Surat Safe Vault Theft : अपने ही लौकर्स के लुटेरे

Surat Safe Vault Theft. सूरत में अलगअलग जगहों पर महेश दियोरा के सेफ वौल्ट की 4 शाखाएं थीं. इन शाखाओं के लौकर्स में लोग अपनी ज्वैलरी व महत्त्वपूर्ण कागजात रखते थे. इन सेफ वौल्ट का संचालन महेश दियोरा अपने दोनों बेटों के साथ करता था. एक दिन महेश दियोरा ने अपने दोनों बेटों की मदद से कुछ लौकर्स से लगभग साढ़े 3 करोड़ रुपए की ज्वैलरी निकाल ली. आखिर ये लोग क्यों बने अपने ही लौकर्स के लुटेरे?

सूरत शहर हीरे और कपड़ा, उस में खासकर साड़ी उद्योग की चमक से जगमगाता महानगर है. यहां करोड़ों रुपए का सोना और हीरा रखने वाले लोग बैंकों से अधिक भरोसा निजी सेफ वौल्ट पर करते हैं. इन्हीं भरोसेमंद नामों में एक था ‘नक्षत्र सेफ वौल्ट’.

सूरत में इस की 4 शाखाएं थीं, 2 महिधरपुरा में, एक वराछा में और एक सिंगणपोर काजवे रोड पर. हजारों लोगों ने अपनी जीवन भर की कमाई, शादीब्याह के गहने और पारिवारिक विरासत इन के यहां लौकरों में सुरक्षित रख छोड़ी थी.

इन के यहां लौकरों में सामान रखने वालों ने कभी सपने में भी नहीं सोचा था कि जिस व्यक्ति को वे अपने खजाने का रखवाला समझ रहे हैं, वही एक दिन सारा माल लूट लेगा.

एक रोज सवेरेसवेरे डभोली रोड पर रहने वाले जानेमाने बिल्डर रमेशभाई जीवराजभाई वाघाणी अपनी पत्नी के साथ सिंगणपोर स्थित नक्षत्र सेफ वौल्ट पहुंचे, क्योंकि उसी रोज सवेरे उन की पत्नी ने कहा था, ”2 महीने बाद भतीजी की शादी है. चलो, आज सारे गहने निकाल लाते हैं, क्योंकि आज आप खाली हो. फिर पता नहीं आप को कब फुरसत मिले.’’

सेफ वौल्ट पहुंच कर रमेशभाई ने अपना लौकर खोला. लौकर के अंदर का नजारा देखते ही उन के चेहरे का रंग उड़ गया. उन के मुंह से एकदम से निकला, ”यह क्या… ऐसा कैसे हो सकता है?’’

पत्नी ने घबरा कर पूछा, ”क्या हुआ?’’

रमेशभाई कांपती आवाज में बोले, ”लौकर तो खाली है. इस में कुछ भी नहीं है. सारा सामान गायब है.’’

रमेशभाई के लौकर में रखे 63 तोला सोने के गहने, जिन की कीमत लाखों रुपए थी, गायब थे. पत्नी की चीख पूरे वौल्ट में गूंज उठी, ”हमारे सारे गहने कहां चले गए? कौन निकाल ले गया?’’

रमेशभाई ने वौल्ट के संचालक महेश दियोरा को फोन किया. क्योंकि सिक्योरिटी गार्ड और कर्मचारियों से बात करने का कोई मतलब नहीं था. कुछ ही देर में वौल्ट के संचालक महेश दियोरा और उस के दोनों बेटे हर्ष दियोरा व हरिकृष्ण दियोरा वहां आ पहुंचे. रमेशभाई गुस्से से बोले, ”मेरे गहने कहां गए?’’

महेश ने सामान्य बनने की कोशिश करते हुए कहा, ”शायद कोई गलतफहमी हो रही है. दोबारा देखिए, गहने लौकर में ही होंगे.’’

”गलतफहमी?’’ रमेशभाई चिल्लाए, ”लाखों रुपए के गहने हवा हो गए और आप कह रहे हैं कि गलतफहमी हो रही है?’’

हर्ष बोला, ”सर, हम सीसीटीवी फुटेज देख लेते हैं. सब पता चल जाएगा. गहने इस तरह लौकर से कैसे गायब हो सकते हैं?’’

लेकिन कुछ ही मिनट बाद उस का सुर बदल गया. उस ने कहा, ”सर, हार्डडिस्क बहुत गर्म हो गई है. सिस्टम काम नहीं कर रहा है. आप कल आइए.’’

उस की इस बात से रमेशभाई को आग लग गई. गुस्से में वह बोले, ”मेरे गहने गायब हैं और आप कह रहे हैं कल आइए. अचरज की बात तो देखो, इतने बड़े सेफ वौल्ट का सीसीटीवी ही नहीं चल रहा?’’

महेश ने बात संभालने की कोशिश करते हुए कहा, ”सिस्टम अपडेट हो रहा है तो सीसीटीवी कैसे चलेगा?’’

रमेशभाई समझ गए कि कहीं न कहीं बड़ा खेल हुआ है. इसलिए कल का इंतजार करना ठीक नहीं है. वह उसी दिन सीधे थाना सिंगणपोर पहुंचे और पूरी घटना बता कर शिकायत दर्ज करा दी.

बेटे ने उगला सच इंसपेक्टर पी.एम. चौधरी ने रमेशभाई की बात ध्यान से सुनी और अपने साथियों की ओर देख कर कहा, ”यह मामला साधारण चोरी का नहीं है.’’

एक सबइंसपेक्टर ने कहा, ”सर, इस मामले में अंदर का आदमी शामिल हो सकता है, वरना बंद लौकर से सामान कैसे गायब हो जाएगा.’’

इंसपेक्टर चौधरी ने गंभीर स्वर में कहा, ”अगर ऐसा है तो कोई भी बच नहीं पाएगा. चलो, सब से पहले मालिक को ही पकड़ा जाए.’’

कुछ ही देर में पुलिस टीम नक्षत्र सेफ वौल्ट पहुंच गई. महेश दियोरा और उस के दोनों बेटे वहीं थे. उन से पूछताछ शुरू हुई. तीनों एक ही बात दोहरा रहे थे कि उन्हें कुछ नहीं पता. लेकिन अनुभवी पुलिस अधिकारी उन के चेहरे पढ़ रहे थे, क्योंकि पुलिस को लगता था कि बिना उन की जानकारी के यहां कुछ भी नहीं हो सकता.

पूछताछ बढ़ती गई. सवाल कठिन होते गए. वही सवाल बारबार अलगअलग तरह से पूछे जाते रहे, जिस में महेश और उन के बेटे फंसते जा रहे थे.

आखिरकार देर रात हर्ष अपने ही जवाबों में फंस गया. उस ने पुलिस के सवालों के आगे सिर झुका लिया. महेश ने बेटे की ओर देखा. उस की आंखों में आंसू थे. वह धीमे से बोला, ”सर, चोरी किसी बाहर वाले ने नहीं की…’’

इंसपेक्टर चौधरी ने पूछा, ”तब चोरी किस ने की है?’’

हर्ष ने कांपती आवाज में कहा, ”चोरी हम ने ही की है.’’

यह सुन कर कमरे में मौजूद सभी पुलिस अधिकारी हैरान रह गए. जिन लोगों के भरोसे हजारों लोगों ने करोड़ों रुपए की अपनी जमापूंजी इन के यहां रखी थी, उन्हीं लोगों ने लौकर तोड़ कर उन्हें लूट लिया था.

महेश दियोरा और उस का छोटा बेटा हरिकृष्ण पुलिस अधिकारियों के सामने सिर झुकाए बैठा था, क्योंकि हर्ष ने स्वीकार कर लिया था कि चोरी किसी बाहरी गिरोह ने नहीं, बल्कि उन्होंने स्वयं की थी.

इंसपेक्टर पी.एम. चौधरी ने महेश की ओर देखते हुए कहा, ”इतना बड़ा विश्वासघात करने की वजह क्या थी? तुम लोगों को करोड़ों रुपए के गहने चुराने की नौबत क्यों आई?’’

हर्ष ने गहरी सांस लेते हुए कहा, ”सर, मेरी एक गलती ने पूरे परिवार को अपराधी बना दिया.’’

”आखिर ऐसी कौन सी गलती कर दी तुम ने कि दूसरों के गहने तुम्हें चोरी करने पड़े?’’

हर्ष ने रुआंसी आवाज में कहना शुरू किया, ”सर, मैं औनलाइन ट्रेडिंग करता था. शुरुआत में खूब फायदा हुआ. लगा कि शेयर बाजार से जल्दी ही अमीर बन जाऊंगा, लेकिन धीरेधीरे एक के बाद एक गलत सौदे होते गए. घाटा होने लगा, जो बढ़ता ही गया. नुकसान पूरा करने के लिए और पैसा लगाया. लेकिन जब नुकसान होने लगा तो हर बार नुकसान ही होता रहा.’’

वह कुछ क्षण चुप रहा. फिर आगे बोला, ”सर, देखते ही देखते मैं ने 3 करोड़ रुपए गंवा दिए.’’

”इतने सारे पैसे आए कहां से?’’ इंसपेक्टर चौधरी ने पूछा.

”दोस्तों से, रिश्तेदारों से उधार लिया. उस के बाद ब्याज पर भी पैसे लिए और जब लौटाने का समय आया, तब मेरे पास कुछ भी नहीं बचा था.’’ हर्ष ने बताया.

हर्ष ने इतना कहा था कि हरिकृष्ण बोला, ”पैसे लेने वालों के रोज फोन आते. लोग धमकी देते थे, कोई घर आने की बात कहता था.’’

तब महेश दियोरा ने कहा, ”सर, हर्ष की वजह से पूरा परिवार बरबाद होने की कगार पर पहुंच गया था.’’

इस पर इंसपेक्टर चौधरी ने तीखे स्वर में कहा, ”खुद को बरबाद होने से बचाने के लिए तुम लोगों ने अपने ही ग्राहकों को लूटने का फैसला कर लिया? अपनी बरबादी बचाने के लिए दूसरों को बरबाद कर दिया.’’

चोरी का बना प्लान

महेश की नजरें झुक गईं. फिर उस ने कहा, ”जी सर, एक रात हम तीनों बापबेटे वौल्ट के औफिस में बैठे थे. तब हर्ष ने कहा कि अगर किसी तरह 3 करोड़ रुपए मिल जाएं तो सारी परेशानी खत्म हो जाए.’’

तब महेश ने कहा कि इतने सारे रुपए आएंगे कहां से? कुछ देर बाद हर्ष की नजर सामने रखी लौकरों की सूची पर पड़ी. उस की आंखों में एक खतरनाक चमक उभर आई. उस ने कहा, ”पापा, हमारे पास तो करोड़ों का सोना रखा है.’’

महेश चौंका, ”तुम कहना क्या चाहते हो?’’

”कुछ लौकर ऐसे हैं, जो महीनों और सालों से नहीं खुले हैं. अगर उन में से थोड़ाथोड़ा सोना निकाल लिया जाए तो किसी को महीनों तक पता नहीं चलेगा.’’ हर्ष ने कहा.

हरिकृष्ण ने भयभीत हो कर कहा, ”लेकिन पकड़े गए तो?’’

हर्ष बोला, ”हम कैसे पकड़े जाएंगे, क्योंकि हम ही तो वौल्ट के मालिक हैं और मालिक कहीं पकड़ा जाता है.’’

इसी के बाद उस खौफनाक साजिश ने जन्म लिया, जिस ने सैकड़ों परिवारों की नींद उड़ा दी.

नक्षत्र सेफ वौल्ट की 4 शाखाएं थीं— एक वराछा में, 2 महिधरपुरा में और एक सिंगणपोर काजवे रोड पर. चारों शाखाओं का बारीकी से अध्ययन करने के बाद महेश ने कहा, ”वराछा और महिधरपुरा में चोरी करना तो आत्महत्या होगी.’’

हर्ष ने पूछा, ”क्यों?’’

महेश समझाने लगा, ”वहां हीरा व्यापारी, दलाल और रत्न कलाकार रोज अपने लौकर खोलते हैं. कई लोग तो दिन में 2-2 बार आते हैं. अगर एक भी लौकर तोड़ा गया तो उसी दिन पता चल जाएगा.’’

तब हरिकृष्ण ने पूछा, ”फिर?’’

महेश ने कहा, ”सिंगणपोर शाखा ठीक रहेगी.’’

हर्ष ने मुसकरा कर कहा, ”वहां ज्यादातर परिवार वाले हैं. वे शादीब्याह, त्यौहार या किसी खास मौके पर ही लौकर खोलते हैं. कई लोग तो 6 महीने या साल भर तक लौकर देखने भी नहीं आते.’’

”यही हमारी सब से बड़ी सुरक्षा होगी.’’ महेश बोला.

तीनों ने तय किया कि चोरी केवल सिंगणपोर शाखा में ही की जाएगी. कई दिनों तक कंप्यूटर रिकौर्ड खंगाले गए. ऐसे लौकरों की सूची तैयार की गई, जो लंबे समय से नहीं खोले गए थे.

तभी महेश ने कहा, ”इन लौकरों में परिवारों के पुराने गहने होंगे. उन्हें उन गहनों की जरूरत कम पड़ती होगी. ऐसे लौकरों में चोरी करने पर महीनों तक चोरी का पता नहीं चलेगा.’’

सूची तो तैयार हो गई. अब समस्या यह थी कि बिना चाबी के लौकर कैसे खोले जाएं? हर्ष सोच कर बोला, ”इस के लिए हमें ऐसा आदमी चाहिए, जिसे ताले तोडऩे में महारत हासिल हो.’’

महेश कुछ देर सोचता रहा. फिर अचानक बोला, ”मुझे एक ऐसा आदमी याद आ गया. उस का नाम है मणीभाई राजाभाई चौहान. सूरत के पुणागाम में रहने वाला यह 59 साल का आदमी चाबी बनाने और किसी भी तरह का ताला खोलने में माहिर माना जाता है.’’

मणीभाई मूलरूप से आणंद जिले के सोजित्रा तहसील के विरोल गांव का रहने वाला था, लेकिन सालों से वह सूरत के पुणागाम इलाके में रह कर चाबी बनाने का काम करता था. शहर में उस की पहचान ऐसे कारीगर की थी, जो किसी भी तरह के ताले की डुप्लीकेट चाबी बना सकता था और मुश्किल से मुश्किल ताला भी खोल सकता था.

एक रोज शाम को महेश दियोरा ने उसे फोन किया, ”मणीभाई, एक खास काम है.’’

”कैसा काम?’’ ”कुछ लौकर्स की चाबी बनानी हैं.’’

”मालिक की अनुमति है?’’ महेश ने कहा, ”मैं ही मालिक हूं.’’

यह सुन कर मणीभाई निश्चिंत हो गया. 1,200 प्रति लौकर की चाबी बनाने की बात तय कर के रात को सेफ वौल्ट बंद होने के बाद मणीभाई वहां पहुंचा. महेश ने कहा, ”हर लौकर को खोलने और उस की डुप्लीकेट चाबी बनाने के लिए तुम्हें 1,200 रुपए मिलेंगे.’’

मणीभाई ने पूछा, ”इतने सारे लौकर क्यों खोलने हैं?’’

हर्ष ने कहा, ”कुछ पुराने लौकर बदलने हैं. ग्राहक महीनों से नहीं आए हैं.’’

मणीभाई को कोई शक नहीं हुआ. उस ने काम स्वीकार कर लिया.

उसे क्या पता था कि वह अनजाने में देश की सब से बड़ी निजी लौकर चोरियों में से एक का हिस्सा बनने जा रहा है.

एआई से ली हेल्प

रोज की तरह शाम को शाखा बंद हो जाती थी. सभी कर्मचारी चले जाते थे. इस के बाद शुरू होता था चोरी का असली खेल. महेश मुख्य दरवाजा भीतर से बंद कर देता था. हर्ष सूची निकालता था और हरिकृष्ण निगरानी करता था.

उस के बाद मणीभाई अपने औजार निकालता और कुछ ही मिनटों में मास्टर चाबी और विशेष उपकरणों की मदद से लौकर खोल देता. तब महेश धीरे से कहता, ”सिर्फ सोने के गहने निकालो. चांदी, दस्तावेज या दूसरे सामान को मत छूना.’’

हर्ष सावधानी से केवल सोने के आभूषण निकालता. हार, चूडिय़ां, कंगन, मंगलसूत्र, झुमके, जो भी सोना मिलता, अलग बैग में रख दिया जाता.

इस के बाद मणीभाई फिर उस लौकर को इस तरह बंद कर देता कि बाहर से देखने पर कोई पहचान ही न सके कि उसे कभी खोला गया था. यह प्रक्रिया एकएक कर के कई लौकर्स के साथ दोहराई गई.

महेश ने पहले ही हर्ष से कहा था कि ऐसे लौकर चुनना, जो 6 महीने या एक साल से न खोले गए हों. हर्ष कंप्यूटर रिकौर्ड देख कर ऐसे ही ग्राहकों की सूची तैयार करता था, जो सालों से लौकर खोलने नहीं आए थे. उस का तर्क था कि जब तक ग्राहक आएगा, तब तक सोना बिक चुका होगा और उस का कर्ज भी उतर चुका होगा. यही गणित इस पूरे षडयंत्र की सब से बड़ी ताकत थी.

लेकिन चोरी करना जितना जरूरी था, उस से कहीं ज्यादा जरूरी था सबूत मिटाना. हर्ष ने कहा, ”अगर किसी ने सीसीटीवी फुटेज देख ली तो..?’’

महेश सोचने लगा. वह कुछ कहता, उस के पहले ही हरिकृष्ण बोला, ”आजकल हर सवाल का जवाब इंटरनेट पर मिल जाता है.’’

यहीं से उन्होंने तकनीक का सहारा लेने का फैसला किया. उन्हें नहीं मालूम था कि बाद में यही तकनीक उन के खिलाफ सब से बड़ा सबूत बनेगी.

कुछ दिनों बाद एक ग्राहक अपने लौकर में कुछ देखने आया. उसे लौकर के लौक में हलका सा अंतर महसूस हुआ. उस ने कर्मचारियों से कहा, ”मुझे सीसीटीवी फुटेज दिखाइए.’’

महेश तुरंत बोला, ”आज सिस्टम में कुछ तकनीकी खराबी है. फिर कभी आ कर देख लेना.’’

ग्राहक चला गया, लेकिन महेश समझ गया कि अगर सीसीटीवी फुटेज बचे रहे तो सारा खेल खत्म हो जाएगा. उसी रात हर्ष ने अपना मोबाइल उठाया और गूगल जेमिनी खोल कर ऐसा सवाल पूछा, जो आगे चल कर पूरे देश में चर्चा का विषय बनने वाला था.

हर्ष ने गूगल जेमिनी पर सवाल टाइप किया कि कैमरे की रिकौर्डिंग और हार्डडिस्क का डेटा स्थाई रूप से कैसे डिलीट करें. इस के बाद उस ने एक और सवाल पूछा कि डीवीआर से डेटा कैसे हटाया जाए कि फोरैंसिक जांच में भी रिकवर न हो सके?

एआई से मिले मार्गदर्शन के आधार पर दोनों भाइयों ने डीवीआर और हार्डडिस्क से रिकौर्डिंग हटाने का प्रयास किया. उन का मकसद साफ था कि अगर कभी पुलिस या कोई ग्राहक फुटेज मांगे तो उन के लौकर खोलने और अंदरबाहर आनेजाने का कोई डिजिटल सबूत न मिले. इस के बाद महेश ने राहत की सांस लेते हुए कहा, ”अब कोई सबूत नहीं बचा.’’

उन्हें विश्वास था कि उन्होंने अपने अपराध के सभी निशान मिटा दिए हैं, लेकिन वे यह नहीं जानते थे कि डिजिटल दुनिया में हर गतिविधि अपने पीछे कोई न कोई सुराग छोड़ जाती है. क्योंकि डिजिटल दुनिया में जो एक बार टाइप हो गया, उसे मिटाया नहीं जा सकता.

पिघला कर बेचा सोना

अब अगला सवाल था कि चुराए गए गहनों का क्या किया जाए? अगर उन्हें उसी तरह बेचा गया तो ज्वैलर्स या पुलिस आसानी से पहचान सकती है. इसलिए महेश ने निर्णय लिया कि गहनों को उसी तरह बेचने के बजाय सभी गहनों को भट्ठी में पिघला कर सिल्लियों का रूप दे दिया जाए.

फिर वही किया गया और उन सिल्लियों को सूरत के कुछ सर्राफा व्यापारियों को बेच दिया गया. मिलने वाले पैसे सीधे हर्ष के बैंक खातों में जमा होने लगे.

उस की योजना थी कि पहले शेयर बाजार और ब्याजखोरों का कर्ज चुकाया जाए. उस के बाद धीरेधीरे सब सामान्य हो जाएगा. लेकिन संयोग ने साथ नहीं दिया. जिस बात से वे सब से ज्यादा बचना चाहते थे, वही हो गई. डभोली रोड निवासी बिल्डर रमेशभाई जीवराजभाई वाघाणी अपने लौकर से गहने निकालने पहुंचे.

जैसे ही उन्होंने लौकर खोला, उन के 63 तोला सोने के गहने गायब थे.

उन्होंने तुरंत महेश दियोरा से जवाब मांगा. महेश ने फिर वही पुराना बहाना बनाया कि शायद कोई तकनीकी गड़बड़ी है. इसलिए सिस्टम काम नहीं कर रहा, लेकिन इस बार सामने वाला व्यक्ति सामान्य ग्राहक नहीं था.

रमेशभाई सीधे थाना सिंगणपोर पहुंचे और अपनी शिकायत दर्ज करा दी.

यहीं से वह जांच शुरू हुई, जिस ने पूरे परिवार के अपराध का परदाफाश कर दिया. पूछताछ में टूट गए बापबेटे महेश दियोरा, हर्ष और हरिकृष्ण को हिरासत में ले कर गहन पूछताछ की गई.

जैसे ही मीडिया में यह खबर फैली कि ‘नक्षत्र सेफ वौल्ट’ के मालिक ही अपने ग्राहकों के लौकर लूटते रहे, पूरे सूरत शहर में सनसनी फैल गई.

अगली सुबह सिंगणपोर, वराछा और महिधरपुरा स्थित नक्षत्र सेफ वौल्ट की चारों शाखाओं के बाहर सैकड़ों लोगों की भीड़ लग गई.

हर किसी के चेहरे पर चिंता साफ दिखाई दे रही थी. कोई अपनी पत्नी के साथ आया था, कोई बूढ़े पेरेंट्स को ले कर. महिलाएं तो रो रही थीं.

एक महिला रोते हुए कह रही थी कि 6 महीने बाद उस की बेटी की शादी है. अगर उस के गहने नहीं मिले तो क्या होगा? एक बुजुर्ग व्यक्ति बुदबुदा रहा था कि पूरी जिंदगी की कमाई इसी लौकर में रखी थी.

पुलिस ने व्यवस्था संभाली और एकएक कर के लोगों को लौकर खोलने की अनुमति दी गई. शुरुआत में पुलिस के पास केवल एक शिकायत थी कि 63 तोला सोना गायब है.

लेकिन जांच आगे बढ़ी तो एकएक कर के नए मामले सामने आने लगे. सब से पहले डाह्या दुला अणघण अपनी पत्नी काशीबेन के साथ पहुंचे. उन्होंने कांपते हाथों से लौकर खोला. लौकर के अंदर देखते ही काशीबेन की चीख निकल गई. उन के करीब 29 तोला सोने के गहने गायब थे. उन्होंने ये गहने अपनी बहू और बेटियों के लिए संभाल कर रखे थे, जो गायब हो चुके थे. उन की आंखों से आंसू निकल आए थे.

उस के बाद विपुल चोवटिया का नंबर आया. उन्होंने लौकर खोला. उन के 27.5 तोला सोने के गहने भी गायब थे. वह गुस्से में बोले, ”जिन के भरोसे गहने रखे, वही चोर निकले.’’

इस के बाद सब से बड़ा झटका राजेश मालविया को लगा. उन के लौकर से 60 तोला सोने के गहने गायब मिले. राजेश ने सिर पकड़ लिया. उन की 3 पीढिय़ों की यह जमापूंजी थी. राजेशभाई का 49 तोला, रमेशभाई का 3 तोला, जीतेंद्रभाई का 13 तोला, चिरागभाई का 62 तोला, उत्सवभाई का 16 तोला.

अब तक चोरी का कुल आंकड़ा बढ़ कर लगभग 4 करोड़ रुपए तक पहुंच गया था, लेकिन पुलिस का अनुमान था कि यह अंतिम आंकड़ा नहीं है. अभी कई लौकरधारक शहर से बाहर हैं तो कुछ लोगों को घटना की जानकारी ही नहीं मिली थी.

इस का मतलब चोरी की रकम बढ़ सकती है. उसी दिन डीसीपी राघव जैन ने प्रैस कौन्फ्रेंस कर के मीडिया को बताया कि लौकर की चोरी के मामले का खुलासा हो गया है और इस मामले से जुड़े सारे अपराधी पकड़े जा चुके हैं.

यह चोरी वौल्ट के मालिक महेश दियोरा और उस के बेटों हर्ष और हरिकृष्ण ने की थी. हर्ष को शेयर मार्केट में 3 करोड़ का घाटा हो गया था, जिस की भरपाई के लिए यह चोरी की गई थी.

पूछताछ में हर्ष ने स्वीकार किया था कि चोरी के गहने को पिघला कर उन की सिल्लियां बनाई गई थीं. उस के बाद उन्हें सूरत के 2 सर्राफा व्यापारियों मितेष पारेख और कौशल सुपेडा को बेचा गया था. पुलिस ने तुरंत काररवाई करते हुए दोनों ज्वैलर्स को हिरासत में ले लिया था.

जांच में पुलिस को पता चला था कि हर्ष ने चोरी का सोना बेच कर मिले पैसे अपने बैंक खातों में जमा किए थे. इसलिए इंसपेक्टर चौधरी ने तुरंत उस के बैंक खाते सीज करा दिए. बैंक की जमा पर्चियां, पासबुक और लेनदेन से जुड़े दस्तावेज भी पुलिस ने जब्त कर लिए थे.

आरोपियों के कब्जे से 15 लाख रुपए नकद भी बरामद किए थे. पुलिस यह भी पता लगा रही है कि चोरी की रकम कहां खर्च की गई और इस पूरे खेल में कोई और भी शामिल था. चाबी बनाने वाले मणीभाई राजाभाई चौहान को भी गिरफ्तार कर लिया गया है.

पुलिस ने महेश दियोरा, उस के दोनों बेटों हर्ष और हरिकृष्ण तथा मणीलाल को अदालत में पेश कर के पुलिस रिमांड पर भी लिया था. पूछताछ के बाद सभी को फिर से अदालत में पेश किया गया, जहां से सभी को जेल भेज दिया गया था. Surat Safe Vault Theft

Bathroom Murder : 45 दिन लाश पर बैठ कर नहाती रही रूबी

Bathroom Murder. रूबी शर्मा ने पति सुरेंद्र कुमार शर्मा की हत्या कर शव को बाथरूम में दफना दिया. फिर 45 दिनों तक उसी पर बैठ कर नहाती रही. आखिर ऐसा क्या हुआ था कि 7 जन्मों का रिश्ता इतनी जल्दी यहां तक पहुंच गया. आइए जानते हैं दिल दहला देने वाली इस घटना की पूरी कहानी

रूबी शर्मा से 3-4 दिन में वापस आने की बात कह कर पति सुरेंद्र कुमार शर्मा (44) घर से कहीं चला गया था. वह यह बता कर नहीं गया था कि कहां जा रहा है. कई दिनों इंतजार करने के बाद 18 मई, 2026 को रूबी ने आगरा के वायु विहार, शाहगंंज में रहने वाले अपने जेठ अनिल शर्मा को फोन किया.

उन्हें बताया कि सुरेंद्र ने भरतपुर में झगड़ा किया था. भरतपुर वालों ने पुलिस से शिकायत कर दी है, इस के चलते वहां की पुलिस दबिश देने आ रही है. इसलिए मां और बच्चियों को अपने घर ले जाओ.

इस के बाद जेठ अनिल शर्मा मां और दोनों भतीजियों को अपने घर वायु विहार, शाहगंज, आगरा ले आए. इस के आधा घंटे बाद जेठ अनिल के पास रूबी का फोन आया. रूबी ने बताया कि पति सुरेंद्र 3 हजार रुपए ले कर कहीं चले गए हैं. जाते समय कह रहे थे कि 2-3 दिन में आ जाऊंगा.

इस पर अनिल ने रूबी से कहा कि तुम भी हमारे यहां आ जाओ.

रूबी ने कहा कि मैं 2 दिन यहीं रुक कर सुरेंद्र का इंतजार करूंगी. इस के 2 दिन बाद रूबी भी जेठ के घर पहुंच गई.

कुछ दिन अपने जेठ के घर रहने के बाद सास व बेटियों के साथ रूबी फिर से अपने घर आ गई. कई दिन बाद भी पति के वापस नहीं आने और न कोई समाचार मिलने से रूबी परेशान हो गई. रूबी का रोरो कर बुरा हाल हो रहा था.

उस ने 26 मई को जेठ अनिल को फोन किया, ”मुझे चिंता हो रही है, आज कई दिन हो गए सुरेंद्र घर वापस नहीं आए हैं. अपना मोबाइल भी घर छोड़ कर गए हैं.’’

यह बात सुन कर अनिल शर्मा रूबी के घर पहुंच गया. वह आगरा के सिकंदरा के दहतोरा स्थित रेणुका धाम कालोनी में रहती थी. रूबी के साथसाथ अनिल को भी अपने भाई सुरेंद्र की चिंता हो रही थी. विचारविमर्श के बाद रूबी जेठ के साथ 26 मई, 2026 को थाना सिकंदरा की प्राची टावर पुलिस चौकी पहुंची और पति की गुमशुदगी दर्ज करा दी.

उधर रूबी और अनिल सुरेंद्र को तलाशते रहे. यहां तक कि रूबी अपने जेठ को ले कर एक बाबा के पास भी गई. पति के इस तरह चले जाने से परेशान रूबी रोती रहती. पड़ोसी उसे समझाते, ”धीरज रखो, पुलिस सुरेंद्र को तलाश रही है. घर वापस आ जाएंगे.’’

सुरेंद्र को लापता हुए लगभग 45 दिन हो गए थे. उस का पुलिस व सुरेंद्र के फेमिली वालों को कोई सुराग नहीं मिला था.

भरतपुर का निवासी था सुरेंद्र

सुरेंद्र कुमार शर्मा मूलरूप से राजस्थान के भरतपुर का रहने वाला था. वह आगरा के सिकंदरा के दहतोरा स्थित रेणुका धाम कालोनी में रहता था. रूबी इटावा की रहने वाली है. सुरेंद्र की शादी 2010 में रूबी से हुई थी. उन की 13 और 9 साल की 2 बेटियां हैं. सुरेंद्र के साथ उस की विधवा मां कमला देवी भी रहती थीं. उन्हें आंखों से कम दिखाई देता है.

सुरेंद्र के पिता राधेश्याम शर्मा भरतपुर के एक इंटर कालेज में शिक्षक थे. 24 साल पहले रिटायर होने के बाद आगरा आ गए थे. सिकंदरा की रेणुका धाम कालोनी में रहने लगे. उन की 14 साल पहले मृत्यु हो चुकी है. सुरेंद्र उन का छोटा बेटा था, बड़ा बेटा अनिल औटो चालक है और वायु विहार, शाहगंज में अपने परिवार के साथ रहता है.

राधेश्याम शर्मा की मौत के बाद 32 हजार रुपए पेंशन पत्नी कमला देवी के नाम आती है. सुरेंद्र 16 मई, 2026 से लापता था. इस के 10 दिन बाद 26 मई को रूबी ने थाने में उस की गुुमशुदगी की सूचना दर्ज कराई थी. रूबी लगातार पुलिस, घर वालों और पड़ोसियों को पति सुरेंद्र के लापता होने की बात बताती रही.

45 दिन बीत जाने और छोटे भाई सुरेंद्र का अब तक कोई सुराग नहीं मिलने से अनिल को अब रूबी पर शक होने लगा था. वह समझ गया था कि सुरेंद्र के लापता होने की बात रूबी को जरूर मालूम है, लेकिन वह सच्चाई को छिपा रही है.

इसलिए अनिल पूरी तरह रूबी के पीछे लग गया. रूबी के हर मूवमेंट पर वह नजर गड़ाए हुए था. सुरेंद्र के खिलाफ ट्रक चोरी के एक पुराने मामले में सत्यापन के लिए एक सिपाही जब बुधवार पहली जुलाई को रूबी के घर आया तो रूबी ने उसे बताया, ”पति 16 मई से लापता है.’’

सत्यापन के लिए सिपाही ने रूबी की फोटो खींच ली. फोटो खिंचते ही रूबी घबरा गई.

सिपाही के जाने के बाद रूबी ने सोचा कि एक न एक दिन तो राज खुलना ही है. क्यों न खुद ही सब कुछ सच बता दे. उसे रात को नींद नहीं आती थी. ऐसा लगता था कि पति बाथरूम से बाहर निकल कर आ रहा है. उस ने 2 जुलाई को अपनी सास कमला से जेठ अनिल को घर बुलाने के लिए फोन कराया.

अनिल शर्मा 3 जुलाई को रूबी के घर पहुंच गया. मां ने अनिल से कहा, ”सुरेंद्र के बारे में बहू (रूबी) मुझे तो कुछ बता नहीं रही है तुम पूछो.’’

इस पर अनिल ने रूबी पर दबाव बनाते हुए कहा, ”तुझे कोई परेशानी है या किसी चीज से डर रही है या तूने कुछ करा है या वह तुझ से कुछ कह कर गया है तो मुझे बता, मैं तेरी पूरी मदद करूंगा. तुझे कुछ नहीं होने दंूगा. बता सुरेंद्र कहां है?’’

रूबी बोली, ”घर पर ही हैं.’’ अनिल ने पूछा, ”घर पर कहां?’’

”बाथरूम में हैं.’’

इस पर अनिल ने बाथरूम में जा कर देखा, लेकिन वहां सुरेंद्र नहीं था. अनिल ने कहा कि बाथरूम में तो सुुरेंद्र नहीं है.

तभी रूबी बोली, ”जमीन के नीचे है.’’ ”तूने उसे गाड़ दिया है?’’

”हां, 17-18 मई की रात में सुरेंद्र शराब पी कर आए थे. नशे में उन्होंने पंखे से लटक कर आत्महत्या कर ली. मैं घबरा गई और बाथरूम में 2 फीट गहरा गड्ढा खोद कर लाश को उस में दबा दिया और ऊपर से प्लास्टर करा दिया.’’

लेकिन रूबी की यह दलील अनिल के सामने नहीं चली, क्योंकि वह रूबी के बारे में पूरी सच्चाई पहले ही पता कर चुका था. इस बात की हवा उस ने रूबी को नहीं लगने दी थी.

तब रूबी पूरी तरह टूट गई और उस ने जेठ को पूरी सच्चाई बता दी. इतना ही नहीं, उस ने जेठ के सामने गिड़गिड़ाते हुए कहा, ”इसे यहीं गड़ा रहने दो. किसी को मत बताओ. यदि आप मुझे व मेरे बच्चों को मुसीबत से बचाना चाहते हो तो इतना उपकार कर दो.’’

भाई की हत्या पर अनिल को बहुत दुख हुआ और उस ने थाना सिकंदरा में यह सूचना दे दी. सूचना मिलते ही पुलिस 3 जुलाई, 2026 को रूबी के घर पहुंची. वहां पुलिस को रूबी का व्यवहार संदिग्ध लगा. जानकारी होने पर पुलिस ने रूबी के बाथरूम का निरीक्षण किया.

बाथरूम के फर्श पर कुछ दिन पहले प्लास्टर कराया गया था. पुलिस ने फर्श खेादने के लिए कार्यपालक मजिस्ट्रेट की अनुमति लेने के बाद बाथरूम के फर्श को 2 मजदूरों से खुदवाया. बाथरूम का फर्श तोड़ते ही तेज दुर्गंध आने लगी, जिस से वहां खड़ा होना भी दुश्वार हो गया.

लगभग 2-3 फीट की गहराई पर कुछ हड्ïिडयां व एक नर कंकाल मिला. इस के साथ ही हाथ में पहनने का कड़ा व रुद्राक्ष की माला भी मिली. कपड़े गल चुके थे.

सुरेंद्र के फेमिली वालों ने माला व कड़ा देख कर शिनाख्त करते हुए बताया कि ये दोनों चीजें सुरेंद्र की हैं. 45 दिनों से दबा राज अब बाहर आ चुका था. यह लाश किसी दुश्मन ने नहीं बल्कि एक पत्नी ने जमीन में दफन की थी.

रूबी 45 दिनों तक पुलिस, परिजनों और मोहल्ले वालों से इस खौफनाक सच को छिपाए रही. यहां तक कि वह मोहल्ले के लोगों के पास जाजा कर पति को ढंूढने का नाटक करती रही. पुलिस ने सुरेंद्र की हत्या के आरोप में भाई अनिल शर्मा की तहरीर पर हत्या की रिपोर्ट पत्नी रूबी के खिलाफ दर्ज कर उसे गिरफ्तार कर लिया.

पैनल से कराया पोस्टमार्टम

डीसीपी (सिटी) अली अब्बास के अनुसार पुलिस ने 2 डौक्टरों के पैनल से सुरेंद्र शर्मा की लाश का पोस्टमार्टम कराया है. डीएनए सैंपल सुरक्षित रखा गया, ताकि वैज्ञानिक रूप से सह साबित किया जा सके कि कंकाल सुरेंद्र का है.

पुलिस यह भी जांच करने लगी कि सुरेंद्र की हत्या और लाश ठिकाने लगाने में रूबी अकेली थी या उस के साथ कोई और भी था?

पुलिस द्वारा की गई पूछताछ में रूबी ने बताया कि आए दिन की बात हो गई थी. सुरेंद्र शराब पी कर आते और उस के साथ मारपीट करते थे. वह कोई काम नहीं करते थे. कुछ दिन पहले जोमैटो में डिलीवरी बौय का काम किया, लेकिन वह भी छोड़ दिया. मैं सिलाई का काम करती थी. मेरे सिलाई के पैसे छीन लेते थे. मम्मी की पेंशन के रुपए भी ले लेते थे. रोजरोज के उत्पीडऩ से वह आजिज आ चुकी थी. तब उसे मजबूरी में यह कदम उठाना पड़ा. सुरेंद्र की हत्या की वजह सामने आई तो हर कोई सन्न रह गया.

सुरेंद्र शर्मा की हत्या से पहले 16 मई को वह भरतपुर में पत्नी के साथ अपने मामा के यहां गया था. वहां पर भी उस ने बखेड़ा खड़ा किया था. तब रिश्तेदारों ने पुलिस केस करने की बात कही थी. इस के बाद सुरेंद्र ने रिश्तेदारों को समझाने के लिए और पुलिस में रिपोर्ट न करने के लिए दूसरे दिन रूबी को फिर भरतपुर भेजा.

भरतपुर में रिश्तेदारों ने रूबी के साथ भी बुरा व्यवहार किया. पति और बच्चों के साथ उसे भी जेल भिजवाने की धमकी दी गई. इस से रूबी डर गई. वापस आ कर उस ने पति को सारी बात बताई. इस पर पति ने शराब के नशे में रूबी के साथ मारपीट की.

भरतपुर की इस घटना ने रूबी के गुस्से को और हवा दी. उसे लगा कि पति मर जाएगा तो सब ठीक हो जाएगा. जिंदा भी वह किसी काम का नहीं है.

खीर में मिलाईं गोलियां

भरतपुर में अपमानित होने पर रूबी खून का घंूट पी कर वापस आगरा आ गई थी. सुरेंद्र बेरोजगार होने के साथ ही नशेड़ी भी था. वह पत्नी को कहीं भी पीट दिया करता था. बेटियां बड़ी हो रहीं थीं, उन की भी शर्म नहीं करता था.

रूबी ने मन ही मन एक खौफनाक निर्णय लिया. इस की हवा उस ने किसी को नहीं लगने दी. 17 मई, 2026 की रात सुरेंद्र बाजार से मीट ले कर आया था. घर में उस ने खाना खाने से पहले शराब पी. इस के बाद वह पत्नी से बोला, ”कुछ मीठा खाने का मन है.’’

तब रूबी ने खीर बनाई और गुस्से में घर में नींद की रखी लगभग 20 गोलियां खीर में मिला दीं. रूबी के खौफनाक दरादों से अंजान सुरेंद्र नशे में होने के कारण खीर खा कर गहरी नींद में सो गया. वह नींद की गोलियां पति और सास दोनों ही खाते थे. इस के चलते घर में नींद की गोलियां रखीं थीं.

रात 3 बजे रूबी की आंखें खुलीं. उस ने पति के सीने पर कान लगा कर दिल की धड़कन सुनने का प्रयास किया. कोई हलचल नहीं थी. उसे लगा कि पति मर गया है. उस ने सुबह सास और दोनों बेटियों को उठाया, उन से कहा, घर पर पुलिस आने वाली है. भरतपुर से पापा (सुरेंद्र के मामा) का फोन आया था. बोल रहे थे सुरेंद्र घर पर हंगामा कर के गया था. भरतपुर पुलिस ही अब सबक सिखाएगी. रूबी की बात सुन कर सास और बेटियां डर गईं.

उस ने सास और बेटियों को जेठ अनिल कुमार शर्मा के घर भेज दिया. उन के जाने के बाद रूबी ने पति को फिर से चैक किया. रूबी को अब लाश जल्दी से जल्दी ठिकाने लगानी थी. पलंग पर लाश पड़ी थी. वह उसे घसीटते हुए बाथरूम में ले आई.

उस ने फावड़े से बाथरूम की खुदाई की और 2-3 फीट गहरी खुदाई कर लाश गड्ïढे में डाल दी लाश को गलाने के लिए घर में रखा नमक भी लाश के ऊपर डाल दिया.

पहले लैट्रीन की सीट करीब एक फीट ऊंची थी, शेष बाथरूम नीचा था. पति की लाश दफनाने के बाद दोनों एक लेवल में करा लिए. इस के बाद 19 मई की सुबह एक राजमिस्त्री और एक मजदूर आए और प्लास्टर करके चले गए. किसी को शक न हो इसलिए रूबी घर का ताला बंद कर जेठ के घर चली गई.

रूबी से डीसीपी (सिटी) सैयद अली अब्बास, एडीसीपी (सिटी) हिमांशु गौरव, एसीपी (हरीपर्वत) अमीषा, इंसपेक्टर (सिकंदरा) राजीव त्यागी ने कई घंटे पूछताछ की. पूछताछ के बाद उसे 4 जुलाई को जेल भेज दिया. कई घंटे चली पूछताछ में रूबी ने यही बताया कि उस ने खुद अकेले ही वारदात को अंजाम दिया.

रूबी ने पुलिस पूछताछ में बताया कि जब उस की दोनों बेटियां उस से यही पूछती थीं कि पापा कहां चले गए तो वह उन्हें यही बताती कि पता नहीं वह बिना बताए कहां चले गए. पुलिस उन्हें ढूंढ रही है.

बाथरूम और घर सामान्य दिखता रहा, लेकिन अंदर एक खौफनाक सच छिपा था. रूबी अपने पति को बाथरूम में दफन करने के बाद पति की लाश के ऊपर बेखौफ बैठ कर 45 दिन तक नहाती रही.

जब एक बार उस की बड़ी बेटी ने कहा, ”मम्मी, बाथरूम का फर्श एक जगह से चटक गया है.’’

इस बात से रूबी अंदर ही अंदर डर गई और अपनी पोल खुलने के डर से उस ने सीमेंट घोल कर दरार को भर दिया.

मिस्त्री से कराया प्लास्टर

रूबी ने पति की लाश को घर के बाथरूम मेंं दफन करने के बाद उस पर प्लास्टर एक मिस्त्री से कराया था. पुलिस ने उस मिस्त्री का पता लगा कर उस के बयान दर्ज किए हैं. मिस्त्री रवि कुमार ने बताया, ”रूबी के मकान की बगल में उस ने एक मकान कुछ महीने पहले बनाया था. तभी उस से परिचय हुआ था. उस ने बाथरूम का फर्श कराने की बात कही थी.

उस समय वह महिला अपने बाथरूम में स्वयं मिट्टी डाल रही थी. इस पर रवि ने कहा, ”तुम क्यों मिट्टी डाल रही हो? एक मजदूर बुला लो वह डाल देगा, उस का भी कुछ भला हो जाएगा.’’

तब रूबी ने उसी समय फर्श करने को कहा.

मिस्त्री रवि ने उस से कहा कि वह फर्श अभी नहीं कर पाएगा. अगले दिन रवि एक मजदूर को ले कर रूबी के घर पहुंचा था.

रूबी ने 500 रुपए सीमेंट लाने को दिए. रवि 350 रुपए की सीमेंट बोरी लाया. 150 रुपए लौटा दिए. बालू रूबी के घर के बाहर पड़ी थी. राजमिस्त्री ने पौन घंटे में बाथरूम का फर्श डाल दिया था. रूबी ने उसे 500 रुपए मजदूरी दी थी.

रूबी ने बाथरूम में मिट्टी डाल कर जमीन पहले ही समतल कर दी थी. राजमिस्त्री और मजदूर को नहीं पता था कि बाथरूम में कोई लाश दफन है. यह बात बाद में पता चली.

पापा जिंदा थे

रूबी की बड़ी बेटी ने पुलिस को बताया कि जब हम लोग 18 मई को ताऊ के घर जा रहे थे, तब पापा जिंंदा थे. वे कमरे में लेटे हुए थे और पैर हिला रहे थे. उन का मम्मी से कोई लड़ाईझगड़ा नहीं हुआ था.

मम्मी ने ताऊ से हम दोनों बहनों व दादी को ले जाने को कहा था, लेकिन घर पर आने से मना किया था. ताऊ से कहा था कि घर के बाहर दुकान से तीनों को ले जाना. ताऊ हम लोगों को वहीं से अपने साथ ले गए थेे.

एकाउंट से निकाले पैसे

मृतक सुरेंद्र के बड़े भाई अनिल कुमार शर्मा ने बताया कि सुरेंद्र के लापता होने, रूबी के लगातार बदलते बयानों से रूबी पर उसे शक हो गया था. उस ने बताया कि भतीजियों व मम्मी को अपने घर ले जाने पर रूबी ने घर न आने और बाहर से ही उन लोगों को ले जाने की बात कही थी. इस से भी शक हुआ था.

इस के साथ ही मम्मी को 32 हजार रुपए पेंशन मिलती है. रूबी डेबिट कार्ड और पासबुक अपने पास रखती थी. उस में से 10 हजार रुपए रूबी उन्हें देती थी. जून माह में रूबी ने रुपए नहीं दिए थे. कह रही थी कि अभी रुपए बैंक खाते में नहीं आए हैं.

इस पर अनिल को शक हुआ, क्योंकि सुरेंद्र लापता था. शक होने पर अनिल ने भरतपुर जा कर बैंक से मम्मी के खाते का स्टेटमेंट निकलवाया तो पता चला कि पैसे खाते से निकाले जा चुके हैं. इस संबंध में जब रूबी से बात की तो वह चुप हो गई.

रूबी ने पुलिस को बताया कि उस की शादी झूठ पर हुई थी. शादी के समय बताया गया था कि सुरेंद्र पढ़ालिखा है. अच्छी नौकरी करता है. मैं ने अपना भाग्य मानते हुए उसे स्वीकार कर लिया और शादी के लिए राजी हो गई, लेकिन शादी के बाद पता चला कि सुरेंद्र शराब पीने का आदी था. वो शराब पी कर मेरे साथ मारपीट करता था.

बच्चे पैदा होने के बाद भी उस के उत्पीडऩ को सहती रही थी. मुझे जिंदगी भर एक ही मलाल रहेगा कि मेरी किस्मत में यह नशेबाज क्यों लिखा था. पता नहीं अब मेरी बेटियों का क्या होगा?

जज के सामने फूट फूट कर रोई

कोर्ट में पेशी के दौरान जज के सामने रूबी फूटफूट कर रोने लगी. इस दौरान उस ने अपने ऊपर लगे आरोप को स्वीकार करते हुए कहा कि पति की हत्या कर के उस से बड़ी गलती हो गई.

मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रैट (सीजेएम) आगरा की अदालत में हुई सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष की ओर से मौजूद अभियोजन अधिकारी बृजभूषण कुशवाहा ने बताया कि रूबी को पति की हत्या के मामले में अदालत के सामने पेश किया गया था, जहां से उसे 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया.

कथा लिखने तक इस मामले में पुलिस मजबूत साक्ष्यों का संकलन करने की कोशिश कर रही थी. पुलिस हत्याकांड की कडिय़ां जोडऩे के साथ ही फोरैंसिक टीम के साथ क्राइम सीन का रीक्रिएशन करने पर विचार कर रही है. इस के माध्यम से पुलिस घटना के अंदाज और उस में लगे समय का आकलन करेगी. रीक्रिएशन के बाद आरोपित रूबी से जेल में भी बयान लिए जा सकते हैं.

कोर्ट में पैरवी को मजबूत करने के लिए पुलिस ने घटनाक्रम तैयार कर लिया है. इस के लिए बाथरूम को पहले जैसा करना पड़ेगा. इस से यह जानकारी हो सकेगी कि बाथरूम में कितनी मिट्टी डाली गई? और इस में कितना समय लगा? सुरेंद्र के शव को बाथरूम में कितना नीचे दफन किया गया था? बाथरूम में इस के लिए ज्यादा खुदाई तो नहीं की गई थी?

इन सभी सवालों के जबाव पुलिस को क्राइम सीन के दोहराने से मिल जाएंगे. इस के लिए सुरेंद्र कुमार शर्मा की लंबाई और वजन के पुतले को दफन किया जाएगा. सीन रीक्रिएशन के बाद रूबी शर्मा के बयानों से उन का मिलान किया जाएगा. जरूरत पडऩे पर पुलिस दोबारा जेल में जा कर रूबी के बयान दर्ज करेगी.

बैरक में रही बेचैन

पति सुरेंद्र शर्मा की हत्या करने के आरोप में रूबी को महिला बैरक में रखा गया था. उस की पहली रात जेल में करवटें बदलते हुए कटी. सुबह होने पर वह उठी और नित्यकर्म के बाद लाइन में लग कर उस ने नाश्ता लिया और दोपहर में खाना लिया. वह अन्य बंदियों से बातचीत भी नहीं कर रही थी.

हर वारदात के पीछे कोई न कोई मकसद जरूर होता है. जैसे नीला ड्रम कांड वाली मेरठ की मुसकान पर अपने पति के रहते गैर से संबंध, जबकि इंदौर की सोनम पर शादी के बाद भी प्रेमी से संबंध बनाए रखना और प्रेमी के साथ मिल कर पति की हत्या करने, वहीं पुणे की सिया का शादी के पहले ही बौयफ्रेंड से रिश्ता रखना और उस के साथ मिल कर होने वाले पति की हत्या करने का आरोप है.

हाल की ऐसी घटनाओं के मूल में अवैध संबंध की बात आई, लेकिन रूबी द्वारा अपने पति की हत्या किए जाने के पीछे ऐसी कोई वजह सामने नहीं आई है. फिर भी रूबी ने पति का कत्ल किया और उस की लाश को अकेले ही बाथरूम में दफना दिया.

इस की वजह जानने के लिए पुलिस ने विशेषज्ञों की मौजूदगी में रूबी से लंबी पूछताछ की. इस पूछताछ में पुुलिस को हत्या की एक ही वजह मिली, पति द्वारा पत्नी का निरतंर उत्पीडऩ किया जाना और उसे जिल्लत की जिंदगी जीने के लिए मजबूर करना.

महिलाएं हो रही हैं कट्टर

हर रिश्ते की बुनियाद विश्वास पर टिकी होती है, लेकिन जब यही विश्वास लालच, नऊरत या छल के आगे टूट जाता है तो अंजाम इतना भयावह हो सकता है कि सुनने वाला भी सिहर उठे.

आगरा में इस तरह का यह कोई पहला मामला नहीं है. इस से पहले भी पति की हत्या के मामले सामने आ चुके हैं. फरवरी 2026 की रात को गांव लोधई, एकता निवासी लवकेश की हत्या हुई थी.

लवकेश की पत्नी गौरी के प्रेम संबंध चचेरे देवर सुंदर से चल रहे थे. पति ने दोनों को रंगेहाथों पकड़ लिया. इस के बाद पत्नी ने पति की प्रेमी के साथ मिल कर हत्या कर दी थी.

इतना ही नहीं पत्नी ने हत्या को आत्महत्या का रूप दे दिया था. बाद में परिजनों ने अंतिम संस्कार कर दिया था. पत्नी गौरी की हरकतों को देख कर हत्याकांड का खुलासा हो गया था.

अप्रैल 2026 की रात सैंया निवासी लोकेंद्र की हत्या हुई थी. मृतक की पत्नी सोमवती के संबंध गांव के महेश से हो गए थे. पत्नी ने प्रेमी के साथ मिल कर पति की हत्या करा दी थी. हत्या के बाद शव को खेत में जला दिया था. बाद में इस हत्याकांड का खुलासा हुआ था. Bathroom Murder

Haridwar Double Murder Case : समलैंगिक संबंधों में मारे गए 2 साधु

Haridwar Double Murder Case. पथरेश्वर महादेव मंदिर के महंत अखिल गिरी और उत्तम गिरी के बीच समलैंगिक संबंध बन चुके थे. एक दिन इसी मंदिर में रहने वाले महंत सेवा गिरी और पारस गिरी ने इन दोनों महंतों को आपत्तिजनक स्थिति में देख लिया. इस के बाद इन महंतों के बीच ऐसा खूनी खेल खेला गया कि

भीषण गरमी के बाद अचानक ठंडी हवा चलने लगी थी. इस के बाद क्षेत्र में रिमझिम वर्षा शुरू हो गई थी और मौसम बड़ा सुहाना हो गया था. तभी गांव की पगडंडी पर दरजनों ग्रामीण गुस्से में थाने की ओर बढ़ रहे थे. वे लोग आपस में जोरजोर से बातें करते जा रहे थे. ऐसा लग रहा था कि जैसे उन के अंदर कोई ज्वालामुखी समा गई हो.

ग्रामीणों के चेहरे पर भय व गुस्से के भाव आजा रहे थे. उस समय शाम के लगभग 5 बज रहे थे. थोड़ी देर में सभी ग्रामीण थाने के गेट पर पहुंच गए थे.

ग्रामीणों ने संतरी को बताया कि वे पास के गांव से ही आए हैं. गत रात से गांव के मंदिर के 2 साधु लापता हो गए हैं. उन के लापता होने से गांव में हड़कंप मच गया है, क्योंकि ये दोनों साधु ही गांव के मंदिर में सुबहशाम पूजाअर्चना व आरती किया करते थे. मगर आज शाम 4 बजे दोनों साधुओं के शव मंदिर परिसर में लोगों को 2 स्थानों पर दबाए हुए मिल गए हैं.

मंदिर के लापता 2 साधुओं के शव मिलने की जानकारी ग्रामीणों से सुन कर संतरी हैरान हो गया था और उस ने तत्काल ही यह सूचना स्टाफ की मीटिंग ले रहे एसएचओ रविंद्र कुमार को दी.

यह सूचना मिलते ही एसएचओ रविंद्र कुमार तुरंत ही बाहर आए और वहां खड़े ग्रामीणों से साधुओं को गड्ढों में दबाए जाने की जानकारी ली.

इस के बाद रविंद्र कुमार ने देर करना उचित न समझा और वे आवश्यक फोर्स ले कर मौके की ओर चल पड़े.

इसी बीच उन्होंने यह सूचना क्षेत्र के सीओ देवेंद्र नेगी, एसपी (देहात) शेखर चंद सुयाल व एसएसपी नवनीत सिंह भुल्लर को मोबाइल फोन द्वारा दे दी.

मंदिर के लापता साधुओं के शव मंदिर परिसर में दबे होने की सनसनीखेज सूचना पा कर ये तीनों अधिकारी भी चौंक पड़े थे और वे भी घटनास्थल की ओर चल पड़े थे.

उक्त मामला उत्तराखंड के हरिद्वार जिले के थाना पथरी स्थित गांव शिवगढ़ के पथरेश्वर महादेव मंदिर का  था. यह मामला 20 जुलाई, 2026 का था. मंदिर परिसर में पुलिस के पहुंचते ही वहां खड़ी भीड़ तितरबितर होने लगी थी.

इस के बाद एसएचओ रविंद्र कुमार व सीओ देवेंद्र नेगी ने साधुओं के शवों का निरीक्षण करना शुरू कर दिया था. शवों पर धारदार हथियारों के निशान थे. सूचना पा कर एफएसएल टीम भी मौके पर आ गई थी. घटनास्थल थाने से मात्र 6 किलोमीटर दूर था, अत: पुलिस फोर्स मात्र 20 मिनट में मौके पर पहुंच गई थी.

पुलिस को जानकारी मिली थी कि मंदिर का मुख्य पुजारी अखिल गिरी मौके से फरार है तथा वहां पर गड्ढों में दबाए गए शव सेवा गिरी व पारस गिरी के हैं.

20 जुलाई, 2026 की सुबह गांव के श्रद्धालु हमेशा की तरह पूजाअर्चना के लिए मंदिर पहुंचे थे तो उन्हें वहां नित्य की भांति सेवा गिरी व पारस गिरी कहीं नजर नहीं आए थे. उस वक्त ग्रामीणों ने इस ओर खास ध्यान भी नहीं दिया था.

लेकिन बाद में मंदिर परिसर में लापता साधुओं के शव मिलने के कारण यह मामला बड़ा सनसनीखेज हो गया था. इस के अलावा मंदिर के पुराने पुजारी महंत अखिल गिरी का गायब होना इस हत्याकांड में संदेह पैदा कर रहा था, क्योंकि महंत अखिल गिरी काफी वर्षों से मंदिर का कार्यभार संभाल रहे थे. इस के अलावा कभीकभार बाहर से आए कुछ साधुसंत भी वहां ठहरा करते थे.

इस के बाद सीओ देवेंद्र नेगी व एसएचओ रविंद्र कुमार ने मंदिर के आसपास के श्रद्धालुओं से उस मंदिर के बारे में जानकारी प्राप्त करनी शुरू कर दी.

दूसरी ओर फोरैंसिक टीम ने वहां के आसपास के क्षेत्र के फिंगरप्रिंट लेने शुरू कर दिए थे. इस घटना की सूचना पा कर सीआईयू टीम, एसपी (देहात) शेखर चंद्र सुयाल व एसएसपी नवनीत सिंह भुल्लर भी मौके पर आ गए थे.

इस के बाद इन अधिकारियों ने भी मौके पर आने के बाद घटनास्थल का निरीक्षण किया था और पुलिस व ग्रामीणों से इस घटना से संबंधित जानकारी प्राप्त की. निरीक्षण करने के बाद थानेदार महेंद्र पुंडीर ने घटनास्थल की काररवाई निपटा कर दोनों शव पोस्टमार्टम के लिए हरिमिलाप राजकीय अस्पताल हरिद्वार भेज दिए.

इस दोहरे हत्याकांड का मुकदमा पुलिस ने श्रद्धालु पंकज निवासी गांव ऐथल की ओर से दर्ज कर लिया.

पुलिस अधिकारियों के सामने इन साधुओं के हत्यारों का पता लगाना बड़ी चुनौती थी. मंदिर का महंत अखिल गिरी के भी गायब होने से यह हत्याकांड रहस्यमय बन गया था.

इस हत्याकांड के खुलासे के लिए एसपी (देहात) शेखर चंद सुयाल व सीओ देवेंद्र नेगी ने महंत अखिल गिरी उर्फ अंकुर गिरी को पकडऩे की योजना बनाई. इस योजना को अमली जामा पहनाने के लिए 3 पुलिस टीमों का गठन किया गया, जिस में सीआईयू इंसपेक्टर रविंद्र शाह, एसटीएफ इंसपेक्टर पवन स्वरूप व सीआईयू टीम (रुड़की) को भी शामिल किया गया था. सेवा गिरी व पारस गिरी की मौत का कारण पोस्टमार्टम रिपोर्ट में गला घोंटना व चाकू से गोदना बताया गया था.

इस के बाद ये टीमें महंत अखिल गिरी की तलाश में उस के संभावित ठिकानों पर दबिशें डालने लगीं. पुलिस की यह मेहनत रंग लाई. 2 दिन बाद ही पुलिस ने महंत अखिल गिरी को गिरफ्तार कर लिया. उसे ले कर पुलिस थाने आ गई. उस से सेवा गिरी व पारस गिरी की हत्या के बारे में पूछताछ की तो वह काफी देर तक पुलिस को गच्चा देने की कोशिश करता रहा.

तब सीओ श्री नेगी ने अखिल गिरी को धमकाते हुए कहा, ”याद रखो महंत, हमें पथरेश्वर मंदिर की सारी जानकारी है. मंदिर में कौन कब आता था? कौन रात को ठहरता था और वहां रात को क्याक्या होता था? इस बारे में सब कुछ पता चल चुका है हमें. यदि तुम हमें सेवा गिरी व पारस गिरी की हत्या की सच्चाई खुद ही बता दोगे तो ठीक है, अन्यथा पुलिस को सच कुबूलवाना भी आता है.’’

नेगी की यह धमकी सुन कर महंत थरथर कांपने लगा. थोड़ी देर चुप रहने के बाद महंत अखिल गिरी ने साधुओं सेवा गिरी व पारस गिरी की हत्या की योजना बनाने की बात कुबूल कर ली. इस के बाद महंत अखिल गिरी ने सेवा गिरी व पारस गिरी की हत्या की जो कहानी पुलिस को बताई, वह इस प्रकार है—

अखिल गिरी मूलरूप से थाना पथरी अंतर्गत गांव शिवगढ़ का ही रहने वाला है. लगभग 15 साल पहले उस ने संन्यास की दीक्षा ले ली थी. लगभग 11 साल पहले वह गांव के ही पथरेश्वर मंदिर में आ कर बतौर महंत रहने लगा था.

इस के बाद वह मंदिर में पूजाअर्चना करने लगा. फिर गांव के श्रद्धालुओं का मंदिर में आनाजाना बढ़ गया. सभी ग्रामीण उस की इज्जत करने लगे थे.

लगभग 5 साल पहले 2 साधु सेवा गिरी व पारस गिरी अखिल गिरी के पास आए थे. उन दोनों साधुओं ने मंदिर में रहने की इच्छा जताई तो अखिल गिरी ने उन्हें मंदिर में रहने की अनुमति दे दी.

दोनों साधु सेवा गिरी और पारस गिरी मूलरूप से जिला मुजफ्फरनगर के कस्बा शुक्रताल के निवासी थे. इस के बाद तीनों साधु मंदिर में रहने लगे और तीनों बारीबारी से मंदिर में सुबहशाम पूजापाठ करने लगे.

इसी प्रकार 2 साल बीत गए. डेढ़ साल पहले एक अन्य साधु मंदिर में आया और वहां रहने की इच्छा जताई थी. उस का नाम उत्तम गिरी था और वह मूलरूप से राजस्थान का रहने वाला था. अखिल गिरी ने उत्तम गिरी को भी अपने मंदिर में रख लिया था.

एक साल पुरानी बात है. एक दिन रात को ठंड के मौसम में उत्तम गिरी अखिल गिरी के पास सोया हुआ था. चिपट कर सोने से अखिल गिरी की काम वासना जाग गई थी और उस ने उत्तम गिरी के साथ समलैंगिंक संबंध बना लिए थे. उस के बाद से ही ये दोनों साधु जब मन होता, तब समलैंगिक संबंध बना लेते थे. यह सिलसिला चलता रहा.

करीब 2 महीने पहले उन के समलैंगिंक संबंधों की जानकारी सेवा गिरी व पारस गिरी को भी हो गई थी. एक दिन दोनों ने अखिल गिरी के सामने आ कर मंदिर की गद्ïदी पारस गिरी को सौंपने प्रस्ताव रखा.

उस समय अखिल गिरी ने यह कह दिया था कि इस प्रस्ताव का उत्तर बाद में दूंगा यानी वह बहाना बना कर इसे टाल गया था. इस के बाद दोनों साधु अकसर अखिल गिरी पर पथरेश्वर मंदिर की गद्ïदी सौंपने का दबाव बनाने लगे थे.

गद्ïदी सौंपने का दबाव बनाने के कारण अखिल गिरी तनाव में रहने लगा था और उस ने चुपचाप ही सेवा गिरी व पारस गिरी को रास्ते से हटाने की योजना बनाई.

योजना की जानकारी उस ने अपने साथियों आशु निवासी गांव इसमाइलपुर थाना लकसर व राम मिलन निवासी गोरसांड़ा जिला उत्तरकाशी व हाल निवासी करनाल हरियाणा को दी. इस के बाद उन्होंने साधु पारस गिरी व सेवा गिरी की हत्या करने के लिए मौके की तलाश में रहने लगे थे.

वह 18 जुलाई, 2026 का दिन था. उसी दिन शाम को अखिल गिरी आशु की बाइक पर बैठ कर पास के ही गांव सुलतानपुर कुन्हारी के पंचेश्वर मंदिर में पहुंचा. एक घंटे के बाद वे लोग वापस पथरेश्वर महादेव मंदिर में आ गए थे.

फिर योजना के अनुसार अखिल गिरी ने सेवा गिरी को पगड़ी पहना कर उसे पथरेश्वर मंदिर का कार्यभार सौंप दिया. इसी खुशी में देर रात एक शराब पार्टी का आयोजन अखिल गिरी और उस के साथियों द्वारा किया गया.

सभी ने पहले खूब शराब पी. जब सेवा गिरी व पारस गिरी नशे में धुत हो गए तो पहले उन चारों ने उन का गला घोंट दिया. इस के बाद उन चारों ने उन पर पाठल व चाकुओं से हमला कर दिया. उन दोनों के मरने पर चारों ने उन्हें मंदिर परिसर के पास ही 2 गड्ढे खोद कर उन्हें वहां दबा दिया. फिर  चारों पथरी के काठापीर के जंगल में जा कर छिप गए.

इस के बाद पुलिस ने अखिल गिरी के ये बयान दर्ज कर लिए. उसी दिन ही शाम को पुलिस ने काठापीर दरगाह के जंगल से आरोपियों राम मिलन व आशु को गिरफ्तार कर लिया. राम मिलन व आशु ने पुलिस के समक्ष सेवा गिरी व पारस गिरी की हत्या करनी कुबूल कर ली थी और पुलिस को दिए गए बयानों में अखिल गिरी के बयानों का ही समर्थन किया था.

तीनों आरोपियों के पकड़े जाने के बाद अगले दिन एसएसपी नवनीत सिंह भुल्लर ने इस हत्याकांड का खुलासा हरिद्वार में प्रैसवार्ता के दौरान कर दिया.  प्रैसवार्ता के बाद पुलिस ने आरोपियों को कोर्ट में पेश कर के जेल भेज दिया. पुलिस ने सेवा गिरी व पारस गिरी की हत्या में प्रयुक्त चाकू भी आरोपियों की निशानदेही पर बरामद कर लिया.

कथा लिखे जाने तक हत्यारोपियों अखिल गिरी, राम मिलन व आशु जेल में बंद थे. पुलिस द्वारा इस दोहरे हत्याकांड के चौथे आरोपी उत्तम गिरी की तलाश की जा रही थी.

इस मामले की विवेचना एसएचओ रविंद्र कुमार द्वारा की जा रही थी. रविंद्र कुमार इस हत्याकांड में आरोपियों के खिलाफ साक्ष्य एकत्र कर के उन के खिलाफ चार्जशीट अदालत में भेजे जाने की तैयारी कर रहे थे.

Ketan Agarwal Murder Case : कत्ल में फंसी केतन की मंगेतर

Ketan Agarwal Murder Case.  पेरेंट्स ने 20 वर्षीय सिया गोयल की शादी रियल एस्टेट कारोबारी विशाल अग्रवाल के 26 वर्षीय बेटे केतन अग्रवाल से तय जरूर कर दी थी, लेकिन सिया किसी भी कीमत पर अपने प्रेमी क्रिकेटर चेतन चौधरी को छोडऩा नहीं चाहती थी. एक तरफ बेटे की शादी को भव्य तरीके से करने के लिए विशाल अग्रवाल ने 17 करोड़ रुपए में जयपुर में एक महल भी बुक करा दिया था. इतना ही नहीं, उन्होंने मेहमानों के सफर के लिए 2 स्पैशल विमान भी बुक करा दिए थे. तो वहीं दूसरी तरफ सिया अपने मंगेतर केतन अग्रवाल को ठिकाने लगाने के लिए अपने प्रेमी चेतन चौधरी के साथ ऐसी खौफनाक साजिश रच चुकी थी कि

20 वर्षीय सिया गोयल और 22 वर्षीय चेतन चौधरी का प्यार अटूट था. दोनों ही जीवन भर साथ रहना चाहते थे, लेकिन दोनों के आर्थिक स्तर में जमीनआसमान का अंतर था. सिया के पेरेंट्स को बेटी के लव अफेयर के बारे में जानकारी हुई तो उन्होंने भागदौड़ कर सिया का रिश्ता एक धनाढ्य परिवार में तय कर दिया.

इस युवक का नाम केतन अग्रवाल था. सिया केतन अग्रवाल से शादी हरगिज नहीं करना चाहती थी. वह अपने पेरेंट्स से इस मंगनी का विरोध भी नहीं कर सकी. चूंकि सिया और चेतन एकदूसरे के साथ जीने और मरने की कसमें खा चुके थे, इसलिए दोनों ने मिल कर मंगेतर केतन से छुटकारा पाने के लिए चिंतन किया. एक दिन चेतन ने सिया से कहा, ”सिया, चलो हम कहीं दूर किसी दूसरे शहर में चल कर शादी रचा लेते हैं. बाद में जब स्थिति सामान्य हो जाएगी, तब वापस आ जाएंगे.’’

यह सुन कर सिया का मूड खराब हो गया. कहने लगी, ”कैसी बात करते हो तुम, जानते हो मेरी इतनी हाईप्रोफाइल फेमिली है. भाग कर शादी करने में मेरे परिवार की कितनी बदनामी होगी, इस का तुम्हें अंदाजा है?’’

”तो फिर तुम ही बताओ कि केतन से कैसे छुटकारा पाया जाए?’’ चेतन ने कहा.

”देखो, एक ही रास्ता है कि केतन को मौत के घाट उतार दिया जाए.’’ ”यह कैसे हो सकता है?’’

”जहर दे कर मार सकते हैं. उस की कार से एक्सीडेंट भी कराया जा सकता है और क्याक्या हो सकता है? यूट्यूब पर और क्राइम थ्रिलर वेब सीरीज देख कर तुम भी चिंतन करो, मैं भी करती हूं. कोई भी ऐसा तरीका निकालो, जिस से केतन परलोक भी सिधर जाए और हम लोगों का नाम न आए और हम पर कोई शक भी न करे.’’ सिया गंभीर होते हुए बोली.

इतना तय कर के दोनों अपनेअपने घर चले गए और मिशन की तैयारी करने लगे.

जब से सिया गोयल की बुआ ने उस का रिश्ता 26 वर्षीय केतन अग्रवाल से तय करा दिया था. तभी से सिया एक गंभीर उलझन में फंस गई. उस समय उसे लगा कि अभी तो उस की उम्र कम है. हो सकता है अभी शादी में वक्त हो. पहले सगाई होगी. उस के 2-4 साल के बाद शादी होगी. तब तक केतन से शादी खत्म करने का कोई न कोई रास्ता भी निकल आएगा.

लेकिन सिया का यह अंदाजा गलत साबित हुआ. 11 फरवरी, 2026 को सिया गोयल और केतन अग्रवाल की सगाई हो गई. 25 नवंबर, 2026 का पंडित ने दोनों की शादी का मुहूर्त भी निकाल दिया.

मंगनी के बाद जब सिया अपने प्रेमी चेतन से मिलती है तो वह उसे उकसाते हुए कहता है कि तुम तो मुझ से शादी कर रही थी! तुम ने तो कसम खाई थी कि जिंदगी भर साथ रहेंगे, मरेंगे साथ, सब कुछ साथ करेंगे, लेकिन अब तो तुम पराई होने जा रही हो!

”देखो चेतन, मैं घर वालों को शादी के लिए मना नहीं कर पाई. अब तुम बताओ कि केतन को ठिकाने लगाने का कोई प्लान तैयार किया या नहीं? जो भी हो, प्लान जल्दी तैयार करो, फिर उसे अंजाम तक पहुंचाया जाएगा.’’

31 मई 2026 की बात है, केतन अपनी मंगेतर सिया को लोहागढ़ किला घुमाने ले गया. यह महाराष्ट्र के पुणे जिले में लोनावला हिल स्टेशन के पास स्थित एक प्रसिद्ध पहाड़ी दुर्ग है. इस का इतिहास लगभग 2,000 साल पुराना है.

31 मई की वह दोपहर लोहागढ़ की चढ़ाई के लिए बेहद गर्म थी, लेकिन हवाओं में एक अलग ही बेचैनी थी. केतन, जो अपनी मंगेतर सिया को ले कर बेहद उत्साहित था, उसे सब से ऊंची चोटी ‘विंचू काटा’ की ओर ले गया.

सूरज की किरणें लोहागढ़ के पत्थरों से टकरा कर और भी तेज हो रही थीं. केतन, जो अपनी फिटनैस और ट्रैकिंग के शौक के कारण आगेआगे चल रहा था, वह पूरी तरह से बेखबर था कि उस के पीछे चल रही सिया के कदमों में प्यार कम और एक भयानक कशमकश ज्यादा है.

जैसे ही वे किले के सब से ऊंची चोटी पर पहुंचे, जहां से नीचे की खाई एक अंतहीन अंधेरे की तरह दिखाई दे रही थी, केतन उत्साह से चिल्लाया, ”देखो सिया, यहां से पूरा नजारा कितना अद्ïभुत दिखता है. यहां बैठते हैं, थोड़ी देर सुकून से बातें करेंगे.’’

केतन एक चट्टान के किनारे पर जा कर बैठ गया. वह अपनी खुशी में मग्न था, नीचे फैली हरियाली को निहार रहा था और भविष्य के सपने देख रहा था. उसे लगा कि वह अपनी मंगेतर के साथ जीवन के सब से खूबसूरत पलों में से एक जी रहा है. ठीक उसी पल, सिया उस के पास अपनी बांहों से उसे घेरे बैठी थी.

उस के दिमाग में अचानक एक विचार कौंधा, ”अगर मैं अभी इसे थोड़ा सा धक्का दे दूं, तो? क्या कोई देख पाएगा? क्या यह एक हादसा नहीं लगेगा?’’

बनाया हत्या का ब्लूप्रिंट

उस ने अपनी सांसें थाम लीं. केतन अभी भी उसी तरह बैठा था, बेफिक्र हो कर प्यारमोहब्बत की बातें कर रहा था. सिया के शरीर में एक अजीब सी सिहरन दौड़ी. उस का हाथ केतन के कंधे पर था. उस ने केतन की ओर देखा, एक क्षण के लिए दुनिया थम गई. उस का मन उस खाई की गहराई को माप रहा था और मन का दूसरा हिस्सा शायद उस अपराध की कल्पना से कांप रहा था.

केतन ने मुड़ कर उसे देखा और मुसकराते हुए कहा, ”क्या हुआ? तुम डरी हुई लग रही हो?’’

सिया ने अपना हाथ पीछे खींच लिया. उस दिन उस ने धक्का नहीं दिया. शायद डर की वजह से वह इतना साहस जुटा नहीं पाई या शायद इसलिए क्योंकि उस पल वह अकेली थी. इस के लिए उसे चेतन का साथ भी चाहिए था.

फिर भी वह 31 मई का दिन सिया के दिमाग में एक ‘ब्लूप्रिंट’ छोड़ गया था. नीचे उतरते वक्त, केतन अपनी मंगेतर का हाथ थामे आ रहा था, केतन सिया के प्यार में पागल हो चुका था.

देखने में सिया की तरफ से कोई कमी नजर नहीं आ रही थी. ऐसा लग रहा था जैसे दोनों तरफ बराबर आग लगी हुई है, जबकि सिया का मन अब उस चट्टान पर वापस जाने की साजिशें बुन रहा था.

वह दिन सिर्फ एक सैर का अंत नहीं था, बल्कि एक जान को खत्म करने की उस सुनियोजित योजना की पहली कड़ी थी. वहां सब से ऊंची चोटी पर केतन को खतरनाक जगह बैठा देख सिया के मन में पहली बार उसे धक्का दे कर मारने का आइडिया आया.

सिया लोहागढ़ की ऊंचाई से वापस आई तो चेतन के पास गई. वह बहुत गुस्से में था. उस ने चेतन का हाथ थामने की कोशिश की, लेकिन चेतन ने झटक दिया.

”नहीं, चेतन! ऐसा नहीं है जैसा तुम सोच रहे हो,’’ उस ने आगे कहा, ”वह मुझे बस घुमाने ले गया था. मेरा मन वहां बिलकुल नहीं था. मैं तो बस उस दिन का इंतजार कर रही हूं, जब मैं हमेशा के लिए तुम्हारी हो जाऊं. मुझे पता है कि वो क्या चाहता है, लेकिन मैं उसे सफल नहीं होने दूंगी. तुम चिंता मत करो सुहागरात जैसा दिन उस की जिंदगी में कभी नहीं आएगा.’’

सिया ने चेतन की आंखों में सीधे देखते हुए एक गहरी और डरावनी शांति के साथ कहा, ”मेरी बात सुनो. केतन का खेल खत्म हो जाएगा. मैं यहां यही बात करने आई हूं.’’

सिया की बात सुन कर चेतन का गुस्सा धीरेधीरे पिघल कर एक खतरनाक शांति में बदल गया. सिया ने बताया कि केतन को ऊंची पहाड़ी से धक्का दे कर उस की जीवनलीला समाप्त की जा सकती है. चेतन और प्रेमिका सिया में इस आइडिया को ले कर खूब चिंतन हुआ.

चेतन ने कहा कि यदि मैं साथ होता तो अपने दोनों के बीच का कांटा हमेशा के लिए निकल गया होता.

सिया ने कहा, ”अभी बिगड़ा क्या है? मैं उसे फिर उसी जगह पर ले कर जाऊंगी. आप साथ रहना. अपना क्रिकेट जैसा शानदार प्रदर्शन केतन को दुनिया से आउट करने के लिए हौसले और ताकत के साथ कर दिखाना.’’

इस तरह केतन को ऊंची पहाड़ी से धकेल कर उस की जीवन लीला समाप्त करने की योजना फाइनल हो गई.

यूं हुआ लव अफेयर

महाराष्ट्र के पुणे शहर का बिबवेवाड़ी इलाका आधुनिक रिहायशी कालोनियों और पुराने व्यावसायिक बाजारों का अनोखा संगम माना जाता है. यहां ड्राई फ्रूट्स, कपड़ों, इलेक्ट्रौनिक्स और दैनिक उपयोग की वस्तुओं की सैकड़ों दुकानें हैं. बिबवेवाड़ी के इसी व्यस्त बाजार में चेतन चौधरी की दुकान है.

उसी के पास सिया गोयल के पापा प्रवीण गोयल का भी औफिस है. यहां से बिजनैस संचालित होता है. लेकिन वहां इन लोगों की मुलाकात पहले नहीं हुई थी.

सिया का एक भाई साहिल गोयल है. साहिल गोयल क्रिकेट का शौकीन है. अच्छा क्रिकेट खेलता है और पुणे में अलगअलग क्लबों के साथ मैच खेलता था. इत्तेफाक से उसी इलाके का चेतन भी क्रिकेट खेलता था.

2024 में एक बड़ा मैच था. साहिल ने अपनी बहन सिया से कहा कि क्रिकेट का आज एक खास मैच है तुम चलोगी?

भाईबहन में भी दोस्ती और प्यार था. उस ने कहा, ”चलूंगी.’’

पहली बार सिया साहिल के साथ मैच देखने के लिए गई. साहिल की टीम में चेतन चौधरी भी था. सिया ने पूरा मैच देखा. उस दिन पहली बार खुद साहिल ने सिया को चेतन से मिलवाया. साहिल ने उन दोनों का परिचय कराया.

किसी ने नहीं सोचा था कि यह औपचारिक परिचय आने वाले समय की एक बड़ी त्रासदी बन जाएगा. उस दिन की मुलाकात बस ‘हायहैलो’ तक सीमित रही, लेकिन चेतन की नजरों में सिया के प्रति एक खास आकर्षण की चमक साफ देखी जा सकती थी.

इस के बाद कई मुलाकातें हुईं. क्रिकेट मैचों में भी सिया और चेतन का एक साथ आनाजाना लगा रहा. पिछले साल दिवाली पर साहिल ने पार्टी रखी. उस ने अपने दोस्तों को बुलाया. चेतन भी उस दिवाली पार्टी में आया.

पार्टी में साहिल के तमाम दोस्त थे और सिया भी पार्टी में मौजूद रही. उस पार्टी में पहली बार सिया और चेतन दोनों में एक तरह से प्यार हुआ. मौका मिलते ही चेतन ने धीरे से मुसकराते हुए पूछा, ”मैच याद है?’’

सिया ने खिलखिला कर जवाब दिया, ”हांहां, याद है. आप ने जो छक्का मारा था, वह छोटा रह गया था और कैच होने की वजह से आप आउट हो गए थे.’’

चेतन भी चूकने वाला कब था, ”उस ने कहा दिवाली के मौके पर आप मुझे कैच कर लो.’’

”मैं कैच करूंगी तो आप आउट नहीं होगे बल्कि गपच लिए जाओगे, क्योंकि यहां आप का छक्का बाउंड्री लाइन से बाहर है.’’

सिया की यह बात सुन कर चेतन शरमा गया. कहने लगा, ”आप को क्रिकेट की बहुत जानकारी है.’’

इस तरह इन दोनों के बीच बातचीत का सिलसिला शुरू हो गया और फिर बहुत देर तक चलता रहा. इस के बाद फोन नंबर एक्सचेंज हुए.

दोनों बातचीत करने लगे. चेतन की 22 साल की ऊर्जा और सिया की 20 साल की चंचलता के बीच एक गहरा जुड़ाव पैदा हो गया.

बाद में साहिल को इस बात का अहसास हो चुका था कि चेतन और उस की बहन सिया एकदूसरे से प्यार करते हैं. यहां तक कि उन की एक बुआ को भी इस बात की भनक लग गई थी. एक वक्त ऐसा आया, जब साहिल गोयल को यकीन हो गया कि चेतन और सिया रिलेशनशिप में हैं. उस ने उसे 1-2 बार सिया से कहा भी, लेकिन सिया ने टाल दिया कि दोस्त है, फ्रेंड है.

बताते हैं कि साहिल और उस के फेमिली वाले सिया की हरकतों से परेशान हो गए थे. सभी ने मिलकर चिंतन किया. सामूहिक निर्णय लिया गया कि किसी अच्छे घर में सिया की शादी कर दी जाए. साहिल की बुआ रेणू मित्तल और फूफा नरेंद्र मित्तल को इस की जिम्मेदारी सौंपी गई.

इसी बीच उन के एक रिश्तेदार के यहां शादी थी. उस शादी में केतन के पापा विशाल अग्रवाल की फेमिली और सिया गोयल के फेमिली वाले भी पहुंचे थे. दोनों परिवार वाले एकदूसरे को बहुत सालों से जानते थे. नरेंद्र मित्तल विशाल अग्रवाल के चचेरे मामा थे.

नरेंद्र मित्तल ने सिया गोयल के लिए केतन अग्रवाल से रिश्ता चलाने की बात कही थी. विशाल अग्रवाल से कहा था कि आप अपने बेटे के साथ मेरे बहनोई की बेटी सिया गोयल की शादी करा दो. दोनों की जोड़ी अच्छी जमेगी.

क्योंकि नरेंद्र मित्तल चचेरे मामा थे तो विशाल अग्रवाल मना नहीं कर पाए. रिश्ते को अंजाम तक पहुंचने से पहले दोनों से पूछा गया था. दोनों को एकदूसरे को समझने के लिए टाइम भी दिया गया था. दोनों उस वक्त बहुत खुश थे. तभी जा कर मंगनी हुई थी.

केतन के परिवार को सिया का गारंटी कार्ड नरेंद्र मित्तल और रेनू मित्तल ने दिया था कि लड़की की हमारी पूरी गारंटी है. लड़की बहुत सभ्य है.

केतन के पापा विशाल ने कहा कि सिया की उम्र अभी कम है. अभी 20 साल की भी नहीं हुई है. तो आप इतनी जल्दी इस की शादी क्यों शादी कर रहे हो?

तो उन्होंने कहा कि हमें शादी आज नहीं तो कल करनी ही है. इस के बाद दोनों की जल्द ही शादी करने की बात तय हो गई.

17 करोड़ का महल

केतन और सिया की शादी नवंबर, 2026 में राजस्थान के उदयपुर में शाही अंदाज में होने वाली थी. मेहमानों के ठहरने के लिए जयपुर में 17 करोड़ रुपए का एक आलीशान महल बुक किया गया था.

शादी समारोह की भव्यता को देखते हुए, मेहमानों के सफर के लिए 2 स्पैशल विमान भी कर लिए गए थे. ये तैयारियां अग्रवाल परिवार की आर्थिक मजबूती और सामाजिक रुतबे तथा केतन के प्रति परिवार के प्रेम और स्नेह को दिखाती हैं.

यही वह मोड़ था, जहां उन की कहानी का ‘मीठापन’ कड़वाहट में बदलने लगा. चेतन चौधरी के लिए, सिया को खोने का विचार ही असहनीय था और सिया, जो अपने परिवार के दबाव और चेतन चौधरी के प्रति अपने लगाव के बीच फंसी थी, मानसिक रूप से वह अस्थिर होने लगी.

उन के बीच की बातचीत अब भविष्य की उन योजनाओं के इर्दगिर्द घूमने लगी, जिन में केतन अग्रवाल का कोई स्थान नहीं था.

चेतन से फोन पर घंटों की बातचीत और चैटिंग से जो कभी प्यार भरी बातें हुआ करती थीं, अब षड्यंत्रों का आधार बन गईं.

एक दिन सिया ने अपने प्रेमी चेतन को बताया कि 6 जून, 2026 को केतन, उस की बहन संजना और मेरे लिए इंडोनेशिया के बाली जाने का प्रीवेडिंग ट्रिप बुक कर चुका है. सिया और चेतन बहुत अच्छी तरह जानते थे कि अगर केतन विदेश चला गया तो वहां उसे मारना बहुत मुश्किल होगा.

सिया ने चेतन से कहा, ”6 जून से पहले ही केतन का काम तमाम करना होगा.’’

यहीं से हत्या की साजिश का पहला चरण शुरू हुआ. सिया 5 जून को फिर लोहागढ़ की पहाड़ी पर जाने के लिए केतन से जिद करने लगी. केतन मना करने लगा है तो उस ने कहा, ”कोई नहीं, हम चलेंगे और 2-4 घंटे में आ जाएंगे.’’

यह बात केतन ने अपने फेमिली वालों से कही तो पेरेंट्स ने यह कहते हुए मना कर दिया कि कल तुम्हें इंडोनेशिया जाना है. अभी तुम पहाड़ी पर जाओगे तो थक जाओगे. वहां ऊंची चढ़ाई है, कोई जरूरत नहीं है जाने की.

यह बात सिया को पता चली तो उस के होश उड़ गए.

अब सिया का पहला मकसद केतन को भारत में ही रोकना था, जिस से कि जल्दी से जल्दी केतन को इस ऊंची पहाड़ी पर ले जा कर धक्का दे कर उस की जीवन लीला समाप्त की जा सके.

बाली टूर किया फेल

6 जून, 2026 को केतन, केतन की बहन संजना, सिया और सिया का भाई साहिल, ये चारों घर से फ्लाइट पकडऩे के लिए मुंबई एयरपोर्ट निकले. ये सभी लोग प्रीवेडिंग के लिए बाली इंडोनेशिया जा रहे थे.

बाली जाने के लिए सब लोग मुंबई एयरपोर्ट की तरफ रवाना हुए. रास्ते में चाय पीने के लिए रुकने को कहा. सभी लोग लोनावला के पास एक फूड पौइंट पर रुके थे. यहीं पर सिया ने अपनी चाल चली और किसी तरह केतन का पासपोर्ट छिपा लिया.

जब केतन का पासपोर्ट गायब हुआ, तब किसी को भी सिया पर जरा भी शक नहीं हुआ. उस समय किसी ने भी यह नहीं सोचा था कि इस के पीछे कोई बड़ी साजिश छिपी हो सकती है. उस दिन पुणे से मुंबई एयरपोर्ट जाने वाली गाड़ी के ड्राइवर वैभव जाधव ने बताया कि सुबह करीब 10 बजे वह पुणे पहुंचा.

सभी मुंबई पुणे एक्सप्रैसवे पर रवाना हुए, तो सिया ने अचानक चाय पीने के बहाने एक फूड मौल पर रुकने को कहा. करीब 10 मिनट बाद वह वापस आई और ड्राइवर वैभव जाधव से कार की डिक्की खोलने को कहा. सिया ने केतन के बैग से उस का पासपोर्ट निकाला और अपनी जेब में रख लिया था.

एयरपोर्ट पर छोडऩे के करीब 2 मिनट बाद फोन आया कि केतन का पासपोर्ट शायद कैब में रह गया है. ड्राइवर ने कहा कि उस ने पूरी कार देख ली थी. पासपोर्ट नहीं मिला. इस के बावजूद उस से वीडियो कौल करवा कर पूरी कैब दिखवाई गई. फिर उसे दोबारा एयरपोर्ट बुलाया गया. जहां केतन और साहिल ने खुद कार की तलाशी ली, लेकिन पासपोर्ट कहीं नहीं मिला. सिया ने बैग से केतन का पासपोर्ट निकालने के बाद वाशरूम में जा कर फाड़ कर फेंक चुकी थी.

जब वे लोग एयरपोर्ट पहुंचे, तब चैकिंग के दौरान पता चला कि केतन का पासपोर्ट तो गायब है. मजबूरी में सभी को ट्रिप कैंसिल करनी पड़ी. केतन निराश हो कर पुणे लौट आया. अब हत्या की साजिश का फेज 2 शुरू होता है.

सिया ने अपने सासससुर और मंगेतर केतन से कहा कि इंडोनेशिया का कार्यक्रम रद्द हो गया तो जल्दी दूसरा पासपोर्ट निकलवाओ और बाली चलते हैं, नहीं तो फिर सब से अच्छा टूर लोहागढ़ की पहाड़ी का ही रहेगा.

केतन को ट्रैकिंग का शौक है, वहां मुझे भी बहुत आनंद आया था. होने वाली दुलहन का दिल रखने के लिए न चाहते हुए भी केतन ने 14 जून, 2026 का कार्यक्रम लोहागढ़ के किले पर जाने का तय कर लिया.

सिया ने अपने प्रेमी चेतन से यह सब बात बताई और योजना को क्रियान्वयन करने के लिए कहा. शातिरदिमाग चेतन ने कहा कि यह काम तुम्हें अकेले ही करना है. तुम्हारी मदद के लिए मैं दूर रह कर ही निगरानी करता रहूंगा.

14 जून, 2026 की सुबह लोहागढ़ की फिजाओं में मानसून की पहली फुहारों की महक थी. बादलों ने आसमान को एक धुंधली चादर से ढंक रखा था. लोहागढ़ की सीढिय़ां चढ़ते हुए केतन बारबार पीछे मुड़ कर सिया का हाथ थाम लेता था.

वह उसे संभल कर चलने के लिए कहता, अपनी मंगेतर की सुरक्षा को ले कर वह बहुत ज्यादा सचेत था. उसे क्या पता था कि जिस हाथ को वह सहारा देने के लिए पकड़ रहा है, वही हाथ उसे खाई में धकेलने के लिए आतुर है.

आखिरकार, सिया ने पहाड़ी के ऊपरी हिस्से में पहुंच कर केतन के पास खड़ी हो कर सेल्फी लेने को कहा. जैसे ही उस ने फोटो के लिए हाथ आगे बढ़ाया, बड़ी फुरती से सिया सामने आई और केतन को धक्का दे दिया.

केतन लडख़ड़ा कर नीचे गिरता, इस से पहले एक पेड़ से टकराया और उस ने पेड़ को मजबूती से पकड़ लिया. अपना मिशन फेल होते देख वह तुरंत मंगेतर केतन के पास गई और उस को हाथ पकड़ कर ऊपर ले आई.

शातिरदिमाग सिया ने तुरंत नाटक किया और मंगेतर से कहा कि सांप आ गया था. मैं ने आप को सांप के काटने से बचाने के लिए हलका सा धक्का दिया था.

केतन अपनी मंगेतर से प्यार करता था और उसे सिया पर पूरा भरोसा भी था. उस ने सिया की इस झूठी कहानी को सच मान लिया. उसे लगा कि सिया ने उस की जान बचाई है. उसे अपनी मौत की साजिश का जरा भी शक नहीं हुआ. उस ने घर आ कर भी अपने पेरेंट्स से यह बात बताई और सिया की तारीफ की.

यूएस में की थी पढ़ाई

रियल एस्टेट कारोबारी विशाल अग्रवाल अपनी फेमिली के साथ पुणे जिले के गहुंजे में रहते थे. केतन अग्रवाल उन का इकलौता बेटा था. हर मायने में वह एक आदर्श बेटा और करोड़ों रुपए के पारिवारिक कारोबार का उत्तराधिकारी था.

केतन अग्रवाल विदेश से पोस्ट ग्रैजुएशन की पढ़ाई पूरी करने के बाद हाल ही में भारत लौटा था और परिवार के बिजनैस की जिम्मेदारी संभाल चुका था. वह पारिवारिक स्वामित्व वाली रियल एस्टेट कंपनी ‘सक्सेस ग्रुप’ का निदेशक होने के साथसाथ मुख्य विपणन अधिकारी (सीएमओ) भी था.

उस ने यूएस के बैबसन एफडब्ल्यू ओलिन ग्रैजुएट स्कूल औफ बिजनैस से उद्यमिता में मास्टर औफ साइंस की डिग्री पूरी की. इस से पहले उस ने सिंबायोसिस यूनिवर्सिटी से बीबीए की डिग्री भी प्राप्त की थी.

26 साल की उम्र में केतन अग्रवाल उस मुकाम पर था, जहां ज्यादातर भारतीय परिवार अपने बेटे की जिंदगी का सब से खूबसूरत अध्याय शुरू होते देखना चाहते हैं.

सिया गोयल का परिवार पुणे के बिबवेवाड़ी (मार्केट यार्ड के निकट) स्थित ‘लीला कुंज’ नामक बंगले में रहता है.

सिया के पापा प्रवीण गोयल मुख्यरूप से ड्राईफ्रूट्स के थोक व्यापारी बताए गए हैं. जबकि मम्मी पूजा गोयल गृहिणी हैं.

चेतन चौधरी के फादर का नाम बाबूलाल चौधरी है. यह मारवाड़ी लोग जोधपुर के पलासनी गांव के रहने वाले हैं. बरसों पहले कारोबार के लिए यहां आए थे. पुणे में मार्केट यार्ड नाम के इलाके में चेतन के पापा बाबूलाल चौधरी की दुकान है.

इलाके में अधिकांश दुकानें मारवाड़-मेवाड़ के लोगों की हैं. जहां वे ड्राइफ्रूट्स और किराना का बिजनैस करते हैं. चेतन के फादर की दुकान के सामने ही सिया गोयल के फादर का औफिस भी है.

उक्त मामले में चेतन के एक चाचा, उदयराम चौधरी का भी नाम सामने आया है, उन्होंने भी बाबूलाल चौधरी की तर्ज पर मीडिया पर एकतरफा कहानी दिखाने का आरोप लगाया और चेतन को एक सीधासादा और अनुशासित युवक बताते हुए उस की बेगुनाही का दावा किया.

योजना को दिया अंजाम

19 जून को सिया का जन्मदिन था, जिस के लिए केतन ने महाबलेश्वर में एक लग्जरी रिसौर्ट बुक किया था. सिया के जन्मदिन को एक यादगार और आकर्षक बनाने की योजना बनाई गई थी.

18 जून को सिया ने प्रीवेडिंग शूट का बहाना बना कर उसे फिर लोहागढ़ चलने के लिए मजबूर किया.

लोहागढ़ किले में सिया मंगेतर केतन अग्रवाल के साथ थी. दोनों ट्रैकिंग का मजा ले रहे थे और किले पर तसवीरें खींच रहे थे.

उस दिन, जब केतन ने सिया का हाथ थामा और खाई की तरफ मुड़ा तो उसे अहसास भी नहीं था कि वह अपनी उस मंगेतर के साथ चल रहा है, जो उस की हत्या करने को आतुर है.

आसपास का माहौल बिलकुल शांत और सामान्य लग रहा था. उसी दौरान सिया ने अपने मंगेतर केतन अग्रवाल को धक्का दे कर करीब 400 फीट गहरी खाई में गिरा दिया. उस के गिरते ही अचानक पहाड़ों के सन्नाटे को चीरते हुए जोर की चीख गूंजी. पल भर में ही मंजर बदल गया.

केतन किले की पहाड़ी से गहरी खाई में जा गिरा. इतनी ऊंचाई से पत्थरों पर गिरने के बाद बचने की कोई गुंजाइश नहीं थी. सिया बहुत घबरा गई और रोतेबिलखते हुए पुलिस को मदद के लिए बुलाया.

घटना की जानकारी मिलने पर थोड़ी देर में थाना लोनावला पुलिसकर्मी मौके पर पहुंच गए. मामला पहाड़ से खाई में गिरने का होने के कारण वहां पहुंचे पुलिसकर्मियों ने थाने के इंसपेक्टर दिनेश तायडे को सूचना दी. इंसपेक्टर दिनेश तायडे पुलिस बल के साथ घटनास्थल पर पहुंचे.

मामला गंभीर देख उन्होंने अपने उच्च अधिकारियों को घटना की सूचना दी. कुछ ही देर में डीवाईएसपी गजानन टोम्पे भी घटनास्थल पर पहुंच गए. सूचना पा कर एसपी संदीप सिंह गिल ने भी वहां पहुंच कर घटनास्थल का मुआयना किया. मौके पर पहुंची पुलिस को सिया ने बताया कि उस का मंगेतर केतन अग्रवाल पहाड़ी पर किनारे पर जा कर सेल्फी ले रहा था. हवा का एक तेज झोंका आया. उसी दौरान अचानक उस का पैर फिसल गया और वो खाई में जा गिरा. शुरुआत में पूरा मामला ट्रैकिंग हादसे जैसा ही लग रहा था.

पुलिस ने भी अपनी शुरुआती जांच के बाद इसे एक्सीडेंटल डेथ मान लिया. मौत की वजह एक्सीडेंट दर्ज कर ली गई और फाइल बंद होने वाली थी कि अचानक हालत ने एक नया मोड़ लिया.

सुबह के पौने 11 बजे सिया की मम्मी पूजा का फोन केतन की मम्मी राखी के पास आया कि केतन फोर्ट से गिर गया है. उन्हें लगा सीढिय़ां चढ़तेचढ़ते कहीं ठोकर लगने से गिर गया होगा. इस के बाद राखी ने सिया को बहुत कौल की.

कई कौल बाद उस ने फोन उठाया तो केतन के पापा विशाल अग्रवाल ने पूछा, ”बेटा, केतन कहां से गिरा है?’’

सिया ने बताया, ”हम ऊपर पूरा फोर्ट चढ़ गए थे, सेल्फी लेते समय उन का पैर फिसल गया था. ऊपर से गिरे हैं.’’

सिया की बात सुनते ही विशाल अग्रवाल के पैरों तले से जैसे जमीन खिसक गई.

उन के हाथ से फोन फिसलतेफिसलते बचा और उन के गले से एक चीख तक नहीं निकली. बस, आंखों से आंसुओं का सैलाब उमड़ पड़ा.

विशाल अग्रवाल की आवाज में जो सख्ती थी, वह पल भर में ही करुण विलाप में बदल गई. उन्हें लगा जैसे किसी ने उन के सीने पर वज्रपात कर दिया हो. वह पल उन के लिए पूरी जिंदगी का सब से लंबा और डरावना क्षण बन गया था.

उन का सारा संसार बिखर गया था. एक पल में ही घर की खुशियां मातम में बदल गईं और दिल की हर धड़कन सिर्फ केतन की सलामती की दुआ कर रही थी. घर का माहौल पलभर में बदल गया. विशाल ने बिना एक पल गंवाए पुणे से लोहागढ़ के लिए निकलने की तैयारी शुरू कर दी.

उन्हें उम्मीद थी कि शायद कहीं कोई गलतफहमी हो. उस सफर का हर किलोमीटर उन के लिए एक ऐसी आशंका से भरा था, जिसे कोई भी पेरेंट्स अपनी जिंदगी में कभी नहीं देखना चाहते.

बीच रास्ते में ही सिया ने किसी पुलिस वाले से उन की बात कराई. विशाल अग्रवाल ने बताया हम वहां पहुंचे तो देखा कि सिया का कोई खास दुखी होने वाला अंदाज नहीं था. केतन का शव रेस्क्यू करने वाले सुनील गायकवाड़ ने बताया कि केतन के सिर पर गंभीर चोट थी.

खोपड़ी कुचली हुई थी और हाथ पैरों पर भी कई जगह चोट के निशान थे. अन्य लोग रो रहे थे और मदद के लिए चिल्ला रहे थे, लेकिन सिया गोयल शांत खड़ी थी. सुनील ने कहा कि शव को जंगल के रास्ते बाहर लाया गया.

सिया पर हुआ शक

पुलिस को 18 जून, 2026 की सुबह करीब साढ़े 10 बजे इस पूरी घटना की सूचना मिली थी. बचाव अभियान दोपहर साढ़े 12 बजे चलाया गया और करीब डेढ़ बजे शव एंबुलेंस में पहुंचाया गया था.

पोस्टमार्टम के बाद पुलिस ने डैडबौडी विशाल अग्रवाल को सौंप दी. पुलिस को इस मामले में दुर्घटना पर संदेह हो ही रहा था.

सिया सोशल मीडिया पर दुख व्यक्त करने के लिए फोटो के साथ कुछ मार्मिक लाइनें डाल रही थी. केतन की मौत के बाद, सिया ने जिस तरह का अभिनय किया, वह किसी भी थ्रिलर फिल्म को मात देने वाला था.

21 जून को केतन के फादर, रिश्तेदार और उन के दोस्त नवदीप जिंदल व तरुण मित्तल के साथ उस पहाड़ी पर गए, जहां से केतन गिरा था. वहां के हालात देख कर परिवार को समझ आ गया कि कोई इंसान वहां से गलती से नहीं फिसल सकता. तब उन्हें पहली बार शक हुआ था कि इस जगह को केतन की हत्या करने के लिए जानबूझ कर चुना गया.

3 दिन बाद जब सिया घर आई तो केतन की बहन ने घटना के बारे में उस से जानकारी करनी चाही, सिया से पूछा था कि वह कहां बैठी थी? केतन कैसे गिरा और किले के उस किनारे तक कैसे पहुंचा?

सिया ने किसी भी सवाल का संतोषजनक जवाब नहीं दिया था. उस का रोना भी परिवार को बनावटी लगा था.

अगले दिन भी जब वह उन के घर आई, तब भी फेमिली वालों ने पूछा कि केतन का कौन सा पैर फिसला था, लेकिन वह चुप रही. सवालजवाब के दौरान शादी तय कराने वाली बुआ भी थी. वह सिया को वहां से धकियाती व खींचती हुई ले गई.

तब से वह पूरी तरह शक के घेरे में आ गई. परिवार में सलाहमशविरे के बाद विशाल अग्रवाल ने एसपी (देहात) संदीप सिंह गिल से जा कर अपनी बात कही.

पुलिस को पहले से ही यह वारदात संदिग्ध लग रही थी, क्योंकि केतन नियमित रूप से ट्रैकिंग करता था और उसे पहाड़ी इलाकों का अच्छा अनुभव था.

पुलिस इंतजार कर रही थी कि फेमिली वाले आ कर कोई तहरीर दें तो इस की जांच कराई जाए. विशाल अग्रवाल ने एसपी (देहात) संदीप सिंह गिल को तहरीर सौंप दी, जिस के बाद पुलिस ने मामले की गहन जांच शुरू कर दी.

पुलिस ने सिया के कौल रिकौर्ड खंगाले. एक मोबाइल नंबर पर पुलिस की नजर जम गई. उस पर जनवरी से केतन की हत्या वाले दिन सुबह 7 बजे तक सिया ने 2004 कौल्स में करीब 338 घंटे बातचीत की थी. यह नंबर पुणे के ही एक और व्यापारी परिवार के युवक चेतन चौधरी का था.

जांच में यह भी पता चला कि पहाड़ी से केतन अग्रवाल के नीचे गिरने से 34 मिनट पहले सिया ने चेतन चौधरी से ‘सीक्रेट कौल’ पर बात की थी.

जांच के दौरान पुलिस ने किले के आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली. फुटेज में एक संदिग्ध युवक दिखाई दिया, जिस ने भीषण गरमी में हुडी पहन रखी थी और हेडफोन के जरिए अपना चेहरा छिपाने की कोशिश किए हुए था.

पुलिस का माथा वहीं ठनक गया. ध्यान से देखने पर पता चला कि हुडी वाला युवक लगातार सिया और केतन का पीछा कर रहा था. इसी संदिग्ध गतिविधि ने पुलिस का ध्यान आकर्षित किया. पुलिस ने युवक की पहचान की. वह चेतन चौधरी था.

जांच आगे बढ़ाई तो कथित तौर पर सिया गोयल और उस के प्रेमी चेतन चौधरी की साजिश का परदाफाश हो गया. पुणे पुलिस द्वारा की जा रही जांच एक सुनियोजित साजिश की परतों को खोलती जा रही है.

इस के बाद पुलिस ने 23 जून को सिया गोयल और चेतन चौधरी को हिरासत में ले लिया. पुलिस ने उन्हें 2 बार पूछताछ के लिए रिमांड पर लिया है. दोनों ने केतन अग्रवाल की सुनियोजित तरीके से हत्या करने का अपराध स्वीकार कर लिया. दोनों आरोपियों ने यह भी सोचा था कि केतन जिंदा बच भी जाएगा तो दिव्यांग तो जरूर हो जाएगा. तब सिया के पास उस से शादी नहीं करने का बहाना होगा.

जांच के दौरान कई पहलू सामने आए. इन में प्रेम संबंध, पैसों का लेनदेन और पहले से रची गई साजिश शामिल थी.

गिरफ्तारी के बाद उन्हें वडगांव मावल अदालत में पेश किया गया, जहां से उन्हें आगे की जांच जारी रखने के लिए 29 जून तक 7 दिनों की पुलिस हिरासत में भेजा गया.

29 जून को उन की कस्टडी समाप्त होने वाली थी, लेकिन एसपी संदीप सिंह गिल ने बताया कि पुलिस ने अदालत से कहा था कि मामले की जांच अभी अधूरी है और कई महत्त्वपूर्ण पहलुओं की पड़ताल बाकी है. इस के लिए इन का पुलिस रिमांड जरूरी है. तब कोर्ट ने आरोपी सिया गोयल और चेतन चौधरी की पुलिस कस्टडी 3 जुलाई 2026 तक बढ़ा दी.

लगाए गंभीर आरोप

केतन अग्रवाल हत्याकांड के मुख्य आरोपी सिया गोयल और चेतन चौधरी को पुलिस रिमांड समाप्त होने के बाद 3 जुलाई 2026 शुक्रवार को एक बार फिर न्यायिक मजिस्ट्रैट प्रथम श्रेणी ए.एम. विभूति की अदालत में पेश किया गया. सुनवाई के दौरान अदालत परिसर और उसके आसपास सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए थे. सुनवाई के दौरान पुलिस ने दोनों की 3 दिन की अतिरिक्त पुलिस रिमांड मांगी थी.

दोनों पक्षों के वकीलों की बात सुनने के बाद अदालत ने पुलिस की रिमांड अरजी खारिज करते हुए दोनों आरोपियों को 14 दिन की न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया.

इस से पहले महाराष्ट्र प्रदेश के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से केतन के पिता विशाल अग्रवाल ने मुलाकात कर न्याय मांगा.

फडणवीस ने कहा कि सरकार दोषियों को कड़ी सजा दिलाने में, कोई कसर नहीं छोड़ेगी. महाराष्ट्र सरकार ने त्वरित अदालत की स्थापना को मंजूरी दी और वरिष्ठ अधिवक्ता और राज्यसभा सदस्य उज्ज्वल निकम को इस मामले में विशेष लोक अभियोजक नियुक्त किया.

उज्ज्वल निकम 26/11 मुंबई आतंकी हमले के मुख्य आरोपी कसाब को फांसी तक पहुंचाने और देश के कई हाईप्रोफाइल मामलों में सरकार का पक्ष रख चुके हैं.

27 जून को पुणे के गहूंजे स्थित बेलमंडो सोसाइटी में केतन को न्याय दिलाने के लिए एक विशाल कैंडल लाइट मार्च निकाला गया था. इस मार्च में केतन के दादा देवीचंद अग्रवाल भी अपनी कमजोर सेहत के बावजूद शामिल हुए थे.

पूरे पुणे और देश भर के लोगों में इस विश्वासघात को ले कर भारी आक्रोश और गुस्सा था. लोग लगातार सोशल मीडिया और सड़कों पर आरोपियों के लिए फांसी की सजा की मांग कर रहे थे.

विशाल अग्रवाल ने सिया के परिवार पर भी गंभीर आरोप लगाए. उन का कहना था कि सिया को शराब पीने सहित कई बुरी आदतें थी और उस का परिवार भी उस के व्यवहार से परेशान था.

इस पूरे घटनाक्रम के बीच पुलिस जब रिमांड की तिथि से एक दिन पूर्व यानी 2 जुलाई, 2026 को सिया गोयल को लोनावला स्थित उस के आलीशान आवास पर जांच के लिए ले गई थी तो वापसी में वहां एक बेहद शर्मनाक नजारा देखने को मिला.

खुद को चारों तरफ से मीडिया के कैमरों और भारी भीड़ से घिरा देख सिया गोयल अचानक अपना मानसिक संतुलन खो बैठी. उस ने बिना किसी पछतावे या डर के खुलेआम मीडियाकर्मियों और वहां मौजूद आम जनता की तरफ बेहद अश्लील इशारा करते हुए अपनी बीच वाली अंगुली (मिडिल फिंगर) दिखा दी.

सिया की यह बदतमीजी और हेकड़ी वहां मौजूद कैमरों में लाइव कैद हो गई.

सिया गोयल का एक पुराना वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल है. वीडियो में हाथों में बीयर जैसी बोतल लिए एक नाइट क्लब में किसी से फोन पर बातचीत करते दिख रही है.

इस दौरान उसे गालीगलौज करते और यह कहते सुना गया है कि पहले वह धोखा देता है फिर मुझे फोन करता है. मीडिया रिपोट्र्स में दावा किया गया कि यह वीडियो दिसंबर 2025 में रिकौर्ड किया गया था. सिया के इस व्यवहार को ले कर सोशल मीडिया में तरहतरह की चर्चाएं शुरू हो गईं.

सिया ने पुलिस को बताया था कि केतन गंजा होने के कारण विग लगाता था और साथ में हकलाता भी था, इसलिए वह उस से शादी नहीं करना चाहती थी.

विशाल अग्रवाल ने कहा कि उन का बेटा विग का केवल एक छोटा सा पैच लगाता था और इस की जानकारी सगाई से पहले सिया और उस के फेमिली वालों को दे दी गई थी. उन्होंने कहा कि सिया को इस बात से कोई आपत्ति थी तो वह शादी से इनकार कर सकती थी. बेटे की जान लेने की क्या जरूरत थी?

घटना से ठीक 1 दिन पहले यानी 17 जून को सिया गोयल घर से झूठ बोल कर बाहर निकली और पुणे के कोडवा इलाके के थर्ड वेव कौफी कैफे में अपने बौयफ्रेंड चेतन चौधरी से मिली. कैफे में लगे सीसीटीवी कैमरों में दोनों कैद हो गए.

पुलिस का कहना है कि यहां इन्होंने बैठ कर 18 तारीख को केतन की हत्या करने की पूरी साजिश रची थी. इस में यह भी शामिल था कि किले से धक्का देते समय सिया केतन की पहुंच से दूर रहे.

चेतन और सिया के बीच कथित तौर पर यह तय हुआ था कि केतन की हत्या के बाद, शक से बचने के लिए वह 3 साल तक शादी नहीं करेगी.

बताया जाता है कि इस के क्रियान्वयन के लिए शादी के कपड़ों की खरीदारी करने के बहाने करीब एक करोड़ रुपए अपने मंगेतर केतन से ले कर प्रेमी चेतन को दे चुकी थी.

रिमांड के दौरान ही पुलिस ने सिया को उस के घर ले कर गई. सिया के घर में तलाशी कर के वारदात वाले दिन उस के द्वारा पहने गए कपड़े भी बरामद कर लिए, जिन्हें अहम सबूत माना जा रहा है.

सिया और चेतन के बयानों में लगातार आ रहे भारी विरोधाभास और झूठ के पुलिंदे को देखते हुए पुणे पुलिस ने अदालत में सिया का पौलीग्राफ टेस्ट कराने की अरजी दे दी थी, क्योंकि सिया का आरोप था कि चेतन ने धक्का दिया है जबकि चेतन का कहना था कि सिया ने धक्का दिया है.

लेकिन आरोपी सिया गोयल और चेतन चौधरी ने अपने कानूनी अधिकारों का इस्तेमाल करते हुए यह टेस्ट कराने से साफ इंकार कर दिया.

क्राइम का रीक्रिएशन

रिमांड के दौरान पुलिस सिया को लोहागढ़ फोर्ट ले कर गई थी. किस्मत का खेल देखिए. 10 दिन बाद एक बार फिर सिया उसी जगह पर जा कर खड़ी थी. यहां से चेतन को धक्का दिया गया था. आज वह उस की डमी को धक्का दे रही थी. सोचो, उस के दिमाग में क्या चल रहा होगा.

पुलिस डीवाईएसपी गजानन टोम्पे ने बताया कि घटनास्थल का पुनर्निर्माण करने के लिए पुलिस ने केतन अग्रवाल के बराबर वजन वाला एक डमी भी तैयार की थी. वारदात वाली जगह पर उस डमी को नीचे गिरा कर क्राइम सीन को रीक्रिएट किया गया था.

उस के बाद पुलिस उस के प्रेमी चेतन चौधरी को भी उस की उसी पोशाक में लोहागढ़ किले में ले कर गई. जहां से उस ने केतन को धक्का दिया था. पुलिस ने चेतन के सामने भी क्राइम सीन को रीक्रिएट किया.

पुलिस की जांच के अनुसार चेतन पुणे से करीब 90 किलोमीटर दूर लोहागढ़ किले तक स्कूटी से पहुंचा था. उस ने कार का इस्तेमाल नहीं किया, ताकि टोल प्लाजा पर कार का रिकौर्ड न बने. पुलिस ने वह स्कूटी जब्त कर ली है.

शातिरदिमाग चेतन ने किले में प्रवेश करने का टिकट भी नहीं लिया था यह कह कर अंदर चला गया था कि वह यहां कसरत करने आया है. इस के अलावा घटना वाले दिन पहनी गई उस की हुडी और हैडफोन भी बरामद किए गए हैं.

जांच में जुटी पुणे ग्रामीण पुलिस ने आरोपी चेतन चौधरी के एक कालेज के सहपाठी को अपनी हिरासत में लिया. आरोपीयों द्वारा सब से अधिक बात करने वालों में यह मोबाइल नंबर भी शामिल था. पुलिस को पुख्ता अंदेशा है कि इस व्यक्ति को केतन अग्रवाल की हत्या की खौफनाक साजिश के बारे में सब कुछ पहले से मालूम था.

सिया और चेतन ने मोबाइलों के चैट और मैसेज डिलीट किए थे, पुलिस लैब में उन्हें रिकवर करा रही है. इस में ऐसे संकेत भी मिले हैं कि चेतन और सिया ने गुपचुप तरीके से विवाह भी कर लिया था.

दरअसल, सिया को चेतन पर शक हो रहा था कि कहीं केतन की हत्या होने के बाद चेतन ने उसे धोखा दिया तो वह कहीं की नहीं रहेगी. सिया ने चेतन से कहा कि पहले विवाह की रस्म अदा करो. उस के बाद केतन को पहाड़ी से नीचे धकेला जाएगा.

यह विचार सिया के दिमाग में इसलिए आया कि चेतन केतन को पहाड़ी से धकेलने की योजना में सिया को आगे कर रहा था. खुद परदे के पीछे रहना चाहता था.

पुलिस को संकेत मिले हैं कि विवाह पंजीकरण कार्यालय में अपना विवाह रजिस्टर्ड भी कराया था. विवाह कब और कहां तथा कैसे हुआ या नहीं हुआ, पुलिस इस की भी जांच कर रही है. पुलिस अधिक से अधिक सबूत जुटाने में लगी है.

इस हत्याकांड को ले कर महाराष्ट्र विधानसभा में जोरदार हंगामा हुआ. पीठासीन अधिकारी राजू खरे ने सरकार को इस मामले की जांच के लिए एक विशेष जांच दल (एसआईटी) गठित करने का निर्देश दिया था.

एनसीपी विधायक सुनील शेल्के ने सदन में मुद्ïदा उठाते हुए मांग की कि सिया के परिवार को भी इस हत्याकांड में आरोपी बनाया जाए. उन्होंने आरोप लगाया कि लड़की के परिवार ने उस के प्रेम संबंधों की बात केतन के परिजनों से छिपाई थी. चेतन और सिया दोनों जेल में थे.

यह अपराध की दुनिया का वह ‘शौर्टकट’ था, जिस ने केतन अग्रवाल की जान ले ली. सिया ने उस ‘परफेक्ट मर्डर’ की योजना बनाई, जिसे दुनिया एक ट्रैकिंग हादसा समझ ले.

उस ने और चेतन ने मिल कर हफ्तों तक इस खौफनाक साजिश को बुना. लोहागढ़ का किला, जो कभी शिवाजी महाराज की वीरता का प्रतीक था, सिया की नफरत और जुनून का गवाह बन गया.

पोते के सदमे में चल बसे दादा

केतन अग्रवाल की मौत के बाद दादा देवीचंद अग्रवाल लगातार गहरे सदमे में थे. उन की तबीयत बिगड़ती चली

गई. उन्हें पुणे के जुपिटर हौस्पिटल में भरती कराया गया, जहां डौक्टर उन्हें बचाने की कोशिश करते रहे, लेकिन शायद उन का मन पहले ही टूट चुका था.

पेशेवर की तरह की प्लानिंग

14 जून की नाकामी के बाद 14 से 18 के बीच में सिया और चेतन एक बार दोनों इसी किले पर रेकी के लिए आए थे. दोनों ऊंची पहाड़ी पर जा कर खड़े हुए. दोनों ने बात

की कि किस पोजीशन में केतन को खड़ा करना है. कैसे उसे बातों में उलझाना है और फिर किस तरीके से अचानक धक्का देना है कि उसे संभलने का मौका ही न मिले.

यूट्यूब पर इस संबंध बहुत कुछ सर्च किया गया था. इतना ही नहीं क्राइम थ्रिलर फिल्म और वेब सीरीज भी देखी गई थीं. साथसाथ इन दोनों को एक डर भी था और वो यह कि कितनी भी हम एहतियात बरतें हो सकता है कि पुलिस को हम पर शक हो. हमारे रिश्तों पर शक हो. फिर हम से पूछताछ हो सकती है. ऐसे में उन दोनों को क्या जवाब देना है? बाकायदा सिया और चेतन ने पुलिस के प्रश्न और उन के उत्तर की भी तैयारी की.

प्लानिंग के तहत 18 जून को चेतन अपना मोबाइल अपनी शौप पर छोड़ कर आया, जिस से उस की लोकेशन अपनी दुकान की दिखाई दे. भीषण गरमी होने के बावजूद उस ने हुडी पहनी ताकि उसे कोई पहचान नहीं पाए.

फोर्ट में कितने सीसीटीवी कैमरे हैं. इन दोनों ने खुद अपनी आंखों से एकएक कैमरे को टटोलने की कोशिश की और अनजान बन कर लोगों से पूछा तो पता चला कि इस किले में कुल 3 सीसीटीवी कैमरे लगे हैं. एक मेन एंट्री पौइंट जहां पर यह हुडी में कैद हुआ था.

दूसरा बिलकुल सेंटर पौइंट पर जब स्केलेस से एंट्री से आधे रास्ते पर पहुंचते हैं. वहां एक प्लेटफार्म है. लोग थक जाते हैं, थोड़ी देर के लिए रुकते हैं.

तीसरा, जहां इस किले को जाने वाली सीढिय़ां खत्म हो जाती हैं. वहां भी एक प्लेटफार्म है, जो एक सेल्फी पौइंट है. चेतन ने क्या चालाकी की? उसे पता है कि एंट्री गेट पर सीसीटीवी कैमरा और उस में वो कैद होगा. तो 18 जून की सुबह जब वह गया तो उस कैमरे से अपना चेहरा छिपाने के लिए उस ने हुडी पहन ली. पीछे पिट्ठू बैग भी लटका लिया था.

जहां से धक्का दिया था, उस से ठीक पहले एक सुनसान जगह पर चेतन ने अपना हुडी उतार कर बैग में रख लिया. बैग से एक टीशर्ट निकाल कर पहन ली. इस के बाद जब फाइनली काम हो गया. चेतन ने थोड़ी दूर सन्नाटे में जा कर टीशर्ट उतारी और बैग में रख ली.

फिर से उस ने हुडी पहनी और फिर नीचे आया, क्योंकि ऊपर जाते वक्त वो हुडी में कैमरे में कैद हो चुका है. तो इसलिए वापसी में भी उसे हुडी में उस कैमरे में कैद होना था. और टीशर्ट इसलिए बदली कि अगर किसी ने गलती से उसे देख लिया या पता चल गया तो लोगों की नजरों में एक हुडी वाला शख्स और एक टीशर्ट वाला 2 अलगअलग शख्स हो जाएंगे.

इन दोनों की इतनी गहरी प्लानिंग थी, जैसे पेशेवर क्रिमिनल सोचते हैं. इन दोनों ने गूगल और यूट्यूब पर भी जा कर यह सर्च किया कि मौत के तरीके क्याक्या हैं? जिन में हम बच सके. पुलिस को शक न हो.

4 जुलाई, 2026 शनिवार रात करीब पौने 10 बजे डौक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया. परिवार का कहना है कि पोते के वियोग का दर्द वह सहन नहीं कर पाए.

यह वही दादा थे, जो कुछ दिन पहले अपने पोते को न्याय दिलाने के लिए निकाले गए कैंडल मार्च में शामिल हुए थे. कांपते कदमों से भी वह न्याय की उम्मीद ले कर चले थे, लेकिन शायद उन के भीतर उम्मीद से ज्यादा दर्द था.

आज अग्रवाल परिवार दोहरी पीड़ा से गुजर रहा है. एक ओर केतन की कथित हत्या का न्याय मिलने का इंतजार, दूसरी ओर उस बुजुर्ग की कमी, जिस ने अपने पोते के गम में दुनिया को अलविदा कह दिया.

केतन के दादाजी, देवीचंद अग्रवाल, जिन्होंने शून्य से एक विशाल व्यापारिक साम्राज्य खड़ा किया था, अपने पोते में अपना अक्स देखते थे. केतन उन के लिए सिर्फ एक वारिस नहीं, बल्कि उन के बुढ़ापे की लाठी और उस विरासत का भविष्य था, जिसे उन्होंने खूनपसीने से सींचा था. यह सिर्फ एक बीमारी नहीं बल्कि पोते के वियोग की वह आग थी, जो उन्हें धीरेधीरे कर के लील गई.

आखिर जिम्मेदार कौन

जांच में जब सिया से पूछताछ हुई तो उस की बातों में एक अजीब सी ठंडी सच्चाई थी. उस ने पुलिस के सामने कुबूल किया कि शादी तोडऩा मेरे लिए

एक विकल्प नहीं था. अगर मैं रिश्ता तोड़ती तो पूरा समाज मेरे पेरेंट्स की तरफ अंगुलियां उठाता. मेरे परिवार की प्रतिष्ठा के सामने मेरा अपना वजूद कुछ भी नहीं था. मेरे परिवार की गरिमा, मर्यादा, प्रतिष्ठा या सम्मान तुलनात्मक दृष्टि से केतन के परिवार से कम नहीं था.

कहते हैं कि अपने पेरेंट्स के आत्मसम्मान और गौरव के महत्त्व को समझने की भावना बेटियों में ज्यादा होती है. सिया के अंदर भी सामाजिक परंपराओं और परिवार से मिले संस्कार थे, जिस के कारण वह अपने सिद्धांतों से समझौता नहीं करना चाहती थी.

सिया के मन का यह ‘गणितÓ बहुत ही घातक था. उसे लगा कि यदि वह सगाई तोड़ती है तो वह एक ‘विद्रोहीÓ कहलाएगी, लेकिन अगर केतन ‘हादसेÓ का शिकार हो जाए तो वह एक ‘दुखी मंगेतरÓ बन कर सहानुभूति की हकदार होगी.

उस के लिए केतन का मरना, एक तय शादी के टूटने से कहीं अधिक आसान और सुरक्षित रास्ता था.

केतन अग्रवाल का मामला केवल इसलिए चर्चा में नहीं आया कि एक युवा की असामान्य परिस्थितियों में मृत्यु हुई, बल्कि इस ने समाज की कई धारणाओं को भी झकझोर दिया.

लोगों ने फिर से यह सवाल पूछना शुरू किया कि क्या धनदौलत किसी परिवार को दुख से बचा सकती है? क्या भव्य शादी की तैयारियां अपने आप में भरोसे और मजबूत रिश्ते की गारंटी होती हैं? या फिर चमकती रोशनी और मुसकराती तसवीरों के पीछे भी ऐसी अनकही कहानियां छिपी हो सकती हैं, जिन का अंदाजा किसी को नहीं होता? समाज अब किस दिशा में जा रहा है? इस का जिम्मेदार कौन है?  Ketan Agarwal Murder Case

Child Kidnapping Case : चले थे फिरौती वसूलने

Child Kidnapping Case. बेरोजगारी से तंग आ कर राधिका ने अपने भाई और सहेली के साथ मिल कर अपनी गरीबी दूर करने का जो शार्टकट रास्ता अपनाया, वह एकदम फिल्मी निकला. उन्होंने बैंक लूटने जैसी कई योजनाएं बनाईं, लेकिन सफलता नहीं मिली. आखिर उन्होंने लाखों रुपए पाने के लिए अगला कदम उठाया, ङ्क्षकतु आधुनिक तकनीकी जांच के आगे उन की योजना बालू की भीत साबित हुई और सभी 5 घंटे के भीतर इस तरह दबोच लिए गए कि

इंदौर का रहने वाला विनीत प्रजापति (22 वर्ष) पिछले कई महीने से बेरोजगार चल रहा था. उसे एक प्राइवेट कंपनी में नौकरी मिली थी. वह कंपनी 6 महीने बाद ही बंद हो गई. असल में वह कंपनी फरजी थी, जिस में काम करने का विनीत को पैसा भी नहीं मिला.

विनीत की बहन राधिका प्रजापति (19 साल) भी साधारण पढ़ीलिखी थी. वह टेलीकौलिंग का काम करती थी. इस काम में उसे भी बहुत कम पैसा मिलता था. महीने 2 महीने में नौकरी छूट जाती थी. दोनों भाईबहन आर्थिक तंगी को ले कर परेशान रहते थे. उन के घर की माली हालत भी काफी दयनीय थी.

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एक रोज विनीत दुखी मन से बहन से बोला, ”ऐसे कब तक चलेगा, कुछ समझ में नहीं आ रहा है?’’

”सभी जगह ठगबेइमान बैठे हैं…प्राइवेट कंपनी वाले काम करवा कर भी पैसा नहीं देते हैं.’’ राधिका बोली.

”क्या करूं? तुम ही कोई उपाय सोचो… गरीबी दूर कैसे हो?’’ विनीत उदासी के साथ बोला.

”हमारे पास थोड़ी सी पूंजी हो जाए, तब हम लोग अपना कोई काम कर सकते हैं.’’ राधिका बोली.

”पूंजी कहां से आएगी? तुम जो कमाती हो उस से तो किसी तरह घर का खर्च पूरा हो पाता है.’’ विनीत बोला.

”लेकिन भैया कुछ तो उपाय करना होगा… ऐसे कब तक चलेगा. पहले मैं तुम्हारे लिए किसी नौकरी के बारे में पता करती हूं.’’ राधिका बोली.

”हांहां, पता कर लो, तुम्हारे साथ टेलीकौलिंग करने वाली और भी तो लड़कियां होंगी.’’ विनीत बोला.

राधिका की एक हमउम्र सहेली तनीषा सेन (20 वर्ष) पहले उस के साथ ही काम करती थी. वह पहले फ्लिपकार्ट में थी. वहां से जौब छोड़ कर एक दुकान में सेल्सगर्ल लग गई थी. राधिका ने उस से अपने 12वीं पास भाई के लिए कोई नौकरी पता करने के लिए कहा.

तनीषा खुद अपने पति की बेरोजगारी की समस्या से परेशान थी. सहेली के भाई के लिए कैसे नौकरी पता करती? उस का ड्राइवर पति ललित पिछले 6 महीने से नौकरी तलाश रहा था. फिर भी राधिका ने तनीषा से बात करने का मन बना लिया.

अगले दिन ही राधिका की मुलाकात तनीषा से हुई. उस ने तनीषा से अपने दिल की बात कही तो तनीषा ने भी अपने मन की बात उसे बता दी. थोड़ी देर उन के बीच उदासी और चुप्पी का माहौल बना रहा. अचानक तनीषा की नजर सामने एक बैंक के साइनबोर्ड पर पड़ी. चहकती हुई बोली, ”लगता है, हमें ढेर सारे पैसों के लिए बैंक ही लूटना पड़ेगा.’’ ”वह कैसे?’’ राधिका ने सवाल किया.

”अरे, मैं तो मजाक कर रही हूं…हम ऐसा कैसे कर सकती हैं?’’ तनीषा बोली.

”मजाक नहीं है तनीषा, तू बिलकुल सही बोल रही है. बैंक में ही तो बहुत सारा पैसा होता है. सोचती हूं उसे लूट लिया जाए तो हमारी गरीबी दूर हो सकती है.’’ राधिका बोली.

”तो फिर इस का प्लान बनाएं? मैं ललित से बात करूं क्या?’’ तनीषा बोली. ”हांहां, बात कर न अपने हसबैंड से…मैं भी अपने भाई से इस बारे में बताती हूं.’’

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दोनों सहेलियों की बैंक लूटने की मजाकमजाक में शुरू हुई बात ललित और विनीत तक जा पहुंची. इसे दोनों ने गंभीरता से लिया और जल्द ही इस पर योजना बनाने के लिए एक मीटिंग तक कर ली.

मीटिंग में यह बात सामने आई कि बैंक लूटने में काफी खतरा है. इस से आसान तो यही रहेगा कि क्यों न किसी ज्वैलर्स के शोरूम को ही लूट लिया जाए.

इस योजना पर सभी की सहमति बन गई. यह भी तय हो गया कि कौन ग्राहक बन कर शोरूम में जाएगा और कौन लूट का काम करेगा. उस के बाद लूटा हुआ माल ले कर वे फरार हो जाएंगे.

इस योजना को कार्यरूप देने के लिए उन्होंने कई बैठकें कीं, लेकिन इस के लिए उन्हें हथियार और गाड़ी का इंतजाम करने की जरूरत महसूस हुई. इस पर राधिका ने ही सवाल किया कि हथियार के इंतजाम करने के लिए हम लोगों के पास पैसे नहीं हैं. इसलिए कोई वैसी योजना बनाई जाए, जिस में कुछ भी खर्च न करना पड़े.

तनीषा बोली, ”तब तो एक ही योजना है, जिस में कोई पैसा नहीं लगता है.’’ ”क्या…क्या? जल्दी बताओ.’’ राधिका चहकती हुई बोली. ”किडनैप!’’ तनीषा बोली.

”हां, सही तो कह रही है…किसी अमीर फेमिली के बच्चे का किडनैप कर लो और उसे फोन कर 15-20 लाख रुपए फिरौती के झटक लो.’’ ललित बोला. ”और इस में पुलिस केस का भी अधिक खतरा नहीं रहता है.’’ विनीत तुरंत बोला.

”राधिका क्या कहती हो? इस पर तैयारी शुरू की जाए?’’ तनीषा बोली. ”हांहां, हम लोग इस के लिए तैयार हैं.’’ विनीत और ललित एक साथ बोल पड़े.

जल्द ही भाईबहन और पतिपत्नी ने शातिराने अंदाज में बच्चे के किडनैप करने की योजना बना डाली.

बात 23 अप्रैल, 2026 की है. शाम के वक्त मध्य प्रदेश के शहर इंदौर के लालाराम नगर क्षेत्र में 9 वर्षीय नैतिक सोनकर और 11 वर्षीय सम्राट एक पार्क में क्रिकेट खेल रहे थे. वहां राधिका और तनीषा भी मौजूद थीं. उन्होंने बच्चों को नाश्ता और पालतू जानवर दिखाने का लालच दिया. बच्चे उन की बात का भरोसा कर उन के साथ चल दिए.

23 अप्रैल की रात 8 बजे तक इंदौर के पलासिया थाना क्षेत्र में बसे लालाराम नगर में सब कुछ  सामान्य था. किंतु एक घंटे बाद इलाके में रहने वाले 9 और 11 साल के 2 बच्चों के किडनैप की खबर से पूरे इलाके में हलचल मच गई.

लालाराम नगर में अधिकांश निम्नमध्यम वर्गीय परिवार रहते हैं. इसलिए ऐसे 2 परिवारों के मासूम बच्चों के किडनैप की बात किसी की समझ में नहीं आ रही थी. दरअसल, हुआ यह कि यह दोनों बच्चे रोज की तरह तिरुपति खेल मैदान में मोहल्ले के बच्चों के साथ क्रिकेट खेल रहे थे.

यह इन का रोज का काम था, मगर जब उस रोज अंधेरा घिरने तक दोनों बच्चे अपने घर वापस नहीं लौटे, तब दूसरे बच्चों ने बताया कि उन को एक लड़की तोता, खरगोश दिखाने के लिए ले गई थी.

यह सूचना थाना पलासिया में दी गई तो टीआई सुरेंद्र सिंह रघुवंशी ने इस मामले को गंभीरता से लिया. उन्होंने सीनियर औफिसर्स को इंफार्मेशन देने के बाद एक टीम इलाके में लगे सीसीटीवी कैमरों की जांच में लगा दी.

एक कैमरे की फुटेज में दोनों बच्चे एक युवती के साथ जाते दिखाई दिए. यह देख कर पुलिस के साथसाथ मोहल्ले वाले भी बच्चों की खोज में जुट गए.

लेकिन इस से पहले कि उन का कुछ पता चल पाता, रात लगभग 11 बजे किडनैप हुए एक बच्चे की मम्मी के फोन पर वीडियो कौल आई. कौल करने वालों ने बच्चों को छोडऩे के लिए 15 लाख रुपए की फिरौती की मांग की.

जिन 2 बच्चों का किडनैप हुआ था, उन में एक के फादर गन्ने के रस का ठेला लगाते थे, जबकि दूसरे के फादर रामायण मंडली में ढोलक बजाने का काम करते थे. ऐसे में इन परिवारों के लिए इतने पैसों का इंतजाम करना आसान नहीं था, इसलिए किडनैपर ने जिस महिला को फोन कर के फिरौती मांगी थी, वह उस के सामने बारबार हाथपैर जोड़ रही थी.

इस मुसीबत की घड़ी में लालाराम नगर में रहने वाले सभी परिवार एकजुट हो गए. जिस के पास जो कुछ था, सब ला कर पीडि़त परिवार को सौंप दिया. कुछ ही देर में साढ़े 7 लाख रुपए जमा हो गए. इसलिए परिवार ने बदमाशों से अनुरोध किया कि वे इतना पैसा ले कर उन के बच्चों को छोड़ दें. इस से अधिक पैसा वे नहीं दे पाएंगे. जबकि किडनैपर्स 15 लाख से कम पर राजी नहीं हो रहे थे.

इधर किडनैपर्स और पीडि़त परिजनों के बीच फिरौती की रकम को ले कर बात चल रही थी, उधर पुलिस भी अपने स्तर से काररवाई करने में लगी हुई थी. एसीपी तुषार सिंह के नेतृत्व में पलासिया, संयोगिता गंज, छोटी ग्वालटोली, राजेंद्र नगर, द्वारकापुरी, तुकोगंज आदि थानों की पुलिस टीमें अपने काम में लग चुकी थीं.

दरअसल, फिरौती के लिए जिस फोन नंबर से कौल आई थी, उस की लोकेशन राजेंद्र नगर की मिल रही थी. इसलिए पुलिस का पूरा ध्यान राजेंद्र नगर पर था.

इस के अलावा अपहरण के स्थान से राजेंद्र नगर तक जाने वाले रास्तों में पडऩे वाले इलाके में भी पुलिस सतर्क थी. साइबर टीम लगातार काम कर रही थी, जिस के चलते पता चला कि जिस नंबर से आरोपी पीडि़त परिवार से वाट्सऐप चैट कर रहे थे, वह राजेंद्र नगर थाना इलाके के दत्तनगर में ऐक्टिव था.

इसे ध्यान में रख कर बड़ी संख्या में पुलिस दत्तनगर में चारों तरफ फैल कर एकएक मकान पर नजर टिका चुकी थी. पूरी तरह यह एक गहन अभियान बन गया था. इस दौरान पुलिस टीम ने पाया कि आधी रात हो जाने के बाद भी एक मकान की लाइट बारबार जल रही है और बंद हो रही है.

पुलिस ने शक के आधार पर वहां दबिश दी तो वहां किडनैप किए गए दोनों बच्चों के साथ 19 साल की राधिका नाम की युवती पाई गई. इस तरह पुलिस को 5 घंटे में ही दोनों अपहृत बच्चों को मुक्त करने में सफलता मिल गई थी.

राधिका को गिरफ्तार कर लिया गया था. उस से पूछताछ की गई. तब उस ने अपने 3 साथी सगे भाई विनीत, अपनी सहेली तनीषा और उस के पति ललित के नाम बताए. पुलिस ने उसी समय छापेमारी कर अन्य 3 आरोपियों को भी गिरफ्तार कर लिया.

Child Kidnapping Case

दोनों बच्चे जैसे ही किडनैपर्स के चंगुल से छूट कर अपनेअपने घर आए तो पूरे इलाके में खुशी का माहौल बन गया. बच्चों ने बहलाफुसला कर साथ ले जाने की बात बताई. उन्होंने बताया कि कुछ दिनों से एक युवती खेल के मैदान में आ रही थी.

वह भी बच्चों के साथ खेल में शामिल हो जाती थी. बच्चे उन्हें दीदी कह कर बुलाने लगे थे. घटना के रोज उसी दीदी ने उन्हें तोता, खरगोश और कुत्तों के बच्चे देने की बात बोल कर अपने साथ ले गई थी. वे उन्हें कुछ दूर तक पैदल, फिर कार में बैठा कर ले गई थी. घर ले जा कर उन्होंने उन को खानेपीने के लिए भी दिया. इसी बीच एक बच्चे से उस की मम्मी का फोन नंबर लिया था.

बच्चों ने यह भी बताया कि जब पुलिस आई तो दीदी ने कहा था कि बदमाश आ गए हैं, तुम लोग छिप जाओ और शोर मत करना. दीदी के कहने पर हम लोग गैलरी में चादर ओढ़ कर छिप गए थे.

दूसरी तरफ आरोपियों ने पुलिस को पूछताछ में किडनैप की पूरी कहानी इस प्रकार बताई—

राधिका को पहले से मालूम था कि तिरुपति ग्राउंड में रईस परिवारों के बच्चे खेलने आते हैं, इसलिए प्लान बना कर 2 दिनों तक तनीषा ने वहां रेकी की और बच्चों को मोबाइल पर जानवरों के वीडियो दिखा कर उन से दोस्ती करने के बाद 11 अप्रैल, 2026 को उन में से 2 बच्चों को अपने साथ ले गई.

लेकिन यहां बच्चों की पहचान करने में उस से गलती हो गई, जिस से उस ने 2 मजदूर परिवार के बच्चों का किडनैप कर लिया.

पुलिस द्वारा किडनैप में इस्तेमाल किए गए कई मोबाइल फोन जब्त किए गए. पुलिस जांच में पाया गया कि किडनैप की साजिश पहले से रची गई थी.

घटना से 3-4 दिन पहले से ही तनीषा सेन उस गार्डन के आसपास घूम रही थी. उस ने पपी, कबूतर, सफेद चूहे, खरगोश और बिल्लियों की कहानियां सुना कर और अपने फोन पर जानवरों के वीडियो दिखा कर धीरेधीरे बच्चों से दोस्ती कर ली थी. विनीत ने बच्चों से वादा किया कि अगर वे उन के साथ चलेंगे तो उन्हें ये जानवर तोहफे में मिलेंगे. यह सुन कर बच्चे बिना किसी शक के उन के जाल में फंस गए.

तनीषा सेन ने एक कैब बुलाई और दोनों बच्चों को राजेंद्र नगर इलाके के एक फ्लैट में ले गई, जहां उस ने उन के वीडियो बनानी शुरू कर दी.

जब उस रात दोनों बच्चों ने कहा कि उन्हें भूख लगी है तो उस ने उन्हें खिलाने के लिए दूध में सेवइयां बनाईं. एसीपी सिंह ने इस बात की पुष्टि की कि बच्चों को कोई नुकसान नहीं पहुंचाया गया.

बचाए जाने के तुरंत बाद दोनों बच्चों को मैडिकल जांच के लिए एमवाई हौस्पिटल ले जाया गया और बाद में उन्हें उन के पेरेंट्स को सौंप दिया गया.

पुलिस ने चारों आरोपियों राधिका, उस के भाई विनीत, सहेली तनीषा सेन और तनीषा के पति ललित को गिरफ्तार कर कोर्ट में पेश किया, जहां से उन्हें जेल भेज दिया गया.

Maharashtra Crime Story : भारी पड़ी पत्नी को धमकी

Maharashtra Crime Story. लाश दफना दी गई थी. उस की हत्या को छिपाए रखने के लिए उस के ऊपर ही ढाबा बना लिया गया था. किंतु जुर्म तो जुर्म ही होता है, वह एक न एक दिन उजागर हो कर ही रहता है. ऐसा ही 4 साल से लापता विनोद नवले की कहानी में हुआ. आरोपी सचिन द्वारा पत्नी को दी गई धमकी के बाद 4 साल पहले की गई विनोद की हत्या का यह केस उजागर हो ही गया. केस के खुलते ही फिल्म ‘दृश्यम’ की याद ताजा हो गई.

ट्रक ड्राइवर विनोद अश्रुब नवले (उम्र 38) अपने परिवार के साथ महाराष्ट्र के मेहकर तालुका के सुकली गांव में रहता था. परिवार में पत्नी, 2 बेटियां, एक बेटा और पेरेंट्स के साथ रह कर खुशहाल जीवन गुजार रहा था. वह संयुक्त परिवार में रहता था. उस के 2 विवाहित भाइयों का भी परिवार था.

उस ने परिवार के लोगों के कहने पर ट्रक की ड्राइवरी छोड़ कर छोटी गाड़ी कार की ड्राइविंग का काम करने लगा था. उसी की तरह ही सुकली गांव का सुनील बाजीराव जाधव भी ड्राइवर था. इस नाते दोनों का अकसर मिलनाजुलना होता रहता था.

सुनील जाधव (39 साल) के पास अपनी गाड़ी थी. वह मेहकर से छत्रपति संभाजीनगर (पुराना नाम औरंगाबाद जिला) तक यात्रियों को ले जाया करता था, जबकि विनोद नवले उसी सड़क पर दूसरे की गाड़ी चलाता था.

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दोनों एकदूसरे के प्रतिद्वंद्वी ड्राइवर थे. उन के बीच हमेशा सवारी को ले जाने को ले कर  बहस होती रहती थी. एक रोज जैसे ही दोनों का आमनासामना हुआ, सुनील विनोद को देखते ही भड़क उठा. गुस्से में बोला, ”तुम मेरी सवारी को क्यों ले गए?’’

”सवारी किसी की नहीं होती है, वह जिस के साथ जाना चाहे, जाएगी.’’ विनोद शांति से बोला.

”उस की मेरे साथ पहले बात हो गई थी तो तुम उसे कैसे ले कर चले गए?’’

”तुम ने उसे जो किराया बताया, वह अधिक लगा…और मेरा किराया उसे जायज लगा. अब इस में मेरी क्या गलती है.’’ विनोद बोला.

”गलत है, तुम ने जानबूझ कर मेरी सवारी को कम किराया बता कर बहलाफुसला लिया. फिर तूने ऐसा किया तो देख ले, मुझ से बुरा कोई नहीं होगा.’’ सुनील गुस्से में बोला. एक तरह से सुनील ने उसे चेतावनी दी थी.

सुनील और विनोद के बीच हमेशा ऐसी बहस हो जाती थी. कई बार वे आपस में झगड़ जाते थे. कार पार्क करने की जगह, लाइसेंस, किराया, सवारी की सीट आदि को ले कर दोनों के बीच बहस, झगड़े और यहां तक कि गालीगलौज तक हो जाती थी.

पहले जब विनोद ट्रक ड्राइवर था, तब सुनील का भाई भी ट्रक चलाता था. इसलिए उन के बीच अकसर बहस होती रहती थी. इसी वजह से विनोद और सुनील के बीच पुरानी दुश्मनी चली आ रही थी.

जब से विनोद कार चलाने लगा था, तब से उन के बीच की दुश्मनी और बढ़ गई थी. काम कम होने पर कई बार दोनों एक ही सवारी को ले कर खींचातानी करने लगते थे. विनोद हमेशा सवारी को जायज किराया ही बताता था, जबकि सुनील अधिक किराया वसूलने की फिराक में रहता था. इस पर विनोद उसे गलत माहौल बनाने से मना करता था. किंतु सुनील उस की बातों को अनसुना कर झगड़ा कर लेता था.

दोनों के बीच दुश्मनी दिनबदिन बढ़ती जा रही थी. बढ़ती दुश्मनी के कारण ही विनोद सुनील की आंखों में आंखें डाल कर हमेशा से ही घूरता रहता था.

सुनील हमेशा विनोद पर हावी बना रहता था. उसे लगता था कि विनोद उस के कामधंधे में बाधा पहुंचा रहा है.

विनोद जब तक ट्रक चलाता था, तब तक सुनील उस का अधिक विरोध नहीं करता था, लेकिन जब से वह कार चलाने लगा था, तब से उसे अपना घोर प्रतिद्वंद्वी मान बैठा था. एक रोज उस ने विनोद के खिलाफ एक खतरनाक योजना बना डाली.

बात 4 साल पहले की है. सुनील गाड़ी चलाने के अलावा ब्याज पर पैसे का भी लेनदेन करता था. मेहकर में रहने वाला सचिन उगले उस से अकसर ब्याज पर पैसे लेता था. सचिन की मोला रोड स्थित जामगांव शिवरा में ‘पैलवान’ नाम का एक ढाबा था. सचिन भी सुनील की तरह झगड़ालू, गुंडागर्दी करने में माहिर था. उस पर एक हत्या का आरोप भी था.

सुनील को लगा कि वह अपने कट्टर दुश्मन विनोद को उस की मदद से ठिकाने लगा सकता है. दरअसल, उस की विनोद को अपनी राह से हमेशा के लिए हटाने की योजना थी. इसे अंजाम तक पहुंचाने के लिए सुनील ने सचिन को विनोद का कत्ल करने की सुपारी दे दी.

इस के बाद सचिन ने 2 और लोगों को अपने साथ मिला लिया. विनोद को खत्म करने की योजना पर काम शुरू कर दिया. सचिन सही मौके की तलाश में लग गया था.

योजना के मुताबिक सचिन उगले ने 2 मई, 2022 की शाम 4 बजे विनोद को मोला रोड स्थित जामगांव शिवरा के ‘पैलवान’ ढाबे पर बुलाया. बाद में सुनील जाधव भी वहां आ गया. सचिन अपने साथ 2 और लोगों को  लाया था. सभी ने मिल कर वहां शराब पी. उन्होंने विनोद को ज्यादा शराब पिलाई.

जब विनोद नशे में धुत्त हो कर बेहोश हो गया, तब सब ने उस पर धारदार चाकू और कैंची से वार कर दिए.  विनोद के पेट, गरदन, गले और छाती पर चाकू और कैंची से अनगिनत वार किए गए. नतीजतन विनोद खून से लथपथ हो कर थोड़ी देर में ही मर गया.

दूसरी तरफ सचिन का अपनी पत्नी के साथ संबंध बिगड़ चुके थे. विनोद नवले की हत्या के कुछ दिनों बाद ही उस ने पैलवान ढाबा भी बंद कर दिया था. इस के सवाल पर सचिन अपनी पत्नी को पीटता और गाली देता था. इसीलिए उस की पत्नी हमेशा उस से तलाक मांगती थी.

अपनी पत्नी से बहस के दौरान सचिन हमेशा कहता था कि उस ने सुनील जाधव की मदद से सुकली के एक आदमी का मर्डर कर दिया है. अगर तुम मुझ से तलाक मांगोगी तो मैं तुम्हें उस हत्या के मामले में फंसा दूंगा.

सचिन के लगातार उत्पीडऩ और जान से मार डालने की धमकी से उस की पत्नी तंग आ चुकी थी. भीतर ही भीतर पति से खफा हो चुकी थी. पति तलाक देने से इनकार करता जा रहा था.

आखिरकार उस ने एक दिन फैसला किया और 17 अप्रैल, 2026 को वह पुलिस स्टेशन जा पहुंची. जिस तरह की सचिन उसे धमकियां देता था, एकएक कर पूरी बात पुलिस से शिकायत कर दी. पुलिस उस की अपने पति के खिलाफ शिकायत सुन कर सन्न रह गई. क्योंकि उस ने सचिन द्वारा किए गए हत्याकांड के बारे में भी बताया था.

जब पुलिस ने सचिन की पत्नी की शिकायत पर गौर किया, तब थाना के अधिकारियों को सुकली के 4 साल से लापता विनोद नवले का ध्यान आया.

फिर क्या था. सचिन की पत्नी की उस के खिलाफ प्रताडऩा की शिकायत दर्ज कर उस पर नजर रखना शुरू कर दी.

इस बात का सचिन को भी अहसास हो गया कि पुलिस उस पर नजर रखे हुए है. वह पकड़े जाने के डर से घबरा गया. खुद ही 20 अप्रैल, 2026 की आधी रात को मेहकर पुलिस स्टेशन चला गया. उस ने पुलिस के सामने विनोद नवले की हत्या के बारे में सब कुछ बता दिया.

सचिन द्वारा दी गई जानकारी के आधार पर पुलिस की सभी जांच एजेंसियां 21 अप्रैल की सुबह 7 बजे घटनास्थल पर पहुंचीं.

बुलढाणा के मेहकर से 2 किलोमीटर दूर मोला रोड पर पैलवान नाम ढाबे के पास पुलिस काफिला मौजूद था. जिस में एंबुलेंस, पुलिस वाहन, फोरैंसिक वाहन, चिकित्सा अधिकारी, राजस्व और नगर परिषद के कर्मचारी, कुछ मजदूर और जेसीबी मशीनें थीं. ये सब उधर से गुजरने वाले लोगों के कौतूहल बनी हुई थीं.

कुछ मिनटों में ही जेसीबी से ढाबे को ढहा दिया गया. सैंकड़ों लोग यह समझ नहीं पा रहे थे कि आखिर क्या मामला है, जो बड़ी संख्या में आई पुलिस के पुलिस अधिकारी और कर्मचारी अपनेअपने काम में व्यस्त थे. जैसे ही पुलिस हिरासत में मौजूद एक व्यक्ति ने उस जगह की ओर इशारा किया, जहां सीमेंटकंक्रीट का मलबा था, जेसीबी ने सीमेंट का मलबा हटा दिया. बाद में, मजदूरों ने वहां खुदाई शुरू कर दी.

कुछ समय बाद खुदाई में एक मानव कंकाल मिला. कंकाल और उस के पास पड़ी कुछ वस्तुओं को देख कर एक महिला रोने लगी. महिला का रोना देख कर वहां मौजूद लोगों का दिल दहल गया. उस दृश्य को देख कर देखने वालों की रूह कांप उठी. कुछ लोग डर के मारे वहां से चले गए. जबकि कुछ जिज्ञासावश वहीं रुके रहे.

एकदम से फिल्मी दृश्य था. मेहकर पुलिस थाने से संबंधित वरिष्ठ आला पुलिस अधिकारी घटनास्थल पर पहुंचे और मेहकर थानेदार वेंकटेश अलेवार को जांच के लिए दिशानिर्देश दिए.

भीड़ में दबी आवाज में चर्चा चल रही थी कि चार साल पहले सुकली से लापता विनोद नवले की हत्या गांव के सुनील जाधव और मेहकर के सचिन उगले ने की थी. खुदाई में निकला कंकाल विनोद नवले का था.

पुलिस ने घटनास्थल पर पंचनामा और सभी कानूनी औपचारिकताएं पूरी कर मानव कंकाल को अपने कब्जे में ले लिया था. लोग हतप्रभ थे कि सच में कानून और प्रशासन के हाथ लंबे होते हैं. 4 साल बाद हत्या का खुलासा हुआ.

विनोद नवले की हत्या क्यों की गई? ऐसा क्यों किया गया और 4 साल बाद यह कैसे सामने आया? इस पर मीडिया में चर्चा होने लगी.

मृतक विनोद नवले के भाई मनोज अश्रुब नवले (उम्र 35, निवासी सुकली) की शिकायत पर बुलढाणा के मेहकर पुलिस ने आरोपी सुनील बाजीराव जाधव (39 साल, निवासी सुकली ) और सचिन ज्ञानेश्वर उगले (32 साल, निवासी अन्नाभाऊ साठे नगर मेहकर) के खिलाफ हत्या कर लाश छिपाने का मामला दर्ज कर लिया गया.

चूंकि यह घटना 2022 की थी, इसलिए आईपीसी के तहत मामला दर्ज किया गया. विनोद हत्याकांड के दोनों आरोपियों को अदालत में पेश किया गया. वहां से अदालत ने आरोपियों को न्यायिक हिरासत में भेज दिया.

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Sarita.

पुलिस हिरासत में पूछताछ के दौरान, सुनील जाधव ने व्यापारिक विवाद को ले कर रची गई उस ने उस की हत्या की साजिश रची थी. साजिश के तहत सचिन उगले को सुपारी दे कर विनोद की बेरहमी से हत्या करवाई थी.

4 साल पहले हुई हत्याकांड की जांच के दौरान पुलिस ने पुष्टि की कि सचिन उगले और सुनील जाधव के अलावा 2 और संदिग्ध पवन रामचंद्र घेवंडे (28 साल, निवासी मेहकर गांव, चिखली) और अंकुश दत्तात्रेय बोडखे (35 साल, निवासी जामगांव गांव, मेहकर) भी इस मामले में शामिल थे. उन्हें भी हिरासत में ले लिया गया. इस घटना की जांच महाराष्ट्र के बुलढाणा एसपी नीलेश तांबे, एडिशनल एसपी अमोल गायकवाड़, एसडीपीओ संतोष खाडे के निर्देशन में गठित पुलिस टीम ने की.

पुलिस टीम में मेहकर पुलिस थाने के एसएचओ वेंकटेश आलेवार, एएसआई अशोक अवचार, विनोद नरवाडे, संदीप बिरंजे, एसआई गणेश कड, किरण खाडे, हेडकांस्टेबल लक्ष्मण कुटक, पवार, प्रभाकर शिवंकर, चव्हाण, ठाकरे, घुगे, कांस्टेबल मोहम्मद परशुवाले, केशव अवचार, तांबेकर, पैठाणे, गारोडे आदि शामिल थे.

पुलिस ने सभी आरोपियों से पूछताछ के बाद उन्हें जेल भेज दिया. कथा लिखे जाने तक सभी आरोपी न्यायिक हिरासत में थे. Maharashtra Crime Story

Rajasthan Blackmail Murder : तन आप का है इसे न बनने दें खिलौना

Rajasthan Blackmail Murder. लच्छू देवी ने ठाकुर सुरेंद्र सिंह राजपूत को अपना तन तो सौंप दिया, लेकिन उस के संबंधों की वीडियो किसी तरह गांव के ही गणपत सिंह के हाथ लग गई. वीडियो के बूते वह उसे ब्लैकमेल करने पर उतर आया. काश! लच्छू देवी ठाकुर के हाथों अपने तन को खिलौना न बनने देती तो

ठाकुर गजेंद्र सिंह ने लच्छू देवी का उतरा हुआ चेहरा देखा तो पूछा कि क्या टेंशन है. तब वह बोली, ”कुंवर सा, आज गणपत सिंह ने बताया कि उस के पास मेरा एक आपत्तिजनक वीडियो क्लिप है. वह उस के बूते मुझे ब्लैकमेल कर रहा है. वह धमकी दे रहा है कि मेरा कहना नहीं मानेगी तो वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल कर देगा. अगर वीडियो वायरल हो गया तो मैं किसी को मुंह दिखाने लायक नहीं रहूंगी.’’

यह सुन कर गजेंद्र को करंट जैसा झटका लगा. उस ने पूछा, ”आपत्तिजनक वीडियो किस के साथ है तुम्हारा?’’

तब लच्छू देवी ने कहा, ”आप के पिताजी ठाकुर सुरेंद्र सिंह के साथ. अगर वीडियो वायरल हुआ तो आप लोग भी मुंह दिखाने लायक नहीं रहोगे. ठाकुर साहब की इज्जत मिट्टी में मिल जाएगी. गणपत सिंह को कैसे मनाया जाए, आप ही कोई उपाय बताएं.’’

गजेंद्र सिंह ने यह सुना तो उस के पैरों तले जैसे जमीन सरक गई. गजेंद्र जानता था कि अगर वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गई तो घर की मानमर्यादा, इज्जत सब चली जाएगी. कुछ सोच कर गजेंद्र सिंह बोला, ”गणपत सिंह को बातचीत के लिए गांव से दूर बुलाओ. उस से बात करता हूं. अगर वह मानता है तो ठीक, वरना उस का इलाज ही करना पड़ेगा.’’

”आप कहेंगे तो मैं उसे बुला लूंगी.’’ लच्छू देवी बोली.

इस के बाद गजेंद्र सिंह ने अपने खेतों पर काश्तकार का काम करने वाले मित्र वागाराम भील से इस मुद्ïदे पर चर्चा की. गजेंद्र ने उस से कहा, ”वागाराम, मेरे पिताजी और लच्छू देवी की एक आपत्तिजनक वीडियो गणपत सिंह के पास है. वह उसे वीडियो के बल पर ब्लैकमेल कर रहा है. उसे समझाते हैं, मानेगा तो ठीक वरना उसे दुनिया से अलविदा करना है. इस काम में क्या तुम मेरा साथ दोगे?’’

यह सुन कर वागाराम बोला, ”आप के लिए तो ठाकुर साहब यह जान भी कुरबान है. बुलाओ उसे, अगर वह वीडियो डिलीट करता है तो ठीक, वरना उस का काम तमाम कर देंगे.’’ वागाराम ने सहमति जता दी तो गजेंद्र सिंह ने अपने पिता सुरेंद्र सिंह की प्रेमिका लच्छू देवी से कहा, ”लच्छू, तू गणपत सिंह को बातचीत के बहाने कोलाया नाडा जाने वाली ग्रेवल रोड पर ले आना. वहां पर मैं और वागाराम पहले से मौजूद रहेंगे. हम पहले उसे वीडियो डिलीट करने को कहेंगे. वह मान जाएगा तो ठीक, नहीं माना तो मोबाइल छीन कर वीडियो डिलीट कर देंगे. अगर फिर भी नहीं माना तो उसे मौत की नींद सुला देंगे. बड़ा आया ब्लैकमेल करने वाला. हमारी इज्जत नीलाम करेगा साला…’’

राजस्थान के जिला जालौर के उपखंड भीनमाल के थाना रामसीन के अंतर्गत एक गांव मांडोली पड़ता है. इसी गांव में रण सिंह राजपूत अपनी पत्नी हवा कंवर एवं 3 बेटों कल्याण सिंह, अभय सिंह और गणपत सिंह के साथ रह रहे थे. रण सिंह के सब से छोटे बेटे गणपत सिंह ने गांव मांडोली में किराने की एक दुकान खोल रखी थी. इसी दुकान के सामने लच्छू देवी अपने पति सवाराम चौधरी के साथ रहती थी.

मांडोली गांव में ही ठाकुर सुरेंद्र सिंह राजपूत रहता था. खेतीबाड़ी से उसे करोड़ों रुपए की सालाना आय होती थी. वैसे वह सरकारी टीचर था. ठाकुर साहब ने मांडोली गांव के वागाराम भील को खेती बंटाई पर दे रखी थी. लच्छू देवी भी ठाकुर सुरेंद्र सिंह के यहां काम करती थी.

अधेड़ उम्र पार कर चुके सुरेंद्र सिंह की नजर लच्छू देवी पर पड़ी तो वह उस पर अपना दिल हार बैठा. अपने बच्चों की उम्र की लच्छू देवी को उस ने पैसों के बल पर हमबिस्तर बना लिया. वह मौका मिलते ही लच्छू के तन से खेलने लगता.

ठाकुर हवस में अंधा था. वह यह भूल गया था कि उस के अवैध संबंधों का परिवार या गांव वालों को पता चल गया तो इज्जत पल भर में मिट्टी में मिल जाएगी, मगर अवैध संबंध रखने वाले ठाकुर को भरोसा था कि उस की पोल कभी नहीं खुलेगी. मगर ऐसा हो न सका.

ठाकुर सुरेंद्र सिंह और लच्छू देवी की प्रेम लीला की भनक गांव में हो गई थी. उन की प्रेम लीला का आपत्तिजनक वीडियो किसी तरह गणपत सिंह के हाथ लगा तो वह भी उस से पैसे ऐंठने का लोभ न छोड़ सका. वीडियो में ठाकुर सुरेंद्र सिंह एवं उस की प्रेमिका लच्छू देवी रासलीला कर रहे थे. इस वीडियो के दम पर गणपत सिंह पैसे ऐंठना चाह रहा था.

लच्छू देवी ने जब वीडियो के बारे में सुना तो उस के होश उड़ गए. उस ने प्रेमी ठाकुर के बेटे गजेंद्र सिंह से इस वीडियो की चर्चा की तो उस ने अपने पिता की इज्जत बचाने के लिए कुछ भी करने का फैसला ले लिया.

प्लान के अनुसार 27 अगस्त, 2024 की शाम लगभग साढ़े 7 बजे लच्छू देवी चौधरी अपने मांडोली स्थित घर के सामने गणपत सिंह की दुकान पर पहुंची और उस ने गणपत सिंह से कहा, ”तुम आज रात 8 बजे  कोलाया नाडा रोड पर आ जाना, वहीं पर वीडियो के बारे में बात करनी है और हां अकेले ही आना. मैं खुश तुम्हें कर दूंगी.’’

यह सुन कर गणपत सिंह ने कहा, ”मैं आ कर मिलता हूं. तुम पहुंचो.’’

लच्छू देवी चौधरी मुसकराते हुए वहां से चली गई. गणपत सिंह थोड़ी देर बाद अपनी किराने की दुकान बंद कर के अपनी बाइक से लच्छू चौधरी द्वारा बताई जगह पर पहुंचा. वहां पर बरसात का पानी जमा था. उस रोड पर आवागमन न के बराबर था. गणपत वहां पहुंचा तभी वहां पर झाडिय़ों में छिप कर बैठे गजेंद्र और वागाराम आ गए.

उन्हें देख कर गणपत सिंह चौंक गया. तभी गजेंद्र ने गणपत सिंह से कहा, ”गणपत, तू जिस आपत्तिजनक वीडियो के दम पर लच्छो को ब्लैकमेल कर रहा है, उसे अभी डिलीट कर.’’

यह सुन कर गणपत बोला, ”यदि मैं ऐसा नहीं करूंगा तो तू क्या कर लेगा मेरा.’’

”अरे मान जा, इसी में तेरी भलाई है, वरना जान से हाथ धो बैठेगा.’’ गजेंद्र ने धमकाते हुए कहा.

गणपत सिंह भी बिना डर के बोला, ”अब मैं वीडियो वायरल कर के उन लोगों को मुंह दिखाने लायक नहीं छोड़ूंगा.’’

इतना सुनते ही गजेंद्र के तनबदन में आग लग गई. वह समझ गया कि गणपत ऐसे नहीं मानेगा. अपने पिता की इज्जत व मानमर्यादा बचाने के लिए गजेंद्र सिंह ने अपने साथी वागाराम भील के साथ मिल कर गणपत सिंह मांडोली को दबोच लिया. दोनों ने गणपत सिंह पर हथियारों से हमला कर दिया.

सिर पर गंभीर चोटें लगने से गणपत सिंह नीचे गिर पड़ा. जब गजेंद्र ने दरांती (कूट) का वार गणपत के सिर पर किया तो उस के सिर के साथ कान भी कट कर गिर गया. गणपत को दरांती से काटने के बाद उस ने उस की तलाशी ली, ताकि मोबाइल में से आपत्तिजनक वीडियो डिलीट कर दे. मगर गणपत के पास मोबाइल नहीं था. ऐसे में गजेंद्र ने उसे मौत की नींद सुला दिया.

कोलाया नाडी के पास एक ढाणी में शादी समारोह था. शादी में जा रहे लोग कहीं उन्हें देख न लें. इस डर से गजेंद्र सिंह ने गणपत की हत्या कर उस के शव को कीचड़ में फेंक दिया और उस की बाइक कीचड़ के पास गिरा दी. इस के बाद गजेंद्र ने कत्ल करने वाला हथियार दरांती (कूट) वागाराम भील को दे कर कहा, ”इसे खेत वाली ढाणी में छिपा देना. मैं सुबह पत्नी के साथ जोधपुर चला जाऊंगा. तुम दोनों इस घटना की चर्चा किसी से मत करना. अगर घटना की चर्चा की तो हम फंस जाएंगे. हमारे पास मोबाइल भी नहीं है, ऐसे में कोई सबूत नहीं है. पुलिस चाह कर भी हम को पकड़ नहीं सकती. हमने कोई सबूत नहीं छोड़ा है. गणपत का ब्लांइड मर्डर कभी नहीं खुलेगा. मैं भी चलता हूं.’’

कह कर गजेंद्र सिंह घटनास्थल से एक किलोमीटर दूर अपने घर मांडोली चला गया.

वागाराम भील दरांती ले कर खेत में बनी ढाणी पहुंचा और ढाणी में दरांती छिपा दी. गणपत की हत्या के बाद लच्छू देवी चौधरी की चिंता खत्म हो गई थी.

27 अगस्त, 2024 की रात 10 बजे तक गणपत सिंह दुकान से घर नहीं पहुंचा तो उस की मां हवाकंवर एवं पत्नी भारती कंवर को चिंता हुई. गणपत को दुकान पर जा कर देखा, दुकान बंद थी. दुकान पर बाइक भी नहीं थी. गणपत बाइक पर कहीं गया था, मगर कहां गया? यह किसी को पता नहीं था. मोबाइल घर पर बेटे के पास था. गणपत सिंह के अचानक गायब होने से उस का पूरा परिवार चिंतित था. उसे गांव में तलाश किया गया, मगर पता न लगा. फेमिली वालों ने रामसीन थाने में गणपत सिंह की गुमशुदगी की जानकारी दी. पुलिस ने सोचा कि वह कहीं काम से चला गया होगा, आ जाएगा.

मगर 28 अगस्त, 2024 का सूरज उदय हो गया, गणपत घर नहीं लौटा. फेमिली वाले गणपत सिंह की तलाश में लगे थे.

28 अगस्त, 2024 की सुबह 8 बजे मांडोली गांव से एक किलोमीटर दूर सिकवाड़ा मार्ग पर कोलाया नाडा के पास ग्रेवल रोड पर गणपत सिंह का शव कीचड़ में औंधे मुंह पड़ा मिला. उस की बाइक भी पास में गिरी पड़ी मिली. परिजनों ने गणपत का शव देखा तो वह बिलख कर रोने लगे.

घटना की खबर पुलिस थाना रामसीन को दी गई. सुबहसवेरे हत्या की खबर पा कर इंसपेक्टर कमल किशोर पुलिस टीम के साथ घटनास्थल पर पहुंचे. तब तक गणपत सिंह का शव मिलने की खबर मांडोली गांव में आग की तरह फैल गई थी. तमाम लोग घटनास्थल पर जमा हो गए थे.

गणपत सिंह की मौत की खबर उस के घर पहुंची तो घर में कोहराम मच गया था. बूढ़ी मां हवा कंवर गश खा कर गिर पड़ी. मृतक की पत्नी भारती कंवर रोरो कर बेहाल थी. गांव की महिलाएं उन्हें ढांढस बंधा रही थीं. पुलिस टीम ने घटनास्थल का निरीक्षण किया. निरीक्षण करने पर मामला संदिग्ध लगा. इंसपेक्टर कमल किशोर ने घटना की जानकारी आला अधिकारियों को दी.

तब सूचना पा कर जालौर के एसपी ज्ञानचंद यादव, एएसपी रामेश्वर लाल,  डीएसपी (भीनमाल) अनराज सिंह मय एफएसएल, एमओबी टीम के साथ घटनास्थल पर पहुंचे और शव व घटनास्थल का बारीकी से निरीक्षण किया. एफएसएल टीम ने साक्ष्य एकत्र किए.

मृतक के सिर पर गहरी चोट के निशान थे. कान भी कटा था. एसपी ज्ञानचंद यादव ने पुलिस अधिकारियों को उचित काररवाई कर आरोपियों की गिरफ्तारी के निर्देश दिए. इस के बाद मृतक को पोस्टमार्टम के लिए भीनमाल अस्पताल भेज दिया.

मैडिकल बोर्ड से पोस्टमार्टम करा कर शव परिजनों को सौंप दिया. 28 अगस्त, 2024 को कल्याण (48 साल) की लिखित तहरीर पर बीएनएस की धारा 103 (1), 3(5) के तहत अज्ञात हत्यारों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कर ली.

मामले की जांच इंसपेक्टर कमल किशोर ने खुद संभाली. इंसपेक्टर कमल किशोर ने सब से पहले घटनास्थल कोलाया नाडा में घटना वाली रात एक्टिव मोबाइल फोन नंबरों की डिटेल्स निकलवाई. घटना की रात घटनास्थल के आसपास के क्षेत्र में 300 से ज्यादा नंबर एक्टिव मिले. ऐसे में पुलिस के लिए भूसे में सूई ढूंढने जैसा था. फिर भी पुलिस ने उन नंबरों की गहनता से जांच की.

मृतक के परिजनों ने पुलिस को कुछ संदिग्ध लोगों के नाम बताए थे. पुलिस ने उन से भी पूछताछ की, कोई सफलता नहीं मिली. पुलिस को ऐसा कोई टैक्निकल एविडेंस भी नहीं मिला, जिस के आधार पर हत्यारों के बारे में कोई जानकारी मिल सके.

गणपत के हत्यारोपियों की गिरफ्तारी नहीं होने से मृतक के परिजन एवं आम राजपूत वर्ग में भारी रोष था. परिजनों ने गणपत सिंह की हत्या में गजेंद्र सिंह का नाम भी संदिग्धों  में बताया था.

पुलिस ने गजेंद्र सिंह को थाने बुला कर पूछताछ की. उस ने एसएचओ को बताया, ”सर, 27 अगस्त, 2024 को मैं अपने घर पर ही था. मेरे मोबाइल की लोकेशन देख लो. मैं 27-28 की रात पत्नी के साथ जोधपुर गया था. मेरे ससुर की तबीयत ठीक नहीं थी. ससुरजी की खबर लेने व गाड़ी की सर्विस कराने जोधपुर गया था. जोधपुर से जब घर फोन किया तो पता चला था कि गणपत सिंह की गांव के बाहर लाश मिली है. मुझे यह जान कर बड़ा दुख हुआ था. तब मैं ने गांव के कई लोगों को कौल कर के गुस्सा भी जाहिर किया था. मेरा तो गणपत भाई लगता था. मैं उसे भला क्यों मारता. मेरी उस से कोई दुश्मनी भी नहीं थी. मृतक के परिजन पता नहीं क्यों मुझ पर शक कर रहे हैं. मेरा गणपत हत्याकांड से कोई लेनादेना नहीं है.’’

पुलिस ने गजेंद्र सिंह के मोबाइल की लोकेशन निकलवाई. उस की लोकेशन घटना वाली रात मांडोली स्थित उस के घर की आ रही थी. रात में फोन बंद था. फिर 28 अगस्त की सुबह उस का फोन भाद्राजून से आगे खुला था. 28 अगस्त को लोकेशन जोधपुर की आ रही थी. पुलिस ने गजेंद्र सिंह को पूछताछ के बाद छोड़ दिया था.

मृतक के परिजनों ने जिन संदिग्धों के नाम बताए थे. उन से पूछताछ कर पुलिस ने छोड़ दिया तो मृतक के परिजन भड़क गए. उन का सोचना था कि संदिग्ध लोगों से पुलिस ने पैसे खाए हैं. उन का आरोप था कि संदिग्ध लोगों को पुलिस थाने बुला कर उन को कुरसी पर बिठा कर मेहमाननवाजी कर के बिना पूछताछ छोड़ देती है.

गणपत सिंह हत्याकांड को 2 महीने से ज्यादा गुजर गए थे. मगर पुलिस के हाथ खाली थे. पुलिस का रटा सा जवाब था, ”गणपत सिंह हत्याकांड में कोई सबूत नहीं मिला. बिना सबूत शक के आधार पर किसी बेगुनाह की गिरफ्तारी नहीं कर सकते. पुलिस जांच कर रही है. सबूत मिलने पर आरोपियों की गिरफ्तारी की जाएगी. इस में समय कितना लगेगा, कह नहीं सकते.’’

गणपत सिंह हत्याकांड का खुलासा नहीं होने पर परिजनों व सर्वसमाज में भारी रोष था. आक्रोशित लोगों ने 9 सितंबर, 2024 को रामसीन थाना परिसर में प्रदर्शन किया, जहां पुलिस ने 10 दिन में मामले के खुलासे का भरोसा दिया था.

जब आरोपी पुलिस की गिरफ्त में नहीं आए तो 15 अक्तूबर, 2024 को जालौर जिला मुख्यालय पर विशाल धरना हुआ. बाद में 28 अक्तूबर, 2024 को मंत्री जोगेश्वर गर्ग के आश्वासन पर धरना स्थगित किया गया. मंत्री गर्ग ने लापरवाह पुलिसकर्मियों को हटाने व जांच अधिकारी बदलने का वादा किया था.

मुख्यमंत्री के नाम मुख्य सचेतक जोगेश्वर गर्ग को ज्ञापन सौंपा. वहीं एसपी ज्ञानचंद यादव ने जल्द खुलासा करने का आश्वासन दिया. इस तरह गणपत सिंह हत्याकांड को एक साल बीत गया. एक साल बाद भी पुलिस हत्यारों का कोई सुराग नहीं लगा पाई थी.

पुलिस परिजनों को लगातार आश्वासन दे रही थी, लेकिन ठोस काररवाई के अभाव में न्याय की उम्मीद लुप्त होती दिख रही थी. ऐसे में एसएचओ कमल किशोर से जांच सांचौर डीएसपी (आईपीएस) शरण गोपी नाथ कांबले को सौंपी गई.

डीएसपी कांबले ने 150 लोगों से पूछताछ कर पहले 13 फिर 3 संदिग्ध चिह्निïत किए. इस बीच 3 जांच अधिकारी बदल गए थे. मृतक के परिजनों को विश्वास था कि डीएसपी कांबले गणपत सिंह हत्याकांड का खुलासा कर के आरोपियों को पकड़ लेंगे. कांबले ने जब 150 में से 3 संदिग्ध चिह्निïत किए तो उम्मीद जागी कि अब घटना का खुलासा हो जाएगा.

डीएसपी कांबले द्वारा चिह्निïत 3 संदिग्धों के नारको टेस्ट के लिए कोर्ट में अपील की गई. आरोपी गजेंद्र सिंह ने सशर्त नारको कराने को कहा, जिस में उस ने मानसिक व शारीरिक नुकसान के 2 करोड रुपए की गारंटी मांगी थी. हालांकि अन्य 2 संदिग्ध नारको टेस्ट के लिए तैयार थे. किसी संदिग्ध का नारको टेस्ट नहीं हो सका. गजेंद्र सिंह ने 2 करोड रुपए की शर्त रखी तो नारको टेस्ट नहीं हो सका.

उस समय तक गजेंद्र सिंह संदिग्ध था. जांच अटक गई थी. इसी दौरान डीएसपी कांबले का ट्रांसफर हो गया.

डीएसपी कांबले का ट्रांसफर होने के बाद गणपत सिंह मामले की फाइल धूल फांकने लगी. पुलिस का सुस्त रवैया देख कर गणपत सिंह का परिवार रोष में था.

गणपत सिंह हत्याकांड के 12 दिन बीत जाने पर जब खुलासा नहीं हुआ था तो 9 सितंबर, 2024 को रामसीन थाने में एक दिन का धरना दिया गया. इस के बाद 15 अक्तूबर, 2024 को जालौर में धरनाप्रदर्शन किया, जो क्रमिक रूप से 15 दिनों तक चला और पुलिस अधिकारियों के जल्द खुलासे के आश्वासन पर समाप्त कर दिया.

हत्या के इस मामले को एक साल हो गया था, मगर खुलासा नहीं हुआ तो 16 नवंबर, 2025 को गणपत सिंह की 80 वर्षीय मां  हवा कंवर, पत्नी भारती कंवर भूख हड़ताल पर बैठ गईं. 9 दिनों तक भूख हड़ताल पर बैठीं तो विधायक रविंद्र सिंह भाटी धरनास्थल पर पहुंचे और पुलिस प्रशासन के आला अधिकारियों से गणपत सिंह हत्याकांड मामले के जल्द खुलासे की मांग की.

मृतक की पत्नी भारती कंवर ने केंद्र सरकार को पत्र लिख कर गणपत सिंह हत्याकांड की सीबीआई जांच की मांग की. विधानसभा में भी गणपत सिंह की हत्या का खुलासा नहीं होने का मामला उठाया गया.

विधायक रविंद्र सिंह ने मृतक की मां हवा कंवर एवं अन्य परिजनों से मिल कर न्याय दिलाने में सहयोग करने का आश्वासन दिया.

इस के बाद 25 नवंबर, 2025 को स्थानीय सांसद लुंबा राम चौधरी ने धरनास्थल पर पहुंच कर उन से बात की. तब पुलिस प्रशासन ने एक माह में हत्या का खुलासा करने का पुन: आश्वासन दिया. इस के बाद उन्होंने धरना खत्म किया.

इस दौरान जालौर के एसपी ज्ञानचंद यादव का तबादला हो चुका था. जालौर के नए एसपी शैलेंद्र सिंह इंदोलिया ने जिले की बागडोर संभाल ली थी. नवंबर, 2025 में हुई भूख हड़ताल के बाद मामले की जांच एडिशनल एसपी भूपेंद्र सिंह को सौंपी गई.

जोधपुर रेंज के आईजी ने गणपत सिंह हत्याकांड मामले की फाइल मंगवाई और एक एसआईटी गठित कर मामले का जल्द खुलासा करने का निर्देश दिया. रामसीन थाने के तत्कालीन एसएचओ कमल किशोर का भी तबादला हो चुका था. उन की जगह अरविंद कुमार ने चार्ज संभाल लिया था. गणपत सिंह हत्याकांड को 18 महीने हो चुके थे, फिर भी आरोपी पकड़े नहीं जा सके थे.

मृतक के परिजनों एवं समाज के बढ़ते दबाव एवं नित्य नए धरनाप्रदर्शन एवं भूख हड़ताल को देखते हुए आईजी के निर्देशानुसार एसपी शैलेंद्र सिंह इंदोलिया ने एएसपी भूपेंद्र सिंह आईपीएस के नेतृत्व में एक पुलिस टीम का गठन किया.

इस टीम में थाना कोतवाली जालौर के एसएचओ रामेश्वर भाटी, एसएचओ (रामसीन) अरविंद कुमार, एएसआई अमर सिंह, लादाराम, जय सिंह, सुरेंद्र सिंह, भूपाराम, कांस्टेबल रमेश चंद्र, ओमप्रकाश, जयंती लाल, गणपत सिंह, धीरज सिंह, भैराराम, नरपत सिंह, कुलदीप सिंह, थान सिंह, महिला कांस्टेबल भंवरी, सोनिया, सुशीला आदि को शामिल किया गया.

गठित टीम ने घटना के प्रत्येक पहलू की बारीकी से जांच की. मगर फरवरी 2026 बीतने को आया था और आरोपी पकड़े नहीं गए. तब मृतक के फेमिली वालों ने कफन के साथ फिर से 27 फरवरी, 2026 को जिला कलेक्ट्रेट जालौर के समक्ष भूख हड़ताल पर बैठ गए.  इस भूख हड़ताल में 80 वर्षीय बुजुर्ग हवा कंवर के अलावा गणपत सिंह की पत्नी, बच्चे, भाई कल्याण सिंह, अभय सिंह और भाभी भी बैठे थे. भूख हड़ताल लगातार जारी थी.

14 मार्च, 2026 को विधायक रविंद्र सिंह भाटी भी धरनास्थल पहुंचे. उन्होंने बुजुर्ग हवा कंवर की पीड़ा को सुना. मृतक के अन्य परिजनों से भी मुलाकात की.

विधायक रविंद्र सिंह भाटी ने सरकार को चेतावनी दी कि आरोपियों की जल्द गिरफ्तारी नहीं हुई तो वह जालौर के इतिहास का सब से बड़ा चक्का जाम करेंगे. मृतक का पूरा परिवार 27 फरवरी से भूख हड़ताल पर था. जब 14 मार्च को विधायक भाटी धरनास्थल पर पहुंचे, तब विधायक भाटी से मुलाकात के बाद परिवार के अन्य सदस्यों ने क्रमिक अनशन शुरू किया था.

Rajasthan Blackmail Murder

परिजन इस बार कमर कस कर भूख हड़ताल पर बैठे थे कि उन्हें मरना मंजूर है, मगर बगैर हत्या के खुलासे वे यहां से नहीं उठेंगे. मृतक की 80 वर्षीय मां का अनशन देख कर पुलिस प्रशासन में हड़कंप मच गया. प्रशासन समझ गया कि आरोपी गिरफ्तार नहीं किए तो बुजुर्ग हवा कंवर की अनशन के चलते जान जा सकती है.

जालौर जिला कलेक्टर एवं एसपी शैलेंद्र सिंह इंदोलिया ने डौक्टरों की टीम को बुजुर्ग के स्वास्थ्य पर नजर रखने को कहा. विधायक भाटी के चक्का जाम की चेतावनी देते ही पुलिस प्रशासन समझ गया कि अब बहानेबाजी नहीं चलेगी. अगर रविंद्र सिंह भाटी चक्का जाम पर उतरे तो फिर हालात संभलेंगे नहीं. बस, फिर क्या था. पुलिस ने जांच तेज कर दी.

मृतक की मां हवा कंवर ने गणपत सिंह हत्याकांड में गजेंद्र सिंह, निवासी मांडोली पर आरोप लगाया था. पूरा मांडोली गांव गजेंद्र सिंह को गणपत सिंह की हत्या में घटना के दिन से आरोपी बता रहा था, मगर पुलिस सबूत नहीं होने को कह कर टाल रही थी, लेकिन विधायक के चक्का जाम की चेतावनी के बाद पुलिस टीम ने 16 मार्च, 2026 को आरोपियों वागाराम भील, लच्छू देवी चौधरी और गजेंद्र सिंह को डिटेन कर कड़ी पूछताछ की.

आरोपियों ने गणपत सिंह मांडोली की हत्या करने का जुर्म कुबूल कर लिया. तब पुलिस ने तीनों आरोपियों गजेंद्र सिंह, वागाराम एवं लच्छू देवी चौधरी को गिरफ्तार कर लिया.

आरोपियों की गिरफ्तारी होने की जानकारी एसपी शैलेंद्र सिंह इंदोलिया ने मृतक के परिजनों को दी. तब 18 दिन से भूख हड़ताल पर बैठी हवा कंवर एवं क्रमिक अनशन कर रहे अन्य परिजनों ने भूख हड़ताल समाप्त कर दी.

आरोपियों की गिरफ्तारी होने के बाद विधायक रविंद्र सिंह भाटी ने वीडियो कौल कर वृद्ध हवा कंवर एवं गणपत सिंह की पत्नी भारती कंवर से बात की. दोनों ने विधायक भाटी का आभार जताया. 16 मार्च को धरना प्रदर्शन खत्म हो गया.

18 माह तक बेटे को न्याय दिलाने का जज्बा रख कर धरनाप्रदर्शन व अनशन करने वाली 80 वर्षीय मां की ममता की जीत हुई. हर तरफ मां हवा कंवर के जज्बे की तारीफ हो रही है.

मंगलवार 17 मार्च, 2026 को गिरफ्तार आरोपियों गजेंद्र सिंह, वागाराम एवं लच्छू देवी को एडीजे कोर्ट भीनमाल में पेश कर 4 दिनों के पुलिस रिमांड पर लिया और थाना रामसीन ला कर पूछताछ की. पुलिस पूछताछ में इस ब्लाइंड मर्डर की जो कहानी सामने आई, वह इस प्रकार निकली—

राजस्थान के जिला जालौर के उपखंड भीनमाल के थाना रामसीन से करीब 40 किलोमीटर दूर एक गांव मांडोली आता है. इस गांव में राजपूत, देवासी, चौधरी, मेघवाल, भील के अलावा अन्य जाति के लोग भी रहते हैं. मांडोली गांव विधायक रतन देवासी का गांव है. इसी गांव में पेशे से सरकारी टीचर सुरेंद्र सिंह रहता है.

सुरेंद्र सिंह राजपूत मांडोली गांव का संपन्न किसान है. उसे रावला कह कर गांव के लोग सम्मान देते थे. देश स्वतंत्र हुआ तो राजा रजवाड़े एवं जागीरें जाती रहीं, मगर  जिन के पास जागीरें थी, आज भी उन्हें जागीरदार या ठाकुर साहब कहा जाता है. सुरेंद्र सिंह ने अपनी कुछ जमीन बंटाई पर दे रखी थी. पिछले 4 सालों से मांडोली निवासी वागाराम उस की खेतीबाड़ी संभाले हुए था. वह खेती के अलावा घर के और भी काम कर देता है.

मांडोली गांव के सवाराम चौधरी की पत्नी लच्छू देवी भी रावले में ठाकुर सुरेंद्र सिंह के यहां काम करती थी. अधेड़ उम्र के ठाकुर सुरेंद्र सिंह का लच्छू देवी पर दिल आ गया तो उस ने उस पर डोरे डालने शुरू किए. लच्छू नासमझ तो थी नहीं. वह ठाकुर साहब की मेहरबानी का मतलब समझ गई. शादीशुदा और बालबच्चेदार होते हुए उस ने ठाकुर सुरेंद्र सिंह के सामने समर्पण कर दिया. एक बार मर्यादा टूटी तो अकसर मौका मिलते ही यह खेल खेला जाने लगा. गांव में दबी जुबान में लोग सुरेंद्र सिंह और लच्छू देवी के प्रेम प्रसंग की बातें करने लगे.

मांडोली के गणपत सिंह राजपूत को भी ठाकुर और लच्छू देवी के प्रेम संबंधों की भनक लग गई थी. लच्छू देवी के मकान के सामने गणपत सिंह की किराने की दुकान थी. गणपत सिंह का विवाह भारती कंवर के साथ हुआ था. वक्त के साथ गणपत सिंह एक बेटा एवं एक बेटी का बाप बन गया.

सब कुछ ठीकठाक चल रहा था. इसी दौरान गणपत सिंह के हाथ ठाकुर सुरेंद्र सिंह और लच्छू देवी का एक आपत्तिजनक वीडियो हाथ लग गया. गणपत सिंह ने इस वीडियो की बात लच्छू देवी को बताते हुए कहा, ”तुम्हारा और ठाकुर सुरेंद्र सिंह का एक आपत्तिजनक वीडियो है मेरे पास. मैं चाहूं तो इसे वायरल कर सकता हूं. मगर…’’

उस की बात सुन कर लच्छू देवी के माथे पर पसीने की बूंदें उभर आईं. लच्छू देवी के ठाकुर से अवैध संबंध थे. लच्छू देवी समझ गई कि अगर वीडियो वायरल हुआ तो वह किसी को मुंह दिखाने लायक नहीं रहेगी. इस के बाद से लच्छू देवी के दिन का चैन और रातों की नींद उड़ गई थी. उस ने वीडियो की बात अपने प्रेमी ठाकुर सुरेंद्र सिंह के बेटे गजेंद्र सिंह को बताई. फिर उस ने वागाराम के साथ मिल कर घटना को अंजाम दिया.

वागाराम आदतन शराब पीता था तो मुख्य आरोपी गजेंद्र सिंह और उस के पिता सुरेंद्र को डर था कि वह कहीं किसी के सामने नशे में हत्या की पोल न खोल दे. ऐसे में गजेंद्र ने वागाराम की शराब छुड़ाने की योजना बनाई, लेकिन वह वागाराम के साथ शराब पीने वाले अन्य 5 लोगों सहित कुल 8 जनों को शराब छुड़ाने ले गए.

गजेंद्र ने 5 जनों को अपने घर से व अन्य लोगों को गांव के बाहर से अपनी बोलेरो गाड़ी में बिठाया और आहोर के अगवरी गांव स्थित एक भोपा के पास ले गया. वहां इन सभी को 3 घंटे रखा. जैसेजैसे नंबर आया, उन्हें दवा दिलाई. दवा की एवज में प्रति व्यक्ति 2,500 रुपए लिए गए. सभी लोगों के पैसे गजेंद्र ने दिए. वहां बताया गया था कि दवा लेने के बाद 3 दिनों तक शराब पीने की इच्छा नहीं होती है.

उन सभी ने दवा ले ली. जब भी वे लोग दवा लेने के बाद शराब पीते तो उन्हें उल्टी हो जाती थी. इस तरह गजेंद्र ने वागाराम की शराब छुड़वा दी और निश्चिंत हो गया कि अब वह कभी पकड़ा नहीं जाएगा.

पुलिस जांच में सामने आया कि वागाराम पिछले 4 सालों से सुरेंद्र के खेतों पर काम कर रहा था. इन 4 सालों में वह सुरेंद्र के परिवार का विश्वासपात्र बन चुका था. इसी कारण गजेंद्र ने उसे वारदात में भी साथ रखा था. घटना के अगले दिन शव मिलने की सूचना जैसे ही मांडोली गांव में फैली तो वागाराम भी घटना से अनजान बन कर ग्रामीणों के साथ हो लिया.

ग्रामीणों के अनुसार मौके पर पुलिस जांच के बाद शव उठाने में वागाराम ने ही मदद की थी. जैसे ही शव को अस्पताल ले जाया गया, वहां गाड़ी में से शव को वागाराम ने मोर्चरी में भी रखवाया था. बाद में अंतिम संस्कार तक वह साथ रहा था. इस दौरान वह लोगों के बीच रह कर चल रही चर्चा की जानकारी जुटाता रहा था.

आरोपी लच्छू देवी से एसएचओ अरविंद कुमार ने पूछताछ की तो उस ने सारा राज खोल दिया. इस के बाद वागाराम को डिटेन कर पूछताछ की तो उस ने मुख्य आरोपी गजेंद्र सिंह के साथ मिल कर गणपत सिंह मांडोली की हत्या करने का जुर्म कुबूल कर लिया. तब आरोपी गजेंद्र सिंह को भी पकड़ लिया.

तीनों आरोपियों के पकड़े जाने के बाद 18 दिन से भूख हड़ताल पर बैठी मृतक की मां हवा कंवर ने कहा कि उन्हें न्याय मिल गया. एक मां की जिद के आगे 18 माह बाद उस के बेटे के हत्यारोपी आखिर पकड़े गए.

आरोपियों ने रिमांड के दौरान पूरी कहानी बता दी. आरोपी वागाराम की निशानदेही पर हत्या में प्रयुक्त हथियार दरांती (कूट) उस के खेत में बनी ढाणी से बरामद कर लिया गया. 3 जांच अधिकारियों ने मामले की जांच की और आखिर गणपत सिंह मांडोली ब्लाइंड मर्डर का खुलासा कर दिया.

पुलिस ने पूछताछ पूरी होने पर आरोपी लच्छू देवी को रिमांड अवधि खत्म होने से एक दिन पूर्व 19 मार्च, 2026 को और अन्य आरोपियों गजेंद्र सिंह एवं वागाराम भील को रिमांड अवधि खत्म होने पर 20 मार्च, 2026 को एडीजे कोर्ट भीनमाल में पेश किया. जहां से सभी को जेल भेज दिया गया. कथा लिखे जाने तक तीनों आरोपियों में से किसी की जमानत नहीं हुई थी.

Family Crime Story : यूं ही नहीं बहक जाती पत्नी

Family Crime Story : एक तरफ काम और पारिवारिक जिम्मेदारियों से बोझिल रवि काले थका हुआ था, जबकि 4 बच्चे जनने के बाद भी उस की पत्नी अंबिका काले को प्रेमी की यादें गुदगुदाती रहती थीं. 12 साल के वैवाहिक जीवन के बावजूद विवाहिता अंबिका नाजायज रिश्ते की डोर थामे थी. उस के बाद जो कुछ हुआ, उस में पति का संयम टूटा और फिर

रवि काले शाम को जब घर आया, तब पत्नी अंबिका काले को सजीसंवरी देख कर हैरान रह गया. वह अन्य दिनों की तरह बेहद खूबसूरत लग रही थी. वैसे वह बहुत सुंदर थी. मौडल की तरह चिकना शरीर, कमर, पेट, पीठ, बड़ी आंखें, रसीले होंठ, गाल और स्तनों के उभार आदि को देख कर उस की उम्र का अंदाजा लगाना आसान नहीं था, जबकि वह 3 बेटियों और एक बेटे की मां थी. उन की शादी के 12 साल बीत चुके थे.

रवि उस के सजने का कारण पूछने ही वाला था, तभी बच्चों ने आ कर बताया कि आज उन के घर कौन आया था. उस का नाम सुनते ही रवि के चेहरे पर खुशी की जगह तनाव दिखने लगा. तुरंत वह अंबिका पर बरस पड़ा, तुम्हें बारबार उस से मिलने से मना किया है, लेकिन तुम पर कोई असर नहीं हो रहा है. बताओ, अब मैं क्या करूं तुम्हारा? तुम को मेरी फिक्र ही नहीं है. अंबिका भन्नाते हुए बोली. क्या फिक्र नहीं है? जो तुम कहती हो, जो तुम मांगती हो, वह सब कुछ हैसियत से अधिक देता हूं… रवि बोला.

एक औरत को पति से और भी कुछ चाहिए होता है. वह तुम दे नहीं नहीं पाते हो. अंबिका तीखेपन के साथ बोली. और क्या चाहिए तुम्हें? रवि बोला. कोई औरत मर्द से क्या चाहती है तुम्हें नहीं पता है क्या? अंबिका अब तुनकती हुई बोली. अब मैं क्या करूं? कमजोरी है तो है… इलाज करवाओ मर्दाना कमजोरी का वरना? वरना क्या? किसी दिन उडऩछू हो जाऊंगी मैं…तुम देखते रहना. फिर मत कहना कि पहले क्यों नहीं बताया.

रवि और अंबिका के बीच काफी समय तक इस तरह की अपसी बातें होती रहीं. दोनों एकदूसरे की निजी खामियों को उजागर करते रहे. साधारण परिवार की अंबिका जब 12 साल पहले रवि के साथ सात फेरे ले कर आई थी, तब दोनों ने खुशहाल जिंदगी की शुरुआत की थी. दोनों की जोड़ी की परिवार और समाज में तरीफ होती थी.

कुछ सालों में ही दोनों 3 बेटियों और एक बेटे के पेरेंट्स बन गए. रवि पर परिवार की जिम्मेदारियों का बोझ आ गया. परिवार का खर्च उठाने के लिए वह मेहनतमशक्कत करने लगा. एक तरफ घर की जरूरतें पूरी होने लगी थीं, जबकि दूसरी तरफ अंबिका के प्यार और देहसुख की प्यास बढऩे लगी थी.

जब वह खाली समय में घर पर होती, तब तन्हाई से तनाव में आ जाती थी. बेचैनी बढऩे लगती थी. ऐसे वक्त में न तो मोबाइल के रील्स से मन को शांति मिलती थी और न ही मनोरंजन के दूसरे साधनों से इच्छापूर्ति हो पाती थी. इसी क्रम में बीते दिनों की याद सताने लगती थी. तब अकसर पूर्व प्रेमी उस के दिलोदिमाग में आ जाता था. उस की अचानक आई छवि से वह और भी बेचैन हो जाती थी. बारबार ऐसा होने पर उस से मिलने को बेताब हो गई थी. किसी तरह उस ने पूर्व प्रेमी का मोबाइल नंबर मालूम कर लिया था.

बात पहली दिसंबर, 2025 की है. रवि उस रोज दोपहर में ही काम से घर लौट आया था. अंबिका घर में नहीं थी. उस के बच्चे अपने ननिहाल गए थे. पत्नी का बैग घर में नहीं था. छिटपुट सामान बैड पर बिखरा हुआ था. उस के रोजाना पहनने वाले कपड़ेलत्ते भी नहीं थे.

उसे समझने में देर नहीं लगी कि अंबिका कहां गई होगी, लेकिन यह नहीं समझ पाया कि वह अपने सारे नए कपड़े और जेवर वगैरह क्यों साथ ले गई? कुछ सेकेंड रुक कर रवि ने अंबिका के मायके में फोन मिलाया. फोन उस की सास ने रिसीव किया. अभी वह पत्नी के बारे में पूछने वाला ही था कि उधर से ही वही पूछ बैठी, दामादजी, आप कैसे हैं? अंबिका कैसी है? बच्चे अपनी मम्मी को याद कर रहे हैं…

रवि आश्चर्य में पड़ गया. कारण वह जो समझ रहा था, वह गलत था. सास की बात से लगा कि अंबिका मायके नहीं गई है. उस ने तुरंत फोन कट कर दिया. सोचने लगा अंबिका अपने मायके नहीं गई है तो कहां गई होगी? मायके जाती जो वहां जाने के लिए पैसे जरूर मांगती. इस का मतलब वह कहीं और चली गई है. फिर उसे कुछ दिनों पहले उस के द्वारा कही गई बात याद आई, मैं उडऩछू हो जाऊंगी!

वह सोच में पड़ गया, जरूर उस दिन के झगड़े का असर है. वह अपने प्रेमी संग फुर्र हो गई है! अब उसे कहां ढूंढा जाए? कुछ मिनट सोचने के बाद उस ने महाराष्ट्र के सोलापुर के करकब थाने में पत्नी अंबिका की गुमशुदगी दर्ज करवा दी. पुलिस ने अंबिका के गुमशुदा होने की सूचना जारी कर दी. उस ने पुलिस को उस रिश्तेदार के बारे में भी बताया, जिस के साथ अंबिका के होने की संभावना थी. वह उस का प्रेमी था. अकसर उस की अनुपस्थिति में वह घर आता रहता था.

इस पर रवि ने कई बार उस पर आपत्ति भी जताई थी. अंबिका पर इस का कोई असर नहीं हुआ था. उलटे वह उस से उलझ जाती थी. पिछले हप्ते तो उस ने गजब ही आरोप मढ़ दिया था. उस पर नामर्द होने का आरोप लगाया था और भाग जाने की चुनौती दे डाली थी.

कुछ दिन पहले जब अंबिका घर छोड़ कर चली गई थी, तब रवि ने रिश्तेदारों की मदद से ढूंढ कर बच्चों की खातिर उसे समझाबुझा कर लाया गया. अंबिका ने भी पति की बात मान ली थी और अपनी गलती सुधारने की कसम खाई थी. रवि ने भी उस की गलतियों पर चादर डाल दी थी. कुछ दिन तक तो अंबिका ठीक से रही. अपने बच्चों का ख्याल रखने लगी. पति से भी प्यार से बातें करने लगी.

किंतु एक दिन फिर वही हरकत करने लगी. पति के घर पर नहीं होने पर अपने प्रेमी को बुलाने लगी. उस के साथ रंगरलियां मनाने लगी. एक बार जब रवि ने रंगेहाथों पकड़ लिया, तब पति पर ही आगबबूला हो गई. दरअसल, अंबिका पति को नजरंदाज कर चुकी थी. उसे प्रेमी की बाहों में कुछ पल गुजारना अच्छा लगने लगा था. पति से शरीरसुख से वंचित अंबिका अपने प्रेमी से वासना की आग बुझाने लगी थी. उस का पति के प्रति नजरिया ही बदल चुका था. उसे इस बात का जरा भी मलाल नहीं था कि उस की इस हरकत का बच्चों पर क्या असर होगा? पति की परिवार और समाज में क्या इज्जत रहेगी?

पति के समझाने पर भी अंबिका ने अपने प्रेमी का साथ नहीं छोड़ा. जब पति काम पर चला जाता था, तब अंबिका प्रेमी को घर बुला लेती थी. रवि को पूरा विश्वास था कि इस बार भी अंबिका जरूर अपने प्रेमी के पास ही गई होगी. पिछली बार उसे गोवा से ढूंढ निकाला था. सो रवि गोवा चला गया. उस का अनुमान सही निकला था. अंबिका अपने प्रेमी संग मिल गई.

इस बार उस ने धैर्य और शांति से काम लिया, उस के पिता के बीमार होने का बहाना बनाया. यह भी वादा किया कि एक बार अपने पापा को चल कर देख ले. उन्हें दिल का दौरा पड़ा है. आईसीयू में हैं. उस के बाद वह जिस के साथ रहना चाहे रहे, उसे कोई आपत्ति नहीं होगी.

अंबिका पति की बातों में आ गई और 7 दिसंबर, 2025 की रात अपने गांव लौट आई. घर आ कर उस ने पाया कि पति उसे झूठ बोल कर गोवा से लाया है. इस पर वह बहुत गुस्से में आ गई. उसे मारने को दौड़ी. रवि अपना बचाव करने लगा. अंबिका ने चोट खाई नागिन की तरह फुंफकारते हुए उस की गरदन पर अपने दांत गड़ा दिए.

दर्द से तड़पते रवि ने उसे धकेल दिया. वह काफी गुस्से में आ चुका था. उस ने पास पड़ी लाठी से अंबिका की पिटाई कर दी. रात का समय था. अंबिका चीखतीचिल्लाती रही, रवि उसे बेरहमी से पीटता रहा. लाठी की मार से जब अंबिका अधमरी हो गई, तब घर के दूसरे कमरे से खेती में काम आने वाला लोहे का औजार ले आया. उस ने अंबिका के सिर पर जोर का हमला कर दिया.

इस हमले से अंबिका के सिर से खून बह निकला. वह वहीं जमीन पर बेसुध पड़ी रही. कुछ देर में ही उस की मौत हो गई. रवि डर गया और वहां से फरार हो गया. 8 दिसंबर, 2025 को सुबह के समय सोलापुर के करकंब पुलिस थाने में खड़भोसे गांव में महिला की हत्या की सूचना मिली.

यह सूचना गांव की पुलिस द्वारा मिली थी. घटनास्थल पर पहुंची पुलिस ने तहकीकात की. मृतक की पहचान विवाहित अंबिका काले के रूप में हुई, जिस की उम्र 30 वर्ष के करीब थी. इस की जांच की जिम्मेदारी एपीआई सागर कुंजीर को दी गई थी. उन्होंने एसआई नीलेश गायकवाड़, हैडकांस्टेबल बापूसाहेब मोरे, बालाजी घोलवे और अभिषेक के साथ जांच पूरी की.

मौकाएवारदात पर हत्या में इस्तेमाल लाठी और लोहे का औजार बरामद कर लिया गया. पुलिस ने वहां मौजूदा लोगों से पूछताछ की. उन्होंने घटना की रात चीखनेचिल्लाने की आवाजें सुनी थीं. इस पर उन्होंने ध्यान नहीं दिया. क्योंकि ऐसा वे अकसर सुनते रहे थे. इस वारदात के बारे में अंबिका के पापा अरुण सोनबा चव्हाण रैना, जो सोलापुर के तहसील पंढरपुर स्थित गांव बादलकोट के रहने वाले हैं, करकंब पुलिस थाने में शिकायत दर्ज करवा दी.

उन्होंने पुलिस को बताया कि उन की बेटी अंबिका पर उस का पति रवि हमेशा शक किया करता था. उस की वजह से उन दोनों में 7 दिसंबर की रात काफी झगड़ा हो गया था. इस झगड़े में ही रवि ने अंबिका की हत्या कर दी. अंबिका के पापा की इस शिकायत पर रवि ही हत्याकांड का मुख्य आरोपी था. उस की तलाश जल्द ही कर ली गई. पकड़ा गया और उस ने अपने बयान में हत्या में शामिल होना कुबूल कर लिया. उस के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कर उसे मजिस्ट्रैट के सामने पेश किया गया, जहां से उसे जेल भेज दिया गया. Family Crime Story

Jharkhand Student Missing Case : छात्रा के कंकाल से थाना सस्पेंड

 Jharkhand Student Missing Case. झारखंड पुलिस के लिए यह कितनी शर्मनाक बात है कि 18 वर्षीय छात्रा की तलाश 8 माह तक नहीं कर पाई. जब हाईकोर्ट ने इस में दखल दिया, तब उस का कंकाल बरामद हुआफिर जो ऐक्शन लिया गया, उस में एसएचओ सहित 10 एसआई, 5 एएसआई, 2 हवलदार और 11 सिपाहियों पर ऐसी गाज गिरी कि

झारखंड के औद्योगिक शहर बोकारो के खुंटाडीह गांव की रहने वाली 18 वर्षीय पुष्पा महतो 21 जुलाई, 2025 को 10 किलोमीटर दूर चास स्थित अपने कालेज के लिए साइकिल से निकली थी.तब उस की मम्मी रेखा देवी अपने घर के पास के खेतों में काम करने गई हुई थी. जब वह शाम को घर वापस लौटी, तब पता चला कि पुष्पा घर वापस नहीं आई थी. उस के बाद वह बेटी की तलाश में कई घंटे गांव के गलीमोहल्ले में भटकती रही.

कुछ पता नहीं चलने पर रेखा देवी पिंड्राजोरा थाने पहुंची. उस ने एसएचओ अभिषेक रंजन को बेटी के गायब होने की जानकारी देते हुए उस की गुमशुदगी दर्ज कराने की मांग की. एसएचओ ने जवान बेटी की गुमशुदगी लिखने के बजाए रेखा देवी को आश्वासन दे कर वापस घर भेज दिया.

वह अगले रोज फिर थाने गई, लेकिन पुलिस ने उन्हें ‘लौट आएगी, कहीं चली गई होगी!’ कह कर भेज दिया. वह लगातार थाने जा कर बेटी का पता लगाने की तलाश के लिए फरियाद करती रही पर थाने में पुष्पा की सनहा (जनरल डायरी एंट्री) तक नहीं लिखी गई.

तब रेखा देवी ने एक दिन बोला, साहब, सनहा (प्रारंभिक सूचना) तो लिख लीजिए!  फी मिन्नतों के बाद एसएचओ अभिषेक रंजन ने 24 जुलाई को सनहा लिखा, लेकिन पुष्पा की खोजबीन करने में दिलचस्पी नहीं दिखाई.

रेखा देवी अपनी बेटी की तलाशी के लिए रोज थाने जाती रही. हर बार कोई न कोई बहाना बना कर पुलिस उसे लौटा देती थी. रेखा ने पड़ोस में रहने वाले युवक दिनेश कुमार महतो पर शक जाहिर कर जांच करने की गुहार एसएचओ से लगाई, किंतु एसएचओ के कानों पर इस की जूं तक नहीं रेंगी. रेखा को किसी ने बताया कि जब तक पुष्पा के गुमशुदगी की एफआईआर नहीं लिखी जाएगी, तब तक पुलिस उस की तलाश नहीं करेगी.

काफी मिन्नतें करने पर भी एसएचओ अभिषेक रंजन ने जब बेटी की गुमशुदगी दर्ज नहीं की तो रेखा इस के लिए एसपी हरविंदर सिंह से मिली. वहां भी उस ने पड़ोसी युवक दिनेश पर शक जताते हुए शिकायत की. दिनेश एक दबंग युवक था. उस के राजनीतिज्ञों से भी अच्छे संबंध थे, इसलिए थाना पुलिस उस के खिलाफ कोई ऐक्शन नहीं ले रही थी, इस बात को एसपी साहब समझ गए. लिहाजा उन के सख्त आदेश के बाद एसएचओ को पुष्पा की रिपोर्ट दर्ज करनी पड़ी.

झारखंड

पुष्पा के लापता होने के 13वें दिन यानी 4 अगस्त, 2025 को पिंड्राजोड़ा थाने में मानव तसकरी से संबंधित भारतीय न्याय संहिता की धारा 140(3) के तहत एफआईआर दर्ज की गई, लेकिन वो भी अज्ञात के खिलाफ. रेखा की काफी फरियादों के बाद एसपी हरविंदर सिंह ने इस केस के खुलासे के लिए थाना स्तर की एक एसआईटी गठित की. इस के बावजूद पुष्पा की तलाश नहीं हो पाई. जबकि रेखा देवी अपनी हर फरियाद में पड़ोसी दिनेश को ही इस का दोषी बताती रही.

पुष्पा रोजाना 10 किलोमीटर दूर साइकिल से चास स्थित अपने कालेज जाती थी. इस पर रेखा का कहना था, मेरी बेटी का रिश्ता तय हो गया था, जिसे सुन कर दिनेश कई बार मेरी बेटी को परेशान कर चुका था. उस ने पुलिस को बताया, 21 जुलाई को बेटी के नहीं मिलने पर अंत में मैं दिनेश के घर गई थी, लेकिन वह घर पर नहीं मिला था. घर पर उस के न मिलने पर मैं डर गई कि दिनेश की वजह से मेरी बेटी के साथ कोई अनहोनी न हो जाए. इस के बाद पति के कहने पर मैं सीधे थाने पहुंची.

रेखा देवी और उस का पति अनंत महतो थाने में चक्कर लगातेलगाते परेशान हो गए थे. मुखिया से ले कर विधायक तक और बोकारो जिले के हर जन प्रतिनिधि से बेटी की सकुशल वापसी की फरियाद की, लेकिन उन्हें निराशा ही हाथ लगी. यह भागादौड़ी करतेकरते 6 महीने गुजर गए. इस के बाद बोकारो जिला परिषद उपाध्यक्ष बबीता देवी से उस की मुलाकात हुई. बबीता देवी ने रेखा की हरसंभव मदद करने का आश्वासन दिया.

बबीता देवी पहले पुष्पा के परिजनों को साथ ले कर एसपी से मिलीं. उन्हें इस केस को ले कर उन का रवैया संतोषजनक नहीं लगा. तब बबीता देवी की मदद से रेखा देवी ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया. उस ने जवान बेटी के गायब होने के मामले में पुलिस द्वारा कोई ठोस कदम नहीं उठाए जाने की शिकायत के साथ बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका दायर की.

कोर्ट में जब इस केस की सुनवाई शुरू हुई, तब पाया कि पुलिस मामले की लीपापोती करने में लगी हुई है. यह भी पता चला कि स्थानीय पुलिस ने आरोपी को बचाने की कोशिश की है. कोर्ट को आरोपी से मिले होने और उस के बचाने के कई सबूत मिले. इस पर हाईकोर्ट ने मामले की गंभीरता को देखते हुए झारखंड डीजीपी तदाशा मिश्रा और बोकारो एसपी हरविंदर सिंह को कड़ी फटकार लगाई. साथ ही जल्द रिपोर्ट पेश करने का आदेश दिया.

पीडि़त पक्ष की तरफ से वकील विंसेंट मार्की ने अपने तर्क रखे. इस मामले की महत्त्वपूर्ण सुनवाई 27 फरवरी, 9 मार्च और 23 मार्च, 2026 को हुई. हाईकोर्ट ने पुष्पा के मामले में एसपी हरविंदर सिंह पर सख्ती दिखाई. पीडि़त पक्ष के वकील विंसेंट मार्की ने पुलिस पर आरोप लगाया कि हाईकोर्ट के इस सख्त रवैये के बाद परिवार को डराने की मंशा से 3 अप्रैल, 2026 को पुलिस ने अनंत महतो के बुजुर्ग चाचा सम्पद महतो को थाने ले जा कर उन के साथ मारपीट की.

विंसेंट मार्की ने कोर्ट में कहा, सम्पद महतो के साथ थाने में हुई इस मारपीट की जानकारी 7 अप्रैल को हम ने हाईकोर्ट के समक्ष लिखित तौर पर रखी. इस पर हाईकोर्ट ने बोकारो एसपी के साथ डीजीपी झारखंड को भी तलब किया.  हाईकोर्ट ने 7 मार्च को दिए अपने लिखित आदेश में एसपी को चेतावनी दी. हाईकोर्ट ने कहा, यह स्पष्ट किया जाता है कि याचिकाकर्ता या उस के परिवार के सदस्यों के साथ कोई भी अप्रिय घटना घटित होने पर, बोकारो के एसपी व्यक्तिगत रूप से उत्तरदायी होंगे.

हाईकोर्ट की इस टिप्पणी के बाद डीजीपी तदाशा मिश्रा ने सीआईडी की डीआईजी संध्या रानी मेहता को जांच सौंपी. दूसरी तरफ एसपी हरविंदर सिंह ने डीएसपी आलोक रंजन के नेतृत्व में एक नई एसआईटी टीम का गठन किया. 9 अप्रैल को गठित एसआईटी ने 10 अप्रैल, 2026 को जांच शुरू कर दी.

हाईकोर्ट ने इस मामले की सुनवाई के दौरान एसपी हरविंदर सिंह से पूछा  कि एफआईआर दर्ज होने में 13 दिन क्यों लग गए? इस सवाल पर निलंबित एसएचओ अभिषेक रंजन ने तर्क देते हुए कहा कि परिजन सिर्फ यह चाहते थे कि उन की बेटी मिल जाए. वह कोर्ट में बोले, बेटी का रिश्ता हो जाने के कारण परिजन शुरू में नहीं चाहते थे कि प्राथमिकी दर्ज हो.

इस पर कोर्ट में पुष्पा के पापा अनंत महतो ने कहा, बेटी का रिश्ता तय हो गया था, लेकिन वह ऐसा कभी नहीं चाहते थे कि लापता बेटी की तलाशी के लिए एफआईआर दर्ज नहीं हो. एसएचओ खुद ही प्राथमिकी दर्ज नहीं करना चाहते थे. कोर्ट में अनंत सिंह ने यह भी कहा, एफआईआर तो दर्ज हुई, लेकिन पुलिस काररवाई करने से कोसों दूर रही.

इस आरोप पर एसएचओ अभिषेक रंजन ने कोर्ट में कहा, परिजनों के शक के आधार पर हम ने अभियुक्त दिनेश कुमार महतो से कई बार पूछताछ की. उस की सीडीआर रिपोर्ट निकाली, लेकिन अभियुक्त और मृतक पुष्पा के बीच बातचीत का रिकौर्ड नहीं मिला, ऐसे में उसे छोडऩा पड़ा.

कोर्ट की इस फटकार और आदेश के बाद 11 अप्रैल, 2026 को पुलिस ने मुख्य आरोपी दिनेश महतो को गिरफ्तार किया. अगले रोज 12 अप्रैल, 2026 को आरोपी की निशानदेही पर पुलिस ने चास कालेज के पास झाडिय़ों से पुष्पा का कंकाल, उस के कपड़े, बाल और हत्या में इस्तेमाल हथियार बरामद किए. जांच में यह साबित हुआ कि पिंड्राजोरा पुलिस ने जानबूझ कर मामले को दबाया था. इस के बाद एसपी ने पिंड्राजोरा थाने के एसएचओ के साथ सभी 28 पुलिसकर्मियों 10 एसआई, 5 एएसआई, 2 हवलदार और 11 सिपाहियों को निलंबित कर दिया. इस में थानाप्रभारी से ले कर सिपाही तक शामिल थे.

जांच में पता चला कि पुष्पा के मर्डर का आरोपी दिनेश कुमार महतो कई लड़कियों के संपर्क में था. वह पुष्पा के अलावा और भी कई लड़कियों से बातें करता था. इस का सबूत उस के पास से पुलिस द्वारा बरामद किए गए 23 सिमकार्डों और 4 मोबाइल फोंस से मिला.

हत्यारोपी दिनेश वीपीएन नंबर वाले इंटरनेट कालिंग का भी इस्तेमाल किया करता था. यह इंटरनेट कालिंग ही वह कड़ी थी, जिस ने पुलिस को दिनेश की गिरेबान तक पहुंचा दिया. फिर तो पुलिस की जांच में पुष्पा हत्याकांड को ले कर चौंकाने वाले खुलासे हुए.

जांच के दौरान यह शर्मनाक तथ्य भी उजागर हुआ है कि पिंड्राजोरा थाने के एसएचओ और पुष्पा गुमशुदगी केस के आईओ यानी जांच अधिकारी, इस केस के मुख्य आरोपी दिनेश के साथ पार्टी किया करते थे. यहां तक कि पुलिस पदाधिकारियों द्वारा दिनेश कुमार महतो से पैसे लेने की बात भी सामने आई.

बताया गया कि एसएचओ और जांच अधिकारी ने हत्यारोपी को यह भरोसा दिला दिया था कि वह इस केस में आसानी से बच कर निकल जाएगा. किंतु नई एसआईटी गठित होने के बाद वह बच नहीं पाया. एसआईटी ने 4 दिन में ही केस को सुलझा दिया. जबकि पिंड्राजोरा पुलिस ने पुष्पा की गुमशुदगी केस की जांच को जितना टाला जा सकता था, उतना टालने की कोशिश की.

जिस केस को सुलझाने में एसएचओ और जांच अधिकारी अनिकेत कुमार को 8 महीने लग गए, उसे सिटी डीएसपी आलोक रंजन के नेतृत्व में बनाई गई स्पैशल इंवेस्टिगेशन टीम (एसआईटी) ने महज 4 दिनों में सुलझा लिया.

यह सफलता टैक्निकल सर्विलांस के जरिके मिली. हाईकोर्ट की सख्ती के बाद एसआईटी ने जब छानबीन शुरू की तब पता चला कि 21 जुलाई, 2025 को मृतका पुष्पा और हत्यारोपी दिनेश कुमार महतो के मोबाइल की लोकेशन पहले गांव, फिर कालेज और इस के बाद बाजार में एक ही जगह पर थी, जिस का मतलब यह हुआ कि वे दोनों साथ थे. बाजार में ही दोनों की आखिरी मोबाइल लोकेशन मिली थी और फिर फोन बंद हो गया था.

इस के बाद पुलिस ने 21 अप्रैल से पहले और बाद दिनेश महतो की गतिविधियों को बारीकी से छानबीन की. पता चला कि पुष्पा की गुमशुदगी के बाद दिनेश लगातार वीपीएन नंबर वाले इंटरनेट कालिंग का इस्तेमाल किया करता था. वह जानता था कि इस में लोकेशन ट्रेस नहीं की जा सकती है. यही पुलिस के लिए शक का कारण बना. पुलिस को शक हुआ और जब दिनेश से कड़ाई से पूछताछ की गई तो उस ने सारा राज उगल दिया. पुलिस को दिनेश ने बताया कि उस का बीते 3 सालों से पुष्पा से प्रेम संबंध बना हुआ था. अकसर फोन पर बातचीत करता था. इसी बीच घरवालों ने पुष्पा की शादी तय कर दी थी, इस के बाद पुष्पा उस पर शादी का दबाव बना रही थी. इसी बात से नाराज हो कर उस ने पुष्पा की हत्या की साजिश रची थी और इस साजिश को अमलीजामा भी पहना दिया था.

दिनेश ने सुनियोजित साजिश के तहत 24 जुलाई, 2025 को पुष्पा को चास कालेज के पास मिलने के बहाने बुलाया और फिर कालेज के पीछे के सुनसान जंगल में ले जा कर चाकू से ताबड़तोड़ हमला कर उस की हत्या कर दी. इस के बाद शव को जंगल में छिपा दिया था.

जांच में सामने आया कि पहली एसआईटी टीम और थाना स्तर पर गंभीर लापरवाही हुई थी. पहले एसएचओ सहित कुछ पुलिसकर्मियों को निलंबित किया गया और बाद में पूरे थाना स्टाफ व एसआईटी टीम पर काररवाई की गई. अब सभी के खिलाफ विभागीय जांच भी शुरू कर दी गई है. पुलिस ने आरोपी की निशानदेही पर हत्या में इस्तेमाल चाकू भी बरामद कर लिया है. कंकाल की पहचान के लिए डीएनए टेस्ट की प्रक्रिया जारी है, जिस से पता चल सके कि बरामद कंकाल पुष्पा का ही है.

इस काररवाई पर पुष्पा महतो के पेरेंट्स ने राहत की सांस ली है, लेकिन वह चाहते हैं कि मामले की जांच सीबीआई से करवाई जाए, ताकि अभियुक्त के अलावा निलंबित पुलिसकर्मियों के कारनामों की निष्पक्ष जांच हो. वरना कुछ दिनों के बाद सभी पुलिसकर्मियों का निलंबन खत्म हो जाएगा. वे दोबारा किसी पीडि़त को मिलने वाले न्याय के रास्ते में रोड़ा बनेंगे.

वह आगे कहते हैं, हमारी बेटी तो वापस आ नहीं सकती, लेकिन अभियुक्त को फांसी की सजा मिलनी चाहिए. अनंत महतो के परिवार में उन की पत्नी रेखा देवी के अलावा और एक 16 साल का बेटा है, जिस की पढ़ाई इस केस की वजह से छूट गई है. अनंत महतो अपने बेटे के भविष्य को ले कर चिंतित हैं, जिन्हें वह राजस्थान की उस कंपनी में भेज चुके हैं, जहां वह खुद मजदूरी करते थे.

क्षेत्रीय लोग पुलिसकर्मियों के निलंबन से संतुष्ट नहीं हैं. वह उन के खिलाफ भी सख्त कानूनी काररवाई कर उन्हें गिरफ्तार करने की मांग कर रहे हैं.  Jharkhand Student Missing Case

Social Media Scam: आप तो नहीं फंसीं ऐसे जाल में

Social Media Scam : औनलाइन इमोशनल रिलेशन बना कर युवतियों को फंसाने और धमकाने वाले साहिल विश्वकर्मा के सोशल मीडिया पर 100 फरजी प्रोफाइल थे. उस ने युवतियों को अपने जाल में फंसा कर उन के 250 से ज्यादा अश्लील वीडियो बना रखे थे. उन्हीं वीडियो के जरिए वह उन से इस तरह पैसों की वसूली करता था कि

बात 11 मार्च, 2026 की है. मध्य प्रदेश के जबलपुर शहर में स्थित बरगी नगर पुलिस चौकी की इंचार्ज सरिता पटेल सुबह के समय अपने केबिन में बैठी थीं कि तभी बाहर से किसी महिला के रोने की आवाज आई. उन्होंने सिर उठा कर देखा तो एक युवती हाथ में रूमाल दबाए, सकुचाते हुए अंदर दाखिल हो रही थी. उस की आंखें सूजी हुई थीं और चेहरे पर असीम पीड़ा थी.

युवती को अंदर बुला कर सरिता पटेल ने उसे सामने की कुरसी पर बैठने का इशारा किया. इस के बाद उन्होंने उस से उस की समस्या के बारे में पूछा. इस पर युवती ने धीरे से कहा, मैम, मुझे एक लड़का बहुत परेशान कर रहा है. उस की बात सुन कर चौकी इंचार्ज ने उसे पूरी बात विस्तार से बताने को कहा.

इस पर 23 साल की एमबीए स्टूडेंट यविता ने बताया कि वह बरगी नगर इलाके में अपने फादर के साथ रहती है, मम्मी का 5  साल पहले ही देहांत हो चुका था. पापा एक निजी कंपनी में काम करते हैं. वह मेरी पढ़ाने में कोई कसर नहीं छोड़ रहे.  यविता ने आगे बताया कि मैं भी मेहनत कर के अच्छे नंबरों से पास होती रही. अपने करिअर को ले कर मैं काफी गंभीर थी.

उस ने बताया कि करीब 8 महीने पहले उस की दोस्ती हर्षित मिश्रा नाम के एक युवक से हुई थी. हर्षित उस के एक दोस्त का दोस्त था. दोनों में अच्छी बातचीत होती थी. कभीकभार उस से मुलाकात भी हो जाती थी. लेकिन कई महीने से उन की बातचीत बंद थी. हर्षित और यविता के बीच कोई झगड़ा नहीं हुआ था, बस दूरियां बढ़ गई थीं. दिसंबर 2025 के पहले हफ्ते में यविता के इंस्टाग्राम पर एक फ्रेंड रिक्वेस्ट आई. नाम था हर्षित मिश्रा. प्रोफाइल फोटो में हर्षित की ही फोटो थी. यविता ने बिना सोचे रिक्वेस्ट एक्सेप्ट कर ली. कुछ देर बाद एक मैसेज आया.

हाय यविता, कैसी हो? बहुत दिनों बाद बात हुई. यविता ने जवाब दिया, मैं ठीक हूं. तुम सुनाओ, कहां हो आजकल? इस पर हर्षित ने बताया कि वह नागपुर में है और एक प्राइवेट जौब कर रहा है. धीरेधीरे बातचीत बढ़ी. यविता को कोई शक नहीं हुआ, क्योंकि वह हर्षित के बारे में सब कुछ जानती थी, तभी तो उस ने उस की फ्रेंड रिक्वेस्ट स्वीकार की थी.

इस के बाद 28 जनवरी, 2026 को यविता के मोबाइल पर अननोन नंबर से फोन आया. फोन करने वाले ने अपना नाम साहिल बताते हुए कहा कि वह हर्षित का दोस्त है. यविता ने हैरानी से पूछा, हर्षित का दोस्त..? आप का नाम पहले मैं ने कभी सुना नहीं. एनीवे बोलिए. फिर साहिल बोला, देखो, मैं सीधे मुद्दे की बात करता हूं. हर्षित ने मुझे तुम्हारे कुछ निजी फोटो और वीडियो दिए हैं. उस ने कहा है कि अगर पैसे मिलेंगे तो ये तुम्हें वापस मिल जाएंगे. मैं ने उसे साढ़े 8 हजार रुपए दे दिए हैं. अब तुम मुझे मेरे पैसे वापस कर दो तो मैं ये सारी चीजें तुम्हें दे दूंगा.

साहिल की बात सुन कर यविता के होश उड़ गए. उस के पास कोई फोटो या वीडियो नहीं था, लेकिन सामने वाला कह रहा था कि उस के पास कुछ है. उस ने घबरा कर कहा,  हर्षित से बात करूंगी. साहिल ने तुरंत कहा, नहीं, तुम हर्षित से बात मत करो. वह मुझे पैसे वापस नहीं करेगा. तुम मुझे मेरे पैसे दो, बस.

यविता बदनामी के डर से कांप गई. अगर उस के कोई फोटो या वीडियो वायरल हो गए तो उस का क्या होगा? उस की पढ़ाई, उस का करिअर, उस के पापा का भरोसा, सब कुछ खत्म हो जाएगा. उस ने कांपते होंठों से कहा, ठीक है… मैं पैसे दे दूंगी.

अगले ही दिन उस ने साहिल को साढ़े 8 हजार रुपए ट्रांसफर कर दिए. उस ने सोचा कि इस से बात खत्म हो जाएगी, लेकिन एक हफ्ते बाद फिर साहिल का फोन आया. इस बार साहिल ने कहा, देखो, मैं ने अपने एक और दोस्त को ये फोटो दिखाए हैं. वह भी पैसे मांग रहा है. अगर तुम ने उसे भी पैसे नहीं दिए तो वह वायरल कर देगा. यविता ने पूछा, कितने पैसे? 15 हजार.

यविता के पास इतने पैसे नहीं थे. उस ने अपनी सहेली से पैसे उधार लिए और फिर से साहिल को ट्रांसफर कर दिए. इसी तरह हर हफ्ते कोई न कोई बहाना बनता. कभी साहिल कहता कि हर्षित और फोटो दे रहा है. यविता एक माह में लगभग 40-50 हजार रुपए उसे दे चुकी थी. उस ने अपनी पढ़ाई के लिए जो पैसे जमा किए थे, वे सब खत्म हो गए. उस ने अपनी छोटी बहन के लिए जो ज्वैलरी खरीदी थी, वह भी बेच दी. हर रात वह सोचती कि कल यह सिलसिला खत्म होगा, लेकिन हर सुबह एक नई धमकी के साथ होती.

18 फरवरी, 2026 को रात के समय फिर साहिल का फोन आया तो यविता ने सख्त लहजे में कहा, मैं और पैसे नहीं दे सकती. तुम ने मुझे बरबाद कर दिया है. अब चाहे जो करो. फोन पर कुछ पल की खामोशी रही. फिर साहिल ने धीमी मगर खतरनाक आवाज में कहा,’अच्छा? तो अब पैसे नहीं देना चाहती? तो फिर एक रास्ता और है. क्या रास्ता? मुझ से मिलो. बस एक बार. मेरे साथ शारीरिक संबंध बनाओ. एक बार में ही मैं सारे फोटो और वीडियो डिलीट कर दूंगा. और तुम्हें फिर कभी परेशान नहीं करूंगा.

यविता को लगा जैसे उस के शरीर में बिजली का करंट दौड़ गया हो. वह चीखते हुए बोली, तुम पागल हो गए हो? मैं ऐसा कुछ नहीं करूंगी. उस ने फोन काट दिया. उस रात वह सो नहीं पाई. उसे लगा कि अब सच में उस की फोटो वायरल हो जाएगी. वह अपने पापा को मुंह कैसे दिखाएगी, पड़ोसी क्या कहेंगे, उस की तो जिंदगी बरबाद हो जाएगी.

लेकिन अगले दिन कुछ नहीं हुआ. उस के बाद भी कई दिनों तक कुछ नहीं हुआ. यविता ने सोचा कि शायद साहिल डर गया है. उस ने अपनी पढ़ाई पर ध्यान देना शुरू कर दिया, लेकिन 4 मार्च, 2026 को होली के दिन शाम करीब 5 बजे साहिल ने उसे फोन कर कहा, मैं बरगी नगर में हूं. होली पर घर आया हूं. तुम से मिलना है.

यविता ने कहा, मैं तुम से नहीं मिल सकती. साहिल ने धमकी भरे लहजे में कहा, तो क्या अब मैं सारे फोटो वायरल कर दूं? तुम्हारे पापा को, तुम्हारे कालेज वालों को, सब को भेज दूं? यविता की सांसें तेज हो गईं. वह बोली, ठीक है… कहां मिलना है? साईं मंदिर के पास, 15 मिनट में.

यविता ने घर से निकलते हुए अपनी एक सहेली को लोकेशन भेज दी और लिखा, अगर मैं एक घंटे में वापस न आऊं तो पुलिस को फोन कर देना. यविता जब साईं मंदिर पहुंची तो वहां पहले से ही एक युवक खड़ा था. औसत कदकाठी, साधारण कपड़े. कोई खास बात नहीं. उस ने यविता को देखा और मुसकराया. वह मुसकान यविता को बेहद अजीब लगी. साहिल ने कहा, चलो, थोड़ी दूर चलते हैं, यहां भीड़ है. यविता ने कहा, नहीं, यहीं बात करो. क्या चाहिए तुम्हें ? साहिल ने कहा, 12 हजार रुपए चाहिए. जल्दी दो. मेरे पास पैसे नहीं हैं. तुम ने मुझ से 50 हजार ले लिए. अब और नहीं दे सकती.

साहिल ने जैसे उस की बात को सुना ही नहीं. देखो, अगर आज पैसे नहीं दिए तो कल सुबह तुम्हारे पापा के फोन पर तुम्हारे फोटो होंगे, समझी? यविता की आंखों में आंसू आ गए. उस ने अपने बैग से 12 हजार रुपए निकाले. ये पैसे उस ने अपनी दादी से कालेज फीस के लिए लिए थे. उस ने साहिल को पैसे दिए और बिना एक शब्द कहे वहां से चली गई.

रास्ते भर वह सोचती रही कि अब और नहीं. अब बस, इस की शिकायत पुलिस से करनी ही होगी, वरना यह इसी तरह उसे ब्लैकमेल करता रहेगा. इस के बाद यविता 11 मार्च, 2026 को बरगी नगर पुलिस चौकी पहुंच गई और चौकी इंचार्ज सरिता पटेल को अपने साथ घटी सारी कहानी बता दी.

सरिता पटेल ने तुरंत मामले की गंभीरता को समझते हुए आरोपी साहिल के खिलाफ बीएनएस की धारा 75 (1) (2), 78 (1) (2), 308 (2) के तहत रिपोर्ट दर्ज कर इस की सूचना थाना बरगी के टीआई नीलेश दोहरे और एसपी (जबलपुर) संपत उपाध्याय को दे दी. एसपी संपत उपाध्याय ने आरोपी को गिरफ्तार करने के लिए एएसपी (जोन- 4) अंजना तिवारी व एएसपी (सिटी) अंजुल अयंक मिश्रा के निर्देशन में एक पुलिस टीम का गठन किया.

टीम में टीआई नीलेश दोहरे, चौकी इंचार्ज सरिता पटेल, एसआई मुनीश, एएसआई भैयालाल वर्मा, कपूर सिंह, कांस्टेबल मुकेश डेहरिया, मयंक चौरसिया, दुर्गेश झारिया, नीरज उपाध्याय, शेर सिंह पटेल आदि को शामिल किया गया. इस के बाद पुलिस टीम ने आरोपी को पकडऩे के लिए जाल बिछाना शुरू कर दिया.

टीम ने सब से पहले उस का पता हासिल किया. पता चला कि आरोपी का पूरा नाम साहिल विश्वकर्मा है और वह बरगी नगर के ही हौस्टल ब्लौक का रहने वाला है. पुलिस टीम उस के घर पहुंची तो वह घर पर नहीं मिला. घर पर उस के पापा अशोक विश्वकर्मा मिले. उन्होंने पुलिस को बताया कि साहिल नागपुर में रहता है. होली के त्यौहार पर यहां आया था, कल ही वापस चला गया.

इस के बाद पुलिस टीम तुरंत नागपुर के लिए रवाना हो गई. नागपुर में वह एक प्राइवेट कंपनी में नौकरी करता था. इसलिए शाम को जब वह कमरे पर लौटा तो पुलिस ने उसे दबोच लिया. उस के कमरे की तलाशी ली गई तो पुलिस हैरान रह गई. साहिल के पास से 2 मोबाइल फोन, 3 पेन ड्राइव और 8 सिम कार्ड मिले. जब इन की जांच की गई तो पुलिस के होश उड़ गए. एक पेन ड्राइव में 250 से ज्यादा लड़कियों के फोटो और वीडियो थे. वे लड़कियां मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश और छत्तीसगढ़ की थीं. कई लड़कियों के साथ उस के अश्लील चैट के स्क्रीनशाट थे. इंस्टाग्राम पर उस की 100 से ज्यादा लड़कियों के नाम से फेक आईडी थीं.

पूछताछ में पता चला कि साहिल विश्वकर्मा बरगी नगर का रहने वाला ग्रैजुएट था. उस के पापा ड्राइवर थे, मम्मी घरेलू महिला और एक छोटी बहन थी. पढ़ाई में औसत, लेकिन कंप्यूटर और सोशल मीडिया में उसे महारत हासिल थी. उस ने बताया कि सब से पहले वह इंस्टाग्राम पर लड़कियों के नाम से फेक आईडी बनाता था. किसी लड़की की असली फोटो लगा देता था. फिर उस आईडी से दूसरी लड़कियों को रिक्वेस्ट भेजता था. लड़कियां लड़की को देख कर आसानी से फ्रेंड रिक्वेस्ट एक्सेप्ट कर लेती थीं.

बातचीत शुरू होती थी. फिर वह उन से उन के परिवार, दोस्तों, बौयफ्रेंड के बारे में पूछता था. धीरेधीरे उन की पर्सनल लाइफ के बारे में सब कुछ जान लेता था. फिर एक दिन उन्हें कौल कर के बताता था कि उन के प्रेमी के बारे में उसे सब पता है या उन की कोई पर्सनल बात पता है. डर के मारे वे पैसे दे देती थीं.

जो पैसे नहीं देती थीं, उन्हें वह धमकी देता था कि तुम्हारे पापा या भाई को बता दूंगा कि तुम किसी लड़के से मिलती हो. कुछ लड़कियां इस डर से उस के साथ शारीरिक संबंध बनाने को तैयार हो जाती थीं. जब पुलिस ने पूछा कि उस ने कितनी लड़कियों को ब्लैकमेल किया तो उस ने बेधड़क कहा, 100 से ज्यादा.

पैसे का हिसाब पूछने पर वह हंसा, हर्षित मेरा दोस्त है. मुझे पता था कि यविता उस से पहले मिलती थी और अब बात नहीं होती. यह सब से आसान तरीका था. उस ने हर्षित के नाम से इंस्टाग्राम आईडी बनाई, उस पर हर्षित की ही फोटो लगाई. यविता ने बिना कुछ सोचे एक्सेप्ट कर लिया. आरोपी साहिल विश्वकर्मा से पूछताछ करने के बाद पुलिस ने उसे कोर्ट में पेश कर जेल भेज दिया.

यह सराहनीय कार्य करने पर एसपी संपत उपाध्याय ने चौकी प्रभारी एसआई सरिता पटेल, एसआई मुनीश, कांस्टेबल मयंक चौहान, शेर सिंह पटेल को पुरस्कृत करने की घोषणा की है.    —यविता बदला हुआ नाम है. Social Media Scam