सोने की चेन ने बनाया कातिल – भाग 1

मध्य प्रदेश के इंदौर का बख्तावर नगर एक ऐसा इलाका है, जहां ज्यादातर धनाढ्य लोग रहते हैं. यहां रहने वाले वे लोग हैं, जो सरकारी नौकरियों में हैं या फिर रिटायर हो चुके हैं. पौश होने की वजह से यह इलाका शांत रहता है. नौकरीपेशा होने की वजह से यहां रहने वाले लोग एकदूसरे की हर तरह से मदद करने को भी तैयार रहते हैं.

1 मई, 2014 की दोपहर के 2 बजे के आसपास दिव्य मिश्रा अपनी बुआ शकुंतला मिश्रा के यहां पहुंचा तो मकान का मुख्य दरवाजा खुला हुआ था. उसे यह देख कर हैरानी हुई, क्योंकि उस की बुआ का घर कभी इस तरह खुला नहीं रहता था. वह दरवाजा तभी खोलती थीं, जब आने वाले को दरवाजे में लगी जाली से देख कर पहचान लेती थीं.

62 वर्षीया शकुंतला मिश्रा उस मकान में अपनी बहन अनिता दुबे के साथ रहती थीं. उन के पति विक्रम मिश्रा की बहुत पहले एक सड़क हादसे में मौत हो चुकी थी. पति की मौत के समय वह गर्भवती थीं. पति की मौत का सदमा उन्हें इतना गहरा था कि गर्भ में पल रही बेटी की भी मौत हो गई थी. इस के बाद उन्हें मृतक आश्रित कोटे से पति की जगह वन विभाग में नौकरी मिल गई थी. अब वह उस से भी रिटायर हो चुकी थीं.

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पति की मौत के बाद उस घर में शकुंतला अपनी मौसेरी बहन अनिता दुबे के साथ रहती थीं. अनिता उन्हीं के साथ रह कर पढ़ीलिखी थी. बाद में उसे नौकरी मिल गई. साथ रहते हुए उसे अपनी मौसेरी बहन से इतना लगाव हो गया था कि उस ने भी शादी नहीं की थी.

अनिता दुबे शिक्षा विभाग में संचालक थीं. दोनों ही बहनों की कोई औलाद नहीं थी, इसलिए उन्होंने अपनी संपत्ति एकदूसरे के नाम कर रखी थी. उन के पास पड़ोस वालों से काफी अच्छे संबंध थे. मोहल्ले के सभी बच्चे उन्हें बुआ कहते थे. कभी कोई उन के चरित्र पर अंगुली नहीं उठा सका था, इसलिए सब उन की काफी इज्जत करते थे.

मकान मे उन के साथ कोई मर्द नहीं रहता था, इसलिए सुरक्षा की दृष्टि से वे हमेशा अपना दरवाजा बंद रखती थी. शकुंतला मिश्रा के पिता दूरसंचार विभाग में डाइरैक्टर के पद से रिटायर हुए थे. वह भी परिवार के साथ बख्तावरनगर में ही रहते थे.

दिव्य ने बुआ के घर का बाहरी दरवाजा खुला देखा तो उसे काफी हैरानी हुई थी. वह अंदर पहुंचा तो उसे कोई नहीं दिखाई दिया, किसी की आवाज भी सुनाई नहीं दी. घर में सन्नाटा पसरा था. उस ने आवाज भी दी, तब भी कोई जवाब नहीं मिला. थोड़ी देर वह असमंजस की स्थिति में खड़ा रहा, उस के बाद वह पहली मंजिल की सीढि़यां चढ़ने लगा.

ऊपर पहुंच कर उस ने देखा, कमरे की लकड़ी की अलमारियां खुली पड़ी थीं और उन का सारा सामान बिखरा पड़ा था. किसी अनहोनी से उस का दिल धड़कने लगा. तभी उस की नजर फर्श पर पड़ी तो उसे खून फैला दिखाई दिया. खून देख कर वह घबरा गया. उस ने तुरंत अपने दोस्तों और घर वालों को फोन कर दिया. दोस्त और घर वाले भी वहीं रहते थे, थोड़ी ही देर में सब आ गए.

फर्श पर घसीटने के निशान थे. निशान के अनुसार सभी बाथरूम में पहुंचे तो वहां शकुंतला और अनिता के शव एक दूसरे के ऊपर पड़े थे. स्थिति देख कर लोगों को समझते देर नहीं लगी कि लूटपाट के लिए लुटेरों ने दोनों की हत्या कर दी थी. तुरंत घटना की सूचना थाना पलासिया पुलिस को दी गई.

सूचना देने के थोड़ी देर बाद थानाप्रभारी शिवपाल सिंह कुशवाह पुलिस बल के साथ घटनास्थल पर आ गए. एक तो पौश इलाके का मामला था, दूसरे मृतका ही नहीं, उन के सारे नाते रिश्तेदार उच्च सरकारी पदों पर थे, इसलिए मामले की गंभीरता को देखते हुए थानाप्रभारी शिवपाल सिंह ने पुलिस उच्चाधिकारियों को घटना की सूचना दे दी. सुबूत जुटाने के लिए फोरैंसिक एक्स्पर्ट डा. सुधीर शर्मा को भी घटनास्थल पर बुला लिया गया था.

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डा. सुधीर शर्मा ने घटनास्थल एवं लाशों के निरीक्षण में पाया कि मृतका अनिता एवं हत्यारे के बीच जम कर संघर्ष हुआ था. क्योंकि उस के नाखून में हत्यारे की त्वचा एवं सिर के बाल मिले थे. उन्होंने उसे सुरक्षित कर लिया था. हत्यारे ने दोनों के सिर पर किसी भारी चीज से वार कर के उन्हें मारा था. उन के शरीर के कुछ गहने भी गायब थे. पुलिस ने घटनास्थल की सारी काररवाई निपटा कर दोनों लाशों की पोस्टमार्टम के लिए जिला अस्पताल भिजवा दिया था.

निरीक्षण में पुलिस ने देखा था कि कूलर खुला पड़ा था. शायद वह रिपेयरिंग के लिए खोला गया था. अलमारियों के सामान के बिखरे होने से साफ था कि मामला लूटपाट का था. पुलिस द्वारा की गई पूछताछ में पता चला था कि कीमती गहने तो लौकर में रखे थे, रोजाना उपयोग में लाए जाने वाले गहने ही घर में थे. उन में से कितना गया था और उन की कीमत क्या रही होगी, यह कोई नहीं बता सका था. लेकिन इतना जरूर बताया गया था कि शकुंतला का मोबाइल तो है, जबकि अनिता का मोबाइल गायब है.

निरीक्षण में थानाप्रभारी शिवपाल सिंह ने देखा था कि दोनों लाशों के हाथों की अंगूठियां जस की तस थीं. इस से उन्होंने अंदाजा लगाया कि लुटेरा पेशेवर नहीं था. घर की सभी अलमारियों, बक्सों और लौकर के ताले टूटे पड़े थे. इस का मतलब लुटेरे के हाथ जो लगा था. उसे ले कर वह भाग निकला था. क्योंकि तलाशी में करीब 50 पर्स पाए गए थे और हर पर्स में कोई न कोई गहना और कुछ नकद रुपए मिले थे.

कूलर रिपेयर करने वाले का एक पंफलेट मिला था, कूलर भी खुला पड़ा था. इस से पुलिस को लगा कि कहीं कूलर बनाने वाले ने ही तो इस घटना को अंजाम नहीं दिया. पुलिस ने उस पंफलेट को अपने कब्जे में ले लिया. क्योंकि पुलिस का यह अंदाजा सही निकला.

दरअसल पड़ोस की छोटी छोटी 3 लड़कियों ने बताया था कि घटना से पहले वे वहां खेल रही थीं तो कूलर बनाने वाले ने उन्हें यह कह कर घर भेज दिया था कि कहीं करंट न लग जाए. इस बात से पुलिस की आशंका को बल मिला.

अय्याशी में डबल मर्डर : होटल मालिक और गर्लफ्रेंड की हत्या – भाग 1

जैसे ही इशिका ने घर का दरवाजा खोला, सामने कमरे में उस की मम्मी सरिता और उस के अंकल रवि ठाकुर के शव पड़े हुए थे. यह देखते ही उस की चीख निकल गई. फर्श पूरी तरह से खून से लाल हुआ पड़ा था. सरिता और रवि ठाकुर दोनों के शरीर पूरी तरह से नग्न थे.

घर का दृश्य देखते ही उस ने इस की सूचना सब से पहले पुलिस को दी. यह घटना मध्य प्रदेश के इंदौर के एरोड्रम थाना क्षेत्र में स्थित अशोक नगर में हुई थी. यहीं पर सरिता तीसरी मंजिल पर किराए के मकान में रहती थी. डबल मर्डर की सूचना पाते ही एरोड्रम थाने के एसएचओ राजेश साहू तुरंत ही पुलिस टीम के साथ घटनास्थल पर पहुंच गए थे.

ममता अपने घर के काम में बिजी थी. उसी वक्त उस के मोबाइल पर किसी की काल आई. जैसे ही ममता ने अपने मोबाइल पर नजर डाली, रवि ठाकुर का फोन था. रवि बाबू का फोन देखते ही उस का दिल तेजी से धड़कने लगा. वह समझ नहीं पा रही थी कि वह उस की काल रिसीव करे या काट दे.

ममता का पति नितिन उस समय घर पर ही था. उस वक्त तो उस ने रवि की काल रिसीव नहीं की, लेकिन जैसे ही उस का पति घर से काम के लिए निकला, ममता ने रवि बाबू को काल बैक कर दी.

ममता की काल रिसीव करते ही रवि ठाकुर बोला, ”और ममता रानी, कैसी हो? क्या बात है, आजकल तो तुम हमारा फोन भी रिसीव नहीं कर रही हो?’’

”ठाकुर साहब, ऐसी कोई बात नहीं. दरअसल, उस वक्त मेरे पति घर पर ही थे, जिस वजह से मैं फोन रिसीव नहीं कर सकी. बोलिए ठाकुर साहब, कैसे फोन किया?’’ ममता ने पूछा.

तभी रवि ठाकुर ने कहा, ”ममता रानी, आज शाम को टाइम निकाल कर होटल चली आना. तुम्हारी दावत है.’’

”नहीं…नहीं…ठाकुर साहब, आज मैं आप के पास नहीं आ सकती. आज मुझे घर पर जरूरी काम है.’’

”ममता रानी, जरूरी काम तो हर रोज होते ही रहते हैं. हमारा भी आज जरूरी काम है. अगर आज तुम नहीं आई तो हमारा जरूरी काम कैसे होगा. आज तो तुम्हें आना ही पड़ेगा.’’ रवि अपनी जिद पर अड़ गया तो ममता के चेहरे पर परेशानी के भाव उभर आए थे.

फिर भी उस ने मरे मन से कहा, ”ठीक है, मैं आने की कोशिश करूंगी. लेकिन मैं आप के होटल नहीं आ पाऊंगी. अगर हम दोनों सरिता दीदी के घर पर मिलें तो ज्यादा अच्छा रहेगा.’’

रवि ठाकुर को सरिता के घर जाने में भी कोई परेशानी नहीं थी, क्योंकि सरिता के साथ भी ममता की तरह उस के गहरे संबंध थे. ममता का आज कहीं भी जाने का मन तो नहीं था. लेकिन रवि ठाकुर को मना करने की उस की हिम्मत नहीं थी.

सरिता मध्य प्रदेश के इंदौर शहर के अशोक नगर में अपनी बेटी इशिका और पति ऋषि के साथ रहती थी. दोपहर के कोई 11 बजे सरिता की बेटी इशिका कोचिंग जाने के लिए घर से निकली थी. पति भी किसी काम से घर से चला गया था. बेटी के घर से निकलते ही सरिता ने कहा था कि बेटी ठंड का मौसम है, टाइम से घर आ जाना.

इशिका को घर से निकले मुश्किल से एक घंटा भी नहीं हुआ था. तभी उस की मम्मी का उस के फोन पर मैसेज आ गया. उस ने जैसे ही मैसेज को पढ़ा तो वह हक्की बक्की रह गई. मैसेज में लिखा था, ‘बेटी कुछ लोग मुझे मारने की कोशिश कर रहे हैं. तू जल्दी से घर वापस आ जा.’

नग्न अवस्था में मिले रवि और ममता के शव

मैसेज पढ़ते ही इशिका बुरी तरह से घबरा गई. उस के बाद वह कामधाम छोड़ कर तुरंत ही घर पहुंची. घर पर अपनी मम्मी और अंकल की खून सनी लाशें देख कर वह घबरा गई. वह जोरजोर से चीखने लगी. कुछ देर बाद इशिका ने थाना एरोड्रम में फोन कर के इस मामले की सूचना दे दी.

घटनास्थल पर पहुंचते ही एसएचओ राजेश साहू ने कमरे की जांचपड़ताल की. सरिता और रवि ठाकुर के शव नग्न अवस्था में खून से लथपथ पड़े हुए थे. वहीं पर एक पुरानी तलवार भी पड़ी हुई थी.

पुलिस ने अपनी जांचपड़ताल की तो घर के दरवाजे पर भी जबरन प्रवेश के निशान पाए गए, जिस से पता चला कि हत्यारों की संख्या एक से अधिक थी. घर का दृश्य देख कर लगता था कि हत्यारों ने खून और सबूत को साफ करने की कोशिश भी की थी.

इस डबल मर्डर की सूचना पाते ही एडिशनल डीसीपी (जोन 1) आलोक शर्मा, एसीपी विवेक चौहान के साथ ही एफएसएल विशेशज्ञ भी मौके पर पहुंचे. विशेषज्ञों ने घटनास्थल से कुछ सबूत इकट्ठा किए.

पुलिस अधिकारियों ने घटनास्थल पर पहुंचते ही मृतका की बेटी इशिका से जानकारी ली. मृतका सरिता की बेटी इशिका ने पुलिस को जानकारी देते हुए बताया कि रवि बाबू का सरवटे बसस्टैंड इलाके में होटल है. उस की मम्मी सरिता एक ब्यूटीपार्लर चलाती थीं. दोनों में अच्छी जान पहचान और घरेलू संबंध थे, जिस के कारण दोनों ही रवि बाबू अकसर उन के घर पर आतेजाते रहते थे. रवि बाबू के 3 बच्चे थे.

इस जघन्य अपराध की तह तक पहुंचने के लिए एडिशनल डीसीपी आलोक शर्मा ने साइबर टीम के साथसाथ एक पुलिस टीम का भी गठन किया.

इस टीम में एसआई लक्ष्मण सिंह गौड़, रविराज सिंह बैस, हैडकांस्टेबल अरविंद तोमर, पवन पांडेय, कमलेश चावला, विलियम सिंह, जितेंद्र सांखला, विजय वर्मा, माखन चौधरी, कांस्टेबल संजय दांगी, विशाल दभाडे, महिला कांस्टेबल रितिका शर्मा आदि को शामिल किया गया था.

टीम का गठन होने के बाद पुलिस ने अपनी काररवाई करते हुए इस क्षेत्र में लगे लगभग 50 सीसीटीवी कैमरे खंगाले, साथ ही लगभग 100 से ज्यादा संदिग्धों से पूछताछ भी की.

कैमरों की जांच करने के बाद पुलिस को जानकारी मिली. इस दौरान मृतक रवि ठाकुर के अलावा 2 व्यक्ति (एक महिला और एक पुरुष) भी आए थे.

यह सब जानकारी जुटाने के बाद पुलिस ने रवि ठाकुर और सरिता ठाकुर के मोबाइलों की खोज की तो दोनों के मोबाइल ही गायब मिले.

पुलिस कैसे पहुंची हत्यारों तक

उस के बाद पुलिस ने दोनों के मोबाइल नंबरों को सर्विलांस पर लगा कर उन की काल डिटेल्स निकलवाई तो पता चला कि इस हत्याकांड से कुछ देर पहले ही सरिता ने अपनी सहेली ममता के फोन पर बात की थी. उसी काल डिटेल्स के द्वारा पता चला कि रवि ठाकुर सरिता के साथसाथ ममता से भी बात करता था.

पुलिस ने सीसीटीवी कैमरे की फुटेज के आधार पर ममता की शिनाख्त की तो पुलिस का शक उसी पर पक्का हो गया.

उसी शक के आधार पर पुलिस ने ममता के घर पर दबिश दी तो वह घर से गायब मिली. उस के बाद पुलिस ने उस के मोबाइल पर संपर्क करने की कोशिश की तो उस का मोबाइल भी बंद मिला. उस के मोबाइल को ट्रेस करते हुए पुलिस ने देर रात देवनगर (खजराना) से ममता उर्फ पिंकी और उस के पति नितिन को गिरफ्तार कर लिया था.

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दोनों पतिपत्नी को अपनी हिरासत में लेते ही पुलिस ने उन से इस हत्याकांड के संबंध में पूछताछ की तो दोनों ने जल्दी ही अपना अपराध स्वीकार कर लिया. ममता ने पुलिस को बताया कि काफी समय से रवि ठाकुर उस के साथ ब्लैकमेलिंग का खेल खेल रहा था.

पुलिस ने रवि ठाकुर के मोबाइल की गैलरी सर्च की तो उस में कई महिलाओं के अश्लील वीडियो मिले, जो सभी उसी के होटल में बनाए गए थे.

पुलिस को रवि ठाकुर के होटल में कई गुप्त कैमरे भी मिले, जिन के सहारे से ही वह महिलाओं के साथ अश्लील हरकतें करते हुए उन की अश्लील वीडियो बना कर उन के साथ अवैध संबंध बनाता था. पुलिस द्वारा पूछताछ के बाद इस हत्याकांड की जो कहानी उभर कर सामने आई, वह इस प्रकार थी.

मध्य प्रदेश के जिला इंदौर के नंदानगर निवासी रवि ठाकुर ने सरवटे बस स्टैंड के पास स्थित 3 होटल मां वैष्णो पैलेस, हनी और होटल सागर ठेके पर ले रखे थे. इन होटलों से रवि ठाकुर को अच्छी कमाई होती थी. सरिता ठाकुर से रवि ठाकुर की पुरानी जानपहचान थी.

वर्चस्व की लड़ाई में मारा गया गैंगस्टर अन्ना

अन्ना छोटू चौबे को भाई कह कर बुलाता था. अवैध वसूली, मारपीट, चोरी, धमकी देना इस गैंग का रोजाना का काम हो गया था. अनिराज के अपराधों की पहुंच जबलपुर समेत आसपास के कटनी, नरसिंहपुर और सिवनी जिलों में भी हो गई थी.

अनिराज उर्फ अन्ना छोटू का दाहिना हाथ बन गया था. अपराध की दुनिया में अनिराज का कद छोटू के मुकाबले बढऩे लगा, उसे अच्छी कदकाठी का भी फायदा मिल रहा था. एक गर्लफ्रेंड को ले कर दोनों में दरार हो गई. छोटू चौबे जिस लड़की के लिए अपनी जान न्यौछावर करता था, उसी पर अन्ना का भी दिल आ गया.

जबलपुर को कभी आचार्य विनोबा भावे ने संस्कारधानी कहा था, मगर पिछले कुछ दशकों से जबलपुर अपराध की राजधानी बन कर रह गया है. जबलपुर शहर के अब्दुल रज्जाक, विजय यादव, बब्बू पंडा, कक्कू पंजाबी, रतन यादव, नीरज ठाकुर, छोटू चौबे जैसे दरजनों गैंगस्टर रहे हैं, जिन का खौफ शहर के नागरिकों के साथ व्यापारियों को भी रहता है.

पहली दिसंबर, 2023 को जबलपुर के माढोताल थाने के टीआई के मोबाइल फोन पर एक काल आई. टीआई ने जैसे ही काल रिसीव की तो दूसरी तरफ से आवाज आई, ”सर, मैं कठौंदा कंपोस्ट प्लांट से सुपरवाइजर बोल रहा हूं. यहां ग्रीनसिटी कठौंदा कंपोस्ट प्लांट के पास तालाब में एक लाश तैर रही है. पता नहीं मरने वाला कौन है, जल्दी से यहां पुलिस भेजिएगा.’’

जैसे ही सुपरवाइजर से लाश मिलने की सूचना मिली, टीआई तत्काल ही पुलिस टीम के साथ वहां पहुंच गए. तब तक वहां लोगों की भीड़ लग चुकी थी. पुलिस ने गोताखोरों की मदद से लाश को बाहर निकलवाया.

मरने वाला हट्टाकट्टा नौजवान था, जिस की उम्र 35 से 40 साल की रही होगी. मृतक के शरीर पर पीले रंग की शर्ट थी और उस के बाएं हाथ पर टैटू से अंगरेजी में ‘अनुष्का’ लिखा हुआ था. जब पुलिस ने वहां पर मौजूद लोगों से पूछताछ की तो जल्द ही लाश की शिनाख्त हो गई.

लोगों ने बताया कि यह लाश इलाके के मशहूर गुंडे अन्ना की है, जो जबलपुर के रसल चौक साईं मंदिर के बाजू में रहता था. अन्ना इलाके में बदमाश के रूप में कुख्यात था. ओमती पुलिस थाने की गुंडे बदमाशों की सूची में उस का नाम शामिल था.

पुलिस ने लाश का पंचनामा तैयार कर पोस्टमार्टम के लिए मैडिकल कालेज भेज दिया. पोस्टमार्टम रिपोर्ट में पता चला कि अन्ना के सिर पर गोली मारी कर हत्या की गई थी.

कौन था अन्ना नायडू

माढ़ोताल पुलिस ने जिस अन्ना की लाश बरामद की थी, आखिर वह शख्स कौन था. 35 साल के अन्ना का पूरा नाम अनिराज नायडू था, जो 4 बहनों के बीच इकलौता भाई था. उस की चारों बहनों की शादी हो चुकी थी. 2008 में अनिराज की शादी बरखा नायडू से हुई थी, जिस से 2 बेटियां हैं, जिन की उम्र 16 और 7 साल है.

अनिराज अपनी बड़ी बेटी अनुष्का से बहुत प्यार करता था. यही वजह थी कि उस ने कलाई में उस के नाम का टैटू गुदवाया हुआ था.

शहर के कुख्यात बदमाश अन्ना नायडू के खौफनाक इरादों से हर कोई वाकिफ था कि मौका पडऩे पर अन्ना 15 से 20 लोगों पर अकेला ही भारी पड़ जाता था. यही कारण था कि दूसरे बदमाश भी उस से थरथराते थे. अन्ना जुर्म की इस अंधेरी दुनिया में आ तो गया था, मगर वह अपनी बीवी और बच्चों को इस माहौल से दूर ही रखना चाहता था.

यही वजह थी कि पत्नी बरखा और दोनों बेटियों को उस ने इंदौर शिफ्ट कर दिया था. उस की पत्नी बरखा नायडू चाहती थी कि पति अपराध की दुनिया छोड़ कर एक अच्छी जिंदगी जिए, परंतु जुर्म की दुनिया में फंसने के बाद वहां से निकलना अन्ना के लिए इतना आसान भी नहीं था.

अन्ना के पिता इस दुनिया में नहीं थे और अपनी मां नंदिनी का वह लाडला था. उस की मां अन्ना को साईं कह कर बुलाती थी.

अन्ना के घर छोटू चौबे का आनाजाना था. जब भी छोटू घर आता था तो मां बड़ी परेशान रहती थी. घर के सारे खर्चे अन्ना ही चलाता था. मां जब भी अन्ना से उस के कामकाज के बारे में पूछती, वह कोई उत्तर देने की बजाय हंस कर टाल देता था.

जबलपुर के गोरा बाजार इलाके में अन्ना का बहुत आतंक था, वह गुंडागर्दी कर के वहां के व्यापारियों और राहगीरों को परेशान करता था. बढ़ती शिकायतों के बाद अक्तूबर, 2020 में पुलिस ने उस के खिलाफ काररवाई की थी.

उस समय क्राइम ब्रांच के एएसआई जगन्नाथ यादव ने अनिराज नायडू उर्फ अन्ना की सड़क पर दौड़ा कर पिटाई की थी. एएसआई द्वारा गोरा बाजार क्षेत्र में मारपीट कर अन्ना के कपड़े फाड़ कर निर्वस्त्र कर दिया था. उसी समय एक वकील ने उसे बचाने के लिए अपनी स्कूटी खड़ी की तो वह इस दौरान अपनी जान बचाने के लिए वहां से वकील की स्कूटी ले कर भाग खड़ा हुआ. इस घटना की रिपोर्ट गोरा बाजार थाने में दर्ज कराई गई थी.

बाद में आरोपी अनिराज उर्फ अन्ना के पकड़े जाने के बाद उसे गोरखपुर थाने में पेश किया गया था. उस वक्त उस का हाथ टूटा हुआ था और उस की हालत देख उस की गिरफ्तारी दर्ज कर मैडिकल में भरती करा दिया गया था, दूसरे दिन सुबह उसे जेल भेज दिया गया था.

बाद में अन्ना के घर वालों ने पुलिस पर उस की बेरहमी से पिटाई कर उसे निर्वस्त्र कर दौड़ाए जाने का आरोप लगाते हुए काररवाई की मांग की  थी. अन्ना की मां नंदिनी व बहन करुणा राजमन का कहना था कि अनिराज ने अपराध किया था तो उसे कानून के हिसाब से सजा दी जानी चाहिए, लेकिन क्राइम ब्रांच के एएसआई जगन्नाथ यादव ने उस की बेरहमी से पिटाई की और सरेराह मारपीट कर उसे निर्वस्त्र कर दिया था. घर वालों का आरोप था कि इस दौरान एएसआई द्वारा अपने मोबाइल पर घटना की रिकौर्डिंग भी की गई.

अन्ना के दोस्त आकाश से मिला क्लू

जबलपुर के एसपी आदित्य प्रताप सिंह ने इस माामले की जांच माढोताल टीआई विपिन ताम्रकार को सौंपी. डीएसपी भगत सिंह गोथरिया के निर्देशन में गठित टीम में टीआई विपिन ताम्रकार के साथ एसआई विजय पुष्पाकर, हैडकांस्टेबल भूपेंद्र रावत, कांस्टेबल शशि प्रकाश को भी शामिल किया गया.

पुलिस टीम  ने पूरे शहर के सीसीटीवी फुटेज खंगाले और लगभग 60 से अधिक संदिग्ध लोगों से पूछताछ की. कई लोग पुलिस को गुमराह करने की कोशिश भी कर रहे थे. किसी ने बताया कि अन्ना को 25 नवंबर, 27 तो कभी 28 नवंबर को देखा था.  एक शख्स ने पुलिस को बताया कि 25 नवंबर को उखरी चौक के पास हेयर ड्रेसर के पास अनिराज को शेविंग करवाते हुए देखा था. पुलिस को इस मामले की गुत्थी सुलझाने में काफी मशक्कत करनी पड़ रही थी.

अनिराज कुछ ही समय में इलाके का कुख्यात बदमाश बन गया था. उस के खिलाफ हत्या के प्रयास, लूट, मारपीट, अवैध वसूली, अवैध हथियार रखने समेत कई केस अलगअलग थानों में दर्ज हो गए.

अनिराज के पास से पुलिस को एंड्रायड फोन मिला, जिस में सिम नहीं थी. जांच में पता चला कि अनिराज मोबाइल में सिम नहीं रखता था. जब कभी उसे बात करनी होती तो वह वाट्सऐप या इंस्टाग्राम काल करता था.

पुलिस अन्ना की हत्या की जांच में जुटी हुई थी. जबलपुर के माढ़ोताल थाने के टीआई विपिन ताम्रकार अपनी टीम के साथ जांच में जुटे हुए थे. पुलिस ने माढ़ोताल से ले कर विजय नगर, संजीवनी नगर, आईटीआई समेत आसपास लगे 5 से अधिक सीसीटीवी खंगाल डाले, पर हत्यारों का कोई सुराग नहीं मिला.

इस बीच, पुलिस के हाथ अनिराज का एक दोस्त आकाश पटेल लग गया. जब पुलिस ने उस से पूछताछ की तो आकाश ने बताया कि 21 नवंबर की दोपहर करीब 12 बजे अन्ना, अनुश्रेय राय, कामरान के साथ 4-5 लड़के मेरे घर आए थे. दिन भर शराब पीने के बाद शाम 8 बजे सभी वहां से चले गए थे.

इस आधार पर पुलिस जब अनुश्रेय राय के घर पहुंची तो वह घर पर नहीं मिला. 12वीं पास अनुश्रेय राय किराए पर अपने मातापिता और दादी के साथ रहता है. पुलिस ने जब अनुश्रेय को काल किया तो उस का मोबाइल बंद मिला. बस यहीं से पुलिस को शक हुआ और पुलिस टीम इन पर नजर रखने लगी.

पुलिस को मुखबिर से पता चला कि 4 जनवरी को अनुश्रेय और कामरान मुंबई से इंदौर आ गए. जबलपुर में कामरान अली के पिता का 40वां था, जिस में शामिल होने के लिए कामरान अनुश्रेय के साथ 9 जनवरी की रात बस से जबलपुर आ रहा था, तभी पुलिस ने दोनों को दबोच लिया. दोनों से जब सख्ती के साथ पूछताछ की गई तो अन्ना के मर्डर की पूरी कहानी आईने की तरह साफ हो गई.

साल 2013 में अन्ना की मुलाकात छोटू से जब हुई थी, उस समय अनिराज पेशे से ड्राइवर था और छोटू चौबे छोटेमोटे अपराध किया करता था. दोनों एकदो मुलाकातों के बाद अच्छे दोस्त बन गए.

अनिराज हट्टाकट्टा नौजवान था. वह भी छोटू के साथ वसूली, मारपीट जैसे अपराध करने लगा. उन का उद्ïदेश्य लोगों के बीच खौफ पैदा करना और वर्चस्व बनाना था. छोटू ने गैंग बना लिया.

अनिराज ने भी अलग गैंग बनाना शुरू कर दिया था, यही बात छोटू चौबे को खटकने लगी. उसे लगा कि अगर अनिराज आगे बढ़ गया तो उस का वर्चस्व ही खत्म हो जाएगा.

3 नवंबर को संपत्ति को ले कर दोनों में फोन पर जम कर बहस और गालीगलौज भी हुई थी. प्रौपर्टी के एक विवाद को ले कर दोनों में तलवारें भी खिंच गईं. इस के बाद छोटू ने अनिराज को रास्ते से हटाने का प्लान बना लिया.

छोटू चौबे ने मदन महल में एक वारदात को अंजाम दिया था, जिस के चलते कुछ समय पहले ही उस पर 2 हजार रुपए का इनाम घोषित किया गया था. छोटू पुलिस के इनाम और विरोधियों के चलते लगातार शहर से बाहर रह रहा था.

मुंबई में बनी अन्ना के मर्डर की योजना

छोटू चौबे पर जबलपुर में अपराध के इतने मामले दर्ज हो चुके थे कि वह फरारी काटने नेपाल चला गया था. नेपाल में रहते हुए उसे पता चला कि ओमती और पनागर में दर्ज मामलों में उस की गैंग का साथी नया मोहल्ला निवासी 30 साल का कामरान अली भी  मुंबई के चार रोड, दादर वडाला में रह कर फरारी काट रहा है. कामरान चूंकि अन्ना नायडू के भी करीब था, इसलिए छोटू उस से मिलने के लिए नेपाल से पहले दिल्ली और फिर मुंबई पहुंच गया.

यहीं पर छोटू ने कामरान के साथ मिल कर अन्ना नायडू की हत्या का प्लान बनाया. इस के लिए छोटू ने अपने गैंग के करीबी नया मोहल्ला निवासी मोहम्मद आदिल और संजीवनी नगर गढ़ा निवासी अनुश्रेय राय को भी तैयार किया.

18 साल का अनुश्रेय वुशु का राज्य स्तर का खिलाड़ी था. राज्य स्तर की प्रतियोगिताओं में उस ने मैडल भी जीते थे, लेकिन कुछ समय पहले से वह इस गैंग के चक्कर में बदमाशी करने लगा था. अन्ना फरारी के दौरान कई बार उस के घर में रुकता था.

वहीं नया मोहल्ले का रहने वाला मोहम्मद आदिल पेशे से मैकेनिक था, लेकिन वह देसी पिस्टल बनाने और उन्हें सुधारने का काम भी कर लेता था.

लिंक रोड में उस की दुकान थी. छोटू पिछले 2 साल से आदिल के पास गाड़ी सुधरवाने आता था. छोटू की आदिल से पहचान तब हुई थी, जब वह बाइक ठीक कराने उस के पास गया था. उस समय आदिल ने छोटू की पिस्टल को भी ठीक किया था. उसी समय छोटू ने उसे अपनी गैंग में जोड़ लिया था. कुछ ही महीने में आदिल छोटू का राइट हैंड बन गया.

16 नवंबर, 2023 को छोटू और कामरान फ्लाइट से जबलपुर आए. पूरा प्लान पहले से तैयार था. प्लान के मुताबिक कामरान ने अन्ना से संपर्क किया. कामरान और अनुश्रेय 21 नवंबर, 2023 की सुबह अनिराज से मिले. कामरान ने अन्ना से कहा, ”भाई, बहुत दिनों से हम साथ नहीं बैठे, आज रात कहीं पार्टी करते हैं.’’

अन्ना शराब पार्टी का न्यौता मिलते ही खुश हो कर बोला, ”हां भाई, बताओ किस जगह पहुंचना है.’’

”लार्ड गंज में आकाश के घर बैठ कर मस्ती करते हैं,’’ अनुश्रेय बोला.

इस के बाद दोपहर को ही वे आकाश के घर लार्डगंज पहुंच गए, जहां सब ने खूब शराब पी. रात के लगभग 8 बजे शराब पीने के बाद कामरान और अन्ना अनुश्रेय के घर पहुंचे, जहां अन्ना सो गया. कामरान और अनुश्रेय ने यहीं पर खाना और्डर किया. खाना खाने के बाद रात के लगभग एक बजे दोनों ने अन्ना को हिलाडुला कर देखा. वह अब भी बेसुध पड़ा हुआ था.

रात के लगभग डेढ़ बजे अनुश्रेय ने कामरान के फोन से छोटू को काल किया, ”भाई, जल्दी से मेरे घर आ जाओ. अन्ना शराब के नशे में  मदहोश हो कर सो गया है.’’

यह सुनते ही छोटू चौबे अपने साथी आदिल के साथ अनुश्रेय के घर पहुंच गया, जहां अन्ना सो रहा था. छोटू ने बिना समय गंवाए पास में रखी पिस्टल निकाली और अन्ना की खोपड़ी पर फायर कर उस की हत्या कर दी. कुछ ही पलों में अन्ना का काम तमाम हो गया.

इस के बाद उन्होंने लाश को स्कौर्पियो की डिक्की में रखा और कृषि उपज मंडी, फिर गायत्री मंदिर होते हुए कठौंदा पहुंचे और लाश को तालाब में फेंक कर लौट आए. इस के बाद छोटू, कामरान और अनुश्रेय मुंबई चले गए थे, वहीं आदिल भी वहां से भाग निकला था.

2222 ही क्यों रखा गैंग का नाम

जबलपुर के राइट टाउन में होमसाइंस कालेज रोड पर रहने वाले एक संभ्रांत परिवार से ताल्लुक रखने वाला छोटू चौबे 2015 से कई बड़ी वारदातों को अंजाम दे चुका है. छोटू चौबे की गाडिय़ों के साथ उस के पर्सनल मोबाइल नंबर और साथियों के मोबाइल नंबर में 2222 होता है. इसलिए छोटू चौबे ने अपनी गैंग का नाम डबल टू डबल टू (2222) रखा है.

2018 में एनएसयूआई नेता सक्षम गुलाटी और इमरान बाबर के बीच हुए झगड़े के दौरान पुलिस की गाड़ी पर गोली चलाने की घटना में छोटू चौबे की मुख्य भूमिका थी.

छोटू की विजय यादव गैंग से अदावत थी. छोटू की आपराधिक प्रवृत्ति को देखते हुए एसपी ने उस पर 10 हजार का इनाम भी घोषित किया था, इस के बावजूद वह पुलिस की गिरफ्त में नहीं आ पाता है. पिछले सालों में छोटू ने शहर के अलगअलग इलाकों में दिनदहाड़े फायरिंग कर खाकी वरदी को खुलेआम चुनौती दी, लेकिन पुलिस आज तक उसे पकड़ नहीं सकी.

छोटू चौबे ने 2018 में अपने जन्मदिन पर ग्वारीघाट नर्मदा तट पर देर रात साथियों के साथ पूजनअर्चन करने के बाद दोनों हाथों में पिस्टल ले कर कई फायर किए थे. जिस का वीडियो भी यूट्यूब पर अपलोड किया गयाथा.

उस समय इस वीडियो को शहर के काफी युवाओं ने लाइक किया था. इस के अलावा छोटू के घुंघराले बाल, मोटी चेन और दोनों हाथों में रिवौल्वर पकड़े हुए तसवीरें वायरल कर के सोशल मीडिया पर गैंग औफ 2222 से जुडऩे के लिए युवाओं को गैंग से जुडऩे की अपील की गई थी, जिस में टैगलाइन थी—’आइए गैंग औफ 2222 से जुडि़ए. हमारे गैंग से जुडऩे वालों को कोई हाथ तो क्या, घूर भी नहीं सकता.’

इस टैगलाइन के साथ उन दिनों फेसबुक, यूट्यूब और वाट्सऐप ग्रुपों पर गैंगस्टर छोटू चौबे की तसवीरों के साथ बंदूक, रिवौल्वरों की तसवीरें और कई लाइव वीडियो अपलोड किए गए थे. चौंकाने वाली बात यह है कि शहर के 5 हजार से ज्यादा युवा इस गैंग से जुड़ चुके हैं.

झंडा यात्रा में पुलिस से कैसे बच गया गैंगस्टर छोटू

18 जनवरी, 2022 को जबलपुर की मदन महल पुलिस ने छोटू चौबे को गिरफ्तार किया था. उस समय जबलपुर के अलगअलग थाना क्षेत्रों में 16 आपराधिक मामले दर्ज थे.

छोटू के खिलाफ बलवा, मारपीट, हत्या का प्रयास और आम्र्स एक्ट के तहत मामले दर्ज होने के बाद उस पर प्रतिबंधात्मक काररवाई की गई. मगर उस की आदतों में कोई सुधार नहीं हुआ. विजय नगर पुलिस ने उस पर एनएसए लगाया तो वह फरार हो गया था.

कुख्यात बदमाश छोटू चौबे ने 13-15 मई, 2018 की दरमियानी रात अपने 15-20 साथियों के साथ गोरखपुर से एंपायर तिराहे तक जम कर आतंक मचाया था. गोरखपुर गुरुद्वारे के पीछे रहने वाले महबूब अली के घर पर काम करने वाले शाहरुख नाम के युवक को ढूंढने पहुंचे छोटू चौबे ने महबूब पर दनादन गोलियां चलाते हुए कई घरों में तोडफ़ोड़ भी की थी.

गोली चलने में महबूब और उस का भाई रहमान बालबाल बच गए, गोलियों की आवाज सुन कर पूरा मोहल्ला इकट्ठा हो गया, जिस के बाद छोटू और उस के गुर्गे भाग निकले.

कुछ देर बाद ही छोटू अपने साथियों के साथ एंपायर तिराहा स्थित महबूब अली के कैंट नाके पर पहुंचा, जहां नाके पर बैठे विकास चक्रवर्ती नाम के कर्मचारी को चाकुओं से छलनी करने के बाद छोटू और उस के साथियों ने कई राउंड फायरिंग भी की थी.

रात करीब 2 से 3 बजे हुई इस वारदात के बाद छोटू की गैंग अंडरग्राउंड हो गई और फिर पुलिस सक्रिय हो कर सुबह तक सिर्फ खोखे बटोरती रही.

पुलिस रिकौर्ड में मोस्टवांटेड गैंगस्टर छोटू चौबे ने 13 अगस्त, 2018 को जबलपुर शहर में  झंडा यात्रा निकाली थी. इस झंडा यात्रा का सोशल मीडिया पर खूब प्रचार भी किया गया. निर्धारित तारीख और समय पर झंडा यात्रा शुरू हुई, यात्रा में मोस्टवांटेड गैंगस्टर छोटू चौबे भी शामिल हुआ, लेकिन पुलिस उसे पकड़ नहीं पाई, जबकि पुलिस इसी यात्रा के लिए ट्रैफिक व्यवस्था संभाल रही थी.

गैंगस्टर छोटू का नेटवर्क पुलिस से भी तेज था. मदन महल और गढ़ा पुलिस गैंगस्टर छोटू चौबे की झंडा यात्रा में ट्रैफिक व्यवस्था संभाल रही थी. सब कुछ खुल्लमखुल्ला था, परंतु पुलिस उस की तलाश तक नहीं कर रही थी.

जब किसी जागरूक नागरिक ने इस की सूचना पुलिस को दी तो उस समय के गोरखपुर थानाप्रभारी संदीप आयाची तत्काल पूरे दलबल के साथ शारदा मंदिर और आसपास के इलाके में दबिश देने लगे, परंतु छोटू को इस की भनक पहले ही लग गई और वह अपने साथियों के साथ आराम से निकल गया.

अनिराज नायडू उर्फ अन्ना की हत्या के मामले में पुलिस ने अनुश्रेय राय और कामरान अली को गिरफ्तार कर कोर्ट में पेश किया, जहां से उन्हें जेल भेज दिया गया. वहीं मर्डर का मुख्य आरोपी छोटू चौबे उर्फ सुयश और मोहम्मद आदिल कथा लिखने तक फरार थे. पुलिस ने छोटू और आदिल की गिरफ्तारी पर 10-10 हजार का इनाम भी घोषित किया था.

—कथा पुलिस सूत्रों पर आधारित

एसडीएम पत्नी का हत्यारा बना पति – भाग 3

3 अक्तूबर, 2021 को जिस दिन उन्होंने शादी करने की सूचना दी, हम उसी दिन नीलिमा परिवार के साथ डिंडोरी पहुंचे, लेकिन मनीष वहां से गायब था. वह यहां सिर्फ पैसे लेने ही आता था.

शादी के बाद ही निशा को अपने पति मनीष पर संदेह होने लगा था, क्योंकि खुद को मनीष की दूसरी पत्नी बताने वाली रश्मि उसे मैसेज कर के कहती थी कि वह उस की पहली पत्नी है. उस के दोनों मोबाइल नंबर से भेजे मैसेज के स्क्रीनशौट्स भी उस ने सेव कर रखे थे.

निशा के परिवार के लोगों को पहले से ही मनीष पर संदेह था. मनीष ने मैट्रीमोनियल साइट पर अपने आप को प्रौपर्टी डीलर बताया था, जबकि वह बस कंडक्टर था. निशा ने उस की प्रोफाइल को सच मान कर घर वालों को बगैर बताए मनीष से शादी कर ली.

शादी के बाद मनीष की असलियत निशा जान चुकी थी, मगर अपने पद और स्टेटस के लिहाज से वह खून का घूंट पी कर रह गई थी. मनीष ने जब अपनी जरूरतों के लिए निशा पर पैसों का दबाव बनाना शुरू किया तो निशा ने एक बार बैंक से लोन ले कर उसे 5 लाख रुपए दिए थे. बाद में वह 15 लाख रुपए मांगने लगा तो निशा ने अपनी बड़ी बहन नीलिमा को बताया तो नीलिमा ने डांटते हुए सख्त हिदायत दे रखी थी कि उसे और पैसे नहीं देना.

मनीष पर परिवार के लोगों के संदेह की वजह यह भी थी कि वह खुद को अखंड समाज पार्टी का अध्यक्ष बताता था और इस नाम का विजिटिंग कार्ड भी उस ने दिया था, परंतु जब परिवार वालों ने अपने स्तर पर उस की पड़ताल की तो पता चला कि यह फरजी है.

सर्विस रिकौर्ड में नौमिनी बनाने पर क्यों अड़ा था मनीष

मनीष बेरोजगार था, इस से पुलिस का शक और बढ़ा, इसलिए जब पुलिस ने सख्ती की तो मनीष ने अपना गुनाह स्वीकार कर लिया कि उस ने ही निशा की हत्या की थी. उस की वजह यह थी कि बारबार कहने के बाद भी निशा सरकारी दस्तावेजों, मसलन सर्विस बुक, बैंक अकाउंट्स और इंश्योरेंस वगैरह में उसे अपना नौमिनी नहीं बना रही थी. इस पर दोनों में आए दिन कहासुनी और झगड़ा भी हुआ करता था, जो 28 जनवरी को भी हुआ तो मनीष ने तकिए से मुंह दबा कर पत्नी का नामोनिशान मिटा दिया.

निशा ने अपने सरकारी दस्तावेज और बैंक में पति की जगह बहन नीलिमा और उस के बेटे स्वप्निल का नाम बतौर नौमिनी दिया था. सामान्य तौर पर विवाहित महिलाएं पति का नाम देती हैं. इस वजह से भी मनीष शर्मा अपनी पत्नी निशा से विवाद करता था.

मनीष के दूसरे लड़कियों से संबंध की जानकारी निशा को थी. निशा मनीष की हरकतों से परेशान रहने लगी थी, मगर अपने ओहदे और प्रतिष्ठा की वजह से वह कोई ठोस कदम नहीं उठा पा रही थी.

मनीष अकसर ग्वालियर में ही रहता था. 10-15 दिनों में वह शहपुरा आता था. 25 जनवरी को मनीष शहपुरा आया और निशा से पैसों की मांग करने लगा. निशा अगले दिन होने वाले गणतंत्र दिवस की तैयारियों में व्यस्त थीं. इसलिए उन्होंने मनीष की डिमांड पर कोई ध्यान नहीं दिया.

गणतंत्र दिवस पर पूरे दिन वह कार्यक्रम में व्यस्त रहीं. 27 जनवरी को पैसे मांगने पर दोनों के बीच विवाद हुआ. दूसरे दिन 28 जनवरी, 2024 को सुबह 10 बजे मनीष निशा से बोला, ”निशा, मैं ने तुम से शादी की है. आखिर तुम मुझे अपने सर्विस रिकौर्ड में नौमिनी क्यों नहीं बनाना चाहती?’’

”तुम ने शादी कर के सोने के अंडे देने वाली मुरगी पा ली है. तुम ने झूठ बोल कर मुझ से शादी की. मैं तुम्हारी अय्याशी का खर्च अब नहीं उठा सकती.’’ निशा ने टोटूक कह दिया.

”मैं किस के साथ अय्याशी कर रहा हूं?’’ भड़कते हुए मनीष बोला.

”सोशल मीडिया पर जिस लड़की के साथ तुम्हारी फोटो है, उसी के साथ गुलछर्रे उड़ाते हो और खर्च मुझ से मांगते हो. अब से  एक पैसा तुम्हें नहीं मिलेगा.’’ गुस्से में निशा ने कहा.

इतना सुनते ही मनीष गुस्से से आगबबूला हो गया और तकिया उठा कर निशा का मुंह जोर से बंद कर दिया.

कुछ ही पलों में दम घुटने से निशा की मौत हो गई. निशा की नाक से खून निकल आया, जिस से बेडशीट और तकिए के साथ निशा के कपड़ों पर खून के निशान बन गए. मनीष ने निशा के कपड़े चेंज किए और बैडशीट, तकिया कवर के साथ सभी कपड़े वाशिंग मशीन में डाल दिए.

हत्या के बाद सुबूत मिटाने की गरज से उस ने निशा के खून से सने कपड़े वाशिंग मशीन में धोए और अपने बचाव के लिए जो कहानी गढ़ी, वह पुलिस की सख्ती के आगे टिक नहीं पाई.

पुलिस ने निशा की हत्या के आरोपी मनीष शर्मा के खिलाफ आईपीसी की धारा 302, 304बी और 201 के तहत मामला दर्ज कर शहपुरा न्यायालय में पेश किया, जहां आरोपी लगातार पुलिस को चकमा देने के लिए चक्कर खा कर गिरने का नाटक कर रहा था.

इसी के चलते उसे 30 जनवरी की रात भर गिरफ्तारी के बाद भी पुलिस की निगरानी में भरती के दौरान थाने ला कर भी 3 बार पूछताछ की गई.

31 जनवरी, 2024 की दोपहर को आरोपी मनीष शर्मा को शहपुरा न्यायालय में पेश किया गया, लेकिन वहां भी वह चक्कर खा कर गिरने का नाटक करने लगा. न्यायालय के आदेश पर उसे फिर अस्पताल में भरती कराया गया.

देर शाम को पुलिस की सख्ती के बाद आरोपी मनीष शर्मा जेल भेज दिया. एसडीएम निशा नापित की मौत की कहानी बताती है कि किस तरह प्रशासनिक पदों पर बैठे पढ़ेलिखे लोग भी सोशल मीडिया साइट्स पर दी गई जानकारी को सच मान कर शादी जैसा अहम निर्णय ले लेते हैं और अपनी जिंदगी दुश्वार कर जान से हाथ धो डालते हैं.

—कथा मीडिया रिपोर्ट पर आधारित

एसडीएम पत्नी का हत्यारा बना पति – भाग 2

बड़ी बहन ने बताया निशा के पति का सच

2021 से पहले स्वप्निल निशा के पास रह कर ही स्कूल की पढ़ाई करता था, बाद में निशा की शादी मनीष से होने पर मनीष ने ऐतराज जताया तो मनीष के कहने पर निशा ने अपने पास रखने से मना कर दिया था.

छत्तीसगढ़ के अंबिकापुर में रहने वाली निशा नापित ने छत्तीसगढ के अंबिकापुर में चौपड़ा कालोनी में रह कर अपनी पढ़ाई की थी. उन के पापा ज्ञानचंद नापित और मम्मी का पहले ही निधन हो चुका था. निशा की बड़ी बहन के अलावा उन का कोई नहीं था.

निशा बचपन से ही प्रशासनिक अधिकारी बनने का सपना देख रही थीं. वह जिंदगी को अपने तरीके से जीना चाहती थीं. प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी करतेकरते शादी की उम्र होने पर बड़ी बहन नीलिमा ने निशा से कहा, ”अब तू शादी कर ले, अधिकारी बनने के चक्कर में तेरी उम्र निकल रही है.’’

इस पर निशा ने अपना रुख साफ करते हुए कहा, ”दीदी, जब तक मैं अपना करिअर नहीं बना लेती, तब तक शादी हरगिज नहीं करूंगी.’’

निशा के इस जबाब पर नीलिमा के पास चुप रह जाने के अलावा कोई दूसरा रास्ता भी नहीं था. निशा नापित ने 15 मार्च, 2003 को नायब तहसीलदार के पद पर सेवाएं मध्य प्रदेश के छिंदवाडा जिले से शुरू की थी. पदोन्नत हो कर पहले वह तहसीलदार बनीं और उस के बाद डिप्टी कलेक्टर के पद पर पदस्थ हुई थीं. 2010 में निशा तहसीलदार बना कर सतना भेजी गईं और 2020 में उन का प्रमोशन डिप्टी कलेक्टर के रूप में हो गया. उस समय निशा मंडला में पोस्टेड थीं.

निशा ने दूसरी जाति के युवक से की थी शादी

प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारियों ने जब उन की बहन नीलिमा को पूरा घटनाक्रम बताया तो उन्होंने निशा के पति मनीष को ही मौत का जिम्मेदार बताया. छत्तीसगढ़ के अंबिकापुर की रहने वाली निशा नापित और ग्वालियर के रहने वाले मनीष शर्मा ने लवमैरिज की थी. निशा नाई जाति की थीं जबकि मनीष ब्राह्मण था.

दोनों की मुलाकात एक मैट्रीमोनियल साइट ‘शादी डौटकौम’ के जरिए हुई थी. दोनों ने एकदूसरे को पसंद कर लिया और अक्तूबर 2020 में मंडला के गायत्री मंदिर में उन्होंने शादी कर ली थी.

एसडीएम जैसे ओहदे पर बैठीं निशा नापित की मनीष से जानपहचान एक मैट्रीमोनियल साइट के जरिए हुई थी. उस समय निशा की उम्र 46 साल हो चुकी थी. घर वाले भी निशा के लिए रिश्ते तलाश रहे थे. ऐसे ही समय निशा को मनीष की प्रोफाइल ठीक लगी.

मनीष उस समय 40 साल का था और निशा से शादी करने तैयार था. एकदूसरे को जानने समझने के लिए फोन पर शुरू हुआ बातचीत का सिलसिला मुलाकातों में बदल गया और जल्द ही दोनों में प्यार भी हो गया.

इस मामले में निशा ने अपनी बड़ी बहन नीलिमा से चर्चा की तो नीलिमा ने मनीष से बातचीत कर उस के बारे में तहकीकात की. मनीष से हुई बातचीत में नीलिमा को मनीष के व्यवसाय को ले कर शक भी हुआ था और नीलिमा ने निशा को आगाह भी किया था कि वह सोच समझ कर फैसला ले.

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नीलिमा नापित 

इस के बाद निशा ने परिवार को बिना बताए शादी कर ली थी. परिवार के लोगों को बाद में जानकारी लगी. निशा एक बार नीलिमा से मिलने घर आई तो पति मनीष भी साथ में था. मंडला में पोस्टिंग के दौरान भी दोनों के बीच खूब विवाद हुआ था. तत्कालीन एसपी ने दोनों को समझाया था.

निशा छत्तीसगढ़ की रहने वाली थीं और उन की शादी ग्वालियर में हुई थी. वह बतौर डिप्टी कलेक्टर जुलाई, 2023 में डिंडोरी जिले में पदस्थ हुई थीं और उन्हें 2023 के विधानसभा चुनाव से पहले शहपुरा एसडीएम की कमान सौंपी गई थी.

निशा को कुत्ते पालने का बहुत शौक था, जब वह सतना में पोस्टेड थीं, तब उन के पास 3 डौग्स थे और शहडोल जिले के अनूपपुर आने के बाद 2 डौग और रख लिए थे. मनीष से शादी होने के कुछ ही महीने बाद उन्होंने वो सारे डौग्स अपने घर अंबिकापुर भेज दिए थे.

बाद में निशा की बड़ी बहन नीलिमा नापित ने पुलिस को बताया कि शादी के तीसरे दिन से ही मनीष निशा को पैसों के लिए प्रताडि़त करने लगा था. उस का कई दूसरी महिलाओं से भी अफेयर था.

पति की इन हरकतों से परेशान निशा ने नीलिमा के बेटे स्वप्निल को सरकारी दस्तावेजों में अपना नौमिनी बना दिया था. इस से मनीष झल्लाया रहता था, क्योंकि आमतौर पर तमाम रिकौर्डों में जीवनसाथी को ही नौमिनी बनाया जाता है.

शादी के चंद दिनों बाद ही निशा को समझ आ गया था कि अकसर घर से गायब रहने वाले मनीष ने उस के रुतबेदार ओहदे, पगार और पैसों से शादी की है. आए दिन वह निशा से पैसे मांगता रहता था. एक बार तो धंधे रोजगार के लिए निशा ने बैंक लोन ले कर भी उसे 5 लाख रुपए दिए थे. मनीष शराब भी पीता था और आवारा, मनचले भंवरों की तरह तितलियों पर मंडराना भी उस की फितरत थी. जाहिर है, प्यार का भूत निशा के सिर से उतर चुका था. निशा जल्दबाजी में लिए गए अपने शादी के फैसले पर पछता रही थी.

मनीष ने निशा ने क्यों छिपाई सच्चाई

मनीष शर्मा का परिवार ग्वालियर में  रहता है. मनीष जब 14 साल का था, तभी उस ने घर छोड़ दिया था. वह घर से अलग ही रहता था. 2009 में वह घर आया था, तब उस ने कहा था कि मुझे खेती में हिस्सा चाहिए. उस के भाई नीलेश ने उस के हिस्से की 3 बीघा जमीन उस के नाम कर दी थी. इस के बाद हमारा उस से कोई रिश्ता नहीं रहा.

2018 में वह एक बार फिर घर आया और मां से कहने लगा कि मेरी उम्र 40 साल हो गई है. शादी नहीं हुई है. मेरे लिए एक रिश्ता आया है. मां ने पहले इनकार किया, लेकिन सब रिश्तेदारों ने सोचा कि चलो शादी के बाद सुधर जाएगा. यही सोच कर उस की शादी कर दी.

शादी के 3 महीने ही हुए थे कि मनीष ने उस लड़की से भी झगड़ा शुरू कर दिया. जब मां उस के कमरे में गई तो वह बोला कि तुम मेरे लिए मर गए हो. फिर हम ने अपने मामा से बात की. मामा ने समझाने की कोशिश की तो मनीष ने कहा कि तुम सब मेरे लिए मर चुके हो. बाद में फिर मनीष का उस लड़की से तलाक हो गया.

शादी डौटकौम पर अपनी प्रोफाइल में अपने आप को प्रौपर्टी डीलर बताने वाले मनीष शर्मा की जब निशा से शुरुआती मुलाकात हुई तो वो खुद को एक इंजीनियर बताता था. रिश्ते के लिए जब निशा की बड़ी बहन नीलिमा ने बात की तो वह उन के सवालों का ठीक से जवाब नहीं दे पाया. लेकिन निशा ने परिवार के मना करने के बावजूद एक दिन फोन कर बताया कि उन्होंने शादी कर ली है.

एसडीएम पत्नी का हत्यारा बना पति – भाग 1

शाहपुरा पुलिस फोरैंसिक टीम के साथ जब जांच के लिए एसडीएम बंगले पर पहुंची तो पाया कि एसडीएम निशा की मौत जिस कमरे में हुई थी, वहां के बैड की बैडशीट और तकिया का कवर वहां मौजूद नहीं था.  पुलिस टीम ने जब मनीष से इस के बारे में पूछा तो उस ने कहा, ”मैडम को उल्टी होने पर नाक से ब्लड आया था, जिस से कपड़े खराब हो गए थे. इसी वजह से उस ने बैडशीट और तकिए का कवर मशीन में धोने के लिए डाला था.’’

पुलिस टीम ने जब वाशिंग मशीन का ढक्कन खोला तो बैडशीट और तकिए के कवर के साथ एसडीएम निशा के कपड़े भी मशीन के सुखाने वाले पोर्शन में पड़े हुए थे. पुलिस टीम यह सोच कर हैरान थी कि एसडीएम बंगले पर मौजूद कर्मचारी से कपड़े मशीन में धुलवाने के बजाय मनीष ने खुद यह काम क्यों किया. मनीष के इसी बयान पर पुलिस का शक यकीन में बदल गया.

रविवार 28 जनवरी, 2024 का दिन था और मौसम का सब से सर्द दिन. ऐसे में सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में तैनात सीनियर डा. रत्नेश द्विवेदी अपने सरकारी आवास पर बैठे धूप का आनंद ले रहे थे, तभी दोपहर करीब 2 बजे उन के मोबाइल फोन पर घंटी बजी.

जैसे उन्होंने काल रिसीव की तो दूसरी तरफ से हड़बड़ी में एक आवाज सुनाई दी, ”डाक्टर साहब, मैं गाड़ी भेज रहा हूं, जल्दी से एसडीएम के बंगले पर आ जाइए. मैडम की तबीयत ज्यादा खराब है.’’

फोन मध्य प्रदेश के डिंडोरी जिले की तहसील शहपुरा की एसडीएम निशा नापित के बंगले से आया था, लिहाजा डा. रत्नेश द्विवेदी बिना देर किए तैयार हो गए और जैसे ही गाड़ी आई, उस में बैठ कर वह एसडीएम बंगले पर पहुंच गए.

बंगले के बाहर एक शख्स उन का बेसब्री से इंतजार कर रहा था. जैसे ही डा. द्विवेदी गाड़ी से उतरे तुरंत ही उस शख्स ने कहा, ”डाक्टर साहब, अंदर चलिए. मैडम सुबह 10 बजे के बाद से ही कुछ बोल नहीं रहीं.’’

डा. रत्नेश द्विवेदी उस शख्स के साथ बंगले के अंदर दाखिल हुए. एसडीएम निशा नापित अपने बैड पर बेहाल पड़ी थीं. डा. द्विवेदी ने स्टेथस्कोप के एक सिरे को अपने कानों से  और उस का दूसरा सिरा मैडम के सीने के बाईं ओर लगाया और उस शख्स से मुखातिब होते हुए बोले, ”मैडम की ऐसी हालत कब से है?’’

”डाक्टर साहब, कल शनिवार को उन का व्रत था और मेरे मना करने के बाद भी वह 2 अमरूद खा गईं. मैडम का एक ही गुर्दा काम करता है और उन को सर्दीखांसी की हमेशा दिक्कत रहती थी. शायद इसी वजह से आज 10 बजे के आसपास उन को उल्टी हुई, फिर उन की नाक से ब्लड आया. इसे ले कर हमारी बहस भी हुई. वह नहीं मानीं, गुस्से में सो गईं तो मैं भी गुस्से में बाहर आ गया.’’ एसडीएम बंगले पर मौजूद उस शख्स ने बताया.

”जब उल्टी होने पर नाक से ब्लड आया था, तभी आप को मुझे फोन करना था.’’ डा. रत्नेश द्विवेदी बोले.

”रविवार को कोई काम रहता नहीं, इसलिए मैं ने जगाया ही नहीं. 10 बजे काम वाली बाई आई तो मैं घूमने चला गया. फिर बाई ने खाना बनाया और चली गई. फिर एक बजे के आसपास मैं ने सोचा खाने के लिए मैडम को जगा दूं. जब वह नहीं जागीं तो मैं ने आप को काल किया.’’

”मैडम को तत्काल अस्पताल ले चलो. हाइपरटेंशन या फिर ब्रेन हेमरेज की वजह से नाक से खून निकलता है.’’ कान से स्टेथस्कोप निकालते हुए डा. द्विवेदी ने कहा.

यह घटना 28 जनवरी, 2024 दोपहर 3 बजे की थी. उप जिलाधिकारी (एसडीएम) निशा को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र शहपुरा लाया गया, जहां पर मौजूद डाक्टरों ने जांच के बाद बताया कि उन की मौत हो चुकी है. तहसील के सब से बड़े अधिकारी की मौत का मामला था, ऐसे में डा. रत्नेश द्विवेदी ने उन की मौत की सूचना जिले के वरिष्ठ अधिकारियों को दे दी.

वाशिंग मशीन देख कर पुलिस क्यों हुई हैरान

सूचना मिलते ही डिंडोरी जिले के कलेक्टर विकास मिश्रा और एसपी अखिल पटेल, बालाघाट रेंज के डीआईजी मुकेश श्रीवास्तव भी शहपुरा अस्पताल पहुंच गए. संदिग्ध हालात में मौत की वजह से पुलिस ने एसडीएम का बंगला सील कर दिया और निशा नापित के घर वालों को भी सूचना दे दी गई.

एसपी अखिल पटेल

सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के डाक्टरों को शक होने पर पुलिस को खबर दे कर एसडीएम निशा का इलाज शुरू किया तो पाया कि निशा की मौत तो कोई 4-5 घंटे पहले ही हो चुकी थी.

मध्य प्रदेश के आदिवासी जिले डिंडोरी की शहपुरा तहसील में पिछले साल ही तहसीलदार पद से प्रमोट हुई निशा एसडीएम बनी थीं, इसलिए कस्बे में उन्हें हर कोई जानता था. शहपुरा पुलिस आई और उस ने एसडीएम के साथ रहने वाले उन के पति मनीष से पूछताछ की तो वह एक ही कहानी दोहराता रहा. पुलिस ने उन के ड्राइवर और घर के अन्य कर्मचारियों से भी पूछताछ की.

पुलिस की पूछताछ में मनीष ने कहा कि वह प्रौपर्टी ब्रोकर है और पत्नी निशा के पास आता जाता रहता है. पुलिस के शक की सुई मनीष की ओर ही घूम रही थी. एसपी अखिल पटेल ने मामले को गंभीरता से लेते हुए एसडीओपी मुकेश अविंदा के नेतृत्व में एक टीम का गठन किया, जिस में जांच शहपुरा पुलिस थाने के टीआई एस.एल. मरकाम को सौंप दी.

एसडीएम निशा की मौत की खबर जैसे ही उन के घर वालों को लगी तो उन्हें पहले तो विश्वास ही नहीं हुआ. शहपुरा में पोस्टमार्टम के बाद 30 जनवरी को निशा का पार्थिव शरीर छत्तीसगढ़ के अंबिकापुर ले जाया गया, जहां उन के परिवार के लोगों की मौजूदगी में अंतिम संस्कार किया गया. निशा का अंतिम संस्कार बहन नीलिमा के बेटे स्वप्निल ने किया.

हुस्न और नशे के जाल में फंसा खिलाड़ी

हुस्न और नशे के जाल में फंसा खिलाड़ी – भाग 3

कोई डेढ़ दो साल पहले एक युवक के माध्यम से सुहैल को पता चला कि कोठारी के रईस किसान का खूबसूरत जवान बेटा जिम खेलने के लिए सीहोर के चक्कर लगा रहा है. नरेश देखने में था भी हैंडसम, इसलिए मोटी मुर्गी देख कर सुहैल किसी तरह नरेश से जानपहचान करने के बाद एक रोज उसे अपने घर ले गया.

वास्तव में सुहैल शिकार को फांसने के लिए हर किस्म के हथियार का इस्तेमाल करता था. इसलिए नरेश को फांसने के लिए सुहैल की पत्नी और बेटी रुकैया खुल कर अपना जादू दिखाने लगीं. नरेश भी रुकैया की खूबसूरती पर फिदा हो गया, जिस से वह अकसर सुहैल से मिलने के बहाने उस के घर आनेजाने लगा.

आखिर रुकैया उसे फांसने में सफल हो ही गई. फिर सुहैल ने धीरेधीरे नरेश को मुफ्त में कोकीन और ब्राउन शुगर का नशा करवाना शुरू कर दिया. जब वह नशे का आदी हो गया तो सुहैल ने नशे की कीमत वसूलनी शुरू कर दी.

नरेश के पास पैसों की कमी नहीं थी, इसलिए वह रुकैया के चक्कर में पैसा लुटाने लगा. योजना के अनुसार नरेश के नशे की गिरफ्त में आ जाने के बाद रुकैया को पीछे हट जाना था, लेकिन नरेश के मामले में रुकैया खुद शिकार हो चुकी थी. इसलिए वह नरेश से नजदीकी बनाए रही, जिस के चलते सुहैल को नरेश से परेशानी होने लगी. लेकिन वह खूब पैसे लुटा रहा था, इसलिए सुहैल अपनी आंखें बंद किए रहा.

नरेश खतरे को समझ नहीं पाया

धीरेधीरे नरेश के हाथ की वह रकम खत्म होने लगी, जो उस ने जिम खोलने के लिए घर से ली थी. पैसा खत्म हो गया तो सुहैल उसे उधारी में नशे की पुडि़या देने लगा. इस में सुहैल को कोई परेशानी नहीं थी. उसे डर केवल इस बात का था कि रुकैया और नरेश को ले कर समाज में कोई बवाल खड़ा न हो जाए. इसलिए वह नहीं चाहता था कि अब नरेश उस के घर आए.

लेकिन नरेश के ऊपर प्यार और कोकीन का ऐसा नशा सवार था कि गांव से निकल कर सीधे सुहैल के घर पहुंच जाता. बाद में धीरे धीरे नरेश को अपनी गलती का अहसास होने लगा था. उस का स्वास्थ्य भी गिरने लगा था इसलिए उस ने सुहैल के घर जाना कुछ कम कर दिया. सुहैल को अब अपने पैसों की चिंता होने लगी, जो नरेश के ऊपर उधार थे.

11 नवंबर को नरेश ने जिम के उपकरण खरीदने के लिए घर से 4 लाख रुपए लिए, लेकिन पैसा जेब में आया तो उसे नशे की सुध आ गई. वह सीधे सुहैल के घर जा पहुंचा, जहां सुहैल ने नशे की पुडि़या देने से पहले अपने उधार के 2 लाख रुपए मांगे. इस पर नरेश ने कहा कि पैसा तो उस के पास इस समय भी है, लेकिन वह इस से जिम का सामान खरीदने जा रहा है. बाद में जिम से पैसे कमा कर उस का सारा हिसाब चुकता कर देगा.

उस दौरान नरेश की नजरें घर में रुकैया की तलाश कर रही थीं. यह देख कर सुहैल का दिमाग खराब हो गया. उसे लगा कि अगर आज नरेश का फाइनल हिसाब कर दिया जाए तो उस का पैसा वसूल हो जाएगा. यह सोच कर उस ने कमरे में पड़ा चाकू उठा कर सीधे नरेश के सीने पर वार कर दिया.

नरेश काफी ताकतवर था. चाकू से घायल होने के बावजूद भी वह सुहैल से भिड़ गया. इधर कमरे में हल्ला सुन कर सुहैल की पत्नी इशरत और बेटा अमन अंदर पहुंचे तो वहां का नजारा देख कर चौंक गए. चूंकि नरेश सुहैल पर भारी पड़ रहा था, इसलिए सुहैल ने पत्नी और बेटे से मदद करने को कहा.

इशरत और अमन नरेश पर पिल पड़े, जिस के चलते सुहैल ने जल्द ही उस पर चाकू से कई वार कर खेल खत्म कर दिया. अब जरूरत नरेश की लाश को ठिकाने लगाने की थी. इतनी भारी लाश एक बार में चोरीछिपे नहीं ले जाई जा सकती थी. इसलिए तीनों ने मिल कर बांके की मदद से रात में ही नरेश की लाश के 8 टुकड़े कर दिए.

इस के बाद एक प्लास्टिक के बोरे में धड़ और दूसरे में सिर तथा तीसरे में हाथ व चौथे बोरे में उस के पैर एवं कपड़े और जूते भर दिए. फिर रात में 4 बजे के करीब सुहैल अपनी स्कूटी पर एकएक बोरा ले जा कर कर्बला के पास सीवन नदी में फेंक आया.

इस दौरान रात में ही नरेश के घर वाले बेटे के बारे में सुहैल से पूछताछ कर चुके थे, इसलिए वह समझ गया कि अगर वह घर पर रहा तो फंस जाएगा. योजनानुसार सुबह होते ही वह बीमारी के नाम पर भोपाल के एलबीएस अस्पताल में भरती हो गया. लेकिन एडीशनल एसपी समीर यादव के सामने उस की एक नहीं चली, जिस के चलते खुद सुहैल के हिस्से में मौत आई, जबकि आरोपी मांबेटे को मिलीं सलाखें.

इशरत और अमन से पूछताछ के बाद पुलिस ने उन्हें न्यायालय में पेश किया, जहां से दोनों को जेल भेज दिया गया.

—कथा में रुकैया परिवर्तित नाम है

हुस्न और नशे के जाल में फंसा खिलाड़ी – भाग 2

इस बीच पुलिस ने नरेश के मोबाइल फोन की काल डिटेल निकलवा ली थी, जिस में पता चला कि नरेश की दिन में कईकई बार सुहैल से बात होती थी. इतना ही नहीं, सुहेल की पत्नी के अलावा सुहैल की जवान बेटी रुकैया से भी नरेश की अकसर बात होने के सबूत मिले.

घटना वाले दिन भी नरेश और सुहैल के बीच कई बार बात हुई थी. जिस समय नरेश का मोबाइल बंद हुआ था, तब वह उसी टावर के क्षेत्र में था, जिस में सुहैल का घर है. अब तक पुलिस के सामने यह साफ हो चुका था कि जिस रोज नरेश गायब हुआ था, वह सुहैल के घर आया था यानी उस के साथ अच्छाबुरा जो भी हुआ इसी इलाके में हुआ था.

इस इलाके में सुहैल का मकान ही एक ऐसा ठिकाना था, जहां नरेश का लगभग रोज आनाजाना था. लेकिन पुलिस पूछताछ से पहले ही उस की मौत हो चुकी थी, इसलिए यह मामला पुलिस के सामने बड़ी चुनौती बन कर खड़ा हो गया था. पुलिस अभी और सबूत हासिल करना चाहती थी ताकि सुहैल की बीवी से पूछताछ की जा सके.

एएसआई आर.एस. शर्मा ने सुहैल के घर के आसपास के रास्तों पर लगे सीसीटीवी की फुटेज चैक की. जल्द ही इस के अच्छे परिणाम सामने आए. पता चला कि 12 नवंबर की सुबह कोई 4 बजे सुहैल 4 बार अपनी एक्टिवा से निकला और एक निश्चित  दिशा में जा कर वापस आता हुआ दिखा. जाते समय हर बार उस की एक्टिवा पर प्लास्टिक का एक बोरा रखा था, जो सफेद रंग का था.

इतनी रात में किसी काम से आदमी का एक ही दिशा में 4-4 बार जाना संदेह पैदा कर रहा था. पता नहीं उन बोरों में वह क्या ले कर गया था.

पत्नी और बेटा आए संदेह के घेरे में

इस बारे में पुलिस ने सुहैल की पत्नी इशरत और बेटे अमन से पूछताछ की. इस पर उन का कहना था कि नशा कर के वह आधी रात में कहां आतेजाते थे, इस बारे में उन्हें कुछ नहीं पता. पूछने पर वह झगड़ा करने लगते थे, इसलिए उन से कोई बात नहीं करता था.

मुख्य संदिग्ध सुहैल की मृत्यु हो चुकी थी, इसलिए ये दोनों मांबेटे सारी बात उस के ऊपर टाल कर बच निकलना चाहते थे. लेकिन पुलिस उन की मंशा जान चुकी थी. उन के साथ वह सख्ती भी नहीं करना चाहती थी. लिहाजा पुलिस टीम ने उन रास्तों की जांच की जो सुहैल के घर से निकल कर आगे जाते थे. उन रास्तों से पुलिस कर्बला तक पहुंच गई. वहीं पर पुलिस को सीवन नदी में सफेद रंग के बोरे तैरते दिखे.

प्लास्टिक के उन बोरों के ऊपर मक्खियां भिनभिना रही थीं. अब शक करने की कोई गुंजाइश नहीं रह गई थी. क्योंकि सुहैल भी हर बार अपनी एक्टिवा पर घर से सफेद रंग की प्लास्टिक के बोरे ले कर निकला था. पुलिस ने उन बोरों को बाहर निकाल कर खोला तो उन में से एक युवक का 8 टुकड़ों में कटा सड़ागला शव मिला. पुलिस को 3 बोरे मिल चुके थे. चौथा बोरा वहां नहीं था. यानी मृतक के पैर अभी नहीं मिले थे. पुलिस चौथे बोरे को भी तलाशती रही.

दूसरे दिन सुबह कुछ दूरी पर चौथी बोरा भी मिल गई, जिस में शव के पैर व खून सने कपड़े और जूते थे. इन अंगों को जब नरेश के भाई को दिखाया तो उस ने शव की पहचान अपने भाई नरेश के रूप में कर दी.

मामला अब सीहोर कोतवाली के हाथ आ चुका था, इसलिए एडीशनल एसपी समीर यादव के निर्देश पर टीआई संध्या मिश्रा की टीम ने सुहैल के घर की तलाश ली तो टीम को एक कमरे की दीवारों पर लगे खून के दाग मिल गए, जिन के नमूने जांच के लिए सुरक्षित रख लिए गए.

घर की दीवारों पर खून के धब्बे मिलने के अलावा नरेश वर्मा की लाश भी बरामद हो चुकी थी, इसलिए अब सुहैल की पत्नी और बेटे के सामने बच निकलने का कोई रास्ता नहीं था. पुलिस ने इशरत और उस के बेटे से पूछताछ की तो उन्होंने स्वीकार कर लिया कि 11 नवंबर को किसी बात पर नरेश से विवाद हो जाने पर सुहैल ने नरेश की हत्या कर दी थी.

मांबेटे द्वारा अपराध स्वीकार करने के बाद पुलिस ने उन के घर से हत्या में प्रयुक्त चाकू और बांका के अलावा खून सने कपड़े भी बरामद कर लिए. दोनों से पूछताछ के बाद नरेश वर्मा की हत्या की कहानी कुछ इस प्रकार सामने आई—

मध्य प्रदेश के सीहोर जिले के कोठारी गांव के रहने वाले नरेश को बचपन से ही खेलों में रुचि थी. उम्र बढ़ने के साथ उस की खेलों में रुचि और भी बढ़ती गई. नतीजतन उस ने कराटे में ब्लैक बेल्ट हासिल कर लिया.

इस के अलावा वह पावर लिफ्टिंग जैसे खेल में भी बढ़चढ़ कर भाग लेने लगा. पावर लिफ्टिंग की राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताओं में भाग ले कर मैडल भी हासिल किए. खेलों से उसे बेहद लगाव था, इसलिए वह इसी क्षेत्र में अपना कैरियर बनाना चाहता था.

नरेश फंसा नशे और ग्लैमर के चक्कर में

जब उसे मनमुताबिक नौकरी नहीं मिली तो उस ने सीहोर में अपना खुद का जिम खोलने की कवायद शुरू कर दी. वैसे भी उस के पिता कोठारी गांव के संपन्न किसान थे, उस के पास पैसों की कमी नहीं थी. सीहोर में ही दूल्हा बादशाह रोड पर सुहैल अपने परिवार के साथ रहता था.

सुहैल कोकीन और ब्राउन शुगर बेचता था. वह कई सालों से नए युवकों को अपने जाल में फांस कर नशे का लती बना देता था. कोकीन और ब्राउन शुगर की तस्करी के आरोप में वह कई बार गिरफ्तार हो चुका था. लेकिन जमानत पर बाहर आने के बाद फिर अपने इसी धंधे से जुड़ जाता था. केवल सुहैल ही नहीं, इस काम में उस का पूरा परिवार संलिप्त था.

सुहैल पैसे वाले युवकों से दोस्ती कर उन्हें अपने घर बुलाता, जहां उस की पत्नी इशरत और खूबसूरत बेटी रुकैया पिता के इशारे पर उस युवक पर ऐसा जादू चलातीं कि वह बारबार उस के घर के चक्कर लगाने लगता था. जब सुहैल देखता कि शिकार उस के फैलाए जाल में फंस चुका है तो पहले वह उसे कोकीन या ब्राउन शुगर का फ्री में नशा करवाता था, फिर बाद में धीरेधीरे नशे की पुडि़या के बदले पैसे वसूलने लगता.

जब युवक को नशे की लत लग जाती तो उस की पत्नी और बेटी शिकार से दूरी बना लेती थीं. लेकिन तब तक उस युवक की चाह दूसरे सुख से अधिक नशे के सुख की बन जाती थी. इसलिए वह सुहैल का गुलाम बन कर रहने के लिए भी तैयार हो जाता था, जिस के बाद सुहेल उस से तो पैसा लूटता ही, साथ ही उस की मदद से दूसरे युवकों को भी अपने नशे का आदी बना देता था.

हुस्न और नशे के जाल में फंसा खिलाड़ी – भाग 1

घटना मध्य प्रदेश के सीहोर जिले के आष्टा थाने की है. 12 नवंबर, 2018 को आष्टा के टीआई कुलदीप खत्री थाने में बैठे थे. तभी क्षेत्र के कोठरी गांव का हेमराज अपने गांव के कन्हैयालाल को साथ ले कर टीआई के पास पहुंचा. उस ने उन्हें अपने 29 वर्षीय बेटे नरेश वर्मा के लापता होने की खबर दी.

हेमराज ने बताया कि नरेश कराटे में ब्लैक बेल्ट होने के अलावा पावर लिफ्टिंग का राष्ट्रीय स्तर का खिलाड़ी रह चुका है. वह सीहोर में अपना जिम खोलना चाहता था. जिम का सामान खरीदने के लिए वह सुबह 10 बजे के आसपास घर से 4 लाख रुपए ले कर निकला था.

उस ने रात 8-9 बजे तक घर लौटने को कहा था. लेकिन जब वह रात 12 बजे तक भी नहीं आया तो हम ने उस के मोबाइल पर संपर्क करने की कोशिश की, पर उस का मोबाइल फोन बंद मिला. उस के दोस्तों से पता किया तो उन से भी नरेश के बारे में कोई जानकारी नहीं मिली.

नरेश के पास 4 लाख रुपए होने की बात सुन कर टीआई कुलवंत खत्री को मामला गंभीर लगा, इसलिए उन्होंने नरेश की गुमशुदगी दर्ज कर मामले की जानकारी एसपी राजेश चंदेल और एडीशनल एसपी समीर यादव को दे दी.

वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों के निर्देश पर टीआई खत्री ने जब हेमराज सिंह से किसी पर शक के बाबत पूछा तो उस ने बादशाही रोड पर रहने वाले सुहैल खान का नाम लिया. उस ने बताया कि सुहैल व उस के बेटे नरेश का वैसे तो कोई मेल नहीं था, इस के बावजूद काफी लंबे समय से नरेश का सुहैल के घर आनाजाना काफी बढ़ गया था.

सुहैल और नरेश की दोस्ती किस तरह बनी और बढ़ी थी, इस बात की जानकारी हेमराज को भी नहीं थी. परंतु लोगों में इस तरह की चर्चा थी कि सुहैल की खूबसूरत बेटी इस का कारण थी और घटना वाले दिन भी नरेश के मोबाइल पर सुहैल का कई बार फोन आया था.

हेमराज ने आगे बताया कि जब देर रात तक नरेश घर नहीं लौटा था तो हम ने सुहैल से ही संपर्क किया. उस ने बताया कि नरेश के बारे में उसे कुछ पता नहीं है. इतना ही नहीं नरेश का अच्छा दोस्त होने के बावजूद सुहैल ने उसे ढूंढने में भी रुचि नहीं दिखाई.

यह जानकारी मिलने के बाद एडीशनल एसपी समीर यादव ने सीहोर कोतवाली की टीआई संध्या मिश्रा को सुहैल की कुंडली खंगालने के निर्देश दिए. टीआई संध्या मिश्रा ने जब सुहैल के बारे में जांच की तो पता चला कि सुहैल कई बार नशीले पदार्थ बेचने के आरोप में गिरफ्तार किया जा चुका है.

इस के बाद अगले ही दिन पुलिस ने सुहैल के घर दबिश डाली, लेकिन सुहैल घर पर नहीं मिला. घर में केवल उस की बीवी इशरत और बेटा अमन मिले. सुहैल के बारे में पत्नी ने बताया कि उन की तबीयत खराब हो गई थी और वह भोपाल के एलबीएस अस्पताल में भरती हैं.

‘‘उन की तबीयत को क्या हुआ?’’ पूछने पर परिवार वालों ने बताया, ‘‘कभीकभी अधिक नशा करने पर उन की ऐसी ही हालत हो जाती है. इस बार हालत ज्यादा खराब हो गई, जिस से वह कुछ बोल भी नहीं पा रहे थे.’’

यह बात एडीशनल एसपी समीर यादव के दिमाग में बैठ गई. क्योंकि सुहैल की तबीयत उसी रोज खराब हुई, जिस रोज नरेश गायब हुआ था. दूसरे अब तक तो वह तबीयत खराब होने पर बातचीत करता था, लेकिन पहली बार ऐसा हुआ कि वह बोल भी नहीं पा रहा था.

यादव समझ गए कि वह न बोल पाने का नाटक पुलिस पूछताछ से बचने के लिए कर रहा है, इसलिए उन्होंने आष्टा थाने के टीआई को जरूरी निर्देश दे कर सुहैल से पूछताछ के लिए भोपाल के एलबीएस अस्पताल भेज दिया.

सुहैल से पूछताछ के लिए टीआई कुलदीप खत्री एलबीएस अस्पताल पहुंच गए. उन्होंने वार्ड में भरती सुहैल से पूछताछ की तो उस ने पुलिस की किसी बात का जवाब नहीं दिया.  तब टीआई अस्पताल से लौट आए, लेकिन उन्होंने उस पर नजर रखने के लिए सादे कपड़ों में एक कांस्टेबल को वहां छोड़ दिया.

पुलिस के जाने के कुछ देर बाद सुहैल जेब से मोबाइल निकाल कर किसी से बात करने लगा. यह देख कर कांस्टेबल चौंका और समझ गया कि सुहैल वास्तव में न बोलने का ढोंग कर रहा है. यह बात उस ने टीआई कुलदीप खत्री को बता दी.

अब टीआई समझ गए कि जरूर नरेश के लापता होने का राज सुहैल के पेट में छिपा है. लेकिन सुहैल इलाज के लिए अस्पताल में भरती था. डाक्टर की सहमति के बिना उस से अस्पताल में पूछताछ नहीं हो सकती थी. तब पुलिस ने सुहैल के बेटे और पत्नी को पूछताछ के लिए उठा लिया.

सांप की पूंछ पर पैर रखो तो वह पलट कर काटता है, लेकिन पैर अगर उस के फन पर रखा जाए तो वह बचने के लिए छटपटाता है. यही इस मामले में हुआ.

जैसे ही सुहैल को पता चला कि पुलिस उस के बीवी बच्चों को थाने ले गई है तो वह खुदबखुद स्वस्थ हो गया. इतना ही नहीं, अगले दिन ही वह अस्पताल से छुट्टी करवा कर पहले घर पहुंचा और वहां से सीधे आष्टा थाने जाने के लिए रवाना हुआ. सुहैल भी कम शातिर नहीं था. वह किसी तरह पुलिस पर दबाव बनाना चाहता था. इसलिए आष्टा बसस्टैंड से थाने की तरफ जाने से पहले उस ने सल्फास की कुछ गोलियां मुंह में डाल लीं.

पुलिस को धोखा देने के चक्कर में मौत

सल्फास जितना तेज जहर होता है, उतनी ही तेज उस की दुर्गंध भी होती है. सुहैल का इरादा कुछ देर मुंह में सल्फास की गोली रखने के बाद बाहर थूक देने का था, ताकि जहर अंदर न जाए और उस की दुर्गंध मुंह से आती रहे, जिस से डर कर पुलिस उस से ज्यादा पूछताछ किए बिना ही छोड़ दे. हुआ इस का उलटा. मुंह में रखी एक गोली हलक में अटकने के बाद सीधे पेट में चली गई. इस से वह घबरा गया. उस ने तुरंत थाने पहुंचने की सोची, लेकिन थाने से बाहर कुछ दूरी पर गिर कर तड़पने लगा.

पुलिस को इस बात की खबर लगी तो उसे पहले आष्टा, फिर सीहोर अस्पताल पहुंचाया गया, लेकिन उपचार के दौरान सुहैल की मौत हो गई. सुहैल की मौत हो जाने से पुलिस को सुहैल की बीवी और बेटे को छोड़ना पड़ा. अब तक पुलिस पूरी कहानी समझ चुकी थी. नरेश के साथ जो कुछ भी हुआ है, उस में सुहैल और उस के परिवार का ही हाथ है.

हकीकत यह जानते हुए भी एडीशनल एसपी समीर यादव को कुछ दिनों के लिए जांच का काम रोक देना पड़ा. कुछ दिन बाद फिर जांच आगे बढ़ी तो सुहैल की बीवी और बेटे से पूछताछ की गई. लेकिन वे कुछ भी जानने से इनकार करते रहे.