Crime Kahani : पैसों के लालच में दोस्त का गला दबा कर मार डाला

Crime Kahani : सुरेश चौहान और लेखराज चौहान की 35 साल पुरानी इतनी गहरी दोस्ती थी कि दोनों बिजनैस भी साझे में करते थे. पिता की तरह इन दोनों के बेटे सचिन और हर्ष में भी दांतकाटी दोस्ती थी. लेकिन मोटी रकम के लालच में लेखराज के बेटे हर्ष ने यह दोस्ती पीपीई किट में दफन कर दी

21 जून, 2021 की दोपहर करीब साढ़े 3 बजे सचिन अपने घर पर सो रहा था, तभी उस के मोबाइल पर वाट्सऐप काल आई. सचिन उठा और जाने के लिए तैयार हुआ. लेकिन वह गया नहीं, कुछ देर बाद कपड़े उतार कर वह लेट गया. बिस्तर पर लेटे हुए वह कुछ सोचने लगा, तभी उसे भूख लगी तो उस ने मां अनीता से खाने के लिए कुछ देने को कहा. मां ने उसे सैंडविच बना कर दिया. इसी बीच दोबारा फोन आया तो सचिन टीशर्ट और लोअर में ही सैंडविच खाते हुए चप्पलें पहने ही घर से जाने लगा. मां ने कहा, ‘‘बेटा, तुम ने अभी नाश्ता भी नहीं किया है, कहां जा रहे हो, पहले नाश्ता तो कर लो?’’

उस ने कहा, ‘‘मां, बस अभी लौट कर आता हूं.’’  सचिन ने कहा और वह घर से चला गया. काफी देर तक जब सचिन नहीं आया तो मां को चिंता हुई. वह उसे लगातार उसे फोन कर रही थी, लेकिन सचिन काल रिसीव करने के बजाय बारबार फोन काट देता था. अनीता समझ नहीं पा रही थीं कि सचिन ऐसा क्यों कर रहा है. उस के आने के इंतजार में रात हो गई. रात 11.37 बजे सचिन के पिता सुरेश चौहान के फोन की घंटी बजी. लेकिन नींद में होने के कारण वह फोन उठा नहीं सके. तब अनीता ने देखा तो वह मिस्ड काल उन के बेटे सचिन की ही थी. तब उन्होंने 11.55 बजे कालबैक की.

मगर सचिन की जगह कोई और फोन पर बात कर रहा था. अनीता ने पूछा कौन बोल रहे हो? इस पर उस ने कहा, ‘‘मैं सचिन का दोस्त हूं.’’

‘‘सचिन कहां हैं?’’ अनीता ने पूछा.

‘‘उस ने शराब ज्यादा पी ली है, इसलिए वह सो रहा है. वैसे सचिन इस समय नोएडा में है.’’ उस ने बताया.

‘‘नोएडा…वह वहां कैसे पहुंचा?’’ उन्होंने पूछा.

‘‘यह बात तो आप को सचिन ही बताएगा.’’

‘‘तुम मेरी सचिन से बात कराओ.’’

‘‘सचिन अभी बात करने की कंडीशन में नहीं है, आप सुबह बात कर लेना,’’ कहते हुए उस ने सचिन का फोन स्विच्ड औफ कर दिया.

उत्तर प्रदेश की ताजनगरी आगरा के थाना न्यू आगरा के दयालबाग क्षेत्र की जयराम बाग कालोनी निवासी कोल्ड स्टोरेज कारोबारी सुरेश चौहान के 25 वर्षीय इकलौते बेटे सचिन चौहान का घरवाले सारी रात बैचेनी से इंतजार करते रहे. लेकिन उस का फोन औन नहीं हुआ.  बेटे के बारे में कोई सुराग न मिलने पर दूसरे दिन मंगलवार को घर वालों ने आसपड़ोस के साथ ही रिश्तेदारी में तलाश किया. लेकिन सचिन का कोई सुराग नहीं मिला. पूरे दिन तलाश करने के बाद 22 जून की शाम तक जब सचिन नहीं लौटा और न उस का मोबाइल औन हुआ, तब पिता सुरेश चौहान अपने पार्टनर लेखराज चौहान के साथ थाना न्यू आगरा पहुंचे.

गंभीरता से नहीं लिया केस उन्होंने थानाप्रभारी को बेटे के लापता होने के बारे में बताया. पुलिस ने उन की तहरीर पर सचिन की गुमशुदगी दर्ज कर ली. पुलिस ने उन से फिरौती के लिए फोन आने के बारे में पूछा. सुरेश चौहान ने इस पर इनकार कर दिया. फिरौती के लिए फोन न आने की बात पर पुलिस ने मामले को गंभीरता से नहीं लिया. कह दिया कि यारदोस्तों के साथ कहीं चला गया होगा और 1-2 दिन में आ जाएगा. पुलिस के रवैए से असंतुष्ट सुरेश चौहान तब खुद ही अपने बेटे की तलाश में जुट गए. उन्होंने कालोनी में रहने वाले एक सेवानिवृत्त अधिकारी से भी मदद ली. उन्हें सीसीटीवी की एक फुटेज मिली, जिस में बाइक सवार 2 युवक नजर आ रहे थे. इन में से पीछे बैठा युवक भी हेलमेट लगाए था.

यह सचिन ही था. यह जानकारी उन्होंने पुलिस को दी. फुटेज देखने के बाद पुलिस ने कहा कि इस में अपहरण जैसी कोई बात नहीं है. इस में तो आप का बेटा सचिन खुद अपनी मरजी से बाइक पर बैठा नजर आ रहा है. 3 दिन तक जब सचिन का कोई सुराग नहीं मिला तो घर वाले परेशान हो गए. पुलिस भी उन से परिचितों व रिश्तेदारी में तलाश करने की बात कहती रही. सुरेश चौहान के बिजनैस पार्टनर लेखराज चौहान के एक रिश्तेदार मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के कार्यालय में तैनात हैं. लेखराज ने उन्हें फोन किया. फिर मुख्यमंत्री कार्यालय के हस्तक्षेप के बाद मामला एसटीएफ के सुपुर्द किया गया. एसटीएफ ने 23 जून को इस मामले में छानबीन शुरू कर दी.

सब से पहले एसटीएफ ने सीसीटीवी वाली फुटेज देखी. जिस में सचिन बाइक पर पीछे हेलमेट लगाए बैठा था. एसटीएफ ने टेक्निकल रूप से जांच शुरू की. जांच शुरू की तो कड़ी से कड़ी जुड़ती चली गई और पुलिस केस के खुलासे के नजदीक पहुंच गई. पुलिस को पता चला कि सचिन का अपहरण कर लिया गया है. 27 जून की रात को पुलिस को मुखबिर से सूचना मिली कि इस घटना में शामिल एक आरोपी वाटर वर्क्स चौराहे पर मौजूद है. समय पर पुलिस वहां पहुंच गई और एसटीएफ ने उसे धर दबोचा. पकड़ा गया आरोपी हैप्पी खन्ना था. पता चला कि वह फरजी दस्तावेज से सिम लेने की फिराक में था. लेकिन सिम लेने से पहले ही उसे गिरफ्तार कर लिया गया था. उस ने बताया कि फरजी सिम से सचिन के पिता से 2 करोड़ की फिरौती मांगी जाती.

हैप्पी ने बताया कि सचिन अब इस दुनिया में नहीं है, उस की हत्या तो किडनैप करने वाले दिन ही कर दी थी. यह सुनते ही सनसनी फैल गई. पुलिस ने गुमशुदगी की सूचना को भादंवि की धारा 364ए, 302, 201, 420 में तरमीम कर दिया. दोस्त ही निकला कातिल हैप्पी से पूछताछ के आधार पर अन्य आरोपियों को पकड़ने के लिए ताबड़तोड़ दबिशें दे कर पुलिस ने 4 अन्य आरोपियों को भी गिरफ्तार कर लिया. इन में मृतक के पिता के बिजनैस पार्टनर लेखराज चौहान का बेटा हर्ष चौहान के अलावा सुमित असवानी निवासी दयाल बाग,  मनोज बंसल उर्फ लंगड़ा व रिंकू  निवासी कमलानगर शामिल थे.

चौंकाने वाली बात यह निकली  कि अपने दोस्त सचिन की तलाश में पुलिस और एसटीएफ की मदद करने का दिखावा करने वाला हर्ष चौहान स्वयं भी इस साजिश में शामिल था. 27 जून, 2021 को परिजनों को जैसे ही पता चला कि सचिन की हत्या उस के कुछ दोस्तों ने कर दी है तो घर में कोहराम मच गया. परिजनों का रोरो कर बुरा हाल  हो गया. सचिन अपने घर का इकलौता चिराग था, जिसे दोस्तों ने बुझा दिया था. पुलिस की कड़ी पूछताछ में सभी आरोपी टूट गए. सभी ने स्वीकार किया कि उन्होंने सचिन का अपहरण कर उस की हत्या कर लाश का अंतिम संस्कार पीपीई किट पहना कर करने के बाद उस की अस्थियां यमुना में विसर्जित करने का जुर्म कबूल कर लिया.

28 जून, 2021 को प्रैस कौन्फ्रैंस में एसएसपी मुनिराज जी. ने इस सनसनीखेज हत्याकांड का परदाफाश कर दिया. सचिन की मौत की पटकथा एक महीने पहले ही लिख ली गई थी. आरोपियों ने पहले ही तय कर रखा था कि सचिन का अपहरण कर हत्या कर देंगे. उस के बाद 2 करोड़ रुपए की फिरौती उस के पिता से वसूलेंगे. पुलिस पूछताछ में हत्यारोपियों द्वारा सचिन के अपहरण और हत्या के बाद उस के शव का दाह संस्कार की जो कहानी सामने आई, वह बड़ी ही खौफनाक थी—

मूलरूप से बरहन कस्बे के गांव रूपधनु निवासी सुरेश चौहान आगरा के दयाल बाग क्षेत्र की जयराम बाग कालोनी में रहते हैं. उन का गांव में ही एसएस आइस एंड कोल्ड स्टोरेज है. इस के अलावा वह आगरा और हाथरस में जिला पंचायत की ठेकेदारी भी करते हैं. लेखराज चौहान भी उन के गांव का ही है. दोनों ने एक साथ काम शुरू किया. ठेकेदारी भी साथ करते हैं. उन दोनों के बीच पिछले 35 सालों से बिजनैस की साझेदारी चल रही थी. सुरेश चौहान का बेटा सचिन व लेखराज का बेटा हर्ष भी दोनों अच्छे दोस्त थे और एक साथ ही व्यापार व ठेकेदारी करते थे. दयाल बाग क्षेत्र की कालोनी तुलसी विहार का रहने वाला सुमित असवानी बड़ा कारोबारी है. 2 साल पहले तक वह अपनी पत्नी व 2 बेटों के साथ चीन में रहता था.

वहां उस का गारमेंट के आयात और निर्यात का व्यापार था. लेकिन 2019 में चीन में जब कोरोना का कहर शुरू हुआ तो वह परिवार सहित भारत आ गया. दयालबाग में ही सौ फुटा रोड पर उस ने सीबीजेड नाम से स्नूकर और स्पोर्ट्स क्लब खोला. सुमित महंगी गाड़ी में चलता था. वहीं वह रोजाना दोस्तों के साथ पार्टी भी करता था. उस के क्लब में हर्ष और सचिन भी स्नूकर खेलने आया करते थे. इस दौरान सुमित की भी उन दोनों से गहरी दोस्ती हो गई. बताया जाता है कि हर्ष चौहान के कहने पर सुमित असवानी ने धीरेधीरे कर के सचिन चौहान को 40 लाख रूपए उधार दे दिए. जब उधारी चुकाने की बारी आई तो सचिन टालमटोल कर देता. जबकि उस के खर्चों में कोई कमी नहीं आ रही थी.

कई बार तकादा करने पर भी सचिन ने रुपए नहीं लौटाए. यह बात सुमित असवानी को नागवार गुजरी. तब उस ने मध्यस्थ हर्ष चौहान पर भी पैसे दिलाने का दबाव बनाया, क्योंकि उस ने उसी के कहने पर सचिन को पैसे दिए थे. सुमित था मास्टरमाइंड  हर्ष के कहने पर भी सचिन ने उधारी की रकम नहीं लौटाई. यह बात हर्ष को भी बुरी लगी. इस पर एक दिन सुमित असवानी ने हर्ष से कहा, ‘‘अब जैसा मैं कहूं तुम वैसा करना. इस के बदले में उसे भी एक करोड़ रुपए मिल जाएंगे.’’

रुपयों के लालच में हर्ष चौहान सुमित असवानी की बातों में आ गया. दोनों ने मिल कर घटना से एक महीने पहले सचिन चौहान के अपहरण की योजना बनाई. फिर योजना के अनुसार, सुमित असवानी ने इस बीच सचिन चौहान से अपने मधुर संबंध बनाए रखे ताकि उसे किसी प्रकार का शक न हो. इस योजना में सुमित असवानी ने रुपयों का लालच दे कर अपने मामा के बेटे हैप्पी खन्ना को तथा हैप्पी ने अपने दोस्त मनोज बंसल और उस के पड़ोसी रिंकू को भी शामिल कर लिया. उन्होंने यह भी तय कर लिया था कि अपहरण के बाद सचिन की हत्या कर के उस के पिता से जो 2 करोड़ रुपए की फिरौती वसूली जाएगी. उस में से एक करोड़ हर्ष चौहान को, 40 लाख सुमित असवानी को और बाकी पैसे अन्य भागीदारों में बांट दिए जाएंगे.

षडयंत्र के तहत उन्होंने अपनी योजना को अमली जामा 21 जून को पहनाया. सुमित असवानी ने अपने मोबाइल से उस दिन सचिन चौहान को वाट्सऐप काल की. उस ने सचिन से कहा, ‘‘आज मस्त पार्टी का इंतजाम किया है. रशियन लड़कियां भी बुलाई हैं. बिना किसी को बताए, चुपचाप आ जा.’’

सचिन उस के जाल में फंस गया. घर पर बिना बताए वह पैदल ही निकल आया. वे लोग क्रेटा गाड़ी से आए थे. रिंकू गाड़ी चला रहा था. मनोज बंसल उस के बगल में बैठा था. वहीं सुमित और हैप्पी पीछे की सीट पर बैठे थे. सचिन बीच में बैठ गया. सुमित असवानी व साथी शाम 4 बजे पहले एक शराब की दुकान पर पहुंचे. वहां से उन्होंने शराब खरीदी. इस के बाद सभी दोस्त कार से शाम साढ़े 4 बजे सौ फुटा रोड होते हुए पोइया घाट पहुंचे. हैप्पी के दोस्त की बहन का यहां पर पानी का प्लांट है. इन दिनों वह प्लांट बंद पड़ा था. हैप्पी ने पार्टी के नाम पर प्लांट की चाबी पहले ही ले ली थी.

पीपीई किट से लगाई लाश ठिकाने वहां पहुंच कर सभी पहली मंजिल पर बने कमरे में पहुंचे. शाम 5 बजे शराब पार्टी शुरू हुई. जब सचिन पर नशा चढ़ने लगा, तभी सभी ने सचिन को पकड़ लिया. जब तक वह कुछ समझ पाता, उन्होंने उस के चेहरे  पर पौलीथिन और टेप बांध दिया, जिस से सचिन की सांस घुटने लगी. उसी समय सुमित असवानी उस के ऊपर बैठ गया और उस का गला दबा कर हत्या कर दी. इस बीच अन्य उस के हाथपैर पकड़े रहे. सचिन की हत्या के बाद उस के शव का अंतिम संस्कार करने का निर्णय लिया गया. इस के लिए शातिर दिमाग सुमित असवानी ने पीपीई किट में लाश को श्मशान घाट पर ले जाने का आइडिया दिया ताकि पहचान न हो सके और कोई उन के पास न आए.

इस के लिए कमला नगर के एक मैडिकल स्टोर से एक पीपीई किट यह कह कर खरीदी कि एक कोरोना मरीज के अंतिम संस्कार के लिए चाहिए. रिंकू शव को बल्केश्वर घाट पर ले जाने के लिए एक मारुति वैन ले आया. सचिन के शव को पीपीई किट में डालने के बाद वह बल्केश्वर घाट पर रात साढ़े 8 बजे पहुंचे. वहां उन्होंने बल्केश्वर मोक्षधाम समिति की रसीद कटवाई व अंतिम संस्कार का सामान खरीदा. उन्होंने मृतक का नाम रवि वर्मा और पता 12ए, सरयू विहार, कमला नगर लिखाया था. इस दौरान कर्मचारी ने मोबाइल नंबर पूछा. तब एक हत्यारोपी ने हड़बड़ी में अपने जीजा का मोबाइल नंबर बता दिया. उसे लगा कि यह गलती हो गई. तब उस ने वह नंबर कटवा दिया, बाद में परची पर फरजी मोबाइल नंबर लिखवा दिया.

यह भी बताया कि मृतक कोरोना पौजिटिव था, इस के चलते उस की मौत हो गई. शव को जलाने के बाद रात साढ़े 10 बजे सभी अपनेअपने घर चले गए.  हर्ष ने मनोज बंसल को सचिन का मोबाइल दे कर उसी शाम साढ़े 7 बजे ही खंदारी से इटावा की बस में बैठा दिया. उस से कहा गया कि इटावा पहुंच कर वह मोबाइल औन कर ले, जिस से लोकेशन इटावा की मिले. फिर इटावा से वह सचिन के घर फोन कर 2 करोड़ की फिरौती मांगे. फिरौती की काल करने के बाद वह मोबाइल औफ कर ले. इस के बाद वह वहां से कानपुर चला जाए. वहां मोबाइल चालू करे. ताकि पुलिस भ्रमित रहे और हम लोग पकड़ में न आएं.

पुलिस को भटकाने की साजिश रात 12 बजे इटावा पहुंच कर मनोज ने जैसे ही मोबाइल औन किया तो देखा मोबाइल पर सचिन की मां अनीता के लगातार फोन आ रहे थे. मनोज ने डर से फोन नहीं उठाया और न फिरौती मांगी. उस ने उसी समय फोन स्विच्ड औफ कर दिया. सुबह 4 बजे मनोज दूसरी बस पकड़ कर कानपुर पहुंचा. वहां पहुंच कर फिर से मोबाइल औन किया और बाद में उसे कानपुर के झकरकटी स्टैंड पर फेंक दिया. ऐसा इसलिए किया ताकि पुलिस सचिन की तलाश करे तो उस के मोबाइल की लोकेशन इटावा व कानपुर की मिले. पुलिस समझे कि अपहर्त्ता उसे कानपुर की तरफ से ले गए हैं. वह पुलिस को भ्रमित करना चाहते थे. पूरे घटनाक्रम के दौरान किसी ने एकदूसरे से फोन पर बात तक नहीं की, ताकि पुलिस पकड़ न सके.

दूसरे दिन 22 जून की सुबह 8 बजे जा कर हैप्पी और रिंकू ने सचिन की अस्थियां यमुना में विसर्जित कर दीं. वे लोग दोपहर 12 बजे पानी के प्लांट से सचिन की चप्पलें उठा कर जंगल में फेंक आए. बताते चलें आरोपी मनोज एक पैर से विकलांग है. उस के 2 बच्चे हैं. पिता की दुकान थी, लेकिन बंद हो गई. लौकडाउन में ढाई लाख का कर्ज हो गया था. हैप्पी सुमित का ममेरा भाई था. उस की शादी नहीं हुई है. सुमित के साथ ही काम करता है. पिता की मौत हो चुकी है. उसे रुपयों की जरूरत थी. रिंकू एक स्कूल की वैन चलाता था. लौकडाउन के कारण स्कूल बंद होने से वह भी बेरोजगार था. इसलिए वे सभी पैसों के लालच में आ गए थे.

सचिन ने बीबीए तक की पढ़ाई की थी.  वह पिता के साथ उन के कारोबार में हाथ बंटाता था. जबकि उन के पार्टनर लेखराज चौहान का बेटा हर्ष सचिन से 2 साल छोटा था और बीबीए की पढ़ाई कर रहा था. वह भी पिता के साथ कारोबार में हाथ बंटाता था. 2 करोड़ की फिरौती के लालच में दोस्तों ने भरोसे को तारतार कर दिया. शातिरों ने अपहरण और हत्या की पूरी साजिश इस तरह रची कि पुलिस उलझ कर रह जाए. सामान्य काल की जगह वाट्सऐप काल की. फोन भी दूसरे शहर में ले जा कर फेंक दिया. सबूत मिटाने के लिए अंतिम संस्कार भी पीपीई किट में कर दिया ताकि कोई सवाल न उठाए. यहां तक कि अस्थियों को यमुना में विसर्जित कर दीं ताकि डीएनए टेस्ट भी न कराया जा सके.

पुलिस ने जुटाए सबूत लेकिन फिर भी आरोपी पुलिस की गिरफ्त से बच न सके. अपहरण व हत्या के बाद फिरौती वसूलने का सारा तानाबाना सुमित व हर्ष ने ही बुना था. पुलिस ने गिरफ्तार किए गए हत्यारोपियों से 7 मोबाइल, 1200 रुपए नकदी के साथ ही 2 कारें भी बरामद कीं. इस के चलते पुलिस को न तो लाश मिली न ही अस्थियां मिलीं. ऐसे में केस में मजबूत साक्ष्य ही आरोपियों को सजा दिला पाएंगे. इस के लिए पुलिस ने फोरैंसिक एक्सपर्ट की टीम की मदद से 28 जून के बाद 29 जून को भी अन्य साक्ष्य जुटाए. जिस पानी के प्लांट में हत्याकांड को अंजाम दिया गया, वहां से फोरैंसिक एक्सपर्ट की टीम को सचिन का एटीएम कार्ड मिला. यह सचिन की हत्या के दौरान संघर्ष में गिर गया होगा.

इस के अलावा टीम को वहां फिंगर और फुटप्रिंट भी मिले हैं, ये आरोपियों के अलावा सचिन के हो सकते हैं. वहीं कुछ बाल भी मिले हैं. यह आरोपियों के हो सकते हैं. इन्हें फोरैंसिक साइंस लैब भेजा गया है. यहां से पुलिस ने जली हुई सिगरेट, खाली गिलास और पानी की बोतल बरामद की है.  इन पर फिंगरप्रिंट थे. इन्हें लिया गया है. वहीं पुलिस ने श्मशान घाट पर रवि वर्मा के नाम से रसीद कटवाई गई थी. पता सरयू विहार, कमला नगर का लिखाया गया था, मगर यहां कोई रहता नहीं है. पुलिस ने घाट के कर्मचारी के बयान दर्ज किए हैं. कमला नगर में जिस मैडिकल स्टोर से पीपीई किट खरीदी थी, उस के मालिक के बयान के साथ ही दुकान में लगे कैमरों के फुटेज भी लिए गए हैं.

इस के साथ ही पुलिस को कमला नगर व बल्केश्वर क्षेत्र के सीसीटीवी कैमरों की फुटेज भी मिल गई है, जिस में आरोपी साफ नजर आ रहे हैं. उन की लोकेशन भी है, जो केस में आरोपियों को सजा दिलाने के लिए साक्ष्य बनेंगे. आरोपियों की कार और वैन पुलिस ने बरामद कर ली है. कार में वे सचिन को ले गए थे, जबकि वैन में शव को ले कर गए थे. इस साल सचिन की शादी की तैयारी थी. उस के लिए कई रिश्ते आए थे. बात भी चल रही थी. सोचा था कि नवंबर में उस की शादी कर देंगे. बेटे की शादी कर बहू घर लाने की ख्वाहिश अब चौहान दंपति का सपना ही बन कर रह गई.

29 जून को पुलिस ने गिरफ्तार किए गए पांचों हत्यारोपियों को न्यायालय में पेश किया, जहां से सभी को जेल भेज दिया गया. Crime Kahani

 

Crime Kahani : जायदाद के लिए बड़े बेटे ने किया परिवार के चार लोगों का कत्ल

Crime Kahani : कभीकभी घर के छोटेछोटे विवादों को जब गंभीरता से नहीं लिया जाता है तो वह भयानक रूप भी ले लेते हैं. काश! बालाराम अपने बड़े बेटे गंगाराम की समस्या पर ध्यान देते तो शायद उन के घर से 4 अर्थियां न उठतीं…

गंगाराम अपनी मां दुलारीबाई से किसी भटियारिन की तरह हाथ नचाता हुआ गुस्से से बोला, ‘‘मैं ने तुम्हें कितनी बार बोला है कि मुझे निकासी के लिए रास्ता दो. मुझे लंबा चक्कर काट कर घर तक पहुंचना पड़ता है. उस समय तो और परेशानी बढ़ जाती है जब खेतों से फसल बैलगाड़ी में लाद कर लाते हैं.

‘‘आखिर मेरी बात तुम कब समझोगी. हर साल इसी बात का रोना होता है. सवा महीने बाकी हैं, फसल तैयार हो चुकी है. मुझे निकासी के लिए रास्ता चाहिए. और उस 2 एकड़ खेत में से हिस्सा भी चाहिए. मैं भी परिवार वाला हूं.’’

‘‘अच्छा…अभी तो मांबाप को पूछता नहीं है और जिस दिन जमीन से हिस्सा मिल गया, मांबाप मानने से भी इनकार कर देगा. गंगाराम, मैं ने दुनिया देखी है. बंटवारा हुआ नहीं कि मांबाप के हाथ में कटोरा थमा दोगे. बुढ़ौती में भीख मांगनी पड़ जाएगी. दोनों मांबेटे में इसी तरह काफी देर तक झगड़ा चलता रहा. उसी समय गंगाराम के पिता बालाराम खेत से घर लौटे. दुलारी ने बेटे की शिकायत अपने पति से की, ‘‘लो, संभालो अपने बेटे को, जो जी में आता है बोलता ही चला जाता है.’’

गंगाराम अपने पिता से बोला, ‘‘बाबूजी, मां को समझाओ और संभालो नहीं तो किसी दिन मेरा मूड खराब हो गया तो इसे गंडासे से काट कर नदी में…’’

बालाराम ने बीच में हस्तक्षेप किया, ‘‘बहुत बोल चुका,’’ उन्होंने अपनी पत्नी दुलारी का पक्ष लिया, ‘‘अब अगर तू अपनी मां को एक भी शब्द बोला तो मुझ से बुरा कोई नहीं होगा.’’

इस झगड़े के बीच गंगाराम की पत्नी निर्मला पति का हाथ पकड़ कर बाहर लाने लगी. गंगाराम ने निर्मला का हाथ झटक दिया, ‘‘आज मैं बुड्ढे बुढि़या को छोड़ूंगा नहीं.’’

कहता हुआ गंगाराम अपने पिता बालाराम से जा भिड़ा. बापबेटे को एकदूसरे से हाथपाई करते देख गांव के लोग जमा हो गए. गांव वालों ने बापबेटे को बड़ी मुश्किल से एकदूसरे से अलग किया. गंगाराम लोगों की बांहों में जकड़ा हुआ कसमसा रहा था. साथ ही गुस्से से चीखता रहा. दोनों एकदूसरे के कट्टर विरोधी हो गए. कोढ़ में खाज यह हुआ कि इसी बीच निर्मला बीमार रहने लगी. इस के लिए निर्मला अपनी सास दुलारीबाई को जिम्मेदार ठहराने लगी. वह सास पर यह आरोप लगाती कि उस ने उस के ऊपर कोई टोनाटोटका करा दिया है. गंगाराम ने कई ओझागुनिया को पत्नी को दिखाया. मर्ज यह था कि निर्मला के सिर में दर्द बना रहता था और शाम को बुखार चढ़ने लगता था.

झाड़फूंक से कोई सुधार न हुआ तो वह डाक्टर के पास गया. टेस्ट करवाने पर पता चला कि निर्मला को टायफायड है. एलोपैथी दवा भी चली और झाड़फूंक भी. पता नहीं किस ने असर दिखाया, निर्मला धीरेधीरे ठीक होने लगी. गंगाराम और उस की पत्नी निर्मला के दिमाग में यह बात घर कर गई थी कि उस की सास दुलारीबाई किसी तांत्रिक ओझा से मिल कर उन्हें बरबाद करने पर तुली है. इस बात पर गंगाराम की सोच भी निर्मला की सोच से अलग नहीं थी. निर्मला जब पूरी तरह से ठीक हो गई और उस के शरीर में जान आ गई तब वह अपनी सास पर इलजाम लगाने लगी. एक बार फिर दोनों पक्षों में तकरार और झिकझिक होने लगी. वह एकदूसरे के लिए गलत भावनाएं रखने लगे. फिर वही समय आया, नवंबर दिसंबर का. फसल तैयार हो कर खेत से कोठरी में जाने को तैयार थी.

मुद्दा फिर वही उठा कि बैलगाड़ी में रखे अनाज को दूसरे रास्ते से लाना होगा. बालाराम और दुलारी किसी भी तरह से इस बात के लिए तैयार नहीं थे कि निकासी के लिए बाड़ी से जगह दी जाए. हर साल फसल तैयार होने के बाद यही सवाल खड़ा हो जाया करता था. कई सालों से यह निकासी का मसला न तो सुलझ रहा था और न ही दूरदूर तक कोई समाधान ही दिखाई दे रहा था. आज भी इसी विवाद को ले कर गंगाराम और निर्मला दोनों का मन खिन्न था. खाना खाने के बाद दोनों पतिपत्नी टीवी देखने लगे. टीवी पर वह क्राइम स्टोरी पर आधारित सीरियल देख रहे थे. उस सीरियल की कहानी उन की जिंदगी से जुड़ी जैसी थी. दोनों ने बड़े ध्यान से खामोशी के साथ वह सीरियल देखा. सीरियल खत्म होने के बाद दोनों ने उस पर चर्चा की.

गंगाराम और उस की पत्नी को इस बात की चिंता हो रही थी कि कहीं ऐसा न हो कि मांबाप पूरी जमीन छोटे भाई रोहित के नाम कर जाएं. वैसे भी छोटा होने के नाते वह मांबाप का चहेता था. इस सोच ने निर्मला और गंगाराम को परेशान कर डाला. जब इंसान को कोई चीज मिलने की संभावना दिखाई न देती है, तब वह उसे किसी दूसरे ही तरीके से हासिल करने की कोशिश में लग जाता है. इन दोनों ने भी एक योजना बना ली. गंगाराम और निर्मला ने एक योजना के तहत अपने व्यवहार में थोड़ाबहुत बदलाव किया. अपने पिता बालाराम और मां दुलारीबाई से सहजता से पेश आने लगे. बालाराम और दुलारी को आश्चर्य हुआ कि हमेशा कड़वे बोल बोलने वालों की जुबान में शहद कैसे घुल गया.

इस के बाद उन दोनों ने विचारविमर्श किया कि अपनी योजना में किसे शामिल किया जाए, जिस से उन की योजना सफल हो जाए. नजर और दिमाग के घोड़े दौड़ाने के बाद गंगाराम ने धुधवा गांव के ही नरेश सोनकर, योगेश सोनकर और कोपेडीह निवासी रोहित सोनकर से जिक्र किया. पैसों के लालच में तीनों ही उन की योजना में शामिल हो गए. तीनों ने योजना बना कर वारदात को अंजाम देने के लिए 21 दिसंबर, 2020 का दिन तय किया. योजना के अनुसार, चारों लोग खेत पर पहुंच गए. वहां बालाराम और उस का छोटा बेटा रोहित तड़के में खेतों पर पानी लगा रहे थे. उन्होंने उन दोनों को दबोच लिया और सीमेंट की बनी पानी की हौदी में डुबो कर दोनों को मार दिया.

अगला निशाना अब दुलारीबाई और उस की बहू कीर्तन रही. चारों दबेपांव वहां पहुंचे, जहां वे सब्जियों का गट्ठर तैयार करने में व्यस्त थीं. शिकारी की तरह दबेपांव वे उन के करीब पहुंचे और कुल्हाड़ी से ताबड़तोड़ वार कर उन दोनों की जिंदगी भी खत्म कर दी. इतना सब कुछ करने के बाद उन लोगों ने चैन की सांस ली. यहां यह बताते चलें कि निर्मला उन चारों को ऐसा करते हुए दरवाजे की ओट से देख रही थी. काम को अंजाम देने के बाद गंगाराम ने तीनों साथियों को वहां से रवाना कर दिया. निर्मला और गंगाराम दोनों ने मिल कर कुल्हाड़ी को बाड़ी में ही दबा दिया. सुबह के 5 बजतेबजते पूरे खुरमुड़ा गांव में इस दहला देने वाली हत्या की चर्चा होने लगी.

अम्लेश्वर थाने में संजू सोनकर निवासी खुरमुड़ा की रिपोर्ट पर अमलेश्वर थानाप्रभारी वीरेंद्र श्रीवास्तव ने इस नृशंस हत्याकांड की सूचना वरिष्ठ अधिकारियों को दी. जांचपड़ताल के लिए फोरैंसिक टीम घटनास्थल पर पहुंच गई. आईजी विवेकानंद सिन्हा के सुपरविजन में जांच होती रही. पुलिस को किसी तरह का कोई सूत्र नहीं मिल रहा था जिस से जांच आगे बढ़ती. डौग स्क्वायड टीम घटनास्थल पर पहुंच चुकी थी. मृतकों के शव के समीप ले जा कर कुत्ते को छोड़ दिया गया. खोजी कुत्ता गोलगोल चक्कर लगाता हुआ मृतकों को सूंघ कर खेत की ओर कुछ दूर तक गया. मौके की जांच से इतना तो स्पष्ट था कि हत्यारे 2-3 से कम नहीं थे. खेत में रासायनिक छिड़काव कर दिया गया था, जिस के कारण खोजी कुत्ते को सही दिशा नहीं मिल पा रही थी.

बहरहाल, पुलिस ने लाश पोस्टमार्टम के लिए भेज दी. जब पुलिस को किसी तरह का सूत्र नहीं मिला तो पुलिस ने गंगाराम के साढ़ू नरेश सोनकर को विश्वास में ले कर मुखबिरी का जिम्मा सौंपा. नरेश मंझा हुआ खिलाड़ी था. उस ने पुलिस को मुखबिरी करने के बहाने उलझाए रखा. जांच के लिए आईजी विवेकानंद सिन्हा ने कुछ बिंदु तय किए. उन बिंदुओं को आधार बना कर पुलिस जांच में जुटी रही. इस सामूहिक हत्याकांड को हुए 3 महीने बीत चुके थे. लेकिन अपराधियों का कोई अतापता नहीं था. थानाप्रभारी वीरेंद्र श्रीवास्तव ने अपने एक मुखबिर को नरेश के पीछे लगा दिया. नरेश की एक्टिविटी पुलिस को शुरू से ही संदेहास्पद लगी थी.

फोरैंसिक विशेषज्ञों की टीम के सहयोग से भौतिक साक्ष्य जुटाया गया. टीम ने वैज्ञानिक एवं तकनीकी साक्ष्य को आधार बना कर बारीकी से पूछताछ कर जानकारी इकट्ठी की. पुलिस ने संदेहियों को हिरासत में ले कर सघन पूछताछ की. इस घटना का मास्टरमाइंड बालाराम का अपना सगा बड़ा बेटा गंगाराम निकला. गंगाराम की स्वीकारोक्ति के बाद योगेश सोनकर, नरेश सोनकर, रोहित सोनकर उर्फ रोहित मौसा को गिरफ्तार कर लिया गया. सभी को घटनास्थल पर ले जा सीन रीक्रिएशन कराया गया. आरोपियों की निशानदेही पर हत्या में प्रयुक्त कुल्हाड़ी पुलिस ने बालाराम की बाड़ी से बरामद कर ली. घटना के वक्त पहने गए कपड़ों को इन चारों ने ठिकाने लगा दिया था.

18 मार्च, 2021 को आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया गया, जिस में निर्मला भी शामिल थी. इन चारों आरोपियों का नारको टेस्ट भी कराया गया. आईजी विवेकानंद सिन्हा ने अमलेश्वर थाना स्टाफ की पीठ थपथपाई. पुलिस ने सभी आरोपियों गंगाराम, उस की पत्नी निर्मला, योगेश सोनकर, नरेश सोनकर और रोहित सोनकर को गिरफ्तार कर कोर्ट में पेश किया, जहां से उन्हें जेल भेज दिया गया.Crime Kahani

 

Hindi Crime Story : लापता युवक का 10 साल बाद मिला कंकाल, नोकिया फोन से खुला मौत का राज

Hindi Crime Story : हाल ही में मौत का एक ऐसा मामला सामने आया है, जिस ने सभी को झकझोर कर रख दिया है. एक कमरे से आ रही तेज दुर्गंध ने इलाके में सनसनी फैला दी. जिसे देख आस पास के लोग हैरान हो गए और तुरंत पुलिस को सूचित किया. मौके पर पहुंची पुलिस ने एक कमरे में कंकाल बरामद किया. यह कंकाल किस का था? इस का हत्यारा कौन था? इन सभी सवालों ने पुलिस को भी उलझा कर रख दिया है. चलिए जानते हैं कि इस चौंकाने वाली घटना को विस्तार से

यह सनसनीखेज घटना हैदराबाद के नामपल्ली इलाके की है. जहां 14 जुलाई, 2025 को उस समय हड़कंप मच गया, जब लोगों को पता चला कि 10 साल से लापता अमीर खान का कंकाल एक बंद कमरे में पड़ा था. घटना तब सामने आई, जब स्थानीय युवक क्रिक्रेट खेल रहे थे तो उन की बौल उस घर में जा गिरी, जिस में कंकाल था. बौल लेने गया युवक कंकाल को घर में देखकर दंग रहा गया. उस के पैरों के नीचे की जमीन खिसक गई.

वह दौड़ता हुआ वहां से भागा और इस के बाद उस ने तुरंत आसपास के लोगों को यह बताया. पुलिस को सूचित किया गया. पुलिस टीम ने मौके पर पंहुच कर जांच शुरु कर दी. इस के बाद पुलिस घर के पास पहुंची और ताला तोड़ा तो अदंर एक कंकाल पड़ा हुआ था और उसके साथ एक पुराना नोकिया फोन भी मिला. इस फोन की मदद से पुलिस को मृतक की पहचान करने मे सफलता मिली.

पुलिस को बाद में जांच द्वारा पता चल सका कि यह कंकाल 55 साल के अमीर खान का है, जो 10 साल से लापता था. पुलिस की जांच के अनुसार घर करीब 7 साल से बंद था.

पुलिस को शुरुआत में लगा की किसी ने अमीर की हत्या की होगी. लेकिन फोन की जांच ने पूरा मामला बदल दिया. पुलिस ने जब फोन को चार्ज किया तो उस में करीब 84 मिस्ड कौल थीं, जो उस के दोस्तों और रिश्तेदोरों की थीं. पुलिस ने बताया की ये मिस्ड कौल 2015 के आसपास की गई थीं, जब अमीर खान लापता हुआ था.

पुलिस के अनुसार, अमीर खान घर नामपल्ली इलाके में अकेला रहा करता था. अमीर के अब्बू का नाम मुनीर खान था और उन के 10 बच्चे थे. इन में अमीर खान 10 तीसरे नंबर का था.
परिवार के सभी लोग अलग अलग जगह रहा करते हैं.

पुलिस को शक है कि अकेलेपन और किसी स्वास्थ्य प्रोब्लम के कारण उस की मौत हुई होगी. पुलिस ने कंकाल को फोरैंसिक जांच के लिए भेज दिया है. मामले की जांच गहराई से एसीपी (आसिफनगर) किशन कुमार की देखरेख में चल रही है. Hindi Crime Story

Delhi News : दोस्ती पर दाग – जिगरी दोस्तों ने चाकू से ली एकदूसरे की जान

Delhi News : दिल्ली मे एक ऐसा सनसनीखेज मामला सामने आया है जहां दो जिगरी दोस्तों के बीच झगड़ा इतना बढ़ा कि उन्होंने एक दूसरे पर चाकू से हमला कर जान ले ली. कभी गहरे दोस्त रहे ये लड़के आखिर कातिल कैसे बन गए. जानते हैं पूरी स्टोरी विस्तार से दोस्तों ने ली एक दूसरे की जान,

यह घटना दिल्ली के तिलक नगर की है, जहां 13 जुलाई 2025 दिन रविवार रात के दिन यह वारदात हुई. जहां दो जिगरी यार एक पार्क में बैठे थे, तभी दोनों के बीच किसी बात को लेकर बहस शुरू गई. दोनों के बीच यह बहस इतनी बढ़ गई कि दोनों में हाथापाई होने लगी और फिर दोनों ने गुस्से में एक दूसरे पर चाकू से हमला शुरू कर दिया. यह हमला इतना गंभीर था कि दोनों गंभीर रुप से घायल हो गए.

फिर आसपास के लोगों ने दोनों घायलों को तुरंत स्थानीय अस्पताल ले गए और पुलिस को भी सूचित कर दिया गया. सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर अस्पताल पहुंच जाती है. पुलिस ने देखा कि दोनों बुरी तरह से घायल थे. डौक्टरों ने इलाज शुरू कर दिया था, लेकिन गंभीर चोटों के कारण दोनों ने रात में दम तोड़ दिया.
पुलिस ने जांच में पाया कि मृतकों में एक का नाम आरिफ और दूसरे का नाम संदीप था. जो दोनों ही ख्याला बी ब्लौक के रहने वाले थे और एक ही गली में दोनों अपने परिवार के साथ रहते थे.

दिल्ली पुलिस के अनुसार, डीसीपी वेस्ट विचित्र ने कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी है. पुलिस के द्वारा जांच गहराई से की जा रही है. पुलिस स्थानीय क्षेत्र में जाकर पता करने की कोशिश कर रही है कि दोनों जिगरी दोस्तों के बीच ऐसा क्या हुआ जिससे बहस खूनी संघर्ष में बदल गई. साथ ही पुलिस दोनों के परिवार वालों से पूछताछ कर रही है ताकि यह यह पता किया जा सके कि दोनों के बीच दोस्ती आखिर में दुश्मनी में कैसे बदल गई.

पुलिस का कहना है कि पोस्टमार्टम रिर्पोट और अन्य साक्ष्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी. इस दर्दनाक घटना ने पूरे इलाके में हड़कंप मचा दिया है. पुलिस ने जांच में यह भी जाना कि आरिफ और संदीप दोनों शादीशुदा भी थे. संदीप का प्रौपर्टी का बिजनेस कर रहा था जबकि इससे पहले वह एक जिम ट्रेनर भी रह चुका था. वही आरिफ का भी अलग पेशा था. पुलिस इस मामले की गहराई से जांच कर रही है. Delhi News

MP News : शक के चलते पत्नी ने डॉक्टर पति को करंट लगाकर मार डाला

MP News : नीरज पाठक एक जानेमाने डाक्टर थे. उन की पत्नी डा. ममता पाठक कैमेस्ट्री की प्रोफेसर थी. उच्चशिक्षित और प्रतिष्ठित परिवार होने के बावजूद ममता पाठक पति पर शक करती थी. शक का यह कीड़ा इतना बलवती हो गया कि एक दिन इस ने…

मध्य प्रदेश के बुंदेलखंड इलाके के छतरपुर जिले की एक पौश कालोनी है, लोकनाथपुरम. इसी कालोनी में 65 साल के डा. नीरज पाठक का एक क्लीनिक है. डा. पाठक इस जिले के जाने माने मैडिसिन स्पैशलिस्ट हैं. डा. पाठक छतरपुर के जिला अस्पताल में डाक्टर थे, परंतु रिटायरमेंट के 2 साल पहले ही सरकारी नौकरी से वीआरएस ले लिया था. तभी से वह अपने निजी क्लीनिक पर मरीजों का उपचार करते थे. डा. पाठक की 62 साल की पत्नी ममता पाठक छतरपुर के शासकीय महाराजा कालेज में कैमेस्ट्री की प्रोफेसर थीं. मगर अपने पति से उन की कैमेस्ट्री कभी ठीक नहीं रही. डा. दंपति के 2 बेटे हैं, जिन में से बड़ा बेटा नीतेश पाठक मानसिक रूप से अस्वस्थ रहता है.

वह रूस से एमबीबीएस की पढ़ाई छोड़ कर घर आ गया था, जबकि छोटा बेटा मानस आईटी से इंजीनियरिंग की डिगरी लेने के बाद अमेरिका में नौकरी करता है. डा. नीरज और ममता की शादी जब 11 मई 1994 को हुई थी, तो परिवार के लोग दोनों की योग्यता और पद पर नाज करते थे. शादी के कुछ समय बाद तक तो सब कुछ ठीकठाक चलता रहा, पर 2 बेटों के जन्म के बाद उन के दांपत्य जीवन में दरार आ गई. डा. पाठक जिले के नामीगिरामी चिकित्सक थे, तो ममता पाठक भी शहर के सब से प्रतिष्ठित सरकारी कालेज में प्रोफेसर थीं. अपनी योग्यता के इसी अहं के कारण दोनों के बीच दीवार खड़ी हो गई.

कहते हैं कि केवल उच्च शिक्षा और पैसा हासिल कर लेने से ही सब कुछ नहीं मिल जाता, जीवन में खुशियां लाने के लिए खुला मन और अच्छी सोच का होना जरूरी है. डा. नीरज पाठक और ममता पाठक की जिंदगी में शक की लाइलाज बीमारी ने जहर घोलने का काम किया. घुलता गया शक का जहर पढ़ीलिखी प्रोफेसर ममता पाठक को हमेशा यही शक बना रहता था कि उन के पति के किसी महिला से अवैध संबंध हैं. इस की वजह से वह अपने पति की हर गतिविधि पर नजर रखती और छोटीछोटी बातों को ले कर शंका करती. डा. पाठक पत्नी के इस व्यवहार से दुखी रहते थे. दोनों के बीच चरित्र संदेह को ले कर अकसर लड़ाईझगडे़ और मारपीट होती रहती थी.

छोटीछोटी बातों से शुरु हुई कलह घर की चारदीवारी से बाहर निकलने लगी. दोनों एकदूसरे के बुरे व्यवहार की शिकायत कई बार पुलिस के आला अधिकारियों से कर चुके थे. पुलिस भी पतिपत्नी के आपसी विवाद में ज्यादा कुछ न कर उन्हें हर बार समझाइश दे कर मामले को रफादफा करती रही. आखिरकार, ममता का शक्की मिजाज उन के दांपत्य जीवन में बिखराव का कारण बन गया. यानी करीब 11 साल पहले ममता अपने बेटों को ले कर अपने पति से अलग रहने लगी. बाद में छोटा बेटा मानस नौकरी के लिए अमेरिका चला गया. अलग रहते हुए भी ममता अपने पति से घर चलाने का खर्च वसूल करती रही. इधर डा. पाठक एक घरेलू नौकर के भरोसे अपनी जिंदगी की गाड़ी खींच रहे थे.

पतिपत्नी के रिश्ते की दरार जब बढ़ जाती है तो रिश्ते बोझिल हो जाते हैं. यही वजह थी कि दोनों एक दूसरे के खिलाफ थाने में कई बार रिपोर्ट दर्ज करा चुके थे. हाईप्रोफाइल इस दंपति की आपसी कलह ने उन की सामाजिक प्रतिष्ठा को भी प्रभावित कर दिया था. छतरपुर जिले में डा. पाठक का अपना रसूख था, मगर पत्नी की हरकतों की वजह से डा. पाठक मानसिक रूप से प्रताडि़त हो रहे थे. ऐसे में पुलिस और रिश्तेदारों की पहल पर पतिपत्नी में समझौता हुआ और सितंबर 2020 में ममता अपने बेटे नीतेश को ले कर पति के घर वापस आ गई. कमरे में पड़ी थी डा. पाठक की लाश पहली मई 2021 को सुबह का समय था. ममता पाठक ने 100 डायल पर सूचना दी कि उन के पति कमरे में मृत पड़े हुए हैं.

ममता की सूचना पर छतरपुर के सिविल लाइंस थाने के टीआई जगतपाल सिंह पुलिस टीम के साथ डा. पाठक के बंगले पर पहुंच गए. प्रोफेसर ममता पाठक बदहवास हालत में मिली. टीआई प्रोफेसर ममता पाठक से परिचित थे तो उन्होंने बैडरूम में पड़े हुए डा. पाठक की ओर इशारा करते हुए कहा, ‘‘मैडम डा. साहब को क्या हो गया?’’

प्रोफेसर ममता पाठक ने टीआई को बताया, ‘‘डा. पाठक पिछले कुछ दिनों से बीमार चल रहे थे और आज उन की डेथ हो गई’’ टीआई जगतपाल सिंह को याद आया कि अभी 2 दिन पहले 29 अप्रैल को ही डा. पाठक ने व्हाट्एप के माध्यम से उन्हें एक शिकायत भेजी थी कि उन की पत्नी और बेटा उन्हें प्रताडि़त कर रहे हैं. खैर, उन की मौत कैसे हुई, यह बात तो उन्हें जांच के बाद ही पता चलनी थी. चूंकि मामला शहर के हाई प्रोफाइल डा. पाठक से जुड़ा था, इसलिए उन्होंने इस की सूचना पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों को दे दी. उन्होंने फोरैंसिक एक्सपर्ट की टीम भी डा. पाठक के बंगले पर बुला ली.

चूंकि कोरोना महामारी का खौफ पूरे शहर में था, इस वजह से पीपीई किट में पहुंची पुलिस ने जिस बैड रूम में डा. नीरज पाठक का शव पड़ा उस रूम के अलावा पूरे बंगले की जांच की. पोस्टमार्टम में हुआ नया खुलासा पुलिस ने कागजी काररवाई पूरी कर मामला संदिग्ध होने की वजह से शव को पोस्टमार्टम के लिए जिला अस्पताल भेज दिया. एसपी सचिन शर्मा के निर्देश पर 3 डाक्टरों की टीम ने डा. पाठक के शव का पोस्टमार्टम किया. अगले दिन पुलिस के पास जब पोस्टमार्टम रिपोर्ट आई तो पुलिस अधिकारी आश्चर्यचकित रह गए. रिपोर्ट में बताया गया कि डा. पाठक की मौत बिजली का करंट लगने से हुई थी. मौत 24 घंटे से पहले होने का अंदेशा भी जताया गया.

डा. पाठक के अंतिम संस्कार के कुछ दिन तक पुलिस ममता और उस के बेटे नीतेश के बयान नहीं ले सकी, लेकिन पुलिस की शंका की सुई पत्नी ममता पाठक की ओर ही घूम रही थी. इधर ममता पाठक पुलिस को यही बता रही थी कि डा. पाठक पिछले 3 दिनों से बीमार थे, इस कारण उन की मौत हो गई. मौके पर पहुंचे डा. पाठक के रिश्तेदारों ने पुलिस को बताया कि ममता पाठक द्वारा डा. नीरज पाठक को कमरे में बंद कर प्रताडि़त कर उन्हें खाना भी नहीं दिया गया था. डा. पाठक की हत्या के बाद से ही पुलिस इस मामले की तफ्तीश में जुट गई थी. छतरपुर जिले के एसपी सचिन शर्मा ने पुलिस की एक टीम गठित की जिस में टीआई जगतपाल सिंह, एसआई माधवी अग्निहोत्री, गुरुदत्त सेषा, प्रधान आरक्षक हरचरन राजपूत, आरक्षक दिनेश मिश्रा और धर्मेंद्र चतुर्वेदी को शामिल किया गया.

पुलिस टीम ने जांचपड़ताल शुरू की तो पूरे घटनाक्रम की कडि़यां जुड़ती रहीं और इस बात का पुख्ता सबूत मिल गया कि डा. पाठक को उन की पत्नी ने ही मौत के घाट उतारा है. 7 मई 2021 को पुलिस ने ममता पाठक को हिरासत में ले कर पूछताछ की तब ममता पहले तो पुलिस को अलगअलग बयान दे कर गुमराह करती रही, लेकिन एसआई माधवी अग्निहोत्री ने जब उस से सख्ती से पूछताछ की तो मामले का सच सामने आ गया. पूछताछ में पत्नी ममता ने पति की हत्या की जो कहानी बताई, वह रिश्तों को शर्मसार करने वाली निकली. शक की वजह से शुरू हुआ रिश्तों के बिखराव का अंतहीन सिलसिला आखिर पति की मौत का कारण बन गया.

11 साल के वनवास के बाद ममता अपने पति के पास वापस जरूर आ गई थी, लेकिन पतिपत्नी के संबंधों में कड़वाहट खत्म नहीं हुई थी. सनकी मिजाज की ममता के दिमाग में बैठा शक का कीड़ा हमेशा कुलबुलाता रहता था. इसी वजह से ममता की रातों की नींद गायब हो गई थी. जब ममता डा. पाठक को नींद न आने की बात कहती तो डा. पाठक ममता को रात में एक इंजेक्शन लगा देते थे. जिस से ममता को नींद आ जाती थी. खाने में मिला दीं नींद की गोलियां इंजेक्शन के बाद ममता को होश नहीं रहता. जब सुबह उस की नींद खुलती तो उसे यही शक बना रहता कि डा. पाठक उसे बेहोशी का इंजेक्शन दे कर किसी महिला के साथ रंगरलियां मनाते हैं. इस बात को ले कर दोनों में अकसर विवाद होता.

अप्रैल की 29 तारीख को भी इसी बात को ले कर जब विवाद बढ़ गया तो ममता ने डा. पाठक को कमरे में बंद कर दिया. डा. पाठक ने एक वीडियो वायरल कर इस बात की जानकारी अपने एक वकील और रिश्तेदारों को देते हुए शिकायत टीआई जगतपाल को भी व्हाट्सएप द्वारा कर दी. रिश्तेदारों और पुलिस की समझाइश से मामला शांत तो हो गया, लेकिन ममता के मन में अपने पति के प्रति नफरत इस हद तक बढ़ गई कि ममता ने अपने पति को हमेशा के लिए मौत की नींद सुलाने का निश्चय कर लिया. 29 अप्रैल, 2021 को ममता ने डा. पाठक के खाने में नींद की गोलियां मिला दीं और उन के कमरे में भोजन की थाली ले कर पहुंच गई.

डा. पाठक के साथ तमीज से पेश आते हुए उस ने उन से खाना खाने का आग्रह किया. विवाद की वजह से सुबह से भूखेप्यासे रहे डा. पाठक ने खाना खाया. खाना खाने के बाद ही वह गहरी नींद में चले गए. ममता ने सोचा कि नींद की ज्यादा गोलियां खाने से डा. पाठक की मृत्यु हो गई है. इस के बाद डर के मारे उस का बुरा हाल था. ममता यही सोचसोच कर डर रही थी कि कहीं खाने में नींद की गोलियां मिलाने की बात सामने आई तो उस का जेल जाना तय है. इस के बाद उस के मस्तिष्क में एक विचार आया. तब वह नीचे से बिजली का एक्सटेंशन बोर्ड और वायर ले कर उस कमरे में पहुंची जहां पति अचेत अवस्था में पड़े थे, उस बोर्ड से ममता ने पति को काफी देर तक बिजली का करंट लगाया, जिस से डा. नीरज की मौत हो गई.

पति की मौत होने के बाद दूसरे दिन 30 अप्रैल को वह एक प्राइवेट कार में अपने बेटे को ले कर झांसी चली गई. इसी दौरान उस ने एक वीडियो देखा था, जिस में बताया था कि खाने में जहर या नशीली दवा देने के बाद यदि 2 दिन तक शव को रखा रहने दिया जाए तो पोस्टमार्टम में नशीली दवा जहर ट्रैस नहीं होता है. ममता अपने बेटे के साथ शाम को छतरपुर वापस आ कर चुपचाप सो गई. डा. पाठक की डेडबौडी को घर में पड़े जब 2 दिन हो गए तो ममता को पूरी तरह यकीन हो गया कि अब पोस्टमार्टम रिपोर्ट में नशीली दवा की पुष्टि नहीं होगी. इस के बाद पहली मई को उस ने पुलिस को सूचना दी. इसी वजह से पोस्टमार्टम में नशीली दवा देने की बात नहीं आई.

ममता पाठक के बयान के आधार पर पुलिस ने उस के खिलाफ पति की हत्या का मामला दर्ज किया और उस की निशानदेही पर प्रयुक्त बची हुई नींद की गोलियां ममता पाठक के किचन से बरामद कर लीं. बिजली का करंट लगाने में उपयोग किया गया एक्सटेंशन बोर्ड और वायर भी ममता के बेडरूम के दराज से बरामद हुआ. बेटे नीतेश के मानसिक रूप से फिट न होने के कारण उस की संलिप्तता इस घटनाक्रम में साबित नहीं हो सकी. 8 मई, 2021 को ममता को हिरासत में ले कर न्यायालय में पेश किया जहां से उसे छतरपुर जेल भेज दिया गया. शक्की मिजाज बीवी की सनक मिजाजी की वजह से एक उच्च शिक्षित परिवार किस तरह जीवन भर मुश्किलों का सामना करता रहा और अपने पति की कातिल बनी बीवी ममता को उम्र के आखिरी पड़ाव पर जेल की सलाखों के बीच रहने को मजबूर होना पड़ा. MP News

कथा पुलिस सूत्रों पर आधारित

Parivarik Kahani in Hindi : पिता जायदाद बेचना चाहता था तो बेटे और बेटी ने कर दी हत्या

Parivarik Kahani in Hindi : अनुज और उस की बहन अल्पना को लगा कि उन के पिता सुनील कुमार जो कुछ कर रहे हैं, वह उन के भविष्य के लिए ठीक नहीं है. इस से बचने के लिए अल्पना ने अपने प्रेमी संजेश और भाई अनुज के साथ मिल कर जो योजना बनाई, वह…

रात लगभग 2 बजे  पिता सुनील कुमार की चीख सुन कर पहली मंजिल पर सो रहे बेटे अनुज और उस की मां आशा देवी की आंखें खुल गईं. दोनों बदहवास से नीचे उतर कर बरामदे में पहुंचे. देखा बरामदे में सो रहे पिता सुनील कुमार के सिर पर गांव का ही अनवर कुल्हाड़ी से ताबड़तोड़ प्रहार कर रहा है. जब बेटे व पत्नी ने अनवर को रोकने की कोशिश की तो वह जान से मारने की धमकी दे कर वहां भाग गया. अनुज ने देखा पिता की मौत हो चुकी थी. रात के समय पिता की नृशंस हत्या से घर में कोहराम मच गया. शोर सुन कर आसपास के लोग भी आ गए.

अनुज ने उसी समय थाना चित्राहाट में फोन कर घटना की जानकारी दी. यह घटना आगरा के चित्राहाट थाना क्षेत्र के नाहि का पुरा गांव में 25 मार्च, 2021 की रात को हुई थी. सूचना मिलते ही थानाप्रभारी महेंद्र सिंह भदौरिया उसी समय टीम के साथ गांव में जा पहुंचे. उन्होंने अनुज से घटना के बारे में जानकारी ली. इस के बाद उन्होंने घटना की जानकारी एसपी (पूर्वी) अशोक वेंकट को दी. वह भी कुछ ही देर में घटनास्थल पर पहुंच गए. पूछताछ में अनुज ने पुलिस को बताया, रोजाना की तरह पिता रात को बरामदे में चारपाई पर सो रहे थे. जबकि परिवार के अन्य सदस्य ऊपरी मंजिल पर सोए हुए थे.

रात लगभग 2 बजे पिता की चीख सुन कर आंखें खुल गईं. वह और मां दोनों बरामदे की ओर दौड़े. बरामदे में गांव का अनवर जो हमारे परिवार से रंजिश मानता है, पिता के सिर पर कुल्हाड़ी से ताबड़तोड़ प्रहार कर रहा था. उन लोगों ने रोकने का प्रयास किया तो वह जान से मारने की धमकी देता हुआ भाग गया. सिर से निकले खून के छींटों से दीवार भी लाल हो गई थी. अचानक हुए हमले से पिता अपना बचाव नहीं कर सके और उन की मौत हो गई. घटनास्थल की काररवाई करने के बाद पुलिस ने लाश पोस्टमार्टम के लिए भेज दी. घर वालों के अनुसार 21 मार्च को खेत पर अनुज और अनवर के बेटे विजय के बीच विवाद हो गया था.

अनवर ने अपने बेटे विजय का पक्ष लेते हुए अनुज के सिर में ईंट मार दी थी, जिस से सिर से खून बहने लगा. इतना ही नहीं अनवर ने धमकी दी, ‘‘मैं तेरा काल हूं, तेरी बलि चढ़ाऊंगा.’’

घर आ कर अनुज ने पिता सुनील कुमार को घटना की जानकारी दी. इस पर सुनील अपने घायल बेटे को ले कर अनवर के घर पहुंचे. शिकायत करने पर अनवर के घर वालों ने गालीगलौज करने के साथ ही पितापुत्र को जान से मारने की धमकी दी थी. इस के बाद थाना चित्राहाट में घटना की अनवर के विरुद्ध प्राथमिकी दर्ज करा दी थी. लेकिन बाद में गांव के लोगों ने बीच में पड़ कर सुलह करा दी थी. इस के बाद अनवर ने वारदात को अंजाम दे दिया. पीडि़त घर वालों ने पुलिस को बताया कि यदि आरोपी अनवर जल्द गिरफ्तार नहीं किया गया तो अनुज के साथ भी अनहोनी हो सकती है. अनुज की तरफ से अनवर के खिलाफ हत्या का मुकदमा दर्ज करा दिया.

44 वर्षीय सुनील कुमार पूर्व प्रधान रामप्रकाश का बेटा था. सुनील के परिवार में पत्नी आशा देवी के अलावा बेटा अनुज के अलावा 2 बेटियां थीं. परिवार ने अनवर की धमकी को हलके में लिया था. मुकदमा दर्ज करने के बाद पुलिस आरोपी अनवर की तलाश में जुट गई. आरोपी के घर पर दबिश दी गई, लेकिन वह नहीं मिला. फरार आरोपी की गिरफ्तारी के लिए एसपी (पूर्वी) अशोक वेंकट ने पुलिस की टीम का गठन किया. पुलिस टीम में थानाप्रभारी (बाह) विनोद कुमार पवार, थानाप्रभारी (जैतपुर) योगेंद्र पाल सिंह, थानाप्रभारी (चित्राहाट) महेंद्र सिंह भदौरिया, सर्विलांस टीम के प्रभारी नरेंद्र कुमार व उन की टीम को शामिल किया गया.

पुलिस जहां अनवर की गिरफ्तारी का प्रयास कर रही थी, वहीं वह घटना के संबंध में गहराई से जांचपड़ताल में जुटी थी. इस संबंध में पुलिस को गांव वालों ने बताया कि सुनील अय्याश किस्म का व्यक्ति था. गांव के अलावा आसपास के गांवों में कई महिलाओं से उस के अवैध संबंध थे. वह उन पर खूब पैसा खर्च करता था. इस के लिए वह पहले अपनी जायदाद बेच चुका था. हाल ही में उस ने बेटी की शादी के नाम पर कुछ जमीन का सौदा भी कर दिया था. इसी को ले कर घर में क्लेश हो रहा था. सुनील की बेटी व बेटा भी इस बात से नाराज थे. पुलिस का मानना था कि बच्चों के बीच हुए विवाद के बाद जब दोनों पक्षों में सुलह हो गई थी तब अनवर ने सुनील की हत्या क्यों की? और वह भी अकेले. हत्या जैसी घटना को अकेले अनवर अंजाम नहीं दे सकता था.

उस का कोई साथी भी इस में जरूर शामिल होगा. लेकिन मृतक के घर वालों से पूछताछ के साथ ही अनुज ने रिपोर्ट में भी केवल अनवर को ही नामजद किया था. इस बीच आरोपी अनवर की तलाश में जुटी पुलिस की टीमों के हाथ कई अहम सुराग लगे, जिस से वह पुलिस की पकड़ में आ गया. अनवर को पुलिस पकड़ कर थाने लाई. यहां उस से कड़ाई से पूछताछ की गई. पूछताछ में उस ने पुलिस को बताया कि सुनील की हत्या के बाद वह मौके पर पहुंचा था. मृतक का शव चारपाई से उस ने ही उतरवा कर जमीन पर रखवाया था. उस के बाद सुनील के घर वालों की कानाफूसी पर वहां से निकल गया था.

मृतक की पत्नी से भी पुलिस को अहम सुराग मिले थे, जिस से इस हत्याकांड में बेटा व बेटी के लिप्त होने की बात सामने आई थी. पुलिस ने सुनील की हत्या के आरोप में मृतक के बेटे अनुज, बेटी अल्पना के साथ ही अल्पना के प्रेमी संजेश तथा संजेश के दोस्त मदन यादव को 29 मार्च, 2021 को गिरफ्तार कर लिया. पुलिस ने हत्या में शामिल आरोपियों की गिरफ्तारी से पहले उन के खिलाफ पुख्ता सबूत जुटाए और 30 मार्च को सुनील हत्याकांड का परदाफाश कर दिया. चारों आरोपियों ने हत्या में शामिल होने का जुर्म कबूल करते हुए हत्या में प्रयुक्त चारपाई का पाया, जिस से सुनील के सिर को कूंच कर हत्या की गई थी, को एक खेत से हत्यारोपियों की निशानदेही पर बरामद कर लिया.

पुलिस पूछताछ में हत्यारोपियों ने सुनील कुमार की हत्या की जो कहानी बताई, वह चौंकाने वाली थी—

सुनील कुमार अपनी जायदाद  बेचबेच कर अपने शौक पूरे कर रहा था. पिता की हरकतों से परिवार में क्लेश चल रहा था. हाल ही में सुनील ने अपनी 6 बीघा जमीन का 20 लाख रुपए में सौदा किया था. इस बात की जानकारी घर वालों को जैसे ही हुई, उन्होंने इस का कड़ा विरोध किया. ननिहाल वालों को भी इस संबंध में बताया, उन्होंने भी सुनील को समझाया लेकिन उन के समझाने का भी कोई सुनील पर कोई असर नहीं हुआ. इस पर बेटे अनुज और बेटी अल्पना को अपने भविष्य की चिंता सताने लगी. यदि पिता संपत्ति बेचबेच कर इसी तरह बरबाद करते रहे तो परिवार के सामने भूखों मरने की नौबत आ जाएगी. तब दोनों भाईबहनों ने पिता सुनील का पुरजोर विरोध किया तो सुनील ने अनुज और अल्पना के साथ मारपीट कर दी.

संपत्ति के विवाद में आए दिन हो रहे गृह क्लेश के बीच 21 मार्च को गांव में बच्चों के विवाद में अनुज का अनवर से झगड़ा हो गया. इसी घटना को आधार बना कर अनुज और अल्पना ने अपने पिता सुनील की हत्या की योजना बना डाली. अल्पना के पिछले 6 सालों से सूरजनगर गांव के संजेश से प्रेम संबंध थे. उधर सुनील अल्पना की शादी के लिए रिश्ता तलाश रहा था, जबकि अल्पना संजेश से प्यार करती थी और उसी से शादी करना चाहती थी. अनुज और अल्पना ने प्रेमी संजेश के साथ पिता सुनील कुमार की हत्या की साजिश रची. अल्पना ने संजेश को बताया कि पिता को हम दोनों के प्रेम संबंधों का पता चल गया है और वे उस की शादी के लिए रिश्ता तलाश रहे हैं, साथ ही वह अपने शौक पूरा करने के लिए जमीन भी बेच रहे हैं.

यदि उन्होंने इसी तरह सारी जमीन बेच दी तो हमारे लिए कुछ नहीं बचेगा. उन्होंने 20 लाख रुपए में जमीन बेचने का सौदा भी कर लिया है. यदि उन्हें जल्दी से रास्ते से नहीं हटाया गया तो हम लोगों को पछताना पड़ेगा. सुनील ने कुछ दिन पहले अल्पना व अनुज के साथ मारपीट की थी. ये बात संजेश को बुरी लगी थी. तब प्रेमी संजेश ने अपनी प्रेमिका अल्पना की खातिर सुनील को ठिकाने लगाने के लिए अपने गांव के ही दोस्त मदन यादव को तैयार कर लिया. 25 मार्च, 2021 की रात को संजेश की फोन काल पर ही मदन यादव सुनील की हत्या करने के लिए वहां पहुंच गया. रात 2 बजे घर के बरामदे में सो रहे सुनील के सिर पर चारपाई के पाए से ताबड़तोड़ वार कर उस की हत्या कर दी. हत्या को अंजाम देने के बाद संजेश और मदन अपने घर चले गए.

उन के जाने के बाद योजनानुसार अनुज ने शोर मचाया. इस पर आसपास के लोग आ गए. अनुज ने ही पुलिस को फोन पर घटना की जानकारी दी. पुलिस टीम में थानाप्रभारी (बाह) विनोद कुमार पवार, थानाप्रभारी (जैतपुर) योगेंद्र पाल सिंह, थानाप्रभारी (चित्राहाट) महेंद्र सिंह भदौरिया, सर्विलांस टीम के प्रभारी नरेंद्र कुमार व उन की टीम को शामिल किया गया. पुलिस जब चारों आरोपियों अनुज, अल्पना, संजेश और मदन यादव को गिरफ्तार कर न्यायालय ले जा रही थी, तो वे हंस रहे थे. पिता की हत्या के बाद बेटे अनुज और बेटी अल्पना के चेहरे पर कोई शिकन नहीं थी.

पुलिस ने अपनी सूझबूझ से दूध का दूध और पानी का पानी कर एक बेगुनाह अनवर को हत्या के मामले में जेल जाने से बचा लिया. पुलिस ने सुनील के चारों हत्यारोपियों को न्यायालय के समक्ष पेश कर जेल भेज दिया. Parivarik Kahani in Hindi

—कथा पुलिस सूत्रों पर आधारित

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

UP Crime News : जायदाद के लालच में बहू ने सास को जहर का इंजेक्शन देकर मार डाला

UP Crime News : एक ऐसा दिल दहला देने वाला मामला सामने आया है, जिसने समाज को झकझोर कर रख दिया है. जहां एक बहू ने जायदाद के लालच में सास की हत्या कर दी. आइए खोलते हैं इस स्टोरी की हर परत को

यह घटना उत्तर प्रदेश जिले के झांसी की है. जहां 24 जून को सुशीला देवी घर में मृत पाई गई. शुरुआत में मामला पुलिस को डकैती जैसा लगा, लेकिन जैसे जैसे पुलिस ने आगे की जांच की तो सुशीला की हत्या की परतें दर परतें खुलती गई. पुलिस ने जांच में पाया कि सुशील की हत्या उसकी बहू पूजा जाटव ने की है. सास का अंतिम संस्कार होते ही बहू पूजा जाटव अचानक लापता हो गई, जिससे शक और गहराता गया.

इसके बाद पुलिस ने मोबाइल लोकेशन, कॉल रिकॉर्ड, सीसीटीवी से खुलासा हुआ कि सास की हत्याकांड की असली मास्टरमाइंड पूजा जाटव ही निकलती है. पूजा ग्वालियर की रहने वाली है. वह अपनी 18 बीघा जमीन को बेचकर ग्वालियर में बसना चाहती थी. ये सारी जमीन उसके पति कल्याण के नाम पर थी. इसी जमीन में उसका देवर और ससुर उसको हिस्सा देने के लिए भी तैयार थे. लेकिन सास सुशीला देवी जमीन देने को तैयार नहीं थीं और हस्ताक्षर से इनकार कर दिया. इसी नाराजगी में पूजा ने सास की हत्या की साजिश रच डाली.

पुलिस के अनुसार, पूजा ने इस हत्या लिए अपनी बहन कामिनी और उसके प्रेमी अनिल वर्मा को शामिल किया. इसी साजिश तहत 24 जून की शाम तीनों ने सुशीला देवी को जहर का इंजेक्शन दिया, फिर गला घोंटकर मार डाला. फिर हत्या कर तीनों ने करीब 8 लाख के जेवर भी चुराए, ताकि वारदात को डकैती का रूप दिया जा सके. पुलिस ने तीनों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है.

पूछताछ में पूजा ने सास की हत्या की साजिश कबूल की, लेकिन उसका अतीत और चौंकाने वाला निकला. पहले पति से शादी में उसे घरेलू हिंसा झेलनी पड़ी थी. एक झगड़े में पति ने उस पर गोली चला दी थी, जिससे उसकी ज़िंदगी में नया मोड़ आ गया.

यह मामला कोर्ट तक पहुंचा और इसी केस के दौरान पूजा की मुलाकात कल्याण से हुई, जिससे नजदीकियां बढ़ीं और दोनों ने शादी कर ली. छह साल बाद कल्याण की सड़क हादसे में मौत हो गई. इसके बाद पूजा ने कल्याण के बड़ें भाई से अवैध संबंध बना लिए और उसके साथ लिव-इन में रहने लगी. संतोष पहले से ही शादीशुदा था. इसके बाद संतोष की पत्नी ने लगातार इस रिश्ते का विरोध किया और कहा की वह कल्याण की विधवा है, इसी लिए संपत्ति मे आधा हिस्सा मिलना चाहिए.

यह बात सास को मंजूर नहीं थी. उसका मानना था की पूजा का व्यवहार अच्छा नही है. इसी के चलते वह सपंत्ति पर हक जमा रही है.

पुलिस ने जांच के बाद पूजा, कामिनी और अनिल को गिरफ्तार कर लिया गया है. उन पर हत्या, साजिश और डकैती की धाराएं लगाई गई हैं. पुलिस अब अन्य एंगल से भी मामले की जांच कर रही है.UP Crime News

Murder Mystery Story : मछली करी में थैलियम जहर मिलाकर साली और सास को मार डाला

Murder Mystery Story : वहम के शिकार वरुण ने अपनी पत्नी और उस के घर वालों से बदला लेने का जो अनूठा तरीका अपनाया, वह नायाब था. वह अपनी योजना में सफल भी रहा, लेकिन…

बात 31 जनवरी, 2021 की है. वरुण अरोड़ा ने अपनी पत्नी दिव्या को फोन किया, ‘‘दिव्या, आज तुम सब्जी मत बनाना, मैं शाम को आऊंगा तो होटल से तुम सब की पसंद की मछली करी ले कर आऊंगा.’’

रियल एस्टेट कारोबारी वरुण दक्षिणी दिल्ली के ग्रेटर कैलाश पार्ट-1 में रहता था. उस की ससुराल पश्चिमी दिल्ली के इंद्रपुरी  इलाके में थी. उस समय उस की पत्नी दिव्या अपने मायके इंद्रपुरी में थी. इसलिए वरुण ने दिव्या को फोन कर के मछली करी ले कर आने को कहा था. मछली करी दिव्या और उस के मायके वालों को बहुत पसंद थी, इसलिए पति से बात करने के बाद दिव्या ने अपनी मम्मी अनीता से कह दिया कि आज वरुण इधर ही आ रहे हैं. वह होटल से मछली करी ले कर आएंगे. इसलिए आज सब्जी नहीं बनानी. नौकरानी से कह देना कि वह आज केवल रोटी बना दे.

शाम को वरुण अपनी ससुराल के लिए चला तो उस ने एक होटल से सब के लिए मछली करी पैक करा ली. उस की ससुराल में पत्नी के अलावा ससुर देवेंद्र मोहन शर्मा, सास अनीता शर्मा, साली प्रियंका और एक नौकरानी थी. उन सभी के हिसाब से वह काफी मछली करी ले कर आया था. शाम को जब खाना खाने की बारी आई तब अरुण ने कहा कि उस का पेट खराब है, इसलिए वह खाना नहीं खाएगा. दिव्या ने उस से कहा भी कि वह उस के लिए खिचड़ी या और कोई चीज बनवा देगी, लेकिन वरुण ने मना कर दिया. उस ने केवल नींबू पानी पिया. वरुण की लाई मछली करी घर के लोगों को बहुत स्वादिष्ट लगी.

इसलिए सभी ने जी भर कर खाना खाया. वरुण के दोनों बच्चे उस समय तक सो गए थे. रात को वरुण ससुराल में ही सो गया और अगले दिन अपने घर चला गया. इस के 2 दिन बाद दिव्या की मां अनीता को उल्टीदस्त की शिकायत हुई. उन्हें चक्कर भी आने लगे. तबीयत जब ज्यादा खराब होने लगी तब अनीता शर्मा को सर गंगाराम अस्पताल ले जाया गया. वहां भी उन की तबीयत दिनप्रतिदिन बिगड़ती जा रही थी. डाक्टर समझ नहीं पा रहे थे कि आखिर उन्हें हुआ क्या है. हालत गंभीर होती देख उन्हें आईसीयू में शिफ्ट कर दिया गया. इसी बीच अनीता की छोटी बेटी प्रियंका की भी हालत बिगड़ने लगी.

उस का भी पेट खराब हो गया और उल्टियां होने लगीं. साथ ही उस का सिर भी घूम रहा था. प्रियंका को राजेंद्र प्लेस के पास स्थित बी.एल. कपूर अस्पताल में एडमिट करा दिया गया. उधर ससुराल वालों की तबीयत खराब होने से वरुण मन ही मन खुश था, क्योंकि उस ने जो प्लान बनाया था वह सफल हो रहा था. 4-5 दिन बाद उस की पत्नी दिव्या को भी वही शिकायत होने लगी, जो उस की मां और बहन को हुई थी. दिव्या को भी सर गंगाराम अस्पताल में भरती करा दिया गया. वरुण द्वारा लाई गई मछली करी उस की ससुराल के जिन लोगों ने खाई थी, उन सब की हालत बिगड़ने लगी. ससुर देवेंद्र मोहन शर्मा की भी अचानक तबीयत खराब हो गई.

इस के अलावा घर की नौकरानी का भी यही हाल हुआ तो उसे भी डा. राम मनोहर लोहिया अस्पताल में भरती करा दिया गया. परिवार के सभी लोगों का अलगअलग अस्पतालों में इलाज चल रहा था. इसी बीच बी.एल. कपूर अस्पताल में भरती वरुण की साली प्रियंका की 15 फरवरी, 2021 को इलाज के दौरान मौत हो गई. रिश्तेदार इसे फूड पौइजनिंग का मामला मान रहे थे. इसलिए उन्होंने इस की शिकायत पुलिस में न कर के उस का अंतिम संस्कार कर दिया. हालांकि वरुण अस्पताल में ससुराल के सभी लोगों की देखरेख कर रहा था, लेकिन अंदर ही अंदर वह खुश था क्योंकि उस का प्लान पूरी तरह सफल हो गया था.

उधर सर गंगाराम अस्पताल में लाई गई अनीता की भी 22 मार्च, 2021 को मृत्यु हो गई. डाक्टरों ने जब उन के यूरिन और ब्लड की जांच की तो उस में थैलियम नाम का एक जहरीला रसायन पाया गया. डाक्टर समझ गए कि किसी ने उन्हें थैलियम जहर दे कर मारा है. अस्पताल द्वारा इस की सूचना पुलिस को दे दी गई. पुलिस  ने डाक्टरों से बात की तो उन्हें भी यह मामला संदिग्ध लगा. अनीता इंद्रपुरी में रहती थी, इसलिए इस की सूचना इंद्रपुरी थाने के थानाप्रभारी सुरेंद्र कुमार को दी गई थी. वह तुरंत अस्पताल पहुंच गए. थानाप्रभारी ने जब डाक्टर से बात की तो पता चला कि थैलियम एक अलग तरह का जहरीला रसायन होता है, जिस का असर बहुत धीरेधीरे होता है.

इस के अलावा इस रसायन की एक खास बात यह है कि इस में किसी तरह की गंध और स्वाद नहीं होता. यह रंगहीन और गंधहीन होता है. यह जानकारी मिलने के बाद थानाप्रभारी समझ गए कि जरूर इस मामले में कोई गहरी साजिश है. उन्होंने छानबीन की तो पता चला कि 15 फरवरी को अनीता की छोटी बेटी प्रियंका की भी बी.एल. कपूर अस्पताल में इलाज के दौरान मृत्यु हो गई थी. पुलिस ने बी.एल. कपूर अस्पताल के डाक्टरों से मुलाकात की तो उन्होंने बताया कि प्रियंका के शरीर में भी थैलियम के लक्षण पाए गए थे. इस के अलावा इस परिवार के अन्य सदस्य यानी अनीता की बड़ी बेटी दिव्या और अनीता के पति देवेंद्र मोहन शर्मा और नौकरानी भी अस्पताल में भरती थे.

इस से पुलिस समझ गई कि किसी ने गहरी साजिश के तहत पूरे परिवार को अपना शिकार बनाने की कोशिश की थी. थानाप्रभारी ने इस की सूचना एसीपी विजय सिंह को दी. अब यह मामला जिले के पुलिस अधिकारियों तक पहुंच चुका था. डीसीपी के निर्देश पर एसीपी विजय सिंह ने इंद्रपुरी के थानाप्रभारी सुरेंद्र सिंह और मायापुरी के इंसपेक्टर प्रमोद कुमार को इस मामले की जांच में लगा दिया. पुलिस ने देवेंद्र मोहन शर्मा और उन की बेटी दिव्या का इलाज कर रहे डाक्टरों से  फिर से बात की. इस के अलावा उन्होंने डा. राम मनोहर लोहिया अस्पताल में भरती उन की नौकरानी का इलाज कर रहे डाक्टरों से भी मुलाकात की. पुलिस को पता चला कि उपचाराधीन इन मरीजों के अंदर भी थैलियम रसायन पाया गया है.

अनीता के शव का डा. राम मनोहर लोहिया अस्पताल में पोस्टमार्टम कराया गया. पुलिस ने वहां के डाक्टरों से इस की डिटेल्ड एटौप्सी रिपोर्ट ली. उस में बताया गया कि अनीता के शरीर में थैलियम था. अब तक की जांच से पुलिस को यह पता लग चुका था कि परिवार के सभी लोगों को कोई ऐसी चीज खिलाई गई थी, जिस में थैलियम रसायन मिला हुआ था. वह चीज क्या थी और किस ने खिलाई, यह जांच का विषय था. इस परिवार का दामाद वरुण ही अस्पताल में उन सब की देखभाल कर रहा था. वरुण के चेहरे से सास और साली की मौत का गम साफ झलक रहा था. इस के अलावा वह डाक्टरों से लगातार अपनी पत्नी दिव्या और ससुर को बचाने की गुहार भी कर रहा था.

पुलिस को अपनी जांच आगे बढ़ानी थी, इसलिए पुलिस ने वरुण से इस बारे में पूछताछ की. वरुण ने पुलिस को बताया कि वह तो अपने घर ग्रेटर कैलाश में रहता है. ससुराल के सभी लोगों को अचानक क्या हो गया, इस की उसे कोई जानकारी नहीं है. पुलिस को केस की तह तक जाना था, इसलिए वह वरुण को ग्रेटर कैलाश पार्ट-1 में स्थित उस के घर पर ले गई. निशाने पर वरुण पुलिस ने उस के घर की तलाशी ली तो एक गिलास में कुछ संदिग्ध चीज  दिखी. पुलिस ने वह गिलास अपने कब्जे में ले लिया और गिलास में क्या है, यह जानने के लिए उसे फोरैंसिक जांच के लिए भेज दिया. उस गिलास के अलावा पुलिस को वरुण के घर से अन्य कोई संदिग्ध चीज नहीं मिली.

पुलिस यह तो अच्छी तरह जान चुकी थी कि जिस ने भी इस परिवार को जहरीला पदार्थ दिया है, वह विश्वस्त होगा और उस का इन के घर आनाजाना भी रहा होगा. लिहाजा पुलिस ने देवेंद्र मोहन शर्मा के घर पर जो लोग आतेजाते थे, उन से एकएक कर पूछताछ शुरू कर दी. पुलिस बहुत तेजी के साथ जांच कर रही थी. उधर फोरैंसिक जांच से पता चला कि वरुण के यहां से गिलास में जो चीज बरामद की गई थी, वह थैलियम नाम का जहरीला पदार्थ ही था. यह जानकारी मिलने के बाद वरुण पुलिस के शक के दायरे में आ गया. लिहाजा पुलिस ने उस से सख्ती से पूछताछ की. आखिर वरुण ने सच उगल ही दिया. उस ने स्वीकार कर लिया कि उस ने ही अपनी ससुराल के लोगों को थैलियम जहर दिया था. उन सभी का नामोनिशान मिटाने की वरुण ने जो कहानी बताई, वह हैरतअंगेज थी.

रियल एस्टेट कारोबारी वरुण ने करीब 12 साल पहले दिव्या से शादी की थी. दिव्या उस के साथ बहुत खुश थी. वरुण का कारोबार अच्छा चल रहा था, इसलिए दिव्या को कोई परेशानी नहीं थी. जीवन हंशीखुशी से चल रहा था. लेकिन बाद में उन के जीवन में एक समस्या खड़ी हो गई. समस्या यह कि शादी के कई साल बाद भी दिव्या मां नहीं बन पाई. वरुण ने डाक्टरों से उस का इलाज भी कराया, लेकिन उस के घर में किलकारी नहीं गूंजी. जब पतिपत्नी हर तरफ से हताश हो गए, तब उन्होंने शादी के करीब 7 साल बाद आईवीएफ प्रोसेस का सहारा लिया. इस का सही परिणाम निकला और दिव्या ने जुड़वां बच्चों को जन्म दिया. जिस में एक बेटी थी और एक बेटा.

अब उन के घर में एक नहीं, बल्कि 2-2 बच्चों की किलकारियां गूंजने लगीं. उन की खुशी का कोई ठिकाना नहीं था. जुड़वां बच्चे होने के बाद दिव्या के मायके वाले भी बहुत खुश थे. दिव्या दोनों बच्चों की सही देखभाल कर रही थी. वक्त के साथ बच्चे करीब 4 साल के हो गए. लगभग एक साल पहले वरुण के पिता की अचानक मौत हो गई. पिता की मौत के बाद वरुण की गृहस्थी में एक ऐसी समस्या ने जन्म ले लिया, जिस ने न सिर्फ वरुण के बल्कि वरुण की ससुराल वालों के जीवन को उजाड़ दिया. बेटे के रूप में बाप की वापसी की चाहत हुआ यह कि पिता की मौत के बाद दिव्या फिर से प्रैगनेंट हो गई. इस से वरुण बहुत खुश था.

वह सोच रहा था कि उस की पत्नी की कोख में उस के पिता ही आए हैं. वह पत्नी की अच्छी तरह से देखभाल करने लगा. उधर जिस महिला डाक्टर के पास  दिव्या अपना चैकअप कराने जाती थी, उस ने दिव्या से कहा कि इस बार उस का प्रैग्नेंट होना उस के स्वास्थ्य के लिए ठीक नहीं है. किसी तरह उस ने बच्चे को जन्म दे भी दिया तो उस का बच पाना मुश्किल होगा. दिव्या ने यह बात वरुण को बताई तो उस ने उस की बात पर विश्वास नहीं किया. वरुण ने कहा कि डाक्टर झूठ बोल रही है. ऐसा कुछ नहीं होगा. वह उसे और होने वाले बच्चे को कुछ नहीं होने देगा. वरुण ने अबौर्शन कराने से साफ मना कर दिया.

उस ने कहा कि बच्चे के रूप में उस के पिता आ रहे हैं, इसलिए वह किसी भी सूरत में उस का गर्भपात नहीं कराएगा. दिव्या ने डाक्टर वाली बात अपने मायके में बताई तो उस की मां अनीता ने कहा कि यदि उस का गर्भपात नहीं कराएगा तो वह खुद उस के साथ जा कर उस का गर्भपात करा देगी . क्योंकि बेटी की जिंदगी का सवाल है. बेटी जीवित रहेगी तो बच्चा कभी भी हो जाएगा. एक दिन वरुण की सास ने वरुण को अपने घर बुला कर समझाया कि जब डाक्टर बच्चा पैदा करने के लिए मना कर रही है तो ऐसे में उस का गर्भपात कराना ही बेहतर है. लेकिन वरुण अपनी जिद पर अड़ा था.

उस ने कहा कि वह किसी भी सूरत में उस का गर्भपात नहीं होने देगा. इस बात पर उन की आपस में खटपट भी हो गई. इतना ही नहीं, उस दिन ससुराल में वरुण की काफी बेइज्जती भी हुई. वरुण की सास अनीता भी अपनी जिद पर अड़ी थी. उस ने वरुण की इच्छा के खिलाफ दिव्या का गर्भपात करा दिया. यह बात वरुण को बहुत बुरी लगी. उस ने सोचा कि उस की सास ने बच्चे का नहीं, बल्कि गर्भ में पल रहे उस के पिता को मारा है. उसी समय वरुण ने तय कर लिया कि वह अपनी बेइज्जती करने वालों और गर्भपात कराने वाले अपने ससुरालियों को सबक सिखा कर रहेगा. इस के बाद वरुण ससुराल वालों को सबक सिखाने के उपाय खोजने लगा. वह ऐसी तरकीब खोज रहा था, जिस से काम भी हो जाए और उस पर कोई शक भी न करे. इस बारे में वह इंटरनेट और यूट्यूब पर भी सर्च करता था.

खतरनाक रसायन थैलियम इसी दौरान उसे थैलियम नामक जहरीले रसायन के बारे में जानकारी मिली. थैलियम एक ऐसा जहर होता है कि यह जिस व्यक्ति को दिया जाता है उसे शुरुआत में उल्टीदस्त, जी मिचलाने की शिकायत होती है और जल्दी ही उस की मृत्यु हो जाती है. क्योंकि मृत व्यक्ति के शरीर पर जहर जैसे कोई भी लक्षण नहीं मिलते, इसलिए लोग यही समझते हैं कि उस की मौत फूड पौइजनिंग की वजह से हुई है. यह जानकारी मिलने के बाद वरुण ने थैलियम रसायन पाने की कोशिश शुरू कर दी. आदमी कोशिश करे तो बेहतर रिजल्ट निकल ही आता है. यही वरुण के साथ भी हुआ. इस खोजबीन में उसे पंचकूला की एक लैबोरेटरी का पता चला.

उस ने वहां औनलाइन संपर्क कर रिसर्च के नाम पर थैलियम मंगा लिया. अब उस का मकसद किसी तरह इसे अपने ससुराल वालों को खिलाना था. इस के लिए उस ने सब से पहले अपने ससुराल वालों से संबंध सामान्य करने शुरू किए क्योंकि पत्नी का गर्भपात कराने के बाद उन से उस के संबंध बिगड़ गए थे. इस साल जनवरी के अंतिम सप्ताह में वरुण की पत्नी दिव्या अपने दोनों बच्चों के साथ मायके गई हुई थी. अब तक ससुराल वालों से वरुण के संबंध नौर्मल हो चुके थे. वह फिर से ससुराल आनेजाने लगा था. वरुण को पता था कि उस की ससुराल के लोगों को मछली करी बहुत पसंद है.

योजना के अनुसार वरुण ने 31 जनवरी, 2021 को पत्नी दिव्या को फोन कर के कह दिया कि वह आज होटल से मछली करी ले कर आएगा, इसलिए घर पर सब्जी न बनवाए. दिव्या ने यह बात अपनी मम्मी अनीता को बता दी. जिस से उस दिन उन लोगों ने अपनी नौकरानी से केवल रोटियां ही बनवाई थीं. योजना के अनुसार, वरुण ने एक होटल से मछली करी खरीदी और उस में थैलियम मिला दिया. फिर मछली करी ले कर ससुराल पहुंच गया. अपनी तबीयत खराब होने का बहाना बना कर उस ने उस दिन ससुराल में खाना नहीं खाया. घर की नौकरानी सहित ससुराल के सभी लोगों ने मछली करी खाई, जिस से जहरीला रसायन थैलियम उन सब के शरीर में पहुंच गया और उस ने धीरेधीरे अपना असर दिखाना शुरू कर दिया.

इस के बाद उन लोगों की तबीयत खराब होने लगी तो उन सभी को अस्पताल में भरती कराया गया. वरुण के दोनों बच्चे उस के पहुंचने से पहले ही खाना खा कर सो गए थे, जिस से वे बच गए. वरुण अस्पताल में देखभाल करने का नाटक इसलिए कर रहा था ताकि उस पर कोई शक न करे, लेकिन पुलिस जांच में उस की साजिश उजागर हो गई. वरुण अरोड़ा से पूछताछ के बाद पुलिस ने उसे न्यायालय में पेश किया, जहां से उसे जेल भेज दिया गया. कथा लिखने तक वरुण के ससुर देवेंद्र मोहन शर्मा और नौकरानी की हालत गंभीर बनी हुई थी. जबकि दिव्या की 8 अप्रैल को मौत हो गई. पुलिस जांच में पता चला कि दिल्ली में थैलियम रसायन दे कर किसी को मारने का यह पहला मामला है. Murder Mystery Story

—कथा पुलिस सूत्रों पर आधारित

 

Family Crime : मां ने ही बेटे को उतारा मौत के घाट, वजह जानकर रह जाएंगे दंग

Family Crime :  कहते हैं पूत कपूत भले बन जाए, लेकिन माता कभी कुमाता नहीं बनती. लेकिन एकलौते बेटे जितेंद्र के अत्याचारों ने आखिर गीता देवी को कुमाता बनने के लिए मजबूर कर ही दिया…

राजस्थान के भरतपुर जिले और उत्तर प्रदेश के मथुरा जिले की सीमाएं एकदूसरे से सटी हुई हैं. इसी सीमा पर भरतपुर जिले की ग्राम पंचायत जाटौली रथभान का गांव कोलीपुरा बसा हुआ है. इसी साल 21 मार्च की बात है. पौ फट गई थी, लेकिन सूरज निकलने में अभी देर थी. कुछ लोग खेतों की तरफ जा रहे थे, तभी उन्होंने कोलीपुरा गांव के पास एक खेत में एक युवक का शव पड़ा देखा. कुछ लोगों ने शव के पास जा कर देखा. वहां शराब की बोतल, गिलास, नमकीन और पानी के पाउच पड़े थे.

खेत में लाश मिलने की बात जल्दी ही आसपास के गांवों में फैल गई. इस के बाद कोलीपुरा समेत दूसरे गांवों के लोग भी मौके पर जमा हो गए. किसी गांव वाले ने पुलिस को इस की सूचना दे दी. सूचना मिलने पर भरतपुर जिले की चिकसाना थाना पुलिस मौके पर पहुंच गई. पुलिस ने लाश का मुआयना किया. करीब 25 साल के उस युवक की कनपटी पर गोली लगी हुई थी. लग रहा था कि उसे नजदीक से गोली मारी गई थी. पुलिस ने वहां इकट्ठा लोगों से मृतक युवक के बारे में पूछताछ की. लोगों ने शव देख कर उस की शिनाख्त कर ली. उस का नाम जितेंद्र उर्फ टल्लड़ था. वह मथुरा जिले के ओल गांव के रहने वाले नत्थी सिंह का बेटा था.

एकलौता बेटा था जितेंद्र कोलीपुरा गांव में जिस जगह जितेंद्र की लाश मिली थी, वह जगह उस के गांव से करीब दोढाई किलोमीटर ही दूर थी. उस जगह से कुछ ही दूरी पर शराब का ठेका भी था. पुलिस ने मौके पर मौजद कोलीपुरा गांव के लोगों से पूछताछ की. इस में पता चला कि एक दिन पहले यानी 20 मार्च की शाम को 7-8 बजे के आसपास गांव वालों ने 3-4 युवकों को उस जगह देखा था. गांव वालों से पूछताछ में जो बातें पता चलीं, उस से पुलिस ने अंदाजा लगाया कि जितेंद्र अपने दोस्तों के साथ रात में खाली खेत में शराब पी रहा होगा. इस दौरान किसी बात पर उन दोस्तों में झगड़ा हो गया होगा. झगड़े में ही किसी ने उसे गोली मार दी होगी. गोली पास से मारी गई, जो उस की आंख के नीचे कनपटी पर धंस गई.

लाश की शिनाख्त हो गई थी. मृतक जितेंद्र का गांव भी वहां से ज्यादा दूर नहीं था. इसलिए थानाप्रभारी ने एक सिपाही ओल गांव भेज कर उस के घर वालों को मौके पर बुला लिया. घर वालों ने लाश की शिनाख्त जितेंद्र के रूप में कर दी. उन्होंने पुलिस को बताया कि जितेंद्र कल शाम को आसपास घूमने जाने की बात कह कर घर से निकला था. इस के बाद वह रात को घर नहीं लौटा. रात को उस की तलाश भी की, लेकिन पता नहीं चला. पुलिस ने जितेंद्र के घर वालों से जरूरी पूछताछ की. इस के बाद लाश पोस्टमार्टम के लिए सरकारी अस्पताल भिजवा दी. पोस्टमार्टम कराने के बाद उसी दिन पुलिस ने लाश जितेंद्र के घर वालों को दे दी.

एकलौते जवान बेटे जितेंद्र की लाश देख कर उस की मां गीता दहाड़े मार कर रोने लगी. जितेंद्र की मौत से दुखी दोनों बहनों और बहनोइयों की आंखों से भी आंसू थमने का नाम नहीं ले रहे थे. जवान मौत का गम तो पूरे गांव को था. फिर वे तो घर के लोग थे. उन का रोना, विलाप करना स्वाभाविक था. मृतक के चाचा राधाचरण ने जितेंद्र की हत्या का मामला भरतपुर जिले के चिकसाना पुलिस थाने में दर्ज करा दिया. थानाप्रभारी रामनाथ सिंह गुर्जर ने इस मामले की जांच खुद अपने हाथ में ले ली. पुलिस ने शुरू की जांच मृतक जितेंद्र के पिता नत्थी सिंह की मौत हो चुकी थी. जितेंद्र शादीशुदा था. करीब 9 महीने पहले उस की शादी ज्योति से हुई थी. ज्योति के साथ वह खुश था.

पतिपत्नी में किसी तरह की कोई अनबन नहीं थी. दोनों का दांपत्य जीवन सुखी था. परिवार में केवल 2 ही प्राणी थे. जितेंद्र की मां गीता और उस की पत्नी ज्योति. पुलिस ने इन दोनों से पूछताछ की, लेकिन न तो कातिलों के बारे में कुछ पता चला और न ही कत्ल के कारण का राज सामने आया. पुलिस ने ओल गांव के लोगों से भी पूछताछ की, लेकिन कोई खास बात पता नहीं चली. यह बात जरूर पता चली कि जितेंद्र के घर उस की 2 शादीशुदा बहनों और बहनोइयों का आनाजाना रहता था. पुलिस ने दोनों बहनोइयों विपिन और सुनील से भी पूछताछ की, लेकिन जितेंद्र की हत्या के बारे में ऐसा कोई सुराग नहीं मिला, जिस से कातिलों तक पहुंचा जा सके.

जांचपड़ताल में मृतक जितेंद्र की किसी से दुश्मनी या खराब चालचलन की बात भी सामने नहीं आई. यह पता चला कि जितेंद्र शराब पीने का आदी था. शराब पी कर वह घर में क्लेश और अपनी मां से मारपीट करता था. जितेंद्र के घर वालों और गांव वालों से पूछताछ में कोई बात पता नहीं चलने पर पुलिस ने ओल गांव से कोलीपुरा तक 2 किलोमीटर के दायरे में लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज देखने का फैसला किया. सीसीटीवी फुटेज में एक पलसर बाइक पुलिस के संदेह के दायरे में आई. पुलिस ने नंबरों के आधार पर इस बाइक के मालिक का पता लगाया. इस के बाद पुलिस ने महेंद्र ठाकुर को पकड़ा. वह मथुरा जिले के फरह थानांतर्गत परखम गांव का रहने वाला है.

किराए के हत्यारे ने उगला राज सख्ती से पूछताछ में महेंद्र ठाकुर ने जितेंद्र की हत्या का राज उगल दिया. उस ने जो बताया, उस से पुलिस को भी एक बार तो भरोसा नहीं हुआ कि कोई मां भी अपने बेटे को मरवा सकती है. पुलिस ने महेंद्र ठाकुर को गिरफ्तार कर लिया. उस से पूछताछ के आधार पर मृतक के बहनोई विपिन को भी गिरफ्तार कर लिया. विपिन मथुरा जिले के फरह थाना इलाके के गांव सनोरा का रहने वाला है. विपिन से पूछताछ के बाद पुलिस ने पहली अप्रैल को जितेंद्र की मां गीता देवी को भी गिरफ्तार कर लिया. इन से पूछताछ में जो कहानी उभर कर सामने आई, वह एक मां की अपनी कोख से पैदा किए एकलौते बेटे के प्रति नफरत की इंतहा की कहानी है.

मथुरा जिले के ओल गांव के रहने वाले नत्थी सिंह के परिवार में उस की पत्नी गीता देवी के अलावा 2 बेटियां और एक बेटा था. नत्थी के पास खेतीबाड़ी थी. इस से अच्छी गुजरबसर हो जाती थी. घरपरिवार में मौज थी. किसी तरह की कोई कमी नहीं थी. नत्थी सिंह की कुछ साल पहले मृत्यु हो गई. गीता देवी पर परिवार की जिम्मेदारी आ गई. दोनों बेटियां जवान हो रही थीं. इसलिए उसे उन के हाथ पीले करने की ज्यादा फिक्र थी. रिश्तेदारों से पूछ परखने के बाद उस ने अपनी दोनों बेटियों की शादी पास के ही गांव सनोरा में एक ही परिवार में तय कर दी. सनोरा गांव भी मथुरा जिले के फरह थाना इलाके में आता है. गीता ने सनोरा गांव के रहने वाले विपिन से बड़ी बेटी की शादी कर दी और विपिन के छोटे भाई सुनील से छोटी बेटी की शादी कर दी.

बेटियों की शादी के बाद गीता देवी के सिर से एक बोझ सा उतर गया. उस की आधी चिंता खत्म हो गई. दोनों बेटियां पास के ही गांव में ब्याही थीं, इसलिए उन का जब मन होता, मां गीता के पास आ जाती थीं. गीता का दोनों बेटियों से ज्यादा मोह था. इसलिए बेटी या जमाई आते तो वह खुले हाथ से उन पर पैसे खर्च करती थी. उन्हें दान या शगुन देने में कोई कंजूसी नहीं करती थी. कभी कोई दुखतकलीफ होती तो गीता फोन कर दोनों में से किसी भी बेटी को अपने पास बुला लेती. 2-4 दिन रुक कर वे चली जातीं. गीता का मन अपनी बेटियों में ज्यादा लगता था. होने को तो वे जितेंद्र की ही बहनें थी, लेकिन मां का बेटियों के प्रति लाडप्यार देख कर जितेंद्र को कोफ्त होती थी.

शराब पी कर कलह करता था जितेंद्र जितेंद्र शराब पीता था. उस की इस बुरी लत पर मां टोकती थी. बहनें जब घर पर होतीं, तो वे भी जितेंद्र को लताड़ लगाती थीं. मां और बहनों के टोकने पर उसे बुरा लगता था. ऐसा 1-2 बार नहीं, बीसियों बार हुआ. धीरेधीरे जितेंद्र के मन में मां और बहनों के प्रति गुस्सा बढ़ने लगा. शराब पीने के बाद जितेंद्र कई बार अपनी मां से मारपीट करने लगा. पहले तो मां और बहनबहनोइयों ने उसे समझाया, लेकिन उस के दिमाग में यह बात बैठ गई कि मां उस से ज्यादा प्यार दोनों बहनों को करती है. इस से जितेंद्र के मन में हीनभावना बढ़ती गई.

वह मां की बातों पर ऐतराज जताने लगा. मां जब अपनी बेटियों और जमाई को पैसे या कोई सामान देती तो जितेंद्र को बुरा लगता था. वह घर में मां से झगड़ा करता और उसे पीटता था. बुढ़ापे की ओर बढ़ रही गीता बेटे की रोजरोज की पिटाई को आखिर कब तक बरदाश्त करती. घर में हालत यह हो गए कि मां और बेटा दोनों एकदूसरे से नफरत करने लगे. दोनों नफरत की आग में जलते थे. जितेंद्र तो अपनी नफरत की आग को मां की पिटाई कर शांत कर लेता था, लेकिन गीता क्या करती? वह जवान बेटे का मुकाबला भी नहीं कर सकती थी. एक दिन गीता ने अपने बड़े जमाई विपिन को घर बुला कर सारी बातें बताईं. विपिन को पहले से ही अपने साले जितेंद्र की सारी हरकतों के बारे में पता था.

विपिन को यह भी पता था कि जितेंद्र को समझानेबुझाने का कोई फायदा नहीं है. उस ने अपनी सास को कोई न कोई रास्ता निकालने का भरोसा दिया और यह सुझाव दिया कि जितेंद्र की शादी कर दी जाए. हो सकता है शादी के बाद वह सुधर जाए. गीता को भी यह बात ठीक लगी. उस ने रिश्ता ढूंढ कर पिछले साल जितेंद्र की शादी कर दी. ज्योति से उस की शादी धूमधाम से हो गई. गीता ने सोचा था कि शादी के बाद बेटा सुधर जाएगा. शादी का लड्डू खा कर जितेंद्र ज्योति के साथ खुश था. इसी हंसीखुशी के बीच, शादी के कुछ समय बाद ही ज्योति गर्भवती हो गई.

मां ने कराया गर्भपात ज्योति के गर्भवती होने से जितेंद्र खुश था, लेकिन गीता के मन में इस की जरा भी खुशी नहीं थी. बेटे के अत्याचारों से नफरत की आग में सुलगती गीता नहीं चाहती थी कि घर में कोई नया वारिस आए. इसलिए उस ने बहू ज्योति को भरोसे में ले कर उस का ढाई महीने का गर्भपात करा दिया. दरअसल, गीता के पास करीब 50 लाख रुपए की संपत्ति थी. यह संपत्ति वह अपनी दोनों बेटियों को देना चाहती थी. बेटे जितेंद्र को संपत्ति में से फूटी कौड़ी भी नहीं देना चाहती थी. जितेंद्र जब गीता को पीटता था, तो वह कई बार यह बात कह चुकी थी. जितेंद्र को भी इस का अंदेशा था कि पैतृक संपत्ति में से मां उसे कुछ नहीं देगी. इसीलिए वह मां पर अत्याचार और अपनी बहनों का विरोध करता था.

शादी के बाद भी बेटा जितेंद्र नहीं सुधरा. वह अपनी मां पर अत्याचार करता रहा, तो गीता उस से तंग आ गई. उस ने अपने बड़े जमाई विपिन के साथ मिल कर जितेंद्र की रोजरोज की पिटाई से छुटकारा पाने के लिए उस का काम तमाम करने की योजना बनाई. विपिन को इस में अपना फायदा नजर आया. एक तो जितेंद्र मां के लाडप्यार के कारण अपनी बहनों से भी नफरत करता था. इसलिए विपिन ने सोचा कि यदि जितेंद्र नाम का कांटा निकल जाएगा तो नफरत की झाड़ी हमेशा के लिए कट जाएगी. फिर सास गीता भी बेटे की रोज की पिटाई से बच जाएगी. इस के अलावा गीता की संपत्ति भी उस के हाथ में आ जाएगी.

विपिन ने अपनी सास के भरोसे का फायदा उठाया. योजना के तहत, उस ने सास का खाता अपने नजदीकी बैंक में ट्रांसफर करवा लिया और खुद नौमिनी बन गया. गीता के बैंक खाते में करीब 7 लाख रुपए थे. गीता ने विपिन की मदद से इसी साल जनवरी महीने में मथुरा जिले के कुख्यात सुपारी किलर छविराम ठाकुर के गैंग को अपने बेटे जितेंद्र की हत्या की 3 लाख रुपए की सुपारी दे दी. उसी दिन एडवांस के रूप में उसे 50 हजार रुपए भी दे दिए. छविराम ठाकुर ने अपनी गैंग के शार्पशूटर महेंद्र ठाकुर को जितेंद्र की हत्या का जिम्मा सौंप दिया.

मां ही बनी हत्यारिन योजनाबद्ध तरीके से महेंद्र ठाकुर ने शराब पिलाने के बहाने जितेंद्र से दोस्ती की. इस के बाद 20 मार्च की शाम महेंद्र ने जितेंद्र को बुलाया. महेंद्र के साथ एकदो लोग और भी थे. उन्होंने कोलीपुरा गांव के पास ठेके से शराब खरीदी. इन सभी ने पास ही एक खाली खेत में बैठ कर शराब पी. रात करीब 8-साढ़े 8 बजे शराब का दौर खत्म हुआ तो जितेंद्र ने अपने घर जाने की बात कही. महेंद्र ने उसे पकड़ कर वापस बैठा लिया और तमंचा निकाल कर उस की कनपटी पर गोली मार दी. जितेंद्र कुछ बोलता, उस से पहले ही उस के प्राण निकल गए.

सीसीटीवी फुटेज के आधार पर महेंद्र ठाकुर की गिरफ्तारी के बाद पुलिस ने जितेंद्र की हत्या के मामले में उस के बहनोई विपिन और मां गीता को भी गिरफ्तार कर लिया. गीता को अपने ही बेटे की हत्या कराने का कतई मलाल नहीं था. उस ने कहा, ‘‘मैं ने उसे जनम दिया और मैं ने ही उसे मरवा दिया, इस का कोई अफसोस नहीं है. पति की मौत के बाद दोनों बेटियां ही मेरा खयाल रखती थीं. बेटा तो रोज पैसे मांगता और मारपीट करता था. कभी बेटियां मेरे पास आ जातीं, तो वह उन का विरोध करता था.

‘‘वह मेरे बैंक खाते और सारी संपत्ति का अकेला ही मालिक बनना चाहता था. मैं ने उसे कई बार समझाया, लेकिन वह किसी भी कीमत पर दोनों बहनों को स्वीकार नहीं करता था. मैं उस की रोजरोज की कलह से तंग आ गई थी. इसलिए उसे रास्ते से हटाना ही उचित समझा. कोई नया वारिस न आए, इसलिए बहू ज्योति का भी गर्भपात करा दिया.’’ सभी आरोपियों से पूछताछ करने के बाद पुलिस ने उन्हें कोर्ट में पेश कर जेल भेज दिया. Family Crime

family story hindi : पति की प्रताड़ना से टूट चुकी पत्नी ने 5वीं मंजिल से लगाई छलांग

family story hindi : इंजीनियरिंग की कोचिंग करते समय ही शुभम और रजनी को प्यार हो गया था. लेकिन उन्होंने शादी नौकरी लग जाने के बाद की. ससुराल जाने के बाद रजनी को शुभम का जो रूप देखने को मिला, उस की उस ने कल्पना तक नहीं की थी. इस के बाद जो भयावह मंजर सामने आया वह…

23 मार्च, 2021 की शाम 5 बजे चकेरी थानाप्रभारी दधिबल तिवारी को सूचना मिली कि चंदारी स्थित 60 साइंटिस्ट हौस्टल की पांचवीं मंजिल से कूद कर रक्षा शोध संस्थान की अवर अभियंता रजनी त्रिपाठी ने खुदकुशी कर ली है. यह खबर उन्हें कृष्णानगर चौकी इंचार्ज आर.जे. गौतम द्वारा मिली थी. चूंकि मौत का यह मामला हाईप्रोफाइल था, अत: थानाप्रभारी सूचना मिलते ही घटनास्थल के लिए रवाना हो गए. जाने से पहले उन्होंने पुलिस अधिकारियों को भी सूचना दे दी थी. दधिबल तिवारी पुलिस बल के साथ चंदारी स्थित 60 साइंटिस्ट हौस्टल पहुंचे तो वहां कर्मचारियों की भीड़ जुटी थी. जेई रजनी त्रिपाठी का शव हौस्टल के बाहर खून से तरबतर पड़ा था.

उन का सिर फट गया था और शरीर के अन्य भाग चकनाचूर हो गए थे. कर्मचारियों ने उन्हें बताया कि रजनी त्रिपाठी डीएमएसआरडीई (डिफेंस मटीरियल ऐंड स्टोर रिसर्च ऐंड डेवलपमेंट इस्टैब्लिशमेंट) में अवर अभियंता थी. उन के पास 60 साइंटिस्ट हौस्टल के देखरेख की भी जिम्मेदारी थी. उन्होंने पांचवीं मंजिल से कूद कर आत्महत्या की है. दधिबल तिवारी अभी निरीक्षण कर ही रहे थे कि खबर पा कर एसएसपी प्रीतिंदर सिंह तथा एसपी (पूर्वी) शिवाजी भी वहां आ गए. पुलिस अधिकारियों ने मौके पर फोरैंसिक टीम को भी बुला लिया. पुलिस अधिकारियों ने शव का निरीक्षण किया, फिर वे हौस्टल की पांचवीं मंजिल की छत पर पहुंचे, जहां से रजनी त्रिपाठी ने छलांग लगाई थी.

वहां पर पुलिस अधिकारियों को उन की चप्पलें, मोबाइल फोन और बैग मिला. बैग को खंगाला गया तो बैग में नींद की 15 गोलियों का पैकेट मिला, जिस में 6 गोलियां नहीं थीं. साथ ही फिनायल की बोतल मिली, जिस का ढक्कन खुला था. बैग में एक पर्स भी मिला जिस में नकदी थी. इसी बैग में सुसाइड नोट भी था. बैग को पुलिस ने अपने कब्जे में ले लिया. पुलिस अधिकारियों ने अनुमान लगाया कि मौत को गले लगाने से पहले जेई रजनी त्रिपाठी ने नींद की गोलियां खाई थीं और एकदो ढक्कन फिनायल भी पिया था. फोरैंसिक टीम ने भी घटनास्थल की बारीकी से जांच की. टीम ने बैग से बरामद सामान की भी जांच की तथा साक्ष्य एकत्र किए.

एसएसपी प्रीतिंदर सिंह व एसपी शिवाजी ने मृतका के मोबाइल को खंगाला तो उस में रजनी के पिता का मोबाइल नंबर सेव था. अत: उन्होंने उन के पिता परमात्मा शरण को उन की मौत की सूचना दी तथा शीघ्र घटनास्थल पर आने को कहा. बेटी की मौत की सूचना पा कर वह घबरा गए. इस के बाद तो उन के घर परिवार में सनसनी फैल गई. बैग में मिला सुसाइड नोट मृतका के पिता को सूचना देने के बाद पुलिस अधिकारियों ने बैग से बरामद रजनी के सुसाइड नोट का अवलोकन किया. सुसाइड नोट अंगरेजी में लिखा गया था, जिस में उन्होंने लिखा था, ‘पति शिवम मुझे प्रताडि़त करता है. रुपयों की मांग करता है. सास, जेठ, देवर भी धमकाते हैं. हमारी मासूम बेटी का इलाज भी पति नहीं कराना चाहता. वह चाहता है कि बेटी मर जाए.’

सुसाइड नोट पढ़ने के बाद पुलिस अधिकारी समझ गए कि रजनी त्रिपाठी ने पति व ससुरालीजनों की प्रताड़ना से आजिज आ कर आत्महत्या की है. उन की मौत का जिम्मेदार उन का पति व ससुराल के अन्य लोग हैं. उन्हें कानून के शिकंजे में कसना होगा. इसी समय मृतका रजनी के परिवार के लोग आ गए. बेटी का शव देख कर परमात्मा शरण त्रिपाठी फफक पड़े. भाई निखिल भी रो पड़ा. पुलिस अधिकारियों ने उन्हें धैर्य बंधाया तथा घटना के संबंध में पूछताछ की. परमात्मा शरण ने उन्हें बताया कि वह आईआईटी नानकारी में रहते हैं. उन्होंने मई, 2019 में बड़ी बेटी रजनी का विवाह गुजैनी निवासी शुभम पांडेय के साथ किया था. शादी के चंद माह बाद ही वह बेटी को दहेज के लिए प्रताडि़त करने लगा.

रजनी की सास शशि पांडेय तथा जेठ सत्यम व देवर हिमांशु उर्फ सनी भी उसे दहेज के लिए प्रताडि़त करते थे. उन की मांग थी कि मायके से 10 लाख रुपए ला कर दे तथा गांव की जमीन में भी हिस्सा दो. मांग पूरी न होने पर उन्होंने रजनी को जान से मारने की धमकी दी थी. धमकी से डर कर रजनी मायके में आ कर रहने लगी थी. मार्च 2020 में जब लौकडाउन लगा तो दामाद शुभम पांडेय भी आ कर बेटी के साथ रहने लगा. यहां भी वह रजनी को प्रताडि़त करता था और वेतन का रुपया छीन लेता था. विरोध करने पर वह घर वालों से मारपीट पर उतारू हो जाता था.

26 फरवरी, 2020 को रजनी ने अस्पताल में बेटी को जन्म दिया था. बेटी पैदा होने से शुभम नाराज था क्योंकि वह बेटा चाहता था. जन्म के बाद मासूम को इंफैक्शन हो गया था. इलाज के लिए उसे प्राइवेट अस्पताल में भरती कराया था. लेकिन शुभम बेटी का इलाज नहीं कराना चाहता था. वह चाहता था कि वह मर जाए. इलाज को ले कर वह रजनी तथा घर के लोगों को प्रताडि़त करता था. एक सप्ताह पहले वह रजनी से लड़झगड़ कर अपने घर गुजैनी चला गया था. तब से रजनी बेहद परेशान थी. आज सुबह 10 बजे रजनी कार से ड्राइवर के साथ अस्पताल का बिल पास कराने अपने औफिस के लिए निकली थी.

11 बजे हमारी रजनी से बात भी हुई थी. लेकिन उस के बाद मुझे शाम को उस की मौत की सूचना मिली. रजनी की मौत का जिम्मेदार उस का पति शुभम पांडेय तथा उस के घर वाले हैं. उन दहेजलोभियों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कर कानूनी काररवाई की जाए. निरीक्षण व पूछताछ के बाद पुलिस अधिकारियों ने मृतका रजनी के शव को पोस्टमार्टम हेतु लाला लाजपतराय अस्पताल भिजवा दिया. चूंकि मृतका के सुसाइड नोट में उत्पीड़न की बात कही गई थी तथा मृतका के पिता ने भी दहेज उत्पीड़न की बात कही थी. अत: एसएसपी प्रीतिंदर सिंह ने चकेरी थानाप्रभारी दधिबल तिवारी को तुरंत रिपोर्ट दर्ज करने तथा आरोपियों को गिरफ्तार करने का आदेश दिया.

आदेश पाते ही दधिबल तिवारी ने मृतका रजनी के पिता परमात्मा शरण त्रिपाठी की तहरीर पर भादंवि की धारा 304 के तहत मृतका के पति शुभम पांडेय, जेठ सत्यम पांडेय, देवर हिमांशु तथा सास शशि पांडेय के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कर ली तथा उन की गिरफ्तारी के प्रयास में जुट गए. 24 मार्च, 2021 को जब रक्षा सामग्री और भंडार अनुसंधान और विकास प्रतिष्ठान की अवर अभियंता रजनी त्रिपाठी की मौत की खबर अखबारों में छपी तो शुभम पांडेय व उस के घर वाले घबरा उठे. उन की बेचैनी तब और बढ़ गई, जब उन्हें पता चला कि उन के खिलाफ दहेज हत्या का मुकदमा दर्ज हो चुका है और पुलिस उन की तलाश में जुटी है.

वे अपने बचाव में घर से फरार हो गए और गिरफ्तारी से बचने के लिए सत्तापक्ष के नेताओं के तलवे चाटने लगे. 24 मार्च को ही कड़ी सुरक्षा के बीच मृतका रजनी के शव का पोस्टमार्टम हुआ. पोस्टमार्टम हाउस के बाहर उमड़ी भीड़ के बीच कल्याणपुर से विधायक एवं उच्च शिक्षा राज्यमंत्री नीलिमा कटियार भी पहुंचीं. उन्होंने बिलखते मृतका के पिता परमात्मा शरण त्रिपाठी को धैर्य बंधाया और कहा कि दुख की इस घड़ी में वह उन के साथ हैं. वह उन की हरसंभव मदद करेगी. दहेजलोभियों को बख्शा नहीं जाएगा. उन की गिरफ्तारी जल्द ही होगी.

चूंकि राज्यमंत्री का बयान पुलिस के जेहन में था. अत: पुलिस ने ताबड़तोड़ छापेमारी कर मृतका रजनी के पति शुभम पांडेय व जेठ सत्यम पांडेय को नाटकीय ढंग से 25 मार्च को गिरफ्तार कर लिया. पुलिस पूछताछ में शुभम व सत्यम पांडेय ने खुद को निर्दोष बताया. उन्होंने मृतका के पिता द्वारा लगाए गए आरोपों को गलत बताया. उन्होंने कहा कि उन लोगों ने कभी भी रजनी का उत्पीड़न नहीं किया. उस ने प्रेम विवाह किया था. दहेज की बात कहां से आ गई. रजनी जिद्दी व घमंडी थी. वह हमारे परिवार को हमेशा नीचा दिखाने की कोशिश करती थी. जेई रजनी ने किया था प्रेम विवाह कानपुर शहर का एक मोहल्ला नानकारी पड़ता है. आईआईटी से नजदीक होने के कारण इसे आईआईटी नानकारी के नाम से जाना जाता है.

यह कल्याणपुर थाना अंतर्गत आता है. इस मोहल्ले में ज्यादातर धनाढ्य लोगों का निवास है. इसी नानकारी में परमात्मा शरण अपने परिवार के साथ रहते थे. उन के परिवार में पत्नी गुड्डी के अलावा 3 बेटियां रजनी, अंशुल, रोषी तथा एक बेटा निखिल था. परमात्मा शरण त्रिपाठी कानपुर के मुख्य डाकघर में वरिष्ठ सहायक के पद पर थे. उन का अपना आलीशान मकान था. उन की आर्थिक स्थिति मजबूत थी. परमात्मा शरण त्रिपाठी स्वयं पढ़ेलिखे थे, अत: उन्होंने अपने बच्चों को भी उच्चशिक्षा दिलाई थी. अंशुल पढ़लिख कर बैंक में मैनेजर के पद पर कार्यरत थी, जबकि बेटा निखिल आईआईटी कानपुर से पीएचडी कर रहा था. बड़ी बेटी रजनी की तमन्ना इंजीनियर बनने की थी. वह खूब मेहनत कर रही थी और इंजीनियरिंग की कोचिंग भी जाती थी.

रजनी त्रिपाठी जिस कोचिंग सेंटर में इंजीनियरिंग की पढ़ाई के लिए जाती थी, उसी में शुभम पांडेय भी पढ़ने आता था. शुभम पांडेय कानपुर के गोविंदनगर थानांतर्गत गुजैनी मोहल्ले में रहता था. उस का बड़ा भाई सत्यम पांडेय प्राइमरी स्कूल में शिक्षक था, जबकि छोटा भाई हिमांशु उर्फ सनी लेखपाल था. मां शशि पांडेय घरेलू महिला थीं. उन की आर्थिक स्थिति भी मजबूत थी. शुभम और रजनी हमउम्र थे. दोनों साथसाथ कोचिंग कर रहे थे, अत: उन में दोस्ती थी. दोस्ती धीरेधीरे प्यार में बदल गई. प्यार का रंग गहरा हुआ तो दोनों एकदूसरे के बिना अपने को अधूरा समझने लगे. एक रोज प्यार के क्षणों में शुभम ने अपनी मोहब्बत का इजहार कर दिया तो रजनी ने उस के प्यार पर मोहर लगा दी.

दोनों में तय हुआ कि डिग्री हासिल करने के बाद जब वे नौकरी करने लगेंगे, तब ब्याह रचा लेंगे. समय बीतने के साथ शुभम ने इंजीनियरिंग की डिग्री हासिल कर ली और वह एक निजी कंपनी में इंजीनियर बन गया. रजनी त्रिपाठी भी डिग्री हासिल करने के बाद डीएमएसआरडीई (रक्षा सामग्री और भंडार अनुसंधान) में अवर अभियंता के पद पर नौकरी करने लगी. उसे 60 साइंटिस्ट हौस्टल के देखरेख की जिम्मेदारी भी दी गई. हर रोज विभागीय कार ड्राइवर के साथ वह औफिस आतीजाती थी. नौकरी लग जाने के बाद शुभम ने रजनी के समक्ष शादी का प्रस्ताव रखा, जिसे रजनी ने सहर्ष स्वीकार कर लिया. दोनों ने परिवार वालों को अपने प्यार के बाबत बताया और शादी की इच्छा जताई.

दोनों परिवारों की सहमति के बाद 2 मई, 2019 को रजनी और शुभम शादी के बंधन में बंध गए. शुभम की दुलहन बन कर रजनी ससुराल आ गई. ससुराल वालों ने किया प्रताडि़त ससुराल में चंद माह बाद ही रजनी को प्रताडि़त किया जाने लगा. पति, सास, जेठ व देवर उस पर 10 लाख रुपया मायके से लाने का दबाव बनाने लगे. गांव की जमीन में भी हिस्सा देने की बात कहने लगे. रजनी ने जब बात मानने से इनकार कर दी तो उसे प्रताडि़त किया जाने लगा. उसे जानमाल की धमकी भी दी जाने लगी. प्रताड़ना से आजिज आ कर रजनी ससुराल छोड़ कर मायके आ गई. मार्च, 2020 में जब लौकडाउन घोषित हुआ तो शुभम का काम प्रभावित हुआ. अत: वह भी रजनी के साथ नानकारी आ कर रहने लगा.

ससुराल में रहते हुए भी शुभम पत्नी को प्रताडि़त करता और उस का वेतन छीन लेता. रजनी व उस के मातापिता विरोध करते तो शुभम उन के साथ मारपीट करता. लोकलाज और बेटी के भविष्य को देखते हुए परमात्मा शरण, शुभम के खिलाफ कोई काररवाई न करते. 26 फरवरी, 2021 को रजनी ने प्राइवेट अस्पताल में एक बेटी को जन्म दिया. बेटी के जन्म से शुभम का मूड खराब हो गया. उस ने खूब हंगामा किया और रजनी को भी प्रताडि़त किया. बेटी बीमार पड़ी तो वह उस का इलाज भी नहीं कराना चाहता था. वह चाहता था कि बेटी मर जाए. लेकिन रजनी ने इलाज कराया तो वह 12 मार्च को लड़झगड़ कर तथा तरहतरह की धमकियां दे कर अपने घर गुजैनी चला गया.

पांचवीं मंजिल से लगाई छलांग पति की प्रताड़ना से रजनी टूट चुकी थी. उसे अपना जीवन नीरस लगने लगा था. वह दिनरात अपने व अपनी मासूम बेटी के भविष्य के बारे में सोचती. वह कई दिनों तक इन्हीं झंझावात में उलझी रही. आखिर उस ने हताश जिंदगी का अंत करने का निश्चय किया. इस के लिए उस ने 15 गोलियों वाले नींद की गोली के पत्ते को खरीदा तथा फिनायल की एक बोतल खरीदी. इसे उस ने अपने बैग में सुरक्षित कर लिया. इस के बाद रात में उस ने अंगरेजी में सुसाइड नोट लिखा और उसे भी बैग में रख लिया. 23 मार्च, 2021 की सुबह 10 बजे रजनी कार से ड्राइवर के साथ घर से निकली. लगभग 11 बजे पिता ने उस से बात की तो उस ने बताया कि वह हौस्पिटल का बिल पास कराने चंदारी स्थित औफिस जा रही है.

उस के बाद रजनी शहर में घूमती रही. शाम 4 बजे वह औफिस पहुंची. कार उस ने सड़क किनारे खड़ी करा दी और 60 साइंटिस्ट हौस्टल पहुंची. इस के बाद वह सीढि़यां चढ़ कर हौस्टल की पांचवीं मंजिल की छत पर पहुंची. यहां उस ने चप्पलें उतारीं और बैग से नींद की 6 गोलियां निकाल कर फिनायल के साथ निगल लीं. उस के बाद उस ने छलांग लगा दी. हौस्टल के कर्मचारियों ने रजनी की बौडी को देखा तो वह सहम गए. उन में से एक कर्मचारी ने भाग कर कृष्णानगर चौकी इंचार्ज आर.जे. गौतम को सूचना दी. चौकी इंचार्ज ने तुरंत थानाप्रभारी दधिबल तिवारी को घटना से अवगत कराया. उस के बाद पुलिस व अधिकारी घटनास्थल पहुंचे.

26 मार्च, 2021 को पुलिस ने अभियुक्त शुभम व सत्यम पांडेय को कानपुर कोर्ट में मजिस्ट्रैट के समक्ष पेश किया, जहां से उन्हें जिला जेल भेज दिया गया. कथा संकलन तक शशि व हिमांशु पांडेय को पुलिस गिरफ्तार करने का प्रयास कर रही थी. family story hindi

—कथा पुलिस सूत्रों पर आधारित