True crime Story: सुरजीत सिंह ने अपनी एकलौटी बेटी बरखा की शादी ब्रिटेन में रहने वाले एनआरआई जसबीर से इसलिए की थी ताकि उस की जिंदगी हंसीखुशी से कट सके. लेकिन ब्रिटेन पहुंचने पर उसे पति की सच्चाई पता चली तो…
रात का दूसरा पहर अपने अंतिम पड़ाव पर था. बावजूद इस के बिस्तर पर लेटी बरखा की आंखों से नींद कोसों दूर थी. नींद आती भी तो कैसे? एक एनआरआई लड़के के साथ अगले दिन उस की सगाई जो होने वाली थी. इसलिए उस की आंखों में नींद की जगह हसीन ख्वाबों ने डेरा जमा रखा था. वह पलकें बंद किए रहरह कर मुस्कराए जा रही थी. वह खुद भी नहीं चाहती थी कि वे ख्वाब उस की आंखों से दूर हों. आखिर उसे एक अजीब से आनंद की अनुभूति जो हो रही थी. समय कब रुकता है. वह तो अपनी गति से सरकता जा रहा था. रात का तीसरा और फिर चौथा पहर भी यूं ही गुजर गया. सुबह के उजाले ने दस्तक दे दी थी. अन्य दिनों की अपेक्षा उस दिन उस ने कुछ पहले ही बिस्तर छोड़ दिया.
उस के चेहरे पर ताजगी देख कर कोई नहीं कह सकता था कि वह रात भर सोई नहीं थी. चेहरे पर मुस्कराहट अब भी कायम थी. दिल उमंगों से भरा था और रोमरोम रोमांचित हो रहा था. बरखा रानी पंजाब के होशियारपुर जिले के रहने वाले सुरजीत सिंह की इकलौती बेटी थी. यही कारण था कि वह सब की लाडली थी. वह सुंदर तो थी ही साथ ही पढ़ने में तेज थी. उस का हंसमुख व चंचल स्वभाव सभी को पसंद था. उस ने संस्कारों का दामन सदा थामे रखा था, तभी तो कभी कोई ऐसा कदम उठाने की गलती नहीं की, जिस से किसी को उस के चरित्र पर अंगुली उठाने का मौका मिले.
यही कारण था कि मांबाप भी उस पर पूरा भरोसा करते थे. एमए करने के बाद बरखा टीचर बनना चाहती थी, पर उस के पिता सुरजीत सिंह नहीं चाहते थे कि बेटी शादी से पहले नौकरी करे. वह चाहते थे कि पढ़ालिखा कर उस की शादी अपनी ही बिरादरी के किसी ऐसे संस्कारी युवक से करें, जो विदेश में रह कर खूब कमाता हो ताकि बेटी सुखी रह सके. उन के कई रिश्तेदार और परिचित विदेश में रहते थे. उन से भी उन्होंने बरखा के लिए कोई एनआरआई लड़का देखने के लिए कह दिया था. कुछ दिनों बाद उन के एक रिश्तेदार ने उन्हें बरखा के लिए एक लड़का बताया. वह अच्छा पढ़ालिखा होने के साथ संस्कारी भी था और ब्रिटेन में रह कर अच्छा कमा रहा था.
उस युवक का नाम था जसबीर राम गिंडे. वैसे जसबीर भी पंजाब का ही रहने वाला था. वहीं से उस ने बीटेक की पढ़ाई की थी. फिर आईटी क्षेत्र में महारत हासिल कर के वह ब्रिटेन चला गया था. वहां आईटी औफिसर के पद पर उस की नौकरी स्काटलैंड के रायल बैंक में लग गई थी. 2 साल बाद जब वह वहां ठीक से स्थापित हो गया तो अपने परिवार को भी वहीं ले गया. उस के परिवार में मांबाप के अलावा एक छोटी बहन थी. उस ने विक्टरी लेन, रीड्सवुड में एक बंगला भी खरीद लिया था. बंगला खरीदने में उस के पिता ने भी अपनी जमीन बेच कर उस की आर्थिक मदद की थी.
जसबीर गिंडे 28 साल का हो गया था. सो उस के मातापिता चाहते थे कि जल्दी से उस के सिर पर सेहरा बांध दें. बेटे का घर बसाने के बाद वह बेटी के भी हाथ पीले करना चाहते थे. क्यों कि वह भी 26 साल की हो चली थी. वैसे वह बेटी की शादी पहले करनी चाहते थे. लेकिन उस ने शर्त रखी थी कि वह भाभी के आने बाद ही घर से विदा होगी. जसबीर शादी नहीं करना चाहता था, पर मांबाप की इच्छा के आगे उसे झुकना पड़ा. यह अक्टूबर, 2012 की बात है. पिता के कहने पर जसबीर शादी के उद्देश्य से परिवार सहित भारत आया था. पहली नजर में ही उसे बरखा की खूबसूरती भा गई.
उस के मातापिता व बहन को भी बरखा पसंद आ गई थी. वहीं बरखा व उस के मातापिता को भी जसबीर और उस का परिवार पसंद आ गया था. इसलिए उन का रिश्ता तय हो गया. उसी समय यह बात भी तय हो गई कि शादी यानी आनंदकारज की रस्म मार्च, 2013 में होगी. रिश्ता पक्का होने के बाद जसबीर और बरखा करीब एक सप्ताह साथ घूमेफिरे, ताकि एकदूसरे को और अच्छे से जान सकें. इस दौरान दोनों ही खुश और संतुष्ट थे. जसबीर को लगा कि बरखा उस के लिए एक सफल जीवनसाथी सिद्ध होगी. वहीं बरखा को भी लगा कि उस ने जिस तरह के युवक के साथ जिंदगी जीने का ख्वाब देखा था, जसबीर वैसा ही है.
करीब 15 दिन भारत में रह कर जसबीर परिवार के साथ ब्रिटेन लौट गया. जाते समय बरखा ने उस से मुस्करा कर कहा था, ‘‘मैं तुम्हारा सेहरा बांध कर आने का इंतजार करूंगी.’’
बरखा और जसबीर की फोन पर अकसर बातें होती रहती थीं. इसी तरह वक्त गुजरता गया. मार्च, 2013 का महीना भी आ गया. शादी की तारीख से एक सप्ताह पहले ही जसबीर का परिवार भारत आ गया. आते ही वह बरखा से मिला. दोनों ने घंटों साथ बिताए. इस के बाद बरखा की नींद गायब हो गई. नींद की जगह जसबीर की यादों ने ले ली थी. सगाई तय होने के अगले दिन दोनों गुरुग्रंथ साहिब के समक्ष गुरुद्वारे में सात फेरों के बंधन में बंध गए. एक सादा समारोह में शादी करने के बाद दोनों परिवारों की तरफ से एक बैंक्वेट हाल में रिसैप्शन दिया गया, जिस में करीब 700 लोगों ने शिरकत की.
घर से विदा होने के बाद वह जसबीर के पुश्तैनी मकान में पहुंची. वहां वह 2 दिन ठहरने के बाद मायके लौट आई. जसबीर के परिवार को ब्रिटेन लौटना था. इसलिए उन्होंने हनीमून भी नहीं मनाया था. उन्होंने तय किया था कि वे ब्रिटेन पहुंच कर ही हनीमून मनाएंगे. बरखा का पासपोर्ट तो बन चुका था, पर वीजा नहीं मिला था. इस कारण दोनों के बीच फिर से सात समुद्र की दूरी बन गई. पर उन के साथ कुछ हसीन यादें थीं. जिनके सहारे और मोबाइल पर बात कर के उन का वक्त कटता रहा.
इस दौरान जसबीर की बहन के लिए भी अच्छा लड़का मिल गया तो उस की सगाई भी तय कर दी गई. बहन की शादी से पहले ही जसबीर पत्नि का वीजा लगवाने की कोशिश करने लगा. आखिर 6 महीने बाद अगस्त में बरखा को वीजा मिल गया. वीजा मिलने के बाद जसबीर और उस का परिवार तो खुश था, बरखा की खुशी का भी ठिकाना नहीं था. वह भारत से ही दुलहन की तरह सजधज कर ब्रिटेन पहुंची. वहां एयरपोर्ट पर जसबीर उसे लेने आया. पति को देख कर उस की खुशी का ठिकाना नहीं रहा. वह उस के गले लग गई. खुशी के कारण उस की आंखों से आंसू छलक आए.
बरखा जब जसबीर के विक्टरी लेन स्थित घर पर पहुंची तो उस के स्वागत में परिवार के सभी लोग खड़े मिले. मेन दरवाजे पर एक फीता बंधा था और पूरे घर को दुलहन की तरह सजाया गया था. बरखा ने जैसे ही फीता काटने की रस्म अदा की तो सभी ने ताली बजा कर, नाचगा कर खुशी का इजहार किया. पूरे परिवार ने दिल खोल कर बरखा का इस तरह स्वागत किया, जिस की कल्पना तक बरखा ने नहीं की थी. जसबीर ने उसे तोहफे की टोकरी देते हुए कहा, ‘‘तुम्हारा नए घर में स्वागत है.’’ इस पर बरखा मंदमंद मुस्कुराए बिना नहीं रह सकी. उन के इस अपनेपन में वह अपने वतन, अपने घरवालों की याद को भी बिसरा बैठी थी. वह अपने भाग्य पर इतरा रही थी.
बरखा के आने से घर का माहौल ही बदल गया था. उस के आने के चौथे दिन ही उस की ननद यानी जसबीर की छोटी बहन की शादी होनी थी. इस खुशी में बरखा के आने से चार चांद लग गए थे. बरखा ने इस तरह सारा घर संभाल लिया था, जैसे वह वहां बरसों से रह रही हो. ननद की शादी की तैयारी उस ने अपने हाथों से की. यहां तक कि ननद को सजाया भी उस ने ही. बहन की शादी के बाद तीसरे दिन जसबीर और बरखा हनीमून के लिए लंदन चले गए. दोनों ने एक सप्ताह खूब सैर की, खूब आनंद उठाया. इस दौरान जसबीर ने बरखा को ऊपरी तौर पर तो प्यार किया. उस की हर खुशी का खयाल भी रखा, पर उस ने पतिपत्नी के बीच बनने वाले सुख का अहसास उसे नहीं करवाया. बरखा ने भी इस बात पर ज्यादा गौर नहीं किया.
हनीमून से लौट कर दोनों खुश थे. फिर जसबीर अपनी नौकरी पर जाने लगा. अपनी नई जिंदगी की शुरुआत के साथ जसबीर अपने और बेहतर भविष्य की तलाश में भी लग गया. वह बैंक की नौकरी छोड़ कर लंदन स्थित फाइनेंशियल ओंबड्समैन सर्विस में नौकरी पाने की कोशिश करने लगा. बरखा का दिन घर के काम और सासससुर की देखभाल में बीत जाता, तो रात को उसे उम्मीद होती कि पति उसे औरतपन के सुख से अवगत कराएगा, पर ऐसा नहीं होता तो उसे थोड़ा दुख होता. पर उस ने इस बात को गंभीरता से नहीं लिया.
बरखा की कई बार रात को आखें खुलीं तो उस ने पति को किसी से मोबाइल पर बात करते हुए पाया. एक दिन उस ने पूछ ही लिया, ‘‘आखिर इतनी रात को किस से बात करते हो? क्या कोई और लड़की है तुम्हारी जिंदगी में? अगर ऐसा है, तो मुझे साफसाफ बता दो.’’
‘‘नहीं, ऐसी कोई बात नहीं है. दरअसल, मैं दोस्तों से बात करता हूं. दिन में तो काम की वजह से समय मिल नहीं पाता. इस कारण रात को तसल्ली से बात कर लेता हूं.’’ जसबीर ने सफाई दी.
‘‘लाओ, जरा अपना फोन दिखाओ.’’ बरखा ने सच्चाई जानने की कोशिश की.
जसबीर ने एक पल भी नहीं गंवाया, न ही किसी प्रकार की नानुकुर की. उस ने अपना मोबाइल पत्नी के हाथ में थमा दिया. बरखा ने काल डिटेल्स की जांच की. उस ने देखा कि जिस नंबर पर जसबीर ने रात को बात की थी, वह किसी अंगरेज युवक का था. उस के मोबाइल में किसी भी लड़की के नाम से कोई नंबर सेव नहीं था. इस से वह संतुष्ट तो हो गई, पर उसे यह बात खलती रही कि उसे जसबीर पर शक नहीं करना चाहिए था.
‘‘देख लिया.’’ जसबीर ने कहा, ‘‘मेरा भरोसा करो. मेरा किसी लड़की से किसी तरह का संबंध नहीं है. यकीन करो कि आज तक मैं ने कभी किसी लड़की को नजर भर कर देखा तक नहीं है. मेरी जिंदगी में आने वाली तुम पहली और आखिरी लड़की हो. मैं भरोसा दिलाता हूं कि कभी तुम्हारा भरोसा नहीं टूटने दूंगा.’’
जसबीर की बात से बरखा संतुष्ट थी. उसे पूरा यकीन हो गया था कि जसबीर सही बोल रहा है. एक शाम औफिस से आने के बाद जसबीर कहीं जाने के लिए तैयार होने लगा तो बरखा ने पूछ ही लिया, ‘‘कहां जा रहे हो?’’
‘‘अरे हां, मैं तो तुम्हें बताना ही भूल गया. दरअसल, मैं एक क्लब का मेंबर हूं. वहां आज रात हम दोस्तों ने पार्टी रखी है. वहीं जाना है. मैं रात को घर नहीं आऊंगा. तुम चिंता मत करना.’’ जसबीर ने कहा. बरखा को जसबीर की बात पर कोई शक नहीं था. इस कारण उस ने ज्यादा पूंछताछ नहीं की. जसबीर तैयार हो कर चला गया.
रात में सासससुर को खाना खिलाने के बाद रसोई साफ करके बरखा भी सोने चली गई. सुबह उस के उठने से पहले ही कालबेल बजी तो उसी ने दरवाजा खोला, उस का पति लौटा था. बरखा ने महसूस किया कि जसबीर के चेहरे पर खुशी और संतुष्टी के भाव थे. वह बेहद उत्साहित दिख रहा था. उसने प्यार से बरखा को चूमते हूए कहा, ‘‘खूब मजा आया रात दोस्तों के साथ मस्ती कर के.’’
इस पर बरखा मुस्करा दी और उस के लिए रसोई में चाय बनाने चली गई. जसबीर के बंगले में 4 कमरे थे. एक ड्राईंगरूम और 3 बेडरूम. एक बेडरूम जसबीर के मातापिता के लिए था. दूसरा जसबीर और बरखा के लिए. तीसरा बेडरूम जसबीर की बहन का था. जो उस की शादी के बाद खाली रहता था. यह बेडरूम जसबीर व बरखा के बेडरूम के बराबर में ही था. 11 सितंबर, 2013 की रात करीब 2 बजे की बात है. प्यास महसूस होने पर बरखा की नींद टूटी तो उस ने पाया कि जसबीर बेड पर नहीं था. जबकि वह उस के साथ ही सोया था. उस ने सोचा कि शायद बाथरूम गया होगा. पानी पीने के बाद उस की आंख तुरंत नहीं लगी. वह करवटें बदलती रही. इसी बीच उसे तरहतरह की अवाजें सुनाई देने लगीं. वह चौंकी. उठ कर इधरउधर देखा. कहीं कोई नहीं था.
वह सोच में पड़ गई. फिर उस ने सोचा कि पति ही बाथरूम में स्पीकर औन कर के अपने किसी दोस्त से बतिया रहा होगा. क्योंकि वह दोस्तों से रात में ही बातें करता था. तभी उस की नजर मेज पर रखे मोबाइल पर गई. मोबाइल पति का ही था. वह चौंकी कि जब मोबाइल यहां है तो वो बाथरूम में किस से बातें कर रहा है. वह बिस्तर से उठी और बाथरूम का दरवाजा खटखटाने लगी. अंदर से जब कोई प्रतिक्रिया नहीं हुई तो उस ने दरवाजे का हैंडल घुमाया. दरवाजा खुल गया. दरवाजे के खुलते ही वह चौंक गई क्योंकि पति बाथरूम में था ही नहीं. उसे अब चिंता हुई कि आधी रात को वह चला कहां गया.
उस ने सासससुर के बेडरूम के नजदीक जा कर देखा. वहां भी दरवाजा बंद था और अंदर खामोशी छाई थी. अब वह खाली पड़े बेडरूम की तरफ गई. उस ने दरवाजे पर कान लगाए तो महसूस किया कि आवाजें उसी बेडरूम से आ रही थीं. अंदर से आने वाली आवाजें पुरुषों की ही थीं. एक आवाज को तो वह पहचान गई, वह उस के पति की थी. लेकिन दूसरी आवाज उसे अनजानी लगी. दोनों आवाजों का लहजा उसे अजीब लगा. उस ने दरवाजे के हैंडल को घुमाया. अंदर से लौक न होने की वजह से वह खुल गया. दरवाजा खोलते ही बरखा की नजर अंदर बेड पर पड़ी तो वह हैरान रह गई. उसे अपनी आंखों पर जैसे विश्वास ही नहीं हो रहा था.
बेड पर जसबीर के साथ उस की ही उम्र का एक भारतीय मूल का युवक और था. उस समय दोनों के शरीर पर कपड़े का नामोनिशान नहीं था. दोनों एकदूसरे से लिपटे हुए पतिपत्नी की तरह प्यार कर रहे थे. यह देख कर बरखा समझ गई कि उस का पति ‘गे’ है, इसीलिए वह उस से शारीरिक संबंध नहीं बनाता था. बरखा की हैरत का ठिकाना नहीं था. दिल तो किया कि उसी समय पति को जलील करे, पर इतनी रात में किसी तरह का बवाल खड़ा करना उस ने उचित नहीं समझा. उस ने सोचा कि एकांत के समय वह जसबीर से बात करेगी. बहरहाल वह आहत थी. उस के सारे ख्वाब पलभर में टूट कर बिखर गए.
हौले से दरवाजा बंद कर के वह अपने बेडरूम में आ कर लेट गई. उस की नींद तो उड़ चुकी थी. अब तो वीरान आंखों में ख्वाबों की जगह आंसुओं ने ले ली. वह रोती रही और अपनी किस्मत को कोसती रही. सुबह करीब 5 बजे बरखा ने बेडरूम का दरवाजा खुलने की आवाज सुनी तो हल्की सी आंख खोल कर देखा. जसबीर लौट आया था. वह आंख बंद कर सोने का नाटक कर ऐसे ही लेटी रही. जसबीर भी उस के बराबर में आ कर लेट गया. फिर जल्दी ही उसे नींद आ गई. बरखा ने 6 बजे के करीब बिस्तर छोड़ दिया. क्योंकि इसी समय उस के सासससुर भी उठ जाते थे. वह उन्हें बेड टी बना कर देती थी. उस ने बाथरूम में जा कर चेहरा देखा तो उस की आंखें रोरो कर लाल हो चुकी थीं. चेहरा भी भावशून्य दिख रहा था. उस ने अच्छे से चेहरा धोया और रसोई में चाय बनाने चली गई.
चाय बना कर जब वह सासससुर के बेडरूम में गई तो उस का चेहरा देख सास ने टोका, ‘‘क्या बात है बरखा, तुम्हारी आंखें क्यों लाल हैं?’’
‘‘पता नहीं, सारी रात जलन सी होती रही.’’ वह सच्चाई छिपा गई.
‘‘लापरवाही ठीक नहीं है. जसबीर को जगने दे. डाक्टर के पास चली जाना.’’ सास ने कहा.
‘‘ठीक है.’’ बरखा बोली. फिर वह अपने कामों में लग गई. करीब 9 बजे जसबीर सो कर उठा और तैयार हुआ. बरखा ने अन्य दिनों की तरह उस का नाश्ता लगा दिया. वह नाश्ता करने लगा. उसे यह अहसास नहीं हुआ कि बरखा ने उस का नंगापन देख लिया है. जबकि बरखा के अंदर एक तूफान उमड़ रहा था.
जसबीर बैंक चला गया. उस के जाने के बाद वह सारे दिन तरहतरह के खयालों में खोई रही.
रात में जब बरखा बेडरूम में पहुंची तो जसबीर ने टोका, ‘‘तुम्हारी तबीयत ठीक नहीं लग रही. मां कह रही हैं कि तुम्हारी आंखें भी लाल थीं. सब खैरियत तो है?’’
बरखा ने लंबी सांस ली, ‘‘खैरियत ही तो नहीं है.’’
‘‘क्या हुआ?’’ जसबीर ने पूछा.
‘‘मैं ने तुम्हें नंगा ही नहीं देखा, तुम्हारा नंगापन भी देख लिया है.’’ उस ने गुस्से में कहा.
‘‘क्या कह रही हो, समझ नहीं आया. साफसाफ कहो.’’ जसबीर नहीं जानता था कि पत्नी किस तूफान को थामे है.
‘‘मुझे पता चल गया कि तुम मुझ से दूर क्यों रहते हो? मुझे यहां आए एक महीना हो गया, पर तुम ने मुझे पत्नी का सुख नहीं दिया.’’ बरखा का ज्वालामुखी धीरेधीरे फटने लगा था.
‘‘क्या पता चल गया?’’ जसबीर नासमझ बनते हुए बोला.
‘‘यही कि तुम ‘गे’ हो.’’ बरखा शेरनी की तरह दहाड़ी.
‘‘क्या, क्या कह रही हो?’’ अपनी सच्चाई सुन कर जसबीर हड़बड़ा गया.
‘‘अगर तुम में किसी औरत को रखने की काबिलियत नहीं है तो क्यों की मुझ से शादी?’’ वह गुर्राई.
‘‘बरखा, तुम समझने की कोशिश करो. मैं तुम से बहुत प्यार करता हूं.’’ जसबीर मामला शांत करने की गरज से बोला.
‘‘अगर तुम ‘गे’ थे, तो पहले ही बता देना चाहिए था. मुझे गलतफहमी में रख कर शादी क्यों की?’’
‘‘मैं शादी नहीं करना चाहता था, मांबाप की जिद के कारण करनी पड़ी. डरता था कि मेरे गे होने का राज खुल गया तो उन पर क्या गुजरेगी. पर सच मानो बरखा, मैं तुम से प्यार करता हूं. धीरेधीरे सब ठीक हो जाएगा.’’ जसबीर ने उसे सफाई दी.
‘‘तुम्हारे इस तरह के प्यार के साथ जिंदगी नहीं गुजरेगी. तुम ने मेरी जिंदगी बरबाद कर के रख दी.’’ वह शांत होने का नाम नहीं ले रही थी.
‘‘मैं खुद को बदल दूंगा बरखा, मुझे कुछ समय दो.’’ जसबीर गुनहगार की तरह गिड़गिड़ा रहा था.
‘‘तुम जिस आदत के आदी हो, वह कभी नहीं बदलती. तुम नपुंसक हो नपुंसक. अब मैं सब को बता दूंगी कि तुम गे हो.’’ वह चीखी.
नपुंसक की गाली सुन कर जसबीर भी खुद पर काबू नहीं रख पाया. वह भी चीखा, ‘‘अपनी हद मेें रहो वरना…’’
‘‘वरना क्या. हां, बताओ वरना क्या.’’ कहते हुए बरखा ने उसे बेड से धक्का दे कर नीचे गिरा दिया.
इस के बाद तो जसबीर जैसे होश ही खो बैठा, ‘‘अभी बताता हूं.’’ कहते हुए उस ने बेड के पास रखे वैक्यूम क्लीनर का पाइप खींचा और उस के गले में लपेट कर कसने लगा. साथ ही बड़बड़ाता रहा, ‘‘देखो, मैं क्या कर सकता हूं.’’
जसबीर ने उस का गला तब तक दबाए रखा, जब तक कि उस की सांस नहीं थम गई. कुछ ही देर में उस की गरदन एक ओर लुढ़क गई, तो जसबीर की आंखें फटी की फटी रह गईं. उस का गुस्सा उड़नछू हो गया. अब उसे अफसोस हुआ कि वह क्या कर बैठा. मगर अब हो भी क्या सकता था. वह घबराया. उस के मातापिता अपने बेडरूम में सो रहे थे. उस ने हलके से मेन गेट खोला और बाहर का जायजा लिया. उसे दूर तक कहीं कोई नजर नहीं आया. वह फटाफट बेडरूम में लौटा और पत्नी की लाश को घसीट कर लान में ले आया और वहां रखे इनसिनेटर (कूड़ेदान) में डाल कर ऊपर से कुछ सूखे पत्ते उस में डाल दिए.
इस के बाद वह थोड़ी दूर स्थित पेट्रोल पंप पर जा कर वहां से एक कैन में पेट्रोल भरवा लाया. वह पेट्रोल इनसिनेटर के अंदर उड़ेल कर आग लगा दी. उसी समय उस के बंगले के सामने वाले बंगले की खिड़की से एक महिला ने उसे यह सब करते हुए देख लिया था. उस ने सोचा कि वह कूड़े को आग लगा रहा है. जसबीर आग लगा कर बेडरूम में लौट आया और आगे के बारे में सोचने लगा. उधर सुबह उस के मातापिता सो कर उठे और उन्हें बेड टी नहीं मिली तो वह बरखा को आवाज लगाने लगे. जसबीर को इस का अहसास ही नहीं था. वह तो अपनी उलझन में उलझा था. उस की मां बरखा को खोजते हुए बेडरूम में आ गईं. उन्होंने जसबीर से पूछा, ‘‘बेटा, बरखा कहां है? आज चाय नहीं दी.’’
मां की आवाज सुन कर जसबीर हड़बड़ाहट में बोला, ‘‘वह तो रात को मुझ से झगड़ने के बाद घर छोड़ कर चली गई.’’
‘‘कहां गई? तू ने उसे जाने क्यों दिया? कहां होगी वह. इस परदेश में उस का हमारे अलावा कोई है भी नहीं.’’ जसबीर की मां घबरा गईं.
जसबीर खामोश रहा, तो वह फिर बोलीं, ‘‘यहां बैठा क्या कर रहा है? जा कर उसे खोज. पुलिस में रिपोर्ट लिखवा.’’
जसबीर होश में आया. उसे बचाव का कोई रास्ता नहीं सूझा तो वह तैयार हो कर वाल्सेल पुलिस स्टेशन जा पहुंचा और बरखा की गुमशुदगी दर्ज करवा दी. गुमशुदगी दर्ज करने के बाद इंसपेक्टर सर्बजीत जोहल कुछ सहकर्मियों के साथ जसबीर के बंगले पर पहुंचे. वहां पड़ोसियों से पूछताछ करने पर सामने वाले बंगले में रहने वाली महिला ने बता दिया कि रात को उस ने जसबीर के बंगले में स्थित बगीचे में रखे इनसिनेटर से धुआं उठते देखा था. वहां से कुछ अजीब सी गंध भी आ रही थी.
इंसपेक्टर सर्बजीत ने बगीचे में रखे इनसिनेटर का ढक्कन उठाया, तो चौंक पड़े. उस में राख के बीच एक मानव कंकाल पड़ा था. संभवतया वह किसी महिला का था क्योंकि वहां पर कुछ गहने भी थे. सोने की चूडि़यां, ब्रेसलेट और अंगूठी. इस बारे में जब जसबीर की मां से पूछा गया तो उन्होंने बताया कि ये वही जेवर हैं, जो बरखा ने शादी के रोज से अब तक पहने रखे थे. इस से यही पता लगा कि वह कंकाल बरखा का ही था.
लाश की शिनाख्त हो गई, तो सवाल उठा कि घर में ही हत्या कर बरखा की लाश को जला दिया गया और घर में किसी को पता भी नहीं चला. जबकि सभी साक्ष्य बता रहे थे कि हत्या पूरी योजना के साथ की गई होगी. इस बारे में जसबीर से पूछा गया, तो वह बारबार झूठ बोलता रहा. इंसपेक्टर सर्बजीत को शक था कि जसबीर ने ही बरखा को जलाया होगा. उसे उसी समय हिरासत में ले लिया गया और लाश को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया. पुलिस स्टेशन में जब जसबीर से सख्ती से पूछताछ की गई, तो उस ने स्वीकार कर लिया कि उसी ने अपनी नवविवाहिता बरखा की हत्या की थी. उस ने कहा कि यह सब गुस्से में हुआ. उस का इरादा उस की हत्या करने का नहीं था.
दूसरे दिन यानी 13 सितंबर, 2013 को जसबीर को वाल्वर हैमाट कोर्ट में पेश किया गया. साथ ही बरखा की पोस्टमार्टम रिपोर्ट भी पेश की गई. रिपोर्ट में बताया गया कि बरखा की मौत दम घुटने के कारण हुई. जसबीर को कोर्ट से जेल भेज दिया गया. वहीं भारत में रहने वाले बरखा के मातापिता को घटना की सूचना दे दी गई. उस के पिता सुरजीत सिंह ब्रिटेन पहुंच गए और अंतिम संस्कार के लिए बेटी का कंकाल अपने साथ भारत ले आए.
कोर्ट में जसबीर के खिलाफ मुकदमा चला. कई पेशियां हुईं. डिफेंस केस के वकील डेविड नाथन ने कोर्ट में बताया कि सारी जांच के बाद यह नतीजा निकलता है कि जसबीर ने अपनी पत्नी की हत्या पूरी योजना के साथ की थी. उस ने जिस अमानवीयता से घटना को अंजाम दिया, उस के हिसाब से आरोपी को सख्त से सख्त सजा मिलनी चाहिए. जांच के दौरान यह भी सामने आया कि जसबीर लंबे समय से डिप्रेशन में रहता था. 2010-11 में उस ने अपने डिप्रेशन का इलाज करवाया था. इलाज करने वाले डा. श्रीनिवास ने कोर्ट में बताया कि जसबीर राम गिंडे ने उन से करीब 2 साल इलाज करवाया था. वह काम से संबंधित तनाव में रहता था.
डिप्रेशन के चलते उस ने कई बार आत्महत्या करने की कोशिश भी की थी. एक बार तो उस ने अपनी कलाई भी काट ली थी और एक बार फांसी लगाने की भी कोशिश की थी. कोर्ट में वह वीडियो भी दिखाई गई, जब बरखा शादी के बाद पहली बार जसबीर के बंगले में दाखिल हुई थी. वहीं जसबीर की बहन की शादी की वीडियो भी दिखाई गई. इस के विपरीत पुलिस ने उस पेट्रोल पंप की सीसीटीवी फुटेज भी पेश की, जिस में साफ दिख रहा था कि घटना वाली रात जसबीर ने वहां से पेट्रोल खरीदा था.
कोर्ट में दरजन भर गवाह पेश किए गए. इन में एक सरकारी वकील डेबी गोल्ड ने कोर्ट में बयान दिया कि जब जसबीर भारत में रहता था, तो वहां पंजाब में भी उस के कई गे दोस्त थे. ब्रिटेन में भी उस के कई एशियन और ब्रिटिश गे युवकों से शारीरिक संबंध थे. उस ने गे मेल फ्रेंड्स क्लब भी बना रखा था. गे क्लब में मेलमुलाकात के साथ आपस में देह संबंध भी बनाए जाते थे. उन्होंने बताया कि वह चाह कर भी अपनी पत्नी के साथ शारीरिक संबंध नहीं बना सकता था. इसलिए वह पत्नी से तलाक लेने की भी सोच रहा था. पर डर था कि इस के लिए उसे कारण बताना होगा. अगर वह गे होना कारण बताता तो उस के परिवार की भी बदनामी होती. कुल मिला कर वह एक झूठी मैरिज लाइफ बिता रहा था.
वहीं आरोपी जसबीर राम गिंडे ने अपना अपराध स्वीकार करते हुए कोर्ट में बयान दिया कि जब वह 12 साल का था, तब उसे पता चला कि वह समलैंगी प्रवृत्ति का है. विपरीत लिंगी की तरफ उस का कोई आकर्षण नहीं था. उस ने कभी अपने मातापिता को अपनी सच्चाई नहीं बताई थी. क्योंकि वे इसे सहन नहीं कर पाते. इसी कारण वह शादी नहीं करना चाहता था, पर मातापिता की इच्छा के कारण उसे मजबूर होना पड़ा था.
जसबीर ने आगे बताया कि लाख छिपाने के बाद भी आखिर पत्नी को उस की सच्चाई पता चल गई थी. इस पर 12 सितंबर, 2013 की रात बरखा ने उसे बहुत जलील किया. बात बढ़ गई तो गुस्से में अपना आपा खो दिया और हत्या का गुनाह कर बैठा. सारे गवाह और सुबूत जसबीर के खिलाफ थे. वहीं वह खुद अपना अपराध स्वीकार कर चुका था. इसलिए जज जान वार्नर ने उसे दोषी करार देते हुए कहा कि अभियुक्त ने बरखा के साथ क्रूरतापूर्वक व्यवहार किया था. उस की निर्दयता से हत्या कर दी. हद तो यह हो गई कि मानवीयता की हद पार करते हुए उस ने उस के शरीर को पेट्रोल डाल कर जला दिया. फिर झूठी रिपोर्ट लिखवाने पुलिस स्टेशन चला गया.
यानी उस ने योजना अनुसार घटना को अंजाम दिया. इसलिए अभियुक्त जसबीर राम गिंडे का यह अपराध क्षमा की श्रेणी में नहीं आता. 25 अप्रैल, 2015 को जज जान वार्नर ने अपना फैसला सुनाते हुए जसबीर राम गिंडे को 21 साल की सजा सुनाई. साथ ही यह भी कहा कि उस की जमानत की किसी अरजी पर कभी सुनवाई नहीं की जाएगी. वह समाज के लिए घातक सिद्ध हो सकता है. कोर्ट से पुलिस वैन में जेल जाते वक्त जसबीर राम गिंडे की आंखों के आंसू थम नहीं रहे थे. उसे अपने किए पर पछतावा था. True crime Story






