बाप बेटे क्यों बने जल्लाद
बेटी की इस गुहार पर भी पिता कृपाराम व भाई राघवराम का दिल नहीं पसीजा. आरती जब बीच में आई तो राघव ने डंडे से उसे भी मारना शुरू कर दिया. सिर में डंडा लगने से वह बेहोश हो गई. फिर रस्सी से बापबेटे ने उस का गला कस दिया.
आरती को मारने के बाद उन दोनों ने सतीश को भी पीटपीट कर अधमरा कर दिया. आपत्तिजनक हालत में आरती व सतीश के पकड़े जाने से दोनों का गुस्सा सातवें आसमान पर था. गुस्से में उन्होंने रस्सी से सतीश का गला भी कस दिया. कुछ देर छटपटाने के बाद सतीश ने वहीं दम तोड़ दिया.
इस सनसनीखेज डबल मर्डर के बाद दोनों पुलिस की गिरफ्त से बचने की जुगत करने लगे. वहीं लाशों को ठिकाने लगाने की योजना बनाने लगे. सतीश के शव को जंगल में छिपाने व आरती के शव को अयोध्या ले जा कर दफनाने की योजना बनाई गई. तय किया गया कि आरती के बारे में कोई पूछेगा तो कह देंगे कि रिश्तेदारी में गई है.
दोनों बापबेटे रात में ही एक चारपाई पर सतीश के शव को रख कर गांव से लगभग डेढ़ किलोमीटर दूर एक गन्ने के खेत में ले गए. दोनों ने शव को गन्ने के खेत में छिपा दिया. जिस रस्सी से सतीश का गला कस कर हत्या की थी, उसे भी चारपाई के साथ ही खेत में फेंक आए.
सतीश के शव को छिपाने के बाद अब रात में ही आरती का शव ठिकाने लगाना था. कृपाराम और राघवराम आरती के शव को कार से ले कर गांव से 20 किलोमीटर दूर अयोध्या पंहुचे. अयोध्या में सरयू नदी के किनारे श्मशान घाट पर एक बालू के टीले में शव को दफन कर गांव वापस आ गए और घर में शांत हो कर बैठ गए. ताकि किसी को दोहरे हत्याकांड का पता न चल सके.
लेकिन मंगलवार 21 अगस्त को सुबह सतीश के नहीं मिलने पर उस के घर वालों ने उसे बहुत तलाशा. जब उन्हें जानकारी हुई कि आरती भी घर पर नहीं है तो उन लोगों ने पुलिस को सूचना दे दी. क्योंकि वे लोग भी आरती और सतीश के रिश्ते के बारे में जानते थे.
थाने में आरती के पिता कृपाराम चौरसिया ने कहा कि हमारे यहां गांव के लड़के से शादी नहीं होती है. सतीश भले ही हमारी जाति का था, लेकिन वह था तो हमारे गांव का ही. ऊपर से वह आरती का भाई लगता था. आरती किसी दूसरे गांव के लड़के से बोलती तो हम लोग उसकी शादी करवा देते.
हमारे घर से 20 मीटर की दूरी पर ही सतीश का घर था. रोज का आमनासामना होता था. वह बचपन से घर आताजाता था. दोनों साथ खेले, हम लोग उसे आरती का बड़ा भाई कहते थे. हम लोग आरती के साथ उस का रिश्ता कैसे मंजूर कर लेते?
3-4 महीने पहले दोनों को गांव के एक युवक ने साथसाथ देख लिया था. दोनों बाहर कहीं साथ में बैठे थे. इस बात की जानकारी उस ने हमें दी थी. जब आरती की घर पर बहुत पिटाई की थी. उस को सख्ती से मना किया था कि वह कभी सतीश से न मिले, लेकिन हफ्ते भर पहले वह सतीश से मिलने फिर चली गई.
इस के बाद आरती के घर से निकलने पर पूरी तरह पाबंदी लगा दी थी, लेकिन उस ने सतीश को 20-21 अगस्त की रात को घर बुला लिया. अगर हम अपनी बेटी को नहीं मारते तो वह हमें मुंह दिखाने लायक नहीं छोड़ती.
सतीश की निर्मम हत्या किए जाने पर उस के घर में कोहराम मच गया. मां प्रभावती और भाई बहनों का रोरो कर बुरा हाल हो गया. सतीश के घर वाले और रिश्तेदार गम के साथ गुस्से में दिखे.

सतीश की मां प्रभावती का कहना था कि आरती के पिता कृपाराम चौरसिया, भाई राघवराम के साथ ही उस का चाचा आज्ञाराम और उस का बेटा विजय भी इस हत्याकांड में शामिल हैं. कृपाराम व राघवराम ने भी थाने में पुलिस को उन के नाम बताए थे. लेकिन पुलिस ने केवल बापबेटे को ही गिरफ्तार किया है.
आरती के पिता व भाई ने जुुर्म कुबूल कर लिया. इस से आरती के चाचा आज्ञाराम और उस के बेटे विजय को राहत मिली है. मगर सतीश की मां अपने बेटे को न्याय दिलाने की खातिर अभी भी मामले में आज्ञाराम व विजय को आरोपी बनाए जाने की मांग कर रही है.
उस का आरोप है कि जिस तरह से दोहरे हत्याकांड को अंजाम दिया गया है और दोनों की लाशों को घटनास्थल से हटाया गया है, उस में सिर्फ 2 लोग ही शामिल नहीं हो सकते. प्रभावती अंतिम सांस तक सभी दोषियों के खिलाफ कड़ी काररवाई के लिए संघर्ष करने की बात कहती है.
गांव में हुए दोहरे हत्याकांड के खुलासे व आरती के पिता व भाई द्वारा हत्या करने का जुर्म कुबूल करने तथा दोनों की गिरफ्तारी से गांव के लोग सन्न रह गए. गिरफ्तारी के बाद आरती के अन्य परिजन घर में ताला लगा कर भाग गए थे. पूरे गांव में इसी घटना की चर्चा हो रही थी.
वहीं सतीश की हत्या की सूचना सोमवार को ही मोबाइल से पिता बिंदेेश्वरी प्रसाद चौरसिया को दी गई. वे ट्रेन से मुंबई से गांव पहुंच गए. वे अपने बेटे की हत्या पर फफकते हुए बोले, ”पता होता कि उस की हत्या कर दी जाएगी तो उसे भी अपने साथ मुंबई ले जाते. बेटे को तो न खोना पड़ता.’’
बिंदेश्वरी ने रोते हुए कहा कि फांसी की सजा देने का अधिकार तो सिर्फ अदालत को है, लेकिन बाप बेटे ने मिल कर जल्लाद की तरह मेरे जिगर के टुकड़े सतीश को फांसी दे दी.

औनर किलिंग के हत्यारों कृपाराम व राघवराम को गिरफ्तार करने वाली पुलिस टीम में एसएचओ सत्येंद्र वर्मा, एसआई विजय प्रकाश, हैडकांस्टेबल दया यादव, कुषार यादव, आशुतोष पांडे, अमरीश मिश्रा व कांस्टेबल रिषभ शामिल थे. एसपी अंकित मित्तल ने 24 घंटे में डबल मर्डर का परदाफाश करने वाली पुलिस टीम को पुरस्कृत किया.
गुमशुदगी की रिपोर्ट को भादंवि की धारा 302, 201 में तरमीम कर प्रेमी युगल आरती चौरसिया व सतीश चौरसिया की हत्या के आरोपी कृपाराम चौरसिया व उस के बेटे राघवराम चौरसिया को गिरफ्तार कर 23 अगस्त, 2023 को पुलिस ने न्यायालय में पेश किया. जहां से दोनों को जेल भेज दिया गया.

एएसपी शिवराज
हंसते खेलते युवा प्रेमी युगल को मौत की नींद सुला दिया गया, जहां आदमी चांद पर पहुंच रहा है. जमाना चाहे कितना भी आगे बढ़ गया हो, लेकिन दकियानूसी सोच उन्हें आगे नहीं बढऩे दे रही. कृपाराम और राघवराम जैसे लोग समाज में नासूर बने हुए हैं, जो झूठी आन, बान और शान के लिए औनर किलिंग जैसे अपराध करते हैं.
—कथा पुलिस सूत्रों पर आधारित
राजेश ने मकान का ठेका अपने दोस्त हेमंत सोनकर के रिश्तेदार इंजीनियर शैलेंद्र सोनकर को दे दिया. ठेका मिलने के बाद शैलेंद्र ने राजेश के घर आनाजाना शुरू कर दिया. इसी आनेजाने में शैलेंद्र सोनकर की नजर राजेश की खूबसूरत पत्नी उर्मिला पर पड़ी. पहली ही नजर में उर्मिला उस के दिलो दिमाग में रचबस गई. उर्मिला भी जवान और हैंडसम शैलेंद्र को देख कर प्रभावित हुई.

इंजीनियर शैलेंद्र सोनकर
उर्मिला देह सुख से वंचित थी, इसलिए उस का मन बहकने लगा. जब औरत का मन बहकता है तो उसे पतित होने में देर नहीं लगती. इस के बाद उर्मिला की आंखों के सामने शैलेंद्र की तसवीर घूमने लगी. वैसे भी उर्मिला ने महसूस किया था कि वह जब भी घर आता है, उस की मोहक नजरें हमेशा ही उस से कुछ मांगती सी प्रतीत होती हैं.
दोनों के बीच प्यार के बीज अंकुरित हो गए. फिर जल्द ही उन के बीच शारीरिक संबंध भी कायम हो गए.
आखिर क्यों बहकी उर्मिला
कुछ समय बाद उर्मिला शैलेंद्र की इस कदर दीवानी हो गई कि वह अपने निर्माणाधीन मकान पर भी जाने लगी. मौका निकाल कर वह वहां भी शैलेंद्र के साथ मौजमस्ती कर लेती थी.
विवाहित और 2 बच्चों की मां उर्मिला ने पति से विश्वासघात कर शैलेंद्र के साथ अवैध संबंध तो बना लिए थे, लेकिन उस वक्त उस ने यह नहीं सोचा था कि इस का अंजाम क्या होगा. 2 नावों पर पैर रखना हमेशा नुकसानदायक ही होता है.
हुआ यह कि मार्च 2023 की एक दोपहर राजेश अचानक स्कूल से घर वापस आ गया और उस ने उर्मिला व शैलेंद्र को आपत्तिजनक अवस्था में देख लिया. फिर तो राजेश का खून खौल उठा. शैलेंद्र फुरती से भाग गया. तब उस ने उर्मिला की जम कर पिटाई की.
बाद में उस ने शैलेंद्र को खूब फटकार लगाई. उर्मिला की अनैतिकता को ले कर कभीकभी झगड़ा इतना बढ़ जाता कि वह उर्मिला को जानवरों की तरह पीटता.
एक दिन तो हद ही हो गई. राजेश की पिटाई से आहत हो कर उर्मिला नग्नावस्था में ही घर के बाहर आ गई थी. अड़ोसपड़ोस तथा परिवार के लोग उर्मिला की अनैतिकता से वाकिफ थे, इसलिए किसी ने भी उस का पक्ष नहीं लिया.
पति की पिटाई से उर्मिला राजेश से नफरत करने लगी थी. इसी नफरत के चलते उस ने एक रोज राजेश को खाने में जहर दे दिया. उस की तबीयत बिगड़ी तो घर वालों ने उसे प्राइवेट अस्पताल में भरती कराया, जहां उस का 2 सप्ताह इलाज चला. तब जा कर वह ठीक हुआ.
उर्मिला अपने आशिक शैलेंद्र को भी पति के खिलाफ उकसाती थी. वह वीडियो काल कर उसे अपने शरीर के जख्म दिखाते हुए ताने देती थी कि यह जख्म तुम्हारे प्यार की निशानी के तौर पर दिए गए हैं. उर्मिला के शरीर पर जख्म देख कर शैलेंद्र का गुस्सा फट पड़ता था.
पति की हत्या क्यों कराना चाहती थी उर्मिला
एक दिन उर्मिला ने शैलेंद्र से कहा, ”मैं अब अपने पति से छुटकारा चाहती हूं. वह हम दोनों के मिलन में बाधा बना है. प्रताडि़त भी करता है. तुम इस कांटे को हमेशा के लिए दूर कर दो. राजेश के पास 3 करोड़ का जीवन बीमा और 20 करोड़ की अचल संपत्ति तथा यह 6 करोड़ का आलीशान मकान है. उस के मरने के बाद यह सब हमारा होगा. मैं तुम से ब्याह कर लूंगी. फिर हम दोनों आराम से रहेंगे. उस की सरकारी नौकरी भी मुझे मिल जाएगी.’’
शैलेंद्र सोनकर का ममेरा भाई विकास सोनकर शास्त्री नगर में रहता था. वह ड्राइवर था. उस ने अपनी मंशा उसे बताई तो विकास ने शैलेंद्र को अपने साथी ड्राइवर सुमित कठेरिया से मिलवाया, जो आवास विकास-3 कल्याणपुर में रहता था.
सुमित ने शैलेंद्र को एक ट्रक ड्राइवर से मिलवाया. ट्रक ड्राइवर ने राजेश को ट्रक से कुचल कर मारने का वादा किया और 2 लाख में हत्या की सुपारी ली. इस के बाद उर्मिला ने रुपयों का इंतजाम किया और डेढ़ लाख रुपए ड्राइवर को दे दिए, लेकिन उस ट्रक ड्राइवर ने काम तमाम नहीं किया और डेढ़ लाख रुपया ले कर फरार हो गया.
उस के बाद सुमित कठेरिया ने विकास के साथ मिल कर राजेश की हत्या की सुपारी 4 लाख में ली. उर्मिला और शैलेंद्र हर हाल में राजेश को मौत के घाट उतारना चाहते थे, अत: उन्होंने रकम मंजूर कर ली. इस के बाद उर्मिला, शैलेंद्र, सुमित व विकास ने राजेश को कुचल कर मारने की पूरी योजना बनाई.
4 नवंबर, 2023 की सुबह 6 बजे राजेश गौतम मार्निंग वाक पर निकला, तभी उस की पत्नी उर्मिला ने शैलेंद्र को फोन पर सूचना दे दी. सूचना पा कर सुमित कठेरिया अपनी ईको स्पोर्ट कार से तथा शैलेंद्र विकास के साथ अपनी वैगनआर कार से स्वर्ण जयंती विहार पहुंच गए.
उन लोगों ने पहले रेकी की, फिर राजेश की पहचान कर सुमित कठेरिया ने अपनी ईको स्पोर्ट कार से राजेश को जोरदार टक्कर मारी. राजेश टकरा कर करीब 20 मीटर दूर जा गिरा और तड़पने लगा.
टक्कर मारने के बाद भागते समय सुमित की कार बिजली के खंभे से टकरा गई और उस का टायर फट गया. तब सुमित अपनी कार वहीं छोड़ कर कुछ दूरी बनाए खड़ी शैलेंद्र की वैगनआर कार के पास पहुंचा और उस में बैठ कर शैलेंद्र के साथ फरार हो गया.
पूछताछ करने के बाद पुलिस ने 30 नवंबर, 2023 को आरोपी उर्मिला गौतम, शैलेंद्र सोनकर तथा विकास सोनकर को कानपुर कोर्ट में पेश किया, जहां से उन्हें जिला जेल भेज दिया गया. आरोपी सुमित कठेरिया ने भी बाद में अदालत में आत्मसमर्पण कर दिया था.
राजेश के दोनों बेटे अपने ताऊ ब्रह्मदीन के पास रह रहे थे. ताऊ ने दोनों बच्चों के पालनपोषण की जिम्मेदारी ली है.
—कथा पुलिस सूत्रों पर आधारित
अपने बारे में पूर्णव शंकर शिंदे ने लोगों को बताया कि उस ने आस्ट्रेलिया से एमबीबीएस कर रखा है. उस की मुलाकात डा. पूजा से हुई तो उस ने खुद को अविवाहित बताया जबकि वह शादीशुदा था. उस से नजदीकी बढ़ा ली फिर जल्द शादी भी कर ली.
पूजा की डाक्टर की डिग्री शिंदे के लिए लौटरी लगने जैसी थी. उस ने पहली पत्नी प्राजक्ता के नाम डा. पूजा बदल कर फरजी डिग्री बना ली. इस तरह से बीएएमएस प्राजक्ता नकली एमबीबीएस डिग्रीधारी डा. पूजा बन गई.
ऐसा कर शिंदे ने एकएक कर 2 अन्य युवतियों से भी शादी रचा ली थी. उस की जालसाजी यहीं नहीं रुकी थी, बल्कि उन लड़कियों से शादी के बाद उन के पहचानपत्र में अहम बदलाव करवा दिया था. नए नाम के एफीडेविट और अखबारों में नाम बदलने का विज्ञापन दे कर सब के नाम डा. पूजा करा दिए थे. उस के बाद सभी की फरजी एमबीबीएस की डिग्री भी बनवा ली थीं.
इस के पीछे उस ने एक खास योजना बना रखी थी, लेकिन उसे अंजाम तक पहुंचाने से पहले ही वह पुलिस के हत्थे चढ़ चुका था. हालांकि इस की उस ने बुनियाद रख ली थी.
दिल्ली एनसीआर का ग्रेटर नोएडा पिछले एक दशक में तेजी से विकसित होने वाला उपनगर बन चुका है. वहां न केवल रिहायशी मल्टीस्टोरी बिल्डिंगों में लोगों ने रहना शुरू कर दिया है, बल्कि उन की हर जरूरी सुविधाओं के लिए नएनए संसाधन और सुविधाएं भी मिलने लगी हैं. उन्हीं में एक अतिआवश्यक जरूरत मैडिकल सुविधा की भी है. डाक्टर की निजी क्लीनिक से ले कर सुपरस्पैशलिटी अस्पताल तक खोले जा रहे हैं.
बात अगस्त 2023 की है. ग्रेटर नोएडा के घोड़ी बछेड़ा गांव के पास एक 35-36 साल का दिखने वाला व्यक्ति अस्पताल खोलने के लिए जगह तलाश रहा था. वह एक बड़ी गाड़ी में सवार था, जिस के नंबर प्लेट के पास ही भाजपा के महामंत्री की चमकती हुई बड़ी प्लेट भी लगी हुई थी.
उसी समय उस की कार के पास उत्तर प्रदेश पुलिस की गाड़ी आ कर रुकी. उस में बैठेबैठे पुलिस अधिकारी ने आवाज लगाई, ”अरे भाई, यह गाड़ी किस की है? कौन है इस का मालिक?’’
”मेरी है, क्या बात है?’‘ भाजपा नेमप्लेट वाली गाड़ी से उतरने वाला व्यक्ति बोला.
”क्या नाम है?…और कहां के महामंत्री हो भाई!’‘ पुलिसकर्मी ने पूछा.
”मैं पूर्णव शंकर शिंदे हूं. डाक्टर हूं, महाराष्ट्र के जलगांव जिले का भाजपा का महामंत्री भी हूं.’‘
”आप को पता नहीं है यूपी का नियम? नंबर प्लेट से बड़ी महामंत्री की इतनी बड़ी किसी भी तरह की प्लेट लगानी मना है.’‘ पुलिसकर्मी ने कहा.
”इस में क्या गलत है? प्रदेश में भाजपा सरकार है, केंद्र में भी वही है, मैं उस का एक सिपाही हूं.’‘ शिंदे बोला.
”नेम प्लेट कहीं और लगा लो…और हां, यहां क्या करने आए हो?’‘
”मुझे यहां पर एक बड़ा अस्पताल खोलना है. उस के लिए जगह तलाश रहा हूं.’‘ शिंदे बोला.
इसी बीच सवालजवाब करने वाले उस पुलिस वाले के कान में पास बैठे दूसरे पुलिसकर्मी ने कुछ कहा.
पुलिस को शिंदे पर क्यों हुआ शक
दरअसल, शिंदे से सवाल जवाब करने वाले दादरी कोतवाली इंसपेक्टर सुजीत उपाध्याय थे. उन के बगल में बैठे साइबर सेल प्रभारी आशीष यादव को शिंदे की गतिविधियों पर कुछ संदेह हुआ था और इसी संदेह के चलते उन्होंने एसएचओ को धीमे से कुछ कहा था.
अभी तक नरमी से पूछताछ करते हुए उपाध्याय के तेवर अचानक बदल गए थे. उन्होंने सख्ती के साथ आदेश के अंदाज में कहा, ”अपना ड्राइविंग लाइसेंस दिखाओ और गाड़ी के सभी कागज ले कर आओ.’‘
”क्या हुआ जो आप गुस्से में बोल रहे हैं… आप लोग जानते नहीं मैं कौन हूं?’‘ शिंदे भी थोड़ा रौब से बोला.
”तू जो भी है, पहले यहां आ.’‘ इस बार यादव बोले.
”अभी आता हूं.’‘ कहता हुआ शिंदे अपनी ड्राइविंग सीट के सामने के लौकर से गाड़ी के कागजात निकाल कर 4 कदम दूरी पर खड़ी यूपी पुलिस की गाड़ी के पास चला गया.
उस के कागजात ले कर दोनों पुलिसकर्मी उलटपुलट कर देखने लगे. कुछ सेकेंड बाद ही उपाध्याय पूछने लगे, ”तू नेता है या डाक्टर? गाड़ी जलगांव, महाराष्ट्र की है और तू यहां नोएडा में डाक्टरी करता है. गाड़ी भी महाराष्ट्र की है…माजरा क्या है?’‘
”कुछ भी नहीं, मैं तो…’‘
”…तू सेक्टर म्यू-दो में रहता है न! वहां भी तूने एक अस्पताल का बोर्ड लगा रखा है, लेकिन क्लिनिक कहां है?’‘ यादव ने बीच में ही कई सवाल दाग दिए.
”आप लोग तो मेरे साथ बहुत गलत बरताव कर रहे हैं…’‘
”मुझे लगता है कि गलत तो तुम कर रहे हो. और ये क्या है? तुम्हारे ड्राइविंग डाक्यूमेंट के साथ शादी का सर्टिफिकेट! वह भी 2-2…’‘ यादव 2 पेपर लहराते हुए बोले. यह सुनते ही शिंदे बोल पड़ा, ”ऐंऽऽ शादी सर्टिफिकेट! नहीं तो!’‘
”मैं गलत बोल रहा हूं. दोनों आर्यसमाज मंदिर के हैं. उन पर नंबर एक ही है. चलो मेरे साथ थाने, आगे की पूछताछ वहीं होगी.’‘ यादव सख्ती से बोले.
”नहीं नहीं, आप को कुछ गलतफहमी हो गई है. एक असली और दूसरा उस की ही फोटोकापी है.’‘ शिंदे ने सफाई दी.
”फिर दोनों में नाम अलगअलग कैसे हैं? एक में डा. पूजा कुशवाहा लिखा है और दूसरे में प्राजक्ता शिंदे!’‘ यादव बोले.
”चलोचलो, तुम्हारी गाड़ी मेरा कांस्टेबल ले आएगा, तुम मेरे साथ पुलिस गाड़ी में बैठो.’‘ इस बार उपाध्याय बोले.
शिंदे ने किस तरह की 4 शादियां
थाने में शिंदे से पूछताछ के बाद उस के बारे में जो कहानी सामने आई, वह चौंकाने वाली थी. बल्कि वह एक फरजी डाक्टर पाया गया. उस ने जालसाजी से 4 शादियां रचा रखी थीं. सभी में पत्नियों का नाम संयोग से पूजा था. बरामद 2 विवाह प्रमाणपत्र भी फरजी पाए गए. एक पर नाम डा. प्राजक्ता शिंदे दर्ज था, जबकि दूसरे पर डा. पूजा कुशवाहा का नाम लिखा था.
उस ने बताया कि डा. प्राजक्ता शिंदे उस की पहली पत्नी है. वह बीएएमएस है. वह उसे छोड़ चुकी है. नोएडा आने से पहले वह दिल्ली के वसंत विहार में रहता था. वहीं उस की मुलाकात साल 2019 में दिल्ली की एमबीबीएस डा. पूजा कुशवाहा से हुई थी, जिस के बाद में उस ने शादी कर ली.
कुछ दिन बाद ही पूजा को पता चला कि शिंदे शादीशुदा है. उस के साथ डा. प्राजक्ता रहती थी. इस पर डा. पूजा ने आरोपी के खिलाफ कानूनी काररवाई करने की धमकी दे डाली. तभी वह दिल्ली से प्राजक्ता को ले कर नोएडा चला आया. अपने साथ डा. पूजा की डिग्री और उस के दूसरे दस्तावेज भी ले आया, जिन के आधार पर उस ने पहली पत्नी प्राजक्ता की फरजी एमबीबीएस की डिग्री बना ली.
दरअसल, बीएएमएस आयुर्वेद के डाक्टर की पढ़ाई का एक हिस्सा है. साढ़े 5 साल का स्नातक कोर्स करने के बाद बैचलर औफ आयुर्वेदिक मैडिसिन एंड सर्जरी (बीएएमएस) की डिग्री दी जाती है. दूसरा फरजीवाड़ा उस ने यह किया कि 2-2 बीवियां होने के बावजूद उस ने वैवाहिक वेबसाइट से वर तलाशने वाली युवतियों से नंबर ले कर उन से संपर्क करना शुरू कर दिया. उन्हें अपने बारे में डाक्टर बताता था.
डाक्टरी की डिग्री की वजह से युवतियां असानी से उस के झांसे में फंस जाती थीं. युवतियों को प्रेमजाल में फांसने में माहिर पूर्णव शंकर शिंदे खुद को विदेशी शिक्षा प्राप्त एक प्रतिभाशाली और अमीर डाक्टर बताता था.
वह ग्रेटर नोएडा के एक गांव शाहबेरी में किराए पर रहने लगा था. वहीं उस ने अश्वपूर्व फाउंडेशन और अश्वपूर्व मल्टी हौस्पिटल के नाम का एक आकर्षक बोर्ड लगा दिया था.
बोर्ड पर अपना और पहली पत्नी को एमबीबीएस डाक्टर दर्शाते हुए नाम लिखवा लिया था. साथ ही फाउंडेशन का जीएसटी रजिस्ट्रैशन भी करवा लिया था. पहली पत्नी उस के साथ रहती थी. जब कोई मरीज आता था, तब उस का पहली पत्नी डा. प्राजक्ता ही उपचार करती थी.
शिंदे ने राजनीतिक पहुंच का रुतबा दिखा कर न केवल फाउंडेशन व अस्पताल के नाम पर लोन लिया, बल्कि 2-2 जीएसटी रजिस्ट्रैशन नंबर जारी करवा लिए थे. यही नहीं, वह जीएसटी रिफंड का धंधा भी करता था. ऐसा कर वह सरकार के राजस्व में लाखों रुपए का चूना लगा चुका था.
उस ने पत्नी प्राजक्ता को पूजा कुशवाहा के नाम पर पेश कर फाइनैंस कंपनी से लोन लिया था. गाड़ी और स्कूटी को भी फाइनैंस करवा रखा था. एसबीआई और दूसरे बैंक समेत अन्य फाइनैंस कंपनियों से लोन व क्रेडिट कार्ड ले रखे थे. उस के नाम आदित्य बिरला कैपिटल फाइनैंस से 5 लाख का लोन था, जो अश्वपूर्वा मल्टी स्पैशलिटी हौस्पिटल के नाम पर ले रखा था.
उस ने एक कंपनी प्राजक्ता के साथ पार्टनरशिप में बना रखी थी. यहां तक कि अपना ड्राइविंग लाइसैंस भी कपिल त्यागी के नाम से बना रखा था. यह कहना गलत नहीं होगा कि वह जालसाजी का पूरा लबादा ओढ़े हुए था.
अपनी पहचान पत्र को बदलने के लिए जनप्रतिनिधियों के फरजी हस्ताक्षर भी कर लेता था. उस के पास से एक पैन कार्ड करेक्शन का फार्म भी बरामद किया गया, जिस पर पूजा शिंदे नाम लिखा था. उस के द्वारा दादरी विधायक तेजपाल नागर के फरजी हस्ताक्षर दुरुपयोग करने की बात भी सामने आई.
क्यों बनवाए नेताओं के लेटर पैड
पुलिस ने जांच में पाया कि शिंदे ने 5 महीने पहले ही महाराष्ट्र की एक युवती के साथ धोखा दे कर शादी की थी. फिलहाल वह गर्भवती है. उस युवती को धोखा होने के बारे में थोड़ी सी भी आशंका नहीं थी.
मामले की तहकीकात पूरी होने के बारे में एडिशनल डीसीपी अशोक कुमार ने बताया कि मुंबई के जुहू निवासी पूर्णव शंकर शिंदे खुद को एमबीबीएस डाक्टर बताता था. इस के पास एक एंबुलेंस भी है, जिस पर अश्वपूर्वा हौस्पिटल लिखा है. यही नहीं वह एक एसेंट गाड़ी चलाता था और फरजी हौस्पिटल बना कर लोन ले लेता था. पकड़ में न आए, इसलिए आयकर भी दाखिल करता था.
आरोपी शिंदे पहली बार 2015 में एक मैडिकल छात्रा पूजा से मिला था. तब वह आगरा से मैडिकल की पढ़ाई कर रही थी. उसे उस ने अपने आप को बिजनैसमैन बताया था. उस ने उस से आर्यसमाज मंदिर में शादी कर ली थी. उन का विवाह कुछ दिनों तक ही चला था. उस के बाद उस ने अपने राज्य की लड़की से शादी रचा ली थी.
कुछ समय बाद ही डा. पूजा कुशवाहा को पता चला कि पूर्णव शंकर शिंदे की एक पत्नी पहले से है. इस के बाद दोनों में अनबन हो गई. शातिर पूर्णव शंकर शिंदे पुत्र सर्वानंद शंकर को गैलेक्सी गोलचक्कर अजायबपुर से गिरफ्तार किया गया था. उस के पास से विधायक के लैटर पैड बरामद किए गए, जिन का इस्तेमाल दस्तावेज बनाने के लिए करता था. उस ने बताया कि उस ने शादी के बाद पत्नी का नाम पूजा पुत्री चंद्रपाल रखा था.
इस बारे में उस ने बताया कि उसे पूजा नाम से लगाव हो गया था, फिर इसी के अनुसार वह आधार कार्ड में संशोधन करवा लेता था. तीसरी शादी करने के बाद युवती का नाम पूजा पुत्री चंद्रपाल रखने के लिए उसी ने विधायक के लेटर पैड का प्रयोग किया था.
साथ ही उस ने अन्य महिलाओं के आधार कार्ड व पैन कार्ड को अपने हिसाब से अपडेट कराने के लिए आर्यसमाज मंदिर के विवाह प्रमाणपत्र का प्रयोग किया था. उस के पास से 2 महिलाओं के विवाह प्रमाणपत्र भी मिले. साथ ही उस के पास से 6 कोरे प्रमाणपत्र भी मिले.
एक के बाद क्यों कर रहा था फरजीवाड़ा
आरोपी शिंदे ने हौस्पिटल का प्रमाण देने के लिए सभी चीजों का प्रयोग किया था. जिन में से एक एंबुलेंस आरोपी के कब्जे से बरामद कर ली गई. एंबुलेंस पर चारों तरफ अश्वपूर्वा मल्टी स्पेशलिटी हौस्पिटल बड़े लाल रंग के अक्षरों में लिखा गया था.
इस एंबुलेंस के नंबर को चैक करने पर पता चला कि वह किसी लीलावती मल्टीस्पैशलिटी हौस्पिटल के नाम पर रजिस्टर्ड है, जिस की 2017 में वैधता खत्म हो चुकी थी. इस के साथ ही आरोपी द्वारा अपना रौब जमाने के लिए एक कार का प्रयोग किया जाता था. उस पर बड़े अक्षरों में जिला महामंत्री भारतीय जनता पार्टी, जिला जलगांव, महाराष्ट्र लिखा था.
यही नहीं, आरोपी द्वारा एक अन्य फरजी कंपनी भी बना रखी थी. जिस का नाम अश्वपूर्वा एक्सरे एमेजिंग सेंटर प्राइवेट लिमिटेड रखा गया था. उस के 2 पार्टनरों में एक शिंदे की पत्नी प्राजक्ता पूर्णव शिंदे थी.
इस प्रकार कंपनी बना कर अभियुक्त द्वारा फाउंडेशन और हौस्पिटल के फरजी बिल बनाए जाते थे. उन को प्रस्तुत कर जीएसटी रिफंड प्राप्त किया जाता था. इस से सरकार को राजस्व की हानि होती थी. आरोपी द्वारा बनाए गए हौस्पिटल के स्थान पर असल में बरतनों की दुकान है.
पूर्णव शंकर शिंदे का मकसद डा. पूजा के एजुकेशनल डाक्यूमेंट का प्रयोग कर अलगअलग महिलाओं के दस्तावेजों को अपडेट कर उन का नाम डा. पूजा करना तथा उन के आधार कार्ड व पैन कार्ड के सिबिल स्कोर के आधार पर लोन लेना व उन को वापस नहीं करना था.
सभी आरोपी महिलाओं के नाम को पूजा के नाम पर इसलिए करना चाहता था कि उस के पास एक ही सैट एजुकेशनल दस्तावेज थे. जिन को चैक करने पर वह असली पाए जाते थे. इस कारण से वह अन्य सभी महिलाओं, जिन को वह शादी के लिए झांसे में लेता था, के आधार व पैन कार्ड मे पूजा पुत्री चंद्रपाल की जन्मतिथि अपडेट करवा लेता था.
पुलिस ने आरोपी पूर्णव शंकर शिंदे से पूछताछ कर उसे कोर्ट में पेश कर जेल भेज दिया.
—कथा पुलिस सूत्रों पर आधारित
गन्ने के खेत में मिला सतीश का शव
हत्या का जुर्म कुबूल करने के बाद पुलिस ने आरती के भाई राघवराम की निशानदेही पर गन्ने के खेत से सतीश का शव, चारपाई व रस्सी बरामद कर ली. फोरैंसिक टीम व डौग स्क्वायड को भी बुला लिया गया था. खोजी कुत्ता गन्ने के खेत के बाद दौड़ता हुआ राघवराम के घर पर जा पहुंचा.
फोरैंसिकटीम ने भी घटनास्थल से कुछ साक्ष्य जुटाए. पुलिस ने मौके की काररवाई निपटाने के बाद शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया. वहीं आरती को बालू के टीले में दफन किए जाने की जानकारी पर एसएचओ सत्येंद्र वर्मा ने डीएम से अनुमति ली.
इस के बाद पुलिस टीम के साथ अयोध्या जा कर वहां के अधिकारियों से बात कर के सरयू नदी के किनारे बालू के टीले में दफन आरती का शव निकलवाया. मौके की काररवाई के बाद उस का अयोध्या में ही पोस्टमार्टम कराया गया.
सनसनीखेज दोहरे हत्याकांड का पुलिस ने 24 घंटे के अंदर ही परदाफाश कर दिया. इस डबल मर्डर की दिल दहलाने वाली जो कहानी सामने आई, वह इस प्रकार निकली—
19 वर्षीय सतीश चौरसिया का गांव की ही रहने वाली 18 साल की आरती चौरसिया से पिछले लगभग 2 सालों से अफेयर चल रहा था. दोनों एक ही जाति के थे. गांव के नाते सतीश का आरती के घर आनाजाना था. दोनों ही जवानी की दहलीज पर कदम रख चुके थे.
सतीश कदकाठी का कसा हुआ नौजवान था. वह सुंदर भी था. आरती उस की ओर आकर्षित हो गई. जब भी सतीश घर पर आता, आरती उसे कनखियों से देखा करती थी. इस बात का आभास सतीश को भी था. वह भी मन ही मन आरती को चाहने लगा था.

अब दोनों का बचपन का प्यार जवान हो गया था. जब कभी दोनों की नजरें मिलतीं तो दोनों एकदूसरे को देख कर मुसकरा देते थे. दोनों के बीच घर वालों के सामने सामान्य बातचीत होती थी.
धीरेधीरे उन की दोस्ती प्यार में बदल गई. अब दोनों की मोबाइल पर प्यार भरी बातें होने लगीं. फिर उन की अकसर गांव के बाहर चोरी छिपे मुलाकातें होने लगीं. प्रेमीयुगल एकदूसरे का हाथ थाम कर शादी करने का फैसला भी ले चुके थे.
सतीश ने आरती से साफ लहजे में कह दिया था, ”आरती, दुनिया की कोई ताकत हम दोनों को शादी करने से नहीं रोक सकती है. मैं ने तुम से सच्चा प्यार किया है और आखिरी सांस तक करता रहंूगा.’’
आरती ने भी मरते दम तक साथ निभाने का वादा किया.
आरती और सतीश खुश थे. दोनों अपने भावी जीवन के सपने देखते. दुनिया से बेखबर वे अपने प्यार में मस्त रहते थे. पर गांवदेहात में लव स्टोरी ज्यादा दिनों तक नहीं छिप पाती. यदि किसी एक व्यक्ति को भी इस की भनक लग जाती है तो कानाफूसी से बात गांव भर में जल्द ही फैल जाती है.
किसी तरह आरती के घर वालों को भी इस बात का पता चल गया कि आरती का सतीश के साथ चक्कर चल रहा है. इस बात की जानकारी मिलने के बाद आरती के घर वाले कई बार विरोध कर चुके थे. विरोध के बाद सतीश का आरती के घर जाना बंद हो गया, लेकिन मौका मिलने पर दोनों चोरीछिपे मुलाकात जरूर कर लेते थे.
घर से निकलने पर क्यों लगाई पाबंदी
20-21 अगस्त, 2023 की रात को जब राघवराम घर आया, उस समय आरती और उस की मम्मी खाना बना रही थीं. पिता पास ही बैठे हुए थे. राघव पिता के पास जा कर बैठ गया. दोनों बाप बेटे कामकाज की बातें करने लगे. कुछ देर बाद खाना बन कर तैयार हो गया. तब मां ने आवाज लगा कर राघव व अपने पति को बुला लिया. दोनों खाना खाने किचन के पास पहुंच गए. किचन के पास ही बैठ कर चारों ने खाना खाया. ये लोग आपस में बात कर रहे थे, लेकिन आरती कुछ बोल नहीं रही थी.
आरती उन लोगों से नाराज थी. क्योंकि घर वाले एक हफ्ते से उसे घर से बाहर नहीं निकलने दे रहे थे. दरअसल, आरती अपने प्रेमी सतीश से चोरीछिपे मिलती थी. जिस की जानकारी होने पर उस पर रोक लगाई गई थी.
आरती और सतीश के प्रेम प्रसंग की वजह से गांव में उन की बदनामी हो रही थी. जो घर वालों को बरदाश्त नहीं थी, लेकिन यह बात आरती नहीं समझ पा रही थी. वह तो सतीश के साथ शादी करने की जिद पर अड़ी हुई थी.
करीब एक हफ्ते से आरती घर वालों के डर से अपने प्रेमी सतीश से मिलने नहीं जा पा रही थी. उसे उन का यह फरमान नागवार गुजर रहा था. उधर सतीश भी आरती से मिलने के लिए बेचैन था. दोनों ही जल बिन मछली की तरह एकदूसरे के लिए तड़प रहे थे.
इस के चलते आरती ने फोन कर के सतीश को 20-21 अगस्त की रात को मिलने के लिए अपने घर के पीछे बुला लिया.
रंगेहाथों पकड़ा गया प्रेमी युगल
अपनी प्रेमिका आरती से मोबाइल पर बात होने के बाद सतीश ने घर वालों के सोने का इंतजार किया. रात साढ़े 12 बजे जब घर वाले सो गए तो वह बाहर की बैठक (कमरे) से निकल कर आरती के घर जा पहुंचा. उस समय आरती के घर वाले भी गहरी नींद में सोए हुए थे. आरती बेसब्री से उसी के आने की बाट जोह रही थी. उसे एकएक पल काटना भारी हो रहा था.
सतीश जैसे ही आरती के घर के पास पहुंचा, फोन करने पर आरती दरवाजा खोल कर बाहर आ गई. दोनों एकदूसरे का हाथ थामे वहीं घर के पीछे झाडिय़ों की आड़ में चले गए. वहां पहुंचते ही दोनों ने एकदूसरे को अपनी बांहों के घेरे में कस लिया. दोनों एकदूसरे से पूरे एक हफ्ते बाद मिले थे.
घर वालों से बेपरवाह हो कर युगल प्रेमी कानाफूसी में इतने मगन हो गए कि उन्हें किसी बात का अहसास ही नहीं हुआ. दोनों ही तनमन से प्यासे थे. वे अपने जज्बातों पर काबू नहीं कर पाए और दो तन एक हो गए.
रंगेहाथों पकड़े जाने पर डर की वजह से सतीश प्रेमिका के घर वालों से अपनी गलती की माफी मांगने लगा. मगर आरती के पिता व भाई के सिर पर खून सवार था. घर वाले दोनों को पकड़ कर पीटते हुए घर में ले आए. बापबेटे डंडे से सतीश की जम कर पिटाई करने लगे.
अपने प्रेमी की हालत देख कर आरती रो पड़ी. प्रेमी के साथ पकड़े जाने पर आरती ने पिता और भाई से उसे छोडऩे की काफी विनती की. आरती ने उन के सामने हाथ जोड़ कर कहा, ”मैं सतीश के साथ ही जीना और मरना चाहती हंू. इसलिए मारना है तो हम दोनों को ही मार दो, एक को नहीं.’’
पुलिस जांच से अब तक यह साफ हो चुका था कि उर्मिला और ठेकेदार इंजीनियर शैलेंद्र के बीच कोई चक्कर है. पुलिस ने अब हत्यारोपियों को गिरफ्तार करने की योजना बनाई. पुलिस टीम ने विकास सोनकर, शैलेंद्र सोनकर व सुमित कठेरिया को गिरफ्तार करने के लिए उन के घरों पर दबिश दी, लेकिन वह अपने घरों से फरार थे.
29 नवंबर, 2023 की शाम 5 बजे एसएचओ पवन कुमार को मुखबिर के जरिए पता चला कि उर्मिला व उस के साथी इस समय कोयला नगर स्थित गणेश चौराहे पर मौजूद हैं. शायद वे शहर से फरार होने की फिराक में हैं.
चूंकि सूचना खास थी, अत: एसएचओ पुलिस टीम के साथ वहां पहुंच गए और उर्मिला को उस के 2 साथियों के साथ हिरासत में ले लिया. लेकिन सुमित कठेरिया वहां से फरार हो गया था. तीनों को थाने लाया गया.
पुलिस अधिकारियों ने उन से पूछताछ की तो तीनों ने राजेश की हत्या में शामिल होने का जुर्म कुबूल कर लिया.
चूंकि तीनों हत्यारोपियों ने शिक्षक राजेश की हत्या का जुर्म कुबूल कर लिया था, इसलिए मृतक के बड़े भाई ब्रह्मदीन की तरफ से शैलेंद्र सोनकर, विकास, सुमित कठेरिया तथा उर्मिला गौतम के खिलाफ हत्या का मुकदमा दर्ज कर लिया और सुमित के अलावा तीनों को विधिसम्मत गिरफ्तार कर लिया. सुमित कठेरिया की तलाश में पुलिस जी जान से जुट गई.

पुलिस कस्टडी में आरोपी
पुलिस द्वारा की गई जांच, आरोपियों के बयानों एवं मृतक के घर वालों द्वारा दी गई जानकारी के आधार पर इस वारदात के पीछे औरत और जुर्म की एक ऐसी कहानी सामने आई, जिस ने प्यार और प्रौपर्टी के लालच में अपने ही सुहाग की सुपारी दे दी.
उर्मिला की शादी की अजीब थी कहानी
उत्तर प्रदेश के कानपुर शहर के चकेरी थाने के अंतर्गत आता है- दहेली सुजानपुर. 2 दशक पहले दहेली सुजानपुर गांव था और यहां खेती होती थी. लेकिन जैसे जैसे शहर का विकास हुआ, यह गांव शहर की परिधि में आ गया. कानपुर विकास प्राधिकरण ने किसानों की जमीन अधिग्रहण कर कालोनियां बनाईं और लोगों को बसाया. प्रौपर्टी डीलरों ने भी प्लौट काट कर बेचे तथा फ्लैट भी बनाए. सालों पहले जो जमीन कौडिय़ों के दाम बिकती थी, वही जमीन अब लाखोंकरोड़ों की हो गई है.
इसी दहेली सुजानपुर में राजाराम गौतम रहते थे. उन के 3 बेटे ब्रह्मïादीन, राजेश व महेश थे. राजाराम के पास 20 एकड़ जमीन थी. उन्होंने अपने जीते जी मकान व जमीन का बंटवारा तीनों बेटों में कर दिया था. हर बेटे के हिस्से में करोड़ों की जमीन आई थी. उन के 2 बेटे ब्रह्मदीन व महेश, सनिगवां में मकान बना कर परिवार सहित रहने लगे थे. बड़ा बेटा ब्रह्मदीन एमईएस चकेरी में नौकरी करता था. ब्रह्मादीन के बेटे कुलदीप का इंडियन नेवी में चयन हो गया था.
राजेश गौतम 3 भाइयों में मंझला था. वह अन्य भाइयों से ज्यादा तेजतर्रार था. वह दहेली सुजानपुर में ही रहता था. उस के परिवार में पत्नी उर्मिला के अलावा 2 बेटे थे. वह सरसौल ब्लाक के सुभौली गांव स्थित प्राथमिक पाठशाला में अध्यापक था. राजेश दबंग शिक्षक था.
वर्ष 2012 में राजेश का विवाह खूबसूरत उर्मिला के साथ बड़े ही नाटकीय ढंग से हुआ था. दरअसल, राजेश अपने दोस्त विमल के लिए उर्मिला को देखने उस के साथ बनारस गया था. विमल ने तो उर्मिला को देखते ही पसंद कर लिया था, लेकिन उर्मिला ने विमल को यह कह कर नकार दिया था कि विमल गंजा है. वहीं उस ने राजेश को पसंद कर लिया था.
बनारस से लौटने के बाद उर्मिला और राजेश के बीच मोबाइल फोन पर प्यार भरी बातें होने लगीं. 2-3 महीने बाद उर्मिला ने अपने घर वालों को और राजेश ने भी अपने घर वालों से एकदूसरे से शादी कराने की बात कही तो घर वालों ने भी इजाजत दे दी. उस के बाद 17 जून, 2012 को उर्मिला का विवाह राजेश के साथ धूमधाम से हो गया.

राजेश गौतम और उर्मिला
खूबसूरत उर्मिला को पा कर राजेश गौतम अपने भाग्य पर इतरा उठा था. उर्मिला भी उस से शादी कर के खुश थी. उर्मिला ने आते ही घर संभाल लिया था और पति को अपनी अंगुलियों पर नचाने लगी थी. शादी के एक साल बाद उर्मिला ने एक बेटे को जन्म दिया. बेटे के जन्म से घर में खुशियां दोगुनी हो गईं.
इस के 2 साल बाद उर्मिला ने एक और बेटे को जन्म दिया. 2 बच्चों के जन्म के बाद राजेश ने पत्नी की इच्छाओं पर गौर करना कम कर दिया. क्योंकि उस ने नौकरी के साथसाथ प्रौपर्टी डीलिंग का काम भी शुरू कर दिया था.
पति की बेरुखी पर उर्मिला रात भर बेचैन रहती. उसे घर में सब सुख था, किसी चीज की कमी न थी, लेकिन पति के प्यार से वंचित थी. इस तरह उर्मिला नीरस जिंदगी गुजारने लगी. उस ने दोनों का एडमिशन कोयला नगर स्थित मदर टेरेसा स्कूल में करा दिया.
राजेश गौतम ने प्रौपर्टी डीलिंग में करोड़ों रुपए कमाए. साथ ही कोयला नगर क्षेत्र में ही उस ने 5-6 प्लौट भी खरीद लिए, जिन की कीमत करोड़ों रुपए थी. राजेश कमाई में इतना व्यस्त हो गया कि पत्नी की भावनाओं की कद्र करना ही भूल गया.
30 करोड़ की संपत्ति थी राजेश के पास
वह सुबह उठता, पहले टहलने जाता, फिर तैयार होकर स्कूल चला जाता. दोपहर बाद स्कूल से आता, फिर प्रौपर्टी के काम में व्यस्त हो जाता. इस के बाद देर रात आता और खाना खा कर सो जाता. यही उस का रुटीन था.
राजेश गौतम की तमन्ना थी कि वह कोयला नगर में एक ऐसा आलीशान मकान बनाए, जिस की चर्चा क्षेत्र में हो. अपनी तमन्ना पूरी करने के लिए उस ने 300 वर्गगज वाले अपने प्लौट पर मकान बनाने का फैसला किया. इस के लिए उस ने 6 करोड़ रुपए का इंतजाम भी कर लिया.
प्रशासन के कुछ लोगों ने नाले के पास जा कर देखा तो वहां पर प्रतिभा पूरी तरह से नग्न अवस्था में मृत पड़ी हुई थी. इस जानकारी के मिलते ही अस्पताल प्रशासन के हाथपांव फूल गए. प्रतिभा के मृत पाए जाने की सूचना पुलिस को भी दे दी गई.
सभी लोग इस बात पर हैरान थे कि 8 नवंबर, 2023 को दोपहर ढाई बजे से शाम करीब 7 बजे तक उस स्थान पर प्रतिभा को खोजा गया, लेकिन उस वक्त वहां पर उस का कोई नामोनिशान नहीं था. फिर 29 घंटे बाद उस का शव उसी जगह पर कहां से आ गया था?
पुलिस भी मौके पर पहुंच गई. प्रतिभा के घर वालों का कहना था कि उस के साथ अस्पताल के ही किसी कर्मचारी ने दुष्कर्म कर हत्या कर दी. उस के एक हाथ पर कई घाव थे. पुलिस ने महिला के साथ दुष्कर्म की आशंका को देखते हुए स्लाइड बनवाने का निर्णय भी लिया गया था. साथ ही इस केस की जांच के लिए नगर मजिस्ट्रैट विजयशंकर तिवारी को चुना गया था. लेकिन इस घटना को 5 दिन बीत जाने के बाद भी मैडिकल कालेज में एडमिट प्रतिभा की मौत के रहस्य से परदा नहीं उठ सका.
उत्तर प्रदेश के बांदा जिले के थाना अतरा के अनथुवा गांव निवासी रामसेवक विश्वकर्मा ने अपनी पत्नी प्रतिभा को 3 नवंबर, 2023 को रानी दुर्गा मैडिकल कालेज में प्रसव पीड़ा के चलते भरती कराया. प्रसव पीड़ा के चलते प्रतिभा को प्रसूति रोग वार्ड का बैड नंबर 3 दिया गया था.

प्रतिभा विश्वकर्मा के साथ ज्यादा ही परेशानी थी, जिस कारण डाक्टरों ने उस का औपरेशन करने की सलाह दी थी. उसी शाम को प्रतिभा ने औपरेशन के बाद एक बच्ची को जन्म दिया. प्रतिभा के एक बच्ची के जन्म के बाद रामसेवक के परिवार में खुशी का माहौल था. प्रतिभा ने सर्जरी के द्वारा बच्ची को जन्म दिया था. जच्चाबच्चा दोनों ही सुरक्षित थे.
7 नवंबर, 2023 को प्रतिभा को डिसचार्ज होना था. लेकिन उस से पहले ही अचानक प्रतिभा की तबियत कुछ खराब हो गई, जिस के बाद उसे फिर से इमरजेंसी वार्ड में भरती कराया गया. जहां पर उस का उपचार शुरू किया गया था. लेकिन 8 नवंबर की सुबह को प्रतिभा अपने बैड से गायब मिली. उस के इमरजेंसी वार्ड से अचानक गायब होने से उस के घर वाले परेशान हो गए. प्रतिभा को पूरे अस्पताल में खोजा गया, लेकिन उस का कहीं भी अतापता नहीं लग सका.
प्रतिभा के गायब होने की जानकारी अस्पताल प्रशासन को लगी तो महकमे में अफरातफरी हो गई. प्रतिभा के घर वालों ने अस्पतालकर्मियों से उस के बारे में जानकारी ली तो उन की तरफ से कोई संतोषजनक उत्तर नहीं मिला तो उन्होंने इस की सूचना पुलिस को दी.
मरीज के गायब होने की जानकारी मिलते ही मैडिकल कालेज चौकीप्रभारी कुलदीप तिवारी तुरंत ही घटनास्थल पर पहुंच गए. वहां पहुंचते ही उन्होंने वहां पर मौजूद मैडिकल कालेज कर्मियों से प्रतिभा के बारे में जानकारी जुटाई. उस के बाद भी पुलिसकर्मियों के साथसाथ प्रतिभा के घर वालों ने भी उस की काफी खोजबीन की, लेकिन उस का कहीं भी पता न चल सका.
अगले दिन 9 नवंबर को दिन के 11 बजे औक्सीजन प्लांट में तैनात कर्मचारी शकील को एसएनसीयू वार्ड के पीछे नाली में प्रतिभा की नग्न लाश पड़ी दिखाई दी. शकील ने इस की जानकारी मैडिकल प्रशासन को दी. अस्पताल प्रशासन ने पुलिस को सूचना दे कर बुला लिया. मौके पर पहुंचे चौकीप्रभारी कुलदीप तिवारी ने प्रतिभा के शव का निरीक्षण किया. उस की लाश नाले में औंधे मुंह पड़ी हुई थी.
क्या प्रतिभा को बनाया हवस का शिकार
घटनास्थल का निरीक्षण करने के बाद ही कुलदीप तिवारी ने इस सब की जानकारी अपने उच्चाधिकारियों को दी. खबर मिलते ही कोतवाल अनूप दुबे, सीओ सदर अबुंजा त्रिवेदी, एएसपी लक्ष्मीनिवास मिश्र, सिटी मजिस्ट्रेट विजयशंकर तिवारी घटनास्थल पर पहुंचे और जांचपड़ताल की.
मौके पर पहुंची डौग स्क्वायड के साथ फोरैंसिक टीम ने भी घटनास्थल की जांचपड़ताल की. फोरैंसिक टीम ने मौके से कुछ सबूत भी लिए. इस बारे में पुलिस प्रशासन ने मैडिकल कालेज के प्राचार्य डा. एस.के. कौशल से भी जानकारी जुटाई.
प्राचार्य एस.के. कौशल ने बताया कि इमरजेंसी वार्ड में नर्स, एसआर व जेआर की ड्यूटी रहती है. महिला इस तरह से अचानक कैसे गायब हुई, स्टाफ के सभी लोगों से जानकारी ली जाएगी. लापरवाही बरतने वाले पर सख्त काररवाई की जाएगी.
प्रतिभा के मृत पाए जाने की सूचना पर उस के घर वालों के साथसाथ अन्य लोग भी मैडिकल कालेज पहुंच गए. उस की हत्या को ले कर उन्होंने काफी हंगामा किया. इस सब से भी बड़ी बात यह थी कि अगर किसी ने इस वारदात को अंजाम दिया तो इतने बड़े कैंपस में किसी की नजर क्यों नहीं पड़ी.
घर वालों का कहना था कि उस के नग्न शव के पड़े होने व एक हाथ पर कई घाव उस के साथ किसी अनहोनी का संकेत कर रहे हैं. उसी कारण घर वाले उस के पंचनामे के लिए किसी भी तरह से राजी नहीं थे. फिर भी किसी तरह पुलिस प्रशासन ने उन्हें समझायाबुझाया और प्रतिभा के शव की संपूर्ण काररवाई करते हुए पंचनामा किया. फिर उस के शव को पोस्टमार्टम के लिए भिजवा दिया.
अगले दिन शुक्रवार को 3 डाक्टरों डा. एम.के. गुप्ता, डा. रामनरेश व मैडिकल कालेज के फोरैंसिक विभाग के विभागाध्यक्ष डा. आभास कुमार के पैनल ने वीडियोग्राफी के साथ प्रतिभा के शव का पोस्टमार्टम किया. प्रसूता प्रतिभा के शरीर पर अनगिनत चोटों के निशान पाए गए, वह भी उस की मौत की एक वजह थे. इस मामले को गंभीरता से लेते हुए पुलिस ने दूसरे एंगल से जांचपड़ताल शुरू की.

उसी जांच की कड़ी में 11 नवंबर की देर रात को कोतवाली पुलिस ने मैडिकल कालेज में घटनास्थल पर सीन औफ क्राइम दोहराया. मैडिकल कालेज के शल्य विभाग की बिल्डिंग में भी बारीकी से जांचपड़ताल की. उस के बाद एसएनसीयू वार्ड के पीछे जा कर फिर से घटनास्थल को खंगाला गया.
उस के साथ ही डाक्टरों, पैरामैडिकल स्टाफ व गार्डों समेत वहां भरती मरीजों के परिजनों से भी कड़ी पूछताछ की गई. सीन औफ क्राइम के समय 1-2 तीमारदारों ने बताया कि महिला को आईसीयू वार्ड के पास वाली सीढ़ियों पर देखा गया था.
यह जानकारी मिलने के बाद पुलिस ने अंदाजा लगाया कि महिला आईसीयू वार्ड से सीढ़ियां चढ़ कर छत तक पहुंची होगी. उस के बाद पुलिस ने छत पर जा कर हर तरह से जांचपड़ताल की. लेकिन इस मामले में कोई नतीजा सामने न आने के बाद कोतवाल अनूप दुबे ने इस केस की जांच आगे भी जारी रखी, लेकिन फिर भी पुलिस के हाथ अब तक खाली थे.
इस मामले में सब से बड़ी बात यह थी कि इस मैडिकल कालेज में सुरक्षा के लिए 36 सिक्योरिटी गार्ड तैनात थे. वहीं मैडिकल कालेज में 70 सीसीटीवी कैमरे लगे थे. लेकिन इस मामले में कहीं से भी कोई ऐसा क्लू नहीं मिला था, जिस से उस महिला की हत्या के आरोपी का पता चल सके.
मामले की जांच के लिए डीएम ने एडीएम अमिताभ यादव के नेतृत्व में एक पुलिस टीम बनाई. टीम में एएसपी लक्ष्मीनिवास मिश्र और सीएमओ डा. ए.के. श्रीवास्तव को शामिल किया गया. तीनों अधिकारियों ने अपनी जांच रिपोर्ट डीएम को सौंपते हुए इमरजेंसी वार्ड में ड्यूटी पर तैनात मैडिकल कालेज के 11 कर्मचारियों की लापरवाही का जिक्र किया था.
सिक्योरिटी गार्ड और सीसीटीवी कैमरों से कैसे बचे आरोपी
महिला की लाश मिलने वाली जगह को देखते हुए यह तो आशंका जाहिर की जा रही थी कि उस महिला की हत्या करने से पहले उस के साथ बलात्कार हुआ होगा. मगर इस सब में भी सब से बड़ी बात यह थी कि मरीज मैडिकल कालेज की ऊपरी बिल्डिंग से नीचे कैसे आई और उस के साथ यह दुस्साहस किस ने किया.
हालांकि जिस जगह पर महिला का शव मिला, उस स्थान पर कहीं भी सीसीटीवी कैमरा लगा हुआ नहीं था. लेकिन मैडिकल कालेज की ऊपरी बिल्डिंग से नीचे तक कहीं न कहीं तो कैमरा अवश्य ही लगा होना चाहिए था.
यही नहीं उस मैडिकल कालेज के इमरजेंसी से ले कर एसएनसीयू वार्ड के बीच अंदरूनी कारीडोर में कहीं भी कैमरा लगा हुआ नहीं था. कालेज के इस इलाके में हमेशा ही सन्नाटा पसरा रहता है, जिस का लाभ अपराधियों ने उठाया.
मैडिकल कालेज के इमरजेंसी वार्ड के बाहरी हिस्से में एक सीसीटीवी कैमरा लगा हुआ था, जिस की फुटेज निकालने पर पता चला कि मृतक प्रतिभा बुधवार की सुबह 5 बज कर 42 मिनट पर इमरजेंसी वार्ड से बाहर अकेली ही आई थी.
मैडिकल कालेज के इमरजेंसी वार्ड में एक सीनियर डाक्टर, एक जूनियर डाक्टर के अलावा 3 नर्सिंग स्टाफ, 2 वार्डबौय और 2 सफाईकर्मियों की ड्यूटी शिफ्टों में रहती है.
घटना वाले दिन भी इतना ही स्टाफ वहां पर मौजूद था. यही नहीं, उस दिन मृतका के घर वालों में उस के जेठ, जेठानी के अलावा उस का एक भाई भी उसी वार्ड के बाहर थे. लेकिन उन के सोने के बाद ही प्रतिभा पता नहीं कब वार्ड से बाहर आई और वहां से कैसे नीचे पहुंची. उन्हें कुछ भी पता नहीं चला.
मृतका के घर वालों का कहना था कि प्रतिभा के लापता होते ही उन्होंने कई बार मैडिकल कालेज के स्टाफ से उसे तलाशने के लिए कहा, लेकिन मैडिकल कालेज का स्टाफ से उसे खुद तलाशने की बात कह कर अपना पल्ला छाड़ लिया था. जिस से साफ जाहिर होता है कि इस सब में मैडिकल कालेज कर्मचारियों की मिलीभगत थी.
इस मामले में जांच समिति ने भले ही मैडिकल कालेज के 11 कर्मचारियों को जिम्मेदार ठहराते हुए अपनी रिपोर्ट प्रशासन को सौंपी थी. लेकिन इस के बाद भी महिला की मौत की वजह से परदा नहीं उठ पाया.
प्रतिभा की स्वाभाविक मौत हुई या फिर उस की बलात्कार के बाद हत्या की गई है. इस का जवाब न तो पुलिस के पास ही है और न ही मैडिकल कालेज प्रशासन के पास.
मृतका के घर वालों का कहना था कि प्रतिभा की डाक्टरों ने सीजेरियन डिलीवरी कराई थी. उस के बाद जच्चाबच्चा दोनों ही स्वस्थ थे. दोनों के स्वस्थ होने के कारण डाक्टरों ने 7 नबंवर, 2023 को डिसचार्ज होने की तारीख भी दे दी थी.
लेकिन शाम को प्रतिभा को दवा देने के बाद ही उस की हालत अचानक बिगड़ गई, जिस के कारण प्रतिभा का मानसिक संतुलन खराब सा लगने लगा था. इस से साबित होता है कि उसे कोई गलत दवा दी गई थी. उस के बाद उस की परेशानी को देखते हुए फिर से उसे इमरजेंसी वार्ड में भरती कराया गया था, जहां से वह अगली ही सुबह गायब मिली.
वह मैडिकल कालेज की तीसरी मंजिल से नीचे कैसे आई. वह खुद नीचे आई या फिर उसे गिराया गया, इस मिस्ट्री का जवाब न तो पुलिस प्रशासन के पास है और न ही मैडिकल कालेज प्रशासन के पास. वहीं मैडिकल कालेज के प्राचार्य डा. एस.के. कौशल ने इस मामले को पुलिस जांच का हिस्सा बताते हुए पल्ला झाड़ लिया.
लेकिन मृतका के नग्न शव के पास ही उस के नीचे के कपड़े पड़े होने व उस के एक हाथ में काफी चोटों के निशान पाए जाने से यह तो साफ है कि महिला के साथ दरिंदगी की गई थी. इस सब में मैडिकल कालेज के किसी व्यक्ति का हाथ हो सकता है. जिस की विवेचना होना अति अनिवार्य हो जाती है.
मैडिकल कालेज के पहले के मामलों का क्यों नहीं हुआ खुलासा
रानी दुर्गावती मैडिकल कालेज का यह कोई पहला ऐसा मामला नहीं, जिस का खुलासा नहीं हुआ. इस से पहले भी 13 सितंबर, 2022 की शाम को मैडिकल कालेज हौस्टल में एमबीबीएस फोर्थ ईयर के छात्र अमित मजूमदार ने फांसी लगा कर आत्महत्या कर ली थी.
उस के बाद पुलिस जांचपड़ताल के दौरान पुलिस को उस के रूम से एक सुसाइड नोट प्राप्त हुआ था, जिस में उस ने लिखा था कि उस की मौत का किसी को भी जिम्मेदार न ठहराया जाए. वह स्वयं ही आत्महत्या कर रहा है.
शिकोहाबाद के एटा चौराहा निवासी अपूर्व मजूमदार का बेटा 25 वर्षीय अमित मजूमदार बांदा के इसी मैडिकल कालेज में एमबीबीएस में अंतिम वर्ष का छात्र था. 13 सितंबर, 2022 को उस ने कालेज हौस्टल में ग्राउंड फ्लोर पर स्थित अपने कमरे के अंदर छत के पंखे से लटक कर आत्महत्या कर ली थी. उस वक्त भी प्रशासन ने छात्र को डिप्रेशन का शिकार बताया था.
पुलिस ने इस मामले में उस के घर वालों से पूछताछ भी की थी, लेकिन उस के घर वालों ने बताया था कि उन का बेटा सीधासादा व होनहार था. उसे किसी बात की डिप्रेशन थी, यह बात मैडिकल कालेज के प्रशासन के लोग ही बता रहे थे.
उस छात्र की मौत का रहस्य भी एक राज बन कर ही रह गया था. इस मामले में पुलिस ने काफी हाथपांव मारे थे, लेकिन उस के फांसी लगाने की वजह स्पष्ट नहीं कर पाए थे.
कुछ इसी तरह का मामला इसी वर्ष 16 अगस्त, 2023 को सामने आया था. एमबीबीएस थर्ड ईयर की 23 वर्षीय छात्रा ऊषा भार्गव ने पहले हाथ की नस काटी फिर फांसी लगा कर खुदकुशी कर ली थी. उस का शव भी मैडिकल कालेज के एक कमरे में मिला था. छात्रा की आत्महत्या की सूचना पाते ही पुलिस मौके पर पहुंची थी.
उस के बाद पुलिस ने मैडिकल कालेज प्रशासन से उस के बारे में पूछताछ करने के बाद उस की लाश का पंचनामा भरने के बाद पोस्टमार्टम हेतु भिजवा दी थी. उसी जांचपड़ताल में पुलिस ने उस के कमरे से उस की एक डायरी प्राप्त की थी. पुलिस ने अपनी काररवाई करते हुए उस के साथ रह रही कई छात्राओं से भी उस के बारे में पूछताछ की थी.
पुलिस जांच में उस की डायरी से कुछ भावनात्मक बातें लिखी हुई थीं. उस के साथ ही पुलिस ने उस की काल डिटेल्स निकाल कर भी जानकारी जुटाई थी. लेकिन पुलिस किसी भी नतीजे पर नहीं पहुंच पाई थी.
ऊषा भार्गव राजस्थान के चुरू की रहने वाली थी. छात्रा के इस तरह से फांसी लगा कर जान देने की घटना से भी कई सवाल उठे थे. इस मामले को गंभीरता से लेते हुए पुलिस प्रशासन ने उस के साथ पढ़ रहे कई छात्रों से जानकारी जुटाई थी. लेकिन कोई नतीजा नहीं निकला था. उस के बाद भी मैडिकल कालेज प्रशासन ने इस प्रकरण की जांच की बात कही थी. लेकिन उस की जांच रिपोर्ट आज तक सामने नहीं आई.
बहरहाल, कथा लिखे जाने तक पुलिस प्रतिभा की मौत की सच्चाई का पता नहीं लगा पाई थी.
—कथा पुलिस सूत्रों व पीड़ितों से बातचीत पर आधारित
आशू यानी आशीष कुमार जब सजधज कर निकलता है तो युवक ही नहीं, बड़ेबूढ़े भी उसे देखते रह जाते हैं. उस के रूप सौंदर्य पर लोग इस कदर मोहित हो जाते हैं कि उसे जीवनसाथी के रूप में पाने की कल्पना करने लगते हैं. यही नहीं, जब वह कातिल अदाओं के साथ स्टेज पर नृत्य करता है तो नवयुवकों के साथ बुड्ढे भी बहकने लगते हैं.
आशू के इन गुणों को देख कर लगता है कि वह कोई लड़की है. लेकिन ऊपर जो नाम लिखा है, उस से साफ पता चलता है कि वह लड़की नहीं, लड़का है. इलाहाबाद का बहुचर्चित डांसर एवं ब्यूटीशियन आशीष कुमार उर्फ आशू बेटे के रूप में पैदा हुआ था, इसीलिए घर वालों ने उस का नाम आशीष कुमार रखा था. बाद में सभी उसे प्यार से आशू कहने लगे थे. लेकिन लड़का होने के बावजूद उस का रूपसौंदर्य ही नहीं, उस में सारे के सारे गुण लड़कियों वाले हैं.
आशू का जन्म उत्तर प्रदेश के जिला इलाहाबाद के मोहल्ला जीटीबीनगर में रहने वाले विनोद कुमार शर्मा के घर हुआ था. पिता इलाहाबाद में ही व्यापार कर विभाग में बाबू थे. परिवार शिक्षित, संस्कारी और संपन्न था. 4 भाइयों और 2 बहनों में तीसरे नंबर का आशू पैदा भले ही बेटे के रूप में हुआ था, लेकिन जैसेजैसे वह बड़ा होता गया, उस में लड़कियों वाले गुण उभरते गए. उस के हावभाव, रहनसहन एवं स्वभाव सब कुछ लड़कियों जैसा था. वह लड़कों के बजाय लड़कियों के साथ खेलता, उन की जैसी बातें करता.
जब कभी उसे मौका मिलता, वह अपनी बहनो के कपड़े पहन कर लड़कियों की तरह मेकअप कर के आईने में स्वयं को निहारता. मां और बहनों ने कभी उसे रोका तो नहीं, लेकिन उस के भविष्य को ले कर वे चिंतित जरूर थीं.
आशू जिन दिनों करेली के बाल भारती स्कूल में कक्षा 6 में पढ़ता था, स्कूल के वार्षिकोत्सव में पहली बार उसे नृत्य के लिए चुना गया. कार्यक्रम के दौरान जब आशू को लड़की के रूप में सजा कर स्टेज पर लाया गया तो लोग उसे देखते रह गए. लड़की के रूप में उस ने नृत्य किया तो उस का नृत्य देख कर लोगों ने दांतों तले अंगुली दबा ली.
इस के बाद मोहल्ले में ही नहीं, शहर में होने वाले सांस्कृतिक कार्यक्रमों में आशू को नृत्य के लिए बुलाया जाने लगा. चूंकि उस समय आशू बच्चा था, इसलिए घर वाले उसे उन सांस्कृतिक कार्यक्रमों में जाने से मना नहीं करते थे. लेकिन आशू बड़ा हुआ तो लोग उस के हावभाव को ले कर उस के पिता और भाइयों के सामने अशोभनीय ताने मारने लगे, जिस से उन्हें ठेस लगने लगी.
आखिकार एक दिन आशू को ले कर घर में हंगामा खड़ा हो गया. पिता और भाइयों ने उस से साफ कह दिया कि वह पढ़ाई पर ध्यान दे, कहीं किसी कार्यक्रम में जाने की जरूरत नहीं है. लेकिन आशू स्वयं को रोक नहीं पाया. मौका मिलते ही वह कार्यक्रमों में भाग लेने पहुंच जाता.
आशू की हरकतों से घर वाले स्वयं को बेइज्जत महसूस करते थे. लोग उसे ले कर तरहतरह की चर्चा करते थे. कोई उसे किन्नर कहता था तो कोई शारीरिक रूप से लड़की कहता. जब बात बरदाश्त से बाहर हो गई तो घर वालों ने कक्षा 8 के बाद उस की पढ़ाई छुड़ा दी.
अब तक आशू काफी समझदार हो चुका था. पढ़ाई छुड़ा दिए जाने के बाद वह घर में बैठबैठे बोर होने लगा. घर में सिर्फ मां और बहनें ही उस से बातें करती थीं, वही उस की पीड़ा को भी समझती थीं. क्योंकि वे स्त्री थीं. वे हर तरह से उसे खुश रखने की कोशिश करती थीं.
वक्त गुजरता रहा. पिता और भाई भले ही आशू के बारे में कुछ नहीं सोच रहे थे, लेकिन मां उस के भविष्य को ले कर चिंतित थी. उस ने उसे अपने पैरों पर खड़ा करने के लिए पति से गंभीरता से विचार किया. अंतत: काफी सोचविचार के बाद आशू की पसंद के अनुसार उसे नृत्य और ब्यूटीशियन का कोर्स कराने का फैसला लिया गया.
आशू को नृत्यं एवं ब्यूटीशियन की कोचिंग कराई गई. चूंकि उस में नृत्य एवं ब्यूटीशियन का काम करने की जिज्ञासा थी, इसलिए जल्दी ही वह इन दोनों कामों में निपुण हो गया. इस के बाद उस ने अपना ब्यूटीपार्लर खोल लिया. इस काम में आशू ने पैसे के साथसाथ अच्छी शोहरत भी कमाई.
घर वाले आशू के इस काम से खुश तो नहीं थे, लेकिन विरोध भी नहीं करते थे. वह जब तक घर पर रहता, पिता और भाइयों से डराडरा रहता, क्योंकि वे उस के लड़की की तरह रहने से घृणा करते थे. आशू बड़ा हो गया. लेकिन खुशियां और आनंद उस के लिए सिर्फ देखने की चीजें थीं, क्योंकि वह घर में घुटनभरी जिंदगी जीने को मजबूर था.
आशू चूंकि अपने गुजरबसर भर के लिए कमाने लगा था, इसलिए खुशियां और आनंद पाने के लिए वह अपना घर छोड़ने के बारे में सोचने लगा. क्योंकि वह पिता और भाइयों की उपेक्षा एवं घृणा से त्रस्त हो चुका था. मजबूर हो कर 7 साल पहले आशू ने दिल मजबूत कर के घर छोड़ दिया और कैंट मोहल्ले में किराए पर कमरा ले कर आजादी के साथ रहने लगा. आशू के लिए यह एक नया अनुभव था.
आजाद होने के बाद आशू में लड़की होने की कसक पैदा होने लगी. कहा जाता है कि मनुष्य जैसा सोचता है, वैसा ही बन जाता है. आशू के साथ भी ऐसा ही हुआ. उस की भी कमर लड़कियों की तरह पतली होने लगी और नीचे के हिस्से भरने लगे. उस का रूपसौंदर्य औरतों की तरह निखरने लगा. कुछ ही दिनों में वह पूरी तरह से औरत लगने लगा.
आशू को लड़कियों जैसा ऐसा रूप मिला था कि वह जब कभी स्टेज पर नृत्य करता लोग देखते रह जाते थे. आज स्थिति यह है कि वह इलाहाबाद शहर का मशहूर डांसर माना जाता है. इस समय वह अतरसुइया में रहता है. वह जो कमाता है, उस का अधिकांश हिस्सा समाजसेवा पर खर्च करता है. यही वजह है कि लोग उसे सम्मान की नजरों से देखते हैं.
आशू उपेक्षित एवं तिरस्कृत गरीब परिवार के लड़केलड़कियों को आत्मनिर्भर बनाने में उन की आर्थिक मदद तो करता ही है, अपने ‘जया बच्चन नृत्य एवं संगीत स्कूल’ में नि:शुल्क नृत्य भी सिखाता है. उस के इस स्कूल में 25 लड़के एवं 20 लड़कियां नृत्य सीख रही हैं. इस के अलावा वह लड़केलड़कियों को आत्मनिर्भर बनाने के लिए ब्यूटीशियन का कोर्स भी कराता है.
आशू को सब से बड़ा दुख इस बात का है कि परिवार में इतने लोगों के होते हुए भी वह अकेला है. जबकि दुखसुख बांटने के लिए एक साथी की जरूरत होती है. लेकिन उस की स्थिति ऐसी है कि वह किसी को अपना साथी नहीं बना सकता. औरत के लिए मर्द तो मर्द के लिए औरत के प्यार की जरूरत होती है, लेकिन आशू का तन मर्द का है तो मन औरत का. ऐसे में उसे न तो मर्द का प्यार मिल पा रहा है, न औरत का.
उस रात सभी लोग खाना खाने के बाद सोने चले गए. आधी रात को राघव को कुछ उलझन महसूस हुई तो वह बाहर आ गया. बाहर टहलने के बाद राघव आरती के कमरे की ओर गया तो वह वहां नहीं थी. तब राघव मम्मी के पास गया, आरती वहां भी नहीं थी. इस के बाद राघव ने घर में सभी को उठा दिया. लेकिन बदनामी के डर से घर वालों ने शोर नहीं मचाया.
पहले तो आरती की घर में ही तलाश की फिर बाहर गांव में निकल गए, लेकिन आरती कहीं नहीं मिल रही थी. घर वाले समझ गए कि वह सतीश चौरसिया के साथ ही होगी. उसे तलाशता हुआ राघव जब अपने घर के पीछे पहुंचा तो वहां का दृश्य देख कर उस का खून खौल उठा. आरती और सतीश आपत्तिजनक स्थिति में थे. राघव इसे बरदाश्त नहीं कर पाया. उस ने अपने पापा मम्मी को मौके पर बुला लिया.
उत्तर प्रदेश के जनपद गोंडा का एक थाना है धानेपुर. इस थाना क्षेत्र के अंतर्गत गांव मेहनौन आता है. इसी गांव के रहने वाले हैं बिंदेश्वरी चौरसिया. उन के 5 बेटे व एक बेटी थी. अपने 3 बेटों लवकुश, संजय और हरिश्चंद्र के साथ बिंदेश्वरी मुुंबई में रहते थे.
संजय व हरिश्चंद्र अपने पिता के साथ वहां पावरलूम में काम करते थे, जबकि लवकुश चाय की दुकान चलाता था. बिंदेश्वरी के 2 बेटे सतीश व विशाल गांव में ही अपनी मां के साथ रह रहे थे. जबकि बेटी की वह शादी कर चुके थे.
गांव में सब कुछ ठीक चल रहा था. अचानक बिंदेेश्वरी का 19 वर्षीय बेटा सतीश चौरसिया 20-21 अगस्त, 2023 की रात घर से अचानक लापता हो गया. घर वाले सारी रात उस का इंतजार करतेे रहे. सुबह होने पर उन्होंने अपने तरीके से खोजबीन की, लेकिन उस का कोई पता नहीं चला. इस पर सतीश की मां प्रभावती ने थाना धानेपुर में 21 अगस्त की सुबह सतीश की गुमशुदगी दर्ज करा दी.
गुमशुदगी दर्ज हो जाने के बाद 22 अगस्त, 2023 को थाना धानेपुर के एसएचओ सत्येंद्र वर्मा जांच के लिए पुलिस टीम के साथ गांव मेहनौन पहुंचे. सतीश के घर वालों से उन्होंने पूछताछ की.

एसएचओ सत्येंद्र वर्मा
सतीश की मां प्रभावती ने उन्हें बताया कि 20-21 अगस्त की देर रात खाना खा कर सतीश घर के बाहरी हिस्से में बनी बैठक (कमरे) में सोने चला गया था. आधी रात को जब उस की आंखें खुलीं तो सतीश बैठक में नहीं दिखाई दिया.
उस ने सोचा कि शायद वह टायलेट के लिए खेत में गया होगा. लेकिन काफी देर बाद भी वह नहीं लौटा. सुबह होते ही सतीश को सभी ने गांव में तलाशना शुरू किया, लेकिन वह कहीं नहीं मिला.
पुलिस ने गांव में अपने स्तर से जांचपड़ताल करने के साथ ही सतीश के मोबाइल की काल डिटेल्स निकलवाई. इस से पता चला कि रात को सतीश की गांव की रहने वाली एक युवती से फोन पर बात हुुई थी. वह रात को उस से मिलने गया था. इस के बाद से ही वह लापता हो गया था. सतीश की मां ने बताया कि उसे पता चला है कि गांव की आरती भी अपने घर पर नहीं है.
सतीश और आरती अपने घरों में नहीं थे. दोनों के इस तरह गायब हो जाने पर गांव में चर्चाओं का दौर शुरू हो गया. सभी दबी जुबान से कह रहे थे कि दोनों गांव से भाग गए हैं. अब कहीं जा कर शादी कर लेंगे. कोई कह रहा था कि आरती सतीश पर जान छिड़कती थी. 2 साल से चल रहे उन के प्रेम प्रसंग के बारे में कौन नहीं जानता. जितने मुंह उतनी बातें.
घर वालों ने पुलिस को क्यों उलझाया
इस जानकारी के बाद पुलिस आरती के घर पहुंची. घर पर आरती के पिता कृपाराम चौरसिया और भाई राघवराम चौरसिया मिले. आरती के घर वाले शांति से अपने घर पर बैठे थे. आरती के पिता कृपाराम से एसएचओ ने आरती के बारे में पूछताछ की.
पहले तो उन लोगों ने पुलिस को अपनी बातों में उलझाया. कई तरह की बातें बनाईं. कृपाराम चौरसिया ने बताया कि गांव का सतीश चौरसिया उन की बेटी आरती को बहलाफुसला कर रात को अपने साथ भगा ले गया है. जिस से गांव में उन की बहुत बदनामी हो रही है.
तब एसएचओ सत्येंद्र वर्मा ने कहा कि आप लोग दोनों की तलाश क्यों नहीं कर रहे? अब तक थाने में रिपोर्ट दर्ज क्यों नहीं कराई?
बापबेटे इस बात पर बगलें झांकने लगे. अपनी बातों से पुलिस को उन्होंने हरसंभव उलझाने की कोशिश की, लेकिन पुलिस के तर्कों के आगे उन की एक नहीं चली.
पुलिस को पहले ही इस मामले में मुखबिर से महत्त्वपूर्ण जानकारी मिल गई थी. सतीश के मोबाइल की काल डिटेल्स से यह पता चल गया था कि रात को सतीश आरती के घर गया था.
पुलिस ने अनहोनी का शक होने पर कृपाराम व उस के बेटे राघवराम को हिरासत में ले लिया. पुलिस ने दोनों से कहा, ”सीधेसीधे सच बता दो, नहीं तो पुलिस फिर अपने तरीके से पूछेगी.’’
तब दोनों कहने लगे कि आरती की कई दिनों से तबियत खराब चल रही थी. हम लोग इलाज के लिए उसे अयोध्या ले जा रहे थे. रास्ते में उस की मौत हो गई. तब हम ने अयोध्या में ही उस का अंतिम संस्कार कर दिया. सतीश के बारे में उन्हें कोई जानकारी नहीं है.

एसपी अंकित मित्तल
बापबेटे पलपल में बयान बदल रहे थे. तब पुलिस ने दोनों से सख्ती की इस पर वे टूट गए और सतीश और आरती की हत्या करने का जुर्म कुबूल कर लिया. इस के बाद एसएचओ एएसपी शिवराज व सीओ शिल्पा वर्मा को घटना से अवगत करा दिया. दोनों पुलिस अधिकारी गांव पहुंच गए. दोनों ने पूछताछ कर पूरे घटनाक्रम की जानकारी एसपी अंकित मित्तल को दी.
उर्मिला ने शैलेंद्र को रिझाने के जतन शुरू कर दिए. कभी वह उसे तिरछी नजरों से देख कर मुसकराती तो कभी शरमाने का अभिनय करती. शैलेंद्र पहले से ही उसे हसरत भरी निगाहों से देखता था. उर्मिला ने मुसकरा कर उसे देखना शुरू किया तो उस की हसरतें उफान मारने लगीं.
जब उर्मिला के कामुक बाणों का शैलेंद्र पर प्रभाव हुआ तो वह एक कदम आगे बढ़ी. यही नहीं, अब वह निर्माणाधीन मकान देखने भी जाने लगी. वहां दोनों खुल कर बतियाते और हंसीमजाक भी करते. शैलेंद्र समझ गया कि उर्मिला उस की बांहों में समाने को बेताब है.
एक दिन उस ने साहस दिखाते हुए उर्मिला को बाहुपाश में जकड़ लिया, ”भाभी, बहुत ललचा चुकी हो, आज मर्यादा टूट जाने दो.’’
”तोड़ दो,’’ उम्मीद के विपरीत उर्मिला शैलेंद्र की आंखों में देखते हुए मुसकराई, ”मैं भी यही चाहती हूं.’’
राजेश गौतम स्कूल गया था और दोनों बेटे पढऩे के लिए स्कूल जा चुके थे. सुनहरा मौका देख कर शैलेंद्र उर्मिला को बैड पर ले गया. इस के बाद दोनों ने अपनी हसरतें पूरी कीं.
4 नवंबर, 2023 की सुबह 7 बजे किसी परिचित ने कानपुर के अनिगवां निवासी ब्रह्मदीन गौतम को फोन पर सूचना दी कि उन का शिक्षक भाई राजेश गौतम स्वर्ण जयंती विहार स्थित पार्क के पास सड़क पर घायल पड़ा है. उस का एक्सीडेंट हुआ है. किसी तेज रफ्तार कार ने उसे कुचल दिया है. यह जानकारी मिलते ही ब्रह्मदीन ने अपने बेटे कुलदीप को साथ लिया और स्वर्ण जयंती विहार पहुंच गए. वहां पार्क के पास राजेश सड़क पर औंधे मुंह पड़ा था.
उस के सिर से खून बह रहा था. थोड़ी ही देर में घर के अन्य लोगों के साथ राजेश की पत्नी उर्मिला भी वहां पहुंच गई. पति की हालत देख कर उर्मिला की चीख निकल गई. ब्रह्मदीन व महेश भी भाई की हालत देख कर हैरान रह गए थे. कुलदीप तो समझ ही नहीं पा रहा था कि चाचा हर रोज मार्निंग वाक पर इसी सड़क पर आते थे, लेकिन आज इतना खतरनाक एक्सीडेंट कैसे हो गया.
राजेश को हिलाडुला कर देखा गया तो उस के शरीर में कोई हरकत नहीं हुई. लेकिन सांस की आस में राजेश को कांशीराम अस्पताल ले जाया गया, जहां के डाक्टरों ने उसे रीजेंसी ले जाने को कहा. इसी बीच किसी ने राजेश के एक्सीडेंट की सूचना थाना सेन पश्चिम पारा पुलिस को दे दी थी.
सूचना मिलते ही एसएचओ पवन कुमार कुछ पुलिसकर्मियों के साथ कांशीराम अस्पताल पहुंच गए. डाक्टरों के अनुसार राजेश की सांसें थम चुकी थीं, लेकिन घर वालों की जिद की वजह से पुलिस उसे पहले रीजेंसी फिर जिला अस्पताल हैलट ले गई. वहां के डाक्टरों ने भी राजेश गौतम को मृत घोषित कर दिया. इस के बाद पुलिस ने शव को कब्जे में ले लिया और घटना की सूचना वरिष्ठ अधिकारियों को दे दी.
कुछ देर बाद एसएचओ पवन कुमार दुर्घटनास्थल का निरीक्षण करने पहुंचे तो वहां भीड़ जुटी थी. सुबह की सैर करने वाले कई लोग भी वहां मौजूद थे. उन में से एक कमल गौतम ने बताया कि राजेश गौतम से वह परिचित था. वह हर रोज मार्निंग वाक पर आते थे.
आज सुबह साढ़े 6 बजे के लगभग वह सड़क पर तेज कदमों से टहल रहे थे, तभी एक कार उन के नजदीक से पास हुई. फिर उसी कार ने कुछ दूरी पर जा कर यू टर्न लिया और तेज रफ्तार से आ कर राजेश को टक्कर मार दी. राजेश उछल कर दूर जा गिरे.
एसएचओ पवन कुमार घटनास्थल पर जांच कर ही रहे थे, तभी एसीपी (घाटमपुर) दिनेश कुमार शुक्ला तथा एडीसीपी अंकिता शर्मा भी वहां पहुंच गईं. पुलिस अधिकारियों ने घटनास्थल का निरीक्षण किया तथा वहां मौजूद कुछ लोगों से पूछताछ की.
अंतिम संस्कार के बाद मृतक का भाई ब्रह्मदीन, महेश तथा भतीजा कुलदीप, उर्मिला के घर में ही रात को रुक गए. रात में राजेश की मौत पर चर्चा शुरू हुई तो कुलदीप बोला, ”उर्मिला चाची, हमें लगता है कि चाचा को सोचीसमझी रणनीति के तहत मौत के घाट उतारा गया है और दुर्घटना का रूप दिया गया है. लगता है कि चाचा से कोई खुन्नस खाए बैठा था.’’
”कुलदीप, ऐसा कुछ भी नहीं है. तुम सब लोग मेरे घर पर फालतू की बकवास मत करो और मेरा दिमाग खराब न करो. अच्छा होगा, तुम सब हमारे घर से चले जाओ.’’
घर वालों को उर्मिला पर क्यों हुआ शक
उर्मिला का व्यवहार देख कर कुलदीप ने उर्मिला से बहस नहीं की और अपने पिता व परिवार के अन्य लोगों के साथ वापस घर लौट आया.
इधर तमतमाई उर्मिला सुबह 10 बजे ही एडीसीपी कार्यालय जा पहुंची. उस ने एडीसीपी अंकिता शर्मा को एक तहरीर देते हुए कहा कि उसे शक है कि पति के भतीजे कुलदीप व उस के घर वालों ने पति की करोड़ों की प्रौपर्टी हड़पने के लिए दुर्घटना का रूप दे कर उन की हत्या की है.

एडीसीपी अंकिता शर्मा
इधर कुलदीप को जब पता चला कि उर्मिला चाची ने उस के व घर वालों के खिलाफ शिकायत की है तो कुलदीप एडीसीपी अंकिता शर्मा से मिला और बताया कि वह नेवी में कार्यरत है. उसे शक है कि उस के चाचा राजेश की मौत किसी षड्यंत्र के तहत हुई है. वह चाहता है कि इस की गंभीरता से जांच हो.
इस के बाद पुलिस ने घटनास्थल के आसपास के सीसीटीवी फुटेज खंगाली. इस से पता चला कि राजेश को कुचलने के बाद कार बेकाबू हो कर खंभे से टकराई तो कार चालक पीछे आ रही दूसरी वैगन आर कार में सवार हो कर भाग गया था.
इन सबूतों को देख कर एडीसीपी अंकिता शर्मा ने एसीपी दिनेश शुक्ला की देखरेख में एक जांच टीम भी गठित कर दी. टीम में 2 महिला सिपाही व एक तेजतर्रार महिला एसआई को भी शामिल किया गया.
पुलिस कैसे पहुंची आरोपियों तक
ईको स्पोर्ट कार, जिस से राजेश को टक्कर मारी गई थी, का पता लगाया तो वह कार आवास विकास 3 कल्याणपुर, कानपुर निवासी सुमित कठेरिया की निकली. वैगनआर कार के नंबर की जांच करने पर पता चला कि यह नंबर फरजी है. यह नंबर किसी लोडर का था. अब पुलिस का शक और गहरा गया.
जांच में पुलिस टीम को 12 संदिग्ध मोबाइल नंबर मिले थे, उन में एक नंबर मृतक राजेश की पत्नी उर्मिला का भी था. पुलिस ने जब उर्मिला के मोबाइल नंबर की काल डिटेल्स निकलवाई तो पता चला कि उस ने एक फोन नंबर पर महीने भर में 400 बार काल्स की थीं. घटना वाले दिन भी उस की इस नंबर पर कई बार बातें हुई थीं. पुलिस ने इस नंबर की जांचपड़ताल की तो पता चला कि यह नंबर शैलेंद्र सोनकर का है.
पुलिस ने शैलेंद्र सोनकर के बारे में मृतक के घर वालों से जानकारी जुटाई तो पता चला कि शैलेंद्र सोनकर आर्किटेक्ट इंजीनियर है. उसी ने राजेश के कोयला नगर वाले मकान को बनाने का ठेका लिया था. मकान बनवाने के दौरान ही शैलेंद्र का उर्मिला के घर आनाजाना शुरू हुआ और दोनों के बीच नजदीकियां बढ़ी थीं.