Thriller Hindi Story: अति की आजादी मिलने पर बच्चों का बिगड़ जाना कोई बड़ी बात नहीं है. कारा भी अपने मातापिता की लापरवाही से बिगड़ी थी. मांबाप यह तो जानते थे कि गलत राह पर उठे पैरों को रोकना संभव नहीं है, उन्हें यह पता नहीं था कि वह किस हद तक जा सकती है. उस दिन मौसम का मिजाज बहुत खुशगवार था. शाम को भी यही स्थिति बनी रही.देखतेदेखते शाम सिमट गई और डूबते सूरज को अलविदा कह कर अंधेरे ने अपनी चादर फैला दी.

आसमान साफ था. छोटेबड़े सभी तारे जगमगाने लगे थे. चांद ने भी कुछ पल पहले अपने आने की आहट दे दी थी. चांदनी रात थी. हवा ऐसे गायब थी, जैसे चलना ही भूल गई हो. हवा बंद होने की वजह से लंबेघने दरख्तों पर झुंड में सिर से सिर जोड़े पत्ते भी खामोश थे. चारों तरफ सन्नाटा पसरा था. ठंड अपने यौवन पर थी, जिस के कारण लोग अपने घरों में दुबके हुए थे. उसी शांत वातावरण में कहकहों की कई आवाजें एक साथ गूंजीं. यह आवाजें बोर्डन हाऊस नाम की एक विशाल इमारत के मुख्य दरवाजे से आई थीं. यहां माइकम बोर्डन अपनी पत्नी कैथरीन बोर्डन और 3 बच्चों के साथ रहते थे. बड़ी बेटी कैटीलिन 15 साल की थी, उस से छोटी कारा 14 साल की तो सब से छोटा बेटा जेम्स महज 11 साल का था.

आज जेम्स की पहली गर्लफ्रैंड पहली बार घर आई थी. इस खुशी को सेलीब्रेट करने के लिए घर में छोटी सी पार्टी रखी गई थी. जब जेम्स की फ्रैंड जाने लगी तो सभी उसे विदा करने दरवाजे तक आए थे. तभी किसी ने कुछ ऐसा कह दिया था कि सभी दिल खोल कर हंस पड़े थे. इसी हंसीखुशी भरे माहौल को बीते एक घंटा भी नहीं हुआ था कि बोर्डन हाऊस से फिर एक के बाद एक 2 आवाजें गूंजीं. ये आवाजें गोलियां चलने की थीं. गोलियों की आवाजें सुन कर पड़ोसियों की नींद उड़ गई. सभी उस ओर भागे. जरूर बोर्डन हाऊस में कोई हादसा पेश आया था. हादसा वाकई दिल दहला देने वाला था. लोगों ने अंदर जा कर देखा तो मुंह से चीख निकल गई.

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