Love Stories: किरण की कहानी – प्यार दे या मार दे

Love Stories: रखने को तो घर वालों ने उस का नाम किरण रख दिया था, लेकिन मिडिल स्कूल की पढ़ाई के दौरान ही उस की समझ में आ गया था कि उस की जिंदगी में उम्मीद की कोई किरण नहीं है. इस की वजह यह थी कि प्रकृति ने उस के साथ घोर अन्याय किया, जो उसे एक आंख से दिव्यांग बनाया था.

किरण न बहुत ज्यादा खूबसूरत थी और न ही किसी रईस घराने से ताल्लुक रखती थी. एक मामूली खातेपीते परिवार की यह साधारण सी युवती न तो अपनी उम्र की लड़कियों की तरह रोमांटिक सपने बुनती थी और न ही ज्यादा सजनेसंवरने की कोशिश करती थी. घर में पसरे अभाव भी उसे दिखाई देते थे तो खुद को ले कर पिता का चिंतित चेहरा भी उस की परेशानी का सबब बना रहता था.

उस के पिता डालचंद कौरव अब से कई साल पहले नरसिंहपुर जिले की तहसील गाडरवारा के गांव सूरजा से भोपाल आ कर बस गए थे. उन का मकसद बच्चों की बेहतर परवरिश और शहर में मेहनत कर के ज्यादा से ज्यादा पैसा कमाना था, जिस से घरपरिवार का जीवनस्तर सुधरे और धीरेधीरे ही सही, बच्चों का भविष्य बन सके. इस के लिए वह खूब मेहनत करते थे. लेकिन आमदनी अगर चवन्नी होती थी तो पता चलता था कि महंगाई की वजह से खर्चा एक रुपए का है.

वह भोपाल में एक प्राइवेट कंपनी में नौकरी करते थे, जहां से मिलने वाले वेतन से खींचतान कर किसी तरह खर्च चल जाता था. 3 बेटियों के पिता डालचंद बड़ी बेटी की शादी ठीकठाक और खातेपीते परिवार में कर चुके थे. उस के बाद किरण को ले कर उन की चिंता स्वाभाविक थी, क्योंकि आजकल हर कोई उस लड़की से शादी करने से कतराता है, जिस के शरीर में कोई कमी हो.

सयानी होती किरण की भी समझ में यह बात आ गई थी कि एक आंख कमजोर होने की वजह से सपनों का कोई राजकुमार उसे ब्याहने नहीं आएगा. शादी होगी भी तो वह बेमेल ही होगी, इसलिए उस ने काफी सोचविचार के बाद तय कर लिया कि जो भी होगा, देखा जाएगा. हालफिलहाल तो पढ़ाई और कैरियर पर ध्यान दिया जाए. अपने एकलौते भाई राजू को वह बहुत चाहती थी, जो बाहर की भागादौड़ी के सारे काम तेजी और संयम से निपटाता था. यही नहीं, वह पढ़ाई में भी ठीकठाक था.

छोटी बहन आरती भोपाल के प्रतिष्ठित सैम कालेज में पढ़ रही थी. किरण भी वहीं से बीकौम की पढ़ाई कर रही थी. वह स्वाभिमानी भी थी और समझदार भी, लिहाजा उस ने मीनाल रेजीडेंसी स्थित एजिस नाम के कालसैंटर में पार्टटाइम नौकरी कर ली थी. वहां से मिलने वाली तनख्वाह से वह अपनी पढ़ाई का और अन्य खर्च उठा लेती थी.

21 अक्तूबर, 2016 को किरण अपने घर ई-34 सिद्धार्थ लेकसिटी, आनंदनगर से रोज की तरह कालेज जाने को तैयार हुई तो घर का माहौल रोज की तरह ही था. चायनाश्ते का दौर खत्म हो चुका था और सभी अपनेअपने औफिस, स्कूल और कालेज जाने के लिए तैयार हो रहे थे.

किरण भी तैयार थी. वह कालेज के लिए घर से निकलने लगी तो चाचा संबल कौरव से खर्चे के लिए कुछ पैसे मांगे. उन्होंने उसे 20 रुपए दे दिए. किरण का भाई राजू भी तैयार था, इसलिए किरण उस के साथ चली गई. ऐसा लगभग रोज ही होता था कि जब किरण जाने लगती थी तो राजू उस के साथ हो लेता था और उसे सैम कालेज के गेट पर छोड़ देता था. उस दिन भी उस ने किरण को कालेज के गेट पर छोड़ा तो वह चुपचाप अंदर दाखिल हो गई. उन दिनों सैम कालेज में निर्माण कार्य चल रहा था.

राजू को कतई अहसास नहीं था कि बहन के दिलोदिमाग में एक ऐसा तूफान उमड़ रहा है, जो उस की जिंदगी लील लेगा. वह दीदी को बाय कह कर वापस चला गया तो किरण सीधे कालेज की निर्माणाधीन बिल्डिंग ब्लौक की छत पर जा पहुंची और चौथी मंजिल पर जा कर खड़ी हो गई. उस के दिल में उमड़ता तूफान अब शबाब पर था, जिस का मुकाबला करने की हिम्मत अब उस में नहीं रह गई थी. लिहाजा वह चौथी मंजिल से सीधे नीचे कूद गई.

इस के बाद सैम कालेज में हल्ला मच गया. इतनी ऊंचाई से नीचे कूदने के बाद किरण के जिंदा बचने का कोई सवाल ही नहीं था. जरा सी देर में छात्रों की भीड़ इकट्ठा हो गई. इस बात की खबर कालेज प्रबंधन तक भी पहुंच गई. फलस्वरूप उसे तुरंत नजदीकी नर्मदा अस्पताल पहुंचाया गया. अस्पताल से पुलिस को खबर कर दी गई. किरण को देखने के बाद डाक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया.

कालेज प्रबंधन ने किरण की बहन आरती को इस हादसे की सूचना दी तो उस ने घर वालों को बताया. घर वाले भागेभागे नर्मदा अस्पताल पहुंचे, लेकिन तब तक किरण दुनिया को अलविदा कह चुकी थी. उस के पास से कोई सुसाइड नोट भी नहीं मिला था, जबकि आमतौर पर ऐसा नहीं होता कि कोई पढ़ीलिखी समझदार युवती खुदकुशी करे और सुसाइड नोट न छोड़े. पर इस मामले में ऐसा ही हुआ था. कौरव परिवार में रोनाधोना मच गया था. किरण के सहपाठी भी दुखी थे कि आखिर जिंदादिल किरण ने ऐसा आत्मघाती कदम क्यों उठाया.

पुलिस ने जांच को आगे बढ़ाते हुए छानबीन और पूछताछ शुरू की. जिस खुदकुशी को गुत्थी समझा जा रहा था, वह चंद घंटों में सुलझ गई, जो प्यार में धोखा खाई हीनभावना से ग्रस्त एक लड़की की दर्दभरी छोटी सी कहानी निकली.

किरण ने सुसाइड नोट छोड़ने की जरूरत शायद इसलिए नहीं समझी थी, क्योंकि उसे जो कहना था, उसे वह अपने फेसबुक एकाउंट में लिख चुकी थी. किरण के घर और कालेज वाले यह जान कर हैरान हो उठे थे कि किरण किसी से प्यार करती थी और वह भी इतना अधिक कि अपने प्रेमी की बेरुखी से घबरा गई थी और उसे कई दिनों से मनाने की कोशिश कर रही थी.

सैम कालेज से बीई कर रहा रोहित किरण का बौयफ्रैंड था, जो बीते कुछ दिनों से उसे भाव नहीं दे रहा था. रोहित की दोस्ती और प्यार ने किरण के मन में जीने की उम्मीद जगा दी थी, उस की नींद में कई रोमांटिक ख्वाब पिरो दिए थे. इस से उसे लगने लगा था कि अभी भी दुनिया में ऐसे तमाम लड़के हैं, जो प्यार के सही मतलब समझते हैं. जातिपांत, ऊंचनीच और शारीरिक कमियों पर ध्यान नहीं देते. उन के लिए सूरत से ज्यादा सीरत अहम होती है.

सब कुछ ठीकठाक चल रहा था, पर कुछ दिनों से रोहित का मूड उखड़ाउखड़ा रहता था. वह किरण से बात भी नहीं कर रहा था. उस का यह रवैया किरण की समझ में नहीं आ रहा था. अगर रोहित उसे वजह बताता तो तय था कि वह किसी न किसी तरह उसे मना लेती, कोई गलतफहमी होती तो वह उसे दूर कर देती. लेकिन रोहित की इस बेरुखी से किरण को अपने ख्वाब उजड़ते नजर आए और वह खुद को ठगा सा महसूस करने लगी.

जब प्रेमी बात ही नहीं कर रहा था तो वह क्या करती  लिहाजा किरण ने फेसबुक पर कशिश कौरव नाम से बनाए अपने एकाउंट पर मन की व्यथा साझा करनी शुरू कर दी. अपने पोस्टों में उस ने बौयफ्रैंड के छोड़े जाने यानी ब्रेकअप की बात कही और भावुकता में अपने सुसाइड की बात भी कह डाली थी. शायद ही नहीं, निश्चित रूप से वह अपने प्रेमी को अपने दिल का दर्द बताना चाह रही थी, जो उस की सांसों में बस चुका था.

एक जगह उस ने शायराना अंदाज में लिखा था, ‘ऐ इश्क तुझे खुदा की कसम या तो मुझे मेरा प्यार दे या फिर मुझे मार दे.’

प्यार नहीं मिला तो किरण ने खुद के लिए मौत चुनने की नादानी कर डाली, वह भी इस तरह कि कोई रोहित पर सीधे अंगुली न उठा सके. लेकिन फेसबुक एकाउंट में अपने प्यार और प्रेमी की बेरुखी की चर्चा कर के उस ने उसे शक के दायरे में तो ला ही दिया था. दूसरे दिन पुलिस ने साईंखेड़ा स्थित रोहित के घर में दबिश दी, लेकिन वह घर पर नहीं मिला. जाहिर है, किरण की खुदकुशी के बाद वह गिरफ्तारी के डर से फरार हो गया था.

पुलिस ने कालेज में पूछताछ की तो एक बात यह भी सामने आई कि रोहित और किरण में दोस्ती तो थी, पर प्यार जैसी कोई बात उन के बीच नहीं थी. किरण की कुछ सहेलियों ने दबी जुबान से स्वीकार किया था कि वह रोहित से एकतरफा प्यार करती थी. इस का मतलब तो यही हुआ कि किरण दोस्ती को प्यार मानते हुए जबरदस्ती रोहित के गले पड़ना चाहती थी. इस बात का खुलासा अब रोहित ही कर सकता है, जो कथा लिखे जाने तक पुलिस की पकड़ में नहीं आया था.

किरण भावुक थी और रोहित को ले कर शायद वह जरूरत से ज्यादा जज्बाती हो गई थी. इस की एक वजह उस की आंख की विकृति से उपजी हीनभावना भी हो सकती है. रोहित से दोस्ती के बाद निस्संदेह उस की यह सोच और भी गहरा गई होगी. फेसबुक पर उस ने तरहतरह से रोहित को मनाने की कोशिश की थी, लेकिन असफल रही थी.

जब उसे लगा कि यार और प्यार नहीं तो जिंदगी क्यों, जो अब किसी के काम की नहीं. यही सोच कर उस ने यह खतरनाक फैसला ले डाला होगा.

कौरव परिवार ने इस गम में दिवाली नहीं मनाई. उन्हें अपनी लाडली किरण की मौत के बारे में यकीन ही नहीं हो रहा है. उन्हें लगता ही नहीं कि अब वह इस दुनिया में नहीं है. डालचंद के चेहरे पर विषाद है, पर इसलिए नहीं कि किरण ने उन की चिंता हमेशा के लिए दूर कर दी है, बल्कि इसलिए कि उन की बेटी ने जल्दबाजी में आत्मघाती फैसला ले लिया और खुद ही हमेशा के लिए उन से दूर चली गई.

रोहित का कुछ खास बिगड़ेगा, ऐसा नहीं लग रहा. क्योंकि उस ने अगर किरण से कुछ वादे किए भी होंगे तो उन के प्रमाण नहीं हैं और न ही किरण ने उसे सीधे तौर पर अपनी खुदकुशी का जिम्मेदार ठहराया है.

संभव है कि वह दोस्ती को प्यार समझते हुए मन ही मन रोहित को चाहने लगी हो और ठुकराए जाने पर व्यथित हो कर टूट गई हो. लेकिन वह हौसला और सब्र रख कर जिंदा रहती तो शायद बात बन जाती. Love Stories

Pune Crime News: रासिला ने ऐसा सोचा भी न था

Pune Crime News: आईटी क्षेत्र में बंगलुरु की इंफोसिस सौफ्टवेयर कंपनी का एक बड़ा नाम है. केरल की रहने वाली रासिला ओ.पी. इसी कंपनी के पुणे फेज-2 स्थित कंपनी में नौकरी करती थी. वह सौफ्टवेयर इंजीनियर थी. इस कंपनी के प्रोजेक्ट इतने महत्त्वपूर्ण होते हैं कि उन्हें पूरा करने के लिए कर्मचारियों और अधिकारियों को कभीकभी 24-24 घंटे तक काम करना पड़ता है. 29 जनवरी को रविवार था.

शहर के अधिकांश औफिस और प्रतिष्ठान बंद थे. लेकिन इंफोसिस कंपनी का एक प्रोजेक्ट इतना अर्जेंट था कि उसे पूरा करने के लिए कर्मचारियों को रविवार को भी औफिस आना पड़ा था. इस प्रोजेक्ट को पूरा करने की जिम्मेदारी पुणे और बंगलुरु टीम को सौंपी गई थी. रासिला भी उस दिन इसी प्रोजेक्ट की वजह से औफिस आई थी. बंगलुरु में कुछ कर्मचारी अपनेअपने घरों में बैठ कर उस की मदद कर रहे थे.

कंपनी का प्रोजेक्ट लगभग पूरा हो गया था. केवल कुछ ही औपचारिकताएं बाकी रह गई थीं कि शाम 7 बजे अचानक रासिला और बंगलुरु टीम के बीच फोन और ईमेल से होने वाली बातचीत बंद हो गई. बंगलुरु के कर्मचारी समझ नहीं पाए कि अचानक यह क्या हो गया.

तमाम कोशिशों के बाद भी रासिला और बंगलुरु के कर्मचारियों के बीच जब संपर्क नहीं हो पाया तो उन के मन में तरहतरह की आशंकाएं जन्म लेने लगीं. उन्होंने पुणे के बड़गांव में रहने वाले इंफोसिस सौफ्टवेयर के सीनियर एसोसिएट कंसलटेंट और रासिला के प्रोजेक्ट रिपोर्टिंग मैनेजर अभिजीत कोठारी को फोन किया.

उन्हें सारी बातें बता कर रासिला के विषय में पता लगाने के लिए कहा. अभिजीत ने उसी वक्त रासिला को फोन लगाया. उस के फोन की घंटी तो बज रही थी, पर वह फोन नहीं उठा रही थी. इस के बाद उन्होंने पुणे फेज-2 स्थित कंपनी के औफिस के लैंडलाइन पर फोन किया.

फोन एक सिक्योरिटी गार्ड ने उठाया. उस ने अभिजीत को बताया कि वह ड्यूटी पर अभीअभी आया है. उस के पहले ड्यूटी पर सिक्योरिटी गार्ड भावेन सैकिया था. वह अपनी ड्यूटी पूरी कर के अपना चार्ज उसे दे कर चला गया है. अभिजीत कोठारी ने जब ड्यूटी पर मौजूद गार्ड से रासिला के बारे में पूछा तो गार्ड रासिला की केबिन में गया. इस के बाद उस गार्ड ने जो जानकारी दी, उसे सुन कर उन के पैरों तले से जमीन खिसक गई.

फिर क्या था, कुछ ही देर में अभिजीत कोठारी इंफोसिस के औफिस पहुंच गए. उन्होंने देखा कि औफिस के अंदर रासिला की खून से लथपथ लाश पड़ी थी. शव के आसपास काफी खून फैला था. चेहरा पूरी तरह किसी भारी और ठोस वस्तु से कुचला गया था. अभिजीत कोठारी ने मामले की जानकारी कंपनी के प्रमुख अधिकारियों और रासिला के परिवार वालों को देने के बाद थाना हिंजवाली पुलिस को दे दी थी.

थाना हिंजवाली के थानाप्रभारी अरुण वायकर अपने सहायकों के साथ तुरंत घटनास्थल पर पहुंच गए. हत्या की जानकारी अपने वरिष्ठ अधिकारियों को दे कर वह मामले की जांच में जुट गए. वह घटनास्थल का निरीक्षण कर रहे थे कि पुणे शहर के डीसीपी गणेश शिंदे, एसीपी वैशाली जाधव भी घटनास्थल पर आ गईं.

उन के साथ डौग स्क्वायड और फिंगरप्रिंट ब्यूरो के अधिकारी भी आए थे. सभी ने घटनास्थल का बारीकी से निरीक्षण किया तो पाया कि रासिला की हत्या की बड़ी बेरहमी से की गई थी. उस के गले में एक पीले रंग का तार लपेटा हुआ था. वह कंप्यूटर का तार था. पुलिस यह जानने की कोशिश करने लगी कि ऐसा कौन व्यक्ति हो सकता है, जिस ने इस की हत्या के बाद चेहरा तक कुचल दिया.

घटनास्थल की काररवाई पूरी कर के पुलिस ने लाश को पोस्टमार्टम के लिए पुणे के मसन अस्पताल भिजवा दिया. इस के बाद कंपनी के प्रोजेक्ट मैनेजर अभिजीत कोठारी की ओर से रासिला की हत्या का मुकदमा दर्ज कर मामले की जांच शुरू कर दी. शुरुआती जांच में पुलिस को पता चला कि रासिला जिस केबिन में बैठती थी, वह बेहद सुरक्षित थी.

उस का दरवाजा एक विशेष कार्ड के टच होने पर ही खुलता था. इस से पुलिस को यही लगा कि उस की हत्या में किसी ऐसे आदमी का हाथ है, जिस का उस केबिन में आनाजाना था. इस संबंध में पुलिस ने कंपनी के कर्मचारियों से पूछताछ की तो कंपनी का सिक्योरिटी गार्ड भावेन सैकिया पुलिस के शक के दायरे में आ गया. इस के बाद कंपनी के सीसीटीवी कैमरों की फुटेज देखी गई तो स्पष्ट हो गया कि सिक्योरिटी गार्ड भावेन ने ही रासिला की हत्या की थी.

एसीपी वैशाली जाधव के निर्देशन में जब पुलिस टीम सिक्योरिटी गार्ड भावेन के घर पर पहुंची तो वह घर पर नहीं मिला. उस के घर के दरवाजे पर ताला लगा था. पड़ोसियों ने बताया कि भावेन की मां की तबीयत अचानक खराब हो गई थी, इसलिए वह अपने गांव चला गया है. जिस सिक्योरिटी एजेंसी में उस की नियुक्ति थी, उस से संपर्क कर पुलिस ने भावेन के बारे में सारी जानकारी ले ली.

जहांजहां से भावेन के गांव जाने के साधन मिलते थे, उन सभी रास्तों पर नाकेबंदी करवा दी गई. इस के अलावा जांच टीम को 7 भागों में विभाजित कर उन्हें महानगर मुंबई और पुणे के विभिन्न इलाकों के लिए रवाना कर दिया गया. रासिला की हत्या पुणे पुलिस के लिए प्रतिष्ठा का प्रश्न बन चुकी थी. क्योंकि पिछले साल आईटी प्रोफेशनल महिला ज्योति कुमारी, नयना पुजारी, दर्शना टोगारी और अंतरा दास की कंपनी के सिक्योरिटी गार्डों द्वारा जिस तरह हत्याएं की गई थीं, उसे देख कर आईटी कंपनियों में काम करने वाली महिलाओं के भीतर डर का माहौल बन गया था.

इसलिए इस मामले का खुलासा करने के लिए वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों पर दबाव बढ़ गया था. यही वजह थी कि एसीपी वैशाली जाधव ने इस मामले की जांच अपने हाथों में ले ली थी. आखिरकार एसीपी वैशाली जाधव और उन की टीम की मेहनत रंग लाई और 8 घंटे की कोशिश के बाद सौफ्टवेयर इंजीनियर रासिला के हत्यारे भावेन सैकिया को महानगर मुंबई के छत्रपति शिवाजी रेलवे स्टेशन से गिरफ्तार कर लिया गया.

पुलिस टीम जिस समय छत्रपति शिवाजी रेलवे स्टेशन पहुंची थी, उस समय रात के लगभग 3 बज रहे थे. भावेन सैकिया अपना पूरा चेहरा कंबल के नीचे ढक कर टिकट खिड़की के पास बैठा खिड़की के खुलने का इंतजार कर रहा था. मुखबिर के इशारे पर पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर लिया था.

सिक्योरिटी गार्ड भावेन सैकिया को ले कर पुलिस पुणे आ गई. उस से थोड़ी पूछताछ कर के उसे पुणे के प्रथम श्रेणी दंडाधिकारी ए.एस. वारूलकर के सामने पेश कर 4 फरवरी, 2017 तक की रिमांड पर ले लिया. पूछताछ में उस ने अपना जुर्म स्वीकार कर लिया. उस ने इस हत्याकांड की जो कहानी बताई, इस प्रकार निकली.

27 वर्षीय भावेन सैकिया मूलरूप से असम के गांव ताती विहार का रहने वाला था. उस के पिता ने 3 शादियां की थीं. भावेन सैकिया उन की तीसरी पत्नी का बेटा था. भावेन महत्त्वाकांक्षी के साथ पढ़ाईलिखाई में भी होशियार था.

उस का स्वभाव उग्र था. इस वजह से उस की अपने सौतेले भाइयों से नहीं पटती थी. 12वीं कक्षा में अच्छे अंक पाने के बाद उस ने स्नातक की पढ़ाई करनी चाही पर उस के सौतेले भाई नहीं चाहते थे कि वह पढ़े. किसी न किसी बात को ले कर वह उस से झगड़ने लगते थे. फिर एक दिन झगड़ा इतना बढ़ गया कि सन 2013 में उस ने अपने सौतेले भाई की हत्या कर दी. हत्या के बाद वह घर से फरार हुआ तो वापस गांव नहीं लौटा.

सन 2014 में वह पुणे पहुंच गया और वहां की एक सिक्योरिटी एजेंसी में सिक्योरिटी गार्ड के पद पर उस की नौकरी लग गई. कंपनी की तरफ से भावेन की तैनाती इंफोसिस सौफ्टवेयर कंपनी के औफिस में हो गई. उस ने औफिस के पास ही हिजवाड़ी जयरामनगर के फेज-3 में एक कमरा किराए पर ले लिया.

नौकरी के दौरान उस में काफी परिवर्तन आ गया था. औफिस में काम करने वाली लड़कियों को वह चाहत की निगाहों से देखता. खूबसूरत लड़कियां उस की कमजोरी बन गई थीं. किसी न किसी बहाने वह उन से बातें करता और उन्हें छूने की कोशिश करता था. इसी प्रकार की कोशिश जब उस ने रासिला ओ.पी. के साथ की तो उस ने भावेन की बात अनदेखी नहीं की, बल्कि उस से अपनी नाराजगी भी जता दी.

घटना के 2 दिन पहले रासिला ने भावेन सैकिया को अपने केबिन में बुला कर काफी डांटाफटकारा और उस की हरकतों की शिकायत ईमेल द्वारा उस की सिक्योरिटी कंपनी के वरिष्ठ अधिकारियों से करने की भी धमकी दी. इस धमकी से भावेन काफी डर गया था. उसे लग रहा था कि रासिला उस की शिकायत जरूर कर देगी. उस की शिकायत पर उसे अपनी नौकरी जाने का डर था.

24 वर्षीय रासिला ओझम पोईल पुराईत उर्फ रासिला ओ.पी. मूलरूप से केरल राज्य के कालीकट जिले के गांव कुदमंगलम की रहने वाली थी. उस के पिता ओझम पोईल पुराईत उर्फ राजू ओ.पी. होमगार्ड में एक तृतीय श्रेणी कर्मचारी थे. परिवार में उस के और पिता के अलावा एक बड़ा भाई तेजस कुमार ओ.पी. था. मां पुष्पलता का देहांत उस समय हो गया, जब छोटी थी. दोनों भाईबहन का बचपन बहुत ही गरीबी में बीता था. पिता से ही दोनों को मां का प्यार मिला था. घर की परिस्थतियों को देखते हुए दोनों बच्चों ने मन लगा कर पढ़ाई की.

रासिला और तेजस कुमार दोनों ने 98 प्रतिशत अंकों से 12वीं की परीक्षा पास की. इंजीनियरिंग की परीक्षाएं भी दोनों ने प्रथम श्रेणी से पास की थीं. इंजीनियरिंग के बाद तेजस कुमार को आबूधाबी की एयरलाइंस कंपनी में और रासिला की बंगलुरु की इंफोसिस सौफ्टवेयर कंपनी में असिस्टैंट इंजीनियर के पद पर नौकरी लग गई. अपने बच्चों को अच्छी जगह और अच्छे पद पर देख कर राजू ओ.पी. की सारी चिंताएं दूर हो गईं. रासिला की अच्छी पोस्ट देख कर तो उस की शादी के रिश्ते भी आने शुरू हो गए थे.

रासिला खूबसूरत तो थी ही, साथ ही वह कंपनी की जिस पोस्ट पर काम करती थी, उस की जिम्मेदारी भी अच्छी तरह निभा रही थी. अपने काम और व्यवहार से उस ने कंपनी के कई वरिष्ठ अधिकारियों के दिल में एक खास जगह बना ली थी. इस श्रेणी में एक बड़ा अधिकारी ऐसा था जो रासिला को अपने दिल में एक खास जगह देना चाहता था, पर रासिला को वह पसंद नहीं था. जिस के कारण वह अधिकारी रासिला से चिढ़ गया और उसे किसी न किसी बहाने परेशान करने लगा.

उस अधिकारी से परेशान हो कर रासिला ने कुछ वरिष्ठ अधिकारियों से उस की शिकायत कर दी. साथ ही अपना इस्तीफा भी दे दिया. लेकिन कंपनी ने उस का इस्तीफा स्वीकार नहीं किया. बल्कि कंपनी ने रासिला का ट्रांसफर इंफोसिस कंपनी की पुणे ब्रांच में कर दिया और पुणे के हिजवाड़ी के जयरामनगर फेज-1 में उस के रहने की व्यवस्था भी कर दी. पुणे ब्रांच में रासिला को आए अभी 5 महीने ही हुए थे कि उसे औफिस के सिक्योरिटी गार्ड भावेन सैकिया से दोचार होना पड़ा.

घटना के दिन सारा औफिस बंद होने के बावजूद भी कंपनी द्वारा सौंपे गए प्रोजेक्ट को पूरा करने के लिए रासिला को अपने औफिस आना पड़ा था. दिन के 2 बजे जब वह अपने औफिस में पहुंची तो काफी खुश थी. उस समय सिक्योरिटी गार्ड भावेन अपनी ड्यूटी पर तैनात था. रासिला ने अपने एक्सेस कार्ड से केबिन का लौक खोला और केबिन के अंदर जा कर अपने बंगलुरु ब्रांच के कुछ साथियों के साथ औनलाइन जुड़ कर अपने प्रोजेक्ट की तैयारी में जुट गई थी.

इधर रासिला की धमकी और अपनी नौकरी को ले कर भावेन काफी परेशान था. उस की समझ में नहीं आ रहा था कि वह क्या करे क्या न करे. शिकायत को अपने वरिष्ठ अधिकारियों तक जाने से कैसे रोके इसी बारे में वह सोचने लगा. सोचविचार करने के बाद उस ने खतरनाक फैसला ले लिया.

उस समय रासिला औफिस में अकेली थी. बातचीत करने के लिए मौका अच्छा था. अपनी हरकतों की माफी मांगने के बहाने वह रासिला के केबिन में जाने में कामयाब हो गया. केबिन के अंदर पहुंचते ही उस ने रासिला से कहा, ‘‘मैडम, आप मेरी शिकायत मेरे अधिकारियों से नहीं करना वरना मेरी नौकरी चली जाएगी और मैं बेकार हो जाऊंगा.’’ वह गिड़गिड़ाया.

रासिला ने एक बार गार्ड के चेहरे को देखा. जिस पर मिलेजुले खौफ का असर स्पष्ट दिखाई पड़ रहा था. हालांकि रासिला ने उस की हरकतों को नजरअंदाज कर दिया था. लेकिन वह उसे थोड़ा और सबक सिखाना चाहती थी, जिस से वह सुधर जाए. इसलिए वह गंभीर होते हुए बोली, ‘‘नौकरी चली जाएगी, बेकार हो जाओगे तो मैं क्या करूं. तुम्हें  लड़कियों को परेशान करने का बड़ा शौक है न, अब भुगतो, मैं ने तो तुम्हारी शिकायत तुम्हारी कंपनी के सीनियर अधिकारियों को ईमेल से कर दी है. अब जाओ गांव में ही बैठना.’’

यह सुन कर भावेन का चेहरा क्रोध से तमतमा उठा. अपने आपे से बाहर होते हुए उस ने इंटरनेट का वायर खींच कर रासिला के गले में डालते हुए कहा, ‘‘मैडम, यह तुम ने अच्छा नहीं किया. अब तुम्हें इस की सजा तो भुगतनी ही पड़ेगी.’’

रासिला उस का इरादा जान कर अपने बचाव के लिए काफी चीखीचिल्लाई. पर उस वक्त उस की मदद के लिए वहां कोई नहीं था. उस ने उस इंटरनेट वायर से रासिला का गला घोंट दिया. उस की हत्या करने के बाद उस ने अपने बूटों से ठोकरें मारमार कर उस का चेहरा लहूलुहान कर दिया.

रासिला की हत्या करने के बाद जब भावेन का गुस्सा शांत हुआ तो वह बाहर आ कर आराम से अपनी जगह बैठ गया. उसे पुलिस और कानून का डर लगने लगा. उस की समझ में नहीं आ रहा था कि वह अब कहां जाए. गांव जा नहीं सकता था, क्योंकि उस पर सौतेले भाई की  हत्या का आरोप था. पुणे और गांव की पुलिस से बचने के लिए उस के पास कोई रास्ता नहीं था. ऐसे में उसे बस आत्महत्या के अलावा और कोई चारा नहीं दिखा.

उस की ड्यूटी का टाइम भी पूरा हो चुका था. जैसे ही दूसरा सिक्योरिटी गार्ड शिफ्ट बदलने आया तो उसे जिम्मेदारी सौंप कर भावेन औफिस से निकल गया. आत्महत्या करने के लिए वह पुणे रेलवे स्टेशन पर पहुंचा ताकि किसी टे्रेन के सामने कूद कर जीवनलीला खत्म कर ले लेकिन ऐसा करने की उस की हिम्मत नहीं हुई.

फिर उस ने आत्महत्या करने के बजाय किसी दूसरे शहर में जाने का इरादा बनाया. अपने कमरे से उसे कुछ जरूरी सामान भी साथ लेना था. इसलिए कमरे पर पहुंच कर उस ने पड़ोसियों से झूठ कह दिया कि उस की मां की तबीयत खराब है. बैग में कपड़े आदि भर कर वह महानगर मुंबई के छत्रपति शिवाजी रेलवे स्टेशन पहुंचा. वहां से टिकिट ले कर उसे अपनी किसी मंजिल की ओर रवाना होना था. पर इस के पहले ही वह पुलिस के हत्थे चढ़ गया. भावेन मराली सैकिया से विस्तार से पूछताछ करने के बाद पुलिस ने न्यायालय में पेश कर उसे जेल भेज दिया.

पुलिस ने रासिला ओ.पी. के शव को पोस्टमार्टम के बाद उस के पिता राजू ओ.पी. और परिजनों को सौंप दिया. पिता और परिवार वालों का कहना था कि रासिला की हत्या एक साजिश के तहत इंफोसिस कंपनी के ही एक बड़े अधिकारी ने कराई है, जिस की शिकायत उन्होंने हिजवाड़ी पुलिस थाने में दर्ज करवा दी.

पुलिस ने उन्हें भरोसा दिया कि रासिला की हत्या के मामले में जो भी दोषी होगा, उस के खिलाफ सख्त काररवाई की जाएगी. मामले की जांच थानाप्रभारी अरुण वायकर कर रहे थे. कथा लिखे जाने तक भावेन सैकिया की जमानत नहीं हो सकी थी. Pune Crime News

– कथा पुलिस सूत्रों पर आधारित

Kanpur Crime: बदले का प्यार – क्या रीता को मिल पाया अपना प्यार

Kanpur Crime: 2 हत्याओं की बात थी, इसलिए सूचना मिलते ही एसपी (ग्रामीण) जयप्रकाश सिंह, सीओ अजय कुमार और थानाप्रभारी प्रयाग नारायण वाजपेयी गांव अज्योरी पहुंच गए थे. यह गांव उत्तर प्रदेश के महानगर कानपुर के थाना सजेती के अंतर्गत आता है. दोनों हत्याएं इसी गांव के श्रीपाल के घर हुई थीं. यह 19 अगस्त, 2017 की बात है.

पुलिस अधिकारी श्रीपाल के घर के अंदर  घुसे तो वहां की हालत देख कर दहल उठे. आंगन  में 2 लाशें खून से सनी अगलबगल पड़ी थीं. एक लाश युवक की थी तो दूसरी युवती की. युवक की उम्र 25 साल के आसपास थी, जबकि युवती की 20 साल के आसपास थी. दोनों लाशों के बीच 315 बोर का एक तमंचा और कारतूस के 2 खोखे भी पड़े थे.

पुलिस अधिकारी यह देख कर सोच में पड़ गए कि युवती की लाश पर तो घर वाले बिलख रहे थे, जबकि युवक की लाश पर वहां कोई रोने वाला नहीं था. एसपी जयप्रकाश सिंह ने श्रीपाल से इस बारे में पूछा तो उस ने कहा, ‘‘साहब, युवती मेरी बेटी रीता है और युवक मेरे दामाद बबलू का छोटा भाई पीयूष उर्फ छोटू. इसी ने गोली मार कर पहले रीता की हत्या की होगी, उस के बाद खुद को गोली मार आत्महत्या कर ली है. जब इस ने यह सब किया, तब घर में कोई नहीं था.’’

‘‘इस ने ऐसा क्यों किया?’’ जयप्रकाश सिंह ने पूछा.

‘‘साहब, पीयूष रीता से एकतरफा प्यार करता था और शादी के लिए परेशान कर रहा था. जबकि रीता उस से शादी नहीं करना चाहती थी. आज भी इस ने शादी के लिए ही कहा होगा, रीता ने मना किया होगा तो उस ने उसे मार डाला.’’ श्रीपाल ने कहा.

‘‘तुम ने पीयूष के घर वालों को इस घटना की सूचना दे दी है?’’

‘‘जी साहब, मैं ने फोन कर के इस के पिता और भाई को बता दिया है. लेकिन उन्होंने आने से साफ मना कर दिया है.’’ श्रीपाल ने कहा.

‘‘क्यों?’’ जयप्रकाश सिंह ने पूछा.

‘‘साहब, इस की हरकतों से पूरा परिवार परेशान था. यह घर वालों से रीता से शादी कराने के लिए कहता था, शराब पी कर झगड़ा करता था, इसलिए घर वाले इस से त्रस्त थे. यही वजह है कि इस की मौत की खबर पा कर भी कोई आने को तैयार नहीं है.’’

इस के बाद सीओ अजय कुमार ने पीयूष के पिता विश्वंभर को फोन किया तो उस ने कहा, ‘‘साहब, मिट्टी का तेल डाल कर आप उस की लाश को जला दीजिए. उस ने जो किया है, उस से मैं किसी को मुंह दिखाने लायक नहीं रहा. अब मैं उस का मुंह नहीं देखना  चाहता.’’

इस के बाद अजय कुमार ने उस के बडे़ भाई बबलू को फोन किया तो उस ने भी यह कह कर आने से मना कर दिया कि उस की हरकतों से परेशान हो कर उस ने तो पहले ही उस से संबंध खत्म कर लिए थे. अब तक फोरेंसिक टीम आ चुकी थी. उस ने अपना काम कर लिया तो थानाप्रभारी प्रयाग नारायण वाजपेयी ने दोनों लाशों का पंचनामा तैयार कर उन्हें पोस्टमार्टम के लिए हैलट अस्पताल भिजवा दिया.

इस के बाद रीता के घर वालों से विस्तार से पूछताछ की गई. इस पूछताछ में हत्या की जो कहानी निकल कर सामने आई, वह इस प्रकार थी—

कानपुर के कस्बा सजेती से 3 किलोमीटर की दूरी पर सड़क किनारे बसा है गांव अज्योरी. इसी गांव में श्रीपाल अपनी पत्नी, 2 बेटियों गुड्डी, रीता और 2 बेटों रविंद्र एवं अरविंद के साथ रहता था. उस के पास खेती की जो जमीन थी, उसी की पैदावार से वह अपना गुजरबसर करता था.

श्रीपाल की बड़ी बेटी गुड्डी ने दसवीं पास कर के पढ़ाई छोड़ दी तो उन्होंने कानपुर के थाना नौबस्ता के मोहल्ला मछरिया के रहने वाले विश्वंभर के बेटे बबलू से उस का विवाह कर दिया. विश्वंभर का अपना मकान था. भूतल पर किराने की दुकान थी, जिसे वह संभालते थे. बबलू नौकरी करता था, जबकि उस से छोटा पीयूष ड्राइवर था.

पीयूष ट्रक चलाता था. उसे जो भी वेतन मिलता था, वह खुद पर ही खर्च करता था. घर वालों को एक पैसा नहीं देता था. हां, अगर गुड्डी कुछ कह देती तो वह उस की फरमाइश पूरी करता था. देवरभाभी में पटती भी खूब थी. दोनों के बीच हंसीमजाक भी खूब होती थी. लेकिन इस हंसीमजाक में दोनों मर्यादाओं का खयाल जरूर रखते थे.

गुड्डी की छोटी बहन रीता बेहद खूबसूरत थी. उस की इस खूबसूरती में चारचांद लगाता था उस का स्वभाव. वह अत्यंत सौम्य और मृदुभाषी थी. जवानी की दहलीज पर उस ने कदम रखा तो उस की खूबसूरती और बढ़ गई. देखने वालों की निगाहें जब उस पर पड़तीं, ठहर कर रह जातीं. रीता तनमन से जितनी खूबसूरत थी, उतना ही पढ़ने में भी तेज थी. इस समय वह बीए फाइनल ईयर में पढ़ रही थी. अपने स्वभाव और पढ़ाई की वजह से रीता मांबाप की ही नहीं, भाइयों की भी आंखों का तारा थी.

पीयूष जब कभी भाई की ससुराल जाता, उस की नजरें रीता पर ही जमी रहतीं. मौका मिलने पर वह उस से हंसीमजाक और छेड़छाड़ भी कर लेता था. जीजासाली का रिश्ता होने की वजह से रीता ज्यादा विरोध भी नहीं करती थी. शरमा कर आंखें झुका लेती थी. इस से पीयूष को लगता था कि रीता उस में दिलचस्पी ले रही है.

इसी साल जून महीने की एक तपती दोपहर को पीयूष ट्रक ले कर हमीरपुर जा रहा था. घाटमपुर कस्बा पार करते ही उस का ट्रक खराब हो गया. उस ने ट्रक खलासी के हवाले किया और खुद आराम करने की गरज से भाई की ससुराल पहुंच गया. संयोग से उस समय रीता घर में अकेली थी. छोटे जीजा को देख कर रीता ने मुसकराते हुए पूछा, ‘‘आप चाय पिएंगे या शरबत?’’

‘‘चिलचिलाती धूप से आ रहा हूं. अभी कुछ भी पीने से तबीयत खराब हो सकती है.’’ अंगौछे से पसीना पोंछते हुए पीयूष ने कहा.

‘‘जीजाजी, आप आराम कीजिए मैं टीवी देख रही हूं. आप को जब भी कुछ पीना हो, बता दीजिएगा.’’ रीता ने कहा.

‘‘टीवी पर देहसुख वाली फिल्म देख रही हो क्या?’’ पीयूष ने हंसी की.

शरमाते हुए रीता ने कहा, ‘‘जीजाजी, आप इस तरह की फालतू बातें मत किया कीजिए.’’

‘‘रीता यह फालतू की बात नहीं, इसी में जिंदगी का सच है.’’

‘‘कुछ भी हो, मुझे इस तरह की बातों में कोई रुचि नहीं है.’’ कहते हुए रीता कमरे से चली गई.

थोड़ी देर आराम करने के बाद पीयूष ने पानी मांगा तो रीता गिलास में ठंडा पानी ले आई. उसे देख कर पीयूष ने कहा, ‘‘रीता, तुम सचमुच बहुत सुंदर हो. तुम्हें देख कर किसी का भी मन डोल सकता है. मेरा भी जी चाहता है कि तुम्हें अपनी बांहों में भर लूं.’’

रीता ने अदा से मुसकराते हुए कहा, ‘‘अभी धीरज रखो जीजाजी और आराम से पानी पियो. मुझे बांहों में भरने का सपना रात में देखना.’’

इस के बाद दोनों खिलखिला कर हंस पड़े. पीयूष मन ही मन सोचने लगा कि रीता उस की किसी भी बात का बुरा नहीं मानती है. इस का मतलब उस के दिल में भी वही सब है, जो वह उस के बारे में सोचता है. जिस तरह वह रीता को चाहता है, उसी तरह रीता भी मन ही मन उसे चाहती है.

रीता के प्यार में आकंठ डूबा पीयूष उसे अपनी जीवनसंगिनी बनाने का ख्वाब देखने लगा. अब वह रीता के घर कुछ ज्यादा ही आनेजाने लगा. उसे रिझाने के लिए जब भी वह आता, कोई न कोई उपहार ले कर आता. थोड़ी नानुकुर के बाद रीता उस का लाया उपहार ले भी लेती. जबकि रीता जानती थी कि इन उपहारों को लाने के पीछे पीयूष का कोई न कोई स्वार्थ जरूर है.

दिन बीतने के साथ रीता को पाने की चाहत पीयूष के मन में बढ़ती ही जा रही थी. लेकिन रीता न तो उस के प्यार को स्वीकार रही थी और न ही मना कर रही थी. रीता के कुछ न कहने से पीयूष की समझ में नहीं आ रहा था कि रीता उस से प्यार करती भी है या नहीं?

इस बात को पता करने के लिए एक दिन पीयूष रीता के यहां आया और उस की खूबसूरती का बखान करते हुए उस का हाथ पकड़ कर बोला, ‘‘रीता, मैं तुम से बहुत प्यार करता हूं और अब तुम्हारे बिना नहीं रह सकता.’’

‘‘यह क्या कह रहे हैं जीजाजी आप?’’ रीता ने अपना हाथ छुड़ा कर कहा, ‘‘आप भले ही मुझ से प्यार करते हैं, लेकिन मैं आप से प्यार नहीं करती. आप से हंसबोल लेती हूं तो इस का मतलब यह नहीं कि मैं आप से प्यार करती हूं.’’

‘‘मजाक मत करो रीता,’’ पीयूष ने कहा, ‘‘रीता, तुम मेरी साली हो और साली तो वैसे भी आधी घरवाली होती है. लेकिन मैं तुम्हें पूरी तरह अपनी घरवाली बनाना चाहता हूं. इसलिए तुम मना मत करो.’’

‘‘हरगिज नहीं,’’ रीता गुस्से में बोली, ‘‘न तो मैं तुम से प्यार करती हूं और न तुम मेरी पसंद हो. मैं बीए कर रही हूं, जबकि तुम कक्षा 8 भी पास नहीं हो. मैं किसी पढ़ेलिखे लड़के से शादी करूंगी, किसी ड्राइवर से नहीं, इसलिए आप मुझे भूल जाओ.’’

रीता के इस तरह साफ मना कर देने से पीयूष का दिल टूट गया. लेकिन वह एकतरफा प्यार  में इस तरह पागल था कि उसे लगता था कि एक न एक दिन रीता मान जाएगी. इसलिए उस ने रीता के यहां आनाजाना बंद नहीं किया. यह बात अलग थी कि अब रीता उस से ज्यादा बात नहीं करती थी.

रीता ने पीयूष के एकतरफा प्यार की बात घर वालों को बताई तो सब परेशान हो उठे. यह एक गंभीर समस्या थी, इसलिए यह बात गुड्डी और उस के पति बबलू को भी बता दी गई. दोनों ने पीयूष को समझाया कि वह रीता को भूल जाए. इस पर पीयूष ने साफ कह दिया कि वह शादी करेगा तो सिर्फ रीता से करेगा, वरना जहर खा कर जान दे देगा.

पीयूष शराब भी पीता था. रीता ने उस के प्यार को ठुकराया तो वह कुछ ज्यादा ही शराब पीने लगा. वह जबतब शराब पी कर रीता से मिलने उस के घर पहुंच जाता और रीता पर शादी के लिए दबाव बनाता. रीता उसे खरीखोटी सुना कर शादी से मना कर देती थी.

पीयूष रीता के घर वालों पर भी शादी के लिए दबाव डाल रहा था. वह धमकी भी देता था कि अगर रीता से उस की शादी नहीं हुई तो अच्छा नहीं होगा. आखिर निराश हो कर पीयूष ने रीता के घर जाना बंद कर दिया. लेकिन वह उसे फोन जरूर करता था. रीता कभी फोन रिसीव कर लेती तो कभी काट देती. पीयूष दिनरात फोन करने लगा तो परेशान हो कर रीता ने अपना फोन नंबर ही बदल दिया.

रीता के यहां से इनकार होने पर पीयूष ने भाई और पिता से कहा कि वे रीता के पिता से बात कर के उस की शादी रीता से करा दें. अगर वे शादी के लिए तैयार नहीं होते तो गुड्डी को घर से निकाल दें. इस पर बात करने की कौन कहे, पिता और भाई ने पीयूष को ही डांटा.

पिता और भाई के मना करने से नाराज हो कर पीयूष ने काफी मात्रा में नींद की गोलियां खा लीं. उस की हालत बिगड़ने लगी तो उसे हैलट अस्पताल ले जाया गया, जहां डाक्टरों ने उसे बचा लिया. इस के बाद बबलू गुड्डी को ले कर परिवार से अलग हो गया और किराए का कमरा ले कर रहने लगा. विश्वंभर ने भी पीयूष से परेशान हो कर उस से बातचीत बंद कर दी.

पीयूष रीता के प्यार में इस तरह पागल था कि उसे जबरदस्ती हासिल करने के बारे में सोचने लगा. उस का एक साथी ड्राइवर अपराधी प्रवृत्ति का था. कई बार वह जेल भी जा चुका था. उसी की मदद से पीयूष ने 315 बोर का एक तमंचा और 4 कारतूस खरीदे. उस ने उसी से तमंचा चलाना भी सीखा.

पीयूष 19 अगस्त, 2017 की दोपहर घर पहुंचा और पिता से जबरदस्ती मोटरसाइकिल की चाबी ले कर मोटरसाइकिल निकाली और रीता के घर पहुंच गया. संयोग से उस समय घर में रीता अकेली थी. पीयूष ने रीता को आंगन में बुला कर उस का हाथ पकड़ कर कहा, ‘‘रीता, मैं तुम से आखिरी बार पूछ रहा हूं कि तुम मुझ से शादी करोगी या नहीं?’’

अपना हाथ छुड़ाते हुए रीता गुस्से में बोली, ‘‘मैं ने कितनी बार कहा कि मैं तुम से शादी नहीं कर सकती. आखिर यह बात तुम्हारी समझ में क्यों नहीं आती?’’

‘‘एक बार और सोच लो रीता. तुम्हारा मना करना कहीं तुम्हें भारी न पड़ जाए?’’

‘‘मैं ने एक बार नहीं, हजार बार सोच लिया है कि मैं तुम से शादी नहीं करूंगी.’’

‘‘तो फिर यह तुम्हारा आखिरी फैसला है?’’ पीयूष ने पूछा.

‘‘हां, यह मेरा आखिरी फैसला है.’’ रीता ने कहा.

‘‘तो फिर मेरा भी फैसला सुन लो. अगर तुम मेरी दुलहन नहीं बनोगी तो मैं तुम्हें किसी और की भी दुलहन नहीं बनने दूंगा.’’ कह कर पीयूष ने कमर में खोंसा तमंचा निकाला और रीता के सीने पर फायर कर दिया. गोली लगते ही रीता जमीन पर गिरी और तड़प कर मर गई.

रीता की हत्या करने के बाद पीयूष ने अपनी भी गरदन पर तमंचा सटा कर गोली चला दी. गोली उस के सिर को भेदती हुई उस पार निकल गई. कुछ देर तड़पने के बाद उस ने भी दम तोड़ दिया.

गोली चलने की आवाज सुन कर आसपड़ोस वाले श्रीपाल के घर पहुंचे तो आंगन में 2-2 लाशें देख कर दहल उठे. पूरे गांव में शोर मच गया. श्रीपाल घर पहुंचे तो रीता के साथ पीयूष की लाश देख कर समझ गए कि पीयूष ने रीता की हत्या कर के आत्महत्या कर ली है. इस के बाद उन्होंने पुलिस को सूचना दे दी.

पीयूष के घर वाले पुलिस के कहने के बाद भी उस की लाश लेने नहीं आए तो पुलिस ने रीता की लाश के साथ पीयूष की लाश को भी श्रीपाल के हवाले कर दिया. मजबूरी में श्रीपाल को बेटी की लाश के साथ पीयूष का अंतिम A करना पड़ा. थाना सजेती पुलिस ने इस मामले में रिपोर्ट तो दर्ज की, पर आरोपी द्वारा आत्महत्या कर लेने से फाइल बंद कर दी. Kanpur Crime

– कथा पुलिस सूत्रों पर आधारित

Haryana Crime News: दोस्त बना जीजा, खतरनाक नतीजा

सुबह का उजाला अभी फैलना शुरू हुआ था कि ‘बचाओ बचाओ’ की मर्मभेदी चीख ने वहां मौजूद लोगों का ध्यान अपनी ओर खींच लिया था. चीखने वाले पर तेजधार हथियार से एक युवक ने हमला किया था, जिस से गंभीर रूप से घायल हो कर वह चीखा था. चीखने के साथ ही वह सड़क पर गिर पड़ा था और गिरते ही बेहोश हो गया था.

उस युवक के गिरते ही उस पर हमला करने वाला युवक लंबे फल का खून सना चाकू हाथ में लिए भागा था. सुबह का समय होने की वजह से वहां बहुत कम लोग थे, लेकिन जो भी थे, वे उस का पीछा करने या पकड़ने की हिम्मत नहीं कर सके थे.

पर उन लोगों ने इतना जरूर किया कि हमलावर के भागने के बाद सड़क पर घायल पड़े युवक को पंचकूला के सैक्टर-6 स्थित जनरल अस्पताल पहुंचा दिया था. उसे देखते ही डाक्टरों ने मृत घोषित करने के साथ इस की सूचना पुलिस को दे दी थी.

सूचना मिलते ही थाना मौलीजागरां के एएसआई गुरमीत सिंह सुबह 7 बजे के करीब अस्पताल पहुंच गए थे. घटना की जानकारी ले कर उन्होंने थानाप्रभारी इंसपेक्टर बलदेव कुमार को सूचित किया तो सिपाही अमित कुमार के साथ वह भी अस्पताल पहुंच गए थे.

जरूरी काररवाई कर के बलदेव कुमार ने उन लोगों से बात की, जो मृतक को अस्पताल ले कर आए थे. वे 2 लोग थे, जिन में एक 19 साल का मोहम्मद चांद था और दूसरा था ड्राइवर अशोक कुमार. पूछताछ में चांद ने बताया था कि वह पंचकूला के सैक्टर-16 की इंदिरा कालोनी के मकान नंबर 1821 में रहता था और सैक्टर-17 की राजीव कालोनी स्थित शरीफ हलाल मीट शौप पर नौकरी करता था.

सुबह जल्दी जा कर चांद ही दुकान खोलता था. मृतक को ही नहीं, उस पर हमला करने वाले को भी वह अच्छी तरह से पहचानता था. वह सुबह 5 बजे दुकान पर पहुंचा तो मुर्गा सप्लाई करने वाली गाड़ी आ गई. गाड़ी के ड्राइवर अशोक कुमार ने मोहम्मद चांद को आवाज दे कर गाड़ी से मुर्गे उतारने को कहा.

मोहम्मद चांद गाड़ी के पीछे पहुंचा तो गाड़ी में बैठा ड्राइवर का सहायक इरफान उतर कर उस के पास आ गया. जैसे ही वह जाली वाला दरवाजा खोल कर मुर्गे निकालने के लिए आगे बढ़ा, शाहबाज हाथ में चाकू लिए वहां आया और इरफान के सिर पर उसी चाकू से वार कर दिया.

वार होते ही इरफान पीछे की ओर घूमा तो शाहबाज ने कहा, ‘तुम ने मेरी भोलीभाली बहन को अपनी मीठीमीठी बातों में फंसा कर मेरी मरजी के खिलाफ उस से शादी की है न? तो आज मैं तुझे उसी का सबक सिखा रहा हूं. आज मैं तुझे जिंदा नहीं छोड़ूंगा.’

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इस के बाद शाहबाज ने इरफान की छाती, आंख के नीचे और कमर तथा पेट पर लगातार कई वार किए. इरफान ‘बचाओ…बचाओ’ की गुहार लगाते हुए नीचे गिर गया. शाहबाज का गुस्सा और उस के हाथ में चाकू देख कर कोई भी उस के पास जाने की हिम्मत नहीं कर सका.

लेकिन जैसे ही शाहबाज चला गया, मोहम्मद चांद और अशोक कुमार ने किसी तरह इरफान को अस्पताल पहुंचाया, जहां डाक्टरों ने उसे देखते ही मरा हुआ बताया. ऐसा ही कुछ अशोक कुमार ने भी बताया था, लेकिन उस का कहना था कि वह आगे था. शोर सुन कर पीछे आया. तब तक शाहबाज अपना काम कर के जा चुका था.

इंसपेक्टर बलदेव कुमार ने हत्याकांड के चश्मदीद मोहम्मद चांद के बयान के आधार पर शाहबाज के खिलाफ हत्या का मुकदमा दर्ज करने की अनुशंसा कर के तहरीर थाना भेज दी, जहां एफआईआर नंबर 101 पर भादंवि की धारा 302 के तहत यह केस दर्ज कर लिया गया. यह घटना 4 जून, 2016 की है.

उसी दिन पुलिस की एक टीम शाहबाज की तलाश में जुट गई. उस के बारे में पता करने के लिए विश्वस्त मुखबिर भी सक्रिय कर दिए गए थे. मुखबिर की ही सूचना पर शाहबाज को उसी दिन रात में गांव मक्खनमाजरा से गिरफ्तार कर लिया गया.

अदालत से कस्टडी रिमांड ले कर सब से पहले शाहबाज से उस चाकू के बारे में पूछा गया, जिस से उस ने इरफान का कत्ल किया था. 6 जून को उस की निशानदेही पर वह चाकू मौलीजागरां की एक कब्रगाह से बरामद कर लिया गया. उस ने वहां चाकू को पत्थरों के नीचे दबा कर रखा था. लेकिन उस पर लगा खून उस ने साफ कर दिया था.

इस के बाद शाहबाज से इरफान की हत्या के बारे में पूछताछ की गई तो उस ने जो कहानी सुनाई, वह इस प्रकार थी—

मूलरूप से उत्तर प्रदेश के जिला बिजनौर के रहने वाले शाहबाज और इरफान एक ही गांव के रहने वाले थे, इसलिए वे एक साथ खेलकूद कर बड़े हुए थे. कुछ दिनों पहले कामधंधे की तलाश में दोनों चंडीगढ़ आ गए. इरफान जहां अपने बड़े भाई के साथ आया था, वहीं शाहबाज अपने पूरे परिवार के साथ आया था. उस के परिवार में अब्बूअम्मी के अलावा एक छोटी बहन साहिबा थी.

चंडीगढ़ में दोनों पंचकूला की सीमा पर बसे गांव मौलीजागरां में थोड़ी दूरी पर अलगअलग किराए के मकान ले कर रहने लगे थे. मौलीजागरां जहां चंडीगढ़ में पड़ता है, वहीं मुख्य सड़क के उस पार की दुकानें हरियाणा के जिला पंचकूला के सैक्टर-17 की राजीव कालोनी के अंतर्गत आती हैं. उन्हीं में से एक दुकान पर शाहबाज जहां मुर्गे काटने का काम करने लगा था, वहीं इरफान को मुर्गे सप्लाई करने वाली गाड़ी पर सहायक की नौकरी मिल गई थी.

अपने हिसाब से दोनों का काम ठीकठाक चल रहा था. शाहबाज के अब्बू को भी नौकरी मिल गई थी. इरफान और शाहबाज हमउम्र थे. दोनों इतने गहरे दोस्त थे कि उन में सगे भाइयों जैसा प्यार था. एक दिन भी दोनों एकदूसरे से मिले बिना नहीं रह पाते थे. एकदूसरे के यहां आनाजाना, खाना खा लेना या फिर कभीकभार सो जाना आम बात थी.

साहिबा भी दोनों के साथ बचपन से खेलतीकूदती आई थी. मगर अब वह जवान हो चुकी थी. घर वाले उस के निकाह के बारे में सोचने लगे थे. देखनेदिखाने की बात चली तो साहिबा ने हिम्मत कर के शरमाते हुए घर वालों से कहा कि वह इरफान से प्यार करती है और उसी से निकाह करना चाहती है.

साहिबा की इस बात से शाहबाज के घर में तूफान सा आ गया. घर का कोई भी आदमी इस रिश्ते के लिए तैयार नहीं था. शाहबाज ने साफ कहा, ‘‘इस से बड़ी जिल्लत मेरे लिए और क्या होगी कि लोग यह कह कर मेरा मजाक उड़ाएंगे कि अपनी बहन का निकाह करने के लिए ही मैं ने इरफान से दोस्ती की थी. क्या निकाह के लिए सिर्फ वही रह गया है? दुनिया में और कोई लड़का नहीं है? मैं यह निकाह किसी भी कीमत पर नहीं होने दूंगा.’’

शाहबाज ने साहिबा को तो लताड़ा ही, इरफान से भी झगड़ा किया. इरफान ने उसे समझाने की कोशिश करते हुए कहा कि जो भी होगा, घर वालों की रजामंदी से होगा. लेकिन शाहबाज ने साफ कह दिया कि वह साहिबा को भूल जाए और किसी अन्य लड़की से निकाह कर ले, वरना उस के लिए ठीक नहीं होगा.

शाहबाज की इस धमकी का नतीजा यह हुआ कि कुछ दिनों बाद इरफान साहिबा को भगा ले गया और एक धार्मिक स्थल पर दोनों ने निकाह कर लिया. वह वापस आया तो साहिबा को शरीकेहयात बना कर आया. शाहबाज को इस मामले में सारी गलती इरफान की नजर आ रही थी. उस ने अपने दिलोदिमाग में बैठा लिया कि इरफान ने साहिबा के भोलेपन का फायदा उठा कर उसे अपनी बातों में फंसा लिया है.

शाहबाज इरफान से पहले से ही नाराज था, जलती पर घी का काम किया उस ने साहिबा को भगा कर. उस के अब्बू ने इस से बहुत ज्यादा शर्मिंदगी महसूस की. इसी की वजह उन्होंने 2 दिनों बाद ही मौलीजागरां का अपना निवास छोड़ दिया था और वहां से 20 किलोमीटर दूर जा कर कस्बा डेराबस्सी में किराए का मकान ले कर रहने लगे थे. उन्होंने उधर जाना ही छोड़ दिया था. शाहबाज को नौकरी की वजह से उधर जाना पड़ता था.

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जिस मीट की दुकान पर शाहबाज काम करता था, इरफान रोजाना उधर मुर्गे की सप्लाई करने आता था. लेकिन निकाह के बाद वह उधर दिखाई नहीं दिया था. पता चला कि निकाह के दिन से ही उस ने छुट्टी ले रखी है.

4 जून, 2016 की बात है. साहिबा से इरफान को निकाह किए 5 दिन हो गए थे. सुबह के 5 बजे शाहबाज दुकान पर पहुंच कर मुर्गा काटने वाला चाकू तेज कर रहा था. तभी मुर्गेवाली गाड़ी आ कर उस की दुकान से थोड़ी दूरी पर सड़क के किनारे रुकी. इरफान उतर कर गाड़ी के पीछे की ओर आया.

शाहबाज ने उसे आते देखा तो उसे देख कर उस की आंखों में खून उतर आया. उस के पास सोचनेविचारने का वक्त नहीं था. वह मीट काटने वाला चाकू ले कर तेजी से भागता हुआ इरफान के पास पहुंचा और जरा सी देर में उसे मौत के घाट उतार कर भाग गया.

पहले तो उस ने कब्रिस्तान के पास एक जगह चाकू को साफ कर के पत्थरों के नीचे छिपा दिया. उस के बाद बचने के लिए इधरउधर छिपता रहा. लेकिन पुलिस ने उसे पकड़ लिया. उस ने कहा कि इरफान ने काम ही ऐसा किया था, जिस से उसे मारने का कोई अफसोस नहीं है. इरफान ने जो किया था, उस की उसे यही सजा मिलनी चाहिए थी.

पूछताछ के बाद पुलिस ने शाहबाज को फिर से अदालत में पेश किया, जहां से उसे न्यायिक हिरासत में बुड़ैल जेल भेज दिया गया.

बलदेव कुमार ने उस के खिलाफ आरोपपत्र तैयार कर समय से निचली अदालत में दाखिल कर दिया, जहां से सैशन कमिट हो कर 13 सितंबर, 2016 से मामले की सुनवाई चंडीगढ़ के अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश अतुल कसाना की अदालत में शुरू हुई.

6 अक्तूबर को अदालत ने शाहबाज के खिलाफ धारा 302 का चार्ज फ्रेम कर दिया. उस ने अदालत में खुद को बेकसूर बताते हुए दरख्वास्त की थी कि पुलिस ने एक झूठी कहानी गढ़ कर इस केस में उसे बिना मतलब फंसा दिया है. वह अपने उन बयानों से भी मुकर गया, जो उस ने कस्टडी रिमांड के दौरान पुलिस को दिए थे.

मामले की विधिवत सुनवाई शुरू होते ही अभियोजन पक्ष ने डा. अमनदीप सिंह, डा. गौरव, मोहम्मद चांद, इंतजाम अली, अशोक कुमार, इंसपेक्टर बलदेव कुमार, फोटोग्राफर फूला सिंह, हवलदार सतनाम सिंह, रमेशचंद, धर्मपाल एवं यशपाल के अलावा सीनियर कांस्टेबल कृष्णकुमार, एसआई गुरमीत सिंह, एसआई गुरनाम सिंह और डा. मनदीप सिंह के रूप में 15 गवाह अदालत में पेश किए.

इस के बाद अतिरिक्त पब्लिक प्रौसीक्यूटर ने अभियोजन पक्ष की गवाहियों के पूरी होने के बाद सीआरपीसी की धारा 293 के तहत फोरैंसिक साइंस लैबोरेटरी की रिपोर्ट के अलावा विसरा रिपोर्ट भी पेश की.

अभियोजन पक्ष की काररवाई पूरी होने के बाद 20 जनवरी, 2017 को कोड औफ क्रिमिनल प्रोसीजर की धारा 313 के तहत अभियुक्त शाहबाज का स्टेटमैंट रिकौर्ड किया गया. अभियुक्त ने उक्त सभी गवाहों को झूठ करार देते हुए यही कहा कि वह बेकसूर है. उसे झूठा फंसाया गया है.

बचाव पक्ष की ओर से साहिबा को पेश किया गया. कोड औफ क्रिमिनल प्रोसीजर की धारा 315 के अधीन दर्ज अपने बयान में साहिबा ने अदालत को बताया कि उस ने इरफान से प्रेम विवाह किया था, जिस का परिवार वालों ने पहले तो विरोध किया, लेकिन बाद में मान गए थे.

इरफान ने उसे बताया था कि उस की कुछ गलत लोगों से ऐसी दुश्मनी हो गई है कि वे मौका मिलने पर उस की जान ले सकते हैं. ऐसे में हो सकता है, इरफान को उन्हीं लोगों ने मारा हो, न कि शाहबाज ने.

बचाव पक्ष की ओर से अशोक कुमार को अविश्वसनीय करार देते हुए अदालत ने उसे मुकरा गवाह घोषित करने की गुहार लगाई गई, जो अदालत ने मान भी ली. यह भी दलील दी गई कि पुलिस द्वारा बरामद चाकू पर डाक्टर की रिपोर्ट के मुताबिक मानवीय खून नहीं लगा था.

31 जनवरी, 2017 को विद्वान जज अतुल कसाना ने इस मामले का फैसला सुनाते हुए खुली अदालत में कहा कि उन्होंने दोनों पक्षों को ध्यानपूर्वक सुनने के अलावा सभी साक्ष्यों को गौर से जांचापरखा है, जिन से यह केस शीशे की तरह साफ है. अशोक कुमार को भले मुकरा गवाह करार दिया गया है, लेकिन उस की गवाही को नकारा नहीं जा सकता.

वह भी एक तरह से इस केस का चश्मदीद गवाह था. भले ही उस की गवाही में बाद में कुछ विपरीत बातें सामने आईं, जिस वजह से उसे मुकरा गवाह घोषित किया गया. लेकिन उस की शुरू की गवाही अभियोजन पक्ष को पूरी तरह मजबूती देने में सहायक सिद्ध हुई है.

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चाकू पर मानवीय खून का अंश होने की बात रिपोर्ट में पहले ही आ चुकी है. हालांकि अभियुक्त ने उसे फेंकने से पहले साफ कर दिया था. साहिबा को बचाव पक्ष ने गवाह के रूप में पेश कर के केस की दिशा बदलने का प्रयास किया. लेकिन उस की प्रेम विवाह वाली बात मान लेने से ही प्रौसीक्यूशन की कहानी को बल मिल जाता है.

लिहाजा यह अदालत इस निष्कर्ष पर पहुंची है कि अभियोजन पक्ष आरोप सिद्ध करने में कामयाब रहा है और अभियुक्त शाहबाज खान मृतक मोहम्मद इरफान का कत्ल करने का दोषी पाया गया है. अभी वह जेल में है. सजा की बाबत सुनने के लिए उसे अगले दिन अदालत में पेश किया जाए.

अगले दिन शाहबाज को ला कर अदालत में पेश किया गया तो माननीय एडीजे अतुल कसाना ने उसे उम्रकैद के अलावा 10 हजार रुपए जुरमाने की सजा सुनाई. Haryana Crime News

– कथा अदालत के फैसले पर आधारित 

Hindi Crime Stories: बेवफा आशिक को दी मौत की सजा

Hindi Crime Stories: पीड़ित का नाम-विभाष कुमार कनेरिया. उम्र-35 साल. पिता का नाम-परसराम कनेरिया. पेशा-जमीन की दलाली. निवासी-बैतूल. हालमुकाम 307, 2 सी, साकेत नगर, भोपाल. जुर्म-माशूका से बेवफाई. सजा-सजा ए मौत. कातिल-मोंटी उर्फ योगेश्वरी बरार. यह वाकिआ 5 जून, 2016 का है, जब विभाष कुमार को उस की ही माशूका मोंटी ने चाकू से हमला कर मौत के घाट उतार दिया था.

विभाष कुमार उन लाखों नौजवानों में से एक था, जो रोजगार की तलाश में भोपाल आ कर रहने लगा था. कुछ और उसे आता नहीं था, इसलिए वह दिखने में सब से आसान लगने वाला जमीनों की दलाली का काम करने लगा और इमारतें बनाने के धंधे में भी उतरने वाला था.

भोपाल जैसे बड़े शहर में अपनी आमदनी के दम पर 10 साल गुजार देना यह बताता है कि विभाष कुमार अपने धंधे में माहिर हो गया था और उस की कमाई ठीकठाक हो रही थी. लेकिन 35 साल का हो जाने के बाद भी उस ने शादी नहीं की थी, तो वजह उस की 28 साला माशूका मोंटी थी, जिस के साथ वह बीते 9 सालों से लिव इन रिलेशनशिप में था यानी वे दोनों बगैर शादी किए मियांबीवी की तरह रहते थे, जो हर्ज की बात इस लिहाज से थी कि मोंटी रिश्ते में उस की बहन लगती थी.

पहले प्यार और फिर जिस्मानी संबंध बना कर उन दोनों ने कोई समझदारी का काम नहीं किया था. अंदाजा लगाया जा सकता है कि आज की खूबसूरत दिखने वाली मोंटी 9 साल पहले जब जवानी की दहलीज पर दाखिल हुई होगी, तो कितनी खूबसूरत रही होगी.

मोंटी भी लाखों लड़कियों की तरह भोपाल पढ़ने आई थी. पढ़ाई तो उस ने की, पर साथसाथ चचेरे भाई के साथ मुहब्बत की भी डिगरी ले डाली थी.

मोंटी पढ़ेलिखे घर की लड़की है, जिस के पिता टिमरनी, हरदा के एक स्कूल में टीचर और मां होस्टल वार्डन थीं. बेटी भी अच्छे से पढ़लिख कर कुछ बन जाए, इसलिए उन्होंने मोंटी को पढ़ाई के लिए भोपाल भेज दिया था, पर गलती यह की थी कि सहूलियत और हिफाजत के लिए उसे अपने दूर के रिश्ते के भाई विभाष कुमार के पास रहने छोड़ दिया था, जिस के पास उस की बहन भी रहती थी.

विभाष कुमार और मोंटी जवानी के जोश के चलते रिश्ते की हदें ज्यादा दिनों तक निभा नहीं पाए और सबकुछ भूल कर एकदूसरे में ऐसे खोए कि उन्होंने अपने आने वाले कल के बारे में कुछ नहीं सोचा.

गलती आशिक की

 9 साल का अरसा कम नहीं होता. एक कली को फूल बना चुके विभाष कुमार का दिल अपनी माशूका से उचटने लगा था, क्योंकि जैसेजैसे पैसा आता गया, वैसेवैसे उसे नईनई तितलियां भी मिलने लगी थीं.

उधर, मोंटी तो विभाष को ही अपना सबकुछ मान बैठी थी. शादी हो न हो, उसे इस बात से कोई मतलब नहीं था, वह तो बस हर हाल में आशिक का साथ चाहती थी.

ऐसा भी नहीं था कि वह एकदम नादान या देहाती लड़की थी, बल्कि बेहद समझदार और सधी हुई लड़की थी, जिस ने भोपाल की बरकतउल्ला यूनिवर्सिटी से साइकोलौजी में एमए की डिगरी ली थी. लिहाजा, कुदरती तौर पर वह जाननेसमझने लगी थी कि कौन कब क्या बरताव करेगा.

लेकिन पढ़ाईलिखाई या डिगरियों का जिंदगी की सचाई से कोई लेनादेना नहीं होता. यह बात मोंटी को समझाने वाला कोई नहीं था.

भड़की माशूका

 विभाष कुमार की कम होती दिलचस्पी को मोंटी बखूबी समझ रही थी, पर उसे ज्यादा अफसोस इस बात का रहने लगा था कि उसे छोड़ कर उस का आशिक इधरउधर मुंह मारने लगा था. भले ही वे पतिपत्नी नहीं बने थे, लेकिन मियांबीवी की तरह रह रहे थे, इसलिए मोंटी की बेचैनी या तिलमिलाहट कुदरती बात थी.

मोंटी ने कई बार विभाष कुमार को समझाया था कि दूसरी लड़कियों से प्यार की पींगे मत बढ़ाओ. यह मुझ से बरदाश्त नहीं होता है, लेकिन अब तक विभाष कुमार उस की कमजोरी ताड़ चुका था कि वह यों ही कलपती रहेगी, पर कुछ कर नहीं पाएगी.

अब से तकरीबन 4 साल पहले विभाष कुमार की बहन आभा, जिस का एक नाम रीना भी है, भी भोपाल में उन्हीं के साथ आ कर रहने लगी थी, तो मोंटी ने साकेत नगर में किराए पर अलग मकान ले लिया था, जो इस नाजायज रिश्ते को बनाए रखने में काफी मददगार साबित हुआ था.

हालांकि रीना इन दोनों के मियांबीवी सरीखे रिश्ते को ताड़ चुकी थी. मोंटी का मकान उस के घर से पैदल की दूरी पर था, इसलिए रीना से कुछ छिपा नहीं था.

रीना के जरीए ही इस रिश्ते की बात विभाष कुमार की मां तक पहुंची थी, जो पति की मौत के बाद से ही अपनी औलादों को ले कर परेशान रहने लगी थीं. विभाष कुमार की कमाई से ही उन का बैतूल का खर्च चलता था.

विभाष कुमार और मोंटी के रिश्ते के बारे में सुन कर मां का डरना लाजिम था, इसलिए उन्होंने उसे ऊंचनीच समझाई, तो वह मान गया. वैसे भी विभाष कुमार का जी अब मोंटी से ऊबने लगा था, इसलिए उस ने माशूका से दूरी बनाना शुरू कर दिया. लेकिन मोंटी किसी भी शर्त पर उस का साथ या पीछा छोड़ने को तैयार नहीं थी.

ऐसे लिया बदला

5 जून, 2016 को मोंटी विभाष कुमार के घर पहुंची और रातभर वहीं रही. जब दूसरे कमरे में आभा यानी रीना सो गई, तो उस ने विभाष कुमार को लताड़ना शुरू कर दिया. इसी कहासुनी में विभाष कुमार ने उसे अपनी सगाई के फोटो मोबाइल पर दिखाए, जिन में एक लड़की यानी उस की मंगेतर उसे केक खिला रही थी.

फोटो देख कर मोंटी के तनबदन में आग लग गई. हालांकि वह पहले से काफीकुछ जानती थी, पर नौबत यहां तक आ जाएगी, इस का उसे अंदाजा नहीं था.

रातभर दोनों तूतूमैंमैं करते रहे. मोंटी की दलीलें अपनी जगह ठीक थीं कि जब उस ने अपना सबकुछ उसे सौंप दिया है, तो वह किसी और का कैसे हो सकता है? विभाष कुमार का यह कहना था कि उस की मरजी जिस से चाहे शादी करे.

इस कहासुनी के बाद कोई हल न निकलता देख विभाष कुमार जब गहरी नींद में सो गया, तो नागिन सी तिलमिलाई मोंटी ने चाकू से उस के सीने पर हमला किया और फिर कहीं वह जिंदा न बच जाए, इसलिए ताबड़तोड़ हमले करती रही.

शोर सुन कर रीना जागी और बाहर आई तो नजारा देख कर हैरान रह गई. उस ने मोंटी को पकड़ने की कोशिश की, पर वह मोबाइल और चाकू फेंक कर भाग खड़ी हुई.

रीना कुछ पड़ोसियों की मदद से जैसेतैसे उसे अस्पताल ले गई, पर डाक्टरों ने उसे मरा घोषित कर दिया.

विभाष कुमार की हत्या करने के बाद मोंटी को होश आया, तो उस ने खुद को भी खत्म करने की ठान ली. शायद उस के लिए विभाष के बाद दुनिया में कुछ रह नहीं गया था. उस ने पहले खुद पर चाकू से हमला किया, पर घबरा गई, क्योंकि इस में मरने की गारंटी नहीं थी.

घाव बड़ा नहीं था, इसलिए उस ने उस को ढक लिया और नजदीकी आरआरएल चौराहे पर जा कर पैट्रोल पंप से बोतल में पैट्रोल खरीदा और खुद पर उड़ेल लिया, पर खुद को आग लगाने की हिम्मत नहीं जुटा पाई.

जाहिर है, मोंटी अपना आपा खो चुकी थी, इसलिए खुदकुशी की तीसरी कोशिश उस ने कुएं में कूद कर की, पर जिस कुएं में वह कूदी, उस में 4 फुट ही पानी था. लिहाजा, वह फिर बच गई.

इधर, पुलिस को कत्ल की वारदात की खबर लग चुकी थी, इसलिए वह तुरंत मोंटी की तलाश में जुट गई थी. राह चलते लोगों से पूछताछ की बिना पर पुलिस वाले कुएं के पास पहुंचे, तो मोंटी अंदर ही थी. पिपलानी के गांधी मार्केट का यह कुआं 20 फुट गहरा है.

मोंटी को बाहर निकालने के लिए डायल 100 के ड्राइवर बलवीर ने हिम्मत दिखाई और कुएं में उतर कर उसे सहीसलामत ऊपर ले आया. थाने जा कर मोंटी फरियाद करती रही कि विभाष को तो उस ने मार दिया है, लेकिन उसे अब कब फांसी दोगे.

पुलिस वालों ने उसे प्यार से पुचकारा और खाने के लिए सैंडविच मंगा कर दिए, तो मोंटी कुछ सामान्य हुई और उस ने बताया कि विभाष की सगाई के फोटो देख कर मैं आपे से बाहर हो गई थी, इसलिए उसे चाकू से गोद कर मार डाला. यह चाकू उस ने कुछ दिन पहले ही औनलाइन शौपिंग कर के मंगाया था.

अगले दिन सुबह के 9 बज चुके थे. सारा शहर जाग उठा था. ‘एक माशूका ने आशिक की बेरहमी से हत्या की’ यह खबर जिस ने भी सुनी, उस ने कलयुग को कोसा, प्यारमुहब्बत और वफा पर उंगलियां उठाईं. अब तक लोगों ने यही सुना था कि बेवफाई के चलते आशिक ने माशूका की हत्या की, पर इस मामले में उलटा हुआ.

कइयों ने रिश्ते की बहन से मुहब्बत करने को ही गलत ठहराया, पर कोई मोंटी का दर्द नहीं समझ पाया, जो बेवफा आशिक को अपने हाथों मौत की सजा देने की बात कहते हुए खुद अपने लिए फांसी का फंदा मांग रही है. Hindi Crime Stories

Love Crime Story: पहली मोहब्बत का जलजला

Love Crime Story: 6 मई, 2022 की सुबह 10 बजे मुरादाबाद के थाना सिविल लाइंस के थानाप्रभारी रविंद्र प्रताप सिंह रोजाना की भांति अपने औफिस में बैठे कामकाज देख रहे थे. उन्हें औफिस के बाहर किसी महिला के रोने की आवाज आई तो उन्होंने घंटी बजा कर पहरे पर तैनात सिपाही को बुला कर पूछा कि कौन रो रहा है.

सिपाही ने बताया कि साहब गांव मेहलकपुर से एक महिला आई है कह रही है कल से उस का आदमी गायब है. उस का फोन भी नहीं लग रहा है. थानाप्रभारी रविंद्र प्रताप सिंह ने सिपाही से कहा कि महिला को अंदर भेजो.

महिला ने थानाप्रभारी को बताया, ‘‘साहब, मेरा नाम गीता उर्फ कुसुम पाल है. मैं मेहलकपुर में रहती हूं. मेरे पति निपेंद्र कल अकेले ही गिरिजा देवी मंदिर, जोकि रामनगर उत्तराखंड में है, घूमने गए थे.’’

‘‘जब घूमने गए थे तो तुम्हें साथ क्यों नहीं ले गए?’’ थानाप्रभारी ने पूछा.

‘‘साहब, दरअसल बात यह है कि मेरा 11 साल का एक बेटा बिराज है, जो मुरादाबाद के कांठ रोड पर स्थित कौन्वेंट स्कूल में पढ़ता है. स्कूल से लाने ले जाने के कारण मैं उन के साथ नहीं जा सकती थी.’’ महिला ने बताया.

थानाप्रभारी ने गीता से कहा, ‘‘देखो, तुम अपने रिश्तेदारों से मालूम करो कि वह रिश्तेदारी में तो कहीं नहीं है.

अगले दिन तक निपेंद्र घर नहीं लौटा तो गीता घर के कुछ लोगों के साथ एसएसपी हेमंत कुटियाल के पास पहुंची और पति निपेंद्र के गुम होने की बात बताई. एसएसपी ने मामले की गंभीरता को देखते हुए एसपी (सिटी) अखिलेश भदौरिया को निर्देश दिए.

कप्तान का निर्देश मिलते ही एसपी (सिटी) अखिलेश भदौरिया थाना सिविल लाइंस पहुंच गए. उन्होंने थानाप्रभारी रविंद्र प्रताप सिंह से गीता के पति निपेंद्र की गुमशुदगी दर्ज करवा दी.

एसपी (सिटी) ने सीओ आशुतोष तिवारी को अपनी निगरानी में इस मामले की जांच करने के निर्देश दिए. सीओ आशुतोष तिवारी ने एक दिन पहले ही अपना कार्यभार ग्रहण किया था. निपेंद्र के लापता होने के मामले में एसपी (सिटी) अखिलेश भदौरिया को पता चला कि मामला गंभीर है. इसलिए उन्होंने निपेंद्र के घर वालों को औफिस बुलाया.

8 मई, 2022 को निपेंद्र की मां कुशमेश देवी व छोटा भाई पविंदर कुमार एसपी (सिटी) के पास पहुंच गए. उन्होंने बताया कि साहब, हमें निपेंद्र के लापता होने का शक उस की पत्नी गीता उर्फ कुसुम पाल पर ही है. उस के अवैध संबंध शादी से पहले गांव मेहलकपुर मायके में नीरज नाम के युवक से थे. यह जानकारी मिलते ही एसपी (सिटी) अखिलेश भदौरिया ने थाना प्रभारी रविंद्र प्रताप सिंह को गीता और नीरज के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कर गीता उर्फ कुसुम पाल व नीरज को गिरफ्तार करने को कहा.

थानाप्रभारी रविंद्र प्रताप सिंह भी हरकत में आ गए. वह टीम के सहयोग से गीता और नीरज को हिरासत में ले कर थाने लौट आए. उन्होंने गहनता से दोनों से पूछताछ की.

वह दोनों अपने को निर्दोष बताते रहे. तब पुलिस ने दोनों के मोबाइल नंबरों की काल डिटेल्स निकलवाई तो दोनों के बीच घंटों तक बात करने का ब्यौरा मिला.

5 मई, 2022 को निपेंद्र गायब हुआ था. उसी रात 12 बजे नीरज की काल गीता उर्फ कुसुम पाल के मोबाइल पर आई थी. पुलिस ने गीता से पूछा कि रात में नीरज ने क्या बात की थी, हमारे पास तुम्हारे द्वारा बात करने की सारी रिकौर्डिंग है. तुम दोनों में क्या बात हुई, हमें मालूम है.’’

इतना सुनते ही दोनों घबरा गए. उन्हांने अपना जुर्म स्वीकार कर लिया. दोनों ने जो कुछ बताया एसपी (सिटी) व अन्य पुलिसकर्मियों के भी होश उड़ गए.

नीरज ने बताया, ‘‘साहब, निपेंद्र अब इस दुनिया में नहीं है. मैं ने व मेरे साथ 2 अन्य साथियों ने उस की हत्या कर लाश को जिम कार्बेट नैशनल पार्क के जगंल में फेंक दिया.

निपेंद्र की हत्या की बात सुन कर पुलिस भी चौंक गई. नीरज और गीता से पूछताछ करने के बाद निपेंद्र की हत्या की जो कहानी सामने आई, वह इस प्रकार निकली—

जिला बिजनौर के कस्बा धामपुर टीचर कालोनी निवासी निपेंद्र की शादी गीता उर्फ कुसुम पाल निवासी गांव मेहलकपर निजामपुर, थाना सिविल लाइंस मुरादाबाद के साथ हुई थी.

मृतक निपेंद्र के पिता सुरेश पाल सिंह सिंचाई विभाग में उच्च पद पर कार्यरत थे. इन की पत्नी कुशमेश पाल है. सुरेश पाल सिंह के 2 बेटे थे. बड़े बेटे का नाम निपेंद्र पाल छोटे बेटे का नाम परविंदर था.

निपेंद्र पाल की शादी के साल भर बाद बेटा पैदा हुआ था. जिस का नाम बिराज रखा था. कुछ साल पहले सुरेश पाल सिंह का निधन हो गया था. मृत्यु के समय सुरेश पाल सिंह सर्विस में थे. मृत्यु के बाद उन की नौकरी कंपनसेशन ग्राउंड पर उन के बेटे परविंदर को मिल गई.

पिता सुरेश पाल सिंह को जो पैसा मिला, उस का बड़ा  बेटा निपेंद्र हकदार होगा. पिता सुरेश पाल सिंह के विभाग से 25 लाख रुपए मिले जो निपेंद्र को मिले. वह पैसे उस ने अपनी पत्नी गीता उर्फ कुसुम पाल के खाते में डलवा दिए थे.

गीता उर्फ कुसुम पाल अधिकतर समय अपने मायके मेहलकपुर, मुरादाबाद में ही बिताती थी. गीता की मां ने उस के लिए गांव मेहलकपुर में ही नया मकान बनवा कर दिया था, जिस में वह रहती थी.

गीता व उस की 4 बहनों के नाम 120 बीघा जमीन थी. गीता ही उसे जोतवा रही थी. मृतक निपेंद्र इंटर पास था,जबकि गीता बीएससी पास थी. निपेंद्र बेरोजगार था.

घटना से करीब 2 महीने पहले निपेंद्र धामपुर, बिजनौर से गांव मेहलकपुर में स्थित अपनी ससुराल में आ कर रहने लगा था. गीता ने अपनी व बहनों की 120 बीघा जमीन मेहलकपुर गांव के ही नीरज को बंटाई पर दे दी थी. जिस कारण नीरज गीता के घर आनेजाने लगा था. तभी उस के संबंध गीता से हो गए थे.

जब निपेंद्र मेहलकपुर गांव आया था, तब उस को खेत बंटाईदार नीरज व गीता के संबंधों का पता चला. निपेंद्र ने पत्नी गीता को बहुत समझाया कि गांव में मुझे तरहतरह की बातें सुननी पड़ रही हैं.

गीता ने कहा कि गांव वाले मुझ से रंजिश रखते हैं मुझे पहले भी तथा अब भी बदनाम करने से नहीं चूकते हैं. इस बात को ले कर निपेंद्र का पत्नी से आए दिन झगड़ा होने लगा था.

निपेंद्र ने अब ज्यादा ही शराब पीनी शुरू कर दी थी. अकसर निपेंद्र का नीरज को ले कर झगड़ा होता था कि वह घर क्यों आता है.

निपेंद्र अकसर खोयाखोया और उदास सा रहने लगा था. निपेंद्र जब शराब पी कर घर आता था तो गीता से मारपीट करने लगा था. उधर निपेंद्र के वहां रहने की वजह से नीरज व गीता की हसरतें पूरी नहीं हो पा रही थीं.

निपेंद्र हमेशा यही सोचता रहता था कि मैं ने बहुत बड़ी गलती कर दी जो पिता के मिले 25 लाख रुपए गीता के खाते में जमा कर दिए.

नीरज गीता का पहला प्यार था. शादी के बाद भी गीता नीरज को भूली नहीं थी. शादी के बाद भी नीरज का धामपुर अकसर आनाजाना था. निपेंद्र नीरज और गीता के संबंधों से बिलकुल अनभिज्ञ था. जब वह 2 महीने पहले मेहलकपुर आया तो इन संबंधों का पता चला था. नीरज जब भी गीता के घर आता तो गीता नीरज की बहुत आवभगत करती थी. निपेंद्र मन मसोस कर रह जाता था.

निपेंद्र के ससुराल में रहने की वजह से नीरज व गीता का मिलनाजुलना बिलकुल बंद हो गया था. नीरज व गीता अपनी हसरतें पूरी नहीं कर पाते थे.

घर में आए दिन होने वाले झगड़ों से निजात पाने के लिए नीरज व गीता ने एक खतरनाक योजना बना डाली. इस योजना में नीरज ने अपने चचेरे भाई मिथुन व भतीजे सौरभ को भी शामिल कर लिया था.

योजना के अनुसार 5 मई, 2022 की शाम 5 बजे निपेंद्र पेपर मिल चौराहे से घर का सामान लेने के लिए निकला, तभी गीता ने अपने प्रेमी नीरज को फोन किया कि निपेंद्र शराब पीने के लिए ठेके पर जाने के लिए निकला है. इस के बाद नीरज अपने 2 साथियों के साथ स्कौर्पियो कार से निकला. रास्ते में उसे निपेंद्र मिला गया.

नीरज ने गाड़ी रोक कर पूछा, ‘‘जीजा कहां जा रहे हो? आओ, हम तुम्हें बाजार तक छोड़ देंगे.’’

निपेंद्र गाड़ी में बैठ गया था.

‘‘क्या लेने जा रहे हो दारू?’’ नीरज बोला.

‘‘नहीं, मैं घर का सामान लेने निकला था.’’ निपेंद्र ने बताया.

निपेंद्र गाड़ी को शराब के ठेके के पास ले गया तभी नीरज का चचेरा भाई मिथुन भाग कर ठेके से एक बोतल शराब, 4 गिलास, पानी की एक बोतल, नमकीन, सिगरेट की डब्बी, पान मसाला ले कर आ गया था.

नीरज बोला, ‘‘यहां चौराहे पर पुलिस रहती है क्यों न चड्ढा पुल के आगे वहीं एकांत में गाड़ी खड़ी कर आराम से पिएंगे. चड्ढा पुल से हो कर रामनगर, उत्तराखंड के लिए रास्ता है. चारों ने गाड़ी में बैठ कर शराब पी.

ज्यादा शराब निपेंद्र को दी. जब निपेंद्र नशे में हो गया तो नीरज गाड़ी को रामनगर से ऊपर पर्यटनस्थल गिर्जिया देवी मंदिर से 7 किलोमीटर दूर वन विभाग की मुहान चौकी के पास जिम कार्बेट नैशनल पार्क के जंगल में ले गया.

वहां तीनों ने मिल कर निपेंद्र की गला घोट कर हत्या कर दी. जब तीनों ने यह देख लिया कि निपेंद्र मर चुका है तो उन्होंने उस की लाश गहरी खाई में फेंक दी.

निपेंद्र को ठिकाने लगाने के बाद नीरज ने 5 मई, 2022 की रात करीब 12 बजे अपनी प्रेमिका गीता को बता दिया कि काम हो गया है.

इतना सुनते ही गीता खुशी से झूम उठी. फोन को चूम कर बोली, ‘‘आई लव यू.’’

उस के बाद रात में ही तीनों अपने गांव मेहलकपुर आ गए थे. नीरज अपने घर न जा कर आम के बाग में रखवाली करने वाले चौकीदार की झोपड़ी में जा कर सो गया था.

योजना के मुताबिक, गीता उर्फ कुसुम पाल 6 मई, 2022 की सुबह 10 बजे अपने पति निपेंद्र की गुमशुदगी दर्ज करवाने थाना सिविल लाइंस पहुंच गई और थानाप्रभारी को पति के गायब होने की सूचना दी.

अब मुरादाबाद पुलिस को निपेंद्र की लाश बरामद करनी थी. लिहाजा पुलिस उसे ले कर रामनगर पहुंची. नीरज पुलिस को जगहजगह घुमाता रहा. गहरी खाइयां थीं. नीचे जंगली जानवरों का डर.

जिम कार्बेट नैशनल पार्क की वन विभाग की पुलिस ने भी मुरादाबाद पुलिस को सहयोग किया. निपेंद्र का शव बरामद कराने के लिए नीरज पुलिस को कभी इधर तो कभी उधर घुमाता रहा लेकिन उस का शव बरामद नहीं हो सका था.

हार कर पुलिस ने अभियुक्त नीरज व उस की प्रेमिका गीता उर्फ कुसुम पाल को 13 मई, 2022 को कोर्ट में पेश कर जेल भेज दिया. पुलिस ने निपेंद्र की हत्या में शामिल 2 अभियुक्तों मिथुन व सौरभ को भी 14 मई, 2022 को गिरफ्तार कर लिया. उन्होंने भी निपेंद्र की हत्या में साथ देने का अपराध स्वीकार कर लिया. निपेंद्र का शव बरामद करने के लिए पुलिस इन दोनों अभियुक्तों को भी रामनगर ले गई.

सौरभ और मिथुन की निशानदेही पर पुलिस ने उस जगह को ढूंढ निकाला, जहां पर निपेंद्र की हत्या कर लाश फेंकी गई थी. वहां से मुरादाबाद पुलिस ने ऊंची पहाड़ी के नीचे जा कर मृतक निपेंद्र का मोबाइल फोन, खून से सनी पैंट,

लाल शर्ट, उस की एक चप्पल, पत्थरों पर लगे बाल, अभियुक्त नीरज की दोनों चप्पलें, हत्या में प्रयुक्त स्कौर्पियो कार बरामद की.

मृतक निपेंद्र की लाश को जंगली जानवर खा गए थे. वह इलाका जंगली जानवरों का है. 10 दिन से पड़ी लाश जंगली जानवरों का निवाला बन चुकी थी. जो कपडे़ मिले थे, उन में जंगली जानवरों के दांतों के निशान (छेद) मिले थे. इससे लगा कि लाश जंगली जानवर खा चुके थे.

हत्या की आरोपी गीता उर्फ कुसुम पाल ने अपने पति निपेंद्र की हत्या के बाद अभियुक्त प्रेमी नीरज से दूसरी शादी का प्लान तैयार किया था. जो कशिश प्रेमी नीरज में थी, वह पति निपेंद्र में नहीं मिली. क्योंकि गीता के संबंध नीरज से शादी से पहले से थे.

नीरज गीता का पहला प्यार था. शादी के बाद भी वह नीरज को भुला नहीं पाई थी. वैसे प्रेमी नीरज भी शादीशुदा था. प्रेमी नीरज को यह भी पता था कि गीता के पास काफी बड़ी प्रौपर्टी है.

पुलिस ने मृतक निपेंद्र की हत्या में 2 अन्य अभियुक्तों मिथुन व सौरभ को 15 मई, 2022 को जेल भेज दिया था. पुलिस ने मृतक निपेंद्र के 11 साल के बेटे बिराज को उस की मौसी को सौंप दिया था. कथा लिखने तक उस की देखभाल मौसी कर रही थी.

Rajasthan Crime: आनंदलोक की सैर का हर्जाना

Rajasthan Crime: राजस्थान के नागौर जिले का मकराना कस्बा संगमरमर पत्थर के लिए पूरी दुनिया में मशहूर है. इसी मकराना कस्बे में तमाम ऐसे व्यवसायी हैं, जो मार्बल व्यवसाय कर के हर साल करोड़ों रुपए कमाते हैं. व्यवसायियों ने संगमरमर मार्बल पत्थर कटिंग की फैक्ट्रियां खोल रखी हैं. इन फैक्ट्रियों में पत्थरों की कटिंग होने के बाद और्डर के हिसाब से माल देश के अलगअलग कोनों में भेजा जाता है.

मकराना के दीपक भी मार्बल व्यवसायी हैं. घरपरिवार से संपन्न दीपक हैंडसम ही नहीं दिल के भी भले आदमी हैं. गरीबों की वह अकसर मदद किया करते थे. उन के पास रुपएपैसों की कमी नहीं थी. दीपक को मार्बल व्यवसाय से लाखों रुपए की कमाई हर महीने होती थी. वह बनठन कर रहते थे.

दीपक की हर रोज कई लोगों से मुलाकात होती रहती थी. कभी किसी व्यक्ति को रुपएपैसे की जरूरत पड़ती थी तो वह दीपक से अपना दुखड़ा कह देता. दीपक से उस का दुख देखा नहीं जाता था. वह मांगने वाले की मदद कर के दिल में सुकून महसूस करते थे.

दीपक का अपना खुशहाल परिवार था. मातापिता, भाईबहन, पत्नी और बच्चे. सभी खुशहाल और इज्जत से जीवन जी रहे थे.

यह बात आज से 3 साल पहले की है. दीपक के मोबाइल पर एक काल आई. उन्होंने काल रिसीव कर कहा, ‘‘हैलो, दीपक बोल रहा हूं. आप कौन बोल रहे हैं?’’

‘‘दीपकजी, नमस्कार. मैं गुणावती गांव से रेखा कंवर बोल रही हूं. पहचाना मुझे?’’ फोन करने वाली युवती ने कहा.

तब दीपक बोले, ‘‘रेखा कंवर! मुझे कुछ याद नहीं आ रहा. बोलिए, मैं आप की क्या सेवा कर सकता हूं?’’

‘‘दीपकजी, गुणावती गांव के जनरल स्टोर पर और ब्यूटीपार्लर में आप से कई बार मुलाकात हो चुकी है. अब पहचाना?’’ युवती बोली.

दीपक को अब कुछकुछ याद आया. वह बोले, ‘‘अच्छा, तो आप जनरल स्टोर की मालकिन रेखाजी बोल रही हैं. पहचान लिया. कहिए, कैसे याद किया?’’

‘‘दीपकजी, मैं बहुत परेशान हूं और इसी वक्त आप से मिलना चाहती हूं. मैं इस समय जनरल स्टोर पर आप का इंतजार कर रही हूं. मुझे आप पर पूरा भरोसा है कि आप अवश्य आ कर मेरा दुख और परेशानी दूर करेंगे.’’

‘‘ऐसी क्या परेशानी है, जिस से आप दुखी हैं. जरा बताएंगी?’’ दीपक ने पूछा.

‘‘आप यहां आ जाएं, फिर सब बता दूंगी. प्लीज दीपकजी, जल्दी आइएगा. मैं इंतजार कर रही हूं.’’ रेखा कंवर ने विनती भरे स्वर में कहा.

दीपक को लगा कि रेखा को जरूर कोई परेशानी है. दीपक से किसी की परेशानी या दुख देखा नहीं जाता था. वह बिना कुछ सोचेविचारे गाड़ी ले कर उसी वक्त मकराना से गांव गुणावती के लिए चल दिए.

थोड़ी देर बाद दीपक रेखा कंवर के जनरल स्टोर पर पहुंच गए. उस वक्त जनरल स्टोर पर रेखा कंवर अकेली थी. दीपक के आते ही रेखा ने दुकान बंद की. वह दीपक की गाड़ी में बैठ कर अपने घर आ गई. उस का घर पास में ही था.

दीपक भी उस के साथ उस के घर में आ गया. दोनों जब कमरे में पहुंचे तो रेखा कंवर ने कमरे का दरवाजा बंद कर अंदर से कुंडी लगा दी. दीपक ने रेखा को कुंडी लगाते देखा तो वह बोला, ‘‘कुंडी क्यों लगाई? दरवाजा खोल कर बात करना ठीक नहीं रहेगा क्या?’’

सुन कर रेखा बोली, ‘‘ऐसी बातें बंद दरवाजों के पीछे ही ठीक हैं.’’

कहने के साथ रेखा कंवर ने अपने सारे कपड़े उतार दिए. रेखा को कपड़े उतारते देख दीपक डरते हुए बोला, ‘‘रेखाजी, यह क्या कर रही हैं? मैं जा रहा हूं.’’

कहने के साथ ही दीपक कुंडी खोलने लगा. तभी रेखा ने उस का कुंडी वाला हाथ पकड़ कर अपने शरीर पर रखते हुए कहा, ‘‘अगर मेरा कहना नहीं मानोगे तो मैं हल्ला मचा कर लोगों को इकट्ठा कर के बताऊंगी कि तुम मेरे साथ रेप कर रहे थे. बेहतर होगा कि मेरा साथ दो. मेरा दिल तुम पर आ गया था.

‘‘मेरी जैसी गोरी व खूबसूरत युवती को इस हालत में देख कर भी तुम ऐसे भाग रहे हो जैसे मैं मर्द हूं और तुम औरत और मैं तुम्हारे साथ रेप करने वाली हूं. सोचना छोड़ो और आओ आनंदलोक की सैर करो.’’

कहने के साथ ही रेखा ने दीपक की कमीज भी उतार दी. दीपक इज्जतदार था. वह सोच रहा था कि अगर कोई ऐसे वक्त पर यहां आ गया और उस ने रेखा के साथ बंद कमरे में देख लिया तो इज्जत का जनाजा निकल जाएगा.

दीपक जान छुड़ाने की कोशिश कर रहा था. वहीं रेखा कंवर उस के साथ शारीरिक संबंध बनाने को उतावली हो रही थी. दीपक के न…न करने पर भी रेखा नहीं मानी और उस ने दीपक को भी कपड़ों से मुक्त कर दिया.

दीपक समझ गया था कि वह गलत युवती के पास आ गया है. अब जान छुड़ानी है तो इस के साथ शारीरिक संबंध बनाने ही पडें़गे.

दीपक ने लोकलाज छोड़ कर रेखा कंवर को बांहों में भरा और बिस्तर पर आ गया. इस के बाद दोनों के तन एकदूसरे से रगड़ने लगे. सांसों का तूफान उठा और कमरे का तापमान बढ़ गया.

रेखा गोरी रंगत की सुंदर युवती थी. उस समय रेखा 29 वर्ष की और दीपक 50 साल का था. रेखा के तन में काफी देर बाद दीपक ने अपने तन की गरमी उड़ेल कर रेखा को चूमते हुए कहा, ‘‘सच में आनंदलोक की सैर करा दी. बड़ा मजा आया.’’

सुन कर रेखा मंदमंद मुसकरा कर बोली, ‘‘मुझे तो तुम से भी ज्यादा मजा आया. आज के बाद मैं जब भी फोन करूं या तुम्हारा मन हो फोन कर के आ जाना. दोनों इसी तरह खूब मौजमस्ती किया करेंगे. आज से हम दोनों दोस्त नहीं प्रेमी हैं.’’

सुन कर दीपक बोला, ‘‘मैं डर रहा था कि कोई आ जाएगा तो मेरी इज्जत चली जाएगी. आगे से हम पूरी सावधानी से प्रेमिल संबंध जारी रखेंगे डार्लिंग.’’

उस दिन दोनों ने शारीरिक संबंध बनाने के बाद एकदूजे से विदा ली. दीपक बहुत खुश था. उस ने कभी सोचा भी न था कि एक दिन हूर जैसी युवती उस पर इस तरह फिदा हो कर पके आम सी उस के पहलू में आ गिरेगी.

3 साल पहले शुरू हुआ यह शारीरिक संबंधों का खेल अकसर दीपक और रेखा दोहराने लगे. रेखा का जब मन होता, वह दीपक के मोबाइल पर फोन कर के उसे अपने जनरल स्टोर या घर पर बुला लेती. फिर दोनों रेखा के घर में बंद कमरे में कपड़ों से मुक्त हो कर एकदूजे में समा जाते.

अधेड़ उम्र में दीपक उस का ऐसा दीवाना हुआ कि वह रुपएपैसे से रेखा की दिल खोल कर मदद करने लगा. रेखा का बचपन से सपना था कि वह किसी अमीर युवक से शादी कर के मौजमस्ती की जिंदगी बिताए. मगर गरीब मातापिता के लिए जब रोटी का जुगाड़ करना ही मुश्किल था तो ऐसे में महत्त्वाकांक्षी बेटी के लिए धनवान युवक से शादी करना सपने जैसा था.

रेखा जब जवान हुई, तब उस के मातापिता ने उस के योग्य वर की खोज शुरू की. उन की मेहनत रंग लाई और रेखा कंवर की शादी नागौर जिले के मकराना थानांतर्गत गुणावती गांव के विक्रम सिंह के साथ आज से करीब 8-9 साल पहले हो गई थी.

रेखा कंवर दुलहन बन कर जब ससुराल पहुंची तो उस के सारे अरमान बिखर गए. जैसा स्मार्ट व धनवान जीवनसाथी रेखा को चाहिए था, विक्रम वैसा नहीं था.

विक्रम सिंह गरीब था. वह कच्चे घर में रहता था और मार्बल फैक्ट्री में मार्बल कटिंग का काम करता था. कहने का मतलब यह कि विक्रम सिंह मजदूरी कर के परिवार का पालनपोषण करता था.

रेखा ने अपनी किस्मत को कोसा और पति विक्रम सिंह के साथ किसी तरह जीवन गुजारने लगी. रेखा जब अपना कच्चा मकान देखती तो उसे बहुत दर्द होता. वह चाहती थी कि उस का मार्बल का पक्का मकान हो. घर में वे सब सुखसुविधाएं हों जो एक साधनसंपन्न व्यक्ति के घर में होती हैं.

जैसी सोच थी रेखा की, उसी के अनुसार वह योजना बना रही थी. रेखा अब तक यह समझ गई थी कि अगर वह पति के भरोसे बैठी रही तो उस की इच्छाएं अधूरी ही रहेंगी. विक्रम को मजदूरी के इतने पैसे मिलते थे कि उस से बड़ी मुश्किल से रोटी का ही जुगाड़ हो पाता था.

विक्रम और रेखा अपने संयुक्त परिवार से अलग हो कर कच्चा मकान बना कर रहने लगे. रेखा का ख्वाब था पैसों में खेलना और ऐशोआराम से जीवन जीना. जब उस के ख्वाब अधूरे ही रहे तो उस ने गुणावती गांव में फैंसी जनरल स्टोर व ब्यूटीपार्लर खोल लिया. इस से थोड़ी आर्थिक स्थिति जरूर सुधरी, मगर वह जैसा चाहती थी वैसा कुछ नहीं हुआ.

रेखा कंवर सोशल मीडिया पर एक्टिव रहती थी. उस ने सोशल मीडिया के जरिए दीपक से बात करनी शुरू की और फिर चंद मुलाकातों में ही रेखा जान गई कि अगर उस के ख्वाब पूरे होने हैं तो दीपक से दोस्ती करनी होगी.

दीपक से जानपहचान बढ़ा कर उसे तकलीफ में होने की बात कह कर गांव गुणावती बुला कर अपने घर में ले जा कर शारीरिक संबंध बना लिए. उस के बाद रेखा कंवर अकसर दीपक को फोन कर के अपने घर बुला कर शारीरिक संबंध बनाती थी.

दीपक सोचता था कि रेखा का दिल उस पर आया है, इस कारण वह उस से शारीरिक संबंध बनाती है. दीपक की रेखा से गहरी छनने लगी. रेखा जबतब बहाने बना कर उस से रुपए भी ऐंठती रहती थी.

रेखा ने अपने पति विक्रम सिंह और गांव के लोगों से दीपक का परिचय अपने धर्मभाई के रूप में कराया था. रेखा कहती थी कि दीपक उस का धर्मभाई है, जो सगे भाई से भी बढ़ कर है. वह रुपएपैसे से उस की मदद करता है.

रेखा जब पैसा घर लाती तब पति पूछता, ‘‘रेखा, ये रुपए कहां से आए?’’

सुन कर रेखा कहती, ‘‘दीपक भैया ने दिए हैं. वह कहते हैं कि मैं ऐश करूं और बहन मुसीबत में दिन गुजारे. यह उन्हें अच्छा नहीं लगता है. दीपक भैया हालचाल पूछते रहते हैं. हमारी आर्थिक स्थिति देख कर मेरे लाख मना करने के बाद भी कसम दिला कर रुपएपैसे देते हैं.’’

सुन कर बेचारा पति विक्रम इसे ही सच मान लेता था. उसे भनक तक नहीं लगी थी कि उस की बीवी दीपक के साथ क्या खेल कर रही है. वह समझता था कि दीपक अच्छाभला आदमी है.

पिछले साल रेखा कंवर ने अपना कच्चा घर तोड़ कर मार्बल का मकान बनवाना शुरू कर दिया था. तब भी रेखा ने विक्रम से कहा कि उस का धर्मभाई दीपक मकान बनाने में दिल खोल कर मदद कर रहा है.

विक्रम को और क्या चाहिए था. वह आंखें मूंद कर पत्नी पर विश्वास करता था. वहीं रेखा अपने पति से विश्वासघात कर रही थी. वह धर्मभाई बने दीपक की बांहों में झूला तो झूलती ही थी, विदेशी पोर्न फिल्मों की नायिका की तरह दीपक से कई पोजीशन में शारीरिक संबंध बना कर उस की तबीयत खुश कर देती थी.

दीपक पिछले काफी समय से चिंतित व गुमसुम सा रहने लगा था. उस के घर वालों ने पूछा भी कि वह गुमसुम सा क्यों लग रहा है. मगर दीपक यह कह देता कि मुझे किस बात की चिंता होगी. आप लोगों का वहम है.

मगर परिजन व मित्रों को लगता था कि दीपक डराडरा सा रहता है. उस के माथे पर चिंता की लकीरें स्पष्ट दिख रही थीं. वह 16 अप्रैल, 2022 के बाद से एकदम गुमसुम व चिंतित हो गया. उस की जीने की इच्छा खत्म हो गई थी. उस के मन में आत्महत्या करने के विचार आ रहे थे.

दीपक ने आत्महत्या करने की ठान ली. उस ने इस बात की चर्चा किसी से नहीं की. दीपक ने सुसाइड करने से पहले एक बार अपनी बहन से मिल कर आने के बाद सुसाइड करने का मन में पक्का विचार कर लिया.

वह 22 अप्रैल, 2022 को मकराना से अपनी बहन से मिलने जयपुर पहुंचा. बहन ने भाई की हालत व गुमसुम सा देखा. तब उस ने पूछा, ‘‘क्या बात है भाईसाहब, आप बहुत दुखी लग रहे हैं. जो भी बात हो कह दो. शायद मैं कुछ मदद कर सकूं.’’

सुन कर दीपक सुबकने लगा. बहन ने सांत्वना दे कर चुप कराया. तब दीपक बोला, ‘‘मुझे एक औरत और 2 आदमी मिल कर हनीट्रैप में फंसा कर ब्लैकमेल कर रहे हैं. उन लोगों ने मुझ से 31 लाख रुपए ले लिए हैं. एक हफ्ते पहले उन लोगों ने मेरा उस महिला के साथ अश्लील वीडियो भेज कर 50 लाख रुपए मांगे हैं. रुपए नहीं देने पर अश्लील वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल करने की धमकी दे रहे हैं. मैं उन के जाल में बुरी तरह फंस गया हूं. मैं रुपए दूंगा तब वे और डिमांड करेंगे और नहीं दूंगा तो वे लोग वीडियो वायरल कर देंगे. इज्जत जाए उस से पहले मैं सुसाइड कर रहा हूं.’’

सुन कर बहन बोली, ‘‘वह औरत कौन है उस के साथ जो 2 लोग हैं, वे कौन हैं?’’

इस के बाद दीपक ने रेखा कंवर से मिलने के बाद से अब तक की पूरी कहानी विस्तार से सुना दी. सुन कर बहन बोली, ‘‘योजना के तहत रेखा ने तकलीफ में होने का नाटक कर तुम्हें घर बुलाया. इस के बाद कमरे का दरवाजा बंद कर कपड़े उतार कर तुम्हें डराधमका कर शारीरिक संबंध बनाए. उस की वीडियो बना ली ताकि भविष्य में तुम्हें ब्लैकमेल कर के रुपए ऐंठ सके. तुम मेरे साथ मकराना थाने चलो. वहां हम रिपोर्ट कर के इस गैंग को गिरफ्तार करा देंगे.’’

दीपक ने भी थाने जा कर रिपोर्ट दर्ज कराने का मन बना लिया. दोनों भाईबहन 24 अप्रैल, 2022 को मकराना थाने पहुंच गए और थानाप्रभारी प्रमोद कुमार शर्मा को सारी बात बता दी. इस के बाद रेखा कंवर, विक्रम सिंह और शैतान सिंह के खिलाफ हनीट्रैप में फंसा कर ब्लैकमेल करने की रिपोर्ट दर्ज करा दी.

थानाप्रभारी प्रमोद कुमार शर्मा को दीपक ने बताया कि रेखा ने उस के अश्लील वीडियो बना रखे थे. इस के बाद उस ने वीडियो शेयर करने की धमकी दे कर 8 लाख रुपए ले लिए. डेढ़ महीने पहले वह रेखा के पास गया तो वहां पहले से रेखा कंवर का भांजा शैतान सिंह व विक्रम सिंह मौजूद था. दोनों ने उन के पुराने वीडियो दिखा कर दबाव बनाया और रेखा से फिर से संबंध बनाने को कहा. इस का भी उस ने वीडियो बना लिया.

दीपक ने बताया कि 10 दिन पहले शैतान सिंह ने उस के मोबाइल पर वह वीडियो भेज कर धमकाया और 23 लाख रुपए ले लिए. इस के बाद वे 50 लाख रुपए देने का दबाव बनाने लगे.

23 लाख रुपए लेने के बाद शैतान सिंह ने अप्रैल के दूसरे हफ्ते में उसे धमकाया कि मामला निपटाना है तो 50 लाख रुपए लगेंगे. रुपए नहीं देने पर उस ने वीडियो वायरल करने की धमकी दी.

थानाप्रभारी प्रमोद कुमार शर्मा ने मामला दर्ज करने के बाद काररवाई करते हुए उसी दिन 24 अप्रैल, 2022 को रेखा कंवर, विक्रम सिंह व शैतान सिंह को कस्टडी में ले लिया. तीनों आरोपियों को थाने ला कर पूछताछ की.

पुलिस पूछताछ में आरोपियों ने जुर्म कुबूल कर लिया. मार्बल व्यापारी दीपक को हनीट्रैप में फंसाने वाली रेखा लग्जरी लाइफ जीना चाहती थी. पति महंगे शौक पूरे नहीं कर पा रहा था. वह चाहती थी कि उस का एक आलीशान घर हो.

इस बीच दीपक के संपर्क में आई. दोनों के बीच 3 साल से रिलेशन थे लेकिन बढ़ते लालच के चलते वह व्यापारी से 50 लाख रुपए मांगने लगी, जिस से ये सारी कहानी सामने आ गई.

नागौर एसपी राममूर्ति जोशी, कुचामन सिटी एएसपी गशेराम के सुपरविजन में डीएसपी मकराना रविराज सिंह और थानाप्रभारी प्रमोद कुमार शर्मा की टीम ने आरोपी रेखा कंवर, शैतान सिंह और विक्रम सिंह को गिरफ्तार कर लिया.

पुलिस ने आरोपियों के मोबाइल जब्त कर जांच के लिए भेज दिए. खैर, जो भी हो रेखा का लालच उसे ले डूबा. पूछताछ पूरी कर तीनों आरोपियों को कोर्ट में पेश कर न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया.द्य

—कथा पुलिस सूत्रों पर आधारित.

कथा में दीपक नाम परिवर्तित है.

Rajasthan Crime: हत्यारा प्रेमी – आशिक क्यों बना कातिल

Rajasthan Crime: राजस्थान के जिला नागौर में एक कस्बा है. मेड़ता सिटी. इसी कस्बे में कभी मीराबाई जन्मी थीं. मीरा का मंदिर भी यहां बना हुआ है. मेड़ता सिटी की गांधी कालोनी में दीपक उर्फ दीपू रहता था. दीपक के पिता बंशीलाल डिस्काम कंपनी में नौकरी करते थे. उन की पोस्टिंग सातलावास जीएसएस पर थी. पिता की सरकारी नौकरी होने की वजह से घर में किसी तरह का अभाव नहीं था. जिस से दीपक भी खूब बनठन कर रहता था.

मेड़ता सिटी में नायकों की ढाणी की रहने वाली इंद्रा नाम की युवती से उसे प्यार हो गया था. दीपक चाहता था कि वह अपनी प्रेमिका पर दिल खोल कर पैसे खर्च करे पर उसे घर से जेब खर्च के जो पैसे मिलते थे उस से उस का ही खर्चा बड़ी मुश्किल से चल पाता था. चाह कर भी वह प्रेमिका इंद्रा को उस की पसंद का सामान नहीं दिलवा पाता था.

तब दीपक ने अपनी पढ़ाई बीच में ही छोड़ दी और वह पिता के साथ डिस्काम में ही काम करने लगा. वहां काम करने से उसे अच्छी आय होने लगी. अपनी कमाई के दम पर वह इंद्रा को अपनी मोटरसाइकिल पर घुमाताफिराता. अपनी कमाई का अधिकांश भाग वह प्रेमिका इंद्रा पर ही खर्च करने लगा.

इंद्रा एक विधवा युवती थी. दरअसल इंद्रा की शादी करीब 3 साल पहले बीकानेर में हुई थी पर शादी के कुछ दिन बाद ही उस के पति की अचानक मौत हो गई. पति की मौत का उसे बड़ा सदमा लगा.

ऊपर से ससुराल वाले उसे ताने देने लगे कि वह डायन है. घर में आते ही उस ने पति को डस लिया. ससुराल में दिए जाने वाले तानों से वह और ज्यादा दुखी हो गई और फिर एक दिन अपने मायके आ गई.

मायके में रह कर वह पति की यादों को भुलाने की कोशिश करने लगी. धीरेधीरे उस का जीवन सामान्य होता गया. वह बाजार आदि भी आनेजाने लगी. उसी दौरान उस की मुलाकात दीपक उर्फ दीपू से हुई. बाद उन की फोन पर भी बात होने लगी. बातों मुलाकातों से बात आगे बढ़ते हुए प्यार तक पहुंच गई. इस के बाद तो वह दीपक के साथ मोटरसाइकिल पर घूमनेफिरने लगी.

यह काम इंद्रा के घर वालों को पता नहीं थी. उन्हें तो इस बात की चिंता होने लगी कि विधवा होने के कारण बेटी का पहाड़ सा जीवन कैसे कटेगा. वह उस के लिए लड़का तलाशने लगे.

आसोप कस्बे में एक रिश्तेदार के माध्यम से पंचाराम नाम के युवक से शादी की बात बन गई. फिर नाताप्रथा के तहत इंद्रा की पंचाराम से शादी कर दी. यह करीब 8 माह पहले की बात है.

दूसरी शादी के बाद इंद्रा ससुराल चली गई तो दीपक बुझा सा रहने लगा. उस के बिना उस का मन नहीं लग रहा था. वह कभीकभी इंद्रा से फोन पर बात कर लेता था. कुछ दिनों बाद इंद्रा आसोप से मायके आई तो वह दीपक से पहले की तरह मिलने लगी. दूसरे पति पंचाराम से ज्यादा वह दीपक को चाहती थी. क्योंकि वह उसे हर तरह से खुश रखता था.

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मार्च 2017 में दीपक के घर वालों ने अपने ही समाज की लड़की से दीपक की शादी कर दी. दीपक ने अपनी शादी की बात इंद्रा से काफी दिनों तक छिपाए रखी पर इंद्रा को किसी तरह अपने प्रेमी की शादी की बात पता चल गई. यह बात इंद्रा को ठीक नहीं लगी. तब इंद्रा ने दीपक से बातचीत कम कर दी.

जब दीपक उसे मिलने के लिए बुलाता तो वह बेमन से उस से मिलने जाती थी. अक्तूबर, 2017 के तीसरे हफ्ते में दीपक और इंद्रा की मुलाकात हुई तो इंद्रा ने कहा, ‘‘दीपू, ससुराल से पति का बुलावा आ रहा है. मैं 2-4 दिनों में ही चली जाऊंगी.’’

‘‘इंद्रा प्लीज, ऐसा मत करो. तुम चली जाओगी तो मैं तुम्हारे बिना कैसे जी पाऊंगा. याद है जब तुम शादी के बाद यहां से चली गई थी तो मेरा मन नहीं लग रहा था.’’ दीपक बोला.

‘‘मेरी दूसरी शादी हुई है. मैं पति को खोना नहीं चाहती. मुझे माफ करना. मुझे ससुराल जाना ही होगा.’’ इंद्रा ने कहा.

दीपक उसे बारबार ससुराल जाने को मना करता रहा. पर वह जाने की जिद करती रही. इसी बात पर दोनों में काफी देर तक बहस होती रही. इस के बाद दोनों ही मुंह फुला कर अपनेअपने घर चले गए.

उस रोज 27 अक्तूबर, 2017 का दिन था. मेड़ता सिटी थाने में किसी व्यक्ति ने सूचना दी कि एक युवती की अधजली लाश जोधपुर रोड पर स्थित जय गुरुदेव नगर कालोनी के सुनसान इलाके में पड़ी है. सुबहसुबह लाश मिलने की खबर से थाने में हलचल मच गई.

थानाप्रभारी अमराराम बिश्नोई पुलिस टीम के साथ सूचना में बताए पते पर पहुंच गए. घटनास्थल के आसपास भीड़ जमा थी. पुलिस ने घटनास्थल का बारीकी से निरीक्षण किया, मगर अधजले शव के पास ऐसी कोई चीज नहीं मिली जिस से मृतका की पहचान हो पाती.

थानाप्रभारी की सूचना पर सीओ राजेंद्र प्रसाद दिवाकर भी मौके पर पहुंच गए थे. उन्होंने भी मौके का निरीक्षण कर वहां खड़े लोगों से पूछताछ की. कोई भी उस शव की शिनाख्त नहीं कर सका.

नायकों की ढाणी का रहने वाला रामलाल नायक भी लाश मिलने की खबर पा कर जय गुरुदेव नगर कालोनी पहुंच गया. उस की बेटी  इंद्रा भी 26 अक्तूबर से लापता थी. झुलसी हुई लाश को वह भी नहीं पहचान सका. लाश की शिनाख्त न होने पर पुलिस ने जरूरी काररवाई कर लाश पोस्टमार्टम के लिए भेज दी.

मरने वाली युवती की शिनाख्त हुए बिना जांच आगे बढ़नी संभव नहीं थी. सीओ राजेंद्र प्रसाद दिवाकर और थानाप्रभारी अमराराम बिश्नोई इस बात पर विचारविमर्श करने लगे कि लाश की शिनाख्त कैसे हो. उसी समय उन के दिमाग में आइडिया आया कि यदि मृतका के अंगूठे के निशान ले कर उन की जांच कराई जाए तो उस की पहचान हो सकती है क्योंकि आधार कार्ड बनवाते समय भी फिंगर प्रिंट लिए जाते हैं. हो सकता है कि इस युवती का आधार कार्ड बना हुआ हो.

पुलिस ने आधार कार्ड मशीन में मृतका के अंगूठे का निशान लिया तो पता चला कि मृतका का आधार कार्ड बना हुआ है. इस जांच से यह पता चल गया कि मृतका का नाम इंद्रा पुत्री रामलाल नायक है. लाश की शिनाख्त होने के बाद पुलिस ने रामलाल नायक को सिटी थाने बुलाया और उस की तहरीर पर अज्ञात लोगों के खिलाफ भादंवि की धारा 302, 201 के तहत रिपोर्ट दर्ज कर ली.

पुलिस ने रामलाल नायक से पूछताछ की तो उस ने बताया कि इंद्रा करीब डेढ़ महीने पहले गांधी कालोनी निवासी अपने दोस्त दीपक के साथ बिना कुछ बताए कहीं चली गई थी. उन दिनों गणपति उत्सव चल रहा था. वह 7-8 दिन बाद वापस घर लौट आई थी. इस बार भी सोचा था कि उसी के साथ कहीं चली गई होगी. मगर उस का मोबाइल बंद होने के कारण उन्हें शंका हुई.

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रामलाल ने शक जताया कि इंद्रा की हत्या दीपक ने ही की होगी. रामलाल से पुलिस को पता चला कि इंद्रा के पास मोबाइल फोन रहता था जो लाश के पास नहीं मिला था. अब दीपक के मिलने पर ही मृतका के फोन के बारे में पता चल सकता था.

28 अक्तूबर को डा. बलदेव सिहाग, डा. अल्पना गुप्ता और डा. भूपेंद्र कुड़ी के 3 सदस्यीय मैडिकल बोर्ड ने इंद्रा के शव का पोस्टमार्टम किया. पोस्टमार्टम के बाद शव उस के परिजनों को सौंप दिया गया.

केस को सुलझाने के लिए सीओ राजेंद्र प्रसाद दिवाकर के नेतृत्व में एक पुलिस टीम  बनाई गई. टीम में थानाप्रभारी (मेड़ता) अमराराम बिश्नोई, थानाप्रभारी (कुचेरा) महावीर प्रसाद, हैडकांस्टेबल भंवराराम, कांस्टेबल हरदीन, सूखाराम, अकरम, अनीस, हरीश, साबिर खान और महिला कांस्टेबल लक्ष्मी को शामिल किया गया. दीपक की तलाश में पुलिस ने इधरउधर छापेमारी की. तब कहीं 5 दिन बाद पहली नवंबर, 2017 को दीपक उर्फ दीपू पुलिस के हत्थे चढ़ पाया.

पुलिस ने थाने ला कर जब उस से इंद्रा की हत्या के बारे में पूछा तो वह थोड़ी देर इधरउधर की बातें करता रहा लेकिन थोड़ी सख्ती के बाद उस ने इंद्रा की हत्या करने का जुर्म स्वीकार कर लिया.

पुलिस ने उसी रोज दीपक को मेड़ता सिटी कोर्ट में पेश कर के 5 दिन के रिमांड पर ले लिया और कड़ी पूछताछ की. पूछताछ में इंद्रा मर्डर की जो कहानी प्रकाश में आई वह इस प्रकार निकली.

दीपक और इंद्रा एकदूजे से बेइंतहा मोहब्बत करते थे. लेकिन उन के संबंधों में दरार तब आई जब इंद्रा को दीपक की शादी होने की जानकारी मिली. इंद्रा को दीपक की यह बात बहुत बुरी लगी कि उस ने शादी करने की बात उस से छिपाए क्यों रखी. इंद्रा को यह महसूस हुआ कि दीपक उसे छल रहा है. इसलिए उस ने दीपक से संबंध खत्म कर पति के पास जाने का फैसला कर लिया. यही बात उस ने दीपक को साफसाफ बता दी.

दीपक ने उसी रोज तय कर लिया था कि अगर इंद्रा ने ससुराल जाने का कार्यक्रम नहीं बदला तो वह उसे जान से मार डालेगा. इंद्रा को यह खबर नहीं थी कि दीपक उस की जान लेने पर आमादा है. जब 26 अक्तूबर को दीपक ने इंद्रा को फोन कर के बुलाया तो उसे पता नहीं था कि प्रेमी के रूप में उसे मौत बुला रही है.

उसे 27 अक्तूबर को ससुराल जाना था इसलिए सोचा कि जाने से पहले एक बार दीपक से मिल ले. इसलिए उस के बुलावे पर वह उस से मिलने पहुंच गई. इंद्रा ने जब उसे बताया कि वह कल ससुराल जाएगी तो दीपक ने ससुराल जाने से उसे फिर मना किया. वह नहीं मानी तो वह उसे बहलाफुसला कर मोटरसाइकिल से सातलावास डिस्काम जीएसएस पर बने कमरे में ले गया.

ससुराल जाने के मुद्दे पर फिर इंद्रा से बहस हुई. दीपक को गुस्सा आ गया. उस ने पहले से बनाई योजनानुसार इंद्रा की चुन्नी उसी के गले में लपेट कर उस की हत्या कर दी. गला घोंटने से इंद्रा की आंखें बाहर निकल गईं और कुछ ही देर में उस की मौत हो गई.

इस के बाद उस की लाश को एक बोरे में डाला और बाइक पर रख कर उसे मेड़ता सिटी से बाहर जोधपुर रोड पर जय गुरुदेव कालोनी में सुनसान जगह पर ले गया.

इस के बाद अपनी मोटरसाइकिल से पैट्रोल निकाल कर रात के अंधेरे में लाश को आग लगा दी. उस ने सोचा कि अब शव की शिनाख्त नहीं हो पाएगी और वह बच जाएगा. लेकिन आधार मशीन पर मृतका के अंगूठे का निशान लेते ही लाश की शिनाख्त हो गई और फिर पुलिस दीपक तक पहुंच गई.

पुलिस ने दीपक की निशानदेही पर उस की बाइक भी जब्त कर ली, जो इंद्रा की लाश ठिकाने लगाने में प्रयुक्त की गई थी. पूछताछ पूरी होने पर दीपक उर्फ दीपू को 5 नवंबर, 2017 को पुन: कोर्ट में पेश किया, जहां से उसे न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया. मामले की जांच थानाप्रभारी अमराराम बिश्नोई कर रहे थे. कथा लिखे जाने तक दीपक की जमानत नहीं हुई थी.

– कथा पुलिस सूत्रों पर आधारित

Crime Kahani: प्रेमिका का एसिड अटैक – सोनम ने की प्रेम की हद पार

Crime Kahani: पहली मंजिल पर रह रहे किराएदार के कमरे से सुबहसुबह तेज चीखने की आवाज भूतल पर रह रहे मकान मालिक सुरेशचंद्र की पत्नी ने सुनी. आवाज सुन कर एक बार तो वह सोच में पड़ गईं. लेकिन दूसरे ही पल लगातार आ रही चीखों को सुन कर वह एक ही सांस में सीढि़यां चढ़ कर किराएदार नर्स सोनम पांडेय के कमरे में पहुंच गईं. क्योंकि चीख उसी के कमरे से आ रही थी. वहां का दृश्य देख कर उन की आंखें आश्चर्य से फटी रह गईं. पीछेपीछे मकान मालिक सुरेशचंद्र भी वहां पहुंच गए.

कमरे के फर्श पर सोनम और देवेंद्र झुलसे हुए पड़े थे. वहीं पर एक स्टील का डब्बा पड़ा था. कमरे में तेजाब की तेज दुर्गंध आ रही थी. दोनों ही तेजाब की जलन और दर्द से तड़प रहे थे. उस समय सुबह के यही कोई 7 बज रहे थे. इसी बीच झुलसी हालत में ही देवेंद्र ने अपने दोस्त शिवम को फोन किया.

कुछ ही देर में शिवम आटो ले कर वहां पहुंच गया. वह आननफानन में घायल देवेंद्र को आटो में ले कर अस्पताल जाने लगा. इस पर मकान मालिक सुरेशचंद्र ने उस से कहा कि वह घायल सोनम को भी साथ ले जाए. क्योंकि इलाज की उसे भी जरूरत है. तब शिवम ने कहा, ‘‘मैं पहले देवेंद्र को अस्पताल में भरती करा दूं वह ज्यादा झुलस गया है. इस के बाद सोनम को ले जाऊंगा.’’ इस तरह वह देवेंद्र को वहां से ले कर चला गया.

जब शिवम सोनम को काफी देर तक लेने नहीं आया तो सुरेशचंद्र ने इस की सूचना थाना हरीपर्वत के थानाप्रभारी अरविंद कुमार को दे दी. थानाप्रभारी सूचना मिलते ही मौके पर पहुंच गए. उन्होंने तेजाब से झुलसी सोनम को एक निजी अस्पताल में भरती कराया. वहीं अस्पताल में भरती 80 फीसदी झुलसे देवेंद्र की उपचार के दौरान दोपहर करीब ढाई बजे मौत हो गई.

पुलिस ने मरने से पहले देवेंद्र के मजिस्ट्रैट के सामने बयान दर्ज करा लिए थे. उस ने अपने बयान में सोनम पांडेय को एसिड अटैक के लिए जिम्मेदार बताया था. देवेंद्र के घर वालों को जब यह जानकारी उस के दोस्त शिवम ने दी तो उस के घर में रोना शुरू हो गया. वह 5 बहनों के बीच अकेला भाई था, रोतेरोते मां और बहनों की हालत बिगड़ गई. दरअसल, यह मामला उत्तर प्रदेश के आगरा शहर के थाना हरीपर्वत क्षेत्र स्थित शास्त्रीनगर का है.

देवेंद्र ने अपने बयान में बताया था कि 25 मार्च, 2021 की सुबह सोनम ने उसे अपने कमरे में लगे पंखे को ठीक करने के लिए बुलाया था. जैसे ही देवेंद्र कमरे में आया तो सोनम ने स्टील के डब्बे में रखा तेजाब उस के ऊपर उड़ेल दिया. अचानक हुए इस हमले से वह खुद को बचा नहीं सका. एसिड अटैक के दौरान नर्स सोनम पर भी तेजाब गिर गया था, जिस से वह भी झुलस गई थी. अब प्रश्न यह था कि सोनम ने देवेंद्र के ऊपर एसिड अटैक क्यों किया?

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पुलिस ने मकान मालिक सुरेशचंद्र से बात की तो उन्होंने पुलिस को बताया कि सोनम पहले शास्त्रीनगर में ही स्थित किसी दूसरे मकान में रहती थी. 5 महीने से वह उन के मकान में किराए पर रह रही थी. देवेंद्र को वह अपना पति बताती थी. वह कमरे पर उस के पास 10-12 दिनों में आता और 1-2  दिन रुक कर चला जाता था. उस का कहना था कि पति बाहर काम करते हैं.

वहीं सूचना पा कर अस्पताल पहुंचे देवेंद्र के घर वालों ने इन सब बातों से अनभिज्ञता जताई. उन का कहना था कि  सोनम के देवेंद्र से संबंध होने की उन्हें जानकारी नहीं थी. उन्होंने बताया कि देवेंद्र अविवाहित था और उस की 28 अप्रैल को शादी होने वाली थी. देवेंद्र की मां कुसुमा ने सोनम पांडेय पर बेटे की हत्या का आरोप लगाया. सोनम के कमरे की तलाशी के दौरान पुलिस ने स्टील का एक डब्बा बरामद किया. संभवत: इस एक लीटर वाले डब्बे में दूध लाया जाता होगा. इस में ही तेजाब रखा हुआ था. इस डब्बे की तली में तेजाब भी मिला. वहीं कमरे से देवेंद्र के जले हुए कपड़े व जूते भी मिले. पुलिस ने इन साक्ष्यों को जब्त कर जरूरी काररवाई के बाद फोरैंसिक लैब भेज दिया.

घटना की जानकारी मिलने पर एसपी (सिटी) रोहन प्रमोद बोत्रे ने घटनास्थल का निरीक्षण किया व अस्पताल भी गए. उन्होंने पत्रकारों को बताया कि सोनम और देवेंद्र के बीच प्रेम संबंध थे. आरोपी युवती को गिरफ्तार कर लिया गया है. चूंकि वह भी एसिड की चपेट में आ कर झुलसी है, इसलिए इलाज के लिए उसे अस्पताल में भरती कराया गया है.

पुलिस ने जरूरी काररवाई करने के बाद देवेंद्र के शव को पोस्टमार्टम के लिए मोर्चरी भेज दिया. पुलिस ने मामले की गहनता से जांच की. जांच में पता चला कि सोनम पांडेय मूलरूप से उत्तर प्रदेश के औरैया जिले के भागूपुर की रहने वाली शादीशुदा युवती है. सोनम की शादी करीब 10 साल पहले गुजरात में हुई थी. शादी के कुछ दिनों बाद ही पतिपत्नी के बीच लड़ाईझगड़ा रहने लगा. इस दौरान वह एक बेटे की मां भी बन गई. शादी के 2 साल बाद ही वह अपने बेटे को ले कर अपने मायके आ गई.

कुछ समय बाद वह आगरा आ कर नर्स की नौकरी करने लगी थी. वह सिकंदरा बाईपास स्थित एक अस्पताल में नर्स थी. बेटा ननिहाल में ही रह रहा था. सोनम ने अब तक अपने पति से तलाक नहीं लिया था. उस ने अपने साथी कर्मचारियों को भी अपने शादीशुदा होने के बारे में नहीं बताया था. 28 वर्षीय देवेंद्र राजपूत मूलरूप से उत्तर प्रदेश के कासगंज जिले के सहावर क्षेत्र के गांव बाहपुर का रहने वाला था. देवेंद्र चिकित्सा क्षेत्र में बचपन से ही रुचि रखता था. इसलिए उस ने लैब टैक्नीशियन का कोर्स किया था.

सुनहरे भविष्य की तलाश में वह आगरा आ गया था और पिछले 8 साल से लाल पैथ लैब में सहायक के पद पर काम कर रहा था. वह आगरा के ही खंदारी इलाके में किराए पर रहता था. चूंकि सोनम और देवेंद्र एक ही फील्ड से जुड़े थे, एक दिन काम के दौरान दोनों की जानपहचान हो गई. साथसाथ काम करते पहले दोनों में दोस्ती हुई, जो बाद में प्यार में बदल गई.

पिछले 3 सालों से दोनों लिवइन रिलेशन में रह रहे थे. सोनम ने अपने मकान मालिक को बता रखा था कि देवेंद्र उस का पति है. इस तरह देवेंद्र का जब मन होता, वह सोनम से मिलने उस के कमरे पर चला जाता था. इसी बीच सोनम को पता चला कि देवेंद्र की शादी कहीं और तय हो गई है. इस जानकारी से सोनम का गुस्सा सातवें आसमान पर पहुंच गया. क्योंकि वह देवेंद्र पर शादी करने का दबाव बना रही थी. सोनम ने घटना से कुछ दिन पहले देवेंद्र से कहा, ‘‘मैं तुम से बहुत प्यार करती हूं और तुम से शादी करना चाहती हूं.’’

देवेंद्र को सोनम के बारे में पता चल चुका था कि वह शादीशुदा है और उस के एक बच्चा भी है. देवेंद्र तो सोनम के साथ पिछले 3 साल से केवल टाइम पास कर रहा था. देवेंद्र ने उसे समझाते हुए कहा,‘‘सोनम तुम शादीशुदा हो. तुम्हारे एक बेटा भी है. और तुम ने अब तक अपने पति से तलाक भी नहीं लिया है. ऐसे में हम शादी कैसे कर सकते हैं? ऐसी स्थिति में मेरे घर वाले भी शादी के लिए तैयार नहीं होंगे. फिर मेरी भी शादी तय हो चुकी है.’’

देवेंद्र की इन बातों ने आग में घी डालने का काम किया. सोनम अपना आपा खो बैठी. उस ने मन ही मन तय कर लिया कि वह अपने प्रेमी को किसी और का हरगिज नहीं होने देगी. अपने खतरनाक मंसूबे की भनक उस ने देवेंद्र को नहीं लगने दी. इस बीच देवेंद्र ने सोनम के कमरे और उस से मिलनाजुलना भी बंद कर दिया. अपनी योजना को अंजाम देने के लिए सोनम ने 25 मार्च, 2021 की सुबह देवेंद्र को फोन कर कमरे का पंखा ठीक करने के बहाने अपने पास बुलाया था.

देवेंद्र सोनम के कमरे पर पहुंचा तो उन दोनों के बीच शादी की बात को ले कर गरमागरमी हुई. इस के बाद सोनम ने स्टील के डब्बे में पहले से लाए तेजाब से देवेंद्र पर अटैक कर दिया, जिस से वह गंभीर रूप से सिर से पैर तक झुलस गया. जानकारी मिलने पर घटना के दूसरे दिन सोनम के पिता आगरा आ गए. उन्होंने घायल बेटी को एस.एन. मैडिकल कालेज में भरती कराया. वहां उपचार होने से उस की हालत में सुधार हुआ. हालांकि उस समय तक उस के बयान दर्ज नहीं हो सके थे.

प्रेमिका के तेजाबी हमले ने एक साथ 3 परिवारों के अरमानों को झुलसा दिया. 5 बहनों में इकलौता भाई और एक मां से उस का घर का चिराग छीन लिया. मां और बहनें देवेंद्र के सिर पर सेहरा बांधने की तैयारी में जुटी थीं. शादी के कार्ड भी छप गए थे.

शादी में बुलाने वालों को कार्ड भेजने की तैयारी चल रही थी. वहीं कासगंज की रहने वाली जिस युवती से देवेंद्र का रिश्ता तय हो गया था और एक महीने बाद दोनों को फेरे लेने थे, उस के अरमानों को भी तेजाब से हमेशा के लिए झुलसा दिया. पोस्टमार्टम के बाद देवेंद्र का शव रात 9 बजे जब घर पहुंचा तो बेटे का शव देख कर मां बेहोश हो गईं. वहीं पांचों बहनें अपने छोटे भाई के शव से लिपट कर रोने लगीं. पूरे गांव में शोक का माहौल था. उधर जिस घर में देवेंद्र की बारात जानी थी वहां उस की मौत की खबर पहुंचने से कोहराम मच गया.

दूसरे दिन शुक्रवार की सुबह देवेंद्र का शोकपूर्ण माहौल में अंतिम संस्कार किया गया. सभी का कहना था कि देवेंद्र की हत्यारोपी को सख्त से सख्त सजा मिलनी चाहिए. कहानी लिखे जाने तक प्रेमिका का इलाज चल रहा था. ठीक होने पर उसे जेल जाना पड़ेगा. देश भर में हर साल एसिड अटैक की तमाम घटनाएं होती हैं, वह भी तेजाब पर बैन लगाए जाने के बाद. एसिड अटैक एक खतरनाक अपराध है, जो महिला हो या पुरुष सभी की जिंदगी तबाह कर देता है. सुप्रीम कोर्ट के सख्त आदेशों के बाद भी देश में गैरकानूनी रूप से होने वाली एसिड की बिक्री पर रोक नहीं लगाई जा सकी है.

एसिड बिक्री को ले कर जो कानून हैं, उन्हें सख्ती के साथ जमीन पर उतारा जाना बेहद जरूरी है. एसिड अटैक से पीडि़त व्यक्ति के निजी, सामाजिक, पारिवारिक और आर्थिक जीवन पर बेहद बुरा प्रभाव पड़ता है. Crime Kahani

—कथा पुलिस सूत्रों पर आधारित

Hindi Story: जब बिगड़ी बात तब हुआ फसाद

Hindi Story: हेमंत कटारे मध्य प्रदेश में भिंड जिले की अटेर विधानसभा सीट से कांग्रेस के विधायक हैं. इस सीट से साल 2013 में उन के पिता सत्यदेव कटारे जीते थे जो विधानसभा में विपक्ष के नेता थे.

पिता की मौत से उपजी हमदर्दी और कांग्रेस के दिग्गज नेता व गुना के सांसद ज्योतिरादित्य सिंधिया से नजदीकियों का फायदा हेमंत कटारे को उपचुनाव में मिला और उन्होंने भाजपा के वजनदार उम्मीदवार अरविंद भदौरिया को 800 वोटों के अंतर से हरा दिया.

हेमंत कटारे जीत कर भोपाल आए तो उन का स्वागत किसी हीरो की तरह धूमधड़ाके से हुआ. कई पत्रकारों ने उन के इंटरव्यू लिए थे. उन में से एक थी 21 साला खूबसूरत प्रिंशु सिंह जो कुछ करगुजरने की चाह लिए पत्रकारिता की पढ़ाई करने भोपाल आई थी.

प्रिंशु सिंह भोपाल की माखनलाल चतुर्वेदी पत्रकारिता यूनिवर्सिटी के आखिरी साल में थी और पिछले साल उस ने पढ़ाई में गोल्ड मैडल हासिल किया था.

यह प्यार था या…

हेमंत कटारे और प्रिंशु सिंह की नजर पहली दफा जो मिली तो वे दोनों दोस्त बन गए और फिर आम प्रेमियों की तरह भोपाल में छिप कर इधरउधर मिलने लगे.

हेमंत कटारे इस प्यार को छिपाए रखना चाहते थे क्योंकि उन के राजनीतिक कैरियर की अभी शुरुआत थी. प्यार उजागर होता तो बदनामी भी होती. दो टूक कहा जाए तो वे इश्क की रंगीनियों में तो रहना चाहते थे लेकिन प्रिंशु सिंह से शादी नहीं करना चाहते थे और इस बाबत उन्होंने प्रिंशु सिंह से कोई वादा भी नहीं किया था.

crime

आजकल के ज्यादातर नौजवान प्यार तो किसी और से करते हैं पर शादी किसी और से करते हैं. इसी दौरान दोनों मरजी से हमबिस्तरी का भी लुत्फ उठा लें तो भी बात हैरत की नहीं रह जाती.

प्यार में दिक्कत तब खड़ी होती है जब दोनों में से कोई एक जज्बातों और हमबिस्तरी की कीमत मांगते हुए दूसरे को ब्लैकमेल करने लगे, धमकी देने लगे या फिर डर के मारे किसी तरह का जिस्मानी नुकसान पहुंचाए.

प्यार अगर वक्तीतौर पर जिस्मानी सुख भोगने का जरीया हो और वक्त रहते ही आशिकमाशूक अपने रास्ते अलग न करें तो तय है कि वे किसी हादसे या आफत की गिरफ्त में आने वाले होते हैं. ऐसा ही कुछ इस मामले में भी हुआ.

जब खुले राज तो

मध्य प्रदेश की सियासत में जनवरी और फरवरी के महीने में हेमंत कटारे और प्रिंशु सिंह की मुहब्बत के चर्चे अलगअलग अंदाज से किसी टैलीविजन सीरियल की तरह होते रहे जिन्हें आम लोगों ने भी चटकारे ले कर दिलचस्पी से सुना.

14 जनवरी, 2018 को प्रिंशु सिंह ने एक वीडियो वायरल करते हुए हेमंत कटारे पर इलजाम लगाए कि वे उस का बलात्कार करते रहे हैं. प्रिंशु सिंह ने यह भी दावा किया कि उस के पास हेमंत कटारे के ऐसे वीडियो और आडियो हैं जिन से यह साबित होता है कि हेमंत कटारे उसे प्यार के झांसे में ले कर धोखा देते रहे हैं और अब उसे डराधमका रहे हैं.

वीडियो वायरल हुआ तो हाहाकार मच गया. वजह, इलजाम पत्रकारिता की एक छात्रा ने विधायक पर लगाया था. शुरुआत में तो लोग इसे प्रिंशु सिंह की सनक और ब्लैकमेलिंग समझते रहे पर दाल में काला है यह खुद हेमंत कटारे ने साबित कर दिखाया.

तीसरे दिन ही हेमंत कटारे ने भी खुद का बनाया एक वीडियो वायरल किया जिस में वे कह रहे हैं कि प्रिंशु सिंह उन्हें ब्लैकमेल कर रही है और 2 करोड़ रुपए न देने पर उन की राजनीतिक और निजी जिंदगी तबाह करने की धमकी दे रही है.

इस वीडियो में हेमंत कटारे ने विक्रमजीत सिंह नाम के एक शख्स का भी जिक्र किया कि उस ने प्रिंशु सिंह की तरफ से पैसे मांगे थे.

विक्रमजीत सिंह भोपाल के एक कार शोरूम जीवन मोटर्स में काम करता है और भारतीय जनता पार्टी का छोटामोटा नेता भी है इसलिए मामला मुहब्बत का कम सियासत का ज्यादा हो चला.

हेमंत कटारे को विक्रमजीत सिंह और प्रिंशु सिंह मिल कर ब्लैकमेल कर रहे थे या नहीं यह राज अब देर से ही सही पर खुलेगा जरूर लेकिन प्रिंशु सिंह को हेमंत कटारे से इस तरह के सख्त जवाब की उम्मीद नहीं थी.

हेमंत कटारे ने पुलिस में शिकायत भी दर्ज करा दी थी और प्रिंशु सिंह की गिरफ्तारी के बाद वीडियो वायरल किया था.

पुलिस में रिपोर्ट दर्ज कराने के बाद हेमंत कटारे ने प्रिंशु सिंह को भोपाल के कारोबारी इलाके एमपी नगर के पास चेतक ब्रिज पर बुलाया और उसे एडवांस में 5 लाख रुपए दिए.

इस तयशुदा जगह पर पुलिस वाले सादी वरदी में पहले से ही तैनात थे जिन्होंने प्रिंशु सिंह को नकद 5 लाख रुपए के साथ गिरफ्तार कर ब्लैकमेलिंग के इलजाम में जेल भेज दिया.

हेमंत कटारे का वीडियो वायरल हुआ तो एक तरह से यह साफ हो गया कि प्रिंशु सिंह उस से सौदेबाजी कर रही थी और उस सौदे की दलाली विक्रमजीत सिंह कर रहा था.

रोजे गले पड़े

प्रिंशु सिंह के जेल चले जाने के बाद हेमंत कटारे ने छुटकारे की मीलों लंबी सांस ली कि चलो पिंड छूटा. पर तब तक राज्य की सियासत में काफी भूचाल आ चुका था. भाजपाई तो खामोश थे लेकिन कांग्रेसी दिग्गज नेता अजय सिंह राहुल और प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अरुण यादव के अलावा ज्योतिरादित्य सिंधिया ने भी हेमंत कटारे को बेगुनाह बताते हुए इस मामले को भाजपा की साजिश बताया.

जेल जा कर प्रिंशु सिंह खामोश नहीं बैठी बल्कि पेशी के दिन उस ने अदालत में पत्रकारिता यूनिवर्सिटी से आए अपने दोस्तों से कहा कि वह बेगुनाह है. हेमंत कटारे और पुलिस वाले मिले हुए हैं.

प्रिंशु सिंह का दूसरा वीडियो उस की गिरफ्तारी के बाद वायरल हुआ था जिस में वह अपने पहले के वीडियो के बाबत बारबार माफी मांगती नजर आ रही थी कि उस ने यों ही मजाक में वीडियो वायरल कर दिया था, क्योंकि हेमंत कटारे ने उस से मिलने की पेशकश बड़ी बेरुखी से ठुकरा दी थी.

यह वीडियो तब वायरल हुआ जब प्रिंशु सिंह जेल में थी और पुलिस उस का मोबाइल फोन जब्त कर चुकी थी. फिर वीडियो कैसे बना और वायरल हुआ इस बाबत प्रिंशु सिंह साफसाफ कुछ नहीं बोली तो अंदाजा यह लगाया गया कि विक्रमजीत सिंह ने बचाव के लिए यह वीडियो पहले से ही तैयार कर रखा था कि अगर हेमंत कटारे झांसे या धमकी में न आए तो मामले पर लीपापोती यों ही हंसीमजाक में की जा सके.

जेल से प्रिंशु सिंह ने हेमंत कटारे पर फिर पुराने इलजाम दोहराए और जमानत की मांग की जो उसे मिल भी गई. बारी अब खुद को सयाना समझ रहे हेमंत कटारे की थी जिन के खिलाफ पुलिस ने प्रिंशु सिंह की शिकायत पर बलात्कार और अपहरण का मामला दर्ज कर लिया.

वारंट जारी होते ही हेमंत कटारे फरार हो गए और खुद की बेगुनाही साबित करने का वीडियो वायरल करते रहे.

इधर विक्रमजीत सिंह ने भी एक वीडियो वायरल कर डाला कि वह तो हेमंत कटारे के कहने पर इन दोनों के बीच बात बनाने की कोशिश कर रहा था.

बकौल विक्रमजीत सिंह, हेमंत कटारे ने एक कांग्रेसी नेता के जरीए उसे कहलवाया था कि मामला रफादफा करवाओ, क्योंकि उन की सगाई हो चुकी है और अप्रैल में शादी होने वाली है.

यानि कुछ ऐसा था जिस से हेमंत कटारे डर रहे थे, लेकिन वह जो भी था इतना नहीं था कि उस की कीमत 2 करोड़ रुपए दी जाए पर सौदा 50 लाख रुपए में तय हुआ था.

पुलिस ने बिगाड़ी बात

देखा जाए तो यह प्यार में सौदेबाजी का मामला था जिस में प्रिंशु सिंह हेमंत कटारे की जिंदगी से हट जाने और राज छिपाए रखने की कीमत मांग रही थी. चूंकि यह काम वह अकेले नहीं कर सकती थी इसलिए उस ने अपने दोस्त विक्रमजीत सिंह को साथ मिला लिया था.

प्रिंशु सिंह को उम्मीद थी कि पहला वीडियो वायरल होते ही हेमंत कटारे डर के मारे उस की मांगें मान लेंगे और उसे तगड़ी रकम मिल जाएगी, लेकिन मामला पुलिस में पहुंचा तो फिर इन दोनों के हाथ में कुछ नहीं रह गया.

पुलिस वालों ने इस मामले में दोनों तरफ से मलाई काटी और चाटी. पहले प्रिंशु सिंह को गिरफ्तार कर हेमंत कटारे को बेफिक्र कर दिया गया और फिर उन्हें ही गिरफ्तार कर हमेशा के लिए उन के दामन पर दाग लगा दिया.

इधर प्रिंशु सिंह की मां भोपाल आईं और उन्होंने भी वीडियो के जरीए कहा कि उन की बेटी बेकुसूर है, उस के साथ कोई गंदा काम नहीं हुआ है. विक्रमजीत सिंह ने प्रिंशु सिंह को बहकाया है.

किस ने किस को कितना बहलाया था यह सब अब अदालत में तय होगा. एक तरफ मां हेमंत कटारे को क्लीन चिट दे रही हैं तो बेटी खुलेआम उन्हें बलात्कारी बता रही है.

हेमंत कटारे को एक लड़की से सैक्सी चैटिंग भारी पड़ गई या सचमुच उन के प्रिंशु सिंह से जिस्मानी रिश्ते थे, ऐसे कई राज अब अदालत में खुलेंगे. जाहिर है कि कई राज दफन भी रहेंगे.

हेमंत कटारे की फरारी ने उन्हें शक के दायरे में ला खड़ा कर दिया. कल तक कंधे से कंधा मिला कर चल रहे कांग्रेसी अब उन से किनारा करने लगे हैं.

महंगा पड़ा नौसिखियापन

हेमंत कटारे की समझ पर जवानी का जोश भारी पड़ा और वे सियासत का पहला सबक भी नहीं समझ पाए कि इस में कोई किसी का सगा नहीं होता. इस नौसिखिएपन और नासमझी की सजा वे भुगत भी रहे हैं. कल तक जिन विधायक के साथ गनमैनों और समर्थकों का कारवां चला करता था, वे अब तनहाई में दिन काट रहे हैं.

मुद्दे की बात प्यार में बेईमानी है जो प्रिंशु सिंह ने भी की थी और हेमंत कटारे ने भी. पर दोनों को बेईमानी का भी सलीका नहीं आता था.

मामूली खातेपीते घर की प्रिंशु सिंह रातोंरात नाम कमा लेना चाहती थी जो उसे मिला तो पर इस तरीके से कि शायद ही कोई मीडिया हाउस अब उसे नौकरी दे. उस के एक दोस्त के मुताबिक प्रिंशु सिंह की शादी 23 फरवरी को होनी थी जो इस मामले की वजह से खटाई में पड़ गई है.

हेमंत कटारे का राजनीतिक कैरियर भी डांवांडोल हो गया है. जो साख उन के पिता ने कमाई थी वह एक नासमझी के चलते धूल में मिल गई है. Hindi Story