Motivational Story: जरूरत के समय एकदूसरे की मदद करने से बड़ी कोई बात नहीं हो सकती. लेकिन गिनेचुने लोगों की बात छोड़ दें तो आजकल कौन किस की मदद करती है? कम से कम ऐसी मदद तो कोई कतई नहीं करेगा जैसी हम आप को बताने जा रहे हैं. जी हां, आर. स्वाति की मदद जिन लोगों ने की, उन की प्रशंसा में जो भी कहा जाए, कम है. आप भी उन की तारीफ किए बिना नहीं रह सकेंगे.

दरअसल, तमिलनाडु के कस्बा मुसिरी, त्रिचुरापल्ली की रहने वाली आर. स्वाति को कोयंबटूर  की अन्ना आरंगम तमिलनाडु एग्रीकल्चर यूनिवर्सिटी में एडमिशन लेना था. 10+2 में उस ने 1017 अंक प्राप्त किए थे इसलिए एडमिशन में कोई प्रौब्लम नहीं थी. यूनिवर्सिटी की ओर से स्वाति को 8 अगस्त, शनिवार को साढ़े 8 बजे काउंसिलिंग के लिए बुलाया गया था.

स्वाति अपनी मां थंगपोन्नू के साथ समय पर घर से निकली भी लेकिन गलतफहमी से वे सुबह साढ़े 6 बजे पहुंच गईं चेन्नै की अन्ना यूनिवर्सिटी. वहां जा कर उन्होंने लोगों से जब अन्ना आरंगम एग्रीकल्चर यूनिवर्सिटी के बारे में पूछा तो लोगों को आश्चर्य हुआ क्योंकि चेन्नै में इस नाम की कोई यूनिवर्सिटी थी ही नहीं. इत्तफाक से स्वाति और उस की मां की बात ‘ट्वाकर्स’ नाम के वाकर्स गु्रप के मेंबरों से हो रही थी, जो मार्निंग वाक पर निकले थे. उसी ग्रुप में इंजीनियरिंग कालेज, गिंडी के पूर्व छात्र एम. श्रवणन भी थे. उन्होंने बताया कि अन्ना आरंगम एग्रीकल्चर यूनिवर्सिटी तो कोयंबटूर में है.

यह सुन कर स्वाति और उस की मां घबरा गईं क्योंकि कोयंबटूर तो वहां से 525 किलोमी दूर थी. जाहिर है, इतनी दूर ट्रेन से उस दिन पहुंचना संभव नहीं था. उन दोनों के पास ज्यादा पैसे भी नहीं थे. एक लड़की के कैरियर का सवाल था. स्वाति और उस की मां से बातचीत के बाद ‘ट्वाकर्स गु्रप’ के सदस्यों ने फैसला किया कि वे किसी भी तरह स्वाति को कोयंबटूर पहुंचाएंगे ताकि वह काउंसिलिंग में भाग ले सके. ग्रुप के मेंबरों ने पहले मांबेटी को नाश्ता कराया. फिर तत्काल 10,500 रुपए एकत्र किए ताकि उन के लिए एयर टिकट की व्यवस्था की जा सके.

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