Punjab Murder Case: पत्नी को गंडासे से काट डाला

Punjab Murder Case: एक सनसनीखेज मामला सामने आया है, जिस ने इंसानियत को झकझोर कर रख दिया. एक पति ने शक के चलते अपनी ही पत्नी की बेरहमी से हत्या कर दी. आखिर ऐसा क्या हुआ कि बात इतनी बढ़ गई? किस वजह से एक हंसताखेलता परिवार खूनखराबे में बदल गया? आइए जानते हैं इस दिल दहला देने वाली घटना की पूरी कहानी, जो रिश्तों में पनपते अविश्वास के खतरनाक परिणामों से सावधान करती है.

यह वारदात पंजाब के संगरूर जिले के पास स्थित गांव खंडेबाद की है. मंगलवार को गांव में उस समय हड़कंप मच गया जब कुलदीप सिंह ने अपनी पत्नी हरकीरत कौर उर्फ गीतू पर घर के बेडरूम में तेजधार गंडासे से ताबड़तोड़ हमला कर दिया. पत्नी के चरित्र पर संदेह को ले कर दोनों के बीच तनाव बताया जा रहा है. गुस्से में आ कर कुलदीप ने एक के बाद एक वार किए, जिस से हरकीरत की मौके पर ही मौत हो गई.

हैरानी की बात यह है कि वारदात को अंजाम देने के बाद आरोपी ने घटना का वीडियो भी बनाया. वीडियो में उस ने अपना जुर्म कुबूल किया और उसे सोशल मीडिया पर पोस्ट कर दिया. इस के बाद वह खुद थाना लहरागागा पहुंचा और आत्मसमर्पण कर दिया.

घटना की सूचना मिलते ही डीएसपी रणबीर सिंह पुलिस टीम के साथ मौके पर पहुंचे. बेडरूम का दृश्य दिल को झकझोरने वाला था. खून से लथपथ शव बिस्तर के पास जमीन पर पड़ा था, जबकि पास में ही वारदात में इस्तेमाल किया गया गंडासा भी मिला. पुलिस ने तुरंत शव और हथियार को कब्जे में ले कर आगे की काररवाई शुरू की. फोरैंसिक टीम ने मौके पर पहुंचकर साक्ष्य जुटाए और शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया.

पुलिस अधिकारियों के अनुसार, कुलदीप सिंह गांव के पूर्व कार्यकारी सरपंच तरसेम सिंह का बेटा है. उस की शादी हरकीरत कौर के साथ हुई थी और दोनों के 3 बच्चे हैं. 2 बेटियां और एक बेटा. शुरुआती जांच में सामने आया है कि आरोपी लंबे समय से अपनी पत्नी के चरित्र पर शक करता था. इसी शक ने आखिरकार इस खौफनाक वारदात का रूप ले लिया.

फिलहाल पुलिस ने कुलदीप सिंह के खिलाफ हत्या का मामला दर्ज कर लिया है और आगे की जांच जारी है. Punjab Murder Case

UP Crime News: अवैध संबंधों के चलते पति की कुल्हाड़ी से हत्या

UP Crime News: एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है जिस ने पारिवारिक रिश्तों को झकझोर कर रख दिया. आरोप है कि पत्नी ने अपने प्रेमी के साथ मिलकर पति की कुल्हाड़ी से हत्या कर दी. आखिर ऐसी क्या वजह बनी थी कि मामला हत्या तक पहुंच गया? इस सनसनीखेज वारदात के पीछे की पूरी कहानी क्या है? आइए जानते हैं विस्तार से, ताकि रिश्तों में पनपते अविश्वास और गलत फैसलों के खतरनाक परिणाम समझे जा सकें.

यह घटना उत्तर प्रदेश के इटावा जिले से सामने आई है. जहां रात के समय पूजा ने अपने प्रेमी अर्पित के साथ मिलकर पति रनवीर सिंह यादव पर कुल्हाड़ी से हमला कर हत्या कर दी. बताया जाता है कि करीब 8 साल पहले रनवीर की शादी मथुरा निवासी पूजा से हुई थी. वैवाहिक जीवन की शुरुआत से ही दोनों के संबंध तनावपूर्ण रहे. कुछ समय बाद पूजा मायके चली गई थी. करीब 3 साल बाद रनवीर उसे समझाकर वापस अपने साथ ले आया था.

गांव में रहने वाले अर्पित, जो सर्वेश का बेटा है, का उस के घर पर आनाजाना था. इसी दौरान पूजा और अर्पित के बीच नजदीकियां बढ़ीं. पति की गैरमौजूदगी में मुलाकातें बढ़ती गईं और दोनों के संबंधों की चर्चा धीरेधीरे गांव में फैलने लगी. जब रनवीर को इन संबंधों की जानकारी हुई तो उस ने इस का विरोध किया.

एएसपी (ग्रामीण) श्रीशचंद्र के अनुसार, रविवार को कथित तौर पर पूजा ने अर्पित को घर बुलाया. पहले रनवीर को शराब पिलाई गई और फिर रात करीब 8 बजे उस पर घर के भीतर कुल्हाड़ी से कई वार किए गए. हमले की गंभीरता के चलते रनवीर की मौके पर ही मौत हो गई.

सोमवार सुबह जब उस के पिता लाखन सिंह घर पहुंचे तो उन्होंने चबूतरे पर बेटे का खून से लथपथ शव पड़ा देखा. पास ही खून से सनी कुल्हाड़ी भी पड़ी थी.  घटना के बाद पूजा और अर्पित फरार हो गए थे.

मृतक के भाई प्रदीप उर्फ लालू की शिकायत पर पुलिस ने पूजा, उस के प्रेमी अर्पित और अर्पित के पिता सर्वेश के खिलाफ हत्या का मामला दर्ज कर लिया है. आरोपियों की तलाश में 3 पुलिस टीमें गठित की गईं. मंगलवार सुबह करीब सवा 10 बजे भरथनाबिधूना रोड स्थित अहनैया नदी के पास से पूजा और अर्पित को गिरफ्तार कर लिया गया.

पूछताछ के दौरान पूजा ने स्वीकार किया कि अवैध संबंधों का पति द्वारा विरोध किए जाने के कारण उस ने साजिश रचकर यह कदम उठाया. फिलहाल पुलिस मामले की विस्तार से जांच कर रही है. UP Crime News

Emotional Story: मोहब्बत की मिसाल

Emotional Story: मुगल बादशाह शाहजहां अपनी बेगम मुमताज महल को बहुत प्यार करते थे, उस प्यार की निशानी के रूप में उन्होंने ताजमहल बनवाया था. उसी तरह अपनी बीवी से मोहब्बत करने वाले कादरी भी गांव में छोटा सा ताजमहल बनवा रहे हैं. सफेद कुरतापाजामा और सिर पर गोल टोपी लगाए फैजुल हसन कादरी गांव पहुंचे तो उन से मिलने के लिए पूरा गांव उमड़ पड़ा. उन से मिल कर गांव का हर आदमी खुश था. गांव वाले उन की बातें सुनने के लिए उत्सुक थे. इस की वजह यह थी कि कादरी प्रदेश के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव से मिल कर गांव लौटे थे. उन से मिलने आने वालों में बच्चों से ले कर बुजुर्ग तक थे. उन में से किसी बुजुर्ग ने कहा, ‘‘कादरी भाई, तुम ने वाकई गांव का नाम रोशन कर दिया. ऊपर वाला तुम्हें लंबी उम्र बख्शे.’’

कादरी ने पलभर के लिए थकी आंखों से उन्हें देखा, उस के बाद आहिस्ता से बोले, ‘‘ऐसा कुछ नहीं है अनवर मियां, मैं ने कुछ नहीं किया, जो कुछ किया है, ऊपर वाले ने किया है?’’

‘‘तुम ने क्या किया है कादरी भाई, यह हम लोगों से ज्यादा और कौन जान सकता है. तुम्हारी यही सादगी तो सब को पसंद है.’’ कादरी के एक हमउम्र ने आगे बढ़ कर उन के कंधे पर हाथ रख कर कहा, ‘‘आप ही हो, जिस की बदौलत आज हमारे गांव को एक नई पहचान मिली है, वरना हमारे इस अदने से गांव को कौन जानता था. विकास का रास्ता खुल गया है. अब हमारे गांव का तेजी से विकास होगा, यह कोई छोटी बात है. यह सब आप की वजह से ही हुआ है. आप न होते तो यह कतई मुमकिन न होता.’’

दरअसल, कादरी के मुख्यमंत्री से मिलने पर मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने गांव का विकास कराने की सरकारी घोषणा कर दी थी, इसलिए गांव वाले खुश थे और उन का हालचाल जानने आए थे. हालचाल जानने के बाद किसी ने कहा, ‘‘अब तो अपने कादरी भाई का नाम बदल देना चाहिए.’’

‘‘क्यों?’’ किसी ने हैरानी से पूछा.

‘‘कादरी भाई मुगल बादशाह शाहजहां भले न सही, लेकिन हमारे लिए तो यह आज के शाहजहां ही हैं. शाहजहां ने अपनी बेगम मुमताज की याद में जो काम किया था, आज वही काम यह भी कर रहे हैं.’’ उस आदमी ने कहा.

उम्र के आखिरी पड़ाव का सफर तय कर रहे 82 वर्षीय फैजुल हसन कादरी उत्तर प्रदेश के जिला बुलंदशहर के दिल्लीबदायूं राष्ट्रीय राजमार्ग संख्या 93 के किनारे बसे गांव कसेर कलां के रहने वाले हैं. यहां उन की चरचा इस वजह से की जा रही है, क्योंकि वह अपनी मरहूम बेगम तजुम्मली की याद में गांव में एक मिनी ताजमहल बनवा रहे हैं. अपनी जिंदगी भर की कमाई तो उन्होंने उस में लगा ही दी है, अपना ख्वाब पूरा करने के लिए वह गुजारे के लिए मिलने वाली पैंशन भी उसी पर खर्च कर रहे हैं. इस की मुख्य वजह यह है कि वह अपनी बेगम से बहुत मोहब्बत करते थे. इसीलिए उस की याद में वह कुछ ऐसा करना चाहते थे, जिसे जमाना याद करे.

कादरी की कोई औलाद नहीं थी. लोगों ने उन से बहुत कहा था कि जब पहली बीवी से बच्चे नहीं हो रहे हैं तो वह दूसरा निकाह कर लें. उन का मजहब भी इस की इजाजत देता था, लेकिन उन्हें यह कतई मंजूर नहीं था कि उन की बीवी को उन से मिलने वाली मोहब्बत बंट जाए, इसलिए उन्होंने किसी की बात नहीं सुनी. आज उसी बेगम की याद में वह ताजमहल बनवा रहे हैं. बेगम की मोहब्बत और ताजमहल बनाने को ले कर ही वह देशविदेश की सुर्खियों में ऐसे आए कि प्रदेश के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने भी एक बड़े समारोह में उन से मिल कर उन्हें सम्मानित किया और उन की बीवी के प्रति ऐसी मोहब्बत देख कर उन के मुरीद हो गए.

मुख्यमंत्री ने न सिर्फ कादरी के अधूरे ताजमहल को पूरा कराने का वादा किया, बल्कि गांव का विकास कराने की भी घोषणा कर दी. यह 28 अगस्त, 2015 की बात थी. फैजुल हसन कादरी के इस मुकाम पर पहुंचने की एक अलग ही कहानी है. कादरी परमाणु विद्युत उपकेंद्र के रूप में मशहूर नजदीकी कस्बा नरौरा के पोस्टऔफिस में नौकरी करते थे. वह सादगी पसंद नेकदिल इंसान थे. उन की इसी नेकदिली की वजह से उन्हें समाज में इज्जत की नजरों से देखा जाता था. लोगों की मदद करना और उन के दुखसुख में शामिल होना, उन की आदत में शुमार था.

सालों पहले उन का निकाह तजुम्मली के साथ हुआ था. तजुम्मली भी उन्हीं की तरह सीधीसादी थीं. आपस में दोनों एकदूसरे से बेहद प्यार करते थे. उन की जिंदगी में बस एक ही गम था कि शादी के 20 सालों बाद भी उन्हें कोई बच्चा नहीं हुआ था. यह ऐसा गम था, जो कादरी को भी सालता था और तजुम्मली को भी. तजुम्मली जब भी उदासी के भंवर में होतीं तो अकसर कहती, ‘‘पता नहीं क्या बदनसीबी थी, जो मैं आप को एक औलाद नहीं दे सकी.’’

ऐसे में कादरी उसे दिलासा देते, ‘‘ऐसी कोई बात नहीं है तजुम्मली, औलाद न होने से मेरे लिए तुम्हारी अहमियत कम नहीं हो जाती. मैं तुम से बेइंतहा मोहब्बत करता हूं. फिर उदास होने से क्या फायदा.’’

मामला जब इस तरह का हो तो समाज के लोग, जानपहचान वाले और नातेरिश्तेदार भी बातें बनाने लगते हैं. लोग तरहतरह के मशविरे देने लगते हैं. कादरी और तजुम्मली के साथ भी ऐसा ही हुआ था, लेकिन उन्होंने उन बातों पर जरा भी गौर नहीं किया. सब से अहम बात यह थी कि कादरी हर सूरत में अपनी बेगम के साथ थे. कादरी जब उम्र में थे तो उन के नजदीकी अकसर उन्हें सलाह देते थे कि इस हालत में लोग तलाक दे कर या फिर बिना तलाक के ही दूसरा निकाह कर लेते हैं. औलाद के लिए उन्हें भी दूसरा निकाह कर लेना चाहिए. लेकिन उन का जमीर इस के लिए गवाही नहीं देता था. क्योंकि वह सचमुच तजुम्मली से मोहब्बत करते थे. इसलिए दूसरी शादी कर के वह उन का दिल कतई नहीं तोड़ना चाहते थे.

इस पर लोग उन्हें ताना भी मारते थे कि बीवी से मोहब्बत तो हर कोई करता है, क्या उन की मोहब्बत अनोखी है. लेकिन कादरी ने साफ कह दिया कि कुछ भी हो, वह दूसरा निकाह बिलकुल नहीं करेंगे. रही बात अनोखी मोहब्बत की तो यह उन का दिल जानता है. इसे जताने से क्या फायदा. वह पत्नी को कतई नहीं छोड़ सकते. नातेरिश्तेदार, गांव वालों ने इस तरह न जाने कितनी बार उन्हें निकाह की सलाह दी, लेकिन कादरी ने कभी किसी की न सुनी और न मानी.

कादरी जिस मजहब से थे, उन्हें निकाह की आजादी थी. इस के लिए पहली बीवी की रजामंदी भी कोई मायने नहीं रखती थी. वह ऐसे लोगों को जानते थे, जो शौकिया कई बीवियों के शौहर बनने का ख्वाब देखते थे. कादरी के पास माकूल वजह भी थी. बच्चे न होने पर वह दूसरा निकाह आसानी से कर सकते थे. यह डर तजुम्मली को सालता भी रहता था. कलेजे पर पत्थर रख कर वह भी कादरी से कहती थीं, ‘‘जब सभी दूसरे निकाह के लिए कह रहे हैं तो आप दूसरा निकाह कर क्यों नहीं लेते?’’

‘‘तुम्हारे ताल्लुक उन लोगों से नहीं, मेरे साथ हैं. मैं तुम्हारा शौहर हूं, तुम से मोहब्बत करता हूं. मुझे तुम्हारा दिल तोड़ने से बेहतर है मैं बेऔलाद ही रहूं.’’

‘‘फिर भी…’’ तजुम्मली ने आगे कुछ कहना चाहा तो कादरी ने उन्हें बीच में ही टोक दिया, ‘‘अब बस करो और आइंदा इस मसले पर कोई बात भी मत करना.’’

वक्त अपनी गति से आगे बढ़ता रहा. इस मसले पर कादरी ने न कभी बेगम की सुनी और न दुनियाजहान की. वह अपने इरादों पर अटल रहे. जिंदगी को उस के असल रूप में स्वीकार कर के वह बेहद खुश थे. कई मौकों पर तजुम्मली के प्रति उन की मोहब्बत साफ झलकती थी, जिस की लोग मिसालें भी दिया करते थे. बच्चे न होने पर भी उन्होंने बीवी को नहीं छोड़ा था, यह छोटी बात नहीं थी. सरकारी मुलाजिम होने के चलते कादरी को ठीकठाक तनख्वाह मिलती थी, उस से आराम से उन की जिंदगी बसर हो रही थी. इस के अलावा उन के पास खेती की जमीन भी थी.

देखतेदेखते जिंदगी का लंबा सफर गुजर गया. बुढ़ापे की तरफ उन के कदम बढ़ चुके थे. कादरी नौकरी से रिटायर हो गए. इसी बीच तजुम्मली को गले के कैंसर की बीमारी ने घेर लिया. कादरी ने न सिर्फ उन का इलाज कराया, बल्कि खूब सेवा भी की. वक्त की अपनी चाल होती है. मौत एक कड़वी हकीकत है. तमाम कोशिशों के बाद दिसंबर, 2011 में तजुम्मली का इंतकाल हो गया.

तजुम्मली कादरी की जिंदगी का सब से बड़ा सहारा थीं. बेगम की रुख्सती ने उन्हें गमजदा कर दिया. अपनों का बिछड़ना सभी को बहुत दर्द देता है. वक्त ही धीरेधीरे इस की भरपाई करता है. कादरी भी धीरेधीरे इस से उबरे. उन्होंने तजुम्मली की यादों को जिंदा रखने और अपनी मोहब्बत जताने के लिए कुछ अलग करने की ठानी. कादरी जानते थे कि मुगल सल्तनत के शहंशाह शाहजहां ने अपनी बेगम मुमताज की याद में आगरा में संगमरमर का ताजमहल बनवाया था. दुनिया के अजूबों में शुमार ताजमहल मोहब्बत की बेजोड़ निशानी के रूप में दुनिया भर में मशहूर है. कादरी न शाहजहां थे, न उन के पास इतनी दौलत थी कि उस तरह का कोई अजूबा बनवा सकते. फिर भी वह इसी से मिलताजुलता ऐसा कुछ करना चाहते थे, जिस से जमाना उन्हें याद रखे.

बेगम की मौत ने उन्हें न सिर्फ तनहा, बल्कि मायूस भी कर दिया था. जिंदगी भर उन्होंने बेगम से पाक मोहब्बत की थी. लोग इस की मिसालें भी दिया करते थे. शायद इसीलिए कादरी ने मन ही मन ठान लिया कि वह भी अपनी बेगम की याद में शाहजहां की तरह ही ताजमहल बनवाएंगे. गांव के किनारे उन की 6 बीघा जमीन थी. वहीं तजुम्मली को दफन कर कब्र बनाई गई थी. वहीं पर 24 सितंबर, 2012 को कादरी ने ताजमहल की तरह छोटा ताजमहल बनवाना शुरू कर दिया. जब गांव वालों को इस का पता चला तो हौसलाअफजाई करने के बजाय वे उन का मजाक उड़ाने लगे. कुछ लोगों ने तो यहां तक कह दिया कि वह अपनी कमाई बेकार में क्यों खर्च कर रहे हैं. जोड़ कर रखें, बुढ़ापे में दवादारू में काम आएगी.

कादरी का कहना था कि मौत तो बिना पैगाम के आती है. वह किस के लिए पैसे जोड़ कर रखें. उन के लिए तो बीवी ही दौलत थी, वह रही नहीं. अब उस की यादों के सहारे ही जिंदा हैं. उस के नाम पर जो भी करेंगे, वही कम है. कादरी ऐसी बातों पर बहुत कम ध्यान देते थे. क्योंकि उन्होंने अपने इरादों को मजबूत लहरों पर सवार कर दिया था. इंसान का जुनून ही उसे मनचाहे मुकाम तक पहुंचाता है. वह जो चाहता है, कर सकता है. कादरी का जिद और जुनून ही था कि पत्नी की याद में बनने वाले ताजमहल में उन्होंने अपनी जिंदगीभर की कमाई लगा दी थी. जमीन बेची और अपनी बेगम के गहने भी बेच कर लगा दिए. इस तरह करीब 15 लाख रुपए खर्च कर दिए.

लेकिन उन का सपना पूरा नहीं हुआ. इमारत तो बन कर तैयार हो गई, लेकिन उस में संगमरमर लगाने और फिनिशिंग का काम नहीं हो सका. कादरी की मोहब्बत का लोग लोहा मान गए थे. उन की मोहब्बत की मिसालें दी जाने लगीं. उन की मोहब्बत की निशानी मिनी ताजमहल चर्चा में आया तो लोग उसे देखने के लिए आने लगे. ताज को पूरा करने की उन की ख्वाहिश लोगों से छिपी नहीं थी. इसलिए कुछ लोगों ने उन के सामने प्रस्ताव रखा कि वे पैसों से मदद कर के रुका काम पूरा करा दें. लेकिन खुद्दारी दिखा कर उन्होंने यह कह कर मना कर दिया कि यह उन की मोहब्बत है, लिहाजा वह इस में किसी को शामिल नहीं करना चाहते.

कादरी की उम्र का आखिरी पड़ाव चल रहा है. ताजमहल पूरी तरह बनने से पहले वह खुद न चल बसें, इस आशंका के चलते उन्होंने ताजमहल के अंदर बनी तजुम्मली की कब्र के बराबर में अपने लिए कब्र खुदवा कर छोड़ दी. यही नहीं, लोगों से कह भी दिया कि उन के इंतकाल के बाद उन्हें तजुम्मली के बराबर में ही दफन किया जाए. कादरी को पेंशन मिलती है. खर्च से जो भी पैसा बचता है, वह उसे ताजमहल बनवाने में लगा देते हैं. उन्होंने अपने घर की बिजली का कनेक्शन भी कटवा दिया है, जिस से बिल के भी पैसे बच जाएं. वह उन पैसों को भी ताजमहल के निर्माण में लगा रहे हैं.

पत्नी की मोहब्बत में ताजमहल बनवाने की चर्चाएं मीडिया द्वारा देश में ही नहीं, विदेश तक पहुंच गईं. इस के बाद कादरी का ताजमहल देखने और कवरेज के लिए यूरोप के वेल्जियम से पत्रकार मैक्स, मिस विक्टोरिया, जर्मनी की पत्रकार क्लाडिया एंड्रिस ही नहीं, बीबीसी वर्ल्ड न्यूज चैनल के अलावा ब्रिटेन और पाकिस्तान तक के पत्रकार आए. कादरी का ताजमहल मीडिया में सुर्खियां बन गया तो इस की जानकारी जिलाधिकारी बी. चंद्रकला को भी हुई. उन्होंने तमाम जानकारियां जुटाईं और उसी बीच प्रदेश सरकार ने विशिष्टता का प्रदर्शन करने वाली प्रतिभाओं को सम्मानित करने का एक कार्यक्रम आयोजित करने का फैसला किया तो जिलाधिकारी ने कादरी का नाम भी शासन को भेज दिया.

जिलाधिकारी ने तहसीलदार विजय कुमार को मौकामुआयना करने के साथ कादरी से मिलने के भी निर्देश दिए थे. संयोग से शासन ने कादरी के नाम को स्वीकृति दे दी. इस के बाद जिलाधिकारी बी. चंद्रकला ने कादरी को मुलाकात के लिए बुलवाया. कादरी ने ख्वाहिश जाहिर की कि वह अपनी खेती की जमीन सरकार को दान दे कर वहां बालिकाओं के लिए एक इंटर कालेज बनवाना चाहते हैं. दरअसल, कादरी को यह बात हमेशा से खटकती रही थी कि उन के गांव की लड़कियों को प्राथमिक शिक्षा के बाद आगे की पढ़ाई के लिए दूर जाना पड़ता है. इसी वजह से लड़कियां चाह कर भी नहीं पढ़ पातीं. इसीलिए वह चाहते थे कि अगर उन के गांव में ही कोई कालेज बन जाए तो गांव की लड़कियां आराम से पढ़ाई कर सकेंगी. उन की इस बात को भी सरकार तक पहुंचा दिया गया.

एक दिन कादरी को सूचना मिली कि उन्हें मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के कार्यक्रम में शामिल होने के लिए लखनऊ जाना है तो उन्हें अपने कानों पर विश्वास नहीं हुआ. 28 अगस्त को कादरी लखनऊ में आयोजित कार्यक्रम में शामिल होने पहुंचे. कादरी की मोहब्बत का किस्सा सुन कर और उन के मिनी ताजमहल की तसवीर देख कर मुख्यमंत्री उन की मोहब्बत के कायल हो गए. मुख्यमंत्री ने कादरी को सम्मानित करने के साथसाथ, उन के अधूरे ताजमहल को पूरा कराने का भी आश्वासन दिया.

इसी के साथ मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने कसेर कलां गांव को श्री जनेश्वर मिश्र ग्राम योजना में शामिल करने की घोषणा भी कर दी. इस योजना के तहत गांव के विकास के लिए प्रतिवर्ष 40 लाख रुपए मिला करेंगे. इस के अलावा यह भी वादा किया कि गांव में बलिका इंटर कालेज के लिए आगामी वित्तीय वर्ष में बजट स्वीकृत कर दिया जाएगा. अब कादरी खुश हैं कि एक दिन उन की ताजमहल पूरा होने की तमन्ना जरूर पूरी हो जाएगी.

पूरी जिंदगी चाय से परहेज करने वाले कादरी बीवी की मौत के बाद से अपना खाना खुद ही बनाते हैं. अब कादरी की तबीयत ठीक नहीं रहती. लेकिन उन के सिर पर ऐसा जुनून सवार है कि वह हर वक्त ताजमहल के रूप में अपने ख्वाब को पूरा करने की ही सोचते रहते हैं. अपने आशियाने से वह हर रोज उसे देखते हैं और उस की खूबसूरती की उम्मीद किया करते हैं. कादरी को उम्मीद है कि एक दिन उन का भी ताज संगमरमर से चमकता नजर आएगा.

आगरा से लगभग 130 किलोमीटर दूर कादरी का ताज आज दुनिया में सुर्खियां बटोर रहा है. अब उन के ताजमहल को देखने के लिए विदेशी पर्यटक भी आने लगे हैं. जब कोई देशीविदेशी आदमी कादरी के ताजमहल को देखने आता है तो वह बहुत खुश होते हैं. उन्होंने कभी नहीं सोचा था कि उन की मोहब्बत को एक दिन इस तरह लोग जानने लगेंगे. Emotional Story

—कथा कादरी के साक्षात्कार पर आधारित.

 

True Crime Story: जयपुर की रेव पार्टी – बेटे के कंलक से आहत गुलाबो

True Crime Story: अपने कालबेलिया डांस से दुनिया भर में पहचान बनाने वाली गुलाबो की नृत्य कला वाकई अनूठी है. इसी के बूते पर उस ने दौलत और शोहरत अर्जित की, लेकिन उस के बेटे भवानी सिंह ने फार्महाउस पर रेव पार्टी कर के मां को शर्मसार तो किया ही, कानून के पचड़े में भी फंसा दिया.

उस दिन तारीख थी 31 अगस्त. रात काफी गहरा गई थी. घड़ी की सूइयों ने कुछ ही देर पहले 12 बजाए थे. कैलेंडर के हिसाब से 1 सितंबर की तारीख शुरू हो चुकी थी. जयपुर के पुलिस कमिश्नर जंगा श्रीनिवास राव अपने सरकारी आवास पर बैडरूम में लेटे सोने की तैयारी कर रहे थे. दिन भर की भागदौड़ और औफिस में लंबी सिटिंग से वह बुरी तरह थक चुके थे. बैडरूम की दीवार पर लगे टीवी पर दिन भर की खबरें चल रही थीं. उस समय करीब सभी चैनलों पर सब से ज्यादा चर्चित शीना मर्डर केस और इंद्राणी की खबरें आ रही थीं. हालांकि शीना मर्डर केस 2-3 दिनों से मीडिया में हौट बना हुआ था. उस दिन नई बात यह थी कि इंद्राणी कोर्ट में बेहोश हो गई थीं.

सीनियर आईपीएस औफिसर होने के नाते जंगा के दिमाग में इंद्राणी केस को ले कर कई तरह के सवाल उमड़घुमड़ रहे थे. साथ ही वह आजकल के सामाजिक पतन के बारे में भी सोच रहे थे. उन की सोच का दायरा उन हाईप्रोफाइल लोगों के इर्दगिर्द सिमटा था, जो धनदौलत, अय्याशी और शोहरत के लिए अपने खून के रिश्तों को भी तारतार करने में पीछे नहीं रहते.

टीवी बंद कर के राव बिस्तर पर लेट गए और आंखें मूंद कर सोने का प्रयास करने लगे. तभी उन के मोबाइल पर एक काल आई. नंबर अनजाना था. फिर भी उन्होंने फोन रिसीव करते हुए कहा, ‘‘हैलो.’’

‘‘पुलिस कमिश्नर साहब बोल रहे हैं?’’ दूसरी ओर से आवाज आई.

‘‘हां, मैं पुलिस कमिश्नर बोल रहा हूं.’’ राव ने शालीनता से कहा.

‘‘सर, जयपुर में एक नामी महिला के फार्महाउस पर रेव पार्टी हो रही है, जिस में विदेशी महिलाएं भी आई हुई हैं. उन के साथ कई युवक हैं, सब के सब पैसे वालों की बिगड़ी औलादें.’’ फोन करने वाले ने कहा.

‘‘आप कौन बोल रहे हैं और यह पार्टी हो कहां रही है?’’ पुलिस कमिश्नर ने फोन करने वाले से पूछा.

‘‘सर, मुझे अपना शुभचिंतक समझ लीजिए. नाम बताने की कोई जरूरत नहीं है, क्योंकि आप के पास मेरा मोबाइल नंबर आ गया है. मैं जानता हूं, आप को झूठी सूचना दूंगा तो मुझे हवालात जाना पड़ेगा.’’ फोन करने वाले ने लंबी सांस ले कर कहा, ‘‘सर, आप जगह पूछ रहे हैं, जो बताना जरूरी है. यह रेव पार्टी हरमाड़ा में सीकर रोड से निकलने वाली नींदड़ जयरामपुरा रोड पर हो रही है. वहां कई गाडि़यां भी खड़ी हैं.’’ कह कर सूचना देने वाले ने फोन काट दिया.

जंगा श्रीनिवास राव अनुभवी पुलिस औफिसर थे. वे फोन करने वाले की विश्वासपूर्वक कही गई बातों से ही समझ गए कि सूचना गलत नहीं है. फोन करने वाले ने केवल अपना नाम छिपाया था, नंबर नहीं इसलिए विश्वास किया जा सकता था कि सूचना सही है. नवधनाढ्य वर्ग में आजकल तरहतरह की नैतिकअनैतिक पार्टियों का चलन बढ़ रहा है. जयपुर राजस्थान का महानगर है, देश भर में हीरेजवाहरात का सब से बड़ा कारोबार जयपुर में ही होता है. कालेसफेद धंधों से अथाह पैसा कमाने वालों की संख्या रोजाना बढ़ रही है. जयपुर के चारों ओर छोटेबड़े तमाम फार्महाउस हैं.

राजनेताओं से ले कर आला अफसरों, बड़े व्यापारियों और कारोबारियों के फार्महाउसों पर आए दिन छोटीमोटी पार्टियां होती रहती हैं. लेकिन जयपुर में रेव पार्टी का आयोजन कभीकभार ही सुनने में आता है. इसलिए रेव पार्टी की सूचना पर राव ने तुरंत काररवाई करने का फैसला कर लिया. उन्होंने अपने अधीनस्थ 5 अधिकारियों को शौर्ट नोटिस पर अपने घर बुला लिया. रात करीब डेढ़ बजे तक पांचों अधिकारी पुलिस कमिश्नर के बंगले पर पहुंच गए. जंगा ने उन अधिकारियों को मोबाइल पर मिली सूचना के बारे में बताते हुए कहा कि तुरंत काररवाई करनी है.

अगर गैरकानूनी रूप से कोई पार्टी हो रही है तो कोई कितना भी बड़ा आदमी हो, उसे पकड़ने में हमें जरा भी नहीं झिझकना है. इसी के साथ पुलिस कमिश्नर ने पांचों अधिकारियों को अलगअलग थानों से 70-75 जवानों की टीम बना कर छापा मारने के निर्देश दिए. पुलिस कमिश्नर के निर्देश पर पांचों अधिकारियों ने फोन कर के अपने अधीनस्थ थानाप्रभारियों को तुरंत एकएक पुलिस टीम बनाने को कहा. साथ ही उन्हें यह भी निर्देश दिए कि वह हरमाड़ा थाना इलाके में नींदड़-जयरामपुरा रोड पर गणेश मंदिर के पास पहुंच जाएं. कुछ ही देर में जयपुर के विभिन्न थानों से अलगअलग टीमों के साथ पुलिस की गाडि़यां दौड़ पड़ीं. दूसरी ओर पुलिस कमिश्नर के बंगले से निकल कर पांचों अधिकारी भी गणेश मंदिर के पास पहुंच गए. उस समय तक रात के लगभग 3 बज चुके थे.

जयरामपुरा रोड पर गणेश मंदिर के पास कई फार्महाउस बने हुए हैं. एडिशनल डीसीपी (पश्चिम) करण शर्मा के नेतृत्व में पुलिस की टीमें गणेश मंदिर के आसपास के फार्महाउसों की टोह लेती हुई आगे बढ़ने लगीं. कुछ ही देर में पुलिस को सड़क किनारे एक फार्महाउस के अंदर कई गाडि़यां खड़ी नजर आईं. फार्महाउस में बाहर ज्यादा रोशनी नहीं थी. अंदर की ओर केवल एक बल्ब जल रहा था, लेकिन अंदर से तेज धूमधड़ाके की आवाजें आ रही थीं. पुलिस दल ने अपनी गाडि़यां कुछ दूर रोक दीं और फार्महाउस का बाहर से जायजा लिया. मेनगेट अंदर से बंद था. पुलिस दल को 2-3 लोग अंदर अंधेरे में पेड़ों के आसपास खड़े नजर आए. इस से पुलिस को यकीन हो गया कि अंदर जरूर कोई न कोई पार्टी चल रही है और ये लोग बाहर की निगरानी के लिए खड़े हैं.

एडिशनल डीसीपी ने अपने साथी अधिकारियों और जवानों से तुरंत एक्शन लेने को कहा. देखते ही देखते 70 से ज्यादा पुलिस जवानों ने फार्महाउस को घेर लिया. कुछ जवान गेट फांद कर अंदर दाखिल हो गए. उन्होंने सब से पहले अंधेरे में निगरानी कर रहे लोगों को दबोचा. इस के बाद उन्होंने मेनगेट खोल कर अधिकारियों को अंदर बुला लिया. पुलिस अफसर जब फार्महाउस के अंदर एक विशाल हाल में पहुंचे तो दंग रह गए. वहां तमाम युवक डीजे की धुन पर झूम रहे थे. तेज आवाज में अंगरेजी संगीत बज रहा था. डांस के नाम पर झूमने वाले सभी युवक नशे में थे.

शराब की बोतलें खुली हुई थीं. वहां मौजूद सभी युवक बरमूडा टीशर्ट पहने हुए थे और पूरी मस्ती के मूड में थे. उन के साथ एक विदेशी युवती भी मौजूद थी. उस समय पार्टी पूरे शबाब पर थी. सारे युवा अपनेअपने तरीके से मौजमस्ती कर रहे थे. उन में से कई तो मदमस्त हो कर थिरक रहे थे. पुलिस को देखते ही पार्टी में भगदड़ मच गई. नशे में झूमते युवा इधरउधर भागने लगे. पुलिस ने भागदौड़ कर के 26 युवकों को पकड़ लिया. साथ ही पार्टी में शामिल फिनलैंड की एक युवती भी पकड़ी गई. पुलिस ने मौके से महंगी शराब की बोतलें, चरस, गांजा, एनर्जी ड्रिंक्स, शक्तिवर्धक दवाएं और आपत्तिजनक सामान के अलावा कार तथा 13 हाईपावर बाइकें जब्त कीं. पुलिस की इस काररवाई के  दौरान पार्टी में एंजौय कर रहे कई युवा अंधेरे का फायदा उठा कर इधरउधर भाग कर आसपास के फार्महाउसों में उगी फसलों में छिप गए.

फार्महाउस से पकड़े गए सभी लोगों को पुलिस हरमाड़ा थाने ले आई. वहां एडिशनल डीसीपी ने पकड़े गए युवकों से पूछताछ शुरू की तो उन्हें बड़ा झटका लगा. यह फार्महाउस अंतरराष्ट्रीय नृत्यांगना गुलाबो का था. दुनिया भर में अपने कालबेलिया डांस से दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर देने वाली वही गुलाबो, दौलत और शोहरत जिस के कदम चूमती थी. स्वर्गीय प्रधानमंत्री राजीव गांधी जिसे अपनी बहन मानते थे. कांग्रेस अध्यक्षा सोनिया गांधी भी जिसे ननद मानती हैं. पकड़े गए युवाओं में गुलाबो का बेटा भवानी सिंह भी था.

पूछताछ में पता चला कि फिनलैंड की रहने वाली 24 वर्षीया युवती तरू आरियो नेपाल में अपने पुरुष मित्र के पास आई थी. तरू ने नेपाली मित्र से भारत घूमने की इच्छा जताई तो उस ने अपनी व्यस्तता के बारे में बता कर तरू आरियो को अपने एक नेपाली साथी के साथ भारत भेज दिया. तरू टूरिस्ट वीजा पर हिमाचल होते हुए राजस्थान आई थी. राजस्थान में कई जगह घूमने के बाद वह पुष्कर पहुंची थी. पुष्कर से उसे वही नेपाली युवक इस रेव पार्टी में जयपुर ले आया था. पुलिस ने पकड़े गए युवाओं की मैडिकल जांच कराई, ताकि यह पता चल सके कि उन्होंने नशे के लिए कौनकौन से ड्रग लिए थे?

आवश्यक काररवाई के बाद पुलिस ने हर्षित कौशिक, ऋषि कौशिक, सुनील मोतियानी, आकाश रोचवानी, भवानी सपेरा, अभिमन्यु, उवेश करणी, चिराग मीणा, हर्ष शेखावत, विजय प्रकाश, आलविन, राजेंद्र सैनी, पूर्व सिंह राठौड़, मुकेश धानका, कदीर, अक्षत स्थापक, आशीष भावन, प्रखर मिश्रा, श्रेय वर्मा, विशाल चंदानी, गौरव, राज शर्मा, सर्वोत्तम शर्मा, हर्ष को एनडीपीएस एक्ट में और फिनलैंड निवासी युवती तरू ओरियो को शांतिभंग करने के आरोप में गिरफ्तार कर लिया. पकड़े गए युवकों में कई निजी कालेजों के छात्र भी थे. पुलिस ने हरमाड़ा थाने में मुकदमा दर्ज कर के उस में गुलाबो को भी नामजद किया. पुलिस ने 1 सितंबर को सभी आरोपियों को अदालत में पेश किया.

अदालत ने 25 युवकों को जेल भेज दिया, जबकि विदेशी युवती को जमानती मुचलके पर छोड़ दिया गया. गुलाबो के बेटे भवानी सपेरे का पुलिस ने 2 दिनों का रिमांड लिया, ताकि उस से विस्तृत पूछताछ की जा सके. बाद में उसे भी जेल भेज दिया गया. पुलिस को गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ में पता चला कि रेव पार्टी का आयोजन गुलाबो के बेटे भवानी ने किया था. यह पार्टी भवानी के दोस्त ऋषि कौशिक ने अपने जन्मदिन की आड़ में आयोजित की थी. पकड़े गए युवक भवानी और ऋषि के जानकार थे. पुलिस के सामने यह बात भी आई कि पार्टी में आए युवाओं को भवानी ने ही स्मैक, गांजा सहित अन्य नशीले पदार्थ उपलब्ध कराए थे. पुलिस को इस फार्महाउस पर पहले भी इस तरह की पार्टियां आयोजित होने की बातें पता चली है.

भवानी की गिरफ्तारी पर पुलिस ने पुष्टि करने के लिए गुलाबो को फोन किया. गुलाबो ने पुलिस को बताया कि वह अपने भाई को राखी बांधने के लिए पुष्कर गई थी. इसी दौरान उस के बेटे भवानी का फोन आया था. उस ने कहा था कि वह रात को अपने दोस्त की बर्थडे पार्टी में जाएगा. इस पर गुलाबो ने भवानी को रात में जल्दी घर पहुंचने की ताकीद की थी. गुलाबो का कहना है कि भवानी ने उस से झूठ बोला और गलत गतिविधि में पकड़ा गया. अगर उस ने गलती की है तो उसे सजा मिलनी चाहिए.

बेटे भवानी के इस तरह अपने ही फार्महाउस पर आयोजित रेव पार्टी में पकड़े जाने से गुलाबो को बड़ा झटका लगा. झटका इसलिए कि उस ने जीवन भर अपनी कला और मेहनत के बल पर दुनिया में जो नाम और शोहरत हासिल की थी, वह सब बेटे भवानी ने एक ही दिन में मिट्टी में मिला दी थी. बेटे की करतूतों पर गुलाबो की परेशानी स्वाभाविक ही थी. राजस्थान के कालबेलिया समुदाय में सन 1960 में जन्मी गुलाबो अपने मातापिता की सातवीं संतान थी. गुलाबो का असली नाम धनवंतरि है. गुलाबो नाम उस के पिता ने दिया था. जन्म के एक घंटे बाद ही परिजनों ने उसे दुत्कार दिया था, लेकिन परिवार की ही एक बेऔलाद आंटी ने उसे गोद ले लिया था. गुलाबो का बचपन मातापिता की उपेक्षा और आर्थिक तंगी में गुजरा.

सपेरा परिवार से होने के कारण गुलाबो सांपों के बीच खेलतीकूदती हुई बड़ी हुई. कई बार उस ने सांपों का जूठा दूध पी कर अपनी भूख मिटाई. घरपरिवार में सांप व बीन रहती थी, इसलिए वह 2 साल की उम्र से ही बीन की धुन पर डांस करने लगी थी. जैसेजैसे वह बड़ी होती गई, उस के सपेरा नृत्य में निखार आता गया. डांस में अपने शारीरिक लोच के कारण वह बचपन से ही लोगों का ध्यान आकर्षित करने लगी थी. 12 साल की उम्र में गुलाबो ने अजमेर जिले के पुष्कर में आयोजित ऊंट महोत्सव में पहली बार हजारों देसीविदेशी पर्यटकों के सामने कालबेलिया नृत्य की अपनी कला का प्रदर्शन किया.

राजस्थान पर्यटन विभाग की ओर से किए गए काफी प्रयासों के बाद गुलाबो के घर वालों ने उसे स्टेज पर परफौरमेंस की अनुमति दी थी. गुलाबो के घर वालों का कहना था कि कालबेलिया समाज के लोग स्टेज पर परफौरमेंस नहीं करते. गुलाबो ने पुष्कर में अपनी नृत्यकला दिखाने के बाद पीछे मुड़ कर नहीं देखा. वह पुष्कर से जयपुर, फिर दिल्ली और इस के बाद दुनिया के तमाम बड़े देशों में अपने डांस का जादू बिखेरती चली गई. इसी दौरान सन 1986 में तत्कालीन प्रधानमंत्री स्व. राजीव गांधी ने विदेशों में भारत की अच्छी छवि बनाने के लिए फेस्टिवल औफ इंडिया सीरीज शुरू कराई.

इसी सीरीज में अपने नृत्य के बल पर गुलाबो ने राजीव गांधी और सोनिया गांधी का दिल जीत लिया. इस के बाद से राजीव गांधी गुलाबो को अपनी बहन मानने लगे थे. राजीव गांधी की अकाल मौत के बाद सोनिया गांधी ने भी गुलाबो पर स्नेह बनाए रखा. इसी दौरान गुलाबो की शादी सोहन नाथ से हो गई. सोहननाथ कालबेलिया समुदाय से नहीं था, लेकिन बाद में वह कालबेलिया समाज में कनवर्ट हो गया. शादी के बाद गुलाबो जयपुर आ कर शास्त्रीनगर में मकान बना कर रहने लगी.  दुनिया भर में डांस की परफौरमेंस से गुलाबो के पास शोहरत के साथ पैसा भी आया.

पैसा आया तो गुलाबो ने जयपुर में सीकर रोड स्थित नींदड़-जयरामपुरा रोड पर एक जमीन खरीद ली. बाद में इस जमीन को उस ने फार्महाउस के रूप में विकसित कर लिया. कालांतर में गुलाबो के 5 बच्चे हुए. गुलाबो रियलिटी शो बिग बौस के पांचवें सत्र की प्रतिभागी भी रह चुकी है. फिल्म अभिनेता संजय दत्त की मेजबानी वाला यह सीजन 2 अक्तूबर, 2011 से 7 जनवरी, 2012 तक प्रसारित किया गया था. इस सीजन के दिवाली स्पैशल एपिसोड की शुरुआत अभिनेता सलमान खान की मेजबानी से हुई थी. इस सत्र की विजेता अभिनेत्री जूही परमार रही थीं.

गुलाबो आज राजस्थान ही नहीं, भारतीय कला संस्कृति की रोल मौडल है. वह इंटरनेशनल कल्चर एवं म्यूजिक सर्किट का एक हिस्सा है. इतना ही नहीं, वह कई फिल्मों में मशहूर अभिनेताओं के साथ अपनी नृत्यकला का प्रदर्शन भी कर चुकी है. पिछले दिनों गुलाबो ने राजस्थान के चर्चित भंवरी केस पर बनी फिल्म में एक आइटम नंबर भी किया था. इस आइटम नंबर में गुलाबो के साथ उस की 3 बेटियों ने भी अपनी नृत्य कला दिखाई है. गुलाबो हर साल डेनमार्क के कोपेनहेगन में बच्चों को डांस का प्रशिक्षण देने जाती है.

गुलाबो के डांस में बिजली जैसी तेजी और शरीर में गजब की लचक है. सलमासितारों से जड़े काले लहंगे पर कांचली कुर्ती और ओढ़नी ओढ़ कर गुलाबो जब संगीत की धुन पर फिरकी की तरह तेजी से घूमते हुए कालबेलिया डांस करती है तो दर्शक मंत्रमुग्ध हो जाते हैं. गुलाबो कालबेलिया डांस का प्रशिक्षण स्कूल खोलना चाहती है, लेकिन फिलहाल बेटे भवानी की करतूत से उसे गहरा झटका लगा है. इस से उबरने में उसे समय लगेगा. True Crime Story

Crime Story: बड़े लोगों के बड़े बडें राज

Crime Story: शीना बोरा के कत्ल की कहानी तमाम रहस्यों में उलझी हुई है. कुछ रहस्य सुलझ गए हैं तो कुछ सुलझ जाएंगे. लेकिन यह रहस्य शायद ही सुलझ पाए कि इतने धनाढ्य और नामीगिरामी परिवार की होते हुए भी इंद्राणी मुखर्जी ने ऐसा क्यों किया? दौलत के लिए तो यह हो नहीं सकता, क्योंकि दौलत तो उन के कदम चूमती थी. फिर क्या रहस्य था शीना की हत्या का?

मुंबई के पूर्व पुलिस कमिश्नर राकेश मारिया को मुंबई में अवैध हथियारों की खरीदफरोख्त से जुड़ी एक गुप्त सूचना मिली थी. इस संबंध में अपराधियों की धरपकड़ करतेकरते एक ऐसा कार ड्राइवर पुलिस के हत्थे चढ़ा, जिस से 7.66 एमएम की एक पिस्टल बरामद हुई. बरामद पिस्टल की मिल्कीयत की बाबत वह कोई सबूत पेश नहीं कर सका, न ही उस के पास हथियार रखने का कोई लाइसेंस था. उस का कहना था कि वह पिस्टल उसे एक जगह लावारिस पड़ा मिला था. पुलिस ने उस से सघन पूछताछ की. इस पूछताछ में की गई सख्ती उस से बरदाश्त नहीं हुई तो उस ने एक ऐसे सनसनीखेज अपराध का खुलासा कर दिया, जिस के बारे में सुनते ही पुलिस वालों के पैरों तले से जमीन खिसक गई.

उस ड्राइवर का नाम था श्यामवर राय. पुलिस द्वारा उस के अन्य अपराधों के बारे में पूछे जाने पर श्यामवर राय ने बताया कि उस ने कभी कोई अपराध नहीं किया. अलबत्ता कत्ल के एक मामले में अपनी मालकिन को सहयोग जरूर दिया था. श्यामवर राय ने पूछताछ में जो कुछ बताया, उसे सुन कर पुलिस दुविधा में पड़ गई, वजह यह थी कि वह एक निहायत संगीन अपराध था और एक जानीमानी हस्ती से जुड़ा था. वह जिस कत्ल के बारे में पुलिस को बता रहा था, उस में मुख्य रूप से एक ऐसी औरत का हाथ था, जो न केवल मीडिया जगत की जानीमानी हस्ती थी, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी खासा रुतबा रखती थी.

सन 2008 में उस का नाम दुनिया की 50 पावरफुल महिलाओं की सूची में शामिल किया गया था. इस के अलावा भी उस के नाम के साथ अन्य कई उपाधियां जुड़ी थीं. पूछताछ में ड्राइवर श्यामवर राय ने सीधेसीधे बताया कि उस महिला ने एक अन्य आदमी के साथ मिल कर अपनी छोटी बहन को मौत के घाट उतारा था और उस का शव रायगढ़ के जंगल में ले जा कर जला दिया था. बाद में उसे वहीं दफन कर दिया गया था. लेकिन बिना पर्याप्त सबूतों के उस महिला पर हाथ डालना आसान नहीं था. वैसे भी यह बात 3 साल से ज्यादा पुरानी थी.

महाराष्ट्र पुलिस के वरिष्ठ अधिकारी राकेश मारिया अपनी योग्यता और आपराधिक केसों को प्रोफेशनल तरीके से हल कर के दोषियों को सजा दिलवाने के लिए जाने जाते रहे हैं. इस का एक कारण यह भी रहा कि कोई भी आपराधिक मामला हल करने में उन्होंने कभी हड़बड़ी या जल्दबाजी नहीं की. वांछित अपराधी पर भी उन्होंने तभी हाथ डाला, जब उस के खिलाफ पर्याप्त सबूत हाथों में आ गए. इस केस में तो आरोपी का कद इतना बड़ा था कि बिना सही सबूतों के उस पर हाथ डालने का मतलब था, अपनी नौकरी से हाथ धोना. इसलिए राकेश मारिया ने एकएक कदम फूंकफूंक कर रखने का फैसला किया.

राकेश मारिया 30 सितंबर, 2015 को पुलिस कमिश्नर पद से मुक्त होने जा रहे थे. इसलिए वह चाहते थे कि मुंबई पुलिस कमिश्नर पद के बचेखुचे दिन बिना किसी दागधब्बे के अमनचैन से निकल जाएं. यह केस फूलप्रूफ तरीके से हल करने के लिए मारिया ने डीसीपी धनंजय कुलकर्णी के अलावा कुछ अन्य काबिल अफसरों और पुलिस कर्मचारियों की टीम बनाई. यह टीम मामले की तह में जा कर दोषियों के खिलाफ सबूत जुटाने में जुट गई. मारिया पलपल की खबर रख रहे थे. इस काम में उन्हें 3 महीने तो लगे, लेकिन उन्होंने कत्ल का केस हल करने के लिए वांछित सबूत जुटा लिए.

मीडिया जगत की जानीमानी हस्ती पीटर मुखर्जी ने सन 1993 से 2007 तक स्टार इंडिया के साथ काम किया था. ‘कौन बनेगा करोड़पति’ और ‘सास भी कभी बहू थी’ जैसे सीरियल को अस्तित्व में लाने का श्रेय उन्हें भी दिया गया था. यह केस पीटर मुखर्जी की पत्नी इंद्राणी मुखर्जी से ही जुड़ा था. दरअसल, इंद्राणी बोरा पहले मुकेश अंबानी की रिलायंस इंडस्ट्रीज में बतौर एचआर कंसल्टेंट काम करती थी. वह निहायत ही खूबसूरत औरत थी. कहते हैं कि एक कौकटेल पार्टी में किसी ने पीटर और इंद्राणी का परिचय करवाया तो इंद्राणी ने बेतकल्लुफी से पीटर के गले लगते हुए कहा कि वह उन्हें न केवल पहले से जानती है, बल्कि एक सफल आदमी के रूप में उन्हें पसंद भी करती है.

इंद्राणी के बात करने के खुले लहजे और उस की खूबसूरती ने पीटर का मन कुछ इस तरह मोह लिया कि वह उसे पाने के लिए लालायित हो उठे. पीटर किसी अन्य औरत के साथ पार्टी में आए थे, जिसे वहीं छोड़ कर वह इंद्राणी के साथ चले गए. इस के बाद तो जैसे दोनों लिवइन रिलेशनशिप में रहने लगे. बाद में नवंबर, 2002 में दोनों ने शादी कर ली. उस समय पीटर 46 साल के तलाकशुदा अधेड़ थे, जबकि इंद्राणी 30 साल की थी यानी पीटर से 16 साल छोटी.

इंद्राणी ने पीटर से खुद को सिंगल मदर बता कर कहा था कि उस ने अपने आत्मसम्मान की वजह से अपने अभिभावकों से रिश्ता तोड़ रखा है. पीटर के कहने पर इंद्राणी अपनी 5 साल की बेटी विधि को भी घर में ले आई, जिसे पीटर ने विधिवत अपनी दत्तक पुत्री बना लिया. सन 2007 में जब पीटर ने स्टार को छोड़ा तो यह कंपनी स्टार इंडिया, स्टार ग्रुप और स्टार एंटरटेन इंडिया नाम की 3 कंपनियों में बंट गई. पीटर मुखर्जी को स्टार ग्रुप का सीईओ बनाया गया और एंटरटेन इंडिया का सीईओ बनाया गया समीर नायर को. इस बीच पीटर व इंद्राणी ने मिल कर आईएनएक्स मीडिया कंपनी की स्थापना कर ली थी. दरअसल यह कदम इंद्राणी के लिए ही उठाया गया था.

हकीकत में शादी के बाद धीरेधीरे इंद्राणी ने पीटर मुखर्जी की जिंदगी पर पूरी तरह कब्जा कर लिया था. उस की जिस्मानी मादकता में खोए पीटर भी उसी के इशारों पर नाच रहे थे. पीटर के स्टार ग्रुप छोड़ने से 1 साल पहले ही इंद्राणी ने विधिवत आईएनएक्स कंपनी की चेयरपरसन का काम संभाल लिया था. साथ ही उस ने अन्य कई चैनल भी लांच करने की योजना बनानी शुरू कर दी थी. पीटर और इंद्राणी ने आईएनएक्स कंपनी को बड़े पैमाने पर लांच करने की बात कह कर देशविदेश की विज्ञापन कंपनियों से अपार धन एकत्र किया. देखतेदेखते ये लोग 800 करोड़ की संपत्ति के मालिक बन गए. मीडिया जगत में दोनों का खूब रुतबा तो था ही.

चेयरपरसन होने के नाते चूंकि इंद्राणी ही कंपनी का सारा काम देख रही थी, इसलिए उसे तमाम अवार्ड भी मिले और उस की पर्सनैलिटी पर लेखफीचर भी छपने लगे. कई बार टीवी पर भी उस के इंटरव्यू आए. इंद्राणी कुछ तो कुदरतन खूबसूरत थी, कुछ वह खूब बनठन कर रहा करती थी. फलस्वरूप पार्टियों में उस के व्यक्तित्व का अलग ही आकर्षण होता था. वह सब से खुल कर बातें करने में भी परहेज नहीं करती थी. साथ ही वह डांस भी बहुत अच्छा किया करती थी. यहां तक कि कभीकभी वह गीत वगैरह सुना कर भी महफिल में रंग जमा देती थी.

इत्तफाकन अगर वह किसी पार्टी में न पहुंच पाती तो अन्य लोग सब से ज्यादा उसी के बारे में पूछताछ करते थे. वैसे भी उस के बारे में यह बात मशहूर थी कि जिंदगी को सही मायनों में जीना है तो इस का गुर इंद्राणी मुखर्जी से सीखो. मुखर्जी परिवार संपन्न परिवार था. उन के यहां किसी चीज की कमी नहीं थी. पैसा तो जैसे इस परिवार के आंगन में बरसता था. सब कुछ बहुत अच्छा चल रहा था. तभी अचानक एक दिन एक लड़की शीना बोरा और लड़का मिखाइल पूछतेपूछते मुखर्जी परिवार के घर आ पहुंचे. उन दोनों को देख कर इंद्राणी पहले तो चौंकी, फिर उस ने पीटर को बताया कि ये दोनों उस के छोटे भाईबहन हैं.

यह जान कर पीटर ने उन दोनों की काफी आवभगत की और उन्हें अपने साथ ही रहने को कहा. इंद्राणी ने उन के रहने की अलग व्यवस्था करवा दी. सन 2010 में पीटर व इंद्राणी कुछ समय के लिए इंग्लैंड चले गए. वापस लौट कर वे फिर से अपनी खुशहाल जिंदगी में रम गए. इंद्राणी ने अपने भाईबहन की बात करना पहले ही बंद कर दिया था. पीटर मुखर्जी ने एकाध बार पूछा तो उस ने बताया कि मिखाइल अपना कारोबार जमाने में व्यस्त हो गया है, जबकि शीना को अमेरिका में अच्छी नौकरी मिल गई है. पीटर पत्नी की हर बात पर आंख मूंद कर विश्वास कर लेते थे. इस बार भी उन्हें इंद्राणी की बात पर कोई संदेह नहीं हुआ.

वक्त अपनी रफ्तार से गुजर रहा था कि अचानक एक रोज…

उस दिन अगस्त, 2015 की 26 तारीख थी. पीटर मुखर्जी अपनी पत्नी इंद्राणी के साथ वरली स्थित अपने निवास पर थे. सुबह का वक्त था. डोरबेल बजने पर घर के नौकर ने दरवाजा खोला तो सामने मुंबई पुलिस खड़ी थी. इंद्राणी को बुला कर एक महिला सबइंसपेक्टर ने आगे आ कर कहा, ‘‘मैडम, हमारे अफसरों को किसी केस के सिलसिले में आप से बात करनी है. कृपया आप हमारे साथ अभी थाने चलें.’’

इंद्राणी मुखर्जी मीडिया जगत से जुड़ी एक बड़ी हस्ती थी. वह पता नहीं कितने पुलिस अधिकारियों और प्रशासनिक अधिकारियों से अकसर मिला करती थी. वे तमाम लोग उसे निजी रूप से जानते थे. इसलिए इंद्राणी के लिए आम लोगों की तरह पुलिस से भयभीत होने जैसा कुछ नहीं था. वह बेझिझक बेपरवाह पुलिस की गाड़ी में बैठ कर उन के साथ चली गई. थाना खार में पहुंच कर उसे बताया गया कि उसे उस की बहन शीना बोरा के कत्ल और उस की लाश को खुर्दबुर्द करने के आरोप में गिरफ्तार किया गया है. इस संबंध में उस के खिलाफ भादंवि की धाराओं 302 (हत्या) व 201 (सबूत नष्ट करने) के तहत आपराधिक मामला दर्ज किया जा चुका है.

इस के साथ ही पुलिस ने उस की गिरफ्तारी के बारे में उस के पति पीटर मुखर्जी को भी सूचित कर दिया. पीटर मुखर्जी यह सुन कर अचंभित रह गए कि शीना का कत्ल कर दिया गया है और इस का इलजाम इंद्राणी पर है. उन्होंने कहा कि इंद्राणी ने अगर वाकई ऐसा किया है तो उस ने निहायत ही घिनौना काम किया है. इस के बावजूद उन्होंने पत्नी की मदद के लिए वकीलों का इंतजाम कर दिया.  पुलिस थाना खार में थोड़ीबहुत मनोवैज्ञानिक पूछताछ करने के बाद उसी रोज कस्टडी रिमांड के लिए इंद्राणी को बांद्रा स्थित मेट्रोपौलिटन मजिस्ट्रेट की अदालत में पेश किया गया.

इंद्राणी की ओर से महानगर के 2 जानेमाने वकीलों ने उस के बचाव में अदालत में पेश हो कर कहा कि उन की मुवक्किला को झूठे केस में फंसाया जा रहा है. किसी ने अगर शीना का कत्ल कर दिया था तो इस में इंद्राणी मुखर्जी का क्या कसूर? वकीलों का कहना था कि इस मामले में पुलिस के पास उन की संलिप्तता का कोई प्रमाण नहीं है. वैसे भी वह मीडिया जगत की एक सम्मानित महिला हैं न कि कोई पेशेवर अपराधी. इसलिए अदालत को उसे पुलिस रिमांड में न दे कर तुरंत जमानत पर रिहा कर देना चाहिए.

माननीय दंडाधिकारी ने इंद्राणी के वकीलों की दलील सुनने के साथसाथ पुलिस का पक्ष भी सुना और उन के द्वारा पेश किए गए तथ्यों को भी जांचापरखा. इस के बाद अदालत ने पुलिस को इंद्राणी का रिमांड दे दिया. पुलिस ने इंद्राणी मुखर्जी को 5 दिनों तक कस्टडी रिमांड में रख कर शीना बोरा की हत्या के बारे में पूछताछ की. लेकिन इंद्राणी भी कम नहीं थी. पुलिस के तमाम हथकंडों के आगे न तो वह झुकी और न ही डरी. अपने ऊपर लगाए गए आरोपों को मानने से उस ने साफ इनकार कर दिया. वह पुलिस को यही समझाने का प्रयास करती रही कि शीना मरी नहीं, अमेरिका में नौकरी कर रही है. हां, पिछले कुछ अरसे से वह उस के संपर्क में नहीं है, न ही उस के पास उस का कौंटेक्ट नंबर या पता वगैरह है.

इंद्राणी द्वारा पुलिस को बताए अनुसार, किसी बात पर शीना से उस की बहस हो गई थी, जिस से नाराज हो कर वह 3 साल पहले अमेरिका चली गई थी. वहीं से उस ने एक बार फोन कर के बताया था कि अमेरिका में उसे बहुत अच्छी नौकरी मिल गई है, इसलिए अब वह दोबारा कभी उस के पास इंडिया नहीं आएगी. इंद्राणी आसानी से काबू में नहीं आ रही थी. वह एक ही रट लगाए हुए थी कि इस केस में उस के किसी दुश्मन के कहने पर उसे गलत तरीके से फंसाया जा रहा है. इंद्राणी से उस का अपराध कबूल करवाना पुलिस के लिए टेढ़ी खीर साबित हो रहा था.

दूसरा कोई चारा न देख पुलिस ने ड्राइवर श्यामवर राय को ला कर उस के सामने खड़ा कर दिया. वह पहले ही से कस्टडी रिमांड में चल रहा था. उसे सामने देख इंद्राणी को कंपकंपी छूट गई. पुलिस के मुताबिक इस के बाद इंद्राणी ने शीना की हत्या करने की बात कबूल करते हुए कई राज खोले. पुलिस कमिश्नर राकेश मारिया ने उसी दिन पत्रकारों को बताया कि शीना असलियत में इंद्राणी की बहन न हो कर बेटी थी. जुलाई, 2012 में जब वह 22 वर्ष की थी, उस की हत्या कर दी गई. अपनी ही बेटी के कत्ल का तानाबाना इंद्राणी ने खुद ही बुना था. शीना को ब्रांदा से सूमो गाड़ी पर अपहृत कर के मुंबई के दूरवर्ती इलाके रायगढ़ में एक सुनसान जगह पर ले जाया गया.

गाड़ी में शीना और इंद्राणी के अलावा ड्राइवर श्यामवर राय व संजीव खन्ना नामक शख्स थे. ड्राइवर ने इंद्राणी मुखर्जी के मुंह से इस शख्स का नाम सुन लिया था, मगर उसे यह नहीं मालूम हो पाया था कि दोनों का आपस में रिश्ता क्या था. बकौल पुलिस आयुक्त मारिया इंद्राणी ने पूछताछ में बताया कि उस ने शीना को रायगढ़ के फार्महाउस में होने वाली पार्टी में शामिल होने के बहाने से बुलाया था. शीना की हत्या मुंबई से दूर खोपोली सड़क मार्ग पर एक सुनसान जगह पर गला दबा कर की गई, फिर रायगढ़ के जंगल में पैट्रोल छिड़क कर शव को न केवल जलाया गया, बल्कि उसे वहीं गड्ढा खोद कर दफन भी कर दिया गया.

पुलिस कमिश्नर का यह बयान मीडिया के जरिए लोगों के सामने आया तो पूरे देश की नजरें इसी खबर पर टिक गईं. यह मुंबई महानगर का हाईप्रोफाइल केस था, जो अनैतिक संबंध, रिश्तों में धोखे और पैसों के लालच में उलझी किसी थ्रिलर स्टोरी की तरह सामने आता दिखाई दे रहा था. 27 अगस्त को पुलिस ने संजीव खन्ना को गिरफ्तार कर लिया. पता चला वह इंद्राणी का पूर्व पति था. खन्ना से की गई पूछताछ में पता चला कि उस की और इंद्राणी की मुलाकात 1980 के दशक में मेघालय की राजधानी शिलांग में तब हुई थी, जब इंद्राणी हायर एजुकेशन के सिलसिले में वहां रह रही थी.

पूछताछ में संजीव खन्ना ने पुलिस को बताया कि इंद्राणी के पिता एक बड़े कारोबारी थे. उस से उन का परिचय गुवाहाटी में अपना कारोबार जमाते समय हुआ था. इस संबंध में उन्होंने खन्ना की काफी मदद की थी. उन की बेटी इंद्राणी से खन्ना का इस से पहले ही परिचय हो चुका था, जो वक्त के साथ प्रेम में बदल गया था. बाद में दोनों ने आपस में शादी कर ली थी. इसी बीच मिखाइल ने पुलिस को यह बयान दे कर चौंका दिया कि वह इंद्राणी मुखर्जी का भाई नहीं, बल्कि बेटा है. अलबत्ता वह अपने पिता का नाम नहीं बता पाया. फिर भी उस ने यह बात पूरा जोर दे कर कही कि निश्चित रूप से उस की बहन शीना की हत्या हुई है, लेकिन इस संबंध में कुछ सनसनीखेज खुलासे वह तब करेगा, जब मुंबई पुलिस इस केस की अपनी छानबीन पूरी कर लेगी.

पुलिस के हवाले से यह बात भी सामने आई कि शीना के संबंध पीटर मुखर्जी की पहली पत्नी शबनम से पैदा बेटे राहुल मुखर्जी के साथ थे और दोनों शादी करना चाहते थे. यह बात सामने आने पर पीटर मुखर्जी ने अफसोस जाहिर करते हुए केवल इतना ही कहा कि वह सोच भी नहीं सकते थे कि उन के परिवार में इतना कुछ घट जाएगा और उन्हें पता भी नहीं चलेगा. इंद्राणी के बारे में भी अब तक यह तथ्य सामने आ गया था कि उस ने खुद को सिंगल मदर बता कर जब पीटर मुखर्जी से शादी की थी तो एक नहीं, कई झूठ बोले थे. उन में सब से बड़ा झूठ तो यही था कि उस ने अपनी औलादों मिखाइल व शीना को बेटाबेटी की जगह अपना भाईबहन बताया था.

अब यह बात भी सामने आई कि पीटर मुखर्जी से पहले भी इंद्राणी 2 शादियां कर चुकी थी. उस के पहले पति का नाम था सिद्धार्थ दास, जबकि संजीव खन्ना उस का दूसरा पति था. सिद्धार्थ से उसे बेटी शीना व बेटा मिखाइल पैदा हुए थे और संजीव खन्ना से बेटी विधि, जिसे पीटर मुखर्जी ने दत्तक पुत्री बना लिया था. रहस्यों से भरी किसी फिल्म की तरह पीटर के सामने नईनई बातें आ रही थीं. मीडिया के लोग उन से असलियत जानने को उन के घर के चक्कर लगाने लगे. आखिर परेशान हो कर पीटर को अपना बयान जारी करना पड़ा, ‘मैं पूरी तरह सदमे में हूं. अब तक मैं शीना को इंद्राणी की बहन मानता आया था और मिखाइल को उस का भाई. अब पता चल रहा है कि दोनों उस की अपनी औलाद थे.

‘शीना जब भारत नहीं आ रही थी तो मेरे बेटे राहुल ने मुझ से कहा था कि पापा कुछ गड़बड़ है. उस ने एक बार मुझे यह बताने की कोशिश भी की थी कि शीना असल में इंद्राणी की बेटी हो सकती है. लेकिन मैं ने उस की बात को खारिज कर दिया था. दूसरों की जिंदगी से जुड़ी सनसनीखेज कहानियां सुनना और पढ़ना जितना खुशगवार लगता है, उतना ही मुश्किल होता है अपने जीवन में इस तरह की कहानी से रूबरू होना.’

इस बीच पुलिस ने श्यामवर की निशानदेही पर रायगढ़ के जंगल से बरामद शीना की हड्डियों को मुंबई के जेजे अस्पताल में सुरक्षित रखवा दिया था. श्यामवर राय के अनुसार शीना की हत्या के बाद इंद्राणी मुखर्जी व संजीव खन्ना ने उसे चुप रहने के लिए बहुत बुरी तरह से धमकाया था, साथ ही मुंह बंद रखने के लिए उसे 50 हजार रुपए भी दिए थे.

पुलिस प्रवक्ता के अनुसार, श्यामवर राय इस अपराध में सीधे तौर पर शामिल नहीं था. इंद्राणी मुखर्जी का वह निजी ड्राइवर था. वह उस के दबंग स्वभाव से अच्छी तरह परिचित था. साथ ही वह यह भी जानता था कि इंद्राणी के बहुत ऊंचे संबंध थे, जिन के चलते वह किसी के खिलाफ कुछ भी करवा सकती थी. उस ने पुलिस को बताया कि उस की मालकिन अपने पति पीटर मुखर्जी को भी जूती की नोक पर रखती थी और उन्हें जराजरा सी बात पर बुरी तरह लताड़ देती थी. घर में एक तरह से इंद्राणी मुखर्जी का ही एकछत्र राज था. इन्हीं वजहों से श्यामवर राय अपनी मालकिन से बहुत डरता था. हालांकि शीना की हत्या के बाद उस का कई बार मन हुआ कि वह इस बारे में पुलिस को बता दे.

लेकिन वह इंद्राणी मुखर्जी के खिलाफ जाने का साहस कभी नहीं जुटा पाया. अब जबकि इंद्राणी मुखर्जी व संजीव खन्ना खुद सलाखों के पीछे हैं तो श्यामवर पुलिस संरक्षण में पूरी तरह इन के खिलाफ खड़ा हो गया था. वैसे भी उन के खिलाफ खड़े होने में ही उस की भलाई थी. संजीव खन्ना कोलकाता में केबल नेटवर्क का कारोबार करता था. उस के पास फाइनैंस का ज्यादा इंतजाम नहीं था और उस का बिजनैस भी घाटे में जा रहा था. 24 अप्रैल, 2012 को शीना के मर्डर के बाद एकदम से उस के खाते में इतनी बड़ी रकम आ गई थी कि रातोंरात उस ने अपने डूबते कारोबार को संभाल लिया था.

इस के साथ ही उस ने कोलकाता के चौरंगी लेन क्षेत्र में 1500 वर्गफुट के एरिया में  ‘1658 बार ऐंड किचन’ नाम से नया काम भी शुरू कर दिया था. इस काम में उस का एक पार्टनर भी था अजय रावला, जो उस की गिरफ्तारी के बाद भूमिगत हो गया था. इस के अलावा भी खन्ना ने पश्चिम बंगाल के बावाली शहर में अपना एक हेरिटेज रिजौर्ट बना रखा था. हालांकि यह बात पूरी तरह साफ थी कि खन्ना के पास अचानक इतनी बड़ी धनराशि कहां से आ गई थी कि उस ने अपना डूबता हुआ कारोबार संभालने के साथसाथ नए काम भी शुरू कर दिए थे. लेकिन पुलिस इस बारे में आधिकारिक तौर पर कुछ भी बताने की स्थिति में नहीं थी. सिवाय इस के कि शीना की हत्या में संजीव खन्ना भी उतना ही कसूरवार था, जितना कि इंद्राणी मुखर्जी.

शीना मर्डर केस की जांच आगे तो बढ़ रही थी, लेकिन बुरी तरह उलझीउलझी सी स्थिति में. यहां तक कि हत्या का मकसद तक साफ रूप से सामने नहीं आ रहा था. सही परिणाम सामने आते न देख 27 अगस्त, 2015 को पुलिस कमिश्नर राकेश मारिया ने इस केस की जांच का जिम्मा पूरी तरह अपने हाथ में ले लिया. उन्होंने थाने में बैठ कर केस के तीनों अभियुक्तों से खुद पूछताछ की. साथ ही उन्होंने इंद्राणी मुखर्जी के सौतेले बेटे राहुल मुखर्जी को भी वहां बुलवा लिया था. उस से भी पूछताछ की गई. इस पूछताछ में संजीव खन्ना ने खुद को निर्दोष बताते हुए कहा कि जब अपराध हुआ, तब वह अपने किसी काम से मुंबई आया था. यहां आ कर वह इंद्राणी के कहने पर उस की कार में बैठ गया था और कार चलते ही वह सो गया था. उसे नहीं मालूम कि उस की नींद के दौरान कार में या कार के बाहर क्या हुआ.

संजीव खन्ना ने पुलिस कमिश्नर मारिया को बताया, ‘‘सर, मेरी व इंद्राणी की बेटी विधि अमेरिका में पढ़ रही है. विधि को पीटर मुखर्जी ने गोद ले रखा है. शीना का पीटर के बेटे राहुल से अफेयर था. दोनों लिवइन रिलेशनशिप में भी रहे थे. इसे ले कर इंद्राणी शीना से बहुत नाराज थी. सो उस ने अपने ड्राइवर से मिल कर शीना की हत्या कर दी.’’

लेकिन पुलिस के थोड़ा सख्ती करते ही उस ने अपना अपराध स्वीकार कर लिया. उस ने मकसद के बारे में बताया कि विधि इंद्राणी की बेटी थी और शीना भी उसी की बेटी निकल आई थी. ऐसी स्थिति में उस के न रहने से इंद्राणी की प्रौपर्टी में उस का हिस्सा विधि को मिल जाता. राहुल मुखर्जी से एक घंटा पूछताछ करने के बाद उसे वापस घर भेज दिया गया था. 12 घंटे बाद उसे फिर से पूछताछ के लिए थाना खार में बुलवाया गया. पुलिस कमिश्नर राकेश मारिया ने उस से खुद सवाल किए. दरअसल वह जानना चाहते थे कि एक बरस से अधिक तक शीना के साथ लिवइन रिलेशनशिप में रहने के बाद वह एकाएक उस की ओर से बेफिक्र क्यों हो गया था? उस ने इस संबंध में पुलिस में रिपोर्ट क्यों नहीं लिखवाई?

राहुल को वरली व खार के उन फ्लैटों में भी ले जाया गया, जहां शीना और वह साथसाथ रहे थे. शीना का भाई मिखाइल अभी तक चुप था, अब उस ने भी टीवी पर आ कर सीधेसीधे साफ कहना शुरू कर दिया कि उस के पास ऐसे पक्के सबूत हैं, जो इंद्राणी मुखर्जी को शीना का कातिल करार देने के लिए काफी हैं. मिखाइल गुवाहाटी में रहता था. पुलिस ने वहां पहुंच कर उस से पूछताछ की. उस ने कुछ टेप व फोटो वगैरह पुलिस को दिए. साथ ही अपना बयान दर्ज करवाने के अलावा यह भी बताया कि शीना के साथसाथ इंद्राणी उसे भी मार देना चाहती थी. इतना ही नहीं, अभी भी उसे उस की ओर से जान का खतरा है.

मिखाइल ने पुलिस को शीना का बर्थ सर्टिफिकेट भी दिया, जिस पर उस के मातापिता के नाम वाले कौलम में उस के नानानानी उपेंद्र कुमार बोरा व दुर्गारानी बोरा का नाम दर्ज था. शीना की जन्मतिथि थी 11 फरवरी, 1989. मिखाइल उस से बड़ा था, उस के अभिभावक भी उस के नानानानी ही थे. बरसों पहले शीना को जन्म देने के बाद इंद्राणी ने शीना और मिखाइल को अपने मातापिता के पास छोड़ कर सिद्धार्थ दास से शादी कर ली थी. अभी तक सब को यही पता था कि पीटर मुखर्जी ही इंद्राणी के पति थे. अब यह बात सामने आई कि पीटर से पहले उस ने संजीव खन्ना से शादी की थी, जिस से शादी के बाद उस ने बेटी विधि को जन्म दिया था. संजीव से पहले उस ने सिद्धार्थ दास से शादी की थी.

इंद्राणी का आचरण बेहद उलझा हुआ था, पुलिस ने फिलहाल इसी को खंगालने की सोची. देखा जाए तो इंद्राणी का पूरा जीवन अय्याशी, मक्कारी और झूठी महत्त्वाकांक्षाओं से भरा था. वह जिंदगी में सब कुछ हासिल करने के लिए ऊंची से ऊंची उड़ान भरना चाहती थी, जिस के लिए वह कुछ भी करने को तैयार रहती थी. जहां जरा सा फायदा नजर आया, वहां उस ने अपना जिस्म दांव पर लगाने में भी झिझक नहीं की.  वैसे इंद्राणी का मूल नाम था परी. अपने मांबाप की एकलौती संतान थी वह. परी के पिता का पहले अच्छाभला कारोबार था, जिस के घाटे में चले जाने की वजह से वह कुंठित हो गए थे. पत्नी से भी अनबन रहने लगी थी.

औलाद के रूप में उन के यहां एक बेटी ही थी परी, जिस पर गुस्सा उतारने के लिए वह उसे जराजरा सी बात पर पीटने लगते थे. कई बार तो उसे मारपीट कर कमरे में बंद कर दिया जाता था. एक बार परेशानी की हालत में वह घर से भाग गई. लेकिन स्टेशन पर गाड़ी में बैठने से पहले ही वह पिता द्वारा पकड़ ली गई. उस रोज उस की इतनी पिटाई हुई कि वह 2 बार तो बेहोश हो गई. बहरहाल, जैसेतैसे परी ने स्कूली शिक्षा पूरी की. आगे की पढ़ाई के लिए उसे शिलांग भेज दिया गया, जहां उस के कदम बहके और 1988 में उस ने महज 17 साल की उम्र में कुंवारी मां के रूप में मिखाइल को जन्म दिया. फिर 1989 में शीना पैदा हो गई. इस के बाद दोनों बच्चों को अपने मांबाप की गोद में डाल कर वह अपनी खुद की बनाई राह पर निकल पड़ी. इस नई राह पर उस ने अपना नाम रखा इंद्राणी.

इंद्राणी ने सब से पहले शादी की अपने से दोगुनी उम्र के वकील से, जो ज्यादा दिनों तक टिक नहीं पाई. इस के बाद शिलांग में उस की मुलाकात सिद्धार्थ दास से हुई. दोनों ने विवाह भी किया, लेकिन कुछ ही दिनों में दोनों का तलाक हो गया. फिर वापस गुवाहाटी पहुंच कर उस ने साहिल नाम के लड़के से प्रेम विवाह किया. उस के साथ भी इंद्राणी का रिश्ता ज्यादा दिनों तक नहीं टिक पाया. उस ने मामूली सी अनबन पर उसे भी तलाक दे दिया. तदनंतर गुवाहाटी से कोलकाता आ कर इंद्राणी ने एक निजी फर्म में काम किया, जहां उस की मुलाकात कारोबारी संजीव खन्ना से हुई. खन्ना को अपने प्रेमजाल में फंसा कर इंद्राणी ने उस से शादी कर ली, जिस से उसे बेटी विधि पैदा हुई.

खन्ना के साथ भी उस की शादी ज्यादा दिन नहीं टिक पाई. अंतत: उस ने संजीव खन्ना को भी तलाक दे दिया और नन्हीं विधि को ले कर मुंबई चली आई. मुंबई में इंद्राणी को अच्छी नौकरी मिली तो नए पति के रूप में पीटर मुखर्जी भी मिल गए. अब उस के लिए आसमान को छूने के रास्ते खुल गए थे. स्टार पति के साथ वह खुद भी स्टार बन गई थी. हालांकि इंद्राणी की कारगुजारियों के चलते पीटर भी बदनाम होने लगे थे. खैर, पुलिस की निरंतर पूछताछ अभी भी जारी थी. इस बार की पूछताछ में इस बात का सनसनीखेज खुलासा हुआ कि कत्ल किए जाते वक्त शीना 2 माह की गर्भवती थी. इस संबंध में राहुल मुखर्जी के मामा शालीन सिंह ने देहरादून में पत्रकारों को बताया कि राहुल व शीना के रिश्ते को उन की बहन शबनम व मां सीमा सिंह ने भी मंजूरी दे दी थी.

पीटर मुखर्जी की पहली ससुराल देहरादून के बदीपुर इलाके में है, जहां उन की पहली पत्नी शबनम का गुलएशबनम नाम से फार्महाउस है. इस से कुछ ही दूरी पर उन की मां सीमा सिंह का शंकर सदन नाम से बंगला है. बकौल शालीन सिंह सन 2011 में राहुल के साथ शीना जब शबनम के फार्महाउस पर आई थी तो राहुल ने अपनी मां के सामने उस से शादी की बात रखी थी. इस पर शबनम ने अपनी मां और उन्हें सलाहमशविरे के लिए वहां बुला लिया था. शालीन सिंह के अनुसार, शीना सभी को बहुत पसंद आई थी. वैसे भी वह और राहुल पतिपत्नी की तरह रह रहे थे. इसलिए उन सब ने इस शादी के  लिए हामी भर दी थी. अगले दिन राहुल शीना को ले कर मुंबई चला गया. इस के बाद उस की कोई खबर नहीं आई थी.

पुलिस हिरासत में अपना गुनाह कबूल करते हुए संजीव खन्ना ने पुलिस से पूरा सहयोग करने की बात कहते हुए घटनास्थल पर जा कर शीना की कुछ हड्डियां बरामद करवा दीं. यहां से उस का एक दांत भी मिला. देहरादून से पुलिस ने शीना का पासपोर्ट भी बरामद कर लिया था. पुलिस ने हड्डियां, खोपड़ी व दांत वगैरह डीएनए परीक्षण के लिए सुरक्षित रख लिए थे. दरअसल इस केस में दोषियों को सजा दिलवाने के लिए अहम भूमिका फोरैंसिक प्रमाण ही निभा सकते थे. 29 अगस्त को पुलिस ने वह कार भी बरामद कर ली, जिस का इस्तेमाल शीना के मर्डर में हुआ था.

इस के बावजूद इस केस में कोई भी बात पूरी तरह खुल कर सामने नहीं आ रही थी. यही वजह थी कि लोगों को पुलिस की तफ्तीश पर जरा भी विश्वास नहीं हो पा रहा था. इसे ले कर पुलिस की किरकिरी भी हो रही थी. इसी बीच रायगढ़ के तत्कालीन एसपी आर.डी. शिंदे संदेह के घेरे में आ गए. महाराष्ट्र के डीजीपी संजीव दयाल ने बताया कि 2012 में शीना का शव मिलने पर लापरवाही बरतने वाले किसी भी पुलिसकर्मी अथवा अधिकारी को बख्शा नहीं जाएगा. उल्लेखनीय है कि तब रायगढ़ पुलिस ने जंगल से जला हुआ शव और सूटकेस मिलने पर न तो हत्या का कोई केस दर्ज किया था और न ही जले हुए शव का पोस्टमार्टम करवाया था.

30 अगस्त को इंद्राणी के गैरेज से ठीक वैसा ही सूटकेस मिला, जैसा कि शीना के शव के टुकड़े रखने के लिए इस्तेमाल किया गया था. पुलिस सूत्रों के मुताबिक इस सूटकेस में मिखाइल की हत्या कर के उस के शव के टुकड़े रखे जाने थे. बताते चलें कि मिखाइल पहले ही यह दावा कर चुका था कि शीना से भी पहले इंद्राणी की योजना उस की हत्या करने की थी. 31 अगस्त को पुलिस रिमांड खत्म हो रहा था. अभी तक की पूछताछ से पुलिस खुद भी संतुष्ट नहीं थी. रिमांड बढ़ाने के अनुरोध के साथ इंद्राणी, संजीव व श्यामवर को फिर से बांद्रा मजिस्ट्रेट की कोर्ट में पेश किया गया तो पुलिस रिमांड की अवधि 5 सितंबर, 2015 तक के लिए बढ़ा दी गई.

इस केस में हर दिन नएनए खुलासे हो रहे थे. 2 सितंबर को सिद्धार्थ दास ने कोलकाता में कुछ पत्रकारों से संपर्क कर के कहा, ‘‘शीना मर्डर केस के बारे में अखबारों और टीवी चैनलों से पता चला तो मैं सच्चाई पर पड़ा परदा उठाने को मजबूर हुआ हूं. इंद्राणी से न तो मेरी कानूनी तौर पर और न ही किसी मंदिर में शादी हुई थी. हम दोनों 1986 से 1989 तक लिवइन रिलेशनशिप में पतिपत्नी की तरह जरूर रहे थे. इसी दौरान हमारे 2 बच्चे मिखाइल और शीना पैदा हुए थे. मैं ही इन दोनों का जैविक पिता हूं. हां, इंद्राणी ने वाकई अगर शीना की हत्या की है तो निश्चित ही उसे फांसी की सजा होनी चाहिए. मैं डीएनए टेस्ट करवा कर पुलिस की हर तरह की मदद करने को तैयार हूं.’’

इसी दिन पीटर को भी पूछताछ के लिए थाने बुलाया गया, जहां उन्हें देखते ही इंद्राणी रोने लगी. इन दोनों को आमनेसामने बिठा कर पुलिस ने पीटर से उन की फाइनैंशियल ट्रांजेक्शंस की जानकारी मांगी, जो उन्होंने विस्तारपूर्वक दे दी. पीटर से पुलिस ने निरंतर 12 घंटों तक पूछताछ की. पीटर के सामने इंद्राणी ने एक बार फिर हत्या का अपना जुर्म स्वीकार किया. इसी दौरान शीना की एक डायरी भी सामने आई, जिस का हर पन्ना भावुकता से भरा था. इंद्राणी के बारे में उस ने एक जगह लिखा था, ‘मुझे नहीं पता कि मां मुझे याद करती है या नहीं, लेकिन वह मेरी मां है, मैं उन्हें चाहती हूं. वह दुनिया की सब से हसीन औरत हैं, एकदम फिल्मी हीरोहन लगती हैं. लेकिन उन की फितरत ऐसी है कि मैं उन्हें डायन कहना पसंद करूंगी.’

4 सितंबर को इस केस में बड़ा खुलासा यह हुआ कि रायगढ़ से मिली खोपड़ी का मिलान शीना के फेशियल रीकंस्ट्रक्शन से हो गया. 5 तारीख को रिमांड समाप्ति पर इंद्राणी, संजीव व श्यामवर को फिर से अदालत में पेश कर के 7 सितंबर तक इन का कस्टडी रिमांड बढ़वा लिया गया. रिमांड की इस अवधि में पुलिस ने कुछ ऐसे हथकंडों का इस्तेमाल किया कि शीना मर्डर केस की सारी सच्चाई पूरी तरह खुल कर सामने आ गई: दरअसल, इंद्राणी के लिए हर रिश्ता एक सीढ़ी था, जिस के सहारे वह आसमान की ऊंचाइयां छूना चाहती थी. सामने वाले को धोखा देना उस की फितरत में शुमार था.

दिल से तो वह किसी को भी पसंद नहीं करती थी, न अपने किसी प्रेमी या पति को और न ही अपनी औलादों को. उसे तो अपना मतलब निकालना आता था, इस के लिए सामने वाला उस के जिस्म को भले ही किसी भी तरह से क्यों न रौंद जाए. शायद इसीलिए संजीव खन्ना को तलाक दे दिए जाने के बावजूद उस ने उस से रिश्ता खत्म नहीं किया था. इंद्राणी द्वारा पुलिस को बताए अनुसार, वह अगर तेजतर्रार थी तो शीना भी कम नहीं थी. दोनों जब भी मिलतीं, दोनों का आपस में खूब झगड़ा होता था. मिखाइल भी हमेशा अपनी बहन का ही साथ देता था.

इंद्राणी ने पुलिस को बताया, ‘‘दरअसल, शीना मेरे कई राज जानती थी, जिन के आधार पर वह मुझे ब्लैकमेल किया करती थी. इस के बदले वह मुझ से एक बड़ा फ्लैट चाहती थी. मैं चूंकि उस से नफरत करती थी, इसलिए उस से छुटकारा पाने की सोचने लगी थी. यह नफरत तब और बढ़ गई, जब शीना ने पीटर के बेटे राहुल से ताल्लुकात बढ़ा कर उस से शादी की घोषणा कर दी. जबकि एक तरह से वह उस का भाई था. यह जान कर मैं उस के प्रति नफरत से भर उठी. राहुल से उसे गर्भ भी ठहर गया था.’’

बकौल इंद्राणी उस ने शीना को खत्म करने की सोची. फिर उस के दिमाग में आया कि इस सूरत में मिखाइल आसमान सिर पर उठा लेगा. अत: इंद्राणी ने उसे भी मौत की नींद सुलाने का फैसला कर लिया. इस के लिए उस ने संजीव खन्ना को बुलवा कर उस से मिल कर अपनी खूनी योजना तैयार की. पीटर मुखर्जी उन दिनों विदेश गए हुए थे. योजना बना कर इन लोगों ने मिखाइल को इंद्राणी के वरली वाले फ्लैट पर बुला कर उसे अपने साथ एक पार्टी में चलने को कहा. साथ ही बताया कि रास्ते में शीना के कालेज से उसे भी साथ ले चलेंगे.

इस बीच इंद्राणी ने जहर मिला कोल्डड्रिंक का गिलास मिखाइल के सामने रखते हुए उसे पी लेने को कहा. मिखाइल को चूंकि इंद्राणी पर पहले ही संदेह था, अत: उस ने कहा कि वह वहीं बैठ कर आराम से कोल्डड्रिंक पीता है, तब तक वे लोग जा कर शीना को ले आएं. पार्टी में जाने को उसे तैयार होने में समय भी तो लगेगा. इंद्राणी व संजीव उस की बातों में आ कर शीना को लेने चले गए. उन के जाने के बाद मिखाइल चुपचाप वहां से निकल गया. शीना को घर ला कर इन्होंने पहले वही जहर मिला कोल्डड्रिंक पिलाया, फिर उस का गला घोंट दिया. बाद में उस के शव को अच्छे कपड़े पहना कर उस का मेकअप कर दिया. इंद्राणी ने उस के होंठों पर चटकीली लाल लिपस्टिक लगा कर आंखों पर गहरे रंग का चश्मा चढ़ा दिया.

इस के बाद कार की पीछे वाली सीट पर बैठ कर इंद्राणी ने अपनी बगल वाली सीट पर शीना के शव को बैठी अवस्था में रखते हुए उस का सिर अपने कंधे पर इस तरह टिका लिया, मानो वह थक कर सो गई हो. उस के दूसरी तरफ संजीव खन्ना बैठा. ड्राइवर श्यामवर राय को बाद में बुलाया गया. इस तरह पूरे फिल्मी अंदाज में इन लोगों ने मुंबई से 85 किलोमीटर दूर रायगढ़ के जंगलों में जा कर शीना के शव के टुकड़े किए. तत्पश्चात उन टुकड़ों को अपने साथ लाई खाली अटैची में भर कर एक गड्ढे में डाला और जला दिया. इस के बाद इन लोगों की इसी तरह मिखाइल को मारने की योजना भी थी.

पीटर से भी अब तक लगातार पूछताछ होती रही थी, मगर जब ये बातें प्रमाणों के साथ सामने आईं तो उन्हें क्लीनचिट दे दी गई. 7 सितंबर को पुलिस रिमांड की समाप्ति पर तीनों अभियुक्तों को फिर से अदालत पर पेश कर के 21 सितंबर, 2015 तक के लिए न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया. इस बीच शीना की हड्डियों का डीएनए इंद्राणी और मिखाइल से मैच होने की रिपोर्ट आ गई थी. जब इस बात को ले कर विवाद बढ़ा कि राकेश मारिया को शीना मर्डर केस की जांच से हटाने के लिए उन्हें डीजी होमगार्ड्स बनाया गया है तो महाराष्ट्र सरकार ने इस की जांच सीबीआई को सौंप दी है. Crime Story

 

Crime Stories: सीरियल किलर बलदेव

Crime Stories: मांबाप की उपेक्षा का शिकार बलदेव सिंह लोगों की सेवा कर के पैसा कमाना चाहता था, लेकिन सेवा से पैसा नहीं मिला तो उस ने 2 लोगों को मौत के घाट उतार दिया. इस के बाद तो उस ने हत्याओं का ऐसा सिलसिला चलाया कि…

कुछ दिनों पहले देश के प्रमुख अखबारों में एक समाचार प्रमुखता से छपा था कि देश में एक ऐसा सीरियल किलर गिरोह सक्रिय है, जो अब तक सौ से भी ज्यादा लोगों को मौत के घाट उतार चुका है. आगे भी न जाने कितने लोगों की हत्याएं कर सकता है. गिरोह में कितने सदस्य हैं, इस की किसी को खबर नहीं थी. वे हत्याएं क्यों कर रहे थे, इस का भी कुछ पता नहीं चल रहा था. कहीं लगता था कि हत्या लूटपाट के लिए की गई है तो कहीं कुछ और ही नजर आ रहा था. कत्ल करने का तरीका जरूर पता चल गया था. पहले वे मारने वाले को विश्वास में लेते थे, उस के बाद उसे एकांत में ले जा कर उस का टेंटुआ दबा कर मौत के घाट उतार देते थे.

मजे की बात यह थी कि हत्यारों ने कहीं कोई सुराग नहीं छोड़ा था. उन्हें हत्या करते भी किसी ने नहीं देखा था. कहीं कैमरे में भी उन का यह कारनामा नहीं कैद हुआ था. मुंबई में इस गिरोह के एक सदस्य के पकड़े जाने की जानकारी जरूर मिली थी, लेकिन उस से भी विस्तार से कुछ पता नहीं चला था. शायद मुंबई पुलिस गिरोह के सभी सदस्यों को गिरफ्तार करने के बाद ही इस अमानवीय कांड के रहस्य से परदा हटाना चाहती थी. मुंबई पुलिस अपने हिसाब से मामले की जांच कर रही थी कि पंजाब की एक घटना ने अचानक इस पूरे रहस्य से परदा हटा दिया.

4 जून, 2015 को लुधियाना के थाना डिवीजन नंबर 6 के थानाप्रभारी इंसपेक्टर कंवरजीत सिंह को उन के मुखबिर से सूचना मिली कि कलगीधर रोड पर शिमलापुरी की गली नंबर 17 के मकान नंबर 5740 में रहने वाले बलवीर सिंह का बेटा इंदर सिंह देखने में तो सीधासादा साइकिल रिपेयर करने वाला गुरसिख है. लेकिन असलियत में वह बहुत खतरनाक अपराधी है. संदेह है कि वह कई हत्याओं में शामिल रहा है. मुखबिर की इस सूचना पर कंवरजीत सिंह को याद आया कि उस आदमी को तो उन्होंने कई बार थाने बुला कर उस से थोड़ीबहुत पूछताछ की थी.

इस पूछताछ में उन्हें कभी नहीं लगा था कि वह किसी हत्या में शामिल रहा होगा. धरमकरम की बातें करने वाले उस आदमी से जो छोटेमोटे अपराध हो गए थे, उस के लिए उस ने अफसोस जाहिर करते हुए यही कहा था कि अब उस ने अपनी जिंदगी वाहेगुरु को समर्पित कर दी है. किसी भी तरह का अपराध करने की कौन कहे, अब वह किसी का मन दुखाने की भी नहीं सोचता. वह सच्चाई की राह पर चलना चाहता है. कुछ भी था, मुखबिर की सूचना को न एकदम से झुठलाया जा सकता था और न ही इस बात को हलके में लिया जा सकता था. इसलिए कंवरजीत सिंह ने एसआई राजविंदर सिंह को भेज कर उस आदमी को थाने बुलवा लिया. वह आसानी से चला भी आया.

थाने में इंदर सिंह से पूछताछ शुरू हुई. पहले तो वह पुलिस को बहकाता रहा, लेकिन जब पुलिस ने उस पर मनोवैज्ञानिक दबाव बनाया तो अचानक उस ने बड़े ही आत्मविश्वास के साथ कहा, ‘‘साहब, जब किसी आदमी का बुरा वक्त आता है तो उस के हाथों ऐसेऐसे काम हो जाते हैं, जिन्हें करने के बारे में उस ने कभी सोचा भी नहीं होता.’’

‘‘तो तुम्हारे हाथों ऐसे कौन से गलत काम हो गए, जिन्हें करने के बारे में तुम ने कभी सोचा भी नहीं था?’’ एसआई राजविंदर सिंह ने पूछा.

इंदर सिंह की इन बातों से राजविंदर सिंह को थोड़ी हैरानी हुई थी. उस समय वह 2 सिपाहियों के साथ उस से सहज रूप से बात कर रहे थे. शुरुआती पूछताछ चल रही थी.

इसी शुरुआती पूछताछ में राजविंदर सिंह उसे बातों में उलझा कर धीरेधीरे मनोवैज्ञानिक ढंग से मुद्दे की बात पर इस तरह ले आए कि उस ने ऐसा अपराध स्वीकार कर लिया कि सुन कर दोनों सिपाहियों सहित राजविंदर सिंह के पैरों तले से जमीन खिसक गई. राजविंदर सिंह के सवालों के जवाब में इंदर सिंह ने कहा था, ‘‘गलत तो गलत ही है साहब, हम आदमी पर आदमी मारते गए, जो भी हत्थे चढ़ा, टेंटुआ दबा कर उसे ऊपर पहुंचा दिया. कभी हिसाब लगाने की कोशिश ही नहीं की कि हम ने कितने लोगों को मौत के घाट उतार दिया है.’’

इंदर सिंह के इस अपराध स्वीकारोक्ति के बाद राजविंदर सिंह उसे सिपाहियों की निगरानी में छोड़ कर सीधे थानाप्रभारी के पास पहुंचे. राजविंदर की बात सुन कर कंवरजीत सिंह भी सकते में आ गए. इस का मतलब मुखबिर की सूचना एकदम सही थी. उन्होंने तुरंत इस बात की जानकारी लुधियाना के डीसीपी नवीन सिंगला को दे कर उन से दिशानिर्देश मांगे. नवीन सिंगला ने कहा, ‘‘इस तरह की बातें करने वाले का या तो दिमाग हिला होता है या फिर वह बहुत शातिर किस्म का होता है. इसलिए उस आदमी से ज्यादा सख्ती करने के बजाय मनोवैज्ञानिक तरीके से ही पूछताछ जारी रखो. अगर वह लुधियाना के किसी हत्या के मामले के बारे में बताए तो उसे विधिवत गिरफ्तार कर लो.’’

कंवरजीत सिंह राजविंदर के साथ इंदर सिंह से मनोवैज्ञानिक तरीके से पूछताछ करने लगे. इस पूछताछ में इंदर सिंह ने जो बताया, उस से उस की कहानी इस तरह से सामने आई: इंदर सिंह, जिस ने अपना असली नाम बलदेव सिंह बताया, जिला लुधियाना की तहसील जगराओं की चुंगी नंबर 5 के पास स्थित मोहल्ला अगवाड़गुजरां का रहने वाला था. उस के पिता का नाम हरभजन सिंह था. उस के मांबाप ने उस का नाम बलदेव सिंह रखा था. 4 भाइयों में बलदेव दूसरे नंबर पर था. बड़े भाई निहाल सिंह और उस से छोटे डिंपल सिंह का विवाह हो चुका था. लेकिन उस की और सब से छोटे जस्सा सिंह की शादी नहीं हुई थी.

सातवीं पास करने के बाद बलदेव ने वैल्डिंग का काम सीखा और एक फैक्ट्री में नौकरी करने लगा. जब तक वह बाहर रहता, खुश रहता. लेकिन घर आते ही उस की खुशी गायब हो जाती. इसलिए उस का मन घर में बिलकुल नहीं लगता था. इस की वजह यह थी कि उस के पिता जराजरा सी बात पर उस की मां की पिटाई करते रहते थे, जो उस से बरदाश्त नहीं होता था. पिता ने घर में इस तरह अपना दबदबा बना रखा था कि घर में उस से कुछ कहने की किसी में हिम्मत नहीं थी. कह तो बलदेव सिंह भी कुछ नहीं पाता था, लेकिन उसे यह बात खलती बहुत थी. एक दिन उस के पिता किसी बात पर उस की मां को मारनेपीटने लगे तो उस से बरदाश्त नहीं हुआ और उस ने आगे बढ़ कर पिता का हाथ पकड़ लिया.

इस बात पर पिता ने तो उसे मारापीटा ही, मां ने भी उसे ही डांट कर उस की गलती निकाली. यही नहीं, पिता ने घर से निकल जाने को कहा तो उस के इस फैसले में मां ने भी उसी का साथ दिया. इस के बाद उस घर में रहना बलदेव सिंह को ठीक नहीं लगा और उस ने हमेशा के लिए अपना घर छोड़ दिया. इधरउधर भटकता हुआ एक दिन वह हिमाचल प्रदेश के सुप्रसिद्ध मणिकर्ण गुरुद्वारा पहुंचा. वहां रहते हुए संगतसेवा में उस का मन कुछ इस कदर रमा कि उस ने वहीं रहने का मन बना लिया. उसे वहां रहते हुए धीरेधीरे 6 साल बीत गए.

एक बार वहां इस तरह का एक ऐसा धार्मिक जत्था आया, जो देश के सभी धर्मस्थलों की यात्रा पर निकला था. मणिकर्ण में रहते हुए बलदेव सिंह को काफी अरसा गुजर गया था, इसलिए अन्य धर्मस्थलों को देखने की चाह में वह उस जत्थे के साथ आगरा चला गया. वहां गुरु का ताज गुरुद्वारा उसे इस कदर पसंद आया कि वह वहीं रुक गया और संगतों की सेवा करने लगा. यहां मुंबई का रहने वाला एक लंगड़ा एक अन्य लड़के के साथ गुरुद्वारा के जानवरों की सेवा करता था. रोजरोज मिलने से बलदेव की उन से दोस्ती हो गई. कुछ ही दिनों में उन की यह दोस्ती घनिष्ठता में बदल गई. इस की वजह यह थी कि तीनों की पारिवारिक स्थितियां करीबकरीब एक जैसी थीं.

बलदेव की तरह उन दोनों के घरों में भी उन के मांबाप के बीच झगड़ा रहता था. इन्हीं झगड़ों से परेशान हो कर वे भी घर से भाग आए थे. एक दिन तीनों ने सलाह की कि क्यों न वे मिल कर शहर में एक कमरा ले लें, जहां से आराम से सो सकें. इस के बाद उन्होंने आगरा शहर में वाजिब किराए पर एक कमरा ले लिया. इस के बाद वे दिन भर गुरुद्वारा में सेवाकार्य करते और खापी कर रात में अपने कमरे पर आ कर आराम से सो जाते. उन के पास जो थोडे़बहुत पैसे थे, उन से उन्होंने कमरे का पहले महीने का किराया दे दिया था. आगे के लिए उन के पास पैसे नहीं थे. गुरुद्वारा में उन की सेवा के बदले मुफ्त में खाने और ठहरने की सुविधा थी. इस के अलावा उन्हें वहां से कोई तनख्वाह वगैरह नहीं मिलती थी.

एक तरह से किराए का कमरा ले कर उन्होंने बेकार ही अपना खर्च बढ़ा लिया था. पैसों की दिक्कत आई तो सलाहमशविरा कर के उन्होंने उस का भी हल निकाल लिया. दरअसल, दिन भर तो गुरुद्वारा में श्रद्धालुओं की भीड़ रहती ही थी, रात में भी बाहर से आए लोगों की अच्छीखासी संख्या वहां ठहरा करती थी. इसलिए वहां के सभी कमरे प्राय: भरे रहते थे. ऐसे में बलदेव और उस के दोस्तों को अक्सर गुरुद्वारा के प्रांगण में फर्श पर सोना पड़ता था. इसी वजह से उन्होंने शहर में किराए का कमरा लिया था. पैसे की दिक्कत हल करने के लिए उन्होंने योजना यह बनाई कि रात में गुरुद्वारा से चलते समय वह ऐसे 2-3 लोगों को अपने साथ कमरे पर ले आएंगे, जिन्हें वहां कमरा नहीं मिला हुआ होगा. कमरे पर ला कर वे उन की खूब सेवा करेंगे, जिस के बदले में वे उन से कुछ बख्शीश मांग लिया करेंगे.

इस के बाद उन्होंने एक दंपति को अपने साथ ले जाने के लिए राजी कर लिया. उन्होंने उन्हें अपने कमरे पर ला कर उन की खूब सेवा की. उस दंपति ने भी अपना हक मानते हुए उन से सेवा तो खूब करवाई, लेकिन सुबह चलते समय बख्शीश के नाम पर उन्हें कुछ नहीं दिया. जबकि उन के पास पैसों की कमी नहीं है, इस बात का अंदाजा बलदेव और उस के साथियों को हो गया था. दंपति के इस रवैए पर उन्हें गुस्सा आ गया. परिणामस्वरूप उन्होंने पतिपत्नी को पकड़ कर उन के टेंटुए दबा दिए. दोनों को मौत के घाट उतार कर उन का सारा पैसा और अन्य कीमती सामान ले लिया.

बिना किसी योजना के अचानक उन लोगों ने 2 कत्ल कर दिए थे. परेशान होना लाजिमी था. पुलिस पकड़ कर जेल में डाल देती. पुलिस से बचने के लिए लाशों को कमरे में बंद कर के उन्होंने बाहर से ताला लगाया और बस से मथुरा चले गए. वहां से पीलीभीत जाने के लिए उन्होंने बसअड्डे से एक टैक्सी की. अब तक कत्ल करने की उन की घबराहट पूरी तरह खत्म हो चुकी थी. अब उन्हें लगने लगा था कि पैसा कमाने का यह बढि़या और आसान तरीका है. टैक्सी में लंगड़ा आगे ड्राइवर की बगल वाली सीट पर बैठा था. बलदेव और दूसरा साथी पीछे वाली सीट पर बैठे थे.

तीनों में दोस्ती जरूर थी, लेकिन अभी तक वे एकदूसरे के निजी जीवन के बारे में ज्यादा कुछ नहीं जानते थे. सही बात तो यह थी कि अभी उन्हें एकदूसरे के नाम तक पता नहीं थे. वे एकदूसरे को बाबाजी कह कर पुकारते थे. हालांकि बाद में बलदेव को एक का नाम बलजिंदर मालूम हो गया था. मथुरा के बसअड्डे से चल कर टैक्सी करीब एक किलोमीटर गई होगी कि तीनों ने एकदूसरे को आंखों का इशारा किया और टैक्सी रुकवा ली. बलजिंदर ड्राइवर के ठीक पीछे बैठा था. टैक्सी के रुकते ही उस ने ड्राइवर के गले में रस्सी डाली और कसना शुरू कर दिया. लंगड़े और बलदेव ने ड्राइवर को तब तक पकड़े रखा, जब तक वह मर नहीं गया. उस की तलाशी में उस के पास उन्हें मात्र 8 सौ रुपए मिले.

सुनसान जगह पर लाश को फेंक कर टैक्सी लंगड़ा चलाने लगा. कोई 7-8 किलोमीटर दूर जाने पर एक टै्रक्टर ट्रौली से कार का एक्सीडेंट हो गया. तब कार को वहीं छोड़ कर वे बस से अमरियां की ओर चल पड़े. अमरियां से करीब 20 किलोमीटर दूर एक कस्बे में बस रुकी तो उन्होंने बस छोड़ दी और एक टैक्सी किराए पर ले ली. इस के ड्राइवर को भी पहले की तरह रास्ते में मार कर लाश गड्डे में फेंक दी और कार ले कर चले गए. इस ड्राइवर की जेब से उन्हें मात्र 3 सौ रुपए मिले थे.अमरियां शहर में इन्होंने खायापिया. ये किसी छोटी जगह पर रुकना चाहते थे. अमरियां से थोड़ा आगे बढ़े होंगे कि टैक्सी का बोनट झटके से खुल गया और उस की विंडस्क्रीन टूट कर बिखर गई.

टैक्सी को उसी हालत में वहीं छोड़ कर वे एक ट्रक से अमरियां लौट आए और वहां से पीलीभीत की ओर चले गए. वहां से इन्हें कारसेवा वालों की बस मिल गई, जिस से ये पंजाब चले गए. पंजाब पहुंच कर लंगडे के कहने पर उसे मोरिंडा फतेहगढ़ रोड पर स्थित रेलवे फाटक पार करते ही खुले में पड़ने वाले संतों के एक डेरे पर उतार दिया गया. जबकि बलजिंदर और बलदेव पहले लुधियाना गए और फिर वहां से अमृतसर चले गए. अमृतसर में दोनों हरमंदिर साहिब गुरुद्वारा में सेवा करते हुए अपना समय बिताने लगे. यहां एक दिन उन की मुलाकात एक ऐसे आदमी से हुई, जो उन दिनों मणिकर्ण गुरुद्वारे में सेवा किया करता था, जब ये भी वहां सेवा कर रहे थे.

वह आदमी पेशे से पेंटर था, शहर में उस की अपनी दुकान थी. एक दिन वह बलदेव और बलजिंदर को अपनी दुकान पर ले गया, जहां उन्होंने उसे लूटने की नीयत से उस का टेंटुआ दबा दिया. मारने के बाद उस की सोने की चेन, अंगूठियां और नकदी लूट कर उसी के स्कूटर से वे लुधियाना आ गए. यहां गिल चौक इलाके के एक आदमी को बलजिंदर ने वह स्कूटर बेच दिया, साथ ही यहीं पर रहने का तय कर लिया. लुधियाना के कोटमंगलसिंह इलाके में उन्होंने किराए पर कमरा ले लिया. मकान मालिक बुजुर्ग औरत थी. एक दिन उन्हें मौका मिला तो उन्होंने गला घोंट कर उसे भी मार दिया.

यहां लूटपाट करने के बाद दोनों एक संत के डेरे पर जा कर वहां आने वाले श्रद्धालुओं की सेवा करने लगे. लुधियाना में ही बलदेव की एक दूर की रिश्तेदार रहती थीं. 15 दिनों बाद वह बलजिंदर को साथ ले कर उस से मिलने चला गया. पहले भी वह उन के यहां जाता रहता था. लेकिन तब उस की सोच इस तरह की नहीं थी. जिंदगी के प्रति अब उस का नजरिया बदल चुका था. बलदेव की उस रिश्तेदार देविंदर कौर के गले में पहनी सोने की मोटी चेन और कानों में लटकते कीमती झुमके देख कर बलजिंदर के हाथों में खुजली होने लगी. उस ने आव देखा न ताव, गले में डाल रखे दुपट्टे से ही देविंदर कौर का काम तमाम कर दिया. इस के बाद बलदेव ने उस के सारे गहने उतार लिए.

यहां से भाग कर दोनों हुजूर साहिब चले गए, जहां उन्हें पुराना सेवादार गुलजार सिंह मिल गया. इस के बाद तीनों एकसाथ मुंबई चले गए. वहां वे चूडि़यां बनाने वाली फैक्ट्री में काम करने लगे. एक महीने बाद बलदेव अकेला दिल्ली आ गया और फर्नीचर का काम करने लगा. दिल्ली में उसे किसी अखबार से पता चला कि मुंबई में बलजिंदर एक फैक्ट्री मालिक की हत्या के आरोप में गोरेगांव पुलिस द्वारा गिरफ्तार कर लिया गया है. उस में छपे समाचार में यह भी लिखा था कि पुलिस की पूछताछ में उस ने अपने साथियों के साथ मिल कर 105 लोगों से अधिक की हत्याएं करने की बात कबूली है. इस से बलदेव सिंह को यह सोच कर घबराहट होने लगी कि बलजिंदर ने कहीं उस का नाम तो नहीं ले लिया.

डर की वजह से वह गुरुद्वारा शीशगंज में जा कर रहने लगा. कुछ दिनों बाद उसे वहां एक ऐसा बुजुर्ग जोड़ा मिला, जिन का जवान बेटा कई सालों पहले उन से नाराज हो कर कहीं चला गया था. उस की तलाश में वे मारेमारे फिर रहे थे. आंखों से भी उन्हें कम दिखाई देने लगा था. कुदरत का खेल देखो कि बलदेव की शक्लसूरत और कदकाठी उन के बेटे से हूबहू मेल खा रही थी. उसे देखते ही उन्होंने जिद पकड़ ली कि वही उन का खोया बेटा है. पतिपत्नी बलदेव से मिन्नत करने लगे कि वह गुस्सा थूक दे और उन के साथ घर लौट चले. इस बुजुर्ग दंपति का नाम था बलबीर कौर और सरदार बलबीर सिंह. ये लुधियाना के कलगीधर रोड पर शिमलापुरी की गली नंबर 17 के म.नं. 5740 के रहने वाले थे. उन के बेटे का नाम था इंदर सिंह.

बलदेव सिंह उन्हें बिलकुल नहीं जानता था. लेकिन उसे लगा कि कुदरत ऐसा खेल खेल कर शायद उसे बचाना चाहती है. वह उस बुजुर्ग दंपति के साथ उन का बेटा इंदर सिंह बन कर लुधियाना आ गया. उस ने तय कर लिया था कि अब वह कभी कोई अपराध नहीं करेगा. यहां भी दुर्भाग्य ने उस का साथ नहीं छोड़ा. इंदर सिंह भी छोटेमोटे अपराधों में पुलिस में वांछित था. इसी डर से वह भगौड़ा हुआ था. उस के मांबाप के मन में न जाने कैसे यह बात बैठ गई थी कि वह उन की किसी बात पर खफा हो कर घर छोड़ कर चला गया था.

पुलिस को जब उस के घर आने की खबर मिली तो उसे थाने में बुलाया जाने लगा. इस बात का पुलिस को कभी अंदाजा नहीं था कि वह इंदर सिंह न हो कर उस का हमशक्ल है. चूंकि उस के खिलाफ दर्ज मामले ज्यादा गंभीर नहीं थे, इसलिए पुलिस उसे थाने बुला कर थोड़ीबहुत पूछताछ कर के समझाबुझा कर घर भेज देती थी. लेकिन जब उस के सीरियल किलर होने की जानकारी मिली तो पुलिस ने उस से मनोवैज्ञानिक तरीके से विस्तृत पूछताछ की. तब उस ने अपना अपराध स्वीकार करने में देर नहीं लगाई. इस पूछताछ से लुधियाना में हुए 2 कत्ल के मामले भी हल हो गए. जहां तक 105 से अधिक कत्ल करने संबंधी छपे समाचार का सवाल था तो इस बारे में उस ने पुलिस को यही बताया कि इस के विधिवत खुलासा बलजिंदर ही कर सकता है.

लुधियाना में हुए कत्ल के मामलों में बलजिंदर भी वांछित था, इसलिए पुलिस ने 22 अगस्त, 2015 को उसे ट्रांजिट रिमांड पर लुधियाना ले आने का प्रयास किया. लेकिन मुंबई पुलिस का कहना है कि इस बारे में जब तक महाराष्ट्र सरकार की अनुमति नहीं मिल जाती, इतने खौफनाक अपराधी को मुंबई से बाहर नहीं भेजा जा सकता. इस दौरान बलदेव सिंह को 5 दिनों के कस्टडी रिमांड पर रख कर गहन पूछताछ की गई. उस के बाद लुधियाना पुलिस ने उसे न्यायिक हिरासत में जेल भिजवा दिया, जहां से अन्य जगहों की पुलिस उस के द्वारा अपने यहां किए गए अपराध संबंधी पूछताछ करने के लिए ट्रांजिट रिमांड पर ले जा रही है.

पंजाब पुलिस बलदेव सिंह का डोजियर देश के अन्य तमाम राज्यों को भेज कर उन के यहां उस के बताए तरीके से हुई हत्याओं की सूची तैयार कर रही है. पुलिस का कहना है कि बलदेव सिंह ने जितने कत्ल किए हैं, उन सब का ब्यौरा सिलसिलेवार बताना, उस के लिए संभव नहीं है. वैसे उस का कहना है कि वह जिस भी शहर में गया है, वहां उस ने कम से कम 5-7 हत्याएं तो की ही हैं. Hindi Stories

—कथा पुलिस सूत्रों पर आधारित.

 

Love Story: इश्क में सिर कलम – परिवार जान का दुश्मन

Love Story: 19 साल की कीर्ति हमेशा की तरह घर से बाजार जाने को कह कर निकली थी. मां को बताया था कि वह पहले कांता के पास जाएगी. उसे भी साथ में जाना है. उस को अपने लिए कुछ जरूरी सामान खरीदना है. रास्ते में ही उस का भाई कुणाल मिल गया. वह ट्यूशन पढ़ कर साइकिल से घर लौट रहा था. उस ने टोका था, ‘‘कहां जा रही है अकेली?’’

कुणाल कीर्ति से केवल एक साल छोटा था. भाई को भी उस ने सहमते हुए वही कहा, जो मां से बता कर निकली थी. इस पर उस ने सवाल भी किए थे, ‘‘लेकिन, कांता का घर तो पीछे रह गया?’’ कुणाल ने उस से कहा.

इस पर सफाई देते हुए वह बोली, ‘‘कांता खेत पर गई हुई है, रास्ते में मिल जाएगी.’’

उस के बाद कीर्ति तेजी से आगे बढ़ गई और कुणाल तेजी से साइकिल के पैडल मारते हुए वहां से चला गया.

उस के जाते ही कीर्ति अपने आप से बोलने लगी, ‘हुंह… बड़ा आया सवाल- जवाब करने वाला. खुद तो ट्यूशन के बहाने दोस्तों के साथ घूमता फिरता है और हमें रोकताटोकता रहता है.’

इस के बाद कीर्ति अपने प्रेमी अविनाश के पास एक निश्चित जगह पर पहुंच गई, जो उस का इंतजार कर रहा था. उसे देखते ही अविनाश खुश हो गया. वह अपने मोबाइल में टाइम दिखा कर चहकती हुई बोली, ‘‘देखो, आज मैं ने तुम्हारी शिकायत पूरी कर दी है. एकदम समय पर पहुंच गई हूं.’’

‘‘मुझे तुम्हारा भाई घर जाते हुए दिखा था, तब लगा तुम शायद आज नहीं आ पाओगी, लेकिन तुम ने तो वाकई कमाल कर दिया.’’ खुशी और आश्चर्य से अविनाश ने उस के हाथ पकड़ लिए.

‘‘चलो, उधर पीछे की ओर बैठते हैं. मैं तुम्हारे लिए कुछ लाई हूं.’’ कीर्ति स्कूल की पुरानी बिल्डिंग की ओर इशारा करती हुई बोली.

‘‘हां चलो, मैं ने वहां पर एक अच्छी जगह देखी है, जहां अब कोई आताजाता नहीं है. और वहां बैठने लायक थोड़ी साफसफाई भी है.’’ अविनाश बोला.

उस के बाद दोनों सरकारी स्कूल की पुरानी बिल्डिंग के पिछवाड़े खाली जगह पर चले गए. वहां छोटेबड़े पेड़पौधे लगे थे. हरियाली थी. मनमोहक जगह थी. लोगों की नजरों से बच कर कुछ समय वहां बिताया जा सकता था.

दोनों वहीं एक पेड़ की ओट में बैठ गए. कीर्ति अपने साथ पीठ पर लादे छोटा सा बैग उतार कर खोलने लगी. उस में से गांठ लगी पौलीथिन निकाली.

‘‘क्या है इस में?’’ अविनाश ने जिज्ञासावश पूछा.

‘‘अभी बताती हूं. इस में तुम्हारी पसंद का नाश्ता है. मैं ने खासकर तुम्हारे लिए कांदापोहा बनाया है. लेकिन मिर्ची तेज लगेगी. तुम्हें पसंद है न, इसीलिए हरी मिर्च ज्यादा डाली हैं.’’ कीर्ति पौलीथिन पैक की गांठ खोलती हुई बोली.

‘‘अरे वाह! मेरी पसंद का तुम कितना खयाल रखती हो. मैं भी तुम्हारे लिए कुछ ले कर आया हूं.’’ अविनाश सामने बैठते हुए बोला.

‘‘क्या लाए हो दिखाओ,’’ कीर्ति बोली.

‘‘पहले पोहा खा लेता हूं, फिर दिखाता हूं, खूशबू अच्छी आ रही है.’’ अविनाश बोला.

‘‘देखो कैसा कलर है पोहा का. नमक कम लगे तो बताना अलग से पुडि़या में है.’’ कीर्ति तब तक पोहा एक छोटी सी थर्मो प्लेट में निकाल चुकी थी.

अविनाश ने भी अपने बैग से एक छोटा सा पैकेट निकाल लिया था. उसे देखते ही कीर्ति चहक पड़ी, ‘‘अरे हेडफोन! यह महंगा वाला लगता है…’’

‘‘हां, थोड़ा महंगा है, लेकिन कार्डलैस है. तुम को औनलाइन पढ़ाई में दिक्कत आ रही थी, इसलिए तुम्हारे लिए खरीदा है.’’ अविनाश बोला. उस ने पैकेट खोल कर गले में पहनने वाले हेडफोन को उस के गले में डाल दिया.

‘‘पोहा भी खाओ ना,’’ कीर्ति खुशी से बोली.

‘‘कीर्ति हम लोग कब तक छिप कर मिलते रहेंगे. तुम्हारा भाई हमेशा हमें शक की निगाह से देखता है. वो है तो उम्र में छोटा लेकिन पता नहीं क्यों उस की नजरें हमेशा हमें तरेरती रहती हैं.’’

‘‘क्या करूं अविनाश, मैं भी उस से परेशान रहती हूं. पता नहीं इस हेडफोन को ले कर कितने सवालजवाब करे.’’

‘‘बोल देना मैं ने ट्यूशन पढ़ा कर कमाए पैसों से खरीदा है.’’

इस तरह कीर्ति और अविनाश का आपसी प्रेम परवान चढ़ने लगा था. वे एकदूसरे के दिलों की भावना को गहराई से समझने लगे थे, उन के बीच प्रेम में कोई छलावा या दिखावा नहीं था. केवल एक ही बात मन को कचोटती थी कि उन्हें मिलने के लिए घर वालों से कई तरह के झूठ बोलने पड़ते थे. ऐसा करते हुए कीर्ति कई बार परेशान हो जाती थी. मन दुखी हो जाता था.

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महाराष्ट्र के औरंगाबाद जिले में वैजापुर तहसील के लाड़गांव शिवार की रहने वाली कीर्ति को गांव के ही अविनाश संजय थोरे से प्यार हो गया था. दोनों अकसर ही छिपछिप कर मिलते और घंटों प्यारभरी बातों में डूबे रहते थे. इस बीच उन्होंने हर तरह के सपने बुने थे.

उन के बीच पढ़ाईलिखाई से ले कर सिनेमा, संगीत, फैशन, मौडल, एंटरटेनमेंट, हाटबाजार, शहरी मौल मल्टीप्लेक्स और कोरोना तक की बातें होती थीं.

कई बार वे आलिया भट्ट से ले कर अमिताभ बच्चन और दीपिका पादुकोण से ले कर रणवीर, अक्षय और विराट कोहली को ले कर चर्चा और बहस करने लगते थे.

जब मोदी, राहुल, प्रियंका की बातें होतीं तब दोनों चिढ़ जाते थे. अविनाश कहता कि हमें राजनीति से कोई मतलब नहीं है. कीर्ति भी तुनकती हुई कहती, मुझे कौन सी राजनीति से मतलब है. अरे, लौकडाउन लगने से वे बातों में आ जाते हैं. मैं क्या करूं.

प्यार परवान चढ़ा तो दोनों ने जीवन भर साथ रहने का निश्चय कर लिया. इस बारे में उन्होंने अपनीअपनी किताबें हाथ में ले कर कसम खाई कि वे शादी करेंगे एकदूसरे के साथ ही.

उन्होंने अपनी किताबों पर एकदूसरे का नाम लिख कर अदलाबदली भी कर ली थी. हालांकि दोनों को ही मालूम था कि परिवार और बिरादरी वाले उन की शादी में रोड़ा अटकाएंगे. वजह थी दोनों ही जातियों के बीच बरसों से चला आ रहा मनमुटाव.

लाड़गांव शिवार में 2 उपनाम के परिवारों में विवाह संबंध नहीं होते हैं. यह कोई एक गोत्र वाला मामला नहीं है, बल्कि दोनों के बीच वर्चस्व और मानमर्यादा की लड़ाई का है. एक पक्ष का मानना है कि उन के नाम वाले लोग ही गांव के मुखिया रहे हैं, इसलिए यहां उन की ही चलेगी.

जबकि दूसरे पक्ष का तर्क होता है कि वह भी उसी जाति से ताल्लुक रखते हैं और उन्होंने भी राज किया है, इसलिए उन का वर्चस्व और मानसम्मान ज्यादा होना चाहिए. इस भाव के कारण दोनों बिरादरी के लोग एकदूसरे को नीचा दिखाने की जुगत में लगे रहते हैं.

ऐसे गांव में जब कीर्ति और अविनाश के दिलों में एकदूसरे के लिए प्यार की कोपलें फूटीं तो वे शादी की इच्छा घर वालों से बताने में डर गए. उन्हें पता था कि दोनों के घर वाले इस के लिए कभी भी राजी नहीं होंगे. अलबत्ता बात का बतंगड़ बन जाएगा और नौबत मरनेमारने तक आ जाएगी. तब दोनों प्रेमियों ने भाग कर शादी करने का फैसला कर लिया. जून 2021 में दोनों ने किसी को बताए बिना घर से भाग कर पुणे के आलंदी में विवाह कर लिया.

इस शादी की सूचना जब कीर्ति के पिता संजय मोटे को मिली, तो उस ने घर में तांडव शुरू कर दिया. वह आगबबूला हो गया. उसे लगा कि बेटी के इस कदम से उस की प्रतिष्ठा धूमिल हो गई है. गांव भर के आगे उस की नाक कट गई है. इस तनाव के चलते उस ने अपनी पत्नी शोभा पर ही बेटी को नहीं संभाल पाने का आरोप मढ़ दिया.

वह आए दिन अपनी पत्नी को कोसने लगा. उस के साथ गालीगलौज और मारपीट तक शुरू कर दी. हर गलती के लिए वह अपनी पत्नी को ही दोषी ठहरा देता. यही नहीं, कीर्ति के छोटे भाई कुणाल पर भी जबतब बाप का गुस्सा फूटने लगा.

संजय मोटे के उग्र तेवरों के कारण पूरा परिवार बुरी तरह तनाव में आ गया था. सब के दिमाग में यह बात बैठ गई कि कीर्ति ने प्रेम विवाह कर गांव भर में उन की इज्जत मिट्टी में मिला दी है.

कुछ दिनों बाद कीर्ति और अविनाश लाड़गांव आ कर रहने लगे. कीर्ति के अपनी ससुराल में पति के साथ रहने की खबर कीर्ति के घर वालों को मिली.

उन्हें यह भी मालूम हुआ कि कीर्ति को अविनाश के घर वालों ने अपना लिया है. कीर्ति अपनी ससुराल में रचबस गई थी. खुशी की बात यह थी कि वह गर्भवती थी. उस के पेट में 2 माह का गर्भ था.

कीर्ति की मां शोभा को जब दोनों के गांव लौटने का समाचार मिला तो एक दिन वह जा कर बेटीदामाद से उन के घर पर मिल आई. बेटी और दामाद से बड़ी आत्मीयता से मिली. कीर्ति ने महसूस किया कि उस की मां को अब उस की अविनाश से शादी को ले कर कोई शिकायत नहीं है.

मां ने मीठीमीठी बातें कर पिता को भी मना लेने का वादा किया. जबकि सच्चाई तो यह थी उस की मां भीतर ही भीतर सुलग रही थी. उस के दिलोदिमाग में खुराफाती योजना बन चुकी थी. यह बात उस ने केवल अपने बेटे संकेत को बताई.

योजना के मुताबिक ही 5 दिसंबर, 2021  को शोभा फिर अपने बेटे कुणाल के साथ कीर्ति की ससुराल गई. उस वक्त कीर्ति खेत में अपने सासससुर के साथ काम कर रही थी. मां और भाई को आया देख वह खेत का काम छोड़ कर खुशीखुशी घर दौड़ी आई.

उस ने बड़े प्यार से मां और भाई को पानी का गिलास दिया और चाय बनाने के लिए रसोई में चली गई. उस समय उस का पति अविनाश भी घर पर ही था, लेकिन तबियत ठीक नहीं होने के कारण वह दूसरे कमरे में लेटा हुआ था.

अचानक अविनाश को रसोई में बरतनों के गिरने की आवाज सुनाई दी. वह बिस्तर से उठ कर रसोई में आया. वहां का नजारा देख कर तो उस के होश ही उड़ गए. वह रसोई के दरवाजे पर ठिठक गया. हाथपैर जैसे सुन्न पड़ गए.

रसोई में शोभा यानी उस की सास ने अपनी बेटी कीर्ति के दोनों पैर कस कर पकड़ रखे थे और उस का छोटा भाई कुणाल एक धारदार हथियार कोयता से बहन की गरदन पर वार पर वार किए जा रहा था.

मां और भाई के हमले से कीर्ति बुरी तरह छटपटा रही थी. मगर उस की छटपटाहट क्षण भर में ठहर गई और भाई ने अंतिम वार कर उस की गरदन को धड़ से अलग कर दिया.

बहन का सिर बालों से पकड़ कर लहराते हुए दूसरे हाथ में खून सना कोयता लिए दरवाजे पर खड़े अविनाश को मारने के लिए झपटा. बीमार अविनाश कमजोरी महसूस कर रहा था. वह किसी तरह वहां से बच कर निकल भागा.

कीर्ति का भाई बहन का सिर हाथ में ले कर बाहर बरामदे में आया. बाहर खड़ी भीड़ को उस ने बहन का खून टपकता सिर दिखाया. मोबाइल निकाल कर सेल्फी खींची और फिर मां को मोटरसाइकिल पर बैठा कर पुलिस थाने जा पहुंचा. थाने में उस ने हत्या का जुर्म स्वीकारते हुए सरेंडर कर दिया.

वैजापुर के डीएसपी कैलाश प्रजापति ने इस बारे में मीडिया को जानकारी दी. उन्होंने कहा कि औनर किलिंग का यह रोंगटे खड़े कर देने वाला कांड है. छोटे भाई ने जिस बेरहमी से अपनी बड़ी बहन की हत्या की, उसे देख कर पुलिस भी थर्रा गई.

उन्होंने बताया कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट से पता चला है कि कीर्ति 2 महीने की गर्भवती थी. एक मां द्वारा एक होने वाली मां की ऐसी जघन्य हत्या समाज की संकीर्ण मानसिकता बताती है.

अपनी झूठी इज्जत के लिए अपने खून का भी खून करने में लोग नहीं हिचकते हैं और यहां तो एक महिला ने ऐसा कांड कर डाला. इन दोनों से पूछताछ में पता चला कि ये लोग कीर्ति की हत्या की योजना पहले से ही बना कर बैठे थे. बस मौके की तलाश थी, जो उस रोज मिल गया था.

इस मामले में मां और बेटे के खिलाफ भादंवि की धारा 302 के तहत हत्या का आरोपी बनाया गया है. आधार कार्ड और स्कूल प्रमाण पत्र के अनुसार कुणाल नाबालिग था, इसलिए न्यायालय ने उसे नाबालिग मानते हुए औरंगाबाद के बाल न्यायालय के समक्ष हाजिर करने के आदेश दिए. जहां से उसे जुवेनाइल होम भेज दिया गया. जबकि मां शोभा को हत्या के आरोप में जेल भेजा गया है. Love Story

—कथा पुलिस सूत्रों पर आधारित. कथा में कुणाल परिवर्तित नाम है.

Delhi Crime: कातिल हुई मुस्कान – मौत का कारण बनी पत्नी

Delhi Crime: 8 अगस्त, 2021 की बात है. दक्षिणपूर्वी दिल्ली के न्यू फ्रैंड्स कालोनी पुलिस को क्षेत्र के नाले में एक बड़ा सूटकेस मिला. उस सूटकेस में से हाथ निकला हुआ था. इस से यह बात समझने में देर नहीं लगी कि जरूर इस में किसी की लाश है. लिहाजा तुरंत ही मौके पर क्राइम इनवैस्टीगेशन टीम को बुला लिया.

जब बैग खोला गया तो उस में 35-37 साल के एक व्यक्ति की लाश निकली जो फूली हुई थी. उस के दाढ़ी थी. उस की गरदन पर घाव था, जिस पर तौलिया लपेटा हुआ था. लाश के नीचे एक चादर भी थी. उस के दाहिने हाथ पर अंगरेजी में ‘नवीन’ नाम का टैटू गुदा था. पुलिस ने मौके की काररवाई कर के लाश एम्स की मोर्चरी में सुरक्षित रखवा दी और इस की सूचना दिल्ली के सभी थानों को दे दी.

इस के 5 दिन बाद खानपुर की रहने वाली मुसकान नाम की 22 वर्षीय युवती ने थाना नेब सराय में अपने पति नवीन के गायब होने की सूचना दर्ज कराई. उस ने बताया कि उस का पति 8 अगस्त से घर से लापता है. गुमशुदगी दर्ज कराने के बाद वह अपने घर चली गई. इस की जांच एएसआई सुरेंद्र को सौंपी गई. मुसकान के थाने से चले जाने के बाद एएसआई सुरेंद्र को न्यू फ्रैंड्स कालोनी क्षेत्र में 5 दिन पहले मिली अज्ञात युवक की लाश का ध्यान आया. एम्स में रखी उस लाश को दिखाने के मकसद से उन्होंने मुसकान को फोन किया, लेकिन उस ने कौंटैक्ट के लिए जो फोन नंबर दिए थे, वह नाट रिचेबल मिले.

वह कांस्टेबल नितिन और रोहित के साथ लाश के बारे में सूचना देने के लिए मुसकान के पते पर ही खानपुर चले गए. घनी आबादी वाले इलाके  में मकान तलाशने में पुलिस को ज्यादा दिक्कत नहीं आई, लेकिन वहां कमरे के दरवाजे पर ताला लगा देख कर झटका जरूर लगा. मुसकान ने कमरा किराए पर ले रखा था. पुलिस ने उस के बारे में मकान के दूसरे किराएदारों और आसपास के लोगों से पूछताछ की. मालूम हुआ कि मुसकान कुछ दिन पहले ही कमरे को छोड़ कर कहीं और जा चुकी है. मुसकान क्या करती थी, कहां आतीजाती थी, इस बारे में किसी को भी विशेष जानकारी नहीं थी.

उस के बाद मकान मालिक प्रदीप से पूछताछ करने पर मालूम हुआ कि मुसकान डेढ़ महीने पहले ही यहां रहने आई थी और अचानक कहीं दूसरी जगह शिफ्ट हो गई. उस के साथ एक 2 साल की बच्ची भी रहती थी. बीचबीच में खानपुर के ही दूसरे मोहल्ले में रहने वाली उस की मां मीनू भी उस के पास आती थी, लेकिन वह साथ में नहीं रहती थी.

आखिर मुसकान के पास पहुंच गई पुलिस

48 वर्षीय मीनू को मोहल्ले के कई लोग जानते थे. आजीविका के लिए वह घरेलू नर्स का काम करती थी. बताते हैं कि उस की अपने पति विजय से नहीं बनती थी. अब पुलिस के सामने नई समस्या आ गई कि अपने लापता पति की शिकायत करने वाली ही लापता हो चुकी थी. मुसकान को तलाशने के लिए पुलिस टीम ने तसवीरें दिखा कर और हुलिया बता कर डोरटूडोर पूछताछ शुरू कर दी.

थोड़े प्रयास के बाद पुलिस को सफलता मिल गई. उस का ठौरठिकाना तो नहीं मालूम हुआ, लेकिन एक नई बात की जानकारी जरूर मिल गई. वह यह कि उस के पास एक फैशनपरस्त जमालुद्दीन नाम का एक लड़का आताजाता है. पुलिस को पता चला कि वह 18-19 साल का लड़का है. स्टाइलिश फटी जींसटीशर्ट पहनता है और स्पाइकी हेयर कट रखता है. पड़ोसियों को उस की गतिविधियां संदिग्ध लगी थीं.

वैसे तो जमालुद्दीन के बारे में पड़ोसियों से और अधिक जानकारी नहीं मिल पाई. सिर्फ इतना मालूम हुआ कि उस की बोली में बिहारी टोन था और मुसकान के कमरा छोड़ने से एक दिन पहले आधी रात को उस के कमरे से झगड़ने की काफी तेज आवाजें आई थीं.

इसी दौरान पुलिस को मुसकान का दूसरा मोबाइल नंबर 9540833333 मिल गया. उस पर काल करने पर लोकेशन खानपुर गांव की मिली. पुलिस टीम तुरंत वहां जा पहुंची. वहीं मुसकान अपनी मां मीनू और 2 साल की बच्ची तृषा के साथ मिल गई.

पुलिस टीम को घर की चौखट पर देख कर पहले तो मुसकान सकपकाई, फिर जल्द ही सहमती हुई तन कर खड़ी हो गई. पुलिस ने मुसकान से सीधा सवाल किया, ‘‘क्या तुम्हारे पति के दाएं हाथ पर नवीन नाम का टैटू गुदा हुआ था?’’

जवाब में मुसकान कुछ नहीं बोली. पुलिस ने दोबारा पूछा, ‘‘क्या तुम्हारे लापता पति के दाएं हाथ पर उस के नाम का कोई टैटू था?’’

‘‘क्यों, क्या बात है?’’ मुसकान धीमे से बोली.

‘‘बात यह है कि हमें एक युवक की लाश मिली है, जिस के दाहिने हाथ पर ‘नवीन’ गुदा हुआ है. और तुम ने भी पति का नाम नवीन ही लिखवाया है.’’ पुलिस ने बताया.

‘‘मैं उस बारे में कुछ नहीं जानती.’’ मुसकान बोली और इधरउधर झांकने लगी.

पुलिस टीम ने महसूस किया कि मुसकान कुछ छिपाने की कोशिश कर रही है. तभी एक कांस्टेबल ने मुसकान के हाथ से उस का मोबाइल फोन ले लिया.

गैलरी खोल कर उस में डाउनलोड तसवीरें खंगालने पर नवीन की हाथ उठाए हुए तसवीर मिल गई. उस से लाश की तसवीर पूरी तरह मेल खा रही थी. उस तसवीर में भी नवीन के दाएं हाथ पर ‘नवीन’ नाम का टैटू दिख रहा था. बाद में उस की पुष्टि नवीन के भाई संदीप ने भी कर दी.

पुलिस टीम ने मुसकान से पूछा, ‘‘तुम्हारे लापता पति की लाश मिली है और तुम्हें जरा भी दुख नहीं हो रहा है? आखिर बात क्या है?’’

‘‘क्या करूंगी दुखी हो कर, वह लौट तो नहीं आएगा न!’’ मुसकान बोली.

‘‘फिर भी, तुम्हारी बहुत सारी यादें जुड़ी होंगी उस के साथ? 2-4 बूंद आंसू ही बहा लो उस के नाम के.’’

‘‘फिर भी क्या सर, कैसी यादें, कैसे आंसू. कुछ भी तो नहीं. उस ने जीते जी मुझे कम दुख दिए थे, जो उस की मौत के बाद गम मनाऊं?’’ वह बोली.

‘‘मैं समझ सकता हूं तुम्हारी अभी की स्थिति. लेकिन तुम्हें नवीन के बारे में जो भी बातें मालूम हैं बता दो, ताकि उस की मौत का कारण मालूम हो सके. उस की किसी के साथ दुश्मनी या दोस्ती के बारे में… जो भी हो साफसाफ बताओ,’’ एएसआई सुरेंद्र ने पूछा.

‘‘मैं कुछ और नहीं जानती हूं सिवाय इस के कि वह मेरा पति था. और मैं ने एक गलत आदमी के साथ प्रेम किया, मम्मी के मना करने के बावजूद उस से शादी की. आज वह हमें और बच्ची को अनाथ छोड़ गया.’’ कहती हुई मुसकान रोने लगी. उस वक्त तो एसआई ने मुसकान से कुछ और नहीं पूछा, लेकिन उन्हें नवीन की हत्या के सिलसिले में एक संदिग्ध जरूर मान लिया. उन्होंने उस के बारे में जल्द ही कुछ और जानकारियां हासिल कर लीं.

एक महत्त्वपूर्ण जानकारी घटना की तारीख को रात के समय नवीन से झगड़ने वाले लड़के जमालुद्दीन के बारे में भी थी. वह भी खानपुर गांव में रहता था. पढ़ालिखा नहीं था. उस के पास कोई कामधंधा भी नहीं था. लौकडाउन खत्म होने के बाद 2 महीने पहले ही वह बिहार से आया था. एएसआई सुरेंद्र ने सारी जानकारी थानाप्रभारी सुमन कुमार को दे दी. मामला गंभीर लग रहा था, इसलिए डीसीपी आर.पी. मीणा ने एसीपी अविनाश कुमार के नेतृत्व में एक टीम गठित कर दी.

ऐसे खुली मर्डर मिस्ट्री

टीम में थानाप्रभारी सुमन कुमार, इंसपेक्टर जितेंद्र कश्यप, अनिल प्रकाश, एसआई विष्णुदत्त, महावीर, कांस्टेबल सुरेंद्र, रामकिशन, नितिन, रोहित, जानी, अनिल, विक्रम आदि को शामिल किया.

पुलिस टीम गंभीरता से इस केस को खोलने में जुट गई. इस का परिणाम यह निकला कि पुलिस ने कुछ सबूतों के आधार पर 7 लोगों को गिरफ्तार कर लिया. उन से हुई पूछताछ से कई राज परत दर परत खुलते चले गए. घटना की रात 7 अगस्त, 2021 को जमालुद्दीन मुसकान के घर पर ही था. उन दिनों नवीन कहीं और रहता था. जबकि मुसकान उस से झगड़ कर अपनी बच्ची को ले कर खानपुर में अपनी मां के घर से थोड़ी दूरी पर अलग कमरा ले कर रहती थी. वहीं पास में ही जमालुद्दीन भी रहता था.

अकेली लड़की को देख कर पहले तो वह उस के इर्दगिर्द मंडराता रहा, फिर जल्द ही मुसकान ने ही उस से जानपहचान कर ली. उसे कोई काम तलाशने के लिए कहा. हालांकि जमालुद्दीन भी काम की तलाश में था. आठवीं पास मुसकान डिलीवरी गर्ल का काम कर चुकी थी. मर्डर मिस्ट्री का राज खुल जाने के बाद पहली गिरफ्तारी मुसकान की हुई थी. उस ने अपने पति की हत्या के बारे में विस्तार से बताया कि किस तरह से नवीन की गरदन में चाकू घोंप कर हत्या की गई.

उस की मौत के बाद कैसे जमालुद्दीन ने बाथरूम में उस की लाश को नहलाधुला कर खून के दागधब्बे साफ किए थे और उस ने खुद कमरे में फैले खून को साफ किया.

मुसकान ने बताया कि यह सब करते हुए सुबह होने वाली थी. जमाल ने अपने एक दोस्त राजपाल को नवीन की लाश वहां से हटाने में मदद के लिए बुलाया. नवीन और जमाल ने खून सने कपड़े चिराग दिल्ली के नाले में फेंक दिए थे. तब तक दिन निकल आया था. जमाल उसी दिन अपने घर से एक ट्रौली बैग लाया. उस में नवीन की लाश ठूंसठूंस कर पैक कर दी. उस बैग को जमाल अपने दोस्त के साथ आटो से ले जा कर सुखदेव विहार के नाले में फेंक आया.

मुसकान की गिरफ्तारी के बाद पुलिस टीम को मोबाइल नंबरों की काल डिटेल्स मिल गई, जिस में जमाल का साथ देने वालों में विवेक उर्फ बागड़ी और कौशलेंद्र का भी नाम आ गया. विवेक (20 वर्ष) को देवली की नई बस्ती से गिरफ्तार करने में पुलिस को सफलता मिल गई. उस ने नवीन की हत्या में शामिल होने का जुर्म कुबूल कर लिया.

तीसरी गिरफ्तारी जमाल की मुरादाबाद शहर से हुई. लाश को नाले में फेंकने के बाद वह दिल्ली से फरार हो गया था. उस ने अपना मोबाइल फोन बंद कर लिया था. वह मोबाइल नंबर बिहार का था. उस नंबर को पुलिस सर्विलांस में लगा दिया गया.

पता चला कि वह सप्तक्रांति ट्रेन से अपने घर जा रहा है. सफर के दौरान उस का नंबर तब ट्रैक हो गया, जब उस ने टीटीई को अपना कन्फर्म टिकट का मैसेज दिखाने के लिए कुछ समय के लिए मोबाइल औन किया. उस समय उस की लोकेशन मुरादाबाद की थी. वह सप्तक्रांति एक्सप्रैस से बिहार जा रहा था. दिल्ली पुलिस ने उसी समय मुरादाबाद की जीआरपी से संपर्क किया तो जीआरपी ने ट्रेन रुकवा कर तलाशा और उसे वहीं हिरासत में ले लिया. फिर दिल्ली पुलिस उसे मुरादाबाद से दिल्ली ले आई.

प्यारमोहब्बत ने जरूरतों को लगा दिए पंख

इसी तरह से विशाल की गिरफ्तारी देवली खानपुर से और कौशलेंद्र की बरेली से करने में पुलिस को सफलता मिली. छठे और सातवें अभियुक्त के रूप में राजकुमार और मुसकान की मां मीनू को भी खानपुर से हिरासत में ले लिया गया. मीनू ने बताया कि नवीन की हत्या के समय वह कमरे में ही मौजूद थी. उस की हत्या के बाद वह अपने कमरे पर वापस आ गई थी. अभियुक्तों की निशानदेही पर हत्या में इस्तेमाल सबूत भी बरामद कर लिए.

नवीन की हत्या का राज तो खुल गया था, लेकिन मुसकान और नवीन के संबंध में आई कड़वाहट का राज खुलना अभी बाकी था. आखिर क्या वजह थी कि जिसे मुसकान ने दिलोजान से चाहा, उस की हत्या करवा दी? यह बदलते हुए महानगरिया सामाजिक परिवेश की काली सच्चाई को भी उजागर करता है.

आठवीं पास मुसकान ने जब अपने पैरों पर खड़ी होने की कोशिश शुरू की, तब उसे जोमैटो के फूड सेक्शन में एक काम मिल गया. थोड़ी सी तनख्वाह में खर्च चलाना मुश्किल हो गया. ऊपर से उम्र की नजाकत और प्यारमोहब्बत ने उस की जरूरतों को पंख लगा दिए. वहीं उस की मुलाकात नवीन से हुई. उस ने बेहतर जिंदगी जीने के सपने दिखाए और जल्द ही उस के रूपसौंदर्य की तारीफों के पुल बांधने शुरू कर दिए. यह सब करीब साढ़े 4 साल पहले की बातें हैं. उन दिनों नवीन दक्षिणपुरी में रहता था.

मुसकान अपने प्रेम की खातिर नवीन के साथ रहने लगी. अपनी अलग दुनिया बसा ली. 2 साल बाद एक बच्ची की मां भी बन गई. संयोग से उस के एकडेढ़ साल बाद ही कोरोना महामारी का कहर उस पर भी टूटा, जिस से उस की आमदनी बंद हो गई.

दांपत्य जीवन में तनाव ही तनाव आ गया. हर रोज नवीन से उस का झगड़ा होने लगा. नवीन भी कामधंघा छूटने के चलते काफी डिप्रेशन में आ गया था. अपना गम दूर करने के लिए जो कमाता था, उसे शराब में उड़ाने लगा था. मुसकान इस का विरोध करती, तब वह मारपीट पर उतारू हो जाता था. करीब 7 महीने पहले जनवरी में एक दिन मुसकान अपनी बच्ची को ले कर मां मीनू के पास देवली खानपुर आ गई. वहां भी नवीन बारबार आने लगा. लेकिन जब भी आता था, नशे में धुत रहता था और मुसकान को गालियां बकता था.

एक दिन ऊब कर मीनू ने उसे अपने घर से अलग कमरा दिलवा दिया ताकि नवीन की नजरों से वह दूर रहे. वहीं मुसकान की मुलाकात जमालुद्दीन से हुई. मुसकान को वह मन ही मन चाहने लगा था. मुसकान भी उसे अपनी घरेलू मदद के लिए कमरे पर आने से नहीं रोकती थी. हालांकि मुसकान के दिल में उस के प्रति अधिक जगह नहीं थी.

एक बार नवीन खानपुर के उस कमरे पर भी आ गया. मुसकान को आश्चर्य हुआ कि उसे उस के कमरे का पता कैसे चला. इस पर जमाल ने बताया कि एक बार उस ने बच्ची के साथ उसे दूध की दुकान पर देख लिया था. वहां भी उस के साथ झगड़ने लगा था. वह बारबार पूछ रहा था कि बच्ची उस के पास कैसे है? वह तो उस की बेटी है. उसी समय वह पीछा करता हुआ गली के कोने तक आया था.

बात यहीं खत्म नहीं हुई. 7 अगस्त की रात को नवीन नशे ही हालत में सीधा मुसकान के कमरे पर आ धमका. उस वक्त कमरे पर जमालुद्दीन भी था. उसे देखते ही नवीन आगबबूला हो गया और झगड़ने लगा.

इसी बीच मीनू भी आ गई. मीनू ने नवीन को समझाने की कोशिश की, लेकिन वह कुछ भी सुनने को राजी नहीं था.

मुसकान ने भी उसे समझाने की कोशिश की तो नवीन ने मुसकान के मुंह पर घूंसा मारा. उस के मुंह से खून निकलने लगा. तभी जमालुद्दीन ने नवीन को रोकने की कोशिश की. फिर कमरे में नवीन और जमाल के बीच तूतूमैंमैं हाथापाई में बदल गई. नवीन ने जमाल को भद्दीभद्दी गालियां तक देनी शुरू कर दी. यहां तक कि उस के मांबाप और कौम को ले कर भी भलाबुरा कहना शुरू किया.

कौम और मांबाप पर बात आते ही जमाल ने भी झट कमरे में छिपा कर रखा चाकू निकाला और नवीन की गरदन पर वार कर दिया. नशे की हालत में नवीन संभल नहीं पाया. जख्म भी काफी गहरा था. उस की मौत कुछ समय में ही हो गई.

जमाल लाश को देख कर पसीनेपसीने हो गया. तभी मुसकान वहां आई. पहले तो वह भी घबराई फिर जल्द ही खुद को संभाला. अपनी बच्ची को मां के हवाले किया और उसे अपने घर ले जाने के लिए कहा. उस के बाद दोनों ने लाश को ठिकाने लगाने और सबूत मिटाने के काम किए. पुलिस ने सभी आरोपियों से पूछताछ करने के बाद उन्हें कोर्ट में पेश कर जेल भेज दिया. Delhi Crime

Crime Kahani: प्रेमिका का एसिड अटैक – सोनम ने की प्रेम की हद पार

Crime Kahani: पहली मंजिल पर रह रहे किराएदार के कमरे से सुबहसुबह तेज चीखने की आवाज भूतल पर रह रहे मकान मालिक सुरेशचंद्र की पत्नी ने सुनी. आवाज सुन कर एक बार तो वह सोच में पड़ गईं. लेकिन दूसरे ही पल लगातार आ रही चीखों को सुन कर वह एक ही सांस में सीढि़यां चढ़ कर किराएदार नर्स सोनम पांडेय के कमरे में पहुंच गईं. क्योंकि चीख उसी के कमरे से आ रही थी. वहां का दृश्य देख कर उन की आंखें आश्चर्य से फटी रह गईं. पीछेपीछे मकान मालिक सुरेशचंद्र भी वहां पहुंच गए.

कमरे के फर्श पर सोनम और देवेंद्र झुलसे हुए पड़े थे. वहीं पर एक स्टील का डब्बा पड़ा था. कमरे में तेजाब की तेज दुर्गंध आ रही थी. दोनों ही तेजाब की जलन और दर्द से तड़प रहे थे. उस समय सुबह के यही कोई 7 बज रहे थे. इसी बीच झुलसी हालत में ही देवेंद्र ने अपने दोस्त शिवम को फोन किया.

कुछ ही देर में शिवम आटो ले कर वहां पहुंच गया. वह आननफानन में घायल देवेंद्र को आटो में ले कर अस्पताल जाने लगा. इस पर मकान मालिक सुरेशचंद्र ने उस से कहा कि वह घायल सोनम को भी साथ ले जाए. क्योंकि इलाज की उसे भी जरूरत है. तब शिवम ने कहा, ‘‘मैं पहले देवेंद्र को अस्पताल में भरती करा दूं वह ज्यादा झुलस गया है. इस के बाद सोनम को ले जाऊंगा.’’ इस तरह वह देवेंद्र को वहां से ले कर चला गया.

जब शिवम सोनम को काफी देर तक लेने नहीं आया तो सुरेशचंद्र ने इस की सूचना थाना हरीपर्वत के थानाप्रभारी अरविंद कुमार को दे दी. थानाप्रभारी सूचना मिलते ही मौके पर पहुंच गए. उन्होंने तेजाब से झुलसी सोनम को एक निजी अस्पताल में भरती कराया. वहीं अस्पताल में भरती 80 फीसदी झुलसे देवेंद्र की उपचार के दौरान दोपहर करीब ढाई बजे मौत हो गई.

पुलिस ने मरने से पहले देवेंद्र के मजिस्ट्रैट के सामने बयान दर्ज करा लिए थे. उस ने अपने बयान में सोनम पांडेय को एसिड अटैक के लिए जिम्मेदार बताया था. देवेंद्र के घर वालों को जब यह जानकारी उस के दोस्त शिवम ने दी तो उस के घर में रोना शुरू हो गया. वह 5 बहनों के बीच अकेला भाई था, रोतेरोते मां और बहनों की हालत बिगड़ गई. दरअसल, यह मामला उत्तर प्रदेश के आगरा शहर के थाना हरीपर्वत क्षेत्र स्थित शास्त्रीनगर का है.

देवेंद्र ने अपने बयान में बताया था कि 25 मार्च, 2021 की सुबह सोनम ने उसे अपने कमरे में लगे पंखे को ठीक करने के लिए बुलाया था. जैसे ही देवेंद्र कमरे में आया तो सोनम ने स्टील के डब्बे में रखा तेजाब उस के ऊपर उड़ेल दिया. अचानक हुए इस हमले से वह खुद को बचा नहीं सका. एसिड अटैक के दौरान नर्स सोनम पर भी तेजाब गिर गया था, जिस से वह भी झुलस गई थी. अब प्रश्न यह था कि सोनम ने देवेंद्र के ऊपर एसिड अटैक क्यों किया?

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पुलिस ने मकान मालिक सुरेशचंद्र से बात की तो उन्होंने पुलिस को बताया कि सोनम पहले शास्त्रीनगर में ही स्थित किसी दूसरे मकान में रहती थी. 5 महीने से वह उन के मकान में किराए पर रह रही थी. देवेंद्र को वह अपना पति बताती थी. वह कमरे पर उस के पास 10-12 दिनों में आता और 1-2  दिन रुक कर चला जाता था. उस का कहना था कि पति बाहर काम करते हैं.

वहीं सूचना पा कर अस्पताल पहुंचे देवेंद्र के घर वालों ने इन सब बातों से अनभिज्ञता जताई. उन का कहना था कि  सोनम के देवेंद्र से संबंध होने की उन्हें जानकारी नहीं थी. उन्होंने बताया कि देवेंद्र अविवाहित था और उस की 28 अप्रैल को शादी होने वाली थी. देवेंद्र की मां कुसुमा ने सोनम पांडेय पर बेटे की हत्या का आरोप लगाया. सोनम के कमरे की तलाशी के दौरान पुलिस ने स्टील का एक डब्बा बरामद किया. संभवत: इस एक लीटर वाले डब्बे में दूध लाया जाता होगा. इस में ही तेजाब रखा हुआ था. इस डब्बे की तली में तेजाब भी मिला. वहीं कमरे से देवेंद्र के जले हुए कपड़े व जूते भी मिले. पुलिस ने इन साक्ष्यों को जब्त कर जरूरी काररवाई के बाद फोरैंसिक लैब भेज दिया.

घटना की जानकारी मिलने पर एसपी (सिटी) रोहन प्रमोद बोत्रे ने घटनास्थल का निरीक्षण किया व अस्पताल भी गए. उन्होंने पत्रकारों को बताया कि सोनम और देवेंद्र के बीच प्रेम संबंध थे. आरोपी युवती को गिरफ्तार कर लिया गया है. चूंकि वह भी एसिड की चपेट में आ कर झुलसी है, इसलिए इलाज के लिए उसे अस्पताल में भरती कराया गया है.

पुलिस ने जरूरी काररवाई करने के बाद देवेंद्र के शव को पोस्टमार्टम के लिए मोर्चरी भेज दिया. पुलिस ने मामले की गहनता से जांच की. जांच में पता चला कि सोनम पांडेय मूलरूप से उत्तर प्रदेश के औरैया जिले के भागूपुर की रहने वाली शादीशुदा युवती है. सोनम की शादी करीब 10 साल पहले गुजरात में हुई थी. शादी के कुछ दिनों बाद ही पतिपत्नी के बीच लड़ाईझगड़ा रहने लगा. इस दौरान वह एक बेटे की मां भी बन गई. शादी के 2 साल बाद ही वह अपने बेटे को ले कर अपने मायके आ गई.

कुछ समय बाद वह आगरा आ कर नर्स की नौकरी करने लगी थी. वह सिकंदरा बाईपास स्थित एक अस्पताल में नर्स थी. बेटा ननिहाल में ही रह रहा था. सोनम ने अब तक अपने पति से तलाक नहीं लिया था. उस ने अपने साथी कर्मचारियों को भी अपने शादीशुदा होने के बारे में नहीं बताया था. 28 वर्षीय देवेंद्र राजपूत मूलरूप से उत्तर प्रदेश के कासगंज जिले के सहावर क्षेत्र के गांव बाहपुर का रहने वाला था. देवेंद्र चिकित्सा क्षेत्र में बचपन से ही रुचि रखता था. इसलिए उस ने लैब टैक्नीशियन का कोर्स किया था.

सुनहरे भविष्य की तलाश में वह आगरा आ गया था और पिछले 8 साल से लाल पैथ लैब में सहायक के पद पर काम कर रहा था. वह आगरा के ही खंदारी इलाके में किराए पर रहता था. चूंकि सोनम और देवेंद्र एक ही फील्ड से जुड़े थे, एक दिन काम के दौरान दोनों की जानपहचान हो गई. साथसाथ काम करते पहले दोनों में दोस्ती हुई, जो बाद में प्यार में बदल गई.

पिछले 3 सालों से दोनों लिवइन रिलेशन में रह रहे थे. सोनम ने अपने मकान मालिक को बता रखा था कि देवेंद्र उस का पति है. इस तरह देवेंद्र का जब मन होता, वह सोनम से मिलने उस के कमरे पर चला जाता था. इसी बीच सोनम को पता चला कि देवेंद्र की शादी कहीं और तय हो गई है. इस जानकारी से सोनम का गुस्सा सातवें आसमान पर पहुंच गया. क्योंकि वह देवेंद्र पर शादी करने का दबाव बना रही थी. सोनम ने घटना से कुछ दिन पहले देवेंद्र से कहा, ‘‘मैं तुम से बहुत प्यार करती हूं और तुम से शादी करना चाहती हूं.’’

देवेंद्र को सोनम के बारे में पता चल चुका था कि वह शादीशुदा है और उस के एक बच्चा भी है. देवेंद्र तो सोनम के साथ पिछले 3 साल से केवल टाइम पास कर रहा था. देवेंद्र ने उसे समझाते हुए कहा,‘‘सोनम तुम शादीशुदा हो. तुम्हारे एक बेटा भी है. और तुम ने अब तक अपने पति से तलाक भी नहीं लिया है. ऐसे में हम शादी कैसे कर सकते हैं? ऐसी स्थिति में मेरे घर वाले भी शादी के लिए तैयार नहीं होंगे. फिर मेरी भी शादी तय हो चुकी है.’’

देवेंद्र की इन बातों ने आग में घी डालने का काम किया. सोनम अपना आपा खो बैठी. उस ने मन ही मन तय कर लिया कि वह अपने प्रेमी को किसी और का हरगिज नहीं होने देगी. अपने खतरनाक मंसूबे की भनक उस ने देवेंद्र को नहीं लगने दी. इस बीच देवेंद्र ने सोनम के कमरे और उस से मिलनाजुलना भी बंद कर दिया. अपनी योजना को अंजाम देने के लिए सोनम ने 25 मार्च, 2021 की सुबह देवेंद्र को फोन कर कमरे का पंखा ठीक करने के बहाने अपने पास बुलाया था.

देवेंद्र सोनम के कमरे पर पहुंचा तो उन दोनों के बीच शादी की बात को ले कर गरमागरमी हुई. इस के बाद सोनम ने स्टील के डब्बे में पहले से लाए तेजाब से देवेंद्र पर अटैक कर दिया, जिस से वह गंभीर रूप से सिर से पैर तक झुलस गया. जानकारी मिलने पर घटना के दूसरे दिन सोनम के पिता आगरा आ गए. उन्होंने घायल बेटी को एस.एन. मैडिकल कालेज में भरती कराया. वहां उपचार होने से उस की हालत में सुधार हुआ. हालांकि उस समय तक उस के बयान दर्ज नहीं हो सके थे.

प्रेमिका के तेजाबी हमले ने एक साथ 3 परिवारों के अरमानों को झुलसा दिया. 5 बहनों में इकलौता भाई और एक मां से उस का घर का चिराग छीन लिया. मां और बहनें देवेंद्र के सिर पर सेहरा बांधने की तैयारी में जुटी थीं. शादी के कार्ड भी छप गए थे.

शादी में बुलाने वालों को कार्ड भेजने की तैयारी चल रही थी. वहीं कासगंज की रहने वाली जिस युवती से देवेंद्र का रिश्ता तय हो गया था और एक महीने बाद दोनों को फेरे लेने थे, उस के अरमानों को भी तेजाब से हमेशा के लिए झुलसा दिया. पोस्टमार्टम के बाद देवेंद्र का शव रात 9 बजे जब घर पहुंचा तो बेटे का शव देख कर मां बेहोश हो गईं. वहीं पांचों बहनें अपने छोटे भाई के शव से लिपट कर रोने लगीं. पूरे गांव में शोक का माहौल था. उधर जिस घर में देवेंद्र की बारात जानी थी वहां उस की मौत की खबर पहुंचने से कोहराम मच गया.

दूसरे दिन शुक्रवार की सुबह देवेंद्र का शोकपूर्ण माहौल में अंतिम संस्कार किया गया. सभी का कहना था कि देवेंद्र की हत्यारोपी को सख्त से सख्त सजा मिलनी चाहिए. कहानी लिखे जाने तक प्रेमिका का इलाज चल रहा था. ठीक होने पर उसे जेल जाना पड़ेगा. देश भर में हर साल एसिड अटैक की तमाम घटनाएं होती हैं, वह भी तेजाब पर बैन लगाए जाने के बाद. एसिड अटैक एक खतरनाक अपराध है, जो महिला हो या पुरुष सभी की जिंदगी तबाह कर देता है. सुप्रीम कोर्ट के सख्त आदेशों के बाद भी देश में गैरकानूनी रूप से होने वाली एसिड की बिक्री पर रोक नहीं लगाई जा सकी है.

एसिड बिक्री को ले कर जो कानून हैं, उन्हें सख्ती के साथ जमीन पर उतारा जाना बेहद जरूरी है. एसिड अटैक से पीडि़त व्यक्ति के निजी, सामाजिक, पारिवारिक और आर्थिक जीवन पर बेहद बुरा प्रभाव पड़ता है. Crime Kahani

—कथा पुलिस सूत्रों पर आधारित

Crime Story: औनलाइन चलता सेक्स रैकेट

Crime Story: 22 जनवरी, 2021 की बात है. 12 साल की मानसी पास की दुकान से चिप्स लेने गई थी. जब वह काफी देर बाद भी घर नहीं लौटी तो घर वालों को उस की चिंता हुई. घर वाले उस दुकानदार के पास पहुंचे, जिस के पास वह अकसर खानेपीने का सामान लाती थी. उन्होंने उस दुकानदार से मानसी के बारे में पूछा तो दुकानदार ने  बताया कि मानसी तो काफी देर  पहले ही चिप्स का पैकेट ले कर जा चुकी है.

जब वह चिप्स ले कर जा चुकी है तो घर क्यों नहीं पहुंची, यह बात घर वालों की समझ में नहीं आ रही थी. उन्होंने आसपास के बच्चों से उस के बारे में पूछा, लेकिन उन से भी मानसी के बारे में कोई जानकारी नहीं मिली.

घर वालों की समझ में नहीं आ रहा था कि आखिर मानसी गई तो गई कहां. उन्होंने उसे इधरउधर तमाम संभावित जगहों पर ढूंढा लेकिन उस का कहीं पता नहीं चला. तब उन्होंने इस की सूचना पश्चिमी दिल्ली के थाना राजौरी गार्डन में दे दी. चूंकि मामला एक नाबालिग लड़की के लापता होने का था, इसलिए पुलिस ने इस मामले को गंभीरता से लिया. पुलिस ने मानसी के पिता की तरफ से गुमशुदगी की सूचना दर्ज कर ली.

डीसीपी (पश्चिमी दिल्ली) उर्विजा गोयल को जब 12 वर्षीय मानसी के गायब होने की जानकारी मिली तब उन्होंने थाना पुलिस को इस मामले में तीव्र काररवाई करने के आदेश दिए. डीसीपी का आदेश पाते ही थानाप्रभारी ने इस मामले की जांच के लिए एएसआई विनती प्रसाद के नेतृत्व में एक पुलिस टीम गठित कर दी.

एएसआई विनती प्रसाद ने सब से पहले लापता बच्ची के घर वालों से उस के बारे में विस्तार से जानकारी ली. इतना ही नहीं, उन्होंने घर वालों से यह भी जानना चाहा कि उन की किसी से कोई रंजिश तो नहीं है. घर वालों ने उन से साफ कह दिया कि उन की किसी से कोई दुश्मनी नहीं है. इस के बाद पुलिस अपने स्तर से मानसी को तलाशने लगी. जिस जगह से मानसी गायब हुई थी, पुलिस ने उस क्षेत्र के सीसीटीवी कैमरों की फुटेज देखी. इस के अलावा स्थानीय लोगों से भी बच्ची के बारे में जानकारी हासिल की. पुलिस ने सोशल मीडिया पर भी निगरानी कर दी, लेकिन कहीं से भी मानसी के बारे में कोई सुराग नहीं मिला.

पुलिस टीम को जांच करतेकरते करीब 2 महीने बीत चुके थे. जब बच्ची कहीं नहीं मिली तो पुलिस ने ह्यूमन ट्रैफिकिंग के एंगल को ध्यान में रखते हुए केस की जांच शुरू कर दी. यानी पुलिस को यह शक होने लगा कि कहीं ऐसा तो नहीं कि बच्ची जिस्मफरोशी गैंग के चंगुल में फंस गई हो. इस बिंदु पर जांच करते करते पुलिस टीम ने कई जगहों पर दबिशें दीं, लेकिन लापता बच्ची का सुराग नहीं मिला.

करीब 2 महीने बाद पुलिस को सूचना मिली कि मानसी का अपहरण करने के बाद उसे दिल्ली के मजनूं का टीला इलाके में रखा गया है और वहीं पर उस से जिस्मफरोशी का धंधा कराया जा रहा है. यह सूचना रोंगटे खड़े कर देने वाली थी. क्योंकि मानसी की उम्र केवल 12 साल थी और इस उम्र में उस बच्ची के साथ जिस तरह का कार्य कराने की जानकारी मिली, वह मानवता को शर्मसार करने वाली ही थी.

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जांच अधिकारी विनती प्रसाद ने यह खबर अपने उच्चाधिकारियों को दी फिर उन्हीं के दिशानिर्देश पर पुलिस टीम ने 17 मार्च, 2021 को मजनूं का टीला इलाके में एक घर पर दबिश दी. मुखबिर की सूचना सही निकली. मानसी वहीं पर मिल गई. पुलिस ने मानसी को सब से पहले अपने कब्जे में लिया. इस के बाद पुलिस ने वहां 2 महिलाओं सहित 4 लोगों को गिरफ्तार किया.

पुलिस ने उन सभी से पूछताछ की तो उन्होंने स्वीकार किया कि वे बड़े स्तर पर एस्कौर्ट सर्विस मुहैया कराते थे और उन का धंधा ज्यादातर वाट्सऐप ग्रुप और इंटरनेट के माध्यम से चलता है. उन के पास से पुलिस ने 5 मोबाइल फोन बरामद किए. फोनों की जांच की गई तो तमाम वाट्सऐप ग्रुप में ऐसी लड़कियों के अनेक फोटो मिले, जिन से वे जिस्मफरोशी कराते थे. पुलिस ने गिरफ्तार किए हुए उन चारों लोगों से पूछताछ की तो पता चला कि उन में से संजय राजपूत और कनिका राय मजनूं का टीला के रहने वाले थे जबकि अंशु शर्मा  मुरादाबाद का और सपना गोयल मुजफ्फरनगर की.

ये सभी औनलाइन सैक्स रैकेट चलाते थे. जांच में पता चला कि इन लोगों के काम करने का तरीका एकदम अलग था. यह गिरोह सोशल साइट पर ज्यादा सक्रिय था. गैंग के लोग 150 से ज्यादा वाट्सऐप ग्रुप में सक्रिय थे. एस्कौर्ट सर्विस मुहैया कराने वाली लड़की के फोटो ये वाट्सऐप ग्रुप में शेयर करते थे. इस के बाद ग्रुप से जो कस्टमर इन के संपर्क में आता था, उस से यह पर्सनल चैटिंग करने के बाद पैसों की डील फाइनल करते थे. फिर औनलाइन ही पेमेंट अपने खाते में ट्रांसफर कराने के बाद कस्टमर के बताए गए स्थान पर ये लड़की को सप्लाई करते थे.

इस तरह यह गैंग देश के अलगअलग बड़े शहरों में लड़कियों की सप्लाई करते था. इतना ही नहीं, फाइव स्टार होटलों में भी इन के पास से लड़कियां सप्लाई की जाती थीं. आरोपियों ने बताया कि उन के गैंग के सदस्य अलगअलग जगहों से लड़कियां उन के पास लाते थे. मानसी का भी गैंग के 2 लोगों ने अपहरण उस समय किया था, जब वह दुकान पर गई थी. उस का अपहरण करने के बाद वह उसे अपने घर पर ले गए थे.

उन्होंने मानसी से कहा था कि आज उन के यहां पर जन्मदिन है इसलिए वह बच्चों को इकट्ठा कर के केक काटेंगे. उन्होंने मानसी को केक खाने को दिया. केक खाते ही मानसी को नशा हो गया. इस के बाद दोनों मानसी को मजनूं का टीला ले गए, वहां पर संजय राजपूत, अंशु शर्मा, सपना गोयल और कनिका राय मिली. 12 साल की बच्ची को देख कर ये चारों खुश हो गए कि अब इस से मोटी कमाई की जा सकती है. क्योंकि वह तो उसे सोने का अंडा देने वाली मुरगी समझ रहे थे.

जब मानसी पर हल्का नशा सवार था, तभी उस के साथ रेप किया गया. होश आने पर मानसी दर्द से कराहती रही. इस के बाद भी इन लोगों को उस पर दया नहीं आई. उन्होंने उसी रात उसे किसी दूसरे ग्राहक के सामने पेश किया. इस तरह वह मानसी का शारीरिक शोषण करते रहे. जब वह विरोध करती तो ये लोग उसे प्रताडि़त करते थे. इस तरह मानसी इन लोगों के चंगुल में बुरी तरह फंस चुकी थी. वहां से निकलने का उस के पास कोई उपाय नहीं था.

आरोपियों के 2 अन्य साथी फरार हो चुके थे. पुलिस ने उन की तलाश में अनेक स्थानों पर दबिश दी, लेकिन उन का पता नहीं चला. आरोपी 35 वर्षीय संजय राजपूत, 21 वर्षीय अंशु शर्मा, 24 साल की सपना गोयल और 28 साल की कनिका राय से विस्तार से पूछताछ करने के बाद पुलिस ने उन्हें न्यायालय में पेश किया, जहां से उन्हें जेल भेज दिया गया. अभियुक्तों के पास से बरामद की गई 12 वर्षीय मानसी को पुलिस ने उपचार के लिए अस्पताल में भरती करा दिया. मानसी ने अपने साथ घटी सारी घटना पुलिस को बता दी.

आरोपियों को जेल भेजने के बाद पुलिस गंभीरता से इस बात की जांच करने में जुट गई. इस गैंग के तार देश में किनकिन लोगों से जुड़े थे और इन्होंने अब तक कितनी लड़कियों का अपहरण किया था. Crime Story

(कथा में मानसी परिवर्तित नाम है)