Family Crime: पहली पत्नी अपर्णा प्रियदर्शिनी की एक्सीडेंट में मृत्यु के बाद ओडिशा के कांस्टेबल दीपक राउत (39 वर्ष) ने बीमा कंपनी से डेढ़ करोड़ रुपए का क्लेम लिया. इस के बाद उस ने कांस्टेबल शुभमित्रा साहू (25 वर्ष) को प्रेम जाल में फांस कर उस से कोर्टमैरिज कर ली. फिर एक दिन उस ने शुभमित्रा को भी ठिकाने लगा दिया. पुलिस ने जब जांच कर गड़े मुर्दे खोदे तो ऐसी सच्चाई जगजाहिर हुई कि…
महिला कांस्टेबल शुभमित्रा साहू अपने दोस्त कांस्टेबल दीपक राउत के साथ गुपचुप तरीके से की गई कोर्ट मैरिज को जल्द से जल्द सार्वजनिक करना चाहती थी, जबकि 39 वर्षीय दीपक राउत अब शुभमित्रा साहू (25 वर्ष) को अपनी जिंदगी से हमेशाहमेशा के लिए निकालने का प्लान बना चुका था.
अपने इसी प्लान को आखिरी मंजिल तक पहुंचाने के लिए उस ने 6 सितंबर, 2025 की तारीख को चुना. शुभमित्रा साहू की ड्यूटी डीसीपी ट्रैफिक कार्यालय में थी. शाम 7 बजे उस की ड्यूटी खत्म हुई तो दीपक राउत ने फोन कर के उसे एक अनजान जगह मिलने के लिए बुलाया. जब शुभमित्रा 7 बज कर 10 मिनट पर उस की बताई गई जगह पर पहुंची तो दीपक राउत अपनी होंडा सिटी कार से उस का इंतजार कर रहा था.
दीपक उसे कार में बिठा कर भीड़भाड़ से दूर एक सुनसान जगह पर ले गया और फिर जंगल के सुनसान इलाके में उस ने कार रोक दी. इस दौरान शुभमित्रा ने दीपक से अपने उधार के 20 लाख रुपयों की मांग की, क्योंकि वह अपनी शादी को सार्वजनिक कर एक ग्रांड पार्टी देना चाहती थी. जबकि दीपक शुभमित्रा को एक पाई तक देने के मूड में नहीं था. वह तो केवल कोर्ट मैरिज की आड़ में उस के शरीर और भावनाओं से खेल रहा था.
पैसे मांगने पर दोनों के बीच विवाद हो गया. कांस्टेबल दीपक ने उसे गालियां देनी शुरू कर दीं तो शुभमित्रा भी जवाब में उसे गालियां देने लगी. इस पर दीपक ने उस के साथ मारपीट करनी शुरू कर दी. इस दौरान शुभमित्रा ने दीपक को जोर से एक लात मार दी. गुस्से में आ कर दीपक ने शुभमित्रा का गला पकड़ लिया और तब तक दबाता रहा, जब तक वह बेसुध हो कर नीचे नहीं गिर गई. कुछ ही पलों में शुभमित्रा की मौत हो गई.
शुभमित्रा की हत्या करने के बाद दीपक ने उस का शव अपनी कार की डिक्की में रखा. पूरे एक दिन तक वह शुभमित्रा का शव अपनी कार की डिक्की में रख कर सामान्य तरीके से ही घूमता रहा. यहां तक कि वह अपनी ड्यूटी करने थाने भी गया. इस के बाद उस ने अपने चचेरे भाई को पैसे देने का लालच दे कर उसे और उस के ड्राइवर को जेसीबी ले कर शव को 170 किलोमीटर दूर क्योंझर जिले के घाटगांव क्षेत्र के पास जंगल में भेज दिया. वहां उन्होंने सुनसान जगह पर जेसीबी से गहरा गड्ढा खोद कर शुभमित्रा साहू को दफना दिया.
25 वर्षीय शुभमित्रा साहू उस समय कोरडा टाउन, पिचकुली, सूर्यनगर, भुवनेश्वर में किराए के मकान में रहती थी. उस के औफिस से उस के कमरे का रास्ता बमुश्किल आधे घंटे का था. शुभमित्रा की मम्मी सुकीर्ति साहू उस के साथ में रहती थीं. जब शाम को 8 बजे तक भी शुभमित्रा साहू अपने घर नहीं पहुंची तो उस की मम्मी एकदम से घबरा गईं. उन्होंने तुरंत अपने पति और बेटी को इस बारे में सूचना दी और अपने पड़ोस की एक महिला के साथ शुभमित्रा का पता लगाने उस के औफिस में चली गईं.

औफिस से पता चला कि शुभमित्रा साहू तो रोजाना की तरह आज शाम को 7 बजे अपनी ड्यूटी खत्म कर के अपने घर की ओर निकल गई थी. अब तक पुलिस महकमे में भी इस खबर को सुन कर हड़बड़ी मच गई थी. शुभमित्रा साहू की मम्मी सुकीर्ति साहू ने तुरंत कैपिटल थाने में अपनी बेटी शुभमित्रा साहू के लापता होने की सूचना दर्ज करा दी.
पुलिस अब तुरंत हरकत में आ गई थी. दूसरे दिन लापता शुभमित्रा साहू की मम्मी सुकीर्ति साहू और पापा धुरयदान साहू ने पुलिस कमिश्नर (भुवनेश्वर) सुरेश देव दत्ता सिंह से व्यक्तिगत रूप से मुलाकात कर बेटी को तलाशने में त्वरित जांच की मांग की. पुलिस कमिश्नर ने संबंधित अधिकारियों को लापता ट्रैफिक कांस्टेबल शुभमित्रा साहू की खोज के लिए आवश्यक दिशानिर्देश जारी कर दिए.
पुलिस टीमें लगातार शुभमित्रा साहू की तलाश में जुटी हुई थीं. इस के लिए पुलिस ने अपनी कई टीमें बना रखी थीं, लेकिन हफ्ता गुजरने के बाद भी पुलिस के पास कोई भी सुराग हाथ नहीं आ पाया था. पुलिस टीम को शुभमित्रा के किराए के घर पर उस का खुद का मोबाइल भी सुरक्षित हालत में बरामद हुआ था.
अब पुलिस टीम को यह बात साफ नहीं हो पा रही थी कि लापता महिला कांस्टेबल शुभमित्रा साहू अपना मोबाइल अपने ही घर में जल्दबाजी में भूल गई थी या जानबूझ कर छोड़ गई थी. एक महिला कांस्टेबल रहस्यमय तरीके से ड्यूटी के स्थान से ले कर अपने किराए के मकान के बीच भला कैसे गायब हो सकती थी. यह प्रश्न अब ओडिशा पुलिस के लिए खुद एक प्रतिष्ठा का प्रश्न बन चुका था.
अपनी इसी प्रतिष्ठा को बरकरार रखने के लिए आखिरकार डीसीपी भुवनेश्वर ने सोशल मीडिया प्लेटफार्म ‘एक्स’ पर शुभमित्रा की फोटो और उस की पूरी डिटेल्स को शेयर करते हुए एक पोस्ट में लिखना पड़ा था कि क्या आप ने हमारी महिला कांस्टेबल शुभमित्रा साहू, जिस की उम्र 25 वर्ष और लंबाई लगभग 5 फुट है, जिस ने ड्यूटी से अपने घर को निकलते समय बैंगनी रंग का टौप और सफेद सलवार पहनी हुई थी, उसे कहीं पर देखा है?
यदि किसी ने इन महिला कांस्टेबल को कहीं पर भी आतेजाते या टहलते हुए कहीं पर देखा है तो कृपया हमें हमारे मोबाइल नंबर 7008264419 और 8280338022 पर सूचित करें. सूचना देने वाले की पहचान गोपनीय रखी जाएगी. इस के अतिरिक्त भुवनेश्वर पुलिस ने लापता शुभमित्रा की सूचना देने वाले व्यक्ति को 25 हजार रुपए इनाम देने की घोषणा भी कर दी थी.
भुवनेश्वर पुलिस पूरे जोरशोर से शुभमित्रा की तलाश कर रही थी. इस के लिए पुलिस सीसीटीवी कैमरे और शुभमित्रा के घर से बरामद उस के मोबाइल फोन को भी अनलौक करने में जुटी जुटी हुई थी, लेकिन पुलिस को अभी तक कोई भी सूत्र हाथ नहीं लग पाया था. शुभमित्रा अपने औफिस से शाम को 7 बजे के बाद अपने घर आने के रास्ते में अचानक कहां लापता हो गई थी, यह प्रश्न बारबार पुलिस को परेशान कर रहा था.
जांच के दौरान पुलिस के सामने यह बात साफ हो चुकी थी कि शुभमित्रा के गायब होने में उस के किसी खास परिचित, प्रेमी आदि का हाथ हो सकता है, इसलिए अब पुलिस इस केस की जांच ‘लव एंगल’ से भी करने लगी. आखिरकार, भुवनेश्वर पुलिस के कैपिटल पुलिस स्टेशन के जांच अधिकारियों को अपनी विस्तृत जांच करने के दौरान यह पता चला कि भुवनेश्वर में शुभमित्रा साहू के साथ आखिरी बार पुलिस कमिश्नरेट में तैनात पुलिस कांस्टेबल दीपक राउत को देखा गया था.
पुलिस टीम ने तत्काल दीपक राउत को हिरासत में ले कर पूछताछ शुरू कर दी. इसी दौरान पुलिस को यह भी पता चला कि पिछले साल दीपक और शुभमित्रा ने गुपचुप कोर्ट मैरिज कर ली थी, जिस के बारे में दोनों के फेमिली वालों को पता तक नहीं था. अब पुलिस का शक दीपक पर पूरी तरह से बढ़ गया था. पुलिस द्वारा पूछताछ करने पर संदिग्ध दीपक राउत शुभमित्रा के गायब होने के बाद दुखी होने का दिखावा करता रहा. यहां तक कि वह शुरू में परिवार और पुलिस के साथ उसे ढूंढने में मदद करने का झूठा दिखावा करता रहा.
पुलिस पूछताछ में दीपक राउत ने सामान्य स्थिति का दिखावा करते हुए यह बात स्वीकार की कि उस के और शुभमित्रा के बीच में प्रेम प्रसंग था और उस ने शुभमित्रा के साथ 23 जुलाई, 2024 को कोर्ट मैरिज भी छिप कर कर ली थी. दीपक राउत ने पुलिस पूछताछ में आगे बताया कि वह 6 सितंबर, 2025 को जब शुभमित्रा एकाएक लापता हो गई थी तो वह अपने एक रिश्तेदार से मिलने क्योंझर गया था और उस ने अपनी प्रेयसी और पत्नी शुभमित्रा साहू की सकुशल व सुरक्षित वापसी के लिए वहां के तारिणी मंदिर में प्रार्थना भी की थी.
इस बात की पुष्टि करते हुए उस ने पुलिस टीम को अपने मोबाइल में खींची गई तसवीरें और पूजापाठ करते हुए ली गई सेल्फी भी दिखाई. इस के साथ ही उस ने सोशल मीडिया पर किया गया अपना पोस्ट भी दिखाया, जिस में उस ने शुभमित्रा के लापता होने की जानकारी पोस्ट की थी और लोगों से अपील भी की थी कि उस के बारे में किसी भी किस्म की जानकारी होने पर तुरंत पुलिस को दिए गए मोबाइल फोन पर सूचना दें.

शुभमित्रा साहू की जांच में एक अहम मोड़ तब आया, जब पुलिस ने लापता शुभमित्रा का फोन अनलौक करने के बाद उस के वाट्सऐप चैट्स को एक्सेस किया. इस में इस बात का पता चला कि शुभमित्रा ने 10 लाख रुपए कोर्ट मैरिज से पहले दीपक राउत को उधार दिए थे. उस के बाद शुभमित्रा दीपक से अपने 10 लाख रुपए लौटाने के साथसाथ 10 लाख रुपए अतिरिक्त देने की डिमांड कर रही थी, ताकि वह धूमधाम के साथ अपनी शादी की पार्टी अपने फेमिली वालों व परिचितों के बीच कर सके.
लेकिन दीपक इस विवाह को सार्वजनिक किए जाने के खिलाफ था. वह शुभमित्रा से बारबार यही कहता था कि वह अभी तक अपनी पहली पत्नी अपर्णा की मृत्यु से ठीक तरह से उबर नहीं पाया है. इस के अलावा दीपक बारबार इस बात का उलाहना भी शुभमित्रा को देता रहता था कि उस ने शुभमित्रा का एक करोड़ रुपए का बीमा करा रखा है, जिस की किश्त देना उसे भारी पड़ता जा रहा है, इसलिए दीपक उस के 10 लाख रुपए लौटाने के एकदम खिलाफ हो गया था.
इन सभी बातों से शुभमित्रा काफी तनाव में आ गई थी, जिस के कारण उस के वाट्सऐप मैसेज में पुरी, मथुरा और वाराणसी जाने की इच्छा जताई थी. शुरू में दीपक राउत ने पुलिस को यह कह कर गुमराह करने की कोशिश की थी कि शुभमित्रा की अपने मम्मीपापा के साथ अनबन रहती थी, जिस के कारण वह अपना घर छोड़ कर चली गई होगी. उस के बाद पुलिस टीम ने पुरी, वाराणसी और मथुरा में जा कर भी शुभमित्रा की तलाश की, लेकिन पुलिस टीम को शुभमित्रा का कोई सुराग नहीं मिल पाया था.
फिर पुलिस ने आरोपी दीपक राउत का पौलीग्राफ टेस्ट कराया. पौलीग्राफ टेस्ट के दौरान दीपक राउत के जवाब भ्रामक पाए गए. उस के बाद पुलिस ने जब उस के साथ सख्ती की तो फिर उस ने शुभमित्रा साहू की हत्या करने की बात स्वीकार कर ली. शुभमित्रा साहू और दीपक राउत की पहली मुलाकात किसी फिल्मी सीन की तरह घटित हुई थी. उस दिन शुभमित्रा को औफिस में ज्यादा काम हो गया था, जिस की वजह से वह शाम को 7 बजे अपने घर लौटने के बजाय रात लगभग 9 बजे अपने औफिस से स्कूटी से घर के लिए निकली थी.
जैसे ही शुभमित्रा एक अंधेरी सी सड़क से गुजरी तो उसे एक लड़की की चीख सुनाई पड़ी. चीख सुनते ही शुभमित्रा ने अपनी स्कूटी तत्काल उस तरफ मोड़ दी, जिधर से चीखने की आवाज आई थी. तभी उस की नजर एक अंधेरे कोने पर पड़ी तो उस ने देखा कि एक युवती को 4 युवकों ने चारों ओर से घेर रखा था और वे सब उस युवती को पकड़ कर उस के साथ छेड़छाड़ कर रहे थे. शुभमित्रा खुद एक पुलिस वाली थी, इसलिए उस ने अपनी स्कूटी साइड में खड़ी की और तुरंत उस युवती को बचाने चली गई. पहले तो उन चारों युवकों ने शुभमित्रा को धमकाया, लेकिन जब शुभमित्रा ने उन में से 2 युवकों के चेहरों पर थप्पड़ जड़े तो उन के होश ठिकाने आ गए.
अब चारों युवक उस युवती को छोड़ कर शुभमित्रा से मारपीट करने लगे. पहले तो कुछ देर तक शुभमित्रा चारों से मुकाबला करती रही, लेकिन एक युवती अकेली उन चारों का मुकाबला भला कैसे कर सकती थी. इसलिए धीरेधीरे वे चारों युवक उस पर अब भारी पड़ते जा रहे थे. तभी उन में से एक युवक बोल पड़ा, ”इस के कारण हमारा शिकार देखो भाग गया. इतने दिन से हम उस के पीछे पड़े थे, उस की एकएक गतिविधि को देख रहे थे, आज हमें मौका मिला तो यह समाज सुधारक न जाने कहां से बीच में टपक पड़ी. चलो, कोई बात नहीं, अब इसी से मजे ले लेते हैं.’’
यह सुन कर सुमित्रा की रूह भी एकबारगी कांप सी उठी थी. वह अब सोचने लगी थी कि उस ने तो एक असहाय युवती को बचाने की कोशिश की थी, लेकिन अब तो यहां पर दांव उलटा ही पड़ गया. वह अपनी ओर से उन चारों दरिंदों से फिर भी भिड़ रही थी और बीचबीच में वह मदद के लिए चीखपुकार भी रही थी. तभी उस सड़क से अपनी बाइक पर दीपक गुजर रहा था, उस ने जब अपने सामने एक युवती को अकेले 4 युवकों से मुकाबला करते देखा तो वह दंग रह गया. दीपक ने तुरंत अपनी बाइक रोकी और युवकों को ललकारने लगा. युवकों ने जब देखा कि अब मुकाबले में एक और आदमी शामिल हो गया है तो उन में से 2 युवकों ने चाकू निकाल लिए थे.
लेकिन जब दीपक कयामत बन कर उन सड़कछाप शोहदों पर एकाएक कर टूट पड़ा तो वे चारों शोहदे उस के ताइक्वांडो और जूडो कराटे का सामना चाह कर भी नहीं कर सके. दोनों चाकू वाले गुंडे तो दीपक के हाथों में पड़ गए, जिन की उस ने दिल से कुटाई की, लेकिन 2 शोहदे वहां से भागने में कामयाब हो गए. वहां पर ऐसा भी नहीं था कि अन्य लोग नहीं थे. दूर से तमाशा देखने वाले और उस घटना का वीडियो बनाने वाले भी उस भीड़ में शामिल थे, लेकिन उन लोगों ने न तो उस युवती की मदद की और न ही दीपक की सहायता करने के लिए आगे आए.
शुभमित्रा इस युवक के समय पर किए गए इस साहसिक कार्य को देख कर एकदम कायल हो गई थी. वह उस अनजान युवक को धन्यवाद देने के लिए जब उस के पास गई तो वह युवक किसी को फोन कर रहा था. उस के फोन कटते ही वहां पर पुलिस भी आ गई थी, जो उन दोनों शोहदों को पुलिस की गाड़ी में बिठा कर वहां से चली गई थी.
शुभमित्रा यह समझ चुकी थी कि यह युवक अवश्य कोई पुलिस वाला हो सकता है. जब उस ने अपनी नजरें उठा कर युवक की ओर देखा और दोनों की आंखें मिलीं तो पहला खयाल शुभमित्रा के दिल में यही आया था कि काश! ऐसा निडर पति मुझे भी मिल जाता तो पूरी जिंदगी कितनी आसानी से और बेफिक्री से गुजर जाती.
अपने मन की भावनाओं को किसी तरह शुभमित्रा ने काबू किया और उस अनजान व्यक्ति का धन्यवाद करते हुए बोली, ”सर, आज रात यदि आप यहां पर समय से नहीं आते तो ये चारों शोहदे मेरी जान अवश्य ले लेते. पता नहीं मेरी क्या हालत कर डालते. कहीं मुंह दिखाने लायक नहीं रह पाती मैं. आप का मैं किन शब्दों में धन्यवाद करूं, यह मेरी समझ में नहीं आ रहा है सर! क्या मैं जान सकती हूं कि आप किस विभाग में काम करते हैं?’’
”जी, इस में धन्यवाद वाली भला क्या बात है. एक पुलिसकर्मी होने के नाते तो यह मेरा फर्ज बनता भी है. वैसे मुझे यह लग रहा है कि मैं ने आप को कहीं देखा जरूर है. क्या मैं आप का परिचय जान सकता हूं.’’ उस युवक ने कहा.
”जी सर, मेरा नाम शुभमित्रा साहू है, मैं ट्रैफिक पुलिस में कांस्टेबल हूं और डीसीपी (ट्रैफिक) में आजकल कंप्यूटर का काम देखती हूं. आप ने मुझे अवश्य देखा होगा, आप कहां पर हैं सर!’’ शुभमित्रा ने पूछा.
”शुभमित्राजी, मैं कमिश्नर औफिस में लेखा विभाग में पोस्टेड हूं. देखिए, आप भी हमारे डिपार्टमेंट से ही हैं, इसलिए यदि आप मुझे सर कह कर न पुकारें तो मुझे अच्छा लगेगा. मेरा नाम दीपक राउत है, आप मुझे यदि दीपक नाम से संबोधित करेंगी तो मुझे अच्छा लगेगा,’’ दीपक ने मुसकराते हुए कहा.
”वैसे आप काफी बहादुर हैं. आप ने उन चारों को ऐसी मार लगाई, जिस से मेरा तो दिल खुश हो गया दीपकजी.’’ शुभमित्रा ने मुसकराते हुए कहा.
दीपक भी पहली नजर में शुभमित्रा का दीवाना सा हो गया था. उस का मन कर रहा था कि वह इस शुभमित्रा जैसी हसीन युवती को जी भर कर देखता रहे और उस के साथ ढेर सारी बातें करता रहे.
तभी शुभमित्रा ने कहा, ”दीपकजी, देखिए अब यहां पर भीड़ काफी अधिक हो चुकी है. लोग तो केवल तमाशबीन बन कर वीडियो बनाते फिरते हैं. किसी ने हम दोनों का ही वीडियो बना लिया तो हम दोनों के लिए यह ठीक नहीं हो सकता. ये तमाशबीन लोग अपने आप कुछ करते नहीं हैं, लेकिन बात का बतंगड़ बनाने में हमेशा आगे रहते हैं.’’
”आप वाकई बहुत समझदार हैं, लेकिन मैं तो आप की बहादुरी और खूबसूरती का पहली नजर में ही कायल हो गया हूं. आप से दोबारा कब मुलाकात होगी? क्या आप का मोबाइल नंबर ले सकता हूं?’’ दीपक ने सीधेसीधे कह दिया था.
”दीपकजी, आप से मिल कर मुझे आज सचमुच बहुत खुशी हो रही है, आप मेरा मोबाइल नंबर नोट कर लीजिए. आप कौल कीजिए, मैं भी आप का मोबाइल नंबर सेव कर लूंगी.’’ शुभमित्रा ने मुसकराते हुए कहा.

दीपक ने तुरंत ही उस मोबाइल नंबर पर फोन किया तो दूसरी तरफ से शुभमित्रा के मोबाइल पर घंटी बजने लगी थी. शुभमित्रा ने भी दीपक का नंबर सेव कर लिया. 25 वर्षीय शुभमित्रा साहू उड़ीसा के जगतपुर जिले के पारादीप की रहने वाली थी. उस के पापा का नाम धुरयदान साहू और मम्मी का नाम सुकीर्ति साहू था. शुभमित्रा अपने परिवार में सब से बड़ी थी. उस के 2 छोटे भाई और एक बहन थी. बचपन से ही शुभमित्रा का सपना पुलिस की नौकरी करने का था, इसलिए वह पढ़ाई के साथसाथ खेलकूद में भी स्कूल और कालेज में सब से आगे रहती थी.
उस के पापा एक किसान थे, इसलिए शुभमित्रा नौकरी कर अपने मम्मीपापा और दोनों छोटे भाइयों को एक सुखद भविष्य देना चाहती थी. सुभमित्रा की कोशिशें रंग लाईं और उस ने इधर बीए में प्रवेश प्रवेश लिया तो दूसरी तरफ उस की नियुक्ति ओडिशा पुलिस में हो गई. यह साल 2018 की बात है.
उस के बाद शुभमित्रा की पोस्टिंग जनवरी 2024 में भुवनेश्वर के कैपिटल थाने में ट्रैफिक पुलिस कांस्टेबल के रूप में हो गई. शुभमित्रा की उम्र भी तब 24 साल की हो गई थी, इसलिए उस के पेरेंट्स उस से शादी करने के लिए दबाव बनाते रहते थे, लेकिन शुभमित्रा का अपना यह मानना था कि अभी उस की शादी की उम्र भी नहीं है. दूसरा वह अपनी पसंद से ही शादी करना चाहती थी. शुभमित्रा साहू के दिल में दीपक राउत ने एक बौलीवुड हीरो की तरह एंट्री कर के ऐसी छाप छोड़ दी थी, जिसे वह भूल नहीं पा रही थी. एक ही दिन और एक ही पल में वह अपना दिल दीपक को न्यौछावर कर चुकी थी.
इस घटना को 2 दिन हो चुके थे, लेकिन शुभमित्रा सोच रही थी कि 2 दिन हो चुके हैं, दीपक ने अभी तक भी उसे फोन नहीं किया.
उस समय रात के लगभग 10 बजे थे. शुभमित्रा खाना खा कर अपने कमरे में बैठी एक किताब पढ़ रही थी. तभी उस के मोबाइल की घंटी बजी. उस ने स्क्रीन देखी तो पता चला कि वह कौल दीपक की ही है. शुभमित्रा के चेहरे पर मुसकान तैर गई. दोनों के बीच थोड़ी देर बातचीत हुई. उस के बाद दीपक ने उसे सीधासीधा कह दिया कि वह उस से दोस्ती कर उसे सदा के लिए अपनाना चाहता है.
शुभमित्रा भी यही चाहती थी. लिहाजा उस ने भी दीपक के प्रस्ताव पर अपनी सहमति जता दी. इस के बाद तो दोनों के बीच मुलाकातें भी होने लगी थीं. दीपक ने शुभमित्रा को यह भी बता दिया था कि 2018 में उस की शादी अपर्णा से हुई थी, लेकिन एक सड़क दुर्घटना में उस की जुलाई 2024 में मौत हो गई थी. दीपक की इस ईमानदारी पर शुभमित्रा बहुत प्रभावित हुई.
शुभमित्रा अब जल्द से जल्द धूमधाम से दीपक से शादी करना चाहती थी, लेकिन दूसरी तरफ दीपक ने उस से कहा कि अभी हम लोग कोर्ट मैरिज कर लेते हैं, क्योंकि अभी वह अपनी पहली पत्नी के दुख से पूरी तरह से उबर नहीं पाया है. कुछ समय बाद जब सब नारमल हो जाएगा तो धूमधाम से सब के सामने सामाजिक रीतिरिवाज से विवाह कर लेंगे.
उस के बाद शुभमित्रा और दीपक राउत ने अपने फेमिली वालों, परिचितों से छिप कर 23 जुलाई, 2024 को कोर्ट मैरिज कर ली. कोर्ट मैरिज के बाद शुभमित्रा अपने पेरेंट्स के पास ही रह रही थी और दीपक भी अकेले अपने घर में रह रहा था. कभीकभार वह घूमने का प्लान बना कर दूसरे शहर में साथ रह लेते थे. एक कहावत भी है कि आज की मतलब की दुनिया में कौन किसी का होता है, आज तो धोखा वही देता है, जिस पर भरोसा होता है.
उन के आपसी संबंध अब भले ही चाहे दुनिया से दूर थे, पर अब बद से बदतर होते जा रहे थे. दीपक राउत के मन में लालच की बेल पूरी तरह फैल चुकी थी, इसलिए उस ने एक फुलप्रूफ प्लान बना कर शुभमित्रा साहू की हत्या कर उस का शव ठिकाने लगा दिया. पुलिस ने दीपक से पूछताछ के बाद उस की निशानदेही पर 17 सितंबर, 2025 बुधवार को मजिस्ट्रैट की निगरानी में जेसीबी की मदद से उस जगह की खुदाई कराई, जहां पर शुभमित्रा साहू का शव सीमेंट के एक बैरल में बंद और लगभग 10 फीट नीचे जमीन में दबा हुआ था. जरूरी काररवाई कर शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया.
इस के बाद पुलिस ने आरोपी दीपक राउत की होंडा सिटी कार नंबर ओडी02आर 8494 को भी जब्त कर लिया. दीपक राउत के कुबूलनामे और साक्ष्यों के आधार पर भुवनेश्वर के कैपिटल थाने में उस के खिलाफ बीएनएस की धारा 103(1) और 238 के तहत मामला दर्ज कर लिया गया. साथ ही पुलिस ने शव को छिपाने के लिए आरोपी दीपक रावत के चचेरे भाई विनोद बिहारी भुइयां (38 वर्ष) और जेसीबी चालक शंभूनाथ महंत (23 वर्ष) को भी गिरफ्तार कर लिया.
महिला पुलिस कांस्टेबल शुभमित्रा मर्डर केस जब ओडिशा के लोगों के सामने जगजाहिर हुआ तो आरोपी दीपक राउत की मुश्किलें अब और भी बढ़ गई हैं. दीपक की पहली पत्नी अपर्णा प्रियदर्शिनी के पेरेंट्स ने भी अब पुलिस के समक्ष अपर्णा की हत्या किए जाने की शिकायत दर्ज कराई है. मृतका अपर्णा प्रियदर्शिनी की छोटी बहन रोजलिन ने मीडिया को बताया है कि शुरुआत में हमें यह लगा था कि हमारी बहन की मौत महज एक दुर्घटना थी. अब दीपक राउत की दूसरी पत्नी शुभमित्रा साहू की हत्या के बाद हमें यह पूरा यकीन है कि दीपक ने मेरी बहन की भी हत्या की होगी और हत्या को दुर्घटना का रूप दे दिया. अपर्णा की मौत की दोबारा जांच की मांग को ले कर ढेंकनाल पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज कराई है.
रोजलिन ने यह आरोप भी लगाया है कि अपने पति दीपक के साथ अपर्णा का वैवाहिक जीवन शुरू से ही समस्याओं, परेशानियों और अथाह दुखों से भरा था. शादी के कुछ महीनों बाद ही दीपक ने अपर्णा को परेशान और प्रताडि़त करना शुरू कर दिया था. इस संबंध में अपर्णा ने पुलिस कमिश्नरेट में औनलाइन शिकायत भी दर्ज कराई थी, लेकिन पुलिस ने दीपक के खिलाफ कोई भी काररवाई नहीं की.
रोजलिन ने यह राज भी खोला कि दीपक ने उस की बहन का एक करोड़ रुपए का बीमा कराया था, जोकि बहन की मृत्यु के बाद उसे मिल भी चुका है. अब हमें उस के ऊपर यह शक है कि दीपक ने इंश्योरेंस क्लेम पाने के लिए अपर्णा की हत्या की थी. शुभमित्रा साहू के हत्यारे कांस्टेबल दीपक राउत की पहली शादी अपर्णा प्रियदर्शिनी के साथ 25 अप्रैल, 2018 को हुई थी. दीपक राउत की पहली पत्नी अपर्णा प्रियदर्शिनी एक राजस्व निरीक्षक (कानूनगो) थी और ढेंकनाल जिले में तैनात थी.

19 मार्च, 2022 को दीपक राउत ने खुंटुनी थाने में शिकायत दर्ज कराई कि उस की पत्नी अपर्णा प्रियदर्शिनी (31 वर्ष) की 2 दिन पहले ट्रक नंबर ओडी02 एस 3486 की चपेट में आने से मौत हो गई थी. कथित दुर्घटना एनएच-55 पर राधा किशोरपुर चौक के पास हुई थी. घटना के बारे में दीपक राउत ने तब पुलिस को बयान दिया था कि घटना के दिन अपर्णा उस (दीपक) के साथ अपनी गाड़ी से अपने गृहनगर लौट रही थी, तब एक जगह गाड़ी को रुकवा कर अपर्णा ने दीपक से कहा कि उसे टायलट जाना है.
जब वह सड़क पार टायलेट में जाने के लिए सड़क पार कर रही थी तो कथित तौर पर रात को 9 से साढ़े 9 बजे के बीच एक ट्रक ने अपर्णा को टक्कर मार दी, जिस से उस के सिर में गंभीर चोटें आ गई थीं. उस के बाद दीपक उसे ले कर अस्पताल गया, जहां पर इलाज के दौरान उस की मौत हो गई. उस समय खुंटुनी पुलिस ने इस केस की जांच की थी. जांच के दौरान पुलिस ने उक्त पंजीकरण वाले ट्रक का पता लगा लिया और चालक को हिरासत में ले लिया था. लेकिन पुलिस जांच में यह पाया गया कि दुर्घटना वाले दिन वह ट्रक उस इलाके में नहीं था.
उस के बाद दीपक राउत ने दावा किया कि शायद अंधेरा होने के कारण उस ने ट्रक का गलत नंबर नोट कर लिया होगा. वह शायद कोई दूसरे नंबर का वाहन हो सकता है. रिपोर्ट लिखाने वाला एक पुलिसकर्मी था, इसलिए उस की बातों पर यकीन कर के जांच अधिकारी ने यह निष्कर्ष निकाला कि उस दुर्घटना के लिए एक अज्ञात वाहन ही जिम्मेदार था. उस के बाद कोई अन्य सुराग न मिल पाने के कारण जांच अधिकारी द्वारा अदालत में एक अंतिम सत्य रिपोर्ट (एफटीआर) प्रस्तुत की गई, जिस में यह संकेत दिया गया कि यह घटना वास्तविक थी, लेकिन उस विशेष ट्रक को दोषी ठहराने के लिए पुलिस के पास पर्याप्त सबूत नहीं थे.
अदालत द्वारा यह पूछे जाने पर कि क्या फिर शिकायतकर्ता पुलिस कांस्टेबल दीपक राउत झूठ बोल रहे थे और क्या पुलिस को उस समय अपर्णा प्रियदर्शिनी की मौत में किसी गड़बड़ी का संदेह था. जांच अधिकारी ने तब अदालत में बताया था कि इन सभी सवालों के जवाब विस्तृत जांच के बाद ही मिल पाएंगे. इस मामले में मृतका अपर्णा की बहन रोजलिन ने मीडिया और पुलिस को दिए अपने शिकायती पत्र में यह भी आरोप लगाया है कि अपर्णा के पति दीपक राउत ने उन्हें फोन पर बताया था कि खुंटुनी के राधा दामोदरपुर के पास अपर्णा का एक्सीडेंट हुआ था.

पहले तो दीपक राउत ने मृतका अपर्णा के परिजनों को यह बताया था कि अभी हम दोनों दुर्घटनास्थल पर ही हैं. उस के बाद में उन के द्वारा यह बताया गया था कि दीपक अपर्णा को एससीबी मैडिकल कालेज और अस्पताल ले कर गया है. बाद में हमें दीपक राउत का एक और कौल आया, जिस में बताया गया कि अपर्णा को वह कटक के एक निजी अस्पताल ले कर गया है. इस मामले में कटक (ग्रामीण) के एसपी विनीत अग्रवाल ने मीडिया को बताया कि हम ने अपर्णा प्रियदर्शिनी की हत्या का मामला दर्ज कर लिया है और इस की जांच के लिए एक डीएसपी स्तर के अधिकारी को नियुक्त कर दिया है.

भुवनेश्वर पुलिस द्वारा 19 सितंबर, 2025 को बताया गया कि 25 वर्षीय महिला ट्रैफिक कांस्टेबल शुभमित्रा साहू की हत्या को रैड फ्लैग घोषित कर दिया गया है. अब यह जांच क्राइम ब्रांच (सीबी) के डीजीपी की निगरानी में होगी. भुवनेश्वर के कमिश्नरेट पुलिस के समन्वित सहयोग के साथ, एजेंसी कैपिटल थाना पुलिस और खुंटुनी पुलिस द्वारा पहले एकत्र किए गए सभी साक्ष्यों और आंकड़ों की जांच करेगी. इस के साथ ही सीएडब्लू (महिलाओं के विरुद्ध अपराध) और सीडब्लू (साइबर विंग) दोनों ही इकाइयां इस मामले की बारीकी से जांच और छानबीन करेंगी.
ओडिशा पुलिस ने वर्ष 2014 में जांच की रेड फ्लैग श्रेणी शुरू की थी, जिस के तहत मामलों की जांच सर्वोच्च प्राथमिकता के आधार पर की जाती है. इस रेड फ्लैग जांच में महिला कांस्टेबल शुभमित्रा की हत्या के साथसाथ 17 मार्च, 2022 को ओडिशा के कटक के आधागढ़ के पास एक सड़क दुर्घटना में आरोपी कांस्टेबल दीपक राउत की पहली पत्नी अपर्णा प्रियदर्शिनी की मृत्यु के बीच संभावित संबंध का भी पता लगाया जाएगा, जिस के लिए दीपक राउत की जीवन बीमा पौलिसी से डेढ़ करोड़ रुपए का भुगतान मिला था.

18 सितंबर, 2025 को भुवनेश्वर के डीसीपी जगमोहन मीणा ने आरोपी हत्यारे पुलिस कांस्टेबल दीपक राउत को उस की नौकरी से निलंबित कर दिया. उस के एक रिश्तेदार और एक अन्य सहयोगी को भी शुभमित्रा साहू के शव को ठिकाने लगाने में आरोपी दीपक राउत की मदद करने में गिरफ्तार कर लिया गया है. इसी बीच मृतका शुभमित्रा के पोस्टमार्टम के नमूने भुवनेश्वर स्थित राज्य फोरैंसिक विज्ञान प्रयोगशाला में भेज दिए गए हैं, क्योंकि क्योंझर जिला मुख्यालय अस्पताल में सड़ीगली लाशों की विस्तृत और सटीक रिपोर्ट देने के लिए पर्याप्त सुविधाएं उपलब्ध नहीं थीं.
मृतका कांस्टेबल शुभमित्रा साहू का पोस्टमार्टम उस के भाइयों का मौजूदगी में करा लिया गया है. पुलिस इस मामले की तफ्तीश गंभीरता से कर रही थी. Family Crime






