UP News: चांदनी वास्तव में इतनी खूबसूरत थी कि गोरखपुर का विश्वकर्मा चौहान उस पर मर मिटा था. जबकि वह एक बेटी का बाप था. पत्नी ममता उस पर जान छिड़कती थी, लेकिन प्रेमिका चांदनी के प्यार में विश्वकर्मा एक दिन ऐसा जघन्य अपराध कर बैठा कि न वह घर का रहा और न घाट का.
विश्वकर्मा ने प्रेमिका चांदनी से मिल कर पत्नी ममता के साथ हुए विवाद के बारे में सारी बातें बताईं और उसे रास्ते से हटाने के बारे में सुझाव भी मांगा तो उस ने बड़ी खूबसूरती के साथ अपना पल्ला झाड़ते हुए कहा, ”जो भी करना है, आप को करना है. मुझे तो आप के पहलू में सिर रख कर सोना है बस.’’
उधर बेटी की परवरिश के लिए ममता पति विश्वकर्मा से अपने हक के लिए दबाव बनाए हुए थी. पत्नी के दबाव से वह परेशान हो गया था. इसी बीच उस ने अपने हिस्से की गांव वाली जमीन पापा से अपने नाम रजिस्ट्री करा कर वह 35 लाख रुपए में बेच दी. जब ममता को जानकारी हुई कि पति ने गांव वाली अपने हिस्से की जमीन 35 लाख रुपए में बेच दी है तो वह उन रुपयों में से आधा हिस्सा मांगने लगी. पति ने फिर वही रटारटाया जवाब दिया कि चाहे जो कुछ भी हो जाए, उसे एक फूटी कौड़ी नहीं देगा. इस के बाद पति और पत्नी के बीच विवाद और गहराता चला गया.
ममता और विश्वकर्मा के बीच विवाद इस कदर बढ़ता चला गया कि विश्वकर्मा को ममता के नाम से ही नफरत हो गई थी और उस के खून से अपने हाथ रंगने के लिए तैयार हो गया था. उस दिन के बाद से वह पत्नी की हर गतिविधि पर नजर रखने लगा. वह उस की रेकी करने लगा था. यह घटना से करीब एक महीने पहले की बात थी. ममता अपनी बेटी को साथ ले कर शाहपुर थानाक्षेत्र के गीता वाटिका मोहल्ले में किराए के कमरे में रहती थी. यहीं रह कर वह प्राइवेट जौब कर अपनी और बेटी की परवरिश करती थी. विश्वकर्मा ने पता लगा लिया था कि वह बेटी के साथ कहां रहती है.
बात 4 सितंबर, 2025 की है. शाम साढ़े 7 बजे ममता बेटी को साथ ले कर घरेलू सामान की खरीदारी और फोटो खिंचवाने के लिए बाजार गई थी. पत्नी को घर से बाहर निकलते देख पहले से घात लगाए बैठा विश्वकर्मा अलर्ट हो गया और उस के पीछे लग गया. जहांजहां वह जाती, विश्वकर्मा उस के पीछे था. इस बात से अंजान ममता अपनी धुन में खोई बेटी के साथ बाजार की ओर बढ़ती रही. उसे इस बात का कतई अंदेशा नहीं था कि पति उस का पीछा कर रहा है.
ममता बेटी को ले कर गीता वाटिका के आसपास की दुकानों से सामान खरीद कर जेल रोड के सामने स्थित राधिका स्टूडियो में दाखिल हुई तो स्टूडियो से थोड़ी पहले विश्वकर्मा अपनी बाइक खड़ी कर के उस के वहां से आने का इंतजार करने लगा. करीब 20 मिनट बाद ममता बेटी के साथ फोटो खिंचवा कर स्टूडियो से बाहर निकली तो उसे देखते ही विश्वकर्मा का जबड़ा गुस्से से भिंच गया.
ममता स्टूडियो से जैसे ही थोड़ी आगे बढ़ी, तभी विश्वकर्मा उस के सामने आ खड़ा हुआ. पति को सामने देख कर ममता सहम गई और वहीं खड़ी हो गई. बेटी भी पापा को देख कर सकते में आ गई. अभी वह कुछ कह या समझ पाती, तब तक उस ने हेलमेट में छिपा कर रखा तमंचा निकाला और एक गोली पत्नी ममता के सीने में और दूसरी गोली बाएं कंधे पर चला दी.
गोली लगते ही ममता लहराते हुए जमीन पर गिर पड़ी और तड़पने लगी. यह देख कर बेटी अपनी जान बचा कर वहीं आसपास छिप गई. विश्वकर्मा घुटने जमीन पर टिका कर नीचे बैठ कर तड़प रही पत्नी को गौर से देखने लगा और होंठों में बुदबुदाया, ”कहा था मैं ने कि मुझ से पंगा मत ले, मत ले, लेकिन तू नहीं मानी. तूने मेरी बात मान ली होती और आराम से तलाक दे दिया होता तो तू ऐसे सड़क पर नहीं पड़ी होती, जिंदा रहती. अपनी बेटी के साथ जीती, लेकिन अपनी अकड़ के आगे तूने झुकना नहीं सीखा तो मैं कहां तुझे बख्शने वाला था. हरामजादी कहीं की…’’
इधर गोली चलने की आवाज सुनते ही व्यापारी अपनी दुकानों के शटर धड़ाधड़ गिराने लगे. कुछ ही देर में वहां सन्नाटा पसर गया. इसी बीच भीड़ में से किसी ने घटना की सूचना गोरखपुर के शाहपुर थाने के इंसपेक्टर नीरज राय को दे दी. घटना की सूचना मिलते ही इंसपेक्टर राय फोर्स के साथ मौके पर पहुंच गए. पुलिस ने देखा तमंचा हाथ में लिए हत्यारा विश्वकर्मा चौहान वहीं बैठा है. फिर क्या था, पुलिस ने उसे तमंचे सहित गिरफ्तार कर लिया.
आननफानन में घायल ममता को जीप में लाद कर जेल रोड स्थित विनायक नर्सिंगहोम ले जाया गया, जहां डौक्टरों ने जांच के बाद उसे मृत घोषित कर दिया.
मम्मी की मौत की सूचना मिलते ही मासूम बेटी लडख़ड़ा कर फर्श पर जा गिरी. वह यह समझ नहीं पा रही थी कि उस के साथ ये क्या हो रहा है. ऐसा कौन सा गुनाह किया था, जो उसे इतनी बड़ी सजा दी है. सिर से मम्मी का साया छिन गया तो वह अब किस के सहारे जीएगी? वीरान सी जिंदगी अकेले कैसे जीएगी? पुलिस ने ममता के शव को कब्जे में ले कर पोस्टमार्टम के लिए गुलरिहा स्थित बाबा राघवदास मैडिकल कालेज भिजवा दिया. पुलिस ने ममता के मोबाइल फोन से उस के बड़े भाई संदीप चौहान, जो लुधियाना में परिवार सहित रहता था, को सूचना देते हुए मौके पर आने के लिए कहा.
बहन की हत्या की सूचना मिलते ही वह उसी रात प्राइवेट वाहन से लुधियाना से गोरखपुर के लिए रवाना हो गया था. अगले दिन यानी 5 सितंबर, 2025 को संदीप चौहान परिवार सहित गोरखपुर पहुंचा और शाहपुर थाने आया तो वहां मामा संदीप को देखते ही उस की भांजी उस से लिपट कर फफकफफक कर रोने लगी. भांजी को रोता देख कर संदीप भावुक हो उठा. सुरक्षा के लिहाज से पुलिस ने बीती रात से ही मृतका की बेटी को अपनी सुरक्षा में ले रखा था, ताकि उसे कोई नुकसान न पहुंचा सके. क्योंकि इस घटना की वही एकमात्र चश्मदीद गवाह थी.
पोस्टमार्टम के बाद में पुलिस ने ममता चौहान की लाश उस के भाई संदीप को सौंप दी थी. जहां उन्होंने राजघाट श्मशान में अंतिम संस्कार कराया और उसे साथ ले कर अपने गांव खजनी के पुरैना कटया चला गया. आरोपी विश्वकर्मा चौहान से की गई पूछताछ में कहानी कुछ ऐसे सामने आई—
36 वर्षीया ममता चौहान 3 भाइयों संदीप चौहान, सनी चौहान और सुभाष चौहान के बाद जन्मी थी. घर में वह सब से छोटी थी और सब की लाडली भी थी. सब से बड़े भाई संदीप से उस की काफी निभती थी. ममता पिता के समान बड़े भाई को सम्मान देती थी.
मन जैसा नहीं था पति
ममता नाम के अनुरूप ही थी. उस की वाणी से रस टपकता था. लोग उस की प्रशंसा किए बिना रहते नहीं थे, लेकिन जिद्ïदी तो इतनी थी कि एक बार किसी काम के लिए अपनी जिद पर अड़ जाती तो उसे पूरा किए बिना पीछे हटती नहीं थी. घर ही नहीं आसपास के सभी लोग उस के इस व्यवहार से वाकिफ थे. धीरेधीरे बचपन की गलियों को पीछे छोड़ उस ने जवानी की दहलीज पर पांव रखा तो फेमिली वालों को उस की शादी की चिंता सताने लगी थी. फेमिली वालों ने उस की शादी के लिए नातेरिश्तेदारों से अच्छे लड़के की तलाश करने के लिए कह रखा था.
जल्द ही फेमिली वालों की मनोकामना पूरी भी हो गई और ममता के लिए जैसा वर चाहते थे, उन्हें हरसेवकपुरम के रहने वाले विश्वकर्मा चौहान के रूप में मिल गया था. फिर जल्द ही उन की शादी हो गई. कसरती और गठीले बदन वाला विश्वकर्मा चौहान देखने में मेहनतकश तो लगता था, लेकिन वह वैसा था नहीं. ममता ने सपनों के जिस राजकुमार की कल्पना की थी, वह वैसा निकला नहीं. पति का चरित्र रसिक और आपराधिक था, क्योंकि अपने हार्डकोर क्रिमिनल भतीजे की संगत में रह कर वह भी छोटेमोटे अपराध करने लगा था.
जब तक ममता पति की पूरी सच्चाई जानती, तब तक बहुत देर हो चुकी थी, क्योंकि तब तक वह एक बेटी की मां बन चुकी थी. धीरेधीरे बेटी बड़ी हो रही थी. पिता की आपराधिक छाया बेटी पर न पड़ेे, इसलिए वह पति को आपराधिक छवि से दूर होने के लिए समझाती रही. एक दिन ममता ने पति को समझाते हुए कहा, ”ऐ जी, तुम यह काम छोड़ क्यों नहीं देते? देखो, अब तुम्हारा परिवार है. एक बेटी भी हो चुकी है. धीरेधीरे बड़ी होगी और जब मुझ से पापा के काम के बारे में पूछेगी तो मैं उसे क्या जवाब दूंगी. क्या कहूंगी उसे कि तेरे पापा अच्छा काम नहीं करते, वह बुरे इंसान हैं तो उस के बालमन को कितना गहरा आघात पहुंचेगा. इस बारे में कभी सोचा है?’’
”यार, तुम कितना बकबक करती हो. सोने भी नहीं देती, जा चुपचाप सो जा. रात काफी गहरी हो चुकी है. इस बारे में हम सबेरे बात करते हैं. मुझे जोर की नींद आ रही है.’’ पत्नी के सवालों को सुन कर विश्वकर्मा बात इधरउधर टालमटोल कर सोने का बहाना बनाने लगा था.
”एक नहीं सुनूंगी मैं आज तुम्हारी. क्यों न पूरी रात यंू ही आंखों में कट जाए, लेकिन अपने सवालों के जबाव सुने बगैर न खुद सोऊंगी और न ही सोने दूंगी. बताइए, ये गंदा काम छोड़ कर क्यों नहीं कोई दूसरा काम करते हैं, जिस में 2 पैसों की आमदनी हो और सम्मान से जीए भी.’’
”मेरे को गुस्सा मत दिला ममता. सोने दे. कहा न, इस बारे में कल सबेरे बात करते हैं. फिर सुनती क्यों नहीं?’’ उस ने पत्नी को डांटा.
”मेरे सवालों का जबाव दे दो, चुप हो जाऊंगी. तुम्हारा कल का सवेरा कभी आता ही नहीं. सवेरा हुआ नहीं कि तैयार हो कर बाहर निकल जाओगे और फिर रात में ही घर वापस लौटोगे. तो बताओ, मैं कब तुम से बात करूं?’’
”जिसे तुम गंदा काम कहती हो, वह मेरा प्रोफेशन है, अपने प्रोफेशन से अलग रह कर जिंदा नहीं रह सकता मैं. मेरे से पहले मुझे कोई टपका दिया तो करती रह जाना शृंगार. बेवा की जिंदगी ही नसीब होगी, इसलिए तुम भी सो जाओ और मुझे भी सोने दो. बेटी सो रही है, जग जाएगी. मेरे को भी पता है कि बेटी बड़ी होगी और मेरे पेशे के बारे में जानेगी तो उसे दुख होगा. तब की तब देखी जाएगी. तब के लिए रात क्यों खराब करती हो?’’ कहते हुए विश्वकर्मा खर्राटे भरने लगा और ममता उसे देखती रह गई.
सुबह होते ही फ्रैश हो कर विश्वकर्मा नाश्ता कर के बाहर निकल गया. रात का ममता का गुस्सा अभी ठंडा नहीं हुआ था. नाश्ता बना कर पति को दे तो दिया था, लेकिन गुस्से से उस का नथुना अभी भी फूल और पिचक रहा था.
सौतन लाने की थी तैयारी
विश्वकर्मा के दिन का आधा समय सोशल मीडिया (फेसबुक) देखने में बीत जाता था. यही नहीं, फेसबुक पर लड़कियों से घंटों चैटिंग करता रहता था. यह देख कर ममता जलभुन जाती थी. चैटिंग करता था सो अलग की बात थी, कई लड़कियों से उस के अफेयर चल रहे थे, जिन में चांदनी नाम की एक युवती को तो पत्नी की सौतन बनाने की तैयारी में जुटा हुआ था. पति की करतूतों से ममता के सपने आहत हो चुके थे. जो सपने आंखों में सजाए पीहर से ससुराल आई थी, सासससुर और जेठ सब के सब मम्मीपापा और भाई जैसे ही मिले, लेकिन जिस के साथ जीवन बिताना था, वही छलिया निकला. अब बेटी ही उस के जीने का एकमात्र सहारा बची थी.
जब से पति कि चरित्र की कलई उस के सामने खुली थी, तब से उस का मन पति के प्रति घृणा से भर गया था. नफरत हो गई थी उस की सूरत से. धीरेधीरे दोनों के बीच मनभेद ने अपना स्थान बनाना शुरू कर दिया था. ममता और विश्वकर्मा एक छत के नीचे रहते तो जरूर थे, लेकिन उन में अजनबियों जैसा व्यवहार था. उन के बीच में बातचीत कम होती थी, वाट्सऐप से बातें होती थीं. किसी चीज की जरूरत होती थी तो ममता उसे वाट्सऐप पर मैसेज भेज देती थी. विश्वकर्मा उसे पकड़ कर उस की जरूरतें पूरी कर देता था.
पत्नी करने लगी थी नफरत
पत्नी की नफरत भरी हरकतों से विश्वकर्मा का भी मन उस के प्रति नफरतों से भरता जा रहा था. इस का नतीजा यह हुआ कि पत्नी से दूरियां बना गर्लफ्रेंड चांदनी को घर की जीनत बनाने के ख्वाब देखने लगा. कल तक जो पति छिपछिप कर अपनी महिला दोस्तों से फेसबुक पर चैटिंग करता था, वह अब पत्नी के सामने उन से रोमांटिक बातें करता था. यह देख कर ममता जलभुन जाती थी. धीरेधीरे बेटी 10 साल की हो गई थी. मम्मी और पापा के बीच की दूरियों को समझ रही थी. उन के खटास रिश्तों को अपने प्यार की मिठास से सुंदर बनाने की अथाह कोशिश करती रही, लेकिन उस का यह प्रयास नाकाम साबित हुआ था.
दिन पर दिन पतिपत्नी के रिश्तों में खाई और गहराती जा रही थी. यह देख और सोच कर बेटी का हृदय आत्मग्लानि से भरा जा रहा था कि मेरा क्या कुसूर था, जो मम्मी और पापा के झगड़े के बीच वह पिस रही है. ममता के कंधे पर बेटी की जिम्मेदारी का बोझ आ गया था. पति इधरउधर से जो भी कमाता था, अपनी अय्याशी पर उड़ा देता था. बेटी से भी उस ने एक तरह से मुंह मोड़ लिया था. जबकि बेटी सयानी होती जा रही थी. उस का भविष्य दोनों की लड़ाईझगड़े के बीच पिसता जा रहा था. पति ने जब अपना हाथ खींच लिया तो ममता बेटी के जीवन संवारने के लिए प्राइवेट नौकरी करने लगी.
ममता के घर से बाहर नौकरी करने पर विश्वकर्मा को आपत्ति थी. पति के इस रवैए से नाखुश ममता बेटी को साथ ले कर मायके खजनी चली गई. वहां कुछ दिनों तक रही और बड़े भाई संदीप से अपना दुखड़ा रोती रही. भाई भी बहनोई के चरित्र से परेशान हो चुका था. वह भी नहीं समझ पा रहा था कि दोनों के रिश्ते को कैसे सही करूं. दोनों को समझासमझा कर थक चुका था, लेकिन इस का नतीजा सिफर ही निकला.
पत्नी ममता के मायके में रहने से विश्वकर्मा चौहान स्वच्छंद जीवन जी रहा था. उस के जीवन में कई लड़कियों ने अपना बसेरा डाल रखा था. समयसमय पर वह सभी के साथ फ्लर्ट करता था. उन लड़कियों में एक लड़की सब से अलग मिजाज की थी, जिस का नाम था चांदनी. बिलकुल चांदनी के माफिक उजली गोरीचिट्टी, मानो खुद चांदनी धरा पर अपनी छटा बिखेर रही हो. उस से टूट कर प्यार करता था विश्वकर्मा. वह भी उसे दिल की गहराइयों तक प्यार करती थी. उस के प्यार में अंधी थी वह.
विश्वकर्मा के जीवन में चांदनी के आने के बाद उस के जीने का तौरतरीका ही बदल गया था. पत्नी ममता तो उसे फूटी आंख नहीं भा रही थी. वह चाहता था कि पत्नी से जितनी जल्दी हो सके, उतनी जल्दी आजादी मिल जाए तो चांदनी के साथ शादी कर के आगे का जीवन मजे से जीए. लेकिन ममता एक पढ़ीलिखी, मेहनतकश और मजबूत इरादों वाली महिला थी. इतनी आसानी से वह पति को आजादी देने वाली नहीं थी. कसम खा ली थी कि शरीर के चाहे टुकड़ेटुकड़े हो जाएं, पति को आजादी नहीं दूंगी.
पति के चालचलन से खीझ कर ही वह बेटी को साथ ले कर मायके चली गई थी. पत्नी के मायके जाने से विश्वकर्मा चौहान की जिंदगी में जैसे बहार आ गई थी. पत्नी के इस फैसले से वह बेहद खुश था, जैसे उस की मुराद पूरी हो गई थी. विश्वकर्मा चौहान का मकान पूरी तरह से खाली था. मम्मीपापा गांव में रहते थे. एक भाई था, वह भी अपने परिवार के साथ अलग रहता था. पत्नी के मायके जाने के बाद उसे रोकनेटोकने वाला कोई नहीं था.
पत्नी के जाने के बाद अपनी प्रेमिका चांदनी को वह अपने घर ले आया था. एक मेहमान की तरह उस ने उस की खूब आवभगत की. बढ़चढ़ कर उस की खातिरदारी की. अपनी शानदार आवभगत से चांदनी बहुत खुश हुई. अपनी भावनाओं को वह रोक नहीं पा रही थी. आखिरकार उस ने कह ही दिया, ”बहुत खुश हूं मैं आप की मेहमाननवाजी से. मेरा दिल भर गया. नहीं जानती थी कि आप मुझे से इतना प्यार करते हो. मेरे लिए आप के दिल में इतना सम्मान है, चाहत है, बेपनाह इश्क है.’’
”सो तो है,’’ विश्वकर्मा अपना अपना दायां हाथ बाएं सीने से सटा कर अदब से झुक कर बोला था, ”मैं चीज ही ऐसा हूं जनाबेआली. मेरी अनोखी खातिरदारी से अच्छेअच्छे लोग पिघल जाते हैं. फिर आप फिसली तो क्या फिसली.’’
”अच्छा!’’ चांदनी चहक कर बोली, ”जनाब को खुद के आदरसत्कार पर बड़ा नाज है, लगता है.’’
”जी, मोहतरमा. कोई शक.’’
”नहीं,’’ कह कर दोनों ने एकदूसरे को प्यारभरी नजरों से देखते हुए ठहाके लगाए.
हालांकि इस से पहले भी विश्वकर्मा चांदनी को अपने घर पर कई बार ले कर आ चुका था, मगर दोनों को जितना आनंद आज के दिन आया था, उतना आनंद इस से पहले कभी नहीं आया था.
खैर, ठहाका लगातेलगाते वह चांदनी के बगल में बैठ गया तो वह भी गंभीर हो
बिखरे आंचल को सहेजने लगी और सहज हो गई.
पलभर के लिए कमरे में गहरा सन्नाटा पसर गया था. दोनों के दिलों की धड़कनें तेज हो गई थीं. प्रेम अग्नि में उन के तनबदन तपने लगे थे. एक अजीब सी ठंडीठंडी सुरहुरी चांदनी के बदन में उठ रही थी. उस का रोमरोम खिल उठा था. विश्वकर्मा धीरेधीरे बेकाबू हो रहा था. चांदनी भी उस की तपिश में पिघलती जा रही थी. इश्क की आग में दोनों बराबर जल रहे थे. विश्वकर्मा के छूते ही वह छुइमुई की तरह सिकुड़ती जा रही थी. उस के पूरे बदन में झुरझुरी पैदा हो गई थी. सांसें धौंकनी की तरह तेजतेज चलने लगी थी. वह बेकाबू होती जा रही थी, फिर भी खुद पर नियंत्रण रखे हुई थी. वह आहिस्ता से बोली, ”बस, मुझे और बेकाबू मत कीजिए, वरना जूठी हो जाऊंगी.’’
प्यार में हुआ अंधा
”रोको मत, मुझे. हो जाने दो बेकाबू मुझे. आज पूरी तरह समा जाना चाहता हूं मैं.’’ विश्वकर्मा मद्धिम स्वर में बोला.
”नही…नहीं.’’ चांदनी कसमसा उठी, ”अभी नहीं. आप जब पूरी तरीके से मुझे पूरा अधिकार देंगे, तभी मैं सौंपूंगी खुद को आप के हवाले.’’
”कैसी बातें करती हो मेरी जान. तुम तो मेरी हो और मैं तुम्हारा हूं. क्या मुझ पर और मेरे प्यार पर तुम्हें भरोसा नहीं है.’’
”पूरा भरोसा है, यकीन भी है, लेकिन…’’
”लेकिन क्या?’’
”अब और सहन किया नहीं जा रहा है, मुझ से. समा जाने दो मुझे तुम में.’’
”नहीं…नहीं…अभी नहीं. शादी से पहले नहीं.’’
”जिद मत करो, चांदनी. तुम्हारी दूरी तनिक भी बरदाश्त नहीं हो रही है. 2 जिस्म एक जान हो जाने दो हमें. अपने प्यार की एक नर्ह कहानी अपने जिस्म पर लिख लेने दो हमें.’’ वासना की आग में जलता हुआ विश्वकर्मा बोले जा रहा था. जबकि प्रेमिका चांदनी लगातार उस से दूरियां बनाए हुए थी.
”देखिए, इस वक्त आप पूरी तरह बहक रहे हैं. ऐसे में कोई ऊंचनीच हो जाएगी तो समाज हम पर थूकेगा. कहीं मुंह दिखाने लायक नहीं रहूंगी मैं. सो प्लीज, मेरी बात मान जाइए और दूर हो जाइए.’’
प्रेमिका की बात सुन कर विश्वकर्मा के सिर से रोमांस का भूत उतर गया और वह बुरी तरह झल्ला उठा. वह बोला, ”अच्छेखासे मूड का तुम ने कचरा बना दिया.’’
”मैं ने क्या किया, जो आप इतना बिदक रहे हो.’’ चांदनी के चेहरे पर एक कुटिल मुसकान थिरक रही थी, ”मैं ने थोड़ा सा सामाजिक आइना ही तो दिखाया आप को. यही कहा न कि अभी नहीं. जो करना है शादी के बाद करना है तो भला इस में क्या गलत कहा. इतने ही उतावले हो रहे हो मेरे जिस्म को पाने के लिए तो क्यों नहीं अपनी बीवी को तलाक दे रहे हो.’’ चांदनी के स्वर में अजीब सी तल्खी थी, जैसे सीधे छुरी उस के सीने में उतार दिया हो.
”क्या बेवकूफों की तरह बकवास करती हो तुम?’’
”आ…ह…हा… अब मेरी बात बेवकूफों की तरह लगने लगी.’’
”हां, तो…’’
”तो क्या? कुछ भी गलत तो नहीं कहा मैं ने. अपनी बीवी को तलाक दे दीजिए, मुझ से शादी कीजिए और मेरी जवानी के मजे लीजिए.’’
”तलाक…तलाक…तलाक… क्यों मेरे दिमाग का दही बना रही है. दे दूंगा, उसे तलाक भी दे दूंगा, पर आज का दिन तो मत खराब कर मेरी जान. मजे तो लूट लेने दे, क्यों तड़पा रही हो, क्यों सता रही हो अपने दीवाने को. बेचारा मुफ्त में मर जाएगा तेरी इस नानुकुर में.’’
”अपने राजा को ऐसे थोड़े ही न मरने दूंगी मैं,’’ शरारत भरे अंदाज में चांदनी बोली, ”अभी तो मेरे राजा को जन्नत की सैर करानी बाकी है.’’
”देख चांदनी, तू मेरे को ऐसे मत सता, मेरा मूड खराब हुआ तो…’’
”तो…तो…क्या करोगे जानू.’’ चांदनी ने प्रेमी को जलाने के लिए उसे छेड़ा, ”जान से मार देंगे?’’
”अरे नहीं, यही तो नहीं कर सकता मैं. ऐसा करने से पहले मैं मर जाऊंगा. तू तो मेरी जान है. मेरे रगों में बहने वाला खून है. भला तुम्हें क्यों मारूंगा. अब तो कुछ न कुछ जल्द सोचना ही पड़ेगा.’’
”किस बारे में?’’
”तुम्हारे बारे में.’’
”मतलब?’’
”मतलब, तुम से दूर रह कर तो जी नहीं सकता और तू करीब आने नहीं देगी तो मुझे पत्नी के तलाक के बारे में सोचना ही पड़ेगा. जितनी जल्द उसे तलाक दूंगा, तभी तो तुम्हें अपने घर की जीनत बना सकंूगा.’’
”अब की है मुद्ïदे की बात. बीवी को तलाक दे दीजिए, ये जीनत उसी दिन आप की हो जाएगी.’’
”ठीक है, मैं ममता को तलाक देने के लिए किसी अच्छे वकील से मिल कर आगे की प्रोसेस करता हूं.’’
”ठीक है, चलती हूं मैं, बहुत देर हो चुकी है मेरे को आए, बाय…बाय…’’ कह कर चांदनी अपने घर के लिए रवाना हो गई तो विश्वकर्मा भी उसे बाय बाय बोल कर बाहर तक छोड़ कर आया और थोड़ा नाश्ता कर के फिर सो गया.
चांदनी से बात कर के विश्वकर्मा की खुशी का ठिकाना नहीं था तो चांदनी भी कुछ कम खुश नहीं थी. प्रेमी के साथ बिताए पल को सोचसोच कर उस का रोमरोम खिल उठा था और यही सोच रही थी कि काश! उस खूबसूरत पल को कैद कर लेती तो कितना अच्छा होता. कब मेरा प्यार, दुल्हनिया बना कर मुझे अपने घर ले जाएगा, वह पल कब आएगा.
तलाक को उकसाया
उस दिन के बाद से चांदनी दिन भर में विश्वकर्मा को 2-3 बार फोन कर के पत्नी को तलाक देने के लिए उकसा दिया करती थी. प्रेमिका का फोन आते ही वह विचलित हो जाता था. और उसे भरोसा दिलाता था कि जल्द से जल्द ममता को तलाक दे देगा और उसे अपनी दुल्हन बना कर ले आएगा. इस बारे में वकील से बात कर ली है. थोड़ा वक्त उसे और दे दे. विश्वकर्मा चांदनी को आश्वासन दे चुका था कि पत्नी ममता को जल्द ही तलाक दे देगा, लेकिन वह जानता था उसे तलाक दे पाना इतना आसान नहीं था, क्योंकि वह खुद ही इतनी आसानी से उसे आजाद नहीं कर रही थी.
विश्वकर्मा का एक भतीजा बदमाश था. लूट, हत्या, छिनैती, हत्या के प्रयास जैसे तमाम संगीन जुर्मों में वांछित चल रहा था. वह पुलिस एनकाउंटर में मार गिराया गया था. भतीजे की धमक से विश्वकर्मा बेहद प्रभावित था. वह भी उसी ढर्रे पर चल निकला था. काफी सारे दुश्मन उस ने अपने आस्तीन में पाल लिए थे. अपनी सुरक्षा के मकसद से वह अपने पास एक अवैध तमंचा रखता था. चांदनी के प्यार में विश्वकर्मा इस कदर अंधा हो चुका था कि उसे पत्नी ममता और बेटी की सूरत दिखाई नहीं दे रही थी, उसे तो बस कपड़े की तरह औरतें बदलने की आदत बन चुकी थी.
फ्लर्ट तो वह कई लड़कियों के साथ करता था, लेकिन चांदनी उसे इस कदर भा गई थी कि उसे पत्नी बनाने के लिए ठान लिया था, इसीलिए वह पत्नी को तलाक दे देना चाहता था. उस ने तलाक की अरजी न्यायालय में दाखिल भी कर दी थी. इस के बाद वह ममता से कोर्ट में गवाही देने के लिए दबाव बनाने लगा था, ताकि दोनों अपनी जिंदगी अपने तरीके से खुल कर जी सकें. पति विश्वकर्मा से ममता ने साफ शब्दों में कह दिया था कि न वह उसे तलाक देगी और न ही मनमानी करने देगी. भले ही जान ही क्यों न चली जाए.
आखिर एक बेटी है, जो सयानी हो रही है, उसे पढ़ाना है, उस का जीवन संवारना है. यदि पति गांव में स्थित अपने हिस्से वाला पूरा खेत मेरे नाम कर दे तो सोचूंगी.
पति कर बैठा क्राइम
विश्वकर्मा जानता था कि ममता उसे आसानी से तलाक नहीं देने वाली है. यानी घी सीधी अंगुली से निकलने वाला नहीं है. फिर तो अंगुली टेढ़ी करनी ही पड़ेगी. उस ने तय कर लिया कि यदि ममता मेरी आजादी की राह में रोड़ा बन रही है तो इसे मौत के घाट उतारना ही पड़ेगा. ममता ने भी अदालत में खर्चे का दावा ठोक दिया था. पति की अय्याशी का जवाब देने के लिए सोशल मीडिया पर रोमांटिक रील बनाबना कर पोस्ट करने लगी थी. ममता का यह रुख देख कर वह और बौखला गया था, लेकिन खिसियानी बिल्ली की तरह सिर्फ खंभा नोच कर रह गया था. इधर ममता मायके से वापस लौट कर शाहपुर थानाक्षेत्र के गीता वाटिका मोहल्ले में एक किराए का कमरा ले कर बेटी के साथ रह रही थी. वहीं रह कर वह नौकरी पर जाती थी.
इधर विश्वकर्मा यह पता लगा रहा था कि ममता ने अपना नया ठिकाना कहां बनाया है. आखिरकार उस ने पता लगा ही लिया था कि वह गीता वाटिका कालोनी में किराए का कमरा ले कर रहती है. पते की बात तो यह थी कि जिस दिन से ममता ने बेटी को अपने साथ ले कर पति का घर छोड़ा था, उस के लिए दूसरी औरत को ले आने का रास्ता खुल गया था. दूसरी औरत यानी प्रेमिका चांदनी को घर ला कर उस के साथ रंगरेलियां मनाता था. वह अपने आशिक विश्वकर्मा पर पत्नी ममता से तलाक लेने के लिए बराबर दबाव बना रही थी.
विश्वकर्मा ममता के उस फैसले से और खार खाए हुए था, जिस में उस ने भरणपोषण के लिए अदालत में याचिका दायर की थी. और वह उसे अपने हिस्से में से एक फूटी कौड़ी देने के लिए तैयार नहीं था. और फिर 4 सितंबर, 2025 की रात जेल रोड के सामने उस की गोली मार कर हत्या कर दी. कथा लिखे जाने तक आरोपी विश्वकर्मा चौहान जेल की सलाखों के पीछे था. पत्नी की हत्या का उसे जरा भी मलाल नहीं था. इस बात की उसे खुशी थी कि अब उसे पैसे नहीं देने पड़ेंगे, लेकिन उस ने तनिक भी नहीं सोचा कि मासूम बेटी का क्या होगा? वह किस के सहारे जीएगी? उस का सहारा कौन बनेगा?
हैवानियत की पराकाष्ठा पर उतर आए विश्वकर्मा ने तनिक भी सोचा होता कि वह जो कर रहा है, गलत कर रहा है तो शायद उस की खुशहाल गृहस्थी बची रहती और बेटी अपने पेरेंट्स के प्यार से महरूम नहीं होती. UP News
(कथा में चांदनी परिवर्तित नाम है)






