Chhattisgarh News: एजूकेशन कारोबारी अभिषेक मिश्रा के अपने ही इंस्टीट्यूट की युवा प्रोफेसर किम्सी जैन से प्रेमिल रिश्ते हो गए थे. विवाह के बाद वह अभिषेक से किनारा करने लगी तो अभिषेक को यह नागवार गुजरा. तब अभिषेक से छुटकारा पाने के लिए किम्सी ने अपने रोबोट इंजीनियर पति और चचिया ससुर के साथ मिल कर जो किया, उसे उचित कतई नहीं कहा जा सकता.
पुलिस हैडक्वार्टर के उस मीटिंग हौल में छत्तीसगढ़ पुलिस के तमाम अधिकारी मौजूद थे. उन में फोरैंसिक, साइबर और क्राइम एक्सपर्ट ही नहीं, वे लोग भी थे, जिन्हें बड़े से बड़े अनसुलझे मामले सुलझाने में महारथ हासिल थी. यह बात अलग थी कि जिस मामले को ले कर यह मीटिंग बुलाई गई थी, उसे ले कर सभी के चेहरे पर चिंता की लकीरें थीं.
मीटिंग में मामले से जुड़े छोटेबड़े सभी बिंदुओं को ले कर चर्चा हो रही थी. लेकिन अफसोस की बात यह थी कि कुछ भी नतीजा सामने नहीं आ रहा था. प्रोजैक्टर के दोनों ओर बिछी कुरसियों पर बैठे अधिकारियों के बीच बैठे डीजीपी ए.एस. उपाध्याय ने सभी को संबोधित करते हुए कहा, ‘‘यह कितने अफसोस की बात है कि इस मामले में हम अपराधियों तक नहीं पहुंच पा रहे हैं.’’
‘‘सर, हम कोशिश तो कर रहे हैं, लेकिन…’’ सामने बैठे एक पुलिस अधिकारी ने कहा, ‘‘ऐसा कोई सुराग ही नहीं मिल रहा है कि…’’
‘‘जरूरी नहीं कि हर कोशिश का नतीजा निकल ही आए. इस के अलावा जब तक कुछ नतीजा सामने न आ जाए, तब तक यह भी तो पता नहीं चलता कि कोशिश की जा रही है.’’
‘‘सर, इस मामले में अपराध करने वाले बहुत चालाक हैं. उन्होंने किसी जासूसी फिल्म की तरह हमारे सामने चुनौती पेश की है. उन्होंने ऐसा कोई सुराग ही नहीं छोड़ा. और जो सुराग मिले भी हैं, वे उलझाने वाले हैं. ऐसे में हमारे लिए यह तय करना मुश्किल हो गया है कि यह मामला किडनैपिंग का है या कुछ और.’’
‘‘हमारा काम सुरागों को ढूंढना और उसी के सहारे मामले की तह तक पहुंचना है. यह तो जानते ही हो कि कोई भी अपराधी पुलिस से ज्यादा चालाक नहीं होता. उस सुराग को खोजिए, जिस तक अभी तक आप पहुंच नहीं पाए हैं. उस के मिलते ही केस खुल जाएगा और अपराध करने वाले आप की हिरासत में होंगे.’’
‘‘सर, इस मामले में हम ने पुलिस की 35 टीमें लगा रखी हैं. जल्द ही कोई न कोई परिणाम सामने आएगा.’’
‘‘ठीक है, जांच में छोटी से छोटी बात का खयाल रखा जाए. आप लोग निर्देश के लिए मुझ से सीधे या अपने आईजी तथा एसपी से कौंटैक्ट कर सकते हैं. कुछ भी कीजिए, इस मामले में अब हम और फजीहत नहीं चाहते.’’ डीजीपी ए.एन. उपाध्याय ने कहा.
इसी के साथ मीटिंग खत्म हो गई. कोई भी अपराध होने के बाद जांच में उस मामले से पुलिस का रिश्ता उतना ही गहरा होता है, जितना दिल से धड़कनों का. लेकिन कुछ ऐसे भी सनसनीखेज मामले सामने आ जाते हैं, जिन में पुलिस के अच्छे से अच्छे एक्सपर्ट भी गच्चा खा जाते हैं. पुलिस जांच के अपने एक मायने होते हैं, लेकिन जब कोई सबूत हाथ न लगे और जो मिलें भी, वे दगा दे जाएं तो पुलिस अधिकारियों के पसीने छूट जाते हैं. अरबपति अभिषेक मिश्रा के हत्या के मामले में भी कुछ ऐसा ही हो रहा था. इस मामले में पूरे राज्य की पुलिस के जांबाज पुलिस वाले भी चकरा कर रहे गए थे. इस की वजह भी हैरान करने वाली थी.
पुलिस की 35 टीमें एक महीने में लगभग डेढ़ हजार लोगों से पूछताछ कर चुकी थीं. वे 7 राज्यों, 20 से ज्यादा शहरों की खाक छान चुकी थीं, करीब एक करोड़ फोन काल चेक करने के अलावा सैकड़ों हिस्ट्रीशीटर और तमाम रजिस्टर्ड अपराधियों से गहरी पूछताछ कर चुकी थीं, इन में तमाम हाई प्रोफाइल खूबसूरत लड़कियां भी शामिल थीं. पूछताछ, धरपकड़ और काल ट्रैसिंग का भी सिलसिला जारी था. इस के बावजूद इस अपराध की पृष्ठभूमि और जांच में सुराग तो मिलते थे, लेकिन वे तह तक पहुंचाने में सफल नहीं होते थे. एक तरह से देखा जाए तो यह राज्य का सब से बड़ा मामला बन गया था. शायद इसीलिए मामले का किसी भी तरह खुलासा हो जाए, डीजीपी ए.एन. उपाध्याय ने तमाम पुलिस अधिकारियों के साथ बैठक की थी.
समझ में नहीं आ रहा था कि अभिषेक अचानक कहां गायब हो गए थे. गायब होने के बाद फिरौती के लिए फोन भी आया था. फोन करने वाले ने नक्सली आंदोलन का प्रतीक ‘लाल सलाम’ कह कर संदेह की सुई नक्सलियों की ओर घुमा दी थी. इस तरह साजिश रचने वाले आजाद थे. मामला बेहद हैरतअंगेज और सनसनीखेज बन गया था. राज्य के लोगों की निगाह इस मामले पर टिकी थीं. मीडिया में हर रोज खबरें आ रही थीं. मामला इसलिए बड़ा हो गया था, क्योंकि अभिषेक मिश्रा कोई मामूली आदमी नहीं थे.
भारत का 26वां राज्य छत्तीसगढ़ ऊंचीनीची पर्वत श्रेणियों से घिरा है. राजधानी रायपुर से लगभग 30 किलोमीटर दूर राज्य का तीसरा बड़ा शहर है दुर्गभिलाई. मुंबई- नागपुर-कोलकाता राष्ट्रीय राजमार्ग पर स्थित यह शहर इस्पात संयत्र के लिए प्रसिद्ध है. इसी शहर के पौश इलाके नेहरूनगर (पश्चिम) की कोठी संख्या- 45ए/13 में रहते हैं आई.पी. मिश्रा. मृदुभाषी और व्यवहारकुशल आई.पी. मिश्रा कोई छोटेमोटे आदमी नहीं हैं. उन के हाथों में शंकराचार्य गु्रप के कई बड़े शैक्षणिक संस्थानों, यूनिवर्सिटी और स्टील कंपनी की कमान है. उन के संस्थानों का शुमार राज्य के बड़े से बड़े संस्थानों में होता है. पूरी प्रौपर्टी और कारोबार अरबों में है. अब ऐसे आदमी की राजनैतिक और सामाजिक पहुंच तो होगी ही. नाम, शोहरत और दौलत भी उन के कदम चूम रही है.
करीब 2 सौ करोड़ के एंपायर के मालिक आई.पी. मिश्रा के बेटे थे अभिषेक मिश्रा. हंसमुख स्वभाव के अभिषेक खुद भी शंकराचार्य ग्रुप औफ इंस्टीट्यूट के डायरेक्टर थे. उन के परिवार में पत्नी जया मिश्रा के अलावा 2 बच्चे थे. पिता के साथ अभिषेक भी शिक्षा जगत में बड़ा नाम थे. उन की ख्याति में तब और भी इजाफा हो गया था, जब उन्होंने सन 2013 में माओवाद विषय पर आधारित एक क्षेत्रीय फिल्म ‘अलाप’ का निर्माण किया था. यही नहीं, करोड़ों रुपए में रायपुर रेंजर्स के नाम से वह टैनिस लीग की टीम की स्पौंसरशिप भी कर चुके थे.
कौन, कब, किस मुसीबत में फंस जाए, कोई नहीं जानता. मिश्रा परिवार के साथ भी ऐसा ही हुआ था. 9 नवंबर, 2015 की शाम अभिषेक अपनी लाल रंग की स्कोडा कार नंबर सीजी 07 एमए 0007 से किसी को बिना कुछ बताए निकले तो रहस्यमय तरीके से लापता हो गए थे. काफी रात होने पर भी जब वह वापस नहीं आए तो आई.पी. मिश्रा और अभिषेक की पत्नी जया ने उन के मोबाइल कर फोन किया. मोबाइल पर लगातार घंटी जाती रही, लेकिन फोन नहीं उठा. उन्होंने बात तो नहीं की, लेकिन एमएमएस के जरिए बता दिया कि वह थोड़ी देर में आ जाएंगे.
थोड़ी और रात बीती तो उन का मोबाइल भी बंद हो गया. इस से घर वालों को चिंता हुई. आई.पी. मिश्रा ने जानपहचान वालों से अभिषेक के बारे में पता किया, लेकिन उन का कुछ पता नहीं चला. फिर तो वह रात चिंता में बीती. किसी अनहोनी की आशंका से परेशान घर वालों ने सवेरा होते ही इस बात की सूचना पुलिस को दे दी. मामला प्रतिष्ठित परिवार का था, इसलिए एसपी मयंक श्रीवास्तव ने स्थानीय थाना पुलगांव के थानाप्रभारी पी.के. साहू को इस मामले की जांच के आदेश दे दिए. पुलिस ने सक्रिय हो कर अभिषेक की खोजबीन शुरू कर दी. अभिषेक को ले कर हर कोई परेशान था. वह कहां गए हैं, यह उन्होंने घर वालों को भी नहीं बताया था.
अगले दिन उन के लापता होने का मामला शहर भर में चर्चा का विषय बन गया. पुलिस को अभिषेक के अपहरण की आशंका अधिक थी. यह तब सच भी साबित हुआ, जब उन के पिता आई.पी. मिश्रा के मोबाइल पर अभिषेक के मोबाइल से फिरौती का फोन आया. उन के मोबाइल से किसी अज्ञात ने फोन कर के कहा, ‘‘लाल सलाम.’’
‘‘कौन बोल रहे हैं?’’ आई.पी. मिश्रा ने पूछा.
‘‘लाल सलाम, सुना नहीं… मिश्राजी, आप बेटे को ले कर परेशान न हों. वह हमारे कब्जे में है. हम उसे छोड़ देंगे, लेकिन बदले में मोटी फिरौती चाहिए. रकम कहां पहुंचानी है, यह हम तुम्हें बाद में बता देंगे.’’ फोन करने वाले ने पल भर रुक कर कहा, ‘‘और हां, ज्यादा चालाक बनने की कोशिश मत करना, वरना तुम्हें बेटे की लाश ही मिलेगी.’’
आई.पी. मिश्रा कुछ कहते, उस के पहले ही फोन काट दिया गया. इस के तुरंत बाद मोबाइल फोन बंद कर दिया गया. उन्होंने यह बात पुलिस को बताई तो पुलिस विभाग में हड़कंप मच गया. मामला एक अरबपति और रसूख वाले के अपहरण का था, इसलिए शक सीधे नक्सलियों पर गया, क्योंकि जिस तरह उन्होंने ‘लाल सलाम’ कहा था, वह नक्सलियों का प्रचलित शब्द था. प्रदेश के डीजीपी ए.एन. उपाध्याय सहित आला अधिकारियों ने तुरंत काररवाई के आदेश दिए. थाना पुलगांव में अपराध संख्या 643/2015 पर अभिषेक मिश्रा के अपहरण का मुकदमा दर्ज कर लिया गया.
आननफानन पुलिस की एक दर्जन टीमें गठित कर दी गईं. एसपी मयंक श्रीवास्तव, डीएसपी (क्राइम) कविलाश टंडन, एएसपी राजेश अग्रवाल के दिशानिर्देशन में ये टीमें जांच में जुट गईं. आईजी प्रदीप गुप्ता मामले की मौनीटरिंग कर रहे थे. इस कोशिश में पुलिस को रायपुरधमतरी के वीआईपी रोड से अभिषेक मिश्रा की कार लावारिस हालत में खड़ी मिल गई. पुलिस ने कार की तलाशी ली, लेकिन उस से कोई ऐसा सुराग नहीं मिला, जिस से पुलिस को जांच के लिए कोई दिशा मिल पाती.
भिलाई से रायपुर के बीच एक टौल नाका पुलिस चैकिंग पौइंट पड़ता है, वहां सीसीटीवी कैमरे लगे हैं. पुलिस ने उन की वीडियो फुटेज को खंगाली. 9 नवंबर की रात अभिषेक की स्कोडा कार कैमरे में कैद तो हुई थी, लेकिन तसवीर धुंधली थी, इसलिए यह पता लगाना मुश्किल था कि उस में कौन सवार था. फिरौती की काल धमतरी इलाके से की गई थी. धीरेधीरे एक सप्ताह बीत गया, लेकिन पुलिस किसी नतीजे पर नहीं पहुंच सकी. क्राइम ब्रांच के प्रभारी विशाल सून भी इस मामले की जांच में लगे थे. पुलिस ने अभिषेक के मोबाइल नंबर की लोकेशन और काल डिटेल्स निकलवाई.
मोबाइल की लोकेशन के अनुसार, अभिषेक शाम 5 बजे से रात 9 बज कर 40 मिनट तक भिलाई के विभिन्न इलाके में घूमते हुए रायपुर गए थे. वहां जा कर उन का मोबाइल बंद हो गया था. रास्ते से ही उन्होंने घर वालों को एसएमएस किए थे. अगले दिन उन का मोबाइल धमतरी इलाके में ही बंद हुआ था. वहीं से फोन कर के फिरौती मांगी गई थी. इस के बाद फोन फिर बंद हो गया था. इस के बाद अपहर्ताओं ने अभिषेक के घर वालों से कोई संपर्क नहीं किया था.
इस से अपहरण में नक्सलियों का हाथ होने की आशंका कम हो गई थी. इस की वजह भी थी. अमूमन नक्सली किसी को अपहृत कर के अपनी मांगों को पूरा करने के लिए उसे खूब प्रचारित करते हैं. लेकिन इस मामले में ऐसा कतई नहीं हुआ था. पुलिस ने मुखबिरों की भी मदद ली. उन से मिली जानकारी से साफ हो गया कि इस मामले में नक्सलियों का हाथ नहीं है. पुलिस जांच को भटकाने के लिए लाल सलाम कह कर मामले को नक्सलियों से जोड़ने की कोशिश की गई थी. अपहरण के बारे में जांच के लिए पुलिस ने अलगअलग राज्यों के अपहरण करने वाले कई गिरोहों से पूछताछ की. ऐसे अपराधियों से भी पूछताछ की गई, जो जेल में बंद थे. क्योंकि जेल में बंद कोई बड़ा अपराधी भी ऐसा करा सकता था.
पुलिस की कई टीमें दिनरात काम कर रही थीं. शहर में तरहतरह की चर्चाएं हो रहीं थीं. यह भी चर्चा चली थी कि अभिषेक के घर वालों ने अपहर्ताओं को 10 करोड़ की फिरौती की रकम दे दी है. लेकिन जब अभिषेक लौट कर नहीं आए, तो इस चर्चा पर खुद ही विराम लग गया. एक चर्चा यह भी चली थी कि अभिषेक को फिल्म निर्माण व टैनिस टीम के प्रायोजक बनने पर बड़ा घाटा हुआ था, इसलिए वह खुद ही भूमिगत हो गए हैं. पुलिस ने इन पर भी जांच की, लेकिन कोई सफलता नहीं मिली. संदेह के आधार पर पुलिस ने शंकराचार्य ग्रुप से जुड़े लोगों और उन के घर वालों से भी पूछताछ की, लेकिन इस का भी कोई नतीजा नहीं निकला. उन लोगों से भी पूछताछ की गई, जिन से 9 नवंबर को अभिषेक से बातें हुई थीं.
इन में एक किम्सी जैन भी थी. 9 नवंबर की शाम उस की भी अभिषेक से बात हुई थी. किम्सी भिलाई में ही चौहान टाउन के ब्लाक-जी स्थित अपौर्टमैंट के फ्लैट नंबर-18 में अपने पति विशाल जैन के साथ रहती थी. विशाल पेशे से इंजीनियर था और रोबोट्स के पार्ट्स बनाता था. किम्सी का विवाह एक साल पहले ही विशाल से हुआ था. उन का 2 महीने का एक बेटा था. यह रूटीन पूछताछ थी. इन में कोई भी संदिग्ध नहीं था.
किम्सी ने बताया था कि हौकी टीम की स्पौंसरशिप के सिलसिले में उस ने अभिषेक से बात की थी. वह और उस के पति दोनों ही अभिषेक को जानते थे. वह अभिषेक के इंस्टीट्यूट में बतौर प्रोफेसर नौकरी कर चुकी थी, जबकि विशाल भी शंकराचार्य गु्रप के इंजीनियरिंग कालेज में कंप्यूटर लगाने का काम कर चुका था. 18 नवंबर को बालौदा बाजार में एक युवक का शव मिला. इस से पुलिस की चिंता बढ़ गई. अपहर्ता चूंकि कोई संपर्क नहीं कर रहे थे और अभिषेक का कोई सुराग भी नहीं मिल रहा था, इसलिए आशंका हत्या की भी थी. पुलिस मौके पर पहुंची. उस ने अभिषेक के घर वालों को भी बुलाया, लेकिन राहत की बात यह रही कि यह लाश अभिषेक की नहीं थी.
अभिषेक के घर वालों को भी अनहोनी की आशंका थी, लेकिन उन की उम्मीदों में अभिषेक जिंदा थे. इस दौरान भिलाई समेत आसपास के जिलों में जो भी लाशें मिलीं, उन सभी की जांच की गई. अब तक 25 दिन हो गए थे, परंतु अभिषेक का कुछ पता नहीं चल सका था. पुलिस ने प्रेमप्रसंग के एंगल पर काम करते हुए कई लड़कियों और महिलाओं से पूछताछ की थी. इन में स्टाफ के लोग भी शामिल थे. यहां भी नतीजा शून्य ही रहा. मामले की गूंज सत्ता के गलियारों में भी थी. प्रदेश के मुख्यमंत्री डा. रमन सिंह ने पुलिस के बड़े अधिकारियों को अभिषेक की जल्द बरामदगी के निर्देश दिए थे. इस के बाद पुलिस की 35 टीमों का गठन कर के जांच में लगा दिया गया था.
लेकिन इस मामले की गुत्थी सुलझाने में पुलिस के पसीने छूट रहे थे. पुलिस की टीमें बिहार, राजस्थान, मध्य प्रदेश, ओडिशा, उत्तर प्रदेश, दिल्ली और आंध्र प्रदेश तक घूम आई थीं. वहां कईकई दिनों तक डेरा डाले रहीं, लेकिन कोई नतीजा नहीं निकला था. पुलिस जहां जीजान से लगी थी, वहीं मीडिया हर रोज पुलिस की नाकामी के किस्से छाप रही थी. जब पुलिस हर तरह से फेल होने लगी तो डीजीपी ने मीटिंग कर के इन्वैस्टीगेशन की समीक्षा की और नए सिरे से जांच के आदेश दिए.
अब तक अभिषेक को गायब हुए एक महीने से ज्यादा का वक्त बीत चुका था. इस के बाद पुलिस ने बड़ा साइबर औपरेशन चलाया. इस काम में प्रदेश के साइबर एक्सपर्ट के साथ बंगलुरु के विशेषज्ञों को भी लगाया गया. इस औपरेशन में पुलिस ने अभिषेक के मोबाइल की लोकेशन के साथ करीब एक करोड़ नंबर निकाले. इन सभी नंबरों की ट्रैकिंग की गई. यह बहुत ही मुश्किल काम था, लेकिन पुलिस ने उस में से करीब 15 सौ नंबरों को सर्विलांस पर लगाया.
पुलिस ने अभिषेक का पुराना काल डिटेल्स खंगाला तो उस में किम्सी का नंबर मिला. पता चला कि दोनों में अकसर बातें होती रहती थीं. इस से पुलिस को उस पर शक हुआ. पुलिस को याद आया कि उस से तो पहले भी पूछताछ हो चुकी है, क्योंकि 9 नवंबर को उस ने अभिषेक के फोन पर बात की थी. पुलिस ने एक बार फिर उस से पूछताछ की. इस बार भी उस ने वही सब बताया जो पहले बता चुकी थी. उस का कहना था कि वह उस के यहां नौकरी करती थी, इसलिए काम के सिलसिले में उस से बातें होती रहती थीं.
पुलिस ने उस के इंजीनियर पति विकास से भी पूछताछ की. इस पूछताछ में कोई ऐसी वजह सामने नहीं आई कि उन्हें हिरासत में लिया जाता. लेकिन पुलिस को उन के चेहरे पर आने वाले भावों से लग रहा था कि वे झूठ बोल रहे हैं. बिना सबूत के सच उगलवाने का पुलिस के पास कोई उपाय नहीं था. मामला इतना सुर्खियों में था कि छोटी सी भी गलती पर पुलिस खुद कठघरे में खड़ी हो सकती थी. वैसे भी पुलिस किसी से तब ही सच उगलवा पाती है, जब संदिग्ध के खिलाफ उस के पास कुछ पुख्ता सबूत हों. अब पुलिस की नजरें किम्सी और विकास पर जम गई थीं. शायद इसी वजह से पहले क्राइम ब्रांच में तैनात रहे तेजतर्रार एएसआई एस.एन. सिंह को विशेष तौर पर जांच में लगाया गया.
चोरीछिपे विकास की निगरानी शुरू की गई तो पाया गया कि ये लोग किसी से ज्यादा मतलब नहीं रखते. अभिषेक के मामले में क्या हो रहा है, इस पर लोगों से चर्चा जरूर करते रहते थे. पुलिस को किम्सी और विकास का मोबाइल नंबर मिल गया था. सर्विलांस से पता चला कि दोनों मोबाइल के जरिए एक खास नंबर के संपर्क में रहते थे. उस नंबर के बारे में पता किया गया तो वह नंबर विकास के चाचा अजीत का था. जांच से पता चला कि अजीत स्मृतिनगर स्थित एक पुराने बंगलेनुमा घर में बतौर किराएदार रहता है. विकास और किम्सी अकसर उस के यहां आतेजाते रहते थे. पुलिस को विकास के यहां अखबार डालने वाले हौकर से पता चला था कि इधर एक महीने से विकास कई अखबार ले रहा था.
इस से पुलिस को शक हुआ कि शायद वे अभिषेक के मामले में ज्यादा से ज्यादा जानकारी लेने के लिए ऐसा कर रहे हैं. पुलिस का संदेह और मजबूत हुआ. निगरानी बढ़ गई. जबकि विकास और किम्सी को पता ही नहीं था कि उन की निगरानी हो रही है. इसी बीच एक स्पैशल इन्वैस्टीगेशन टीम (एसआईटी) गठित कर दी गई, जिस में एसपी मयंक श्रीवास्तव, एएसपी (क्राइम) अजात बहादुर, जांजगीर चांपा के एएसपी विजय अग्रवाल, सीएसपी राजीव वर्मा, टीआई संजय सिंह, कलीम खान, थानाप्रभारी पी.के. साहू आदि को शामिल किया गया.
पुलिस ने विकास के मोबाइल की पूरी डिटेल्स हासिल कर ली. सर्विलांस टीम ने जब गहराई से उस का विश्लेषण किया तो हैरान रह गई, क्योंकि 9 नवंबर की शाम 5 बजे से रात साढ़े 9 बजे तक अभिषेक के मोबाइल की लोकेशन और उस के मोबाइल की लोकेशन एक साथ मूव कर रही थी. इस तरह शक यकीन में बदल गया तो 22 दिसंबर की रात पुलिस ने विकास और उस के चाचा अजीत को पूछताछ के लिए हिरासत में ले लिया. पुलिस ने दोनों से पूछताछ शुरू की तो विकास ने कहा कि वह 9 नवंबर को अपने काम से कई स्थानों पर घूमने गया था.
‘‘ऐसा भी क्या काम था, जो तुम रायपुर तक घूमने गए थे?’’ एक पुलिस अधिकारी ने पूछा तो उस ने कहा, ‘‘मुझे वहां काम था.’’
पुलिस को लगा कि यह चालाक और शातिर है. तब पुलिस ने उसे फंसाने के लिए सवालों का जाल बुन कर उस पर सख्ती की तो वह गुमसुम हो गया. तब पुलिस ने कहा, ‘‘कुछ बताओगे या हमें कुछ और भी करना होगा?’’
‘‘अभिषेक को हम ने मार दिया है.’’ विकास ने एकदम से सच उगल दिया.
‘‘क्या?’’
‘‘जी सर, हमारे पास उस से पीछा छुड़ाने का और दूसरा कोई रास्ता नहीं था. वह मेरी पत्नी को परेशान कर रहा था.’’
सच जान कर पुलिस हैरान रह गई. पुलिस अब अभिषेक का शव बरामद करना चाहती थी. शुरुआती पूछताछ में उन्होंने बताया था कि अभिषेक की लाश स्मृतिनगर स्थित अजीत के घर के बगीचे में दबा कर ऊपर से सब्जियां लगा दी गई हैं. अगली सुबह अभिषेक की हत्या की खबर जंगल में लगी आग की तरह फैल गई. मिश्रा परिवार में तो कोहराम मच गया. विकास और अजीत को भारी पुलिस की मौजूदगी में स्मृतिनगर ले जाया गया, जहां उन के बताए स्थान पर खुदाई कराई गई. फोरैंसिक टीम को भी मौके पर बुलवा लिया गया था.
पुलिस की गाडि़यां देख कर अजीत के घर के सामने सैकड़ों लोगों की भीड़ लग गई थी. करीब 6 फुट गहरा गड्ढा खोदने पर जहां बहुत सारा नमक बिखरा मिला, वहीं एक बोरे और प्लास्टिक की पौलीथिन में अभिषेक का शव बरामद हुआ. शव बुरी तरह से सड़ चुका था. घटना की जानकारी होने पर पूरे शहर में सनसनी फैल गई. घर वालों ने शव की शिनाख्त कर दी. इस के बाद पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए भिजवा दिया. पुलिस पूछताछ में विकास ने बताया था कि हत्या में किम्सी भी शामिल थी. उस समय वह नौकरी की तलाश में दिल्ली गई हुई थी, इसलिए उस की गिरफ्तारी के लिए हवाई मार्ग से तुरंत एक टीम दिल्ली के लिए रवाना कर दी गई. दिल्ली पुलिस की मदद से छत्तीसगढ़ पुलिस किम्सी को गिरफ्तार कर के भिलाई ले आई.
इस के बाद पुलिस के आला अधिकारियों ने तीनों से पूछताछ की तो अभिषेक हत्याकांड मामले में सनसनीखेज खुलासे और फूलप्रूफ योजना से हर कोई हैरत में पड़ गया. किसी ने नहीं सोचा था कि एक बड़े रसूख वाले आदमी के कत्ल का खुलासा ऐसा होगा कि हर कोई हैरान रह जाएगा. पूछताछ में जो कहानी सामने आई, वह वाकई चौंकाने वाली थी. मासूम सी दिखने वाली किम्सी अभिषेक के कत्ल की वजह बनी थी. आईजी प्रदीप गुप्ता ने प्रेस कौन्फ्रैंस कर के हत्याकांड का खुलासा किया.
दरअसल, विवाह के बाद से ही विकास महसूस करने लगा था कि किम्सी गुमसुम और परेशान रहती है. बेटे के जन्म के बाद उस की इस आदत में और भी इजाफा हुआ. विकास इंजीनियर और तेजतर्रार आदमी था. आखिर एक दिन उस ने उस से पूछ ही लिया, ‘‘किम्सी, मैं देख रहा हूं कि जब से तुम्हारी शादी हुई है, तभी से तुम कुछ परेशान सी रहती हो, आखिर बात क्या है?’’
‘‘कुछ नहीं.’’
‘‘कुछ है, तभी तो मैं पूछ रहा हूं. बताओ न क्या बात है?’’ विकास ने किम्सी का चेहरा दोनों हथेलियों के बीच ले कर प्यार से पूछा तो उस की आंखें भर आईं.
विवेक ने किम्सी को आश्वस्त करते हुए कहा, ‘‘बताओ क्या बात है?’’
कुछ पल की खामोशी के बाद किम्सी ने कहा, ‘‘मुझे ब्लैकमेल किया जा रहा है विकास.’’
‘‘क…क…क्या…?’’
‘‘हां विवेक, मैं अपनी जिंदगी से परेशान हो चुकी हूं.’’
‘‘कौन ब्लैकमेल कर रहा है तुम्हें?’’
‘‘बताती हूं, लेकिन पहले तुम्हें एक वादा करना होगा.’’
‘‘क्या?’’
‘‘तुम मुझ से नाराज नहीं होओगे. मुझ से जो हुआ, वह मेरी मजबूरी थी विकास. मैं तुम से बहुत प्यार करती हूं और तुम्हें खोना नहीं चाहती.’’
विकास ने विश्वास दिलाया तो किम्सी ने उसे जो कुछ बताया, उसे सुन कर विकास के रौंगटे खड़े हो गए. किम्सी ने जो बताया था, उस के अनुसार वह इंस्टीट्यूट में नौकरी के दौरान अभिषेक के संपर्क में आई. अभिषेक चूंकि डायरेक्टर थे, इसलिए वह उसे काम के बहाने अपने पास बुला लिया करते थे. उस के प्रति उन का व्यवहार मधुर होता गया. बातचीत के दौरान हंसीमजाक भी कर लिया करते. शुरू में तो किम्सी को लगा कि उन की आदत ही ऐसी होगी, लेकिन धीरेधीरे उस की समझ में आ गया कि अभिषेक उस की तरफ आकर्षित हैं.
एक दिन उन्होंने एक फाइल ले कर किम्सी को अपने औफिस में बुलाया. जरूरी बातें समझाने के बाद उन्होंने चाय का औफर किया तो वह मना नहीं कर सकी. चाय पीते हुए अभिषेक ने किम्सी के चेहरे को पढ़ते हुए कहा, ‘‘मुझे तुम से एक जरूरी बात कहनी थी किम्सी.’’
‘‘क्या सर?’’
‘‘किम्सी मैं तुम्हें बहुत लाइक करता हूं.’’
‘‘व्हाट सर, लेकिन…’’ वह सकपका गई.
‘‘किम्सी, दुनिया की इस भीड़ में ऐसे बहुत कम लोग होते हैं, जिन्हें हम दिल से पसंद करते हैं. डौंटमाइंड किम्सी, मैं विश्वास का रिश्ता चाहता हूं.’’
किम्सी को झटका तो लगा, लेकिन एक तरफ उसे यह खुशी भी हुई कि कोई इतनी बड़ी हस्ती उसे पसंद करता है. नौकरी, कमजोरी और उम्र के नाजुक बहाव में अभिषेक को नाखुश करना उसे अपने बूते से बाहर लगा, इसलिए जवाब में उस ने मुसकरा दिया. उस दिन के बाद उन के बीच का रिश्ता बदल गया. यह सन 2014 की बात थी. एक दौर ऐसा भी आया, जब रिश्ता मर्यादाओं को लांघ गया. समय अपनी गति से चलता रहा. उन के रिश्ते कई महीने इसी तरह अनवरत चलते रहे. उसी बीच किम्सी का रिश्ता विकास के साथ तय हो गया. बाद में विकास के साथ विवाह हो गया तो किम्सी ने इंस्टीट्यूट की नौकरी को अलविदा कह दिया. विवाह के बाद किम्सी ने अभिषेक के साथ के अपने रिश्ते को वक्ती गलती मान कर खुद को
बदल लिया. उस ने अभिषेक को नजरअंदाज करना शुरू कर दिया. उस का यह रुख अभिषेक को नागवार गुजरा. एक दिन दोनों की मुलाकात हुई तो किम्सी ने कहा, ‘‘हमारे बीच जो हुआ, वह वक्ती था सर. अब मैं शादीशुदा हूं, इसलिए मैं अपने हसबैंड को धोखा नहीं देना चाहती.’’
‘‘तो ठीक है, मेरे पास तुम्हारे बहुत से राज हैं, मैं उन्हें दफन कर दूंगा, लेकिन बाद में, अभी नहीं. मेरी भी मजबूरी है. किम्सी, मैं तुम्हें इतनी जल्दी आजाद नहीं कर सकता.’’
यह सुन कर किम्सी के होश उड़ गए. अभिषेक के रसूख के सामने वह कुछ भी नहीं थी. किम्सी दबाव में आ गई. इस के बाद वह अभिषेक की मरजी का शिकार होती रही. किम्सी एक बच्चे की मां भी बन गई, लेकिन अभिषेक पीछा छोड़ने को तैयार नहीं था. किम्सी ने कई बार मना किया, लेकिन अभिषेक पर कोई असर नहीं हो रहा था. किम्सी कोई अच्छी नौकरी कर के कैरियर बनाना चाहती थी. परिवार और कैरियर के बीच अभिषेक से रिश्तों का तालमेल बनाए रखना उस के लिए मुश्किल हो रहा था.
वह घुटघुट कर जीने लगी. उस की परेशानियां उस के चेहरे पर साफ दिखाई देती थीं, जिस की वजह से विकास ने पकड़ लिया. किम्सी के मुंह से अभिषेक की करतूत सुन कर एकबारगी विकास को अपने कानों पर भरोसा नहीं हुआ. वह गुस्से में बोला, ‘‘तुम ने यह बात मुझ से पहले क्यों नहीं बताई?’’
‘‘मुझे डर लगता था विकास.’’
उस रात विकास को नींद नहीं आई. लेकिन उस ने तय कर लिया कि किसी भी तरह वह किम्सी को इस मुसीबत से छुटकारा दिला कर रहेगा. अगले दिन विकास किम्सी को ले कर अपने चाचा अजीत के पास गया. विकास और किम्सी ने उन्हें सारी बातें बताईं तो उन्हें भी गुस्सा आ गया. उन्होंने किम्सी से पूछा, ‘‘तुम ने उसे समझाया नहीं?’’
‘‘मैं उस से बहुत मिन्नतें कर चुकी हूं चाचा, लेकिन वह मेरा पीछा छोड़ने को तैयार नहीं है. कहता है कि अगर मैं ने उस की बात नहीं मानी तो वह मुझे बरबाद कर देगा,’’ किम्सी ने रोते हुए कहा, ‘‘मन तो करता है कि मैं मर जाऊं, जिस से हमेशा के लिए उस से पीछा छूट जाए.’’
किम्सी की बातों से विकास और अजीत तिलमिला कर रह गए. विकास गुस्से में बोला, ‘‘तुम्हें मरने की क्या जरूरत है, मरने का काम तो उस ने किया है.’’
उन्होंने इस मामले पर काफी विचार किया. वे जानते थे कि अभिषेक रसूख वाला आदमी है. उस से सीधे टकराना कतई ठीक नहीं है. ऐसा करने पर वह किसी रूप में उन्हीं को नुकसान पहुंचा सकता है. लेकिन वे उस से छुटकारा भी पाना चाहते थे, इसलिए सब कुछ योजना बना कर ढंग से करना चाहते थे. विकास, अजीत और किम्सी ने तय किया कि अभिषेक की हत्या कर के वे इस राज को हमेशा के लिए दफन कर देंगे. इस के लिए बड़ी योजना की जरूरत थी. उस दिन के बाद तीनों ने इस मुद्दे पर विचार करना शुरू कर दिया. बदले की आग में झुलस रहे विकास को अजय देवगन की फिल्म ‘दृश्यम’ याद आई. इस फिल्म की कहानी उसे खुद से जुड़ी लग रही थी.
तेजतर्रार विकास ने भी कुछ वैसा ही करने की सोची. इस के लिए तीनों ने कई बार दृश्यम फिल्म देख कर उस की बारीकियों को समझा और तय कर लिया कि वे इसी कहानी को दोहरा कर पुलिस को गुमराह कर देंगे. उन्होंने योजना बना डाली कि कैसे और क्या करना है. फूलप्रूफ योजना तैयार कर के सब से पहले विकास ने मजदूरों को ला कर चाचा अजीत के यहां बगीचे में करीब छह फुट गहरा गड्ढा खुदवा डाला. मजदूरों ने गड्ढा खुदवाने की वजह पूछी तो विकास ने कहा कि वह भूकंप को ले कर कोई प्रयोग करना चाहता है. इस के बाद नमक के दर्जनों पैकेट ला कर अजीत के घर में रख दिए गए.
योजना के अनुसार, 9 नवंबर की शाम किम्सी ने अभिषेक को फोन कर के कहा कि उस के पास हौकी टीम की स्पौंसरशिप के लिए एक बड़ी पार्टी है, उस पर वह उस से चर्चा करना चाहती है. उसी के साथ उस ने यह भी कह दिया कि वह अपने फ्लैट में अकेली है तो अभिषेक बिना कुछ सोचेसमझे खुशीखुशी उस के यहां आने को तैयार हो गए.
विकास और अजीत भी वहीं मौजूद थे. तीनों उन के आने का इंतजार करने लगे. कुछ ही देर में वह किम्सी के बताए फ्लैट में पहुंच गए. किम्सी ने मुसकराते हुए उन का स्वागत किया. अभिषेक खुश थे कि किम्सी अभी भी उन के करीब रहना चाहती है. किम्सी ने उन्हें बातों में लगा लिया तो विकास ने पीछे से उन के सिर पर रौड से वार कर दिया. चोट लगते ही अभिषेक गिर गए. इस के बाद भी कई वार किए गए.
जब उन्हें भरोसा हो गया कि अभिषेक की मौत हो चुकी है तो विकास ने तुरंत अभिषेक के मोबाइल का स्विच औफ कर दिया. पहले से जो तय था, उसी के अनुसार तीनों ने मिल कर अभिषेक के हाथपैर बांध कर लाश को एक बड़ी पौलीथिन में रख कर उसे टेप से बंद कर एक बोरी में भर दिया. किम्सी फ्लैट पर ही रही, जबकि विकास ने अभिषेक का मोबाइल औन किया और उन की कार भिलाई के कई क्षेत्रों में घुमा कर रायपुर के वीआईपी रोड पर ले जा कर छोड़ दिया. अपनी गंध मिटाने के लिए उस ने कार में शराब छिड़क दी. रास्ते में टौल नाका था, वहां सीसीटीवी कैमरा लगा था. यह बात उसे पता थी. उस ने अन्य कारों के साथ कार को इस एंगल से निकाला था कि उस की तसवीर ठीक से कैमरे में कैद नहीं हो सकी थी.
इस बीच विकास ने अभिषेक के मोबाइल को चालू रखा और उस से आई.पी. मिश्रा और जया को मैसेज करता रहा, ताकि उन्हें संदेह न हो और पुलिस भी उलझ कर रह जाए. कार को वीआईपी रोड पर छोड़ कर विकास अजीत के साथ मोटरसाइकिल से लगभग रात 10 बजे वापस आ गया. अजीत मोटरसाइकिल से उस के साथ गया था. रात में विकास ने अपनी क्वांटों कार निकाली और लाश की बोरी को उसी में रख कर करीब डेढ़ किलोमीटर दूर स्मृतिनगर पहुंच गया. बोरी गड्ढे में डाल कर लाश को गलाने के लिए उस पर नमक डाल दिया. इस के बाद गड्ढे को बंद कर दिया. जिस रौड से हत्या की थी, उसे छिपा दिया. इस के बाद राहत की सांस लेते हुए विकास ने कहा, ‘‘जो हुआ है, उसे सब लोग भूल जाओ.’’
‘‘लेकिन भूलना इतना आसान नहीं है.’’ किम्सी ने चिंतित हो कर कहा तो विकास ने उसे समझाया, ‘‘पागल मत बनो. मेरा वादा है कि पुलिस कभी हम तक नहीं पहुंच पाएगी और अगर आती भी है तो हमें ऐसे रिएक्ट करना है, जैसे कुछ हुआ ही नहीं है.’’
‘‘ठीक है.’’
किम्सी और विकास अपने फ्लैट पर आ गए. इस के बाद वे ऐसे रहने लगे, जैसे कुछ हुआ ही नहीं था. योजना के अनुसार विकास ने धमतरी जा कर फिरौती के लिए फोन कर के जांच नक्सलियों की ओर भटका दी. इस के बाद वापसी में उस ने अभिषेक के मोबाइल को एक नदी में फेंक दिया. अभिषेक की हत्या के मामले की जांच पुलिस किस दिशा में कर रही है, इस पर उन्होंने पूरी नजर बनाए रखी.
पुलिस ने पहली बार किम्सी से पूछताछ की तो उस ने बेहद मासूमियत से साफसाफ जवाब दे कर पुलिस को उलझा दिया. पुलिस जांच की ज्यादा से ज्यादा जानकारी के लिए उन्होंने कई अखबार लगा लिए. अभिषेक के अपहरण को ले कर पुलिस भटक रही थी. यह खबर पढ़ कर तीनों खुश थे. इस बीच उन्होंने जिस गड्ढे में अभिषेक को दफनाया था, उस के ऊपर फूलगोभी के पौधे लगा दिए. बाद में संदेह के आधार पर किम्सी और विकास से पूछताछ की गई तो इस बार भी वे पुलिस को चकमा देने में कामयाब रहे. इस बीच नौकरी की तलाश में किम्सी दिल्ली चली गई. अलबत्ता वह विकास से हालात की जानकारी लेती रहती थी. लेकिन आगे की जांच में जो स्थितियां बनीं, उस से तीनों पुलिस के शिकंजे में आ गए.
पूछताछ के बाद उन की निशानदेही पर पुलिस ने हत्या में प्रयुक्त रौड, अभिषेक की घड़ी और कपड़े आदि बरामद कर लिए. विस्तृत पूछताछ के बाद पुलिस ने सभी आरोपियों को अदालत में पेश किया, जहां से उन्हें 14 दिनों की न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया. कथा लिखे जाने तक उन की जमानतें नहीं हो सकी थीं. पुलिस आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट तैयार कर रही थी. दूसरी ओर शव पुराना होने की वजह से पोस्टमार्टम रिपोर्ट में मौत की सही वजह स्पष्ट नहीं हो सकी.मौत की सही वजह का पता लगाने के लिए पु च के लिए प्रयोगशाला भेज दिया है.Chhattisgarh News
—कथा पुलिस सूत्रों पर आधारित






