हीरा व्यापारी का फाइव स्टार लव – भाग 3

होटल के सीसीटीवी फुटेज से मिला सुराग

मृतक संदीप कांबले शादीशुदा था व एक 13 साल की बेटी का पिता था. मृतक के छोटे भाई विशाल कांबले ने जुलकबारी पुलिस स्टेशन में भादंवि की धारा 302/34 के तहत एफआईआर भी दर्ज करा दी थी.

पुलिस ने जब जांच आगे बढ़ाई तो पता चला कि मृतक संदीप सुरेश कांबले के साथ पश्चिम बंगाल के हावड़ा जिले की 25 वर्षीय अंजलि शा ने होटल के कमरा नंबर 922 में चेक इन किया था. अंजलि का विवरण उस की फोटो पहचान (आईडी) के साथ पुलिस को मिला था.

होटल के सीसीटीवी फुटेज को खंगालने पर यह बात भी सामने आई कि अंजलि शा 5 फरवरी, 2024 अपराह्नï पौने 3 बजे 27 वर्षीय विकास शा के साथ कमरे से निकली थी.

पुलिस टीम ने दोनों संदिग्धों अंजलि और विकास की तसवीरों से पूरा विवरण तत्काल वायरलेस सैट पर पूरे गुवाहाटी में प्रसारित करवा दिया, उस के बाद पुलिस टीम को गुवाहाटी के लोकप्रिय गोपीनाथ बोरदोलोई अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे (एलजीबीआईए) पर दोनों संदिग्धों के नामों की जांच करने पर पता चला कि दोनों संदिग्धों ने गुवाहाटी से पश्चिम बंगाल के कोलकाता के लिए हवाई टिकट बुक किया था. उन के प्रस्थान का समय दिनांक 5 फरवरी, 2024 की रात सवा 9 बजे का था.

संदिग्धों के बारे में एकत्र की गई जानकारी के आधार पर लोकप्रिय गोपीनाथ बोरदोलोई अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे की ओर जाने वाली सभी सड़कों के किनारे बोरझार चौकी (ओपी) क्षेत्र में एक पुलिस नाका (चैकिंग) स्थापित कर दिया गया.

पुलिस की यह कोशिश आखिरकार रंग लाई और 5 फरवरी, 2024 की शाम 5 बज कर 42 मिनट पर जब वे दोनों एक किराए की टैक्सी से हवाई अड्डे की ओर जा रहे थे, उन्हें पुलिस टीम द्वारा गिरफ्तार कर लिया गया. दोनों संदिग्धों से गहन पूछताछ के बाद इस हत्याकांड की जो कहानी निकल कर सामने आई, वह एक प्रेम त्रिकोण की थी.

44 वर्षीय संदीप सुरेश कांबले पुणे जिले का रहने वाला हीरा व्यापारी और कार डीलर थे. 25 वर्षीय अंजलि शा कोलकता के होटल में काम करती थी. दोनों का एक बार परिचय हुआ तो यह परिचय दोस्ती और उस के बाद धीरेधीरे प्यार में बदल गया था. संदीप सुरेश कांबले भले ही अंजलि से करीब दोगुने उम्र का था, लेकिन बहुत पैसे वाला था, इसीलिए अवैध संबंध बन गए थे.

संदीप उसे काफी महंगे महंगे तोहफे देता रहता था. उन के बीच यह संबंध तकरीबन एक साल तक बदस्तूर जारी रहा, लेकिन इस बीच अंजलि शा की जिंदगी में विकास शा की एंट्री हो गई. 27 वर्षीय विकास भी कोलकाता में रह कर ही नौकरी करता था. अंजलि काफी समय तक 2 नावों पर सवारी करती रही.

एक ओर जहां अंजलि 2 नावों पर सवार हो कर जिंदगी के अनमोल सुख ले रही थी, वहीं दूसरी तरफ उस के पहले प्रेमी संदीप सुरेश कांबले को उस के दूसरे प्रेम संबंध के बारे में पता चल गया. उस ने जब अंजलि से जवाबतलब किया तो इस दोहरी जिंदगी से परेशान हो कर अंजलि ने संदीप सुरेश कांबले के बजाय विकास को चुना.

यह बात सुरेश कांबले को नागवार गुजरी और फिर उस ने अंजलि को अंतरंग फोटो के जरिए ब्लैकमेल करना शुरू कर दिया.

संदीप कांबले अब अंजलि शा पर शादी करने का दबाव भी डालने लगा था, जबकि अंजलि उस से शादी करना तो दूर, अब दोस्ती भी नहीं करना चाहती थी. उस ने संदीप से सारे रिश्ते भी तोड़ दिए थे. संदीप अंजलि को किसी भी हालत में अपने से दूर नहीं होने देना चाहता था.

संदीप अंजलि को क्यों करता था ब्लैकमेल

जब अंजलि उस से किनारा करने लगी तो संदीप अब काफी आक्रामक हो गया था और उस ने अंजलि और विकास के परिवार के सदस्यों से संपर्क करना शुरू कर दिया ताकि अंजलि उस से शादी करने के लिए मजबूर हो सके. यहां तक कि संदीप ने विकास के साथ अपनी और अंजलि की तसवीरें भी साझा कीं ताकि उन दोनों का रिश्ता टूट सके.

अंजलि ने संदीप के साथ अपना रिश्ता खत्म कर दिया था, मगर संदीप उस पर लगातार दबाब डाल रहा था और उस ने अंजलि का पीछा करना जारी रखा, जबकि दूसरी तरफ अंजलि अब विकास के साथ प्रेम में थी.

इस के कुछ समय बाद अंजलि ने विकास शा को संदीप सुरेश कांबले बारे में सब कुछ सचसच बता दिया. यह भी बताया कि संदीप कांबले ने उस की कुछ अंतरंग तसवीरें खींच ली थीं, जोकि उस के पास हैं.

विकास अब अंजलि से प्यार करने लगा था. उन का प्यार परवान चढऩे लगा, इसलिए दोनों ने मिल कर एक योजना बनाई कि अंजलि कोलकाता में संदीप को मिलने के लिए अकेले में बुलाएगी. जिस मीटिंग में विकास भी उस के साथ शामिल होगा. दोनों मिल कर संदीप को जबरदस्ती पकड़ लेंगे और उस से उस के वो दोनों मोबाइल फोन छीन लेंगे, जिन में अंजलि और संदीप की अंतरंग तसवीरें कैद थीं. उस के बाद दोनों संदीप को बेहोश कर वहां से भाग जाएंगे.

प्रेमिका क्यों बनी कातिल

लेकिन संदीप को अंजलि पर न जाने क्यों शक सा हो गया था, इसलिए उस ने कोलकाता में मिलने से मना कर दिया. मगर संदीप के दिल में अंजलि के प्रति अभी भी काफी प्रेम था, इसलिए उस ने अंजलि से कहा कि यदि वह अकेले में उस से मिलना चाहती है तो वह गुवाहाटी में उस से मिल सकती है.

संदीप ने उस से कहा कि एक बार वह गुवाहाटी में कामाख्या मंदिर के दर्शन कर ही आए थे, इस बार एक फिर से देवी के दर्शन भी कर सकते हैं और मिल भी सकते हैं.

अंजलि ने यह बात विकास को बता दी तो दोनों ने अलग अलग गुवाहाटी जाने का प्रोग्राम बना लिया. वे दोनों संदीप से किसी भी तरह मोबाइल फोन छीन लेना चाहते थे.

प्लान के मुताबिक अंजलि गुवाहाटी एयरपोर्ट पर संदीप से मिली और फिर रेडिसन ब्लू होटल के लिए रवाना हो गई, जहां उन्होंने होटल के कमरा नंबर 922 में चैक इन किया. यह जानकारी अंजलि ने विकास को दे दी. अपना कमरा नंबर बता कर उसे रेडिसन ब्लू होटल में ही कमरा लेने को कहा. विकास भी होटल आ गया और उस ने कमरा नंबर 1024 में चैकइन किया.

इस बीच संदीप बाथरूम में गया तो अंजलि ने कमरे का दरवाजा खोल दिया और विकास को जल्दी कमरे में आने को कहा. विकास सारे सामान के साथ जो पहले से ही उन के प्लान में शामिल था, कमरा नंबर 922 में पहुंच गया. कमरे के अंदर दाखिल होते ही विकास ने कमरे का दरवाजा भीतर से बंद कर दिया.

विकास अपने साथ नींद की गोलियां और भांग के लड्डू (गोल मिठाई) और रस्सी भी लाया था ताकि संदीप को काबू किया जा सके. संदीप जैसे ही बाथरूम से बाहर आया और जब उस की नजर विकास पर पड़ी तो वह आगबबूला हो गया.

विकास और संदीप के बीच हाथापाई होने लगी. अंजलि भी हाथापाई करने में पीछे नहीं रही और वह भी विकास का भरपूर साथ देने लगी थी. संदीप अकेला काफी देर तक उन दोनों का मुकाबला करता रहा, लेकिन वे दोनों अब उसे बुरी तरह से पीटने लगे थे, जिस के कारण संदीप की नाक और मुंह से खून बहने लगा था. लेकिन वे दोनों तब तक संदीप के साथ बुरी तरह मारपीट करते रहे, जब तक वह बेहोश हो कर फर्श पर गिर नहीं गया.

संदीप के फर्श पर गिरते ही दोनों ने उस के दोनों मोबाइल फोन अपने कब्जे में ले लिए. जब उन्होंने रस्सी से संदीप को बांधना चाहा तो उन्होंने देखा कि संदीप मर चुका था. इस के बाद दोनों घबरा गए और अपना अपना सामान ले कर होटल से दोपहर पौने 3 बजे चले गए.

पहले वे दोनों कोलकाता के लिए ट्रेन पकडऩे के लिए गुवाहाटी के कामाख्या रेलवे स्टेशन गए थे. वहां वे दोनों काफी देर तक बैठे भी रहे थे. उस के बाद विकास ने रेडिसन ब्लू होटल के रिसैप्शन में फोन कर रूम नंबर 922 में ठहरे व्यक्ति के अस्वस्थ होने की सूचना दी.

उस समय कोलकाता के लिए कोई ट्रेन उपलब्ध न होने के कारण उन्होंने ट्रेन से कोलकाता जाने का इरादा बदल दिया और उस दिन रात को सवा 9 वाले प्लेन से कोलकाता जाने का टिकट बुक करा लिया. मगर इस के पहले वहां पर गुवाहाटी पुलिस सजग और सतर्क हो चुकी थी, जिस के कारण जब वे दोनों एलजीबीआईए की तरफ जा रहे थे तो पुलिस ने उन दोनों को गिरफ्तार कर लिया.

पुलिस ने दोनों आरोपियों से महत्त्वपूर्ण सबूत बरामद किए, जिन में खून से सने कपड़े, मृतक के दोनों मोबाइल फोन व भांग की मिठाई, नींद की गोलियों के साथसाथ आपत्तिजनक बातचीत वाले दोनों आरोपियों के मोबाइल शामिल थे.

गुवाहाटी पुलिस ने अंजलि शा और उस के प्रेमी विकास शा को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया.

—कहानी पुलिस सूत्रों व जनचर्चा पर आधारित है. तथ्यों का नाट्य रूपांतरण किया गया है.

हीरा व्यापारी का फाइव स्टार लव – भाग 2

वे जाड़ों के दिन थे. संदीप कई दिनों से अंजलि को अपने होटल के कमरे में आमंत्रित करता रहता था. उस दिन रेस्टोरेंट में संदीप ने अंजलि से कहा, ”अंजलि, आज मेरा जन्मदिन है, इसलिए आज आप को मेरे कमरे में जन्मदिन सेलिब्रेट करने आना ही होगा. मैं बिलकुल भी ‘न’ शब्द तुम्हारे मुंह से नहीं सुनना चाहता.’’

”ठीक है, मैं शाम 6 बजे आप के कमरे में पहुंच जाऊंगी, आप अपने होटल का पता और कमरा नंबर मुझे मैसेज कर दीजिएगा,’’ अंजलि ने कहा.

ऐसे हुई नए संबंधों की शुरुआत

अपने तय समय के मुताबिक अंजलि ठीक 6 बजे शाम को संदीप कांबले के कमरे में पहुंच गई थी. उस ने डोरबेल बजाई तो संदीप उसी का बेसब्री से इंतजार कर रहा था.

”सच में अंजलिजी, आप के इंतजार का एकएक पल मुझे एक युग के समान लग रहा था. देखिए, आप ठीक 15 मिनट देरी से पहुंची हैं. आइए, आप का तहेदिल से स्वागत है,’’ संदीप ने अंजलि का स्वागत करते हुए कहा.

”आप के जन्मदिन का गिफ्ट लेने में थोड़ी देर हो गई थी जनाब!’’ अंजलि ने उसे गिफ्ट देते हुए जन्मदिन की बधाई दी.

संदीप ने तुरंत अपने कोट की जेब से एक हीरे की अंगूठी निकाली, ”ये हमारी दोस्ती की पहली मुलाकात के लिए है,’’ संदीप ने उस के हाथ में अंगूठी देते हुए कहा.

”अरे संदीपजी, आप यह क्या कर रहे हैं? इतनी महंगी वो भी हीरे की अंगूठी देने की भला क्या जरूरत थी? देखिए, यह बात ठीक नहीं है,’’ अंजलि ने हिचकिचाते हुए कहा.

”अंजलि, अब तुम मेरी एक अच्छी दोस्त बन चुकी हो, वैसे भी मैं हीरे का व्यापारी हूं इसलिए तुम्हें मेरी ओर से यह भेंट स्वीकार करनी ही पड़ेगी.’’ संदीप ने कहा.

उस के बाद संदीप का बर्थडे केक काटा गया. आज की शाम को संदीप रंगीन करना चाहता था, इसलिए उस ने अपने साथ 3-4 पैग स्काच के दोस्ती का हवाला दे कर अंजलि को पिला डाले थे. उस के बाद रात के खाने का भी समय हो गया था.

दोनों ने खाना खाया और ठंड का बहाना करते हुए संदीप अपने बिस्तर पर रजाई ओढ़ कर लेट सा गया. नशे का असर अब अंजलि पर धीरेधीरे हावी होने लगा था, उसे लग रहा था जैसे वह आसमान में उड़ी जा रही हो.

अंजलि कमरे में रखे सोफे पर संदीप के ठीक सामने बैठी हुई थी. संदीप ने उस की ओर देखा तो वह अब सोफे से खड़ी हो कर संदीप के एकदम नजदीक आ कर खड़ी हो गई थी. संदीप ने जब उस की आंखों में झांका तो उसे साफसाफ दिखाई पड़ा कि अंजलि की आंखें नशे से गुलाबी सी हो गई थीं और उस के सीने का उतारचढ़ाव जैसे बेकाबू सा होता चला जा रहा था.

संदीप अब अंजलि के दिल की बात अच्छी तरह से भांप चुका था. फिर भी उस ने अपनी ओर से पहल करते हुए कहा, ”अंजलि, अगर तुम्हें ठंड लग रही है तो यहां मेरे पास रजाई के अंदर आ जाओ. लगता है अब तुम काफी थक चुकी हो.’’

”तुम नहीं समझोगे संदीपजी, ये निगोड़ी ठंड रजाई का गरमी से नहीं भाग सकती. चलो, अगर तुम कहते हो तो आ ही जाती हूं.’’ कहते हुए अंजलि संदीप के साथ बैड पर उस की रजाई के अंदर घुस गई.

जैसे ही अंजलि उस की बगल में रजाई के भीतर आई तो संदीप को ऐसा लगा कि उस के बगल में लेटी हुई अंजलि के शरीर से लपटें निकल रही हैं और वह उन लपटों में जल रहा है. अब संयम की लगाम संदीप के हाथों से बिलकुल ही छूट चुकी थी. जैसा मंसूबा उस ने तैयार किया था, वह जैसे पूरा हो चुका था.

उस ने अंजलि के शरीर को बुरी तरह से भींच लिया था और वे दोनों सारी रात एकदूसरे की अतृप्त कामनाओं को पूरा करने में जुट गए थे.

गुवाहाटी के फाइव स्टार होटल रेडिसन ब्लू में हुई हत्या

असम के गुवाहाटी स्थित जुलकबारी थाने के एसएचओ अपने औफिस में बैठ कर आवश्यक काम निपटा रहे थे, तभी उन का मोबाइल फोन बजने लगा.

”हैलो, मैं जुलकबारा एसएचओ इंसपेक्टर रंजीत कुमार रे बोल रहा हूं. कहिए, हम आप की क्या सहायता कर सकते हैं?’’ एसएचओ ने फोन उठाते हुए.

”सर, मैं रेडिसन ब्लू होटल से प्रकाश थापा बोल रहा हूं. सर, यहां पर रूम नंबर 922 में एक व्यक्ति का मर्डर हो गया है. आप यहां जल्दी आ जाइए.’’ दूसरी ओर से मैनेजर ने कहा.

”अरे फाइव स्टार होटल में मर्डर हो गया? कौन था वह आदमी? कहां का रहने वाला था? जरा विस्तार से बताओ तो?’’ एसएचओ ने पूछा.

”सर, मृतक का नाम संदीप सुरेश कांबले है. उन की उम्र लगभग 44 वर्ष की है. वह पिछले कई सालों से हमारे रेगुलर कस्टमर थे. उन का हीरे और कारों का व्यवसाय था, वह अपनी एक महिला मित्र के साथ होटल के कमरा नंबर 922 में ठहरे हुए थे,’’ होटल मैनेजर प्रकाश थापा ने जल्दीजल्दी कहा.

”ठीक है प्रकाश थापाजी, आप अपने कर्मचारियों को होटल के उस कमरे के बाहर तैनात करवा दीजिए. कमरे के भीतर कोई भी व्यक्ति न जाए, हम तुरंत आ रहे हैं.’’ कहते हुए एसएचओ ने काल डिसकनेक्ट कर दी.

जुलकबारी एसएचओ रंजीत कुमार रे ने घटना की सूचना तुरंत अपने उच्चाधिकारियों को दी और अपनी टीम के साथ घटनास्थल की ओर निकल गए. जब जुलकबारी थाने के प्रभारी होटल रेडिसन ब्लू में पहुंचे, तब तक घटनास्थल पर पुलिस कमिश्नर दिगंता बराह, डीसीपी (वेस्ट) पद्मनाभ बरुआ, एडीसीपी (वेस्ट) नंदिनी ककाटी, डौग स्क्वायड की टीम और फोरैंसिक टीम भी घटनास्थल पर पहुंच चुकी थी.

होटल के कमरा नंबर 922 में एक व्यक्ति की लाश पड़ी थी. उस की नाक और मुंह से खून निकल रहा था तथा शरीर पर भी चोटों के निशान थे. होटल में जमा की गई आईडी के आधार पर उस की पहचान पुणे निवासी संदीप सुरेश कांबले के रूप में हुई.

पुलिस ने काररवाई पूरी करने के बाद मृतक की लाश पोस्टमार्टम के लिए भेज दी.

पुलिस टीम गठित होने के बाद टीम को पता चला कि 5 फरवरी, 2024 को होटल रेडिसन ब्लू के रिसैप्शन में दोपहर को किसी अनजान नंबर से काल आई थी कि आप के रेडिसन ब्लू के कमरा नंबर 922 में जो व्यक्ति ठहरा हुआ है, उस की तबीयत अचानक खराब हो गई है, इसलिए आप लोग तुरंत उसे प्राथमिक चिकित्सा देने का इंतजाम करें.

जांच करने पर जब होटल के कर्मचारी कमरा नंबर 922 में पहुंचे तो वहां पर संदीप सुरेश कांबले मृत पड़े थे, जिस की सूचना तुरंत होटल मैनेजर ने पुलिस को दे दी थी. अब तक पुलिस की टीम सारे सीसीटीवी फुटेज खंगाल चुकी थी. एक सीसीटीवी में होटल रेडिसन ब्लू के कर्मचारियों ने मृतक महिला मित्र को पहचान लिया, जो अकसर मृतक के साथ होटल में ठहरने को आती रहा करती थी.

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सीसीटीवी फुटेज 

उस की पहचान अंजलि शा के रूप में हुई. सीसीटीवी फुटेज में वह महिला एक पुरुष के साथ दिखाई दे रही थी, जो होटल कर्मचारियों के लिए एकदम अंजान चेहरा था. होटल के रजिस्टर को बारीकी से चैक किया गया तो यह जानकारी निकल कर सामने आई कि

सीसीटीवी फुटेज में अंजलि शा होटल के कमरा नंबर 1024 में भी दाखिल होते देखी गई थी. उस के बाद सीसीटीवी फुटेज में संदिग्ध महिला ने कमरा नंबर 922 का पिछला दरवाजा खोला था, जिस में एक अन्य संदिग्ध व्यक्ति कमरा नंबर 922 में दाखिल हुआ था. उस के बाद वे दोनों एक साथ होटल रेडिसन ब्लू के बाहर के दरवाजे में बदहवासी की स्थिति में देखे गए थे.

पुलिस टीम ने जब कमरा नंबर 1024 के ग्राहक का बायोडाटा और फोन नंबर खंगाला गया तो  वह 27 वर्षीय विकास शा पश्चिम बंगाल के हावड़ा जिले के गोलाबारी पुलिस स्टेशन के अंतर्गत 12/6 ऋषिकेश घोष लेन सैकिया का निकला. एक और बात निकल कर सामने आई कि रेडिसन ब्लू होटल के रिसैप्शन पर फोन विकास शा ने ही किया था.

अब पुलिस ने अंजलि शा और विकास शा का फोन नंबर सर्विलांस पर लगवा दिया था. अब तक मृतक के छोटे भाई विशाल कांबले भी गुवाहाटी पहुंच चुके थे. मृतक की पहचान संदीप सुरेश कांबले, निवासी जिला पुणे के अंतर्गत 11, पर्णकुटी पायथा, यरवदा के रूप में हो चुकी थी.

हीरा व्यापारी का फाइव स्टार लव – भाग 1

रेडिसन ब्लू होटल के कमरा नंबर 922 में हीरा व्यापारी संदीप सुरेश कांबले का शव फर्श पर पड़ा हुआ था. उस की लाश खून से लथपथ थी. चारों तरफ खून ही खून बिखरा पड़ा था.

मृतक की स्थिति देखने से साफसाफ पता चल रहा था कि उस ने आखिरी क्षणों तक काफी संघर्ष किया था, लेकिन हत्यारे शायद एक से अधिक थे, इसलिए उसे अपनी जान गंवानी पड़ी थी.

पुलिस कमिश्नर गुवाहाटी दिगंता बराह ने डीसीपी (वेस्ट) पद्मनाभ बरुआ और एडीसीपी (वेस्ट) नंदिना ककाटी के सुपरविजन में तुरंत पुलिस टीम का गठन कर दिया. इंसपेक्टर संजीत कुमार रे को केस का जांच अधिकारी बनाया गया.

44 वर्षीय संदीप सुरेश कांबले और 25 वर्षीय अंजलि की मुलाकात 10 फरवरी, 2023 को कोलकाता में हुई थी. संदीप सुरेश कांबले पुणे का निवासी था और उस का डायमंड व कार का व्यवसाय था. वह अकसर बड़ेबड़े शहरों में अपने व्यवसाय के सिलसिले में आताजाता रहता था, जबकि अंजलि शा पश्चिम बंगाल के हावड़ा जिले के अंतर्गत दक्षिण बक्सर संतरागाछी पुलिस स्टेशन की मूल निवासी थी, जो अभी भोपाल में रहती थी.

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      मृतक संदीप सुरेश कांबले

संदीप और अंजलि की मुलाकात नेताजी सुभाषचंद्र बोस इंटरनैशनल एयरपोर्ट, कोलकाता के एक रेस्टोरेंट में हुई थी, जहां पर अंजलि स्टोर मैनेजर के पद पर कार्य कर रही थी.

असल में संदीप अपने व्यापार के सिलसिले में कोलकाता आया हुआ था. उस ने खाने के और्डर में चिकन सूप मांगा, लेकिन वेटर ने भूलवश उसे वेजेटेबल सूप दे दिया और सूप भी टेबल पर रखते समय छलक कर संदीप के कीमती कपड़ों पर आ गिरा था. जिस के कारण संदीप ने गुस्से में पूरा रेस्टोरेंट ही सिर पर उठा लिया था.

वेटर जल्दी से भाग कर अंजलि के पास आया और उस ने कहा, ”अंजलि मैम, यह ग्राहक तो थोड़ी ही गलती पर मुझ पर बुरी तरह से भड़क गया. उस ने मुझे गालियां तक दे डालीं. अब उस ने पुलिस को बुलाने की धमकी भी दे दी है.’’

अंजलि ने देखा कि वेटर गिरीश डर से बुरी तरह कांप रहा था. अंजलि ने उसे समझाबुझा कर किचन में भेज दिया और खुद संदीप के पास चली गई. उस ने संदीप से बड़े ही शिष्ट अंदाज में वेटर की भूल के लिए क्षमा मांगी. खुद अपने रुमाल को गीला कर उस से संदीप के कपड़ों को साफ किया और संदीप को एक अलग कमरे में ले जा कर उसे खुद ही सूप सर्व किया.

संदीप एक ही पल में अंजलि की बातों, उस के व्यवहार और उस के खूबसूरत चेहरे का दीवाना सा हो गया था. उस ने फिर वहां पर लंच और डिनर भी किया और दोनों ने एकदूसरे को अपने मोबाइल नंबर भी दे दिए. अब जब कभी संदीप का कोलकाता में आना होता था तो वह अंजलि के रेस्टोरेंट में ही खाना खाया करता था. इस बीच वह एकदूसरे के बारे में काफी कुछ जान चुके थे.

एक दिन ऐसे ही संदीप ने अंजलि से पूछ लिया, ”अंजलि, आप को जीवन में अकेलापन नहीं खलता?’’

”देखिए संदीपजी, अकेलापन तो जरूर खलता है, मगर हमेशा एक उम्मीद भी बनी रहती है कि मैं अकेली नहीं हूं. किसी को ऊपर वाले ने मेरे लिए जरूर बना रखा है. वैसे आप को तो अकेलापन नहीं खलता होगा. आप की तो पत्नी है और 2 प्यारे प्यारे बच्चे भी हैं.’’ अंजलि ने बेहद गंभीरता से कहा.

”अंजलिजी, कभीकभी जीवन में सब कुछ होते हुए भी अकेलापन खलता रहता है. मानता हूं कि मेरी पत्नी है, बच्चे भी हैं, मगर जीवन में मुझे अभी भी अकेलापन लगता है. मैं जैसी पत्नी चाहता था, वैसी पत्नी शायद मुझे मिल न सकी. इसलिए भटकता रहता हूं.’’ संदीप ने उदासी भरे स्वर में कहा.

”अरे सर, आप तो इतने पैसे वाले हैं, करोड़पति आदमी हैं. आप तो जिस पर भी नजर मारें, वह आप की हो जाएगी.’’ अंजलि ने मुसकराते हुए कहा.

”अरे, अपने ऐसे नसीब कहां? हां, मगर आप की बातों से लगता है जैसे आप अब अपने जीवनसाथी की तलाश में हैं.’’ संदीप ने कहा.

”देखिए जनाब, मैं ने ऐसा तो नहीं कहा कि शादी करने के बाद अकेलापन बिलकुल भी दूर हो जाता है या बिलकुल खत्म सा हो जाता है. इसलिए मैं शादी झंझट से दूर ही रहना चाहती हूं. वैसे शादी करने के बाद इंसान अपने जीवन में कितना सुखी रह सकता है, यह बात तो मुझ से बेहतर आप जानते हैं. वैसे सच कह रही हूं मैं न? हां, मुझे एक सच्चे दोस्त की तलाश अवश्य है, मगर यह तलाश कब और कहां खत्म होगी, इस बात का पता मुझे बिलकुल भी नहीं है. हां, तलाश जारी है.’’ अंजलि ने अपनी आंखें आकाश की तरफ घुमाते हुए कहा.

अंजलि की बातें वाकई इतनी सही और सटीक थीं कि उन बातों ने संदीप के दिल को भीतर तक हिला कर रख डाला था. उसे अंजलि की बातों में एकदम सच्चाई नजर आ रही थी. शादी होने और बच्चों के बावजूद भी तो वह खुद हमेशा कितना अकेलापन महसूस करता था. वह आज भी सचमुच कितना अकेला था.

”चलो, मैं मानता हूं कि मैं शादी करने के बाद भी आज भी अपने आप को अकेला महसूस करता हूं. मगर क्या आप ने अपने अकेलेपन को दूर करने के बारे में कभी सोचा भी है?’’ संदीप ने पूछा.

”संदीपजी, अपनी तो तलाश जारी है. मैं ने अभीअभी आप से यह बात कही तो है न!’’ अंजलि ने कहा.

”आप एकदम सही कह रही हैं कि आप की तलाश तो मैं आप से कुछ कहना चाहता हूं, यदि आप मेरी बात का बुरा न मानें तो..?’’ संदीप ने हिचकते हुए कहा.

”जी, आप तो मेरे अपने से हैं, आप की बात का भला मैं क्यों बुरा मानने लगी.’’ अंजलि को संदीप की बातों में कोई विशेष ऐसी बात लग रही थी, मानो जिसे वह दिल से सुनना चाहती थी. उस ने एक बार संदीप की आंखों में आंखें डाल कर देखा, फिर अगले ही पल शरमाते हुए अपनी नजरें झुका दी थीं.

संदीप ने अंजलि पर क्यों डाले डोरे

संदीप तो जैसे अपने दिल की बात कहने के लिए कब से उतावला सा हो रहा था. उस ने अपनी ही रौ मैं बहते हुए आखिरकार दिल की बातें अंजलि से कह ही डाली थी, ”अंजलिजी, सचमुच मैं अपने दिल से कह रहा हूं आप को यदि बुरा भी लगेगा तो मुझ पर इस का कोई फर्क भी नहीं पड़ेगा. सच कहूं तो आप से मिलने से पहले मैं वाकई अपने आप को हमेशा अधूरा सा महसूस करता था, मगर जिस दिन से मुझे आप मिलीं, आप का व्यवहार, स्वभाव, बातें, आप का अपनापन सब मुझे ऐसा लगा जैसे आप मेरी अपनी हैं.

”आप आज से नहीं, बल्कि जैसे जन्म जन्मांतर से मेरी अपनी हैं. आप से मिलने से पहले मुझे लगता था जैसे मैं ने अपने जीवन में कुछ पाया ही नहीं है. मगर, अब मुझे ऐसा लगने लगा है जैसे आप ही मेरा सब कुछ हैं. मैं हमेशा यही सोचता हूं कि मैं आप के सामने बैठ कर आप को निहारता रहूं, आप से बातें करता रहूं, मेरा पूरा जीवन बस आप को देखते हुए गुजर जाए.’’

”देखिए संदीपजी, आप जो कुछ कह रहे हैं, मैं मानती हूं कि आप शायद सच कह रहे हैं. मगर ये बात भी सच है कि आप एक शादीशुदा इंसान हैं, आप का अपना एक संयुक्त परिवार है, आप का एक छोटा भाई भी है. आप के ऊपर अपने परिवार की पूरी पूरी जिम्मेदारी भी है. इसलिए बेहतर यही होगा कि आप मुझे भूल कर कुछ नई शुरुआत करें.’’ अंजलि ने कहा.

”देखो अंजलि, यह बात सही है कि मैं एक विवाहित पुरुष हूं, मेरा अपना एक परिवार भी है. मगर ये बात भी, बिलकुल सच है कि जिस दिन से मैं ने तुम्हें देखा है, मैं अपना दिल हार चुका हूं. मैं आप को अपने दिल की गहराइयों से बेइंतहा प्यार करने लगा हूं.’’ ऐसा कहते हुए संदीप ने अंजलि के दोनों हाथों को थाम लिया था.

”देखो संदीप, कहीं तुम बीच में मुझे कभी धोखा तो नहीं दोगे न? मुझे मंझधार में छोड़ कर तो नहीं चले जाओगे?’’ अंजलि ने भी अपने दिल की बात कह ही डाली.

”ऐसा भला तुम सोच भी कैसे सकती हो अंजलि,’’ कहते हुए संदीप ने अंजलि को अपनी बाहों में भर लिया था.

कहावत भी है कि जहां चाह होती है, वहां राह अपने आप निकल आती है. पहले तो अंजलि यह सोच कर कि संदीप एक शादीशुदा है, उस से बचती रही. संदीप की कामुकता भरी छेड़छाड़ को वह नजरअंदाज करती रही, परंतु एक दिन तो संदीप ने मर्यादा और नैतिकता की सारी हदें ही तोड़ डाली थीं.

जी का जंजाल बनी प्रेमिका – भाग 3

मनोहर ने अपने पिता केदार सिंह से शादी के लिए कहा तो उन्होंने मना कर दिया. लेकिन मनोहर ने जिद पकड़ ली कि वह शादी करेगा तो सीमा से ही करेगा अन्यथा कुंवारा ही रहेगा. तब मजबूर हो कर केदार सिंह को झुकना पड़ा. वह सीमा से उस की शादी कराने को राजी तो हो गए लेकिन उन्होंने शर्त रख दी कि सीमा को उन के हिसाब से घर में रहना होगा. जबकि वह जानते थे कि सीमा ज्यादा दिनों तक उन की इच्छानुरूप नहीं रह सकती. इसीलिए उन्होंने यह शर्त रखी थी.

मनोहर से शादी के बाद सीमा ने एक बेटे को जन्म दिया, जिस का नाम आयुष रखा गया. लेकिन घर में उसे सब प्यार से शिवा कहते थे. केदार सिंह ने सीमा पर काफी बंदिशें लगा रखी थीं. उसे परेशान करने के लिए वह बात बात पर उसे प्रताडि़त करते रहते थे.

सीमा को बंदिशें वैसे भी कभी रास नहीं आईं, वह तो खुले आकाश में विचरण करने वाली युवती थी. यही वजह थी कि जल्दी ही वह उस घर के माहौल से तंग आ गई. वह उस घर से भागने की कोशिश करने लगी. आखिर एक दिन मौका मिलते ही वह बेटे को ले कर उस घर से हमेशा हमेशा के लिए भाग निकली.

सीमा मायके आई तो उस का पिता कमल सिंह किसी मामले में गोरखपुर जेल में बंद था. सीमा अकसर अपने पिता से मिलने जेल जाती रहती थी. वहीं उस की मुलाकात मणिकांत मिश्रा से हुई. वह भी अपने पिता विश्वंभरनाथ मिश्रा से मिलने जेल आता रहता था.

मणिकांत के पिता विश्वंभरनाथ मिश्रा जिला महाराजगंज में कोऔपरेटिव बैंक की नौतनवां शाखा में सचिव थे. 2008 में उन्हें गबन और धोखाधड़ी के मामले में गोरखपुर जेल भेज दिया गया था. मणिकांत मिश्रा मांबाप का एकलौता बेटा था.

मणिकांत भी अपने पिता से मिलने जेल आता रहता था और सीमा भी. अकसर दोनों की मुलाकात हो जाती थी. कभी दोनों ने एकदूसरे के बारे में पूछ लिया तो उस के बाद उन में बातचीत होने लगी. बातचीत होतेहोते उन में दोस्ती हुई और फिर प्यार.

बाप जेल में था, मुकदमा चल रहा था. आमदनी का कोई और जरिया नहीं था इसलिए मणिकांत दिल्ली चला गया और वहां वह कढ़ाई का काम करने लगा. रहने के लिए उस ने डाबड़ी की सीतापुरी कालोनी में अवधेश के मकान में एक कमरा किराए पर ले लिया. मणिकांत दिल्ली में रहता था और सीमा गोरखपुर में. लेकिन दोनों में फोन पर बातें होती रहती थीं. सीमा ने उस से कहा कि उसे वहां अच्छा नहीं लगता. इस पर मणिकांत ने उसे दिल्ली बुला लिया. वह बेटे को ले कर दिल्ली पहुंच गई.

सीमा को दिल्ली आए 2-3 दिन ही हुए थे कि एक रात उस ने कहा, ‘‘मणि, हम दोनों एकदूसरे को पसंद ही नहीं करते, बल्कि एकदूसरे को जीजान से चाहते भी हैं. हमें एकदूसरे से दूर रहना भी अच्छा नहीं लगता. क्यों न हम दोनों शादी कर लें?’’

सीमा की इस बात पर मणिकांत गंभीर हो गया. कुछ देर सोचने के बाद उस ने कहा, ‘‘सीमा, प्यार करना अलग बात है और शादी करना अलग बात. मैं तुम से प्यार तो करता हूं, लेकिन शादी नहीं कर सकता.’’

‘‘क्यों, प्यार करते हो तो शादी करने में क्या परेशानी है?’’

‘‘तुम शादीशुदा ही नहीं, किसी दूसरे के एक बच्चे की मां भी हो. ऐसे में मैं तुम से कैसे शादी कर सकता हूं?’’

‘‘तो क्या तुम मुझे बेसहारा छोड़ दोगे? मैं तो बड़ी उम्मीद ले कर तुम्हारे पास आई थी कि तुम मुझ से प्यार करते हो, इसलिए मुझे अपना लोगे.’’

‘‘सीमा, मैं तुम्हें बेसहारा भी नहीं छोड़ सकता और शादी भी नहीं कर सकता. अगर तुम चाहो तो एक रास्ता है.’’

‘‘क्या?’’

‘‘लिवइन रिलेशनशिप. यानी हम दोनों बिना शादी के एक साथ पतिपत्नी की तरह रह सकते हैं.’’

सीमा मरती क्या न करती, वह राजी हो गई. इस के बाद दोनों बिना शादी के ही पतिपत्नी की तरह साथ रहने लगे. मणिकांत ने पास के ही चाणक्य प्लेस स्थित एक प्ले स्कूल में आयुष का एडमिशन करा दिया. सीमा की भी उस ने एक कालसेंटर में नौकरी लगवा दी. वहां सीमा को 5 हजार रुपए प्रतिमाह वेतन मिलता था.

सीमा जल्दी ही अपने रंग दिखाने लगी. वह घूमने, फिल्में देखने और महंगा खाना खाने पर जरूरत से ज्यादा पैसे खर्च करने लगी. उस का पूरा वेतन इसी में खर्च हो जाता. पैसे खत्म हो जाते तो वह परेशान हो उठती. तब वह आसपड़ोस से उधार लेने लगी. उन पैसों को भी वह अपने शौक पूरा करने में उड़ा देती.

उधार देने वालों के पैसे सीमा वापस न करती तो वे मणिकांत से पैसे मांगते. सीमा की इन हरकतों से मणिकांत परेशान रहने लगा. उस ने सीमा को कई बार समझाया, लेकिन उस पर कोई असर नहीं हुआ.

धीरेधीरे उसे सीमा के चरित्र पर भी शक होने लगा. क्योंकि सीमा हर किसी से इस तरह खुल कर बात करती थी जैसे वह उस का बहुत खास हो. इस के अलावा उसे लोगों से पैसा भी बड़े आराम से उधार मिल जाता था. इस से मणिकांत को लगने लगा कि सीमा ने ऐसे लोगों से संबंध बना रखे हैं. इन्हीं बातों को ले कर दोनों के बीच आए दिन झगड़ा होने लगा.

हद तब हो गई, जब सीमा मणिकांत पर दबाव बनाने लगी कि वह गोरखपुर की अपनी सारी संपत्ति बेच कर दिल्ली में एक अच्छा सा मकान ले कर यहीं रहे. मणिकांत सीमा की हरकतों से वैसे भी परेशान था. जब वह उस पर संपत्ति बेचने के लिए ज्यादा दबाव बनाने लगी तो वह सीमा से छुटकारा पाने के बारे में सोचने लगा. उसे पता था कि यह औरत सीधे उस का पीछा नहीं छोड़ेगी. इसलिए उस ने उसे खत्म करने का विचार बना लिया.

पूरी योजना बना कर उस ने सीमा से गोरखपुर के अपने गांव चलने को कहा तो वह खुशी खुशी चलने को तैयार हो गई. 15 सितंबर की दोपहर मणिकांत ने सीमा और आयुष को साथ ले कर लखनऊ जाने के लिए गोमती एक्सप्रेस पकड़ी.

रात 10 बजे वह लखनऊ के चारबाग स्टेशन पर उतरा. उस ने सीमा से कहा कि इस समय गोरखपुर जाने के लिए कोई बस या ट्रेन नहीं मिलेगी, इसलिए आज रात यहीं किसी होटल में रुक जाते हैं.

सीमा क्या कहती, वह होटल में रुकने को तैयार हो गई. रिक्शे पर बैठ कर उस ने रिक्शे वाले से किसी छोटे और सस्ते होटल में चलने को कहा. रिक्शे वाला तीनों को नाका हिंडोला थाने के विजयनगर स्थित सिंह होटल एंड पंजाबी रसोई ले गया. वहां मणिकांत ने  होटल के रिसैप्शन पर बैठे मैनेजर रामकुमार से एक कमरे की डिमांड की तो उस ने उस से आईडी मांगी.

मणिकांत ने सुबह को आईडी की फोटोकौपी देने को कहा. तब उस ने उस का आधार कार्ड ले कर उस का नंबर, मोबाइल नंबर और पता दर्ज कर लिया. कमरे का किराया 350 रुपए ले कर उस ने कमरा नंबर 102 की चाबी मणिकांत को दे दी. वह सीमा और आयुष को ले कर कमरे में चला गया.

सीमा और आयुष को कमरे में छोड़ कर मणिकांत चारबाग गया और वहां किसी ढाबे से खाना ले आया. खाना खा कर वह सीमा से बातें करने लगा. तभी किसी बात पर उस की  सीमा से बहस हो गई तो वह सीमा को पीटने लगा. सीमा जोरजोर से रोने लगी. मां की पिटाई और उसे रोता देख कर मासूम आयुष भी रोने लगा.

मणिकांत सीमा की पिटाई करते हुए उसे बाथरूम में ले गया. वहां उस ने उसे इस तरह पीटा की वह बेहोश हो गई. उसे उसी हालत में छोड़ कर वह आयुष के पास आया और उसे बिस्तर पर लिटा कर किसी तरह सुला दिया. इस के बाद उस ने घर से बैग में रख कर लाया सब्जी काटने वाला चाकू निकाला और बाथरूम में बेहोश पड़ी सीमा का बेरहमी से गला काट दिया, जिस से उस की मौत हो गई. रात भर वह उसी कमरे में रहा. सवेरा होने पर उस ने मैनेजर से अपना आधार कार्ड लिया और बैग ले कर निकल गया. होटल से निकल कर वह गोरखपुर स्थित अपने घर चला गया.

उस ने अपनी ओर से होटल में कोई सुबूत नहीं छोड़ा था, लेकिन पुलिस आयुष की स्कूल ड्रेस के टैग के सहारे उस तक पहुंच ही गई. सारी कानूनी औपचारिकताएं पूरी कर के पुलिस ने मणिकांत को न्यायालय में पेश किया, जहां से उसे न्यायिक अभिरक्षा में जेल भेज दिया गया.

पुलिस ने आयुष को चाइल्डलाइन भेज कर सीमा के पति मनोहर और उस के घर वालों से संपर्क किया तो उस के चाचा चाची आ कर उसे ले गए. कथा लिखे जाने तक पुलिस होटल के मालिक के खिलाफ भी काररवाई करने की तैयारी कर रही थी.

—कथा पुलिस सूत्रों पर आधारित

जी का जंजाल बनी प्रेमिका – भाग 2

थाना नाका हिंडोला के थानाप्रभारी विजय प्रकाश बच्चे को साथ ले कर थाने आ गए और होटल मालिक राजकुमार की ओर से मृतका सीमा के पति बबलू के खिलाफ हत्या का मुकदमा दर्ज करा दिया. रिपोर्ट दर्ज करने के बाद पुलिस ने होटल में दर्ज आधार कार्ड के पते और मोबाइल नंबर की जांच कराई तो दोनों फरजी निकले.

आधार कार्ड के अनुसार बबलू का पता आरजेड-30, स्मितापुरी, पार्क रोड, नई दिल्ली लिखा था जो फरजी पाया गया. आधार कार्ड के नंबर में 2 अंक गलत थे. कमरे में ऐसा कुछ भी नहीं मिला था, जिस से हत्यारे के बारे में या मृतका के बारे में कुछ पता चलता.

इंसपेक्टर विजय प्रकाश सिंह सोच रहे थे कि अब क्या किया जाए. तभी उन की नजर आयुष पर पड़ी. वह स्कूल की ड्रेस पहने था. उन्होंने उस की स्कूली शर्ट के कालर पर लगे टैग को देखा. उस में जो लेबल लगा था, उस में स्टार यूनिफार्म लिखा था. इस का मतलब ड्रेस जिस कंपनी में तैयार की गई थी, उस का नाम स्टार यूनिफार्म था.

स्कूल ड्रेस तैयार करने वाली इस कंपनी के बारे में शायद इंटरनेट से कुछ पता चल जाए, यह सोच कर उन्होंने इंटरनेट पर सर्च किया तो कंपनी का पता और फोन नंबर मिल गया. पुलिस ने उस नंबर पर फोन कर के संपर्क किया. जब कंपनी के बारे में पता चल गया तो पुलिस ने वाट्सएप द्वारा आयुष और उस की ड्रेस की फोटो कंपनी को भेजी तो कंपनी ने बताया कि यह ड्रेस एक प्ले स्कूल की है, जिस का पता है एम-24, चाणक्य प्लेस, डाबड़ी, नई दिल्ली.

यह जानकारी मिलने के बाद पुलिस की एक टीम नई दिल्ली पहुंच गई. इस पुलिस टीम ने प्ले स्कूल के प्रबंधक को आयुष का फोटो दिखा कर पूरी बात बताई तो प्रबंधक ने स्कूल के रजिस्टर से आयुष के घर का पता लिखा दिया. आयुष के मातापिता स्कूल से कुछ दूरी पर सीतापुरी कालोनी में अवधेश के मकान में किराए पर कमरा ले कर रहते थे.

पुलिस टीम ने अवधेश से पूछताछ की तो पता चला कि उस के किराएदार का नाम बबलू नहीं बल्कि मणिकांत मिश्रा है और वह गोरखपुर के थाना सहजनवां के मोहल्ला डुगडुइया का रहने वाला है. उस के पिता का नाम विश्वंभरनाथ मिश्रा है. सीमा उस की ब्याहता पत्नी नहीं थी बल्कि दोनों लिवइन रिलेशन में रहते थे.

पुलिस टीम ने दिल्ली से ही इंसपेक्टर विजय प्रकाश को फोन कर के सीमा के असली हत्यारे का नाम पता बता दिया. इस के बाद विजय कुमार ने दूसरी पुलिस टीम गोरखपुर भेज दी.

19 सितंबर को गोरखपुर गई पुलिस टीम ने स्थानीय पुलिस की मदद से मणिकांत के घर छापा मारा तो वह घर पर ही मिल गया. पूछताछ में उस ने न केवल सीमा की हत्या का अपना अपराध कुबूल कर लिया बल्कि हत्या में प्रयुक्त सब्जी काटने वाला चाकू भी बरामद करा दिया. पुलिस टीम मणिकांत को गिरफ्तार कर के लखनऊ ले आई. थाने में की गई पूछताछ में मणिकांत ने सीमा की हत्या की जो कहानी सुनाई, वह कुछ इस प्रकार थी.

उत्तर प्रदेश के जिला गोरखपुर के थाना पिपराइच के पुखरभिंडा गांव में रहता था कमल सिंह. उस के परिवार में पत्नी और एक ही बेटी थी सीमा. वह अपराधी प्रवृत्ति का था, इसलिए पत्नी और बच्चों पर खास ध्यान नहीं देता था. वैसे भी वह ज्यादातर जेल में ही रहता था, इसलिए पत्नी और बेटी अपने मन की मालिक थीं.

सीमा खूबसूरत भी थी और महत्त्वाकांक्षी भी. वह जवान हुई तो उस की खूबसूरती लोगों की आंखों में बैठ गई. उसे जो भी देखता, देखता ही रह जाता. जिस का बाप अपराधी हो, उस के घर का माहौल तो वैसे भी अच्छा नहीं होता क्योंकि उस के साथ उठने बैठने वाले कोई अच्छे लोग तो होते नहीं.

कमल के यहां भी उसी के जैसे लोग आते थे. जवान बेटी को ऐसे लोगों से दूर रखना चाहिए, लेकिन कमल को इस बात की कोई चिंता ही नहीं थी. वह सभी को घर के अंदर ही बैठाता था. बदमाश प्रवृत्ति का व्यक्ति किसी का नहीं होता, इसलिए उन सब की नजरें कमल की जवान बेटी पर जम गई थीं.

बगल के ही गांव भरहट का रहने वाला एक लड़का कमल के यहां आता रहता था. वह भी अपराधी प्रवृत्ति का था. वह कुंवारा था, इसलिए उस ने कमल सिंह के सामने सीमा से शादी करने का प्रस्ताव रखा तो कमल सिंह ने सोचा कि उसे बेटी की शादी तो करनी ही है. अगर वह अपने हिसाब से शादी करेगा तो दुनिया भर का इंतजाम और दानदहेज के लिए काफी पैसे खर्च करने पड़ेंगे.

और यदि वह सीमा की शादी इस लड़के से कर देता है तो उसे अपने पास से एक पैसा खर्च नहीं करना पड़ेगा. इतना ही नहीं बल्कि वह चाहे तो इस लड़के से कुछ पैसे भी ले लेगा. लड़का उसे पसंद था इसलिए उस ने कहा, ‘‘सीमा की शादी तो मैं तुम से कर दूंगा लेकिन कुछ देने के बजाय मुझे तुम से कुछ चाहिए.’’

लड़का भी सीमा के लिए बेचैन था. इसलिए उस ने कहा, ‘‘चाचाजी, मैं सीमा के लिए अपना सब कुछ आप को दे सकता हूं.’’

‘‘मुझे तुम्हारा सब कुछ नहीं चाहिए. सब कुछ दे दोगे तो मेरी बेटी को खिलाओगे पिलाओगे कहां से. मुझे कुछ रुपए चाहिए. क्योंकि मेरे ऊपर काफी कर्ज हो गया है.’’

वह लड़का कमल द्वारा मांगी गई रकम देने को तैयार हो गया तो उस ने सीमा का विवाह उस युवक से करा दिया. सीमा पिता के घर से ससुराल पहुंच गई. वहां कुछ दिनों तक तो सब कुछ ठीकठाक रहा, लेकिन बाद में वह लड़का बातबात पर सीमा से मारपीट करने लगा तो परेशान हो कर सीमा उस से तलाक ले कर मायके चली आई.

सीमा पहले से ही बिना अंकुश की थी. शादी के बाद वह और आजाद हो गई. उसे किसी से भी बात करने या मिलने में जरा भी हिचक नहीं होती थी. कोई रोकटोक भी नहीं थी इसलिए वह कहीं भी किसी के भी साथ घूमने चली जाती थी. इस की सब से बड़ी वजह थी उस की जरूरतें. इसलिए जो भी उस की जरूरतें पूरी करता, वह उसी की हो जाती.

ऐसे में ही उस की मुलाकात थाना पिपराइच के गांव पकडि़यार के रहने वाले केदार सिंह के बेटे मनोहर सिंह से हुई तो वह उस से जुड़ गई. केदार सिंह खेतीकिसानी करते थे. मनोहर सीमा को इस कदर चाहने लगा कि वह उस से शादी करने के बारे में सोचने लगा.

जी का जंजाल बनी प्रेमिका – भाग 1

प्रदेश की राजधानी होने के नाते रोजाना लाखों लोग लखनऊ आते जाते रहते हैं. इसी वजह से लखनऊ के रेलवे स्टेशन चारबाग के आसपास तो हर तरह के होटलों की भरमार है ही, उस से सटे इलाकों का भी यही हाल है. ऐसा ही एक इलाका है नाका हिंडोला. यहां भी छोटे बड़े तमाम होटल हैं.

नाका हिंडोला के मोहल्ला विजयनगर में गुरुद्वारे के पीछे एक होटल है सिंह होटल एंड पंजाबी रसोई. 16 सितंबर की सुबह 11 बजे के आसपास होटल का कर्मचारी मोहन बहादुर बेसमेंट में बने कमरों की ओर गया तो गैलरी में उसे एक बच्चा रोता हुआ दिखाई दिया.

वह लपक कर बच्चे के पास पहुंचा. बच्चा 4 साल के आसपास रहा होगा. उस ने उसे गोद में उठा कर पुचकारते हुए पूछा, ‘‘क्या हुआ बेटा, मम्मी ने मारा क्या?’’

‘‘नहीं, मम्मी ने नहीं मारा. मम्मी को पापा मार कर भाग गए.’’ बच्चे ने कहा.

‘‘मार कर कहां भाग गए पापा?’’ मोहन ने पूछा तो बच्चा रोते हुए बोला, ‘‘पता नहीं?’’

मोहन बहादुर को पहले लगा कि पतिपत्नी में मारपीट हुई होगी या हो रही होगी, इसलिए बच्चा रोते हुए बाहर आ गया होगा. लेकिन अब उसे मामला कुछ और ही लगा, इसलिए उस ने पूछा, ‘‘मम्मी कहां हैं?’’

‘‘वह बाथरूम में पड़ी है.’’ बच्चे ने कहा.

‘‘तुम किस कमरे से बाहर आए हो?’’ मोहन ने जल्दी से पूछा तो बच्चे ने कमरा नंबर 102 की ओर इशारा कर दिया.

मोहन बच्चे को गोद में लिए कमरे के अंदर बने बाथरूम में पहुंचा तो वहां की हकीकत देख कर परेशान हो उठा. बाथरूम में एक महिला की अर्धनग्न लाश पड़ी थी. बच्चे ने उस लाश की ओर अंगुली से इशारा कर के कहा, ‘‘यही मेरी मम्मी है. पापा इन्हें मार कर भाग गए हैं.’’

लाश देख कर मोहन बच्चे को गोद में उठाए लगभग भागते हुए होटल के मैनेजर रामकुमार के पास पहुंचा. उस ने पूरी बात उन्हें बताई तो होटल में अफरातफरी मच गई. होटल के सारे कर्मचारी इकट्ठा हो गए.

मैनेजर रामकुमार ने स्वयं कमरे में जा कर देखा. लाश देख कर उन के भी हाथपांव फूल गए. उन्होंने तुरंत होटल मालिक राजकुमार और स्थानीय थाना नाका हिंडोला पुलिस को घटना की सूचना दी.

सूचना मिलते ही इंसपेक्टर विजय प्रकाश सिंह ने पहले तो इस घटना की सूचना पुलिस अधिकारियों को दी, उस के बाद खुद पुलिसकर्मियों को साथ ले कर सिंह होटल पहुंच गए.

होटल मालिक राजकुमार उन का इंतजार बाहर कर रहे थे. उन के पहुंचते ही वह उन्हें साथ ले कर बेसमेंट स्थित उस कमरे पर पहुंचे, जिस में लाश पड़ी थी. लाश कमरे के बाथरूम में अर्धनग्न अवस्था में थी. सरसरी तौर पर निरीक्षण के बाद उन्होंने मृतका के नग्न हिस्से पर कपड़ा डलवाया.

मृतका की उम्र 22-23 साल रही होगी. उस के गले को किसी तेज धारदार हथियार से काटा गया था, जिस से निकला खून गरदन से ले कर पीठ के नीचे तक जमीन पर फैला था.

इंसपेक्टर विजय प्रकाश सिंह लाश का निरीक्षण कर ही रहे थे कि एएसपी (पश्चिम) अजय कुमार और सीओ कैसरबाग हृदेश कठेरिया भी फोरेंसिक टीम के साथ होटल पहुंच गए. फोरेंसिक टीम घटनास्थल से साक्ष्य जुटाने में लग गई तो पुलिस अधिकारी होटल के मालिक और मैनेजर से पूछताछ करने लगे.

कमरे की तलाशी में ऐसी कोई भी चीज नहीं मिली, जिस से मृतका या उस के पति के बारे में कुछ पता चलता. पुलिस अधिकारियों ने बच्चे को अपने पास बुला कर पुचकारते हुए प्यार से पूछा, ‘‘बेटा, तुम्हारा नाम क्या है?’’

‘‘आयुष. यह मेरा स्कूल का नाम है. घर में मुझे सब शिवा कहते थे.’’ बच्चे ने जवाब में बताया.

‘‘तुम्हारी मम्मी को किस ने मारा?’’

‘‘पापा ने मारा है.’’

‘‘पापा ने मम्मी को कैसे मारा?’’ एएसपी अजय कुमार ने पूछा तो बच्चे ने कहा, ‘‘पहले तो पापा ने मम्मी को खूब मारा. मम्मी खूब रो रही थीं. फिर भी पापा उन को मारते रहे. पापा उन्हें मारते हुए बाथरूम में ले गए. वहीं मम्मी बेहोश हो गईं. मम्मी को मारते देख मैं जोरजोर से रो रहा था. पापा ने मुझे गोद में उठाया और बिस्तर पर लिटा दिया. कुछ देर में मैं सो गया. सुबह उठ कर देखा तो मम्मी मर चुकी थी. पापा नहीं दिखाई दिए तो मैं रोने लगा. रोते हुए कमरे से बाहर आया तो अंकल ने मुझे गोद में ले लिया.’’

पुलिस अधिकारियों ने बच्चे को एक महिला सिपाही के हवाले कर के उसे बच्चे को कुछ खिलाने पिलाने को कहा. इस के बाद होटल के मैनेजर रामकुमार से मृतका के बारे में पूछताछ की गई तो उस ने बताया, ‘‘कल यानी 15 सितंबर की रात 11 बजे एक आदमी पत्नी और बेटे के साथ आया था.

उस ने अपना नाम बबलू, पत्नी का सीमा और 4 वर्षीय बेटे का नाम आयुष उर्फ शिवा बताया. कमरा मांगने पर मैं ने उस से आईडी मांगी तो उस ने अपना आधार कार्ड दिया. तब काफी रात हो चुकी थी, इसलिए उस की फोटोकौपी नहीं हो सकती थी. इसलिए मैं ने उस का आधार कार्ड रख लिया और उसे कमरा नंबर 102 की चाबी दे दी. होटल का वेटर उस का सामान ले कर उसे कमरे तक पहुंचाने गया.

‘‘कमरे में जाने के कुछ देर बाद बबलू चारबाग गया और वहां से खाना ले आया. सुबह साढ़े 6 बजे बबलू ने मेरे पास आ कर कहा कि मुझे आधार कार्ड की जरूरत है इसलिए आप मुझे मेरा आधार कार्ड दे दीजिए. थोड़ी देर में दुकान खुल जाएगी तो मैं फोटोकौपी करा कर दे दूंगा. चिंता की कोई बात नहीं, मेरी पत्नी और बच्चा होटल में ही है.

‘‘मैं ने आधार कार्ड दे दिया तो वह कमरे में गया और अपना बैग ले कर चला गया. उस की पत्नी और बच्चा होटल में ही था, इसलिए मैं ने सोचा वह लौट कर आएगा ही. लेकिन वह लौट कर नहीं आया. जब आयुष रोता हुआ कमरे से बाहर आया तो पता चला कि वह पत्नी की हत्या कर के भाग गया है.’’

बबलू भले ही आधार कार्ड ले कर चला गया था, लेकिन उस का नंबर, उस पर लिखा पता और मोबाइल नंबर होटल के रजिस्टर में लिख लिया गया था. पुलिस ने उस का आधार नंबर, पता और मोबाइल नंबर नोट कर लिया. इस के बाद घटनास्थल की काररवाई निपटा कर लाश को पोस्टमार्टम के लिए मैडिकल कालेज भिजवा दिया गया.

कांस्टेबल रूपा तोमर हत्याकांड : दोस्ती और प्यार की खौफनाक कहानी

कांस्टेबल रूपा तोमर हत्याकांड : दोस्ती और प्यार की खौफनाक कहानी – भाग 4

1 मई को रूपा ने राहुल से मिलने आने को कहा. राहुल ने इनकार किया तो वह मिन्नत करते हुए बोली, ‘‘प्लीज राहुल आ जाओ, मैं तुम्हें सच बताना चाहती हूं. ऐसा कुछ नहीं है जैसा तुम सोच रहे हो.’’

राहुल तैयार हो गया. रूपा ने इंटरनेट के जरिए 1 मई का ट्रेन से उस का आरक्षण भी करा दिया. उस के साथ वक्त बिताने के लिए उस ने 24 घंटे की छुट्टी भी ले ली. एक दिन पहले रूपा ने मकान मालिक को भी बता दिया कि उस का मंगेतर उस से मिलने के लिए आएगा.

1 मई की दोपहर राहुल उस के पास गया. रूपा बहुत खुश थी. रूपा ने खाना बनाया और दोनों ने साथ खाना खाया. रूपा ने उसे बताया कि किस तरह लोगों ने उस का फायदा उठाने की कोशिश की. चूंकि वे लोग अपने इरादों में नाकामयाब रहे इसलिए उसे भड़का रहे हैं.

इसी बीच रूपा के मोबाइल पर 1-2 लोगों के फोन आए. इंसान के दिमाग में शक हो तो उसे सबकुछ वैसा ही दिखता है, जैसा उस के दिमाग में चल रहा होता है. राहुल के साथ भी यही हुआ. उसे लगा कि उस के पुरुष दोस्तों के फोन हैं और विवाह के बाद भी वह ऐसी ही रहेगी. इस तरह फोन आने पर दोनों के बीच काफी तनातनी हुई. इसी बीच राहुल ने एक खतरनाक निर्णय ले लिया.

दरअसल, रिश्ता होने के बाद एक दिन राहुल ने टीवी पर फिल्म ‘बाजीगर’ देखी थी. फिल्म में शाहरूख खान चालाकी से दुश्मन की बेटी को प्यार के जाल में फंसा कर पहले सुसाइड नोट लिखवाता है फिर उसे छत से फेंक देता है.

राहुल के पास जब रूपा के बारे में फोन आने शुरू हुए थे तो उस ने सोच लिया था कि अगर उसे रूपा पर विश्वास नहीं हुआ, तो वह भी उसे इसी तरह मार डालेगा. उस दिन जब रूपा के मोबाइल पर एकदो फोन आए तो राहुल ने मन ही मन ऐसा ही करने की योजना बना ली. इस के लिए सब से पहले उस ने प्यार जता कर रूपा को झांसे में लिया.

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राहुल

रूपा भावात्मक व आत्मिक रूप से उसे अपना मान चुकी थी और हर हाल में उस की होना चाहती थी. अपनी योजना के अनुसार राहुल ने कागज पैन उठाया और अपनी तरफ से सुसाइड नोट लिख कर रूपा को थमाते हुए बोला, ‘‘मैं तुम्हें इतना प्यार करता हूं. अब अगर मुझे कुछ भी हो जाए, उफ तक नहीं करूंगा. अब बोलो तुम भी मुझ से इतना ही प्यार करती हो?’’

‘‘बिलकुल.’’

‘‘तो ठीक है, जैसा मैं ने लिखा है, हिम्मत है तो तुम भी एक कागज पर लिख कर दो.’’

‘‘तुम्हारे लिए मैं जान भी दे सकती हूं राहुल, मैं ने तुम्हें अपना सब कुछ मान लिया है. फिर ये लाइनें क्या चीज हैं. लाओ लिख देती हूं.’’

राहुल से कागज पैन ले कर रूपा ने भी वैसा ही लिख कर दे दिया. इस के बाद राहुल हंस कर बोला, ‘‘अब तुम्हारा गला दबा दूं?’’

‘‘ये जान अब मेरी नहीं, तुम्हारी है राहुल. चाहे जो करो.’’ रूपा ने कहा तो राहुल दोनों हाथ आगे बढ़ा कर बोला, ‘‘ट्राई करें?’’

उस वक्त रूपा लेटी हुई थी. उस ने सोचा कि राहुल मजाक कर के उस की परीक्षा ले रहा है. राहुल ने उस के दोनों हाथों के पंजे उस की गरदन पर रख कर उन के ऊपर हलका दबाव बनाया तो रूपा कुछ नहीं बोली. वह इसे मजाक समझती रही. उसे नहीं पता था कि वह अपनी मौत को न्यौता दे रही है. राहुल ने इस का फायदा उठा कर कस कर उस की गरदन दबा दी और तब तक हाथ नहीं हटाए जब तक उस के प्राण नहीं निकल गए.

रूपा के हाथ उस के कब्जे में थे. उस की छटपटाहट रोकने के लिए वह उस के ऊपर बैठ गया था. इस तरह राहुल अपनी योजना में पूरी तरह कामयाब हो गया.

इस के बाद उस ने एक दुपट्टा ले कर कुंडे से बांधा और रूपा को उठा कर उस पर लटका दिया. फिर उस ने बिस्तर वगैरह ठीक किया. अपना लिखा सुसाइड नोट उस ने अपनी जेब में रखा और रूपा को उसी हालत में छोड़ कर चुपचाप वहां से निकल गया. उस ने सोचा था कि पुलिस इसे आत्महतया ही समझेगी. ऐसा हुआ भी, लेकिन पोस्टमार्टम रिपोर्ट ने सारी पोल खोल दी.

राहुल के बयानों के बाद पुलिस ने विशेष व राहुल को भी भारतीय दंड संहिता की धारा 109 का आरोपी बना लिया. पुलिस ने विशेष को भी गिरफ्तार कर लिया जबकि पूरे प्रकरण पर नजर रख रहा सिपाही सुशील तब तक ड्यूटी से फरार हो गया था. पुलिस ने दोनों गिरफ्तार आरोपियों को अदालत में पेश किया, जहां से उन्हें 14 दिन की न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया. कथा लिखे जाने तक पुलिस सुशील को गिरफ्तार नहीं कर सकी थी.

—कथा पुलिस सूत्रों पर आधारित

कांस्टेबल रूपा तोमर हत्याकांड : दोस्ती और प्यार की खौफनाक कहानी – भाग 3

रूपा विशेष को अपना दोस्त भी मानती थी और शुभचिंतक भी. उस ने इस बारे में विशेष को भी बताया. विशेष पहले ही कुढ़ा बैठा था. उस ने रूपा की हां में हां तो मिलाई पर अंदर ही अंदर जलता रहा. विशेष चाहता था कि रूपा की शादी किसी से भी न हो ताकि उसे और उस के घर वालों को यह पछतावा रहे कि विशेष से रिश्ता न कर के उन्होंने बहुत बड़ी भूल की है.

विशेष ने किसी तरह सुशील का पता लगाया और उस से संपर्क कर के रूपा के पुराने दिनों की बातें बता कर उसे भड़काने का प्रयास किया. लेकिन उस पर इस का कोई असर नहीं पड़ा.

उधर रूपा ने सुशील के बारे में अपने घर वालों से बात की. जब उन्हें पता लगा कि बेटी विवाह करना चाहती है, तो उन्होंने सुशील के बारे में पता लगाया. लेकिन उन्हें जो जानकारी मिली उसे उन के पैरों तले की जमीन खिसक गई. सुशील न सिर्फ विवाहित था बल्कि एक बच्चे का बाप भी था. यह बात रूपा को पता चली तो उस के सारे सपने टूट कर बिखर गए. वह समझ गई कि सुशील को विवाह की जल्दी क्यों नहीं थी.

दरअसल सुशील शादी के बहाने उसे भावनाओं के जाल में फंसा कर मन बहलाने का साधन बनाना चाहता था. इस झटके ने रूपा को अंदर तक हिला कर रख दिया. रूपा ने सुशील को जम कर खरीखोटी सुनाई और उस से पूरी तरह संपर्क तोड़ दिया. विशेष को इस से बहुत सुकून मिला, जबकि रूपा से अफसोस जता कर वह उस का सच्चा हितैषी होने का ढोंग करता रहा. इसी बीच सुशील का स्थानांतरण बागपत जिले में हो गया.

उधर रूपा के परिजनों ने उस के लिए रिश्ते की तलाश शुरू कर दी. मार्च, 2014 में यह तलाश राहुल के रूप में पूरी हुई. अच्छे परिवार का राहुल सीआरपीएफ में था. रूपा और राहुल ने एक दूसरे को पसंद कर लिया तो दोनों का रिश्ता पक्का हो गया. दोनों ही परिवार चाहते थे कि विवाह जल्द हो जाए. इसलिए 7 अप्रैल को सगाई की रस्म पूरी कर दी गई. विवाह के लिए भी 16 जून की तारीख तय हो गई.

सगाई होने के बाद रूपा और राहुल की मोबाइल पर बातें होने लगीं. रूपा ने राहुल को विश्वास दिलाया कि वह उसे बहुत प्यार करती है और हमेशा करती रहेगी. राहुल भी यह सोच कर मन ही मन खुश था कि उस ने होने वाली पत्नी के रूप में रूपा जैसी सुंदर व हंसमुख युवती का चुनाव किया है. रूपा की खुशी भी किसी से छिपी नहीं थी. उस ने सभी को बता दिया था कि एक महीने बाद उस का विवाह होने वाला है.

विशेष खुद को रूपा का हितैषी जताता था. वह प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहा था. इस के लिए वह जब तब रूपा से पैसे मांगता रहता था. वह भी यह सोच कर पैसे दे देती थी कि वह उस का दोस्त भी है और वक्त का मारा भी. रूपा नहीं जानती थी कि वह आस्तीन का सांप है.

विशेष को जब रूपा की सगाई और विवाह की योजना का पता चला, तो एक बार फिर उस पर बिजली सी गिरी. उस ने तय कर लिया कि वह इस रिश्ते को तुड़वा कर रहेगा. विशेष सुशील के नजदीक आ चुका था. पोल खुलने पर रूपा के हाथों हुई बेइज्जती की वजह से सुशील भी अपमान की आग में झुलस रहा था.

सुशील अपराध शाखा में रह चुका था. अपने संपर्कों का इस्तेमाल कर के उस ने सब से पहले रूपा की काल डिटेल्स हसिल की. इस से उसे उस नंबर का पता चल गया जिस पर वह सब से ज्यादा बात करती थी. वह नंबर राहुल का था. उस ने राहुल का नंबर विशेष को बता दिया. विशेष ने राहुल को एक दिन फोन कर के बताया कि वह रूपा से शादी न करे क्योंकि वह उसे प्यार करता है और उस से शादी करना चाहता है. विशेष ने अपना नाम बताए बिना राहुल के सामने शर्त रखी थी कि वह इस बारे में रूपा को कुछ न बताए.

भावी पत्नी के बारे में ऐसी बातें सुन कर राहुल का खून खौल गया. उस ने रूपा से इस मुद्दे पर बात की, तो उस ने इसे झूठ बताया. बहरहाल, दोनों के बीच तकरार और प्यार चलता रहा. धीरेधीरे राहुल को विश्वास हो गया कि कोई उसे भड़काने के लिए ऐसा कर रहा है.

राहुल को विश्वास में ले कर रूपा ने वह नंबर हासिल कर लिया जिस से राहुल को फोन किया गया था. वह नंबर विशेष का निकला. रूपा ने फोन मिला कर विशेष को खूब लताड़ा. उस ने सफाई देनी चाही, लेकिन रूपा ने उस की एक नहीं सुनी.

इस के बाद विशेष की हालत हारे हुए जुआरी जैसी हो गई. रूपा ने उस से बात तक करनी छोड़ दी. योजनानुसार इस के बाद सुशील ने राहुल को फोन कर के अपने और रूपा के रिश्ते की बातें बताईं और उस से दूर रहने को कहा. इन बातों से राहुल का दिमाग खराब हो गया. इस तरह विशेष और सुशील ने मिल कर उस के मन में शक का बीज बो दिया.

इस बात को ले कर रूपा और उस के बीच तकरार भी हुई. इधर यह सब चल रहा था और उधर रूपा का परिवार विवाह की तैयारियां करने में लगा था. इन बातों के बाद राहुल ने रूपा से बात करनी बंद कर दी तो वह विचलित हो गई. इस के बावजूद उस ने राहुल को विश्वास दिलाने के लिए उसे फोन करना जारी रखा. दोनों के बीच कई दिनों तक रूठने मनाने का दौर चलता रहा.

उधर विशेष भी राहुल को फोन कर के भड़काता रहा. जबकि रूपा राहुल को विश्वास दिलाती कि वह सिर्फ उसी से प्यार करती है और उस के लिए अपनी जान भी दे सकती है.

कांस्टेबल रूपा तोमर हत्याकांड : दोस्ती और प्यार की खौफनाक कहानी – भाग 2

पुलिस ने रूपा के मकान मालिक से भी पूछताछ की. उस ने एक ऐसी बात बताई जिस से पुलिस के शक को और भी बल मिला. रूपा ने मकान मालिक को एक दिन पहले बताया था कि उस का मंगेतर उस से मिलने के लिए आएगा.

यह जानने के बाद पुलिस ने राहुल के नंबर की सभी डिटेल्स हासिल कर लीं. उस से पता चला कि 1 मई की दोपहर से ले कर रात तक राहुल की लोकेशन बुलंदशहर में ही थी. इस के बाद उस ने अपना मोबाइल स्विच्ड औफ कर दिया था. शक को मजबूत आधार मिला, तो पुलिस ने रूपा के घर वालों की तरफ से राहुल के खिलाफ हत्या का केस दर्ज कर लिया. इस के बाद पुलिस उस की तलाश में जुट गई.

एक पुलिस टीम राहुल की तलाश में पटना रवाना कर दी गई. 14 मई को पुलिस राहुल को हिरासत में ले कर बुलंदशहर लौट आई. पुलिस की इस तरह की काररवाई से वह हक्का बक्का था. पुलिस ने उस से सीधा सवाल किया, ‘‘तुम ने रूपा की हत्या क्यों की?’’

‘‘मैं भला उस की हत्या क्यों करूंगा सर, वह मेरी मंगेतर थी. हम दोनों तो अपनी शादी से खूब खुश थे.’’ राहुल ने संक्षिप्त शब्दों में सीधा जवाब दिया.

‘‘तुम्हारा मोबाइल क्यों बंद था?’’

पूछने पर राहुल बोला, ‘‘मेरा मोबाइल खराब हो गया था. मुझे आप से ही पता चला है कि रूपा की हत्या हो गई है.’’

‘‘तुम्हारी रूपा से आखिरी मुलाकात कब हुई थी?’’

‘‘सगाई के बाद हम लोग एक बार मिले थे. वैसे मोबाइल पर हम बराबर बातें करते रहते थे.’’ राहुल के जवाबों से पुलिस समझ गई कि वह हद से ज्यादा चालाक भी है और झूठ बोलने में माहिर भी. लेकिन जब पुलिस ने उस के साथ सख्ती की तो वह टूट गया.

पहले वह खामोश हो कर शून्य को ताकता रहा, फिर उस ने कुबूल कर लिया कि रूपा की हत्या उस ने ही की थी और यह आइडिया उसे शाहरूख खान की फिल्म बाजीगर देख कर आया था. रूपा की हत्या की उस ने जो वजह बताई वह एक युवा लड़की के विश्वास व भावनाओं के साथ खिलवाड़ के बाद बेरहमी से हुए कत्ल की कहानी थी.

किसान परिवार में जन्मी रूपा होनहार युवती थी. उस की ख्वाहिश थी कि वह बड़ी हो कर पुलिस विभाग में नौकरी करे. यह सर्वविदित है कि उद्देश्य अगर पहले ही साफ हो जाए तो मंजिल तक पहुंचने की राहें आसान हो जाती हैं. रूपा के साथ भी ऐसा ही कुछ था. रूपा का परिवार आर्थिक रूप से बहुत ज्यादा सक्षम नहीं था. वह चाहती थी कि बड़ी हो कर परिवार के लिए कुछ करे.

इंसान की जिंदगी कई तरह की राहों से हो कर गुजरती है. इन राहों में बहुत से लोग मिलते बिछड़ते हैं. इन लोगों में किस से करीबी रिश्ते बन जाएं कोई पता नहीं होता. कालेज के दिनों में ही रूपा की मुलाकात विशेष कुमार से हुई. विशेष कुमार जिला मेरठ के खेखड़ा थाना क्षेत्र के गांव का रहने वाला था.

रूपा सुंदर व हंसमुख स्वभाव की थी. विशेष उसे पसंद करता था. वह पढ़ने में भी मेहनती था. विचार मिले तो दोनों के बीच दोस्ती हो गई. विशेष की पारिवारिक हालत काफी खराब थी. वह किसी भी तरह अपनी पढ़ाई पूरी कर के नौकरी करना चाहता था.

रूपा उन युवतियों में से थी जो दूसरों की पीड़ा को अपनी समझते हैं. एक दिन विशेष को परेशान देख रूपा ने उस से पूछा तो उस ने बताया कि वह फीस का इंतजाम नहीं कर पा रहा है. हो सकता है, फीस न भर पाने के कारण उसे पढ़ाई छोड़नी पड़े.

रूपा उस की बात सुन कर गंभीर हो गई. उस ने विशेष को समझा कर आश्वासन दिया कि वह उस की मदद करेगी. उस ने किसी तरह इंतजाम कर के विशेष को फीस के रुपए दे दिए. इस से वह बहुत खुश हुआ.

बीए करने के दौरान ही 2011 में उत्तर प्रदेश पुलिस में सिपाही के पद के लिए वैकेंसी निकलीं तो रूपा और विशेष ने तय किया कि वह इस के लिए प्रयास करेंगे. दोनों ने एकसाथ पंजीकरण फार्म भरा. चयन के लिए प्रतियोगी टेस्ट हुए, तो रूपा का चयन हो गया जबकि विशेष रह गया. इस से रूपा को तो दुख पहुंचा ही विशेष भी मन मार कर रह गया. रूपा का परिवार बेटी के पुलिस में जाने से खुश था. कुछ महीनों के प्रशिक्षण के बाद रूपा को तैनाती मिल गई.

2013 में रूपा का स्थानांतरण बुलंदशहर जनपद में हो गया. विशेष चूंकि अब तक कहीं नौकरी नहीं कर पाया था इसलिए वह परेशान रहता था. वक्त वक्त पर रूपा उस की आर्थिक मदद करती रहती थी. दोनों की इच्छा विवाह करने की थी, लेकिन रूपा का परिवार उस के परिवार की माली हालत की वजह से इस के लिए तैयार नहीं हुआ.

विशेष ने सोचा था कि उसे कमाऊ पत्नी मिलेगी तो उस के आर्थिक संकट दूर हो जाएंगे. रिश्ता नहीं होने से वह निराश हो गया. नतीजतन उस के दिल में प्रतिशोध की चिंगारी भड़कने लगी. उस ने मन ही मन फैसला कर लिया कि वह रूपा को किसी और की भी नहीं होने देगा. लेकिन उस ने अपने इरादे कभी जाहिर नहीं होने दिए. यह अलग बात थी कि मांगने पर रूपा उसे पैसे भेज देती थी.

रूपा की तैनाती देहात के थाने में थी. वहां उसे काफी दिक्कत होती थी. इसलिए वह शहर में आना चाहती थी. इसी दौरान उस की मुलाकात सिपाही सुशील जावला से हो गई. सुशील अपराध शाखा में तैनात था और मूल रूप से नव सृजित जिला शामली के थाना कांधला क्षेत्र के गांव भभीसा का रहने वाला था. वह काफी तेज तर्रार था. अधिकारियों के संपर्क में रहने से डिपार्टमेंट में उस की अच्छी पकड़ थी.

रूपा पहली ही नजर में सुशील के दिल में उतर गई. भावनात्मक स्वभाव की रूपा पुलिस की नौकरी में भले ही आ गई थी, लेकिन उस में न तो पुलिस जैसी तेजी थी और न ही उसे जमाने का तजुर्बा था. सुशील ने दोस्ती का हाथ बढ़ाया तो रूपा भी इनकार नहीं कर सकीं.

रूपा ने अपनी समस्या सुशील को बता दी थी. सुशील चाहता था कि रूपा पूरी तरह उस के जाल में फंस जाए, इसलिए उस ने अधिकारियों से अपने संबंधों का फायदा उठा कर रूपा को शहर लाने के प्रयास शुरू कर दिए. इस प्रयास में उसे सफलता मिली, जिस की बदौलत रूपा को शहर कोतवाली में तैनाती मिल गई.

दोनों के बीच मुलाकातों बातों का सिलसिला बढ़ा तो सुशील ने प्रेम का इजहार कर के रूपा के सामने शादी का प्रस्ताव रखा. एक तो सुशील अपनी ही जाति का था. दूसरे था भी मेरठ की तरफ का रहने वाला. इसलिए रूपा को यह ठीक लगा. उस ने सोचा कि सुशील भी चूंकि सरकारी नौकरी में है इसलिए दोनों का जीवन सुखमय रहेगा. शादी की बात करते समय सुशील ने एक बात साफ कर दी थी कि वह शादी 2 साल से पहले नहीं करेगा. उस ने चूंकि रूपा को खूब सपने दिखाए थे, इसलिए वह 2 साल बाद भी शादी करने को तैयार थी.