पत्नी ने रचाई साजिश : 5 लाख की सुपारी देकर कराया पति का खौफनाक कत्ल

Crime News : मौडर्न और महत्त्वाकांक्षी विनीता ने प्रवक्ता पति के होते 2-2 प्रेमी बना लिए थे. जब वह चेन मार्केटिंग कंपनी ‘वेस्टीज’ से जुड़ने के बाद तो वह अवधेश को 2 कौड़ी का समझने लगी थी. आखिर उस ने अपने मन की करने के लिए…

42 वर्षीय अवधेश सिंह जादौन फिरोजाबाद जिले के भीतरी गांव के निवासी थे. वह बरेली जिले के सहोड़ा में स्थित कुंवर ढाकनलाल इंटर कालेज में हिंदी लेक्चरर के पद पर तैनात थे. नौकरी के चलते ढाई वर्ष पहले उन्होंने बरेली के कर्मचारीनगर की निर्मल रेजीडेंसी में अपना निजी मकान ले लिया था, जिस में वह अपनी पत्नी विनीता और 6 वर्षीय बेटे अंश के साथ रहते थे. 12 अक्तूबर, 2020 को अवधेश से फोन पर गांव में रह रही उन की मां अन्नपूर्णा देवी ने बात की थी. अवधेश उस समय काफी परेशान थे. मां ने उन्हें दिलासा दी कि जल्द ही सब ठीक हो जाएगा. इस के बाद उन्होंने अवधेश से बात करनी चाही, लेकिन बात न हो सकी. उन का मोबाइल बराबर स्विच्ड औफ आ रहा था. अन्नपूर्णा को चिंता हुई तो वह 16 अक्तूबर को बरेली पहुंच गईं. जब वह बेटे के मकान पर पहुंची, तो वहां मेनगेट पर ताला लगा मिला.

पड़ोसियों से पूछताछ की तो पता चला कि 12 अक्तूबर, 2020 को कुछ लोग कार से अवधेश के मकान में आए थे. तब से उन्हें नहीं देखा. अन्नपूर्णा का दिल किसी अनहोनी की आशंका से धड़कने लगा. वह वहां से स्थानीय थाना इज्जतनगर पहुंच गईं और थाने के इंसपेक्टर के.के. वर्मा को पूरी बात बताई. यह भी बताया कि अवधेश को अपने ससुरालीजनों से खतरा था. यह बात अवधेश ने 12 अक्तूबर को फोन पर बात करते समय मां को बताई थी. उस की पत्नी विनीता भी अपने बच्चे के साथ गायब थी. इस पर अन्नपूर्णा से लिखित तहरीर ले कर इंसपेक्टर वर्मा ने थाने में अवधेश सिंह जादौन की गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज करा दी.  फिरोजाबाद के फरिहा में 4/5 दिसंबर, 2019 की रात एक ज्वैलर्स की दुकान में हुई चोरी के मामले में पुलिस के एसओजी प्रभारी कुलदीप सिंह ने नारखी थाना क्षेत्र के धौकल गांव निवासी हिस्ट्रीशीटर शेर सिंह उर्फ चीकू को पकड़ा.

25 अक्तूबर, 2020 की शाम शेर सिंह को उठा कर जब उस से पूछताछ की गई तो उस ने बरेली के हिंदी प्रवक्ता अवधेश सिंह की हत्या करना स्वीकार किया. अवधेश की पत्नी विनीता ने अवधेश की हत्या के लिए उसे 5 लाख की सुपारी दी थी. इस में विनीता के पिता थाना नारखी के खेरिया खुर्द गांव निवासी रिटायर्ड फौजी अनिल जादौन, भाई प्रदीप जादौन, बहन ज्योति, विनीता का आगरा निवासी प्रेमी अंकित और शेर सिंह के 2 साथी भोला और एटा निवासी पप्पू जाटव शामिल थे. हत्या में कुल 8 लोग इस शामिल थे. शेर सिंह ने बताया कि बरेली में हत्या करने के बाद लाश को सभी लोग फिरोजाबाद ले कर आए और यहां नारखी में रामदास नाम के व्यक्ति के खेत में गड्ढा खोद कर दफना दिया था.

अवधेश मिला पर जीवित नहीं इस खुलासे के बाद फिरोजाबाद पुलिस ने बरेली की इज्जतनगर पुलिस को सूचना दी. अवधेश की मां अन्नपूर्णा को बुला कर 26 अक्तूबर, 2020 को फिरोजाबाद पुलिस ने तहसीलदार की उपस्थिति में उस खेत में बताई गई जगह पर खुदाई करवाई तो वहां से अवधेश की लाश मिल गई. चेहरा बुरी तरह जला हुआ था. शव को कब्जे में ले कर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया. अवधेश की लाश मिलने के बाद उसी दिन इज्जतनगर थाने में विनीता, ज्योति, अनिल जादौन, प्रदीप जादौन, अंकित, शेर सिंह उर्फ चीकू, भोला सिंह और पप्पू जाटव के विरुद्ध भादंवि की धारा 147/302/201 के तहत मुकदमा दर्ज कर लिया गया. इस के बाद हत्याभियुक्तों की तलाश में ताबड़तोड़ दबिश दी गई, लेकिन सभी अपने घरों से लापता थे.

उन सब के मोबाइल नंबर सर्विलांस पर लगवा दिए गए. सभी के मोबाइल बंद थे. बीच में किसी से बात करने के लिए कुछ देर के लिए खुलते तो फिर बंद हो जाते. उन की लोकेशन जिस शहर की पता चलती, वहां पुलिस टीम भेज दी जाती. लेकिन वहां पहुंचने से पहले ही हत्यारे वहां से निकल जाते थे. 31 अक्तूबर, 2020 को एक हत्यारोपी पप्पू जाटव उर्फ अखंड प्रताप को इंसपेक्टर के.के. वर्मा ने गिरफ्तार कर लिया. उस ने भी बयान में वहीं कहा, जो शेर सिंह ने कहा था. इस बीच 5 नवंबर को इज्जतनगर पुलिस ने सभी आरोपियों के गैरजमानती वारंट हासिल कर लिए. अगले ही दिन इस से डर कर अवधेश की पत्नी विनीता ने अपने वकील के माध्यम से थाने में आत्मसमर्पण कर दिया.

पूछताछ में वह अपने मृतक पति अवधेश को ही गलत साबित करने पर तुल गई. जबकि उस की सारी हकीकत सब के सामने आ गई. जब उस से क्रौस क्वेशचनिंग की गई. कई सवालों पर वह चुप्पी साध गई. अनिल जादौन परिवार के साथ फिरोजाबाद के गांव खेरिया खुर्द में रहते थे. वह सेना से रिटायर थे. परिवार में पत्नी रेखा और 3 बेटियां विनीता, नीतू और ज्योति व एक बेटा प्रदीप था. अनिल के पास पर्याप्त कृषियोग्य भूमि थी. तीनों बेटियां काफी खूबसूरत थीं और सभी ने स्नातक तक पढ़ाई पूरी कर ली थी. 2010 में नीतू का अफेयर गांव के ही पूर्व प्रधान के बेटे के साथ हो गया. जिस पर काफी बवाल हुआ. इस पर अनिल ने जल्द से जल्द अपनी बेटियों का विवाह करने का फैसला कर लिया. नारखी थाना क्षेत्र के ही गांव भीतरी में बाबू सिंह का परिवार रहता था.

परिवार में पत्नी अन्नपूर्णा और 2 बेटे रमेश और अवधेश थे. रमेश का विवाह हो चुका था और वह परिवार के साथ जयपुर में रह कर नौकरी कर रहा था. अविवाहित अवधेश हिंदी प्रवक्ता के पद पर नौकरी कर रहा था. नौकरी के चक्कर में उस की उम्र अधिक हो गई थी. अवधेश विनीता से 12 साल बड़ा था. फिर भी अनिल विनीता की शादी उस से करने को तैयार हो गए. अनिल ने विनीता से बात की तो वह मना करने लगी कि 12 साल बड़े लड़के से शादी नहीं करेगी. अनिल ने जब समझाया कि वह सरकारी नौकरी में है, उस के पास पैसों की कमी नहीं है तो वह शादी के लिए तैयार हो गई. 2011 में अवधेश का विनीता से विवाह हो गया. उसी दिन ज्योति का भी विवाह हुआ. विनीता मायके से ससुराल आ गई. विनीता पढ़ीलिखी आजाद खयालों वाली युवती थी. जबकि अवधेश सीधेसादे सरल स्वभाव का था. दोनों एक बंधन में तो बंध गए थे लेकिन उन के विचार, उन की सोच बिलकुल एकदूसरे से अलग थी.

पति सीधा था पत्नी मौडर्न विनीता को ठाठबाट से रहना पसंद था. जबकि अवधेश को साधारण तरीके से जीवन जीना अच्छा लगता था. दोनों की सोच और खयाल एक नहीं थे तो उन में आए दिन मनमुटाव और विवाद होने लगा. विनीता की अपनी सास अन्नपूर्णा से भी नहीं बनती थी. अवधेश अपनी मां की बात मानता था. विनीता इस बात को ले कर भी चिढ़ती थी. दोनों के बीच विवाद कम होने का नाम नहीं ले रहे थे. 6 साल पहले विनीता ने एक बेटे को जन्म दिया, जिस का नाम उन्होंने अंश रखा. ढाई वर्ष पहले बरेली के इज्जतनगर थाना क्षेत्र के कर्मचारी नगर की निर्मल रेजीडेंसी में अवधेश ने अपना निजी मकान ले लिया. पहले वह मकान विनीता के नाम लेना चाहता था.

लेकिन उस की बातें और हरकतों से उस का मन बदल गया. वह विनीता व बेटे के साथ अपने नए मकान में आ कर रहने लगा. बढ़ते आपसी विवादों में विनीता अवधेश से नफरत करने लगी थी. उस ने शादी से पहले सोचा था कि अवधेश उस के कहे में चलेगा, उस की अंगुलियों के इशारे पर नाचेगा, लेकिन वैसा कुछ नहीं हुआ. पैसों के लिए उसे अवधेश का मुंह देखना पड़ता था. अवधेश अपनी सैलरी से विनीता को उस के खर्च के लिए 3 हजार रुपए महीने देता था. उस में विनीता का गुजारा नहीं होता था. अपने खर्चे को देखते हुए विनीता ने घर में ही ‘रिलैक्स जोन’ नाम से एक ब्यूटीपार्लर खोल लिया. विनीता अपनी छोटी बहन ज्योति की ससुराल जाती थी. वहीं पर उस की मुलाकात सिपाही अंकित यादव से हो गई.

अंकित यादव बिजनौर का रहने वाला था. उस समय उस की पोस्टिंग मैनपुरी में थी. अंकित अविवाहित था और काफी स्मार्ट था. विनीता से उस की बात हुई तो वह उस के रूपजाल में उलझ कर रह गया. फिर दोनों मोबाइल पर बातें करने लगे. एक दिन अंकित विनीता से मिलने बरेली आया. दोनों एक होटल में मिले. उस दिन से दोनों के बीच प्रेम संबंध बन गए. विनीता से मिलने वह अकसर बरेली आने लगा. विनीता का भाई प्रदीप एक मल्टीलेवल मार्केटिंग कंपनी में नौकरी करता था. उस ने विनीता से कहा कि वह मल्टीलेवल मार्केटिंग से जुड़ी कंपनी ‘वेस्टीज’ से जुड़ जाए. इस में कम समय में ज्यादा पैसा कमाने का मौका मिलता है. चेन मार्केटिंग कंपनियां कंपनी से जुड़ने वाले लोगों को बड़ेबडे़ सपने दिखाती हैं.

विनीता ने भी कंपनी से जुड़ने का फैसला कर लिया. वह कई मीटिंग में गई और मीटिंग में जाने के बाद उस पर चेन मार्केटिंग के जरिए जल्द से जल्द पैसा कमा कर रईस बनने का नशा सवार हो गया. इस के लिए उस ने इसी साल की शुरुआत में कंपनी जौइन कर ली. इस के लिए विनीता ने किसी बड़ी महिला अधिकारी की तरह अपनी वेशभूषा बनाई. शानदार सूटबूट में चश्मा लगा कर जब वह इंग्लिश में बड़े विश्वास के साथ अपनी बात किसी भी व्यक्ति के सामने रखती तो वह उस का मुरीद हो जाता और उस के कहने पर कंपनी जौइन कर लेता. भाई प्रदीप की लाल टीयूवी कार विनीता अपने पास रखने लगी. वह इसी कार से लोगों से मिलने जाती थी.

लग्जरी कार से सूटेडबूटेड महिला को उतरता देख कर लोगों पर इस का काफी गहरा प्रभाव पड़ता. घर की चारदीवारी से विनीता बाहर निकली तो उस ने अपने लिए पैसों का इंतजाम करना शुरू कर दिया. अब लोग विनीता से मिलने घर पर भी आने लगे. विनीता की चल पड़ी दुकान अवधेश तो दिन में कालेज में होता था और शाम को ही लौटता था. उसे पड़ोसियों से पता चलता तो अवधेश और विनीता में विवाद होता. विनीता पहले जब अवधेश से नहीं डरीदबी तो अब तो वह खुद का काम कर रही थी. ऐसे में अवधेश को ही शांत होना पड़ता था. दोनों  के बीच की दूरियां गहरी खाई में तब्दील होती जा रही थीं. दूसरी ओर विनीता की बहन ज्योति का अपनी ससुरालवालों से मनमुटाव हो गया था. वह काफी समय से मायके में रह रही थी. विनीता ने उसे अपने पास रहने के लिए बुला लिया. इस से भी अवधेश खफा था.

लौकडाउन के दौरान फेसबुक पर विनीता की दोस्ती अमित सिसोदिया उर्फ अंकित से हुई. अमित आगरा का रहने वाला था और वेस्टीज कंपनी से ही जुड़ा था, जिस से विनीता जुड़ी थी. अमित विवाहित था और एक बेटे का पिता भी था. दोनों की फेसबुक पर बातें हुईं तो पता चला कि अमित विनीता के भाई प्रदीप का दोस्त है. इस के बाद दोनों खुल कर बातें करने लगे और मिलने भी लगे. दोनों अलगअलग शहरों में होने वाले कंपनी के सेमिनार में भी साथ जाने लगे. अमित और विनीता की सोच और विचार काफी मिलते थे. एक साथ रहने के दौरान विनीता को यह बात महसूस हो गई थी. दोनों ही जिंदगी में खूब पैसा कमाना चाहते थे. दोनों साथ बैठते तो कल्पनाओं की ऊंची उड़ान भरते. एक दिन अमित ने विनीता का हाथ अपने हाथ में ले कर कहा, ‘‘विनीता, हम दोनों बिलकुल एक जैसे है.

एक जैसा सोचते हैं, एक जैसा काम करते है और एक ही उद्देश्य है, एकदूसरे का साथ भी हमें भाता है. क्यों न हम हमेशा के लिए एक हो जाएं.’’

विनीता पहले हलके से मुसकराई, फिर गंभीर मुद्रा में बोली, ‘‘हां अमित, मैं भी ऐसा ही सोच रही थी. यह भी सोच रही थी कि तुम मेरी जिंदगी में पहले क्यों नहीं आए, आ जाते तो मुझे कष्टों से न गुजरना पड़ता.’’ कुछ पलों के लिए रुकी, फिर बोली, ‘‘खैर अब भी हम एक हो सकते हैं ठान लें तो.’’

विनीता की स्वीकृति मिलते ही अमित खुश हो गया, ‘‘तुम ने कह दिया तो अब हमें एक होने से कोई नहीं रोक सकता.’’ कह कर अमित ने विनीता को बांहों में भर लिया. विनीता भी उस से लिपट गई. अमित को पा कर जैसे विनीता ने राहत की सांस ली. उसे ऐसे ही युवक की तलाश थी जो उस के जैसा हो, उसे समझता हो और उस के लिए कुछ भी करने को तैयार हो जाए. दूसरी ओर वह अंकित यादव से भी संबंध बनाए हुए थी. विनीता दिनरात एक कर के अपने मार्केटिंग के बिजनैस में सफल होना चाहती थी. इसलिए वह इस में लगी रही. कुछ महीनों में ही उस ने अपने अंडर में एक हजार लोगों की टीम खड़ी कर दी. कंपनी ने उसे कंपनी का ‘सिलवर डायरेक्टर’ घोषित कर दिया.

विनीता खुशी से फूली नहीं समाई. कंपनी ने उसे एक स्कूटी भी इनाम में दी. विनीता अपनी कंपनी के कार्यक्रमों और उस के रिकौर्डेड संदेशों को अपने फेसबुक अकाउंट पर डालती रहती थी. कंपनी से जुड़ने के लिए लोगों से अपील भी करती थी कि उस के पास बिजनैस करने का एक अनोखा आइडिया है, जिस में महीने में 5 से 50 हजार तक कमा सकते हैं. जो कमाना चाहते हैं, उस से मिलें. विनीता की जिंदगी में सब कुछ अब अच्छा ही अच्छा हो रहा था. बस खटकता था तो अवधेश. उस के साथ होने वाली कलह. अब विनीता अवधेश से छुटकारा पाने की सोचने लगी थी. उस की जिंदगी में अमित आ चुका था, वह उस के साथ जिंदगी बिताने का सपना देखने लगी थी. अमित भी उस से कई बार कह चुका था कि वह कहे तो अवधेश को ठिकाने लगा दिया जाए. वह ही मना कर देती थी.

अवधेश के मरने से उसे हमेशा के लिए छुटकारा तो मिलता ही साथ ही अवधेश का मकान और सरकारी नौकरी भी मिल जाती. यही सोच कर उस ने आगे की योजना बनानी शुरू कर दी. इस में उस ने अपने पिता व भाई से साफ कह दिया कि वह अवधेश के साथ नहीं रहना चाहती. उसे मारने से उसे मकान और उस की सरकारी नौकरी भी मिलेगी. विनीता के पिता अनिल ने एक बार कहा भी कि वह अपना बसा हुआ घर न उजाड़े, लेकिन विनीता नहीं मानी. विनीता की जिद और लालच के लिए वे सभी उस का साथ देने को तैयार हो गए. विनीता का एक मुंहबोला चाचा था शेर सिंह उर्फ चीकू. वह उस के पिता अनिल का खास दोस्त था. शेर सिंह नारखी थाने का हिस्ट्रीशीटर था, उस पर वर्तमान में 16 मुकदमे दर्ज थे.

विनीता ने शेर सिंह से कहा कि उसे उस के पति अवधेश की हत्या करनी है. शेर सिंह ने उस से 5 लाख रुपए का इंतजाम करने को कहा तो विनीता ने हामी भर दी. अवधेश ने कार खरीदने के लिए घर में रुपए ला कर रखे थे. सोचा था कि नवरात्र में बुकिंग करा देगा और धनतेरस पर गाड़ी खरीद लेगा. उन पैसों पर विनीता की नजर पड़ गई. उन रुपयों में से 70 हजार रुपए निकाल कर विनीता ने शेर सिंह को दे दिए, बाकी पैसा बाद में देने को कहा. इस के बाद शेर सिंह ने अपने गांव के ही भोला सिंह और एटा के पप्पू जाटव को हत्या में साथ देने के लिए तैयार कर लिया. शेर सिंह ने विनीता, विनीता के पिता अनिल, भाई प्रदीप और प्रेमी अमित सिसोदिया के साथ मिल कर अवधेश की हत्या की योजना बनाई. विनीता ने बाद में ज्योति को इस बारे में बता कर उसे भी अपने साथ शामिल कर लिया.

12 अक्तूबर, 2020 की रात अवधेश रोज की तरह टहलने के लिए निकले. उस के जाने के बाद विनीता ने हत्या के उद्देश्य से पहुंचे शेर सिंह, भोला, पप्पू जाटव, अनिल, प्रदीप और अमित को घर के अंदर बुला लिया. सभी घर में छिप कर बैठ गए. कुछ देर बाद जब अवधेश लौटे तो घर में घुसते ही सब ने मिल कर उसे दबोच लिया. विनीता अपने बेटे अंश को ले कर ऊपरी मंजिल पर चली गई. नीचे सभी ने अवधेश को पकड़ कर उस का गला घोंट दिया. अवधेश के मरने के बाद विनीता नीचे उतर कर आई. अवधेश की लाश को बड़ी नफरत से देख कर गाली देते हुए उस में कस के पैर की ठोकर मार दी. देर रात अमित ने लाश को सभी के सहयोग से अपनी आल्टो कार में डाल लिया. इस के बाद प्रदीप की टीयूवी कार जो विनीता के पास रहती थी, सब उस में सवार हो गए.

प्रदीप कार चला रहा था. उस के पीछे थोड़ी दूरी पर अंकित चल रहा था. लगभग साढ़े 3 घंटे का सफर तय कर के अवधेश की लाश को ले कर वे फिरोजाबाद में नारखी पहुंचे. लेकिन तब तक उजाला हो चुका था. इसलिए लाश को कहीं दफना नहीं सकते थे. इन लोगों ने पूरा दिन ऐसे ही निकाला. इस बीच लाश को जलाने के लिए बाजार से तेजाब खरीद कर लाया गया. अंधेरा होने पर नारखी में रामदास के खेत में गड्ढा खोद कर अवधेश की लाश को उस में डाल दिया गया. फिर लाश पर तेजाब डाल दिया गया, जिस से लाश का चेहरा व कई हिस्से जल गए. लाश को दफनाने के बाद सभी वहां से लौट आए. विनीता बराबर वीडियो काल के जरिए उन लोगों के संपर्क में थी. 14 अक्तूबर, 2020 को वह भी बेटे अंश को ले कर घर से भाग गई.

शेर सिंह पकड़ा गया तो घटना का खुलासा हुआ. उस ने विनीता के प्रेमी अंकित का नाम लिया. घटना की खबर अखबारों की सुर्खियां बनीं तो विनीता के प्रेमी सिपाही अंकित यादव ने देखा. अंकित ने अपना नाम समझा. उसे लगा कि पुलिस को विनीता की काल डिटेल्स से उस के बारे में पता लग गया है. अब वह भी इस हत्याकांड की जांच में फंस जाएगा. दूसरी ओर अंकित नाम आने पर विनीता के शातिर दिमाग ने खेल खेला. अपने प्रेमी अमित सिसोदिया को बचाने के लिए वह अंकित को ही फंसाने में लग गई. 26 अक्तूबर, 2020 को वह अंकित यादव से मिलने संभल गई. 2 महीने से अंकित संभल की हयातनगर चौकी पर तैनात था. वहां वह उस से मिली. कुछ सिपाहियों ने उसे उस के साथ देखा भी. विनीता उस से मिल कर चली गई. अंकित भयंकर तनाव में आ गया.

27 अक्तूबर, 2020 को उस ने अपने साथी सिपाही की राइफल ले कर उस से खुद को गोली मार ली. अंकित के आत्महत्या कर लेने की बात विनीता को पता चल गई थी. इसलिए जब उस ने आत्मसमर्पण किया तो वह सारा दोष अंकित यादव पर डालती रही. वह अपने प्रेमी अमित सिसोदिया उर्फ अंकित को बचाना चाहती थी. समर्पण से पहले विनीता ने अपना मोबाइल भी तोड़ दिया था, ताकि पुलिस उस मोबाइल से कोई सुराग हासिल न कर सके. गैरजमानती वारंट जारी होने के बाद से सभी आरोपियों में इस बात का खौफ है कि पुलिस उन की संपत्तियों को तोड़फोड़ सकती है, कुर्क कर सकती है. इसलिए बारीबारी से सभी आत्मसमर्पण करने की तैयारी में लग गए.

फिलहाल कथा लिखे जाने तक पुलिस शेष आरोपियों की तलाश में जुटी हुई थी. शेर सिंह की रिमांड 20 नवंबर को मिलनी थी.

—कथा पुलिस सूत्रों व मीडिया में छपी रिपोर्टों के आधा

Murder Story : 5 लाख की सुपारी देकर कराया पति का कत्ल

Murder Story : संगीता ने अपने घर वालों से विद्रोह कर के पप्पू से प्रेम विवाह किया था. वह उस के 2 बच्चों की मां भी बनी. पप्पू ने उसे गांव का उपमुखिया भी बनवाया और उस के लिए 2-2 जगह मकान भी बनवाए. लेकिन जब उस की जिंदगी में लल्लन आया तो…

बिहार का जिला पूर्णिया. दिन रविवार, तारीखऊ 26 मई, 2019. समय शाम के 7 बजे. पप्पू यादव पूर्णिया की प्रभात कालोनी स्थित घर से अपने गांव चनका जाने के लिए निकला. दरअसल, पप्पू के 2 मकान थे, एक पूर्णिया की प्रभात कालोनी में और दूसरा गांव चनका में. प्रभात कालोनी में वह पत्नी संगीता और दोनों बच्चों के साथ रहता था. उस की पत्नी संगीता गांव की उपमुखिया थी और अपने बच्चों के साथ ज्यादातर पूर्णिया में रहती थी. घर से निकल कर पप्पू जब जगैल चौक स्थित राइस मिल के पास पहुंचा, तभी पीछे से तेज गति से आई एक बाइक आई और उस के सामने आ कर रुकी.

अचानक यह होने पर पप्पू की बाइक उस बाइक से टकराने से बालबाल बची. जैसे ही पप्पू ने अपनी बाइक के ब्रेक लगाए, वह जमीन पर फिसल गई. बाइक के गिरते ही पप्पू भी नीचे जा गिरा. पप्पू के सामने जो बाइक आ कर रुकी थी, उस पर 2 युवक सवार थे. फुरती के साथ दोनों युवक बाइक से नीचे उतरे और पप्पू के सामने जा खड़े हुए. उन दोनों को देख कर पप्पू समझ गया कि इन के इरादे ठीक नहीं हैं. खतरा भांप कर पप्पू बाइक को वहीं छोड़ कर विपरीत दिशा में भागा, वे दोनों युवक भी उस के पीछे दौड़े. दौड़तेदौड़ते एक युवक ने कमर से पिस्तौल निकाल कर उस पर ताबड़तोड़ गोलियां बरसानी शुरू कर दीं.

उस ने 7 गोलियां चलाईं. जो पप्पू के सिर से ले कर कमर तक लगीं. गोलियां लगते ही पप्पू जमीन पर गिर गया. खून से तरबतर पप्पू कुछ तड़पता रहा फिर उस की मौत हो गई. उस के मरने के बाद बदमाश जिस ओर से आए थे, अपनी बाइक से उसी ओर भाग गए. दिनदहाड़े बाजार के नजदीक गोलियां चलने से बाजार में भगदड़ मच गई. लोग धड़ाधड़ अपनी दुकानों के शटर गिराने लगे. इसी बीच किसी ने 100 नंबर पर फोन कर के पुलिस कंट्रोल रूम को हत्या की सूचना दे दी थी. वह इलाका श्रीनगर थाना क्षेत्र में आता था. पुलिस कंट्रोल रूम ने घटना की सूचना श्रीनगर थाने को दे दी.

सूचना मिलते ही थानाप्रभारी संजय कुमार सिंह पुलिस टीम के साथ घटनास्थल की तरफ रवाना हो गए. उपमुखिया का पति था मृतक मौके पर पहुंच कर पुलिस ने लहूलुहान पड़े शख्स का मुआयना किया. उस के शरीर में कोई हरकत नहीं हो रही थी, वह मर चुका था. पुलिस ने वहां मौजूद लोगों से लाश की शिनाख्त करानी चाही तो भीड़ में से एक युवक ने लाश की पहचान कर ली. उस ने बताया कि मृतक का नाम पप्पू यादव है. वह चनका पंचायत क्षेत्र की उपमुखिया संगीता का पति है. लाश की शिनाख्त होते ही पुलिस ने थोड़ी राहत की सांस ली और उपमुखिया संगीता से फोन पर संपर्क कर उन्हें दुखद सूचना दे कर मौके पर बुलाया.

संगीता पति की हत्या की सूचना पाते ही दहाड़ें मार कर रोने लगी. घर पर वह जिस अवस्था में थी, उसी में बच्चों को साथ ले कर घटना स्थल पर पहुंच गई. बदमाशों ने पप्पू को गोलियों से छलनी कर दिया था. सूचना पा कर थोड़ी देर में एसपी विशाल शर्मा और एसडीपीओ (सदर) आनंद पांडेय भी मौके पर आ गए थे. पुलिस अधिकारियों ने घटनास्थल का मुआयना किया. मृतक के शरीर पर गोलियों के कई घाव थे. घटनास्थल से कुछ दूर उस की बाइक जमीन पर गिरी पड़ी थी. यह देख पुलिस अधिकारियों ने अनुमान लगाया कि पप्पू की हत्या बदमाशों ने लूट के लिए नहीं की है. अगर बदमाश लूट के लिए करते तो बाइक अपने साथ ले जाते.

चूंकि हत्या उपमुखिया के पति की हुई थी. इसलिए स्थिति विस्फोटक बन सकती थी, इस से पहले कोई व्यक्ति कानून अपने हाथ में लेता, एसएसपी ने जरूरी लिखापढ़ी पूरी करवा कर लाश पोस्टमार्टम के लिए जिला अस्पताल, पूर्णिया भिजवा दी. अगली सुबह यानी 27 मई को उपमुखिया संगीता के पति पप्पू यादव हत्याकांड को ले कर उपमुखिया के समर्थकों ने शहर में जगहजगह तोड़फोड़ की. वे हत्यारों को जल्द से जल्द गिरफ्तार करने की मांग कर रहे थे. एसपी विशाल शर्मा मौके पर पहुंच गए. उन्होंने लोगों को आश्वासन दिया कि पप्पू यादव के हत्यारों को जल्द से जल्द गिरफ्तार कर लिया जाएगा.

विशाल शर्मा के आश्वासन के बाद आंदोलनकारी शांत हुए. इस के तुरंत बाद थानाप्रभारी संजय कुमार सिंह ने केस की जांच शुरू कर दी. प्रभात कालोनी पहुंच कर उन्होंने संगीता से मुलाकात की और उन से पूछा कि किसी पर कोई शक वगैरह हो तो बताएं. संगीता ने पति की हत्या में पट्टीदारों की भूमिका पर शक जाहिर किया. वर्षों से दोनों परिवारों के बीच जमीन को ले कर विवाद चल रहा था. संगीता के बयान के आधार पर पुलिस ने पट्टीदारों को हिरासत में ले लिया. उन से सख्ती से पूछताछ की गई, लेकिन पप्पू यादव की हत्या में उन की कोई भूमिका नजर नहीं आई तो पुलिस ने कुछ खास हिदायतें दे कर उन्हें छोड़ दिया. इस के अलावा पुलिस ने और भी कई संदिग्धों से पूछताछ की, लेकिन हत्यारों का कोई सुराग नहीं मिल सका.

देखतेदेखते इस घटना को घटे 15 दिन बीत गए. पुलिस जांच जहां से चली थी, वहीं आ कर रुक गई. उस की समझ में नहीं आ रहा था कि पप्पू की हत्या किस वजह से हुई और हत्यारा कौन है? इस के बाद थानाप्रभारी ने मृतक पप्पू और उस की पत्नी उपमुखिया संगीता के फोन नंबरों की काल डिटेल्स निकलवाई. इस के अलावा सुरागरसी के लिए मुखबिरों को भी लगा दिया. दोनों की काल डिटेल्स का पुलिस ने बारीकी से अध्ययन किया. पुलिस को मिला सुराग संगीता की फोन की काल डिटेल्स देख कर पुलिस चौंकी. घटना से कुछ देर पहले और घटना से कुछ देर बाद संगीता की एक ही नंबर पर लंबी बातचीत हुई थी. खास बात यह थी कि उस नंबर पर संगीता की कई दिनों से लंबीलंबी बात हो रही थी. यह बातचीत अधिकतर रात के समय ही होती थी. यह बात पुलिस को हजम नहीं हो रही थी.

पुलिस ने उस नंबर की काल डिटेल्स निकलवा कर जांच की तो वह मोबाइल नंबर लल्लन कुमार यादव, निवासी भोकराहा, पूर्णिया का निकला. इस जानकारी के बाद पुलिस लल्लन पर नजर रखने लगी. उस के बारे में गोपनीय तरीके से सारी जानकारी एकत्र की जाने लगीं. जांच में पता चला कि लल्लन यादव उपमुखिया संगीता का दूर के रिश्ते का देवर है. वह संगीता के प्रभातनगर कालोनी स्थित मकान पर अकसर आताजाता था. इसी दरम्यान दोनों के बीच प्रेम हो गया था. पुलिस को तब और हैरानी हुई, जब पता चला कि लल्लन यादव ने घटना से 2 दिन पहले संगीता के आईडीबीआई बैंक खाते से एक लाख रुपए निकाले थे. यह रुपए संगीता ने लल्लन को नई बाइक खरीदने के लिए दिए थे. इस से पुलिस को यकीन हो गया कि पप्पू की हत्या में मृतक की पत्नी संगीता और उस के प्रेमी लल्लन यादव का हाथ है.

पुलिस ने दोनों के घर दबिश दी तो दोनों ही फरार मिले. पप्पू यादव हत्याकांड को धीरेधीरे 3 महीने बीत चुके थे. इस दौरान मुखबिर ने पुलिस को इत्तला दी थी कि पप्पू की हत्या मुंगेर जिले के बरियापुर के रहने वाले शार्प शूटर संतोष चौधरी और उस के साथी निशांत यादव ने की थी. शार्प शूटर संतोष चौधरी का नाम सामने आते ही पुलिस चौंकी, क्योंकि संतोष कौन्ट्रैक्ट किलर था. पैसे ले कर हत्या करना उस का पेशा था. मुंगेर सहित बिहार के कई जिलों में उस के खिलाफ हत्या और हत्या के प्रयास के कई मुकदमे दर्ज थे. वह पुलिस को चकमा देने में माहिर था. जिले के विभिन्न इलाकों में बड़ी घटनाओं को अंजाम देने के बावजूद वह केवल 1-2 बार जेल गया था.

शार्प शूटर संतोष की हुई तलाश पुलिस संतोष को पकड़ने की योजना बना ही रही थी कि 31 अगस्त, 2019 की शाम मुखबिर ने थानाप्रभारी संजय कुमार सिंह को एक ऐसी सूचना दी, जिसे सुनते ही उन की बांछे खिल उठीं. सूचना यह थी कि पप्पू यादव हत्याकांड को अंजाम देने वाला शार्प शूटर संतोष चौधरी अपने दोस्त निशांत यादव के साथ किसी टारगेट को पूरा करने के लिए अगली सुबह यानी पहली सितंबर, 2019 को आ रहा है. मुखबिर की सूचना पर थानाप्रभारी संजय कुमार सिंह ने उसी रात संतोष और निशांत को गिरफ्तार करने की रणनीति बनाई. उन्होंने इस मिशन को इतना गुप्त रखा कि टीम के 7 सदस्यों के अलावा 8वें को खबर तक नहीं लगने दी.

पहली सितंबर, 2019 की सुबह थानाप्रभारी संजय कुमार सिंह अपनी टीम के साथ खुट्टी धुनौल चौकी के पास सादा कपड़ों में दुपहिया वाहनों की चैकिंग में जुट गए. मुखबिर ने बदमाशों को यहीं आना बताया था. सुबह 8 बजे के करीब 2 युवक अपाचे मोटरसाइकिल पर चौकी की ओर आते दिखाई दिए. बाइक पर वही नंबर अंकित था जो मुखबिर ने बताया था. जैसे ही वे नजदीक आए पुलिस ने उन्हें चारों ओर से घेर लिया. तलाशी के दौरान बदमाशों के पास से एकएक लोडेड पिस्तौल, संतोष के पास से 5 जिंदा कारतूस और 2 मोबाइल फोन और निशांत के पास से एक मोबाइल फोन बरामद हुए. नाम पूछने पर दोनों ने अपने नाम संतोष चौधरी और निशांत यादव बताए.

3 महीनों से पुलिस को इन्हीं दोनों बदमाशों की तलाश थी. पुलिस दोनों को गिरफ्तार कर के थाने ले आई और उन से सख्ती से पूछताछ शुरू की तो दोनों ने अपना जुर्म कबूल कर लिया. शूटर संतोष चौधरी ने पुलिस को बताया कि पप्पू की हत्या के लिए उस की पत्नी संगीता देवी ने लल्लन यादव के मार्फत 5 लाख की सुपारी दी थी. पेशगी के तौर पर लल्लन यादव ने उसे सवा लाख रुपए दिए थे. बाकी रुपए काम हो जाने के बाद देने का वादा किया था. जो अब तक नहीं मिला. उसी दिन मुखबिर की सूचना पर पुलिस ने लल्लन यादव को भी गिरफ्तार कर लिया. पुलिस ने लल्लन यादव का सामना जब संतोष चौधरी से कराया तो उस के होश उड़ गए.

अंतत: उस ने भी अपना जुर्म कबूलते हुए पुलिस को सब कुछ बता दिया. उस ने प्रेमिका के इशारे पर पप्पू की हत्या का तानाबाना बुना था. पप्पू की हत्या का खुलासा हो चुका था. तीनों आरोपियों लल्लन यादव, संतोष चौधरी और निशांत यादव से पूछताछ के बाद पप्पू यादव की हत्या की जो कहानी सामने आई इस प्रकार थी. 35 वर्षीय पप्पू यादव मूलरूप से पूर्णिया जिले के श्रीनगर थाना क्षेत्र के चनका गांव का रहने वाला था. 3 भाई बहनों में पप्पू सब से बड़ा था. धनदौलत और खेतीबाड़ी से मजबूत पप्पू मिलनसार और मेहनती था. उस ने अपनी मेहनत के बलबूते पर पैसा भी कमाया था और रुतबा भी.

बात सन 2007 की है. जातेआते पड़ोस के गांव की संगीता से पप्पू की आंखें लड़ गईं. दोनों का प्यार बढ़ा तो 31 जनवरी, 2008 को उन्होंने भाग कर पहले मंदिर में और फिर कोर्ट में शादी कर ली. शादी के बाद दोनों परिवारों के बीच खूब हंगामा हुआ था. इस के बाद संगीता के घर वालों ने उस से हमेशा के लिए रिश्ता तोड़ लिया था. पप्पू के घर वालों ने संगीता को बहू के रूप में स्वीकार लिया था. पप्पू और संगीता ने किया था प्रेम विवाह संगीता को जीवन साथी के रूप में पा कर पप्पू खुश था. वह उस से इतना प्यार करता था कि उस के लिए कुछ भी करने को तैयार रहता था. दोनों की गृहस्थी हंसीखुशी से चल रही थी. समय के साथ संगीता 2 बच्चों की मां बन गई, जिस से परिवार की खुशियां और बढ़ गईं.

इसी दौरान गांव में हुए मुखिया के चुनाव में संगीता उपमुखिया चुन ली गई. उपमुखिया बन जाने के बाद पढ़ीलिखी संगीता के भाग्य ने करवट ली. गांव वालों के काम से संगीता और पप्पू का पूर्णिया शहर के अधिकारियों के पास आनाजाना शुरू हो गया. इसी के मद्देनजर पप्पू ने पूर्णिया की प्रभात कालोनी में भी मकान बनवा लिया था. शहर में मकान हो जाने के बाद संगीता का मन गांव में नहीं लगता था. बच्चों और पति के साथ वह शहर वाले मकान में आ गई थी. संगीता और पप्पू कभी गांव में रहते थे तो कभी पूर्णिया में. सन 2016 में पप्पू के दूर के रिश्ते का भाई लल्लन बीए की पढ़ाई के लिए पूर्णिया आया और किराए का कमरा ले कर अकेला रहने लगा. लल्लन जानता था उस के भाईभाभी भी पड़ोस में रहते हैं. कभीकभी वह उन से मिलने प्रभात कालोनी आ जाता और घंटों साथ बिता कर अपने कमरे पर लौट जाता था.

लल्लन की रिश्ते की भाभी संगीता चुलबुली और मजाकिया स्वभाव की थी, तो लल्लन भी कुछ कम नहीं था. 20-21 साल का लल्लन भी मजाकिया था. वह दिल खोल कर भाभी से मजाक करता था. लल्लन से बातें कर के संगीता को अच्छा लगता था. देवरभाभी के बीच का मजाक कभीकभी तो निम्न स्तर तक पहुंच जाता था. भद्दी मजाक सुन कर संगीता बुरा मानने के बजाय मजे लेती थी. मजाकमजाक में ही देवर और भाभी के बीच आंखें चार हुईं. यह सन 2016 की बात है जब लल्लन संगीता के संपर्क में आया था. लल्लन और संगीता का प्यार परवान चढ़ा तो दोनों अपनेअपने हिसाब से भविष्य के सपने देखने लगे. 2 बच्चों की मां संगीता यह भूल गई थी वह किसी और की पत्नी है. पप्पू के प्यार के लिए उन से घर वालों से बगावत कर के हमेशा के लिए रिश्ता तोड़ा था. लल्लन के प्यार में वह सब कुछ भुला बैठी थी. उस की आंखों में सिर्फ लल्लन का प्यार झलकने लगा था.

दोनों के बीच प्यार का सिलसिला आगे बढ़ा तो लल्लन ने संगीता से बातचीत के लिए फरजी नाम और पते पर 2 मोबाइल सिम ले लिए. जिस में से एक सिम का उपयोग लल्लन खुद करता था और दूसरे मोबाइल फोन और सिम का इस्तेमाल संगीता करती थी. किसी को शक न हो, इसलिए दोनों बीचबीच में यह सोच कर सिम की अदलाबदली कर लेते थे, ताकि मामला अगर कभी पकड़ में आए तो पुलिस के हाथ उन तक नहीं पहुंच पाएं. पतिपत्नी के बीच लल्लन बना खलनायक पूर्णिया में रहते हुए लल्लन कुछ अपराधियों के संपर्क में आ गया था. पैसों की जरूरत के लिए वह अपराध की दलदल में भी उतर गया था. वह जिन बदमाशों के संपर्क में था, वे अवैध असलहों और कारतूसों के बड़े सप्लायर थे. इसी चक्कर में लल्लन 3 घटनाओं में अरोपी बन गया था.

अवैध असलहों की तस्करी के मामले में पुलिस ने उसे अगस्त 2018 में गिरफ्तार कर जेल भेजा था. पूर्णिया जेल में ही लल्लन की मुलाकात मुंगेर जिले के बरियारपुर के रहने वाले शूटर संतोष चौधरी से हुई. वह पैसे ले कर हत्याएं करता था. पप्पू को अपनी पत्नी संगीता और लल्लन के अवैध संबंधों की जानकारी हो गई थी. लल्लन को ले कर दोनों के बीच अकसर विवाद भी होता था. यह विवाद इतना बढ़ जाता था कि उन के बीच हाथापाई तक की नौबत आ जाती थी. संगीता किसी भी हालत में लल्लन से अलग होने के लिए तैयार नहीं थी. उस ने पति से साफ कह दिया था कि वह लल्लन के बिना नहीं जी सकती. भले ही जिस्म पर तुम्हारा (पप्पू) अधिकार हो लेकिन इस दिल पर लल्लन का अधिकार है, मुझे उस से कोई अलग नहीं कर सकता, तुम भी नहीं.

पत्नी का दोटूक जवाब सुनने के बाद पप्पू का पुरुषत्व ललकार उठा. वह क्या कोई भी पति सहन नहीं कर सकता कि उस की पत्नी उस के जीते जी किसी गैरमर्द की बाहों में झूले. संगीता और पप्पू अपनीअपनी जिद पर अड़े थे, जिस की वजह से दोनों की जिंदगी विवादों के ऐसे तूफान में घिर गई जिस से उन के जीवन का तिनकातिनका बिखेर दिया. घर से जैसे सुकून और शांति दोनों ही रूठ गईं. घर में आए दिन किचकिच होती रहती थी. संगीता पति को समझने लगी नासूर संगीता लल्लन के प्यार में पागल थी. जो पप्पू कभी उस के सपनों का राजकुमार था, वही उस के लिए खलनायक बन गया था. संगीता पप्पू नाम के खलनायक को अपनी जिंदगी से हमेशा के लिए उखाड़ फेंकना चाहती थी. इस के लिए वह लल्लन के जेल से आने का इंतजार कर रही थी. आखिर वह अपने प्रेमी की जमानत के लिए खुद आगे आई और वकील से बात कर उस की जमानत करा दी.

फरवरी 2019 में जब लल्लन जेल से बाहर आया तो उस ने पप्पू को अपने रास्ते से हटाने की योजना बनाई. दरअसल संगीता ने लल्लन से कह दिया था कि अगर मुझे पाना चाहते हो तो पप्पू नाम के कांटे को हमेशा के लिए रास्ते से हटा दो. अगर ऐसा नहीं कर सकते तो मुझे भूल जाओ, फिर कभी मेरे दरवाजे पर मत आना. प्रेमिका के गुस्से को देख कर लल्लन डर गया और उस ने उस की बात मानने के लिए हामी भर दी. उस दिन के बाद उस ने संतोष चौधरी की तलाश शुरू कर दी. संतोष भी जमानत पर जेल से बाहर आ चुका था. संतोष चौधरी से फोन पर बात कर लल्लन यादव ने पप्पू यादव की हत्या की बात की. 5 लाख रुपए में सौदा हो गया. संतोष ने पेशगी के रूप में 2 लाख रुपए मांगे. बाकी की रकम काम हो जाने के बाद देने की बात हुई.

हत्या के नाम पर लल्लन ने खरीदी बाइक लल्लन ने यह बात संगीता को बता दी. संगीता ने अपने आईडीबीआई बैंक एकाउंट से 2 लाख रुपए निकाल कर लल्लन को दे दिए. लल्लन ने चालाकी करते हुए उस पैसे में से शूटर को एक लाख 25 हजार रुपए दिए और बाकी रकम अपने पास रख ली. घटना से 2 दिन पहले लल्लन ने अपने लिए नई बाइक खरीदने के लिए संगीता से एक लाख रुपए की और डिमांड की. संगीता ने उसे एक लाख रुपए और दे दिए. सब कुछ योजना के अनुसार चल रहा था. संगीता और पप्पू के बीच मनभेद और मतभेद दोनों ही चल रहे थे. 26 मई, 2019 की शाम साढ़े 7 बजे जब शहर वाले घर से अपनी बाइक से गांव चनका के लिए निकला तो संगीता ने फोन कर के लल्लन को बता दिया. लल्लन ने यह बात शूटर संतोष चौधरी को बता दी.

लल्लन की काल आने के बाद संतोष चौधरी अपने साथ निशांत यादव को साथ ले कर जगैल चौक राइस मिल के पास घात लगा कर खड़ा हो गया. संतोष 2 दिन से पप्पू पर नजर रखे हुए था. वह उस की रेकी कर रहा था कि वह कब, कहां और कैसे जा रहा है. जब वह निश्चिंत हो गया था कि पप्पू के आनेजाने का एकमात्र रास्ता यही है तो वहीं घात लगा कर खड़ा हो गया. जैसे ही पप्पू अपनी बाइक से जगैल चौक राइस मिल के पास पहुंचा, पहले से मौजूद संतोष ने उस के पीछेपीछे अपनी बाइक लगा दी और ओवरटेक कर के उस की बाइक रोक ली. बाइक संभालते समय पप्पू फिसल कर जमीन पर जा गिरा. इस से पहले कि वह कुछ समझ पाता, संतोष ने पिस्तौल निकाल कर उस पर तान दी. पप्पू जान बचा कर वहां से भागा तो संतोष और निशांत यादव ने उसे दौड़ा कर गोलियों से भून डाला.

पप्पू की हत्या करने के बाद संतोष चौधरी ने लल्लन को फोन कर के बता दिया था कि उस ने टारगेट पूरा कर दिया है. बाकी की रकम उसे जल्द से जल्द मिल जानी चाहिए. लल्लन ने फोन कर के यह बात संगीता को बता दी. पति की हत्या की खबर सुन कर संगीता खुश हुई. बाद में पुलिस द्वारा फोन करने पर वह घडि़याली आंसू बहाते हुए घटनास्थल पर पहुंची, लेकिन उस की चालाकी धरी की धरी रह गई. अंतत: वह वहां पहुंच गई, जहां उसे अपने कर्मों की सजा भोगनी है.

कथा लिखे जाने तक उपमुखिया संगीता गिरफ्तार की जा चुकी थी. तीनों आरोपियों लल्लन यादव, संतोष चौधरी और निशांत यादव के साथ वह भी जेल की सलाखों के पीछे पहुंच गई. पुलिस ने केस की तफ्तीश कर चारों के खिलाफ अदालत में आरोपपत्र दाखिल कर दिया.

—कथा पुलिस सूत्रों पर आधारित