Gujrat News: पैसों की चकाचौंध में बह गई भावना

Gujrat News: 30 जून, 2023 को गुजरात के जिला भरूच के थाना जंबुसर पुलिस को सूचना मिली कि पगरनाला में एक लाश पड़ी है. सूचना मिलते ही थाना पुलिस घटनास्थल पर पहुंच गई. लाश किसी पुरुष की थी, जिस की उम्र 36 साल के आसपास थी.

मरने वाले के शरीर पर कपड़े के नाम पर सिर्फ पैंट थी. पुलिस ने पैंट की तलाशी ली कि शायद उस की जेब से ऐसा कुछ मिल जाए, जिस से उस की पहचान हो जाए. पर उस की जेब से कुछ भी नहीं मिला. आसपास भी ऐसी कोई चीज नहीं मिली थी, जिस से उस की पहचान हो पाती. तब पुलिस ने घटनास्थल की औपचारिक काररवाई पूरी कर लाश को पोस्टमार्टम के लिए भिजवा दिया.

इस के बाद थाने आ कर यह पता करने की कोशिश की जाने लगी कि जिले में कहीं कोई गुमशुदगी तो नहीं दर्ज है. पर जिले के किसी थाने में उस हुलिए के किसी व्यक्ति की कोई गुमशुदगी दर्ज नहीं थी. पोस्टमार्टम के बाद पुलिस ने लाश को बड़ौदा की मोर्चरी में रखवा दी. इस के बाद पुलिस यह पता करने की कोशिश करती रही कि मरने वाला कौन है?

10 दिन बाद हुई लाश की शिनाख्त

लाश मिलने के 10 दिनों बाद थाना जंबुसर से करीब 400 किलोमीटर दूर जिला बनासकांठा के थाना थराद के एसएचओ इंसपेक्टर सी.पी. चौधरी ने फोन कर के जंबुसर पुलिस से पूछा, “पता चला है कि आप के थानांतर्गत एक पुरुष की लाश मिली है. मरने वाले की उम्र 36 साल के आसपास है.”

“जी, आज से 10 दिन पहले नाले में एक लाश मिली थी. मरने वाले की यही उम्र होगी, जितनी आप बता रहे हैं. मैं उस के फोटो भेज रहा हूं. लाश अभी मोर्चरी में रखी है.” थाना जंबुसर पुलिस ने कहा.

जंबुसर पुलिस ने लाश के फोटो भेजे तो पता चला कि वह लाश गुजरात के जिला बनासकांठा की तहसील थराद के गांव चोटपा के रहने वाले मारवाड़ी चौधरी पटेल शंकरभाई की थी. वह गांव में रह कर खेती करने के साथसाथ मकान बनाने के ठेके लेता था. उस के परिवार में पत्नी भावना पटेल के अलावा 3 बच्चे और बूढ़े मांबाप थे. पिता को लकवा मार दिया था, इसलिए वह चलफिर नहीं सकते थे.

29 जून, 2023 को साइट से आने के बाद शाम का खाना खा कर शंकर यह कह कर घर से निकला था कि वह पड़ोस में रहने वाले ऊदाजी के पास जा रहा है. वह घर से गया तो फिर लौट कर नहीं आया. घर वालों ने थोड़ी देर इंतजार किया. पर जब समय ज्यादा होने लगा तो उस के बारे में पता करने लगे. फोन किया गया तो पता चला फोन बंद है.

अगले दिन यानी 30 जून को थाना थराद पुलिस को सूचना दी गई, लेकिन थाना थराद पुलिस ने इस मामले को गंभीरता से लेने के बजाय एकदो दिन और इंतजार करने के लिए कह कर सूचना देने गई शंकर की मां मीरादेवी को वापस भेज दिया था.

गुमशुदगी दर्ज कर पुलिस ने की कार्यवाही

जब 2 जुलाई तक शंकर नहीं आया तो मीरादेवी दोबारा थाने जा पहुंची. इस बार इंसपेक्टर सी.पी. चौधरी से उन की मुलाकात हो गई. उन्होंने तुरंत शंकर की गुमशुदगी दर्ज कराई और शंकर के बारे में पता कराने का आश्वासन दे कर मीरादेवी को घर भेज दिया.

इस के बाद एसएचओ ने शंकर की तलाश शुरू की. गांव वालों से पूछताछ में पता चला कि शंकर की पत्नी भावनाबेन का चरित्र ठीक नहीं है. इस के बाद उन्होंने भावना का फोन सर्विलांस पर लगवा दिया. इस से उन्हें पता चला कि भावना लगातार पड़ोसी गांव कलश के रहने वाले शिवा पटेल के संपर्क में है.

जब उन्होंने शिवा पटेल के बारे में पता किया तो जानकारी मिली कि वह 29 जून को अंकलेश्वर से गांव आया तो था, पर अपने घर नहीं गया था. इस के अलावा 29 जून को उस ने शंकर को फोन भी किया था. 29 जून की शंकर और शिवा के फोन की लोकेशन निकलवाई गई तो पता चला कि दोनों के फोन की लोकेशन एक साथ थी.

इस से पुलिस को उस पर शक हुआ तो पुलिस ने उस की लोकेशन निकलवाई. उस की लोकेशन अंकलेश्वर की मिली. इंसपेक्टर सी.पी. चौधरी की टीम अंकलेश्वर पहुंची और शिवा को गिरफ्तार कर के थाने ले आई.

थाने ला कर शिवा से पूछताछ शुरू हुई. शिवा पुलिस को गोलगोल घुमाता रहा. उस का कहना था कि वह 29 जून को गांव गया ही नहीं था. इधर शंकर से उस की मुलाकात ही नहीं हुई, लेकिन जब पुलिस ने उस के मोबाइल फोन की लोकेशन उस के सामने रखी तो उस ने शंकर के मर्डर में अपना अपराध स्वीकार करते हुए कहा कि भावना के साथ रहने के लिए उस ने शंकर की हत्या की है. इस के बाद उस ने भावना से प्यार होने से ले कर शंकर की हत्या की जो कहानी सुनाई, वह इस प्रकार थी.

मेले में मिल गए दोनों के दिल

शंकरभाई पटेल और भावनाबेन का विवाह करीब 14 साल पहले हुआ था. शंकर अपने परिवार के साथ चोटपा गांव में खेतों के बीच मकान बना कर रहता था. उस की दोस्ती कलश गांव के शिवाभाई पटेल से थी. वह भी मारवाड़ी चौधरी पटेल था. वह भी खेतों के बीच घर बना कर रहता था, शायद इसीलिए दोनों में कुछ ज्यादा पटती थी.

शिवा शंकर के घर भी खूब आताजाता था. शिवा अंकलेश्वर में मेटल का धंधा करता था. वह जब भी अंकलेश्वर से गांव आता, शंकर को अपनी क्रेटा गाड़ी में बैठा कर घुमाता था.

एक बार वह राजस्थान के बौर्डर पर लगने वाले लवाड़ा के मेले में घूमने जा रहा था तो शंकर के साथ उस की पत्नी भावना भी मेला देखने गई थी. उसी मेले में शिवा और भावना ने एकदूसरे का मोबाइल नंबर ले लिया था. बाद में दोनों के बीच फोन पर बातें होने लगीं. फोन पर बातें करतेकरते दोनों के बीच प्रेम संबंध बना तो फिर शारीरिक संबंध भी बन गए.

शिवा कुंवारा था, जवान था, अच्छा पैसा कमाता था, उसे एक महिला शरीर की जरूरत भी थी, जो भावना ने पूरी कर दी थी. शिवा के पास पैसों की कमी नहीं थी, वह दिल खोल कर भावना पर पैसे खर्च करता था तो भावना भी प्यार से उस की शारीरिक जरूरतें पूरी करती थी. यह अवैध संबंध इसी तरह चलते रहे.

यह लगाव जब गहराया तो भावना अकसर शिवा से शिकायत करने लगी, “मेरा पति शंकर मुझे बहुत परेशान करता है. जराजरा सी बात पर मुझे मारता है.”

शिवा के प्यार में डूब गई भावना

जब कभी भावना और शंकर में झगड़ा होता तो भावना शिवा को फोन कर के पति और अपना झगड़ा शिवा को सुनाती भी थी. शंकर भावना के साथ जो बरताव कर रहा था, वह शिवा को अच्छा नहीं लगता था. पर वह शंकर से कुछ कह भी नहीं सकता था.

शिवा भावना से बहुत प्यार करता था, इसलिए एक दिन उस ने कहा, “तुम शंकर को छोड़ कर मेरे साथ क्यों नहीं रहने आ जाती? मैं तुम्हें रानी की तरह रखूंगा.”

इस पर भावना ने कहा, “घर में बूढ़े मांबाप हैं, उन्हें छोड़ कर आऊंगी तो समाज मुझ पर थूकेगा. मेरी बहुत बदनामी होगी.”

“तब तुम्हीं बताओ मैं क्या करूं?” शिवा ने कहा.

“कुछ तो करना ही होगा, मैं इस आदमी के साथ अब नहीं रह सकती.” भावना बोली.

28 जून, 2023 को किसी बात पर शंकर और भावना में झगड़ा हुआ. तब भावना ने शिवा को फोन कर के कहा, “शिवा, तुम किसी भी तरह मुझे इस आदमी से छुड़ाओ. अब मैं इस आदमी के साथ बिलकुल नहीं रह सकती.”

शिवा भावना से प्यार तो करता ही था. पर उस के लिए परेशानी यह थी कि उस की बिरादरी में पति या पत्नी को छोडऩा आसान नहीं है. इसलिए जब उस ने भावना से एक बार फिर शंकर को छोड़ कर आने को कहा तो भावना बोली, “अगर मैं शंकर को छोड़ कर आती हूं तो समाज में मेरी बहुत बदनामी होगी. इसलिए शंकर से छुटकारा पाने के लिए उस का कुछ करना होगा.”

“वही तो मैं पूछ रहा हूं कि शंकर का किया जाए?” शिवा ने पूछा.

“ऐसा है, अगर तुम मेरे साथ रहना चाहते हो तो उसे खत्म कर दो. वह नहीं रहेगा तो हम दोनों आराम से रह सकेंगे.” भावना ने कहा.

“ठीक है, जैसा तुम कह रही हो, वैसा ही करते हैं. आराम से बैठ कर योजना बनाते हैं, उस के बाद शंकर को खत्म कर देते हैं.” शिवा ने कहा.

शंकर की हत्या की हुई प्लानिंग

28 जून को यह बात हुई थी. इस के पहले भी दोनों में शंकर नाम के कांटे को निकालने की कई बार बात हो चुकी थी, लेकिन इस के पहले फाइनल योजना नहीं बनी थी. पर इस बार दोनों ने फोन पर ही शंकर को खत्म करने की फाइनल योजना बना डाली.

योजना बनाने के बाद किसी को शक न हो, इसलिए भावना 28 जून को ही मायके चली गई. 29 जून को शिवा ने एक दूसरे नंबर से अपने दोस्त शंकर को फोन कर के अच्छीअच्छी बातें करने के बाद विश्वास में ले कर कहा, “यार शंकर, तुम से एक जरूरी काम है. मैं गाड़ी ले कर आ रहा हूं. तुम ऐसा करो, सडक़ पर आ कर मुझ से मिलो.”

इस बीच भावना से भी शिवा की बातचीत होती रही. 2 महीने पहले भावना और शिवा के बीच शंकर को मारने की बात हुई थी, तब भावना ने कहा था कि शंकर को नींद की गोली खिला कर खत्म कर दो. इसलिए 2 महीने पहले ही उस ने भरूच सिटी से नींद की गोलियां खरीद कर रख ली थीं, जो उस की गाड़ी में ही रखी थीं. 2 महीने पहले हुई बातचीत के अनुसार शिवा अपनी योजना में आगे बढ़ रहा था.

कार में गला घोंट कर की थी हत्या

29 जून, 2023 की दोपहर को अपनी क्रेटा कार नंबर जीजे16डी के1389 ले कर शिवा अंकलेश्वर से निकला. उस ने अपने निकलने की बात शंकर को बता दी थी. चलने के पहले उस ने नींद की गोलियां पीस कर पानी की बोतल में मिला दी थीं.

रात करीब 9 बजे वह गांव चोटपा पहुंचा. उस ने शंकर से बता ही दिया था कि एक जरूरी काम से उसे साथ चलना है, इसलिए वह खाना खा कर तैयार था. गांव पहुंचते ही शिवा ने फोन किया तो शंकर आ कर उस की कार में बैठ गया. शिवा इधरउधर गाड़ी घुमाने लगा.

शिवा समय गुजार रहा था कि शंकर उस से पानी पीने के लिए मांगे. इसलिए वह शंकर को चोटपा से खोडा चरकपोस्ट, साचोर, ननेवा से घानेरा ले गया. जब वह काफी दूर निकल गया तो शंकर ने पानी पीने के लिए मांगा. शिवा ने तुरंत पानी की वही बोतल पकड़ा दी, जिस में उस ने नींद की गोलियां पीस कर मिलाई थीं.

वह पानी पीने के थोड़ी देर बाद शंकर को नींद आ गई. इस के बाद शिवा घानेरा से सीधे डीसा रोड पर गया. सडक़ पर सुनसान जगह देख कर शिवा ने कार रोकी और शंकर के मोबाइल को स्विच्ड औफ कर दिया कि किसी को पता न चल सके.

इस के बाद वह गाड़ी ले कर चल पड़ा. काफी दूर जाने के बाद सुनसान जगह देख कर उस ने सडक़ के किनारे गाड़ी रोक दी. शंकर गहरी नींद में था. शिवा ने कार में रखी रस्सी निकाली और शंकर के गले में लपेट कर कस दी. गला घोंटने से शंकर की सांस हमेशा हमेशा के लिए रुक गई.

बच्चों के अनाथ होने पर समाज ने की मदद

अब उसे शंकर की लाश को ठिकाने लगाना था. वह लाश को ऐसी जगह फेंकना चाहता था, जहां कोई उस की पहचान न कर सके. उस ने शंकर को आगे की सीट पर इस तरह बैठा दिया, जिस से लगे कि वह बैठेबैठे सो रहा हो.

शंकर की लाश को ले कर वह डीसा, पालनपुर, मेहसाणा, अहमदाबाद, बड़ौदा होते हुए वह जंबुसर गया. जंबुसर चौराहे से थोड़ी दूर आगे से सिंगल रोड गई थी. उसे वह रोड सुनसान दिखाई दी तो उस ने कार उसी रोड पर उतार दी. लगभग एक किलोमीटर जा कर शिवा को एक पगरनाला दिखाई दिया तो उस ने शंकर की लाश उसी पगरनाले में फेंक दी. उस समय सुबह के 6 बज रहे थे.

लाश को ठिकाने लगाने के बाद शिवा ने फोन कर के यह बात भावना को बताई और वहां से सीधे अंकलेश्वर चला गया. 2 दिन बाद भावना भी ससुराल आ गई, जिस से किसी को उस पर शक न हो.

हत्याकांड का खुलासा हो जाने के बाद थाना थराद पुलिस ने भावना को भी गिरफ्तार कर लिया. शिवा को थाने में देख कर उस ने भी अपना अपराध स्वीकार कर लिया था. इस के बाद थाना थराद पुलिस ने शिवा और भावना को बनासकांठा की अदालत में पेश किया, जहां से दोनों का 6 दिन का रिमांड लिया गया.

रिमांड के दौरान बनासकांठा के एसपी अक्षयराज मकवाना ने प्रैस कौन्फ्रैंस की. पत्रकारों के सामने भी प्रेमिका प्रेमी भावना और शिवा ने अपना अपराध स्वीकार कर लिया. इस के बाद सारे सबूत जुटा कर पुलिस ने दोनों को दोबारा अदालत में पेश किया, जहां से दोनों को जेल भेज दिया गया.

शंकर, जिस की हत्या हुई है, उस के पिता लकवाग्रस्त हैं, मां बूढ़ी है. 3 बच्चे हैं, जिस में सब से बड़ी बेटी 7 साल, उस से छोटा बेटा 4 साल और सब से छोटा बेटा 2 साल का है. पिता की हत्या हो गई है. पिता की हत्या के आरोप में मां जेल में है. बच्चों की हालत पर दया खा कर आजणा चौधरी समाज के बुजुर्गों ने बच्चों की मदद के लिए 15 लाख रुपए इकट्ठा कर के दिए हैं. Gujrat News

Love Story: बहन का प्यार – यार बना गद्दार

Love Story: निश्चित जगह पर पहुंच कर अखिलेश उर्फ चंचल को प्रियंका दिखाई नहीं दी तो वह बेचैन हो उठा. उस बेचैनी में वह इधरउधर  टहलने लगा. काफी देर हो गई और प्रियंका नहीं आई तो वह निराश होने लगा. वह घर जाने के बारे में सोच रहा था कि प्रियंका उसे आती दिखाई दे गई. उसे देख कर उस का चेहरा खुशी से खिल उठा. प्रियंका के पास आते ही वह नाराजगी से बोला, ‘‘इतनी देर क्यों कर दी प्रियंका. मैं कब से तुम्हारा इंतजार कर रहा हूं. अच्छा हुआ तुम आ गईं, वरना मैं तो निराश हो कर घर जाने वाला था.

‘‘जब प्यार किया है तो इंतजार करना ही पड़ेगा. मैं तुम्हारी तरह नहीं हूं कि जब मन हुआ, आ गई. लड़कियों को घर से बाहर निकलने के लिए 50 बहाने बनाने पड़ते हैं.’’ प्रियंका ने तुनक कर कहा.

‘‘कोई बात नहीं, तुम्हारे लिए तो मैं कईकई दिनों तक इंतजार करते हुए बैठा रह सकता हूं. क्योंकि मैं दिल के हाथों मजबूर हूं,’’ अखिलेश ने कहा, ‘‘प्रियंका, मैं चाहता हूं कि तुम आज कालेज की छुट्टी करो. चलो, हम सिनेमा देखने चलते हैं.’’

प्रियंका तैयार हो गई तो अखिलेश पहले उसे एक रेस्टोरेंट में ले गया. नाश्ता करने के बाद दोनों सिनेमा देखने चले गए.

सिनेमा देखते हुए अखिलेश छेड़छाड़ करने लगा तो प्रियंका ने कहा, ‘‘दिनोंदिन तुम्हारी शरारतें बढ़ती ही जा रही हैं. शादी हो जाने दो, तब देखती हूं तुम कितनी शरारत करते हो.’’

‘‘शादी नहीं हुई, तब तो इस तरह धमका रही हो. शादी के बाद न जाने क्या करोगी. अब तो मैं तुम से शादी नहीं कर सकता.’’ अखिलेश ने कान पकड़ते हुए कहा.

‘‘अब मुझ से पीछा छुड़ाना आसान नहीं है. शादी तो मैं तुम्हीं से करूंगी.’’ प्रियंका ने कहा.

‘‘फिर तो मुझे यही गाना पड़ेगा कि ‘शादी कर के फंस गया यार.’’’ अखिलेश ने कहा तो प्रियंका हंसने लगी.

प्रियंका उत्तर प्रदेश के जिला शाहजहांपुर के थाना सदर बाजार के मोहल्ला बाड़ूजई प्रथम के रहने वाले चंद्रप्रकाश सक्सेना की बेटी थी. वह ओसीएफ में दरजी थे. उन के परिवार में प्रियंका के अलावा पत्नी सुखदेवी, 2 बेटे संतोष, विपिन तथा एक अन्य बेटी कीर्ति थी. बड़े बेटे संतेष की शादी हो चुकी थी. वह अपनी पत्नी प्रीति के साथ दिल्ली में रहता था.

कीर्ति की भी शादी शाहजहांपुर के ही मोहल्ला तारोवाला बाग के रहने वाले राजीव से हुई थी. वह अपनी ससुराल में आराम से रह रही थी. गै्रजएुशन कर के विपिन ने मोबाइल एसेसरीज की दुकान खोल ली थी. जबकि प्रियंका अभी पढ़ रही थी. प्रियंका घर में सब से छोटी थी, इसलिए पूरे घर की लाडली थी. विपिन तो उसे जान से चाहता था.

प्रियंका बहुत सुंदर तो नहीं थी, लेकिन इतना खराब भी नहीं थी कि कोई उसे देख कर मुंह मोड़ ले. फिर जवानी में तो वैसे भी हर लड़की सुंदर लगने लगती है. इसलिए जवान होने पर साधारण रूपरंग वाली प्रियंका को भी आतेजाते उस के हमउम्र लड़के चाहत भरी नजरों से ताकने लगे थे. उन्हीं में एक था उसी के भाई के साथ मोबाइल एसेसरीज का धंधा करने वाला अखिलेश यादव उर्फ चंचल.

अखिलेश उर्फ चंचल शाहजहांपुर के ही मोहल्ला लालातेली बजरिया के रहने वाले भगवानदीन यादव का बेटा था. भगवानदीन के परिवार में पत्नी सुशीला देवी के अतिरिक्त 3 बेटे मुनीश्वर उर्फ रवि, अखिलेश उर्फ चंचल, नीलू और 2 बेटियां नीलम और कल्पना थीं. अखिलेश उस का दूसरे नंबर का बेटा था. भगवानदीन यादव कभी जिले का काफी चर्चित बदमाश था. उस की और उस के साथी रामकुमार की शहर में तूती बोलती थी.

रामकुमार की हत्या कर दी गई तो अकेला पड़ जाने की वजह से भगवानदीन ने बदमाशी से तौबा कर लिया और अपने परिवार के साथ शांति से रहने लगा. लेकिन सन 2002 में उस के सब से छोटे बेटे नीलू की बीमारी से मौत हुई तो वह इस सदमे को बरदाश्त नहीं कर सका और कुछ दिनों बाद उस की भी हार्टअटैक से मौत हो गई.

बड़ी बेटी नीलम का विवाह हो चुका था. पिता की मौत के बाद घरपरिवार की जिम्मेदारी बड़े बेटे रवि ने संभाल ली थी. वह ठेकेदारी करने लगा था. हाईस्कूल पास कर के अखिलेश ने भी पढ़ाई छोड़ दी और मोबाइल एसेसरीज का धंधा कर लिया. एक ही व्यवसाय से जुड़े होने की वजह से कभी विपिन और अखिलेश की बाजार में मुलाकात हुई तो दोनों में दोस्ती हो गई थी.

दोस्ती होने के बाद कभी अखिलेश विपिन के घर आया तो उस की बहन प्रियंका को देख कर उस पर उस का दिल आ गया. फिर तो वह प्रियंका को देखने के चक्कर में अकसर उस के घर आने लगा. कहने को वह आता तो था विपिन से मिलने, लेकिन वह तभी उस के घर आता था, जब वह घर में नहीं होता था. ऐसे में भाई का दोस्त होने की वजह से उस की सेवासत्कार प्रियंका को करनी पड़ती थी. उसी बीच वह प्रियंका के नजदीक आने की कोशिश करता.

उस के लगातार आने की वजह से विपिन से उस की दोस्ती गहरी हो ही गई, प्रियंका से भी उस की नजदीकी बढ़ गई. इस के बाद विपिन और अखिलेश ने मिल कर मोबाइल हैंडसेट बनाने वाली एक नामी कंपनी की एजेंसी ले ली तो उन का कारोबार भी बढ़ गया और याराना भी. इस से उन का एकदूसरे के घर आनाजान ही नहीं हो गया, बल्कि अब साथसाथ खानापीना भी होने लगा था.

अब अखिलेश को प्रियंका के साथ समय बिताने का समय ज्यादा से ज्यादा मिलने लगा था. उस ने इस का फायदा उठाया. उसे अपने आकर्षण में ही नहीं बांध लिया, बल्कि उस से शारीरिक संबंध भी बना लिए. वह विपिन की अनुपस्थिति का पूरा फायदा उठाने लगा. विपिन के चले जाने के बाद केवल मां ही घर पर रहती थी. वह घर के कामों में व्यस्त रहती थी. फिर उसे बेटी पर ही नहीं, बेटे के दोस्त पर भी विश्वास था, इसलिए उस ने कभी ध्यान ही नहीं दिया कि वे दोनों क्या कर रहे हैं.

प्रियंका अपने भाई और परिवार को धोखा दे रही थी तो अखिलेश अपने दोस्त के साथ विश्वासघात कर रहा था. वह भी ऐसा दोस्त, जो उस पर आंख मूंद कर विश्वास करता था. उसे भाई से बढ़ कर मानता था. प्रियंका और अखिलेश क्या कर रहे हैं, किसी को कानोकान खबर नहीं थी. जबकि जो कुछ भी हो रहा था, वह सब घर में ही सब की नाक के नीचे हो रहा था.

संतोष की पत्नी प्रीति को बच्चा होने वाला था, इसलिए संतोष ने प्रीति को शाहजहांपुर भेज दिया. डिलीवरी की तारीख नजदीक आ गई तो उसे जिला अस्पताल में भरती करा दिया गया. प्रीति के अस्पताल में भरती होने की वजह से विपिन और उस की मां का ज्यादा समय अस्पताल में बीतता था.

छुट्टी न मिल पाने की वजह से संतोष नहीं आ सका था. उस स्थिति में प्रियंका को घर में अकेली रहना पड़ रहा था. विपिन को अखिलेश पर पूरा विश्वास था, इसलिए प्रियंका और घर की जिम्मेदारी उस ने उस पर सौंप दी थी. अखिलेश और प्रियंका को इस से मानो मुंहमांगी मुराद मिल गई थी. जब तक प्रीति अस्पताल में रही, दोनों दिनरात एकदूसरे की बांहों में डूबे रहे.

26 फरवरी, 2014 को प्रीति को जिला अस्पताल में बेटा पैदा हुआ था. खुशी के इस मौके पर अखिलेश ने 315 बोर के 2 तमंचे और 10 कारतूस ला कर विपिन को दिए थे. भतीजा पैदा होने पर दोनों ने उन तमंचों से एकएक फायर भी किए थे. बाकी 8 कारतूस और दोनों तमंचे अखिलेश ने विपिन से यह कह कर उस के घर रखवा दिए थे कि भतीजे के नामकरण संस्कार पर काम आएंगे. विपिन ने दोनों तमंचे और कारतूस अपने कमरे में बैड पर गद्दे के नीचे छिपा कर रख दिए थे.

विपिन पुलिस में भरती होना चाहता था, इसलिए रोजाना सुबह 5 बजे उठ कर जिम जाता था. वहां से वह 9 बजे के आसपास लौटता था. कभीकभी उसे देर भी हो जाती थी. 23 मार्च को विपिन 9 बजे के आसपास घर लौटा तो मां नीचे बरामदे में बैठी आराम कर रही थीं. भाभी प्रीति बच्चे के साथ सामने वाले कमरे में लेटी थी. उस ने कपड़े बदले और ऊपरी मंजिल पर बने अपने कमरे में सोने के लिए चला गया.

विपिन ने दरवाजे को धक्का दिया तो पता चला वह अंदर से बंद है. इस का मतलब अंदर कोई था. उस ने आवाज दी, लेकिन अंदर कोई प्रतिक्रिया नहीं हुई. उस ने पूरी ताकत से दरवाजे पर लात मारी तो अंदर लगी सिटकनी उखड़ गई और दरवाजा खुल गया. अंदर अखिलेश और प्रियंका खड़े थे. दोनों की हालत देख कर विपिन को समझते देर नहीं लगी कि अंदर क्या कर रहे थे. उन के कपड़े अस्तव्यस्त थे और वे काफी घबराए हुए थे.

विपिन के कमरे में घुसते ही प्रियंका निकल कर नीचे की ओर भागी. विपिन का खून खौल उठा था. उस ने गुस्से में अखिलेश को एक जोरदार थप्पड़ जड़ते हुए कहा, ‘‘तुझे मैं दोस्त नहीं, भाई मानता था. मैं तुझ पर कितना विश्वास करता था और तूने क्या किया? जिस थाली में खाया, उसी में छेद किया.’’

‘‘भाई, मैं प्रियंका से सच्चा प्यार करता हूं और उसी से शादी करूंगा.’’ अखिलेश ने कहा, ‘‘वह मुझ से शादी को तैयार है.’’

‘‘तुम दोनों को पता था कि हमारी जाति एक नहीं है तो यह कैसे सोच लिया कि तुम्हारी शादी हो जाएगी?’’ विपिन गुस्से से बोला, ‘‘तुम ने जो किया, ठीक नहीं किया. मेरी इज्जत पर तुम ने जो हाथ डाला है, उस की सजा तो तुम्हें भोगनी ही होगी.’’

अखिलेश को लगा कि उसे जान का खतरा है तो उस ने जेब से 315 बोर का तमंचा निकाल लिया. वह गोली चलाता, उस के पहले ही विपिन ने उस के हाथ पर इतने जोर से झटका मारा कि तमंचा छूट कर जमीन पर गिर गया. अखिलेश ने तमंचा उठाना चाहा, लेकिन विपिन ने फर्श पर पड़े तमंचे को अपने पैर से दबा लिया.

अखिलेश कुछ कर पाता, विपिन ने बैड पर गद्दे के नीचे रखे दोनों तमंचे और आठों कारतूस निकाल कर उस में से एक तमंचा जेब में डाल लिया और दूसरे में गोली भर कर अखिलेश पर चला दिया. गोली अखिलेश के सीने में लगी. वह जमीन पर गिर गया तो विपिन ने एक गोली उस के बाएं हाथ और एक पेट में मारी. 3 गोलियां लगने से अखिलेश की तुरंत मौत हो गई.

अखिलेश का खेल खत्म कर विपिन नीचे आ गया. प्रियंका बरामदे में दुबकी खड़ी थी. उस के पास जा कर उस ने पूछा, ‘‘मैं ने सही किया या गलत?’’

प्रियंका ने जैसे ही कहा, ‘‘गलत किया.’’ विपिन ने उस की कनपटी पर तमंचे की नाल रख कर ट्रिगर दबा दिया. प्रियंका कटे पेड़ की तरह फर्श पर गिर पड़ी. इस के बाद उस ने एक गोली और चलाई, जो प्रियंका के सीने में बाईं ओर लगी. प्रियंका की भी मौत हो गई. प्रियंका को खून से लथपथ देख कर उस की मां और भाभी बेहोश हो गईं.

अखिलेश और प्रियंका की हत्या कर विपिन घर से बाहर निकला तो सामने पड़ोसी सचिन पड़ गया. सचिन से उस की पुरानी खुन्नस थी. उस ने उस की ओर तमंचा तान दिया. विपिन का इरादा भांप कर सचिन अपने घर के अंदर भागा. विपिन भी पीछेपीछे उस के घर में घुस गया. सचिन कहीं छिपता, विपिन ने उस पर भी गोली चला दी. गोली उस की कमर में लगी, जिस से वह भी फर्श पर गिर पड़ा.

सचिन के घर से निकल कर विपिन अपने एक अन्य दुश्मन सतीश के घर में घुस कर 2 गोलियां चलाईं. लेकिन ये गोलियां किसी को लगी नहीं. अब तक शोर और गोलियों के चलने की आवाज सुन कर आसपड़ोस वाले इकट्ठा हो गए थे. लेकिन विपिन के हाथ में तमंचा देख कर कोई उसे पकड़ने की हिम्मत नहीं कर सका. इसलिए विपिन एआरटीओ वाली गली में घुस कर आराम से फरार हो गया.

किसी ने कोतवाली सदर बाजार पुलिस को इस घटना की सूचना दे दी थी. चंद मिनटों में ही कोतवाली इंसपेक्टर यतेंद्र भारद्वाज पुलिस बल के साथ घटनास्थल पर पहुंच गए थे. इस के बाद उन की सूचना पर पुलिस अधीक्षक राकेशचंद्र साहू, अपर पुलिस अधीक्षक (नगर) ए.पी. सिंह, फोरेंसिक टीम और डाग स्क्वायड की टीम भी वहां आ गई थी.

पुलिस तो आ गई, लेकिन अपनी नौकरी पर गए चंद्रप्रकाश को किसी ने इस बात की सूचना नहीं दी. काफी देर बाद सूचना पा कर वह घर आए तो बेटी की लाश देख कर बेहोश हो गए. एक ओर बेटी की लाश पड़ी थी तो दूसरी ओर उस की और उस के प्रेमी की हत्या के आरोप में बेटा फरार था.

सचिन की हालत गंभीर थी. इसलिए पुलिस ने उसे तुरंत सरकारी अस्पताल भिजवाया. उस की हालत को देखते हुए सरकारी अस्पताल के डाक्टरों ने उसे कनौजिया ट्रामा सेंटर ले जाने को कहा. लेकिन वहां भी उस की हालत में कोई सुधार नहीं हुआ. तब उसे वसीम अस्पताल ले जाया गया. डा. वसीम ने उस का औपरेशन कर के फेफड़े के पार झिल्ली में फंसी गोली निकाली. इस के बाद उस की हालत में कुछ सुधार हुआ.

फोरेंसिक टीम ने घटनास्थल से साक्ष्य उठा लिए. डाग स्क्वायड टीम ने खोजी कुतिया लूसी को छोड़ा. वह विपिन के घर से निकल कर सतीश के घर तक गई, जहां विपिन ने 2 गोलियां चलाई थीं. घटनास्थल के निरीक्षण के बाद पुलिस अधिकारियों को समझते देर नहीं लगी कि मामला अवैध संबंधों में हत्या का यानी औनर किलिंग का है.

पुलिस ने घटनास्थल की सारी काररवाई निपटा कर दोनों लाशों को पोस्टमार्टम के लिए सरकारी अस्पताल भिजवा दिया. इस के बाद थाने आ कर इंसपेक्टर यतेंद्र भारद्वाज ने अखिलेश के बड़े भाई मुनीश्वर यादव की ओर से विपिन सक्सेना के खिलाफ अखिलेश और प्रियंका की हत्या का मुकदमा दर्ज कर लिया. इस के बाद विपिन की तलाश शुरू हुई.

26 मार्च की सुबह पुलिस ने मुखबिर की सूचना पर विपिन को पुवायां रोड पर चिनौर से पहले हाइड्रिल पुलिया के पास से गिरफ्तार कर लिया. उस समय वह अपने चचेरे भइयों सुशील और लल्ला के पास चिनौर जा रहा था. कोतवाली ला कर उस से पूछताछ की गई तो उस ने बिना किसी हीलाहवाली के अपना जुर्म कुबूल कर लिया.

पूछताछ में विपिन ने पुलिस को बताया कि जिस यार को मैं भाई की तरह मानता था, उस ने मेरी इज्जत पर हाथ डाला तो मुझे इतना गुस्सा आया कि मैं ने उस का खून कर दिया. घटना को अंजाम देने के बाद वह एआरटीओ वाली गली के पास से निकल रहे नाले में अखिलेश से छीना तमंचा और अपनी खून से सनी टीशर्ट निकाल कर फेंक दी थी.

खाली बनियान और जींस पहने हुए वह एआरटीओ गली से रोडवेड बसस्टैंड पहुंचा. यहां से उस ने निगोही जाने के लिए सौ रुपए में एक आटो किया. निगोही जाते समय रास्ते में उस ने दूसरा तमंचा फेंक दिया. निगोही से वह प्राइवेट बस से बरेली पहुंचा. बरेली में उस ने नई टीशर्ट खरीद कर पहनी. पूरे दिन वह इधरउधर घूमता रहा. रात को उस ने बरेली रेलवे स्टेशन से दिल्ली जाने के लिए टे्रन पकड़ ली.

दिल्ली में विपिन बड़े भाई संतोष के यहां गया. उसे उस ने पूरी बात बताई. संतोष को पता चल गया कि प्रियंका मर चुकी है, फिर भी वह उस के अंतिम संस्कार में शाहजहांपुर नहीं गया. संतोष को जब पता चला कि पुलिस विपिन की गिरफ्तारी के लिए घर वालों तथा रिश्तेदारों को परेशान कर रही है तो उस ने उसे घर भेज दिया.

26 मार्च को विपिन अपने चचेरे भाइयों के पास चिनौर जा रहा था, तभी पुलिस ने मुखबिरों से मिली सूचना पर गिरफ्तार कर लिया था. उस समय भी उस के पास एक तमंचा था.

पूछताछ में विपिन ने बताया था कि उस के पास कारतूस नहीं बचे थे. अगर कारतूस बचा होता तो वह खुद को भी गोली मार लेता. कानूनी औपचारिकताएं पूरी कर के पुलिस ने विपिन को सीजेएम की अदालत में पेश किया, जहां से उसे जेल भेज दिया गया. Love Story

—कथा पुलिस सूत्रों पर आधारित

MP News: पति के अंतरंग वीडियो बनाने वाली पत्नी

MP News: कोई भी महिला सब कुछ बरदाश्त कर सकती है, लेकिन अपने पति को किसी दूसरी महिला के साथ रोमांस करते सहन नहीं कर सकती. लेकिन चंद्रिका पालीवाल ऐसी थी, जो अपने पति अविनाश प्रजापति को अपने ही सामने दूसरी महिलाओं के साथ हमबिस्तर होने को कहती थी. पति को ऐसा करते देख वह बहुत खुश होती थी. आखिर चंद्रिका पालीवाल ऐसा क्यों करती थी? जानने के लिए पढ़ें सोशल क्राइम की यह खास स्टोरी.

एक निजी बैंक में क्लर्क के रूप में काम करने वाली अलका की शादी करीब 5 साल पहले हुई थी, लेकिन एक साल के अंदर ही उस का पति से तलाक हो गया. वह भोपाल की अवधपुरी कालोनी में रहती थी. तलाक के कुछ ही महीनों के बाद बिना जीवनसाथी के अलका को अपने जीवन में सूनापन महसूस होने लगा. लिहाजा अलका ने दूसरी शादी के लिए मैट्रीमोनियल साइट का सहारा लिया.

मैट्रीमोनियल साइट्स पर कई युवकों की प्रोफाइल वह रोज ही देखती थी. एक दिन 36 वर्षीय अविनाश प्रजापति नाम के युवक की फोटो और प्रोफाइल देख कर उस की आंखों में चमक आ गई. प्रोफाइल से पता चला कि भोपाल का ही रहने वाला अविनाश तलाकशुदा है और उस का स्टील का बड़ा कारोबार है. साथ ही वह छत्तीसगढ़ में धनलक्ष्मी नाम की फैक्ट्री का संचालन भी करता है.

अलका को महसूस हुआ कि उस के जैसी तलाकशुदा युवती के लिए शायद अविनाश ही परफेक्ट है और अच्छेखासे कारोबार की वजह से आर्थिक रूप से भी मजबूत है. 2024 के दिसंबर महीने में एक दिन सुबह अलका ने मैट्रीमोनियल साइट पर दिए गए अविनाश के कौन्टेक्ट नंबर पर फोन किया. कौल रिसीव होते ही अलका ने कहा, ”हैलो, मैं अलका बोल रही हूं. मैं एक प्राइवेट बैंक में क्लर्क हूं. मैं ने आप की प्रोफाइल देखी, जो मुझे अच्छी लगी. आप से शादी के संबंध में मैं मिलना चाहती हूं.’’

अंधा क्या चाहे 2 आंखें. अविनाश भी उत्सुकता दिखाते हुए बोला, ”हां, मैं ने भी आप का बायोडाटा चैक किया है. कभी मेरे घर पर आइएगा, यहां बैठ कर इत्मीनान से बात करते हैं.’’

बातचीत से अलका को लगा कि अविनाश भी उसे पसंद करता है. यही सोच कर अलका 6 दिसंबर, 2024 को उस के घर मिलने के लिए पहुंच गई. इत्तफाक से अविनाश भी भोपाल की नई कालोनी प्रतीक गार्डन में रहता था, जहां पर बमुश्किल 20-25 मकान ही बने थे. अलका ने जैसे ही अविनाश के घर पर दस्तक दी तो दरवाजा एक महिला ने खोला. महिला ने उसे अंदर ले जा कर हाल में बैठाया, तभी अविनाश भी वहां आ गया. चायनाश्ते के दौरान जब तीनों डायनिंग टेबल पर बैठे तो अविनाश ने उस महिला का परिचय कराते हुए कहा, ”अलका, यह मेरी मम्मी हैं. इन का नाम चंद्रिका पालीवाल है. यही मुझे रोज शादी के लिए फोर्स करती हैं.’’

अलका को चंद्रिका की फिटनैस देख कर आश्चर्य हुआ तो उस ने पूछ ही लिया, ”मम्मीजी, आप लगती नहीं कि अविनाश की मम्मी हैं. अपनी फिटनैस का राज हमें भी बता दीजिए.’’

”जिस मां की केयर करने वाला अविनाश जैसा बेटा हो, उस की फिटनैस तो अच्छी होगी ही. तुम भी शादी के लिए हां कर दो, यह तुम्हें पलकों पर बिठा कर रखेगा.’’ चंद्रिका ने हंसते हुए जबाब दिया. इतना सुनते ही अलका शरमा गई. चाय नाश्ता करने के बाद चंद्रिका ने कहा, ”बेटा, तुम लोग अंदर जा कर आपस में बातचीत करो, मैं तब तक खाना बनाती हूं. आज संडे है, अलका खाना खा कर ही यहां से जाएगी.’’

अलका भी यही चाह रही थी कि उसे अविनाश के साथ कुछ समय एकांत में बिताने को मिले. चंद्रिका ने जैसे उस के मन की बात पढ़ ली. तभी अविनाश अलका से बोला, ”चलो अंदर बैठ कर बातचीत करते हैं.’’

पहली मुलाकात में ही बांहों में समा गई अलका

अविनाश अलका को अपने बैडरूम में ले गया. अविनाश का बैडरूम बड़े ही करीने से सजा हुआ था, जिसे देख अलका बहुत प्रभावित हुई. बैडरूम में एक ही बैड पर आसपास बैठ कर दोनों के बीच बातचीत चलने लगी. इसी दौरान अविनाश ने अलका की तारीफ करते हुए कहा, ”अलका, तुम गजब की खूबसूरत हो, तुम यदि शादी के लिए हां कह दो तो मैं तुम्हें रानी बना कर रखूंगा.’’

”वैसे आप भी बहुत हैंडसम हो, आप की लाइफस्टाइल देख कर मुझे भी यकीन है कि मेरा खयाल आप बहुत अच्छे से रख सकते हो.’’ अलका अपनी तारीफ पर शरमाते हुए बोली.

”आई लव यू अलका, तुम्हारी पारखी नजर का मैं तो कायल हो गया.’’ इतना कहते हुए अविनाश ने अलका के हाथों को अपने हाथों में ले लिया.

”मगर डर भी लगता है कि कहीं धोखा न खा जाऊं, पहली शादी का जख्म मुश्किल से भूल पाई हूं. कहीं मुझे मंझधार में तो नहीं छोड़ दोगे?’’ आंखों में छलके आंसुओं को पोंछते हुए अलका बोली.

”मुझ पर भरोसा रखो, मैं तुम्हारी आंखों में आंसू की एक बूंद भी नहीं आने दूंगा.’’ अविनाश ने अलका के माथे पर चुंबन देते हुए कहा. अविनाश ने अलका के भावुक मन का फायदा उठाते हुए एक कदम और आगे बढ़ाते हुए उसे बैड पर लिटा दिया और उस के होंठों को चूमने लगा. अलका को लंबे समय बाद किसी पुरुष की देह का स्पर्श मिला था, इसलिए वह भी इस आग में जल्दी ही पिघल गई. देह की तपिश जब ठंडी हुई तो अपने कपड़ों की सलवटें ठीक करते हुए वह बैड से उठ कर बाथरूम की तरफ बढ़ गई.

उस दिन के बाद उन की मुलाकातों का सिलसिला चलने लगा. अविनाश ने अपने व्यवहार से अलका के दिल में जगह बना ली थी. अलका अविनाश की बातों पर आंखें मूंद कर भरोसा करने लगी थी. मुलाकात के समय जब अलका ने शादी के संबंध में अविनाश से कहा, ”अविनाश, जब हम दोनों एकदूसरे को इतने करीब से समझ चुके हैं तो अब हमें शादी भी कर लेनी चाहिए.’’

”शादी भी जल्द ही कर लेंगे, शादी से पहले बिजनैस बढ़ाने के लिए मुझे कुछ पैसों की जरूरत है. यदि तुम मदद कर दो तो करोड़ों रुपए का मुनाफा बिजनैस में हो जाएगा.’’  अविनाश ने कहा. अलका उस की बातों में आ गई और भावना में बह कर अपनी सारी जमा पूंजी करीब 40 लाख रुपए कैश और 5 लाख रुपए की ज्वैलरी उस ने अविनाश को दे दी. जब अलका ने अविनाश से शादी करने के लिए दबाव बनाया तो उस ने अलका से शादी करने से इंकार कर दिया. अलका को अविनाश से यह उम्मीद कतई नहीं थी. अब तक अलका को यह भी पता चल गया था कि अविनाश के घर रहने वाली चंद्रिका नाम की महिला उस की मम्मी नहीं, उस की दूसरी पत्नी है.

उस ने जब अविनाश से अपने दिए पैसों और ज्वैलरी की मांग की तो अविनाश धमकी देते हुए बोला, ”तुम ने अपनी मरजी से मेरे साथ संबंध बनाए थे, जिस की वीडियो रिकौर्डिंग मेरी पत्नी चंद्रिका ने अपने मोबाइल में सहेज कर रख ली, जिसे कभी भी वायरल कर दूंगा.’’

इतना सुनते ही अलका के पैरों तले से जमीन खिसक गई और वह मन मसोस कर रह गई.

मानसी ने भी सुना दी अलका को आपबीती

एक दिन अलका जब अविनाश से  अपने पैसों का तगादा करने जा रही थी तो अविनाश  के घर से एक युवती को बाहर निकलते देखा तो उसे शक हुआ. अलका अविनाश के घर जाने के बजाय चुपचाप उस के पीछे हो ली. प्रतीक गार्डन कालोनी से बाहर निकलते ही अलका ने उस से बातचीत करनी शुरू कर दी. पहले तो वह युवती अनजान बन कर औपचारिक बातचीत करती रही, लेकिन जब अलका ने उसे अपनी आपबीती बताई तो मानसी नाम की वह युवती अलका को अपनी भी रामकहानी सुनाने लगी. वह भोपाल के ही अशोका गार्डन इलाके में रहती थी. और प्राइवेट जौब करने के साथ घर पर ब्यूटीपार्लर चलाती थी.

मानसी ने अलका से कहा, ”दीदी, मेरे साथ भी अविनाश ने शादी करने का झांसा दे कर कई बार संबंध बनाए हैं.’’

”तुम ने उस को पैसे तो नहीं दिए मानसी?’’ अलका ने पूछा.

”दीदी, अविनाश ने कंपनी में इनवैस्ट करने के लिए 40 लाख रुपए मुझ से यह कह कर लिए थे कि जल्दी ही उस के पैसे दोगुने हो जाएंगे.’’ मानसी ने बताया.

”फिर तुम्हें रुपए वापस  मिले कि नहीं?’’ अलका ने पूछा.

”नहीं मिले दीदी, अभी मैं उस के घर पैसे मांगने ही गई थी, मगर उस ने रुपए देने के बजाय धमकी दी है कि अगर कभी रुपए मांगे तो तुम्हारे साथ बनाए संबंधों का वीडियो वायरल कर दूंगा.’’ मानसी ने रोते हुए बताया.

अलका ने मानसी को ढांढस बंधाते हुए कहा, ”अब रोनेधोने से कुछ नहीं होगा तुम मेरा साथ दो. हम इस धोखेबाज अविनाश को सबक सिखाकर ही मानेंगे.’’

अलका और मानसी ने मिल कर 2 सितंबर, 2025 शाम को भोपाल के एसीपी कार्यालय पहुंच कर एसीपी डा. रजनीश कश्यप को अपने साथ हुई धोखाधड़ी की कहानी विस्तार से सुनाई. एसीपी डा. रजनीश कश्यप ने दोनों को बाग सेवनिया पुलिस थाने में रिपोर्ट दर्ज कराने के लिए कहा. उसी दिन रात को दोनों ने बाग सेवनिया पुलिस थाने में जा कर लिखित शिकायत दर्ज कराई. टीआई अमित सोनी ने अलका और मानसी की तरफ से आरोपी अविनाश प्रजापति के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज करने के बाद दोनों युवतियों के महिला पुलिसकर्मियों की मौजूदगी में बयान दर्ज किए.

रिपोर्ट दर्ज करने के बाद पुलिस टीम ने अविनाश प्रजापति के प्रतीक गार्डन कालोनी में स्थित उस के घर पर दबिश दे कर उसे दबोच लिया, लेकिन उस की दूसरी पत्नी चंद्रिका वहां पर नहीं मिली. वह अपने 5 साल के बच्चे को ले कर फरार हो गई. पूछताछ में अविनाश प्रजापति ने कुबूल किया कि उस ने दोनों युवतियों से शादी करने का वादा कर के उन से शारीरिक संबंध बनाए थे. उस ने मैट्रीमोनियल साइट में बायोडाटा डाल कर अपने आप को तलाकशुदा बताया था, जबकि वह पहले से शादीशुदा था और उस का 5 साल का एक बेटा भी था.

अविनाश ने एक कंपनी का सीईओ बता कर दोनों युवतियों से निवेश करने का झांसा दे कर करीब 85 लाख रुपए की रकम ऐंठी थी. यह रकम अविनाश की पत्नी चंद्रिका पालीवाल के खाते में जमा भी हुई थी. पूछताछ में पुलिस को पता चला कि अविनाश प्रजापति मूलरूप से मध्य प्रदेश के नरसिंहपुर जिले का रहने वाला है. वह डेढ़ साल पहले ही भोपाल में रहने आया था. शुरू में वह शाहपुरा थाना क्षेत्र स्थित रोहित नगर में रहता था. चंद्रिका पालीवाल उस की दूसरी पत्नी है. पहली पत्नी को वह तलाक दे चुका है.

उस के पिता पुरुषोत्तम प्रजापति नरसिंहपुर जिले के सुआतला गांव में ग्राम सहायक थे. अविनाश खुद को बड़ा बिजनैसमैन बताता था और अलगअलग गाडिय़ों से आताजाता था, जबकि पत्नी चंद्रिका टैक्सी से घूमती थी. कालोनी में लोग इन्हें स्टील का व्यापारी समझते थे. दोनों ने मिल कर एक फरजी फाइनैंस कंपनी भी बना रखी थी. आरोपी के खिलाफ सरिया बेचने के नाम पर ऐप बनाने के नाम पर और निवेश करने का झांसा दे कर लोगों से पैसा ऐंठने की कई एफआईआर अलगअलग थाना क्षेत्रों में दर्ज हैं.

चंद्रिका और अविनाश को ऐसे हुआ था प्यार

चंद्रिका पालीवाल भी राजगढ़ जिले के नरसिंहगढ़ की रहने वाली है. वह भोपाल के पास मिसरोद इलाके में एक आटो मोबाइल कंपनी में सेल्स एग्जीक्यूटिव का काम करती थी. एक दिन अविनाश एक लग्जरी कार की इनक्वायरी करने शोरूम पहुंचा तो उस की मुलाकात चंद्रिका से हुई. एक पेशेवर सेल्स एग्जीक्यूटिव की तरह चंद्रिका ने मुसकरा कर उस का स्वागत किया. तभी अविनाश ने उस से कहा, ”मैडम, मुझे 15-16 लाख की रेंज में और सभी तरह के लेटेस्ट सेफ्टी फीचर्स वाली कार चाहिए.’’ अविनाश ने कहा.

तब एक राउंड टेबल के पास बैठ कर चंद्रिका उसे कार की खूबियां गिना कर अपना एक ग्राहक पक्का कर रही थी, मगर अविनाश की निगाहें उस के खूबसूरत बदन पर टिकी हुई थीं, वह कार से ज्यादा चंद्रिका को निहार रहा था. उस दिन जल्द ही कार खरीदने का आश्वासन दे कर अविनाश चंद्रिका का विजिटिंग कार्ड ले कर घर आ गया था. उस के बाद से ही चंद्रिका अविनाश को रोज ही फोन लगा कर कार खरीदने के बारे में पूछती. फोन पर हुई बातचीत और मुलाकातों के बाद दोनों के बीच दोस्ती हो गई. फिर यह दोस्ती प्यार में कब बदल गई, उन्हें पता नहीं चला. कुछ ही महीने बाद दोनों ने सहमति से शादी भी कर ली.

अविनाश प्रजापति से कहीं ज्यादा शातिर उस की दूसरी पत्नी चंद्रिका पालीवाल है. उस का भाई सूरज पालीवाल भी बहन की ही तरह ठग है. तीनों के खिलाफ उत्तर प्रदेश के झांसी जिले में स्थित थाना चिरगांव  में 24 अप्रैल, 2023 को गबन का केस दर्ज हुआ था. इस प्रकरण में तीनों आरोपी गिरफ्तार भी हुए थे. इसी गिरफ्तारी के वक्त जेल में बंद मिर्ची बाबा के साथ पतिपत्नी की मुलाकात हुई थी.

अविनाश की पत्नी चंद्रिका पालीवाल का आपराधिक इतिहास भी पुलिस ने खंगाला है. चंद्रिका पालीवाल ने 2023 में सीहोर जिले के बुधनी विधानसभा क्षेत्र से समाजवादी पार्टी के उम्मीदवार ‘मिर्ची बाबा’ (असली नाम रामेश्वर सिंह) के लिए प्रस्तावक के रूप में नामांकन पत्र पर हलफनामा दाखिल किया था. चुनाव आयोग के रिकौर्ड में उस के हस्ताक्षर मौजूद हैं. चंद्रिका की अनेक राजनेताओं से अच्छी जानपहचान भी थी, जिस के चलते वह बेखौफ हो कर इस तरह के अपराधों को अंजाम दे रही थी.

अविनाश प्रजापति ने अपनी पढ़ाई पूरी करने के बाद परिवार की मरजी से पहली शादी की थी. लेकिन वैवाहिक जीवन में अनबन के कारण पहली पत्नी से उस का जल्दी ही तलाक हो गया. तलाक के बाद उस की लाइफ में चंद्रिका आई. चंद्रिका से शादी के बाद अविनाश का बिजनैस घाटे में चला गया तो आर्थिक तंगी से जूझ रहे अविनाश को चंद्रिका ने ठगी करने की सलाह दी.

2023 से दोनों ने मैट्रीमोनियल वेबसाइट्स पर फरजी प्रोफाइल बना कर तलाकशुदा और विधवा महिलाओं को शादी का झांसा दे कर ठगना शुरू कर दिया. शुरू में यह सिर्फ आर्थिक ठगी थी, लेकिन धीरेधीरे यह खेल शारीरिक शोषण और ब्लैकमेल तक पहुंच गया. चंद्रिका खुद इस साजिश की मास्टरमाइंड थी और अविनाश उस के इशारों पर नाचता था.

अविनाश के खिलाफ दर्ज हैं अनेक मुकदमे

अविनाश प्रजापति की गिरफ्तारी के बाद पुलिस जांच में पता चला है कि अविनाश के खिलाफ अलगअलग थानों में जालसाजी के 8 मुकदमे दर्ज हैं. उस के खिलाफ नरसिंहपुर जिले के सुआतला थाने में पहली पत्नी ने दहेज प्रताडऩा का मुकदमा 2016 में दर्ज कराया था. इस के बाद दूसरा मुकदमा 2022 में सागर जिले के आगासोद थाने में दर्ज हुआ था, जिस में गबन और जालसाजी की धाराएं लगी थीं. 2022 में हरदा जिले के टिमरनी थाने में दर्ज तीसरे प्रकरण में उस के खिलाफ जालसाजी और धमकाने की रिपोर्ट दर्ज हुई थी. चौथा मामला 2022 में सागर जिले के कोतवाली थाने में दर्ज हुआ था.

इसी तरह उत्तर प्रदेश के सुलतानपुर  जिले में स्थित कुडवार थाने में पांचवां मुकदमा 2022 में दर्ज हुआ था. ये दोनों मुकदमे जालसाजी और गबन से जुड़े हुए थे. वहीं छठवां प्रकरण 2018 में चंडीगढ़ के सेंट्रल सेक्टर 17 में दर्ज हुआ था. इस प्रकरण में भी जालसाजी, कूटरचित दस्तावेजों का इस्तेमाल करने में वह आरोपी है. इस के अलावा अविनाश प्रजापति के खिलाफ बैतूल जिले के जेएमएफसी कोर्ट में 13 लाख 61 हजार रुपए की धोखाधड़ी करने का मुकदमा भी चल रहा है.

अविनाश को रिमांड पर ले कर पुलिस ने जब पूछताछ की तो उस ने साफ तौर पर कहा कि उस की पत्नी चंद्रिका ने ही यह प्लान बनाया था कि विधवा महिलाओं को शादी का लालच दे कर उन के साथ शारीरिक संबंध बनाए जाएं और इस का वीडियो वह बनाएगी. चंद्रिका का मानना था कि वीडियो वायरल होने की धमकी देने पर महिलाएं कभी शिकायत नहीं करेंगी, क्योंकि समाज में बदनामी का डर उन्हें चुप रहने को मजबूर कर देगा.

यही सोच कर दोनों ने कई महिलाओं को अपना शिकार बनाया. ज्यादातर महिलाएं जो विधवा थीं या वैवाहिक जीवन में अकेलापन झेल रही थीं, उन्हें टारगेट बनाया गया. पीडि़ताओं ने डर और शर्म के कारण लंबे समय तक चुप्पी साधे रखी. सबसे पहले दोनों मैट्रीमोनियल साइट्स का इस्तेमाल कर के तलाकशुदा या विधवा महिलाओं से संपर्क करते थे. कारपोरेट और बैंकिंग सेक्टर में काम करने वाली महिलाओं को विशेष रूप से निशाना बनाया जाता था, क्योंकि वे आर्थिक रूप से स्वतंत्र होती हैं और शादी के लिए योग्य लड़के की तलाश में आसानी से फंस सकती हैं. अलका और मानसी के अलावा भी पुलिस को अब तक और भी कई पीडि़त महिलाओं की शिकायत मिली है.

अविनाश की रिमांड 13 सितंबर को समाप्त होने से पहले ही बाग सेवनिया थाना पुलिस ने उसे कोर्ट में पेश किया, जहां से मजिस्ट्रैट ने उसे न्यायिक हिरासत में भेज दिया. पुलिस ने कोर्ट से चंद्रिका पालीवाल की तलाश और गिरफ्तारी के लिए भी वारंट जारी करने की दरख्वास्त की. आरोपी दंपति के खिलाफ बलात्कार, आपराधिक धमकी और आईटी एक्ट की विभिन्न धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज किया गया है. चंद्रिका पालीवाल सोशल मीडिया पर भी काफी ऐक्टिव थी. वह अपनी लग्जरी लाइफस्टाइल लोगों को दिखाती रहती थी. इंस्टाग्राम पर उस के 28 हजार से अधिक फालोअर्स हैं. इस केस में नाम आने के बाद से वह गायब है. साथ ही कोई एक्टिविटी भी नहीं है. कथा लिखे जाने तक पुलिस चंद्रिका पालीवाल की तलाश में जुटी हुई थी.

यह घटना समाज के लिए एक बड़ा सबक है कि औनलाइन रिश्तों या फाइनैंस स्कीम्स में आंख बंद कर के भरोसा करना खतरनाक हो सकता है. मैट्रीमोनियल साइट्स पर दी गई अनजान लोगों की प्रोफाइल पर भरोसा करने से पहले जांचपड़ताल जरूरी है. MP News

(कथा में अलका और मानसी परिवर्तित नाम हैं)

 

 

Crime News : बदले की आग

Crime News : लखनऊ के थाना मडि़यांव के थानाप्रभारी रघुवीर सिंह को सुबहसुबह किसी ने फोन कर के सूचना दी कि ककौली में बड़ी खदान के पास एक कार में आग लगी है. सूचना मिलते ही रघुवीर सिंह ककौली की तरफ रवाना हो गए. थोड़ी ही देर में वह ककौली की बड़ी खदान के पास पहुंच गए. उन्होंने एक जगह भीड़ देखी तो समझ गए कि घटना वहीं घटी है. जब तक पुलिस वहां पहुंची, कार की आग बुझ चुकी थी. पुलिस ने देखा, कार के अंदर कोई भी सामान सलामत नहीं बचा था.

यहां तक कि कार की नंबर प्लेट का नंबर भी नहीं दिखाई दे रहा था. इसी से अंदाजा लगाया गया कि आग कितनी भीषण रही होगी. जली हुई कार के अंदर कुछ हड्डियां और 2 भागों में बंटी इंसान की एक खोपड़ी पड़ी थी. उन्हें देख कर थानाप्रभारी चौंके. हड्डियों और खोपड़ी से साफ लग रहा था कि कार के अंदर कोई इंसान भी जल गया था.

थानाप्रभारी ने अपने आला अधिकारियों को भी इस घटना की सूचना दे दी थी. इस के बाद थोड़ी ही देर में क्षेत्राधिकारी (अलीगंज) अखिलेश नारायण सिंह फोरेंसिक टीम के साथ वहां पहुंच गए. कार के अंदर जली अवस्था में एक छोटा गैस सिलेंडर और शराब की खाली बोतल भी पड़ी थी. फोरेंसिक टीम ने अपना काम निपटा लिया तो पुलिस ने अपनी जांच शुरू की.

कार की स्थिति देख कर पुलिस को यह समझते देर नहीं लगी कि यह दुर्घटना नहीं, बल्कि साजिशन इसे अंजाम दिया गया है. कार एक खुले मैदान में थी. आबादी वहां से कुछ दूरी पर थी. इसलिए हत्यारों ने वारदात को आसानी से अंजाम दे दिया था. यह 4 दिसंबर, 2013 की बात है.

कार में कोई ऐसी चीज नहीं मिली थी, जिस से जल कर खाक हो चुके व्यक्ति की शिनाख्त हो पाती. इसलिए पुलिस ने घटनास्थल की आवश्यक काररवाई निपटा कर बरामद हड्डियों और खोपड़ी को पोस्टमार्टम के लिए मैडिकल कालेज भेज दिया, जहां से हड्डियों को फोरेंसिक जांच के लिए भेज दिया गया.

अब तक इस घटना की खबर जंगल की आग की तरह आसपास फैल चुकी थी. ककौली के ही रहने वाले सुरजीत यादव का छोटा भाई रंजीत यादव 3 दिसंबर को कार से कटरा पलटन छावनी एरिया में किसी शादी समारोह में शामिल होने के लिए घर से निकला था. उसे उसी रात को लौट आना था. लेकिन वह नहीं लौटा तो घर वालों को उस की चिंता हुई. यही वजह थी कि यह खबर सुनते ही सुरजीत बड़ी खदान की तरफ चल पड़ा. वहां पहुंच कर कार देखते ही वह समझ गया कि यह कार उसी की है.

सुरजीत ने थानाप्रभारी रघुवीर सिंह को अपने भाई के गायब होने की पूरी बात बता कर आशंका जताई कि कार में जल कर जो व्यक्ति मरा है, वह उस का भाई रंजीत हो सकता है. इस के बाद सुरजीत की तहरीर पर थानाप्रभारी ने अज्ञात लोगों के खिलाफ रंजीत की हत्या की रिपोर्ट दर्ज करा दी.

सुरजीत से बातचीत के बाद थानाप्रभारी रघुवीर सिंह ने तहकीकात शुरू की तो पता चला कि रंजीत शादी समारोह में जाने के लिए घर से निकला तो था, लेकिन समारोह में पहुंचा नहीं था. अब सोचने वाली बात यह थी कि वह शादी समारोह में नहीं पहुंचा तो गया कहां था. यह जानने के लिए उन्होंने मुखबिर लगा दिए. एक मुखबिर ने बताया कि 3 दिसंबर की शाम रंजीत को देशराज और अजय के साथ देखा गया था. देशराज हरिओमनगर में रह कर सिक्योरिटी एजेंसी चलाता था. रंजीत उसी की सिक्योरिटी एजेंसी में सिक्योरिटी गार्ड की नौकरी करता था.

देशराज से पूछताछ के बाद ही सच्चाई का पता चल सकता था, इसलिए पुलिस ने उस की तलाश शुरू कर दी. 5 दिसंबर, 2013 को सुबह 5 बजे के करीब उसे रोशनाबाद चौराहे के पास से गिरफ्तार कर लिया गया. थाने ला कर जब देशराज से पूछताछ की गई तो उस ने सारा सच उगल दिया. इस के बाद उस ने रंजीत यादव को जिंदा जलाने की जो कहानी बताई, वह इस प्रकार थी.

मूलरूप से उत्तर प्रदेश के जिला सीतापुर का रहने वाला देशराज लखनऊ के हरिओमनगर में एक सिक्योरिटी एजेंसी चलाता था. वहीं पर उस ने एक मकान किराए पर ले रखा था. वह लखनऊ में अकेला रहता था, जबकि उस की पत्नी और बच्चे सीतापुर में रहते थे. समय मिलने पर वह अपने परिवार से मिलने सीतापुर जाता रहता था. उस की एजेंसी अच्छी चल रही थी. जिस से उसे हर महीने अच्छी आमदनी होती थी. कहते हैं, जब किसी के पास उस की सोच से ज्यादा पैसा आना शुरू हो जाता है तो कुछ लोगों में नएनए शौक पनप उठते हैं. देशराज के साथ भी यही हुआ. वह शराब और शबाब का शौकीन हो गया था.

वह पास के ही ककौली गांव भी आताजाता रहता था. वहीं पर एक दिन उस की नजर रानी नाम की एक औरत पर पड़ी तो वह उस पर मर मिटा.

रानी की अजीब ही कहानी थी. उस का विवाह उस उम्र में हुआ था, जब वह विवाह का मतलब ही नहीं जानती थी. नाबालिग अवस्था में ही वह 2 बेटों अजय, संजय और एक बेटी सीमा की मां बन गई थी. उसी बीच किसी वजह से उस के पति की मौत हो गई. पति का साया हटने से उस के ऊपर जैसे मुसीबतों का पहाड़ टूट पड़ा. जब कमाने वाला ही न रहा तो उस के सामने आर्थिक संकट पैदा हो गया. मेहनतमजदूरी कर के जैसेतैसे वह दो जून की रोटी का इंतजाम करने लगी.

देशराज ने उस की भोली सूरत देखी तो उसे लगा कि वह उसे जल्द ही पटा लेगा. रानी से नजदीकी बढ़ाने के लिए वह उस से हमदर्दी दिखाने लगा. रानी देशराज के बारे में ज्यादा नहीं जानती थी. बस इतना ही जानती थी कि वह पैसे वाला है. एक पड़ोसन से रानी ने देशराज के बारे में काफी कुछ जान लिया था. इस के बाद धीरेधीरे उस का झुकाव भी उस की तरफ होता गया.

एक दिन देशराज रानी के घर के सामने से जा रहा था तो वह घर की चौखट पर ही बैठी थी. उस समय दूरदूर तक कोई नजर नहीं आ रहा था. मौका अच्छा देख कर देशराज बोल पड़ा, ‘‘रानी, मुझे तुम्हारे बारे में सब पता है. तुम्हारी कहानी सुन कर ऐसा लगता है कि तुम्हारी जिंदगी में सिर्फ दुख ही दुख है.’’

‘‘आप के बारे में मैं ने जो कुछ सुन रखा था, आप उस से भी कहीं ज्यादा अच्छे हैं, जो दूसरों के दुख को बांटने की हिम्मत रखते हैं. वरना इस जालिम दुनिया में कोई किसी के बारे में कहां सोचता है?’’

‘‘रानी, दुनिया में इंसानियत अभी भी जिंदा है. खैर, तुम चिंता मत करो. आज से मैं तुम्हारा पूरा खयाल रखूंगा. चाहो तो बदले में तुम मेरे घर का कुछ काम कर दिया करना.’’

‘‘ठीक है, आप ने मेरे बारे में इतना सोचा है तो मैं भी आप के बारे में सोचूंगी. मैं आप के घर के काम कर दिया करूंगी.’’

इतना कह कर देशराज ने रानी के कंधे पर सांत्वना भरा हाथ रखा तो रानी ने अपनी गरदन टेढ़ी कर के उस के हाथ पर अपना गाल रख कर आशा भरी नजरों से उस की तरफ देखा. देशराज ने मौके का पूरा फायदा उठाया और रानी के हाथ पर 500 रुपए रखते हुए कहा, ‘‘ये रख लो, तुम्हें इस की जरूरत है. मेरी तरफ से इसे एडवांस समझ लेना.’’

रानी तो वैसे भी अभावों में जिंदगी गुजार रही थी, इसलिए उस ने देशराज द्वारा दिए गए पैसे अपने हाथ में दबा लिए. इस से देशराज की हिम्मत और बढ़ गई. वह हर रोज रानी से मिलने उस के घर पहुंचने लगा. वह जब भी उस के यहां जाता, रानी के बच्चों के लिए खानेपीने की कोई चीज जरूर ले जाता. कभीकभी वह रानी को पैसे भी देता. इस तरह वह रानी का खैरख्वाह बन गया.

रानी हालात के थपेड़ों में डोलती ऐसी नाव थी, जिस का कोई मांझी नहीं था. इसलिए देशराज के एहसान वह अपने ऊपर लादती चली गई. पैसे की वजह से उस की बेटी सीमा भी स्कूल नहीं जा रही थी. देशराज ने उस का दाखिला ही नहीं कराया, बल्कि उस की पढ़ाई का सारा खर्च उठाने का वादा किया.

स्वार्थ की दीवार पर एहसान की ईंट पर ईंट चढ़ती जा रही थी. अब रानी भी देशराज का पूरा खयाल रखने लगी थी. वह उसे खाना खाए बिना जाने नहीं देती थी. लेकिन देशराज के मन में तो रानी की देह की चाहत थी, जिसे वह हर हाल में पाना चाहता था.

एक दिन उस ने कहा, ‘‘रानी, अब तुम खुद को अकेली मत समझना. मैं हर तरह से तुम्हारा बना रहूंगा.’’

यह सुन कर रानी उस की तरफ चाहत भरी नजरों से देखने लगी. देशराज समझ गया कि वह शीशे में उतर चुकी है, इसलिए उस के करीब आ गया और उस के हाथ को दोनों हथेलियों के बीच दबा कर बोला, ‘‘सच कह रहा हूं रानी, तुम्हारी हर जरूरत पूरी करना अब मेरी जिम्मेदारी है.’’

हाथ थामने से रानी के शरीर में भी हलचल पैदा हो गई. देशराज के हाथों की हरकत बढ़ने लगी थी. इस का नतीजा यह निकला कि दोनों बेकाबू हो गए और अपनी हसरतें पूरी कर के ही माने.

देशराज ने वर्षों बाद रानी की सोई भावनाओं को जगाया तो उस ने देह के सुख की खातिर सारी नैतिकताओं को अंगूठा दिखा दिया. अब वह देशराज की बन कर रहने का ख्वाब देखने लगी. देशराज और रानी के अवैध संबंध बने तो फिर बारबार दोहराए जाने लगे. रानी को देशराज के पैसों का लालच तो था ही, अब वह उस से खुल कर पैसों की मांग करने लगी.

देशराज चूंकि उस के जिस्म का लुत्फ उठा रहा था, इसलिए उसे पैसे देने में कोई गुरेज नहीं करता था. इस तरह एक तरफ रानी की दैहिक जरूरतें पूरी होने लगी थीं तो दूसरी तरफ देशराज उस की आर्थिक जरूरतें पूरी करने लगा था. वर्षों बाद अब रानी की जिंदगी में फिर से रंग भरने लगे थे.

ककौली गांव में ही भल्लू का परिवार रहता था. पेशे से किसान भल्लू के 2 बेटे रंजीत, सुरजीत और 2 बेटियां कमला, विमला थीं. चारों में से अभी किसी की भी शादी नहीं हुई थी.

24 वर्षीय रंजीत और 22 वर्षीय सुरजीत, दोनों ही भाई देशराज की सिक्योरिटी एजेंसी में काम करते थे. रंजीत और देशराज की उम्र में काफी लंबा फासला था. देशराज की जवानी साथ छोड़ रही थी, जबकि रंजीत की जवानी पूरे चरम पर थी. वैसे भी वह कुंवारा था. देशराज और रंजीत के बीच बहुत अच्छी दोस्ती थी. दोनों साथसाथ खातेपीते थे.

एक दिन शराब के नशे में देशराज ने रंजीत को अपने और रानी के संबंधों के बारे में बता दिया. यह सुन कर रंजीत चौंका. यह उस के लिए चिराग तले अंधेरे वाली बात थी. उसी के गांव की रानी अपने शबाब का दरिया बहा रही थी और उसे खबर तक नहीं थी. वह किसी औरत के सान्निध्य के लिए तरस रहा था. रानी की हकीकत पता चलने के बाद जैसे उसे अपनी मुराद पूरी होती नजर आने लगी.

रंजीत के दिमाग में तरहतरह के विचार आने लगे. वह मन ही मन सोचने लगा कि जब देशराज रानी के साथ रातें रंगीन कर सकता है, तो वह क्यों नहीं? वह देशराज की ब्याहता तो है नहीं.  अगले दिन रंजीत देशराज से मिला तो बोला, ‘‘रानी की देह में मुझे भी हिस्सा चाहिए, नहीं तो मैं तुम दोनों के संबंधों की बात पूरे गांव में फैला दूंगा.’’

देशराज को रानी से कोई दिली लगाव तो था नहीं, वह तो उस की वासना की पूर्ति का साधन मात्र थी. उसे दोस्त के साथ बांटने में उसे कोई परेशानी नहीं थी. वैसे भी रंजीत का मुंह बंद करना जरूरी था. इसलिए उस ने रानी को रंजीत की शर्त बताते हुए समझाया, ‘‘देखो रानी, अगर हम ने उस की बात नहीं मानी तो वह हमारी पोल खोल देगा. पूरे गांव में हमारी बदनामी हो जाएगी. इसलिए तुम्हें उसे खुश करना ही पड़ेगा.’’

रानी के लिए जैसा देशराज था, वैसा ही रंजीत भी था. उस ने हां कर दी. इस बातचीत के बाद देशराज ने यह बात रंजीत को बता दी. फलस्वरूप वह उसी दिन शाम को रानी के घर पहुंच गया. एक ही गांव का होने की वजह से दोनों न केवल एकदूसरे को जानते थे, बल्कि उन में बातें भी होती थीं. रंजीत उसे भाभी कह कर बुलाता था.

सारी बातें चूंकि पहले ही तय थीं, सो दोनों के बीच अब तक बनी संकोच की दीवार गिरते देर नहीं लगी. दोनों के बीच शारीरिक संबंध बने तो रानी को एक अलग ही तरह की सुखद अनूभूति हुई. रंजीत के कुंवारे बदन का जोश देशराज पर भारी पड़ने लगा. उस दिन के बाद तो वह अधिकतर रंजीत की बांहों में कैद होने लगी. रंजीत भी रानी की देह का दीवाना हो चुका था. इसलिए वह भी उस पर दिल खोल कर पैसे खर्च करने लगा. रंजीत ने मारुति आल्टो कार ले रखी थी, जो उस के भाई सुरजीत के नाम पर थी. रंजीत रानी को अपनी कार में बैठा कर घुमाने ले जाने लगा. वह उसे रेस्टोरेंट वगैरह में ले जा कर खिलातापिलाता और गिफ्ट भी देता.

रानी की जिंदगी में रंजीत आया तो वह देशराज को भी और उस के एहसानों को भूलने लगी. रंजीत उस के दिलोदिमाग पर ऐसा छाया कि उस ने देशराज से मिलनाजुलना तक छोड़ दिया. इस से देशराज को समझते देर नहीं लगी कि रानी रंजीत की वजह से उस से दूरी बना रही है. उसे यह बात अखरने लगी. रानी को फंसाने में सारी मेहनत उस ने की थी, जबकि रंजीत बिना किसी मेहनत के फल खा रहा था.

इसी बात को ले कर रंजीत और देशराज में मनमुटाव रहने लगा. देशराज ने रंजीत से उस की कुछ जमीन खरीदी थी, जिस का करीब 5 लाख रुपया बाकी था. रंजीत जबतब देशराज से अपने पैसे मांगता रहता था. इस बात को ले कर रंजीत कई बार उसे जलील तक कर चुका था.

एक तरफ रंजीत ने देशराज की मौजमस्ती का साधन छीन लिया था तो दूसरी ओर उसे 5 लाख रुपए भी देने थे. इसलिए सोचविचार कर उस ने रंजीत को अपने रास्ते से हटाने का फैसला कर लिया. इस के लिए उस ने अपने यहां सुरक्षा गार्ड की नौकरी कर रहे अजय पांडेय को भी लालच दे कर अपनी योजना में शामिल कर लिया. अजय सीतापुर के कमलापुर थानाक्षेत्र के गांव रूदा का रहने वाला था.

3 दिसंबर की शाम को रंजीत को कटरा पलटन छावनी में एक वैवाहिक समारोह में जाना था. यह बात देशराज को पता थी. उस ने उसी दिन अपनी योजना को अंजाम देने के बारे में सोचा. उस दिन देर शाम रंजीत घर से तैयार हो कर कार से कटरा पलटन जाने के लिए निकला. रास्ते में एक जगह उसे देशराज और अजय पांडेय मिल गए. वहां से वे हाइवे पर ट्रामा सेंटर के पास गए और शराब खरीद कर बड़ी खदान के पास आ गए.

तीनों ने कार के अंदर बैठ कर शराब पी. देशराज और अजय ने खुद कम शराब पी, जबकि रंजीत को ज्यादा पिलाई. जब रंजीत नशे में धुत हो गया तो दोनों ने उसे पिछली सीट पर लिटा दिया. कार में एक छोटा गैस सिलेंडर भरा रखा था, जिसे रंजीत घर से गैस भराने के लिए लाया था. साथ ही कार में एक बोतल पेट्रोल भी रखा था. देशराज ने कार के सभी शीशे चढ़ा कर गैस सिलेंडर की नौब खोल दी, जिस से तेजी से गैस रिसने लगी.

देशराज पेट्रोल की बोतल उठा कर कार से बाहर आ गया और कार के सभी दरवाजे बंद कर दिए. इस के बाद उस ने कार के ऊपर सारा पेट्रोल छिड़क कर आग लगा दी. चूंकि कार के अंदर गैस भरी थी, इसलिए आग की लपटें तेजी से बाहर निकलीं. देशराज का चेहरा और हाथ जल गए. गैस और पेट्रोल की वजह से कार धूधू कर के जलने लगी. नशे में धुत अंदर लेटे रंजीत ने बाहर निकलने की कोशिश की, लेकिन वह नाकामयाब रहा. अपना काम कर के देशराज और अजय वहां से भाग खडे़ हुए.

देशराज मौके से तो भाग गया, लेकिन कानून से नहीं बच सका. इंसपेक्टर रघुवीर सिंह ने रानी से भी पूछताछ की. हत्या के इस मामले में उस की कोई भूमिका नहीं थी. अलबत्ता जब गांव वालों को यह पता चला कि हत्या की वजह रानी थी तो लोगों ने उस के साथ भी मारपीट की.

पुलिस ने देशराज को मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट की अदालत में पेश करने के बाद जेल भेज दिया. कथा संकलन तक पुलिस अजय पांडेय को गिरफ्तार नहीं कर पाई थी.v Crime News

—कथा पुलिस सूत्रों पर आधारित

Love Crime : प्रेमिका ने प्रेमी से पहले संबंध बनाए फिर पैट्रोल से जिंदा जला दिया

Love Crime : दिल्ली के निजामुद्दीन रेलवे स्टेशन के नजदीक नांगली राजपुर स्थित यश गैस्टहाऊस में 27 अक्तूबर, 2015 को एक ऐसी घटना घटी कि गैस्टहाऊस के मैनेजर और कर्मचारी सिहर उठे. शाम के करीब 4 बजे गैस्टहाऊस के कमरा नंबर 24 से अचानक चीखने की आवाजें आने लगीं. चीखें सुन कर मैनेजर सुमित कटियार 2 कर्मचारियों के साथ उस कमरे की ओर भागे. वहां पहुंच कर उन्होंने देखा कि कमरे से धुआं भी निकल रहा है.

उस कमरे में सुबह ही एक आदमी अपनी पत्नी के साथ आया था. कमरे से चीखने की जो आवाज आ रही थी, वह उसी आदमी की थी. मैनेजर की समझ में नहीं आ रहा था कि आखिर उस आदमी के साथ ऐसा क्या हो गया, जो वह इस तरह चीख रहा है. चीखों और धुआं निकलने से उस ने यही अंदाजा लगाया कि शायद वह आदमी जल रहा है. यह सोच कर सुमित कटियार घबरा गए.

कमरे का दरवाजा अंदर से बंद था. उन्होंने दरवाजा थपथपाया, लेकिन वह नहीं खुला. वह परेशान हो उठे. जब उन्हें कोई उपाय नहीं सूझा तो उन्होंने अन्य कर्मचारियों के साथ मिल कर कमरे का दरवाजा तोड़ दिया. कमरे के अंदर का खौफनाक दृश्य देख कर सब की घिग्घी बंध गई. कमरे में पड़े बैड के नीचे एक आदमी आग में जलते हुए तड़प रहा था. उस के शरीर पर एक भी कपड़ा नहीं था. बैड के पास खड़ी उस की पत्नी हैरत से उसे जलता देख रही थी. वह भी उसी हालत में थी.

सुमित कटियार ने तुरंत पुलिस कंट्रोल रूम को फोन कर के इस घटना की सूचना दे दी. थोड़ी ही देर में पुलिस कंट्रोल रूम की गाड़ी वहां पहुंच गई, जिस में 4 पुलिसकर्मी थे. यह क्षेत्र दक्षिणीपूर्वी दिल्ली के थाना सनलाइट कालोनी के अंतर्गत आता है, इसलिए पुलिस कंट्रोल रूम से इस घटना की सूचना थाना सनलाइट कालोनी को भी दे दी गई थी.

खबर मिलते ही थानाप्रभारी ओमप्रकाश लेखवाल 2 हैडकांस्टेबलों को ले कर घटनास्थल पर पहुंच गए. निरीक्षण में उन्हें कमरे में एक अधेड़ आदमी फर्श पर झुलसा पड़ा मिला. वह बेहोशी की हालत में लगभग 90 प्रतिशत जला था. उस के कपड़े बैड के पास रखी मेज पर रखे थे. मेज के नीचे एक कोल्डङ्क्षड्रक्स की 2 लीटर की खाली बोतल रखी थी, जिस में थोड़ा पैट्रोल था. थानाप्रभारी ने एक हैडकांस्टेबल के साथ उस जले हुए आदमी को इलाज के लिए अस्पताल भेज दिया.

जिस व्यक्ति के साथ यह घटना घटी थी, वह कौन था, कहां का रहने वाला था और यह घटना कैसे घटी थी, इस बारे में थानाप्रभारी ओमप्रकाश लेखवाल ने गैस्टहाऊस के मैनेजर सुमित कटियार से पूछा तो उन्होंने बताया कि जो आदमी आग से झुलसा है, उस का नाम गजानन है. वह सुबह साढ़े 10 बजे अपनी पत्नी सुनीता के साथ आया था. उस ने आईडी के रूप में अपने वोटर कार्ड की फोटोकौपी जमा कराई थी.

तब उसे कमरा नंबर 24 दे दिया गया था. इस के बाद अभी थोड़ी देर पहले कमरे से चीखने की आवाज सुनाई दी तो वह कुछ कर्मचारियों के साथ वहां पहुंचा. तब उस ने कमरे से धुआं निकलते देखा. उस ने दरवाजा खुलवाने की कोशिश की. जब दरवाजा नहीं खुला तो उस ने दरवाजा तोड़ दिया.

इस के आगे मैनेजर ने बताया कि जब उस ने गजानन की पत्नी सुनीता से आग लगने के बारे में पूछा तो उस ने कहा कि उस की शादी को 15 साल हो गए हैं, लेकिन अभी तक उन्हें संतान नहीं हुई. बड़ेबड़े डाक्टरों को दिखाया, तांत्रिकों के पास भी गए, लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ. संतान न होने की वजह से दोनों काफी परेशान थे. एक दिन पहले उस के पति ने उस से कहा कि कल उन्हें महाराष्ट्र के नागपुर शहर चलना है. वहां एक बहुत पहुंचे हुए फकीर हैं, जो दुआ पढ़ा हुआ पानी देते हैं. वह पानी पीने के बाद संतान सुख का लाभ मिलता है.

चूंकि जिस ट्रेन से उन्हें नागपुर जाना था, वह रात 9 बजे की थी. इतना टाइम वे सडक़ पर नहीं बिता सकते थे, इसलिए आराम करने के लिए इस गैस्टहाऊस में आ गए. शारीरिक संबंध बनाने के बाद पति पर न जाने क्या फितूर सवार हुआ कि उन्होंने साथ लाए कपड़े के बैग से 2 लीटर वाली प्लास्टिक की बोतल निकाली और उस में भरा पैट्रोल खुद पर उड़ेल लिया. वह कुछ समझ पाती पति ने माचिस की तीली जला कर खुद को आग लगा ली.

“कहां है गजानन की पत्नी सुनीता?” ओमप्रकाश लेखवाल ने पूछा तो मैनेजर इधरउधर देखने लगा. उस ने पूरा गैस्टहाऊस छान मारा, लेकिन सुनीता कहीं नहीं मिली.

“तुम्हारी लापरवाही की वजह से वह भाग गई,” ओमप्रकाश लेखवाल ने कहा, “तुम ने गजानन की उस पत्नी की कोई आईडी ली थी?”

“सर, पति की आईडी मिल गई तो मैं ने उस की आईडी लेना जरूरी नहीं समझा.” कह कर मैनेजर ने सिर झुका लिया.

“वह गजानन की पत्नी ही थी, मुझे नहीं लगता. वह मौजमस्ती के लिए उस के साथ यहां आई थी. मुझे पूरा यकीन है कि वह पैट्रोल गजानन नहीं वही लाई थी. अपना काम कर के वह रफूचक्कर हो गई. उस ने तुम्हें झूठी कहानी सुना कर विश्वास में ले लिया और कपड़े पहन कर चली गई. लापरवाही तुम लोग करते हो और भुगतना पुलिस को पड़ता है.” ओमप्रकाश लेखवाल ने नाराजगी प्रकट करते हुए कहा.

थानाप्रभारी ने गैस्टहाऊस का रजिस्टर चैक किया तो उस में गजानन का पता चांदनी चौक, पुरानी दिल्ली का लिखा था. जबकि उस ने अपने वोटर आईडी कार्ड की जो छायाप्रति जमा कराई थी, उस में उस का पता गांव कामनवास, सवाई माधोपुर, राजस्थान लिखा था.

पुलिस ने गैस्टहाऊस के मैनेजर को वादी बना कर भादंवि की धारा 307 के तहत रिपोर्ट दर्ज कर ली. गजानन का हाल जानने के लिए ओमप्रकाश लेखवाल अस्पताल पहुंचे तो उन्हें पता चला कि गजानन की मौत हो चुकी है. मरने से पहले उस ने डाक्टरों को बताया था कि उसे सुनीता उर्फ ङ्क्षरकू ने जलाया था.

गजानन की मौत की खबर उस के घर वालों को देना जरूरी था, इसलिए उस ने गैस्टहाऊस में दिल्ली का जो पता लिखाया था, पुलिस चांदनी चौक स्थित उस पते पर गौरीशंकर मंदिर पहुंची तो वहां से पता चला कि गजानन पहले इसी मंदिर में महंत था. लेकिन कुछ दिनों पहले उसे वहां से हटा दिया गया था. अब वह सवाई माधोपुर स्थित अपने गांव में रहता था. दिल्ली वह 10-15 दिनों में आताजाता रहता था.

इस के बाद दिल्ली पुलिस ने राजस्थान पुलिस को गजानन की हत्या की खबर भिजवा कर संबंधित थाने द्वारा उस के घर वालों को उस की हत्या की खबर भिजवा दी. खबर सुन कर गजानन के घर वाले थाना सनलाइट कालोनी पहुंच गए.

डीसीपी संजीव रंधावा ने सुनीता की तलाश के लिए पुलिस की एक टीम बनाई, जिस में एसआई ललित कुमार, हैडकांस्टेबल मान ङ्क्षसह, कांस्टेबल सूबे ङ्क्षसह, महिला कांस्टेबल संगीता ङ्क्षसह को शामिल किया गया. टीम का नेतृत्व ओमप्रकाश लेखवाल को सौंपा गया.

गजानन चांदनी चौक के जिस गौरीशंकर मंदिर में महंत था, पुलिस टीम ने वहीं से जांच शुरू की. वहां से पुलिस को कई चौंकाने वाली जानकारियां मिलीं. पता चला कि गजानन 10 साल पहले दिल्ली आया था और गौरीशंकर मंदिर का महंत बन गया था. मंदिर में पूजापाठ कराने के साथसाथ वह ज्योतिषी एवं तंत्रमंत्र का भी काम करता था. उस के पास अपनी समस्याओं के समाधान के लिए पुरुषों के साथसाथ महिलाएं भी आती थीं.

इन में कुछ महिलाओं से उस की अच्छी जानपहचान हो गई थी. वह शराब भी पीने लगा था. इन में से कुछ महिलाओं से उस के अनैतिक संबंध भी बन गए थे. बाद में जब यह बात गौरीशंकर मंदिर की प्रबंधक कमेटी को पता चली तो कमेटी ने सन 2008 में गजानन को मंदिर से निकाल दिया था.

इस के बाद गजानन ने मंदिर के बाहर फूल एवं पूजा सामग्री बेचने की दुकान खोल ली. उस की यह दुकान बढिय़ा चलने लगी थी. उस ने दुकान पर काम करने के लिए 2 नौकर रख दिए और खुद राजस्थान स्थित अपने घर चला गया. यह 2-3 साल पहले की बात है. वह हफ्तादस दिन में दुकान पर आता और नौकरों से हिसाब कर के चला जाता था. यह जानकारी हासिल कर के पुलिस टीम थाने लौट आई.

उधर पोस्टमार्टम के बाद 20 अक्तूबर, 2015 को लाश गजानन के परिजनों को सौंप दी गई. घर वालों ने निगमबोध घाट पर ही उस की अंत्येष्टि कर दी. एसआई ललित कुमार ने घर वालों से पूछताछ की तो उन्होंने किसी पर शक नहीं जताया.

पुलिस ने गैस्टहाऊस में लगे सीसीटीवी कैमरे की फुटेज देखी. फुटेज में सुनीता उर्फ ङ्क्षरकू का चेहरा तो नजर आ रहा था, लेकिन पुलिस के लिए मुश्किल यह थी कि इतनी बड़ी दिल्ली में उसे कहां ढूंढ़ा जाए. पुलिस के पास सुनीता का कोई मोबाइल नंबर भी नहीं था, जिस से उस के द्वारा उसे ढूंढने में आसानी हो. गैस्टहाऊस में गजानन के कपड़ों से एक मोबाइल फोन मिला था. घर वालों ने बताया था कि वह मोबाइल गजानन का ही है.

ललित कुमार ने सुनीता का फोन नंबर जानने के लिए गजानन के मोबाइल की काल लौग देखी तो एक नंबर पर उन की नजर टिक गई. क्योंकि वह नंबर ‘माई लव’ के नाम से सेव था. ललित कुमार जानना चाहते थे कि यह नंबर किस का है. उन्होंने अपने सैल फोन से वह नंबर मिलाया.

कुछ देर बाद एक महिला ने फोन रिसीव कर के ‘हैलो’ कहा तो ललित कुमार बोले, “कार में चलने का शौक है तो इस के लोन की किस्तें भी समय से जमा करा दिया करो. 3 महीने हो गए, आप ने अभी तक किश्तें नहीं जमा कीं.”

“अरे भाई, आप कौन बोल रहे हैं? मैं ने कार के लिए कब लोन लिया?” दूसरी ओर से महिला ने कर्कश स्वर में कहा.

“आप रुखसार बोल रही हैं न?” ललित कुमार ने पूछा.

“नहीं बाबा, मैं रुखसार नहीं, सुनीता हूं. रौंग नंबर.”

“सौरी मैडम, गलत नंबर लग गया.” ललित कुमार ने कहा. इस के बाद उन्होंने फोन काट दिया. इस बातचीत के बाद उन की आंखों में चमक आ गई. क्योंकि सुनीता के फोन नंबर की पुष्टि हो गई थी.

ललित कुमार ने सुनीता का फोन नंबर सॢवलांस पर लगवाया तो उस की लोकेशन लाल किला, रेलवे कालोनी की मिली. वह टीम के साथ रेलवे कालोनी पहुंचे तो वहां के लोगों से सुनीता के बारे में पूछने पर पता चला कि सुनीता का पति रेलवे में नौकरी करता है. वह पहले इसी कालोनी में पति के साथ रहती थी, पर 4 सालों से वह परिवार के साथ नोएडा में कहीं रहने चली गई है.

पता चला कि रेलवे कालोनी का वह क्वार्टर उस ने किसी को किराए पर दे रखा था. किराएदार से वह उस दिन मिलने आई थी. उस से मिल कर वह नोएडा चली गई थी. नोएडा में सुनीता कहां रह रही है, यह बात रेलवे कालोनी में रहने वाला कोई नहीं बता सका.

अलबत्ता सुनीता ने जिस परिवार को अपना क्वार्टर किराए पर दिया था, उस ने पुलिस को बताया कि उस का कुछ जरूरी सामान एक कमरे में रहता है, जिस की चाबी सुनीता के पास रहती है. आज जब वह मिलने आई थी तो वहां से कुछ सामान अपने बैग में भर कर ले गई थी.

इतनी जानकारी मिलने के बाद ललित कुमार ने सॢवलांस द्वारा सुनीता के फोन की लोकेशन पता की तो इस बार लोकेशन नोएडा सैक्टर-29 की निकली.

28 अक्तूबर, 2015 की सुबह ललित कुमार ने टीम में शामिल महिला कांस्टेबल के साथ नोएडा के सैक्टर- 29 स्थित एक मकान पर दबिश दी तो वहां सुनीता मिल गई. थाने ला कर जब उस से पूछताछ की गई तो उस ने कहा, “मेरा गजानन से रिश्ता जरूर था, मगर मैं ने उन्हें जला कर नहीं मारा. उन्होंने खुद ही पैट्रोल डाल कर आग लगाई थी.”

“तो फिर तुम वहां से भागी क्यों?” थानाप्रभारी ओमप्रकाश लेखवाल ने पूछा.

“स…सर, मैं डर गई थी.” वह बोली.

“गजानन भला खुद को आग क्यों लगाएगा?” ओमप्रकाश लेखवाल ने पूछा.

“सर, बात यह है कि गजानन की पत्नी बीमार रहती है. जब मुझ से उन का रिश्ता बना तो वह मुझ पर शादी करने का दबाव बनाने लगे. मैं 2 बच्चों की मां हूं. बच्चों को छोड़ कर मैं ऐसा कैसे कर सकती थी?” कह कर सुनीता सिसकने लगी.

पलभर बाद वह हिचकियां लेते हुए बोली, “26 अक्तूबर की शाम गजानन ने फोन कर के कहा कि मुझ से मिलने की उस की काफी इच्छा है. अगले दिन उन्होंने सुबह 10 बजे मुझे हजरत निजामुद्दीन रेलवे स्टेशन के बाहर बुलाया. अगले दिन तयशुदा समय पर मैं स्टेशन के बाहर पहुंची तो उन्हें मैं ने इंतजार करते पाया. उन के कंधे पर कपड़े का एक बैग था.

“गजानन मुझे यश गैस्टहाऊस ले गए. उन्होंने वहां मुझे अपनी पत्नी बताया था. कमरे में जा कर हम ने शारीरिक संबंध बनाए. उस के बाद गजानन ने साथ लाए बैग से प्लास्टिक की 2 लीटर की बोतल निकाली और उस का ढक्कन खोला. उस में पैट्रोल भरा था.

“गजानन ने मुझ से कहा कि वह आखिरी बार पूछ रहा है कि मैं उस से शादी करूंगी या नहीं? मैं ने साफ इनकार कर दिया. तब उन्होंने कहा कि जब तुम नहीं मान रही तो मैं खुदकुशी कर लूंगा, लेकिन पुलिस यही समझेगी कि उसे तुम ने जलाया है. इस के बाद गजानन ने पूरा पैट्रोल अपने शरीर पर छिडक़ कर आग लगा ली.”

फिर सुनीता जोरजोर से रोते हुए बोली, “सर, मैं ने उन्हें नहीं मारा. मुझे फंसाने के लिए उन्होंने खुदकुशी की थी.”

ओमप्रकाश लेखवाल को लगा कि सुनीता की आंखों के आंसू घडिय़ाली हैं, यह जरूर कुछ छिपा रही है. उन्होंने महिला कांस्टेबलों को इशारा किया. महिला कांस्टेबल ने सुनीता को एक अलग कमरे में ले जा कर थोड़ी सख्ती की तो उस ने सहजता से अपना जुर्म कबूल कर लिया.

सुनीता उर्फ ङ्क्षरकू मूलरूप से पटना, बिहार की रहने वाली थी. 13 साल पहले उस की शादी विजय कुमार के साथ हुई थी. विजय कुमार दिल्ली में रहता था और हजरत निजामुद्दीन रेलवे स्टेशन पर बतौर टैक्नीशियन नौकरी करता था. वह पति के साथ खुश थी. वह 2 बच्चों की मां बनी. विजय कुमार को रेलवे की ओर से जामामस्जिद के पास बनी रेलवे कालोनी में क्वार्टर मिला था. उस में वह पत्नी सुनीता और बच्चों के साथ रहता था.

सुनीता आजादखयालों की थी, जबकि विजय कुमार पंरपरावादी. सुनीता को घूमने एवं सिनेमाहौल में फिल्में देखने का शौक था. अपने शौक पूरे करने के लिए वह पति से अनापशनाप खर्च लेती रहती थी. सुनीता अकसर गौरीशंकर मंदिर भी जाया करती थी. वहीं 8 साल पहले उस की मुलाकात मंदिर के महंत गजानन से हुई.

गजानन पुजारी होने के साथसाथ ज्योतिषी भी था. यही वजह थी कि उस के पास महिलाओं की भीड़ लगी रहती थी. सुनीता गजानन से मिली तो वह उस का दीवाना हो गया. इस के बाद दोनों के बीच संबंध बन गए. कुछ दिनों बाद गजानन और सुनीता के संबंधों की बात मंदिर की प्रबंधक कमेटी को पता चली तो उसे मंदिर से निकाल दिया गया. तब वह मंदिर के बाहर फूल व पूजा सामग्री बेचने लगा.

सुनीता और गजानन के संबंध पहले की ही तरह जारी रहे. गजानन ने चांदनी चौक में किराए का मकान ले रखा था. जब भी उस की इच्छा होती, वह सुनीता को अपने कमरे पर बुला लेता. वह सुनीता को शौक पूरे करने के लिए अच्छेखासे पैसे भी देता था.

सन 2014 के अगस्त महीने में गजानन ने सवाई माधोपुर में अपना एक प्लौट 25 लाख रुपए में बेचा तो सुनीता के मांगने पर उस ने उसे 10 लाख रुपए उधार दे दिए. सितंबर, 2015 के अंतिम दिनों में गजानन ने उस से अपने रुपए मांगे तो सुनीता बहाने बनाने लगी.

दरअसल, अब तक गजानन का मन सुनीता से भर चुका था. वह अपने 10 लाख रुपए ले कर उस से हमेशा के लिए पीछा छुड़ाना चाहता था. लेकिन सुनीता की नीयत में खोट आ गई थी. वह गजानन के 10 लाख रुपए किसी भी सूरत में लौटाना नहीं चाहती थी. वह टालमटोल करने लगी तो गजानन धमकी देने लगा कि उस ने उस के अंतरंग क्षणों की वीडियो बना रखी है. अगर उस ने उस के पैसे नहीं लौटाए तो वह वीडियो उस के पति को दिखा देगा.

सुनीता डर गई. उस ने गजानन की हत्या करने की योजना बना डाली. सुनीता ने 26 अक्तूबर, 2015 की रात गजानन को फोन किया. उस समय गजानन सवाई माधोपुर स्थित अपने घर में था. सुनीता ने कहा, “कल सुबह तुम हजरत निजामुददीन रेलवे स्टेशन के बाहर 11 बजे मिलना. मैं तुम्हारे 10 लाख रुपए लौटा दूंगी.”

पैसों के लालच में गजानन रात में ही ट्रेन द्वारा राजस्थान से चल पड़ा और 27 अक्तूबर की सुबह 9 बजे हजरत निजामुद्दीन रेलवे स्टेशन पहुंच गया. वह स्टेशन के बाहर खड़ा हो कर सुनीता का इंतजार करने लगा.

10 बजे के करीब सुनीता वहां पहुंची. वह गजानन को नांगली राजपुर स्थित यश गैस्टहाऊस ले गई. वहां गजानन ने एक कमरा बुक कराया. जैसे ही वे दोनों कमरे में पहुंचे, तभी सुनीता ने दरवाजा अंदर से बंद कर लिया. मौके का फायदा उठाने के लिए गजानन ने उसे आगोश में ले लिया.

इस के बाद दोनों ने कपड़े उतार कर शारीरिक संबंध बनाए. हसरतें पूरी करने के बाद दोनों बिस्तर पर निर्वस्त्र लेटे थे, तभी गजानन ने उस से अपने 10 लाख रुपए मांगे. तब सुनीता ने कहा, “पंडितजी, 8-10 सालों से मैं तुम्हारी सेवा करती आ रही हूं. अब तो आप उन पैसों को भूल जाइए.”

“नहीं सुनीता, घर वालों को इस की जानकारी हो गई है. वे सब मुझ से झगड़ा करते हैं. इसलिए मैं पैसे मांग रहा हूं.” गजानन ने कहा.

सुनीता उठी और साथ लाए बैग से पैट्रोल से भरी बोतल निकाल कर उस के ऊपर उड़ेल दी. इस से पहले कि गजानन कुछ समझ पाता, सुनीता ने उस पर आग लगा दी. जलता हुआ गजानन चीखने लगा. उस की चीख सुन कर गैस्टहाऊस का मैनेजर वहां आ पहुंचा. इस के बाद क्या हुआ, आप ऊपर पढ़ ही चुके हैं.

सुनीता से पूछताछ कर के पुलिस ने 29 अक्तूबर, 2015 को उसे कोर्ट में पेश किया, जहां से उसे जेल भेज दिया गया. Love Crime

—कथा पुलिस सूत्रों पर आधारित

Punjab News : पीठ पर ‘धोखेबाज’ लिखने वाला सीरियल किलर

Punjab News : 33 वर्षीय रामस्वरूप उर्फ सोढ़ी दिन भर तो मर्दों के लिबास में रहता था, मगर रात होते ही वह एक महिला की तरह साजशृंगार कर अपने शिकार की तलाश में निकल जाता था. फिर अपने शिकार का मर्डर कर लाश की पीठ पर एक शब्द लिखता था ‘धोखेबाज’. उस के बाद मृतक के पैरों को छू कर माफी मांगता था. इस तरह वह दरजन भर हत्याएं कर चुका था. विदेश से नौकरी कर के पंजाब लौटा रामस्वरूप कैसे बना सीरियल किलर?

पंजाब के जिला रूपनगर के एरिया निरंकारी भवन के पास एक कार काफी समय से संदिग्ध अवस्था में खड़ी रही तो आसपास के दुकानदारों और राहगीरों की भीड़ वहां पर एकत्रित हो गई. इन में से कुछ युवकों ने जब कार के भीतर झांका तो उन के जैसे होश ही उड़ गए, क्योंकि कार के भीतर एक युवक की लाश पड़ी थी. जिस के शरीर पर कोई भी कपड़ा नहीं था. तभी किसी राहगीर ने पुलिस कंट्रोल रूम को फोन कर यह जानकारी दे दी. चूंकि यह क्षेत्र रूपनगर के थाना सिटी के अंतर्गत आता था, इसलिए पुलिस कंट्रोल रूम से इस की इत्तला थाना सिटी को दे दी गई.

सूचना मिलते ही थाना सिटी की पुलिस तुरंत ही घटनास्थल पर पहुंच गई. अब तक आसपास काफी भीड़ जमा हो चुकी थी. पुलिस ने भीड़ को अलग करने के बाद कार के भीतर देखा तो उस में एक युवक की निर्वस्त्र लाश पड़ी हुई थी. किसी तरह कार का दरवाजा खोल कर पुलिस ने लाश कार से बाहर निकाली और उस का निरीक्षण किया तो लाश की पीठ पर ‘धोखेबाज’ लिखा हुआ था. पुलिस ने लाश का पंचनामा कर पोस्टमार्टम के लिए भिजवा दिया. यह बात पिछले साल की 24 जनवरी की है. पुलिस द्वारा गहरी छानबीन करने के बाद पता चला कि वह लाश हरप्रीत सिंह उर्फ सन्नी की थी, जो रूपनगर के ही मोहल्ला जगजीत नगर का रहने वाला था.

उस के बाद थाना सिटी में अज्ञात हत्यारे के खिलाफ हत्या का मुकदमा दर्ज कर लिया गया. पुलिस ने पोस्टमार्टम कराने के बाद मृतक हरप्रीत सिंह की लाश को उस के फेमिली वालों को सौंप दी और केस की छानबीन में जुट गई, लेकिन 11 महीने बीतने पर भी हत्यारे का कोई भी सुराग पुलिस के हाथ नहीं आ सका. इसी तरह 6 अप्रैल, 2024 को रूपनगर जिले के ही गांव बारहा पिंड में पंजहेरा रोड के पास एक अज्ञात शव मिलने की खबर कीरतपुर साहिब पुलिस को मिली. पुलिस जब मौके पर पहुंची तो उस लाश के ऊपर भी कोई कपड़ा नहीं था. जब पुलिस ने लाश को कब्जे में ले कर छानबीन की तो उस अज्ञात लाश की नंगी पीठ पर भी ‘धोखेबाज’ लिखा हुआ था.

पुलिस द्वारा जब उस अज्ञात लाश की आसपड़ोस के गांवों में पहचान कराई गई तो पता चला कि यह लाश मुकंदर सिंह की थी. मुकंदर सिंह उर्फ बिल्ला पुत्र शाम लाल की उम्र 34 वर्ष थी और वह रूपनगर जिले के ही गांव बेगमपुरा (घनौली) जिला रूपनगर का निवासी था. वह ट्रैक्टर रिपेयङ्क्षरग का काम करता था. इस संबंध में मृतक के फेमिली वालों की ओर से थाना कीरतपुर साहिब में हत्या का मुकदमा दर्ज कर दिया गया. इन दोनों घटनाओं में हत्याओं का एक ही पैटर्न था. मृतकों की लाश पर कपड़े नहीं पाए गए थे और पीठ पर ‘धोखेबाज’ लिखा गया था. मगर एक चीज दोनों में अलग पाई गई थी.

पोस्टमार्टम रिपोर्ट के अनुसार, हरप्रीत सिंह की हत्या किसी कपड़े द्वारा गला घोंट कर की गई थी, जबकि मुकंदर सिंह उर्फ बिल्ला की हत्या किसी भारी वस्तु जैसे ईंटपत्थरों द्वारा पीटपीट कर की गई थी. मगर इस हत्या के कई महीने बीत जाने के बाद भी पुलिस हत्यारे को पकडऩे में कामयाब नहीं हो सकी थी. यह मामला जब पुलिस के आला अधिकारियों के पास पहुंचा तो डीजीपी गौरव यादव ने अधिकारियों की बैठक कर उन्हें हत्या के ये दोनों केस खोलने के उचित दिशानिर्देश दिए.

रूपनगर रेंज के डीआईजी हरचरण सिंह भुल्लर के निर्देशों के बाद जिला रूपनगर में जघन्य अपराधों के मामलों को सुलझाने के लिए सभी पुलिस अधिकारियों को निर्देश जारी किए गए. इस के बाद एसपी गुलनीत सिंह खुराना के सुपरविजन में एक विशेष पुलिस टीम का गठन कर दिया गया, जिस में एसपी नवनीत सिंह माहल, डीएसपी अजय कुमार और एसएचओ इंसपेक्टर जतिन कुमार को शामिल किया गया. 18 अगस्त, 2024 को पुलिस को 37 वर्षीय मनिंदर सिंह निवासी कीरतपुर साहिब का शव जियो पेट्रोल पंप, मनाली रोड के सामने झाडिय़ों में निर्वस्त्र मिला. मनिंदर सिंह टोल प्लाजा गोदरा पर एक चाय की दुकान चलाता था. मनिंदर सिंह के गले पर भी गला घोंटने के वही निशान थे. यानी कि उस की पीठ पर भी ‘धोखेबाज’ लिखा हुआ था.

यह सब देख कर पुलिस टीम को यह साफ हो गया था कि इस मर्डर के पीछे भी उसी सीरियल किलर का हाथ है, जो गला घोंट कर, पीटपीट कर मर्दों की हत्या करता है और बाद में उन की पीठ पर ‘धोखेबाज’ लिख देता है. अब यह सीरियल किलर एक चुनौती बन कर पुलिस के सामने आ चुका था. पुलिस फिर से तहकीकात में जुट गई. पुलिस ने अब रात की गश्त भी लगा दी थी, लेकिन कातिल अभी भी पुलिस की गिरफ्त से काफी दूर था. पुलिस 18 अगस्त, 2024 को हुए मनिंदर सिंह के मर्डर की तफ्तीश कर रही थी. पंजाब के रोपड़ के कीरतपुर साहिब में एक टोल प्लाजा है, उस के हाइवे पर एक चाय और खानेपीने की दुकान है और उसी दुकान के मालिक मनिंदर सिंह की लाश उस की दुकान के सामने की ओर झाडिय़ों में मिली थी.

पुलिस ने मौके पर पहुंच कर घटनास्थल की सूक्ष्मता से गहन जांचपड़ताल भी की, परंतु हत्या का कोई भी सूत्र पुलिस के हाथ नहीं आ पाया था. घटनास्थल के आसपास कोई सीसीटीवी कैमरा भी नहीं था. वहां पर काफी अंधेरा था. तभी मृतक के फेमिली वालों से गहन पूछताछ करने पर पुलिस टीम को यह जानकारी मिली कि जिस मनिंदर सिंह की हत्या हुई थी, उस का मोबाइल फोन न घर पर, न दुकान पर और न ही उस स्थान पर मिला था, जहां पर उस की लाश मिली थी. पुलिस टीम ने मृतक के फेमिली वालों से उस का फोन नंबर मांग कर उसे सर्विलांस पर लगा दिया, जिस से पुलिस को पता चला कि मृतक मनिंदर सिंह का फोन ऐक्टिव था और इस मोबाइल फोन का इस्तेमाल भी हो रहा था.

पुलिस ने सर्विलांस के सहारे उस व्यक्ति को पकड़ लिया, जो मृतक के फोन का इस्तेमाल कर रहा था. पुलिस ने उसे तुरंत गिरफ्तार कर लिया. पुलिस को अब पूरा यकीन हो गया था कि उन्होंने आरोपी को पकड़ लिया है और मनिंदर सिंह मर्डर केस सौल्व कर लिया है. लेकिन जब पुलिस ने मोबाइल फोन इस्तेमाल करने वाले व्यक्ति से विस्तार पूछताछ की तो उस ने पुलिस को बताया कि मैं ने यह मोबाइल फोन तो किसी से सेकेंडहैंड खरीदा है. इंसपेक्टर जतिन कुमार पुलिस ने उस व्यक्ति से पूछा, ”यह मोबाइल फोन तुम ने किस से खरीदा? उस की हुलिया, कदकाठी कैसी थी?’’

”साहब, उस आदमी का हुलिया बड़ा विचित्र था.’’ उस व्यक्ति ने बताया.

”कैसा विचित्र हुलिया?’’ इंसपेक्टर ने पूछा.

उस व्यक्ति ने बताया, ”साहब, जिस ने मुझे यह मोबाइल फोन बेचा था, वह असल में था तो एक पुरुष, लेकिन उस ने कपड़े, अपना सारा साजशृंगार एक महिला की तरह कर रखा था. उस ने तो अपने सिर पर पल्लू भी डाला हुआ था. लिबास से तो वह पूरी तरह से एक सुंदर महिला की तरह नजर आ रहा था, परंतु जब उस ने मेरे साथ बातचीत की तो मुझे पता चला कि वह तो एक पुरुष है.’’

पुलिस टीम ने फिर उस गिरफ्तार व्यक्ति से उस पुरुषनारी मिक्स चेहरे, उस की ऊंचाई, उस की बनावट के बारे में विस्तार से बताने को कहा और वहां पर एक स्केच आर्टिस्ट को भी बुलवा लिया गया. उस गिरफ्तार व्यक्ति के बताए अनुसार पुलिस ने उस संदिग्ध का एक स्केच तैयार करवाया और उस स्केच को उस इलाके और आसपास के इलाकों, थानों में भिजवा कर एरिया के सभी मुखबिरों को भी काम पर लगा दिया. उस इलाके के सीमावर्ती जिलों के थानों व सभी एरिया में उस संदिग्ध व्यक्ति के स्केच को जगहजगह चस्पा कर दिया गया, जिस का परिणाम एकदम सामने भी आ गया. मुखबिर के द्वारा पुलिस टीम को यह सूचना मिली कि इसी हुलिए का एक आदमी रोपड़ के इलाके में घूमता हुआ पाया गया है.

उस के बाद उस स्केच के सहारे पुलिस ने उस संदिग्ध व्यक्ति को रूपनगर जिले के गांव भरतगढ़ से अपनी हिरासत में ले लिया. उस का नाम रामस्वरूप उर्फ सोढ़ी था. पंजाब पुलिस को अब तक यह यकीन हो चुका था कि उन्होंने कीरतपुर साहिब के मनिंदर सिंह के मर्डर का केस अब तो सौल्व कर ही लिया है, लेकिन थाने में जब पुलिस ने सोढ़ी से पूछताछ की तो जब धीरेधीरे उस ने जो कुछ भी पुलिस को बताया तो उसे सुन कर तो पुलिस के भी होश उड़ गए थे.

क्योंकि पंजाब पुलिस ने जिसे कातिल समझ कर गिरफ्तार किया था, वह तो एक ऐसा सीरियल किलर निकल कर सामने आया, जिस ने पिछले डेढ़ साल में कुल 11 हत्याओं को अंजाम दिया था. ताज्जुब की बात तो यह थी कि वह कातिल जोकि एक सीरियल किलर भी था, वह अब तक भी पुलिस की रडार तक में नहीं आ पाया था. 4 महीने पहले होशियारपुर-फगवाड़ा बाईपास पर रेलवे फाटक पर वार्ड नंबर 20 के पार्षद जसवंत राय काला के भाई गुरनाम राम उर्फ गामा निवासी आदर्श कालोनी, पिपलांवाला, जिला होशियारपुर की हत्या की बात भी रामस्वरूप उर्फ सोढ़ी सीरियल किलर ने स्वीकार कर ली है.

गुरनाम राम उर्फ गामा होशियारपुर-फगवाड़ा बाईपास पर स्थित रेलवे क्रासिंग पर एक ढाबा चलाता था. वैसे तो हर रोज रात को वह अपने घर पर सोने के लिए आ जाया करता था, लेकिन कत्ल वाली रात वह अपने ढाबे पर ही सो गया था. अकसर जब उसे रात को ढाबा बंद करने में देर हो जाया करती थी तो वह उस रात अपने ढाबे पर ही सो जाता था. अगली सुबह जब उस के ढाबे पर कुछ लोग गए तो उन्होंने देखा कि गुरनाम राम उर्फ गामा का शव चारपाई के नीचे पड़ा था और उस के गले में कुछ निशान भी स्पष्ट नजर आ रहे थे.

जब गामा के मर्डर की सूचना उस के पार्षद भाई जसवंत राय को मिली तो वह भी तुरंत घटनास्थल पर पहुंच गए और उन्होंने इस की सूचना तुरंत पुलिस को दे दी. थोड़ी ही देर के बाद पुलिस भी मौके पर पहुंच गई थी. पुलिस व फेमिली वालों ने घटनास्थल पर जांच की तो पता चला कि मृतक गुरनाम राम का पर्स व स्कूटी भी मौके पर मौजूद नहीं थे. इन हालात को देखते हुए मृतक के फेमिली वालों ने शक जताया था कि लूट की नीयत से गामा की हत्या की गई थी. बाद में सीरियल किलर रामस्वरूप उर्फ सोढ़ी ने गामा के मर्डर की बात भी स्वीकार कर ली है.

इस संबंध में एसएसपी होशियारपुर ने कहा कि इस संबंध में उन्हें रोपड़ पुलिस ने जानकारी दी है और आरोपी रामस्वरूप उर्फ सोढ़ी को अब प्रोडक्शन वारंट पर पूछताछ के लिए होशियारपुर लाने की काररवाई शुरू कर दी, ताकि मामला और अधिक साफ हो सके. 33 वर्षीय रामस्वरूप उर्फ सोढ़ी गांव चौरा, थाना गढ़शंकर जिला होशियारपुर पंजाब का रहने वाला है. उस ने 10वीं तक की पढ़ाई की थी. रामस्वरूप बचपन से ही समलैंगिक था, उसे बचपन में लड़कियों की तरह के कपड़े पहनने, लड़कियों की तरह चलने और उन की तरह ही सजने और संवरने का मन करता था.

बचपन के दिनों में भी रामस्वरूप पड़ोस की लड़कियों के कपड़े पहन कर जब सजनेसंवरने लगता था, आंखों में काजल और होंठों पर लिपस्टिक लगा लेता था और उस के बाद जब वह शीशे में अपना चेहरा देखता तो उसे एक असीम खुशी मिलती थी. उसे ऐसा करता देख जब पेरेंट्स ने देखा तो उस की पिटाई भी की थी. एक बार जब वह नवीं क्लास में था तो उस साल वह अपनी शैतानियों व खेलकूद में मस्त रहने के कारण फेल भी हो गया था. रामस्वरूप घर का इकलौता बेटा था, इसलिए पेरेंट्स चाहते थे कि वह खूब अच्छी पढ़ाई करे और गांव के अन्य लोगों की तरह विदेश में जा कर अच्छी नौकरी करे. इसलिए जब वह नवीं कक्षा में फेल हो गया था तो उस के पेरेंट्स ने उस की जम कर पिटाई भी की थी और उसे पढ़ाई के महत्त्व को समझाया था.

इस का परिणाम अच्छा रहा. रामस्वरूप ने अगले साल नवीं कक्षा पास कर ली और उस के बाद दसवीं कक्षा भी पास कर ली. इस के बाद वह बड़े ट्रक चलाने की ट्रेनिंग लेने लगा, ताकि विदेश में जा कर नौकरी पा सके. उस के बाद पंजाब के अन्य युवाओं की तरह रामस्वरूप ने भी विदेश जा कर पैसा कमाने के बारे में कोशिश करनी शुरू कर दी. रामस्वरूप ने अपना पासपोर्ट बनवाया और नौकरी करने दुबई चला गया. दुबई में जा कर उस ने एक साल अच्छे से नौकरी भी की. इस बीच वह अपने पेरेंट्स को भी हर महीने पैसे भेजता रहता था, लेकिन दुबई में रहने के एक साल के बाद वह ऐसे कुछ लोगों के संपर्क में आया, जो समलैंगिक अर्थात ‘गे’ थे. वह वहां पर गया तो उसे ये अच्छा लगने लगा और वह दुबई के एक ‘गे’ क्लब में शामिल हो गया.

इस के बाद रामस्वरूप के पेरेंट्स ने उसे घर बुलवा लिया, क्योंकि वह पिछले 2 सालों से अपने घर भी नहीं आया था और घर पर कभीकभार ही पैसे भेजता था. उस के बाद रामस्वरूप वापस अपने गांव आ गया. घर पर वह एक महीने तक रहा, लेकिन फिर अपने गांव से उस का मन उचटने लगा. इस बार उस ने अपना नया वीजा कतर के लिए बनवा लिया और फिर कतर चला गया. कतर जाने के बाद उस ने वहां पर कुछ साल मन लगा कर काम किया. इस दौरान वह नियमित रूप से अपने पेरेंट्स को पैसे भेजता रहता था, जिस के कारण गांव में उस के फादर ने एक नया घर भी बनवा लिया था. खेती तो उन की गांव में थी ही. अब उन्होंने अपनी जमीन भी ठेके पर दे दी थी.

रामस्वरूप को विदेश भेजने के लिए उस के फादर ने गांव के कुछ लोगों से जो कर्ज लिया था, उसे भी चुकता कर दिया गया. इस के बाद जब उस के पेरेंट्स को रामस्वरूप पर भरोसा हो गया कि अब वह काफी समझदार हो गया है तो उन्होंने फिर से वापस गांव बुला लिया. गांव आने के बाद उस के फादर ने पास के गांव की एक लड़की से रामस्वरूप का विवाह कर दिया. रामस्वरूप अब गांव में अपनी खेती का काम खुद देखने लगा था. उस के पिता भी उस के साथ काम में हाथ बंटाते रहते थे. उस के फादर ने अब गांव में एक दुकान भी खोल ली थी और अच्छे नस्ल की गाय और भैंसें भी खरीद ली थीं. जमीन तो उन के पास पहले से ही थी. चारे की कोई कमी नहीं थी, इसलिए उन का दूध का काम भी अच्छा चलने लगा. इस बीच रामस्वरूप 3 बच्चों का बाप भी बन चुका था.

घर में सब कुछ ठीकठाक चल रहा था. रामस्वरूप को बेटी की उम्र भी 11 साल की हो गई थी. लेकिन तभी रामस्वरूप को शराब और ड्रग्स की बुरी लत लग गई. उस का व्यवहार भी अब काफी बदलने सा लगा था. जब वह नशे में हो जाता तो उस का मन विचित्र कुंठा से भर जाता था. नशे के कारण उस ने एकएक कर के घर के सामान, गाय, भैंसों को भी बेचना शुरू कर दिया था. एक दिन वह नशे में घर पर आया, तब तक रात के 12 बजे का समय हो गया था. रामस्वरूप के पेरेंट्स, बच्चे, पत्नी सभी सो चुके थे. उस ने दरवाजा खटखटाया तो पत्नी की नींद एकदम से खुल गई.

उस ने रामस्वरूप से खाने के लिए पूछा तो वह होटल से खाना खा कर आया था और शराब और ड्रग्स के नशे में धुत था. वह खींच कर अपनी पत्नी को दूसरे कमरे में ले गया. कमरे में आ कर उस ने तुरंत दरवाजा अंदर से बंद कर दिया और बाज की तरह झपट्टा मार कर अपनी पत्नी पुष्पा (परिवर्तित नाम) को बुरी तरह से दबोच लिया. उस ने पहले पुष्पा के संवेदनशील अंगों पर दांत गड़ा दिए, फिर उसे निर्वस्त्र करने के बाद अपनी जेब से जैल निकाला और पुष्पा के साथ अप्राकृतिक कृत्य करने लगा.

काफी देर तक तो पुष्पा संकोचवश अपने दांतों को भींच कर इस भयंकर दर्द से छटपटाती रही, लेकिन जब पीड़ा बढ़ती गई, उसे अब ऐसा लग रहा था मानो उस का पूरा शरीर फट रहा है तो वह जोरजोर से चीखनेचिल्लाने लगी, लेकिन रामस्वरूप अपने मन की करता रहा. जब वह पूरी तरह से संतुष्ट हो गया, तभी उस ने पुष्पा को मुक्त किया. अपनी संतुष्टि के बाद रामस्वरूप कमरे से बाहर निकल कर अपने गांव के दोस्त के घर पर जा कर सो गया. पुष्पा की सास अब तक पुष्पा की चीखपुकार को सुन कर कमरे में आ चुकी थी, लेकिन जब बहू ने सास को बताया कि उन का बेटा अपनी बहू के साथ पशुवत व्यवहार करने लगा है तो उसे सुन कर सास की भी सांसें थम सी गई थीं.

सास ने यह बात अपने पति को बताई तो उन्होंने भी अपना सिर पीट लिया. इस के बाद रामस्वरूप के फादर ने सोचा कि एक बार जमीनजायदाद से बेदखल करने का डर दिखाते हैं, उस के बाद शायद यह ठीक हो जाए. यही सोच कर उस के फादर ने कानूनी रूप से बेदखली की औपचारिकताएं पूरी करते हुए उसे अपनी जमीनजायदाद से बेदखल कर दिया. रामस्वरूप के फादर का यह मानना था कि उन का तो एक ही बेटा है. शायद बेदखल के डर से अपनी बुरी आदतों को छोड़ कर वापस अपने घर लौट आएगा, लेकिन उन की यह सोच किसी भी काम न आ सकी. रामस्वरूप सुधरने के बजाए और भी बिगड़ता चला जा रहा था. वह तो अब अपने पेरेंट्स और पत्नी को जान से मारने की धमकी भी देने लगा था.

आसपड़ोस के लोगों से लड़ाईझगड़ा करने, लोगों से उधार ले क र उस को चुकता न करने की रोजरोज शिकायतें उन के घर पर आने लगी थीं. इस के अलावा अपने नशे के लिए वह अब तक अपने सभी मवेशियों को बेच चुका था. अब रामस्वरूप के फादर को लगा कि यदि इस का ऐसा ही हाल रहा तो यह अपनी सारी जमीन और जायदाद भी बेच देगा और अब रामस्वरूप के पेरेंट्स वृद्धावस्था की ओर भी बढऩे लगे थे. उन्होंने सोचा कि हम दोनों के मरने के बाद तो रामस्वरूप अपने बीवीबच्चों को भी सड़क पर भीख मांगने के लिए मजबूर कर सकता है.

इसलिए एक रोज अपने दिल पर पत्थर रखते हुए पेरेंट्स ने पहले तो रामस्वरूप की जम कर पिटाई की, फिर उस के फादर ने रामस्वरूप को हाथ जोड़ते हुए आखिरकार कह ही दिया, ”बेटा रामस्वरूप, अब हम तुम्हारी हरकतों से बहुत दुखी और परेशान हो चुके हैं. हम ने तुम्हें अपनी जमीनजायदाद से भी बेदखल कर दिया है. हमारी तुम से यही विनती है कि तुम अब इस घर से सदासदा के लिए नाता तोड़ दो. हम और तुम्हारी पत्नी व बच्चे तक भी अब तुम्हारी शक्ल भी देखना नहीं चाहते हैं.’’ कहते हुए उन्होंने दरवाजा बंद कर दिया था. यह बात जनवरी 2022 की है.

घर से निकाले जाने के बाद रामस्वरूप ने शरम के मारे अपने गांव को भी सदा के लिए अलविदा कह दिया था. कुछ दिन तो वह खानाबदोशों की तरह इस गांव से उस गांव भटकता रहा. उसे शराब की भी लत लग चुकी थी, उसे जिंदा रहने के लिए अब पैसों की भी जरूरत हो रही थी. भीख मांगमांग कर वह आखिर कब तक गुजारा कर सकता था. शराब के बिना एक पल भी जीना अब उस के लिए दूभर सा होता जा रहा था. फिर यहीं से एक आम आदमी से उस के सीरियल किलर बनने की शुरुआत हुई. अब वह ट्रक चालकों से लिफ्ट ले कर इधरउधर घूमता और भटकता रहता था. उस ने वहां पर देखा कि ‘गे’ या समलैंगिक लोग लंबी दूरी की गाडिय़ों में, बसों में और ट्रकों में सैक्स वर्कर के रूप में काम कर के काफी अच्छा पैसा कमा रहे थे.

रामस्वरूप उर्फ सोढ़ी एक बार जब सब से पहले दुबई गया था तो वह वहां पर एक ‘गे’ क्लब में शामिल भी हुआ था. इस के लिए उसे अनुभव भी था. उस ने सोचा कि क्यों न वह भी एक सैक्स वर्कर के तौर पर अपने अनुभव का इस्तेमाल करे. उसे अब अपनी दिनचर्या चलाने, शराब पीने और खुद को जिंदा रखने के लिए पैसों की बेहद जरूरत भी थी, इसलिए उस ने ‘गे’ के रूप में सैक्स वर्कर बनने का अंतिम फैसला कर लिया. इस के लिए वह दिन में तो एक सामान्य पुरुष की तरह ही रहता था, लेकिन रात होते ही वह मर्दों का लिबास बदल कर औरतों के कपड़े और औरतों की तरह ही साजशृंगार कर के जिला रूपनगर, जिला रोपड़, फतेहपुर साहिब और होशियारपुर की सड़कों पर रात को अपने ग्राहकों की तलाश करने निकल पड़ता था और फिर कहीं पर सड़क के किनारे खड़ा हो जाता था.

जब वह देखता कि कोई मर्द अपनी गाड़ी में अकेला है तो वह उस से लिफ्ट मांग लेता और गाड़ी में बैठने के कुछ देर बाद वह उस मर्द से बात करता कि क्या वह ‘गे’ सैक्स करना चाहता है. मर्द द्वारा इकरार करने पर वह फिर उस से पैसों की बात करता और फिर आखिरकार एक रकम पर उन का समझौता हो जाता था. एक तरह से रामस्वरूप उर्फ सोढ़ी अब जिस्मफरोशी का धंधा करने लगा था. जून, 2023 को भी रोपड़ के पास सड़क पर रामस्वरूप महिला का वेश बना कर लिफ्ट का इंतजार करने लगा और फिर एक ने उसे अपनी गाड़ी में लिफ्ट दे दी. कुछ दूर आगे चलने के बाद जब सुनसान सड़क आई तो दोनों के बीच डेढ़ सौ रुपए में धंधे की बात भी हुई. डेढ़ सौ रुपए में जिस्म का सौदा हुआ. गाड़ी वाला मान भी गया.

उस के बाद दोनों के बीच जिस्मानी संबंध भी बने. काम पूरा होने के बाद रामस्वरूप ने गाड़ी वाले से अपने पैसे मांगे तो गाड़ी वाले ने उसे गाड़ी से उतरने को कहा और उसे 100 रुपए का नोट पकड़ा कर गाड़ी से नीचे धक्का दे कर गिरा दिया. रामस्वरूप को उस की इस हरकत पर काफी गुस्सा आ गया. वह हमेशा अपने कंधे पर अंगोछा डाले रखता था. वह तुरंत गाड़ी में चढ़ा और फुरती से ड्राइवर का गला घोंट कर उसे मौत की नींद सुला दिया. ड्राइवर ने अभी पूरे कपड़े पहने भी नहीं थे. मर्डर करने के बाद रामस्वरूप ने उस के सारे कपड़े उतार दिए और उस की पीठ पर लिख दिया ‘धोखेबाज’. फिर उस के पैर छूने के बाद रामस्वरूप वहां से चला गया.

यह रामस्वरूप उर्फ सोढ़ी का पहला कत्ल था. पुलिस घटनास्थल पर आई, तफ्तीश भी की. इस के बाद पूरे डेढ़ साल भी बीत गया, लेकिन कातिल का पता नहीं चल सका और पुलिस ने वह फाइल ही क्लोज कर दी. बस, फिर यहीं से कत्ल का सिलसिला शुरू हो गया. रामस्वरूप हर रात को महिला के वेश में सड़क के किनारे खड़ा हो जाता और फिर गाड़ी रुकवा कर ग्राहक से सौदा करता. कई बार तो ऐसा भी हुआ कि ग्राहक शराफत से अपने किए गए वादे के अनुसार पैसे दे कर चला जाता तो वह कत्ल से बच भी जाता. अगर ग्राहक अपने वादे के अनुसार पैसे नहीं देता तो फिर रामस्वरूप अपने गले में बांधे अंगोछे से ग्राहक को सदासदा के लिए मौत की नींद सुला देता था.

बहुत सारे मामलों में ऐसा भी हुआ कि रामस्वरूप का ग्राहक से झगड़ा नहीं हुआ, सब कुछ प्रेम से निपट गया और इस तरह उन सारे ग्राहकों की जान भी बच गई थी. लेकिन इस के विपरीत जिनजिन लोगों के साथ रामस्वरूप का झगड़ा हुआ, उन में से किसी की भी जान बच नहीं सकी थी, क्योंकि रामस्वरूप ने या तो अंगोछे से या घटनास्थल पर मौजूद ईंटपत्थरों से पीटपीट कर उन सब की जान ले ली थी. हर हत्या के बाद वह प्रायश्चित कर मृतक के पैर छूता था.

18 अगस्त, 2024 को रामस्वरूप उर्फ सोढ़ी कीरतपुर साहिब पहुंचा. वहां पर टोल प्लाजा के पास एक चाय की दुकान थी. उस दुकान का मालिक 37 वर्षीय मनिंदर सिंह था. उस समय दुकान में सभी ग्राहक जा चुके थे. मनिंदर सिंह भी दुकान बंद कर रहा था, तभी रामस्वरूप वहां पर महिला के वेश में जा पहुंचा. उस ने घूंघट भी डाला हुआ था. इशारों ही इशारों में दोनों के बीच गुप्त बातचीत हुई, उस के बाद पैसों की बातचीत हुई. आपस में संबंध भी बने, लेकिन इस के बाद पैसों को ले कर दोनों के बीच झगड़ा हो गया. रामस्वरूप हमेशा नशे में रहता था और जो क भी ग्राहक पैसे देते समय उस को परेशान करता या जलील करता था तो रामस्वरूप गुस्से में आ कर अंगोछे से उसे मार डालता था.

यहां पर भी रामस्वरूप ने यही किया और उस ने अंगोछे से गला घोट कर मनिंदर सिंह की जान ले ली और वहां से निकलने लगा. यहीं पर इस क्रूर सीरियल किलर से एक बहुत बड़ी गलती भी हो गई. उस की नजर जमीन पर पड़े मृतक मनिंदर सिंह के मोबाइल पर पड़ी, जो काफी कीमती लग रहा था. रामस्वरूप उस मोबाइल फोन को अपने साथ ले गया, जिसे उस ने एक आदमी को बेच दिया. जिस के कारण आखिरकार वह पुलिस की गिरफ्त में आ गया.

इस के बाद पुलिस इन सारे इलाकों में उन लावारिस लाशों की गहन जांचपड़ताल में जुट गई, खासकर जिन की हत्या गला घोंट कर की गई थी या ईंटपत्थरों से हुई थी. क्योंकि सीरियल किलर रामस्वरूप उर्फ सोढ़ी के बयान के अनुसार वह कभी भी अपने साथ हथियार ले कर नहीं चला. बस जब कोई ग्राहक पैसों के लेनदेन में झगड़ा करता या उस के ऊपर छींटाकशी करता तो उसे एकदम से गुस्सा आ जाता था. वह उन का मर्डर कर देता था. पुलिस रामस्वरूप द्वारा की गई 9 हत्याओं को वेरिफाई कर चुकी थी.

ऐसा ही एक केस कई साल पहले दिल्ली में भी सामने आया था, जहां पर एक सीरियल किलर ने कई दरजन लोगों की हत्याएं की थीं. उस के बाद उस ने और कितने लोगों को मारा, यह उसे भी याद नहीं था. दरअसल, ऐसे लोग मानसिक रोगी हो जाते हैं, उन्हें पता ही नहीं चलता कि वे नशे में क्या कर बैठे हैं. पंजाब की यदि बात की जाए तो पंजाब में दरबारा सिंह के बाद रामस्वरूप उर्फ सोढ़ी ऐसा दूसरा सीरियल किलर है, जिस ने 11 से अधिक हत्याएं की थीं. दरबारा सिंह बच्चों का मर्डर करता था. सैक्स के अनुसार बना रखी हैं कई कैटेगरीज

आज की इस अद्भुत दुनिया में स्त्री, पुरुष और किन्नर के बीच में भी बहुत सारे जेंडर हैं. अगर किसी पुरुष का आकर्षण किसी महिला महिला की ओर है और वह केवल किसी महिला के साथ ही यौन संबंध बनाता है तो ऐसे लोगों को स्ट्रेट कहते हैं. यही बात महिलाओं के बारे में भी है. जब कोई महिला किसी पुरुष के साथ शारीरिक संबंध बनाती तो उसे भी स्ट्रेट कहा जाता है. अब बात यदि हम अन्य जेंडरों की करें तो वे हैं एल, जी, बी, टी, क्यू, ए और आई होते हैं. एल यानी लेस्बियन: लेस्बियन का मतलब होता है कि जब कोई युवती अथवा महिला दूसरी युवती या महिला की ओर आकर्षित रहती है तो इन्हें समलैंगिक महिलाएं कहा जाता है. लेस्बियन सैक्स के दौरान दोनों पार्टनर केवल महिलाएं ही रहती हैं.

जी यानी गे: ऐसे युवक या पुरुष जो केवल किसी युवक या पुरुष के साथ यौन संबंध बनाते हैं और उन की तरफ आकर्षित होते हैं तो उन को ‘गेÓ कहा जाता है. इन्हें समलैंगिक पुरुष कहा जाता है. ‘गेÓ सैक्स के दौरान दोनों पार्टनर केवल पुरुष ही रहते हैं. समलैंगिक महिला या पुरुष का पता समाज को तब तक नहीं चल पाता, जब तक कि वह इस का रहस्य खुद न उजागर करें. बहुत से समलैंगिंग पुरुष अथवा महिला अपनी इच्छा न होने पर भी विवाह करते हैं और अपना घरपरिवार बसाते हैं. जीवन भर समाज उन की असली पहचान पता नहीं लगा पाता है, वे खुद भी न तो समझ पाते हैं और न ही यह स्वीकार भी कर पाते हैं कि ये लेस्बियन या ‘गेÓ हैं.

बी यानी बाइसैक्सुअल: ऐसे पुरुष या महिला, जो दोनों के प्रति आकर्षित होते हैं यानी कि महिला और पुरुष दोनों के साथ सैक्स संबंध बनाते हैं, उन्हें बाइसैक्सुअल कहा जाता है. लड़के और लड़कियां दोनों बाइसैक्सुअल होते हैं. टी यानी ट्रांसजेंडर: जब जन्म से शरीर पुरुष का हो, लेकिन वह खुद को लड़की अथवा महिला जैसा महसूस करता हो अथवा शरीर तो महिला का हो लेकिन उसे खुद पुरुष जैसा महसूस होता हो तो उन्हें ट्रांसजेंडर कहते हैं. कभीकभी तो पुरुष स्त्री और स्त्री पुरुष बन जाते हैं. क्यू यानी क्वीपर: क्वीपर का शाब्दिक अर्थ होता है अजीब, यानी कि कुछ लोग यह तय नहीं कर पाते कि वे किस के साथ शारीरिक संबंध बनाना चाहते हैं. महिला से या पुरुष से, इन्हें ‘क्वीपरÓ कहा जाता है.

आई यानी इंटरसैक्स: जब शारीरिक रूप कोई इंसान न तो महिला होता है और न ही पुरुष, इन के गुप्तांगों की पहचान स्पष्ट नहीं होती तो उन्हें इंटरसैक्स कहते हैं. इन को आम भाषा में किन्नर अथवा हिजड़ा कहा जाता है. ए यानी एसैक्शुअल: ऐसे लोग जिन में किसी के भी प्रति यौन आकर्षण नहीं होता, उन्हें किसी के साथ भी सैक्स संबंध बनाने की चाहत नहीं होती तो उन्हें एसैक्शुअल कहा जाता है.

 

 

 

रेशमा की हंसी ने बुलाई मौत

उत्तर प्रदेश के महानगर मुरादाबाद के डीआईजी निवास के नजदीक गौतम नगर की गली नंबर-9 में नन्हे अपनी पत्नी रेशमा और ढाई साल के बेटे व मां के साथ 2 कमरों के मकान में रहता था. 8 मई, 2023 की रात 11 बजे की बात है. नन्हे के पड़ोस में रहने वाली नाजमा की रसोई के शेड पर रात के करीब 11 बजे कुछ गिरने की आवाज आई, जिस से रसोई के ऊपर की सीमेंट की चादरें तक टूट गईं. नाजमा समझी कि घर में चोर आ गए, उस ने अपने परिवार के लोगों को उठाया और जोर से ‘चोर…चोर’ कहते हुए शोर मचा दिया.

शोर सुन कर आसपास के घरों से लोग निकल आए. उन्होंने तभी देखा कि नन्हे अपनी पत्नी रेशमा के बाल पकड़ कर खींचता हुआ अपने घर में ले गया था. उधर नाजमा व अन्य लोगों ने देखा कि रसोई का शेड टूटा हुआ नीचे पड़ा है, वहां पर खून भी पड़ा था. इस के अलावा जिधर से नन्हे अपनी पत्नी रेशमा को घसीट कर ले गया था, वहां पर खून की बूंदें दिखाई दे रही थीं. इकट्ठा हुए लोग यह जानने के लिए नन्हे के घर पहुंच गए थे कि आखिर हुआ क्या है.

खून देख कर लोगों को हुआ शक

नन्हे के घर का गेट अंदर से बंद था. लोगों ने नन्हे को आवाज लगाई और गेट खोलने को कहा. नन्हे बोला कुछ नहीं हुआ मेरी पत्नी रेशमा ने गुस्से में अपनी कलाई की नस काट ली है, वह अस्पताल गई है. पड़ोसी नाजमा ने आवाज दी, ‘‘नन्हे गेट तो खोल, तूने मेरी रसोई का शेड तोड़ दिया है, उसे अब कौन बनवाएगा.’’

इस के बाद नन्हे ने अपने घर का गेट खोल दिया. गेट खुलते ही वहां मौजूद लोग अंदर घर में दाखिल हो गए. उन्होंने नन्हे की पत्नी रेशमा को पूरे घर में तलाशा, वह नहीं मिली. लोगों ने इतना जरूर देखा कि मकान के सेप्टिक टैंक (गटर) के पास खून की बूंदें व खून साफ करने के निशान थे. लोगों को मामला गंभीर दिखा तो उसी समय किसी ने थाना सिविल लाइंस को फोन कर दिया.

उस समय एसएचओ गजेंद्र सिंह रात्रि गश्त की तैयारी कर रहे थे ड्राइवर गाड़ी में बैठा उन के आने का इंतजार कर रहा था. एसएचओ कमरे से बाहर आए. तभी ड्ïयूटी औफिसर ने उन्हें डीआईजी साहब के बंगले के पास गौतम नगर गली नंबर 9 में लोगों की भीड़ जमा होने की सूचना दी.

यह सुन कर एसएचओ सीधे गौतम नगर चले गए. पुलिस को देखते ही लोग अपनेअपने घरों में चले गए. कुछ लोग छतों पर खड़े हुए थे. एसएचओ गजेंद्र सिंह ने पूछा कि नन्हे का घर कौन सा है? लोगों ने इशारे से बताया, ‘‘साहब वो है.’’

नन्हे के मकान का गेट खुला था. पुलिस जब उस के घर में पहुंची तो घर में जगहजगह खून बिखरा पड़ा था. एक छोटा दोढाई साल का बच्चा सोता मिला. पूरा घर खाली था. पुलिस को देख नन्हे के घर में कुछ बुजुर्ग लोग भी आ गए थे. उन्होंने बताया, ‘‘साहब, नन्हे व उस की पत्नी रेशमा में झगड़ा हुआ था, सेप्टिक टैंक के पास ज्यादा खून पड़ा है.’’

एसएचओ गजेंद्र सिंह ने एक सिपाही से कह कर गटर का ढक्कन उठवाया तो उस में कंबल व अंदर कपड़े पड़े थे. उन्हें हटा कर देखा तो वहां मौजूद पुलिस व लोग सन्न रह गए. गटर के अंदर रेशमा की खून से लथपथ लाश पड़ी हुई थी. पुलिस ने शव को गटर से बाहर निकाला. रेशमा का गला काटा गया था.

नन्हे आया पुलिस हिरासत में

इस हत्याकांड की सूचना एसएचओ गजेंद्र सिंह ने अपने उच्च अधिकारियों को दी. सूचना मिलते ही मुरादाबाद के एसएसपी हेमराज मीणा, एसपी (सिटी) अखिलेश भदौरिया, सीओ अर्पित कपूर भी घटनास्थल पर पहुंच गए. उन्होंने भी घटनास्थल की जांच की.

पुलिस के आने से पहले हत्यारा नन्हे घर से भाग गया था. एसएसपी हेमराज मीणा ने सीओ अर्पित कपूर के नेतृत्व में एक पुलिस टीम का गठन किया. पुलिस टीम आरोपी नन्हे की तलाश में जुट गई. पुलिस को 9 मई, 2023 को सफलता मिल गई.

मुखबिर की सूचना पर टीम ने भीमराव अंबेडकर पुलिस अकादमी के केंद्रीय पुलिस अस्पताल के सामने से नन्हे को उस समय धर दबोचा, जब वह बाहर भागने की फिराक में था. थाना सिविल लाइंस में उच्च अधिकारियों के सामने नन्हे से पूछताछ की गई तो उस ने पत्नी की हत्या करने का जुर्म स्वीकार कर लिया. उस ने पत्नी रेशमा के मर्डर की जो कहानी बताई, इस प्रकार निकली—

रेशमा नन्हे की थी दूसरी बीवी

मुरादाबाद शहर के गौतम नगर निवासी नन्हे की पहली शादी काशीपुर निवासी नाजनीन से हुई थी. नन्हे ईरिक्शा चलाता था. पहली पत्नी नाजनीन से 2 बेटियां पैदा हुईं. किसी वजह से दोनों के बीच अकसर झगड़ा होने लगा तो एक दिन गुस्से में नाजनीन अपनी छोटी बेटी को ले कर अपने मायके काशीपुर चली गई. उस ने नन्हे के साथ रहने को मना कर दिया. बड़ी बेटी नन्हे की बड़ी बहिन के पास है.

पत्नी के वापस न आने की शिकायत नन्हे ने थाना सिविल लाइंस में भी की. पुलिस ने नाजनीन को काशीपुर से थाने बुलाया. थाने में ही नाजनीन ने पति के साथ न रहने की बात दोहरा दी. तब नन्हे ने उसे तलाक दे दिया. यह बात करीब ढाई साल पहले की है.

पत्नी से तलाक के बाद नन्हे अकेला हो गया. फिर करीब 2 साल पहले जिला बिजनौर के कस्बा नेहटौर के कासमपुर लेखराज बाग निवासी रेशमा से निकाह कर लिया था. रेशमा भी पहले से शादीशुदा थी. उस के भी 2 बच्चे थे.

रेशमा की पहले लव मैरिज हुई थी. बदायूं निवासी कन्हैया नाम के युवक के पिता नेहटौर, बिजनौर में लेखराज बाग में आम के बाग की रखवाली करते थे. आम के बाग में कन्हैया भी अपने पापा के साथ ही रहता था.

कन्हैया गठे शरीर का गबरू इंसान था. वह गांव में स्थित दुकान से अकसर घरेलू खानेपीने का सामान लेने जाता था. वहीं पर खूबसूरत रेशमा से उस की आखें चार हुईं. दोनों ही एकदूसरे को चाहने लगे. बाग का एकांत क्षेत्र दोनों के मिलने के लिए काफी मुफीद था. नैन मटक्का होतेहोते दोनों में शारीरिक संबंध बन गए थे.

अवैध संबंध हो जाने के बाद एक दिन कन्हैया व रेशमा दोनों गायब हो गए थे. उस के बाद दोनों ने लव मैरिज कर ली थी. रेशमा उस के साथ हंसीखुशी रह रही थी. वह 2 बच्चों की मां बन चुकी थी. बाद में रेशमा अकसर अपने मायके में रहने लगी थी. यह बात कन्हैया को पसंद नहीं थी. जिस कारण कन्हैया व रेशमा में झगड़ा रहने लगा था. रेशमा का बड़ा बेटा अपने पिता कन्हैया से बहुत लगाव रखता था.

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रेशमा ने भी छोड़ रखा था पहला पति

रेशमा के अब्बू मेहंदी हसन का पहले ही इंतकाल हो चुका था. रेशमा का छोटा बेटा उस समय गोद में था. उस के बाद से रेशमा अपनी ससुराल नहीं गई थी. कन्हैया व रेशमा के बीच संबंध बिलकुल खत्म हो गए थे.

उधर रेशमा की अम्मी नसीमा ने अपने एक परिचित की मदद से नन्हे की मां छोटी से संपर्क साधा कि तुम्हारा बेटा भी अपनी पहली पत्नी नाजनीन को तलाक दे चुका है, मेरी बेटी रेशमा भी अपने पहले पति से अलग हो गई. इसलिए क्यों न नन्हे और रेशमा का निकाह कर दिया जाए.

करीब 2 साल पहले नन्हे ने नेहटौर जिला बिजनौर की रेशमा से निकाह कर लिया. नन्हे रेशमा को पा कर बहुत खुश था, क्योंकि रेशमा बला की खूबसूरत थी. नन्हे रेशमा से बहुत प्यार करता था. नन्हे ईरिक्शा चला कर ज्यादा से ज्यादा पैसे कमाने में लगा रहता था. थकाहारा नन्हे घर आ कर खाना खा कर सो जाता था.

रेशमा कहीं अपने घर या रिश्तेदारों में हंसहंस कर फोन पर बात करती तो नन्हे को शक पैदा होता था कि उस का किसी गैरमर्द से जरूर कोई चक्कर चल रहा है. इसी बात को ले कर अकसर नन्हे और रेशमा में झगड़ा होता रहता था. शक आदमी को पागल बना देता है, ऐसा ही नन्हे के साथ हुआ था. नन्हे द्वारा पत्नी के चरित्र पर शक करने के बाद रेशमा ने भी नन्हे से दूरी बनानी शुरू कर दी. नन्हे रेशमा की बेवफाई से परेशान था. सुंदर होना भी उस के लिए एक अभिशाप बन गया था.

आदमी की फितरत ही कुछ ऐसी होती है कि सुंदर पत्नी यदि किसी से हंस कर बात कर ले या फोन पर ज्यादा परिवार वालों से बात कर ले तो वह शक करने लगता है. नन्हे के मन में शक ज्यादा गहराने लगा था. घर में आए दिन झगड़े होने लगे थे.

पति को होने लगा रेशमा पर शक

8 मई, 2023 की रात करीब 11 बजे से पहले भी रेशमा के चरित्र को ले कर दोनों में झगड़ा हुआ था. नन्हे का शक इतना बढ़ गया था कि वह कुछ भी करने को तैयार था. उस दिन नन्हे की मां अपनी छोटी लडक़ी शहनाज की ससुराल काशीपुर, उत्तराखंड गई हुई थी. घर में रेशमा के पहले पति कन्हैया से पैदा ढाई साल का बेटा ही मौजूद था.

उस दिन नन्हे खाना खा कर सोने चला गया था. उस की पत्नी रेशमा भी अपने बच्चे के साथ दूसरे कमरे में सोने चली गई थी. उधर नन्हे की नींद जैसे कोसों दूर हो चुकी थी. उसे नींद नहीं आ रही थी. मन में तरहतरह के विचार आ रहे थे.

वह उठा व घर में रखा छुरा उठा कर दूसरे कमरे में सो रही रेशमा के पास पहुंच गया. उस ने उस की गरदन जैसे ही छुरा से रेतनी शुरू की रेशमा की नींद खुल गई. पूरा जोर लगा कर रेशमा ने नन्हे को पलंग से नीचे गिरा दिया और वह कमरे से बाहर आ गई थी.

घायल अवस्था में छत से कूद गई थी रेशमा

जान बचाने का रास्ता नहीं था. घायल रेशमा भाग कर मकान की सीढिय़ों पर चढ़ गई. वहां से उस ने बराबर में रहने वाली नाजमा के घर में छलांग लगा दी. वह घर में न गिर कर गली में गिर गई. ठीक उसी समय नन्हे भी पीछा करते हुए वहां पहुंचा. उस ने भी पड़ोसी के घर में छलांग लगा दी. वह नाजमा की रसोई, जिस की छत सीमेंट के चादरों की थी, पर जा कर गिरा. उस के कूदते ही रसोई का शेड धड़ाम से टूट कर नीचे गिरा. बहुत जोर की आवाज हुई.

शोर सुन कर नाजमा ने समझा कि घर में चोर आ गए हैं, उस ने शोर मचा दिया. चोरचोर सुनते ही पड़ोसी लोग अपनेअपने घरों से निकल आए. नाजमा और पड़ोसियों ने देखा नन्हे रेशमा के बाल पकड़ कर खींचते हुए अपने घर में ले गया. वहां घायल रेशमा नन्हे के पैरों पर पड़ कर अपनी जान की भीख मांगने लगी. नन्हे पर भूत सवार था. उस ने एक झटके में रेशमा का गला रेत कर मौत के घाट उतार दिया.

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आननफानन में नन्हे ने अपने सेप्टिक टैंक (गटर) का ढक्कन उठा कर रेशमा के शव को उस में डाल कर ऊपर से कंबल व अन्य कपड़े डाल दिए. जो खून घर में पड़ा था जो उसे दिखाई दिया, उसे उस ने साफ कर दिया था.

मोहल्ले वाले जब पुलिस बुलाने की कोशिश कर रहे थे तो पुलिस के आने से पहले ही नन्हे फरार हो गया था. पुलिस ने रेशमा की हत्या की सूचना उस के मायके वालों को दी. रेशमा की अम्मी नसीमा सूचना मिलते ही अपने बड़े बेटे नाजिम व छोटी बेटी व बहनोई को ले कर मुरादाबाद आ गई. रेशमा की लाश देख कर घर के लोगों का रोरो कर बुरा हाल था.

रेशमा की अम्मी नसीमा ने थाना सिविल लाइंस में नन्हे के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज करवाई. पोस्टमार्टम के बाद रेशमा का शव अपने घर नेहटौर ले कर चली गई थी. साथ में रेशमा का ढाई साल का बेटा भी अपने साथ ले गई थी. वहां जा कर उन्होंने रेशमा को दफन कर दिया था. नन्हे से पूछताछ के बाद पुलिस ने उसे 9 मई, 2023 को न्यायालय में पेश कर जेल भेज दिया.

दो बहनों का एक प्रेमी

दो बहनों का एक प्रेमी – भाग 3

जिस जगह शमीम बानो का कत्ल हुआ था, वहां घनी आबादी थी. शमीम का गला तो रेता ही गया था. उस के हाथ की अंगुली भी कटी हुई थी. इस का मतलब था कि मृतका का हत्यारों से संघर्ष हुआ था और उसी की वजह से उस की अंगुली कटी थी. आश्चर्य की बात यह थी कि इस के बावजूद किसी ने शोरशराबे की आवाज नहीं सुनी थी.

शमीम की हत्या किस ने और क्यों की, यह बात किसी की समझ में नहीं आ रही थी. पुलिस ने इस मुद्दे पर गहराई से सोचा तो उस की निगाह रूबीना पर गई, क्योंकि शमीम और रूबीना की अच्छी दोस्ती थी. उसी ने उसे दिल्ली के किसी लड़के से मिलवाया था.

पुलिस ने इस पहलू पर भी गौर किया कि कहीं रूबीना कोई सैक्स रैकेट तो नहीं चलाती है. क्योंकि उस स्थिति में उस के रैकेट में शमीम के भी शामिल होने की संभावना हो सकती थी. साथ ही यह भी कि लेनदेन के किसी विवाद की वजह से शमीम की हत्या हो सकती थी.

शमीम की हत्या के मामले में कई दिनों तक अटकलों का बाजार गरम रहा. जितने मुंह उतनी बातें. पुलिस ने रूबीना से भी पूछताछ की. लेकिन रूबीना और शमीम की भाभी जरीना ने जो बयान दिए, उस ने आफरीन को ही कटघरे में ला कर खड़ा कर दिया.

रूबीना ने बताया कि आफरीन अपने चचेरे भाई सिद्दीक से प्यार करती थी. एक बार वह घर से 50 हजार रुपए ले कर सिद्दीक के साथ भाग भी चुकी है. वह सिद्दीक से शादी करना चाहती थी, लेकिन शमीम मना करती थी. उस का कहना था कि सिद्दीक एक तो कुछ कमाता नहीं है, ऊपर से लोफरलंपट स्वभाव का है.

रूबीना की भाभी जरीना ने बताया कि वह 4 बजे के आसपास शमीम के घर अपना सब्जी वाला डोंगा लेने गई थी. तब आफरीन घर में ही थी और उस ने दरवाजा नहीं खोला था. इस पर जरीना ने खिसिया कर कहा था कि कोई अंदर है क्या, जो तू दरवाजा नहीं खोल रही है. जवाब में आफरीन ने कहा था कि अप्पी घर में नहीं है, वह गेट नहीं खोलेगी.

जरीना ने अपना डोंगा मांगा तो उस ने गेट के ऊपर से उस का डोंगा थमा दिया. डोंगा ले कर वह अपने घर लौट आई थी. शाम 6 बजे के करीब जब जरीना खीर ले कर गई तो आफरीन ने दरवाजा खोल दिया और खीर लेने के बाद बोली, ‘‘भाभी, मेरी अप्पी को देख लो. किसी ने उस का गला काट दिया है.’’

जरीना और रूबीना के इस बयान के बाद शक की सुई आफरीन की तरफ घूम गई. सच्चाई की तह तक जाने के लिए पुलिस ने मुखबिरों का जाल बिछाया तो पता चला कि आफरीन साढ़े 4 बजे अपने घर से निकल कर सामने वाली पान की गुमटी पर आई थी और उस ने वहां से पान मसाला और सिगरेट लिया था. दुकानदार ने उस से पूछा भी था कि क्या कोई आया है. इस पर उस ने बताया था कि कुछ मेहमान आए हैं, उन्हीं के लिए ले जा रही हूं.

ये बातें पता चलने के बाद थानाप्रभारी आलोक कुमार ने आफरीन का मोबाइल अपने कब्जे में ले लिया. यहां स्पष्ट कर दें कि शमीम के पिता अब्दुल रशीद इस मामले में सिराज को दोषी ठहरा रहे थे और वह उस तसवीर को सिराज की बता रहे थे, जो आफरीन ने पुलिस को दी थी.

पुलिस ने वह तसवीर रूबीना सहित मोहल्ले के कई लोगों को दिखाई, लेकिन उसे किसी ने भी नहीं पहचाना. लोगों ने बताया कि तसवीर वाले लड़के को न तो कभी शमीम के घर पर देखा गया था और न ही वह कभी उसे मोहल्ले में दिखाई दिया था.

अगले दिन पोस्टमार्टम के बाद शमीम का शव सुपुर्द-ए-खाक कर दिया गया. दूसरी ओर पुलिस सिराज की तलाश में तो लगी ही थी, साथ ही उस ने आफरीन और शमीम के फोन नंबरों की काल डिटेल्स भी निकलवा ली थीं. आफरीन की काल डिटेल्स में एक नंबर पर बहुत ज्यादा बातें हुई थीं. पुलिस ने उस नंबर का पता किया तो वह सिद्दीक का निकला.

तीसरे दिन शमीम का तीजा होने के बाद देर रात को पुलिस ने आफरीन, उस के पिता अब्दुल रशीद और भाई अतीक को उठा लिया. थाने में तीनों से बारीबारी से लंबी पूछताछ की गई. अंतत: पुलिस के सवालों से घबरा कर आफरीन टूट गई. उस ने अपने बयान में बताया कि कुछ दिनों पहले शमीम के संबंध सिद्दीक से थे.

बाद में सिद्दीक को शमीम की जगह उस से प्यार हो गया था. शमीम उन दोनों के प्यार में रोड़ा बन रही थी, इसलिए उस ने अपना रास्ता साफ करने के लिए सिद्दीक के साथ मिल कर बहन की हत्या करने की योजना बनाई.

इस योजना के मुताबिक सिद्दीक 11 दिसंबर, 2013 को बाजार से तीन पैकेट बिरयानी ले कर आया. उस ने एक पैकेट में पहले ही नशीली दवा मिला दी थी. नशीले पदार्थ वाली बिरयानी उन्होंने शमीम को दे दी और एकएक पैकेट दोनों ने ले लिए.

बिरयानी खाने के बाद शमीम अर्धबेहोशी में चली गई. उस के हाथपैर उस के वश में नहीं रहे. यह देख सिद्दीक और आफरीन ने मिल कर उस का गला रेत दिया. शमीम पर दवा का इतना ज्यादा असर था कि वह चीख भी नहीं सकी. अर्धबेहोशी के उसी आलम में उस ने अपने हाथ चला कर बचाने की कोशिश की थी, जिस से उस के हाथ की अंगुली में जख्म आ गया था.

शमीम के मरने के बाद सिद्दीक बाहर निकलने के लिए उपयुक्त समय का इंतजार करता रहा. जब सूरज छिप गया और अंधेरा घिर आया तो वह चुपचाप बाहर निकल गया. आफरीन के इस बयान के बाद पुलिस ने देर रात सिद्दीक को उस के घर इफ्तखाराबाद से गिरफ्तार कर लिया और आफरीन के पिता तथा भाई को छोड़ दिया.

16 दिसंबर को आफरीन की डाक्टरी जांच कराई गई, जिस में वह 3 महीने की गर्भवती पाई गई. डाक्टरी जांच के बाद सिद्दीक और आफरीन को अदालत में पेश कर के जेल भेज दिया गया. कथा लिखे जाने तक दोनों जेल में थे.

— कथा पुलिस सूत्रों पर आधारित

दो बहनों का एक प्रेमी – भाग 2

11 दिसंबर, 2013 को अब्दुल रशीद और अतीक सुबह को अपने काम पर चले गए. शमीम और आफरीन घर में अकेली रह गईं. उस दिन शमीम के बड़े भाई की पत्नी जरीना ने खीर बनाई थी. शाम को 6 बजे वह एक कटोरे में खीर ले कर शमीम को देने आई. दरवाजा शमीम की जगह आफरीन ने खोला. वह जरीना को देखते ही घबराई सी बोली, ‘‘भाभी, अंदर आओ. देखो, अप्पी को पता नहीं क्या हो गया है. किसी ने उन का गला काट दिया है, लगता है मर गई हैं.’’

जरीना उस वक्त मुख्य दरवाजे की दहलीज पर खड़ी थी. आफरीन की बात सुन कर वह 2 कदम पीछे हट गई. उस ने सहमते हुए कहा, ‘‘मैं तुम्हारे घर में दाखिल नहीं होऊंगी. मोहल्ले के लोगों को बुला लो.’’

आफरीन ने यह बात सामने पान की गुमटी पर बैठने वाले व्यक्ति को बताई. लेकिन उस ने भी अंदर जा कर देखने की हिम्मत नहीं की. अलबत्ता उस ने यह बात आसपास के लोगों को जरूर बता दी. इस का नतीजा यह हुआ कि कुछ ही देर में यह खबर पूरे इलाके में फैल गई. अब्दुल रशीद के घर के सामने तमाम लोग जमा हो गए. लेकिन डर की वजह से कोई भी अंदर नहीं गया.

इसी बीच किसी ने पुलिस कंट्रोल रूम को फोन कर दिया. शमीम और आफरीन की बड़ी बहन तहसीन और दूसरे भाई की पत्नी भी उसी मोहल्ले में रहती थीं. खबर मिलते ही वे दोनों भी आ गईं. हिम्मत कर के बड़ी बहन और भाभी अंदर गईं. अंदर शमीम की लाश खून से लथपथ पड़ी थी. वे उसे देखते ही रोने लगीं. जरा सी देर में कोहराम मच गया.

पुलिस कंट्रोल रूम से सूचना मिलते ही यशोदानगर पुलिस चौकी के इंचार्ज जय वीर सिंह अपने सहयोगियों कांस्टेबल राम नारायण, आजाद, शिव प्रताप यादव, रामलखन और राजेश सिंह के साथ घटनास्थल पर आ गए. घटनास्थल की स्थिति देखने के बाद जयवीर सिंह ने इस मामले की जानकारी अपने वरिष्ठ अधिकारियों को दे दी.

राजीवनगर के एफ ब्लौक में एक युवती का कत्ल हो गया है, यह पता चलते ही थाना नौबस्ता के प्रभारी आलोक कुमार यादव कांस्टेबल सुमित नारायण यादव, नीरज कुमार यादव, रणजीत सिंह यादव, देवेश कुमार आदि के साथ घटनास्थल पर जा पहुंचे. पुलिस ने अंदर जा कर देखा तो शमीम तख्त के ऊपर बिस्तर पर औंधे मुंह पड़ी थी. उस के गले से काफी मात्रा में खून रिसा था, जिस से बिस्तर गीला हो गया था.

बिस्तर पर बिछी चादर के एक कोने पर संभवत: हत्यारे ने अपने खून सने हाथ पोंछे थे. वहां भी काफी खून लगा हुआ था. अभी थानाप्रभारी घटनास्थल का निरीक्षण कर ही रहे थे कि सीओ रोहित मिश्र फौरेंसिक टीम के साथ आ पहुंचे.

पुलिस ने नंबर पूछ कर शमीम के पिता को इस घटना की खबर देनी चाहिए तो उन का फोन स्विच्ड औफ मिला. आफरीन कुछ नहीं बता पा रही थी, इसलिए पुलिस घर के मुखिया अब्दुल रशीद के आने का इंतजार करने लगी.

अब्दुल रशीद रात 9 बजे अपने बेटे अतीक के साथ घर लौटे तो दरवाजे पर पुलिस की जीप और पुलिस वालों को खड़ा देख परेशान हो गए. उन की समझ में नहीं आया कि उन के घर के बाहर इतनी भीड़ क्यों है. उन्होंने घर के अंदर जा कर देखा तो वह गश खा कर गिरतेगिरते बचे. 3-4 लोगों ने मिल कर उन्हें जैसेतैसे संभाला.

अब्दुल रशीद से भी कोई महत्त्वपूर्ण बात पता नहीं चली तो थानाप्रभारी आलोक कुमार यादव ने प्राथमिक काररवाई पूरी कर के मृतका शमीम की लाश पोस्टमार्टम के लिए भेज दी. इस के साथ ही अब्दुल रशीद की तहरीर पर भादंवि की धारा 302/201 के तहत अज्ञात हत्यारों के खिलाफ केस दर्ज कर लिया गया.

अब्दुल रशीद ने पुलिस को बताया कि दिल्ली में रहने वाले सिराज के साथ शमीम के प्रेमसंबंध थे. जबकि वह उस की शादी अपनी पसंद के लड़के से करना चाहते थे. उन्होंने उस की शादी भी तय कर दी थी. इस पर सिराज ने धमकी दी थी कि अगर शमीम की शादी कहीं और की तो उसे जान से मार देगा. अब्दुल रशीद ने यह भी बताया कि सिराज से शमीम की जानपहचान रूबीना ने ही कराई थी.

आफरीन ने अपने बयान में पुलिस को बताया कि दोपहर 2 बजे शमीम के मोबाइल पर किसी का फोन आया था. फोन पर बात करने के बाद शमीम ने उस से कहा था कि कोई उस से मिलने आ रहा है, इसलिए वह कुछ समय के लिए घर से बाहर चली जाए और उस के सामने न पड़े, क्योंकि उस की नजर अगर उस पर पड़ गई तो वह उसे पसंद कर लेगा.

आफरीन ने आगे बताया कि पहले तो वह घर से बाहर नहीं जाना चाहती थी, लेकिन जब शमीम ने आने वाले की एक फोटो दिखाई तो वह मान गई और घर से निकल कर अंबेडकर पार्क की तरफ चली गई. उस वक्त शमीम भी उस के साथ थी, क्योंकि आने वाले ने उस से अंबेडकर मूर्ति के पास मिलने को कहा था. यह साढ़े 3 बजे की बात है.

आफरीन के अनुसार वह अंबेडकर पार्क के पास से होते हुए घर के पीछे वाली गली में चली गई थी और वहीं बैठ कर बहन के फोन का इंतजार करने लगी थी. अगले 3 घंटे उस ने वहीं बिताए और जब 6 बजने को आए और अंधेरा छाने लगा तो वह वहां से उठ कर घर लौट आई. उस समय घर का दरवाजा उढ़का हुआ था. वह अंदर पहुंची तो उस ने शमीम को खून से लथपथ मरा हुआ पाया.

यह सब बताने के बाद आफरीन कमरे में गई और एक तसवीर थानाप्रभारी को देते हुए कहा कि शमीम से यही लड़का मिलने आने वाला था. उस ने यही फोटो उसे दिखाई थी.

थानाप्रभारी ने फोटो को गौर से देखा, वह किसी 16-17 साल के लड़के की फोटो थी. उस फोटो को देख कर ऐसा नहीं लगता था कि वह हत्यारा हो सकता है. दूसरी बात यह भी थी कि उस लड़के का नामपता किसी को मालूम नहीं था. ऐसे में उसे तलाश करना आसान नहीं था.