Crime Story Real : जन्मदिन पर मिली मौत

Crime Story Real : किट्टी कुमारमंगलम एक ऐसे रसूखदार परिवार से ताल्लुक रखती थीं, जिस की 4 पीढि़यों का राजनीतिक इतिहास रहा है. लेकिन उन की एक छोटी सी गलती उन के जन्मदिन पर इस तरह मौत बन कर टूटी कि…

6 जुलाई, 2021 की रात के करीब साढ़े 11 बजे का वक्त था. दक्षिणपश्चिम जिले के पौश इलाके वसंत विहार के ए-ब्लौक में दूसरी मंजिल पर बने एचआईजी फ्लैट 15/9 के सामने पुलिस तथा इलाके के लोगों की भारी भीड़ जमा थी. जिले के डीसीपी इंगित प्रताप सिंह, एडिशनल डीसीपी अमित गोयल, अमित कौशिक, एसीपी राकेश दीक्षित, वसंत विहार थाने के एसएचओ सुनील कुमार गुप्ता, इंसपेक्टर परमवीर दहिया और संदीप कुमार के अलावा उन के थाने का मातहत स्टाफ मौजूद था. इस फ्लैट में अकेली रहने वाली एडवोकेट किट्टी कुमारमंगलम (70) की किसी ने हत्या कर दी थी.

दरअसल, किट्टी कुमारमंगलम वृद्ध वकील होने के साथ एक ऐसे राजनीतिक परिवार से जुड़ी महिला थीं, जिस की भारत के राजनीतिक इतिहास में गहरी पृष्ठभूमि थी. वह दूसरी मंजिल के इस फ्लैट में अकेली रहती थीं. पास की एक स्लम बस्ती में रहने वाली नौकरानी मिथिला (32) उन के घर सुबह, दोपहर व शाम को झाड़ू, पोंछा, बरतन धोने व खाना बनाने के लिए घर आती थी. उस दिन यानी 6 जुलाई की शाम करीब सवा 8 बजे भी हमेशा की तरह मिथिला किट्टी के रसोईघर में खाना बना रही थी जब किसी ने कालबेल बजाई. किट्टी उस वक्त अपने बैडरूम में बिस्तर पर लेट कर टीवी देख रही थीं.

कालबेल की आवाज सुन कर किट्टी ने बैडरूम से ही मिथिला को आवाज लगा कर देखने के लिए कहा. मिथिला ने दरवाजा खोला तो कालोनी का धोबी राजू 2 लड़कों के साथ बाहर खड़ा था. मिथिला ने जब 2 अनजान लोगों के साथ राजू को देखा तो आने का कारण पूछा. राजू ने बताया कि इस्त्री करने के लिए कपड़े लेने हैं.

‘‘यहीं रुको, मैडम से पूछ कर ला कर देती हूं.’’ कहते हुए मिथिला दरवाजा खुला छोड़ कर अपनी मालकिन किट्टी के बैडरूम की तरफ बढ़ गई.

नौकरानी मिथिला के पलटते ही राजू धोबी फ्लैट के अंदर दाखिल हो गया और उस ने अपने दोनों साथियों को भी इशारा कर अपने पीछे आने को कहा. नौकरानी मिथिला मालकिन किट्टी के बैडरूम में पहुंची और उन्हें बताया कि राजू धोबी कपड़े लेने आया है. उस के साथ 2 अनजान लड़के भी हैं, इसलिए उस ने उसे बाहर ही रोक दिया है. यह सुन कर किट्टी कुमारमंगलम राजू से बात करने के लिए मिथिला के साथ बैडरूम से बाहर आ गईं. लेकिन उन्होंने देखा तब तक राजू व उस के दोनों साथी फ्लैट के अंदर दाखिल हो चुके थे.

एक लड़का मुख्य दरवाजे को अंदर से बंद कर रहा था. यह देख कर वह राजू को डांटते हुए बोलीं, ‘‘ऐ राजू, कौन हैं ये लोग और तुम इन्हें अंदर कैसे लाए?’’

इतना कहना था कि राजू समेत तीनों लड़कों ने चीते जैसी फुरती से किट्टी व मिथिला को दबोच लिया. एक युवक मिथिला को कमरे में ले गया जबकि राजू धोबी व एक अन्य युवक ने किट्टी को पकड़ कर उन के बैडरूम की तरफ ले गए और गला घोट कर हत्या कर दी. उधर दूसरे कमरे में मिथिला का भी गला घोंट दिया. थोड़ी देर छटपटाने के बाद मिथिला के हाथपांव भी ढीले पड़ गए. मिथिला की मौत का इत्मीनान कर युवक कमरे से बाहर निकला. इस के बाद राजू और उस के साथियों ने घर की अलमारी, लौकरों को खंगालना शुरू किया. नकदी, गहनों के साथ जो भी कीमती सामान मिला, उन्हें 2 बैगों में भर लिया.

मिथिला को आया होश इस के बाद साथ लाए स्कूटर से तीनों फरार हो गए. करीब आधा घंटे बाद नौकरानी मिथिला को होश आ गया. किसी तरह उस ने खुद को संयत किया. मालकिन किट्टी के बैडरूम में जा कर देखा तो वह बिस्तर पर निष्प्राण पड़ी थीं.  मिथिला ने अपने पति रामेश्वर को फोन किया, जो पास की ही स्लम बस्ती में रहता था. रामेश्वर कुछ ही देर बाद अपने पिता को ले कर वहां पहुंच गया. मिथिला ने उन्हें सारी बात बताई. रामेश्वर ने पुलिस को फोन कर के घटना की जानकारी दी, जिस के बाद पीसीआर मौके पर आई. इस के 15 मिनट बाद वसंत विहार थाने के थानाप्रभारी सुनील कुमार गुप्ता पुलिस टीम के साथ वहां पहुंच गए. तब मिथिला ने उन्हें पूरे घटनाक्रम की जानकारी दी.

मामला हाईप्रोफाइल परिवार का था, इसलिए थानाप्रभारी ने उच्चाधिकारियों को भी इस की सूचना दे दी तो वे भी क्राइम इनवैस्टीगेशन और फोरैंसिक टीम के साथ घटनास्थल पर पहुंच गए. मिथिला से पता चला कि किट्टी कुमारमंगलम की बेटी रुचिरा चड्ढा गुरुग्राम में रहती हैं. तब पुलिस ने उन्हें भी तत्काल घटना से अवगत करा दिया. अगले एक घंटे के भीतर रुचिरा के साथ दिल्ली व आसपास रहने वाले कुमारमंगलम परिवार के रिश्तेदारों व परिचितों के आने का सिलसिला शुरू हो गया. पुलिस ने घर के बाहर लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज की जांचपड़ताल की तो पूरा घटनाक्रम वैसे ही पाया गया, जैसा मिथिला ने बयान किया था.

पूरी कालोनी राजू धोबी को जानती थी, क्योंकि कालोनी के बाहर वही ज्यादातर परिवारों के कपड़े इस्त्री करने का काम करता था. लिहाजा डीसीपी इंगित प्रताप प्रताप सिंह के आदेश पर थानाप्रभारी सुनील गुप्ता ने एक टीम को तत्काल पास के भंवर सिंह कैंप स्लम कालोनी भेजा, जहां धोबी राजू कनौजिया अपने परिवार के साथ रहता था. पुलिस ने अगले 2 घंटे के भीतर राजू को दबोच लिया. पुलिस ने उस के कब्जे से लूट के साढ़े 9 हजार रुपए, 1-2 आभूषण तथा एक लौकर बरामद कर लिया. उस ने बताया कि उस लौकर में कुछ दस्तावेज थे, जिसे उस ने अपने काम का नहीं होने के कारण एक जगह फेंक दिए थे. पुलिस टीम ने उसे साथ ले जा कर वे दस्तावेज भी बरामद कर लिए.

उस से पूछताछ में पता चला कि उस के साथ वारदात को राकेश राज व सूरज ने अंजाम दिया था. दोनों के नामपते हासिल कर पुलिस टीमों ने उन की तलाश में छापेमारी शुरू कर दी. तड़के 6 बजे पुलिस ने राकेश राज को भी उस के घर मुनीरका से गिरफ्तार कर लिया. उस के कब्जे से करीब 10 हजार रुपए बरामद हुए. दोनों से पूछताछ के बाद उन्हें कोर्ट में पेश कर जेल भेज दिया गया. राजू मूलरूप से मध्य प्रदेश का रहने वाला है. पिछले 5 सालों से वह डीडीए वसंत विहार में कपड़ों पर इस्त्री करने का काम करता था. किट्टी कुमारमंगलम के घर पर से भी वह कपड़े लेने जाता था. चूंकि वह घर में अकेली रहती थीं, इसलिए यदाकदा वह राजू से बाजार से कुछ सामान भी मंगा लेती थीं. यही कारण था कि राजू की एंट्री उन के कमरे तक थी.

किट्टी उस पर भरोसा करने लगीं. भरोसा इतना बढ़ गया कि वह घर में आने पर कपड़े लेने उन के बैडरूम तक भी पहुंच जाता था. एवज में किट्टी राजू को खर्च के लिए कुछ पैसे भी दे देती थीं. लेकिन पिछले साल जब कोरोना की बीमारी के लौकडाउन लगा तो राजू का कामधंधा चौपट हो गया. कुछ दिन पहले जब वह किट्टी कुमारमंगलम के घर गया तो उन्होंने राजू के सामने ही अपनी अलमारी का लौकर खोल कर उस में से कुछ पैसे निकाल कर राजू को कोई सामान लाने के लिए दिए. जन्मदिन पर आए मृत्युदूत राजू ने अलमारी व लौकर में रखे गहने तथा नोटों की झलक देखी तो अचानक उस के दिमाग में खयाल आया कि क्यों न किट्टी मैडम को ही लूट लिया जाए. क्योंकि वह अकेली रहती हैं.

6 जुलाई, 2021 को किट्टी कुमार मंगलम का जन्मदिन था. उस दिन उन के दोनों बच्चों रुचिरा और बंगलुरु में रहने वाले बेटे रंगराजन मोहन कुमार मंगलम, जोकि तमिलनाडु में कांग्रेस पार्टी का अध्यक्ष है, ने अपनी मां को वीडियो काल कर के बधाई दी थी. उस दिन पूरे समय किट्टी को जन्मदिन की बधाई देने का सिलसिला चलता रहा. उसी दिन राजू के साथ एक योजना बनाई. राकेश राज विदेश मंत्रालय में अनुबंध के तौर पर ड्राइवर था जबकि सूरज एक स्कूल में कैब चालक था. लेकिन कोरोना व लौकडाउन के कारण दोनों के ही कामधंधे प्रभावित हुए थे और वह आर्थिक तंगी के दौर से गुजर रहे थे.

जब शराब तीनों पर अपना रंग दिखाने लगी तो राजू ने उन दोनों को बताया कि जहां वह कपड़े प्रैस करने का ठिया लगाया है, वहां एक बूढ़ी औरत अकेली रहती है. उस के घर में लाखों रुपए नकद व गहने मिल सकते हैं. बस फिर क्या था, आननफानन में योजना बनी और उसी दिन इसे अंजाम देने का फैसला कर लिया गया. रात करीब 8 बजे तीनों राजू के स्कूटर से किट्टी के घर गए. घर के बाहर लगे सीसीटीवी कैमरे से पता चला कि राजू और उस के दोनों दोस्त इमारत में दाखिल होते दिख रहे हैं. रात 8.10 बजे राजू ने किट्टी के दरवाजे की घंटी बजाई और मिथिला ने दरवाजा खोला. इस के बाद उन्होंने वारदात को अंजाम दिया. शराब के नशे के कारण सूरज इस बात को नहीं समझ पाया कि मिथिला बेहोश हुई है या सचमुच मर चुकी है.

सूरज का नामपता हासिल हो चुका था. लेकिन वह अपने घर नहीं मिला. पुलिस ने सर्विलांस से उस की लोकेशन ट्रेस करनी शुरू कर दी. डीसीपी इंगित प्रताप सिंह के आदेश पर अगले दिन एक पुलिस टीम सूरज की गिरफ्तारी के लिए राजस्थान के लिए रवाना हो गई, क्योंकि उस की लोकेशन वहां की मिल रही थी. सूरज निकला बेहद शातिर 12 जुलाई को दिल्ली पुलिस की टीम ने मध्य प्रदेश पुलिस के सहयोग से तीसरे आरोपी सूरज को टीकमगढ़ जिले के गांव बलदेवपुरा से गिरफ्तार कर लिया. वह अपनी दूसरी पत्नी के मायके में था. थाना जतारा के अंतर्गत गांव में सूरज अपनी पत्नी के साथ छिपा हुआ था. दिल्ली पुलिस ने उस के पास से 34 लाख रुपए के लूटे हुए गहने व 60 हजार रुपए नकद बरामद कर लिए.

पूछताछ में उस ने बताया कि लूटपाट का माल तीनों में बराबरबराबर बांटने की बात हुई थी लेकिन लूट के बाद उस के मन में लालच आ गया. घर में केवल 30 हजार की नकदी मिली थी, जो उस ने 3 हिस्सों में बांट दी. उस ने एकदो गहने भी राकेश व राजू को दे दिए. बाकी गहने उस ने यह कह कर अपने पास रख लिए कि कल वह इन्हें अपनी जानपहचान वाले सुनार को बेच कर नकदी ले लेगा और फिर उसे आपस में बांट लेंगे. पुलिस ने सूरज के कब्जे से लूटे गए 522 ग्राम सोना और 300 ग्राम चांदी के आभूषण जब्त किए. इस के अलावा मोबाइल और कैश समेत कुल करीब 33 लाख रुपए का सामान बरामद किया. दिल्ली ला कर वसंत विहार पुलिस ने सूरज को अदालत में पेश किया, जहां से उन्हें जेल भेज दिया गया. Crime Story Real

—कथा पुलिस जांच पर आधारित

Crime Story Real : पत्नी का काटा गला, बेटे का घोंटा गला फिर कर ली खुदकुशी

Crime Story Real : आबिद शेख और उस की पत्नी आलिया शेख उच्च शिक्षित ही नहीं बल्कि ऊंचे पदों पर नौकरी करते थे. लेकिन बेटे के जन्म के बाद उन की गृहस्थी में कलह पैदा हो गई. इस की वजह यह थी कि बेटे को एक खतरनाक बीमारी थी. जिस की वजह से वह हताश हो गए. इस हताश जिंदगी का जो मंजर सामने आया वह…

सुबह 10 बजे एक महिला का शव मिला ही था, अब शाम एक मासूम बच्चे का शव मिला तो महानगर मुंबई से सटे पुणे शहर की पुलिस की नींद उड़ गई थी. पहला शव सासवड़ पुलिस थाने के अंतर्गत तो दूसरा भारती विद्यापीठ थानाक्षेत्र में मिला था. दोनों शव अलगअलग जगहों पर मिले थे. पुलिस टीम ने दोनों शव औपचारिकताएं पूरी कर पोस्टमार्टम के लिए पुणे के सेसून डाक अस्पताल भेज दिए. पोस्टमार्टम रिपोर्ट से पता चला कि महिला के साथ मारपीट कर उस का गला चीरा गया था जबकि बच्चे की हत्या गला दबा कर की गई थी.

हालांकि उन दोनों के शव पुलिस को 2 थानों में अलगअलग मिले थे लेकिन पुलिस का अंदाजा था कि उन दोनों की हत्याओं में किसी एक व्यक्ति का ही हाथ रहा होगा. मृतका महिला और बच्चे की शक्लसूरत हूबहू होने के कारण आशंका यह भी व्यक्त की जा रही थी कि वे दोनों शव मांबेटे के भी हो सकते हैं. हत्यारे ने पुलिस को भ्रमित करने के लिए शवों को अलगअलग फेंका होगा. घटना 15 जून, 2021 की थी. उस दिन सासवड़ पुलिस थाने के प्रभारी अन्ना साहेब धोलप को फोन पर किसी व्यक्ति ने बताया कि तालुका परंदर के दखल गांव के पास एक महिला का शव पड़ा हुआ है. मामला शायद हत्या का लग रहा है.

उक्त जानकारी पा कर थानाप्रभारी अन्ना साहेब धोपल तुरंत अपने सहायकों को ले कर घटनास्थल पर पहुंच गए. रास्ते में ही उन्होंने इस मामले की जानकारी अपने वरिष्ठ अधिकारियों को दे दी थी. घटनास्थल पर पहुंच कर थानाप्रभारी अन्ना साहेब धोलप ने शव का बारीकी से निरीक्षण किया. पूछताछ और शिनाख्त से यह मालूम हुआ कि मृतका उस इलाके की नहीं थी. लेकिन वहां से कुछ दूर स्थित दखल होटल और सड़क पर लगे सीसीटीवी कैमरे के फुटेज में उस का चेहरा साफ नजर आया था. ब्रेजा कार में वह एक पुरुष और एक बच्चे के साथ थी. घटनास्थल की जांचपड़ताल करने के बाद शव पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया. फिर वह सीसीटीवी कैमरों की फुटेज अपने कब्जे में ले कर थाने लौट आए.

अब तक मामले की खबर मिलने पर पुणे के जौइंट पुलिस कमिश्नर अशोक मोराले, डीसीपी सागर पाटिल और क्राइम बांच के डीसीपी श्रीनिवास घाडगे सासवड़ पुलिस थाने पहुंच गए थे, जहां उन्होंने मामले की गंभीरता पर गहराई से विचारविमर्श कर जांच की जिम्मेदारी थानाप्रभारी को सौंप दी. अपने वरिष्ठ अधिकारियों के निर्देश पर थानाप्रभारी अन्ना साहेब घोलप मामले की रूपरेखा तैयार कर जांच की दिशा तय करते, इस के पहले ही उस कड़ी में एक दूसरी कड़ी भी जुड़ गई थी. यह कड़ी भारती विद्यापीठ पुलिस थाने से जुड़ी हुई थी, जो हैरान कर देने वाली थी.

खबर के अनुसार भारती विद्यापीठ थाने के थानाप्रभारी जगन्नाथ कलसकर को पुणे के दत्तनगर स्थित कागज घाट सुरंग के जामुलकर वाड़ी के पास एक मासूम बच्चे का शव पड़े होने की जानकारी मिली थी. पुलिस कंट्रोल रूम से मिली जानकारी के बाद वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों ने भी घटनास्थल का दौरा किया. पुलिस अधिकारी यह देख कर चौंक गए कि वह ब्रेजा कार इस मामले में भी इस्तेमाल की गई थी जो उस महिला के मामले में की थी. बच्चे का शव वहां डालने के बाद वह पुणे सतारा रोड की तरफ निकल गई थी.  कुछ घंटों के अंतराल में एक महिला और एक बच्चे के शव के मिलने के कारण दूसरे दिन खबर फैलते ही जहां शहर में हलचल मच गई थी, वहीं पुलिस की जिम्मेदारियां भी बढ़ गई थीं.

मामला कहीं रोड पर न आ जाए, इस के लिए डीसीपी सागर पाटिल और डीसीपी श्रीनिवास घाडगे ने मामले को गंभीरता से लिया. उन्होंने स्वयं मामले की जांच की जिम्मेदारी संभाली थी. अब उन का लक्ष्य था मामले की उस तीसरी कड़ी का, जो उन दोनों हत्याओं में इनवाल्व था. उन का मानना था कि यह घटना किसी पारिवारिक समस्या से जुड़ी हो सकती है. उन्होंने घटनास्थलों पर मिले सीसीटीवी फुटेज को गहराई से खंगाला और उस कार के नंबर को देखा तो वह टैक्सी थी. इस के बाद पुलिस उस ट्रैवल कंपनी की तलाश में जुट गई, जिस के अधीन वह टैक्सी चल रही थी. इस के पहले कि पुलिस उस कार और ट्रैवल कंपनी तक पहुंचती उस से पहले ही उस ट्रैवल कंपनी का कर्मंचारी पुलिस के पास पहुंच गया.

दरअसल, हुआ यह था कि कार जब अपने तयशुदा समय पर कंपनी नहीं पहुंची तो ट्रैवल कंपनी उस की तलाश में लग गई थी. कंपनी कर्मचारी पहले बुकिंग कस्टमर आबिद शेख के घर गया. वहां पर जब उन्हें आबिद शेख नहीं मिला तो पड़ोसियों से पूछताछ की. पड़ोसियों ने भी उस के बारे में अनभिज्ञता जाहिर की. जब मामला गंभीर लगा तो कंपनी ने टैक्सी में जीपीएस के सहारे टैक्सी का पता लगा लिया. वह टैक्सी पुणे-सतारा रोड के मार्केट यार्ड की एक दुकान के सामने लावारिस हालत में खड़ी थी. इस बात की जानकारी उन्होंने सासवड़ पुलिस अधिकारियों को दे दी.

पुलिस उस कार तक पहुंची तो कार की तलाशी में रक्तरंजित कपड़ों और चाकू के मिलने से यह बात साफ हो गई थी कि वह कपड़े मृतका और बच्चे के थे, जिस की हत्या कर हत्यारे ने पूरे पुणे शहर में सनसनी फैला दी. हत्यारे आबिद शेख ने ऐसा क्यों किया था, इस के पीछे उस की क्या मजबूरी थी, यह रहस्य जांच का विषय था. पुलिस ने उस ट्रैवल कंपनी के औफिस में जा कर पूछताछ की तो पता चला कि आबिद शेख ने 11 जून, 2021 को 2 दिनों के लिए अपने परिवार सहित पिकनिक पर जाने के लिए वह टैक्सी बुक की थी. उस ने कहा था कि कार वह खुद ही चलाएगा, ड्राइवर की जरूरत नहीं है. इस के बाद उस ने अपनी बुकिंग 2 दिनों के लिए बढ़ा दी.

बुकिंग के अनुसार उसे कार 14 जून, 2021 को सुबह वापस कर देनी चाहिए थी लेकिन ऐसा नहीं हुआ. 15 जून, 2021 की शाम तक जब आबिद शेख ने कंपनी को कार नहीं लौटाई तो कंपनी कर्मचारियों ने कार की तलाश शुरू कर दी. कार अपने कब्जे में लेने के बाद पुलिस टीम ने घटनास्थल और लोगों से पूछताछ कर वहां लगे सीसीटीवी कैमरों के फुटेज देखे तो मालूम हुआ कि आबिद शेख वह कार रात 12 बजे छोड़ कर के हजर गेट की तरफ पैदल ही निकल गया था. सामान के नाम पर उस के पास सिर्फ एक छोटा सा बैग था. कुछ दूर तक वह पैदल चलता हुआ दिखाई दिया था. इस के बाद वह किसी वाहन से निकल गया था.

अब एक तरफ जहां दोनों थानों की पुलिस सरगरमी से आबिद शेख को तलाश रही थी वहीं दूसरी ओर उसे ले कर गांव का पूरा परिवार परेशान था. 16 जून का पूरा दिन निकल गया और आबिद शेख का जब परिवार से कोई संपर्क नहीं हुआ तो उस के घर वालों ने पुणे में रहने वाले उस के चचेरे भाई रहमान को फोन कर आबिद का पता लगाने के लिए कहा. क्योंकि 14 जून की रात साढे़ 9 बजे के बाद उस से कोई संपर्क नहीं हुआ था. रहमान जब आबिद शेख की खैरियत जानने के लिए उस के घर गया तो घर में ताला झूल रहा था. पासपड़ोस वालों ने उसे जो कुछ बताया, उसे सुन कर वह सन्न रह गया था. पहले कार कंपनी के लोग, बाद में पुलिस भी आ कर वहां से चली गई थी. उस का कोई पता नहीं है.

यह जानकारी पाते ही आबिद शेख के पिता 17 जून, 2021 की सुबह पुणे पहुंच गए. मामले की गंभीरता को समझते हुए वह जौइंट सीपी अशोक मराले से मिले. उन्होंने उन्हें सारी बातें बता दी. इस के बाद उन्होंने आबिद शेख की गुमशुदगी की शिकायत दर्ज करवा दी. अस्पताल की मोर्चरी पहुंच कर उन्होंने पोते और बहू के शव की शिनाख्त कर उसे अपने कब्जे में ले कर उस का कफनदफन कर दिया था. अब पुलिस की सब से बड़ी प्राथमिकता थी आबिद शेख की तलाश. उस के पास पासपोर्ट था. इस के लिए पुलिस ने उस के खिलाफ लुकआउट नोटिस जारी कर एयरपोर्ट पर पाबंदी लगवा दी थी. ताकि वह विदेश न भाग सके.

आबिद शेख की तलाश में पुलिस अपनी कोई नई रणनीति तैयार करती, उस के पहले ही आबिद शेख की गुमशुदगी का रहस्य उजागर हो गया. उस का शव खालापुर के खडकवासा बैंक की झील में तैरता हुआ हवेली थाने की पुलिस ने बरामद कर लिया. 19 जून, 2021 की सुबह इस की खबर वहां के कुछ स्थानीय मछुआरों ने पुलिस को दी थी. खबर मिलते ही हवेली पुलिस थाने की पुलिस तुरंत मौके पर पहुंच गई थी. उन्होंने जब शव की तलाशी ली तो उस का आधार कार्ड, पैन कार्ड और उस के अन्य सामानों को देख कर पुलिस को सारा मामला समझ में आ गया था. उन्होंने तत्काल इस मामले की जानकारी पुणे शहर के वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों को दी.

खबर मिलते ही पुणे की पुलिस वहां पहुंच गई. 9 दिनों तक चले इस मामले की सारी कडि़यां जुड़ने के बाद इस दोहरे हत्या और आत्महत्या की जो मार्मिक कहानी उभर कर सामने आई थी, उस की पृष्ठभूमि कुछ इस प्रकार थी. 38 वर्षीय स्वस्थ सुंदर आबिद शेख मध्य प्रदेश के जिला विदिशा का रहने वाला था. उस के पिता का नाम अब्दुल शेख था. वह मध्य प्रदेश में ही जिला नियोजन अधिकारी के पद पर तैनात थे. परिवार शिक्षित और सभ्य था. घर में किसी चीज की कोई कमी नहीीं थी. परिवार में 2 भाई थे. बड़ा भाई कनाडा में सेटल था. आबिद के पास भी कनाडा की नागरिकता थी लेकिन वह वहां रहता नहीं था. घूमनेफिरने के लिए जाता जरूर था. लेकिन उसे वहां का वातावरण अच्छा नहीं लगता था. इसलिए वह घूमफिर कर वापस अपने देश लौट आता था.

अपना ग्रैजुएशन पूरा करने के बाद वह 2007 में सर्विस की तलाश में पुणे आ गया था. थोड़ी सी स्ट्रगल करने के बाद उस की नियुक्ति एक जीवन बीमा कंपनी में ब्रांच मैनेजर के पद पर हो गई थी. उस का अच्छा वेतन देख कर परिवार वाले बेहद खुश थे. यहीं पर आबिद शेख की मुलाकात आलिया शेख से हुई. 35 वर्षीय आलिया सुंदर युवती थी. वह मूलरूप से मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल की रहने वाली थी. आलिया शेख का परिवार भी आबिद शेख के परिवार से किसी माने में कम नहीं था. उस के पिता मध्य प्रदेश के वनरक्षक अधिकारी थे.

आलिया शेख परिवार की लाडली बेटी थी. पूरा परिवार उसे प्यार करता था. परिवार वाले उस की नौकरी के पक्ष में नहीं थे. लेकिन किसी तरह उस ने अपने परिवार को राजी कर लिया और वह पुणे की एक बड़ी प्राइवेट कंपनी में अच्छे पद पर काम करने लगी थी. 2009 में अपनी एक जीवन बीमा पौलिसी के सिलसिले में जब वह बीमा कंपनी में आबिद शेख से मिली तो वह उस से काफी प्रभावित हुई थी. यही हाल आबिद का भी था. आलिया की सुंदर छवि उस के दिमाग पर पूरी तरह हावी हो गई थी. वह आलिया की पौलिसी का काम कर के उस के काफी करीब आ गया था.

छोटीछोटी मुलाकातें जब आगे बढ़ीं तो दोनों के दिलों में प्यार का अंकुर फूटने लगा. कुछ ही दिनों में उस ने वृक्ष का रूप धारण कर लिया. कुछ दिनों तक कौफी शौप, मौलों में घूमनेफिरने के बाद वह अपनी एक सुंदर गृहस्थी बसाने का सपना देखने लगे थे. दोनों ने निकाह कर के एक साथ रहने का फैसला कर लिया. यह बात जब दोनों के घर वालों को मालूम पड़ी तो उन्होंने इस का विरोध किया. उन्हें हर तरह से समझाया. ऊंचनीच का वास्ता दिया. लेकिन घर वालों की बातों की परवाह किए बिना ही दोनों ने अपने कुछ दोस्तों को साथ ले कर निकाह कर लिया. निकाह के कुछ दिनों बाद तक तो परिवार उन से नाराज रहा, लेकिन फिर सब कुछ ठीक हो गया था. परिवार वालों ने उन के निकाह को मान्यता दे दी.

निकाह के 2 साल बाद 2013 में वह पुणे के घानोरी इलाके में स्थित किराए के एक फ्लैट में आ कर रहने लगे. दोनों पतिपत्नी खुश थे. यहां शिफ्ट हुए अभी कुछ दिन ही हुए थे कि आलिया गर्भवती हो गई थी. उस ने  सुंदर से बच्चे को जन्म दिया जिस का नाम उन्होंने अयान रखा. बच्चे के जन्म से दोनों बेहद खुश थे. दोनों थकेहारे जब अपने काम से लौटते थे तो बच्चे को देख कर उन की थकान उतर जाती थी. समय अपनी गति से चलता रहा. पतिपत्नी उस के भविष्य के लिए सुंदरसुंदर सपने बुनते रहे. लेकिन ये सारे सपने तब कांच की तरह टूट कर बिखर गए जब उन्हें मालूम पड़ा कि उन का बच्चा मानसिक रूप से ठीक नहीं है.

डाक्टरों के अनुसार, बच्चा औटिज्म नामक बीमारी से ग्रस्त था. यह जान कर दोनों पतिपत्नी का अस्तित्व हिल गया था. बच्चे को संभालने के लिए जहां एक तरफ आलिया को अपनी नौकरी छोड़नी पड़ी थी. वहीं दूसरी ओर बच्चे को ले कर आबिद शेख की मानसिक स्थिति बिगड़ती चली गई. वह बच्चे की बीमारी को ले कर हताश और निराश रहने लगा था. बच्चे के स्वास्थ्य को ले कर पतिपत्नी में अकसर लड़ाई होने लगी थी. यहां तक कि दोनों में मारपीट की नौबत भी आ जाती थी. आखिरकार रोजरोज के झगड़ों और मारपीट से तंग आ कर आबिद ने एक खतरनाक फैसला कर लिया. इस के लिए उस ने पिकनिक का सहारा लिया.

अकसर पिकनिक पर जाने के कारण आलिया को कोई संदेह नहीं हुआ. वह खुशीखुशी पिकनिक पर जाने के लिए तैयार हो गई थी. पिकनिक की योजना तैयार कर आबिद ने पहले 2 दिनों के लिए एक ट्रैवल कंपनी से एक ब्रेजा कार किराए पर ली. और 2-3 दिनों तक वे इधरउधर घूमते रहे.14 जून, 2021 को उन के परिवार वालों का फोन आया. फोन पर आबिद ने कहा कि वे आधे घंटे में अपने घर पहुंच जाएंगे.  इस बीच उन्होंने होटल में खाना खाया. खाना खाने के बाद वे होटल से बाहर आए तो आलिया और आबिद में कहासुनी शुरू हो गई. जिस के चलते पहले दोनों में मारपीट हुई.

इस के बाद आबिद ने चाकू से काट कर उसे ठिकाने लगा दिया. उस का शव सुनसान जगह पर छोड़ने के बाद मासूम बच्चे का भी गला दबा कर उस की हत्या कर दी. और उसे ला कर पुणे के कागज घाट सुरंग के जाभुलकर वाड़ी में डाल दिया था. इस के बाद पुणे-सतारा रोड पर कार छोड़ कर वह अपने अपराध का प्रायश्चित करने के लिए खडकवासा बैंक की गहरी झील के पास गया और उस झील में कूद कर आत्महत्या कर ली. विस्तृत जांचपड़ताल के बाद पुलिस जांच टीम ने हत्या-आत्महत्या करने वालों में कोई जीवित न होने के कारण मामले की फाइनल रिपोर्ट लगा कर मामला बंद कर दिया था. Crime Story Real

 

Crime Story Real : देवर संग मिलकर पत्नी ने रची साजिश फिर पति का गला दबाकर मार डाला

Crime Story Real :  दिव्यांग सिकंदर शरीर से कमजोर था पर मेहनतकश था. लेकिन काम के चक्कर में वह पत्नी ललिता की खुशियों का गला घोंटता रहा. सिकंदर की यह लापरवाही ललिता पर भारी पड़ने लगी. इसी दौरान ललिता ने अपने कदम देवर जितेंद्र की तरफ बढ़ा दिए. यहीं से ललिता की ऐसी खतरनाक लीला शुरू हुई कि… दे

32 वर्षीया ललिता झारखंड के कोडरमा जिले के गांव दौंलिया की रहने वाली थी. उस की मां का नाम राजवती और पिता का नाम दुल्ली था. वह 4 भाइयों की इकलौती बहन थी. इसलिए घर में सभी की लाडली थी. 16 साल की होते ही उस पर यौवन की बहारें मेहरबान हो गई थीं. बाद में समय ऐसा भी आया कि वह किसी प्रेमी की मजबूत बांहों का सहारा लेने की कल्पना करने लगी. गांव के कई नवयुवक ललिता पर फिदा थे. ललिता भी अपनी पसंद के लड़के से नैन लड़ाने लगी. इस के बाद तो दिन प्रतिदिन उस की आकांक्षाएं बढ़ने लगीं तो अनेक लड़कों के साथ उस के नजदीकी संबंध हो गए.

Ghar ki Kahaniyan

दुल्ली के कुछ शुभचिंतक उसे आईना दिखाने लगे, ‘‘तुम्हारी बेटी ने तो यारबाजी की हद कर दी. वह खुद तो खराब है, गांव के लड़कों को भी खराब कर रही है. लड़की जब दरदर भटकने की शौकीन हो जाए तो उसे किसी मजबूत खूंटे से बांध देना चाहिए. जितनी जल्दी हो सके, ललिता का विवाह कर दो, वरना तुम बहुत पछताओगे.’’

अपमान का घूंट पीने के बाद दुल्ली ने एक दिन ललिता को समझाया. उसी दौरान मां राजवती ने ललिता की पिटाई करते हुए चेतावनी दी, ‘‘आज के बाद तेरी कोई ऐसीवैसी बात सुनने को मिली तो मैं तुझे जिंदा जमीन में दफना दूंगी.’’

उस समय ललिता ने कसम खा कर किसी तरह अपनी मां को यकीन दिला दिया कि वह किसी लड़के से बात नहीं करेगी. ललिता बात की पक्की नहीं, बल्कि ख्वाहिशों की गुलाम थी. कुछ समय तक ललिता ने अपनी जवानी के अरमानों को कैद रखा, लेकिन अरमान बेलगाम हो कर उस के जिस्म को बेचैन करते तो वह अंकुश खो बैठी और फिर से लड़कों के साथ मटरगश्ती करने लगी. लेकिन यह मटरगश्ती अधिक दिनोें तक नहीं चल सकी. इस की वजह थी कि उस के पिता दुल्ली ने उस का रिश्ता तय कर दिया था. ललिता का विवाह कोडरमा जनपद के ही गांव करौंजिया निवासी काली रविदास के बेटे सिकंदर रविदास से तय हुआ था.

सिकंदर किसान था और एकदम सीधासादा इंसान था. लेकिन एक पैर से दिव्यांग था. उस का एक छोटा भाई जितेंद्र रविदास था. सिकंदर की उम्र विवाह योग्य हो चुकी थी, इसलिए ललिता का रिश्ता सिकंदर के लिए आया तो काली रविदास मना नहीं कर सके.  12 साल पहले दोनों का विवाह बड़ी धूमधाम से हो गया. कालांतर में ललिता 3 बेटों की मां बन गई. विवाह के बाद से ही सिकंदर ललिता के साथ अलग मकान में रहने लगा था. सिकंदर का छोटा भाई जितेंद्र अपने मातापिता के साथ रहता था. सिकंदर दिव्यांग होने पर भी खेतों में दिनरात मेहनत करता रहता था. इसलिए जब वह घर पर आता तो थकान से चूर हो कर सो जाता था, जिस से ललिता की ख्वाहिशें अधूरी रह जाती थीं.

पति के विमुख होने से ललिता बेचैन रहने लगी. इस स्थिति में कुछ औरतों के कदम गलत रास्ते पर चल पड़ते हैं, ऐसा ही ललिता के साथ भी हुआ. अब उसे ऐसे शख्स की तलाश थी, जो उसे भरपूर प्यार दे और उस की भावनाओं की इज्जत करे. उस शख्स की तलाश में उस की नजरों को अधिक भटकना नहीं पड़ा. घर में ही वह शख्स उसे मिल गया, वह था जितेंद्र. सिकंदर जहां अपने भविष्य के प्रति गंभीर तथा अपनी जिम्मेदारियों को समझने वाला था, वहीं जितेंद्र गैरजिम्मेदार था. जितेंद्र का किसी काम में मन नहीं लगता था.

जितेंद्र की निगाहें ललिता पर शुरू से थीं. वह देवरभाभी के रिश्ते का फायदा उठा कर ललिता से हंसीमजाक भी करता रहता था.  जितेंद्र की नजरें अपनी ललिता भाभी का पीछा करती रहती थीं. दरअसल जितेंद्र ने ललिता को विवाह मंडप में जब पहली बार देखा था, तब से ही वह उस के हवास पर छाई हुई थी. अपने बड़े भाई सिकंदर के भाग्य से उसे ईर्ष्या होने लगी थी. वह सोचता था कि ललिता जैसी सुंदरी के साथ उस का विवाह होना चाहिए था. काश! ललिता उसे पहले मिली होती तो वह उसे अपनी जीवनसंगिनी बनाता और उस की जिंदगी इस तरह वीरान न होती, उस की जिंदगी में भी खुशियां होतीं.

ललिता के रूप की आंच से आंखें सेंकने के लिए ही वह ललिता के घर के चक्कर लगाता. चूंकि वह घर का ही सदस्य था, इसलिए उस के आनेजाने और वहां हर समय बने रहने पर कोई शक नहीं करता था. जितेंद्र की नीयत साफ नहीं थी, इसलिए वह ललिता से आंखें लड़ा कर और हंसमुसकरा कर उस पर डोरे डाला करता था. सिकंदर सुबह खेत पर जाता तो दीया बाती के समय ही लौट कर आता. जितेंद्र के दिमाग में अब तक ललिता के रूप का नशा पूरी तरह हावी हो गया था. इसलिए ललिता को पाने की चाह में उस के सिकंदर के घर के फेरे जरूरत से ज्यादा लगने लगे.

ललिता घर पर अकेली होती थी, इसलिए जितेंद्र के पास मौके ही मौके थे. एक दिन जितेंद्र दोपहर के समय आया तो ललिता दोपहर के खाने में तहरी बनाने की तैयारी कर रही थी, जिस के लिए आलू व टमाटर काट रही थी. जितेंद्र ने खुशी जाहिर करते हुए कहा, ‘‘लगता है, आज अपने हाथों से स्वादिष्ट तहरी बनाने जा रही हो.’’

‘‘हां, खाने का इरादा है क्या?’’

‘‘मेरा ऐसा नसीब कहां, जो तुम्हारे हाथों का बना स्वादिष्ट खाना खा सकूं. नसीब तो सिकंदर भैया का है, जो आप जैसी रूपसी उन को पत्नी के रूप में मिलीं.’’

यह सुन कर ललिता मुसकान बिखेरती हुई बोली, ‘‘ठीक है, मुझ से विवाह कर के तुम्हारे भैया ने अपनी किस्मत चमका ली तो तुम भी किसी लड़की की मांग में सिंदूर भर कर अपनी किस्मत चमका लो.’’

‘‘मुझे कोई दूसरी नहीं, तुम पसंद हो. भाभी, अगर तुम तैयार हो तो मैं तुम्हारे साथ अपना घर बसाने को तैयार हूं.’’

ललिता जितेंद्र के रोज हावभाव पढ़ती रहती थी. इसलिए जान गई थी कि जितेंद्र के दिल में उस के लिए नाजुक एहसास है. लेकिन वह इस तरह चाहत जाहिर कर के उस से प्यार की सौगात मांगेगा, ललिता ने सोचा तक न था. अचानक सामने आई ऐसी असहज स्थिति से निपटने के लिए वह उस से आंखें चुराने लगी और कटी हुई सब्जी उठा कर रसोई की तरफ चल दी. तभी उस के बच्चे भी घर आ गए. प्यार में विघ्न पड़ता देख कर जितेंद्र भी वहां से उठ गया. उस दिन के बाद जब भी मौका मिलता, वह ललिता के पास पहुंच जाता और अपने प्यार का विश्वास दिलाता. धीरेधीरे ललिता को उस के प्यार पर यकीन होने लगा. उसे भी अपने प्रति जितेंद्र की दीवानगी लुभाने लगी थी.

उस की दीवानगी को देख कर ललिता के दिल में उस के लिए प्यार उमड़ पड़ा. कल तक जो ललिता जितेंद्र के हवास पर छाई थी, अब जितेंद्र ललिता के हवास पर छा गया. एक दिन जितेंद्र ने फिर से ललिता के सामने अपने प्यार का तराना सुनाया तो वह बोली, ‘‘जितेंद्र, मेरे प्यार की चाहत में पागल होने से तुम्हें क्या मिलेगा. मैं विवाहित होने के साथसाथ 3 बच्चों की मां भी हूं. इसलिए मुझे पाने की चाहत अपने दिल से निकाल दो.’’

‘‘यही तो मैं नहीं कर पा रहा, क्योंकि यह दिल पूरी तरह से तुम्हारे प्यार में गिरफ्तार है.’’

ललिता कुछ नहीं बोल सकी. जैसे उस के जेहन से शब्द ही मिट गए थे. जितेंद्र ने अपने हाथ उस के कंधे पर रख दिए, ‘‘भाभी, कब तक तुम अपने और मेरे दिल को जलाओगी. कुबूल कर लो, तुम्हें भी मुझ से प्यार है.’’

ललिता ने सिर झुका कर जितेंद्र की आंखों में देखा और फिर नजरें नीची कर लीं. प्रेम प्रदर्शन के लिए शब्द ही काफी नहीं होते, शारीरिक भाषा भी मायने रखती है. जितेंद्र समझ गया कि मुद्दत बाद सही, ललिता ने उस का प्यार कुबूल कर लिया है. उस ने ललिता के चेहरे पर चुंबनों की झड़ी लगा दी. ललिता भी सुधबुध खो कर जितेंद्र से लिपट गई. उस समय मन के मिलन के साथ तन की तासीर ऐसी थी कि ललिता का जिस्म पिघलने लगा.  इस के बाद दोनों ने अपनी हसरतें पूरी कर लीं. यह बात करीब 6 साल पहले की है. बाद में यह मौका मिलने पर चलता रहा.

13 मई, 2021 को दोपहर करीब 12 बजे सिकंदर दास लोचनपुर गांव के निजी कार चालक विजय दास के साथ चरवाडीह के संजय दास के यहां शादी समारोह में गया. सिकंदर और विजय दोनों कार से गए थे. कार विजय की थी. साढ़े 3 बजे शादी से दोनों निकल आए. लेकिन सिकंदर दास घर नहीं लौटा. उस के नंबर पर सिकंदर के चाचा ने फोन किया गया तो विजय ने उठाया. उस से पूछा गया कि सिकंदर कहां है तो विजय द्वारा अलगअलग ठिकाने का पता बताते हुए फोन काट दिया. इस के बाद सिकंदर की काफी तलाश की गई, वह नहीं मिला. 16 मई को ललिता ने कोडरमा के थानाप्रभारी और एसपी को एक पत्र दिया, जिस में उस ने अपने पति सिकंदर दास के लापता होने की बात लिखी. सिकंदर के गायब होने का आरोप उस ने कार चालक विजय दास पर लगाया था.

चूंकि मामला चांदवारा थाना क्षेत्र के करौंजिया गांव का था. इसलिए एसपी पुलिस ने मामला चांदवारा थाने में ट्रांसफर कर दिया. चांदवारा थाने के थानाप्रभारी सोनी प्रताप सिंह ने पूरा मामला जान कर थाने में सिकंदर की गुमशुदगी दर्ज करा दी. थानाप्रभारी सोनी प्रताप ने 20 मई को जामू खाड़ी से विजय दास को गिरफ्तार कर लिया. सख्ती से पुलिस ने पूछताछ की तो विजय ने सिकंदर की हत्या करने की बात स्वीकारी. उस ने इस हत्या में सिकंदर की पत्नी ललिता और भाई जितेंद्र का भी हाथ होने की बात बताई. 20 मई को विजय के बाद ललिता और जितेंद्र को भी पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया. उन की निशानदेही पर रात में कोटवारडीह के बंद पड़े मकान से सिकंदर की लाश बरामद कर ली.

वह अर्द्धनिर्मित मकान सिकंदर का था. लाश को पोस्टमार्टम के लिए भेजने के बाद चांदवारा थाने के थानाप्रभारी सोनी प्रताप सिंह अभियुक्तों को ले कर थाने आ गए. थाने में सख्ती से की गई पूछताछ में उन्होंने हत्या के पीछे की पूरी कहानी बयां कर दी. एक दोपहर को जितेंद्र और ललिता घर में बेधड़क रंगरलियां मना रहे थे कि अचानक किसी काम से सिकंदर खेतों से घर लौटा तो उस ने उन दोनों को रंगरलियां मनाते रंगेहाथों पकड़ लिया. यह देख कर उसे एक बार तो अपनी आंखों पर विश्वास ही नहीं हुआ कि उस की पत्नी ऐसा भी कर सकती है. वह ललिता पर खुद से भी ज्यादा विश्वास करता था. लेकिन हकीकत तो सामने उस की दगाबाजी की तरफ इशारा कर रही थी.

दूसरी ओर सगा छोटा भाई जितेंद्र था, जिसे वह बहुत प्यार करता था, उस का खूब खयाल रखता था. वही उस की गृहस्थी में आग लगा रहा था. अपनों की इस दगाबाजी से सिकंदर इतना आहत हुआ कि उस ने पूरे घर को सिर पर उठा लिया. ललिता और जितेंद्र ने भी उस से अपनी गलती की माफी मांग ली और भविष्य में ऐसा कुछ न करने का वादा किया तो सिकंदर शांत हुआ. जितेंद्र और ललिता ने उस समय तो अपनी जान छुड़ाने के लिए वादा कर दिया था, लेकिन वे इस पर अमल करने को कतई तैयार नहीं थे. लेकिन उन का भेद खुल चुका था, इसलिए मिलन में उन को बहुत ऐहतियात बरतनी पड़ती थी. वे चोरीछिपे फिर से मिल लेते थे.

सिकंदर ने देखा तो उस ने विरोध किया. मामला घर की चारदीवारी से निकल कर गांव के लोगों तक पहुंच गया. पंचायत तक बैठ गई. भरी पंचायत में ललिता ने जितेंद्र के साथ रहने की बात कही. लेकिन फैसला न हो सका. इस के बाद सिकंदर उन दोनों के बीच की एक बड़ी दीवार था, जिसे गिराए बिना वे हमेशा के लिए एक नहीं हो सकते थे. इसलिए ललिता और जितेंद्र ने सिकंदर की हत्या करने की ठान ली. सिकंदर दास ने विजय दास से लोन दिलाने के नाम पर डेढ़ लाख रुपए लिए थे. सिकंदर ने जब लोन नहीं दिलाया तो विजय उस से अपने दिए रुपए वापस मांगने लगा. सिकंदर रुपए देने में टालमटोल कर रहा था. ऐसे में ललिता ने जितेंद्र से बात कर के विजय को अपने प्लान में शामिल करने की बात कही.

उस ने यह भी कहा कि सिकंदर का काम तमाम होने के बाद वह अकेले विजय को उस की हत्या में फंसवा देगी, जिस से वे दोनों बच जाएंगे. जितेंद्र को उस की बात सही लगी. दोनों ने विजय से बात की तो वह सिकंदर की हत्या में उन दोनों का साथ देने को तैयार हो गया. 13 मई, 2021 को एक शादी समारोह से लौटने के बाद विजय सिकंदर को ले कर कोटवारडीह में उस के अर्धनिर्मित मकान पर ले गया. वहां ललिता और जितेंद्र पहले से मौजूद थे. तीनों ने मिल कर सिकंदर की गला दबा कर हत्या कर दी और लाश एक कमरे में डाल कर कमरा बंद कर दिया.

लेकिन सिकंदर की हत्या में विजय को फंसाने की योजना ही ललिता और जितेंद्र को भारी पड़ गई. ललिता ने उस पर शक जताया तो पुलिस विजय को पकड़ कर उन तक पहुंच गई. तीनों अभियुक्तों के खिलाफ हत्या व साक्ष्य छिपाने का मुकदमा दर्ज कर के चांदवारा पुलिस ने तीनों को कोर्ट में पेश करने के बाद जेल भेज दिया. Crime Story Real

—कथा पुलिस सूत्रों पर आधारित

Crime Story Real : प्रेमिका के इशारे पर बच्चे का किडनैप करके मार डाला

Crime Story Real : कभीकभी कुछ लोग मामूली खुन्नस में एक बड़ा अपराध कर बैठते हैं. पार्वती और उस के प्रेमी संदीप चौहान ने अगर संयम से काम लिया होता तो शायद उन्हें…

मई महीने की 15 तारीख की सुबह करीब 10 बजे प्रेमा का ढाई साल का बड़ा बेटा रितेश चौहान अपने घर के बाहर खेल रहा था. प्रेमा जब घर से बाहर निकली तो उसे रितेश दिखाई न दिया. तब उस ने बेटे को आवाज लगाई, ‘‘रितेश, बेटा कहां हो?’’

लेकिन रितेश घर के आसपास कहीं न मिला. प्रेमा रितेश को घर के बाहर न पा कर घबरा गई. वह उसी समय अपने ससुर जगराम के पास गई, क्योंकि प्रेमा का पति जवाहर लाल एक दिन पहले ही गांव से दिल्ली गया था. प्रेमा रोते हुए ससुर जगराम से बोली, ‘‘बाबूजी, रितेश अभी कुछ देर पहले घर से बाहर खेल रहा था. लेकिन अब वह कहीं दिखाई नहीं दे रहा है.’’

बहू प्रेमा की बात सुन कर जगराम भी घबरा गए और उन्होंने घर के आसपास अपने ढाई वर्षीय पोते रितेश को आवाज देनी शुरू कर दी, लेकिन रितेश का कहीं पता नहीं चला. इस के बाद प्रेमा देवी, ससुर जगराम और प्रेमा देवी के 2 देवर सहित परिवार के सभी सदस्य बदहवासी की अवस्था में उसे इधरउधर ढूंढने लगे. लेकिन रितेश का कहीं नहीं मिला. परिवार वालों ने उसे आसपास के खेतों, बागबगीचों में हर जगह ढूंढा, पर उस के बारे में कहीं कोई जानकारी नहीं मिली. रितेश के गायब होने की खबर एक दिन पहले दिल्ली गए उस के पिता जवाहरलाल को भी फोन द्वारा दे दी गई. बेटे के गायब होने की खबर पा कर जवाहर भी घबरा गया और वह उसी दिन दिल्ली से अपने घर के लिए चल पड़ा. इधर प्रेमा का रोरो कर बुरा हाल हो गया था.

रितेश के गायब होने की सूचना जंगल में आग की तरह आसपास के गांवों में भी फैल चुकी थी. लोग जी जान से रितेश को खोजने में लगे थे. तभी किसी ने रितेश के दादा जगराम को बताया कि चचेरा भाई संदीप चौहान रितेश को साइकिल पर बैठा कर कहीं ले जा रहा था. रितेश के परिजनों ने संदीप को पकड़ कर उस से कड़ाई से पूछा कि रितेश के साथ उस ने क्या किया है तो संदीप बोला, ‘‘मुझे नहीं पता और न ही मैं ने रितेश को देखा है.’’

लोग बारबार संदीप से रितेश के बारे में पूछते रहे लेकिन संदीप रितेश के बारे में अनभिज्ञता ही जाहिर करता रहा. इस के बाद लोगों के कहने पर जगराम ने स्थानीय थाने सोनहा पहुंच कर पोते के गायब होने की जानकारी देते हुए संदीप पर उसे गायब करने का आरोप लगाया. जगराम की शिकायत को थानाप्रभारी अशोक कुमार सिंह ने गंभीरता से लिया. उन्होंने अपने उच्चाधिकारियों को भी घटना की सूचना दे दी. सूचना पा कर एसपी आशीष श्रीवास्तव, सीओ (रुधौली) धनंजय सिंह कुशवाहा, स्वाट, एसओजी और सर्विलांस और डौग स्क्वायड टीम के साथ पहुंच गए. इस के अलावा रुधौली सर्किल के सभी थानों को भी रितेश की खोज में लगा दिया गया.

पुलिस स्वाट और डौग स्क्वायड टीम के साथ रितेश को खोजने में लगी हुई थी, लेकिन उस का कहीं पता नहीं चल रहा था और उधर पुलिस जगराम की शिकायत पर आरोपी संदीप के घर पहुंची तो वह भी घर पर नहीं मिला. अगले दिन 16 मई की सुबह पुलिस ने संदीप को गांव के पास से धर दबोचा. जब पुलिस ने उस से रितेश के बारे में पूछताछ की तो उस ने बताया कि वह रितेश को बिसकुट टौफी दिलाने ले गया था. जिस के बाद उस ने रितेश को उस के घर पर छोड़ दिया था. पुलिस को संदीप के बातचीत के लहजे से कुछ शक हुआ, फिर पुलिस ने उस से सख्ती से पूछताछ शुरू कर दी, जिस से संदीप टूट गया. इस के बाद उस ने अपने रिश्ते के भतीजे ढाई वर्षीय रितेश की हत्या किए जाने की बात कबूल कर ली.

उस ने बताया कि रितेश की हत्या उस ने गांव की ही महिला पार्वती के कहने पर की थी. पार्वती उस की प्रेमिका है. उस ने पुलिस को बताया कि हत्या करने के बाद रितेश की लाश खाजेपुर के जंगल में छिपा दी थी. पुलिस ने हत्यारोपी महिला पार्वती को भी उस के घर से गिरफ्तार कर लिया. उस के घर से पुलिस को रितेश की चप्पलें और वारदात में प्रयुक्त साइकिल भी बरामद हो गई. रितेश की लाश बरामद करने के लिए पुलिस दोनों आरोपियों को खाजेपुर के जंगल में ले गई. वहां एक गड्ढे से रितेश की लाश बरामद कर ली गई. रितेश की हत्या और उस की लाश मिलने की जानकारी जैसे ही उस की मां प्रेमा को मिली तो वह बेसुध हो कर गिर पड़ी, उधर बाकी परिजनों का भी रोरो कर बुरा हाल था.

रितेश की लाश की बरामदगी के बाद पुलिस ने जरूरी काररवाई कर लाश पोस्टमार्टम के लिए भेज दी. संदीप और पार्वती से विस्तार से पूछताछ की गई तो उन्होंने ढाई वर्षीय रितेश की हत्या की जो कहानी बताई, वह इस प्रकार थी—

उत्तर प्रदेश के जिला बस्ती के सोनहा थाना क्षेत्र के दरियापुर जंगल टोला उकड़हवा की रहने वाली पार्वती देवी का पति अहमदाबाद में रह कर नौकरी करता था. पार्वती कुछ दिनों गांव में रहती तो कुछ दिनों अहमदाबाद में अपने पति के साथ गुजारती थी. शादी के बाद पार्वती 4 बेटियों और एक बेटे की मां बन चुकी थी. इस के बावजूद भी वह अपने पति से संतुष्ट नहीं थी. इसलिए वह किसी ऐसे साथी की तलाश में थी, जो उस की ख्वाहिशें पूरी कर सके. पार्वती अहमदाबाद से जब अपने गांव आती तो हरिराम का लड़का संदीप चौहान कभीकभार उस के घर आ जाता था. पार्वती जब हृष्टपुष्ट संदीप को देखती तो उस के दिल में चाहत की हिलारें उठ जाती थीं. उसे अपने जाल में फांसने के लिए वह उस से अश्लील मजाक करने लगती.

संदीप बच्चा तो था नहीं, इसलिए वह पार्वती के इशारों को समझने लगा था. आखिर एक दिन पार्वती ने मौका पा कर संदीप से अपने दिल की बात कह दी, ‘‘संदीप, तुम मुझे बहुत अच्छे लगते हो. तुम्हें देख कर मुझे कुछकुछ होने लगता है.’’

पार्वती की तरफ से खुला आमंत्रण पा कर संदीप भी खुद पर काबू नहीं रख सका. इस के बाद दोनों ने अपनी हसरतें पूरी कीं. फिर तो उन्हें जब भी मौका मिलता, अपनी हसरतें पूरी कर लेते. इधर जब पार्वती गांव से अपने पति के पास अहमदाबाद चली जाती तो फिर उसे संदीप की याद सताती थी. इसलिए वह फिर से गांव भाग आती थी. कहा जाता है कि इश्क और मुश्क छिपाए नहीं छिपता है, उसी तरह से पार्वती और संदीप के अवैध संबंध की बात धीरेधीरे आसपड़ोस में भी फैलने लगी थी. लोग जब भी दोनों को देखते तो कानाफूसी करने लगते थे. यह बात धीरेधीरे संदीप के घर वालों को भी पता चल चुकी थी. जिस के बाद संदीप के घर वालों ने उसे समझाया भी, लेकिन पार्वती पर कोई असर नहीं पड़ा.

रितेश की हत्या के लगभग 2 महीने पहले एक दिन संदीप चौहान के रिश्ते की भाभी प्रेमा की पार्वती के साथ किसी बात को ले कर कहासुनी हो गई. इसी दौरान तूतूमैंमैं के दौरान प्रेमा ने पार्वती और संदीप के संबंधों को ले कर कटाक्ष कर दिया. बात बढ़ी तो प्रेमा ने इस की शिकायत सोनहा थाने में कर दी, जहां पुलिस ने दोनों को बुला कर समझायाबुझाया. पार्वती को प्रेमा द्वारा थाने में बुलाया जाना नागवार लगा. उसे लगा कि उस ने कोई गलती नहीं की, उस के बावजूद भी उसे थाने बुला कर नीचा दिखाया गया. यह बात पार्वती के मन में गांठ कर गई और वह प्रेमा से बदला लेने की फिराक में लग गई.

थाने से आने के बाद पार्वती प्रेमा से बदले की फिराक में लगी रही. बदले की आग में झुलस रही पार्वती ने एक छोटी सी वजह से एक खौफनाक फैसला ले लिया था. उस ने इस के लिए अपने प्रेमी संदीप चौहान को मोहरा बनाने की चाल चली और संदीप के साथ मिल कर मासूम रितेश की हत्या की खौफनाक साजिश तैयार कर डाली. संदीप चौहान पार्वती के साथ मिल कर पूरी प्लानिंग के साथ इस घटना को अंजाम देना चाहता था. इस के लिए उस ने प्रेमा के घर आनाजाना शुरू कर दिया और वह रोज रितेश के साथ खेलता और साइकिल पर बैठा कर अकसर उसे टौफी, बिसकुट दिलाने दुकान तक ले जाता था. जब उसे लगा कि कोई उस पर शक नहीं करेगा तो पार्वती के साथ मिल कर रितेश की हत्या की साजिश को अंजाम तक पहुंचाने का फैसला कर लिया.

संदीप ने पुलिस पूछताछ में बताया कि वह हर रोज की तरह 15 मई, 2021 की सुबह करीब 10 बजे प्रेमा के घर पहुंचा, जहां रितेश को बाहर अकेले खेलते देख मौका पा कर उसे टौफी और बिसकुट दिलाने के बहाने  साइकिल पर बैठा कर ले गया. अपनी प्रेमिका पार्वती के कहने पर वह उसे गांव से दूर खाजेपुर के जंगल में ले गया और वहीं उस की गला दबा कर हत्या कर दी. उस के शव को उस ने वहीं पर एक छोटे से गड्ढे में डाल कर पत्तियों से छिपा दिया. ढाई वर्षीय रितेश के गायब होने के बाद खोजबीन में लगे परिजनों को जब यह पता चला कि आखिरी बार रितेश को संदीप के साथ साइकिल पर बैठे देखा गया था तो लोगों के शक की सुई संदीप पर टिक गई. जिस के बाद पुलिस के हिरासत में आने के बाद संदीप ने सब कुछ सचसच बता दिया.

जब लोगों को यह बात पता चली कि पार्वती और उस के प्रेमी संदीप ने जघन्य तरीके से मासूम रितेश की हत्या की है तो लोगों का गुस्सा बढ़ने लगा. पुलिस के उच्चाधिकारियों ने स्थिति को बिगड़ने से बचाने के लिए कुछ दिनों के लिए गांव में पीएसी की प्लाटून के साथ पुलिस बल तैनात कर दिया था. पुलिस ने 24 घंटे के भीतर घटना का परदाफाश कर हत्यारोपी पार्वती और संदीप चौहान के खिलाफ आईपीसी की धारा 364 (अपहरण), 302 (हत्या), 201 (हत्या के बाद शव छिपाना), 120बी (वारदात की साजिश में सम्मिलित होने) का मुकदमा दर्ज कर आरोपियों को कोर्ट में पेश कर जेल भेज दिया. आरोपी पार्वती के गुनाहों के चलते जब उस की डेढ़ साल की बेटी को भी अपना समय जेल में बिताना होगा. Crime Story Real