Crime : 30 साल की रंजिश ने ली चार लोगों की जान

सौतिया डाह हमेशा खतरनाक होती है. रामविलास का दूसरी शादी करना पहली पत्नी मनतोरिया को कभी नहीं भाया था. उस ने अपने सीने में धधकती आग को 30 साल तक दबाए रखा. जब उस के बेटे बड़े हो गए तो उस ने अपने पति, सौतन सुनीता और उस के दोनों बेटों को…

62 वर्षीय रामविलास साह जिला सीतामढ़ी के डुमरा थाना क्षेत्र में आने वाले गांव बनचौरी में अपने परिवार के साथ रहता था. उस के परिवार में दूसरी पत्नी सुनीता के अलावा 2 बेटे थे. पहली पत्नी मनतोरिया से उस के 6 बच्चे थे. लेकिन मनतोरिया अपने बच्चों के साथ दूसरे मकान में रहती थी. एक तरह से उस का पति रामविलास से कोई संबंध नहीं था. रामविलास के पास खेती की अच्छीखासी जमीन थी. डुमरा इलाके में वह बड़े काश्तकारों में शुमार था. रामविलास के दिन बड़ी खुशहाली में कट रहे थे. अपने नियमानुसार वह सुबह 5 बजे बिस्तर त्याग देता था.

4 जून, 2018 को सुबह के 9 बजे गए थे. उस दिन न तो रामविलास उठा और न ही उस की पत्नी सुनीता और न ही उस के दोनों बेटे. घर में भी कोई हलचल नहीं हो रही थी. यह देख कर पड़ोस में रहने वाले रामविलास के भतीजे श्रवण को बड़ा अजीब लगा. इस के पहले ऐसा कभी नहीं हुआ था कि चाचा या चाची इतनी देर तक सोते रहे हों. यह देख कर श्रवण से नहीं रहा गया तो वह चाचाचाची को आवाज लगाते हुए उन के घर के अंदर दाखिल हो गया. घर का मुख्य दरवाजा यूं ही भिड़ा हुआ था, हलका सा धक्का देते ही किवाड़ खुल गई. श्रवण आवाज देते हुए चाचाचाची के कमरे में पहुंच गया.

कमरे में जा कर उस की नजर बिस्तर पर पड़ी तो उस का दिल दहल गया. बिस्तर पर रामविलास साह और उस की पत्नी सुनीता देवी की रक्तरंजित लाशें पड़ी थीं. श्रवण चिल्लाते हुए उलटे पांव बाहर आ गया.
उस के चीखने की आवाज सुन कर आसपड़ोस के लोग भी वहां आ गए. जब वे लोग रामविलास के घर में गए तो पतिपत्नी की लाशें देख कर हैरत में रह गए. उन के दोनों बच्चे घर में दिखाई नहीं दे रहे थे. लोगों ने जब दूसरे कमरे में देखा तो उन के दोनों बेटों नवल और राहुल की लाशें भी खून से लथपथ पड़ी मिलीं.
हत्यारों ने चारों की हत्या बड़ी बेरहमी से गला रेत कर की थी. थोड़ी देर में ही 4-4 लाशें पाए जाने की खबर बनचौरी गांव में ही नहीं बल्कि पूरे डुमरा क्षेत्र में फैल गई. जिस ने भी सुना दौड़ा चला आया.

देखतेदेखते वहां भारी भीड़ जमा हो गई थी. इसी बीच किसी ने घटना की सूचना थाना डुमरा को दे दी थी. एक ही परिवार के 4 लोगों की हत्या की सूचना मिलते ही थानाप्रभारी विकास कुमार सिंह तुरंत पुलिस टीम के साथ बनचौरा के लिए रवाना हो गए. जब वह घटनास्थल पर पहुंचे तो रामविलास के घर के बाहर लोगों का हुजूम लगा था. उच्चाधिकारियों को घटना की सूचना देने के बाद थानाप्रभारी घटनास्थल का निरीक्षण करने लगे. घटना की सूचना मिलते ही एसपी विकास बर्मन, एएसपी संदीप कुमार नीरज, डीएसपी (सदर) कुमार वीर वीरेंद्र, डीएसपी राजवंश सिंह, नगर थाने के इंसपेक्टर मुकेश चंद कुंवर, एसआई शशि भूषण सिंह आदि घटनास्थल पर पहुंच गए.

छानबीन के दौरान पुलिस अधिकारियों ने पाया कि हत्यारों ने चारों को गोली मारी थी. बाद में उन्होंने सब के गले रेते थे. ऐसा काम वही कर सकता था, जो उन से सख्त नफरत करता हो. मतलब यह कि हत्यारा नहीं चाहता था कि उन में से कोई भी जिंदा बचे. वह उन्हें आखिरी सांस तक मरते देखना चाहता था. छानबीन के दौरान पुलिस ने मौके से 4 खोखे बरामद किए. हत्यारों ने घर में रखे किसी भी सामान को हाथ नहीं लगाया था, कमरे का सारा सामान अपनी जगह रखा था. इस से साफ जाहिर हो रहा था कि हत्यारों का मकसद सिर्फ हत्या करना था. इस का मतलब रामविलास साह और उस के परिवार की हत्या किसी साजिश के तहत की गई थी. निश्चित रूप से हत्यारे परिचित रहे होंगे, जिन्हें घर के कोने की जानकारी थी. तभी वह बड़ी आसानी से अपना काम कर के निकल गए और किसी को कानोंकान भनक तक नहीं लगी.

घटना की सूचना मृतक रामविलास के साले यानी सुनीता के भाई बिरजू साह को मिली तो वह भी बनचौरी पहुंच गया. बहनोई और भांजों की लाशें देख वह दहाड़ मार कर रोने लगा. उस की बहन के घर में कोई दीया जलाने वाला तक नहीं बचा था. पड़ोसियों, गांव वालों आदि से बात करने के बाद पुलिस ने मौके की काररवाई निपटा कर चारों लाशें पोस्टमार्टम के लिए जिला अस्पताल भिजवा दीं. पुलिस ने मृतका सुनीता के भाई बिरजू को थाने बुलवा कर पूछताछ की तो उस ने इस सामूहिक नरसंहार के लिए अपने बहनोई की पहली बीवी मनतोरिया देवी और उस के 3 बेटों बिटटू कुमार, विक्रम कुमार उर्फ पप्पू और रोहित कुमार को जिम्मेदार मानते हुए नामजद रिपोर्ट दर्ज करा दी.

बिरजू साह की तहरीर पर पुलिस ने नामजद लोगों के खिलाफ भादंवि की धारा 302, 120बी, 34 और 27 आर्म्स एक्ट के तहत केस दर्ज कर लिया. घटना की मौनिटरिंग एसपी विकास बर्मन खुद कर रहे थे. उन्होंने सदर डीएसपी कुमार वीर वीरेंद्र को निर्देश दिया कि पुलिस की एक टीम बना कर आरोपियों को जल्द से जल्द गिरफ्तार करें ताकि वे भाग न सकें. डीएसपी कुमार वीर वीरेंद्र ने आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए एक स्पैशल टीम गठित की, जिस में तेजतर्रार और  विश्वासपात्र पुलिसकर्मियों को शामिल किया गया. नामजद चारों आरोपी गांव बनचौरी के ही रहने वाले थे.

पुलिस को मुखबिर के जरिए सूचना मिली कि आरोपी गांव में ही छिपे हैं और भाग निकलने का मौका ढूंढ रहे हैं. मुखबिर की सूचना पर पुलिस अविलंब बनचौरी पहुंची और रामविलास की पत्नी मनतोरिया के घर दबिश दी. घर खुला हुआ था लेकिन वहां कोई नहीं मिला. तभी पुलिस को पता चला कि चारों आरोपी अभीअभी घर छोड़ कर फरार हुए हैं. आरोपियों को पकड़ने के लिए पुलिस गांव के बाहर पहुंची. पुलिस को देखते ही आरोपी बिट्टू, विक्रम और रोहित भागने लगे. पुलिस ने दौड़ कर तीनों आरोपियों को पकड़ लिया. ये तीनों भाई थे. इन की मां मनतोरिया उन के साथ नहीं थी. शायद वह किसी दूसरे रास्ते से निकल गई थी. पुलिस तीनों आरोपियों को थाने ले आई. थानाप्रभारी विकास कुमार सिंह ने आरोपियों की गिरफ्तारी की सूचना डीएसपी कुमार वीर वीरेंद्र सिंह और एसपी विकास बर्मन को दे दी.

दोनों अधिकारी थाने पहुंच गए. एसपी और डीएसपी के समक्ष थानाप्रभारी ने तीनों आरोपियों से चौहरे हत्याकांड के संबंध में पूछताछ की तो उन्होंने बिना किसी झिझक के अपना जुर्म कबूल कर लिया. चारों की हत्या किए जाने का उन्हें कोई मलाल नहीं था. उन के चेहरों पर कोई अफसोस नहीं दिख रहा था बल्कि उन की आंखों में मृतकों के प्रति नफरत की चिंगारी फूट रही थी. पुलिस ने जब उन से हत्याओं की वजह पूछी तो उन्होंने विस्तार से कहानी सुनाई. पता चला कि इस खूनी कहानी की काली दास्तान पारिवारिक रंजिश की बुनियाद पर लिखी जा गई थी.

तीनों आरोपियों को गिरफ्तार करने के बाद एसपी विकास वर्मन ने पुलिस लाइंस में पत्रकार वार्ता का आयोजन किया. तीनों आरोपियों ने पत्रकारों के सामने अपने पिता, सौतेली मां और दोनों सौतेले भाइयों की हत्या किए जाने का जुर्म कबूल किया. इस के बाद पुलिस ने उन्हें कोर्ट में पेश कर न्यायिक हिरासत में भेज दिया. इस खूनी कहानी को विस्तार से जानने के लिए हमें 30 साल पीछे जाना होगा, जब इस कहानी की बुनियाद रखी गई. रामविलास साह अपने पिता के साथ खेतीकिसानी का काम करता था. करीब 40 साल पहले उस के पिता ने उस का विवाह मनतोरिया के साथ कर दिया था. रामविलास की जिंदगी में मनतोरिया बहार बन कर छा गई. समय के साथ मनतोरिया 6 बच्चों की मां बनी. जिन में 3 बेटे और 3 बेटियां थीं.

करीब 30 साल पहले रामविलास साह ने सुनीता से दूसरी शादी रचा ली थी. पति के इस फैसले पर मनतोरिया आगबबूला हो गई. बच्चे भी पिता की दूसरी शादी से खुश नहीं थे, उन्होंने सुनीता को मां मानने से इनकार कर दिया. यहीं से रामविलास साह के जीवन में महाभारत की शुरुआत हो गई. रामविलास ने सुनीता से किस विवशता अथवा मजबूरी के तहत शादी की थी, इसे रामविलास ही जानता होगा. हालांकि रामविलास दोनों पत्नियों को बराबर प्यार देता था. पहली पत्नी के बच्चों को वही दुलार देता था जो उन्हें
देता आया था. बच्चों के साथ उस ने कभी भेदभाव नहीं किया. लेकिन बच्चे पिता से नाखुश रहते थे और अपनी मां का ही साथ देते थे.

खैर, आगे चल कर सुनीता भी 2 बच्चों नवल कुमार उर्फ भोलू और राहुल कुमार की मां बन गई. नवल और राहुल के पैदा होने के बाद तो घर में कलह और बढ़ गई. पहली पत्नी मनतोरिया और उस के बच्चे रामविलास पर दबाव बना रहे थे कि वह सुनीता से संबंध तोड़ दे. लेकिन रामविलास ने मनतोरिया और बच्चों से दो टूक कह दिया था कि चाहे कुछ भी हो जाए वह सुनीता से कभी अलग नहीं हो सकता. पति का यह जवाब सुन कर मनतोरिया मन मसोस कर रह गई. आखिर रामविलास ने इस कलह से निबटने के लिए अपनी संपत्ति 2 बराबर भागों में बांट दी. एक हिस्सा मनतोरिया के नाम लिख दिया और दूसरा हिस्सा सुनीता के नाम. यही नहीं उस ने पुस्तैनी मकान भी पहली पत्नी को दे दिया और उसी गांव में घर से थोड़ी दूरी पर एक नया घर बना कर सुनीता और दोनों बच्चों के साथ रहने लगा.

लेकिन उस का यह पूरा खेल उल्टा पड़ गया. मनतोरिया और उस के तीनों बच्चों को ये सब इसलिए नागवारा गुजरा कि रामविलास ने सौतेली मां को अपनी जायदाद में से हिस्सा क्यों दिया. उन्होंने पिता से कहा कि वह सौतेली मां का हिस्सा उन्हें दे दें, नहीं तो इस का अंजाम बुरा हो सकता है. लेकिन रामविलास ने पत्नी और बच्चों की बातों पर ध्यान नहीं दिया. बात इसी साल मार्चअप्रैल महीने की है. मनतोरिया और उस के तीनों बेटों बिट्टू, विक्रम और रोहित के मन में लालच आ गया. उन्होंने धोखे से सुनीता के हिस्से की 12 कट्ठे जमीन में से 4 कट्ठा जमीन 4 लाख रुपए में बनचौरी गांव के पवन साह को बेच दी. पवन साह के नाम जमीन का बैनामा होने तक सुनीता या रामविलास को कानोंकान खबर तक नहीं हुई.

लेकिन यह बात छिपने वाली नहीं थी. आखिरकार रामविलास को पता चल ही गया कि मनतोरिया ने धोखे से सुनीता के हिस्से की 4 कट्ठा जमीन गांव के पवन साह को बेच दी है. इस बात को ले कर मनतोरिया और सुनीता के बीच विवाद छिड़ गया. रामविलास सुनीता का ही साथ दे रहा था. उस ने मनतोरिया को इस के लिए खूब खरीखोटी सुनाई. इस पर मनतोरिया के सब से छोटे बेटे रोहित ने पिता को भलाबुरा कह दिया. बेटे की बात रामविलास के दिल में चुभ गई. उस ने आव देखा न ताव, उस के गाल पर 2 थप्पड़ रसीद कर दिया. बेटे पर हाथ उठाने वाली बात न तो मनतोरिया को अच्छी लगी और न ही बिट्टू और विक्रम को. 2 थप्पड़ों से उस के सीने में धधक रही नफरत की आग ज्वाला बन गई. यह बात तीनों बेटों को नागवार गुजरी कि पिता ने कैसे हाथ उठाया. उन्होंने ठान लिया कि इस का परिणाम उन्हें भुगतना ही होगा. सुनीता जब तक जिंदा रहेगी तब तक उन्हें चैन नहीं मिलेगा.

उस रोज के बाद से तीनों भाइयों के सिर पर खून सवार हो गया. वह पिता, सौतेली मां और उस के दोनों बेटों को मौत के घाट उतारने की योजना बनाने लगे. बिट्टू और विक्रम ने रुपयों का बंदोबस्त कर के आर्म्स सप्लायर वीरेंद्र ठाकुर 25 हजार रुपए में 2 पिस्टल और कारतूस खरीद लिए. उस के बाद बेटों ने मां को बता कर उसे भी अपनी योजना में शामिल कर लिया. मनतोरिया तो चाहती ही थी कि उस की सौतन सुनीता उस के रास्ते से हट जाए. उस ने बच्चों को डांटने के बजाए उन की पीठ थपथपाई. मां के योजना में शामिल हो जाने से बेटों के हौसले बुलंद हो गए. बिट्टू और रोहित ने साथ देने के लिए खोया गांव में रहने वाले ममेरे भाई रामकृत साह और सियाराम साह को भी योजना में शामिल कर लिया.

अब वह जल्द से जल्द अपनी योजना को अंजाम देना चाहते थे. आखिर इस के लिए उन्होंने 3 जून, 2018 की रात तय की. योजना को अंजाम देने से पहले तीनों भाइयों ने रात में शराब पी. 3-4 जून, 2018 की रात करीब 12 बजे बिट्टू, विक्रम और रोहित हथियार ले कर अपने पिता रामविलास साह के घर की ओर बढ़े. बिट्टू और विक्रम ने खिड़की से भीतर झांक कर देखा तो रामविलास और सुनीता गहरी नींद में सोए थे. दूसरे कमरे में नवल और राहुल भी सो रहे थे. बिट्टू और विक्रम के मुख्य शिकार नवल और राहुल ही थे. उन्होंने पहले उन्हीं की हत्या करने की योजना बनाई थी. विक्रम ने खिड़की से ही नवल और राहुल के सीने में 1-1 गोली उतार दी, जबकि बिट्टू ने पिता रामविलास और सौतेली मां सुनीता को गोली मारी, रोहित बाहर खड़ा पहरा दे रहा था.

गोली मारने के बाद बिट्टू और विक्रम घर में घुस गए और दोनों ने फलदार चाकू से चारों के गले रेत दिए. इस के बाद इन लोगों ने सीने पर ताबड़तोड़ वार कर अपने आक्रोश को ठंडा किया. जब उन्हें विश्वास हो गया कि चारों के जिस्म ठंडे पड़ गए हैं, तो उन्हें तसल्ली हुई. इस खूनी खेल को अंजाम देने में उन्हें केवल आधा घंटा लगा. इस के बाद वे अपने घर पहुंचे और खून से सने अपने हाथपैर धोए. फिर मां को बता दिया कि उन्होंने उन चारों को मौत के घाट उतार दिया. अब उन के रास्ते का कांटा सदा के लिए हट गया है.
उसी रात उन्होंने अपनी मां को ममेरे भाई रामकृत साह और सियाराम साह के साथ भेज दिया. वहां से दोनों
मनतोरिया को कहां ले गए अब तक पता नहीं चला. 4 जून, 2018 को ही तीन आरोपी गिरफ्तार कर लिए.

मनतोरिया कथा लिखने तक पुलिस की गिरफ्त से दूर थी. पुलिस ने बिट्टू कुमार, विक्रम और रोहित की निशानदेही पर हत्या में प्रयुक्त पिस्टल और चाकू भी बरामद कर लिए. इस के अलावा उन्हें पिस्टल और कारतूस उपलब्ध कराने वाले बिट्टू के ममेरे भाई रामकृत साह और सियाराम साह को 6 जून, 2018 को गिरफ्तार किया गया. पुलिस ने तीनों आरोपियों से पूछताछ कर के उन्हें जेल भेज दिया.
—कथा पुलिस सूत्रों पर आधारित

crime news : प्रेमिका बनी भाभी तो किया भाई का कत्ल

खूबसूरत खालिदा और नौशाद एकदूसरे को दिलोजान से चाहते थे, लेकिन खालिदा के घर वालों ने उस का निकाह नौशाद के भाई आफताब से कर दिया. भाभी के रूप में अपनी महबूबा को देख कर नौशाद का दिमाग खराब हो जाता था. फिर एक दिन…  

दिनों मेरी पोस्टिंग नौशहरा में थी. मेरी रिहाइश भी थाने के करीब ही थी. एसआई मशकूर हुसैन ने खबर सुनाई

नौशहरा गांव में एक कत्ल की वारदात हो गई है. मकतूल का बाप और 2 आदमी बाहर बैठे आप का इंतजार कर रहे हैं.’ मैं उन लोगों के साथ फौरन मौकाएवारदात पर जाने के लिए रवाना हो गया. मकतूल का नाम आफताब था, वह फय्याज अली का बड़ा बेटा था. उस से छोटा नौशाद उस की उम्र 20 साल थी. आफताब उस से 2 साल बड़ा था. उस की शादी एक महीने पहले ही हुई थी. मकतूल का बाप फय्याज अली छोटा जमींदार था. उस के पास 10 एकड़ जमीन थी, जिस पर बापबेटे काश्तकारी करते थे. मैं खेत में पहुंचा, जहां पर 2 छोटे कमरे बने हुए थे. बरामदे में कटे हुए गेहूं का ढेर लगा था. फय्याज के साथ मैं कमरे के अंदर पहुंच गया. मकतूल की लाश कमरे में पड़ी चारपाई के पायंते पर पड़ी थी.

मैं ने गौर से लाश की जांच की. वह औंधे मुंह पड़ा था. मुंह के करीब खून का छोटा सा तालाब बन गया था. खोपड़ी पर किसी वजनी चीज से वार किया गया था. खोपड़ी का पिछला हिस्सा काफी जख्मी था. खोपड़ी चटक गई थी. यह जख्म ही मौत की वजह था. वार बड़ी बेदर्दी से किया गया था, जिस से मारने वाले की नफरत का अंदाजा होता था. मेरे अंदाज के मुताबिक उसे सुबह 5-6 बजे मारा गया था. मैं ने कमरे की अच्छे से तलाशी ली. आला कत्ल नहीं मिला. मैं ने दूसरे कमरे की भी तलाशी ली, जहां खेती के औजार और बीज पड़े थे. काररवाई पूरी होने पर लाश मशकूर हुसैन के साथ पोस्टमार्टम के लिए सिटी अस्पताल भिजवा दी.

कमरे के बाहर अब तक काफी लोग जमा हो चुके थे. मैं ने फय्याज को तसल्ली दी. उसे यकीन दिलाया कि कातिल जल्दी ही पकड़ा जाएगा. फिर उस से पूछा, ‘‘क्या आफताब की किसी से लड़ाई थी?’’

उस ने रोते हुए जवाब दिया, ‘‘उस का कोई दुश्मन नहीं था. वह तो सब से मिलजुल कर रहता था.’’

‘‘पर फय्याज अली, लाश की हालत देख कर लगता है कि किसी ने दुश्मनी निकाली है. क्या किसी पर शक है? उस की लाश कितने बजे मिली थी?’’

‘‘हुजूर, वह सुबह 5 बजे अपने भाई के साथ खेतों पर निकल जाता था. लाश 8 बजे मिली. मैं देर से उन का नाश्ता ले कर जाता था.’’

‘‘क्या तुम आज भी 8 बजे नाश्ता ले कर निकले थे?’’

‘‘जी सरकार. आज मैं अकेले आफताब का नाश्ता लाया था, क्योंकि नौशाद बीमार घर पर पड़ा है.’’

काफी देर तक मैं अंदरबाहर की तलाशी लेता रहा. फिर फय्याज अली से पूछा, ‘‘जब तुम कमरे पर पहुंचे तो तुम ने क्या देखा?’’

‘‘जब मैं खेतों पर पहुंचा, मैं ने उसे खेत में नहीं देखा तो परेशान हो गया. वह सवेरे घर से कर डेरे से खेतों के कपड़े पहन कर काम शुरू करता था. शाम को काम खत्म कर के घर के कपड़े बदलता था. जब मैं कमरे पर पहुंचा तो वह घर के कपड़ों में ही औंधा पड़ा था. उसे कपड़े बदलने का मौका भी नहीं मिला था. शायद कातिल उस के साथ ही यहां पहुंचा हो.’’

‘‘मेरे खयाल में कातिल ने बेखबरी में मकतूल पर पीछे से वार किया है. उसे कपड़े बदलने का मौका तक नहीं मिल सका. मुझे शक है कि कातिल पहले से ही कमरे में था.’’

‘‘लेकिन दोनों कमरों के दरवाजे हम ताला लगा कर बंद करते हैं. कोई बंदा अंदर कैसे जा सकता है?’’

अचानक मेरी नजर कमरे की खिड़की पर पड़ी, जिस से आसानी से एक आदमी कमरे के अंदर सकता था. मैं ने खिड़की की तरफ इशारा करते हुए कहा, ‘‘देखो, वह खिड़की खुली हुई है. कुंडी नहीं लगी है.’’

फय्याज हैरानी से बोला, ‘‘हैरत है जनाब, हम रोज शाम को खिड़की दरवाजे याद से बंद करते हैं. कल शायद भूल हो गई और कातिल को अंदर आने का मौका मिल गया.’’

उस के बाद मैं फय्याज के साथ कमरे बंद करवा कर उस के घर पहुंचा, जहां उस की बीवी सुलताना और बहू खालिदा थीं. घर का माहौल बेहद बोझिल था. आसपड़ोस की औरतें दोनों को तसल्ली दे रही थीं. मुझे नौशाद कहीं दिखाई नहीं दिया. मैं ने उस के बारे में पूछा तो पता लगा कि वह रिश्तेदारी में मौत की खबर देने गया है. औरतें कुछ बताने की हालत में नहीं थींमैं बाहर गया. सामने किराने की एक दुकान थी. मैं वहां पहुंच गया. मैं ने दुकानदार अली से कहा, ‘‘तुम्हारी दुकान के सामने ही रहने वाले फय्याज का कत्ल हो गया है. तुम्हारा इस बारे में क्या खयाल है?’’

उस ने बड़ी ही उदासी से कहा, ‘‘बहुत अफसोसजनक घटना है. आफताब बहुत अच्छा लड़का और कबड्डी का अच्छा खिलाड़ी था.’’

‘‘चाचा, मुझे लगता है कि यह कत्ल दुश्मनी और नफरत का नतीजा है. क्या तुम्हें कुछ अंदाजा है, कौन यह काम कर सकता है?’’

कुछ देर वह सोचता रहा फिर बोला, ‘‘सरकार, ऐसे तो मुझे कुछ अंदाजा नहीं है. अभी तो बेचारे की शादी हुई थी. बड़ा ही सीधा बंदा था और बहुत ही धीमे मिजाज का. पर मुझे याद पड़ता है कुछ अरसे पहले कबड्डी के एक मैच में विरोधी टीम के एक बंदे ने बेइमानी की थी. उस का नाम फैजी था. दोनों की खूब कहासुनी हुई थी. फैजी का एक साथी जावेद भी बहुत बढ़चढ़ कर बोल रहा था. वह तो अच्छा हुआ देखने वालों ने समझाबुझा कर मामला संभाल लिया. मैं भी वहीं था. फैजी और जावेद बड़े लड़ाकू किस्म के लड़के हैं. उस दिन आफताब खेल से बाहर निकल गया. बात खत्म हो गई.’’

‘‘यह कितने दिन पहले की बात है?’’ 

चाचा ने सोच कर कहा, ‘‘उस की शादी के बाद ये मैच हुआ था. पर थानेदार साहब, यह इतनी बड़ी बात नहीं है कि कोई किसी का कत्ल कर दे.’’

मैं ने चाचा को बहुत कुरेदा पर कोई खास जानकारी हो सकी. थाने पहुंच कर मैं ने जावेद को बुलवाया तो पता चला कि वह किसी काम से गल्ला मंडी गया है. सिपाही उस की मां से कह कर आया था कि आने पर उसे थाने भेज दे. शाम को मशकूर हुसैन शहर से वापस गया. लाश दूसरे दिन मिलने वाली थी. मौत की वजह खोपड़ी पर लगी चोट थी. मैं ने मशकूर हुसैन से पूछा, ‘‘तुम जावेद के बारे में क्या जानते हो?’’

उस ने कहा, ‘‘जावेद कबड्डी का अच्छा खिलाड़ी है. एक मैच में उस की आफताब से लड़ाई भी हुई थी, पर यह इतनी अहम बात नहीं है कि बात कत्ल तक पहुंच जाए.’’

‘‘जावेद के आने पर असली बात पता चलेगी.’’

‘‘एक बात और है सर, मेरी मालूमात के मुताबिक जावेद की बहन फरीदा की शादी आफताब से होने वाली थी. एक साल मंगनी रही फिर आफताब के घर वालों ने यह कह कर मंगनी तोड़ दी कि लड़की का चालचलन ठीक नहीं है. और फिर उस की शादी भाई की बेटी खालिदा से कर दी.’’

मैं ने कहा, ‘‘मंगनी टूटने का भी दुख और अपमान ऐसे काम को उकसा सकता है.’’

अगले दिन फिर मैं फय्याज अली के घर गया. जावेद अभी तक नहीं आया था. मैं उस के बारे में सोच रहा था. फय्याज अली के घर का माहौल वैसा ही शोकग्रस्त था. मैं मकतूल की बेवा खालिदा से मिला. वह सदमे में थी. रोरो कर उस की आंखें सुर्ख हो रही थीं. अच्छी खूबसूरत लड़की बेहाल हो रही थी. उस से कुछ पूछना बेकार था. मैं ने फय्याज से पूछा, ‘‘क्या कबड्डी के एक मैच में जावेद और आफताब की लड़ाई हुई थी?’’

उस ने बेबसी से कहा, ‘‘हां, मैं ने भी सुना था कि कुछ बेइमानी होने पर दोनों के बीच में कहासुनी हुई थी.’’

मैं ने आफताब की मां से पूछा, ‘‘आप के बेटे की मंगनी पहले जावेद की बहन फरीदा से हुई थी. फिर मंगनी क्यों तोड़ दी? हो सकता है, इस वाकये की वजह से जावेद आफताब से नफरत करने लगा हो.’’

‘‘मंगनी तो टूटी थी क्योंकि फरीदा का चालचलन अच्छा नहीं था. पर थानेदार साहब, मुझे जावेद से ज्यादा फैजी पर शक है क्योंकि कबड्डी के मैदान के साथसाथ आफताब ने उसे जिंदगी के मैदान में भी हरा दिया था. क्योंकि फैजी खालिदा से शादी करना चाहता था. वैसे हमारी फैजी से कोई सीधी रिश्तेदारी नहीं है, पर खालिदा की मां और फैजी की मां आपस में बहनें हैं

‘‘खालिदा फैजी की खालाजाद बहन है. फैजी की मां की बड़ी आरजू थी कि वह खालिदा को अपनी बहू बनाए पर खालिदा की मां ने साफ इनकार कर दिया. इस पर बहुत लड़ाई भी हुई थी. लंबी नाराजगी चल रही है और खालिदा की शादी मेरे बेटे आफताब से हो गई. इस के पहले फैजी की मां और खालिदा की मां के ताल्लुकात बहुत अच्छे थे और सदमे में फैजी के बाप को फालिज का असर हो गया.’’

सारी कहानी सुन कर मैं सोच में पड़ गया. अब फैजी और जावेद दोनों शक के घेरे में गए थे. मैं ने फय्याज अली को बताया, ‘‘लाश शाम तक जाएगी. वे लोग मय्यत का बंदोबस्त कर लें.’’ 

सब को तसल्ली दे कर मैं वहां से उठ गया. उस दिन भी नौशाद से मुलाकात हो सकी. वह काम से बाहर गया था. सुलताना से की गई मालूमात तफ्तीश को आगे बढ़ाने में कारामद थी. जब मैं बाहर निकला तो फय्याज के साथ एक अधेड़ उम्र का आदमी और एक लड़का भी था. फय्याज ने बताया, ‘‘यह मेरे भाई फिदा अली हैं और यह खालिदा का भाई सईद.’’ इन के बारे में मैं पहले ही सुन चुका था. इन लोगों से कुछ पूछना बेकार था.

दूसरे दिन जावेद मेरे सामने खड़ा था. कसरती नौजवान था. उस के चेहरे पर रूखापन और अकड़ थी. उस ने तीखे लहजे में पूछा, ‘‘थानेदार साहब, मैं ने क्या किया है जो आप ने मुझे थाने बुलाया है?’’

‘‘मुझे कुछ पूछताछ करनी है. सीधा और सही जवाब चाहिए.’’

‘‘मुझे झूठ बोलने की क्या जरूरत है. बेवजह मुझे पकड़ लाए.’’

हवलदार ने एक चांटा उसे जड़ा तो उस का दिमाग सही हो गया. धीमे लहजे में बोला, ‘‘पूछिए, क्या पूछना है?’’

‘‘वारदात के दिन तुम कहां थे? शाम तक भी घर वापस नहीं आए.’’

‘‘सरकार, मैं गल्ला मंडी गया था. कुछ काम पड़ गया, आतेआते रात हो गई. सुबह आप की खिदमत में हाजिर हूं.’’

‘‘गल्ला मंडी क्यों गए थे?’’

‘‘मुझे सब्जियों के बीज लाने थे और गेहूं के दाम भी चैक करने थे. मैं सवेरे 8 बजे घर से निकला था.’’

इस का मतलब वह आफताब की मौत के बाद घर से निकला था. मैं आंख बंद कर के उस पर यकीन नहीं कर सकता था.

‘‘तुम ने जो बीज खरीदे, उस की रसीद दिखाओ?’’ 

उस ने जेब से तुड़ीमुड़ी रसीद निकाल कर मेरे आगे कर दी. तारीख की जगह पर मुझे ओवरराइटिंग का गुमान हुआ. मैं ने रसीद दराज में रख ली.

‘‘जावेद, यह बताओ कि आफताब की मंगनी तुम्हारी बहन से हुई थी तो यह मंगनी क्यों टूट गई?’’

‘‘सरकार, उन लोगों ने मेरी बहन पर बदचलनी का इलजाम लगा कर मंगनी तोड़ दी. मुझे बहुत गुस्सा आया रंज भी हुआ. बेवजह मेरी बहन बदनाम हुई.’’

‘‘और इसी का बदला लेने के लिए गुस्से में तुम ने आफताब का कत्ल कर दिया.’’

वह घबरा कर बोला, ‘‘थानेदार साहब, गुस्सा अपनी जगह है. मैं इस बात के लिए आफताब को कत्ल नहीं कर सकता. हां, मेरी उस से लड़ाई हुई थी. उसे बुराभला कह कर मैं ने अपना गुस्सा उतार लिया था और अपने दोस्त फैजी का साथ दिया था. मैं कसम खाता हूं, मैं इस कत्ल में शामिल नहीं हूं.’’

मैं ने पलटवार किया, ‘‘तो क्या यह कत्ल फैजी ने किया है? वह खालिदा से शादी करना चाहता था, पर जब उस की शादी आफताब से हो गई तो बदला लेने के लिए उस ने आफताब को मार दिया.’’

वह जल्दी से बोला, ‘‘नहीं सरकार, फैजी ऐसा नहीं कर सकता. इतनी सी बात के लिए कोई खून नहीं कर सकता. मैं यह मानता हूं कि मेरे और फैजी के दिल में आफताब के लिए जहर भरा था, पर हम ने कत्ल की वारदात नहीं की है.’’

मैं ने धमकाते हुए कहा, ‘‘तुम शक के दायरे से बाहर नहीं हो. गांव छोड़ कर बाहर मत जाना.’’

दोपहर को पोस्टमार्टम रिपोर्ट गई और साथ ही लाश भी. लाश घर वालों के सुपुर्द कर दी गई. रिपोर्ट के मुताबिक, आफताब को 18 तारीख की सवेरे 5 और 6 बजे के बीच मारा गया था

मौत खोपड़ी चटखने से हुई. खोपड़ी के पिछले हिस्से पर लोहे की भारी चीज से वार किया गया था. यह वार बेखबरी में पीछे से किया गया थाशाम को लाश को दफना दिया गया. काफी लोग जमा हुए थे. गमी का माहौल था. दूसरे दिन मैं ने मशकूर हुसैन को जावेद की बात की सच्चाई जानने को रसीद के साथ गल्ला मंडी रवाना कर दिया. उस के बाद फैजी को थाने बुलाया. फैजी 23-24 साल का गोरा जवान था. आते ही उस ने तीखे लहजे में पूछा, ‘‘मुझे आप ने सिपाही से पकड़वा कर क्यों बुलवाया? मेरा क्या कसूर है?’’

मैं ने नरम लहजे में कहा, ‘‘तुम से कुछ पूछताछ करनी है. एक बार में सच बोल दो तो बेहतर है. मार के बाद तो सच ही निकलेगा. तुम ने आफताब का कत्ल क्यों किया?’’

वह चीखते हुए बोला, ‘‘आप यह कैसा इलजाम लगा रहे हैं. इस कत्ल में मैं शामिल नहीं हूं. खुदा की कसम, मैं ने उस का कत्ल नहीं किया. यह सरासर इलजाम है.’’

मैं ने कड़क कर कहा, ‘‘फिर बताओ किस ने कत्ल किया? तुम उस से नफरत करते थे क्योंकि तुम्हारी पसंद की लड़की की शादी आफताब से हो गई थी. उस की जीत तुम से बरदाश्त नहीं हुई. कबड्डी के मैदान में भी तुम ने उस से झगड़ा किया था.’’

‘‘यह सही है कि मैं उस से नफरत करता था, पर सच्चाई यह है कि मैं ने आफताब को नहीं मारा.’’

‘‘जब तक सही कातिल हाथ नहीं आता, शक में तुम हवालात में बंद रहोगे.’’

फैजी की गिरफ्तारी की खबर जल्दी ही गांव में फैल गई. उस की मां रोतेधोते हमारे पास पहुंच गई. कहने लगी, ‘‘मेरा बेटा बेकसूर है. सुलताना ने आप को भड़काया, इलजाम लगाया, आप ने उसे हवालात में डाल दिया. यह जुल्म है सरकार. यह बात सही है कि फैजी खालिदा से शादी करना चाहता था पर मेरी बहन ने ही मना कर दिया, मैं किसी को क्या दोष दूं.’’

मैं ने उसे समझाते हुए कहा, ‘‘देखो, अभी जांच चल रही है. फैजी शक के दायरे में आता है, इसलिए उसे बंद किया है. अगर वह बेकसूर है तो यकीन रखो, मैं उसे छोड़ दूंगा.’’

वह रोते हुए बोली, ‘‘हुजूर, उस का बाप भी फालिज में पड़ा हुआ है. बेटा जेल में बंद है, हम पर रहम करें.’’ 

मैं ने समझाबुझा कर उसे घर भेजा. इसी बीच मशकूर हुसैन गल्ला मंडी से लौट आया. उस ने बताया, ‘‘तारीख में हेरफेर किया गया है. 3 को 8 बनाया गया है. बीज 13 तारीख को खरीदे गए थे, रसीद में 18 है.’’ 

वह दूसरी रसीद भी साथ लाया था. मैं ने फौरन जावेद को बुलवाया. उसे दोनों रसीदें दिखाईं तो वह हड़बड़ा गया. कहने लगा, ‘‘मैं ने तारीख बदली है यह सच है, पर इस की वजह दूसरी है, जिसे मैं ही जानता हूं.’’

मैं ने एक चांटा लगाते हुए पूछा, ‘‘वारदात के अलावा और क्या वजह हो सकती है.’’

वह गिड़गिड़ाया, ‘‘हुजूर, बात यह है कि 13 तारीख की रसीद दिखा कर मैं ने अपने बाप से पैसे वसूल कर लिए थे. मुझे जुए की लत लग गई है. 18 को मैं गल्ला मंडी तो गया था पर कुछ खरीदा नहीं और पुरानी रसीद में तारीख बदल कर अब्बा से दोबारा पैसे वसूल कर लिए. बस इतनी सी बात है.’’

वह रोने लगा, कसमें खाने लगा. उस की बात में सच्चाई थी क्योंकि गल्ला मंडी से यही मालूम हुआ था कि वह 13 तारीख को बीज ले गया था, 18 तारीख को सिर्फ कर चला गया था. वहां से वह हनीफ के जुआ अड्डे पर गया था. पर मैं इस तरह से उसे छोड़ नहीं सकता था. मैं ने उसे भी हवालात में डलवा दिया. गल्ला मंडी की जांच एक सिपाही के जिम्मे कर दी. शाम को मैं खुद फैजी के घर चला गया. उस का बाप बाबू खां दुबलापतला, बीमार सा आदमी था. फालिज ने उसे बिस्तर से लगा दिया था. मैं ने उसे तसल्ली दी, ‘‘हौसला रखो बाबू खां. फैजी अगर बेकसूर है तो मैं तुम से वादा करता हूं कि उस का बाल भी बांका नहीं होगा.’’

उस ने कांपती आवाज में कहा, ‘‘थानेदार साहब, इंसान गलती का पुतला है. ऐसी ही संगीन गलती मेरी बीवी जाहिदा ने भी की. वह खालिदा की शादी आफताब के बजाय नौशाद से करती तो बहुत अच्छा होता.’’

बाबू खां की एक बात में हजार भेद छिपे थे. बाबू खां को समझा कर मैं लौट आया. जैसे ही मैं थाने पहुंचा, सिपाही साजिद मेरे आगे हाथ जोड़ कर खड़ा हो गया और बोला, ‘‘सर, मुझ से बड़ी गलती हो गई. 18 तारीख वारदात के दिन जब हम लोग कमरों की तलाशी ले रहे थे, मुझे यह अंगूठी खिड़की के बाहर पड़ी मिली थी. मैं ने इसे जेब में रख लिया था और फिर एकदम भूल गया. आज जब ड्रैस धोने को निकाला तो यह अंगूठी हाथ लगी.’’

उस ने अंगूठी मेरी टेबल पर रख दी. गुस्सा तो मुझे बहुत आया. क्लू के होते हुए भी मैं अंधेरे में हाथपांव मार रहा था. 2 बंदों को हवालात में बिठा रखा था. मैं ने साजिद अली की अच्छी खबर ली और वार्निंग दी कि ऐसी गलती दोबारा नहीं होनी चाहिएअंगूठी अच्छीखासी महंगी थी, जिस में चौकोर माणिक जड़ा था. चारों तरफ नन्हे फिरोजे जड़े हुए थे. मैं ने जावेद और फैजी को अपने कमरे में बुलाया. दोनों के हाथ बारीकी से चैक किए. वहां किसी की अंगुली पर अंगूठी का निशान नहीं था. फिर मैं ने उन्हें अंगूठी दिखाते हुए कहा, ‘‘सचसच बताना, यह अंगूठी किस की है? क्या इसे पहचानते हो?’’

दोनों के मुंह से एक साथ निकला, ‘‘हां सरकार, यह अंगूठी नौशाद की है.’’

कच्चा वारदाती जब पुलिस के हाथ चढ़ता है तो 2 झन्नाटेदार थप्पड़ उसे सच बोलने पर मजबूर कर देते हैं. नौशाद को गिरफ्तार कर के जब मेरे सामने लाया गया, मैं ने माणिक जड़ी अंगूठी उस के सामने रख दी. थप्पड़ों से पहले ही उस के होश ठिकाने चुके थे. अंगूठी देखते ही उस का रंग उड़ चुका था. मैं ने पूछा, ‘‘यह अंगूठी तुम्हारी है ?’’

‘‘सर, यह आप को कहां से मिली?’’

‘‘जहां से तुम खिड़की के रास्ते कमरे के अंदर पहुंचे थे, वहां दीवार के पास पड़ी थी.’’

वह हक्काबक्का मेरी सूरत देख रहा था. बाबू खां का कहा हुआ एक वाक्य मेरे जहन में गूंज रहा था, ‘‘मांबाप को शादी के वक्त औलाद की पसंदनापसंद का खयाल रखना चाहिए. अगर वह खालिदा का रिश्ता आफताब के बजाय नौशाद से करती तो बहुत बेहतर होता.’’ अब इस वाक्य के पीछे छिपी कहानी पूरी तरह मेरी समझ में गई थी. नौशाद ने कांपती आवाज में कहा, ‘‘यह अंगूठी मेरी है.’’

‘‘क्या तुम खालिदा से मोहब्बत करते हो और वह भी तुम्हें पसंद करती है?’’

‘‘जी, यह सच है मैं और खालिदा एकदूसरे से बहुत मोहब्बत करते हैं.’’ उस ने थूक निगलते हुए कहा.

‘‘तो क्या अपनी पसंद और मोहब्बत को पाने के लिए सगे भाई को कत्ल कर देना चाहिए?’’ मैं ने नफरत भरे लहजे में कहते हुए एक तमाचा और मारा. यह खुदगर्जी और जुल्म की एक बदतरीन मिसाल थी. इस से पहले मैं ने नौशाद को देखा ही नहीं था, नहीं तो शायद उस की खूबसूरती देख कर मेरे दिल में शक होता. नौशाद ने रोते हुए गरदन झुका ली.

अगले एक घंटे के अंदर मैं ने उस का इकबालिया बयान ले लिया. किस्सा यूं था

खालिदा और नौशाद बेहद खूबसूरत थे. वे दोनों एकदूसरे से मोहब्बत करते थे पर खालिदा की मां ने फैजी का रिश्ता आने की वजह से उस की शादी आफताब से तय कर दी और एक हफ्ते के अंदर ही खालिदा और आफताब की शादी निपटा दी. खालिदा और नौशाद को शादी के मौके पर कुछ कहने का वक्त ही नहीं मिला. जब होश आया, जुबान खोलते, तब तक शादी हो चुकी थीखालिदा ब्याह कर उसी के घर में गई. वह ब्याह कर और कहीं जाती तो शायद नौशाद उसे भूल जाता, पर अपने ही घर में अपनी महबूबा को भाभी के रूप में देख कर नौशाद का दिमाग खराब हो गया. वह रातदिन खालिदा को देख कर जलता और सोचता कि उसे कैसे हासिल किया जाए. फिर एक दिन उस ने एक शैतानी मंसूबा बना डाला और फैसला कर लिया कि सगे भाई आफताब को रास्ते से हटा देगा.

अपने मंसूबे के मुताबिक वारदात के एक दिन पहले अपनी बीमारी का कामयाब ड्रामा रचाया और 18 तारीख की सुबह वह भाई के साथ काम करने के लिए खेतों पर नहीं गया. वह छत पर सोता था, इसलिए उस की कारगुजारी सब से छिपी रही. किसी को कानोंकान खबर भी नहीं हुई कि मकतूल के पहले चुपके से वह डेरे पर पहुंच गया. अपने मकसद को पूरा करने के लिए उस ने खिड़की की कुंडी नहीं लगाई थी. वह खिड़की के रास्ते आफताब से पहले ही कमरे में घुस कर दरवाजे के पीछे छिप कर खड़ा हो गया और आफताब का इंतजार करने लगा

जैसे ही आफताब ताला खोल कर कमरे में दाखिल हुआ, उस ने लोहे के भारी रेंचपाने से उस के सिर पर करारा वार किया. अगले ही पल किसी कटे हुए दरख्त की तरह वह जमीन पर गिर गया. उस की खोपड़ी चटख गई थीनौशाद खिड़की के रास्ते कमरे में आया था. चढ़ते वक्त उस की अंगूठी दीवार के पास गिर गई, उसे पता नहीं चला. और साजिद ने भी अंगूठी देने में देर कर दी, नहीं तो केस दूसरे दिन ही हल हो जाता. बेवजह ही फैजी और जावेद को हवालात में बंद रखा. जर, जोरू और जमीन शुरू से ही कत्ल की वजह बनते रहे हैं. दोनों ही खूबसूरत लड़की और लड़के की जिंदगी नादानी में उठाए एक कदम से बरबाद हो गई.

Sexual Assault : मां और बेटियों से कई दिनों तक दुष्कर्म के बाद हत्या

सरकार चाहे कितने भी दावे कर ले, लेकिन सच्चाई यह है कि हिंदुस्तान में आज भी महिलाओं को पालतू जानवरों की तरह खरीदाबेचा जाता है. इस कहानी में भी महिला बिकतेबिकाते हरसहाय के पास पहुंची. उस हैवान ने महिला और उस की बच्ची के साथ हैवानियत का ऐसा खेल खेला कि… 

गुजरात के खूबसूरत शहर सूरत की कई मायनों में अपनी अलग पहचान है. हीरा नगरी के नाम से जाने वाले इस शहर में व्यापक स्तर पर हीरे तराशने का काम होता है. इस के अलावा सूरत की साडि़यां भी पूरे देश में मशहूर हैं. उस दिन सूरत शहर के थाना पांडेसरा क्षेत्र में जीयावबुडि़या रोड पर साईंमोहन सोसायटी के पास कुछ बच्चे मैदान में क्रिकेट खेलने गए थे. इन में कुछ बच्चे जमीन में विकेट गाड़ रहे थे तो कुछ बौलिंग और कुछ फील्डिंग की प्रैक्टिस कर रहे थे. तभी उन की बौल मैदान के पास झाडि़यों की तरफ चली गई. 2-3 बच्चे बौल लेने के लिए झाडि़यों की ओर गए तो वहां उन्हें एक लड़की पड़ी दिखाई दी.

लड़की को इस तरह पड़ा देख बच्चे डर गए और अपने साथियों के पास लौट आए. उन्होंने अपने साथियों को झाडि़यों के पास एक लड़की के पड़े होने की बात बताई. इस के बाद 8-10 बच्चे झाडि़यों के पास पहुंचे तो वहां का नजारा देख सन्न रह गए. वहां एक लड़की की लाश पड़ी हुई थी. यह देख बच्चे अपनी बौल ढूंढना और क्रिकेट खेलना भूल कर दौड़ते हुए साईंमोहन सोसायटी की तरफ गए. उन्होंने लोगों को मैदान के पास झाडि़यों में एक लड़की की लाश पड़ी होने की जानकारी दी. बच्चों के बताने पर कई लोग झाडि़यों के पास गए तो वहां सचमुच लाश पड़ी हुई थी. लोगों ने इस की सूचना पुलिस को दे दी.

कुछ ही देर में पांडेसरा थाने की पुलिस मौके पर पहुंच गई, पुलिस ने मौकामुआयना किया. लाश को उलटपुलट कर देखा. लाश करीब 10-11 साल की लड़की की थी. उस के बदन पर नीले सफेद रंग की टीशर्ट और नीला पायजामा था. उस के गले के अलावा शरीर पर कई जगह मारपीट के निशान साफ नजर रहे थे. पुलिस ने वहां एकत्र लोगों से मृत लड़की की शिनाख्त कराने की कोशिश की, लेकिन किसी ने उसे नहीं पहचाना. पुलिस ने पंचनामे के बाद लाश को पोस्टमार्टम के लिए सिविल अस्पताल भेज दिया. पोस्टमार्टम की प्राथमिक रिपोर्ट में पता चला कि लड़की के साथ दुष्कर्म किया गया था. रिपोर्ट में उस की हत्या कुछ घंटे पहले किए जाने की बात कही गई थी. हत्या गला घोंट कर की गई थी.

पांडेसरा पुलिस स्टेशन में उसी दिन अज्ञात व्यक्ति के खिलाफ हत्या, दुष्कर्म और पोक्सो एक्ट के तहत मामला दर्ज कर लिया गया. यह बीते 6 अप्रैल की बात है. लड़की की शिनाख्त होने से पुलिस को लगा कि उस की हत्या कहीं दूसरी जगह की गई होगी और शव यहां क्रिकेट मैदान के पास ला कर फेंक दिया गया होगा. पुलिस के लिए सब से पहले लड़की की शिनाख्त होना जरूरी था. इस के लिए पुलिस ने लड़की के फोटो के साथ स्टेट कंट्रोलरूम को इस की जानकारी भेज दी. इस के अलावा शहर के विभिन्न पुलिस स्टेशनों में दर्ज लापता लड़कियों के बारे में सूचनाएं जुटाई गईं. काफी कोशिश के बाद भी उस लड़की के बारे में पुलिस को कोई जानकारी नहीं मिल सकी.

लाश मिलने के अगले ही दिन पुलिस ने लड़की की पहचान में आम लोगों का सहयोग मांगते हुए उस के बारे में सूचना देने वाले को 20 हजार रुपए का इनाम देने की घोषणा कर दी. घोषणा में पुलिस ने यह भी जोड़ा कि जानकारी देने वाले का नाम गुप्त रखा जाएगा. पुलिस ने भले ही इनाम का ऐलान कर दिया था, लेकिन इस का कोई फायदा नहीं हुआ. पुलिस को मृतका के बारे में कोई सूचना नहीं मिली. इस पर पुलिस अपने तरीके से जांचपड़ताल में जुट गई. इसी बीच 9 अप्रैल को सूरत शहर के पांडेसरा इलाके में ही जीयाव गांव के नजदीक हाईवे किनारे की झाडि़यों में एक महिला की सड़ीगली लाश मिली. लाश कई दिन पुरानी थी. यह जगह साईंमोहन सोसायटी से ज्यादा दूर नहीं थी. पुलिस ने महिला की लाश का पोस्टमार्टम करवाया

पोस्टमार्टम की प्राथमिक रिपोर्ट से पता चला कि महिला की उम्र 35-40 साल के बीच थी और उस की हत्या कई दिन पहले गला घोंट कर की गई थी. इस महिला की भी पहचान नहीं हो सकी. 4 दिन के भीतर एक ही थानाक्षेत्र में एक लड़की और एक महिला की लाश मिलने से इलाके में सनसनी फैल गई थी. पुलिस के लिए यह परेशानी की बात थी कि दोनों शवों की ही शिनाख्त नहीं हो सकी थी. जबकि आमतौर पर शव की शिनाख्त होने पर ही जांच आगे बढ़ती है. दोनों शव मिलने की जगह में करीब 2 किलोमीटर की दूरी होने के कारण पुलिस को दोनों शवों के बीच आपसी संबंध होने का संदेह हुआ. पुलिस का अनुमान था कि महिला उस लड़की की मां हो सकती है. इस बात की पुष्टि के लिए पुलिस ने महिला और लड़की के शव का डीएनए टेस्ट कराने के लिए सैंपल भेजे.

जहां लड़की की लाश मिली थी, उस के आसपास में लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज देखी गई. फुटेज में तड़के करीब साढ़े 4 बजे एक हैचबैक कार नजर आई. कई कैमरों की फुटेज देखने पर कार का रंग काला होने का पता चला. इस पर पुलिस ने भेस्तान इलाके में काले रंग की सभी हैचबैक कार के बारे में पूछताछ की. आरटीओ कार्यालय से भी काले रंग की सभी हैचबैक कार के बारे में जानकारी जुटाई गई. काफी भागदौड़ के बाद पुलिस की नजरें कार नंबर जीजे05सी एल8520 पर अटक गई. इस कार के मालिक के बारे में पता चला कि कार भेस्तान के सोमेश्वर नगर में रहने वाले रामनरेश के नाम से रजिस्टर्ड है. पुलिस ने पूछताछ के लिए रामनरेश को थाने बुलवा लिया. उस ने बताया कि उस की कार 6 अप्रैल को हरसहाय गुर्जर ले गया था.

पुलिस हरसहाय गुर्जर की तलाश में जुट गई. पता चला कि हरसहाय गुर्जर सूरत के भेस्तान इलाके में सोमेश्वर सोसायटी की एक बिल्डिंग में अपने बड़े भाई हरिसिंह के साथ रह रहा था. हरिसिंह मार्बल लगाने की ठेकेदारी करता थावह मूलरूप से राजस्थान के सवाई माधोपुर जिले में गंगापुर सिटी के पास कुरकुरा खुर्द गांव का रहने वाला था. उस के परिवार में पत्नी और 2 बेटे थे. एक बेटा उस के साथ सूरत में और दूसरा बेटा कुरकुरा खुर्द गांव में रहता था. हरसहाय के बारे में सारी जानकारी जुटा कर पुलिस ने सूरत की सोमेश्वर सोसायटी में उस के मकान पर दबिश दी तो वह वहां नहीं मिला. पड़ोसियों से पूछताछ में पता चला कि हरसहाय 2-3 दिन पहले ही पत्नी और बच्चों के साथ अपना सारा सामान ले कर गांव चला गया है.

इस पर अहमदाबाद पुलिस की क्राइम ब्रांच की एक टीम राजस्थान भेजी गई. राजस्थान में सवाई माधोपुर पुलिस की मदद से 20 अप्रैल को कुरकुरा खुर्द गांव से हरसहाय गुर्जर को पकड़ लिया गया. गुजरात पुलिस उसे सूरत ले गई. इस बीच डीएनए जांच से इस बात की पुष्टि हो गई कि पांडेसरा में जीयाव के पास जिस महिला का शव मिला, वह दुष्कर्म पीडि़ता 11 साल की बेटी की मां ही थी. महिला और बच्ची के शव की डीएनए रिपोर्ट पौजिटिव आई. हरसहाय से की गई पूछताछ में अभागिन मांबेटी के मामले में मानव तसकरी होने की बात सामने आई. दोनों मांबेटी से कई दिनों तक दुष्कर्म कर के बाद में उन्हें मौत की नींद सुला दिया गया था. इस मामले में बाद में पुलिस ने मानव तस्करी से जुड़े हरसहाय के कुछ अन्य साथियों को भी गिरफ्तार कर लिया.

पुलिस की पूछताछ में मांबेटी की हत्या की जो कहानी सामने आई, वह इस तरह थी

राजस्थान के सवाई माधोपुर जिले में गंगापुर सिटी के पास कुरकुरा खुर्द गांव का रहने वाला हरसहाय गुर्जर कई साल पहले गुजरात के सूरत चला गया था. उस का बड़ा भाई हरिसिंह भी सूरत में रहता था. हरसहाय सूरत में मकानों और अन्य बिल्डिंगों में ठेके ले कर मार्बल लगाने का काम करता था. हरसहाय भेस्तान के सोमेश्वर सोसायटी की एक बिल्डिंग में पत्नी रमादेवी और छोटे बेटे प्रियांशु के साथ किराए के मकान में रहता था. उस का बड़ा बेटा दीपांशु राजस्थान में गांव में ही रहता था. हरसहाय के पास मार्बल लगाने का काम करने वाले एक युवक कुलदीप की शादी नहीं हुई थी. कुलदीप करीब 6 महीने पहले राजस्थान से एक महिला को शादी करने के मकसद से 35 हजार रुपए में खरीद कर सूरत ले आया था. उस महिला के साथ 11 साल की एक बेटी भी थी. बाद में कुलदीप के घर वालों ने खरीदी हुई महिला से उस की शादी करने से इनकार कर दिया.

कुलदीप ने हरसहाय को सारी बात बताई. हरसहाय ने उस महिला और उस की बेटी को रखने की हामी भर ली. इस पर कुलदीप और मुकेश ने वह महिला और उस की बेटी हरसहाय को सौंप दीं. हरसहाय ने मांबेटी के रहने की व्यवस्था सूरत के कामरेज में टाइल्स फिटिंग की एक साइट पर कर दी. उस ने दोनों मांबेटी के रहने के साथ खानेपीने का भी इंतजाम कर लिया. इस के एवज में हरसहाय ने महिला से ज्यादती कर अवैध संबंध बना लिए. इश्कमुश्क और अवैध संबंधों के मामले ज्यादा दिनों तक छिपे नहीं रहते. यहां भी ऐसा ही हुआ. कुछ दिनों बाद हरसहाय की पत्नी रमादेवी को इस बात का पता चल गया कि उस के पति ने एक महिला को रखा हुआ है.

दरअसल हरसहाय उस महिला के लिए कई बार अपने घर से कई तरह के सामान और कपड़े ले कर जाता था और वहां से कईकई घंटे बाद लौटता थारमादेवी जब उस से इस बारे में पूछती तो वह उसे साफ जवाब नहीं देता था. एक दिन रमादेवी ने अपने भरोसे के एक आदमी को पति के पीछे लगा दिया. बाद में उस आदमी ने रमादेवी को बताया कि हरसहाय ने एक औरत रखी हुई है. रमादेवी इस बात पर पति से झगड़ा करने लगी. घर में रोजरोज की कलह शुरू हो गई. इस बीच हरसहाय ने उस महिला और उस की बेटी को कामरेज से हटा कर मानसरोवर के एक फ्लैट में रख दिया. दूसरी तरफ हरसहाय ने जिस महिला को रखा हुआ था, वह बारबार शादी करने या पैसे देने की बात कहती थी. इस पर हरसहाय परेशान रहने लगा. कोई और रास्ता देख उस ने महिला से पीछा छुड़ाने का फैसला कर लिया.

मार्च महीने के चौथे सप्ताह में हरसहाय ने पहले उस महिला के सिर पर ईंट मार कर उसे घायल कर दिया. इस के बाद दुपट्टे से उस का गला घोंट कर उसे मार डाला. महिला की हत्या उस की मासूम बेटी के सामने की गई. इस के बाद हरसहाय ने उस महिला का शव पांडेसरा में जीयाव के पास फेंक दिया था. बाद में 9 अप्रैल को पुलिस ने उस महिला का शव सड़ीगली हालत में बरामद किया था. महिला की हत्या के बाद उस की 11 साल की बेटी को हरसहाय अपने घर पर ले आया. वह बच्ची अपनी मां के लिए रोती रहती थी. किसी दूसरे की बच्ची को अपने घर लाने पर रमादेवी का अपने पति से झगड़ा बढ़ गया. हरसहाय यह तय नहीं कर पा रहा था कि उस बच्ची का क्या करे.

घर में बढ़ते झगड़े को देख कर और उस बच्ची द्वारा कभी भी पोल खोल दिए जाने के डर से वह बच्ची को बंधक बना कर यातनाएं देने लगा. कई बार वह उसे डंडे से बेरहमी से पीटता था. बच्ची के शरीर पर उस ने ब्लेड से कई घाव कर दिए थे. इस दौरान हरसहाय ने उस मासूम से दुष्कर्म भी किया. 5 अप्रैल की रात हरसहाय उस बच्ची को मकान की छत पर ले गया, जहां उस ने उस के साथ दुष्कर्म किया. दुष्कर्म के बाद उस ने उस के नाजुक अंगों पर घाव कर दिए. फिर गला दबा कर बच्ची को मार डाला. बच्ची की हत्या उस ने सिर्फ इसलिए की कि कहीं वह अपनी मां की हत्या का राज उजागर कर दे. हरसहाय 6 अप्रैल को तड़के रामनरेश की कार से उस बच्ची के शव को साईंमोहन सोसायटी के पीछे क्रिकेट मैदान के पास झाडि़यों में फेंक आया. बाद में उसी दिन बच्ची का शव पांडेसरा पुलिस ने बरामद किया था. बच्ची की पोस्टमार्टम रिपोर्ट में उस के शरीर पर 80 से ज्यादा घाव मिले.

20 दिनों की मशक्कत के बाद सूरत पुलिस ने राजस्थान और सूरत में 40 से ज्यादा लोगों से पूछताछ कर के मांबेटी की शिनाख्त करने में सफलता हासिल कर ली. वह महिला राजस्थान के सीकर की रहने वाली थी. महिला की मां के मुताबिक, उस की बेटी का चेहरा बचपन में गर्म पानी से झुलस गया था. इस वजह से उस की शादी नहीं हो पा रही थी. बाद में उस की शादी 22 जून, 2007 को सीकर के फतेहपुर कस्बे में कर दी गई. ससुराल में आर्थिक हालत बहुत अच्छी नहीं थी. शादी के साल भर बाद ही उस महिला ने एक बेटी को जन्म दिया. बाद में महिला ने फतेहपुर निवासी पति को छोड़ दिया. उस ने 2010 में बूंदी में एक युवक से शादी कर ली. महिला अपनी बेटी को भी बूंदी ले गई. महिला का दूसरा पति बूंदी में जूतेचप्पल बेचने का काम करता था. उस की पहली पत्नी की मौत हो चुकी थी. पहले से ही उस के 3 बच्चे थे. दूसरी शादी के बारे में महिला ने अपने परिवार वालों को नहीं बताया था.

दूसरी शादी करने के बावजूद महिला को सुख नसीब नहीं हुआ. उस का पति से झगड़ा रहने लगा. एक बार पति से झगड़ा होने पर महिला अपने मायके चली गई. बाद में उस का पति भी बूंदी से सीकर गया. उस समय महिला की मां ने उस से कहा कि या तो यहां पर रुक जा, नहीं तो फिर दोबारा यहां पर मत आना. इस के बाद वह सीकर से चली गई थी. इस के बाद महिला के घर वालों का उस से कोई संपर्क नहीं हुआ था. घटना से करीब 7 महीने पहले यह महिला अपने पति से 2 दिन में आने की बात कह कर बेटी के साथ घर से निकली थी. वह घर से जेवर भी ले गई थी. लोगों ने महिला को बूंदी के बसस्टैंड पर एक युवक के साथ देखा था

जब वह 2 दिन तक घर नहीं लौटी तो पति ने उसे फोन किया. महिला ने कहा कि वह जयपुर में है और काफी परेशानी में है. इस के बाद उस का महिला से संपर्क नहीं हुआ तो उस ने बूंदी कोतवाली में रिपोर्ट दर्ज करा दी थी. पुलिस ने महिला की मोबाइल लोकेशन निकलवाई तो वह गंगापुर सिटी की आई. इस पर उस के दूसरे पति ने गंगापुर सिटी जा कर भी उस की तलाश की लेकिन उस का पता नहीं चल सका. बाद में उस की मोबाइल लोकेशन दौसा गंगापुर सिटी और इस के बाद सूरत आती रही. महिला के दूसरे पति का कहना है कि वह उस की पत्नी को बेचने और खरीदने वाले को नहीं जानता. उस का आरोप है कि पुलिस ने सपोर्ट नहीं किया. पुलिस अगर सपोर्ट करती तो उस की पत्नी सूरत नहीं पहुंचती और आज वह जिंदा होती.

सूरत पुलिस ने सीकर पहुंच कर महिला के परिजनों को खोज लिया. फिर फोटो, आधार कार्ड और अन्य सबूतों के आधार पर महिला की शिनाख्त की. इस के बाद पुलिस सीकर से महिला के घर वालों को सूरत ले गई. सूरत में पुलिस की मौजूदगी में 27 अप्रैल को मोरा भागल स्थित कब्रिस्तान में परिजनों ने महिला और उस की बेटी के शव दफना दिए. हतभागी मांबेटी को एकता ट्रस्ट के अब्दुल मलबारी के सहयोग से दफनाया गया था. हालांकि यह सब पुलिस ने गुप्तरूप से किया और मीडिया को इस से दूर रखा. पुलिस ने मीडिया को गुमराह करने के लिए कब्रिस्तान के गेट पर ताला भी लगा दिया था

महिला के परिजनों को पुलिस जिस कार में कब्रिस्तान ले गई, उस के नंबर भी ढक दिए थे. घर वालों को मुंह ढक कर कार में बीच में बैठा कर लाया और ले जाया गया. इस के बाद सूरत पुलिस ने महिला के सीकर से आए घर वालों के बयान दर्ज किए. घर वालों ने बताया कि 2 साल पहले उन की बेटी सीकर में घर आई थी, उस के बाद से उन का उस से कोई संपर्क नहीं था. इस मामले में यह खास बात रही कि 26 अप्रैल को पांडेसरा इलाके में क्रिकेट मैदान के पास मिले बच्ची के शव की शिनाख्त के लिए सूरत पुलिस और अहमदाबाद क्राइम ब्रांच सहित करीब 500 पुलिस जवानों को लगाया गया था. पुलिस ने करीब 8 हजार घरों पर जा कर बच्ची का फोटो दिखा कर उस की पहचान करने की कोशिश की थी. सूरत शहर में बच्ची के पोस्टर चिपकवाए गए. बच्ची की पहचान बताने वाले को 20 हजार रुपए का इनाम देने की घोषणा की गई.

भेस्तान क्षेत्र के अलावा नैशनल हाईवे के आसपास के इलाके में करीब 800 से ज्यादा सीसीटीवी कैमरों की फुटेज देखी गई. गुजरात के अलावा आसपास के 3 राज्यों से गुमशुदा बच्चियों के फोटो से मृतक बच्ची का फोटो मिलान करने का प्रयास किया गया. सूरत से अन्य राज्यों में जाने वाली ट्रेनों में बच्ची के फोटो चिपकवाए गए. सूरत के नागरिकों ने भी अपने स्तर पर बच्ची की पहचान के लिए इनाम का ऐलान किया था. कपड़ा व्यापारियों ने दूसरे राज्यों में भेजे जाने वाले माल के पार्सलों पर भी बच्ची के फोटो चिपकवाए. जिस जगह बच्ची का शव मिला था, उस के आसपास 5 अप्रैल की रात से 6 अप्रैल की सुबह तक एक्टिव रहे करीब एक हजार मोबाइल नंबरों की जांच की गई.

भेस्तान में सोमेश्वर सोसायटी की जिस बिल्डिंग में बच्ची को बंधक बना कर उस से दुष्कर्म और फिर हत्या की गई थी, उस बिल्डिंग के लोगों को बच्ची का शव मिलने के बाद पुलिस ने फोटो दिखाया था, लेकिन किसी ने उसे नहीं पहचाना था. इस का कारण यह था कि बच्ची को घर से बाहर नहीं निकलने दिया जाता था. सूरत के पुलिस कमिश्नर सतीश शर्मा का कहना है कि आरोपियों को सख्त सजा दिलाने के लिए पुलिस के पास काफी सबूत हैं. सीसीटीवी फुटेज हैं. मांबेटी का डीएनए मैच हो गया है. दूसरी ओर गुजरात के गृह राज्यमंत्री प्रदीप सिंह जडेजा का कहना है कि इस मामले की सुनवाई फास्टट्रैक कोर्ट में होगी. इस के लिए सरकार स्पैशल पब्लिक प्रोसिक्यूटर नियुक्त करेगी.

बहरहाल, यह मामला केवल खुल गया है, बल्कि यह बात भी उजागर हो गई है कि महिलाओं की खरीद फरोख्त आज भी हो रही है. खरीदार खरीदी गई महिला को उपभोग की वस्तु मानता है. जब तक मन चाहता है उपभोग करता है. मन भर जाने पर उसे दरदर की ठोकरें खाने के लिए छोड़ देता है या हरसहाय जैसे दरिंदे पीछा छुड़ाने के लिए उसे मौत के घाट उतार देते हैं. इस कहानी में तो महिला का कोई कसूर था और उस की बच्ची का. लेकिन दरिंदों ने उन की जान ले ली.

         

प्यार की जीत : सुनीता और सुमेर की प्रेम कहानी

दांपत्य की लालसा

मंगेतर की कब्र पर रासलीला

दगा दे गई सोशल मीडिया की गर्लफ्रैंड

प्यार की जीत : सुनीता और सुमेर की प्रेम कहानी – भाग 3

भगवानदास सोनी के पड़ोस में ही ईश्वरनाथ गोस्वामी परिवार के साथ रहते थे. उन्हीं का बेटा था सुमेरनाथ गोस्वामी. ईश्वरनाथ गोस्वामी के एक भाई पुलिस की नौकरी से रिटायर हो कर जयपुर में रहते थे. उन के बच्चे नहीं थे, इसलिए सुमेरनाथ को उन्होंने गोद ले रखा था. पढ़ाई पूरी कर के सुमेरनाथ एक प्राइवेट स्कूल में पढ़ाने लगा था.

सुमेरनाथ नौकरी करने लगा तो घर वालों ने अपनी जाति की लड़की से उस की शादी कर दी थी. चली आ रही परंपरा के अनुसार सुमेरनाथ शादी के पहले पत्नी को देख नहीं सका था. इसलिए शादी के पहले वह उस के बारे में कुछ भी नहीं जान सका. शादी के बाद पत्नी घर आई तो दोनों के स्वभाव में जमीनआसमान का अंतर था. सुमेरनाथ जितना सीधा और सरल था, उस की पत्नी उतनी ही गरममिजाज थी. परिणामस्वरूप दोनों में निभ नहीं पाई.

सुमेरनाथ ने पत्नी को ले कर जो सपने देखे थे, कुछ ही दिनों में सब बिखर गए. पत्नी की वजह से घर में हर समय क्लेश बना रहता था. उस ने पत्नी को बहुत समझाया, लेकिन उस पर कोई फर्क नहीं पड़ा. वह किसी भी तरह का समझौता करने को तैयार नहीं थी. पत्नी की वजह से सुमेर परेशान रहने लगा था.

पत्नी के दुर्व्यवहार से तंग सुमेरनाथ का झुकाव पड़ोस में रहने वाली सुनीता सोनी की ओर हो गया था. पड़ोस में रहने की वजह से वह सुनीता को बचपन से देखता आया था. लेकिन उस ने कभी उस से प्यार या शादी के बारे में नहीं सोचा था.

सुनीता सुंदर तो थी ही, इसलिए वह उसे अच्छी भी लगती थी. लेकिन एक तो दोनों की जाति अलग थी, दूसरे मोहल्ले की बात थी, इसलिए सुमेरनाथ ने उस के बारे में कभी इस तरह की बात नहीं सोची थी.

सुनीता को कभी पढ़ाई में कोई परेशानी होती तो वह मदद के लिए सुमेरनाथ के पास आ जाती थी. ऐसे में कभी सुमेरनाथ पत्नी की वजह से परेशान रहता तो वह सहानुभूति जता कर उस की परेशानी को कम करने की कोशिश करती. कभीकभी उसे सुमेरनाथ पर दया भी आती.

परेशानी में सुनीता का सहानुभूति जताना सुमेरनाथ को धीरेधीरे अच्छा लगने लगा था. इसलिए उस की सहानुभूति पाने के लिए वह अकसर उस के सामने पत्नी की व्यथा ले कर बैठ जाता. सुनीता जवान भी हो चुकी थी और खूबसूरत भी थी. बात और व्यवहार से वह समझदार लगती थी, इसलिए सुमेरनाथ उस की ओर आकर्षित होने लगा. उसे लगता, सुनीता जैसी पत्नी मिली होती तो जीवन सुधर गया होता.

मन में आकर्षण पैदा हुआ तो सुनीता के प्रति सुमेरनाथ की नजरें बदलने लगीं. नजरें बदलीं तो बातें भी बदल गईं और उन के कहने का तरीका भी. इस बदलाव को सुनीता ने भांप भी लिया. सुनीता को भी सुमेरनाथ भला आदमी लगता था. सीधासरल भी था और पढ़ालिखा भी. फिर उस के लिए उस के मन में दया और सहानुभूति भी थी.

उसी दौरान जहां सुमेरनाथ का पत्नी की सहमति से तलाक हो गया, वहीं सुनीता की शादी उस के पिता और ताऊ ने एक ऐसे लड़के से तय कर दी, जो अंगूठाछाप था. इस विरोधाभास से सुनीता के मन में घर वालों के प्रति जो विद्रोह उपजा, उस ने सुमेरनाथ के लिए उस के मन में जो सहानुभूति और दया थी, उसे चाहत में बदल दिया. जब दोनों ओर दिलों में चाहत पैदा हुई तो इजहार होने में देर नहीं लगी.

इजहार हो गया तो कभी पढ़ाई के बहाने सुनीता सुमेरनाथ से मिलने उस के घर आ जाती तो कभी किसी बहाने से कहीं बाहर मिलने चली जाती. इन मुलाकातों ने जहां प्यार को बढ़ाया, वहीं व्याकुल मन को शांत करने के लिए मुलाकातें भी बढ़ने लगीं. इन्हीं मुलाकातों ने जब लोगों के मन में संदेह पैदा किया तो लोग उन पर नजरें रखने लगे. इस का नतीजा यह निकला कि लोगों को उन के प्यार की जानकारी हो गई. बात एक ही मोहल्ले और अलगअलग जाति के लड़केलड़की की थी, इसलिए दोनों को ले कर खुसुरफुसुर होने लगी.

बात दोनों के घर वालों तक पहुंची तो रोकटोक शुरू हुई. लेकिन आज मोबाइल के जमाने में रोकटोक का कोई फायदा नहीं रह गया. दूसरे सुनीता और सुमेरनाथ प्यार की राह पर अब तक इतना आगे निकल चुके थे कि घर वालों की रोकटोक या बंदिशें उस पर जरा भी असर नहीं डाल सकती थीं. क्योंकि अब उन का प्यार मंजिल पाने यानी शादी के मंसूबे तक पहुंच चुका था.

इस की वजह यह थी कि दोनों बालिग थे और अपनाअपना भलाबुरा समझते थे. इसलिए अगर वे अपनी मरजी से भी शादी कर लेते थे तो उन्हें कोई नहीं रोक सकता था.  सुनीता किसी अनपढ़ से शादी कर के अपनी जिंदगी बरबाद नहीं करना चाहती. इसलिए वह मांबाप की इज्जत को दांव पर लगा कर सुमेरनाथ से शादी के लिए तैयार थी.

एक औरत के दुर्व्यवहार से दुखी सुमेरनाथ भी सुनीता के व्यवहार का कायल था. इसलिए बाकी की जिंदगी वह सुनीता की जुल्फों तले खुशी से गुजारना चाहता था. उन्हें पता था कि समाज ही नहीं, घर वाले भी उन की शादी कभी नहीं होने देंगे, इसलिए उन्होंने किसी अन्य शहर में जा कर शादी करने का निर्णय लिया.

सुनीता और सुमेरनाथ ने शादी के लिए जरूरी कागजात यानी स्कूल के प्रमाणपत्र आदि सहेज कर रखने के साथ रुपएपैसों की व्यवस्था कर ली. उन्हें पता था कि वे अलगअलग जाति के हैं, इसलिए उन्हें आर्यसमाज मंदिर में शादी करनी होगी. उस के बाद अदालत से विवाह की मान्यता मिल जाएगी. पूरी तैयारी कर के उन्होंने भागने की तारीख भी 2 जुलाई तय कर ली.

योजना के अनुसार, 2 जुलाई, 2014 की रात 3 बजे अपने कपड़े लत्ते ले कर सुनीता तय जगह पर पहुंच गई. सुमेरनाथ वहां पहले ही पप्पूराम की गाड़ी ले कर पहुंच गया था. सुनीता के आते ही उस ने उसे गाड़ी में बिठाया और अपनी मंजिल पर निकल पड़ा.

अपने बयान में सुनीता ने कहा था कि वह बालिग है और उस ने खूब सोचसमझ कर सुमेरनाथ गोस्वामी से शादी की है. अब वह उसी के साथ रहना चाहती है, इसलिए पुलिस सुरक्षा में उसे सुमेरनाथ के साथ सुरक्षित स्थान तक पहुंचाने की कृपा की जाए.

इस के बाद मजिस्ट्रेट ने सुनीता को सुमेरनाथ के साथ भेजने का आदेश दे दिया. सुनीता अदालत से बाहर निकलने लगी तो उस की एक झलक पाने के लिए भीड़ टूट पड़ी. पुलिस ने हलका बल प्रयोग कर के भीड़ को हटाया और अपनी सुरक्षा में इस प्रेमी युगल को जयपुर पहुंचा दिया. कथा लिखे जाने तक यह दंपति जयपुर में ही था.

—कथा पुलिस सूत्रों पर आधारित

सनक में कर बैठी प्रेमी के दोस्त की हत्या

प्यार की वो आखिरी रात