Love Story: पैसों पर टिकी मोहब्बत का यही अंजाम होना था

Love Story: पुरानी दिल्ली स्थित जामा मसजिद के पास सड़क के किनारे दाहिनी ओर कई मध्यम दर्जे के होटल हैं, जिन में दूरदराज से जामा मसजिद देखने आए लोग ठहरते हैं. इन्हीं होटलों में एक है अलदानिश, जिस के मैनेजर सोहेल अहमद हैं.  19 नवंबर, 2016 को वह होटल के रिसेप्शन पर बैठे अपनी ड्यूटी कर रहे थे, तभी साढ़े 11 बजे एक लड़का एक लड़की के साथ उन के पास आया. दोनों काफी खुश लग रहे थे.

लड़के ने साथ आई लड़की को अपनी पत्नी बताते हुए कहा कि वह जामा मसजिद देखने आया है. उसे एक दिन के लिए एक कमरा चाहिए. सोहेल ने लड़के का नामपता पूछ कर रजिस्टर में नोट किया. उस के बाद आईडी मांगी तो उस ने जेब से अपना आधार कार्ड निकाल कर उन के सामने काउंटर पर रख दिया. आधार कार्ड उसी का था.

उस का नाम आजम और पता राजीव बस्ती, कैप्टननगर, पानीपत, हरियाणा था. इस के बाद सोहेल ने सर्विस बौय मोहम्मद मिनहाज को बुला कर आजम को कमरा नंबर 203 देखने के लिए भेज दिया.

थोड़ी देर बाद अकेले ही वापस आ कर आजम ने कहा कि कमरा उसे पसंद है. इस के बाद अन्य औपचारिकताएं पूरी कर के सोहेल ने कमरा नंबर-203 उस के नाम से बुक कर दिया. कमरे का किराया 12 सौ रुपए जमा कर के आजम वापस कमरे में चला गया. सोहेल ने रुपए और आधार कार्ड अपनी दराज में रख लिया.

करीब 2 घंटे बाद आजम मैनेजर सोहेल के पास आया और अपना आधार कार्ड मांगते हुए कहा कि उसे उस की फोटो कौपी करानी है. सोहेल ने आधार कार्ड दे दिया तो वह तेजी से बाहर निकल गया. उस के जाने के थोड़ी देर बाद मोहम्मद मिनहाज किसी काम से कमरा नंबर 203 में गया तो उस ने वहां जो देखा, सन्न रह गया.

मिनहाज भाग कर नीचे आया और मैनेजर सोहेल अहमद के पास जा कर बोला, ‘‘कमरा नंबर 203 के बाथरूम में लड़की की लाश पड़ी है. शायद उस के साथ जो आदमी आया था, उस ने उसे मार दिया है.’’ यह सुन कर सोहेल परेशान हो उठा.

उस ने तुरंत होटल के मालिक इसलामुद्दीन के बेटे दानिश को फोन कर के सारी बात बताई. दानिश होटल आने के बजाय सीधे थोड़ी दूर स्थित जामा मसजिद पुलिस चौकी पर पहुंचा और चौकीइंचार्ज मोहम्मद इनाम को सारी बात बता दी. चौकीइंचार्ज इनाम चौकी में मौजूद सिपाहियों को ले कर होटल जा पहुंचे. लाश का सरसरी तौर पर निरीक्षण करने के बाद उन्होंने हत्याकांड की सूचना थाना जामा मसजिद के थानाप्रभारी अनिल बेरीवाल को दे दी.

सूचना मिलते ही अनिल बेरीवाल पुलिस बल के साथ घटनास्थल पर पहुंच गए. घटनास्थल से ही उन्होंने इस घटना की सूचना  उच्चाधिकारियों को दे दी थी. अतिरिक्त थानाप्रभारी धन सिंह सांगवान भी सूचना पा कर होटल पहुंच गए थे. थोड़ी देर में सैंट्रल डिस्ट्रिक की क्राइम टीम तथा एफएसएल टीम भी पहुंच गई थी. लाश का सिर बाथरूम में टौयलेट पौट के ऊपर तथा पैर दरवाजे की तरफ थे. गरदन पर चोट के निशान थे.

लगता था हत्या गला दबा कर की गई थी. एफएसएल टीम ने अपना काम निपटा लिया तो अनिल बेरीवाल ने लाश को पोस्टमार्टम के लिए जयप्रकाश नारायण अस्पताल भिजवा दिया. होटल से लौट कर पुलिस टीम ने अपराध संख्या 135/2016 पर हत्या के इस मुकदमे को अज्ञात के खिलाफ दर्ज कर मामले की जांच अतिरिक्त थानाप्रभारी धन सिंह सांगवान को सौंप दी गई.

धन सिंह सांगवान ने होटल के मैनेजर सोहेल अहमद को थाने बुला कर पूछताछ की तो उस ने हत्या का शक मृतका के शौहर आजम पर जताया. आजम अपना आधार कार्ड भले ही साथ ले गया था, लेकिन उस में दर्ज उस का पता मैनेजर ने अपने रजिस्टर में लिख लिया था. उस का मोबाइल नंबर भी लिखा हुआ था.

आजम का पता धन सिंह को मिल ही गया था. उन्होंने उसे गिरफ्तार करने के लिए एक पुलिस टीम गठित की, जिस में एसआई धर्मवीर, हैडकांस्टेबल नीरज तथा कुछ अन्य लोगों को शामिल किया. अगले दिन सुबह 8 बजे वह अपनी टीम के साथ होटल के रजिस्टर में लिखे पते पर पहुंचे तो पता चला कि आजम पहले वहां एक कमरा किराए पर ले कर रहता था. लेकिन अब वह अपनी अम्मी समीना, अब्बा मोहम्मद सलीम के साथ राजीव कालोनी के मकान नंबर-1109/10 (गंदा नाला के निकट) रहता है. इस के बाद धन सिंह वहां पहुंचे तो वह घर में सोता हुआ मिल गया.

उसे जगाया गया तो दिल्ली पुलिस को देख कर उस के हाथपांव फूल गए. पुलिस पहचान के लिए अलदानिश होटल के सर्विस बौय मिनहाज को साथ ले कर आई थी. आजम को देखते ही उस ने कहा, ‘‘साहब, यही आदमी उस औरत के साथ होटल में आया था.’’ मुजरिम के पकड़े जाने से धन सिंह सांगवान ने राहत की सांस ली. आजम ने अपना अपराध स्वीकार कर लिया था.

उस ने मृतका का नाम शबनम बताया. वह कभी उस के पड़ोस में रहने वाले अलादिया की पत्नी थी. लेकिन इस समय वह दिल्ली में रहता था. धन सिंह ने आजम से अलादिया का फोन नंबर ले कर उसे फोन किया कि उस की पत्नी दुर्घटना में घायल हो गई है, वह दिल्ली के थाना जामा मसजिद पहुंच जाए. धन सिंह आजम को ले कर दिल्ली आ गए. वह थाने पहुंचे तो मृतका का शौहर अलादिया उन का इंतजार कर रहा था. उसे जयप्रकाश नारायण अस्पताल ले जाया गया तो उस ने मृतका की लाश की शिनाख्त अपनी पत्नी शबनम के रूप में कर दी.

अगले दिन शबनम की लाश का पोस्टमार्टम हुआ तो पता चला कि उस की मौत दम घुटने से हुई थी. आजम को अगले दिन तीसहजारी कोर्ट में पेश कर के पूछताछ के लिए एक दिन के पुलिस रिमांड पर ले लिया गया. रिमांड अवधि के दौरान आजम ने शबनम का मोबाइल (बिना सिम का), अपना मोबाइल और श्मशान घर की छत पर फेंका गया शबनम का पर्स बरामद करा दिया. पूछताछ में उस ने शबनम की हत्या की जो कहानी बताई, वह इस प्रकार थी—

सोनिया उर्फ शबनम जिला शामली के गांव कुडाना के रहने वाले रामनरेश की बेटी थी. 2 बेटों पर एकलौती होने की वजह से सोनिया को कुछ ज्यादा ही लाडप्यार मिला, जिस से वह स्वच्छंद हो गई. लेकिन उस के कदम बहकते, उस के पहले ही रामनरेश ने सन 2009 में उस की शादी उत्तर प्रदेश के जिला गाजियाबाद के लोनी के रहने वाले करण के साथ कर दी.

शुरूशुरू  में तो सब ठीक रहा, लेकिन जब घरगृहस्थी का बोझ सोनिया पर पड़ा तो वह परेशान रहने लगी. करण की आमदनी उतनी नहीं थी, जितने उस के खर्चे थे. करण उस की फरमाइशें पूरी नहीं कर पाता था. सोनिया ने देखा कि करण उस के मन की मुरादें पूरी नहीं कर पा रहा है तो जल्दी ही उस का मन उस से भर गया.

करण और सोनिया के बीच मनमुटाव रहने लगा. कोई न कोई बहाना बना कर सोनिया अकसर कुडाना आ जाती. उसी बीच बस से आनेजाने में उस की मुलाकात बस कंडक्टर अलादिया से हुई. वह गाजियाबाद का रहने वाला था. वह सोनिया की सुंदरता पर मर मिटा. उसे खुश करने के लिए अलादिया उस की हर मांग पूरी करने लगा. इस का नतीजा यह निकला कि एक दिन सोनिया अलादिया के साथ भाग गई.

अलादिया सोनिया को ले कर सोनीपत पहुंचा और वहां कैप्टननगर में किराए का कमरा ले कर रहने लगा. कुछ दिनों बाद अलादिया ने सोनिया के साथ निकाह कर लिया और उस का  नाम शबनम रख दिया. सोनिया की इस हरकत से नाराज हो कर ससुराल वालों ने ही नहीं, मायके वालों ने भी उस से रिश्ता खत्म कर लिया.

सोनिया उर्फ शबनम अलादिया के साथ खुश थी. उसे खुश रखने के लिए अलादिया उस की हर बात मानता था और उस के सारे नाजनखरे उठाता था. चूंकि अलादिया बस कंडक्टर था, इसलिए वह सुबह घर से निकलता तो देर रात को ही घर वापस आता था. दिन भर शबनम अकेली रहती थी. उस के पड़ोस में आजम भी अकेला ही रहता था. उस के अम्मीअब्बू राजीव कालोनी में गंदा नाला के निकट रहते थे.

वह शबनम का हमउम्र था. शबनम उसे बहुत अच्छी लगती थी, इसलिए कोई न कोई बहाना बना कर वह उस से बातें करने की कोशिश करता था. वह एक कबाड़ी के यहां काम करता था, जहां से उसे 9 हजार रुपए वेतन मिलता था.

चूंकि आजम अकेला ही रहता था. इसलिए सारे पैसे खुद पर खर्च करता था. लेकिन इधर शबनम पर दिल आया तो वह उस के लिए खानेपीने की चीजें ही नहीं, गिफ्ट भी लाने लगा. फिर तो जल्दी ही दोनों के बीच अवैधसंबंध बन गए. चूंकि अलादिया दिन भर घर से बाहर रहता था, इसलिए आजम को शबनम से मिलने में कोई परेशानी नहीं होती थी.

लेकिन इस तरह की बातें कहां छिपी रहती हैं. शबनम और आजम के संबंधों की जानकारी अलादिया को हो गई. उस ने इस बारे में शबनम से पूछा तो उस ने कहा कि कभीकभार आजम उस से मिलने घर आ जाता है, लेकिन उस से उस के संबंध ऐसे नहीं हैं, जिसे गलत कहा जा सके.

अलादिया समझ गया कि शबनम आजम से अपने अवैध संबंधों को स्वीकार तो करेगी नहीं, इसलिए उसे दोनों को चोरीछिपे पकड़ना होगा. कुछ दिनों बाद एक दिन अलादिया काम पर जाने की बात कह कर घर से निकला जरूर, लेकिन काम पर गया नहीं. 3-4 घंटे इधरउधर समय गुजार कर वह दोपहर को अचानक घर पहुंचा तो देखा कि घर का दरवाजा अंदर से बंद है. उस ने शबनम को आवाज लगाई तो थोड़ी देर में शबनम ने दरवाजा खोला. उस समय उस के कपड़े तो अस्तव्यस्त थे ही, चेहरे का भी रंग उड़ा हुआ था.

शबनम की हालत देख कर अलादिया को अंदाजा लगाते देर नहीं लगी कि अंदर क्या हो रहा था. वह उसी बारे में सोच रहा था कि अंदर से सिर झुकाए आजम निकला. अलादिया ने उसे रोक कर खूब खरीखोटी सुनाई और अपने घर आने पर सख्त पाबंदी लगा दी. कुछ कहे बगैर आजम चुपचाप चला गया.

उस के जाने के बाद अलादिया ने शबनम की जम कर खबर ली. शबनम ने माफी मांगते हुए फिर कभी आजम से न मिलने की कसम खाई. इस के बाद कुछ दिनों तक तो शबनम आजम से दूरी बनाए रही, लेकिन जब उस ने देखा कि अलादिया को उस पर विश्वास हो गया है तो वह फिर लोगों की नजरें बचा कर आजम से घर से बाहर मिलने लगी.

आजम शबनम को फोन कर के कहीं बाहर बुला लेता और वहीं दोनों तन की प्यास बुझा कर घर वापस लौट आते. शबनम को खुश करने के लिए आजम उस की हर मांग पूरी करता था. आजम और शबनम भले ही चोरीछिपे घर से बाहर मिलते थे, लेकिन अलादिया को उन की मुलाकातों का पता चल ही जाता था.

परेशान हो कर अलादिया शबनम के साथ पानीपत छोड़ कर दिल्ली आ गया और बदरपुर में किराए क  कमरा ले कर रहने लगा. उस का सोचना था कि इतनी दूर आ कर शबनम और आजम का मिलनाजुलना नहीं हो पाएगा. लेकिन उन के बीच संबंध उसी तरह बने रहे. मोबाइल द्वारा दोनों के बीच बातचीत होती ही रहती थी.

मौका मिलते ही शबनम आजम को फोन कर देती थी और जहां दोनों को मिलना होता था, आजम वहां आ जाता था. इस के बाद किसी होटल में कमरा ले कर दोनों मिल लेते थे. शबनम जब भी आजम से मिलने आती थी, वह उस के लिए कोई न कोई गिफ्ट ले कर आता था, उसे नकद रुपए भी देता था.

19 नवंबर को शबनम ने फोन कर के आजम को दिल्ली के महाराणा प्रताप बसअड्डे पर बुलाया. आजम पानीपत से चल कर करीब 10 बजे बसअड्डे पर पहुंचा तो शबनम उसे वहां इंतजार करती मिली. वहां से दोनों जामा मस्जिद के पास स्थित होटल अलदानिश पहुंचे और मौजमस्ती के लिए किराए पर कमरा ले  लिया. पहले दोनों ने जी भरकर मौजमस्ती की. उस के बाद दोनों बातें करने लगे.

शबनम ने आजम से 10 हजार रुपए मांगे. आजम ने कहा कि इस समय उस के पास इतने रुपए नहीं हैं तो शबनम को गुस्सा आ गया और उस ने आव देखा न ताव, एक करारा थप्पड़ आजम के गाल पर जड़ दिया. शबनम के हाथ से थप्पड़ खा कर आजम को भी गुस्सा आ गया. शबनम की इस हरकत का बदला लेने के लिए आगेपीछे की सोचे बगैर आजम कूद कर उस के सीने पर सवार हो गया और दोनों हाथों से गला पकड़ कर दबा दिया. पलभर में ही शबनम ने दम तोड़ दिया.

शबनम की हत्या करने के बाद आजम ने लाश को उठाया और उसे बाथरूम की फर्श पर लिटा कर उस का पर्स और मोबाइल फोन ले कर होटल के रिसैप्शन पर पहुंचा. वहां बैठे होटल के मैनेजर सोहेल अहमद से अपना आधार कार्ड फोटोस्टेट कराने के बहाने ले कर वह फरार हो गया.

बसअड्डे से उस ने  पानीपत जाने वाली बस पकड़ी और अपने घर पहुंच गया. थोड़ी देर बाद उस ने शबनम का खाली पर्स कालोनी में बने श्मशान घर की छत पर फेंक दिया. शबनम के मोबाइल फोन से उस का सिम निकाल कर बाहर फेंक दिया और मोबाइल फोन अपने पास रख लिया. उस ने सोचा था कि पुलिस उस तक पहुंच नहीं पाएगी, लेकिन घटना के अगले ही दिन दिल्ली पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर लिया.

23 नवंबर को रिमांड की अवधि समाप्त होने पर उसे फिर से तीसहजारी कोर्ट में पेश किया गया, जहां से उसे 14 दिनों की न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया.

– कथा पुलिस सूत्रों पर आधारित

Crime Story: क्या कुसूर था वैशाली का

Crime Story: हरियाणा से निकला नारा ‘बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ’ भले ही राष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान  बनाने में कामयाब रहा हो, लेकिन कुछ सिरफिरे इस नारे के मूलतत्त्व की ऐसी धज्जियां उड़ा रहे हैं कि इंसानियत ही नहीं हैवानियत भी शर्म से सिर झुका ले. बेटी के लिए सब कुछ करने वाले मांबाप तक नहीं समझ पाते कि उन्होंने बेटी को बचा कर,उसे पढ़ा कर गुनाह किया या बेटी होना ही उस का गुनाह था. बेटी के मांबाप को जिंदगी भर दर्द और गुस्से का घूंट पीने को मजबूर करने वाले ऐसे दरिंदों को जितनी सजा दी जाए, कम है.

यौवन सब को आता है, लड़कों को भी लड़कियों को भी. यौवन आता है तो निखार भी आता है और सुंदरता भी बढ़ती है. लड़कों को तो इस सब से कोई फर्क नहीं पड़ता, लेकिन कई बार लड़कियों के लिए यह सब बहुत भारी पड़ता है. उन्हें इस सब की ऐसी कीमत चुकानी पड़ती है, जिस के बारे में स्वयं लड़की ने तो क्या, किसी ने भी सोचा तक नहीं होता. बांसवाड़ा, राजस्थान की 18 वर्षीया वैशाली के साथ भी ऐसा ही कुछ हुआ. न तो वैशाली को खुद पता था और न उस के मातापिता को कि उस की खूबसूरती पर एक रक्तपिपासु की नजर जमी है.

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बांसवाड़ा की अगरपुरा कालोनी में रहने वाली वैशाली फर्स्ट ईयर की छात्रा थी और अपने परिवार के साथ रहती थी. उस के पिता पिंकेश शर्मा विकलांग हैं. वैशाली के घर के सामने ही जगदीश बंजारा का घर था. कुछ समय तक जगदीश वैशाली का सहपाठी भी रहा था.

जब से वैशाली यौवन द्वार पर आ कर खड़ी हुई थी, तभी से जगदीश की नजरें उस पर जम गई थीं. जगदीश और उस का भाई रमेश उसे आतेजाते छेड़ते थे. वैशाली ने इस बात की शिकायत अपने मातापिता से भी की थी. इतना ही नहीं, कालोनी वालों ने भी जगदीश की आए दिन उधमबाजी करने की पुलिस से शिकायत की थी.

जगदीश संभवत: किसी गलतफहमी का शिकार था, यही वजह थी कि वह वैशाली से एकतरफा प्यार करने लगा था. जबकि वैशाली उस से बात तक करने को तैयार नहीं थी.

बुधवार 2 अगस्त, 2017 की दोपहर 12 बजे वैशाली फर्स्ट फ्लोर की बालकनी में बाई के साथ कपड़े सुखा रही थी. उस के पिता पिंकेश शर्मा ऊपर की मंजिल पर थे. तभी सामने के घर में रहने वाला जगदीश दीवार फांद कर आया और उस ने अनायास वैशाली को दबोच लिया.

उस ने साथ लाए चाकू से वैशाली की गर्दन पर इतने वार किए कि वह लहूलुहान हो कर गिर पड़ी. जगदीश जैसे आया था, वैसे ही भाग गया. बाई ने शोर मचाया तो पासपड़ोस के लोग भी आ गए और वैशाली के परिवार वाले भी. वैशाली को आननफानन में अस्पताल ले जाया गया, लेकिन तब तक वह दम तोड़ चुकी थी.

इस बीच किसी ने फोन कर के इस मामले की सूचना थाना कोतवाली को दे दी थी. कोतवाली पुलिस भी मौकाएवारदात पर पहुंच गई और महिला थाने की पुलिस भी. पूरी जानकारी ले कर पुलिस ने वैशाली के पिता पिंकेश शर्मा की तहरीर पर जगदीश बंजारा के खिलाफ भादंवि की धारा 450 (हथियार ले कर जबरन घर में घुसने), 376, 511 (बलात्कार की कोशिश), हत्या के लिए 302 और 34 के अंतर्गत केस दर्ज कर लिया. इस के साथ ही पुलिस ने जगदीश बंजारा की खोज शुरू कर दी, लेकिन तब तक पूरा बंजारा परिवार फरार हो चुका था.

वैशाली की हत्या को ले कर पूरी अगरपुरा कालोनी में रोष था. इतना रोष कि लोग बंजारा परिवार के घर को आग लगा देना चाहते थे. गंभीर स्थिति को देखसमझ कर एसपी के आदेश पर बंजारा परिवार के घर पर 7 सशस्त्र सिपाहियों का पहरा बैठा दिया गया था. इस के बावजूद कुछ युवक उस घर को क्षति पहुंचाने के लिए आए तो पुलिस ने उन्हें समझा कर वापस लौटा दिया.

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काफी भागदौड़ के बाद सिपाही इंद्रजीत सिंह और लोकेंद्र सिंह ने जैसेतैसे 3 अगस्त को जगदीश बंजारा को गिरफ्तार कर लिया. थाने ला कर उस से काफी पूछताछ की गई, लेकिन उस ने मुंह नहीं खोला.

आखिर इतना बड़ा अपराध कर के वह कब तक चुप रह सकता था. 4 अगस्त को उसे मुंह खोलना ही पड़ा. पुलिस से उस ने केवल इतना ही कहा, ‘‘मैं वैशाली से प्यार करता था. वह मेरी बनने को तैयार नहीं थी, फिर मैं उसे किसी और की कैसे होने दे सकता था? इसलिए मैं ने उसे मार डाला.’’

मृतका वैशाली के पिता पिंकेश शर्मा चाहते थे कि इस ममले की जांच महिला थाने के सीआई देवीलाल करें. इस के लिए वह एसपी से मिले.

एसपी ने केस की जांच सीआई देवीलाल को सौंप दी. पुलिस जगदीश बंजारा को जेल भेज चुकी है. केस की जांच सीआई देवीलाल कर रहे हैं, जगदीश बंजारा को पकड़ने वाले सिपाही इंद्रजीत सिंह और लोकेंद्र सिंह को पुलिस विभाग ने सम्मानित किया है. Crime Story

Madhya Pradesh Crime: आईफोन में फंसा इश्क

Madhya Pradesh Crime:  सतपुड़ा की पहाडि़यों से घिरे मध्य प्रदेश के अमला को मध्य प्रदेश का शिमला भी कहा जाता है. 5 जुलाई, 2022 की सुबह अमला पुलिस स्टेशन के टीआई संतोष पंद्रे पुराने केस की फाइल को देख रहे थे, तभी केबिन के बाहर से आई आवाज ने उन का ध्यान फाइल से हटा दिया.

‘‘साब, क्या मैं अंदर आ सकती हूं?’’ दरवाजे पर एक अधेड़ उम्र की महिला अपने पति के साथ खड़ी थी.

उन्हें देखते ही टीआई ने कहा, ‘‘आइए, अंदर आ जाइए, कहिए कैसे आना हुआ?’’

‘‘साब, मेरा नाम लता काचेवार है. मेरे पति इस दुनिया में नहीं हैं. मेरा बेटा मानसिक रूप से बीमार है. हम लोग अमला नगर परिषद के वार्ड नंबर 10 में रहते हैं. मेरी 19 साल की बेटी मुसकान 3 जुलाई की सुबह बाजार से जरूरी सामान लेने के लिए घर से निकली थी, मगर अभी तक घर नहीं लौटी है,’’ यह कहते हुए लता फफक कर रो पड़ी.

टीआई ने उसे ढांढस बंधाते हुए कहा, ‘‘आप चिंता मत कीजिए, पुलिस आप की हरसंभव मदद करेगी. मुसकान का हुलिया बताइए और अगर उस की कोई फोटो हो तो मुझे दे दीजिए. पुलिस उसे जल्द ही खोज निकालेगी.’’

‘‘साब, मुसकान के हाथ पर 3 स्टार वाला एक टैटू बना हुआ है और उस के बाल सुनहरे हैं और ये रही उस की फोटो,’’ लता ने अपनी बेटी की फोटो पर्स से निकालते हुए कहा.

टीआई संतोष पंद्रे ने फोटो पर नजर डाली तो सुनहरे बालों की खूबसूरत नाकनक्श की मुसकान को देख क र समझ गए कि उम्र के इस मोड़ पर अकसर लड़केलड़कियों के कदम फिसल ही जाते हैं.

‘‘यदि तुम्हें किसी पर शक हो तो खुल कर बताओ, पुलिस तुम्हारे साथ है.’’ टीआई ने कहा.

‘‘साब, मेरी बेटी कभी घर और दुकान के अलावा कहीं नहीं जाती थी. किसी लड़के के साथ उस की दोस्ती भी नहीं थी. साब, पिछले 2 सालों से वह अमला के कृष्णा ज्वैलर्स के यहां सेल्सगर्ल का काम कर रही है.’’ लता ने टीआई को बताया.

टीआई ने मुसकान की जल्द ही पतासाजी का आश्वासन देते हुए लता को घर जाने को कहा.

लता जानती थी कि मुसकान अकसर खरीददारी के लिए कृष्णा ज्वैलर्स के मालिक पुनीत सोनी के साथ नागपुर आतीजाती थी और कई बार काम के सिलसिले में वहीं होटल में रुक भी जाती थी. लेकिन अब तो उस का पता ही नहीं चल पा रहा था.

दूसरे दिन सुबह तक मुसकान न तो घर लौटी और न ही उस से फोन पर संपर्क हो पाया तो लता ने कृष्णा ज्वैलर्स के मालिक पुनीत सोनी को फोन लगा कर बेटी के संबंध में जानकारी ली.

पुनीत ने लता को बताया कि मुसकान तो कल दुकान पर आई ही नहीं थी. इतना ही नहीं, पुनीत ने यह भी बताया कि वह 2-3 दिन छुट्टी पर जाने की बात भी कह रही थी.

पुनीत की बातें सुन कर लता के पैरों तले से जमीन खिसक गई. उसे समझ नहीं आ रहा था कि आखिर मुसकान कहां चली गई.

उधर पुलिस ने मुसकान की गुमशुदगी दर्ज करने के बाद उस की पतासाजी के लिए सोशल मीडिया पर उस की सूचना प्रसारित कर दी. इस के अलावा विभिन्न थानों में भी उस की फोटो भेज दी. मगर मुसकान के बारे में कोई भी सुराग पुलिस के हाथ नहीं लगा.

अमला शहर की सीमा महाराष्ट्र और छत्तीसगढ़ से भी लगी हुई हुई है. ऐसे में आपराधिक घटनाओं की सूचनाओं के आदानप्रदान के लिए पुलिस विभाग का अंतरराज्यीय वाट्सऐप ग्रुप बना हुआ है.

7 जुलाई, 2022 को उसी वाट्सऐप ग्रुप में नागपुर काटोल पुलिस ने एक नौजवान युवती की लाश मिलने की पोस्ट शेयर की तो बैतूल जिले की एसपी सिमाला प्रसाद की नजर उस पोस्ट पर ठहर गई.

वह लाश महाराष्ट्र के नागपुर के पास काटोल पुलिस थाने के अंतर्गत चारगांव इलाके में ईंट भट्ठे के पास मिली थी. वह पीले रंग की टीशर्ट पहने थी, जिस पर अंगरेजी में लव लिखा हुआ था. उस के हाथ पर 3 स्टार का टैटू बना हुआ था. युवती के सिर पर हमले की वजह से चेहरे की पहचान आसानी से नहीं हो पा रही थी.

एसपी ने यह पोस्ट अमला पुलिस के सोशल मीडिया एकाउंट पर शेयर की तो अमला पुलिस थाने के टीआई संतोष पंद्रे ने फोटो को गौर से देखा. मुसकान की मां लता ने उन्हें जो फोटो दिया था, उस से उस की कदकाठी काफी मेल खा रही थी.

टीआई ने मुसकान की मां लता को थाने बुला कर वह फोटो दिखाई तो उस के होश उड़ गए. पीली टीशर्ट और हाथ पर बने टैटू को देख कर वह जोर से चीखी, ‘‘मेरी बेटी कहां है और उस का ये हाल किस ने कर दिया?’’

इस के बाद पुलिस लता को ले कर नागपुर के काटोल पहुंच गई. काटोल पुलिस थाने के टीआई महादेव आचरेकर ने लता को युवती की लाश के कपड़े, अंगूठी और मोबाइल फोन दिखाया तो उस ने बताया कि ये सब उस की बेटी मुसकान के हैं.

महाराष्ट्र के किसी भी थाने में इस तरह के हुलिए वाली किसी लड़की की गुमशुदगी दर्ज नहीं थी.

इस वजह से पुलिस ने अंदाजा लगाया कि युवती शायद पड़ोसी राज्यों में से किसी शहर की रहने वाली हो.

इस पर नागपुर क्राइम ब्रांच ने मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ आदि राज्यों की पुलिस से संपर्क किया और फोटो सोशल मीडिया पर शेयर कर दी. पोस्टमार्टम के बाद लाश की शिनाख्त न होने से काटोल पुलिस ने लाश दफना दी थी.

नागपुर (ग्रामीण) पुलिस के काटोल थाने में मुसकान की हत्या का मामला कायम कर लता से पूछताछ की और मुसकान के मोबाइल में मिले फोटो के आधार पर यह बात सामने आई कि मुसकान का प्रेम प्रसंग कृष्णा ज्वैलर्स के मालिक पुनीत सोनी से चल रहा था. लिहाजा काटोल पुलिस केस की जांच के लिए अमला आ गई.

पुलिस ने पुनीत सोनी से मुसकान की हत्या के संबंध में पूछताछ की तो पहले तो वह पूरे घटनाक्रम से अंजान बना रहा. पुलिस ने जब उस के मोबाइल की काल डिटेल्स रिपोर्ट सामने रखी तो वह बगलें झांकने लगा.

पुलिस ने उस के शोरूम पर काम करने वाले 17 साल के किशोर अन्नू से पूछताछ की तो वह डर गया और उस ने पल भर में ही पूरे रहस्य से परदा हटा दिया. पुलिस टीम ने पुनीत से सख्ती से पूछताछ की तो मुसकान की हत्या की सारी कहानी सामने आ गई.

अमला के सरदार वल्लभभाई पटेल वार्ड में रहने वाली मुसकान महत्त्वाकांक्षी थी, मगर परिवार की माली हालत के चलते उसे हायर सेकेंडरी परीक्षा पास करते ही सेल्सगर्ल की नौकरी करनी पड़ी.

कोरोना काल में मुसकान के पिता की मौत हो जाने के बाद परिवार की माली हालत खराब हो गई थी. मुसकान का बड़ा भाई आपराधिक किस्म का था. आए दिन उस के झगड़े होते रहते थे. इसी के चलते पिछले साल उस का किसी ने मर्डर कर दिया था.

बड़े भाई की मौत के बाद घर चलाना मुश्किल हो गया था. ऐसे में मुसकान कृष्णा ज्वैलर्स शोरूम पर सेल्सगर्ल की नौकरी करने लगी.

मुसकान को कृष्णा ज्वैलर्स शोरूम पर काम करते हुए बमुश्किल महीना भर ही बीता था, मगर इस एक महीने में ही उसे एक बात साफ समझ में आ गई थी कि शोरूम के मालिक पुनीत की नजरें उसे ही घूरा करती हैं.

28 साल का पुनीत सोनी अपने पिता सुनील सोनी की एकलौती संतान होने के साथ हैंडसम भी था. मध्य प्रदेश के बैतूल जिले में अमला नगर परिषद की गणेश कालोनी में रहने वाले पुनीत का ज्वैलरी का कारोबार आसपास के इलाकों में खूब चलता है.

19 साल की खूबसूरत मुसकान जब पुनीत के पास काम मांगने आई तो वह पहली ही नजर में पुनीत के दिल में उतर गई. वैसे तो पुनीत शादीशुदा होने के साथ एक बेटे का बाप भी था, लेकिन खूबसूरत लड़की को अपने सामने पा कर उस की चाहत इस कदर बढ़ चुकी थी कि वह अपने आप को रोक नहीं सका.

एक दिन शोरूम पर जब ग्राहक नहीं थे तो पुनीत ने अपने दिल का हाल मुसकान से कह ही दिया, ‘‘मुसकान, तुम बहुत खूबसूरत हो, तुम्हें देखता हूं तो मैं अपने दिल को काबू में नहीं रख पाता हूं.’’

कम उम्र में घरपरिवार के खर्च की जिम्मेदारी संभालने वाली मुसकान भी उस के प्यार के इजहार को नकार न सकी. ज्वैलरी शोरूम पर ही उन का प्यार परवान चढ़ने लगा.

पुनीत मुसकान की हर ख्वाहिश और जरूरतों का खयाल रखने लगा. पुनीत मुसकान को अपने प्यार के जाल में फंसा चुका था. वह आए दिन मुसकान को तरहतरह के गिफ्ट की पेशकश करता था. दुकान में 17 साल का एक लड़का अन्नू (परिवर्तित नाम) भी काम करता था. पुनीत और मुसकान के बीच मीडिएटर का काम अन्नू करता था.

पुनीत मुसकान के साथ संबंध बनाने को उतावला हो रहा था, मगर मुसकान अपने मातापिता के डर से इस के लिए राजी नहीं थी.

पिछले साल दीपावली के पहले की बात है. एक दिन मौका पा कर पुनीत मुसकान के घर जा कर उस की मां से बोला, ‘‘मांजी दीपावली के बाद सीजन शुरू होने वाला है. ज्वैलरी की खरीदारी के लिए मुसकान को नागपुर साथ ले जाना है, मुसकान को ग्राहकों की पसंदनापसंद का खूब अनुभव हो गया है.’’

बेटी की तारीफ सुन कर लता ने यह सोच कर हामी भर दी कि आखिर पुनीत उस का मालिक जो ठहरा, उस के साथ जाने में हर्ज ही क्या है.

मुसकान के घर वालों की सहमति मिलते ही एक दिन कार से पुनीत और मुसकान नागपुर के लिए चल पड़े. रास्ते में कार के सफर के दौरान उन्होंने खूब मस्ती की. नागपुर पहुंच कर दिन भर ज्वैलरी की खरीदारी की और पुनीत ने मुसकान को नए स्टाइलिश कपड़े दिलाए तो उस की खुशी दोगुनी हो गई.

मुसकान अपने आप पर फख्र कर रही थी कि पुनीत उस का कितना खयाल रखता है. शाम को एक होटल में कमरा ले कर दोनों ठहर गए. कमरे में पहुंचते ही पुनीत के सब्र का बांध टूट चुका था. उस ने मुसकान को अपनी बाहों में भरते हुए कहा, ‘‘तुम्हारा प्यार पाने के लिए मैं कब से तड़प रहा था मेरी जान, आज मुझे अपनी प्यास बुझा लेने दो.’’

मुसकान ने भी हौले से पुनीत के सिर पर हाथ घुमाते हुए कहा, ‘‘थोड़ा सब्र करो. मैं तो पूरी रात तुम्हारे साथ हूं. मैं भी अपना सब कुछ तुम्हें लुटा दूंगी.’’

प्यार के जोश और वासना की आग में 2 जिस्म कब एक जान हो गए, उन्हें पता ही नहीं चला. रात भर होटल में अपनी हसरतों को पूरा करने के बाद दूसरे दिन सुबह दोनों अमला पहुंच गए.

एक बार शुरू हुआ वासना का खेल धीरेधीरे रफ्तार पकड़ चुका था. पुनीत ज्वैलरी की खरीदारी का बहाना बना कर मुसकान को अकसर ही नागपुर और दूसरे शहरों में ले जाने लगा.

मुसकान भी यह बात समझ चुकी थी कि शादीशुदा जिंदगी जीने वाला उस का प्रेमी पुनीत केवल उस के जिस्म से ही खेल रहा था, लिहाजा वह भी पुनीत से अपनी हर जायजनाजायज मांग रखने लगी थी.

धीरेधीरे वह पुनीत को ब्लैकमेल भी करने लगी. पुनीत यदि मुसकान की मांग पूरी करने में आनाकानी करता तो वह उसे बदनाम करने की धमकी देने लगती.

देखते ही देखते मुसकान की लाइफस्टाइल काफी मौडर्न हो चुकी थी. महंगे कपड़े और मोबाइल का शौक उस के सिर चढ़ कर बोल रहा था. बदनामी के डर से मुसकान की हर डिमांड पूरी करना पुनीत की मजबूरी बन चुकी थी.

जून महीने के अंतिम सप्ताह की बात है. रात के करीब 9 बजे जब  मुसकान अपने घर जाने लगी तो उस ने पुनीत से कहा, ‘‘मेरा मोबाइल बारबार हैंग हो जाता है, मुझे एक आईफोन दिला दो.’’

‘‘चलो देखते हैं, अभी तो घर निकलो बाद में बात करते हैं.’’ पुनीत ने उस समय तो बात टालने के मकसद से यह कह कर बात खत्म कर दी थी.

धीरेधीरे पुनीत को यह बात समझ आ गई थी कि दुकान की आमदनी का बहुत बड़ा हिस्सा वह मुसकान पर खर्च कर रहा है. पुनीत यह सोच कर हैरान था कि इसी तरह चलता रहा तो किसी दिन उस का ज्वैलरी का कारोबार ठप्प हो जाएगा.

प्रेमिका की आए दिन बढ़ने वाली डिमांड उस की परेशानी का सबब बन चुकी थी. इस बार 60-70 हजार के आईफोन की डिमांड से पुनीत मन ही मन तिलमिला गया था. उसे अब रातरात भर नींद नहीं आ रही थी.

आखिर में पुनीत ने मुसकान से छुटकारा पाने का कठोर निर्णय ले लिया था. अपनी इस योजना में उस ने दुकान पर काम करने वाले नौकर अन्नू को रुपयों का लालच देते हुए शामिल कर लिया था.

योजना के मुताबिक पुनीत ने 3 जुलाई की सुबह अचानक मुसकान को फोन किया, ‘‘हैलो मुसकान, जल्दी से तैयार हो जाओ, आईफोन लेने के लिए नागपुर चलना है.’’

मुसकान आईफोन मिलने की खुशी में पागल हो गई और जल्दी से तैयार हो कर घर से बाहर निकलते हुए मां से केवल इतना ही कह पाई, ‘‘मैं बाजार जा रही हूं, कुछ देर में वापस आती हूं.’’

कुछ ही देर में  पुनीत और अन्नू कार ले कर बाजार आ चुके थे. बाजार से मुसकान को कार में बिठा कर वे नागपुर के लिए रवाना हो गए.

कार पुनीत ही ड्राइव कर रहा था और मुसकान अगली सीट पर बैठी थी, जबकि पिछली सीट पर बैठा अन्नू मोबाइल पर गेम खेलने का नाटक कर रहा था.

कार से सफर के दौरान मुसकान को बीयर की पेशकश की गई, लेकिन उस ने इंकार कर दिया. पुनीत और अन्नू ने मिल कर शराब पी. कुछ ही घंटों में कार मध्य प्रदेश की सीमा से बाहर निकल चुकी थी.

रास्ते में सुनसान जगह पर पुनीत ने कार रोकी और बराबर की सीट पर बैठी मुसकान के गले में हाथ डाल कर प्यार का नाटक करने लगा. इसी दौरान पीछे बैठे हुए अन्नू ने उस का जोर से गला दबा दिया. मुसकान ने जोर से चीखने की कोशिश की, मगर पुनीत ने उस का मुंह हथेली से बंद कर दिया.

कुछ ही देर में जब वह बेहोश हो गई तो दोनों ने उसे कार से बाहर खींच लिया और सड़क पर पड़े पत्थर से उस का सिर कुचल कर मौत के घाट उतार दिया. मुसकान की लाश को सड़क के किनारे लुढ़का कर दोनों कार से अमला वापस आ गए.

पुनीत ने मुसकान की ब्लैकमेलिंग से तंग आ कर उसे प्रदेश के बाहर खत्म करने की योजना इसलिए बनाई ताकि किसी को उस पर शक न हो. मगर पुलिस की नजरों से वह ज्यादा दिन तक बच नहीं सका.

महाराष्ट्र के काटोल पुलिस के टीआई महादेव आचरेकर और मध्य प्रदेश के अमला पुलिस के टीआई संतोष पंद्रे की सूझबूझ से 11 जुलाई को मुसकान की हत्या के राज से परदा हट गया.

महाराष्ट्र पुलिस ने पुनीत सोनी और अन्नू को मुसकान की हत्या के जुर्म में भादंवि की धारा 302 और 201 के तहत दर्ज कर कोर्ट में पेश किया, जहां से पुनीत को नागपुर सैंट्रल जेल और अन्नू को बाल सुधार गृह भेज दिया. Madhya Pradesh Crime

—कथा पुलिस सूत्रों पर आधारित. कथा में अन्नू परिवर्तित नाम है. Madhya Pradesh Crime

Crime Thriller Hindi: जन्मदिन में मिली मौत – बेकसूर को मिली सजा

Crime Thriller Hindi: शहाबुद्दीन ने अपनी होने वाली पत्नी हसमतुल निशां से कहा. ‘‘निशां अपने जन्मदिन की पार्टी पर हमें दावत नहीं दोगी क्या?’’  ‘‘क्यों नहीं, जब आप ने मांगी है तो पार्टी जरूर मिलेगी. हम कार्यक्रम तय कर के आप को बताते हैं.’’ निशा ने अपने मंगेतर को भरोसा दिलाया.

निशां घर वालों के दबाव में बेमन से शहाबुद्दीन से शादी करने के लिए तैयार हुई थी, क्योंकि वह तो शाने अली को प्यार करती थी. इसलिए मंगेतर द्वारा शादी की पार्टी मांगने वाली बात उस ने अपने प्रेमी शाने अली को बताई तो वह भड़क उठा. उस ने कहा ‘‘निशा तुम एक बात साफ समझ लो कि जन्मदिन की पार्टी में शहाबुद्दीन और मुझ में से केवल एक ही शामिल होगा. तुम जिसे चाहो बुला लो.’’

निशा को इस बात का अंदाजा पहले से था कि शाने अली को यह बुरा लगेगा. उस ने कहा, ‘‘शाने अली, तुम तो खुद जानते हो कि मुझे वह पसंद नहीं है. लेकिन अब घर वालों की बात को नहीं टाल सकती.’’

‘‘निशा, तुम यह समझ लो कि यह शादी केवल दिखावे के लिए है.’’ शाने अली ने जब यह कहा तो निशा ने साफ कह दिया कि शादी दिखावा नहीं होती. शादी के बाद उस का मुझ पर पूरा हक होगा.’’

‘‘नहीं, शादी के पहले और शादी के बाद तुम्हारे ऊपर हक मेरा ही रहेगा. जो हमारे बीच आएगा, उसे हम रास्ते से हटा देंगे.’’ यह कह कर शाने अली ने फोन रख दिया.

हसमतुल निशां ने बाद में शाने अली से बात की और उन्होंने यह तय कर लिया कि वे दोनों एक ही रहेंगे. उन को कोई जुदा नहीं कर पाएगा. दोनों के बीच जो भी आएगा, उसे राह से हटा दिया जाएगा.

शहाबुद्दीन की शादी हसमतुल निशां के साथ तय हुई थी. निशां लखनऊ स्थित पीजीआई के पास एकता नगर में रहती थी. वह अपने 2 भाइयों में सब से छोटी और लाडली थी. शहाबुद्दीन भी अपने घर में सब से छोटा था. वह निशां के घर से करीब 35 किलोमीटर दूर बंथरा में रहता था.

शहाबुद्दीन ट्रांसपोर्ट नगर में एक दुकान पर नौकरी करता था, जो दोनों के घरों के बीच थी. हसमतुल निशां ने अपने घर वालों के कहने पर शहाबुद्दीन के साथ शादी के लिए हामी तो भर दी थी पर वह अपने प्रेमी शाने अली को भूलने के लिए भी तैयार नहीं थी.

ऐसे में जैसेजैसे शहाबुद्दीन के साथ शादी का दिन करीब आ रहा था, दोनों के बीच तनाव बढ़ रहा था. हसमतुल निशां ने पहले ही फैसला ले लिया था कि वह शादी का दिखावा ही करेगी. बाकी मन से तो अपने प्रेमी शाने अली के साथ रहेगी.

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शहाबुद्दीन के साथ हसमतुल निशां की सगाई होने के बाद दोनों के बीच बातचीत होने लगी. शहाबुद्दीन अकसर उसे फोन करने लगा. मिलने के लिए भी दबाव बनाने लगा. यह बात निशां को अच्छी नहीं लग रही थी.

शाने अली भी नहीं चाहता था कि निशां अपने होने वाले पति शहाबुद्दीन से मिलने जाए. जब भी उसे यह पता चलता कि दोनों की फोन पर बातचीत होती है और वे मिलते भी हैं. इस बात को ले कर वह निशां से झगड़ता था. दोनों के बीच लड़ाईझगड़े के बाद यह तय हुआ कि अब शहाबुद्दीन को रास्ते से हटाना ही होगा.

शहाबुद्दीन को अपनी होने वाली पत्नी और उस के प्रेमी के बारे में कुछ भी पता नहीं था. वह दोनों को आपस में रिश्तेदार समझता था और उन पर भरोसा भी करता था. अपनी होने वाली पत्नी हसमतुल निशां को अच्छी तरह से जाननेसमझने के लिए वह उस के करीब आने की कोशिश कर रहा था. उसे यह नहीं पता था कि उस की यह कोशिश उसे मौत की तरफ ले जा सकती है.

शहाबुद्दीन अपनी मंगेतर के साथ संबंधों को मधुर बनाने की कोशिश कर रहा था पर प्रेमी के मायाजाल में फंसी हसमतुल निशां अपने को उस से दूर करना चाहती थी. परिवार के दबाव में वह खुल कर बोल नहीं पा रही थी.

12 मार्च, 2021 को उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के मोहनलालगंज थाना क्षेत्र में स्थित कल्लू पूरब गांव के पास झाडि़यों में शहाबुद्दीन उर्फ मनीष की खून से लथपथ लाश पड़ी मिली. करीब 26 साल के शहाबुद्दीन के सीने में चाकू से कई बार किए गए थे.

गांव वालों की सूचना पर पुलिस ने शव को बरामद किया. शव मिलने वाली जगह से कुछ दूरी पर ही एक बाइक खड़ी मिली. बाइक में मिले कागजात से पुलिस को पता चला कि वह बाइक मृतक शहाबुद्दीन की ही थी. इस के आधार पर पुलिस ने उस के घर पर सूचना दी.

शहाबुद्दीन के भाई ने अनीस ने शव को पहचान भी लिया. अनीस की तहरीर पर पुलिस ने धारा 302 आईपीसी के तहत मुकदमा कायम किया.

हत्या की घटना को उजागर करने और अपराधियों को पकड़ने के लिए डीसीपी (दक्षिण लखनऊ) रवि कुमार, एडिशनल डीसीपी पुर्णेंदु सिंह, एसीपी (दक्षिण) दिलीप कुमार सिंह ने घटनास्थल पर पहुंच कर फोरैंसिक टीम व डौग स्क्वायड बुला कर मामले की पड़ताल शुरू की.

शहाबुद्दीन के शव की तलाशी लेने पर पर्स और मोबाइल गायब मिला. शव के पास 2 टूटी कलाई घडि़यां और एक चाबी का गुच्छा मिला. यह समझ आ रहा था कि हत्या के दौरान आपसी संघर्ष में यह हुआ होगा.

पुलिस के सामने शहाबुद्दीन के घर वालों ने उस की होने वाली पत्नी हसमतुल निशां के परिजनों पर हत्या का आरोप लगाया. डीसीपी रवि कुमार ने इस केस को सुलझाने के लिए एसीपी दिलीप कुमार के नेतृत्व में एक पुलिस टीम गठित की.

टीम में इंसपेक्टर दीनानाथ मिश्रा, एसआई रमेश चंद्र साहनी, राजेंद्र प्रसाद, धर्मेंद्र सिंह, महिला एसआई शशिकला सिंह, कीर्ति सिंह, हैडकांस्टेबल अश्वनी दीक्षित, कांस्टेबल संतोश मिश्रा, शिवप्रताप और विपिन मौर्य के साथ साथ सर्विलांस सेल के सिपाही सुनील कुमार और रविंद्र सिंह को शामिल किया गया. पुलिस ने सर्विलांस की मदद से जांच शुरू की.

शहाबुद्दीन बंथरा थाना क्षेत्र के बनी गांव का रहने वाला था. वह ट्रांसपोर्ट नगर में खराद की दुकान पर काम करता था. 11 मार्च, 2021 को वह अपने पिता मीर हसन की बाइक ले कर घर से जन्मदिन की पार्टी में हिस्सा लेने के लिए निकला था. शहाबुद्दीन की मंगेतर हसमतुल निशां ने उसे जन्मदिन की पार्टी में शामिल होने का न्योता दिया था.

शहाबुद्दीन ने यह बात अपने घर वालों को बताई और दुकान से सीधे पार्टी में शामिल होने चला गया था. देर रात वह घर वापस नहीं आया. अगले दिन यानी 12 मार्च की सुबह 11 बजे पुलिस ने उस की हत्या की सूचना उस के घर वालों को दी.

अनीस ने पुलिस का बताया कि 27 मई को शहाबुद्दीन और हसमतुल निशां का निकाह होने वाला था. बारात लखनऊ में पीजीआई के पास एकता नगर में नवाबशाह के घर जाने वाली थी. शहाबुद्दीन की हत्या की सूचना पा कर पिता मीर हसन, मां कमरजहां, भाई इश्तियाक, शफीक, अनीस और राजू बिलख रहे थे.

मां कमरजहां रोते हुए कह रही थी, ‘‘मेरे बेटे की किसी से कोई दुश्मनी नहीं थी. वह घर का सब से सीधा लड़का था. उस ने किसी का कुछ भी नहीं बिगाड़ा था. ऐसे में उस के साथ क्या हुआ?’’

पुलिस ने जन्मदिन में बुलाए जाने और लूट की घटना को सामने रख कर छानबीन शुरू की.

शहाबुद्दीन की हत्या को ले कर परिवार के लोगों को एक वजह शादी लग रही थी. परिवार को शहाबुद्दीन की हत्या के पीछे उस की होने वाली पत्नी और उस के भाइयों पर शक था. इसलिए अनीस की तहरीर पर पुलिस ने हसमतुल निशां और उस के भाइयों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया.

पुलिस ने तीनों को हिरासत में ले कर पूछताछ शुरू कर दी. पुलिस की विवेचना में यह बात खुल कर सामने आई कि शहाबुद्दीन की हत्या में उस की होने वाली पत्नी हसमतुल निशां का हाथ था. यह भी साफ था कि हसमतुल निशां का साथ उस के भाइयों ने नहीं, बल्कि उस के प्रेमी शाने अली ने दिया था.

शहाबुद्दीन उर्फ मनीष की हत्या की साजिश उस की मंगेतर हसमतुल निशां और उस के प्रेमी शाने अली ने अपने 6 अन्य साथियों के साथ मिल कर रची थी. मोहनलालगंज कोतवाली के इंसपेक्टर दीनानाथ मिश्र के मुताबिक बंथरा कस्बे के रहने वाले शहाबुद्दीन की शादी हसमतुल निशां के साथ 27 मई को होनी थी. इस से हसमतुल खुश नहीं थी.

वह पीजीआई के पास रहने वाले शाने अली से प्यार करती थी. इस के बाद भी परिवार वालों के दबाव में शहाबुद्दीन से मिलती रही. जैसेजैसे शादी का समय पास आता जा रहा हसमतुल निशां अपने मंगेतर शहाबुद्दीन से पीछा छुड़ाने के बारे में सोचने लगी.

इस के लिए उस ने अपने प्रेमी शाने अली के साथ मिल कर योजना बनाई. हसमतुल निशां चाहती थी कि शाने अली उस के मंगेतर शहाबुद्दीन को किसी तरह रास्ते से हटा दे.

योजना को अंजाम देने के लिए शाने अली ने अपने जन्मदिन के अवसर पर 11 मार्च, 2021 को शहाबुद्दीन को मिलने के लिए बुलाया.

गुरुवार रात के करीब साढ़े 8 बजे शाने अली और उस के दोस्त बाराबंकी निवासी अरकान, मोहनलालगंज निवासी संजू गौतम, अमन कश्यप और पीजीआई निवासी समीर मोहम्मद बाबूखेड़ा में जमा हुए. जैसे ही शहाबुद्दीन वहां पहुंचा शाने अली और उस के दोस्तों ने उस पर चाकू से ताबड़तोड़ हमला कर दिया.

अपने ऊपर चाकू से हमला होने के बाद भी शहाबुद्दीन ने हार नहीं मानी और अपनी जान बचाने के लिए वह हमलावरों से भिड़ गया.

शाने अली और उस के हमलावर दोस्तों को जब लगा कि शहाबुद्दीन बच निकलेगा तो उन लोगों ने कुत्ते को बांधी जाने वाली जंजीर से शहाबुद्दीन का गला कस दिया, जिस से शहाबुद्दीन अपना बचाव नहीं कर पाया और अपनी जान से हाथ धो बैठा.

अगले दिन जब शहाबुद्दीन का शव मिला तो उस के भाई अनीस ने हसमतुल निशां के भाइयों पर हत्या का शक जताया. पुलिस ने संदेह के आधार पर ही उन से पूछताछ शुरू की थी. इस बीच पुलिस को हसमतुल निशां और शाने अली के प्रेम संबंधों के बारे में पता चला. पुलिस ने जब हसमतुल निशां से पूछताछ शुरू की तो वह टूट गई.

हसमतुल निशां ने पुलिस को बताया कि उस ने प्रेमी शाने अली के साथ मिल कर मंगेतर शहाबुद्दीन की हत्या कर दी. इस के बाद पुलिस ने शाने अली और उस साथियों को पकड़ने के लिए उन के घरों पर दबिशें दे कर गिरफ्तार कर लिया.

शहाबुद्दीन की हत्या के आरोप में पुलिस ने हसमतुल निशां, शाने अली, अरकान, संजू गौतम, अमन कश्यप, समीर मोहम्मद को जेल भेज दिया. पुलिस को आरोपियों के पास से एक चाकू, गला घोटने के लिए प्रयोग में लाई गई चेन, संजू की मोटरसाइकिल, 2 कलाई घडि़यां, 6 मोबाइल फोन और आधार कार्ड बरामद हुए.

सभी आरोपियों से पूछताछ के बाद उन्हें न्यायालय में पेश करने के बाद जेल भेज दिया गया. 24 घंटे के अंदर केस का खुलासा करने वाली पुलिस टीम की डीसीपी (दक्षिण) रवि कुमार ने सराहना की. Crime Thriller Hindi

MP Crime: पैसों की भूखी एक प्रेमिका का हैरतअंगेज खेल

MP Crime: आज एक की बांहों में, तो कल दूसरे की बांहों में. इस तरह के कई प्रेमी देखने को मिल जाएंगे, पर कई लड़कों से इश्क लड़ा कर उन के पैसों पर ऐश करने का शौक रखने वाली लड़कियां कम ही मिलती हैं. विदिशा, मध्य प्रदेश की स्वीटी (बदला हुआ नाम) उन में से एक थी. उसे बौयफ्रैंड बनाने का शौक था. वह आए दिन नएनए बौयफ्रैंड बनाती थी. जिस की जेब उसे तंग लगने लगती, वह उस को अपनी जिंदगी से दूर कर देती थी.

हाल ही में स्वीटी ने गोपाल रैकवार को अपने हुस्न के जाल में फंसाया. कुछ समय तक उस के पैसों पर खूब ऐश की. जब उस ने महसूस किया कि गोपाल की जेब तंग हो रही है, तो उस ने एक बकरा काट कर बेचने वाले मोटे आसामी अकरम को हुस्न का चारा दिखा कर अपना आशिक बना लिया और उसे हलाल करने लगी. इस बात का पता गोपाल को चला. वह स्वीटी को अकरम से दूर रखने की कोशिश करने लगा. स्वीटी कम होशियार नहीं थी. उस ने दोनों हाथों में लड्डू हासिल करने के लिए अपने प्रेमियों के सामने दिल्ली सरकार के ईवनऔड वाले फार्मूले की तरह तारीख को आपस में बांट लेने का औफर रखा.

गोपाल को स्वीटी का औफर पसंद नहीं आया, तो उस की लाश शहर के बाहर एक कुएं में मिली. मध्य प्रदेश के विदिशा जिले के लोहांगीपुरा की रहने वाली 19 साला स्वीटी दिखने में काफी खूबसूरत थी. उस के पिता की मौत कई साल पहले हो गई थी. उस की विधवा मां बच्चों की सही तरीके से देखभाल नहीं कर पा रही थी. वह मंडी में मजदूरी कर के अपने तीनों बच्चों का पेट पाल रही थी.

कहते हैं कि गरीब की बेटी जल्दी ही जवान हो जाती है. ऐसा ही स्वीटी के साथ भी हुआ. अपनी ख्वाहिशों को पूरा करने के लिए उस ने अपने हुस्न को ही चारा बना लिया. उस ने खातेपीते घरों के लड़कों को पटाना शुरू किया. स्वीटी के हुस्न को पाने के लालच में कई लड़के बहुत कुछ लुटाने को तैयार थे. वह उन्हें हुस्न का स्वाद चखाती, इस के बदले में उन से मोटी रकम लेती. उस रकम से वह ऐश करती.

स्वीटी को मोटरसाइकिल चलाने का शौक था.  विदिशा और बीना की भीड़ भरी सड़कों पर तेज स्पीड में मोटरसाइकिल चला कर वह लोगों के आकर्षण का केंद्र बन चुकी थी. गोपाल खातेपीते घर से था. वह स्वीटी की खूबसूरती के जाल में फंस कर उस से प्यार करने लगा. वह उस पर मनमाना खर्च भी करने लगा. जब भी वे दोनों मोटरसाइकिल पर शहर में घूमने निकलते, तो स्वीटी गोपाल को पीछे बिठा कर मोटरसाइकिल खुद चलाती थी. उस वक्त गोपाल स्वीटी की कमर को कस कर पकड़ लेता था.

पूरे शहर में दोनों के प्यार की चर्चा हो रही थी. यह बात गोपाल के घर वालों तक भी पहुंच गई. उन्हें स्वीटी का स्वभाव बिलकुल भी पसंद नहीं था. वे स्वीटी को चालू किस्म की लड़की मानते थे. गोपाल के परिवार वालों ने समझाते हुए उसे स्वीटी से दूर रहने की हिदायत दी, पर गोपाल पर स्वीटी के प्यार का नशा बुरी तरह से चढ़ा हुआ था. इधर स्वीटी ने महसूस किया कि गोपाल का हाथ कुछ तंग होता जा रहा है. ऐसे में वह दूसरे प्रेमी की तलाश में लग गई. एक दिन स्वीटी की मुलाकात 28 साला अकरम से हुई. वह मांस बेचने का धंधा करता था. उस की कमाई अच्छी थी. स्वीटी ने उसे अपने हुस्न के जाल में फंसा लिया. वह उस पर दिल खोल कर खर्च करने लगा.

स्वीटी इस बात का ध्यान रखती थी कि उस की और अकरम की दोस्ती की खबर गोपाल को न लगे. इस के लिए वह गोपाल से भी मिलती रही. गोपाल से स्वीटी और अकरम की दोस्ती की खबर ज्यादा दिनों तक छिपी नहीं रह सकी. उस ने स्वीटी पर अपना हक जताते हुए उसे अकरम से दूर रहने की हिदायत दी. स्वीटी ने गोपाल से कहा, ‘‘तुम मेरे मामले में दखलअंदाजी मत करो. मैं किस से मिलूंगी या नहीं मिलूंगी, यह मेरा पर्सनल मामला है. तुम अगर चाहते हो कि मेरा प्यार तुम्हें भी बराबर मिलता रहे, तो मेरे पास एक फार्मूला है. तुम दिल्ली सरकार के ईवनऔड फार्मूले की तरह तारीख तय कर लो. मैं उस दिन तुम्हारे पास रहूंगी और अगले दिन अकरम के साथ.’’

गोपाल को उस की बात पसंद नहीं आई. वह स्वीटी को हमेशा अपनी बांहों में रखना चाहता था. उस ने स्वीटी के फार्मूले को मानने से इनकार कर दिया. इधर गोपाल स्वीटी को रोकने में लगा था कि वह अकरम से न मिले. साथ ही, अकरम को भी वह बारबार मोबाइल कर के स्वीटी से दूर रहने की हिदायत देता रहा था. अकरम ने स्वीटी को फोन कर के कहा, ‘‘अपने आशिक गोपाल को संभाल ले, वरना मैं उसे ऊपर पहुंचा दूंगा.’’

स्वीटी को गोपाल अब सिरदर्द लगने लगा था, क्योंकि वह काफी टोकाटाकी करने लगा था. स्वीटी ने अकरम से कहा, ‘‘रोजरोज के झगड़े से अच्छा है कि गोपाल को निबटा ही दें.’’

अपनी प्रेमिका का आदेश मिलते ही अकरम ने 28 मार्च, 2016 की रात को गोपाल को अपनी दुकान पर बुलाया. अपने नौकर सुरेश पाल के साथ मिल कर उस ने गोपाल को जम कर शराब पिलाने के बाद उस की हत्या कर दी. अकरम ने यह सूचना स्वीटी को दे दी. गोपाल की हत्या की खबर सुन कर स्वीटी काफी खुश हुई. वह अकरम की दुकान पर पहुंच गई. वहां तीनों ने जम कर शराब पी और जश्न मनाया.

बाद में पुलिस ने हत्या के आरोप में अकरम, उस के नौकर सुरेश पाल व स्वीटी को गिरफ्तार कर लिया. इस केस की जांच कर रहे अधिकारी राजेश तिवारी का कहना है, ‘‘जवानी के जोश में नौजवानों को किसी बात का होश ही नहीं रहता है. लड़के खेलीखाई लड़की से मेलजोल बढ़ाते वक्त उस पर भरोसा न रखें, क्योंकि ऐसी लड़की अपने फायदे के लिए कुछ भी कर सकती है.’’ MP Crime

Top 10 love Crime Story in Hindi : टॉप 10 लव क्राइम स्टोरी हिंदी में

Top 10 love Crime Story Of 2022 : इन लव क्राइम स्टोरी को पढ़कर आप जान पाएंगे कि कैसे समाज में प्रेम ने कईओं के घर बर्बाद किये है और किसी ने प्यार के लिए अपनों को ही शिकार बना लिया. और अपने ही प्यार को धोखा देकर उसे मार देना. अपने और अपने परिवार को ऐसे हो रहे क्राइम से सावधान करने के लिए पढ़िए Top 10 love Crime story in Hindi मनोहर कहानियां जो आपको गलत फैसले लेने से बचा सकती है.

  1.  2 करोड़ की प्रीत : चेतन हुआ ब्लैकमेलिंग का शिकार

25 सितंबर, 2019 तक मध्यप्रदेश में उजागर हुए सैक्स स्कैंडल जिसे मीडिया ने हनीट्रैप नाम दिया था, का मुकम्मल बवाल मच चुका था. हर दिन इस स्कैंडल से जुड़ी कोई खबर सनसनी पैदा कर रही थी. राजनैतिक और प्रशासनिक गलियारों में काम कम इस देशव्यापी स्कैंडल और उस से जुड़े अधिकारियों और नेताओं की चर्चा ज्यादा हो रही थी कि इस में कौनकौन फंस सकते हैं.

लेकिन जब सरकार ने इस स्कैंडल की जांच के बाबत विशेष जांच दल का गठन कर दिया तो चर्चाएं और खबरें धीरेधीरे कम होने लगीं और दीवाली आतेआते लोगों की जिज्ञासा भी खत्म होने लगी.

जो लोग यह जानने को उत्सुक थे, उन नेताओं और अधिकारियों के असल चेहरे और नाम उजागर होंगे, जिन्हें ब्लैकमेल किया जा रहा था, उन की उत्सुकता भी ठंडी पड़ गई थी.

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2.  10 दिन का खूनी खेल : जौनी ने क्यों किये इतने अपराध

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अपराध चाहे जैसा भी हो, अपराध ही होता है, सामाजिक समन्वय के विरुद्ध उठाया हुआ कदम. मानवीयता पर प्रहार. हर अपराध की सजा होती है. एक दिन से ले कर आजीवन तक. कालकोठरी से ले कर फांसी तक. वैसे यह भी सही है कि कुछ अपराधी कानून के बारीक छिद्रों का सहारा ले कर बच निकलते हैं और कई अपने दांवपेंचों से कानून की चौखट तक जाते ही नहीं. अश्विनी उर्फ जौनी ऐसा तो नहीं था, लेकिन उस की सोच जरूर कुछ ऐसी ही थी अपने बारे में.

अश्विनी उर्फ जौनी जिला बिजनौर के कस्बा बढ़ापुर का रहने वाला था. पढ़ालिखा, स्वस्थ सुंदर युवक. पिता सुभाष धामपुर की गन्ना सहकारी समिति में नौकरी करते थे. शिक्षा के महत्त्व को समझने वाले सुभाष ने अश्विनी को एमकौम तक पढ़ाया था. उस ने इंटरमीडिएट श्योहारा के स्कूल से किया.

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3. पूजा सिंह केस: ड्राइवर बना जान का दुश्मन

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कर्नाटक की राजधानी बेंगलुरु के दक्षिण में स्थित केंपेगौड़ा इंटरनैशनल एयरपोर्ट के पास एक गांव है कडयारप्पनहल्ली. 31 जुलाई, 2019 की बात है. इस गांव के कुछ लोग सुबहसुबह जब जंगल की ओर जा रहे थे, तो रास्ते में उन्होंने एक युवती की लाश पड़ी देखी. उन लोगों ने इस बात की जानकारी कडयारप्पनहल्लीके सरपंच को दी. सरपंच ने बिना विलंब किए इस मामले की सूचना बेंगलुरु पुलिस कंट्रोल रूम को दे दी.

सरपंच और कंट्रोल रूम से खबर पाते ही बेंगलुरु सिटी पुलिस हरकत में आ गई.  थानाप्रभारी ने ड्यूटी पर तैनात अफसर को इस मामले की डायरी बनाने को कहा और पुलिस टीम के साथ घटनास्थल की ओर रवाना हो गए.

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4.  मर कर भी न होंगे जुदा

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उत्तर प्रदेश का एक शहर एवं जिला मुख्यालय है फिरोजाबाद. यह शहर कांच की चूडि़यों के लिए प्रसिद्ध है. इसी जिले के थाना बसई मोहम्मदपुर के गांव आलमपुर कनैटा में राजवीर सिंह लोधी अपने परिवार के साथ रहता था. उस की पत्नी की करीब 3 साल पहले मौत हो गई थी.

राजवीर की गांव में आटा चक्की थी. उस के 2 बेटे बलजीत व जितेंद्र के अलावा 2 बेटियां राधा, ललिता उर्फ लता थीं. वह एक बेटे और एक बेटी की शादी कर चुका था. छोटा बेटा जितेंद्र पिता के साथ चक्की के काम में हाथ बंटाता था जबकि ललिता उर्फ लता गांव के ही स्कूल में पढ़ रही थी.

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5. जिंदगी की चादर के छेद : प्रेम ने किया रिश्तों का अंत

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उत्तर प्रदेश के बदायूं शहर के सिविल लाइंस इलाके में एक स्कूल है होली चाइल्ड. निशा इसी स्कूल में पढ़ाती थी. उस का पति राजकुमार पादरी था और उस की पोस्टिंग बदायूं जिला मुख्यालय से लगभग 23 किलोमीटर दूर वजीरगंज की एक चर्च में थी. चर्च में जब ज्यादा काम रहता था तो राजकुमार रात में वहीं रुक जाता था.

निशा को स्कूल की बिल्डिंग में ही रहने के लिए कमरा मिला हुआ था, जहां पर वह पति राजकुमार और 2 बेटियों रागिनी व तमन्ना के साथ रहती थी. राजकुमार और निशा की मुलाकात लखनऊ में पादरी के काम की ट्रेनिंग के दौरान हुई थी, जोकि वीसीसीआई संस्था द्वारा अपने धर्म प्रचारकों को दी जाती है. कुछ मुलाकातों के बाद दोनों एकदूसरे को पसंद करने लगे.

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6. बेरहम बेटी : प्रेमी के लिए की पिता की हत्या

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कर्नाटक की राजधानी बेंगलुरु देश का तीसरा सब से बड़ा नगर है. बेंगलुरु के राजाजी नगर थाना क्षेत्र

में भाष्यम सर्कल के पास वाटल नागराज रोड स्थित पांचवें ब्लौक के 17वें बी क्रौस में जयकुमार जैन अपने परिवार के साथ रहते थे.

जयकुमार जैन का कपड़े का थोक व्यापार था. पत्नी पूजा के अलावा उन के परिवार में 15 वर्षीय बेटी राशि (काल्पनिक नाम) और उस से छोटा एक बेटा था. जयकुमार मूलरूप से राजस्थान के जयपुर जिले के विराटनगर के पास स्थित मेढ़ गांव के निवासी थे. पैसे की कोई कमी नहीं थी, इसलिए परिवार के सभी सदस्य ऐशोआराम की जिंदगी जीने में यकीन करते थे.

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7. इश्क की फरियाद : परिवार का अंत

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25अप्रैल, 2019 को कोराना गांव के लोगों ने बाकनाला पुल के नीचे एक युवक का शव पड़ा देखा. कोराना गांव लखनऊ के थाना मोहनलालगंज के अंतर्गत आता है, जो  लखनऊ मुख्यालय से करीब 20 किलोमीटर दूर है. ग्रामीणों ने जब नजदीक जा कर देखा तो उन्होंने मृतक को पहचान लिया.

वह 45 वर्षीय आशाराम रावत का शव था, जो डलोना गांव का रहने वाला था. वह मोहनलालगंज में राजकुमार का टैंपो किराए पर चलाता था. उसी समय किसी ने इस की सूचना थाना मोनहलालगंज पुलिस को दे दी तो कुछ ही देर में थानाप्रभारी गऊदीन शुक्ल एसआई अनिल कुमार और हैडकांस्टेबल राजकुमार व लाखन सिंह को साथ ले कर घटनास्थल की तरफ रवाना हो गए.

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8. अन्नपूर्णा : सिंदूर की जगह खून

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कानपुर स्थित दलहन अनुसंधान केंद्र का सुरक्षाकर्मी के.पी. सिंह सुबह 8 बजे ड्यूटी पूरी कर अपने घर जा रहा था. जब वह बैरीबागपुर जाने वाली लिंक रोड पर पहुंचा तो उस ने रोड के किनारे एक युवती का शव पड़ा देखा. के.पी. सिंह ने यह सूचना जीटी रोड से गुजर रहे राहगीरों को दी तो कुछ ही देर में वहां लोगों की भीड़ जमा हो गई. इसी बीच के.पी. सिंह ने फोन द्वारा सड़क किनारे लाश पड़ी होने की सूचना थाना बिठूर पुलिस को दे दी. यह बात 17 अप्रैल, 2019 की है.

सूचना पाते ही बिठूर थानाप्रभारी विनोद कुमार सिंह पुलिस टीम के साथ बताई गई जगह पर पहुंच गए. युवती की उम्र 20-22 साल के आसपास थी. उस के सिर और चेहरे पर ईंटपत्थर या किसी अन्य वजनी चीज से वार किया गया था.

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9. सेक्स स्केंडल : ब्लैकमेलिंग से हुए कई शिकार

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यह देह व्यापार और ब्लैकमेलिंग का वैसा और कोई छोटामोटा मामला नहीं है, जिस में लोगों को पता चल जाए कि पकड़े गए लोगों के नाम, वल्दियत और मुकाम क्या हैं, बल्कि इस हाईप्रोफाइल मामले की हैरतअंगेज बात यह है कि इस में उन औरतों के नाम और पहचान उजागर हो जाना है, जो अपने हुस्न के जाल में मध्य प्रदेश के कई नेताओं और आईएएस अफसरों को फंसा कर करोड़ों रुपए कमा चुकी हैं.

खूबसूरत, स्टायलिश, सैक्सी और जवान औरत किसी भी मर्द की कमजोरी हो सकती है, लेकिन जब वे मर्द अहम ओहदों पर बैठे हों तो चिंता की बात हो जाती है. क्योंकि इन की न केवल समाज में इज्जत और रसूख होता है, बल्कि ये वे लोग हैं जो सरकार की नीतियांरीतियां बनाते हैं.

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10. पहलवान का वार : अनजान लड़की बनी मौत का कारण

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11अगस्त, 2019 को सुबह करीब साढ़े 5 बजे का वक्त था. मध्य प्रदेश के छतरपुर जिले के बसंतपुर तिगेला

गांव के लोग खेतों की तरफ जा रहे थे, तभी उन्हें गांव के कच्चे रोड पर किसी व्यक्ति की डैडबौडी पड़ी दिखी. किसी ने इस की सूचना फोन द्वारा चंदला थाने को दे दी.

सुबहसुबह लाश मिलने की सूचना मिलते ही टीआई वीरेंद्र बहादुर सिंह घटनास्थल की तरफ रवाना हो गए. जब वह घटनास्थल पर पहुंचे तो कच्ची सड़क पर एक आदमी का खून से लथपथ शव पड़ा था. इस की सूचना टीआई ने एसपी (छतरपुर) तिलक सिंह को दे दी. टीआई वीरेंद्र बहादुर सिंह ने लाश का मुआयना किया तो उस के शरीर पर गोलियों के घाव दिखे. मृतक की उम्र 40-45 साल के बीच रही होगी.

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UP Crime News: साजिश के चक्रव्यूह में 3 बहनें

UP Crime News: उन्नाव जिले के असोहा थाना अंतर्गत एक गांव है बबुरहा. करीब 300 की आबादी वाले इस गांव में ज्यादातर घर ब्राह्मणों और गोस्वामियों के हैं. कुछ परिवार दलितों के भी हैं. बबुरहा में दलित सूरज पाल, संतोष व सूरजबली अपने परिवार के साथ रहते हैं. इन में सूरज पाल व सूरजबली सगे भाई हैं, जबकि संतोष उन का भतीजा है. सूरज पाल के परिवार में पत्नी विटोला के अलावा 4 बेटे सरयू, मनीष, सुमित, अमित तथा 2 बेटियां काजल व नैंसी थी. बड़ी बेटी काजल 15 साल की थी. हाईस्कूल की परीक्षा पास करने के बाद उस की पढ़ाई बंद हो गई थी. वह मां के साथ घर खेत में काम करने लगी थी.

सूरजबली के परिवार में पत्नी गंगाजली के अलावा 3 बेटे विशाल, कल्लू, मल्लू तथा एक बेटी रोशनी थी. 3 भाइयों के बीच वह इकलौती थी, इसलिए घर की दुलारी थी. उस ने 9वीं कक्षा पास करने के बाद स्कूल जाना बंद कर दिया था और घर के काम में हाथ बटाने लगी थी. 17 वर्षीय रोशनी का रंगरूप तो साधारण था, लेकिन दिखने में सुंदर थी. संतोष के परिवार में पत्नी सुनीता के अलावा एक बेटा शिवांग तथा बेटी मोनिका थी. संतोष की पहली पत्नी का नाम सन्नो था. उस की 12 साल पहले मौत हो चुकी थी. सन्नो की एक बेटी कोमल थी. सुनीता कोमल की सौतेली मां थी. 14 वर्षीय कोमल 10वीं की छात्रा थी.

चूंकि रोशनी, कोमल तथा काजल हमउम्र और एक ही परिवार की थीं, सो उन में गहरी दोस्ती थी. तीनों का एकदूसरे के घर आनाजाना बना रहता था. दोस्ती के चलते वे हर बात एकदूसरे से शेयर करती थीं. साथ खातीपीती थीं तथा हंसतीबतियाती थीं. खेतों पर भी साथ ही जाती थीं और साथ ही लौटती थीं. रोशनी, काजल और कोमल दिन में 2 बार पशुओं का चारा (वरसीम) काटने खेत पर जाती थीं. पहली पाली में वे सुबह 8 बजे जातीं और 11 बजे घर वापस आ जातीं. फिर नहातीधोती, खानाखाती और आराम करतीं. दूसरी पाली में वे शाम 3 बजे खेत पर जातीं और शाम 5 बजे तक पशुओं का चारा ले कर वापस घर आ जातीं. इस के बाद घरेलू काम करतीं.

हर रोज की तरह 17 फरवरी, 2021 को भी रोशनी, काजल व कोमल शाम 3 बजे पशुओें का चारा काटने बबुरहा नाला स्थित अपने खेतों पर गई थीं. उन्हें शाम 5 या साढ़े 5 बजे तक आ जाना चाहिए था, लेकिन जब शाम 6 बजे तक वापस घर नहीं आईं, तो घर वालों को चिंता हुई. काजल के पिता सूरज पाल से नहीं रहा गया तो वह उन की तलाश में खेत की ओर निकल पड़ा. लड़कियों की खोज करते हुए जब वह भतीजे संतोष के सरसों के खेत पर पहुंचा, तो उस के मुंह से चीख निकल गई. रोशनी, कोमल व काजल एक के ऊपर एक पड़ी थीं. उन के मुंह से झाग निकल रहे थे और गले में दुपट्टे कसे हुए थे.

सूरज पाल बदहवास हालत में गांव की ओर भागा और परिवार तथा पड़ोसियों को सूचना दी. इस के बाद तो गांव में सनसनी फैल गई. घर व गांव के लोग घटनास्थल पर आ गए.

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केवनी गांव के निवासी जिला पंचायत सदस्य उमाशंकर दीक्षित उर्फ पवन अपनी कार से असोहा जा रहे थे. उन्होंने बबुरहा नाला के पास खेत में भीड़ देखी तो कार सड़क किनारे खड़ी कर दी और खेत पर जा पहुंचे. वहां 3 लड़कियों को मरणासन्न स्थिति में देख कर उन का दिल पसीज गया. इस के बाद तीनों अचेत किशोरियों को उन्होंने अपनी कार से सीएचसी असोहा पहुंचाया. जहां डा. विमल आर्या ने काजल और कोमल को तो मृत घोषित कर दिया, जबकि रोशनी जीवित थी. उस की सांसें चल रही थीं. डा. आर्या ने आशंका जताई कि किशोरियों की मौत जहर पीने से हुई है. काजल और

कोमल की मौत से असोहा के सरकारी अस्पताल में सनसनी फैल गई. घर वाले रोनेधोने लगे. इसी बीच थाना असोहा पुलिस को 2 दलित किशोरियों की मौत की खबर लगी तो थानाप्रभारी ओम प्रकाश रजक पुलिस टीम के साथ सीएचसी असोहा पहुंच गए. उन्होंने घटना की जानकारी वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों को दी तथा नाजुक हालत में पड़ी रोशनी को जिला अस्पताल उन्नाव में भरती कराया. सूचना पा कर एसपी आनंद कुलकर्णी, डीएम रवींद्र कुमार, एडीएम राकेश सिंह, सिटी मजिस्ट्रैट चंदन पटेल, डीएसपी गौरव त्रिपाठी तथा कोतवाल दिनेश चंद्र जिला अस्पताल आ गए और रोशनी के संबंध में जानकारी ली.

इमरजेंसी के डा. गौरव अग्रवाल ने पुलिस व प्रशासन के अधिकारियों को बताया कि रोशनी की हालत बेहद नाजुक है. उसे इलाज हेतु कानपुर रेफर करना होगा. इस पर पुलिस अधिकारियों ने रोशनी को कानपुर के सर्वोदय नगर स्थिति रीजेंसी अस्पताल में भरती करा दिया. इधर 2 दलित किशोरियों की संदिग्ध मौत की खबर टीवी चैनलों पर ब्रेकिंग न्यूज के रूप में चलने लगी तो हड़कंप मच गया. एडीजी (लखनऊ जोन) एस.एन. सावंत तथा आईजी लक्ष्मी सिंह असोहा थाना पहुंच गईं. वहां एसपी आनंद कुलकर्णी, एएसपी विनोद कुमार पांडेय, कमिश्नर रंजन कुमार, एसडीएम राजेश चौरसिया तथा डीएम रवींद्र कुमार पहले से मौजूद थे.

वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों ने रोतेबिलखते मृतका के घर वालों को धैर्य बंधाया, फिर उन से घटना के संबंध में जानकारी हासिल की. इस के बाद मृतका काजल और कोमल के शवों को पोस्टमार्टम के लिए उन्नाव के जिला अस्पताल भिजवा दिया. पुलिस अधिकारियों को डर था कि कहीं यह मामला हाथरस कांड की तरह तूल न पकड़ ले. अत: आईजी लक्ष्मी सिंह ने कड़ा रुख अपनाया और बबुरहा गांव को छावनी में तब्दील करा दिया. बबुरहा गांव को जाने वाला हर रास्ता सील कर दिया गया. सतर्कता के नाते पुलिस का कड़ा पहरा बैठा दिया गया.

लक्ष्मी सिंह ने यह भी आदेश दिया कि कोई भी व्यक्ति पीडि़त परिवार से न मिलने पाए. मीडियाकर्मियों को भी गांव में जाने तथा पीडि़त परिवार के सदस्यों से बातचीत करने को मना कर दिया गया. प्रदेश के मुखिया योगी आदित्यनाथ ने भी दलित किशोरियों की मौत की घटना को गंभीरता से लिया और इस मामले में डीजीपी हितेशचंद्र अवस्थी से पूरी रिपोर्ट मांगी. उन्होंने घटना को बेहद दुर्भाग्यपूर्ण बताया तथा मृतकों के घर वालों को 5-5 लाख रुपया मुआवजा देने का आदेश दिया. वहीं अस्पताल में भरती पीडि़त रोशनी के घर वालों को 2 लाख रुपया नकद देने को कहा गया. साथ ही उन्नाव के डीएम रवींद्र कुमार को सरकारी खर्चे पर उस का बेहतर से बेहतर इलाज कराने का आदेश दिया गया.

18 फरवरी, 2021 को 2 दलित किशोरियों की संदिग्ध मौत का मामला अखबारों की सुर्खियों में छपा तो राजनीतिक पार्टियां मुद्दा गरमाने में लग गईं. आईजी लक्ष्मी सिंह इस मामले का खुलासा जल्द करना चाहती थीं, सो उन्होंने असोहा थाने में डेरा डाल दिया और उन्नाव कप्तान आनंद कुमार कुलकर्णी को जल्द खुलासे का आदेश दिया. कुलकर्णी ने खुलासे हेतु एएसपी विनोद कुमार पांडेय के निर्देशन में एक पुलिस टीम का गठन किया. इस टीम में असोहा थानाप्रभारी ओम प्रकाश रजक, उन्नाव कोतवाल दिनेश चंद्र, डीएसपी गौरव त्रिपाठी तथा एक दरजन तेजतर्रार पुलिसकर्मियों को शामिल किया गया. डौग स्क्वायड तथा फोरैंसिक टीम को भी साथ लिया गया.

गठित टीम ने सब से पहले आपस में विचारविमर्श किया, जिस से तय हुआ कि किशोरियों की मौत के 3 कारण हो सकते हैं. पहला उन्होंने आत्महत्या के लिए जहर पिया. दूसरा हत्या के लिए उन्हें जहर दिया गया और तीसरा मामला औनर किलिंग का हो सकता है. पुलिस टीम ने इन्हीं बिंदुओं पर जांच शुरू की. टीम ने सब से पहले घर के एकएक सदस्य से अलगअलग पूछताछ की, फिर पोस्टमार्टम रिपोर्ट का अध्ययन किया. रिपोर्ट के अनुसार कोमल और काजल की मौत जहर से हुई थी. उन के शरीर पर कोई चोट के निशान नहीं थे और न ही दुष्कर्म किया गया था.

रिपोर्ट का अध्ययन करने के बाद पुलिस टीम खोजी कुत्ता टीम व फोरैंसिक टीम के साथ घटना वाले खेत पर पहुंची. यहां पुलिस टीम ने बारीकी से निरीक्षण किया तथा घर वालों के अलावा कई अन्य लोगों के बयान दर्ज किए. खोजी कुत्ता टीम ने घटनास्थल पर कुत्ता छोड़ा, तो वह सूंघ कर पाठकपुरा गांव की ओर भागा और गुलशन की परचून की दुकान पर जा कर रुका. टीम ने उस से कड़ाई से पूछताछ की तो उस ने बताया कि उस की दुकान पर दरजनों लोग आते हैं, कब कौन क्या सामान ले गया, वह नहीं बता पाएगा. पूछताछ के बाद जब कुछ हासिल नहीं हुआ तो टीम वापस आ गई.

फोरैंसिक टीम ने जांच शुरू की तो घटनास्थल से 25 मीटर दूर एक खेत के बाहर कुरकुरे के 2 तथा नमकीन के 2 खाली रैपर मिले. पास में ही कीटनाशक का खाली रैपर भी मिला. करीब 10 मीटर आगे सोडा बोतल भी पड़ी थी. यहीं पर पान मसाले का खाली रैपर तथा अधजली सिगरेट पड़ी थी. फोरैंसिक टीम ने घटनास्थल से मिले सामान को सुरक्षित कर लिया. टीम ने बबुरहा गांव के परचून के दुकानदार साबिर से पूछताछ की तो उस ने बताया कि रोशनी जब खेत पर जा रही थी, तब उस ने कुरकुरे के 2 पैकेट खरीदे थे.

अब सवाल यह था कि रोशनी ने जब 2 पैकेट खरीदे थे, तो रैपर 4 कैसे मिले. इस का मतलब किशोरियों के अलावा कोई और भी था. पर वह कौन था? फोरैंसिक और पुलिस टीम अभी माथापच्ची कर ही रही थी कि एक मुखबिर ने आ कर जानकारी दी कि उस ने 17 फरवरी की शाम 6 बजे के आसपास पाठकपुरा गांव के विनय उर्फ लंबू तथा उस के दोस्त सचिन को खेत से गांव की ओर भाग कर आते देखा था. पुलिस के लिए यह जानकारी महत्त्वपूर्ण थी. चूंकि रैपर व अन्य सामान भी विनय के खेत से ही मिला था, अत: पुलिस का शक उस पर और भी गहरा गया. इस के बाद पुलिस टीम ने रात में पाठकपुरा गांव में छापा मार कर विनय उर्फ लंबू तथा सचिन को उन के घर से गिरफ्तार कर लिया. दोनों को थाना असोहा लाया गया.

थाने पर आईजी लक्ष्मी सिंह तथा एसपी आनंद कुलकर्णी ने डीएम रवींद्र कुमार की उपस्थिति में विनय व सचिन से घटना के संबंध में पूछताछ की. पूछताछ में विनय व सचिन ने जुर्म का कबूल कर लिया. उस के बाद आईजी लक्ष्मी सिंह ने प्रैसवार्ता की और आरोपियों को मीडिया के समक्ष पेश कर घटना का खुलासा किया. चूंकि विनय उर्फ लंबू तथा सचिन ने जुर्म कबूल कर लिया था, अत: थानाप्रभारी ओमप्रकाश रजक ने मृतका काजल के पिता सूरज पाल की तहरीर पर भादंवि की धारा 302/201 के तहत विनय उर्फ लंबू तथा सचिन के विरुद्ध रिपोर्ट दर्ज कर दोनों को गिरफ्तार कर लिया. पुलिस पूछताछ में एक नाकाम आशिक के षडयंत्र की सनसनीखेज घटना प्रकाश में आई.

बबुरहा गांव निवासी रोशनी, काजल और कोमल तथा पाठकपुरा गांव निवासी किशन पाल के बेटे विनय उर्फ लंबू के खेत अगलबगल थे. दोनों का अपनेअपने खेतों पर आनाजाना लगा रहता था. खेतों पर ही एक रोज 17 वर्षीय रोशनी की मुलाकात विनय से हुई. विनय मन ही मन रोशनी को चाहने लगा और उस से ब्याह रचाने की सोचने लगा. एक रोज विनय ने बातों ही बातों में रोशनी से प्यार का इजहार किया तो उस ने उसे बुरी तरह झिड़क दिया. अपमानित होने के बावजूद विनय ने रोशनी से बातचीत बंद नहीं की. रोशनी पशुओं का चारा लेने कोमल व काजल के साथ खेत पर आती थी. रोशनी से बतियाने विनय भी उन के पास पहुंच जाता था.

वह अपने साथ कभी नमकीन तो कभी चिप्स लाता था. वह बतियाने के लालच में चिप्स व नमकीन रोशनी को देता था, जिसे वे तीनों मिलबांट कर खा लेती थीं. रोशनी विनय से हंसतीबोलती जरूर थी, लेकिन विनय से प्यार नहीं करती थी. जबकि विनय उस का आशिक बन चुका था. एक दिन रोशनी ने विनय से पूछा, ‘‘तुम्हारे खेत से चारा काट लूं?’’

विनय मुसकरा कर बोला, ‘‘काट लो, तुम्हारे ससुर का ही खेत है.’’

‘‘ऐसी बात क्यों कर रहे हो? मेरे ससुर का खेत कैसे हुआ?’’ रोशनी ने तुनक कर पूछा.

‘‘मुझ से शादी के बाद मेरे पिता तुम्हारे ससुर ही तो होंगे.’’ विनय ने जवाब दिया.

रोशनी गुस्से से बोली, ‘‘तुम्हें शरम नहीं आ रही, क्या बोल रहे हो? तुम मेरी जाति के जरूर हो, लेकिन तुम ने सोच कैसे लिया कि मैं तुम से प्यार… शादी करूंगी. आगे से ऐसी बात की तो अच्छा नहीं होगा. समझे.’’

शादी से इनकार करने और अपमानित होने के बाद विनय ने निश्चय कर लिया कि अगर रोशनी उस की नहीं हुई तो किसी और की भी नहीं होगी. उस ने रोशनी की हत्या की योजना बना ली और दोस्त सचिन को भी शामिल कर लिया. इस के बाद वह उचित समय का इंतजार करने लगा. 17 फरवरी, 2021 की शाम 4 बजे विनय उर्फ लंबू अपने दोस्त सचिन के साथ अपने खेत पर पहुंचा. विनय के हाथ में पानी की बोतल थी तथा सचिन के हाथ में नमकीन के 2 पैकेट और पान मसाला की पुडि़या थी, जिसे विनय ने ही गुलशन की दुकान से मंगाया था.

खेत के किनारे बैठ कर विनय ने कीटनाशक दवा की पुडि़या जेब से निकाली और उसे फाड़ कर पानी की बोतल में अच्छी तरह से मिला दिया. फिर नमकीन का एक पैकेट खोल कर खाता हुआ संतोष के खेत पर पहुंचा, जहां रोशनी, कोमल व काजल वरसीम काट रही थीं. विनय ने नमकीन का पैकेट रोशनी की तरफ बढ़ाया, लेकिन उस ने नहीं लिया और बोली वह कुछ देर पहले कुरकुरे खा चुकी है. लेकिन लालचवश काजल ने पैकेट ले लिया और आधा नमकीन कोमल को दे कर खाने लगी. नमकीन कड़वा था सो काजल ने विनय से पानी की बोतल मांग ली, फिर बारीबारी से काजल और कोमल ने पानी पिया. कुछ पानी बचा जिसे रोशनी ने पी लिया.

पानी पीने के चंद मिनट बाद ही उन तीनों की आंखों के आगे अंधेरा छाने लगा और वे अचेत हो कर गिर पड़ीं. उन के मुंह से झाग निकलने लगे. विनय तो केवल रोशनी को मारना चाहता था, लेकिन तीनों की बिगड़ी हालत देख कर वह घबरा गया. उस ने सचिन की मदद से एक के ऊपर दूसरी को लिटाया. फिर पान मसाला खाया और सिगरेट पी. उस के बाद दोनों गांव की ओर भाग गए. इधर जब रोशनी, कोमल व काजल खेत से घर नहीं लौटीं तो सूरज पाल उन की खोज में गया. वहां वह बेहोश मिलीं. उन्हें तत्काल अस्पताल पहुंचाया गया, जहां कोमल व काजल को मृत घोषित कर दिया गया तथा रोशनी को रीजेंसी अस्पताल में भरती कराया गया. सूचना पर पहुंची पुलिस ने शव को कब्जे में ले कर जांच शुरू की और हत्या का परदाफाश किया.

20 फरवरी, 2021 को असोहा पुलिस ने अभियुक्त विनय उर्फ लंबू तथा सचिन को उन्नाव कोर्ट में सीजेएम की अदालत में पेश किया, जहां से उन्हें जेल भेज दिया गया. कथा संकलन तक उन की जमानत नहीं हुई थी. रीजेंसी अस्पताल में रोशनी का इलाज सरकारी खर्च पर चल रहा था. साथ ही सहायता राशि पीडि़त परिवारों को उन्नाव डीएम द्वारा दे दी गई थी. UP Crime News

—कथा पुलिस सूत्रों पर आधारित

Romantic Love Story: एक फूल दो माली – प्रेमियों की कुर्बानी

Romantic Love Story: उत्तर प्रदेश की मोहब्बत की नगरी आगरा का एक थाना है एत्माद्दौला. इसी थाना क्षेत्र के अंतर्गत फाउंड्री नगर स्थित यमुना किनारे सुबह एक युवक का शव पड़ा मिला. देखतेदेखते वहां लोग एकत्र हो गए. इसी बीच किसी ने पुलिस को सूचना दे दी. सूचना मिलते ही थानाप्रभारी देवेंद्र शंकर पांडेय मय पुलिस टीम के घटनास्थल पर पहुंच गए. यह बात 22 नवंबर, 2021 की है. थानाप्रभारी देवेंद्र शंकर पांडेय जिस समय वहां पहुंचे, उस समय वहां लोगों की भीड़ जुट चुकी थी. उन्होंने भीड़ को हटाते हुए शव व घटनास्थल का बारीकी से निरीक्षण किया.

मृतक युवक की उम्र 25-26 साल के लगभग थी. युवक के शरीर पर चोट के निशान थे. शव देखने से ऐसा लग रहा था कि युवक की मारपीट कर हत्या करने के बाद शव को यहां ला कर फेंका गया था. मृतक की जामातलाशी में उस की जेब से एक लव लैटर (प्रेमपत्र) व डाक्टर की परची मिली. लव लैटर पर मृतक का मोबाइल नंबर भी लिखा था. लेकिन मोबाइल नहीं मिला. मृतक के पास से ऐसा कुछ नहीं मिला, जिस से उस की शिनाख्त हो सके. पुलिस ने लोगों से शव की शिनाख्त कराने का भी प्रयास किया, लेकिन कोई भी शव को पहचान नहीं सका.

थानाप्रभारी ने जानकारी दे कर उच्चाधिकारियों को भी अवगत करा दिया. मौके की काररवाई निपटाने के बाद पुलिस ने शव को मोर्चरी भिजवा दिया. अब पुलिस के सामने सब से बड़ा प्रश्न युवक की शिनाख्त का था. पुलिस की कोशिश थी कि जल्दी से शव की शिनाख्त हो जाए, ताकि हत्या का राज उजागर हो सके और हत्यारे पकड़े जा सकें. पुलिस ने लव लैटर पर अंकित मोबाइल नंबर की कालडिटेल्स निकलवाई. इस में कई नंबर मिले. एक नंबर आगरा निवासी मृतक के चाचा भोला का व एक नंबर जीजा अखिलेश कुमार का भी था. 23 नवंबर को पुलिस ने अखिलेश को फोन किया. इस संबंध में पूछताछ करने के बाद उन्हें थाने बुला लिया.

पुलिस ने उन्हें एक युवक का शव यमुना किनारे मिलने की जानकारी दी. बाद में परिजनों ने मोर्चरी जा कर शव की पहचान शाहगंज के नगला मोहन निवासी 25 वर्षीय सनी के रूप में की. शव की शिनाख्त हो जाने के बाद पुलिस ने 24 नवंबर को शव का पोस्टमार्टम कराया. दूसरे दिन पोस्टमार्टम रिपोर्ट आ गई. पोस्टमार्टम रिपोर्ट में मौत का कारण गला घोंटना व चोटों से होना आया था. इस से स्पष्ट हो गया कि हत्यारों ने युवक के साथ मारपीट कर गला दबा कर हत्या कर दी थी. इस के बाद सनी के पिता मुकेश ने एत्माद्दौला थाने में 27 नवंबर को हत्या का मुकदमा दर्ज कराया. रिपोर्ट में आरोप लगाया गया था कि बेटे को रेखा नाम की एक महिला ने फोन कर पार्टी के बहाने बुलाया था.

इस के बाद अपने साथी के साथ मिल कर हत्या कर दी. साक्ष्य मिटाने के लिए शव को ला कर यमुना किनारे फेंक दिया. इस संबंध में हत्या, साक्ष्य मिटाने और एससी/एसटी एक्ट में मुकदमा दर्ज किया गया. रिपोर्ट दर्ज होने के बाद पुलिस इस हत्याकांड में साक्ष्य जुटाने के काम में लग गई. पता चला कि मृतक सनी के पिता मुकेश अपनी पत्नी के साथ हरियाणा में रहते हैं. आगरा में उन के बेटे सनी और विक्की रहते थे. सनी के लापता होने की जानकारी मिलने पर वे आगरा आ गए थे.

पुलिस को जांच के दौरान पता चला कि 21 नवंबर की सुबह 11 बजे जब सनी अपने चाचा भोला के साथ बैठा था. तभी उस के मोबाइल पर बोदला निवासी रेखा ने काल की और पार्टी के लिए बोदला बुलाया था. रेखा ने सनी को अपने साथ मुकेश जाट के भी होने की जानकारी दी थी. फोन आने के बाद सनी चला गया था.

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21 नवंबर की शाम 6 बजे सनी ने मुकेश जाट के मोबाइल से अपनी मां से बात की थी. उस ने मां से हालचाल पूछने के बाद बताया था कि वह मुकेश और रेखा के साथ है. कुछ देर में घर आ जाएगा. उस ने मां को बताया कि उस के मोबाइल का बैलेंस खत्म हो गया है. आप भाई व चाचा को यह बात बता देना. दूसरे दिन दोपहर में रेखा सनी के घर पहुंची. उस ने भोला की पत्नी यानी सनी की चाची को सनी का कीपैड वाला मोबाइल दिया. उस मोबाइल में सिम और चिप नहीं थी. रेखा ने बताया कि सनी सिमकार्ड निकाल कर फैक्ट्री चला गया है. उस से यह मोबाइल घर पर देने को कहा.

जब सनी रात में घर नहीं आया तो परिजनों को चिंता हुई. इस पर परिजनों ने फैक्ट्री जा कर सनी को तलाशा. लेकिन उन्हें सनी नहीं मिला. पुलिस ने पूछताछ करने के साथसाथ अपने तौर पर मामले की छानबीन शुरू की. पुलिस को कुछ लोगों ने बताया कि सनी को मुकेश जाट, रेखा व 2 अन्य युवकों के साथ घटना की शाम आटो में बैठे देखा था. इस पर उन्हें टोका भी था. तब मुकेश ने कहा था कि पार्टी करने जा रहे हैं. इस के बाद वे लोग आटो में बैठ कर चले गए थे.

शक की सुई रेखा पर आ कर टिक गई. फोन लोकेशन के आधार पर कई लोगों से पूछताछ की. 3 दिसंबर को पुलिस ने टेढ़ी बगिया स्थित अंबेडकर पार्क से महिला रेखा को हिरासत में ले लिया. पुलिस ने उस के पास से एक मोबाइल बरामद किया. उसे हिरासत में ले कर पुलिस थाने लौट आई. थाने में उस से कड़ाई से पूछताछ की गई. तब रेखा ने सनी की हत्या का जुर्म कुबूल करते हुए हत्या में शामिल 3 अन्य लोगों के नाम बताए. इन में रेखा का प्रेमी मुकेश जाट के अलावा उस के 2 दोस्त विशाल व पवन राठौर भी शामिल थे.

तब इन में से एक आरोपी विशाल को भी पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया. इस हत्याकांड के पीछे की जो कहानी सामने आई, वह इस तरह निकली—

मुकेश जाट मूलरूप से भड़ाका, हाथरस का निवासी है. उस के मातापिता की मौत हो चुकी है. उस की एक बहन है. वह आगरा में नगला जगजीवनराम में रहता है. यहां आ कर आटो चलाने का काम करने लगा. उस की दोस्ती एक साल पहले बोदला निवासी रेखा से हुई थी. हुआ यह कि रेखा एक जूता फैक्ट्री में काम करती थी. मुकेश अपने आटो से रेखा को उस के घर से फैक्ट्री लाने ले जाने का काम करता था. इस के चलते दोनों में दोस्ती हो गई. जो धीरेधीरे प्यार में बदल गई. रेखा के पहले पति की मौत हो चुकी थी. पहले पति से 11 साल का एक बेटा है. पहले पति की मौत के बाद रेखा की दूसरी शादी रमेश से हो गई थी. रेखा अपने बेटे के साथ रमेश के साथ रहने लगी.

रेखा मनमौजी थी. वह रमेश का कहना भी नहीं मानती थी. उस के मन में जो आता, वह करती. रमेश रेखा की आदतों से परेशान रहता था. लेकिन चाह कर भी उस से कुछ कह नहीं पाता था. जिस जूता फैक्ट्री में रेखा काम करती थी, उसी में सनी भी दूसरे विभाग में काम करता था. एक महीने पहले सनी की नजर रेखा पर पड़ गई. चंचल और सुंदर रेखा सनी को भा गई. दोनों एक ही फैक्ट्री में काम करते थे. इसी दौरान दोनों में बातचीत हो जाती थी. इस के बाद दोनों की दोस्ती हो गई. दोनों ने एकदूसरे को अपनेअपने मोबाइल नंबर भी दे दिए. दोनों घंटों मोबाइल पर एकदूसरे से अपने दिल की बात करने लगे.

घटना से कुछ दिन पहले रेखा के प्रेमी मुकेश जाट ने अपनी प्रेमिका को फोन पर हंसहंस कर बात करते देख लिया. उस के तनबदन में आग लग गई. उस की प्रेमिका इतना हंसहंस कर किस के साथ बात कर रही है. उस ने रेखा से इस बारे में जब पूछा तो रेखा अंदर ही अंदर डर गई. बात घुमाते हुए उस ने बताया कि उसी की फैक्ट्री में काम करने वाला सनी था, जो उसे बारबार फोन करता है. वह उस से दोस्ती करना चाहता है. मुकेश रेखा से बहुत प्यार करता था. उस पर पैसा भी बहुत खर्च करता था. उस की हर फरमाइश पूरी करता था. उसे अपनी प्रेमिका के किसी दूसरे व्यक्ति से बात करते देखना बहुत नागवार गुजरा. उस ने रेखा से कहा कि वह सनी से बात करना बंद कर दे. रेखा ने वायदा किया कि वह सनी से बात नहीं करेगी.

कुछ दिन तो सब कुछ ठीक रहा, रेखा ने सनी से बात नहीं की. आग दोनों के दिलों में लगी हुई थी. रेखा और सनी आपस में फिर मिलने और बात करने लगे. इस पर मुकेश ने रेखा के जरिए सनी को पार्टी के बहाने बोदला बुलवाया. मुकेश ने सनी को रेखा से अपने संबंध की जानकारी दी. मुकेश ने सनी से रेखा से दूर रहने की हिदायत दी. इस पर सनी ने रेखा को छोड़ने से मना कर दिया. इस बात को ले कर दोनों में वादविवाद भी हुआ. मुकेश को यह बात बहुत बुरी लगी. लेकिन उस ने यह बात जाहिर नहीं होने दी. उस ने मन ही मन सनी को सबक सिखाने का फैसला ले लिया. इस बीच मुकेश ने अपने दोस्त आटो चालक विशाल और पवन राठौर को फोन कर के वहां बुला लिया.

मुकेश ने सनी की रेखा से दोस्ती कराने व इस खुशी में दारू पार्टी देने का झांसा देते हुए अपने दोस्तों के साथ आटो से गोकुल नगर ले गया. वहां सभी ने बैठ कर शराब पी. सनी को जम कर शराब पिलाई गई. उस समय रात घिर आई थी. इस के बाद आटो से उसे यमुना किनारे सुनसान रास्ते पर ले गए, सनी को ज्यादा नशा हो गया था. इस का फायदा उठाते हुए सनी को आटो से उतार कर मुकेश व उस के दोस्तों ने लातघूंसों से पीटा फिर उस की गला दबा कर हत्या कर दी और लाश यमुना किनारे फेंक कर सभी लोग फरार हो गए.

सनी की हत्या के आरोप में रेखा व विशाल को 3 दिसंबर, 2021 को जेल भेजे जाने के बाद पुलिस ने सभी बिंदुओं पर गहनता से जांच शुरू कर दी और अन्य आरोपियों की तलाश में जुट गई. सनी की हत्या को एक महीना बीत गया था. लेकिन पुलिस के हाथ खाली थे. जबकि नामजद मुख्य हत्यारोपी मुकेश जाट व उस के साथी पवन राठौर को पुलिस अब तक गिरफ्तार नहीं कर सकी थी. इस से मृतक के परिजनों में रोष बढ़ता जा रहा था. पुलिस ने अन्य हत्यारोपियों मुकेश जाट व पवन राठौर की गिरफ्तारी के लिए कई जगहों पर दबिश भी दी. लेकिन मुकेश का कोई सुराग नहीं लग रहा था. इस पर पुलिस ने उसपर 25 हजार रुपए का ईनाम घोषित कर दिया.

25 दिसंबर, 2021 की रात लगभग ढाई बजे पुलिस टेढ़ी बगिया पर चैकिंग कर रही थी. तभी पुलिस को मुखबिर से जानकारी मिली कि सनी हत्याकांड को अंजाम देने वाला मुख्य हत्यारोपी मुकेश जाट शोभा नगर से अपने घर जगजीवनराम नगर बाइक से जा रहा है. इस पर एसओजी टीम को बुला लिया गया. कुछ देर बाद मुकेश जैसे ही वहां से गुजरा पुलिस ने रुकने का इशारा किया, लेकिन उस ने बाइक की स्पीड बढ़ा दी. कच्चे रास्ते पर बाइक फिसल गई. पुलिस के घेरने पर मुकेश फायरिंग करने लगा. जवाबी काररवाई में उस के पैर में गोली लगने पर वह घायल हो गया. पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर लिया. उस के कब्जे से तमंचा, 3 कारतूस, 2 खोखा व बाइक बरामद कर ली. घायल मुकेश को इलाज के लिए सरकारी अस्पताल में भरती कराया गया.

एसपी (सिटी) विकास कुमार ने प्रैस कौन्फ्रैंस में ईनामी मुख्य हत्यारोपी की गिरफ्तारी की जानकारी दी. पता चला कि मुकेश जाट शातिर वाहन चोर है. उस पर विभिन्न थानों में 15 मुकदमे दर्ज हैं. थाना न्यू आगरा में दर्ज गैंगस्टर के मुकदमे में मुकेश वांछित था और 3 साल से पुलिस को चकमा दे रहा था. उस पर 25 हजार का ईनाम भी घोषित था. पुलिस पूछताछ में मुकेश जाट ने अपने साथियों के साथ सनी की हत्या का जुर्म कुबूल कर लिया. उस ने बताया कि उस की दोस्ती एक साल से रेखा से थी. बाद में सनी बीच में आ गया. वह रेखा से दोस्ती करना चाहता था. मुकेश को यह दोस्ती पसंद नहीं थी. उस ने सनी को रेखा से दूर रहने की हिदायत दी लेकिन वह नहीं माना. इस पर अपने 2 दोस्तों की मदद से उस की हत्या कर दी.

फरारी के दौरान मुकेश ने अपने साथी आशीष प्रजापति के साथ एग्रीकल्चर फैक्ट्री फाउंड्री नगर से 16 दिसंबर को बाइक चोरी कर ली थी. रुपए खत्म होने पर वह अपने घर जा रहा था. एसएसपी सुधीर कुमार सिंह ने सनी हत्याकांड का परदाफाश करते हुए बताया कि हत्याकांड में शामिल रेखा, पवन व मुकेश जाट को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया गया है. जबकि मुकेश जाट के साथी पवन राठौर ने अदालत में आत्मसमर्पण कर दिया है. इस प्रकार सनी हत्याकांड के सभी आरोपी जेल जा चुके हैं. सनी अविवाहित था. रेखा चंचल तितली की तरह थी. एक फूल से पराग लेने के बाद दूसरे फूल पर मंडराती थी. इसी के चलते उस ने अपने मोहपाश में सनी को बांध लिया था.

सनी को उस की फितरत की जानकारी नहीं थी. यदि वह दूसरे की प्रेमिका से दोस्ती के चक्कर में पड़ कर उस पर अपना अधिकार नहीं जमाता तो सनी को अपनी जान नहीं गंवानी पड़ती. Romantic Love Story

—कथा पुलिस सूत्रों पर आधारित

Love Crime: झोपड़ी में बुझी तन की आग

Love Crime: बात मध्य प्रदेश के सिंगरौली जिले के चितरंगी थानांतर्गत धवई गांव की है. थानाप्रभारी अपने औफिस में दैनिक कामों में लगे हुए थे. तभी उन्हें चितरंगी-कर्थुआ रोड पर स्थित एक झोपड़ी में किसी महिला की लाश मिलने की सूचना मिली. सूचना मिलते ही पुलिस टीम के साथ वह पर घटनास्थल के लिए रवाना हुए. उन के वहां पहुंचने से पहले ही काफी भीड़ वहां जुट चुकी थी. थानाप्रभारी ने भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति से इस बारे में बात की.

उस व्यक्ति ने बताया कि हम गांव वालों को काफी दिनों से आसपास में अजीब सी दुर्गंध आ रही थी. हमें लगा कि कोई जानवर मरा होगा, उसी से बदबू आ रही होगी. किंतु ऐसा नहीं था. यह बदबू तो रसवंती नामक महिला की झोपड़ी से आ रही थी. पुलिस द्वारा तुरंत मौके का बारीकी से निरीक्षण किया गया, वहां चारपाई के नीचे रसवंती की लाश पड़ी थी, जो पूरी तरह से सड़ चुकी थी. मामले की गंभीरता को देखते हुए थानाप्रभारी डी.एन. राज ने इस की सूचना अपने एसडीपीओ राजीव पाठक को दी. सूचना मिलते ही वह तत्काल मौके पर पहुंचे. यह बात 11 नवंबर, 2021 की थी.

लाश को देखने के बाद यह तय कर पाना काफी मुश्किल था कि यह मामला स्वाभाविक मौत का है या हत्या का. पुलिस ने सुराग तलाशने के लिए शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया. जिस के बाद गांव वालों से पूछताछ शुरू की, लेकिन कोई खास जानकारी हाथ नहीं लगी. पोस्टमार्टम रिपोर्ट के आने पर पता चला कि रसवंती की मृत्यु गला घोटने से हुई थी. जिस के बाद एसडीपीओ राजीव पाठक के निर्देश पर चितरंगी थाने में अज्ञात के खिलाफ हत्या का मामला दर्ज कर जांच प्रारंभ कर दी.

चूंकि महिला की सुरक्षा एवं उन से जुड़े मामले शासन के उच्च प्राथमिकता वाले विषयों में से हैं, जिस के कारण एसपी (सिंगरौली) वीरेंद्र कुमार सिंह स्वयं ही इस मामले की जांच को खुद आगे बढ़े. एसडीपीओ राजीव पाठक ने सब से पहले गांव वालों से पूछताछ की, जिस में पता चला कि रसवंती शादीशुदा और एक बच्चे की मां थी, मगर लंबे समय से अपने पति व बच्चे को छोड़ कर धवई गांव में अपने भाई के साथ रहती थी. जिस के बाद पारिवारिक झगड़ों के चलते वह गांव से बाहर चितरंगी और कर्थुआ रोड पर एक झोपड़ी बना कर अकेली ही रहने लगी थी.

चूंकि रसवंती अकेली रहती थी और काफी समय से गांव में ही रहती थी, इस कारण उस के बारे में जो भी जानकारी मिल सकती थी, वह गांव वालों से ही मिलती. लेकिन गांव वालों का सहयोग पुलिस को नहीं मिला. तब थानाप्रभारी ने अपने मुखबिरों को सक्रिय किया और अपने मुखबिरों द्वारा जानकारी हासिल करने का प्रयास शुरू कर दिया था. इस कोशिश में कई महत्त्वपूर्ण जानकारी पुलिस के हाथ लगी थीं. पता चला कि रसवंती कोई काम नहीं करती थी. वह केवल एक छोटी सी किराने की दुकान लगा कर अपना गुजारा करती थी, जोकि काफी नहीं था. पुलिस को पता चला कि वह इस दुकान की आड़ में अपना जिस्म बेच कर गुजारा चलाया करती थी.

इस की जानकारी मिलने पर थानाप्रभारी को यह मामला अवैध संबंधों का लगा. एसडीपीओ के निर्देश पर ऐसे लोगों की जानकारी जुटाने का काम शुरू किया गया जो अकसर रसंवती के संपर्क में रहते थे या उस से मिलने झोपड़ी में आया करते थे. जांच के दौरान पुलिस को इस बात की जानकारी मिली कि रसवंती की झोपड़ी में बिजली नहीं थी. उसे अपने काम के लिए प्राकृतिक रोशनी पर ही निर्भर रहना पड़ता था. जिस वजह से वह अपने पास टौर्च या मोबाइल तो रखती ही होगी, लेकिन पुलिस को ये दोनों की सामान मौके से नहीं मिले. इस से शक हुआ कि शायद मोबाइल और टौर्च दोनों ही हत्यारे अपने साथ ले गए होंगे. एसडीपीओ ने गांव वालों से पूछताछ करतेकरते इतना तो समझ लिया था कि हत्यारा इसी गांव का होगा.

इसलिए उन्होंने जांच के परिणामों को गांव वालों के बीच फैलाना शुरू कर दिया. इस का नतीजा भी जल्द ही सामने आ गया, जब 2 दिनों बाद गांव में एक जगह पर रसवंती की टौर्च पड़ी मिली, जो हत्या के बाद से ही गायब थी. टौर्च जिस स्थान पर मिली, उस के आसपास रहने वालों की सूची तैयार करवाई गई तथा इस बात की जानकारी जुटाई कि इन में से कौन रसवंती से रात में मिलने आया करते थे. इस में से एक नाम सामने आया 22 साल के प्रिंस यादव का.

पुलिस को जानकारी मिली कि भले ही प्रिंस रसंवती से आधे से भी कम उम्र का था, लेकिन रसवंती के पास उस का आनाजाना भी काफी था. यहां तक कि शादी होने के बाद भी प्रिंस ने रसवंती के यहां आनाजाना नहीं छोड़ा था. इस जानकारी के बाद पुलिस ने प्रिंस के मोबाइल फोन की काल डिटेल्स निकलवाई, जिस में पता चला कि प्रिंस और रसवंती के बीच अकसर फोन पर काफीकाफी देर तक बातचीत होती रहती थी. इतना ही नहीं, लाश मिलने के 15 दिन पहले जिस रोज रसवंती का फोन बंद हुआ था. तब उस के फोन पर आखिरी बार बात प्रिंस ने ही की थी. इसलिए पुलिस ने प्रिंस यादव को हिरासत में ले कर पूछताछ की, जिस में पहले तो वह पुलिस को गुमराह करने का प्रयास करने लगा.

लेकिन वह ज्यादा देर टिक नहीं पाया और उस ने अपने दोस्त गांव के ही युवक अजीत यादव के साथ मिल कर रसवंती की हत्या करने की बात स्वीकार कर ली. इस के बाद पुलिस ने गांव से अजीत यादव को भी गिरफ्तार कर लिया, जिस के बाद हत्या के पीछे की कहानी इस प्रकार सामने आई—

पति को छोड़ कर मायके लौटी रसवंती कुछ साल तक तो भाई के घर में आराम से रही, लेकिन समय के साथ उसे अपनी जिंदगी में एक पुरुष की कमी खलने लगी थी. पति को छोड़ कर अकेली रह रही रसवंती पर गांव के कुछ युवकों की भी नजर थी और यह बात रसवंती भी जानती थी. फिर उस ने उन्हीं युवकों में से एक को चुन लिया और अपने तन की प्यास बुझाने का रास्ता खोज निकाला. युवक से दोस्ती हुई तो वहां जरूरत पड़ने पर उसे खर्च करने के लिए पैसे भी देने लगा. यहीं से रसवंती को अपनी देह की कीमत का पता चला. उसे लगा कि यदि वह 2-4 युवकों को अपने पास आने का मौका दे तो उस की शारीरिक जरूरत तो पूरी होगी ही, साथ ही कुछ आमदनी भी हो जाया करेगी.

यही सोच कर उस ने गांव के कई युवकों से संबंध बना लिए थे. रसवंती के हरकतों की यह जानकारी जब उस के भाई को हुई तो उस ने उसे टोका तो 10 साल पहले रसवंती ने भाई का घर छोड़ दिया और खुद एक झोपड़ी बना कर रहने लगी. चूंकि यह झोपड़ी रसवंती की अपनी थी तो वह जिसे चाहे उसे वहां मिलने के लिए बुला लिया करती थी. इस के अलावा उस ने दिखावे के लिए वहां एक छोटी सी दुकान भी लगा ली थी. वक्त के साथ रसवंती की उम्र बढ़ने लगी, इसलिए गांव के युवकों ने उस में दिलचस्पी लेनी कम कर दी. जो उस की उम्र के थे, वे घरपरिवार वाले थे सो जब रसवंती के पास आने वाले मर्दों की संख्या घटने लगी तो रसवंती ने नया दांव खेला. उस ने कम उम्र के लड़कों को सैक्स का चस्का लगाना शुरू किया.

प्रिंस यादव भी रसवंती की इस योजना का शिकार 16 साल की उम्र में ही बन गया था. चूंकि उस वक्त तक प्रिंस के मन में सैक्स के प्रति एक नया ही नशा था, सो वह रसवंती को ही सब से बड़ा सुख मान कर उस के पास आने लगा. रसवंती इश्क तो किसी से करती नहीं थी. उस के लिए तो यह काम भी पैसा कमाने का एक जरिया था. इसलिए प्रिंस से भी वह अपनी पूरी कीमत वसूलती थी. वह रसवंती के पास केवल सैक्स का सुख लेने आया था, लेकिन धीरेधीरे वह उस का दीवाना हो गया. वह लगभग रोज ही उस से मिलने आने लगा.

कहना नहीं होगा कि अब रसवंती प्रिंस के लिए प्यार बन गई थी. जबकि प्रिंस, रसवंती के लिए एक सौदा था, इसलिए वह आए दिन उस से पैसों की मांग करती रहती थी. प्रिंस भी उसे यदाकदा खर्च के लिए पैसे देता रहता था. प्रिंस 21 साल का हो गया तो उस के घर वालों ने उस की शादी कर दी. लेकिन पत्नी के आने के बाद भी उस का रसवंती के पास जाना कम नहीं हुआ. दरअसल, रसवंती के लिए सैक्स एक धंधा था, इसलिए वह जानती थी कि उस के पास दूसरों से कुछ अलग नहीं होगा तब तक उस के पास ग्राहक क्यों आएगा. इसलिए प्रिंस जैसे युवकों को वह हर उस तरीके से संतुष्ट करने को राजी रहती थी. जिस की मांग युवा वर्ग में अधिक है.

इस की वह कीमत भी खूब वसूलती थी. लेकिन वह भूल चुकी थी कि प्रिंस के मन में जो पागलपन 16 साल में था, वह इन 6 सालों मे नहीं रह गया. दूसरा प्रिंस की शादी भी हो चुकी थी, इसलिए रसवंती उस की जरूरत भी नहीं रह गई थी. रसंवती द्वारा पैसों की मांग उस के लिए अब भारी पड़ने लगी थी. जबकि उम्र बढ़ने से दीवानों की संख्या कम हो जाने के कारण रसवंती प्रिंस से ज्यादा से ज्यादा पैसा वसूलना चाहती थी. इसलिए दोनों के बीच पैसों को ले कर विवाद होने लगा था. इस से तंग आ कर प्रिंस ने रसवंती के पास जाना बंद कर दिया. रसवंती जवान होती तो दूसरा दीवाना खोज लेती. अब 48 साल की उम्र में उसे कोई प्रिंस के जैसा दीवाना तो मिलने से रहा, इसलिए वह प्रिंस पर मिलने के आने के लिए दबाव बनाने लगी.

उस का कहना था कि अगर प्रिंस उस से मिलने नहीं आएगा तो वह पूरे गांव में पिं्रस के साथ अपने संबंधों का ढिंढोरा पीट देगी. प्रिंस इस बात से परेशान हो गया तो उस ने अपने दोस्त अजीत यादव के साथ मिल कर रसवंती की आवाज हमेशा के लिए खामोश करने की ठान ली. इस के लिए योजना बना कर दोनों दोस्त 27 अक्तूबर, 2021 की शाम रसवंती के पास पहुंचे, जहां उसे कुछ रुपए दे कर दोनों ने बारीबारी से पहले तो रसवंती के साथ संबंध बनाए. फिर साथ में लाई जानवर बांधने की रस्सी से उस का गला दबा कर हत्या कर दी और लाश को वहीं चारपाई के नीचे डाल कर घर आ गए.

चूंकि रसवंती गांव में बदनाम थी, इसलिए उस के गांव में न दिखने पर भी किसी ने न तो उस की चर्चा की और न ही खोजखबर ली. रसवंती की हत्या का पता उस समय चला, जब उस की लाश सड़ जाने के कारण फैल रही बदबू से लोग परेशान हो गए और उन्होंने पुलिस को खबर दी. पुलिस ने आरोपी प्रिंस यादव और अजीत यादव से पूछताछ कर उन्हें कोर्ट में पेश कर जेल भेज दिया. Love Crime

Hindi Stories: संबंधों की कच्ची दीवार : रिश्तें बने बोझ

Hindi Stories: 36 वर्षीया रीता मनचली भी थी और महत्त्वाकांक्षी भी. कस्बे के तमाम लोग उस से नजदीकियां बढ़ाना चाहते थे. मगर पिछले 4 सालों से उस के मन में बसा हुआ था, पड़ोस में रहने वाला 41 वर्षीय राजेंद्र सिंह. वह उस का रिश्तेदार भी था और हर समय उस का ध्यान भी रखता था. शादीशुदा होते हुए भी रीता और राजेंद्र के संबंध बहुत गहरे थे. राजेंद्र 3 बच्चों का बाप था तो रीता भी 2 बच्चों की मां थी. राजेंद्र और रीता का पति मनोज दोनों ईंट भट्ठे पर काम करते थे. वहीं पर दोनों के बीच नजदीकियां बनी थीं.

राजेंद्र व रीता के संबंधों की जानकारी रीता के पति मनोज को भी थी और कस्बे के लोगों को भी. इस बाबत रीता के पति मनोज ने दोनों को समझाने का काफी प्रयास भी किया था, मगर न तो रीता मानी और न ही राजेंद्र. उन दोनों का आपस में मिलनाजुलना चलता रहा. दोनों का लगाव इस स्थिति तक पहुंच गया था कि दोनों एकदूसरे के बगैर नहीं रह सकते थे.

इसी दौरान 16 मार्च, 2021 को रीता गायब हो गई. उस के पति मनोज ने उसे सभी संभावित जगहों पर ढूंढा. वह नहीं मिली तो वह झबरेड़ा थाने जा पहुंचा. थानाप्रभारी रविंद्र कुमार को उस ने बताया, ‘‘साहब, कल मेरी पत्नी रीता काम से अपनी सहेली हुस्नजहां के साथ बैंक गई थी लेकिन आज तक वापस नहीं लौटी है. मैं उसे आसपास व अपनी सभी रिश्तेदारियों में जा कर तलाश कर चुका हूं, मगर उस का कुछ पता नहीं चल सका.’’

थानाप्रभारी रविंद्र कुमार ने रीता की बाबत मनोज से कुछ जानकारी ली. साथ ही उस का मोबाइल नंबर भी नोट कर लिया. पुलिस ने रीता की गुमशुदगी दर्ज कर मनोज को घर भेज दिया. थानाप्रभारी रविंद्र कुमार ने रीता की गुमशुदगी को गंभीरता से लिया. उन्होंने रीता के मोबाइल नंबर की काल डिटेल्स निकलवाई और इस प्रकरण की जांच थाने के तेजतर्रार थानेदार संजय नेगी को सौंप दी. मामला महिला के लापता होने का था, इसलिए रविंद्र कुमार ने इस बाबत सीओ पंकज गैरोला व एसपी (क्राइम) प्रदीप कुमार राय को जानकारी दी.

अगले दिन रीता के मोबाइल नंबर की काल डिटेल्स पुलिस को मिल गई. संजय नेगी ने विवेचना हाथ में आते ही क्षेत्र में लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली. सीसीटीवी कैमरों की फुटेज में रीता अपने पड़ोसी राजेंद्र के साथ बाइक पर बैठ कर जाती दिखाई दी.

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इस के बाद शक के आधार पर एसआई संजय नेगी ने राजेंद्र को हिरासत में ले लिया और उस से रीता के लापता होने के बारे में गहन पूछताछ की. पूछताछ के दौरान राजेंद्र पुलिस को बरगलाते हुए कहता रहा कि उस की रीता से रिश्तेदारी है और उस ने 2 दिन पहले रीता को थोड़ी दूर तक बाइक पर लिफ्ट दी थी. लेकिन अब रीता कहां है, उसे इस बाबत कोई जानकारी नहीं है. शाम तक राजेंद्र इसी बात की रट  लगाए रहा. शाम को अचानक ग्रामीणों ने पुलिस को सूचना दी कि सैदपुरा के पास गंगनहर में एक महिला का शव तैर रहा है.

इस सूचना पर थानेदार संजय नेगी अपने साथ रीता के पति मनोज को ले कर वहां पहुंचे. संजय नेगी ने ग्रामीणों की मदद से शव को गंगनहर से बाहर निकलवाया. मनोज ने शव को देखते ही पहचान लिया कि वह शव उस की पत्नी रीता का ही है. शव के गले पर निशान थे. पुलिस ने मौके की काररवाई निपटा कर शव पोस्टमार्टम के लिए राजकीय अस्पताल रुड़की भेज दिया. रीता का शव बरामद होने की सूचना पा कर एसपी (क्राइम) प्रदीप कुमार राय थाना झबरेड़ा पहुंचे.

राय ने जब राजेंद्र से पूछताछ की तो वह अपने को बेगुनाह बताने लगा. राय व थानाप्रभारी रविंद्र कुमार ने जब सख्ती से राजेंद्र से पूछताछ की तो वह टूट गया. उस ने रीता की हत्या करना स्वीकार कर लिया और उस से पिछले कई सालों से चल रहे आंतरिक संबंधों को भी कबूल कर लिया. रीता की हत्या करने की राजेंद्र ने पुलिस को जो जानकारी दी, वह इस तरह थी—

राजेंद्र जिला हरिद्वार के कस्बा झबरेड़ा स्थित एक ईंट भट्ठे पर पिछले 20 साल से काम कर रहा था. उस के परिवार में उस की पत्नी सुनीता, बेटी प्रिया (21), दूसरी बेटी खुशी (15) व बेटा कार्तिक (12) था. ईंट भट्ठे पर काम कर के राजेंद्र को 15 हजार रुपए प्रतिमाह की आमदनी हो जाती थी. इस तरह से राजेंद्र के परिवार की गाड़ी अच्छी से चल रही थी. उसी ईंट भट्ठे पर रीता का पति मनोज भी काम करता था.

साथ काम करतेकरते मनोज और राजेंद्र में दोस्ती हो गई. फिर दोनों का एकदूसरे के घर आनाजाना शुरू हो गया. इस आनेजाने में रीता और राजेंद्र के बीच नाजायज संबंध बन गए. वह दोनों आपस में दूर के रिश्तेदार भी थे. दोनों के संबंधों की खबर उन के घर वालों को ही नहीं बल्कि गांव वालों को भी हो गई थी. इस के बावजूद उन्होंने एकदूसरे का साथ नहीं छोड़ा. उन के संबंध करीब 7 सालों तक बने रहे. पिछले साल अचानक राजेंद्र व रीता के जीवन में एक ऐसा मोड़ आ गया कि दोनों के बीच में दूरियां बढ़ने लगीं. 30 मार्च, 2020 का दिन था. उस समय देश में लौकडाउन चल रहा था. उस दिन जब राजेंद्र से रीता मिली तो उस ने राजेंद्र के सामने शर्त रखी कि वह उस के साथ शादी कर के अलग घर में रहना चाहती है.

रीता की बात सुन कर राजेंद्र सन्न रह गया. उस ने रीता को समझाया कि अब इस उम्र में यह सब करना हम दोनों के लिए ठीक नहीं होगा, क्योंकि हम दोनों पहले से ही शादीशुदा व बड़े बच्चों वाले हैं. अलग रहने से हम दोनों के परिवार वालों की जगहंसाई होगी. हम किसी परेशानी में भी पड़ सकते हैं. राजेंद्र के काफी समझाने पर भी रीता नहीं मानी और राजेंद्र से शादी करने के लिए जिद करने लगी. खैर उस वक्त तो राजेंद्र किसी तरह से रीता को समझाबुझा कर वापस आ गया. इस के बाद उस ने रीता से दूरी  बनानी शुरू कर दी. उस ने उस का मोबाइल अटैंड करना कम कर दिया और उस से कन्नी काटने लगा.

अपनी उपेक्षा से आहत रीता घायल शेरनी की तरह क्रोधित हो गई. उस ने मन ही मन में राजेंद्र से बदला लेने का निश्चय कर लिया. उस दौरान राजेंद्र अपनी बड़ी बेटी प्रिया की शादी के लिए वर की तलाश में था. राजेंद्र अपनी बिरादरी के लोगों से शादी के लिए प्रिया के संबंध में बात करता रहता था. जब इस बात का पता रीता को चला कि राजेंद्र अपनी बेटी के लिए लड़का तलाश रहा है तो उस ने राजेंद्र की बेटी की शादी में अड़ंगा लगाने का निश्चय किया. इस के बाद जो भी लोग प्रिया को शादी के लिए देखने आते रीता उन लोगों से संपर्क करती और उन्हें बताती कि राजेंद्र की बेटी प्रिया का किसी से चक्कर चल रहा है.

रीता के मुंह से यह सुन कर राजेंद्र की बेटी से शादी करने वाले लोग शादी का विचार बदल देते थे. इस तरह रीता ने प्रिया से शादी करने वाले 2 परिवारों को झूठी व भ्रामक जानकारी दे कर प्रिया के रिश्ते तुड़वा दिए थे. जब इस बात की जानकारी राजेंद्र को हुई तो वह तिलमिला कर रह गया. धीरेधीरे समय बीतता गया. वह 28 फरवरी, 2021 का दिन था. उस दिन अचानक एक ऐसी घटना घट गई, जिस से राजेंद्र तड़प उठा और उस ने रीता की हत्या करने की योजना बना डाली. हुआ यूं कि 28 फरवरी, 2021 को कस्बे में रविदास जयंती मनाई जा रही थी. उस समय राजेंद्र की छोटी बेटी खुशी ट्यूशन पढ़ कर वापस घर जा रही थी. तभी रास्ते में उसे रीता का बेटा सौरव खड़ा दिखाई दिया.

खुशी कुछ समझ पाती, इस से पहले ही सौरव ने खुशी के साथ अश्लील हरकतें करनी शुरू कर दीं. इस पर खुशी ने शोर मचा दिया. खुशी के शोर मचाने पर सौरव वहां से भाग गया. खुशी ने घर आ कर इस छेड़खानी की जानकारी अपने पिता राजेंद्र को दी. इस के बाद राजेंद्र ने रीता को रास्ते से हटाने की योजना बनाई. राजेंद्र रीता की हत्या का तानाबाना बुनने लगा. दूसरी ओर रीता राजेंद्र के इस खतरनाक इरादे से बेखबर थी. योजना के तहत राजेंद्र ने 15 मार्च, 2021 को रीता को फोन कर के कहा कि वह उसे 20 हजार रुपए देना चाहता है, इस के लिए उसे मंगलौर आ कर मिलना पड़ेगा.

उस की इस बात पर लालची रीता राजी हो गई. 16 मार्च को रीता उस के साथ बाइक पर बैठ कर मंगलौर के लिए चल पड़ी. जब दोनों सैदपुरा की गंगनहर पटरी पर पहुंचे तो राजेंद्र ने बाइक रोक कर रीता से कहा, ‘‘मैं तुम्हें सरप्राइज दे कर 20 हजार रुपए देना चाहता हूं, तुम जरा मुंह दूसरी ओर घुमा लो.’’

जैसे ही रीता ने मुंह दूसरी ओर घुमाया तो राजेंद्र ने रीता के गले में लिपटी चुन्नी से उस का गला घोंट दिया. रीता की हत्या के सबूत मिटाने के लिए उस ने उस का मोबाइल व चुन्नी गंगनहर के पानी में फेंक दिए. फिर वह बाइक से अपने घर लौट आया.

पुलिस ने राजेंद्र के बयान दर्ज कर लिए और इस प्रकरण में उस के खुलासे के बाद इस मुकदमे में धारा 302 व 201 बढ़ा दी. एसआई संजय नेगी ने अभियुक्त की निशानदेही पर गंगनहर की पटरी से सही झाडि़यों में फंसी रीता की चुन्नी बरामद कर ली. रीता की पोस्टमार्टम रिपोर्ट में उस की मौत का कारण गला घोंटने से दम घुटना बताया गया. राजेंद्र से पूछताछ करने के बाद पुलिस ने उसे कोर्ट में पेश किया, जहां से उसे जेल भेज दिया गया. Hindi Stories

—कथा पुलिस सूत्रों पर आधारित