Hindi Crime Story: पहली पत्नी की हत्या के आरोप में सजा काट चुके कपिल शर्मा ने दूसरी पत्नी पार्वती की भी हत्या कर आत्महत्या का रूप देना चाहा. पर लाख छिपाने पर भी उस का गुनाह छिप न सका.

24 मार्च, 2016 को शाम करीब 6 बजे 2 युवक एक युवती को एम्स के ट्रामा सेंटर ले कर पहुंचे. उन में से एक का नाम रामबीर और दूसरे का कपिल शर्मा था. जिस युवती को वे ट्रामा सेंटर ले कर आए थे, वह कपिल शर्मा की 27 वर्षीया पत्नी पार्वती थी. कपिल ने डाक्टरों को बताया कि पार्वती आत्महत्या के लिए गले में दुपट्टा बांध कर पंखे से झूल गई थी.

आपातकालीन सेवा में तैनात डाक्टर पार्वती का परीक्षण करने लगे तो उन्हें वह मृत दिखाई दी. उस की सांसें काफी देर पहले ही बंद हो चुकी थीं और शरीर ठंडा हो चुका था. उस के गले में चारों तरफ रस्सी के बांधने का निशान था. इस के अलावा उस के हाथपैर, ठोड़ी, चेहरे, होंठ आदि पर चोट के निशान थे. उस का होंठ कटा हुआ था, जिस से खून भी निकला था. उस के पति कपिल शर्मा के भी चेहरे व अन्य जगहों पर चोट के निशान थे, जिन से खून छलक आया था. वह भी अपना इलाज करने को कह रहा था.

चोटों के बारे में कपिल ने बताया कि जब वह पत्नी को इलाज के लिए बाइक से अस्पताल ला रहा था तो महारानीबाग टी पौइंट पर एक आटोरिक्शा से एक्सीडेंट हो गया था, जिस से उसे और पत्नी को चोटें आई थीं. इस बात की पुष्टि उस के साथ आए युवक रामबीर ने भी की. पार्वती के गले के चारों तरफ जो निशान था, उस से डाक्टरों को शक हुआ, क्योंकि गले में फंदा लगा कर आत्महत्या के अधिकांश मामलों में फंदे का निशान पूरे गले पर नहीं आता. निशान करीब आधे गले तक ही आता है, इसलिए डाक्टरों ट्रामा सेंटर में मौजूद पुलिस चौकी में इस संदिग्ध केस की सूचना दे दी.

डाक्टरों की सूचना पर कांस्टेबल जगबीर पुलिस चौकी में मौजूद इमरजेंसी वार्ड में पहुंच गए. उन्होंने डाक्टरों से बात की. मृतका के गले का निशान देख कर उसे भी शक हुआ. कपिल शर्मा दक्षिणपूर्वी दिल्ली के थाना न्यू फ्रैंड्स कालोनी के तहत तैमूर नगर में रहता था, इसलिए मामले की एमएलसी तैयार कर जगबीर ने सूचना न्यू फ्रैंड्स कालोनी थाने को दे दी. सूचना मिलने पर थाने से एसआई संतोष पाबरी, लोकेंद्र त्यागी, कांस्टेबल संदीप और कांस्टेबल कमलेश ट्रामा सेंटर के लिए निकल पड़े.

पुलिस ने सब से पहले मृतका पार्वती की लाश का मुआयना किया. इमरजेंसी वार्ड में भरती उस के पति कपिल शर्मा का इलाज चल रहा था. उस से पूछताछ की तो उस ने उन्हें वही बताया, जो पहले बताया था. पुलिस को कपिल की बातों पर शक हो रहा था. उसी बीच थानाप्रभारी कुलदीप सिंह भी ट्रामा सेंटर पहुंच गए. उन्होंने भी लाश का मुआयना कर कपिल से पूछताछ की.

कपिल शर्मा के साथ अस्पताल में मौजूद रामबीर से थानाप्रभारी ने बात की तो उस ने बताया कि कपिल के शोर मचाने पर जब वह मोहल्ले के दूसरे लोगों के साथ उस के कमरे में गया तो पार्वती बैड पर पड़ी थी और कपिल उस के पास बैठा रो रहा था. पूछने पर कपिल ने बताया था कि पार्वती गले में दुपट्टा बांध कर पंखे से लटकी हुई थी. चाकू से दुपट्टा काट कर उस ने उसे उतारा था. उस समय कपिल शर्मा गहरे दुख में था, इसलिए अस्पताल से छुट्टी हो जाने के बाद ही पुलिस ने उस से पूछताछ करना जरूरी समझा. मामला आत्महत्या का है या हत्या का, यह बात पोस्टमार्टम के बाद ही साफ होनी थी. इसलिए लाश को पोस्टमार्टम के लिए एम्स की मार्च्युरी भेज दिया गया.

कुलदीप सिंह कपिल शर्मा के तैमूरनगर स्थित कमरे का मुआयना करने पहुंचे. उस का कमरा पहली मंजिल पर था. वह एक छोटा सा कमरा था, जिस में दरवाजे के दाहिनी ओर एक बैड डला था. कोने में प्लास्टिक का छोटा कूलर रखा था. पुलिस को कमरे में सामान बिखरा हुआ मिला. वहीं पर दुपट्टे के 2 टुकड़े मिले और उन टुकड़ों के पास ही चाकू पड़ा मिला. कोने में बिजली का करीब एक 2 मीटर तार का टुकड़ा भी मिला. बिजली का स्विच बोर्ड भी टूटा हुआ मिला. कमरे के जिस पंखे से लटक कर फांसी लगाने की बात कही गई, उन्होंने उस पंखे का भी निरीक्षण किया. वह पंखा एकदम सहीसलामत था. उस पंखे पर धूल जमी थी.

थानाप्रभारी ने जांच के लिए फोरैंसिक विभाग के फिजिकल डिवीजन की एक्सपर्ट टीम और क्राइम इनवैस्टीगेशन टीम को भी बुला लिया.  दोनों टीमों ने घटनास्थल पर पहुंच कर जांच की और सबूत जुटाए. जिस दुपट्टे से कपिल ने फांसी लगाने की बात की थी, फोरैंसिक टीम ने दुपट्टे के उन दोनों टुकड़ों की जांच की. पता चला कि वह दुपट्टा इतना छोटा था कि उस से गले और पंखे में गांठें नहीं बंध सकती थीं. अब तक जो भी जांच हुई, उस से पार्वती के आत्महत्या करने की कहानी झूठी लग रही थी. कुल मिला कर शक की सूई उस के पति कपिल शर्मा पर ही जा रही थी. अगले दिन पुलिस को पार्वती की जो पोस्टमार्टम रिपोर्ट मिली, उस में बताया गया था कि उस की मौत फांसी लगा कर नहीं, बल्कि मुंह व नाक दबा कर की गई थी.

इतना ही नहीं, उस के शरीर पर चोटों के 26 निशान भी पाए गए थे. पुलिस का शक सही निकला. कपिल भी ट्रामा सेंटर से डिस्चार्ज हो चुका था. वह कहीं भाग न जाए, इसलिए पार्वती के अंतिम संस्कार के समय पुलिस मौजूद रही. पत्नी का क्रियाकर्म करने के बाद पुलिस ने 26 मार्च को थाने बुला कर कपिल शर्मा से पूछताछ की. अपना वही पुराना राग अलापता रहा कि पार्वती ने खुदकुशी की है. लेकिन पुलिस के पास इतने सबूत थे कि उन के आगे वह टिक नहीं सका.

कपिल शर्मा को लगा कि वह अपने बुने जाल में फंस चुका है तो उस ने सच बोलना ही उचित समझा. वह बोला, ‘‘सर, मुझ से बहुत बड़ी गलती हो गई. मैं ने ही गुस्से में पार्वती की हत्या की थी. लेकिन यह सब अचानक हो गया था.’’

इस के बाद उस ने पार्वती की हत्या की जो कहानी बताई, वह इस प्रकार निकली—

32 वर्षीय कपिल शर्मा मूलरूप से उत्तर प्रदेश के जिला सीतापुर का रहने वाला था. हाईस्कूल पास करने के बाद वह आगे की पढ़ाई नहीं कर सका तो पिता के साथ खेती के काम में लग गया. कपिल दबंग किस्म का था. छोटीछोटी बातों पर वह मोहल्ले में लोगों से झगड़ बैठता था. उस की इस आदत से घर वाले भी परेशान थे. वह उसे समझासमझा कर हार चुके थे, पर उस पर कोई फर्क नहीं पड़ता था. तब पिता ने यह सोच कर उस की शादी कर दी कि शायद घरगृहस्थी में बंधने के बाद वह सुधर जाए. लेकिन शादी के बाद भी कपिल के स्वभाव में कोई फर्क नहीं आया बल्कि शादी के कुछ दिनों बाद ही उस का अपनी पत्नी से भी झगड़ा रहने लगा. दोनों के बीच की दूरियां बढ़ने लगीं. हालात यहां तक पहुंच गए कि उस ने शादी के डेढ़-दो साल बाद ही पत्नी को जला कर मार दिया. यह सन 2004 की बात है.

कपिल ने इस मामले को भी आत्महत्या का रूप देने की कोशिश की थी, पर ससुराल वालों के रिपोर्ट करने के बाद कपिल को जेल जाना पड़ा. कोर्ट में केस चला, जिस में उस का दोष सिद्ध हो गया और उसे 7 साल की सजा हुई. जेल के नियम और कानूनों का सही से पालन करने की वजह से उसे साढ़े 4 साल बाद ही रिहाई मिल गई. जेल से छूटने के बाद कपिल अपने एक दोस्त के साथ काम की तलाश में दिल्ली चला आया. उस का दोस्त दिल्ली के एक निजी अस्पताल में नौकरी करता था. दोस्त कपिल के लिए भी नौकरी ढूंढने लगा, लेकिन उस समय उसे नौकरी नहीं मिली.

उसी दौरान हजरत निजामुद्दीन क्षेत्र के एक पुरुष मरीज की देखभाल के लिए एक नर्सिंग अटेंडेंट की जरूरत थी. कपिल को कोई काम नहीं मिल रहा था तो वह यह काम करने को तैयार हो गया. कपिल अस्पताल की ओर से उस मरीज की देखभाल करने के लिए हजरत निजामुद्दीन चला गया. रहने के लिए उसे उसी कोठी में एक कमरा भी मिल गया था. उसी कोठी में पार्वती नाम की एक युवती खाना बनाने आती थी. 21 साल की पार्वती मूलरूप से नेपाल की थी. वह शादीशुदा थी. उस के 2 बच्चे भी थे.

पार्वती भी तेजतर्रार थी, पति से उस की नहीं बनती थी. कुछ दिनों पहले ही वह गुस्से में पति को छोड़ कर दिल्ली चली आई थी. दोनों बच्चों को भी वह पति के पास ही छोड़ आई थी. दिल्ली आ कर वह कोठियों में खाना बनाने का काम करने लगी थी. कपिल और पार्वती एक ही जगह काम करते थे, इसलिए उन की दोस्ती हो गई थी. चूंकि कोठी में दोनों साथसाथ रहते थे, इसलिए उन की नजदीकियां बढ़ती गईं. फिर एक दिन ऐसा भी आया, जब उन के बीच शारीरिक संबंध बन गए.

इस के बाद उन्होंने एक मंदिर में शादी कर ली. शादी के बाद वे दक्षिणपूर्वी दिल्ली के थाना न्यू फ्रैंड्स कालोनी के तहत तैमूरनगर में किराए का कमरा ले कर रहने लगे. यह बात सन 2011 की है. कपिल और पार्वती दोनों ही कमा रहे थे, इसलिए उन के सामने कोई आर्थिक परेशानी नहीं थी, पर एक चिंता उन्हें सताए जा रही थी कि कई साल बाद भी उन के कोई बच्चा नहीं हुआ. पार्वती को कई बार गर्भ ठहरा भी, लेकिन 1-2 महीने बाद ही किसी वजह से गर्भपात हो जाता था.

बारबार गर्भ गिरने से पार्वती को तो दुख होता ही था, कपिल भी परेशान रहने लगा. इस के लिए वह हर बार पत्नी पार्वती को ही दोषी मानता था. कपिल ने शराब भी पीनी शुरू कर दी थी. नशे में धुत हो कर घर लौटना जैसे उस की आदत हो चुकी थी. पार्वती उसे ज्यादा शराब पीने को मना करती तो वह उस से झगड़ा करने लगता. कभीकभार बात बढ़ने पर वह उस की पिटाई भी कर देता. इसी दौरान हजरत निजामुद्दीन के बाद कपिल को पीतमपुरा में किसी मरीज की देखभाल करने का काम मिल गया. वह वहां अपनी मोटरसाइकिल से आताजाता था. जब कपिल पिता नहीं बन सका तो सोचने लगा कि पार्वती के अंदर ही कोई कमी है, जिस की वजह से उस के गर्भ में बच्चा नहीं रुक रहा.

कपिल ने पार्वती को छोड़ने की धमकी दी तो वह उस के सामने गिड़गिड़ाई, ‘‘मैं ने तुम्हारे लिए अपने पति और बच्चों तक को छोड़ दिया और तुम इस तरह की बात कर रहे हो. बताओ, ऐसे में मैं कहां जाऊंगी.’’

‘‘तुम भाड़ में जाओ. ऐसी औरत का क्या फायदा, जो बच्चा तक न दे सके.’’ कपिल ने गुस्से में कहा.

‘‘यह कोई मेरे हाथ में तो है नहीं, जब इलाज के बाद भी बच्चा नहीं रुक रहा तो मैं क्या करूं.’’ वह बोली.

‘‘अब तू एक ही शर्त पर यहां रहेगी. मैं चाहे कुछ भी करूं, तू मेरे काम में दखल नहीं देगी.’’ कपिल ने फरमान सुनाया.

पार्वती की मजबूरी थी. उस ने भी कह दिया कि वह अब उस से कुछ नहीं कहेगी. इस के बाद कपिल घर कितने बजे लौटता, वह कहां जाता, पार्वती इस बारे में उस से कुछ नहीं पूछती. बस वह उसे समय पर खाना बना कर दे देती थी. लेकिन इसी साल मार्च के महीने में कपिल को जब पता चला कि पत्नी को फिर से गर्भ ठहर गया है तो वह खुश हुआ. उस के मन में फिर से उम्मीद की किरण जाग उठी. उस ने पत्नी के प्रति अपना व्यवहार बदल दिया. वह उस के साथ प्यार से पेश आने लगा. इतना ही नहीं, वह उस के खानपान का भी ध्यान रखने लगा.

लेकिन होली से 2-3 दिन पहले अचानक फिर से गर्भपात हो गया. यह उन दोनों के लिए बड़े दुख की बात थी. इस के बाद कपिल की तो जैसे उम्मीद ही टूट गई. होली के अगले दिन धुलेंदी थी. उस दिन बहुत से लोग रंग में सराबोर और नशे में चूर होते हैं. कपिल उस दिन अपने काम से दोपहर बाद ढाई बजे घर लौट आया था. उस समय भी वह शराब पीए हुए था और शराब की एक बोतल अपने साथ लाया था. कमरे में आते ही वह पत्नी के साथ गालीगलौज करने लगा. पार्वती पहले तो सब बरदाश्त करती रही, जब बातें बरदाश्त से बाहर हुईं तो उस ने जवाब देने शुरू कर दिए.

पार्वती का बोलना ही था कि कपिल का गुस्सा उस पर फूट पड़ा. उस ने उस की लातघूंसों से पिटाई शुरू कर दी. इतना ही नहीं, गुस्से में तमतमाए कपिल ने अपने हाथों से उस की नाक और मुंह दबा कर हत्या कर दी. पत्नी के मर जाने के बाद कपिल का नशा उतर गया. अब उसे पुलिस द्वारा पकड़े जाने का डर था. पुलिस से बचने का वह उपाय सोचने लगा. तभी उस के दिमाग में आया कि यदि वह इस हत्या को आत्महत्या का रूप दे देगा तो वह आसानी से बच सकता है.

आत्महत्या का केस दिखाने के लिए उस ने कमरे में पड़े बिजली के तार को पत्नी की गरदन में डाल कर दोनों हाथों से कस दिया, जिस से उस के गले पर निशान पड़ जाएं. फिर पत्नी के एक दुपट्टे को चाकू से काट कर उसे लाश के पास ही डाल दिया. यह काम करने के बाद वह कमरे का दरवाजा भिड़ा कर हाथ में शराब की बोतल लिए पहली मंजिल से नीचे उतर आया. नीचे कुछ दोस्त मिले तो उन के साथ बैठ कर उस ने शराब पी. 2 पैग पी कर वह दोस्तों के बीच से उठ कर पास में स्थित पान की दुकान पर गया. वहां से पान खाते हुए वह सीधे अपने कमरे पर चला गया.

कमरे में घुसते ही उस ने योजनानुसार शोर मचाना शुरू कर दिया. शोर सुन कर आसपड़ोस के लोग उस के यहां इकट्ठा हुए तो उस ने उन्हें बताया कि पत्नी गले में दुपट्टे का फंदा बना कर पंखे से झूल गई. बड़ी मुश्किल से उस ने चाकू से दुपट्टा काट कर उसे उतारा है. उस समय पार्वती के शरीर में गरमाहट थी. लोगों के कहने पर वह अपने दोस्त रामबीर के साथ पत्नी को एम्स के ट्रामा सेंटर ले गया.

मोटरसाइकिल रामबीर चला रहा था. महारानी बाग के पास उस की बाइक एक औटोरिक्शा से भिड़ गई. रामबीर तो किसी तरह संभल गया, लेकिन कपिल और उस की मृत पत्नी को चोटें आईं. उसी दौरान औटोरिक्शा वाला वहां से भाग गया. जैसे ही वह ट्रामा सेंटर में पार्वती को ले कर पहुंचे, डाक्टरों ने उस के गले पर लगे निशान से ही पहचान लिया कि यह केस आत्महत्या का नहीं हो सकता. कपिल शर्मा से पूछताछ के बाद पुलिस ने 26 मार्च को उसे कोर्ट में पेश कर 2 दिनों के पुलिस रिमांड पर लिया. रिमांड अवधि में जरूर सबूत जुटा कर उन्होंने उसे फिर से न्यायालय में पेश किया, जहां से उसे जेल भेज दिया गया. मामले की विवेचना थानाप्रभारी कुलदीप सिंह कर रहे हैं.

पहली पत्नी की हत्या के आरोप में सजा काट चुके कपिल शर्मा को एहसास होना चाहिए था कि जुर्म चाहे कितने भी शातिराना तरीके से किया जाए, वह उजागर हो ही जाता है. पार्वती से शादी करने के बाद उसे फिर से अपनी बाकी की जिंदगी हंसीखुशी से बिताने का मौका मिला था, लेकिन उस की जिद और नासमझी ने उसे कहीं का नहीं छोड़ा. यदि पार्वती के गर्भ में बच्चा नहीं ठहर रहा था तो उसे किसी अच्छे डाक्टर से इलाज कराना चाहिए था. बहरहाल, कपिल शर्मा के असंयमित काम की वजह से पार्वती को तो अपनी जान से हाथ धोना ही पड़ा, वह खुद भी सलाखों के पीछे पहुंच गया. Hindi Crime Story

—कथा पुलिस सूत्रों पर आधारित

 

और कहानियां पढ़ने के लिए क्लिक करें...