Family Crime . चंद्रशेखर ने मुन्नी को बहुत समझाया कि वह बंटा का साथ छोड़ दे, पर वह नहीं मानी. जब चंद्रशेखर ने देखा कि मुन्नी के अवैध संबंधों की वजह से बच्चे बिगड़ ही नहीं रहे, उन की जान पर भी आ गई है तो उस ने पत्नी की जान ले ली.
सुबह 8 बजे के करीब कानपुर के थाना घाटमपुर के गांव सिमौर में यह खबर जंगल की आग की तरह फैल गई कि चंद्रशेखर ने अपनी पत्नी मुन्नी की हत्या कर दी है. फिर तो थोड़ी ही देर में चंद्रशेखर के घर के सामने पूरा गांव जमा हो गया. इसी गांव में मुन्नी की बड़ी बहन ब्याही थी.
उस के पति सोहनलाल ने इस बात की जानकारी पुलिस और अपनी ससुराल वालों को दी तो थानाप्रभारी अशोक कुमार सिंह पुलिस बल के साथ पहुंच गए. उन्हीं की सूचना पर एसपी एन.एन. तिवारी, सीओ जीतेंद्र सिंह भी फोरैंसिक टीम के साथ पहुंच गए.
फोरैंसिक टीम और पुलिस ने घटनास्थल की काररवाई निपटा कर लाश को पोस्टमार्टम के लिए हैलेट अस्पताल भिजवा दिया. इस के बाद हत्या की सूचना पा कर गांव सिमौर आई मृतका की मां से पूछताछ की गई तो उस ने पुलिस को बताया कि उस की बेटी मुन्नी बदचलन थी. कई सालों से उस के अवैध संबंध गांव के ही बंटा सविता से थे.
चंद्रशेखर पत्नी की हरकतों से परेशान था. बारबार मना करने के बाद भी वह नहीं मान रही थी. मजबूर हो कर ही चंद्रशेखर ने उस की हत्या की है.
पुलिस मृतका मुन्नी के पति चंद्रशेखर को हिरासत में ले कर थाने ले आई. इस के बाद मृतका की मां की ओर से मुन्नी की हत्या का मुकदमा दर्ज किया गया. चंद्रशेखर से विस्तार से पूछताछ की गई तो इस पूछताछ में पत्नी की हत्या का अपना अपराध स्वीकार करते हुए उस ने उस की हत्या की जो कहानी सुनाई, वह इस प्रकार थी.
कानपुर के थाना घाटमपुर के गांव सिमौर का रहने वाला चंद्रशेखर खेतीबाड़ी और मेहनतमजदूरी कर के गुजरबसर करता था. करीब 15 साल पहले उस की शादी विधनू की रहने वाली मुन्नी से हुई थी. विवाह के बाद चंद्रशेखर 3 बच्चों का बाप बना. इस समय उस की बड़ी बेटी 14 साल की है तो छोटा बेटा 10 साल का. उस के तीनों बच्चे गांव के ही सरकारी स्कूल में पढ़ते हैं.
शादी के बाद ही चंद्रशेखर को पता चल गया था कि उस की पत्नी का चरित्र ठीक नहीं है. उस ने सोचा कि शादी के बाद सुधर जाएगी. लेकिन ऐसा नहीं हुआ. दरअसल अलगअलग लोगों से शारीरिक सुख ले चुकी मुन्नी देवी के कदम शादी के बाद भी नहीं थमे.
शादी के बाद भी उस ने गांव के कई लोगों से संबंध बनाए. लेकिन उस के संबंध बंटा सविता से बने तो वह उसी की हो कर रह गई. चंद्रशेखर की गैरमौजूदगी में वह बंटा सविता को घर भी बुलाने लगी. भला इस तरह की बातें कहां छिपी रहती हैं. दोनों के इस संबंध की चर्चा गांव में फैली तो लोग चंद्रशेखर को ताना देने लगे.
पत्नी की हरकतों के बारे में सुन कर चंद्रशेखर को बहुत गुस्सा आया. इस के बाद उस ने इधरउधर और बच्चों से पत्नी के बारे में पता किया तो उसे जो पता चला, उस से उस के होश उड़ गए. उस ने मुन्नी को मारापीटा और बंटा सविता से मिलनेजुलने एवं बातचीत करने के लिए सख्ती से मना किया.
लेकिन बंटा के प्यार में पागल मुन्नी पति के मना करने के बावजूद लोगों की नजरें बचा कर उस से मिलती रही. चंद्रशेखर ने बच्चों को पत्नी पर नजर रखने के लिए लगा रखा था. लेकिन मुन्नी बच्चों को इधरउधर भेज कर बंटा को अपने घर बुला लेती तो कभी खुद ही लोगों की नजरें बचा कर उस के घर चली जाती थी.
जब कभी बंटा के घर आने की जानकारी चंद्रशेखर को होती तो मुन्नी से उस का लड़ाईझगड़ा तो होता ही, वह उस की जम कर पिटाई भी करता. इस के बावजूद मुन्नी पर बंटा के प्यार का ऐसा भूत सवार था कि वह उस से मिले बिना रह नहीं पाती थी.
चंद्रशेखर पत्नी की इल हरकतों से तंग आ चुका था, जिस की वजह से वह काफी परेशान रहता था. उस की समझ में नहीं आ रहा था कि वह इस पत्नी का क्या करे. उस की बेटी भी सयानी हो रही थी. मां का असर उस पर भी पड़ सकता था. कभीकभी तो उस का मन होता कि वह पत्नी को ही खत्म कर दे, जिस से सारा झंझट खत्म हो जाए.
लेकिन सयानी बेटी और बेटों के भविष्य के बारे में सोच कर वह शांत रह जाता था. उस ने पत्नी को मारपीट कर ही नहीं, प्यार से समझा कर भी सही राह पर लाने की कोशिश की. लेकिन मुन्नी के दिमाग में बंटा सविता इस कदर बस गया था कि वह न पति की बात मान रही थी, न मायके वालों की.
हर समय मुन्नी प्रेमी बंटा सविता के बारे में ही सोचा करती थी. इस की वजह यह थी कि लोकलाज त्याग कर वह पूरी तरह बेशर्म हो चुकी थी, यहां तक कि उसे सयानी हो रही बेटी की भी चिंता नहीं थी. चंद्रशेखर को जब लगा कि बंटा सविता के प्यार में पागल मुन्नी अब सुधरने वाली नहीं है. बेटी पर उस के चरित्र का असर न पड़े, इसलिए उसे उस की ननिहाल पहुंचा दिया.
शाम को चंद्रशेखर घर लौटा तो पता चला कि मुन्नी 3 घंटे से गायब है. उसे पता ही था कि वह कहां होगी. वह बंटा के घर पहुंचा तो मुन्नी वहां मिल गई. उस ने उस को दौड़ादौड़ा कर मारा. इस के बाद मुन्नी सीधे नंदना पुलिस चौकी गई और चौकीप्रभारी श्यामशंकर पांडेय से पति की शिकायत कर दी.
श्यामशंकर ने उस से कहा कि वह घर पहुंचे, घर आ कर वह दोनों पक्षों की बात सुन कर काररवाई करेंगे. शाम को श्यामशंकर पांडेय सिमौर आए और चंद्रशेखर को बुलवाया. उस समय मुन्नी घर में नहीं थी. उन्होंने चंद्रशेखर से पूछताछ की तो उस ने पूरी बात बता दी.
गलती मुन्नी की थी, इस के बावजूद श्यामशंकर ने चंद्रशेखर को हिदायत दी कि औरत एक कमजोर पक्ष है, इसलिए वह अपनी पत्नी को समझाबुझा कर रास्ते पर ले आए. अब उसे मारापीटा और वह पुलिस के पास शिकायत ले कर आई तो पुलिस उसे जेल भेज देगी.
पुलिस के इस एकतरफा दबाव से चंद्रशेखर मायूस हो गया. जैसे ही पुलिस गांव से गई, मुन्नी पे्रमी सविता के घर से निकली. सब कुछ आंखों से देख कर भी चंद्रशेखर उस से कुछ नहीं कह सका. क्योंकि अब वह पुलिस की चेतावनी से डरा हुआ था.
इस के बाद तो मुन्नी के हौसले और बुलंद हो गए. अभी तक जो काम वह चोरीछिपे करती थी, अब खुलेआम करने लगी. चंद्रशेखर पत्नी की इन हरकतों से अब ऊब चुका था. पत्नी की वजह से गांव और रिश्तेदारों में उस की बदनामी हो रही थी.
उस की समझ में नहीं आ रहा था कि वह क्या करे? क्योंकि पत्नी को सुधारने का अब उस के पास कोई उपाय नहीं रह गया था. कभीकभी उस की हत्या के बारे में सोचता, लेकिन बच्चों के भविष्य को सोच कर वह शांत रह जाता. इस स्थिति में उस की हालत पागलों जैसी हो गई थी.
23 अप्रैल, 2014 की शाम चंद्रशेखर खेतों से गेंहू की कटाई करने गया तो अगले दिन 24 अप्रैल की सुबह थकामांदा घर लौटा. वह जैसे ही चारपाई पर बैठा, उस के छोटे बेटे श्याम ने उस के कान के पास मुंह ले जा कर धीरे से कहा, ‘‘पापा, आज बंटा सविता पूरी रात घर में था.’’
दरअसल, बच्चे खाना खा कर सो गए तो मुन्नी ने बंटा को अपने घर बुला लिया था. देर रात जब श्याम की आंखें खुलीं तो कमरे से आ रही आवाजों को सुन कर वह कमरे में चला गया. उस समय दोनों आपत्तिजनक स्थिति में थे.
श्याम को देख कर दोनों ने जल्दीजल्दी कपड़े पहने. इस के बाद बंटा ने श्याम का गला दबाते हुए कहा, ‘‘अब इसे मार देना ही ठीक रहेगा, वरना यह सुबह अपने पापा से सब बता देगा.’’
मुन्नी ने श्याम को बंटा के चंगुल से छुड़ाते हुए कहा, ‘‘तुम्हें इस की चिंता करने की कोई जरूरत नहीं है. जो होगा मैं देख लूंगी. वह मेरे ऊपर हाथ नहीं उठा सकता, क्योंकि पुलिस ने उसे धमका दिया है. जेल जाने से वह बहुत डरता है.’’
बेटे की बात सुन कर चंद्रशेखर सन्न रह गया. उसे गुस्सा बहुत आया. उस ने इस बारे में मुन्नी से पूछा तो वह लड़ने लगी. गुस्से में चंद्रशेखर उसे मारने दौड़ा तो वह तन कर खड़ी हो गई. पति को अंगुली दिखाते हुए वह बोली, ‘‘दूर खड़े रहना. अगर हाथ लगाया तो पुलिस से तेरे हाथपैर तुड़वा कर जेल भिजवा दूंगी.’’
‘‘इस का मतलब तू सुधरेगी नहीं?’’ चंद्रशेखर गुस्से में चिल्लाया. ‘‘मैं जब चाहूंगी, तब अपने प्रेमी बंटा को घर में बुलाऊंगी और जब चाहूंगी उस के घर जाऊंगी. तू मुझे उस से मिलने से कभी नहीं रोक सकता.’’ मुन्नी भी चिल्लाई. ‘‘मेरे जमीर को मत ललकार, मर्द हूं एक मिनट में घरपरिवार खाक कर दूंगा.’’ चंद्रशेखर चिल्लाया. ‘‘कैसा मर्द, मैं तुझे मर्द नहीं समझती. तू मेरा कुछ नहीं कर सकता.’’ मुन्नी ने चंद्रशेखर को जलील करते हुए कहा. ‘‘अब घर से कदम निकाल कर देख, मैं तेरी क्या दशा करता हूं.’’ चंद्रशेखर ने कहा.
‘‘घर से बाहर निकलने की बात तो दूर, मैं अभी बंटा के घर जा रही हूं. देखती हूं तू क्या करता है?’’ कह कर मुन्नी घर से बाहर जाने लगी तो गुस्से में पागल चंद्रशेखर ने आगे बढ़ कर मुन्नी को पकड़ा और आंगन में पटक दिया.
मुन्नी उठ पाती, वहीं रखे फावड़े को उठा कर चंद्रशेखर ने पूरी ताकत से उस के मुंह पर वार कर दिया. मुन्नी का मुंह फट गया और दांत टूट गए, जिस से वह बेहोश हो गई. इस के बाद फावड़े का दूसरा वार उस की गरदन पर किया, जिस से गरदन कट गई. थोड़ी देर तड़प कर मुन्नी हमेशाहमेशा के लिए शांत हो गई.
इस के बाद पुलिस ने चंद्रशेखर की निशानदेही पर खून सना वह फावड़ा उस के घर से बरामद कर लिया, जिस से मुन्नी की हत्या की गई थी.
सारी काररवाई निबटा कर ए.के. सिंह ने चंद्रशेखर को उसी दिन अदालत में पेश किया, जहां से उसे जेल भेज दिया गया. आखिर मुन्नी की हवस से एक हंसताखेलता परिवार बरबाद हो गया.Family Crime






