Punjab News : पीठ पर ‘धोखेबाज’ लिखने वाला सीरियल किलर

Punjab News : 33 वर्षीय रामस्वरूप उर्फ सोढ़ी दिन भर तो मर्दों के लिबास में रहता था, मगर रात होते ही वह एक महिला की तरह साजशृंगार कर अपने शिकार की तलाश में निकल जाता था. फिर अपने शिकार का मर्डर कर लाश की पीठ पर एक शब्द लिखता था ‘धोखेबाज’. उस के बाद मृतक के पैरों को छू कर माफी मांगता था. इस तरह वह दरजन भर हत्याएं कर चुका था. विदेश से नौकरी कर के पंजाब लौटा रामस्वरूप कैसे बना सीरियल किलर?

पंजाब के जिला रूपनगर के एरिया निरंकारी भवन के पास एक कार काफी समय से संदिग्ध अवस्था में खड़ी रही तो आसपास के दुकानदारों और राहगीरों की भीड़ वहां पर एकत्रित हो गई. इन में से कुछ युवकों ने जब कार के भीतर झांका तो उन के जैसे होश ही उड़ गए, क्योंकि कार के भीतर एक युवक की लाश पड़ी थी. जिस के शरीर पर कोई भी कपड़ा नहीं था. तभी किसी राहगीर ने पुलिस कंट्रोल रूम को फोन कर यह जानकारी दे दी. चूंकि यह क्षेत्र रूपनगर के थाना सिटी के अंतर्गत आता था, इसलिए पुलिस कंट्रोल रूम से इस की इत्तला थाना सिटी को दे दी गई.

सूचना मिलते ही थाना सिटी की पुलिस तुरंत ही घटनास्थल पर पहुंच गई. अब तक आसपास काफी भीड़ जमा हो चुकी थी. पुलिस ने भीड़ को अलग करने के बाद कार के भीतर देखा तो उस में एक युवक की निर्वस्त्र लाश पड़ी हुई थी. किसी तरह कार का दरवाजा खोल कर पुलिस ने लाश कार से बाहर निकाली और उस का निरीक्षण किया तो लाश की पीठ पर ‘धोखेबाज’ लिखा हुआ था. पुलिस ने लाश का पंचनामा कर पोस्टमार्टम के लिए भिजवा दिया. यह बात पिछले साल की 24 जनवरी की है. पुलिस द्वारा गहरी छानबीन करने के बाद पता चला कि वह लाश हरप्रीत सिंह उर्फ सन्नी की थी, जो रूपनगर के ही मोहल्ला जगजीत नगर का रहने वाला था.

उस के बाद थाना सिटी में अज्ञात हत्यारे के खिलाफ हत्या का मुकदमा दर्ज कर लिया गया. पुलिस ने पोस्टमार्टम कराने के बाद मृतक हरप्रीत सिंह की लाश को उस के फेमिली वालों को सौंप दी और केस की छानबीन में जुट गई, लेकिन 11 महीने बीतने पर भी हत्यारे का कोई भी सुराग पुलिस के हाथ नहीं आ सका. इसी तरह 6 अप्रैल, 2024 को रूपनगर जिले के ही गांव बारहा पिंड में पंजहेरा रोड के पास एक अज्ञात शव मिलने की खबर कीरतपुर साहिब पुलिस को मिली. पुलिस जब मौके पर पहुंची तो उस लाश के ऊपर भी कोई कपड़ा नहीं था. जब पुलिस ने लाश को कब्जे में ले कर छानबीन की तो उस अज्ञात लाश की नंगी पीठ पर भी ‘धोखेबाज’ लिखा हुआ था.

पुलिस द्वारा जब उस अज्ञात लाश की आसपड़ोस के गांवों में पहचान कराई गई तो पता चला कि यह लाश मुकंदर सिंह की थी. मुकंदर सिंह उर्फ बिल्ला पुत्र शाम लाल की उम्र 34 वर्ष थी और वह रूपनगर जिले के ही गांव बेगमपुरा (घनौली) जिला रूपनगर का निवासी था. वह ट्रैक्टर रिपेयङ्क्षरग का काम करता था. इस संबंध में मृतक के फेमिली वालों की ओर से थाना कीरतपुर साहिब में हत्या का मुकदमा दर्ज कर दिया गया. इन दोनों घटनाओं में हत्याओं का एक ही पैटर्न था. मृतकों की लाश पर कपड़े नहीं पाए गए थे और पीठ पर ‘धोखेबाज’ लिखा गया था. मगर एक चीज दोनों में अलग पाई गई थी.

पोस्टमार्टम रिपोर्ट के अनुसार, हरप्रीत सिंह की हत्या किसी कपड़े द्वारा गला घोंट कर की गई थी, जबकि मुकंदर सिंह उर्फ बिल्ला की हत्या किसी भारी वस्तु जैसे ईंटपत्थरों द्वारा पीटपीट कर की गई थी. मगर इस हत्या के कई महीने बीत जाने के बाद भी पुलिस हत्यारे को पकडऩे में कामयाब नहीं हो सकी थी. यह मामला जब पुलिस के आला अधिकारियों के पास पहुंचा तो डीजीपी गौरव यादव ने अधिकारियों की बैठक कर उन्हें हत्या के ये दोनों केस खोलने के उचित दिशानिर्देश दिए.

रूपनगर रेंज के डीआईजी हरचरण सिंह भुल्लर के निर्देशों के बाद जिला रूपनगर में जघन्य अपराधों के मामलों को सुलझाने के लिए सभी पुलिस अधिकारियों को निर्देश जारी किए गए. इस के बाद एसपी गुलनीत सिंह खुराना के सुपरविजन में एक विशेष पुलिस टीम का गठन कर दिया गया, जिस में एसपी नवनीत सिंह माहल, डीएसपी अजय कुमार और एसएचओ इंसपेक्टर जतिन कुमार को शामिल किया गया. 18 अगस्त, 2024 को पुलिस को 37 वर्षीय मनिंदर सिंह निवासी कीरतपुर साहिब का शव जियो पेट्रोल पंप, मनाली रोड के सामने झाडिय़ों में निर्वस्त्र मिला. मनिंदर सिंह टोल प्लाजा गोदरा पर एक चाय की दुकान चलाता था. मनिंदर सिंह के गले पर भी गला घोंटने के वही निशान थे. यानी कि उस की पीठ पर भी ‘धोखेबाज’ लिखा हुआ था.

यह सब देख कर पुलिस टीम को यह साफ हो गया था कि इस मर्डर के पीछे भी उसी सीरियल किलर का हाथ है, जो गला घोंट कर, पीटपीट कर मर्दों की हत्या करता है और बाद में उन की पीठ पर ‘धोखेबाज’ लिख देता है. अब यह सीरियल किलर एक चुनौती बन कर पुलिस के सामने आ चुका था. पुलिस फिर से तहकीकात में जुट गई. पुलिस ने अब रात की गश्त भी लगा दी थी, लेकिन कातिल अभी भी पुलिस की गिरफ्त से काफी दूर था. पुलिस 18 अगस्त, 2024 को हुए मनिंदर सिंह के मर्डर की तफ्तीश कर रही थी. पंजाब के रोपड़ के कीरतपुर साहिब में एक टोल प्लाजा है, उस के हाइवे पर एक चाय और खानेपीने की दुकान है और उसी दुकान के मालिक मनिंदर सिंह की लाश उस की दुकान के सामने की ओर झाडिय़ों में मिली थी.

पुलिस ने मौके पर पहुंच कर घटनास्थल की सूक्ष्मता से गहन जांचपड़ताल भी की, परंतु हत्या का कोई भी सूत्र पुलिस के हाथ नहीं आ पाया था. घटनास्थल के आसपास कोई सीसीटीवी कैमरा भी नहीं था. वहां पर काफी अंधेरा था. तभी मृतक के फेमिली वालों से गहन पूछताछ करने पर पुलिस टीम को यह जानकारी मिली कि जिस मनिंदर सिंह की हत्या हुई थी, उस का मोबाइल फोन न घर पर, न दुकान पर और न ही उस स्थान पर मिला था, जहां पर उस की लाश मिली थी. पुलिस टीम ने मृतक के फेमिली वालों से उस का फोन नंबर मांग कर उसे सर्विलांस पर लगा दिया, जिस से पुलिस को पता चला कि मृतक मनिंदर सिंह का फोन ऐक्टिव था और इस मोबाइल फोन का इस्तेमाल भी हो रहा था.

पुलिस ने सर्विलांस के सहारे उस व्यक्ति को पकड़ लिया, जो मृतक के फोन का इस्तेमाल कर रहा था. पुलिस ने उसे तुरंत गिरफ्तार कर लिया. पुलिस को अब पूरा यकीन हो गया था कि उन्होंने आरोपी को पकड़ लिया है और मनिंदर सिंह मर्डर केस सौल्व कर लिया है. लेकिन जब पुलिस ने मोबाइल फोन इस्तेमाल करने वाले व्यक्ति से विस्तार पूछताछ की तो उस ने पुलिस को बताया कि मैं ने यह मोबाइल फोन तो किसी से सेकेंडहैंड खरीदा है. इंसपेक्टर जतिन कुमार पुलिस ने उस व्यक्ति से पूछा, ”यह मोबाइल फोन तुम ने किस से खरीदा? उस की हुलिया, कदकाठी कैसी थी?’’

”साहब, उस आदमी का हुलिया बड़ा विचित्र था.’’ उस व्यक्ति ने बताया.

”कैसा विचित्र हुलिया?’’ इंसपेक्टर ने पूछा.

उस व्यक्ति ने बताया, ”साहब, जिस ने मुझे यह मोबाइल फोन बेचा था, वह असल में था तो एक पुरुष, लेकिन उस ने कपड़े, अपना सारा साजशृंगार एक महिला की तरह कर रखा था. उस ने तो अपने सिर पर पल्लू भी डाला हुआ था. लिबास से तो वह पूरी तरह से एक सुंदर महिला की तरह नजर आ रहा था, परंतु जब उस ने मेरे साथ बातचीत की तो मुझे पता चला कि वह तो एक पुरुष है.’’

पुलिस टीम ने फिर उस गिरफ्तार व्यक्ति से उस पुरुषनारी मिक्स चेहरे, उस की ऊंचाई, उस की बनावट के बारे में विस्तार से बताने को कहा और वहां पर एक स्केच आर्टिस्ट को भी बुलवा लिया गया. उस गिरफ्तार व्यक्ति के बताए अनुसार पुलिस ने उस संदिग्ध का एक स्केच तैयार करवाया और उस स्केच को उस इलाके और आसपास के इलाकों, थानों में भिजवा कर एरिया के सभी मुखबिरों को भी काम पर लगा दिया. उस इलाके के सीमावर्ती जिलों के थानों व सभी एरिया में उस संदिग्ध व्यक्ति के स्केच को जगहजगह चस्पा कर दिया गया, जिस का परिणाम एकदम सामने भी आ गया. मुखबिर के द्वारा पुलिस टीम को यह सूचना मिली कि इसी हुलिए का एक आदमी रोपड़ के इलाके में घूमता हुआ पाया गया है.

उस के बाद उस स्केच के सहारे पुलिस ने उस संदिग्ध व्यक्ति को रूपनगर जिले के गांव भरतगढ़ से अपनी हिरासत में ले लिया. उस का नाम रामस्वरूप उर्फ सोढ़ी था. पंजाब पुलिस को अब तक यह यकीन हो चुका था कि उन्होंने कीरतपुर साहिब के मनिंदर सिंह के मर्डर का केस अब तो सौल्व कर ही लिया है, लेकिन थाने में जब पुलिस ने सोढ़ी से पूछताछ की तो जब धीरेधीरे उस ने जो कुछ भी पुलिस को बताया तो उसे सुन कर तो पुलिस के भी होश उड़ गए थे.

क्योंकि पंजाब पुलिस ने जिसे कातिल समझ कर गिरफ्तार किया था, वह तो एक ऐसा सीरियल किलर निकल कर सामने आया, जिस ने पिछले डेढ़ साल में कुल 11 हत्याओं को अंजाम दिया था. ताज्जुब की बात तो यह थी कि वह कातिल जोकि एक सीरियल किलर भी था, वह अब तक भी पुलिस की रडार तक में नहीं आ पाया था. 4 महीने पहले होशियारपुर-फगवाड़ा बाईपास पर रेलवे फाटक पर वार्ड नंबर 20 के पार्षद जसवंत राय काला के भाई गुरनाम राम उर्फ गामा निवासी आदर्श कालोनी, पिपलांवाला, जिला होशियारपुर की हत्या की बात भी रामस्वरूप उर्फ सोढ़ी सीरियल किलर ने स्वीकार कर ली है.

गुरनाम राम उर्फ गामा होशियारपुर-फगवाड़ा बाईपास पर स्थित रेलवे क्रासिंग पर एक ढाबा चलाता था. वैसे तो हर रोज रात को वह अपने घर पर सोने के लिए आ जाया करता था, लेकिन कत्ल वाली रात वह अपने ढाबे पर ही सो गया था. अकसर जब उसे रात को ढाबा बंद करने में देर हो जाया करती थी तो वह उस रात अपने ढाबे पर ही सो जाता था. अगली सुबह जब उस के ढाबे पर कुछ लोग गए तो उन्होंने देखा कि गुरनाम राम उर्फ गामा का शव चारपाई के नीचे पड़ा था और उस के गले में कुछ निशान भी स्पष्ट नजर आ रहे थे.

जब गामा के मर्डर की सूचना उस के पार्षद भाई जसवंत राय को मिली तो वह भी तुरंत घटनास्थल पर पहुंच गए और उन्होंने इस की सूचना तुरंत पुलिस को दे दी. थोड़ी ही देर के बाद पुलिस भी मौके पर पहुंच गई थी. पुलिस व फेमिली वालों ने घटनास्थल पर जांच की तो पता चला कि मृतक गुरनाम राम का पर्स व स्कूटी भी मौके पर मौजूद नहीं थे. इन हालात को देखते हुए मृतक के फेमिली वालों ने शक जताया था कि लूट की नीयत से गामा की हत्या की गई थी. बाद में सीरियल किलर रामस्वरूप उर्फ सोढ़ी ने गामा के मर्डर की बात भी स्वीकार कर ली है.

इस संबंध में एसएसपी होशियारपुर ने कहा कि इस संबंध में उन्हें रोपड़ पुलिस ने जानकारी दी है और आरोपी रामस्वरूप उर्फ सोढ़ी को अब प्रोडक्शन वारंट पर पूछताछ के लिए होशियारपुर लाने की काररवाई शुरू कर दी, ताकि मामला और अधिक साफ हो सके. 33 वर्षीय रामस्वरूप उर्फ सोढ़ी गांव चौरा, थाना गढ़शंकर जिला होशियारपुर पंजाब का रहने वाला है. उस ने 10वीं तक की पढ़ाई की थी. रामस्वरूप बचपन से ही समलैंगिक था, उसे बचपन में लड़कियों की तरह के कपड़े पहनने, लड़कियों की तरह चलने और उन की तरह ही सजने और संवरने का मन करता था.

बचपन के दिनों में भी रामस्वरूप पड़ोस की लड़कियों के कपड़े पहन कर जब सजनेसंवरने लगता था, आंखों में काजल और होंठों पर लिपस्टिक लगा लेता था और उस के बाद जब वह शीशे में अपना चेहरा देखता तो उसे एक असीम खुशी मिलती थी. उसे ऐसा करता देख जब पेरेंट्स ने देखा तो उस की पिटाई भी की थी. एक बार जब वह नवीं क्लास में था तो उस साल वह अपनी शैतानियों व खेलकूद में मस्त रहने के कारण फेल भी हो गया था. रामस्वरूप घर का इकलौता बेटा था, इसलिए पेरेंट्स चाहते थे कि वह खूब अच्छी पढ़ाई करे और गांव के अन्य लोगों की तरह विदेश में जा कर अच्छी नौकरी करे. इसलिए जब वह नवीं कक्षा में फेल हो गया था तो उस के पेरेंट्स ने उस की जम कर पिटाई भी की थी और उसे पढ़ाई के महत्त्व को समझाया था.

इस का परिणाम अच्छा रहा. रामस्वरूप ने अगले साल नवीं कक्षा पास कर ली और उस के बाद दसवीं कक्षा भी पास कर ली. इस के बाद वह बड़े ट्रक चलाने की ट्रेनिंग लेने लगा, ताकि विदेश में जा कर नौकरी पा सके. उस के बाद पंजाब के अन्य युवाओं की तरह रामस्वरूप ने भी विदेश जा कर पैसा कमाने के बारे में कोशिश करनी शुरू कर दी. रामस्वरूप ने अपना पासपोर्ट बनवाया और नौकरी करने दुबई चला गया. दुबई में जा कर उस ने एक साल अच्छे से नौकरी भी की. इस बीच वह अपने पेरेंट्स को भी हर महीने पैसे भेजता रहता था, लेकिन दुबई में रहने के एक साल के बाद वह ऐसे कुछ लोगों के संपर्क में आया, जो समलैंगिक अर्थात ‘गे’ थे. वह वहां पर गया तो उसे ये अच्छा लगने लगा और वह दुबई के एक ‘गे’ क्लब में शामिल हो गया.

इस के बाद रामस्वरूप के पेरेंट्स ने उसे घर बुलवा लिया, क्योंकि वह पिछले 2 सालों से अपने घर भी नहीं आया था और घर पर कभीकभार ही पैसे भेजता था. उस के बाद रामस्वरूप वापस अपने गांव आ गया. घर पर वह एक महीने तक रहा, लेकिन फिर अपने गांव से उस का मन उचटने लगा. इस बार उस ने अपना नया वीजा कतर के लिए बनवा लिया और फिर कतर चला गया. कतर जाने के बाद उस ने वहां पर कुछ साल मन लगा कर काम किया. इस दौरान वह नियमित रूप से अपने पेरेंट्स को पैसे भेजता रहता था, जिस के कारण गांव में उस के फादर ने एक नया घर भी बनवा लिया था. खेती तो उन की गांव में थी ही. अब उन्होंने अपनी जमीन भी ठेके पर दे दी थी.

रामस्वरूप को विदेश भेजने के लिए उस के फादर ने गांव के कुछ लोगों से जो कर्ज लिया था, उसे भी चुकता कर दिया गया. इस के बाद जब उस के पेरेंट्स को रामस्वरूप पर भरोसा हो गया कि अब वह काफी समझदार हो गया है तो उन्होंने फिर से वापस गांव बुला लिया. गांव आने के बाद उस के फादर ने पास के गांव की एक लड़की से रामस्वरूप का विवाह कर दिया. रामस्वरूप अब गांव में अपनी खेती का काम खुद देखने लगा था. उस के पिता भी उस के साथ काम में हाथ बंटाते रहते थे. उस के फादर ने अब गांव में एक दुकान भी खोल ली थी और अच्छे नस्ल की गाय और भैंसें भी खरीद ली थीं. जमीन तो उन के पास पहले से ही थी. चारे की कोई कमी नहीं थी, इसलिए उन का दूध का काम भी अच्छा चलने लगा. इस बीच रामस्वरूप 3 बच्चों का बाप भी बन चुका था.

घर में सब कुछ ठीकठाक चल रहा था. रामस्वरूप को बेटी की उम्र भी 11 साल की हो गई थी. लेकिन तभी रामस्वरूप को शराब और ड्रग्स की बुरी लत लग गई. उस का व्यवहार भी अब काफी बदलने सा लगा था. जब वह नशे में हो जाता तो उस का मन विचित्र कुंठा से भर जाता था. नशे के कारण उस ने एकएक कर के घर के सामान, गाय, भैंसों को भी बेचना शुरू कर दिया था. एक दिन वह नशे में घर पर आया, तब तक रात के 12 बजे का समय हो गया था. रामस्वरूप के पेरेंट्स, बच्चे, पत्नी सभी सो चुके थे. उस ने दरवाजा खटखटाया तो पत्नी की नींद एकदम से खुल गई.

उस ने रामस्वरूप से खाने के लिए पूछा तो वह होटल से खाना खा कर आया था और शराब और ड्रग्स के नशे में धुत था. वह खींच कर अपनी पत्नी को दूसरे कमरे में ले गया. कमरे में आ कर उस ने तुरंत दरवाजा अंदर से बंद कर दिया और बाज की तरह झपट्टा मार कर अपनी पत्नी पुष्पा (परिवर्तित नाम) को बुरी तरह से दबोच लिया. उस ने पहले पुष्पा के संवेदनशील अंगों पर दांत गड़ा दिए, फिर उसे निर्वस्त्र करने के बाद अपनी जेब से जैल निकाला और पुष्पा के साथ अप्राकृतिक कृत्य करने लगा.

काफी देर तक तो पुष्पा संकोचवश अपने दांतों को भींच कर इस भयंकर दर्द से छटपटाती रही, लेकिन जब पीड़ा बढ़ती गई, उसे अब ऐसा लग रहा था मानो उस का पूरा शरीर फट रहा है तो वह जोरजोर से चीखनेचिल्लाने लगी, लेकिन रामस्वरूप अपने मन की करता रहा. जब वह पूरी तरह से संतुष्ट हो गया, तभी उस ने पुष्पा को मुक्त किया. अपनी संतुष्टि के बाद रामस्वरूप कमरे से बाहर निकल कर अपने गांव के दोस्त के घर पर जा कर सो गया. पुष्पा की सास अब तक पुष्पा की चीखपुकार को सुन कर कमरे में आ चुकी थी, लेकिन जब बहू ने सास को बताया कि उन का बेटा अपनी बहू के साथ पशुवत व्यवहार करने लगा है तो उसे सुन कर सास की भी सांसें थम सी गई थीं.

सास ने यह बात अपने पति को बताई तो उन्होंने भी अपना सिर पीट लिया. इस के बाद रामस्वरूप के फादर ने सोचा कि एक बार जमीनजायदाद से बेदखल करने का डर दिखाते हैं, उस के बाद शायद यह ठीक हो जाए. यही सोच कर उस के फादर ने कानूनी रूप से बेदखली की औपचारिकताएं पूरी करते हुए उसे अपनी जमीनजायदाद से बेदखल कर दिया. रामस्वरूप के फादर का यह मानना था कि उन का तो एक ही बेटा है. शायद बेदखल के डर से अपनी बुरी आदतों को छोड़ कर वापस अपने घर लौट आएगा, लेकिन उन की यह सोच किसी भी काम न आ सकी. रामस्वरूप सुधरने के बजाए और भी बिगड़ता चला जा रहा था. वह तो अब अपने पेरेंट्स और पत्नी को जान से मारने की धमकी भी देने लगा था.

आसपड़ोस के लोगों से लड़ाईझगड़ा करने, लोगों से उधार ले क र उस को चुकता न करने की रोजरोज शिकायतें उन के घर पर आने लगी थीं. इस के अलावा अपने नशे के लिए वह अब तक अपने सभी मवेशियों को बेच चुका था. अब रामस्वरूप के फादर को लगा कि यदि इस का ऐसा ही हाल रहा तो यह अपनी सारी जमीन और जायदाद भी बेच देगा और अब रामस्वरूप के पेरेंट्स वृद्धावस्था की ओर भी बढऩे लगे थे. उन्होंने सोचा कि हम दोनों के मरने के बाद तो रामस्वरूप अपने बीवीबच्चों को भी सड़क पर भीख मांगने के लिए मजबूर कर सकता है.

इसलिए एक रोज अपने दिल पर पत्थर रखते हुए पेरेंट्स ने पहले तो रामस्वरूप की जम कर पिटाई की, फिर उस के फादर ने रामस्वरूप को हाथ जोड़ते हुए आखिरकार कह ही दिया, ”बेटा रामस्वरूप, अब हम तुम्हारी हरकतों से बहुत दुखी और परेशान हो चुके हैं. हम ने तुम्हें अपनी जमीनजायदाद से भी बेदखल कर दिया है. हमारी तुम से यही विनती है कि तुम अब इस घर से सदासदा के लिए नाता तोड़ दो. हम और तुम्हारी पत्नी व बच्चे तक भी अब तुम्हारी शक्ल भी देखना नहीं चाहते हैं.’’ कहते हुए उन्होंने दरवाजा बंद कर दिया था. यह बात जनवरी 2022 की है.

घर से निकाले जाने के बाद रामस्वरूप ने शरम के मारे अपने गांव को भी सदा के लिए अलविदा कह दिया था. कुछ दिन तो वह खानाबदोशों की तरह इस गांव से उस गांव भटकता रहा. उसे शराब की भी लत लग चुकी थी, उसे जिंदा रहने के लिए अब पैसों की भी जरूरत हो रही थी. भीख मांगमांग कर वह आखिर कब तक गुजारा कर सकता था. शराब के बिना एक पल भी जीना अब उस के लिए दूभर सा होता जा रहा था. फिर यहीं से एक आम आदमी से उस के सीरियल किलर बनने की शुरुआत हुई. अब वह ट्रक चालकों से लिफ्ट ले कर इधरउधर घूमता और भटकता रहता था. उस ने वहां पर देखा कि ‘गे’ या समलैंगिक लोग लंबी दूरी की गाडिय़ों में, बसों में और ट्रकों में सैक्स वर्कर के रूप में काम कर के काफी अच्छा पैसा कमा रहे थे.

रामस्वरूप उर्फ सोढ़ी एक बार जब सब से पहले दुबई गया था तो वह वहां पर एक ‘गे’ क्लब में शामिल भी हुआ था. इस के लिए उसे अनुभव भी था. उस ने सोचा कि क्यों न वह भी एक सैक्स वर्कर के तौर पर अपने अनुभव का इस्तेमाल करे. उसे अब अपनी दिनचर्या चलाने, शराब पीने और खुद को जिंदा रखने के लिए पैसों की बेहद जरूरत भी थी, इसलिए उस ने ‘गे’ के रूप में सैक्स वर्कर बनने का अंतिम फैसला कर लिया. इस के लिए वह दिन में तो एक सामान्य पुरुष की तरह ही रहता था, लेकिन रात होते ही वह मर्दों का लिबास बदल कर औरतों के कपड़े और औरतों की तरह ही साजशृंगार कर के जिला रूपनगर, जिला रोपड़, फतेहपुर साहिब और होशियारपुर की सड़कों पर रात को अपने ग्राहकों की तलाश करने निकल पड़ता था और फिर कहीं पर सड़क के किनारे खड़ा हो जाता था.

जब वह देखता कि कोई मर्द अपनी गाड़ी में अकेला है तो वह उस से लिफ्ट मांग लेता और गाड़ी में बैठने के कुछ देर बाद वह उस मर्द से बात करता कि क्या वह ‘गे’ सैक्स करना चाहता है. मर्द द्वारा इकरार करने पर वह फिर उस से पैसों की बात करता और फिर आखिरकार एक रकम पर उन का समझौता हो जाता था. एक तरह से रामस्वरूप उर्फ सोढ़ी अब जिस्मफरोशी का धंधा करने लगा था. जून, 2023 को भी रोपड़ के पास सड़क पर रामस्वरूप महिला का वेश बना कर लिफ्ट का इंतजार करने लगा और फिर एक ने उसे अपनी गाड़ी में लिफ्ट दे दी. कुछ दूर आगे चलने के बाद जब सुनसान सड़क आई तो दोनों के बीच डेढ़ सौ रुपए में धंधे की बात भी हुई. डेढ़ सौ रुपए में जिस्म का सौदा हुआ. गाड़ी वाला मान भी गया.

उस के बाद दोनों के बीच जिस्मानी संबंध भी बने. काम पूरा होने के बाद रामस्वरूप ने गाड़ी वाले से अपने पैसे मांगे तो गाड़ी वाले ने उसे गाड़ी से उतरने को कहा और उसे 100 रुपए का नोट पकड़ा कर गाड़ी से नीचे धक्का दे कर गिरा दिया. रामस्वरूप को उस की इस हरकत पर काफी गुस्सा आ गया. वह हमेशा अपने कंधे पर अंगोछा डाले रखता था. वह तुरंत गाड़ी में चढ़ा और फुरती से ड्राइवर का गला घोंट कर उसे मौत की नींद सुला दिया. ड्राइवर ने अभी पूरे कपड़े पहने भी नहीं थे. मर्डर करने के बाद रामस्वरूप ने उस के सारे कपड़े उतार दिए और उस की पीठ पर लिख दिया ‘धोखेबाज’. फिर उस के पैर छूने के बाद रामस्वरूप वहां से चला गया.

यह रामस्वरूप उर्फ सोढ़ी का पहला कत्ल था. पुलिस घटनास्थल पर आई, तफ्तीश भी की. इस के बाद पूरे डेढ़ साल भी बीत गया, लेकिन कातिल का पता नहीं चल सका और पुलिस ने वह फाइल ही क्लोज कर दी. बस, फिर यहीं से कत्ल का सिलसिला शुरू हो गया. रामस्वरूप हर रात को महिला के वेश में सड़क के किनारे खड़ा हो जाता और फिर गाड़ी रुकवा कर ग्राहक से सौदा करता. कई बार तो ऐसा भी हुआ कि ग्राहक शराफत से अपने किए गए वादे के अनुसार पैसे दे कर चला जाता तो वह कत्ल से बच भी जाता. अगर ग्राहक अपने वादे के अनुसार पैसे नहीं देता तो फिर रामस्वरूप अपने गले में बांधे अंगोछे से ग्राहक को सदासदा के लिए मौत की नींद सुला देता था.

बहुत सारे मामलों में ऐसा भी हुआ कि रामस्वरूप का ग्राहक से झगड़ा नहीं हुआ, सब कुछ प्रेम से निपट गया और इस तरह उन सारे ग्राहकों की जान भी बच गई थी. लेकिन इस के विपरीत जिनजिन लोगों के साथ रामस्वरूप का झगड़ा हुआ, उन में से किसी की भी जान बच नहीं सकी थी, क्योंकि रामस्वरूप ने या तो अंगोछे से या घटनास्थल पर मौजूद ईंटपत्थरों से पीटपीट कर उन सब की जान ले ली थी. हर हत्या के बाद वह प्रायश्चित कर मृतक के पैर छूता था.

18 अगस्त, 2024 को रामस्वरूप उर्फ सोढ़ी कीरतपुर साहिब पहुंचा. वहां पर टोल प्लाजा के पास एक चाय की दुकान थी. उस दुकान का मालिक 37 वर्षीय मनिंदर सिंह था. उस समय दुकान में सभी ग्राहक जा चुके थे. मनिंदर सिंह भी दुकान बंद कर रहा था, तभी रामस्वरूप वहां पर महिला के वेश में जा पहुंचा. उस ने घूंघट भी डाला हुआ था. इशारों ही इशारों में दोनों के बीच गुप्त बातचीत हुई, उस के बाद पैसों की बातचीत हुई. आपस में संबंध भी बने, लेकिन इस के बाद पैसों को ले कर दोनों के बीच झगड़ा हो गया. रामस्वरूप हमेशा नशे में रहता था और जो क भी ग्राहक पैसे देते समय उस को परेशान करता या जलील करता था तो रामस्वरूप गुस्से में आ कर अंगोछे से उसे मार डालता था.

यहां पर भी रामस्वरूप ने यही किया और उस ने अंगोछे से गला घोट कर मनिंदर सिंह की जान ले ली और वहां से निकलने लगा. यहीं पर इस क्रूर सीरियल किलर से एक बहुत बड़ी गलती भी हो गई. उस की नजर जमीन पर पड़े मृतक मनिंदर सिंह के मोबाइल पर पड़ी, जो काफी कीमती लग रहा था. रामस्वरूप उस मोबाइल फोन को अपने साथ ले गया, जिसे उस ने एक आदमी को बेच दिया. जिस के कारण आखिरकार वह पुलिस की गिरफ्त में आ गया.

इस के बाद पुलिस इन सारे इलाकों में उन लावारिस लाशों की गहन जांचपड़ताल में जुट गई, खासकर जिन की हत्या गला घोंट कर की गई थी या ईंटपत्थरों से हुई थी. क्योंकि सीरियल किलर रामस्वरूप उर्फ सोढ़ी के बयान के अनुसार वह कभी भी अपने साथ हथियार ले कर नहीं चला. बस जब कोई ग्राहक पैसों के लेनदेन में झगड़ा करता या उस के ऊपर छींटाकशी करता तो उसे एकदम से गुस्सा आ जाता था. वह उन का मर्डर कर देता था. पुलिस रामस्वरूप द्वारा की गई 9 हत्याओं को वेरिफाई कर चुकी थी.

ऐसा ही एक केस कई साल पहले दिल्ली में भी सामने आया था, जहां पर एक सीरियल किलर ने कई दरजन लोगों की हत्याएं की थीं. उस के बाद उस ने और कितने लोगों को मारा, यह उसे भी याद नहीं था. दरअसल, ऐसे लोग मानसिक रोगी हो जाते हैं, उन्हें पता ही नहीं चलता कि वे नशे में क्या कर बैठे हैं. पंजाब की यदि बात की जाए तो पंजाब में दरबारा सिंह के बाद रामस्वरूप उर्फ सोढ़ी ऐसा दूसरा सीरियल किलर है, जिस ने 11 से अधिक हत्याएं की थीं. दरबारा सिंह बच्चों का मर्डर करता था. सैक्स के अनुसार बना रखी हैं कई कैटेगरीज

आज की इस अद्भुत दुनिया में स्त्री, पुरुष और किन्नर के बीच में भी बहुत सारे जेंडर हैं. अगर किसी पुरुष का आकर्षण किसी महिला महिला की ओर है और वह केवल किसी महिला के साथ ही यौन संबंध बनाता है तो ऐसे लोगों को स्ट्रेट कहते हैं. यही बात महिलाओं के बारे में भी है. जब कोई महिला किसी पुरुष के साथ शारीरिक संबंध बनाती तो उसे भी स्ट्रेट कहा जाता है. अब बात यदि हम अन्य जेंडरों की करें तो वे हैं एल, जी, बी, टी, क्यू, ए और आई होते हैं. एल यानी लेस्बियन: लेस्बियन का मतलब होता है कि जब कोई युवती अथवा महिला दूसरी युवती या महिला की ओर आकर्षित रहती है तो इन्हें समलैंगिक महिलाएं कहा जाता है. लेस्बियन सैक्स के दौरान दोनों पार्टनर केवल महिलाएं ही रहती हैं.

जी यानी गे: ऐसे युवक या पुरुष जो केवल किसी युवक या पुरुष के साथ यौन संबंध बनाते हैं और उन की तरफ आकर्षित होते हैं तो उन को ‘गेÓ कहा जाता है. इन्हें समलैंगिक पुरुष कहा जाता है. ‘गेÓ सैक्स के दौरान दोनों पार्टनर केवल पुरुष ही रहते हैं. समलैंगिक महिला या पुरुष का पता समाज को तब तक नहीं चल पाता, जब तक कि वह इस का रहस्य खुद न उजागर करें. बहुत से समलैंगिंग पुरुष अथवा महिला अपनी इच्छा न होने पर भी विवाह करते हैं और अपना घरपरिवार बसाते हैं. जीवन भर समाज उन की असली पहचान पता नहीं लगा पाता है, वे खुद भी न तो समझ पाते हैं और न ही यह स्वीकार भी कर पाते हैं कि ये लेस्बियन या ‘गेÓ हैं.

बी यानी बाइसैक्सुअल: ऐसे पुरुष या महिला, जो दोनों के प्रति आकर्षित होते हैं यानी कि महिला और पुरुष दोनों के साथ सैक्स संबंध बनाते हैं, उन्हें बाइसैक्सुअल कहा जाता है. लड़के और लड़कियां दोनों बाइसैक्सुअल होते हैं. टी यानी ट्रांसजेंडर: जब जन्म से शरीर पुरुष का हो, लेकिन वह खुद को लड़की अथवा महिला जैसा महसूस करता हो अथवा शरीर तो महिला का हो लेकिन उसे खुद पुरुष जैसा महसूस होता हो तो उन्हें ट्रांसजेंडर कहते हैं. कभीकभी तो पुरुष स्त्री और स्त्री पुरुष बन जाते हैं. क्यू यानी क्वीपर: क्वीपर का शाब्दिक अर्थ होता है अजीब, यानी कि कुछ लोग यह तय नहीं कर पाते कि वे किस के साथ शारीरिक संबंध बनाना चाहते हैं. महिला से या पुरुष से, इन्हें ‘क्वीपरÓ कहा जाता है.

आई यानी इंटरसैक्स: जब शारीरिक रूप कोई इंसान न तो महिला होता है और न ही पुरुष, इन के गुप्तांगों की पहचान स्पष्ट नहीं होती तो उन्हें इंटरसैक्स कहते हैं. इन को आम भाषा में किन्नर अथवा हिजड़ा कहा जाता है. ए यानी एसैक्शुअल: ऐसे लोग जिन में किसी के भी प्रति यौन आकर्षण नहीं होता, उन्हें किसी के साथ भी सैक्स संबंध बनाने की चाहत नहीं होती तो उन्हें एसैक्शुअल कहा जाता है.

 

 

 

Aligarh News : पत्नी के समलैंगिक संबंधों के कारण में मारा गया पति

Aligarh News : 4 बच्चों की मां रूबी ने रजनी से बने समलैंगिक संबंधों के लिए अपने पति भूरी सिंह को रजनी के साथ मिल कर ठिकाने लगा दिया. बच्चों की तो छोडि़ए, अगर वह अपने और रजनी के भविष्य के बारे में सोचती तो…

जिला अलीगढ़, उत्तर प्रदेश. तारीख 10 मार्च, 2020. अलीगढ़ के थाना गांधीपार्क क्षेत्र की कुंवरनगर कालोनी. उस दिन होली थी. कुंवरनगर कालोनी के भूरी सिंह ने दोस्तों और परिचितों के साथ जम कर होली खेली. होली खेलने के बाद वह नहाधो कर सो गया. भूरी सिंह सटरिंग का काम करता था. शाम को सो कर उठने के बाद वह अपनी पत्नी रूबी से यह कह कर कि ठेकेदार से अपने रुपए लेने जा रहा है, घर से निकल गया. जब वह देर रात तक घर वापस नहीं आया तो पत्नी को उस की चिंता हुई. रात गहराने लगी तो रूबी ने किराएदार हरिओम की पत्नी रितू के मोबाइल से पति को फोन किया, लेकिन उस का फोन रिसीव नहीं हुआ.

दूसरे दिन 11 मार्च की सुबह 7 बजे लोगों ने कालोनी से निकलने वाले नाले में एक लाश उल्टी पड़ी देखी. इस जानकारी से कालोनी में सनसनी फैल गई. आसपास के लोग जमा हो गए. इसी बीच किसी ने पुलिस को सूचना दे दी. कुछ ही देर में थाना गांधी पार्क के थानाप्रभारी सुधीर धामा पुलिस टीम के साथ वहां पहुंच गए. इसी बीच भूरी सिंह की पत्नी रूबी को किसी ने नाले में लाश मिलने की जानकारी दी. रूबी तत्काल वहां पहुंच गई. थानाप्रभारी ने लाश को नाले से बाहर निकलवाया. मृतक की शिनाख्त घटनास्थल पर पहुंची उस की पत्नी रूबी व छोटे भाई किशन लाल गोस्वामी ने भूरी सिंह गोस्वामी के रूप में की.

थानाप्रभारी ने इस घटना की जानकारी अपने उच्चाधिकारियों को दे दी थी. कुछ ही देर में एसपी (सिटी) अभिषेक कुमार फोरैंसिक टीम के साथ मौकाएवारदात पर पहुंच गए. पति की लाश देख रूबी बिलखबिलख कर रो रही थी. मोहल्ले की महिलाओं ने उसे किसी तरह संभाला. पुलिस अधिकारियों ने घटनास्थल का बारीकी से निरीक्षण किया, फिर फोरैंसिक टीम ने भी जांच कर साक्ष्य जुटाए.  मृतक के मुंह पर टेप लगा था और उस के हाथपैर रस्सी से बंधे हुए थे. जांच के दौरान फोरैंसिक टीम ने देखा कि मृतक भूरी की गरदन पर चोट का निशान है. भूरी सिंह की हत्या किस ने और क्यों की, इस का जवाब किसी के पास नहीं था. सवाल यह भी था कि हत्यारे हत्या कर लाश को मृतक के छोटे भाई के घर के पास नाले में क्यों फेंक गए थे?

पुलिस का अनुमान था कि हत्यारे भूरी सिंह की हत्या किसी अन्य स्थान पर करने के बाद लाश को उस के छोटे भाई किशन गोस्वामी के घर के पास फेंक गए होंगे. होली का त्यौहार होने के कारण आवागमन कम होने से हत्यारों को लाश फेंकते किसी ने नहीं देखा होगा. पुलिस को मृतक की जेब से उस का मोबाइल भी मिल गया था. थानाप्रभारी ने रूबी से उस के पति के बारे में पूछताछ की. रूबी ने बताया, ‘मंगलवार रात 9 बजे पति के मोबाइल पर पेमेंट ले जाने के लिए ठेकेदार का फोन आया था. इस के बाद वह घर से निकल गए और फिर नहीं लौटे. काफी रात होने पर उन्हें फोन किया, लेकिन काल रिसीव नहीं हुई थी.’ परिवार वालों को यह जानकारी नहीं थी कि भूरी सिंह किस ठेकेदार के पास रुपए लेने गया था. पुलिस ने मौके की काररवाई निपटाने के बाद लाश को पोस्टमार्टम के लिए भिजवा दिया.

दूसरे दिन पोस्टमार्टम की रिपोर्ट आई तो पता चला कि भूरी सिंह की हत्या तार अथवा रस्सी से गला घोटने से हुई थी. मृतक के भाई किशनलाल गोस्वामी की तहरीर पर पुलिस ने मृतक भूरी सिंह की पत्नी रूबी, उस के किराएदार डब्बू, डब्बू की पत्नी रजनी और दूसरे किराएदार हरिओम और डब्बू के एक दोस्त आसिफ के विरुद्ध हत्या का केस दर्ज कर लिया. रिपोर्ट में आरोप लगाया गया कि मृतक भूरी सिंह की पत्नी रूबी के किराएदार डब्बू से अवैध संबंध थे. इस का भूरी सिंह विरोध करता था. इस बात को ले कर रूबी और भूरी सिंह में आए दिन झगड़ा होता रहता था. घटना से 10 दिन पहले भी रूबी व किराएदार डब्बू ने मिल कर भूरी सिंह को पीटा था.

घटना वाली रात डब्बू ने अपने दोस्त आसिफ को घर बुलाया और पांचों नामजदों ने मिल कर भूरी की हत्या कर दी. हत्या के बाद लाश को मकान से कुछ दूर नाले में फेंक दिया. सुबह रूबी ने अपने आप को साफसुथरा दिखाने के लिए पुलिस को कपोलकल्पित कहानी सुनाई थी कि भूरी सिंह ठेकेदार से पेमेंट लेने गया था, जो लौट कर घर नहीं आया. पुलिस ने हत्या का मुकदमा दर्ज करने के बाद जांच शुरू कर दी. सीओ (द्वितीय) पंकज श्रीवास्तव ने बताया कि मृतक की लाश से उस का मोबाइल बरामद हुआ था, जिस की मदद से कुछ तथ्य सामने आए. पुलिस केस की गहनता से जांच कर रही थी. नतीजतन पुलिस ने घटना के दूसरे दिन ही इस हत्या की गुत्थी सुलझा ली.

दरअसल, पुलिस ने भूरी सिंह की हत्या के आरोप में मृतक की पत्नी रूबी व उस के किराएदार डब्बू की पत्नी रजनी को हिरासत में ले कर पूछताछ की. शुरुआती पूछताछ में दोनों पुलिस को बरगलाने की कोशिश करने लगीं. लेकिन जब सख्ती हुई तो दोनों एकदूसरे को देख कर टूट गईं और अपना जुर्म कुबूल कर लिया. 12 मार्च को एसपी (सिटी) अभिषेक कुमार ने पुलिस लाइन में प्रैसवार्ता के दौरान जो कुछ बताया, वह चौंकाने वाला था. दरअसल, सभी समझ रहे थे कि भूरी सिंह की हत्या उस की पत्नी रूबी के किराएदार डब्बू से अवैध संबंधों के बीच रोड़ा बनने के चलते की गई थी, लेकिन हकीकत कुछ और ही थी, जिसे सुन कर पुलिस ही नहीं सभी हक्केबक्के रह गए.

भूरी सिंह की हत्या का कारण था 2 महिलाओं के समलैंगिक संबंध. रूबी और रजनी ने अपना जुर्म कबूल कर लिया. दोनों ने इस हत्याकांड के पीछे जो कहानी बताई, वह चौंकाने वाली थी—

भूरी सिंह की हत्या पूरी प्लानिंग के तहत की गई थी. इन दोनों महिलाओं ने ही उस की हत्या की पटकथा एक माह पहले लिख दी थी, जिसे अंजाम तक पहुंचाया होली के दिन गया. भूरी सिंह की पहली पत्नी की मृत्यु के बाद उस का विवाह पत्नी की बहन यानी साली रूबी से करा दिया गया था. भूरी सिंह दूसरी पत्नी रूबी से उम्र में 11 साल बड़ा था. भूरी सिंह के पहली पत्नी से 3 बेटे व 1 बेटी थी. भूरी सिंह सीधेसरल स्वभाव का था. वह केवल अपने काम से काम रखता था. ऐसे व्यक्ति का सीधापन कभीकभी उस के लिए ही घातक साबित हो जाता है. भूरी सिंह जैसा था, उस की पत्नी रूबी ठीक उस के विपरीत थी. वह काफी तेज और चंचल स्वभाव की थी.

घर वालों ने उस की शादी भूरी सिंह से इसलिए की थी ताकि बहन के बच्चों की देखभाल ठीक से हो जाए. वह मजबूरी में भूरी सिंह का साथ निभा रही थी. अपनी ओर भूरी सिंह द्वारा ध्यान न देने से जवान रूबी की रातें करवटें बदलते कटती थीं. भूरी सिंह अपने बड़े भाई के मकान में किराए पर रहता था. पड़ोस में ही रजनी भी किराए के मकान में रहती थी. दोनों हमउम्र थीं. एकदूसरे के यहां आनेजाने के दौरान जानेअनजाने सोशल मीडिया पर अश्लील फोटो, वीडियो देखतेदेखते दोनों में नजदीकियां हो गईं, फिर दोस्ती गहरा गई.

दोनों के बीच समलैंगिक संबंध बन गए और एकदूसरे से पतिपत्नी की तरह प्यार करने लगीं. रूबी पत्नी तो रजनी पति का रिश्ता निभाने लगी. दोनों सोशल मीडिया की इस कदर मुरीद थीं कि अपना ज्यादातर समय मोबाइल पर बिताती थीं. दोनों अपने इस रिश्ते के वीडियो तैयार कर के टिकटौक पर भी अपलोड करती थीं. उन के कई वीडियो वायरल हो चुके थे. डब्बू और रजनी की शादी को 5 साल हो गए थे. उन का कोई बच्चा नहीं था. इसलिए भी दोनों महिलाओं के रिश्ते और गहरे हो गए. बाद में दोनों ने साथ रहने की कसमें खाते हुए कभी जुदा न होने का फैसला लिया.

इस बीच भूरी सिंह ने अपना मकान बनवा लिया था. रूबी और रजनी के बीच बने संबंध इस कदर प्रगाढ़ हो चुके थे कि घटना से एक साल पहले पति भूरी सिंह से जिद कर के रूबी ने अपने मकान की ऊपरी मंजिल पर एक कमरा और बनवा लिया था. फिर रजनी को उस के पति डब्बू के साथ किराएदार बना कर रख लिया, ताकि उन के संबंधों के बारे में किसी को पता न चल सके. एक ही मकान में रहने से अब दोनों महिलाएं बिना किसी डर के आपस में मिल लेती थीं. भूरी सिंह सटरिंग के काम के लिए सुबह ही निकल जाता था और देर शाम लौटता था. इस के चलते दोनों सहेलियों में पिछले 2 सालों में गहरे समलैंगिक संबंध बन गए थे. दोनों एकदूसरे से बिना मिले नहीं रह पाती थीं.

इन अनैतिक संबंधों को बनाए रखने के लिए दोनों काफी गोपनीयता बरतती थीं. फिर भी उन की पोल खुल ही गई. एक माह पहले ही भूरी सिंह को अपनी पत्नी रूबी  और किराएदार रजनी के बीच चल रहे अनैतिक संबंधों का पता चल गया. दोनों महिलाओं के बीच चल रहे प्रेम संबंधों का पता चलने के बाद भूरी सिंह के होश उड़ गए. वह परेशान रहने लगा. उस ने इन अनैतिक संबंधों को गलत बताते हुए विरोध किया. उस ने पत्नी रूबी को समझाया और रजनी से दूर रहने को कहा. इन्हीं संबंधों को ले कर दोनों में विवाद होने लगा. भूरी सिंह ने रूबी को सुधर जाने की हिदायत देते हुए कहा कि वह अपने मकान में रजनी को किराएदार नहीं रखेगा.

दूसरे दिन भूरी सिंह के काम पर जाने के बाद रूबी ने यह बात रजनी को बताई. भूरी सिंह उन के प्रेम संबंधों में बाधक बन रहा था, इस से दोनों परेशान हो गईं. काफी विचारविमर्श के बाद दोनों ने राह के रोड़े भूरी सिंह को रास्ते से हटाने का फैसला कर लिया. इस के बाद भी दोनों के संबंध चलते रहे. हां, अब दोनों थोड़ी होशियारी से मिलती थीं. होली वाले दिन शाम को रूबी और रजनी ने भूरी सिंह को जम कर शराब पिलाई. इस के चलते भूरी सिंह नशे में बेसुध हो गया, तो दोनों ने उस के हाथपैर रस्सी से बांधे और मुंह पर टेप लगाने के बाद रस्सी से गला घोंट कर हत्या कर दी.

रात होने पर दोनों ने लाश को पड़ोस में रहने वाले छोटे भाई किशनलाल के घर के पास नाले में फेंक दिया ताकि शक भाई  के ऊपर जाए. बुधवार को कुंवर नगर कालोनी में नाले में उस का शव मिला. पुलिस द्वारा पूछताछ करने पर रूबी ने अफवाह फैला दी कि उस का पति भूरी सिंह ठेकेदार से रुपए लेने की बात कह कर घर से निकला था, लेकिन देर रात तक जब घर वापस नहीं आया, तब उस ने किराएदार हरिओम की पत्नी रितू के फोन से काल थी. जबकि हकीकत वह स्वयं जानती थी. पुलिस ने इस हत्याकांड का खुलासा करने के साथ ही दोनों महिलाओं की निशानदेही पर हत्या में प्रयुक्त रस्सी व टेप बरामद कर लिया. दोनों महिलाओं को न्यायालय में पेश करने के बाद जेल भेज दिया गया.

हालांकि भारतीय दंड संहिता की धारा-377 को वैध कर दिया गया है यानी समलैंगिकता अब हमारे देश में कानूनन अपराध नहीं है, अर्थात आपसी सहमति से 2 व्यस्कों के बीच समलैंगिक संबंध अब अपराध नहीं रहा. लेकिन हमारे देश में अभी तक इसे पूरी तरह अपनाया नहीं गया है. इसी के चलते लोग अपने संबंधों को समाज में स्थापित करने के लिए अपराध की राह पर चल पड़ते हैं. भूरी सिंह हत्याकांड के पीछे भी यही कारण प्रमुख रहा. दोनों महिलाओं के अनैतिक संबंधों के चलते उन के परिवार उजड़ गए. भूरी सिंह की मौत के बाद उस के चारों अबोध बच्चे अनाथ हो गए.

—कथा पुलिस सूत्रों पर आधारित

लेस्बियन मां ने की बेटे की हत्या

लेस्बियन मां ने की बेटे की हत्या – भाग 3

इशरत परवीन शांता की हमउम्र थी और उन की दोस्ती शादी के पहले से थी, जो शांता की शादी के बाद भी बनी रही. वह शांता को घरेलू नाम गुड्डी कह कर बुलाती थी. दोनों सहेलियों में जबरदस्त प्रेम था. दोनों हर रोज एकदूसरे से मिले या बात किए बगैर रह नहीं पाती थीं.

शादी के पहले से थे समलैंगिक संबंध

शांता की शादी पंकज शर्मा के साथ 2012 में हुई थी. वहीं, इशरत परवीन का निकाह 2018 में हुआ था. शादी के कुछ समय बाद ही इशरत परवीन ने अपने पति का घर छोड़ दिया था और अपने मायके में रह रही थी.

इधर शांता की भी अपने पति के साथ हमेशा अनबन होती रहती थी. दोनों जब भी साथ होतीं, तब अपने अपने पति की शिकायतों का पुलिंदा खोल लेती थीं. उस के बाद अपने मन की भड़ास निकालते हुए हमबिस्तर हो जाती थीं.

उन के बीच समलैंगिक संबंध बेहद गहरे बन चुके थे. उन के बीच अप्राकृतिक सैक्स संबंधों की भूख इस कदर थी कि वे इस की तलब पूरी करने के लिए किसी भी हद तक जाने के लिए तैयार रहती थीं.

पंकज शर्मा द्वारा शांता और इशरत के बीच समलैंगिकता का खुलासा होते ही पुलिस द्वारा दोनों से अलगअलग स्नेहांशु की हत्या के बारे में सख्ती के साथ पूछताछ की गई.

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पहले तो वे मुकरती रहीं, लेकिन बाद में शांता ने स्वीकार कर लिया कि उस ने ही अपने बेटे की हत्या की है. इसी तरह से अलग से हुई इशरत से पूछताछ में उस ने भी हत्या में सीधे तौर पर शामिल होने की बात स्वीकार कर ली.

शांता ने बताया कि वह अपनी गर्लफ्रेंड से मिले बगैर नहीं रह सकती थी, जिस में उस का बेटा ही बाधक बन चुका था. यानी कि अपने लेस्बियन प्रेमी से मिलने की तीव्र इच्छा में एक मां ने ही बेटे को मौत की नींद सुला दिया था. उन्होंने घटना को किस तरह से अंजाम दिया, इस बारे में विस्तार से जो कुछ बताया वह इस प्रकार है.

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शांता ने पुलिस को बताया कि शादी से पहले ही उस के इशरत के साथ समलैंगिक रिश्ते थे. दोनों एकदूसरे के साथ संबंध बनाती थीं. दोनों की शादी हो जाने के बाद भी उन के बीच यह रिश्ता बना रहा. इशरत ने तो इस संबंध के लिए अपने पति और ससुराल तक को त्याग दिया था. जबकि शांता किसी तरह पति के साथ मतभेद के बावजूद ससुराल में टिकी हुई थी. इसी बीच वह एक बेटे की मां बन गई थी, जो 10 साल का हो चुका था.

दोनों पतिपत्नी काम करते थे, इस कारण उन के पास आर्थिक तंगी नहीं थी. बच्चा भी प्राइवेट स्कूल में पढ़ाई कर रहा था.

एक रोज स्नेहांशु ने दोनों को आपत्तिजनक हालत में तब देख लिया था, जब वह स्कूल से घर आया था. उस वक्त तो उस ने कुछ नहीं बोला, लेकिन जब इशरत ने वहां से जाते वक्त अपने बैग से चौकलेट निकाल कर उसे दी, तब उसे फेंकते हुए स्नेहांशु बोला, ”मौसी तुम गंदी हो, मुझे तुम से बात नहीं करनी है. जाओ, यहां से.’’

यह सुन कर मां बोली, ”नहीं बेटा, मौसी को ऐसे नहीं बोलते हैं.’’

”बोलूंगा, मौसी गंदी है. तुम भी गंदी हो. सब को बोलूंगा… पापा को भी बोलूंगा.’’ स्नेहांशु चीखता हुआ बोला और घर से बाहर जाने लगा. शांता ने उसे खींच कर अपनी गोद में बिठा लिया. ‘प्यारा बेटा, दुलारा बेटा’ कह कर पुचकारने लगी.

उस रोज किसी तरह से शांता और इशरत ने उस के पसंद की मिठाई खिलाने, चौकलेट देने और साइकिल दिलवाने के आश्वासन पर वह थोड़ी देर में नरम पड़ गया. किंतु उस के चेहरे से साफ पता चल रहा था कि उसे अपनी मां और मौसी से नफरत हो चुकी है.

उसी दिन से शांता और इशरत की रातों की नींद उड़ गई थी. दोनों को डर सता रहा था कि उन के बैडरूम की बात कहीं इस बच्चे के द्वारा सभी को मालूम न हो जाए. स्नेहांशु उस की सच्चाई को लोगों से बता न दे, जिस से उन की समाज में बनीबनाई छवि खराब हो जाएगी. उन्हें इस से अधिक चिंता यह सताने लगी थी कि वे अपने सैक्स की भूख कैसे मिटा पाएंगी?

करीब हफ्ते भर से उन्हें रिश्ता बनाने का मौका नहीं मिला था. यह बेचैनी उन के दिमाग की नसों को बुरी तरह से झिंझोड़ चुकी थी. वे बौखलाहट से भर गई थीं. उन की स्थिति मनोरोगी जैसी हो गई थी.

18 फरवरी, 2024 को घर में कोई नहीं था. कई दिनों बाद इशरत आई थी. दोनों अपने कमरे में थीं. स्नेहांशु इशरत को देखते ही साइकिल ले कर निकल पड़ा था. थोड़ी देर में घर आया. सीधा अपनी मां के कमरे में जा घुसा. वहां दोनों को उस ने नग्न हालत में देखा तो वह चीख पड़ा, ”तुम लोग गंदे हो.’’

उन्होंने तुरंत अपनेअपने कपड़े पहने. तब तक स्नेहांशु कमरे से निकल चुका था. कुछ मिनट में ही दोनों कमरे से बाहर निकलीं. प्लान के मुताबिक उन्होंने मिल कर सब से पहले एक मूर्ति से उदास बैठे स्नेहांशु के सिर पर कई वार कर दिए.

जब बुरी तरह से चोट खा कर वह बेहोश हो गया और जमीन पर गिर पड़ा तो उन्होंने उस के हाथों की नसें काट दीं. इस पर भी उन्हें जीवित बचने का अंदेशा हुआ, तब उस के शरीर पर रसोई के चाकू से अनगिनत प्रहार कर दिए. इस हत्या से पहले दोनों ने घर के टीवी की आवाज तेज कर दी, ताकि बच्चे की चीख बाहर न पहुंचे.

स्नेहांशु फर्श पर बेसुध पड़ा था. उस के बाद दोनों वहां से फरार हो गईं. इशरत ने अपना मोबाइल फोन कर लिया था. फरार होने के बीच चंद मिनट के लिए इशरत ने अपना मोबाइल फोन औन कर शांता से बात की थी. एफएसएल और फिंगरप्रिंट एक्सपर्ट की रिपोर्ट सामने आने के बाद पुलिस पूरी तरह से निश्चिंत हो गई कि इस घटना को इन दोनों महिलाओं ने ही अंजाम दिया था.

पुलिस ने शांता शर्मा और उस की सहेली इशरत परवीन को गिरफ्तार कर लिया. जांच अधिकारी के मुताबिक दोनों महिलाओं के समलैंगिक संबंधों की जानकारी शांता के पति को भी थी, लेकिन वह लोकलाज के मारे यह पूरी बात हमेशा छिपाता रहा. कथा लिखे जाने तक दोनों को न्यायिक हिरासत में ले कर आगे की काररवाई की जा रही थी.

लेस्बियन मां ने की बेटे की हत्या – भाग 2

पूछताछ में पंकज शर्मा के मकान से 5 मकान दूर रहने वाले नीतीश आनंद ने बताया कि जब उन के घर से बच्चे के चीखने चिल्लाने की आवाजें आईं तो वह दौड़ेदौड़े घटनास्थल पर पहुंचे. उन्होंने देखा कि बच्चे के सिर पर गहरी चोट लगी थी. उस के पूरे शरीर पर चाकू से गोदे जाने के निशान थे. खून से लथपथ वह तड़प रहा था. इस से पहले कि वह दूसरे की मदद से उसे ले कर अस्पताल जा पाते, उस ने दम तोड़ दिया. इसी बीच उस के मम्मीपापा को सूचित किया जा चुका था.

सीसीटीवी फुटेज से मिले सुराग

फिर सवाल था कि आखिर कौन हो सकता है, किस ने अपनी खुन्नस और अपनी दुश्मनी मासूम बच्चे से निकाली? इन्हीं सवालों के सहारे पुलिस मौके से सुराग और सबूतों को बटोरने में जुट गई. पुलिस ने बच्चे के बारे में जानकारी इकट्ठा की. उस की मां से कुछ बुनियादी सवालों को ले कर भी पूछताछ की. जैसे वो कहां जाता था, किन बच्चों के साथ खेलता था, किसकिस से मिलता था. हालांकि मामूली सवालों के जवाब से पुलिस को तसल्ली नहीं हुई.

घटनास्थल का पुलिस कमिश्नर अमित पी. जबलगी ने भी दौरा किया और उस के बाद फोरैंसिक टीम ने नमूने इकट्ठे कर जांच के लिए भेज दिए. पूछताछ में पंकज शर्मा ने रोते हुए बताया कि उन के परिवार के साथ इलाके में किसी से भी कोई रंजिश नहीं है.

किंतु कुछ दिन पहले स्कूल में उन के बेटे और एक सीनियर छात्र के बीच किसी बात को ले कर झगड़ा हो गया था. दोनों एक साथ ही स्कूल जाया करते थे. फिर भी उन्हें यह विश्वास नहीं हो पा रहा है कि मामूली झगड़े के लिए कोई कैसे इस तरह से निर्मम तरीके से बच्चे की हत्या कर सकता है?

पुलिस के सामने सब से बड़ा सवाल था कि आखिर बच्चे को ले कर किसी की किसी के साथ क्या दुश्मनी हो सकती है? इस दिशा में तहकीकात शुरू की गई. पूछताछ के लिए सब से पहले उस के मम्मीपापा से कई सवाल किए गए.

इस के अलावा जांचकर्ताओं को पता चला कि शांता अकसर अपने बेटे को पीटती थी. इस का कारण पूछने पर उस ने बताया कि वह पढ़ नहीं पाता था, तब उसे पीटती थी. उस के बयानों की पुष्टि के लिए कुछ पड़ोसियों और स्नेहांशु के हमउम्र दोस्तों से भी पूछताछ की गई.

तमाम पूछताछ और छानबीन करने पर भी पुलिस को जब कोई सुराग नहीं मिला, तब पुलिस की टीम घटना के अगले दिन मौका ए वारदात पर फिर जा पहुंची. वहां सुराग खंगालने लगी. तमाम साइंटिफिक सुरागों, मोबाइल टावर से मिली लोकेशन और फोरैंसिक एक्सपर्ट के जरिए मिले सबूतों के साथसाथ कुछ सीसीटीवी फुटेज भी खंगाले गए.

घर के बाहर लगे सीसीटीवी कैमरे के फुटेज निकाले गए. सीसीटीवी में पुलिस ने देखा कि 2 महिलाएं स्नेहांशु के घर से बाहर निकल रही हैं. इन में से एक स्नेहांशु की मम्मी थी तो दूसरी की पहचान उस की सहेली इशरत परवीन के रूप में हुई. पुलिस ने मृतक के घर वालों के मोबाइल फोन नंबरों की काल डिटेल्स निकलवाई.

पुलिस ने इशरत के बारे में जल्द ही कई जानकारियां जुटा ली थीं. शांता शर्मा से उस का फोन नंबर ले लिया था और उस के फोन की काल डिटेल्स भी निकलवा ली थी. काल डिटेल्स के अनुसार शांता के नंबर से उस की हर रोज काफी समय तक बात होती रहती थी. किंतु घटना के दिन उस की शांता से काफी कम समय के लिए बात हुई थी.

एक और चौंकाने वाली बात थी कि उस रोज उस का मोबाइल करीब 6 घंटे तक बंद रहा. इशरत परवीन के मोबाइल की लोकेशन दोपहर 2 बजे कोलकाता के वाटगंज में दिखी थी. फिर उस का मोबाइल स्विच्ड औफ हो गया था. दोबारा तकरीबन 5-6 घंटे बाद शाम को 8 बजे उस के मोबाइल की टावर लोकेशन कोलकाता के वाटगंज की थी.

मां आई शक के दायरे में

असल में चंद मिनट के लिए ही उस का मोबाइल फोन चालू हुआ था, फिर उसी के नंबर से शांता के मोबाइल नंबर पर बात हुई थी. पुलिस के लिए यही बात चौंकाने वाली थी. यहीं से पुलिस को शक हुआ और दोनों ही उस बच्चे की हत्या के संदेह के दायरे में आ गईं. देर किए बगैर पुलिस हत्या के आरोप में बच्चे की मां शांता शर्मा को पूछताछ के लिए थाने ले आई.

पुलिस ने बच्चे की हत्या और घटना के समय उस के वहां नहीं होने के बारे में कई सवाल किए गए. इस क्रम में यह भी पूछा गया कि उस ने अपने बच्चे को क्यों मारा? कई बार वह अपने ही जवाब में उलझी हुई तो भयभीत भी नजर आई. उस के मनोभाव और जवाब बदलते देख कर पुलिस ने उसे हिरासत में ले लिया. सीधे लौकअप में डाल दिया.

उस के गिरफ्त में आने के बाद सनसनी फैल गई. इस की खबरें लोकल चैनल और सोशल मीडिया पर तेजी से चलने लगीं. पूछताछ के दरम्यान उस के विचलित होने की हरकतों से पुलिस का शक और गहरा हो गया था.

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                                                  शांता और उस की सहेली इशरत

दूसरी तरफ शांता गिरफ्त में आते ही तब कमजोर पड़ गई थी, जब उस के पति के साथ कुछ बातचीत हुई. पति ने उस के कान में क्या कुछ कहा, जो वह एकदम से ढीली पड़ गई. उस ने वह बात पुलिस से भी कही.

दरअसल, पंकज शर्मा ने अपनी पत्नी के गलत आचरण के बारे में बताते हुए कहा था, ”जैसी करनी वैसी भरनी है साहब जी…आदत से लाचार थी. मेरे मना करने पर भी नहीं मानती थी.’’

”क्या उस का किसी के साथ कोई चक्कर था? कोई बौयफ्रेंड था?’’ पुलिस ने पूछा तो इस पर पंकज शर्मा छूटते ही तीखे लहजे में बोले, ”बौयफ्रेंड नहीं सर, उस की गर्लफ्रेंड थी.’’

”तुम्हारा कहना है कि उस का किसी लड़की के साथ ही चक्कर था. मतलब कि वह लेस्बियन है?’’ जांच अधिकारी चौंकते हुए बोला. फिर थोड़ा ठहर कर पूछा, ”लेकिन इस का बच्चे की हत्या से क्या संबंध हो सकता है?’’

”वह मैं नहीं जानता, लेकिन इतना पता है कि वह अपनी सहेली इशरत के साथ घंटों बंद कमरे में अकेले समय गुजारती थी,’’ पंकज बोला.

”यह तुम क्या कह रहे हो अपनी पत्नी के बारे में!’’

”मैं बिलकुल सही कह रहा हूं सर, मैं ने अपनी पत्नी शांता और उस की सहेली इशरत को कई बार समलैंगिक संबंध बनाते हुए पकड़ा है. इस पर उन्हें डांटा भी था. शांता को समझाया भी था कि शादी से पहले तक जो था, सो था अब बच्चा बड़ा हो रहा है. उसे मालूम होगा, तब उस पर बुरा असर पड़ेगा. लेकिन वह नहीं मानती थी.’’ पंकज शर्मा बोले.

”तुम ने उस की सहेली से भी इस संबंध को खत्म करने के बारे में कुछ नहीं कहा?’’ जांच अधिकारी ने सवाल किया.

”मैं ने उसे भी समझाने की कोशिश की थी, लेकिन बाद में बीवी ने चुप रहने को कहा था और हिदायत देती हुई मुझे इशरत की तरफ से धमकी दी कि अगर मैं ने इस बारे में उस से दोबारा बात की तो वह मुझे रेप के मामले में फंसा देगी. फिर मैं डर गया और अपने मुंह पर ताला जड़ लिया.’’ यह कहते हुए पंकज शर्मा ने एक लंबी सांस ली. उन्होंने महसूस किया कि जैसे उन के दिलोदिमाग पर से कोई बोझ उतर गया हो.

पुलिस टीम के सामने एक और नई बात आ गई थी. साथ ही उस के शक की सूई शांता की सहेली इशरत की ओर भी घूम गई थी. उस वक्त रात अधिक हो चुकी थी और वह कोलकाता वाटगंज में रहती थी, जो दूसरे थाना क्षेत्र में था. उसे हिरासत में लेने के लिए उत्तरपाड़ा थाना पुलिस पहले श्रीरामपुर महिला थाने पहुंची और वहां की पुलिस टीम के साथ इशरत परवीन को उस के घर से उठा लाई.

लेस्बियन मां ने की बेटे की हत्या – भाग 1

पुलिस की शुरुआती जांच में हैवानियत का पता चला. 10 वर्षीय स्नेहांशु के सिर को भारी चीज से कुचला गया था. उस के हाथों की  नसें काट दी गई थीं. सब्जी काटने वाली छुरी से उस के शरीर पर अनगिनत जख्म किए गए थे. घटनास्थल पर ही एक टेढ़ी छुरी पड़ी थी. घर में रखे गए सारे सामान सुरक्षित थे. इसे देख कर कोई भी आसानी से समझ सकता था कि घटना लूट को अंजाम देने के लिए नहीं की गई थी.

पुलिस की फोरैंसिक टीम ने लाश और घटनास्थल की जांच के बाद पाया कि हत्यारा बच्चे के साथ बड़ी बेरहमी से पेश आया होगा.

जिस तरह से बच्चे की हत्या की गई थी, उस से यह भी जाहिर हो रहा था कि हो न हो जिस ने भी मारा, उसे इस बच्चे से बेहद नफरत रही होगी. इतना ही नहीं, जख्मों से यह भी साफ पता चला कि कातिल किसी भी सूरत में बच्चे को जीवित बचने नहीं देना चाहता था.

पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता से करीब 17 किलोमीटर दूर हुगली जिला काफी चहलपहल वाले क्षेत्रों में से एक है. यहां के ऐतिहासिक, धार्मिक और कारोबारी महत्त्व वाले घनी आबादी के शहर कोन्नगर के आदर्शनगर मोहल्ले में 18 फरवरी, 2024 की शाम के वक्त अचानक चिल्लपों मच गई थी. कई लोग स्नेहांशु के घर की ओर दौड़ पड़े थे, जबकि कुछ लोग अपनेअपने घरों के दरवाजे पर आ कर कानाफूसी करने लगे थे.

”अरी ओ सोनू की मां, सुना है स्नेहांशु को किसी ने मार दिया? अभी तो एक घंटा पहले इधर साइकल चला रहा था. क्या हुआ उसे? जा… जा कर पता करो तो क्या बात है?’’ एक वृद्धा पड़ोसी महिला से बोली.

”हां चाची, मैं ने भी थोड़ी देर पहले उस के घर से चीखने चिल्लाने की आवाजें सुनी थीं. उस के घर से टीवी की बहुत तेज आवाज आ रही थी, पता नहीं चल पाया कि कोई चीख रहा है या कोई मारपीट वाली फिल्म चल रही है.’’ 10 साल के स्नेहांशु के स्कूल में पढऩे वाले सोनू की मां बोली.

”अरे, मैं तो चली जाती शांता के घर… मेरे घुटने में दर्द है न! ज्यादा चल नहीं सकती मैं. आज सुबह से शांता भी नहीं दिखाई दी. लगता है, उस की सहेली आई हुई है.’’ वृद्धा बोली.

”हां चाची, शांता बहन की सहेली को तो मैं ने दोपहर में ही उस के घर जाते देखा था, लेकिन स्नेहांशु को क्या हुआ. सोनू को भेजती हूं पता करने.’’

”अरे नहीं वह बच्चा है, तू ही चली जा.’’ वृद्धा बोली.

”जी चाची,’’ कहती हुई सोनू की मां स्नेहांशु के घर की ओर जाने लगी.

उसी वक्त उस ओर तेजी से पुलिस की एक गाड़ी भी गुजरी. वृद्धा हैरानी से देखती हुई बुदबुदाई, ”लगता है, मैं ने सही सुना…पता नहीं क्या हो गया इस मोहल्ले में!’’

स्नेहांशु के बारे में बात कर रही औरतों के घर से करीब 200 मीटर की दूरी पर दाईं ओर गली में मुड़ते ही पंकज शर्मा पूरे परिवार के साथ रहते थे. परिवार में पत्नी शांता शर्मा के अलावा उन का 10 साल का बेटा स्नेहांशु था. हां, साथ में प्यारा सा पालतू कुत्ता और पड़ोस में उन के भाई का परिवार भी रहता था.

शांता अपने ससुर ओमप्रकाश शर्मा, सास प्रेमलता शर्मा, देवर प्रभात शर्मा और जय के साथ रहती थी. पति पंकज और बेटा स्नेहांशु भी साथ थे. एक अन्य देवर प्रवीर अपने परिवार के साथ सिलीगुड़ी में रहता था.

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चाकू से गोद कर किस ने की बच्चे की हत्या

पंकज शर्मा के घर में कोहराम मचा हुआ था. वहां उत्तरपारा थाने से आई पुलिस मौजूद थी. शाम होने के चलते गली में लोगों का आवागमन अधिक था. पड़ोसियों के अलावा आतेजाते लोगों की अच्छीखासी भीड़ लग चुकी थी.

घर में हत्या की वारदात हुई थी. हत्या एक बच्चे की थी. मरने वाला चौथी कक्षा में पढऩे वाला 10 साल का स्नेहांशु था. गोलमटोल चेहरे वाला वह बहुत ही प्यारा बच्चा था. घर में उसी बच्चे की रक्तरंजित लाश पड़ी हुई थी. लाश की हालत ऐसी कि वह देखी नहीं जा रही थी. मौजूद लोग उस की मासूमियत और स्वभाव की चर्चा कर रहे थे.

कहें तो लोगों को भरोसा ही नहीं हो पा रहा था कि कुछ समय पहले गली में साइकल चलाने वाला स्नेहांशु अब इस दुनिया में नहीं रहा. सभी के दिमाग में कई सवाल कौंध रहे थे कि आखिर उसे किस ने मारा होगा? क्यों मारा होगा? एक बच्चे से किसी की भला क्या दुश्मनी हो सकती है? क्या वह घर में अकेला था?…लेकिन उन का कुत्ता तो बहुत वफादार था!

पास बैठी मां शांता का रोरोकर बुरा हाल था. इस घटना के बारे में पहली जानकारी स्नेहांशु की हमउम्र चचेरी बहन को तब हुई थी, जब वह किसी काम से उस के घर आई थी.

उस से पुलिस ने शुरुआती पूछताछ की. उस ने बताया कि मृत भाई की हालत देख कर वह काफी डर गई थी. उस वक्त घर में और कोई नहीं था. वह भाग कर सीधे अपने घर आ गई थी. उस ने अपने मम्मीपापा को उस बारे में बताया. उन्होंने ही पहले पुलिस को, फिर पंकज शर्मा को फोन कर दिया था.

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                    स्नेहांशु शर्मा

स्नेहांशु शर्मा एक जानेमाने अंगरेजी माध्यम के स्कूल में पढ़ता था. उस के मम्मीपापा दोनों कामकाजी थे. पंकज शर्मा कोलकाता की एक निजी कंपनी में काम करते थे, जबकि मां शांता शर्मा एक कौस्मेटिक की दुकान में काम करती थी.

इत्तफाक ही था कि वारदात के वक्त दोनों घर से बाहर थे, जबकि घर के दूसरे सदस्य भी बस कुछ देर के लिए बाहर गए थे. इसी बीच कातिल ने घर में घुस कर स्नेहांशु की जान ले ली.

साथ ही पुलिस कुछ ऐसी बातों पर गौर किया, जिन से बच्चे की हत्या का सुराग मिल सकता था. पुलिस ने पाया कि घर का पालतू कुत्ता वारदात के वक्त खामोश था. वहां मौजूद मोहल्ले के अन्य लोगों का कहना था कि वह किसी भी अजनबी को देखते ही भौकने लगता था.

इसी बात को ले कर पुलिस के लिए हैरानी की बात यह थी कि घर में स्नेहांशु  का कत्ल हो गया और कुत्ते को एक बार भी किसी ने भौकते नहीं सुना. उस की मां ने बताया कि वह कुछ समय के लिए बाजार गई थी. पुलिस के गले यह बात नहीं उतरी थी कि बच्चे को छोड़ कर वह अकेली बाजार गई थी, जबकि सामान्य तौर पर ऐसा नहीं होता है.

समलैंगिक फेसबुक फ्रेंड दे गया मौत

समलैंगिक फेसबुक फ्रेंड दे गया मौत – भाग 4

मुकेश ने हसन से विकृत तरीके से बनाए समलैंगिक संबंध

घर आने के बाद मुकेश ने अपना मोबाइल फोन बंद कर दिया, क्योंकि उसे पता था कि पत्नी कृष्णा देर रात तक उसे कई बार फोन करेगी और वह नहीं चाहता था कि अपने नए प्रेमी से हो रही पहली मुलाकात में कोई खलल डाले. मुकेश और हसन ने रात को करीब साढ़े 9 बजे तक बियर पी और खाना खाया. दोनों ने मिल कर बियर की बोतल कूड़ेदान में डाल दी और खाने के बरतन साफ कर के रख दिए.

उस के बाद दोनों बेडरूम में आ गए और वहां एकदूसरे के कपड़े उतार कर एकदूसरे के जिस्म से खिलवाड़ करने लगे. मुकेश के मुकाबले हसन शारीरिक बनावट में थोड़ा कमजोर था, जबकि मुकेश का शरीर थोड़ा कद्दावर था. मुकेश समलैंगिक तो था ही लेकिन उस के साथ ही उस में कुछ ऐसी आदतें भी थीं, जो आमतौर पर यौन विकृत लोगों में होती हैं.

मसलन उसे हाथपांव बांध कर प्यार करने में बेहद आनंद आता था. मुकेश ने जब अपनी ख्वाहिश हसन को बताई तो उस को बड़ा अजीब सा लगा. लेकिन थोड़ी नानुकुर के बाद अपने हाथ और पांव बंधवाने के लिए तैयार हो गया. इस के बाद मुकेश ने हसन के साथ शारीरिक संबंध बनाए, लेकिन अपने विकृत अप्राकृतिक प्यार के दौरान मुकेश ने हसन को इतनी बुरी यातनाएं दीं कि हसन का दिल दहल गया.

हसन मुकेश से लाख मिन्नतें करता रहा, लेकिन उन्माद में अंधे हो चुके मुकेश के ऊपर उस की चीखों का भी कोई असर नहीं हुआ, बल्कि इस सब से मुकेश को और ज्यादा आनंद की अनुभूति हो रही थी. जिस्मानी संबंध बना कर मुकेश तो जरूर आनंदित हुआ, लेकिन हसन के दिल में उस के लिए अचानक इतना गुस्सा और नफरत भर गई कि उस ने तय कर लिया वह मुकेश को इस की सजा जरूर देगा.

जो दौर मुकेश ने हसन के साथ किया था, वही बारी अब हसन की थी. अब बारी मुकेश के हाथ और पांव बांधने की थी. जिस के बाद हसन ने उसे बिस्तर पर उलटा लिटा दिया. हसन ने भी उस के साथ संबंध बनाए. पानी पीने के बहाने वह किचन की तरफ गया. वहां उसे और तो कुछ नहीं मिला, लेकिन वहां पड़ा लोहे का तवा देख उस ने उसी को उठा लिया.

हसन के मन में भर गई थी नफरत

मुकेश ने हसन के साथ जो भी किया था, उसे ले कर हसन के दिल और दिमाग में इतना गुस्सा भरा हुआ था कि वह बेडरूम में आया और आते ही उस ने तवे से मुकेश के सिर और चेहरे पर ताबड़तोड़ वार करने शुरू कर दिए. हसन ने करीब 25 से 30 बार मुकेश के सिर और चेहरे पर वार किए. मुकेश कुछ समझता, उस से पहले कुछ ही क्षण में खून से सराबोर हो कर उस का शरीर निढाल हो गया. हाथ और पांव बंधे होने कारण वह कोई बचाव भी नहीं कर सका.

नफरत में उस ने मुकेश के निष्प्राण हो चुके शरीर को बिस्तर से नीचे जमीन पर गिरा दिया और उस के बाद शरीर पर जहां तहां तवे के फिर वार किए. तब कहीं जा कर उस का गुस्सा ठंडा हुआ. कुछ देर तक हसन वहीं बैठ रहा. जब गुस्सा शांत हुआ तो उसे लगा कि उस ने कुछ ज्यादा ही कर दिया. क्योंकि मुकेश की मौत हो चुकी थी.

लेकिन अब कोई चारा नहीं था. देखा उस समय रात के साढ़े 12 बजे थे. इतनी रात को अगर वह घर से निकाल कर जाता तो न ही उसे कोई सवारी मिलनी थी, ऊपर से पकड़े जाने का खतरा भी था. लिहाजा उस ने कुछ घंटे तक वहीं रुकने का फैसला किया. मुकेश की हत्या करने के बाद हसन सुबह करीब 4 बजे तक उसी के बेडरूम में रहा.

इस दौरान उस ने बाथरूम में जा कर अपने शरीर पर लगे खून के धब्बे साफ किए और अपने कपड़े पहन लिए. उस ने रसोई में जा कर चाय बना कर भी पी. सुबह होने से पहले उस ने मुकेश के पैंट में रखे पर्स से कुछ पैसे निकाले और घर से बाहर निकला.

गली में सन्नाटा पसरा था. उस ने घर की कुंडी बाहर से लगा दी और पैदल चहलकदमी करते हुए सडक़ पर आ गया. कुछ दूर जाने के बाद वह एक आटो में बैठ कर बसअड्डे पहुंचा. बसअड्डे से सुबह 6 बजे चलने वाली बस में सवार हो कर मोदीनगरआया.

मुकेश की हत्या के बाद हसन को विश्वास था कि पुलिस उसे पकड़ नहीं पाएगी, क्योंकि मुकेश के साथ उसे किसी ने देखा नहीं था. फिर भी हसन के दिल में एक डर बैठा हुआ था, इसीलिए वह केवल एक बार कुछ देर के लिए अपनी दुकान पर गया था और वहां अपने कपड़े बदलने के बाद वह दुकान बंद कर के चला गया. 3 दिनों तक हसन अपनी जानपहचान वालों के यहां बहाने बना कर समय काटता रहा.

25 सितंबर, 2023 को भी वह हापुड़ केवल इसलिए गया था, ताकि वहां एक दिन रह कर यह पता लगा सके कि पुलिस ने मुकेश की हत्या में अभी तक किसी को गिरफ्तार किया है या नहीं. क्योंकि उसे लग रहा था कि पुलिस उस के पास तक तो पहुंच नहीं पाएगी, इसलिए हत्याकांड का खुलासा करने के लिए वह किसी बेगुनाह को मुकेश की हत्या के आरोप में गिरफ्तार कर जेल भेज देगी.

लेकिन हसन की सोच गलत निकली, पुलिस की कार्यशैली और जांच करने के तरीकों के बारे में उसे पता नहीं था. कत्ल के बाद खुद तक पहुंचने वाले सबूत यानी मोबाइल को तो वह अपने साथ ले कर ही घूम रहा था. उसी के जरिए पुलिस आसानी से उस तक पहुंच गई.

जांच अधिकारी इंसपेक्टर नीरज कुमार ने आरोपी हसन से पूछताछ कर उसे मुकेश की हत्या के आरोप में गिरफ्तार कर लिया. पुलिस ने हसन से 25 सितंबर, 2023 को अधिकारियों और मुकेश के परिजनों के समक्ष भी पूछताछ की और 26 सितंबर को उसे सक्षम अदालत में पेश किया, जहां से उसे जेल भेज दिया गया.

(कथा पुलिस की जांच आरोपी के बयान और परिजनों की शिकायत पर आधारित)

समलैंगिक फेसबुक फ्रेंड दे गया मौत – भाग 3

जांच अधिकारी को मिला सुराग

जांच अधिकारी नीरज को कातिल तक पहुंचने का क्लू तो मिल गया था, लेकिन अभी हसन के बारे में जानकारी जुटाना और हत्या का कारण जानना जरूरी था. आगे की तफ्तीश में पता चला कि हसन और मुकेश करीब एक माह से फेसबुक पर फ्रेंड बने थे और दोनों के बीच अकसर मैसेंजर चैट पर बातचीत होती थी. पुलिस ने जब मैसेंजर चैट को खंगाला तो कुछ ऐसी जानकारी हाथ लगी, जिस से कत्ल की इस वारदात की गुत्थी लगभग सुलझने के करीब पहुंच गई.

इसी बीच कालोनी के सीसीटीवी फुटेज की जांच कर रही पुलिस टीम को पता चला की करीब साढ़े 7 बजे मुकेश एक आदमी के साथ अपने घर में प्रवेश हुआ था और सुबह करीब 4 बजे वह व्यक्ति अकेला घर से बाहर निकला था. पुलिस ने करीब 100 से अधिक सीसीटीवी कैमरों की फुटेज चैक की थी, तब जा कर यह सफलता मिली. इंसपेक्टर नीरज कुमार ने मोबाइल कंपनी के रिकौर्ड में दर्ज हसन का फोटो हासिल कर लिया.

पुलिस की एक टीम को उसी दिन हसन के मेरठ जिले के गांव धौलड़ी स्थित पते पर भेजा गया, लेकिन वह घर पर नहीं मिला. पुलिस ने हसन के घर वालों से पूछताछ की तो पता चला कि वह मोदीनगर के राज चोपला पर जर्राह का काम करता है. हसन ने वहां एक दुकान ले रखी थी. वह दुकान में ही रात को सोता था. सप्ताह में एक बार वह अपने घर जाता था. गांव में उस के मातापिता और पत्नी नसरीन व 3 से 5 साल की उम्र के 2 बच्चे रहते थे.

पुलिस की टीम हसन के घर वालों से उस की मोदीनगर स्थित दुकान का पता ले कर जब मोदीनगर पहुंची तो वहां दुकान पर ताला लगा मिला. आसपड़ोस के दुकानदारों से पूछताछ करने पर पता चला कि पिछले 3 दिनों से हसन ने अपनी जर्राह की दुकान नहीं खोली है. थकहार कर पुलिस टीम वापस हापुड़ लौट गई. इंसपेक्टर नीरज कुमार समझ गए कि अब टेक्निकल सर्विलांस ही हसन तक पहुंचने का इकलौता रास्ता है. उन्होंने हसन के मोबाइल की निगरानी शुरू कर दी. जल्द ही इस का परिणाम भी सामने आया.

हसन चढ़ गया पुलिस के हत्थे

25 सितंबर, 2023 को पुलिस टीम को सर्विलांस की निगरानी से पता चला कि हसन हापुड़ की मोर्चरी रोड पर एक छोलेभटूरे की दुकान पर मौजूद है. इंसपेक्टर नीरज कुमार ने तत्काल अपनी टीम ले कर मोर्चरी रोड की घेराबंदी कर ली और छोले भटूरे की दुकान के बाहर खड़े हसन को उस की फोटो से पहचान कर हिरासत में ले लिया.

खुद को पुलिस के चंगुल में फंसा देख कर हसन के होश उड़ गए और वह उलटे पुलिस से सवाल करने लगा कि एक शरीफ आदमी को उन्होंने क्यों पकड़ा है. जब पुलिस ने उसे बताया कि उसे मुकेश कर्दम की हत्या के जुर्म में गिरफ्तार किया गया है तो वह अनजान बनते हुए उलटा सवाल करने लगा कौन मुकेश कर्दम? वह किसी मुकेश कर्दम को नहीं जानता.

इंसपेक्टर नीरज कुमार को अपने अनुभव से यह बात बखूबी पता थी कि अपराधी इतनी आसानी से अपना गुनाह कबूल नहीं करता. लिहाजा पुलिस की टीम पहले उसे कोतवाली ले कर आई, उस के बाद मामूली सी सख्ती के बाद ही हसन टूट गया और उस ने अपने गुनाह की पूरी कहानी बयां कर दी.

हसन बचपन से ही समलैंगिक संबंधों का शौकीन था. उस के कई दोस्त थे, जिन के साथ उस के शारीरिक संबंध थे. हालांकि वह शादीशुदा और 2 बच्चों का बाप था, लेकिन इस के बावजूद समलैंगिक संबंधों का उस का शौक कम नहीं हुआ. हसन मोदीनगर स्थित अपनी दुकान में ही सोता था, यदाकदा वहीं पर वह अपने समलैंगिक दोस्तों को बुला कर अपना शौक भी पूरा करता था.

समलैंगिक मुकेश की हसन से फेसबुक पर हुई दोस्ती

मुकेश कर्दम से करीब एक माह पहले फेसबुक के माध्यम से उस की दोस्ती हुई थी. मुकेश के साथ फेसबुक के मैसेंजर पर चैट करते हुए जब उसे पता चला कि वह भी समलैंगिक संबंधों का शौकीन है तो दोनों की दोस्ती और गाढ़ी हो गई. इस के बाद तो अकसर दोनों वाट्सऐप काल और चैट पर भी बात करने लगे.

3 बच्चों का पिता मुकेश कर्दम भी समलैंगिक संबंधों का शौकीन था. हसन और मुकेश की दोस्ती की खास बात यह थी कि दोनों ऐसे समलैंगिक थे, जिन में लडक़े और लडक़ी यानी मर्द व औरत दोनों तरह के रिश्ते बनाने की खूबियां थीं. मुकेश और हसन में बातें तो लगभग रोज ही हो रही थीं, लेकिन दोनों में इस बात की तड़प थी कि वह एक बार मौका पा कर एकदूसरे से प्यार करें. इस के लिए मुकेश को किसी मौके का इंतजार था.

मुकेश को वह मौका मिला 18 सितंबर, 2023 को जब उस की पत्नी बच्चों के साथ बुलंदशहर स्थित अपने मायके गई थी. मुकेश ने हसन को 18 सितंबर की सुबह ही बता दिया था कि आज वह अपने हापुड़ स्थित घर पर रात को अकेला रहेगा. मुकेश ने हसन से पूछा कि क्या वह आज की रात उस की मेहमाननवाजी कबूल करेगा.

हसन ने थोड़ी आनाकानी करते हुए कहा कि उस के काम का बड़ा नुकसान हो जाएगा तो मुकेश ने कहा, ‘‘अरे यार कोई बात नहीं, तुम आ तो जाओ. नुकसान का हरजा खर्चा मैं दे दूंगा.’’

इस के बाद हसन ने मुकेश की मेहमाननवाजी कबूल कर ली और वह शाम को 5 बजे दुकान बंद कर के बस में सवार हो कर हापुड़ पहुंच गया. इस दौरान हसन और मुकेश की कई बार वाट्सऐप पर चैट भी हुई और फोन पर बातचीत भी हुई.

दूसरी तरफ मुकेश भी पत्नी और बच्चों को ससुराल में छोड़ कर दोपहर तक वापस हापुड़ आ गया. उस के बाद मुकेश ने दिनभर अपनी किराने की दुकान पर काम किया. एक नए प्रेमी से मिलने की तड़प में वह दोपहर से ही बेहद उतावला था, इसलिए उस ने शाम को करीब 7 बजे अपनी दुकान बंद कर दी. उस के बाद वह बसअड्ïडे पहुंचा, जहां हसन उस का इंतजार कर रहा था.

फोन और फेसबुक की एक माह पुरानी मुलाकात के बाद 2 चाहने वाले दोस्त एकदूसरे के सामने थे, दोनों के लिए ही यह पल बेहद रोमांच पैदा करने वाला था. काफी देर तक दोनों वहीं इधरउधर की बातें करते रहे. उस के बाद मुकेश ने अपने और हसन के लिए बीयर की बोतलें और कुछ खानेपीने का सामान खरीदा और मुकेश उसे अपने घर ले आया.

समलैंगिक फेसबुक फ्रेंड दे गया मौत – भाग 2

हत्यारे की घर में हुई फ्रेंडली एंट्री

एक दूसरी बात प्राथमिक जांच में साफ हो रही थी, वह यह थी कि कातिल मुकेश का परिचित था. क्योंकि घर में किसी तरह की जोरजबरदस्ती से प्रवेश के कोई निशान नहीं मिले थे. इतना ही नहीं कातिल वारदात को अंजाम देने के बाद घर के दरवाजे की कुंडी बाहर से बंद करके चला गया था. दूसरी बात जो एकदम साफ थी वो यह कि घर के अंदर से कोई भी कीमती सामान गायब नहीं हुआ था. यानी कत्ल करने वाले का मकसद चोरी या लूट करने का नहीं था, बल्कि मुकेश की हत्या करना ही था.

हत्यारे ने जिस बेरहमी से मुकेश का कत्ल किया था, उस से लग रहा था कि वह बेहद गुस्से में रहा होगा, क्योंकि उस ने तवे से मुकेश पर ताबड़तोड़ वार किए थे. फोरैंसिक टीम ने अपना काम खत्म कर लिया था, लिहाजा एसपी अभिषेक वर्मा ने एसएचओ नीरज कुमार को शव को पोस्टमार्टम के लिए भिजवाने का आदेश दिया. जिस के बाद शव का पंचनामा तैयार किया गया और उसे पोस्टमार्टम के लिए जिला अस्पताल भेज दिया गया.

इंसपेक्टर नीरज कुमार ने मृतक मुकेश के साले की शिकायत पर अज्ञात हत्यारों के खिलाफ 21 सिंतबर को भादंसं की धारा 302 (हत्या) और 201 (सबूत नष्ट करने की धारा) में मुकदमा दर्ज कर जांच का काम अपने हाथों में ले लिया. उच्चाधिकारियों के आदेश पर उन की मदद के लिए एक टीम का गठन कर दिया गया, जिस में एसआई राकेश कुमार, हैडकांस्टेबल अजीत सिंह, रविंद्र सिंह, दीपक कुमार, दिनेश कुमार और विष्णु के साथ कांस्टेबल सुनील कुमार को जांच दल में शामिल किया गया.

पोस्टर्माटम के बाद शव परिजनों को सौंपा जा चुका था. परिवार के लोग जब अंतिम संस्कार के काम से फारिग हो गए और माहौल थोड़ा शांत हो गया तो जांच अधिकारी नीरज कुमार ने सब से पहले मृतक मुकेश की पत्नी कृष्णा से यह जानना जरूरी समझा कि उन्हें अपने पति की हत्या में किसी पर शक तो नहीं है.

लेकिन कृष्णा ने जो कुछ बताया, उसे जान कर इंसपेक्टर नीरज कुमार का दिमाग ही घूम गया. कृष्णा ने बताया कि उस के पति मुकेश का अपने दोनों भाइयों राकेश और विनोद से पैतृक संपत्ति को ले कर मनमुटाव चल रहा था. उसे शक था कि उन दोनों ने ही मुकेश की या तो खुद हत्या की है या उन्होंने किसी से करवाई है.

जब तक कातिल पुलिस के हाथ में न आ जाए, तब तक पुलिस की नजर में हर शख्स कातिल ही लगता है. चूंकि मुकेश की पत्नी कृष्णा ने दोनों जेठों पर सीधे आरोप लगाया था. लिहाजा पहले जांच इसी बिंदु से शुरू हुई. पुलिस ने दोनों भाइयों को सब से पहले हिरासत में ले लिया.

उन के बारे परिवार के दूसरे सदस्यों से जानकारी ली गई तो पता चला कि दोनों बड़े भाइयों का मुकेश से एक पैतृक प्लौट को ले कर विवाद जरूर था, लेकिन विवाद ऐसा नहीं था कि दोनों भाई अपने छोटे भाई की हत्या कर दें. दोनों भाई मुकेश से बेहद प्यार करते थे. उल्टा मुकेश ही यदाकदा बड़े भाइयों से लड़ जाता, लेकिन वे नजरअंदाज कर देते थे.

पुलिस ने सच का पता लगाने के लिए मुकेश के दोनों भाइयों के मोबाइल नंबरां की काल डिटेल्स, उन की लोकेशन और वाट्सऐप चैट निकलवाई तो पता चला कि दोनों भाइयों की वारदात वाले दिन या इस के आसपास मुकेश के घर के आसपास लोकेशन भी नहीं थी. यानी उन के खिलाफ आरोप सिर्फ शक की वजह से थे, लेकिन उन के पीछे ठोस सबूत नहीं था.

हालांकि इंसपेक्टर नीरज कुमार ने मुकेश के दोनों भाइयों को अभी शक के दायरे से बाहर नहीं किया था, लेकिन उन्होंने दोनों को हिरासत से रिहा कर दिया और अपने 2 हैडकांस्टेबल को दोनों की निगरानी और कुछ अन्य जानकारियां एकत्र करने के काम पर लगा दिया.

अलगअलग टीमें जुटी जांच में

जांच अधिकारी नीरज कुमार ने अब हत्याकांड के दूसरे पहलुओं पर जांच शुरू कर दी. पुलिस की नौकरी के दौरान नीरज कुमार ने अपने अनुभव से एक बात सीखी थी कि जिस आदमी के साथ अपराध घटित होता है, उस का कारण भी उसी इंसान के इर्दगिर्द होता है. नीरज कुमार समझ गए कि हो न हो, मुकेश की हत्या का राज उसी से जुड़ा हुआ है. कातिल तक पहुंचने के लिए उन्होंने सब से पहले मुकेश कर्दम की छानबीन करने का फैसला किया.

उन्होंने अपनी टीम को 2 भागों में बांट दिया. एक टीम को मुकेश के मोबाइल की काल डिटेल्स, उस की लोकेशन और वाट्सऐप से जुड़ी सारी चैट निकालने के काम पर लगाया और साथ ही मुकेश के फेसबुक और इंस्टाग्राम जैसे सोशल मीडिया प्लेटफार्म का पता लगा कर उन की छानबीन करने का काम शुरू कर दिया. पुलिस की एक टीम मुकेश के घर के आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की छानबीन करने लगी.

24 घंटे के भीतर इस जांच के परिणाम सामने दिखने लगे. मोबाइल की काल डिटेल्स से पता चला कि जिस रात मुकेश की हत्या हुई थी, उस से पहले दिन में और शाम को एक मोबाइल नंबर पर मुकेश की कई बार बातचीत हुई थी. मुकेश के मोबाइल में आखिरी काल भी इस नंबर पर की गई थी और उस के बाद मुकेश का मोबाइल स्विच्ड औफ हो गया. यह करीब शाम साढ़े 7 बजे की बात है.

जांच अधिकारी इंसपेक्टर नीरज कुमार के लिए अब यह जानना बहुत जरूरी हो गया था कि वह नंबर आखिर किस का था. उस नंबर की काल डिटेल्स निकाली गई तो पता चला कि वह किसी हसन नाम के व्यक्ति के नाम पर पंजीकृत था. हसन का पता मेरठ जिले के धोलड़ी गांव का था.

काल डिटेल्स से यह भी पता चला कि मुकेश और हसन के बीच पिछले एक महीने से बातचीत का सिलसिला चल रहा था. जब हसन की लोकेशन चेक की गई तो पता चला दिन में उस की लोकेशन मोदीनगर के राज चोपड़ा के आसपास थी, जबकि शाम साढ़े 7 बजे के बाद से 19 सितंबर की सुबह 4 बजे तक उस के मोबाइल की लोकेशन मुकेश के घर के आसपास ही थी.

इस का मतलब साफ था कि हसन वारदात वाली रात को मुकेश के घर पर था. यह जानकारी बेहद काम की थी, लेकिन हत्या की गुत्थी सुलझाने और कातिल तक पहुंचने के लिए अभी कई सवालों के जवाब ढूंढे जाने बाकी थे.