True Crime Story: बात 25 मई, 2013 की है. चेन्नई सेंट्रल क्राइम ब्रांच के इंसपेक्टर विजय कुमार के नेतृत्व में एक पुलिस टीम दिल्ली पुलिस॒ आयुक्त नीरज कुमार से मिली. टीम ने पुलिस आयुक्त को 2 फोटोग्राफ्स दिखाते हुए कहा कि ये दोनों बहुत बड़े जालसाज हैं और चेन्नई के कई लोगों से करोड़ों रुपए ठग कर फरार हो चुके हैं. इन के मोबाइल की लोकेशन बता रही है कि ये दोनों ठग दिल्ली में ही कहीं छिपे हुए हैं. इंसपेक्टर विजय कुमार ने यह भी बताया कि फोटो में जो युवती है, वह एक फिल्म अभिनेत्री है.
पुलिस आयुक्त ने इंसपेक्टर विजय कुमार से दोनों ठगों की काल डिटेल्स ले कर उस पर नजर डाली, तो पता चला कि उन के फोन की लोकेशन दक्षिणी दिल्ली के फतेहपुर बेरी इलाके की आ रही थी. इसलिए उन्होंने चेन्नई सेंट्रल क्राइम ब्रांच की टीम को दक्षिणी दिल्ली जिले के पुलिस उपायुक्त बी.एस. जायसवाल के पास भेज दिया. चेन्नई पुलिस टीम दक्षिणी दिल्ली के डीसीपी बी.एस. जायसवाल के पास पहुंच गई. टीम से बात करने के बाद पुलिस उपायुक्त ने वाहन चोर निरोधी दस्ते के इंचार्ज एसआई बलिहार सिंह को बुलाया और चेन्नई पुलिस के साथ मिल कर इस मामले में जौइंट औपरेशन चलाने को कहा.
चूंकि बलिहार सिंह अंतरराज्यीय अपराध के कई बड़े मामलों का खुलासा कर चुके थे इसलिए सब से पहले उन्होंने पूरे मामले को समझने के बाद चेन्नई क्राइम ब्रांच टीम से आरोपियों के रहनसहन, शौक आदि के बारे में जानकारी हासिल की. इंसपेक्टर विजय कुमार ने उन्हें बताया कि जिन आरोपियों की उन्हें तलाश है, उन के नाम लीना मारिया पौल और बालाजी उर्फ शेखर रेड्डी उर्फ सुकेश चंद्रशेखर हैं. लीना मारिया पौल एक अभिनेत्री है. खास बात यह है कि ये दोनों ही शाही अंदाज में रहते हैं, महंगी गाडि़यां इस्तेमाल करते हैं और गाड़ी पर नीली या लालबत्ती लगा कर चलते हैं. बलिहार सिंह ने जब दोनों ठगों के फोन की करेंट लोकेशन चेक की तो वह फतेहपुर बेरी क्षेत्र की ही आ रही थी.
फतेहपुर बेरी इलाके में कई बड़े फार्महाउस भी हैं. इस से उन्होंने यही अनुमान लगाया कि वे लोग शायद किसी फार्महाउस में ही रह रहे होंगे. बलिहार सिंह ने एएसआई सुखविंदर सिंह, कांस्टेबल अमित कुमार, नरेश कुमार, मुनिंदर, अनिल कुमार आदि की टीम बना कर तुरंत फतेहपुर बेरी इलाके में भेज दिया और जिस मोबाइल टावर के क्षेत्र में आरोपियों के फोन थे, उस के आसपास के फार्महाउसों पर निगरानी करने को कहा. इस के अलावा उन्होंने फतेहपुर बेरी इलाके के कई प्रौपर्टी डीलरों से भी यह पता लगाने की कोशिश की कि उन की मार्फत किसी आदमी या औरत ने कोई फार्महाउस तो किराए पर नहीं लिया है. लेकिन प्रौपर्टी डीलरों से उन्हें कोई खास जानकारी नहीं मिली.
दिल्ली पुलिस की जो टीम फतेहपुर बेरी इलाके में फार्महाउसों के बाहर वाच कर रही थी, उस ने देखा कि वहां स्थित असोला गांव के खारी फार्महाउस में महंगीमहंगी गाडि़यां आजा रही हैं. एएसआई सुखविंदर ने यह बात बलिहार सिंह को बता दी. बलिहार सिंह ने सुखविंदर से कह दिया कि वह अपना काम इस तरह करें कि उस फार्महाउस में रहने वाले किसी भी व्यक्ति को भनक न लगे. पुलिस टीम गोपनीय रूप से अपने काम को अंजाम देती रही. अगले दिन पुलिस टीम से बलिहार सिंह को जो रिपोर्ट मिली, वह चौंकाने वाली थी.
उन्हें बताया गया कि फार्महाउस से जो लग्जरी कार निकलती है, उस के शीशों पर काली फिल्म चढ़ी होती है तथा उस के आगे हूटर बजाती हुई एक पायलट कार चलती है और पीछे सुरक्षाकर्मियों की कार. वह सुरक्षाकर्मी काले रंग के सफारीसूट पहने हुए होते हैं. जिस फार्महाउस से वे गाडि़यां निकलती थीं, उस पर एक राजनीतिक पार्टी का झंडा भी लगा हुआ था इसलिए उन्होंने सोचा कि कहीं ऐसा तो नहीं कि वहां कोई वीवीआईपी रहता हो. इस बारे में बलिहार सिंह ने डीसीपी से बात की तो डीसीपी ने सतर्कता के साथ औपरेशन जारी रखने को कहा.
डीसीपी के आदेश पर बलिहार सिंह भी उस फार्महाउस से कुछ दूर खडे़ हो कर निगरानी करने लगे. शाम के समय उन्होंने फार्महाउस से एक गाड़ी को निकलते हुए देखा. उस गाड़ी के शीशों पर काली फिल्म चढ़ी हुई थी. उस गाड़ी के आगे हूटर बजाती हुई एक पायलट गाड़ी चल रही थी जबकि पीछे सुरक्षाकर्मियों की गाड़ी थी. इस से ऐसा लगा कि फार्महाउस से निकलने वाला कोई महत्त्वपूर्ण व्यक्ति ही होगा.
दिल्ली पुलिस की टीम प्राइवेट गाड़ी में थी. फार्महाउस से निकलने वाला व्यक्ति कौन है और कहां जा रहा है, पता लगाने के लिए दिल्ली पुलिस की टीम भी कुछ फासला बना कर उन कारों के पीछे लग गई. कुछ देर बाद कारों का काफिला वसंतकुंज के एंबियंस मौल के सामने जा कर रुका. बीच वाली कार के रुकते ही पीछे वाली कार में चल रहे 4 बौडीगार्ड फुरती से उतर कर उस कार के पास जा कर खड़े हो गए. 1 बौडीगार्ड ने कार का पिछला दरवाजा खोला तो उस में से एक युवती उतरी. उतरने वाली युवती बेहद खूबसूरत थी.
उस ने जो कपड़े पहन रखे थे, उन से उस की खूबसूरती में और भी चार चांद लग गए थे. बलिहार सिंह ने जेब से फोटो निकाल कर उस युवती से चेहरा मिलाने की कोशिश की. वह मन ही मन खुश हुए क्योंकि वह युवती वही लीना मारिया पौल ही थी. जिस की तलाश में चेन्नई पुलिस दिल्ली आई हुई थी. लीना मारिया पौल कार से अकेली ही उतरी थी. उस का साथी बालाजी उस के साथ नहीं दिखा. दिल्ली पुलिस दोनों को एक साथ गिरफ्तार करना चाहती थी इसलिए उस ने अकेली लीना मारिया को गिरफ्तार करना उचित नहीं समझा, बल्कि उस के वापस लौटने का इंतजार करने लगी.
थोड़ी खरीदारी कर के लीना मौल से बाहर आई और हूटर बजाती हुई पायलट गाड़ी के साथ असोला गांव के खारी फार्महाउस की तरफ रवाना हो गई. पुलिस उस के पीछेपीछे थी. दिल्ली पुलिस ने लीना मारिया को पहचान लिया था. वह खारी फार्महाउस में रह रही थी. इस का मतलब था कि बालाजी भी वहीं रह रहा होगा. उस वक्त शायद वह फार्महाउस में नहीं था. उम्मीद थी कि रात को वह जरूर आएगा. इसलिए दोनों को गिरफ्तार करने के लिए रात में ही दबिश देना ठीक था. बलिहार सिंह ने टीम के सदस्यों को फार्महाउस की निगरानी पर लगा दिया और अगली काररवाई पर रणनीति बनाने के लिए अपने औफिस लौट आए.
चेन्नई क्राइम ब्रांच की टीम दिल्ली के ही एक होटल में ठहरी हुई थी. डीसीपी बी.एस. जायसवाल ने चेन्नई क्राइम ब्रांच और दिल्ली पुलिस टीम के साथ मीटिंग की और इस संयुक्त टीम को कुछ जरूरी दिशानिर्देश दे कर फार्महाउस में दबिश डालने की इजाजत दे दी. दबिश के लिए उन्होंने जिले के अन्य थानों के कुछ पुलिसकर्मियों को भी उन के साथ भेज दिया. रात होने पर दिल्ली पुलिस ने खारी फार्महाउस को चारों ओर से घेर लिया. हालांकि फार्महाउस की दीवारें 10-12 फुट ऊंची थीं फिर भी फार्महाउस के बाहर सुरक्षा के कड़े बंदोबस्त थे.
पुलिस ने फार्महाउस का गेट खुलवाया तो पहरे पर कई सिक्योरिटी गार्ड तैनात मिले. पुलिस सिक्योरिटी गार्डों से बात ही कर रही थी कि 4 बौडीगार्ड वहां आ गए. उन के हाथों में रिवाल्वर थे. इतनी ज्यादा पुलिस फोर्स देख कर बौडीगार्ड भी सकपका गए. पुलिस ने चारों बौडीगार्डों को काबू में कर के लीना मारिया को भी हिरासत में ले लिया. पुलिस ने पूरा फार्महाउस छान मारा लेकिन लीना मारिया का साथी बालाजी नहीं मिला. पूछताछ करने पर लीना ने बताया कि बालाजी फरार हो चुका है. तलाशी के दौरान वहां से 81 महंगी घडि़यां बरामद हुईं.
ये सभी घडि़यां विदेशी थीं. फार्महाउस में रोल्स रायस फैंटम, निसान जीटीआर, एस्टन मार्टिन, हमर-2, औडी-4, रेंज रोवर, मित्सुबिशी इवो, बीएमडब्ल्यू-5300, लैंड क्रूजर जैसी महंगी गाडि़यां खड़ी हुई थीं. जिन्हें देख कर लीना मारिया की शानोशौकत का अंदाजा लगाया जा सकता था. ये सभी गाडि़यां ऐसी थीं जिन्हें सिर्फ अरबपति ही खरीद सकते हैं. एक साथ इतनी गाडि़यां देख कर पुलिस भी सोच में पड़ गई कि इन लोगों का ऐसा कौन सा काम है जिस की बदौलत इन्होंने इतनी महंगी गाडि़यों का जखीरा खड़ा कर दिया.
पुलिस ने 25 वर्षीया लीना मारिया पौल से जब पूछताछ की, तो ठगी के धंधे से जुड़ने की उस की एक दिलचस्प कहानी सामने आई. लीना मारिया पौल के पिता सी.एस. पौल मूलरूप से केरल के त्रिशूर जिले के रहने वाले थे. शादी से पहले वह एक भारतीय कंपनी में इंजीनियर थे. उन की शादी के कुछ दिनों बाद ही उन की दुबई की मेस्को कंपनी में इंजीनियर के पद पर नौकरी लग गई. कुछ दिनों तक वह दुबई में अकेले रहे, बाद में वह पत्नी को भी साथ ले गए. सी.एस. पौल को अच्छीखासी तनख्वाह मिलती थी इसलिए उन्हें किसी तरह की कोई परेशानी नहीं थी. उन की जिंदगी मौजमजे से बीत रही थी.
इसी दौरान सी.एस. पौल एक बेटी के बाप बने. जिस का नाम लीना मारिया पौल रखा गया. लीना बेहद खूबसूरत थी. पौल दंपति उसे बहुत प्यार करते थे. उस की परवरिश बहुत ही नाजों में हुई. वह मांबाप की लाडली बेटी थी. घर में किसी चीज की कोई कमी नहीं थी. पौल साहब बेटी की हर फरमाइश पूरी करते थे. पौल दंपति ने लाड़प्यार के साथसाथ लीना की पढ़ाई पर भी पूरा ध्यान दिया. जिस की वजह से वह शुरू से ही पढ़ाई में होशियार रही. पिता ने लीना की दिलचस्पी को देखते हुए उसे बीडीएस (बैचलर औफ डेंटल सर्जरी) कराया. 20 साल की उम्र में वह दांतों की डाक्टर बन गई. लेकिन बीडीएस करने के बाद लीना का विचार ऐसा बदला कि घर वाले देखते ही रह गए.
पौल दंपति का केरल से पैदाइशी जुड़ाव था. अपने नातेरिश्तेदारों से मिलने के लिए वे दुबई से केरल आते रहते थे. बाद में लीना को भी भारत आना अच्छा लगने लगा, तो वह कभीकभार अकेली ही केरल आने लगी. लीना को बौलीवुड और दक्षिण भारतीय फिल्में पसंद थीं. लीना की खूबसूरती और फिगर बहुत ही प्रभावशाली थी. जब भी वह कोई भारतीय फिल्म देखती तो खुद की तुलना फिल्म की हीरोइन से करने लगती थी. वह सोचती थी कि यदि वह भी किसी तरह फिल्मी दुनिया में चली जाए, तो किस्मत खुल जाएगी. दौलत और शोहरत उस के कदमों में होगी. यही सोच कर उस ने डाक्टरी पेशा शुरू करने का विचार छोड़ दिया.
सी.एस. पौल को इस बात का पता नहीं था कि लीना ने दिमाग में कोई दूसरा प्लान बना रखा है. वह तो यही सोच रहे थे कि लीना या तो दुबई के ही किसी अस्पताल में नौकरी करेगी या फिर दांतों का अपना क्लिनिक खोलेगी. मगर एक दिन लीना ने जब पिता को अपने मन की बात बताई तो वह चौंके. उन्होंने उसे समझाया, ‘‘बेटा, फिल्मी दुनिया में जाना इतना आसान नहीं है. इस के लिए बाकायदा ट्रेनिंग की जरूरत होती है. जबकि तुम्हारे पास इस तरह का कोई अनुभव नहीं है. इसलिए तुम ये फालतू की बातें छोड़ कर अपनी प्रैक्टिस करो या कहीं नौकरी कर लो.’’
‘‘डैडी, पता नहीं क्यों मेरा मन डाक्टरी करने को नहीं कर रहा. मैं फिल्म लाइन में अपनी किस्मत आजमाना चाहती हूं. मुझे उम्मीद है कि कोशिश करने पर मुझे सफलता जरूर मिलेगी.’’ लीना ने अपने मन की बात कह दी.
‘‘ठीक है, जैसी तुम्हारी मरजी. मगर ध्यान रखना कि इस लाइन में धोखेबाज बहुत हैं, उन से होशियार रहना.’’
पिता से अनुमति ले कर लीना दुबई से केरल आ गई. लीना खूबसूरत और आकर्षक फिगर की मल्लिका जरूर थी लेकिन उसे एक्टिंग का कोई अनुभव नहीं था. वह जानती थी कि दक्षिण भारतीय फिल्मों और बौलीवुड की फिल्मों में कई हीरोइनों ने मौडलिंग के रास्ते एंट्री की थी और अब वे सफल हैं. लीना ने कुछ ऐसी मौडलिंग एजेंसियों से संपर्क किया जहां मौडलिंग कर के कई लड़कियां फिल्मी दुनिया में गई थीं. लीना के आकर्षक लुक की वजह से एक मौडलिंग कंपनी ने उस के अलगअलग ऐंगल से कुछ फोटो खींचे और छपने के लिए उन्हें एक फेमस मैगजीन में भेज दिया.
मैगजीन में फोटो छपने से लीना मारिया को अच्छी पब्लिसिटी मिली. इस के बाद उस के फोटो कई मैगजीनों में छपे. इस की एवज में लीना को नाममात्र के ही पैसे मिले थे. लीना को इस रास्ते से आगे बढ़ना था इसलिए उस ने पैसों की तरफ ध्यान न दे कर और ज्यादा मेहनत की. कुछ दिनों बाद उस की खुशी तब और बढ़ी जब उसे कुछ विज्ञापन फिल्मों में काम करने का मौका मिला. इस के बाद लीना ने अलगअलग कंपनियों के कई उत्पादों की मौडलिंग की. इस से उसे नाम और दाम दोनों मिले. विज्ञापन फिल्मों में काम करने से लीना मारिया को जो पैसे मिलते, उन से वह अपना लिविंग स्टैंडर्ड मेंटेन करने लगी.
वह फाइवस्टार होटलों में विज्ञापन कंपनियों की तरफ से आयोजित होने वाली पार्टियों में शिरकत करती रहती थी. ऐसी ही एक पार्टी में उस की मुलाकात दक्षिण भारतीय फिल्मों के एक डाइरैक्टर से हुई. वह डाइरैक्टर सुप्रसिद्ध अभिनेता मोहनलाल के साथ ‘रेड चिलीज’ नाम से एक फिल्म बना रहे थे. उन्हें हीरोइन के लिए एक नए चेहरे की तलाश थी. लीना मारिया उन्हें अपनी फिल्म के लिए पसंद आ गई. लीना से उन्होंने अपनी फिल्म में काम करने के बारे में बात की, तो उस ने तुरंत हामी भर दी. क्योंकि यही उस का सपना था. उस के लिए खुशी की बात यह थी कि उसे पहली ही फिल्म में मोहनलाल जैसे सुप्रसिद्ध अभिनेता के साथ काम करने का मौका मिल रहा था. इसलिए उस ने डाइरैक्टर से पैसों के बारे में भी कोई बात नहीं की.
फिल्म बन जाने के बाद रिलीज हुई और दर्शकों को पसंद भी आई. पहली ही फिल्म सफल हो जाने पर लीना का आत्मविश्वास और बढ़ा. लीना की हिंदी और अंगरेजी के अलावा तमिल, तेलुगू और मलयालम भाषाओं पर भी अच्छी पकड़ थी. इसलिए उस ने तय कर लिया था कि उसे जिस भाषा की भी फिल्म मिलेगी, वह साइन कर लेगी. इस के बाद लीना मारिया को मलयालम फिल्म ‘कोबरा’ में काम करने का मौका मिला. इस फिल्म में हीरो ममूटी थे. यह फिल्म भी हिट हुई. फिर उस ने तमिल फिल्म ‘हसबैंड इन गोवा’ में काम किया. कई हिट फिल्में करने के बाद लीना ने बौलीवुड की तरफ कदम बढ़ाने शुरू कर दिए. अपनी अदाकारी के बूते वह बौलीवुड में जाना चाहती थी. इसलिए बौलीवुड में एंट्री के लिए उस ने अपने संपर्क बढ़ाने शुरू कर दिए.
लीना की मेहनत रंग लाई और सुजीत सरकार ने उसे अपनी फिल्म ‘मद्रास कैफे’ के लिए साइन कर लिया. लीना मारिया को इस फिल्म में लिट्टे के एक सदस्य का किरदार निभाना था. फिल्म में मशहूर अभिनेता जौन अब्राहम को लिया गया था. इस फिल्म की शूटिंग भी शुरू हो गई थी. लीना को हर जगह सफलता मिल रही थी इसलिए वह बहुत खुश थी. चूंकि यह सारी सफलताएं उसे फाइवस्टार होटलों की पार्टियों में शरीक होने के बाद ही मिली थीं, इसलिए शूटिंग से निपटने के बाद वह ऐसी पार्टियों में जरूर जाती थी.
ऐसी ही एक पार्टी में लीना मारिया की मुलाकात बालाजी नाम के व्यक्ति से हुई. बालाजी आकर्षक व्यक्तित्व का आदमी था. परिचय में उस ने खुद को पूर्व मुख्यमंत्री करुणानिधि का पोता और बड़ा बिल्डर बताया. उस ने लीना की फिल्में देखी थीं, साक्षात मुलाकात होने पर वह मन ही मन उसे चाहने लगा. बालाजी लीना को हर हाल में अपने जाल में फांसना चाहता था इसलिए उस ने उस से कहा, ‘‘आप रामू को तो जानती ही होंगी?’’
‘‘रामू यानी रामगोपाल वर्मा…’’ लीना ने चौंक कर पूछा, तो बालाजी ने हां कहा.
‘‘सर, उन्हें कौन नहीं जानता. वह तो बौलीवुड के जानेमाने डाइरैक्टर हैं. उन्होंने न जाने कितनी हीरोइनों को फर्श से अर्श तक पहुंचा दिया.’’
‘‘वह मेरा दोस्त है. अभी 2 दिन पहले ही उस से मेरी मुलाकात हुई थी.’’ बालाजी ने कहा तो लीना की आंखों में चमक आ गई. वह मन ही मन सोचने लगी कि जब रामगोपाल वर्मा उस का दोस्त है तो उस की मार्फत उसे रामू की फिल्म में काम मिल सकता है. इसलिए वह चहकते हुए बोली, ‘‘सर, मैं खुशनसीब हूं जो आप से मुलाकात हुई. वैसे भी मैं इस वक्त बौलीवुड की तरफ ही ध्यान लगाए हुए हूं. एक फिल्म तो मिल भी चुकी है जिस की शूटिंग कुछ दिनों में खत्म होने वाली है.’’
‘‘लीना, पहली बात तो यह कि मुझे सर..सर कह कर बात मत करो. और दूसरी बात यह है कि रामू से जब मेरी बात हुई थी तो उस ने बताया था कि वह एक फिल्म बना रहा है जिस का अभी नाम नहीं रखा गया है. हीरोइन के लिए उसे किसी नई लड़की की तलाश है. यदि आप इच्छुक हों, तो उस से बात करूं?’’
रामगोपाल वर्मा की फिल्मों में काम करने के लिए तमाम लड़कियां लालायित रहती हैं. जबकि लीना मारिया को यह मौका बड़ी आसानी से मिल रहा था. इसलिए उस ने तुरंत हां कर दी. वह सोचने लगी कि रामगोपाल वर्मा की फिल्मों में काम मिलने से उस की किस्मत चमक जाएगी. इस मुलाकात के बाद लीना की बालाजी के साथ अकसर मुलाकातें होने लगीं. जल्दी ही दोनों के बीच गहरी दोस्ती हो गई. बालाजी ने लीना को बौलीवुड के और भी कई डाइरैक्टरों के साथ मुलाकात कराने का आश्वासन दिया. लीना बालाजी के रहनसहन और ठाठबाट से बहुत प्रभावित थी. दोनों की दोस्ती धीरेधीरे प्यार में बदल गई. बाद में लीना ने उसे अपना तन तक सौंप दिया.
बालाजी ने लीना को शाही जिंदगी जीने का ऐसा चस्का लगा दिया कि वह उस की हकीकत जानने के बाद भी उस से दूर नहीं जा सकी. प्यार हो जाने के बाद लीना को पता लगा कि न तो वह पूर्व मुख्यमंत्री करुणानिधि का पोता है और न ही कोई बड़ा बिल्डर बल्कि एक बड़ा जालसाज है. उस ने जालसाजी से करोड़ों रुपए कमाए थे. रातदिन मेहनत करने के बावजूद भी लीना इतने रुपए नहीं कमा पाई थी, जितने बालाजी ने उस के सामने ला कर रख दिए थे. बड़ेबड़े बिजनैसमैनों को ठगना बालाजी के बाएं हाथ का खेल था. लीना को बालाजी के साथ रह कर ऐश और कैश दोनों मिल रहे थे इसीलिए वह उस के साथ खुशीखुशी लिवइन रिलेशन में रह रही थी.
लीना ने जौन अब्राहम के साथ जो ‘मद्रास कैफे’ फिल्म की थी, वह अगस्त 2013 में रिलीज होगी. अगर वह चाहती तो उसे बौलीवुड की और भी फिल्मों में काम मिल सकता था लेकिन बालाजी के चंगुल में फंसने के बाद उस ने और फिल्मों में काम करने की कोशिश करनी बंद कर दी थी. मूलरूप से बंगलुरु का रहने वाला बालाजी खुद को कर्नाटक कैडर का आईएएस बताता था. वह कभी अपना नाम शेखर रेड्डी, तो कभी सुरेश चंद्रशेखर रख लेता था. कोच्चि के रहने वाले बैजू की इमैनुवल सिल्क के नाम से एक टेक्सटाइल कंपनी थी.
अपने बिजनैस के प्रमोशन के लिए कुछ बिजनैसमैनों ने प्रसिद्ध हीरो और हीरोइनों का सहारा लेना शुरू कर दिया है. बैजू ने भी कोट्टायम में अपने एक शोरूम का उद्घाटन कराने के लिए तेलुगू फिल्मस्टार अल्लु अर्जुन को बुलाया था, जिस की वजह से शहर में उन की खासी चर्चा हुई थी. वर्ष 2012 में वह चेन्नई में अपना नया शोरूम खोल रहे थे. इस के लिए वह बौलीवुड की किसी अभिनेत्री को बुलाना चाहते थे. बैजू बालाजी को जानते थे. उन्होंने बालाजी से किसी फिल्मस्टार को बुलाने के बारे में बात की. इस पर बालाजी ने बैजू को आश्वासन दिया कि वह उन के शोरूम के उद्घाटन के लिए बौलीवुड अभिनेत्री कैटरीना कैफ को बुला सकता है मगर वह 20 लाख रुपए लेगी.
बैजू खुश हो गए. उन्होंने बालाजी को 20 लाख रुपए दे दिए और अपने शोरूम का उद्घाटन अभिनेत्री कैटरीना कैफ से कराने के निमंत्रणपत्र छपवा कर बंटवा दिए. इस की पूरे इलाके में चर्चा फैल गई. बौलीवुड की फेमस हीरोइन के आने पर उसे देखने वालों की संख्या बढ़ना लाजिमी था. पुलिस को जब कैटरीना कैफ के आने की बात पता चली तो वह भी सक्रिय हो गई. भीड़ को नियंत्रित करने के लिए पुलिस ने भी पूरी योजना बना ली.
जिस दिन बैजू के शोरूम का उद्घाटन होना था, उस दिन सुबह से ही लोग उन के शोरूम के आसपास जुटने शुरू हो गए थे. भारी तादाद में पुलिस भी वहां पहुंच गई. भीड़ अनियंत्रित होती जा रही थी. सभी लोग कैटरीना कैफ के आने का बेसब्री से इंतजार कर रहे थे. भीड़ को देख कर बैजू खुश हो रहे थे. निर्धारित समय के बाद भी जब कैटरीना कैफ वहां नहीं पहुंची तो दर्शक निराश होने लगे.
बैजू बारबार बालाजी का नंबर मिला रहे थे लेकिन उस का फोन उस समय स्विच्ड औफ आ रहा था. भीड़ काबू करने में पुलिस को मशक्कत करनी पड़ रही थी इसलिए पुलिस वाले बैजू से बारबार कैटरीना के बारे में मालूमात कर रहे थे. परेशान बैजू की समझ में नहीं आ रहा था कि वह लोगों को क्या जवाब दे. निर्धारित कार्यक्रम के कई घंटों बाद भी जब कैटरीना कैफ वहां नहीं आईं, तो थकहार कर लोग गालियां देते हुए अपनेअपने घर चले गए. बैजू ने किसी और व्यक्ति से शोरूम का उद्घाटन कराया.
बालाजी का नंबर स्विच्ड औफ आने के बाद बैजू को शक हो गया. उन्होंने किसी तरह कैटरीना कैफ के मुंबई स्थित औफिस का फोन नंबर ले कर फोन किया तो पता चला कि कैटरीना कैफ तो इस समय लंदन में एक फिल्म की शूटिंग में व्यस्त हैं. उन्होंने किसी को शोरूम वगैरह के उद्घाटन के लिए कोई डेट नहीं दी थी. यह सुन कर बैजू समझ गए कि वह ठगे जा चुके हैं. उन्होंने बालाजी के खिलाफ थाना कलसमरी में धोखाधड़ी की रिपोर्ट दर्ज करा दी. इस की जांच सबइंसपेक्टर अब्दुल लतीफ को सौंपी गई.
उधर शातिरदिमाग बालाजी ने चेन्नई के अन्नानगर (वेस्ट) एक्सटेंशन में फ्यूचर टेक्निक प्राइवेट लिमिटेड नाम की एक कंपनी खोली. इस कंपनी की मार्फत इस बार उस का इरादा मोटा हाथ मारने का था. उस ने अपने एक परिचित एम.बालासुब्रह्मण्यम और उन की पत्नी चित्रा को कंपनी का मैनेजिंग डाइरैक्टर बनाया. इस के बाद उस ने केनरा बैंक की एक शाखा से कंपनी के नाम 19 करोड़ का लोन ले लिया और लीना मारिया के साथ वहां से रफूचक्कर हो कर अंडरग्राउंड हो गया.
बाद में जब बैंक के वरिष्ठ अधिकारियों ने कागजों की जांच की, तो पता चला कि बालाजी ने 19 करोड़ रुपए के लोन के लिए जो कागजात जमा किए थे, वे फरजी थे. इस पर बैंक के डिप्टी जनरल मैनेजर टी.एस. नालाशिवम ने बालाजी के खिलाफ भादंवि की धारा 420, 419, 406, 170, 34 के तहत रिपोर्ट दर्ज करा दी. मामला करोड़ों रुपए की जालसाजी का था, इसलिए पुलिस भी हरकत में आ गई और उस ने तुरंत काररवाई करते हुए उस कंपनी के मैनेजिंग डाइरैक्टर एम. बालासुब्रह्मण्यम और उन की पत्नी चित्रा को गिरफ्तार कर लिया. पुलिस ने बालाजी की बहुत तलाश की लेकिन वह नहीं मिल सका.
दूसरी ओर बालाजी अंडरग्राउंड रह कर ठगी की दूसरी योजना को अंजाम देने की फिराक में लगा हुआ था. ठगी के कारनामों में अब लीना मारिया भी उस का साथ देने लगी थी. इस बार उस ने ठगी की अलग तरह की वारदात को अंजाम दिया. चेन्नई स्थित स्काइलार्क टेक्सटाइल ऐंड आउटफिटर नाम की फर्म के प्रोपराइटर श्री चक्रवर्ती राज्य सरकार के विभिन्न विभागों के कर्मचारियों की वर्दियां बनाने का टेंडर लेते थे. टेंडर लेने के लिए वह सरकारी अधिकारियों से भी सांठगांठ रखते थे.
लीना और बालाजी ने चक्रवर्ती को कर्नाटक राज्य के मैडिकल तथा ट्रांसपोर्ट डिपार्टमेंट के कर्मचारियों की वर्दियां सिलवाने का टेंडर दिलाने के नाम पर उन से करीब 63 लाख रुपए ठग लिए. चक्रवर्ती से बालाजी ने खुद को तमिलनाडु अरबन डेवलपमेंट प्रोजेक्ट का डाइरैक्टर जयकुमार (आईएएस) और लीना मारिया को अपनी सेक्रेटरी बताया था. करोड़ों का फायदा होता देख चक्रवर्ती ने यह रकम खुशीखुशी बालाजी को सौंपी थी. कुछ दिनों तक तो चक्रवर्ती की जयकुमार उर्फ बालाजी से फोन पर बात होती रही, लेकिन बाद में उस का फोन बंद हो गया.
कई दिनों बाद भी बालाजी का फोन चालू नहीं हुआ, तो उन्होंने तमिलनाडु अरबन डेवलपमेंट प्रोजेक्ट के औफिस में संपर्क किया. उस औफिस में पता चला कि वहां जयकुमार नाम का कोई डाइरैक्टर है ही नहीं. ठगी का अहसास होने पर चक्रवर्ती ने 6 मई, 2013 को थाने में भादंवि की धारा 406, 419, 420, 120बी के तहत रिपोर्ट दर्ज करा दी. इस तरह की ठगी के कई मामले हो चुके थे. पुलिस को यह पता चल ही चुका था कि इन मामलों को बालाजी और उस की प्रेमिका अभिनेत्री लीना मारिया ही अंजाम दे रहे हैं इसलिए पुलिस दोनों के फोटो हासिल कर के उन की तलाश में जुट गई. जब थाना पुलिस को सफलता नहीं मिली, तो इस मामले की जांच चेन्नई सेंट्रल क्राइम ब्रांच के हवाले कर दी.
सेंट्रल क्राइम ब्रांच ने अपने सोर्स के आधार पर लीना मारिया पौल और बालाजी उर्फ शेखर रेड्डी उर्फ सुकेश चंद्रशेखर की तलाश शुरू कर दी. टीम ने कई संभावित जगहों पर दबिशें दीं लेकिन वे दोनों नहीं मिले. उधर लीना मारिया और बालाजी को इस बात की भनक लग चुकी थी कि क्राइम ब्रांच उन के पीछे पड़ी हुई है इसलिए दोनों करीब 2 महीने पहले दिल्ली भाग आए. दिल्ली में उन्हें एक ऐसी जगह की तलाश थी, जो उन के लिए सुरक्षित हो. इस के लिए उन्होंने दक्षिणी दिल्ली के फतेहपुर बेरी के पास असोला गांव में स्थित मोहिंदर सिंह के खारी फार्महाउस को 4 लाख रुपए प्रति महीने किराए पर ले लिया. बातचीत करने के बाद वे दोनों दिल्ली से कहीं चले गए और 15 दिन पहले ही उस फार्महाउस में रहने के लिए आए थे.
चूंकि वे दोनों इस बार कोई बड़ा हाथ मारना चाहते थे इसलिए उन्होंने अपने पास कई लग्जरी और कीमती गाडि़यां रख रखी थीं. साथ ही लीना ने अपने लिए एक एजेंसी से 4 बौडीगार्ड भी ले रखे थे जो काले रंग के सफारी सूट पहनते थे तथा अपने पास रिवाल्वर रखते थे. फार्महाउस के गेट पर बैठने के लिए उन्होंने एक सिक्योरिटी एजेंसी से करीब आधा दरजन सिक्योरिटी गार्ड भी ले रखे थे. लीना मारिया और बालाजी जब भी बाहर निकलते, 3 गाडि़यों के साथ वीवीआईपी अंदाज में निकलते थे. चेन्नई की सेंट्रल क्राइम ब्रांच ने दोनों के मोबाइल नंबरों को इलैक्ट्रौनिक सर्विलांस पर लगा रखा था.
उन्हें पता चला कि उन्होंने अपने मोबाइल सेटों में वोडाफोन कंपनी के सिमकार्ड डाल रखे हैं. उन की लोकेशन दिल्ली आ रही थी. इसलिए चेन्नई क्राइम ब्रांच टीम ने दिल्ली पुलिस से संपर्क किया और आरोपियों को गिरफ्तार करने में सहयोग मांगा. इस तरह दिल्ली पुलिस ने अभिनेत्री लीना मारिया पौल को गिरफ्तार करने के बाद उसे 28 मई, 2013 को साकेत कोर्ट में चीफ मैट्रोपौलिटन मजिस्ट्रेट के समक्ष पेश किया, जहां से चेन्नई सेंट्रल क्राइम ब्रांच उसे ट्रांजिट रिमांड पर अपने साथ चेन्नई ले गई. इस के अलावा दिल्ली पुलिस ने फार्महाउस से जो 4 बौडीगार्ड हिरासत में लिए थे, उन्हें फतेहपुर बेरी थाना पुलिस के हवाले कर दिया.
फतेहपुर बेरी थाना पुलिस ने जब उन बाउंसरों से पूछताछ की, तो उन्होंने अपने नाम नरेंद्र, राजकुमार निवासी झज्जर, राहुल निवासी फतेहपुर बेरी और प्रदीप निवासी पानीपत बताया. जांच में पता चला कि उन के हथियारों के लाइसेंस हरियाणा और जम्मूकश्मीर से बने थे जो समस्त भारत के लिए वैध थे. लेकिन दिल्ली में कई महीने से रहने के बावजूद उन्होंने इस की सूचना दिल्ली की लाइसेंसिंग अथारिटी को नहीं दी थी. जबकि 1 महीने से ज्यादा रहने पर नियमानुसार सूचना अथारिटी को दी जानी चाहिए थी. इसलिए फतेहपुर बेरी पुलिस ने चारों बाउंसरों के खिलाफ 30 आर्म्स एक्ट के तहत मुकदमा पंजीकृत कर के उन्हें गिरफ्तार कर जेल भेज दिया.
फार्महाउस में जो महंगी और लग्जरी गाडि़यां पाई गईं, उन के बारे में पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि कहीं वे गाडि़यां चोरी की तो नहीं हैं. क्योंकि बालाजी और लीना मारिया ने भले ही करोड़ों रुपए ठगे थे, लेकिन यह रकम इतनी बड़ी नहीं थी कि इतनी महंगी गाडि़यां खरीदी जा सकें. पुलिस उन गाडि़यों के मालिकों का पता लगाने की कोशिश कर रही है. True Crime Story
—कथा पुलिस सूत्रों पर आधारित






