Love stories : कजरारी आंखों और प्यार से भरी पूनम की कहानी

Love stories : पूनम ने बहुत सोचसमझ कर पति के रूप में राजेश का चयन किया था, लेकिन उस के मातापिता ने इसे इज्जत का सवाल बना लिया. जब पूनम राजेश के साथ भाग गई तो पुलिस ने राजेश को गिरफ्तार कर के पूनम को बरामद कर लिया, लेकिन इस के बाद…   

पूनम की झील जैसी गहरी, कजरारी आंखों में गजब की कशिश थी. गोल चेहरा, गुलाबी होंठ और भरे हुए गालों वाली पूनम ने जब उम्र के 18 साल पार किए तो वह गांव के युवकों की नजरों में चुभने लगी थी. जब पूनम स्कूल जाने के लिए या किसी काम से घर से बाहर निकलती, तो गांव लड़के उसे छेड़ने लगते. उन की यही छेड़छाड़ पूनम को जवान और खूबसूरत होने का अहसास कराती थी. पूनम के पिता गिरजाशंकर कन्नौज जिले में पड़ने वाले थाना गुरसहायगंज के गांव ताखेपुरवा के रहने वाले थे. उन के परिवार में पत्नी कमला के अलावा 2 बेटियां थीं सुधा और पूनम उर्फ मोनी. साथ ही एक बेटा भी अजय.

गिरजाशंकर के पास 5 बीघा उपजाऊ जमीन थी, जिस में अच्छी पैदावार होती थी. कृषि की आय से ही वह परिवार का पालनपोषण करता था. कुल मिला कर गिरजाशंकर का खातापीता परिवार था. बहुत सुखी नहीं तो गांव के हिसाब से उस के घर में किसी चीज की कमी नहीं थी. भाईबहनों में पूनम सब से छोटी थी. उस की बड़ी बहन सुधा की शादी फर्रुखाबाद शहर के रहने वाले आलू व्यवसाई रामकुमार के साथ हुई थी. वह अपनी ससुराल में सुखी थी. पूनम पढ़ने में तेज थी, उस ने गांव के माध्यमिक विद्यालय से प्रथम श्रेणी में हाईस्कूल पास किया था. आगे की पढ़ाई के लिए उस ने गुरसहायगंज के सरस्वती देवी इंटर कालेज में 11वीं में प्रवेश ले लिया था. पढ़ाई के साथ पूनम घरेलू कामों में मां का हाथ भी बंटाती थी.

आहिस्ताआहिस्ता जवानी के शिखर की ओर कदम बढ़ा रही पूनम के मातापिता गिरजाशंकर और कमला को उस की शादी की चिंता सताने लगी थी. वे लोग बेटी की शादी किसी खातेपीते, संस्कारवान परिवार में करना चाहते थे ताकि उस का भविष्य उज्ज्वल रहे पूनम के विवाह के लिए गिरजाशंकर सालों से पैसा जमा कर रहे थे. आजकल ज्यादातर मांबाप दहेज के नाम पर धनधान्य दे कर बेटियों का भविष्य बनाने की कोशिश करते हैं. गिरजाशंकर की सोच भी ऐसी ही थी. इस के लिए वह प्रयासरत भी थे. मांबाप जहां अपने हिसाब से पूनम के लिए सपने देख रहे थे, वहीं पूनम अपने हिसाब से भावी जीवनसाथी को ले कर सपने बुन रही थी. वह सोच रही थी कि उस का जीवनसाथी उसी की तरह पढ़ालिखा, सुंदर सलोना और मृदुभाषी हो.

वह इतना प्यार करने वाला हो कि जहां वह कदम रखे, उस का जीवनसाथी उस जगह अपनी हथेली पसार दे. टीवी, इंटरनेट और मोबाइल ने पूनम के सपनों को पंख लगा दिए थे. टीवी पर पूनम जब कभी दहेज प्रताड़ना की खबरें देखती तो उसे बड़ी कोफ्त होती. वह सोचती दुनिया में कैसेकैसे लोग हैं जो चंद रुपयों के लिए अपनी जीवनसंगिनी को मंझधार में छोड़ देते हैं. दहेज के लोभी लोगों से पूनम नफरत करती थी. घरवर की तलाश पूनम को पता था कि उस के मांबाप उस के भावी जीवनसाथी के लिए पैसों के मामले में किसी भी हद तक जा सकते हैं. वे लोग हर हाल में उस के सुखद भविष्य के लिए वह सब भी करेंगे, जो उन की हैसियत के बाहर होगा.

लेकिन पूनम किसी दहेज लोलुप से शादी नहीं करना चाहती थी. वह नहीं चाहती थी कि उस के पिता कर्ज में डूबें, किसी साहूकार के सामने हाथ फैलाएं. समय अपनी निर्बाध गति से दौड़ता रहा. गिरजाशंकर ने पूनम के लिए अच्छे घरवर की मुहिम सी छेड़ दी. उस ने अपने नातेरिश्तेदारों को भी पूनम के लिए अच्छा घरवर बताने के लिए कह दिया. 19वां बसंत पार करने के बाद पूनम का रूप और भी निखर गया था. गिरजाशंकर और कमला यही सोचते थे कि कोई अच्छा लड़का मिल जाए तो पूनम की शादी जल्दी कर दें. पूनम को नापसंद किए जाने की रत्ती भर भी गुंजाइश नहीं थी.

कई लड़के और उन के परिवार पूनम को  देखने के लिए गिरजाशंकर के घर आए. उन लोगों ने पूनम को पसंद भी किया, लेकिन पूनम ने रिश्ता ठुकरा दिया. कारण पूनम को जो लोग देखने आए थे, सब दहेज के लालची थे. कोई लाखों का कैश मांग रहा था तो कोई कार की डिमांड कर रहा था. पूनम को दहेज लोभियों से नफरत थी, सो उस ने शादी से इनकार कर दिया. पूनम ने शादी से इनकार जरूर कर दिया था, लेकिन वह शादी के प्रति सजग भी थी और गंभीर भी. उसे मोबाइल पर इंटरनेट चलाने का बड़ा शौक था. फुरसत में वह सोशल साइट फेसबुक पर नएनए फ्रेंड बनाती और उन से चैटिंग करती. जो युवक उसे मन भाता, उस का मोबाइल नंबर ले कर वह उसे अपना नंबर दे देती थी. वह ऐसे दोस्तों से बात भी करती थी. अगर किसी युवक से बतियाना अच्छा लगता तो वह उस का फोन रिसीव करती, अन्यथा डिसकनेक्ट कर देती.

चैटिंग सर्फिंग के दौरान फेसबुक पर पूनम का परिचय राजेश कुमार यादव से हुआ. पूनम ने उस की प्रोफाइल देखी तो पता चला, उस की उम्र 27 साल है और वह फिरोजाबाद के जसराना थाना क्षेत्र के गांव हरदासपुर जमाली का रहने वाला है. उस के 2 अन्य भाई थे, जो किसान थे. जबकि वह बीए पास कर चुका था. राजेश कुमार यादव पढ़ालिखा भी था और दिखने में स्मार्ट भी. राजेश की हकीकत जान कर पूनम का रुझान उस की ओर हो गया. फेसबुक के माध्यम से पूनम राजेश के संपर्क में गई, दोनों चैटिंग करते थे. दोनों ने अपने मोबाइल नंबर भी एकदूसरे को दे दिए थे, जिस से उन के बीच अकसर बातें होने लगी थीं

बातों के दौरान पूनम राजेश के परिवार के बारे में अधिक से अधिक जानकारी जुटाने की कोशिश करती थी. कह सकते हैं कि पूनम राजेश से प्रभावित थी, इसीलिए उस के बारे में इतनी खोजबीन कर रही थी. एक दिन बातचीत के दौरान पूनम ने कहा, ‘‘राजेश, मैं ने तुम्हारे परिवार के बारे में बहुत कुछ पूछ और जान लिया लेकिन यह नहीं पूछा कि तुम करते क्या हो?’’

राजेश खिलखिला कर हंसते हुए बोला, ‘‘पूनम, मुझे झूठ बोलने की आदत नहीं है, इसलिए सच बताऊंगा. सच्चाई यह है कि मैं बेरोजगार नहीं हूं. सर्विस करता हूं और नोएडा में रहता हूं.’’

पूनम मन ही मन खुश हुई और बोली, ‘‘राजेश, मुझे यह जान कर बेहद खुशी हुई कि तुम बेरोजगार नहीं हो. सर्विस करते हो और अपने परिवार पर बोझ नहीं हो.’’

अब तक दोनों की दोस्ती गहरा गई थी. पूनम को लगा कि राजेश ही उस के सपनों का राजकुमार है, इसलिए उस का मन राजेश को देखने, उस से मिलने और आमनेसामने बैठ कर बातें करने का होने लगाइसीलिए एक रोज उस ने बातोंबातों में राजेश को अपने गांव के निकटवर्ती कस्बे गुरसहायगंज आने को कह दिया. दिन, तारीख समय भी उसी दिन निश्चित हो गया. गुरसहायगंज में मिलने में इसलिए कोई परेशानी नहीं थी, क्योंकि पूनम वहां पढ़ने जाती थी. पूनम के इस बुलावे को राजेश ने सहर्ष स्वीकार कर लिया. निश्चित दिन राजेश तय समय पर गुरसहायगंज पहुंच गया. मोबाइल के माध्यम से दोनों एकदूसरे के संपर्क में थे. पूनम उस से बस स्टौप से लगभग एक किलोमीटर दूर रामजानकी मंदिर के पास मिली. दोनों ने अपनी वेशभूषा एकदूसरे को बता दी थी, इसलिए एकदूसरे को पहचानने में परेशानी नहीं हुई.

प्यार के 2 कदम राजेश कुमार यादव का व्यक्तित्व आकर्षक था तो पूनम भी खूबसूरत और जवानी से भरपूर थी. राजेश से बातें करतेकरते पूनम सोचने लगी कि उस ने भावी पति के रूप में जैसे सुंदर और सजीले युवक के सपने संजोए थे, राजेश वैसा ही सुंदर, सजीला युवक है. अगर राजेश से उस की शादी हो जाए तो उस का जीवन सुखमय हो जाएगा. पूनम इसी सोच में डूबी थी कि राजेश बोला, ‘‘तुम इतनी सुंदर होगी, मैं सोच भी नहीं सकता था. जैसा तुम्हारा नाम है, वैसा ही रूप भी है. तुम वास्तव में पूनम का चांद हो. वैसे बुरा मानो तो एक बात बोलूं.’’

पूनम की धड़कनें तेज हो गईं. उस ने सोचा कहीं ऐसा तो नहीं कि जो वह सोच रही है, राजेश भी वही सोच रहा हो. मन की बात मन में छिपा कर वह बोली, ‘‘जो कहना चाहते हो, बेहिचक कहो.’’

‘‘तुम्हें देखते ही दिल में प्यार का अहसास जाग उठा है,’’ कहते हुए राजेश उस के हाथ पर हाथ रख कर बोला, ‘‘आई लव यू पूनम.’’

प्रेम निवेदन सुनते ही पूनम मानो आपे में नहीं रह पाई. उस ने अपना दूसरा हाथ उठा कर राजेश के हाथ पर रख कर कह दिया, ‘‘आई लव यू टू.’’

फलस्वरूप चंद मिनटों में दोनों की दोस्ती प्यार में बदल गई. इस के बाद पूनम घर वालों की आंख में धूल झोंक कर राजेश से मिलने लगी. राजेश घर वालों को बिना कुछ बताए पूनम के प्यार में बंध गया. जैसेजैसे समय बीतने लगा, दोनों का प्यार दिन दूना रात चौगुना बढ़ने लगा. पूनम कालेज जाने के बहाने घर से निकलती और राजेश को मिलने के लिए गुरसहायगंज बुला लेती. इस के लिए वह राजेश को फोन कर के मिलने का दिन, समय पहले ही तय कर लेती थी. गुरसहायगंज व्यापारिक कस्बा है, जहां दरजनों ऐसे लौज और होटल हैं, जहां आसानी से कमरा उपलब्ध हो जाता है. दोनों प्रेमी ऐसे ही लौज होटल में मिलते थे

राजेश कुमार यादव मूलरूप से फिरोजाबाद जिले के थाना जसराना के हरदासपुर जमाली गांव का रहने वाला था. उस के 2 भाई थे श्याम सिंह बद्रीप्रसाद यादव, जो गांव में किसानी करते थे. उन की आर्थिक स्थिति मजबूत थी. गांव में उन का पक्का दोमंजिला मकान था, जिस में हर सुविधा उपलब्ध थीदोनों भाई विवाहित थे और संयुक्त परिवार की तरह साथसाथ रहते थे. राजेश अभी कुंवारा था. बीए पास करने के बाद उस ने कंप्यूटर का प्रशिक्षण लिया था. इस के बाद वह नोएडा की एक कंपनी में काम करने लगा था. नौकरी के दौरान ही उस की दोस्ती पूनम से हो गई थी और वह उस से मिलने आने लगा था.

राजेश और पूनम एकदूसरे से बेइंतहा प्यार करने लगे. दोनों शादी करना चाहते थे. लेकिन दोनों शादी कर पाते, उस के पहले ही उन के प्यार का भांडा फूट गया. हुआ यह कि एक रोज पूनम ने राजेश को मिलने के लिए गुरसहायगंज बुलाया. जब दोनों रामजानकी मंदिर परिसर में आपस में बातें करते हुए हंसबोल रहे थे, गांव के एक युवक ने पूनम को देख लियाउस ने गांव लौट कर पूनम की मां कमला के कान भर दिए. सयानी बेटी का किसी अनजान युवक से हंसनाबतियाना कमला को नागवार लगा, वह तिलमिला उठी.

कुछ देर बाद पूनम घर वापस आई तो मां का चेहरा तमतमाया हुआ था. पहले तो वह सहम गई फिर सहजता से बोली, ‘‘मां, क्या बात है? तुम नाराज क्यों हो? क्या पिताजीने कुछ ऊटपटांग कह दिया?’’

कमला गुस्से से बोली, ‘‘बाप को बीच में क्यों लाती है, पहले तू यह बता कि कहां से रही है?’’

‘‘मां, मैं कालेज गई थी और वहीं से रही हूं. पर यह सब क्यों पूछ रही हो? क्या तुम्हें मुझ पर कोई शक है?’’

‘‘हां शक है, क्योंकि तू कालेज गई ही नहीं थी, बल्कि किसी से इश्क लड़ा रही थी. सचसच बता, कौन है वह, जिस ने तुझे भरमा लिया है?’’

‘‘मां, यह सब झूठ है, किसी ने तुम्हारे कान भर दिए हैं.’’ पूनम ने सफेद झूठ बोला.

‘‘बुलाऊं रामनरेश को, जिस ने तुम दोनों को रामजानकी मंदिर में इश्क लड़ाते देखा था.’’ कमला ने सच्चाई बता दी.

रामनरेश का नाम सुन कर पूनम चौंक पड़ी. वह जान गई कि उस के प्यार का भांडा फूट गया है. अब सच्चाई बताने में ही भलाई थी. अत: वह बोली, ‘‘मां, मैं राजेश से बतिया रही थी. मैं ने आप से झूठ बोला था कि कालेज गई थी. राजेश पढ़ालिखा स्मार्ट युवक है.’’

‘‘पहले तू यह बता कि राजेश है कौन? उस से तेरी दोस्ती कैसे हुई?’’ कमला ने पूछा.

पूनम बोली, ‘‘मां, राजेश नोएडा में रह कर नौकरी करता है. वह फिरोजाबाद का रहने वाला है. हमारी दोस्ती फेसबुक पर हुई थी. फिर मोबाइल फोन पर बातें करने लगे. इस के बाद वह मुझ से मिलने आने लगा. हम दोनों एकदूसरे से बेहद प्यार करते हैं और शादी करना चाहते हैं.’’

कमला गुस्से से बोली, ‘‘कुलच्छिनी, मुंहजली, तू इतनी बड़ी रासलीला रचाती रही और मुझे खबर तक नहीं लगी. मांबाप की नाक कटाते हुए तुझे शर्म नहीं आई. अगर हमें पता होता कि तू बड़ी हो कर हमारी छाती पर मूंग दलेगी तो जन्मते ही तेरा गला दबा देती. आज के बाद अगर तू राजेश से मिली या बात की तो मुझ से बुरा कोई नहीं होगा.’’

‘‘लेकिन मां, तुम मेरी बात तो सुन लो.’’

‘‘चुपऽऽ अब क्या रह गया है सुननेसुनाने को. हमारी इज्जत तो तूने मिट्टी में मिला दी.’’

कमला गुस्से में पैर पटकती हुई दूसरे कमरे में चली गई. पूनम कमरे में खड़ी आंसू बहाती रही. उस की समझ में नहीं रहा था कि अब क्या करे? एक तरफ मांबाप की इज्जत थी तो दूसरी ओर उस का प्यार. कमला ने पूनम की हरकतों की जानकारी पति को दी तो गिरजाशंकर को बहुत दुख हुआ. उसी पूनम ने पिता के विश्वास को तोड़ दिया था. गिरजाशंकर ने पूनम को प्यार से समझाया और अपने कदम वापस खींचने को कहा. पूनम ने भी पिता से वादा कर लिया कि अब वह राजेश से कभी नहीं मिलेगी. इस के बाद पूनम को कालेज जाना बंद करा दिया गया. कमला उस पर कड़ी नजर रखने लगी.

लेकिन पूनम अपने वादे पर कायम नहीं रह सकी. पूनम और राजेश एकदो माह तक एकदूसरे के लिए तड़पते रहे, फिर जब उन से नहीं रहा गया तो दोनों चोरीछिपे मिलने लगे. उन का मिलन महीने में बमुश्किल एक या 2 बार हो पाता था. बाकी दिनों में दोनों मोबाइल पर बात कर के दिल की लगी बुझाते थे. ऐसे ही एक रात पूनम राजेश से मोबाइल पर बतिया रही थी कि तभी कमला की आंख खुल गई. वह समझ गई कि पूनम राजेश से ही बात कर रही है. वह आहिस्ता से उठी और पूनम के हाथ से मोबाइल छीन कर दूर फेंक दिया, फिर उसे थप्पड़ घूंसों से पीटने लगी. पिटाई के दौरान कमला ने उसे खूब खरीखोटी सुनाई.

मां की पिटाई से पूनम तिलमिला उठी और बोली, ‘‘मां, तुम मुझे मारपीट कर जख्मी तो कर सकती हो, लेकिन मेरे प्यार को कम नहीं कर सकतीं. मैं राजेश से प्यार करती हूं और करती रहूंगी. शादी भी उसी से करूंगी.’’

बेटी की ढिठाई पर कमला को गुस्सा तो बहुत आया लेकिन किसी तरह गुस्से को काबू में कर के वह दूसरे कमरे में चली गई. अगले कई दिनों तक मांबेटी के बीच बात नहीं हुई. पूनम को अब सारा जहां वीराना लगने लगावह कोई काम करने बैठती तो राजेश का चेहरा सामने जाता. फिर वह उसी के बारे में सोचने लगती. मां ने उस का मोबाइल फोन भी छीन लिया था, जिस की वजह से अब वह राजेश से भी बात नहीं कर पाती थी. दूसरी ओर पूनम से संपर्क हो पाने के कारण राजेश की स्थिति भी पागलों जैसी हो गई थी. वह रातदिन पूनम से मिलने के उपाय सोचता रहता था, लेकिन मिल नहीं पाता था. फोन पर भी पूनम से संपर्क नहीं हो पा रहा था, जिस से उस की बेचैनी बढ़ती जा रही थी

कहते हैं, जहां चाह होती है वहां राह मिल ही जाती है. एक दिन राजेश मोटरसाइकिल से पूनम के गांव आया. उस ने पूनम के घर के चक्कर लगाए तो पूनम उसे दरवाजे पर दिख गई. उस ने इशारा कर पूनम को गांव के बाहर आने को कहा. पूनम ने हिम्मत जुटाई और बहाना कर के घर से निकल आई. गांव के बाहर सड़क पर राजेश उस के इंतजार में खड़ा था. पूनम के आते ही उस ने उसे मोटरसाइकिल पर बिठाया और सड़क किनारे बगीचे में पहुंच गया. वहां दोनों एक पेड़ की ओट में बैठ कर बतियाने लगे. राजेश बोला, ‘‘पूनम, अब मुझ से तुम्हारी जुदाई बरदाश्त नहीं होती. तुम नहीं मिली तो मैं जीवित नहीं रह पाऊंगा.’’

राजेश की बात सुन कर पूनम उस के सीने से लिपट गई. उस की आंखों से आंसू बहने लगे. कुछ देर में जब आंसुओं का सैलाब थमा तो पूनम बोली, ‘‘राजेश, तुम्हारी जुदाई मुझ से भी बरदाश्त नहीं होती, मैं भी तुम्हारे बिना नहीं जी पाऊंगी. तुम कुछ करो.’’

‘‘मेरा भी यही हाल है पूनम. घरसमाज के लोग हमें जीने नहीं देंगे. अब तो एक ही रास्ता बचा है.’’

‘‘वह क्या?’’ पूनम ने पूछा.

‘‘यही कि हम आत्महत्या कर लें और दुनिया को दिखा दें कि हम सच्चे प्रेमी थे. क्योंकि सच्चा प्यार करने वाले जान तो दे सकते हैं किंतु जुदाई बरदाश्त नहीं कर सकते.’’

‘‘क्या इस के अलावा और कोई रास्ता नहीं है?’’ पूनम ने पूछा.

‘‘एक रास्ता और भी है.’’ राजेश बोला.

‘‘क्या?’’

‘‘यही कि तुम मेरे साथ नोएडा भाग चलो. वहां हम दोनों मंदिर में शादी कर लेंगे. दोनों पतिपत्नी बन जाएंगे तो फिर हमारा कोई कुछ नहीं बिगाड़ पाएगा.’’

‘‘तुम ठीक कहते हो, मैं तुम्हारा साथ देने को तैयार हूं.’’ इस के बाद पूनम और राजेश ने साथ भागने की योजना बनाई. दोनों ने दिन तारीख भी तय कर ली. इस के बाद पूनम तैयारी में जुट गई. उस ने अपने मातापिता को आभास तक नहीं होने दिया कि वह उन की इज्जत को छुरा घोंपने जा रही है. उन्हीं दिनों एक रात जब कमला गहरी नींद में सो गई तो पूनम उठी, उस ने अपना जरूरी सामान बैग में रखा और दबेपांव घर के बाहर गई. गांव के बाहर सड़क किनारे राजेश मोटरसाइकिल लिए खड़ा था. पूनम के आते ही उस ने उसे मोटरसाइकिल पर बिठाया और वहां से निकल गया.

नोएडा में राजेश 12-22 चौड़ा मोड़ पर वेद मंदिर के पास किराए के मकान में रहता था. पूनम को वह अपने इसी मकान में ले गया. उस ने अपनी प्रेमकहानी अपनी भाभी सरिता को बताई और भैया के साथ शीघ्र आने का अनुरोध कियालेकिन उस का भाई श्याम सिंह यादव इतना नाराज हुआ कि उस ने आने से साफ इनकार कर दिया. इस के बाद राजेश ने मंदिर में पूनम की मांग में सिंदूर भर कर उस के साथ प्रेम विवाह कर लिया और दोनों पतिपत्नी की तरह रहने लगे. उधर सुबह को कमला सो कर उठी तो बगल की चारपाई पर पूनम को देख उस का माथा ठनका. उस ने घर के अंदर पूनम को ढूंढा, लेकिन जब वह कहीं नहीं दिखी तो वह दरवाजे पर पहुंची. दरवाजे की कुंडी खुली हुई थी

कमला ने झकझोर कर पति को जगाया और पूनम के लापता होने की बात बताई. सुन कर गिरजाशंकर घबरा गया. उस ने घरबाहर सब जगह पूनम की खोज की. पर जब वह नहीं मिली तो दोनों ने माथा पीट लिया. दोनों जान गए कि पूनम उन की इज्जत पर दाग लगा कर अपने प्रेमी राजेश के साथ भाग गई है. कमला और गिरजाशंकर कई दिनों तक पूनम के भागने वाली बात छिपाए रहे. लेकिन ऐसी बातें छिपती कहां हैं. इस बीच पूरा गांव जान गया कि पूनम किसी लड़के साथ भाग गई हैपूनम को ले कर गांव में तरहतरह की बातें होने लगी थीं. खासकर औरतें ज्यादा चटखारे ले कर बातें कर रही थीं. पूनम के इस कदम से गिरजाशंकर की इज्जत मिट्टी में मिल गई थी.

पूनम अपने साथ मोबाइल ले गई थी. उस का मोबाइल नंबर गिरजाशंकर के पास था. उस ने पूनम से बात करने की कोशिश की, लेकिन फोन बंद होने की वजह से बात नहीं हो पाई. इसी बीच कमला को पूनम की एक कौपी पर दर्ज राजेश के घर नोएडा का पता मिल गयाकमला ने पति पर दबाव बनाया कि वह थाने जा कर रिपोर्ट दर्ज कराए. पत्नी की बात मान कर गिरजाशंकर थाना गुरसहायगंज जा पहुंचा. थाने पर उस समय थानाप्रभारी राजबहादुर सिंह मौजूद थे. गिरजाशंकर ने उन्हें सारी बात बताई और रिपोर्ट दर्ज करने की गुहार लगाई.

थानाप्रभारी राजबहादुर सिंह ने गिरजाशंकर को विश्वास दिलाया कि वह उस की बेटी पूनम को बरामद करने का पूरा प्रयास करेंगे. इस के साथ ही उन्होंने गिरजाशंकर की तहरीर पर भादंवि की धारा 363, 366 के तहत राजेश कुमार यादव के विरुद्ध रिपोर्ट दर्ज कर ली. इस मामले की विवेचना चौकी इंचार्ज देवेंद्र कुमार को सौंपी गई. एसपी के आदेश पर गिरफ्तारी चौकी इंचार्ज देवेंद्र कुमार ने जांच शुरू की तो पता चला पूनम बालिग है और अपनी मरजी से अपने प्रेमी राजेश के साथ भागी है. उसे बलपूर्वक भगा कर नहीं ले जाया गया. यह पता चलने के बाद राजबहादुर सिंह ने जांच में कोई रुचि नहीं दिखाई

हालांकि वह दबिश का परचा काटते रहे. गिरजाशंकर जब भी बेटी के बारे में पूछने थानाचौकी जाता तो उसे आश्वासन मिलता कि उस की बेटी जल्द बरामदगी हो जाएगी. धीरेधीरे 3 महीने बीत गए. लेकिन पूनम की बरामदगी नहीं हो सकी. तब गिरजाशंकर अपनी फरियाद ले कर एसपी अमरेंद्र प्रसाद सिंह के औफिस पहुंचा. गिरजाशंकर ने उन्हें पूनम के बरामद होने की बात बताई, साथ ही पुलिस की भी शिकायत की. एसपी अमरेंद्र प्रसाद सिंह ने गिरजाशंकर की व्यथा को समझ कर आश्वासन दिया कि उस की बेटी जल्द ही मिल जाएगी.

अमरेंद्र प्रसाद सिंह ने पूनम के मामले को गंभीरता से लिया और थानाप्रभारी राजबहादुर सिंह को आदेश दिया कि वह पूनम को शीघ्र बरामद कर नामजद आरोपी को बंदी बना कर जेल भेजें. आदेश पाते ही थानाप्रभारी राजबहादुर सिंह ने राजेश के घर हरदासपुर जमाली गांव में छापा मारा, लेकिन राजेश पूनम वहां नहीं मिले. इस पर पुलिस ने उस के भाई श्याम सिंह और बद्रीप्रसाद को हिरासत में ले लिया और उन से राजेश पूनम के बारे में जानकारी जुटाई. श्याम सिंह यादव ने थानाप्रभारी राजबहादुर सिंह को बताया कि राजेश पूनम को ले कर नोएडा के सेक्टर 12-22 मोड़ के पास रह रहा है. पता चला है कि उन दोनों ने शादी कर ली है. यह पता लगते ही पुलिस नोएडा पहुंची और पूनम को राजेश के कमरे से बरामद कर लिया. राजेश को हिरासत में ले लिया गया. पुलिस दोनों को थाना गुरसहायगंज ले आई.

बेटी की बरामदगी की जानकारी कमला और गिरजाशंकर को मिली तो दोनों थाने पहुंच गए. वहां दोनों पूनम को मनाने में जुट गए. लेकिन पूनम ने मांबाप के साथ जाने से साफ मना कर दियाइस के बाद थानाप्रभारी राजबहादुर सिंह ने पूनम को महिला पुलिस संरक्षण में डाक्टरी परीक्षण हेतु जिला अस्पताल कन्नौज भेजा. डाक्टरी परीक्षण के बाद पुलिस ने सीआरपीसी की धारा 164 के तहत पूनम का बयान मजिस्ट्रैट के सामने दर्ज कराया. जीत गया प्यार अपने बयान में पूनम ने कहा कि वह राजेश से प्रेम करती है. उस के साथ उस ने मंदिर में विवाह भी कर लिया है. अब वह उस की पत्नी है. राजेश उसे भगा कर नहीं ले गया था. उस के मांबाप ने राजेश के विरुद्ध गलत रिपोर्ट दर्ज कराई है. वह मांबाप के घर नहीं जाना चाहती, बल्कि अपने पति राजेश के साथ रहना चाहती है

चूंकि पूनम ने राजेश के साथ जाने की इच्छा जाहिर की थी, इसलिए मजिस्ट्रैट ने पूनम को राजेश के साथ रहने की इजाजत दे दी. लेकिन राजेश पुलिस हिरासत में था. पुलिस ने पूनम के बयान के दूसरे दिन राजेश को कन्नौज कोर्ट में पेश किया. राजेश के भाई श्याम सिंह ने वकील के जरिए पहले ही कोर्ट में जमानती प्रार्थना पत्र दाखिल कर दिया था. चूंकि पूनम ने अपने बयान में राजेश को निर्दोष बताया था, इसी आधार पर उसे जमानत मिल गई. राजेश की जमानत के बाद थाना गुरसहायगंज में पंचायत हुई. पंचायत की अगुवाई थानाप्रभारी राजबहादुर सिंह ने की. इस पंचायत में पूनम के मातापिता को बुलवाया गया और खुशीखुशी बेटी की शादी कर उसे विदा करने का अनुरोध किया गया

थोड़ी नानुकुर के बाद पूनम के मातापिता राजी हो गए. इस के बाद थाने में धूमधाम से पूनम और राजेश की शादी हो गई. वरवधू को थानाप्रभारी राजबहादुर सिंह के अलावा राजेश के भाई श्याम सिंह, उन की पत्नी सरिता तथा अन्य लोगों ने आशीर्वाद दिया. देर से ही सही, पूनम और राजेश के प्यार की अच्छी परिणति हुई. पूनम अब राजेश के साथ सुखमय जीवन बिता रही है.

   —कथा पुलिस सूत्रों पर आधारित

Love story : लव इज ब्यूटीफुल

Love story : अद्वित ऐसा हैंडसम युवक था, जिस पर कालेज की तमाम लड़कियां फिदा थीं, लेकिन वह उन सभी को केवल फ्रेंड ही मानता था. फिर एक दिन कालेज की ही शरमीले स्वभाव की सिंगर नैंसी की शालीनता का उस पर ऐसा असर हुआ कि वह उस का दीवाना हो गया. एकदूसरे को करीब से जानने के बाद उन दोनों के मुंह से यही निकला कि लव इज ब्यूटीफुल.

स्वभाव से शरमीली नैंसी को किसी से भी ज्यादा बातचीत करना पसंद नहीं था. पर आम आदमी जिस माहौल में रहता है, उसी तरह रहना उसे अच्छा लगता है. नैंसी के घर का माहौल भी कुछ ऐसा ही था. उस के घर में बाहर के लोगों से बातचीत करने की छूट नहीं थी. खासकर लड़कों से बात करना उस की फेमिली को बिलकुल पसंद नहीं था. नैंसी को सादी सिंपल रहना पसंद था. वह कपड़े भी उसी तरह पहनती थी. वैसे तो उस की तमाम फ्रेंड थीं, पर बेस्ट फ्रेंड कहा जा सके, इस तरह की कोई नहीं थी. 

नैंसी कालेज पहुंच चुकी थी और उस दिन कालेज में उस का पहला दिन था, इसलिए पलक उसे बुलाने आई थी. पलक स्कूल से ही उस के साथ पढ़ रही थी. उन की 2 सहेलियां रास्ते में उन का इंतजार कर रही थीं. इस तरह चारों सहेलियां कालेज पहुंच गईं. गेट के अंदर एंटर करते ही नैंसी की नजर कालेज के ग्राउंड की ओर चली गई. पूरा ग्राउंड लड़केलड़कियों से भरा था. नैंसी ने इस तरह का दृश्य पहली बार देखा था, क्योंकि इस से पहले उस ने केवल लड़कियों के साथ ही पढ़ाई की थी. अब उसे लड़कों के साथ भी पढऩा पड़ेगा, यह सोच कर वह काफी नरवस हो गई थी. 

उसे नरवस देख कर पलक ने उस का हाथ पकड़ कर आगे की ओर खींचा. इस के बाद इशारा कर के अपनी सहेलियों से कहा, ”यार, जरा सामने तो देखो, उस लड़के के आसपास कितनी भीड़ है. आखिर यह कौन है?’’

सब के साथ नैंसी भी उसी ओर देखने लगी. उस की नजर उस लड़के पर जम कर रह गई. उस की सहेली कुमुद ने कहा, ”यार, लड़का कितना क्यूट है.’’

हां, है तो यार बहुत क्यूट,”माधवी ने कहा, ”मैं इसे जानती हूं. इस का नाम अद्वित है. यह मेरे घर के सामने ही रहता है. मेरे भाई का फ्रेंड है. यह अपने कालेज का हीरो है. न जाने कितनी लड़कियां इस पर फिदा हैं.’’

वाह भई, तेरे तो घर के सामने ही रहता है,’’ पलक ने कहा, ”भई, तेरी तो हायहैलो में बात बन सकती है.’’

मेरा ऐसा नसीब कहां. उस की तो पहले से ही सेटिंग है सेकेंड ईयर की काव्या के साथ.’’ माधवी ने आह भरते हुए कहा.

माधवी की बात पूरी होते ही कुमुद बोली, ”यह कह कर यार तूने तो मूड ही खराब कर दिया.’’

चलो, आज कालेज का पहला दिन है. हमें लेट नहीं होना चाहिए.’’ नैंसी बोली.

इस के बाद सभी क्लास की ओर चल पड़ीं. क्लास में नए लोग, नए चेहरे देख कर नैंसी थोड़ा बेचैन थी तो थोड़ा एक्साइटेड भी. इस तरह वह कालेज का पहला दिन एंजौय कर रही थी. जल्दी ही कालेज में भी नैंसी की कुछ फ्रेंड बन गई थीं. पर नैंसी की अभी भी किसी लड़के से बातचीत नहीं होती थी. अपने काम से काम रखने वाली नैंसी को कभीकभी अद्वित का चेहरा जरूर याद आ जाता था, लेकिन उस ने तय कर रखा था कि वह किसी लड़के से दोस्ती नहीं करेगी. 

अपने विचारों को इसी तरह इग्नोर करते हुए नैंसी ने कालेज के 6 महीने निकाल दिए. 6 महीने पर कालेज में मिड फंक्शन होता था, जिसे ले कर कालेज के छात्र और छात्राएं बहुत उत्साहित थे. उस दिन नैंसी अपनी सहेलियों के कालेज पहुंची तो लेक्चर शुरू हो चुका था. पलक ने कहा, ”यार, आज तो लेक्चर शुरू हो चुका है. जेडी सर का लेक्चर है. अगर क्लास में गई तो वह भरी क्लास में बेइज्जत कर देंगे.’’

बेइज्जत होने से अच्छा है चलो आज लेक्चर छोड़ देते हैं.’’ कुमुद ने कहा.

भई, मैं तो लेक्चर नहीं छोड़ सकती. मेरा भाई यहीं कहीं घूम रहा होगा. देख लिया तो बहुत नाराज होगा.’’ माधवी ने कहा.

तो तुम दोनों जाओ. मैं और नैंसी तो मिड फंक्शन के रिहर्सल में जा रही हैं.’’ नैंसी का हाथ पकड़ कर कुमुद ने कहा, ”चल नैंसी, मुझे क्लास नहीं लेना.’’

मैं भी तुम लोगों के साथ चल रही हूं.’’ पलक ने कहा.

पलक, तू तो मेरे साथ क्लास लेने चलेगी, क्योंकि तेरी वजह से ही हम लेट हुए हैं.’’ माधवी ने कहा.

माधवी पलक को ले कर क्लास में चली गई तो कुमुद और नैंसी रिहर्सल हाल की ओर बढ़ गईं. नैंसी ने कुमुद के साथ जैसे ही रिहर्सल हाल में कदम रखा, कोई नैंसी से इतने जोर से टकराया कि अगर टकराने वाले ने उसे पकड़ न लिया होता तो हंड्रेड परसेंट वह गिर जाती. डर के मारे उस ने आंखें बंद कर ली थीं. उस ने आंखें खोलीं तो देखा, दोनों हाथों से अद्वित उसे पकड़े हुए था. अद्वित ने कहा, ”सौरी, मैं थोड़ा जल्दी में था.’’

अद्वित तो उसे संभाल कर चला गया, पर नैंसी की समझ में नहीं आया था कि आखिर हुआ क्या था. थोड़ी देर वह पूरे घटनाक्रम को समझने की कोशिश करती रही. तभी कुमुद ने उसे झकझोर कर कहा, ”यार, तेरे बजाय वह मुझ से टकराया होता और मुझे पकड़ कर गिरने न देता. कैसा फिल्मी सीन था.’’

नैंसी मन ही मन खुश थी. पर कुमुद को दिखाने के लिए उस ने अपनी मुखमुद्रा गंभीर बना कर कहा, ”कैसा फिल्मी सीन, कितने जोर से लगा, तुझे कुछ पता भी है. चलो अंदर चलते हैं, नहीं तो फिर कोई टकरा जाएगा.’’

हाल में डांस की प्रैक्टिस चल रही थी. वहां की स्थिति देख कर नैंसी और कुमुद खुश हो गईं. कुमुद ने तो नैंसी से डांस में भाग लेने के लिए भी कहा, पर शरमीली स्वभाव की होने की वजह से नैंसी ने साफ मना कर दिया. तभी उस की नजर अद्वित पर पड़ी, जो सभी को डांस सिखा रहा था. उस के साथ एक लड़की भी थी, जो डांस स्टेप कर रही थी. नैंसी को लगा, यही काव्या है. 

बड़ी तन्मयता से वह अद्वित और काव्या को देख रही थी. तभी उस का ध्यान भंग करते हुए कुमुद ने कहा, ”नैंसी, तुझे नहीं जाना तो कोई बात नहीं. तू मेरा बैग संभाल, मैं मैडम से बात कर के आती हूं.’’

कुमुद का बैग थामते हुए नैंसी ने कहा, ”ठीक है, तुम जाओ.’’

नैंसी अद्वित के ऊपर से नजरें हटा कर दूसरे रिहर्सल देखने लगी. पर उस की नजरें बारबार अद्वित की ओर ही घूम जाती थीं. कुमुद वापस आई तो उसे गौर से देखते हुए नैंसी ने कहा, ”क्या हुआ? मुंह क्यों लटका कर आ रही है?’’

मैम ने मना कर दिया. उन्होंने कहा कि अब तो औडिशन हो चुके हैं.’’

तो फिर..?’’

तो फिर क्या. चलो, अब चलते हैं.’’ कुमुद ने कहा.

नैंसी और कुमुद बाहर जाने के लिए जैसे ही गेट पर पहुंचीं, सामने आ कर अद्वित खड़ा हो गया, ”वेट… वेट… दरअसल डांस के लिए हमें एक मेंबर की जरूरत है. मैं ने मैम से बात की तो उन्होंने कहा कि आप लोग डांस के लिए पूछ रही थीं. सो यू कैन जौइन अस.’’

एक्साइटेड हो कर कुमुद ने कहा, ”या… या…औफकोर्स, चल नैंसी.’’

मैं चल कर क्या करूंगी. तू जा कर रिहर्सल कर. मैं कैंटीन में जा कर बैठती हूं.’’ नैंसी ने कहा.

इट्स ओके. आप यहां भी बैठ सकती हैं.’’ अद्वित ने शिष्टता से कहा. 

कुमुद ने नैंसी का हाथ पकड़ा और वहां पड़ी कुरसियों में से एक पर बैठा दिया. वह जाने लगी तो नैंसी ने कहा, ”यार, मैं यहां बैठ कर क्या करूंगी.’’

कुमुद ने अपना मुंह उस के कान के पास ले जा कर कहा, ”थोड़ी देर बैठ न यार यहां. तू रहेगी तो अकेलापन नहीं महसूस होगा. अभी चलते हैं थोड़ी देर में.’’

ठीक है, बैठती हूं थोड़ी देर.’’

नैंसी बैठ कर रिहर्सल देखने लगी. पर उस की नजरें तो अद्वित पर ही जमी थीं. नैंसी रोजाना कुमुद के साथ रिहर्सल देखने के बहाने अद्वित को देखने आती. उस दिन भी नैंसी कुमुद के साथ रिहर्सल देखने पहुंची तो देखा, अद्वित काव्या के साथ कपल डांस कर रहा था. दोनों को साथ डांस करते देख नैंसी का चेहरा उतर गया. वह तुरंत रिहर्सल हाल से बाहर निकल गई. कुमुद ने पलट कर देखा तो नैंसी हाल में नहीं थी. वह इधरउधर नैंसी को देखने लगी. वह सोचने लगी कि नैंसी कहां चली गई, तभी अद्वित ने उसे बुला लिया.

नैंसी बाथरूम में जा कर खूब रोई और सोचने लगी कि उसे यह क्या हो रहा है. अद्वित कालेज का हीरो है और वह एक साधारण सी लड़की. उस की ओर वह कभी नहीं देखने वाला. फिर उस का तो काव्या के साथ पहले से ही अफेयर चल रहा है. ऐसे में वह उस के बारे में क्यों इतना सोच रही है. किसी के भी बारे में सोचने के बजाय उसे अपनी पढ़ाई पर ध्यान देना चाहिए. 

कुमुद अद्वित के पास पहुंची तो उस ने पूछा, ”आज तुम्हारी फ्रेंड नहीं दिखाई दे रही है?’’

इधरउधर देखते हुए कुमुद ने कहा, ”मैं भी उसे ही खोज रही हूं. साथ आई तो थी, पर दिखाई नहीं दे रही है.’’

तुम कह रही थी कि वह गाती बहुत अच्छा है?’’

हां, गाती तो अच्छा है.’’ कुमुद ने कहा.

हमें एक सिंगर की जरूरत है. अपने डांस में रीमा नाम की जो सिंगर थी, उस की आज तबीयत खराब हो गई है.’’

पर वह गाने के लिए तैयार नहीं होगी,’’ कुमुद ने कहा, ”वह बहुत शरमीली है.’’

एक बार तुम उस से बात कर के तो देखो.’’

ठीक है, आज बात कर के कल बताती हूं.’’

ओके, पर बात जरूर कर लेना.’’

लेक्चर पूरा होने के बाद पलक, माधवी और नैंसी बातें करते हुए बाहर निकलीं तो कुमुद भी रिहर्सल कर के उन के पास पहुंच गई. उसे देख कर पलक ने पूछा, ”आज तू रिहर्सल से जल्दी आ गई?’’

इस नैंसी को खोजने आई हूं.’’ कुमुद ने कहा, ”मुझे लगा पता नहीं कहां चली गई.’’

यह तो आज हमारे साथ लेक्चर में थी.’’ माधवी ने कहा.

तू तो मेरे साथ रिहर्सल में गई थी. बिना बताए क्यों चली आई?’’ कुमुद ने नैंसी से पूछा.

भई तू तो डांस में है, इसलिए लेक्चर में नहीं आती. मैं तो बेकार में ही वहां अपना समय खराब करती हूं. उस से अच्छा है क्लास में आ कर बैठूं. एग्जाम में आसानी रहेगी.’’ नैंसी ने कहा.

कह तो ठीक रही है. पर तू भी पार्टीसिपेट कर न.’’

पर मुझे कहां डांस आता है.

डांस के लिए नहीं, गाने के लिए.’’ कुमुद ने कहा.

पर गाने के लिए तो रीमा है न.’’ पलक ने कहा.

उस की तबीयत खराब हो गई है. इसलिए एक सिंगर चाहिए.’’ कुमुद ने कहा.

पर मैं इतने लोगों के सामने नहीं गा सकती.’’ नैंसी ने कहा.

यह तो मुझे पता है. वह तो अद्वित ने कहा था, इसलिए मैं ने कहा.’’ कुमुद ने कहा.

क्या, अद्वित ने कहा नैंसी को गाने के लिए? पर उसे कैसे पता चला कि नैंसी गाती है?’’ माधवी ने पूछा.

वह तो मैं ने ही बताया था. एक दिन वह कह रहा था कि तुम्हारी फ्रेंड बोलती नहीं. तब मैं ने कहा था कि वह बहुत शरमीली है. कभी गाती है, तभी हम लोगों के सामने खुलती है. शायद यह बात उसे याद थी, इसलिए आज जरूरत पडऩे पर उस ने मुझ से कह दिया.’’

वाह कितना अच्छा लड़का है. काश, मुझे गाना आता होता तो मैं अद्वित के साथ टाइम स्पेंड कर सकती.’’ पलक ने आह भरते हुए कहा.

नहीं आता गाना तो सपने मत देख.’’ माधवी बोली.

यार कुमुद कभी मुझे भी मिला अद्वित से.’’ पलक बोली.

इस में क्या, रिहर्सल हाल में आ जाना, मिला दूंगी.’’ कुमुद ने कहा, ”वह जरा भी एटीट्यूड वाला नहीं है. पर अद्वित का किसी से बात करना काव्या को पसंद नहीं है. फिर भी अद्वित किसी को मना नहीं करता. नैंसी तू मना कर रही है?’’

हां, मैं नहीं गा सकती.’’ नैंसी बोली.

भई, हमें तो भूख लगी है. चलो 

कैंटीन में चल कर कुछ खाते हैं.’’ पलक ने कहा.

सभी कैंटीन में पहुंचीं तो अद्वित का ग्रुप वहां पहले से ही बैठा था. कैंटीन में घुसते ही नैंसी की नजर सीधे अद्वित पर ही पड़ी. क्योंकि वह सामने ही बैठा था. संयोग से वह दरवाजे की ओर ही ताक रहा था, इसलिए दोनों की नजरें मिल गईं. अद्वित के सामने वाली ही खाली मेज पर सभी बैठ गईं. बैठते ही 

पलक ने कहा, ”किसे क्या खाना है, जल्दी बोलो.’’

कुमुद ने सैंडविच कहा तो माधवी ने बर्गर और नैंसी ने कहा कि वह केवल कोल्डड्रिंक पीएगी. सभी ने अपनीअपनी इच्छा जाहिर कर दी तो पलक ने कहा, ”चल नैंसी, आर्डर कर आते हैं.’’

अद्वित ने कुमुद से इशारे से नैंसी के बारे में पूछा तो कुमुद ने इशारे में ही बताया कि उस ने मना कर दिया है. पलक और नैंसी आर्डर दे कर जैसे ही वापस आईं, अद्वित ने उन लोगों के पास आ कर कहा, ”हाय गाइस, कैन आई जौइन यू?’’

हां… हां, क्यों नहीं. आज ही मेरी फ्रेंड तुम से मिलने के लिए कह रही थी.’’ कुमुद ने अद्वित को सब से मिलाते हुए कहा, ”नैंसी को तो तुम पहचानते ही हो.’’

हां क्यों नहीं, मैं उसी से बात करने आया हूं.’’ अद्वित ने कहा.

मुझ से?’’ नैंसी चौंकी.

हां, मैं ने कुमुद से तुम से गाने के लिए बात करने को कहा था. पर तुम ने मना कर दिया.’’ अद्वित ने कहा.

मैं इतने लोगों के बीच नहीं गा सकती.’’

यह तो तुम्हें लगता है. तुम ट्राई तो करो.’’

मुझे अपने बारे में पता है. मैं किसी से बात तक नहीं कर सकती, गाने की तो बात दूर रही.’’ नैंसी ने कहा.

तुम ने मेरे मन को बांध लिया है, इसलिए मैं चाहता हूं तुम गाओ. क्यों गाइस, तुम लोगों को क्या लगता है?’’ अद्वित ने कहा.

सभी ने अद्वित की बात पर हामी भर दी तो नैंसी नरवस हो गई. उसे नरवस देख कर अद्वित ने कहा, ”ओके, जैसी तुम्हारी मरजी. मैं कल तक तुम्हारे जवाब का वेट करूंगा. उस के बाद किसी दूसरे से बात करूंगा. पर एक बात याद रखना, जिंदगी में चांस बारबार नहीं मिलता.’’

इतना कह कर अद्वित सभी को बाय कह कर चला गया. रात को नैंसी को नींद नहीं आ रही थी. वह यही सोच रही थी कि अद्वित ठीक ही कह रहा था कि जिंदगी में बारबार चांस नहीं मिलता. अब उसे मिल रहा है तो उसे उस का उपयोग करना चाहिए. पर उसे डर लग रहा था. क्योंकि उस ने कभी किसी कार्यक्रम में पार्टीसिपेट नहीं किया था. फिर रोजाना अद्वित को काव्या के साथ देख कर भी उसे अच्छा नहीं लगेगा. वह क्या करे, उस की कुछ समझ में नहीं आ रहा था. यही सब सोचतेसोचते उसे कब नींद आ गई, वह जान नहीं पाई.

सुबह नैंसी थोड़ा देर से जागी. उस दिन उस के चेहरे पर स्माइल थी. सुबहसुबह उस के चेहरे पर स्माइल देख कर उस की मम्मी ने पूछा, ”पहली बार हंसते हुए उठी हो. सपने में ऐसा क्या देखा है?’’

आप को कैसे पता चला कि मैं ने सपना देखा है?’’

तुम्हारे हंसने से पता चल रहा है.’’

हां मम्मी, सपना तो देखा है,’’ नैंसी ने कहा, ”हमारे कालेज का फंक्शन था. उस में मैं ने गाना गाया. मेरे गाने पर सभी तालियां बजा रहे थे. पर मम्मी, पापा पार्टीसिपेट करने देंगे?’’

उन से कहने की जरूरत ही क्या है. तुम पार्टीसिपेट करो. जा, जल्दी तैयार हो जा, तेरी सहेलियां तुझे लेने आ रही होंगी.’’ नैंसी की मम्मी ने कहा.

कुमुद ने जैसे ही रिहर्सल हाल में प्रवेश किया, अद्वित ने उस के पास आ कर पूछा, ”नैंसी नहीं आई?’’

तभी पीछे से नैंसी को आते देख अद्वित खुश हो गया. उस ने कहा, ”मुझे विश्वास था कि तुम यह चांस मिस नहीं करोगी.’’

मैं ने पहली बार इस तरह की हिम्मत की है अद्वित. पता नहीं मैं यह काम कर भी पाऊंगी या नहीं?’’ नैंसी ने कहा.

तुम ने हिम्मत की, यह अच्छी बात है. निश्चित तुम यह काम कर लोगी. चलो अब, हमारे पास ज्यादा समय नहीं है.’’

उस दिन पहली बार नैंसी स्टेज पर चढ़ी. उसे जो गाना गाने के लिए दिया गया, उस के लिए गिटार बजने लगा. पर वह वहां उतने लोगों को देख कर नरवस हो गई. अद्वित ने स्टेज पर जा कर उसे संभाला. उस ने कहा, ”तुम यह सोच कर गाओ कि तुम्हारे सामने कोई नहीं है.’’

अद्वित मुझे डर लग रहा है. जब मैं इतने लोगों के सामने नहीं गा सकती तो फंक्शन में तो और न जाने कितने लोग होंगे?’’ नैंसी ने रुआंसी हो कर कहा.

तुम गा सकती हो नैंसी.’’ अद्वित ने कहा.

नैंसी जैसे ही स्टेज की ओर बढ़ी, तभी स्टेज के नीचे से कुछ लड़के कहने लगे कि अद्वित यह किसे गाने के लिए ले आया है. लगता है, इसे कुछ आताजाता नहीं है. इस तरह की बातें सभी जोरजोर से कर रहे थे. नैंसी घबरा गई और भाग कर बाहर निकल गई. अद्वित उस के पीछेपीछे दौड़ा.

बाहर आ कर नैंसी रोने लगी थी. तभी एक हाथ उस के सामने आया पानी का गिलास लिए हुए. वह हाथ किसी और का नहीं, अद्वित का था. पानी पी कर नैंसी ने कहा, ”अद्वित, मैं ने कहा था न कि मैं नहीं गा पाऊंगी.’’

और मैं अब भी कह रहा हूं कि तुम गा लोगी. तुम्हारा जो डर है, उसे दूर करने का यही समय है. अगर आज तुम ने उन लोगों को जवाब नहीं दिया तो फिर कभी जवाब नहीं दे पाओगी.’’ अद्वित ने कहा.

मुझे बहुत डर लग रहा है.’’ 

एक बार मेरे ऊपर भरोसा कर के देखो. मुझे पूरा विश्वास है कि तुम बहुत अच्छा गा लोगी.’’ अद्वित बोला.

थोड़ा सोच कर नैंसी बोली, ”ओके.’’

अद्वित के साथ नैंसी रिहर्सल हाल में वापस आ गई. अद्वित के साथ नैंसी को देख कर काव्या को अच्छा नहीं लगा. नैंसी स्टेज पर चढ़ी तो उस के साथ अद्वित भी स्टेज पर आ गया. नैंसी ने एक बार अद्वित की ओर देखा और आंखें बंद कर के गाना शुरू कर दिया. उस का गाना सुन कर रिहर्सल हाल में शांति छा गई. सभी केवल उसी को सुन रहे थे. उसे गाते देख अद्वित खुश हो गया. नैंसी का गाना पूरा हुआ. इस बात से चिढ़ कर काव्या रिहर्सल हाल से बाहर निकल गई. रिहर्सल हाल तालियों की गडग़ड़ाहट से गूंज उठा. नैंसी ने आंखें खोलीं. अपनी इस सफलता पर वह बहुत खुश थी. उस ने अद्वित की ओर देख कर कहा, ”थैंक्स.’’

अभी इस थैंक्स को संभाल कर रखो. बहुत लोगों को कहना पड़ेगा.’’ अद्वित ने कहा, ”कल इसी समय पर रिहर्सल हाल में मिलना, बाय.’’

नैंसी काफी सुकून महसूस कर रही थी. उस ने जिस बात की कल्पना भी नहीं की थी, एक के बाद एक लोग आ कर उस के गाने की तारीफ करते हुए उसे बधाई दे रहे थे. कुमुद ने पास आ कर कहा, ”यार तूने तो कमाल ही कर दिया.’’

थैंक्स.’’ नैंसी ने कहा.

ओह मैडम तो छा गईं. पूरे कालेज में इन्हीं के गाने की तारीफ चल रही है.’’ पलक बोली.

माधवी ने कहा, ”यार, इस ने तो गजब ही कर दिया, इतने लोगों के बीच स्टेज पर गा कर.’’

हां यार, मुझे भी यकीन नहीं हो रहा. थैंक्स टू अद्वित. उस ने मुझे बहुत एनकरेज किया.’’ नैंसी बोली.

नैंसी की इस बात पर पलक मुसकरा कर रह गई. पर कुमुद चुप नहीं रह सकी. उस ने कहा, ”लगता नहीं है कि अद्वित तुझे कुछ ज्यादा ही भाव दे रहा है?’’

ऐसा कुछ भी नहीं है. मुझे पता है कि काव्या उस की गर्लफ्रेंड है. वह मुझे एक फ्रेंड की ही तरह एनकरेज कर रहा है. और वैसे भी कहां अद्वित और कहां मैं. पर उस ने मेरे अंदर का डर निकालने में मेरी बड़ी मदद की, यह बात मैं कभी नहीं भूलूंगी.’’

रिहर्सल हाल से सीधे अद्वित कैंटीन में पहुंचा तो वहां उसे काव्या बैठी दिखाई दे गई. उस के पास जा कर उस के बगल बैठते हुए अद्वित ने कहा, ”आज रिहर्सल नहीं करना क्या?’’

तुम्हें उस बहनजी से फुरसत मिले, तब न.’’ काव्या तुनक कर बोली.

उस का नाम नैंसी है. आखिर तुम उस से इतना चिढ़ क्यों रही हो? उसे कौन्फिडेंस की जरूरत थी, इसलिए मैं ने थोड़ा एनकरेज कर दिया.’’ अद्वित ने कहा.

अद्वित तुम्हें तो पता है, मैं तुम्हारे लिए क्या फील करती हूं?’’

काव्या प्लीज, मैं ने तुम्हें कितनी बार समझाया कि तुम केवल मेरी दोस्त हो. इस से ज्यादा तुम मुझ से कुछ अपेक्षा मत रखना.’’ इतना कह कर अद्वित कैंटीन से बाहर निकल गया. अद्वित की इस बात से काव्या की आंखों में आंसू आ गए.

रिहर्सल हाल में डांस की प्रैक्टिस चल रही थी, तभी अद्वित ने 5 मिनट के ब्रेक की घोषणा कर दी. उस के बाद कुमुद के पास जा कर बोला, ”तुम ने नैंसी को समय बता दिया था न? क्योंकि रिहर्सल कंटीन्यू चलता रहेगा.’’

हां, वह आती ही होगी.’’ कुमुद ने कहा. 

तभी काव्या आ कर उस के पास खड़ी हो गई. उसे देख कर कुमुद बोली, ”मैं पानी पी कर आती हूं.’’

काव्या एकटक अद्वित को ही ताक रही थी. जबकि अद्वित कहीं और ही देख रहा था. काव्या धीरे से बोली, ”कल की बात के लिए सौरी अद्वित. तुम हमेशा वह बात करने के लिए मना करते हो, पर मैं हमेशा वही बात करती हूं.’’

सौरी यार, मैं भी कल कुछ ज्यादा ही गुस्सा हो गया था.’’

छोड़ो न उस बात को. चलो कौफी पीते हैं.’’

नहीं काव्या, नैंसी आती होगी. हम सब को गाने के साथ प्रैक्टिस करनी है.’’ अद्वित ने कहा.

अद्वित की बात पूरी भी नहीं हुई थी कि नैंसी आ कर खड़ी हो गई. नैंसी उस दिन जींस और टौप पहन कर आई थी. उस के बाल खुले हुए थे. उस दिन वह रोजाना से कुछ अलग ही लग रही थी. अद्वित उसे देखता ही रह गया. यह काव्या को जरा भी नहीं अच्छा लगा. अद्वित ने उस अपलक निहारते हुए कहा, ”यू लुक नाइस नैंसी.’’

नैंसी ने मुसकराते हुए कहा, ”थैंक्यू.’’

इस के बाद सभी स्टेज की ओर बढ़ गए. थोड़ी ही देर में ड्रम्स, गिटार बजने लगा. नैंसी ने गाना शुरू कर दिया. डांस की भी प्रैक्टिस शुरू हो गई. प्रैक्टिस पूरी होते ही अद्वित ने माइक ले कर कहा, ”ओके गाइस, अब आज यहीं तक. कल 10 बजे सभी लोग तैयार रहना. अब अपने पास बहुत कम समय बचा है.’’

इस के बाद सभी रिहर्सल हाल से निकलने लगे. नैंसी और कुमुद भी निकल रही थीं. गेट के पास उन्हें अद्वित मिल गया. कुमुद ने कहा, ”नैंसी मुझे कुछ काम है, मैं जा रही हूं. तुम पलक के साथ आ जाना.’’

ओके.’’ नैंसी ने कहा.

कुमुद के जाते ही अद्वित ने कहा, ”कैसा लग रहा है? लग रहा है आज कौन्फिडेंस कुछ इनक्रीज हुआ है?’’

हां, कल मोटीवेशनल गुरु ने स्पीच दी थी न, उसी का असर था.’’ नैंसी ने कहा.

दोनों हंस पड़े. इसी तरह एकएक दिन बीत रहा था. अद्वित रोजाना नैंसी को मोटीवेट कर रहा था, साथ ही उस के साथ हंसीठिठोली भी कर लेता था. दोनों के बीच अच्छा संबंध बन गया था. अब अद्वित काव्या की अपेक्षा नैंसी के साथ ज्यादा समय बिताने लगा था. नैंसी भी अब अपनी लाइफ को इंजौय कर रही थी.  रोजाना नैंसी की सहेलियां अद्वित को ले कर उसे चिढ़ातीं, पर नैंसी पर उन की बातों का कोई असर नहीं पड़ रहा था. वह अद्वित की दोस्त बन कर खुश थी. काव्या को भी लगने लगा था कि अद्वित को नैंसी से कुछ ज्यादा ही भावनात्मक लगाव हो गया है. पर वह अद्वित की दोस्ती को खोना नहीं चाहती थी, इसलिए कुछ कहती नहीं थी. इसी तरह दिन कट रहे थे. मिड फंक्शन के अब 6 दिन बाकी रह गए थे.

उस दिन रिहर्सल शुरू होने में कुछ समय बाकी था. कुमुद ने कहा, ”चल नैंसी, कहीं नाश्ता कर लेते हैं. रिहर्सल शुरू हो गया तो टाइम नहीं मिलेगा.’’

यार, तुम पलक के साथ नाश्ता कर लो. मैं रिहर्सल हाल में जा रही हूं.’’

कोई बात नहीं, तेरी इच्छा नहीं है तो तू जा.’’ कुमुद बोली.

नैंसी रिहर्सल हाल में पहुंची तो वहां कोई नहीं था. उसे लगा कि अभी कोई नहीं आया है. वह स्टेज पर जा कर रियाज करने लगी. उसी बीच दबे पांव आ कर अद्वित उस के सामने बैठ गया. वह नैंसी को एकटक ताक रहा था. 

नैंसी ने आंखें खोलीं तो सामने अद्वित को पा कर स्तब्ध रह गई. अद्वित भी चकित रह गया. नैंसी ने कहा, ”अरे अद्वित, तुम कब आए? तुम्हारे आने का तो मुझे पता ही नहीं चला.’’

जब तुम आंखें बंद कर के रियाज कर रही थी तब. एक बात कहूं, अगर तुम उलटा न समझो तो?’’ 

कहो… कहो, इस में उलटा क्या समझना.’’ नैंसी बोली.

तुम आंख बंद कर के रियाज करती हो तो बहुत सुंदर लगती हो.’’

पहली बार किसी ने इस तरह की तारीफ की है.’’ नैंसी ने हंस कर कहा. 

क्यों, आज तक किसी ने तुम से यह बात नहीं कही?’’ हैरानी से अद्वित ने कहा.

जब किसी से इतनी बात ही नहीं की तो तारीफ कैसे करेगा. इतने सालों में पहली बार अगर किसी से हिलीमिली हूं तो वह तुम से. किसी को बेस्ट फ्रेंड कह सकूं, अभी तक कोई मिला ही नहीं था.’’

अच्छा तो तुम मुझे बेस्ट फ्रेंड मानती हो?’’

हां, एक बेस्ट फ्रेंड जो कर सकते हैं, वह तुम ने कर दिखाया है. मेरा कौन्फिडेंस इनक्रीज कर के.’’

हां, यह बात तो सच है. अब तुम ने बेस्ट फ्रेंड कहा है तो एक बात पूछ लूं?’’

हां , पूछो.’’ नैंसी ने कहा.

तुम्हें कैसा लड़का अच्छा लगता है? अद्वित ने पूछा.

मतलब?’’ नैंसी ने अद्वित की आंखों में देखा.

मैडम, मतलब यह कि जिसे आप परफेक्ट बौयफ्रेंड बना सको, उस लड़के में कैसी खूबियां देखना चाहती हो तुम?’’ अद्वित ने पूछा.

छि… बौयफ्रेंड. मैं कभी बौयफ्रेंड नहीं बनाऊंगी.’’

क्यों, बौयफ्रेंड बनाने में क्या दिक्कत है?’’

बस, मुझे नहीं पसंद है यह सब.’’ नैंसी ने कहा, ”बाय द वे, तुम यह सब क्यों पूछ रहे हो. तुम्हारी तो आलरेडी एक गर्लफ्रेंड है.’’

कौन?’’ अद्वित ने पूछा.

काव्या और कौन.’’

तुम से किस ने कहा कि काव्या मेरी गर्लफ्रेंड है?’’

क्यों नहीं,’’ नैंसी बोली, ”कालेज में तो सभी कहते हैं कि काव्या तुम्हारी गर्लफ्रेंड है.’’

वह मेरी बेस्ट फ्रेंड है, गर्लफ्रेंड नहीं.’’ अद्वित ने कहा.

ओह, तुम जैसे लड़के की गर्लफ्रेंड न हो, कोई विश्वास नहीं करेगा.’’

अद्वित ने पूछा, ”मेरे जैसा मतलब?’’

तुम्हारे जैसा डैशिंग, हैंडसम, काइंड हार्ट.’’

बस… बस, अब रहने दो. मैं आकाश में उडऩे लगूंगा.’’ अद्वित ने कहा.

अद्वित की बात पर नैंसी हंसी तो अद्वित भी उस के साथ हंसने लगा. अब तक रिहर्सल का समय हो गया था, इसलिए सभी रिहर्सल हाल में आ गए. अद्वित और नैंसी को साथ हंसते देख काव्या को गुस्सा आ गया. वह अद्वित के पास आई तो उस ने कहा, ”हाय काव्या.’’

हाय, तुम्हें प्रिंसिपल मैम बुला रही हैं अद्वित.’’ काव्या ने कहा.

ओके, काव्या, तुम सभी को सेट करो, मैं आ रहा हूं. नैंसी, तुम कुमुद को फोन कर के बुला लो.’’ कहते हुए अद्वित चला गया.

नैंसी कुमुद को फोन कर के अपनी जगह पर आई तो वहां काव्या पहले से बैठी थी. नैंसी के आते ही उस ने कहा, ”तो हो गई तुम्हारी और अद्वित की सेटिंग?’’

क्या?’’ नैंसी चौंकी.

हां, तुम दोनों जिस तरह एकदूसरे के साथ टाइम स्पेंड कर रहे हो, उस से तो सब को यही लग रहा है कि तुम दोनों के बीच कुछ चल रहा है. पर डोंट वरी, तुम टेंशन मत लो, यह अद्वित की पुरानी आदत है. उसे जो अच्छा लगता है, वह बहुत अच्छा लगता है और फिर जब वह उसे छोड़ देता है तो उस की ओर देखता तक नहीं. 

और फिर तुम तो एक भी एंगल से ऐसी नहीं हो कि उसे अच्छी लगो. फिर भी वह तुम्हें भाव दे रहा है, यह बहुत बड़ी बात है. पर उस ने जब भी गर्लफ्रेंड बदली है, मुझे बताया है. क्योंकि सभी जानते हैं कि आज नहीं तो कल उसे मेरे पास ही आना है. यह मैं तुम्हें इसलिए बता रही हूं, क्योंकि तुम बड़ेबड़े सपने न देखने लगो.’’ काव्या ने कहा.

यह सब तुम मुझे क्यों बता रही हो? और तुम चिंता मत करो, मेरे और अद्वित के बीच ऐसा कुछ भी नहीं है. मुझे अच्छी तरह पता है कि अद्वित मेरी जैसी लड़की को कभी पसंद नहीं करेगा. सो डोंट वरी.’’ कह कर नैंसी उठी और रुआंसा चेहरा ले कर बाहर निकल गई. 

रास्ते में उसे कुमुद मिली. उस ने उसे रोका भी, पर नैंसी चली गई. बाहर आ कर नैंसी खूब रोई. रोते हुए वह सोच रही थी कि काव्या सच ही कह रही थी, एक भी एंगल से वह अद्वित के लायक नहीं है. अद्वित ने आज भी उसे गर्लफ्रेंड नहीं कहा था, पर वह बौयफ्रेंड के बारे में जरूर पूछ रहा था. आखिर क्या चल रहा है उस के मन में? क्या वह उसे भी अपनी अन्य गर्लफ्रेंड की ही तरह समझ रहा है? अब उस का अद्वित से दूर रहना ही ठीक हैं.

अद्वित रिहर्सल हाल में वापस आया तो नैंसी उसे दिखाई नहीं दी. वह उस के बारे में कुमुद से पूछ रहा था कि नैंसी आती दिखाई दे गई. कुमुद ने कहा, ”वह देखो, आ रही है नैंसी.’’

नैंसी को आते देख कुमुद उस की ओर बढ़ी तो पीछेपीछे अद्वित भी चल पड़ा. पास पहुंच कर कुमुद ने पूछा, ”नैंसी, तुम रोते हुए बाहर क्यों गई थी?’’

अद्वित नैंसी की ही ओर देख रहा था. नैंसी ने कहा, ”नहीं तो, मैं रो कहां रही थी. वह तो आंख में कुछ पड़ गया था.’’

इतना कह कर नैंसी वहां से चली गई. नैंसी का यह व्यवहार अद्वित को कुछ अजीब लगा. पर वह पूरे मन से रिहर्सल में लग गया. नैंसी भी मन लगा कर रिहर्सल कर रही थी. रिहर्सल पूरा होने पर अद्वित नैंसी की ओर बढ़ा, पर कुछ कहे बगैर नैंसी चली गई. 

शाम हो गई थी. उस दिन अद्वित का मन काफी खिन्न था. उस की समझ में नहीं आ रहा था कि नैंसी का व्यवहार अचानक बदल क्यों गया था. नैंसी क्यों रो रही थी और उसे इग्नोर क्यों कर रही थी? क्या उस से कोई गलती हो गई थी? कहीं गर्लफ्रेंड वाली बात उसे बुरी तो नहीं लग गई थी? तरहतरह की बातें उस के दिमाग में आ रही थीं. उस ने नैंसी को फोन किया, पर नैंसी ने फोन नहीं उठाया. नैंसी सोने की तैयारी कर रही थी, तभी उस के मोबाइल की नोटिफिकेशन की टोन बजी. उस ने देखा तो अद्वित का मैसेज था— ‘रिहर्सल टाइम 8 एएम.नैंसी सोचने लगी कि इतनी जल्दी तो रिहर्सल कभी हुआ नहीं. फिर उस के मन में आया कि अब फंक्शन में बहुत कम दिन रह गए हैं, इसलिए ज्यादा से ज्यादा प्रैक्टिस करनी होगी. वह काव्या की कही बात को सोचतेसोचते सो गई.

अगले दिन नैंसी ने कुमुद को फोन किया. उस ने फोन नहीं उठाया तो नैंसी को लगा कि वह निकल गई. नैंसी भी बैग ले कर कालेज के लिए निकल गई. वह रिहर्सल हाल में पहुंची तो उसे वहां कोई दिखाई नहीं दिया. वह जाने के लिए पलटी तो सामने अद्वित खड़ा था. नैंसी ने पूछा, ”अभी और कोई नहीं आया क्या? कोई दिखाई नहीं दे रहा?’’

किसी और को यह टाइम दिया ही नहीं तो दिखाई कहां से देगा.’’

तो फिर मुझे क्यों बुला लिया?

तुम से कुछ बात करनी थी.’’

अभी नहीं, बाद में बात करेंगे.’’ कह कर नैंसी जाने के लिए मुड़ी तो अद्वित ने उस का हाथ पकड़ लिया. नैंसी गुस्से में बोली, ”अद्वित यह क्या है?’’

मैं भी तुम से यही पूछना चाहता हूं कि यह सब क्या है? तुम मेरा फोन नहीं उठाती, मुझे इग्नोर करती हो. आखिर तुम्हें हो क्या गया है?’’ अद्वित ने पूछा.

अपना हाथ छुड़ाते हुए नैंसी ने कहा, ”तुम मेरा हाथ छोड़ो, मुझे कुछ नहीं हुआ है.’’

नैंसी का हाथ छोड़ कर अद्वित ने कहा, ”सौरी, मुझे नहीं पता कि तुम्हारा व्यवहार अचानक क्यों बदल गया है. पर काफी समय से मैं तुम से कुछ कहना चाहता हूं.’’

नैंसी ने वापस लौट कर कहा, ”तुम्हें जो कहना है, जल्दी कहो. मुझे जाना है.’’

मैं तुम से कल बौयफ्रेंड के बारे में पूछ रहा था. उस का पूछने का मुख्य मतलब यह था कि मैं जानना चाहता था कि तुम्हें कैसा बौयफ्रेंड पसंद है. मैं उसी के हिसाब से खुद में बदलाव लाना चाहता हूं. पर तुम तो बौयफ्रेंड की बात सुन कर ही चिढ़ गई. इसलिए मैं ने तुम से कुछ कहा नहीं. सच बात तो यह है कि मेरी बहुत सारी गर्लफ्रेंड रह चुकी हैं. पर पिछले  6 महीने से मैं ने कोई नई गर्लफ्रेंड नहीं बनाई है. 

इधर एक महीने से मेरे मन और मस्तिष्क पर तुम ने कब्जा जमा लिया है. मैं ने अपनी सभी गर्लफ्रेंड की ब्यूटी देख कर डेट की है. पर तुम्हारी इनर ब्यूटी मुझे स्पर्श कर गई. तुम्हारा भोलापन और तुम्हारी सादगी ने मुझे तुम्हारा दीवाना बना दिया है. तुम्हारे लिए जो फीलिंग्स हुई हैं, वह आज तक किसी के लिए नहीं हुई है नैंसी. मैं तुम्हारा रिसपेक्ट करता हूं. कल से तुम्हारा यह जो ब्यवहार बदल गया है, वह मुझ से सहन नहीं हो रहा है. इसलिए मैं जो तुम से फंक्शन के बाद कहना चाहता था, वह आज ही कह रहा हूं. आई लव यू नैंसी.’’

नैंसी की आंखों में खुशी के आंसू आ गए थे. पर तभी काव्या की कही बात कि तू अद्वित के लायक नहीं है. कहां अद्वित और कहां तू. याद आ गई थी. 

उस ने आंखों के आंसू पोंछ कर अद्वित की ओर पलट कर कहा, ”पर मैं तुम से प्यार नहीं करती.’’ कह कर नैंसी चली गई. 

नैंसी की इस बात से अद्वित की आंखों में आंसू आ गए. वह नैंसी को जाते देखता रहा. नैंसी का व्यवहार अद्वित की समझ में नहीं आ रहा था. वाशरूम में मुंह धोते हुए वह सोच रहा था कि अब वह नैंसी को कनविंस नहीं करेगा. शायद वह नैंसी के लायक ही नहीं है. अब वह नैंसी को टेंशन न दे कर एक अच्छे दोस्त की तरह सपोर्ट करेगा. रिहर्सल हाल में जा कर वह नैंसी को खोजने लगा. नैंसी उसे दिखाई नहीं दी तो उसे लगा कि शायद आज नैंसी नहीं आएगी, पर थोड़ी देर में नैंसी आ कर स्टेज पर बैठ गई. दोनों ने एकदूसरे की ओर देखा. उस के बाद दोनों की नजरें झुक गईं. अद्वित ने रिहर्सल शुरू किया. उस दिन रिहर्सल शाम तक चलता रहा. 

उस दिन डांस का फाइनल हिस्सा हो गया. सभी आराम करने के लिए बैठ गए. अद्वित ने माइक से बताया कि डांस की फाइनल प्रैक्टिस हो चुकी है. कल हम सब का अंतिम दिन है, इसलिए कल फुल डांस की प्रैक्टिस होगी. उस के बाद लास्ट प्रैक्टिस फंक्शन वाले दिन होगी. अगले दिन मिलने की बात कह कर वह चल पड़ा तो सभी उठ कर उस के पीछेपीछे चल पड़े. अगले दिन सभी रिहर्सल हाल में प्रैक्टिस कर रहे थे. पर उस दिन अद्वित का मन नहीं लग रहा था, क्योंकि वह प्रैक्टिस का अंतिम दिन था. नैंसी से रोजाना मिलने का वह अंतिम दिन था. उस के बाद वह फंक्शन के दिन ही मिलने वाली थी, इसलिए अद्वित उसे जी भर कर देख लेना चाहता था. नैंसी के मन में भी कुछ ऐसा ही चल रहा था. पर वह जाहिर नहीं होने देना चाहती थी. 

दोनों एकदूसरे की ओर देख कर भी एकदूसरे को नहीं देख रहे थे. दोनों को एकदूसरे से बात करनी थी, पर नैंसी दिल दबाए बैठी थी और अद्वित नैंसी की नाराजगी की वजह से बात करने नहीं जा रहा था. प्रैक्टिस करतेकरते कब शाम हो गई, पता ही नहीं चला. सभी एकदूसरे को फंक्शन के लिए बेस्ट औफ लक कह कर घर जाने के लिए निकले. अद्वित ने नैंसी को भी बेस्ट औफ लक कह कर कहा कि उस ने उस से जो भी कहा, वह सब वह भूल कर उसे एक अच्छा दोस्त समझे. नैंसी हांकह कर चली गई. 

सभी 2 दिन फंक्शन की व्यवस्था करने में लगे रहे. इस बीच दोनों आमनेसामने पड़ते तो मुसकराते और अपने काम में लग जाते. पलक और माधवी इस पर नजर रख रही थीं. पलक, माधवी, कुमुद और नैंसी काफी दिनों बाद उस दिन कैंटीन में शांति से बैठी थीं. उसी बीच पलक ने पूछा, ”नैंसी, तुम्हारे और अद्वित के बीच कुछ हुआ है क्या?’’

नीचे देखते हुए नैंसी ने कहा, ”नहींकुछ नहीं हुआ.’’

तो सामने पडऩे पर भी बात क्यों नहीं करती?’’ माधवी ने कहा.

सब की ओर देखते हुए नैंसी ने कहा, ”यार, तुम सब भी न. चलो अच्छा, अब देर हो रही है.’’ कह कर नैंसी उठ खड़ी हुई. 

नैंसी का हाथ पकड़ कर बैठाते हुए कुमुद ने कहा, ”इधर कुछ दिनों से मैं देख रही हूं कि जो अद्वित कालेज की जान था, अब वह चुपचुप रहता है. शायद इस का कारण तुम हो. इधर 4-5 दिनों में ऐसा क्या हो गया, जो तुम ने उस से बात करनी बंद कर दी?’’

रोते हुए नैंसी ने पूरी बात बता कर कहा, ”अद्वित को तो तमाम अच्छी लड़कियां मिल जाएंगी, मेरी जैसी डरपोक, बहनजी जैसी लड़की उस के लायक नहीं.’’

यू नो नैंसी, अभी तुम ने अद्वित की लाइफ देखी नहीं. उस के साथ पल भर बिताने के लिए लड़कियां मरती हैं और मुझे लगता है कि वह तुम्हारे साथ समय बिताना चाहता है. अद्वित के लिए तुम जितना स्पैशल हो, कोई दूसरी नहीं. उस की लाइफ मैं ने नजदीक से देखी है, इसलिए कह रही हूं.’’

इतना समझाने के बाद भी अगर तुम्हारी समझ में नहीं आ रहा तो नैंसी यू आर डेफिनेटली फूल. चलो फ्रेंड्स…’’ कह कर पलक खड़ी हो गई.

आंखों में आंसू भरे नैंसी सब को जाते देखती रही.

आखिर वह दिन आ गया, जिस का पूरा कालेज बेसब्री से इंतजार कर रहा था. सभी फंक्शन की तैयारी में व्यस्त थे. नैंसी तैयार हो रही थी, पर वह काफी नरवस लग रही थी. इधरउधर देखते हुए वह अद्वित को खोज रही थी. उस ने कुमुद से भी अद्वित के बारे में पूछा, पर उस ने कोई जवाब नहीं दिया. एक के बाद एक परफारमेंस हो रहे थे. नैंसी तथा उस के ग्रुप के परफारमेंस का समय नजदीक आ रहा था. फिर भी अद्वित का कुछ पता नहीं था. ग्रुप के सभी लोग एकदूसरे से अद्वित के बारे में पूछ रहे थे. नैंसी अद्वित को खोजने नीचे जा रही थी कि तभी सामने से आ रहे अद्वित ने कहा, ”अरे नैंसी, कहां जा रही हो. परफारमेंस का समय हो गया है.’’

तुम कहां थे? तुम्हें कब से खोज रही हूं.’’

अद्वित ने हंस कर कहा, ”मैं तो यहीं था. शायद तुम्हें खोजने में देर हो गई.’’

अद्वित का व्यंग्य नैंसी समझ गई. नीचे देखते हुए उस ने कहा, ”अद्वित, मैं तुम से कुछ कहना चाहती हूं.’’

अद्वित जैसे उस की बात का इंतजार कर रहा हो, इस तरह उतावलेपन में बोला, ”बोलो… बोलो, मैं सुन रहा हूं.’’

अद्वित… अद्वित मैं… आई मीन… तुम… यानी मैं… मैं… आई… आई…’’

नैंसी अपनी बात कह पाती, तभी अद्वित और नैंसी के ग्रुप के परफारमेंस का एनाउंसमेंट हो गया. नैंसी और अद्वित स्टेज की ओर भागे. भागते हुए ही अद्वित ने कहा, ”नैंसी, तुम्हें गाने की शुरुआत करनी है, तुम आगे चलो.’’

अद्वित, मुझे डर लग रहा है.’’

नैंसी का हाथ पकड़ कर अद्वित ने कहा, ”डोंट वरी बी योर बेस्ट, बेस्ट औफ लक.’’

नैंसी स्टेज पर जा कर खड़ी हो गई. आडिएंस उस के गाने की राह देख रहे थे और नैंसी अद्वित की ओर देख रही थी. अद्वित ने उस की ओर देखा तो उस ने गाना स्टार्ट कर दिया. उस के बाद अद्वित के ग्रुप का डांस होने लगा. गाना और डांस के पूरा होते ही हाल तालियों की गडग़ड़ाहट से गूंज उठा. जिसे देखो वही, नैंसी के गाने की तारीफ कर रहा था. जबकि वह अद्वित को खोज रही थी. भीड़ कम होते ही वह अद्वित की खोज में निकल पड़ी. अंत में खोजतेखोजते वह रिहर्सल हाल के पास पहुंची तो देखा, अद्वित वहां बैठा था. वह भी जा कर उस के पास बैठ गई. अद्वित ने कहा, ”अब बोलो, तुम क्या कहना चाहती थी?’’

अद्वित, आज स्टेज पर जो नैंसी थी, वह एकदम अलग नैंसी थी. तुम ने मुझे पूरी तरह बदल दिया अद्वित. मेरे आत्मविश्वास की एकमात्र वजह तुम हो. तुम्हारा यह उपकार शायद मैं कभी न भूल पाऊं.’’

धीरे से हंसते हुए अद्वित ने कहा, ”तुम ने कैसे मेरा उपकार मान लिया, तुम मुझ से यही कहने आई थी?’’

नहीं, मैं केवल यह कहने नहीं आई थी.’’ मैं तो तुम जो सुनना चाहते हो, वह कहने आई थी. तुम्हें इतने दिनों से परेशान कर रही हूं, उस के लिए सौरी. अद्वित, जो बात आज तक नहीं कह सकी, वह आज कह रही हूं. मैं तुम्हें प्यार करती हूं. जब से पहली बार कालेज में देखा है, तब से करती हूं. पहली नजर में ही मुझे तुम से प्यार हो गया था.’’ नैंसी ने कहा.

नैंसी की ओर देखते हुए अद्वित ने कहा, ”तो फिर उस दिन तुम ने क्यों मना कर दिया था?’’

खड़ी होते हुए नैंसी ने कहा, ”क्योंकि मैं तुम्हारे लायक नहीं.’’

अद्वित ने उसे अपनी ओर घुमा कर कहा, ”तुम यह कैसे डिसाइड कर सकती हो कि तुम मेरे लायक हो या नहीं. तुम्हें पता नहीं, मैं तुम्हारे लिए कितना तड़पा हूं. आज तक किसी ने मुझे रुलाया नहीं, पर तुम ने मुझे रुलाया है.’’ इतना कहतेकहते अद्वित की आंखों में आंसू आ गए.

अद्वित के आंसू पोंछते हुए नैंसी ने कहा, ”आई एम सौरी. पर मैं भी तुम्हारे लिए कम नहीं रोई.’’

नैंसी को सीने से लगा कर अद्वित ने कहा, ”तो अब कह दो न, जिसे सुनने के लिए मैं तड़प रहा हूं.’’

घुटनों पर बैठ कर नैंसी ने कहा, ”सो मी अद्वित, मैं अपनी पूरी जिंदगी तुम्हारे साथ गुजारना चाहती हूं. बताओ, तुम्हारा क्या विचार है?’’

अद्वित ने भी नैंसी के सामने घुटनों पर बैठ कर कहा, ”आई लव यू.’’

लव यू फारवेयर.’’ नैंसी ने भी कहा.

इस के बाद तो नैंसी और अद्वित की लव स्टोरी कालेज में फेमस हो गई. नैंसी को अब किसी का डर नहीं था. उस ने अद्वित को खुले दिल से स्वीकार कर लिया था. अद्वित ने भी कभी उसे अनकंफर्टेबल फील नहीं होने दिया था. नैंसी अद्वित के साथ रह कर जिंदगी का एकएक पल जीना सीख रही थी. जब भी इस तरह के लवबड्र्स के बारे में सुनने को मिलता है, तब वह कहावत सार्थक लगती है. हम खुशी से कह सकते हैं— ‘लव इज रियली ब्यूटीफुल.

Mumbai : सैक्स करने से मना किया तो प्रेमिका का रस्सी से घोंट डाला गला

Mumbai : तमाम लड़केलड़कियों की तरह आंखों में फिल्मी दुनिया के सपने सजा कर मानसी दीक्षित मुंबई गई थी. उसे काम मिलने भी लगा था, लेकिन मुजम्मिल उस के सपनों को ही नहीं उसे भी निगल गया…   

15  अक्तूबर, 2018 की दोपहर के करीब ढाई बजे मुंबई के मार्गों और बाजारों में अच्छीभली भीड़ थीउसी वक्त मुंबई (Mumbai) के अंधेरी इलाके के मिल्लत नगर से एक ओला कैब निकली, जिस में एक युवक बैठा था. 19-20 साल का वह युवक घबराया हुआ सा लग रहा था. उस ने कैब सांताक्रुज एयरपोर्ट के लिए बुक कराई थी, लेकिन वहां जाने के बजाय वह जोगेश्वरी, गोरेगांव और मलाड की सड़कों पर घूमता रहा. आखिर में उस ने मलाड केमाइंडस्पेसके सामने कैब रुकवाई.

उस ने ड्राइवर को यह कह कर बिल चुकता कर दिया कि वह माइंडस्पेश में बैठ कर दोस्त का इंतजार करेगा और फिर दोनों आटोरिक्शा से एयरपोर्ट जाएंगे. उस युवक का सूटकेस डिक्की में रखा था. उस ने ड्राइवर को कह कर अपना सूटकेस निकलवाया, जो काफी भारी था. करीब 3 साल से कैब चला रहे ड्राइवर ने महसूस किया कि सूटकेस में उस युवक के वजन से भी ज्यादा वजन है. किराए के पैसे ले कर ड्राइवर आगे बढ़ गया, लेकिन लगभग 500 मीटर जाते ही उस के दिमाग को झटका लगा. टैक्सी में आए युवक के उसे तो हावभाव सामान्य लगे और ही एयरपोर्ट के लिए कैब बुक कर के इधरउधर भटकना.

साथ में भारी वजन का सूटकेस और माइंडस्पेस के सामने मैंग्रोव की झाडि़यों के पास उतरना. सब कुछ संदिग्ध लग रहा था. कुछ गड़बड़ लगी तो कैब ड्राइवर यू टर्न ले कर वापस आया. लेकिन तब तक वह युवक सूटकेस मैंग्रोव की झाडि़यों में फेंक कर जा चुका था. कैब ड्राइवर ने 4-5 लोगों को बुला कर सारी बात बताई और पुलिस कंट्रोल रूम को फोन कर दिया. मलाड का वह इलाका थाना बांगुर नगर में आता था. कंट्रोल रूम से यह खबर उच्चाधिकारियों और थाना बांगुर नगर थाने को दे दी गई. गश्त पर निकली थाने की पुलिस जिप्सी को तत्काल वहां पहुंचने को कहा गया.

सूचना पा कर थाना बांगुर नगर के थाना इंचार्ज विजय वाने ने ड्यूटी अफसर से इस मामले को डायरी में दर्ज करने को कहा और इंसपेक्टर अरविंद चंदन शिवे, सबइंसपेक्टर विनीत कदम, दिलीप काले, सिपाही राजू जाधव और संतोष देसाई को साथ ले कर मौके पर पहुंच गए. उन्होंने टैक्सी ड्राइवर से मोटीमोटी बातें पूछने के बाद सूटकेस को मैंग्रोव की झाडि़यों से बाहर निकलवाया. सूटकेस में निकला सनसनी का सामान  पुलिस ने वहां मौजूद लोगों की उपस्थिति में सूटकेस को खुलवाया तो सभी हैरान रह गए. सूटकेस में एक युवती की लाश थी. करीब 20-21 साल की वह युवती देखने में काफी सुंदर थी और अच्छे परिवार की लग रही थी. कपड़े भी उस ने ब्रांडेड पहन रखे थे.

मृतका के सिर पर गहरा घाव था, जिस से साफ पता चल रहा था कि उस के सिर पर किसी भारी चीज से वार किया गया था. उस के गले पर भी गोलाई में डार्क कलर का निशान था, जिसे देख कर ऐसा लग रहा था जैसे गले में रस्सी डाल कर खींची गई हो. थानाप्रभारी विजय वाने ने शव का निरीक्षण किया और लाश को पोस्टमार्टम के लिए अस्पताल भेज दिया. सूटकेस और रस्सी को पुलिस ने जाब्ते की काररवाई में शामिल कर लिया. काररवाई निपटा कर पुलिस थाने लौट आईकैब ड्राइवर को पुलिस अपने साथ ले आई थी. उस से डीसीपी संग्राम सिंह निशानदार के समक्ष पूछताछ की गई. पूछताछ के बाद डीसीपी संग्राम सिंह निशानदार ने इस मामले की जांच इंसपेक्टर अरविंद चंदन शिवे को सौंप दी.

इंसपेक्टर अरविंद चंदन शिवे ने सीनियर अधिकारियों के निर्देश पर केस की जांच के लिए एक पुलिस टीम गठित की, जिस में उन्होंने असिस्टेंट इंसपेक्टर विनीत कदम, दिलीप काले, सिपाही राजू जाधव और संतोष देसाई को शामिल किया गया. पुलिस टीम के सामने सब से बड़ी चुनौती यह थी कि मुंबई जैसे महानगर में हत्यारे को कहां और कैसे खोजे, जबकि अभी तक यह ही पता नहीं था कि मृतक युवती रहती कहां थी और उस का नाम क्या था? इस काम में कैब ड्राइवर मदद कर सकता था, इसलिए पुलिस ने उसे साथ रखा.

स्कौटलैंड के बाद दूसरे नंबर पर आने वाली मुंबई पुलिस ने इस मर्डर मिस्ट्री को ओला कंपनी के बुकिंग नंबर और मौकाएवारदात से मिले सीसीटीवी कैमरों की फुटेज के आधार पर 4 घंटों में सुलझा लिया. ओला को बुकिंग नंबर से हत्यारे का पता और फोन नंबर मिल गए थे, जिस से पुलिस को उस तक पहुंचने में कोई परेशानी नहीं हुई. पुलिस टीम ने जिस समय अभियुक्त के घर पर छापा मारा, उस समय वह घर के अंदर अकेला था और अपने गुनाह के साक्ष्यों को मिटाने की कोशिश कर रहा था. पुलिस टीम ने उस घर को सील कर के उसे अपनी गिरफ्त में ले लिया. घटनास्थल से सबूत जुटा कर पुलिस उसे अपने साथ थाने ले आई. पूछताछ में उस ने अपना नाम मुजम्मिल इब्राहिम सईद बताया और मृतका का नाम मानसी दीक्षित.

इस के पहले कि पुलिस पूछताछ के लिए अभियुक्त को रिमांड पर ले पाती, यह खबर मीडिया में लीक हो गई. इस के बाद तो इलैक्ट्रौनिक और सोशल मीडिया ने इस खबर को देश भर में फैला दियाघर वाले पहुंचे मुंबई (Mumbai) मानसी दीक्षित के घर वालों ने जब यह खबर टीवी पर देखी तो उन के होश उड़ गए. उस के घर में कोहराम मच गया. मानसी दीक्षित राजस्थान के कोटा शहर की स्टेशन रोड पर स्थित मंगलायन अपार्टमेंट के फ्लैट नंबर 602 की रहने वाली थीउस के पिता का नाम ऋषि दीक्षित था, जो कोटा के रेलवे वर्कशाप में सर्विस करते थे. उन के परिवार में पत्नी पद्मा के अलावा 2 बेटियां थीं. बड़ी बेटी का नाम दीक्षा था और छोटी का नाम मानसी

जैसेतैसे खुद को संभाल कर मानसी के घर वाले मुंबई के लिए रवाना हो गए. ऋषि दीक्षित की दोनों बेटियां पढ़ाईलिखाई में होशियार और महत्त्वाकांक्षी थीं. ऋषि दीक्षित दोनों बेटियों को पढ़ालिखा कर अच्छा जीवन देना चाहते थे. उन की मृत्यु के बाद उन का यह सपना उन की पत्नी पद्मा दीक्षित ने पूरा किया. बड़ी बेटी दीक्षा को उन के ही विभाग के डीआरएम औफिस में नौकरी मिल गई थी. जबकि छोटी बेटी मानसी दीक्षित कई साल के संघर्ष के बाद उस मुकाम पर पहुंची, जो उस के सपनों में था. मानसी बचपन से ही मौडलिंग और फिल्मों की दीवानी थी. जब कभी वह किसी मैगजीन या विज्ञापनों में किसी मौडल की तसवीर देखती तो उस की आंखों में भी वैसे ही सपने तैरने लगते थे.

उस की मां ब्यूटीशियन होने के नाते मानसी के मन और सपनों को आसानी से जान लेती थीं. उन्हें जब भी मौका मिलता, मानसी को अपने साथ पार्लर ले जातीं. बेटी को वह सुंदरता के सारे गुण सिखाया करती थीं. शुरू हुई मानसी के सपनों की उड़ान मां का सहयोग पा कर मानसी ने पूरी तरह अपना ध्यान मौडलिंग और फिल्मों की तरफ लगा दिया था. वह अपने स्कूल से ले कर कालेजों तक वहां होने वाले हर छोटेबड़े कल्चरल प्रोग्रामों में भाग लेती रही. कालेज की पढ़ाई खत्म होने के बाद मानसी पूरी तरह से मौडलिंग और बौलीवुड में कूद गई. उस ने फेसबुक और इंस्टाग्राम पर अपनी काफी तसवीरें डाल रखी थीं. मानसी ने अपनी फेसबुक प्रोफाइल में बैकग्राउंड इमेज लगाई थी, जिस में उस ने लिखा थाआई एम मी यानी मैं, मैं हूं. यह तुम कभी नहीं हो सकते.

जाहिर है मानसी ने यह शब्द किसी को चैलेंज करने के लिए लिखा था. यह बात 4 साल पहले की थी, जब वह महज 16 साल की थी. सोशल मीडिया में मानसी की एक से बढ़ कर एक ग्लैमरस तसवीरें पड़ी थींमिस कोटा की हैसियत से मानसी को मौडलिंग के छोटेमोटे काम भी मिलने लगे थे. लेकिन मानसी इस से खुश नहीं थी. उस का सपना मौडलिंग और बौलीवुड में ऊंचे स्थान तक जाने का था. उस का यह सपना मुंबई में ही पूरा हो सकता था. बहरहाल, मार्च 2018 में मानसी का मुंबई में रहने का सपना भी पूरा हो गया. उसे मुंबई की एक प्राइवेट कंपनी .के. टावर्स फाइनैंस ने बुलाया था. मुंबई में मानसी ने अंधेरी के शास्त्रीनगर में किराए का एक कमरा ले लिया और वहीं रहने लगी. खाली समय में मानसी सोशल मीडिया में बिजी रहती थी.

मानसी दीक्षित एक खूबसूरत, कमसिन और बोल्ड युवती थी. शायद यही वजह थी कि मुंबई के ग्लैमरस वर्ल्ड ने उसे हाथोंहाथ लिया. मौडलिंग, टीवी सीरियल, क्राइम पेट्रोल और कई म्यूजिक एलबमों के साथसाथ उसे बौलीवुड की शार्ट फिल्मों में भी काम मिलना शुरू हो गयामानसी की खूबसूरती और बोल्डनैस उस की सफलता का राज थे. वह कई धारावाहिकों और एलबमों में नजर आई और यही वजह शायद उस की हत्या का कारण बनी. उस की मौत के बाद पुलिस ने जब उस का सोशल मीडिया एकाउंट खंगाला तो कई चौंका देने वाली बातें सामने आईं. पता चला कि इसी साल वह यूएई और थाईलैंड की सैर कर चुकी थी. अपने फेसबुक पेज पर उस ने एक जगह लिखा था, ‘मैं जब लोगों की जिंदगी से जाती हूं तो अपना निशान छोड़ जाती हूं. अच्छा हो या बुरा, कम से कम मुझे हमेशा याद तो रखेंगे.’

इस के साथ ही वह अपनी कमियां भी स्वीकार करती थी. उस ने अपने एक पुराने पोस्ट के लिए क्षमा मांगी थी और लिखा भी था, ‘मैं तुम्हारी तरह परफेक्ट नहीं हूं. मुझ में भी कमियां हैं. मुझे जिंदगी से अभी बहुत कुछ सीखना है लेकिन मैं अपने जीवन, अपने सफर का आनंद ले रही हूं. जीवन ने जो दिया, उसे स्वीकार कर रही हूं और भगवान की बहुत शुक्रगुजार हूं.’

इस से यह बात साफ थी कि मानसी एक खुले दिमाग की दिलखुश युवती थी. उसे दोस्ती करना और दोस्तों के साथ घूमनेफिरने, मस्ती करने में मजा आता था. साथ ही उसे अपने कैरियर से भी लगाव था. वह अपने परिवार से बहुत प्यार करती थी और उस की अहमियत भी अच्छी तरह समझती थी

जहां एक तरफ मानसी अपनी मंजिल की ओर बढ़ रही थी, वहीं दूसरी तरफ मुजम्मिल इब्राहिम सईद के रूप में एक नाग उसे निकलने के लिए तैयार बैठा था. 19 वर्षीय मुजम्मिल इब्राहिम सईद हैदराबाद का रहने वाला था. उस के पिता सिराजु हसन सईद काफी समय पहले मर्चेंट नेवी में इंजीनियर थे. वहां से रिटायर होने के बाद उन्होंने मुंबई के जोगेश्वरी इलाके में मिल्लतनगर स्थित अल अहद इमारत की दूसरी मंजिल पर एक फ्लैट खरीद लिया था. अपने परिवार के साथ वह इसी फ्लैट में रहते थेसिराजु हसन का संबंध हैदराबाद के एक रईस खानदान से था. इस खानदान की काफी बड़ी हवेली और जमीनें थीं. मुजम्मिल परिवार का एकलौता बेटा था, जिसे बड़े लाडप्यार से पाला गया था. सिराजु हसन उसे पढ़ालिखा कर अपनी तरह इंजीनियर बनाना चाहते थे. जबकि मुजम्मिल की पढ़ाईलिखाई में कोई रुचि नहीं थी

परेशान हो कर सिराजु ने 5वीं कक्षा के बाद उसे आगे पढ़ने के लिए हैदराबाद में रह रहीं उस की नानी के पास भेज दिया. नानी की छत्रछाया में रह कर वह अपना ग्रैजुएशन पूरा कर पाता, इस के पहले ही उस के सिर से नानी का साया उठ गया. सोशल मीडिया के माध्यम से मिले मुजम्मिल और मानसी मानसी दीक्षित की तरह ही मुजम्मिल इब्राहिम भी सोशल मीडिया और बौलीवुड का दीवाना था. फेसबुक के माध्यम से उस ने जब मौडल मानसी को देखा तो उस के दिल में हलचल मचने लगी. उस ने मानसी से नजदीकियां बढ़ाने और दोस्ती के लिए अपना एक बढि़या प्रोफाइल तैयार कर के फेसबुक और इंस्टाग्राम पर डाला दिया. साथ ही मानसी को फ्रेंड रिक्वेस्ट भी भेज दी. मानसी उस से प्रभावित हो गई और उस ने मुजम्मिल की दोस्ती स्वीकार कर ली.

सोशल मीडिया पर काफी समय तक दोनों की दोस्ती चलती रही. मुजम्मिल ने मानसी से खुद को मौडलिंग में कामयाब युवक बताया था. सोशल मीडिया पर जब दोनों की दोस्ती गहरा गई तो वह अपनी मां के साथ घूमने के बहाने मुंबई गया और अपने एक कौमन दोस्त के साथ मानसी से मिला.  इस के बाद जबतब दोनों मिलने लगे. कभी किसी रेस्तरां तो कभी किसी बिजनैस सेंटर पर इस बीच दोनों एकदूसरे से काफी घुलमिल गए थे. घटना के दिन 11 बजे जब मां अपनी एक सहेली से मिलने घर से बाहर गई तो मुजम्मिल ने मानसी को एक मौडलिंग कंपनी के लिए फोटो शूट करने के बहाने अपने फ्लैट पर बुला लिया.

जब मानसी उस के फ्लैट पर पहुंची तो मुजम्मिल ने इधरउधर की बातों के बाद उस के साथ सैक्स की इच्छा जताई और उस से अश्लील हरकतें करने लगा. मानसी ने इस सब का जम कर विरोध किया. जब वह फ्लैट से बाहर निकलने के लिए दरवाजे की तरफ बढ़ी तो मुजम्मिल ने डर कर पास पड़ा स्टूल उठा कर मानसी के सिर पर दे मारा, जिस से उस के सिर से खून बहने लगा. वह बेहोश हो कर फर्श पर गिर पड़ी. एक पल के लिए तो मुजम्मिल के दिल में मानसी के प्रति हमदर्दी जागीवह मानसी को होश में लाने के लिए उस के मुंह पर पानी के छींटे मारने लगा. लेकिन जब मानसी को होश आने लगा तो उस के मन में बुरेबुरे खयाल खलबली मचाने लगे.

उस ने सोचा कि मानसी अगर पुलिस के पास चली गई तो वह कहीं का नहीं रहेगा. पुलिस, जेल और हथकड़ी की कल्पना करते हुए उस ने एक खतरनाक फैसला ले लिया. अपने आप को बचाने के लिए वह घर के अंदर रखी कपड़े सुखाने वाली रस्सी ले आया और उस से मानसी का गला घोंट दिया. सहेली के घर गई उस की मां कभी भी लौट कर सकती थीं. इस के पहले कि मां घर आएं, मुजम्मिल ने घर में रखे ट्रैवल सूटकेस में रस्सी सहित मानसी की लाश डाल दी और ठिकाने लगाने के लिए सांताकु्रज एयरपोर्ट जाने के लिए ओला कंपनी की एक कैब बुक कर ली. कैब गई तो उस ने ड्राइवर की मदद से ट्रैवल सूटकेस को कैब की डिक्की में रखवा लिया. फिर वह ओला कैब में बैठ कर सांताक्रुज एयरपोर्ट जाने के बजाए किसी सुनसान जगह तलाशने लगा

कुछ समय इधरउधर भटकने के बाद उसे मलाड स्थित माइंडस्पेस के सामने वह जगह मिल गई. सूटकेस को वहां ठिकाने लगाने के बाद वह अपने घर लौट आया. घर कर उस ने फर्श पर फैले मानसी के खून की साफसफाई कर दी, गिराफ्तारी के बाद पूछताछ में मुजम्मिल पुलिस को सहयोग नहीं कर रहा था. वह अपने आप को निर्दोष बता कर बारबार अपना बयान बदल रहा था. लेकिन जब पुलिस ने थोड़ी सख्ती दिखाई तो वह टूट गया और उस ने अपना गुनाह कबूल कर लिया.

विस्तृत पूछताछ के बाद जांच अधिकारी इंसपेक्टर अरविंद चंदन शिवे ने उस के खिलाफ भादंवि की धारा 302, 201 के तहत मुकदमा दर्ज कर के उसे न्यायिक हिरासत में आर्थर रोड जेल भेज दिया.

   —कथा पुलिस सूत्रों पर आधारित

Lakhimpur Kheri : प्रेमिका को खेत में बुलाकर चाकू से किया कत्ल

Lakhimpur Kheri Crime News :  राजू और साबिया खातून आपस में रिश्तेदार थे. उन की मोहब्बत इतनी जुनूनी थी कि राजू ने उसे अंगूठी तक पहना दी थी. फिर बाद में उन के प्यार का धागा ऐसा टूटा कि…  

श्चिमी उत्तर प्रदेश के जिला लखीमपुरखीरी (Lakhimpur Kheri Crime News) के हैदराबाद थाने का एक गांव है सरकारगढ़. इसी गांव में शराफत खां अपने परिवार के साथ रहते थे. वह खेतीकिसानी का काम करते थे. उन के परिवार में पत्नी नजमा के अलावा 6 बेटे और 3 बेटियां थीं. उन के 2 विवाहित बेटे शब्बन और चमन सऊदी अरब में काम करते थे. बाकी बेटे गांव में ही मेहनतमजदूरी करते थे. उन की सब से छोटी बेटी साबिया खातून काफी सुंदर थी. वह गोला गोकरननाथ कस्बे के एक कालेज से बीए कर रही थी. थाना कोतवाली गोला के अंतर्गत गांव बहारगंज में लड्डन खां रहते थे, खेतीकिसानी करने वाले लड्डन के परिवार में पत्नी रजिया के अलावा 3 बेटे 2 बेटियां थीं.

लड्डन खां शराफत खां के बेटे शब्बन के ससुर थे. शब्बन की शादी लड्डन की बेटी से हुई थी. रिश्तेदारी होने की वजह से शब्बन का साला राजू उस के यहां आताजाता रहता था. इसी आनेजाने में उस की नजर शब्बन की बहन साबिया पर टिकी रहती थी. वह साबिया को चाहने लगा था. इसलिए वह उस से खूब बातें किया करता थाधीरेधीरे साबिया का भी झुकाव उस की तरफ होने लगा था. साबिया के स्कूल जाने के टाइम पर वह गांव से बाहर मोटरसाइकिल लिए खड़ा रहता. साबिया के वहां पहुंचने पर वह उसे अपनी बाइक पर बैठा कर कालेज छोड़ने जाता और छुट्टी होने पर उसे गांव के बाहर छोड़ देता. इसी दरमियान दोनों और करीब आते गए. दोनों एक साथ घूमते और मस्ती करते थे.

एक दिन एक पार्क में बैठे हुए दोनों बतिया रहे थे, तभी राजू ने अपनी जेब से पैक की हुई एक छोटी सी डिब्बी निकाल कर साबिया के हाथ पर रख दी. साबिया के होंठ लरज उठे. उस की आंखें भी मासूमियत से राजू को निहार रही थीं. वह आहिस्ता से बोली, ‘‘क्या है इस में.’’

तभी राजू ने कहा, ‘‘खोलो तो सही, अभी मालूम पड़ जाएगा कि इस में क्या है.’’ साबिया ने पैक किया रैपर हटा कर डिब्बी का ढक्कन खोला तो डिब्बी में चांदी की एक अंगूठी दिखाई दी. उस अंगूठी में 2 छोटेछोटे दिल बने हुए थे, जो एकदूसरे से जुड़े हुए थेउन जुडे़ दिलों के अंदर छोटेछोटे नगीने भी जड़े हुए थे. अंगूठी देखने के बाद साबिया ने राजू की ओर निहारा. चेहरे पर प्रसन्नता के भाव साफ झलक रहे थे. राजू उस के मनोभावों को समझ चुका था, ‘‘साबिया, कैसा लगा मेरा यह पहला तोहफा?’’

‘‘बहुत अच्छा है.’’ वह बोली

राजू कहां चूकने वाला था. उस ने पूछा, ‘‘और मैं?’’

साबिया के कपोल पर हया के भाव उभरे. वह खामोश ही रही. साबिया को खामोश देख कर राजू ने उसे पुन: कुरेदा, ‘‘तुम ने बताया नहीं?’’

साबिया सकुचाती और शरमाती हुई बोली, ‘‘मालूम नहीं.’’

तभी राजू ने साबिया के हाथ से अंगूठी ले ली. इस के बाद उस ने साबिया के बाएं हाथ की कलाई अपने हाथ में ले कर उस समय अंगुली में अंगूठी पहना दी. साबिया खातून के लिए यह पहला अवसर था, जब किसी चाहने वाले युवक ने प्यार भरे अंदाज में उसे छुआ था. वह आनंद से सिहर उठी. साबिया को घर जाने को काफी देर हो गई थी. वह आहिस्ता से बोली, ‘‘राजू, अब चलो. घर वाले परेशान हो रहे होंगे.’’

‘‘ठीक है, तुम्हें घर तक छोड़ दूं.’’ राजू ने कहा.

‘‘नहीं, तुम मुझे रोज की तरह गांव के बाहर ही छोड़ देना. मैं नहीं चाहती कि घर वालों और गांव वालों को हमारे प्यार की भनक लगे.’’ साबिया ने कहा.

राजू उसे बाइक पर बैठा कर चल दिया. बाइक चलाते हुए राजू बोला, ‘‘साबिया, शायद तुम्हें पता नहीं कि सूर्य को बादल चाहे जितना भी ढक लें, प्रकृति और लोगों को सूर्य के निकलने का अहसास हो ही जाता है. इसी तरह हम जितना भी चाहें कोशिश कर लें, प्यार को बहुत दिनों तक छिपा नहीं सकते.’’

‘‘हां, इतना तो मैं भी जानती हूं, राजू. लेकिन मैं नहीं चाहती कि शुरुआत में ही हमारे प्यार को ले कर कोई समस्या खड़ी हो.’’ इसी तरह बातचीत करतेकराते वह गांव के बाहर तक पहुंच गए. साबिया बाइक से उतरी और अपने घर की ओर चल दी

वह घर पहुंची तो उसे घर का माहौल रोज की तरह ही सामान्य लगा. इस से उस ने राहत की सांस ली. समय ने साथसाथ उन दोनों का प्यार और प्रगाढ़ होता चला गया. घर और परिवार से दोनों छिपछिप कर मिल लिया करते थे. किसी चाहने वाले को मुलाकात के लिए चाहे कितना भी समय मिल जाए, इस के बावजूद भी उन की यही चाहत होती है कि काश, इस मुलाकात के समय यह घड़ी की सुइयां भी ठहर जाया करें2 दिन बाद राजू साबिया से फिर मिला. तब राजू ने शिकायत की कि वह उसे जितना समय देती है, उतना उस के लिए कम पड़ता है. साबिया ने उसे अपनी मजबूरी बताई और कहा कि वह और ज्यादा देर तक घर के बाहर नहीं रह सकती. फिर भी उस ने प्रेमी की बेचैनी को काफी हद तक दूर करने का रास्ता निकाल लिया

उस ने कहा कि रात को वह जब फ्री हो कर अपने कमरे में होगी, तब उस के मोबाइल पर मिस काल दे दिया करेगी. इस के बाद वह उसे फोन मिला लिया करे. साबिया ने उसे यह भी हिदायत दी कि जब तक वह उसे मिस्ड काल किया करे, वह उसे फोन करे, वरना भेद खुल सकता है. राजू ने खुशीखुशी उस की बात मान ली. इस के बाद दोनों के बीच मोबाइल पर भी बातें होने लगीं, लेकिन मोबाइल पर उन के द्वारा बातें करने वाली बात परिवार वालों से ज्यादा दिन तक नहीं छिप सकी. एक रात सबीना अपने कमरे में बिस्तर पर लेटी चादर सिर पर तान कर मोबाइल पर राजू से बात कर रह थी

उसी दौरान उस के पिता शराफत लघुशंका के लिए उठे तो उन्हें साबिया के कमरे से दबीदबी सी आवाज सुनाई दी. साथ ही हल्की हंसी की आवाज से वह ठिठक गए. उन्होंने दरवाजे को धकेला तो वह खुल गया. साबिया चादर के अंदर मुंह छिपाए फोन पर बात करने में व्यस्त थी. उसे इस बात का जरा भी भान नहीं हुआ कि कब उस के पिता उस के सिरहाने कर खड़े हो गए. शराफत ने कान लगा कर उस की कुछ बातें सुनीं. जितना कुछ शराफत ने सुना, उस से ज्यादा वह समझ गए. इस के बाद शराफत ने एक झटके में साबिया के ऊपर से चादर हटा दी.

चादर हटते ही साबिया चौंक पड़ी. अपने सिर के पास पिता को खड़ा देख कर वह एक झटके से बिस्तर से उठी और उस के मुंह से हकलाहट भरी आवाज निकली, ‘‘अब्बू.’’

वह शराफत के सामने खड़ी कांप रही थी. शराफत ने सवाल नहीं गोले दागे. उन्होंने पूछा, ‘‘किस से बातें कर रही थी?’’

साबिया खामोश रही. शराफत दहाड़ा, ‘‘बोलती क्यों नहीं?’’

साबिया सिसकती हुई संक्षेप में सब बताती चली गई. शराफत ने गुस्से में उफनते हुए कहा, ‘‘आइंदा उस लुच्चे से हरगिज बात मत करना और अगर की तो तेरी खैर नहीं.’’ इतना कह कर शराफत ने उस के हाथ से मोबाइल छीन लिया ओर अपने साथ ले गए. अगले दिन साबिया राजू से मिली और पूरी बात बता दी. साबिया का मोबाइल छिन जाने के कारण बात नहीं हो सकती थी. इसलिए उसे राजू ने अपना एक मोबाइल देना चाहा, लेकिन साबिया ने लेने से इनकार कर दिया. तब राजू ने गुस्सा जाहिर करते हुए कहा, ‘‘इस का मतलब साबिया तुम मुझ से प्यार नहीं करोगी?’’

वह रुआंसी, सी हो कर बोली, ‘‘राजू, मैं ने ऐसा तो नहीं कहा.’’

‘‘फिर मोबाइल क्यों नहीं ले रही हो?’’

‘‘नहीं, अब मुझे मोबाइल नहीं लेना.’’ कहते हुए उस ने अनामिका से अंगूठी निकाल कर राजू की हथेली पर रख दी. इस के बाद वह वहां नहीं ठहरी. तेजी से घर की ओर रुख कर गई. राजू उसे देखता ही रह गया. उस ने कई बार उसे पुकारा, ‘‘साबियासाबिया…’’ लेकिन साबिया को रुकना था और वह रुकी. राजू ठगा सा, अपमानित सा खुद को महसूस कर रहा था. उस के अंदाज में प्यार नहीं, बदले की भावना घर कर गई. उस ने पुन: साबिया को आवाज देनी चाही, लेकिन कुछ सोच कर उस ने आवाज नहीं दीसाबिया के पास मोबाइल फोन भी नहीं था जिस से वह बात कर सके. लिहाजा उन के बीच होने वाली बातचीत बंद हो गई. राजू अब यह सोचने लगा कि यदि साबिया एक बार फिर उस से अकेले में मिले तो वह उसे मना लेगा.

4 दिन बाद दोनों की किसी तरह 10 मिनट के लिए मुलाकात हुई. राजू ने पुन: अपने सोए हुए प्यार को जागृत करना चाहा किंतु साबिया ने साफसाफ मना कर दियाराजू के काफी दबाव बनाने पर साबिया ने यहां तक कह दिया, ‘‘राजू, मेरे घर वाले नहीं चाहते कि मैं तुम से किसी तरह का संबंध रखूं इसलिए तुम से मिलना मेरी मजबूरी है.’’

राजू ने गहरी सांस लेते हुए कहा, ‘‘मैं तुम्हारे घर वालों की बातों को समझता हूं. वे लोग ऐसा चाहते हैं कि तुम मुझ से मिलो और बात करो. अब तुम मुझे यह बताओ कि क्या तुम भी अपने घर वालों की बात से पूरी तरह सहमत हो.’’

साबिया थोड़ा झल्ला कर बोली, ‘‘राजू कितनी बार कहूं कि तुम मुझ से जो उम्मीद बांधे हो, वह कभी पूरी नहीं होगी. मैं अपने घरपरिवार से अलग नहीं हो सकूंगी.’’

राजू व्यंग्य से मुसकराते हुए बोला, ‘‘इन सब बातों के बारे में तो तुम्हें बहुत पहले सोचना था. मैं तुम से बहुत प्यार करता हूं, साबिया. लेकिन तुम मुझ से दूर होने की कोशिश कर रही हो, मैं ऐसा नहीं कर सकता.’’

‘‘तुम कहना क्या चाहते हो, राजू.’’

‘‘मैं कोई दूसरी भाषा में बात नहीं कर रहा हूं, जिसे तुम समझ नहीं पा रही हो.’’

‘‘मैं तुम्हारी कोई बात नहीं सुनना चाहती.’’ कहते हुए साबिया अपने घर की ओर बढ़ चली.

राजू ने सपने में भी नहीं सोचा था कि एक साल चलने वाला उस का प्यार एक मिनट में यूं टूट जाएगा. उसे क्या मालूम था कि प्यार का घरौंदा बनाने में पूरी उम्र लग जाती है और बिखरने में पल भर लगता है. प्यार चाहे एक साल का हो या 40 साल का, टूटने का दर्द होना लाजिमी है. कहीं ऐसा तो नहीं कि साबिया की लाइफ में कोई और गया है, तभी तो साबिया एकदम से बदल गई. यह बात राजू के दिमाग में अच्छी तरह से बैठ गई. साबिया उस की नहीं हो सकी, राजू को इस का दुख था. पर वह किसी और की हो जाए, इस बात को वह कतई बरदाश्त नहीं कर सकता था. इसे संयोग कहें या साबिया की बदनसीबी कि एक रोज राजू ने एक लड़के से साबिया को बातचीत करते देख लिया

साबिया हंसतीमुसकराती उस से बतिया रही थी. यह देख कर राजू के कलेजे पर सांप लोट गया. फिर कोई एक बार नहीं, बल्कि उस ने उसे उसी लड़के से 2-3 बार बात करते देखा था. राजू मौके की फिराक में रहने लगा था कि कब साबिया उसे अकेली मिले और उस के मुंह से सच्चाई जाने. सच्चाई जानने के लिए 2-3 मौके हाथ भी आए. उस का साबिया से आमनासामना भी हुआ, लेकिन राजू के कुछ कहने से पहले ही साबिया कन्नी काट कर निकल जातीसाबिया के इस व्यवहर से राजू छटपटा उठा. सच्चाई जानने के लिए वह राजू व्याकुल रहने लगा. सच्चाई तो वह साबिया के मुंह से ही सुनना चाहता था. वह उपयुक्त समय के इंतजार में था. लेकिन उस के लाख चाहने पर भी उसे मौका नहीं मिल रहा था. उसे यह भी पता चला कि साबिया के पास एक मोबाइल फोन रहता है. उस का नंबर भी उसे मिल गया.

9 जून की रात साढ़े 3 बजे बाइक से राजू  साबिया के गांव पहुंचा. फिर साबिया को फोन कर के उस के घर के पास एक खेत में बुलाया. पहले साबिया मना करती रही लेकिन राजू के बारबार कहने पर परेशान हो कर वह उस से मिलने को तैयार हो गई. उस समय साबिया के घर के सभी लोग सो रहे थे. साबिया चुपके से अपने बिस्तर से उठी और मेन गेट खोल कर राजू की बताई जगह पर पहुंच गई. वहां उसे राजू मिला. वह साहस बटोर कर बोली, ‘‘राजू, मैं कई बार बोल चुकी हूं कि तुम से किसी प्रकार का संबंध नहीं रखना चाहती, इस के बावजूद भी तुम मुझे परेशान कर रहे हो.’’

राजू गहरी नजरों से साबिया की ओर देखते हुए बोला, ‘‘साबिया, क्या तुम उस लड़के से प्यार करती हो?’’

साबिया उस की बातों को नजरअंदाज करती हुई बोली, ‘‘तुम्हारा क्या मतलब है. मेरी कुछ समझ में नहीं रहा.’’

‘‘बनो मत साबिया, तुम्हारी बेरुखी मुझे जीने नहीं दे रही है. मुझे यह पता चला है कि तुम्हारा उस लड़के से…’’

‘‘राजू, तुम्हारा यह आरोप गलत और बेबुनियाद है.’’

‘‘मैं ने तुम्हें उस के साथ बातें करते देखा है.’’

साबिया ने आश्चर्य से राजू की ओर देखा, ‘‘तुम क्या कह रहे हो, मेरी तो कुछ समझ में नहीं रहा है. किस से बात की, कब बात की और यदि मैं ने किसी से बात कर भी ली तो तुम उस का नाम क्यों नहीं बता रहे हो.’’ साबिया ने नाम जानने को उसे उकसाया.

राजू बोला, ‘‘मुझे नाम बताने की कोई जरूरत नहीं. तुम खुद अच्छी तरह से समझ रही हो. साबिया, अब भी वक्त है, तुम उसे भूल जाओ नहीं तो…’’

उस की बातों पर साबिया को गुस्सा गया. वह बोली, ‘‘सुनो राजू, मैं तुम्हारी जागीर नहीं हूं, जिस पर तुम हुकुम चलाओ. मेरी जो मरजी होगी, मैं वही करूंगी. तुम कौन होते हो मुझे रोकने वाले.’’

‘‘जानना चाहती हो, ठहरो बताता हूं.’’ इतना कह कर उस ने अपनी जेब में रखे चाकू को निकाला और साबिया पर वार कर दिया, ‘‘दिल दिया है तो जान भी ले लूंगा.’’

साबिया ने अपने आप को बचाने का भरसक प्रयास किया, लेकिन असफल रही. राजू ने ताबड़तोड़ कई प्रहार साबिया के शरीर पर किए साबिया खून से लथपथ जमीन पर गिर पड़ी. राजू ने फिर उस के गले पर चाकू से कई वार किए. जिस से उस की मृत्यु हो गई. इस के बाद राजू वहां से फरार हो गया. सुबह होने पर घर वालों ने साबिया को गायब देखा तो वे सभी हैरान रह गए कि वह रात में घर में से कहां चली गई. सभी उसे तलाशने लगे लेकिन कुछ पता नहीं चला. इसी बीच गांव के किसी व्यक्ति ने खेत में पड़ी साबिया की लाश देखी तो साबिया के पिता शराफत अली खां को यह खबर दे दी. वह घर के अन्य सदस्यों के साथ तुरंत मौके पर पहुंच गए. साबिया की लाश देख कर सब फफक कर रो पड़े.

7 बजे के करीब शराफत ने स्थानीय थाना हैदराबाद में फोन कर के घटना की सूचना दी. सूचना पा कर थानाप्रभारी सत्येंद्र कुमार सिंह हमराहियों के साथ घटनास्थल पर पहुंच गए. लाश का निरीक्षण करने के बाद उन्होंने लाश पोस्टमार्टम के लिए मोर्चरी भेज दी. थानाप्रभारी ने शराफत से पूछताछ की तो उन्होंने बताया कि रात में सहरी खाने के बाद  सब सो गए थे. सुबह उठे तो साबिया अपने बिस्तर से गायब थी. इस का मतलब यह है कि रात में किसी के बुलावे पर वह मिलने गई. यह काम उस के बेटे शब्बन का साला राजू ही कर सकता है. वही साबिया के पीछे हाथ धो कर पड़ा था. साबिया उस से मिलना  पसंद नहीं करती थी.

यह जानकारी मिलने के बाद थानाप्रभारी ने गांव वालों से पूछताछ की तो पता चला कि राजू और साबिया के बीच प्रेमसंबंध थे. उन को कई बार एक साथ देखा गया था. मगर सवाल यह खड़ा था कि राजू ने आखिर साबिया की हत्या क्यों की. थानाप्रभारी सत्येंद्र सिंह ने शराफत की तहरीर के आधार पर राजू अज्ञात लोगों के खिलाफ भादंवि की धारा 302 के तहत मुकदमा दर्ज करा दिया. चूंकि राजू पहले से ही घर से फरार था, इसलिए उस की सुरागरसी के लिए उन्होंने अपने विश्वस्त मुखबिरों को लगा दिया. 11 जून, 2018 को सुबह सवा 5 बजे पुलिस ने राजू को केशवपुर तिराहे से एक मुखबिर की सूचना पर गिरफ्तार कर लिया

राजू से सख्ती से पूछताछ की तो उस ने अपना जुर्म स्वीकार कर लिया. राजू की निशानदेही पर पुलिस ने आलाकत्ल चाकू, खून से सनी उस की टीशर्ट, पैंट और बाइक बरामद कर ली. इस के बाद उसे न्यायालय में पेश करने के बाद जेल भेज दिया.

   — कथा पुलिस सूत्रों पर आधारि

Lucknow Crime : शेल्टर होम में लड़कियों के साथ जबरन कराया जाता देह व्यापार

Lucknow Crime : शेल्टर होम वृद्ध, अनाथ बच्चों, बेसहारा महिलाओं वगैरह के लिए बनाए जाते हैं, जिन्हें सरकार से प्रोजेक्टों के नाम पर मोटा पैसा मिलता है, लेकिन इन शेल्टर होम्स के अंदर की सच्चाई कुछ और ही होती है. देवरिया का शेल्टर होम भी…  

5 अगस्त, 2018 की दोपहर का समय था. उत्तर प्रदेश के देवरिया शहर के स्टेशन रोड स्थित एक शेल्टर होम से निकल कर 15 साल की एक लड़की शहर कोतवाली पहुंची. वह पहली बार किसी थाने में आई थी, इसलिए उसे यह समझ नहीं रहा था कि किस से क्या बात करे. उस ने मन को पक्का कर लिया था कि आज चाहे कुछ भी हो जाए, अपनी बात पुलिस को बता कर ही रहेगी. थाने में घुसते ही कुरसी पर बैठे जो अधिकारी दिखे वह उन के पास ही पहुंच गई. वह थानाप्रभारी थे. उस लड़की ने थानाप्रभारी से कहा, ‘‘अंकल, हम जिस शेल्टर होम में रहते हैं, उस में क्याक्या होता है, हम आप से बताना चाहते हैं.’’

थानाप्रभारी ने उसे पूरी बात बताने को कहा तो वह आगे बोली, ‘‘अंकल, हफ्ते के आखिरी दिनों में शेल्टर होम से लड़कियों को जबरदस्ती अनजान लोगों के साथ लाल और नीली बत्ती लगी गाडि़यों में भेजा जाता है, जहां उन का यौनशोषण होता है.

‘‘यही नहीं, जब कोई लड़की उन की बात मानने से इनकार करती है तो उसे परेशान किया जाता है, उस पर जुल्म ढाए जाते हैं. लड़कियां रात भर बाहर रहती हैं और सुबह मुंहअंधेरे उन्हीं गाडि़यों से शेल्टर होम लौट आती हैं.

‘‘जो लड़कियां मैडम के कहे अनुसार काम करती हैं, उन से मैडम खुश रहती हैं और उन के साथ अच्छा व्यवहार करती हैं. लड़कियों को लगता है कि मैडम की बात और उन की पहुंच बहुत ऊपर तक है, इसलिए वे उन से डरती हैं.’’

उस लड़की की बात सुनने के बाद थानाप्रभारी को मामला गंभीर दिखाई दिया. वह लड़की जो थाने आई थी, मां विंध्यवासिनी महिला एवं बालिका संरक्षण गृह, देवरिया की थी. इस संस्था के गोरखपुर और सलेमपुर में भी शेल्टर होम हैं. इस की संचालिका गिरिजा त्रिपाठी हैंशेल्टर होम की ऐसी ही घटना बिहार के मुजफ्फरपुर में घटी थी, जिस की पूरे देश में किरकिरी हो रही थी. इस घटना से बिहार सरकार भी बैकफुट पर थी, इसलिए थानाप्रभारी ने यह जानकारी तुरंत एसपी रोहन पी. कनय को दी. एसपी ने पहले इस मामले की जांच के आदेश दिए. उसी शाम को थाना पुलिस जब मां विंध्यवासिनी महिला एवं बालिका संरक्षण गृह पहुंची तो वहां कई लड़कियां और बच्चे गायब मिले.  

यह जानकारी जब देवरिया पुलिस ने लखनऊ में बैठे पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों को दी तो सभी के होश उड़ गए. क्योंकि संस्था की संचालिका गिरिजा त्रिपाठी एक जानीमानी शख्सियत थी. उस के पति मोहन त्रिपाठी और बेटी लता त्रिपाठी भी संस्था चलाने में सहयोग करते थे. गिरिजा त्रिपाठी पहले हाउसवाइफ थी, जबकि पति भटनी शुगर मिल में काम करता था. पति के वेतन से ही किसी तरह घर का खर्च चलता था. ऐसे में गिरिजा त्रिपाठी ने सामान्य औरतों की तरह घर पर ही कपड़े सिलने का काम शुरू किया, जो वक्त के साथ सिलाई सेंटर बन गया.

पति की नौकरी जाने के बाद उस ने सन 1993 में चिटफंड कंपनी खोली. बाद में इसी कंपनी का प्रारूप बदल कर एनजीओ बना दिया गया. वैसे गिरिजा त्रिपाठी रूपई गांव की रहने वाली थी. उस की ससुराल पड़ोस के ही नूनखार गांव में थी. सन 2003 के करीब गिरिजा त्रिपाठी की संस्था को शेल्टर होम खोलने का प्रोजेक्ट मिला. सरकार ने इस के लिए बजट भी देना शुरू कर दियाधीरेधीरे गिरिजा त्रिपाठी ने शासन और प्रशासन में गहरी पैठ बना ली, जिस का फायदा उठाते हुए उस ने देवरिया के अलावा गोरखपुर और सलेमपुर में भी वृद्धाश्रम खोल लिया. रजना बाजार और उसरा के पास भी संस्था के नाम से उस ने काफी प्रौपर्टी खरीद ली.

उत्तर प्रदेश सरकार की कई योजनाओं के संचालन के काम भी गिरिजा त्रिपाठी की संस्था मां विंध्यवासिनी महिला एवं बालिका संरक्षण गृह को मिलने लगे, इस में सरकार की महत्त्वाकांक्षी पालन गृह योजना भी थी. इस के अलावा योगी सरकार ने जब सामूहिक विवाह योजना का काम शुरू किया तो इन लोगों को उस में भी जगह मिल गई. मां विंध्यवासिनी महिला एवं बालिका संरक्षण गृह की संचालिका गिरिजा त्रिपाठी बच्चों को गोद देने का भी एक सेंटर चलाती थी, जो बाल कल्याण समिति के अधीन काम करता था. वहां से बच्चों को गोद दिया जाता था. किसी वजह से 23 जून, 2017 के बाद इस संस्था की मान्यता रद्द कर दी गई थी. इस के बावजूद यहां पर शेल्टर होम के लिए लड़कियां और बच्चे लाए जा रहे थे.

कई लड़कियां ऐसी थीं, जिन्होंने घर से भाग कर शादी की थी. ऐसे मामलों में पुलिस लड़के को जेल भेजने के बाद लड़की को शेल्टर होम भेज देती है. पता चला कि शेल्टर होम में ऐसी लड़कियों को डराधमका कर उन से जिस्मफरोशी कराई जाती थीपुलिस ने ऐसी बालिग लड़कियों को उन के मांबाप के पास भेजने की कोशिश की, लेकिन उन लड़कियों ने यह सोच कर घर जाने से मरा कर दिया कि अगर घरपरिवार वालों को पता चला कि वे गलत काम करती हैं तो उन की बदनामी तो होगी ही, साथ ही जेल से आने के बाद उन का पति भी साथ रखने से मना कर देगा.

कई लड़कियों ने बताया कि उन से घरेलू नौकर का काम कराने के लिए भी दूसरी जगह भेजा जाता था. पुलिस के पास जो लड़की शिकायत दर्ज कराने आई थी, उस का नाम नीता (परिवर्तित नाम) था. वह भी घर से भाग कर आई थी और गरीब घर की थी. उस के घर वालों को खाने तक के लाले पड़े थे. नीता इस संस्था में करीब 3 महीने पहले ही आई थी. जब उसे रात को कार से कहीं भेजा गया तो वह मौका पा कर भाग निकली और पुलिस तक पहुंच गई. मां विंध्यवासिनी महिला एवं बालिका संरक्षण गृह की संचालिका गिरिजा त्रिपाठी का रसूख देवरिया, गोरखपुर से ले कर राजधानी लखनऊ तक था. वह हर सरकार में सत्ता के ऊंचे पदों पर बैठे लोगों तक अपनी पहुंच रखती थी. इसी वजह से संस्था की मान्यता रद्द होने के बावजूद उस के शेल्टर होम में लड़कियां भेजी जाती रहीं

पुलिस खुलासे के बाद उत्तर प्रदेश सरकार हरकत में आई और पुलिस की उच्चस्तरीय जांच कमेटी का गठन किया गया. एसआईटी जांच की अगुवाई की जिम्मेदारी एडीजी संजय सिंघल को सौंपी गई. जांच में 2 महिला आईपीएस अधिकारियों पूनम और भारती सिंह के अलावा सीओ अर्चना सिंह, इंसपेक्टर ब्रजेश सिंह आदि को भी शामिल किया गया. पुलिस और प्रोबेशन विभाग अलगअलग जांच करने में जुट गए. पुलिस ने संस्था के खिलाफ अलगअलग मामलों में भादंवि की धारा 188, 189, 310, 343, 354, 504, 506 के साथ 7/8 पोक्सो एक्ट और जेजे एक्ट के तहत मुकदमा दर्ज किया. सरकार के साथ हाईकोर्ट ने भी इस मामले को संज्ञान में लिया.

पुलिस की एसआईटी ने जांच के काम को जिस तरह से आगे बढ़ाया, उस में कई ऐसे प्रमाण मिले, जिस से पता चला कि शेल्टर होम में तमाम तरह की गड़बडि़यां थीं. सैक्स रैकेट तो बस उस का एक हिस्सा भर था. इस के अलावा चाइल्ड लेबर और बच्चों को गोद दिए जाने के भी तमाम मामले थे. गिरिजा ने अपने बेटे, बहू और बेटियों को भी संस्था से जोड़ रखा था. जांच कर रही पुलिस टीम के पास अलगअलग तरह की शिकायतें रही थीं. कई परिवारों की लड़कियां गायब थीं और कुछ के नाम ही दर्ज नहीं थे. ऐसे में वहां पर सच्चाई का पता लगाना बहुत मुश्किल काम था.

पुलिस ने देवरिया के साथ गोरखपुर की चाणक्यपुरी कालोनी में ओल्ड एज होम का पता लगाया. गोरखपुर के इस शेल्टर होम को गिरिजा की दूसरी बेटी कनकलता देख रही थी. वह जिले के प्रोबेशन विभाग में थी. गोरखपुर प्रशासन इस बात की जांच कर रहा है कि ओल्ड एज होम में लड़कियों का आनाजाना तो नहीं थागोरखपुर के डीएम विजयेंद्र पांडियन और एसएसपी शलभ माथुर ने अपनी देखरेख में जांच आगे बढ़ाई. यहां पुलिस ने कई लोगों को पकड़ा भी. यह होम बिना मान्यता के चल रहा था. आरोप तो यह भी है कि यहां देवरिया से ला कर लड़कियों को रखा जाता था.

देवरिया शेल्टर होम प्रकरण में सरकार ने जिले के आला अफसरों को बदल दिया. बस्ती की रहने वाली एक लड़की ने बताया कि उसे धमकी दे कर शेल्टर होम से बाहर ले जाया जाता था. डराया जाता था कि अगर तुम बाहर नहीं गई तो तुम्हारे पति को मरवा देंगे. इस लड़की ने बताया कि शेल्टर होम में नाबालिग लड़कियां थीं, जो प्रेम विवाह करने के बाद यहां रह रही थीं. उन का भी शोषण होता था. उत्तर प्रदेश महिला कल्याण मंत्री रीता बहुगुणा जोशी ने कहा कि इस में स्थानीय पुलिस प्रशासन की भूमिका ठीक नहीं पाई गई. जब सन 2017 से इस शेल्टर होम की मान्यता नहीं थी तो वहां पर लड़कियों को पुलिस क्यों भेज रही थी?

सरकार ने सूचना मिलते ही कड़े कदम उठाए हैं. देवरिया के शेल्टर होम को सन 2010 में मान्यता दी गई थी. उसी समय बाल संरक्षण, बालिका संरक्षण महिला संरक्षण के प्रोजेक्ट दिए गए थे. रीता बहुगुणा ने कहा कि विपक्ष के जो लोग देवरिया कांड की आलोचना कर रहे हैं, उन के कार्यकाल में ही ऐसी संस्थाओं को लाइसैंस दिया गया था. ऐसे में विपक्ष बेकार का मुद्दा बना रहा है. योगी सरकार ने इस मामले पर त्वरित काररवाई कर के कड़ा संदेश दिया है. शेल्टर होम की जांच कर रही एसआईटी टीम 20 अगस्त को शेल्टर होम की अधीक्षिका कंचनलता को जांच के लिए साथ ले गई. बालगृह भवन में प्रवेश करते समय अंदर की बिजली गुल थी. कमरों में अंधेरा छाया हुआ था. उन्हीं बंद कमरों में लड़कियों को रखा जाता था. एसआईटी ने कई तथ्य जुटाए.

सुबह जांच करने गई टीम ने शाम 5 बजे तक जांच की और मिली सामग्री अपने कब्जे में ले ली. एसआईटी ने गिरिजा त्रिपाठी के परिवार की लाल रंग की बत्ती लगी कार को जब्त कर लियाजांच में पुलिस की भूमिका संदेह के घेरे में है, जिस के बाद 100 से अधिक एसआई जांच में फंस सकते हैं. टीम ने लड़कियों के कपड़े, खिलौने, बिस्तर की भी जांच की. शेल्टर होम के कार्यालय में टंगी फोटो से यह पता चला कि कौनकौन से लोग यहां कार्यक्रमों में आते रहे हैं. पुलिस उन से भी पूछताछ कर सकती है. दूसरी ओर इलाहाबाद हाईकोर्ट इस मामले की सुनवाई कर रहा है. कोर्ट ने लड़कियों के नाम सार्वजनिक करने वालों को भी गलत बताया और पूछा कि जब कोर्ट ने लड़कियों को किसी से मिलने देने से मना किया था तो प्रशासन ने लड़कियों की गोपनीयता का खयाल क्यों नहीं रखा.

हाईकोर्ट के मुख्य न्यायमूर्ति डी.बी. भोसले और न्यायमूर्ति यशवंत वर्मा इस केस को सुन रहे हैं. जांच और कोर्ट के फैसले के बाद ही शेल्टर होम का सच सामने सकेगापूरे प्रकरण में एक बात साफ है कि शेल्टर होम जिस मकसद से बने हैं, उन को वे पूरा नहीं कर पा रहे हैं. ऐसे में कोई कोई पारदर्शी व्यवस्था प्रशासन और सरकार को बनानी चाहिए, तभी ये जरूरतमंदों को सहयोग कर सकेंगे.

Punjab Crime : टेलीफोन के तार से बेटी के प्रेमी का घोंटा गला

Punjab Crime : ठंडे बस्ते में पड़ी गुरदीप सिंह की हत्या की फाइल धूल फांक रही थी. मेरे आदेश पर गुरदीप की हत्या के मामले की फिर से जांच की गई तो हत्या की चौंकाने वाली ऐसी कहानी सामने आई कि…  

पूरे मामले को पढ़ने के बाद एक बात मेरी समझ में नहीं रही थी कि जब गुरदीप सिंह 18 तारीख को अपने काम पर लुधियाना चला गया था तो फिर 2 दिन बाद उस की लाश अपने ही घर के सामने कैसे मिली. इस का मतलब यह है कि या तो गुरदीप लुधियाना गया ही नहीं या फिर किसी के बुलावे पर वह 2 दिन बाद ही गांव वापस गया था. पर वह शख्स कौन था, जिस के साथ वह शहर से 2 दिन बाद ही गांव गया था. इन्हीं सब बातों का मुझे पता लगाना था.

साल 2018 के जुलाई महीने में मेरी नियुक्ति पंजाब के खन्ना जिले में बतौर एसएसपी हुई थी. इस के पहले मैं होशियारपुर, दसूहा में रहा था. 2011 बैच से आईपीएस करने के बाद मेरी पहली नियुक्ति 2014 में लुधियाना में एसीपी के पद पर हुई थी. जब मैं ने वहां अपना काम शुरू किया, तब शहर की कानूनव्यवस्था चरमराई हुई थी. यातायात का तो बहुत बुरा हाल था. सब से पहले मैं ने शहरवासियों से मिलमिल कर अपना परिचय बढ़ाया और जगहजगह सभाएं कर पुलिस और जनता के बीच की दूरी खत्म करने की कोशिश की. उन्हें कानून के दायरे में रह कर एक अच्छा नागरिक बनने की सलाह दी.

यातायात को सुचारू रूप से चलाने के लिए मैं ने अपने स्टाफ को कड़े आदेश दे रखे थे कि यातायात नियमों का उल्लंघन करने वाला कोई नेता हो या कोई अधिकारी, उसे बख्शा नहीं जाए. इसी कड़ी में अपनी नौकरी के मात्र 3 महीने बाद ही दिसंबर माह में पंजाब ऐंड हरियाणा हाईकोर्ट के एक जस्टिस की गाड़ी का नो पार्किंग का चालान काटने के बदले में मुझे ट्रांसफर झेलना पड़ा था.

लुधियाना से जालंधर, दसूहा, होशियारपुर आदि होते हुए जब मैं ने खन्ना पहुंच कर एसएसपी का कार्यभार संभाला तो अपनी आदत के अनुसार मैं ने अपने अधीनस्थ अधिकारियों को यह सख्त आदेश दिया कि किसी भी मामले में लापरवाही नहीं बरती जाएगी. कार्यभार संभालने के बाद सब से पहले मैं ने उन फाइलों को अपना निशाना बनाया जो पिछले 3-4 सालों से बंद पड़ी हुई थीं और उन पर अब तक कोई काररवाई नहीं हुई थी.

इन ढेरों फाइलों में एक फाइल सरवन कौर की थी. शिकायतकर्ता 50 वर्षीय सरवन कौर के 23 वर्षीय शादीशुदा बेटे गुरदीप की किसी ने हत्या कर के उस की लाश उसी के ही घर के सामने डंगरों वाले बाड़े में फेंक दी थी. मैं ने सरवन कौर के बयान पढ़े. उस का बयान पढ़ने के बाद पता चला कि वह समराला थाने के गांव लोपो के रहने वाले लक्ष्मण सिंह की पत्नी थी. वह अपने पति के साथ खेतों पर मेहनतमजदूरी करती थी. उस के 2 बेटे और 2 बेटियां थीं. सभी शादीशुदा थे और अपनेअपने घरों में खुश थे. बेटों में पवित्र सिंह बड़ा था और गुरदीप उर्फ निका छोटा

गुरदीप ने किसी लड़की से लवमैरिज की थी और वह उसी के साथ लुधियाना में रहता था. गुरदीप जेसीबी चलाता था. जब भी मौका मिलता, अपनी मां से मिलने वह गांव चला आता था16 नवंबर, 2015 को भी गुरदीप अपनी मां से मिलने के लिए घर आया था और 2 दिन रहने के बाद 18 तारीख को अपने काम पर लुधियाना लौट गया. 22 तारीख की सुबह 6 बजे गुरदीप का पिता लक्ष्मण सिंह अपने घर के सामने डंगरों के बाड़े में पशुओं को चारा डालने गया तो वहां पर बेटे गुरदीप की लाश देख कर गश खा कर गिर गया

देखने से लग रहा था कि किसी ने गुरदीप की गला घोंट कर हत्या कर दी थी. उस के गले में केसरी रंग का पटका बंधा हुआ था. बेटे की लाश देख कर लक्ष्मण ने जोरजोर से रोना शुरू कर दिया. रोने की आवाज सुन कर उस के परिवार के साथसाथ गांव वाले भी वहां जमा हो गए. गांव के किसी आदमी ने इस घटना की सूचना थाना समराला को दे दी. थाना समराला के तत्कालीन प्रभारी मंजीत सिंह एसआई नछत्तर सिंह के साथ मौके पर पहुंचे थे. घटनास्थल का मौकामुआयना करने के बाद उन्होंने मृतक के परिवार वालों और ग्रामीणों के बयान दर्ज करने के बाद गुरदीप की हत्या का मुकदमा भादंवि की धारा 302, 34 के तहत दर्ज कर के लाश पोस्टमार्टम के लिए सरकारी अस्पताल भेज दी थी.

आगे की काररवाई के नाम पर तफ्तीश जारी है, लिख कर फाइल बंद कर दी गई थी. थानाप्रभारी मंजीत सिंह का तबादला हो जाने के बाद शायद नए थानाप्रभारी ने उक्त फाइल को खोल कर देखने की जहमत भी नहीं उठाई थी. उस के बाद कई थानाप्रभारी आए और गए, गुरदीप की हत्या की फाइल नीचे दब कर रह गई थी. इस घटना को लगभग ढाई साल गुजर गए थे. फाइल का पूरी तरह से अध्ययन करने के बाद मैं ने तत्कालीन डीएसपी समराला हरसिमरत सिंह शेतरा और थानाप्रभारी भूपिंदर सिंह को अपने औफिस बुलाया. मैं ने उक्त फाइल उन्हें सौंपते हुए कहा कि मुझे जल्द से जल्द गुरदीप के हत्यारों का पता चाहिए. साथ ही केस की प्रोग्रैस रिपोर्ट रोज शाम को मेरी टेबल पर होनी चाहिए.

इस के बाद थानाप्रभारी भूपिंदर सिंह ने लोपा गांव में अपना नेटवर्क फैला दिया. गांव में ज्यादातर मेहनतमजदूरी करने वाले लोग थे. किसी को फुरसत नहीं थी. सभी अपने कामों में व्यस्त थे. फिर इतनी पुरानी बात लोग भूल से गए थे. उन्हें सिर्फ इतना याद था कि सरवन के बेटे गुरदीप की हत्या हुई थी. मृतक की मां बेटे के हत्यारों को पकड़ने के लिए समयसमय पर अधिकारियों के यहां चक्कर काटती रहती थी. सरवन ने पुलिस को 4 संदिग्ध लोगों के नाम पुलिस को देते हुए उन पर शक जताया था, पर उस की बातों की ओर किसी ने ध्यान नहीं दिया था.

मैं ने उन चारों लोगों के नाम अपने खास मुखबिर को सौंपते हुए कहा था कि इन चारों की पूरी कुंडली का पता लगाओ और साथ में इस बात का भी पता लगाओ कि उस दिन गुरदीप अपने गांव किस के बुलावे पर लुधियाना से आया थाअगले 2 दिन में मुझे इस पूरे मामले की तह तक की जानकारी मिल गई. और तो और, इस हत्या की योजना का एक चश्मदीद गवाह भी मेरे हाथ लग चुका था. सारी बातें मैं ने थानाप्रभारी भूपिंदर सिंह को बताईं. मैं ने उन चारों लोगों के नाम देते हुए कहा, ‘‘इन्हें बुलवा कर पूछताछ करो.’’

भूपिंदर सिंह ने उसी दिन गांव लोपो के मोहन सिंह, गुरमुख सिंह, दविंदर सिंह और बब्बू सिंह को थाने बुलवा लिया. इन चारों में मोहन सिंह के अलावा उस का एक बेटा, एक भाई और एक भतीजा था. मैं भी थाने पहुंच गया. ढाई साल बाद जब गुरदीप की हत्या की जांच शुरू हुई तो सब चौंक गए. काफी देर याद करने का नाटक करने के बाद मोहन सिंह ने बताया था कि लक्ष्मण के बेटे की मौत हुई तो थी पर उस की मौत से उस का या उस के परिवार का कोई वास्ता नहीं था. लेकिन मेरे पास इस बात का पुख्ता सबूत था कि गुरदीप की हत्या के पीछे सिर्फ और सिर्फ मोहन सिंह का ही वास्ता है.

मैं ने काफी कोशिश की थी कि वह प्यार से अपने आप जुर्म कबूल कर के सब कुछ बता दे पर वह अपनी बातों से मुझे गुमराह करने की कोशिश करता. अंत में मैं ने चंद सिंह नाम के उस आदमी को ला कर मोहन सिंह के सामने खड़ा कर दिया, जिस के सामने उस ने अपने बेटे और भाई के साथ मिल कर गुरदीप की हत्या की योजना बनाई थी. चंद सिंह भी लोपो गांव का एक जाट जमींदार था. चंद सिंह को अपने सामने देख कर मोहन की घिग्घी बंध गई. वह बगलें झांकने लगा. अंत में उस ने और अन्य तीनों ने अपना अपराध स्वीकार करते हुए बताया था कि उन्होंने ही योजना बना कर गुरदीप की हत्या की थी.

चारों आरोपियों को उसी दिन 5 अगस्त, 2018 को अदालत में पेश कर पुलिस रिमांड पर लिया गया. विस्तार से की गई पूछताछ के बाद गुरदीप की हत्या की जो कहानी सामने आई, उस में दोष गुरदीप का अधिक था. गुरदीप के पड़ोस में मोहन सिंह का घर था. मोहन सिंह मजदूर किसान था. मोहन की एक बेटी थी हरमनदीप कौर जो पास के रोपलो गांव में स्थित स्कूल में पढ़ती थी. गुरदीप गांव का बांका नौजवान था. पड़ोसी होने के नाते बचपन से ही हरमन और गुरदीप साथसाथ खेले थे और दोनों परिवारों का एक दूजे के घर काफी आनाजाना था.

हरमन जब जवान हुई तो उस का झुकाव गुरदीप की ओर हो गया था, जबकि गुरदीप ने लुधियाना काम करना शुरू कर दिया था. लेकिन वह जब भी गांव आता तो हरमन को अपने आसपास मंडराते पाता था. फिर मौका देख कर दोनों एकदूसरे से मिलने लगे. हरमन के लिए गुरदीप से मिलने में कोई परेशानी नहीं थी क्योंकि दोनों के परिवार में घनिष्ठ संबंध थे. वह स्कूल से छुट्टी मार कर गुरदीप के साथ सैरसपाटे पर चली जाया करती थी. धीरेधीरे उन के याराने के चर्चे गांव में भी होने लगे थे. उड़तेउड़ते यह बात मोहन सिंह को भी पता चल गई थी. उस ने जब अपनी बेटी की निगरानी की तो असलियत सामने गई थी.

फिर एक दिन मोहन सिंह को स्कूल से खबर मिली कि हरमनदीप कौर कई दिनों से स्कूल से गैरहाजिर है. यह सुन कर मोहन समझ गया कि वह गुरदीप के साथ ही घूमफिर रही होगी. उस दिन मोहन ने बेटी हरमन को खूब डांटाफटकारा. साथ ही उस ने गुरदीप के घर जा कर उस की मां और बाप को खूब खरीखोटी सुनाई. इतना ही नहीं उन्हें धमकी भी दी कि अगर गुरदीप ने अपनी आदत नहीं बदली तो गंभीर परिणाम भुगतना पड़ेगा.

गलती गुरदीप की थी, इसलिए बात को खत्म करने के लिए सरवन कौर और उस के पति लक्ष्मण ने मोहन सिंह के पैर पकड़ कर माफी मांग ली. कुछ दिन के लिए मामला ठंडा पड़ गया था. एक दिन मोहन को गांव वालों से पता चला कि गुरदीप के पास हरमन की अश्लील फोटो हैं. वह गांव में लोगों को बताता फिर रहा है कि अगर मोहन ने उसे हरमन से मिलने से रोका तो ये फोटो इंटरनेट पर डाल कर उन्हें बदनाम कर देगा.  यह बात सुन कर मोहन के पैरों तले से जमीन खिसक गई. मोहन सिंह ने उसी दिन गुरदीप के घर जा कर उस के मांबाप से बात की. उन्होंने मोहन को आश्वासन दिया कि यदि ऐसी कोई फोटो गुरदीप के पास है तो वह उस से फोटो ले कर उन्हें सौंप देंगे. गुरदीप ने वे फोटो किसी को नहीं दिए. इस बात को ले कर मोहन और लक्ष्मण के परिवार में कई बार झगड़ा भी हुआ पर गुरदीप ने वह फोटो नहीं दीं.

गुरदीप को किसी भी तरह मानता देख कर मोहन सिंह को अपनी इज्जत बचाने का एक ही रास्ता दिखाई दिया. वह रास्ता था गुरदीप की हत्या कर देने का. रहेगा बांस, बजेगी बांसुरी. अपने भाई और बेटे के साथ मिल कर मोहन ने गुरदीप की हत्या की योजना बनाई. इस बारे में मोहन सिंह ने चंद सिंह से भी मशविरा किया. अपनी योजना के अनुसार 21 नवंबर, 2015 की शाम को मोहन ने हरमन से गुरदीप का फोन नंबर ले कर उसे फोन कर गांव के बाहर मिलने के लिए बुलाया था. मोहन ने गुरदीप को कहा था कि अगर तुम फोटो वापस नहीं लौटाना चाहते तो हरमन से शादी कर लो. अगर हरमन से शादी करनी है तो आज रात 9 बजे तक गांव के अड्डे पर मिलो. यह बात सुन कर गुरदीप झट से तैयार हो गया. वह ठीक 9 बजे अड्डे पर पहुंच गया.

नवंबर महीने में हलकीहलकी ठंड पड़ रही थी. वैसे भी गांवों में दिन छिपने के बाद लोग अपनेअपने घरों में दुबक जाते हैं. जिस समय गुरदीप अड्डे पर पहुंचा तो उस समय चारों ओर सन्नाटा पसरा पड़ा था. बात करने के बहाने वे चारों उसे सुनसान खेत में ले गए. मोहन सिंह ने एक बार फिर गुरदीप को अपनी इज्जत का वास्ता देते हुए फोटो लौटाने के लिए कहा. गुरदीप ने शराब पी रखी थी. फोटो लौटाने की बात सुन कर गुरदीप भड़क गया. इतना ही नहीं, वह धमकी देने लगा तो मोहन सिंह को गुस्सा गया. चारों ने पकड़ कर उसे जमीन पर पटक दिया और अपने साथ लाए टेलीफोन के तार से उस का गला घोंट दिया

इस के बाद उसी के सिर पर बंधे पटके को उतार कर उस के गले में डाला और कस दिया. गुरदीप की हत्या करने के बाद चारों ने उस की लाश खेत से उठा कर उस के घर के सामने डाल दी. इस मुकदमे की जांच पूरी गहराई, तकनीकी ढंग और खुफिया सूत्रों के साथ की गई थी. इसी कारण इस ब्लाइंड मर्डर की गुत्थी को ढाई साल बाद सुलझाया जा सका था. रिमांड के बाद 6 अगस्त, 2018 को गुरदीप की हत्या के आरोप में मोहन सिंह, गुरमुख सिंह, दविंदर सिंह और बब्बू को अदालत में पेश कर जेल भेज दिया गया.

स्टोरी में दी गई फोटो काल्पनिक है.

  — प्रस्तुति: हरमिंदर कपूर

 

Rajasthan Crime : संपत्ति के लिए प्रेमी से कराई पति की हत्या

Rajasthan Crime : जब किसी ब्याहता के पैर बहक जाते हैं तो उसे वापस अपने रास्ते पर लाना बड़ा मुश्किल होता है. बैंक मैनेजर रोशनलाल की पत्नी निर्मला के साधनसंपन्न होने के बावजूद पड़ोसी उमेश शर्मा से नाजायज संबंध हो गए. इस का नतीजा इतना दुखद निकला कि…

इसी साल 19 सितंबर की बात है. रोशनलाल यादव को बैंक में काम करतेकरते काफी देर हो गई थी. रोशनलाल जयपुर में गवर्नमेंट हौस्टल चौराहे के पास स्थित सिटी बैंक की शाखा में मैनेजर थे. वैसे तो उन्हें आमतौर पर रोजाना ही शाम के 7-8 बज जाते थे. इस की वजह यह थी कि निजी बैंकों में सरकारी बैंकों की तरह सुबह 10 से शाम 5 बजे तक की ड्यूटी नहीं होती है. हालांकि निजी बैंकों में भी ड्यूटी आवर्स होते हैं, लेकिन सारी जिम्मेदारियां मैनेजर की होती हैं. इसीलिए उन्हें बैंक से निकलने में रात के साढ़े 8 बज गए थे.

दिन भर कामकाज करने और उच्चाधिकारियों के ईमेल, वाट्सऐप के जवाब देतेदेते रोशनलाल भी थक गए थे. काम की व्यस्तता में वह शाम की चाय भी नहीं पी सके थे. जोरों की भूख भी लग रही थी. वे जल्द घर पहुंच कर फ्रैश होने के बाद भोजन करना चाह रहे थे. रोशनलाल ने बैंक के बाहर खड़ी अपनी कार निकाली और घर की ओर चल दिए. उन के साथ बैंक का एक कर्मचारी उन की कार में पानीपेच चौराहे तक साथ आया, वह पानीपेच चौराहे पर उतर गया. रोशनलाल जयपुर के करधनी इलाके में गणेश नगर विस्तार कालोनी में पत्नी और बच्चों के साथ रहते थे.

कोई पुराना गीत गुनगुनाते हुए रोशनलाल अपनी कार मध्यम रफ्तार से चला रहे थे. रास्ते में उन्हें सिगरेट पीने की तलब लगी तो अपने घर से करीब एक किलोमीटर पहले रास्ते में कार रोक दी. कार से उतर कर वह दक्षिणमुखी हनुमान मंदिर के पास एक थड़ी पर सिगरेट लेने चले गए. सिगरेट ले कर वह अपनी कार में आ कर बैठे ही थे कि सामने से अचानक एक स्कूटी पर सवार 2 युवक तेजी से उन की कार के सामने आ गए. स्कूटी से उतर कर एक युवक उन के पास आया और नजदीक से 2 फायर कर दिए. दोनों गोलियां रोशनलाल के सीने में लगीं यह रात करीब 9 बजे की घटना है. गोली चलते ही उस इलाके में अफरातफरी मच गई. यह इलाका रोशनलाल के घर के पास था, इसलिए कुछ लोग उन्हें जानतेपहचानते थे.

आसपास के लोग रोशनलाल को उन की ही कार से नजदीकी निजी अस्पताल ले गए. निजी अस्पताल के डाक्टरों ने प्राथमिक उपचार के बाद उन की गंभीर हालत को देखते हुए उन्हें सवाई मानसिंह अस्पताल ले जाने को कहा. रोशनलाल को निजी अस्पताल ले जाने वाले लोग जब उन्हें सवाई मानसिंह अस्पताल ले जा रहे थे तो उन्होंने रास्ते में करधनी पुलिस थाने पर रुक कर पुलिस को इस घटना के बारे में बता दिया. थाने में ही खड़ी सरकारी एंबुलेंस से एक पुलिसकर्मी के साथ रोशनलाल को सवाई मानसिंह अस्पताल भेजा गया. साथ ही उन के परिजनों को भी सूचना दे दी गई.

सूचना मिलने पर रोशनलाल की पत्नी निर्मला यादव और कुछ सगेसंबंधी सीधे अस्पताल पहुंच गए. अस्पताल में डाक्टरों ने रोशनलाल की जिंदगी बचाने का हरसंभव प्रयास किया, लेकिन रात करीब सवा 11 बजे उन की मृत्यु हो गई. बैंक मैनेजर रोशनलाल पर हुई फायरिंग की जानकारी मिलने पर पुलिस ने घटनास्थल पर जा कर जांचपड़ताल की. पुलिस ने फायरिंग करने वाले बदमाशों का पता लगाने के लिए घटनास्थल के आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों के फुटेज खंगाले, लेकिन पुलिस को रात भर की भागदौड़ के बाद भी बदमाशों का कुछ पता नहीं चला. केवल इतना ही पता चल पाया कि बदमाश पहले से ही घात लगा कर बैठे थे. वे लोग रोशनलाल का बैंक से लौटने का इंतजार कर रहे थे.

दूसरे दिन रोशनलाल के बड़े भाई कोटपुतली निवासी रत्तीराम यादव की रिपोर्ट पर थाना करधनी में रोशनलाल की हत्या का मामला आईपीसी की धारा 302 व 34 में दर्ज कर लिया गया. पोस्टमार्टम कराने के बाद पुलिस ने रोशनलाल का शव उन के घर वालों को सौंप दिया. मुकदमा दर्ज होते ही पुलिस जांच में जुट गई. पुलिस ने मृतक की पत्नी निर्मला सहित परिवार के लोगों और बैंककर्मियों से पूछताछ कर के पता लगाने का प्रयास किया कि क्या उन की किसी से दुश्मनी थी. पुलिस ने बैंक के उस कर्मचारी से भी पूछताछ की, जो रोशनलाल के साथ पानीपेच चौराहे तक आया था.

उस ने बताया कि रास्ते में चिंकारा कैंटीन के पास रोशनलाल के मोबाइल पर एक फोन आया था, जिस पर वे कुछ देर तक बात करते रहे थे. फोन किस का था, यह उसे पता नहीं. वह पूरा दिन करीब सौ लोगों से पूछताछ, मौकामुआयना और कैमरों की फुटेज की जांच में निकल गया. रात तक हत्यारों के बारे में कुछ पता नहीं चला. रोशनलाल मूलरूप से जयपुर जिले के कोटपुतली के रहने वाले थे. उन की मौत की सूचना मिलने पर उन के गांव से भी कुछ लोग जयपुर आ गए थे. पुलिस ने उन से भी पूछताछ कर के रोशनलाल के हत्यारों का पता लगाने की कोशिश की, लेकिन इस से कोई खास मदद नहीं मिल सकी.

पुलिस की जांच में 2-3 बातें मुख्यरूप से सामने आईं. एक तो यह कि रोशनलाल बैंक में कामर्शियल वाहनों के लोन मंजूर करते थे. बैंक से लोन देने के अलावा वह निजी रूप से भी ब्याज पर लोगों को पैसा उधार देते थे. रोशनलाल ने कुछ लोगों को मोटी रकम भी उधार दे रखी थी. एक महत्त्वपूर्ण बात यह भी पता चली कि पत्नी निर्मला से उन का अकसर झगड़ा होता रहता था. निर्मला ने करीब 4 महीने पहले मारपीट की शिकायत पुलिस को दी थी. पुलिस इन तीनों कोणों से जांच करने में जुट गई.

इस के लिए जयपुर के अतिरिक्त पुलिस आयुक्त (प्रथम) नितिन दीप ब्लग्गन के निर्देश पर पुलिस उपायुक्त (पश्चिम) अशोक कुमार गुप्ता ने अतिरिक्त पुलिस उपायुक्त (प्रथम) रतन सिंह और झोटवाड़ा के सहायक पुलिस आयुक्त आस मोहम्मद के सुपरविजन में करधनी थानाप्रभारी मानवेंद्र सिंह चौहान, मुरलीपुरा, झोटवाड़ा व कालवाड़ के थानाप्रभारियों और इंसपेक्टर जहीर अब्बास के नेतृत्व में अलगअलग स्पैशल टीमें गठित कीं. इस बीच पुलिस ने रोशनलाल के मकान के आसपास के लोगों से पूछताछ की तो लोगों ने उमेश शर्मा पर शक करते हुए उस के मोबाइल नंबर भी दे दिए. उमेश पहले रोशनलाल के पड़ोस में ही रहता था. पारिवारिक बातों को ले कर रोशनलाल, उन की पत्नी निर्मला और उमेश के बीच कई बार झगड़े होते थे.

बाद में उमेश वहां से अपना खुद का मकान खाली कर के जयपुर (Rajasthan Crime) में ही मानसरोवर कालोनी में रहने लगा था. उस ने गणेश नगर विस्तार के अपने मकान के 2 कमरे किराए पर दे दिए थे. अपने मकान की देखभाल के बहाने उमेश आए दिन इस कालोनी में आता रहता था. पुलिस ने उमेश के मोबाइल नंबरों की लोकेशन खंगाली तो उत्तराखंड की आई. पुलिस ने उत्तराखंड पुलिस की मदद से 21 सितंबर को उमेश और उस के 3 साथियों को अल्मोड़ा से पकड़ लिया. मृतक की पत्नी भी थी शामिल पुलिस इन सब को जयपुर ले आई. उमेश ने पूछताछ में पुलिस को बताया कि उस ने बैंक मैनेजर रोशनलाल की हत्या अपने भाई की मार्फत उत्तर प्रदेश के शूटरों को सुपारी दे कर करवाई थी.

उमेश ठेकेदारी करता था. इसी काम के बहाने वह रोशनलाल की हत्या से करीब 10 दिन पहले उत्तराखंड चला गया था. उत्तराखंड से ही वह मोबाइल के जरिए रोशनलाल की गतिविधियों पर नजर रखे हुए था. उस ने यह काम शातिराना तरीके से इसलिए किया था, ताकि उस की लोकेशन जयपुर में न आए. उमेश ने पुलिस को बताया कि रोशनलाल की हत्या की साजिश में उन की पत्नी निर्मला भी शामिल थी. इस पर पुलिस ने निर्मला को थाने बुला कर पूछताछ की. निर्मला और उमेश से अलगअलग और आमनेसामने बैठा कर की गई पूछताछ में रोशनलाल की हत्या का राज खुल कर सामने आ गया.

इस से यह बात भी साफ हो गई कि निर्मला ने ही उमेश के साथ मिल कर अपने बैंक मैनेजर पति की हत्या करवाई थी. निर्मला को प्रेमी के साथ पति की संपत्ति भी चाहिए थी, इसलिए उस ने रोशनलाल को तलाक देने के बजाय उन की हत्या करवा दी. यह रोशनलाल का दुर्भाग्य था कि निर्मला की बेवफाई का पता होने के बावजूद वह अपनी जान नहीं बचा सके. उन्हें यह बात अच्छी तरह पता थी कि उन की पत्नी एक दिन उस की हत्या करा देगी. फिर भी वह इतने दरियादिल थे कि अपनी पत्नी की उस के प्रेमी से शादी कराने को भी तैयार हो गए थे. लेकिन निर्मला का प्रेमी उमेश समय पर अदालत नहीं पहुंचा, जिस से दोनों की शादी नहीं हो सकी.

निर्मला यादव और उमेश शर्मा से पूछताछ के आधार पर पुलिस के सामने जो कहानी आई, वह इस तरह थी—

रोशनलाल यादव जयपुर जिले के कोटपुतली के पवाना गांव के रहने वाले थे. सन 2004 में रोशन का विवाह निर्मला से हो गया. वह उन से उम्र में 6 साल छोटी थी. जब निर्मला की शादी हुई, तब वह 11वीं कक्षा में पढ़ती थी. उन्होंने शादी के बाद निर्मला को एमए तक पढ़ाया. साथ ही फैशन डिजाइनिंग का कोर्स भी कराया. नौकरी के दौरान रोशनलाल की जहां भी पोस्टिंग हुई, उन्होंने निर्मला को अपने साथ रखा. बैंक में बड़े पद पर होने के कारण रोशन की तनख्वाह भी अच्छी थी. घर में कभी किसी चीज की कमी नहीं रही.

8 साल पहले सन 2010 में जयपुर (Rajasthan Crime) में पोस्टिंग होने पर रोशनलाल ने करधनी में एक प्लौट ले कर अपना मकान बनवा लिया. उसी दौरान उत्तर प्रदेश के फिरोजाबाद जिले के नई आबादी रैना गांव के रहने वाले उमेश शर्मा ने भी रोशनलाल के पड़ोस में मकान बनवाया. दोनों ने एक ही दिन अपनेअपने मकान में गृह प्रवेश किया. रोशनलाल और उमेश के बीच बन गए पारिवारिक संबंध उमेश शर्मा 2003 के आसपास जयपुर आया था. उस समय जयपुर में प्रौपर्टी बाजार में बूम आया हुआ था. उमेश ने प्रौपर्टी में रकम लगा कर काफी पैसा कमाया. वह अमीरों की तरह जिंदगी जीता था. फिलहाल उस के पास करधनी इलाके में 2 मकान और अजमेर रोड पर बिचून में 15 बीघा जमीन थी. कई प्रौपर्टीज में उस ने मोटा पैसा लगा रखा था. अब वह ठेकेदारी का काम भी करने लगा था.

पड़ोसी होने के नाते उमेश व रोशनलाल के परिवार के बीच अच्छे संबंध थे. एकदूसरे के घर आनाजाना लगा रहता था. दोनों परिवार एकदूसरे के सुखदुख में भी काम आते थे. सन 2016 में उमेश और रोशनलाल सहित कालोनी के कई परिवार शिमला घूमने गए. शिमला में उमेश की निर्मला से नजदीकियां बढ़ गईं. शिमला से जयपुर लौटने के कुछ दिन बाद ही निर्मला के भाई की मौत हो गई. उस समय सांत्वना देने के लिए उमेश का पूरा परिवार कई बार निर्मला के घर गया. जनवरी 2017 में उमेश और निर्मला के बीच मोबाइल पर एसएमएस और वाट्सऐप के माध्यम से चैटिंग होने लगी.

कभीकभी दोनों मोबाइल पर भी बातें कर लेते थे. बाद में दोनों के बीच शारीरिक संबंध बन गए. पहले दोनों छिप कर मिलते थे. बाद में जब उन के संबंधों की चर्चा पासपड़ोस में होने लगी तो रोशनलाल को इस बात का पता चल गया. उन्होंने निर्मला को काफी भलाबुरा कहा और समझाया भी. इस के बाद दोनों परिवारों में झगड़े होने लगे. निर्मला से अवैध संबंधों को ले कर कई बार उमेश और रोशनलाल के बीच मारपीट की नौबत भी आ गई थी. बाद में नवंबर 2017 में उमेश शर्मा गणेश नगर विस्तार करधनी का अपना मकान खाली कर के मानसरोवर कालोनी में रजतपथ पर किराए के मकान में रहने लगा. उमेश ने रोशनलाल के पड़ोस का अपना मकान किराए पर दे दिया था.

उमेश भले ही रोशनलाल के मकान से 20 किलोमीटर दूर रहने लगा था, लेकिन निर्मला से उस की बातचीत होती रहती थी. इतना जरूर हुआ था कि अब निर्मला और उमेश का मिलनाजुलना कम हो गया था. फिर भी जैसे ही मौका मिलता, तब दोनों एकदूसरे से मिल लेते थे. निर्मला करती थी पति को निपटाने की बातनिर्मला जब भी उमेश से मिलती, तो उस से अपने पति रोशनलाल को रास्ते से हटाने की बात कहती थी, ताकि दोनों बिना किसी डर के एकदूसरे के साथ रह सकें. उमेश तो पहले से ही निर्मला के प्यार में अंधा हो चुका था. निर्मला के बारबार कहने पर उस ने इसी साल अप्रैल में आपराधिक पृष्ठभूमि वाले अपने सगे भाई राहुल शर्मा को रोशन की हत्या की जिम्मेदारी सौंप दी. राहुल ने रोशन की हत्या करवाने के लिए अपने भाई से 4 लाख रुपए लिए.

राहुल के खिलाफ उत्तर प्रदेश में मारपीट, लूट और वाहन चोरी के कई मामले दर्ज थे. राहुल ने जयपुर के जगतपुरा में टीएस टेक्सटाइल्स नाम से बैडशीट बनाने की फैक्ट्री लगा रखी थी, जिस में उसे काफी नुकसान हुआ था. वह कर्ज में डूबा हुआ था. राहुल भी पहले गणेश नगर विस्तार में ही रहता था. बाद में वह जगतपुरा में रहने लगा था.  राहुल ने रोशनलाल की हत्या के लिए उत्तर प्रदेश के फिरोजाबाद के शूटर शिवकांत उर्फ लालू, पप्पू कश्यप और विष्णु कश्यप नाम के बदमाशों से संपर्क किया. संपर्क होने के बाद राहुल ने इन बदमाशों को जयपुर बुलाया. बदमाश हथियार ले कर जयपुर पहुंचे. राहुल ने 29 मई से 1 जून तक तीनों बदमाशों को जयपुर के एक होटल में ठहराया.

राहुल ने रोशल की हत्या के लिए एडवांस के तौर पर शूटर शिवकांत को 30 हजार रुपए, विष्णु को 15 हजार और पप्पू कश्यप को 10 हजार रुपए दिए थे. राहुल ने भाई उमेश से लिए 4 लाख रुपए में से बाकी पैसे अपना कर्ज चुकाने में खर्च कर दिए थे. इस दौरान राहुल ने इन बदमाशों से रोशनलाल की उन के मकान, सिटी बैंक और कोटपुतली के पास स्थित गांव के आसपास की रैकी करवाई. उमेश शर्मा इन शूटरों से फिरोजाबाद और जयपुर में तो मिला ही, रोशनलाल की रैकी में कई बार उन के साथ भी रहा.

रैकी के दौरान निर्मला अपने पति रोशन के आनेजाने की पूरी सूचना उमेश को देती रही. कई बार कोशिशों के बावजूद उत्तर प्रदेश से आए शूटरों को रोशनलाल की हत्या का मौका नहीं मिला. बाद में तीनों शूटर जयपुर से वापस चले गए. 2 सप्ताह बाद ही राहुल ने फिरोजाबाद से तीनों शूटरों को फिर जयपुर बुलाया. उन्हें 15 और 16 जून को गोपालपुरा के एक होटल में ठहराया गया. इस बार भी राहुल और उमेश ने रोशनलाल की रैकी करवाई, लेकिन शूटर अपने मकसद में कामयाब नहीं हो सके. इस बीच उमेश शर्मा से मुलाकात होने और कई जगह रैकी में साथ रहने के दौरान फिरोजाबाद से आए शूटरों को पता चला कि राहुल तो केवल मोहरा है.

रोशनलाल की जान तो उमेश शर्मा लेना चाहता है और उमेश काफी मोटी आसामी है, इसलिए शूटरों ने राहुल से रोशनलाल को मारने के एवज में अपनी डिमांड बढ़ा कर 15 लाख रुपए कर दी. राहुल उन दिनों कर्ज में डूबा हुआ था. रोशनलाल की हत्या की सुपारी के नाम पर वह अपने भाई उमेश से 4 लाख रुपए पहले ही ले चुका था. दूसरी ओर एकएक दिन गिन रही निर्मला लगातार उमेश पर रोशन को मरवाने के लिए दबाव बना रही थी. इस पर उमेश ने अपने भाई राहुल पर रोशनलाल की जल्द से जल्द हत्या करवाने या 4 लाख रुपए वापस लौटाने का दबाव बनाया.

भाई पर दबाव बना कर उमेश उत्तराखंड चला गया. उसे उम्मीद थी कि जल्दी ही रोशनलाल का खेल खत्म हो जाएगा. इसलिए अपने बचाव के लिए वह अपने साथी महेंद्र प्रताप उर्फ टीटू के साथ अल्मोड़ा में कार्यरत अपने साले आकाश रावत के पास चला गया. महेंद्र प्रताप उर्फ टीटू को रोशनलाल की हत्या की साजिश और पूरे घटनाक्रम की जानकारी दी. वह उमेश के गांव के पास का ही रहने वाला था और दोनों भाइयों उमेश व राहुल का खास दोस्त था. उमेश ने महेंद्र प्रताप को काफी पैसा भी दे रखा था. निर्मला ने प्रेमी को दिया था उलाहना 18 सितंबर को निर्मला ने मोबाइल पर उमेश से बात कर के अभी तक काम न होने का उलाहना दिया.

इस पर उमेश ने अपने भाई राहुल को रोशन की हत्या या पैसे वापस करने का अल्टीमेटम दे दिया. उन दिनों राहुल का भांजा फरीदाबाद निवासी मनीष उर्फ सनी जयपुर आया हुआ था. आखिरकार राहुल ने अपने भांजे के साथ मिल कर रोशनलाल की हत्या करने का फैसला किया. राहुल ने मनीष के साथ मिल कर 19 सितंबर की रात करीब 9 बजे फायरिंग कर के रोशनलाल की हत्या कर दी. रोशन को गोलियां मारने के तुरंत बाद राहुल ने उमेश को फोन कर के बता दिया कि रोशन को मार दिया. रोशनलाल की मौत की सूचना मिलने के बाद उमेश के साले आकाश रावत ने राहुल के बैंक खाते में 20 हजार रुपए ट्रांसफर कर दिए.

पुलिस ने रोशनलाल की हत्या के मामले में उस की पत्नी निर्मला यादव और उस के प्रेमी उमेश शर्मा के अलावा जयपुर के करधनी इलाके में गणेश नगर विस्तार के रहने वाले महेंद्र प्रताप ओझा उर्फ टीटू, उमेश के साले आकाश रावत और फिरोजाबाद के शूटर शिवकांत उर्फ लालू को गिरफ्तार कर लिया. इन में आकाश रावत मूलत: आगरा के सिकंदरा थानांतर्गत शास्त्रीपुरम का रहने वाला था. वह आजकल उत्तराखंड में जिला ऊधमसिंह नगर के रुद्रपुर में रह रहा था. पुलिस ने वारदात में इस्तेमाल की गई राहुल की स्कूटी उस के घर से बरामद कर ली.

पूछताछ में यह बात भी सामने आई कि रोशनलाल ने लोगों को करीब 50 लाख रुपए ब्याज पर दे रखे थे. निर्मला इस रकम के साथसाथ रोशनलाल की सारी संपत्तियां लेना चाहती थी. इसलिए वह रोशन से तलाक लेने के बजाय उस की हत्या करवाना चाहती थी. उमेश ने भी रोशनलाल से मोटी रकम ब्याज पर ले रखी थी. उमेश चाहता था कि रोशनलाल मारा जाए तो पैसे नहीं चुकाने पड़ेंगे. इसलिए उस ने रोशन की मौत का सौदा किया. वह निर्मला के सामने यह दिखावा करता रहा कि वह यह सब उस के प्रेम की वजह से कर रहा है.

पत्नी के प्रेमी से शादी कराने को राजी हो गए थे रोशनलाल उमेश और निर्मला के अवैध संबंधों के बारे में रोशनलाल को सब से पहले उमेश की पत्नी ने ही बताया था. इस के दूसरे ही दिन रोशन ने घर में नया मोबाइल चार्जिंग के लिए लगा देखा तो निर्मला से पूछा. उस ने बताया कि यह मोबाइल उमेश ने दिया है. रोशन ने पत्नी से मोबाइल का लौक खुलवाया. मोबाइल में निर्मला और उमेश के बीच हुई वाट्सऐप चैटिंग देख कर रोशनलाल अपनी 2 बेटियों और 3 साल के बेटे के भविष्य और अपनी प्रतिष्ठा के कारण खून का घूंट पी कर रह गए.

निर्मला का उमेश के प्रति लगातार बढ़ा झुकाव देख कर रोशनलाल अपने बच्चों का भविष्य बचाने के लिए उस की शादी उमेश से कराने को भी तैयार हो गए थे. पतिपत्नी कोर्ट में पहुंच भी गए, लेकिन वहां पर उमेश नहीं आया. इस के कुछ दिन बाद तक रोशन के घर में शांति रही. निर्मला उमेश से नहीं मिली लेकिन कुछ दिन बाद ही वह फिर उस से मिलने लगी. एक दिन रोशन ने दोनों को देख लिया तो निर्मला ने कहा कि उमेश ने उस के साथ जबरदस्ती की है. तब रोशन ने उस से कहा कि अगर जबरदस्ती की है तो उमेश के खिलाफ बलात्कार का केस दर्ज कराने चलो. निर्मला थाने पहुंच भी गई, लेकिन उमेश के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराने से पहले ही वह बदल गई. वह आगे से उमेश से न मिलने का वादा कर के रोशनलाल को मना कर बिना रिपोर्ट दर्ज कराए घर वापस लौट आई.

इस के कुछ दिन बाद करीब एक साल पहले निर्मला अपने ढाईतीन साल के बेटे को गोद में ले कर प्रेमी उमेश के साथ भागने के लिए घर से निकल गई. निवारू रोड पर वह उमेश से मिलने के बाद अपने रिश्तेदार के घर चली गई. बाद में रोशन उसे समझाबुझा कर घर ले आए. निर्मला प्रेमी के प्यार में इतनी अंधी हो गई थी कि वह अपने प्रेमी और उस के रिश्तेदारों के जरिए पति को धमकी भरे फोन करवाती, फिर खुद ही पड़ोसियों से जा कर कहती कि पति को कोई जान से मारने की धमकी दे रहा है. हत्या से करीब एक सप्ताह पहले निर्मला और रोशनलाल के बीच झगड़ा हुआ. मामला पुलिस तक पहुंच गया.

रोशन ने मिल रही धमकियों के बारे में पुलिस को बताया. लेकिन पुलिस ने मामले को गंभीरता से न ले कर दोनों को समझा कर घर भेज दिया. पुलिस ने यह जानने की भी कोशिश नहीं की कि धमकियां कहां से मिल रही हैं. अगर पुलिस जांच करती तो शायद रोशनलाल आज जीवित होते. बाद में पुलिस ने इस मामले में उत्तर प्रदेश के शूटर पप्पू कश्यप को भी गिरफ्तार कर लिया. पप्पू ने पुलिस को बताया कि शिवकांत के साथ उस ने और विष्णु कश्यप ने जयपुर व कोटपुतली में रोशनलाल की रैकी की थी.

उन्हें लगा कि अगर रोशन की हत्या के बाद पुलिस उन तक पहुंच गई तो वे फंस जाएंगे. इसलिए पप्पू और विष्णु कश्यप उत्तर प्रदेश में पहले से दर्ज आपराधिक मामलों में जारी वारंट की वजह से खुद ही गिरफ्तार हो गए और जमानत नहीं करवाई. कथा लिखे जाने तक इस मामले में राहुल शर्मा और उस के भांजे मनीष उर्फ सनी के अलावा एक शूटर फरार था. पुलिस इन की तलाश में जुटी थी. पुलिस ने गिरफ्तार सभी 6 आरोपियों को 30 सितंबर को अदालत में पेश कर के जेल भिजवा दिया.

यह विडंबना रही कि निर्मला को अपने बैंक मैनेजर पति के खून से हाथ रंगने के बाद भी प्रेमी नहीं मिल सका. अभी 6वीं और 7वीं कक्षा में पढ़ने वाली निर्मला की 2 बेटियां बड़ी होने के बाद भी अपनी मां को कभी माफ नहीं कर सकेंगी. और तो और निर्मला के 3 साल के अबोध बेटे से भी मां का आंचल छिन गया है.

Love Crime : भाभी को देवर ने तमंचे से मारी गोली

Love Crime : बबलू बड़े भाई की साली सोनी से प्यार करने लगा था, सोनी भी उसे प्यार करती थी. लेकिन बदली परिस्थितियों में जब सोनी की शादी बबलू के दूसरे भाई अनिल से हो गई तो प्रेमिका से भाभी बनी सोनी के नए रिश्ते को बबलू बरदाश्त नहीं कर पाया और…

सियाराम के तीसरे नंबर के बेटे अनिल कुमार उर्फ बंटू की पत्नी सोनी उर्फ सुनीता ने शादी के डेढ़ साल बाद बेटे को जन्म दिया था. अनिल ने जब फोन कर के यह खुशखबरी गांव में रह रहे अपने पिता को दी तो पूरे परिवार में खुशी छा गई. घर में जश्न मनाने की तैयारियां शुरू हो गईं. कार्यक्रम में शामिल होने के लिए अनिल भी पत्नी सोनी और नवजात शिशु के साथ गांव आ गया. किसी ने सोचा भी नहीं था कि परिवार की खुशियों को अचानक ऐसा ग्रहण लगेगा कि 2-2 लाशें बिछ जाएंगी.

उत्तर प्रदेश के जिला फिरोजाबाद के थाना नगला खंगर क्षेत्र में एक गांव है गलपुरा. इस गांव में रहने वाले सियाराम के 5 बेटे हैं, इन में 3 बेटों राजेश, संजय व अनिल कुमार उर्फ बंटी की शादी हो चुकी थी, जबकि 19 साल का श्यामगोपाल उर्फ बबलू व सब से छोटा लवकुश अभी अविवाहित थे. बड़े बेटे राजेश की सीमा से, संजय की विनीता से और अनिल उर्फ बंटी की शादी सोनी से हुई थी. 22 साल की सोनी की शादी डेढ़ साल पहले ही अनिल के साथ हुई थी. संजय की पत्नी विनीता और अनिल की पत्नी सोनी सगी बहनें थीं. दोनों का मायका जिला इटावा के थाना जसवंतनगर क्षेत्र के गांव बनामई में था.

13 अगस्त, 2018 को सोमवार था. परिवार के लोग सुबह ही खेत पर धान की रोपाई करने चले गए थे. बहू विनीता कुछ देर पहले ही घर वालों के लिए खाना ले कर खेत पर गई थी. घर में केवल लवकुश और उस की भाभी सोनी ही थे. अचानक घर के अंदर से गोली चलने की आवाज आई. कोई कुछ समझ पाता इस से पहले ही घर के अंदर से लवकुश का बड़ा भाई श्यामगोपाल उर्फ बबलू तेजी से बाहर निकला, उस के हाथ में तमंचा था. घर से 10-12 कदम की दूरी पर गली में पहुंचते ही उस ने अपने सिर में गोली मार ली. गोली लगते ही वह रास्ते में गिर गया. उस के सिर से खून बह रहा था.

गोलियां चलने की आवाज सुन कर गांव में सनसनी फैल गई. सियाराम के घर के बाहर गांव वालों की भीड़ लग गई. घर के अंदर बबलू की भाभी सोनी और घर के बाहर देवर बबलू की लहूलुहान लाशें पड़ी थीं. बबलू की लाश के पास ही .315 बोर का तमंचा भी पड़ा था. बबलू ने अपनी भाभी सोनी को गोली मार कर हत्या करने के बाद खुद को गोली मार ली थी. सियाराम के दूसरे नंबर के बेटे संजय की शादी विनीता के साथ हुई थी. शादी के समय संजय की साली सोनी और भाई बबलू जवानी की दहलीज पर कदम रख रहे थे. कभीकभी बबलू अपनी भाभी को विदा कराने उस के मायके बनामई जाता था.

वहीं पर सोनी और बबलू की नजरें एकदूसरे से टकरा गईं. बबलू को सोनी अच्छी लगी. सुंदर, चंचल और अल्हड़ सोनी को भी गठे बदन का बबलू मन भा गया. कुछ ही मुलाकातों में दोनों एकदूसरे को दिल दे बैठे थे. दोनों के बीच काफीकाफी देर तक प्यार भरी बातें होने लगीं. बातों के बीच चुहलबाजी भी खूब होती. दोनों ही एकदूसरे को पसंद करने लगे थे. एक दिन अकेले में मौका पा कर बबलू ने सोनी का हाथ अपने हाथों में ले कर कहा, ‘‘इस जन्म में ही नहीं, हम 7 जन्मों तक साथ रहेंगे.’’

दोनों ने एकदूसरे का साथ निभाने की कसमें खाईं. प्यार के इजहार के बाद दोनों भविष्य के इंद्रधनुषी सपने संजोने लगे. अब दोनों को केवल सही वक्त का इंतजार था. सोनी और बबलू अपने प्यार की पीठ पर सवार हो कर भविष्य के सपने देख रहे थे. लेकिन इसी बीच सोनी की बड़ी बहन विनीता को अपने देवर और बहन के बीच पनपे प्रेम की खबर लग गई. विनीता ने यह बात घरपरिवार के लोगों को बता दी. कच्ची उम्र के दोनों प्रेमी कोई ऐसा भी कदम उठा सकते थे, जिस से परिवार की बदनामी हो. इसलिए उन लोगों ने सोनी की शादी बबलू के बड़े भाई अनिल से तय कर दी. बबलू चाह कर भी इसलिए कुछ नहीं कर सका, क्योंकि शादी दोनों परिवारों की मरजी से तय हुई थी.

दरअसल सोनी के घर वालों को मालूम था कि बबलू सोनी से उम्र में छोटा तो है ही, गुस्सैल स्वभाव का भी है. वह शराब भी पीता था. जबकि अनिल की हेयर कटिंग की दुकान थी, जिस से वह ठीकठाक पैसा कमा लेता था. दूसरी ओर सोनी और बबलू के दिलों में बराबर की आग लगी थी. बबलू इस इंतजार में था कि भाई अनिल की शादी हो जाने के बाद वह अपनी प्रेमिका सोनी से शादी करेगा. लेकिन अचानक ऐसी स्थिति बन जाएगी, इस बारे में उस ने सोचा तक नहीं था.

सोनी ने तो कल्पना भी नहीं की थी कि उसे अपने प्रेमी बबलू के घर उस के भाई की पत्नी बन कर जाना पड़ेगा. उस के दिल के अरमान आंसुओं में बह गए थे. मजबूरी में उस ने दिल पर पत्थर रख लिया. अंतत: अनिल और सोनी की शादी हो गई. सोनी बबलू की भाभी बन कर उसी के घर में आ गई थी. प्रेमिका की शादी बड़े भाई से हो जाने की वजह से बबलू पूरी तरह टूट गया. वह चोरीछिपे सोनी से अपने प्यार का इजहार करता, लेकिन उस की ओर से अब कोई जवाब नहीं मिलता था. घर में सोनी के जेठजेठानी, बहन, ससुर, सास जावित्री के अलावा छोटा देवर लवकुश भी था. एक तो संयुक्त परिवार, दूसरे बदनामी का डर, इसलिए सोनी ने शादी के बाद बबलू के प्यार को हवा नहीं दी.

इस से बबलू परेशान रहने लगा. वह बिन पानी की मछली की तरह तड़प रहा था. गुस्सेबाज तो वह था ही, ऐसी स्थिति में उस का गुस्सा और भी बढ़ गया. घर हो या बाहर वह किसी से भी उलझ पड़ता था. अब गांव में बबलू का मन नहीं लगता था. घर वालों के कहने पर बबलू गुड़गांव की एक कंपनी में काम करने चला गया. बबलू घर से दूर जरूर चला आया, लेकिन सोनी की यादों को दिल से दूर नहीं कर सका. उस के साथ बिताए पल उसे याद आते रहते थे. सोतेजागते उस की आंखों के सामने सोनी की तसवीर घूमती रहती थी. वह चाहता था कि सोनी को भूल जाए, लेकिन चाह कर भी वह उसे भुला नहीं पा रहा था.

इसी बीच अनिल अपनी पत्नी सोनी को ले कर सिरसागंज चला गया और वहां किराए का मकान ले कर रहने लगा. सिरसागंज में अनिल की हेयर कटिंग की दुकान भदान रेलवे फाटक के पास थी. सब कुछ ठीकठाक चल रहा था. शादी के डेढ़ साल बाद सोनी ने बेटे को जन्म दिया. इस की जानकारी उस ने गांव में रह रहे अपने परिवार को दी, तो सभी खुश हुए. उन्होंने जश्न मनाने की तैयारी शुरू कर दी. घटना से 20 दिन पूर्व अनिल अपनी पत्नी व 25 दिन के बच्चे के साथ गांव आ गया. उधर घर में सोनी के आ जाने की जानकारी मिलने पर बबलू भी गुड़गांव से गांव आ गया. घर पहुंचते ही उस की नजर भाभी बनी सोनी से मिली तो दिल में समाई पुरानी यादें फिर से ताजा हो गईं.

बच्चे को गोद में ले कर उस ने खूब प्यार किया. एक दिन अकेले में मौका मिलने पर जब उस ने सोनी के सामने अपने प्यार का वास्ता दिया तो सोनी ने उस का कड़ा विरोध करते हुए पुरानी बातें भूल जाने को कहा. बबलू को सोनी से ऐसी उम्मीद नहीं थी. प्रेमिका रह चुकी सोनी की इस बेरुखी से बबलू अंदर तक टूट गया. बबलू को गुड़गांव से आए अभी कुछ दिन ही हुए थे. 13 अगस्त की सुबह 7 बजे सोनी ने लंच बना कर अपने पति अनिल को दिया. लंच ले कर अनिल अपनी कटिंग की दुकान पर चला गया. परिवार के सदस्य खेत पर धान की रोपाई करने गए हुए थे. सियाराम की पत्नी जावित्री 8 दिन पहले अपनी बेटी की ससुराल गांव दौकेली चली गई थी.

जावित्री की बेटी गर्भवती थी, इस लिए उस ने मदद के लिए मां को अपने पास बुला लिया था. उस दिन बबलू सुबह ही घर से निकल कर गांव में घूमने चला गया था. सोनी और उस की बहन विनीता ने मिल कर खाना बनाया. विनीता सभी के लिए खाना ले कर खेतों पर चली गई. छोटा देवर लवकुश कमरे में बैठा खाना खा रहा था. उस समय 10 बजे थे. सुनीता उर्फ सोनी हैंडपंप से पानी भर रही थी. वह एक बार पानी भर कर अंदर रख आई थी. दूसरी बार जब वह पानी लेने जा रही थी तभी बबलू घर आ गया. घर में आते ही उस ने आंगन में खड़ी सोनी के सामने गुस्से में बीती बातों को दोहराया. इस पर सोनी ने झुंझलाते हुए कहा कि तुम्हें घर और समाज में इज्जत से रहना है तो बीती बातों को भूलना होगा.

सोनी के इतना कहते ही बबलू ने अपनी कमर में खोंसा हुआ तमंचा निकाला और उस की कनपटी पर लगा कर गोली चला दी. गोली लगते ही सोनी कटे पेड़ की तरह आंगन में गिर पड़ी. बबलू ने जैसे ही दोबारा तमंचे में कारतूस डालने का प्रयास किया, कमरे में खाना खा रहा छोटा भाई लवकुश चीखता हुआ उस की तरफ दौड़ा और उसे रोकने की कोशिश की. इस पर बबलू तमंचा लोड कर के घर के बाहर भागा और घर से 10-12 कदम चलते ही उस ने तमंचे से अपने सिर में गोली मार ली. गोली लगते ही वह गिर कर ढेर हो गया.

गांव वालों ने इस घटना की सूचना पुलिस और बबलू के घर वालों को दी. जब यह खबर खेत पर पहुंची, तब सभी लोग खाना खा रहे थे, घर पर खूनी खेल खेला जाएगा इस का उन्हें अंदाजा नहीं था. सभी खाना छोड़ कर घर की ओर दौड़े. उधर कुछ गांव वालों ने अनिल की दुकान पर जा कर उस की पत्नी की हत्या की जानकारी दी. अनिल दुकान बंद कर के आ गया. सूचना मिलते ही नगला खंगर के थानाप्रभारी दीपक चंद्र दीक्षित, क्षेत्राधिकारी सिरसागंज अजय कुमार चौहान घटनास्थल पर पहुंच गए. उन्होंने इस वारदात की सूचना अपने उच्चाधिकारियों को भी दे दी. एसएसपी फिरोजाबाद सचिंद्र पटेल, एसपी (ग्रामीण) महेंद्र सिंह गांव गलपुरा पहुंच गए. पुलिस अधिकारियों ने घटनास्थल का निरीक्षण करने के साथसाथ गांव वालों व घर वालों से घटना की विस्तार से जानकारी ली.

पुलिस ने आंगन में पड़ी सोनी की लाश के पास से खाली कारतूस तथा बबलू की लाश के पास से तमंचा व उस में फंसा खोखा जब्त कर लिया. मृतका का पति अनिल जब गांव पहुंचा तो घर पर पुलिस व गांव वालों की भीड़ मौजूद थी. जावित्री को भी सूचना दे कर बुला लिया गया था. जावित्री ने जैसे ही बहू सोनी की लाश देखी तो वह उस से लिपट कर रोने लगी. गांव वालों के अनुसार बबलू सोनी को गोली मारने के बाद उस की लाश पर ही खुद को गोली मारना चाहता था, लेकिन भाई लवकुश के शोर मचाने पर उस ने घर के बाहर जा कर आत्महत्या कर ली.

घटना के संबंध में अनिल ने अपने भाई बबलू के खिलाफ अपनी पत्नी सोनी की हत्या की रिपोर्ट भादंवि की धारा 302 के अंतर्गत थाना नगला खंगर में दर्ज कराई. पुलिस ने दोनों शवों को पोस्टमार्टम के लिए जिला अस्पताल भेज दिया. बबलू के सिर इश्क का जुनून इस कदर हावी था कि वह अपना पराया कुछ भी नहीं सोच पा रहा था. इसी के चलते उस ने यह घातक कदम उठाया. उस ने भाई की बसीबसाई गृहस्थी तो उजाड़ी ही, उस के दुधमुंहे बच्चे से उस की मां भी छीन ली.

सोनी को बेटा पैदा होने पर सियाराम के परिवार में खुशियां मनाई जानी थीं, लेकिन परिवार की खुशियों में 2-2 मौतों से ग्रहण लग गया.

— कथा पुलिस सूत्रों पर आधारित

जीजासाली का खूनी इश्क : प्रेम ने तोड़ी सीमा

UP News : 9 साल पहले जब अजय साहू उर्फ मोहित ने सरिता से विवाह किया था, तब सरिता से छोटी साली कविता 15 साल की थी. इस के 3 साल बाद 18 साल की उम्र में वह भरीपूरी युवती लगने लगी थी. ससुराल में अजय के सासससुर के अलावा उस की 2 सालियां कविता और सविता थीं, कोई साला नहीं था. सविता काफी छोटी थी, इसलिए अजय को खिलानेपिलाने व उस की सुखसुविधा का खयाल रखने की जिम्मेदारी बड़ी साली कविता की थी. कविता भी अपने जीजा का हुक्म मानने के लिए एक पैर पर खड़ी रहती थी.

जीजा की जरूरतों का खयाल रखना साली का कर्त्तव्य होता है, इस में कोई नई बात नहीं है. अजय भी इन बातों को सामान्य रूप से लेता था. लेकिन एक दिन अचानक ही वह कविता के अद्भुत सौंदर्य की तेज रोशनी में चौंधिया गया. एक दिन जब अजय ससुराल पहुंचा तो कविता किसी परिचित के यहां मांगलिक समारोह में जाने के लिए तैयार हो रही थी. कविता ने सुर्ख लाल जोड़ा पहन रखा था और अपने बाल खुले छोड़ रखे थे. कलाई में चूडि़यां और चेहरे पर सादगी भरा शृंगार. आंखों में काजल की रेखा और होंठों पर हलकी सी लिपस्टिक. उसे देख कर अजय की नजरें ऐसी चिपकीं कि हटने को ही तैयार नहीं हुईं.

कविता ने अजय को मीठा और पानी ला कर दिया, फिर चाय बना कर पिलाई. कुछ देर उस के पास बैठ कर अपनी बहन की खैरियत पूछी. फिर उस के पास से उठते हुए बोली, ‘‘जीजाजी, आप आराम करो, मैं जल्दी ही लौट आऊंगी.’’

कविता चली गई और वह देखता रह गया. अजय बैड पर लेट गया और कविता के बारे में सोचने लगा कि इतनी सुंदर तो सरिता तब भी नहीं लगी थी, जब दुलहन बन कर उस के घर आई थी. अजय ने अपने मन से कविता का खयाल निकालने की बहुत कोशिश की, पर कामयाब नहीं हो सका. कविता के सौंदर्य की तेज रोशनी से उस ने जितना दूर जाना चाहा, उतना ही मस्तिष्क से अंधा होता गया. अजय सोचने लगा कि मेरी शादी भले ही सरिता से हो गई पर कविता भी तो उस की साली ही है. साली यानी आधी घरवाली.

अजय के मन में पाप समाया तो वह कविता को पाने की जुगत में लग गया. उत्तर प्रदेश के कौशांबी जिले के गांव पूरब थोक में राजेश चंद्र अपने परिवार के साथ रहते थे. वह खेतीबाड़ी का काम करते थे. परिवार में पत्नी उषा और 3 बेटियां सरिता, कविता और सविता थीं. बेटा न होने का राजेश को कतई गम नहीं था. उन्होंने तीनों बेटियों की बेटों से बढ़ कर परवरिश की थी. सरिता ने इंटर की पढ़ाई पूरी कर ली थी. कौशांबी के ही कुम्हियवा गांव में रामहित साहू रहते थे. वह भी खेतीकिसानी करते थे. उन के 3 बेटे थे, जिस में अजय उर्फ मोहित सब से बड़ा था. अजय ने इंटरमीडिएट तक पढ़ाई करने के बाद अपना खुद का काम करने का निर्णय लिया.

काफी सोचविचार के बाद उस ने डीजे संचालन का काम शुरू किया. उस का यह काम अच्छा चल गया. अपने इसी काम के दौरान एक वैवाहिक समारोह में उस की मुलाकात सरिता से हुई. सरिता उस समारोह में काफी सजधज कर आई थी. इस वजह से वह काफी खूबसूरत दिख रही थी. डीजे पर डांस करने के दौरान सरिता ने ‘डीजे वाले बाबू मेरा गाना बजा दो’ गाना चलाने की मांग की. अजय औपरेटर के पास ही खड़ा था. उस की पीठ सरिता की तरफ थी. मधुर आवाज सुनते ही अजय पलटा तो पलटते ही सरिता को देखा तो देखता ही रह गया. अजय काफी स्मार्ट था. उसे अपनी तरफ देखते पा कर सरिता भी लजा गई और बोली, ‘‘सौरी, मैं आप को डीजे वाला समझ बैठी. इसलिए अपनी पसंद का गाना चलाने के लिए कह दिया.’’

अजय उस के भोलेपन पर मुसकराते हुए बोला, ‘‘आप से कोई गलती नहीं हुई, मैं डीजे वाला बाबू ही हूं यानी इस डीजे का मालिक.’’

‘‘ओह…तो यह बात है, तो मेरा पसंदीदा गाना लगवा दें, जिस से मैं डांस कर सकूं.’’ सरिता ने तिरछी नजरों से अजय को निहारते हुए कहा.

अजय ने औपरेटर को बोल कर ‘डीजे वाले बाबू…’ गाना लगवा दिया. गाना भारीभरकम स्पीकरों पर गूंजने लगा तो सरिता अपनी सहेलियों के साथ डांस करने लगी. वह डांस कर जरूर रही थी, लेकिन उस का सारा ध्यान अजय पर ही था. अजय भी उसे देखते हुए मुसकरा रहा था. वह इशारे से बारबार सरिता की तारीफ भी कर रहा था. उस की तारीफ पा कर सरिता लजा कर दूसरी ओर देखने लगती थी. डांस खत्म होने के बाद भी दोनों वहां से हटने को तैयार नहीं थे. उन की निगाहें मिलने के बाद अब उन के दिल मिलने को तड़प रहे थे. वह तड़प उन की निगाहों में बखूबी नजर आ रही थी.

आखिर अजय ने उसे इशारे से अपने पीछेपीछे आने को कहा तो सरिता उस का इशारा समझ कर दिल के हाथों मजबूर हो कर उस के पीछेपीछे चली गई.

अजय एकांत में सुनसान जगह पर खड़ा हुआ तो शरमातेसकुचाते सरिता भी वहां पहुंच गई और पूछने लगी, ‘‘आप ने मुझे इशारे से अपने पीछे आने को क्यों कहा?’’

‘‘क्यों…क्या तुम्हें वास्तव में नहीं पता?’’ अजय उस की आंखों में देखते हुए बोला, ‘‘जरा अपने दिल पर हाथ रख कर अपनी धड़कनों को सुनो, जवाब मिल जाएगा.’’

‘‘सब दिल का ही तो मामला है, ये ऐसा मजबूर कर देता है कि इंसान अपनी सुधबुध खो बैठता है. और इंसान वही करने लगता है जो यह चाहता है. मैं भी दिल के हाथों मजबूर हो कर यहां आ गई हूं.’’ सरिता अपने दिल की व्यथा उजागर करती हुई बोली.

‘‘ये दिल ही तो है जब इस के अपने मन का मीत मिल जाता है तो प्यार की घंटी बजा कर आगाह कर देता है. देखो न, जब तुम्हारे दिल को मेरे दिल ने पुकारा तो तुम्हारा दिल मेरे पीछेपीछे खिंचा चला आया. कहने को हम अजनबी हैं, लेकिन हमारे दिलों ने हमारे बीच प्यार के रिश्ते की नींव रख दी है, जिस पर हमें मिल कर प्यार की इमारत खड़ी करनी है. अगर मेरा प्यार मेरा साथ मंजूर हो तो मेरे पास आ कर गले लग जाओ.’’ कहते हुए अजय ने बड़ी चाहत भरी नजरों से देखा तो सरिता उस की ओर खिंची चली गई और उस के गले लग गई.

यह ऐसा प्यार था, जिस ने बिना एकदूसरे के बारे में जाने उन के दिलों को मिला दिया था. उस के बाद उन दोनों ने एकदूसरे के बारे में जाना, खूब ढेर सारी बातें कीं. मोबाइल नंबर एकदूसरे को दिए. फिर मिलने का वादा कर के जुदा हो गए. उस दिन के बाद उन में बराबर बातें और मुलाकातें होने लगीं. करीब 9 साल पहले दोनों ने प्रेम विवाह कर लिया. सरिता के घर वालों को कोई ऐतराज नहीं था लेकिन अजय के घर वाले इस प्रेम विवाह के खिलाफ थे. अजय विवाह करने के बाद कौशांबी के सिराथू कस्बे में सैनी रोड पर किराए का कमरा ले कर सरिता के साथ रहने लगा. अजय अपनी जिंदगी से काफी खुश था.

सरिता की छोटी बहन कविता की खूबसूरती अजय का मन लुभाती तो थी, पर उस की नजरें बेईमान नहीं थीं. लेकिन उस दिन कविता को सुर्ख लाल जोड़े में सजासंवरा देखा तो वह उसे दुलहन सी हसीन लगी. बस, जीजा के मन में साली के लिए फितूर समा गया. कविता के बारे में सोचते हुए अजय सो गया और सपने में भी कविता उस का चैन हरती रही. सुखद सपनों में खोया अजय न जाने कब तक सोया रहता कि उस की सास उषा ने आ कर जगा दिया, ‘‘अजय बेटा उठो, शाम हो गई है.’’

अजय हड़बड़ा कर उठ बैठा, ‘‘मैं दोपहर को सोया था और अब शाम ढल रही है. मम्मी, आप ने मुझे जगाया क्यों नहीं.’’

‘‘तुम्हारे आराम में विघ्न न पड़े, इसलिए मैं ने नहीं जगाया.’’ उषा बोली, ‘‘तुम उठ कर हाथमुंह धो लो, तब तक कविता चाय बना कर ले आएगी.’’

अजय ने बाथरूम में जा कर हाथमुंह धोया और तौलिए से पोंछने के बाद कुरसी पर आ कर बैठ गया. सामने किचन में कविता खड़ी चाय बना रही थी.

अब उस के शरीर पर लाल जोड़े की जगह सफेद सलवारसूट था. कलाई में चूडि़यां भी नहीं थीं. उस ने चेहरा पानी से जरूर धो लिया था, पर मेकअप की मौजूदगी अब भी नुमायां हो रही थी.

आंखें मिलते ही कविता मुसकराई, ‘‘जीजाजी, खूब मजे से सोए.’’

अजय ने मन ही मन में जवाब दिया, ‘सपने में बिजली गिरा कर मासूम बन रही हो.’ लेकिन जुबान से बोला, ‘‘मजा ले कर सो रहा था या कजा से गुजर रहा था, बाद में बताऊंगा. पहले तुम बताओ, कब आईं?’’

‘‘थोड़ी ही देर में आ गई थी. घर आ कर देखा तो आप सो गए थे. इसलिए मैं भी घर के कामों मे लग गई थी.’’ कविता ने मुसकरा कर कहा और उस के सामने टेबल पर चाय का कप रख दिया. फिर उसी के पास बैठ गई.

अजय को उस समय वहां अपनी सास की मौजूदगी खल रही थी. कविता अकेली होती तो वह उसे रिझाने का प्रयास करता. अजय की मजबूरी यह थी कि वह न सास को वहां से जाने को कह सकता था और न कविता का हाथ पकड़ कर अकेले में बात करने के लिए ले जा सकता था. रात को खाना खाने के बाद अजय को कविता के कमरे में सोने के लिए पहुंचा दिया गया. और कविता सविता के कमरे में उस के साथ सो गई. अगले दिन सुबह होने पर अजय के सासससुर खेतों पर चले गए. सविता स्कूल चली गई. इस से अजय को कविता से बात करने का मौका मिल गया. उस समय कविता नहाने जा रही थी. अजय ने उस से पूछा, ‘‘कविता, नहाने के बाद तुम कौन से कपड़े पहनोगी?’’

कविता ने सहजता से उत्तर दिया, ‘‘मुझे कहीं जाना तो है नहीं, इसलिए घर में जो पहनती हूं, वही पहन लूंगी.’’

‘‘घर में पहनने वाले नहीं,’’ अजय ने मन की परतें उस के सामने खोलनी शुरू कर दीं, ‘‘तुम वही लाल जोड़ा पहनो, जो तुम ने कल पहना था.’’

‘‘वह रोज पहनने के लिए थोड़े ही है,’’ कविता मुसकरा कर बोली,‘‘ वह लाल जोड़ा विशेष अवसरों पर पहनने के लिए बनवाया है. कहीं विशेष प्रोग्राम होता है, तभी पहनती हूं.’’

अजय कविता के सामने आ कर खड़ा हो गया और उस की आंखों में आंखें डाल कर बोला, ‘‘तुम मुझे चाहती हो न?’’

कविता जीजा के मन का मैल नहीं समझ सकी. उस ने सहजता से जवाब दिया, ‘‘हां, चाहती हूं.’’

‘‘अगर तुम मुझे चाहती होगी तो वही लाल जोड़ा पहनोगी.’’

‘‘जीजाजी, मेरी समझ में नहीं आ रहा है कि तुम लाल जोड़े को पहनने की जिद क्यों कर रहे हो?’’ वह बोली.

‘‘इसलिए कि उसे पहन कर तुम दुलहन जैसी लगती हो.’’

‘‘इस का मतलब यह हुआ कि आप लोग मेरा विवाह कर के मुझे इस घर से निकालने पर तुले हैं.’’ कविता हंसी, ‘‘अब तो मैं उसे हरगिज नहीं पहनने वाली.’’ कह कर कविता तेजी से बाथरूम की ओर बढ़ गई.

लड़की ‘न’ कहे तो उस की ‘हां’ समझना चाहिए, सोच कर अजय के होंठों पर मुसकान फैल गई. अजय पहले ही तैयार हो चुका था. इसलिए वह बैठ कर अखबार पढ़ने लगा. कुछ देर बाद जब कविता नहा कर तैयार हुई तो मन ही मन खयाली पुलाव पका रहे अजय ने देखा तो जैसे उस के अरमान बिखर कर रह गए. कविता ने लाल जोड़ा नहीं पहना था. उस ने मेहंदी कलर का सलवारसूट पहन रखा था. उस सलवार सूट में भी उस का सौंदर्य कयामत ढा रहा था. भीगे बालों से टपकती बूंदें उस के चेहरे पर आ कर ठहर गई थी, जिस से भीगाभीगा उस का सौंदर्य दिल को लुभाने वाला था. अजय बेकाबू हो उठा और उस ने कविता को बांहों में भर लिया और उस के गालों को चूम लिया.

कविता स्तब्ध रह गई. जीजा ने यह क्या गजब कर डाला. किसी तरह उस ने स्वयं को अजय के चंगुल से आजाद किया और कमरे से निकल भागी. तभी सास भी घर लौट आई. जबकि उन्होंने दीदी से प्रेम विवाह किया है. दोपहर को अजय को भोजन कराने के बाद उषा किसी काम से बाजार चली गई. अजय कविता के कमरे में गया और उस के पास बैठते हुए बोला, ‘‘कविता जब से तुम को लाल जोड़े में देखा है, दिल वश में नहीं है. कुछ करो कविता, वरना मैं तुम्हारे वियोग में तड़पतड़प कर मर जाऊंगा.’’

‘‘अब मैं क्या कर सकती हूं, आप की शादी तो सरिता दीदी से हो गई और वह भी आप ने लव मैरिज की है.’’

‘‘तुम पहले मिल जाती तो सरिता से बिलकुल शादी नहीं करता. लेकिन अब भी देर नहीं हुई है शादी टूटने में कितनी देर लगती है. तुम हां बोलो तो मैं सरिता को तलाक दे कर तुम से विवाह करने का जतन करूं.’’ अजय बेबाकी से बोला.

‘‘धत्त,’’ कविता हंसते हुए बैड से उठ खड़ी हुई, ‘‘जीजा, तुम पागल हो गए हो.’’

उस के बाद उस ने हाथ छुड़ाया और कमरे से जाने लगी तो अजय बेसब्र हो उठा और उस का हाथ पकड़ कर खींच कर बैड पर गिरा लिया. इस के बाद वह उसे पागलों की तरह चूमने लगा.

कविता के कुंवारे बदन को परपुरुष का कामुक स्पर्श मिला तो वह भी बहक गई. उस के बाद उन के बीच अनैतिक रिश्ता कायम हो गया. कविता को अपने जीजा के प्यार में गजब का न भूलने वाला आनंद मिला. इस के बाद जब तक अजय रहा, वह कविता के साथ मजे लेता रहा. संबंधों का यह सिलसिला चलता रहा. दूसरी ओर सरिता ने एक बेटी को जन्म दिया, जिस का नाम तनु रखा गया. लेकिन अजय तो कविता के प्यार में पागल था. अब वह ससुराल के अधिक चक्कर लगाने लगा. ससुराल वालों का माथा ठनका. जब नजर रखी तो उन्होंने कविता के साथ अजय की खिचड़ी पकती देखी. इस से पहले कि कोई अनर्थ हो जाए राजेश चंद्र ने बेटी कविता का विवाह कौशांबी के चरवा गांव निवासी नीरज से कर दिया. यह 5 साल पहले की बात है.

विवाह का एक साल बीततेबीतते कविता भी एक बेटी की मां बन गई. अब वह कभीकभार ही मायके आ पाती थी. उस के आने पर अजय ससुराल पहुंच जाता था. दोनों की चाहत तन मिलने से कुछ समय के लिए पूरी हो जाती, लेकिन फिर वही पहले जैसा हाल हो जाता. दोनों को अपने बीच की दूरी बहुत अखर रही थी. कविता पूरी तरह से अजय के प्यार में रंगी थी. इसलिए उस का ससुराल में मन नहीं लगता था. एक साल पहले वह ससुराल से मायके आई तो वापस लौट कर ससुराल नहीं गई. अजय की खुशी का ठिकाना न रहा. वह पहले की भांति उस से मिलने जाने लगा. अजय की ससुराल वाले सब जान कर भी कुछ न कर पाते. वह चुपचाप तमाशा देखते रहे.

सरिता को भी अपने पति के अपनी बहन कविता से संबंध की जानकारी हो गई. इस के बाद अजय और सरिता में विवाद होने लगा. अजय एक बहन का पति था तो दूसरे का प्रेमी. वह दोनों के जीवन से खेल रहा था. 13 अक्तूबर को अजय इलैक्ट्रौनिक्स का सामान खरीदने के लिए सुबह प्रयागराज चला गया. शाम 6 बजे जब वह घर लौटा तो दरवाजा अंदर से बंद नहीं था, धक्का देते ही खुल गया. जैसे ही वह अंदर पहुंचा तो कमरे में उस की पत्नी सरिता और 7 वर्षीय बेटी तनु की लाशें पड़ी थीं. यह देख कर वह चीखनेचिल्लाने लगा. शोर सुन कर आसपास के लोग वहां आ गए. घटना की खबर मिलने पर क्षेत्र के विधायक शीतला प्रसाद पटेल भी वहां पहुंच गए. अजय के कमरे में उस की पत्नी व बेटी की लाशें देखने के बाद उन्होंने सैनी कोतवाली के इंसपेक्टर प्रदीप सिंह को घटना की सूचना दे दी.

इंसपेक्टर प्रदीप सिंह ने अपने उच्चाधिकारियों को दोहरे हत्याकांड की सूचना दे दी. फिर घटनास्थल की ओर रवाना हो गए. घटनास्थल पर पहुंच कर उन्होंने लाशों का निरीक्षण किया. सरिता की लाश कमरे में मेज के पास जमीन पर पड़ी थी. उस के गले को चाकू से रेता गया था. शरीर पर भी 4-5 घाव के निशान थे. लाश के पास काफी खून पड़ा था, जो सूख चुका था. लाश अकड़ी हुई थी. दरवाजे के पास सरिता की बेटी तनु की लाश पड़ी थी. उस के गले पर दबाए जाने के निशान मौजूद थे. तनु की लाश में काफी चींटियां लग गई थीं. निरीक्षण करने के बाद अनुमान लगाया गया कि दिन में किसी वक्त दोनों को मारा गया है. घर में किसी व्यक्ति द्वारा जबरन घुसने का कोई सबूत नहीं मिला. न ही आसपास पड़ोस में किसी ने घटना को अंजाम देने के समय किसी प्रकार का शोरशराबा सुना था. इस का मतलब यह कि हत्यारा कोई परिचित व्यक्ति है.

इसी बीच एसपी अभिनंदन, एएसपी समर बहादुर सिंह और सीओ (सिराथू) श्यामकांत भी डौग स्क्वायड और फोरैंसिक टीम के साथ पहुंच गए. फोरैंसिक टीम साक्ष्य जुटाने में लग गई. उच्चाधिकारियों ने लाश व घटनास्थल का निरीक्षण किया. तत्पश्चात अजय साहू से पूछताछ की तो उस ने सुबह प्रयागराज जाने और शाम 6 बजे घर आने पर घटना का पता होने की बात बताई. सीसीटीवी फुटेज देखी गई. लेकिन कोई संदेहास्पद व्यक्ति नहीं दिखा. इंसपेक्टर प्रदीप सिंह को अजय पर ही शक था. उन्होंने अपना शक एसपी अभिनंदन को बताया. एसपी अभिनंदन की सोच भी वही थी. अजय ने बताया था कि वह दोपहर 12 बजे के करीब प्रयागराज गया था. उस के बाद ही लगभग 2-3 बजे घटना हुई होगी. लेकिन 3-4 घंटे में लाश अकड़ नहीं सकती.

ऐसा तभी होता है, जब घटना हुए 10-12 घंटे का समय हो जाए. यानी सुबह के समय तब अजय घर पर ही था. अजय ने ही हत्या कर के सारी कहानी गढ़ी है, इस का विश्वास हुआ तो अजय से और सख्ती से पूछताछ के लिए उसे थाने ले जाया गया. लेकिन इस से पहले दोनों लाशों को पोस्टमार्टम के लिए मोर्चरी भेज दिया गया. उन्होंने अज्ञात के खिलाफ हत्या की रिपोर्ट दर्ज करा दी. पूछताछ करने पर वह चुप ही रहे लेकिन सविता फट पड़ी. उस ने बताया कि कविता दीदी और जीजा का आपस में काफी लगाव था. इंसपेक्टर प्रदीप सिंह का शक सही साबित हुआ. इस के बाद अजय से थाने में सख्ती से उन्होंने पूछताछ की तो उस ने अपना जुर्म स्वीकार कर लिया और इस जुर्म में उस ने साली कविता के भी शामिल होने की बात स्वीकारी. दोनों ने ही मिल कर सरिता की हत्या की साजिश रची थी. इस के बाद कविता को भी हिरासत में ले कर पूछताछ की गई.

पूछताछ में पता चला कि अजय और कविता एकदूसरे से विवाह कर के साथ रहना चाहते थे. सरिता उन के संबंधों का विरोध कर रही थी, वह उन के रास्ते में आ रही थी. इसलिए कविता और अजय ने मिल कर सरिता की हत्या की योजना बनाई. अजय ने कविता से बात करने के लिए दूसरा नंबर ले रखा था, उसी से बराबर कविता से बात करता था. उसी नंबर से बात कर के उन्होंने हत्या का षडयंत्र रचा. 13 अक्तूबर की सुबह 6 बजे अजय ने घर में रखे सब्जी काटने वाले चाकू से नींद में सोई सरिता का गला काट दिया. सरिता चीख भी न सकी, जमीन पर गिर कर तड़पने लगी. अजय ने फिर उस के शरीर पर कई वार किए, जिस से सरिता की मौत हो गई. अपने पिता के हाथों मां को मरता देख कर मासूम तनु जाग गई और डर की वजह से रोते हुए बाहर की तरफ भागने लगी. अजय ने दरवाजे तक पहुंचने से पहले ही उसे पकड़ लिया और उस का सिर दीवार पर पटक दिया.

सिर में लगी चोट से तनु बेहोश हो गई. अजय ने फिर उस का गला घोंट कर उस की भी हत्या कर दी. अजय तनु को मारना नहीं चाहता था लेकिन भेद खुलने के डर से उसे बेटी की हत्या करनी पड़ी. उस ने हत्या के बाद कविता से मोबाइल पर बात की और दोनों की हत्या करने की बात बता दी. इस के बाद वह बाजार गया और कई जगह जानबूझ कर गया, जिस से वह सीसीटीवी कैमरों में कैद में आ जाए. एक जगह उस ने समोसा खरीद कर भी खाया. इस के बाद वह प्रयागराज चला गया. वहां वह शाहगंज इलाके में कई उन इलैक्ट्रौनिक सामानों की दुकानों पर गया, जहां सीसीटीवी कैमरे लगे थे. अपने प्रयागराज में होने के सबूत छोड़ कर शाम को वह कौशांबी लौट आया. यहां लौटने के बाद भी कुछ जगहों पर गया.

शाम 6 बजे वह कमरे पर पहुंचा और लाश देख कर शोर मचाने लगा. लेकिन काफी होशियारी के बाद भी वह कविता के साथ कानून के शिकंजे में फंस गया. इंसपेक्टर प्रदीप सिंह ने दोनों आरोपियों को न्यायालय में पेश किया, वहां से दोनों को जेल भेज दिया गया.

—कथा पुलिस सूत्रों पर आधारित