Bihar Crime: सनकी आशिक से रहें अलर्ट

Bihar Crime: 18 वर्षीय आरती वरमाला के समय बेहद खुश थी. स्टेज पर जैसे ही उस ने अपने मंगेतर के गले में जयमाला डाली, उसी दौरान किसी ने उस के पेट में सटा कर गोली मार दी. एक झटके में ही 2 परिवारों की खुशियां जयमाला के टूटे फूलों की तरह बिखर गईं…ऐसा क्यों हुआ? किस ने किया? पढ़ें, इस सिरफिरे प्रेमी की कहानी में…

वैसे तो बिहार के शहर बक्सर के जर्रेजर्रे में आज भी वीरता का गौरवशाली इतिहास बोलता है. अंगरेजों से लोहा लेने वाली बंदूकों की आवाज की गूंज की कहानियां भी सुनीसुनाई जाती हैं. किंतु विवाह के मौके पर लोगों का बारात में बंदूक ले कर आना और आतिशबाजी की तरह आसमानी फायर करना सामान्य बात है. बक्सर के चौसा नगर पंचायत में 24 फरवरी, 2026 को नंद चौधरी के घर पर उन की 18 वर्षीय बेटी आरती की बारात आने वाली थी. रात के 10 बज चुके थे. घर पूरी तरह रोशनी से नहाया हुआ था. आवागमन के मुख्य रास्ते पर करीब 250 मीटर की दूरी तक और अगलबगल की गलियों में एलईडी बल्ब, ट्यूबलाइट्स और तेज रोशनी वाले वैपर लाइट की दिन के उजाले जैसी रोशनी फैली हुई थी.

वहां घर के लोगों का आनाजाना हो रहा था. बच्चे भी अपनी धुन में खेलकूद रहे थे. घर के पास में ही एक चौड़ी जगह पर जयमाला का इंतजाम किया गया था. इस के लिए एक किनारे पर टेंट के नीचे मंच सजा दिया गया था. उस पर मुश्किल से 8-10 लोग खड़े हो सकते थे. मंच के सामने कुछ कुरसियां लगाई जा चुकी थीं. वहां की भी सजावट जबदरस्त थी. फूलों की सजावट साथसाथ चौंधिया देने वाली रंगीन रोशनी से गजब का माहौल बन गया था.

घर के लोग बारात आने का बेसब्री से इंतजार कर रहे थे. हालांकि बलिया से आई बारात जनमासे में पहुंच चुकी थी. बारातियों को नाश्ता वगैरह भी करवाया जा रहा था. उन के तैयार हो कर निकालने की भी लगभग तैयारी हो चुकी थी. बारातियों में से एक व्यक्ति ने उस की कमान संभाल ली थी और सभी को जल्द कमरे और हौल से बाहर निकलने को कह रहे थे. कुछ इसी तरह का माहौल दुलहन के कमरे में भी बना हुआ था. ब्यूटी पार्लर द्वारा सजीधजी दुलहन अपनी सहेलियों और रिश्तेदारों से घिरी बैठी थी. उस की सुंदरता की तरीफें हो रही थीं. हंसीमजाक भी चल रही थी, जबकि घर में विवाह के मुख्य कर्ताधर्ता इस शादी के कार्यक्रम को तेजी से बढ़ाने में लगे हुए थे.

महिलाओं को द्वार पर जल्द बारात लगाए जाने का इंतजार था. वे बारातियों के स्वागत की थाली सजाए हुए थीं. थाली का दीपक बुझने नहीं पाए, इस के लिए साथ में माचिस भी रखी थी. उन में दूल्हे के साथ पारंपरिक रस्में निभाने की उत्सुकता थी. महिलाओं ने इस के लिए अपनेअपने काम बांट लिए थे. इसी बीच एक बुजुर्ग महिला बोली, ”अरे तुम सब यहीं हंसीठिठोली करती रहोगी, बाहर जा कर पता तो करो…बारात जनमासे से निकली भी है या अभी वहीं सज रही है?’’

”आंटी, बारात निकल चुकी है…बैंड की तेज आवाज सुनाई दे रही है.’’ दुलहन की एक सहेली बोली.

”ठीक है, दुलहन को छत पर ले जा, उसे बारात दिखा कर तुरंत ले आना…’’ महिला बोली.

”दुलहन को क्या आंटी?’’ सहेली ने प्रश्न किया.

”अरे, यह भी एक रस्म है…दुलहन को अपनी बारात देखने से उस के लिए शुभ होता है.’’

”अच्छा तो यह बात है…ठीक है आंटी… अरे, चलोचलो, दुलहन को ले चलते हैं छत पर…’’ यह कहती हुई लड़कियां दुलहन को छत पर ले गईं. वहां वे छत के मुंडेर के किनारे जा जा कर खड़ी हो गईं.

तब तक बैंडबाजे की आवाज काफी तेज हो चुकी था. इस का मतलब था कि बारात दरवाजे के नजदीक पहुंच चुकी थी.

घर की बड़ीबुजुर्ग महिलाएं हाथों में दीपबाती का थाल लिए हुए दूल्हे के स्वागत के लिए सजी गाड़ी के पास पहुंच गई थीं. कुछ मिनटों में ही दूल्हे की आरती और पूजन की रस्म अदायगी हो गई. दूल्हे को पास ही मंच पर ले जाया गया. इसी बीच एक महिला ने आवाज लगाई, ”दुलहन को जल्दी से ले कर आओ, जयमाला करनी है.’’

बैंड की तेज आवाज में कौन, क्या बोल रहा है, ठीक से किसी को समझ में नहीं आ रहा था. किंतु उपस्थित लोग इशारेइशारे में वहां के स्वागतसत्कार का काम निपटा रहे थे. फेमिली वालों की तरफ के लड़के बारातियों की आवभगत कर रहे थे. उन्हें कोल्डड्रिंक और नाश्ता परोसा रहे थे, जबकि घर की कुछ लड़कियां और औरतें दूल्हे के आसपास मंच पर जा पहुंची थीं. वे एक लय के साथ विवाह गीत में बारातियों के लिए गालियां गाए जा रही थीं.

दुलहन जैसे ही घर के मुख्य दरवाजे से अपनी सहेलियों के साथ बाहर निकली, फोटाग्राफर और वीडियोग्राफर की लाइटें उस ओर फोकस हो गईं. तेज रोशनी में दुलहन का चेहरा और भी निखरा हुआ दिखने लगा था. वह धीरेधीरे मंच की ओर नजाकत के साथ चलती हुई दूल्हे के पास पहुंच चुकी थी. उन्हें दुल्हे के बगल में बिठाने से पहले जयमाला की रस्म निभानी थी, सो वह घर की 2 लड़कियों के साथ खड़ी हो गई थी. उन के सामने दूल्हा भी आ कर खड़ा हो गया था. उन के साथ भी कुछ लड़के थे. संभवत: वे उन के दोस्त और रिश्तेदार थे.

आरती – जयमाला के समय प्रेमी की गोली का शिकार

दोनों के हाथों में जयमाला पकड़ा दी गई थी. जयमाला पहनाने की पहल दुलहन की तरफ से की गई. उस की एक सहेली ने हाथ में वरमाला को अच्छी तरह पकडऩे को कहा, ”दूल्हा लंबा है, एक झटके में पैर उचका कर माला डाल देना. हम लोग भी तुम्हें सहारा देख थोड़ा उठा देंगे.’’

दुलहन ने इशारे में गरदन हां में हिला दी. एक सहेली बोली, ”लड़के वालो! रेडी हो जाओ… ठीक से जयमाला पकड़ लो…पहले दुलहन माला पहनाएगी, उस के बाद दूल्हे को माला पहनाना है. हां, कोई गड़बड़ी नहीं होनी चाहिए.’’

”आप जैसी खूबसूरत साली हो, तब तो गड़बड़ी हो कर ही रहेगी.’’ दूल्हे का एक दोस्त चुटकी लेते हुए बोला और लड़कियों की तरफ अपना हाथ बढ़ा दिया.

”जो कुछ बोलना है, मुंह से बोल लो… हमें टच करने की कोशिश भी नहीं करना!’’

”साली हो कर इतनी सख्ती ठीक नहीं है.’’

”क्या ठीक, क्या नहीं वह सब बाद में करना पहले लड़के को और पास लाओ!’’ लड़की बोली और दुलहन को एक कदम आगे बढ़ा कर वरमाला के लिए इशारा कर दिया.

दुलहन ने वरमाला दूल्हे की गरदन में डालने के हाथ उठाया, लेकिन यह क्या, दूल्हे को 2 लड़कों ने पैर पकड़ कर काफी ऊंचा उठा दिया… और दुलहन हाथ में वरमाला पकड़े ठगी सी उसे देखती रह गई.

”चालाकी खेलते हैं. अभी मैं भी दिखाती हूं. फेल करती हूं तुम्हारी चालाकी.’’

इसी बीच मंच पर लड़के वालों की तरफ से हलचल मच गई…’’अरेअरे, तू कौन है भाई? बारात का तो नहीं लगता. और…और यहां पिस्टल ले कर कैसे घुस गया दूल्हादुलहन के बीच में? फायरिंग करनी है, तो नीचे जा कर हवाई फायरिंग कर न! यहां जयमाला की रस्म होने दे.’’ दूल्हे का एक दोस्त नाराजगी के साथ बोला.

”मैं तो यहीं फायरिंग करूंगा…तू रोक सकता है तो रोक ले!’’ मंच पर अचानक चढ़ आया युवक भी उसी के लहजे में आक्रोश के साथ बोला और अपनी पिस्टल उस की ओर तान दी.

”अरे…अरे भाई! मजाक मत कर यार, गोली चल जाएगी…हटा ले इसे सामने से!’’ दूल्हे के साथ खड़ा दूसरा लड़का बोल पड़ा.

पिस्टल ताने लड़के ने उस की तरफ से पिस्टल हटा ली, किंतु अगले पल उस ने दुलहन आरती को निशाना बना लिया था. उस की यह हरकत स्टेज पर मौजूद सभी को अटपटी लगी. कई लोगों ने एक सुर में विरोध किया. बैंडबाजे और डेक स्पीकर की आवाज में सभी पिस्टल थामे लड़के को चिल्ला कर बोले जा रहे थे. इसी बीच कब गोली चलने की आवाज आई किसी को पता ही नहीं चला… मंच पर अफरातफरी मच गई. दुलहन वहीं गिर गई थी…उसे गोली लग गई थी.

जयमाला के समय दुलहन आरती की गोली मार कर हत्या का प्रयास करने वाला सिरफिरा आशिक दीनबंधु

यह क्या हो गया? क्या हो गया दुलहन को?… उठाओ जल्दी…! अगले पल वह लड़का वहां से फरार हो गया था. मंच पर जयमाला के फूल बिखर गए थे. एक पल में गोली चलने की बात फैल गई. कुछ लोगों ने तुरंत दुलहन को हाथ और पैरों से टांग कर गाड़ी में डाला और अस्पताल ले गए. तुरंत अस्पताल में भरती कराया गया, जहां उस की हालत नाजुक बनी हुई है. पेट से खून निकल रहा था. अस्पताल के इमरजेंसी वार्ड में डौक्टर जांच करने लगे. तब तक मुफस्सिल थाने की पुलिस भी वहां पहुंच चुकी थी. कानूनी काररवाई शुरू कर दी गई. पुलिस को डौक्टर से मालूम हुआ कि दुलहन को  पेट में सटा कर गोली दागी गई थी.

गोली मारते ही वैवाहिक कार्यक्रम में हड़कंप मच गया. शादी की खुशियां चीखपुकार में बदल गईं. दुलहन आरती को गंभीर हालत में वाराणसी रेफर कर दिया गया. गोली शरीर के नाजुक हिस्से में लगी थी, जिस से उस की स्थिति चिंताजनक बन गई थी. जबकि गोली मारने वाला युवक फरार हो गया था. इस मामले को मुफस्सिल थाना क्षेत्र में दर्ज कर लिया गया. बाराती और ग्रामीण भी जान बचाने के लिए इधरउधर भाग गए थे. पुलिस ने इस घटना के बारे में स्थानीय लोगों और विवाह में आए लोगों से पूछताछ की.

बारात उत्तर प्रदेश के बलिया जिले के सुलेमानपुर गांव से आई थी. पूरे विधिविधान के साथ विवाह की रस्मों के दरम्यान यह घटना हो गई. पूछताछ में मालूम हुआ कि अचानक जयमाला के मंच पर चढ़ आया युवक पड़ोस का ही दीनबंधु था. उस ने दुलहन को निशाना बना कर गोली चलाई थी. स्थानीय लोगों के अनुसार यह मामला प्रेम प्रसंग से जुड़ा बताया गया. आरोपी युवक आरती का पड़ोसी था और दोनों के बीच पहले से संबंध होने की चर्चा गांव में थी. कुछ लोगों ने बताया कि आरती की शादी तय होने से युवक नाराज था और इसी रंजिश में उस ने यह खौफनाक कदम उठाया.

पुलिस ने जांच में इस जानकारी को नोट कर लिया. सवाल था कि घटना पूर्व नियोजित थी या अचानक गुस्से में अंजाम दी गई. मुफस्सिल थाना पुलिस द्वारा मौके पर छानबीन के बाद रिपोर्ट दर्ज कर ली. पुलिस ने समारोह स्थल से साक्ष्य जुटाए और प्रत्यक्षदर्शियों से पूछताछ पूरी हो जाने के बाद फरार आरोपी की गिरफ्तारी के लिए छापेमारी करने लगी. इस सनसनीखेज घटना के बाद पूरे इलाके में दहशत का माहौल बन गया था. ग्रामीणों में आक्रोश साफ देखा देखा जा रहा था. लोग कानूनव्यवस्था पर सवाल उठा रहे थे. वहीं दुलहन की फेमिली पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा था. शादी की खुशियां पल भर में मातम में बदल गई थीं. इस का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल होने लगा था. यूट्यूबर अपनेअपने अंदाज में वारदात का विवरण दे रहे थे.

दरअसल, सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे एक वीडियो में दूल्हादुलहन स्टेज पर मौजूद दिखे और पूरा घर शादी की खुशियां मनाता नजर आ रहा था. इतने में जयमाला लाई जाती है और दू्ल्हादुलहन को दी जाती है, जैसे ही रस्म की बारी आती है वैसे ही एक सिरफिरा स्टेज पर आता है और दुलहन पर पिस्टल से फायर कर देता है. दुलहन को गोली लग जाती है. सभी दुलहन को संभालने लगते हैं. मेहमानों के होश उड़ जाते हैं. दुलहन भी बेहोश होकर वहीं स्टेज पर गिर जाती है. हैरान करने वाला वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो चुका था.

दुलहन की बारात लौट गई थी. बारात में आए लोगों की प्रतिक्रिया भी जले पर नमक छिड़कने जैसी ही थी. दूल्हे का कहना का कहना था कि अगर पहले पता होता तो वो कभी नहीं आते. घायल दुलहन का भी एक वीडियो आने से पता चल चुका था कि उसे गोली मारने वाला सिरफिरा आशिक दीनबंधु था. वह लंबे से उस के पीछे पड़ा था. पुलिस उस की गिरफ्तारी में जुट गई थी.

जल्द ही आरोपी दीनबंधु गिरफ्तार भी कर लिया गया. जब उस की क्राइम हिस्ट्री की जांच की, तब पाया गया कि शराब तस्करी के मामले में 2021 में वह जेल जा चुका था. उस से पुलिस के लिए यह जानना भी आवश्यक था कि उस के पास हथियार कैसे आए और गोली मारने के पीछे उस की असली मंशा क्या थी? क्या यह सिर्फ प्रेम प्रसंग का मामला था या इस के पीछे कोई और भी कारण था?

आरती के फादर नंद मल्लाह का कहना है कि वह एकतरफा प्यार करता था. लड़की उसे पसंद नहीं करती थी, इसलिए उस ने गोली मार दी. उन्होंने बताया कि आरोपी एक बार पहले भी उन की बेटी की शादी तुड़वा चुका है.

जब शादी तय हुई थी, तब आरोपी ने लड़के के घर वालों को धमकाया था. धमकी से डर कर लड़के वालों ने वह रिश्ता तोड़ दिया था. इस के बाद गांव वालों ने पंचायत बिठाई थी. लड़के को गांव से बाहर भेज दिया गया वह उस पर नजर बनाए हुए था. पुलिस ने आरोपी दीनबंधु के पास से पिस्टल भी बरामद कर ली गई थी. एसपी शुभम आर्य ने बताया कि पूछताछ के दौरान आरोपी ने स्वीकार किया है कि वह एक से अधिक गोली मारना चाहता था, लेकिन पिस्टल फंस जाने के कारण वह दोबारा गोली नहीं चला सका. उस के खिलाफ दर्ज प्राथमिकी में हत्या या हत्या के प्रयास की बीएनएस की धारा 109 लगाई गई. भारतीय कानून के तहत किसी व्यक्ति को जान से मारने की कोशिश एक गंभीर अपराध माना जाता है.

इस मामले में दुलहन आरती का बयान भी महत्त्वपूर्ण था. उस ने गिरतेगिरते कहा था, ”दीनबंधु ने मुझे गोली मार दिया है.’’

गोली लगने के बाद आरती को तुरंत बक्सर सदर अस्पताल ले जाया गया. वहां उस की हालत गंभीर बताई गई, जिस के बाद आरती को वाराणसी के बीएचयू में रेफर कर दिया गया. दीनबंधु ने पुलिस को बताया कि वह और आरती एक ही मोहल्ले में पलेबढ़े. बचपन में दोनों साथ खेलते थे. जब आरती सिर्फ 6 साल की थी, तब उस के परिवार ने उसे बाहर खेलने से मना कर दिया. इस के बाद वक्त का ऐसा पहिया घूमा कि अगले 15 सालों तक दीनबंधु ने आरती की झलक तक नहीं देखी. वह बस उस की यादों के सहारे बड़ा हुआ.

साल 2024 में दीनबंधु ने आरती को पहली बार सलवारसूट में देखा तो उसे लगा कि यही वो लड़की है जिस के साथ वह अपनी पूरी जिंदगी बिताना चाहता है. दीनबंधु ने हिम्मत जुटाई और अपने दोस्तों के उकसाने पर आरती का पीछा किया. उस ने बीच सड़क पर आरती को रोक कर अपने प्यार का इजहार किया और शादी का प्रस्ताव रखा, लेकिन आरती ने साफसाफ न कह दिया.

उस के बाद उस के दिल और दिमाग में जो हलचल हुई, उस बारे में दीनबंधु ने कहा कि आरती की न सुनने के बाद उसे लगा कि अब पूरी दुनिया खत्म हो गई है. एक बार न सुनने के बाद भी वो लगातार आरती को मनाने की कोशिश करता रहा. उसे लगा कि शायद उस के पुराने आपराधिक रिकौर्ड की वजह से आरती उसे पसंद नहीं कर रही है.

जब उसने दोबारा कोशिश की, तो आरती ने दोटूक शब्दों में कह दिया, ”मैं तुम जैसे लड़के से कभी शादी नहीं करूंगी.’’

आरती की यही बात उस के दिल में सूई की तरह चुभ गई और उस के प्यार को एक जिद में बदल दिया. आरती की शादी एक साल पहले कहीं तय हुई थी. यह खबर सुनते ही वह आपा खो बैठा. वह सीधे लड़के वालों के घर पहुंच गया और उन्हें जान से मारने की धमकी दी. डर के मारे लड़के वालों ने शादी तोड़ दी. इस हरकत से आरती के पापा ने समाज के सामने दीनबंधु के फेमिली वालों को काफी खरीखोटी सुनाई. बेइज्जती से तंग आ कर दीनबंधु के फादर ने उसे काम करने के लिए पंजाब भेज दिया, ताकि वह सुधर जाए, पर उस का दिमाग आरती में ही अटका था.

पंजाब में बैठ कर भी दीनबंधु अपने दोस्तों के जरिए आरती की हर हलचल पर नजर रखे हुए था. उसे पता चला कि अगस्त 2025 में आरती की शादी दोबारा तय हो गई है. यह सुनते ही उस के सिर पर खून सवार हो गया. वह पंजाब से 1300 किलोमीटर दूर उत्तर प्रदेश के गहमर गांव पहुंचा. यह गांव गाजीपुर जिले में गंगा किनारे स्थित है. इसे सैनिकों का गांव भी कहा जाता है. यहां के लगभग हर घर से सेना में जवान हैं. यहां के एक परिचित से उस ने 32 हजार रुपए में एक पिस्टल खरीदी.

22 फरवरी, 2026 को वह चुपचाप अपने गांव पहुंचा और घर जाने के बजाय दोस्त के कमरे पर रुका, ताकि किसी को भनक नहीं लगे. फिर आरती की शादी के रोज वो स्टेज के पास गया और उसे गोली मार दी. उस ने सोचा कि आरती उस की नहीं तो किसी की नहीं हो सकती. संयोग से उस की घटनास्थल पर मौत नहीं हो सकी और उसे गंभीर हालत में अस्पताल में भरती करवा दिया गया. कथा लिखे जाने तक आरती का औपरेशन सफल हो गया था, लेकिन खतरा बना हुआ था. वह बोलने से असमर्थ थी.

आरती के पापा इस घटना से काफी आहत हैं. वह कहते हैं कि अभी भी उन की बेटी बोल नहीं पा रही है और डौक्टर की निगरानी में है. उस की सर्जरी हुई थी, उस के 12 घंटे बाद होश आया था. हम ने शादी के लिए भी काफी कर्ज लिया था और अब इलाज में भी कर्ज ले कर ही पैसा बहा रहे हैं. मुझे पैसों की चिंता नहीं है, मैं बस यह चाहता हूं कि आरोपी के खिलाफ सख्त काररवाई हो. Bihar Crime

 

 

Chhattisgarh Crime: प्रेमी को केवल – जिस्मानी प्यार तो नहीं

Chhattisgarh Crime: प्यार में अंधी हुई उर्मिला निषाद शादीशुदा विजय बांधे से प्यार कर बैठी. प्रेमी उस के जिस्म से खेलता रहा, लेकिन जैसे ही उर्मिला ने उस पर शादी का दबाव बनाने की भूल की तो विजय एक दिन इतना खूंखार बन गया कि…

अपनी प्रेमिका उर्मिला निषाद को ठिकाने लगाने के लिए विजय बांधे मौके की तलाश कर रहा था. योजना के मुताबिक उस ने पहले हार्डवेयर दुकान से सब्जी काटने वाला चाकू खरीदा और 7 दिसंबर 2025 रविवार की शाम उस ने उर्मिला को फोन लगाया तो उर्मिला ने उस से कहा, ”हां विजय, बोलो क्या बात है?’’

विजय एक कैटरर था, इसलिए उस ने उर्मिला को बताया, ”उर्मिला, बात दरअसल यह है कि आज रात एक प्रोग्राम में खाना बनाने के लिए और्डर बुक हुआ है, हमें वहां चलना पड़ेगा.’’ विजय ने बताया.

”लेकिन पहले तो तुम ने बताया नहीं कि आज का कोई कैटरिंग का और्डर है.’’ उर्मिला ने आशंका जताते हुए कहा.

”असल में क्या है उर्मिला, यह और्डर अर्जेंट में आज ही बुक हुआ है, इसलिए पहले से तुम्हें मैं कैसे बताता.’’ विजय ने सफाई देते हुए कहा.

”ठीक है, मैं तैयार होती हूं, मगर जाना कहां है, यह तो तुम ने बताया नहीं.’’ उर्मिला बोली.

”तुम्हें आम खाने हैं या पेड़ गिनने हैं, जल्दी से तैयार हो जाओ, मैं तुम्हें लेने आ रहा हूं.’’ उर्मिला पर अधिकार जमाते हुए विजय ने फोन काट दिया.

शाम का अंधेरा होते ही विजय ने अपनी बाइक निकाली और उर्मिला के घर की तरफ चल दिया. उर्मिला घर से निकलने को तैयार थी. जैसे ही विजय ने उस के घर के सामने बाइक रोक कर हार्न बजाया, उर्मिला अपने छोटे से बैग के साथ घर से बाहर निकल आई और झट से विजय की बाइक पर बैठ गई.

विजय ने रास्ते में एक रेस्टोरेंट के सामने बाइक रोकी तो उर्मिला ने सवाल किया, ”अब क्यों बाइक रोक दी?’’

इस पर विनोद बोला, ”खाना बनाते देर हो जाएगी, मोमोज और पकौड़ा पैक करवा लेता हूं, रास्ते में कहीं बैठ कर खा लेंगे.’’

मोमोज और पकौड़े पैक करवाने के बाद दोनों उतई गांव की तरफ निकल पड़े. रास्ते में नहर के पास खेल मैदान पर विनोद ने बाइक खड़ी करते हुए उर्मिला से कहा, ”शाम के समय यहां कोई नहीं है और लोगों का आनाजाना भी कम होता होगा, यहीं बैठ कर कुछ खा लेते हैं.’’

दोनों बीच मैदान खाने के लिए बैठ गए. पहले तो दोनों के बीच पहले से चल रहे विवादों पर बात शुरू हुई और थोड़ी ही देर में बहस गर्म हो गई. इसी बीच विजय ने बैग में रखे धारदार चाकू से अचानक उर्मिला पर वार कर दिए. पहले गले पर, फिर शरीर पर कई बार हमले किए. उर्मिला वहीं गिर गई. इस के बाद जिस साजिश की तैयारी विनोद ने पहले से की  थी, उसे अंजाम देने का वक्त आ गया था. विजय बोतल में अपने साथ पेट्रोल भी लाया था.

उस ने बाइक की डिक्की में रखी पेट्रोल की बोतल निकाली और उर्मिला के शरीर पर पेट्रोल उड़ेल दिया. इस के बाद उस ने जेब से माचिस निकाली और आग लगा दी. पास में रखी धान की पराली भी उस ने उसी आग में फेंक दी, ताकि शव पूरी तरह जल कर नष्ट हो जाए और कोई उसे पहचान न पाए. इस के बाद विजय सीधे अपने गांव करगाडीह लौट गया और ऐसे व्यवहार करने लगा, जैसे कुछ हुआ ही न हो. मगर पुलिस की नजरों से उस का कांड छिप नहीं सका और 24 घंटों के अंदर ही पुलिस ने अधजली लाश की गुत्थी सुलझाने में सफलता हासिल कर ली.

उतई पुलिस ने विजय बांधे को उर्मिला के कत्ल के जुर्म में उसे दुर्ग जिले की अदालत में पेश किया, जहां से उसे जेल भेज दिया गया. छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले के उतई थाना क्षेत्र में 8 दिसंबर की सुबह करगाडीह पऊवारा नहर किनारे बने खेल मैदान में गांव के कुछ लोग एक्सरसाइज करने पहुंचे तो वहां का नजारा देख कर उन की आंखें खुली की खुली रह गईं. खेल मैदान के एक कोने में पड़े धान के पुआल के ढेर में एक महिला का अधजला शव पड़ा हुआ था. यह खबर पूरे इलाके में जंगल की आग की तरह फैल गई.

लोगों ने इस की सूचना सब से पहले गांव कोटवार को दी. गांव कोटवार केवल दास मानिकपुरी ने शव देख कर तुरंत पुलिस को सूचना दी. मौके पर पहुंची पुलिस टीम को जांच में शव के पास से आधा जला चप्पल और धारदार हथियार मिला, जिस से हत्या की आशंका गहरी हो गई. फोरैंसिक एक्सपर्ट को घटनास्थल पर मौजूद बड़े पत्थरों पर खून के निशान दिखे, जिस से यह संभावना और मजबूत होती गई कि हत्या के बाद शव को पत्थरों से भी कुचला गया है. शुरुआती जांच में यह अंदेशा व्यक्त किया गया है कि युवती की पहले धारदार हथियार से हत्या की गई, फिर सबूत मिटाने के लिए उस पर पराली या किसी ज्वलनशील पदार्थ का इस्तेमाल कर शव को जला दिया गया हो.

फोरैंसिक टीम ने मिट्टी के नमूने, खून के धब्बे, जले हुए अवशेष और हथियार समेत कई महत्त्वपूर्ण साक्ष्य वहां से जुटाए. पुलिस ने घटनास्थल के आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों के फुटेज खंगालने शुरू कर दिए, ताकि हत्या के समय क्षेत्र में आनेजाने वालों की गतिविधियों का पता लगाया जा सके. उतई पुलिस ने आसपास के गांवों में ग्रामीणों से भी पूछताछ की, जिस से लाश की पहचान हो सके.

शुरुआती जांच में न तो मृतका की पहचान हो पाई, न ही कोई गवाह मिला. मौके पर पहुंची पुलिस टीम और फोरैंसिक एक्सपर्ट को पराली के बीच अधजला शव पड़ा मिला था, इसलिए यह साफ था कि हत्या कहीं और नहीं, इसी जगह की गई थी और पहचान छिपाने के इरादे से लाश जलाने की कोशिश भी की गई. एफएसएल टीम और डौग स्क्वायड मौके पर पहुंचे, लेकिन महिला की पहचान स्पष्ट नहीं थी, पुलिस ने इसे ‘ब्लाइंड मर्डर’ मानते हुए कई टीमें गठित कीं. एसएसपी विजय अग्रवाल के निर्देश पर 6 विशेष टीमें रात भर जांच में लगी रहीं.

घटनास्थल से मिले मोमोज के टुकड़ों और मोजों के आधार पर पुलिस ने 5 किलोमीटर के दायरे में दुकानदारों से पूछताछ की और पेट्रोल पंप के सीसीटीवी फुटेज खंगाले. 8 दिसंबर, 2025 की सुबह विजय बांधे सुपेला थाने पहुंचा. एसएचओ को अपना परिचय देते हुए उस ने कहा कि मेरे साथ काम करने वाली उर्मिला निषाद कल रात से घर नहीं पहुंची है.

”तुम उस से आखिरी बार कब मिले थे?’’ एसएचओ ने पूछा.

”सर, कल दिन में मेरी उस से फोन पर बात हुई थी, मगर रात से ही उस का फोन बंद आ रहा है. सुबह मैं ने उस के घर जा कर पता किया तो मालूम हुआ कि वह शाम को कहीं गई थी, मगर रात अपने घर नहीं लौटी.’’

बात महिला के लापता होने की थी, इसलिए उन्होंने उर्मिला निषाद की गुमशुदगी तुरंत दर्ज करा दी. एसएचओ ने इस की इत्तला एसएसपी विजय अग्रवाल को भी दे दी. एसएसपी के निर्देश पर पुलिस टीम ने जिले के सभी थाना क्षेत्रों में दर्ज गुमशुदगी की रिपोर्टों की पड़ताल करनी शुरू कर दी. इस के अलावा गठित टीम ने आसपास के सीसीटीवी कैमरों के फुटेज खंगाले तो दूसरी टीम ने मोबाइल लोकेशन देखी. जांच की इसी कड़ी में एक पेट्रोल पंप के सीसीटीवी फुटेज में एक बाइक सवार युवक को पुलिस ने संदिग्ध मान कर जांच शुरू की.

दरअसल, उस युवक के पीछे बाइक पर एक महिला बैठी हुई थी और युवक ने बाइक में पेट्रोल डलवाने के बजाय बोतल में पेट्रोल लिया था. एक रेस्टोरेंट में लगे सीसीटीवी फुटेज में यही युवक मोमोज और चाइनीज पकौड़े पैक करवा रहा था. अंत में शक की सुई विजय बांधे नाम के उस व्यक्ति की ओर घूमी, जिस ने खुद को पीडि़त का परिचित बता कर सुपेला थाने में उस की गुमशुदगी दर्ज कराई थी. पुलिस ने जब विजय बांधे को पूछताछ के लिए बुलाया तो उस की बातें शुरू से ही बेमेल लगीं. वह बारबार अपने बयान बदल रहा था और घटनाक्रम बताने में हिचक भी दिखाई दे रही थी.

तकनीकी टीम ने जब विजय का मोबाइल लोकेशन व मूवमेंट खंगाला तो पता चला कि घटना वाली शाम उस के मोबाइल की लोकेशन पुरई गांव की उसी नहर की थी, जहां पर अधजली लाश मिली थी. देर रात पूछताछ के दौरान जब विजय पर पुलिस के सवालों का दबाव और सख्ती बढ़ी तो आखिरकार वह टूट गया और उस ने पूरे मामले की कहानी पुलिस को साफसाफ बता दी. विजय की गिरफ्तारी के बाद पुलिस ने उस के घर और आसपास तलाशी ली. उस के कपड़ों पर खून के निशान मिले, जिन्हें उस ने छिपाने की कोशिश की थी. घटना में इस्तेमाल किया गया चापर भी बरामद हुआ. पेट्रोल डालने वाली बोतल और अन्य सामग्रियां भी पुलिस ने जब्त कीं.

फोरैंसिक टीम ने घटनास्थल से मिले अवशेषों और आरोपी के कपड़ों का मिलान किया, जिस से पूरे घटनाक्रम की पुष्टि हो गई. पुलिस पूछताछ में विजय ने स्वीकार किया कि नहर के पास मिली अधजली लाश सुपेला की रहने वाली उर्मिला निषाद की थी, जिस का कई वर्षों से उस के साथ प्रेम प्रसंग था. उर्मिला उस के ऊपर शादी के लिए दबाव बना रही थी, जिस से परेशान हो कर उस ने हत्या की योजना बनाई.

24 साल का विजय बांधे छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले के करगाडीह गांव का रहने वाला था और कैटरिंग का काम करता था. 30 साल की उर्मिला निषाद भी पिछले कुछ सालों से उस के साथ काम कर रही थी. कैटरिंग के काम में अकसर रातरात भर दूसरे गांव कस्बों में जाना पड़ता था. साथ काम करतेकरते दोनों करीब आ गए और उन का रिश्ता भावनात्मक होतेहोते प्रेम संबंधों तक पहुंच गया. विजय शादीशुदा था और उस की पत्नी गर्भवती थी. इस के बावजूद उर्मिला उस पर विवाह का प्रेशर बना रही थी. इसी मुद्ïदे पर दोनों के बीच कई बार लड़ाईझगड़े हो चुके थे.

”विजय, आखिर तुम कब तक मेरी भावनाओं से खेलते रहोगे, मैं इस तरह अपनी जिंदगी बरबाद नहीं होने दूंगी.’’ एक दिन उर्मिला ने उलाहना देते हुए कहा.

”देखो उर्मिला, तुम समझती क्यों नहीं. तुम्हें तो पहले ही मैं ने बता दिया था कि मैं शादीशुदा हूं, फिर भी तुम जिद कर रही हो.’’ विजय ने सफाई दी.

”तो क्या मैं जीवन भर तुम्हारी रखैल बन कर रहूंगी, तुम्हें मुझ से शादी करनी ही होगी.’’ उर्मिला गुस्से में तमतमा कर बोली.

”उर्मिला मैं ने तुम्हें धोखे में नहीं रखा, पत्नी के रहते तुम से मैं कैसे शादी कर सकता हूं. और मैं तुम्हारी जरूरतों का तो ध्यान रख रहा हूं.’’ विजय ने सहानुभूति दिखाते हुए कहा.

”तुम्हें तो मेरे जिस्म से ही मतलब है, अगर तुम मुझे दिल से चाहते तो ऐसी बात कभी नहीं करते.’’ उर्मिला ने आंसू बहाते हुए कहा.

”देखो उर्मिला, मेरी बीवी अभी प्रैग्नेंट है और मैं उसे किसी भी सूरत में छोड़ नहीं सकता. मुझे सोचने के लिए कुछ वक्त दो.’’ विजय ने मामले को शांत करने के लिहाज से कहा.

कैटरिंग के पैसों को ले कर भी विवाद खड़ा हो गया था. इसलिए धीरेधीरे उन के बीच का रिश्ता एकतरफा दबाव और आपसी मनमुटाव की भेंट चढऩे लगा था. कुछ समय से उर्मिला उसे सार्वजनिक रूप से लगातार अपमानित कर रही थी. इस बात को ले कर विजय के मन में इतना तनाव बढ़ गया था कि उस की स्थिति सांपछछूंदर जैसी हो गई थी. उर्मिला द्वारा की जा रही बारबार की बेइज्जती, गुस्से और शादी करने के दबाव से परेशान हो कर ही विजय के द्वारा उर्मिला को रास्ते से हटाने की साजिश रची जा रही थी. विजय को अपनी गलती का अहसास भी हो रहा था कि शादीशुदा होने के बावजूद उसे उर्मिला की बातों में नहीं आना था.

उर्मिला सुपेला गांव की रहने वाली थी. उस का विवाह करीब 10 साल पहले हो चुका था, पहले पति से उस का 8 साल का एक बेटा भी है. पति शराबी था, शराब पी कर उर्मिला के साथ मारपीट करता था. जब बेटा 3 साल का था, तभी उस ने पति को छोड़ दिया और अपनी सास और बेटे के साथ अलग रहने लगी. उर्मिला ने इस के बाद दूसरी शादी कर ली, लेकिन दूसरे पति के साथ भी वह ज्यादा दिनों तक रिश्ता नहीं निभा सकी. इस के बाद वह कैटरिंग का काम करने वाले विजय बांधे के संपर्क में आ गई.

उर्मिला ने शादी तो 2 बार कर ली, मगर उस के दिल पर राज करने वाला उसे कोई नहीं मिला. उस के दोनों पति न तो उस की जिस्मानी जरूरतों को पूरा कर सके और न ही उस के सपनों को साकार कर सके. यही वजह रही कि उर्मिला अपने से कम उम्र के विजय पर फिदा हो गई. विजय ने उर्मिला की कमजोरी का फायदा उठाते हुए उस से नजदीकियां बढ़ाईं और उस के साथ शारीरिक संबंध बनाने लगा. विजय उतई थान के अंतर्गत करगाडीह गांव का रहने वाला था. करगाडीह और सुपेला गांव के बीच की दूरी 15 किलोमीटर थी. कैटरिंग के काम के दौरान दोनों के बीच जिस ढंग से नजदीकियां बढ़ रही थीं, दोनों के बीच प्रेम की डोर मजबूत हो रही थी.

अकसर ही विजय उर्मिला को घुमाने ले जाता था और उस से कई बार शारीरिक संबंध भी बना चुका था. उर्मिला विजय पर दबाव बना रही थी कि वह भी सुपेला में उस के साथ रहे, मगर विजय शादीशुदा था और अपनी प्रैग्नेंट पत्नी की वजह से उर्मिला के साथ रहने को तैयार नहीं था. इसी बात पर दोनों के बीच मनमुटाव बढऩे लगा था और विवाद की स्थिति बनने लगी थी. उर्मिला निषाद की हत्या की घटना युवतियों को सचेत करती है कि प्रेम संबंध बनाते समय इस बात का ध्यान रखें कि कोई पुरुष उन से केवल जिस्मानी संबंध बनाने के लिए तो प्रेम का नाटक नहीं कर रहा.

किसी शादीशुदा पुरुष से प्रेम करने की भूल से उन्हें जीवन भर का पछतावा ही मिल सकता है. यदि किसी मजबूरी के चलते ऐसे पुरुषों से प्रेम संबंध कायम भी हो जाएं तो इस बात का खयाल रखें कि उन पर शादी करने का दबाव कदापि न बनाएं, अन्यथा उन का हश्र भी उर्मिला निषाद की तरह होगा. Chhattisgarh Crime

 

 

Bihar News: रहस्य में उलझी नीट छात्रा की मौत

Bihar News: पटना के बहुचर्चित गल्र्स हौस्टल कांड के गुनहगारों में रेपिस्ट से ले कर पुलिस अधिकारी, 2 प्राइवेट अस्पताल और पोस्टमार्टम रिपोर्ट तैयार करने वाले डौक्टर तक शामिल पाए गए. लेकिन गिरफ्तारी केवल हौस्टल मालिक की हुई. मृतका नाबालिग थी, मामला पोक्सो का भी बन गया. पढ़ें, पूरी कहानी. कैसे, कब, क्या हुआ और कौनकौन हैं आरोपी?

बिहार के जहानाबाद की रहने वाली गायत्री भी त्रद्गठ्र्ठं श्रेणी की ही थी. करिअर और जीवन को बेहतर बनाने के सपने उस ने भी देखे थे. पटना में रह कर मैडिकल की पढ़ाई के लिए नीट की तैयारी कर रही थी. इंटरमीडियट की परीक्षा भी सिर पर थी. निश्चित तौर पर उस के जेहन में फिजिक्स, केमिस्ट्री और बायोलौजी के अलावा और कुछ नहीं था.

वह 45 किलोमीटर की दूरी तय कर लोकल ट्रेन से 5 जनवरी, 2026 की शाम को 3 बजे के करीब अपने शंभु हौस्टल पहुंच गई थी, जो चित्रगुप्त नगर थाना क्षेत्र के मुन्नाचक में है. रात को 9 बजे अपनी मम्मी से उस की फोन पर बात भी हुई थी. उस ने ठीकठाक हौस्टल पहुंचने की जानकारी मम्मी को दे दी थी. अगले रोज 6 जनवरी, 2026 की शाम को गायत्री के फेमिली वालों को एक अनजाने फोन नंबर से कौल मिली कि उन की बेटी गायत्री की तबीयत खराब है. उसे डा. सहजानंद हौस्पिटल में भरती करवाया गया है.

फोन करने वाला न तो हौस्टल का कोई स्टाफ था और न ही उस का संचालक या मालिक ही था. इस पर गायत्री के पेरेंट्स को हैरानी हुई. वे घबरा गए. साइबर फ्रौड की आशंका से घिर गए कि किसी ने फोन गलत मकसद से तो नहीं किया है. फिर भी उस के फेमिली वालों ने पटना में रह रहे अपने एक परिचित को फोन कर हौस्पिटल भेज दिया. परिचित कुछ समय में ही हौस्पिटल पहुंच गए, जो हौस्टल के बगल में ही है. उन्होंने वहां गायत्री को एडमिट पाया, लेकिन वह बेहोश थी.

डा. सहजानंद ने गायत्री को सीरियस बता कर इलाज में असमर्थता जताई और उसे सेंट्रल हौस्पिटल, पटना रेफर कर दिया. वहां पर साथ में हौस्टल की एक केयर टेकर नीतू भी थी. वह उसे सेंट्रल हौस्पिटल न ले जा कर प्रभात मेमोरियल हौस्पिटल ले कर गई. उस के साथ परिचित भी गए. रात के 8 बज चुके थे, तब तक गायत्री के फेमिली वाले भी प्रभात मेमोरियल हौस्पिटल पहुंच गए. हौस्पिटल में गायत्री को भरती कर लिया गया था. उस की हालत नाजुक बनी हुई थी. उसे क्या हुआ है, फेमिली वालों को कुछ पता नहीं चल पा रहा था.

वे हैरानपरेशान थे कि आखिर उन की बेटी को अचानक क्या हो गया, जो उस की हालत सीरियस हो गई. उसे आईसीयू में रखा गया था और वहां डाक्टरों व नर्स के सिवाय किसी को भी वहां जाने की इजाजत नहीं थी. लिहाजा ठंड की रात में फेमिली वाले हौस्पिटल के वेटिंग एरिया में बैठे थे. उन के पास उसी रात एक महिला पुलिस (एसआई) आई और उन्हें अपना नंबर दे कर बोली, ”कुछ भी शक हो या जरूरत पड़े तो फोन कीजिएगा.’’

उन की जैसेतैसे कर रात बीती. वे पूरी रात हौस्पिटल के डौक्टर, नर्स और अन्य स्टाफ रूम का चक्कर लगाते रहे कि आखिर उन की बच्ची को हुआ क्या है, जो इतनी सीरियस हो गई. किंतु उन्होंने महसूस किया कि वहां उन की परेशानी समझने वाला कोई नहीं था.

सुबह हुई और 7 जनवरी को भी उन की बेटी दिन भर हौस्पिटल में एडमिट रही. उस रोज भी डौक्टर ने नहीं बताया कि लड़की के साथ क्या कुछ हुआ है. वे सिर्फ यही कहते रहे, ‘बस! इलाज चल रहा है. बच्ची बेहोश है, होश आने पर मिलवाया जाएगा.’

उसी दिन गायत्री के फेमिली वाले शंभु गल्र्स हौस्टल गए. उन्हें पहले तो उस के रहने वाले कमरे में जाने से मना कर दिया गया. काफी मिन्नतों के बाद उन्हें कमरे में जाने दिया गया. वह कमरा साफ था. उस वक्त हौस्टल में कई छात्राएं थीं, लेकिन किसी ने भी उन से बात नहीं की. उन्हीं में से उन्हें किसी ने फोन पर गायत्री के बीमार होने की सूचना दी थी.

क्यों छिपाया सच

उस रोज भी गायत्री आईसीयू में बेहोश पड़ी रही. अगले दिन 8 जनवरी, 2026 को प्रभात मेमोरियल हौस्पिटल के ही एक डौक्टर ने शाम को बताया कि गायत्री के साथ फिजिकली कुछ हुआ है, चोट के निशान हैं, ब्लीडिंग हुई है. यह सुनते ही उस के फेमिली वाले परेशान हो गए. गायत्री के होश में आने के इंतजार में शाम हो गई. करीब 6 बजे उसे होश आया.

सामने अपनी मम्मी को देख कर वह रोने लगी. उस का रुदन तेज हो गया. रोते हुए उस ने बताया कि उस के साथ गलत हुआ है. उसी वक्त वहां डौक्टर आ गए और उन्होंने फेमिली वालों को बाहर निकाल दिया. उसी वक्त वे दोबारा हौस्टल गए. वहां मौजूद एक केयर टेकर के साथ कमरे में गए. बच्ची के कमरे से कुछ सामान निकाला. साथ में कुछ पैसे, जो करीब 11 हजार थे, निकाल लिए. उस वक्त कमरे का फर्श बिलकुल साफ था, लेकिन वहां का सामान इधरउधर बिखरा पड़ा था. उन्हें केयर टेकर की बातों से भी आभास हुआ कि बेटी के साथ कुछ गलत हुआ है.

फेमिली वाले काफी परेशान हो गए थे. उन्होंने 9 जनवरी को उस नंबर पर कौल किया, जो 6 जनवरी की रात को महिला एसआई ने दिया था. उन्होंने बेटी की गंभीर हालत और उस के बारे जो कुछ मालूम हुआ, उस बारे में एसआई को बताया. कुछ समय में ही कदमकुआं थाने से पुलिस आई और बयान ले कर चली गई. कदमकुआं थाने ने इस मामले को चित्रगुप्त नगर थाने में भेज दिया. उस के बाद चित्रगुप्त नगर थाने की एसएचओ रोशनी कुमारी प्रभात मेमोरियल हौस्पिटल आ गईं. वह भी गायत्री के फेमिली वालों के बयान और उस की तसवीर आदि ले कर चली गई. तब तक गायत्री फिर बेहोश हो गई थी. इस कारण उस का बयान नहीं लिया जा सका.

उसी दिन 9 जनवरी की शाम को एक महिला नीलम अग्रवाल प्रभात मेमोरियल हौस्पिटल पहुंची. उस ने खुद को हौस्टल की मालकिन बताया और फेमिली वालों से बोली कि हौस्टल का नाम बदनाम हो जाएगा, इसलिए केस को वापस ले लीजिए, मैनेज कर लीजिए. इस पर नीलम की फेमिली वालों के साथ बहस हो गई. वे तूतूमैंमैं करते हुए आपस में उलझ गए. उन के बीच काफी बकझक होने और बिगड़ती स्थिति को देख कर मौत से जूझ रही गायत्री के एक रिश्तेदार ने चित्रगुप्त नगर थाने की एसएचओ रोशनी कुमारी को कौल कर दोबारा बुलाया.

(ऊपर) रोहित मैडिकल स्टोर का मालिक जहां से गायत्री द्वारा नींद की गोलियां खरीदे जाने की बात कही जा रही है और (दाहिने) शंभू हौस्टल का मालिक मनीष रंजन

रोशनी कुमारी तुरंत हौस्पिटल पहुंच गईं. नीलम अग्रवाल एसएचओ रोशनी कुमारी के साथ भी उलझ गई. उसे एसएचओ से झगड़ते देख साथ आई एक महिला कांस्टेबल ने नीलम अग्रवाल को एक थप्पड़ जड़ दिया. नीलम बौखला गई, लेकिन उसे पुलिस अपने साथ ले गई. बाद में फेमिली वालों को मालूम हुआ कि उसे थाने ले जा कर छोड़ दिया गया था.

शंभू गल्र्स हौस्टल की मालकिन नीलम अग्रवाल के बारे में बताया जाता है कि उस के पति शंभू अग्रवाल का निधन हो चुका है. उस के 2 बेटे श्रवण और अंशु हैं. जिस बिल्डिंग में शंभू गल्र्स हौस्टल चल रहा है, उस बिल्डिंग का मालिक मनीष रंजन है. वह हौस्टल में ही सब से ऊपर के फ्लैट में अपने परिवार के साथ रहता है. 9 जनवरी, 2026 को पूरे दिन और पूरी रात गायत्री बेहोश रही. उस की स्थिर हालत हो देख कर फेमिली वालों की चिंता बढ़ती जा रही थी. उसे वे 10 जनवरी को इस अस्पताल से बाहर ले जाना चाहते थे, लेकिन प्रभात मेमोरियल का डा. सतीश उन्हें जाने नहीं दे रहा था.

मृतका गायत्री को फाइल फोटो और उस की मौत पर प्रदर्शन करते आक्रोशित स्थानीय लोग

तब फेमिली वाले आईसीयू में जबरन घुस गए. बेहोश बच्ची को वहां से डिस्चार्ज करने को ले कर फेमिली वालों की डा. सतीश के साथ जबरदस्त बहस हो गई. उन की कहासुनी के साथसाथ धक्कामुक्की भी हुई.

संदिग्ध रही पुलिस भूमिका

फेमिली वाले किसी तरह से गायत्री को 10 जनवरी, 2026 को ही दिन में 2-3 बजे के आसपास उसे मेदांता अस्पताल ले कर गए. तब तक गायत्री की हालत काफी बिगड़ चुकी थी. मेदांता में एडमिट करने से पहले ही डौक्टरों ने कहा कि इस की हालत काफी नाजुक है. बचने की संभावना सिर्फ एक फीसदी है, वे उसे नहीं बचा सकते हैं. फिर भी काफी मिन्नतों के बाद गायत्री को मेदांता में भरती कर लिया गया. वहां गायत्री का नए सिरे से इलाज शुरू हुआ. डौक्टरों ने उसे बचाने में पूरी ताकत झोंक दी, किंतु 11 जनवरी को दोपहर लगभग साढ़े 12 बजे गायत्री को मृत घोषित कर दिया.

गायत्री की मौत का मामला पुलिस में जा चुका था, इसलिए मेदांता से पहले 2 अस्पतालों में उस के इलाज, हौस्टल में हालत बिगडऩे और असामयिक मौत की वजह से उस की लाश फेमिली वालों को तुरंत नहीं सौंपी जा सकी. प्रोटोकाल की प्रक्रिया के तहत 12 जनवरी, 2026 को गायत्री के शव को पोस्टमार्टम के लिए पटना मैडिकल कालेज और हौस्पिटल (पीएमसीएच) भेज दिया गया. पोस्टमार्टम के बाद बच्ची का पार्थिव शव शाम को बाहर निकाला गया. उसे फेमिली वालों का सौंप दिया गया. फेमिली वाले उस के अंतिम संस्कार के लिए गंगा किनारे पटना के गुलाबी घाट ले जाने लगे. इस दरम्यान फेमिली वालों को पीएमसीएच में पोस्टमार्टम टीम के एक डौक्टर से मालूम हुआ कि उन की बेटी के साथ रेप हुआ था. उस ने यहां तक कहा कि वे लाश को न जलाएं.

उस के बाद परिजन अचानक उस की लाश को गुलाबी घाट के गेट से वापस पटना के गांधी मैदान के एक किनारे कारगिल चौक पर ले आए. फेमिली वालों और उन के साथ कुछ लोगों ने कारगिल चौक पर ले जा कर शव को रख दिया. तभी एएसपी कुमार अभिनव ने वहां पहुंच कर बताया कि उन्हें बरगलाया गया है. गायत्री के साथ कोई रेप नहीं हुआ है. फेमिली वालों ने जब पुलिस की बात मानने से इनकार कर दिया तो पुलिस कारगिल चौक से उन्हें जबरन हटाने के लिए उन पर लाठीचार्ज करने लगी और जबरदस्ती एंबुलेंस से उस की लाश को गुलाबी घाट ले गई.

तब परिजन पीछेपीछे गए और गायत्री का अंतिम संस्कार कर दिया. तब तक हौस्टल में एक नीट की छात्रा के मौत की खबर सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल होने लगी. फेमिली वाले दोहरे मानसिक तनाव में आ गए. एक तरफ वे अपनी मेधावी बेटी की असामयिक मौत और उस के साथ गलत किए जाने की पीड़ा के गम से घिरे हुए थे, दूसरी तरफ वे पुलिस की हर हिदायत और बात मानने के दबाव में भी आ गए. क्योंकि उन्हें गायत्री की मौत के संबंध में मुंह बंद रखने की सख्त हिदायत मिली थी.

उन्हें चित्रगुप्त थाने की एसएचओ रोशनी कुमारी द्वारा पोस्टमार्टम रिपोर्ट लेने के लिए 15 जनवरी, 2026 को बुलाया गया था. वे वहां सुबह 10 बजे ही पहुंच गए. लंबे इंतजार के बाद रात के 8 बजे पोस्टमार्टम रिपोर्ट मिली. जिस में स्पष्ट कहा गया था कि ‘यौन हिंसा की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता.’

कौन था रेपिस्ट

रिपोर्ट में शरीर पर कई चोटों के निशान, खरोंच, बल प्रयोग के संकेत और जबरन शारीरिक संबंध बनाए जाने की आशंका जताई गई थी. इस रिपोर्ट में कई चौंकाने वाले खुलासे हुए, जिस में लिखा था कि छात्रा की मौत स्वाभाविक नहीं थी. उस के शरीर पर कई जगहों पर चोट के निशान मिले हैं. साथ ही उस से रेप किया गया, इस की भी पुष्टि की गई है. पीडि़ता के प्राइवेट पार्ट में अंदरूनी चोटें पाई गई हैं. इसी आधार पर रेप की पुष्टि की गई है. पीडि़ता के शरीर और गरदन पर खरोंच व दबाव के निशान भी मिले हैं.

इस से यह साफ हो गया था कि घटना के समय छात्रा ने हरसंभव विरोध किया था. रिपोर्ट में मौत के कारणों का भी जिक्र किया गया था. बताया गया कि छात्रा की मौत गला दबाने या दम घुटने से होने के संकेत मिले हैं. इस से उस थ्योरी को भी बल मिल गया, जिस में कहा जा रहा था कि छात्रा की हत्या की गई है. दिलदिमाग को सुन्न कर देने वाली इस रिपोर्ट को पढऩे के बावजूद मृतका के फेमिली वाले अपने गम और पीड़ा को समेटे हुए बोझिल मन से जहानाबाद लौट गए, लेकिन वे आक्रोश से भरे हुए थे. जबकि स्थानीय पत्रकारों और विपक्ष के नेताओं के संपर्क में बने रहे.

गायत्री नीट की तैयारी कर रही थी. वह जहानाबाद की रहने वाली थी. पटना के एक कोचिंग सेंटर में वह नीट (राष्ट्रीय पात्रता प्रवेश परीक्षा) की तैयारी कर रही थी. पटना के चित्रगुप्तनगर में ही वह शंभू गल्र्स हौस्टल में रहने लगी थी. दिसंबर के अंतिम सप्ताह में नए साल की छुट्टी होने पर अपने घर जहानाबाद चली गई थी. जहानाबाद से वह 5 जनवरी को पटना अपने हौस्टल में वापस लौटी थी, लेकिन इस के अगले ही दिन 6 जनवरी को जब वह ब्रेकफास्ट और लंच के लिए कमरे के बाहर नहीं आई, तब हौस्टल के स्टाफ को फिक्र हुई. इस के बाद जब वो कमरे में दाखिल हुए तो गायत्री बेहोश मिली.

बिहार की सोशल मीडिया के हर दूसरे न्यूज चैनल पर नीट छात्रा की मौत की चर्चा होने लगी. उन की खबरों में तरहतरह की बातें सामने आने लगीं. दूसरी तरफ पुलिस का कहना था कि छात्रा ने अत्यधिक मात्रा में नींद की गोलियों का सेवन किया था. उस के शरीर में टाइफाइड जैसे संक्रमण के लक्षण पाए गए थे, जिस से उस की हालत गंभीर हो गई थी. जब मीडिया ने इस पर सवाल उठाए और छात्रा के साथ रेप होने की आशंका जताई, तब पुलिस ने अपने दावे के साथ इसे गलत बताया. इस पर पुलिस का कहना था कि हौस्टल के आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज, हौस्टल स्टाफ के बयान और प्रारंभिक मैडिकल रिपोर्ट के आधार पर यह स्पष्ट हुआ कि छात्रा के साथ किसी प्रकार का यौनशोषण नहीं हुआ.

जैसे ही पोस्टमार्टम रिपोर्ट की आशंका जताने वाली बात सामने आई, पुलिस की आत्महत्या वाले तथ्य का सड़कों पर विरोध शुरू हो गया. पुलिस के इस दावे के खिलाफ बड़ी संख्या में छात्रछात्राओं के अलावा विपक्ष ने सीधेसीधे बिहार सरकार के गृहमंत्री को चुनौती दे दी. हौस्टल और प्रभात अस्पताल के सामने विरोध प्रदर्शन होने लगे. मोमबत्तियां जलाए हुए मृतका को श्रद्धांजलि देने वालों का तांता लग गया. इसी के साथ ही मृतका के पापा ने भी मीडिया के जरिए आरोप लगाया कि उन की बेटी पुलिस, अस्पताल और हौस्टल संचालक की मिलीभगत का शिकार हुई है.

उन्होंने यह भी कहा कि परिवार को धमकाया गया और मामले को दबाने के लिए लाखों रुपए देने के प्रलोभन भी दिए गए. इसी के साथ मृतका के फादर ने अपनी बेटी के लिए न्याय की गुहार लगा दी. पोस्टमार्टम रिपोर्ट के हवाले से छात्रा के फादर ने चित्रगुप्त नगर थाने में 16 जनवरी, 2026 को एफआईआर (केस नंबर 14/26) दर्ज करवा दी. एफआईआर में हौस्टल में बेटी के साथ दुष्कर्म कर उस की हत्या किए जाने और पटना पुलिस की शुरुआती जांच में लापरवाही के कारण यह संदेह गहराने लगा कि पुलिस और प्रभात मेमोरियल अस्पताल  को बचाने की कोशिश कर रहे हैं.

एसआईटी के साथ पटना सेंट्रल रेंज के आईजी जितेंद्र राणा ने मामले की जांच शुरू कर दी

बढ़ते जनदबाव के कारण पुलिस ने तेजी से काररवाई शुरू कर दी. मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने हौस्टल बिल्डिंग के मालिक मनीष कुमार रंजन, जो उदल प्रसाद के बेटे और पटना के मुन्ना चौक, सहजानंद गली के रहने वाला है, को गिरफ्तार कर लिया. आरोपी को कोर्ट में पेश कर न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया. नीट छात्रा कांड में विशेष जांच टीम (एसआईटी) का गठन 16 जनवरी, 2026 को तब किया गया, जब इस मामले को ले कर कई नेताओं और स्थानीय लोगों द्वारा पटना में होहल्ला किया गया. गृहमंत्री को पत्र लिख कर जांच की गुहार लगाई गई.

उन्होंने सीधे तौर पर आरोप लगाया कि गायत्री के साथ गलत हुआ है और उसे अस्पताल ने ही इलाज के दौरान मौत की नींद सुला दिया. इस का जितना दोषी हौस्टल है, उतनी ही दोषी पुलिस और अस्पताल भी है.

फेमिली पर दबाव क्यों

एक राजनेता ने तो सीधेसीधे हौस्टल प्रशासन द्वारा देहव्यापार करवाए जाने तक का आरोप लगा दिया. जबकि एक अन्य नेता ने मृतका के पेरेंट्स से मिल कर पूरे मामले की तहकीकात की और दोषियों के खिलाफ मोर्चा खोल दिया. उन्होंने इस बात का भी परदाफाश किया कि पीडि़ता के परिवार पर यौन शोषण और मामले को छिपाने के लिए दबाव बनाया गया था. उन्होंने वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों और पीडि़त परिवार से मुलाकात कर निष्पक्ष जांच की मांग की. उन्होंने कहा, ‘परिवार का मानना है कि पहले जांच अधिकारी लापरवाह थे. वे अपनी बेटी के लिए विभागीय काररवाई और न्याय चाहते हैं.’

पीडि़ता के रिश्तेदारों ने आरोप लगाया कि हौस्टल मैनेजमेंट ने मामले को दबाने के लिए उन्हें 10 लाख रुपए की रिश्वत देने की कोशिश की. साथ ही उन्होंने पहले अस्पताल के एक डौक्टर पर भी सबूत मिटाने की कोशिश करने का आरोप लगाया. गायत्री को बाद में जयप्रभा मेदांता अस्पताल में शिफ्ट किया गया, जहां इलाज के दौरान उस की मौत हो गई.

इस के बाद बिहार पुलिस के डीजीपी विनय कुमार ने एसआईटी गठित करने का आदेश दिया. यह कदम पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के एक दिन बाद उठाया गया, जिस में संकेत मिला था कि यौन हिंसा से इनकार नहीं किया जा सकता, जो पुलिस के पहले के दावे के विपरीत था कि लड़की ने आत्महत्या की थी. पटना मैडिकल कालेज और अस्पताल में किए गए पोस्टमार्टम के अनुसार, शरीर पर कई नाखूनों के निशान, शारीरिक चोटें और संघर्ष के निशान पाए गए थे, जो हाल ही में उस के साथ किए गए जबरदस्ती के इस्तेमाल का संकेत देने वाले थे.

12 जनवरी की इस रिपोर्ट में कहा गया कि ‘यौन हिंसा से इनकार नहीं किया जा सकता’ और आगे की जांच के लिए एआईआईएमएस को विशेषज्ञ राय के लिए भेजा गया है. इस रिपोर्ट के बाद पटना में जबरदस्त सार्वजनिक आक्रोश का माहौल बन गया. इसे देखते हुए पटना सेंट्रल रेंज के इंसपेक्टर जनरल (आईजी) जितेंद्र राणा ने नई बनी एसआईटी के साथ जांच की प्रक्रिया शुरू कर दी. जांच कुल 5 बिंदुओं पर शुरू की गई. फोरैंसिक और तकनीकी जांच के लिए फोरैंसिक टीम ने छात्रा के कपड़ों, कमरे और हौस्टल से सबूत इकट्ठे किए. कपड़ों पर मिले नमूनों में पुरुष जैविक ट्रेस (जैसे स्पर्म) पाए गए, जिस से यौन हिंसा की संभावना जांच का अहम हिस्सा बनी.

एसएओ रोशनी कुमारी

दूसरी जांच डीएनए की थी. टीम ने संदिग्धों के डीएनए सैंपल लिए. संदिग्धों में मृतका के करीबी रिश्तेदार के अलावा हौस्टल में अकसर आनेजाने वाले लोगों के भी लिए गए. इन के नमूने को परीक्षण के लिए भेजा गया, ताकि उस के मिलान से यह पता चले कि किस का स्पर्म से लड़की के कपड़े पर पाए गए स्पर्म से मेल खाते हैं. इस आधार संदिग्ध दोषी तक पहुंचा जा सकता है. शुरू में कुल 6 लोगों के नमूने लिए गए थे, लेकिन 40 लोगों तक को इस जांच में शामिल किया जा सकता है. हालांकि यह भी विवाद का एक कारण बन गया.

जांच का तीसरा पहलू सर्विलांस के लिए सीसीटीवी और डिजिटल ट्रेल करना है. इस के लिए सीसीटीवी फुटेज, फोन डेटा (सीडीआर) और अन्य डिजिटल सबूतों की जांच की जाने लगी, ताकि घटना के समय संदिग्धों की लोकेशन का पता लगाया जा सके. चौथे किस्म के जांच का बिंदु गवाह के बयान और पूछताछ को बनाया गया. लिखे जाने तक 100 से अधिक लोगों से पूछताछ की गई और करीब 40 बयान दर्ज किए गए, जिन में परिवार के सदस्य भी शामिल थे. पांचवीं जांच हौस्टल और मैडिकल कालेज से संबंधित थी.

इस के लिए एसआइटी ने शंभू गल्र्स हौस्टल को सील कर दिया. मैडिकल रिकौर्ड, डौक्टरों और हौस्टल स्टाफ के बयान भी जांच में लिए गए. इसी दौरान मृतका द्वारा नींद की दवा खरीदने की भी चर्चा हुई. बाद में जहां से दवा खरीदी गई, उस की जांचपड़ताल की गई. इस के अलावा एसआईटी ने अतिरिक्त काररवाई कर पुलिस के प्रारंभिक रवैए पर भी सवाल उठाए. कुछ संदिग्ध पुलिस अधिकारियों को जांच में अनदेखी और जानबूझ कर मृतका के खिलाफ काम में लिप्त पाया गया. उस के बाद उन्हें निलंबित कर दिया गया.

सब से पहली गाज चित्रगुप्त नगर थाने की एसएचओ पर गिरी. उसे सस्पेंड कर दिया गया. उस पर शुरुआती जांच में लापरवाही, समय पर काररवाई नहीं करने और सबूतों को सही तरीके से सुरक्षित नहीं करने का लगाया गया. निलंबित किए जाने वालों में कदमकुआं थाने के अतिरिक्त थानेदार हेमंत झा भी हैं, उन पर भी जांच में गंभीरता नहीं दिखाने और जरूरी कदम नहीं उठाने का आरोप लगाया गया. इन दोनों पुलिस अधिकारियों को लापरवाही और कर्तव्य में चूक के कारण निलंबित किया गया है, ताकि आगे की जांच वरिष्ठ अधिकारियों की निगरानी में हो सके.

इस तरह से एसआईटी की जांच इस मुकदमे को एक साधारण मौत के मामले से बदल कर एक संभावित यौन अपराध व हत्या की दिशा में ले गई. एफएसएल और डीएनए जैसे वैज्ञानिक सबूतों की मदद से यह समझने की कोशिश की गई कि इस पूरे मामले में किस का योगदान है? संदिग्ध कौन था? वास्तविक अपराध कैसे हुआ? Bihar News

 

Short Love Story in Hindi: प्रेमिका से मौजमस्ती तो शादी क्यों नहीं

Short Love Story in Hindi: काशीपुर के सलमान को मोहल्ले की ही रहने वाली शादीशुदा सीमा खातून से प्यार हो गया था. सीमा भी उस पर इस कदर फिदा हुई कि वह सलमान की खातिर अपने पति तक को छोडऩे के लिए तैयार हो गई. वह उस से शादी की जिद करने लगी. अविवाहित सलमान तो उसे केवल मौजमस्ती का साधन ही समझता रहा. फिर एक दिन सीमा की शादी करने की जिद उस मुकाम पर पहुंची कि…

सलमान और सीमा खातून के प्रेम संबंध पिछले 2 सालों से चले आ आ रहे थे. शादीशुदा सीमा उसे दिलोजान से चाहती थी. पिछले एक साल से सलमान सीमा से किनारा करना चाहता था, क्योंकि उस के फेमिली वाले किसी और लड़की से उस की शादी करना चाहते थे. लेकिन सीमा किसी भी हालत में उस से जुदा नहीं होना चाहती थी. जब वह नहीं मानी तो सलमान ने परेशान हो कर सीमा को रास्ते से हटाने की योजना बना ली थी. मोहल्ले की ही रहने वाली नशा तसकर मेहरुन्निसा भी सीमा से अपनी दुश्मनी का हिसाब पूरा करना चाहती थी, यह बात सलमान जनता था. इस के बाद सलमान और मेहरुन्निसा ने सीमा को ठिकाने लगाने की योजना बना ली.

योजना के मुताबिक 17 अक्तूबर, 2025 की शाम को मेहरुन्निसा ने फोन कर के सीमा को काशीपुर के केवीआर तिराहे पर बुलाया. सीमा वहां पहुंच गई. इस के बाद वे तीनों कंटेनर के केबिन में बैठ कर बातें करने लगे. उसी दौरान सीमा सलमान से उस के साथ शादी करने की जिद करने लगी. समझाने पर भी जब सीमा नहीं मानी तो सलमान ने पास बैठी मेहरुन्निसा को इशारा किया. तभी मेहरुन्निसा ने सीमा के दोनों हाथ पकड़ लिए. इस के बाद सलमान ने सीमा की चुन्नी से उस की गला घोंट कर हत्या कर दी. मेहरुन्निसा सीमा को अपने हाथों से तब तक जकड़े रही, जब तक सीमा की मौत न हो गई.

सीमा के मरने के बाद मेहरुन्निसा वापस चली गई और सलमान कंटेनर में सीमा की लाश ठिकाने लगाने के लिए हरिद्वार की ओर निकल पड़ा. जब कंटेनर ले कर वह नगीना पहुंचा था तो उस ने एक जेरीकेन में कंटेनर के डीजल टैंक से 6-7 लीटर डीजल निकाल कर रख लिया था ताकि मौका मिलने पर सीमा की लाश को जला सके. फिर सलमान ने हरिद्वार की ओर कंटेनर को दौड़ा दिया. कंटेनर चलाते समय वह सीमा के शव को ठिकाने लगाने के लिए सुनसान जगह की भी तलाश कर रहा था.

रात 12 बजे के बाद उस का कंटेनर एक सुनसान जगह पर पहुंचा. इस के बाद उस ने कंटेनर को अंधेरे में एक साइड में खड़ा कर दिया. फिर अंधेरे में उस ने केबिन से सीमा की लाश नीचे उतारी. सीमा की लाश को वह खींच कर एक झाड़ी के पास ले गया. लाश के ऊपर उस ने एक दरी डालने के बाद जेरीकेन का सारा डीजल उस के ऊपर छिड़क कर उस में आग लगा दी. सीमा की लाश को आग के हवाले करने के बाद वह तुरंत कंटेनर ले कर देहरादून के लिए निकल गया.

डा. सुधांशु शुक्ला सुबह अपनी पत्नी के साथ गांव गजीवाली के जंगल में सुबह की सैर कर रहे थे. यह उन का रोज का नियम था. सैर करने के लिए वह सुबह लगभग 5 बजे अपनी पत्नी के साथ घर से निकल जाते थे. जिस क्षेत्र में डा. शुक्ला सैर करने के लिए निकलते थे, वहां यदाकदा बंदर, जहरीले सांप, जंगली हाथी, गुलदार आदि भी विचरण करते हुए दिखाई पड़ जाते थे. जंगली इलाका होने के कारण डा. शुक्ला वहां पर सदैव सतर्क हो कर पत्नी के साथ  सैर करते थे, लेकिन 18 अक्तूबर, 2025 को जब वह थोड़ी देर सैर करने के बाद एक झाड़ी के पास पहुंचे थे तो उन्हें वहां पर जलाई गई एक झाड़ी दिखाई दी. जब वह उस जली हुई झाड़ी के थोड़ा पास पहुंचे तो उन्होंने वहां पर एक जली हुई डैड बौडी देखी.

‘सुनसान जंगल में वह जली हुई डैड बौडी किस की होगी और उसे किस ने यहां ला कर जलाया होगा?’ यह सोच कर डा. शुक्ला घबरा गए. उन के साथ सैर कर रहीं उन की पत्नी भी डर गई थीं. तभी वहां से गुजर रहे लोगों को रोक कर उन्होंने डैड बौडी के बारे में बताया. कुछ ही देर में वहां पर काफी लोग इकट्ठे हो गए. सब ने देखा था कि वह डैड बौडी काफी हद तक जल चुकी थी, सिर्फ शव के दोनों पंजे तथा दोनों हाथों की कलाइयां ही जलने से बची हुई थीं. पैरों के बिछुओं से अंदाजा लगाया कि किसी शादीशुदा महिला को जलाया गया है. वहां पर उस समय दहशत का वातावरण था. अत: वहां पर मौजूद लोगों ने इस मामले की सूचना पुलिस को देने का फैसला किया. यह इलाका जिला हरिद्वार के नजीबाबाद रोड पर स्थित थाना श्यामपुर के अंतर्गत आता था, इसलिए एक व्यक्ति ने फोन द्वारा घटना की सूचना थाने में दे दी.

उस समय सुबह के 7 बजे थे. थाना श्यामपुर के एसएचओ मनोज शर्मा को जब यह सूचना मिली थी तो वह तत्काल ही एसएसआई मनोज रावत व कुछ अन्य पुलिसकर्मियों को ले कर सूचना में बताए गए पते की तरफ निकल गए. उन्होंने यह सूचना सीओ एस.एस. नेगी, एसपी (सिटी) पंकज गैरोला, एसपी (क्राइम) जितेंद्र मेहरा तथा एसएसपी प्रमेंद्र डोभाल को दी थी. घटनास्थल वहां से मात्र 3 किलोमीटर दूर हरिद्वार नजीबाबाद रोड पर गांव गाजीवाली में खैरा ढाबे के पीछे झाडिय़ों का इलाका था, इसलिए एसएचओ थोड़ी देर में ही वहां पहुंच गए.

जब पुलिस वहां पहुंची तो उस समय वहां दरजनों लोगों की भीड़ थी. एसएचओ ने वहां पर जलाई गई लाश का निरीक्षण करना शुरू कर दिया. वैसे तो लाश पूरी जल गई थी, मगर लाश के पैरों के पंजे व कलाइयां नहीं जल सकी थीं. लाश के पैरों में बिछुए होने तथा पंजे में काला कपड़ा होने से श्री शर्मा को लगा कि यह लाश किसी महिला की है. अज्ञात हत्यारों ने जंगल में ला कर महिला के शव को इसलिए जलाया होगा, जिस से कि उस की पहचान न हो सके. इस के बाद श्री शर्मा ने डा. सुधांशु से इस शव के पहली बार देखे जाने के बारे में जानकारी ली थी. शव महिला का होने के कारण श्री शर्मा ने शव का पंचनामा भरने के लिए थाने से महिला थानेदार अंजना चौहान को मौके पर बुलवा लिया था.

घटनास्थल पर पुलिस की काररवाई चल ही रही थी कि सीओ एस.एस. नेगी, एसपी (सिटी) पंकज गैरोला, एसपी (क्राइम) जितेंद्र मेहरा तथा फोरैंसिक टीम भी वहां पहुंच गई थी. इस के बाद फोरैंसिक टीम व पुलिस ने शव के कई कोणों से फोटो खींचे तथा आसपास से अन्य सबूत भी जुटाए. मृतका की शिनाख्त न होने से पुलिस के लिए यह ब्लाइंड मर्डर था. महिला के इस ब्लाइंड मर्डर की गुत्थी को सुलझाने के लिए एसपी (क्राइम) जितेंद्र मेहरा ने सीआईयू यूनिट प्रभारी नरेंद्र बिष्ट की टीम को भी मौके पर बुलवा लिया था.

इस मामले में मृतका की पहचान करना पुलिस के सामने सब से बड़ी चुनौती थी. पुलिस ने वहां मौजूद स्थानीय लोगों से पहले मृतका के बारे में पूछताछ की थी, मगर अभी तक पुलिस को मृतका के बारे में कोई भी जानकारी हासिल नहीं हो सकी थी. इस के बाद एसपी जितेंद्र मेहरा के निर्देश पर महिला थानेदार अंजना चौहान ने मृतका की जली हुई डैडबौडी को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया.

इस के बाद एसएसपी प्रमेंद्र डोवाल ने ब्लाइंड मर्डर केस की गुत्थी सुलझाने के लिए एसपी (क्राइम) जितेंद्र मेहरा के निर्देशन और सीओ एस.एस. नेगी की अध्यक्षता में एक पुलिस टीम का गठन किया. टीम में एसएचओ मनोज शर्मा, सीआईयू इंसपेक्टर नरेंद्र बिष्ट, एसआई गगन मैठाणी, नवीन चौहान, मनोज रावत, कांस्टेबल राहुल देव आदि को शामिल किया गया. एसएसपी ने वहां आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगालने के आदेश टीम को दिए. उन के दिशानिर्देश पर पुलिस टीम जांच में जुट गई.

जांच के दौरान पुलिस को पता चला कि नजीबाबाद से हो कर हरिद्वार की ओर रास्ते में पहले पीनाक होटल व बाद में उमेश्वर धाम में सीसीटीवी कैमरे लगे हुए हैं. पुलिस टीम ने दोनों स्थानों के बीती रात के कैमरों की फुटेज को चैक किया. पुलिस ने जांच में पाया कि उस रात लगभग 842 छोटेबड़े वाहन इस रास्ते से गुजरे थे. पुलिस को शक था कि किसी छोटे वाहन से मृतका को हत्यारों द्वारा यहां लाया गया होगा. इस के बाद अगले दिन भी पुलिस टीम ने हरिद्वार से रायवाला तक सीसीटीवी कैमरों की फुटेज चैक की.

वैसे तो पुलिस टीम को विशेष जानकारी मृतका के बारे में नहीं मिली, मगर एक बात सीआईयू प्रभारी नरेंद्र बिष्ट के गले नहीं उतर रही थी कि पीनाक होटल व उमेश्वर धाम की दूरी लगभग 500 मीटर है. सभी वाहन पीनाक होटल से उमेश्वर धाम मात्र 2 या 3 मिनट में पहुंचे थे. मगर एक सफेद कंटेनर घटना वाली रात को पीनाक होटल से उमेश्वर धाम 19 मिनट में पहुंचता कैमरों में दिखाई दिया था. इस बात पर बिष्ट का शक सफेद कंटेनर पर गहरा गया था.

इस सफेद कंटेनर पर शक गहराने के कारण पुलिस ने इस केस को सुलझाने के लिए इस की डोर पकड़ ली थी. इस के बाद पुलिस ने कंटेनर के रजिस्ट्रैशन नंबर यूके18 सीए 4788 के मालिक की जानकारी की. पता चला कि यह कंटेनर जिंदल वेजिटेबल कंपनी, नारायण नगर इंडस्ट्रियल एरिया, काशीपुर उत्तराखंड के नाम से रजिस्टर्ड है. एक पुलिस टीम काशीपुर जाने के लिए निकल पड़ी. पुलिस टीम ने उत्तराखंड के ही शहर काशीपुर पहुंच कर उक्त नंबर के सफेद कलर के कंटेनर के स्वामी से संपर्क किया तो उन्हें जानकारी मिली कि घटना वाली रात को कंटेनर चालक सलमान निवासी मझरा लक्ष्मीपुर, कोतवाली काशीपुर ही देहरादून मंडी के लिए ले कर गया था. इस के बाद सलमान 2 दिनों के बाद वापस लौटा था. यह भी पता चला कि इस समय सलमान कंटेनर ले कर पानीपत (हरियाणा) गया हुआ है.

पुलिस टीम ने जब सलमान के बारे में स्थानीय लोगों से जानकारी ली तो कुछ हैरान करने वाली जानकारी मिली. पता चला कि सलमान का एक भाई व 2 बहनें हैं. सलमान के प्रेम संबंध मोहल्ले की ही सीमा खातून नाम की एक महिला से चल रहे हैं. इस के अलावा गत 17 अक्तूबर, 2025 से ही सीमा खातून यहां से लापता चल रही है. सीमा खातून की गुमशुदगी कोतवाली काशीपुर की पुलिस चौकी बासकुडाव में दर्ज थी. सीमा खातून अंतिम बार मोहल्ले की एक महिला मेहरुन्निसा के साथ देखी गई थी. उस के बाद से ही सीमा लापता हो गई थी. काशीपुर पुलिस द्वारा भी सीमा खातून की तलाश की जा रही है.

इस के बाद टीम ने लापता सीमा की फोटो देखी. फोटो में सीमा का चेहरा जली हुई महिला के शरीर से काफी मेल खा रहा था. अंत में पुलिस टीम ने लापता होने वाले दिन की वीडियो काशीपुर के एक सीसीटीवी कैमरे में देखी थी तो टीम को पूरा विश्वास हो गया कि श्यामपुर के जंगल में मिला जला हुआ शव सीमा खातून का ही था, क्योंकि उस समय सीमा खातून ने काला सूट पहन रखा था. बरामद जले हुए शव के पैरों के पास भी पुलिस ने अधजला काला कपड़ा बरामद किया था. अब श्यामपुर पुलिस टीम ने कोतवाली काशीपुर में ही मेहरुन्निसा से पूछताछ करने का मन बनाया था. कोतवाली में जब मेहरुन्निसा को बुलाया गया, तब उस के चेहरे पर हवाइयां उड़ रही थीं. पुलिस ने जब मेहरुन्निसा से सीमा के लापता होने की बाबत पूछा तो वह पुलिस के सामने शांत खड़ी रही.

इस के बाद सीआईयू इंचार्ज श्री बिष्ट ने मेहरुन्निसा को सख्ती से फटकारते हुए कहा, ”तुम या तो सीधी तरह से सीमा के लापता होने की सच्चाई पुलिस को सचसच बता दो, वरना पुलिस के सामने मुर्दे भी बोलने लगते हैं, यह तुम जान लो.’’

बिष्ट की इस धमकी का मेहरुन्निसा पर  जादू की तरह असर हुआ. उस ने पुलिस को बताया कि उस ने व सलमान ने गत 17 अक्तूबर, 2025 को सीमा की हत्या कर दी थी. फिर सलमान ने उस की लाश ठिकाने लगाई थी. मेहरुन्निसा के ये बयान दर्ज करने के बाद पुलिस की टीम सीमा के कपड़े व फोटो से उस की शिनाख्त करने के लिए सीमा के शौहर शादाब, भाई मेहंदी हसन व मेहरुन्निसा को ले कर थाना श्यामपुर आ गई थी. यहां पहुंचने के बाद सीमा के शौहर शादाब ने उस के जले हुए शव से ही सीमा की पहचान कर ली थी. सीमा की पोस्टमार्टम रिपोर्ट में उस की मौत का कारण उस का गला घोंटा जाना बताया गया था.

मेहरुन्निसा की गिरफ्तारी के बाद उसी दिन शाम को ही श्यामपुर पुलिस ने चैकिंग के दौरान रसियाबड के पास से आरोपी सलमान को उस के कंटेनर सहित गिरफ्तार कर लिया. इस के बाद सलमान को थाना श्यामपुर लाया गया. थाने में मेहरुन्निसा को देख कर सलमान समझ गया कि मेहरुन्निसा ने पुलिस को सब कुछ बता दिया होगा, इसलिए उस ने पुलिस के सामने सीमा की हत्या मेहरुन्निसा के साथ मिल कर करने का जुर्म कुबूल कर लिया था. पूछताछ में सलमान ने सीमा से प्रेम संबंध से ले कर उस की हत्या किए जाने तक की सारी कहानी उगल दी. सलमान और मेहरुन्निसा से पूछताछ करने के बाद पुलिस ने सलमान की निशानदेही पर डीजल की जेरीकेन भी बरामद कर ली.

एसएचओ मनोज शर्मा ने सलमान व मेहरुन्निसा की गिरफ्तारी की सूचना एसपी (क्राइम) जितेंद्र मेहरा व एसएसपी प्रमेंद्र डोभाल को दे दी. तब 24 अक्तूबर, 2025 की शाम को ही हरिद्वार के मायापुर स्थित एसपी (सिटी) कार्यालय में पुलिस अधिकारियों ने एक प्रैसवार्ता का आयोजन कर ब्लाइंड मर्डर केस का खुलासा कर दिया. इस के बाद पुलिस ने आरोपी सलमान व मेहरुन्निसा को कोर्ट में पेश किया था, जहां से उन दोनों को जेल भेज दिया गया. सीमा हत्याकांड की तफ्तीश एसएचओ मनोज शर्मा द्वारा की जा रही थी. श्री शर्मा शीघ्र ही आरोपियों के विरुद्ध साक्ष्य एकत्र कर के चार्जशीट कोर्ट में भेजने की तैयारी कर रहे थे. Short Love Story in Hindi

 

Love Story in Hindi: औनलाइन इश्क जरा सोचसमझ के

Love Story in Hindi: पांचवीं पास मसजिद का इमाम और 3 बच्चों का बाप शहजाद बहुत चालबाज था. उस ने उच्चशिक्षित असमिया युवती नईमा यासमीन से औनलाइन दोस्ती कर उसे न सिर्फ फरेबी इश्क के जाल में फांसा, बल्कि उस से औनलाइन निकाह भी कर लिया. एक दिन नईमा ने जब अपना मुंह खोला तो उसे ऐसी सजा दी गई कि…

असम की रहने वाली नईमा यासमीन पिछले 2 दिनों से नोएडा के वन बीएचके फ्लैट में उदास बैठी थी. उस की उदासी के कई कारण थे. उस ने मोबाइल से बैंक बैलेंस चैक किया था, जो जीरो पर आ गया था. कहीं भी कोई सेविंग्स नहीं बची थी. सारे पैसे खत्म हो गए थे. उसे अपना मेट्रो कार्ड रिचार्ज करवाने के लिए पैसे की जरूरत थी. मोबाइल का रिचार्ज भी 2 दिनों में खत्म होने वाला था. इस बारे में अपनी बहन को बताए भी काफी समय बीत चुका था. उस से कुछ पैसे अकाउंट में ट्रांसफर करने की उस ने मदद मांगी थी. यह बात सितंबर महीने की 16 तारीख दोपहर की है.

उसे जल्द ही कोई दूसरी नौकरी तलाशनी थी. दिल्ली के एनसीआर गुरुग्राम की नौकरी छोड़े 2 हफ्ते हो गए थे. वह कई दूसरी कंपनियों में अपना रिज्यूम दे चुकी थी, लेकिन कहीं से बुलावे का मेल नहीं आया था. वह पिछले साल 2024 में शादी के बाद गुरुग्राम के पीजी से शिफ्ट हो कर नोएडा में अपने पति शहजाद के साथ रह रही थी. कई बातें दिमाग में उमड़घुमड़ रही थीं. तभी कौल बेल बजने पर उस का ध्यान भंग हो गया. वह बेमन से दरवाजा खोलने के लिए उठ रही थी. तब तक 2-3 बार कौल बेल बज चुकी थी.

दरवाजे की कुंडी खोल कर अपने कमरे में जाने को मुड़ी ही थी कि पीछे से प्यार भरी आवाज आई, ”क्या बात है बेगम साहिबा!  पूछे बगैर कुंडी खोल दी! दरवाजे पर कोई और होता तो..? ऐसी भूल मत किया करो.’’

यह उस के पति शहजाद की आवाज थी, जिस का नईमा ने कोई जवाब नहीं दिया था और कमरे में चली गई थी. पीछेपीछे शहजाद भी आ गया. उस ने पूछा, ”नौकरी का कहीं से बुलावा आया?’’

”अभी नहीं,’’ नईमा उदासी से बोली.

”कोई बात नहीं, चलो जब तक कहीं से कोई बुलावा नहीं आता, तब तक तुम्हें सैर करवाने ले चलता हूं.’’ शहजाद बोला.

”मैं टेंशन में हूं और तुम्हें सैर की सूझ रही है.’’

”थोड़ा घूमोगी तभी तो तुम्हारा मन हलका होगा. आज नहीं तो कल नौकरी मिल ही जाएगी, चिंता क्यों करती हो?’’ शहजाद बोला.

नईमा को पति के बदले रूप पर हैरानी हुई. कुछ देर पहले वह उस से काफी झगड़ कर निकला था. फिर अचानक उस से प्यार जताने लगा, सैर पर जाने के लिए कह रहा है. वह बोली, ”पैसे कहां हैं?’’

”इस की चिंता मत करो…’’ शहजाद के आगे कुछ बोलने से पहले ही पास रखे नईमा के मोबाइल पर मैसेज आने की टोन सुनाई दी. वह यूपीआई द्वारा पैसे आने का मैसेज था.

टोन सुन कर शहजाद फोन की तरफ देखने लगा. वह बोला, ”यह लो, पैसे भी आ गए!’’

”नहींनहीं! इस पर नजर मत डालो. बड़ी मिन्नतों के बाद दीदी ने पैसे भेजे हैं. मेट्रो कार्ड और फोन रिचार्ज करवाना है.’’ नईमा तुनकती हुई बोली और पैसा ट्रांसफर का मैसेज पढऩे लगी.

उस में शहजाद भी झांकने लगा. अंगरेजी में लिखा मैसेज आसानी से नहीं समझ पाया. बैलेंस अमाउंट देखने से पहले ही नईमा ने मोबाइल बंद कर दिया.

”ठीक है मत बताओ, मेरी जेब में पैसे हैं. यह देखो.’’ कहते हुए शहजाद ने जेब से 500 रुपए के नोटों की एक गड्डी निकाल कर दिखा दी.

”इस में पूरे 30 हजार रुपए हैं. चलो, तुम्हें मेरठ घुमा लाता हूं. वहीं कुछ शौपिंग भी करवा दूंगा. बचे पैसे तुम रख लेना.’’

”इतने पैसे कहां से आए. अभी तो तुम्हारे पास एक रुपया नहीं था…सचसच बताना किस से कर्ज लिया है?’’ नईमा बोली.

”तुम बेकार की बातों में मत उलझो. तैयार हो जाओ, हमें जल्दी निकलना है.’’ शहजाद बोला और अपना सामान पैक करने के लिए बैग निकाल लिया.

नईमा शहजाद के इस रूप को देख कर हैरान थी. बातबात पर गालियां बकने और हाथ उठाने वाले में यह बदलाव कैसे आ गया. इस पर अधिक बात न करना ही उस ने मुनासिब समझा. उस की दिली तमन्ना को पूरा करने के लिए वह भी उस के साथ चलने की तैयारी करने लगी.

कुछ घंटे बाद शहजाद और नईम मेरठ के भीड़भाड़ वाले बाजार में थे. वहीं दोनों ने कुछ शौपिंग की. नईमा ने झिझकते हुए अपनी पसंद की एक ड्रैस ली, लेकिन नईम ने उस के लिए एक बुरका भी खरीद लिया. फिर दोनों ने एक साधारण से रेस्टोरेंट में खाना खाया.

वहीं शहजाद की मुलाकात नदीम से हुई. उस का परिचय नईमा से करवाया, ”यह मेरा खास दोस्त है. मुसीबत में मेरा साथ देता है.’’

”अच्छा!’’ नईमा इस से अधिक और कुछ नहीं बोली.

शहजाद उसे रेस्टोरेंट के बाहर तक छोड़ आया.

तब तक शाम घिरने लगी थी. नईम वापस दिल्ली लौटने को बोली. इस पर शहजाद ने अगले रोज लौटने के बारे में बोल कर अपने दोस्त नदीम घर ठहरने का आग्रह किया.

नईमा थकान महसूस कर रही थी. शहजाद के आग्रह को मान लिया. दोनों नदीम के घर की ओर चल पड़े. रास्ते में एक जूस की दुकान दिखी. शहजाद बोला, ”क्यों न एकएक गिलास जूस पी लिया जाए! जूस की यह बहुत फेमस दुकान है. तुम्हारे लिए कौन सा जूस बनवाऊं?’’

”अनार का बनवा लो,’’ वह बोली.

”ठीक है, मैं तो अनानास का लूंगा!’’ शहजाद बोला और जूस की दुकान की ओर चल पड़ा. नईमा थोड़ी दूरी पर खड़ी रही. कुछ मिनटों में ही शहजाद 2 गिलास जूस ले कर नईमा के पास आ गया. दोनों ने अपनीअपनी पसंद का जूस पीया और फिर वहां से चल पड़े. अगले रोज 17 सितंबर, 2025 को मेरठ में जानी थाने की पुलिस को सिवालखास जंगली इलाके में एक महिला की रक्तरंजित लाश मिली. लाश बुरके में थी. पुलिस लावारिस लाश की पहचान के लिए तहकीकात में जुट गई. महिला का गला रेता हुआ था.

इस की स्थिति देख कर पहली नजर में पुलिस ने अनुमान लगाया कि महिला की मौत गला रेतने से हुई होगी. किंतु हो सकता है उस की मौत के और भी कुछ कारण रहे हों. हो सकता है उस का गला घोंटा गया हो या फिर उसे जहर खिलाने के बाद मृत देह का गला रेता गया हो. कारण जो भी हो, वो तो पोस्टमार्टम के बाद ही पता चल सकेगा.  शक्ल और कदकाठी से महिला उत्तर पूर्व की लग रही थी, जिस की उम्र लगभग 35-36 साल थी.

मौत के कारण की जांच के लिए लाश को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया. उस की रिपोर्ट में गला रेतने से मौत की पुष्टि हुई. किंतु उस की हफ्तों तक पहचान नहीं हो पाई. पुलिस को कोई सुराग भी हाथ नहीं लग रहा था. मेरठ की पुलिस तफ्तीश में जुटी हुई थी.

अचानक 8 अक्तूबर, 2025 को मेरठ पुलिस को एक गुमशुदा की रिपोर्ट पर ध्यान गया. दरअसल, वह रिपोर्ट मुजफ्फरनगर के चरथावल थाने में दर्ज की गई थी. करीब 35 वर्षीया नईमा यासमीन नामक महिला के बारे में बताया गया था कि वह 16 सितंबर से लापता है. गुमशुदमी दर्ज होते ही नईमा यासमीन का फोटो और पूरी डिटेल्स पुलिस के औनलाइन रिकौर्ड पर फीड हो गई. मेरठ पुलिस की नजर जब इस पर गई, तब वह चौंक गई. कारण गुमशुदा महिला की तसवीर 17 सितंबर को बरामद हुई लाश से मिलतीजुलती थी.

मेरठ पुलिस को गुमशुदा की रिपोर्ट से ही शिकायत दर्ज करवाने वाले के बारे में मालूम हो गया. वह पहले चरथावल थाने गई. वहां से रिपोर्ट दर्ज करवाने वाले का पूरा विवरण ले लिया, जो उस लापता महिला नई यासमीन का पति शहजाद है. उस के ग्राम सैद नगला मुजफ्फरनगर का रहने की पुष्टि हुई. मेरठ पुलिस तुरंत शहजाद के घर गई. पुलिस को देखते ही शहजाद घबरा गया. उस की बौडी लैंग्वेज से पुलिस समझ गई कि जरूर दाल में कुछ काला है. पुलिस ने उसे उस की लापता पत्नी की लाश मिलने की जानकारी दी.

यह सुन कर शहजाद घडिय़ाली आंसू बहाने लगा. फिर पुलिस उसे पूछताछ के लिए थाने ले गई. थाने में उस से यासमीन की हत्या के संबंध में पूछताछ की तो शहजाद पुलिस के सवालों के सही जवाब देने से कतराता रहा, किंतु जब पुलिस ने सख्त रुख अख्तियार किया, तब  उस ने नईम की हत्या करना कुबूल कर लिया. उस ने यह भी बताया कि इस वारदात को अंजाम देने में उस ने अपने साथी नदीम अंसारी की मदद ली थी. दोनों ने मिल कर यासमीन की हत्या की थी. इस से पहले उस ने यासमीन को जूस में नींद की गोलियां मिला कर दी थीं. उस के बेहोश हो जाने के बाद दोनों उसे घटनास्थल तक ले गए थे.

हत्या के बाद किसी को शक नहीं हो, इसलिए उस ने गुमशुदगी की रिपोर्ट थाना चरथावल में दर्ज करवाई थी. यह उस तक पुलिस के पहुंचने का कारण बन गया. जांचपड़ताल के बाद जानी थाने की पुलिस ने शहजाद और नदीम को गिरफ्तार कर वारदात का खुलासा कर दिया. पुलिस ने उस की निशानदेही पर हत्या में प्रयुक्त छुरी व रस्सी भी बरामद कर ली. इस खुलासे पर एसएसपी डा. विपिन ताडा ने पुलिस टीम को 25 हजार रुपए का इनाम दे कर पुरस्कृत किया. शहजाद ने नईम की हत्या करने का जो कारण बताया, इस में उस की मक्कारी, हैवानियत, अपनी पहली बीवी और इसलाम धर्म तक के साथ बेवफाई की हैरान करने वाली दर्दनाक दास्तान थी.

हत्या की शिकार होने वाली नईमा यासमीन और शहजाद एक बेमेल जोड़ा था. उन के बीच कुछ समय के लिए वैचारिक तालमेल बन गए थे और यही उन के बीच प्रेम संबंध और निकाह का कारण भी था. नईम यासमीन जितनी सच्ची और प्रतिभावान और पढ़ीलिखी थी, शहजाद उतना ही उस के उलट था. असम के शहर गुवाहाटी की रहने वाली नईमा ग्रैजुएट थी और दिल्ली एनसीआर में स्थित मल्टीनैशनल कंपनी में नौकरी करती थी. दूसरी तरफ 5वीं तक पढ़ाई करने वाला शहजाद मेरठ की एक मसजिद में इमाम की छोटी से नौकरी करता है. वह शादीशुदा है और 3 बच्चों का बाप भी था. वह सोशल मीडिया का दीवाना था.

साल 2024 में उस की नईमा से औनलाइन जानपहचान हो गई थी. नईमा एनिमल वेलफेयर एनजीओ से भी जुड़ी थी. जानवरों से उसे बेहद लगाव था. साथ ही उस के पास 5-6 बिल्लियां भी थीं. इसी एनजीओ के जरिए साल 2024 में उस की मुलाकात शहजाद से हुई थी. सोशल मीडिया के जरिए दोनों के बीच बातचीत शुरू हुई और फिर धीरेधीरे दोस्ती आगे बढ़ी. शहजाद ने खुद को दिल्ली विश्वविद्यालय (डीयू) का ग्रैजुएट और कारोबारी बता कर नईमा का दिल जीत लिया था. साथ ही उस ने कहा था कि उसे भी बिल्लियों से बहुत प्यार है. उस ने नईमा से वही बातें कीं, जो उसे पसंद थीं.

कैट लवर बन कर शहजाद ने धीरेधीरे नईमा का भरोसा जीत लिया था और फिर प्यार का सिलसिला शुरू हो गया था. सितंबर 2024 में दोनों ने औनलाइन निकाह भी कर लिया. निकाह के बाद दोनों दिल्ली में साथ रहने लगे, जिस की जानकारी नईमा की बहन को भी थी. नईमा खुश थी और अपने नए जीवन की बातें सिर्फ अपनी बहन के साथ साझा करती थी. निकाह के करीब 3 महीने बाद शहजाद ने नईमा से मुजफ्फरनगर में स्थित अपना पुश्तैनी घर दिखाने के लिए कहा. उस के कहने पर नईमा मुजफ्फरनगर पति के घर पहुंची. वहां उस के सपने टूट गए. खुद को बिजनैसमैन बताने वाला शहजाद बेहद साधारण परिवार से था और एक इमाम की नौकरी करता था. खुद मसजिद के राशन पर पलता था. उस का कोई कारोबार या व्यापार नहीं था. उस ने नईमा को झूठ बताया था.

सब से बड़ा झूठ तो उस ने अपनी शादी को ले कर कहा था. नईमा से उस ने बात छिपा ली थी कि वह पहले से विवाहित और 3 बच्चों का बाप भी है. नईमा को समझते देर नहीं लगी कि शहजाद ने उस से निकाह उस की नौकरी और सैलरी, सेविंग्स के लालच में किया था. इस सच्चाई के खुलते ही नईमा ने शहजाद का विरोध किया. बदले में शहजाद उस के साथ गालीगलौज और मारपीट  पर उतर आया. शहजाद की हकीकत जान कर नईमा यासमीन पूरी तरह टूट गई. उस ने अपना दुखड़ा बहन को सुनाया. अपनी सच्चाई का परदाफाश होते  ही शहजाद का चेहरा भी बदल गया. वह नईमा की सैलरी हड़पने लगा. उस की सारी सेविंग्स भी खत्म कर दी.

नईमा परेशान हो गई. उस ने शहजाद से पहली पत्नी और बच्चों से मिलने से मना किया. यह बात शहजाद को नागवार गुजरी. तब उस ने नईमा को ही रास्ते से हटाने का प्लान बना लिया.  जिस के लिए उस ने अपने दोस्त नदीम को 12 हजार रुपए दे कर योजना में शामिल कर लिया. योजना के मुताबिक शहजाद 16 सितंबर, 2025 को शौपिंग के बहाने नईमा को मेरठ ले कर आया और रास्ते में उसे जूस में नींद की गोलियां दे कर बेहोश कर दिया. फिर दोनों उसे जंगली इलाके के एक खेत में ले गए. जहां नदीम ने रस्सी से उस का गला दबाया और शहजाद ने छुरे से गले को रेत दिया. फिर दोनों ने लाश को एक बुरके में लपेट कर फेंक दिया. फिर वापस घर लौट आए.

हफ्तों तक वे चुप्पी साधे रहे, लेकिन भीतरभीतर डरे हुए भी थे कि कहीं वे पकड़े न जाएं. इसी भय से शहजाद ने 8 अक्तूबर, 2025 को मुजफ्फरनगर में नईमा यासमीन की गुमशुदगी भी दर्ज करवा दी थी. पुलिस ने आरोपी शहजाद और उस के साथी नदीम से पूछताछ करने के बाद कोर्ट में पेश किया, जहां से दोनों को जेल भेज दिया गया. Love Story in Hindi

 

UP Crime News: 8 करोड़ के लालच में अस्पताल संचालक किडनैप

UP Crime News: गोरखपुर में स्थित एक अस्पताल के संचालक अशोक जायसवाल के दिलोदिमाग से किडनैप की छाप मिटने का नाम ही नहीं ले रही थी. पहले उन के बिजनैसमैन पिता को किडनैपर्स ने मोटी रकम ले कर छोड़ा. उस के बाद उन के बड़े भाई का किडनैप हो गया. उन्हें भी मोटी रकम दे कर किडनैपर्स से छुड़ाया गया. इन दोनों घटनाओं से वह उबर पाते, उस से पहले ही 8 करोड़ रुपए की फिरौती के लिए अशोक जायसवाल का ही किडनैप हो गया. क्या उन की पत्नी डा. सुषमा जायसवाल ने किडनैपर्स को यह रकम दी या फिर…

गोरखपुर मुख्यालय से 60 किलोमीटर दूर स्थित है थाना सिकरीगंज. गांव अबू पट्टी इसी थानाक्षेत्र के अंतर्गत पड़ता है. यह गांव मुसलिम बाहुल्य के रूप में जाना जाता है. गांव के अधिकांश युवा खाड़ी देशों में जौब कर के अच्छा पैसा कमाते हैं. यही देख इसी गांव का रहने वाला 35 वर्षीय कमालुद्दीन अहमद उर्फ कमालु का भी सपना ढेरों पैसे कमाने का था. अमीर बनने के लिए वह किसी भी हद तक जाने के लिए तैयार रहता था. छोटीमोटी चोरियां कर के उस ने जरायम की दुनिया के रोजनामचे पर अंगद की तरह मजबूती से पांव जमा कर पुलिस की नाक में दम कर दिया था.

खतरनाक असलहों और लड़कियों के शौकीन कमालु ने 3 शादियां की थीं, जिन में 2 लड़कियां हिंदू और एक मुसलिम थी. दोनों हिंदू लड़कियों में से एक कमालु की छाया बन कर हर वक्त उस के साथ रहती थी. वही उस के नाम से इंस्टाग्राम चलाती और उस के गुनाहों का बहीखाता संभालती. वह लड़कियों की तस्करी भी करता था, तभी तो उस की पुलिस से ले कर राजनेताओं के बीच में गहरी पैठ बन गई थी. इसलिए वह पुलिस के चंगुल में आसानी से फंसता नहीं था.

बात मई, 2025 की है. शाम के 5 बजे का वक्त था. कमालु अपने घर के डाइनिंग रूम में सोफे पर बैठा हुआ था. सामने लकड़ी की बनी छोटी मेज पर कांच की प्याली में चाय रखी थी, जिसे वह चुस्की ले कर पी रहा था. तभी उस के मोबाइल फोन की घंटी बजी. उस ने दाहिने हाथ में मोबाइल उठा कर नंबर को गौर से देखा, वह उस के परिचित प्रदीप सोनी का था. काल रिसीव कर वह अदब से बोला, ”बताएं सोनीजी, आज इस नाचीज की कैसे याद आई?’’

”कुछ खास काम था तुम से.’’

”मेरे से खास काम..!’’ चौंकते हुए कमालु ने सवाल किया, ”बताएं…बताएं, क्या खास काम है?’’

”एक मोटी आसामी कटने को तैयार है. बोलो, टास्क पूरा करोगे?’’

”कीमत?’’

”8 करोड़.’’

”8 करोड़.’’ सुन कर कमालु ऐसे चौंका, जैसे उसे सैकड़ों बिच्छुओं ने एक साथ डंक मारे हों.

”आसामी मोटी और बड़ी है. 8 करोड़ की रकम उस के घर में रखी है, मगर मेरी एक शर्त है.’’ प्रदीप शख्स ने कहा.

”हां, बोलो भाईजान. कैसी शर्त है?’’

”पहली शर्त तो यह कि कुछ भी हो जाए, इस में मेरा नाम सामने नहीं आना चाहिए. दूसरी शर्त टास्क पूरी होने के बाद फिरौती की रकम में से आधा हिस्सा मेरा. बोलो, मेरी दोनों शर्तें मंजूर हैं तुम्हें?’’

”हां, 100 फीसदी डील पक्की समझो. बस मुझे मेरे शिकार का पता दे दो.’’

”वह है पादरी बाजार स्थित अंशुमान हौस्पिटल का डायरेक्टर और सेना से रिटायर जवान अशोक जायसवाल. उस की पत्नी डा. सुषमा जायसवाल है. एक बेटी और एक बेटा है, जो शहर से बाहर रहते हैं. घर पर मियांबीवी के अलावा तीसरा कोई नहीं रहता है. अपनी फिटनैस के लिए वह रोज सुबह साढ़े 5 बजे साइकिल से जेल रोड बाईपास से होते हुए रेलवे स्टेडियम में जौगिंग और स्वीमिंग करने अकेला जाता है.’’

प्रदीप सोनी ने शिकार का पूरा हुलिया और उस के आनेजाने की पूरी खबर कमालु को दे दी. सारी जानकारी पा कर कमालु की खुशियों का ठिकाना नहीं था. वह इस टास्क को पूरा करने लिए जीजान लगाने के लिए तैयार था. कमालु के पास 8-10 सदस्यों का गैंग था. करुणेश कुमार दुबे उस का सब से विश्वासपात्र था. यूं कहें कि वह उस का दाहिना हाथ था. करुणेश बेलाघाट थाने के शंकरपुर स्थित चौतरा पट्टी का रहने वाला था. कमालु की तरह वह भी कम समय में अमीर बनने के सपने देखा करता था. बाद में वह कमालु के गैंग का सक्रिय सदस्य बन गया.

ऐसे किया किडनैप

अस्पताल के डायरेक्टर अशोक जायसवाल का किडनैप करने का टास्क मिलने के बाद कमालु करुणेश के साथ उस की रेकी के काम में जुट गया. पूरे 2 महीने तक रेकी करने के बाद जब उन्हें लगा कि अब टास्क पूरा करने का समय आ चुका है, तब कमालु ने इस काम को अंजाम देने के लिए अपने और साथियों श्याम सुंदर उर्फ गुड्डू यादव, जनार्दन गौड़, प्रीतम कुमार, अंश कुमार और शेरू सिंह को सक्रिय किया.

योजना तैयार होने के बाद 25 जुलाई, 2025 को शिकार को टारगेट बनाने की बुनियाद रखी. शातिर कमालु ने गिरोह के सदस्यों को 2 टीमों में बांट दिया, ताकि कोई मुसीबत आने पर सभी साथी सुरक्षित निकल कर भागने में सफल रहें. पहली टीम में उस ने श्यामसुंदर, जनार्दन गौड़ और करुणेश दुबे को रखा था. जबकि दूसरी टीम में वह खुद, प्रीतम कुमार, शेरू सिंह और अंश कुमार को रखा था.

25 जुलाई, 2025 की भोर के 4 बजे एक कार में सवार हो कर श्यामसुंदर, जनार्दन गौड़ और करुणेश दुबे कौआबाग अंडरपास पहुंचे. कार श्यामसुंदर चला रहा था. कार एक साइड में लगा कर तीनों उस में से निकल कर थोड़ीथोड़ी दूरी पर फैल गए थे, ताकि किसी को उन पर शक न हो. अंडरपास के दूसरी ओर कमालु कार ले कर खड़ा था, जिस में प्रीतम कुमार, शेरू सिंह और अंश कुमार सवार थे.

ठीक साढ़े 5 बजे साइकिल पर सवार हो कर अशोक जायसवाल कौआबाग पुलिस चौकी होते हुए अंडरपास की ओर आते दिखाई दिए. उन्हें आते हुए देख कर करुणेश, जनार्दन और श्यामसुंदर सतर्क हो गए. जैसे ही अशोक अंडरपास के पास पहुंचे, अचानक उन की साइकिल के सामने करुणेश आ गया और उन की साइकिल रोक कर पता पूछने के बहाने अपनी बातों में उलझा लिया. तब तक वहां श्यामसुंदर और प्रीतम भी पीछे से आ गए और अशोक को धक्का दे कर साइकिल से नीचे गिरा दिया.

अशोक जायसवाल साइकिल सहित नीचे गिर गए. वह खुद को संभाल पाते या कुछ समझ पाते, इतने में तीनों ने उन्हें दबोच कर कार की पिछली सीट पर डाल दिया. अशोक को बीच में बैठा कर उन्होंने उन की आंखों पर पट्टी बांध दी. टारगेट पूरा होने की सूचना जैसे ही कमालु को मिली, वह खुशी से झूम उठा और अपनी कार ले कर करुणेश की कार के पीछे लगा दी. इधर अशोक जायसवाल को घर से निकले करीब 4 घंटे बीत चुके थे. वह अब तक घर नहीं पहुंचे थे. यह देख कर उन की पत्नी डा. सुषमा जायसवाल परेशान हो गई थीं कि कभी ऐसा नहीं हुआ कि उन्हें घर लौटने में इतनी देर लगे. जौगिंग कर के वह 2 घंटे में घर लौट आते थे, फिर आज कहां रह गए. उन का फोन भी लगातार स्विच्ड औफ आ रहा था.

पति का फोन लगातार बंद आने पर डा. सुषमा को किसी अनहोनी की आशंका हुई. मन में बुरेबुरे खयालों के काले बादल उमडऩे लगे. अभी वह इन्हीं खयालों के मकडज़ाल में उलझी हुई थीं कि उन के फोन की घंटी घनघना उठी. डिसप्ले पर उभर रहा नंबर अननोन था. हिम्मत कर के डा. सुषमा ने वह कौल रिसीव किया, ”हैलो! कौन?’’

”क्या मेरी बात डौक्टर सुषमा जायसवाल से हो रही है?’’ दूसरी ओर से रौबीली आवाज कान के परदे से टकराई.

”हां, मैं सुषमा जायसवाल हूं. बताइए, क्या बात है?’’

”सुन डौक्टरनी, तेरा पति अशोक मेरे कब्जे में है. उसे जिंदा और सहीसलामत देखना चाहती है तो 8 करोड़ रुपए तैयार कर के रखना. दोबारा फोन करूंगा तो बताऊंगा कि रुपए कब और कहां ले कर आना है. और हां, जरा भी होशियारी करने की कोशिश मत करना, वरना तेरे पति को खलास कर दूंगा, रोती रहना जिंदगी भर. समझी. यह भी सुन ले, पुलिस के पास जाने की गलती कतई मत करना, वरना इस के शरीर के इतने टुकड़े करूंगा कि तेरे को जोडऩे में जिंदगी बीत जाएगी, समझी. चल, पैसों के इंतजाम में जुट जा.’’ फोन करने वाले ने सुषमा को धमकी दी. धमकी करुणेश ने दी थी.

8 करोड़ की मांगी फिरौती

पति के किडनैप होने की सूचना पाते ही डा. सुषमा घबरा गईं. समझ में नहीं आ रहा था कि क्या करें? किडनैपर ने पति को आजाद करने के बदले में 8 करोड़ रुपयों की डिमांड की थी. ये 8 करोड़ रुपए कहां से आएंगे? काफी सोचविचार कर डा. सुषमा जायसवाल अपने बहनोई को साथ ले कर शाहपुर थाने पहुंचीं. इंसपेक्टर नीरज राय को उन्होंने पति के किडनैप से ले कर बदमाशों द्वारा फिरौती में 8 करोड़ की रकम मांगने की बात बताई.

डा. सुषमा के मुंह से किडनैपर्स द्वारा फिरौती की 8 करोड़ की रकम सुन कर इंसपेक्टर नीरज राय चौंक पड़े. यह सूचना उन्होंने वरिष्ठ अधिकारियों को दी तो पुलिस विभाग में हड़कंप मच गया और आननफानन में सीमा के सभी राष्ट्रीय राजमार्गों को सील करा कर बैरिकेड्स लगा कर वाहनों की जांच शुरू करने के आदेश दे दिए गए, लेकिन बदमाश पुलिस की पकड़ से बहुत दूर जा चुके थे. रिटायर्ड एयरफोर्स जवान और अस्पताल संचालक अशोक जायसवाल के किडनैप केस को एसएसपी राजकरन नैयर ने गंभीरता से लिया. उन्होंने एसपी (सिटी) अभिनव त्यागी के नेतृत्व में पुलिस की 4 टीमें बनाईं और उन्हें बदमाशों को पकडऩे के लिए रवाना किया.

पुलिस के लिए यह घटना चुनौतीपूर्ण थी और वे किडनैप किए गए अशोक जायसवाल को सकुशल बचाना चाहते थे. बदमाशों ने जिस नंबर से फिरौती की रकम के लिए कौल की थी, एसपी (सिटी) अभिनव त्यागी ने सब से पहले उसे सर्विलांस पर लगा दिया और बदमाशों के लोकेशन का पता लगाने की कोशिश की. साथ ही उन्होंने डा. सुषमा से यह भी कह दिया कि बदमाशों का फिर से फोन आए तो उसे अपनी लंबी बातों में देर तक उलझाए रखें. उसी शाम 4 बजे के करीब बदमाशों का फोन डा. सुषमा जायसवाल के फोन पर आया. 8 करोड़ की फिरौती की मांग पर सौदेबाजी करतेकरते बदमाश 15 लाख की रकम पर आ कर टिक गए.

पति की सलामती के लिए वह जैसेतैसे 8 लाख रुपयों का इंतजाम कर सकीं और बदमाशों के बताए गीडा थानाक्षेत्र के कालेसर नामक स्थान पर रकम पहुंचाने के लिए तैयार हुईं. दूसरी तरफ सर्विलांस के जरिए पुलिस दोनों की बातों को सुन भी रही थी. इस के अलावा डा. सुषमा ने एसपी (सिटी) अभिनव त्यागी को फोन कर के किडनैपर्स से हुई सारी बात बता दी. सादे कपड़ों में पुलिस टीम ने कालेसर एरिया को चारों ओर से घेर लिया था. किडनैपर्स ने पैसे लेने के लिए यही जगह डा. सुषमा जायसवाल को बताई थी. शाम 7 बजे के करीब एक नीले रंग की कार कालेसर आ कर रुकी तो सादे कपड़ों में चारों ओर फैली पुलिस पोजीशन ले कर सतर्क हो गई. उन्हें यकीन था कि इसी कार में बदमाश अशोक जायसवाल को ले कर आए होंगे.

पलभर बाद कार में से 3 व्यक्ति बाहर निकले, जबकि कार के अंदर एक व्यक्ति बैठा नजर आ रहा था. इस के कुछ दूरी पर एक और कार आ कर खड़ी हो गई. पहली वाली कार से उतरे 3 व्यक्तियों में से एक ने चारों तरफ का जायजा लेने के बाद अपनी जेब से फोन निकाला और वह कोई नंबर लगाने के बाद फोन पर बात करने लगा. एसपी (सिटी) त्यागी को विश्वास हो गया कि ये शायद बदमाश ही हैं, जो फिरौती की रकम लेने यहां आए हैं. इसलिए उन्होंने मौके पर मौजूद पुलिस टीम को फोन कर के सतर्क किया और किसी भी तरह बदमाशों को गिरफ्तार करने का आदेश दिया.

आदेश मिलते ही घात लगाए बैठी पुलिस टीम बदमाशों की ओर बढ़ी तो तीनों बदमाश खतरे को भांप कर मौके से भागने लगे. बदमाशों को भागता देख कार में बैठा व्यक्ति भी दरवाजा खोल कर कार में से निकल कर भागने लगा. वह व्यक्ति कोई और नहीं, बल्कि अपहृत किए गए अशोक जायसवाल ही थे. पुलिस ने अशोक को सकुशल बरामद कर लिया.

भावुक हो पत्नी से लिपट गए अशोक जायसवाल

पुलिस के साथ पत्नी सुषमा जायसवाल को देख कर अशोक जायसवाल को सहसा यकीन नहीं हुआ. पत्नी को देखते ही उन की आंखें डबडबा गईं और वह उन से जा लिपटे. पति को सहीसलामत देख कर सुषमा का भी गला रुंध गया था. भावुक हो कर कुछ पलों तक दोनों एकदूसरे को अपलक देखते रहे. इधर पुलिस ने भागने वाले तीनों किडनैपर्स को कुछ दूर जा कर पकड़ लिया, जिन में 2 किडनैपर्स जनार्दन गौड़ और श्यामसुंदर उर्फ गुड्ïडू यादव भागते समय सड़क पर गिर गए थे, जिस से दोनों के पैरों में गंभीर चोटेें आई थीं. वे लंगड़ा कर चल रहे थे. पुलिस ने करीब 15 घंटों में अपहृत अशोक जायसवाल और किडनैपर्स को सकुशल पकडऩे में कामयाबी हासिल कर ली थी.

पुलिस तीनों किडनैपर्स को ले कर थाना शाहपुर पहुंची. इधर इंसपेक्टर नीरज राय ने कप्तान राजकरन नैय्यर और एसपी (सिटी) अभिनव त्यागी को सूचना दे दी थी. अशोक जायसवाल की सकुशल बरामदगी और 3 किडनैपर्स की गिरफ्तारी की सूचना पाते ही दोनों अधिकारी थाने पहुंचे और तीनों किडनैपर्स से सख्ती से पूछताछ की तो करुणेश दुबे ने बताया कि घटना का मास्टरमाइंड कमालुद्ïदीन अहमद उर्फ कमालु है. कमालु के अलावा घटना में प्रीतम, शेरू सिंह और अंश तिवारी भी शामिल थे. कुल मिला कर इस घटना में 7 किडनैपर्स के नाम सामने आए, जिन में 4 मौके से गाड़ी ले कर फरार हो गए थे.

अगले दिन 26 जुलाई, 2025 को एसएसपी राजकरन नैय्यर ने पुलिस लाइन में प्रैसवार्ता आयोजित की और तीनों किडनैपर्स को गिरफ्तार करने और अशोक जायसवाल को सहीसलामत बरामद करने की जानकारी पत्रकारों को दी. जांच में सामने आया कि परिवार की गतिविधियों पर कोई नजर बनाए हुए था, जिस की वजह से पूरे औपरेशन को बहुत गोपनीय रखा गया था. फिर तीनों को अदालत में पेश कर के 14 दिनों की न्यायिक हिरासत में गोरखपुर मंडलीय कारागार, बिछिया भेज दिया. फरार चारों बदमाशों की गिरफ्तारी के लिए उन के ठिकानों पर दबिश देने लगे, लेकिन बदमाश पुलिस की पकड़ से दूर थे.

27 जुलाई, 2025 को डीआईजी डा. एस. चनप्पा ने घटना के मास्टरमाइंड कलामुद्ïदीन उर्फ कमालु के ऊपर 50 हजार रुपए का इनाम घोषित किया. इनाम घोषित होते ही अगले दिन 28 जुलाई को कमालु रायबरेली की कोर्ट में एक पुराने केस में आत्मसमर्पण कर जेल चला गया. ऐसा करना कमालु की मजबूरी थी, उसे डर सता रहा था कि कहीं उस का एनकाउंटर न हो जाए. एनकाउंटर के डर से ही उस ने खुद को न्यायालय में आत्मसमर्पण किया था. गोरखपुर पुलिस ने कमालु से पूछताछ के लिए न्यायालय में ट्रांजिट रिमांड की मांग कर दी थी.

24 अगस्त, 2025 को पुलिस की मेहनत रंग लाई और कमालु 48 घंटे की रिमांड पर पुलिस को सौंप दिया गया. कड़ी सुरक्षा के बीच कमालु रायबरेली जेल से गोरखपुर लाया गया. पुलिस अधिकारियों ने गुप्त स्थान पर रख कर उस से सख्ती से पूछताछ की तो उस ने रट्टू तोते की तरह सारा राज उगल दिया था और परतदरपरत राज खुलता चला गया. पूछताछ में कमालु ने बताया कि अशोक जायसवाल के अपहरण की सुपारी उन्हीं के पड़ोसी ज्वैलर प्रदीप सोनी ने दी थी.

उस ने आगे बताया कि गोला थाने का गैंगस्टर मोनू त्रिपाठी, तरुण त्रिपाठी का दोस्त था. क्रिमिनल्स से उस की अच्छी दोस्ती थी. यह बात तरुण जानता था. उस ने लाखों रुपए मिलने का लालच दे कर इसे भी अपनी योजना में मिला लिया था. मोनू का दोस्त करुणेश दुबे था, जो मेरा (कमालुद्दीन उर्फ कमालु) गैंग चलाता था. मोनू त्रिपाठी के जरिए प्रदीप सोनी और तरुण त्रिपाठी मुझ तक पहुंचे और अशोक जायसवाल के किडनैप सुपारी दी. पूछताछ के बाद पुलिस ने आरोपी कमालु को 26 अगस्त, 2025 को रायबरेली जेल पहुंचा दिया. इस के बाद पुलिस ने आरोपी प्रदीप सोनी, देवेशमणि त्रिपाठी उर्फ तरुण त्रिपाठी और मोनू त्रिपाठी को गिरफ्तार कर उस से भी पूछताछ की.

पिता और भाई भी हो चुके थे किडनैप

अशोक जायसवाल किडनैप केस में अब तक 10 आरोपी अरेस्ट किए जा चुके थे. 2 आरोपी पुलिस की पकड़ से अभी भी दूर थे. पुलिस ने सभी आरोपियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर जेल भेज दिया था और फरार चल रहे 2 आरोपियों प्रीतम और अंश तिवारी की तलाश तेज कर दी थी. अशोक जायसवाल मूलरूप से बिहार के बेतिया जिले के रहने वाले थे. वह व्यापार घराने से ताल्लुक रखते थे. उन के पिता बड़ेलाल जायसवाल एक बड़े व्यापारी थे. एक दिन में लाखों का कारोबार होता था. बात सन 1993 की है. तब बिहार में अपहरण कारोबार बड़े पैमाने पर चल रहा था. एक शाम बदमाशों ने अशोक के पिता का किडनैप कर लिया और फिरौती की बड़ी रकम दे कर उन्हें मुक्त कराया था.

पिता के साथ घटी घटना की छाप अभी पूरी तरह से अशोक जायसवाल के जहन से उतरी नहीं थी कि 1995 में उन के बड़े भाई मुरारी लाल का अपहरण हो गया. इस बार भी बदमाशों ने बड़ी फिरौती ले कर मुरारी लाल को आजाद किया था. बारबार परिवार में घट रही घटनाओं से अशोक जायसवाल इस कदर डर गए थे कि अब बेतिया में रहना नहीं चाहते थे. इसे इत्तफाक ही कहा जाएगा कि व्यापारी घराने में होते हुए वह व्यापार के धंधे से दूर रहे थे. इसी दौरान उन्हें एयरफोर्स में नौकरी मिल गई. साल 2000 में उन का ट्रांसफर गोरखपुर हो गया और परिवार के साथ गोरखपुर आ गए.

यहीं रह कर कई साल नौकरी की. साल 2003 में वह एयरफोर्स से रिटायर हुए. रिटायरमेंट के बाद वह शाहपुर थानाक्षेत्र के पादरी बाजार इलाके में जमीन ले कर बस गए थे. पत्नी सुषमा जायसवाल भी बस्ती जिले के एक सरकारी अस्पताल में डौक्टर थी. समय अपनी रफ्तार आगे बढ़ता रहा. रिटायरमेंट में अशोक को अच्छीखासी रकम मिली थी और पत्नी भी सरकारी मुलाजिम थीं. दोनों को मिला कर उन के पास अच्छा बैंक बैलेंस था. वे जहां रहते थे, उसी जमीन पर उन्होंने ‘आयुष्मान हौस्पिटल’ बनाया. अस्पताल के निचले हिस्से में वे परिवार सहित रहते थे. ऊपर अस्पताल चलता था.

अशोक जायसवाल के पास जब पैसे आने लगे तो उन्होंने एक स्कूल खोलने की योजना बनाई. यह बात 2017-18 की थी. अपनी योजना को पूरी करने के लिए उन्होंने करोड़ों रुपए की पिपराइच में जमीन खरीदी. जमीन खरीद कर उसे वैसे ही छोड़ दी, ताकि वक्त आने पर उस का सही से इस्तेमाल किया जा सके. यह बात उन के करीबी जानते थे. यही नहीं, उन्होंने अपने बड़बोलेपन में अपने करीबियों और दोस्तों के बीच में यह बात फैला दी थी कि उन को और जमीन की तलाश है. मिल जाए तो खड़ेखड़े नकद खरीद लेंगे. 8-10 करोड़ रुपए तो घर के कैशबौक्स में हमेशा पड़े रहते हैं.

लालच में ज्वैलर ने रची किडनैप की साजिश

यह बात उन का पड़ोसी और बस्ती जिले का रहने वाला प्रदीप सोनी उर्फ पिंटू को भी पता चल गई. हाल में वह पादरी बाजार में किराए का कमरा ले कर परिवार के साथ रहता था. वह उन्हीं के आयुष्मान हौस्पिटल के निचले वाले हिस्से में बनी दुकानों में एक दुकान किराए पर ले कर ज्वैलरी का शोरूम खोल रखा था. अशोक ने सुरक्षा के लिहाज से अस्पताल में कई सीसीटीवी कैमरे लगे थे, जिस का एक्सेस अशोक जायसवाल के मोबाइल में था तो वही एक्सेस प्रदीप के मोबाइल में भी था, जिस की जानकारी अशोक को नहीं थी. उसी एक्सेस के जरिए वह उन की हरेक गतिविधियों पर नजर गड़ाए हुए था.

पड़ोसी प्रदीप सोनी की नीयत में खोट आ गई थी. दरअसल, वह इन दिनों काफी परेशान चल रहा था. उस की परेशानी का कारण था कर्ज का लेना. प्रदीप ने यहां से पहले पादरी बाजार से जेल बाईपास रोड पर एक दुकान ली थी. वह दुकान अच्छीभली चल रही थी. जब जेल बाईपास रोड का चौड़ीकरण हुआ तो उस की दुकान टूट गई थी, जिस से उसे बड़ा नुकसान हुआ था. उस ने अशोक से 5 लाख रुपए कर्ज ले रखा था. अशोक पैसे लौटाने के लिए उस पर बारबार दबाव बनाने लगे थे. उन के तकादे से वह बुरी तरह परेशान रहने लगा था.

प्रदीप सोनी को पता चल चुका था कि अशोक जायसवाल के कैश बौक्स में 8 से 10 करोड़ रुपए नकद पैक हैं. इस के बाद उस ने अशोक जायसवाल को किडनैप कराने का प्लान बनाया और सोचा कि 8 करोड़ की फिरौती में से वह उन के 5 लाख रुपए भी लौटा देगा. इस प्लान को अंजाम देने के लिए उस ने अपने खास दोस्त देवेशमणि त्रिपाठी उर्फ तरुण त्रिपाठी और इंद्रेश तिवारी उर्फ मोनू को शामिल कर लिया और उन्हें लालच दिया कि फिरौती की रकम में से एकएक करोड़ आपस में बांट लेंगे और अपना देश छोड़ कर नेपाल में शिफ्ट हो जाएंगे, जहां मजे से जिंदगी कटेगी और पुलिस कभी उन तक पहुंच भी नहीं पाएगी.

उसी प्लान के तहत 25 जुलाई, 2025 को सुबह के समय अशोक जायसवाल का अपहरण करा लिया. लेकिन उन के ख्वाब अधूरे के अधूरे रह गए. डा. सुषमा जायसवाल की समझदारी के चलते घटना में लिप्त सभी आरोपी गिरफ्तार कर जेल भेज दिए गए. 2 आरोपियों प्रीतम और अंश तिवारी कथा संकलन तक फरार चल रहे थे. UP Crime News

 

 

MP Crime News : बेदर्दी न समझा कोमल दिल की बात

MP Crime News : सैक्स की चाहत के लिए किया गया प्रेम न केवल अनैतिक और विरोध का तानाबाना बुन लेता है, बल्कि प्रेमी युगल को नाजायज और नापाक राह पर ले जाता है. ऐसा ही कुछ 21 वर्षीय रानू मेहर और रामनिवास सोलंकी के साथ हुआ, जिस के बाद…

रामनिवास सोलंकी अपने घर की छत पर अकेला बैठा था. शाम का अंधेरा घिरने में अभी वक्त था. एकदम तन्हाई में डूबा हुआ था. सामने दूर तक गांव का नजारा वहां से दिख रहा था. उस की पतली पगडंडियों पर गाहेबगाहे उस की नजर ठहर जाती थी. वहां इक्कादुक्का लोगों का आनाजाना हो रहा था. उन में अधिकतर गांव की ओर आने वाले ही थे.

अचानक उस की निगाह कंधे से बैग लटकाए एक युवती पर ठहर गई. वह उस की जानीपहचानी थी और गांव से बाहर जाती दिख रही थी. वह उस के बारे में सोचने लगा, ‘रानू मायके कब आई थी? अब कहां जा रही है?…शायद ससुराल?…आई थी तब उस ने मुझे कौल क्यों नहीं की?…पता लगाना होगा कि क्या बात है?’

रामनिवास चाहता तो वहीं से उसे आवाज दे सकता था, लेकिन उस ने अपने मोबाइल से उसे कौल कर दिया. कुछ सेकेंड तक रिंग जाने के बाद कौल डिसकनेक्ट हो गई. उस ने सोचा कि शायद उस का मोबाइल बैग में होगा. उस का अनुमान सही था. देखा युवती कुछ सेकेंड में ही अपने बैग से मोबाइल निकाल चुकी थी.

अगले पल रामनिवास के फोन पर रिंग बजने लगी थी. उस ने तुरंत कौल रिसीव कर ली.

”हां जानू! तुम कब आई…बताया नहीं… मिले बगैर जा रही हो!’’

”आज ही दिन में आई थी…जल्दी लौटना है…फिर आऊंगी.’’ जवाब देने वाली युवती रानू मेहर रामनिवास के गांव की ही थी. तालाब के दूसरी छोर पर उस का मायका था. उन की पुरानी और गहरी जानपहचान थी. उन के बीच सालों से प्रेम संबंध में ताजगी बनी हुई थी, जबकि युवती पास के ही गांव में ब्याही थी. शादीशुदा हो कर भी उस का दिल और दिमाग रामनिवास के दिल में ही अटका हुआ था.

”तो फिर मिली क्यों नहीं?’’ रामनिवास ने मायूसी से शिकायत की.

”क्या करती मिल कर, तुम मेरी बात मानते ही नहीं.’’

”कैसे मान लूं, तुम अब दूसरे की हो!’’

”चलो, अब फोन काटो,’’ बोलते हुए रानू ने कौल डिसकनेक्ट कर दी.

रानू का अचानक फोन कट जाने पर रामनिवास दुखी महसूस करने लगा. सोचने लगा कि आखिर वह उस से चाहती क्या है? मई की तपिश का महीना था. उस की इच्छा हुई कि तालाब के ठंडे पानी में नहा लिया जाए. इसी के साथ उस के मन में कई तरह के खयाल आते रहे. उन में बारबार रानू का चेहरा भी घूमता रहा. उस के साथ गुजारे गए हसीन लम्हों को याद करने लगा. तालाब में तैरते वक्त उसे याद आया कि कैसे उस ने इसी तालाब में रानू को तैरना सिखाने की पहल की थी.

बात 4 साल पहले की है. बरसात का मौसम था. रामनिवास सोलंकी गांव के तालाब में तैराकी कर रहा था. कुछ देर बाद जब वह तालाब से बाहर निकला, तब उस ने देखा कि उसे गांव की ही लड़की रानू मेहर निहार रही है. वह झेंप गया, लेकिन लड़की बोल पड़ी, ”तुम तो बहुत अच्छा तैरना जानते हो… मुझे भी तैरने का बहुत शौक है.’’

”तो सीख लो, किस ने रोका है.’’

”कैसे सीखूं…कोई लड़की तुम्हारी तरह अच्छी तैराक नहीं है.’’

”मैं सिखा दूं?’’

”हां, तुम सिखा दोगे मुझे तैरना!’’ रानू बोली.

”फीस लगेगी.’’ रामनिवास गमछे से अपना अधनंगा बदन पोंछता हुआ बोला.

”क्या फीस लोगे?’’

”तैराकी सिखाने के बाद बताऊंगा.’’

”बाद में मेरी जान मांग ली तो!’’

”तुम जैसी सुंदर लड़की की भला जान कौन मांगेगा?’’

”तो क्या मांगोगे?’’

”दिल?’’

”चल हट… बड़ा आया दिल लेने वाला!’’ रानू बोलती हुई शरमा गई थी.

”तैरना सीखना है तो बोलो, अभी से ही ट्रेनिंग शुरू कर देता हूं.’’

”हांहां सीखना है न, लेकिन डर लगता है…बाबू को मालूम हो गया तो वह मेरा गला घोंट देगा!’’ रानू आशंका जताती हुई बोली.

”बाबू को मालूम होगा तब न! दोपहर में सिखाऊंगा जब बाबू खेतों पर गए होंगे. चलो आ जाओ… पानी में उतरो.’’

”दूसरे कपड़े ले कर आती हूं.’’ रानू बोल कर अपने घर की ओर दौड़ पड़ी.

कुछ मिनटों में ही रानू पौलीथिन बैग में कपड़े ले कर तालाब के किनारे लौट आई थी. चंचल रानू को संभालता हुआ रामनिवास कमर तक पानी में उतर गया था. उस ने उस के दोनों हाथों को पकड़ कर एक झटके में डुबकी लगाई, जिस के लिए रानू शायद पहले से तैयार नहीं थी. जिस से उस के नाकमुंह में पानी घुस गया था. अपना हाथ छुड़ाती हुई दोनों हथेलियों से नाकमुंह में घुस आए पानी को साफ किया. चेहरा पोंछती हुई बोली, ”ऐसे तो तुम मुझे मार ही डालोगे…सांस नहीं ले पा रही थी.’’

”इतने में घबरा गई…यह तुम्हारा पहला सबक था. उस में पास हो गई…अब अगले स्टेप के लिए तैयार हो जाओ!’’ रामनिवास प्यार से बोला.

”लेकिन अचानक से पानी में डुबो दिया था!’’ रानू बोली. उस का कोई जवाब दिए बगैर रामनिवास ने उस की कमर में हाथ डाला और उसे अपनी दोनों हथेलियों पर उठा लिया. अब उस का चेहरा आसमान की ओर था.

”अपना सिर पानी में डूबने से बचाना है और दोनों पैरों को पानी पर पटकना है…’’

रानू इस निर्देश का पालन करने लगी. कुछ देर बाद रामनिवास ने उसे अचानक छोड़ दिया. तब तक वह और गहरे पानी तक चली गई थी. सीने तक पानी में गिर पड़ी. किसी तरह उस ने खुद को संभाला और रामनिवास से लिपट गई. उसे अजीब सी अनुभूति हुई. किसी मर्द की बाहों में आना 17 साल की रानू का पहला अनुभव था. रामनिवास के लिए भी गीले बदन में रानू को पकड़े रहने का पहला अनुभव था. दोनों कुछ कम पानी में आ गए थे. रामनिवास उस की कमर और पीठ को सहला रहा था, किंतु जल्द ही रानू उस से अलग हो कर पानी से बाहर आ गई. अपने कपड़ों की थैली उठाई और पास की झाड़ी के पीछे चली गई. ओट में जा कर अपने कपड़े बदले और जाने लगी.

कपड़े बदल कर जब वह निकली तो रामनिवास बोला, ”अब और नहीं सीखना है?’’

”आज नहीं.’’ कहती हुई रानू चली गई. उस के जाने के काफी देर बाद तक रानू के शरीर स्पर्श को वह याद करता रहा.

इसी के साथ एक सच यह भी था कि रानू और रामनिवास के दिलों की धड़कनें एकदूसरे के लिए धड़कने लगी थीं.

उस के बाद दोनों का दोपहर में घंटे दो घंटे तक तालाब के पानी में तैरना सीखनेसिखाने का सिलसिला चल पड़ा. वह समय उन के लिए एकदूसरे के साथ पानी में रोमांस करने का भी था. रानू कुछ हफ्ते में ही तैरना सीख चुकी थी. वह रामनिवास की ऐहसानमंद थी कि बगैर कोई फीस दिए उस ने उस से तैरना सीख लिया है. उस के प्रति प्रेम की कोमलता के एहसास से भर गई थी. रामनिवास का भी कमोबेश यही हाल था, लेकिन उस के दिल में प्यार का मतलब रानू की कमसिन देह भर से था. वह उस मौके की ताक में रहने लगा था कि कब रानू उसे अपना सर्वस्व समर्पित कर दे.

जल्द ही उसे वह मौका भी मिल गया. एक दफा जब दोनों एकांत में एकदूसरे की तारीफ करते हुए रोमांस की बातों में मशगूल थे, तब रामनिवास ने अपनी वासना की प्यास बुझाने के लिए रानू को राजी कर लिया था. उस रोज दोनों ने साथ जिएंगे साथ मरेंगे की कसमें भी खाईं. रामनिवास ने रानू के सिर पर हाथ रख कर परिवार और गांव के समाज के विरोध का सामना कर शादी रचाने की सौंगंध ली. उन के बीच महीने 2 महीने नहीं, बल्कि 4 साल तक प्रेम संबंध कायम रहे. हालांकि उन के बारे में गांव में चर्चा भी होने लगी थी, लेकिन कोई खुल कर उन का विरोध नहीं जताता था.

इस दौरान जब भी रानू रामनिवास से मिलती, तब छूटते ही शादी की बात छेड़ देती थी…और फिर उन के बीच एक खटास की भावना भर जाती थी. हालांकि रामनिवास प्रेमिका रानू को शादी का आश्वासन दे कर नई उम्मीद से भर देता था.

इसी बीच दोनों के प्रेम संबंध की सूचना रानू के परिवार तक जा पहुंची. उस के मम्मीपापा रानू के इस व्यवहार से खफा हो गए और वे जल्द से जल्द उस की शादी रचाने की कोशिश में लग गए. पापा ने उस के घर से निकलने पर पाबंदी लगा दी थी. उन का प्रयास सफल हुआ और रानू की शादी पास के गांव गरोठ में रहने वाले एक युवक से कर दी गई. शादी के बाद भी विवाहिता रानू मेहर का दिल रामनिवास सोलंकी में लगा रहा.  वह चाहती थी कि वही उस का जीवनसाथी बने. जबकि रामनिवास गांव और परिवार में अपनी इज्जत बनाए रखना चाहता था. वह नहीं चाहता था कि उस के प्यारमोहब्बत के चलते 2 परिवारों के बीच तनाव का महौल कायम हो जाए.

रानू मेहर के मायके में सभी इस बात से निश्चिंत हो गए थे कि रानू का घर बस गया है. उस ने कुंवारेपन में जो गलतियां कीं, अब उस के गांव के रामनिवास से मिलने में किसी को कोई आपत्ति नहीं थी. वह बेरोकटोक रामनिवास के घर चली जाती, उस की फेमिली वालों के साथ हंसीमजाक करती. इसी तरह रामनिवास भी रानू के मायके आने के बाद उस के घर जा कर एक बार जरूर मिल आता या फिर वे अपने पुराने प्रेम को ताजा करने के लिए तालाब के किनारे घंटों समय गुजार लते थे.

दूसरी तरफ रानू मेहर इसी उम्मीद में रहती थी कि एक न एक दिन रामनिवास सोलंकी जरूर उस के साथ शादी रचाएगा. इस उम्मीद के साथ वह अपने गांव आती रहती थी और रामनिवास से शादी करने का दबाव बनाती थी. जबकि वह कई बार उस से कन्नी काट चुका था. उस के रानू से बचने का कारण भी था. बातोंबातों में वह कई बार धमकी भी दे चुकी थी. वह बोल चुकी थी कि अगर उस ने शादी नहीं की, तब पुलिस के पास चली जाएगी. रेप का मुकदमा कर देगी. हालांकि उस ने बात को संभाल लिया और बोली कि वह मजाक कर रही है. ऐसा वह उस के साथ हरगिज नहीं करेगी.

उस रोज तो बात आईगई हो गई थी, लेकिन रामनिवास के दिमाग में रेप में फंसाए जाने की आशंका के कीड़े ने काटना शुरू कर दिया था. यही कारण था कि वह उस से दूरी बनाए रखना चाहता था. वह रानू को भूलने की कोशिश तो कर रहा था, लेकिन जब वह मायके आती थी, तब उस के उस साथ गुजारे हसीन रोमांस की यादें ताजा हो जाती थीं. उस रोज भी वैसा ही कुछ हुआ था, जब रामनिवास छत पर तन्हा बैठा था और उस से मिले बगैर रानू चली गई थी. वह मन मसोस कर रह गया था. उस के ठीक एक हफ्ते बाद ही 25 मई को रानू फिर मायके आई थी. आते ही सीधे रामनिवास को फोन किया. उसे तुरंत मिलने के लिए बुलाया.

उस वक्त रामनिवास गांव से बाहर गया हुआ था. उस ने 2 घंटे बाद आने को कहा, लेकिन रानू ने मिलने की बेसब्री दिखाई और कहा कि घर से बाहर किसी एकांत जगत पर मिलना चाहती है. इस पर रामनिवास ने तालाब के किनारे रात होने पर मिलने को कहा. उस ने समय तय कर लिया और छिप कर आने को कहा.

रानू ने ऐसा ही किया. वह गांव वालों की नजरों से बचती हुई 25 मई, 2025 की रात करीब 10 बजे तालाब के किनारे ओट ले कर बैठ गई. जल्द ही रामनिवास भी वहां पहुंच गया. आते ही मजाक किया, ”जानू! तैरने चलें!’’

”मजाक मत करो, आज में बहुत सीरियस मूड में हूं.’’

”क्यों, क्या बात हुई, पति से झगड़ कर आई हो?’’ रामनिवास बोला.

पति से तो नहीं, लेकिन तुम से जरूर झगडऩे आई हूं.’’ रानू बोली.

उस के बोलने के अंदाज से रामनिवास को लगा कि उस की मजाक का उस ने गंभीरता से जवाब दिया है. वह कुछ पल के सन्न सा रह गया.

”क्यों तुम से नहीं झगड़ सकती? मैं तुम से बहुत नाराज हूं. तुम से बहुत शिकायत है…’’ रानू बिफरती हुई बोली.

”शिकायत? किस बात की?…मेरी बीवी हो जो तुम्हारी शिकायतों को दूर करूं?’’ रामनिवास भी उसी के लहजे में बोला.

”तुम्हारी यही बात मुझे पसंद नहीं आती…मैं तुम्हारी प्रेमिका हूं…पहली प्रेमिका…मैं ने तुम्हें अपना सब कुछ सुपुर्द कर दिया…और तुम कहते हो मैं क्यों तुम्हारी शिकायत सुनूं?’’ रानू बोली.

”यही कहने के लिए बुलाया था?’’

”किस से कहूं अपने दिल की बात?’’

”पति से?’’

”उसे पसंद नहीं करती! तुम को मेरा पति बनना होगा, वरना मैं तूफान मचा दूंगी….अब और बहाना नहीं चलेगा? बहुत हो गया तुम्हारा आश्वासन!’’ रानू मेहर बोले जा रही थी.

”इस तरह से बात करने की जरूरत नहीं है. मेरी भी मजबूरी है. अभी तुम से शादी नहीं कर सकता. मेरा कोई ठोस काम नहीं है. मुझे गांव में ही रहना है. खेती से आमदनी करनी है. अगर कहीं दूसरे शहर में कामधंधा मिल जाए, तब शादी की बात सोची जा सकती है.’’

”आज तुम अपने वादे से भी मुकर गए.’’

”ऐसा ही समझो…इसी में हम दोनों की भलाई है. हम लोग एक ही गांव के हैं. हम लोगों का घर 10-12 घरों  के अंतर पर है. शादी कर हम लोग इसी गांव में कैसे रह पाएंगे? तुम अब शादीशुदा हो. मैं किसी ब्याहता को कैसे अपनी पत्नी बना सकता हूं. तुम्हारे मायके और ससुराल वाले हम पर मुकदमा ठोक देंगे, तब क्या होगा… कोर्टकचहरी के चक्कर में नहीं पडऩा चाहता.’’ रामनिवास ने अपने मन की बात कह दी. उस ने एक तरह से अपना फैसला ही सुना दिया कि वह अब उस के साथ शादी नहीं कर सकता.

”कोर्टकचहरी के चक्कर में तो ऐसे भी आ जाओगे…उस रोज मजाक में बोली थी, आज वैसा नहीं है…तुम पर रेप का मुकदमा कर दूंगी. सीधे जेल जाओगे.’’ रानू गुस्से में आ गई थी और वहां से जाने के लिए उठ खड़ी हुई थी.

उस की तल्ख बातें सुन कर रामनिवास का दिमाग भन्ना गया था. दिलोदिमाग में तेजाबी तूफान उमडऩे लगा था. उस ने महसूस किया कि उस के हाथपैर बेकाबू हो गए हैं. अगले ही पल रामनिवास के दोनों हाथ रानू मेहर की गरदन को दबोच चुके थे. अचानक इस हमले के लिए रानू तैयार नहीं थी. अपने दोनों हाथों से रामनिवास की पकड़ से मुक्त होने की कोशिश करने लगी, लेकिन उस की बलिष्ठ भुजाओं की मजबूती के आगे असफल रही.

कुछ सेकेंड में ही उस की गरदन झूल गई. उस की मिमियाती आवाज भी बंद हो गई. रामनिवास के हाथों की पकड़ ढीली हुई, तब रानू जमीन पर धड़ाम से गिर पड़ी. सामने गिरी रानू की लाश को रामनिवास ने 2 बार ठोकरें मारी और भुनभुनाया, ”बड़ा आई थी मुझे जेल भेजने…’’

अगले रोज रानू के अचानक लापता हो जाने पर उस के मायके वाले परेशान हो गए. उस के बारे में पता लगाना शुरू किया. उन्हें आश्चर्य हुआ कि वह कभी भी इस तरह घर से बिना कहे कहीं नहीं जाती थी. गांव वालों से पूछताछ की गई. किसी ने उस के बारे में कुछ नहीं बताया. उस के पापा को बहुत चिंता हुई. उन्होंने रानू की ससुराल वालों से उस की तहकीकात की. उन्होंने उस के ससुराल में नहीं होने की पुष्टि की. उस के पति ने गरोठ थाने पर रानू मेहर की गुमशुदगी की सूचना लिखवा दी. जिस के बाद फेमिली वाले और पुलिस उस की तलाश में जुट गए. रानू के घर से लापता होने के 4 दिन बाद भी कहीं पता नहीं चला.

अचानक 29 मई, 2025 को गांधी सागर जलाशय के बैकवाटर से एक अज्ञात महिला की लाश मिली. पुलिस को शक हुआ कि लाश मृतका रानू मेहर की हो सकती है. लाश की पहचान के लिए पुलिस ने मृतका के घर वालों को बुलाया, लेकिन शव की स्थिति इतनी खराब थी कि वे उसे नहीं पहचान पा रहे थे. इसलिए पुलिस ने फेमिली वालों के डीएनए से मृतका के डीएनए की जांच करवाई. रिपोर्ट आने के बाद मृतका की पहचान हो पाई. पहचान होते ही मृतका के पापा ने गांव के ही रामनिवास सोलंकी पर हत्या की आशंका जताई, क्योंकि रानू के गायब होने के बाद से वह भी गांव से गायब था. पुलिस ने जल्द ही आरोपी को गिरफ्तार कर उस से सख्ती से पूछताछ की, जिस पर आरोपी ने मृतका की हत्या करना कबूल किया.

आरोपी रामनिवास सोलंकी ने बताया कि रानू मेहर शादीशुदा होते हुए भी उस से शादी कर साथ रहने को कहती थी. जबकि वह अविवाहित था, लेकिन सामाजिक बंधन के चलते उस का रानू से शादी करना संभव नहीं था. इसलिए रानू की जिद से परेशान हो कर उस ने उस की हत्या कर दी. इस के बाद शव को पानी में फेंक दिया था. पुलिस ने आरोपी रामविलास सोलंकी पर हत्या की धाराओं में मामला दर्ज कर उसे कोर्ट में पेश कर जेल भेज दिया. इस मामले की जांच गरोठ थाने के एसएचओ हरीश मालवीय कर रहे थे. MP Crime News

 

 

UP Crime News : दहेज का लालच जिंदा जली निक्की

UP Crime News : एक तरफ पूरे देश में दहेज हत्या के झूठे मामलों में परिजनों को फंसाने जैसे अपराधों पर बहस छिड़ी है, वहीं इसी बीच ग्रेटर नोएडा में विपिन भाटी और उस के फेमिली वालों पर 27 वर्षीय पत्नी निक्की को जला कर मारने का आरोप लगा है. क्या वास्तव में निक्की दहेज लोभियों के लालच में जलाई गई या इस के पीछे की सच्चाई कुछ और है? पढ़ें रोंगटे खड़े कर देने वाली यह कहानी.

दिल्ली के पास ग्रेटर नोएडा के दादरी इलाके के रूपवास गांव की रहने वाली निक्की और उस की बड़ी बहन कंचन की शादी 27 दिसंबर, 2016 में ग्रेटर नोएडा के सिरसा गांव में एक ही परिवार के 2 भाइयों से हुई थी. बड़े भाई रोहित से भिखारी सिंह की बड़ी बेटी कंचन और छोटे भाई विपिन से छोटी बेटी निक्की की शादी हुई थी. भिखारी सिंह पायला कभी गांव के बड़े काश्तकार थे, लेकिन ग्रेटर नोएडा के विकास के साथ उन की जमीनें ग्रेटर नोएडा अथौरिटी ने अधिग्रहीत कर लीं.

मुआवजे के रूप में मिली करोड़ों की रकम ने भिखारी सिंह के परिवार की जिंदगी का कायाकल्प कर दिया. परिवार में पत्नी वसुंधरी के अलावा 2 बेटियां और 2 बेटे रोहित व अतुल थे. रोहित की 2016 में शादी भी हो चुकी है, लेकिन पारिवारिक विवाद के कारण अब उस की पत्नी मीनाक्षी अपने मायके में है.

दूसरी तरफ ग्रेटर नोएडा के सिरसा गांव में रहने वाले सत्यवीर सिंह के परिवार में पत्नी दयावती के अलावा 2 बेटे हैं रोहित व विपिन. सत्यवीर सिंह अपने गांव के एक छोटे काश्तकार थे. उन की हैसियत भिखारी सिंह जैसी तो नहीं थी, लेकिन उन की जमीन का भी कुछ मुआवजा मिला था, जिस से उन्होंने गांव में अच्छा सा घर बनवा लिया. साथ ही घर के बाहरी इलाके में कुछ दुकानें बना कर किराए पर दे दीं. इस के अलावा उन्होंने एक किराना की दुकान खुद भी खोल ली. इसी दुकान पर सत्यवीर व उन के दोनों बेटे रोहित और विपिन भी बैठने लगे. उन की आमदनी के बस यही जरिया था.

निक्की (27 वर्ष) व कंचन (29 वर्ष)  की शादी दोनों सगे भाइयों से तब हुई, जब देश में नोटबंदी के बाद ज्यादातर लोगों के पास नकदी की कमी थी. इसीलिए उस वक्त दोनों बहनों की शादी सादगीपूर्ण तरीके से जरूर हुई, लेकिन नोटबंदी के बावजूद भिखारी सिंह ने दिल खोल कर पैसा खर्च किया.

बाद में हालात सामान्य होने पर निक्की के पिता भिखारी सिंह ने शादी में दिए जाने वाले सामान की भरपाई कर दी. निक्की के पति को शादी के बाद एक स्कौर्पियो कार के अलावा आभूषण, नकदी और भोग विलास की हर चीज दी. वक्त धीरेधीरे गुजरता गया. निक्की की बहन कंचन के 2 बच्चे हुए. बेटी लाव्या (7 साल) व बेटा विनीत (4 साल), जबकि निक्की का एक बेटा है जो अब करीब 6 साल का है.

विपिन कोई काम नहीं करता था,  इसलिए निक्की ने कुछ साल पहले अपनी बहन के साथ मिल कर ससुराल के घर की ऊपरी मंजिल पर एक ब्यूटी पार्लर खोला था. पार्लर का काम काफी अच्छा चल रहा था, लेकिन ससुराल वालों के दबाव में कुछ ही महीने पहले उन्हें ब्यूटी पार्लर बंद करना पड़ा.

शादी के 9 साल बाद अचानक 21 अगस्त, 2025 की देर शाम को बड़ी बहन कंचन ने ग्रेटर नोएडा के पुलिस कंट्रोल रूम को सूचना दी कि शाम करीब साढ़े 5 बजे उस की सास दयावती और देवर विपिन ने उस की बहन निक्की को ज्वलनशील पदार्थ डाल कर जला दिया है. सास ने अपने हाथ में ज्वलनशील पदार्थ लिया और विपिन को पकड़ाया, जिसे विपिन ने निक्की के ऊपर डाल दिया. साथ ही निक्की के गले पर हमला किया. जिस के बाद उस की बहन बेहोश हो गई. जब मैं ने इस का विरोध किया तो मेरे साथ भी मारपीट की गई. कंचन ने पुलिस को दी शिकायत में कहा कि उस का पति रोहित भाटी और ससुर सत्यवीर मौके पर मौजूद थे.

गंभीर हालत में निक्की को पड़ोसियों की मदद से वह फोर्टिस हौस्पिटल एच्छर, ग्रेटर नोएडा ले गई, जहां हालत बिगडऩे पर उसे दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल रेफर कर दिया गया. वहां इलाज के दौरान उस की मौत हो गई. कंचन ने पुलिस को बताया कि जिस समय उस की बहन की हत्या की गई, वह मौके पर थी, लेकिन वह चाह कर भी कुछ नहीं कर सकी.

बहन की मौत से गुस्साई कंचन ने अगली सुबह ससुरालियों पर दहेज हत्या का आरोप लगाते हुए कासना कोतवाली में तहरीर दे कर पिता सतवीर भाटी, सास दयावती और दोनों बेटों रोहित व विपिन के खिलाफ बीएनएस की धारा 103(1) (हत्या), 115(2) (चोट पहुंचाना) और 61(2) के तहत केस दर्ज कर दिया.

ससुराल वालों द्वारा दहेज की मांग के लिए निक्की की जला कर हत्या करने की खबर अगली सुबह पूरे नोएडा व एनसीआर के साथ गुर्जर समाज के बीच जंगल की आग की तरह फैल गई थी. जगहजगह निक्की के हत्यारों की गिरफ्तारी और न्याय की मांग के लिए धरनेप्रर्दशन होने लगे. हाथों में ‘जस्टिस फौर निक्की बहन’ की तख्ती और बैनर ले कर दरजनों  बसों, कारों, ट्रैक्टर ट्रौली, दोपहिया ले कर सैकड़ों ग्रामीणों के साथ परिजन कासना कोतवाली जा पहुंचे. इस दौरान उन के साथ किसान संगठन और समाजवादी छात्र से जुड़े लोग भी रहे.

मृतका की बहन कंचन का साफ कहना था कि उस की बहन को कई दिनों से परेशान किया जा रहा था. साजिश के तहत जला कर उस की हत्या की गई है. उस का पति विपिन उस से पूरी रात मारपीट करता था. वह अपनी बहन को इंसाफ दिलाना चाहती है. जिस तरह से उस की बहन तड़पतड़प कर मरी, उसी तरह से आरोपियों को भी फांसी की सजा मिलनी चाहिए.

कोतवाली प्रभारी धर्मेंद्र शुक्ल व ग्रेटर नोएडा जोन के एडिशनल डीसीपी सुधीर कुमार पर आरोपियों को पकडऩे का दबाव लगातार बढ़ रहा था. फेमिली वालों का सीधा आरोप था कि विपिन भाटी व उस के घर वाले निक्की को दहेज के लिए लगातार परेशान कर रहे थे. पिछले कुछ समय से वे निक्की पर दबाव डाल रहे थे कि जो मर्सिडीज गाड़ी भिखारी सिंह ने अपने लिए खरीदी है, वह उसे गिफ्ट की जाए तथा कामधंधा शुरू करने के लिए 35 लाख रुपए नकद दिए जाएं.

परिजनों का साफ आरोप है कि शादी के बाद से ही विपिन लगातार कुछ न कुछ मांग करता रहता था, लेकिन शादी के 9 साल बाद अब उस की मांगें पूरी करना उन के वश से बाहर हो गया था.

वायरल वीडियो से पेचीदा हुआ मामला

घटना के दौरान घर में मौजूद कंचन ने अपनी छोटी बहन के साथ मारपीट और आग के हवाले करने का वीडियो भी बनाया था. इस दौरान निक्की का बेटा भी मौजूद था. महिला को आग लगाने का वीडियो सोशल मीडिया पर अगले दिन जम कर वायरल हो गया. वीडियो में दिखाई दे रहा है कि विपिन और मृतका की सास निक्की के बाल खींच कर मारपीट करते हैं. साथ ही एक दूसरे वीडियो में आग लगने के दौरान निक्की सीढिय़ों से उतरती हुई दिख रही है.

वीडियो में देखा जा सकता है कि आग में झुलसने के दौरान उस के शरीर के कपड़े भी जल जाते हैं. वह पूरी तरह से झुलसने के बाद बदहवास हालत में जमीन पर बैठी है. वहीं एक अन्य वीडियो में निक्की के बेटे को यह कहते हुए सुना जा सकता है कि उस के पापा ने मम्मा को लाइटर से जलाया.

कंचन के बयान और सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो के बाद ग्रेटर नोएडा पुलिस पर दबाव इस कदर बढ़ा कि पुलिस की कई टीमें गठित कर दबिशें शुरू की गईं. परिणामस्वरूप निक्की की हत्या में नामजद चारों आरोपियों विपिन भाटी, उस के पिता सत्यवीर भाटी, भाई रोहित भाटी व मां दयावती को अलगअलग इलाकों से गिरफ्तार कर लिया गया.

लेकिन विपिन भाटी को जब पुलिस ज्वलनशील पदार्थ बरामद करने के लिए ले जा रही थी तो उस ने एक दरोगा का रिवौल्वर छीन कर भागने की कोशिश की. विपिन ने पुलिस टीम पर फायर किया तो आत्मरक्षा में पुलिस ने भी जवाबी फायर किया, जिस में पुलिस की गोली विपिन की टांग में लगी. इस के बाद विपिन पर एक अन्य केस भी दर्ज हो गया. लेकिन पुलिस हिरासत में विपिन ने जो बयान मीडिया को दिया, वह इशारा करता है कि दाल में कुछ काला जरूर है. उस ने मीडिया से कहा कि उस ने अपनी पत्नी को नहीं जलाया और मारा, बाकी लड़ाईझगड़ा तो हर फेमिली में होता है. इस से ज्यादा मैं कुछ नहीं कहूंगा.

एक कत्ल 2 कहानी से गहराता रहस्य

निक्की भाटी मर्डर केस की जांच जैसेजैसे आगे बढ़ रही है, नए सबूत, लोगों के बयान और कुछ नए वीडियो सामने आ रहे हैं, वैसेवैसे कहानी एक रहस्यमयी पहेली में बदलती जा रही है. 27 वर्षीय निक्की की मौत के बाद आरोपप्रत्यारोप का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा. मायके वाले इसे साफसाफ दहेज हत्या करार दे रहे हैं. दूसरी तरफ आरोपी विपिन भाटी तथा उस के कुछ पड़ोसियों का कहना है कि दोनों के बीच तनाव की असली वजह सोशल मीडिया पर निक्की और कंचन की मौजूदगी थी.

इस केस की जांच कर रही कासना पुलिस असमंजस में है. अभी पुलिस भी मिले सबूतों के आधार पर पैसों और गाड़ी की मांग को ही हत्या की वजह मान रही है, लेकिन साथ ही पुलिस नए सिरे से जांच भी कर रही है. दरअसल, जांच टीम के सामने अब 2 परस्पर विरोधी कहानियां हैं.

पहली कहानी यह कि निक्की भाटी को उस के पति और ससुराल वाले लगातार दहेज के लिए प्रताडि़त करते थे. उस से 35 लाख रुपए की मांग की जा रही थी और यही प्रताडऩा उस की मौत का कारण बनी. दूसरी कहानी यह है कि निक्की और उस की बड़ी बहन कंचन इंस्टाग्राम पर रील्स बनाया करती थीं. यह बात उन के पति और ससुराल वालों को बुरी लगती थी. इस वजह से उन के बीच अकसर तनाव होता था, जो खूनी अंजाम तक पहुंच गया.

निक्की भाटी की ससुराल सिरसा गांव में है. उस के ससुराल के आसपास के लोगों का कहना है कि निक्की और कंचन अपने घर से छोटा ब्यूटी पार्लर चलाती थीं. इस के साथ ही दोनों बहनें इंस्टाग्राम पर मेकओवर रील्स बना कर पोस्ट करती थीं. इन रील्स में वे साधारण लुक से ट्रांजिशन कर तैयार और स्टाइलिश अंदाज में नजर आती थीं. ये रील्स उन के पतियों, विपिन और रोहित भाटी को नागवार गुजरती थीं. एक पड़ोसी ने बताया, रील्स बनाने को ले कर उन के बीच अकसर झगड़ा हुआ करता था.

बताया जा रहा है कि इसी साल 11 फरवरी को निक्की व विपिन और कंचन व रोहित के बीच जम कर झगड़ा हुआ था. इस दौरान दोनों बहनों के साथ मारपीट भी हुई थी. इस वजह से दोनों बहनें अपने मायके रूपबास गांव चली गई थीं.

लड़कियों को मायके में देख कर आसपास के लोग आवाज उठाने लगे तो पंचायत बैठाई गई. 18 मार्च, 2025 को सुलह इस शर्त पर हुई कि दोनों बहनें आगे से रील्स नहीं बनाएंगी. वे मान भी गईं, लेकिन चंद दिनों बाद दोनों ने फिर से वीडियो पोस्ट करना शुरू किया और तनाव दोबारा गहराने लगा.

विपिन भाटी के चचेरे भाई देवेंद्र ने बताया कि जिस समय घटना हुई, उस समय विपिन घर पर नहीं था. इधर, निक्की को जिस अस्पताल में भरती कराया गया था, उस अस्पताल की रिपोर्ट भी सामने आ गई है. उस में बताया गया है कि निक्की की मौत सिलेंडर फटने के कारण आग लगने से हुई है. हालांकि जब पुलिस घटनास्थल पर पहुंची तो वहां सिलेंडर फटने के कोई सबूत नहीं मिले. पर ज्वलनशील पदार्थ का डिब्बा और लाइटर मिला है. वहीं, जिस वक्त घर में निक्की को आग लगी, उस वक्त के सीसीटीवी में उस का पति विपिन घर के पास एक दुकान के बाहर खड़ा दिखाई दे रहा है. इन तमाम सबूतों ने निक्की की मौत को बुरी तरह उलझा दिया है.

मौत की जांच में आया नया मोड़

नया मोड़ लेती निक्की भाटी की मौत में निक्की के कमरे से बरामद ज्वलनशील पदार्थ और कई नए वीडियो क्लिप ने पुलिस जांच की दिशा ही बदल दी है. अब नए सिरे इस घटना की जांच की जा रही है. इस मामले की जांच कर रही पुलिस को निक्की के कमरे से ज्वलनशील तरल पदार्थ बरामद हुआ, जिसे फोरैंसिक जांच के लिए भेजा गया. इस के साथ ही 21 अगस्त की घटना से जुड़े कई छोटे वीडियो क्लिप भी सामने आए हैं.

इन की वजह से पूरी जांच की दिशा बदल गई है. एक नया वीडियो सामने आया है, जिस में सास दयावती अपने बेटे विपिन और बहू निक्की को झगड़े के दौरान अलग करती नजर आ रही है. एक दूसरा वीडियो, जिसे निक्की की बहन कंचन ने शूट किया था, उस में एक आवाज सुनाई देती है, ‘ये क्या कर लिया.’ इस बयान और वीडियो के सामने आने के बाद अब नए सिरे से केस जांच की जा रही है. पुलिस जांच के दौरान एक सीसीटीवी फुटेज भी मिला है. इस में विपिन घटना से ठीक पहले अपने घर के बाहर खड़ा नजर आया है. इस के अलावा ग्रेटर नोएडा के जारचा इलाके में पिछले साल अक्तूबर में दर्ज एक पुराने मामले की भी जांच की जा रही है, जिस में विपिन पर प्रीति नामक लड़की के साथ मारपीट करने और उसे धमकी देने का आरोप लगा था.

इस के साथ ही एक निजी अस्पताल के मेमो के अनुसार निक्की घर में गैस सिलेंडर फटने से झुलसी थी. उसे विपिन का चचेरा भाई देवेंद्र अस्पताल ले कर पहुंचा था. वहीं दूसरी ओर बहन कंचन का आरोप है कि यह सुनियोजित दहेज हत्या थी. देवेंद्र का बयान भी मामले को उलझा रहा है. उस का कहना है कि निक्की बारबार पानी मांग रही थी. उसे सांस लेने में दिक्कत हो रही थी. इसी बीच निक्की और कंचन के पिता भिखारी सिंह ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और सीएम योगी आदित्यनाथ से इस मामले में हस्तक्षेप की मांग की है. उन्होंने आरोप लगाया कि उन की बेटी को दहेज के लिए जिंदा जला दिया गया.

पुलिस की जांच अब 3 बिंदुओं पर टिक गई है. पहला ज्वलनशील पदार्थ की फोरैंसिक रिपोर्ट, नए वीडियो क्लिप और कंचन के बदलते बयान. यही 3 कडिय़ां यह तय करेंगी कि निक्की की मौत गैस सिलेंडर हादसा थी या एक साजिश के तहत की गई दहेज हत्या. निक्की भाटी की डेथ मिस्ट्री उलझती क्यों जा रही है, इस का जवाब सिर्फ निक्की की मौत के सच से ही नहीं लगेगा, बल्कि निक्की की भाभी यानी भाई की पत्नी के आरोप भी इस मामले को उलझा रहे हैं.

यह मामला अब महज एक केस नहीं, परिवार के भीतर छिपी 2 सच्चाइयों की जंग का रूप ले चुका है. दरअसल, निक्की की भाभी मीनाक्षी ने कहा कि दहेज की आग ने उस की शादी को भी खत्म कर दिया है. मीनाक्षी का कहना है कि साल 2016 में भिखारी सिंह पायला के बेटे रोहित पायला से उस की शादी हुई. पिता ने दहेज में सियाज कार और 20 तोला सोना दिया. लेकिन एक्सीडेंट का बहाना बना कर कार एक हफ्ते में बेच दी गई.

इस के बाद ताने, मारपीट और अपमान का सिलसिला शुरू हुआ और इस की रफ्तार बढ़ती गई. सास और दोनों ननद उस के बाल पकड़ कर घसीटती थीं. पति भी मारपीट करता था. एक बार तो उस ने गोली तक चला दी. मीनाक्षी का आरोप सिर्फ हिंसा तक सीमित नहीं है. वह दोहरी नीति की बात करती है. वह कहती है, ”मुझे फोन रखने तक की इजाजत नहीं थी, लेकिन बेटियों के लिए पार्लर, सोशल मीडिया पर रील्स, इंस्टाग्राम, सब मंजूर था. यदि बहू के लिए नियम थे तो बेटियों के लिए क्यों नहीं? एक जैसी सख्ती क्यों नहीं?’’

मीनाक्षी के मुताबिक उस की शादी के 9 साल हो गए, लेकिन वह मुश्किल से 9 महीने ही ससुराल में रह पाई. दहेज पर पंचायतें बैठीं. एक नहीं, 100 बार पंचायत हुई. हर बार नतीजा यही कि बहू घर छोड़ दे. साल 2018 में दहेज प्रताडऩा का मामला दर्ज हुआ, लेकिन साल 2020 में दबाव और समझौते की राजनीति के बीच केस वापस लेना पड़ा. उसी साल पिता चल बसे. मीनाक्षी कहती है, ”जिस दिन पापा गए, उसी दिन मेरे लिए सब कुछ खत्म हो गया. मुझे बेघर कर दिया गया. मेरी सारी उम्मीदें खत्म हो गईं. तब से मैं अपने मायके में हूं.’’

मीनाक्षी के सारे आरोपों के बीच ससुर भिखारी सिंह पायला जवाब देते हुए कहते हैं, ”मेरे बेटे रोहित ने कभी मीनाक्षी पर हाथ नहीं उठाया. मेरे पास सारे सबूत हैं. हमारे दरवाजे हमेशा मीनाक्षी के लिए खुले हैं. मीनाक्षी कभी भी आ कर यहां रह सकती है.’’ वे अपने परिवार के पक्ष में खड़े दिखते हैं और मीनाक्षी की बातों को साफतौर पर खारिज करते हैं. फिलहाल ग्रेटर नोएडा पुलिस नए सबूतों और बयानों के आधार पर इस केस की जांच नए सिरे से कर रही है. कंचन व निक्की के तीनों बच्चे अपने नाना के पास हैं. परिवार अब कंचन को भी उस की ससुराल में भेजना नहीं चाहता.

विरोधाभासी सबूतों के कारण कासना पुलिस भले ही विपिन भाटी व उस के परिजनों को निक्की भाटी की दहेज के लिए हत्या करने के आरोप में जेल भेज कर उन पर मुकदमा चलाए. लेकिन यह कहना अभी जल्दबाजी हो सकती है कि निक्की की मौत एक सोचीसमझी साजिश है. हो सकता है यह एक हादसा भी हो.

दहेज ने ली संजू की जान, बच्ची संग जल मरी

राजस्थान के जोधपुर में ग्रेटर नोएडा जैसी दिल दहला देने वाली वारदात सामने आई है. यहां दहेज प्रताडऩा से तंग आ कर एक स्कूल टीचर ने अपनी मासूम बच्ची के साथ जान दे दी. पीडि़ता की पहचान 32 वर्षीय संजू बिश्नोई के रूप में हुई है. उस ने अपनी 3 साल की बेटी को गोद में ले कर पेट्रोल डाला और खुद को आग के हवाले कर दिया. बच्ची की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि उस ने अस्पताल में दम तोड़ दिया.

एक पुलिस अधिकारी ने बताया कि यह घटना 22 अगस्त, 2025 की है. महिला ने जब खुद को और अपनी बेटी को आग लगाई, उस वक्त उस का पति दिलीप बिश्नोई घर पर मौजूद नहीं था. अचानक धुआं उठता देख पड़ोसी घबराए और तुरंत महिला के पापा को फोन किया. जब परिवार घर पहुंचा तो उन्होंने संजू को जलती हालत में पाया. बच्ची ने उन की आंखों के सामने ही दम तोड़ दिया.

सूचना मिलने पर पुलिस मौके पर पहुंची. मंडोर के एसीपी नागेंद्र कुमार ने बताया कि बच्ची की मौके पर ही मौत हो गई थी, जबकि महिला का जोधपुर के महात्मा गांधी अस्पताल में इलाज के दौरान शनिवार को निधन हो गया. उस के पिता ने 24 अगस्त को स्थानीय थाने में लिखित शिकायत दर्ज कराई. इस में साफतौर पर आरोप लगाया गया कि उस की बेटी को लगातार दहेज के लिए प्रताडि़त किया जा रहा था. इस से तंग आ कर बेटी ने बच्ची सहित जान दे दी.

पुलिस ने पीडि़ता के पिता की शिकायत के आधार पर उस के पति दिलीप बिश्नोई, सास, ससुर और ननद के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज कर लिया है. पीडि़ता के फेमिली वालों ने यह भी आरोप लगाया है कि ससुराल वालों ने मिल कर संजू को आत्महत्या के लिए उकसाया. पुलिस को घटनास्थल से एक नोट भी बरामद हुआ है, जिस में संजू ने अपने ससुराल वालों पर गंभीर आरोप लगाए हैं. एसीपी ने बताया कि मोबाइल फोन जब्त कर लिया गया है और जांच के लिए फोरैंसिक साइंस लैब भेजा गया है. मोबाइल से कई अहम जानकारियां सामने आने की उम्मीद है.

बताया जा रहा है कि संजू बिश्नोई साल 2021 से एक सरकारी सीनियर सेकेंडरी स्कूल में टीचर के पद पर तैनात थी. 10 साल पहले उस की शादी दिलीप बिश्नोई के साथ हुई थी. उसी समय से उस का पति और ससुराल वाले उसे प्रताडि़त कर रहे थे. पिछले कुछ समय से ससुराल वालों के साथ झगड़ा ज्यादा बढ़ गया था. शनिवार को भी उन के बीच विवाद हुआ था. इस की वजह से संजू बहुत नाराज और दुखी थी. उस ने स्कूल से वापस आने के बाद अपनी बच्ची को गोद में लिया और अपने ऊपर पेट्रोल छिड़क कर आग लगा ली. दोनों शवों का महात्मा गांधी अस्पताल में पोस्टमार्टम कराया गया.

गाड़ी न मिलने पर शालवी की बलि

बीहार के पश्चिमी चंपारण में बगहा जिले के चौतरवा थाना क्षेत्र के अहिरवलिया गांव में 24 अगस्त की रात दहेज के लिए एक विवाहिता शालवी देवी की हत्या का मामला प्रकाश में आया है. मृतका लगुनाहा-चौतरवा पंचायत की मुखिया शैल देवी की 23 वर्षीय बहू शालवी देवी थी.  घटना के संबंध में बताया जाता है कि मुखिया शैल देवी के बेटे अमित शाही की शादी जनवरी, 2023 में शालवी के साथ धूमधाम से हुई थी. शादी के बाद शालवी अपनी ससुराल अहिरवलिया आई, जहां कुछ दिनों तक उसे ठीक से रखा गया.

इधर, मृतका के चाचा व बेतिया के सिकटा थाने के जगीरहा निवासी तथा बलथर पंचायत के मुखिया सुनील सिंह ने आरोप लगाया कि 27 जनवरी, 2023 को उन की भतीजी शालवी की शादी अहिरवालिया निवासी स्व. घनश्याम शाही एवं वर्तमान मुखिया शैल देवी के बेटे अमित शाही से हुई थी. शादी के बाद से ही चार पहिया वाहन की मांग को ले कर शालवी को बारबार प्रताडि़त किया जा रहा था. बीच में कई बार मेरे द्वारा अहिरवलिया आ कर मामले में दोनों परिवार के बीच कई बार पंचायत भी हुई. शालवी द्वारा बारबार फोन पर कहा जाता था कि आप लोग गाड़ी दे दीजिए. नहीं तो ये लोग मुझे मार डालेंगे.

2 महीने पहले अहिरवलिया आ कर अमित शाही से उन्होंने खुद कहा था कि मुझे 6 महीने का समय दीजिए, आप को मैं स्वयं गाड़ी दूंगा. अभी 2 माह भी नहीं हुए कि ससुराल वालों ने मेरी भतीजी को बड़ी बेरहमी से प्रताडि़त कर मार डाला. आरोप लगाया कि मेरी भतीजी के हत्यारों ने आंखें फोडऩे के बाद उस का हाथ भी तोड़ दिया था. संभावना है कि उस की हत्या तकिया से मुंह दबा कर की गई थी. कारण कि ससुराल का कोई भी व्यक्ति घर पर नहीं है. लोगों ने पुलिस को फोन किया. तब पुलिस ने पहुंच कर शव को अपने कब्जे में लिया है.

शादी के अभी मात्र 17 महीने हुए हैं. उसे 7 माह की एक बच्ची भी है. अस्पताल में डौ. अशोक कुमार तिवारी के नेतृत्व में 3 सदस्यीय टीम डौ. अरुण कुमार, डौ. तारिक नदीम ने मृतका का पोस्टमार्टम किया. मामले में एसएचओ राहुल कुमार ने बताया कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही मौत के कारणों का पता लग पाएगा. UP Crime News

 

 

Delhi Crime News : ट्रिपल मर्डर – बेटे ने किया मम्मीपापा और भाई का कत्ल

Delhi Crime News : एक दिल दहला देने वाली वारदात ने पूरे इलाके को दहशत में डाल दिया है. इस खौफनाक घटना में एक शख्स ने बेरहमी से अपानी ही फेमिली के 3 लोगों की हत्या कर दी. घटना इतनी भयावह थी कि जिस ने भी सुना वह सन्न रह गया. खून से लथपथ लाशें देखकर लोग दंग रह गए. सवाल यह उठता है कि आखिर कौन था वह दरिंदा जिस ने पूरे परिवार को खत्म करने की साजिश रची और क्यों की यह दिल दहला देने वाली वारदात? आइए जानते हैं सनसनीखेज क्राइम की पूरी यह पूरी खबर-

यह दर्दनाक घटना देश की राजधानी दिल्ली के मैदानगढ़ी क्षेत्र में स्थित खरक रिवाड़ गांव की है, जहां 20 अगस्त, 2025 को एक ही परिवार के 3 लोगों की हत्या कर दी गई. पुलिस को सूचना मिलने पर एक घर से तीन लाशें बरामद हुईं, जिनमें 2 पुरुष और एक महिला शामिल थी. मृतकों की पहचान प्रेम सिंह (50), रजनी (45) और ऋतिक के रूप में हुई.

मौके पर पहुंचकर पुलिस ने पूरे घर को सील कर दिया और सबूत जुटाने शुरू कर दिए. जांच में सामने आया कि महिला रजनी की हत्या बड़ी ही बेरहमी से उस का मुंह बांधकर की गई थी.

दक्षिणी दिल्ली के  इस तिहरे हत्याकांड ने सनसनी फैला दी. डीसीपी ने बताया कि पीसीआर काल में जानकारी दी गई थी कि एक लड़के ने हाथ काट लिया है और खून बह रहा है. पुलिस मौके पर पहुंची तो ग्राउंड फ्लोर पर खून से लथपथ 2 शव और पहली मंजिल पर एक महिला का शव मिला, जिसका मुंह बंधा था. पुलिस को शक है कि छोटे बेटे ने ही यह वारदात की और वह फरार हो गया. छोटा बेटा नशे का आदी था. इसलिए घर में रोजाना झगड़ा किया करता था. जिससे बेटे ने धारदार हथियार और ईंटपत्थर से हमला कर तीनों की जान ले ली.

अब पुलिस ने तीनों शवों की तसवीरें ले कर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिए हैं और जांच शुरू कर दी है. पुलिस अब घर के लापता सदस्य की तलाश कर रही है. अधिकारियों ने बताया कि घर से दुर्गंध आने पर पड़ोसियों ने सूचना दी थी. मौके पर पहुंचने पर हत्याकांड का खुलासा हुआ. शवों को पोस्टमार्टम के लिए भेज ने के बाद पुलिस ने मामले की जांच तेज कर दी गई है. Delhi Crime News

Hindi Crime Story : हनीमून में बीवी लाई मौत

Hindi Crime Story : 21 वर्षीय राज कुशवाहा इंदौर में स्थित सोनम रघुवंशी (24 वर्ष) के भाई की प्लाईवुड फैक्ट्री में नौकरी करता था. वहीं पर सोनम को राज कुशवाहा से प्यार हो गया. दोनों ने जीवन भर साथ रहने का वादा कर लिया. इसी दौरान फेमिली वालों ने सोनम की शादी राजा रघुवंशी से कर दी. फिर प्रेमी राज कुशवाहा के साथ मिल कर सोनम ने हनीमून के बहाने पति राजा रघुवंशी को ठिकाने लगाने की ऐसी योजना बनाई, जिस की गूंज पूरे देश में फैल गई.

सोनम रघुवंशी नहीं चाहती थी कि उस की शादी उस के प्रेमी राज कुशवाहा के अलावा किसी और के साथ हो, लेकिन उस के न चाहते हुए भी पेरेंट्स ने उस की शादी राजा रघुवंशी के साथ तय कर दी थी. शादी तय हो जाने के बाद वह बहुत परेशान थी, क्योंकि तनमन से वह प्रेमी राज की थी. इसलिए वह ताउम्र उसी के साथ रहना चाहती थी. उस ने प्रेमी को फोन कर कहा, ”राज, पापा ने मेरी शादी तय कर दी है. और मालूम है शादी की तारीख क्या है, 11 मई 2025.’’

”शादी से क्या होता है सोनम, कागज के एक टुकड़े और कुछ मंत्र पढ़ देने से कोई रिश्ता नहीं बनता.’’ राज ने उसे आश्वस्त करते हुए कहा.

”राज, मैं किसी और की नहीं हो सकती. मैं सिर्फ तुम्हारी हूं और अगर तुम ने मुझे नहीं अपनाया तो मैं सच कह रही हूं, मैं मर जाऊंगी. आज वो जो लड़का मुझे देखने आया था राजा रघुवंशी, वो मुझे देख कर मुसकरा रहा था. जिसे देख कर मेरे अंदर ऐसी आग लग रही थी कि एक घूंसा मार कर उस की वो मुसकान वहीं दबा दूं. पर पापा वहीं थे, इसलिए कुछ कर नहीं पाई. लेकिन मेरी बात ध्यान से सुन लो राज, अगर तुम ने मेरा साथ नहीं दिया तो मैं दुनिया में ऐसा तूफान ला दूंगी कि लोग मेरे नाम से भी डरेंगे. मैं सब कुछ जला दूंगी खुद को, इस दुनिया को और हर रिश्ते को.’’

”तुम मेरी थी, मेरी हो और मेरी ही रहोगी सोनम,’’ राज ने कहा.

”मैं सिर्फ तुम्हारे लिए बनी हूं राज, किसी और के लिए नहीं.’’

”चिंता मत करो और विश्वास रखो सोनम, अगर उस की परछाई भी तुम्हें छुएगी तो मैं उसे जिंदा नहीं छोड़ूंगा.’’

”मैं तुम्हें पहले ही बता चुकी हूं, पापा हार्ट के पेशेंट हैं. मैं ऐसा कोई भी कदम नहीं उठा सकती, जिस का उन की सेहत पर असर हो. घर से भाग कर कहीं और जा कर रहने का खयाल तो दिल से निकाल दो.’’

”फिर तुम ही कुछ बताओ कि क्या किया जाए?’’

”मेरा आइडिया यह है कि मेरी कदकाठी की कोई लड़की तलाश की जाए. उस की हत्या कर के जला दिया जाए. मेरी स्कूटी में भी वहीं आग लगा दी जाए. यह काम किसी ऐसी सुनसान जगह पर किया जाए, जिस से कि कोई देख न सके. तब यह साबित हो जाएगा कि सोनम मर गई. फिर हम दोनों किसी और शहर में जा कर अपनी नई जिंदगी की शुरुआत करेंगे.’’

सोनम ने कहा कि घरों में काम करने वाली किसी लड़की की तलाश आसानी से हो सकती है. लेकिन काफी तलाश के बाद भी घर में साफसफाई चौकाबरतन करने के लिए ऐसी कोई लड़की हाथ नहीं लगी, जिस की कदकाठी सोनम जैसी हो. इस से राज ने राहत की सांस ली. इस की वजह यह थी कि इस से राज और उस के परिवार की जिंदगी ही तबाह हो जाती. घर में आर्थिक साधन जुटाने के लिए वह अकेला ही था. घर का खर्च उस के वेतन में मुश्किल से चल पाता था. सोनम अगर अपने घर वालों के लिए मर गई होती तो नई परेशानी ही खड़ी हो जाती. यदि वह घर से 30 या 40 लाख रुपए ले कर भी आ जाती तो भी कब तक उस से गुजारा होता.

सेफ गेम खेलना चाहता था राज कुशवाहा

दूसरी जगह दोनों को नौकरी मिलना भी आसान नहीं था. कोई बिजनैस करने के लिए बड़ी मुश्किलों का सामना करना पड़ता. इस तरह राज भी अपने परिवार के लिए एक तरह से मर ही चुका होता. राज कुशवाहा ने सोनम को समझाया कि इस तरह की दुर्घटना से तुम्हारे पापा तुम्हारी मौत का सदमा शायद बरदाश्त नहीं कर पाएंगे. अगर हार्टअटैक से बच भी जाएं तो जीते जी भी उन की मौत हो जाएगी. उस की पहली योजना घर से भागने की भी मेरी समझ से परे थी, क्योंकि उस का अंजाम भी वही होता. आर्थिक संकट से राज का परिवार ही नहीं, बल्कि राज और सोनम भी जूझ रहे होते.

यह सोच कर राज ने उस की दोनों ही योजनाओं को फेल करने में पूरा दिमाग लगा दिया. वह चाहता था कि सोनम से शादी कर के फैक्ट्री का मालिक बन जाएगा, जिस में अब तक नौकरी करता था. वह ऐसा कोई कदम नहीं उठाना चाहता था, जिस से कि सोने के अंडे देती मुरगी उस के हाथ से निकल जाए.

सोनम की शादी की तारीख करीब आ चुकी थी. उस की चिंता बढ़ती जा रही थी. सोनम की चिंता दूर करने के लिए राज ने एक ऐसा प्लान तैयार किया, जिसे सुन कर सोनम खुशी से उछल पड़ी. उस ने कहा, ”इस का मतलब यह है कि मैं विधवा हो जाऊंगी और बिरादरी का कोई व्यक्ति विधवा से शादी करने के लिए आसानी से तैयार नहीं होगा. फिर विधवा से शादी किसी और बिरादरी के युवक से करने के लिए मेरे पापा भी राजी हो जाएंगे. यानी हम दोनों पतिपत्नी के रूप में जिंदगी बिता कर अपने सपनों को साकार कर सकेंगे. बहुत बढिय़ा.’’

”लेकिन एक वादा करो,’’ राज ने कहा.

”क्या?’’

”शादी के बाद उस दुष्ट को सुहागरात की रस्म अदा करने नहीं दोगी.’’

”इस का मतलब यह कि मुझे सुहागन बनते ही यानी सुहागरात मनाने से पहले विधवा करना चाहते हो.’’ सोनम ने मुसकराते हुए कहा, ”यह पक्का वादा है, मुझे चाहे जो भी जतन करना पड़े, मैं उसे सुहागरात को हाथ नहीं लगाने दूंगी.’’

इंदौर मध्य प्रदेश का सब से बड़ा और सब से व्यस्त शहर है. यह ऐतिहासिक, सांस्कृतिक, शैक्षणिक और व्यावसायिक दृष्टि से अत्यंत महत्त्वपूर्ण स्थान रखता है. यह शहर एक तरफ अपने गौरवशाली अतीत की गवाही देता है तो दूसरी ओर आधुनिकता और प्रगति का प्रतीक भी है. इस शहर का नाम इंद्रेश्वर महादेव मंदिर से लिया गया है, जो अब भी शहर के मध्य में स्थित है.

राजवाड़ा, इंदौर की 7 मंजिला ऐतिहासिक इमारत मराठा, मुगल और फ्रांसीसी वास्तुकला का अद्भुत संगम है. यह शहर के दिल में स्थित है. यह महल होलकर शासकों की विलासिता और कलात्मक रुचि का प्रतीक है. यूरोपीय शैली में बना यह महल अपने भव्य फरनीचर, दीवारों पर सुंदर चित्रों और विशाल गार्डन के लिए प्रसिद्ध है. इंदौर केवल एक शहर नहीं, बल्कि अनुभवों का संगम है, जहां इतिहास बोलता है, स्वाद महकता है, शिक्षा ऊंचाइयां छूती है और स्वच्छता संस्कृति बन जाती है.

इतनी खूबियों वाले इसी शहर में देवी सिंह नाम के एक व्यक्ति निवास करते हैं. उन का एक बेटा गोविंद रघुवंशी और बेटी सोनम रघुवंशी है. उन की पत्नी संगीता रघुवंशी घरेलू काम संभालती हैं. दरअसल, सोनम रघुवंशी का मूल निवास गुना जिला है. सोनम अपने भाई गोविंद से उम्र में छोटी है. गोविंद की शादी करीब 8 साल पहले विदिशा से हुई थी और उस के 2 बच्चे हैं. सोनम का परिवार पिछले कुछ सालों से इंदौर में रह रहा है. बताया जाता है कि उन्होंने गुना से इंदौर आने का फैसला उस वक्त लिया, जब गोविंद ने व्यापार में कदम रखा. शुरुआत में गोविंद एक निजी कंपनी में नौकरी करता था. लेकिन साल 2020 के आसपास उस ने माइका (सनमाइका) के व्यापार में कदम रखा और खुद की कंपनी खड़ी की.

शुरुआत में गोविंद केवल तैयार माल खरीद कर बेचने का काम करता था, लेकिन बाद में उस ने मैन्युफैक्चरिंग यूनिट लगाने का फैसला लिया. अब उस की एक माइका मैन्युफैक्चरिंग यूनिट गुजरात में स्थापित है, जहां से वह माल तैयार कर विभिन्न शहरों में सप्लाई करता है. सोनम के परिवार का बिजनैस अग्रणी कारोबार में से एक था. परिवार की इंदौर में एक सनमाइका बनाने की यूनिट है. देवी सिंह को पैरालाइसिस का अटैक हुआ था, जिस के कारण वह फैक्ट्री में सक्रिय भूमिका नहीं निभा पाते. सोनम रघुवंशी और गोविंद रघुवंशी दोनों भाईबहन मिल कर कारोबार संभालते हैं. सोनम अपने ही पिता की कंपनी में बतौर एचआर काम करती थी.

इसी शहर में अशोक रघुवंशी का एक परिवार है. इन के 3 बेटे और एक बेटी है. एक बेटे का नाम सचिन रघुवंशी, दूसरे का विपिन रघुवंशी, तीसरा सब से छोटा 28 वर्षीय बेटा राजा रघुवंशी और बेटी सृष्टि है. उन का ट्रांसपोर्ट का प्रमुख व्यवसाय है. राजा रघुवंशी व 2 बड़े भाई सचिन और विपिन भी संयुक्त परिवार के रूप में रहते हैं.  ‘रघुवंशी ट्रांसपोर्ट’ नामक कंपनी परिवार के सभी लोग 2007 से संयुक्त रूप से चलाते थे. इस कंपनी का मुख्य काम स्कूलों और कोचिंग संस्थानों को किराए पर बसें उपलब्ध कराना है. सोनम रघुवंशी और राजा रघुवंशी दोनों के परिवार का आपस में कोई रिश्ता नहीं था. इन में से कोई एकदूसरे को जानता तक नहीं था. दोनों परिवारों की मुलाकात बहुत ही रोचक तरीके से हुई.

पहली अक्तूबर, 2024 को हर साल की तरह रामनवमी के दिन रघुवंशी समाज का सामूहिक भंडारा आयोजित हुआ था. यह कार्यक्रम इंदौर के रघुवंशी बिरादरी के लिए अपनेअपने बच्चे के लिए अपने ही समाज में लड़का और लड़की के विवाह के लिए रिश्ता तलाशने का एक बेहतरीन माध्यम है.

सामाजिक रीतिरिवाज से हुई शादी

रघुवंशी समाज के लोग रामनवमी के दिन एक स्थान पर एकत्रित होते हैं और यहां पर अपनेअपने बच्चों की जानकारी एक परची में लिख कर रख दिया करते हैं. इस में लड़के या लड़की का नाम, उम्र, पढ़ाई और काम के बारे में जानकारी लिखी होती है. एक तरह से इसे बायोडाटा कहा जा सकता है. रघुवंशी संस्थान बायोडाटा के आधार पर रजिस्ट्रैशन कर लेता है. इस डाटा को व्यवस्थित कर के रघुवंशी समाज की एक पत्रिका जारी की जाती है, जिस में रघुवंशी परिवारों द्वारा रजिस्ट्रैशन में दी गई जानकारी को प्रकाशित किया जाता है. इस पत्रिका में जिसे लड़की की तलाश है तो वो लड़की का बायोडाटा देखता है और जिसे लड़के की तलाश है, वो लड़के का.

यहां सोनम और राजा रघुवंशी के परिवार के लोगों ने भी इन दोनों का रजिस्ट्रैशन कराया था. यहीं से ही इन दोनों का परिवार आपस में मिला. दोनों के परिवार वालों को सब सही लगा. दोनों ही मांगलिक थे. कुंडली भी मिल गई, इसलिए बात शादी तक जा पहुंची. राजा रघुवंशी का एक संपन्न परिवार है. घर में सब से छोटा होने के कारण राजा रघुवंशी की शादी का सब को बहुत अरमान था. शादी समारोह को भव्य बनाने के लिए काफी तैयारी की गई. जम कर पैसा खर्च किया गया.

उधर सोनम का परिवार राजा की टक्कर का परिवार था. सोनम की शादी के भी उस के परिवारजनों को बहुत अरमान थे, लेकिन खर्च करने में काफी कंजूसी की गई और वह उत्साह सोनम की शादी में नजर नहीं आया, जिस की अपेक्षाएं की जा रही थीं. बहरहाल, 11 मई को एक भव्य शादी समारोह हुआ. सात फेरे हुए. सभी सामाजिक और धार्मिक रस्में पूरी की गईं. 12 मई, 2025 को सोनम दुलहन बन कर राजा रघुवंशी के घर आ गई. दोनों परिवार और पतिपत्नी सभी खुश थे. किसी तरह का कोई भी विवाद नहीं था. राजा रघुवंशी की ओर से दहेज की कोई मांग की ही नहीं गई थी.

सोनम 4 दिन ससुराल में रहने के बाद मायके चली गई. मायके से ही सोनम रघुवंशी ने हनीमून का कार्यक्रम भी अचानक बना लिया. सोनम ने अपने पति राजा रघुवंशी को इस बात के लिए राजी किया कि शारीरिक संबंधों के जरिए शादी को परिपूर्ण करने से पहले उन्हें कामाख्या देवी मंदिर में पूजाअर्चना करनी चाहिए. पहले तय हुआ कि दोनों असम के कामाख्या देवी मंदिर जाएंगे. फिर वहीं से कश्मीर के लिए निकल जाएंगे. सोनम अपने मातापिता के घर से सीधे एयरपोर्ट गई, जबकि राजा रघुवंशी अपने घर से 10 लाख रुपए से अधिक के गहने पहन कर निकला था. इस में एक हीरे की अंगूठी, एक चेन और एक ब्रेसलेट शामिल था.

दोनों 20 मई को पहले असम के कामाख्या देवी मंदिर पहुंचे. यह असम के गुवाहाटी शहर में नीलांचल पहाड़ी पर स्थित है. कामाख्या मंदिर से उन्होंने कश्मीर की जगह मेघालय जाने का प्रोग्राम बनाया. 20 मई, 2025 को ही दोनों मेघालय पहुंचे. 21 मई को राजा और सोनम रघुवंशी शिलांग पहुंचे थे और एक होमस्टे में रुके थे. 22 मई को उन्होंने एक स्कूटी किराए पर ली और सोहरारिम चले गए. शाम तक वे मावलखियात पहुंचे और एक गाइड लिया. गाइड की मदद से वे शिप्रा होमस्टे में रुके. इस के बाद गाइड को उन्होंने छोड़ दिया.

अगले दिन यानी 23 मई को सोनम और राजा रघुवंशी से उन के फेमिली वालों का कांटेक्ट बंद हो गया. दोनों के परिजन चिंतित हो गए और उन के लापता होने की खबरें आम हो गईं. सोनम का भाई गोविंद रघुवंशी और राजा का भाई विपिन रघुवंशी लापता पतिपत्नी की तलाश करने मेघालय पहुंचे. उन्होंने शिलांग की पुलिस से कांटेक्ट किया. उम्मीद के मुताबिक रिस्पौंस न मिलने पर दोनों वापस इंदौर लौट आए. इंदौर के एडिशनल डीसीपी राजेश दंडोतिया से शिकायत की और बात मुख्यमंत्री तक भी पहुंच गई. यहां की सरकार ने मेघालय की सरकार से संपर्क साधा. इस बीच मामला बहुत तूल पड़ चुका था.

मेघालय सरकार की बदनामी होने लगी. यहां की अर्थव्यवस्था का एक महत्त्वपूर्ण स्रोत पर्यटकों से है. इस घटना से पर्यटकों में दहशत का माहौल हो गया. पर्यटक देर शाम अपने होटल के कमरों से निकलने में डरने लगे. अफवाह यह थी कि कपल का अपहरण कर के बांग्लादेश ले जाया गया है और उन के सारे पैसे और ज्वैलरी लूट ली गई है. मध्य प्रदेश सरकार ने तो केंद्र सरकार को पत्र लिख कर मामले की सीबीआई जांच करने की सिफारिश भी कर दी. 2 जून, 2025 को फिर राजा रघुवंशी का शव वेईसावडांग झरने के पास गहरी खाई में मिला. शव बुरी तरह सड़ चुका था. राजा के भाई विपिन ने ही शव की पहचान की. वह भी उन के हाथ पर बने ‘राजा’ टैटू से. लेकिन सोनम नहीं मिली.

शुरुआत में लगा कि दोनों का एक्सीडेंट हुआ होगा, लेकिन पोस्टमार्टम रिपोर्ट से खुलासा हुआ कि राजा की हत्या धारदार हथियार से की गई थी. इंदौर शहर के हर घर में इस घटना को ले कर अफसोस जताया जा रहा था, सब लोग सोनम के जिंदा मिल जाने की कामना कर रहे थे. मेघालय पुलिस सोनम को बरामद करने और मामले की गुत्थी सुलझाने के लिए औपरेशन चला रही थी, जिस का नाम ‘औपरेशन हनीमून’ रखा गया. मेघालय सरकार ने एसआईटी गठित कर पुलिस की कई टीमें मामले का राज फाश करने के लिए लगा दीं.

पुलिस को जांच में पता चला कि 22 मई को राजा और सोनम शिलांग के मावलखियात गांव पहुंचे और वहां से नोंग्रियाट गांव में मशहूर ‘लिविंग रूट ब्रिज’ देखने गए. दोनों ने रात एक होमस्टे में बिताई. 23 मई की सुबह 6 बजे दोनों होटल से बाहर निकल आए. किराए की स्कूटी पर सैर के लिए निकले. इस के बाद दोनों रहस्यमय ढंग से लापता हो गए.

टूर गाइडों से मिली खास जानकारी

24 मई की रात को उन की स्कूटी ओसारा हिल्स की पार्किंग में लावारिस हालत में मिली, जो होमस्टे से 25 किलोमीटर दूर थी. 28 मई को जंगल में 2 बैग मिले. मावलाखियात से नोंग्रियात तक की यात्रा पर उन्हें ले जाने वाले गाइड भकुपर वानशाई थे. पुलिस को उन से महत्त्वपूर्ण सुराग हाथ लगे. गाइड ने पुलिस को बताया कि कपल ने 22 मई को फोन किया. उस समय शाम के करीब साढ़े 3 बजे थे, लेकिन मैं ने मना नहीं किया और उन्हें नोंग्रियात तक गाइड करने का फैसला किया. उन्हें शिपारा होमस्टे पर छोडऩे के बाद हम वहां से निकल पड़े.

एक अन्य गाइड अल्बर्ट पीडी भी उन के साथ थे. गाइड ने यह भी बताया कि 3 व्यक्ति इस कपल के साथ और थे. वे तीनों हिंदी में बात कर रहे थे. वह हिंदी कम जानता है, इसलिए समझ नहीं पाया. वानशाई ने कहा कि हम ने अगले दिन (23 मई) के लिए अपनी सेवा की पेशकश की, लेकिन उन्होंने यह कहते हुए मना कर दिया कि उन्हें रास्ता पता है. वानशाई ने अपने पुलिस बयान में कहा कि सोनम ने उन से ज्यादातर बातचीत अंगरेजी में की. केस को खोलने के लिए पुलिस पर बहुत दबाव था, पुलिस की टीमें अपना काम कर रही थीं. वह हत्यारों तक पहुंच गई थी. हत्या के 3 आरोपियों को गिरफ्तार भी कर लिया था. इस से पहले 8 मई की रात करीब 11 बजे मेघालय पुलिस पूरे लावलश्कर के साथ कोतवाली महरौनी के ग्राम चौकी पहुंची थी.

यहां राजा रघुवंशी हत्याकांड का आरोपी आकाश कमरे में सोते हुए मिला था. मेघालय पुलिस ने आकाश से पूछा कि सोनम रघुवंशी कहां है? उसे कहां छिपाया है. आकाश ने सोनम के बारे में कोई जानकारी होने से मना कर दिया था. तब परिजनों से सोनम के बारे में पूछताछ की. उन्होंने भी इंकार कर दिया था.  आकाश राजपूत (19 वर्ष) और उस के परिजन के इंकार करने के बाद भी मेघालय और जनपद की पुलिस ने मकान का चप्पाचप्पा छाना. यहां तक कि मकान के टपरे में रखे भूसे के ढेर के अंदर तक सोनम को तलाशा था.

पुलिस की यह काररवाई करीब एक घंटे तक चलती रही. जब पुलिस को यकीन हुआ कि सोनम यहां नहीं है, तब वह आकाश राजपूत और उस के 3 साथियों को अपने साथ ले गई थी. मध्य प्रदेश की पुलिस के सहयोग से मेघालय पुलिस ने इस हत्या में शामिल 3 हमलावरों आकाश राजपूत (19 वर्ष) के बाद विशाल सिंह चौहान (22 वर्ष) और राज सिंह कुशवाह (21 वर्ष) को भी गिरफ्तार कर लिया. इन की गिरफ्तारी के बाद ही नाटकीय ढंग से सोनम ने सरेंडर किया. आधी रात के बाद सोनम उत्तर प्रदेश के गाजीपुर में स्थित काशी चाय जायका होटल पर पहुंची. यह होटल रात भर खुलता है.

गाजीपुर के नंदगंज थाने के अंतर्गत आता है. होटल संचालक साहिल यादव उस समय मौजूद थे. साहिल यादव से उस ने मोबाइल मांगा. अपने भाई को फोन मिलाया, लेकिन रोती रही बात नहीं कर पाई. साहिल यादव ने सोनम के भाई गोविंद से बात की, उस ने इस होटल का पता बताया. आधे घंटे के भीतर नंदगंज थाना पुलिस वहां पहुंच गई. सोनम को हिरासत में ले लिया गया. मध्य प्रदेश और मेघालय पुलिस को इस की सूचना दी गई. सोनम ने दावा किया कि उसे अगवा करने के बाद उस के साथ क्या हुआ, इस बारे में उसे कुछ याद नहीं है. उस ने कहा कि उसे अंधेरे कमरे में रखा गया था, बाहर की दुनिया से उस का कोई संपर्क नहीं था. वह जैसेतैसे वहां से निकली.

सोनम से पूछताछ के बाद पुलिस ने आनंद कुर्मी को भी पकडऩे में सफलता हासिल की. आरोपी आनंद कुर्मी (23) खिमलासा थाना क्षेत्र के बसाहरी गांव में अपने चाचा भगवानदास कुर्मी के घर में छिपा हुआ था. मेघालय से आई पुलिस टीम ने स्थानीय पुलिस की मदद से आरोपी को पकड़ा. डीएसपी एस.ए. संगमा के नेतृत्व में आई टीम ने आगासौद, खिमलासा और बीना थाना पुलिस के साथ मिल कर घेराबंदी की. आरोपी को पकडऩे के बाद खिमलासा थाने में पूछताछ की गई. एसडीओपी नितेश पटेल ने बताया कि आरोपी का पिता दौलतराम कुर्मी करीब 20-22 साल पहले परिवार के साथ इंदौर चला गया था. आनंद वहां जियोमार्ट में काम करता था. वह मुख्य आरोपी राज कुशवाहा के संपर्क में था. आनंद मूलरूप से भानगढ़ थाना क्षेत्र के मिर्जापुर गांव का रहने वाला है.

पूछताछ में पता चला कि उस के पिता 4 भाई हैं. बड़े भाई हरिशंकर कुर्मी मिर्जापुर में रहते हैं. वहां 5 एकड़ जमीन पर खेती करते हैं. देवाराम और दौलतराम इंदौर चले गए थे. भगवानदास अपनी ससुराल बसाहरी में रह रहे थे. मेघालय पुलिस यहां से कानूनी औपचारिकताएं पूरी करने के बाद पांचों को मेघालय ले गई. शिलांग में ही एफआईआर दर्ज कराई गई. इंदौर से शुरू हो कर शिलांग और फिर गाजीपुर तक राजा रघुवंशी हत्या कांड फैल गया. शिलांग की अदालत से आरोपियों का 8 दिन का रिमांड मिल गया तो फिर प्याज के छिलकों की तरह परतदरपरत मामला खुलता गया.

सोनम और राजा रघंवुशी चेरापूंजी में झरना देखने जा रहे थे. वक्त बीतने के साथ ही सोनम की बेचैनी बढऩे लगी, योजना के अनुसार वह जल्द से जल्द राजा को ठिकाने लगाना चाहती थी, लेकिन सही जगह नहीं मिल पा रही थी. दोपहर 12 बजते ही पीछे से तेजी से आए तीनों किलर्स राजा से अच्छे से बातचीत करने लगे, ऐसे में राजा को भी कोई शक नहीं हुआ. दोपहर करीब डेढ़ बजे सोनम ने राजा की हत्या के लिए अपना प्लान ऐक्टिव किया. इस के तहत उस ने सब से पहले अपनी सास यानी कि राजा की मम्मी को फोन लगाया. उन के साथ मीठीमीठी बातें कीं. इस का मकसद यही था कि वह परिवार को भरोसा दिला रही थी कि सब कुछ ठीक है.

फोन पर बातचीत के दौरान सोनम ने अपने उपवास की भी चर्चा की. सास के कहने पर उन के बेटे राजा से भी कुछ देर बाद बात कराई. चेरापूंजी की करीब 10 किलोमीटर ऊंची चढ़ाई पर एक सेल्फी स्पौट बना था. उस से पहले पार्किंग स्थल था, सोनम राजा एक स्कूटी से गए थे. तीनों किलर्स ने 2 दुपहिया वाहन किराए पर लिए थे. तीनों गाडिय़ां पार्किंग में खड़ी की गई थीं. उस के बाद किलर्स राजा के पीछे चल दिए. वहां पहुंच कर पतिपत्नी मौसम का नजारा कर रहे थे. तभी सोनम ने मौका पाते ही किलर्स को इशारा किया और अपने पति राजा रघुवंशी को सेल्फी के लिए तैयार करने लगी. इतने में पीछे से एक किलर ने कुल्हाड़ीनुमा एक तेज धार वाले हथियार से पूरी ताकत से राजा पर वार कर दिया. राजा नीचे गिर गया. राजा ने उठने की कोशिश की. तभी दूसरे ने दूसरे हथियार से सामने से उस के सिर पर जोरदार वार किया.

योजना के अनुसार की थी राजा की हत्या

राजा वहीं ढेर हो गया, उस के बाद भी मिनी कुल्हाड़ी से एक वार उस पर और किया गया. उस का काम तमाम हो जाने पर और शरीर का सारा खून निकल जाने पर तीनों ने सेल्फी पौइंट पर उसे उठा कर रखा. वहां  करीब 3 फीट ऊंची ग्रिल लगी हुई थी. राजा की लाश को उठा कर नीचे गहरी खाई में फेंकने की तीनों ने कोशिश की, मगर सफलता नहीं मिली. तब सोनम ने आगे बढ़ कर लाश को ऊपर उठा कर खाई में फेंकने के लिए मदद की. ऐसा करने से उन के कपड़ों पर खून लग गया तो उन्होंने खून में सने कपड़े उतार कर वहीं फेंक दिए. उस के बाद तीनों पार्किंग स्थल पर पहुंचे. वहां से तीनों किलर्स वाली 2 स्कूटियों पर बैठ कर चारों निकल लिए.

पुलिस को जांच में यह भी पता चला कि एक बुरका, जो विशाल ले कर आया था, सोनम को दिया. सोनम वह बुरका पहन कर अकेले वहां से निकली, ताकि बीच में जो टोल आते हैं या सीसीटीवी में उस का चेहरा  कैद न होने पाए. उस के बाद सोनम वहां से गुवाहाटी पहुंची. वहां के आईएसबीटी से वह बस ले कर पटना के लिए और फिर पटना से वह आरा पहुंच गई. आरा से वह लखनऊ पहुंची और लखनऊ से 26 तारीख को इंदौर पहुंच गई. इंदौर में राज कुशवाहा से उस की मुलाकात हुई. देवास नाके के पास एक किराए के फ्लैट में वह 8 जून तक इंदौर में रही. इस बीच राज कुशवाहा ने सोनम की सहूलियत का पूरा खयाल रखा था.

4 जून, 2025 को राजा के शव को इंदौर लाया गया. सोनम ने अपने पति राजा की अर्थी के लिए कफन और फूल मालाओं का इंतजाम कर के अपने प्रेमी राज के हाथ अपनी ससुराल भिजवाया. राजा के परिवार में सब से ज्यादा उस की मम्मी और बहन सृष्टि का रोरो कर बुरा हाल था. पूरे इंदौर में रघुवंशी समाज में रोष व्याप्त था. शोक की लहर दौड़ गई थी. इस के लिए एक दिन कैंडल मार्च का आयोजन हुआ. इस में बड़ी संख्या में समाज के लोग उपस्थित हुए.

शिलांग के एसपी विवेक सिएम ने प्रैस कौन्फ्रेंस कर कहा कि पहले राजा के कत्ल करने का प्लान गुवाहाटी में था, लेकिन यह प्लान फेल होने पर शिलांग में राजा रघुवंशी मारा गया. 3 बार कत्ल करने का प्रयास किया गया, लेकिन किलर्स असफल हो गए और चौथी बार में हत्या कर पाए. उन्होंने बताया कि राजा मर्डर केस का मास्टरमाइंड राज कुशवाहा है, सोनम ने उस का साथ दिया. पहले दिन की पूछताछ में आरोपियों ने अपना जुर्म कुबूल कर लिया. तीनों आरोपी राज कुशवाहा और सोनम के दोस्त हैं, जिस में एक राज का चचेरा भाई था. दोस्ती के कारण तीनों आरोपी हत्या में शामिल हुए. शिलांग एसपी विवेक सिएम ने आगे कहा कि यह मामला सुपारी का नहीं है. तीनों आरोपी भी 19 मई को गुवाहाटी आ गए थे.

पुलिस की जांच में यह भी पता चला कि सोनम रघुवंशी और राज कुशवाहा राजा रघुवंशी की हर हालत में हत्या करना चाहते थे. उन्होंने इस के लिए एक पिस्टल खरीदी थी. यदि कुछ भी नहीं हो पाता तो सोनम सेल्फी देने के बहाने राजा को सेल्फी पौइंट से नीचे गहरी खाई में जिंदा ही धकेल देती. पुलिस को यह भी पता चला कि राज और सोनम ने हीराबाग के फ्लैट में एक बैग छिपाया था. इस बैग में कपड़ों के बीच देसी पिस्टल, 5 लाख रुपए, सोने की चेन, अंगूठी और राजा की हत्या से संबंधित कुछ अन्य सबूत वाली चीजें थीं. मेघालय पुलिस ने पांचों अपराधियों से पूछताछ कर उन्हें जेल भिजवा दिया.

अभी इंदौर में मेघालय पुलिस की टीम एक बैग की तलाश कर रही है. यह ट्रौली बैग मेघालय से विशाल चौहान ने देवास नाका के उस फ्लैट पर पहुंचाया था, जहां पर सोनम हत्या के बाद रुकी थी. अब एक प्रौपर्टी डीलर, जिस का नाम है सिलोन जेम्स, की गिरफ्तारी हुई है. यह वही प्रौपर्टी डीलर है, जिस ने सोनम को राजा रघुवंशी की हत्या के बाद जब सोनम इंदौर लौटी थी तो इंदौर में रेंट पर फ्लैट दिलाया था. गुना का एक सिक्योरिटी गार्ड भी अब शिलांग पुलिस के शक के घेरे में है. पुलिस सूत्रों ने बताया कि सुरक्षा गार्ड बलबीर अहिरवार उर्फ बल्लू को गिरफ्तार कर लिया गया है. इसी मामले में आठवें आरोपी की भी गिरफ्तारी हुई है.

प्रौपर्टी डीलर ने पुलिस को बताया कि किसी स्थान पर बैग जला दिया है. पुलिस ने  उस स्थान की भी जांच की. कुछ नमूने लिए हैं. पुलिस ने उसे मेघालय ले जा कर अदालत में पेश किया. आठवें आरोपी ग्वालियर निवासी लोकेंद्र सिंह तोमर को मेघालय पुलिस ने गिरफ्तार किया है, जो उस फ्लैट का मालिक है जिस में हत्या के बाद फरार हुई सोनम रघुवंशी इंदौर में छिपी थी.

सोनम की फैक्ट्री में एंप्लाई था राज

राज कुशवाहा गाजीपुर थाना क्षेत्र के रामपुर गांव का निवासी है. राज कुशवाहा के पापा 3 भाई थे. 2 भाई रामपुर सुकेति गांव में अभी भी रहते हैं. 15 साल पहले राज कुशवाहा के पिता की स्थिति अच्छी नहीं थी. वह इंदौर चले गए थे. वहां फल की दुकान लगाने लगे. परिवार की हालत सुधरने पर करीब 10 साल पहले परिवार को वहीं बुला लिया. राज कुशवाहा की मम्मी चुन्नीबाई, बड़ी बहन सुहानी और छोटी बहन प्रिया और राज कुशवाहा अपने पापा के पास इंदौर चले आए. कोरोना काल में उस के पापा परिवार के साथ गांव आ गए. उस समय राज कुशवाहा भी आ गया.

कोरोना काल में ही राज के पापा की मौत हो गई. राज कुशवाहा परिवार के साथ फिर इंदौर आ गया. यहां राज कुशवाहा  प्लाईवुड की एक कंपनी में काम करने लगा. यह कंपनी सोनम रघुवंशी की थी. सोनम के यहां पर राज प्लाईवुड का काम करता था. उस ने ज्यादा तो नहीं, लेकिन हाईस्कूल परीक्षा पास कर रखी थी. इस कंपनी में उसे अकाउंट के काम पर लगा लिया गया. एक दिन राज कुशवाहा सोनम रघुवंशी के केबिन में पहुंचा. उसे देखते ही सोनम रघुवंशी ने पूछा, ”हां बताओ, कैसे आना हुआ?’’

”मैडम, मुझे 5 हजार रुपए की जरूरत है.’’

सोनम मलिकाना तेवर में बोली, ”अभी एक हफ्ता पहले ही तो वेतन मिला है. अभी से एडवांस लेने आ गए.’’

कुछ और खरीखोटी सुनाई. राज कुशवाहा बड़ा निराश हुआ, उस की आंखें डबडबा गईं. औफिस से बाहर जाने के लिए राज कुशवाहा जैसे ही मुड़ा, सोनम की आवाज आई, ”रुपए किस काम के लिए चाहिए?’’

राज कुशवाहा ने कहा, ”मम्मी की तबीयत खराब है. उन के इलाज के लिए जरूरत है.’’ मासूम चेहरे पर बड़ीबड़ी आंखों में छलकते आंसू देख कर सोनम का दिल पसीज गया. सोनम ने दराज से 5 हजार रुपए निकाल कर राज को दे दिए. सोनम के अहसान के बोझ को सिर पर लिए डगमगाते कदमों से राज औफिस से बाहर आ गया. यहीं से उम्र में करीब 5 साल छोटे अपने कर्मचारी राज के लिए सोनम के दिल में हमदर्दी का बीज अंकुरित हो गया. दूसरे दिन फैक्ट्री की साप्ताहिक छुट्टी थी.

अगले दिन राज अपनी ड्यूटी पर समय से फैक्ट्री आ गया और अपने काम में जुट गया. अचानक कदमों की आहट उसे सुनाई दी. उस के टेबल के पास तक कोई आया. इस से पहले कि वह सिर उठा कर देखता, तभी उस के कानों में एक मधुर आवाज सुनाई दी, ”ये लो एक हजार रुपए. यह एडवांस में नहीं जुड़ेंगे. यह मेरी तरफ से अपनी मम्मी की दवाई में खर्च कर लेना. और हां, अब उन की तबीयत कैसी है?’’

इतना सुन कर राज अपनी सीट से उठ कर खड़ा हो गया. नजरें नीची रहीं. अपनी मम्मी की तबीयत के बारे में जानकारी दी. राज ने कहा, ”मैम, आप का दिल कितना बड़ा है, आप जैसे लोग समाज में अब कम ही मिलते हैं. यह एहसान मैं जिंदगी भर नहीं भूल सकता.’’

एक दिन इंदौर के खूबसूरत मार्केट में राज गया था, तभी अचानक किसी ने उसे आवाज दी. उस ने मुड़ कर देखा तो सोनम स्कूटी रोके खड़ी थी. उस ने पास की ही एक कौफी हाउस की तरफ इशारा करते हुए कहा कि यहां आओ, मैं भी पहुंच रही हूं.

उस दिन फैक्ट्री का साप्ताहिक अवकाश था. कौफी हाउस पहुंच कर दोनों आमनेसामने की सीट पर बैठे. सोनम ने कोई बात नहीं की, बल्कि अपने मोबाइल में मगन रही. वेटर 2 कौफी टेबल पर रख गया. राज नजरें नीचे किए हुए बैठा था. राज को सोनम की उस बात का इंतजार था, जिस के लिए उसे यहां कौफी हाउस में बुलाया था.

अचानक सोनम ने कहा, ”हां राज, बताओ मम्मी की कैसी तबीयत है?’’

सिर झुकाए बैठे राज ने कहा, ”अब तो काफी ठीक है.’’

”चलो, कौफी पियो!’’

राज ने कौफी का कप उठाया. उस की नजर सोनम की तरफ गई तो उस के हाथ कांप गए. बड़ी मुश्किल से कप को गिरने से रोक पाया. फिर भी थोड़ी सी कौफी छलक कर गिरी. सोनम की नजरें उस पर गड़ी थीं, उस प्यार भरी नजरों को कोई भी आसानी से समझ सकता था. कातिलाना नजरें और जादुई मुसकराहट उस के दिल में उतर गई. राज ने बड़ी मुश्किल से अपने आप को संभाला. इस तरह हमदर्दी के साथ प्रेम के बीज की भी बुवाई हो गई.

रातें अब ख्वाबों में और दिन उस की यादों में गुजरने लगे. प्रेम का ये अंकुर धीरेधीरे एक विशाल वृक्ष बनने को बेताब था. उस की बातें जैसे ठंडी हवा की तरह गर्म दुपहरी में सुकून दे रही हों. आंखों ही आंखों में जो बातें होतीं, वो लफ्जों से परे थीं. राज का दिल अब हर धड़कन में उस का नाम लेने लगा. वह साथ हो या न हो, उस की मौजूदगी हर पल महसूस होती. राज को अब समझ आने लगा कि ये सिर्फ आकर्षण नहीं, कुछ गहरा ताल्लुक है.

इस तरह हमदर्दी से शुरू हुआ रिश्ता अब इश्क की दहलीज पर दस्तक दे रहा था. राज के दिन अब मस्ती में गुजरने लगे. आर्थिक संकट भी दूर हो गया था, क्योंकि 20 हजार रुपए महीने की नौकरी में उस के परिवार का गुजारा करना मुश्किल होता था. अब तो ठाट ही ठाट थे. दिन गुजरते गए, प्यार की पींगें बढ़ती रहीं और फिर 2 जिस्म एक जान हो गए. साथ जीनेमरने की कसमें खाई गईं और एकदूसरे का साथ न छोडऩे का वादा किया गया.

राजा रघुवंशी हत्याकांड खुल जाने के बाद मेघालय के मुख्यमंत्री कोनराड के. संगमा ने  कहा कि जिन लोगों ने मेघालय को बदनाम किया है, उन्हें माफी मांगनी चाहिए, नहीं तो उन के खिलाफ काररवाई की जाएगी. मेघालय के गृहमंत्री बोले, ”हमारी पुलिस को बेवजह बदनाम किया गया.’’

पुलिस के गले की फांस बन गया था यह केस

मेघालय के गृहमंत्री प्रेस्टोन टेनसांग ने अपने बयान में कहा कि मेघालय पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए गए. ये बात शुरू से हजम नहीं हो रही थी कि यहां के स्थानीय लोग लूटपाट के लिए किसी पर्यटक की हत्या कर दें. अब हमारी पुलिस ने सब दूध का दूध और पानी का पानी कर दिया. इस केस में जल्दी से जल्दी तसवीर साफ होना इसलिए भी जरूरी था कि मेघालय में हर साल 11 लाख टूरिस्ट आते हैं. उन के भरोसे के लिए भी ये जरूरी था कि जल्द से जल्द इस केस का खुलासा हो. उधर सोनम रघुवंशी अपने प्रेमी राज कुशवाहा और अन्य लोगों के पकड़े जाने पर इंदौर से गाजीपुर कैसे गई, उस रहस्य का भी पुलिस ने परदाफाश कर दिया. जिस टैक्सी से सोनम इंदौर से उत्तर प्रदेश रवाना हुई थी, उस के ड्राइवर पीयूष तक भी पुलिस पहुंच गई है.

टैक्सी ड्राइवर पीयूष से भी एक घंटे तक क्राइम ब्रांच थाने में पूछताछ की गई. उधर उजाला यादव ने यह दावा किया था सोनम मुझे वाराणसी कैंट स्टेशन पर मिली थी. एक ड्राइवर और एक व्यक्ति उसे वहां तक छोडऩे आए थे. तुरंत ट्रेन न होने पर सोनम वाराणसी के बस अड्डे पर आई और उसी बस में बैठ गई, जिस में वह बैठी थी. उजाला ने बताया कि वह गोरखपुर जाने के लिए कह रही थी. उस ने एक लड़के से फोन करने के लिए मोबाइल मांगा. उस ने नहीं दिया. मुझ से भी उस ने मोबाइल मांगा, मैं ने दिया. एक नंबर डायल कर के डिलीट कर दिया. काल नहीं की.

ऐसा हो सकता है कि उस के पास कोई मोबाइल होगा. कहीं बीच में उस के पास काल आई होगी कि सभी लोग पकड़े गए हैं. गाजीपुर ही उतर जाए. गाजीपुर उतर कर उस ने वह छोटा मोबाइल नष्ट कर दिया होगा. तभी वह रात के 2 बजे चाय की दुकान पर पहुंच गई. वरना राज और सोनम का इरादा गोरखपुर से नेपाल भाग जाने का था. राज इतना शातिरदिमाग होगा, यह अंदाजा किसी को नहीं था.  ऐसा प्लान पेशेवर अपराधी भी नहीं बना पाते. यदि मामला हाईप्रोफाइल नहीं बनता तो सोनम और राज अपनी योजना में सफल हो जाते. वह तो मेघालय की पुलिस ने ड्रोन कैमरे से रघुवंशी की डेडबौडी तलाश कर ली थी.

एक तरफ राजा की मम्मी हैं, जिन्होंने अपने जिगर के टुकड़े को खोया है, उन पर क्या बीत रही होगी. दूसरी तरफ सोनम की मम्मी का दर्द है, जिसे मर्डर की मास्टरमाइंड बताया जा रहा है. तीसरी मां उस आरोपी राज की है, जिसे सोनम का बौयफ्रेंड बताया जा रहा है. तीनों मां का अपना अलगअलग दर्द है. राज कुशवाह की मम्मी चुन्नीबाई, बड़ी बहन सुहानी और छोटी बहन प्रिया मानने को तैयार नहीं हैं कि राज कुशवाहा राजा रघुवंशी की हत्या कर सकता है. सुहानी ने कहा, ”मेरा भाई ऐसा कर ही नहीं सकता. वह तो सोनम को दीदी कहता था.’’

जहां मृतक राजा की बहन सृष्टि अपने भाई के खोने का दर्द बयां कर रही है, वहीं आरोपी सोनम के प्रेमी राज कुशवाहा की बहन अपने भाई को बेगुनाह बताते हुए साजिश का आरोप लगा रही है. दोनों बहनों का दर्द, एक भाई की हत्या और दूसरे की गिरफ्तारी ने इस हनीमून मर्डर को और मार्मिक बना दिया है. Hindi Crime Story