Love Story : प्रेमिका पर शोला बनी नफरत की चिंगारी

Love Story : 20 साल की सायरा गांव के ही 20 वर्षीय मोहम्मद रफी उर्फ आरिफ को दिल दे चुकी थी. उन की मोहब्बत अमरबेल की तरह बढ़ रही थी. यह बात मोहम्मद रफी ने फोन कर के प्रेमिका की अम्मी को भी बता दी थी. इसी दौरान ऐसा क्या हुआ कि दिलोजान से सायरा को चाहने वाला मोहम्मद रफी उस की जान का दुश्मन बन गया? उस ने पेचकस से गोद कर प्रेमिका का बदन छलनी कर दिया. पढ़ें, यह सनसनीखेज लव क्राइम स्टोरी.

आधी रात बीत चुकी थी. नींद आंखों से कोसों दूर थी. दर्द से जिस्म के कई अंग बुरी तरह से दुख रहे थे. 20 वर्षीय मोहम्मद रफी उर्फ आरिफ किसी तरह से तकलीफ बरदाश्त कर रहा था. दवा खाने के बाद थोड़ा आराम हुआ तो कई तरह के खयाल दिमाग में घूमने लगे कि सायरा ने ऐसा कदम क्यों उठाया? वह तो मेरी प्रेमिका थी. उस ने तो हमेशा की तरह मुझे बड़े प्यार से फोन कर के बुलाया था.

मैं उस के घर के करीब पहुंच भी नहीं पाया था कि मुझे 4-5 युवकों ने डंडों से पीटना शुरू कर दिया. इतना पीटा कि मैं बेबस हो कर जमीन पर गिर गया. इतने में आसपास के लोग आए और मुझे उन के चंगुल से बचाया. आखिर मेरी खता क्या थी? मेरा प्यार तो एकतरफा नहीं था. वो भी मेरे पहलू में इस तरह चिपकी रहती, मानो जिंदगी भर ऐसे ही टूट कर मुझे चाहती रहेगी.

मिलन का हर पल मोहब्बत से भरा था. हर वक्त जिंदगी भर साथ निभाने की कसम खाई थी. फिर ऐसा क्यों हुआ? क्या अब उस की जिंदगी में कोई और आ गया है? मुझ से उस का मोह भंग हो गया है? क्या वह मेरे साथ बेवफाई कर रही है? उसे मुझ से मोहब्बत थी या मोहब्बत का वह नाटक करती थी? ऐसे खयालों का बहुत रात तक मोहम्मद रफी के मनमस्तिष्क में मेला लगा रहा. न जाने कब नींद आ गई.

सुबह आंखें खुलीं तो सूरज अपना साम्राज्य स्थापित कर चुका था. दोपहर होने को थी. करीब 11 बज चुके थे. सुबह उठ कर दिनचर्या से निपटने के बाद मोहम्मद रफी फिर सोच में डूब गया. उस ने अंदाजा लगाया कि यह काम सायरा के गांव के ही किसी नए आशिक का है, जिसे अब सायरा जीजान से चाहने लगी है. मुझे क्या करना चाहिए? बेवफाई का कुछ तो सिला सायरा को मिलना चाहिए. मैं ने तो उस से सच्ची मोहब्बत की थी. ऐसी हालत में मैं अब जिंदा रह कर क्या करूंगा.

तभी उस की मर्दानगी ने उसे झिंझोड़ा. कहा, ‘मर्द का काम मायूस होना नहीं है. अपनी जिंदगी तबाह कर के कुछ भी हासिल नहीं होगा. इस के लिए तो उस की जिंदगी खत्म करनी चाहिए, जो मेरी मोहब्बत को तबाह करने का जिम्मेदार है.’

फिर खयाल आया कि उस के नए आशिक को अगर मौत के घाट उतार भी दूं तो अब वह फिर भी मेरी नहीं होगी. अब तो एक ही रास्ता है कि सायरा को ही इस दुनिया से विदा किया जाए. यह आखिरी खयाल मोहम्मद रफी के दिल में घर कर गया और उस ने इरादा कर लिया कि वह अब सायरा को ठिकाने लगा कर ही दम लेगा.

उत्तर प्रदेश के जिला मुरादाबाद क्षेत्र में स्थित है थाना मैनाठेर. यह थाना मुरादाबाद से संभल जाने वाले मार्ग पर स्थित है. इस थाने से करीब आधा किलोमीटर की दूरी पर है गांव मिलक मैनाठेर. यहां आले हसन नाम के एक व्यक्ति का परिवार रहता था. आले हसन की मौत करीब 4 साल पहले हो चुकी है. उन की पत्नी सफीना अपने बच्चों के साथ मेहनतमजदूरी कर के गुजरबसर करती थी. इन के 6 बच्चे थे, जिस में 2 बेटे व 4 बेटियां थीं.

सब से बड़ी बेटी रेशमा और गुलशन  व गुलिस्ता हैं. तीनों का विवाह हो चुका है. बड़ा बेटा बबलू है, जो केरल में हेयर कटिंग का काम करता है. छोटा भाई जीशान है. वह गांव में ही रहता है. बड़े भाई की शादी हो चुकी है. पत्नी का नाम नाजरीन है. पांचवें नंबर की बेटी सायरा करीब 20 साल की थी.

खूबसूरती की मिसाल थी सायरा

सायरा जवानी के अखाड़े में उतर चुकी थी. उस की खूबसूरती और पर्सनैलिटी के चर्चे उस के सभी रिश्तेदारों में होने लगे. कई परिवार चाहते थे कि सायरा उन के घर की बहू बने. गांव में भी सायरा के दीवानों की कमी नहीं थी. उसे जो भी एक नजर देख लेता, वह देखता ही रह जाता था. उस के गाल पर एक छोटा सा तिल उस की सुंदरता को अनूठा आकर्षण प्रदान करता था. उस की गहरी काजल लगी आंखें एक रहस्यभरी चमक से भरी थीं, जो किसी को भी अपनी ओर खींच लेने के लिए काफी थीं. उस की आंखों की गहराई में डूब कर कोई भी खुद को भूल सकता था.

गुलाबी होंठों पर हमेशा एक हलकी मुसकान खेलती रहती, जो उसे और भी मोहक बना देती. उस की गरदन की सुडौल बनावट और उस पर झूलती आर्टिफिशल ज्वैलरी की पतली चेन उस की खूबसूरती को और निखार देती. जब वह धीमे कदमों से सिर पर चारे की गठरी या टोकरी को दोनों हाथों को ऊपर कर के पकड़ कर चलती, उस की चाल में एक अनजाना आकर्षण छलकता, मानो हर कदम पर किसी संगीत की ताल बज रही हो. उस की त्वचा दमकती हुई थी, जैसे चांदनी की हलकी परछाई किसी शांत झील पर पड़ रही हो. जिस्म से चिपका मामूली सा सस्ते दामों वाला कसा हुआ सलवारकुरता उस के सुडौल शरीर की ख़ूबसूरती को और उभारता.

उस की कमर की कोमल लचक, किसी वसंत की डाली की तरह थी, जो हलकी हवा में मचल उठे. उस की आवाज में एक मदहोश कर देने वाली कोमलता थी, जो दिल में उतर जाती. उस की हंसी में एक अनोखी खनक थी, जो कानों में मिश्री घोल देती थी. उस के चेहरे पर हर समय एक आत्मविश्वास की झलक थी, जो उसे और भी दिलकश बनाती थी. वह खूबसूरत ही नहीं, बल्कि अपने हावभाव से और भी मोहक लगती थी. उस की हर अदा में एक कशिश थी, जो किसी को भी उस की ओर खींचने के लिए काफी थी.

उस की हंसी, उस की मासूमियत और उस की अदा, तीनों मिल कर उसे एक ऐसी जादूगरनी बना देतीं, जिस से बच पाना किसी के लिए भी आसान नहीं था. कह सकते हैं कि गुदड़ी में छिपा एक लाल थी. क्योंकि वह एक गांव में रहती थी. गरीब परिवार था, फिर भी बिरादरी से कई लोग रिश्ते के लिए डिमांड कर चुके थे. शादी के लिए पर्याप्त धन न होने के कारण उस के फेमिली वालों ने कोई रिश्ता स्वीकार नहीं किया था. वह नाई बिरादरी से थी. इस बिरादरी का ग्रामीण क्षेत्र में पिछड़ापन अभी स्पष्ट रूप से देखा जा सकता है. मुरादाबाद जिले में नाई बिरादरी के लोगों की आर्थिक और सामाजिक स्थिति मैं अभी आशातीत सुधार नहीं हुआ है. इस बिरादरी की खूबी यह है कि हर गांव में इन के 1-2 परिवार जरूर होते हैं.

नाई एक पारंपरिक सेवा जाति है, जीवन के तमाम सामाजिक, धार्मिक अवसरों जन्म, विवाह आदि सभी तरह के संस्कारों  में इन की भूमिका रहती थी. परंपरागत पेशा बाल काटना, दाढ़ीमूंछ संवारना, नाखून कटाई आदि सेवाएं भी इन के द्वारा दी जाती रही हैं. इस के बदले गांव के किसान इन्हें पालनपोषण के लिए पर्याप्त पैसे और फसल में अनाज दिया करते थे. अब स्थिति बदल चुकी है. लोगों को हेयर कटिंग की दुकान खोल कर उसी पर निर्भर रहना पड़ता है.

ग्रामीण क्षेत्र में अब इस पेशे का स्कोप नहीं है. गांव में रहने वाले इस बिरादरी के लोग अपने परिवार की गुजरबसर करने के लिए दूसरे प्रदेशों और बड़े महानगरों में जा कर नौकरी करते हैं. कुछ नाई आर्थिक रूप से मजबूत हैं, जबकि कुछ अभी भी गरीबी में जीवनयापन कर रहे हैं. सामाजिक रूप से वे सम्मान और प्रतिष्ठा भी अभी उन्हें हासिल नहीं हुई है.

कुछ क्षेत्रों में अभी भी भेदभाव का सामना करना पड़ता है. आधुनिक सैलून एवं ब्रांडेड सेवाओं के कारण यह पेशा दबता जा रहा है. अधिकांश परिवार अब भी छोटे फुटपाथ,पैंठ बाजार में सैलून या घरों पर कुरसीआईना जैसी अनौपचारिक व्यवस्थाओं में काम करते हैं. आधुनिक सैलून संचालित पूंजीपतियों के दबाव से उन्हें औपचारिक रोजगार में भी न्यूनतम मजदूरी पर काम करना पड़ता है.

खेत में मिला सायरा का शव

मुरादाबाद जिले के मैनाठेर थाना क्षेत्र के गांव मिलक मैनाठेर के रहने वाले आले हसन की 20 साल की बेटी सायरा 31 मई, 2025 की शाम को बकरियों को चारा लेने के लिए खेतों की तरफ गई थी. शाम से रात होने का वक्त आ गया, लेकिन सायरा घर नहीं लौटी तो घर वालों को चिंता होने लगी. मां तो मां ही होती है. पड़ोस की एक उस की चाची भी उस के पीछेपीछे घास काटने गई थी. वह वापस आ गईं. सायरा की अम्मी सफीना ने चाची के घर जा कर पता किया. उन्होंने बताया कि मैं तो उस तरफ ही भिंडी के खेत में चली गई थी. सायरा आगे निकल गई थी. उस के बाद मुझे पता नहीं.

सफीना फिर जंगल की तरफ गई. खेतों के पास मेड़ पर जा कर आवाज देती रही, ‘सायरा.. सायरा…सायरा…’ सायरा जिंदा होती तब बोलती भी. फेमिली वाले खुद ही सायरा को ढूंढते रहे. काफी रात बीतने के बाद भी पुलिस को इस बारे में कोई सूचना नहीं दी. बेइज्जती के डर से उन्होंने पुलिस को कुछ भी नहीं बताया और खुद ही पूरे परिवार के लोग मिल कर सायरा को खोजने लगे.

अपने रिश्तेदारों और गांव के लोगों को भी इन लोगों ने कुछ नहीं बताया. उन का मानना था कि इस से पूरे गांव में बदनामी हो जाएगी, फिर लड़की की शादी में दिक्कत आएगी. रात भर खोजने के बाद भी सायरा का कोई सुराग नहीं मिला. इस के बाद भी फेमिली वालों ने सुबह तक भी इस बात की जानकारी पुलिस को नहीं दी. पहली जून, 2025 सुबह फिर सफीना बेटी को ढूंढने जंगल में गई. करीब 11 बजे सफीना उसे घर के आसपास से खोजती हुई दूर तक खेतों में तलाश कर रही थी. खोजते हुए वह नरोदा रोड पर स्थित मंदिर के पास जब्बार के मक्का के खेत में पहुंची.

खेत में उसे अपनी बेटी सायरा की खून से लथपथ लाश पड़ी दिखी. कपड़े पूरी तरह से खून से भीगे हुए थे, जिसे देख कर सफीना के होश उड़ गए और वह चीखते हुए गांव की तरफ भागी. सफीना की चीख सुन कर गांव में हड़कंप मच गया. गांव के लोगों ने उस से पूछा तो सफीना ने बताया कि उस की बेटी की लाश जब्बार के मक्के के खेत में पड़ी हुई है. बुरी तरीके से उसे किसी धारदार हथियार से गोदा गया है. मतलब कई जगहों पर घाव के निशान हैं. सायरा के फेमिली वाले घटनास्थल पर पहुंच गए. उन का रोरो कर बुरा हाल था. मां तो कई बार रोतीरोती बेहोश हो जाती.

गांव के लोगों से इस परिवार का रोनाबिलखना देखा नहीं जा रहा था. देखते ही देखते जंगल की आग की तरह सायरा की लाश मिलने की खबर पूरे गांव में फैल गई. घटनास्थल पर गांव का मजमा जमा हो गया. उसी दौरान किसी ने इस बात की सूचना थाना मैनाठेर पुलिस को दे दी. जवान लड़की की हत्या की खबर मिलते ही पुलिस महकमे में भी हड़कंप मच गया. तुरंत पुलिस की टीम और तमाम बड़े अफसर इस मामले की जांच के लिए घटनास्थल पर पहुंच गए. सूचना मिलने तत्काल ही एसएसपी सतपाल अंतिल और एसपी (देहात) कुंवर आकाश सिंह भी मौके पर पहुंचे.

घटनास्थल पर भारी भीड़ एकत्र हो गई थी. पुलिस ने घटनास्थल से भीड़ को थोड़ा दूर किया, फिर भी दूर खड़े हो कर भारी संख्या में महिलाएं और पुरुष पुलिस की काररवाई का नजारा करते रहे. फोरैंसिक टीम ने घटनास्थल की फोटोग्राफी के साथ साक्ष्य एकत्र किए फुटेज तैयार की. लाश देख कर पुलिसकर्मियों की भी रूह कांप गई. युवती के चेहरे एवं उस के प्राइवेट पाट्र्स पर चोटें थीं. इस में 30 से ज्यादा वार सायरा पर किए गए. मौके की काररवाई पूरी कर पुलिस ने पोस्टमार्टम के लिए शव को जिला मुख्यालय भेज दिया.

आंखों के रास्ते दिल में ऐसे उतरी सायरा

गांव मिलक मैनाठेर में ही करीब 20 साल का एक युवक मोहम्मद रफी उर्फ आरिफ भी रहता था. इस का मकान सायरा के मकान से थोड़ी ही दूरी पर स्थित था. गांव में ही इस की मुरगा मीट की दुकान थी. परिवार की कोई खास जिम्मेदारी रफी पर नहीं थी. उस का रंग गेहुआं था, न तो बहुत सांवला, न उजला. बल्कि खेतों की पकी हुई मिट्टी जैसा, जिस में परिश्रम और धूप की तपिश रचीबसी हो. शरीर दुबलापतला, मगर मजबूत था.

छाती चौड़ी नहीं, मगर मेहनत से उभरी हुई पसलियां उस की साधना का प्रमाण देती थीं. कंधे तीखे और हड्डीदार, जैसे किसी नए पेड़ की शाखाएं, जो अभी पूरी तरह से मजबूत नहीं हुईं, लेकिन उन में जीवन की जिद ठहर गई हो. उस के हाथ लंबे और पतले थे, हथेलियों की रेखाएं गहरी और खुरदरी थीं. चेहरे पर कभीकभी एक महीन दाढ़ी की परछाईं उतर आई थी, जो उस की जवानी का मूक परिचय थी.

आंखें गहरी और नीची पलकों में शराफत दिखाई देती. उस की चालढाल सीधीसादी थी, मगर उस में एक गैरजाहिर आत्मविश्वास था. जैसे वह न तो दुनिया को रिझाने आया हो, न डराने, बस अपना काम करना जानता हो और उसी में संतोष ढूंढता हो. वह युवक किसी वीर या राजकुमार जैसा नहीं दिखता था, लेकिन मुरगों की गरदन काटतेकाटते उस का दिल सख्त हो गया था.

जवान होने की वजह से अपनी कमाई से अपने शरीर पर काफी खर्च करता. फिल्मों के हीरो की तरह कपड़ों का शौकीन था. बालों की कटिंग भी उस की निराली थी. कोई भी लड़की उसे अपने सपनों का राजकुमार कुबूल कर सकती थी. बात करीब 2 साल पहले की है. सायरा का बकरी का बच्चा (मेमना) घर से बाहर निकल कर उछलकूद करने लगा. सायरा बकरी के बच्चे को पकडऩे घर से निकली. बकरी के बच्चे ने दौड़ लगा दी. सायरा उस के पीछेपीछे दौड़ी. कई लोगों से उस ने कहा कि बकरी के बच्चे को पकड़ लो. किसी ने अनसुना कर दिया, किसी ने पकडऩे की कोशिश की, मगर वह उस के के हाथ न आया.

भागतेभागते बकरी का बच्चा एक घर में घुस गया. आननफानन में बच्चे का पीछा कर रही सायरा जैसे ही उस घर में घुसी, उस घर के दरवाजे से बाहर निकल रहे एक युवक से उस की टक्कर हो गई. सायरा को गिरने से रोकने के लिए दोनों हाथों से उस युवक ने उसे पकड़ लिया. बदहवास सायरा उस की बाहों में समा गई. अपने आप पर काबू करते हुए जब युवक ने सायरा को देखा तो देखता ही रह गया. इतनी हसीन लड़की अपने आप ही उस की बाहों में आ गई. उस की पकड़ से छूटने के बाद सायरा भी युवक को देखती रही और आंखों के रास्ते से सायरा युवक के दिल में उतर गई. दोनों ने अपनीअपनी गलती मानते हुए एकदूसरे को पछतावे भरी नजरों से देखा.

सायरा मुसकराई तो वह युवक भी मुसकरा दिया. सायरा ने शरमाते हुए अपने दुपट्टे को संभाला तथा झपट कर बकरी का बच्चा पकड़ा और उसे ले कर अपने घर आ गई. यह युवक और कोई नहीं मोहम्मद रफी उर्फ आरिफ ही था. दिन तो किसी तरह कट गया. हालांकि दुकान पर ग्राहक ज्यादा नहीं आए. बीचबीच में सायरा का चेहरा उस की निगाहों में आता, फिर कोई ग्राहक आ जाता तो खयाल टूट जाता. रात को जब आराम के लिए बिस्तर पर लेटा. फुरसत के क्षणों में सायरा की तसवीर ही उस की आंखों में घूमने लगी. वह उस के खयालों में डूब गया. उस ने खुद से सवाल किया, यह तो बबलू की बहन है. मेरी जाति बिरादरी की भी नहीं है. क्या यह मुझे पसंद करेगी? फिर खुद ही चुप हो गया.

हर बार उस की आंखों में वही चेहरा लौट आता. हसीन सायरा के बारे में जाने क्याक्या सोचतेसोचते उसे नींद आ गई. मोहम्मद रफी ने अपने दोस्तों से बबलू की बहन के बारे में कुछ प्रारंभिक जानकारियां जुटाईं. मुरगा मीट की दुकान सुबह 10 बजे के बाद ही खोली जाती थी. सुबहसुबह कोई ग्राहक नहीं आता. मोहम्मद रफी ने सायरा की एक झलक पाने के लिए उस की गली के चक्कर काटने शुरू कर दिए. अब रोज उसी रास्ते से जाता, धीरेधीरे चलता, उस मोड़ पर कुछ ज्यादा ही ठहरता. कई दिनों तक उस की मुलाकात या उस का सामना सायरा से नहीं हुआ. वह टाइम बदलबदल कर जाने लगा. एक दिन उस की मुराद पूरी हो गई.

सायरा दरांती और बोरा ले कर घर से निकल ही रही थी, सामने रफी को देख कर एकदम चौंक गई. दरांती उस के हाथ से नीचे गिर गई. उस का चेहरा लाल पड़ गया. मुसकराती और शरमाती हुई वह एकदम पीछे हटी. दरवाजा बंद कर के घर में चली गई. रफी का दिल भी तेजतेज धड़कने लगा. उस ने किसी तरह अपने पर काबू किया. इधरउधर नजर दौड़ाई, किसी ने देखा तो नहीं है. फिर लौट कर घर आ गया. उसे महसूस हुआ कि आग दोनों तरफ बराबर लगी हुई है.

आखिरकार रफी एक दिन जंगल में चारा काट रही सायरा के पास पहुंच गया. सायरा भी रफी को देख कर खड़ी हो गई. रफी ने हिम्मत कर के लडख़ड़ाती जुबान से कहा, ”मैं तुम से प्यार करता हूं. मुझे अपना मोबाइल नंबर दे दो.’’

यह कह कर रफी ने अपनी जेब से मोबाइल निकाला. सायरा ने नंबर बताया और रफी यह कह कर चल दिया कि बाकी बातें फोन पर होंगी.

सायरा में अचानक क्यों आया बदलाव

इस तरह दोनों के बीच प्रेम का सिलसिला शुरू हो गया. फोन पर बात होती रहती और फिर मिलने का जब भी मौका मिलता तो 2 जिस्म एक जान हो जाते. प्यार का यह खेल डेढ़ साल तक खूब चलता रहा. उस के बाद  रफी बीमार हो गया. जिस के चलते मिलने का सिलसिला कम हो गया. फोन पर भी अधिक बात नहीं हो पाती थी. इसी दौरान रफी को अपेंडिक्स का औपरेशन भी कराना पड़ा, जिस से वह शारीरिक और आर्थिक रूप से कमजोर हो गया. अपने स्वास्थ्य की परेशानी से उबरने के बाद प्यार का जुनून फिर रफी के सिर चढ़ कर बोलने लगा, लेकिन अब देर हो चुकी थी. सायरा से पहले जैसा व्यवहार रफी को नहीं मिल पाया. इस से रफी चिंतित हो गया. अब तो वह जब भी फोन मिलाता, उस का फोन बिजी मिलता.

यदि कभी फोन मिल भी जाता तो सायरा किसी भी व्यस्तता का बहाना बता कर फोन काट देती. रफी को शक हो गया कि सायरा ने किसी और को अपना बौयफ्रेंड बना लिया है. रफी सायरा से मिलने को बेताब रहता, लेकिन उस की सायरा से मुलाकात नहीं हो पा रही थी. सायरा ने रफी का फोन रिसीव करना भी बंद कर दिया.

एक ही गांव की बात थी. दोनों के घर के बीच ज्यादा दूरी भी नहीं थी. संबंधों में कटुता की बात सायरा के घर में भी पता चल गई थी. उधर रफी का दीवानापन आक्रामक होता जा रहा था. एक दिन उस ने सायरा को रास्ते में रोक कर बात की. जिस पर सायरा ने रफी से साफ इनकार कर दिया. कहा कि वह अब उस का पीछा न करे नहीं तो अंजाम बुरा होगा. उस समय रफी घर वापस चला गया. उसे मानसिक तनाव हो गया, जिस की वजह से रात भर नींद भी नहीं आई.

दूसरे दिन उस ने फिर सायरा को फोन मिलाया तो फोन उस की मम्मी सफीना ने उठाया. रफी ने कहा कि मैं सायरा से बहुत प्यार करता हूं, उस से शादी करना चाहता हूं. अगर आप कहें तो इसलामी परंपरा के अनुसार रिश्ते की शुरुआत की जाए. यह सुन कर सफीना को बहुत गुस्सा आया, लेकिन उस ने अपने गुस्से पर काबू पाते हुए कहा कि 1-2 दिन में मैं बताती हूं. फिर घर आ जाना, बैठ कर बात हो जाएगी.

पिटाई के बाद आया नफरत का उबाल

सायरा के फेमिली वाले रफी पर चढ़े आशिकी के भूत को उतारने की प्लानिंग कर चुके थे. 2 दिन बाद ही सायरा का फोन आया, ”घर आ जाओ, मम्मी बुला रही हैं.’’

रफी सायरा के घर जाने के लिए निकला तो रास्ते में ही उसे 4-5 युवकों ने मिल कर बुरी तरह पीट दिया था, जिस से उसे अंदरूनी चोटें आईं. इस के बाद रफी सायरा से नफरत करने लगा था.

सायरा की पोस्टमार्टम रिपोर्ट में जिस्म पर 30 गहरे घाव मिले. रिपोर्ट के अनुसार कातिल ने मृतका का गला भी दबाया था. सफीना ने मोहम्मद रफी उर्फ आरिफ के खिलाफ नामजद रिपोर्ट दर्ज करा दी. एसपी (देहात) कुंवर आकाश सिंह ने रफी को पकडऩे के लिए 3 टीमें गठित कीं. एसओजी को भी जांच में लगाया गया. थाना मैनाठेर के एसएचओ किरण पाल अपनी टीम के साथ रफी की तलाश में जुट गए. थोड़ी कोशिश के बाद रफी को गिरफ्तार कर लिया गया.

पुलिस ने उस से पूछताछ की तो सामने आया कि पिटाई की घटना के बाद रफी कई दिनों तक सायरा का पीछा करता रहा. बताया जाता है कि सायरा को मारने के लिए रफी ने तमंचे की भी तलाश की, लेकिन तमंचा और कारतूस मिलना आसान नहीं था. अवैध रूप से तमंचे और कारतूस बेचने वाले मोटी रकम भी मांग रहे थे. तमंचा और कारतूस ले कर घर से निकलना भी खतरे से खाली नहीं था. कहीं पुलिस की चैकिंग हो जाए तो वह अपना मिशन पूरा करने से पहले ही जेल चला जाएगा. मुरगा काटने वाले तेज धार वाले चाकू छुरी उस के पास हर समय उपलब्ध थे, लेकिन चाकू छुरी ले कर घूमना भी सही नहीं था, क्योंकि यह पता नहीं था कि सायरा कब उस के हत्थे चढ़ेगी.

सायरा की हत्या के लिए उस ने पेचकस का चुनाव किया एवं एक बड़ा पेचकस रख कर सायरा की तलाश करता रहा. 31 मई, 2025 को रफी उस का पीछा करते हुए खेत में पहुंच गया. खेत में घुसते ही रफी ने पेचकस उस की कोख में घुसेड़ दिया. पेचकस निकाला तो खून की धारा बहने लगी. सायरा समझ ही नहीं पाई के मामला क्या है? सायरा मक्के के खेत में बैठी हुई दरांती से घास काट रही थी. पहली वार में ही वह ढेर हो गई. उस के हाथ से दरांती दूर जा गिरी. उस ने किसी तरह हिम्मत कर के उठ कर देखा तो सामने उस का प्रेमी मोहम्मद रफी खड़ा था. वह कुछ कह पाती, उस से पहले उस ने पेचकस से दूसरा वार उस के पेट पर कर दिया.

जब सायरा दर्द से तड़पने लगी और रफी से अपनी जान की भीख मांगने लगी तो उस ने उस के गुप्तांगों में पेचकस घोंप दिया. खूंखार प्रेमी ने एक विलेन की तरह प्राइवेट पार्ट और पूरे शरीर पर पेचकस से 30 वार किए. इस पर भी उसे तसल्ली नहीं हुई तो उस ने नब्ज टटोल कर देखा. उसे लगा कि अभी सायरा जीवित है. फिर उस ने उस के दुपट्टे से उस का गला घोंट डाला. इस के बाद उस ने उसे हिलाया और जब उसे यकीन हो गया कि सायरा मर चुकी है, तब शव को मक्का के खेत में छिपा दिया. वह घर गया, नहाया, अपने कपड़े बदले और सो गया. मोहम्मद रफी ने अपनी गर्लफ्रेंड का इतनी क्रूरता से कत्ल किया कि जिस ने भी सायरा का शव देखा, वह सन्न रह गया. पुलिस को आरोपी मोहम्मद रफी उर्फ आरिफ के पास से सायरा का मोबाइल फोन मिला.

पुलिस को जांच में पता चला है कि सायरा और रफी के बीच एक महीने में 500 से अधिक बार बात होती थी. आरोपी ने बताया है कि उसे शक था कि सायरा किसी दूसरे युवक से बात करती है. पोस्टमार्टम में दुष्कर्म की पुष्टि नहीं हुई. पुलिस ने मोहम्मद रफी उर्फ आरिफ से पूछताछ करने के बाद उसे कोर्ट में पेश किया, जहां से उसे जेल भेज दिया गया. Love Story

 

 

Hindi Best Stories : प्यार की परख

Hindi Best Stories : फेमिली वालों की मरजी से अपने प्रेमी बैंक मैनेजर आशुतोष वर्मा से शादी कर के सुधा खुश थी. पति का मुंबई ट्रांसफर हो जाने के बाद सुधा एक एनजीओ खोल कर गरीबों व जरूरतमंदों की सेवा करने लगी. एनजीओ के सहयोग से पुलिस ने रेडलाइट एरिया में छापा मारा तो कोठे से बरामद नाबालिग लड़कियों के साथ माधुरी को देख कर सुधा चौंक गई. माधुरी कालेज में साथ पढऩे वाली उस की पक्की सहेली थी. माधुरी वेश्यावृत्ति के अड्डे तक आखिर कैसे पहुंची? पढ़ें, यह सस्पेंस से भरी रोमांटिक कहानी.

सुबह का सूरज आसमान में फैली लालिमा से निकल कर बाहर आया तो सुनहरी धूप खिल गई. सुधा 4 बजे ही बिस्तर से उठ कर स्नान आदि .से निवृत्त हो जाती थी. फिर घर के मंदिर में वह पूजा की थाली ले कर पहुंच जाती थी. यह उस का रोज का नियम था. उस के फेमिली वाले जानते थे कि सुधा संस्कारी लड़की है. मंदिर में उस का साथ देने के लिए वे सब भी नहाधो कर उपस्थित होते थे. उस दिन भी मंदिर की घंटी जैसे ही बजी, सुधा के दादा दीनानाथ, मम्मी जानकी और छोटी बहन कुसुम मंदिर में आ कर खड़े हो गए.

सुधा ने बड़े श्रद्धा भाव से राधाकृष्ण की पूजा की, आरती गाई, फिर मूर्ति के चरणों में नमन करने के बाद वह आरती की थाली ले कर दादाजी के पास आ गई. उस ने झुक कर एक हाथ से दादाजी के चरण स्पर्श किए, फिर पूजा की थाली उन के सामने बढ़ा दी.

दादाजी ने पूजा की थाली में जल रहे आशुतोष पर दोनों हथेलियां घुमा कर हथेलियों को आंखों से स्पर्श किया और सुधा के सिर पर हाथ रख कर प्यार से बोले, ”बेटी, सुबहसुबह तुम्हारी मधुर वाणी से आरती सुन कर मन को बहुत शांति मिलती है, मेरी आत्मा प्रसन्न हो जाती है.’’

सुधा मुसकरा कर मम्मी जानकी के करीब आ गई. पहले उस ने मम्मी के चरण छुए, फिर पूजा की थाली उन के सामने करते हुए बोली, ”आरती लो मम्मी.’’

जानकी ने आरती ली और दादाजी से बोली, ”सुधा में आप के ही संस्कार हैं पिताजी, आज अगर इस के डैडी जीवित होते तो वह अपनी संस्कारी बेटी को देख कर फूले नहीं समाते.’’

दीनानाथ की आंखें सजल हो आईं, वह ठंडी सांस भर कर बोले, ”हां बहू! इस तेजी से बदल रहे समाज में ऐसे बच्चे हर किसी को कहां नसीब होते हैं. तुम भाग्यवान हो जो इस प्यारी बेटी ने तुम्हारी कोख से जन्म लिया.’’

दीनानाथ कुछ और कहते कि तभी सुधा की सहेली माधुरी ने वहां प्रवेश किया. सुधा उसे देख कर चौंक गई. पूजा की थाली मेज पर रखते हुए पूछा, ”माधुरी, तुम इतनी सुबह यहां! सब ठीक तो है न?’’

”सब ठीक है,’’ माधुरी मुसकराई, ”तुम ने एक वादा किया था, कहो तो दादाजी के सामने बता दूं.’’ कहते हुए माधुरी ने अपनी दाईं आंख दबाई.

सुधा ने जल्दी से कहा, ”बता दो. तुम ने साथ में लाइब्रेरी चलने का वादा ही तो लिया था.’’

माधुरी हंसी, ”जल्दी से तैयार हो जाओ, मैं तुम्हारे कमरे में बैठती हूं जा कर.’’

” ठीक है, मैं तुरंत तैयार होकर आती हूं.’’ कहते हुए सुधा ड्रेसिंग रूम की तरफ बढ़ गई. माधुरी उस के कमरे में चली गई.

थोड़ी देर में सुधा तैयार हो गई. मम्मी और दादाजी को बता कर वह माधुरी के साथ घर से निकल आई. थोड़ी दूर आने पर माधुरी ने सुधा की कमर में चिकोटी काटी, ”तुम ने मुझे आज अपने ‘वो’ से मिलवाने का वादा किया था और दादाजी के सामने लाइब्रेरी जाने की बात गढऩे लगी.’’

”तो क्या दादाजी के आगे कह देती कि मैं तुम्हें आशुतोष से मिलवाने वाली हूं.’’ अपनी कमर सहलाते हुए सुधा बोली.

मुसकरा पड़ी माधुरी, ”वाह! दादाजी की संस्कारी पोती, दादाजी से ही फ्लर्ट.’’

सुधा गंभीर हो गई, ”माधुरी, दादाजी से आशुतोष से मुलाकात करने की बात छिपा कर मुझे अच्छा नहीं लग रहा है, लेकिन मैं पहले आशुतोष को अच्छे से परख लेना चाहती हूं, फिर मैं दादाजी को सब कुछ बता दूंगी.’’

माधुरी हैरत से सुधा को देखने लगी, ”प्यार में परखना कैसा सुधा, जिसे चाहो उस की तनमन से प्रेयसी बन आओ, यही तो प्यार होता है.’’

”वाह! यह जाने बगैर कि उस के और हमारे विचार मिलते हैं या नहीं, वह हमें सुखी रख पाएगा, हम उसे मन में बसा लें. नहीं माधुरी, यह प्यार नहीं, यह तो प्रेमी को जबरन अपने ऊपर थोप लेने जैसा हुआ.’’

”तुम्हारा कहना है जिस से दिल लगाओ, पहले उसे मटके की तरह ठोंकबजा कर देख लो.’’

”हर्ज क्या है इस में. माधुरी, आखिर हम उसे जीवनसाथी के रूप में चुनने जा रहे हैं. आंख बंद कर के प्यार के फैसले नहीं लिए जा सकते.’’

”यह तुम्हारी सोच है सुधा.’’ माधुरी गंभीर हो गई, ”मैं प्यार में रोमांटिक हो कर जीना चाहती हूं, मरना नहीं.’’

सुधा ने हैरानी से माधुरी को घूरा, ”मैं समझी नहीं.’’

”सीधी सी बात है यार, प्यार इंजौय करने के लिए है, इसे दिल की गहराई से लगा कर आह! उफ!! करने और प्यार में आत्महत्या करने का समय नहीं है मेरे पास.’’

”ऐसी सोच वाली लड़कियों को एक दिन पछताना पड़ता है माधुरी.’’

”मैं पछताने वालों में से नहीं हूं सुधा. तू साथी को परखते हुए परेशान होती रहना, मैं प्यार में मौजमस्ती करती हुई बहुत आगे चली जाऊंगी.’’ माधुरी ने कहा और हंसने लगी. सुधा उस की बेफिक्री पर उसे देखती रह गई. कानपुर के महक रेस्टोरेंट में आशुतोष वर्मा नाम का युवक टेबल के सामने बैठा किसी का इंतजार कर रहा था. वह स्मार्ट था और देखने में किसी अच्छे घर का लगता था. आशुतोष के सामने टेबल पर कांच की नक्काशीदार प्लेट रखी थी, उस प्लेट में गुलाब का ताजा फूल रखा हुआ था.

तभी रेस्टोरेंट में एक अन्य युवक ने प्रवेश किया. उस ने लाल टी शर्ट और आसमानी रंग की जींस पहनी हुई थी. वह शक्ल से ही आवारा किस्म का लगता था, नाम था रोशन. उस ने दरवाजे पर खड़े हो कर अंदर हाल में नजर दौड़ाई. उस की नजर उस आशुतोष वर्मा पर चली गई, जो प्लेट सजाए किसी का इंतजार करता प्रतीत हो रहा था. रोशन के होंठों पर शरारती मुसकान फैल गई. वह लंबेलंबे कदम रखता हुआ आशुतोष की टेबल की तरफ बढ़ गया. टेबल के पास आ कर उस ने प्लेट में सजा कर रखे गुलाब के फूल को उठा लिया और नाक के पास ले जा कर संूघते हुए बोला, ”वाह! कितनी अच्छी खुशबू है इस गुलाब में.’’

आशुतोष गुस्से में बोला, ”यह क्या बदतमीजी है रोशन?’’

”मैं ने क्या बदतमीजी की यार, कहीं तुम गुलाब का फूल उठा लेने से तो खफा नहीं हो गए हो?’’

”यह फूल मैं ने किसी को देने के लिए खरीदा था रोशन.’’

”ओह, तो तुम्हें भी प्यार का रोग लग गया है.’’ रोशन कहते हुए शरारत से आगे झुका, ”कौन है वह बेबकूफ लड़की, जिस ने तुम जैसे गधे से दिल लगाया है.’’

”तुम्हारी जुबान बहक रही है रोशन.’’ युवक तीखे स्वर में बोला.

”बहकेगी ही आशुतोष बाबू,’’ रोशन लापरवाही से बोला, ”तुम ठहरे किताबी कीड़े, किताबों के अलावा तुम्हें कुछ नजर नहीं आता, फिर लड़की कैसे नजर आ गई तुम्हें. क्या मैं नाम जान सकता हूं उस का?’’

आशुतोष झल्ला कर बोला, ”तुम से मतलब.’’

”मत बता यार, यहां आ रही है, देख ही लूंगा.’’ रोशन मुसकरा कर बोला.

वह एक खाली टेबल पर टांग पसार कर बैठ गया. आशुतोष उसे फाड़ खाने वाली नजरों से देखने लगा. उसी समय एक वेटर रोशन के पास आ कर बोला, ”सर, आप को बार काउंटर पर कोई याद कर रहा है.’’

रोशन उठ खड़ा हुआ, ”चलो!’’

वेटर आगे बढ़ा, तब रोशन आशुतोष की टेबल पर झुक गया, ”घूरो मत यार, माना कि लड़कियां मेरी कमजोरी हैं, लेकिन मैं इतना भी कमाधुरी नहीं हूं कि यारों का माल ही डकार जाऊं. तुम्हारा फूल तुम्हें ही मुबारक.’’

कहने के बाद गुलाब का फूल टेबल पर रखी प्लेट में फेंक कर रोशन तेजी से बार काउंटर की तरफ चला गया. आशुतोष ने गहरी सांस ली, ”बला टली!’’

प्लेट में रखा गुलाब का फूल उठा कर आशुतोष ने डस्टबिन में डाल दिया और खाली पड़ी दूसरी टेबल पर जा कर बैठ गया. उस का मूड खराब हो गया था.

सुधा अपनी सहेली माधुरी के साथ महक रेस्टोरेंट में आई तो आशुतोष वर्मा को अपना इंतजार करते देख कर उस के होंठों पर मीठी मुसकान उभर आई. वह आशुतोष की तरफ बढ़ी. तभी पीछे आ रही माधुरी बार काउंटर की तरफ जा रहे रोशन से टकरा गई. उस के हाथ से पर्स छिटक कर फर्श पर जा गिरा. माधुरी पर्स उठाने के लिए झुकने को हुई तो रोशन भी झुक गया. माधुरी का पर्स उठा कर वह मुसकराता हुआ खड़ा हो गया.

”सौरी मिस… मैं जरा जल्दी में था, यह रहा आप का पर्स.’’

”कोई बात नहीं, ऐसा हो जाता है.’’ माधुरी मुसकरा कर बोली, ”मैं मिस माधुरी हूं.’’ कहने के बाद वह पर्स हिलाती हुई सुधा के पीछे लपकी. उस के कानों में उस युवक (रोशन) के शब्द सुनाई पड़े, ”वाह! क्या मस्त जवानी है.’’

माधुरी ने पलट कर युवक की तरफ कातिल मुसकान बिखेरते हुए हाथ की अंगुलियां नचाईं. फिर सुधा के पीछे उस टेबल पर आ गई, जहां सुधा का दोस्त आशुतोष बैठा हुआ था.

”गुड मार्निंग आशुतोष.’’ सुधा ने

मुसकरा कर अभिवादन करते हुए माधुरी की तरफ इशारा किया, ”यह मेरी सहेली

माधुरी है और माधुरी, यह हैं मेरे दोस्त आशुतोष वर्मा.’’

”हैलो!’’ माधुरी ने बड़ी अदा से हैलो कहते हुए आशुतोष की तरफ अपना हाथ बढ़ाया.

आशुतोष ने तुरंत दोनों हाथ सादगी से जोड़ते हुए कहा, ”नमस्ते जी, बैठिए.’’

माधुरी ने मुंह बनाया, ”आप एडवांस नहीं हैं. शायद आप नहीं जानते कि अब हाथ जोड़े नहीं जाते, पकड़े जाते हैं.’’

आशुतोष ने सुधा की तरफ देख कर बड़े शांत भाव से कहा, ”जिस का हाथ पकडऩा था, मैं पकड़ चुका हूं माधुरीजी. अब सुधा ही मेरी जीवनसंगिनी बनेगी. मैं इसे दिल की गहराई से सच्चा प्यार करता हूं.’’

”लेकिन यह तो आप को इस प्रेम कहानी में ठोंकबजा कर परखना चाहती है मिस्टर आशुतोष.’’ माधुरी ने कटाक्ष किया.

”अच्छी बात है.’’ आशुतोष इत्माधुरीन से बोला, ”मैं इस की कसौटी पर खरा उतरूंगा तभी तो यह मुझे अपना जीवनसाथी बनाएगी. यह तो हर लड़की को करना चाहिए.’’

”आशुतोष बाबू, मान लीजिए, यदि आप इस की कसौटी पर खरे नहीं उतरे तो..?’’ माधुरी ने कनखियों से सुधा की तरफ देखते हुए प्रश्न किया.

सुधा ने आशुतोष से पूछे गए सवाल का जवाब खुद दिया, ”अगर ऐसा हुआ तो हम लाइफ पार्टनर नहीं बनेंगे, किंतु एक अच्छे दोस्त बने रहेंगे हमेशा. यह अपनी पसंद की पत्नी के साथ खुश, मैं अपने पति के साथ खुश.’’

माधुरी ने मुंह बिगाड़ा, ”ऊंह! तुम दोनों घिसेपिटे लोगों में से हो. काश! मेरा कोई बौयफ्रेंड होता तो मैं तुम को दिखाती. ये जवानी दूरदूर बैठ कर आहें भरने के लिए नहीं मिली है. यह तो एकदूसरे से लिपट कर प्यार करने के लिए मिली है.’’

सुधा मुसकराई, ”तो बना लो किसी

को अपना और मिटा लो अपने मन की हसरतें.’’

”कोई मिले तो यार.’’ माधुरी ने हाथ उठा कर अंगड़ाई ली. फिर एकाएक जैसे उसे कुछ याद आया, ”यार सुधा, अभी यहां आते हुए मैं जिस युवक से टकराई थी, वह कैसा रहेगा मेरे लिए?’’

”उस का नाम रोशन है, हमारे

कालेज का स्टूडेंट है, निकम्मा और फरेबी.’’ आशुतोष ने बताया. उस ने सुधा के पीछे आ रही माधुरी को रोशन से टकराते हुए देख लिया था.

माधुरी कुछ कहती, तभी रोशन वहां आ टपका. उस ने आशुतोष के आखिरी शब्दों को सुन लिया था. मुसकरा कर बोला, ”मुझ से जलने वाले मेरी तारीफ इसी तरह करते हैं माधुरीजी. अगर मैं तुम्हारी नजर में अच्छा हूं तो क्या तुम मुझ से दोस्ती करोगी?’’

माधुरी ने झट अपना हाथ रोशन की तरफ बढ़ाया और चहक कर बोली, ”तुम से दोस्ती करूंगी रोशन. सिर्फ दोस्ती ही नहीं, मैं दोस्ती के आगे की हदें भी पार कर के दिखाना चाहती है. मैं सुधा को दिखाना चाहती हूं कि प्यार रोनेतड़पने के लिए नहीं बना है, यह मौजमस्ती करने के लिए बना है.’’

रोशन ने माधुरी की नाजुक कलाई पकड़ कर अपनी ओर खींची और उस की पतली कमर में हाथ डाल कर लरजते स्वर में बोला, ”आओ माधुरी, इस पहली मुलाकात को हसीन और रंगीन बनाते हैं.’’

रोशन माधुरी को ले कर बार की तरफ बढ़ गया. सुधा ठगी सी खड़ी उसे देखती रह गई. आशुतोष ने गहरी सांस भर कर सुधा से कहा, ”तुम्हारी सहेली ने इस शैतान की तरफ हाथ बढ़ा कर अच्छा नहीं किया है सुधा.’’

सुधा ने सिर हिलाया, ”हां आशुतोष! यह लड़की अपनी बरबादी की पहली सीढ़ी पर पांव रख चुकी है. इस का अंजाम ठीक नहीं होगा.’’

एक होटल के कमरे में रोशन सोफे पर बैठा हुआ था. रोशन के सामने शराब की बोतल रखी थी, जिस में से बना कर वह 2 पैग गले से नीचे उतार चुका था. अब वह तीसरा पैग बना रहा था. सोफे के पास ही पलंग बिछा था, जिस पर माधुरी सिर पकड़ कर बैठी हुई थी. वह अपने पूरे होशोहवास में नहीं थी. नशे से उस की पलकें मुंदी हुई थीं. वह बड़बड़ा रही थी, ”यह तुम ने मुझे क्या पिला दिया रोशन, मेरा सिर घूम रहा है.’’

रोशन कुटिलता से मुसकराया, ”व्हिस्की पीने के बाद सिर घूमता ही है जान, कुछ देर सो जाओ…’’

”लेकिन तुम ने तो मुझे बीयर पिलाने की बात की थी…’’

”बीयर बच्चे पीते हैं माधुरी डार्लिंग, तुम तो अब जवान हो गई हो रानी.’’

”रानी!’’ माधुरी ने जबरन अपनी आंखें खोलीं, ”तुम ने मुझ को रानी कहा?’’

”हां डार्लिंग, तुम मेरी रानी हो और मैं तुम्हारा राजा हूं. हम इस समय अपने राजमहल में जश्न मनाने के लिए बैठे हैं.’’

”जश्न! कैसा जश्न?’’ माधुरी लडख़ड़ाती आवाज में इतना ही बोली. उसे जोर का चक्कर आया तो वह पलंग पर लुढ़क गई.

तभी दरवाजे की बेल बजी. रोशन ने तीसरा पैग जल्दी से पी लिया और उठ कर दरवाजा खोल दिया. दरवाजे पर उस के 3 दोस्त खड़े थे. दरवाजा खुलते ही तीनों अंदर आ गए. रोशन दरवाजा लौक कर के सोफे पर आया तो उस ने तीनों को माधुरी की तरफ ललचाई नजरों से देखते हुए पाया. उस का एक दोस्त जयपाल जीभ होंठों पर फिराते हुए बोला, ”गजब की मछली फंसाई है रोशन, इस का जायका तो बहुत स्वादिष्ट होगा.’’

”रोशन नाम है मेरा, मेरी मक्कारी के जाल में ऐसी ही मछलियां खुद आ फंसती हैं.’’ रोशन बेहयाई से हंसते हुए बोला, ”एकदम ताजा माल है, कांटा एक भी नहीं है इस में. मांसल मास बहुत लजीज होगा खाने में.’’ तीनों दोस्त हंसने लगे.

अद्र्धबेहोशी में पड़ी माधुरी फिर बड़बड़ाई, ”कौन हंस रहा है यहां?’’

”मेरे दोस्त हैं जान. 3 हैं, यह जश्न में शामिल होने आए हैं.’’ रोशन दोस्तों की तरफ आंख दबा कर बोला, ”मैं ने इन्हें तुम्हारी जवानी की दावत दी है. लो दोस्तो, पहले मूड बना लो.’’

माधुरी कुछ समझ नहीं पाई. रोशन के दोस्त रोशन के साथ बैठ कर शराब के जाम छलकाने लगे. जब उन के हलक अच्छी तरह तर हो गए, तब उन्होंने पलंग पर बेसुध सी पड़ी माधुरी को घेर लिया और उस के बदन से छेड़छाड़ करने लगे. माधुरी को नशे में भी यह एहसास होने लगा कि उस की आबरू खतरे में है. वह सिर झटक कर आंखें खोलने का प्रयास करती हुई चिल्लाई, ”यह क्या कर रहे हो रोशन..?’’

रोशन बेहयाई से हंसा, ”तुम दोस्ती के आगे की हदें पार करने की बात कर रही थी जान, मेरे दोस्त और मैं तुम्हें उसी हद से आगे ले कर जा रहे हैं.’’

माधुरी के जिस्म से छेड़छाड़ बढ़ती चली गई. वह 4 पुरुष थे और वह नशे में डूबी बेबस नारी. कब तक उन का विरोध करती, कितना चीखपुकार मचाती. उन्होंने उसे बारीबारी से अपनी हवस का शिकार बनाना शुरू कर दिया. उधर सुधा का ग्रैजुएशन कंपलीट हो गया था. अब वह कालेज नहीं जाती थी. घर पर ही रहती थी. माधुरी 2 साल से लापता थी. जिस दिन सुधा उसे अपने दोस्त आशुतोष से मिलवाने के लिए महक रेस्टोरेंट में ले कर गई थी और वहां माधुरी ने रोशन की बाजू थाम ली थी, तभी से वह न घर लौटी थी, न कालेज में ही आई थी. आशुतोष से सुधा को मालूम हुआ था कि उस दिन से रोशन भी कानपुर शहर में नजर नहीं आया था.

फेमिली वालों ने माधुरी के गुम होने की पुलिस में सूचना भी दर्ज करवाई थी, किंतु पुलिस भी उस का पता नहीं निकाल पाई थी. यह मान कर कि माधुरी ने रोशन के साथ भाग कर किसी शहर में शादी कर ली है और वह उसी प्रेमी के साथ प्रेमपूर्वक रह रही है. फेमिली वाले और पुलिस चुप लगा कर बैठ गई थी. हकीकत से सभी अंजान थे. इधर आशुतोष भी अपना ग्रैजुएशन पूरा कर के सरकारी जौब की कोशिश करने लगा था. अभी तक सुधा ने घर में किसी को आशुतोष से प्रेम होने और उसी के साथ सात फेरे लेने का निश्चय करने की बात नहीं बताई थी. वह सही मौके का इंतजार कर रही थी.

एक दिन उसे यह मौका मिल गया. रात को आशुतोष ने उसे मैसेज कर के खुशखबरी दे दी थी कि उसे भारतीय स्टेट बैंक में मैनेजर के पद की नियुक्ति मिल गई है. वह 2 दिन बाद ही ड्यूटी जौइन कर लेगा. दूसरी सुबह नित्य की तरह जब घर के लोग मंदिर में आरती के लिए एकत्र हुए तो पूजाअर्चना के बाद नाश्ते की मेज पर सुधा ने धीरे से दादाजी से कहा, ”एक बात कहूं दादाजी, आप बुरा तो नहीं मानेंगे?’’

”तुम हमारी समझदार बेटी हो, तुम ऐसी कोई बात ही नहीं कहोगी जो हमें बुरी लगे. निस्संकोच कहो, क्या कहना चाहती हो?’’ दादाजी ने स्नेह से कहा.

”दादाजी, मैं 3 साल से एक युवक से दोस्ती निभाती आ रही हूं, युवक अच्छे घर का है और नेकनीयत वाला है. मैं अब उस से शादी करने का आप लोगों से आशीर्वाद लेना चाहती हूं.’’

”यह हमारी बेटी का फैसला है तो हम इंकार नहीं करेंगे. हमारी बेटी किसी गलत जीवनसाथी का चुनाव अपने लिए नहीं करेगी, यह मैं जानता हूं.’’

”लेकिन पिताजी, इस से पूछिए 3 साल से यह उस युवक से दोस्ती करती रही है, हमें यह सस्पेंस पहले क्यों नहीं बताया?’’ सुधा की मम्मी जानकी ने पूछा.

”मम्मी, आशुतोष को मैं किसी अच्छी पोस्ट मिलने का इंतजार कर रही थी, अब उन्हें भारतीय स्टेट बैंक में मैनेजर की नौकरी मिल गई है.’’

”वाह! यह हुई न सोने पर सुहागे वाली बात.’’ दादाजी हंस कर बोले, ”तुम आज ही हमें आशुतोष से मिलवाओ. कल हम तुम्हारा रिश्ता ले कर खुद उस के घर जाएंगे. सुधा ने बहुत दिन इस घर के मंदिर में घंटी बजा ली है.’’ दादा दीनानाथ की बात पर सभी खुल कर हंस पड़े.

उसी दिन सुधा ने आशुतोष को घर बुला कर सभी से मिलवा दिया. आशुतोष सभी को पसंद आना था, क्योंकि यह सुधा की अपनी पंसद थी. दूसरे दिन जानकी और दीनानाथजी ने आ कर आशुतोष के मम्मीपापा से मुलाकात की और उन से सुधा के रिश्ते की बात की. आशुतोष के पापा ने यह रिश्ता स्वीकार कर लिया. फिर शादी की तारीख तय हुई और निश्चित दिन आशुतोष और सुधा की बड़ी धूमधाम से शादी संपन्न हो गई. शादी के 6 माह बाद ही आशुतोष को मुंबई की एसबीआई ब्रांच में भेज दिया गया. वहां उस के रहने के लिए फ्लैट भी दिया गया. आशुतोष जिद कर के सुधा को भी मुंबई ले आया. दिन गुजरते रहे.

आशुतोष सुबह जाता तो शाम को ही घर लौटता था. सुधा बोर हो जाती थी, इसलिए उस ने अपना ‘सहारा’ नाम से एनजीओ खोल लिया और गरीब, असहाय लोगों के लिए हर प्रकार की मदद करने लगी. उस के एनजीओ में कई पढ़ीलिखी युवतियां और बुद्धिजीवी, समाजसेवी लोग भी जुड़ते चले गए. थोड़े समय में ही ‘सहारा’ एनजीओ मुंबई भर में मशहूर हो गया. सहारा एनजीओ मुंबई के मालाबार हिल के क्षेत्र में था. एक दिन एक समाजसेवी विष्णु दत्ता ने सुधा को जानकारी दी कि पीला हाउस के रेडलाइट्स एरिया में कुछ नाबालिग लड़कियों से जबरन धंधा करवाया जा रहा है. जहां ये नाबालिग लड़कियां लाई गई हैं, वह रेशमा बाई का कोठा है.

सुधा यह सूचना पाते ही पीला हाउस के पुलिस स्टेशन में पहुंच गई. वहां का इंचार्ज एकनाथ कांबले था. सुधा ने उस से मिल कर अपना परिचय देते हुए रेशमा बाई के कोठे की सच्चाई बताई. इंचार्ज एकनाथ कांबले ने उस क्षेत्र के डीसीपी से रेशमा बाई के कोठे की हकीकत बताते हुए वहां रेड डालने की इजाजत मांगी तो उन्हें इजाजत मिल गई. आधी रात को इंचार्ज एकनाथ कांबले ने 15 महिला और पुरुष सिपाहियों के साथ रेशमा बाई के कोठे पर छापा मारा. उस वक्त सुधा और समाजसेवी विष्णु दत्ता उस पुलिस दल के साथ थे. कोठे पर पुलिस का छापा पड़ा तो कोठे पर बने छोटेछोटे केबिनों से देहबालाएं और उन के साथ हमबिस्तरी कर रहे पुरुष निर्वस्त्र ही निकल कर भागे. पुलिस ने उन्हें दबोच लिया.

कोठे की संचालिका रेशमा बाई और 2 दलाल भी इन के हाथ आ गए. कोठे की तलाशी ली गई तो एक बंद कोठरी से, जिस पर ताला लगा कर रखा गया था, 3 नाबालिग लड़कियां और एक युवती को आजाद किया गया. जो युवती उस कोठरी में से मिली, उस पर नजर पड़ते ही सुधा बुरी तरह चौंक पड़ी. यह कोई और नहीं माधुरी थी, जो 3 साल पहले कानपुर से लापता हो गई थी. सुधा को पहचान कर माधुरी उस के गले से लिपट गई और फूटफूट कर रोने लगी. सुधा की भी आंखें भर आईं. वह माधुरी की पीठ सहलाते हुए बोली, ”तुझे मैं ने कहांकहां तलाश नहीं किया माधुरी. तू यहां कोठे पर कैसे पहुंच गई?’’

”सब बताऊंगी मैं, पहले मुझे सुरक्षित इस नरक से मुक्ति दिलवा दो सुधा. यहां यह रेशमा नाम की डायन मुझे मांस का लोथड़ा समझ कर रोज जिस्म के भूखे कुत्तों के आगे फेंकती है. ये हवस के दङ्क्षरदे मुझे पूरी बात भभोड़ते हैं, मेरे जिस्म को नोंचते हैं…’’

”अब तुम्हें कोई छुएगा भी नहीं. तुम पुलिस और मेरी ‘सहारा’ एनजीओ के संरक्षण में हो. आओ, थाने चल कर बात करेंगे.’’ पुलिस दल सभी को साथ ले कर पीला हाउस पुलिस स्टेशन में लौट आया.

सुधा भी माधुरी को साथ ले कर पुलिस स्टेशन आ गई. यहां माधुरी की कोठे से बरामदगी के कागजात पूरे करा कर सुधा माधुरी को साथ ले कर अपने एनजीओ वापस लौट आई. सुबह होने वाली थी. सुधा ने आशुतोष को फोन कर के एनजीओ बुला लिया. नाश्ता लाने के लिए भी उस ने पति आशुतोष को कह दिया था. आशुतोष एनजीओ नाश्ता ले कर 7 बजे पहुंचा, तब तक सुधा ने माधुरी को फ्रेश करवा कर नए कपड़े पहनवा दिए थे. आशुतोष रास्ते भर हैरान था कि आज सुबहसुबह सुधा ने उसे नाश्ता ले कर एनजीओ क्यों बुलाया है. जब उस ने सुधा के औफिस में प्रवेश किया तो वहां बैठी माधुरी को देख कर वह बहुत हैरान हो गया.

”यह माधुरी मुंबई कब आ गई सुधा, तुम ने तो मुझे फोन पर बताया ही नहीं कुछ.’’ आशुतोष शिकायती लहजे में बोला.

”यह मुंबई कैसे पहुंची, मैं भी जानना चाहती हूं आशुतोष. फिलहाल तो यह जान लो मैं ने रात को इसे पीला हाउस के रेड लाइट्स एरिया से छुड़वाया है. माधुरी रेशमा बाई के कोठे में पुलिस छापा डालने के दौरान मुझे मिली है.’’

”ओह!’’ आशुतोष ने गहरी सांस ली, ”इसे बरबादी के नरक में उसी कमीने रोशन ने झोंका होगा.’’

”हां आशुतोषजी!’’ माधुरी ने भर्राए स्वर में कहा, ”गलती मेरी थी, मुझे सच्चे प्यार की परख नहीं थी. मैं प्यार को जिस्म की हसरतें पूरी करने का माध्यम मान कर रोशन के हाथों लुटी. उस दिन महक रेस्टोरेंट में मैं ने रोशन की तरफ दोस्ती का हाथ बढ़ा कर बहुत बड़ी भूल की थी. वह मुझे बार में ले गया और शराब पिलाई, फिर मुझे किसी होटल में ले कर गया, वहां पर रोशन ने अपने 3 दोस्तों के साथ मेरी अस्मत से खिलवाड़ किया. उस ने मेरी अश्लील फिल्म बना ली और डराधमका कर मुझे दोस्तों के आगे परोसता रहा.

”कई दिनों तक वह मेरे जिस्म की कमाई खाता रहा, फिर मुझे वह मुंबई में ले आया. यहां उस ने रेशमा बाई के कोठे पर मुझे मोटी कीमत में बेच डाला और उस गलीज धंधे में मुझे धकेल कर वह भाग गया. यदि रात सुधा रेशमा बाई के कोठे पर रेड ने डलवाती तो मैं उसी नरक में सड़सड़ कर किसी दिन मौत के मुंह में समा जाती.’’ माधुरी अपनी बात खत्म करके रोने लगी.

”मैं तुम से हमेशा कहती थी माधुरी, प्यार पूजा और इबादत का ही दूसरा नाम है. प्यार के लिए सच्चे मन से जीया जाता है.

आज के दौरान प्रेम पर वासना हावी हो गई है. आज प्रेमी प्यार की आड़ ले कर प्रेमिका के जिस्म को पाने की फिराक में लगा रहता है, जो लड़कियां प्रेमी के झांसे में आ जाती हैं, एक दिन शरम और अपमान में पछताती हैं. कुछ आत्महत्या कर लेती है, कुछ देह के धंधे में उतर कर समाज को गंदा करती रहती हैं.

”प्यार को सच्चे मन से पूजने वाले प्रेमी अब बहुत कम मिलेंगे. मुझे देखो माधुरी, मैं ने अपने प्यार आशुतोष को ठोंकबजा कर परखा था, यह मुझे सच्चा प्यार करते थे. आज परिवार की रजामंदी से हमारा विवाह हुआ और हम सुखी गृहस्थ जीवन जी रहे हैं.

”आशुतोष यहां मुंबई में एसबीआई बैंक में मैनेजर हैं. हमारा यहां मालाबार हिल में फ्लैट है. मैं यह ‘सहारा’ एनजीओ चलाती हूं. आज से तुम मेरे इस एनजीओ में असहाय लोगों की सेवा का भाव ले कर जिओगी. यूं समझो, आज से तुम्हें नया जन्म मिला है.’’

सुधा ने माधुरी के कंधे पर प्यार से अपना हाथ रखा तो माधुरी सुधा के गले से लिपट गई. उस की आंखों से अभी भी आंसू बह रहे थे. आशुतोष के होंठों पर मीठी मुसकान थी. Hindi Best Stories

 

 

Love Story : गलत प्रेमी जान के लाले

Love Story : मुश्ताक अहमद ने ङ्क्षहदू नाम अजीत बता कर पूजा बिस्वास को पहले अपने प्रेमजाल में फांसा, फिर उस से शादी भी कर ली. इस के बाद एक दिन उस ने पूजा के सिर को धड़ से अलग कर दिया. हत्या के समय पूजा हाथ जोड़ कर उस से रहम की भीख मांग रही थी, लेकिन उस का दिल न पसीजा. मुश्ताक ने आखिर ऐसा क्यों किया?

पूजा बिस्वास को इस बात की जानकारी हो गई थी कि प्रेमी से पति बने मुश्ताक अहमद ने दूसरी शादी अपनी बिरादरी की लड़की से कर ली है, यह बात पूजा से बिलकुल भी बरदाश्त नहीं हुई और वह बिफर कर मुश्ताक से बोली कि तुम तो बहुत धोखेबाज इंसान हो. पहले तो तुम ने धर्म छिपा कर धोखे से मुझ से शादी की और फिर अब अपनी ही बिरादरी में दूसरी शादी भी कर ली. इस बात को ले कर दोनों में कहासुनी हो गई.

इस के बाद तो इस बात को ले कर पूजा ने घर में रोज हंगामा करना शुरू कर दिया था. इतना ही नहीं, सितारगंज में मुश्ताक के घर जा कर वहां भी काफी हंगामा किया. मुश्ताक के फेमिली वालों से भी उस ने लड़ाईझगड़ा किया. यहां तक कि सितारगंज पुलिस को लिखित शिकायत भी दी. मुश्ताक के घर गांव गौरीखेड़ा (सितारगंज) उत्तराखंड में जब रोज हंगामा होने लगा तो उस के फेमिली वालों ने मुश्ताक और पूजा को घर से निकाल दिया. तब मुश्ताक पूजा को अपने साथ ले कर गुरुग्राम वापस आ गया.

गुरुग्राम आ कर अब पूजा रोज मुश्ताक से झगडऩे लगी. रोजरोज की कलह से पेशान हो कर मुश्ताक ने निर्णय ले लिया कि अब वह पूजा को हमेशा के लिए अपने रास्ते से हटा कर ही रहेगा. उस ने अपने दिमाग में हत्या की पूरी योजना का खाका तैयार कर लिया. अपने खूनी प्लान के मुताबिक उस ने पूजा से कहा कि पूजा, मैं अपनी जिंदगी में केवल तुम्हें ही अपनी पत्नी बना कर रखूंगा और अपनी दूसरी पत्नी को तलाक दे दूंगा. चलो, इसी खुशी में हम लोग उत्तराखंड घूमने चलते हैं, वहां पर कुछ दिन घूमने के बाद अपनी बीवी को तलाक दे कर हम वापस गुरुग्राम आ जाएंगे.

15 नवंबर, 2024 को अपने प्लान के मुताबिक मुश्ताक पूजा को अपनी बहन के घर टैक्सी से खटीमा ले कर पहुंचा. रात को वे दोनों वहीं पर रुके. 16 नवंबर, 2024 की सुबह खूनी साजिश के तहत मुश्ताक अपनी टैक्सी से पूजा को घुमाने के बहाने नदन्ना नहर जिला ऊधमसिंह नगर ले गया. नदन्ना नहर के पास एक काली पुलिया है, जो अकसर सुनसान रहती है. मुश्ताक ने चारों ओर देखा तो दूरदूर तक कोई नजर नहीं आ रहा था. उस ने काली पुलिया के पास अपनी टैक्सी रोक दी और दोनों टैक्सी से उतर कर पुलिया के ऊपर बैठ गए.

अपने प्लान के मुताबिक मुश्ताक ने थोड़ी देर तक पूजा से प्रेमपूर्वक बातचीत की. पूजा को समझाया कि वह जल्दी ही अपनी दूसरी बीवी को तलाक देने वाला है. तभी मुश्ताक पेशाब करने का बहाना बना कर पुलिया से उठ गया, जबकि पूजा सामने नहर का दृश्य देखने में मशगूल हो गई थी. मुश्ताक ने इस मौके का भरपूर फायदा उठाया. उस ने फुरती से पैंट की जेब में छिपाया हुआ चाकू निकाला और पीछे से पूजा की गरदन पर घातक वार कर दिया. उधर पूजा को इस बात का आभास तक न था. चाकू के वार से उस की गरदन से खून का फव्वारा फूट पड़ा था.

मुश्ताक ने पत्नी का धड़ से अलग किया सिर

पूजा पीड़ा से जोरजोर से ‘बचाओ… बचाओ’ चिल्लाने लगी थी, लेकिन उस समय वहां पर दूरदूर तक कोई भी इंसान नहीं था, जो पूजा की करुण पुकार को सुन पाता. पूजा ने मुश्ताक से अपनी जान की भीख भी मांगी, परंतु निर्दयी हत्यारा मुश्ताक पूजा की गरदन पर तब तक चाकू से वार करता रहा, जब तक कि गरदन उस के धड़ से पूरी तरह अलग नहीं हो गई. गरदन धड़ से अलग होने पर पूजा ने तड़पते और छटपटाते हुए दम तोड़ दिया. इस के बाद की प्लानिंग भी मुश्ताक ने अपने दिमाग में पहले से ही बना कर रखी थी, इसलिए वह अपनी टैक्सी में तेज धारदार चाकू, चादर और अन्य सामान बैग में छिपा कर लाया था.

मुश्ताक ने सब से पहले धड़ को चादर में पूरी तरह से लपेट कर एक गठरी बनाई. उसे अच्छी तरह से बांधा और नाले मे फेंक दिया. इस के बाद उस ने पूजा के सिर को एक पौलीथिन की थैली में बांधा और सिर को दूसरी जगह ले जा कर पानी में बहा दिया. मुश्ताक इस बात से अब तक निश्चिंत हो चुका था कि पुलिस अब उस का कुछ भी बिगाड़ नहीं पाएगी, क्योंकि अगर पुलिस को किसी तरह पूजा का धड़ मिल भी गया तो वह पूजा के सिर को कभी भी नहीं ढूंढ सकती है.

पूजा गुडग़ांव के एक स्पा सेंटर में काम करती थी. वह भले ही अपनी निजी जिंदगी में व्यस्त रहती थी और उस के दोनों बेटे नानकमत्ता में उस की मम्मी के पास रह कर पढ़ाई करते थे, लेकिन पूजा रोज अपनी मम्मी और छोटी बहन प्रमिला से एक बार सुबह और एक बार रात को अवश्य फोन कर बातचीत कर लिया करती थी. प्रमिला भी गुरुग्राम में रह कर जौब करती थी. पूजा के विवाह के बाद प्रमिला अब अकेले रहने लगी थी. 15 नवंबर, 2024 की रात को पूजा की मम्मी का प्रमिला को फोन आया कि आज पूजा ने फोन पर बात नहीं की. उस के बाद प्रमिला ने पूजा का फोन लगातार ट्राइ करना शुरू कर दिया, लेकिन पूजा का फोन लगातार बंद आता रहा.

उस के बाद प्रमिला ने स्पा सेंटर में पता किया तो वहां पर पता चला कि पूजा 15 नवंबर से स्पा सेंटर में अपने जौब पर नहीं आ रही थी. इस के बाद प्रमिला और उस के फेमिली वाले लगातार पूजा की खोज में लगे रहे. प्रमिला ने नानकमत्ता और सितारगंज में भी अपने फेमिली वालों के साथ पूजा की तलाश जारी रखी, परंतु पूजा का कहीं कोई पता नहीं चल सका. 19 दिसंबर, 2024 को प्रमिला ने गुरुग्राम के सेक्टर-5 थाना पुलिस में पूजा के लापता होने की शिकायत दर्ज करा दी. प्रमिला ने पूजा के बारे में पुलिस को यह जानकारी भी दी कि पूजा का विवाह गांव गौरीखेड़ा जिला ऊधमसिंह नगर के अजीत के साथ हुआ था.

प्रमिला ने पुलिस को यह भी बताया कि अजीत का असली नाम मुश्ताक अहमद था, उस ने अपना धर्म व नाम अजीत बता कर धोखे से उस की बहन के साथ विवाह किया था. प्रमिला की ओर से शिकायत मिलने पर गुरुग्राम सेक्टर-5 थाने के एसएचओ सुखबीर ने अपने उच्च अधिकारियों के निर्देश पर एक विशेष पुलिस टीम का गठन कर दिया. पुलिस टीम ने अपनी जांच शुरू कर दी और सब से पहले लापता पूजा की काल डिटेल्स खंगालनी शुरू की. इस में लोकेशन सहित कई अहम जानकारियां पुलिस के हाथ लगीं.

इन्हीं में पुलिस को मुश्ताक का नंबर भी मिला. मुश्ताक उत्तराखंड का रहने वाला था, इसलिए पुलिस टीम ने सितारगंज जा कर अहम जानकारियां एकत्रित कीं. वहां पर गुरुग्राम पुलिस को पूजा और मुश्ताक के लिवइन रिलेशन व प्रेम विवाह की जानकारी भी मिली. पुलिस टीम ने मुश्ताक के फेमिली वालों से पूछताछ की तो यह पता चला कि मुश्ताक के घर वालों ने पूजा और मुश्ताक को अक्तूबर, 2024 में ही अपने घर से निकाल दिया था. सितारगंज से पुलिस को यह जानकारी भी मिली कि कुछ साल पहले मुश्ताक कुटरी गांव में गाड़ी के पंक्चर लगाने की दुकान चलाता था. वह सितारगंज और खटीमा दोनों जगहों पर रह कर काम करता था. उस के बाद उस ने टैक्सी चलाने का काम करना शुरू कर दिया था. पुलिस ने मुश्ताक की हर जगह तलाश की, लेकिन पुलिस मुश्ताक को ढूंढने में नाकाम रही.

गुरुग्राम पुलिस को इस बीच मुश्ताक के अन्य ठिकानों के बारे में भी पता चला, लेकिन मुश्ताक अब तक वहां से भी निकल चुका था. इस के बाद गुरुग्राम पुलिस ने गुरुग्राम में मुश्ताक के बारे में पता किया कि वह किस की टैक्सी चलाता था, कहां पर रहता था, किसकिस से मिलता था, किनकिन से बातचीत करता था, लेकिन पुलिस के हाथ फिर भी खाली रहे. आखिरकार इस ब्लांइड केस में गुरुग्राम पुलिस ने अब उत्तराखंड पुलिस की मदद ली. उत्तराखंड पुलिस ने इस केस में अपने खास मुखबिर लगा दिए और खुद भी इस केस से जुड़ गई. उत्तराखंड पुलिस और गुरुग्राम पुलिस की संयुक्त कोशिश आखिरकार रंग लाई.

साढ़े 5 महीना चकमा देने के बाद आया पुलिस गिरफ्त में

गुरुग्राम पुलिस को यह जानकारी मिली कि फरार टैक्सी ड्राइवर मुश्ताक सितारगंज के गौरीखेड़ा में एक स्थान पर छिप कर रह रहा है. इस सूचना के मिलते ही गुरुग्राम पुलिस ने उत्तराखंड पुलिस की सहायता से मुश्ताक को गिरफ्तार कर लिया. मुश्ताक को गिरफ्तार कर गुरुग्राम पुलिस ने जब मुश्ताक से पुलिसिया अंदाज में कड़ी पूछताछ की तो वह जल्दी ही टूट गया और उस ने पुलिस को बताया कि उस ने 16 नवंबर, 2024 को ही पूजा की हत्या कर दी थी. मुश्ताक अहमद ने पूजा बिस्वास की हत्या की जो कहानी बताई, वह इस प्रकार निकली—

पुलिस पूछताछ में आरोपी मुश्ताक ने बताया कि पूजा को यह बात पता चल चुकी थी कि उस ने नाम और धर्म छिपा कर पूजा के साथ धोखे से विवाह किया था, इस के कारण वह उस से काफी नाराज रहने लगी थी. उस के बाद मुश्ताक के फेमिली वालों ने उस का विवाह उन की बिरादरी की एक युवती के साथ कर दिया. अब मुश्ताक गुरुग्राम में पूजा से दूरियां बनाने लगा था. उस दिन तारीख थी 10 मार्च 2022. पूजा बिस्वास सुबह से ही अपनी तैयारियों में व्यस्त थी. आज उसे अपनी ड्यूटी पर गुरुग्राम जाना था. उत्तराखंड के नानकमत्ता की रहने वाली पूजा उस दिन अपने घर से रुद्रपुर जा रही थी, जहां से उस ने गुरुग्राम के लिए अपनी अगली बस पकडऩी थी.

रुद्रपुर पहुंचने से 5 किलोमीटर पहले ही उस बस का इंजन एकाएक चलना बंद हो गया, जिस के कारण ड्राइवर को मजबूरन बस रोकनी पड़ी. सभी सवारियां उतर कर टेंपो और रिक्शा ले कर अपने गंतव्य स्थानों पर जा रही थीं. पूजा को रुद्रपुर के रोडवेज स्टेशन जाना था, मगर उसे कोई आटो मिल ही नहीं रहा था. जिस के कारण वह अपना सामान सड़क के किनारे रख कर इंतजार कर रही थी. तभी दूसरी ओर से मुश्ताक नाम का व्यक्ति अपनी किराए की टैक्सी ले कर उधर से गुजरा तो उस की निगाह सड़क के किनारे खड़ी युवती पर पड़ गई.

काले घने लंबे बाल, तीखे नैननक्श, गोराचिट्ठा रंग और इकहरा बदन की पूजा पर मुश्ताक की जैसे ही नजर पड़ी तो वह एक पल के लिए ठगा सा रह गया था. अगले ही पल मुश्ताक ने सड़क के किनारे अपनी टैक्सी रोक दी और टैक्सी से उतर कर युवती के पास चला गया.

”जी, आप को कहीं जाना है क्या? क्या मैं आप की मदद कर सकता हूं?’’ मुश्ताक ने कहा.

”अरे भाईसाहब, आप के पास तो टैक्सी है. इस का भाड़ा भी काफी ज्यादा होगा. मैं तो किसी शेयर आटोरिक्शा का इंतजार कर रही थी.’’ पूजा ने हिचकते हुए कहा.

तभी मुश्ताक ने पूछा, ”जी, मैं आप को जानता नहीं हूं, आप को मैं ने पहली बार ही देखा. मैं ने आप को पसीने से लथपथ, हैरान और परेशान देखा तो मुझ से रहा नहीं गया. आप इस गाड़ी को अपनी ही समझें. वैसे आप को जाना कहां है?’’

”जी, मुझे रुद्रपुर रोडवेज बस अड्डा जाना है, वहां से मुझे गुरुग्राम के लिए बस लेनी है,’’ पूजा ने कहा.

”जी, आप मेरी टैक्सी में बैठेंगी तो मुझे बहुत खुशी होगी.’’ कहते हुए मुश्ताक ने पूजा का सामान टैक्सी में रख दिया था. हालांकि सफर काफी छोटा था. मुश्ताक भी जानबूझ कर टैक्सी काफी आराम से चला रहा था.

तभी मुश्ताक न पीछे की सीट पर बैठी पूजा को सामने के मिरर से देखा और पूछ लिया, ”जी, आप अपना समझ कर मेरी टैक्सी में बेहिचक बैठ गईं, इस के लिए आप का बहुतबहुत धन्यवाद. क्या मैं आप का नाम जान सकता हूं?’’

”जी, मेरा नाम पूजा बिस्वास है. मैं नानकमत्ता की बंगाली कालोनी में रहती हूं. गुरुग्राम में एक स्पा सेंटर में काम करती हूं. आप का नाम क्या है?’’ पूजा बोली.

”जैसे आप इतनी खूबसूरत हैं वैसे ही आप का नाम भी है. मेरी खुशकिस्मत है कि आज अनजाने में ही सही, आप से मेरी मुलाकात हो गई. पूजाजी, मेरा नाम अजीत है. मैं गौरीखेड़ा गांव तहसील सितारगंज में रहता हूं. मेरा टैक्सी का काम है.’’ मुश्ताक ने अपना नाम छिपाते हुए कहा.

मुश्ताक ने पूजा को बसा लिया था दिल में

टैक्सी को मुश्ताक धीरेधीरे चला रहा था. बीचबीच में वह पूजा को देख भी लेता था. पूजा यह समझ गई थी कि अजीत भी उसे देख रहा है, इसलिए वह भी उसे देखने लगी. कुछ समय के लिए दोनों की नजरें टकरातीं, फिर वे दोनों इधरउधर देखने लगते थे. तभी मुश्ताक ने ट्रैक्सी में ब्रेक लगा दिया. अब मुश्ताक पूजा का सामान टैक्सी से निकालने में भी उस की मदद करने लगा था, क्योंकि रुद्रपुर का रोडवेज स्टेशन आ चुका था. मुश्ताक ने बस में सामान चढ़ाने में भी पूजा की पूरी मदद की. काफी देर तक दोनों बातचीत करते रहे.

बस जब रुद्रपुर से गुरुग्राम की तरफ चलने की तैयारी करने लगी तो पूजा मुश्ताक की ओर निहारते हुए बोली, ”अजीतजी, आप बहुत ही सुलझे हुए और परिपक्व इंसान हैं. आप का दिल बहुत अच्छा है. आप का बहुतबहुत धन्यवाद. वैसे किराए के कितने पैसे हुए?’’

”पूजाजी, एक तरफ तो आप मुझे अपना कहती हैं और दूसरी तरफ किराए की बात करने लगीं. अच्छा, अब दोस्ती आगे भी ऐसे ही चलती रहे, उस के लिए कम से कम अपना मोबाइल नंबर तो दे दीजिए.’’

पूजा ने अपना मोबाइल नंबर बताया तो मुश्ताक ने पूजा के मोबाइल पर फोन कर दिया. घंटी बजने लगी. पूजा ने मुसकराते हुए कहा, ”अजीतजी, आप का नंबर मेरे पास आ चुका है, मैं इसे सेव कर लूंगी.’’ उस के बाद बस चल पड़ी थी. उस दिन के बाद से दोनों की अकसर फोन पर बातचीत होने लगी. दोनों को अब एकदूसरे से बात कर के काफी रस आने लगा था. एक दिन में कईकई बार वे दोनों अब आपस में बात करने लगे थे. इस बीच मुश्ताक भी गुरुग्राम आ कर प्राइवेट टैक्सी चलाने लगा था. एक दिन पूजा सुबह से काफी परेशान थी कारण कि नानकमत्ता मम्मी की तबीयत काफी खराब थी, तभी मुश्ताक का फोन आ गया.

”पूजाजी, कई दिनों से आप ने कोई फोन नहीं किया, इसलिए मैं ने आप को फोन कर दिया. कैसी हो आप?’’ मुश्ताक ने पूछा.

”अजीत, घर पर मेरी मम्मी की तबीयत काफी खराब है, उन्हें यहां पर लाना है, इसीलिए काफी परेशान हूं.’’ पूजा ने कहा.

”आप इतनी ज्यादा दुखी और परेशान क्यों हो रही हैं. मेरी गाड़ी में चल कर माताजी को ले कर आ जाते हैं.’’ मुश्ताक ने कहा. यह 2022 की बात थी.

अपनी मम्मी को गुरुग्राम लाने और वापस नानकमत्ता ले जाने और इस बीच अपनी मम्मी की खोजखबर लेने के लिए पूजा ने मुश्ताक की मदद ली. इस के कारण उन दोनों में दोस्ती और आत्मीयता अब अपने चरम पर पहुंचने लगी थी.

ऐसे ही एक दिन जब पूजा अपनी मम्मी को देखने मुश्ताक की टैक्सी ले कर वापस गुरुग्राम लौट रही थी तो मुश्ताक उस से बातें करने लगा था, जबकि पूजा अपने घरपरिवार की समस्याओं के बारे में सोचने में मग्न थी. तभी मुश्ताक ने उस से कहा, ”पूजाजी, पता है आज कौन सी तारीख है?’’

”आज 14 फरवरी का दिन है.’’ पूजा ने उत्तर दिया.

”आज का दिन कितना खास होता है, लगता है आप को पता ही नहीं है.’’ मुश्ताक ने रहस्यमयी ढंग से कहा.

”मुझे तो पता नहीं, आज का दिन इतना खास क्यों होता है, आप ही बता दो.’’ पूजा ने कहा.

”आप भी बुद्धू निकलीं. अरे आज पूरी दुनिया में वेलेंटाइन डे मनाया जाता है, जिसे हिंदी में प्रेम दिवस कहते हैं. आज आप से कुछ दिल की बात कहना चाहता हूं.’’ मुश्ताक ने कहा.

”अरे मैं तो भूल हो गई, आज वेलेंटाइन डे भी है. आप अपने दिल की क्या बात कहना चाहते हो अजीत?’’ पूजा ने पूछा.

मुश्ताक ने टैक्सी सड़क के किनारे खड़ी कर दी, उस के बाद उस ने पूजा का हाथ अपने हाथ में लेते हुए कहा, ”पूजा, मैं तुम से बहुत प्यार करने लगा हूं, अब मैं तुम्हारे बिना एक पल भी जिंदा नहीं रह सकता. लव यू पूजा.’’ मुश्ताक उर्फ अजीत की आवाज लडख़ड़ाने लगी थी.

यह देख पूजा बिस्वास ने एक उचटती हुई निगाह मुश्ताक की ओर डाली और अपना हाथ झटके से खींच लिया. यह देख कर मुश्ताक मन ही मन घबराने लगा और सोचने लगा कि ऐसा लगता है पूजा मेरी बात से कहीं नाराज तो नहीं हो गई. मुझे ऐसे प्रपोज नहीं करना चाहिए था.

”देखो अजीत, ये प्यार कोई हंसीखेल का तमाशा नहीं है. सब से पहले तुम्हें मेरे अतीत को जानना चाहिए.’’ पूजा ने गंभीर हो कर कहा.

”देखिए पूजाजी, मेरे दिल में आप के लिए अब वह स्थान बन चुका है, जिसे मैं किसी भी हालत में खोना नहीं चाहता. आप का अतीत चाहे जैसा भी रहा हो, मैं तुम्हें हर हाल में अपनाना चाहता हूं.’’ मुश्ताक ने भावुक स्वर में कहा.

लिवइन में रहने लगे दोनों

उस के बाद पूजा ने मुश्ताक को बताया, ”मेरा विवाह 18 साल पहले शक्ति फार्म में रतन (परिवर्तित नाम) के साथ हुआ था, मेरा पति रतन मकान में शटरिंग का काम करता था. रतन बहुत शक्की स्वभाव का था, वह मेरे चरित्र पर हमेशा शक करता रहता था. वह शराब पीने का भी आदती थी. बाद में हमारे 2 बेटे भी हो गए. मैं ने सोचा कि बच्चों की जिम्मेदारी सिर पर आने के बाद रतन में सुधार आ जाएगा, लेकिन रतन तो न जाने किस मिट्टी का बना हुआ था. शराब पी कर वह कईकई दिन घर पर ही पड़ा रहता था.

”जब मैं उसे समझाने का प्रयास करती तो वह मुझे बुरी तरह से गालियां देने लगता था. मारपीट करने लगता था. वह केवल मेरे साथ ही नहीं, बल्कि अब बच्चों को भी बुरी तरह से पीटने लगा था. मैं ने जब यह बात अपने मम्मीपापा और भाईबहनों को बताई तो वे मुझे अपने साथ ले गए और फिर 2019 में मैं ने रतन से तलाक भी ले लिया. 2008 में मेरी शादी हुई और 11 साल के बाद मेरा तलाक भी हो गया.’’

”पूजा, आप के घर में कौनकौन है?’’ मुश्ताक ने पूछा.

”अजीतजी, मेरे घर में मेरे मम्मीपापा के अलावा हम 4 बहनें और एक भाई है. बहनों के नाम शिवली, रमा और प्रमिला हैं जबकि मेरे भाई का नाम आशीष है. और भी कुछ पूछना बाकी रह गया हो तो बताइए.’’ पूजा ने कहा.

”पूजाजी, मुझे अब आगे कुछ नहीं पूछना है, बस आप का प्यार पाना चाहता हूं. आप की जिंदगी के सारे दुख बांटना चाहता हूं.’’ मुश्ताक ने कहा.

”ये जानते हुए भी कि मेरा एक बेटा 13 साल का है और दूसरा 11 साल का हो चुका है.’’ पूजा ने कहा.

”पूजा, मैं तुम्हें अपने दिल से भी ज्यादा प्यार करता हूं. मैं जीवन भर तुम्हारा और तुम्हारे बेटों की जिम्मेदारी अपने कंधों पर उठाने के लिए तैयार हूं. तुम एक बार मेरा विश्वास कर के तो देखो!’’ मुश्ताक ने पूजा का हाथ अपने हाथों में लेते हुए कहा.

मोहब्बत एक ऐसा रोग है, जो दबाने पर और भी अधिक भड़कने लगता है. लिहाजा पूजा भी मुश्ताक के बहकावे में आ गई और मोहब्बत के जोश में पूजा ने भी आखिर कह ही दिया, ”अजीत, मैं भी तुम से अब दिलोजान से प्यार करने लगी हूं. तुम ही अब मेरा प्यार, मेरी चाहत, मेरी दीवानगी हो, मैं अब तुम्हारी हूं और मरते दम तक तुम्हारी ही रहूंगी.’’

इस के बाद पूजा और मुश्ताक गुरुग्राम में लिवइन में रहने लगे. इस से पूजा के फेमिली वालों व बहनों को ऐतराज हुआ. उन्होंने पूजा को समझाया कि बिना विवाह किए किसी युवक के साथ रहना हमारे समाज में वर्जित है. पूजा और अजीत उर्फ मुश्ताक ने फिर 10 सितंबर, 2024 में एक मंदिर में जा कर शादी कर ली और फिर बेरोकटोक साथ रहने लगे.

पूजा अब मुश्ताक के साथ अलग फ्लैट में रहने लगी थी. इसी बीच पूजा को पता चल गया कि अजीत ङ्क्षहदू नहीं मुसलिम है और उस का असली नाम मुश्ताक है. धोखा कर के शादी करने पर पूजा और मुश्ताक के बीच कहासुनी भी हुई. जो होना था हो चुका था, इसलिए पूजा चुप हो गई. उस ने यह जानकारी अपनी बहन और मम्मी को भी बता दी थी. इस के बाद पूजा की मुश्ताक के साथ आए दिन कलह होने लगी. यह झगड़ा तब और बढ़ गया, जब मुश्ताक के फेमिली वालों ने मुश्ताक का निकाह अपने ही समाज में कर दिया था. फिर मुश्ताक ने योजना बना कर पूजा बिस्वास का मर्डर कर उस की लाश ठिकाने लगा दी.

गुरुग्राम पुलिस ने उत्तराखंड की खटीमा पुलिस के सहयोग से अभियुक्त मुश्ताक अहमद को गिरफ्तार करने के बाद उस की निशानदेही पर 30 अप्रैल, 2025 को खटीमा काली पुलिया अंडरपास से शव बरामद कर लिया. शव में सिर नहीं था. शव की शिनाख्त करने के लिए पूजा के भाई को वहां पर बुलाया गया तो शव देख कर आशीष फूटफूट कर रोने लगा था. उस ने रोते हुए पुलिस को बताया कि शव के पास जो दुपट्टा पड़ा है, वह दुपट्टा रक्षाबंधन के दिन आशीष ने ही पूजा को शगुन के तौर पर दिया था. पूजा का शव यानी धड़ काफी समय से पानी में पड़े रहने के कारण काफी सडग़ल चुका था. हालांकि शव की पहचान मृतका के भाई ने कपड़ों के आधार पर कर ली थी.

मृतका पूजा के परिजनों ने उत्तराखंड पुलिस पर लगाए आरोप, फांसी की मांग की

2 साल तक अपनी आर्थिक और दैहिक जरूरतों को पूरा करने के बाद प्रेमी मुश्ताक ने अपनी प्रेमिका पूजा की नृशंस हत्या कर दी. गुरुग्राम में काम करते समय पूजा ने जो भी पैसेरुपए कमाए, उस से उस ने अपने प्रेमी मुश्ताक के लिए सितारगंज के गौरीखेड़ा में एक प्लौट खरीदा, जहां आज मुश्ताक का मकान है. इतना ही नहीं पूजा ने मुश्ताक को सोने के जेवर और एक बाइक भी खरीदी.

मृतका पूजा के भाई आशीष और छोटी बहन प्रमिला ने उत्तराखंड पुलिस पर काफी संगीन आरोप लगाए हैं. उन का कहना है कि नवंबर 2024 में जब उन की बहन का कहीं पता नहीं चल रहा था तो वे सितारगंज कोतवाली अपनी बहन पूजा की मिसिंग रिपोर्ट लिखाने गए थे, लेकिन सितारगंज पुलिस ने उन से कोई सहयोग नहीं किया और पूजा के गायब होने की रिपोर्ट दर्ज करने से मना कर दिया. उधर गुरुग्राम पुलिस भी रिपोर्ट दर्ज नहीं कर रही थी. बाद में काफी दबाब बनाने के बाद गुरुग्राम के सेक्टर-5 थाना पुलिस में उन की रिपोर्ट दर्ज की गई.

लव जिहाद की शिकार बनी नानकमत्ता निवासी पूजा ने हत्या से कुछ दिन पहले एसएसपी को पत्र लिख कर मुश्ताक की शिकायत की थी. परिजनों के अनुसार पूजा ने मुश्ताक पर धर्म छिपाने और बाद में जबरन धर्म परिवर्तन करवाने का आरोप लगाया था. इस मामले में एसएसपी ऊधमसिंह नगर मणिकांत मिश्रा ने कोतवाल सितारगंज को निर्देशित भी किया था. इस बारे ने एसएसपी मणिकांत मिश्रा ने जानकारी देते हुए बताया है कि पूजा और मुश्ताक के बीच पहले भी कई विवाद हो चुके थे, जिस संबंध में मेरे कार्यालय में स्टाफ को शिकायती पत्र दिया गया था.

युवक युवती को अपने साथ रखना चाहता था, जबकि युवती उस के साथ नहीं रहना चाहती थी, जिस पर दोनों पक्षों में वार्ता भी कराई गई थी. इस के बावजूद उन के बीच विवाद होते रहे, लेकिन गुमशुदगी के संबंध में मुझे कोई शिकायत पत्र नहीं मिला. युवती के लापता होने के बाद काल डिटेल्स के आधार पर घटना की सच्चाई का पता लगाया गया.

पूजा की हत्या के आरोपी मुश्ताक के घर पर चला बुलडोजर

नानकमत्ता के बंगाली कालोनी निवासी पूजा बिस्वास की नृशंस हत्या के आरोपी मुश्ताक अहमद का सितारगंज के गौरीखेड़ा में बने घर को प्रशासन ने भारी पुलिस की मौजूदगी में 5 मई, 2025 को बुलडोजर लगा कर ध्वस्त कर दिया. 4 मई, 2025 को गुरुग्राम पुलिस गौरीखेड़ा स्थित मुश्ताक के घर पर पहुंची थी, लेकिन उस के घर पर ताला लगा था.

5 मई, 2025 की सुबह उत्तराखंड की पूरी जिले की पुलिस (ऊधमसिंह नगर), पीएसी व प्रशासनिक अधिकारी गौरीखेड़ा पहुंच गए. यहां पर गांव के आवागमन के रास्तों में बैरिकेडिंग लगा कर व भारी संख्या में पुलिस बल तैनात कर आवागमन बंद कर दिया गया. इसी दौरान जेसीबी मशीन से टिन शेड के बने मुश्ताक के मकान को जमींदोज कर दिया गया. भारी पुलिसप्रशासन तैनाती देख कर ग्रामीण अपने घरों में ही बैठे रहे. इस से पूर्व ऊधमसिंह नगर प्रशासन को थारू गौरीखेड़ा निवासी नारायण सिंह ने शिकायत दी थी कि मुश्ताक के पिता अली अहमद ने उस की जमीन पर कब्जा कर मकान बना दिया है और वह मेरी जमीन खाली नहीं कर रहा है.

जांच में पाया गया कि यह भूमि अनुसूचित जनजाति समुदाय के मथुरा प्रसाद की है और मकान अवैध ढंग से बनाया गया था. इस के बाद जिला प्रशासन की ओर से आरोपी को भूमि को खाली करने के लिए नोटिस जारी किया गया था, जिस के बाद आरोपी अपने घर पर ताला लगा कर वहां से फरार हो गए गए थे. जिस के बाद 5 मई, 2025 को पुलिस और प्रशासन की टीम ने बुलडोजर काररवाई करते हुए अवैध मकान को ढहा दिया.

गुरुग्राम पुलिस ने आरोपी मुश्ताक की निशानदेही पर घटनास्थल के पास से मृतका पूजा का टूटा हुआ मोबाइल फोन बरामद कर लिया है. इस के अलावा जिस चाकू से पूजा का गला काटा गया, उसे भी पुलिस ने मुश्ताक की बहन फूलबानो के घर से बरामद कर लिया गया. पुलिस को रेड के दौरान उस की बहन व अन्य सदस्य घर पर नहीं मिले. इस मामले में गुरुग्राम पुलिस आरोपी मुश्ताक अहमद के अन्य संभावित सहयोगियों की भी तलाश कर रही थी. कथा लिखने तक मृतका पूजा के सिर को तलाशने के लिए गुरुग्राम पुलिस उत्तराखंड पुलिस के साथ लगातार सर्च अभियान चला रही थी.

पुलिस गोताखोरों की मदद ले रही थी. सिर तलाशना पुलिस के लिए काफी अहम कड़ी भी है, क्योंकि उस से मृतका महिला के शव की पहचान पुख्ता हो जाएगी, जो कोर्ट में आरोपी हत्यारे मुश्ताक को कड़ी से कड़ी सजा दिलवाने में एक अहम सबूत हो सकता है. Love Story

 

 

Crime News : डाक्टर ने की हैवानियत की हद पार

Crime News : गोरखपुर पुलिस लाइंस स्थित मनोरंजन कक्ष खबर नवीसों से खचाखच भरा हुआ था. सामने कुरसी पर स्पैशल  टास्क फोर्स (एसटीएफ) के आईजी अमिताभ यश और एसएसपी डा. सुनील गुप्ता बैठे हुए थे. चूंकि पत्रकार वार्ता का आयोजन आईजी यश ने किया था, इसलिए ये वार्ता और भी खास लग रही थी. पत्रकारों के मन में एक अजीब सा कौतूहल था. ऐसा लग रहा था जैसे एसटीएफ के हाथ कोई बड़ा मामला लगा है और उसी के खुलासे के लिए लखनऊ से आए अमिताभ यश ने प्रैस वार्ता आयोजित की हो.

थोड़ी देर बाद पत्रकारों के मन से कौतूहल के बादल छंट गए, जब उन के सामने 3 आरोपियों को कतारबद्ध खड़ा किया गया. उन में से एक आरोपी गोरखपुर शहर का जाना माना डाक्टर और आर्यन हौस्पिटल का संचालक डा. डी.पी. सिंह उर्फ धीरेंद्र प्रताप सिंह था.

वार्ता शुरू करते हुए एसटीएफ आईजी अमिताभ यश ने सनसनीखेज खुलासा करते हुए कहा, ‘‘यह पत्रकारवार्ता 6 महीने पहले 2 जून, 2018 को नेपाल के पोखरा से रहस्यमय तरीके से गायब हुई गोरखपुर की सरस्वतीपुरम कालोनी निवासी राजेश्वरी उर्फ राखी श्रीवास्तव केस से जुड़ी हुई है, जिस की लाश 4 जून, 2018 को पोखरा की एक गहरी खाई से बरामद की गई थी.’’

नेपाल पुलिस ने मृतका का पोस्टमार्टम करवाया था. पोस्टमार्टम रिपोर्ट में उस का पेट फटने के कारण मौत की पुष्टि हुई थी. इधर 4 जून, 2018 को राखी के भाई अमर प्रकाश श्रीवास्तव ने बिहार के गया निवासी अपने बहनोई मनीष सिन्हा पर गोरखपुर के शाहपुर थाने में राखी के अपहरण और जान से मारने की धमकी का मुकदमा दर्ज करवाया था. मनीष सिन्हा ने खुद को बेगुनाह बताते हुए मामले की जांच एसटीएफ से कराए जाने की मांग की थी.

मुकदमे से संबंधित विवेचना की फाइल एसटीएफ के पास आई तो जांच शुरू की गई. नेपाल पुलिस ने भारतीय पुलिस से मृतका के फोटो साझा करते हुए केस का खुलासा करने में मदद मांगी थी. फोटो को एसटीएफ के तेजतर्रार सिपाही शुक्ला ने पहचान लिया. वह राखी श्रीवास्तव की तसवीर थी.

जांचपड़ताल में पता चला कि राखी श्रीवास्तव आर्यन हौस्पिटल के संचालक डा. डी.पी. सिंह की दूसरी पत्नी थी. 7 साल पहले दोनों ने आर्यसमाज मंदिर में शादी की थी. शादी के बारे में डाक्टर की पहली पत्नी ऊषा सिंह को जानकारी नहीं थी. जब जानकारी हुई तो परिवार में हड़कंप मच गया.

आगे चल कर डा. डी.पी. सिंह और राखी के बीच संबंधों को ले कर टकराव पैदा हो गया. राखी की उम्मीदें और डिमांड लगातार बढ़ती जा रही थीं. इस सब के चलते डाक्टर राखी से पीछा छुड़ाना चाह रहा था.

आईजी ने आगे बताया, ‘‘राखी ने शहर के कैंट थाने में डी.पी. सिंह के खिलाफ रेप और धमकी देने का मुकदमा भी दर्ज कराया था. हालांकि बाद में दोनों ने सुलह कर लिया था. फरवरी 2018 में राखी ने मनीष सिन्हा से दूसरी शादी कर ली थी, लेकिन इस के बावजूद डा. डी.पी. सिंह और राखी श्रीवास्तव के बीच रिश्ता बना रहा. इस के बावजूद राखी की डिमांड बढ़ती जा रही थी.

‘‘राखी की डिमांड से तंग आ कर डा. डी.पी. सिंह ने राखी की हत्या की साजिश रच डाली. बीते 4 जून, 2018 को राखी नेपाल के पोखरा घूमने गई थी. इस की जानकारी मिलने पर डा. डी.पी. सिंह अपने 2 कर्मचारियों देशदीपक निषाद और प्रमोद सिंह के साथ किराए की स्कौर्पियो से नेपाल गया. जहां उस ने राखी से मुलाकात कर उसे अपने झांसे में ले लिया.

‘‘डा. डी.पी. सिंह ने राखी को शराब पिलाई और नशे की गोली दे कर बेहोश कर दिया. बेहोशी की हालत में डी.पी. सिंह ने राखी को अपने दोनों कर्मचारियों के साथ पहाड़ी से नीचे खाई में फेंक दिया, जहां सिर और पेट में चोट आने से उस की मौत हो गई. बाद में डी.पी. सिंह अपने दोनों साथियों के साथ फरार हो गया. इस हाईप्रोफाइल मामले की जांच में स्थानीय पुलिस के साथ एसटीएफ भी लगी थी. ऐसे में गहराई से मामले की जांच किए जाने पर डा. डी.पी. सिंह और राखी के पहले के संबंधों की तह तक जाने पर हत्याकांड का खुलासा हो पाया.’’

पत्रकारों के पूछे जाने पर डा. डी.पी. सिंह और दोनों कर्मचारियों देशदीपक निषाद तथा प्रमोद सिंह ने अपना अपना जुर्म कबूल करते हुए राखी श्रीवास्तव हत्या में संलिप्तता स्वीकार ली. पत्रकारवार्ता के बाद पुलिस ने तीनों आरोपियों को अदालत में पेश किया. अदालत ने तीनों आरोपियों को जेल भेजने का आदेश दिया. तब पुलिस ने तीनों को गोरखपुर जिला जेल भेज दिया. यह 21 दिसंबर, 2018 की बात है.

आरोपियों के इकबालिया बयान और पुलिस जांचपड़ताल के बाद इस केस की हाईप्रोफाइल प्रेम कहानी कुछ ऐसे सामने आई—

गोरखपुर के कैंट थाना क्षेत्र की पौश कालोनी बिलंदपुर में विद्युत विभाग से सेवानिवृत्त इंजीनियर हरेराम श्रीवास्तव अपने परिवार के साथ रहते थे. उन के परिवार में कुल जमा 6 सदस्य थे, जिन में 2 बेटे और 2 बेटियां थीं. उन के चारों बच्चों में राजेश्वरी सब से छोटी थी. सब उसे प्यार से राखी कहते थे.

चारों भाईबहनों में राखी सब से अलग थी. उस के काम करने का तरीका, उठनेबैठने और पढ़नेलिखने का सलीका, बातचीत करने का अंदाज सब कुछ अलग था. परिवार में सब से छोटी होने की वजह से घर वाले उसे प्यार भी बहुत करते थे.

राखी मांबाप की दुलारी तो थी ही, बड़ा भाई अमर प्रकाश भी उसे बहुत चाहता था. बहन में जान बसती थी बड़े भाई अमर की. जिद्दी स्वभाव की राखी लाड़प्यार में भाई से जो मांगती थी, अमर कभी इनकार नहीं करता था.

राखी पर मोहित हो गया था डा. डी.पी. सिंह

सन 2006 की बात है. राखी के पिता हरेराम श्रीवास्तव बीमार थे. उन्हें इलाज के लिए आर्यन हौस्पिटल में इलाज के लिए भरती कराया गया था. यह हौस्पिटल घर के पास तो था ही, पूर्वांचल का जानामाना भी था. बेहतर इलाज और नजदीक समझते हुए अमर प्रकाश ने पिता को डा. डी.पी. सिंह के हौस्पिटल में भरती करा दिया. पिता की तीमारदारी के लिए घर वाले अस्पताल आतेजाते रहते थे. राखी भी आतीजाती थी.

करीब साढ़े 5 फीट लंबी राखी छरहरी तो थी ही ऊपर से गठीला बदन, गोरा रंग, गोलमटोल चेहरा, नागिन सी लहराती चोटी, झील सी गहरी आंखों से वह बला की खूबसूरत दिखती थी. डा. डी.पी. सिंह उर्फ डा. धीरेंद्र प्रताप सिंह की नजर जब राखी पर पड़ी तो उस का मन राखी में ही उलझ कर रह गया. एक तरह से वह उस के दिल में समा गई.

राखी प्राय: रोज ही पिता को देखने जाती थी. जब भी वह अस्पताल में होती तो डा. डी.पी. सिंह ज्यादा से ज्यादा समय उस के पिता के बैड के आसपास चक्कर लगाता रहता. राखी को यह देख कर खुशी होती कि डाक्टर उस के पिता के इलाज को ले कर गंभीर हैं. वह उन का कितना ध्यान रख रहा है.

2-3 दिन में ही राखी समझ गई कि डा. डी.पी. सिंह जब भी चैकअप के लिए पिता के बैड के आता है तो उस की नजरें पिता पर कम, उस पर ज्यादा टिकती हैं. उस की नजरों में आशिकी झलकती थी. डी.पी. सिंह भी गबरू जवान था. साथ ही स्मार्ट भी. पिता की तीमारदारी में डी.पी. सिंह की सहानुभूति देख कर राखी भी उस के आकर्षक व्यक्तित्व पर फिदा हो गई. वह भी डी.पी. सिंह को कनखियों से देखा करती थी. जब दोनों की नजरें आपस में टकरातीं तो दोनों ही मुसकरा देते.

राखी ने भी खोल दिया दिल का दरवाजा

कह सकते हैं कि राखी और डी.पी. सिंह दोनों के दिल एकदूसरे की चाहत में धड़कने लगे. अंतत: मौका देख कर एक दिन दोनों ने अपने अपने प्यार का इजहार कर दिया. बाली उमर की कमसिन राखी डी.पी. सिंह को दिल से मोहब्बत करने लगी जबकि डी.पी. सिंह राखी को दिल से नहीं, बल्कि उस की खूबसूरती से प्यार करता था.

कई दिनों के इलाज से हरेराम श्रीवास्तव स्वस्थ हो कर अपने घर लौट गए. पिता के हौस्पिटल से डिस्चार्ज होने के बाद राखी किसी न किसी बहाने हौस्पिटल आ कर डी.पी. सिंह से मिलने लगी. सालों तक दोनों एक दूसरे की बाहों में बाहें डाले प्यार के झूले पर पेंग बढ़ाते रहे. आलम यह हो गया कि एकदूसरे को देखे बिना दोनों को चैन नहीं मिलता था.

डा. डी.पी. सिंह के दिल के पिंजरे में कैद हुई राखी ने उस के अतीत में झांका तो उसे ऐसा लगा जैसे उस के पैरों तले जमीन खिसक गई हो. राखी के सपनों का महल रेत की दीवार की तरह भरभरा कर ढह गया. क्योंकि डी.पी. सिंह पहले से शादीशुदा था. उस ने यह बात छिपा कर रखी थी. राखी को जब यह सच्चाई दूसरों से पता चली तो उसे गहरा धक्का लगा. वह डाक्टर से नाराज हो कर गोंडा चली गई. वहां वह बीएड की पढ़ाई करने लगी.

डा. डी.पी. सिंह राखी के अचानक मुंह मोड़ लेने से तड़प कर रह गया. वह समझ नहीं पा रहा था कि अचानक राखी उस से रूठ क्यों गई. डी.पी. सिंह से जब राखी की जुदाई बरदाश्त नहीं हुई तो उस ने राखी से बात की, ‘‘क्या बात है राखी, तुम अचानक रूठ कर क्यों गईं? जाने अनजाने में मुझ से कोई भूल हो गई हो तो मुझे माफ कर दो.’’

‘‘मैं माफी देने वाली कौन होती हूं,’’ राखी तुनक कर बोली.

‘‘अरे बाप रे बाप, इतना गुस्सा!’’ मुसकराते हुए डी.पी. सिंह ने कहा.

‘‘ये गुस्सा नहीं दिल की टीस है, जो आप ने दी है डाक्टर साहब.’’ राखी के चेहरे पर दिल का दर्द छलक आया.

आश्चर्य से डा. डी.पी. सिंह ने कहा, ‘‘मैं ने तुम्हारे दिल को ऐसी कौन सी टीस दे दी कि तुम मुझ से रूठ गईं और शहर छोड़ कर चली गईं. तुम अच्छी तरह जानती हो कि मैं तुम से कितना प्यार करता हूं.’’

‘‘डाक्टर साहब, आप इतनी बड़ी बड़ी बातें कर रहे हो. ये बताओ, आप ने अपनी जिंदगी की इतनी बड़ी सच्चाई मुझ से क्यों छिपाई? आप ने मुझे यह क्यों नहीं बताया कि आप शादीशुदा हो.’’

‘‘हां, यह सच है कि मैं शादीशुदा हूं. यह भी सच है कि मुझे तुम्हें यह सच्चाई पहले बता देनी चाहिए थी लेकिन…’’

‘‘लेकिन क्या?’’ बीच में बात काटते हुए राखी बोली.

‘‘बताने का मौका ही नहीं मिला,’’ डा. सिंह ने सफाई दी, ‘‘मैं तुम्हें अपने जीवन की यह सच्चाई बताने वाला था, लेकिन बताने का मौका नहीं मिला. इस बात का मुझे दुख है.’’

‘‘तो फिर अब यहां क्या लेने आए हैं?’’

‘‘अपने प्यार की भीख. मैं तुम से अपने प्यार की भीख मांगता हूं राखी. तुम मेरा प्यार मुझे लौटा दो. मैं तुम्हारे बिना जी नहीं सकता. फिर मैं यहां से चला जाऊंगा.’’

‘‘ठीक है, लेकिन मेरी भी एक शर्त है.’’ राखी बोली.

‘‘क्या शर्त है तुम्हारी?’’

‘‘यही कि आप को मुझ से शादी करनी होगी. मेरी यह शर्त मंजूर है तो बताओ?’’

‘‘मुझे तुम्हारी यह शर्त मंजूर है. मैं तुम से शादी करने के लिए तैयार हूं. शादी के बाद तुम्हें पत्नी की नजरों से बचा कर ऐसी जगह रखूंगा, जहां तुम पर किसी की नजर न पड़ सके.’’

राखी ने सभी गिलेशिकवे भुला दिए.

राखी बन गई डाक्टर की दूसरी पत्नी

सन 2011 के फरवरी में राखी और डा. डी.पी. सिंह ने परिवार वालों से छिप कर गोंडा जिले के आर्यसमाज मंदिर में प्रेम विवाह कर लिया. प्रेमी प्रेमिका दोनों पतिपत्नी बन गए. लेकिन यह बात राखी के परिवार वालों से ज्यादा दिनों तक छिपी नहीं रही.

राखी के पिता हरेराम श्रीवास्तव को बेटी द्वारा एक शादीशुदा आदमी से शादी करने की बात पता चली तो उन्हें गहरा सदमा पहुंचा. वह इस सदमे को सहन नहीं कर सके और उन की मौत हो गई. उस के बाद राखी के परिवार वालों ने उस से हमेशा हमेशा के लिए रिश्ता तोड़ लिया.

शादी के बाद डी.पी. सिंह ने दूसरी पत्नी राखी के रहने के लिए गोरखपुर के शाहपुर क्षेत्र की पौश कालोनी सरस्वतीपुरम में एक आलीशान मकान खरीद दिया. राखी इसी मकान में रहती थी. हौस्पिटल से खाली होने के बाद डी.पी. सिंह राखी से मिलने उस के पास आता था. घंटों साथ बिता कर वह पहली पत्नी ऊषा सिंह के पास चला जाता था. उस के साथ कुछ समय बिता कर रात में राखी के पास आ जाता.

पहली पत्नी को पता चल गई डाक्टर की हकीकत 

डी.पी. सिंह की पहली पत्नी ऊषा सिंह देख समझ रही थी कि उस के पति के स्वभाव और रहनसहन में काफी तब्दीलियां आ गई हैं. वह उस में पहले की अपेक्षा कम दिलचस्पी ले रहा था. रात रात भर घर से गायब रहता था. वह रात में कहां जाता था, उसे कुछ भी नहीं बताता था. वह बताता भी तो क्या.

हालांकि वह जानता था कि जिस दिन यह सच पहली पत्नी ऊषा को पता चलेगा तो उस की खैर नहीं. आखिरकार डी.पी. सिंह का अंदेशा सच साबित हुआ. ऊषा को पति पर शक हो गया और उस ने पति की दिनचर्या की खोजबीन शुरू कर दी.

ऊषा से पति की सच्चाई ज्यादा दिनों नहीं छिप पाई. आखिर पूरा सच उस के सामने खुल कर आ गया. उस ने भी तय कर लिया कि अपने जीते जी वह अपने सिंदूर का बंटवारा हरगिज नहीं करेगी. या तो सौतन को मार देगी या खुद मर जाएगी.

इस बात को ले कर पतिपत्नी के बीच विवाद खड़ा हो गया. दूसरी औरत राखी को  ले कर ऊषा ने पति को आड़े हाथों लिया तो डी.पी. सिंह की बोलती बंद हो गई. वह हैरान था कि उस की सच्चाई पत्नी तक कैसे पहुंची, जबकि उस ने इस राज को काफी गहराई तक छिपा रखा था.

पत्नी के सामने सच्चाई आने के बाद डी.पी. सिंह की स्थिति बड़ी विचित्र हो गई. वह न तो पत्नी को छोड़ सकता था और न प्रेमिका से पत्नी बनी राखी के बिना रह सकता था. उस की हालत 2 नावों के सवार जैसी थी. इस के बावजूद वह दोनों नावों को डूबने नहीं देना चाहता था. डी.पी. सिंह किसी निष्कर्ष पर पहुंचता, इस से पहले ही पहली पत्नी ऊषा ने डी.पी. सिंह के खिलाफ कैंट थाने में मुकदमा दर्ज करा दिया.

भले ही ऊषा ने उस के खिलाफ मुकदमा दर्ज करा दिया था, डी.पी. सिंह ने इस की कोई परवाह नहीं की. वजह यह थी कि राखी मां बनने वाली थी. राखी और डी.पी. सिंह दोनों इसे ले कर काफी खुश थे. आने वाले बच्चे के भविष्य को ले कर संजीदा थे. समय आने पर राखी ने हौस्पिटल में बेटी को जन्म दिया. लेकिन वह मां की गोद तक जाने से पहले ही दुनिया छोड़ गई. बेटी की मौत ने राखी को झकझोर कर रख दिया. नवजात शिशु की मौत का असर डी.पी. सिंह पर भी पड़ा.

डाक्टर को होने लगा गलती का पछतावा

डी.पी. सिंह को अपने किए का पश्चाताप होने लगा था. वक्त के साथ स्थितियां बदल गईं. उसे लगने लगा कि राखी की खूबसूरती महज एक छलावा था. असल जीवनसाथी तो ऊषा है. अब डा. डी.पी. सिंह अपनी भूल सुधारने के लिए पत्नी की ओर आकर्षित होने लगा. उस ने अपनी भूल सुधारने के लिए ऊषा से एक मौका मांगा, साथ ही वादा किया कि अब ऐसा कभी नहीं होगा.

पति के वादे पर ऊषा को भरोसा नहीं था. सालों तक वह उस की पीठ पीछे रंगरलियां मनाता रहा था. यहां तक कि उसे भनक तक नहीं लगने दी थी. यही सब सोच कर ऊषा ने उसे माफ नहीं किया बल्कि फैसला पति पर छोड़ दिया.

दूसरी ओर डी.पी. सिंह ने राखी से बिलकुल ही मुंह मोड़ लिया. डी.पी. सिंह में पहले से काफी बदलाव आ गया था. लेकिन राखी को यह मंजूर नहीं था कि उस का पति उसे छोड़ कर पहली पत्नी के पास जाए.

राखी ने डी.पी. सिंह को चेतावनी दे दी कि अगर वह उसे छोड़ कर पहली पत्नी के पास गया तो इस का परिणाम भुगतने को तैयार रहे. जब उस ने प्यार के लिए अपना घरबार सब छोड़ दिया तो वह रिश्ता तोड़ने से पहले अच्छी तरह सोच ले.

राखी की चेतावनी ने डा. डी.पी. सिंह के संपूर्ण अस्तित्व को हिला कर रख दिया. वह जानता था कि राखी जिद्दी स्वभाव की है, जो ठान लेती है, कर के रहती है. घरगृहस्थी को बचाने के लिए डी.पी. सिंह धीरेधीरे राखी से किनारा करने लगा.

राखी समझ गई थी कि डी.पी. सिंह उस से बचने के लिए किनारा कर रहा है. डी.पी. सिंह ने भले ही राखी से दूरी बनानी शुरू कर दी थी, लेकिन उस के खर्चे में कमी नहीं की थी. उसे वह उस की मुंहमांगी रकम देता था.

राखी मांगने लगी अपना हक

यह अलग बात है कि राखी रुपए नहीं, अपना पूरा हक चाहती थी. उसे दूसरी औरत बन कर रहना मंजूर नहीं था. वह पत्नी का पूरा अधिकार चाहती थी. जबकि डी.पी. सिंह पहली पत्नी ऊषा को छोड़ने के लिए तैयार नहीं था. राखी उस पर दबाव बनाने लगी थी कि वह ऊषा को हमेशा हमेशा के लिए छोड़ कर उस के पास आ जाए. लेकिन डी.पी. सिंह ने ऐसा करने से साफ मना कर दिया था.

राखी ने सोच लिया था कि वह तो बरबाद हो गई है, पर उसे भी इतनी आसानी से मुक्ति नहीं देगी. डाक्टर को सबक सिखाने के लिए साल 2017 के शुरुआती महीने में राखी ने राजधानी लखनऊ के चिनहट थाने में डा. डी.पी. सिंह के खिलाफ अपहरण और गैंगरेप का मुकदमा दर्ज करा दिया.

यही नहीं उस ने गोरखपुर के महिला थाने में भी डा. सिंह के खिलाफ महिला उत्पीड़न का मुकदमा दर्ज कराया. एक साथ 2-2 मुकदमे दर्ज होते ही डा. सिंह के होश उड़ गए. गैंगरेप का मुकदमा दर्ज होते ही डी.पी. सिंह की शहर ही नहीं, पूर्वांचल भर में थूथू होने लगी. इस के चलते हौस्पिटल बुरी तरह प्रभावित हो गया. मरीज उस के क्लीनिक पर आने से कतराने लगे.

गैंगरेप केस ने डी.पी. सिंह की इज्जत पर बदनुमा दाग लगा दिया था. लोग उसे हिकारत भरी नजरों से देखने लगे और उस पर अंगुलियां उठने लगीं. इस से उस की सामाजिक प्रतिष्ठा की खूब छिछालेदर हुई. अपनी प्रतिष्ठा बचाने के लिए डी.पी. सिंह ने राखी से केस वापस लेने को कहा और उसे मुंहमांगी रकम देने का औफर दिया.

राखी ने उस के सामने सरस्वतीपुरम कालोनी की उस आलीशान कोठी की रजिस्ट्री अपने नाम कराने की शर्त रखी, जिस में वह रह रही थी. वह कोठी करोड़ों की थी. इस के लिए डी.पी. सिंह तैयार नहीं हुआ. उस ने बात टाल दी.

धी रेधीरे डा. डी.पी. सिंह का राखी से मोह खत्म हो गया. दोनों के बीच का प्यार टकराव में बदल गया. कल तक जिस राखी की गंध डी.पी. सिंह की रगों में खून के साथ बहती थी, अब वह दुर्गंध बन गई थी. टकराव की स्थिति में डी.पी. सिंह का जीना मुश्किल हो गया था. उस की पलपल की खुशियां छिन गई थीं. राखी द्वारा पैदा की गई दुश्वारियों से डी.पी. सिंह बौखला गया और उसे रास्ते से हटाने की योजना बनाने लगा.

राखी को हो गया फौजी मनीष से प्यार

इस बीच राखी के जीवन में एक नई कहानी की कड़ी जुड़ गई थी. सरस्वतीपुरम कालोनी में जहां राखी रहती थी, उसी के पड़ोस में मनीष कुमार श्रीवास्तव नाम का एक खूबसूरत और स्मार्ट युवक रहता था. वह आर्मी का जवान था और अपने एक रिश्तेदार के घर अकसर जाताआता था. वह मूलरूप से बिहार के गया जिले का रहने वाला था.

डी.पी. सिंह से रिश्ते खराब होने के बाद राखी अकेलापन दूर करने के लिए मनीष से नजदीकियां बढ़ाने लगी. मनीष भी राखी की खूबसूरती पर फिदा हो गया. थोड़ी मुलाकातों के बाद दोनों एकदूसरे के करीब आ गए. अंतत: फरवरी 2018 में राखी और मनीष ने कोर्टमैरिज कर ली.

शादी के बाद राखी मनीष के साथ गया चली गई. उस ने मनीष से अपने अतीत की सारी बातें बता दीं. मनीष समझदार और सुलझा हुआ इंसान था. वह राखी को समझाता रहता था. मनीष को पत्नी की अतीत की कहानी सुन कर उस के साथ सहानुभूति हो गई. उस ने राखी को समझाया कि जो बीत गया, उसे याद करने से कोई फायदा नहीं है. उसे बुरा सपना समझ कर भुला दो.

राखी ने भले ही मनीष से शादी कर ली थी, लेकिन अपने पहले प्यार डी.पी. सिंह को अपने दिल से निकाल नहीं पाई थी. डा. डी.पी. सिंह जान चुका था कि राखी ने दूसरी शादी कर ली है. डी.पी. सिंह ही नहीं वरन राखी का बड़ा भाई अमर प्रकाश भी इस बात को जान चुका था कि राखी ने दूसरी शादी कर ली है. राखी के इस कृत्य पर उस ने बहन को काफी डांटाफटकारा भी था और समझाया भी था.

दरअसल परिवार वालों ने राखी से संबंध तोड़ लिए थे. एक अमर ही था जिसे राखी की परवाह थी. वह उसे अकसर फोन कर के उस का हालचाल पूछ लेता था. राखी के इस बार के कृत्य से वह दुखी था और उस ने राखी से बात करनी बंद कर दी थी.

इधर राखी डी.पी. सिंह को बारबार फोन कर के मकान की रजिस्ट्री अपने नाम कराने का दबाव बना रही थी. राखी के दबाव बनाने से डी.पी. सिंह परेशान हो गया था. उस का दिन का चैन और रात की नींद उड़ चुकी थी. इस मुसीबत से निजात पाने के लिए वह राखी को रास्ते से हटाने की योजना बनाने लगा.

इस के लिए उस ने 5 बार योजना बनाई, लेकिन पांचों बार अपने मकसद में असफल रहा. अब आगे वह अपने मकसद में असफल नहीं होना चाहता था, इसलिए इस बार उस ने अपने हौस्पिटल के 2 कर्मचारियों देशदीपक निषाद और प्रमोद कुमार सिंह को पैसों का लालच दे कर साथ मिला लिया.

सब कुछ डा. डी.पी. सिंह की योजना के अनुसार चल रहा था. डी.पी. सिंह ने भले ही राखी से कन्नी काट ली थी, लेकिन राखी से फोन पर बात करनी बंद नहीं की थी. ऐसा वह राखी को विश्वास में लेने के लिए कर रहा था. राखी समझ रही थी कि डी.पी. सिंह अभी भी उस से प्यार करता है. राखी डी.पी. सिंह की इस योजना को समझ नहीं पाई. वह उस पर पहले जैसा ही यकीन करती रही.

31 मई, 2018 की बात है. राखी पति मनीष के साथ नेपाल के भैरहवा घूमने गई थी. 2 जून की सुबह पति से नजरें बचा कर उस ने डी.पी. सिंह को फोन कर के बता दिया कि वह भैरहवा घूमने आई है.

यह जान कर डी.पी. सिंह को लगा जैसे खुदबखुद उस की मुराद पूरी हो गई हो. वह जो चाह रहा था, वैसी स्थिति खुदबखुद बन गई. उस ने राखी से कहा कि वह भैरहवा में रुकी रहे. वह भी उस से मिलने आ रहा है. दूसरी ओर भैरहवा घूमने के बाद मनीष ने राखी से घर वापस चलने को कहा तो उस ने कुछ जरूरी काम होने की बात कह कर मनीष को अकेले ही घर वापस भेज दिया. मनीष अकेला ही गोरखपुर वापस लौट आया. वह कुछ दिनों की छुट्टी पर आया हुआ था.

डाक्टर ने रच ली थी खूनी साजिश

2 जून, 2018 को डा. डी.पी. सिंह, देशदीपक निषाद और प्रमोद कुमार सिंह के साथ स्कौर्पियो से नेपाल गया. नेपाल जाते हुए प्रमोद कुमार गाड़ी चला रहा था, जबकि देशदीपक निषाद ड्राइवर के बगल वाली सीट पर बैठा था और डा. सिंह पिछली सीट पर.

दोपहर के समय ये लोग सोनौली (भारत-नेपाल सीमा) होते हुए नेपाल पहुंचे. प्रमोद कुमार ने सोनौली बौर्डर पार करते हुए भंसार बनवाया था. भंसार बनवाने के लिए प्रमोद के ड्राइविंग लाइसेंस की कौपी लगाई गई थी. भंसार नेपाल द्वारा लगाया जाने वाला एक टैक्स होता है जो भारत से नेपाल सीमा में आने वाले वाहनों पर लगता है.

नेपाल के भैरहवा में राखी सड़क पर बैग लिए खड़ी इंतजार करती मिली. राखी से डी.पी. सिंह की बात नेपाल के नंबर से हुई थी. डी.पी. सिंह ने अपना मोबाइल जानबूझ कर घर पर छोड़ दिया था, ताकि जांचपड़ताल के दौरान पुलिस उस पर शक न कर सके.

राखी ने बताया कि वह भैरहवा में सड़क किनारे अकेली खड़ी है. राखी डी.पी. सिंह के पास गाड़ी में बैठ गई. वहां से चारों लोग पोखरा के लिए निकले. इन लोगों ने बुटवल से थोड़ा आगे और पालपा से पहले नाश्ता किया.

सभी लोग बुटवल से लगभग 100 किलोमीटर आगे मुलंग में एक छोटे होटल में रुके. इन लोगों ने होटल में 2 रूम बुक किए थे. डी.पी. सिंह और राखी एक कमरे में ठहरे थे. इस के बाद सुबह लगभग 11 बजे ये लोग खाना खा कर पोखरा के लिए निकले.

शाम को लगभग 4-5 बजे सभी पोखरा पहुंचे और डेविस फाल घूमे. इस के बाद राखी ने शौपिंग की, फिर सभी ने पोखरा में ही नाश्ता किया. इस के बाद ये लोग पहाड़ के ऊपर सारंगकोट नामक जगह पर होटल में रुके. इस होटल में सीसीटीवी कैमरे नहीं लगे थे. डा. डी.पी. सिंह ने खुद इस होटल का चुनाव किया था. होटल में इन लोगों ने पहले चाय पी और बाद में शराब. राखी की चाय में डी.पी. सिंह ने एल्प्रैक्स का पाउडर मिला दिया था.

रात के लगभग 11 बजे दवा ने अपना असर दिखाया तो राखी की तबीयत खराब होने लगी. यह देख डा. डी.पी. सिंह ने इंसानियत की सारी हदें पार कर दीं. उस ने राखी को लातघूंसों से जम कर मारापीटा. मारपिटाई में एक लात राखी के पेट में ऐसी लगी कि वह अर्द्धचेतना में चली गई. थोड़ी देर में उस की सांसें भी बंद हो गईं.

उस की मौत के बाद तीनों राखी की लाश को ले कर उसी रात पोखरा के लिए निकल गए. लाश की शिनाख्त न हो सके, तीनों शातिरों ने राखी का मतदाता पहचानपत्र, मोबाइल फोन, नेपाल रिचार्ज कार्ड कीमत 100 रुपए, सहित कई सामान अपने पास रख लिए थे.

इस के बाद इन लोगों ने राखी को गाड़ी से निकाला और पहाड़ से नीचे धक्का दे दिया और फिर नेपाल से वापस घर लौट आए.

3 जून, 2018 को झाड़ी से नेपाल पुलिस ने राखी की लाश बरामद की. लेकिन उस की शिनाख्त नहीं हुई. नेपाल पुलिस ने लाश का पोस्टमार्टम कराया तो राखी की मौत का कारण पेट फटना सामने आया. पोखरा पुलिस ने अज्ञात के खिलाफ हत्या का मुकदमा दर्ज कर के जांच शुरू कर दी.

इधर मनीष पत्नी को ले कर परेशान था कि उस ने काम निपटा कर शाम तक घर वापस लौटने को कहा था, लेकिन न तो वह घर आई और न ही उस का फोन काम कर रहा था.

मनीष पर ही किया गया शक

मनीष फिर नेपाल के भैरहवा पहुंचा, जहां वह पत्नी के साथ रुका था. वहां जाने पर उसे पता चला कि राखी 2 जून को यहां से चली गई थी. इस के बाद वह कहां गई, किसी को पता नहीं था. 2 दिनों तक मनीष राखी को भैरहवा में खोजता रहा. जब वह नहीं मिली तो 4 जून को मनीष ने फोन कर के इस की सूचना राखी के बड़े भाई अमर प्रकाश श्रीवास्तव को दे दी.

अमर प्रकाश श्रीवास्तव ने राखी के पति मनीष कुमार श्रीवास्तव पर शक जताते हुए गोरखपुर के शाहपुर थाने में मनीष के खिलाफ बहन के अपहरण और जान से मारने की धमकी का मुकदमा दर्ज करा दिया. पुलिस ने काररवाई करते हुए मनीष को गिरफ्तार कर लिया.

जांचपड़ताल में वह कहीं भी दोषी नहीं पाया गया. अंतत: पुलिस ने उसे हिदायत दे कर छोड़ दिया. उधर नेपाल पुलिस ने लाश की शिनाख्त के लिए लाश की कुछ तसवीरें गोरखपुर आईजी जोन जयप्रकाश सिंह के कार्यालय भिजवा दीं. आईजी जोन ने इस की जिम्मेदारी आईजी एसटीएफ अमिताभ यश को सौंप दी. अमिताभ यश ने एसएसपी एसटीएफ अभिषेक सिंह को जांच सौंप दी.

मनीष ने खुद किया जांच में सहयोग

इस बीच मनीष ने आईजी से मिल कर राखी के लापता होने की जांच की मांग की और खुद को निर्दोष बताते हुए मुकदमे से बरी करने की गुहार लगाई. मनीष के आवेदन पर एसटीएफ ने अपने विभाग के तेजतर्रार सिपाहियों यशवंत सिंह, अनूप राय, धनंजय सिंह, संतोष सिंह, महेंद्र सिंह आदि को लगाया.

एसटीएफ की जांचपड़ताल में राखी के मोबाइल की लोकेशन गुवाहाटी में मिली. फिर एक दिन अचानक राखी की डेडबौडी की फोटो सिपाही राजीव शुक्ला के सामने आई तो वह पहचान गया. इस क्लू ने डा. डी.पी. सिंह की साजिश का परदाफाश कर दिया. पुलिस ने जब डा. डी.पी. सिंह को गिरफ्तार कर के पूछताछ की तो सारी सच्चाई सामने आ गई.

डी.पी. सिंह के बयान के बाद उस के दोनों कर्मचारी देशदीपक निषाद और प्रमोद कुमार सिंह को भी गिरफ्तार कर लिया गया. दोनों ने राखी की हत्या करने और डी.पी. सिंह का साथ देने का अपना जुर्म कबूल कर लिया. पुलिस को गुमराह करने के लिए डी.पी. सिंह ने राखी के मोबाइल को गुवाहाटी भिजवा दिया था, ताकि पुलिस को लगे कि राखी जिंदा है और वह गुवाहाटी में है. लेकिन पुलिस ने उस के गुनाहों को बेपरदा कर दिया.

घटना के बाद डी.पी. सिंह ने राखी के दूसरे प्रेमी को फंसाने की योजना बनाई थी. लेकिन उस की यह योजना धरी का धरी रह गई. एसटीएफ ने डी.पी. सिंह और उस के साथियों के पास से राखी का मतदाता पहचान पत्र, मोबाइल फोन, 100 रुपए का नेपाल रिचार्ज कार्ड व अन्य सामान बरामद कर लिया. नेपाल पुलिस ने अपने यहां हत्या का मुकदमा दर्ज कर लिया था. डी.पी. सिंह और उस के दोनों साथियों पर दोनों देशों में एक साथ मुकदमा चलाया जाएगा. Crime News

—कथा पुलिस सूत्रों पर आधारित

Love Story : रहस्यमयी प्यार की अनोखी दास्तान

Love Story : सुबह के ठीक 9 बजे थे. तारीख थी 7 मई, 2022. मध्य प्रदेश के जिला मुरैना थाना सिहोनिया के थानाप्रभारी पवन सिंह भदौरिया अपने कक्ष में आ कर बैठे ही थे कि तभी एक अधेड़ महिला उन की टेबल के सामने आ कर खड़ी हो गई. उस के साथ एक छोटी लड़की भी थी, वह उस का हाथ पकड़े  थी.

महिला परेशान और कमजोर दिख रही थी. उसे भदौरिया ने कुरसी पर बैठने का इशारा किया. एक कुरसी पर वह बैठ गई और बगल की दूसरी कुरसी पर साथ आई लड़की को बैठा दिया. उस ने जो बात बताई उसे सुन कर भदौरिया चौंक गए. परिचय देते हुए उस ने अपना नाम मीराबाई बताया. उस ने कहा कि वह स्व. रामजी लाल सखवार की विधवा है और पास के ही गांव छत्त का पुरा में रहती है.

उस ने चौंकाने वाली बात यह बताई कि उस का बेटा विश्वनाथ 23 नवंबर, 2020 से ही घर नहीं आया है, जबकि वह खेतों में काम करने को कह कर गया था. वह गायब करवा दिया गया है. उस की पत्नी राजकुमारी का कहना है कि वह काम के सिलसिले में गुजरात में रह रहा है, लेकिन मुझे पूरा शक है कि उस की हत्या की जा चुकी है. भदौरिया ने मीराबाई से उस के बेटे के बारे में कुछ और जानकारी मांगते हुए पूछा कि वह कैसे कह सकती है कि उस के बेटे की किसी ने हत्या कर दी होगी. या फिर वह इस का सिर्फ अंदेशा जता रही है?

इतना सुनते ही मीराबाई बिलखने लगी. भदौरिया ने उसे एक गिलास पानी पिलवाया और शांति से बेटे के बारे में बताने को कहा कि उस के बेटे से किस की दुश्मनी थी? वह कहां आताजाता था? पत्नी से उस के कैसे संबंध थे? उस के गायब करने के पीछे किस का हाथ हो सकता है? इत्यादि. मीराबाई 2-3 मिनटों तक शांत बैठी रही, फिर उस ने बताना शुरू किया कि आखिर उसे क्यों अपने बेटे की मौत हो जाने की आशंका है? इस के पीछे कौन हो सकता है? उसे किस तरह से 22 महीनों तक धोखे में रखा गया? उसे अपनी बहू पर क्यों संदेह है? मीराबाई ने भदौरिया को जो कुछ बताया वह इस प्रकार है—

साहबजी, मेरे बेटे का नाम विश्वनाथ संखवार है. वह खेतीकिसानी के पुश्तैनी काम से जुड़ा रहा है. इस काम से कई बार गांव से दूसरे शहरों में भी जाता रहा है. उसे मैं ने अखिरी बार 2 साल पहले नवंबर महीने में तब देखा था, जब कोरोना फैला हुआ था. तारीख अच्छी तरह से याद है. उस रोज की 23 नवंबर, 2020 थी. वह रोज की तरह उस दिन अपने खेत पर गया था, रात गहराने पर भी जब खेत से लौट कर नहीं आया, तब मैं ने अपनी बहू राजकुमारी से उस के बारे में पूछताछ की. बहू ने मुझे बताया कि गुजरात से उन के किसी दोस्त का फोन आया था, इसलिए उन्हें अचानक गुजरात जाना पड़ गया था. वह 4-5 दिनों में लौट आएंगे.

किंतु जब बेटा 5 दिन बाद भी लौट कर नहीं आया, तब मुझे चिंता हुई. मैं ने अपनी बहू से फिर उस के बारे में पूछताछ की. उस ने अपने मोबाइल से मेरे बेटे के स्थान पर किसी और को बेटा बता कर मेरी बात करा दी. मुझे आवाज सुन कर थोड़ा संदेह हुआ, लेकिन बहू ने दबाव डाल कर कहा कि उस की बात उस के बेटे से ही हुई है. उस की थोड़ी तबीयत ठीक नहीं होने से आवाज बदली हुई लगी होगी.

मुझे लगा कि हो सकता है सुनने में ऐसा हुआ हो. उस की बेटे से ही बात हुई होगी. उम्र अधिक होने और सुनने और देखने की समस्या है. जबकि सच तो यह था कि बहू मेरी इस कमजोरी का फायदा उठा कर बेटे की जगह किसी और से बात करवाती रही है. एक ही आवाज सुनसुन कर मैं ने उसे ही अपना बेटा समझ लिया.

यह तो भला हो बेटी वंदना का, जिस ने बहू के इस झांसे को पकड़ लिया. वह अपने मायके आई हुई थी. घर में अपने बड़े भाई को नहीं पा कर उस ने भी भाभी राजकुमारी से पूछताछ की. बहू ने अपनी ननद को भी बताया कि उस के भैया इन दिनों गुजरात में रह रहे हैं. किसी और को भाई बता कर मोबाइल फोन पर उस की बात करवाने लगी. बात शुरू करते ही वंदना ने कहा कि उस की बात विश्वनाथ भैया से नहीं हो रही है. कोई और आदमी उस के भाई की आवाज बना कर बात कर रहा है.

इस तरह वंदना ने भाभी के झूठ और जालसाजी को पकड़ लिया था. उस ने भाभी से पूछा कि वह भैया के बारे में सचसच बताए. इस समय वह कहां हैं? भाभी इस का सही तरह से जवाब नहीं दे पाई. इस के बाद ही बेटी वंदना ने मुझे थाने में भाई की गुमशुदगी की सूचना लिखवाने की सलाह दी. थानाप्रभारी पवन सिंह भदौरिया ने मीराबाई की जानकारी के आधार पर विश्वनाथ की गुमशुदगी की सूचना दर्ज कर ली. साथ ही उन्होंने इस पर काररवाई की शुरुआत करते हुए सब से पहले मुरैना के सभी थानों में विश्वनाथ के हुलिए आदि की जानकारी उपलब्ध करवा दी.

विश्वनाथ के गायब होने की सूचना भी प्रसारित करवा दी गई. मामला एक वैसे वयस्क पुरुष के 22 माह से गुमशुदा होने से संबंधित था, जो परिवार का मुखिया था. इसलिए सिहोनिया थानाप्रभारी ने इसे गंभीरता से ले कर अपने कुछ खास मुखबिर भी लगा दिए. मुखबिरों को सौंपे गए कार्यों में एक कार्य विश्वनाथ की पत्नी के चालचलन के बारे जानकारी जुटाने का भी था. जल्द ही उन से राजकुमारी के अरविंद सखवार नाम के व्यक्ति के साथ अवैध संबंध होने के एक राज का पता चल गया.

मुखबिर ने बताया कि वह विश्वनाथ की गैरमौजूदगी में राजकुमारी से मिलने घर पर आता रहता था. विश्वनाथ के बच्चे उसे चाचा कह कर बुलाते थे. इन दिनों भी उस का आनाजाना लगा हुआ है. भदौरिया के लिए यह बेहद महत्त्वपूर्ण जानकारी थी. उन की जांच की सुई राजकुमारी और अरविंद की ओर घूम गई. इस में उन्होंने अवैध संबंध होने के तार जोड़ लिए. अब उन्हें किसी तरह राजकुमारी और अरविंद के बीच अवैध संबंध के ठोस सबूत की जरूरत थी, ताकि उन की गतिविधियों में विश्वनाथ के शामिल होने का पता चल सके.

इस की तहकीकात में तेजी लाने के लिए उन्होंने अपने मातहतों को साइबर सेल की मदद लेने का निर्देश दिया. विश्वनाथ, राजकुमारी और अरविंद के मोबाइल फोन की काल डिटेल्स निकलवा कर जब उस का अध्ययन किया गया, तब पता चला कि बीते 22 महीनों में राजकुमारी और अरविंद सखवार के बीच सैकड़ों बार बातचीत हुई है. कई बार तो उन के बीच घंटों तक बातचीत हुई थी. इसी के साथ महत्त्वपूर्ण जानकारी 23 नवंबर, 2020 के शाम की थी. उसी दिन अचानक गायब हुए विश्वनाथ, राजकुमारी और अरविंद के मोबाइल फोन नंबरों की लोकेशन सिकरोदा नहर के किनारे की पाई गई.

यहां तक कि गुमशुदा विश्वनाथ और उस की पत्नी राजकुमारी एवं अरविंद सखवार का नंबर जिस मोबाइल फोन में चलाया जा रहा था, उस का आईएमईआई नंबर एक ही था. यह जानकारी थानाप्रभारी को एक महत्त्वपूर्ण कड़ी लगी. उन्होंने तुरंत सादे कपड़ों में महिला कांस्टेबल को राजकुमारी के घर उस वक्त भेजा, जिस वक्त वह घर पर नहीं थी. कांस्टेबल ने राजकुमारी के बेटे और बेटी से पूछताछ की.

उन से चौंकाने वाली जानकारी हाथ लगी. राजकुमारी के बेटे ने तो यहां तक बताया कि 23 नवंबर की शाम को उन के घर अरविंद चाचा आए थे. मम्मी ने पापा को बाजरे का लड्डू खिलाया था. उस के बाद वह सामान खरीदने की बात कह कर उन्हें अरविंद चाचा की बाइक पर बैठा कर ले गई थी. उस दिन के बाद से पापा वापस घर नहीं लौटे हैं.

इस जानकारी से विश्वनाथ के बारे में पुलिस को एक ठोस सबूत मिल गया था. उस के बाद ही थानाप्रभारी ने 10 अगस्त, 2022 को राजकुमारी और अरविंद को थाने बुलाया. उन से अलगअलग घंटों तक पूछताछ की गई. उन से पूछताछ में सामान्य सवाल पूछे गए, जिस में इधरउधर की बातचीत ही अधिक शामिल थी. इस तरह उन पर एक मनोवैज्ञानिक दबाव बनाया गया.

धीरेधीरे राजकुमारी पर पुलिस की सख्ती बढ़ती चली गई. आखिरकार पुलिस की सख्ती के आगे राजकुमारी टूट गई. उस ने अपना जुर्म कुबूल करते हुए जो कुछ बताया, उस से विश्वनाथ की हत्या की पूरी कहानी साफ हो गई. राजकुमारी ने बताया कि 23 नवंबर, 2020 को ही योजनाबद्ध तरीके से उस ने पति को बाजरे के आटे से बने लड्डू में नींद की गोलियां मिला दी थीं. उस के बाद बाजार से सामान खरीदने के बहाने साथ ले कर चली गई थी.

नींद की गोलियों के असर से पति को गहरी नींद आ जाने पर राजकुमारी ने अपने प्रेमी अरविंद से मिल कर उस के कपड़े उतार दिए थे. उस की जेब से मोबाइल फोन और पर्स निकालने के बाद उसी अवस्था में सिकरोदा की नहर में फेंक दिया. तब उन्होंने सोच लिया कि उसे ठिकाने लगा दिया गया है और उन के रास्ते का कांटा निकल गया है.

अगले दिन यानी 24 नवंबर, 2020 को थाना सरायछोला पुलिस द्बारा नहर में बह कर आए अज्ञात व्यक्ति के शव के बरामद किए जाने की जानकारी राजकुमारी को मिली. इस की पुष्टि के लिए उस ने अरविंद को खासतौर से थाने भेजा. अरविंद ने बताया कि उस शव की शिनाख्त किसी ने नहीं की. उसे अज्ञात समझ कर पुलिस ने अंतिम संस्कार करा दिया. विश्वनाथ को रास्ते से हटाने के बारे में राजकुमारी ने उस के अरविंद के साथ प्रेम संबंध का होना बताया, जिस के बारे में उसे जानकारी हो गई थी. राजकुमारी ने बताया कि उसे ले कर विश्वनाथ के साथ झगड़े होते रहते थे. उन के दांपत्य जीवन में कड़वाहट आ गई थी.

राजकुमारी ने बताया कि उस का पति विश्वनाथ खेतीकिसानी के काम के चलते घर काफी देर से लौटता था. फिर हाथपैर धो कर खाना खाने के बाद गांव की चौपाल पर ताश खेलने निकल जाता था. ताश खेलने के बाद वह आधी रात को ही घर लौटता था. घर आते ही गहरी नींद में सो जाता था. ऐसी स्थिति में वह देहसुख से वंचित रहती थी. अरविंद विश्वनाथ के ट्रैक्टर का ड्राइवर था. वह 3 साल पहले ही राजकुमारी के संपर्क में आया था. विश्वनाथ के घर पर नहीं होने पर भी वह बेधड़क घर आताजाता रहता था. बच्चों से भी काफी घुलमिल गया था.

राजकुमारी को पहले तो मालकिन कहता था, लेकिन उस के कहने पर ही उसे भाभी कहने लगा था. कभीकभार राजकुमारी से मजाक भी कर लिया करता था. उस की गदराई देह को वह तिरछी नजरों से देखता रहता था. राजकुमारी को भी अरविंद की चिकनीचुपड़ी बातें सुनने में मजा आता था और उस के मजाक का जवाब मजाक में देने लगी थी. बहुत जल्द ही वह उस के प्रभाव में आ गई थी. राजकुमारी ने बताया कि अरविंद ने उसे इतना प्रभावित कर दिया था कि जब तक दिन भर में एक बार उस का दीदार नहीं कर लेती थी, उसे चैन नहीं मिलता था.

बस फिर क्या था, अरविंद भी उसे चाहत भरी नजरों से ताकने लगा था. एक दिन उस ने मौका पा कर राजकुमारी को अपनी बाहों में जकड़ लिया था. वह पुरुष सुख से वंचित थी, इसलिए उसे अरविंद का रोमांस अच्छा लगा और फिर खुद को नहीं रोक पाई. राजकुमारी के अनुसार, अरविंद से उस रोज जो संतुष्टि मिली थी, वह पति के साथ कई सालों में नहीं मिली थी. वह गबरू जवान बलिष्ठ मर्द था. फिर तो दोनों ओर से जब भी चाहत जागती वे सैक्स करने का मौका निकाल लेते.

वह अकसर उस वक्त घर पर ट्रैक्टर लेने और पहुंचाने आता था, जब विश्वनाथ घर पर नहीं होता था. बूढ़ी सास को काफी कम सुनाई देता था. उस की आंखों की रोशनी भी धुंधली थी. राजकुमारी ने बताया कि एक दिन रात को अरविंद घर पर आया हुआ था. उस दौरान पति दोनों बच्चों को ले कर शादी में जयपुर गया हुआ था. घर में उस के अलावा सिर्फ सास ही थी. घर में सन्नाटा पा कर अरविंद वहीं रुक गया. उन की वह रात मौजमस्ती में गुजरी, लेकिन अलसुबह विश्वनाथ बच्चों समेत घर आ गया. उस रोज अरविंद और राजकुमारी रंगेहाथ पकड़े गए.

उस वक्त अरविंद तो विश्वनाथ की डांटडपट सुन कर चला गया, लेकिन राजकुमारी की नजर पर विश्वनाथ चढ़ गया था. उस घटना के बाद से विश्वनाथ दोनों पर नजर रखने लगा था. हालांकि उस के बाद उस ने अरविंद को नौकरी से निकाल दिया था. राजकुमारी को यह बात और बुरी लगी. उस ने अरविंद को अपनी एक योजना बताई. अरविंद साथ देने के लिए तैयार हो गया. अरविंद की वासना में अंधी राजकुमारी ने अपने सुहाग को ही दांव पर लगा दिया था.

इस तरह से विश्वनाथ की हत्या के बाद वह अपने बच्चों को गांव में बूढ़ी सास के सहारे छोड़ कर मुरैना में कमरा ले कर रहने लगी थी. हालांकि वह बीचबीच में बच्चों और सास से मिलने गांव आ जाती थी. सास को झांसा दिए रहती थी कि उस ने विश्वनाथ के गुजरात जाने के बाद घर की पूरी जिम्मेदारी अपने सिर पर उठा ली है. विश्वनाथ की गुमशुदगी के मामले में थाना सिहोनिया पुलिस ने राजकुमारी और उस के प्रेमी अरविंद को हत्या के आरोप में गिरफ्तार कर अदालत में पेश कर दिया, जहां दोनों ने अपना अपराध स्वीकार कर लिया. इस के बाद विश्वनाथ की पत्नी और उस के प्रेमी को जेल भेज दिया गया.

राजकुमारी ने जो सोचा था, वह पूरा नहीं हुआ. वह अपने पति की हत्या की अपराधी भी बन गई और उस के साथ उस का प्रेमी फंस गया. जो सोच कर उस ने पति की हत्या की, वह अब शायद ही पूरा हो. Love Story

(कथा पुलिस सूत्रों पर आधारित)

Short Hindi Story : दूल्हा एक दुलहन दो

Short Hindi Story : आज के महंगाई के दौर में एक पत्नी के साथ घर को चलाना आसान नहीं है तो वहीं ऐसे भी मामले सामने आए हैं, जहां सामान्य परिवार के युवकों ने एक साथ 2-2 लड़कियों से समाज और घर वालों की सहमति से शादी की. आखिर यह कैसे हुआ?

आज लोग एक शादी कर के परेशान रहते हैं. हां, राजारजवाड़ों के जमाने की बात अलग थी. उस समय जरूर लोग कईकई शादियां करते थे. जिस की जैसी सामर्थ्य होती थी, वह उसी हिसाब से शादी कर लेता था. राजाओं या जमींदारों की तो बात ही अलग थी. वे तो बुढ़ापे तक जवान लड़कियों से शादियां करते रहते थे. कहा जाता है कि पटियाला के महाराजा भूपिंदर सिंह की तो वैधअवैध मिला कर कुल 365 पत्नियां थीं. लेकिन अब समय बदल गया है. महंगाई के इस जमाने में एक पत्नी को ही संभालना लोगों के लिए मुश्किल हो रहा है तो 2 पत्नियों को भला कौन संभाल पाएगा. शादी भी अब एक से ज्यादा नहीं की जा सकती. हां, अगर पहली पत्नी ऐतराज न करे तो आदमी दूसरी शादी कर सकता है.

लेकिन ये शादियां एक साथ नहीं होतीं. किसी को बच्चा नहीं हुआ या पहली पत्नी को असाध्य बीमारी हो गई या फिर किसी से प्यार हो गया तो पहली पत्नी से स्वीकृति ले कर ही लोग दूसरी शादी कर सकते हैं.  जिस ने भी दूसरी शादी की है, उस ने इसी तरह की है. किसी दूसरी महिला के प्यार में पड़ कर भी बहुत लोगों ने धर्म बदल कर दूसरी शादी की है. लेकिन कोई एक ही मंडप में एक साथ 2 लड़कियों से शादी करे तो जान कर थोड़ी हैरानी तो होगी न. भला 2 लड़कियां एक साथ एक ही लड़के से एक ही मंडप में शादी करने को कैसे राजी हो गईं?

लेकिन इस में हैरान होने की बात नहीं है. जहां प्यार होता है, वहां कुछ भी संभव है. जिनजिन लोगों ने पहली पत्नी के रहते दूसरी शादी की है, उन में से ज्यादातर लोगों ने दूसरी शादी प्यार में ही पड़ कर की है. इसी तरह प्यार में ही पड़ कर जिला आदिलपुर के उन्नूर मंडल के गांव घनपुर के रहने वाले अर्जुन ने एक ही मंडप में एक साथ 14 जून, 2021 को 2 लड़कियों से एक साथ शादी की है. हुआ यह कि अर्जुन को पहले अपनी बुआ (पिता की बहन) की बेटी ऊषा रानी से प्यार हो गया. अर्जुन और ऊषा रानी की प्रेमकहानी चल ही रही थी कि अर्जुन को अपनी चाची की बेटी सुरेखा से भी प्यार हो गया.

कहा जाता है कि अर्जुन अपनी इन दोनों प्रेमिकाओं से 4 साल तक मिलताजुलता रहा और किसी और को तो क्या उस की प्रेमिकाओं को भी पता नहीं चला कि उन का प्रेमी एक नहीं, 2-2 लड़कियों से प्यार ही नहीं कर रहा, बल्कि मिलजुल भी रहा है. इस का पता तो तब चला, जब अर्जुन के मातापिता ने उस की शादी का निर्णय लिया. घर वालों ने जैसे ही अर्जुन की शादी की बात चलाई, दोनों लड़कियां आ कर सामने खड़ी हो गईं. दोनों ही लड़कियां उस से शादी को तैयार थीं. इस के लिए अर्जुन को न कोई दुविधा थी और न ही किसी तरह का ऐतराज. ऐतराज होता भी क्यों, उस ने तो दोनों से प्यार किया था.

चूंकि दोनों लड़कियों को भी मंजूर था और उन के घर वालों को भी किसी तरह की कोई आपत्ति नहीं थी, इसलिए अर्जुन की शादी ऊषा रानी और सुरेखा के साथ समुदाय के लोगों की मौजूदगी में धूमधाम से हो गई. आदिवासी समुदाय में जिस तरह के पारंपरिक कपड़े पहन कर विवाह होता है, उसी तरह के कपड़े पहन कर अर्जुन और दोनों लड़कियां आदिवासी समुदाय के रीतिरिवाजों के अनुसार रस्में पूरी कर विवाह बंधन में बंध गए. चूंकि आदिवासी समुदाय में इस तरह के विवाह की अनुमति है, इसलिए अर्जुन को 2 लड़कियों से एक साथ शादी करने में किसी तरह की कोई अड़चन नहीं आई.

अर्जुन के समुदाय में भले ही इस तरह की शादी की अनुमति है, लेकिन ऐसा पहली बार हुआ है, जब 2 दुलहनों ने एक साथ एक दूल्हे से विवाह किया है. आप सोच रहे होंगे कि 2 दुलहनों से एक साथ विवाह करने वाला अर्जुन अनपढ़ गंवार होगा, तभी तो उस ने इस तरह का अजीब काम किया है. ऐसी बात नहीं है. अर्जुन पढ़ालिखा है. उस ने बीएड किया है. लेकिन अभी उसे नौकरी नहीं मिली है. वह प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहा है. आदिवासी समुदाय के अर्जुन का विवाह भले ही अपने समुदाय में इस तरह का पहला विवाह है, जिस ने 2 लड़कियों के साथ एक साथ विवाह किया है, लेकिन इस के पहले 3 जनवरी, 2021 को छत्तीसगढ़ के जिला बस्तर के शहर से लगे गांव टिकरा लोहंगा का रहने वाला चंदू मौर्य एक ही मंडप में पूरे गांव के सामने 2 लड़कियों से विवाह कर चुका है.

दरअसल, चंदू मौर्य अपने ही गांव की हसीना बघेल और सुंदरी कश्यप से प्यार करता था. दोनों लड़कियां भी उसे इस हद तक प्यार करती थीं कि उस के बिना नहीं रह सकती थीं. जब चंदू की शादी की बात चली तो दोनों ही उस के साथ शादी करने को तैयार हो गईं. गांव में पंचायत बैठी. दोनों लड़कियां जिद पर अड़ी थीं. मजबूरन गांव वालों को फैसला लेना पड़ा कि चंदू चाहे तो दोनों लड़कियों के साथ शादी कर सकता है. चंदू भी दोनों लड़कियों के साथ शादी के लिए राजी था. गांव वालों की सहमति थी ही. इस के बाद गांव वालों की मौजूदगी में गाजेबाजे के साथ आदिवासी रीतिरिवाजों के साथ चंदू ने हसीना और सुंदरी के साथ 7 फेरे लिए.

वैसे तो हिंदुओं में कोई युवक 2 शादियां नहीं कर सकता. पर आदिवासी प्रथा के अनुसार पुरुष एक से अधिक शादी कर सकते हैं. फिर भी अर्जुन की ही तरह चंदू का यह पहला मामला है, जब किसी युवक ने एक ही मंडप में 2 लड़कियों के साथ विवाह किया है. हसीना और सुंदरी अपने पति चंदू के साथ हंसीखुशी से रह रही हैं. अर्जुन और चंदू की ही तरह 8 जुलाई, 2020 को मध्य प्रदेश के जिला बैतूल मुख्यालय से 40 किलोमीटर दूर ब्लौक घोड़ाडोंगरी के गांव कोयलारी के रहने वाले संदीप उइके ने भी एक ही मंडप में 2 लड़कियों से विवाह किया था. इन में एक दुलहन उन की प्रेमिका है तो दूसरी उस के मातापिता द्वारा पसंद की गई है.

हुआ यह कि संदीप जब भोपाल में पढ़ रहा था, तभी होशंगाबाद की रहने वाली एक लड़की से उसे प्यार हो गया. दोनों ने शादी का निर्णय कर लिया. वहीं दूसरी ओर घर वालों ने उस की शादी घोड़ाडोंगरी ब्लौक के गांव कोयलारी की रहने वाली एक लड़की से तय कर दी. घर वाले अपनी पसंद की लड़की से शादी करने लिए संदीप पर दबाव डाल रहे थे. दूसरी ओर प्रेमिका संदीप को छोड़ने को तैयार नहीं थी. मामला बढ़ा तो पंचायत बुलाई गई. पूरी बात सुन कर पंचायत ने कहा कि जब दोनों लड़कियां एक साथ रहने को तैयार हैं तो क्यों न दोनों ही लड़कियों की संदीप से शादी करा दी जाए.

दोनों लड़कियां इस बात पर सहमत थीं. उन के घर वालों ने भी ऐतराज नहीं किया. उस के बाद दोनों के घर वालों के अलावा गांव और बिरादरी वालों की मौजूदगी में उन के रीतिरिवाजों के अनुसार एक ही मंडप में संदीप की शादी दोनों लड़कियों से करा दी गई. इसी तरह उत्तर प्रदेश के प्रयागराज का रहने वाला एक युवक मंदिर में 2 लड़कियों की मांग भर कर एक साथ विवाह कर चुका है. दरअसल, हुआ यह था कि युवक एक लड़की से प्यार करता था. लड़की जब भी उस युवक से शादी के लिए कहती तो वह कोई न कोई बहाना बना कर टाल देता था. तब लड़की ने उस से कहा, ‘‘अगर तुम ने मेरे साथ शादी नहीं की, मुझे धोखा दिया तो मैं जहर खा कर जान दे दूंगी.’’

युवक ने लड़की को बहुत समझाया, पर लड़की अपनी जिद पर अड़ी रही. इस पर युवक को गुस्सा आ गया और उस ने लड़की को एक थप्पड़ मार दिया. वह लड़की वहां से सीधे थाना कर्नलगंज पहुंची और युवक के खिलाफ मारपीट का मुकदमा दर्ज करा दिया. मुकदमा दर्ज करने के बाद थाना कर्नलगंज पुलिस ने युवक को गिरफ्तार कर अदालत में पेश किया, जहां से उसे जमानत मिल गई. युवक अपने ही मोहल्ले की एक अन्य  लड़की से पहले से ही प्रेम करता था. उस का और उस लड़की से कई सालों से प्रेम प्रसंग  चल रहा था. एक दिन दोनों यमुना बैंक पर घूम रहे थे तो उस की पहली प्रेमिका ने उन्हें देख लिया. दूसरी लड़की के साथ अपने प्रेमी को देख कर वह लड़की हंगामा करने लगी. आखिर किसी तरह मामला शांत हुआ.

अगले दिन वह युवक अपनी नई प्रेमिका के साथ मंदिर में शादी करने पहुंचा तो न जाने किस तरह सूचना पा कर युवक की पुरानी प्रेमिका भी वहां पहुंच गई. शादी को ले कर वह हंगामा करने लगी. दोनों ही लड़कियां उस युवक से शादी करना चाहती थीं. युवक दोनों को समझाता रहा, पर वे मानने को तैयार नहीं थीं. मजबूर हो कर युवक ने दोनों की मांग भर कर दोनों के साथ शादी कर ली. जिस का वीडियो वायरल हुआ तो लोगों को इस अनोखी शादी का पता चला.

Hindi love Story in Short : एक नेता की प्रेम कहानी

Hindi love Story in Short : सोनिया भारद्वाज को अपने 2 पतियों से वह नहीं मिला, जिस की उसे आकांक्षा थी. तभी तो उस ने कांग्रेस के दिग्गज नेता और पूर्वमंत्री उमंग सिंघार को तीसरा पति बनाने के लिए कदम बढ़ाए. लेकिन शादी के बंधन में बंधने से पहले ही जिस तरह सोनिया ने नेताजी के बंगले में सुसाइड किया, उस से कई तरह के सवाल खड़े हो गए हैं.

‘अब मैं और सहन नहीं कर सकती. मैं ने अपनी तरफ से सब कुछ किया लेकिन उमंग का गुस्सा बहुत ज्यादा है. मुझे डर लगता है कि उमंग मुझे अपनी लाइफ में जगह नहीं देना चाहते… उन की किसी भी चीज को टच करो तो उन्हें बुरा लगता है. इस बार भी मैं खुद भोपाल आई, जबकि वह नहीं चाहते थे कि मैं आऊं. मैं कभी तुम्हारे जीवन का हिस्सा नहीं बन पाई. आर्यन सौरी, मैं तुम्हारी लाइफ के लिए कुछ नहीं कर पाई. मैं जो कुछ भी कर रही हूं अपनी मरजी से कर रही हूं, इस में किसी की कोई गलती नहीं है.

‘उमंग, आप के साथ मैं ने सोचा था कि लाइफ सेट हो जाएगी. आई लव यू. मैं ने बहुत कोशिश की एडजस्ट करने की, पर आप ने मुझे अपनी लाइफ में जगह नहीं दी. सौरी.’

यह लाइनें हैं उस पत्र की, जो सोनिया भारद्वाज ने एक पूर्वमंत्री के बंगले में आत्महत्या करने से पहले लिखा था. 37 वर्षीय सोनिया भारद्वाज की जिंदगी कई मायनों में आम औरतों से काफी अलग थी. बहुत कुछ होते हुए भी उस के पास कुछ नहीं था. वह निहायत खूबसूरत थी और उम्र उस पर हावी नहीं हो पाई थी. कोई भी उसे देख कर यह नहीं मान सकता था कि वह 19 साल के एक बेटे की मां भी है. औरत अगर खूबसूरत होने के साथसाथ विकट की महत्त्वाकांक्षी भी हो तो जिंदगी की बुलंदियां छूने से उसे कोई रोक नहीं सकता. लेकिन अगर वह अपनी शर्तों पर मंजिल और मुकाम हासिल करने की कोशिश करती है तो अकसर उस का अंजाम वही होता है जो सोनिया का हुआ.

बीती 16 मई की रात सोनिया ने आत्महत्या कर ली. भोपाल के पौश इलाके शाहपुरा के बी सेक्टर के बंगला नंबर 238 में फांसी के फंदे पर झूलने और सुसाइड नोट लिखने से पहले उस ने और क्याक्या सोचा होगा, यह तो कोई नहीं बता सकता. लेकिन अपने सुसाइड नोट में उस ने जो लिखा, उस से काफी हद तक यह समझ तो आता है कि वह अपने तीसरे प्रेमी और मंगेतर पूर्वमंत्री उमंग सिंघार की तरफ से भी नाउम्मीद हो चुकी थी. जिंदगी भर प्यार और सहारे के लिए भटकती सी रही हरियाणा के अंबाला के बलदेव नगर इलाके के सेठी एनक्लेव की रहने वाली सोनिया ने आखिरकार भोपाल आ कर एक पूर्व मंत्री उमंग सिंघार के बंगले पर ही खुदकुशी क्यों की, इस सवाल के जबाब में सामने आती है 2 अधेड़ों की अनूठी लव स्टोरी, जिसे शुरू हुए अभी बहुत ज्यादा वक्त नहीं हुआ था.

हालांकि 2 साल एकदूसरे को समझने के लिए कम नहीं होते, पर लगता ऐसा है कि उमंग और सोनिया दोनों ही एकदूसरे को समझ नहीं पाए थे और अगर समझ गए थे तो काफी दूर चलने के बाद कदम वापस नहीं खींच पा रहे थे. सोनिया की पहली शादी कम उम्र में अंबाला के ही संजीव कुमार से हो गई थी. शादी के बाद कुछ दिन ठीकठाक गुजरे. इस दौरान उस ने एक बेटे को जन्म दिया, जिस का नाम आर्यन रखा. 19 साल का हो चला आर्यन इन दिनों शिमला के एक इंस्टीट्यूट से होटल मैनेजमेंट का डिप्लोमा कर रहा है. आर्यन के जन्म के बाद संजीव और सोनिया में खटपट होने लगी, जिस का दोष सोनिया के सिर ही मढ़ा गया. जिस का नतीजा अलगाव की शक्ल में सामने आया.

कुछ समय तनहा गुजारने के बाद सोनिया ने एक बंगाली युवक से दूसरी शादी कर ली. लेकिन उस का दूसरा पति भी उसे जल्द छोड़ कर भाग खड़ा हुआ. फिर जरूर हुई सहारे की अब सोनिया के सामने सब से बड़ी चुनौती आर्यन की परवरिश की थी, जिस के लिए उस ने एक नामी कौस्मेटिक कंपनी में नौकरी कर ली . थोड़ा पैसा आया और जिंदगी पटरी पर आने लगी तो सोनिया को फिर एक सहारे की जरूरत महसूस हुई. यह सहारा उसे दिखा और मिला भी 47 वर्षीय उमंग सिंघार में, जिन से उस की जानपहचान एक मैट्रीमोनियल पोर्टल के जरिए हुई थी. उमंग सिंघार की गिनती मध्य प्रदेश के दबंग जमीनी और कद्दावर नेताओं में होती है. वह निमाड़ इलाके की गंधवानी सीट से तीसरी बार विधायक हैं और कमलनाथ मंत्रिमंडल में वन मंत्री भी रह चुके हैं.

उमंग की बुआ जमुना देवी अपने दौर की तेजतर्रार आदिवासी नेता थीं. उन की मौत के बाद उमंग को उन की जगह मिल गई. निमाड़ इलाके में जमुना देवी के बाद उमंग कांग्रेस के प्रमुख आदिवासी चेहरा हो गए, जिन के राहुल गांधी से अच्छे संबंध हैं. कहा यह भी जाता है कि वह उन गिनेचुने नेताओं में से एक हैं, जिन की पहुंच सीधे राहुल गांधी तक है. विरासत में मिली राजनीति को उमंग ने पूरी ईमानदारी और मेहनत से संभाला और पार्टी आलाकमान को कभी निराश नहीं किया. झारखंड विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ने उन्हें वहां की जिम्मेदारी भी दी थी, जिस पर वह खरे उतरे थे. वहां उन्होंने आदिवासी इलाकों में ताबड़तोड़ दौरे किए थे, नतीजतन कांग्रेस और जेएएम का गठबंधन भाजपा से सत्ता छीनने में सफल हो गया था.

झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने भी एक अंतरंग इंटरव्यू के दौरान, जो रांची में उन के घर पर लिया गया था, इस प्रतिनिधि से उमंग की भूमिका की तारीफ की थी. उमंग सिंघार भी आदिवासियों को हिंदू नहीं मानते और आदिवासी इलाकों में हिंदूवादी संगठनों की गतिविधियों का अकसर विरोध करते रहते हैं. पिछले साल तो उन्होंने इन इलाकों में रामलीला किए जाने का भी विरोध किया था. राजनीतिक जीवन में सफल रहे उमंग की व्यक्तिगत जिंदगी बहुत ज्यादा सुखी और स्थाई नहीं रही. सोनिया की तरह उन की भी 2 शादियां पहले टूट चुकी हैं. पहली पत्नी से तो उन्हें 2 बच्चे भी हैं. यानी सोनिया से शादी हो पाती तो यह उन की भी तीसरी शादी होती.

बहरहाल, दोनों की जानपहचान जल्द ही मेलमुलाकातों में बदल गई और दोनों अकसर मिलने भी लगे. दिल्ली, अंबाला और भोपाल में इन दोनों ने काफी वक्त साथ गुजारा और दिलचस्प बात यह कि किसी को इस की भनक भी नहीं लगी. और जब लगी तो खासा बवंडर मच गया. आत्महत्या करने से पहले सोनिया ने अपने सुसाइड नोट में उमंग की तरफ इशारा करते हुए जो लिखा, वह ऊपर बताया जा चुका है. कोरोना की दूसरी लहर के कहर और लौकडाउन के चलते भोपाल भी सन्नाटे और दहशत में डूबा था. लोग अपने घरों में कैद थे. जैसे ही उमंग के बंगले पर एक युवती के आत्महत्या करने की खबर आम हुई तो इस की हलचल सियासी हलकों में भी हुई.

पुलिस की जांच में उजागर हुआ कि सोनिया भोपाल करीब 25 दिन पहले आई थी और तब से यहीं रह रही थी. एक तरह से दोनों लिवइन रिलेशनशिप में थे.  हादसे के 3 दिन पहले ही दोनों के बीच कहासुनी भी हुई थी. इस के तुरंत बाद उमंग अपने विधानसभा क्षेत्र गंधवानी चले गए थे. नौकर के बयान पर मामला दर्ज बंगले पर ड्यूटी बजा रहे उमंग के नौकर गणेश और उस की पत्नी गायत्री ने अपने बयान में इन दोनों के बीच होने बाली कलह की पुष्टि की. 17 मई, 2021 की सुबह जब गायत्री उमंग के औफिस, जो सोनिया के कमरे में तब्दील हो गया था, पहुंची तो वह अंदर से बंद था. सोनिया चूंकि पहले भी 2 बार इस बंगले में आ चुकी थी, इसलिए दोनों उस की वक्त पर उठने और कसरत करने की आदत से वाकिफ हो गए थे.

गायत्री ने यह बात गणेश को बताई और गणेश ने मोबाइल पर उमंग को बताई तो उमंग ने अपने नजदीकियों को बंगले पर देखने जाने को कहा. उमंग के परिचितों ने जैसेतैसे जब कमरा खोला तो वह यह देख कर सन्न रह गए कि सोनिया ग्रिल पर लटकी है और उस के गले में फांसी का फंदा कसा हुआ है. तुरंत ही इस की खबर उन्होंने उमंग और फिर पुलिस को दी. घबराए उमंग बिना देर किए भोपाल रवाना हो लिए. अब तक मध्य प्रदेश में अटकलों और अफवाहों का बाजार गरमा चुका था और पुलिस बंगले को घेर चुकी थी. शुरुआती जांच और पूछताछ के बाद सोनिया की लाश पोस्टमार्टम के लिए भेज दी गई और उस की मौत की खबर अंबाला में रह रही उस की मां कुंती, बेटे आर्यन और भांजे दीपांशु को भी दी गई .

दीपांशु ने पुलिस को बताया कि पिछली रात को ही सोनिया ने घर वालों से वीडियो काल के जरिए बात की थी, लेकिन तब वह खुश दिख रही थी. ये लोग भी भोपाल के लिए चल दिए. उमंग ने दिया सधा हुआ बयान अब हर किसी को उमंग की प्रतिक्रिया का इंतजार था, जिन्होंने भोपाल आ कर बेहद सधे ढंग से कहा कि सोनिया उन की अच्छी मित्र थी. उस के यूं आत्महत्या करने से मैं हैरान हूं. हम दोनों जल्द ही शादी करने वाले थे. सोनिया के अंतिम संस्कार के वक्त वह उस की मां के गले से लिपट कर रोए तो बहुत कुछ स्पष्ट हो गया कि अब इस हाईप्रोफाइल मामले में कुछ खास नहीं बचा है सिवाय कानूनी खानापूर्ति करने के. क्योंकि सोनिया के परिजन उमंग को उस की आत्महत्या का जिम्मेदार नहीं मान रहे थे.

इधर फुरती दिखाते हुए पुलिस ने उमंग के खिलाफ आत्महत्या के लिए उकसाने आईपीसी की धारा 306 के तहत मामला दर्ज कर लिया था, जिस का आधार सोनिया के सुसाइड नोट और नौकरों के बयानों को बनाया गया था. अब आर्यन का बयान अहम हो चला था उस ने कहा, ‘‘मेरी मां की पिछली रात ही नानी से बात हुई थी. बातचीत के दौरान उन्होंने खुशीखुशी बात की थी. अगर वह मानसिक तनाव में होतीं तो नानी को जरूर बतातीं और न भी बतातीं तो बातचीत से उन की तकलीफ उजागर जरूर होती. अगले महीने उमंग सिंघार मां से शादी करने बाले थे. हमें पिछले साल दिसंबर में इन के संबंधों के बारे में पता चला था. उमंग सिंघार पर हमें कोई शक नहीं है ऐसा कोई सबूत भी नहीं है.’’

आर्यन के बयान से मिला नेताजी को लाभ आर्यन का यह बयान उमंग की कई दुश्वारियां दूर करने वाला था, लिहाजा उन्होंने सरकार पर चढ़ाई करते कहा कि सरकार इस मामले पर राजनीति कर रही है. मैं पुलिस को अपना बयान दे चुका हूं. सोनिया से मेरी बात 15 मई को हुई थी, तब तक वह ठीक थी और उस ने खाना भी खाया था. मैं पुलिस को सहयोग कर रहा हूं. गिरफ्तारी से बचने के लिए वह आला पुलिस अफसरों से भी मिले और दूसरे राजनैतिक हथकंडे भी इस्तेमाल किए. इसी दौरान सोनिया के भांजे दीपांशु ने यह भी उजागर किया कि उस की मौसी सोनिया डिप्रेशन की मरीज थीं और इस की गोलियां भी खा रहीं थीं.

दीपांशु की इस बात से उमंग का कानूनी पक्ष तो मजबूत हुआ, लेकिन वह पूरी तरह बेगुनाह हैं यह नहीं कहा जा सकता. मुमकिन है वह सोनिया से ऊब गए हों या फिर उस की उन्हीं बेजा हरकतों से आजिज आने लगे हों, जिन के चलते उस के दोनों पतियों ने उसे छोड़ दिया था. ऐसे में उन्हें अपनी प्रेमिका को सहारा देना चाहिए था, जो अगर चाहती तो उन्हें बदनाम भी कर सकती थी और सुसाइड नोट में सीधे भी उन्हें दोषी ठहरा सकती थी. लेकिन उस ने ऐसा कुछ किया नहीं. हालांकि सोनिया जैसी औरतें बहुत मूडी और जिद्दी होती हैं क्योंकि वे अपनी शर्तों पर जीने में यकीन करती हैं. लेकिन आत्महत्या कर लेने का उन का फैसला कतई समझदारी या बुद्धिमानी का नहीं माना जा सकता.

सफल और सुखी जिंदगी के लिए हर किसी को कई समझौते करने पड़ते हैं, यह बहुत ज्यादा हर्ज की बात भी नहीं. अगर सोनिया थोड़ा सब्र रखती तो मनचाही जिंदगी जी भी सकती थी. लेकिन डिप्रेशन उसे ले डूबा, जिस की सजा अगर कोई भुगतेगा तो वह उस का लाडला आर्यन होगा, जिसे कभी पिता का सुख मिला ही नहीं. Hindi love Story in Short

 

Hindi Stories : पुलिस अफसर रूपा तिर्की की मौत बनी रहस्य, सुसाइड या साजिश थी

Hindi Stories : रूपा तिर्की एक तेजतर्रार पुलिस अधिकारी थी. बैचमेट एसआई शिव कुमार से वह प्यार करती थी, लेकिन शिव कुमार उस से शादी करने से कतरा रहा था. उस की वादाखिलाफी से वह इस कदर तनाव में आ गई कि…

बात 3 मई, 2021 की है. शाम को करीब 7 बजे का समय रहा होगा. सबइंसपेक्टर मनीषा कुमारी ड्यूटी पूरी करने के बाद अपने क्वार्टर पर पहुंची. उस का क्वार्टर अपनी बैचमेट एसआई रूपा तिर्की के क्वार्टर के सामने था. रूपा तिर्की झारखंड के साहिबगंज जिला मुख्यालय पर महिला थानाप्रभारी थीं और मनीषा साहिबगंज में ही नगर थाने में तैनात थी. मनीषा जब क्वार्टर पर पहुंची, तो रूपा का कमरा अंदर से बंद था. इस का मतलब था कि रूपा अपनी ड्यूटी से आ चुकी थी. रूपा का हालचाल पूछने के लिए मनीषा ने उस के रूम का दरवाजा खटखटाया, लेकिन अंदर से कोई जवाब नहीं मिला.

कई बार की कोशिशों के बाद भी जब रूपा ने कमरा नहीं खोला तो मनीषा सोच में पड़ गई. वैसे भी शाम के करीब 7 ही बजे थे. इसलिए सोने का समय भी नहीं हुआ था. मनीषा ने आसपास के लोगों को बुला कर एक बार फिर रूपा को आवाज देते हुए जोर से दरवाजा खटखटाया, लेकिन इस बार भी कमरे के अंदर से कोई हलचल नहीं हुई. आखिर मनीषा ने दरवाजा तोड़ने का फैसला किया. लोगों की मदद से दरवाजा तोड़ कर मनीषा जब कमरे के अंदर घुसी तो रूपा पंखे के एंगल से एक रस्सी के सहारे लटकी हुई थी. यह देख कर मनीषा हैरान रह गई. उस ने एक पुलिस अफसर के तौर पर रूपा की नब्ज टटोल कर देखी, लेकिन उस में जीवन के कोई लक्षण नजर नहीं आए.

एकबारगी तो वह सोच में पड़ गई कि क्या करे और क्या नहीं करे? फिर उस ने सब से पहले एसपी साहब को सूचना देना उचित समझा. सूचना मिलने पर साहिबगंज एसपी अनुरंजन किस्पोट्टा, एसडीपीओ राजेंद्र दुबे और दूसरे पुलिस अफसर मौके पर पहुंच गए. पुलिस अफसरों ने मौकामुआयना किया. रूपा ने फांसी लगा कर खुदकुशी कर ली थी. अफसरों ने कमरे की तलाशी ली. चीजों को उलटपुलट कर देखा, ताकि कुछ पता चल सके कि रूपा ने यह कदम क्यों उठाया, लेकिन न तो कोई सुसाइड नोट मिला और न ही ऐसी कोई बात पता चली, जिस से रूपा के आत्महत्या करने के कारणों पर कोई रोशनी पड़ती.

पुलिस अफसर समझ नहीं पाए कि ऐसा क्या कारण रहा कि रूपा ने खुदकुशी कर ली? अविवाहित रूपा 2018 बैच की तेजतर्रार महिला सबइंसपेक्टर थी. अफसरों ने रूपा के परिवार वालों को फोन कर के इस घटना की सूचना दी. रूपा के परिजन झारखंड की राजधानी रांची के पास रातू गांव के कांटीटांड में रहते थे. रूपा के फांसी लगाने की बात सुन कर उस के मातापिता अवाक रह गए. रात ज्यादा हो गई थी. पुलिस ने रूपा का शव फांसी के फंदे से उतरवा कर पोस्टमार्टम के लिए सदर अस्पताल भिजवा दिया. दूसरे दिन 4 मई को रूपा के परिवार वाले साहिबगंज पहुंच गए. रूपा की मां पद्मावती उराइन ने पुलिस को बताया कि 3 मई को दोपहर करीब 3 बजे रूपा से उन की बात हुई थी.

तब रूपा ने कहा था कि वह जो पानी पी रही है, वह दवा जैसा कड़वा लग रहा है. बेटी की इस बात पर मां ने उस से तबीयत के बारे में पूछा. रूपा ने मां को बताया कि उस की तबीयत ठीक है. इस पर मां ने उसे आराम करने की सलाह दी थी. महिला थानाप्रभारी बनने पर रूपा को जब पुलिस की सरकारी गाड़ी मिली तो दोनों उसे ज्यादा टार्चर करने लगी थीं. दोनों ने कुछ दिन पहले रूपा को किसी हाईप्रोफाइल केस को मैनेज करने के लिए एक नेता पंकज मिश्रा के पास भी भेजा था. पंकज मिश्रा मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन का नजदीकी रहा है. परिवार वालों ने कहा कि रूपा ने आत्महत्या नहीं की, बल्कि उस की हत्या की गई है. मां ने बेटी की हत्या का आरोप लगाते हुए साहिबगंज एसपी को तहरीर दी.

उन्होंने इस मामले में कमेटी गठित कर पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की. उन्होंने कहा कि उस की बेटी के क्वार्टर के सामने रहने वाली एसआई मनीषा कुमारी और ज्योत्सना महतो हमेशा रूपा को टार्चर करती थीं. वे उस से जलती थीं और हमेशा उसे नीचा दिखाने की कोशिश करती थीं. मां ने लगाया हत्या का आरोप मां पद्मावती ने मौके पर मौजूद रहे लोगों से पूछताछ के बाद रूपा की हत्या करने का आरोप लगाते हुए कहा कि उस के शव को पंखे से लटकाया गया था. पंखे और पलंग की दूरी काफी कम थी. शव पंखे से तो लटका था, लेकिन घुटने पलंग पर मुड़े हुए थे. गले में रस्सी के 2 निशान थे. शरीर के कुछ अंगों पर जगहजगह दाग भी थे.

शव ध्यान से देखने से लग रहा था कि उस के हाथों को पकड़ा गया था. घुटने पर भी मारने के निशान थे. उस के कपड़े भी आधेअधूरे थे. रूपा की मौत के मामले में साहिबगंज के जिरवाबाड़ी ओपी थाने के एसआई सतीश सोनी के बयान के आधार पर केस दर्ज कर लिया गया. पुलिस ने जांचपड़ताल के लिए रूपा का क्वार्टर भी सील कर दिया.  मामला एक पुलिस अधिकारी की मौत का था. दूसरे यह संदिग्ध भी था. इसलिए साहिबगंज के उपायुक्त ने कार्यपालक दंडाधिकारी संजय कुमार और परिजनों की मौजूदगी में शव का मैडिकल बोर्ड से पोस्टमार्टम कराने और इस की वीडियोग्राफी कराने के आदेश दिए. उपायुक्त के आदेश पर पुलिस ने 3 डाक्टरों के मैडिकल बोर्ड से रूपा के शव का पोस्टमार्टम कराया.

पोस्टमार्टम कराने के बाद पुलिस की ओर से साहिबगंज के पुलिस लाइन मैदान में रूपा तिर्की को अंतिम विदाई दी गई. सशस्त्र पुलिस की टुकड़ी ने उन्हें सलामी दी. एसपी अनुरंजन किस्पोट्टा, साहिबगंज के एसडीपीओ राजेंद्र दुबे, बरहरवा के एसडीपीओ प्रमोद कुमार मिश्रा और राजमहल के एसडीपीओ अरविंद कुमार के अलावा अनेक थानाप्रभारियों तथा पुलिस जवानों ने फूलमालाएं अर्पित कर रूपा को श्रद्धांजलि दी. बाद में रूपा का शव परिवार वालों को सौंप दिया गया. रूपा का शव 5 मई की सुबह रूपा के पैतृक गांव रातू के काठीटांड पहुंचा. उसी दिन रूपा का अंतिम संस्कार कर दिया गया. शवयात्रा में गांव के लोगों के साथ राज्यसभा सांसद समीर उरांव, विधायक बंधु तिर्की, रांची की महापौर आशा लकड़ा, महिला आयोग की आरती कुजूर, प्रमुख सुरेश मुंडा सहित अनेक जनप्रतिनिधि भी शामिल हुए, लेकिन पुलिस और प्रशासन का कोई बड़ा अधिकारी वहां नहीं पहुंचा.

सीबीआई जांच की उठी मांग एक तेजतर्रार पुलिस अफसर के तथाकथित रूप से आत्महत्या करने की बात रूपा के गांव में किसी के गले नहीं उतर रही थी. उस के पिता सीआईएसएफ जवान देवानंद उरांव और मां पद्मावती सहित सभी घर वालों का आरोप था कि रूपा की हत्या किसी साजिश के तहत की गई है और इसे आत्महत्या का नाम दिया जा रहा है. रूपा 2018 में पुलिस एसआई बनने से पहले बैंक औफ इंडिया में काम करती थी. उस ने रांची के सेंट जेवियर कालेज से पढ़ाई पूरी की थी. उसे नवंबर 2020 में ही साहिबगंज में महिला थानाप्रभारी बनाया गया था. उस ने यह जिम्मेदारी संभालने के बाद महिला उत्पीड़न रोकने के लिए कई महत्त्वपूर्ण कदम उठाए थे.

मामला गंभीर था. रूपा की 2 बैचमेट महिला सबइंसपेक्टरों और मुख्यमंत्री के करीबी नेता पंकज मिश्रा पर आरोप लग रहे थे. रूपा की मौत को हत्या मानते हुए लोगों ने सोशल मीडिया पर ‘जस्टिस फौर रूपा’ शुरू कर दिया. रूपा के परिजनों को न्याय दिलाने के लिए झारखंड के कई प्रमुख नेता भी आगे आ गए. भाजपा विधायक दल के नेता बाबूलाल मरांडी ने रूपा की मौत को मर्डर मिस्ट्री बताते हुए इस की सीबीआई से जांच कराने की मांग की. उन्होंने कहा कि रूपा के परिवार वालों के आरोप से यह मामला संदेहास्पद है. मरांडी ने कहा कि ऐसे राजनीतिक प्रभावशाली व्यक्ति पर आरोप लगे हैं, जो मौजूदा सरकार में कुख्यात रहा है.

प्रदेश भाजपा महिला मोर्चा ने भी सीबीआई जांच की मांग करते हुए राज्यपाल को औनलाइन ज्ञापन भेजा. मांडर के विधायक बंधु तिर्की ने मुख्यमंत्री को पत्र लिख कर कहा कि रूपा किसी बड़ी साजिश की शिकार हुई है. इसलिए इस मामले की उच्चस्तरीय जांच कराई जाए. बोरियो से सत्तारूढ़ गठबंधन के झारखंड मुक्ति मोर्चा के विधायक लोबिन हेंब्रम ने भी इस मामले की सीबीआई से जांच कराने की मांग उठाई. राज्यसभा सांसद समीर उरांव ने कहा कि मामले में आरोपी पंकज मिश्रा पर मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन का हाथ है. मिश्रा साहिबगंज में सब तरह के वैधअवैध काम करता है.

एसआईटी को सौंपी जांच मामला तूल पकड़ता जा रहा था. जिस पंकज मिश्रा पर आरोप लगाए गए, वह मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन का साहिबगंज में प्रतिनिधि है. आरोपों से घिरने पर सफाई देते हुए मिश्रा ने कहा कि वह पिछले महीने मधुपुर चुनाव में व्यस्त था. इस के बाद कोरोना पौजिटिव होने पर रांची के मेदांता अस्पताल में भरती थे. घटना से एकदो दिन पहले ही अस्पताल से डिस्चार्ज हुए थे. रूपा तिर्की से मुलाकात की बातें सरासर गलत हैं. पुलिस चाहे तो काल डिटेल निकलवा कर जांच करा सकती है. भारी राजनैतिक दबाव पड़ने पर पुलिस ने मामले की तेज गति से जांच शुरू कर दी. एसपी ने इस के लिए डीएसपी (मुख्यालय) संजय कुमार के नेतृत्व में एसआईटी का गठन किया.

एसआईटी में बरहड़वा एसडीपीओ पी.के. मिश्रा, इंसपेक्टर (राजमहल ) राजेश कुमार और 2 महिला पुलिस अधिकारियों को शामिल किया गया. जांच अधिकारी जिरवाबाड़ी थाने की एसआई स्नेहलता सुरीन को बनाया गया. मौके के हालात देख कर पुलिस इसे आत्महत्या मान रही थी, लेकिन रूपा के परिवार वाले इसे हत्या बता रहे थे. सोशल मीडिया पर भी मामला बढ़ रहा था. 2 महिला सबइंसपेक्टरों और एक नेता पर लगे आरोपों को देखते हुए सभी बिंदुओं पर जांच करना जरूरी थी. फोरैंसिक टीम ने 5 मई, 2021 को साहिबगंज पहुंच कर रूपा के क्वार्टर की जांचपड़ताल की और साक्ष्य जुटाए. मौके पर मिली पानी से भरी बोतल व गिलास से अंगुलियों के निशान लिए. कई दूसरी जगहों से भी फिंगरप्रिंट लिए.

पुलिस जांचपड़ताल में जुटी थी, इसी बीच एक औडियो वायरल हो गया. चर्चा रही कि इस औडियो में रूपा तिर्की के पिता और एक युवक की बातचीत थी. यह कोई और नहीं रूपा का बैचमेट एसआई शिवकुमार कनौजिया बताया गया. यह औडियो सामने आने से पता चला कि रूपा का शिवकुमार से अफेयर चल रहा था. औडियो में रूपा के पिता उस युवक से रूपा की शादी के संबंध में बात कर रहे थे. युवक बाचतीत में रूपा को समझाने की बात कह रहा था ताकि वह कोई गलत कदम न उठा ले. औडियो सामने आने के बाद यह मामला ज्यादा उलझ गया. एक पुलिस एसआई की संदिग्ध मौत का मामला होने के कारण झारखंड पुलिस एसोसिएशन ने भी इस की जांच शुरू कर दी.

रांची से एसोसिएशन के प्रांतीय उपाध्यक्ष अरविंद्र प्रसाद यादव, संताल परगना प्रक्षेत्र मंत्री हरेंद्र कुमार, रविंद्र कुमार, पप्पू सिंह, जिला उपाध्यक्ष सुखदेव महतो, सचिव सहमंत्री शमशाद अहमद आदि ने साहिबगंज पहुंच कर मामले की जांच की. इन पदाधिकारियों ने प्रताड़ना के आरोपों से घिरी रूपा की बैचमेट एसआई मनीषा कुमारी और ज्योत्सना से भी कई घंटे तक पूछताछ की. सामने आया बौयफ्रैंड का नाम पुलिस ने मामले की तह में जाने के लिए रूपा के मोबाइल फोन की जांच कर काल डिटेल्स निकलवाई और उस के वाट्सऐप मैसेज, चैटिंग, एसएमएस और वीडियो वगैरह देखे. इस में पता चला कि उस ने आखिरी बातचीत अपने बौयफ्रैंड शिवकुमार कनौजिया से की थी.

रूपा ने शिवकुमार को कई मैसेज भी भेजे थे. शिवकुमार झारखंड के चाइबासा जिले में टोकलो पुलिस थाने में तैनात था. शिवकुमार से पूछताछ करनी जरूरी थी. इसलिए एसआईटी ने उसे साहिबगंज बुलाया. इस बीच, रूपा के परिवार वालों की मांग पर जांच अधिकारी स्नेहलता सुरीन को बदल कर राजमहल इंसपेक्टर राजेश कुमार को इस मामले की जांच सौंप दी गई. आदिवासी समाज की प्रतिभाशाली महिला पुलिस एसआई रूपा तिर्की की संदिग्ध मौत की उच्चस्तरीय जांच की मांग को ले कर पूरे झारखंड में लोग आंदोलन करने लगे. छात्र संगठन, महिला संगठन और आदिवासी संगठनों के अलावा सत्ताधारी दल कांग्रेस सहित विपक्षी दल भाजपा, जनता दल (यू) आजसू आदि ने इस मामले की सीबीआई जांच कराने की मांग सरकार से की.

सत्ताधारी विधायकों ने कहा कि इस घटना से आदिवासी समुदाय में आक्रोश है. सोशल मीडिया पर रूपा को इंसाफ दिलाने के लिए अभियान चल रहे हैं. इस से सरकार की छवि धूमिल हो रही है. लोग हम से सवाल पूछ रहे हैं कि इस की जांच होगी या नहीं. ऐसी हालत में सरकार को सीबीआई जांच से पीछे नहीं हटना चाहिए. झारखंड प्रदेश भाजपा अध्यक्ष और राज्यसभा सांसद दीपक प्रकाश ने रांची के पास रातू गांव में रूपा के घर पहुंच कर पूरे मामले की जानकारी ली. बाद में उन्होंने कहा कि यह हाईप्रोफाइल मामला है. इस में मुख्यमंत्री के संरक्षण प्राप्त लोगों का हाथ है. इसलिए झारखंड पुलिस से न्याय की उम्मीद नहीं है.

रूपा होनहार लड़की थी, उसे धोखे में रख कर मार डाला गया. झारखंड में आगे किसी आदिवासी बेटी के साथ ऐसी घटना नहीं हो, इसलिए इस घटना से परदा उठना जरूरी है. आंदोलन बढ़ते जा रहे थे. रूपा को न्याय दिलाने के लिए महिलाएं प्रदर्शन कर रही थीं. कैंडल मार्च निकाल रही थीं. वहीं, पुलिस की जांच में नईनई बातें सामने आने से मामला उलझता जा रहा था. साहिबगंज पुलिस और झारखंड सरकार की बदनामी हो रही थी.  रूपा के बौयफ्रैंड शिवकुमार कनौजिया को 8 मई को साहिबगंज थाने बुला कर एसआईटी में शामिल अफसरों ने पूछताछ की. उस से रूपा से मुलाकात होने से ले कर अफेयर और शादी की बातों के बारे में सवाल पूछे. उस से रूपा से मुलाकातों और मोबाइल पर चैटिंग वगैरह के संबंध में भी पूछताछ की गई.

करीब 8 घंटे तक पुलिस अधिकारी उस से लगातार पूछताछ करते रहे. बौयफ्रैंड एसआई को भेजा जेल शिवकुमार से पूछताछ के बाद एसआईटी ने अपनी जांच रिपोर्ट एसपी को सौंप दी. इस रिपोर्ट के आधार पर साहिबगंज पुलिस ने 9 मई को एसआई शिवकुमार कनौजिया को रूपा की खुदकुशी का जिम्मेदार मानते हुए गिरफ्तार कर लिया. जांच में सामने आए तथ्यों के आधार पर पुलिस ने पहले दर्ज किए केस को आत्महत्या के लिए उकसाने में परिवर्तित कर शिवकुमार कनौजिया के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया. बाद में शिवकुमार को पुलिस ने उसी दिन अदालत के समक्ष पेश कर जेल भेज दिया. एसपी अनुरंजन किस्पोट्टा का कहना था कि एसआईटी ने जो जांच रिपोर्ट सौंपी, उस में कहा गया कि शिवकुमार ने रूपा की भावनाओं को आहत किया.

इस कारण रूपा ने खुदकुशी की. जांच में पुलिस को एक औडियो भी मिला था. इस औडियो में रूपा तिर्की और उस के प्रेमी एसआई शिवकुमार कनौजिया के बीच बातचीत थी. इस में शिव बातचीत के दौरान रूपा से कई तरह की आपत्तिजनक बातें भी कह रहा था. शिव की इन बातों पर रूपा ने कहा था कि सही से बात करो शिव, नहीं तो हम सुसाइड कर लेंगे. पुलिस ने रूपा को प्रताडि़त करने का आधार बना कर ही शिवकुमार को गिरफ्तार किया.  कहा जाता है कि 2018 बैच के पुलिस एसआई रूपा और शिव कुमार की मुलाकात ट्रैनिंग के दौरान हुई थी. यह मुलाकात धीरेधीरे प्यार में बदल गई. रूपा को शिव पर भरोसा था. वह उस से शादी करना चाहती थी. यह बात भी सामने आई है कि शिव कुमार रूपा से प्यार का नाटक करता था. वह अकसर उस से पैसे मांगता रहता था.

एक बार उस ने मोटरसाइकिल भी मांगी थी. केवल यूज करना चाहता था बौयफ्रैंड वह रूपा से आपत्तिजनक स्थिति में वीडियो काल करने का भी दबाव बनाता था. वह रांची में जमीन खरीदने के लिए रूपा पर दबाव बना रहा था. कहता था कि रांची में आदिवासी की जमीन वह अपने नाम से नहीं खरीद सकता. रूपा जब शिव पर शादी करने का दबाव बनाती, तो वह कोई न कोई बहाना बना देता था. वायरल वीडियो में वह रूपा के पिता से कह रहा था कि वह अंतरजातीय विवाह नहीं करना चाहता. इसलिए अपनी बेटी को समझाएं. पुलिस का दावा है कि रूपा ने आत्महत्या करने से पहले शिव से बात की थी. यह बात भी सामने आई है कि रूपा और शिव कुमार कभीकभार धनबाद में मिलते थे.

इस के लिए रूपा साहिबगंज से अपने ड्राइवर के साथ धनबाद जाती थी और शिवकुमार चाईबासा से आता था. फिर दोनों किसी तय स्थान पर मिलते थे. पुलिस के अनुसार, रूपा की पोस्टमार्टम रिपोर्ट में भी आत्महत्या किए जाने की बात ही सामने आई है. एसपी का कहना है कि रूपा के परिवार वालों ने एसआई मनीषा कुमारी और ज्योत्सना के अलावा पंकज कुमार मिश्रा पर जो आरोप लगाए, उस के संबंध में कोई साक्ष्य नहीं मिले. जांच में इन लोगों की संलिप्तता या षडयंत्र के कोई सबूत नहीं मिले. भले ही पुलिस ने इस मामले का खुलासा कर रूपा के बौयफ्रैंड शिव कुमार को गिरफ्तार कर लिया, लेकिन रूपा के परिवार वाले इस से संतुष्ट नहीं हैं.

साहिबगंज से एसआईटी के पुलिस अधिकारी 10 मई को रूपा के मातापिता के बयान दर्ज करने रांची के रातू गांव पहुंचे तो लोगों ने उन का विरोध कर नारेबाजी की. लोगों ने कहा कि पुलिस की ओर से इस मामले को दूसरी दिशा में ले जाने की कोशिश की जा रही है. रूपा के पिता देवानंद उरांव और मां पद्मावती ने पुलिस अधिकारियों से सवालजवाब किए और कहा कि एसआईटी की जांच धोखा है. लोगों ने इस मामले की जांच सीबीआई से ही कराने की मांग की. बाद में पुलिस अधिकारियों ने लोगों को समझाबुझा कर रूपा के परिवार वालों के बयान दर्ज किए.  साहिबगंज पुलिस का कहना है कि अभी इस मामले की जांच चल रही है. रूपा के साहिबगंज स्थित सरकारी क्वार्टर के बगल में रहने वाले पुलिसकर्मी और उस के परिवार से भी पूछताछ की गई है.

अभी विसरा रिपोर्ट का भी इंतजार है, क्योंकि रूपा ने घटना वाले दिन दोपहर में अपनी मां से बात करते हुए कहा था कि उसे पानी पीने में कड़वा लग रहा है. बहरहाल, साहिबगंज पुलिस की जांच से न तो रूपा के परिवार वाले संतुष्ट हैं और न ही गांव वाले. आदिवासी संगठन भी इसे छलावा बता रहे हैं. रूपा के रातू स्थित आवास पर 11 मई को विभिन्न सामाजिक संगठनों की बैठक हुई. इस में सर्वसम्मति से कहा गया कि पुलिस प्रशासन रूपा के चैट को वायरल कर उस के चरित्र हनन का प्रयास कर रहा है. मामले में असली अपराधियों को बचा कर लीपापोती का प्रयास किया जा रहा है. साहिबगंज एसपी की रिपोर्ट के आधार पर चाईबासा जिले में टोकलो पुलिस थाने में तैनात रहे एसआई शिवकुमार को 11 मई को निलंबित कर दिया गया था.

अभी यह मामला सुलग रहा है और राजनीतिक रूप से भी गरमाया हुआ है. सवाल यही रह गया कि रूपा की मर्डर मिस्ट्री का राज खुलेगा या नहीं? क्या यह मामला प्रेम प्रसंग तक ही सिमट कर रह जाएगा? क्या पुलिस रूपा की मां पद्मावती के आरोपों की तह तक पहुंचेगी? Hindi Stories

 

Hindi love Story : जोधपुर रियासत के राजकुमार की प्रेम कहानी बनी मिसाल, आज भी लोग करते हैं याद

Hindi love Story : जोधपुर रियासत से निर्वासित हो कर कुंवर भीमसिंह को जैसलमेर रियासत में शरण लेनी पड़ी. इसी दरम्यान उन्हें वहां की राजकुमारी नागरकुंवर से प्यार हो गया. इसी दौरान ऐसा वाकया हुआ कि कुंवर भीमसिंह को जोधपुर की राजगद्दी संभालनी पड़ी…

18 वीं शताब्दी काल के मराठा वीर पेशवा बाजीराव (प्रथम) की प्रेयसी मस्तानी की तरह उसी शताब्दी काल में जोधपुर रियासत के नरेश महाराजा विजय सिंह की चहेती थी गुलाबराय पासवान. वह अद्वितीय सुंदर थी. न तो मस्तानी ही कभी विधिवत परंपरा के अनुसार बाजीराव के साथ विवाह रचा सकी और न ही गुलाबराय कभी विजय सिंह की पत्नी का दरजा पा सकी. जोधपुर रियासत में गुलाबराय का सिक्का चलता था. गुलाबराय ने जोधपुर में कई अहम विकास कार्य करवाए. उस की सलाह के बिना विजय सिंह कोई भी कार्य नहीं करवाते थे. गुलाबराय ने पानी की समस्या दूर करने के लिए परकोटे के भीतर गुलाबसागर बनवाया. इस के अलावा कुंजबिहारी मंदिर, महिला बाग, गिरदीकोट आदि का निर्माण भी गुलाबराय की प्रेरणा से हुआ था.

वहीं सोजत शहर का परकोटा और जालौर किले में कुछ निर्माण भी उन्होंने करवाया था. महाराजा विजय सिंह का गुलाबराय से अत्यधिक प्रेम था, इस के चलते उन्होंने अपनी अन्य सभी रानियों को नाराज तक कर लिया था. गुलाबराय के मुंह से निकला हर वाक्य राजा का आदेश बन गया था. गुलाबराय बुद्धिमान और सरल हृदय की थी. उस ने वैष्णव धर्म को अपना रखा था. गुलाबराय ने राजा के माध्यम से पूरी रियासत में वैष्णव धर्मावलंबियों के नियमउपनियम लागू कर रखे थे. गुलाबराय की इच्छा से राज्य में पशुवध पर सख्ती से पाबंदी लगी. इस आज्ञा का पालन नहीं करने वालों को किले में बुला कर मृत्युदंड दिया जाता था. जोधपुर राजमहल की रानियों और रियासत के पंडितों ने गुलाबराय के साथ महाराजा विजय सिंह के संबंधों को स्वीकृति नहीं दी.

गुलाबराय के बढ़ते प्रभाव से राजकुमार और राजपूत सरदार अकसर नाराज रहते थे. राजमहल गुलाबराय के विरोध में था और यहां अकसर षडयंत्र रचे जाने लगे. आखिर एक रात सरदारों ने गुलाबराय की हत्या करवा दी. महाराजा विजय सिंह और गुलाबराय पासवान महाराजा के छोटे बेटे मानसिंह को उत्तराधिकारी बनाना चाहते थे. मगर पोकरण ठाकुर सवाईसिंह आदि बड़े बेटे कुंवर भीमसिंह के पक्ष में थे. इसीलिए महाराजा के निर्णय से नाराज सरदारों ने गुलाबराय पासवान की हत्या कर दी थी. महाराजा विजय सिंह को इस से बड़ा आघात लगा था. उन्हीं दिनों एक रोज महाराजा विजय सिंह की गैरमौजूदगी में भीमसिंह ने दुर्ग और नगर पर अधिकार कर लिया, लेकिन महाराजा के पुन: लौटने पर भीमसिंह को दुर्ग छोड़ कर भागना पड़ा था. महाराजा विजय सिंह ने उस का पीछा करने के लिए सेना भी भेजी.

फिर झंवर के पास महाराजा की सेना और भीमसिंह की सेना के बीच युद्ध भी हुआ. लेकिन पोकरण ठाकुर सवाईसिंह भीमसिंह को ले कर पोकरण चले गए. इस के बाद जब सवाईसिंह तथा भीमसिंह को मारवाड़ में अपना जीवन संकट में दिखाई दिया तो वे जैसलमेर चले आए. जैसलमेर महारावल मूलराज ने उन्हें अत्यंत आदर सहित शरण दी. थोड़ा समय बीता ही था कि जैसलमेर खबर पहुंची कि जोधपुर के मेहते सिंघवी के नीचे लगभग 100 की संख्या में जोधपुर फौज ने बीजोराई गांव पर कब्जा कर लिया है और जोधपुर की इस सेना का इरादा जैसलमेर की तरफ बढ़ने का है. कुंवर भीमसिंह को शरण देने के कारण जोधपुर की सेना ने आक्रमण तो नहीं कर दिया.

इस समाचार ने महारावल मूलराज को हतप्रभ कर दिया. वह सोचने लगे कि जोधपुर ने ऐसा क्यों किया? हमारा तो उन से कोई बैर नहीं है? फिर उन्होंने ऐसा क्यों किया.

‘‘हम ने भीमसिंह जी को शरण दी है हुकुम.’’ दीवान ने कहा.

‘‘मांगने वाले को शरण देना हमारा धर्म है और उस की अंतिम सांस तक रक्षा करना हमारा फर्ज है.’’ महाराज मूलराज ने कहा, ‘‘आप मुकाबले की तैयारी करो. हां, सेनापति जोरावर सिंह कहां है?’’

‘‘हुकुम वह पासवानजी के डेरे पर हैं.’’ दीवान बोला.

‘‘उन्हें तुरंत बुलाओ.’’

हलकारा पासवान के डेरे पर गया और सेनापति जोरावर सिंह को बुला लाया. जोरावर के आने की हलकारे ने सूचना दी. महारावल मूलराज ने सेनापति जोरावर सिंह से कहा, ‘‘जोरावर, जोधपुर रियासत ने हम पर हमला कर दिया है. बीजोराई गांव पर उन्होंने कब्जा कर लिया है जो काम करना है फटाफट कर के युद्ध की तैयारी करो.’’

इस के बाद हाबुर ऊबड़ों की 200 की फौज जैसलमेर बुलाई गई. एक ऊंट सवार उसी समय हाबुर गया और अगले दिन ऊबड़ भाटियों की फौज जैसलमेर आ गई. दूसरे दिन हथियार तैयार करवाए गए. बारूद की कूडि़यां, पेटियां, तलवारें, तोपें, घोड़े, ऊंट, खानेपीने का सामान सारी तैयारी की गई. रात होने तक सारी फौज आ गई. राज रसोड़े से खानापीना हुआ. ऊंट और घोड़ों के लिए चारा, दाना, पानी का इंतजाम हुआ. रात में थोड़ा आराम कर के और भोर होते ही पूजाअर्चना हुई. योद्धाओं की आरती उतारी गई और ‘लक्ष्मीनाथ की जय’ और ‘स्वांगियां देवी की जय’ के साथ फौज को खुद महारावल मूलराज ने विदा किया.

आगे वीरप्रतापी सेनापति जोरावर सिंह और उन के पीछे तमाम फौज थी. आकाश जयकारों से गूंज रहा था. सोनार दुर्ग गर्व से माथा उठाए खड़ा था. पश्चिम की तरफ झुक आया चौदहवीं का चांद किले पर सुहागन के माथे की बिंदी की तरह प्रतीत हो रहा था. ऊंट और घोड़ों पर साजोसामान से लदी फौज को रवाना करते हुए लोगों के सीने उत्साह और जोश से भरे हुए थे. लश्कर रवाना कर के महारावल को सोचने की फुरसत मिली. जोरावर वीर और साहसी था. यह बात महारावल जानते थे. इस कारण वह निश्चिंत थे कि जोरावर सिंह युद्ध जीत कर ही लौटेगा. फौज जिस गांव से गुजरती, घोड़ों की टापें उस से पहले पहुंचतीं. गांव की औरतें, बच्चे उत्सुकता के साथ देखते. लोग जोश से भर कर फौज का स्वागत करते.

खानेपीने की व्यवस्था करते. हर गांव से कुछ युवक अपने हथियार, घोड़ा, ऊंट कुछ भी ले कर साथ हो लेते. इस से फौज का मनोबल और बढ़ता. बीजोराई गांव तक पहुंचतेपहुंचते शाम हो गई और लड़ाकों की संख्या 300 तक पहुंच गई. गांव की सरहद से पहले वे रुक गए. पूर्णिमा का चांद निकल आया था. थोड़ी देर सभी ने आराम किया. रात बढ़ने पर वे गांव के करीब पहुंचे. विस्थापित ग्रामीणों ने हर्ष के साथ उन का स्वागत किया. जोरावर सिंह ने सेना को 4 टुकड़ों में बांट कर गांव को चारों तरफ से घेर लिया. जगहजगह आग जला कर नाकेबंदी कर दी, जिस से दुश्मन भागने न पाए. गांव खाली था. खाली घरों में अब जोधपुर रियासत के सैनिक रह रहे थे. गांव में कहींकहीं चिमनी टिमटिमा रही थी.

सारे गांव में सन्नाटा था. घर पूर्णिमा की चांदनी में दूध की तरह लग रहे थे. गांव के आसपास उतरी फौज के शोर ने जंगल में मंगल कर दिया. 300 की फौज, दोढाई सौ ग्रामीण, कुछ बीजोराई के कुछ आसपास के, स्त्रीपुरुष, बच्चे. घोड़े, ऊंट, बकरियां. गांव के बाहर जंगल में गांव बसा था. इस के समाचार अंदर बीजोराई में भी मिल चुके थे. मेहता सिंघवी ने सारे सिपाहियों को एक जगह बुला कर सचेत कर दिया था. कहीं आक्रमण रात में न हो जाए. गांव के चारों तरफ टिमटिमाती रोशनियों से यह अदांजा नहीं लग पा रहा था कि जैसलमेर की फौज कितनी है. बीजोराई गांव के लोगों ने सेनापति को अपने दुखड़े सुनाए कि अचानक आ कर जोधपुर की फौज ने उन्हें घेर लिया. फौज ने घर से निकाल कर स्त्रियों और बच्चों के सामने लोगों को मारापीटा. उन के घरों को लूट लिया.

कुछ की हत्या कर दी. कइयों को कैद कर लिया. बूढ़े, स्त्रियों और बच्चों को गांव से खदेड़ दिया. कुछ लोग जान बचा कर निकल भागे. जोरावर सिंह ने उन्हें ढांढस दिया. उन के नुकसान की पूर्ति का आश्वासन दिया. इस के बाद रात में ही योजना के अनुसार वार्ता के बहाने मेहता सिंघवी से जैसलमेर फौज के सेनापति जोरावर सिंह अपने साथियों के साथ मिलने गए. मेहता सिंघवी बोला, ‘‘जोरावर सिंह जी, आप की वीरता के बड़े किस्से सुने हैं, आज दर्शन हो गए.’’

‘‘सिंघवीजी, जोधपुर की नाराजगी वाजिब है. इस बात को हमारे दाता भी मानते हैं. हम ने आप के महाराज कुमार भीमसिंह को शरण दे कर भूल की है. मगर यह तो हमारा धर्म है जिसे आप भी समझते हैं. दाता ने खुद मुझे आप की सेवा में भेजा है कि मैं आप से अर्ज करूं कि आप गांवों पर कब्जा करने की जगह हम से बात करें.’’

‘‘जोरावर सिंह जी, आप खुद पधारे इसलिए मानना पड़ेगा कि महारावल सा सचमुच पछता रहे हैं. मैं आप की अर्ज अपने दाता तक जोधपुर पहुंचा दूंगा. आगे हमें क्या करना होगा, यह फैसला तो वह ही करेंगे.’’

इस के बाद जोरावर ने समझाया कि अगर वह जान सलामत चाहते हैं तो गांव खाली कर वापस लौट जाएं. मेहता सिंघवी ने गांव खाली करने से साफ मना किया तो उसी समय जोरावर सिंह ने कटार सिंघवी के सीने में उतार दी. यह सब पलक झपकते ही हो गया. जोरावर के साथियों ने तलवारें खींच लीं. मेहता सिंघवी कातर दृष्टि से देखता हुआ वहीं लुढ़क गया. उसे ऐसे हमले का जरा भी गुमान नहीं था. तभी जोरावर ने अन्य सैनिकों को चेताया कि मेहता सिंघवी मारा जा चुका है, सब हथियार डाल दें वरना वे भी मारे जाएंगे. जोरावर ने कटार वापस खोंस ली और तलवार उठा ली. जोधपुर के सैनिक जैसे भी थे, जिस हाल में थे, हथियार ले कर बाहर निकल पड़े. सिंघवी का शव देख कर वे हताश हो गए. फिर भी जोरावर सिंह और उन की सेना पर टूट पड़े. मगर तब तक फौज आ पहुंची.

एक तो सिंघवी की लाश को देख कर जोधपुर के सिपाहियों की हिम्मत टूट चुकी थी, ऊपर से वह अचानक हुए इस हमले के लिए तैयार भी नहीं थे. उन्हें तो सिंघवी ने निश्चिंत कर दिया था. वह शांतिपूर्वक कोई रास्ता निकल आने के मुगालते में थे. जोधपुर सैनिक संख्या में कम होने के कारण ज्यादा देर टिक नहीं पाए और शीघ्र ही युद्ध हार गए. बंदी सैनिकों को एक घर में निशस्त्र कर के रखा गया. घायलों का उपचार हुआ. शहीदों के पार्थिव शरीर ससम्मान उन के गांव भेजने की व्यवस्था की गई. लड़ाई खत्म होने के बाद बीजोराई गांव वाले अपनेअपने घरों में आए. सारा वातावरण विजय की खुशी और जयकारों से गूंज उठा. उस समय महाराज कुंवर भीमसिंह पोकरण ठाकुर सवाईसिंह के साथ मूलसागर में थे.

उन्हें पता चला, मगर वह फौज के रवाना होने तक जैसलमेर नहीं आए. बाद में आ कर उन्होंने महारावल मूलराज से क्षमा मांगी. महारावल ने कहा, ‘‘महाराजकुमार सा, आप को लज्जित होने की कोई जरूरत नहीं है, ऐसा तो होता ही है.’’

‘‘हुकुम, मेरे कारण यह मुसीबत आई है. मैं आप को परेशानी में नहीं डालना चाहता. मैं कहीं और चला जाऊंगा.’’

‘‘नहीं, कुमारसा. आप हमारे सर के मोड़ हैं. आप इस तरह जाएंगे तो हम इतिहास को क्या मुंह दिखाएंगे. जब तक जैसलमेर में एक भी आदमी जीवित है, आप को चिंता करने की कोई जरूरत नहीं है. आप हमारे मेहमान हैं और यहीं रहेंगे. आप की सेवा में कोई कमी हो तो हुकुम करें.’’

महारावल मूलराज से मिल कर कुंवर भीम सिंह आश्वस्त हुए. वह वापस मूलसागर चले गए. जैसलमेर की जीत की खबर सुन कर उन के मन का बोझ हलका हुआ. मगर वह स्वागत समारोह में शामिल नहीं हुए और पोकरण ठाकुर सवाईसिंह के साथ मूलसागर में ही रहे. जैसलमेर फौज की जोधपुर पर जीत की खबर पहुंचते ही जैसलमेर में खुशी की लहर दौड़ गई. लोगों में जोश भर गया. खबर देने वाले हलकारे को महारावल ने मोतियों का हार ईनाम में दिया. जैसलमेर की जीत कर लौटी सेना का भव्य स्वागत हुआ. जीत का समारोह कई दिन तक चला. इस के बाद सब कुछ पहले की तरह सामान्य हो गया. उन दिनों जोधपुर महाराज कुमार भीमसिंह मूलसागर में रहते थे, मगर अकसर राजमहल आते रहते थे. राजमहल आते तो रनिवास में भी चले जाते थे. इस दरम्यान उन की नजर नागरकुंवर पर पड़ी.

नागरकुंवर महारावल मूलराज की पोती और राजकुमार रायसिंह की पुत्री थी. रायसिंह महारावल मूलराज को राजगद्दी से हटा कर खुद महारावल बन गए थे. मगर थोड़े समय बाद ही जोरावर सिंह और अन्य राजपूत ठाकुरों ने मिल कर रायसिंह को राजगद्दी से हटा कर मूलराज को फिर से महारावल की राजगद्दी पर बिठा दिया था. तब महारावल मूलराज ने अपने बेटे कुमार रायसिंह को देश निकाला दे दिया था. रायसिंह अपनी पत्नी और 2 बेटों के साथ जैसलमेर रियासत छोड़ कर चले गए थे. इन्हीं रायसिंह की राजकुमारी थी नागरकुंवर बाईसा. नागरकुंवर को महारावल मूलराज ने रायसिंह के साथ नहीं जाने दिया था. इस कारण नागरकुंवर बाईसा रनिवास जैसलमेर में ही रहती थी.

रनिवास में कुंवर भीमसिंह की नजर नागरकुंवर पर पड़ी. गोरी गट्ट मोतियों के पानी जैसी. गाल जैसे मक्खन की डलियां, होंठ ऐसे जैसे मलाई में लाल रंग मिला कर मक्खन पर 2 फांके बना दी हों. आंखें ऐसी जैसे मखमल के बटुए में हीरे रखे हुए हों. भीमसिंह तो उस का रूप देख कर जड़ हो गया. वापस मूलसागर आने पर एक ही चेहरा बेचैन किए जा रहा था. आंखें बंद करे तो नागरकुंवर, खोले तो नागरकुंवर. किसी से बात करे तो नागरकुंवर. वह परेशान हो गए. बहुत टालने की कोशिश की मगर मन पर काबू नहीं रहा. तब भीमसिंह अकसर रनिवास में जा कर नागरकुंवर से मिलने लगे. नागरकुंवर 15-16 बरस की थी. ये वही दिन होते हैं, जब कोई दिल को अच्छा लगने लगता है.

नागरकुंवर को भीमसिंह अच्छे लगे थे. यही हाल भीमसिंह का भी था. उन्हें नागरकुंवर के अलावा कुछ भी अच्छा नहीं लगता था. भीमसिंह का आनाजाना रनिवास में बढ़ा और नागरकुंवर से मिलनाजुलना भी. तब महारावल सा को उन के दीवान ने एक रोज कहा, ‘‘दाता, बड़ेबुजुर्गों के लिए बच्चे हमेशा बच्चे ही रहते हैं. पर हुकुम, समय आने पर वे भी बड़े होने लगते हैं. हम को उन की भावनाओं का ध्यान रखना चाहिए. बाईसा 15-16 के पेटे में पहुंच गई हैं. वह शादी के लायक हो गई हैं. अब महाराज कुंवर रायसिंह तो यहां हैं नहीं. बाईसा की जिम्मेदारी अपने ऊपर है. दाता, आप फरमाएं तो शादी की बात चलाई जाए.’’

‘‘बाईसा इतनी बड़ी हो गईं क्या?’’

‘‘हां हुकुम, समय तो अपनी गति से चलता है.’’ दीवान बोला.

‘‘ठीक है, कोई ध्यान में है क्या?’’ महारावल मूलराज सफेद दाढ़ी को टटोलते हुए बोले.

‘‘एक है, आप माफी बख्शें तो अर्ज करूं.’’ दीवान ने कहा.

‘‘कौन है?’’ महारावल ने पूछा तो दीवान बोला, ‘‘राठौड़ अपने पुराने रिश्तेदार हैं. जोधपुर के कुंवर भीमसिंहजी यहां पधारे हुए हैं. शादी के हकदार भी हैं. कल को उन्हें राज मिलेगा. ऐसा मौका कब मिलेगा हुकुम. अभी अहसानों से दबे हैं. लगे हाथ बाईसा का ब्याह महाराज कुंवर भीमसिंह जी से कर लें तो सोने पर सुहागा हो जाए. घरघराना सब ठीक है.’’

आवाज को दबाते हुए दीवान आगे बोले, ‘‘हुकुम, जोधपुर से रोजरोज के झगड़ेटंटे होते हैं, वे भी खत्म हो जाएंगे. भीमसिंह जी के गद्दी बिराजने के बाद सरहद पर रोजरोज की किटकिट भी नहीं होगी.’’

‘‘पर भीमसिंह जी यह न समझें कि हम शरण दे कर अहसानों की कीमत ले रहे हैं.’’ महारावल ने कहा.

‘‘नहीं दाता, अहसान तो हम कर रहे हैं, शरण भी दी और बेटी भी.’’

‘‘महाराज कुंवरसा तो निर्वासित हैं. बारात कहां से आएगी. यों कैसे हो पाएगा ब्याह.’’

महारावल चिंता में पड़ गए. उन के बूढ़े चेहरे पर उदासी छा गई. ललाट पर पड़ी सलवटें और अधिक गहरा गईं. आखिर महारावल की सहमति मिल गई. तब मूलसागर जा कर कुंवर भीमसिंह जी से बात की गई. सुन कर कुंवर भीमसिंह को अपने कानों पर विश्वास नहीं हो रहा था. उन का दिल बल्लियों उछलने लगा. मगर प्रत्यक्षत: गंभीर बने हुए बोले, ‘‘महारावलसा को पता है कि मैं एक निर्वासित राजकुमार हूं. निर्वासित का क्या भरोसा. उम्र भटकते हुए कट सकती है.’’

‘‘हम संबंधों को देखते हैं, सत्ता को नहीं. सत्ता तो आज है कल नहीं भी होगी. पर संबंध तो शाश्वत रहेंगे. राठौड़ वंश तो पीढि़यों से हमारे समधी रहे हैं. आप यहां पधारे हुए हैं. उस से अच्छा सुयोग और क्या होगा. आप नागरकुंवर बाईसा का पाणिग्रहण करें तो यह जैसलमेर पर आप का अहसान होगा. दाता की इच्छा है कि आप स्वीकृति दें तो विवाह की तिथि तय कर ली जाए.’’

सारी बात खोल कर सामने रखी तो कुंवर जानबूझ कर पशोपेश में पड़े दिखाई देने लगे.

‘‘मैं आप लोगों का आभारी हूं कि आप ने मुझे इस योग्य समझा. पर आप तो जानते ही हैं कि बारात जोधपुर से नहीं आ पाएगी. इस से आप लोगों की गरिमा को ठेस पहुंच सकती है.’’

‘‘इतिहास गवाह है कुंवरसा, राजेमहाराजे कभी मुहूर्तों और बारातों के मोहताज नहीं होते. आप आदेश करें, सारे इंतजाम हो जाएंगे.’’

इस बार जवाब ठाकुर सवाईसिंह ने दिया, ‘‘जरूर हुकुम. महाराज कुंवरसा का विवाह बडे़ धूमधाम से होगा. आप तैयारियां कीजिए.’’

तुरंत शगुन में हीरे की अंगूठी, गुड़ और नारियल दिया, ‘‘आप ने शगुन कबूल किया हुकुम, सारा जैसलमेर आप का ऋणी हो गया है. महाराज कुंवरसा के यहां न होने से हमारी चिंताएं बढ़ गई थीं. आज हम धन्य हो गए हुकुम.’’

बात पक्की कर दी गई. शादी की तैयारियां बड़ी धूमधाम से की गईं. मूलसागर से बारात जैसलमेर आई. उस का भव्य स्वागत किया गया. सारा शहर दूल्हे की एक झलक देखने के लिए उमड़ पड़ा. रायसिंह अपनी बेटी का कन्यादान करने नहीं पहुंचे. न ही युवरानी या राजकुमारों को ही भेजा. महारावल ने स्वयं कन्यादान किया. शादी धूमधाम से संपन्न हुई. कुंवर भीमसिंह व राजकुमारी नागरकुंवर की मुलाकातों के चर्चे शहर में न हों और राजमहल की बदनामी न होने लगे, इसलिए उन दोनों का विवाह कर दिया गया. अब दोनों जीवनसाथी बन गए थे और उन्होंने अपना नवजीवन शुरू कर दिया था. चंद दिन ही बीते थे कि महाराजा विजय सिंह का 46 साल की उम्र में स्वर्गवास हो गया.

गुलाबराय की हत्या के बाद महाराजा विजय सिंह को कुछ भी अच्छा नहीं लगता था और थोड़े समय बाद वह भी चल बसे थे. तब कुंवर भीमसिंह अपनी रानी नागरकुंवर के साथ जोधपुर आ गए. भीमसिंह जोधपुर की राजगद्दी पर बैठ गए और नागरकुंवर महारानी बन गईं. Hindi love Story

 

Hindi Love Story in Short : आयशा की कहानी – मरते दम तक पति से किया बेइंतहा प्यार, जानिए कौन था वो

Hindi Love Story in Short  : तमाम तरह से प्रताडि़त होने के बावजूद आयशा अपने शौहर आरिफ को दिलोजान से मोहब्बत करती थी, लेकिन लालची आरिफ आयशा के बजाय अपनी प्रेमिका को चाहता था. निकाह के एक साल बाद आरिफ ने ऐसे हालात बना दिए कि आयशा को अपनी मौत का वीडियो बनाने के लिए मजबूर होना पड़ा…

अहमदाबाद में साबरमती नदी की उफान मारती लहरों पर अटकी मेरी निगाहों में उस वक्त अतीत के लम्हे एकएक कर चलचित्र की तरह तैर रहे थे. रिवरफ्रंट के किनारे चहलकदमी करने वाले लोगों से बेपरवाह मेरे जेहन में सिर्फ जिंदगी के वे अफसोस भरे लम्हे उभर कर सामने आ रहे थे, जिन के कारण आज मेरी जिंदगी इतने अवसाद में भर चुकी थी कि मैं ने एक जिंदगी का सब से कठिन फैसला ले लिया था. मैं अपने अब्बू लियाकत अली मरकाणी की 2 संतानों में सब से बड़ी थी, मुझ से छोटा एक भाई है. अब्बू पेशे से टेलर मास्टर थे. अब्बू बचपन से ही कहा करते थे कि मेरी आयशा बड़ी टैलेंटेड लड़की है.

अब्बू ज्यादा पढ़लिख नहीं सके थे, लेकिन उन का सपना था कि उन के बच्चे पढ़लिख कर काबिल इंसान बनें और लोग उन्हें उन के बच्चों की शोहरत के कारण जानें. अब्बू ने मुझे पढ़ालिख कर या तो आईएएस बनाने या टीचर बनाने का सपना देखा था. इधर अम्मी ने भी मुझे बचपन से ही घर के हर काम में पारंगत कर दिया था. वे कहा करती थीं कि पराए घर जाना है इसलिए अपने घर की जिम्मेदारियां संभाल कर ही ससुराल की जिम्मेदारियों के लिए तैयार होना पड़ता है. मेरा ख्वाब था कि मैं पीएचडी कर के लेक्चरर या प्रोफैसर बनूं. लेकिन कहते हैं न कि इंसान की किस्मत में जो लिखा हो, होता वही है. मुझे राजस्थान के जालौर से बचपन से ही लगाव था.

क्योंकि यहां शहर के राजेंद्र नगर में मेरे मामू अमरुद्दीन रहा करते थे. बचपन से ही जब भी स्कूल की छुट्टियां होती थीं तो मैं मामू के पास ननिहाल आ जाती थी. मामू भी कहते थे कि आयशा तुझे जालौर से जिस तरह का लगाव है उसे देख कर लगता है तेरी शादी यहीं करानी पडे़गी. बचपन में मामू की कही गई ये बातें एक दिन सच साबित हो जाएंगी, इस का मुझे उस वक्त अहसास नहीं था. बात सन 2017 की है, मैं ने ग्रैजुएशन पूरी कर ली थी. हमेशा गरमियों की छुट्टियों की तरह उस साल भी मैं मामू के घर चली गई थी. लेकिन इस बार एक अलग अहसास ले कर लौटी. इस बार मेरी मुलाकात वहां जालौर के ही रहने वाले आरिफ खान से हुई थी.

पता नहीं, वह कौन सा आकर्षण था कि पहली ही नजर में आरिफ मेरे दिल में उतर गया. उस से मिलने के बाद दिल में अजीब सा अहसास जागा, पहली मुलाकात के बाद जब वापस लौटी तो लगा जैसे कोई ऐसा मुझ से दूर चला गया है, जिस के बिना जीवन अधूरा है. मुझे लगा शायद मैं उसे अपना दिल दे बैठी थी. बस यही कारण था कि आरिफ से मिलनेजुलने का सिलसिला लगातार शुरू हो गया. आरिफ में भी मैं ने खुद से मिलने की वैसी ही तड़प देखी, जैसी मुझ में थी. मिलनेजुलने का सिलसिला शुरू होते ही हम दोनों अपने परिवारों के बारे में भी एकदूसरे को जानकारी देने लगे.

आरिफ अपने पिता बाबू खान के साथ जालौर की एक ग्रेनाइट फैक्ट्री में काम करता था. उस के अपने पुश्तैनी घर के बाहर 2 दुकानें थीं, जो उस ने किराए पर दे रखी थीं. आरिफ ग्रेनाइट फैक्ट्री में सुपरवाइजर के पद पर तैनात था, जबकि उस के पिता कंस्ट्रक्शन कंपनी की देखरेख का काम करते थे. जल्द ही हम दोनों की मुलाकातें प्यार में बदल गईं. आरिफ से बढ़ते प्यार के बारे में अपनी मामीजान को सारी बात बताई तो उन्होंने मामा से आरिफ के बारे में बताया. मामा ने पहले आरिफ से मुलाकात की और उस से जानना चाहा कि क्या वह सचमुच मुझ से प्यार करता है. जब उस ने कहा कि वह मुझ से निकाह करना चाहता है तो मामूजान ने आरिफ के अब्बा व अम्मी से मुलाकात की.

उस के बाद जब सब कुछ ठीक लगा तो मामू ने मेरे अब्बू व अम्मी को आरिफ के बारे में बताया. शादी में बदल गया प्यार मिडिल क्लास फैमिली की तरह बेटी के जवान होते ही मातापिता को बेटी के हाथ पीले करने की फिक्र होने लगती है. मेरे अब्बू  और अम्मी मेरे लिए काबिल शौहर तथा एक भले परिवार की तलाश कर ही रहे थे. मामू ने अब्बू को यह भी बता दिया कि उन्होेंने आरिफ व उस के परिवार के बारे में पता कर लिया है. अच्छा खातापीता और शरीफ परिवार है. अब्बू को भी लगा कि चलो बेटी ननिहाल स्थित अपनी ससुराल में रहेगी तो उन्हें  भी चिंता नहीं रहेगी.

इस के बाद मेरे परिवार ने आरिफ के परिवार वालों से मिल कर आरिफ से मेरे रिश्ते की बात चलानी शुरू की. एकदो मुलाकात व बातचीत के बाद आरिफ से मेरा रिश्ता पक्का हो गया. 6 जुलाई, 2018 को आरिफ से मेरे निकाह की रस्म पूरी हो गई और मैं आयशा आरिफ खान के रूप में नई पहचान ले कर अपने मायके से ससुराल जालौर पहुंच गई. हालांकि शादी में दानदहेज देने की कोई बात तय नहीं हुई थी, लेकिन अब्बा ने शादी में अपनी हैसियत के लिहाज से जरूरत की हर चीज दी. आरिफ की मोहब्बत में निकाह के कुछ दिन कैसे बीत गए, मुझे पता ही नहीं चला.

निकाह के 2 महीने बाद ही मेरी जिंदगी में संघर्ष का एक नया अध्याय शुरू हो गया. 2 महीने के भीतर ही मुझे समझ आने लगा कि निकाह के बाद पहली रात को अपने अंकपाश में लेते हुए आरिफ ने मुझ से ताउम्र मोहब्बत करने और जिंदगी भर साथ निभाने का जो वादा किया था, वह दरअसल एक फरेब था. असल में उस की जिदंगी में पहले से ही एक लड़की थी. बेवफाई आई सामने घर वाली के रूप में मेरे शरीर को भोगने के अलावा मोहब्बत तो आरिफ अपनी उस प्रेमिका से करता था, जिस से अब तक वह चोरीछिपे वाट्सऐप पर चैट और वीडियो काल कर के दिन के कई घंटे बातचीत में बिताता था. निकाह के 2 महीने बाद जब आरिफ के फोन से यह भेद खुला तो मेरे ऊपर तो जैसे पहाड़ ही टूट पड़ा.

आरिफ बेवफा होगा, इस की मुझे तनिक भी उम्मीद नहीं थी. एक औरत कुछ भी बांट सकती है, लेकिन पति का बंटवारा उसे कतई गवारा नहीं. जाहिर था, मैं भी एक औरत होने के नाते इस सोच से अछूती नहीं रही. मैं ने आरिफ की इस बात का विरोध किया कि आखिर मुझ में ऐसी कौन से कमी है, जो वह किसी दूसरी औरत में मेरी उस कमी को तलाश रहा है. उस दिन आरिफ ने जो कहा मेरे लिए वह किसी कहर से कम नहीं था. आरिफ ने मुझे बताया कि वह तो शादी से पहले ही एक लड़की से प्यार करता था, मगर जातपात की ऊंचनीच के कारण परिवार वाले उस से शादी के लिए तैयार नहीं हुए.

उस ने तो बस परिवार की खातिर मुझ से निकाह किया था. यह बात मेरे लिए कितनी पीड़ादायक थी, इस का अहसास दुनिया की हर उस औरत को आसानी से हो सकता है जिस ने अपने पति से दिल की गहराइयों से प्यार किया होगा. यह दुख, दर्द, तकलीफ मेरे लिए असहनीय थी. फिर अकसर ऐसा होने लगा कि आरिफ उस प्रेम कहानी को ले कर मेरे ऊपर हाथ छोड़ने लगा. इतना ही नहीं, अब तो वह चोरीछिपे नहीं मेरी मौजूदगी में ही अपनी प्रेमिका से वीडियो काल तक करने लगा था. आंखों से आंसू और दिल में दर्द लिए मैं सब कुछ तड़प कर सह जाती थी.

आरिफ की कमाई के साधन तो सीमित थे, लेकिन उस की आशिकी के कारण उस के खर्चे बेहिसाब थे. इसलिए जब भी उसे पैसे की जरूरत होती तो वह मुझे जरूरत बता कर दबाव बनाता कि मैं अपने अब्बू से पैसे मंगा कर दूं. जिंदगी में पति के साथ दूरियां तो बन ही चुकी थीं, सोचा कि चलो इस से ही आरिफ के साथ संबध सुधर जाएंगे. एकदो बार मैं ने 10-20 हजार मंगा कर आरिफ को दे दिए. लेकिन पता चला कि ये पैसा आरिफ ने अपनी महबूबा के साथ अय्याशियों के लिए मंगाया था. कुछ समय बाद ऐसा होने लगा कि आरिफ ने मुझे एकएक पाई के लिए तरसाना शुरू कर दिया और अपनी सारी कमाई आशिकी में लुटाने लगा. पैसे की कमी होती तो मुझ पर अब्बू से पैसा लाने का दबाव बनाता.

आखिर मैं भी एक साधारण परिवार की लड़की थी, लिहाजा मैं ने कह दिया कि अब मैं अब्बू से कोई पैसा मंगा कर नहीं दूंगी. दरअसल, मैं इतना सब होने के बाद खामोश थी तो इसलिए कि मैं अपने गरीब मातापिता की इज्जत बचाना चाहती थी. पति से मिलने वाले दर्द को छिपाते हुए मैं हर पल एक नई तकलीफ से गुजरती थी, लेकिन इस के बावजूद सहती रही. मेरा दर्द सिर्फ इतना नहीं था. एक बार आरिफ मुझे अहमदाबाद मेरे मायके छोड़ गया. मैं उस समय प्रैग्नेंट थी. आरिफ ने कहा था कि जब मेरे अब्बू डेढ़ लाख रुपए दे देंगे तो वह मुझे अपने साथ ले जाएगा. अचानक इस हाल में मायके आ जाने और आरिफ की शर्त के बाद मुझे परिवार को अपना सारा दर्द बताना पड़ा.

प्रैग्नेंसी के दौरान एक बार आरिफ ने मेरी पिटाई की थी. उसी के बाद से मुझे लगातार ब्लीडिंग होने लगी थी. मायके आने के बाद अब्बू ने मुझे हौस्पिटल में भरती कराया. तब डाक्टर ने तुरंत सर्जरी की जरूरत बताई, लेकिन गर्भ में पल रहे मेरे बच्चे को नहीं बचाया जा सका. इस के बाद जिंदगी में पूरी तरह अवसाद भर चुका था. प्रैग्नेंसी के दौरान आरिफ के बर्ताव से मैं बुरी तरह टूट गई थी. लेकिन ऐसे में अम्मीअब्बू ने मुझे सहारा दिया और मेरा मनोबल बढ़ा कर कहने लगे कि अगर आरिफ नालायक है तो इस के लिए मैं क्यों अपने को जिम्मेदार मान रही हूं.

लेकिन मेरी पीड़ा इस से कहीं ज्यादा इस बात पर थी कि इतना सब हो जाने पर भी आरिफ और उस के परिवार वाले मुझे देखने तक नहीं आए. मुझे लगने लगा कि आरिफ और उस के परिवार के लिए शायद पैसा ही सब कुछ है. वे यही रट लगाए रहे कि जब तक पैसा नहीं मिलेगा, मुझे अपने साथ नहीं ले जाएंगे. मैं या अब्बूअम्मी जब भी आरिफ या उस के परिवार वालों से बात कर के ले जाने के लिए कहते तो वे फोन काट देते. निकाह के बाद दहेज के लिए किसी लड़की की जिंदगी नर्क कैसे बनती है, मैं इस का जीताजागता उदाहरण बन चुकी थी.

सब कुछ असहनीय था मैं थक चुकी थी. मैं ने परिवार वालों को कुछ नहीं बताया. लेकिन मेरे बच्चे की मौत और आरिफ का मुझ से मुंह मोड़ लेना असहनीय हो गया था. लिहाजा थकहार कर 21 अगस्त, 2020 को मैं ने अब्बू के साथ जा कर अहमदाबाद के वटवा थाने में आरिफ और अपने सासससुर तथा ननद के खिलाफ दहेज की मांग तथा घरेलू हिंसा का मुकदमा दर्ज करा दिया. 10 मार्च, 2020 से आरिफ जब से मुझे अब्बू के घर छोड़ कर गया था, तब से मुझे लगने लगा था कि मैं अपने गरीब परिवार पर बोझ बन चुकी हूं. इसलिए मैं ने अहमदाबाद के रिलीफ रोड पर स्थित एसवी कौमर्स कालेज में इकोनौमिक्स से प्राइवेट एमए की पढ़ाई शुरू कर दी और एक निजी बैंक में नौकरी करने लगी.

जिंदगी चल रही थी, गुजर रही थी लेकिन न जाने क्यों मुझे लगने लगा था कि जिदंगी पराई हो गई है. मैं अब भी अपना परिवार जोड़ना चाहती थी. मुकदमा दर्ज होने के बाद भी मैं आरिफ को समझाती रही कि अगर वह मुझे अपना लेगा तो अब्बू से कह कर सब ठीक करा दूंगी. मैं हर तरीके से अपने परिवार को वापस जोड़ने की कोशिश कर रही थी. लेकिन आरिफ मेरी हर बात को बारबार नकारता रहा. 22 फरवरी, 2021 को मैं ने आरिफ से आखिरी बार फोन पर बात की थी. लेकिन आरिफ ने उस दिन जो कुछ कहा, उस ने मुझे भीतर से तोड़ दिया. उस ने कहा कि वह मर भी जाए तो भी मुझे ले कर नहीं जाएगा.

मैं ने आरिफ से कहा कि अगर वह ले कर नहीं जाएगा तो मैं जान दे दूंगी. इस पर आरिफ ने कहा अगर मरना है तो मर जाए, लेकिन मरने से पहले वीडियो बना कर भेज दे. मैं ने भी वादा कर लिया कि ठीक है, मरूंगी जरूर और वीडियो भी भेजूंगी. उसी दिन से मन जिंदगी के प्रति निराशा से भर गया था. 25 फरवरी को मैं उसी निराशा और हताशा में मन की शांति के लिए साबरमती रिवरफ्रंट पर जा पहुंची. यहीं पर बैठेबैठे अतीत के पन्नों  को पढ़ते हुए हताशा ने मुझे एक बार फिर इस तरह घेर लिया कि सोचा जब जीवन खत्म ही करना है तो क्यों न आज ही कर लिया जाए.

वीडियो में उस ने जिक्र किया कि इस मामले में आरिफ को परेशान न किया जाए. मैं आरिफ से प्यार करती थी, इसलिए उस से किया गया वादा पूरा करने के लिए मैं ने एक वीडियो बनाया. आयशा का आखिरी वीडियो ‘हैलो, अस्सलाम आलैकुम, मेरा नाम आयशा आरिफ खान है और मैं अब जो करने जा रही हूं, अपनी मरजी से करने जा रही हूं. मुझ पर कोई दबाव नहीं था. अब मैं क्या बोलूं? बस, यह समझ लीजिए कि अल्लाह द्वारा दी गई जिंदगी इतनी ही है और मेरी यह छोटी सी जिंदगी सुकून वाली थी. डियर डैड आप कब तक लड़ेंगे अपनों से? केस वापस ले लीजिए. नहीं लड़ना.

‘आयशा लड़ाइयों के लिए नहीं बनी. प्यार करते हैं आरिफ से, उसे परेशान थोड़े ही न करेंगे. अगर उसे आजादी चाहिए तो ठीक है वो आजाद रहे. चलो, अपनी जिंदगी तो यहीं तक है.

‘मैं खुश हूं कि मैं अल्लाह से मिलूंगी और पूछूंगी कि मुझ से गलती कहां हो गई. मां बाप बहुत अच्छे मिले, दोस्त भी बहुत अच्छे मिले, पर शायद कहीं कमी रह गई मुझ में या फिर तकदीर में. मैं खुश हूं सुकून से जाना चाहती हूं, अल्लाह से दुआ करती हूं कि वो दोबारा इंसानों की शक्ल न दिखाए.

‘एक चीज जरूर सीखी है मोहब्बत करो तो दोतरफा करो, एकतरफा में कुछ हासिल नहीं है. कुछ मोहब्बत तो निकाह के बाद भी अधूरी रहती हैं. इस प्यारी सी नदी से प्रेम करती हूं कि ये मुझे अपने आप में समा ले.

‘मेरे पीछे जो भी हो प्लीज ज्यादा बखेड़ा खड़ा मत करना, मैं हवाओं की तरह हूं, सिर्फ बहना चाहती हूं. मैं खुश हूं आज के दिन, मुझे जिन सवालों के जवाब चाहिए थे वो मिल गए, जिसे जो बताना चाहती थी सच्चाई बता चुकी हूं. बस इतना काफी है. मुझे दुआओं में याद रखना. थैंक यू, अलविदा.’

आरिफ से मेरा यही वादा था, इसलिए इस वीडियो को मैं ने आरिफ और उस के परिवार वालों को सेंड कर दिया है ताकि उस को समझ आ जाए कि मैं वाकई उस से सच्ची मोहब्बत करती थी और मरने के बाद भी उसे किसी पचडे़ में नहीं फंसाना चाहती. इस वीडियो संदेश को आरिफ को भेजने के बाद मैं ने अपने अब्बू व अम्मी से बात की. उन्हेंबता दिया कि मैं साबरमती के किनारे खड़ी हूं और मरने जा रही हूं.

हालांकि अब्बू  ने खूब मन्नतें की कि कोई गलत कदम न उठाऊं. लेकिन मैं ने खुद की जिंदगी खत्म  करने का फैसला ले लिया था. मरने से पहले भी आरिफ के लिए मेरा प्यार कम नहीं हुआ था इसीलिए मैं ने अब्बू से कहा कि वे आरिफ और उस के खिलाफ दर्ज मामले को वापस ले लें. मैं ने साबरमती के किनारे खड़े हो कर अपने इस फोन और बैग को किनारे रखा और साबरमती के सामने अपनी बांहें फैला दीं और उस के बाद मैं ने अपना भार साबरमती पर छोड़ दिया. Hindi Love Story in Short