Crime Story: औनलाइन चलता सेक्स रैकेट

Crime Story: 22 जनवरी, 2021 की बात है. 12 साल की मानसी पास की दुकान से चिप्स लेने गई थी. जब वह काफी देर बाद भी घर नहीं लौटी तो घर वालों को उस की चिंता हुई. घर वाले उस दुकानदार के पास पहुंचे, जिस के पास वह अकसर खानेपीने का सामान लाती थी. उन्होंने उस दुकानदार से मानसी के बारे में पूछा तो दुकानदार ने  बताया कि मानसी तो काफी देर  पहले ही चिप्स का पैकेट ले कर जा चुकी है.

जब वह चिप्स ले कर जा चुकी है तो घर क्यों नहीं पहुंची, यह बात घर वालों की समझ में नहीं आ रही थी. उन्होंने आसपास के बच्चों से उस के बारे में पूछा, लेकिन उन से भी मानसी के बारे में कोई जानकारी नहीं मिली.

घर वालों की समझ में नहीं आ रहा था कि आखिर मानसी गई तो गई कहां. उन्होंने उसे इधरउधर तमाम संभावित जगहों पर ढूंढा लेकिन उस का कहीं पता नहीं चला. तब उन्होंने इस की सूचना पश्चिमी दिल्ली के थाना राजौरी गार्डन में दे दी. चूंकि मामला एक नाबालिग लड़की के लापता होने का था, इसलिए पुलिस ने इस मामले को गंभीरता से लिया. पुलिस ने मानसी के पिता की तरफ से गुमशुदगी की सूचना दर्ज कर ली.

डीसीपी (पश्चिमी दिल्ली) उर्विजा गोयल को जब 12 वर्षीय मानसी के गायब होने की जानकारी मिली तब उन्होंने थाना पुलिस को इस मामले में तीव्र काररवाई करने के आदेश दिए. डीसीपी का आदेश पाते ही थानाप्रभारी ने इस मामले की जांच के लिए एएसआई विनती प्रसाद के नेतृत्व में एक पुलिस टीम गठित कर दी.

एएसआई विनती प्रसाद ने सब से पहले लापता बच्ची के घर वालों से उस के बारे में विस्तार से जानकारी ली. इतना ही नहीं, उन्होंने घर वालों से यह भी जानना चाहा कि उन की किसी से कोई रंजिश तो नहीं है. घर वालों ने उन से साफ कह दिया कि उन की किसी से कोई दुश्मनी नहीं है. इस के बाद पुलिस अपने स्तर से मानसी को तलाशने लगी. जिस जगह से मानसी गायब हुई थी, पुलिस ने उस क्षेत्र के सीसीटीवी कैमरों की फुटेज देखी. इस के अलावा स्थानीय लोगों से भी बच्ची के बारे में जानकारी हासिल की. पुलिस ने सोशल मीडिया पर भी निगरानी कर दी, लेकिन कहीं से भी मानसी के बारे में कोई सुराग नहीं मिला.

पुलिस टीम को जांच करतेकरते करीब 2 महीने बीत चुके थे. जब बच्ची कहीं नहीं मिली तो पुलिस ने ह्यूमन ट्रैफिकिंग के एंगल को ध्यान में रखते हुए केस की जांच शुरू कर दी. यानी पुलिस को यह शक होने लगा कि कहीं ऐसा तो नहीं कि बच्ची जिस्मफरोशी गैंग के चंगुल में फंस गई हो. इस बिंदु पर जांच करते करते पुलिस टीम ने कई जगहों पर दबिशें दीं, लेकिन लापता बच्ची का सुराग नहीं मिला.

करीब 2 महीने बाद पुलिस को सूचना मिली कि मानसी का अपहरण करने के बाद उसे दिल्ली के मजनूं का टीला इलाके में रखा गया है और वहीं पर उस से जिस्मफरोशी का धंधा कराया जा रहा है. यह सूचना रोंगटे खड़े कर देने वाली थी. क्योंकि मानसी की उम्र केवल 12 साल थी और इस उम्र में उस बच्ची के साथ जिस तरह का कार्य कराने की जानकारी मिली, वह मानवता को शर्मसार करने वाली ही थी.

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जांच अधिकारी विनती प्रसाद ने यह खबर अपने उच्चाधिकारियों को दी फिर उन्हीं के दिशानिर्देश पर पुलिस टीम ने 17 मार्च, 2021 को मजनूं का टीला इलाके में एक घर पर दबिश दी. मुखबिर की सूचना सही निकली. मानसी वहीं पर मिल गई. पुलिस ने मानसी को सब से पहले अपने कब्जे में लिया. इस के बाद पुलिस ने वहां 2 महिलाओं सहित 4 लोगों को गिरफ्तार किया.

पुलिस ने उन सभी से पूछताछ की तो उन्होंने स्वीकार किया कि वे बड़े स्तर पर एस्कौर्ट सर्विस मुहैया कराते थे और उन का धंधा ज्यादातर वाट्सऐप ग्रुप और इंटरनेट के माध्यम से चलता है. उन के पास से पुलिस ने 5 मोबाइल फोन बरामद किए. फोनों की जांच की गई तो तमाम वाट्सऐप ग्रुप में ऐसी लड़कियों के अनेक फोटो मिले, जिन से वे जिस्मफरोशी कराते थे. पुलिस ने गिरफ्तार किए हुए उन चारों लोगों से पूछताछ की तो पता चला कि उन में से संजय राजपूत और कनिका राय मजनूं का टीला के रहने वाले थे जबकि अंशु शर्मा  मुरादाबाद का और सपना गोयल मुजफ्फरनगर की.

ये सभी औनलाइन सैक्स रैकेट चलाते थे. जांच में पता चला कि इन लोगों के काम करने का तरीका एकदम अलग था. यह गिरोह सोशल साइट पर ज्यादा सक्रिय था. गैंग के लोग 150 से ज्यादा वाट्सऐप ग्रुप में सक्रिय थे. एस्कौर्ट सर्विस मुहैया कराने वाली लड़की के फोटो ये वाट्सऐप ग्रुप में शेयर करते थे. इस के बाद ग्रुप से जो कस्टमर इन के संपर्क में आता था, उस से यह पर्सनल चैटिंग करने के बाद पैसों की डील फाइनल करते थे. फिर औनलाइन ही पेमेंट अपने खाते में ट्रांसफर कराने के बाद कस्टमर के बताए गए स्थान पर ये लड़की को सप्लाई करते थे.

इस तरह यह गैंग देश के अलगअलग बड़े शहरों में लड़कियों की सप्लाई करते था. इतना ही नहीं, फाइव स्टार होटलों में भी इन के पास से लड़कियां सप्लाई की जाती थीं. आरोपियों ने बताया कि उन के गैंग के सदस्य अलगअलग जगहों से लड़कियां उन के पास लाते थे. मानसी का भी गैंग के 2 लोगों ने अपहरण उस समय किया था, जब वह दुकान पर गई थी. उस का अपहरण करने के बाद वह उसे अपने घर पर ले गए थे.

उन्होंने मानसी से कहा था कि आज उन के यहां पर जन्मदिन है इसलिए वह बच्चों को इकट्ठा कर के केक काटेंगे. उन्होंने मानसी को केक खाने को दिया. केक खाते ही मानसी को नशा हो गया. इस के बाद दोनों मानसी को मजनूं का टीला ले गए, वहां पर संजय राजपूत, अंशु शर्मा, सपना गोयल और कनिका राय मिली. 12 साल की बच्ची को देख कर ये चारों खुश हो गए कि अब इस से मोटी कमाई की जा सकती है. क्योंकि वह तो उसे सोने का अंडा देने वाली मुरगी समझ रहे थे.

जब मानसी पर हल्का नशा सवार था, तभी उस के साथ रेप किया गया. होश आने पर मानसी दर्द से कराहती रही. इस के बाद भी इन लोगों को उस पर दया नहीं आई. उन्होंने उसी रात उसे किसी दूसरे ग्राहक के सामने पेश किया. इस तरह वह मानसी का शारीरिक शोषण करते रहे. जब वह विरोध करती तो ये लोग उसे प्रताडि़त करते थे. इस तरह मानसी इन लोगों के चंगुल में बुरी तरह फंस चुकी थी. वहां से निकलने का उस के पास कोई उपाय नहीं था.

आरोपियों के 2 अन्य साथी फरार हो चुके थे. पुलिस ने उन की तलाश में अनेक स्थानों पर दबिश दी, लेकिन उन का पता नहीं चला. आरोपी 35 वर्षीय संजय राजपूत, 21 वर्षीय अंशु शर्मा, 24 साल की सपना गोयल और 28 साल की कनिका राय से विस्तार से पूछताछ करने के बाद पुलिस ने उन्हें न्यायालय में पेश किया, जहां से उन्हें जेल भेज दिया गया. अभियुक्तों के पास से बरामद की गई 12 वर्षीय मानसी को पुलिस ने उपचार के लिए अस्पताल में भरती करा दिया. मानसी ने अपने साथ घटी सारी घटना पुलिस को बता दी.

आरोपियों को जेल भेजने के बाद पुलिस गंभीरता से इस बात की जांच करने में जुट गई. इस गैंग के तार देश में किनकिन लोगों से जुड़े थे और इन्होंने अब तक कितनी लड़कियों का अपहरण किया था. Crime Story

(कथा में मानसी परिवर्तित नाम है)

Crime News: खुद को बचाने के लिए मार दिया दोस्त को

Crime News: कंधे पर बैग टांग कर घर से निकलते हुए राजा ने मां से कहा कि वह 2 दिनों के लिए बाहर जा रहा है तो मां ने पूछा, ‘‘अरे कहां जा रहा है, यह तो बताए जा.’’ लेकिन जब बिना कुछ बताए ही राजा चला गया तो माधुरी ने झुंझला कर कहा, ‘‘अजीब लड़का है, यह भी नहीं बताया कि कहां जा रहा है?’’

यह 19 अक्तूबर, 2016 की बात है. मीरजापुर की कोतवाली कटरा के मोहल्ला पुरानी दशमी में अशोक कुमार का परिवार रहता था. उन के परिवार में पत्नी माधुरी के अलावा 4 बेटों में राजन उर्फ राजा सब से छोटा था. उस की अभी शादी नहीं हुई थी. अशोक कुमार के परिवार का गुजरबसर रेलवे स्टेशन पर चलने वाले खानपान के स्टाल से होता था. अशोक कुमार के 2 बेटे उन के साथ ही काम करते थे, जबकि 2 बेटे गोपाल और राजा मुगलसराय रेलवे स्टेशन पर स्थित होटल जननिहार में काम करते थे. चूंकि मीरजापुर और मुगलसराय स्टेशन के बीच बराबर गाडि़यां चलती रहती हैं, इसलिए उन्हें आनेजाने में कोई परेशानी नहीं होती थी.

राजा 2 दिनों के लिए कह कर घर से गया था, जब वह तीसरे दिन भी नहीं लौटा तो घर वालों ने सोचा कि किसी काम में लग गया होगा, इसलिए नहीं आ पाया. लेकिन जब चौथे दिन भी वह नहीं आया तो घर वालों को चिंता हुई. दरअसल इस बीच उस का एक भी फोन नहीं आया था. घर वालों ने फोन किया तो राजा का फोन बंद था. जब राजा से बात नहीं हो सकी तो उस की मां माधुरी ने उस के सब से खास दोस्त रवि को फोन किया. उस ने कहा, ‘‘राजा दिल्ली गया है. मैं भी इस समय बाहर हूं.’’

इतना कह कर उस ने फोन काट दिया था. राजा का फोन बंद था, इसलिए उस से बात नहीं हो सकती थी. उस के दोस्त रवि से जब भी राजा के बारे में पूछा जाता, वह खुद को शहर से बाहर होने की बात कह कर राजा के बारे में कभी कहता कि इलाहाबाद में है तो कभी कहता फतेहपुर में है. अंत में उस ने अपना मोबाइल बंद कर दिया.

जब राजा का कहीं पता नहीं चला तो परेशान अशोक कुमार मोहल्ले के कुछ लोगों को साथ ले कर कोतवाली कटरा पहुंचे और राजा के गायब होने की तहरीर दे कर गुमशुदगी दर्ज करा दी. कोतवाली पुलिस ने गुमशुदगी तो दर्ज कर ली, लेकिन काररवाई कोई नहीं की. इस के बाद अशोक कुमार 26 अक्तूबर को समाजवादी पार्टी के युवा नेता और सभासद लवकुश प्रजापति के अलावा मोहल्ले के कुछ प्रतिष्ठित लोगों को साथ ले कर मीरजापुर के एसपी अरविंद सेन से मिले और उन्हें अपनी परेशानी बताई.

अशोक कुमार की बात सुन अरविंद सेन ने तत्काल कटरा कोतवाली पुलिस को काररवाई का आदेश दिया. कोतवाली पुलिस ने राजा के बारे में पता करने के लिए उस के दोस्त रवि से पूछताछ करनी चाही, लेकिन वह घर से गायब मिला. अब तक राजा को गायब हुए 10 दिन हो गए थे. रवि घर पर नहीं मिला तो पुलिस ने उस का मोबाइल नंबर सर्विलांस पर लगवा दिया, क्योंकि उस ने अपना मोबाइल बंद कर दिया था.

पुलिस की लापरवाही से तंग आ कर बेटे के बारे में पता करने के लिए अशोक कुमार ने अदालत का दरवाजा खटखटाया. मामला न्यायालय तक पहुंचा तो पुलिस ने तेजी दिखानी शुरू की. 28 अक्तूबर, 2016 को राजा के दोस्त रवि और उस के पिता को एसपी औफिस के पास एक मिठाई की दुकान से पकड़ कर कोतवाली लाया गया. लेकिन उन से की गई पूछताछ में कोई जानकारी नहीं मिली तो पुलिस ने उन्हें छोड़ दिया. इसी तरह अगले दिन भी हुआ.

संयोग से उसी बीच एसपी अरविंद सेन ही नहीं, कोतवाली प्रभारी का भी तबादला हो गया. मीरजापुर जिले के नए एसपी कलानिधि नैथानी आए. दूसरी ओर कटरा कोतवाली प्रभारी की जिम्मेदारी इंसपेक्टर अजय श्रीवास्तव को सौंपी गई. अशोक कुमार 9 नवंबर को नए एसपी कलानिधि नैथानी से मिले. एसपी साहब ने तुरंत इस मामले में काररवाई करने का आदेश दिया. उन्हीं के आदेश पर कोतवाली प्रभारी ने अपराध संख्या 1232/2016 पर भादंवि की धारा 364 के तहत मुकदमा दर्ज कर के काररवाई शुरू कर दी.

इस घटना को चुनौती के रूप में लेते हुए एसपी कलानिधि नैथानी ने कोतवाली प्रभारी कटरा, प्रभारी क्राइम ब्रांच स्वाट टीम एवं सर्विलांस को ले कर एक टीम गठित कर दी. इस टीम ने मुखबिरों द्वारा जो सूचना एकत्र की, उसी के आधार पर 14 नवंबर, 2016 को राजा के दोस्त रवि कुमार को मीरजापुर के नटवां तिराहे से गिरफ्तार कर लिया. उस से राजा के बारे में पूछा गया तो उस ने उस के गायब होने के पीछे की जो कहानी सुनाई, उसे सुन कर पुलिस वाले जहां हैरान रह गए, वहीं रवि के पकड़े जाने की खबर सुन कर कोतवाली आए राजा के घर वाले रो पड़े. क्योंकि उस ने राजा की हत्या कर दी थी.

उत्तर प्रदेश के जिला बुलंदशहर के थाना नरसैना के गांव रूखी के रहने वाले नरेश कुमार पीएसी में होने की वजह से मीरजापुर में परिवार के साथ रहते हैं. वह पीएसी की 39वीं वाहिनी में स्वीपर हैं. रवि कुमार उन्हीं का बेटा था. उस की दोस्ती राजा से हो गई थी, इसलिए कभी वह उस से मिलने मुगलसराय तो कभी उस के घर आ जाया करता था. दोनों में पक्की दोस्ती थी.

रवि का एक चचेरा भाई दीपेश उर्फ दीपू फिरोजाबाद के टुंडला की सरस्वती कालोनी में किराए का कमरा ले कर पत्नी के साथ रहता था. वह वहां दर्शनपाल उर्फ जेपी की गाड़ी चलाता था. जेपी की बहन राजमिस्त्री का काम करने वाले प्रवीण कुमार से प्यार करती थी. यह जेपी को पसंद नहीं था. उस ने बहन को समझाया . बहन नहीं मानी तो प्रेमी से उसे जुदा करने के लिए उस ने प्रवीण कुमार को ठिकाने लगाने का मन बना लिया.

यह काम वह अकेला नहीं कर सकता था, इसलिए उस ने अपने ड्राइवर दीपेश उर्फ दीपू को साथ मिलाया और 13 अक्तूबर, 2016 को बहन के प्रेमी प्रवीण कुमार को अगवा कर लिया. दोनों उसे शहर से बाहर ले गए और गोली मार कर हत्या कर दी. दोनों के खिलाफ इस हत्या का मुकदमा थाना टुंडला में दर्ज हुआ. चूंकि इस मुकदमे में एससी/एसटी एक्ट भी लगा था, इसलिए पुलिस दोनों के पीछे हाथ धो कर पड़ गई. दर्शनपाल उर्फ जेपी तो गिरफ्तार हो गया, लेकिन दीपेश उर्फ दीपू फरार चल रहा था.

पुलिस उस की गिरफ्तारी के लिए जगहजगह छापे मार रही थी. पुलिस दीपेश को तेजी से खोज रही थी. इस स्थिति में पुलिस से बचने के लिए वह मीरजापुर आ गया था. टुंडला में घटी घटना के बारे में उस ने चचेरे भाई रवि को बता कर कहा, ‘‘रवि, मैं बुरी तरह फंस गया हूं. अगर तुम मेरी मदद करो तो मैं बच सकता हूं.’’

इस के बाद राजा और दीपेश ने योजना बनाई कि किसी ऐसे आदमी को खोजा जाए, जिसे टुंडला ले जा कर हत्या कर के उस की लाश को जला दिया जाए और लाश के पास दीपेश अपनी कोई पहचान छोड़ दे, जिस से पुलिस समझे कि लाश दीपेश की है और उस की हत्या हो चुकी है. इस के बाद पुलिस उस का पीछा करना बंद कर देगी.

जब ऐसे आदमी की तलाश की बात आई तो रवि को अपने दोस्त राजा उर्फ राजन की याद आई. क्योंकि राजा का हुलिया दीपेश से काफी मिलताजुलता था. फिर क्या था, दोनों ने राजा को ठिकाने लगाने की योजना बना डाली, उसी योजना के तहत उस ने 18 अक्तूबर को राजा को फोन कर के कहा, ‘‘राजा, हम लोगों ने किराए पर एक गाड़ी की है, जिस से कल यानी 19 अक्तूबर को दिल्ली घूमने चलेंगे. मेरा चचेरा भाई दीपेश भी आया हुआ है, वह भी साथ चलेगा. मैं चाहता हूं कि तुम भी चलो.’’

राजा तैयार हो गया तो रवि ने 19 अक्तूबर, 2016 को पीएसी कालोनी के एक परिचित की गाड़ी बुक कराई और राजा को साथ ले कर दिल्ली के लिए चल पड़ा. योजना के अनुसार रास्ते में पैट्रोल खरीद लिया गया. इस के बाद उन्होंने बीयर खरीदी और राजा को जम कर पिलाई. वह नशे में हो गया तो रात 11 बजे के करीब फिरोजाबाद के थाना पचोखरा के गांव सराय नूरमहल और गढ़ी निर्भय के बीच सुनसान स्थान पर पेशाब करने के बहाने गाड़ी रुकवाई और राजा को उतार कर मारपीट कर पहले उसे बेहोश किया, उस के बाद पैट्रोल डाल कर जला दिया.

जब उन्हें विश्वास हो गया कि राजा मर गया है तो पहचान के लिए दीपेश ने अपना जूता राजा की लाश के पास रख दिया, जिस से बाद में उस लाश की पहचान उस की लाश के रूप में हो. इस के बाद दीपेश ने फिरोजाबाद पुलिस को मोबाइल से फोन कर के कहा, ‘‘मैं दीपेश उर्फ बाबू बोल रहा हूं. 3-4 बदमाश मेरा पीछा कर रहे हैं. मुझे बचा लीजिए अन्यथा ये मुझे मार डालेंगे.’’

जिस जगह पर रवि और दीपेश ने राजा को जलाया था, दीपेश का घर वहां से करीब 8 किलोमीटर दूर था. दीपेश ने इस जगह को यह सोच कर चुना था, जिस से पुलिस को लगे कि वह चोरीछिपे अपने गांव आया था. बदमाशों को पता चल गया तो उन्होंने उसे मार डाला. पुलिस को फोन कर के रवि और दीपेश फरार हो गए. जबकि पुलिस सर्विलांस के माध्यम से लोकेशन के आधार पर उन की तलाश में मीरजापुर से फिरोजाबाद तक उन के पीछे लगी थी. दीपेश तो फरार हो गया, लेकिन रवि मीरजापुर तो कभी सोनभद्र तो कभी सिगरौली जा कर छिपा रहा. आखिर ज्यादा दिनों तक वह पुलिस की नजरों से बच नहीं पाया और 14 नवंबर को उसे पकड़ लिया गया.

पूछताछ के बाद रवि की निशानदेही पर पुलिस ने पैट्रोल का डिब्बा, वह गाड़ी जेस्ट कार संख्या यूपी 63जेड 8586, जिस से वे राजा को ले गए थे, बरामद कर ली. इस के बाद उसे उस स्थान पर भी ले जाया गया, जहां उस ने दीपेश के साथ मिल कर राजा को जलाया था. राजा के पिता अशोक कुमार भी साथ थे, इसलिए उन्होंने राजा के अधजले कपड़ों को पहचान लिया था. पुलिस ने रवि को प्रैसवार्ता में पेश किया, जहां उस ने अपना अपराध स्वीकार कर के हत्या की सारी कहानी सुना दी.

घटना का खुलासा होने के बाद कोतवाली पुलिस ने राजा उर्फ राजन की गुमशुदगी हत्या में तब्दील कर आरोपी रवि को अदालत में पेश किया, जहां से उसे जेल भेज दिया गया. दीपेश उर्फ दीपू की तलाश में पुलिस ने ताबड़तोड़ छापे मारने शुरू कर दिए तो दबाव में आ कर उस ने फिरोजाबाद की अदालत में आत्मसमर्पण कर दिया. अदालत ने उसे जेल भेज दिया था. Crime News

Crime Story: गलतफहमी – बेकसूर परिवार को मिली सजा

Crime Story: भीकाजी बोर्डे का घर औरंगाबाद के चिखनठाना की चौधरी कालोनी में था.बोर्डे परिवार में कुल जमा 3 सदस्य थे. भीकाजी बोर्डे, पत्नी कमलाबाई और बेटा भगवान दिनकर बोर्डे. भीकाजी की एक बेटी भी थी विमल, जिस की वह शादी कर चुके थे. विमल 2 बच्चों की मां थी और पति से चल रहे किसी विवाद की वजह से मायके में रह रही थी. उस के दोनों बच्चे पति के पास रह रहे थे.

23 वर्षीय अमोल बोर्डे भगवान दिनकर बोर्डे का दोस्त था. उस का घर बोर्डे परिवार के घर से कुछ दूरी पर था. दोनों हमउम्र थे. दोस्ती के नाते दोनों का एकदूसरे के घर आनाजाना था.

जब से भीकाजी की बेटी विमल मायके आई थी, तब से अमोल भीकाजी के घर कुछ ज्यादा ही आने लगा था. उसे इस बात की जानकारी थी कि विमल और उस के पति के बीच तनातनी चल रही है और वह हालफिलहाल पति के पास जाने वाली नहीं है. दरअसल, अमोल अभी अविवाहित था, इसलिए दोस्त की बहन को दूसरी नजरों से देखने लगा था.

भाई का दोस्त होने के नाते विमल उसे भी भाई समझती थी. वह बात भी उसी अंदाज में करती थी. वैसे भी विमल बातूनी लड़की थी. जब विमल और अमोल के बीच बातों का सिलसिला जुड़ा तो अमोल ने बातों के कुछ शब्दों को ऐसा रंग देना शुरू कर दिया कि उस की चाहत नजर आए. उस के ऐसे शब्दों पर या तो विमल ने ध्यान नहीं दिया या दिया भी तो उस की बातों को गंभीरता से नहीं लिया. अमोल ने मीठीमीठी बातों से विमल को शीशे में उतारने की काफी कोशिश की, लेकिन सफलता नहीं मिली. बहुत कुछ समझ कर भी विमल अमोल को ऐसा कुछ नहीं कहना चाहती थी जिस से भाई भगवान दिनकर और अमोल की दोस्ती में दरार पड़े. लेकिन वह कब तक यह सब सहन करती.

आखिर एक दिन सब्र का प्याला छलक ही गया. हुआ यह कि उस दिन विमल घर पर अकेली थी. अमोल को पता चला तो वह मौके का फायदा उठाने की सोच कर उस के घर पहुंच गया. विमल ने उसे बैठने के लिए कुरसी दी और उस के लिए चाय बनाने चली गई. उस समय वह घर में अकेली थी. अमोल ने अपनी मनमरजी करने के लिए इस मौके को उचित समझा. वापस लौट कर विमल ने चाय का प्याला अमोल को दिया तो उसी समय अमोल ने उस का हाथ पकड़ लिया. उस की इस हरकत पर विमल चौंक गई. उस की नीयत में खोट देख कर उसे गुस्सा आ गया. उस ने अपना हाथ छुड़ाने के बाद चाय का प्याला मेज पर रखा, फिर उसे जम कर लताड़ा और उसी समय घर से भगा दिया.

अमोल को इस बात की उम्मीद भी नहीं थी कि विमल उस की इतनी बेइज्जती करेगी. विमल के हंसहंस कर बात करने से वह तो यही सोचता था कि विमल भी उसे चाहती है. इसी का फायदा उठाने के लिए वह आया भी था. लेकिन उसे उलटे विमल के गुस्से का सामना करना पड़ा. बेइज्जती सह कर वह उस समय वहां से चला गया. घर पहुंचने के बाद भी विमल द्वारा की गई बेइज्जती अमोल के दिमाग में घूमती रही. उस की समझ में नहीं आ रहा था कि इस स्थिति में वह क्या करे.

उधर शाम के समय विमल के मातापिता और भाई घर लौटे तो विमल ने अमोल की हरकत मां कमलाबाई को बता दी. कमलाबाई को बहुत गुस्सा आया. अमोल उस के बेटे का दोस्त था इसलिए वह उसे भी अपने घर का सदस्य समझती थी, लेकिन उस की सोच इतनी घटिया थी, वह नहीं समझ पाई थी. घर की बदनामी को देखते हुए कमलाबाई ने इस बात का शोरशराबा तो नहीं किया लेकिन बेटी को उस से सतर्क रहने की सलाह जरूर दे दी.

अगले दिन अमोल को अपने दोस्त यानी विमल के भाई भगवान दिनकर बोर्डे की याद आई. वह उस के साथ घूमता और गप्पें मारता था, इसलिए उस का मन दोस्त से मिलने के लिए कर रहा था. विमल ने जिस तरह उसे लताड़ा था, वह बात भी उस के दिमाग में घूम रही थी. अमोल यह समझ रहा था कि उस ने विमल के साथ जो हरकत की थी, उस के बारे में विमल अपने घर वालों से चर्चा तक नहीं करेगी, क्योंकि ज्यादातर लड़कियां इस तरह की बातें शुरुआत में अपने तक ही छिपा कर रखती हैं. मातापिता को ये बातें बताने में उन्हें शर्म महसूस होती है.

यही सोच कर अमोल बिना किसी डर के अपने दोस्त भगवान दिनकर बोर्डे से मिलने उस के घर पहुंच गया. विमल अमोल की हरकत मां को पहले ही बता चुकी थी. लिहाजा विमल की मां कमलाबाई ने अमोल को आड़े हाथों लिया. उस ने भी अमोल को जम कर खरीखोटी सुनाई. इतना ही नहीं, उसे बेइज्जत करते हुए धमकी दी कि वह इसी समय वहां से चला जाए और आइंदा उस के घर में कदम न रखे.

बेइज्जती सह कर अमोल वहां से उलटे पांव लौट आया. इस अपमान की ज्वाला उस के सीने में दहकने लगी थी. उस ने तय कर लिया कि विमल और उस की मां ने उस की जो बेइज्जती की है, वह उस का बदला जरूर लेगा. बदले की भावना उस के मन में घर कर गई. बात 25 सितंबर, 2019 की है. अमोल अपने घर पर ही था. उस के दिमाग में बेइज्जती वाली बातें ही घूम रही थीं. वह सोच रहा था कि इस अपमान का बदला कैसे ले. रात के 8 बजे थे. उस समय अमोल को भूख लगी थी. उस ने अपनी मां से खाना परोसने को कहा. मां खाना परोस कर ले आई.

निवाला तोड़ कर वह खाने को हुआ, तभी उस के दिमाग में बदला लेने वाली बात फिर आ गई. अमोल ने खाना छोड़ दिया और किचन की तरफ चल दिया. उस की मां ने बिना खाना खाए उठने की वजह पूछी, लेकिन वह कुछ नहीं बोला. अमोल ने किचन से चाकू उठा कर अपनी जेब में रख लिया. उस की मां पूछती रही, लेकिन उस ने कोई जवाब नहीं दिया. वह घर के बाहर निकल गया. मां पूछने के लिए उस के पीछेपीछे आ रही थी, लेकिन अमोल ने घर का दरवाजा बाहर से बंद कर दिया ताकि मां घर से बाहर न आए. उस की मां, पिता और भांजी घर में ही बंद रह गए. वे समझ नहीं पा रहे थे कि अमोल ने ऐसा क्यों किया.

अपने घर से करीब 70 मीटर दूर वह सीधे विमल के घर में घुस गया. घर में घुसते ही उस ने मुख्य दरवाजा बंद कर दिया. उस समय वह बहुत गुस्से में था. विमल के मांबाप ने जब अमोल को अपने घर में देखा तो उन्होंने उस से वहां आने की वजह पूछी. तभी अमोल ने जेब में रखा चाकू निकाल लिया और अपने दोस्त दिनकर बोर्डे की तरफ बढ़ा. अमोल को गुस्से में देख कर भगवान बोर्डे अपनी जान बचाने के लिए भागा. अमोल ने दौड़ कर भगवान को पकड़ लिया और उस की गरदन पर चाकू से वार कर दिया. तभी भगवान के मातापिता भी वहां आ गए. बेटे के खून के छींटें उन के ऊपर भी गए. दिनकर भगवान बोर्डे वहीं गिर गया और कुछ ही देर में उस की मृत्यु हो गई.

इस के बाद अमोल बोर्डे ने दिनकर की मां कमलाबाई पर हमला किया. फिर उस ने उस के पिता को भी निशाने पर ले लिया. इस तरह उस ने परिवार के 3 लोगों की हत्या कर दी. इस दौरान विमल दरवाजा खोल कर बाहर भाग गई थी. विमल ने यह बात पड़ोसियों को बताई तो वे घरों से बाहर निकल आए. 3 हत्याएं करने के बाद अमोल खून सना चाकू ले कर घर से बाहर निकला तो कई लोग वहां खड़े थे. लेकिन अमोल की आंखों में तैर रहे गुस्से और खून सने चाकू को देख कर कोई भी कुछ कह नहीं सका और वह वहां से चला गया.

किसी ने इस तिहरे हत्याकांड की खबर पुलिस को दे दी थी. सूचना मिलने पर एमआईडीसी सिडको थाने के प्रभारी सुरेंद्र मोलाले थोड़ी देर में दिनकर बोर्डे के घर पहुंच गए. तभी लोगों ने पुलिस को अमोल बोर्डे के बारे में जानकारी दी कि वह चौराहे पर खड़ा है. यह सूचना मिलने के बाद पुलिस ने चौराहे पर खड़े अमोल बोर्डे को हिरासत में ले लिया. थानाप्रभारी सुरेंद्र मोलाले ने अभियुक्त अमोल से ट्रिपल मर्डर के बारे में पूछताछ की तो उस ने सारी कहानी बता दी.

उस ने कहा कि उस ने अपनी बेइज्जती का बदला लेने के लिए इस वारदात को अंजाम दिया. अमोल बोर्डे से पूछताछ करने के बाद पुलिस ने उसे कोर्ट में पेश कर जेल भेज दिया. Crime Story

Hindi Crime Stories: आधी रात के बाद हुस्न और हवस का खेल

Hindi Crime Stories: 18 नवंबर, 2016 की रात के यही कोई डेढ़ बजे मुंबई से सटे जनपद थाणे के उल्लासनगर के थाना विट्ठलवाड़ी के एआई वाई.आर. खैरनार को सूचना मिली कि आशेले पाड़ा परिसर स्थित राजाराम कौंपलेक्स की तीसरी मंजिल स्थित एक फ्लैट में काले रंग के बैग में लाश रखी है. सूचना देने वाले ने बताया था कि उस का नाम शफीउल्ला खान है और उस फ्लैट की चाबी उस के पास है.

35 साल का शफीउल्ला पश्चिम बंगाल के जिला मुर्शिदाबाद की तहसील नगीनबाग के गांव रोशनबाग का रहने वाला था. रोजीरोटी की तलाश में वह करीब 8 साल पहले थाणे आया था, जहां वह उल्लासनगर के आशेले पाड़ा परिसर स्थित राजाराम कौंपलेकस के तीसरी मंजिल स्थित फ्लैट नंबर 308 में अपने परिवार के साथ रहता था. वह राजमिस्त्री का काम कर के गुजरबसर कर रहा था.

उस के फ्लैट से 2 फ्लैट छोड़ कर उस का मामा राजेश खान अपनी प्रेमिकापत्नी खुशबू उर्फ जमीला शेख के साथ रहता था. 10-11 महीने पहले ही खुशबू राजेश खान के साथ इस फ्लैट में रहने आई थी. वह अपना कमातीखाती थी, इसलिए वह राजेश खान पर निर्भर नहीं थी. राजेश खान कभीकभार ही उस के यहां आता था. ज्यादातर वह पश्चिम बंगाल स्थित गांव में ही रहता था.

18 नवंबर की दोपहर शफीउल्ला अपने फ्लैट पर जा रहा था, तभी इमारत की सीढि़यों पर उस की मुलाकात राजेश खान से हो गई. उस समय काफी घबराया होने के साथसाथ वह जल्दबाजी में भी था. लेकिन शफीउल्ला सामने पड़ गया तो उस ने रुक कर कहा, ‘‘शफी, अगर तुम मेरे साथ नीचे चलते तो मैं तुम्हें एक जरूरी बात बताता.’’

‘‘इस समय तो मैं कहीं नहीं जा सकता, क्योंकि मुझे बहुत तेज भूख लगी है. जो भी बात है, बाद में कर लेंगे.’’ कह कर शफीउल्ला जैसे ही आगे बढ़ा, राजेश खान ने पीछे से कहा, ‘‘यह रही मेरे फ्लैट की चाबी, रख लो. तुम्हारी मामी मुझ से लड़झगड़ कर कहीं चली गई है. मैं उसे खोजने जा रहा हूं. मेरी अनुपस्थिति में अगर वह आ जाए तो यह चाबी उसे दे देना. बाकी बातें मैं फोन से कर लूंगा.’’

राजेश खान से फ्लैट की चाबी ले कर शफीउल्ला अपने फ्लैट पर चला गया तो राजेश खान नीचे उतर गया.  करीब 12 घंटे बीत गए. इस बीच न राजेश खान आया और न ही उस की पत्नी खुशबू आई. शफीउल्ला को चिंता हुई तो उस ने दोनों को फोन कर के संपर्क करना चाहा. लेकिन दोनों के ही नंबर बंद मिले.

शफीउल्ला सोचने लगा कि अब उसे क्या करना चाहिए. वह कुछ करता, उस के पहले ही रात के करीब एक बजे उस के फोन पर राजेश खान का फोन आया. उस के फोन रिसीव करते ही उस ने पूछा, ‘‘तेरी मामी आई या नहीं?’’

‘‘नहीं मामी तो अभी तक नहीं आई. यह बताओ कि इस समय तुम कहां हो?’’ शफीउल्ला ने पूछा.

‘‘तुम्हें राज की एक बात बताता हूं. अब तुम्हारी मामी कभी नहीं आएगी, क्योंकि मैं ने उसे मार दिया है. इस में मुझे तुम्हारी मदद चाहिए. मेरे फ्लैट के बैडरूम में बैड के नीचे काले रंग का एक बैग पड़ा है, उसी में तुम्हारी मामी की लाश रखी है. तुम उसे ले जा कर कहीं फेंक दो. जल्दबाजी में मैं उसे फेंक नहीं पाया. इस समय मैं ट्रेन में हूं और गांव जा रहा हूं.’’

खुशबू की हत्या की बात सुन कर शफीउल्ला के होश उड़ गए. उस ने उस बैग के बारे में आसपड़ोस वालों को बताया तो सभी इकट्ठा हो गए. उन्हीं के सुझाव पर इस बात की सूचना शफीउल्ला ने थाना विट्ठलवाड़ी पुलिस को दे दी थी.

एआई वाई.आर. खैरनार ने तुरंत इस सूचना की डायरी बनवाई और थानाप्रभारी सुरेंद्र शिरसाट तथा पुलिस कंट्रोल रूम एवं पुलिस अधिकारियों को सूचना दे कर वह कुछ सिपाहियों के साथ राजाराम कौंपलेक्स पहुंच गए. रात का समय था, फिर भी उस फ्लैट के बाहर इमारत के काफी लोग जमा थे. उन के पहुंचते ही शफीउल्ला ने आगे बढ़ कर उन्हें फ्लैट की चाबी थमा दी.

फ्लैट का ताला खोल कर वाई.आर. खैरनार सहायकों के साथ अंदर दाखिल हुए तो बैडरूम में रखा वह काले रंग का बैग मिल गया. उन्होंने उसे हौल में मंगा कर खुलवाया तो उस में उन्हें एक महिला की लाश मिली.

बैग से बरामद लाश की शिनाख्त की कोई परेशानी नहीं हुई. शफीउल्ला ने उस के बारे में सब कुछ बता दिया. लाश बैग से निकाल कर वाई.आर. खैरनार जांच में जुट गए. वह घटनास्थल और लाश का निरीक्षण कर रहे थे कि थानाप्रभारी सुरेंद्र शिरसाट, एसीपी अतितोष डुंबरे, एडिशनल सीपी शरद शेलार, डीसीपी सुनील भारद्वाज, अंबरनाथ घोरपड़े के साथ आ पहुंचे.

फोरैंसिक टीम के साथ पुलिस अधिकारियों ने भी घटनास्थल और लाशों का निरीक्षण किया. अपना काम निपटा कर थोड़ी ही देर में सारे अधिकारी चले गए.

लाश के निरीक्षण में स्पष्ट नजर आ रहा था कि मृतका की बेल्ट से जम कर पिटाई की गई थी. उस के शरीर पर तमाम लालकाले निशान उभरे हुए थे. कुछ घावों से अभी भी खून रिस रहा था. उस के गले पर दबाने का निशान था. लाश और घटनास्थल का निरीक्षण कर के सुरेंद्र शिरसाट ने लाश को पोस्टमार्टम के लिए उल्लासनगर के मध्यवर्ती अस्पताल भिजवा दिया.

घटनास्थल की पूरी काररवाई निपटा कर सुरेंद्र शिरसाट थाने लौट आए और सहयोगियों से सलाहमशविरा कर के इस हत्याकांड की जांच एआई वाई.आर. खैरनार को सौंप दी.

वाई.आर. खैरनार ने मामले की जांच के लिए अपनी एक टीम बनाई, जिस में उन्होंने एआई प्रमोद चौधरी, ए. शेख के अलावा हैडकांस्टेबल दादाभाऊ पाटिल, दिनेश चित्ते, अजित सांलुके तथा महिला सिपाही ज्योति शिंदे को शामिल किया.

पुलिस को शफीउल्ला से पूछताछ में पता चल गया था कि राजेश खान ने कत्ल कर के गांव जाने के लिए कल्याण रेलवे स्टेशन से ज्ञानेश्वरी एक्सप्रैस पकड़ ली है. अब पुलिस के लिए यह चुनौती थी कि वह गांव पहुंचे, उस के पहले ही उसे पकड़ ले. अगर वह गांव पहुंच गया और उसे पुलिस के बारे में पता चल गया तो वह भाग सकता था.

इस बात का अंदाजा लगते ही पुलिस टीम ने जांच में तेजी लाते हुए राजेश खान के मोबाइल की लोकेशन पता की तो वह जिस ट्रेन से गांव जा रहा था, वहां से उसे गांव पहुंचने में करीब 10 घंटे का समय लगता.

पुलिस टीम किसी भी तरह उसे हाथ से जाने देना नहीं चाहती थी, इसलिए वाई.आर. खैरनार ने सीनियर अधिकारियों से बात कर के राजेश खान की गिरफ्तारी के लिए एआई ए. शेख और हैडकांस्टेबल माने को हवाई जहाज से कोलकाता भेज दिया. दोनों राजेश के पहुंचने से पहले ही हावड़ा रेलवे स्टेशन पर पहुंच गए और उसे गिरफ्तार कर लिया.

26 साल के राजेश खान को मुंबई ला कर पूछताछ की गई तो उस ने खुशबू से प्रेम होने से ले कर उस की हत्या तक की जो कहानी सुनाई, वह इस प्रकार थी—

राजेश खान पश्चिम बंगाल के जनपद मुर्शिदाबाद की तहसील नगीनबाग के गांव रोशनबाग का रहने वाला था. गांव में वह मातापिता एवं भाईबहनों के साथ रहता था. गांव में उस के पास खेती की जमीन तो थी ही, बाजार में कपड़ों की दुकान भी थी, जो ठीकठाक चलती थी. उसी दुकान के लिए वह कपड़ा लेने थाणे के उल्लासनगर आता था. वह जब भी कपड़े लेने उल्लासनगर आता था, अपने भांजे शफीउल्ला से मिलने जरूर आता था.

24 साल की खुशबू उर्फ जमीला से राजेश खान की मुलाकात उस की कपड़ों की दुकान पर हुई थी. वह उसी के गांव के पास की ही रहने वाली थी. उस की शादी ऐसे परिवार में हुई थी, जिस की आर्थिक स्थिति काफी खराब थी. वह जिन सपनों और उम्मीदों के साथ ससुराल आई थी, वे उसे पूरे होते नजर नहीं आ रहे थे. खुली हवा में सांस लेना घूमनाफिरना, मनमाफिक पहननाओढ़ना उस परिवार में कभी संभव नहीं था.

इसलिए जल्दी ही वहां खुशबू का दम घुटने लगा. खुली हवा में सांस लेने के लिए उस का मन मचल उठा. दुकान पर आनेजाने में जब उस ने राजेश खान की आंखों में अपने लिए चाहत देखी तो वह भी उस की ओर आकर्षित हो उठी.

चाहत दोनों ओर थी, इसलिए कुछ ही दिनों में दोनों एकदूसरे के करीब आ गए. जल्दी ही उन की हालत यह हो गई कि दिन में जब तक दोनों एक बार एकदूसरे को देख नहीं लेते, उन्हें चैन नहीं मिलता. उन के प्यार की जानकारी गांव वालों को हुई तो उन के प्यार को ले कर हंगामा होता, उस के पहले ही वह खुशबू को ले कर मुंबई आ गया और किराए का फ्लैट ले कर उसी में उस के साथ रहने लगा. मुंबई में उस ने उस से निकाह भी कर लिया.

मुंबई पहुंच कर खुशबू ने आत्मनिर्भर होने के लिए एक ब्यूटीपार्लर में नौकरी कर ली. इस से राजेश खान चिंता मुक्त हो गया. वह महीने में 10-15 दिन मुंबई में खुशबू के साथ रहता था तो बाकी दिन गांव में रहता था.

मुंबई आ कर खुशबू में काफी बदलाव आ गया था. ब्यूटीपार्लर में काम करने के बाद उस के पास जो समय बचता था, उस समय का सदुपयोग करते हुए अधिक कमाई के लिए वह बीयर बार में काम करने चली जाती थी. पैसा आया तो उस ने रहने का ठिकाना बदल दिया. अब वह उसी इमारत में आ कर रहने लगी, जहां शफीउल्ला अपने परिवार के साथ रहता था. वहां उस ने सुखसुविधा के सारे साधन भी जुटा लिए थे.

खुशबू के रहनसहन को देख कर राजेश खान के मन संदेह हुआ. उस ने उस के बारे में पता किया. जब उसे पता चला कि खुशबू ब्यूटीपार्लर में काम करने के अलावा बीयर बार में भी काम करती है तो उस ने उसे बीयर बार में काम करने से मना किया. लेकिन उस के मना करने के बावजूद खुशबू बीयर बार में काम करती रही. इस से राजेश खान का संदेह बढ़ता गया.

18 नवंबर की सुबह खुशबू बीयर बार की ड्यूटी खत्म कर के फ्लैट पर आई तो राजेश खान को अपना इंतजार करते पाया. उस समय वह काफी गुस्से में था. उस के पूछने पर खुशबू ने जब सीधा उत्तर नहीं दिया तो वह उस पर भड़क उठा. वह उस के साथ मारपीट करने लगा तो खुशबू ने साफसाफ कह दिया, ‘‘मैं तुम्हारी पत्नी हूं, गुलाम नहीं कि जो तुम कहोगे, मैं वहीं करूंगी.’’

‘‘खुशबू, तुम मेरी पत्नी ही नहीं, प्रेमिका भी हो. मैं तुम्हें बहुत प्यार करता हूं. तुम अपनी ब्यूटीपार्लर वाली नौकरी करो, मैं उस के लिए मना नहीं करता. लेकिन बीयर बार में काम करना मुझे पसंद नहीं है. मैं नहीं चाहता कि लोग तुम्हें गंदी नजरों से ताकें.’’

‘‘मैं जो कर रही हूं, सोचसमझ कर कर रही हूं. अभी मेरी कमानेखाने की उम्र है, इसलिए मैं जो करना चाहती हूं, वह मुझे करने दो.’’ कह कर खुशबू बैडरूम में जा कर कपड़े बदलने लगी.

राजेश खान को खुशबू से ऐसी बातों की जरा भी उम्मीद नहीं थी. वह भी खुशबू के पीछेपीछे बैडरूम में चला गया और उसे समझाने की गरज से बोला, ‘‘इस का मतलब तुम मुझे प्यार नहीं करती. लगता है, तुम्हारी जिंदगी में कोई और आ गया है?’’

‘‘तुम्हें जो समझना है, समझो. लेकिन इस समय मैं थकी हुई हूं और मुझे नींद आ रही है. अब मैं सोने जा रही हूं. अच्छा होगा कि तुम अभी मुझे परेशान मत करो.’’

खुशबू की इन बातों से राजेश खान का गुस्सा बढ़ गया. उस की आंखों में नफरत उतर आई. उस ने चीखते हुए कहा, ‘‘मेरी नींद को हराम कर के तुम सोने जा रही हो. लेकिन अब मैं तुम्हें सोने नहीं दूंगा.’’

यह कह कर राजेश खान खुशबू की बुरी तरह से पिटाई करने लगा. हाथपैर से ही नहीं, उस ने उसे बेल्ट से भी मारा. इस पर भी उस का गुस्सा शांत नहीं हुआ तो फर्श पर पड़ी दर्द से कराह रही खुशबू के सीने पर सवार हो गया और दोनों हाथों से उस का गला दबा कर उसे मौत के घाट उतार दिया.

खुशबू के मर जाने के बाद जब उस का गुस्सा शांत हुआ तो उस के पैरों तले से जमीन खिसक गई. उसे जेल जाने का डर सताने लगा. वह लाश को ठिकाने लगाने के बारे में सोचने लगा. काफी सोचविचार कर उस ने लाश को फ्लैट में ही छिपा कर गांव भाग जाने में अपनी भलाई समझी. उस का सोचना था कि अगर वह गांव पहुंच गया तो पुलिस उसे कभी पकड़ नहीं पाएगी.

उस ने बैडरूम मे रखे खुशबू के बैग को खाली किया और उस में उस की लाश को मोड़ कर रख कर उसे बैड के नीचे खिसका दिया. वह दरवाजे पर ताला लगा कर बाहर निकल रहा था, तभी उस का भांजा शफीउल्ला उसे सीढि़यों पर मिल गया, जिस की वजह से खुशबू की हत्या का रहस्य उजागर हो गया.

घर की चाबी शफीउल्ला को दे कर वह सीधे कल्याण रेलवे स्टेशन पहुंचा और वहां से कोलकाता जाने वाली ज्ञानेश्वरी एक्सप्रैस पकड़ कर गांव के लिए चल पड़ा.

राजेश खान से पूछताछ के बाद पुलिस ने उस के खिलाफ अपराध संख्या 324/2016 पर खुशबू की हत्या का मुकदमा दर्ज कर उसे मैट्रोपौलिटन मजिस्ट्रैट के सामने पेश किया, जहां से उसे जेल भेज दिया गया. मामले की जांच एआई वाई.आर. खैरनार कर रहे थे. Hindi Crime Stories

– कथा पुलिस सूत्रों पर आधारित

Superstition Crime Story: तांत्रिक को न्योते का खतरनाक नतीजा

Superstition Crime Story:  उत्तर प्रदेश के बागपत जिले के नौशाद नामक शख्स के गेहूं के खेत में 11 अप्रैल, 2016 की सुबह लोगों ने एक नौजवान की लाश देख कर पुलिस को सूचना दी. तकरीबन 30 साला नौजवान खून से लथपथ था. उस की हत्या किसी धारदार हथियार से गरदन काट कर की गई थी. उस की पैंट भी नदारद थी. पुलिस नौजवान की शिनाख्त कराने में नाकाम रही. मामला दर्ज कर के पुलिस ने जांचपड़ताल शुरू कर दी. कई दिनों तक कोई नतीजा नहीं निकला.

इधर 16 अप्रैल, 2016 को दिल्ली के जहांगीरपुरी इलाके के कुछ लोग थाना कोतवाली पहुंचे. उन लोगों के मुताबिक, उन के परिवार का एक नौजवान ब्रजेश यादव लापता था. उन्हें पता चला कि उन के यहां कोई लाश मिली है. पुलिस ने फोटो और बरामद सामान दिखाया, तो मृतक की पहचान ब्रजेश के रूप में हो गई.

पुलिस को ताज्जुब यह था कि वे लोग दिल्ली से बागपत किस सूचना पर पहुंचे थे. ब्रजेश के परिवार वालों ने अपने साथ आए नौजवान की ओर इशारा कर के बताया कि वह तांत्रिक है और उस के सिर पर आए जिन्न ने ही बताया था कि लापता ब्रजेश बागपत में यमुना किनारे मरा मिला है. पुलिस को उस तथाकथित तांत्रिक की हरकतें कुछ ठीक नहीं लगीं, तो उसे हिरासत में ले लिया गया. उस तांत्रिक से सख्ती से पूछताछ हुई, तो मामला खुला.

यों उलझे जाल में

दरअसल, गिरफ्तार तांत्रिक इलियास बागपत इलाके का ही रहने वाला था. आवारागर्दी और ठगबाज लोगों की संगत ने उसे पाखंडी बना दिया. उस ने दाढ़ी बढ़ाई और सफेद कपड़े पहन कर तंत्रमंत्र के ढोंग कर लोगों को ठगना शुरू कर दिया. उस ने अपने कई आवारा दोस्त भी अपने साथ मिला लिए, जो उस के चमत्कार के किस्से लोगों को मिर्चमसाला लगा कर सुनाते थे.

समाज में पाखंडियों पर भरोसा करने वाले लोगों की कमी नहीं होती. आज भी लोग तांत्रिकों की तमाम बुरी करतूतों के बाद अपनी तकलीफों का इलाज झाड़फूंक, तंत्रमंत्र में खोजते हैं. ऐसे ही लोगों के पैसे पर वह भी मौज करने लगा.

जहांगीरपुरी के रहने वाले राजू यादव की पत्नी लीला देवी की तबीयत खराब रहती थी. पहले उस का डाक्टर से इलाज कराया. जब उसे कोई फायदा नहीं हुआ, तो उन्होंने मुल्लामौलवियों में झाड़फूक के सहारे इलाज की खोज शुरू कीं. वे इलियास से मिले, तो उस ने खुद को पहुंचा हुआ तांत्रिक बताया और तंत्र विद्या के बल पर इलाज करने को तैयार हो गया. यादव परिवार उसे आसान शिकार लगा. अपने सिर पर वह जिन्न आने की बात करता और इलाज करने का ढोंग करता. चमत्कार की आस में पूरा परिवार उस के झांसे में आ गया.

इलियास अकसर उस के घर पहुंच जाता. इस दौरान उस की खूब इज्जत होती और मुंहमांगी रकम भी मिलती. जिन्न को खुश करने के नाम पर वह शराब और कबाब की दावत भी उड़ाता. यादव परिवार उसे न्योता दे कर सोच रहा था कि वह उन्हें सारे दुखों से नजात दिला देगा. पाखंड के दम पर तांत्रिक मौज करता रहा. महीनों इलाज का फायदा नहीं दिखा, तो उस ने बहका दिया कि बुरी आत्माओं का साया पूरे परिवार पर है. उन्होंने लीला देवी को जकड़ लिया है. वे आत्माएं धीरेधीरे ही उस की तंत्र क्रियाओं से जाएंगी.

एक दिन लीला देवी का बेटा ब्रजेश अचानक गायब हुआ, तो परिवार के लोगों ने उस की खोजबीन शुरू की. दिल्ली में कई जगह वह उसे ढूंढ़ते रहे. कोई समझ नहीं पा रहा था कि वह कहां चला गया था. इस खोजबीन में इलियास भी उन के साथ रहता. जब सभी थक गए, तो इलियास ने तंत्र विद्या के बल पर ब्रजेश का पता लगाने की बात की और तंत्र क्रिया के नाम पर रुपए ऐंठ लिए. इस के बाद उस ने बताया कि उस के सिर पर आए जिन्न ने बताया है कि बागपत में यमुना किनारे ब्रजेश को मार दिया गया है.

सब लोगों के साथ वह भी थाने पहुंचा, तो उस की बात एकदम सच निकली, लेकिन वह पुलिस के जाल में खुद ही उलझ गया.

इसलिए की हत्या

दरअसल, यादव परिवार तांत्रिक  इलियास का पूरी तरह मुरीद हो गया था. उन के पैसे पर वह मौज कर रहा था. तंत्र क्रियाओं के नाम पर शराब के साथ दावतें लेता था. परिवार की एक लड़की को भी उस ने अपने प्रेमजाल में फांस लिया और डोरे डालने शुरू कर दिए. ब्रजेश को उस की हरकतें पसंद नहीं आईं. उसे यह भी लगने लगा कि तंत्र क्रिया की आड़ में इलियास उन लोगों को लूट रहा है.

इलियास को यह बात अखर गई. यादव परिवार उस के लिए सोने के अंडे देने वाली मुरगी बन गया था. उन की जायदाद पर उस की नजर थी. सभी का विश्वास उस ने अपने पाखंड से जीत लिया था. अपने पाखंड के पैर जमाए रखने के लिए उस ने ब्रजेश को ही रास्ते से हटाने का फैसला कर लिया. एक दिन उस ने ब्रजेश को बताया कि उसे अपनी तंत्र क्रियाओं से पता चला है कि बागपत में गंगा किनारे खजाना दबा हुआ है, लेकिन उसे वह खुद नहीं निकाल सकता. उस ने ब्रजेश को समझाया कि उसे वह निकाल ले, बाद में दोनों आधाआधा बांट लेंगे. ऐसे में उस से जिन्न भी नाराज नहीं होंगे.

ब्रजेश को उस ने यह भी समझाया कि वह यह बात किसी को न बताए, वरना खजाना गायब हो जाएगा और उस के हाथ कुछ भी नहीं आएगा. ब्रजेश उस के झांसे में आ गया. 10 अप्रैल की शाम को वह इलियास के साथ बागपत पहुंच गया. अंधेरा होने पर इलियास उसे खेत में ले गया. ब्रजेश को जान का खतरा महसूस हुआ, तो वहां दोनों के बीच लड़ाई हो गई, लेकिन इलियास ने गंड़ासे से उस की गरदन काट कर हत्या कर दी.

ब्रजेश की पहचान जल्द न हो, इसलिए उस ने उस की पैंट उतार कर छिपा दी. इस दौरान इलियास के माथे पर भी चोट आई. बाद में वह ब्रजेश के परिवार में पहुंचा. वह भी ब्रजेश की खोजबीन कराता रहा. उस पर शक न हो, इसलिए उस ने जिन्न वाली मनगढ़ंत कहानी बताई. पाखंडी की पोल खुलने से यादव परिवार के पास पछताने के सिवा कुछ नहीं बचा था. तांत्रिक को न्योता दे कर उस ने धनदौलत और बेटा गंवा दिया था. पाखंडी तांत्रिक अब सलाखों के पीछे है, लेकिन अपनी करतूत का उसे कोई अफसोस नहीं है.

तांत्रिक के कहने पर बनाया चोर

एक नौजवान को तांत्रिक के कहने पर पूरे गांव ने चोर मान लिया. मामला बदायूं के लभारी गांव में सामने आया. दरअसल, हरीकश्यप नामक शख्स के घर से 15 अप्रैल, 2016 को कुछ गहने चोरी हो गए थे. हरी अपने एक तांत्रिक गुरु की शरण में पहुंच गया. तांत्रिक ने पहले पूरी बात सुनी और उस का शक जान कर एक परची पर ‘द’ शब्द से शुरू होने वाला नाम लिख कर उसे थमा दिया. हरी का शक एक झोंपड़ी में रहने वाले दिनेश पर चला गया. अगले दिन गांव में तांत्रिक की मौजूदगी में पंचायत हो गई.

तांत्रिक का कहा लोगों के लिए पत्थर की लकीर हो गया. तांत्रिक ने उस पर जुर्माना थोपने के साथ ही अपनी 5 हजार फीस और आनेजाने का खर्चा भी मांग लिया. दिनेश ने जुर्माना भरने से मना किया, तो उसे गांव से निकल जाने का फरमान सुनाया गया. दिनेश पुलिस की शरण में पहुंच गया. Superstition Crime Story

Family Crime Story: कर्ज चुकाने को भुलाया फर्ज

Family Crime Story: कांचनगरी के नाम से प्रसिद्ध उत्तर प्रदेश के शहर फिरोजाबाद के थाना उत्तर का घनी आबादी वाला मोहल्ला है आर्यनगर. इसी मोहल्ले की गली नंबर-9 में रहते हैं कोयला व्यवसाई लोकेश जिंदल उर्फ बबली. उन की के.डी. कोल ट्रेडर्स नाम से फर्म है.

पहली अप्रैल, 2022 को शाम साढ़े 4 बजे लोकेश के दरवाजे पर लगी कालबैल को किसी ने बजाया. उस समय घर में नौकरानी रेनू शर्मा के अलावा लोकेश की 74 वर्षीय मां कमला अग्रवाल दूसरी मंजिल पर मौजूद थीं. घंटी की आवाज सुन कर रेनू ने दरवाजा खोला. दरवाजे पर 2 युवक खड़े थे. कारोबारी को पूछते हुए दोनों युवक दूसरी मंजिल पर कारोबारी की मां कमला देवी के पास पहुंच गए. दोनों युवक कमला देवी से बातचीत करने लगे. कुछ देर बाद कमला देवी ने रेनू को बुलाया और दोनों मेहमानों के लिए चाय बनाने को कहा. रेनू किचन में चाय बनाने चली गई. जब वह चाय ले कर कमरे में पहुंची तो वहां का नजारा देख कर सन्न रह गई.

माताजी बिस्तर पर लहूलुहान पड़ी थीं. वाशबेसिन का शीशा टूटा पड़ा था. कांच के कुछ टुकड़े बिस्तर पर भी पड़े थे. बदमाशों ने कमला देवी का कांच से गला रेत कर हत्या कर दी थी. कमरे का यह दृश्य देख कर रेनू की चीख निकल गई. एक बदमाश ने रेनू को दबोच लिया. उस की पिटाई कर उसे भी कांच के टुकड़े से घायल कर दिया. धमकी दी कि अगर शोर मचाया तो उसे भी मार देंगे. बदमाश कमरे की अलमारी में रखी नकदी व आभूषण लूट कर भाग गए.

बदमाशों के जाने के बाद रेनू ने शोर मचाया. शोर सुन कर पड़ोसी आ गए. बिस्तर पर कमला देवी की लाश पड़ी थी. इस के साथ ही रेनू घायल थी. वह घबराई हुई थी और रो रही थी. उस दिन अर्पित मां तथा बुआ व चाचा के परिवार के सदस्यों के साथ आसफाबाद स्थित डीडी टाकीज में 3 से 6 बजे शो की मूवी देखने गए हुए थे. वे सब घर से दोपहर ढाई बजे निकले थे. शाम 5 बजे पड़ोसी भाटिया ने फोन कर उन्हें घटना की जानकारी दी.

सभी लोग शो छोड़ कर दौड़ेदौड़े घर पहुंचे. वहां भीड़ और पुलिस को देखते ही परिजनों में हाहाकार मच गया. इस से पहले सूचना मिलने पर थाना उत्तर के थानाप्रभारी संजीव कुमार दुबे अपनी टीम के साथ घटनास्थल पर पंहुच गए थे. तब तक वहां भीड़ जमा हो चुकी थी. मामले की गंभीरता को देखते हुए उन्होंने उच्चाधिकारियों को घटना से अवगत कराया. इस पर एसएसपी आशीष तिवारी, एसपी (सिटी) मुकेशचंद्र मिश्र व अन्य पुलिस अधिकारी घटनास्थल पर पहुंच गए.

एसएसपी आशीष तिवारी ने घटनास्थल का निरीक्षण किया. उन्होंने देखा कि कमला देवी की मौत हो चुकी थी. कमरे में सामान बिखरा पड़ा था. अलमारी खुली पड़ी थी. मृतका के गले, सिर पर चोट के निशान थे. बैड के नीचे खून से सना तकिया पड़ा था. पुलिस ने टापा कलां निवासी घायल नौकरानी रेनू शर्मा को उपचार के लिए प्राइवेट ट्रामा सेंटर भेज दिया. जरूरी काररवाई निपटाने के बाद कमला देवी के शव को मोर्चरी भिजवा दिया.

शहर के व्यस्ततम और तंग गलियों वाले आर्यनगर में दिनदहाड़े दिल दहलाने वाली घटना से सनसनी फैल गई. लोगों के मन में इस बात को ले कर आक्रोश था कि घटनास्थल से थाना कुछ ही दूरी पर स्थित होने के बावजूद पुलिस सूचना देने के आधे घंटे बाद घटनास्थल पर आई. गुस्साए लोगों को एसएसपी आशीष तिवारी ने भरोसा दिया कि इस जघन्य घटना का शीघ्र खुलासा कर दिया जाएगा. कोयला कारोबारी लोकेश जिंदल पिछले 15 दिनों से व्यापार के सिलसिले में गुवाहाटी गए हुए थे. घर पर उन की पत्नी शोभा व बेटा अर्पित थे. अर्पित अपनी मां, चाचा व बुआ के परिवार के साथ मूवी देखने चला गया था.

ऐसा लगता था कि वारदात को अंजाम देने वाले बदमाशों को पहले से घर की पूरी स्थिति का पता था. पुलिस समझ गई थी कि घटना को अंजाम परिचितों द्वारा ही दिया गया है. उपचार के बाद रेनू से पुलिस ने पूछताछ की. रेनू ने बताया कि वह युवकों को नहीं पहचानती. उस ने पूरी घटना पुलिस को बताते हुए कहा, जब उस ने दरवाजा खोला तो 2 लोग खड़े थे. लोकेश बाबूजी को पूछते हुए दोनों अंदर चले आए और सीधे दूसरी मंजिल पर कमरे में माताजी के पास बैठ कर बातें करने लगे. इस से लगा कि वह घरवालों के परिचित हैं. इस तरह नौकरानी ने पूरी बात पुलिस को बता दी.

कारोबारी की मां की हत्या व लूट की गुत्थी नौकरानी के बयानों से उलझ गई थी. जिस तरह से कमला देवी की हत्या की गई, उस से यह बात समझ नहीं आ रही थी कि हत्यारों ने वाशबेसिन पर लगे शीशे को तोड़ कर कांच से हत्या क्यों की? यदि वे हत्या व लूट करने ही आए थे तो अपने साथ कोई हथियार क्यों नहीं लाए? कमला देवी ने चाय बनाने को कहा तो जरूर वे परिचित ही होंगे. घटना के बाद कमला देवी के कमरे में पुलिस को कई अहम सुराग मिले. इन में नौकरानी रेनू की चूडि़यां, चप्पल व कान के कुंडल आखिर वहां कैसे आ गए?

रेनू का कहना था कि बदमाशों द्वारा उस के साथ बुरी तरह मारपीट करने के दौरान ये सभी चीजें वहां गिर गई थीं. नौकरानी के बयानों के हिसाब से पुलिस को साक्ष्य नहीं मिले. परिवार की महिलाओं ने बताया कि यहां से 6 किलोमीटर दूर आसफाबाद स्थित भारत टाकीज में परिवार के सदस्य मूवी ‘द कश्मीर फाइल्स’ देखने गए थे. इस बात की जानकारी केवल रेनू व मां को थी. चाय के प्याले भी नहीं मिले. जिस बरतन में रेनू द्वारा चाय बनाने की बात कही जा रही थी, वह किचन में उसी जगह पर रखा मिला. जहां घर वाले उसे छोड़ कर गए थे. चाय बनाने के कोई सबूत भी नहीं दिखाई दे रहे थे. आसपास के लोगों ने भी 2 लोगों के बाइक से आनेजाने की पुष्टि नहीं की.

इन सब बातों के चलते पुलिस के संदेह की सुई नौकरानी पर भी घूम रही थी. परिवार की महिलाओं ने पुलिस से आरोपियों की गिरफ्तारी की मांग करते हुए न्याय की गुहार लगाई. पूछताछ के दौरान घर वालों ने बताया कि नौकरानी रेनू उन के यहां स्थाई रूप से काम नहीं करती थी. नौकरानी को जरूरत पड़ने पर बुलाया जाता था. बीचबीच में वह अपनी मरजी से आतीजाती थी. शुक्रवार को सभी लोग पिक्चर देखने जा रहे थे, इसलिए मां की देखभाल के लिए उसे बुला लिया था. 3 माह पहले मां की बैक बोन का औपरेशन कराया गया था. तब से ज्यादातर समय वह बिस्तर पर ही गुजारती थीं. लेकिन बेंत के सहारे आसानी से चलफिर लेती थीं.

ऐसा लगता था कि वारदात को अंजाम देने वाले बदमाशों को पहले से ही घर की पूरी स्थिति का पता था कि पहली अप्रैल शुक्रवार को घर में कौनकौन था. एसएसपी आशीष तिवारी ने घटना के खुलासे के लिए फोरैंसिक टीम को भी मौके पर बुला लिया. बदमाशों तक पहुंचने के लिए पुलिस ने क्षेत्र में लगे सीसीटीवी कैमरे खंगालने के साथ ही आसपास के लोगों से घटना के बारे में पूछताछ की. एसओजी के साथ ही 3 थानों की 5 पुलिस टीमें खुलासे के लिए गठित कीं. घटना की जानकारी मिलने पर सदर विधायक मनीष असीजा के साथ ही कई भाजपा नेता भी वहां पहुंच गए. विधायक ने परिजनों को ढांढस बंधाया.

पुलिस टीम में शामिल हत्याकांड का परदाफाश करने वाली टीम में एसपी (सिटी) मुकेश कुमार मिश्र, सीओ (सिटी) हरिमोहन सिंह, थानाप्रभारी (उत्तर) संजीव कुमार दुबे, एसओजी प्रभारी रवि त्यागी, थानाप्रभारी (दक्षिण) रामेंद्र कुमार शुक्ला, थानाप्रभारी (लाइनपार) आजाद पाल, महिला थानाप्रभारी हेमलता, थानाप्रभारी (रामगढ़) हरवेंद्र मिश्रा शामिल थे.

लोकेश जिंदल के मकान पर बदमाशों द्वारा दिनदहाड़े हत्या व लूट को अंजाम दिया गया था. वहां से एसपी (सिटी) मुकेश चंद्र मिश्र का कार्यालय व थाना (उत्तर) करीब 500 मीटर की दूरी पर है. वहीं नगर विधायक मनीष असीजा का आवास महज डेढ़ सौ मीटर व शिकोहाबाद विधायक मुकेश वर्मा का आवास मात्र 50 मीटर दूर है.

इस के बाद भी बदमाश बेखौफ हो कर वारदात को अंजाम दे कर साफ निकल गए. पुलिस को इस की भनक तक नहीं लगी. मामला लोकेश जिंदल की तहरीर पर दर्ज कर लिया गया. सीसीटीवी फुटेज खंगालने के बाद भी पुलिस के हाथ खाली थे. पुलिस को अगर उम्मीद थी तो नौकरानी रेनू शर्मा से ही थी. वही मौके की प्रत्यक्षदर्शी थी. वही बदमाशों के हुलिया की सही जानकारी दे सकती थी, जिस से बदमाश पुलिस की गिरफ्त में आ सकते थे.

पुलिस ने रेनू को विश्वास में ले कर उस से बदमाशों के बारे में गहनता से पूछताछ की. पुलिस ने उसे न्याय दिलाने का भरोसा दिलाया. तब रेनू ने पुलिस को सारी घटना बता दी. तब पुलिस ने बिना देरी किए रात में ही लोहिया नगर से तरुण गोयल को गिरफ्तार कर लिया. दूसरे दिन 2 अप्रैल को एसएसपी आशीष तिवारी ने प्रैस कौन्फ्रैंस बुला कर आर्यनगर में हुई हत्या व लूट की घटना का परदाफाश करते हुए जानकारी दी कि कर्ज में डूबे रिश्तेदार ने ही हत्या व लूट की घटना को अंजाम दिया था.

बदमाश एक ही था. वह भी कोई बाहरी व्यक्ति न हो कर मृतका की बेटी का दामाद था. दामाद होने के कारण उस का घर आनाजाना था उसे सभी सम्मान देते थे. नौकरानी रेनू शर्मा उस से अच्छी तरह परिचित थी. पुलिस ने हत्यारोपी को गिरफ्तार करने के साथ ही उस के कब्जे से लूटे गए 77,620 रुपए तथा ज्वैलरी जिस में सोने की 4 चूडि़यां, कानों के टौप्स, 2 अंगूठियां, चांदी के नोट के साथ आलाकत्ल पेचकस भी बरामद कर लिया. आरोपी ने अपना जुर्म कुबूल कर लिया था. कमला देवी की हत्या लूट के उद्देश्य से की गई थी. पुलिस को वारदात के 12 घंटे बाद ही आरोपी को गिरफ्तार करने में सफलता मिल गई थी.

हत्या व लूट की वारदात को तरुण गोयल ने अंजाम दिया था. वह मूलरूप से मेरठ के सदर बाजार थाना क्षेत्र के बंगला एरिया के मकान नंबर 195 का निवासी है. तरुण मृतका कमला देवी की बेटी रंजना उर्फ पिंकी का दामाद है. वह मेरठ में सेनेटरी का काम करता था. उस का अच्छा कारोबार था. परिजनों के अनुसार क्रिकेट मैचों पर औनलाइन सट्टा खेलने के कारण उस पर 50-60 लाख रुपए का कर्ज हो गया था. तब वह लौकडाउन में भाग कर फिरोजाबाद आ गया था. वह फिरोजाबाद के थाना उत्तर के लोहिया नगर की गली नंबर 2 में घरजमाई बन कर रहने लगा था. यहां रह कर वह सेनेटरी का काम करता था.

तरुण को पता चला कि उस के और नानी सास के परिजन शुक्रवार को एक साथ फिल्म देखने गए हैं और नानी सास ही घर पर अकेली हैं. उस की नजर नानी सास कमला देवी के रुपयों व आभूषणों पर थी. उसे पता था कि लोकेश का कोयले का बड़ा व्यवसाय है. उस ने सुनियोजित षडयंत्र रचा और पहली अप्रैल, 2022 की शाम साढ़े 4 बजे वह आर्यनगर में उन के घर पर पहुंच गया. घंटी बजाने पर रेनू ने दरवाजा खोल दिया. घर पर नौकरानी रेनू को देख कर उसे अपनी योजना पर पानी फिरते दिखा. लेकिन लालच के चलते वह खुद को रोक नहीं सका. दूसरी मंजिल पर वह सीधे कमला देवी के कमरे में पहुंचा.

उस समय कमला देवी सो रही थीं. तरुण ने जैसे ही कमरे में रखी अलमारी खोली. आहट सुन कर कमला देवी जाग गईं. इस पर कमला देवी ने टोका. तभी तरुण ने कमरे में रखे पेचकस से उन के सिर पर वार किया. शोर मचाने पर तरुण ने वाशबेसिन के शीशे को तोड़ दिया और उस के कांच से कमला देवी का गला रेत दिया. आवाज सुन कर रेनू कमरे में आ गई. तरुण ने उसे दबोच लिया और मारपीट करते हुए कांच से उस के शरीर पर वार किए. तरुण ने रेनू की हत्या करने के लिए उस के गले में शीशा फंसा दिया. मगर रेनू गिड़गिड़ाई और पेट में पल रहे बच्चे की दुहाई व राज किसी को न बताने की बात कह कर अपनी जान बचाई.

आरोपी ने रेनू को धमकी देते हुए कहा कि वह घर में 2 बदमाशों के आने की कहानी सभी को बताए. लेकिन उस का नाम हरगिज अपनी जुबान पर न लाए, वरना अंजाम बुरा होगा. इस के बाद अलमारी से नकदी व जेवर लूट कर भाग गया. रेनू ने घटना के बाद हत्यारे द्वारा दी गई धमकी को ध्यान में रखते हुए वैसा ही किया. वह पुलिस को घुमाती रही. इस से पुलिस का शक उसी पर बढ़ता गया. कई घंटे की पूछताछ के बाद आखिर रेनू ने सारा भेद खोल दिया.

हत्याकांड के बाद तरुण खून लगे कपड़े बदलने के लिए अपने घर गया, कपड़े बदले, इस के बाद थाना उत्तर से पुलिस को बुलाने की बात पर वह स्वयं अपनी बाइक से थाने पहुंचा और घटना की जानकारी दी. वारदात के बाद वह लगातार घटनास्थल पर ही रहा ताकि घटना पर नजर रख सके. उसे पता था कि नौकरानी रेनू उस के खिलाफ कुछ नहीं बोलेगी और वह बच निकलेगा. पुलिस द्वारा नानी सास की हत्या कर उन के यहां लूट करने वाले बेटी के दामाद तरुण गोयल को जब जेल ले जाया जा रहा था, तब पत्रकारों ने उस से प्रश्न किया कि जब नौकरानी रेनू शर्मा तुम्हें अच्छी तरह जानती थी, तब तुम ने उस चश्मदीद गवाह को क्यों छोड़ दिया था?

इस पर तरुण ने कहा कि रेनू ने गर्भवती होने की बात बताते हुए 2 जिंदगियों की हत्या नहीं करने की बात कह कर जान की भीख मांगी थी. इस पर उसे जिंदा छोड़ दिया. आरोपी तरुण गोयल को न्यायालय में पेश किया गया, जहां से उसे जेल भेज दिया. आरोपी औनलाइन सट्टा खेलने से कर्जदार हो गया था. उस के शौक भी शानोशौकत वाले थे. उस ने परिस्थितियों का हल निकालने की कोशिश नहीं की.

पैसे के जुनून के चलते घिनौनी साजिश रच कर हत्या व लूट जैसे जघन्य अपराध को अंजाम दे कर रिश्तों में जहर घोलने का काम ही किया. कातिल दामाद के शैतानी दिमाग ने उसे कहीं का नहीं छोड़ा. Family Crime Story

—कथा पुलिस सूत्रों पर आधारित

Romantic Story: बुढ़ापे में दुल्हन कृपया रुकिए

Romantic Story: जिस तरह सड़क पर थोड़ी सी चूक  दुर्घटना आमंत्रित करती है. वैसे ही जिंदगी की अंतिम सीढी में अगर कोई बुजुर्ग धोखे और चालबाजी का शिकार हो जाए तो उसकी जिंदगी नरक बनने से भला कौन बचा सकता है.  दरअसल,छत्तीसगढ़ के बिलासपुर में रिटायर अफसर को बुढ़ापे में शादी महंगी पड़ गयी.लूटेरी दुल्हन ने अफसर से 40 लाख रुपये तो ठगे ही “कार” भी लेकर फरार हो गयी.

अब इस मामले मे, पुलिस शिकायत के बाद जांच कर रही है.  छत्तीसगढ़ के खाद्य विभाग में  अधिकारी रहे एमएल पस्टारिया 77 वर्ष  के हो चुके  हैं, और अपनी अकेली की जिंदगी से अजीज आकर कुछ माह पूर्व  उन्होंने एक  अपरिचित महिला से ब्याह  रचाया. और फिर धीरे-धीरे हो गए ठगी के शिकार । महिला ने उक्त शख्स को धीरे धीरे आईने में उतारा और उसे रुपए पैसों के मामले में नित्य नए  किस्से गढ़ कर रुपए ऐंठती चली गई. श्रीमान बुरी तरह लूट गए तो एक दिन महिला रफूचक्कर हो गई. अब स्थिति यह है कि माया मिली ना राम! ऐसे घटनाक्रम से सबक लेकर कुछ तथ्यों को जाने समझे. ताकि हमारे आसपास, समाज में ऐसी घटनाएं ना हो और लोग सुरक्षित रहें.आबाद रहें.

मेट्रोमोनियल से बचकर

दरअसल ,कुछ समय  पूर्व  उनकी पत्नी का निधन हो गयी था तत्पश्चात बिना सोचे समझे  उन्होंने ‘मैट्रोमानियल’ साइट पर अपना सीवी डाला दिया  था.सीवी के बाद एक महिला ने उनसे संपर्क किया और शादी के लिए हामी भर दी. महिला ने खुद का नाम आशा बताया था. दिसंबर 2016 में  “मध्यप्रदेश में मुख्यमंत्री विधवा एवं परित्याक्ता कन्यादान योजना” का लाभ  उठा कर  दोनों ने विवाह किया . दोनों छत्तीसगढ़ के  बिलासपुर के बंधवापारा में आ कर रहने लगे . इस  दरम्यान  आशादेवी  बीच-बीच में किसी ना किसी बहाने से मायके के नाम पर चली जाती थी. महिला ने श्रीमान  को भरमा कर इस दौरान घूमने फिरने  के नाम पर एक  बेहतरीन कार भी लोन से खरीदवा ली.

महिला के साथ आशीष व राहुल नाम के युवक भी आते थे, जिसे महिला अपना रिश्तेदार बताया करती थी. महिला ने रिटायर अफसर को झांसा दिया कि उसके नाम पर काफी जमीन है, जो बंधक पड़ी हुई हैं. वो अपने रिश्तेदार को जमीन बेचना चाहती है, जिसका सौदा भी वो करोड़ों में कर चुकी है. महिला ने कहा कि बेचने के लिए पहले उसे अपनी जमीन छुडानी पड़ेगी. इस बहाने से एमएल पस्टरिया वह लाखों  रुपये  लेती चली गई. करीब 40 लाख रुपये वो जब ले चुकी श्रीमान को शक होने लगा. रिटायर अधिकारी  ने महिला की बात पर विश्वास पर जेवर बेचकर और उधार लेकर पैसे तक  लिये.

एक दिन जैसा की होना था महिला ने जब देखा कि अब श्रीमान कंगाल हो चुके हैं तो शायद दूसरा शिकार पकड़ने के लिए उड़ गई. इसमें बुजुर्ग अधिकारी ने लिखवाया है कि चार महीने पहले वो जमीन का सौदा कराने के नाम पर गयी और फिर नहीं लौटी यही नहीं महिला जाते-जाते कार भी ले गयी.बहरहाल, बुजुर्गवार थोड़ी समझदारी दिखाते और मेट्रोमोनियल में विज्ञापन देने की बजाय अपने आसपास किसी चिर परिचित महिला से ब्याह रचाते तो उन्हें न ठगी का शिकार होना पड़ता, न हीं धोखा खाकर पुलिस के चक्कर लगाने पड़ते. Romantic Story

Real Crime Story: आस्तीन का सांप – स्वाति बनी शिकार

Real Crime Story: उस दिन गुरुवार था. तारीख थी 2018 की 13 दिसंबर. कोटा के विशेष न्यायिक मजिस्ट्रैट (एनआई एक्ट) राजेंद्र बंशीलाल की अदालत में काफी भीड़ थी. वजह यह थी कि एक नृशंस हत्यारे को उस के अपराध की सजा सुनाई जानी थी. हत्यारे का नाम लालचंद मेहता था और जिन्हें उस ने मौत के घाट उतारा था, वह थीं बीएसएनएल की उपमंडल अधिकारी स्वाति गुप्ता. लालचंद मेहता उन का ड्राइवर रह चुका था. उस के अभद्र व्यवहार को देखते हुए स्वाति गुप्ता ने घटना से 2 दिन पहले ही उसे नौकरी से निकाला था.

3 साल पहले 21 अगस्त, 2015 की रात को लालचंद ने स्वाति की हत्या उन के घर के बाहर तब कर दी थी, जब वह औफिस से लौट कर घर पहुंची थीं. लालचंद ने स्वाति गुप्ता पर चाकू से 10-15 वार किए थे. इस केस में गवाहों के बयान, पुलिस द्वारा जुटाए गए सबूत और अन्य साक्ष्य अदालत के सामने पेश किए जा चुके थे. दोनों पक्षों के वकीलों की जिरह भी हो चुकी थी. सजा के मुद्दे पर बचाव पक्ष के वकील ने कहा था, ‘‘आरोपी का परिवार है, उसे सुधरने का अवसर देने के लिए कम सजा दी जाए.’’

जबकि लोक अभियोजक नित्येंद्र शर्मा तथा परिवादी के वकील मनु शर्मा और भुवनेश शर्मा ने दलील दी थी कि आरोपी लालचंद मेहता मृतका स्वाति का ड्राइवर-कम-केयरटेकर था. परिवादी पक्ष ने उस की हर तरह से मदद की थी, लेकिन उस ने मामूली सी बात पर जघन्य हत्या कर दी थी. इसलिए अदालत को उस के प्रति जरा भी दया नहीं दिखानी चाहिए.

विशेष न्यायिक मजिस्ट्रैट राजेंद्र बंशीलाल जब न्याय के आसन पर बैठ गए तो अदालत में मौजूद सभी लोगों की नजरें उन पर जम गईं. गिलास से एक घूंट पानी पीने के बाद न्यायाधीश ने एक नजर भरी अदालत पर डाली. फिर फाइल पर नजर डाल कर पूछा, ‘‘मुलजिम कोर्ट में मौजूद है?’’

‘‘यस सर,’’ एक पुलिस वाले ने जवाब दिया जो लालचंद को कस्टडी में लिए हुए था.

न्यायाधीश राजेंद्र बंशीलाल ने अपने 49 पेजों के फैसले की फाइल पलटते हुए कहना शुरू किया, ‘‘अदालत ने इस केस के सभी गवाहों को गंभीरतापूर्वक सुना, प्रस्तुत किए गए साक्ष्यों को कानून की कसौटी पर परखा, जानसमझा. बचाव पक्ष और अभियोजन पक्ष की सभी दलीलों को सुना. तकनीकी साक्ष्यों का गहन अध्ययन किया. पूरे केस पर गंभीरतापूर्वक गौर करने के बाद अदालत इस नतीजे पर पहुंची कि लालचंद मेहता ने स्वाति की हत्या बहुत ही नृशंस तरीके से की. यहां तक कि जब उस का चाकू हड्डियों में अटक गया, तब भी उस ने चाकू को जोरों से खींच कर निकाला और फिर वार किए. निस्संदेह यह उस का गंभीर, जघन्य और हृदयविदारक कृत्य था.’’

इस केस का निर्णय जानने से पहले आइए जान लें कि 35 वर्षीय गजेटेड औफिसर स्वाति गुप्ता को क्यों जान गंवानी पड़ी.

बुधवार 20 अगस्त, 2015 को रिमझिम बरसात हो रही थी. रात गहरा चुकी थी और तकरीबन 9 बज चुके थे. बूंदाबादी तब भी जारी थी. घटाटोप आकाश को देख कर लगता था कि देरसवेर तूफानी बारिश होगी.

कोटा शहर के आखिरी छोर पर बसे उपनगर आरके पुरम के थानाप्रभारी जयप्रकाश बेनीवाल तूफानी रात के अंदेशे में अपने सहायकों से रात्रि गश्त को टालने के बारे में विचार कर रहे थे, तभी टेलीफोन की घंटी से उन का ध्यान बंट गया. उन्होंने रिसीवर उठाया तो दूसरी तरफ से भर्राई हुई आवाज आई, ‘‘सर, मेरा नाम दीपेंद्र गुप्ता है. मेरी पत्नी स्वाति गुप्ता का कत्ल हो गया है. हत्यारा मेरा ड्राइवर-कम-केयरटेकर रह चुका लालचंद मेहरा है.’’

हत्या की खबर सुनते ही थानाप्रभारी के चेहरे का रंग बदल गया. उन्होंने पूछा, ‘‘आप अपना पता बताइए.’’

‘‘ई-25, सेक्टर कालोनी, आर.के. पुरम.’’

‘‘ठीक है, मैं फौरन पहुंच रहा हूं.’’ कहते हुए थानाप्रभारी ने फोन डिसकनेक्ट कर दिया. बेनीवाल पुलिस फोर्स के साथ उसी वक्त घटनास्थल की तरफ रवाना हो गए. उस समय रात के करीब साढ़े 9 बज रहे थे.

थानाप्रभारी बेनीवाल अपनी टीम के साथ 15 मिनट में दीपेंद्र गुप्ता के आवास पर पहुंच गए. उन के घर के बाहर भीड़ लगी हुई थी. बेनीवाल की जिप्सी आवास के मेन गेट पर पहुंची. जिप्सी से उतर कर जैसे ही वह आगे बढ़े तो एकाएक उन के पैर खुदबखुद ठिठक गए. गेट पर खून ही खून फैला था. उन्होंने बालकनी की तरफ नजर दौड़ाई तो व्हीलचेयर पर बैठे एक व्यक्ति को लोग संभालने की कोशिश कर रहे थे, जो बुरी तरह बिलख रहा था.

स्थिति का जायजा लेने के बाद थानाप्रभारी बेनीवाल ने फोन कर के एसपी सवाई सिंह गोदारा को वारदात की सूचना दे दी. इस से पहले कि बेनीवाल तहकीकात शुरू करते, एसपी तथा अन्य उच्चाधिकारी फोटोग्राफर व फिंगरप्रिंट एक्सपर्ट के साथ वहां पहुंच गए..

एसपी सवाई सिंह गोदारा और उच्चाधिकारियों के साथ थानाप्रभारी बेनीवाल बालकनी में व्हीलचेयर पर बैठे बिलखते हुए व्यक्ति के पास गए. पता चला कि दीपेंद्र गुप्ता उन्हीं का नाम था. बेनीवाल के ढांढस बंधाने के बाद उन्होंने बताया, ‘‘सर, फोन मैं ने ही किया था.’’

दीपेंद्र गुप्ता ने उन्हें बताया कि उस की पत्नी स्वाति गुप्ता बीएसएनएल कंपनी में उपमंडल अधिकारी थीं. लगभग 9 बजे वह कार से घर लौटी थीं.

जब वह मेनगेट बंद करने गई तभी अचानक वहां छिपे बैठे उन के पूर्व ड्राइवर लालचंद मेहता चाकू ले कर स्वाति पर टूट पड़ा और तब तक चाकू से ताबड़तोड़ वार करता रहा जब तक स्वाति के प्राण नहीं निकल गए. चीखतीचिल्लाती स्वाति लहूलुहान हो कर जमीन पर गिर पड़ीं.

दीपेंद्र की रुलाई फिर फूट पड़ी. उन्होंने सुबकते हुए कहा, ‘‘अपाहिज होने के कारण मैं अपनी पत्नी को हत्यारे से नहीं बचा सका. बादलों की गड़गड़ाहट में हालांकि स्वाति की चीख पुकार और मेरा शोर भले ही दब गया था, लेकिन जिन्होंने सुना वे दौड़ कर पहुंचे, लेकिन तब तक लालचंद भाग चुका था.’’

एक पल रुकने के बाद दीपेंद्र गुप्ता बोले, ‘‘संभवत: स्वाति की सांसों की डोर टूटी नहीं थी, इसलिए पड़ोसी लहूलुहान स्वाति को तुरंत ले अस्पताल गए, लेकिन…’’ कहतेकहते दीपेंद्र का गला फिर रुंध गया.

‘‘स्वाति को बचाया नहीं जा सका. मुझ से बड़ा बदनसीब कौन होगा. जिस की पत्नी को उस के सामने वहशी हत्यारा चाकुओं से गोदता रहा और मैं कुछ नहीं कर पाया?’’

वहशी हत्यारे की करतूत और लाचार पति की बेबसी पर एक बार तो पुलिस अधिकारियों के दिल में भी हूक उठी.

एसपी सवाई सिंह गोदारा ने कुछ सोचते हुए कहा, ‘‘हत्यारे के बारे में मालूम है. वह जल्द ही पुलिस की गिरफ्त में होगा.’’ उन्होंने बेनीवाल से कहा, ‘‘बेनीवाल, मैं चाहता हूं हत्यारा जल्द से जल्द तुम्हारी गिरफ्त में हो. अभी से लग जाओ उस की तलाश में.’’

इस बीच फिंगरप्रिंट एक्सपर्ट और फोटोग्राफर अपना काम कर चुके थे.

‘‘…और हां,’’ एसपी ने बेनीवाल का ध्यान वहां लगे सीसीटीवी कैमरों की तरफ दिलाते हुए कहा, ‘‘इस मामले में लालचंद को पकड़ना तो पहली जरूरत है ही. लेकिन सीसीटीवी फुटेज भी खंगालो, फुटेज में पूरी वारदात नजर आ जाएगी.’’

पुलिस की तत्परता कामयाब रही और देर रात लगभग 2 बजे आरोपी लालचंद को रावतभाटा रोड स्थित मुरगीखाने के पास से गिरफ्तार कर लिया गया. पुलिस ने उस के कब्जे से हत्या में इस्तेमाल किया गया चाकू भी बरामद कर लिया.

इस बीच दीपेंद्र गुप्ता की रिपोर्ट पर भादंवि की धारा 402 और 460 के तहत मुकदमा दर्ज कर लिया गया था. गुप्ता परिवार ने खुद पाला था मौत देने वाले को मौके पर की गई पूछताछ के बाद पुलिस ने स्वाति गुप्ता की लाश मोर्चरी भिजवा दी. पोस्टमार्टम के बाद स्वाति का शव अंत्येष्टि के लिए घर वालों को सौंप दिया गया.

पुलिस के लिए अहम सवाल यह था कि आखिर इतनी हिंसक मनोवृत्ति के व्यक्ति को दीपेंद्र गुप्ता ने ड्राइवर जैसे जिम्मेदार पद पर कैसे नौकरी पर रख लिया. लालचंद पिछले 20 सालों से दीपेंद्र गुप्ता के यहां नौकरी कर रहा था. आखिर उसे किस की सिफारिश पर नौकरी दी गई थी. पुलिस ने यह सवाल दीपेंद्र गुप्ता से पूछा ‘‘उस आदमी के बारे में तो अब मुझे कुछ याद नहीं आ रहा.’’ दीपेंद्र गुप्ता ने कहा, ‘‘उस का कोई रिश्तेदार था, जिस के कहने पर मैं ने लालचंद को अपने यहां नौकरी पर रखा था. लालचंद झालावाड़ जिले के मनोहरथाना कस्बे का रहने वाला था. शायद उस का सिफरिशी रिश्तेदार भी वहीं का था.’’

बेनीवाल ने पूछा, ‘‘जब वह पिछले 20 सालों से आप को यहां काम कर रहा था तो जाहिर है काफी भरोसेमंद रहा होगा. फिर अचानक ऐसा क्या हो गया कि आप ने उसे नौकरी से निकाल दिया.’’

‘‘उस में 2 खामियां थीं…’’ कहतेकहते दीपेंद्र गुप्ता एक पल के लिए सोच में डूब गए. जैसे कुछ याद करने की कोशिश कर रहे हों.

वह फिर बोले, ‘‘दरअसल, उसे एक तो शराब पीने की लत थी और दूसरे वह परिवार की जरूरतों का रोना रो कर हर आठवें दसवें दिन पैसे मांगता. शुरू में मुझे उस की दारूबाजी की खबर नहीं थी. पारिवारिक मुश्किलों का हवाला दे कर वह इस तरह पैसे मांगता था कि मैं मना नहीं कर पाता था. लेकिन स्वाति को यह सब ठीक नहीं लगता था.

दीपेंद्र गुप्ता ने आगे कहा, ‘‘स्वाति ने मुझे कई बार रोका और कहा, ‘बिना किसी की जरूरत को ठीक से समझे बगैर इतनी दरियादिली आप के लिए नुकसानदायक हो सकती है.’ लेकिन मैं ने यह कह कर टाल दिया कि कोई मजबूरी में ही पैसे मांगता है.’’

बेनीवाल दीपेंद्र की बातों को सुनने के साथसाथ समझने की भी कोशिश कर रहे थे. दीपेंद्र ने आगे कहा, ‘‘लेकिन…लालचंद ने शायद मेरी पत्नी स्वाति की आपत्तियों को भांप लिया था. कई मौकों पर मैं ने उसे स्वाति से मुंहजोरी भी करते देखा. मैं ने उसे आड़ेहाथों लेने की कोशिश की. लेकिन उस की मिन्नतों और आइंदा ऐसाकुछ नहीं करने की बातों पर मैं ने उसे बख्श दिया.’’

दीपेंद्र गुप्ता से लालचंद के बारे में काफी जानकारियां मिलीं. लालचंद पिछले 20 सालों से गुप्ता परिवार के यहां काम कर रहा था. अपंग गुप्ता के लिए उसे निकाल कर नए आदमी की तलाश करना पेचीदा काम था.

दरअसल, दीपेंद्र गुप्ता भी एक सफल बिजनैसमैन थे, लेकिन जीवन में घटी एक घटना ने सब कुछ बदल कर रख दिया. दीपेंद्र गुप्ता को उन के दोस्त विनय गुप्ता के नाम से जानते थे. कभी शैक्षिक व्यवसाय से जुड़े दीपेंद्र का लौर्ड बुद्धा कालेज नाम से अपना शैक्षणिक संस्थान था. लेकिन सन 2011 में चंडीगढ़ से कोटा लौटते समय हुए एक रोड ऐक्सीडेंट में उन्हें गंभीर चोटें आईं. ऊपर से इलाज के दौरान उन्हें पैरालिसिस हो गया. तब उन्हें अपना संस्थान बेचना पड़ा.

उन की पत्नी स्वाति गुप्ता उपमंडल अधिकारी थीं, जिन का अच्छाखासा वेतन घर में आता था. इस के अलावा गुप्ता ने अपने आवास के एक बड़े हिस्से को किराए पर भी दे दिया, जिस से मोटी रकम मिलती थी. लालचंद मेहता को दीपेंद्र गुप्ता ने सन 2003 में ड्राइवर की नौकरी पर रखा था. उन की शादी स्वाति से सन 2004 में हुई थी, यानी लालचंद मेहता उन की शादी के एक साल पहले से ही उन के यहां नौकरी कर रहा था.

दीपेंद्र गुप्ता के व्हीलचेयर पर आने के बाद लालचंद सिर्फ ड्राइवर ही नहीं रहा, बल्कि गुप्ता का केयरटेकर भी बन गया. एक तरह से अब दीपेंद्र गुप्ता लालचंद पर निर्भर हो गए थे. लालचंद ने उन की इस लाचारी का फायदा उठाया. वह शराब पी कर घर आने लगा था. गुप्ता के सामने ही स्वाति से बदतमीजी से पेश आने लगा था. अब वह पैसे भी दबाव के साथ मांगने लगा था. उस पर गुप्ता की इतनी रकम उधार हो गई थी कि अपनी 2 सालों की तनख्वाह से भी नहीं चुका सकता था.

उस की दाबधौंस 20 अगस्त, 2015 को दीपेंद्र गुप्ता के सामने आई. उस समय वह दारू के नशे में धुत था. उस की आंखें चढ़ी हुई थीं और स्वाति से अनापशनाप बोल कर पैसे ऐंठने पर उतारू था.

आजिज आ कर स्वाति ने डांटा था लालचंद को पानी सिर से गुजर चुका था. इस से पहले कि गुप्ता कुछ कह पाते, स्वाति ने उसे दो टूक लफ्जों में कह दिया, ‘‘तुम्हें इतना पैसा दिया जा चुका है कि तुम सात जनम तक नहीं उतार सकते. तुम परिवार की जरूरतों के बहाने पैसे मांगते हो और दारू में उड़ा देते हो. फौरन यहां से निकल जाओ. आइंदा इधर का रुख भी मत करना.’’

एसपी सवाई सिंह गोदारा ने इस मामले की सूक्ष्मता से जांच कराई. इस केस में चश्मदीद गवाह कोई नहीं था, लेकिन तकनीकी साक्ष्य इतने मजबूत थे कि उन्हीं की बदौलत केस मृत्युदंड की सजा तक पहुंच पाया.

घर में लगे सीसीटीवी कैमरों में पूरी वारदात की फुटेज मिल गई थी, जिस में लालचंद स्वाति गुप्ता पर चाकू से वार करता हुआ साफ दिखाई दे रहा था.

जांच के दौरान मौके से मिले खून के धब्बे, चाकू में लगा खून और पोस्टमार्टम के दौरान मृतका के शरीर से लिए गए खून के सैंपल का मिलान कराया गया. मौके से मिले फुटप्रिंट का भी आरोपी के फुटप्रिंट से मिलान कराया गया. इन सारे सबूतों को अदालत ने सही माना.

न्यायाधीश राजेंद्र बंशीलाल ने सारे सबूतों, गवाहों और दोनों पक्षों के वकीलों की जिरह सुनने के बाद 49 पेज का फैसला तैयार किया था. अभियुक्त लालचंद को दोषी पहले ही करार दे दिया गया था. 13 दिसंबर, 2018 को उसे सजा सुनाई जानी थी.

न्यायाधीश ने अपना फैसला सुनाते हुए कहा, ‘‘इस में कोई दो राय नहीं कि लालचंद मेहता ने जिस तरह स्वाति की जघन्य हत्या की, वह रेयरेस्ट औफ रेयर की श्रेणी में आता है. लेकिन इस के साथ ही हमें यह भी देखना होगा कि उस ने केवल स्वाति की हत्या ही नहीं की बल्कि अपाहिज दीपेंद्र गुप्ता का सहारा भी छीन लिया. साथ ही उन की मासूम बेटी के सिर से मां का साया भी उठ गया.’’

न्यायाधीश राजेंद्र बंशीलाल ने आगे कहा, ‘‘सारी बातों के मद्देनजर दोषी लालचंद को मृत्युदंड और 30 हजार रुपए जुरमाने की सजा देती है.’’

फैसला सुनाने के बाद न्यायाधीश अपने चैंबर में चले गए.

जज द्वारा सजा सुनाए जाने के बाद पुलिस ने मुलजिम लालचंद मेहता को हिरासत में ले लिया. अदालत द्वारा मुलजिम को मौत की सजा सुनाए जाने पर लोगों ने संतोष व्यक्त किया. Real Crime Story

Social Crime Story: आशिकी ने लगाया गृहस्थी पर ग्रहण

Social Crime Story: सरस्वती को पता चला कि राजपाल का उस की भौजाई से याराना चल रहा है तो उस ने गांव के ही महेश से संबंध बना लिए. इस के बाद ऐसा क्या हुआ कि उसे पति का खून करना पड़ा. शादी के बाद उस की जिंदगी काफी खुशहाल थी. पति और सासससुर का उसे भरपूर प्यार मिलता था. नत्थू सिंह और जाविकी के 2 बेटे थे. बड़ा शिशुपाल और छोटा राजपाल. शादी के कुछ सालों बाद शिशुपाल और उस की पत्नी गुड्डो अपने बच्चों के साथ बगल वाले मकान में अलग रहने लगे थे. छोटे बेटे राजपाल की शादी के बाद जाविकी ने साफ कह दिया था कि बहूबेटा उन के साथ ही रहेंगे.

उत्तर प्रदेश के एटा जिले के गांव फरीदपुर के रहने वाले नत्थू सिंह के छोटे बेटे राजपाल का विवाह बदायूं जिले के गांव कलुआं ढेर निवासी प्रेमपाल की छोटी बेटी सरस्वती के साथ हुआ था. ससुराल में सरस्वती को पति का नहीं, सासससुर का भी खूब प्यार मिला. कालांतर में सरस्वती 3 बेटों, प्रदीप, पवन और मनीष की मां बनी. बेटों के जन्म के बाद ससुराल में सरस्वती का सम्मान और बढ़ गया. राजपाल एटा में नगरिया मोड़ पर स्थित दूध की डेयरी में काम करता था. उसे वहां से जो वेतन मिलता था, उस से परिवार का गुजारा आसानी से हो जाता था. सब कुछ ठीकठाक चल रहा था कि इसी बीच एक दिन सरस्वती की भाभी रामस्नेही उस के यहां आई.

रामस्नेही उस के यहां रही तो 2-3 दिन ही, पर उतने ही दिनों में उस ने सरस्वती के गृहस्थ जीवन में आग लगा दी थी. उस की अपने ननदोई राजपाल से नजदीकियां बढ़ गई थीं, जिस की वजह से राजपाल का पत्नी सरस्वती से मन उचट गया था. उस की दिलचस्पी रामस्नेही में बढ़ गई थी. जल्दी ही सरस्वती को पति का प्यार दिखावा लगने लगा था. इस बारे में जब उस ने पति से पूछा तो वह पत्नी को समझाने के बजाय उस पर खीझ जाता था. पति का यह व्यवहार सरस्वती को जरा भी अच्छा नहीं लगता था. वह मन मसोस कर रह जाती थी.

गांव में राजपाल का एक दोस्त था महेश. उस का उस के यहां काफी आनाजाना था. महेश शादीशुदा था. उसे राजपाल और उस की पत्नी के बीच बढ़ रही दूरियों की जानकारी थी. इसी बात का वह फायदा उठाना चाहता था.

एक दिन महेश राजपाल की गैर मौजूदगी में उस के घर आया. सरस्वती ने उसे देख कर कहा, ‘‘वह तो ड्यूटी पर गए हैं.’’

‘‘जानता हूं भाभी, वह नहीं हैं तो क्या मैं आप से बातें नहीं कर सकता?’’

‘‘हां…हां, क्यों नहीं, आइए.’’ कहते हुए सरस्वती ने उसे घर में आने का इशारा किया.

महेश घर के अंदर आ कर चारपाई पर बैठ गया. उस ने सरस्वती का हालचाल पूछा तो उस ने कहा कि वह बिलकुल ठीक है. महेश ने मौके का फायदा उठाते हुए सरस्वती का हाथ पकड़ कर कहा, ‘‘भाभी, मैं जानता हूं आप कह जरूर रही हैं कि सब ठीक है, लेकिन कुछ भी ठीक नहीं हैं. आप अपने दिल पर हाथ रख कर कहिए कि राजपाल आप का दिल नहीं दुखा रहा है. सब कुछ सहते हुए भी आप के होंठों पर मुसकान है. भाभी, आप अपने मुंह से भले ही न कहें, लेकिन मैं आप का दुख समझता हूं.’’

महेश अपनी मीठीमीठी बातों से सरस्वती को पटाने की कोशिश करने लगा. सरस्वती काफी अवसाद में थी. ऐसी हालत में महेश उसे अपना सा दिखाई देने लगा. तभी महेश चारपाई से उठ कर चलते हुए बोला, ‘‘मेरी समझ में यह नहीं आ रहा है भाभी कि राजपाल इतनी खूबसूरत बीवी की उपेक्षा क्यों कर रहा है?’’

इतना कह कर वह घर से निकल गया. महेश के जाने के बाद सरस्वती उस की बातों पर विचार करने लगी. उसे महेश की बातें बिलकुल ठीक लग रही थीं. उस का ध्यान महेश पर जम गया. अब उस का मन महेश के लिए बेचैन हो उठा. लेकिन इधर वह दिखाई नहीं दे रहा था. एक दिन दोपहर के समय महेश उस के यहां अचानक आ गया. उसे देखते ही वह खुश हो गई. मौका देख कर उस दिन महेश ने कह दिया कि वह उसे प्यार करता है.

सरस्वती कमजोर औरत थी, जरा सा सहारा मिलते ही वह महेश की बांहों में आ गिरी. वह यह भी भूल गई कि वह 3 बच्चों की मां है. उसे पता नहीं था कि पतन का रास्ता बड़ा ही फिसलन भरा होता है. एक बार जो इस पर कदम रख देता है, वह संभल नहीं पाता. सरस्वती के साथ भी यही हुआ. महेश के साथ नजदीकी बनने के बाद वह खुद को उस से अलग नहीं कर पाई. महेश ने जो चाहा था, वह उसे मिल चुका था, इसलिए उस का सरस्वती के यहां वक्तबेवक्त आनाजाना शुरू हो गया था. दोनों ने मिलनेजुलने में सावधानी तो खूब बरती, लेकिन मोहल्ले वालों की नजरों से नहीं बच सके. दोनों के बारे में लोग तरहतरह की बातें करने लगे.

बात राजपाल के कानों तक पहुंची तो उस ने पत्नी से पूछताछ की. पति की तरफ से सरस्वती का मन पहले से ही खट्टा था, इसलिए अपने बारे में कुछ कहने के बजाय उस ने पति को अपनी भाभी रामस्नेही के संबंधों को ले कर खरीखोटी सुना दी. मजबूरन राजपाल को अपना मुंह बंद करना पड़ा. राजपाल के बड़े भाई शिशुपाल का घर बिलकुल बगल में था. शिशुपाल की पत्नी गुड्डो ने जब उसे महेश और सरस्वती के संबंधों के बारे में बताया तो उस ने एक दिन राजपाल को अपने घर बुला कर कहा कि यह सब ठीक नहीं है. महेश का इस तरह सरस्वती से मेलजोल रखने का मतलब क्या है?

भाई की बात सुन कर राजपाल को लगा कि अब उस की मोहल्ले मे खासी बदनामी हो रही है. इस के बाद उस ने गुस्से में सरस्वती की पिटाई कर दी. पिटने के बाद भी सरस्वती कहती रही कि उस के महेश के साथ गलत संबंध नहीं है. लोग वैसे ही उसे बदनाम कर रहे हैं. लेकिन राजपाल को उस की बातों पर यकीन नहीं हुआ. वह अब पत्नी पर निगाह रखने लगा. महेश से संबंध बनने के बाद सरस्वती अपने सासससुर से अलग पति के साथ दूसरे मकान में रहने लगी थी. प्रेमी से मिलने के लिए उस ने एक दूसरा रास्ता निकाल लिया. वह रात के खाने में पति को नींद की गोलियां मिला कर खिला देती थी, जिस से जल्द ही वह गहरी नींद सो जाता था. इस के बाद प्रेमी महेश के साथ वह मौजमस्ती करती थी.

लेकिन एक दिन सरस्वती ने राजपाल को नींद की गोलियां खाने में खिलाईं तो उस के कुछ देर बाद उसे किसी वजह से उलटियां हो गईं, जिस से उस का खाया हुआ ज्यादातर खाना बाहर निकल गया. उलटियां कर के वह बिस्तर पर लेट गया. सरस्वती ने सोचा कि वह सो गया होगा, इसलिए रोज की तरह उस ने महेश को फोन कर दिया. बिना किसी डर के दोनों अपनी हसरतें पूरी करने लगे. उसी दौरान अचानक राजपाल की आंखें खुल गईं. उस के जागते ही महेश वहां से भाग गया. लेकिन राजपाल को पत्नी की हकीकत पता चल गई. उस दिन उस ने उस की खूब पिटाई की.

राजपाल को अब अपनी गृहस्थी बिखरती नजर आ रही थी. उस ने इस बारे में अपने भाई शिशुपाल से बात की. दोनों ने सलाह कर के इस मामले में पंचायत बुलाने का फैसला किया. पंचायत बुलाई गई. पंचायत में महेश के पिता इंदुपाल को भी बुलाया गया. पंचों ने इंदुपाल से साफ कह दिया कि वह महेश को समझा ले, वरना उस के परिवार का हुक्कापानी बंद कर दिया जाएगा.

घर वालों के दबाव में महेश ने सरस्वती से दूरी तो बना ली, लेकिन उस का दिल उस के लिए बेचैन रहता था. उधर सरस्वती की हालत भी बिन पानी मछली जैसी हो रही थी. इस बात ने सरस्वती के मन में पति के प्रति नफरत पैदा कर दी. पतिपत्नी के बीच दूरियां बढ़ती जा रही थीं. उसी बीच एक दिन राजपाल के पास रामस्नेही का फोन आया. उस ने कहा कि उस के पति नौबत सिंह की तबीयत बहुत ज्यादा खराब हो गई है.

राजपाल ने नौबत सिंह की बीमारी की बात सरस्वती को बताई और उसे ले कर कलुआं पहुंच गया. उस ने नौबत सिंह को अस्पताल में भरती करा दिया. लेकिन वह बच नहीं पाया. उस की मौत हो गई. नौबत सिंह की मौत के बाद रामस्नेही एकदम अकेली हो गई. नौबत सिंह रेलवे में नौकरी करता था. अब रामस्नेही राजपाल के सहयोग से मृतक आश्रित के तहत नौकरी पाने की कोशिश करने लगी.

सरस्वती तो कुछ दिनों बाद अपने घर आ गई, पर सलहज की नौकरी के सिलसिले में राजपाल का उस के यहां आनाजाना लगा रहा. सरस्वती मन ही मन बेचैन थी. वह महेश से मिलना चाहती थी, पर उसे एक बुरी खबर मिली कि महेश ट्रैक्टर के नीचे आ गया है, जिस से उस का पैर कट गया है. इस का सरस्वती को बड़ा दुख हुआ. इधर साले नौबत सिंह की मौत के बाद राजपाल सलहज की आर्थिक मदद भी करने लगा था. जब इस बात की जानकारी सरस्वती को हुई तो उस ने ऐसा करने से मना किया.

राजपाल ने उसे यह समझाने की कोशिश की कि रामस्नेही को जब नौकरी मिल जाएगी तो उस के सामने फिर कोई समस्या नहीं रहेगी. शक का एक कीड़ा सरस्वती के दिमाग में और बैठ गया. इसी बीच एक दिन रामस्नेही और उस के बच्चों को राजपाल अपने घर लिवा लाया. वह उस के यहां लगभग 15 दिनों तक रही. उस दौरान राजपाल रामस्नेही से खूब हंसीमजाक करता था. इस बात से सरस्वती को लगा कि उस का पति उस के हाथ से निकल गया है. रामस्नेही तो अपने घर चली गई, पर सरस्वती और राजपाल के रिश्तों में जो कड़वाहट पैदा हुई, वह खत्म नहीं हो सकी. आए दिन उन के बीच झगड़ा होने लगा. सरस्वती का गुस्सा बढ़ता जा रहा था. उसे अपना और अपने बच्चों का भविष्य खतरे में दिखाई देने लगा था.

उस के मन में डर पैदा हो रहा था कि यदि पति ने उसे छोड़ दिया तो वह बच्चों को ले कर कहां जाएगी. राजपाल की अपनी सलहज रामस्नेही से नजदीकी लगातार बढ़ती जा रही थी. अब वह कईकई दिनों तक घर नहीं आता था. वह रामस्नेही के पास चला जाता. सरस्वती जब कभी पूछती तो कह देता कि डेयरी पर ज्यादा काम होने की वजह से वह वहीं रुक गया था. सरस्वती जानती थी कि वह झूठ बोलता है. गुस्से में एक दिन सरस्वती ने अपनी भाभी रामस्नेही को खूब खरीखोटी सुनाई, तब रामस्नेही ने उसे अपने दिल की बात बताते हुए कहा कि वह राजपाल से दूर नहीं रह सकती और वे दोनों साथ रह सकती हैं. सरस्वती आगबबूला होते हुए बोली, ‘‘भाभी, तुम जो कर रही हो, ठीक नहीं है. देखना एक दिन तुम्हें इस का अंजाम भुगतना पड़ेगा.’’

इधर रामस्नेही के भाई को जब बहन की हरकतों की जानकारी हुई तो उस ने भी रामस्नेही को समझाया और कहा कि वह जो कर रही है, उस से समाज में उस की अच्छीखासी बदनामी हो रही है. यह सब ठीक नहीं है. रामस्नेही ने भाई से भी कह दिया कि मरते वक्त उस के पति ने उस का और बच्चों का भार राजपाल पर डाल दिया था. इसलिए अब वह उन के साथ ही रहेगी. बहन के इस जवाब से भाई नाराज हो गया, लेकिन रामस्नेही ने इस की कोई परवाह नहीं की.

अब रामस्नेही और राजपाल ने साथसाथ रहने का फैसला कर लिया. उन्हें समाज की कोई परवाह नहीं थी. रामस्नेही को मर्द की जरूरत थी, वह जरूरत उस के ननदोई राजपाल से पूरी हो रही थी. लोग उस के बारे में क्या कह रहे हैं, इस की उसे कोई परवाह नहीं थी. सरस्वती को इस बात का डर था कि कहीं किसी दिन राजपाल रामस्नेही को ले कर घर न आ जाए. यदि उस ने ऐसा किया तो उसे बाहर का रास्ता दिखा देगा. एक दिन वह अपनी जेठानी गुड्डो के पास जा कर अपनी व्यथा बता कर कहने लगी कि वह राजपाल को समझाए. वह भाभी को अपनी सौत के रूप में स्वीकार नहीं करेगी.

देवरानी की समस्या बड़ी जटिल थी. इसलिए उस ने अपने हिसाब से राजपाल को समझाया, लेकिन राजपाल पर तो इश्क का भूत सवार था. उस ने भाभी की सलाह को एक कान से सुना, दूसरे से निकाल दिया. राजपाल पिछले 15 दिनों से घर नहीं आया था. अचानक 16 अगस्त, 2015 की शाम को आ गया. सरस्वती पहले से ही गुस्से से भरी हुई थी. वह समझ गई कि सौतन के घर से ही आया होगा. वह तुनक कर बोली, ‘‘तुम आ गए?’’

‘‘हां, बहुत काम होता है डेयरी में. आज जा कर फुरसत मिली है.’’ राजपाल ने जवाब दिया.

‘‘मैं अच्छी तरह से जानती हूं कि आजकल तुम कौन सा काम कर रहे हो.’’

‘‘तुम्हें तो जलीकटी सुनाने की आदत हो गई है. अच्छा अब जोरों की भूख लगी है, खाना ले आओ.’’ कह कर राजपाल चारपाई पर बैठ गया. सरस्वती ने एक नजर बच्चों पर डाली. वे डरेसहमे एक तरफ बैठे थे. राजपाल ने एक बार भी उन्हें नहीं देखा. उस का दिल जल गया, उस ने खाने की थाली राजपाल की ओर बढ़ाई और उसी क्षण तय कर लिया कि अब वह और नहीं सहेगी.

राजपाल खापी कर निश्चिंत हो कर चारपाई पर लेट गया. उस की यह निश्चिंतता सरस्वती को अखर गई. बच्चों को खाना खिलाने के बाद उस ने रसोई की सफाई की. इस के बाद वह बच्चों को ले कर ऊपर छत पर चली गई. देर रात को वह उठी और धीरे से नीचे आ गई. राजपाल नीचे चारपाई पर सो रहा था. वह अलमारी के पास गई और धड़कते दिल से दरवाजा खोल कर तमंचा व कारतूस निकाल लाई. तमंचे में कारतूस भरा और राजपाल की चारपाई के पास पहुंच गई. इस से पहले कि उस का इरादा बदल जाता, उस ने तमंचा राजपाल की कनपटी से सटा कर फायर कर दिया. यह 16/17 अगस्त की रात की बात थी.

राजपाल को चीखने का भी मौका नहीं मिला. कुछ ही देर में उस की मौत हो गई. सरस्वती ने कुछ देर बाद मुख्य दरवाजा खोला. बाहर अभी भी सन्नाटा पसरा था. वह तेजी से खेत की ओर बढ़ी, अपने खेत में पहुंच कर उस ने गड्ढा खोदा और उसी में तमंचा दबा दिया. वापस लौट कर उस ने मृत पति पर घृणा भरी नजर डाली और ऊपर जा कर लेट गई. वह सोचने लगी कि अब आगे क्या करना है? सुबह 6 बजे के करीब उठ कर वह अपनी जेठानी के यहां गई और उस से कहा कि राजपाल खून की उलटी कर रहा है. जेठजेठानी घबरा कर उस के यहां आए तो देखा कि राजपाल चारपाई पर लहूलुहान पड़ा था. शिशुपाल ने घूर कर सरस्वती से पूछा, ‘‘किस ने मारी इसे गोली?’’

‘‘मैं क्या जानूं, मैं तो ऊपर सो रही थी.’’ सरस्वती बोली.

शिशुपाल ने उस समय ज्यादा कुछ  कहना उचित नहीं समझा. उस ने पड़ोसियों को इकट्ठा किया और पुलिस को फोन कर दिया. थाना मारघा के थानाप्रभारी घनश्याम सिंह सूचना मिलते ही मयफोर्स के वहां आ गए. उन्होंने राजपाल के शव को देखा, गोली उस की कनपटी पर लगी थी. थानाप्रभारी ने लोगों से पूछताछ की तो लोगों ने बताया कि राजपाल की किसी से कोई दुश्मनी नहीं थी. तभी उन की निगाह सरस्वती की ओर गई, जो चारपाई की पाटी पर सिर रख कर रो रही थी. उन्होंने हैरानी से उसे देखा, फिर पूछा, ‘‘रात में तुम कहां थीं? क्या तुम्हें फायरिंग की भी आवाज नहीं सुनाई दी?’’

‘‘साहब, मैं तो सो रही थी. मैं ने कोई आवाज नहीं सुनी. सुबह उठी तो खून देख कर डर गई और अपनी जेठानी को जा कर बताया.’’ उस ने रोते हुए कहा.

सरस्वती की बौडी लैंग्वेज देख कर थानाप्रभारी को उस पर शक हो गया. खैर, उन्होंने घटनास्थल की काररवाई निपटाने के बाद लाश को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया और हत्या कर मामला दर्ज कर के केस की जांच शुरू कर दी. जांच में उन्हें पता चला कि राजपाल और उस की सलहज रामस्नेही के बीच नाजायज संबंध थे. उन्हें लगा, कहीं यह हत्या इन्हीं संबंधों की वजह से तो नहीं हुई. उन्होंने रामस्नेही से पूछताछ की. उस ने कहा कि यह सब सरस्वती ने किया होगा. इस के बाद थानाप्रभारी ने सरस्वती को थाने बुला कर पूछताछ की. थोड़ी सख्ती के बाद सरस्वती ने सचाई उगल दी. उस ने हत्या का जुर्म स्वीकारते हुए सारी कहानी पुलिस को बता दी.

सरस्वती द्वारा पति की हत्या का गुनाह कबूल कर लेने के बाद पुलिस ने राहत की सांस ली. अब सरस्वती जेल में है. उस की निशानदेही पर हत्या में प्रयुक्त तमंचा पुलिस ने बरामद कर लिया है. Social Crime Story

—कथा पुलिस सूत्रों पर आधारित

UP Crime News: नेतागिरी की आड़ में – पैसों के लालच ने पहुंचाया जेल

UP Crime News: अचानक हुए हजार व 5 सौ के नोटबंदी के फैसले के बाद पूरे देश में अफरातफरी का जो माहौल कायम हुआ, उस से उत्तर प्रदेश का मेरठ शहर भी अछूता नहीं रहा. बैंकों में भीड़ उमड़ पड़ी थी. कोई पुराने नोटों को जमा करना चाहता था तो कोई अपनी जरूरत के हिसाब से नए नोट लेना चाहता था. हर रोज बैंकों में लंबी कतारें लग रही थीं. होने वाली परेशानी से लोगों में गुस्सा भी पनप रहा था. कई दिन बीत जाने के बाद भी हालात जस के तस थे. पुलिस को भी अतिरिक्त ड्यूटी करनी पड़ रही थी. कानूनव्यवस्था की स्थिति न बिगड़े, इस के लिए बैंकों में पुलिस बल तैनात कर दिया गया था. ऐसे में ही एसएसपी जे.

रविंद्र गौड़ को सूचना मिली कि कुछ लोग नए नकली नोटों का धंधा कर रहे हैं. इस के लिए उन्होंने पूरा नेटवर्क भी तैयार कर लिया है. सूचना गंभीर थी, लिहाजा जे. रविंद्र गौड़ ने इस की जानकारी एसपी (क्राइम) अजय सहदेव को दे कर सर्विलांस टीम को अविलंब काररवाई करने के आदेश दिए. थाना पुलिस को भी निर्देश दिए गए कि चैकिंग अभियान चला कर संदिग्ध लोगों की तलाश की जाए. सर्विलांस टीम ने कुछ संदिग्ध लोगों के मोबाइल नंबरों को सर्विलांस पर लगा दिया. 23 दिसंबर, 2016 की रात नेशनल हाइवे संख्या 58 दिल्लीदेहरादून मार्ग स्थित पल्लवपुरम थानाक्षेत्र के मोदी अस्पताल के सामने पुलिस चैकिंग अभियान चला रही थी. आनेजाने वाले संदिग्ध वाहनों की जांच सख्ती से की जा रही थी.

दरअसल पुलिस को सूचना मिली थी कि नकली नोटों का धंधा करने वाले कुछ लोग उधर से निकलने वाले हैं. सीओ वी.एस. वीरकुमार के नेतृत्व में थाना पल्लवपुरम पुलिस और सर्विलांस टीम इस चैकिंग अभियान में लगी थी. पुलिस को एक काले रंग की इंडीवर लग्जरी कार आती दिखाई दी. कार पर किसी पार्टी का झंडा लगा था और उस के अगले शीशे पर बीचोबीच बड़े अक्षरों में वीआईपी लिखा स्टिकर लगा था. पुलिस ने कार को रोका. उस में कुल 3 लोग सवार थे. एक चालक की सीट पर, दूसरा उस की बराबर वाली सीट पर और तीसरा पिछली सीट पर बैठा था. कार रुकवाने पर उस में सवार कुरतापायजामा और जवाहर जैकेट पहने नौजवान ने रौबदार लहजे में पूछा, ‘‘कहिए, क्या बात है, मेरी कार को क्यों रोका?’’

‘‘सर, रूटीन चैकिंग है.’’ एक पुलिस वाले ने कहा.

पुलिस वाले की यह बात उस नौजवान को नागवार गुजरी हो, इस तरह उस ने तंज कसते हुए कहा, ‘‘रूटीन चैकिंग है या आम लोगों को परेशान करने का हथकंडा. आप यह सब करते रहिए और हमें जाने दीजिए.’’

‘‘सौरी सर, हमें आप की कार की तलाशी लेनी होगी.’’ पुलिस वाले ने कहा.

पुलिस वाले का इतना कहना था कि युवक गुस्से में चीखा, ‘‘क्या मतलब है तुम्हारा, हम कोई चोरउचक्के हैं. तुम जानते नहीं मुझे. मैं लोकमत पार्टी का नेता हूं.’’

‘‘वह सब तो ठीक है सर, लेकिन यह हमारी ड्यूटी है. वैसे भी कानून सब के लिए एक है.’’

‘‘पुलिस का काम अपराधियों को पकड़ना है न कि हम जैसे लोगों को परेशान करना. मेरी पहुंच बहुत ऊपर तक है. अगर मैं अपने पावर का इस्तेमाल करने पर आ गया तो एकएक की वरदी उतर जाएगी.’’ युवक ने धमकी दी.

वह युवक चैकिंग का जिस तरह विरोध कर रहा था, उस से पुलिस को उस पर शक हुआ. एक बात यह भी थी कि कई बार शातिर लोग इस तरह की कारों का इस्तेमाल गलत कामों के लिए करते हैं. पुलिस ने तीनों युवकों को जबरदस्ती नीचे उतारा और कार की तलाशी शुरू कर दी. पुलिस को कार में एक बैग मिला. पुलिस ने जब उस बैग को खोला तो उस में 2 हजार और 5 सौ के नए नोट बरामद हुए. उन के मिलते ही पुलिस को धमका रहे युवक के चेहरे पर हवाइयां उड़ने लगीं. पुलिस ने बरामद रकम को गिना तो वह 4 लाख 27 हजार रुपए निकली. पुलिस ने उस के बारे में पूछा, ‘‘यह पैसा कहां से आया?’’

‘‘सर, ये हमारे हैं.’’ जवाब देते हुए युवक सकपकाया.

पुलिस ने नोटों पर गौर किया तो उन का कागज न सिर्फ हलका था, बल्कि रंग भी नए नोटों के मुकाबले थोड़ा फीका था. इस से पुलिस को नोटों के नकली होने का शक हुआ. दूसरी तरफ बरामद रकम के बारे में युवक कोई संतोषजनक जवाब नहीं दे सके. पुलिस ने कार की एक बार फिर तलाशी ली तो उस में से एक तमंचा और 2 चाकू बरामद हुए. पुलिस ने तीनों को हिरासत में लिया और थाने ला कर उन से पूछताछ शुरू कर दी. पहले तो उन्होंने पुलिस को चकमा देने का प्रयास किया, लेकिन जब पुलिस ने सख्ती की तो उन्होंने जो सच कबूला, उसे सुन कर पुलिस हैरान रह गई. वे तीनों नकली नोट छाप कर उन्हें बाजार में चलाने का धंधा कर रहे थे.

पुलिस से बहस करने वाला युवक ही इस धंधे का मास्टरमाइंड था. वह एक पार्टी का पदाधिकारी था और नेतागिरी की आड़ में ही नकली नोटों के इस धंधे को अंजाम दे रहा था. वह नकली नोटों के बदले जमा होने वाली असली रकम के बल पर चुनाव लड़ना चाहता था. जिन युवकों को गिरफ्तार किया गया था, उन के नाम मोहम्मद खुशी गांधी, ताहिर और आजाद थे. तीनों मेरठ के ही भावनपुर थानाक्षेत्र के गांव जेई के रहने वाले थे. पुलिस ने उन के गांव जा कर उन की निशानदेही पर खुशी के घर से प्रिंटर, स्कैनर, कटर और एक प्लास्टिक के कट्टे में भरी कागज की कतरनें बरामद कीं. बरामद सामान के साथ पुलिस उन्हें थाने ले आई. पुलिस ने तीनों युवकों से विस्तृत पूछताछ की तो एक युवा नेता के गोरखधंधे की ऐसी कहानी सामने आई, जो हैरान करने वाली थी. मुख्य आरोपी खुशी गांधी हनीफ खां का बेटा था.

हनीफ के पास काफी खेतीबाड़ी थी. सुखीसंपन्न होने की वजह से गांव में उन का रसूख था. खुशी अपने 5 भाइयों में चौथे नंबर पर था. उस के बड़े भाई खेती करते थे. लेकिन खुशी का मन खेती में नहीं लगा. गलत संगत में पड़ने की वजह से उस के कदम बहक गए थे. बेटे का चालचलन देख कर हनीफ ने उसे समझाने की हरसंभव कोशिश की, लेकिन उस के मन में तो कुछ और ही था. खुशी महत्त्वाकांक्षी युवक था. वह दिन में सपने देखता था और ऊंची उड़ान भरना चाहता था. वह इस सच को स्वीकार नहीं करना चाहता था कि बिना मेहनत के सपनों की इमारत खड़ी नहीं होती.

वक्त के साथ खुशी के रिश्ते जरायमपेशा लोगों से भी हो गए. संगत अपना गुल जरूर खिलाती है. कुछ संगत तो कुछ शौर्टकट से अमीर बनने की चाहत उसे जुर्म की डगर पर ले गई. हर गलत काम दफन ही हो जाए, यह जरूरी नहीं है. आखिर एक मामले में वह पुलिस के शिकंजे में आ गया. दरअसल, 2 साल पहले मेरठ के ही टीपीनगर थानाक्षेत्र के एक तेल कारोबारी के यहां डकैती पड़ी. इस मामले में पुलिस ने खुशी को भी गिरफ्तार कर के जेल भेजा था.

कुछ महीने बाद उस की जमानत हो गई थी. अच्छा आदमी वही होता है, जो ठोकर लगने पर संभल जाए. लेकिन खुशी उन लोगों में नहीं था. अपने जैसे युवकों की उस की मंडली थी. वह छोटेमोटे अपराध करने लगा था. किसी का एक बार अपराध में नाम आ जाए और उस के बाद पुलिस उसे परेशान न करे, ऐसा नहीं होता. खुशी पुलिस के निशाने पर आए दिन आने लगा तो खाकी से बचने के लिए उस ने राजनीति को हथियार बना लिया. इस के लिए उस ने अलगअलग पार्टी के नेताओं से रिश्ते बना लिए. वह रैलियों में भी जाता और लड़कों की टोली अपने साथ रखता. अपना रसूख दिखाने के लिए उस ने एक इंडीवर कार खरीद ली.

उस ने नेशनल लोकमत पार्टी का दामन थाम लिया. खुशी युवा था. पार्टी ने न सिर्फ उसे प्रदेश अध्यक्ष बना दिया, बल्कि आने वाले विधानसभा चुनाव के लिए वह पार्टी का प्रत्याशी भी बन गया. कार में सायरन व पार्टी का झंडा लगाने के साथ उस ने उस पर वीआईपी भी लिखवा दिया था. 8 नवंबर को प्रधानमंत्री की नोटबंदी की घोषणा के बाद पुरानी मुद्रा पर रोक लग गई और नई मुद्रा आनी शुरू हुई. खुशी को लगा कि अमीर बनने का यह अच्छा मौका है. उस ने सोचा कि अगर पैसा होगा तो वह चुनाव भी अच्छे से लड़ सकेगा. पैसों के लिए ही उस के मन में नकली नोट छापने का आइडिया आ गया.

उस ने अपने 2 साथियों ताहिर और आजाद से बात की. वह जानता था कि देहाती इलाकों में नई करेंसी में असली और नकली की पहचान करना आसान नहीं है. क्योंकि नए नोट अभी पूरी तरह प्रचलन में नहीं आए हैं. उस ने शहरी बाजारों में भी नकली नोट चलाने के बारे में सोच लिया. इस खुराफाती काम में उस ने जरा भी देरी नहीं की और बाजार से अच्छे किस्म का स्कैनर, प्रिंटर और कागज खरीद लाया. फिर क्या था, उस ने नए नोटों से नकली नोटों के प्रिंट निकालने शुरू कर दिए. खुशी ने शहर जा कर खरीदारी में वे नोट चलाए तो आसानी से चल गए. इस के बाद उस के हौसले बढ़ गए और वह नकली नोट छापने और चलाने लगा. उन रुपयों से उस ने जम कर शौपिंग की.

देहात के भोलेभाले लोगों को भी उस ने अपना निशाना बनाया. खुशी ने नकली नोट चलाने के लिए कुछ एजेंट बना रखे थे, जिन्हें वह 40 हजार के पुराने नोटों के बदले एक लाख के नए नकली नोट देता था. वह कार का सायरन बजाते हुए पुलिस के सामने से निकल जाता और उस पर किसी को शक नहीं होता. वह खादी की आड़ में खाकी वरदी से बचे रहना चाहता था. खुशी शातिर किस्म का युवक था. वह जानता था कि यह काम ज्यादा दिनों तक चलने वाला नहीं है, क्योंकि जल्दी ही लोग असलीनकली नोट में फर्क करना सीख जाएंगे, इसलिए वह जल्दी से जल्दी ज्यादा से ज्यादा नोट खपाने की कोशिश कर रहा था. यही वजह थी कि वह पुलिस के निशाने पर आ गया.

पूछताछ के बाद एसपी (सिटी) आलोक प्रियदर्शी ने पुलिस लाइन में प्रैसवार्ता कर के युवा नेता के कारनामों का खुलासा किया. इस के बाद पुलिस ने खुशी और उस के साथियों को अदालत में पेश किया, जहां से उन्हें 14 दिनों की न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया. कथा लिखे जाने तक तीनों आरोपियों की जमानत नहीं हो सकी थी.

कथा पुलिस सूत्रों पर आधारित