Crime Story in Hindi: निर्दोष कातिल

लेखक – एडवोकेट बलदेव राय, Crime Story in Hindi:  चश्मदीद गवाह तो था ही, पुलिस ने हत्या में प्रयुक्त हथियार भी बरामद कर लिया था. हत्यारे ने भी अपराध स्वीकार कर लिया था. तब वकील ने ऐसी कौन सी चाल चली कि सब कुछ झूठा हो गया और एक निर्दोष सजा पाने से बच गया. शा म 4 बजे के आसपास मैं सारी फाइलें समेट कर घर जाने की तैयारी कर रहा था कि मेरे परम मित्र वकील विनोद जिंदल ने मेरा रास्ता रोक लिया. मैं कुछ पूछता, उस के पहले ही उन्होंने कहा, ‘‘तुम्हें पता है या नहीं, सुनील सक्सेना का कत्ल हो गया है?’’

विनोद की यह बात सुन कर मैं अवाक रह गया, ‘‘कब और कैसे, उन्हें किस ने मार दिया?’’

विनोद और मैं सालों से दोस्त थे. एक ही जगह वकालत करते थे, इसलिए एक ही केबिन में बैठते थे. लगभग हर मुकदमे पर खुल कर बहस भी करते थे. यही वजह थी कि सक्सेना के कत्ल की सूचना मिलते ही विनोद जिंदल मुझे बताने चले आए थे. सुनील सक्सेना की मौत हमारे लिए गहरा आघात थी. हम दोनों उन्हें वर्षों से जानते थे. बेहद सीधेसादे सक्सेना साहब वर्षों पहले अकेले पड़ गए थे. एकलौता बेटा अमेरिका चला गया था तो पत्नी की मौत हो चुकी थी. सक्सेना साहब करोड़ों की संपत्ति के मालिक थे. यहां उन का उत्तराधिकारी कोई नहीं था. चूंकि मैं उन का पड़ोसी था, इसलिए उन की मौत ने मुझे हिला कर रख दिया था.

विनोद जिंदल और मैं ने पुलिस स्टेशन से संपर्क किया तो पता चला कि हत्यारा मौकाएवारदात पर ही पकड़ लिया गया था. यह जान कर हमें थोड़ी राहत महसूस हुई कि चलो हत्यारा पकड़ा गया है. मगर अगले ही पल हमारी खुशी हैरानी में बदल गई, क्योंकि सुनील सक्सेना की हत्या के आरोप में जिस मदन भाटिया को गिरफ्तार किया गया था, वह गूंगाबहरा था. वह भी हमारे मोहल्ले में ही रहता था. मोहल्ले का होने की वजह से हम मदन भाटिया को भी जानते थे. वह जन्मजात गूंगाबहरा नहीं था. एक हादसे में उस के बोलने और सुनने की शक्ति चली गई थी. उस के पिता की अनाज मंडी में काफी बड़ी आढ़त थी. पैसे वाले लोग थे. मोहल्ले में उन की गिनती इज्जतदार लोगों में होती थी. मदन गूंगा और बहरा था. इसलिए हत्या की वजह समझ में नहीं आ रही थी.

बहरहाल, इस हतयाकांड में अहम बात यह थी कि मौकाएवारदात का चश्मदीद गवाह मृतक सुनील सक्सेना का किराएदार नीरज अरोड़ा था. पुलिस ने हत्यारे मदन भाटिया को घटनास्थल से पिस्तौल सहित गिरफ्तार किया था. अगले दिन सभी अखबारों ने इस हत्याकांड को प्रमुखता से छापा था. पुलिस ने हत्या का मुकदमा दर्ज कर के हत्यारे मदन भाटिया को अदालत में पेश कर के पूछताछ के लिए एक दिन के पुलिस रिमांड पर लिया था. चूंकि हत्या में प्रयुक्त पिस्तौल पहले ही बरामद हो चुका था, इसलिए पूछताछ पूरी कर के पुलिस ने उसे पुन: अदालत में पेश किया, जहां से उसे जेल भेज दिया गया.

कुछ दिनों बाद पुलिस ने मामले की चार्जशीट अदालत में दाखिल कर दी. 3 महीने की लंबी कानूनी प्रक्रिया के बाद किसी तरह मदन भाटिया की जमानत हो सकी. इसी बीच केस की सुनवाई भी शुरू हो गई. मदन भाटिया के पिता श्याम भाटिया से मेरी कई मुलाकातें हुईं. उन्होंने केस लड़ने के लिए अपना वकील कर लिया था, मगर वह मेरे संपर्क में भी बने रहे और केस के हर पहलू पर मुझ से विचारविमर्श भी करते रहे. सच्चाई यह थी कि उन्हें अपने वकील की योग्यता पर कम, मुझ पर अधिक भरोसा था. हमारा मिलनेमिलाने का क्रम चलता रहा. सुनील सक्सेना का बेटा विकास सक्सेना भी पिता की मौत की जानकारी पा कर अमेरिका से भारत आ गया था. आते ही उस ने पिता के हत्यारे को कड़ी से कड़ी सजा दिलाने के लिए वकीलों की फौज खड़ी कर दी थी.

वह हर हाल में मदन को सजा दिलवाना चाहता था. हालात बहुत तेजी से बदल रहे थे. विकास की काररवाई को देखते हुए मदन के पिता श्याम भाटिया बेहद घबरा गए थे. उन्हें लगने लगा था कि मदन को सजा से बचाना मुश्किल ही नहीं, नामुमकिन है. लगभग 6 महीने बाद श्याम भाटिया ने मदन के मुकदमे की पैरवी के लिए मुझ से कहा तो मैं अजीब धर्मसंकट में फंस गया. क्योंकि उन से पहले विकास सक्सेना ने मुझे अपने पिता मृतक सुनील सक्सेना की ओर से मुकदमा लड़ने के लिए कहा था. तब मैं ने समयाभाव की बात कह कर मुकदमे की पैरवी के लिए मना कर दिया था.

ऐसे में अगर मुझे उस मुकदमे में कोई भूमिका निभानी चाहिए थी तो इंसानियत के नाते विकास सक्सेना की ओर से निभानी चाहिए थी. क्योंकि श्याम भाटिया से पहले उस ने मुझ से मुकदमा लड़ने को कहा था. इस के अलावा मृतक सुनील सक्सेना मेरे ज्यादा नजदीकी थे. मेरी उलझन अपनी जगह जायज थी. लेकिन मेरे सहयोगी वकीलों ने जल्दी ही मुझे इस उलझन से मुक्त करा दिया. अगली पेशी पर मैं ने मदन भाटिया की ओर से जवाबी दावा पेश कर दिया. मैं ने इस केस की सारी नकलें निकलवा कर उन का बारीकी से अध्ययन किया. फाइल के अध्ययन के दौरान मैं ने कई महत्त्वपूर्ण बिंदुओं पर जब गौर किया तो मुझे मदन को बचाने के कुछ बिंदु मिल गए.

वैसे तो इस केस में बहस के लिए कई ऐसे सवाल थे, जो इस केस का रुख पलट सकते थे. जैसे कि मदन ने सुनील सक्सेना की हत्या क्यों की, हत्या का उस का उद्देश्य क्या था? किसी भी मामले में सजा के लिए हत्या का कारण और उद्देश्य स्पष्ट करना जरूरी होता है. क्योंकि बिना किसी वजह के कोई किसी की हत्या जैसा अपराध क्यों करेगा? पुलिस ने चार्जशीट में हत्या की कोई वजह नहीं दर्शाई थी. मदन गूंगाबहरा था. उस की इसी कमी का फायदा उठा कर गोली कोई दूसरा भी चला सकता था. पुलिस ने इस बात का भी जिक्र नहीं किया था कि हत्या में प्रयुक्त पिस्तौल मदन ने कहां से खरीदी थी या उसे कहां से मिली थी? रिमांड के दौरान पुलिस ने उस से कोई बरामदगी भी नहीं दिखाई थी. पिस्तौल मौकाएवारदात से ही बरामद कर लिया गया था. इस के अलावा भी तमाम सवाल थे, जिस पर बहस की जा सकती थी.

मुकदमे की फाइल का अध्ययन करने के बाद मैं ने श्याम भाटिया से कुछ निजी जानकारियां हासिल कीं तो पता चला कि भाटिया परिवार का सुनील सक्सेना (मृतक) से किसी तरह का कोई संबंध नहीं था. घटना के समय मदन के हाथ से जो पिस्तौल मिली थी, उस के बारे में भी भाटिया परिवार कुछ नहीं बता सका का. एक बात का जिक्र करना मैं भूल गया कि मदन गूंगाबहरा जरूर था, मगर मानसिक रूप से पूरी तरह स्वस्थ था और बीए तक पढ़ा था. बीए में उस ने प्रथम स्थान प्राप्त किया था. इस के बाद ही उस का एक्सीडेंट हुआ था, जिस में वह अपनी बोलनेसुनने की शक्ति गंवा बैठा था.

मुकदमा काफी उलझा हुआ था, इसलिए मैं ने भाटिया परिवार से हट कर अपना ध्यान अन्य लोगों पर लगाया. एक दिन मैं औफिस में बैठा अपने सहयोगी से इसी केस पर चर्चा कर रहा था कि मेरे मुंशी ने कहा, ‘‘सर, यह चश्मदीद गवाह नीरज अरोड़ा बहुत ही शातिर दिमाग आदमी है. वह सक्सेना साहब के यहां भले ही पिछले 20 सालों से किराए पर रह रहा है, लेकिन आप को पता नहीं कि वह श्याम भाटिया का करीबी रिश्तेदार है.’’

‘‘क्या मतलब..?’’ मुंशी की बात सुन कर मैं चौंका. मेरा दिमाग चक्कर काटने लगा. मैं ने नीरज अरोड़ा और मदन भाटिया सहित मृतक सुनील सक्सेना को एक कड़ी में जोड़ कर देखा तो मुझे दाल में कुछ काला नजर आया.

मैं ने अपने शक को पुख्ता करने के लिए भाटिया परिवार से मुलाकात की तो पता चला कि मदन की सौतेली मां नीरज अरोड़ा की सगी बहन थी, लेकिन नीरज अरोड़ा का भाटिया परिवार से लगभग 32 सालों से कोई संबंध नहीं था. दरअसल नीरज की बहन ने आत्महत्या की थी. उस के बाद मदन के पिता श्याम भाटिया ने दूसरी शादी कर ली थी, जिस से मदन भाटिया सहित 3 संतानें थीं. यह एक ऐसी कड़ी थी, जो कातिल और चश्मदीद गवाह को आपस में जोड़ती थी. दरअसल, वकालत अपने आप में इस तरह की कडि़यों को जोड़ने और तानाबाना बुनने का ही नाम है, जिस तरह एक शब्द के छूट जाने से कहानी के मायने बदल जाते हैं,

उसी तरह किसी कड़ी के बिखर जाने से पूरा मामला ही पलट जाता है. अब मेरे लिए जरूरी था कि मैं मदन और सुनील कुमार को अलगअलग तरीके से नीरज अरोड़ा के साथ जोड़ कर मुकदमे को देखूं. जहां तक मदन की बात थी, मुझे पता चल गया था कि नीरज अरोड़ा अपने सौतेले भांजे को कतई पसंद नहीं करता था. रही बात सुनील सक्सेना की तो वह एक शरीफ और सीधेसादे आदमी थे. लड़ाईझगड़ा से उन का दूरदूर तक कोई नाता नहीं था. मोहल्ले के सभी लोग जानते थे. सक्सेना साहब धार्मिक कार्यों और समाजसेवा में लगे रहते थे. समझ में नहीं आ रहा था कि उन की हत्या क्यों की गई? कुल मिला कर पूरा मुकदमा उलझनों और पेचीदगियों से भरा था.

सुनील सक्सेना हत्याकांड से जुड़ा हर आदमी एक रहस्य की चादर ओढ़े था. नामजद हत्यारे मदन को ही ले लें, उस ने पुलिस के सामने स्वीकार किया था कि हत्या उसी ने की थी. वजह पूछी गई तो उस ने सिर्फ इतना ही कहा था कि सुनील ने उसे रोक कर मारपीट की तो उसे गुस्सा आ गया और उस ने उन्हें गोली मार दी. लड़ाई कहां से और कैसे शुरू हुई, इस का जिक्र मदन ने अपने बयान में नहीं किया था. धीरेधीरे डेढ़ साल गुजर गए. मुकदमे में तारीखें पड़ती रहीं. गवाहियों का समय आया तो सब से पहले मृतक सुनील सक्सेना का किराएदार और इस मुकदमे का चश्मदीद गवाह नीरज अरोड़ा अदालत में पेश हुआ. कटघरे में खड़े हो कर गीता हाथ पर रख कर सत्य बोलने की शपथ लेने के बार अदालती प्रक्रिया शुरू हुई तो न्यायाधीश महोदय ने उस से पूछा, ‘‘घटना वाले दिन तुम कहां थे और तुम ने क्या देखा? विस्तार से अदालत को बताओ?’’

‘‘जब साहब, मैं अपने कमरे से बाहर बालकनी में धूप सेंक रहा था, क्योंकि उस दिन सर्दी कुछ अधिक थी. उसी बीच मुझे शोर सुनाई दिया तो मैं ने नीचे गली में झांका. मेरे मकान मालिक सुनील सक्सेना और मदन भाटिया के बीच हाथापाई हो रही थी. मैं उन्हें छुड़ाने के लिए नीचे भागा. नीचे आने पर मैं उन से चंद कदम दूर रह गया था कि मदन भाटिया ने सुनील सक्सेना पर पिस्तौल से गोली चला दी. गोली लगते ही सुनील सक्सेना गिर पड़े.’’

नवीन अरोड़ा धाराप्रवाह बोल रहा था, इतना कह कर वह रुका तो जज साहब ने कहा, ‘‘बताओ, इस के आगे क्या हुआ?’’

एक लंबी सांस ले कर नवीन ने कहा, ‘‘साहब, जब मैं उन के करीब पहुंचा तो सक्सेना साहब जमीन पर पड़े तड़प रहे थे और मदन हाथ में पिस्तौल लिए खड़ा था. उस समय भी पिस्तौल की नली का रुख सक्सेना साहब की ही ओर था.’’

‘‘तुम्हें ठीक से याद है ना, तुम ने ठीक से देखा था ना कि गोली मदन भाटिया ने ही चलाई थी?’’ सरकारी वकील श्री पांडेय ने पूछा.

‘‘जी बिलकुल याद है. मैं ने अपनी आंखों से देखा था, गोली मदन भाटिया ने ही चलाई थी.’’ नवीन अरोड़ा ने यह बात अपनी आंखों की ओर इशारा कर के दृढ़ता से कही थी. नवीन अरोड़ा ने जब यह बात कही थी, अपनी आखों पर चश्मा लगा रखा था. इस के बाद जज साहब ने मुझ से कहा, ‘‘अगर आप को गवाह से कुछ पूछना है तो पूछ सकते हैं.’’

यहां यह बताना जरूरी है कि पुलिस ने इस मामले में सिर्फ नीरज अरोड़ा को ही चश्मदीद गवाह बनाया था. बाकी पोस्टमार्टम करने वाला डाक्टर, घटनास्थल के फोटो खींचने वाला क्राईम फोटोग्राफर, फिंगरप्रिंट विशेषज्ञ आदि सब फारमैल्टी गवाह थे. कहने का मतलब यह कि सारा मामला नीरज अरोड़ा की गवाही पर टिका था. अगर मैं किसी तरह नीरज को झूठा साबित करने में सफल हो जाता तो यह मामला अपने आप ही खत्म हो जाता. बहरहाल, मैं ने नवीन अरोड़ा की आंखों की ओर इशारा कर के पहला सवाल किया, ‘‘हां तो अरोड़ा साहब, आप ने सचमुच इन्हीं आंखों से गोली चलते देखी थी?’’

अरोड़ा को स्वयं पर कुछ ज्यादा ही विश्वास था. शायद वह बयान को अच्छी तरह से पढ़ और समझ कर आया था. मेरे सवाल के जवाब में उस ने मेरा मजाक उड़ाने के अंदाज में बड़ी मासूमियत से कहा, ‘‘जज साहब, केवल यही एक जोड़ी आंखें मेरे पास हैं, विवशतावश इन्हीं से ही देखना पड़ा था. किसी और की आंखें तो मांग नहीं सकता था.’’

अरोड़ा ने यह बात इतनी मासूमियत से कही थी कि अदालत में ठहाके गूंज उठे. जज साहब ने सभी को चुप रहने के लिए कहा तो मैं ने पुन: अपना वही सवाल दोहराया. इस बार वह कुछ उलझन में पड़ गया. कुछ देर सोच कर बोला, ‘‘वकील साहब, मैं पहले ही आप को बता चुका हूं कि खून होते हुए मैं ने अपनी इन्हीं आंखों से देखा था.’’

उस के इतना कहते ही मैं ने वही सवाल दूसरे तरीके से पूछा, ‘‘इन्हीं आंखों से देखा था?’’

‘‘हां भई, कितनी बार बताऊं? आप बारबार एक ही सवाल क्यों पूछ रहे हैं.’’ नीरज बुरी तरह झुंझला गया. मेरे प्रतिद्वंद्वी वकील ने औब्जैक्शन किया, ‘‘जज साहब गवाह को गुमराह करने की कोशिश की जा रही है.’’

मैं ने बड़ी शालीनता के साथ अदालत से अनुरोध किया, ‘‘जज साहब, मुझे गवाह से कुछ अहम सवाल पूछने दिए जाएं. अगर मेरे प्रतिद्वंदी वकील बीच में रुकावट डालने की कोशिश न करें तो मैं अभी इन के इस गवाह को झूठा साबित कर दूंगा कि मदन भाटिया ने गोली चलाई ही नहीं थी, वह निर्दोष है. इस मामले में पुलिस ने भी गहराई से जांच नहीं की. जो सामने आया, उसी स्थिति में मुकदमा खड़ा कर दिया. यह मुकदमा रेत पर खड़े किए महल की तरह है.’’

जज साहब मेरी बात से पूरी तरह सहमत दिखाई दिए. उन्होंने प्रतिद्वंदी वकीलों को शांत रहने और मुझे चश्मदीद गवाह नीरज अरोड़ा से जिरह जारी रखने के लिए कहा. जज साहब से इजाजत मिलते ही मैं ने नवीन अरोड़ा के समीप जा कर उस के चेहरे पर नजरें गड़ा कर पूछा, ‘‘अरोड़ा साहब, आप का यह चश्मा कैसे टूटा?’’

मेरा यह सवाल सुनते ही उस का दाहिना हाथ चश्मे पर चला गया. चश्मे पर हाथ फेरते हुए उस ने कहा, ‘‘चश्मा तो बिलकुल ठीक है वकील साहब, यह तो कहीं नहीं टूटा.’’

मैं ने उसी अंदाज में कहा, ‘‘लाइए, मुझे दीजिए चश्मा, मैं दिखाता हूं आप का यह चश्मा कहां टूटा है.’’

नीरज अरोड़ा ने चश्मा उतार कर मेरी ओर बढ़ा दिया. मैं ने चश्मा उलटपलट कर देखा और 2 मीटर दूर जा खड़ा हुआ. इस के बाद चश्मा लहराते हुए मैं ने पूछा, ‘‘अरोड़ा साहब, क्या आप बता सकते हैं कि यह वही पिस्तौल है, जिस से मदन भाटिया ने उस दिन सुनील सक्सेना पर गोली चलाई थी?’’

नवीन अरोड़ा परेशान हो कर अपनी आंखों पर जोर डालते हुए बोला, ‘‘वकील साहब, जरा नजदीक तो आइए.’’

मैं आधा मीटर आगे जरूर बढ़ा, लेकिन चश्मा बाएं हाथ से पकड़ कर पीछे ही किए रहा यानी कि चश्मा उस की आंखों से उतनी ही दूरी पर था. कुछ क्षणों तक वह पलकें खोलता और बंद करता रहा. उस के बाद बड़ी होशियारी से बोला, ‘‘जज साहब, डेढ़ साल पुरानी बात है और फिर उस रिवाल्वर पर ऐसी कोई खास निशानी नहीं थी, जिसे मैं दिमाग में बैठा लेता. जैसी पिस्तौलें होती हैं, वैसी ही वह भी थी. शायद ऐसी ही, जैसी वकील साहब हाथ में पकड़ कर दिखा रहे हैं.’’

नीरज अरोड़ा के इतना कहते ही अदालत में हलचल मच गई. लोग आपस में बातचीत करने लगे. मेरे प्रतिद्वंदी वकीलों की भौंहें तन गईं. जबकि मैं अपने मकसद में कामयाब हो गया था. मैं अदालत को जो बात बताना चाहता था, जज साहब उसे काफी हद तक समझ गए थे. अदालत में मौजूद अन्य लोग भी समझ गए थे कि मैं क्या साबित करना चाहता था. शोर कम हुआ तो मैं ने कहा, ‘‘जज साहब, प्रौसीक्यूशन द्वारा पेश किया गया यह गवाह तो झूठा साबित हुआ. इसी की गवाही पर इस मुकदमे की नींव टिकी थी. इस गवाह की दूर की नजर इतनी ज्यादा कमजोर है कि 2 सौ गज दूर तो क्या, 2 गज दूर से भी यह किसी को नहीं पहचान सकता. अभी अदालत ने देखा कि किस तरह यह अपने ही चश्मे को रिवाल्वर बता रहा था.’’

नवीन अरोड़ा की आंखों की जांच रिपोर्ट जो मैं ने उस के डाक्टर से प्राप्त की थी, जज साहब के सामने रखते हुए कहा, ‘‘सर, यह आदमी किसी को भी ठीक से नहीं पहचान सकता.’’

मेरे इतना कहते ही नवीन अरोड़ा चीख उठा, ‘‘चश्मा पहन कर मैं सब कुछ देखपहचान सकता हूं. वकील साहब, मेरा चश्मा दीजिए. उस के बाद देखिए. मैं कितनी दूर तक देखता हूं.’’

मैं उस के मुंह से यही कहलवाना चाहता था. इस के बाद मैं ने चश्मा नीरज अरोड़ा को लौटा दिया और पुलिस को दिए उस के बयान की प्रति अपनी फाइल से निकाल कर जज साहब के सामने रख कर कहा, ‘‘सर, अभीअभी नीरज अरोड़ा ने कहा है कि वह चश्मा पहन कर ही दूर तक देख सकता है. इस का मतलब यह हुआ कि बिना चश्मे के वह देखने में असमर्थ है. पुलिस को दिए अपने बयान में इस ने कहा था कि यह बालकनी में धूप सेंक रहा था. वहां बालकनी में एक चारपाई हमेशा पड़ी रहती थी. वह अक्सर उसी चारपाई पर धूप में सो जाया करता था. मैं ठीक कह रहा हूं ना मि. अरोड़ा?’’

‘‘जी बिलकुल ठीक है. धूप में लेटने से आलस्य आ ही जाता है और अक्सर आंख भी लग जाती है.’’ नीरज अरोड़ा ने मेरी बात का समर्थन किया.

‘‘सर, जिस समय नीचे गली में गोली चली, उस समय भी नीरज अरोड़ा चारपाई पर पड़ा सो रहा था. गोली की आवाज से ही यह जागे थे.’’ इस के बाद मैं ने अपना तर्क प्रस्तुत किया, ‘‘जज साहब, कोई भी आदमी सोते हुए चश्मा नहीं पहनता. अब इस के पीछे धारणा चश्मा टूटने की हो या और कुछ, लेकिन यह सत्य है कि सोते समय चश्मा नहीं पहना जाता.’’

जज साहब मेरी बात से सहमत थे. इस से यह साबित हो गया कि नीरज अरोड़ा ने झूठ बोल कर अदालत को बरगलाया और समय खराब किया था. लिहाजा अदालत ने उस की गवाही रद्द कर दी. पुलिस के पास मदन को कातिल ठहराने का यही एक जरिया था, जो बुरे तरीके से पिट गया था. लेकिन इस के बाद एक अहम सवाल यह बाकी था कि मदन के पास पिस्तौल कहां से आई? इस विषय पर पुलिस की छानबीन मदन भाटिया की गिरफ्तारी और उस के बयान पर आ कर खत्म हो गई थी. 2 महीने बाद की तारीख लगी. उसी दौरान एक करिश्मा हो गया. पुलिस ने लुटेरों के एक ऐसे गिरोह को डकैती डालते हुए रंगेहाथों पकड़ा, जिस के सरगना ने अनेक डकैतियों, अपहरण, हत्या और लूट की वारदातों को स्वीकार किया. उसी में सुनील सक्सेना का कत्ल भी शामिल था.

मामला शीशे की तरह साफ हो गया. पूछताछ में गिरोह के सरगना राम सिंह ने बताया था कि उस दिन शाम को वह अपने साथियों के साथ अनाज मंडी से ही सक्सेना का पीछा करते हुए उस की गली तक पहुंचा. सक्सेना के पास नोटों से भरा बैग था, जिस में लाखों की नगदी थी. जिस समय वह सक्सेना से रुपयों का थैला छीन रहा था, संयोग से उसी समय वह लड़का साइकिल चलाता हुआ वहां आ गया था. राम सिंह के साथ 2 लोग और थे. उस का एक साथी नोटों से भरा बैग छीना और भाग लिया. सक्सेना ने दौड़ कर राम सिंह को पकड़ लिया. अपने बचाव के लिए उस ने अपनी पिस्तौल से सक्सेना को गोली मार दी और पीछे मुड़ कर भागा.

तभी उस लड़के ने उस का रास्ता रोक लिया. उस ने पिस्तौल उसे थमा दी और धक्का मार कर भाग लिया. घायल होने के बावजूद भी सक्सेना उठे और उसे पकड़ने दौड़े. लेकिन वह झुक कर निकल गया. इस के बाद सक्सेना हाथ में पिस्तौल थामे उस लड़के के ऊपर गिर गया. राम सिंह ने आगे बताया था कि उसी बीच गोली चलने की आवाज सुन कर गली के दूसरी ओर हलचल मच गई थी. लेकिन वह तेजी से दूसरी ओर से भाग गया था. राम सिंह के बयान से साफ हो गया था कि गोली मदन ने नहीं चलाई थी. गोली तो उस के हाथ में पिस्तौल आने से पहले ही चल चुकी थी. पकडे़ जाने के डर से खाली पिस्तौल राम सिंह ने मदन को थमा दी थी, जबकि मदन ने समझा कि गोली उस से चली होगी, क्योंकि हाथ में पिस्तौल आते ही खून से लथपथ सक्सेना मदन के ऊपर आ गिरे थे. इस से मदन को लगा कि गोली उस से पिस्तौल से निकल कर लगी है.

मदन ने जब गली में प्रवेश किया था, तब तक राम सिंह के साथी सक्सेना को लूट कर भाग चुके थे. इसलिए मदन ने डकैती होते नहीं देखी थी. लेकिन एक बात अंत तक किसी की समझ में नहीं आई कि मदन ने सक्सेना और राम सिंह के बीच होने वाली हाथापाई का जिक्र अपने बयान में क्यों नहीं किया था. हालांकि बरी होने के बाद मदन ने मुझे बताया था कि यह सब बातें उस ने पुलिस को बताई थीं, लेकिन पुलिस वाले उसे ही अभियुक्त बना कर जांच से बचना चाहते थे. इस के अलावा उसे खुद ही लग रहा था कि गोली उसी से चली थी, इसलिए उस ने अपराध स्वीकार कर लिया था.

बहरहाल, जज साहब ने सब की दलीलें सुनीं, बयान पढ़े, सुबूत देखे और फिर फैसला सुनाया, ‘‘सुनील सक्सेना हत्याकांड में असली मुजरिम पकड़ा जा चुका था और उस ने अपना अपराध स्वीकार कर लिया था, इसलिए अदालत राम सिंह को दोषी करार देते हुए सुनील सक्सेना की हत्या व लूट का दोषी ठहराते हुए उम्रकैद की सजा व 20 हजार रुपए जुर्माने की सजा सुनाती है और मदन भाटिया को बाइज्जत बरी करती है.’’

इस तरह रहस्यरोमांच से भरपूर कत्ल का यह मामला पूरे 3 सालों तक चलने के बाद इस निर्णय पर पहुंचा. अगर कहीं नीरज अरोड़ा की गवाही सच मान ली जाती या राम सिंह न पकड़ा गया होता तो निश्चित मदन को सजा हो जाती. तब एक बेजुबान निर्दोष के साथ कितना बड़ा अन्याय होता. Crime Story in Hindi

(कथा एक सत्यघटना पर आधारित)

प्रस्तुति—हरमिं

Hindi Kahani : पानी चोर – कैसे बनी कल्पना दोषी

Hindi Kahani : रात के तकरीबन 2 बजे थे. कल्पना ने अपना कई दिनों से खाली पड़ा घड़ा उठाया और उसे साड़ी के पल्लू से ढक कर दबे पैर घर से चल पड़ी. करीब 15 मकानों के बाद वह एक कोठी के सामने रुक गई. कल्पना को कोठी की एक खिड़की अधखुली नजर आई. उस ने धीरे से पल्ला धकेला, तो खिड़की खुल गई. उस की आंखें खुशी से चमक उठीं. वह उस खिड़की को फांद कर कोठी में घुस गई. कोठी के अंदर पंखों व कूलरों की आवाजों के अलावा एकदम खामोशी थी. लोग गहरी नींद में सो रहे थे.

कल्पना एक कमरा पार कर के दूसरे कमरे में पहुंची. वहां अलमारी अधखुली थी, जिस में से नोटों की गड्डियां व सोने के गहने साफ दिखाई दे रहे थे. कल्पना उन्हें नजरअंदाज करती हुई आगे बढ़ गई और तीसरे कमरे में पहुंची. वहां कई टंकियों में पानी भरा हुआ था.

कल्पना ने अपना घड़ा एक टंकी में डुबोया और पानी भर कर जिस तरह से कोठी में दाखिल हुई थी, उसी तरह से पानी ले कर अपने घर लौट आई.

‘‘पानी ले आई कल्पना. जब मैं ने देखा कि घड़ा घर पर नहीं है, तो सोचा कि तू पानी लेने ही गई होगी,’’ कल्पना के अधेड़ पति शंकर ने कहा, जो 2 महीने से मलेरिया से पीडि़त हो कर चारपाई पर पड़ा था.

‘‘जी, पानी मिल गया. आप पानी पी कर अपनी प्यास बुझाएं. मैं दूसरा घड़ा भर कर लाती हूं. अजीत उठे, तो उसे भी पानी पिला दीजिएगा,’’ कल्पना ने पानी से भरा गिलास देते हुए कहा.

शंकर ने पानी पी कर अपनी प्यास बुझाई. 2 दिनों से इस घर के तीनों लोगों ने एक बूंद पानी भी नहीं पीया था. अजीत तो कल्पना का दूध पी लेता था, मगर कल्पना और शंकर प्यास से बेचैन हो गए थे.

कल्पना ने पानी से भरा हुआ दूसरा घड़ा भी ला कर रख दिया. जब वह तीसरा घड़ा उठा कर बाहर जाने लगी, तब शंकर ने पूछा, ‘‘आज भीड़ नहीं है क्या? तू ने पानी पीया? टैंकर कहां खड़ा है? क्या आज सरपंच ने टैंकर अपने घर में खाली नहीं किया?’’

‘‘आप आराम कीजिए, मैं अभी यह घड़ा भी भर कर लाती हूं,’’ कह कर कल्पना तीसरा घड़ा उठा कर चली गई.

इस बार भी कल्पना उसी तरह कोठी में दाखिल हुई और घड़ा टंकी में डुबोया. घड़े में पानी भरने की आवाज से अब की बार कोठी का कुत्ता जाग कर भूंकने लगा.

तभी कल्पना को बासी रोटी के टुकड़े एक थाली में पड़े दिखाई दिए. कल्पना ने रोटी का टुकड़ा उठा कर कुत्ते की ओर फेंका और घड़ा उठा कर तीर की मानिंद कोठी के बाहर हो गई. तभी एक काले से आदमी ने वहां आ कर तेज आवाज में कल्पना से पूछा, ‘‘कौन हो?’’

कल्पना बिना कुछ कहे आगे बढ़ती गई. वह आवाज पहचान गई थी. वह सरपंच राम सिंह ठाकुर की आवाज थी. सरपंच ने कल्पना का पीछा करते हुए कहा, ‘‘चोर कहीं की, पानी चोर. शर्म नहीं आती पानी चुराते हुए.’’

इतना कह कर सरपंच ने कल्पना को दबोच लिया. उस ने खुद को छुड़ाना चाहा, तो सरपंच बोला, ‘‘मैं अभी ‘पानी चोर’ कह कर शोर मचा कर सारे गांव वालों को जमा कर दूंगा. भलाई इसी में है कि तू वापस कोठी चल और मुझे खुश कर दे. मैं तेरी हर मुराद पूरी करूंगा.’’

‘‘चल हट,’’ हाथ छुड़ाते हुए कल्पना ने कहा.

सरपंच ने जब देखा कि कल्पना नहीं मान रही है, तो उस ने ‘चोरचोर, पानी चोर’ कह कर जोरजोर से आवाजें लगानी शुरू कर दीं.

आवाज सुन कर गांव वाले लाठी व फरसा ले कर कोठी के पास जमा हो गए. कुछ लोग लालटेनें ले कर आए. मामला जानने के बाद कुछ लोग कल्पना से हमदर्दी जताते हुए कह रहे थे कि बेचारी क्या करती, 2 दिनों से उसे पानी नहीं मिला था. दूसरी ओर सरपंच के चमचे कह रहे थे कि इस पानी चोर को पुलिस के हवाले करो.

‘‘ऐसा मत करो, बेचारी गरीब है. छोड़ दो बेचारी को,’’ एक बूढ़ी औरत ने हमदर्दी जताते हुए कहा.

किसी ने कल्पना के पति शंकर को जा कर बताया कि कल्पना सरपंच के घर से पानी चुराते हुए पकड़ ली गई है और उसे थाना ले जा रहे हैं. बीमार शंकर भागाभागा आया और सरपंच के पैरों पर गिर कर कल्पना की ओर से माफी मांगने लगा. मगर ठाकुर ने उसे पैरों की ठोकर मार दी और कल्पना को ले कर थाने की ओर चल पड़ा. बेचारा शंकर यह सदमा बरदाश्त न कर सका और वहीं हमेशा के लिए सो गया.

कल्पना को ले कर जब सरपंच और उस के चमचे थाने पहुंचे, तो थानेदार ने पूछा, ‘‘क्या हो गया? यह लड़की कौन है? इसे बांध कर क्यों लाए हो?’’

सरपंच ने थानेदार को नमस्ते करते हुए कहा, ‘‘जी, मैं गांव डोगरपुर का सरपंच ठाकुर राम सिंह हूं. इस औरत ने मेरी हवेली में घुस कर चोरी की है. मैं ने इसे रंगे हाथों पकड़ा है और आप के पास शिकायत करने आया हूं,’’ सरपंच ने कहा.

‘‘कितना माल यानी मेरा मतलब है कि कितना सोनाचांदी व रुपए चोरी किए हैं इस ने?’’ थानेदार ने पूछा.

‘‘जी, रुपए या सोनाचांदी नहीं, इस ने तो एक घड़ा पानी मेरे घर में घुस कर चुराया है.

‘‘समूचे इलाके के लोग बूंदबूंद पानी के लिए तरस रहे हैं, वे 15 किलोमीटर पैदल चल कर मुश्किल से एक घड़ा पानी ले कर लौटते हैं.

‘‘इस की हिम्मत तो देखिए साहब, खिड़की फांद कर पानी चुरा कर ले जा रही थी,’’ सरपंच ने बताया.

‘‘क्या चाहते हो तुम?’’

‘‘आप रिपोर्ट लिख कर इस औरत को जेल भेज दो,’’ सरपंच ने कहा.

‘‘जाओ मुंशीजी के पास रिपोर्ट लिखवा दो.’’

‘‘मुंशीजी, रिपोर्ट लिखाने से पहले सरपंच को अच्छी तरह समझा देना,’’ थानेदार ने मुंशीजी को आवाज लगा कर कहा.

मुंशीजी ने सरपंच को एक ओर ले जा कर उस के कान में कुछ कहा.

‘‘अरे हैड साहब, मैं कई सालों से सरपंच हूं. मैं यह अच्छी तरह जानता हूं कि बिना लिएदिए आजकल कोई काम नहीं होता है,’’ सरपंच ने जेब से नोटों की 2 गड्डियां निकाल कर मुंशीजी के हवाले कर दीं.

मुंशीजी ने सरपंच की एफआईआर दर्ज कर ली. कल्पना को थानेदार के सामने पेश किया, ‘‘श्रीमानजी, यह वही लड़की है, जिस ने मेरे घर से एक घड़ा पानी चुराया है.’’

थानेदार ने कल्पना को नीचे से ऊपर तक घूरा और बोला, ‘‘क्या तू ने चोरी की? चोरी करते वक्त तुझे शर्म नहीं आई?’’

कल्पना पत्ते की तरह कांप रही थी. उस के रोने से मुरझाए हुए चेहरे पर आंसुओं की लाइनें नजर आ रही थीं.

दूसरे दिन कल्पना को अदालत में पेश किया गया. वहां सरपंच के साथ उस के चमचे कल्पना के खिलाफ गवाही देने के लिए आए हुए थे. पुलिस ने पानी से भरा हुआ वह घड़ा अदालत में पेश किया, जो कल्पना के पास से जब्त किया गया था. जज ने सब से पहले कल्पना की ओर देखा, जो कठघरे में सिर नीचा किए खड़ी थी. अदालत ने गवाहों के लिए पुकार लगवाई. सरपंच के चमचों ने अदालत को बताया कि कल्पना ने पानी चुराया, जिसे सरपंच ने रंग हाथों पकड़ लिया. मगर मौके पर कोई गवाह नहीं था. सभी गवाहों ने यही बताया कि सरपंच ने उन्हें बताया.

जज ने कल्पना से पूछा, ‘‘क्यों, क्या तुम ने एक घड़ा पानी सरपंच के घर से चुराया?’’

‘‘जी, एक घड़ा नहीं, बल्कि 3 घड़े पानी मैं सरपंच के घर से लाई. पर उसे चुराया नहीं, बल्कि अपने हिस्से का ले कर आई,’’ कल्पना ने बेधड़क हो कर बताया.

‘‘अपने हिस्से का… चुराया नहीं, लाई का क्या मतलब है?’’ जज ने पूछा.

‘‘इस भयंकर गरमी में गांव के सारे कुएं, हैंडपंप व तालाब सूख गए हैं. एकएक बूंद पानी के लिए गांव वाले तरस रहे हैं. प्यास से मर रहे हैं.

‘‘पंचायत ने गांव में पानी का इंतजाम किया है. हमारे गांव में पानी के लिए सिर्फ 2 टैंकरों का इंतजाम है, जिस में से एक टैंकर सरपंच अपने घर खाली करा लेता है, जिसे वह चोरी से बेचता है. दूसरे टैंकर का पानी गांव वाले छीनाझपटी कर के लेते हैं.

‘‘मैं वह अभागी औरत हूं, जिसे कई दिनों से एक बूंद पानी नहीं मिला. बीमार पति घर में हैं. मैं सरपंच के घर से अपने हिस्से का पानी ही लाई हूं.

‘‘मेरी बातों पर यकीन न हो, तो इन गांव वालों से पूछ लीजिए. मैं अदालत से गुजारिश करती हूं कि मैं पानी चोर नहीं हूं, बल्कि असली पानी चोर तो सरपंच है. सरपंच के घर की टंकियां पानी से भरी पड़ी हैं.’’

अदालत में गांव वालों ने भी कहा कि यह बात सच है. कल्पना सही कह रही है.

वह 50 रुपए प्रति घड़े की दर से पानी बेचता है. अभी इस वक्त भी सरपंच के घर पानी के लिए ग्राहकों की लंबी कतार लगी है. सरपंच बगलें झांकने लगा. जज को सरपंच व पुलिस की जालसाजी की बू इस मुकदमे में आने लगी. कल्पना को अदालत ने बाइज्जत बरी कर दिया और असली चोर को पकड़ने के लिए जांच के आदेश जारी कर दिए गए. कल्पना जब अपने गांव पहुंची, तो उसे पता चला कि किसी ने रात में ही उस के पति शंकर, जो सदमे से उसी दिन चल बसा था, की लाश फूंक दी थी.

जब कल्पना अपने घर पहुंची, तो उस का अबोध लड़का अजीत भी हमेशा के लिए सोया हुआ मिला. कल्पना ने जैसे ही अपने बेटे की लाश को देखा, तो उस की जोर से चीख निकल पड़ी.

‘‘अजीत… अजीत…’’ कह कर वह बेहोश हो गई. गांव वाले जो कल्पना के खिलाफ थे, अब सरपंच के खिलाफ नारेबाजी करने लगे, ‘पानी चोर… सरपंच पानी चोर… असली चोर सरपंच…’

कल्पना पागल हो चुकी थी. वह अपने बेटे की लाश को बता रही थी, ‘‘बेटे, मैं पानी चोर नहीं हूं, असली पानी चोर सरपंच है.’’ इतना कह कर कल्पना कभी हंसती, तो कभी रोने लगती थी. पुलिस ने सरपंच के घर से लबालब भरी पानी की कई टंकियों को जब्त किया. जो पानी खरीदने आए थे, उन्हें गवाह बना कर ठाकुर को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया. Hindi Kahani

Crime Story in Hindi : योगा ट्रैनर मर्डर में किसे बचा रही है पुलिस

Crime Story in Hindi : अवैध संबंधों का आरोप लगाते हुए नैनीताल पुलिस ने 35 वर्षीय योगा ट्रैनर ज्योति मेर की हत्या के आरोपी 24 वर्षीय अभय यदुवंशी को गिरफ्तार कर के अपनी पीठ खुद थपथपा ली है. मृतका के फेमिली वालों का आरोप है कि इस हत्याकांड में अन्य कई रसूखदार लोग भी शामिल हैं. आखिर पुलिस के हाथ उन के गिरेबान तक क्यों नहीं पहुंच रहे?

योगा ट्रैनर ज्योति मेर ने हल्द्वानी में स्थित अजय योगा ऐंड फिटनैस सेंटर में आकर्षक वेतन पर महिला योग ट्रैनर के रूप में अपनी नौकरी शुरू की थी. नौकरी जौइन करते ही ज्योति के फेमिली वालों ने उसे जे.के. पुरम छोटी मुखानी में आशा पांडे के घर में किराए पर रूम दिला दिया था. वह वहां रह कर नौकरी कर रही थी. वैसे ज्योति शादीशुदा थी. मूलरूप से हल्दूचौड़, लालकुआं की निवासी ज्योति का विवाह जोधपुर, राजस्थान निवासी कमल सबलानी से हुआ था.

जब से 35 वर्षीय ज्योति मेर ने अजय योगा सेंटर में काम करना शुरू किया था, तभी से उसे अपने मायके की बचपन की एक फ्रेंड नीरा (परिवर्तित नाम) से भी परिचय हो गया था. एक दिन शाम के समय ज्योति को नीरा मिल गई. वह बाजार से सब्जी खरीद रही थी. इस के बाद जब इतने सालों के बाद दोनों एक बार फिर मिले तो दोनों ने एकदूसरे के मोबाइल नंबर ले लिए थे. इन का एकदूसरे के घर आनाजाना भी हो गया था.

ज्योति तो योगा सेंटर में जौब के कारण बिजी होने की वजह से नीरा के घर पर कम ही जा पाती थी, लेकिन नीरा हर तीसरे या चौथे दिन ज्योति से मिलने उस के कमरे पर चली जाया करती थी. उस के बाद वे दोनों सहेलियां बचपन की बातें करतेकरते अपने बचपन की दुनिया में जा पहुंचते थे. इस के अलावा नीरा हर रोज सुबह और शाम को ज्योति के साथ फोन पर बात कर के उस के हालसमाचार लेती रहती थी.

31 जुलाई, 2025 की सुबह 9 बजे नीरा ने रोज की तरह ज्योति को फोन किया. ज्योति के मोबाइल फोन पर घंटी तो जा रही थी, मगर वह फोन रिसीव नहीं कर रही थी. नीरा ने सोचा कि शायद ज्योति बाथरूम में होगी तो इसलिए फोन नहीं उठा रही होगी. उस के बाद नीरा ने हर 5 मिनट बाद ज्योति को कौल करनी शुरू की, मगर ज्योति ने फोन नहीं उठाया.

यह पहली बार था, जब ज्योति इतनी बार कौल करने के बाद भी उस का फोन नहीं उठा रही थी. नीरा ने अपने घर का काम जल्दी से किया और उस के बाद सीधे अपनी सहेली ज्योति मेर के कमरे पर जा पहुंची. जैसे ही नीरा ज्योति के कमरे में पहुंची तो वह फर्श पर बेदम और बेसुध पड़ी हुई थी. नीरा ने तुरंत ज्योति की मम्मी को इस घटना की सूचना दी और मकान मालिक व पड़ोसियों के सहयोग से थाना मुखानी में फोन कर इस घटना की सूचना दी.

शोर सुन कर अब तक घटनास्थल पर पासपड़ोस के काफी लोग भी पहुंच गए थे. थोड़ी ही देर बाद मुखानी थाने के एसएचओ दिनेश जोशी भी कुछ पुलिसकर्मियों के साथ घटनास्थल पर पहुंच गए. एसएचओ दिनेश जोशी ने ज्योति मेर को तुरंत अस्पताल पहुंचाया, जहां पर डौक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया. उस के बाद तो ज्योति मेर के फेमिली वाले भी पहुंच चुके थे. वहां पर लोग तरहतरह के कयास लगा रहे थे.

पुलिस क्यों मान रही थी आत्महत्या

शुरुआती जांच में पुलिस इसे आत्महत्या का केस मान कर चल रही थी, मगर ज्योति के फेमिली वालों का आरोप था कि ज्योति के गले व शरीर के अन्य भागों पर चोट और किसी चीज द्वारा गला दबाए जाने के निशान थे, जिस से वह इसे हत्या का केस मान रहे थे. इस घटना के बारे में पुलिस का यह भी कहना था कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही मौत की असली वजह सामने आ पाएगी.

3 अगस्त, 2025 को मृतका ज्योति मेर की मम्मी दीपा मेर निवासी हल्दुचौड़, तुलारामपुर थाना, लालकुआं नैनीताल ने थाना सुखानी में आ कर एक लिखित तहरीर दी, जिस में उन्होंने बेटी ज्योति मेर की हत्या का शक योगा सेंटर के मालिक अजय यदुवंशी और उस के छोटे भाई अभय यदुवंशी उर्फ राजा पर लगाया. तहरीर के आधार पर एसएचओ दिनेश जोशी ने बीएनएस की धारा 103(1)/3(5) के तहत नामजद आरोपियों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कर ली. शुरुआती पूछताछ के बाद पुलिस अधिकारियों ने मृतका ज्योति मेर के शव को डा. सुशीला तिवारी अस्पताल पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया.

घटना और केस की गंभीरता को देखते हुए नैनीताल के एसएसपी प्रह्लाद नारायण मीणा द्वारा घटना के खुलासे के लिए एक टीम गठित कर दी गई. टीम में अधीनस्थ अधिकारियों और कर्मचारियों को डा. जगदीश चंद्र एसपी (क्राइम), ट्रैफिक नैनीताल व प्रकाश चंद्र एसपी (सिटी) हल्द्वानी नितिन लोहनी (सीओ हल्द्वानी) एसएचओ मुखानी दिनेश चंद्र जोशी आदि को शामिल किया गया.

इस के अलावा इस विशेष पुलिस टीम में थाना मुखानी के एसआई वीरेंद्र चंद्र, वीरेंद्र सिंह बिष्ट, नरेंद्र कुमार, हरजीत सिंह, कांस्टेबल सुनील आगरी, रोहित कुमार, सुरेश देवड़ी, रविंद्र खाती, बलवंत सिंह, धीरज सुगड़ा, शंकर सिंह, अनूप तिवारी, प्रवीण सिंह, महिला कांस्टेबल गंगा मठपाल एवं एसओजी के कांस्टेबल राजेश व अरविंद को शामिल किया गया.

पोस्टमार्टम में हुआ चौंकाने वाला खुलासा

11 अगस्त, 2025 को योगा ट्रेनर ज्योति मेर की पोस्टमार्टम रिपोर्ट में चौंकाने वाला खुलासा हुआ. रिपोर्ट में यह स्पष्ट हो गया कि ज्योति की मौत दम घुटने और सिर पर गंभीर चोट लगने के कारण हुई थी. इस के अलावा उस के सीने में भी चोट के निशान पाए गए, जिस से यह आशंका व्यक्त की गई कि ज्योति की हत्या सुनियोजित तरीके से गला घोंट कर की गई थी. पोस्टमार्टम रिपोर्ट सामने आने के बाद विभिन्न सामाजिक एवं महिला संगठनों ने सड़कों पर उतर कर प्रदर्शन किया और एक बड़े जुलूस के रूप में एसडीएम कोर्ट पहुंच कर इस जघन्य हत्याकांड के जल्द खुलासे की मांग की.

महिलाओं ने आरोप लगाया कि हल्द्वानी की कानूनव्यवस्था पूरी तरह से चरमरा गई है. उन्होंने चेतावनी दी कि जब तक योगा ट्रैनर ज्योति मेर की हत्या के आरोपी गिरफ्तार नहीं होते, आंदोलन और तेज किया जाएगा.

मीडिया से बातचीत करते हुए मृतका की मम्मी दीपा मेर ने कहा, ”मेरी बेटी को बेरहमी से मार डाला गया. अब तक भी आरोपी पकड़े नहीं गए हैं. क्या हमें इंसाफ नहीं मिलेगा?’’

लगातार हल्द्वानी में हो रहे अपराधों और हत्याओं के बीच अब नैनीताल पुलिस की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठने लगे थे. लोगों का कहना था कि हल्द्वानी में महिलाएं और बच्चे अपने आप को असुरक्षित महसूस करने लगे हैं. ऐसे में यह जरूरी है कि पुलिस सख्त से सख्त त्वरित कारवाई करे और जनता का विश्वास बहाल करे. 21 दिन बाद भी जब ज्योति मेर हत्याकांड का खुलासा नहीं हुआ तो धरने के बीच पुलिस कार्यप्रणाली से क्षुब्ध युवक ने विरोधस्वरूप मुंडन करवा लिया.

इधर दिन गुजरते जा रहे थे, लेकिन पुलिस ज्योति मेर के हत्यारों को पकडऩे में कामयाब नहीं हो पा रही थी. पुलिस ने हत्या में नामजद आरोपी अजय यदुवंशी को गिरफ्तार भी कर लिया था, लेकिन पुलिस को उस का इस हत्या में कहीं से कहीं तक लिंक ही नजर नहीं आ रहा था, जबकि अजय का छोटा भाई अभय यदुवंशी फरार हो गया था, जिस का पता पुलिस नहीं लगा पा रही थी. योगा टै्रनर ज्योति मेर हत्याकांड का खुलासा न होने पर हल्द्वानी शहर के बुद्धिजीवियों, सामाजिक कार्यकर्ताओं का आक्रोश दिनप्रतिदिन बढ़ता ही जा रहा था. लोगों का कहना था कि घटना के 21 दिन बाद भी हत्याकांड का खुलासा पुलिस द्वारा नहीं कर पाना पुलिस की सुस्त कार्यप्रणाली को दर्शा रहा है.

19 अगस्त, 2025 को हल्द्वानी के बुद्ध पार्क में एसएसपी को बरखास्त करने की मांग को ले कर लगातार पांचवें दिन लोगों का धरनाप्रदर्शन जारी रहा. धरने में मौजूद वक्ताओं ने मीडिया को बताया कि पुलिस पहले दिन से ही उत्तराखंड के बहुचर्चित अंकिता भंडारी हत्याकांड की तर्ज पर इस मामले को दबाना चाहती है और ढीली काररवाई कर रही है. इस से यह आशंका यहां पर भी प्रदर्शित हो रहा है कि अपराधी को किसी वीआईपी का संरक्षण प्राप्त है.

आखिरकार 20 अगस्त, 2025 को नैनीताल पुलिस ने 22 दिन पहले हुए योगा ट्रैनर हत्याकांड का खुलासा कर हत्या के मुख्य आरोपी को पकड़ लिया. पुलिस की विशेष टीम ने जांच के दौरान घटनास्थल और आसपास के सीसीटीवी फुटेज खंगालने शुरू किए और इस की स्कैनिंग के दौरान एक संदिग्ध युवक कैमरे में ज्योति के कमरे की दिशा से निकलता दिखाई दिया था.

जिस कलाई पर बांधी राखी उसी ने घोंटा गला

उस संदिग्ध युवक के हावभाव और स्थानीय इनपुट के आधार पर उस की पहचान अभय कुमार यदुवंशी उर्फ राजा निवासी गोल, चौक, वाल्मिकी नगर, पश्चिमी चंपारण, बिहार के तौर पर हुई, जो वर्तमान में अजय योगा ऐंड फिटनैस सेंटर, हल्द्वानी परिसर में रहता था. मामले के तूल पकडऩे से पहले अभय यदुवंशी फरार हो गया और लंबे समय तक नेपाल में ही छिपा रहा. इधर दूसरी तरफ नैनीताल पुलिस की टीम उस की तलाश में लगातार दबिश देती रही और अंतत: 20 अगस्त, 2025 को मुख्य अभियुक्त अभय यदुवंशी को ऊधमसिंह नगर नगला तिराहे से गिरफ्तार कर लिया गया.

पुलिस पूछताछ में हत्या के मुख्य आरोपी अभय यदुवंशी उर्फ राजा ने बताया कि हल्द्वानी के चंदन डायग्नोसिस के टौप फ्लोर पर उस के बड़े भाई अजय यदुवंशी की अजय फिटनैस ऐंड योगा सेंटर के नाम से एकेडमी है. जिसे काफी सालों से दोनों भाई मिल कर चला रहे थे. अपने इस योगा सेंटर में मैनेजमेंट के सारे काम शुरू से ही अभय देख रहा था. वर्ष 2023 में ज्योति मेर उन के योगा सेंटर में काम करने आई.

कुछ समय के बाद ज्योति मेर और अजय के बीच में अवैध संबंध स्थापित हो गए, जिसे कई बार अभय ने खुद अपनी आंखों से देख लिया था. आरोपी अभय ने यह भी बताया कि उस के बड़े भाई अजय यदुवंशी की गर्लफ्रेंड माधवी (परिवर्तित नाम) भी उन के योगा सेंटर में काम करती थी. ज्योति और अजय की नजदीकियों की बात माधवी को पता चल चुकी थी और यह बात अभय ने भी अपनी भाभी माधवी को बताई थी, जिस बात से नाखुश हो कर माधवी ने सन 2023 में जहर खा लिया था. उस के बाद ही वर्ष 2024 में अजय ने माधवी से शादी कर ली, लेकिन अजय की नजदीकियां ज्योति मेर से फिर भी कम नहीं हुई थीं.

उस के बाद जब यह बात अजय को पता चली कि उस के छोटे भाई अभय ने उस के और ज्योति के अवैध संबंधों की बात उस की पत्नी माधवी को बता दी है तो अजय ने गुस्सा हो कर योगा सेंटर के मैनेजमेंट के सारे काम छोटे भाई अभय से छीन कर ज्योति मेर के हाथों में सौंप दिए थे. इसी बीच अभय को अपने किसी काम के लिए 10 लाख रुपए की जरूरत पड़ी तो उस ने अपने बड़े भाई अजय से रुपयों की मांग की, लेकिन अजय ने अभय को रुपए देने से साफसाफ मना कर दिया. इस के साथ ही अजय ने अभय को अपने घर से भी निकाल दिया, जिस के बाद अभय को पीजी में रहना पड़ रहा था.

अभय इन सब के पीछे ज्योति मेर को ही जिम्मेदार मानता था. इसलिए उस ने अब मन ही मन ज्योति को हमेशा के लिए रास्ते से हटाने का प्लान बना लिया. अपने प्लान के मुताबिक आरोपी अभय यदुवंशी 30 जुलाई, 2025 की रात को ज्योति के कमरे में गया. थोड़ा बातचीत के बाद ज्योति रसोई से अभय के लिए नींबू पानी बना कर ले आई.

अभय ने ऐसे दिया हत्या को अंजाम

ज्योति तभी रसोई में सब्जी की कड़ाही की गैस बंद करने जैसे ही घुसी, तभी मौका पा कर अभय ने पीछे से जा कर फुरती से ज्योति को दबोच लिया और गले में पड़ी उसी की चुन्नी से उस का गला घोंट दिया.

इस से पहले अभय उस रात गुस्से से हैवान बन चुका था. उस की यह हैवानियत ज्योति मेर की पोस्टमार्टम रिपोर्ट ने भी बयां की थी. ज्योति की पोस्टमार्टम रिपोर्ट में ज्योति के सिर के बाएं हिस्से पर गहरा घाव, दाहिने हाथ की कोहनी के पास घाव, पैरों के निचले हिस्से पर घाव और पीठ की ऊपरी हिस्से की उस की त्वचा बुरी तरह से फटी हुई थी, जबकि अंदरूनी चोटों की बात करें तो ज्योति की खोपड़ी में फ्रैक्चर था. मस्तिष्क में खून भर चुका था. पसलियों में चोट व अंदर खून जमा था, जबकि पेट के अंदर के अंगों (जैसे लीवर आदि) में चोट और रक्तस्राव हुआ था.

अभय ज्योति के पर तब तक वार करता रहा, जब तक वह बेदम हो कर जमीन पर नहीं गिर गई. उस के बाद ज्योति को हिलाडुला कर जब उसे यकीन हो गया कि ज्योति अब मर चुकी है तो उस ने इत्मीनान से ज्योति का शव जमीन पर रखा और फिर वहां से आननफानन में नैनीताल चला गया. रात को नैनीताल में रुका और दूसरे दिन कुछ समय तक नैनीताल में अकेला घूमता रहा. फिर उसी दिन उस ने टैक्सी बुक की और बनबसा होते हुए सीधे नेपाल भाग गया.

योगा ट्रैनर ज्योति मेर को मौत के घाट उतारने का प्लान अभय यदुवंशी काफी पहले ही बना चुका था. वह रोज कुछ न कुछ प्लान बनाता और फिर आखिर में उस प्लान को कैंसिल कर देता था. 30 जुलाई, 2025 को ज्योति की हत्या के दिन भी उस ने काफी ऐहतियात से काम लिया था. उस ने अपने चेहरे और सिर को ढक लिया था, ताकि अगर वह कहीं सीसीटीवी पर नजर भी आए तो उस की पहचान न हो सके. हालांकि वह यहां पर एक बड़ी भूल यह कर गया कि वह अपनी चालढाल को बदलना ही भूल गया और पुलिस की नजरों में आ गया.

पुलिस ने आरोपी अभय यदुवंशी की फोटो नेपाल से ले कर बिहार तक के थानों में पहुंचा दी थी, लेकिन अभय यदुवंशी जानता था कि पुलिस उस के पीछे जरूर पड़ सकती है. इसलिए उस ने पुलिस को चकमा देने के लिए अपना सिर भी मुंडवा लिया था, ताकि पुलिस उस की पहचान न कर सके. लेकिन कहते हैं कि अपराधी चाहे कितना ही शातिर क्यों न हो, वह एक न एक गलती अवश्य कर देता है. इसलिए बुधवार 20 अगस्त, 2025 को जब वह हल्द्वानी में अपनी पहचान छिपाए अपने वकील से मिलने आ रहा था तो वह ऊधमसिंह नगर में पुलिस द्वारा गिरफ्तार कर लिया गया.

वर्ष 2023 में ज्योति मेर योगा ट्रैनर के तौर पर अजय योगा सेंटर में आई थी, तभी से उस की हत्यारोपी अभय यदुवंशी से अच्छी पहचान थी. ज्योति ने अभय को अपना भाई मान लिया था. वर्ष 2024 में उस ने अभय को राखी भी बांधी थी, ज्योति को क्या पता था कि जिस हाथ में वह राखी बांध रही है, उन्हीं हाथों से वह बेदर्दी से तड़पातड़पा कर, गला दबा कर उस की जान ले लेगा.

हल्द्वानी पुलिस की विशेष टीम ने अभियुक्त अभय कुमार यदुवंशी उर्फ राजा (24 वर्ष) को गिरफ्तार कर उस की निशानदेही पर हत्या में प्रयोग किया गया दुपट्टा भी बरामद कर लिया है. पुलिस की इस विशेष टीम के उत्साहवर्धन हेतु उसे ढाई हजार रुपए के ईनाम से भी पुरस्कृत किया गया है. नैनीताल पुलिस ने योगा ट्रैनर ज्योति मेर हत्याकांड का खुलासा भले ही कर दिया है, मगर इस खुलासे से मृतका के फेमिली वाले बिलकुल भी संतुष्ट नहीं हैं. उन्होंने और सामाजिक संगठन पहाड़ी आर्मी ने इस हत्याकांड को कठघरे में ला कर खड़ा कर दिया है.

इस खुलासे को मृतका के फेमिली वालों ने एक नाटकीय एपिसोड करार दिया और कहा कि उन की बेटी के चरित्र पर लांछन लगा कर पुलिस हमारा और जनता का आक्रोश कम करना चाहती है. इस मामले में मृतका की मम्मी दीपा मेर ने मीडिया से बातचीत करते हुए बताया कि इस खुलासे से वह बिलकुल भी संतुष्ट नहीं हैं. मेरी बेटी के चरित्र पर लांछन लगाया गया है. जबकि इस प्रकरण में शामिल अभय यदुवंशी के अलावा अजय यदुवंशी, शालिनी यदुवंशी और गुरमीत नाम के व्यक्तियों पर पुलिस ने कुछ भी कारवाई नहीं की. पुलिस इन लोगों को क्यों बचाना चाहती है. इन तीनों को भी जेल की सलाखों के पीछे डालना होगा. दीपा मेर ने पुलिस के खुलासे पर मुख्य रूप से 7 सवाल पूछे हैं.

पहला, यदि हत्यारा अभय यदुवंशी उर्फ राजा का अपने बड़े भाई से लड़ाईझगड़ा हुआ और उस ने अभय को कारोबार से निकाल कर उस का खानाखर्चा बंद किया तो उस को इस बात पर अपने भाई अजय से नाराजगी होनी चाहिए थी न कि ज्योति से. दूसरा कि यदि अजय यदुवंशी और ज्योति मेर के बीच अवैध संबंध थे तो अजय यदुवंशी की पत्नी माधवी ने चुप्पी क्यों साध रखी थी? इसलिए क्या इस मर्डर केस में वह अपने पति और देवर के साथ शामिल नहीं होगी? तीसरा सवाल यह है कि यदि अजय अपने छोटे भाई अभय को खर्चा नहीं दे रहा था तो इस में ज्योति को मारने का क्या लौजिक है?

चौथा सवाल पुलिस से यह है कि यदि ज्योति मेर की मृत्यु पोस्टमार्टम रिपोर्ट के अनुसार उस के सिर के अंदर रक्तस्राव से हुई थी, जबकि नैनीताल पुलिस ने अपने खुलासे में सिर्फ दुपट्टे से गला दबाने की बात कही है. आखिर इस चोट को मारने के लिए आरोपी ने किस हथियार से उस के सिर पर वार किया था, वह कौन सा हथियार था? वह पुलिस द्वारा क्यों बरामद नहीं किया गया?

दीपा मेर ने पांचवां सवाल यह पूछा कि यदि मुख्य आरोपी अभय यदुवंशी पूरे 22 दिनों तक फरार रहा तो आखिर इस समय उस की मदद कौन कर रहा था? जबकि पैसों के मामले में अभय यदुवंशी काफी लंबे समय से पैदल चल रहा था? छठां सवाल दीपा मेर ने पुलिस से यह पूछा कि यदि अभय यदुवंशी नेपाल भाग गया था तो वह नेपाल से वापस ऊधमसिंह नगर क्यों और कैसे आ गया? पुलिस ने कहा कि वह अपने वकील से मिलने आ रहा था तो इस मुफलिसी में उस की आर्थिक मदद कौन कर रहा था?

सातवां सवाल मृतका की की मम्मी दीपा मेर ने जो पूछा है वह बहुत गंभीर और दिल झकझोर देने वाला है. दीपा मेर ने पुलिस से यह पूछा है कि क्या उत्तराखंड पुलिस सिर्फ एक लड़की के चरित्र पर अंगुली उठा कर अपना काम पूरा करने का श्रेय ले कर जनता और मृतका के फेमिली वालों के आक्रोश को दबाना चाहती है और अन्य केसों की तरह इस में भी लीपापोती कर केस को ढीला और कमजोर करना चाहती है?

इन 7 सवालों और आरोपों के साथ मृतका ज्योति मेर की मम्मी दीपा मेर ने इस जघन्य हत्याकांड के सही खुलासे के लिए उत्तराखंड की धामी सरकार से एसआईटी जांच की मांग की है. उन का कहना है कि एसआईटी जांच से इन सारे पहलुओं पर जब दोबारा से जांच होगी तो दूध का दूध और पानी का पानी हो जाएगा. पुलिस के इस खुलासे को ले कर सामाजिक संगठन पहाड़ी आर्मी के अध्यक्ष हरीश रावत और सुराज सेवा दल कुमाऊं मंडल अध्यक्ष विशाल शर्मा का कहना है कि जिस प्रकार से नैनीताल पुलिस द्वारा सिर्फ एक या 2 पौइंट पर फोकस कर के निर्मम हत्याकांड का उत्तराखंड पुलिस द्वारा खुलासा किया गया है, वह वास्तव में अचंभित करने वाला और दिल को झकझोर देने वाला है.

उन्होंने मीडिया से बात करते हुए कहा है कि यदि इस जघन्य और निर्मम हत्याकांड की सूक्ष्मता और गहराई से जांच की जाए तो इस में कई सफेदपोश और रसूखदारों के शामिल होने की तो पूरीपूरी आशंका है. इस के लिए कई सामाजिक संगठनों ने कुमाऊं कमिश्नर दीपक रावत के माध्यम से मुख्यमंत्री पुष्कर धामी से एसआईटी जांच की मांग की है. उन्होंने कहा है कि यदि सरकार इस प्रकरण पर उचित काररवाई नहीं करेगी तो उन्हें फिर से आंदोलन करने के लिए सड़कों पर उतरने के लिए मजबूर होना पड़ेगा. Crime Story in Hindi

 

 

 

Crime Story in Hindi : बैंकाक का सैक्स स्कैंडल

Crime Story in Hindi : 34 साल की विलावान सिका गोल्फ एम्सावत उर्फ मिस गोल्फ ऐसी सुंदरी थी, जो अच्छेअच्छे संन्यासियों तक को अपने रूपजाल में फांस लेती थी. अपनी मोहिनी अदा के चलते उस ने बैंकाक के प्रसिद्ध बौद्ध मंदिरों के मठाधीशों से न सिर्फ अवैध संबंध बनाए, बल्कि उन के अश्लील फोटो व वीडियो के जरिए उन से 91 करोड़ से अधिक रुपए भी वसूले. आखिर मिस गोल्फ कैसे फांसती थी बौद्ध संन्यासियों को अपने जाल में?

थाईलैंड के बैंकाक में स्थित वाट त्रि थोत्सथेप वोराविहान बौद्ध मंदिर के मठाधीश चाओखुन अर्ज एक आकर्षक कदकाठी का व्यक्ति है. उस की दैहिक बनावट, बौडी लैंग्वेज और बातचीत करने के लहजे को देख कर कोई भी उस की उम्र 58 वर्ष होने का अनुमान नहीं लगा पाता था. यह कहें कि वह किसी फिल्मी नायक की तरह जवान दिखता था. उस की सोच पर भी उम्र का कोई असर नहीं हुआ था. कहने को वह बौद्ध धर्म का एक संत था, लेकिन आधुनिक सोच से भरा हुआ था. उस की बातें नए जमाने के गैजेट और इंटरनेट और सोशल मीडिया फ्रेंडली युवाओं की तरह होती थीं.

चाओखुन अर्ज का असली नाम फ्राथेप वाचिरापामोक था, लेकिन वह मठ के लोगों के बीच अर्ज के नाम से लोकप्रिय था. त्रि थोत्सथेप वोराविहान थाईलैंड के सब से महत्त्वपूर्ण बौद्ध मंदिरों में से एक है. इस का ऐतिहासिक महत्त्व है. इस का निर्माण 19वीं सदी में वहां के तत्कालीन राजतंत्र के शासक द्वारा किया गया था. इस की भव्यता में शाही झलक दिखती है. यहां सभी तरह की आधुनिक और उत्तम रहनसहन की सुविधाएं उपलब्ध हैं. चाओखुन जब से मठाधीश के पद पर नियुक्त हुआ था, तब से उसे मंदिर प्रशासन की तरफ से शाही सुविधाएं और संसाधन मिल गए थे.

साथ ही उस के पास अपने निजी कामकाज के लिए पर्याप्त समय भी होता था. जब भी वह फुरसत में होता, अपना लैपटाप खोल कर देशदुनिया से जुड़ जाता था, उस ने फेसबुक पर अपनी आईडी भी बना रखी थी. उस के हजारों में वर्चुअल फ्रेंड थे. उन के साथ वह अध्यात्म, सेहत, सलाह और समाज सरोकार की बातें करता रहता था. इस दौरान उस की नजर रील्स, गेम्स, औफर आदि पर बनी रहती थी.

वह इस में कम से कम 2 से 3 घंटे तक गुजारता था. फेसबुक में नएनए दोस्त तलाशने से ले कर उस के बारे में जांचपड़ताल करने आदि पर ध्यान देता था. वैसे तो वह फ्रेंड रिक्वेस्ट को बहुत सोचसमझ कर ही स्वीकारता था. हालांकि उन में अधिकतर उस के परिचित या फिर अनुयायी थे. उन के साथ फेसबुक, वाट्सऐप और मैसेंजर के माध्यम से संपर्क बनाता था. वह किसी व्यक्ति की व्यक्तिगत या पारिवारिक समस्या या परेशानी से निकालने का भी काम करता था.

बात 16 मई, 2024 की थी. रात का वक्त था. पूरे बौद्ध मठ का परिसर नींद के आगोश में था. नि:शब्द शांति थी. इसी एकांत में चाओखुन अर्ज की अंगुलियां लैपटाप के कीबोर्ड पर चल रही थीं. सामने स्क्रीन पर फेसबुक से निकली रोशनी में उस के चेहरे पर चमक बनी हुई थी. माउस पैड में अंगुली सरकाते हुए अचानक उस की नजर एक रिक्वेस्ट पर ठहर गई. बेहद खूबसूरत तसवीर थी. दोस्ती करना चाहती थी. चाओखुन ने तुरंत उस की प्रोफाइल खोली. उस का अबाउट पढऩा शुरू किया.

नाम विलावान सिका गोल्फ एम्सावत उर्फ मिस गोल्फ लिखा था. उम्र 34 वर्ष थी. प्रोफाइल में उस ने स्वयं को नोनयाबुरी में एक आलीशान विला की मालकिन और महिला उद्यमी बताया था. उस ने खुद को बौद्ध धर्म का अनुयायी बताया था. वह चाओखुन अर्ज की पहले से ही फालोअर भी थी. मिस गोल्फ की प्रोफाइल में कई तसवीरें भी थीं. कई तसवीरों में अल्ट्रा मौडर्न ड्रेस पहने थी.

उस की तसवीरों ने संन्यासी चाओखुन की कामुकता को उकसा दिया था. एक बार मन भटका तो मिस गोल्फ की सुंदरता और सैक्स अपील का कीड़ा उस संत के मस्तिष्क को कुरेदने लगा था. फिर उस की अंगुली ने कब रिक्वेस्ट बटन को दबा दिया, पता ही नहीं चला. अगले पल संन्यासी का मन कुछ और जिज्ञासाओं से भर गया था. मैसेजिंग शुरू कर दिया. ‘हाय!’ के बाद दनादन 2-3 सवाल कर डाले…

”कहां से हैं?’’

”क्या करती हैं?’’

”आप की सुंदरता का राज क्या है?’’

इन के जवाब में उस ने लिखा, ”मैं महसूस करती हूं कि आप के दिल के करीब हूं… आप से फ्रेंडशिप कर भाग्यशाली बनना चाहती हूं. देखिए, आप से दोस्ती के बगैर मेरी आध्यात्मिक पिपासा शांत नहीं हो पाएगी. मन को शांति के लिए जरूरी है, संत समागम किया जाए!’’

मिस गोल्फ का भावुक मैसेज चाओखुन अर्ज के दिल की गहराइयों तक चला गया था. वह खुद को चाह कर भी नहीं रोक पाया और धड़कते दिल से अपनी इस नई दोस्त पर लिख डाला, ‘मिस गोल्फ! जितनी सुंदर आप हो, उस से अधिक खूबसूरत आप के शब्द! मन आनंदित हो गया!’

दोनों के दिलों में भावनाओं का उफान आ चुका था. दनादन मैसेजिंग का दौर शुरू हो गया. काफी समय तक यह सब चलता रहा. वह चाओखुन के लिए बहुत ही खुशनुमा था. फिर वह सो गया. अच्छी नींद आई. अगले रोज दिनचर्या में लगा हुआ था…

उस के भीतर एक नई सी स्मृति का संचार हो गया था. हर काम को वह बड़ी समझदारी और मुसकराते हुए कर रहा था, लेकिन उस की आंखें बारबार हाल में टंगी दीवार घड़ी पर भी बराबर लगी हुई थीं. आज समय उसे काफी बड़ा और लंबा सा लग रहा था. जैसेतैसे चाओखुन ने रात के 9 बजे तक का समय किसी तरह पास किया. रात के भोजन करने के बाद उस ने अपने सभी अनुचरों को छुट्टी दे दी. अब वह हमेशा की तरह अपने एकांत के निजी समय में था, किंतु उस रात उस में गजब का उतावलापन था. लैपटाप औन करते ही तुरंत फेसबुक के अपने पेज पर था. कई मैसेज उस के जवाब के इंतजार में थे.

मैसेज को पढऩे के बाद चाओखुन अर्ज के दिल की धड़कनें बढ़ गईं. वह मैसेज मिस गोल्फ के थे. अपने प्रतिष्ठित पद की गरिमा और मैसेज भेजने वाली की उम्र के अंतर को ले कर वह सतर्कता बरतना चाहता था. तभी ‘गुड नाइट!’ के साथ ‘हाय हैंडसम!’ का मैसेज आया.

चाओखुन ने भी जवाब में ‘हैलो!…हाउ आर यू?’ लिख दिया.

”आप की फ्रेंडशिप पा कर बहुत खुशी हुई है. मैं आप को दिल से शुक्रिया अदा करती हूं. मेरे लिए यह प्यार की तरह मिला उपहार है. मैं कितनी खुश हूं, इस का बयान नहीं कर सकती. इस के लिए आप का तहेदिल से धन्यवाद करती हूं मिस्टर चाओखुन! आप बहुत हैंडसम दिखते हैं… कितनी उम्र होगी आप की?’’ मिस गोल्फ ने लिखा.

”जी, 2 साल बाद 60 का हो जाऊंगा.’’ चाओखुन ने लिखा.

”अच्छा! लेकिन लगते तो 40 प्लस के हैं.’’ मिस गोल्फ ने हैरानी जताई.

”तुम भी तो 20 प्लस की दिखती हो, लेकिन प्रोफाइल के अनुसार 33 साल की हो. ईश्वर ने गजब की सुंदरता दी है. भाग्यशाली हो!’’

”मुझे आज तक आप जैसा हैंडसम इंसान ही नहीं मिला, आप को पा कर धन्य हो गई हूं… मिलना चाहूंगी.’’ इसी के साथ गोल्फ ने प्यार का धड़कता हुआ इमोजी भेज दिया.

”किंतु मिस गोल्फ, आप को दोस्ती और प्यार करने के लिए बहुत से नौजवान मिल सकते थे, फिर मैं ही क्यों?’’ चाओखुन ने गोल्फ के इशारे को समझते हुए लिखा.

”मैं उम्र से नहीं, बल्कि वैसा पुरुष चाहती हूं, जिस में पुरुषार्थ हो. गंभीरता हो. विचार हो. आजादी पसंद हो. व्यवहारिक हो. आस्थावान हो… अब भला आप से बेहतर मेरे लिए और कोई नहीं हो सकता. प्यार तो आंतरिक भावना की अनुभूति है… मुझे तो ऐसा लगता है, जैसे वह सभी गुण आप में हैं और मेरी चाहत आप को पा कर पूरी हो गई.’’ मिस गोल्फ ने लिखा.

”तुम बातें बहुत लुभावनी करती हो. मन मोह लिया.’’

”क्यों न हम लोग कहीं मिलें?’’

”जरूर, जल्द समय बताऊंगा.’’

इस के बाद चाओखुन और मिस गोल्फ का प्यार तेजी से परवान चढऩे लगा था. पहले वे वर्चुअल थे, जल्द ही दोनों वास्तविकता की धरातल पर आ चुके थे. उन का आपस में मिलनाजुलना भी शुरू हो गया… और चाओखुन अर्ज ने अपने संत की गरिमा, मानमर्यादा और संकल्प के बावजदू गोल्फ के साथ अवैध संबंध तक बना लिया. कहते हैं न कि सुखचैन की बंसी ज्यादा समय तक नहीं बजती. अगर यह बंसी अय्याशी से भरी हो, तब तो कभी भी इस पर ग्रहण लग सकता है. ऐसा ही कुछ बौद्ध संत चाओखुन अर्ज के साथ हुआ.

चाओखुन अर्ज और गोल्फ की मौजमस्ती एक साल तक खूब परवान चढ़ी. उन के बीच काफी लेनदेन हुआ. इस का अड्डा मिस गोल्फ का आलीशान घर था, जहां अय्याशी के सारे संसाधन थे. चाओखुन ने इसे अपने शौक में शामिल कर लिया था, जबकि गोल्फ के लिए यह आमदनी का जरिया था. गोल्फ अपने कामधंधे को सात तालों में छिपा कर रखती थी. इस बारे में उस ने कभी भी चाओखुन को कुछ नहीं बताया. फिर भी न जाने कैसे गोल्फ के कुछ कारनामों की जानकारी बैंकाक की पुलिस को हो गई.

पुलिस को मिलीं 56 हजार पोर्न वीडियो

अचानक जुलाई 2025 के पहले सप्ताह में मिस गोल्फ के महलनुमा घर पर छापेमारी हुई. उसे जानने वाले लोग हैरान रह गए कि आखिर गोल्फ ने क्या किया, जो उस के घर पर पुलिस की पूरी फौज आ गई. थाईलैंड सरकार की नजर में उस ने क्या गैरकानूनी काम किया? खैर, इस का खुलासा 15 जुलाई, 2025 को हो गया. चौतरफा सनसनीखेज खबर फैल गई. जिस ने भी उस बारे में सुना, उस ने दांतों तले अंगुली दबा ली. और फिर यह मामला पूरी दुनिया में फैल गया.

दरअसल, थाइलैंड पुलिस ने एक बड़े सैक्स ब्लैकमेल रैकेट का खुलासा किया था. इस बारे में सबूत जुटाए थे. उस में लिप्त लोगों में बौद्ध भिक्षुकों की सूची भी थी, जबकि इस का मुख्य आरोपी मिस गोल्फ थी. उस के घर से 56,000 पोर्न यानी अश्लील वीडियो और 80,000 न्यूड तसवीरें बरामद की गई थीं. उस में उन बौद्ध भिक्षुओं के अश्लील अय्याशी के वीडियो थे, जिन्होंने बौद्ध धर्म में त्याग, पवित्रता और संन्यास की सौगंध खाई थी. उन्हीं भिक्षुओं में चाओखुन अर्ज का नाम भी था. उस के गोल्फ के साथ अंतरंग संबंधों के कई वीडियो थे.

इस मामले में पकड़ी गई 35 साल की विलावान सिका गोल्फ एम्सावत उर्फ मिस गोल्फ पर कई बौद्ध भिक्षुकों को यौन संबंध बनाने के लिए उकसाने और फिर उन्हें ब्लैकमेल करने का आरोप लगा. रौयल थाई पुलिस सेंट्रल इनवैस्टिगेशन ब्यूरो के अनुसार उस के घर की तलाशी के दौरान बौद्ध भिक्षुकों को ब्लैकमेल के लिए इस्तेमाल की गई हजारों अश्लील तसवीरें और हजारों अश्लील वीडियो जब्त कर लिए. साथ ही इस में संलिप्त थाईलैंड के 9 बौद्ध भिक्षुकों के नाम सामने आने के बाद उन्हें उन के मठों से निष्काषित कर दिया गया.

पुलिस को बैंकाक के उत्तर में नौथबुरी प्रांत में रहने वाली मिस गोल्फ के पास से कई चोरी के सामान भी मिले. उस के बैंक खातों से यह भी पता चला कि कई बौद्ध भिक्षुकों एवं एक बौद्ध मंदिर के बैंक खाते से एक वरिष्ठ भिक्षुक चाओखुन अर्ज ने उस के खाते में 11.9 मिलियन अमेरिकी डौलर यानी 102.33 करोड़ रुपए ट्रांसफर करवाए थे. इन में से ज्यादातर रकम बौद्ध भिक्षुकों द्वारा मिस गोल्फ के खाते में ट्रांसफर की गई थी. जांच में इस बात का भी पता चला कि इन में से अधिकांश रकम मिस गोल्फ द्वारा औनलाइन खेली जाने वाली जुए वाली वेबसाइट पर खर्च की गई थी.

कौन है मिस गोल्फ

इस गंभीर और संवेदनशील मामले के सामने आने के बाद थाईलैंड के मठ प्रशासन पर कई सवालिया निशान खड़े हो गए. देश भर में थेरवाद संप्रदाय के बौद्ध भिक्षुकों की संख्या काफी अधिक है, जिन्हें ब्रह्मचर्य का पालन करना होता है. महिलाओं को केवल छूने मात्र से इन के ब्रह्मचर्य पर सवाल उठने लगते हैं. सैक्स स्कैंडल और ब्लैकमेलिंग में फंसी विलावान सिका गोल्फ एम्सावत उर्फ सिका गोल्फ उर्फ मिस गोल्फ फिचित प्रांत के साकलेक जिले की मूल निवासी है. मीडिया में उस का नाम ‘सिका गोल्फ’ प्रचारित है. ‘सिका’ बौद्ध भिक्षुओं द्वारा महिलाओं के लिए एक आदर की उपाधि है.

गोल्फ एक गरीब परिवार में पलीपढ़ी युवती है. पापा उस की मम्मी जेनी को उस के जन्म के कुछ सालों बाद ही छोड़ कर चले गए थे. गरीबी से जूझते हुए उस की मम्मी ने किसी तरह से पालापोसा. इस कारण उस की ज्यादा पढ़ाई नहीं हो पाई. बड़ी होने पर उस में स्वच्छंदता आ गई. अपने मन की मालिक बन गई. युवावस्था आतेआते वह बेहद खूबसूरत दिखने लगी. उस की सुंदरता पर हर कोई मोहित हो जाता था. वह इस का नाजायज फायदा उठाने लगी.

पढ़ाई से कोई वास्ता नहीं था, लेकिन अच्छे रहनसहन, फैशन और पहनावे की ललक थी. इस की पूर्ति के लिए उस ने अमीर लड़कों को फंसाना शुरू किया. उन से दोस्ती की, बौयफ्रेंड बनाया. उन के साथ घूमनेफिरने और मटरगश्ती करने लगी. यह सब करते हुए उस का कौमार्य कब भंग हुआ, उसे यह सब याद नहीं. इस बात की उसे कोई चिंता नहीं थी. जब वह हर क्लास में बारबार फेल हो जाती थी, तब उस की मम्मी जेनी उसे बारबार अच्छेबुरे की नसीहतें देती थी, लेकिन गोल्फ पर उस का कोई असर नहीं होता था.

गरीबी और अभाव में घुटन महसूस कर चुकी गोल्फ कभीकभी तो अपनी मम्मी से भी झगड़ पड़ती थी. ताने देती थी कि तुम ने मेरे उस धोखेबाज पापा से शादी कर मुझे क्यों पैदा किया, जब तुम मुझे अच्छे कपड़े, अच्छा खाना, अच्छा रहना नहीं दिलवा सकती थी. मुझे इस दुनिया में क्यों आने दिया. वैसे गोल्फ ने एक स्टोर में जब नौकरी की शुरुआत की थी, तभी उस की मम्मी की तबीयत अचानक एक दिन ज्यादा खराब हो गई. अच्छी देखरेख नहीं होने के कारण उस की मम्मी जेनी की मृत्यु हो गई.

मम्मी की मौत के बाद गोल्फ पूरी तरह से आजाद हो गई थी. उस ने अपना घर और अपनी मम्मी के सारे गहने बेच दिए. नई नौकरी और सुनहरे भविष्य को बनाने के लिए पुश्तैनी शहर छोड़ कर बैंकाक आ गई. एक बड़े जनरल स्टोर में रिसैप्शनिस्ट की नौकरी कर ली. एक छोटा सा घर किराए पर ले लिया. यहां रहते हुए उस के सपनों ने एक नई सुनहरी उड़ान भरनी शुरू कर दी थी. उसे फेसबुक, इंस्टाग्राम, टेलीग्राम पर चैटिंग का शौक चढ़ गया था. उसे नएनए पुरुष दोस्त बनाना और फिर उन के साथ अश्लील चैटिंग करना बहुत पसंद था.

वर्ष 2018 के शुरू में उस की फेसबुक द्वारा एक बौद्ध भिक्षु सोमचाई (परिवर्तित नाम) के साथ दोस्ती हो गई. उस के बाद उन दोनों ने आपस में अपने मोबाइल नंबर शेयर किए. प्यार भी ऐसा रंग लाने लगा कि दोनों मिलने लगे. एक मुलाकात में ही दोनों में प्यार का रंग ऐसा चढ़ा कि सोमचाई ने गोल्फ के लिए एक खूबसूरत फ्लैट किराए पर दिलवा दिया. सोमचाई उस के बाद गोल्फ से मिलने अकसर उस फ्लैट पर आने लगा. दोनों लिवइन  में रहने लगे. गोल्फ कुछ दिनों बाद गर्भवती हो गई और उस ने एक बेटे को जन्म दिया. 2019 में बेटा होने के बाद सोमचाई ने गोल्फ से दूरी बढ़ानी शुरू कर दी तो उस ने उसे मीडिया के सामने बदनाम करने की धमकी दे डाली.

इस धमकी का बौद्ध भिक्षुक सोमचाई पर असर हुआ. उस ने बचने के लिए गोल्फ को एकमुश्त 86,206 डौलर (लगभग 74,99,922 रुपए) और प्रतिवर्ष 2,294 डौलर (लगभग 1,99,578 रुपए) बेटे की परवरिश करने के लिए देने को तैयार हो गया. इस के बाद दोनों का मिलनाजुलना लगभग समाप्त होता चला गया था. उन के बीच केवल पैसों का ही लेनदेन होता था.

उस के बाद गोल्फ के दिमाग में तो मानो नया आइडिया आ गया. स्वच्छंदता के मानो पंख लग गए. उस ने अपना टारगेट अब बौद्ध मठाधीशों और बौद्ध भिक्षुओं को बनाना शुरू कर दिया. वह हमेशा 50 वर्ष से अधिक उम्र के बौद्ध मठाधीशों को अपना शिकार बनाने लगी. पहले वह उन बौद्ध भिक्षुओं से फेसबुक के माध्यम से दोस्ती करती थी, फिर अपनी कामोत्तेजक जवानी की तसवीरें भेज कर उन्हें अपनी ओर आकर्षित करती थी. उस के बाद जैसे ही उसे शिकार फंसता नजर आता तो उन के साथ रसीली और कामवासना उकसाने वाली बातें करनी शुरू कर देती थी.

जब उसे लगता कि शिकार फंस चुका है, तब वह उसे अपनी रसीली बातों में फंसा कर किसी अनजान होटल या अपने फ्लैट पर अवैध संबंध बनाने के लिए बुला लेती थी.  उस ने अपने फ्लैट के बैडरूम और बाथरूम में हिडन कैमरे लगा रखे थे. यहां तक कि जब वह किसी होटल में बौद्ध भिक्षुओं को आमंत्रित करती तो वह उन के आने से पहले ही बैडरूम और बाथरूम में हिडन कैमरे लगा देती थी. इस तरह उन की अश्लील वीडियो बना कर रख लेती थी. करीब 5-6 महीने के बाद वह अपने प्रैगनेंट होने का झांसा दे कर उन्हें अश्लील तसवीरें और वीडियो दिखाती थी. उस के बाद ब्लैकमेल शुरू कर देती थी.

गोल्फ का खेल ऐसा हुआ खत्म

उस के इस खेल के अंत की शुरुआत 14 जून, 2025 को तब हो गई, जब विलावान सिका यानी गोल्फ ने बैंकाक की रौयल थाई पुलिस में एक लिखित शिकायत दर्ज कराई. अपनी शिकायत में विलावान ने लिखा कि वाट त्रि थोत्सथेप वोराविहान के बौद्ध मठाधीश फ्राथेप वाचिरापामोक उर्फ चाओखुन अर्ज उस के पति हैं और उन से उन का एक बेटा भी है. विलावान सिका ने दावा किया कि पहले कुछ समय तक चाओखुन अर्ज उस के और बच्चे के भरणपोषण के लिए पैसे नियमित रूप से देते रहे, मगर अब पैसे देने से मुकर रहे हैं. पिछले काफी समय से चाओखुन अर्ज ने उसे बिलकुल भी पैसा नहीं दिया है.

सिका ने यह भी दावा किया कि गर्भावस्था और बच्चे के जन्म के बाद से अब तक चाओखुन अर्ज के ऊपर उस के 7.2 मिलियन बाट (भारतीय करेंसी में लगभग एक करोड़ 70 लाख 7 हजार 200 रुपए) बकाया हैं. कृपया चाओखुन अर्ज से मेरे बकाया रुपए दिलवाने की कृपा की जाए.

धर्मगुरु ने करोड़ों रुपए लुटा दिए मिस गोल्फ पर

यह खबर जैसे ही बैंकाक राष्ट्रीय पुलिस प्रमुख पोल जनरल कितरत फनफेट तक पहुंची तो उन्होंने इस की विस्तृत जांच के लिए तुरंत केंद्रीय जांच ब्यूरो के डिप्टी कमिश्नर पोल मेजर जनरल जारुनाकियात पंकव के नेतृत्व में एक विशेष पुलिस टीम का गठन कर दिया. वाट त्रि थोत्सथेप वोराविहान मंदिर, बैंकाक, थाईलैंड का एक प्रसिद्ध मंदिर है, जिसे आमतौर पर ‘वाट फो’ के नाम से जाना जाता है. इस प्रसिद्ध मंदिर का इतिहास 16वीं शताब्दी से जुड़ा है, जब इसे एक मठ के रूप में स्थापित किया गया था.

थाईलैंड के राजा राम प्रथम ने 18वीं शताब्दी में इस का जीर्णोद्धार कराया और राजा राम तृतीय के शासन काल में इसे वर्तमान स्वरूप दिया गया, जिस में लेटे हुए बुद्ध की विशाल प्रतिमा स्थापित की गई. 18 जून, 2025 को राष्ट्रीय पुलिस प्रमुख के आदेश के बाद बैंकाक की रौयल थाई पुलिस के केंद्रीय जांच ब्यूरो के डिप्टी कमिश्नर पोल मेजर जनरल जारुनकियात पंकव के  नेतृत्व में वाट त्रि थोत्सयेप मंदिर वोराविहान के मठाधीश चाओखुन अर्ज की तलाशी के लिए छापा मारा.

पुलिस ने जब मंदिर के अन्य भिक्षुओं से बातचीत की तो पता चला कि मठाधीश चाओखुन वहां से सीमा पार लाओस भाग चुका है. उस के बाद पुलिस टीम ने जब मठ के खाते की विस्तृत जांचपड़ताल शुरू की तो जांच में यह पाया गया कि मठाधीश फ्राथेप वाचिरा पामोक उर्फ चाओखुन अर्ज ने मंदिर के खातों से 9.05 मिलियन डालर (भारतीय करेंसी में लगभग 75 करोड़ 43 लाख 91 हजार 723 रुपए) की धनराशि अपने निजी खाते में ट्रांसफर की थी.

लेकिन असली जानकारी तभी सामने आ सकती थी, जब चाओखुन अर्ज से पूछताछ होती, इसलिए रौयल थाई पुलिस अब चाओखुन अर्ज की तलाश में जगहजगह छापे मारने लगी. चाओखुन भी जानता था कि वह अधिक समय तक पुलिस की नजरों से छिपा नहीं रह सकता है, इसलिए अंतत: चाओखुन अर्ज ने 27 जून, 2025 को पुलिस के सामने आत्मसमर्पण कर दिया.

पुलिस द्वारा विस्तृत पूछताछ में चाओखुन अर्ज ने बताया कि करीब 2 साल पहले विलावान सिका उर्फ मिस गोल्फ ने उस से फेसबुक के माध्यम से संपर्क किया था और दोस्ती बढ़ाई. बाद में हमारे बीच यौन संबंध स्थापित हो गए, उस के बाद हमारा एक बेटा भी हो गया. फिर विलावान मुझ से पैसे की मांग करने लगी. पहले मैं उसे काफी पैसे देता रहा. लेकिन जब मुझे इस बात की जानकारी हुई कि विलावान के अन्य बौद्ध भिक्षुओं के साथ भी संबंध हैं तो मैं ने धीरेधीरे उस से दूरियां बढ़ानी शुरू कर दी.

उस के बाद विलावान मुझ से फोन कर के मुझ से पैसे मांगने लगी, जब मैं ने और पैसे देने से इंकार कर दिया तो उस ने मेरे साथ एक सौदा किया कि अगर उसे एकमुश्त 7.2 मिलियन बाट (लगभग 17 करोड़ भारतीय रुपए) दे दूं तो वह मेरे साथ खींचे गए अश्लील वीडियो और अश्लील फोटो मुझे दे देगी. यह रकम काफी ज्यादा थी और इसलिए मैं ने इतनी धनराशि देने से साफसाफ मना कर दिया, क्योंकि मैं उसे पहले ही काफी रकम दे चुका था. उस के बाद विलावान ने मुझे धमकी दी कि यदि इसे यह रकम यहीं दी तो वह मेरी पुलिस से लिखित शिकायत दर्ज करा देगी.

मैं उस से नहीं डरा. उसे पैसा देने से इनकार कर दिया. मुझे उम्मीद थी कि वह पैसे ऐंठने के लिए पुलिस की धमकी दे रही थी, लेकिन जब उस ने सही में पुलिस से मेरे खिलाफ रिपोर्ट लिखवा दी, तब बदनामी के डर से सीमा पार लाओस भागना पड़ा. इस के बाद चाओखुन को 27 जून, 2025 को वाट त्रि थोत्सथेप वोराविहान के मठाधीश पद से हटा दिया गया था.

ब्लैकमेलर मिस गोल्फ हुई गिरफ्तार

अब रौयल थाई पुलिस की विशेष जांच टीम गोपनीय ढंग से विलावान सिका के पीछे लग गई और उस की हर गतिविधि पर अपनी पैनी नजर रखे हुई थी. इस के लिए विशेष जांच टीम ने अपने गुप्त मुखबिरों को अलगअलग जानकारियां एकत्रित करने के लिए लगा रखा था. विलावान सिका के घर के आसपास भी मुखबिर उस पर कड़ी नजर रखे हुए थे. इसी क्रम में जांच प्रमुख पोल मेजर जनरल जारुनकियात पंकव के नेतृत्व में पुलिस टीम ने विलावान सिका के घर पर छापा मारा तो पुलिस टीम की आंखें खुली की खुली रह गईं.

पुलिस जांच में पाया गया कि विलावान सिका को कुछ सालों में बौद्ध भिक्षुओं की ओर से उस के खाते में 385 मिलियन बाट (भारतीय रुपयों में लगभग 91 करोड़ 57 लाख 75 हजार 635 रुपए) मिले थे. पुलिस द्वारा मीडिया को साझा किए एक वीडियो में एक बौद्ध भिक्षु को सोफे पर विलावान सिका के साथ लेटा हुआ दिखाया गया. विलावान बौद्ध भिक्षु पर उस के सिर में थप्पड़ मारती दिखी.  पुलिस ने वीडियो क्लिप और कई तसवीरों में यौन क्रियाओं वाली वीडियो भी जब्त कर लीं. पुलिस पूछताछ में एक बौद्ध भिक्षु ने स्वीकार किया कि उस ने विलावान को एक कार भी गिफ्ट की थी.

बैंकाक के वाट माई याई पेन के एक बौद्ध भिक्षु ने पुलिस को बताया कि विलावान सिका गोल्फ ने धार्मिक वस्तुओं की मदद मांगने के बहाने उन से संपर्क किया था. यह भी स्वीकार किया कि वह विलावान के घर पूरी रात रुका था. उस ने दावा किया कि विलावान सिका ने उस के साथ अंतरंग संबंध बनाने की पहल खुद की और उस के बाद विलावान ने उस से एक लाख थाई बाट (भारतीय रुपयों में लगभग 2 लाख 26 हजार 643 रुपए) उधार भी लिए थे.

वाट चुजित थम्मारम के पूर्व मठाधीश फ्रा थेप्पाचारापोर्न, जिसे मठाधीश पद से हटा दिया गया है, जिसे अब सोम्पोंग के नाम से जाना जाता है. उस के भी अश्लील वीडियो विलावान के साथ मिले थे. सोम्पोंग ने पुलिस के सामने स्वीकार किया कि उस ने 12 मिलियन थाई बाट (भारतीय रुपयों में लगभग 32 करोड़ 40 लाख रुपए) से अधिक की राशि विलावान के खातों में हस्तांतरित की थी. पुलिस ने अब तक 12 भिक्षुओं द्वारा विलावान सिका के अवैध संबंधों की पुष्टि की है, जिन में से 9 बौद्ध भिक्षुओं को उन के मठाधीश पद से हटा दिया गया है, जबकि अन्य की जांच अभी जारी है. पुलिस ने बौद्ध भिक्षुओं पर 2 आरोप लगाए हैं.

आपराधिक संहिता की धारा 147 के तहत एक राज्य अधिकारी द्वारा गबन तथा धारा 157 के तहत एक राज्य अधिकारी द्वारा कार्यालय में कदाचार के आरोप थे. दूसरी ओर विलावान सिका पर भ्रष्टाचार निरोधक प्रभाग द्वारा 4 आरोप लगाए गए हैं. आपराधिक संहिता की धारा 147 के तहत संपत्ति के गबन में एक राज्य अधिकारी का समर्थन करना, धारा 157 के तहत कर्तव्य के कदाचार में एक राज्य अधिकारी का समर्थन करना, धन शोधन की साजिश और चोरी की संपत्ति प्राप्त करना है.

इस पूरे प्रकरण में थाईलैंड के राजा वजीरालोंगकोर्न ने दिनांक 22 जुलाई, 2025 को एक शाही आदेश जारी कर दिया. जिस में दरजनों वरिष्ठ भिक्षुओं को मठाधीश संबंधी उपाधियां प्रदान करने की पूर्व घोषणाओं को रद्द कर दिया गया है. राजा ने कहा कि बौद्ध धर्म में आस्था तो बनी रहेगी, लेकिन भिक्षुओं पर भरोसा कम हो सकता है. भिक्षु शायद अपनी वासनाओं में खो गए हैं. Crime Story in Hindi

कथा लिखने तक बैंकाक पुलिस मामले की गंभीरता से जांच कर रही थी.

 

 

Crime Story in Hindi : विश्वासघात का खंजर

Crime Story in Hindi : नवीन पटेल गोवा के एक बड़े व्यापारी थे. वह अपने शोरूम पर काम करने वाले नौकर निशांत पर विश्वास करते हुए अपने घर के सदस्य की तरह ही मानते थे. लेकिन इसी नौकर ने मोटी रकम के लालच में दोस्तों के साथ मिल कर उन्हें विश्वासघात का ऐसा खंजर घोंपा कि…

वीरेंद्र कुमार (25 वर्ष) को गोवा के लोग वीरेंद्र बिहारी कहते थे. कारण वह बिहार के मधुबनी के एक गांव का रहने वाला था. कोरोना काल में अपने गांव चला गया था. घर की आर्थिक स्थिति बहुत ही बिगड़ी हुई थी. पढ़ाई के नाम पर 8वीं पास था. उसे किसी भी तरह की नौकरी मिलने की उम्मीद कतई नहीं थी. काम के नाम पर वह खेतीकिसानी जानता था. कुछ महीने पहले ही रोजीरोटी की तलाश में गोवा आया था. उत्तरी इलाके में अपने कुछ परिचितों के यहां रह रहा था. उन की मदद से ही वह गाडि़यों की देखरेख के लिए एक गैरेज में लग गया था.

किसी भी काम को वह बहुत जल्द सीख लेता था. गाडि़यों की देखरेख करते हुए, गाड़ी से संबंधित वह कई तरह के काम करने में माहिर हो गया था. कई गाडि़यों की अच्छी जानकारी भी हो गई थी. गाड़ी खोलना, गाड़ी चलाना आदि से ले कर इंजन की आवाज पहचान कर उस की खराबी के बारे मालूम कर लेना अच्छी तरह जान गया था. उस ने ड्राइविंग लाइसैंस भी बनवा लिया थे. उस के बाद मानो उस के सपनों को पंख लग गए थे. गैरेज का काम छोड़ कर टैंपो की ड्राइवरी करनी शुरू कर दी थी. इस काम की वजह से उस की जानपहचान निशांत मोगन कैंडोलिम से हो गई थी. वह भी उसी की उम्र का था. वह मंगलूर का रहने वाला था. शहर के चर्चित एक शोरूम आशीर्वाद और गोदाम के मालिक नवीन पटेल के यहां कई सालों से काम कर रहा था.

निशांत को हमेशा माल लानेपहुंचाने के लिए टैंपो की जरूरत पड़ती थी. इसी कारण वह वीरेंद्र के संपर्क में आया. उस ने वीरेंद्र का टैंपो किराए पर लेना शुरू कर दिया. उस का काम, समय की पाबंदी और स्वभाव मालिक को पसंद आया. इस तरह वीरेंद्र भी शोरूम या गोदाम में अकसर सामान की डिलीवरी के लिए जाने लगा. उन में गहरी दोस्ती होने का यही कारण था. जब कभी मौका मिलता तो दोनों इकट्ठे बैठते थे. खातेपीते थे. मौजमस्ती करते थे. एकदूसरे से अपनी बातें शेयर किया करते थे. निशांत के अलावा 25 वर्षीय सुरजीत केसकर, 28 वर्षीय मंजूनाथ और 51 वर्षीय सुभाष भोसले भी कभीकभार वीरेंद्र बिहारी के टैंपो किराए पर लिया करते थे. सुभाष और सुजीत महाराष्ट्र में कोल्हापुर के रहने वाले थे.

इन के परिवार में पुश्तैनी काश्तकारी का काम होता था, जिस से गुजरबसर करना मुश्किल हो रहा था. इस कारण वे भी कामधंधे की तलाश में गोवा आ गए थे. उन का तीसरा साथी मंजूनाथ दक्षिणी गोवा के कांदोली गांव का रहने वाला था. उसे गोवा के चप्पेचप्पे की अच्छी जानकारी थी. दुर्गम से दुर्गम और निर्जन दूरदराज के इलाके के बारे में अच्छी तरह से जानता था. वह भी अच्छी कमाई के मकसद से गांव छोड़ कर शहर आया था. पांचों की दोस्ती के केंद्र में वीरेंद्र बिहारी था. सभी उसे इसलिए भी पसंद करते, क्योंकि वह उन्हें पैसा कमाने के नएनए आइडिया देता था. वह खुद भी खूब पैसा कमाना चाहता था.

कोरोना काल का हुआ असर जब कभी पांचों मिलते तब पैसे कमाने की योजना बनाया करते थे. कोरोना के कहर से गोवा भी तबाह हो गया था. शहर की स्थिति खराब हो गई थी. शहर के अधिकतर कामधंधे और रोजगार ठप पड़ गए थे. इस का सब से अधिक प्रभाव दिहाड़ी पर काम करने वालों पर पड़ा था. काफी लोग अपने गांव चले गए, किंतु कोरोना कम होने के बाद जब वे वापस लौटे तब उन में से कुछ को ही काम मिल पाया. काम नहीं पाने वालों में ये पांचों दोस्त भी थे. वीरेंद्र बिहारी शातिर दिमाग का था. जब उसे कोई ढंग का काम नहीं मिला, तो उस ने वाहन की चोरियां और राहजनी का काम शुरू कर दिया, जिस से उस के खिलाफ थाने में कई शिकायतें भी दर्ज हो गई थीं.

एक के बाद एक जब कई शिकायतें उस के खिलाफ थानों में दर्ज हुईं तो वह कई बार गिरफ्तार भी हुआ. लेकिन किसी तरह जमानत पर छूट कर जेल से बाहर आ गया. इस से वह समझ गया था कि किस तरह के मामले में कैसे छूटा जा सकता है और किस में कितना खर्च कर बचा जा सकता है. वीरेंद्र बिहारी के मन में एक लंबा हाथ मारने का विचार आया. लेकिन यह काम उस के अकेले के वश का नहीं था. उस की योजना के मुताबिक उसे और लोगों की जरूरत थी. वह अपनी योजना को सही तरह से सफल बनाने के लिए एक टीम बनाना चाहता था. इस बारे में उस ने सब से पहले निशांत से बात की. उस ने उसे अपनी योजना के बारे में बताया. पहले तो निशांत उस की योजना सुनते ही घबरा गया. उस ने इनकार कर दिया. कहा कि इस काम में उस का बनाबानाया काम छूट जाएगा.

तब वीरेंद्र ने उस से कहा, ‘‘हमें इस काम में मोटे पैसे एक बार में ही मिल जाएंगे तो कोई दूसरा काम करने की जरूरत ही नहीं पड़ेगी.’’ यह बात निशांत की समझ में आ गई और उस ने इस काम में हामी भर दी. उस के बाद दोनों ने मिल कर टीम को पूरा करने का काम शुरू किया. उन्होंने बाकी के 3 दोस्तों से बात की. सभी उन की योजना सुन कर निशांत की तरह ही घबरा गए थे. लेकिन जब उन्हें समझाया गया कि इस में कानून और पुलिस से कैसे बचा जा सकता है, तब वे भी राजी हो गए. फिर उन्हें एक झटके में लाखों रुपए आने का लालच भी था. नवीन पटेल को लिया निशाने पर इस तरह से पूरी योजना की तैयारी के बाद उन्हें एक ऐसी पार्टी की तलाश थी, जो मालदार हो और उन की थोड़ी सी धमकी पर ही आसानी से उन की बात मान ले. उन की योजना किसी का अपहरण कर मोटी फिरौती वसूलने की थी.

ऐसे में घूमफिर कर के उन की नजर में जिस व्यक्ति की तसवीर उभर कर सामने आई, वह निशांत के मालिक नवीन पटेल की थी. निशांत कई सालों से उन के यहां काम कर रहा था. इसलिए उसे उन के घर, परिवार के लोगों के अलावा उन की अमीरी के बारे में अच्छी जानकारी थी. योजना के अनुसार, उन्होंने नवीन पटेल के औफिस की अच्छी तरह से रेकी की. इस काम को निशांत ने किया. साथ में वीरेंद्र की भी मदद ली. रेकी के बाद दिन और समय तय कर वीरेंद्र बिहारी ने एक एसयूवी कार किराए पर ली. उसी कार से उन्होंने औपरेशन करोड़पति की शुरुआत की. उस दिन अगस्त की 4 तारीख थी. पांचों साथी कार में सवार नवीन पटेल के शोरूम पहुंचे. समय साढ़े 12 बजे का था.

वीरेंद्र अपने 4 साथियों को ले कर शोरूम में घुसा, जबकि एक साथी कार में ही बैठा रहा. वह निशांत था. वह कार में लगे काले शीशे के कारण बाहर से नहीं दिख रहा था. वीरेंद्र ने नवीन पटेल को अपना परिचय एक प्लाईवुड व्यापारी के रूप में दिया. नवीन पटेल से परिचय करने के बाद उस ने अपने 3 सहयागियों के तौर पर बाकी का परिचय करवाया. थोड़ी देर तक इधरउधर की बातें करने के बाद वीरेंद्र ने बताया कि कुछ समय में ही उन का कारपेंटर आने वाला है. वही प्लाईवुड के बारे में बाकी जानकारी देगा. चालाकी से किया अपहरण नवीन पटेल ने उन्हें सामने के सोफे पर बैठने को कहा और अपने एक कर्मचारी को पानी और चाय लाने के लिए बोल कर अपना काम निपटाने लगे. कर्मचारी के वहां से हटते ही वीरेंद्र के एक साथी ने अचानक ही शोरूम का शटर बंद कर दिया.

नवीन पटेल चौंक गए. उन्होंने समझा कि शटर अपने आप गिर गया है. क्योंकि ऐसा पहले भी 2-3 बार हो चुका था. उन्होंने तुरंत अपने कर्मचारी को आवाज लगाई, ‘‘कितनी बार कहा है कि शटर ठीक करवा लो, लेकिन नहीं.’’

नवीन बात पूरी करने वाले ही थे कि वीरेंद्र बिहारी ने फुरती से नवीन  के गले पर चाकू रख दिया. नवीन बौखलाते हुए बोले, ‘‘अरे, यह क्या बदतमीजी है? कौन…कौन हो तुम लोग? यह क्या कर रहे हो?’’

‘‘अगर अपनी जान की सलामती चाहते हो, तो एक करोड़ रुपया निकालो. अभी के अभी.’’ वीरेंद्र कड़कती आवाज में बोला.

‘‘छोड़ो मुझे, मुझे छोड़ दो.’’ नवीन अपना हाथ पीछे ले जा कर दूसरे बदमाश का हाथ पकड़ने की कोशिश करने लगे, जो पीछे से उन के दोनों कंधे पकड़े था.

‘‘नहीं छोड़ेंगे तुम्हें, जब तक कि तुम पैसे नहीं दे देते हो. वरना जिंदा भी नहीं बचोगे.’’ वीरेंद्र बोला. नवीन अचानक आई इस मुसीबत से बुरी तरह घबरा गए. अपने पुराने कर्मचारी निशांत को आवाज दी. चाय लाने के लिए गया कर्मचारी शोरगुल सुन कर वहां आ चुका था. उसे तीसरे बदमाश ने धर दबोचा. नवीन समझ चुके थे कि वे अपहर्त्ताओं के चंगुल में फंस चुके हैं. वह उन से विनती करने लगे, ‘‘मेरे पास पैसा नहीं है. लौकडाउन में इतना बिजनैस भी नहीं हो रहा है.’’

‘‘कहीं से भी लाओ हम नहीं जानते. घरवाली को फोन कर अभी पैसे मंगवाओ. वरना…’’ कहते हुए वीरेंद्र चाकू उन की गरदन पर रेतने की स्थिति में ले आया. काफी कोशिश और मारपीट करने के बाद भी बात नहीं बनी. बारबार नवीन एक ही रट लगाए रहे कि उन के पास पैसे नहीं है. वीरेंद्र ने अपने एक साथी को उन की आंखों और मुंह पर पट्टी बांधने को कहा. फटाफट बदमाशों ने नवीन की आंखों और मुंह पर पट्टी बांधी, फिर चाकू की नोक पर ढकेलते हुए कार के पास ले गए. कार में पहले बैठे निशांत ने उसे तुरंत अंदर बिठा दिया. कार की ड्राइविंग सीट पर वीरेंद्र जा बैठा. कुछ समय में  ही कार सुनसान सड़क पर दौड़ने लगी. एक करोड़ रुपए की मांगी फिरौती यहां तक तो पांचों बदमाशों को सफलता मिल गई थी, लेकिन उन्हें इस बात की चिंता हुई कि वे फिरौती की काल कैसे करें? किस से पैसे मंगवाएं? कहां पर मंगवाएं?

अचानक उन के प्रोग्राम में बदलाव होने से सभी दुविधा में आ गए थे. भीतर से उन्हें पकड़े जाने का डर भी लग रहा था. अपहरण जैसे अपराध का यह उन का पहला अनुभव था. वह अभी तक छोटीमोटी चोरियां और लूटपाट ही किया करते थे. उन्हें यह भी डर था कि अपना फोन इस्तेमाल करने पर तुरंत पुलिस की नजर में आ जाएंगे. ऐसे में हो सकता है कि वह फिरौती मिलने से पहले ही पकड़े जाएं. वीरेंद्र को सामने मोबाइल पर बात करते हुए मजदूरों को देख कर एक आइडिया आया. उस ने तुरंत गाड़ी रोकी और 2 मजदूरों के मोबाइल छीन लिए. फिर गाड़ी तेजी से आगे बढ़ा दी. फोन निशांत को देते हुए नवीन की पत्नी को काल लगाने के लिए कहा.

नवीन पटेल की पत्नी मीनाक्षी का नंबर निशांत को मालूम था. उस ने तुरंत से फोन लगा दिया. मीनाक्षी द्वारा फोन रिसीव करते ही निशांत ने स्पीकर   औन कर दिया.

‘‘हैलो, कौन बोल रहा है?’’ मीनाक्षी ने पूछा.

‘‘मैडम, अगर तुम अपने पति की खैरियत चाहती हो तो एक करोड़ रुपए का बंदोबस्त जल्द कर लो. वरना उन्हें भूल जाओ.’’ वीरेंद्र  कर्कश आवाज में बोला.

‘‘हैलो…हैलो, आप कौन बोल रहे हैं?’’ मीनाक्षी कांपती आवाज में बोली.

‘‘मैं कौन बोल रहा हूं, इस से तुम्हें कोई मतलब नहीं है. तुम सिर्फ उतना ही करो जितना हम कह रहे हैं. पैसा कहां लाना है, यह हम तुम्हें जल्द बातएंगे.’’ वीरेंद्र बोला.

‘‘लेकिन…. लेकिन तुम हो कौन? मेरे पति कहां हैं?’’

‘‘लेकिनवेकिन कुछ नहीं. बस, तुम इतना याद रखना कि पुलिस के पास भूल कर भी मत जाना. नहीं तो नतीजा बुरा होगा, समझी. और हां, तुम्हारा पति हमारे कब्जे में अभी तक सुरक्षित है.’’ कहते हुए वीरेंद्र ने फोन डिसकनेक्ट कर दिया. मीनाक्षी हो गई परेशान दूसरी तरफ नवीन पटेल की पत्नी मीनाक्षी यह समझ गई थीं कि उस के पति का का अपहरण हो चुका है. वह बेहद घबरा गईं. यह बात किसे बताएं, किसे नहीं समझ नहीं पा रही थीं. कुछ पल रुक कर उन्होंने निशांत को फोन लगाया. निशांत ने काल रिसीव की, लेकिन आवाज उस की नहीं थी. कोई और भद्दी गाली देते हुए बोला, ‘‘..आखिर तूने होशियारी दिखा दी न?’’ निशांत का फोन वीरेंद्र ने रिसीव किया था, ‘‘अब किसी को काल मत करना और रुपए के साथ हमारे फोन का इंतजार करना.’’

मीनाक्षी ने झट से फोन कट कर दिया. उन्होंने समझा कि शायद निशांत भी उस के पति के साथ है या फिर उस का फोन अपहर्त्ताओं के पास है. उस के सामने बड़ी समस्या यह भी थी कि एक करोड़ रुपए कहां से लाएगी? अपहर्त्ताओं की इस शर्त से परिवार में कोहराम मच गया. इस समस्या का समाधान कैसे करें, यह उन की समझ में नहीं आ रहा था. मीनाक्षी की मानसिक स्थिति बिगड़ गई. वह डिप्रेशन में चली गईं. परिवार वालों ने बड़ी मुश्किल से उन्हें संभाला. समझाबुझा कर पुलिस की मदद लेने को कहा. तब तक रात के 9 बज चुके थे. मीनाक्षी हिम्मत कर 4 अगस्त, 2021 को रात साढ़े 9 बजे अपने रिश्तेदारों के साथ पणजी पुलिस स्टेशन पहुंचीं. 3 रिश्तेदारों के साथ होने के बावजूद वह काफी घबराई हुई थीं. उन की हालत देख थानाप्रभारी विजय चौडणखर ने हैरानी से पूछा, ‘‘क्या बात है? आप इतना घबराई हुई क्यों हैं?’’

नवीन पटेल गोवा के एक जानेमाने कारोबारी थे, इस कारण थानाप्रभारी मीनाक्षी को पहले से पहचानते थे. हाल में ही वह नवीन की मैरिज एनिवर्सरी में शामिल हुए थे. तब मीनाक्षी ने उन की अच्छी आवभगत की थी. उत्तरी गोवा में थिविन गांव के रहने वाले 30 वर्षीय नवीन पटेल गोवा के एक प्रतिष्ठित व्यक्ति थे. उन का गोवा के मौडल टाउन में आशीर्वाद नाम का एक शोरूम और एक प्लाईवुड का गोदाम था. पुलिस को दी सूचना नवीन की पत्नी को अपने पास आया देख कर थानाप्रभारी चौंक गए. उन की हालत देख किसी अनहोनी की आशंका के साथ उन्होंने पूछा, ‘‘क्या हुआ भाभीजी? आप इतनी घबराई हुई क्यों हैं?’’ इसी के साथ उन्होंने मीनाक्षी को बैठने को कहा.

सामने की कुरसी पर बैठते ही मीनाक्षी फूटफूट कर रोने लगीं. थानाप्रभारी ने उन्हें शांत करवाया. एक ग्लास पानी पिलाया और पूरी बात बताने को कहा. जब मीनाक्षी ने नवीन पटेल के अपहरण की बात बताई तो थानाप्रभारी चिंता में पड़ गए. उन्होंने पूरी बात विस्तार से बताने को कहा. मीनाक्षी ने अपहर्त्ताओं से हुई सभी बातें उन्हें बताईं. साथ ही अपने मोबाइल पर आए अपहर्त्ताओं के काल के समय को बताया. थानाप्रभारी विजय चोडणखर मीनाक्षी का स्मार्टफोन ले कर जांचपरख करने लगे. संयोग से फोन में आटो रिकौर्डिंग का ऐप था. विजय ने काल की रिकौर्डिंग औन कर मीनाक्षी के सामने ही कई बार सुना. फोन में शोरूम के कर्मचारी निशांत का भी नाम था.

उसे काल करने पर मिले जवाब के बारे में पूछने पर मीनाक्षी ने सिर्फ इतना बताया कि वह उन का बहुत ही भरोसेमंद कर्मचारी है और उस का हमारे घर भी आनाजाना होता था. इस वक्त वह कहां है, पूछने पर मीनाक्षी ने बताया कि अब उस का फोन बंद आ रहा है. थानाप्रभारी इतना तो जानते ही थे कि अधिकतर अपहरण के मामले में किसी न किसी नजदीकी का ही हाथ होता है. इसी अंदेशे के साथ उन्होंने निशांत के जरिए अपहर्त्ताओं तक पहुंचने की योजना बनाई. इस के बाद थानाप्रभारी ने मीनाक्षी और उन के साथ आए लोगों के बयानों के आधार पर नवीन पटेल के अपहरण की शिकायत दर्ज कर ली गई. थानाप्रभारी ने उन्हें इस आश्वासन के साथ घर भेज दिया कि पुलिस उन के पति को अवश्य छुड़ा लेगी.

मीनाक्षी के जाने के बाद थानाप्रभारी ने मामले की जानकारी पुलिस कंट्रोल रूम और अपने वरिष्ठ अधिकारियों को देने के साथ ही तुरंत पूरे शहर की नाकेबंदी कर दी. पुलिस हो गई सक्रिय शहर के पुलिस महकमे में नवीन पटेल के अपहरण की सूचना फैल गई. इस की जानकारी व्यापारी वर्ग को भी लग गई, किंतु वे पुलिस की हिदायत के मुताबिक शांत बने रहे. पुलिस ने सब से पहले निशांत की तलाशी का लक्ष्य बनाया, ताकि अपहरण का कोई सुराग हाथ लग सके. उस के मोबाइल फोन की ट्रैकिंग की जाने लगी. अपहरण कांड की सूचना पा कर अगले दिन गोवा के डीजीपी मुकेश कुमार मीणा और एसपी शोभित सक्सेना ने थानाप्रभारी विजय चोडणखर के साथ मिल कर घटनास्थल यानी नवीन पटेल के शोरूम का जा कर निरीक्षण किया.

आसपास के शोरूम वालों से पूछताछ करने पर उन्हें कोई विशेष जानकारी नहीं मिली. शोरूम के कुछ कर्मचारियों ने घटना के दिन शटर बंद करने और चाकू की नोंक पर नवीन को गाड़ी में जबरन बिठाने के अलावा अधिक बातें नहीं बताईं. उन्होंने इस कांड में 5 लोगों के शामिल होने के साथसाथ दोपहर 12 से एक बजे के बीच शोरूम के सामने सफेद एसयूवी कार खड़ी होने की बात कही. निशांत के बारे में पूछने पर कर्मचारियों ने कहा कि उस रोज वह छुट्टी पर था. इस छानबीन के बाद पुलिस अधिकारी अपने औफिस लौट आए. थाने आ कर थानाप्रभारी नवीन पटेल के शोरूम का बारीकी से निरीक्षण करने के अलावा उन्होंने वहां लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज की भी जांच की.

जल्द ही उन्हें उन फोन नंबरों की काल डिटेल्स मिल गई, जिस से पता चला कि काल के वक्त वे गोवा के किस इलाके में थे. इस के बाद नए सिरे से मामले की रूपरेखा तैयार कर तफ्तीश के लिए पुलिस की 4 टीमों का गठन किया गया. सभी टीमें गोवा के अलगअलग इलाकों में फैल गईं. इस मामले में गोवा के आगशी और अगाकैन पुलिस की भी मदद ली गई. अपहर्त्ताओं के मोबाइल फोन की सर्विलांस से मालूम हुआ कि वे नंबर पुराने गोवा सांताक्रुज केवसा के इलाके से एक्टिव करवाए गए थे. उस का आईएमईआई नंबर गोवा के एक व्यक्ति के मोबाइल का था. पुलिस की जांच टीम उस के सहारे आगशी और अगाकैन पुलिस को सतर्क करती हुई उस व्यक्ति के पते पर पहुंच गई.

वहां जा कर मालूम हुआ कि जिन फोन नंबरों से फिरौती की रकम मांगी गई थी, वह फोन दिहाड़ी मजदूरों के थे, जो एक दिन पहले ही कार सवार युवकों ने छीन लिए थे. उन की कार उन युवकों के हुलिया के बारे में पुलिस ने मजदूरों से पूछा तो उन के बारे में उस का हुलिया सीसीटीवी की तसवीरों वाले कार से मेल खाने जैसी थी. उस वक्त वे मेनरोड से अपने घर लौट रहे थे. तभी उन के पास एक कार आ कर रुकी थी, जिस में 5 लोग बैठे थे. एक रास्ता पूछने के लिए बाहर निकला था. उस ने यह भी बताया कि कार में एक आदमी सिर झुकाए 2 लोगों के बीच बैठा हुआ था. दोनों उसे पीछे से हाथ किए ऐसे पकड़ रखे थे, जैसे वे गिरने वाले हों.

मजदूरों से मिली अहम जानकारी मजदूर के बताए गए बदमाशों के हुलिए से जांच टीम को काफी राहत मिली. अपहरण कांड के तार एकदूसरे से जुड़ने लगे थे, लेकिन सब से अहम था अपहर्त्ताओं का पकड़ा जाना और नवीन पटेल को सकुशल बरामद करना. पुलिस ने गोवा में घटित हाल की आपराधिक वारदातों में शामिल लोगों की जानकारी निकलवाई. उस के आधार पर सब से पहला नाम राहजनी और वाहन चोरी के कई गंभीर इलजाम वाले वीरेंद्र कुमार बिहारी का सामने आया. इस नई जानकारी के बाद पुलिस टीम की तफ्तीश वीरेंद्र कुमार बिहारी की तरफ घूम गई. पुलिस टीम ने जब वीरेंद्र के ठिकाने पर छापा मारा तो वह हाथ नहीं लगा, लेकिन उस का एक साथी पुलिस टीम के हत्थे चढ़ गया.

उसे पुलिस टीम थाने ले आई. उस से पूछताछ शुरू होने के साथ ही पुलिस को एक और महत्त्वपूर्ण सुराग मिल गया. वीरेंद्र का पकड़ा गया साथी कोई और नहीं, नवीन पटेल का कर्मचारी निशांत था. पहले तो उस ने अपहरण कांड से अनजान और और खुद को बेकुसूर बताया, लेकिन सख्ती से पूछताछ करने पर उस ने सच कुबूल लिया. उस ने अपने अन्य साथियों के नाम भी बता दिए और यह भी बताया कि वह अपहृत नवीन को कहीं छिपा कर रखने का इंतजाम करने के लिए कमरे पर आया था. अपहर्त्ताओं के चंगुल से सकुशल छुड़ाया पुलिस को अपहर्त्ताओं तक पहुंचने के लिए इतनी जानकारी काफी थी. पुलिस टीम नवीन पटेल को उन के चंगुल से छुड़ाने के लिए निशांत को साथ ले कर उस के बताए अनुसार उस ठिकाने पर जा पहुंची, जहां वे मीनाक्षी को काल कर पैसे मांग रहे थे.

वे सभी पुराने गोवा में एक जर्जर इमारत में थे. पुलिस ने वहां बंधक बना कर रखे गए नवीन पटेल को अपहर्त्ताओं के चंगुल से सकुशल बरामद कर लिया. नवीन पटेल को  सकुशल आजाद करवाने के बाद तीनों थाने के अधिकारियों की मदद से नवीन पटेल अपहरण कांड में शामिल सभी  आरोपियों को निशांत मोगन की निशानदेही पर गिरफ्तार कर लिया गया. थाने ला कर जब उन से पूछताछ की गई तो उन्होंने अपने नाम वीरेंद्र कुमार बिहारी, सुरजीत केसकर, सुभाष भोसले और मंजूनाथ कारवार बताए. सभी से अपहरण से संबंधित मोबाइल फोन और चाकू बरामद कर लिया. उन के खिलाफ नवीन पटेल के अपहरण का मुकदमा दर्ज कर दिया गया. दूसरे दिन उन्हें गोवा मेट्रोपौलिटन मजिस्ट्रेट के सामने पेश कर गोवा की सेंट्रल जेल भेज दिया गया.

कथा लिखे जाने तक आगे की तफ्तीश गोवा कोतवाली पुलिस थाने के थानाप्रभारी विजय चोडणखर कर रहे थे. Crime Story in Hindi

 

Crime Story in Hindi : ऊधम सिंह नगर में धंधा पुराना लेकिन तरीके नए

Crime Story in Hindi : देशदुनिया की शायद ही कोई औरत हो, जो अपनी इच्छा से देहव्यापार को पेशा बनाना चाहती है. किसी भी स्त्री की देह वह बेशकीमती दौलत है, जिस का मूल्यांकन नहीं किया जा सकता, फिर भी इस की बोली लगाने वाले बाजारों की कमी नहीं है. ऐसा ही उत्तराखंड के काशीपुर में एक बाजार है, जो राजारजवाड़ों के जमाने से काफी विख्यात रहा है.

सदियों पहले उस दौर की बात है, जब देश में राजेरजवाड़ों का अपना साम्राज्य हुआ करता था. समूचे इलाके में उन की तूती बोलती थी. उन के मनोरंजन के 2 ही मुख्य साधन हुआ करते थे. एक, जंगली जानवरों का शिकार करना और दूसरा, सुंदर स्त्री की लुभावनी अदाओं के नाचगाने का आनंद उठाने के अलावा यौनाचार में लिप्त हो जाना. ऐसा ही कुछ आज के उत्तराखंड स्थित ऊधमसिंह नगर के काशीपुर में था. तब काशीपुर के कई मोहल्ले तो इस के लिए दूरदूर तक विख्यात थे. उस मोहल्ले की मुख्य सड़क के दोनों ओर वेश्याएं रहती थीं.

देह व्यापार में लिप्त ऐसी औरतें अब वैश्या कहलाना पसंद नहीं करतीं, उन्हें सैक्स वर्कर कहा जाता है. यहां पर कई छोटेबड़े नगरों के लोग अपनी कामपिपासा शांत करने आते थे. बाद में ऐसी औरतों की संख्या बढ़ने पर उन के धंधे को जबरन बंद करवाना पड़ा. सामाजिक दबाव और प्रशासन की सख्ती के आगे इन वेश्याओं को नगर छोड़ कर जाने पर मजबूर होना पड़ा था. उस के बाद उन्होंने मेरठ शहर के लिए पलायन कर लिया था. उन्हीं में कुछ वेश्याएं ऐसी भी थीं, जिन्होंने नगर के आसपास रह कर गुप्तरूप से चोरीछिपे धंधे में लिप्त रहीं. वही सिलसिला बदस्तूर आज भी जारी है.

पुलिस समयसमय पर उन के ठिकानों पर छापामारी करती रहती है. उन्हें हिरासत में ले कर नारी सुधार गृह या जेल भेज दिया जाता है. बात 30 जुलाई की है. पुलिस को जानकारी मिली थी कि काशीपुर के ढकिया गुलाबो मोहल्ले का एक दोमंजिला मकान काफी समय से देह व्यापार का ठिकाना बना हुआ है. इस जानकारी को ध्यान में रखते हुए सीओ अक्षय प्रह्लाद कोंडे के निर्देश पर एक पुलिस टीम गठित की गई. टीम में महिला इंसपेक्टर धना देवी, कोतवाली एसएसआई देवेंद्र गौरव, टांडा चौकी इंचार्ज जितेंद्र कुमार, कांस्टेबल भूपेंद्र जीना, देवानंद, कांस्टेबल गिरीश कांडपाल, दीपक, मुकेश कुमार शामिल थे.

पुलिस टीम ने काफी सावधानी से छापेमारी को अंजाम दिया. सभी पुलिसकर्मी सादे कपड़ों में थे. छापेमारी में उन्हें बताए गए ठिकाने से 4 महिलाएं और 2 पुरुषों को धर दबोचने में सफलता मिली. वे मकान के अलगअलग कमरों में आपत्तिजनक स्थिति में पाए गए थे. देह व्यापार मामले में आरोपी को रंगेहाथों पकड़ना जरूरी होता है. वरना वे संदेह के आधार पर आसानी से छूट जाते हैं. इस छापेमारी में देहव्यापार की सरगना फरार हो गई. पकड़े गए आरोपियों को पूछताछ के बाद जेल भेज दिया गया. वैसे काशीपुर में इस तरह की छापेमारी पहली बार नहीं हुई थी. पहले भी कई बार इलाके में देह व्यापार के ठिकानों पर छापेमारी हो चुकी थी. देह के गंदे धंधे में लगे लोग हमेशा अड्डा बदलते रहते हैं.

देह व्यापार के धंधे में आधुनिकता और बदलाव कई रूपों में सामने आया है, जिस का एक मामला हल्द्वानी पुलिस के सामने 3 अगस्त को आया. पुलिस को सूचना मिली कि हाइडिल गेट स्थित स्पा सेंटर में काफी समय से देह व्यापार का खुला खेल चल रहा है. इस सूचना के आधार पर हल्द्वानी सीओ शांतनु पराशर ने एंटी ह्यूमन ट्रैफिकिंग यूनिट की टीम को साथ ले कर स्पा सेंटर पर छापा मारा. छापेमारी के दौरान एक युवक को युवती के साथ आपत्तिजनक स्थिति में पकड़ा गया. स्पा सेंटर में पुलिस की रेड पड़ते ही हलचल मच गई. सेंटर की संचालिका दिल्ली निवासी सुमन और स्वाति वर्मा फरार हो गईं. जबकि सेंटर के मैनेजर पश्चिम बंगाल के वरुणपारा वारूईपुरा, निवासी नादिया पकड़े गए.

छापेमारी के दौरान स्पा सेंटर से देह व्यापार से संबंधित कई आपत्तिजनक वस्तुएं भी बरामद हुईं. यहां तक कि उस के बेसमेंट से 9 लड़कियां निकाली गईं. उन में 2 उत्तर प्रदेश, एक मध्य प्रदेश, एक मणिपुर, 2 पश्चिम बंगाल और 3 हरियाणा की थीं. पकड़ा गया युवक आशीष उनियाल काठगोदाम का रहने वाला निकला. वह एक निजी कंपनी में काम करता था. स्पा सेंटर में सुनियोजित तरीके से देह व्यापार का धंधा चलाया जा रहा था. धंधेबाजों ने बड़े पैमाने पर मसाज की आड़ में यौनाचार के सारे इंतजाम कर रखे थे. वहां से पकड़ी गई सभी युवतियों के रहने की व्यवस्था सेंटर के बेसमेंट में की गई थी. उन के खानेपीने की पूरी सुविधाएं वहीं की गई थीं.

ग्राहक को स्पा सेंटर आने से पहले ही वाट्सऐप पर युवती की फोटो दिखा कर उस का सौदा कर लिया जाता था. ग्राहक को युवतियों के टाइम के हिसाब से अपौइंटमेंट तय किया जाता था. स्पा सेंटर आते ही ग्राहक को रिसैप्शन पर बाकायदा बिल चुकाना होता था, जो स्पा से संबंधित होते थे. उस के बाद उसे कमरे में बने केबिन में जाने की इजाजत मिलती थी. अपने फिक्स टाइम पर ग्राहक स्पा सेंटर पहुंच जाता था. उन्हें स्पीकर पर आवाज लगाई जाती थी. उस के साथ फिक्स युवती को इस की सूचना पहले होती थी और कुछ समय में ही अपने ग्राहक के पास चली जाती थी. एक युवती को एक दिन में 3 सर्विस देनी होती थी.

सेंटर में आने वाले ग्राहकों का कोई आंकड़ा मौजूद नहीं था. जबकि उन की बिलिंग होती थी. उसे किसी रजिस्टर में दर्ज नहीं किया जाता था. फिर भी पुलिस ने जांच में पता लगाया कि सेंटर को प्रतिदिन 50 हजार की कमाई होती थी. स्पा सेंटर से बरामद सभी युवतियों ने स्वीकार किया कि वे किसी न किसी मजबूरी की वजह से मसाज की आड़ में देह बेचने का काम करती हैं. इसी के साथ उन्होंने सेंटर के मालिक पर आरोप भी लगाया कि उन्हें बहुत कम पैसा मिलने के कारण मजबूरी के चलते बेसमेंट में रहना होता है, जहां काफी मुश्किल होती है. पुलिस पूछताछ के बाद सीओ के निर्देश पर सभी युवतियों को मुखानी स्थित वन स्टौप सेंटर में भेज दिया गया. उसी दौरान 7 अगस्त, 2021 को पुलिस को पता चला कि स्पा सेंटर की आड़ में कई जगहों पर देह व्यापार चल रहा है.

इस सूचना के आधार पर एंटी ह्यूमन ट्रैफिकिंग यूनिट प्रभारी ने सीओ अमित कुमार के साथ मीटिंग कर इस अपराध को जड़ से मिटाने का निर्णय लिया. इस की जानकारी एसएसपी दलीप सिंह को दे कर अनुमति मांगी गई. अनुमति मिलते ही अमित कुमार ने ठोस कदम उठाए. उस योजना को अंजाम देने के लिए पुलिस ने नगर में चल रहे स्पा सेंटरों पर मुखबिरों का जाल बिछा दिया. पुलिस को जहां से भी जानकारी मिलती, वहां तुरंत छापेमारी की जाने लगी. इस सिलसिले में मैट्रोपोलिस सिटी बिग बाजार स्थित सेवेन स्काई स्पा सेंटर में कुछ संदिग्ध युवकयुवतियां दबोचे गए. एक कमरे के केबिन से 2 युवकों को 3 युवतियों के साथ, जबकि दूसरे कमरे में बने केबिनों में 2-2 युवकयुवतियां मसाज में तल्लीन पकड़े जाने पर दबोचा गया. सभी अर्धनग्नावस्था में थे.

सेंटर की गहन छानबीन में प्रयोग किए गए और नए महंगे कंडोम बरामद हुए. रिसैप्शन काउंटर से भी कंडोम बरामद किए गए. कस्टमर एंट्री रजिस्टर से पुलिस को ग्राहकों के एंट्री की तारीख और समय का पता चला. सेंटर की संचालिका सोनू थी. उस ने पुलिस को पूछताछ में बताया कि स्पा सेंटर का मालिक हरमिंदर सिंह हैं, उन के निर्देश पर ही सेंटर में सब कुछ होता रहा है. सेंटर से बरामद 5 युवतियों ने स्वीकार किया कि उन्हें एक ग्राहक के साथ हमबिस्तर होने पर 500 रुपए मिलते थे. इस मामले को पंतनगर थाने में दर्ज किया गया. गिरफ्तार युवकयुवतियों और सेंटर के मालिक हरमिंदर सिंह के खिलाफ रिपोर्ट लिख ली गई. बिलासपुर जिला रामपुर निवासी हरमिंदर सिंह फरार था.

पुलिस उस की तलाश में लगा दी गई थी. इसी तरह ऊधमसिंह नगर में चल रहे स्पा सेंटर पर भी 13 अगस्त को छापेमारी की गई. उस के बाद वहां बसंती आर्या ने सभी स्पा सेंटरों व होटल मालिकों को आवश्यक दिशानिर्देश जारी किए. उन से कहा गया कि सभी ठहरने वाले ग्राहकों के आईडी की फोटो कौपी रखें और उन के नाम व पते रिसैप्शन सेंटर पर जरूर दर्ज करें. साथ ही होटल में सभी जगह पर सीसीटीवी कैमरे चालू हालत में रखने अनिवार्य कर दिए गए. कहते हैं, जहां चाह वहां राह, तो इस धंधे को स्मार्टफोन से नई राह मिल गई है. देह व्यापार में लिप्त काशीपुर की सैक्स वर्करों ने स्मार्टफोन को ग्राहक तलाशने का जरिया बना लिया है. पुरुष भी धंधेबाज औरतों की तलाश आसानी से करने लगे हैं.

देह व्यापार में लिप्त महिलाएं मोबाइल पर चंद अश्लील बातें कर अपने ग्राहकों को फंसा लेती हैं. पैसे का लेनदेन भी उसी के जरिए हो जाता है. वाट्सऐप और वीडियो कालिंग तो इस धंधे के लिए वरदान साबित हो रहा है. इस पर वे अपनी अश्लील फोटो या वीडियो भेज कर उन को लुभा लेती हैं. फिर वह ग्राहक की सुविधानुसार कुछ समय के लिए किराए पर ले रखे कमरे पर ही उसे बुला लेती हैं या उस के बताए ठिकाने पर पहुंच जाती हैं. जो महिलाएं कल तक मंडी से जुड़ी हुई थीं, वे अब इसी तरीके से अपना धंधा चला रही हैं, यही उन की रोजीरोटी का साधन बन चुका है.

जांच में यह भी पता चला कि काशीपुर में कुछ ऐसी बस्तियां हैं, जहां पर कई औरतें अपना धंधा चला कर मोटी कमाई कर रही हैं. उन में कुछ औरतें अधेड़ उम्र की हैं, वे  नई लड़कियों के लिए ग्राहक ढूंढने के साथसाथ उन की सुरक्षा की जिम्मेदारी भी निभाती हैं. ऐसी औरतें ही किराए का मकान या कमरा ले कर रखती हैं. उन में वह खुद रहती हैं. किसी ग्राहक की मांग आते ही वह उन से सौदा तय कर आगे के काम में लग जाती हैं. उन्हें थोड़े समय के लिए अपना घर उपलब्ध करवा देती हैं. ग्राहक को 15 मिनट से ले कर आधे घंटे तक का समय मिलता है. इसी समय के लिए 300 से 500 रुपए वसूले जाते हैं.  इस आय में आधा हिस्सा लड़की को मिलता है. कभीकभी लड़की को ज्यादा भी मिलता है.

यह ग्राहक की संतुष्टि और उस से मिलने वाले अतिरिक्त बख्शीश पर निर्भर करता है. इस गिरोह में घरेलू किस्म की औरतें, स्टूडेंट या पति से प्रताडि़त या उपेक्षित सफेदपोश संभ्रांत किस्म की महिलाएं शामिल होती हैं, जिन के बारे में कोई सोच भी नहीं सकता कि उस पर भी गंदे धंधे के दाग लगे हुए हैं. उन की पब्लिसिटी पोर्न वेबसाइटों के जरिए भी होती रहती है. इस तरह के देह व्यापार का धंधा काशीपुर ही नहीं, बल्कि पूरे उत्तराखंड में अपने पैर पसारता जा रहा है. बताते हैं कि यहां लड़कियां तस्करी के माध्यम से उपलब्ध करवाई जाती हैं, जिन में अधिकतर मजबूर महिलाएं और युवतियां ही होती हैं.

इसी साल जुलाई माह की भी ऐसी एक घटना 21 तारीख को रुद्रपुर में सामने आई. एंटी ह्यूमन टै्रफिकिंग यूनिट के प्रभारी को ट्रांजिट कैंप गंगापुर रोड के पास मोदी मैदान में खड़ी एक संदिग्ध कार के बारे में सूचना मिली. मुखबिर ने एक कार यूके06एए3844 में कुछ पुरुष और महिलाओं के द्वारा अश्लील हरकतें करने की जानकारी दी. इस सूचना पर काररवाई करते हुए इंसपेक्टर बसंती आर्या अपनी टीम के साथ मौके पर पहुंचीं. अपनी टीम के साथ चारों तरफ से कार को घेरते हुए उस कार से 3 लोगों को पकड़ा गया. उन में एक आदमी और 2 औरतें थीं. जब वे पकड़े गए, तब उन की हरकतें बेहद आपत्तिजनक थीं. तीनों को अपनी कस्टडी में ले कर पूछताछ के लिए थाने लाया गया.

आदमी की पहचान उत्तर प्रदेश में बरेली जिले के बहेड़ी थाना के रहने वाले 29 वर्षीय भगवान दास उर्फ अर्जुन के रूप में हुई. महिला की पहचान 32 वर्षीया भारती के रूप में हुई. उस ने बताया कि वह उत्तर प्रदेश में रामपुर जिले के अंतर्गत दिनकरी की रहने वाली है, लेकिन अब वह ऊधमसिंह नगर जिला में  सिडकुल ढाल ट्रांजिट कैंप में रहती है. इसी तरह से दूसरी 21 वर्षीया युवती ने अपना नाम पूजा यादव बताया. उस ने कहा कि उस का पति उत्तर प्रदेश में बाराबंकी जिले के गांव सनसडा में रहता है. तीनों से गहन पूछताछ के बाद उन की तलाशी ली गई. तलाशी में उन के पास से 2 स्मार्टफोन बरामद हुए. मोबाइलों में तमाम अश्लील फोटो, वीडियो के साथ ही अनेक अश्लील मैसेज भी भरे हुए थे.

उन्हीं मैसेज से मालूम हुआ कि ये दोनों महिलाएं एक रात के 1000 से 1500 रुपए लेकर ग्राहकों की रातें रंगीन करती थीं. उन के साथ पकड़ा गया भगवान दास का काम ग्राहक तलाशना होता था. वह उन्हें ग्राहकों तक पहुंचाने का काम करता था. बदले में 500 रुपए वसूलता था. दास ने बताया कि वह ग्राहक की जानकारी होटलों में ठहरने वालों से जुटाता था. इस के लिए अपने संपर्क में आई युवतियों को किसी एकांत जगह पर कार में बैठा कर रखता था और फिर वहीं से ग्राहकों के फोन का इंतजार करता था. जैसे ही किसी ग्राहक का फोन आता वह 10 से 15 मिनट में उस के बताए स्थान पर लड़की को पहुंचा देता था.

तीनों 21 जुलाई को ग्राहक का फोन आने का ही इंतजार कर रहे थे. उन की कोई सूचना नहीं मिल पाने के कारण वे आपस में ही हंसीमजाक करते हुए टाइमपास कर रहे थे. ऐसा करते हुए वे बीचबीच में अश्लील हरकतें भी करने लगे थे. उस दिन भगवान दास ने दोनों को 1500-1500 रुपयों में तय किया था. लेकिन जब काफी समय गुजर जाने के बाद भी उसे कोई ग्राहक नहीं आया था. पुलिस मुखबिर की निगाह उन पर गई और उन्होंने पुलिस को इस की सूचना दे दी. पूछताछ में भगवान दास ने कई मोबाइल नंबर दिए, जो देहव्यापार करने वाली महिलाओं के थे.

वे अपनी बुकिंग एक दिन पहले करवा लेती थीं. बुकिंग के आधार पर ही उन्हें होटल या किसी निजी घर पर ले जाया जाता था. उन्हें ले जाने वाला ही उन का सौदा पक्का कर देता था. औनलाइन पेमेंट आने के बाद ही बताए जगह पर पहुंचती थीं. इस मामले को थाना ट्रांजिट कैंप में दर्ज किया गया. पकड़े गए व्यक्तियों पर  सार्वजनिक स्थान पर अश्लील हरकतें कर अनैतिक देह व्यापार करने के संबंध में रिपोर्ट दर्ज की गई. उन पर आईपीसी की धारा 294/34 लगाई गईं. इसी के साथ उन्हें अनैतिक देह व्यापार निवारण अधिनियम की धारा 5/7/8 के तहत काररवाई की गई. Crime Story in Hindi

Crime Story in Hindi : ऑनलाइन एस्कॉर्ट साइट से चलता था देह व्यापार का धंधा

Crime Story in Hindi : अभिषेक वेबसाइट के जरिए देहरादून में एस्कार्ट सर्विस चलाता था. इंटरनेट पर ग्राहक ढूंढना, उन से सौदेबाजी करना और बताई गई जगह पर लड़कियों को भेजना उस का रोज का काम था. राजधानी देहरादून के अलावा पर्यटन नगरी मसूरी, ऋषिकेश व हरिद्वार में आने वाले पर्यटक ही ज्यादातर उस के ग्राहक होते. उस का सपना पूरे उत्तराखंड में अपना जाल फैलाने का था, लेकिन…

एक कमरे में बैठे संदीप की निगाहें मोबाइल की स्क्रीन पर टिकी हुई थीं. वह वाट्सऐप पर चैट कर रहा था, उस चैट में कई लड़कियों के फोटो थे. वह बारीबारी से उन्हें ध्यान से उन्हें देख रहा था. उस ने एक फोटो की तरफ अंगुली से इशारा करते हुए अपने दोस्त मुकेश से पूछा, ‘‘यह कैसी लग रही है?’’

‘‘अच्छी लग रही है.’’

‘‘मस्ती करेगा इस के साथ?’’ संदीप ने पूछा.

‘‘मतलब?’’ मुकेश उस की बात पर चौंका.

‘‘अब इतना भोला भी मत बन मेरे दोस्त. मतलब यह कालगर्ल है,’’ संदीप ने बताया तो मुकेश ने थोड़ा आश्चर्य से पूछा, ‘‘यह तो तुम्हारे साथ चैट कर रही है?’’

‘‘हां तो क्या हुआ, वाट्सऐप पर तो यह खूब चलता है. अब जमाना बदल गया है मेरे दोस्त. इस तरह की लड़कियां और दलाल अब इसी तरह अपने ग्राहकों से बात करते हैं. वह फोटो भी भेज देते हैं, जो लड़की पसंद आए उस के उन से रेट तय कर लो.’’ संदीप ने बताया.

‘‘तुम्हें यह आइडिया कहां से आया?’’

‘‘मेरे भी एक दोस्त ने मुझे बताया था. तू इतने दिनों बाद मिला है तो सोचा कि थोड़ा तेरा भी मनोरंजन करा दूं.’’

‘‘कोई खतरा तो नहीं है?’’ मुकेश बोला.

‘‘बिलकुल सेफ है यार, कालगर्ल के मामले में 2 ही औप्शन होते हैं या तो लड़की को अपने पास बुलवा लो या खुद उस के ठिकाने पर चले जाओ. यह चालाक होती हैं. अच्छी सोसाइटी में फ्लैट किराए पर ले कर कई लड़कियां एक साथ रहती हैं. वहीं से बुकिंग करती हैं. आजकल यह धंधा खूब हो रहा है.’’ संदीप ने मुकेश को बताया.

‘‘तो ठीक है चलते हैं.’’ मुकेश ने खुश होते हुए कहा.

दरअसल, संदीप उत्तराखंड की राजधानी देहरादून में रह कर नौकरी करता था. मुकेश उस का दोस्त था, जो उस के पास मिलने के लिए आया था. कालगर्ल से बातचीत पक्की होने के बाद दोनों उस के बताए गए पते पर पहुंच गए. यह अड्डा पटेलनगर थाना क्षेत्र में देहराखास मितांस अपार्टमेंट, देवऋषि एनक्लेव के लेन नंबर-7 में था, जिस कालगर्ल से उन की बात हुई थी, वहां वह अकेली नहीं थी, बल्कि उस के जैसी अन्य लड़कियां भी थीं.

कालगर्ल व उन के बीच पैसों का लेनदेन हुआ और फिर करीब एक घंटा रुक कर दोनों खुशीखुशी वहां से वापस चले आए. कालगर्ल के अड्डे पर जाने वाले संदीप व मुकेश कोई अकेले नहीं थे, बल्कि उन की तरह वहां अनेक लोगों का आवागमन भी बना रहता था कहते हैं कि बुराई कोई भी हो, उस की उम्र ज्यादा लंबी कभी नहीं होती और इस तरह की बातें छिपती भी नहीं हैं. इस मामले में भी ऐसा ही हुआ. एक दिन पटेलनगर थानाप्रभारी प्रदीप कुमार राणा के पास एक व्यक्ति का फोन आया. उस ने बताया, ‘‘सर, आप के इलाके में बहुत कुछ गलत हो रहा है.’’

‘‘मतलब?’’

‘‘मेरा मतलब गलत धंधे से है सर, मैं आप से मिलना चाहता हूं.’’

‘‘ठीक है मैं थाने में ही हूं, तुम आ सकते हो.’’ कुछ देर बाद वह व्यक्ति थाने आ कर उन से मिला और कुछ देर बातचीत कर के वापस चला गया. उस ने मितांस अपार्टमेंट में चल रहे सैक्स रैकेट के अड्डे के बारे में ही सूचना दी थी.

दरअसल, वह व्यक्ति कोई और नहीं, बल्कि पुलिस का मुखबिर था. पुलिस ने इस संबंध में कुछ और जानकारियां जुटाईं तो यह भी पता चला कि वहां लड़कियों की बुकिंग औनलाइन एस्कार्ट वेबसाइट से भी की जाती थी. राजधानी में देह व्यापार का इस तरह का धंधा गंभीर था. पुलिस के सामने बड़ा सवाल यह भी था कि इस धंधे में शामिल लड़कियां कौन थीं और उन का जाल कहां तक फैला था, इस गलत धंधे पर चोट करना जरूरी था.

थानाप्रभारी ने इस की सूचना एसएसपी डा. योगेंद्र सिंह रावत, एसपी (सिटी) सरिता डोभाल व सीओ अनुज कुमार को दी. उन्होंने पटेलनगर पुलिस को इस संबंध में काररवाई करने के निर्देश दिए.

काररवाई के लिए एसएसपी ने सीओ अनुज कुमार के निर्देशन में एक पुलिस टीम का गठन किया. इस पुलिस टीम में सीनियर एसआई भुवनचंद्र पुजारी, एसआई कुंदन राम, बाजार चौकीप्रभारी विवेक राठी, महिला एसआई ज्योति कन्याल, सरिता बिष्ट, कांस्टेबल पिंकी भंडारी, निकिता,  ऊषा भट्ट, अजय कुमार, प्रदीप कुमार, रिंकू, योगेश व संदीप कुमार को शामिल किया गया.

26 जुलाई, 2021 की बात थी, जब पुलिस टीम दनदनाते हुए देवऋषि एनक्लेव पहुंच गई. फ्लैट में दबिश दी गई तो वहां का नजारा देख कर टीम हैरान रह गई. वहां बाहर के कमरे में एक महिला व पुरुष आपत्तिजनक अवस्था में एकदूसरे से अलिंगनबद्ध थे. पुलिस दूसरे कमरे में पहुंची, तो वहां 6 लड़कियों के साथ 5 लोग फर्श पर बिछे बिस्तरों पर रंगरलियां मना रहे थे. पुलिस को देखते ही सभी सकपका गए.

‘‘क्या हो रहा है ये सब यहां?’’ थानाप्रभारी ने पूछा.

‘‘सर, ये तो हमारे गेस्ट हैं,’’ एक लड़की ने सकपकाते हुए कहा, तो एसआई ज्योति कल्याण ने उसे हड़काया, ‘‘हमें मालूम है किस तरह के गेस्ट हैं तुम्हारे. तुम लोगों की पूरी कुंडली ले कर ही आए हैं हम लोग. गेस्ट का स्वागत कैसे होता है, यह भी हम ने अपनी आंखों से देख लिया है.’’

‘‘सर, गलती हो गई, माफ कर दीजिए,’’ एक व्यक्ति हाथ जोड़ कर गिड़गिड़ाया.

‘‘गलत काम भी करोगे और माफी भी चाहिए, क्या नाम है तुम्हारा?’’ पुलिसकर्मी ने पूछा.

‘‘सर, मेरा नाम अभिषेक कुशवाह है.’’

‘‘ओह! तुम्हीं अभिषेक हो, तुम ही इस रैकेट के लीडर हो.’’ पुलिसकर्मियों ने सभी लोगों को कस्टडी में ले लिया और कमरों की तलाशी ली.

तलाशी में पुलिस को वहां से कई आपत्तिजनक चीजें मिलीं. पुलिस ने उन के कब्जे से 17 मोबाइल फोन, एक लैपटाप, 13 एटीएम कार्ड, एक स्विफ्ट डिजायर कार, 3 ड्राइविंग लाइसैंस व 16 हजार रुपए नकद बरामद किए. पुलिस मौके पर पकड़े गए सभी लोगों को ले कर थाने आ गई.

पकड़े गए लोगों में देह व्यापार रैकेट का मुख्य संचालक अभिषेक कुशवाह उर्फ वरुण उर्फ साहिल निवासी शाहदरा, दिल्ली, नौशाद हुसैन निवासी बिजनौर, राजवीर गिल निवासी पंजाब, संजीत निवासी पीलीभीत, उत्तर प्रदेश, सुरेंद्र निवासी ऊधमसिंह नगर, प्रीति सोनिया, लाबोनी, नूरेशा खातून, कुसुमा भूसाल सभी निवासी दिल्ली, महिमा निवासी कोलकाता व पलक निवासी हरियाणा शामिल थे. पुलिस ने सभी से बारीबारी से गहराई से पूछताछ की. पुलिस पूछताछ व जांचपड़ताल में औनलाइन व औफलाइन दोनों तरह से देह व्यापार करने वाले रैकेट की कहानी निकल कर सामने आई—

अभिषेक कुशवाह ने देवऋषि एनक्लेव के इस फ्लैट को अपना हैड औफिस बनाया हुआ था. वह इंटरनेट से वेबसाइट के जरिए एस्कार्ट सर्विस चलाता था. इंटरनेट पर ग्राहक ढूंढना, उन से सौदेबाजी करना और बताई गई जगह पर लड़कियों को भेजना उस का प्रतिदिन का काम था. समयसमय पर वह अपना नाम बदलता रहता था. वाट्सऐप के जरिए भी ग्राहकों से बातचीत कर के लड़कियों के फोटोग्राफ भेजे जाते थे. लड़कियों के अलगअलग रेट होते थे. ग्राहक को कोई लड़की पसंद आ जाती थी, तो एडवांस में पैसे मंगा लिए जाते थे.

राजधानी देहरादून के अलावा पर्यटक नगरी मसूरी, ऋषिकेश व हरिद्वार में बाहरी लोग घूमने के लिए आते हैं. ऐसे लोग ही ज्यादातर उन के ग्राहक होते हैं. अभिषेक के तार कई ऐसी लड़कियों से जुड़े हुए थे, जो देह व्यापार करने के लिए तैयार रहती थीं. पकड़ी गई लड़कियों में किसी की मजबूरी थी तो कोई खुशी से पैसों के लिए यह काम करती थी. लड़कियों को एजेंट के जरिए अड्डे पर लाया जाता था. अभिषेक के संपर्क में दिल्ली, हरियाणा, बिहार व पश्चिमी बंगाल की लड़कियां होती थीं.

लड़कियों को कई बार एक महीने व 15 दिनों के हिसाब से ठेके पर लाया जाता था. इतने दिनों की एक तयशुदा एकमुश्त रकम के बदले लड़की को ग्राहकों के सामने परोसा जाता था. लड़कियों को ग्राहक होटल या अन्य जगहों पर ले जाते थे. ग्राहकों से दिन व रात के हिसाब से पैसे लिए जाते थे. फुल नाइट का चार्ज ज्यादा होता था. किसी लड़की के साथ एक रात साथ बिताने की कीमत 7 से 15 हजार रुपए तक होती थी. लड़कियों को ग्राहकों तक पहुंचाने के लिए अभिषेक के पास कार भी थी और सुरेंद्र नाम का ड्राइवर भी. ड्राइवर की जिम्मेदारी लड़कियों को ग्राहकों तक पहुंचाने और फिर तय वक्त पर वापस लाने की होती थी. इस के अलावा फ्लैट पर भी देह व्यापार होता था.

जो ग्राहक लड़कियों के साथ थोड़ा ही वक्त बिताना चाहते थे, उन्हें फ्लैट पर ही बुलवा लिया जाता था. अभिषेक अपने रैकेट में लड़कियां बदलता रहता था. उस की कोशिश होती थी कि ग्राहकों को नईनई लड़कियां मिलती रहें, ताकि उस का धंधा ज्यादा से ज्यादा आबाद हो. फ्लैट में रहने वाले ज्यादातर लोगों को अपने आसपास के लोगों से ज्यादा मतलब नहीं होता, इसलिए किसी को शक नहीं होता था कि फ्लैट में रह कर क्या कुछ धंधा किया जा रहा है. यदि रैकेट में किसी को ऐसा लगता था कि शक किया जा रहा है तो वे लोग जगह बदल दिया करते थे. अभिषेक के रैकेट में शामिल लड़कियां भी कुछ कम नहीं थीं.

अभिषेक के जरिए जो बुकिंग होती थी, उस के अलावा भी वह अपने लिए अलग से सोशल प्लेटफार्म पर अपने फोटोग्राफ अपलोड कर के ग्राहक ढूंढती थीं. कई लोग उन के जाल में फंस जाते थे. इन ग्राहकों से होने वाली कमाई को वह खुद रखती थीं. इस में कोई दूसरा हिस्सेदार नहीं होता था. अभिषेक को देह व्यापार के धंधे में खूब फायदा हो रहा था. वह इसे पूरे उत्तराखंड में फैलाने का सपना देख रहा था. उस का यह सपना पूरा हो पाता, उस से पहले ही वह पुलिस के शिकंजे में आ गया. विस्तृत पूछताछ के बाद पुलिस ने सभी आरोपियों के खिलाफ अनैतिक देह व्यापार अधिनियम की धाराओं 3/4/6/7 के अंतर्गत मुकदमा दर्ज कर के अदालत में पेश किया, जहां से उन्हें जेल भेज दिया गया. Crime Story in Hindi

Crime Story in Hindi : मंगेतर का खूनी सरप्राइज

Crime Story in Hindi : बदचलन गुडि़या की किसी तरह किशन कश्यप से शादी तो तय हो गई लेकिन किशन के घर वालों को गुडि़या के चरित्र के बारे में पता चला तो उन्होंने शादी तोड़ने की धमकी दी. इस से पहले कि यह शादी टूट पाती मंगेतर गुडि़या और उस के घर वालों ने किशन को ऐसा खूनी सरप्राइज दिया कि…

उत्तर प्रदेश के जिला अमेठी के गांव पीपरपुर के रहने वाले निवासी शिवनाथ कश्यप के बेटे किशन की शादी  सुलतानपुर के थाना धम्मौर के हाजीपट्टी गांव निवासी गुडि़या उर्फ प्रभावती से तय हो चुकी थी और 25 जून, 2020 को उन की शादी की तारीख भी तय हो गई थी. शादी तय हो जाने के बाद आजकल मंगेतर से फोन पर बातचीत करना, उस के साथ घूमनाफिरना, शौपिंग करना आम बात हो गई है. किशन और गुडि़या भी 2-4 बार फोन पर बात करते थे. वाट्सएप द्वारा तो उन की रोजाना ही बात होती थी. 11 जून, 2020 को सुबह 4 बजे किशन को गुडि़या ने फोन कर के कहा, ‘‘मुझे अपने लिए कुछ शौपिंग करनी है. यदि आप यहां आ जाओगे तो हम दोनों अपनी पसंद की शौपिंग कर लेंगे.’’

किशन ने हां कर दी और वह उस दिन अपनी मंगेतर के बताए स्थान पर चला गया. जाने से पहले उस ने यह बात अपने घर वालों को बता दी थी. वह चला तो गया, लेकिन वापस नहीं लौटा. घर वालों ने किशन के मोबाइल पर फोन किया गया तो वह बंद मिला. गुडि़या और उस के घर वालों को फोन किया तो उन के मोबाइल भी बंद मिले. अगले दिन शिवनाथ अपने गांव से 30 किलोमीटर दूर हाजीपट्टी गांव स्थित गुडि़या के घर पहुंच गए. वहां गुडि़या और उस के पिता राजाराम ने बताया कि किशन वहां नहीं आया था. शिवनाथ चिंता में डूबे वापस घर लौट आए.

घर पहुंचे तो घर पर गुडि़या की मां कुसुमा और मामा कांशीराम को मौजूद पाया. उन से पूछा तो बताया कि वह किशन के घर न आने की बात बताने आए थे. इस के बाद वे लोग चले गए. इस के बाद शिवनाथ बाजार व भीड़भाड़ वाले इलाकों में जा कर अपने बेटे किशन की फोटो दिखा कर उस के बारे में पूछने लगे कि उन्होंने उसे कहीं देखा है. लेकिन कोई किशन के बारे में कुछ न बता पाया. 14 जून, 2020 को शिवनाथ ने पीपरपुर थाने में किशन की गुमशुदगी दर्ज कराई. 16 जून, 2020 को सुलतानपुर के थाना कोतवाली देहात के अलहदादपुर में शारदा सहायक नहर में किसी नवयुवक की लाश पड़ी मिली. लोगों ने उस की सूचना कोतवाली देहात पुलिस को दे दी.

सूचना पा कर थानाप्रभारी देवेंद्र सिंह हमराह सिपाहियों के साथ घटनास्थल पर पहुंच गए. मृतक की उम्र लगभग 25-26 साल थी. लाश कई  दिन पुरानी लग रही थी और पानी में पड़े रहने के कारण फूल गई थी. अनुमान लगाया गया कि लाश कहीं से बह कर वहां आई थी. फिर भी वहां मौजूद लोगों से लाश की शिनाख्त कराने की कोशिश की गई, लेकिन कोई भी लाश की शिनाख्त नहीं कर पाया. लाश के कई कोणों से फोटो खींच कर देवेंद्र सिंह ने लाश को मोर्चरी में रखवा दिया और फोटो अखबारों में छपवा कर लाश की शिनाख्त की अपील की गई.

किशन के किसी परिचित ने अखबार में फोटो देखा तो वह पहचान गया कि यह तो किशन की लाश का फोटो है. उस व्यक्ति ने वह अखबार शिवनाथ कश्यप को दिखाया. फोटो देखते ही उन की चीख निकल गई और उन के घर में भी सभी रोने लगे. शिवनाथ घर वालों के साथ सुलतानपुर के थाना कोतवाली देहात पहुंच गए. वहां उन्होंने लाश देखी तो उस की शिनाख्त किशन के रूप में कर दी. किशन बचपन में जल गया था, उस जले का निशान उस की पीठ पर था. वही निशान उस की पीठ पर मिला. लेकिन मुकदमा देहात कोतवाली में दर्ज नहीं किया गया. क्योंकि अमेठी के पीपरपुर थाने में गुमशुदगी पहले से दर्ज थी, इसलिए वहीं हत्या का मुकदमा दर्ज कराने को कहा गया.

शिवनाथ पीपरपुर थाने पहुंचे, लेकिन वहां उन की एक न सुनी गई. उन्होंने थाने के कई चक्कर लगाए, लेकिन कोई काररवाई नहीं हुई. अपनी शिकायत ले कर एसपी (सुलतानपुर) डा. विपिन मिश्रा के पास गए तो एसपी विपिन मिश्रा ने कोतवाली देहात के थानाप्रभारी को मुकदमा दर्ज करने का आदेश दिया. जिस के बाद थानाप्रभारी देवेंद्र सिंह ने शिवनाथ की लिखित तहरीर के आधार पर गुडि़या, उस की मां कुसुमा, पिता राजाराम, मामा कांशीराम व लालता के खिलाफ भादंवि की धारा 302/201/394/411 के तहत मुकदमा दर्ज करा दिया. मुकदमा दर्ज होने की खबर लगते ही सभी आरोपी घर से फरार हो गए थे. इसलिए थानाप्रभारी देवेंद्र सिंह ने उन की सुरागरसी के लिए अपने मुखबिरों को लगा दिया. लेकिन काफी प्रयास के बावजूद आरोपित पकड़ में नहीं आ रहे थे.

समय बीतता गया. लगभग एक साल का समय होने को आया ही था कि 9 जून, 2021 को कोतवाली देहात थानाप्रभारी देवेंद्र सिंह ने एक मुखबिर की सूचना पर गुडि़या, उस की मां कुसुमा, पिता राजाराम और मालती देवी को लोहरामऊ बाईपास से गिरफ्तार कर लिया. मालती देवी को घटना के बाद गुडि़या को अपने घर में पनाह देने के मामले में गिरफ्तार किया गया था. थाने ला कर जब चारों आरोपियों से पूछताछ की गई तो उन्होंने अपना जुर्म स्वीकार कर लिया और हत्या के पीछे की कहानी बयां कर दी. सुलतानपुर जिले के धम्मौर थाना क्षेत्र के हाजीपट्टी गांव में रहता था राजाराम कश्यप. राजाराम मेहनतमजदूरी कर के अपने परिवार का पेट पालता था. परिवार में पत्नी कुसुमा, बेटी गुडि़या उर्फ प्रभावती व आरती और 2 बेटे बिन्नू और विमल थे.

24 वर्षीय गुडि़या काफी खूबसूरत और महत्त्वाकांक्षी थी. वह स्वच्छंद स्वभाव की थी. इसलिए हर किसी से बात करने में संकोच नहीं करती थी. शोख और चंचल गुडि़या का यह रूप गांव के मनचलों को खूब भाता था. उसे पाने के लिए हर कोई मचलता था. गुडि़या इस बात को बखूबी जानती थी और चाहती भी यही थी कि लोग उस के दीवाने हो जाएं. जैसा वह चाहती थी ठीक वैसा ही हो रहा था. अपने दीवानों के साथ वह खुल कर बात करती और मजाक करती थी. एक तरह से वह गांव के युवकों के सपनों की रानी बन गई. गांव के ही उन युवकों में शादाब (परिवर्तित नाम) भी था. शादाब दिखने में काफी आकर्षक था और बातें भी अच्छी कर लेता था. गुडि़या की नजरों को शादाब भा गया.

गुडि़या ने महसूस किया था कि जब भी शादाब उस के आसपास होता था तो उस की नजरें उसी पर टिकी रहती थीं. आसपास न होता तो उस की नजरें शादाब को तलाशती रहती थीं. अभी तक वह सिर्फ दूसरों की चाहत थी, लेकिन आज उसे अपनी पहली चाहत का अहसास हुआ था. उस का दिल तो ऐसे मचल रहा था कि जैसे सीने से निकल कर बाहर ही आ जाएगा. उस की चाहत नजरों से साफ झलकने लगी थी. जिसे पढ़ने की कोशिश करता था शादाब. शादाब की हालत भी इस से जुदा नहीं थी. वह भी गुडि़या के रूपरंग में खोया रहता था. दोनों में बातें होने लगीं. वह पहले से ज्यादा मिलने लगे. दोनों की आंखें एकदूसरे के लिए प्यार जता भी रही थीं. लेकिन जुबां से दोनों ही इस बात को कह नहीं रहे थे.

एक दिन जब दोनों मिले तो शादाब गुडि़या का हाथ अपने हाथों मे ले कर सहलाते हुए बोला, ‘‘गुडि़या, यूं तो मैं ने कई लड़कियां देखीं, उन से दोस्ती भी हुई. लेकिन वह मेरी कसौटी पर खरी नहीं उतरीं. लेकिन जब से मेरी तुम से मुलाकात और दोस्ती हुई है, मैं ने तुम को बहुत नजदीक से जानापहचाना. जितना मैं ने आज तक तुम्हें पहचाना है, उस से यह साफ जाहिर होता है कि तुम्हारा दिल और तुम्हारी आत्मा बहुत खूबसूरत है. जिस की वजह से तुम इतनी प्यारी लगती हो कि तुम्हारी मूरत मेरे छोटे से दिल में बस गई है.

‘‘उस मूरत को मैं हमेशा अपने दिल में बसाए रखना चाहता हूं. ये मेरी गुस्ताख नजरें भी हमेशा तुम को अपने सामने रखना चाहती हैं. ऐसे में मेरा यह जानना जरूरी है कि तुम मेरे दिल और नजरों की चाहत को पूरा करने की तमन्ना रखती हो कि नहीं?’’

शादाब के खूबसूरत जज्बातों को बड़े ही प्यार से गुडि़या सुन रही थी. उस के जज्बात सुन कर गुडि़या भी अपने जज्बात न रोक सकी, ‘‘शादाब, मैं भी तुम से यही कहना चाह रही थी, लेकिन बारबार मेरे जज्बात मेरे सीने में कैद हो कर रह जाते थे. यह सोच कर कि कहीं तुम मेरे जज्बातों को न समझ पाए तो मैं अंदर से टूट ही जाऊंगी. लेकिन आज तुम्हारे जज्बात सुन कर मेरे दिल को बहुत सुकून पहुंचा है. हम दोनों के जज्बात आपस में मिलते हैं, यह जान कर मुझे बेहद खुशी हुई है. मैं भी तुम्हारे साथ ही जिंदगी बिताने का सपना देख रही थी, जो आज सच हो गया.’’ भाव विह्वल हो कर गुडि़या शादाब के सीने से लग गई.

शादाब ने भी उसे अपनी बांहों के घेरे में ले लिया. इस से दोनों ने राहत की सांस ली और एकदूसरे के प्यार की गरमी को नजदीक से महसूस किया. इस के बाद दोनों का प्यार दिनोंदिन परवान चढ़ने लगा. एक दिन दोपहर का समय था और घड़ी की सुइयां 2 बजे का समय बता रही थीं. गुडि़या घर पर खाना खाने के बाद आराम कर रही थी. उस की नजर जब घड़ी पर गई तो बिस्तर से उठ कर तैयार होने लगी. उस ने धानी रंग का टौप और काले रंग की स्किन टाइट जींस पहनी तो उस के खूबसूरत बदन को चार चांद लग गए. कपड़े पहनने के बाद जब उस ने आईने में अपने आप को निहारा तो खुशी से फूली नहीं समाई.

यह उस की आदत में भी शुमार था कि रोज आईने के सामने अपने संगमरमरी बदन को देख कर एक बार दिल से मुसकराती जरूर थी. वह तैयार हो कर घर से निकल कर उस स्थान की तरफ बढ़ गई, जहां वह हर रोज अपने प्रेमी शादाब से मिलने जाती थी. वह जब उस स्थान पर पहुंची तो उस ने शादाब को वहां पहले से बैठा देखा, जोकि उस का बेसब्री से इंतजार कर रहा था. वह चुपचाप शादाब के पीछे पहुंची और उस की आंखों को अपने हाथों से बंद कर लिया. यह देख कर पहले तो शादाब हड़बड़ाया लेकिन गुडि़या के हाथों को छू कर वह जान गया कि वह कोई और नहीं बल्कि गुडि़या है. उस ने गुडि़या के हाथों को अपनी आंखोें से हटाया तो उस की खूबसूरती देख कर उस की आंखें चौंधिया गईं.

‘‘क्या बात है, गुडि़या? आज तो बिलकुल बिजली गिरा रही हो.’’ गुडि़या को देखते ही बोला.

‘‘धत्त लगता है आज तुम ने मुझे बेवकूफ बनाने का इरादा बना रखा है.’’ वह इतराते हुए बोली.

‘‘नहीं गुडि़या, मैं तुम्हें बेवकूफ नहीं बना रहा हूं. सच में तुम बहुत खूबसूरत लग रही हो. फिर हीरा अपनी चमक और कीमत खुद नहीं जानता, वह तो सिर्फ जौहरी ही बता सकता है.’’ उस ने कहा.

‘‘अच्छा जौहरी साहब, आप ने इस हीरे की पहचान कर ली हो तो अब जरा यह भी बता दीजिए कि यह हीरे की चमक है या कुछ और…’’

‘‘यह खूबसूरती और चमक सिर्फ खालिस हीरे की ही हो सकती है. लेकिन इस जौहरी ने अगर अपना जौहर इस हीरे पर दिखा दिया तो इस हीरे की खूबसूरती और चमक दोगुनी हो जाएगी.’’ शादाब ने गुडि़या की आंखों में आंखें डाल कर प्यार से अपनी बात कही तो गुडि़या को भी उस की बात की गहराई समझते देर नहीं लगी. इसलिए उस ने लजा कर पलकें झुकाईं और बोली, ‘‘इस हीरे की चाहत तुम हो और यह तुम को जल्द से जल्द पाना चाहता है.’’

इतना कह कर उसने आस भरी नजरों से शादाब की तरफ देखा तो वह मुसकरा रहा था. उस के बाद उन दोनों के बीच शारीरिक रिश्ता भी कायम हो गया. गुडि़या की आम शोहरत सही नहीं थी. गांव में सब उस की दिलफेंक हरकतों के बारे में जानते थे. शादाब के अलावा भी उस के दूसरे युवकों से प्रेम संबंध थे. पूरे गांव में उस की हरकतों के चर्चे होने लगे तो पिता राजाराम और कुसुमा को चिंता हुई. इस से पहले कि देर हो जाए, वह गुडि़या के लिए रिश्ते की तलाश में जुट गए. अमेठी जिले के गांव पीपरपुर में शिवनाथ कश्यप रहते थे. उन के परिवार में 3 बेटे मुरली, किशन व मनोज और 2 बेटी राजकुमारी और शिवकुमारी थीं.

मुरली सूरत (गुजरात) में साडि़यां बनाने वाली फैक्ट्री में काम करता था. वह विवाहित था. पत्नी और 2 बच्चों के साथ वहीं रहता था. किशन भी 5 साल पहले भाई मुरली के पास सूरत चला गया. किशन वहां गत्ता बनाने वाली फैक्ट्री में काम करने लगा. किशन की उम्र 26 साल थी और वह कमाने भी लगा था. इसलिए शिवनाथ ने उस का विवाह करने का निर्णय ले लिया. वैसे भी उस के लिए रिश्ते आने लगे थे. ऊधर गुडि़या के पिता राजाराम भी गुडि़या के हाथ जल्द पीले करने को आतुर थे. उन को किसी से किशन के बारे में पता चला तो शिवनाथ से जा कर रिश्ते की बात की. बात आगे बढ़ी. शिवनाथ ने घर के लोगों के साथ जा कर गुडि़या को देख लिया और पसंद कर लिया.

विवाह की तारीख तय हुई 25 जून 2020. विवाह की तारीख जैसेजैसे नजदीक आने लगी, दोनों परिवार विवाह की तैयारियों में लग गए. लेकिन इसी बीच शिवनाथ और उस के परिवार तक गुडि़या के बदचलन होने की बात पहुंच गई. यह बात पता चलते ही सब सकते में आ गए. ऐसी लड़की को घर की बहू बनाना   किसी तरह से सही नहीं होगा, आगे चल कर दिक्कतें खड़ी होंगी. समय रहते पता चल गया है तो समय रहते इस रिश्ते को तोड़ दिया जाए तो बेहतर होगा. यही सोच कर शिवनाथ ने किशन का गुडि़या से रिश्ता  तोड़ देने की बात गुडि़या के घर वालों को बता दी. यह सुन कर गुडि़या के घर वाले बौखला गए.

गुडि़या की वजह से वैसे भी पूरे गांव में बदनामी हो चुकी थी. अब रिश्ता टूटने की बात और उस की वजह गांव के लोगों को पता चलेगी तो गांव के लोग उन का उपहास उड़ाएंगे.  ऐसे में सब ने किशन के घर वालों को सबक सिखाने के लिए किशन की हत्या करने का फैसला कर लिया. इस सब के पीछे गुडि़या के मामा कांशीराम का सब से बड़ा हाथ था. 11 जून, 2020 को गुडि़या ने सुबह फोन कर के किशन को अपने घर बुलाया. किशन ने मना किया लेकिन गुडि़या ने उसे आने के लिए मना लिया. गुडि़या गांव आने वाले रास्ते पर पहले से खड़ी हो गई. किशन आया तो वहीं रास्ते में गुडि़या ने उसे रोक लिया. वह उसे घर न ले जा कर कुछ दूरी पर नहर के पास सुनसान जगह पर ले गई. वहां राजाराम, कुसुमा और कांशीराम पहले से मौजूद थे. वहां मौजूद सभी लोगों ने किशन को दबोच लिया. किशन को सपने में भी आभास नहीं था कि उस के साथ ऐसा कुछ हो जाएगा.

किशन को दबोच कर उस पर चाकू से कई प्रहार कर के उस की हत्या कर दी और लाश और हत्या में प्रयुक्त चाकू को नहर में फेंक दिया. लाश नहर के पानी के बहाव के साथ बह गई. हत्या करने के बाद सभी लोग अपने घरों को लौट गए.  जब मुकदमा दर्ज हुआ तो सभी घरों से फरार हो गए. गुडि़या ने थाना लंभुआ क्षेत्र के  करवर नंबर 3 नया बाग में रहने वाली मालती देवी के यहां शरण ले ली. मालती ने सब की नजरों से बचा कर उसे अपने घर में रखा. लेकिन गुनाह करने के बाद गुनहगार का बच पाना असंभव होता है. गुडि़या, कुसुमा, राजाराम भी बच न सके और पकडे़ गए. गुडि़या को शरण देने के मामले में मालती को भी गिरफ्तार किया गया. उसे भादंवि की धारा 216 का आरोपी बनाया गया.

कानूनी खानापूर्ति करने के बाद चारों को 10 जून, 2021 को न्यायालय में पेश करने के बाद जेल भेज दिया गया. गुडि़या के दोनों मामा कांशीराम और लालता फरार थे, जिन की तलाश पुलिस सरगरमी से कर रही थी.  कांशीराम की लोकेशन कानपुर में मिली थी, जब तक पुलिस टीम वहां पहुंची, कांशीराम वहां से निकल गया. पुलिस को लालता की लोकेशन घटना वाले दिन घटनास्थल पर नहीं मिली, लेकिन घटना के बाद उस के द्वारा काफी देर तक कई बार घर वालों से बात की गई. इस से पुलिस का मानना है कि घटना के अंजाम देने में शायद वह शामिल नहीं था, लेकिन उसे घटना के बारे में सब पता था. फिलहाल कथा लिखे जाने तक पुलिस उन दोनों की तलाश में लगी थी. Crime Story in Hindi

—कथा पुलिस सूत्रों पर आधारित

Crime Story in Hindi : बच्चे की ख्वाहिश बनी जिंदगी की तबाही

Crime Story in Hindi : रमन की शादी हुए 6 साल हो गए, मगर अभी तक कोई औलाद नहीं हुई. चूंकि दोनों पतिपत्नी धार्मिक स्वभाव के थे, इसलिए वे देवीदेवता से मन्नतें मांगते रहते थे, लेकिन तब भी बच्चा न हुआ. तभी उन्हें पता चला कि एक चमत्कारी बाबा आए हैं. अगर उन का आशीर्वाद मिल जाए, तो बच्चा हो सकता है. यह जान कर रमन और उस की बीवी सीमा उस बाबा के पास पहुंचे. सीमा बाबा के पैरों पर गिर पड़ी और कहने लगी, ‘‘बाबा, मेरा दुख दूर करें. मैं 6 साल से बच्चे का मुंह देखने के लिए तड़प रही हूं.’’

‘‘उठो, निराश मत हो. तुम्हें औलाद का सुख जरूर मिलेगा…’’ बाबा ने कहा, ‘‘अच्छा, कल आना.’’

अगले दिन सीमा ठीक समय पर बाबा के पास पहुंच गई. बाबा ने कहा, ‘‘बेटी, औलाद के सुख के लिए तुम्हें यज्ञ कराना पड़ेगा.’’

‘‘जी बाबा, मैं सबकुछ करने को तैयार हूं. बस, मुझे औलाद हो जानी चाहिए,’’ सीमा ने कहा, तो बाबा ने जवाब दिया, ‘‘यह ध्यान रहे कि इस यज्ञ में कोई भी देवीदेवता किसी भी रूप में आ कर तुझे औलाद दे सकते हैं, इसलिए किसी भी हालत में यज्ञ भंग नहीं होना चाहिए, नहीं तो तेरे पति की मौत हो जाएगी.’’

‘‘जी बाबा,’’ सीमा ने कहा और बाबा के साथ एकांत में बने कमरे में चली गई. वहां बाबा खुद को भगवान बता कर उस के अंगों के साथ खेलने लगा. सीमा कुछ नहीं बोली. वह समझी कि बाबाजी उसे औलाद का सुख देना चाहते हैं, इसलिए वह चुपचाप सबकुछ सहती रही. लेकिन शरद ऐसे बाबाओं के चोंचलों को अच्छी तरह जानता था, इसलिए जब उस की बीवी टीना ने कहा, ‘‘हमें भी बच्चे के लिए किसी साधुसंत से औलाद का आशीर्वाद ले लेना चाहिए,’’ तब शरद बोला, ‘‘औलाद केवल साधुसंत के आशीर्वाद से नहीं होती है. इस के लिए जब तक पतिपत्नी दोनों कोशिश न करें, तब तक कोई बच्चा नहीं दे सकता.’’

‘‘मगर हम यह कोशिश पिछले 5 साल से कर रहे हैं. हमें बच्चा क्यों नहीं हो रहा है?’’ टीना ने पूछा.

‘‘इस की जांच तो डाक्टर से कराने पर ही पता चल सकती है कि हमें बच्चा क्यों नहीं हो रहा है. समय मिलते ही मैं डाक्टर से हम दोनों की जांच कराऊंगा.’’

टीना ने कहा, ‘‘ठीक है.’’

दोपहर को टीना की सहेली उस से मिलने आई, जो उसे एक नीमहकीम के पास ले गई. नीमहकीम ने टीना से कुछ सवाल पूछे, जिस का उस ने जवाब दे दिया. इस दौरान ही उस नीमहकीम ने यह पता लगा लिया था कि टीना को माहवारी हुए आज 14वां दिन है, इसलिए वह बोला, ‘‘तुम्हारे अंग की जांच करनी पड़ेगी.’’

‘‘ठीक है, डाक्टर साहब. मैं कब आऊं?’’ टीना ने पूछा.

‘‘जांच आज ही करा लो, तो अच्छा रहेगा,’’ नीमहकीम ने कहा, तो टीना राजी हो गई.

तब वह नीमहकीम टीना को अंदर के कमरे में ले गया, फिर बोला, ‘‘आप थोड़ी देर यहीं बैठिए और इस थर्मामीटर को 5 मिनट तक अपने अंग में लगाइए.’’

टीना ने ऐसा ही किया.

5 मिनट बाद डाक्टर आया. उस के एक हाथ में अंग फैलाने का औजार और दूसरे हाथ में एक इंजैक्शन था, जिस में कोई दवा भरी थी, जिसे देख कर टीना ने पूछा, ‘‘यह क्या है डाक्टर साहब?’’ ‘‘इस से तुम्हारे अंग की दूसरी जांच की जाएगी,’’ कह कर नीमहकीम ने टीना से थर्मामीटर ले लिया और टीना को मेज पर लिटा दिया. इस के बाद वह उस के अंग में औजार लगा कर जांच करने लगा.

जांच के बहाने नीमहकीम ने टीना के अंग में इंजैक्शन की दवा डाल दी और कहा, ‘‘कल फिर अपनी जांच कराने आना.’’ टीना अभी तक घबरा रही थी, मगर आसान जांच देख कर खुश हुई. फिर दूसरे दिन भी यही हुआ. मगर उस दिन इंजैक्शन को अंग में आगेपीछे चलाया गया था. इस के बाद उसे 14 दिन बाद आने को कहा गया.

टीना जब 14 दिन बाद नीमहकीम के पास गई, तब वह सचमुच मां बनने वाली थी.

यह जान कर टीना बहुत खुश हुई. मगर जब यही खुशी उस ने अपने पति शरद को सुनाई, तो वह नाराज हो गया.

‘‘बता किस के पास गई थी?’’ शरद चीख पड़ा.

‘‘यह मेरा बच्चा नहीं है. मैं ने कल ही अपनी जांच कराई थी. डाक्टर का कहना है कि मेरे शरीर में बच्चा पैदा करने की ताकत ही नहीं है. तब मैं बाप कैसे बन गया?’’ शरद ने कहा.

शरद के मुंह से यह सुनते ही टीना सब माजरा समझ गई. वह जान गई कि नीमहकीम ने जांच के बहाने उस के अंग में अपना वीर्य डाल दिया था. मगर अब क्या हो सकता था. टीना औलाद के नाम पर ठगी जा चुकी थी. आज के जमाने में औलाद पैदा करने की कई विधियों का विकास हो चुका है. परखनली से भी कई बच्चे पैदा हो चुके हैं. यह सब विज्ञान के चलते मुमकिन हुआ है. फिर भी लोग पुराने जमाने में जीते हुए ऐसे धोखेबाजों के पास बच्चा मांगने जाते हैं. इस से बढ़ कर दुख की बात और क्या हो सकती है. Crime Story in Hindi