• UP News: उत्तर प्रदेश के जनपद मुरादाबाद के पाकबड़ा क्षेत्र में काजल के पड़ोस में मुसलिम युवक अरमान रहता था. दोनों एकदूसरे से बेइंतहा मोहब्बत करते थे. उन के बीच प्रेम तभी पनप गया था, जब वे किशोरावस्था की दहलीज पार कर चुके थे. पहले इस की भनक अरमान के फेमिली वालों को लगी. उन्होंने तुरंत समाज और परिवार की लोकलाज और मर्यादा को भांपते हुए अरमान को करिअर बनाने के लिए दुबई भेज दिया.

बीते दिनों सर्दियां शुरू होने से पहले अरमान करीब 4 साल बाद दुबई से अपने घर लौट आया था. उस के जेहन में काजल बसी हुई थी. उस का खूबसूरत मासूम चेहरा वह भुलाए नहीं भूल पाया था. उस ने किसी तरह से उस का नया मोबाइल नंबर पता कर लिया था.

रात का वक्त था. काजल की आंखों में नींद नहीं थी. मोबाइल फोन की स्क्रीन पर अंगुलियां सरका रही थी. कभी रील तो कभी ओटीटी और फिल्मों के शार्ट वीडियो देखने लगी थी. रात के 11 बज चुके थे. तभी स्क्रीन पर वाट्सऐप मैसेज चमकने लगा. लव के इमोजी के साथ लिखा था,’हाय! मुझे पहचाना?’

कुछ पल रुक कर उस ने जवाब टाइप कर दिया, ”नहीं! कौन हो?’’

अगला मैसेज था, ”अरे, मैं अरमान!’’

”कौन अरमान?’’

”वही तुम्हारा अरमान… अरमू.’’ इस मैसेज के पढऩे के बाद काजल की आंखों में अचानक चमक आ गई. उस ने तुरंत मैसेज आने वाले वाले नंबर पर वाट्सऐप कौल कर दिया.

उस के बाद दोनों के बीच बातचीत का सिलसिला जो शुरू हुआ, उन्हें पता ही नहीं चला कि कब रात के 12 बज गए.

दरअसल, दोनों पड़ोसी थे. वे सिर्फ पड़ोसी होने के नाते ही एकदूसरे को नहीं जानतेपहचानते थे, बल्कि उन के बीच प्रेम पनप चुका था. बीते 4 साल पहले अचानक अरमान दुबई चला गया था. उस के बाद काजल कालेज की पढ़ाई पूरी कर एक प्राइवेट स्कूल में टीचर की जौब करने लगी थी.

सालों बाद अरमान की आवाज सुन कर काजल के दिल की धड़कनें तेज हो गई थीं. मन में हलचल होने लगी थी. अगले रोज वे मिले, लेकिन फेमिली वालों से छिप कर.  उन्होंने तय किया कि उन्हें अपने फेमिली और मोहल्ले वालों की नजरों से बच कर रहना होगा. कारण वे अलगअलग धर्मों के थे. लोगों को बात का बतंगड़ बनाने में जरा भी वक्त नहीं लगेगा. वैसे भी समाज की नजरों में हिंदूमुसलिम के बीच भाईचारा बेकार की चीज बन गई है.

अरमान सालों बाद अपनी प्रेमिका काजल को पा कर खुश था. उसे इस बात की बेहद खुशी थी कि काजल उसे जरा भी नहीं भूल पाई थी. लंबे अरसे बाद भी उस का प्रेम जस का तस था. बल्कि उन के प्रेम में और भी गहराई आ गई थी. वे अब प्यारमोहब्बत की बातों के साथसाथ आगे की सुनहरी जिंदगी के सपने बुनने लगे थे. उन के बीच फोन पर बातें होने लगी थीं. बात 18-19 जनवरी, 2026 की रात की है. अरमान को काजल की याद सता रही थी. काजल का भी कुछ ऐसा ही हाल था, जबकि दोनों के बीच फोन पर काफी बातें हो चुकी थीं.

काजल रजाई में सोने की कोशिश कर रही थी, लेकिन नींद नहीं आ रही थी. इसी बीच कमरे का दरवाजा खुलने की आवाज सुनाई दी. उस ने रजाई में लेटेलेटे झांक कर देखा. अंधेरे में कुछ नहीं दिखाई दिया. फिर उस ने मोबाइल की रोशनी में देखा तो सामने अरमान खड़ा था. वह चौंक गई. अभी वह कुछ और सोच पाती, उसे अपने भाई  सतीश की आवाज सुनाई दी. वह चिल्ला रहा था, ”कौन!…कौन है..!’’

उस की आवाज सुन कर काजल अलर्ट हो गई. वह समझ गई कि अरमान को यहां आते हुए सतीश ने शायद देख लिया है. उस ने तुरंत अरमान को अपनी रजाई में छिपा दिया और कमरे से बाहर निकल गई. तब तक सतीश उस के पास पहुंच चुका था. बोला, ”अभीअभी मैं ने किसी को तुम्हारे कमरे में जाते हुए देखा है.’’

”नहींनहीं, मैं ने तो नहीं देखा! तुम्हें कोई धोखा हुआ है…कौन आएगा इतनी रात को?’’ काजल बोली, लेकिन उस की आवाज में लडख़ड़ाहट थी.

उस की बात का जवाब दिए बगैर सतीश सीधा उस के कमरे में जा घुसा. बत्ती जला दी. रजाई पर नजर जाते ही बोला, ”यहां कौन है?’’

”कोई तो नहीं?’’ काजल बोली.

”कोई कैसे नहीं है… वह देखो, रजाई उठी हुई नहीं दिख रही है तुम्हें?’’ सतीश बोला और तुरंत रजाई को खींच लिया. उस में दुबका अरमान हड़बड़ा कर बिस्तर से नीचे उतरने लगा. सतीश ने तुरंत उसे दबोच लिया और आवाज दी, ”राजाराम… राजाराम! जल्दी आना काजल के कमरे में…देखो, यहां क्या हो रहा है?’’

सतीश का भाई राजाराम पास के कमरे में ही था. वह अधकचरी नींद में उठा और भाग कर सतीश के पास पहुंच गया. वहां सतीश बड़ी मुश्किल से अरमान को दबोचे हुए था. वह निकलने की कोशिश कर रहा था. राजाराम ने उस के हाथपैर बांध दिए. उन्हें पहले से काजल और अरमान के प्रेम संबंध के बारे में भनक थी. लोगों से उन के बारे में कई शिकायतें मिल चुकी थीं. किंतु इस का तनिक भी अंदाजा नहीं था कि अरमान उस की बहन के कमरे में उस की रजाई में मिलेगा.

अरमान को वहां पा कर दोनों भाई जितने आक्रोशित थे, उतनी ही नाराजगी बहन काजल के प्रति भी थी. सतीश ने गुस्से में दोनों की पिटाई शुरू कर दी. राजाराम बोला, ”आज इन की खैर नहीं होने दूंगा. अभी रिंकू भैया को बुलाता हूं.’’

उन का बड़ा भाई रिंकू उस वक्त अपनी ससुराल अमरोहा देहात में था. वह अपने बच्चों और पत्नी के साथ वहीं रहता था. सतीश ने उसे फोन कर बुलाया. वह एक घंटे में ही कार से अपने घर पहुंच गया. उस समय रात का करीब एक बज चुका था. आते ही वह आगबबूला हो गया. गुस्से में चीखता हुआ बोला, ”खत्म कर दो साले को, न रहेगा बांस न बजेगी बांसुरी.’’

 

”भैया! ऐसा मत करना, मैं अरमान से प्यार करती हूं. उस के बिना जिंदा नहीं रह सकती.’’ हाथपैर बंधी काजल रोती हुई बोली.

”तू चुप रह कुतिया! सारी फसाद की जड़ तू ही है…तू जिंदा रहेगी, तब न उस से प्यार करेगी.’’ सतीश गुस्से में आंखें दिखाता हुआ बोला.

”मैं कई दिनों से इन पर नजर रखे हुए था. आज पकड़ में आया है…वह भी रंगेहाथों.’’

तीनों भाइयों की आंखों में अरमान और बहन काजल के प्रति अजीब तरह का गुस्सा था. रिंकू फावड़ा ले आया. तब तक सतीश और राजाराम मिल कर अरमान और काजल के हाथपांव को और मजबूती से बांध चुके थे, ताकि वे किसी भी तरह विरोध न कर सकें. तीनों ने मिल कर फावड़े से वार कर दोनों को मौत के घाट उतार दिया. उसी रात तीनों भाइयों ने मिल कर दोनों की लाशों को ठिकाने भी लगा दिया.

रोंगटे खड़ी करने वाली यह वारदात मुरादाबाद जिले के पाकबड़ा थाना क्षेत्र के गांव उमरी सब्जीपुर की थी, जहां सैनी परिवार के 3 भाइयों ने झूठी शान के नाम पर एक प्रेमी जोड़े की बेरहमी से हत्या इसलिए कर दी थी, क्योंकि प्रेमी मुसलिम समाज का था. अगले रोज 19 जनवरी, 2026 को उमरी सब्जीपुर के ही रहने वाले अरमान के पिता हनीफ को बेटे के घर नहीं होने की चिंता होने लगी. वह पाकबड़ा थाने में अरमान की गुमशुदगी की सूचना लिखवाने गए.

उन्होंंने एसएचओ योगेश कुमार को बताया कि उस का बेटा अरमान 18 जनवरी की शाम से ही घर पर नहीं है. रात को वह घर नहीं आया. उस का फोन भी बंद आ रहा है. जबकि अरमान के साथ ऐसा पहले कभी नहीं हुआ. इसी के साथ हनीफ ने पड़ोसी गनपत सैनी पर शक जाहिर करते हुए बताया कि उन का बेटा प्रेमप्रसंग के चलते लापता हो गया है. इस पर एसएचओ ने उलटे हनीफ से ही सवाल कर डाला कि कहीं उस का बेटा ही गनपत की बेटी को भगा कर तो नहीं ले गया? इस का पता लगाने के लिए गनपत की बेटी के बारे में पता करना होगा.

इसी के साथ एसएचओ कुमार ने हनीफ को जाने के लिए कहा और गनपत के बारे में पता लगाने के लिए एक सिपाही को गनपत सैनी के घर भेज दिया. उसी रोज पुलिस को पता चला कि गनपत सैनी की बेटी काजल सैनी भी 18 जनवरी की रात से ही लापता है. पाकबड़ा पुलिस हनीफ और गनपत की जानकारी के आधार पर मान चुकी थी कि अरमान और काजल आपसी प्रेम के चलते लापता हैं. यह कहना मुश्किल था कि काजल को अरमान भगा ले गया है या फिर दोनों अपनी मरजी से कहीं चले गए हैं.

हनीफ पुलिस के इस निर्णय से संतुष्ट नहीं था, क्योंकि पुलिस उस की सुनने के बजाय उसे ही दोषी ठहरा रही थी. यहां तक कि गनपत की बेटी को भगा कर ले जाने का आरोप भी लगा रही थी. जबकि हनीफ अपने बेटे को जबरन लापता किए जाने की आशंका से घिरा हुआ था. उसे कुछ लोगों ने पुलिस के उच्च अधिकारियों के पास जाने की सलाह दी. हनीफ ने ऐसा ही किया और 21 जनवरी, 2026 को मुरादाबाद जा कर एसएसपी सतपाल अंतिल से मिला. उन्हें भी पूरी बात बताई और बेटे की गुमशुदगी की सूचना दर्ज कराने का अनुरोध किया.

उस ने किसी अनहोनी की आशंका जताई और कहा कि 18 जनवरी की रात को गनपत के घर से काफी चीखनेचिल्लाने की आवाजें आ रही थीं. उस वक्त इस पर उस ने ध्यान नहीं दिया था. हनीफ की शिकायत और अरमान के साथ काजल के लापता होने के मामले पर सतपाल अंतिल ने गहराई से विचार किया. वह इस निर्णय पर पहुंचे कि काजल के फादर या कोई परिजन पुलिस के पास अरमान के खिलाफ शिकायत दर्ज करवाने क्यों नहीं पहुंचे, जबकि वह भी उसी दिन से लापता थी.

उन्होंने इस मामले को देखने के लिए सीओ (हाईवे) राजेश कुमार को आवश्यक निर्देश दिए. सीओ राजेश कुमार ने अपनी जांच की शुरुआत गांव उमरी सब्जीपुर पहुंच कर शुरू की. सब से पहले वह गनपत सैनी से मिले और सवाल किया, ”तुम्हारी बेटी पिछले 2 दिनों से लापता है, फिर भी तुम ने उस बारे में पुलिस से शिकायत क्यों नहीं की?’’ इस का सटीक जवाब उस के फेमिली वाले नहीं दे पाए.

सीओ साहब ने उन्हें अपने सभी बेटों के साथ थाने जा कर शिकायत दर्ज करवाने को कहा. पुलिस का दबाव मिलने पर गनपत अपने तीनों बेटों को ले कर थाने गया. वहां पुलिस उन सभी से सख्ती से पूछताछ करने लगी. इस पूछताछ में तीनों बेटे टूट गए और कुबूल कर लिया कि उन्होंने अरमान और काजल की हत्या कर दी है. दोनों को उन्होंने ही मारा है और दोनों की लाशें गांगन नदी के किनारे दफना दी हैं. भाइयों ने बताया कि दोनों लाशें वे बोरियों में भर कर गांव से 2 किलोमीटर दूर नीम करोली के मंदिर के पास ले कर चले गए. वहीं गांगन नदी के किनारे गड्ïढा खोद कर उन्हें दफना दिया.

यह जानकारी मिलने के बाद 21 जनवरी, 2026 की शाम को तीनों भाइयों की निशानदेही पर पुलिस टीम ने नीम करोली मंदिर के पीछे दफनाई गई अरमान और काजल की लाशें बरामद कर लीं. मुसलिम युवक और हिंदु युवती की लाश मिलने की सूचना से पूरे इलाके में सनसनी फैल गई. सांप्रदायिक तनाव बढऩे और अप्रिय घटना की आशंका को भांपते हुए जिला प्रशासन ने गांव में भारी तादाद में पुलिस फोर्स तैनात कर दी. खासकर उमरी सब्जीपुर गांव को पुलिस छावनी में बदल दिया गया था.

दोनों की लाशें देर रात तक बरामद कर ली गई थीं. युवक की पहचान 27 वर्षीय अरमान के रूप में और युवती की पहचान 18 वर्षीया काजल सैनी के रूप में हुई. उन की लाशों का पोस्टमार्टम अगले रोज 22 जनवरी को 3 डाक्टरों के पैनल द्वारा किया गया था. लाशों पर चोट और गहरे जख्म के निशान पाए गए. अरमान के शरीर पर 7 चोटों के निशान थे, जबकि काजल के शरीर पर 9 चोटों के निशान थे. गनपत सैनी की छोटी बेटी काजल की प्रेम कहानी तब शुरू हो गई थी, जब वह 12वीं कक्षा में पढ़ती थी. उस के बाद उस ने गांव के ही एक प्राइवेट स्कूल में टीचर की नौकरी कर ली थी. काजल सुंदर थी.

एक दिन उस की मुलाकात पड़ोसी अरमान से हुई. तब वह उस की कदकाठी और स्टाइल पर फिदा हो गई. इस से पहले उस ने अरमान को कभी इस नजरिए से नहीं देखा था. जैसे ही काजल से अरमान की नजदीकियां बढ़ीं, अरमान भी उसे हसरत भरी नजरों से देखने लगा. जल्द उन के बीच अंकुरित हो रहे प्रेम की जानकारी दोनों के फेमिली वालों को भी हो गई. उन्हें जरा भी अच्छा नहीं लगा कि दोनों के बीच प्रेम संबंध कायम हो. इसे देखते हुए अरमान के अब्बू ने उसे दुबई भेज दिया. वहां अरमान टाइल्स लगाने का काम करने लगा, किंतु हर साल ईद के मौके पर घर आ जाता था. इस कारण उस का काजल से भी मिलनाजुलना होता रहा.

यह कहें कि उन के बीच प्रेम की ताजगी बनी रही. बीते साल 2025 में अरमान हमेशा के लिए दुबई से मुरादाबाद आ गया और यहीं टाइल्स का काम करने लगा. काजल का फोन नंबर चेंज हो चुका था. किसी तरह से उस ने काजल का नया फोन नंबर हासिल कर लिया. उस के बाद दोनों के बीच बातें होने लगीं. उस के बाद जो हुआ, वह उन के प्रेम संबंध के अंत की कहानी लिख गई.

इस मामले में बीएनएस की धारा 103 (1), 238 के तहत राजाराम, सतीश, रिंकू को आरोपी बनाया गया. उन से विस्तार से पूछताछ करने के बाद उन्हें कोर्ट में पेश कर मुरादाबाद जेल भेज दिया गया. UP News

 

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