुले रह गए, साथ ही जिस ने भी सुना उस के भी होश उड़ गए कि कैसा कलयुग आ गया है, जिस में जमीन के लालच में एक सगे भाई ने दूसरे सगे बड़े भाई और 2 भतीजियों जो अनीता से शादी के बाद उस की बेटियां हो गई थीं, सहित 2 सगे भतीजों को भी इतनी साजिशाना और शातिराना तरीके से मारा कि किसी को उस पर शक भी नहीं हुआ.

रेशू की हत्या के आरोप में वह कैसे पकड़ा गया, इस से पहले यह जान लेना जरूरी है कि इस के पहले की 4 हत्याएं उस ने कैसे की थीं. इन में से 2 का जिक्र ऊपर किया जा चुका है. अपने बड़े भाई सुधीर की हत्या लीलू ने एक लाख की सुपारी दे कर मेरठ में करवाई थी और लाश को नदी में बहा दिया था. इसलिए अनीता से शादी करने के बाद वह बेफिक्र था कि सुधीर आएगा कहां से, उसे तो मौत की नींद में वह सुला चुका है  यह कातिल कितना खुराफाती है, इस का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि वह 20 साल पहले ही अपने गुनाहों की स्क्रिप्ट लिख चुका था और हरेक कत्ल के बाद किसी को शक न होने पर उस के हौसले बढ़ते जा रहे थे.

जब शैंकी पैदा हुआ तो उसे लगा कि सुधीर की जमीन उस की बेटियों के नाम हो जाएगी, लिहाजा पहले उस ने पारुल को खाने में जहर दे कर मारा और फिर पायल की भी हत्या कर उस की लाश को नदी में बहा दिया. इस दौरान जमीनजायदाद का धंधा करने के लिए उस ने अपने हिस्से की जमीन बेच दी और मुरादनगर थाने के सामने एक आलीशान मकान भी बनवा लिया. जब इस निकम्मे और लालची से दलाली का धंधा नहीं चला तो उस की नजर दूसरे भाई ब्रजेश की जमीन पर जा टिकी. उसे लगा कि अगर ब्रजेश और उस के बेटों व पत्नी को भी इसी तरह ठिकाने लगा दिया जाए तो उस की ढाई करोड़ की जमीन भी उस की हो जाएगी.

नेकी तो नहीं बल्कि बदी और पूछपूछ की तर्ज पर उस ने साल 2013 में  ब्रजेश के छोटे बेटे 16 वर्षीय नीशू की भी हत्या कर लाश नदी में बहा दी और अपनी गोलमोल बातों से पुलिस में रिपोर्ट लिखाने से ब्रजेश को रोक लिया था. यह उस के द्वारा की गई चौथी हत्या थी. अब तक उसे समझ आ गया था कि और साल, 2 साल या 4 साल लगेंगे, लेकिन जमीन तो उस की हो ही जाएगी. असल में वह चाहता था कि पूरे कुटुंब की जमीन उस के बेटे शैंकी को मिल जाए, जिस से उसे जिंदगी में मेहनत ही न करनी पड़े जैसे कि उसे नहीं करनी पड़ी थी. जाहिर है रेशू की हत्या के बाद वह ब्रजेश और उन की पत्नी को भी ऊपर पहुंचा देने का मन बना चुका था.

ब्रजेश का बेटा 24 वर्षीय रेशू बीती 8 अगस्त को गायब हो गया था. यह उन के लिए एक और सदमे वाली बात थी. क्योंकि नीशू को गुजरे 8 साल बीत गए थे, अब रेशू ही उन का आखिरी सहारा बचा था जिस की सलामती के लिए वे दिनरात दुआएं मांगा करते थे. लेकिन यह अंदाजा दूसरों की तरह उन्हें भी नहीं था कि परिवार को डसने वाला सांप आस्तीन में ही है. लीलू ने इस बाबत और लोगों को भी अपनी साजिश में शामिल कर लिया था. उस ने योजना के मुताबिक रेशू को फोन कर गांव के बाहर मिलने बुलाया और घूमने चलने के बहाने कार में बैठा लिया. इस आई ट्वेंटी कार में इन दोनों के अलावा विक्रांत, सुरेंद्र त्यागी, राहुल और लीलू का भांजा मुकेश भी मौजूद थे.

चलती कार में ही इन लोगों ने रेशू की हत्या रस्सी और लोहे की जंजीर से गला घोंट कर दी और उसे सीट पर जिंदा लोगों की तरह बिठा कर बुलंदशहर की तरफ चल पड़े. कहीं किसी को शक न हो जाए, इसलिए कुछ दूर जंगल में इन्होंने रेशू की लाश को कार की डिक्की में डाल दिया. असल काम हो चुका था, बस लाश और ठिकाने लगाना बाकी था. इस के लिए मूड बनाने इन लोगों ने बुलंदशहर में विक्रांत के ट्यूबवैल पर जोरदार पार्टी की. जब रात गहराने लगी तो इन वहशियों ने रेशू की लाश को एक बोरे में ठूंसा और पहासू इलाके में ले जा कर गंगनहर में बहा दिया. इस के बाद सभी अपनेअपने रास्ते हो लिए. आरोपियों में से सुरेंद्र त्यागी हापुड़ का रहने वाला है और पुलिस में दरोगा पद से रिटायर हुआ है जबकि राहुल उस का नौकर था.

लीलू ने सुरेंद्र को रेशू की हत्या की सुपारी दी थी, जिस ने बुलंदशहर के आदतन अपराधी विक्रांत को भी इस वारदात में शामिल कर लिया था.  इन दोनों का याराना विक्रांत के एक जुर्म में जेल में बंद रहने के दौरान हुआ था. लीलू ने हत्या के एवज में 4 लाख रुपए नकद दिए थे और बाकी बाद में एक बीघा जमीन बेचने के बाद देने का वादा किया था. रेशू के लापता होने के बाद ब्रजेश ने बेटे को काफी खोजा और फिर थकहार कर 15 अगस्त को मुरादनगर थाने में रिपोर्ट दर्ज करा दी. हालांकि लीलू ने इस बार भी उन्हें यह कह कर रोकने की कोशिश की थी कि पुलिस में रिपोर्ट लिखाने से क्या फायदा होगा. लेकिन फायदा हुआ. 24 सितंबर को वह पकड़ा गया और अपने साथियों सहित जेल में है. लीलू इत्तफाकन पकड़ा गया, नहीं तो पुलिस भी हार मान चुकी थी कि अब रेशू नहीं मिलने वाला.

पुलिस के पास रेशू को ढूंढने का कोई सूत्र नहीं था, सिवाय इस के कि उस के और लीलू के फोन की लोकेशन एक ही जगह की मिल रही थी, जो उसे हत्यारा मानने के लिए पर्याप्त नहीं था. लेकिन इनवैस्टीगेशन के दौरान एक औडियो रिकौर्डिंग पुलिस के हत्थे लग गई, जिस में लीलू रेशू की हत्या का प्लान बाकी चारों में से किसी को बता और समझा रहा था. फिर उस ने 5 हत्याओं की बात कुबूली. हत्याओं में 2-3 साल का गैप वह इसीलिए रखता था कि हल्ला न मचे और लोग पिछली हत्या का दुख भूल जाएं. पुलिस हिरासत में लीलू कभी यह कहता रहा कि उसे उन हत्याओं का कोई मलाल नहीं. तो कभी यह कहता रहा कि सजा भुगतने के बाद वह भाईभाभी की सेवा कर प्रायश्चित करना चाहता है.

हैरानी की बात सिर्फ यह है कि 5 हत्याओं का यह गुनहगार लीलू जेल से छूट जाने की उम्मीद पाले बैठा है. वह शायद इसलिए कि 5 में से एक भी लाश बरामद नहीं कर सकी. लेकिन अब लोगों की मांग है कि ऐसे आस्तीन के सांप का जिंदा रहना ठीक नहीं है, लिहाजा उसे फांसी की सजा मिलनी चहिए. यदि ऐसा नहीं हुआ तो यह जरूर एक बड़ी कानूनी खामी साबित होगी. Crime Stories

 

Real Crime Story in Hindi : सीरियल किलर महिलाओं के साथ दुष्कर्म कर गला दबाकर करता था हत्या

Real Crime Story in Hindi : माइना रामुलु अपनी पत्नी रेखा को बहुत प्यार करता था. लेकिन आर्थिक अभाव के चलते रेखा किसी के साथ भाग गई. इस से माइना के मन में महिलाओं के प्रति ऐसी नफरत पैदा हो गई कि उस ने एकएक कर के 18 महिलाओं की हत्या कर दी. हत्या करने का उस का ऐसा तरीका था कि…

हैदराबाद के जुबली हिल्स थाने के इंसपेक्टर राजशेखर रेड्डी अपने औफिस में बैठे आगंतुकों से मुखातिब हो रहे थे. उन के बीच एक 55 वर्षीय व्यक्ति चिंतित और परेशान सा बैठा हुआ था. इंसपेक्टर रेड्डी ने उस से पूछा, ‘‘हां बताइए, यहां कैसे आना हुआ?’’

‘‘सर, मेरा नाम कावला अनाथैया है.’’ उस व्यक्ति ने अपना परिचत देते हुए कहा, ‘‘मैं यूसुफगुड़ा का रहने वाला हूं.’’

‘‘हूं.’’

‘‘सर, मेरी पत्नी कमला बैंकटम्मा 2 दिनों से लापता है. मैं ने उसे अपने स्तर पर हर जगह खोजने की कोशिश की, लेकिन कहीं पता नहीं चला. मैं बहुत परेशान हूं. मेरी पत्नी को ढूंढने में मेरी मदद कीजिए, सर. मैं आप का जीवन भर आभारी रहूंगा.’’

‘‘क्या उम्र होगी आप की पत्नी की?’’ कुछ सोचते हुए इंसपेक्टर रेड्डी ने कावला से सवाल किया.

‘‘यही कोई 50 साल.’’

‘‘50 साल!’’ जबाव सुन कर वह चौंक गए, ‘‘फिर कहां गायब हो सकती हैं? कहीं ऐसा तो नहीं कि आप दोनों के बीच झगड़ा हुआ हो और वह नाराज हो कर घर छोड़ कर चली गई हों?’’

‘‘नहीं साहब, हमारे बीच कोई झगड़ा नहीं हुआ.’’ कावला अनाथैया दोनों हाथ जोड़ बोला, ‘‘कह रही थी काम से जा रही हूं शाम तक लौट आऊंगी. शाम होने के बाद भी जब घर नहीं लौटी तो चिंता हुई. मैं ने अपनी जानपहचान वालों के वहां फोन कर के पता किया लेकिन वह कहीं नहीं मिली.’’

‘‘ठीक है, एक एप्लीकेशन लिख कर दे दीजिए. उन्हें खोजने की हरसंभव कोशिश करेंगे.’’

‘‘ठीक है, साहब. मैं अभी लिख कर देता हूं.’’ उस के बाद कावला अनाथैया कक्ष से बाहर निकला और एक तहरीर थानाप्रभारी रेड्डी को दे दी. इंसपेक्टर राजशेखर रेड्डी ने गुमशुदगी की सूचना दर्ज कर के जांचपड़ताल शुरू कर दी. यह बात पहली जनवरी, 2021 की थी. पुलिस बैंकटम्मा की तलाश में जुट गई थी. 3 दिनों की तलाश के बाद भी बैंकटम्मा का कहीं पता नहीं चला तो पुलिस ने जिले के सभी थानों में उस की गुमशुदगी के पोस्टर चस्पा करा दिए और पता बताने वाले को उचित ईनाम देने की घोषणा भी की. बात 4 जनवरी, 2021 की है. इसी जिले के घाटकेसर थानाक्षेत्र के अंकुशपुर गांव के निकट रेलवे ट्रैक के पास एक 50 वर्षीय महिला की लाश पाई गई. लाश की सूचना पा कर घाटकेसर पुलिस मौके पर पहुंच गई और आवश्यक काररवाई में जुट गई.

महिला के शरीर पर किसी प्रकार का कोई चोट का निशान नहीं था. लाश की पुलिस ने सूक्ष्मता से पड़ताल की तो उस के गले पर किसी चौड़े चीज से गला घोंट कर हत्या किए जाने का प्रमाण मिला था. यह देख कर पुलिस दंग रह गई थी. दरअसल, 25 दिन पहले 10 दिसंबर, 2020 को साइबराबाद थानाक्षेत्र के बालानगर के एक कैंपस के पास 40-45 साल की एक महिला की लाश पाई गई थी. हत्यारे ने उस महिला की भी इसी तरह गला घोंट कर हत्या की थी और उस की लाश सुनसान कैंपस में फेंककर फरार हो गया था. दोनों महिलाओं की हत्या करने का तरीका एक जैसा था. लाश को देख कर यही अनुमान लगाया जा रहा था कि दोनों महिलाओं का हत्यारा एक ही है.

बहरहाल, पुलिस यही मान कर चल रही थी कि हत्यारे ने महिला की हत्या कहीं और कर के लाश छिपाने के लिए यहां फेंक दी होगी. चूंकि जुबली हिल्स पुलिस ने कावला अनाथैया की पत्नी कमला बैंकटम्मा की गुमशुदगी के पोस्टर जिले के सभी थानों में चस्पा कराए थे. उस पोस्टर वाली महिला की तसवीर से काफी हद तक इस महिला का चेहरा मिल रहा था तो साइबराबाद पुलिस ने जुबली हिल्स पुलिस को फोन कर के मौके पर बुला लिया, ताकि लाश की शिनाख्त आसानी से कराई जा सके. सूचना मिलने के कुछ ही देर बाद जुबली हिल्स पुलिस घटनास्थल पर पहुंच गई. लाश की पहचान के लिए पुलिस अपने साथ कावला अनाथैया को भी साथ लेती आई थी.

लाश देखते ही कावला अनाथैया की चीख निकल गई. उन्होंने उस लाश की पहचान अपनी पत्नी कमला बैंकटम्मा के रूप में की. लाश की शिनाख्त होने के बाद पुलिस ने उसे पोस्टमार्टम के लिए अस्पताल भेजवा दिया और गुमशुदगी को हत्या की धारा 302 में तरमीम कर अज्ञात हत्यारे के खिलाफ मुकदमा पंजीकृत कर लिया. कमला बैंकटम्मा की पोस्टमार्टम रिपोर्ट अगले दिन यानी 5 जनवरी, 2021 को आ गई थी. रिपोर्ट पढ़ कर इंसपेक्टर राजशेखर रेड्डी चौंक गए थे. रिपोर्ट में बैंकटम्मा की मौत का कारण दम घुटना बताया गया. इस के अलावा उन के साथ दुष्कर्म होने का उल्लेख भी किया गया था. घटना से 25 दिनों पहले बालानगर क्षेत्र में पाई गई महिला के साथ भी हत्यारे ने दुष्कर्म किया था.

दोनों हत्याओं में काफी समानताएं पाई गई थीं. जांचपड़ताल से पुलिस ने पाया कि दोनों हत्याएं एक ही हत्यारे ने की थीं. इस घटना ने तकरीबन 7-8 साल पुरानी घटना की यादें ताजा कर दी थीं. उस समय हैदराबाद के विभिन्न इलाकों में ऐसी ही महिलाओं की लाशें पाई जा रही थीं, जिस में हत्यारा महिला के साथ दुष्कर्म करने के बाद उस की गला घोंट कर हत्या कर देता था. काफी खोजबीन के बाद पुलिस ने उस सिरफिरे हत्यारे को ढूंढ निकाला था. उस किलर का नाम माइना रामुलु के रूप में सामने आया था, जो संगारेड्डी जिले के बोरामंडा इलाके के कंडी मंडल का रहने वाला था. कई सालों तक जेल में बंद रहने के बाद वह हैदराबाद हाईकोर्ट से साल 2018 में जमानत पर रिहा हुआ था. उस के बाद वह भूमिगत हो गया था.

पिछली घटनाओं की कडि़यों को पुलिस ने इन घटनाओं से जोड़ कर देखा तो आईने की तरह तसवीर साफ हो गई. सभी हत्याओं की कडि़यां चीखचीख कर कह रही थीं कि सिरफिरा हत्यारा माइना रामुलु ही इन हत्याओं को अंजाम दे रहा है. पुलिस कमिश्नर अंजनी कुमार ने हैदराबाद टास्क फोर्स, जुबली हिल्स पुलिस और घाटकेसर पुलिस को खूंखार किलर माइना रामुलु को गिरफ्तार करने के लिए लगा दिया. पुलिस की तीनों टीमें दिनरात रामुलु के ठिकानों पर छापा मार रही थीं, लेकिन उस का कहीं पता नहीं चल रहा था. आखिरकार पुलिस की मेहनत रंग लाई. 22 दिनों बाद यानी 26 जनवरी, 2021 को पुलिस खूंखार सीरियल किलर माइना रामुलु को जुबली हिल्स इलाके से गिरफ्तार करने में कामयाब हो गई.

माइना रामुलु को गिरफ्तार कर के पुलिस टीम जुबली हिल्स थाने ले आई. इंसपेक्टर राजशेखर रेड्डी ने इस की सूचना पुलिस कमिश्नर अंजनी कुमार को दे दी. महिलाओं के दुश्मन सिरफिरे कातिल माइना रामुलु की गिरफ्तारी की सूचना मिलते ही सीपी अंजनी कुमार पूछताछ करने थाने पहुंच गए थे. पुलिस अधिकारियों ने हत्यारे रामुलु से 3-4 घंटों तक कड़ाई से पूछताछ की. चूंकि रामुलु पहले भी ऐसे ही कई मामलों में पकड़ा जा चुका था, इसलिए वह सच बताने में ही अपनी भलाई समझता था. सो उस ने पुलिस के सामने अपना जुर्म कबूल कर लिया कि उसी ने कमला बैंकटम्मा की हत्या की थी. हत्या करने के बाद उस की ज्वैलरी लूट ली थी. फिर उस ने सिलसिलेवार पूरी कहानी पुलिस अधिकारियों को बता दी.

अगले दिन 27 जनवरी को पुलिस कमिश्नर अंजनी कुमार ने पुलिस लाइंस में प्रैस कौन्फ्रैंस आयोजित की. पत्रकारों को जानकारी देते हुए उन्होंने बताया कि माइना रामुलु एक सीरियल किलर है. इस ने बोवेनपल्ली, चंदा नगर और डंडीगल थानाक्षेत्र में सर्वाधिक हत्याएं की थीं. उस पर विभिन्न मामलों के कुल 21 मुकदमे दर्ज हैं, जिन में 16 मामले महिलाओं की हत्याओं के और 4 चोरियों के हैं. वह कई बार जेल की हवा खा चुका है. हत्या के एक मामले में उसे आजीवन कारावास की सजा भी सुनाई जा चुकी है. साल 2018 में जेल से जमानत पर रिहा होने के बाद से वह फरार हो गया था. फरारी के दौरान इस ने 2 और महिलाओं को अपने नापाक इरादों का शिकार बना लिया और बड़ी बेरहमी से उन का कत्ल कर डाला.

घंटों चली वार्ता के दौरान पत्रकारों के सामने सीपी अंजनी कुमार ने किलर रामुलु की करतूतों की कुंडली खोलते रहे. उस के बाद पुलिस ने हत्यारोपी को अदालत में पेश किया, जहां से उसे 14 दिनों की न्यायिक हिरासत में जेल भेजने का आदेश दिया. पुलिस पूछताछ में 18 महिलाओं के कातिल माइना रामुलु ने दिल दहलाने वाला जो बयान दिया था, उसे सुन कर सभी पुलिस अधिकारियों के रोंगटे खड़े हो गए थे. नफरत की आग में जलते हुए माइना रामुलु एक गुनाह की दास्तान 18 बेगुनाह महिलाओं के खून से लिखेगा, किसी ने सोचा भी न था. आखिर उस के दिल में दबी नफरत की कौन सी चिंगारी सुलग रही थी, जिस में वह आहिस्ताआहिस्ता जल रहा था? आइए पढ़ते हैं यह कहानी.

45 वर्षीय माइना रामुलु मूलरूप से संगारेड्डी जिले के बोरामंडा इलाके के कंडी मंडल के रहने वाले चंद्रियाय का बेटा था. चंद्रियाय के 4 बेटों में माइना रामुलु सब से बड़ा था. 6 सदस्यीय परिवार में चंद्रियाय इकलौते कमाने वाले थे. उन की कमाई इतनी नहीं थी कि परिवार की जीविका चलाने के बाद उन्हें बेहतर जिंदगी दे सके. बड़े होने के नाते यह बात रामुलु समझता था. रामुलु गरीबी की चादर ओढ़तेओढ़ते ऊब चुका था. वह मुफलिसी वाली जिंदगी नहीं, बल्कि रईसजादों वाली ठाठबाट की जिंदगी जीना चाहता था. सड़कों पर चमचमाती कार देख कर उस का भी मन होता था कि वह भी ऐसी ही कार में आराम से घूमेफिरे. ऐश की जिंदगी जिए.

इन सब के लिए ढेर सारे पैसों की जरूरत होती है, वह पैसा न तो उस के पास था और न ही उस के मांबाप के पास. लिहाजा वह अपना मन मसोस कर रह जाता था. धीरेधीरे माइना रामुलु जवानी की दहलीज पर कदम रखता जा रहा था. 21 साल का हुआ तो उस के मांबाप ने यह सोच कर बेटे की गृहस्थी बसा दी कि जिम्मेदारी जब सिर पर पड़ेगी तो कमाने लगेगा. लेकिन हुआ इस का उल्टा. माइना रामुलु के कानों पर जूं तक नहीं रेंगी. रामुलु की पत्नी रेखा उस से 4 कदम आगे निकली. आंखों में जो रईसी का ख्वाब लिए ससुराल की दहलीज पर उतरी थी, उस का ख्वाब धरा का धरा रह गया. उस के अरमानों का महल रेत की तरह भरभराकर ढह गया था. आंसू आंखों से सूखने का नाम नहीं ले रहे थे.

रेखा की आंखों से निकले आंसुओं से रामुलु के घर की खुशियां बह गई थीं. आए दिन घर में कलह होती थी. रामुलु के मांबाप नई बहू के व्यवहार से परेशान थे. हर घड़ी वे यही सोचते रहते थे कि इस से अच्छा तो कुंवारा ही था. कम से कम बहू के रूप में यह मुसीबत तो नहीं आती, जो दिनरात का चैन छीन चुकी है. चंद्रियाय के घर से मुसीबत जाने का नाम ही नहीं ले रही थी. जैसेतैसे रामुलु की शादी का एक साल बीता. एक दिन अचानक रामुलु की पत्नी रेखा ससुराल पक्ष के एक परिचित के साथ भाग गई. घर से बहू के भाग जाने से पूरे गांव में रामुलु और उस के घर वालों की बड़ी बदनामी हुई. इस बदनामी को रामुलु के पिता सहन नहीं कर पाए और दिल का दौरा पड़ने से उन की मृत्यु हो गई.

पिता की मौत से रामुलु को गहरा झटका लगा. वह सोचता था कि उसी की वजह से पिता की मौत हुई थी. वह अपने आप को हर घड़ी कोसता रहता. उसी समय उस के दिल में औरत से घृणा हो गई. यह बात साल 2000 के करीब की है. पत्नी की बेवफाई से रामुलु अंदर तक टूट गया था. भले ही पत्नी से उस की पटती नहीं थी, लेकिन उसे दिल की गहराइयों से प्यार करता था. उस की खुशियों का खयाल रखता था. सपने में भी उस ने नहीं सोचा था कि उस की पत्नी इस तरह उस के प्यार को ठोकर मार कर पराए मर्द के साथ भाग जाएगी. उस का चेहरा आंखों के सामने आते ही क्रोध से पागल हो जाता था. गुस्से की ज्वाला में जलते रामुलु ने कसम खा ली कि जिस तरह उस की पत्नी उसे ठुकरा कर पराए मर्द के साथ भाग गई है, उसी तरह उस के किए की सजा हर औरत को भुगतनी होगी.

उसी दिन से माइला रामुलु के दिल में औरतों के लिए नफरत की विषबेल पनप गई. बदनामी की तपिश में जलता हुआ माइला रामुलु धीरेधीरे ताड़ी और शराब का आदी बन गया. हर समय वह शराब और ताड़ी के नशे में डूबा रहता. बात 2003 की है. रामुलु कच्ची दारू पीने तुरपान इलाके में गया. वहां उस की मुलाकात दामिनी से हुई. दामिनी दारू भट्ठी पर काम करती थी. उसे देखते ही रामुलु के जिस्म में वासना के कीड़े कुलबुलाने लगे. वह रोज ही दारू पीने दामिनी की भट्ठी पर आया करता था. धीरेधीरे उस ने दामिनी को अपने प्यार के जाल में फंसा लिया. एक दिन धोखे से वह दामिनी को जंगल में ले गया. वहां उस के साथ मुंह काला किया और उस की साड़ी के पल्लू से गला घोंट कर हत्या कर दी और लाश वहीं छोड़ कर फरार हो गया.

इस के बाद तो माइना रामुलु के जुर्म के रास्ते खुल गए. वह किसी औरत को अपना शिकार बनाता तो उस समय उस के शरीर पर जो भी गहने होते, उन्हें भी लूट लेता. साल 2003 से 2009 तक हैदराबाद के विभिन्न थानाक्षेत्रों तुरपान, रायदुर्गम, संगारेड्डी, डुंडीगल, नरसापुर, साइबराबाद और कोकाटपल्ली में करीब 7 औरतों की हत्या कर के पुलिस को उस ने सकते में डाल दिया था. सातों महिलाओं की एक ही तरीके से साड़ी के पल्लू से गला घोंट कर हत्या की गई थी. पुलिस की जांच में यह बात सामने आई कि हत्यारा कोई एक है और वह भी सिरफिरा, जो सिर्फ महिलाओं को ही अपना शिकार बनाता है. पुलिस ने पहली बार नरसंगी और कोकटपल्ली इलाकों में सन 2009 में हुई अलगअलग जगहों पर हुई हत्याओं को गंभीरता से लिया था.

कोकाटपल्ली के इंसपेक्टर राधाकृष्ण राव ने अपने 3 काबिल सिपाहियों की मदद से 20-25 दिनों की कड़ी मेहनत से हत्या की कड़ी सुलझा ली थी और आरोपी माइना रामुलु को गिरफ्तार करने में सफलता हासिल की. पुलिस ने पहली बार शातिर माइना रामुलु के खिलाफ न्यायालय में चार्जशीट दाखिल की थी. 2 साल बाद 2011 के फरवरी में अदालत ने आरोपी माइना रामुलु को दोषी ठहराया और उसे आजीवन कारावास की सजा सुनाई. साथ ही 50 हजार रुपए का जुरमाना भी भरने के आदेश दिए थे. जुरमाना न भरने की दशा में 6 महीने की अतिरिक्त सजा भी सुनाई. कुछ दिनों तक तो शातिर माइना रामुलु सलाखों के पीछे कैद रहा. इसी दौरान उस ने पूरी जिंदगी सलाखों के पीछे बिताने से बचने के लिए फिल्मी अंदाज में एक बेहद शार्प योजना बनाई.

उस ने मानसिक रोगी की तरह कैदियों से व्यवहार करना शुरू कर दिया. जुर्म की दुनिया के माहिर खिलाड़ी रामुलु ने ऐसा अभिनय किया कि लोगों को लगा कि वह वाकई में बीमार है. इस के बाद उसे जेल से निकाल कर एर्रागड्डा मेंटल हास्पिटल में भरती करा दिया गया. यह नवंबर, 2011 की बात है. एक महीने तक वहां रहने के बाद माइना रामुलु 30 दिसंबर, 2011 की रात पुलिस को चकमा दे कर अस्पताल से भाग गया. यही नहीं, अपने साथ वह 5 अन्य कैदियों को भी भगा ले गया, जो मानसिक बीमारी का इलाज करा रहे थे. उस के दुस्साहसिक कारनामों से पुलिस महकमे के होश उड़ गए. इस सिलसिले में एसआर नगर पुलिस स्टेशन में माइना रामुलु के खिलाफ मामला दर्ज किया गया.

पुलिस कस्टडी से फरार रामुलु फिर अपने शिकार में जुट गया था. सन 2012 में चंदानगर में 2 और 2013 में बोवेनपल्ली के डुंडीगल में 3 महिलाओं की हत्याएं कीं. पांचों महिलाओं की हत्याएं एक ही तरीके साड़ी के पल्लू से गला घोंट कर की गई थीं. पोस्टमार्टम रिपोर्ट में महिलाओं की हत्या से पहले दुष्कर्म किए जाने की बात भी सामने आई थी. पुलिस जांच में महिलाओं की हत्या एक ही तरीके से की गई थी. यह तरीका शातिर किलर माइना रामुलु का था. पुलिस को समझते देर न लगी कि इन हत्याओं के पीछे माइना रामुलु का हाथ है. पुलिस ने इन हत्याआें पर फिर से ध्यान देना शुरू किया. आखिरकार 13 मई, 2013 में बोवेनपल्ली पुलिस रामुलु को गिरफ्तार करने में कामयाब हो गई.

जुर्म के साथसाथ सचमुच माइना रामुलु कानून का एक माहिर खिलाड़ी था. उस के पास एक अच्छा वकील था या फिर उस के सिर पर किसी और ताकतवर व्यक्ति का हाथ, यह बात पुलिस के लिए भी पहेली बनी हुई है. 5 साल बाद उस ने 2018 में तेलंगाना हाईकोर्ट में अपनी सजा कम कराने के संबंध में अपील की. वह अपनी सजा को कम करवाने में कामयाब रहा. 2018 के अक्तूबर में माइना रामुलु के पक्ष में फैसला आया और उसे जेल से रिहा कर दिया गया. एक बार फिर उस ने कानून के मुंह पर तमाचा मार दिया था. जेल से रिहा होने के बाद रामुलु कुछ दिन शांत रहा और पत्थर काटने का काम करने लगा, ताकि लोगों को यकीन हो जाए कि वह सुधर गया है. यह उस का एक छलावा था. काम करना तो एक बहाना था, इस के पीछे उस की मंशा शिकार की तलाश करना था.

यह शिकार उसे यूसुफगुडा निवासी 50 वर्षीया कमला बैंकटम्मा के रूप में मिली. बैकटम्मा से रामुलु की मुलाकात दिसंबर, 2020 में एक शराब की भट्ठी पर हुई थी. सम्मोहन कला से उस ने बैंकटम्मा को अपनी ओर खींच लिया था. बस शिकार को अंतिम रूप देना शेष था. 30 दिसंबर, 2020 की शाम थी. यूसुफगुडा के अहाते में कुछ लोग ताड़ी पी रहे थे. बैंकटम्मा और रामुलु ने भी ताड़ी पी. दोनों पर जब हलका सुरूर चढ़ा तो रामुलु के जिस्म में वासना की आग धधक उठी और वह बैंकटम्मा को अपनी आगोश में लेने के लिए बेताब हो उठा. लेकिन वहां लोग थे, इसलिए वह अपने मकसद में कामयाब नहीं हुआ. इस बीच सूरज डूबने लगा था और रात की काली चादर फैला चुकी थी. रामुलु बैंकटम्मा को ले कर कंपाउंड से बाहर निकल गया.

वे दोनों शहर के बाहरी इलाके में किसी सुनसान जगह की तलाश में चल पड़े. यूसुफगुडा से ये दोनों घाटकेश्वर इलाके के अंकुशापुर पहुंचे. यह एक सुनसान जगह थी. दोनों ने यहां पहुंच कर थोड़ी और ताड़ी पी. इस के बाद रामुलु पूरी तरह बहक गया और बैंकटम्मा को अपनी हवस का शिकार बना डाला. फिर उस की साड़ी के पल्लू से गला घोंट कर उस की हत्या कर दी और लाश रेलवे लाइन के पास ठिकाने लगा कर फरार हो गया. हैदराबाद की तेजतर्रार पुलिस शातिर माइना रामुलु को वैज्ञानिक तथ्यों के आधार पर गिरफ्तार करने में कामयाब हो ही गई. शातिर दिमाग वाला माइना रामुलु शायद यह भूल गया था कि उसे जनम देने वाली भी तो एक औरत ही है.

अगर उस की पत्नी ने उस के साथ धोखा किया था, तो सजा उसे मिलनी चाहिए थी न कि बेकसूर उन 18 महिलाओं को, जिन का न तो कोई दोष था और न ही उन्होंने उस का कोई अहित किया था. रामुलु ने जो किया उस के किए की सजा सलाखों के पीछे काट रहा है. समाज के ऐसे दरिंदों की यही सजा होनी चाहिए. कथा लिखे जाने तक पुलिस ने उस के खिलाफ अदालत में आरोप पत्र दाखिल कर दिया था. Real Crime Story in Hindi

—कथा पुलिस सूत्रों पर आधारित

 

Andhra Pradesh Crime : कोल्डड्रिंक वाली सीरियल किलर महिलाएं

Andhra Pradesh Crime : कंबोडिया से लौटने के बाद 32 वर्षीय मडियाला वेंकटेश्वरी ने ऐसी महिलाओं का गैंग बना लिया, जो उस के साथ क्राइम कर सकें. इस के बाद यह गैंग सायनाइड से एक के बाद एक हत्याएं करता गया. हत्याओं के पीछे गैंग का क्या मकसद था? पढ़ें, सायनाइड सीरियल किलर गैंग की दिल दहला देने वाली कहानी.

आंध्र प्रदेश के जिला गुंटूर के गांव तेनाली की रहने वाली मडियाला वेंकटेश्वरी उर्फ बुज्जी की फेमिली में 3 बहनें और 2 भाई थे. उन के पास थोड़ी सी खेती थी, उसी में परिवार का गुजारा होता था. गांव के सरकारी स्कूल से वेंकटेश्वरी ने 12वीं की परीक्षा अच्छे अकों में पास कर ली थी. वेंकटेश्वरी बचपन से ही बहुत महत्त्वाकांक्षी थी, वह थोड़े ही समय में काफी सारे पैसे कमा लेना चाहती थी. उसे ऐश करने और नएनए कपड़े पहनने का बहुत शौक था. उस की आदतें और व्यवहार परिवार के अन्य सदस्यों से काफी उलटा था.

वह स्वार्थी और रूखे स्वभाव की थी, इसलिए घर के सभी सदस्यों को उस की आदतें पसंद नहीं थीं. वेंकटेश्वरी को घर, पढ़ाई करने के साथसाथ खेती का काम भी करना पड़ता था. इस बीच वेंकटेश्वरी कंप्यूटर का कोर्स भी करने लगी थी. वेंकटेश्वरी घर और खेतीबाड़ी का काम करती तो थी, लेकिन बुझे मन से. उस का इन सब कामों में मन नहीं लगता था. इसलिए जैसे ही उस का कंप्यूटर का कोर्स पूरा हो गया, उसे एक एनजीओ में नौकरी मिल गई. वहां पर उस ने 4 साल तक काम किया.

वेंकटेश्वरी की कई सहेलियां अपनी बहनों के साथ कंबोडिया में जा कर पैसा कमा रही थीं. वह उन सभी के संपर्क में रहती थी. वह उन को बराबर फोन करती रहती थी. 4 साल पहले अप्रैल, 2018 में वेंकटेश्वरी ने अपना पासपोर्ट और वीजा कंबोडिया जाने के लिए एक एजेंट के माध्यम से बनवा लिया और फिर एजेंट ने उसे कंबोडिया भेज दिया. वेंकटेश्वरी के फेमिली वाले नहीं चाहते थे कि वह कंबोडिया जाए, मगर उस ने किसी की भी नहीं सुनी और उस ने अब तक इतने पैसे तो जमा कर ही लिए थे, इसलिए उसे अपने फेमिली वालों से भी पैसे लेने की जरूरत नहीं हुई.

कंबोडिया जाने के बाद तो जैसे वेंकटेश्वरी ने अपने फेमिली वालों को भुला ही दिया था. फेमिली वाले भी उस के व्यवहार और आदतों से काफी दुखी रहते थे, इसलिए उन्होंने भी वेंकटेश्वरी से कोई संपर्क करने की जरूरत नहीं समझी. 2 साल तक तो वेंकटेश्वरी अपने जानपहचान वाली युवतियों के संपर्क में व उन के साथसाथ ही रहती थी. धीरेधीरे उस का संपर्क कंबोडिया की ऐसी युवतियों के साथ भी होने लगा, जो काफी शानोशौकत के साथ रहा करती थीं.

वेंकटेश्वरी ने उन से धीरेधीरे जानपहचान बढ़ाने के साथसाथ उन से नजदीकियां बढ़ानी भी शुरू कर दी थी. उन कंबोडियन युवतियों को जब वेंकटेश्वरी काम की लगी तो उन्होंने उसे अपने पास रहने के लिए बुलवा लिया. फिर धीरेधीरे वेंकटेश्वरी को पता चलने लगा था कि इन कंबोडियन युवतियों का काम क्या था. इतने सारे पैसे कमा कर वह कैसे ऐश से रहा करती थीं. दरअसल, वे कंबोडियन युवतियां लोगों को बहलाफुसला कर कहीं एकांत में ले जाया करती थीं और उस के बाद उन को सायनाइड मिला ड्रिंक मिला कर पिला देती थीं, जिस से कुछ समय बाद उस की मौत हो जाती थी और वे युवतियां उस युवक या युवती से सारा माल लूट लिया करती थीं.

 

वेंकटेश्वरी भी अब उन के ग्रुप में शामिल हो कर लोगों से लूट करने लगी थी. कंबोडियन युवतियों के गिरोह में कुल 8 सदस्य थे. लूट का पैसा आपस में बंट जाता था. 2 साल तक वेंकटेश्वरी उन के ग्रुप में काम करती रही. फिर उस ने सोचा कि यदि वह ऐसा काम अपने देश में जा कर करेगी तो उसे इस से ज्यादा फायदा मिल सकेगा. अपना सारा सामान बेच कर वेंकटेश्वरी 10 जनवरी, 2022 को भारत लौट आई. उसे अपने फेमिली वालों से न तो लगाव था और न ही उस के फेमिली वाले उस से मिलने के इच्छुक थे, इसलिए वेंकटेश्वरी अपने घर नहीं गई और उस ने एक कस्बे में किराए के 2 कमरे ले लिए और उस के पास अब तक कई लाख रुपए भी इकट्ठा हो चुके थे.

वह अपने इन लाखों रुपयों को करोड़ों में तब्दील करना चाहती थी. अब वेंकटेश्वरी अपने ग्रुप के लिए ऐसी महिलाओं की तलाश करने में जुट गई, जिन पर विश्वास किया जा सके. इस के अलावा वह निर्दयी प्रवृत्ति की हों और जल्द से जल्द ढेर सारा पैसा कमाना चाहती हों. वेंकटेश्वरी की तलाश मुनगप्पा रजनी और गुलरा रामनम्मा पर जा कर खत्म हो गई. मुनगप्पा रजनी की उम्र 40 वर्ष की थी और वह विधवा थी, जबकि गुलरा रामनम्मा की उम्र 60 वर्ष थी, जो मुनगप्पा रजनी की मम्मी थी. अपने पति की मृत्यु के बाद मुनगप्पा रजनी अपनी मम्मी गुलरा रामनम्मा के साथ अपने मायके में रहने लगी थी.

दोनों मांबेटी को अच्छे से शीशे में उतारने के बाद वेंकटेश्वरी ने उन दोनों मांबेटी को ऐसे लोगों की तलाश करने में लगा दिया, जिन के पास काफी मात्रा में ज्वेलरी व नकदी रहती हो. उस के बाद वेंकटेश्वरी ने उन को प्लान बताया कि ऐसे लोगो को चिह्निïत करने के बाद उन लोगों से दोस्ती कैसे बढ़ानी है और फिर उन्हें अकेले बुला कर उन को सायनाइड मिला कोल्डड्रिंक पिला दिया जाएगा, जिस से उन की मौत हो जाएगी और हम आसानी से ज्वैलरी और नकदी लूट सकेंगे.

मुनगप्पा रजनी अपनी ससुराल भी कभीकभी इसलिए जाया करती थी कि उस की शादी के समय जो गहने उसे दिए गए थे, उन गहनों को उस की सास सुब्बालक्ष्मी उसे वापस नहीं दे रही थी. उस ने यह बात जब वेंकटेश्वरी यानी कि अपनी गैंग लीडर को बताई तो वेंकटेश्वरी ने उस से कहा कि अब वह बराबर अपनी सास से मिलने अपनी ससुराल जाया करे और हर बार कुछ न कुछ उपहार अपनी सास को देती रहे और उस से नजदीकियां बढ़ाने की कोशिश करे.

अब रजनी ने धीरेधीरे अपनी सास सुब्बालक्ष्मी का दिल जीतना शुरू कर दिया था, जिस से वह अकसर रात को भी उस के घर ही रुकने लगी थी. एक रात जब घर वाले किसी फंक्शन में गए थे तो वह रात को चुपचाप अपनी सास के घर गई. घर पर उस समय कोई नहीं था और उस ने दूध में सायनाइड मिला कर अपनी सास को पिला दिया, जिस के कारण उस की तत्काल मृत्यु हो गई. उस के बाद मुनगप्पा रजनी अपनी सास के सारे गहने ले कर चुपचाप अपने घर पर आ गई. सुबह जब लोगों ने सुब्बालक्ष्मी को घर पर मृत पड़े देखा तो इसे स्वाभाविक मौत समझ कर दाह संस्कार कर दिया.

नवंबर 2022 में नगमा नाम की एक महिला, जोकि मुनगप्पा रजनी की पड़ोसी थी, उस ने रजनी को काफी समय पहले 20 हजार रुपए उधार दे रखे थे और नगमा बारबार रुपयों का तकादा कर रही थी. कई बार तो वह लोगों के सामने भी रजनी की बेइज्जती कर देती थी. रजनी ने उस के साथ भी दोस्ती बढ़ानी शुरू कर दी. एक शाम रजनी ने उसे पास के शहर में सिनेमा देखने को राजी किया. वहीं रास्ते में रजनी की मां गुलरा रामनम्मा और वेंकटेश्वरी भी मिल गए. वे तीनों नगमा को एक सुनसान जगह पर ले गए और फिर उसे कोल्डड्रिंक में सायनाइड मिला कर पिला दिया, जिस के कारण उस की मृत्यु हो गई.

उस के बाद तीनों ने उस के सारे गहने निकाल लिए और उस की लाश को झाडिय़ों में फेंक दिया. तेनाली निवासियों ने इस मौत को भी स्वाभाविक समझा और नगमा का अंतिम संस्कार कर दिया गया. अगस्त 2023 में तेनाली निवासी 60 वर्षीय नागप्पा से इस गैंग ने दोस्ती बढ़ानी शुरू कर दी. रजनी ने नागप्पा का परिचय वेंकटेश्वरी से कराया और बताया कि वह कई साल कंबोडिया में भी रह चुकी है.  रजनी ने नागप्पा को यह भी बताया कि वेंकटेश्वरी का कारोबार अभी भी कंबोडिया और भारत के बड़ेबड़े शहरों में फैला हुआ है. यदि उसे रकम या गहने दिए जाएं तो व डेढ़ साल के बाद दोगुना कर लौटा देती है.

नागप्पा फिर वेंकटेश्वरी से अकसर मिलने लगा. वेंकटेश्वरी ने उसे समझाया कि आप रजनी की जानपहचान वाले हो, इसलिए वह उन का काम कर देगी, परंतु उसे यह बात घर पर किसी को भी नहीं बतानी होगी. क्योंकि इस से सभी मोहल्ले वाले और अन्य लोग भी उस के पीछे पड़ जाएंगे. वह किसीकिसी का ही काम करती है. नागप्पा उस के बहकावे में आ गया. उस के पास गहने व पैसे ले कर वेंकटेश्वरी ने उसे एक सुनसान इलाके में बुलवाया और फिर कोल्डड्रिंक्स में सायनाइड मिला कर उस की हत्या कर दी और उस के सारे गहने और पैसे लूट लिए. उस के बाद तीनों ने उसे सुनसान सड़क के किनारे डाल दिया. यहां पर भी नागप्पा की मृत्यु को स्वाभाविक मृत्यु मान कर उस का दाह संस्कार कर दिया गया.

आसामी के अनुसार लेती थी सुपारी

अप्रैल 2024 में तेनाली निवासी पीसू उर्फ मोशे जोकि एक सरकारी नौकरी से रिटायर हो कर पेंशन ले रहा था, उस की पत्नी का नाम भूदेवी था. पीसू उर्फ मोशे लगभग हर दिन रात को शराब पी कर अपनी पत्नी से जम कर मारपीट करता था और दिन भर उस के साथ गालीगलौज करता रहता था. भूदेवी का एक ही बेटा था, जो अपनी पत्नी और बच्चों के साथ कुवैत में ही परमानेंट रूप से रहने लगा था. भूदेवी की अपनी भी कुछ ख्वाहिशें थीं कि वह अच्छेअच्छे कपड़े पहने, अपने लिए खूब सारे गहने बनवाए और अच्छा खानापीना करे, परंतु उस का पति अपने दोस्तों के साथ शराब की पार्टियां करता रहता था और अपने आप में ही मस्त रहने वाला इंसान था. वह औरत को बस अपने पांव की जूती से अधिक नहीं समझता था और तरहतरह से भूदेवी को प्रताडि़त करता रहता था.

मुनगप्पा रजनी भूदेवी की इस स्थिति को काफी अच्छी तरह से जान चुकी थी, इसलिए उस ने धीरेधीरे भूदेवी से बातचीत कर उस से घर की बातें उगलवानी शुरू कर दीं. रोतेरोते भूदेवी रोज अपने ऊपर हुए जुल्मों की दास्तान अब रजनी को बताने लगी थी. एक दिन रजनी ने भूदेवी को समझाया कि यदि हम मिल कर तुम्हारे पति को ही तुम्हारे रास्ते से हटा देंगे तो हमें क्या मिलेगा. इस पर भूदेवी ने रजनी से पूछा, ”रजनी, वैसे तो मैं यही चाहती हूं कि मेरा पति मोशे मर जाए. पर इस से मेरा क्या फायदा होगा. यदि मुझे कुछ फायदा होगा, तभी न मैं बता पाऊंगा कि मैं तुम्हें क्या दे सकती हूं. इस समय तो मेरे हाथ में फूटी कौड़ी तक नहीं है.’’

”अच्छा अम्मा, ये बताओ कि तुम्हारे पति ने कितने रुपए का बीमा करा रखा है?’’ रजनी ने पूछा.

”उस के 2 बीमे हैं. एक 25 लाख का और दूसरा 30 लाख का है,’’ भूदेवी ने कहा.

”आप के पति ने कितने रुपए की एफडी करा रखी है?’’ रजनी ने पूछा.

”एफडी भी 3 हैं. एक 10 लाख की, दूसरी 25 लाख की और एक तीसरी एफडी भी है जो 15 लाख की है.’’ भूदेवी ने सोचते हुए बताया.

”अरे अम्मा, फिर तो अंकल के मरते ही आप करोड़पति हो जाएंगी. एक करोड़ 5 लाख रुपए मिलेंगे तुम्हें और पेंशन भी तुम्हारे नाम पर हो जाएगी. तब ऐश से रहना. न तुम्हें गालियों की चिंता रहेगी और न ही मारपीट का का डर रहेगा. देखो, हम इतनी साफसफाई से मर्डर का प्लान करेंगे कि किसी को कभी भी हम पर शक तक नहीं हो पाएगा.’’ रजनी ने कहा.

उस के बाद रजनी ने 20 लाख रुपए में सौदा कर लिया और उस ने भूदेवी को उस शराब में सायनाइड मिलाने को दे दिया और आगे का सारा प्लान समझा दिया. भूदेवी यह सब अकेले करने में डर रही थी, इसलिए शाम को जब मोशे बाजार से शराब लाने गया था तो मुनगप्पा रजनी अंधेरे में चुपचाप सब की नजर बचा कर भूदेवी के कमरे में छिप गई. फिर रजनी ने भूदेवी को खुद शराब का गिलास ले कर उस के पति पीसू उर्फ मोशे के पास जाने को कहा. उस दिन पीसू उर्फ मोशे भी अपनी पत्नी की दयालुता और सेवाभाव का कायल हो गया था. उस ने यह कहा भी था, ”अरे भूदेवी, आज सूरज क्या पश्चिम से निकला है, जो तुम आज मेरे ऊपर इतनी मेहरबान हो गई हो.’’

”देखिए जी, मैं आप को हर रोज कुछ न कुछ कह कर आप का पूरा दिन खराब कर दिया करती थी. आज आप के दोस्त भी नहीं आए हैं, इसलिए मैं ने सोचा कि क्यों न अपने हाथों से आप को शराब का जाम दे दूं. आज मैं ने आप के लिए मछली के पकौड़े भी तले हैं.’’ भूदेवी ने मछली के पकौड़ों की ट्रे उस के सामने रखते हुए कहा. अपनी पत्नी भूदेवी के इस कायाकल्प से तो मोशे आज बहुत ही अधिक खुश हो गया था. वह सोचने लगा था कि उस की पत्नी भूदेवी उस का कितना खयाल रखती है, उस से कितना प्यार करती है. वह सचमुच कितना बेवकूफ था, जो अपनी पत्नी को रोजरोज प्रताडि़त करता रहता था.

उस के बाद अगला जाम जो भूदेवी अपने पति के लिए ले कर जा रही थी, उस में रजनी ने सायनाइड मिला दिया और जब वह गिलास भूदेवी ने मोशे को दिया तो अगले चंद सेकेंडों के बाद ही अपनी कुरसी से नीचे गिर गया. रजनी समझ चुकी थी कि मोशे अब मर चुका है, इसलिए उस ने भूदेवी के साथ मिल कर मोशे के मृत शरीर को उस की चारपाई पर डाल दिया और ऊपर से चादर ओढ़ा दी. उस के बाद रजनी ने भूदेवी के कान में समझाते हुए कुछ कहा और वह चुपचाप लोगों की नजर से बचती हुई अकेली के घर से निकल गई.

सुबहसुबह 5 बजे भूदेवी के विलाप से पूरी तेनाली कालोनी के लोग चौंक गए. कुछ ही देर के बाद भूदेवी के घर पर आसपड़ोस के बहुत से लोग आ गए थे. भूदेवी ने लोगों को बताया कि सुबह जब मैं अपने पति को बैड टी देने के लिए कमरे में गई तो उन्होंने कोई हरकत ही नहीं की. लोगों ने जब वहां पर देखा तो शराब के गिलास और खाली बोतलें पड़ी हुई थीं. सब ने यही अनुमान लगाया कि रात को मोशे ने रोज की तरह ही ज्यादा शराब पी ली होगी और फिर सोते हुए उसे साइलेंट अटैक आया होगा, जिस के कारण उस की मौत हो गई होगी. पड़ोसियों ने इसे भी स्वाभाविक मौत समझा और उस के बाद गांव वालों ने मिल कर पीसू उर्फ मोशे का अंतिम संस्कार कर दिया.

28 जून, 2024 को चेब्रोल पुलिस को जानकारी मिली कि वडलामुडी गांव के बाहरी इलाके में एक महिला का क्षतविक्षत अवस्था में शव पड़ा हुआ है. पुलिस जब घटनास्थल पर पहुंची तो पुलिस को वडलामुडी गांव के बाहरी इलाके में एक 35 से 40 साल की उम्र की एक महिला का शव सड़ीगली अवस्था में मिला. पुलिस ने आसपास शव की शिनाख्त करने की कोशिश की, परंतु गांव के आसपास के लोग शव की शिनाख्त नहीं कर सके. वडलामुडी गांव के राजस्व अधिकारी की रिपोर्ट के आधार पर चेब्रोल थाने के एसआई पी. महेश ने अज्ञात मौत और अज्ञात हत्यारे के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया और अज्ञात महिला की डैडबौडी को पोस्टमार्टम के लिए भेज दी.

इस ब्लाइंड मर्डर केस की जांच के लिए गुंटूर रेंज आईजी सर्वश्रेष्ठ त्रिपाठी ने गुंटूर जिला एसपी सतीश कुमार के निर्देशन में 2 टीमें गठित की गईं. टीम में तेनाली डीएसपी बी. जनार्दन राव, पोन्नुरु ग्रामीण सीआई वाई. कोटेश्वर राव और चेब्रोल एसआई डी. वेंकट कृष्णा को शामिल किया गया.

आटो ड्राइवर के एक क्लू से खुला केस

आंध्र प्रदेश की 2 विशेष पुलिस टीमें अब इस ब्लाइंड मर्डर की तह तक जाने की कोशिशों में जुट गई थीं. जांच के दौरान पुलिस ने मृतका की पहचान गुंटूर जिले के तेनाली के यहला लिंगैया कालोनी निवासी शेख नागूर बी (48 वर्ष) के रूप में की. मृतका शेख नागूर बी के बेटे शेख तमीज ने अपनी मम्मी की मौत पर संदेह जताया. शेख तमीज ने पुलिस को बताया कि घर से निकलने से पहले उस की मम्मी शेख नागूर बी ने मुनगप्पा रजनी और मडियाला वेंकटेश्वरी उर्फ बुज्जी से काफी लंबी बातचीत की थी.

तकनीकी सर्विलांस का उपयोग करते हुए पुलिस ने आसपास के सभी सीसीटीवी फुटेज का गहनता से अध्ययन किया तो उस में एक आटो सामने आया, जिस के ड्राइवर का नाम महेश था. पुलिस द्वारा आटो चालक महेश को थाने बुला कर सीसीटीवी फुटेज दिखा कर उस से पूछताछ की गई. आटो ड्राइवर ने खुलासा किया कि 5 जून, 2024 को एक महिला ने तेनाली शहर के सोमसुंदरपालम स्थान में एक पुल पर उस का आटो किराए पर लिया था.

कुछ ही देर के बाद 2 अन्य महिलाएं भी उस के साथ आ गईं और तीनों महिलाएं आटो पर सवार हो गईं, जबकि एक अन्य महिला स्कूटी पर सवार हो कर उस के आटो के पीछेपीछे चलने लगी. आटो में सवार एक महिला ने उसे वडलामुडी जंक्शन तक ले जाने को कहा और उसे किराए के लिए 500 रुपए देने का वादा किया. रास्ते में एक जगह पर एक महिला ने आटो रुकवाया और सामने शराब की दुकान से एक बोतल शराब लाने को कहा. शराब की बोतल की कीमत 500 रुपए थी, जो महेश ने ला कर उन्हें दे दी थी.

आटो चालक महेश ने आगे बताया कि उस ने 3 महिलाओं को अपने आटो से वडलामुडी के बाहरी इलाके में खदानों के पास छोड़ा था, जिन में से एक महिला जिस ने मेरा आटो बुक किया था, उस ने फोनपे के जरिए उस का 500 रुपए का किराया चुकाया. काल रिकौर्ड और डंप डाटा से पुलिस को इस बात की पुष्टि हो गई थी कि आटो चालक महेश, मृतका शेख नागूर बी और 3 संदिग्ध लोगों की 5 जून, 2024 की लोकेशन अपराध स्थल की ही थी. जब उन तीनों के फोन नंबरों की काल डिटेल्स निकाली गई तो वे तीनों फोन नंबर मुनगप्पा रजनी (40 वर्ष), गुलरा रामनम्मा (60 वर्ष) और मडियाला वेंकटेश्वरी उर्फ बुज्जी (32 वर्ष) के थे.

पुलिस ने जब तीनों महिलाओं से पुलिसिया अंदाज में पूछताछ शुरू की तो तीनों ने अपना जुर्म कुबूल कर लिया. इस बीच पोस्टमार्टम रिपोर्ट भी आ चुकी थी, जिस में मौत का कारण शराब में सायनाइड मिलना बताया गया था. पूछताछ के दौरान तीनों आरोपियों ने कुबूल किया कि पैसे दुगना करने का लालच दे कर उन्होंने पैसे और सोना चुराने के इरादे से शेख नागूर बी को बहलाफुसला कर सुनसान इलाके में बुलाया और फिर उसे सायनाइड मिली शराब पिला कर मार डाला. उस की मौत के बाद उन्होंने उस की ज्वेलरी और नकदी लूट ली और उस के शव को झाडिय़ों में फेंक दिया था.

तीनों आरोपियों ने इस हत्या से पहले और अन्य 4 हत्याओं की बात भी कुबूल कर ली. आगे की पूछताछ में तीनों आरोपियों ने यह भी कुबूल किया कि उन्होंने 3 अन्य महिलाओं अन्नपूर्णा, वरलक्ष्मी और मीराबी को भी मारने का प्रयास किया था, लेकिन ऐन वक्त पर जब हम उन्हें सायनाइड युक्त शराब और कोल्ड ड्रिंक पिलाने ही वाले थे कि तभी उन तीनों के परिचितों, रिश्तेदारों के फोन उसी समय उन के मोबाइल पर आ गए थे, जिस में उन्होंने हमारे साथ पार्टी करने की बात कही तो राज खुलने के डर से हम ने उस समय उन की हत्या नहीं की.

पुलिस पूछताछ में तीनों आरोपियों ने बताया कि उन्होंने सायनाइड कृष्णा नाम के एक शख्स से 4 हजार रुपए में 2 बार खरीदा था. कृष्णा तेनाली गांव में ही एक ज्वेलरी शाप में काम करता था. कहानी लिखे जाने तक पुलिस तीनों आरोपियों को जेल भेज चुकी थी, जबकि कृष्णा और भूदेवी फरार थीं, जिन की पुलिस सरगर्मी से तलाश कर रही थी.

 

Uttar Pradesh Crime : महिलाओं को टारगेट बनाने वाला साइको किलर

Uttar Pradesh Crime : 19 वर्षीय अजय निषाद और शिवानी एकदूसरे को जीजान से प्यार करते थे. फिर इसी दौरान ऐसा क्या हुआ कि अजय महिलाओं से ही नफरत करने लगा. एक के बाद एक जानलेवा वारदातों को अंजाम दे कर उस ने लोगों के मन में साइको किलर का ऐसा डर भर दिया कि…

13 नंवबर, 2024 की उस रात गोरखपुर के झंगहा थानाक्षेत्र के रसूलपुर गांव के टोला कटहरिया की रहने वाली 24 वर्षीय कविता गहरी नींद में सो रही थी. घर के अन्य सदस्य अपनेअपने कमरों में सो रहे थे. रात गहरी थी और चारों ओर घनघोर अंधेरा था. कुत्तों के भौंकने की आवाज अंधेरे के सीने को चीर रही थी. उसी समय अचानक कविता के कमरे से उस के जोर से चीखने की आवाज उस के पापा छोटेलाल भारती के कानों से टकराई. 

गहरी नींद में सोए होने के बावजूद छोटेलाल भारती झट से उठ बैठे और कविता के कमरे की ओर दौड़े. पति को अचानक बेटी के कमरे की ओर जाते देख पत्नी सुमन भी उन के पीछे हो ली. वह समझ नहीं पा रही थी कि ऐसा क्या हुआ, जो इतनी तेजी से बेटी के कमरे की ओर जा रहे हैं. पलभर में वह कविता के कमरे में पहुंचे और बिजली का स्विच औन किया तो कविता बिस्तर पर पड़ी दर्द से छटपटा रही थी. उस के सिर से खून बह रहा था. 

छोटेलाल ने बेटी से इस हालात के बारे में पूछा तो उस ने कराहते हुए बताया कि काली शर्ट में एक नकाबपोश ने किसी भारी चीज से सिर पर जोरदार वार किया और सामने के दरवाजे से तेजी से भाग गया. छोटेलाल को समझते देर न लगी कि यह नकाबपोश वही रहस्यमयी व्यक्ति है, जो पिछले 6 महीने से रहस्य बना हुआ है और चुनचुन कर औरतों को अपना शिकार बना रहा है. छोटेलाल दौड़ते हुए उस ओर गया, जिस ओर भागने की बात कविता ने उसे बताई थी. 

घर से कुछ दूर आगे तक छोटेलाल गया, मगर उसे दूरदूर तक कोई नजर नहीं आया, सिवाय चारों ओर फैले सन्नाटे के. लौट कर वह घर पहुंचा. उस ने मोबाइल फोन पर टाइम देखा तो उस समय रात के साढ़े 3 बज रहे थे.  दर्द से बिलबिला रही कविता की आवाज सुन कर फेमिली वाले परेशान थे. छोटेलाल ने उसी समय शोर मचा कर पड़ोसियों को जगाया और नकाबपोश के गांव में होने और बेटी पर हमला करने की बात बता कर उसे पकडऩे में मदद की गुहार लगाई. इस नकाबपोश के आतंक से सिर्फ उस गांव वाले ही नहीं, पासपड़ोस के कई गांव वाले दहशत में जी रहे थे. 

आलम यह हो चला था कि शाम होते ही महिलाएं अपने घरों में दुबक जाती थीं. नकाबपोश की दहशत से कोई भी औरत अकेली रात में कहीं भी नहीं जाती थी. गांव वाले भी चाहते थे कि नकाबपोश जल्द से जल्द पकड़ा जाए. पुलिस भी उसे पकडऩे में लगी हुई थी, लेकिन अभी तक वह भी खाली हाथ थी. इसलिए लोगों ने उसे आज पकडऩे की ठान ली. खैर, गांव वालों ने एकजुट हो कर लाठी और डंडे लिए गांव को चारों ओर से घेर लिया, ताकि जो भी हो वह यहां से बच कर जाने न पाए. दहशत के मारे 6 महीने से गांव वालों की आंखों से नींद गायब हो गई थी. गांव वालों ने गांव का चप्पाचप्पा छान मारा, एकएक गली छान ली, लेकिन उस रहस्यमयी व्यक्ति का कहीं पता नहीं चला. शायद अंधेरे का लाभ उठा कर वह कहीं गुम हो गया था.

बहरहाल, पौ फटते ही छोटेलाल भारती गांव वालों के साथ घायल बेटी को ले कर झंगहा थाने पहुंचे. सुबहसुबह दीवान दयाराम थाने में भारी संख्या में गांव वालों को देख कर चौंक गया. औफिस से निकल कर वह बाहर आया और इतनी सुबह आने का कारण पूछा तो छोटेलाल ने नकाबपोश के द्वारा बीती रात बेटी पर जानलेवा हमला करने की जानकारी दे कर आवश्यक काररवाई करने की गुहार लगाई. थानाक्षेत्र की यह पांचवीं घटना थी और उस हमलावर को पकड़े जाने की बात तो दूर, पुलिस उस की परछाई तक छू नहीं सकी थी. हैडकांस्टेबल दयाराम ने छोटेलाल और उस के साथ आए गांव वालों को भरोसा दिलाया कि बड़े साहब के आते ही उस के खिलाफ जरूरी काररवाई जरूर की जाएगी. पहले अस्पताल जा कर बेटी का इलाज कराएं.

दयाराम ने जो बात कही थी, सच ही कही थी. दर्द से कराह रही कविता को इस समय इलाज की बहुत जरूरत थी.  दीवान की बात मान कर छोटेलाल बेटी को ले कर नजदीक के अस्पताल पहुंचे. चूंकि चोट काफी गहरी थी और हालत गंभीर बनी हुई थी, इसलिए डाक्टर ने उसे भरती कर इलाज करना शुरू किया. 

लगातार घटनाओं से पुलिस भी हुई परेशान

इधर दीवानजी के जरिए तत्कालीन इंसपेक्टर सूरज सिंह को घटना की सूचना मिल चुकी थी. वह तुरंत अस्पताल पहुंचे और घायल कविता के बयान दर्ज कर थाने लौट आए. फिर छोटेलाल की तहरीर पर अज्ञात हमलावर के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया. इंसपेक्टर सूरज सिंह ने घटना की सूचना सीओ (चौरीचौरा) अनुराग सिंह, एसपी (ग्रामीण) जितेंद्र कुमार श्रीवास्तव और एसएसपी डा. गौरव ग्रोवर को दे दी. मामला गंभीर हो चला था. नकाबपोश की इस पांचवीं घटना ने पुलिस महकमे को हिला कर रख दिया था. 

अफसोस की बात तो यह थी कि अभी तक पुलिस यह तक पता लगाने में असफल थी कि आखिर वो है कौन? क्यों वह औरतों को ही अपना निशाना बना रहा है? जानलेवा हमला कर के वह आखिर अंधेरे में गुम कहां हो जाता है? इन तमाम सवालों के जबाव उस नकाबपोश के पकड़े जाने पर ही मिल सकते थे.  14 नंवबर, 2024 की दोपहर में एसएसपी गौरव ने अपने औफिस में इसी घटना को ले कर जरूरी मीटिंग बुलाई थी. उस मीटिंग में एसपी (ग्रामीण) जितेंद्र कुमार, सीओ (चौरीचौरा) अनुराग सिंह, एसएचओ (झंगहा) और एसओजी प्रभारी शामिल थे. पहली घटना से ले कर पांचवीं घटना की चर्चा उस मीटिंग में की गई. 

चर्चा के दौरान एक बात कौमन निकल कर बाहर आई, वह यह थी कि सभी घटनाओं में औरतों पर हमला एक जैसे ही किया गया था, जिस में हमलावर ने किसी वजनी चीज से सिर पर ही वार कर के उन्हें मारना चाहा था.  इस घटना में 11 अगस्त, 2024 को हमलावर का दूसरा शिकार बनी थी ममता देवी (32 साल). 15 दिनों तक अस्पताल में जिंदगी और मौत से जूझती हुई वह जिंदगी से हार गई थी. हमलावर की शिकार बनी औरतों के लिए गए बयान में यह सामने आया था कि देखने में हमलावर दुबलापतला दिखता है, काली शर्ट पहने होता है, चेहरा किसी कपड़े से ढका रखता है और नंगेपांव रहता है.

एसएसपी गौरव ने एक टीम गठित की, जिस की जिम्मेदारी एसपी (ग्रामीण) जितेंद्र को सौंपी. उन्होंने अपने नेतृत्व में पुलिस की कई टीमें गठित कीं. उन टीमों का नेतृत्व उन्होंने सीओ (चौरीचौरा) अनुराग सिंह को सौंपा. एसएसपी के दिशानिर्देशन में अपनी सूझबूझ का परिचय देते हुए सीओ अनुराग सिंह रहस्यमयी हमलावर की खोज में जुट गए. 30 जुलाई, 2024 से 13 नवंबर, 2024 के बीच हुई घटनाओं की गुत्थी सुलझाने के लिए पुलिस ने 20 गांव खंगाले. 150 से अधिक सीसीटीवी कैमरों के फुटेज देखने के साथ ही करीब डेढ़ लाख मोबाइल फोन का डेटा खंगाला. इस के बावजूद उस का कोई सुराग हाथ नहीं लगा.

सफलता नहीं मिलने पर ऐसे व्यक्ति की तलाश शुरू हुई, जो महिला अपराध के मामले में जेल गया हो और घटनास्थल के आसपास उस की लोकेशन रही हो. मगर पुलिस यहां भी खाली हाथ रही. पुलिस टीम ने गांवगांव जा कर लोगों से संदिग्ध लोगों के बारे में जानकारी लेने के बाद उन का थाने का रिकौर्ड चैक किया. संदेह के आधार पर कई लोगों को हिरासत में ले कर पूछताछ भी की गई. काफी मशक्कत के बाद पुलिस के हाथों आखिरकार रहस्यमयी हमलावर की पहचान हो ही गई. दरअसल, 4 घटनास्थलों से जुटाए गए फुटेज में एक ऐसा व्यक्ति देखा गया, जो घटना के बाद तेजी से भागता नजर आ रहा था. 

फुटेज को गहराई से देखा गया तो इकहरे बदन वाला वह व्यक्ति काली शर्ट पहने था और नंगे पांव था. उस का हुलिया ठीक वैसा ही मेल खा रहा था, जैसा पीडि़त महिलाओं ने बताया था. उस रहस्यमयी व्यक्ति की पहचान अजय कुमार निषाद पुत्र स्वामीनाथ निषाद निवासी मंगलपुर गांव के रूप में की गई थी. 

पुलिस क्यों रख रही थी फूंकफूंक कर कदम

पहचान पुख्ता होते ही सीओ अनुराग सिंह की टीम चौकन्नी हो गई थी. वह टीम के साथ इतने सतर्क थे कि किसी भी कीमत पर उस रहस्यमयी हमलावर तक उस की पहचान हो जाने की खबर तक न लगने पाए. वरना वह मौके से फरार हो सकता था और कई दिनों की कड़ी मेहनत पर पानी फिर सकता था. इसलिए वे बहुत फूंकफूंक कर कदम उठा रहे थे. आननफानन में उन्होंने एक योजना बनाई. उस योजना के अनुसार, उसी रात यानी 17 नवंबर की रात में सादे वेश में पुलिस टीम के साथ रात करीब साढ़े 12 बजे मंगलपुर गांव को चारों ओर से घेर लिया. यही नहीं ऐहतियात के तौर पर एसओजी टीम को मौके पर बुला लिया गया था. दोनों टीमें इस औपरेशन को मिल कर अंजाम दे रही थीं, ताकि हमलावर गांव से भाग न सके.

पुलिस मुखबिर के जरिए पहले ही उस की शिनाख्त कर चुकी थी. पुलिस हमलावर अजय के घर की ओर बढ़ रही थी. पुलिस की टीम ने अजय के घर को चारों ओर से घेर लिया था. झंगहा थाने के एसएचओ सूरज सिंह ने दरवाजा थपथपाया. थाप की आवाज सुन कर अधेड़ उम्र के एक शख्स ने दरवाजा खोला. सामने कई लोगों को एक साथ देख कर उस की नींद गायब हो गई. अभी वह कुछ समझ पाता, तभी इंसपेक्टर सूरज सिंह ने अपना परिचय देते हुए कहा, ”मैं झंगहा थाने का इंसपेक्टर सूरज सिंह हूं. तुम्हारे दरवाजे पर पुलिस फोर्स खड़ी है. जो पूछूंगा, उस का सहीसही जवाब देना. क्या अजय यहीं रहता है?’’

हां साहब, अजय यहीं रहता है, लेकिन बात क्या है, सर?’’ अचकचा कर शख्स ने सवाल किया, ”मैं अजय का पिता स्वामीनाथ हूं. इतनी रात गए आप सब यहां. सब ठीक तो है न. मेरे बेटे ने क्या किया है?’’

हां, सब ठीक है. एक नारमल पूछताछ के लिए उसे थाने ले जाना है.’’ इंसपेक्टर सूरज सिंह ने बड़े साधारण तरीके से अपनी बात को आगे रखा, ”पूछताछ के बाद उसे घर तक छोड़ दिया जाएगा.’’

लेकिन बात क्या है साहब?’’

कहा न, एक नारमल पूछताछ है. पूछताछ के बाद उसे छोड़ दिया जाएगा.’’ 

बाहर बातचीत की आवाज सुन कर स्वामीनाथ की पत्नी भी उठ कर पति के पास जा पहुंची थी. दरवाजे पर कई लोगों को देख कर उन की भी आंखें फटी रह गई थीं. पति और सामने खड़े इंसपेक्टर के बीच तीखी बहस हो रही थी. 

देखो, मैं जो पूछ रहा हूं, सीधी तरह से बता दो कि अजय कहां है, वरना मुझे दूसरे तरीके भी आते हैं.’’ इंसपेक्टर सूरज सिंह ने कड़क स्वर में कहा, ”तुम सीधे तरीके से बताते हो या फिर मैं पुलिसिया…’’ 

बात अभी पूरी भी नहीं हुई थी कि स्वामीनाथ गिड़गिड़ाया, ”साहब, मेरे बेटे के साथ कुछ मत कीजिएगा. मैं उसे ले कर आता हूं. वो घर में सो रहा है.’’

ठीक है, उसे ले कर आओ, पूछताछ के बाद छोड़ दिया जाएगा.’’ इंसपेक्टर सिंह ने उसे भरोसा दिलाया, तब कहीं जा कर वह अजय को बुलाने कमरे की ओर बढ़ा. इधर सामने खड़ी अजय की मां समझ नहीं पा रही थी कि पुलिस वाले बेटे को क्यों लेने आए हैं?

कुछ देर के बाद स्वामीनाथ अजय को साथ ले कर बाहर आया और उसे पुलिस को सौंप दिया. यह देख कर उस की मां ने हंगामा किया तो पुलिस के कड़े तेवर देख कर वह चुप हो गई. इंसपेक्टर सूरज सिंह अजय को सीधे थाने ले गए. थोड़ी में सीओ अनुराग सिंह और एसओजी टीम भी थाने पहुंच गई थी. पुलिस के तमाम सवालों का अजय ने एक ही जवाब दिया कि उसे इस घटना के बारे में कोई जानकारी नहीं है और न ही उस ने ऐसा कोई काम किया है.

रात भर पुलिस परेशान रही. अगली सुबह उन चारों महिलाओं को थाने बुलाया गया और उन्हें छिपा कर अजय की शिनाख्त कराई तो चारों पीडि़ताओं ने उसे पहचान लिया. उसी ने उन पर हमला किया था. फिर क्या था, पुलिस ने जब उस से सख्ती से पूछताछ की तो उस ने अपना जुर्म कुबूल कर लिया. उस ने बताया कि वह औरतों से सख्त नफरत करता है. उन का चीखना, तड़पना और उन के जिस्म से बहता खून देख कर उसे बहुत सुकून मिलता था. 

यह सुन कर पुलिस वाले आश्चर्यचकित हो गए कि यह तो किसी मनोरोगी से कम नहीं है. क्योंकि दूसरों को दर्द दे कर, उस की तकलीफ देख कर उसे खुशी मिलती थी. सीओ सिंह ने जब इस का कारण पूछा तो उस का जवाब सुन कर वह भी हैरान रह गए थे. फिर उस ने आगे जो बयान दिया, वह किसी सस्पेंस वाली फिल्मी कहानी से कम नहीं निकला. घटना का खुलासा होने के बाद उसी दिन शाम साढ़े 3 बजे एसएसपी गौरव ग्रोवर ने पुलिस लाइन में प्रैसवार्ता बुला कर करीब 6 महीने से सिरदर्द बनी सीरियल किलर की कहानी का खुलासा किया. 

पत्रकारों ने उक्त घटना के बारे में आरोपी से पूछताछ की तो अजय के चेहरे पर पछतावे का कोई निशान नहीं था. खैर, पुलिस ने अजय कुमार निषाद को नामजद करते हुए बीएनएस की अलगअलग धाराओं में मुकदमा दर्ज कर के अदालत के सामने पेश किया, जहां से उसे 14 दिनों के रिमांड पर जेल भेज दिया गया. अदालती आदेश के बाद अजय को कड़ी सुरक्षा में बिछिया स्थित गोरखपुर मंडलीय कारागार भेज दिया गया.  बहरहाल, पुलिस द्वारा अजय से की गई पूछताछ के बाद हैरान कर देने वाली जो कहानी सामने आई है, वो इस तरह है

अजय को शिवानी से हुआ प्यार

उत्तर प्रदेश के गोरखपुर जिले के दक्षिण में झंगहा थाना के अंतर्गत राजधानी गांव में मंगलपुर नाम का एक टोला पड़ता है. निषाद बाहुल्य गांव में किसान स्वामीनाथ निषाद अपनी पत्नी और 6 बेटे, 4 बेटियों के साथ रहता था. 10 बच्चों में अजय सब से छोटा था. चारों बेटियों और 3 बेटों की शादी वह कर चुका था. अजय भाईबहनों में सब से शातिर और बेहद चालाक किस्म का था. घर की माली हालत से वह अच्छी तरह वाकिफ था. मेहनत कर के कैसे इतने बड़ा परिवार उस के पिता चलाते थे, इस का दर्द सालों से उसे सालता था. 

वह सोचता था कि काश! कहीं से काफी सारा पैसा मिल जाए तो परिवार की माली हालत दुरुस्त कर देता और मजे की जिंदगी जीता. उसे पता था कि सोशल मीडिया पर ऐसी तमाम जानकारियां मिल जाती हैं, जिस के जरिए लाखों रुपए कमाए जा सकते हैं. इसी सोच के चलते बेहद कम उम्र में ही उस ने सोशल मीडिया को खंगालना शुरू किया. अजय स्कूल से छुट्टी के बाद मोबाइल फोन में जमा रहता था. घर वाले उसे समझाते कि पढ़लिख कर कुछ काबिल बन जा, मोबाइल तो जीवन भर चलाना है. जब समय हाथ से निकल जाएगा तो पछताने से कोई फायदा नहीं होगा. पेरेंट्स के समझाने का उस पर कोई असर नहीं होता था, वह अपनी ही धुन में रमा रहता था.

रमेश निषाद अजय के पड़ोसी थे. उन की सब से छोटी बेटी थी शिवानी, जो 15 साल की थी. शिवानी खूबसूरत थी. वह 8वीं कक्षा में पढ़ती थी. लेकिन इसी उम्र में वह पूरी तरह सयानी हो चुकी थी. उस का अंगअंग विकसित हो चुका था. अजय था तो साधारण शक्लसूरत और इकहरे बदन का. उस में कोई खास आकर्षण नहीं था, लेकिन गोरी और सुंदर शिवानी पर उस की जिस दिन से नजर पड़ी थी, वह उस का दीवाना हो चुका था. पड़ोसी होने के नाते अजय और उस के घरपरिवार की रमेश के घर के अंदर तक आनाजाना था. रमेश के फेमिली वाले भी स्वामीनाथ के घर आतेजाते थे. 

खैर, शिवानी आंखों के रास्ते अजय के दिल में उतर आई थी. जिस दिन से उस के दिल में उतरी थी, उस दिन से उस पर शिवानी के प्यार का ऐसा नशा छाया कि दिनरात, सोतेजागते, उठतेबैठते शिवानी ही शिवानी नजर आती थी. शिवानी जान चुकी थी कि अजय उसे चाहता है, उस से प्यार करता है. धीरेधीरे वह भी अजय के प्यार में गिरफ्तार हो गई. लेकिन दोनों ही कच्ची उम्र के प्रेमी थे. अकसर देखा गया है कि इस उम्र के प्यार में प्यार कम और शारीरिक भूख मिटाने की ललक ज्यादा होती है. यहां भी कुछ ऐसा ही आलम था. अजय शिवानी की गदराए देह को पाने के लिए लालायित था. लेकिन उसे ऐसा मौका मिल नहीं पा रहा था, जहां जिस्मानी संबंध बना सके.

वह जिस मौके की तलाश में था, एक दिन वह मौका आखिरकार उसे मिल ही गया. एक दिन की बात है शिवानी के फेमिली वाले किसी जरूरी काम से घर से बाहर गए थे. घर पर शिवानी ही अकेली थी, अजय को यह बात पता थी. दोपहर के समय अजय प्रेमिका के घर पहुंचा. कमरे में शिवानी अकेली थी. और घर के कामों व्यस्त थी. अचानक से सामने अजय को देख कर वह सकपका गई.

तुम यहां..?’’ चौंक कर शिवानी ने पूछा.

हां, मैं.’’ अजय ने जवाब दिया, ”मुझे देख कर तुम्हें खुशी नहीं हुई?’’

खुशी तो हुई पर…’’ बाहर मेनगेट की ओर झांकते हुई शिवानी बोली, ”ऐसे घर में घुसते तुम्हें किसी ने देखा तो नहीं?’’

अगर कोई देख भी लेता तो क्या होता. हम सच्चे प्रेमी हैं. किसी के सामने झुकने वाले नहीं. हम मर मिटने वालों में से हैं.’’

देखो, डायलौगबाजी छोड़ो, यह बताओ किसलिए यहां आए हो. मम्मीपापा कभी भी आ सकते हैं. जल्दी बताओ.’’

शिवानी, तुम तो ऐसे घबरा रही हो जैसे मुझे जानती नहीं हो, किसी अजनबी से मिल रही हो. तुम से प्यार करने के लिए आया हूं.’’ कहते हुए अजय शिवानी के करीब जा पहुंचा. 

प्रेमिका ने क्यों नहीं किया तन समर्पित

अजय को अपने बेहद करीब देख कर शिवानी के दिल की धड़कनें तेज हो गईं. सांसें तेजतेज चलने लगी थीं. प्यार का तपन महसूस कर शिवानी का बदन भी गरम होने लगा था. यह देख अजय खुद को रोक नहीं सका और शिवानी को खींच कर अपनी बाहों में भर लिया. पहली बार किसी पुरुष ने शिवानी को स्पर्श किया था. उसे बहुत अच्छा लग रहा था. उस ने भी उसे अपनी बाहों में भर लिया. दोनों की सांसें और तेज हो गई थीं और बदन जलने लगा था, ”हमें डूब जाने दो शिवानी. 2 जिस्म एक जान हो जाने दो.’’अजय बोला.

मैं भी तुम से बहुत प्यार करती हूं, मैं भी तुम्हारे प्यार के समंदर में डूब जाना चाहती हूं. लेकिन अभी नहीं.’’ शिवानी खुद पर काबू करते हुए बोली, ”यही तो वो दौलत है, जो पत्नी अपने पति को बचा कर उसे सौंपती हैं. हमें अभी सामाजिक मर्यादा नहीं लांघनी है. तुम्हें अभी और इंतजार करना होगा.’’

इंतजार ही तो नहीं हो पा रहा है मुझ से. खो जाने दो मुझे तुम में.’’

नहीं…नहीं…अभी नहीं…’’ कहती हुई शिवानी अजय को धक्का देते हुए उस से दूर हो गई. अजय गिरतेगिरते बचा. 

शिवानी के अचानक बदले मिजाज से वह हैरान रह गया. वह समझ नहीं पाया कि अचानक उस ने उसे धक्का दे कर खुद से दूर क्यों किया.

क्या हुआ शिवानी?’’ आश्चर्य से अजय ने सवाल किया, ”तुम ने मुझे धक्का क्यों दिया?’’

मैं कहती हूं कि तुम यहां से अभी चले जाओ.’’ शिवानी तल्खी से बोली, ”इस से पहले कि कोई हमें इस बंद कमरे में एक साथ देख ले, तुम अभी यहां से चले जाओ.’’ शिवानी दोनों हाथ जोड़ कर उस के सामने गिड़गिड़ाने लगी थी. 

गुस्से में पैर पटकता हुआ अजय तेज कदमों से वहां से चला गया. जिस चाहत को ले कर वह शिवानी से मिलने उस के घर आया था, उस की मंशा पूरी नहीं हो पाई थी. शिवानी ने जोश में भी होश से काम लिया था. इस के बाद भी अजय ने शिवानी से जिस्मानी संबंध बनाने के लिए कई बार रिक्वेस्ट की. लेकिन हर बार उस ने उस की रिक्वेस्ट यह कह कर ठुकरा दी कि जो भी करना होगा, शादी के बाद. शिवानी के बारबार प्रणय निवेदन को ठुकराने से अजय नाराज हो गया और उस के दिमाग में उसे बदनाम करने की खतरनाक साजिश ने जन्म ले लिया. 

उस ने सोचा कि जब हम उस पर दबाव बनाएंगे तो अपनी इज्जत बचाने के लिए वह खुद ही मेरी बाहों में गिर जाएगी. अजय के मोबाइल फोन में शिवानी की कई तसवीरें थीं. गुस्से में उस ने उस के कुछ फोटो को एडिट कर के फेसबुक पर डाल दिया. शिवानी को इस का पता चल गया. उस ने फेसबुक पर अपनी अश्लील फोटो देखी तो आगबबूला हो गई. यह बात शिवानी ने अपने फेमिली वालों को बता दिया. शिवानी के बताने पर घर वालों ने भी फोटो को देखा तो शरम के मारे जमीन में गड़ गए. अजय ने शिवानी को बदनाम करने के लिए कोई कसर नहीं छोड़ी थी. 

शिवानी के फेमिली वालों ने झंगहा थाने में उस के खिलाफ रेप का मुकदमा दर्ज करा दिया. पुलिस ने पोक्सो ऐक्ट में मुकदमा दर्ज कर के अजय को गिरफ्तार कर के बाल कारागार भेज दिया. तब अजय 17 साल का था और यह बात साल 2022 की थी. इस घटना ने अजय को भीतर तक झकझोर कर रख दिया था. वह इस बात से काफी परेशान था कि जो गुनाह उस ने किया ही नहीं, नाहक उस झूठे गुनाह में फंसा कर उसे सजा दिलाई गई है.

अजय ऐसे बना महिलाओं का दुश्मन

6 महीने बाद अजय जमानत पर जेल से छूट कर घर आया. जेल से बाहर आने के बाद अजय के तेवर पूरी तरह बदले हुए थे. औरतों को देखते ही नफरत से दूसरी ओर मुंह फेर लेता था. औरतों से उसे अब घृणा हो गई थी. घर आने के बाद वह शिवानी के घर वालों को झूठा मुकदमा वापस लेने के लिए धमकाने लगा था. उस ने धमकी दी कि ऐसा नहीं किया तो सभी को जान से मार दूंगा. अजय की रोजरोज की धमकियों से शिवानी और उस के घर वाले बुरी तरह परेशान हो गए थे. वे नहीं चाहते थे कि उस का जीवन खराब हो. इसलिए इस बारे में शिवानी के पेरेंट्स ने स्वामीनाथ से शिकायत भी की कि अपने बेटे को संभाल लें, उसे ओछी हरकतें करने से रोक लें वरना उस का जीवन बरबाद हो जाएगा. फिर उन्हें दोषी मत ठहराना. लेकिन उस के फेमिली वालों ने इसे अनसुना कर दिया था. इधर अजय बुरी तरह बागी बन गया था और उसे किसी की भावनाओं से कोई लेनादेना नहीं था.

बुरी तरह परेशान रमेश ने एक बार फिर अजय कश्यप के खिलाफ जान से मारने की धमकी देने का मुकदमा दर्ज करा दिया. पुलिस उसे फिर से गिरफ्तार कर के ले गई और इस बार उसे 6 महीने जेल में रहना पड़ा. फिर उस के फेमिली वालों ने जमानत करा कर उसे जेल से बाहर निकाला. बाल कारागार से बाहर आने के बाद उस के फेमिली वालों ने उसे सूरत भेज दिया. एक साल तक अजय सूरत में रह कर पेंट, पालिश का काम करता रहा. लेकिन उस के दिल से सजा काटने वाली बात नहीं निकली थी. रहरह कर उसे टीस मारती थी. जब उसे बीती बातें याद आतीं तो एक साइको की तरह हरकतें करने लगता था. 

डेढ़ साल बाद जब अजय सूरत से घर लौटा तो एकदम से शांत रहने लगा था. पड़ोसियों से कम बातचीत करता था. ऐसा करना उस की योजना की एक चालाकी भरी कड़ी थी. जो सिर्फ उस के अलावा किसी को पता नहीं था. अजय अपने जीवन में थोड़ा बदलाव ले आया. वह शनिदेव का भक्त बन गया. शनिवार के दिन वह काले कपड़े पहनता और विधिपूर्वक शनिदेव का पूजन करता था. उस दिन नंगे पांव रहता था. वह शिवानी को भूल नहीं पाया था. इतना सब होने के बावजूद भी उसे टूट कर प्यार करता था. उसे जब देखता था तो न जाने उसे क्या हो जाता था. उस दिन पूरा दिन वह बेचैन और परेशान रहता था. 

इस के बाद उस ने तय किया कि शिवानी को जिंदा रख कर उसे ऐसी सजा देना है, जिस का दर्द जीवन भर उसे सालता रहे. योजना के अनुसार, उस ने उन महिलाओं को अपना टारगेट बनाने का फैसला किया, जिन का इस घटना से दूरदूर तक कोई लेनादेना नहीं था. अपनी खतरनाक योजना को पहली बार 29 जुलाई, 2024 को उस ने अंजाम दिया. झंगहा थानाक्षेत्र के सिंहपुर के सहरसा की 50 वर्षीया माया देवी को उस ने अपना टारगेट बनाया था. माया का घर गांव के आखिर में बना था. गरमी के दिन थे. माया का पति बमनलाल कमरे में सो रहा था. उस की पत्नी बरामदे में गहरी नींद में सोई थी. रात के करीब 2 बजे का समय था. अजय काली शर्ट पहने, काले कपड़े से मुंह ढके और नंगे पांव घर में घुस गया. 

माया को देखते ही उस ने हाथ में ली हुई लोहे की रौड से उस के सिर पर जोरदार प्रहार किया. जोरदार वार से गहरी नींद में सोई माया दर्द से तड़पने लगी. उस के सिर से बहता खून और उसे तड़पता देख कर अजय के दिल को ठंडक पहुंची. फिर घटना को चोरी का रूप देने के लिए घर से लोहे का संदूक ले कर भागा और उसे गांव के बाहर छोड़ दिया. ताकि लोग यही समझें कि चोरी के विरोध में चोर ने घटना को अंजाम दिया था. 

महिलाओं की तड़प और खून देख कर होता था खुश

ठीक अजय की सोच के हिसाब से बमनलाल भी सोचने लगा था कि शायद चोर आया होगा. दोनों के बीच हाथापाई हुई होगी. उसी हाथापाई में चोर ने पत्नी पर हमला कर उसे घायल कर दिया होगा. अगली सुबह बमनलाल ने अज्ञात चोर के खिलाफ चोरी का मुकदमा झंगहा थाने में दर्ज करा दिया. शातिर अजय घटना को अंजाम दे क र शांत बैठ गया. किसी को उस पर तनिक भी शक नहीं हुआ था. इस के ठीक 12वें दिन यानी 11 अगस्त, 2024 को अजय ने इसी तर्ज पर उपधवलिया की रहने वाली 32 वर्षीया ममता देवी पर रात के 3 बजे कातिलाना हमला किया और सामान उठा कर भाग गया. फिर अंधेरे में कहीं गायब हो गया. 

ममता पर हमला इतना जोरदार किया था कि वह कई दिनों तक अस्पताल में भरती रही और अंत में इलाज के दौरान उस ने दम तोड़ दिया. बेटी की मौत का सदमा सेवा प्रसाद बरदाश्त नहीं कर पाया और हमेशा के लिए परिवार सहित घर छोड़ कर अपनी नौकरी पर लौट गया और वहीं रहने लग. इस घटना को अंजाम देने के बाद अजय सूरत भाग गया. 14 दिनों बाद सूरत से घर लौटा और फिर तीसरी घटना 25 अगस्त को इसी तर्ज पर इसी थानाक्षेत्र के हाथावाल की रहने वाली 55 वर्षीया रंभा देवी के साथ किया और रात के अंधेरे में गुम हो गया.

इन तीनों घटनाओं के बाद झंगहा क्षेत्र में दहशत फैल गई थी, क्योंकि इन घटनाओं में काफी समानता दिख रही थी. वह थी रात के समय हमले का होना. इस के बाद घर के लोग सतर्क रहने लगे और शाम के बाद महिलाओं के घर से बाहर निकलने पर रोक लगा दी. यह देख कर अजय को खूब मजा आता था और अकेले में ठहाका मार कर हंसता था. इन घटनाओं के बाद पुलिस हरकत में आई और यह पता लगाने में जुट गई कि आखिर वह कौन है, जो इस तरह रात के अंधेरे में महिलाओं को अपना शिकार बना कर और उसी अंधेरे में गुम हो जाता है.

3 महीने शांत रहने के बाद अजय ने चौथी घटना 9 नवंबर, 2024 को मंगलपुर की रहने वाली 32 वर्षीया शांति सिंह पत्नी सोनू सिंह के साथ की. उसे भी रात के समय डंडे से हमला कर बुरी तरह घायल कर दिया और रात के अंधेरे में कहीं गुम हो गया. इस घटना ने पुलिस की आंखों से नींद छीन ली थी. एसएसपी गौरव ग्रोवर भी यह सोचने पर मजबूर हो गए कि घटना चोरी के लिए नहीं, बल्कि जानबूझ कर की जा रही है. 

एक ही तरीके से घटना को अंजाम देने से एक बात पक्की हो गई थी कि रहस्यमय हमलावर जो भी होगा, उस के दिल में महिलाओं के प्रति नफरत भरी होगी. पुलिस अभी इसी सोचविचार में उलझी हुई थी कि पांचवीं घटना 4 दिनों बाद यानी 13 नवंबर, 2024 को इसी थानाक्षेत्र के जंगल रसूलपुर के टोला कटहरिया की रहने वाली 24 वर्षीया कविता पुत्री छोटेलाल भारती के साथ घटी. इस घटना के बाद पुलिस रहस्यमयी हमलावर के पीछे पड़ गई और 5 दिनों की अथक कोशिशों के बाद वैज्ञानिक विधि और मुखबिरों के सहयोग से अजय निषाद को गिरफ्तार करने में कामयाब हो गई. 

खैर, जो भी हो अजय के गिरफ्तार होने से क्षेत्र में डर तो कम हुआ, लेकिन रहस्यमयी हमलावर का दहशत अभी भी बरकरार है. जिनजिन महिलाओं पर उस ने कातिलाना हमला किया है वो महिलाए अभी भी पूरी तरह स्वस्थ नहीं हुई हैं. आरोपी 19 वर्षीय अजय निषाद से विस्तार से पूछताछ कर उस की निशानदेही पर घटना में प्रयुक्त डंडा, लोहे की रौड आदि बरामद करने के बाद उसे बिछिया स्थित गोरखपुर मंडलीय कारागार भेज दिया.

कथा लिखे जाने तक अजय निषाद सलाखों के पीछे था. घर वाले उस की जमानत की कोशिश में जुटे थे, लेकिन उस की जमानत हो नहीं पाई थी.

कथा में शिवानी परिवर्तित नाम है. कथा पुलिस सूत्रों पर आधारित

 

 

Punjab crime : रात में लड़की बनकर घूमता था सीरियल किलर, 18 महीने में किए 11 कत्ल

Punjab crime : एक खतरनाक सीरियल किलर (Serial Killer) की दास्तां, जिसने 11निर्दोष लोगों की हत्या कर दी. इस खौफनाक सीरियल किलर के वारदातों को सुनकर आप की रूह कांप उठेगी.

अक्सर ऐसे सीरियल किलर के बारे में पढ़ते रहे हैं जो आसानी से पकड़े नहीं जाते हैं, लेकिन यहां आपको एक अजीबोगरीब (Serial Killer) के बारे में बताने जा रहे हैं, जिसने धोखेबाजों को मारना अपना मिशन बना लिया था. वह कत्ल करने के बाद उनके पैर छूकर माफी मांगता और मारने के बाद उनकी पीठ पर ‘धोखेबाज’ लिख देता था.

दिन में पुरुष और रात में महिला दिखता

इस सीरियल  किलर का नाम रामस्वरूप है. जिसे पंजाब पुलिस ने पकड़ा है, यह सीरियल किलर एक अनोखी पहचान रखता है. रामस्‍वरूप दिन में दिन में पुरुष जैसी और रात में महिला जैसी रूप बनाता था. पंजाब पुलिस ने इस किलर की पहचान के लिए स्केच भी जारी किया था.

भूलने वाला सीरियल किलर

यह सीरियल किलर 11 कत्ल कर चुका था और कैमरे के सामने उसने अपना जुर्म कबूल कर लिया. हैरानी की बात यह है कि कबूल करने के बाद यह सीरियल किलर खुद कहता है कि मेरी याददाश्त कमजोर है और मुझे अभी तक याद नहीं है कि मैंने कितने कत्ल किए हैं. किलर अपने आप को एक भुलक्कड़ मानता है.

अजीबोगरीब हरकतें करनेवाला रामस्‍वरूप

रामस्‍वरूप कत्ल करने के बाद लोगों की पीठ पर धोखेबाज लिख देता था. इतना ही नहीं, वह मृतक के हाथ पैर पकड़कर उससे माफी भी मांगता था. इसकी इस अजीब हरकत ने उसे इसे एक रहस्यमय और डरावना शख्स बना दिया था.

इस सीरियल किलर ने 18 अगस्त को कीरतपुर साहिब गढ़ मोड़ा टोल प्लाजा के करीब चाय पानी की दुकान वाले 37 वर्षीय शख्स की हत्या कर दी और उसका मोबाइल अपने साथ ले गया. इसी मोबाइल के जरिए पुलिस मोबाइल बेचने वाले के पास पहुंचती है जहां उसे पता चलता है कि मोबाइल बेचने के लिए एक महिला आई थी लेक‍िन देखने में वह पुरुष जैसा लग रहा था. पंजाब पुलिस ने इस शख्स के जरिए सीरियल किलर का स्केच तैयार किया और उसकी तलाश शुरू की. मोबाइल और स्केच के आधार पर ही रामस्वरूप की पहचान और गिरफ्तारी संभव हो सकी. इसके बाद पंजाब पुलिस स्केच के आधार पर उस रामस्वरूप के पास तक पहुंचती है और उसे अरेस्ट कर लेती है.

जब पुलिस उसे पकड़ती है तो लगता है कि उसने सिर्फ एक कत्ल किया होगा लेकिन जब वह अपना मुंह खोलता है तो पुलिस शौक्‍ड रह जाती है उसने ऐसे खुलासे किए कि पुलिस कुछ ही देर में समझ गई कि वह एक खतरनाक सीरियल किलर के सामने खड़ी है.

किस तरह से करता था कत्ल

रामस्‍वरूप एक “गे सेक्स वर्कर” था. यह रात को महिलाओं की तरह सजता था और घूंघट में चेहरा ढक कर ग्राहकों की तलाश में जुड़ जाता. जब इसे कोई ग्राहक मिल जाता है तो वह उस ग्राहक से पैसे के लिए लड़ता और उस ग्राहक का गला घोंट कर हत्या कर देता.

पंजाब पुलिस के मुताबिक इस सीरियल किलर ने डेढ़ साल में 11 कत्ल किए है. अभी पुलिस इससे जुड़े और सबूत तलाश रही है.

Superstition : 10 साल में 12 कत्ल करने वाले तांत्रिक का खौफनाक रहस्य

Superstition : एक ऐसा सीरियल किलर जो बेहद शातिर और खतरनाक था, 6 महीने तक ड्राइवर बन कर छिपा रहा और लोगों व पुलिस की आंखों में धूल झोंकता रहा।

पुलिस भी उस की असलियत नहीं जान पाई थी. इस मास्टरमाइंड ने अपनी चालाकी और रहस्यमयी पहचान से लंबे समय तक कानून को मात देता रहा. इस सनकी कातिल ने 12 लोगों की हत्या की थी मगर लाख कोशिशों के बावजूद पुलिस को चकमा दे कर फरार हो जाता था। मगर कहते हैं न कि कानून के हाथ लंबे होते हैं और यही हुआ भी। एक दिन पुलिस के शिकंजे में यह आ ही गया।

उसे पकड़ने के लिए पुलिस को काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ा था. मीडिया की सुर्खियों में रही इस कातिल की कहानी ने सब को हैरान कर दिया था। जानते हैं, इस कातिल की रहस्य से जुड़ी क्राइम स्टोरी :

हम बात कर रहे हैं गुजरात के राजकोट में पुलिस हिरासत में लिए गए नवल सिंह और उसे पकड़वाने वाला शख्स जिगर गोहिल की. नवल सिंह नगमा (काल्पनिक नाम) महिला से प्यार करता था. दोनों के बीच प्यार हुआ तो फिर जिस्मानी ताल्लुकात भी बन गए। इस बीच नगमा उस पर शादी करने का दबाव डालने लगी। लेकिन वह शादी करने का झांसा देता रहता. इस के बाद प्यार का झूठा वायदा करने वाले इस तांत्रित प्रेमी ने उस महिला से पीछा छुड़ाने के लिए उस का कत्ल कर कर दिया. जब नगमा के मांबाप और उस के भाई को पता चला कि नगमा गुम है तो उस की तलाशी हुई. मांबाप और उस के भाई को नहीं पता था कि उस के तांत्रिक प्रेमी ने नगमा की हत्या कर उसे दफना दिया है.

पुलिस में शिकायत

जब नगमा के घर वाले अपनी बेटी को ढूंढ़ने में कामयाब नहीं हो पाए तो उन्होंने पुलिस में शिकायत दर्ज करा दी. तांत्रिक डरा हुआ था और जब उसे लगा कि पुलिस मेरे पास पहुंच सकती है तो उस ने एक साजिश रची. उस ने नगमा के मांबाप और भाई से बताया कि वह अपनी तंत्र (Superstition) विद्या से नगमा को ढूंढ़ सकता है मगर इस के लिए सब को एक सुनसान दरगाह पर आना होगा.

फिर तांत्रिक अपने षड्यंत्र में कामयाब हो गया और तीनों को प्रसाद में खतरनाक जहर मिला कर खिला दिया, जिस से तत्काल तीनों की मौत हो गई.

मौत के घाट उतार कर उस ने उन तीनों के पास एक सुसाइड नोट रख दिया. इस मर्डर में सीरियल किलर जिगर गोहिल भी था. पुलिस ने इस अपराधी को पकड़ कर हिरासत में रखा था, लेकिन अचानक लौकअप में उस की तबियत बिगड़ गई और वह मर गया.

इस की मौत को लेकर पुलिस खुद ताज्जुब कर रही थी। इस के बाद पुलिस द्वारा इस सीरियल किलर का पोस्टमार्टम कराया गया. जब पुलिस को पता चला कि उस की मौत हार्ट अटैक से हुई है तो पुलिस सोच में पड़ गई क्योंकि जिन 12 लोगों की मौत हुई थी उन की भी हार्ट अटैक से मौतें हुई थीं.

कौन था नवल

नवल एक तांत्रिक था। वह अपने झूठे तंत्रमंत्र का डर दिखा कर लोगों को फंसाता और उन के पैसे लूट कर मौत के घाट उतार दिया करता था. यह तांत्रिक अहमदाबाद के सुरेंद्र नगर में काला जादू किया करता था. इस को तांत्रिक बनने का आइडिया एक तांत्रिक को देख कर आया था. बाकी इस ने टीवी पर आने वाले क्राइम शो पर सीखा.

तांत्रिक जानता था कि बहुत से लोग लालच में पैसे या सोना डबल कराने के लिए तांत्रिक का सहारा लिया करते हैं. बस, इसी बात को जान कर उस ने लोगों को फायदा उठाना चालू कर दिया. इस तांत्रिक का काला जादू चल पडा. इस के बाद वह लोगों को ठगता चला गया.

2021 के एक रोड ऐक्सिडैंट में एक नौजवान की मौत हो गई थी. पुलिस इसे रोड ऐक्सिडैंट मान कर फाइल बंद कर दी। मगर उस के भाई को शक था कि उस का भाई रोड ऐक्सिडैंट में नहीं बल्कि किसी ने उस की हत्या की है. भाई की मौत का पता लगाने के लिए वह पुलिस के चक्कर काटता रहा, लेकिन पुलिस ने उस की एक भी बात नहीं मानी. इस के बाद वह अपने भाई के कातिल का पता करने में लग गया.

कौन था हत्यारा

उसे पता चला कि 1 महीने पहले उस का भाई एक तांत्रिक (Superstition) के संपर्क में आया था. उस का नाम नवल था. इस के बाद वह नवल के करीब जाने लग गया। उस को पता चला कि उस के पास भी एक कार है जिसे रात में टैक्सी के रूप में चलवाता है. नवल को एक टैक्सी ड्राइवर की जरूरत थी और वह उस के पास जा पहुंचा और पार्ट टाइम टैक्सी चलाने लगा.

उस का ड्राइवर बनने के बाद जिगर को पता चला कि तंत्रमंत्र के अलावा उस के और भी कई रूप हैं. इस के बाद जिगर 7 महीने तक उस का ड्राइवर बना और तंत्रमंत्र के अलावा सारी जानकारी इकट्ठा करने लगा.

जिगर ने नवल का भरोसा इतना जीत लिया था कि उसे अपने पूरे रहस्य बता दिया करता था. नवल ने जिगर से कहा कि एक बिजनैसमैन मेरे पास पैसे डबल कराने आने वाला है. फिर क्या था, नवल जिगर को लालच दे कर बोला कि कार की स्टैपनी में एक बोतल और उस में सोडियम नाइट्रेट नाम का रसायन छिपा हुआ है.

इस के साथ ही एक शराब की बोतल भी है. नवल ने प्लान बनाया था कि वह आदमी उस के पास पैसे डबल कराने आएगा तो तुम उसे इस शराब को पिला देना जिस से उस की मौत हो जाएगी. उस ने बताया कि इस रसायन को पिला कर उस ने कई लोगों को मौत के घाट उतार दिया है. उस ने बताया कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट में मौत की वजह हार्ट अटैक आती है. इस बात को सुन कर जिगर को यकीन हो गया था कि उस के भाई की भी मौत इस ने ही की है, क्योंकि पोस्टमार्टम में भी इसी रसायन का नाम आया था. इस के बाद वह पुलिस को मैसेज के जरिए इस बात की जानकारी देता है और अपनी लोकेशन भी बता देता है.

इस के बाद नवल को अरेस्ट कर लिया गया। पुलिस ने पूछताछ की तो उस की बात सुन कर हैरान हो गई थी क्योंकि पुलिस ने एक आम आदमी को अरेस्ट नहीं किया था बल्कि एक सीरियल किलर को अरेस्ट किया था क्योंकि यह किलर 10 साल में 12 कत्ल कर चुका था. पहला कत्ल दादी, दूसरा कत्ल मां और तीसरा कत्ल अपने चाचा का. पुलिस का कहना है कि नवल एक पैसे वाले तांत्रिक (Superstition) को जानता था जो इसी रसायन का प्रयोग किया करता था. पुलिस का मानना है कि 12 कत्ल से भी ज्यादा मौतों का आंकड़ा भी हो सकता था. इस से पूरी पूछताछ करने से पहले ही इस की मौत हो चुकी है.

‘कठपुतली’ रिव्यू : लड़कियों के सीरियल किलर की रहस्यमयी स्टोरी