Love Story: 20 वर्षीय आकांक्षा उर्फ माही 25 वर्षीय प्रेमी सूरज उत्तम को अपना सब कुछ मान बैठी थी. तभी तो वह उस के साथ लिवइन रिलेशन में रह रही थी, लेकिन सूरज कई अन्य लड़कियों के साथ गुलछर्रे उड़ा रहा था. प्रेमी की यह आदत प्रेमिका पर इतनी भारी पड़ी कि…

आकांक्षा उर्फ माही की रोजरोज की किचकिच से सूरज उत्तम परेशान था. वह उस पर शादी करने का दबाव डाल रही थी. शादी न करने पर माही ने उसे रेप के मामले में फंसाने की धमकी भी दे दी थी. सूरज की समझ में नहीं आ रहा था कि वह इस प्रौब्लम से बाहर कैसे निकले?

21 जुलाई, 2025 की सुबह 8 बजे 20 वर्षीय आकांक्षा कान्हा रेस्टोरेंट जाने को घर से निकली तो सूरज फोन पर बात कर रहा था. आकांक्षा को शक हुआ कि वह अपनी किसी गर्लफ्रेंड से बतिया रहा है. उस ने उस समय तो कुछ नहीं कहा, लेकिन दोपहर को फोन कर सूरज को कान्हा रेस्टोरेंट बुला लिया.

सूरज ने अपना मोबाइल फोन टेबल पर रखा. फिर आमनेसामने बैठ कर दोनों बातें करने लगे. इसी समय सूरज की खास गर्लफ्रेंड का वीडियो कौल आया. इस कौल को आकांक्षा उर्फ माही ने देखा तो वह सूरज से झगडऩे लगी. माही को शक हुआ कि सुबह भी सूरज इसी से बात कर रहा था. वीडियो कौल को ले कर दोनों कुछ देर झगड़ते रहे, फिर सूरज वहां से चला गया.

रात 10 बजे सूरज कमरे पर आया तो गर्लफ्रेंड को ले कर दोनों के बीच फिर झगड़ा शुरू हो गया. आकांक्षा धमकी भरे लहजे में बोली, ”सूरज, एक बात कान खोल कर सुन लो. यदि तुम ने मुझे धोखा दिया और शादी नहीं की तो मैं रेप का केस दर्ज करा कर तुम्हें जेल भिजवा दूंगी. फिर ताउम्र जेल में ही रहोगे.’’

आकांक्षा का गुस्सा शांत करने के लिहाज से सूरज बोला, ”माही, मैं तुम्हारे सिवाय किसी और से प्यार नहीं करता. तुम बिना वजह मुझ पर शक कर रही हो.’’

”झूठ, सफेद झूठ. सच्चाई यह है कि तुम खेलते मेरे शरीर से हो और प्यार कहीं और लुटाते हो.’’ माही का गुस्सा और बढ़ गया.

”ऐसा नहीं है माही, मैं तुम्हें बेहद प्यार करता हूं.’’ कहते हुए सूरज माही से प्यार जताने आगे बढ़ा.

तभी माही ने एक जोरदार तमाचा सूरज के गाल पर जड़ दिया और बोली, ”खबरदार! जो मेरे शरीर को छूने की जुर्रत की.’’

गाल पर तमाचा लगते ही सूरज तिलमिला उठा. उस का गुस्सा सातवें आसमान जा पहुंचा. वह आपा खो बैठा और आकांक्षा पर लातघूंसे चलाने लगा. माही चीखी तो सूरज के हाथ उस की गरदन पर पहुंच गए. वह उस का गला कसने लगा. चंद मिनट बाद ही आकांक्षा उर्फ माही की सांसें थम गईं. प्रेमिका माही की हत्या के बाद सूरज घबरा गया. उस ने कानपुर के नौबस्ता में रह रहे अपने दोस्त आशीष को फोन कर सारी बात बताई और मदद मांगी. रात 11 बजे आशीष बाइक से सूरज के कमरे में आ गया.

दोनों ने आकांक्षा उर्फ माही का शव उस के काले रंग के ट्रौली बैग में पैक किया. इस के बाद बंद ट्रौली बैग को बाइक पर रखा और दोनों निकल पड़े. सूरज बाइक चला रहा था, जबकि आशीष पीछे की सीट पर ट्रौली बैग पकड़ कर बैठा. सूरज और आशीष रात के अंधेरे में कानपुर से बिंदकी, फतेहपुर होते हुए लगभग 132 किलोमीटर की दूरी तय कर रात 3 बजे बांदा के चिल्ला घाट यमुना पुल पर पहुंचे. फिर ट्रौली बैग को जिस में माही का शव था, उफनती यमुना नदी में फेंक दिया. उस के बाद दोनों वापस कानपुर आ गए.

आकांक्षा उर्फ माही का मोबाइल फोन सूरज के पास ही था. हत्या के बाद भी उस ने उस का मोबाइल फोन बंद नहीं किया था. विजयश्री अपनी बेटी माही के लिए बेहद परेशान थी. वह उसे बारबार कौल कर रही थी, लेकिन माही उस का कौल रिसीव ही नहीं कर रही थी. जैसेजैसे समय बीतता जा रहा था, वैसेवैसे उस की चिंता भी बढ़ती जा रही थी.

22 जुलाई, 2025 की शाम विजयश्री की बात बड़ी बेटी प्रतीक्षा से तो हो गई थी, लेकिन छोटी बेटी आकांक्षा उर्फ माही से नहीं हो पा रही थी. उस के मोबाइल फोन की रिंग तो जा रही थी, लेकिन वह जवाब नहीं दे रही थी. देर रात विजयश्री ने अपनी चिंता से प्रतीक्षा को अवगत कराया तो उस ने बताया कि माही के फोन पर रिंग जा रही है, लेकिन वह फोन उठा नहीं रही है. यह पहला अवसर था, जब माही मांबहन में से किसी का फोन रिसीव नहीं कर रही थी, अत: विजयश्री घबरा उठी. किसी अनहोनी की आशंका से उस का दिल कांप उठा. जैसेतैसे करवट बदल कर उस ने वह रात बिताई, फिर सवेरा होते ही उस ने ट्रेन पकड़ी और कानपुर पहुंच गई.

प्रतीक्षा कानपुर के बर्रा क्षेत्र में किराए पर रहती थी. विजयश्री उस के रूम पर पहुंची. प्रतीक्षा ने मम्मी के सामने ही माही को कौल लगाई, लेकिन कौल रिसीव नहीं हुई.

तब प्रतीक्षा ने माही के फोन पर मैसेज भेजा, ‘माही, मम्मी रो रही हैं. तुम उन से बात क्यों नहीं कर रही हो.’

कुछ देर बाद माही के फोन से मैसेज आया, ‘बाद में बात करूंगी, अभी मैं ड्यूटी पर हूं.’

प्रतीक्षा ने फिर से मैसेज किया, ‘मम्मी ने पुलिस में शिकायत कर दी है. सूरज का नाम लिखा दिया है.’

इस का माही के फोन से तुरंत मैसेज आया, ‘सूरज का नाम क्यों लिखा दिया. मैं अपनी मरजी से अलग हुई हूं.’

आकांक्षा उर्फ माही नौबस्ता गल्ला मंडी स्थित ‘कान्हा रेस्टोरेंट’ में काम करती थी, अत: विजयश्री प्रतीक्षा के साथ माही का पता लगाने कान्हा रेस्टोरेंट पहुंची. रेस्टोरेंट मालिक ने बताया कि आकांक्षा से उस की फोन पर तो बात नहीं हुई, लेकिन उस ने मैसेज भेजा है कि उसे लखनऊ में जौब मिल गई है, इसलिए अब रेस्टोरेंट में काम नहीं कर पाएगी. मैसेज पढ़ कर मैं ने उसे कोई जवाब नहीं दिया.

आकांक्षा उर्फ माही की एक खास दोस्त मंजू हंसपुरम में रहती थी. विजयश्री उस के घर पहुंची. मंजू ने बताया कि आकांक्षा ने उसे मैसेज भेजा था कि सूरज से ब्रेकअप कर वह लखनऊ आ गई है. मंजू ने कहा कि मैसेज पढऩे के बाद उस ने आकांक्षा से फोन पर बात करने का प्रयास किया था, लेकिन बात नहीं हो पाई. पता नहीं वह किन हालात से गुजर रही होगी. थकहार कर मांबेटी वापस आ गईं. देर रात विजयश्री ने अपने मोबाइल फोन से बेटी को मैसेज किया, ‘माही मुझ से बात करो. बहुत घबराहट हो रही है.’

इस का जवाबी मैसेज आया, ‘भैया, मैं बाद में बात करूंगी.’

इस मैसेज को पढ़ कर विजयश्री का माथा ठनका. वह जान गईं कि माही का फोन कोई दूसरा व्यक्ति चला रहा है. माही खतरे में है. दरअसल, विजयश्री जिस मोबाइल फोन का इस्तेमाल कर रही थी, उसे उस के बड़े बेटे ने खरीद कर दिया था.

माही ने मम्मी के मोबाइल फोन नंबर को अपने मोबाइल फोन में ‘भैया’ के नाम से सेव कर रखा था. माही अगर मैसेज भेजती तो भैया की जगह मम्मी के नाम मैसेज आता. इसी से उसे संदेह हो गया.

आकांक्षा उर्फ माही का प्रेमी था सूरज उत्तम. वह उसी के साथ लिवइन रिलेशन में रहती थी. प्रतीक्षा व उस की मम्मी ने सूरज उत्तम से फोन पर बात की और माही के बारे में पूछा. इस पर उस ने माही के बारे में कोई जानकारी होने से इंकार किया. उस के बाद सूरज उत्तम भी विजयश्री के साथ हो लिया और माही की तलाश में जुटा रहा. प्रतीक्षा और उस की मम्मी माही की तलाश करतेकरते थक गईं तो गुमशुदगी दर्ज कराने थाना नौबस्ता पहुंचीं, लेकिन वहां उन्हें यह कह कर टरका दिया गया कि उन की बेटी जिस कान्हा रेस्टोरेंट में काम करती थी, वह थाना हनुमंत विहार के अंतर्गत आता है.

यह जानकारी पा कर विजयश्री थाना हनुमंत विहार पहुंची. वहां उस ने एसएचओ राजीव सिंह को सारी बात बताई और बेटी की गुमशुदगी दर्ज करने की गुहार लगाई. इस पर उन्होंने कहा कि लड़की कुंवारी है. इज्जत का सवाल है. कुछ रोज और इंतजार कर लो. शायद वापस आ जाए. निराश हो कर तब विजयश्री वापस आ गई. धीरेधीरे एक सप्ताह बीत गया, लेकिन न तो माही का कुछ पता चला और न ही गुमशुदगी दर्ज हो पाई. इस के बाद विजयश्री पुलिस कमिश्नर अखिल कुमार से मिली और गुमशुदा बेटी माही का पता लगाने की गुहार लगाई.

सीपी अखिल कुमार ने विजयश्री को आश्वासन दिया कि रिपोर्ट दर्ज कर उन की बेटी की खोज की जाएगी, लेकिन आश्वासन के बाद भी काररवाई नहीं हुई. इस के बाद विजयश्री ने महिला हेल्पलाइन नंबर 1090 पर कौल लगाई और मदद मांगी. इस पर विजयश्री फिर से थाना हनुमंत विहार पहुंची और एसएचओ राजीव सिंह से मिली. अब तक थाने पर फरमान आ चुका था, अत: बिना किसी हीलाहवाली के माही की गुमशुदगी की सूचना 8 अगस्त, 2025 को दर्ज कर ली गई. मामले की जांच एसआई सुशील कुमार को सौंपी गई.

लेकिन एसआई सुशील कुमार ने माही को खोजने का कोई प्रयास नहीं किया. विजयश्री जब भी दारोगा सुशील कुमार से माही के बारे में पूछती तो वह झल्ला कर कहता, ”तुम्हारी बेटी अपने किसी प्रेमी के साथ घूमने गई होगी. जल्द ही वापस आ जाएगी.’’

दारोगा का जवाब विजयश्री के मन में कांटे की तरह चुभता. परंतु वह मन मसोस कर लौट आती. पुलिस भले ही सुस्त थी, लेकिन विजयश्री बेटी की खोज में जुटी रही. वह जानकारी जुटाने उस मकान पर पहुंची, जहां उस की बेटी अपने प्रेमी सूरज के साथ रहती थी. मकान में कई किराएदार थे. विजयश्री ने किराएदारों से बेटी माही के बारे में पूछा तो उन्होंने बताया कि माही को 21 जुलाई के बाद उन्होंने नहीं देखा. उस के साथ रहने वाला सूरज भी कमरा खाली कर माही का सारा सामान ले गया.

विजयश्री ने पूछा, ”क्या सूरज सामान ट्रौली बैग में भर कर ले गया?’’

इस पर किराएदारों ने बताया कि आकांक्षा जब आई थी, तब ट्रौली बैग था, लेकिन जब सूरज ने कमरा खाली किया, तब ट्रौली बैग नहीं था. सूरज द्वारा कमरा खाली करना और ट्रौली बैग न होने से विजयश्री का माथा ठनका. वह कमरे में पहुंची तो वहां अलमारी पर एक दीपक जल रहा था. दीपक जलता देख विजयश्री को शक हो गया कि उन की बेटी माही के साथ सूरज ने कोई अनहोनी कर दी है. वह जान गई कि माही के गायब होने का राज सूरज के पेट में ही छिपा है.

पुलिस की निष्क्रियता से परेशान विजयश्री ने तब मुख्यमंत्री हेल्पलाइन नंबर 1076 पर अपनी शिकायत दर्ज कराई. वहां से सख्ती बरती गई तब थाना हनुमंत विहार पुलिस सक्रिय हुई. यह मामला डीसीपी (साउथ) दीपेंद्र नाथ चौधरी के संज्ञान में आया तो उन्होंने एसएचओ राजीव सिंह को फटकार लगाई और जल्द से जल्द माही प्रकरण को सुलझाने का आदेश दिया. आदेश पाते ही राजीव सिंह जांच में जुट गए. उन्होंने कौल कर विजयश्री को थाने बुलाया और उन का बयान दर्ज किया. विजयश्री ने बयान में कहा कि सूरज के साथ उन की बेटी माही लिवइन रिलेशन में रह रही थी.

उस की गुमशुदगी का राज उस के दिल में ही छिपा है. यदि उस से सख्ती से पूछताछ की जाए तो माही का पता चल सकता है. विजयश्री ने सूरज का मोबाइल फोन नंबर भी पुलिस को मुहैया करा दिया. इंसपेक्टर राजीव सिंह ने सूरज के फोन नंबर की कौल डिटेल्स तथा लोकेशन निकलवाई तो चौंकाने वाली जानकारी निकली. पता चला कि सूरज और माही के बीच हर रोज बात होती थी. 21 जुलाई, 2025 की दोपहर माही ने आखिरी बार सूरज से बात की थी.

सूरज की लोकेशन 21 जुलाई की रात को कानपुर से बिंदकी होते हुए बांदा की तरफ जाते दिखाई दे रही थी. सब से चौंकाने वाली बात यह थी कि माही के मोबाइल फोन की लोकेशन भी इस दरम्यान बांदा तक गई थी. 3 दिनों बाद उस का फोन बंद हो गया था. 15 सितंबर, 2025 की सुबह 10 बजे एसएचओ राजीव सिंह ने शक के आधार पर सूरज को हिरासत में ले लिया. थाने ला कर उस से 4 घंटे तक आकांक्षा उर्फ माही के बारे में पूछताछ की गई.

लेकिन सूरज लगातार यही बताता रहा कि किसी दूसरी गर्लफ्रेंड से बात करने को ले कर उस का माही से मामूली विवाद हुआ था. फिर वह घर से चली गई. उस के बाद उस की बात नहीं हुई. वह कहां है? किस के साथ है? उसे कुछ भी पता नहीं है. सूरज ने मुंह नहीं खोला तो एसएचओ राजीव सिंह उसे डीसीपी (साउथ) के औफिस ले गए. यहां डीसीपी दीपेंद्र नाथ चौधरी ने उस से पूछताछ की. तब उस ने साफ कह दिया कि उसे माही की कोई जानकारी नही है.

लेकिन जब उन्होंने सूरज के सामने उस के फोन की डिटेल्स रखते हुए सख्ती से पूछा तो वह घबरा गया और बोला, ”साहब, आकांक्षा उर्फ माही अब इस दुनिया में नहीं है. मैं ने उसे मार डाला है.’’

”क्याऽऽ तूने उसे मार डाला?’’ डीसीपी चौंक पड़े. फिर पूछा, ”लाश कहां है?’’

”साहब, माही की लाश को उसी के ट्रौलीबैग में भर कर कानपुर से 132 किलोमीटर दूर बांदा के चिल्लाघाट पुल से यमुना नदी में फेंक दी थी. लाश ठिकाने लगाने में मेरे दोस्त आशीष ने भी मदद की थी.’’

”तुम ने अपनी गर्लफ्रेंड माही की हत्या क्यों की?’’ डीसीपी चौधरी ने पूछा.

इस के बाद सूरज ने अपनी लिवइन पार्टनर की हत्या से ले कर उस की लाश ठिकाने लगाने तक की पूरी कहानी पुलिस को बता दी.

इस के बाद पुलिस ने सूरज की निशानदेही पर दबिश दे कर आशीष को भी उस के नौबस्ता स्थित घर से गिरफ्तार कर लिया. पूछताछ में उस ने सहज ही जुर्म कुबूल कर लिया, लेकिन शव को ठिकाने लगाने में प्रयुक्त आशीष की बाइक को पुलिस बरामद नहीं कर पाई. दूसरे रोज पुलिस सूरज व आशीष को साथ ले कर बांदा के चिल्ला घाट यमुना पुल पर पहुंची. फिर 2 दिन तक माही के शव को बरामद करने के लिए सर्च औपरेशन चलाया, लेकिन यमुना उफान पर थी इसलिए शव बरामद नहीं हो पाया.

20 सितंबर, 2025 को डीसीपी (साउथ) दीपेंद्र नाथ चौधरी ने प्रैसवार्ता की और मीडिया के सामने आकांक्षा उर्फ माही की लव क्राइम स्टोरी का खुलासा किया. इस सनसनीखेज मामले का खुलासा करने में पुलिस को लगभग 2 महीने का समय लग गया. चूंकि दोनों ने अपना जुर्म कुबूल कर लिया था, अत: एसएचओ राजीव सिंह ने मृतका की मम्मी विजयश्री की तरफ से बीएनएस की धारा 103(1) के तहत सूरज तथा आशीष के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कर ली तथा दोनों को बाकायदा गिरफ्तार कर लिया.

आकांक्षा उर्फ माही कौन थी? वह सूरज के संपर्क में कैसे आई? सूरज ने उस की हत्या क्यों की? यह सब जानने के लिए माही के अतीत की ओर चलते हैं. उत्तर प्रदेश के कानपुर शहर से लगभग 40 किलोमीटर दूर एक चर्चित कस्बा है-रूरा. व्यापारिक कस्बा होने से यहां हर रोज चहलपहल रहती है. रूरा उत्तर रेलवे का बड़ा स्टेशन भी है. इसी रूरा कस्बे से 5 किलोमीटर दूर डेरापुर रोड पर एक गांव है-सुजनीपुर. इसी गांव में सुरेश उर्फ बच्चन लाल वर्मा रहता था. उस के परिवार में पत्नी विजयश्री के अलावा 2 बेटे सूरज व आदर्श तथा 2 बेटियां प्रतीक्षा व आकांक्षा थी.

सुरेश वर्मा के पास थोड़ी सी खेती की जमीन थी. वह मेहनतमजदूरी कर परिवार का भरणपोषण करता था. आर्थिक स्थिति ठीक न होने के कारण विजयश्री अपने बच्चों को अच्छी शिक्षा न दिला सकी. बड़ा बेटा सूरज इंटरमीडिएट पास करने के बाद रूरा कस्बे में एक कपड़े की दुकान पर काम करने लगा. बात फरवरी 2022 की है. मियादी बुखार व पीलिया से सुरेश उर्फ बच्चन लाल की मौत हो गई. पति की मौत के बाद परिवार में आर्थिक प्रौब्लम आ गई. विजयश्री की बेटियां जवानी की दहलीज पर थीं. उसे उन के ब्याह की भी चिंता सताने लगी थी, लेकिन घर की माली हालत ऐसी थी कि वह उन के ब्याह के बारे में सोच भी नहीं सकती थी.

 

मम्मी की व्यथा को बड़ा बेटा सूरज भलीभांति समझता था. अत: वह दिल्ली चला गया. वहां वह किसी फैक्ट्री में काम करने लगा. कमाई का पैसा सूरज घर भेजने लगा तो विजयश्री को कुछ राहत मिलने लगी. कर्ज का पैसा भी चुकता करने लगी. एक परिचित के माध्यम से विजयश्री की दोनों बेटियों प्रतीक्षा व आकांक्षा की 20 जून, 2024 को कानपुर में बर्रा बाईपास पर स्थित ‘गुड फूड रेस्टोरेंट’ में नौकरी लग गई.

नौकरी लगने के बाद प्रतीक्षा ने बर्रा में राजेश गुप्ता के मकान में एक कमरा किराए पर ले लिया. इस कमरे में प्रतीक्षा छोटी बहन आकांक्षा उर्फ माही के साथ रहने लगी. दोनों बहनें साथ जातीं और साथ आतीं. मेहनत और लगन से काम करने से दोनों ने रेस्टोरेंट में पैठ बना ली.

प्रतीक्षा व आकांक्षा को सैलरी मिली तो दोनों ने मोबाइल फोन किस्तों में खरीद लिया. उधर सूरज जब दिल्ली से घर आया तो उस ने मम्मी को वह फोन दे दिया, ताकि वह सब से बात कर सके. सूरज ने दूसरा फोन खरीद लिया. आकांक्षा ने मम्मी के फोन नंबर को अपने फोन में भैया के नाम से सेव कर लिया. विजयश्री अब अकसर देर शाम बेटियों से बात करती और फिर निश्चिंत हो कर सो जाती.

इसी दौरान इंस्टाग्राम के माध्यम से आकांक्षा की दोस्ती सूरज उत्तम से हुई. दोस्ती प्यार में बदली और फिर उन के बीच चैटिंग होने लगी. चैटिंग के दौरान ही दोनों ने एकदूसरे को अपने फोन नंबर शेयर किए, फिर उन के बीच मोबाइल फोन के जरिए भी खूब बातें होने लगीं. एक रोज आकांक्षा ने फोन कर सूरज को अपने गुड फूड रेस्टोरेंट बुलाया. सूरज कुछ देर बाद ही रेस्टोरेंट पहुंच गया. वहां पहली बार दोनों ने एकदूसरे को देखा.

20 वर्षीया खूबसूरत आकांक्षा उर्फ माही को देख कर सूरज उस का दीवाना बन गया. वहीं 25 वर्षीय सूरज को देख कर आकांक्षा को लगा कि यही उस के सपनों का राजकुमार है. वह भी उस की दीवानी बन गई. इस के बाद दोनों का प्रेम प्रसंग परवान चढऩे लगा. दोनों के बीच की दूरियां सिमटने लगीं. फिर एक रोज दोनों के बीच शारीरिक संबंध भी बन गए. आकांक्षा उर्फ माही सूरज के साथ गुलछर्रे उड़ाने लगी. सूरज उस पर पैसा खर्च करने लगा.

एक रोज बातचीत के दौरान माही ने सूरज से उस के घरद्वार के बारे में पूछा तो उस ने बताया कि वह फतेहपुर जिले के गांव हरीखेड़ा का रहने वाला है. पापा महानंद उत्तम किसान हैं. उस के 2 अन्य भाई कल्लू व अमन हैं, जो कैटरिंग का काम करते हैं. वह इलैक्ट्रिशियन है और हंसपुरम में रहता है. सूरज के बारे में जानने के बाद माही ने अपने बारे में सूरज को बताया. कुछ समय बाद सूरज आकांक्षा से मिलने उस के किराए वाले रूम पर आने लगा.

एक दिन प्रतीक्षा ने दोनों को मिलन करते देख लिया तो उस ने माही को फटकार लगाई. तब माही ने बताया कि वह और सूरज एकदूसरे से प्रेम करते हैं. उन की दोस्ती इंस्टाग्राम के जरिए हुई थी. वह सूरज से शादी कर उसे अपना जीवनसाथी बनाना चाहती है. माही के लव अफेयर की बात सुन कर प्रतीक्षा के होश उड़ गए. उस ने माही की प्रेम कहानी मम्मी विजयश्री को बताई तो वह परेशान हो गई. विजयश्री ने बेटी को बहुत समझाया, ऊंचनीच का पाठ पढ़ाया, लेकिन माही टस से मस नहीं हुई. उस ने दोटूक शब्दो में मम्मी से कह दिया कि वह सूरज से प्रेम करती है और उसी से ब्याह रचाएगी.

इधर सूरज उत्तम का माही के रूम में आनाजाना बढ़ा तो अन्य किराएदारों की शिकायत पर मकान मालिक राजेश गुप्ता ने सूरज के आने का विरोध किया. आकांक्षा ने सारी बात प्रेमी सूरज को बताई तो उस ने नौबस्ता की धोबिन पुलिया के पास प्रमोद तिवारी के मकान में कमरा किराए पर ले लिया. 11 जुलाई, 2025 को माही ने अपना सारा सामान ट्रौली बैग में भरा और सूरज द्वारा लिए गए किराए के कमरे में आ कर रहने लगी. सूरज भी उस के साथ रहने लगा. इस तरह दोनों लिवइन रिलेशनशिप में रहने लगे.

यही नहीं, सूरज उत्तम ने माही की नौकरी भी छुड़वा दी और नौबस्ता गल्ला मंडी स्थित कान्हा रेस्टोरेंट में नौकरी दिलवा दी. इस रेस्टोरेंट में सूरज इलैक्ट्रिशियन था. उस की मालिक से खूब पटती थी. साथ रहते आकांक्षा को चंद दिन ही बीते थे कि उसे पता चला कि सूरज के कई अन्य लड़कियों से भी प्रेम संबंध हैं. उन से वह छिप कर बातें करता है. उस ने ऐतराज जताया तो दोनों में कहासुनी होने लगी. माही सूरज पर जल्द शादी करने का दबाव भी बनाने लगी.

एक रोज आकांक्षा ने रोते हुए बड़ी बहन प्रतीक्षा को सूरज की अन्य लड़कियों से दोस्ती के बारे में बताया. तब प्रतीक्षा ने सूरज को फटकार लगाई. इस पर सूरज ने माफी मांग ली. लेकिन माफी मांगने के बावजूद उस ने अन्य लड़कियों से बतियाना बंद नहीं किया. 21 जुलाई, 2025 को भी माही और सूरज के बीच इसी बात को ले कर झगड़ा इतना बढ़ गया कि सूरज ने गला घोंट कर आकांक्षा उर्फ माही की हत्या कर दोस्त आशीष के सहयोग से उस की लाश ठिकाने लगा दी.

दूसरे दिन जब माही के मोबाइल फोन पर कौल आने लगी तो उस ने कौल रिसीव नहीं की. मैसेज आने पर मैसेज करता रहा, ताकि उस के जानने वालों को लगे कि वह जिंदा है. इस तरह 3 दिन तक वह माही के जानने वालों को गुमराह करता रहा. 25 जुलाई को वह कानपुर सेेंट्रल स्टेशन पहुंचा और मुंबई जाने वाली ट्रेन में आकांक्षा का फोन बंद कर रख दिया. ऐसा उस ने पुलिस को गुमराह करने के लिए किया.

21 सितंबर, 2025 को पुलिस ने आरोपी सूरज उत्तम और आशीष को कानपुर कोर्ट में पेश किया, जहां से उन्हें जिला जेल भेज दिया गया. कथा संकलन तक पुलिस की 5 टीमें आकांक्षा उर्फ माही का शव बरामद करने के लिए सर्च औपरेशन में जुटी थीं, लेकिन शव बरामद नहीं हुआ था. Love Story

 

 

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