Love Story: पति के जुल्मोसितम से तंग आ चुकी एक बच्चे की मां गीता का झुकाव 25 वर्षीय भरत अहीर की तरफ हो गया. बाद में उस ने प्रेमी भरत के साथ रहने का फैसला कर लिया. इस के लिए उस ने बौलीवुड फिल्म ‘दृश्यम’ देख कर ऐसी खौफनाक योजना बनाई कि…

गुजरात के जिला पाटन के थाना सांतलपुर के अंतर्गत आने वाले गांव जखोत्रा की रहने वाली गीता का विवाह बचपन में ही गांव के ही एक युवक से तय हो गया था. गीता जब सयानी हुई तो उसे वह युवक अच्छा नहीं लगता था. विवाह के बाद उस का पति अपने पेरेंट्स की बातों को ज्यादा मानता था, इसलिए छोटीछोटी बातों पर गीता से मारपीट करता था. इसी तरह के माहौल में वह एक बच्चे की मां बन गई, जो इस समय 3 साल का है.

इसी साल 4 महीने पहले गीता खेतों में जीरा की फसल काट रही थी, तभी उस की मुलाकात गांव के ही रहने वाले भरत अहीर से हुई. दोनों की आंखें मिलीं. भरत कुंवारा था. दोनों ने एकदूसरे का नंबर लिया और आपस में बातें करने लगे, जिस से दोनों को एकदूसरे से प्यार हो गया, जो समय के साथ गहरा होता गया. दोनों एक ही गांव के रहने वाले तो थे ही, पड़ोसी भी थे. भरत मुंबई में कोई प्राइवेट नौकरी करता था. समयसमय पर वह गांव आताजाता रहता था.

फोन पर बात करतेकरते ही उन के बीच प्यार इतना गहरा हो गया कि गीता को अब पति के साथ रहना बिलकुल अच्छा नहीं लगता था. इसलिए गीता ने भरत के साथ रहने की बात की तो वह उसे साथ रखने के लिए खुशीखुशी राजी हो गया, क्योंकि अब उसे भी गीता के बगैर रहना अच्छा नहीं लगता था.

गुजरात में अहीर समाज में बैशाख यानी मई में ही विवाह होते हैं. इसी बैशाख में गीता के चचेरे भाई का विवाह था. शादी में जाने के लिए उस ने पति से कहा, पर पति ने विवाह में जाने से मना कर दिया और गीता को भी नहीं जाने दिया. गीता को यह बात इतनी बुरी लगी कि उस ने भरत को फोन कर के स्पष्ट कह दिया कि अब वह पति के साथ बिलकुल नहीं रहेगी. भरत भी तो यही चाहता था. क्योंकि उस का भी मन अब गीता के बगैर नहीं लग रहा था. इस के बाद दोनों साथ रहने का उपाय खोजने लगे.

दोनों ने एक बार तो भाग जाने के बारे में सोचा. पर भाग जाने के बाद दोनों के घर वाले दोनों को खोज निकालते और फिर उन्हें अलग कर देते. क्योंकि इस के पहले परिवार में एक घटना ऐसी बन चुकी थी. कुछ दिनों पहले गीता की चचेरी बहन भाग चुकी थी. फेमिली वाले उसे ढूंढ कर ले आए थे. इस से गीता जानती थी कि अगर वह भरत के साथ भाग जाती है तो घर वाले कैसे भी उसे ढूंढ निकालेंगे. इसी दौरान लगभग महीने भर पहले गीता ने भाई के मोबाइल में ‘दृश्यम’ फिल्म देखी. फिल्म देखने के बाद उस ने एक खतरनाक योजना बना डाली. उस ने अपनी इस योजना के बारे भरत से बात की.

उस ने कहा, ”हमारे भागने के बाद अगर यह साबित हो जाए कि मैं मर गई हूं तो मुझे कोई नहीं ढूंढेगा. अगर हमें साथ रहना है तो किसी की लाश को मेरे कपड़े पहना कर लाश को जला कर हमें यह साबित करना होगा कि वह मैं हूं.’’

यह सुन कर भरत ने आनाकानी करते हुए कहा, ”ऐसा करने पर हम पकड़े गए तो सारी उम्र जेल में बीत जाएगी.’’

पर गीता ने तो ‘दृश्यम’ फिल्म देखी थी. इसलिए उस ने इतने तर्क दिए कि भरत को उस की बात माननी पड़ी. इस तरह गीता ने भरत को मना लिया. फिर दोनों ने वह स्थान भी तय कर लिया, जहां लाश को जलाना था. पूरी योजना बना कर भरत अहीर मुंबई चला गया, जिस से किसी को यह न लगे कि हत्या में वह भी शामिल था. वह वहां से योजना को पूरी करने के लिए इस तरह आएगा कि गांव के किसी व्यक्ति को पता नहीं चलेगा.

वह चुपके से आएगा और किसी की हत्या कर के गीता के कपड़े पहना कर जला देगा और यह साबित कर देगा कि लाश गीता की जली है. उस के बाद गीता को ले कर मुंबई चला जाएगा, जहां उस के साथ आराम से रहेगा. लगभग एक महीने तक दोनों अपनी इस योजना पर विचार करते रहे. 26 मई, 2025 को भरत मुंबई से आया, पर वह अपने गांव जखोत्रा जाने के बजाय अपने एक रिश्तेदार के यहां चला गया. वह जिस रिश्तेदार के यहां ठहरा था, उस की बाइक ले कर ऐसे व्यक्ति की तलाश में निकल पड़ा, जिस की हत्या कर के उस की लाश को गीता के कपड़े पहना कर जलाया जा सके.

गरमियों के दिन थे. आकाश से आग बरस रही थी. ऐसे में शिकार की तलाश में निकला भरत पूरे दिन भटकता रहा. पर उसे ऐसा कोई आदमी नहीं मिला, जिस से उस का मकसद पूरा हो पाता. शाम हो गई थी. लगभग साढ़े 7 बज रहे थे. भरत बुरी तरह थक गया था. उस समय वह वौवा गांव पहुंचा था. रवेची माता के मंदिर पर रुक कर वह पानी पी कर सोच रहा था कि अब क्या किया जाए, तभी उस की नजर सामने तालाब के पास से गुजर रहे एक अधेड़ पर पड़ी. उस का नाम हरजीभाई सोलंकी था.

भरत ने उसे रोक कर पूछा, ”काका, खेत जा रहे हो क्या?’’

”हां, खेत ही जा रहा हूं.’’ हरजी ने कहा.

भरत तो वैसे भी ऐसे ही मौके की तलाश में था. उस ने हरजी से कहा, ”आओ, मेरी बाइक पर बैठ जाओ. मैं तुम्हें खेत तक छोड़ देता हूं.’’

हरजीभाई को क्या पता था कि आगे मौत मुंह फाड़े खड़ी है. भरत के कहने पर वह उस की बाइक पर पीछे बैठ गया. भरत बाइक स्टार्ट कर के आगे बढ़ाते हुए हरजी से बातें करने लगा. क्योंकि वह हरजी से उस के बारे में अधिक से अधिक जानकारी ले लेना चाहता था. उस ने पूछा, ”काका, आप के घर में कौनकौन हैं?’’

”मेरी न पत्नी है और न ही कोई औलाद है. मैं बहुत दिनों से यहां रह कर खेतों में मजदूरी करता हूं.’’ हरजी ने कहा. हरजी की इस बात से भरत को लगा कि अगर इस की हत्या कर दी जाए तो इस की तलाश करने वाला कोई नहीं है. भरत ने हरजी को खेतों के पास उतार दिया. दूसरी ओर हरजी को लगा कि भरत अच्छा आदमी है. उसे अपनी बाइक पर बैठा कर खेतों तक ले आया है. इसलिए उस ने उसे पानी पी कर जाने के लिए कहा.

हरजी जैसे ही पानी लेने के लिए अपनी झोपड़ी की ओर बढ़ा, भरत ने उसे इतने जोर से धक्का मारा कि वह खुद को संभाल नहीं सका और जमीन पर गिर पड़ा. हरजी जैसे ही जमीन पर गिरा, भरत जल्दी से उस के ऊपर चढ़ गया और उस का गला पकड़ कर दबाने लगा. हरजी ने खुद को छुड़ाने की बहुत कोशिश की, पर भरत जवान और तगड़ा था. इसलिए भरत के आगे उस की एक नहीं चली और गला दबाने से उस की सांसें हमेशा के लिए रुक गईं.

हरजी की मौत हो गई है, यह विश्वास होने के बाद भरत ने उस की लाश को उठा कर बाइक पर पीछे बैठा दिया और खुद आगे बैठ कर लाश को रस्सी से अपनी कमर में इस तरह बांध ली कि वह गिरे न. उस के हाथ भी उस ने रस्सी से बांध दिए, ताकि वे हिलें नहीं. इतना कर के वह जखोत्रा के लिए चल पड़ा. रास्ते में उसे 3 लोग मिले भी, पर अंधेरा होने की वजह से वे जान नहीं पाए कि भरत के पीछे बैठा आदमी जिंदा है या मुर्दा.

जखोत्रा पहुंच कर भरत गांव के सुतकणी नाम के स्थान पर हरजी की लाश को रख कर खड़ा हो गया. वहीं से उस ने गीता को फोन किया कि लाश मिल गई है. तब गीता ने कहा, ”रात एक बजे के आसपास मैं घर से इस तरह निकलूंगी कि किसी को पता नहीं चलेगा. मैं 4 लीटर पेट्रोल ले कर आऊंगी. उसी से लाश को जला दिया जाएगा.’’

गांव के आसपास कोई पेट्रोल पंप नहीं था, इसलिए गांव के दुकानदार पेट्रोल बेचते थे. गीता ने गांव की एक दुकान से पेट्रोल खरीद लिया. उस ने यहां चालाकी दिखाई. उस ने 4 लीटर पेट्रोल के बजाय डेढ़ लीटर पेट्रोल इसलिए खरीदा कि दुकानदार को शक न हो जाए और वह पूछने लगे कि इतने पेट्रोल का वह क्या करेगी. बाकी का पेट्रोल भरत को लाना था, पर उस के पास समय ही नहीं था. किसी ने उसे लाश के साथ देख लिया तो? इस डर से लाश को वहीं छोड़ कर वह एक मंदिर में चला गया. उसी मंदिर में बैठ कर एक बजे तक वह गीता का इंतजार करता रहा.

दूसरी ओर तय प्रोग्राम के अनुसार एक बजे गीता घर से निकल पड़ी. उस ने एक प्लास्टिक की थैली ले रखी थी, जिस में पेट्रोल भरी बोतल और उस की झांझर थी. उस ने लहंगा और चोली पहनी थी, जिस के नीचे लैगिंग और कुरता पहने थी. सुतकड़ी पहुंच कर गीता ने फोन कर के भरत को बुला लिया. थोड़ी ही देर में भरत आ गया तो दोनों ने मिल कर हरजी की लाश को लहंगाचोली और झांझर पहना दी, जिस से लोग यह समझें कि यह लाश गीता की है.

हरजी जो शर्ट पहने था, वह फटी थी, इसलिए उसे वैसे ही छोड़ दिया. फिर हरजी की लाश पर पेट्रोल डाला और आग लगा कर दोनों भाग गए. पेट्रोल कम होने की वजह से लाश ठीक से जल नहीं सकी. नवजीवन का सपना ले कर भरत और गीता जखोत्रा से करीब 165 किलोमीटर दूर जा कर कणोदर के एक होटल में ठहरे. होटल में दोनों ने रात भर मौजमस्ती की और फिर पालनपुर होते हुए राजस्थान के जोधपुर जाने का निश्चय किया. इस के पीछे कारण यह था कि जोधपुर में गुजराती कम रहते हैं, इसलिए वहां पहचाने जाने का डर कम था.

दूसरी ओर गीता के जाने के बाद उस का 3 साल का बेटा जाग कर रोने लगा. उतनी रात को अन्य कोई तो नहीं जागा, पर बच्चे की दादी जाग गई. बच्चे को गोद में ले कर उस ने चुप कराया और गीता को खोजने लगी. जब गीता नहीं मिली तो उस ने फेमिली के अन्य लोगों को जगा कर बताया कि गीता घर में नहीं है. उतनी रात को गीता घर से गायब है, यह जान कर सभी को हैरानी हुई. गीता का पति तो उस की खोज में निकल ही पड़ा, फेमिली वालों के अलावा अगलबगल वाले भी उस की मदद के लिए साथ आ गए थे. अंधेरा होने की वजह से टौर्च का सहारा लिया गया.

सभी लोग गीता की तलाश करतेकरते सुतकड़ी पहुंचे तो किसी को लगा कि थोड़ी दूर पर कोई सो रहा है. उस ने यह बात अन्य लोगों को बताई तो किसी ने कहा कि इतनी रात को यहां कौन सो रहा है? तभी किसी ने कहा कि चल कर देखते हैं. नजदीक पहुंच कर सभी ने जो देखा, उस से सभी के होश उड़ गए. वहां एक अधजली लाश पड़ी थी. कपड़ों से लगा कि यह तो गीता है. पैरों में झांझर भी गीता की थी.

सभी के मन में एक ही सवाल उठा कि गीता यहां कैसे पहुंची? उसे क्या हुआ होगा? गीता ने आत्मदाह किया है या फिर उसे किसी ने जलाया है? इन सभी सवालों के जवाब किसी के पास नहीं थे. पत्नी की लाश देख कर उस का पति जोरजोर से रोने लगा. साथ आए लोगों ने उसे सांत्वना दी और लाश उठा कर घर ले आए. घर आने के बाद एक ओर पुलिस को सूचना देने की बात चल रही थी तो दूसरी ओर उस का अंतिम संस्कार करने की तैयारी चल रही थी. हैरानी के बीच सवेरा हुआ.

घर वालों ने सुबह अंतिम संस्कार के लिए गीता की लाश के कपड़े बदलने शुरू किए तो लाश देख कर सभी को हैरान रह गए. अंधेरे में जिसे वे गीता की लाश समझ कर घर ले आए थे, उसे दाढ़ी थी. जब उसे ठीक से देखा गया तो पता चला कि वह लाश गीता की नहीं, बल्कि किसी मर्द की थी. तब सभी हैरान रह गए थे कि अगर यह लाश गीता की नहीं है तो फिर किस की है. जबकि लाश पर कपड़े और झांझर गीता के ही थे. वे लाश के पास कैसे आए? इस से भी ज्यादा हैरान करने वाली बात यह थी कि गीता कहां है? धीरेधीरे यह बात पूरे गांव में फैल गई. लोगों की समझ में नहीं आ रहा था कि यह क्या हो रहा है?

इस के बाद पुलिस को सूचना दी गई. महिला के कपड़े पहने किसी पुरुष की अधजली लाश की सूचना मिलने के बाद थाना सांतलपुर पुलिस के अलावा एलसीबी (लोकल क्राइम ब्रांच) और एसपी वी.के. नायी तुरंत घटनास्थल पर पहुंच गए. दुर्घटना की धाराओं के अंतर्गत मुकदमा दर्ज कर पुलिस ने जांच शुरू कर दी. खोजी कुत्ता, एफएसएल की टीम और क्राइम इनवेस्टीगेशन टीम को भी सूचना दी गई तो ये लोग भी घटनास्थल पर आ पहुंचे. सभी साक्ष्य जुटाने में लग गए. लाश को कब्जे में ले कर पोस्टमार्टम के लिए भिजवा दिया गया.

पुलिस ने गीता के घर वालों और गांव वालों से पूछताछ शुरू की. इस पूछताछ से एक बात तो साफ हो गई कि पुरुष की लाश पर जो लहंगाचोली थी, वह गीता की ही थी. इसी के साथ पुलिस को गांव वालों से यह भी पता चला कि गीता के साथ उस के पड़ोस में रहने वाला 25 साल का भरत अहीर भी गायब है. इतनी जानकारी मिलने के बाद पुलिस ने अपनी तरह से जांच शुरू की. अपने मुखबिरों को भी लगा दिया. इस के साथ टेक्नोलौजी की भी मदद ली. लाश की शिनाख्त के लिए उस के फोटो जिले के सभी थानों को भेजने के साथ सोशल मीडिया पर भी पोस्ट कर दिए गए.

जखोत्रा से लगभग 7 किलोमीटर दूर वौवा गांव के किसी आदमी ने सोशल मीडिया पर लाश का फोटो देखा तो उस ने पहचान लिया कि यह तो खेतों में मजदूरी करने वाला हरजी है. उस व्यक्ति ने यह बात गांव वालों को बताई. इस के बाद तो यह बात जखोत्रा से करीब 29 किलोमीटर दूर पीपराला गांव में रहने वाले हरजीभाई के फेमिली वालों तक पहुंच गई. हरजी का भाई अपने कुछ सगेसंबंधियों के साथ जखोत्रा पहुंचा.

पुलिस ने उस से पूछताछ की तो पता चला कि जिस की लाश मिली थी, उस का पूरा नाम हरजीभाई देवाभाई सोलंकी था. उस की उम्र 56 साल थी. उस की 3 बार शादी हुई थी. पर तीनों शादियां टिकी नहीं. इस के बाद हरजी इधरउधर भटकता रहता था. जहां कहीं खेतों में काम करने को मिलता था, वहीं मजदूरी कर लेता था. उस की किसी से दुश्मनी नहीं थी. अब सवाल यह था कि हरजीभाई को गीता के कपड़े पहना कर किस ने जलाया था. घटना को घटे अभी कुछ ही समय बीता था कि पुलिस ने अपना ध्यान गीता और भरत पर केंद्रित किया. पुलिस उन की तलाश कर रही थी, पर अभी यह तय नहीं था कि वही आरोपी हैं?

थाना सांतलपुर पुलिस के अलावा एलसीबी और लाश की शिनाख्त होने के बाद एससी/एसटी सेल के डिप्टी एसपी भी इस मामले की जांच में शामिल हो गए थे. लगभग 25 लोगों की टीम शक के आधार पर गीता और भरत को खोज रही थी. इसी दौरान पुलिस को मुखबिरों से एक सूचना मिली. उसी सूचना के आधार पर पुलिस पालनपुर रेलवे स्टेशन पर पहुंची, जहां गीता और भरत अहीर मिल गए. पुलिस दोनों को पकड़ कर थाना सांतलपुर ले आई. भरत ने राजस्थान के जोधपुर जाने के लिए 2 टिकट खरीदे थे.

पुलिस ने दोनों से पूछताछ शुरू की. इस पूछताछ में उन्होंने अपना अपराध स्वीकार कर लिया था. इस के बाद पुलिस ने डमी के माध्यम से पूरी घटना को दोहराया. सारे साक्ष्य जुटा कर पुलिस ने दोनों को अदालत में पेश किया, जहां से उन्हें जेल भेज दिया गया है. Love Story

 

 

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