Rajasthan Murder Mystery. सरिता की बीमारी और झगड़े से  तंग आ कर चंद्रमल ने उसे मार कर जिस तरह उस की लाश को 2 गज जमीन के नीचे पहुंचा दिया था, सोचा था कि कभी यह रहस्य नहीं खुलेगा. लेकिन अपराध कभी छिपा है जो उस का छिपा रहता…

सरिता जैन के मायके वालों को जब पता चला कि उन की बेटी पिछले 2 महीने से लापता  है  तो वे उस की ससुराल जा पहुंचे. सरिता का पति चंद्रमल जैन घर पर ही था. उन लोगों ने उस से सरिता के बारे में पूछा तो वह दुखी हो कर बोला, ‘‘सरिता को तो आप के यहां होना चाहिए. वह मुझ से हमेशा लड़ती रहती थी. बहुत दुखी करती थी मुझे. 2 महीने पहले भी वह मुझ से लड़ी थी और 5 हजार रुपए ले कर घर से जाते हुए बोली, ‘मैं मायके जा रही हूं, आज के बाद अपनी शक्ल मत दिखाना मुझे.’ मैं तो यह सोच कर निश्चिंत बैठा था कि वह मायके में होगी, जब गुस्सा शांत हो जाएगा तो खुद ही लौट आएगी.’’

चंद्रमल जैन ने भर्राई आवाज और डबडबाई आंखों से जो कुछ कहा था, उस से सरिता के मायके वालों को लगा कि वह जो कह रहा है, सच है. सरिता के गायब होने से वे लोग भी दुखी थे. किसी की समझ में नहीं आ रहा था कि जब सरिता न मायके में हैं और न ससुराल में तो वह गई तो गई कहां?

सरिता के पिता को दुखी देख चंद्रमल ने कहा, ‘‘पापा, आप धैर्य रखिए. हम सब मिल कर उसे खोजेंगे. जाते वक्त वह गुस्से में थी, संभव है किसी नातेरिश्तेदार के यहां चली गई हो. मुझे परेशान करने के लिए वह ऐसा भी कर सकती है.’’

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चंद्रमल ने सरिता के मायके वालों के साथ मिल कर उस की खोजबीन शुरू कर दी. लेकिन वह कहीं नहीं मिली तो चंद्रमल ससुराल वालों के साथ थाना केलवाड़ा जा कर थानाप्रभारी रामसुमेर मीणा से मिला. पूरी बात बता कर उस ने अपनी पत्नी सरिता की गुमशुदगी दर्ज करा दी. थानाप्रभारी ने सरिता का हुलिया और फोटो ले कर उन्हें इस हिदायत के साथ वापस लौटा दिया कि पुलिस तो अपना काम करेगी ही, वे लोग भी सरिता को ढूंढते रहें. अगर उस का पता लग जाता है तो उन्हें सूचित कर दें.

रामसुमेर मीणा ने काररवाई करते हुए सरिता जैन के फोटो और हुलिया सभी थानों और अधिकारियों को भेज दिया और अपने ढंग से तफ्तीश शुरू कर दी. उन्होंने चंद्रमल के गांव मंजरा जा कर आसपड़ोस वालों से भी पूछताछ की. गांव वालों से पता चला कि चंद्रमल के 3 साल के वैवाहिक जीवन में उसे कभी खुश नहीं देखा गया.

उस की पत्नी सरिता एक तो बीमार रहती थी, दूसरे वह चिड़चिड़े स्वभाव की झगड़ालू औरत थी. दोनों के बीच आए दिन झगड़ा होना आम बात थी. यह भी पता चला कि सरिता एक बच्चे की मां बनी थी, लेकिन उस का बच्चा पैदा होने के 15 दिनों बाद ही मर गया था. इस के बाद पति पत्नी के बीच दरार और भी चौड़ी हो गई थी.

बातोंबातों में यह भी पता चला कि 2 महीने पहले चंद्रमल ने अपने घर में शौचालय बनवाना शुरू किया था, लेकिन उस का काम बीच में ही रुकवा दिया था. तभी से उस की पत्नी सरिता दिखाई नहीं दे रही. यह बात संदेह पैदा करने वाली थी. लेकिन कोई भी काररवाई करने से पहले रामसुमेर मीणा पुख्ता जानकारी हासिल कर लेना चाहते थे, इसलिए वह थाने लौट आए.

कुछ और बातें जानने के लिए उन्होंने अगले दिन चंद्रमल को थाने बुलवाया. उस ने कहा कि वह अगले दिन थाने आएगा. उस के आश्वासन पर पुलिस लौट आई. लेकिन जब वह अगले दिन नहीं आया तो रामसुमेर मीणा ने उस के घर पुलिस भेजी. उस के घर ताला लगा देख कर पुलिस लौट आई. उस के इस तरह गायब होने से वह पूरी तरह संदेह के दायरे में आ गया.

संदेह बढ़ा तो रामसुमेर मीणा ने चंद्रमल के घर की तलाशी लेने का फैसला किया. इस के लिए उन्होंने एसएसपी से इजाजत मांगी तो उन्होंने स्वीकृति दे दी. इस के बाद रामसुमेर मीणा चंद्रमल के गांव पहुंचे और ग्रामप्रधान और कुछ अन्य जिम्मेदार लोगों को साथ ले कर चंद्रमल के घर का ताला तुड़वाया.

घर की तलाशी ली गई तो एक जगह फर्श को देख कर लगा जैसे वहां कुछ नया काम कराया गया है. उस जगह की सीमेंट को हटाया गया तो नीचे की मिट्टी भुरभुरी थी, जिस में हलकी बदबू का भी अहसास हो रहा था.

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रामसुमेर मीणा समझ गए कि कुछ गड़बड़ जरूर है. उन्होंने गांव वालों की मौजूदगी में उस जगह को खुदवाया तो 2 गज नीचे सरिता की लाश मिल गई. अब तक सूचना पा कर सरिता के मायके वाले भी आ गए थे. रामसुमेर मीणा ने चंद्रमल के घर से बरामद सरिता के शव की उस के घर वालों से शिनाख्त करवा कर पोस्टमार्टम के लिए जिला अस्पताल भिजवा दिया और थाने लौट आए. थाने लौट कर उन्होंने सरिता की गुमशुदगी को हत्या में तब्दील करवा कर आगे की जांच शुरू की. चंद्रमल गांव छोड़ कर कहां जा सकता है, जब इस बारे में गांव वालों तथा सरिता के घर वालों से पूछा गया तो उन्होंने बताया कि वह अपने भाइयों के पास मुंबई जा सकता है.

रामसुमेर मीणा ने उस के नातेरिश्तेदारों के मोबाइल नंबर ले लिए और खुद को चंद्रमल का दोस्त बता कर काम की कुछ बातें पूछीं. इस से पता चल गया कि चंद्रमल मुंबई में ही है.

द्रमल जैन वहां से कहीं और खिसक लेता. रामसुमेर मीणा ने 3 सिपाहियों को मुंबई भेज दिया. इसी के साथ उन्होंने कांदीवली (पूर्व) स्थित थाना समतानगर के सीनियर इंसपेक्टर दिलीप यादव से संपर्क कर उन्हें सारी बात बता कर अनुरोध किया कि वह उसे कब्जे में ले लें.

दिलीप यादव ने सबइंसपेक्टर महेश मछले को चंद्रमल जैन के बारे में बता कर तुरंत काररवाई करने को कहा. महेश मछले ने विलंब किए बगैर पुलिस टीम के साथ चंद्रमल के भाइयों के घर पर छापा मार कर थाने ले आई. ट्रांजिट रिमांड पर केलवाड़ा थाने से आए सिपाही नरेंद्र सिंह, मधुसूदन और सरवन कुमार के हवाले कर दिया गया. इस के बाद तीनों सिपाही उसे ले कर चल पड़े.

43 वर्षीय चंद्रमल जैन मूलरूप से राजस्थान के जनपद राजसमंद के थाना केलवाड़ा के गांव मंजरा का रहने वाला था. उस के पिता का नाम थावरीमल था. उस के परिवार में मातापिता के अलावा 3 बड़े भाई हत्थीमल, प्रकाशचंद्र, पारसमल और एक बहन थी.

चंद्रमल सब से छोटा था. उस के तीनों भाइयों और बहन के विवाह हो चुके थे. वे सब अपनेअपने परिवारों के साथ मुंबई कांदीवली के अशोकनगर में रहते थे. उन सब का अपनाअपना कारोबार था. सभी भाईबहन सुखी थे. परिवार में सिर्फ चंद्रमल ही कुंवारा था, जिस का विवाह नहीं हो पाया था.

इस का कारण उस के मातापिता थे. उस के मातापिता को चंद्रमल के लिए जिस तरह की लड़की की तलाश थी, वैसी लड़की मिल नहीं रही थी. छोटे बेटे की शादी का सपना देखतेदेखते वे चल बसे. मातापिता की मौत के बाद चंद्रमल कुछ दिनों तक मुंबई में अपने भाइयों के साथ रहा.

उस ने वहां कारोबार जमाने की कोशिश की, लेकिन उस का कोई काम जम नहीं सका. मजबूर हो कर वह अपने गांव लौट आया. गांव में उस के पिता की किराने की दुकान थी. उस ने वही दुकान खोल ली और चलाने लगा.

गांव में उस की किराने की दुकान तो चल निकली, लेकिन उस की मदद करने वाला कोई नहीं था. मातापिता की मौत के बाद वह अकेला ही रह गया था. उस का दिन तो बीत जाता था, लेकिन रातें उसे काटने को दौड़ती थी. उस के भाइयों के परिवार थे, लेकिन उस का कोई नहीं था. अगर मांबाप ने उस का भी विवाह कर दिया होता तो उस का भी अपना परिवार होता.

कहते हैं, सब दिन एक जैसे नहीं होते. चंद्रमल का भी वक्त बदला. पड़ोस के गांव के रहने वाले विजय सिंह ने अपनी बेटी सरिता की शादी चंद्रमल से कर दी. विजय सिंह की आर्थिक स्थिति बहुत अच्छी नहीं थी. थोड़ी खेती की जमीन थी, उसी से किसी तरह गुजर होता था. परिवार में पत्नी निर्मला देवी के अलावा एक बेटा और 2 बेटियां थीं. बेटे और एक बेटी की शादी हो चुकी थी. सरिता उस की छोटी बेटी थी, जिस की शादी के लिए वह परेशान था. इस की वजह यह थी सरिता अकसर बीमार रहती थी, उस का स्वभाव भी झगड़ालू था.

चंद्रमल ने इस रिश्ते को अपना भविष्य मान कर स्वीकार कर लिया. सरिता के परिवार की स्थिति ऐसी नहीं थी कि वह शादी का खर्च उठा सकते. इसलिए चंद्रमल ने 13 जून, 2013 को जिला कोर्ट में जा कर सरिता से कोर्ट मैरिज कर ली और पतिपत्नी की तरह रहने लगे.

विवाह के शुरुआती दिन तो हंसीखुशी से बीते. लेकिन जैसेजैसे समय बीतने लगा, वैसेवैसे सरिता की बीमारी और स्वभाव से चंद्रमल दुखी रहने लगा. वह अकसर अपनी बीमारी को ले कर चंद्रमल से लड़ाईझगड़ा और मारपीट करने लगी.

चंद्रमल इसे सरिता की बीमारी की वजह मान कर शांत रह जाता था. पहले तो चंद्रमल ने पत्नी का गांव के डाक्टरों से इलाज कराया, जब कोई फायदा नहीं हुआ तो उस ने सरिता को जिला अस्पताल की महिला स्पैशलिस्ट डाक्टर को दिखाया.

महिला डाक्टर ने उस का चैकअप किया तो पता चला कि वह गर्भवती है. सरिता मां बनने वाली है, यह जान कर चंद्रमल बहुत खुश हुआ. समय पर सरिता ने बेटे को जन्म दिया तो दोनों को बहुत खुशी हुई.

लेकिन उन का बेटा 15 दिनों बाद ही खत्म हो गया. लड़के की मौत ने पतिपत्नी को झकझोर कर रख दिया. चंद्रमल ने तो खुद को किसी तरह संभाल लिया, लेकिन सरिता को बच्चे की मौत का गहरा सदमा लगा. उस की तबीयत दिनप्रतिदिन बिगड़ती गई.

चंद्रमल सरिता के इलाज में कोई कोरकसर नहीं छोड़ रहा था. उस ने अपनी सारी जमा पूंजी सरिता के इलाज में लगा दी, लेकिन उस की बीमारी खत्म होने के बजाय बढ़ती ही जा रही थी. सरिता की बीमारी को ले कर चंद्रमल तो परेशान था ही, सरिता भी काफी चिड़चिड़ी हो गई थी. वह बातबात पर पति से लड़ती रहती थी.

चंद्रमल के पास अब इतने पैसे नहीं थे कि वह सरिता को इलाज के लिए किसी बड़े डाक्टर के पास ले जाता. उस की दुकान बंद हो चुकी थी. सिर पर लोगों का कर्ज चढ़ गया था. वह सरिता की बीमारी और उस के झगड़ालू स्वभाव से काफी दुखी रहने लगा था. इसी से मुक्ति पाने के लिए उस ने एक खतरनाक योजना बना डाली.

घटना के 2 महीने पहले चंद्रमल ने प्रधानमंत्री ग्राम स्वच्छता के अंतर्गत घरघर शौचालय बनाने की मुहिम के तहत अपने घर में शौचालय बनवाने का काम शुरू करवाया. उस ने कुछ मजदूरों से अपने घर के अंदर 8 फुट गहरा एक गड्ढा तैयार करवाया. इस के बाद उस ने उन मजदूरों को यह कह कर छुट्टी दे दी कि आगे का काम वह किसी और से करवाएगा.

इस के बाद उस ने एक रात गहरी नींद में सोई सरिता को उस गड्ढे में डाल कर उसे पूरी तरह से बंद कर दिया और उस के ऊपर सीमेंट का प्लास्टर करा दिया. सरिता को गड्ढे में दफन वह उस के ऊपर 2 महीनों तक चारपाई डाल कर सोता रहा. करीब 2 महीने तक जब चंद्रमल का न शौचालय बना और न इस बीच सरिता नजर आई तो आसपड़ोस में सुगबुगाहट शुरू हुई. लोग उस से सरिता और शौचालय के बारे में पूछने लगे तो उस ने कह दिया कि सरिता मायके चली गई है. सरिता ससुराल से गायब है, यह बात सरिता के पिता विजय सिंह को पता चली तो वह उस के बारे में पता करने चंद्रमल के घर पहुंच गए. इस के बाद सरिता के गायब होने का जो रहस्य खुला, वह ऊपर दिया ही जा चुका है.

तीनों सिपाही चंद्रमल को ले कर थाना केलवाड़ा पहुंचे तो थानाप्रभारी रामसुमेर मीणा ने उस से विस्तृत पूछताछ की. इस के बाद उस के खिलाफ सरिता की हत्या का मुकदमा दर्ज कर उसे अदालत में पेश किया गया, जहां से उसे न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया. Rajasthan Murder Mystery

—कथा पुलिस सूत्रों पर आधारित

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