Crime Story Hindi: पुलिस की गिरफ्त में पुलिस

Crime Story Hindi: खूबसूरत महिलाओं के साथ रंगरेलियां मनाने के चक्कर में कई लोग हनीट्रैप में कुछ इस तरह फंस जाते हैं कि पुलिस के पास जाने की भी हिम्मत नहीं जुटा पाते. आशीष के साथ भी ऐसा ही कुछ हुआ लेकिन समय रहते ही उन की बुद्धि काम कर गई और वह एक बड़ी मुसीबत से बच गए.

आशीष अपनी दुकान पर बैठे थे, उसी समय उन के मोबाइल पर किसी अज्ञात नंबर से केवल हाय लिखा हुआ वाट्सऐप मैसेज आया. वह उसे कोई तवज्जो न दे कर अपने काम में लग गए. कुछ देर बाद उसी नंबर से वाट्सऐप पर 2-3 खूबसूरत लड़कियों के फोटो आए. सुंदर लड़कियों के फोटो देख कर उन की जिज्ञासा बढ़ी तो उन्होंने उस नंबर पर फोन किया, जिस नंबर से मैसेज और फोटो आए थे.

दूसरी ओर किसी लड़की ने फोन उठाया तो आशीष ने पूछा, ‘‘आप के नंबर से मेरे पास 2-3 लड़कियों के फोटो भेजे गए हैं. क्या मैं जान सकता हूं कि ये फोटो मुझे क्यों भेजे गए हैं?’’

‘‘सौरी सर, दरअसल ये फोटो मुझे किसी और को भेजने थे, गलती से आप के नंबर पर चले गए. वैसे सर, अगर आप अन्यथा न लें तो क्या मैं जान सकती हूं कि आप कौन और कहां से बोल रहे हैं?’’ लड़की ने कहा.

‘‘मेरा नाम आशीष है और रानीबाग इलाके में मेरी कार एसेसरीज की दुकान है.’’ आशीष ने उसे अपने बारे में बताया.

कुछ लोग आदतन लड़कियों के फोन को ज्यादा तवज्जो देते हैं. ऐसे लोगों के फोन पर अगर किसी लड़की का फोन आ जाए तो वे उस से ज्यादा से ज्यादा देर तक बात करने की कोशिश करते हैं. आशीष भी ऐसे ही लोगों में थे.

‘‘ओके सर.’’ आशीष की हकीकत जान कर लड़की ने कहा.

‘‘वैसे मैडम, क्या मैं जान सकता हूं कि आप कौन हैं और कहां से बोल रही हैं?’’ आशीष ने पूछा.

‘‘जी मेरा नाम प्रीति है और मैं भी दिल्ली में ही रहती हूं. दरअसल, आप के मोबाइल पर जिन लड़कियों के फोटो आए हैं, वे मुझे किसी और को भेजने थे. वैसे अगर आप भी शौकीन हों तो उन में से कोई लड़की पसंद कर सकते हैं.’’ प्रीति ने मीठे स्वर में कहा.

37 साल के आशीष इतने नासमझ नहीं थे कि प्रीति की बातों का मतलब न समझ पाते. वह चूंकि बीवीबच्चों वाले थे, इसलिए मन ललचाने के बावजूद उन्होंने जल्दबाजी में कोई कदम उठाना उचित नहीं समझा. उन्होंने प्रीति को टालने के लिए कहा, ‘‘मैडम, अभी मैं काम में बिजी हूं, जब भी जरूरत होगी, आप को बता दूंगा.’’

‘‘ठीक है सर, आप जब भी चाहें बेझिझक बता दें. एक बार हमारी सेवा लेने के बाद आप की तबीयत खुश हो जाएगी.’’ कह कर प्रीति ने फोन काट दिया.

इस के बाद प्रीति और आशीष के बीच दोस्ती हो गई. दोनों वाट्सऐप पर अकसर बातें करने लगे. 5-6 महीने तक उन के बीच इसी तरह बातें चलती रहीं. एक बार प्रीति ने एक पता दे कर उन्हें मिलने के लिए बुलाया, पर व्यस्तता की वजह से वह जा नहीं सके. 14 मार्च, 2016 को भी आशीष की वाट्सऐप पर प्रीति से बात हुई. प्रीति ने शिकायती लहजे में कहा, ‘‘आप आए नहीं?’’

‘‘आ कर क्या करें, कोई बढि़या चीज तो आप के पास है नहीं. अगर कोई बढि़या माल हो तो बताइए?’’ आशीष ने कहा.

‘‘हमारे पास बढि़या माल भी है, अभी फोटो भेजती हूं.’’ प्रीति ने कहा.

कुछ देर बाद आशीष के वाट्सऐप पर एक लड़की की फोटो आई. वह लाल रंग का स्लीवलैस टौप पहने थी और वाकई खूबसूरत लग रही थी. फोटो देखते ही आशीष उस पर फिदा हो गए. उन्होंने उसी वक्त प्रीति को फोन कर के कहा, ‘‘मैडम, यह लड़की मुझे पसंद है.’’

‘‘आशीष साहब, इस की एक बार की कीमत 3 हजार रुपए है.’’ प्रीति ने कहा.

कीमत सुन कर आशीष चौंक गए क्योंकि इतने कम पैसों में इतनी सुंदर कालगर्ल नहीं मिल सकती. आशीष ने तुरंत कहा, ‘‘कोई बात नहीं मैडम, जब चीज पसंद आ जाए तो हम कीमत नहीं देखते. आप इसे हमारे पास रानीबाग भेज दीजिए.’’

‘‘सौरी सर, लड़की वहां नहीं जा सकती. दरअसल वह कालेज स्टूडेंट है. अपने घर वालों से कोई बहाना कर थोड़ीबहुत देर के लिए घर से निकल सकती है. ऐसा कीजिए, आप 3 बजे तक रोहिणी सेक्टर-15 में बंसल भवन के पास पहुंच जाइए. तब तक लड़की को मैं अपने फ्लैट में बुला लूंगी. आप को हम पिक कर लेंगे.’’

आशीष ने बात करते हुए दुकान में लगी दीवार घड़ी की तरफ देख कर कहा, ‘‘मैडम, 3 तो बजने वाले हैं. मैं इतनी जल्दी रोहिणी कैसे पहुंच पाऊंगा?’’

‘‘कोई बात नहीं सर, सवा 3-साढ़े 3 तक पहुंच जाइए. हम आप को वहीं मिलेंगे.’’ प्रीति बोली.

आशीष की दुकान पर मौजूद लड़के एक कार में एसेसरीज लगाने में जुटे थे. आशीष को सैक्टर-15 पहुंचने की जल्दी थी. उन्होंने लड़कों से कहा कि वह किसी से मिलने जा रहे हैं, थोड़ी देर में लौट आएंगे. इस के बाद वह अपनी कार से रोहिणी सेक्टर-15 के लिए रवाना हो गए. करीब आधे घंटे बाद वह बंसल भवन के नजदीक पहुंचे तो वहां 2 लड़कियां खड़ी मिलीं. उन में से एक तो वही थी, जिस की फोटो प्रीति ने उन्हें भेजी थी. प्रीति को उन्होंने देखा नहीं था. उस से केवल फोन पर ही बातें हुई थीं. इसलिए वह समझ गए कि दूसरी लड़की प्रीति ही होगी.

फिर भी संतुष्टि के लिए उन्होंने कार से उतर कर प्रीति का नंबर मिलाया और उन दोनों लड़कियों की ओर देखने लगे. नंबर मिलाते ही उन दोनों में से एक ने काल रिसीव करते हुए फोन कान से लगाया तो आशीष ने अपना एक हाथ उठा कर इशारा किया तो दोनों लड़कियां उन की कार के नजदीक आ गईं. उन में से एक लड़की ने अपना परिचय प्रीति और दूसरी का परिचय शिखा के रूप में दिया.

कार को वहीं पार्किंग में लगवा कर प्रीति आशीष को रोहिणी सेक्टर-15 के ही एक फ्लैट में ले जा कर बोली, ‘‘यहां कोई समस्या खड़ी हो सकती है, इसलिए यहां से कहीं और चलना होगा.’’

‘‘कहां?’’ आशीष ने पूछा.

‘‘यहीं रोहिणी के सेक्टर-2 में हमारा फ्लैट है, वहीं चलते हैं.’’ प्रीति बोली.

आशीष ने कार से चलने का प्रस्ताव रखा तो प्रीति बोली, ‘‘साथ चलना ठीक नहीं है, आप अपनी कार से सेक्टर-2 स्थित अवंतिका हौस्पिटल के पास पहुंचिए, हम वहीं मिलेंगे.’’

आशीष कार से सेक्टर-2 की तरफ चल दिए. सेक्टर-2 के अवंतिका हौस्पिटल से कहां जाना है, यह उन्हें पता नहीं था. इसलिए निश्चित जगह पर पहुंच कर उन्होंने प्रीति को फोन लगाया. इस पर प्रीति ने उन्हें सेक्टर-2 के ब्लौक-ए स्थित एक फ्लैट पर आने को कहा. कार खड़ी कर के आशीष ए-ब्लौक में प्रीति द्वारा बताई गई जगह पहुंच गए. वहां प्रीति उन्हें मिल गई. वह उन्हें साथ ले कर एक फ्लैट में पहुंची. उस फ्लैट में 2 कमरे थे. प्रीति ने आशीष से 3 हजार रुपए ले कर उन्हें शिखा के साथ दूसरे कमरे में भेज दिया. आशीष के लिए खुद पर काबू रखना मुश्किल हो रहा था. उन्होंने फटाफट दरवाजा बंद किया और शिखा को अपनी बांहों में समेट लिया.

‘‘इतनी भी क्या जल्दी है जनाब, थोड़ा सब्र रखिए.’’ कहते हुए शिखा ने आशीष की शर्ट के बटन खोलने शुरू कर दिए.

‘‘नहीं शिखा, मैं अब और बरदाश्त नहीं कर सकता,’’ कह कर आशीष ने खुद ही अपने कपड़े उतार दिए. शिखा भी प्राकृतिक अवस्था में आ गई. आखिर आशीष ने अपनी हसरत पूरी कर ली.

इस के बाद शिखा फटाफट कपड़े पहन कर कमरे से बाहर निकल गई. उस के बाहर जाते ही 5 लोग उस कमरे में घुस आए. उन में से एक दिल्ली पुलिस की वर्दी पहने था, जिस की नेमप्लेट पर सुभाषचंद लिखा था. उन में से 2 लोग अपनेअपने मोबाइलों से आशीष की अर्द्धनग्नावस्था की वीडियो बनाने लगे. अचानक आए उन लोगों को देख आशीष के होश उड़ गए. आशीष समझ गए कि ये पुलिस के लोग हैं और वह बुरी तरह फंस गए हैं. पुलिस की वर्दी वाला एएसआई सुभाषचंद था. उस ने कहा, ‘‘रेड में तुम रंगेहाथों पकड़े गए हो.’’

‘‘सर, मुझ से क्या गलती हो गई?’’ आशीष ने डरते हुए पूछा.

‘‘जब तुम रेप के आरोप में जेल जाओगे तो गलती का खुद ही पता चल जाएगा.’’ पुलिस वाले ने धमकाते हुए कहा.

‘‘सर, मैं ने किसी के साथ रेप नहीं किया. वह लड़की तो खुद मुझे यहां ले कर आई थी.’’ आशीष ने सफाई दी.

‘‘चुप रह. उस लड़की का बयान और हमारी बनाई वीडियो फिल्म तुझे सजा दिलाने के लिए काफी है. अब तू खुद सोच ले कि तेरी इस करतूत की वजह से तेरी कितनी बदनामी होगी.’’ पुलिस वाले ने आशीष को हड़काया.

आशीष बुरी तरह डरे हुए थे. वह उन लोगों के सामने हाथ जोड़ कर गिड़गिड़ाने लगे. यह देख कर एएसआई सुभाषचंद ने कहा, ‘‘देख भई, तेरे खिलाफ बड़ा पक्का मामला बन रहा है. इस से बचने का एक ही तरीका है. लेकिन उस के लिए तुझे 15 लाख खर्च करने पड़ेंगे. क्योंकि जिस लड़की के साथ तूने रेप किया है, उसे काफी पैसे देने होंगे, वरना वह नहीं मानेगी.’’

‘‘सर, यह रकम तो बहुत ज्यादा हैं. इतने पैसे मैं कहां से लाऊंगा?’’ आशीष ने कहा.

‘‘यह बात तो तुझे उस के साथ कमरे में जाने से पहले सोचनी चाहिए थी.’’ एएसआई ने कहा.

‘‘सर, यह ऐसे नहीं मानेगा, इसे थाने ले चलो. वहां पर इस के घर वालों और रिश्तेदारों को बुला कर इस की करतूत बताई जाएगी तो यह समझेगा.’’ साथ में खड़े उस के साथी ने कहा.

‘‘नहीं सर, ऐसा मत करिए. मैं बरबाद हो जाऊंगा. आप यहीं मामला निपटा लीजिए.’’ आशीष ने हाथ जोड़ कर कहा.

‘‘तो चल, 10 लाख दे दे. मामला रफादफा कर देंगे.’’ सुभाषचंद ने कहा.

आशीष पुलिस के लफड़े से बचना चाहते थे, इसलिए उन्होंने 10 लाख रुपए देने की हामी भर ली. उन लोगों ने आशीष से कहा कि 3 लाख रुपए अभी दे दे, बाकी कल ले लेंगे. लेकिन उस समय आशीष के पास इतने पैसे नहीं थे. उन की समझ में नहीं आ रहा था कि वह 3 लाख रुपए का इंतजाम कहां से करें. मुसीबत के उस समय में उन्हें अपना दोस्त वैभव याद आया. उस की दिल्ली के मंगोलपुरी इंडस्ट्रियल एरिया में फैक्ट्री थी. वह अपनी फैक्ट्री में है या नहीं, यह जानने के लिए उन्होंने उसे फोन किया. वैभव उस समय फैक्ट्री में ही था.

वे पांचों लोग आशीष के साथ मंगोलपुरी इंडस्ट्रियल एरिया में पहुंच गए. आशीष ने अपनी कार दोस्त की फैक्ट्री के बाहर खड़ी कर दी. एएसआई सुभाषचंद और उस के साथी उस की कार में बैठे रहे. जबकि वह अपने दोस्त के पास चले गए. उन्होंने अपने दोस्त वैभव को खुद के फंसने की पूरी कहानी बता दी. वैभव समझ गया कि आशीष मुसीबत में फंस गया है लेकिन उस समय उस के पास भी 3 लाख रुपए नहीं थे. उस ने किसी तरह एक लाख रुपए का इंतजाम कर के उसे दे दिए. आशीष ने एक लाख रुपए कार में बैठे एएसआई सुभाषचंद को देते हुए कहा कि बड़ी मुश्किल से एक लाख का इंतजाम हो पाया है. इस के लिए भी मुझे अपनी कार गिरवी रखनी पड़ी है.

‘‘इतने से काम नहीं चलेगा. बात 3 लाख की हुई है. पूरी रकम का इंतजाम आज ही करना होगा.’’ उन में से एक शख्स ने कहा.

‘‘मैं ने काफी कोशिश की, लेकिन 3 लाख का इंतजाम नहीं हो पाया. आप मुझे कल तक का टाइम दो. मैं कल तक 2 लाख रुपए का जुगाड़ कर दूंगा.’’ आशीष ने अनुरोध किया.

‘‘2 लाख नहीं, बाकी के सारे पैसे भी कल ही देने होंगे. पैसे कहां पहुंचाने हैं, यह बात हम तुझे फोन कर के बता देंगे. और हां, ज्यादा स्याणा बनने की कोशिश मत करना, वरना तेरी वीडियो फिल्म हमारे मोबाइल में है.’’ उन के एक साथी ने कहा.

इस के बाद वे पांचों वहां से चले गए. आशीष ने राहत की सांस ली. तब तक शाम हो चुकी थी, इसलिए उन्होंने फोन कर के अपनी दुकान पर काम करने वाले लड़के से कह दिया कि दुकान बंद कर के चाबी अपने साथ ले जाए और सुबह जल्दी आ कर दुकान खोल ले. इस के बाद वह भी वेस्ट पटेलनगर के पास शादी खामपुर गांव स्थित अपने घर चले गए. अन्य दिनों की अपेक्षा उस दिन उन का चेहरा मुरझाया हुआ था. पत्नी ने इस की वजह जाननी चाही तो उन्होंने झूठ बोल दिया कि काम की वजह से थकान हो गई है.

खाना खाने के बाद आशीष जब बिस्तर पर लेटे तो उन की आंखों से नींद गायब थी. उन्हें बस यही चिंता सता रही थी कि कल उन लोगों को पैसे कहां से ला कर देंगे. अगर पैसों का इंतजाम नहीं हुआ तो उन्हें रेप के इलजाम में जेल जाना पड़ेगा. रात भर उन के दिमाग में इसी तरह के विचार घूमते रहे. सुबह को वह रानीबाग स्थित अपनी दुकान पर चले गए. आशीष दुकान पर पहुंचे ही थे कि एक अनजान नंबर से उन के मोबाइल पर फोन आया. उन्होंने काल रिसीव की तो दूसरी ओर से एएसआई सुभाषचंद की आवाज आई, ‘‘पैसों का इंतजाम हुआ या नहीं?’’

यह सुन कर आशीष घबरा कर बोले, ‘‘सर, अभी नहीं हुआ है. मैं उसी के इंतजाम में लगा हूं.’’

‘‘जल्दी इंतजाम कर ले. पैसे ले कर तुझे आज ही शाम 7 बजे मंगोलपुरी इंडस्ट्रियल एरिया के अनुकंपा बैंक्वेट हौल के पास आना है.’’ कह कर एएसआई सुभाषचंद ने फोन काट दिया.

आशीष को शाम 7 बजे से पहलेपहले पैसों का जुगाड़ करना था. उन्होंने मार्केट में अपने जानने वालों से बात की, पर पैसों का इंतजाम नहीं हो पाया. ज्योंज्यों समय बीतता जा रहा था, आशीष की चिंता बढ़ती जा रही थी. तमाम कोशिशों के बाद भी पैसों का इंतजाम नहीं हो सका. फिर भी वह शाम 7 बजे से पहले ही निर्धारित जगह पर पहुंच गए. तभी पहले वाले नंबर से उन के मोबाइल पर फोन आया. आशीष ने कह दिया कि वह अनुकंपा बैंक्वेट हौल के सामने खड़े हैं. कुछ देर बाद 20-22 साल का एक युवक उन के पास आया. वह उसे देखते ही पहचान गए. वह युवक कल सुभाषचंद के साथ था. उस युवक ने अपना नाम अमित बताते हुए आशीष से पैसे मांगे.

आशीष ने उस के सामने गिड़गिड़ाते हुए कहा, ‘‘मैं ने बहुत कोशिश की, तमाम लोगों के पास गया और कई से फोन पर भी बात की, लेकिन कहीं भी बात नहीं बनी. आप मुझे थोड़ा वक्त और दे दो.’’

‘‘नहीं, अब तुझे कोई टाइम नहीं मिलेगा. क्या करेगा, कहां से पैसे लाएगा, हमें नहीं पता. जैसे भी हो, पैसे ले कर आज रात साढ़े 9 बजे बाहरी रिंग रोड स्थित काली माता मंदिर पर पहुंच जाना. यह तुझे आखिरी मौका मिल रहा है.’’

यह सुन कर आशीष मानसिक तनाव में आ गए. उन के पास ढाई घंटे का समय बचा था. इन ढाई घंटों में वह इतनी मोटी रकम कहां से लाएं, यह बात उन की समझ में नहीं आ रही थी. अपना दुखड़ा रोने के लिए वह फिर से अपने दोस्त वैभव की फैक्ट्री में चले गए. वैभव को आशीष की हालत पर तरस आ रहा था, पर उस के पास इतनी मोटी रकम नहीं थी. आखिर उस ने आशीष को पुलिस के पास जाने की सलाह दी. आशीष के पास पुलिस में शिकायत ले कर जाने के अलावा कोई रास्ता नहीं था. काफी सोचनेसमझने के बाद वह दोस्त को साथ ले कर बाहरी जिले के थाना रोहिणी (दक्षिणी) चले गए.

थाने में मौजूद थानाप्रभारी संजय शर्मा को आशीष ने पूरी बात बता दी. थानाप्रभारी को जब यह पता चला कि उस गैंग में दिल्ली पुलिस का एक एएसआई भी शामिल है तो उन्हें आश्चर्य हुआ. वह एएसआई असली है या फरजी, यह जांच के बाद ही पता चल सकता था. उन्होंने पूरे मामले से बाहरी जिले के डीसीपी विक्रमजीत सिंह को अवगत करा दिया.

चूंकि उन लोगों ने आशीष को पैसे ले कर उसी रात साढ़े 9 बजे काली माता मंदिर पर बुलाया था, इसलिए उन्हें रंगेहाथों पकड़ने का अच्छा मौका था. डीसीपी विक्रमजीत सिंह ने एसीपी उमेश सिंह के नेतृत्व में एक टीम बनाई. इस टीम में थानाप्रभारी संजय शर्मा, सबइंसपेक्टर रजनीश, हैडकांस्टेबल राजकुमार और कांस्टेबल कुलवीर को शामिल किया गया.

एएसआई सुभाषचंद द्वारा जिस नंबर से आशीष को फोन किया गया था, पुलिस के कहने पर आशीष ने उसी नंबर पर फोन किया, ‘‘हैलो सर, मैं आशीष बोल रहा हूं.’’

तभी दूसरी ओर से आवाज आई, ‘‘हां भई, बोल. पैसों का इंतजाम हो गया क्या?’’

‘‘जी, 9 लाख तो नहीं हो पाए, पर मैं बड़ी मुश्किल से 4 लाख का इंतजाम कर पाया हूं.’’ आशीष ने पुलिस के निर्देशानुसार कहा.

‘‘ठीक है, तू पैसे ले कर वहीं काली माता मंदिर पर पहुंच, हम वहीं मिलेंगे.’’ दूसरी तरफ से आवाज आई.

बात हो जाने के बाद पुलिस टीम सादा कपड़ों में काली मंदिर पर पहुंच गई. इस के कुछ देर बाद ही आशीष भी अपनी कार से वहां पहुंच गए. अपने हाथ में बैग थामे जैसे ही वह कार से उतरे, एएसआई सुभाषचंद और अमित उन के पास पहुंच गए. उस समय सुभाषचंद पुलिस वर्दी में नहीं था. आशीष ने जैसे ही सुभाष के हाथ में बैग दिया, थाना रोहिणी (दक्षिणी) की पुलिस टीम ने दोनों को हिरासत में ले लिया.

पुलिस दोनों को थाने ले आई. अन्य अभियुक्त फरार न हो जाएं, इसलिए एसीपी उमेश सिंह ने इस पुलिस टीम में मंगोलपुरी थाने के सबइंसपेक्टर रोबिन त्यागी, हैडकांस्टेबल दिनेश, सुभाष और कांस्टेबल वीरेंद्र को शामिल कर उसी दिन नांगलोई, कंझावला में दबिशें दे कर कंझावला से टिंकू उर्फ साहिल, नांगलोई से ललित सिंह और आजम खान को गिरफ्तार कर लिया. रैकेट में शामिल युवतियों शिखा और प्रीति के घरों पर भी दबिश डाली गई, लेकिन वे फरार हो चुकी थीं. पुलिस ने पांचों अभियुक्तों से पूछताछ की तो पता चला कि इन का सरगना सुभाषचंद ही था. वह फरजी पुलिस वाला नहीं, बल्कि दिल्ली पुलिस के कम्युनिकेशन विभाग का एएसआई था. उस की पोस्टिंग बाहरी जिला के थाना मंगोलपुरी में थी.

मूलरूप से उत्तर प्रदेश का रहने वाला सुभाषचंद करीब 26 साल पहले दिल्ली पुलिस में भरती हुआ था. बाद में उस ने सुल्तानपुरी में अपना मकान बना लिया था और परिवार के साथ दिल्ली में ही रहने लगा था. उस की मुलाकात जेजे कालोनी सावदा, नांगलोई के रहने वाले टिंकू से हुई. टिंकू साप्ताहिक बाजारों में दुकान लगाता था. टिंकू की दोस्ती कृष्णा पार्क देवली, खानपुर के रहने वाले अमित से थी. टिंकू के 2 दोस्त और थे आजम खान और अमित. आजम एक निजी अस्पताल में डायलिसिस मशीन का टेक्नीशियन था और अमित बाल बियरिंग मैकेनिक था.

ये सभी जल्द से जल्द पैसे कमाने की सोचते रहते थे. 6 महीने पहले ही अमित की प्रीति उर्फ मनीषा से शादी हुई. इसलिए उस का भी खर्च बढ़ गया था. वह आए दिन अखबारों में हनीटै्रप द्वारा लोगों को ठगने की खबरें पढ़ता रहता था. मोटी रकम कमाने के लिए उसे यह काम सही लगा. क्योंकि इस तरह एक ही झटके में मोटी रकम ऐंठी जा सकती थी. यह बात उस ने अपने दोस्तों को बताई. फिर उन लोगों ने इस बारे में मंगोलपुरी थाने में तैनात एएसआई सुभाषचंद से बात की. पैसों के लालच में वह भी उन का साथ देने को तैयार हो गया. असली पुलिस वाले के शामिल होने पर सभी की हिम्मत बढ़ गई.

योजना तो बन गई, लेकिन समस्या यह थी कि किसे फांसा जाए. इस के लिए इन लोगों ने कुछ कालगर्ल्स से संपर्क कर के किसी तरह उन लोगों के फोन नंबर हासिल कर लिए, जो उन के पास मौजमस्ती के लिए आते थे. ग्राहकों को फंसाने की जिम्मेदारी अमित की पत्नी प्रीति उर्फ मनीषा ने संभाली. शिकार फंसाने के लिए वह पहले लोगों से वाट्सऐप पर दोस्ती करती थी. दोस्ती के जरिए वह फंसने वाले से अनौपचारिक बातें भी करने लगती थी. फिर उस के पास कुछ लड़कियों के फोटो भेज कर उन्हें पसंद करने के लिए कहती थी. फंसा हुआ ग्राहक जब किसी लड़की के साथ जाने को तैयार हो जाता था तो उसी दौरान वे लोग उस के आपत्तिजनक फोटो खींच लेते थे. उसी को मुद्दा बना कर ये लोग उस से मोटी रकम ऐंठते थे.

इसी तरह उन्होंने वेस्ट पटेलनगर के शादी खामपुर गांव के रहने वाले आशीष को फांसा था. उस से उन्होंने 15 लाख रुपए मांगे. मामला 10 लाख रुपए में तय हो गया. इस से पहले कि उन की मंशा पूरी हो पाती, 5 अभियुक्त पुलिस के शिकंजे में फंस गए. गिरफ्तार हुए अभियुक्तों की निशानदेही पर पुलिस ने 30 हजार रुपए नकद, 4 मोबाइल फोन, एक डिजिटल कैमरा बरामद किया. पुलिस ने 16 मार्च, 2016 को अभियुक्त सुभाषचंद, ललित सिंह, टिंकू, अमित और आजम को गिरफ्तार कर महानगर दंडाधिकारी रविंद्र सिंह के समक्ष पेश किया. पुलिस ने अमित, ललित और सुभाषचंद को 2 दिनों के रिमांड पर लिया. जबकि आजम व टिंकू को जेल भेज दिया गया.

रिमांड अवधि में पुलिस ने तीनों अभियुक्तों से विस्तार से पूछताछ कर के उन्हें 18 मार्च, 2016 को पुन: कोर्ट में पेश कर जेल भेज दिया. कथा लिखने तक प्रीति और शिखा पुलिस के हत्थे नहीं चढ़ सकी थीं. Crime Story Hindi

—कथा पुलिस सूत्रों पर आधारित. आशीष और वैभव परिवर्तित नाम हैं.

 

True Crime Story: सहेली ने कराई प्रेमी से घिनौनी हरकत

True Crime Story: रोहित ने अपनी नाबालिग प्रेमिका रूबी के सामने जो शर्त रखी थी, अमूमन उस के लिए जल्दी कोई लड़की तैयार नहीं होती. लेकिन प्रेमी की बात मान कर उस ने सहेली के साथ गलत काम तो कराया ही, अपने बचाव में उस की जान भी ले ली.

मध्य प्रदेश के जिला भिंड के एक गांव के अशोक कुमार बरसों पहले हरियाणा के शहर कालका में आ कर बस गए थे. उन के परिवार में पत्नी सीतारानी के अलावा एक बेटा नरेश और बेटी दीक्षा थी. अशोक और उस की पत्नी सीता कालका की बगल में बसे हिमाचल प्रदेश के औद्योगिक नगर परवाणू की अलगअलग फर्मों में नौकरी करते थे. अशोक की ड्यूटी सुबह साढ़े 5 बजे से शाम साढ़े 4 बजे तक रहती थी तो वहीं सीतारानी की ड्यूटी सुबह साढ़े 7 बजे से साढ़े 4 बजे तक की होती थी. दोनों ही अपनी ड्यूटी खत्म कर के पैदल ही घर चले आते थे. एक लंबे अरसे से इन की यही दिनचर्या थी.

कालका और परवाणू के बीच केवल 3 किलोमीटर का फासला है. यहां चलने वाली लोकल बसें अकसर ट्रैफिक में फंस जाती हैं, जिस की वजह से यह दूरी तय करने में उन्हें काफी समय लग जाता है. इसलिए यहां के लोग अकसर इस दूरी को पैदल ही तय कर लेते हैं. परवाणू में किराए के मकान मिलते ही नहीं और अगर मिल भी जाते हैं तो उन का किराया इतना ज्यादा होता है कि फैक्ट्रियों में काम करने वाले लोग उसे वहन नहीं कर पाते, इसलिए परवाणू में काम करने वाले अधिकांश लोगों ने अपनी रिहाइश कालका में ही बना रखी है. अशोक भी पिछले 4 सालों से कालका की एक घनी बस्ती में रह रहा था.

उस के बेटे नरेश ने दसवीं पास कर ली थी. आगे की पढ़ाई करने के बजाय वह नौकरी की तलाश में था. बेटी दीक्षा अभी 3 महीने पहले 13 बरस की हुई थी. वह स्थानीय सरकारी स्कूल की नौवीं कक्षा में पढ़ रही थी. इन दिनों उस की सालाना परीक्षाएं चल रही थीं. 11 मार्च, 2016 को दोपहर बाद 2 बजे उसे अपनी परीक्षा देने जाना था. उस दिन उस का भाई अपनी रिश्तेदारी में कालका से बाहर गया था. वह घर में अकेली ही थी. वैसे भी यहां डर जैसी कोई बात नहीं थी. पासपड़ोस में सब इन्हें जानतेपहचानते थे. शाम के वक्त वह अकसर रोजाना गली के बच्चों के साथ खेलती भी थी.

11 मार्च, 2016 की शाम 6 बजे तक वह घर से बाहर नहीं निकली तो कुछ बच्चे उसे खेलने को बुलाने के लिए उस के घर गए. उस का घर खुला हुआ था. बच्चों ने दीक्षा को आवाज लगाई. जवाब न आने पर उन्होंने भीतर जा कर देखा. वहां का दृश्य देख कर उन के होश उड़ गए. अर्धनग्न अवस्था में दीक्षा बिस्तर पर बेसुध पड़ी थी. बच्चे बाहर आ कर शोर मचाने लगे तो मोहल्ले की औरतें और आदमी वहां आ गए. उन्होंने जा कर देखा तो दीक्षा मृत पड़ी थी. एक जानकार ने अशोक कुमार को फोन कर के कहा उस के यहां कुछ गड़बड़ है, इसलिए जितनी जल्दी हो सके, वह घर आ जाए.

अशोक ने पत्नी को फोन कर दिया. उस के बाद दोनों साथसाथ पैदल घर की तरफ चल दिए. दोनों को एक ही बात बेचैन कर रही थी कि पता नहीं घर पर क्या हो गया है. खैर, वे तेज कदमों से चलते हुए घर पहुंचे तो उन्होंने देखा कि उन के घर के पास काफी भीड़ जमा है. जब उन्होंने देखा कि किसी ने उन की बेटी की हत्या कर दी है तो वे फूटफूट कर रोने लगे. उन के पहुंचने से पहले ही किसी ने पुलिस को फोन कर दिया था.

थाना कालका के थानाप्रभारी उमेद सिंह एसआई रेशम सिंह, हवलदार प्रदीप कुमार, नरेश कुमार, महिला कांस्टेबल जसमीत कौर के अलावा कांस्टेबल रमेश कुमार के साथ घटनास्थल पर पहुंच गए थे. मामला पहले ही फ्लैश किया जा चुका था. सूचना पा कर कालका क्षेत्र के एसीपी राजेश कुमार व जिला पंचकूला के डीसीपी अनिल धवन भी वहां आ गए थे. पुलिस जांच में पहली ही नजर में मामला दुष्कर्म के बाद हत्या का लग रहा था. इसलिए पुलिस ने मृतका के पिता अशोक कुमार की तरफ से अज्ञात के खिलाफ हत्या का केस दर्ज कर लिया था.

लड़की के नीचे के कपड़े शरीर पर नहीं थे. बिस्तर पर जिस स्थिति में उस की लाश पड़ी थी, उस से साफ लग रहा था कि मरने से पहले उस के साथ दुराचार किया गया था. लेकिन बिना मैडिकल जांच के रेप का आरोप नहीं लगाया जा सकता था. देर शाम क्राइम इनवैस्टीगेशन व फोरैंसिक टीमें घटनास्थल पर पहुंच कर सबूत जुटाने में जुट गईं. मौके की प्रारंभिक काररवाई पूरी करने के बाद पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए कालका के सिविल अस्पताल भेज दिया. अब तक काफी रात घिर आई थी. इस केस को हल करने में पुलिस को कोई सुराग नहीं मिल पाया था.

अगली सुबह एसएमओ डा. एस.एस. नरवाल की निगरानी में डाक्टरों के एक पैनल ने दीक्षा के शव का पोस्टमार्टम कर के रिपोर्ट पुलिस को सौंप दी. रिपोर्ट में मौत की वजह दम घुटना बताते हुए दुष्कर्म की पुष्टि की गई थी. इस के अलावा मृतका की गरदन व जिस्म के कुछ अन्य हिस्सों पर ऐसे जख्मों के निशान पाए गए थे, जिस से यह बात साबित होती थी कि मरने से पहले मृतका ने हत्यारे से काफी संघर्ष किया था. पोस्टमार्टम रिपोर्ट में इस बात की भी पुष्टि की गई थी कि दुष्कर्म मरने से पहले किया गया था. मृतका का विसरा निकाल कर रासायनिक परीक्षण के लिए भिजवाने के लिए सुरक्षित रख लिया गया था. दुष्कर्म की पुष्टि हो जाने पर केस में भादंवि की धारा 376 भी जोड़ दी गई. तफ्तीश के नाम पर थाना पुलिस के हाथ अभी खाली थे.

डीसीपी अनिल धवन ने पहले से ही इस केस को गंभीरता से ले रखा था. इस केस का खुलासा करने के लिए उन्होंने पुलिस की 3 टीमें गठित कर दीं. जिन में से एक टीम ने अपनी जांच की शुरुआत मृतका के पड़ोसियों से पूछताछ कर के की. उन से जानकारी मिली कि पिछले कुछ दिनों से दीक्षा के घर के बाहर 2 लड़कों को चक्कर काटते देखा गया था. यह भी पता चला कि सांवले रंग की एक लड़की भी दीक्षा के पास आया करती थी.

पड़ोसियों से हुलिए हासिल कर के पुलिस ने उन के स्कैच तैयार करवाए, साथ ही मृतका का मोबाइल फोन भी चैक किया. पड़ोसियों ने सांवले रंग की जिस लड़की का जिक्र किया था, उसी के हुलिए से मिलतीजुलती एक लड़की का फोटो दीक्षा के वाट्सऐप पर मिल गया. पुलिस ने वह फोटो पड़ोसियों को दिखाया तो उन्होंने इस बात की पुष्टि कर दी कि यही लड़की दीक्षा से मिलने आया करती थी. पर दीक्षा के मातापिता ने उस लड़की को पहचानने से इंकार कर दिया. पुलिस ने वाट्सएप वाली उस लड़की का फोटो दीक्षा के स्कूल की कुछ लड़कियों को दिखाया तो उन्होंने छूटते ही कहा कि यह रूबी है.

वह लड़की भी उसी स्कूल में पढ़ती थी. पिछले साल आठवीं पास कर लेने के बाद इस ने पढ़ाई छोड़ दी थी. स्कूल से रूबी के घर का पता हासिल कर के पुलिस उस के घर पहुंच गई और पूछताछ के लिए उसे थाने ले आई. महिला पुलिस द्वारा उस से मनोवैज्ञानिक तरीके से पूछताछ की गई तो नाबालिग रूबी पुलिस की शुरुआती पूछताछ में ही टूट गई. इस के बाद उस ने अपनी खास सहेली दीक्षा की हत्या की जो कहानी सुनाई, उसे सुन कर पुलिस भी हैरान रह गई. 15 साल की रूबी के पिता परवाणू में ही एक चाय की दुकान चलाते थे. स्कूल से लौटने के बाद रूबी अकसर पिता के काम में हाथ बंटाने के लिए दुकान पर बैठ जाया करती थी. उस से बड़ी 2 बहनें और थीं, जिन की शादियां हो चुकी थीं. सब से छोटा एक भाई था, जो परवाणू के एक स्कूल में पढ़ता था.

रूबी की दुकान पर रोहित नाम का एक युवक रोजाना चाय लेने आता था. वह वहीं की एक फैक्ट्री में नौकरी करता था. 22 साल का रोहित मूलरूप से उत्तर प्रदेश के जिला उन्नाव के गांव मुस्तफाबाद का रहने वाला था. वह करीब 4 साल पहले गांव के एक दोस्त के साथ काम के सिलसिले में परवाणू आया था. यहां उसे सैक्टर-2 स्थित गैसचूल्हा बनाने वाली एक फैक्ट्री में नौकरी मिल गई थी. वहां उस का काम चूल्हों की सफाई करना और फैक्ट्री के लोगों के लिए चाय वगैरह लाना था. रूबी की चाय की दुकान उस की फैक्ट्री के नजदीक थी, इसलिए वह वहीं से फैक्ट्री के कामगारों के लिए चाय लाता था. कई बार उसे दुकान पर रूबी बैठी मिलती थी.

रोहित का चाय का और्डर अन्य ग्राहकों के मुकाबले काफी बड़ा होता था. इस की पेमेंट भी उसी के जरिए होती थी, इसलिए रूबी उस का खास ध्यान रखती थी. रूबी थी तो काफी सांवली, पर उस के नयननक्श अच्छे थे, जिस की वजह से रोहित उसे चाहने लगा था. रूबी को खुश करने के लिए कई बार वह चाय के बिल में 10-12 कप ज्यादा लिखवा कर उसे अपनी फैक्ट्री से अतिरिक्त पैसे दिलवा दिया करता था. अपने पास से भी कई बार उस ने 100-50 का नोट उस के हाथों पर रख कर मुट्ठी बंद कर दी थी. इस से रूबी का झुकाव रोहित की तरफ हो गया. रोहित चौबीसों घंटे फैक्ट्री में रहता था.

फैक्ट्री के वर्करों की छुट्टी हो जाने के बाद एक दिन रोहित ने रूबी को फैक्ट्री में ही बुला लिया. उस दिन दोनों का शारीरिक मिलन हो गया. एक बार जिस्मानी संबंध बनने के बाद उन के बीच इस का सिलसिला चल निकला. पहले रोहित अपनी कमाई से हर महीने कुछ पैसे घर भेज दिया करता था. पर रूबी से संबंध बनने के बाद उस ने घर पैसे भेजने बंद कर दिए. उस ने सारे पैसे रूबी पर लुटाने शुरू कर दिए. रूबी के लिए वह एक तरह से सोने का अंडा देने वाली मुरगी बन गया था.

इसी तरह 2 बरस निकल गए. इस के बाद एक दिन अचानक कुछ ऐसा हो गया कि उन के संबंधों में दरार पड़ गई. दरअसल, एक दिन कालका के मुख्य बाजार में रोहित की रूबी से मुलाकात हुई तो उस के साथ एक गोरीचिट्टी लड़की भी थी. रूबी ने उस लड़की का परिचय अपनी सहेली दीक्षा के रूप में करा कर बताया कि दोनों दूसरी क्लास से आठवीं तक साथसाथ पढ़ी थीं. इसी पहली मुलाकात में रोहित का दिल दीक्षा पर आ गया. इस के बाद रूबी से जब भी उस की मुलाकात होती, वह उस से दीक्षा के बारे में ही बातें करता. इस तरह उस ने दीक्षा के बारे में उस से तमाम जानकारियां हासिल कर लीं.

इस के बाद दीक्षा की झलक पाने के लिए वह उस की गली के चक्कर लगाने लगा. लेकिन दीक्षा न तो किसी से फालतू बातें करती थी और न ही फिजूल में इधरउधर घूमती थी. वह अपनी पढ़ाई और पारिवारिक जिम्मेदारियों को समझने वाली गंभीर प्रवृत्ति की लड़की थी. रोहित को जब लगा कि दीक्षा आसानी से उस के जाल में फंसने वाली नहीं है तो उस ने एक योजना बनाई. उस योजना के तहत उस ने एक दिन रूबी से सीधे कहा, ‘‘देख रूबी, मेरा मन तेरी सहेली दीक्षा पर आ गया है.

अगर तू चाहती है कि हमारा और तेरा रिश्ता हमेशा बना रहे तो कैसे भी तू उस से मेरी एक बार अकेले में मुलाकात करवा दे, सिर्फ एक बार. इस के बाद उस की तरफ देखना तो दूर, मैं कभी उस के बारे में सोचूंगा भी नहीं. अगर तुम ने मेरा यह काम नहीं किया तो समझ लो मेरा और तुम्हारा संबंध हमेशा के लिए खत्म.’’

इस तरह की स्थिति में अमूमन लड़कियां अपने प्रेमी से झगड़ा करने लगती हैं. वह अपने प्यार को हरगिज नहीं बंटने देती. पर रूबी न जाने कैसी घटिया सोच वाली लड़की निकली कि वह रोहित की बात मान गई. इतना ही नहीं, प्रेमी की ख्वाहिश पूरी करवाने के लिए वह दीक्षा के यहां जा पहुंची.  वह दीक्षा से रोहित के मन की बात तो कह नहीं सकती थी, पर साहस जुटा कर उस ने दीक्षा से यह जरूर कह दिया कि उस का दोस्त रोहित परीक्षा वाले दिन मिठाई और चौकलेट से उस का मुंह मीठा करा कर उसे अपनी शुभकामनाएं देना चाहता है.

दीक्षा ने इस पर अपनी कोई प्रतिक्रिया नहीं दी. इस के बावजूद रूबी ने मिठाई खरीद कर उस में बेहोशी की दवा मिला दी. उस के बाद मिठाई और चौकलेट रोहित को देते हुए बोली, ‘‘वह मान तो गई है, लेकिन सिर्फ एक बार के लिए. तुम मेरे ही साथ उस के घर चलना. मैं दरवाजे पर खड़ी हो कर बाहर का ध्यान रखूंगी और तुम उस के कमरे में चले जाना.’’

रोहित खुश हो गया कि अब उस की इच्छा जल्द पूरी हो जाएगी. रूबी को पता था कि दीक्षा की वार्षिक परीक्षा शुरू हो चुकी है और मांबाप के ड्यूटी पर जाने के बाद वह अकेली ही कमरे पर रहती है. 11 मार्च, 2016 को दोपहर के 2 बजे से दीक्षा का पेपर था. उस दिन 11 बजे रूबी रोहित को ले कर दीक्षा के घर पहुंच गई. उस समय दीक्षा अकेली ही बैड पर बैठ कर पढ़ रही थी. अचानक अपनी सहेली रूबी को आया देख कर दीक्षा खुश हुई. 1-2 मिनट बात करने के बाद रूबी कमरे से बाहर चली गई. कमरे में रोहित और दीक्षा रह गए.

इधरउधर की बातें करते हुए रोहित बैड पर उस के नजदीक पहुंच गया. वह उस के साथ छेड़छाड़ करने लगा तो दीक्षा घबरा गई. उस ने उसे डांटा तो रोहित ने जबरदस्ती उस के मुंह में बेहोशी की दवा मिली मिठाई का टुकड़ा डाल दिया. थोड़ी देर में वह निढाल हो गई. इस के बाद रोहित ने उस के साथ मनमानी की. दवा का असर शायद कम था, जिस से दीक्षा थोड़ी देर में होश में आ गई. वह शोर मचाने को हुई तो रोहित ने उस का मुंह दबा लिया. उस की घुटीघुटी आवाज बाहर आ रही थी, जिसे सुन कर रूबी कमरे में आ गई.

उसे देख कर दीक्षा ने अपने मुंह से रोहित का हाथ हटा कर धमकाया कि वह इस बारे में अपने मम्मीपापा को बता कर उसे ऐसा सबक सिखाएगी कि वह याद रखेगी. इस से रूबी डर गई. उसे लगा कि अगर इस ने अपने मांबाप को यह बात बता दी तो उस की मोहल्ले में बदनामी तो होगी, साथ ही वह जेल भी जाएगी. इस से बचने के लिए रूबी ने पास पड़ा तकिया उठा कर उस के चेहरे पर रख दिया. रोहित ने दीक्षा के हाथ पकड़ लिए, जिस से वह ज्यादा विरोध नहीं कर सकी. कुछ ही देर में सांस घुटने से दीक्षा की मौत हो गई. उस वक्त वह अर्धनग्न अवस्था में थी. उसी अवस्था में वे उसे छोड़ कर चले गए.

रूबी से पूछताछ के बाद पुलिस ने उसी दिन यानी 13 मार्च, 2016 को रोहित को भी हिरासत में ले लिया. रूबी चूंकि नाबालिग थी, इसलिए  उसे अगले दिन जुवेनाइल कोर्ट में पेश कर के करनाल स्थित नारी निकेतन भेज दिया गया, जबकि रोहित को कालका के प्रथम श्रेणी के न्यायिक दंडाधिकारी श्री दानेश गुप्ता की अदालत में पेश कर 3 दिनों के पुलिस रिमांड पर ले लिया गया. रिमांड अवधि में पुलिस ने रोहित से विस्तार से पूछताछ की. इस के बाद उसे फिर से अदालत में पेश कर अंबाला जेल भेज दिया गया. True Crime Story

(कथा पुलिस सूत्रों पर आधारित. रूबी, दीक्षा और दीक्षा के परिजनों के नाम परिवर्तित हैं)

 

Crime Story Hindi: 5 घंटे तालाब में डूबा रहा अपराधी

Crime Story Hindi: एक ऐसा शातिर अपराधी सामने आया, जिस की करतूत ने सभी को चौंका दिया. पुलिस से बचने के लिए वह करीब 5 घंटे तक पानी में डूबा रहा और भीतर छिप कर गिरफ्तारी से बचने की कोशिश करता रहा. उस की यह चालाकी और दुस्साहस सुनकर हर कोई दंग रह गया. आखिर कौन था यह शातिर अपराधी, जिसे पकड़ने के लिए पुलिस को कड़ी मशक्कत करनी पड़ी? आइए जानते हैं इस सनसनीखेज मामले की पूरी कहानी, जो आप को अलर्ट रहने का संदेश देगी.

यह शातिर अपराधी हरविंदर सिंह उत्तर प्रदेश के बिजनौर का रहने वाला है, जिस ने अब तक देशभर में 400 से अधिक चोरी की वारदातों को अंजाम दिया है. चौंकाने वाली बात यह है कि वह वर्ष 2017 में बिजनौर के हल्दौर नगर निकाय से निर्दलीय पार्षद भी रह चुका है. हरविंदर सिंह के खिलाफ मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, आंध्र प्रदेश, मुंबई सहित कई स्थानों पर मामले दर्ज हैं. गिरफ्तारी से बचने के लिए वह हर वारदात के बाद सिम बदल लेता था और अपने साथ कोई पहचान पत्र नहीं रखता था. फिलहाल जबलपुर पुलिस और रेलवे सुरक्षा बल द्वारा उस से अन्य मामलों में पूछताछ की जा रही है.

यह सनसनीखेज घटना मध्य प्रदेश के जबलपुर में सामने आई, जहां मंगलवार शाम पुलिस और एक अंतरराज्यीय चोर के बीच फिल्मी अंदाज में पीछा हुआ. पुलिस को चकमा देने के लिए आरोपी खितौला रेलवे स्टेशन के पास काई से भरे एक तालाब में कूद गया और करीब 5 घंटे तक पानी के भीतर छिपा रहा. उस की इस चालाकी ने पुलिस को भी हैरान कर दिया. हैरानी की बात यह रही कि आरोपी सांस लेने के लिए कमल की डंठल, जिसे कमलनाल कहा जाता है, का सहारा लेता रहा.

दरअसल, यह घटना रीवाइतवारी एक्सप्रैस ट्रेन की है, जहां एसी कोच में एक महिला का पर्स चोरी करने की कोशिश के दौरान वह आरपीएफ की नजर में आ गया. ट्रेन के सिहोरा रोड रेलवे स्टेशन के पास धीमी होते ही वह कूदकर भागा, लेकिन जवानों ने उस का पीछा जारी रखा और अंततः उसे घेर लिया. रात के अंधेरे और तालाब में फैली शैवाल के कारण आरोपी काफी देर तक पुलिस की नजरों से ओझल रहा, लेकिन गोताखोरों की मदद से उसे पकड़ लिया गया. गिरफ्तारी के बाद उस ने अपना नाम बबलू और पता चंडीगढ़ बताया, परंतु आरपीएफ इंसपेक्टर राजीव खरब को उस पर संदेह हुआ.

पुराने रिकौर्ड से मिलान करने पर उस की पहचान हरविंदर सिंह उर्फ सनी के रूप में हुई. इस खुलासे ने पुलिस को भी चौंका दिया और उस के आपराधिक नेटवर्क की परतें खुलने लगीं. Crime Story Hindi

Shocking Murder Case: पत्नी की हत्या कर शव सेप्टिक टैंक में छिपाया

Shocking Murder Case: ओडिशा के नबरंगपुर जिले से एक बेहद दर्दनाक और चौंकाने वाली घटना सामने आई है, जिस ने पूरे इलाके को हिला कर रख दिया है. रायघर थाना क्षेत्र के जोड़िंगा पंचायत के बोरगांव  में सुबास गोंड नामक व्यक्ति ने अपनी पत्नी मनई गंड की बेरहमी से हत्या कर दी और फिर सबूत छिपाने के लिए उस के शव को घर के शौचालय के सेप्टिक टैंक में डाल दिया.

जानकारी के अनुसार, सुबास अपनी पत्नी और बच्चों के साथ एक शादी समारोह में शामिल होने गया था. वहां से लौटने के बाद पतिपत्नी के बीच किसी बात को ले कर विवाद शुरू हो गया. बताया जा रहा है कि सुबास को अपनी पत्नी के चरित्र पर शक था, जिस वजह से दोनों के बीच झगड़ा बढ़ गया और गुस्से में उस ने पत्नी पर हमला कर दिया, जिस से उस की मौके पर ही मौत हो गई.

हत्या के बाद आरोपी ने सबूत छिपाने के लिए शव को सेप्टिक टैंक में डाल दिया ताकि किसी को शक न हो. लेकिन इस पूरे मामले का खुलासा तब हुआ, जब उन के 4 साल के मासूम बेटे ने घटना देख ली और डर के कारण पड़ोसियों को सारी बात बता दी. बच्चे की बात सुनकर ग्रामीणों ने सुबास से पूछताछ की, जहां पहले तो वह इनकार करता रहा, लेकिन बाद में उस ने अपना जुर्म कुबूल कर लिया.

सूचना मिलने पर रायघर थाना पुलिस मौके पर पहुंची और सेप्टिक टैंक से शव को बरामद किया. पुलिस ने आरोपी को हिरासत में ले कर पूछताछ शुरू कर दी है. वहीं, यह घटना पूरे क्षेत्र में सनसनी का कारण बन गई है, जहां एक तरफ पति की दरिंदगी ने लोगों को झकझोर दिया है, वहीं एक मासूम बच्चे द्वारा सच उजागर करने ने सभी को भावुक कर दिया है. Shocking Murder Case

Child Murder Case: पिता ने ली 6 साल के बेटे की जान

Child Murder Case: एक ऐसा सनसनीखेज मामला सामने आया है, जहां एक पिता ने अपने ही 6 साल के मासूम बेटे की बेरहमी से हत्या कर दी. वारदात को अंजाम देने के बाद आरोपी ने सबूत मिटाने के इरादे से बच्चे को नदी में फेंक दिया. आखिर ऐसी क्या वजह थी, जिस ने एक पिता को ही अपने बेटे का कातिल बना दिया? इस दर्दनाक और चौंकाने वाली घटना की पूरी सच्चाई जानने के लिए पढ़िए यह विस्तृत कहानी, जो आप को सोचने पर मजबूर कर देगी और सतर्क रहने का संदेश भी देगी.

कर्नाटक के विजयपुरा से एक दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है, जिस ने इंसानियत को झकझोर कर रख दिया. विजयपुरा ग्रामीण पुलिस ने मल्लिकार्जुन हरिकेरी नामक व्यक्ति को अपने 6 साल के बेटे सिद्धार्थ की हत्या के आरोप में गिरफ्तार किया है. आरोप है कि उस ने मासूम को कृष्णा नदी में फेंक दिया, जिस से उस की मौत हो गई.

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, आरोपी को शक था कि बच्चा उस की संतान नहीं है. इसी संदेह ने उसे इतना क्रूर बना दिया कि उस ने अपने ही बेटे की जान ले ली. वह बच्चे को स्कूल में दाखिला कराने का बहाना बनाकर घर से बाहर ले गया और उसे नदी में धकेल दिया. घटना के बाद वह घर लौट आया और जब फेमिली वालों ने बच्चे के बारे में पूछा तो वह गुस्सा करने लगा.

मामला दर्ज होते ही उस ने भागने की कोशिश की, लेकिन पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर लिया.
विजयपुरा के एसपी लक्ष्मण निंबर्गी के अनुसार, यह घटना 15 मार्च, 2026 को हुई थी.

मल्लिकार्जुन अपने बेटे सिद्धार्थ को नए स्कूल में दाखिला दिलाने के बहाने घर से ले गया था, लेकिन कुछ दिनों बाद वह अकेला लौट आया. उस के विरोधाभासी बयानों से परिवार को शक हुआ. पहली अप्रैल, 2026 को सिद्धार्थ के जन्मदिन पर मां ने उस से मिलने की जिद की, जिस के बाद परिजनों ने गुमशुदगी की सूचना दर्ज कराई. पूछताछ में आरोपी ने स्वीकार किया कि वह बच्चे को महाराष्ट्र के कराड ले गया और कृष्णा नदी में धकेल दिया.

आरोपी के कुबूलनामे के बाद विजयपुरा पुलिस ने महाराष्ट्र पुलिस से संपर्क किया. जांच में पता चला कि कराड में पहले से एक अज्ञात बालक की ‘अप्राकृतिक मौत’ का मामला दर्ज था. कराड पुलिस द्वारा उपलब्ध कराए गए सबूतों से पुष्टि हुई कि बरामद शव सिद्धार्थ का ही था.
इस के बाद गुमशुदगी के मामले को हत्या में तरमीम कर दिया गया और आरोपी मल्लिकार्जुन हरिकेरी को गिरफ्तार कर लिया गया. Child Murder Case

Social Crime Story: सहेली ही निकली ब्लैकमेलर

Social Crime Story: मनजीत कौर ने प्रवीण कुमारी को सहेली समझ कर उस के कहने पर अपनी वीडियो क्लिप बनवा ली थी, तब उसे क्या पता था कि यही वीडियो क्लिप उस की जान का जंजाल बन जाएगी.

तनवीर सिंह ने अपनी बहन मनजीत कौर को एटीएम कार्ड देते हुए कहा, ‘‘पापा ने मुझे पैसे निकालने के लिए दिया था, लेकिन मेरा कालेज जाना जरूरी है. इसलिए तुम ऐसा करना कि थोड़ी देर में जा कर पहले एटीएम से रुपए निकाल लेना, उस के बाद बाजार जा कर दरजी से अपने कपड़े ले लेना और लौटते हुए दहीहांडी रेस्टोरेंट वाले शमीजी को 20 हजार रुपए दे देना.’’

‘‘ठीक है, तुम्हारा कालेज जाना जरूरी है तो तुम जाओ. मैं घर के काम करा कर चली जाऊंगी.’’ मनजीत ने कहा.

‘‘और हां, प्रेस वाले से भी पूछ लेना कि उस ने कार्ड छाप दिए या नहीं? अगर नहीं छापे हों तो उन से कह देना कार्ड जल्दी छाप दें. शादी में कुछ ही दिन बाकी रह गए हैं, कार्ड बांटने में भी बड़ा समय लगता है. यह काम जितनी जल्दी निपट जाए, उतना ठीक रहेगा.’’ तनवीर ने कपड़े पहनते हुए कहा.

मनजीत कौर ने भाई से एटीएम कार्ड ले कर अपने पर्स में रख लिया. इस के बाद वह मां के साथ घर के कामों में लग गई. घर के काम कराने के बाद खाना वगैरह खा कर मनजीत दोपहर को बाजार के लिए निकली. पहले उस ने एटीएम से रुपए निकाले.

उस के बाद औटो से गुमार मंडी बाजार गई, जहां दरजी के यहां से उस ने अपने कपड़े लिए. वहां से घंटाघर जा कर लहंगे वाले के यहां से होते हुए वह सिविल लाइन स्थित दहीहांडी रेस्टोरैंट पहुंची. रेस्टोरैंट के मालिक शमीजी को उस ने 20 हजार रुपए दिए, क्योंकि शादी में चायनाश्ते का इंतजाम शमीजी को ही करना था.

सारे काम निपटा कर मनजीत कौर औटो से घर पहुंची. औटो का किराया दे कर जैसे ही वह गेट में घुसी, उस के फोन की घंटी बजी. उस ने फोन रिसीव किया तो दूसरी ओर से एक लड़की की आवाज आई. उस ने अपनी मोटी आवाज में लापरवाही से पूछा, ‘‘मनजीत बोल रही हैं?’’

‘‘जी हां, आप कौन?’’ मनजीत ने पूछा.

‘‘मनजीत है न तो ध्यान से सुन,’’ फोन करने वाली लड़की रौब से धमकी भरे लहजे में बोली. इस के बाद उस ने मनजीत से जो कहा, उसे सुन कर उस का चेहरा सफेद पड़ गया. हाथपैर कांपने लगे. उसे लगा, जैसे फोन हाथ से छूट कर गिर जाएगा. फोन ही नहीं, वह खुद भी गिर जाएगी.

उस लड़की की बातों से मनजीत इतना घबरा गई कि उस से एक कदम भी नहीं चला गया. फोन कटने के तुरंत बाद मनजीत के फोन पर एक वीडियो का एमएमएस आ गया. कांपते हाथों से उस ने इनबौक्स खोल कर वीडियो देखी तो उस के होश उड़ गए. उस का दिलदिमाग और शरीर से नियंत्रण खो गया, जिस से वह चकरा कर गेट के पास ही गिर गई.

संयोग से उसी समय उधर से उस की पड़ोसन गुजर रही थी. उस ने मनजीत को गिरते देखा तो शोर मचाते हुए वह उस के पास पहुंच गई. घर वालों के बाहर आतेआते शोर सुन कर अन्य पड़ोसी भी आ गए थे. पड़ोसियों की मदद से मनजीत के पिता जरनैल सिंह उसे उठा कर अंदर ले गए. डाक्टर को बुलाया गया. उस ने इंजैक्शन लगाया. पूछने पर बताया कि शायद इसे एकदम से किसी बात का गहरा सदमा लगा है.

कुछ दिनों बाद ही मनजीत की शादी होने वाली थी. ऐसे में इस तरह कुछ हो जाना चिंता की बात थी. घर वालों को कुछ पता नहीं था. मनजीत को जो सदमा लगा था, वह फोन पर बात होने और वीडियो देखने के बाद लगा था. आखिर किस ने उसे फोन किया था, फोन करने वाले ने ऐसा क्या कह दिया था और उस वीडियो में ऐसा क्या था, जिसे सुन कर उसे इस तरह का सदमा लगा कि वह बेहोश हो गई थी.

यह सब जानने से पहले आइए थोड़ा मनजीत और उस के घर वालों के बारे में जान लेते हैं. मनजीत के पिता सरदार जरनैल सिंह सरकारी नौकरी से रिटायर हो चुके थे. रिटायर होने के बाद उन्होंने लुधियाना के जस्सियां रोड स्थित नवीननगर में शानदार कोठीनुमा मकान बनवाया था. उन के परिवार में पत्नी के अलावा बेटा तनवीर सिंह और बेटी मनजीत कौर थी.

जरनैल सिंह का छोटा परिवार था. वह हर तरह से सुखी और संपन्न थे. दोनों बच्चों को उन्होंने अच्छी शिक्षा दिलाई थी. मनजीत कौर ने पटना साहिब हिमाचल से बीडीएस (दंत चिकित्सक) की पढ़ाई की थी, जबकि बेटा तनवीर सिंह लुधियाना के आर्य कालेज से बीबीए की पढ़ाई कर रहा था. मनजीत अभी और पढ़ना चाहती थी, लेकिन उस की उम्र शादी लायक हो गई थी, इसलिए मातापिता ने उस का विवाह करना उचित समझा. लड़का देख कर उन्होंने उस की शादी ही नहीं तय कर दी थी, बल्कि जल्दी ही उस की शादी होने वाली थी.

मनजीत सहित पूरा परिवार इस शादी से खुश था. घर में शादी की तैयारियां बड़े जोरोंशोरों से चल रही थीं. इसी बीच मनजीत कौर के साथ यह हादसा हो गया था. किसी की समझ में नहीं आ रहा था कि अचानक हंसतीखेलती मनजीत को यह क्या हो गया? मनजीत बिस्तर पर पड़ गई. उसे बिस्तर पर पड़े धीरेधीरे एक सप्ताह हो गया. वह न कुछ खातीपीती थी और न किसी से बात करती थी. अकेली पड़ीपड़ी आंसू बहाती रहती थी. कुछ पूछने पर ठीक से जवाब भी नहीं देती थी. हर समय खोईखोई सी रहती थी. घर का हंसीखुशी का माहौल एक अबूझ से सन्नाटे में तब्दील हो गया था.

शादी के दिन नजदीक आते जा रहे थे. कार्ड बांटे जा चुके थे, करीबी रिश्तेदार आने भी लगे थे. पहले की कुछ रस्में निभाई भी जाने लगी थीं, लेकिन उन रस्मों में भाग लेते समय मनजीत के चेहरे पर उदासी सी छाई रहती थी. पूरा परिवार परेशान था. सब लोग पूछपूछ कर थक गए थे, लेकिन मनजीत ने कुछ नहीं बताया. उस ने जैसे अपने होठों पर ताला जड़ लिया था. यही खामोशी उसे भीतरभीतर खाए जा रही थी.

आखिर इस तरह कब तक चलता. हर चीज का एक अंत होता है. एक दिन भाई तनवीर ने गुरुग्रंथ साहब के पावन स्वरूप श्री जपुजी साहब का गुटखा ले कर मनजीत के सिर पर रखते हुए कहा, ‘‘आप को गुरुग्रंथ साहबजी की कसम, सचसच बताओ क्या बात है, जो तुम अपनी यह हालत किए हो?’’

मनजीत काफी धार्मिक विचारों वाली थी. वह रोजाना सुबह ज्वालानगर स्थित गुरु निवारण साहब गुरुद्वारा जाती थी, शाम की अरदास में भी वह शामिल होती थी. इस के अलावा दिन में जब भी उसे समय मिलता था, वह नामसिमरन करती थी. लेकिन जब से उस की यह हालत हुई थी, उस ने गुरुद्वारा जाना बंद कर दिया था. उस दिन भाई तनवीर ने जब जपुजी साहब का गुटखा उस के सिर पर रखा तो गुटखा हाथ में ले कर वह जोरजोर से गुरु का नाम ले कर रोने लगी. तनवीर ने उसे चुप नहीं कराया. वह चुपचाप खड़ा उसे रोते देखता रहा. शायद वह चाहता था कि उस के मन में जो गुबार भरा है, वह निकाल दे, तभी ठीक रहेगा.

काफी देर तक रोने के बाद जब मनजीत का मन हलका हुआ तो उस ने तनवीर को जो बताया, उसे सुन कर तनवीर को भी चक्कर आने लगा. उस ने भाई को जो बताया था, वह कुछ इस तरह था. मनजीत रोजाना सुबह गुरुद्वारा साहब जाती थी. वहीं उस की मुलाकात प्रवीण कुमारी से हुई. वह भी लगभग रोज ही गुरुद्वारा आती थी. दोनों में परिचय हुआ तो बातचीत में उस ने खुद को मनजीत के सामने बहुत ही धार्मिक प्रवृत्ति की बताया. इस की वजह यह थी कि मनजीत की गुरुघर में बड़ी श्रद्धा थी. इस तरह दोनों जल्दी ही गहरी दोस्त बन गईं. कुछ दिनों की मुलाकात में मनजीत उसे बहन मानने लगी थी.

गुरुद्वारा साहब में अरदास के बाद मनजीत प्रवीण कुमारी के साथ बैठ कर काफी देर तक बातें करती. इसी बातचीत में प्रवीण कुमारी ने मनजीत कौर के घरपरिवार, आर्थिक स्थिति और उस की शादी के बारे में जान लिया था. यही नहीं, उसे यह भी पता चल गया था कि उस के हाथों में काफी रुपए हैं.

इस के बाद एक दिन याद रखने के बहाने प्रवीण कुमारी ने गुरुद्वारा प्रांगण में मनजीत की एक छोटी सी वीडियो क्लिप बना ली. प्रवीण कुमारी यह वीडियो यादगार के लिए बना रही थी, इसलिए मनजीत कौर ने खुशीखुशी बनवा ली थी. तब उसे क्या पता था कि यही वीडियो उस की जान के लिए आफत बन जाएगी. उसे यह वीडियो बनवाने का पछतावा तो उस दिन हुआ, जिस दिन प्रवीण कुमारी ने उसे ब्लैकमेल करने के लिए फोन पर उस वीडियो  की क्लिप भेजी.

दरअसल, प्रवीण कुमारी ने उस समय तो यादगार के तौर पर मनजीत कौर की वह सीधीसादी वीडियो क्लिप बनाई थी, लेकिन बाद में उस ने उस वीडियो के साथ छेड़छाड़ कर के उसे अश्लील बना दिया था. दरअसल, वह वीडियो मिक्सिंग की एक्सपर्ट थी. अपना यह ज्ञान अच्छे काम में लगाने के बजाय वह गलत काम में लगाने लगी, जो एक तरह से अपराध था. अश्लील वीडियो बना कर उस ने अपने मोबाइल फोन से वीडियो मनजीत कौर के मोबाइल पर भेज कर उस से ढाई लाख रुपए मांगे. इसी के साथ उसे धमकी भी दी कि अगर उस ने उसे रुपए नहीं दिए तो वह उस वीडियो को उस की ससुराल वालों के पास भेजने के साथसाथ इंटरनैट पर भी डाल देगी.

प्रवीण कुमारी की धमकी सुन कर और अपना वीडियो देख कर मनजीत कौर की हालत खराब हो गई थी. क्योंकि ढाई लाख रुपए देना उस के वश की बात नहीं थी. अगर वह वीडियो उस की ससुराल पहुंच जाती तो उस का रिश्ता तो टूटता ही, बदनामी ऊपर से होती. मांबाप की छोड़ो, वह किसी को भी मुंह दिखाने लायक नहीं रहती. इसी बात को मन में लिए मनजीत कौर घुटघुट कर जी रही थी. कई बार तो उस के मन में आत्महत्या करने तक की बात आ चुकी थी.

प्रवीण कुमारी ने तो ढाई लाख रुपए की मांग करते हुए मनजीत कौर को धमकाया ही था, उस के 2 दिनों बाद किसी आदमी ने भी फोन कर के रुपए मांगे थे. उस ने भी रुपए न देने पर अंजाम भुगतने की धमकी दी थी. इस के बाद तो लगातार उस के फोन आने लगे थे. वह उस से रुपए तो मांगता ही था, अश्लील बातें भी करता था, जिस से मनजीत और ज्यादा डर गई थी. मनजीत कौर की पूरी बात सुनने के बाद इस विषय पर तनवीर काफी देर तक सोचता रहा. मामला गंभीर ही नहीं, बहुत नाजुक भी था. छोटी सी गलती उस की बहन की जिंदगी तबाह कर सकती थी. आखिर काफी सोचविचार कर उस ने जो कदम उठाया, वह एकदम सही था.

तनवीर सिंह मनजीत को साथ ले कर जगतपुरी पुलिस चौकी पहुंचा और चौकीइंचार्ज एएसआई जगतार सिंह को पूरी बात बता दी. उस ने जगतार सिंह से इस मामले को गुपचुप तरीके से निपटा कर दोषियों को गिरफ्तार करने की प्रार्थना की. मामले की गंभीरता को देखते हुए जगतार सिंह ने तुरंत इस बात की जानकारी थानाप्रभारी अवतार सिंह को देने के साथ, तनवीर की शिकायत डीडी नंबर 24 पर दर्ज कर के तुरंत काररवाई शुरू कर दी.

थानाप्रभारी अवतार सिंह ने इस मामले को सुलझाने के लिए हैडकांस्टेबल हरविंदर सिंह, जसवीर सिंह और कांस्टेबल जतिंदर सिंह की एक टीम बनाई, जिसे उन्होंने ज्वालानगर स्थित दुख निवारण गुरुद्वारा के पास लगा दिया. क्योंकि उन्हें लग रहा था कि प्रवीण कुमारी गुरुद्वारे जरूर आएगी, जहां से उसे पकड़ लिया जाएगा. लेकिन पुलिस की यह चाल बेकार गई, क्योंकि प्रवीण कुमार वहां आई ही नहीं. फिर भी वहां से यह जरूर पता चल गया कि वह अपने पति महेंद्र के साथ कहां रहती है.

इस का मतलब यह था कि मनजीत कौर को फोन पर प्रवीण के अलावा जिस आदमी ने धमकी दी थी, वह उस का पति महेंद्र रहा होगा. घर का पता मिलने के बाद चौकीइंचार्ज जगतार सिंह ने प्रवीण कुमारी के घर छापा मारा तो पतिपत्नी घर पर नहीं मिले. इस के बाद मुखबिरों को उन के पीछे लगा दिया गया, साथ ही उन के घर पर एक सिपाही भी तैनात कर दिया गया. सिपाही प्रवीण कुमारी के घर इस तरह नजर रख रहा था कि किसी को पता नहीं चल रहा था कि घर पर नजर रखी जा रही है.

30 दिसंबर को जगतार सिंह जैसे ही चौकी पर पहुंचे, मुखबिर ने उन्हें बताया कि प्रवीण कुमारी अपने पति महेंद्र के साथ बसअड्डे पर मौजूद है. उन्होंने देर करना उचित नहीं समझा और सहयोगियों को साथ ले कर तुरंत बसअड्डे पर पहुंच गए. लेकिन प्रवीण कुमारी उन्हें वहां नहीं मिली. तब वह जस्सिया रोड पर संगम पैलेस की ओर बढ़े. थोड़ी दूर जाने पर प्रवीण कुमारी उन्हें 2 लोगों के साथ जाते दिखाई दे गई. पुलिस ने उन्हें घेर कर पकड़ लिया. पूछने पर पता चला प्रवीण कुमारी के साथियों के नाम महेंद्र और सुखचरण थे. महेंद्र तो प्रवीण कुमारी का पति था, जबकि सुखचरण उन का साथी था. पुलिस तीनों को पकड़ कर जगतपुरी पुलिस चौकी ले आई.

चौकी में की गई पूछताछ में पता चला यह सारी योजना प्रवीण कुमारी और महेंद्र के साथ पकड़े गए सुखचरण सिंह ने बनाई थी. वह उसी गुरुद्वारे में ग्रंथी था, जहां मनजीत कौर रोज माथा टेकने आती थी. उसे मनजीत कौर के परिवार की आर्थिक स्थिति का पता था, इसलिए उस ने प्रवीण कुमारी और महेंद्र के साथ मिल कर उसे ब्लैकमेल करने की योजना बनाई थी.

गुंथी सुखचरण सिंह शादीशुदा था और काफी दिनों से उसी गुरुद्वारा में ग्रंथी था, जबकि महेंद्र उन दिनों बेकार था. महेंद्र का पहले अच्छाखासा काम चल रहा था. लेकिन वह और प्रवीण कुमारी अय्याश प्रवृति के थे, इसलिए अय्याशी के चक्कर में उन का कामधंधा बंद हो गया था. इस के बावजूद उन के शाही खर्चों में कोई कमी नहीं आई थी.

खर्चों की वजह से प्रवीण कुमारी और महेंद्र पर काफी कर्ज हो गया. कर्ज देने वाले परेशान करने लगे तो उन्होंने ग्रंथी सुखचरण सिंह के कहने पर मनजीत को ब्लैकमेल करने की योजना बना ली. सीधीसादी मनजीत उन के जाल में फंस भी गई. अच्छा तो यह हुआ कि उस का भाई समझदार था. वह पुलिस के पास चला गया, जिस से एक लड़की की जिंदगी बरबाद होने से बच गई. पूछताछ के बाद जगतार सिंह ने उसी दिन यानी 30 दिसंबर, 2015 को अपराध संख्या 221/15 पर भादंवि की धारा 389/120बी के तहत प्रवीण कुमारी, उस के पति महेंद्र और ग्रंथी सुखचरण सिंह के खिलाफ केस दर्ज कर तीनों को सक्षम अदालत में पेश कर एक दिन के पुलिस रिमांड पर ले लिया.

रिमांड के दौरान जगतार सिंह ने तीनों अभियुक्तों के मोबाइल फोन कब्जे में ले कर उन्हें जांच के लिए भेज दिए. रिमांड अवधि समाप्त होने पर सभी को एक बार फिर अदालत में पेश किया गया, जहां से उन्हें जेल भेज दिया गया. Social Crime Story

(कथा पुलिस सूत्रों पर आधारित, बदनामी की वजह से कुछ पात्रों के नाम बदले हुए हैं)

IPS Love Story: उत्तर प्रदेश के 2 आईपीएस की लव स्टोरी

IPS Love Story: यूपी के आईपीएस अधिकारियों की एक जोड़ी इन दिनों मीडिया की सुर्खी और इंटरनेट पर छाई हुई  है. आईपीएस अधिकारी कृष्ण कुमार बिश्नोई और आईपीएस अंकिता वर्मा की लव स्टोरी की शुरुआत मुख्यमंत्री आदित्यनाथ योगी के गृह जनपद गोरखपुर में तैनाती के दौरान हुई. इस के बाद दोनों 29 मार्च, 2026 को सामाजिक रीतिरिवाज से विवाह बंधन में बंध गए. इन के विवाह की कुछ बातें इतनी दिलचस्प रहीं कि…

संभल के एसपी कृष्ण कुमार बिश्नोई और बरेली की एएसपी अंशिका वर्मा आखिर 29 मार्च को विवाह बंधन में बंध गए. इन दोनों आईपीएस अधिकारियों के विवाह की खबरें देश भर की मीडिया और सोशल मीडिया में छाई रहीं. बाड़मेर से ले कर जोधपुर तक में आयोजित इस भव्य शादी और प्री वेडिंग कार्यक्रमों में दोनों अफसरों का फिल्मी और पारंपरिक अंदाज सोशल मीडिया की सुर्खी बना रहा.

उत्तर प्रदेश के जिला संभल के एसपी कृष्ण कुमार बिश्नोई और बरेली (दक्षिण) की एएसपी अंशिका वर्मा के विवाह की रस्में राजस्थान के बाड़मेर स्थित ‘कृष्ण निवास’ और जोधपुर के अजीत पैलेस में संपन्न हुईं. हालांकि आईपीएस अंशिका वर्मा मूलरूप से यूपी के प्रयागराज की रहने वाली हैं, लेकिन उन्होंने कृष्ण के साथ दांपत्य जीवन की शुरुआत करने के लिए राजस्थान में बिश्नोई समाज में होने वाली शादी की सभी रस्मों को पूरी शिद्दत से निभाया.

हल्दी कार्यक्रम में परिवार के सदस्यों के साथ आईपीएम कृष्ण कुमार विश्नोई

पहले बाड़मेर में बारात सभा की सभी रस्में पूरी हुईं, जिस में कृष्ण कुमार बिश्नोई पारंपरिक राजस्थानी जोधपुरी सूट, पगड़ी और कृपाण धारण कर शामिल हुए. ढोलनगाड़ों और फिल्मी गानों के बीच बारात जोधपुर के लिए रवाना हुई.

बारात सभा के दौरान एसपी कृष्ण कुमार बिश्नोई के हाथों में मेहंदी भी लगाई गई. मेहंदी की रस्म के दौरान वे काफी खुश नजर आए और संगीत की धुन पर जम कर झूमते भी दिखे. इस से पहले 27 मार्च को हल्दी और संगीत का कार्यक्रम हुआ था, जहां पूरे परिवार ने ढोलनगाड़ों के साथ जश्न मनाया. सोशल मीडिया पर इन रस्मों के वीडियो और तसवीरें खूब वायरल हुईं, जिस में कृष्ण कुमार बिश्नोई और अंशिका वर्मा का मस्ती भरा अंदाज दिखा.

सगाई और रिंग सेरेमनी के दौरान यह आईपीएस जोड़ी पूरी तरह फिल्मी रंग में रंगी दिखी. कृष्ण कुमार बिश्नोई ने ‘प्यार का सिग्नल…’ गाने पर जम कर डांस किया और फिर ‘चल प्यार करेगी…’ गाने पर शानदार स्टेज परफारमेंस दी. इस दौरान कृष्ण कुमार बिश्नोई ने अंशिका को गोद में उठा लिया, जिसे देख मेहमानों ने खूब तालियां बजाईं. उन्होंने अपने पापा सुजाना राम बिश्नोई के साथ ‘पापा कहते हैं…’ गाने पर भी डांस कर सब का दिल जीत लिया.

बाड़मेर से बारात जोधपुर के लिए रवाना होने के बाद जोधपुर के मशहूर अजीत पैलेस में 29 मार्च, 2026 को कृष्ण कुमार बिश्नोई ने अंशिका वर्मा के संग सात फेरे लिए और एकदूसरे के जीवनसाथी बन गए. शादी के बाद 30 मार्च को जोधपुर के ही लारिया रिसौर्ट में एक भव्य रिसैप्शन का आयोजन किया गया, जिस में संभल, बरेली व यूपी के अनेक पुलिस व प्रशासनिक अधिकारी भी शामिल हुए. साथ ही कई दिग्गज हस्तियां भी इस शादी के गवाह बनीं.

आईएएस हो या आईपीएस, होते तो सब इंसान ही है. समाज का अभिन्न अंग होने के कारण उन की भी शादियां होती हैं. फिर अगर आईपीएस कृष्ण कुमार बिश्नोई और अंशिका वर्मा की शादी हो गई तो इतना प्रचारित किए जाने की क्या बात है? यह सवाल सभी के जेहन में होगा कि इंटरनेट की दुनिया इन दोनों की शादी पर इतनी सुर्ख क्यों है? शादी के पारंपरिक अंदाज की फोटो से ले कर बेहद खूबसूरत वीडियो क्यों लोगों को इस शादी से जोड़ रहे हैं? दरअसल, इस अनोखी शादी की कई बातें हैं, जो दूसरी शादियों से अलहदा हैं.

पहला तो यही कि कृष्ण कुमार बिश्नोई और अंशिका वर्मा दोनों भारतीय पुलिस सेवा से जुड़े हैं. दूसरे उन की पहली नियुक्ति शुरुआती दौर में एक ही शहर यूपी के गोरखपुर में रही. दोनों की प्रेम कहानी उसी समय शुरू हुई. बाद में एक दूजे की पसंद गहरे प्रेम में तब्दील हो गई और 3 साल बाद दोनों एक दूजे के हो गए. तीसरे पुलिस विभाग में लोकप्रियता की बुलंदियों को छूने वाले इस जोड़े ने आधुनिक तामझाम को छोड़ कर बेहद पारंपरिक ढंग से सभी रीतिरिवाजों और मान्यताओं को अपनाते हुए शादी की रस्में पूरी कीं, जो अधिकांश नौकरशाही से जुड़े लोग नहीं करते.

कृष्ण कुमार बिश्नोई ने इस शादी से दहेज प्रथा पर भी प्रहार किया. उन्होंने अपनी शादी में पारंपरिक दिखावे और दहेज के दिखावे को पूरी तरह नकार दिया. उन्होंने अपनी पत्नी अंशिका वर्मा से शादी में केवल एक रुपया और एक नारियल शगुन के तौर पर स्वीकार किया. यह शादी न केवल उन के सादगीपूर्ण जीवन को दर्शाती है, बल्कि दहेज प्रथा के खिलाफ एक मिसाल भी है. दोनों की शादी के बारे में विस्तार से जानना इसलिए भी जरूरी है, क्योंकि कृष्ण कुमार बिश्नोई जहां संभल जिले में एसपी के पद पर रहते हुए कई कारणों ये राष्ट्रीय चर्चा का विषय बने तो वहीं अंशिका वर्मा बरेली जिले में एएसपी रहते हुए लेडी सिंघम के रूप में विख्यात हुईं.

ऐसे लोकप्रिय जोड़े की शादी और लव स्टोरी लोगों के लिए प्रेरणास्रोत साबित होगी, इसलिए उन की शादी और लव स्टोरी को बताना बेहद जरूरी है.

कौन हैं एसपी बिश्नोई

दरअसल, इस प्रेम कहानी के नायक हैं संभल के एसपी कृष्ण कुमार बिश्नोई, जो अपनी सख्त प्रशासनिक कार्यशैली के लिए जाने जाते हैं. एक अनूठी प्रेम कहानी का नायक होने और आईपीएस बनने से पहले कृष्ण कुमार बिश्नोई के जीवन संघर्ष की भी एक गाथा है, जो देश से प्यार करने वालों और कुछ अलग करने वालों की चाह रखने वालों के लिए प्रेरणादायक है.

राजस्थान के बाड़मेर जिले में धोरीमना गांव से ताल्लुक रखने वाले साधारण किसान परिवार में कृष्ण कुमार बिश्नोई का जन्म हुआ था. वह बेहद ही साधारण परिवार से ताल्लुक रखते हैं. कृष्ण कुमार बिश्नोई 6 भाईबहनों में सब से छोटे हैं. उन के फादर का नाम सुजानाराम बिश्नोई है जबकि मम्मी गंगा देवी कुशल गृहिणी हैं. कृष्ण कुमार बिश्नोई के सब से बड़े भाई भजन लाल बिश्नोई ही गांव में खेतीबाड़ी का काम संभालते हैं.

वर कृष्ण कुमार विश्नोई और अंशिका वर्मा दोनों ही भारतीय पुलिस सेवा से जुड़े हैं

छोटी सी खेतीबाड़ी के जरिए कड़ी मेहनत से 6 बच्चों के बड़े परिवार को पालना कोई आसान काम नहीं था, लेकिन कृष्ण के पापा जानते थे कि उन की कठिन मेहनत में ही उन के बच्चों का उज्जवल भविष्य छिपा है. वह अपने सभी बच्चों को उन की इच्छानुसार शिक्षा दिला कर कामयाब इंसान बनाना चाहते थे. परिवार के सभी बच्चों ने उन की इच्छा को पूरा भी किया.  सब से छोटे कृष्ण कुमार ने गांव के ही प्राइमरी स्कूल से पढ़ाई की. बचपन से ही वह पढऩेलिखने में काफी तेज थे. 8वीं क्लास में उन्होंने पूरे जिले में टौप किया. इस के बाद आगे की पढ़ाई सीकर और फिर जोधपुर के केंद्रीय विद्यालय में की.

उन्होंने दिल्ली के सेंट स्टीफेंस कालेज से ग्रैजुएशन किया. फिर फ्रांस सरकार की स्कौलरशिप पर अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा में मास्टर डिग्री हासिल की. इस के बाद उन्होंने संयुक्त राष्ट्र में एक साल तक काम किया, जहां उन्हें 30 लाख रुपए सालाना का पैकेज मिल रहा था. लेकिन इस सब के बावजूद कुछ ऐसा था, जिस से उन्हें खालीपन महसूस होता था. क्योंकि उन का मन तो देश सेवा में लगा था, इसलिए उन्होंने इस जौब को अलविदा कह दिया. इस के बाद वह वापस अपने वतन लौट आए. शुरू में परिवार तथा दोस्तों ने इस बात के लिए खूब समझाया कि यूएन में इतने बड़े पैकेज की नौकरी छोड़ कर उन्होंने ठीक नहीं किया.

कृष्ण परिवार के साथ सभी दोस्तों की बातें एक कान से सुन कर दूसरे कान से निकाल देते थे. क्योंकि अब उन्होंने ठान लिया था कि भले ही कुछ भी हो, वे समाज सेवा के लिए कोई ऐसी नौकरी करेंगे जो सिस्टम से जुड़ी हो और उन्हें सेवा का अवसर मिले. बहुत विचार करने के बाद उन्हें सिविल सर्विस से जुड़ी सेवा ही एकमात्र ऐसी सेवा दिखी, जिस में रह कर वह अपने अरमानों को पूरा कर सकते थे. लिहाजा उन्होंने सिविल सर्विस में जाने का निश्चय कर लिया, लेकिन इस के लिए जरूरी था कि वह इस के योग्य हों. लिहाजा उन्होंने यूपीएससी की परीक्षा देने का मन बना लिया.

कृष्ण ने दिल्ली की जवाहर लाल नेहरू यूनिविर्सिटी को अपना अगला ठिकाना बनाया, जहां से उन्होंने पहले एम.फिल किया. इसी बीच उन्होंने विदेश मंत्रालय में भी संविदा कर्मी के रूप में काम किया. साथ ही वह यूपीएससी की तैयारी करते हुए पुलिस अफसर के रूप में अपना करिअर बनाने के सपने संजोने लगे. उन का सपना आईपीएस अफसर बनने का था. उन्होंने इस के लिए कड़ी मेहनत की, लेकिन 2017 के अपने पहले प्रयास में वह सफल नहीं हो पाए. लेकिन उन्होंने हिम्मत नहीं हारी और अगले साल 2018 में फिर जीतोड़ मेहनत की तो इस बार उन्हें सफलता मिल गई और वह मात्र 24 साल की उम्र में आईपीएस बन गए.

आईपीएस कृष्ण कुमार बिश्नोई अपने मम्मीपापा के साथ विवाह का निमंत्रण कार्ड ले कर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मिलने पहुंचे.

आईपीएस बनने का सपना पूरा होने के बाद उन्हें यूपी कैडर मिला. अंडर ट्रेनी आईपीएस की तैनाती के बाद उन्हें 2019 में मेरठ व 2021 में मुजफ्फरनगर में बतौर एएसपी तैनाती मिली. 2022 में उन्हें मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के गृह जिले गोरखपुर में एसपी (सिटी) के रूप में बड़ी तैनाती मिली. गोरखपुर में 29 महीने तक एसपी (सिटी) रहते हुए उन्होंने संगठित अपराध पर कड़ा प्रहार किया था. वहां उन्होंने अपराधियों की लगभग 803 करोड़ रुपए की अवैध संपत्ति कुर्क की थी, जिस के डर से कई अपराधी शहर छोड़ कर भाग खड़े हुए थे.

इस दौरान वह मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के काफी करीब माने जाते रहे. जब भी मुख्यमंत्री गोरखपुर मठ आते थे तो बिश्नोई सुरक्षा व्यवस्था में पूरी मुस्तैदी के साथ कमान संभालते थे. उन्हें साल 2024 में गोरखपुर से संभल जिले में एसपी के रूप में तैनात किया गया. दरअसल, संभल पश्चिमी उत्तर प्रदेश का एक अति संवेदनशील जिला है, जहां मुसलिम आबादी की अधिकता के कारण अकसर छोटेछोटे धार्मिक कारणों से सांप्रदायिक तनाव पैदा हो जाते हैं. इस क्षेत्र में अकसर अल्पसंख्यक आबादी से जुड़े विपक्षी राजनीतिज्ञ पुलिस पर हावी हो जाते हैं. कड़े फैसले न लेने की इच्छा शक्ति और दबाव के चलते पुलिस का मनोबल गिरा रहता था.

सख्त फैसलों से बने सुपर कौप

संभल की सुरक्षा को देखते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को एक ऐसे पुलिस अधिकारी की लंबे समय से तलाश थी, जो किसी भी दबाव में काम न करे. जिस में सही फैसले लेने की इच्छाशक्ति हो. ऐसा शख्स उन के सामने ही था, जिसे उन्होंने थोड़ी देर से पहचाना. वह शख्स कोई और नहीं, कृष्ण कुमार बिश्नोई थे, जो सीएम योगी के ही शहर गोरखपुर के एसपी (सिटी) थे. बस, सीएम योगी ने कृष्ण कुमार बिश्नोई को संभल भेजने का फैसला कर लिया. संभल में जौइनिंग से पहले बिश्नोई ने सीएम योगी से मुलाकात की थी, जहां सीएम ने उन्हें शासन की प्राथमिकता गिनाते हुए अपराधियों पर सख्त काररवाई के आदेश दिए.

संभल पहुंचने के बाद बिश्नोई ने कानूनव्यवस्था को ले कर कई सख्त फैसले लिए और प्रशासन के साथ मिल कर जिले में कानून व्यवस्था मजबूत करने के प्रयास किए. इसी के बाद नवंबर, 2024 का वह महीना आया, जब संभल जिले में जामा मसजिद सर्वे के दौरान तनाव की स्थिति पैदा हो गई. इस दौरान हिंसा की घटनाएं सामने आईं. हालात काफी बिगड़ गए, जिसे देख पुलिस प्रशासन ने तुरंत काररवाई की और स्थिति को नियंत्रित करने के लिए अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया.

पुलिस ने ऐसी व्यूह रचना की, जिस से सांप्रदायिक हिंसा करने वालों का दमन ही नहीं हुआ, बल्कि भविष्य में ऐसा करने की सोच रखने वालों के लिए नजीर बन गई. एसपी बिश्नोई इसी सांप्रदायिक तनाव के बीच उस वक्त सोशल मीडिया पर छा गए, जब उन्होंने उपद्रवी युवाओं को समझाते हुए कहा था कि ‘नेताओं के चक्कर में अपना भविष्य खराब न करें.’ यह वीडियो सोशल मीडिया पर जम कर वायरल हुआ. बताया जाता है कि पुलिस ने बेहद कम समय में हालात को नियंत्रित कर लिया था. हिंसा फैलाने वालों के खिलाफ मुकदमे दर्ज किए गए और कई आरोपियों को गिरफ्तार किया गया. कानूनव्यवस्था संभालने की इस काररवाई के बाद पुलिस प्रशासन की सक्रियता की चर्चा प्रदेश स्तर तक हुई.

संभल हिंसा पर बड़ी काररवाई करने वाले बिश्नोई को उन के साहसिक नेतृत्व के लिए 2025 में ‘मुख्यमंत्री मेडल’ से सम्मानित किया गया था. हालांकि राजनीतिक रूप से एसपी बिश्नोई की आलोचना जरूर हुई, लेकिन उन्होंने सारी काररवाई विधिसम्मत ढंग से की, इसलिए न्यायपालिका ने भी उन का साथ दिया.

संभल में पुलिस ने उन के नेतृत्व में कानूनव्यवस्था के साथसाथ आर्थिक अपराधों पर भी काररवाई की. बिजली चोरी के खिलाफ अभियान चलाते हुए पुलिस और बिजली विभाग की संयुक्त टीमों ने कई जगहों पर छापेमारी की. इस दौरान बड़ी संख्या में अवैध कनेक्शन पकड़े गए बिश्नोई ने संभल में अपने कार्यकाल में कई बड़े और चर्चित मामलों को सुलझाया है. संभल में 100 करोड़ से अधिक के बीमा धोखाधड़ी घोटाले का खुलासा उन के ही नेतृत्व में हुआ, जिस में 70 से अधिक गिरफ्तारियां की गईं. इस उपलब्धि के लिए उन्हें 26 जनवरी, 2025 को प्लैटिनम पदक और उत्कृष्ट सेवा पुलिस पदक से सम्मानित किया गया.

इस के अलावा नवंबर 2024 में जामा मसजिद सर्वे के दौरान भड़की हिंसा को उन्होंने कुशल रणनीति से नियंत्रित किया, जिस से उन की प्रशासनिक क्षमता की सराहना हुई. संभल में बिटकौइन निवेश के नाम पर ठगी करने वाले गिरोह के खिलाफ भी उन्होंने कड़ी काररवाई की. इस मामले में आरोपी के खिलाफ लुकआउट सर्कुलर जारी करवाया गया और पीडि़तों का पैसा वापस दिलाने की प्रक्रिया शुरू की गई.

इस तरह के मामलों में उन की सख्ती ने उन्हें एक प्रभावी और निर्णायक अधिकारी के रूप में स्थापित किया है. उन्हें पुलिस सेवा में उत्कृष्ट कार्य के लिए पुलिस मंथन-2025 सम्मेलन में बेस्ट पुलिस अवार्ड से सीएम योगी ने सम्मानित किया. जिस कारण उन की चर्चा प्रदेश भर में हुई. इस आईपीएस जोड़ी की प्रेम कहानी तब तक अधूरी है, जब तक इस की नायिका के बारे में जानकारी नहीं दी जाए. इस की नायिका हैं आईपीएस अंशिका वर्मा.

अंशिका का बैकग्राउंड

अंशिका वर्मा का जन्म 3 जनवरी, 1996 को उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में हुआ था. उन के पापा अनिल वर्मा उत्तर प्रदेश इलेक्ट्रिसिटी कारपोरेशन लिमिटेड के रिटायर्ड कर्मचारी हैं और उन की मम्मी हाउसमेकर. अंशिका की 2 बड़ी बहनें भी हैं, जो वर्किंग हैं. अंशिका की एक बहन इंजीनियर हैं और दूसरी अपना खुद का बिजनैस चलाती हैं. अंशिका प्रयागराज के सिविल लाइन इलाके की रहने वाली हैं. वह बचपन से ही पढ़ाई में तेज थीं. मजबूत एनालिटिकल और प्रौब्लम सौल्विंग स्किल्स ने उन्हें और बेहतर बनाया.

कृष्ण और अंशिका दोनों को लगने लगा कि वे एकदूसरे को इतना पसंद करते हैं कि जीवन भर का साथ निभाना जीवन को नई दिशा दे सकता है, कहते हैं इंसान की शिक्षा में ही उस की परिपक्वता छिपी होती है.

शुरुआती पढ़ाई प्रयागराज में करने के बाद उन्होंने अपनी स्नातक की पढ़ाई नोएडा के गलगोटिया कालेज औफ इंजीनियरिंग से की. जहां से उन्होंने 2018 में इलैक्ट्रौनिक ऐंड कम्युनिकेशन में बीटेक डिग्री हासिल की. टेक्निकल बैकग्राउंड होने के बाद भी सिविल सर्विस के प्रति उन के जुनून ने उन्हें यूपीएससी की सिविल सेवा परीक्षा में बैठने के लिए प्रेरित किया.

2018 में यूपीएससी की तैयारी शुरू करने के बाद उन का उद्देश्य कानूनव्यवस्था के माध्यम से समाज में योगदान देना था. पहले प्रयास में कुछ दिक्कतें आईं, जिस से उन का पहला अटेंप्ट क्लियर नहीं हो सका. लेकिन उन्होंने हिम्मत नहीं हारी. क्योंकि यूपीएससी पास करना उन का जुनून बन गया था. उन्होंने सेल्फ स्टडी से फिर तैयारी की. हर रोज 8 से 10 घंटे तक बगैर कोचिंग के सब्जेक्ट्स पर पढ़ाई करते हुए आगे बढ़ीं.

कहते हैं मेहनत और जुनून के आगे ऊपर वाला भी नतमस्तक हो जाता है. 2020 में अपने दूसरे प्रयास में अंशिका ने यूपीएससी सीएसई क्लियर कर लिया. अंशिका ने शानदार 136वीं आल इंडिया रैंक हासिल की. इसी के साथ उन का चयन भारतीय पुलिस सेवा के लिए हुआ. 2021 में वह इंडियन पुलिस सर्विस में शामिल हुईं और उन्हें कैडर मिला उत्तर प्रदेश. उन की पहली पोस्टिंग आगरा के फतेहपुर सीकरी पुलिस स्टेशन में स्टेशन हाउस औफिसर (एसएचओ) के तौर पर हुई.

किसी भी आईपीएस के लिए जरूरी होता है कि वह नौकरी करने के दौरान पहले 3 महीने किसी थाने में बतौर एसएचओ का कार्यकाल पूरा करे, ताकि वह पुलिसिंग के बेसिक काम सीख सके और एक पीडि़त इंसान किस तरह की पीड़ाओं से गुजारता है, उसे जान सके. 18 दिसंबर, 2023 को उन्हें गोरखपुर में असिस्टेंट सुपरिटेंडेंट औफपुलिस (एएसपी) के पद पर प्रमोट किया गया. एएसपी के तौर पर अपने कार्यकाल के दौरान उन्होंने कई हाईप्रोफाइल मामलों से निपटने में अहम भूमिका निभाई. कुछ ही समय में अंशिका की गिनती तेजतर्रार पुलिस औफिसर के तौर पर होने लगी.

गोरखपुर में करीब 3 साल तक नौकरी करने के बाद अंशिका वर्मा की पहचान तेजतर्रार आईपीएस अधिकारी के तौर पर होने लगी. अंशिका के तेवर और प्रशासनिक क्षमताओं के कारण मीडिया ने उन्हें ‘लेडी सिंघम’ का नाम दे दिया. नौकरी की शुरुआत से ही महिलाओं से जुड़े मुद्दों और उन की सुरक्षा को प्राथमिकता देना उन के कार्यकाल का मुख्य फोकस रहा है. इस वजह से वह काफी चर्चा में रहती हैं, साथ ही उन की सक्सेस स्टोरी भी लोगों के लिए एक मोटिवेशन का काम करती है.

अनुशासन और कठोर नियम के चलते अंशिका उन पुलिसकर्मियों के बीच दहशत बन गईं, जो लापरवाह और कामचोर थे. अंशिका वर्मा एक पुलिस अधिकारी के तौर पर लोगों की पीड़ा और दर्द को करीब से जानना चाहती थीं, इसलिए वह सादे कपड़ों में कभी भी और कहीं भी अकेले लोगों के बीच निकल पड़तीं. उन्हें कभी अपनी सुरक्षा का खौफ नहीं रहा, क्योंकि पढ़ाई के साथ उन्होंने मार्शल आर्ट की ट्रेनिंग ले कर आत्मरक्षा के गुर भी सीखे थे. गोरखपुर में 3 साल काम करने के बाद उन का तबादला बरेली जनपद में हो गया. वह बरेली में पहली महिला एसओजी (स्पैशल औपरेशन ग्रुप) कमांडो यूनिट का नेतृत्व कर रही हैं.

अंशिका वर्मा ने अपने कार्यकाल में कई अहम मामलों का खुलासा किया है. उन्होंने गोरखपुर में बदमाश डायना की गिरफ्तारी और स्टांप घोटाले का परदाफाश कर अपनी पहचान बनाई. तभी उन्हें लेडी सिंघम का खिताब भी मिला.

इस सराहनीय काम के लिए उन्हें डीजीपी सम्मान भी मिला. मार्च 2025 में दिल्ली में आयोजित ब्रिक्स चैंबर औफ कौमर्स एंड इंडस्ट्री के महिला शिखर सम्मेलन में उन्हें ‘वीमन आइकन अवार्ड’ से सम्मानित किया गया, जो उन के कार्य और महिला सशक्तिकरण के प्रति योगदान को दर्शाता है. जब आप सरकारी नौकरी में होते हैं तो बहुत सी बातें और काम ऐसे होते हैं, जिन्हें जनता तक आसानी से नहीं पहुंचाया जा सकता. इस के लिए आज की युवा पीढ़ी के पुलिस व प्रशासनिक अफसरों ने सोशल मीडिया का सहारा लेना शुरू किया है.

अंशिका वर्मा सोशल मीडिया पर भी ऐक्टिव रहने लगीं और अपने नायाब कामों के कारण वह जल्द ही सोशल मीडिया पर काफी लोकप्रिय हो गईं. इंस्टाग्राम पर तो उन के 6 लाख से अधिक फालोअर्स हैं. बरेली में तैनाती के दौरान अंशिका वर्मा ने कई चर्चित मामलों में सक्रिय भूमिका निभाई. धर्म परिवर्तन से जुड़े मामलों, एनडीपीएस ऐक्ट के तहत काररवाई और हत्या के मामलों में पुलिस टीमों का नेतृत्व करते हुए उन्होंने कई आरोपियों को गिरफ्तार कराया. संवेदनशील मामलों में उन की सक्रियता के कारण पुलिस की काररवाई को गति मिली और कई मामलों में कम समय में खुलासा संभव हुआ.

अंशिका वर्मा उस समय सब से ज्यादा सुर्खियों में आईं, जब उन्होंने महिला सुरक्षा के लिए एक नई पहल शुरू की. वर्ष 2025 में बरेली में उन्होंने ‘वीरांगना यूनिट’ का गठन कराया. यह उत्तर प्रदेश की पहली ऐसी यूनिट मानी जाती है, जिस में विशेष रूप से ट्रेंड महिला पुलिसकर्मियों को शामिल किया गया. इस यूनिट की महिला कमांडो को ताइक्वांडो, आत्मरक्षा और दंगा नियंत्रण जैसी ट्रेनिंग दी गई, ताकि वे संवेदनशील मामलों में तुरंत काररवाई कर सकें. महिला सशक्तिकरण की दिशा में इस पहल को महत्त्वपूर्ण कदम माना गया और इस के लिए उन्हें राज्य सरकार की ओर से सम्मानित भी किया गया.

कृष्ण और अंशिका की लव स्टोरी की शुरुआत 2024 से गोरखुपर में ही हो गई थी, जहां कृष्ण कुमार बिश्नोई एसपी (सिटी) थे और अंशिका वर्मा एएसपी थीं. एक दूजे की कार्यशैली और आदतों में समानता के कारण अंशिका वर्मा और कृष्ण कुमार बिश्नोई एकदूसरे को पंसद तो करने लगे थे. अंशिका जिस दंबग तरीके से काम करती थीं, जिस तरह के फैसले लेती थीं, काम करने के जो मानवीय तरीके अपनाती थीं, उन्हें ले कर कृष्ण कुमार बिश्नोई भरी मीटिग्ंस में न सिर्फ उन की तारीफें करते, बल्कि अपने उच्चाधिकारियों से भी उन की सराहना कर देते थे. कृष्ण कुमार अंशिका के काम करने के तरीकों से बेहद प्रभावित थे.

लेकिन एक ही जिले में दोनों तैनात थे, ऊपर से अंशिका कृष्ण की मातहत अधिकारी थीं, लिहाजा एकदूसरे को पंसद करने के बावजूद दोनों ने कभी एकदूसरे से अपनी पंसद का इजहार नहीं किया. बाद में जब 2025 के बीच अंशिका बरेली में एएसपी बन कर गईं और कृष्ण कुमार संभल में एसपी बन कर अपनी दंबगई दिखा रहे थे तो पहले अकसर फुरसत के पलों में दोनों एकदूसरे की कुशलक्षेम जानने के लिए फोन पर बातचीत करने लगे. बाद में गोरखपुर तैनाती के दौरान पुरानी यादों को ताजा करने लगे. बातचीत के इसी सिलसिले के दौरान कब आत्मीयता इतनी बढ़ गई कि दोनों निजता और परिवार की बातें करने लगे.

कृष्ण और अंशिका दोनों को लगने लगा कि वे एकदूसरे को इतना पसंद करते हैं कि जीवन भर का साथ निभाना जीवन को नई दिशा दे सकता है. कहते हैं इंसान की शिक्षा में ही उस की परिपक्वता छिपी होती है.

सुर्खियों में जोड़ी

कृष्ण और अंशिका का प्रेम भी उन्हीं की तरह परिपक्व था. उन्होंने जब अपने दिल की बात एकदूसरे से बताई तो जाहिर है एक ही सोच रखने वाले इंसानों के बीच सहमति बन ही जाती है. जब दोनों ने अपने प्रेम का इजहार किया तो बात आगे बढ़ी. दोनों ने पहले अपने परिवारों को यह बात बता कर उन की सहमति ली, इस के बाद दोनों परिवारों के बीच बात हुई और फिर इसी साल फरवरी में उन की शादी की बात सार्वजनिक हो गई. फरवरी माह में ही कृष्ण कुमार बिश्नोई तथा अंकिता वर्मा ने संभल में एक सादे समारोह में एकदूसरे को अंगूठी पहना कर अपने रिश्ते की घोषणा कर दी.

जब कृष्ण बिश्नोई तथा अंकिता वर्मा ने शादी का फैसला किया तो के.के. बिश्नोई अपने पेरेंट्स को ले कर सीएम योगी आदित्यनाथ को शादी का निमंत्रण देने पहुंचे थे, तब योगी ने उन के साथ जो फोटो खिंचवाई थी, वह भी सोशल मीडिया पर खूब वायरल हुई. पुलिस सेवा में काम करने वाले अधिकारियों के लिए व्यक्तिगत जीवन और पेशेवर जिम्मेदारियों के बीच संतुलन बनाना आसान नहीं होता. ऐसे में इन दोनों तेजतर्रार पुलिस अधिकारियों का जीवनसाथी बनने का फैसला अपने आप में चर्चा का विषय बन गया. दोनों अधिकारियों को उन के काम को ले कर प्रदेश स्तर पर पहचान मिल चुकी थी. कई मौकों पर उन की कार्यशैली की चर्चा भी होती रही है.

अब यह जोड़ी जीवन की नई पारी शुरू कर चुकी है. 29 मार्च को राजस्थान के जोधपुर में निजी जीवन में भी एकदूसरे का साथ निभाने की कसमें खा कर उत्तर प्रदेश पुलिस की यह जोड़ी फिर लोगों के बीच सेवा करने के लिए पहुंच गई है. IPS Love Story

Delhi News: 400 रुपए के विवाद में ली जान

Delhi News: अक्सर हम देखते हैं कि लोग पैसों के लिए झगड़ते हैं, लेकिन क्या आप ने कभी पैसे के लिए किसी की जान लेने की कहानी सुनी है? ऐसा ही एक मामला सामने आया है, जहां 3 नाबालिगों ने सिर्फ 400 रुपए के लिए एक शख्स की चाकुओं से हत्या कर दी. अब सवाल उठता है कि क्या सच में केवल 400 रुपए ही इस हत्या की वजह थे या इस के पीछे कोई और राज छिपा था. चलिए जानते हैं इस पूरी स्टोरी को विस्तार से, जो आप को सोचने पर मजबूर कर देगी.

उत्तर पूर्वी दिल्ली के मुस्तफाबाद से एक खौफनाक घटना सामने आई है, जिस ने इलाके में सनसनी मचा दी. यहां 3 नाबालिगों ने सिर्फ 400 रुपए के मामूली विवाद के चलते 26 साल के कैफ की चाकुओं से गोद कर हत्या कर दी, जबकि चौथा साथी पूरी वारदात का वीडियो बनाता रहा. शव मिलने के बाद गुस्साए परिजनों ने सड़क पर हंगामा किया, जिस से करीब एक घंटे तक यातायात बाधित रहा. पुलिस ने तुरंत तीनों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया.

प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, 3 अप्रैल, 2026 को देर शाम 25 फुटा रोड स्थित बाबू हलवाई की दुकान के पास कैफ को 3 नाबालिगों ने घेर लिया. भागते समय कैफ पास खड़ी साइकिल से टकरा कर गिर गया और तब नाबालिगों ने उस पर चाकुओं से ताबड़तोड़ वार किए. उसे गंभीर हालत में जगप्रवेश चंद्र अस्पताल ले जाया गया, लेकिन डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया.

पुलिस ने हत्या में इस्तेमाल 3 चाकू बरामद किए और प्रारंभिक जांच में पता चला कि मामूली 400 रुपए के विवाद ने इतनी बड़ी वारदात को जन्म दिया. Delhi News

Delhi News: एकतरफा प्यार में मौत, 10वीं की छात्रा की चाकू से गोदकर हत्या

Delhi News: यह घटना एक ऐसी दर्दनाक सच्चाई को सामने लाती है, जिस ने पूरे इलाके को दहला कर रख दिया. एक नाबालिग लड़की, जो अपने भविष्य के सपनों के साथ घर से निकली थी, उसे क्या पता था कि यह उस का आखिरी दिन साबित होगा. दिनदहाड़े हुई इस वारदात ने न सिर्फ एक परिवार को उजाड़ दिया, बल्कि इलाके के लोगों को भी डर और गुस्से से भर दिया. आखिर क्या वजह थी कि एक लड़की को इतनी बेरहमी से मौत के घाट उतार दिया गया. आइए जानते हैं इस पूरी घटना को विस्तार से.

उत्तर पूर्वी दिल्ली के सीमापुरी इलाके में 3 अप्रैल, 2026 को जाह्नवी दवा लेने के लिए बाजार गई थी. उसी दौरान वहां उसे जतिन मिल गया, जो पिछले काफी समय से उसे जानता था. बताया जा रहा है कि दोनों की पहले से पहचान थी, लेकिन उस दिन जो हुआ उस ने सब कुछ खत्म कर दिया. अचानक ही जतिन ने जाह्नवी पर चाकू से ताबड़तोड़ हमला कर दिया, जिस से वह गंभीर रूप से घायल हो कर वहीं गिर पड़ी और आरोपी मौके से फरार हो गया.

घायल हालत में भी जाह्नवी ने हिम्मत नहीं हारी. मौके पर मौजूद एक युवक से फोन ले कर उस ने अपनी मम्मी को कौल किया और अपने ऊपर हुए हमले की जानकारी दी. इस के बाद उसे तुरंत जीटीबी अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उसे बचाने की पूरी कोशिश की, लेकिन उस की हालत बहुत गंभीर थी. शनिवार सुबह इलाज के दौरान उस ने दम तोड़ दिया. पोस्टमार्टम के बाद जब उस का शव परिजनों को सौंपा गया तो परिवार में कोहराम मच गया.

इस घटना से गुस्साए परिजनों और स्थानीय लोगों ने सीमापुरी गोलचक्कर के पास शव रखकर प्रदर्शन किया और इस मामले में शामिल अन्य लोगों की गिरफ्तारी की मांग की. लोगों का कहना था कि सिर्फ एक आरोपी ही नहीं, बल्कि इस मामले में और भी लोग शामिल हो सकते हैं. पुलिस अधिकारियों ने लोगों को आश्वासन दिया कि मामले की पूरी जांच की जाएगी, तब जा कर लोग वहां से हटे. वहीं, घटना के बाद आरोपी जतिन ने भी आत्महत्या कर ली. बताया जा रहा है कि वह अपने घर गया और सिलेंडर का पाइप निकालकर खुद को आग लगा ली, जिस से उस की मौके पर ही मौत हो गई.

शुरुआती जांच में सामने आया है कि जतिन पिछले 2 सालों से जाह्नवी पर शादी का दबाव बना रहा था, लेकिन वह लगातार मना कर रही थी. इसी बात से गुस्से में आ कर उस ने इस खौफनाक वारदात को अंजाम दे दिया. पुलिस अब पूरे मामले की गहराई से जांच कर रही है. Delhi News

True Crime Story: सरिता नायर – अजबगजब का अफसाना

True Crime Story: एक साधारण परिवार की सरिता नायर ने अपनी महत्वाकांक्षाओं की खातिर बड़ेबड़े लोगों तक पहुंच बनाई. यहां तक कि केरल के मुख्यमंत्री ओमन चांडी भी उस की पहुंच से परे नहीं थे. लेकिन इस सब से सरिता नायर को जिल्लत की जिंदगी के अलावा क्या मिला?

कहानी शुरू होती है 1994 से. केरल प्रांत के चेनगन्नूर के शिक्षा विभाग कार्यालय परिसर में एक आयोजन किया जा रहा था, जिस में इस जिले के एक छोटे से गांव की एक लड़की को सम्मानित किया जाना था. उस लड़की की खूबी यह थी कि वह 10वीं क्लास में गांव के स्कूल में अव्वल आई थी और उस का नाम जिले के टौप 10 बच्चों की सूची में था. उस लड़की के साथ एक बड़ी त्रासदी यह हुई थी कि परीक्षा शुरू होने से 2 दिन पहले अचानक उस के पिता का देहांत हो गया था, हालांकि उस दिन सुबह तक वह पूरी तरह स्वस्थ थे.

पिता की मौत उस लड़की के लिए किसी बड़े हादसे से कम नहीं थी. फिर भी उस ने हौसला बरकरार रखते हुए परीक्षाएं दे कर एक मिसाल कायम की थी. इस परीक्षा में उस ने 600 में से 538 (करीब 90 प्रतिशत) अंक हासिल किए थे. उस क्षेत्र  में यह एक कीर्तिमान था. उन दिनों बोर्ड की परीक्षा में इतने अंक हासिल करना किसी आश्चर्य से कम नहीं था. वैसे भी उस लड़की ने विपरीत परिस्थिति में परीक्षा दी थी. शिक्षा विभाग के इस आयोजन में कांग्रेस विधायक सोभना जौर्ज मुख्य अतिथि के रूप में पधारे थे. उन्होंने अपने अभिभाषण में उस लड़की की प्रशंसा करते हुए अन्य विद्यार्थियों को उस से प्रेरणा लेने को कहा था.

वह बच्ची को अपनी जेब से नकद पुरस्कार देने को भी बेताब थे, लेकिन लड़की ने पैसा लेने से इनकार करते हुए कहा था कि उसे केवल बड़ों का आशीर्वाद चाहिए, यही उस के लिए सब से बड़ा पुरस्कार होगा. इस बात पर उस की बहुत सराहना हुई थी. इस की वजह यह थी कि उस का संबंध एक गरीब परिवार से था. वह नायर सर्विस सोसायटी के एक छोटे से फ्लैट में रहती थी. उस के पिता सोमाशेखरन नायर इस सोसायटी के औफिस में क्लर्क थे. यहां से मिलने वाली साधारण सी तनख्वाह से वह जैसेतैसे घर का खर्च चलाते थे. लड़की के परिवार में एक छोटी बहन और मां इंदिरा नायर थीं.

पति की मौत के कुछ दिनों बाद इंदिरा ने परिवार की गुजरबसर करने के लिए स्कूली बच्चों को ट्यूशन पढ़ाने के अलावा एक प्राइवेट  फाइनैंस कंपनी में एकाउंटैंट की नौकरी कर ली थी. दुनिया में 2 बेटियों के अलावा उन का अपना कोई नहीं था. उन्हें खुशी केवल इस बात की थी कि उन की दोनों बेटियां पढ़ाई में होशियार थीं. उन की बड़ी बेटी ने तो दसवीं में एक कीर्तिमान स्थापित किया था.

शिक्षा विभाग के आयोजन के अलावा नायर सर्विस सोसाइटी के पदाधिकारियों और उस सेंट एन्जींस स्कूल वालों ने भी लड़की को सम्मानित किया था, जहां वह पढ़ती थी. स्कूल में संपन्न आयोजन में प्रिंसिपल से ले कर अध्यापिकाओं तक ने उस लडकी को अपनी प्रिय विद्यार्थी कहते हुए घोषणा की थी कि वह जिंदगी में बहुत ऊंचाई पर जा कर अपने परिवार के अलावा इस स्कूल का भी नाम रोशन करेगी. अधिकांश अध्यापिकाओं ने उसे बांहों में भर कर इस तरह अपनत्व जताने की कोशिश की थी कि जैसे वह उन की स्टूडैंट न हो कर बेटी या बहन हो.

अब 22 साल बाद सरिता नायर नाम की वह लड़की 38 वर्ष की प्रौढ़ महिला बन चुकी है. इस बीच उस की जिंदगी में सब कुछ बदल  गया है. कह सकते हैं कि सब उथलपुथल हो चुका है. आज उसी के इलाके के लोग उस के बारे में बात करने से कतराते हैं. उस पर अपनत्व की बौछार करने वाली अध्यापिकाएं उसे पहचानने से इनकार करती हैं. 90 प्रतिशत  अंक लाने वाली इलाके की उस पहली लड़की के बारे में याद दिलाने पर भी कुछ याद न आने का अभिनय करती हैं.

दरअसल, ये लोग अब यह सोच कर भयभीत हो जाते हैं कि कहीं जांच एजेंसियां उन के बारे में यह धारणा न बना लें कि वे आज भी सरिता नायर के संपर्क में हैं. उन्हें डर है कि सरिता नायर के बारे में कुछ बोलने से वे बैठेबिठाए नाहक झमेले में उलझ सकती हैं. इस की वजह यह है कि सरिता नायर ने पिछले कुछ सालों से न केवल केरल के कई मंत्रियों और राजनेताओं, यहां तक कि कई पुलिस अधिकारियों को भी अपने निशाने पर ले रखा था, केरल के मुख्यमंत्री ओमन चांडी के लिए भी वह खतरा बनी हुई थी. इन लोगों के खिलाफ मीडिया में रोजाना ही उस के बयान आ रहे थे. फिर वह खुद भी जेल की हवा खा चुकी थी. अपने बच्चों को भी उस ने  जेल में ही जन्म दिया था.

सरिता नायर की इस बदली जिंदगी के बारे में जानने के लिए हमें फिर से उसी मुकाम पर लौटना पड़ेगा, जब उस के पिता सोमाशेखरन का अचानक देहांत हुआ था और सरिता ने करीब 90 प्रतिशत अंकों के साथ दसवीं पास  कर के वाहवाही बटोरी थी. सरिता को बताया गया था कि उस के पिता की मौत हार्टअटैक से हुई थी. बाद में यह बात भी उड़ी कि नौकरी के दौरान उन पर पैसों की हेराफेरी का आरोप लगा था, जिस से परेशान हो कर उन्होंने आत्महत्या कर ली थी. सरिता ने इस सब की गहराई में जाने की कोशिश की थी, लेकिन वह किसी भी पुख्ता नतीजे पर नहीं पहुंच पाई थी.

मां इंदिरा तो अपनी दोनों बेटियों की परवरिश के लिए मेहनत करने में ही इतनी व्यस्त हो गई थीं कि उन के पास कुछ सोचने या करने का वक्त ही नहीं था. वह किसी भी तरह अपनी बेटियों को पढ़ालिखा कर उन्हें अपने पैरों पर खड़ा करना चाहती थीं. सरिता ने यप 1996 में चेनगन्नूर के क्रिश्चियन कौलेज से अपनी प्री-डिग्री (12वीं कक्षा) की पढ़ाई खत्म की. इस के बाद कोई प्रोफैशनल कोर्स कर के उस ने नौकरी हासिल करने की सोची. लेकिन प्रोफैशनल कोर्स महंगे थे. इंदिरा की इतनी हैसियत नहीं थी कि ऐसे किसी कोर्स में बेटी को दाखिला दिलवा देती.

इस पर सरिता ने थिरूवानानाथापुरम के पास अपने ननिहाल नैय्याटिंकारा के पौलिटेक्निक कौलेज में इंजीनियरिंग करने के लिए दाखिला ले लिया. बाद में उस ने यहां से पढ़ाई छोड़ दी और धानुवाथारापुरम के वीटीएमएनएसएस कालेज में पढ़ने लगी. यहां के लड़के उस से दोस्ती करने को लालायित रहते थे, लेकिन उस ने किसी को अपने नजदीक नहीं आने दिया. जवान होतेहोते सरिता खूब स्मार्ट हो गई थी. उस की कदकाठी भी बढि़या थी. अब वह फर्राटेदार अंग्रेजी भी बोलने लगी थी. पढ़ाई में वह अब भी तेज थी. कौलेज के किसी लड़के में इतनी हिम्मत नहीं थी कि वह उस का रास्ता रोक ले या उस से किसी तरह की बदतमीजी करने की हिमाकत करे.

उन दिनों कालेज कैंपस में राजनीति जोरों पर थी. विद्यार्थी अलगअलग खेमों में बंटे हुए थे. सरिता की किसी खेमे में कोई दिलचस्पी नहीं थी. वह आजाद घूमती थी. बस से कालेज आतीजाती थी. आखिर में उस के बारे में यही सोच लिया गया कि वह अलग किस्म की घमंडी लड़की है, जिसे किसी के साथ दोस्ती में कोई रुचि नहीं है, खासकर लड़कों से. शायद मौजमस्ती की लाइफ से उसे परहेज था. तभी एक दिन एक लड़का सरिता को मोटरसाइकिल पर कालेज छोड़ने आया. उन दिनों उस इलाके में किसी के पास मोटरसाइकिल होना धनाढ्य होने की निशानी थी. इस से कालेज के लड़कों को सरिता के चरित्र पर संदेह हुआ. उन्हें लगा कि वह एकदम छिपी रुस्तम है, जो कालेज में किसी को नजदीक नहीं फटकने देती, लेकिन बाहर किसी अमीरजादे से रिश्ता बनाए हुए थी.

विद्यार्थियों को हैरान करने और जलती पर घी का काम करने वाली बात तब सामने आई, जब सरिता ने अचानक वहां से पढ़ाई बीच में छोड़ कर एक सर्टिफिकेट प्रोग्रामिंग कोर्स करना शुरू कर दिया. यह एक महंगा प्रोफैशनल कोर्स था. इस कोर्स के बाद उसे ढाई लाख रुपए सलाना पैकेज की सैलरी पर कतर एयरलाइंस में एयर होस्टेस की नौकरी मिल गई.

सरिता के पिता की मौत के बाद उस के दूर के रिश्ते के एक अंकल इस परिवार के सुखदुख का ध्यान रखने लगे थे. घर की हर बात के लिए इंदिरा उन से हर तरह की सलाह लिया करती थी. सरिता की एयर होस्टेस की नौकरी की बात बताते हुए इंदिरा ने जब उन से सलाह मांगी तो उन्होंने इस नौकरी पर सख्त ऐतराज जताया. उन का कहना था कि एयर होस्टेस को शर्मनाक कपड़े पहनने पड़ते हैं, जो शरीफ घरों की लड़कियों को शोभा नहीं देते. इस पर सरिता ने गुस्से में आ कर अपौइंटमैंट लैटर फाड़ कर फेंक दिया.

उन अंकल ने प्रयास कर के सरिता की शादी खाड़ी देश में रहने वाले एक शख्स से करवा दी. उन दिनों वह भारत आया हुआ था. कुछ वक्त सरिता के साथ बिताने के बाद वह जल्दी ही उसे अपने पास बुलाने का वादा कर के वापस चला गया. लेकिन बाद में वह सरिता पर कई तरह के आरोप लगा कर उसे तलाक देने की बात कहने लगा.

सरिता फिर से अकेली हो गई थी. अब उस पर एक तरह से बेचारी का ठप्पा लग गया था. लेकिन सरिता ने किसी बात की परवाह न कर के एरनाकुलम की एक प्रसिद्ध शेयर ट्रैडिंग कंपनी में नौकरी कर ली. सरिता बनसंवर कर सलीके से रहती थी. उस के व्यक्तित्व में पहले से कहीं अधिक निखार आ गया था. उस का बातचीत का अंदाज भी बहुत अच्छा था. फर्राटेदार अंग्रेजी उस के व्यक्तित्व पर खूब फबती थी. अपनी नौकरी से जुड़ी हर जिम्मेदारी को वह अच्छी तरह समझती थी और बखूबी निभाती थी.

उस का पति उस से रिश्ता खत्म करने पर तुला था. अब सरिता के बारे में यह कहना शुरू कर दिया कि उस के कई लोगों से अनैतिक संबंध थे. आखिर सरिता ने भी उस पति से रिश्ता खत्म करने का मन बना लिया. दोनों के बीच तलाक की काररवाई शुरू हो गई. जिस फर्म में सरिता नौकरी करती थी, उस के एक मुलाजिम पोरिंजू वेलियाथ ने अपनी एक अलग कंपनी खोल ली थी. वह सरिता को बहुत पसंद करता था और उस की खूबियों से प्रभावित था. वह चाहता था कि वह उस की कंपनी में नौकरी कर ले. सरिता ने पिछली नौकरी छोड़ कर पोरिंजू की फर्म में रिसैप्शनिस्ट की नौकरी कर ली.

जल्दी ही उस का इस नौकरी से मन भर गया और उस ने यहां से रिजाइन कर के पाथानामथिट्टा के नजदीक कोजैनचैरी स्थित केरल फाइनैंस कार्पोरेशन लिमिटेड कंपनी में सहायक ब्रांच मैनेजर की नौकरी कर ली. यहां वह पहले से भी अधिक कुशल कर्मचारी साबित हुई. उस ने कंपनी के लिए बेतहाशा निवेशक जुटाने में अहम भूमिका निभाई. लेकिन उन्हीं दिनों शराब की एक दुकान के मालिक के साथ उस का नाम जुड़ने की अफवाहें उड़ने लगीं.

वह आदमी था बीजू राधाकृष्णन, जो पहले से शादीशुदा था. वह शराब का अपना छोटामोटा कारोबार करने के अलावा उसी फर्म में नौकरी भी करता था, जहां सरिता नौकरी करती थी. सरिता और राधाकृष्णन दोनों एकदूसरे को पसंद करते थे. धीरेधीरे दोनों की नजदीकियां बढ़ती गईं. तब तक सरिता को बीजू के शादीशुदा होने की बात मालूम नहीं थी.

सन 2003 में सरिता और बीजू ने नौकरी छोड़ कर कम ब्याज पर ऋण देने के औफर के साथ क्रेडिट फाइनैंस शौप नाम से अपनी फर्म खोल ली. अभी यह धंधा जम भी न पाया था कि केरल फाइनैंस कार्पोरेशन लिमिटेड कंपनी ने सरिता के खिलाफ उन के यहां नौकरी करने के दौरान घपला करने का केस दर्ज करा दिया. बाद में पता चला कि उसे फंसाने के पीछे बीजू का हाथ था. इस से बीजू व सरिता के संबंधों में दरार आने लगी.

सन 2005 में एक दैनिक अखबार में सरिता नायर से संबंधित एक सनसनीखेज खबर छपी. खबर के अनुसार, सरिता के एक पुलिस अधिकारी से नजदीकी संबंध थे, जिन का वह भरपूर लाभ उठा रही थी. उसी अधिकारी के प्रभाव की वजह से वह लोगों को बेवकूफ बना कर उन की खूनपसीने की कमाई ऐंठ लेती थी. जबकि सरिता के अनुसार ऐसा कुछ नहीं था, बल्कि यह उसे फंसाने और बदनाम करने की साजिश थी. सरिता को इस के पीछे भी बीजू का ही दिमाग काम करता नजर आया.

सरिता ने गहराई में जाने की कोशिश की तो उसे पता चला कि बीजू ने उस से शादी करने के चक्कर में अपनी पत्नी की हत्या कर के उसे आत्महत्या का रूप दे दिया था. इस बीच वह सरिता के साथ लिव इन रिलेशनशिप में रहता रहा था. अब जब उस के एक फिल्म एक्ट्रैस से संबंध बन गए थे तो वह सरिता को अपने रास्ते से हटाने की कोशिश करने लगा था. अंतत: सरिता ने बीजू के खिलाफ पुलिस में लिखित शिकायत कर दी. इस पर विधिवत छानबीन शुरू हो गई.

उन्हीं दिनों सरिता ने आत्महत्या करने की भी कोशिश की. दरअसल वह अपने बारे में स्थानीय अखबारों में छपने वाली झूठी खबरों से परेशान हो गई थी. तब तक उस का अपने पति से तलाक भी हो चुका था. दूसरी ओर बीजू ने यह बात उड़ानी शुरू कर दी थी कि उस की पत्नी रेशमी ने सरिता नायर से परेशान हो कर आत्महत्या की थी. आखिर एक दिन सरिता ने कोजैनचैरी को अलविदा कहते हुए एरनाकुलम के एक काल सेंटर में नौकरी कर ली. यहां उसे एचएसबीसी बैंक के क्रैडिट कार्ड बनवाने के संबंध में लोगों से फोन पर संपर्क करने का काम मिला था. एरनाकुलम में उस का मन नहीं लगा तो उस ने निवेदन कर के अपना तबादला तिरुवनंतपुरम करवा लिया. यह सन 2006 की बात है.

दरअसल, अब वह एक तरह से बीजू से डरने लगी थी. लेकिन वह यहां भी एक दिन अपने गुंडों को ले कर आ धमका और सरिता से बोला, ‘‘तू अगर चाहती है कि तेरी जिंदगी सलामत रहे तो सीधेसीधे मेरा वह 5 लाख रुपया वापस कर दे, जो तूने मुझ से उधार ले रखा है. मेरे खिलाफ तू कितनी भी शिकायतें करती रह, मेरा कुछ नहीं बिगड़ने वाला.’’

बकौल सरिता उस ने बीजू से कभी कोई पैसा नहीं लिया था. दरअसल वह उस पर इस तरह का आरोप लगा कर उसे भयभीत करना चाहता था, ताकि वह उस के खिलाफ पुलिस में की गई अपनी शिकायत वापस ले ले. बहरहाल, जो भी हुआ हो, उन दोनों का आपस में समझौता हो गया. उन्हीं दिनों सोलर एनर्जी प्रोजैक्ट को ले कर व्यापारियों के बीच काफी खुसरफुसर चल रही थी. सरकारी मदद से बड़े स्तर पर जो प्रोजैक्ट शुरू किए जाते हैं, उन में शुरू में लोगों को बहुत फायदा पहुंचने की गुंजाइश होती है. बीजू राधाकृष्णन और सरिता नायर ने भी इस सुनहरे अवसर का फायदा उठाने की सोची.

सन 2007 में बीजू राधाकृष्णन और सरिता नायर ने आईसीएमएस नाम से अपनी सोलर इक्विपमैंट कंपनी रजिस्टर करवा ली, साथ ही इन लोगों ने तिरुवनंतपुरम में कंपनी का औफिस भी खोल लिया. बीजू के अनुसार उस की सब से बड़ी ताकत उस के वे दोस्त थे, जिन की सीधी पहुंच सरकार तक थी. इन में कुछेक  मंत्रियों के बेटे वगैरह भी थे. सोलर प्रोजैक्ट के नाम पर फूलप्रूफ व्यवस्था का मुलम्मा चढ़ा कर इन लोगों ने आम लोगों से बहुत पैसा खींचा. आखिर इन लोगों के खिलाफ लोगों की शिकायत पर पुलिस ने धोखाधड़ी का केस दर्ज कर बीजू राधाकृष्णन व सरिता को गिरफ्तार कर के जेल भेज दिया. गिरफ्तारी के वक्त सरिता 8 महीने की गर्भवती थी.

पूछताछ के वक्त उस ने पुलिस को बताया था कि उस के एक राजनेता से संबंध थे, जिस से वह गर्भवती हो गई थी. बाद में उस ने अपनी न्यायिक हिरासत के दौरान जेल में ही एक बेटे को जन्म दिया था. यहां जब उस से उस बच्चे के पिता का नाम पूछा गया था तो उस ने यह कहते हुए नाम बताने से इनकार कर दिया था कि यह उस की राइट टू प्राइवेसी का मामला है, इसलिए उसे बच्चे के पिता का नाम बताने के लिए मजबूर न किया जाए. खैर, जल्दी ही बीजू की जमानत हो गई और वह जेल से बाहर आ गया. जबकि सरिता को इस के बाद 6 महीनों तक जेल में ही रहना पड़ा था. बाद में उस की जमानत बीजू के प्रयासों से ही हो सकी थी.

केस चलता रहा, धीरेधीरे मामला ठंडा पड़ता गया. वक्त अपनी रफ्तार से आगे बढ़ता गया. बीजू और सरिता के बीच संबंध बनतेबिगड़ते रहे. सन 2011 में केंद्र सरकार की ओर से जवाहर लाल नेहरू नैशनल सोलर मिशन योजना के तहत इच्छुक लोगों को इस मिशन का हिस्सा बनने के एवज में भारी ग्रांट देने की घोषणा हुई. इस मुद्दे पर बीजू और सरिता एक बार फिर साथसाथ हो गए. इस बार उन्होंने पुराना नाम रद्द कर के कंपनी का नया नाम रखा ‘टीम सोलर’.

सरिता नायर फर्राटेदार अंग्रेजी में बात करने में माहिर थी. हालांकि वह किसी से कोई ठगी करना नहीं चाहती थी. लेकिन उस की इस कला और प्रभावशाली व्यक्तित्व से सामने वाला उस की बात मानने को मजबूर हो जाता था. बकौल सरिता अकेला बीजू ही ऐसा था, जिस के सामने न जाने क्यों उसे घुटने टेकने पड़े थे और वह हर तरह से उस का शोषण करता रहा था.

सरिता के बताए अनुसार, अपनी इस खूबी के सहारे उस ने तमाम बडे़बड़े लोगों से संपर्क बना लिए थे, जिन में कई पुलिस अधिकारियों, मंत्रियों और यहां तक कि मुख्यमंत्री ओमन चांडी तक शामिल थे. इन लोगों के यहां उसे बिना किसी औपचारिकता के आनेजाने की आजादी थी. वहां उसे सब पहचानते थे. न कोई उसे मुख्यमंत्री के औफिस में जाने से रोकता था न ही उस के लिए उन के निवास में प्रवेश करने पर कोई पाबंदी थी.

बकौल सरिता, इस के बावजूद सोलर मिशन से संबंधित ग्रांट देने के लिए मुख्यमंत्री ने 7 करोड़ की रिश्वत मांगी थी, जबकि पावर मिनिस्टर आर्यादन मोहम्मद ने अलग से 2 करोड़ रुपए की मांग की थी. सरिता के मुताबिक, तब उस ने 1.9 करोड़ रुपए  मुख्यमंत्री चांडी के सहायक थौमस कुरुविला को दिए थे और 40 लाख रुपए ले जा कर मोहम्मद के सैके्रट्री केसावान के हाथ पर रखे थे. लेकिन इन लोगों का साफ कहना है कि उन्होंने सरिता से कभी कोई रुपया नहीं लिया. वह झूठ बोल रही है. पता नहीं किस के इशारे पर वह उन्हें बदनाम करने के लिए इस तरह की मक्कारी भरा खेल खेल रही है.

सरिता के बताए अनुसार, रिश्वत में इतनी बड़ी रकम देने के बाद उसे पूरा विश्वास था कि उस का यह काम हो जाएगा. लेकिन उस का टैंडर ही गायब कर दिया गया. सरकारी ग्रांट मिलने का तो अब सवाल ही नहीं रह गया था. सरिता का ताश का महल भरभरा कर गिर चुका था. जिन लोगों ने इन के प्रोजैक्ट में पैसे लगाए थे, वे इन के विरुद्ध आ खड़े हुए. आखिर उन लोगों की शिकायत पर आपराधिक मामला दर्ज हुआ और जून, 2013 में सरिता नायर व बीजू राधाकृष्णन फिर से गिरफ्तार हो कर सलाखों के पीछे पहुंच गए.

सरिता के मुताबिक थिरुवानानाथापुरम के नजदीक जो जेल है, उसी में बैठ कर उस ने एक चिट्ठी लिखी. उस में उस ने उन तमाम अतिमहत्त्वपूर्ण लोगों के नाम दिए, जिन्होंने सोलर बिजनैस कौंट्रेक्ट दिलवाने के प्रौमिस के एवज में उस से शारीरिक संबंध बनाए थे. उपरोक्त 42 पृष्ठों की चिट्ठी में 13 वीआईपी लोगों के अलावा एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी का भी जिक्र था. हर व्यक्ति के बारे में सरिता ने विस्तारपूर्वक खुलासा किया था कि किस वादे के एवज में किस तारीख को और कहां उस का जिस्म नोचा गया था.

बकौल सरिता, वह अपने इस पत्र को मूल आकार में रिलीज करना चाहती थी, लेकिन एक जेल अधिकारी ने उसे समझाया और कांटछांट कर के इसे 4 पन्नों का बनवा दिया था. बीजू के अनुसार, इस से संबंधित एक सीडी उस के पास है. बीजू राधाकृष्णन द्वारा अपनी पत्नी की हत्या करने के सबूत भी पुलिस के हाथ लग गए थे. इस अपराध में उस की मां का शामिल होना भी पाया गया था. रेशमी हत्याकांड में उन पर केस चलाया गया. सन 2006 में हुए इस मर्डर का फैसला जनवरी, 2014 में आया, जिस के तहत बीजू व उस की मां को उम्रकैद की सजा सुनाई गई.

टीम सोलर के घपलों और सरिता नायर के गंभीर आरोपों के सिलसिले में सोलर कमीशन बना कर इस की व्यापक न्यायिक जांच पहले ही शुरू हो चुकी थी. इस जांच में एक से एक सनसनीखेज तथ्य सामने आ रहे हैं. इस सिलसिले में मुख्यमंत्री ओमन चांडी के गनमैन सलीमराज को गिरफ्तार करने के अलावा कई सरकारी उच्च अधिकारियों को नौकरी से निलंबित भी किया गया है. चांडी के खिलाफ सबूतों में सरिता ने उन नेताओं की रिकौर्डिंग भी कमीशन के हवाले की है, जिस में वे उसे चांडी के हक में बयान देने की बात समझा रहे हैं. मुख्यमंत्री ओमन चांडी इस सिलसिले में खुद को और अपनी सरकार को बचाने की जीतोड़ कोशिश कर रहे थे, जबकि सरिता नायर को आधार बना कर उन पर विपक्ष  के ताबड़तोड़ हमले जारी थे.

पहले सरिता, फिर नंदनी, फिर लक्ष्मी और अंत में फिर से सरिता नायर के रूप में आ कर इस अलग सी महिला ने जिंदगी से हर तरह की जंग लड़ने की ठान ली है. लड़के के बाद एक लड़की को भी उस ने जेल में ही जन्म दिया था. उस के ये दोनों बच्चे उस की मां की देखरेख में पल रहे हैं. जेल से जमानत पर छूटने के बाद सरिता नायर ने अपने खिलाफ लगे आरोपों को दरकिनार कर, अपनी जिंदगी का एक नया अध्याय लिखना शुरू कर दिया है. अपने को संगीत की दुनिया से जोड़ते हुए उस ने क्रिश्चियनैटी व हिंदुत्व के धार्मिक गीतों की 4 म्यूजिक एलबम निकाली हैं. 4 फिल्मों में काम करने का अनुबंध भी उस ने किया है. इन में एक फिल्म में वह महिला पुलिस अधिकारी का किरदार निभा रही है.

उस का कहना है, ‘‘मैं एक ऐसा डूबता जहाज हूं, जो कभी इस किनारे तो कभी उस किनारे से टकराने की भूल कर के अपने आस्तित्व को डांवाडोल करता रहा. मैं हरेक पर भरोसा कर के गलती पर गलती करती गई. मैं नहीं चाहती कि कोई मुझे मेरी गलती के लिए माफी दे. जहां भी मैं गलत साबित हो जाऊं, मुझे मेरे कुसूर की बराबर सजा दी जाए.

‘‘मैं हंसतेहंसते यह सजा कबूल करूंगी और इस सजा के खिलाफ अपील करने की सोचूंगी भी नहीं. लेकिन मुझे चिंता है अपने दोनों बच्चों के भविष्य की. आगे मुझे जो भी वक्त मिलेगा, मैं उस का सदुपयोग कर के अपने बच्चों का भविष्य सुरक्षित करने की कोशिश करूंगी. फिल्में करूं या एलबम रिलीज करूं, करूंगी सब पैसा कमाने के लिए ही.’’

सराह जोसेफ मलयालम लेखक और एक्टिविस्ट हैं. सरिता नायर पर की गई उन की टिप्पणी के अनुसार, वह एक ऐसी महिला है, जो सिस्टम की पहचान अपने तरीके से करने की कोशिश कर के भ्रष्ट राजनीतिज्ञों का इस्तेमाल करने की सोच बैठी थी. लेकिन उन्होंने न केवल उस से मोटी रिश्वत खाई, उस का जिस्मानी शोषण भी किया. इस लिहाज से वे सरिता नायर से भी बड़े अपराधी हैं. सरिता ने इन्हें एक्सपोज करने का साहस दिखाया है. True Crime Story