Jharkhand News : 10 दिन तक सिर कटी लाश बनी रही रहस्य, आखिर किसकी थी

Jharkhand News : युवावस्था में किसी लड़की के कदम बहक जाएं तो उसे सही रास्ते पर लाना कोई आसान नहीं होता. मोहम्मद जमशेद ने बहकी हुई बेटी सुफिया को सही रास्ते पर लाने की लाख कोशिश की, लेकिन वह नहीं मानी. इस का नतीजा जो निकला वह…

झारखंड की राजधानी रांची के थाना ओरमांझी स्थित साई यूनिवर्सिटी के परिसर में छात्र चहलकदमी कर रहे थे. घूमते हुए कुछ छात्र विश्वविद्यालय के पीछे स्थित जीराबेर जंगल में मस्ती करने पहुंच गए थे. जंगल में वे इधरउधर घूमते हुए जब इस के बीचोबीच पहुंचे तो वहां एक महिला की सिरकटी नग्न लाश देख कर चौंक गए. वे उसी क्षण उलटे पांव दौड़ते हुए विश्वविद्यालय के कैंपस पहुंचे. धौंकनी के समान उन की सांसें तेजतेज चल रही थीं. थोड़ी देर बाद जब वे सामान्य हुए तो उन्होंने लाश वाली बात अपने दोस्तों को बता दी.

जिस ने भी यह खबर सुनी, वह चौंके बिना नहीं रह पाया था. मुंहमुंह होते हुए यह खबर विश्वविद्यालय प्रशासन तक पहुंच गई थी. कैंपस के पीछे लाश की सूचना मिलते ही प्रशासनिक भवन में हड़कंप मच गया. सूझबूझ का परिचय देते हुए विश्वविद्यालय प्रशासन ने घटना की जानकारी ओरमांझी थाने के थानाप्रभारी श्याम किशोर महतो को दे दी. विश्वविद्यालय कैंपस के पीछे जीराबेर जंगल में सिरकटी लाश की सूचना मिलते ही थानाप्रभारी श्याम किशोर महतो चौंक गए. फिर वह कुछ पुलिसकर्मियों के साथ घटनास्थल की ओर रवाना हो गए.

उन के साथ एसआई जयप्रकाश दास, संजय दास और 3 सिपाही थे. मौके पर पहुंच कर महिला की सिर कटी नग्न लाश का निरीक्षण किया. हत्यारों ने युवती की बर्बरतापूर्वक हत्या की थी. गहनतापूर्वक छानबीन करने पर पता चला कि हत्यारों ने युवती के गुप्तांग पर धारदार हथियार से कई वार किए थे और सिर भी काट कर साथ लेता गया था. क्योंकि पुलिस ने जंगल की छानबीन की थी, लेकिन मृतका का सिर कहीं नहीं मिला था. थानाप्रभारी श्यामकिशोर महतो ने दिल दहला देने वाली इस घटना की सूचना एसएसपी सुरेंद्र कुमार झा, एसपी (ग्रामीण) नौशाद अली और डीएसपी चंद्रशेखर आजाद को भी दे दी थी.

सूचना पा कर पुलिस अधिकारी घटनास्थल पर पहुंच चुके थे. अधिकारियों ने भी मौके का मुआयना किया. लाश के पास से शराब की कुछ शीशियां भी पाई गई थीं. इस से यही अनुमान लगाया जा रहा था हत्यारों ने युवती के साथ दुष्कर्म करने के पश्चात अपनी पहचान छिपाने के लिए हत्या कर दी होगी और सिर काट कर अपने साथ ले गया होगा और कहीं छिपा दिया होगा. इसलिए लाश की पहचान नहीं हो पाई थी. थानाप्रभारी श्यामकिशोर महतो ने मौके की काररवाई निपटा कर लाश पोस्टमार्टम के लिए रिम्स अस्पताल भिजवा दी और अज्ञात हत्यारों के खिलाफ भादंवि की धारा 302, 324, 201, 120बी भादंसं के तहत मुकदमा दर्ज कर के जांच शुरू कर दी. यह बात 3 जनवरी, 2021 की है.

अगले दिन रांची के सभी स्थानीय अखबारों ने इस घटना को प्रमुखता से छापा. अखबार में छपी खबर पढ़ कर एक दंपति ने ओरमांझी थाने पहुंच कर थानाप्रभारी से मुलाकात की. थानाप्रभारी ने जब दंपति को अस्पताल ले जा कर वह सिरकटी लाश दिखाई तो दंपति ने उस की शिनाख्त अपनी बेटी के रूप में कर ली. तब पुलिस ने थोड़ी राहत की सांस ली. सोचा कि मृतका की शिनाख्त हो गई है तो हत्या की वजह भी सामने आ ही जाएगी. लेकिन अगले दिन हैरान करने वाली बात सामने आई. जिस दंपति ने सिरकटी लाश को अपनी बेटी के रूप में पहचाना था, उन की बेटी जिंदा घर लौट आई थी.

पता चला कि वह अपने घर से भाग कर शहर में छिप कर अपने प्रेमी के साथ कई दिनों से रह रही थी. जब मामला बिगड़ता देखा तो वह मांबाप के सामने आ गई थी. मतलब साफ था कि मृतका उस दंपति की बेटी नहीं थी तो वह कौन थी? यह पुलिस के लिए अबूझ पहेली बन गई. उसी दिन लाश की शिनाख्त के लिए एसएसपी सुरेंद्र कुमार झा ने 25 हजार रुपए का ईनाम रख दिया. यह भी ऐलान कर दिया था पता बताने वाले की पहचान छिपा कर रखी जाएगी. 2 दिन बीत जाने के बावजूद भी न तो मृतका की शिनाख्त हो सकी थी और न ही उस के बारे में कोई सूचना ही मिली. जबकि एसएसपी ने इस केस के खुलासे के लिए 2 टीमें गठित कर दी थीं और मुखबिर भी लगा दिए थे. बावजूद इस के पुलिस के हाथ खाली थे.

तो आईजी (रांची) ने ईनाम की रकम 25 हजार रुपए से बढ़ा कर 50 हजार कर दी. फिर 2 दिनों बाद 8 जनवरी को शासन स्तर से ईनाम की यह रकम 50 हजार से बढ़ा कर सीधे 5 लाख रुपए कर दी गई. लाश की पहचान के लिए ओरमांझी पुलिस ने जिले के सभी शहरी और ग्रामीण इलाके के थानों से पता करा लिया था कि 2 जनवरी के पहले किसी थाने में किसी युवती के गुम होने की कोई रिपोर्ट तो नहीं दर्ज है? लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ. किसी थाने में किसी युवती की गुमशुदगी की कोई रिपोर्ट दर्ज नहीं थी. पुलिस जहां से चली थी वहीं आ कर खड़ी हो गई.

कोई रास्ता नहीं सूझ रहा था कि लाश की पहचान कैसे कराई जाए. 10 जनवरी, 2021 की दोपहर में चान्हों थाने के चटवल के रहने वाली राबिया परवीन और मोहम्मद जमशेद नाम के एक वृद्ध दंपति रिम्स अस्पताल पहुंचे. अखबारों के माध्यम से उन्हें पता चला था कि 2 जनवरी को जीराबेर जंगल में 18 से 22 साल के बीच एक युवती की सिर कटी लाश बरामद हुई थी. जिस दिन लाश बरामद हुई थी, उस के 2 दिन पहले से उन की ब्याहता बेटी सुफिया परवीन अपनी ससुराल चंदवे, थाना पिठौरिया से रहस्यमय तरीके से गायब थी. अपने दामाद शेख बिलाल से जमशेद ने कई बार फोन कर के बेटी के बारे में पूछा भी, लेकिन उस ने कोई ठोस जवाब नहीं दिया.

मोहम्मद जमशेद और उस की पत्नी राबिया परवीन ने अपने स्तर से संबंधियों और रिश्तेदारों सभी से पता लगा लिया. न तो सुफिया वहां गई थी और न ही उस का फोन काम कर रहा था. सुफिया का फोन लगातार बंद आ रहा था. जमशेद ने अखबारों में जब से सिरकटी लाश के बारे में पढ़ा था, तब से उसे देखने के लिए परेशान और बेचैन था. यही सोच कर वह पत्नी को ले कर 10 जनवरी के दोपहर में रिम्स अस्पताल पहुंचे थे. मोहम्मद जमशेद और राबिया परवीन लाश को देखते ही पहचान गए. लाश उन की बेटी सुफिया परवीन की ही थी, जो पिछले 14 दिनों से अपनी ससुराल चंदवे से गायब थी. राबिया परवीन ने लाश के दाईं पैर पर जले के निशान से उस की पहचान की थी.

दरअसल, सुफिया बचपन में आग से बुरी तरह झुलस गई थी. इलाज के बाद सुफिया के जख्म तो भर गए थे लेकिन दाग अभी भी मौजूद थे. लाश की पहचान होते ही थानेदार श्याम किशोर महतो ने दंपति को थाने बुलाया और दोनों से जानकारी हासिल की. मोहम्मद जमशेद के बयान के आधार पर पुलिस की नजरों में दोषी के रूप में उन का दामाद शेख बिलाल चढ़ गया. पुलिस ने मोहम्मद जमशेद से शेख बिलाल की तसवीर मांगी. अगले दिन मोस्टवांटेड के रूप में शेख बिलाल की तसवीर जिले के हर थाने में चस्पा करा दी और अखबारों में भी प्रकाशित करा दी. पता बताने वालों को ईनाम देने की भी घोषणा कर दी थी.

11 जनवरी को मोहम्मद जमशेद ने दामाद शेख बिलाल के बारे में पुलिस को जो जानकारी दी थी, उसी आधार पर पुलिस ने चंदवे स्थित गांव उस के मकान पर जा कर दबिश दी. घर पर शेख बिलाल की पत्नी शब्बो खातून और उस का नाबालिग बेटा मिला. दोनों से पूछताछ करने पर पुलिस को पता चला कि शेख बिलाल 2 जनवरी से ही घर से गायब है. इस पर पुलिस का शक पुख्ता हो गया कि सुफिया का कत्ल उसी ने किया है, तभी वह घर से फरार है. शब्बो खातून और उस के बेटे से पूछताछ में पुलिस को उन दोनों पर शक हो गया था कि जरूर सुफिया की हत्या की जानकारी दोनों को थी, लेकिन वे कुछ भी नहीं बता रहे थे.

इसी शक के आधार पर पुलिस सिर्फ शब्बो को हिरासत में ले कर थाने ले आई और वहां उस से गहन पूछताछ की. शब्बो पहले नानुकुर करती रही. अंतत: पुलिस के बारबार पूछने पर वह टूट गई और कबूल कर लिया कि उसे अपनी सौतन सुफिया परवीन की हत्या की जानकारी पहले से थी. उस का पति शेख बिलाल ही सुफिया परवीन का कातिल है, उसी ने उस का सिर काट कर घर से 2 किलोमीटर दूर अपने खेत में गड्ढा खोद कर दफना दिया था. शब्बो खातून के मुंह से इतना सुनते ही थानाप्रभारी श्यामकिशोर चौंक गए. फिर तो वह रट्टू तोते की तरह पूरी कहानी उगलती गई. पूरी कहानी सुनने के बाद वह अपना चेहरा हथेलियों बीच छिपा कर सुबकने लगी और पुलिस अधिकारियों से माफी मांगने लगी.

इस के बाद मजिस्ट्रैट की उपस्थिति में पुलिस शब्बो खातून को ले कर चंदवे गांव में स्थित उस खेत में गई जहां सुफिया का कटा सिर दफनाया गया था. पुलिस के पैरों तले से जमीन तब खिसक गई थी जब सिर के इर्दगिर्द बड़ी मात्रा में नमक मिला. हत्यारे शेख बिलाल का तर्क था कि पुलिस उस के गुनाहों से कभी परदा नहीं उठा पाएगी. जब तक उस के गिरेहबान पर हाथ डालेगी तब तक वारदात का नामोनिशान मिट चुका होगा. लेकिन पुलिस ने उस के मंसूबों पर पानी फेर दिया. 10 दिनों से रहस्य बनी सिर कटी लाश की शिनाख्त सुफिया परवीन के रूप में हो गई थी.

सौतन सुफिया की हत्या का राज छिपाने के जुर्म में पुलिस ने शब्बो खातून को गिरफ्तार कर लिया और उस के पति शेख बिलाल की तलाश में उस के ठिकानों पर दबिश दी. 2 दिनों की मेहनत ने अपना रंग दिखाया. आखिरकार 14 जनवरी, 2021 को शेख बिलाल अपने इलाके से उस समय गिरफ्तार कर लिया गया, जब वह भागने की फिराक में रोड पर खड़ा हुआ बस का इंतजार कर रहा था. गिरफ्तार कर पुलिस उसे थाने ले आई. सुफिया हत्याकांड के मुख्य आरोपी शेख बिलाल के गिरफ्तार होते ही थानाप्रभारी श्यामकिशोर ने पुलिस अधिकारियों को सूचना दे दी थी.

एसपी (ग्रामीण) नौशाद अली थोड़ी देर में ओरमांझी थाने पहुंच गए और हत्या के संबंध में आरोपी शेख बिलाल से कड़ाई से पूछताछ शुरू की. बिना हीलाहवाली के शेख बिलाल ने अपना जुर्म कबूल कर लिया कि उसी ने प्रेमिका से दूसरी पत्नी बनी सुफिया परवीन की हालात के हाथों मजबूर हो कर हत्या की थी. फिर उस ने सुफिया से प्यार से ले कर हत्या तक की पूरी कहानी पुलिस को बता दी. उस के बाद पुलिस उसे हिरासत में ले कर वहां गई, जहां सुफिया परवीन की हत्या कर के लाश फेंकी थी. फिर पुलिस उसे वहां ले कर गई, जहां सुफिया का सिर काट कर जमीन के भीतर दफनाया था.

उस के बाद उसी दिन घर ले जा कर शेख बिलाल ने हत्या में प्रयुक्त धारदार हथियार खून में सना दाउली बरामद करा दिया. पुलिस ने दाउली अपने कब्जे में ले लिया और आरोपी को अदालत में पेश कर जेल भेज दिया. क्रूर हत्यारा शेख बिलाल ने सुफिया परवीन की हत्या की जो कहानी पुलिस को बताई, वह कुछ ऐसे सामने आई है—

21 वर्षीय सुफिया परवीन मूलरूप से राजधानी रांची के थाना चान्हों के चटवल इलाके की रहने वाली थी. उस के पिता का नाम मोहम्मद जमशेद और मां का नाम राबिया परवीन था. जमशेद और राबिया की 6 बेटियों और 3 बेटों में वह पांचवें नंबर की थी. प्राइवेट नौकरी कर के जमशेद इतना कमा लेता था जिस से वह अपना और अपने परिवार का भरणपोषण कर लेता था. बच्चों में बेटियां सब से बड़ी थीं. पुराने खयालातों वाला जमशेद बेटियों को नौकरी के लिए कहीं बाहर जाने नहीं देता था. वह एक मध्यमवर्गीय परिवार से ताल्लुक रखता है. समाज में इज्जत ही बेटियों का गहना होती है, जिसे जितना ढक कर रखा जाए वह उतनी पाकीजा रहती है.

इसलिए वह अपनी छोटी सी कमाई में परिवार को खुश रखने की हरसंभव कोशिश करता था, ताकि आधुनिक भौतिक वस्तुओं की चकाचौंध में वे बहकने न पाएं. मोहम्मद जमशेद की सभी संतानों में सुफिया परवीन अलग किस्म की लड़की थी. औसत कदकाठी और गोरे रंग की सुंदर सुफिया चंचल मन और स्वच्छंद खयालातों वाली लड़की थी. सुफिया ने इंटरमीडिएट की पढ़ाई के बाद आगे की पढ़ाई छोड़ दी थी, क्योंकि उस का मन पढ़ाई में नहीं लग रहा था. जमशेद ने 4 बेटियों के हाथ पीले कर दिए थे. मजे से उस की गृहस्थी चल रही थी. अब अच्छा सा घरवर देख कर सुफिया के हाथ पीले करा दे तो एक और बेटी की जिम्मेदारी में रह जाएगी.

जमशेद बेटी की शादी के बारे में पत्नी से विचारविमर्श कर रहा था कि सुफिया के कोरे मन पर मोहब्बत की सुनहरी स्याही से खालिद ने अपनी मोहब्बत की दास्तान लिख दी. अब सुफिया के अस्तित्व पर खालिद का पूरा कब्जा था. दोनों ही एकदूसरे से बेपनाह प्यार करते थे. सुफिया और खालिद के दिलों में मोहब्बत की मीठी उमंग उस समय पनपी थी, जब दोनों की आंखें चार हुई थीं. बलसोकरा गांव निवासी खालिद की शादी सुफिया के घर के बगल में रहने वाली फातिमा से हुई थी. पड़ोसी होने के नाते प्यारी सहेली फातिमा से मिलने सुफिया उस के घर जाती थी. आतेजाते फातिमा के पति खालिद की नजरें सुफिया के हुस्न से टकराईं तो वह उस की जवानी की तीखी तलवार से घायल हो गया था.

उसी दिन उसे पाने की हसरत अपने मन में ठान ली. फातिमा की अजीज सहेली होने के नाते सुफिया से खालिद ने मजाकमजाक में साली का रिश्ता जोड़ लिया था. उसी रिश्ते की आड़ में वह उस से अश्लील मजाक करने लगा. खालिद का मजाक करना सुफिया को अच्छा लगता था. खालिद की चिकनीचुपड़ी और मीठी बातों से उस रोमरोम खिल उठता था. उस के मन को गहराई तक गुदगुदाता था. धीरेधीरे सुफिया खालिद की ओर खिंचती गई और उस की मोहब्बत में गिरफ्तार हो गई थी. यह जानते हुए भी कि खालिद उस की प्यारी सहेली फातिमा का शौहर है, फिर भी सुफिया ने सहेली के पति पर बुरी नजर डाल कर उसे अपने हुस्न के मकड़जाल में कैद कर लिया था.

मोहब्बत की आग में जलते दीवानों ने एकदूसरे के साथ सात जन्मों तक साथ निभाने की कसमें खाईं और एकदूसरे के साथ अपने घरौंदे बसाने के हसीन ख्वाब देखे. खालिद के बिना जीवन अधूरा समझने वाली सुफिया घटना से 10 महीने पहले फरवरी, 2020 में घर छोड़ कर खालिद के साथ भाग गई और दिल्ली जा कर उस के साथ निकाह कर लिया. न जाने सुफिया की हंसतीखेलती गृहस्थी में किस की बुरी नजर लगी कि उस के प्यार का घरौंदा रेत के महल की तरह भरभरा कर ढह गया. खालिद और सुफिया के बीच 2 महीने तक सब कुछ इसी तरह चलता रहा. धीरेधीरे सुफिया के सिर से खालिद की मोहब्बत का जूनुन पूरी तरह उतर गया था.

उन दोनों के बीच में कड़वाहट ने अपना कब्जा जमा लिया था. नए जमाने के खयालातों में जीने वाली सुफिया को पति की बंदिशें अखरने लगीं तो उन के बीच में टकराहट ने पांव जमा लिए थे. अब खालिद के साथ रहना उसे एक पल गवारा नहीं था, लिहाजा सुफिया खालिद को छोड़ कर दिल्ली से अपने मायके चटवल (रांची) आ गई थी. सुफिया ने जो किया था, वह माफी के लायक नहीं था, लेकिन उसे बुरा सपना समझ कर उस के नेकदिल मांबाप ने बेटी को माफ कर घर में जगह दे दी थी. उन का सोचना था सुबह का भूला अगर शाम को घर लौट आए तो उसे भूला नहीं कहते, फिर वह तो उस का अपना खून है, लड़की है, कहां जाएगी.

बेटी के बातव्यवहार और विचारों में बदलाव देख कर मांबाप धीरेधीरे सब कुछ भूलते गए. सुफिया भी खुद को बदलने में जुट गई थी. लेकिन यह सब उस का सिर्फ दिखावा था. मोहब्बत के जिस भंवर से वह अभीअभी बाहर निकली थी, फिर उस के पांव उसी भंवर में जा फंसे थे. सुफिया दिल के हाथों एक बार फिर मजबूर हो गई थी. इस बार उस का दिल खालिद के मामू के शादीशुदा बेटे शेख बिलाल पर आ गया था. कसरती और सुडौल बदन वाले साधारण शक्लसूरत के शेख बिलाल को जब से देखा था, उस दिन से ही उस पर मर मिटी थी.

शेख बिलाल भी सुफिया को देख कर उस पर फिदा था. किसी का भी दिल उस पर आ सकता था. सुफिया को देख कर शेख बिलाल अपने होशोहवास खो बैठा था और उस से प्यार करने लगा था, हालांकि दोनों के दरमियान करीब 14-15 साल का फासला था. कहते हैं प्यार अंधा होता है, न उम्र देखता है न जातपात, बस हो जाता है. सुफिया के साथ भी ऐसा हुआ था. 40 वर्षीय शेख बिलाल मूलरूप से रांची जिले के चंदवे गांव का रहने वाला था. वह पहले से शादीशुदा था. उस की पत्नी शब्बो खातून उर्फ अफसाना थी और एक 14 साल का बेटा भी. शेख बिलाल अपराधी किस्म का था. जिले के कई थानों में उस के खिलाफ मुकदमे दर्ज थे. वह कई मामलों में वांछित भी था.

खैर, धीरेधीरे सुफिया और शेख बिलाल का प्यार जवां हो रहा था. बेटी के दोबारा फिसलते कदम की जानकारी जब सुफिया के मांबाप को हुई तो उन्हें उस की करतूत पर यकीन नहीं हुआ. फिर भी मांबाप ने उसे समझाने की कोशिश की. सुफिया के सिर पर शेख बिलाल के इश्क का भूत सवार था. उस के प्यार में इस कदर डूब चुकी थी कि शेख के अलावा उसे कुछ दिखाई नहीं दे रहा था, मांबाप की तो बात ही छोड़ दीजिए. मांबाप ने जब देखा कि बेटी को समझाने का उस पर कोई असर नहीं हो रहा है तो उसे उस के हाल पर छोड़ दिया. इधर शेख बिलाल ने सुफिया से अपनी शादीशुदा जिंदगी की कहानी छिपा रखी थी और यह भी छिपा रखा था कि वह एक बेटे का बाप है.

बहरहाल, सितंबर, 2020 में दोनों ने निकाह कर लिया. निकाह के बाद शेख बिलाल सुफिया को अपने घर लाया और जब उसे उस की शादीशुदा जिंदगी के बारे में पता चला तो उस ने घर में तूफान खड़ा कर दिया. उस ने पति से कह दिया कि घर में या तो वह रहेगी या उस की सौतन शब्बो. उसे दोनों में से किसी एक को चुनना होगा. असमंजस के भंवर में डूबा शेख बिलाल फैसला नहीं कर पा रहा था कि वह क्या करे. क्योंकि सुफिया का रौद्र रूप देख कर वह डर गया था. वह दोनों में से किसी को भी छोड़ने के लिए तैयार नहीं था इसलिए सब कुछ हालात पर छोड़ दिया.

इधर सुफिया सौतन शब्बो को घर से निकालने की अपनी जिद पर अड़ी हुई थी. सुफिया की जिद ने शेख बिलाल की हंसतीखेलती गृहस्थी को अखाड़ा बना दिया था. शब्बो को ले कर दोनों के बीच घर में रोज झगड़े होने लगे थे. पति के सामने सुफिया ने एक शर्त रख दी. वह शर्त यह थी कि शब्बो को नहीं छोड़ सकते तो मेरे रहने का कहीं और इंतजाम कर दो या तो मुझे पैसे दे दो, जिस से मैं कहीं अलग रह लूं. शेख बिलाल सुफिया की किसी भी शर्त को मानने के लिए तैयार नहीं हुआ. जब सुफिया ने जिद की तो गुस्से में उस ने सुफिया को लातघूंसों से खूब मारा.

पति की पिटाई से सुफिया अंदर तक हिल गई. दोनों के बीच का प्रेम अब नफरत का रूप ले चुका था और नौबत मरनेमारने की आ गई थी. पति की पिटाई से आहत सुफिया ने पति को सबक सिखाने के लिए पिठौरिया थाने में दहेज उत्पीड़न और मारपीट का मुकदमा दर्ज करा दिया. उस की लिखित शिकायत पर पुलिस ने शेख बिलाल को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया. शेख बिलाल ने कभी सपने में भी नहीं सोचा था कि उस की ही पत्नी उस के साथ ऐसा कर सकती है. उस के इस दुस्साहस से बिलाल नफरत से बिलबिला उठा और उस ने सुफिया को सजा देने की ठान ली. इधर सुफिया पति को जेल भिजवाने के बावजूद उसी के घर में सीना ताने डटी रही, तनिक भी डरी नहीं.

उस के डर से सौतन शब्बो खातून और नाबालिग बेटे की घिग्घी बंध गई थी. मांबेटे दोनों घर में डरडर कर रहते रहे और शब्बो पति की जमानत की तैयारी में जुट गई थी. महीना भर जेल में रहने के बाद शेख बिलाल जमानत पर छूट कर घर आया तो सुफिया को देख कर उस का खून खौल उठा. वह उसे अपने घर में एक पल के लिए बरदाश्त नहीं कर पा रहा था. उस का चेहरा देखते ही उसे जेल की सलाखें याद आ रही थी. उस ने सोच लिया था कि उसे अब क्या करना है. शेख बिलाल ने पहली पत्नी शब्बो खातून के साथ मिल कर एक खतरनाक योजना बनाई. योजना सुफिया को रास्ते से हटाने की थी.

पति का साथ देने के लिए वह तैयार हो गई. पहले उसे रास्ते से हटाने के लिए गोली मार कर हत्या करने की योजना बनाई. इस के लिए उस ने एक कट्टा भी खरीद लिया था लेकिन बाद में उस ने अपनी योजना बदल दी. वह कुछ ऐसा करना चाहता था कि न तो लाश को पुलिस पहचान सके और न ही पुलिस कभी उस तक पहुंच सके, एकदम फूलप्रूफ योजना बनाना चाहता था और ऐसी ही योजना बनाई भी. योजना के अनुसार, शेख बिलाल भले ही सुफिया से नफरत करता था लेकिन जानता था कि जब तक वह सुफिया का भरोसा नहीं जीतेगा, तब तक उस की योजना सफल नहीं हो सकती है. षडयंत्र सफल बनाने के लिए उस ने एक चाल चली.

बिलाल ने सुफिया से माफी मांग कर उस का दिल जीत लिया. उस ने उसे भरोसा दिलाया कि वह जो चाहती है, वह वही करेगा. इस के लिए उसे उस का साथ देना होगा. इस पर खुश हो कर सुफिया साथ देने के लिए तैयार हो गई. वह चाहती थी कि उस की सौतन शब्बो जल्दी से जल्दी उस के रास्ते से हट जाए ताकि पति पर उस का पूरा अधिकार हो जाए. चिडि़या को फंसाने के लिए जाल पर शेख बिलाल ने जो दाना डाला था, उस का निशाना एकदम सही जगह पर बैठ गया था. उस ने पत्नी को धीरे से इशारा कर दिया कि शिकार जाल में पूरी तरह से फंस चुकी है, उसे रास्ते से हटाने की देरी है.

तय योजना के मुताबिक, 2 जनवरी, 2021 को शेख बिलाल ने विश्वास में ले कर सुफिया से यह कहा कि आज रात शब्बो का काम तमाम करना है तो सुफिया ने अपनी ओर से हरी झंडी दे दी और खुश भी थी. उस के बाद वह पूरी तैयारी के साथ रात साढ़े 10 बजे के करीब शब्बो खातून और सुफिया परवीन को मोटरसाइकिल पर बैठा कर जीराबेर जंगल की ओर ले गया. बीच में सुफिया बैठी थी, पीछे शब्बो और शेख बिलाल मोटरसाइकिल चला रहा था. जंगल में जैसे ही तीनों बाइक से नीचे उतरे और शेख बिलाल ने बाइक स्टैंड के सहारे खड़ी की, तब तक शब्बो सुफिया पर भेडि़ए की तरह झपटी तो पलट कर शेख भी उस पर झपट पड़ा और उसे जमीन पर पटक दिया.

फिर गला दबा कर सुफिया को मौत के घाट उतार दिया. उस के बाद साथ लाए धारदार हथियार से सिर काट कर धड़ से अलग कर दिया. इस से भी जब उस का मन नहीं भरा तो उस ने सुफिया के सारे कपड़े उतार लिए ताकि उस की पहचान न हो सके. फिर उसी धारदार हथियार से उस के गुप्तांग पर कई वार किए और अपने मन की भड़ास निकाली. सुफिया को मौत के उतारने के बाद शेख बिलाल शब्बो को बाइक पर बिठा कर कपड़े और कटा सिर साथ लेता गया. करीब ढाई किलोमीटर दूर जा कर अपने खेत पर रुका और खेत में 4 फीट गहरा गड्ढा खोद कर सिर दफना दिया और उस पर बड़ी मात्रा में नमक डाल दिया ताकि सिर मिट्टी में गल जाए और पुलिस के हाथों कोई सबूत न लगे.

उस के बाद सुफिया के सारे कपड़े जला दिए और आखिरी सबूत भी नष्ट कर दिया. यह सब करने के बाद घर जा कर दोनों पतिपत्नी आराम से सो गए. उस ने सोचा था कि सबूत के बिना पुलिस उस तक पहुंच नहीं सकेगी, लेकिन उस की यह सोच गलत साबित हुई. शेख बिलाल ने फूलप्रूफ योजना बनाई थी. लेकिन सुफिया के मांबाप ने बेटी की लाश पहचान कर उस की योजना पर पानी फेर दिया और उस के असल ठिकाने पहुंच गया. सुफिया की हत्या में पति के साथ शब्बो खातून भी थी, इसलिए उसे भी गिरफ्तार कर जेल भेज दिया. कथा लिखे जाने तक दोनों जेल में बंद थे. सुफिया की हत्या का जेल में बंद शेख बिलाल को तनिक भी मलाल नहीं था.

—कथा पुलिस सूत्रों पर आधारित

UP News : पत्रकार आशु यादव हत्याकांड – बेवफा प्रेमिका निकली कातिल की मास्टरमाइंड

UP News : बहकी हुई महिला के कदम अकसर किसी अपराध को जन्म देते हैं. एक पुलिसकर्मी की बेटी दीपिका शुक्ला ने पति बल्ली शुक्ला और 2 बेटियों को छोड़ कर अवनीश शर्मा से शादी कर ली. इस के बाद हिस्ट्रीशीटर और कथित पत्रकार आशू यादव से उस के अनैतिक संबंध हो गए. फिर वह अमित के संपर्क में आई. इस का नतीजा यह हुआ कि…

2 जनवरी, 2021 की सुबह धर्मेंद्र नगर, कच्ची बस्ती के कुछ लोग मार्निंग वाक पर निकले तो उन्होंने सीटीआई नहर किनारे सरस्वती शिशु मंदिर स्कूल की बाउंड्री वाल के पास एक लावारिस कार खड़ी देखी. स्थानीय लोगों में चर्चा शुरू हुई, तो लोगों की भीड़ जुट गई. इसी बीच किसी ने फोन कर के थाना बर्रा पुलिस को सूचना दे दी. सूचना मिलते ही थानाप्रभारी हरमीत सिंह पुलिस टीम के साथ घटनास्थल पर आ गए. उन्होंने कार का बारीकी से निरीक्षण किया. कार के शीशों पर काली फिल्म चढ़ी थी, जिस से अंदर का कुछ भी दिखाई नहीं पड़ रहा था.

कार के पिछले शीशे पर एक स्टिकर चिपका था, जिस पर लिखा था ‘अमर स्तंभ हिंदी दैनिक समाचार पत्र’ आशू यादव संवाददाता. स्टिकर पर ‘पुलिस’ और मोबाइल नंबर भी लिखा था. हरमीत सिंह ने अनुमान लगाया कि कार किसी पत्रकार की हो सकती है. उन्होंने स्टिकर पर लिखा मोबाइल नंबर मिलाया, लेकिन वह बंद था. कार के अंदर की स्थिति को जानने के लिए हरमीत सिंह ने कार का पिछला दरवाजा खोला, तो वह सहम गए. पिछली सीट पर एक युवक की लाश पड़ी थी. हरमीत सिंह ने लावारिस कार से शव बरामद होने की सूचना पुलिस अधिकारियों को दी तो मौके पर एसएसपी प्रीतिंदर सिंह, एसपी (पूर्वी) राजकुमार अग्रवाल, एसपी (साउथ) दीपक भूकर तथा सीओ (गोविंद नगर) विकास कुमार पांडेय आ गए.

पुलिस अधिकारियोें ने मौके पर फोरैंसिक टीम को भी बुला लिया. पुलिस अधिकारियों ने बारीकी से कार तथा शव का निरीक्षण किया. मृतक की उम्र 30 वर्ष के आसपास थी. उस के शरीर पर चोटों के निशान थे और गले पर रगड़ का निशान था. इस से अनुमान लगाया कि युवक की हत्या रस्सी से गला घोंट कर की गई होगी. हत्या से पहले संभवत: उस के साथ मारपीट भी की गई थी. फोरैंसिक टीम ने कार से फिंगरप्रिंट लिए तथा अन्य साक्ष्य जुटाए. कार की तलाशी में शराब की एक खाली बोतल, 4 शिकायती पत्र, 2 माइक, आगे की सीट के नीचे प्लास्टिक बैग में 2 टेडीबियर, कोटी, फोटो लगे कई स्टिकर तथा मृतक की जेब से 300 रुपए बरामद हुए. इस सामान को पुलिस ने जाब्ते में ले लिया.

अब तक शव को सैकड़ों लोग देख चुके थे, लेकिन कोई उस की पहचान नहीं कर पाया था. जिस से पुलिस अधिकारियों ने अनुमान लगाया कि मृतक आसपास का नहीं है. अत: उन्होंने शव की पहचान कराने के लिए कानपुर शहर के सभी थानों को कंट्रोलरूम से अज्ञात लाश मिलने के संबंध में सूचना प्रसारित करा दी. कुछ देर बाद ही थाना रेलबाजार के थानाप्रभारी दधिबल तिवारी ने एसपी (पूर्वी) राजकुमार अग्रवाल को सूचना दी कि उन के थाने में आशू यादव नाम के युवक की गुमशुदगी दर्ज है, जो कथित पत्रकार तथा हिस्ट्रीशीटर है. चूंकि कार में लगे पोस्टर में भी आशू यादव का नाम छपा था, अत: एसपी अग्रवाल ने दधिबल तिवारी को आदेश दिया कि वह आशू के घरवालों को साथ ले कर जल्द ही धर्मेंद्र नगर कच्ची बस्ती स्थित नहर की पटरी पर पहुंचें.

आदेश पाते ही दधिबल तिवारी ने आशू यादव के घरवालों को सूचना दी, फिर उन्हें साथ ले कर वहां पहुंच गए. घरवालों ने कार में पड़े शव को देखा तो वे फफक कर रो पड़े. कंचन, शानू, धर्मेंद्र तथा जितेंद्र ने बताया कि शव उन के भाई आशू यादव का है. कार भी उसी की है. रात से लापता था मृतक की बहन शानू व कंचन ने पुलिस अधिकारियों को बताया कि 31 दिसंबर की रात डेढ़ बजे किसी का फोन आने पर आशू अपनी कार ले कर घर से निकला था, फिर रात को वापस नहीं आया. आशू अपने पास 3 मोबाइल फोन रखता था. सुबह हम लोगों ने उस के तीनों नंबरों पर संपर्क करने की कोशिश की, लेकिन तीनों नंबर बंद थे.

इस के बाद हम लोग उस की खोज में जुट गए. चिंता इसलिए भी बढ़ गई थी कि पहली जनवरी को उस का जन्मदिन था. अपना जन्मदिन वह धूमधाम से मनाता था और दोस्तों को बुलाता था. लेकिन उस का कुछ पता नहीं चल रहा था. दिन भर खोजने के बाद जब उस का कुछ भी पता नहीं चला तो उन्होंने शाम को थाना रेलबाजार जा कर उस की गुमशुदगी दर्ज करा दी थी. बहन कंचन ने यह भी बताया कि आशू गले में सोने की चेन तथा दोनों हाथों में सोने की 6 अंगूठियां पहने हुआ था. हत्यारों ने उस के तीनों मोबाइल, चेन तथा अंगूठियां लूट ली हैं. चूंकि शव की शिनाख्त हो गई थी. अत: पुलिस ने घटनास्थल की काररवाई निपटाने के बाद शव को पोस्टमार्टम के लिए लाला लाजपतराय अस्पताल भिजवा दिया.

आशू यादव की गुमशुदगी थाना रेलबाजार में दर्ज थी, अत: थानाप्रभारी दधिबल तिवारी ने मृतक की बहन कंचन की ओर से भादंवि की धारा 364/302/201/120बी के तहत अज्ञात हत्यारों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कर ली. रिपोर्ट दर्ज होने के बाद एसएसपी प्रीतिंदर सिंह ने मृतक आशू यादव के भाई धर्मेंद्र यादव से घटना के संबंध में पूछताछ की. पूछताछ में धर्मेंद्र ने बताया कि उस का भाई आशू हिंदी दैनिक समाचार पत्र ‘अमर स्तंभ’ में काम करता था. कुछ समय पहले उस ने क्षेत्रीय पार्षद मधु के पति राजू सोनकर व उन के बेटों के कारनामोें के खिलाफ समाचार छापा था, जिस पर राजू ने झगड़ा किया था और उस के बेटे अति व सोनू सोनकर ने आशू को जान से मारने की घमकी दी थी. आशू की हत्या में इन्हीं लोगों का हाथ है.

संदेह के आधार पर पुलिस ने राजू व उस के बेटों से पूछताछ की. लेकिन कुछ हाथ नहीं लगा. अत: पूछताछ के बाद उन्हें थाने से घर भेज दिया गया. चूंकि मामला एक कथित पत्रकार व हिस्ट्रीशीटर की हत्या का था. अत: एसएसपी प्रीतिंदर सिंह ने इस ब्लाइंड मर्डर की गुत्थी सुलझाने के लिए तीन टीमों का गठन किया. इन तीनों टीमों को एसपी (पूर्वी) राजकुमार अग्रवाल व एसपी (साउथ) दीपक भूकर के निर्देशन में काम करना था. इन टीमों में इंसपेक्टर (नौबस्ता) सतीश कुमार सिंह, इंसपेक्टर (बर्रा) हरमीत सिंह, इंसपेक्टर (रेलबाजार) दधिबल तिवारी, सीओ (गोविंदनगर) विकास कुमार पांडेय तथा सर्विलांस टीम को शामिल किया गया.

पुलिस की तीनों टीमों ने अलगअलग जांच शुरू की. आशू यादव 31 दिसंबर की रात डेढ़ बजे अपने घर खपरा मोहाल से निकला था और उस के मोबाइल फोन की आखिरी लोकेशन 31 दिसंबर की रात 2:37 बजे मसवानपुर की मिली थी. मिलने लगे सबूत पुलिस की एक टीम ने खपरा मोहाल से घंटाघर, जरीब चौकी, विजय नगर व मसवानपुर तक रोड पर लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली तथा दूसरी टीम ने दूसरे रोड की फुटेज को खंगाला, जिस में आशू की कार मसवानपुर जाते समय फजलगंज व विजयनगर चौराहे पर जाते समय तो दिखी पर लौटते समय दिखाई नहीं दी.

जाहिर था कि हत्या के बाद हत्यारे आशू की कार को किसी दूसरे रूट से लाए थे और धर्मेंद्र नगर स्थित नहर पटरी पर कार को खड़ा कर दिया था. सर्विलांस टीम ने मृतक आशू के तीनों मोबाइल नंबरों की काल डिटेल्स निकलवाई तो पता चला कि 31 दिसंबर की देर रात आशू के मोबाइल फोन पर आखिरी काल एक महिला की आई थी. वह महिला सीतापुर में रहने वाली शालिनी थी. पुलिस जब उस के पते पर पहुंची तो पता चला कि उस फोन नंबर का इस्तेमाल मसवानपुर निवासी दीपिका शुक्ला कर रही थी.

टीम ने दीपिका के संबंध में जानकारी जुटाई तो पता चला कि वह शातिर अपराधी है. शिवली, सचेंडी व कोहना थाने में उस के खिलाफ कई मुकदमे दर्ज हैं. नकली शराब बनाने व बेचने के जुर्म में वह पति के साथ जेल गई थी और अब जमानत पर थी. सर्विलांस टीम ने उस के मोबाइल फोन की काल डिटेल्स निकलवाई तो हिस्ट्रीशीटर अमित गुप्ता के बारे में जानकारी मिली. अमित गुप्ता के फोन की डिटेल्स के जरिए टीम को उस के 2 साथियों जूहीलाल कालोनी निवासी किशन वर्मा व सचिन वर्मा की जानकारी मिली. अमित के मोबाइल फोन पर 31 दिसंबर की रात 2:08 बजे एक मैसेज भेजा गया था, जिस में लिखा था- ‘बुला लो भाई उस को, आज हो जाएगा काम.’ जांच से पता चला कि जिस नंबर से मैसेज भेजा गया था, वह किशन का था.

पुख्ता सबूत मिलने के बाद पुलिस की संयुक्त टीमों ने 3 जनवरी, 2021 की रात 11 बजे किशन वर्मा व सचिन वर्मा के जूही लाल कालोनी स्थित घर से दोनों को गिरफ्तार कर लिया. उन दोनों को थाना रेलबाजार लाया गया. थाने में जब किशन व सचिन वर्मा से आशू यादव की हत्या के संबंध में सख्ती से पूछताछ की गई तो वे टूट गए और हत्या का जुर्म कबूल कर लिया. उन दोनों की निशानदेही पर पुलिस टीमों ने मसवानपुर स्थित दीपिका के घर छापा मारा. लेकिन दीपिका और अमित फरार हो चुके थे. दीपिका के घर से पुलिस ने वह रस्सी बरामद कर ली, जिस से आशू का गला घोंटा गया था.

पूछताछ में आरोपी किशन वर्मा व सचिन ने बताया कि आशू की हत्या प्रेम त्रिकोण में की गई थी. आशू व अमित दोनों का दीपिका से नाजायज रिश्ता था. अमित को आशू और दीपिका की नजदीकियां पसंद नहीं थीं, इसलिए उस ने दीपिका के साथ मिल कर आशू को मौत की नींद सुला दिया. रुपयों के लालच में उन दोनों ने भी अमित का साथ दिया. हत्या मसवानपुर स्थित दीपिका के घर की गई थी. 4 जनवरी, 2021 को रेलबाजार थाना प्रभारी दधिबल तिवारी ने आशू यादव की हत्या का खुलासा करने की जानकारी पुलिस अधिकारियों को दी तो एसएसपी प्रीतिंदर सिंह, एसपी (पूर्वी) राजकुमार अग्रवाल, एसपी (साउथ) दीपक भूकर ने पुलिस लाइन सभागार में प्रैसवार्ता की. एसएसपी ने केस का खुलासा करने वाली टीम को 25 हजार रुपया ईनाम देने की भी घोषणा की.

चूंकि आशू यादव की हत्या का मुकदमा रेलबाजार थाने में पहले से अज्ञात में दर्ज था. अत: खुलासा होने के बाद थानाप्रभारी दधिबल तिवारी ने इस मामले में 4 आरोपी दीपिका शुक्ला, अमित गुप्ता, किशन वर्मा व सचिन वर्मा को नामजद कर दिया. 2 आरोपी दीपिका व अमित फरार थे. आरोपियों से पूछताछ में प्रेम त्रिकोण में हुई हत्या का सनसनीखेज खुलासा हुआ. उत्तर प्रदेश के कानपुर शहर के थाना रेलबाजार के अंतर्गत एक मोहल्ला है-खपरा मोहाल. इसी मोहल्ले के मकान नंबर डी-19 में छोटे सिंह यादव रहते थे. उन के परिवार में पत्नी मालती के अलावा 3 बेटे धर्मेंद्र, जितेंद्र, आशू तथा 2 बेटियां शानू व कंचन थीं. छोटे सिंह की जनरल स्टोर की दुकान थी. उसी की आमदनी से परिवार का भरणपोषण होता था.

3 भाइयों में आशू यादव मंझला था. छोटे सिंह का पूरा परिवार आपराधिक प्रवृत्ति का था. आशू का भाई धर्मेंद्र व चाचा बड़े यादव रेलबाजार थाने के हिस्ट्रीशीटर थे. आशू भी अपने घरवालों की राह पर चल पड़ा. यद्यपि वह पढ़ालिखा व तेजतर्रार था. आशू ने अपराध जगत से नाता जोड़ा तो उस ने अपने चाचा व भाइयों को भी पीछे छोड़ दिया. कुछ समय बाद ही उस पर थाना रेलबाजार, छावनी, फीलखाना समेत अन्य थानों में एनडीपीएस ऐक्ट, शस्त्र अधिनियम, गुंडा अधिनियम, रंगदारी, अपहरण समेत अन्य संगीन धाराओं के 10 मुकदमे दर्ज हो गए. वह रेलबाजार थाने का हिस्ट्रीशीटर बन गया.

आशू यादव ने पुलिसकर्मी राकेश कुमार की बेटी ज्योति से लवमैरिज की थी. राकेश कुमार उन दिनों कानपुर शहर के हरवंश मोहाल थाने में तैनात थे. उन का परिवार भी साथ रहता था. इसी दौरान आशू की मुलाकात ज्योति से हुई. दोनों में प्रेम संबंध बने, फिर ज्योति ने घरवालोें की मरजी के खिलाफ आशू से प्रेम विवाह कर लिया. ज्योति के 7 वर्षीय बेटा शुभ तथा 5 वर्षीया बेटी सोनाक्षी हैं. हिस्ट्रीशीटर बन गया पत्रकार आशू यादव बड़ी ही शानोशौकत से रहता था. अवैध कमाई से उस ने कार भी खरीद ली थी. वह शातिर दिमाग था.

पुलिस से बचने के लिए उस ने हिंदी दैनिक समाचार पत्र ‘अमर स्तंभ’ में काम करना शुरू कर दिया था. उस ने अपनी कार पर भी अमर स्तंभ का स्टिकर लगा लिया था. शासनप्रशासन के अधिकारियों से वह पत्रकार के रूप में ही मिलता था. पत्रकारिता की आड़ में वह जायजनाजायज काम करने लगा था. लोगों से धन वसूली भी करता था. सन 2019 में आशू यादव किसी मामले में जेल गया तो वहां उस की मुलाकात मोती मोहाल निवासी अमित गुप्ता व कल्याणपुर निवासी अवनीश कुमार शर्मा से हुई. तीनों एक ही बैरक में थे. अमित शातिर अपराधी था. उस ने रुपए व जेवर हड़पने के लिए कल्याणपुर निवासी बुआ बिट्टो, फूफा पवन गुप्ता तथा बिट्टो की सास रानी की हत्या कर दी थी.

पकड़े जाने के बाद अदालत ने उसे आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी. अवनीश कुमार शर्मा नकली शराब बनाने व बेचने के जुर्म में जेल में था. चूंकि तीनों शातिर अपराधी थे, अत: उन के बीच दोस्ती हो गई. अवनीश शर्मा की ही पत्नी का नाम दीपिका शुक्ला था. वह भी पति के अवैध कारोबार में हाथ बंटाती थी. दीपिका मूलरूप से शिवली थाने के गांव भीखर की रहने वाली थी. उस के पिता अशोक चतुर्वेदी मुंबई पुलिस में हवलदार थे. रिटायर होने के बाद उन की मुजफ्फरनगर में हत्या कर दी गई थी. कुछ दिनों बाद मां की भी मौत हो गई. उस के बाद सन 2002 में दीपिका ने शिवली थाने के बैरी सवाई गांव निवासी बल्ली शुक्ला उर्फ हरीराम शुक्ला से शादी कर ली.

बल्ली शुक्ला से दीपिका ने 2 बेटियों को जन्म दिया. बल्ली शुक्ला के पड़ोस में अवनीश शर्मा रहता था. उस का बल्ली शुक्ला के घर आनाजाना था. घर आतेजाते अवनीश शर्मा ने दीपिका को अपने प्यार के जाल में फंसा लिया. वर्ष 2016 में अवनीश की दीवानी दीपिका 2 बेटियों को छोड़ कर अवनीश के साथ भाग गई. अवनीश कल्याणपुर में रहता था और नकली शराब बनाता व बेचता था. दीपिका भी अवनीश के साथ नकली शराब बनाने व बेचने का काम करने लगी. उस ने कई शराब तस्करों से अपने संबंध मजबूत कर लिए और उन के मार्फत शिवली, सचेंडी, घाटमपुर तथा कानपुर में नकली शराब बेचने लगी थी.

सन 2017 में नकली व जहरीली शराब पीने से घाटमपुर व सचेंडी में 17 लोगों की मौत हो गई थी. इस मामले में वह अवनीश के साथ पहली बार जेल गई. उस के बाद सन 2019 में कोहना तथा शिवली थाने से भी नकली शराब बनाने व बेचने के जुर्म में जेल गई. कोहना थाने से उसे गैंगस्टर ऐक्ट में जेल भेजा गया था. इस मामले में उसे जून 2020 में जमानत मिली और वह बाहर आ गई. आशू यादव जब जेल से बाहर आया तो उस ने दीपिका से मुलाकात की. मुलाकातें प्यार में बदलीं, फिर दोनों के बीच नाजायज रिश्ता बन गया. दीपिका उस की कार में घूमने लगी तथा उस के घर भी जाने लगी. आशू उस की आर्थिक मदद भी करने लगा.

इधर आजीवन कारावास की सजा भुगत रहे अमित गुप्ता को सितंबर 2020 में पैरोल मिल गई. अमित पैरोल पर बाहर आ रहा था, तो अवनीश ने उस से कहा कि वह उस की पत्नी दीपिका का खयाल रखे तथा उसे भी जेल से बाहर निकलवाने की कोशिश करे. कपड़ों की तरह बदलती रही प्रेमी अमित ने जेल से बाहर आ कर दीपिका से संपर्क किया. कुछ दिनों में ही दोनों के बीच अवैध संबंध बन गए. वह दीपिका को ले कर अपने घर मोतीमोहाल पहुंचा. अमित के घरवालों ने दीपिका को घर में रखने की इजाजत नहीं दी. इस पर वह दीपिका को ले कर मसवानपुर में अनिल शुक्ला के मकान में किराए पर रहने लगा. दिखावे के लिए उस ने बाजार में कपड़े की दुकान खोल ली.

दीपिका के साथ रहते अमित को पता चला कि दीपिका के उस के दोस्त आशू यादव से पहले से ही नाजायज संबंध हैं. यह बात अमित को नागवार लगी और उस ने आशू को मिटाने की ठान ली. उस ने दीपिका से साथ देने को कहा तो वह आनाकानी करने लगी. इस पर अमित ने दीपिका को धमकी दी कि वह साथ नहीं देगी तो वह आशू और उस के नाजायज रिश्तों की बात उस के पति अवनीश को बता देगा. इस धमकी से दीपिका डर गई और वह अमित का साथ देने को राजी हो गई. इस के बाद अमित ने दीपिका के साथ मिल कर आशू के कत्ल की योजना बनाई और अपनी योजना में दोस्त किशन वर्मा व सचिन वर्मा को भी पैसों का लालच दे कर शामिल कर लिया.

योेजना के तहत 31 दिसंबर की रात डेढ़ बजे दीपिका ने आशू के मोबाइल फोन पर काल की और जन्मदिन की बधाई दी. साथ ही घर आने तथा मौजमस्ती करने का आमंत्रण भी दिया. इस के बाद आशू सजसंवर कर अपनी कार से दीपिका के घर मसवानपुर पहुंच गया. जन्मदिन की खुशी में दीपिका ने उसे खूब शराब पिलाई. आशू जब नशे में धुत हो गया तभी अमित अपने साथियों किशन व सचिन के साथ घर आ गया. दोनों ने आशू को दबोच लिया और खूब पिटाई की. फिर अमित व दीपिका ने मिल कर रस्सी से आशू का गला घोंट दिया. इस बीच दीपिका ने आशू के 3 मोबाइल फोन कब्जे में ले कर स्विच्ड औफ कर दिए तथा आशू के गले से सोने की चेन तथा दोनों हाथों से सोने की 6 अंगूठियां उतार लीं.

इस के बाद सब ने मिल कर आशू के शव को उस की कार में रखा और कार बर्रा थाना क्षेत्र के धर्मेंद्र नगर कच्ची बस्ती ला कर नहर की पटरी पर खड़ी कर दी. उस के बाद वे सब फरार हो गए. थाना रेलबाजार पुलिस ने अभियुक्त किशन वर्मा व सचिन वर्मा से पूछताछ के बाद उन्हें 4 जनवरी, 2021 को कानपुर कोर्ट में पेश किया, जहां से उन्हें जेल भेज दिया गया. मुख्य आरोपी अमित गुप्ता तथा दीपिका शुक्ला फरार थीं. पुलिस सरगरमी से उन की तलाश में जुटी थी.

—कथा पुलिस सूत्रों पर आधारित

MP News : मसाज सेंटर की आड़ में सैक्स रैकेट, कई खुलासे एक साथ

MP News : यह सच है कि लौकडाउन में जब लोगों को रोजीरोटी के लाले पड़ रहे थे, तब कुछ लोग मजबूर लड़कियों का सहारा ले कर स्पा के नाम पर सैक्स के धंधे में मोटी कमाई कर रहे थे. भोपाल का ‘लंदन इवनिंग फैमिली सैलून ऐंड स्पा’ भी ऐसा ही था. लेकिन…

देह व्यापार ही इकलौता ऐसा धंधा है, जिस ने लौकडाउन की बंदिश हटते ही काफी कम समय में अपनी पुरानी ऊंचाई को छूने में सफलता हासिल की है. गलियों में चलने वाले छोटेछोटे अंधेरे कमरों वाले चकलाघरों से ले कर सैक्स के हाईप्रोफाइल मसाज सैंटरों पर ग्राहकों की भीड़ उमड़ पड़ी. भोपाल क्राइम ब्रांच के एएसपी गोपाल धाकड़ को तेजी से बढ़ते इस कारोबार के बारे में शहर के अलगअलग इलाकों की सूचनाएं मिल रही थीं. सब से अधिक शिकायतें कोलार स्थित एस.के.प्लाजा बिल्डिंग में संचालित ‘लंदन इवनिंग फैमिली सैलून ऐंड स्पा’ के बारे में थीं, जहां मसाज के नाम पर देह का कारोबार कराए जाने की खबर थी.

एएसपी गोपाल धाकड़ ने इस दुकान पर नजर रखने के लिए अपने कुछ खास मुखबिरों को लगा दिया था. कुछ ही दिन में इन मुखबिरों ने उन्हें जानकारी दी कि इस स्पा के बारे में मिली शिकायत सही है. यहां बड़े पैमाने पर ग्राहकों को मसाज के नाम पर सैक्स सर्विस दी जा रही है. एएसपी धाकड़ ने टीआई क्राइम ब्रांच थाना अजय मिश्रा की एक टीम को इस के खुलासे की जिम्मेदारी सौंप दी. पुलिस को पहले ही जानकारी मिल चुकी थी कि इस स्पा में या तो केवल पुराने और भरोसेमंद ग्राहकों को सैक्स सर्विस दी जाती है. अथवा नए ग्राहक को किसी पुराने ग्राहक के रेफरेंस पर लड़की उपलब्ध कराई जाती है. इसलिए एएसपी धाकड़ ने क्राइम ब्रांच के सब से स्मार्ट माने जाने वाले आरक्षक को पूरी ट्रैनिंग के साथ यहां भेजा.

2 दिसंबर को अपराह्न लगभग 4 बजे जब पुलिस टीम ने एस.के. प्लाजा के पास सुरक्षित दूरी पर पोजीशन ले ली, तब नकली ग्राहक बन कर जाने वाले आरक्षक ने स्पा में प्रवेश किया. काउंटर पर बैठे मैनेजर अनिल वर्मा ने वेलकम करते हुए पूछा कि उस की क्या सेवा कर सकता है.

‘‘यार, मसाज सैंटर में आदमी मछलियां पकड़ने तो आया नहीं होगा. जाहिर सी बात है कि आप के यहां मसाज करवाने आया हूं. सुना है आप की लड़कियां कमाल का मसाज देती हैं.’’ नकली ग्राहक ने पूरे विश्वास के साथ वहां बैठे युवक से कहा.

‘‘जी हां, ठीक सुना आप ने. हमारा सैंटर अपनी सर्विस क्वालिटी के लिए पूरे भोपाल में फेमस है. और आसपास के जिलों में भी.’’ मैनेजर ने बात काटते हुए कहा, ‘‘हमारे यहां सागर, विदिशा के लोग भी आते हैं.’’

‘‘बिलकुल सही. मैं सागर से हूं. मेरे एक दोस्त ने आप के स्पा का पता बताया था. वह कई बार आप के यहां आ चुका है. आई मीन जब भी भोपाल आता है तो वह आप की सर्विस लिए बिना नहीं जाता. और मजेदार बात तो यह है कि बंदे की अभीअभी शादी हुई है, वो भी लव मैरिज. मुझे लगा कि कुछ तो खास होगा आप के यहां जो बंदा नई बीवी छोड़ कर यहां  आता है.’’

शादी और नई बीवी वाली बात नकली ग्राहक ने इसलिए कही थी ताकि स्पा मैनेजर समझ जाए कि वो क्या चाहता है. नकली ग्राहक बन कर गए पुलिसकर्मी का यह तीर निशाने पर लगा. मैनेजर अनिल वर्मा सब भूल गया और उसे अपने किसी पुराने ग्राहक का खास आदमी समझ कर सीधे सैक्स सर्विस की बात करते हुए बोला, ‘‘सर देखिए, इस समय हमारे पास 3 लड़कियां हैं. नेपाली, भोपाली और कानपुरी. इन में से किस की सर्विस लेना पसंद करेंगे आप?

‘‘नेपाली की सर्विस तो कौमन है यार, हर शहर में मिल जाती हैं. नेपाली लोग शोर ज्यादा करते हैं, जो मुझे पसंद नहीं. भोपाली गर्ल की सर्विस तो मैं एमपी नगर के एक स्पा में कई बार टेस्ट कर चुका हूं. ये कानपुरी नाम कुछ नया लगता है.  इस की कुछ क्वालिटी है खास. क्या मैं फोटो देख सकता हूं?’’ नकली ग्राहक ने पूछा.

‘‘फोटो क्या सर, सामने देखिए न,’’ कहते हुए मैनेजर अनिल वर्मा ने काउंटर के नीचे लगा बटन दबा कर घंटी बजाई तो कुछ मिनट में अंदर से लगभग 21-22 साल की एक निहायत खूबसूरत और सैक्सी लुक वाली युवती बाहर आ कर खड़ी हो गई.

‘‘ये लीजिए सर, ये हैं मिस रानी. कानपुर वाली और हमारे यहां आने वाले कस्टमर्स की पहली पसंद भी. आप लकी हैं जो फ्री मिल गई. वरना इन के चाहने वाले खाली ही नहीं छोड़ते.’’

‘‘लगता है इसीलिए मेरा दोस्त आप की इतनी तारीफ करता है,’’ नकली ग्राहक ने मैनेजर का भरोसा जीतने के लिए एक और पासा फेंका.

‘‘सर, पेमेंट आप को पहले करना होगा.’’

‘‘ओके, कितना?’’

‘सर, एक हजार रुपया हमारे स्पा की एंट्री फीस है. 2 हजार इन की बेस प्राइस. कुल 3 हजार.’’

‘‘बेस प्राइस मतलब?’’

‘‘मतलब, सर जो होता है, बस उतना ही. इस के अलावा आप का कुछ स्पैशल शौक है तो रानी उस का चार्ज आप को अलग से बता देंगी.’’

‘‘बहुत स्मार्ट हो दोस्त तुम. ये लो 3 हजार. बाकी हम रानी से डील कर लेंगे, ठीक है न  रानी,’’ नकली ग्राहक ने रानी की तरफ देख कर कहा.

‘‘श्योर सर, आप को सर्विस दे कर मुझे खुशी होगी.’’ रानी ने भी मुसकराते हुए जवाब दिया और उस का हाथ पकड़ कर अंदर बनी केबिन में ले गई, जहां मसाज टेबल नहीं डबल बैड पड़ा था.

‘‘इतना बड़ा बिस्तर, लगता है गु्रप सर्विस भी मिलती है यहां पर.’’

‘‘सब कुछ मिलता है यहां, आप आदेश तो करें. अभी 2 लड़कियां अपने कस्टमर के साथ व्यस्त हैं, फ्री होने वाली हैं. फिर कहेंगे तो आप को भी हम तीनों की गु्रप सर्विस मिल जाएगी.’’

‘‘अरे नहीं आज का दिन तो केवल रानी के नाम.’’ नकली ग्राहक बने पुलिसकर्मी ने रानी को मक्खन लगाया. 2 लड़कियां अपने ग्राहकों को इस समय सर्विस दे रही हैं, यह जान कर उस ने तुरंत कुछ दूरी पर खड़ी अपनी टीम को सिग्नल दे दिया. कुछ ही देर में क्राइम ब्रांच के टीआई अजय मिश्रा अपनी टीम ले कर लंदन इवनिंग फैमिली सैलून ऐंड स्पा में दाखिल हो गए. आननफानन में बंद कमरों से 2 ग्राहकों को अलगअलग 2 युवतियों के संग आपत्तिजनक स्थिति में पकड़ लिया गया. इस के अलावा बिस्तर पर पडे़ यूज और अनयूज कंडोम आदि भी जब्त कर लिए गए.

दबिश के दौरान पुलिस ने स्पा से 21 वर्षीय नेपाली लड़की कोयल, भोपाल निवासी 20 वर्षीय शबनम और कानपुर की 21 साल की रानी के अलावा बैरागढ़ निवासी हितेश लीलानी और नरेंद्र सिरवानी को गिरफ्तार कर लिया जो शबनम और कोयल के साथ यौनाचार में लिप्त थे. पुलिस ने तलाशी के दौरान स्पा से भारी मात्रा में बीयर की खाली कैन और यूज किए हुए कंडोम बरामद कर मैनेजर अनिल वर्मा को भी गिरफ्तार कर लिया. सभी आरोपियों को अदालत में पेश किया, जहां से उन्हें जेल भेज दिया गया. इस के बाद देह धंधे में आई तीनों युवतियों की कहानी इस प्रकार सामने आई.

नेपाली युवती कोयल पति की मौत के बाद काम की तलाश में भोपाल के माता मंदिर इलाके में रहने वाले अपने एक परिचित के घर आई थी. स्पा में मैनेजर का काम करने वाला अनिल वर्मा का उस इलाके में आनाजाना था. जब उस की नजर कोयल पर पड़ी और जानकारी मिली कि वह काम की तलाश में है तो अनिल ने कोयल को अपने स्पा में काम करने का औफर दिया. कोयल तैयार हो गई तो पहले ही दिन मैनेजर ने उसे बता दिया कि हम केवल मसाज का काम करते हैं, लकिन अगर कोई ग्राहक सैक्स की मांग करे तो तुम समझ लेना. इस में काफी पैसा मिलेगा जिस में से बड़ा हिस्सा तुम्हारा होगा.

चूंकि कोयल को काम की जरूरत थी और लौकडाउन के कारण कहीं दूसरी जगह काम नहीं मिल रहा था, इसलिए वह स्पा में मसाज और सैक्स सर्विस गर्ल के रूप में काम करने लगी थी. भोपाल की शबनम को उस के पति ने छोड़ दिया था. शबनम केवल 20 साल की थी और दूसरे एक युवक के साथ रहती थी. जानकारी के अनुसार शबनम के इस काम की जानकारी उस के साथ रहने वाले युवक को भी थी, लेकिन वह इस से होने वाली मोटी कमाई को देख कर शबनम को खुद भी ज्यादा से ज्यादा ग्राहकों को सर्विस देने की सलाह देता था. कानपुर की रानी कई सालों से कालगर्ल के तौर पर काम कर रही थी.

उसे स्पा के मालिक ने स्पैशली अपने यहां ग्राहकों को सर्विस देने के लिए बुलाया था. रानी को इस व्यापार की एक्सपर्ट माना जाता था, इसलिए उस की फीस भी ज्यादा थी. इस संबंध में एएसपी गोपाल धाकड़ ने बताया कि इस स्पा के बारे में काफी दिनों से शिकायत मिल रही थी, जिस के लिए हम ने नकली ग्राहक भेज कर यहां काररवाई कर 3 युवतियों और 2 ग्राहकों के अलावा मैनेजर को भी गिरफ्तार किया.

UP News : भतीजे संग रंगे हाथों पकड़ी गई पत्नी को मारकर पंखे में लटकाया

UP News : पारिवारिक रिश्ते और मानमर्यादाएं परिवार को बांधने और सामाजिक व्यवस्था बनाए रखने में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं. लेकिन 2 बच्चों की मां सुमन ने इन रिश्तों को इस तरह तारतार किया कि…

महेंद्र सिंह को पिछले कुछ दिनों से अजय का अपने घर में आनाजाना ठीक नहीं लग रहा था. वह आता था तो उस की पत्नी सुमन उस से कुछ ज्यादा ही घुलमिल कर बातें करती थी. वैसे तो अजय उस के भाई का ही बेटा था, लेकिन महेंद्र सिंह को उस के लक्षण कुछ ठीक नहीं लग रहे थे. अजय जब महेंद्र सिंह की मानसिक परेशानी का कारण बनने लगा तो एक दिन उस ने सुमन से पूछा कि अजय क्यों बारबार घर के चक्कर लगाता है. इस पर सुमन ने तुनकते हुए कहा, ‘‘अजय तुम्हारे भाई का बेटा है. वह आता है, तो क्या मैं इसे घर से निकाल दूं?’’

महेंद्र सिंह को सुमन की बात कांटे की तरह चुभी तो लेकिन उस के पास सुमन की बात का जवाब नहीं था. वह चुप रह गया. महेंद्र सिंह कानपुर शहर के बर्रा भाग 6 में रहता था. वह मूलरूप से औरैया जिले के कस्बा सहायल का रहने वाला था. वह अपने भाइयों में सब से छोटा था. उस से बड़े उस के 2 भाई थे— मानसिंह और जयसिंह. सब से बड़े भाई मानसिंह के 2 बेटे थे अजय सिंह और ज्ञान सिंह. ज्ञान सिंह की शादी हो गई थी. अजय सिंह अविवाहित था. महेंद्र सिंह की शादी जिला कन्नौज के कस्बा तिर्वा निवासी नरेंद्र सिंह की बेटी सुमन के साथ हुई थी. नरेंद्र के 2 बच्चे थे सुमन और गौरव. लाडली और बड़ी होने की वजह से सुमन शुरू से ही जिद्दी स्वभाव की थी. वह जो ठान लेती, वही करती.

शादी हो कर सुमन जब ससुराल आई, तो उसे ससुराल रास नहीं आई. चंद महीने बाद ही वह पति के साथ कानपुर आ कर रहने लगी. सुमन का पति महेंद्र सिंह दादानगर स्थित एक फैक्ट्री में सुरक्षागार्ड की नौकरी करता था. उस की आमदनी सीमित थी. इस के बावजूद सुमन फैशनपरस्त थी. वह अपने बनावशृंगार पर खूब खर्च करती थी. लेकिन शुरूशुरू में जवानी का जुनून था, इसलिए महेंद्र सिंह ने इन सब पर ध्यान नहीं दिया था. उसे तो बस उस की अदाएं पसंद थीं. समय के साथ सुमन ने पूजा और विभा 2 बेटियों को जन्म दिया. शादी के कुछ समय बाद ही महेंद्र सिंह महसूस करने लगा था कि उस की पत्नी उस के साथ संतुष्ट नहीं है.

दरअसल, सुमन नरेंद्र सिंह की एकलौती बेटी थी और अपनी शादी के बारे में बड़ेबड़े ख्वाब देखा करती थी. लेकिन उस के पिता ने उस की शादी एक साधारण सुरक्षा गार्ड से कर दी थी, जिस से उस के सारे अरमान चूरचूर हो गए थे. और वह बच्चों और चौकेचूल्हे में उलझ कर रह गई थी. फिर भी जिंदगी की गाड़ी जैसेतैसे चलती रही. कहानी ने मान सिंह के बड़े बेटे ज्ञान सिंह की शादी के बाद एक नया मोड़ लिया. ज्ञान सिंह की शादी के मौके पर सुमन ने महसूस किया कि अजय उस का कुछ ज्यादा ही खयाल रख रहा है. वह खाने की थाली ले कर सुमन के पास आया और उस के सामने टेबल पर रखते हुए बोला, ‘‘यहां बैठ कर खाओ चाची.’’

सुमन मुसकरा कर थाली अपनी ओर खिसकाने लगी, तो अजय भी उस की ओर देख कर मुसकराते हुए चला गया. थोड़ी देर बाद वह वापस लौटा तो उस के हाथों में दूसरी थाली थी. वह सुमन के पास ही बैठ कर खाना खाने लगा. खाना खातेखाते दोनों के बीच बातों का सिलसिला जुड़ा, तो अजय बोला, ‘‘चाची तुम सुंदर भी हो और स्मार्ट भी. लेकिन चाचा ने तुम्हारी कद्र नहीं की.’’

अजय सिंह ने यह कह कर सुमन की दुखती रग पर हाथ रख दिया था. ज्ञान सिंह की बारात करीब के ही गांव में जानी थी. शाम को रिश्तेदार व परिवार के लोग बारात में चले गए. लेकिन अजय बारात में नहीं गया. उसी रात जब दरवाजे पर दस्तक हुई, तो सुमन ने दरवाजा खोला. दरवाजे पर अजय खड़ा था. सुमन ने हैरानी से पूछा, ‘‘तुम… बारात में नहीं गए. यहां कैसे?’’

दरवाजा खुला था, अजय सिंह अंदर आ गया तो सुमन ने दरवाजा बंद कर दिया. सुमन की आंखें तेज थीं. उस ने अजय की आंखों की भाषा पढ़ ली.

‘‘चाची, मुझे तुम से कुछ कहना है. बहुत दिनों से सोच रहा हूं, पर मौका ही नहीं मिल पा रहा था. आज अच्छा मौका मिला, इसलिए मैं बारात में नहीं गया.’’ अजय ने कमरे में पड़े पलंग पर बैठते हुए कहा.

‘‘ऐसी क्या बात है, जिस के लिए तुम्हें मौके की तलाश थी?’’ सुमन ने पूछा, तो अजय तपाक से बोला,‘‘चाची आया हूं तो मन की बात कहूंगा जरूर. तुम्हें बुरा लगे या अच्छा. दरअसल बात यह है कि तुम मेरे मन को भा गई हो और मैं तुम से प्यार करने लगा हूं.’’

‘‘प्यार…’’ सुमन ने अजय को गौर से देखा.

आज वह पहले वाला अजय नहीं था, जिसे वह बच्चा समझती थी. अजय जवान हो चुका था. पलभर के लिए सुमन डर गई. उस ने कभी नहीं सोचा था कि वह उस से ऐसा भी कुछ कह सकता है.

‘‘अजय, तुम यहां से जाओ, अभी इसी वक्त.’’ सुमन ने सख्ती से कहा, तो अजय ने पूछा, ‘‘चाची क्या तुम मेरी बात का बुरा मान गईं. मैं ने तो मजाक में कहा था.’’

‘‘अजय, मैं ने कहा न जाओ यहां से.’’ डांटते हुए सुमन ने उसे बाहर का रास्ता दिखा दिया, तो उस के तेवर देख अजय डर कर वहां से चला गया.

अजय तो चला गया लेकिन सुमन रात भर सोच में डूबी अपने मन को टटोलती रही. वह सचमुच महेंद्र सिंह से संतुष्ट नहीं थी. उस की जिंदगी फीकी दाल और सूखी रोटी की तरह थी. पिछले कुछ समय से महेंद्र सिंह की तबियत भी ढीली चल रही थी. ड्यूटी से आने के बाद वह खाना खाते ही सो जाता था. वह पति से क्या चाहती है, यह महेंद्र सिंह ने न तो कभी सोचा और न जानने की कोशिश की. यही वजह थी कि सुमन का मन विद्रोह कर उठा. उस ने मन को काफी समझाने की कोशिश की, लेकिन न चाहते हुए भी उस की सोच नएनए जवान हुए अजय के आस पास ही घूमती रही. उस का मन पूरी तरह बेइमान हो चुका था.

आखिरकार उस ने निर्णय ले लिया कि अब वह असंतुष्ट नहीं रहेगी. चाहे इस के लिए रिश्तों को तारतार क्यों न करना पड़े. कोई भी औरत जब बरबादी के रास्ते पर कदम रखती है तो उसे रोक पाना मुश्किल होता है. यही सुमन के मामले में हुआ. दूसरी ओर अजय यह सोच कर डरा हुआ था कि चाची ने चाचा को सब कुछ बता दिया तो तूफान आ जाएगा. इसी डर से वह सुमन से नहीं मिला. इधर सुमन फैसला करने के बाद तैयार बैठी अजय का इंतजार कर रही थी. उस ने मिलने की कोशिश नहीं की, तो सुमन ने उसे स्वयं ही बुला लिया.

अजय आया तो सुमन ने उसे देखते ही उलाहने वाले लहजे में कहा, ‘‘मुझे राह बता कर खुद दूसरी राह चले गए. क्या हुआ, आए क्यों नहीं?’’

‘‘मैं ने सोचा, शायद तुम्हें मेरी बात बुरी लगी. इसीलिए…’’ अजय ने कहा तो सुमन बोली, ‘‘रात में आना, मैं तुम्हारा इंतजार करूंगी.’’

अजय सिंह समझ गया कि उस का तीर निशाने पर भले ही देर से लगा हो, पर लग गया है. वह मन ही मन खुश हो कर लौट गया. सुमन का पति महेंद्र सिंह दूसरे दिन ही बारात से लौटने के बाद वापस कानपुर आ गया था. लेकिन पत्नी व बच्चों को गांव में ही छोड़ गया था. इसी बीच सुमन और अजय नजदीक आने का प्रयास करने लगे थे. सुमन ने अजय को मिलन का खुला आमंत्रण दिया था. अत: वह बनसंवर कर देर शाम सुमन के कमरे पर पहुंच गया. उस ने दरवाजे पर दस्तक दी तो सुमन ने दरवाजा खोल कर उसे तुरंत अंदर बुला लिया. उस के अंदर आते ही सुमन ने दरवाजा बंद कर लिया.

अजय पलंग पर बैठ गया, तो सुमन उस के करीब बैठ कर उस का हाथ सहलाने लगी. अजय के शरीर में हलचल मचने लगी. वह समझ गया कि चाची ने उस की मोहब्बत स्वीकार कर ली. इसी छेड़छाड़ के बीच कब संकोच की सारी दीवारें टूट गईं, दोनों को पता हीं नहीं चला. बिस्तर पर रिश्ते की मर्यादा भले ही टूट गई, लेकिन सुमन और अजय के बीच स्वार्थ का पक्का रिश्ता जरूर जुड़ गया. अपने इस रिश्ते से दोनों ही खुश थे. सुमन अपनी मौजमस्ती के लिए पाप की दलदल में घुस तो गई, पर उसे यह पता नहीं था कि इस का अंजाम कितना भयंकर हो सकता है. उस दिन के बाद अजय और सुमन बिस्तर पर जम कर सामाजिक रिश्तों और मानमर्यादाओं की धज्जियां उड़ाने लगे.

अजय सुमन के लिए बेटे जैसा था और अजय के लिए वह मां जैसी. लेकिन वासना की आग ने उन के इन रिश्तों को जला कर खाक कर दिया था. सुमन लगभग एक माह तक गांव में रही और गबरू जवान अजय के साथ मौजमस्ती करती रही. उस के बाद वह वापस कानपुर आ गई और पति के साथ रहने लगी. अजय और सुमन के बीच अब मिलन तो नहीं हो पाता था, लेकिन मोबाइल फोन पर दोनों की बात होती रहती थी. सुमन के बिना न अजय को चैन था और न अजय के बिना सुमन को. आखिर जब अजय से न रहा गया तो वह सुमन के बर्रा भाग 6 स्थित घर पर किसी न किसी बहाने से आने लगा. उस ने सुमन के साथ फिर से संबंध बना लिए. कुछ दिनों तक तो सब गुपचुप चलता रहा.

लेकिन फिर अजय का इस तरह सुमन के पास आनाजाना पड़ोसियों को खटकने लगा. लोगों को पक्का यकीन हो गया कि चाचीभतीजे के बीच नाजायज रिश्ता है. नाजायज रिश्तों को ले कर पड़ोसियों ने टोकाटाकी की तो महेंद्र सिंह के होश उड़ गए. उस की पत्नी उसी के सगे भतीजे के साथ मौजमस्ती कर रही थी, यह बात भला वह कैसे बरदाश्त कर सकता था. वह गुस्से में तमतमाता घर पहुंचा. सुमन उस समय घर के कामकाज निपटा रही थी. उसे देखते ही वह गुस्से में बोला, ‘‘तेरे और अजय के बीच क्या चल रहा है?’’

‘‘क्या मतलब है तुम्हारा?’’ सुमन ने धड़कते दिल से पूछा.

‘‘मतलब छोड़ो. यह बताओ कि अजय यहां क्या करने आता है?’’ महेंद्र सिंह ने पूछा तो सुमन बोली, ‘‘कैसी बातें कर रहे हो तुम? अजय तुम्हारा भतीजा है. बात क्या है. उखड़े हुए से क्यों लग रहे हो?’’

‘‘तू मेरी पीठ पीछे क्या करती है, मुझे सब पता है. तेरी पाप लीला पूरे मोहल्ले के सामने आ चुकी है. तूने मुझे किसी को मुंह दिखाने लायक नहीं छोड़ा.’’

‘‘अपनी पत्नी पर गलत इलजाम लगा रहे हो. तुम्हें शर्म आनी चाहिए.’’ सुमन ने रोते हुए कहा, तो महेंद्र सिंह बोला, ‘‘देखो, अब भी वक्त है. संभल जा, नहीं तो अंजाम अच्छा न होगा.’’

महेंद्र सिंह ने भतीजे अजय सिंह को भी फटकार लगाई और बिना मतलब घर न आने की हिदायत दी. महेंद्र सिंह की सख्ती से सुमन और अजय डर गए. अजय का आनाजाना भी कम हो गया. अब वह तभी आता जब उसे कोई जरूरी काम होता. वह भी चाचा महेंद्र सिंह की मौजूदगी में. महेंद्र सिंह अपने बड़े भाई मान सिंह का बहुत सम्मान करता था. इसलिए उस ने अजय की शिकायत भाई से नहीं की थी. लौकडाउन के दौरान मान सिंह ने महेंद्र सिंह से 5 हजार रुपए उधार लिए थे और फसल तैयार होने के बाद रुपया वापस करने का वादा किया था. अजय का आनाजाना कम हुआ तो महेंद्र सिंह ने राहत की सांस ली. उसे भी लगने लगा था कि अब सुमन और अजय का अवैध रिश्ता खत्म हो गया है. लिहाजा उस ने सुमन पर निगाह रखनी भी बंद कर दी थी.

20 जनवरी, 2021 की दोपहर 12 बजे महेंद्र सिंह ने पड़ोसियों को बताया कि उस की पत्नी सुमन ने फांसी लगा कर आत्महत्या कर ली. उस की बात सुन कर पड़ोसी सन्न रह गए. कुछ ही देर बाद उस के दरवाजे पर भीड़ बढ़ने लगी. इसी बीच महेंद्र सिंह ने पत्नी के मायके वालों तथा थाना बर्रा पुलिस को सूचना दे दी. सूचना पाते ही थानाप्रभारी सतीश कुमार सिंह घटनास्थल पर आ गए. उस समय महेंद्र सिंह के घर पर भीड़ जुटी थी. मृतका सुमन की लाश कमरे में पलंग पर पड़ी थी. उस के गले में फांसी का फंदा था, किंतु गले में रगड़ के निशान नहीं थे. फांसी के अन्य लक्षण भी नजर नहीं आ रहे थे.

संदेह होने पर थानाप्रभारी सतीश कुमार सिंह ने पुलिस अधिकारियों को सूचित किया तो कुछ देर बाद एसएसपी प्रीतिंदर सिंह, एसपी (साउथ) दीपक भूकर तथा डीएसपी विकास पांडेय आ गए. पुलिस अधिकारियों ने मौके पर फोरैंसिक टीम को भी बुलवा लिया. पुलिस अधिकारियों ने घटनास्थल का निरीक्षण किया तो उन्हें भी महिला की मौत संदिग्ध लगी. फोरैंसिक टीम को भी आत्महत्या जैसा कोई सबूत नहीं मिला. पुलिस अधिकारी मौकाएवारदात पर अभी निरीक्षण कर ही रहे थे कि मृतका सुमन के मायके पक्ष के दरजनों लोग आ गए. आते ही उन्होंने हंगामा शुरू कर दिया और महेंद्र पर सुमन की हत्या का आरोप लगाया तथा उसे गिरफ्तार करने की मांग की.

चूंकि पुलिस अधिकारी वैसे भी मामले को संदिग्ध मान रहे थे, अत: पुलिस ने मृतका के पति महेंद्र सिंह को हिरासत में ले लिया तथा शव पोस्टमार्टम हेतु भेज दिया. दूसरे रोज शाम 5 बजे मृतका सुमन की पोस्टमार्टम रिपोर्ट थानाप्रभारी सतीश कुमार सिंह को प्राप्त हुई. उन्होंने रिपोर्ट पढ़ी तो उन की शंका सच साबित हुई. रिपोर्ट में बताया गया कि सुमन ने आत्महत्या नहीं की थी, बल्कि गला दबा कर उस की हत्या की गई थी. रिपोर्ट के आधार पर उन्होंने मृतका के पति महेंद्र सिंह से सख्ती से पूछताछ की तो वह टूट गया और उस ने पत्नी सुमन की हत्या का जुर्म कबूल कर लिया.

महेंद्र सिंह ने बताया कि उस की पत्नी सुमन के भतीजे अजय सिंह से नाजायज संबंध पहले से थे. उस ने कल शाम 4 बजे सुमन और अजय को आपत्तिजनक स्थिति में देख लिया. उस समय अजय तो सिर पर पैर रख कर भाग गया. लेकिन सुमन की उस ने जम कर पिटाई की. देर रात अजय को ले कर उस का फिर सुमन से झगड़ा हुआ. गुस्से में उस ने सुमन का गला कस दिया, जिस से उस की मौत हो गई. पुलिस और पड़ोसियों को गुमराह करने के लिए उस ने सुमन के शव को उसी की साड़ी का फंदा बना कर कुंडे से लटका दिया. सुबह वह बड़ी बेटी पूजा को ले कर डाक्टर के पास चला गया.

उसे हल्का बुखार था. वहां से दोपहर 12 बजे वापस आया तो उस ने पत्नी द्वारा आत्महत्या कर लेने का शोर मचाया. उस के बाद पड़ोसी आ गए. चूंकि महेंद्र सिंह ने हत्या का जुर्म कबूल कर लिया था, अत: थानाप्रभारी सतीश कुमार सिंह ने मृतका के भाई गौरव को वादी बना कर भादंवि की धारा 302 के तहत महेंद्र सिंह के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कर ली तथा उसे गिरफ्तार कर लिया. 22 जनवरी, 2021 को पुलिस ने अभियुक्त महेंद्र सिंह को कानपुर कोर्ट में पेश किया, जहां से उसे जिला जेल भेज दिया गया. सुमन की मासूम बेटियां पूजा और विभा ननिहाल में नानानानी के पास रह रही थीं.

—कथा पुलिस सूत्रों पर आधारित

Faridabad Crime News : भाभी संग मिलकर क्यों रचा भाई के कत्ल का खौफनाक खेल

Faridabad Crime News : दिनेश धवन से प्रेम विवाह करने के बाद अनु जब मां नहीं बनी तो उस ने पहले हरजीत से फिर नितिन से नजदीकियां बढ़ाईं. उस के रास्ते में पति बाधक बना तो उस के अगले कदम ने एक ऐसे अपराध को जन्म दिया कि…

28 जनवरी, 2021 को फरीदाबाद के डबुआ कालोनी थाने की पुलिस को सूचना मिली कि गहरे नाले में एक लाश पड़ी है. इस बात की जानकारी मिलते ही वहां के थानाप्रभारी संदीप कुमार अतिरिक्त थानाप्रभारी यासीन खान और कुछ पुलिसकर्मियों को साथ ले कर घटनास्थल की ओर रवाना हो गए. वहां पहुंचने पर उन्होंने देखा कि नाले की कीचड़ में एक लाश पड़ी थी, जिस से काफी दुर्गंध आ रही थी. लाश पुरानी थी, जिसे देख कर पहचानना काफी मुश्किल था. लगता था हत्यारों ने वह कई दिन पहले नाले में फेंकी होगी.

थानाप्रभारी संदीप कुमार ने पुलिसकर्मियों की मदद से लाश बाहर निकलवाई. क्राइम टीम द्वारा लाश की विभिन्न ऐंगल से फोटो लेने के बाद उस की शिनाख्त के प्रयास किए गए. लेकिन उस की शिनाख्त नहीं हो सकी तो उसे फरीदाबाद के बी.के. अस्पताल में सुरक्षित रखवा दिया गया. उसी दिन थानाप्रभारी संदीप कुमार ने अज्ञात व्यक्ति के खिलाफ आईपीसी की धारा 302, 201 के तहत रिपोर्ट दर्ज कर के जांच अतिरिक्त थानाप्रभारी यासीन खान को सौंप दी. इस केस को सुलझाने के लिए डबुआ थाने की एक पुलिस टीम गठित की गई, जिस में थानाप्रभारी संदीप कुमार, एसआई यासीन खान, एएसआई कुलदीप और कांस्टेबल पवन शामिल थे.

जांच अपने हाथ में लेने के बाद विवेचनाधारी अतिरिक्त थानाप्रभारी यासीन खान अपने आसपास के इलाके से इस बात का पता लगाने का प्रयास किया कि पिछले कुछ दिनों में शहर का कोई व्यक्ति गायब तो नहीं है. कई लोगों से पूछताछ करने के बाद उन्हें जानकारी मिली कि दिनेश धवन नाम का एक व्यक्ति सैनिक कालोनी से लापता है. उस का मोबाइल भी इन दिनों स्विच्ड औफ चल रहा है. कहीं मरने वाला वही तो नहीं, ऐसा विचार करते हुए अतिरिक्त थानाप्रभारी यासीन खान सैनिक कालोनी स्थित दिनेश धवन के घर पहुंचे.

वहां उस की पत्नी अनु मिली. अनु के साथ एक व्यक्ति और था. उस का नाम पूछने पर उस ने अपना नाम हरजीत बताया. उन्होंने अनु को नाले से मिली लाश की फोटो दिखाई तो अनु और उस के साथ बैठे हरजीत ने उसे देखने के बाद लाश पहचानने से इनकार कर दी. सैनिक कालोनी से वापस लौट कर अतिरिक्त थानाप्रभारी यासीन खान ने थानाप्रभारी संदीप कुमार को मृतक की पत्नी अनु से हुई पूछताछ के बारे में जानकारी दी तो थानाप्रभारी ने मृतक की फोटो को सोशल मीडिया के अतिरिक्त उस के पोस्टर बनवा कर फरीदाबाद के प्रमुख चौकचौराहों पर चस्पा करने की सलाह दी.

यासीन खान ने ऐसा ही किया. ऐसा करने पर अगले दिन यानी 29 जनवरी को दीपा नाम की औरत डबुआ थाने में आई और उस ने लाश को देखने की इच्छा जाहिर की. तब पुलिस ने उसे फरीदाबाद के बी.के. अस्पताल में रखी लाश दिखाई. लाश काफी बदतर अवस्था में थी, उसे देख कर उस की शिनाख्त करना मुश्किल था लेकिन लाश की दाहिनी कलाई पर एक ब्रेसलेट था, जिसे देख कर दीपा ने बताया कि उस ने यह ब्रेसलेट रक्षाबंधन पर अपने मुंहबोले भाई दिनेश धवन को पहनाया था. इस ब्रेसलेट पर धवन गुदा हुआ था.  दिनेश धवन के कुछ और दोस्तों को बुला कर जब यह लाश दिखाई गई तो उन लोगों ने भी बे्रसलेट देखने के बाद उस की शिनाख्त दिनेश धवन के रूप में की.

यह सब जानने के बाद अतिरिक्त थानाप्रभारी यासीन खान को दिनेश धवन की पत्नी अनु पर शक हो गया. क्योंकि वह लाश की फोटो देखने के बाद उसे पहचानने से साफ इनकार कर चुकी थी. जबकि दूसरी तरफ दिनेश धवन की मुंहबोली बहन दीपा और दोस्त अस्पताल में रखी लाश को दिनेश धवन का होने का दावा कर रहे थे. यासीन खान ने एएसआई कुलदीप को दिनेश धवन के घर भेज कर उस की पत्नी अनु को पूछताछ के लिए थाने बुलवा लिया. पहली फरवरी, 2021 को अनु थाने में पहुंची. पूछताछ के दौरान उस के पति के बारे में पूछा गया तो उस ने बताया कि करीब 20 दिन पहले वह नौकरी करने झारखंड चला गया है जिस से उस की वाट्सऐप पर रोज चैटिंग होती है.

लेकिन जब अनु से दिनेश धवन का मोबाइल नंबर ले कर उस की लोकेशन निकाली गई तो मोबाइल की लोकेशन फरीदाबाद में ही मिली. यह देख कर यासीन खान ने अनु से दोबारा सख्तीपूर्वक पूछताछ की तो वह टूट गई और उस ने अपने प्रेमी नितिन और उस के साथियों के साथ मिल कर अपने पति दिनेश धवन की हत्या की बात स्वीकार कर ली.

पूछताछ के दौरान अनु ने अपने बयान में जो कुछ बताया और पुलिस की जांच के दौरान दिनेश की हत्या के पीछे जो कहानी सामने आई, वह इस प्रकार है—

35 वर्षीय दिनेश धवन पेशे से प्रौपर्टी डीलर था. वह पत्नी अनु के साथ फरीदाबाद की सैनिक कालोनी में रहता था. घर से कुछ ही दूरी पर उस का औफिस था, जहां बैठ कर वह मकान की खरीदफरोख्त और लोगों को दुकान आदि किराए पर दिलवाने का काम करता था. इस काम में उसे अच्छाखासा कमीशन मिल जाता था, जिस से वह बड़े आराम की जिंदगी गुजार रहा था. दिनेश ने लगभग 10 साल पहले अनु से प्रेम विवाह किया था. अनु का मायका भी सैनिक कालोनी में ही था, जहां उस के पिता भाई और अन्य रिश्तेदार रहते थे.

दिनेश धवन और अनु दोनों एकदूसरे को जीजान से प्यार करते थे. वह अनु के सभी नाजनखरे उठाता तो अनु भी दिनेश के मूड का खयाल रखती थी. वह कभी कोई ऐसा काम नहीं करती, जो दिनेश को नागवार गुजरे. धीरेधीरे वक्त गुजरता गया. जिंदगी के खुशनुमा लम्हों को गुजरने में पता कहां चलता है. देखते ही देखते कई साल गुजर गए, लेकिन अनु की गोद हरी नहीं हुई. संतान नहीं होने के कारण उन के जीवन में नीरसता घुलने लगी तो अनु को चिंता हुई. उस ने दिनेश के सामने अपनी चिंता जाहिर की तो उस ने शहर के कई अच्छे डाक्टरों से अपना इलाज करवाया मगर कोई नतीजा नहीं निकला. आखिर में रिश्तेदारों के कहने पर दिनेश धवन और अनु ने बाल आश्रम से एक बच्ची गोद ले ली और उस की परवरिश करने लगे.

दिनेश धवन के औफिस में मिलने के लिए तरहतरह के लोग आते थे. कभीकभार पीनेपिलाने का दौर भी चलता था. वह खुद भी पीने का शौकीन था. पहले तो इतना ही पीता था, जितना पीने के बाद वह अपना होश कायम रख सके. लेकिन बाद में उस के पीने की लिमिट ज्यादा बढ़ गई तो अनु के साथ उस के संबंधों में कड़वाहट आने लगी. अनु दिनेश को पीने से मना करती तो दिनेश एक कान से उस की बात सुनता दूसरे से बाहर निकाल देता था. वह रोज अनु के सामने नहीं पीने की कसम खा कर घर से औफिस निकलता था, लेकिन जब वह वापस लौटता तो उस के कदम लड़खड़ा रहे होते थे.

पति की पीने की आदत से परेशान अनु अपना दुखड़ा लोगों को सुनाती रहती थी. उस की इस परेशानी का फायदा पड़ोस में रहने वाले हरजीत ने उठाया. उस की नजर अनु के खूबसूरत बदन पर टिकी थी. अनु की दुखती रग पर हाथ रख कर वह धीरेधीरे अनु के दिल के करीब आ गया. अनु को भी लगा एक हरजीत ही उस का दुख समझता है. वह कोई भी काम उसे कहती तो वह सब से पहले अनु का कहा काम पूरा करता फिर बाद में अपना काम करता था. दिनेश की शराब की लत के कारण हर रात अनु का उस से विवाद हो जाता था.

सुबह उस के औफिस चले जाने के बाद अनु अपना अपना दुखड़ा हरजीत को सुनाती थी.  हरजीत पहले से अनु को पाने की फिराक में था. वह अनु की हां में हां मिला कर उस के जख्मों पर मरहम लगा कर उस के कोमल दिल में अपनी जगह बनाने की कोशिश करता था. कुछ ही महीनों में अनु के दिल में इस का असर हुआ और हरजीत मौका देख कर उस के साथ जिस्मानी संबंध बनाने में कामयाब हो गया. हरजीत और अनु के इन संबंधों की जानकारी काफी दिनों तक दिनेश धवन को नहीं हुई, मगर जब आसपड़ोस में उस की पत्नी और हरजीत के अवैध संबंधों के बारे में तरहतरह के चर्चे होने लगे तो दिनेश ने अनु से पूछा कि उस के औफिस जाने के बाद हरजीत यहां क्यों आता है.

अनु ने पति के आरोप सिरे से खारिज करते हुए कहा कि हरजीत उम्र में उस से काफी बड़ा है, जिसे वह चाचा कह कर पुकारती है. वह कभीकभार जरूरत पड़ने पर घर का कोई काम उस से करवाती है. जिसे देख कर लोग बेवजह उस से जलते हैं और तुम्हें मेरे खिलाफ भड़काने का काम कर रहे हैं. लेकिन दिनेश ने अपनी गैरमौजूदगी में हरजीत के घर आने पर रोक लगा दी और उसे अपना काम खुद ही निबटाने के लिए कहा. पति की बात सुन कर अनु ने अपनी गलती स्वीकार करते हुए हरजीत को भविष्य में कभी नहीं बुलाने की कसम खाई.

अनु की गलती मानने पर दिनेश ने उसे माफ कर दिया. लेकिन हरजीत और अनु का रिश्ता खत्म नहीं हुआ. पति की नजरों में धूल झोंक कर अनु ने हरजीत से मिलना जारी रखा. दिनेश घवन के दोस्तों में एक नाम नितिन पंडित का था. दिनेश धवन से उम्र में करीब 10 साल छोटा नितिन बल्लभगढ़ की एक कैमिकल फैक्ट्री में नौकरी करता था. छोटा होने के बावजूद उस की दिनेश के साथ खूब छनती थी. दोनों साथ दारू पीते और लंबीलंबी डींगे हांका करते थे. दिनेश धवन जब शराब के नशे में टल्ली हो जाता तो नितिन उसे संभाल कर उस के घर सैनिक कालोनी पहुंचा आता था. नितिन दिनेश की पत्नी अनु को भाभी कहता था. भाभीदेवर का रिश्ता होने के कारण दोनों अकसर हंसीमजाक करते रहते थे. नितिन अनु की खूबसूरती की जी भर कर तारीफ करता था.

धीरेधीरे दोनों एकदूसरे के करीब आ गए और उन के बीच मधुर संबंध कायम हो गए. इस के बाद अनु और नितिन को जब भी मौका मिलता, वे अपनी हसरतें पूरी कर लेते थे. पिछले साल जब पूरे देश में लौकडाउन शुरू हुआ तो सारी दुनिया जैसे ठहर सी गई. लोगों के कामधंधे बंद हो गए. दिनेश घवन की आमदनी बंद हो गई तो वह परेशान रहने लगा. अनु को ऐसी हालत में पति की मदद करनी चाहिए थी, लेकिन हुआ एकदम उलटा. वह दिनेश को अपने जरूरत की चीजें नहीं देने पर उसे ताना मारने लगी. एक तो आमदनी बंद दूसरे अनु के व्यवहार ने उसे अंदर से तोड़ दिया. परेशान हो कर वह हर वक्त नशा करने लगा. इस प्रकार अनु और दिनेश के बीच की दूरी बढ़ती चली गई.

दूसरी तरफ पति के हमेशा घर में रहने से उस के और नितिन के प्यार की कहानी में ब्रेक लग गया. वे दोनों मोबाइल पर बातें कर अपने प्यार का इजहार करते, लेकिन अकेले में मिल कर अपने दिल की प्यास नहीं बुझा पाते थे. घटना से करीब 2 महीने पहले अनु धवन ने नितिन के साथ मिल कर पति को हमेशा के लिए रास्ते से हटा देने की योजना तैयार की. इस काम में मदद के लिए उस का पुराना प्रेमी हरजीत भी राजी हो गया. नितिन ने अपने दोस्त विनीत और विष्णु को इस योजना में शामिल कर लिया. 11 जनवरी, 2021 की शाम को नितिन, विष्णु और विनीत दिनेश के औफिस से घर लौटने के पहले ही अनु के घर में आ कर छिप गए. रोज की तरह उस दिन भी दिनेश धवन नशे में धुत हो कर घर लौटा था.

वह खाना खा कर सो गया. रात के लगभग एक बजे अनु ने अपने प्रेमी नितिन से कहा कि दिनेश नशे में बेसुध है उस का जल्दी से काम तमाम कर दो. अनु का इशारा पा कर नितिन, विनीत और विष्णु दबे पांव गहरी नींद में सो रहे दिनेश धवन के पास पहुंचे और गला दबा कर उसे मौत की नींद सुला दिया. कहीं वह जिंदा न रह जाए, इसलिए उन्होंने उस के सिर परभी डंडे मारे. सुबह लगभग 4 बजे हरजीत अनु के घर पहुंचा तो नितिन ने उस से कहा कि वह अपना काम कर चुका है. वह दिनेश की लाश को अच्छी तरह पैक कर घर में ही छिपा दे. मौका मिलते ही वे लाश को कहीं ठिकाने लगा देंगे.

इतना कह कर नितिन अपने दोस्तों के साथ अनु के घर से निकल गया. हरजीत ने दिनेश धवन की लाश बैडशीट और प्लास्टिक में पैक कर घर के बाथरूम में छिपा दी. 4-5 दिन बाद जब लाश से बदबू आने लगी तब अनु ने घबरा कर नितिन तथा हरजीत से उसे जल्दी ठिकाने लगाने के लिए कहा. तब 18 जनवरी, 2021 को नितिन, हरजीत, विष्णु और दीपक अनु के घर पहुंचे और लाश बैड के अंदर छिपा दी. फिर बैड सहित लाश को एक रेहड़ी के ऊपर डाल कर गहरे नाले के पास ले गए और ठिकाने लगा दी. जब रास्ते में लोगों ने बैड के बारे में पूछा तो हरजीत ने बताया कि वह बैड को रिपेयर कराने के लिए ले जा रहा है. लाश उन्होंने नाले में डाल दी.

लाश ठिकाने लगाने के बाद हरजीत बैड को वापस अनु के घर ले आया, जिसे अनु ने घर की छत पर रखवा दिया. नितिन ने विष्णु को दिनेश धवन की हत्या करने के बदले 41 हजार रुपए देने का वादा किया था, जो अनु ने अपने अकाउंट से विष्णु को ट्रांसफर कर दिए. दिनेश धवन की हत्या करने के बाद अनु और नितिन अपनी आने वाली नई जिंदगी गुजारने के हसीन सपने देख रहे थे, लेकिन पुलिस ने उन्हें गिरफ्तार कर उन के सपनों को चकनाचूर कर दिया. अनु को पहली फरवरी, 2021 को गिरफ्तार  करने के बाद अगले दिन पुलिस ने पहले अनु के प्रेमी नितिन तथा उस के दोस्तों विनीत, विष्णु, हरजीत और दीपक को भी गिरफ्तार कर लिया.

पुलिस ने सभी आरोपियों को कोर्ट में पेश किया, जहां से सभी को 14 दिनों की न्यायिक हिरासत में भेज दिया.

Bijnor News : चाची के इश्क में भतीजे ने उतारा चाचा को मौत के घाट

Bijnor News :  2 बच्चों की मां सुशीला की घरगृहस्थी ठीकठाक चल रही थी. उस का पति वीर सिंह उस का हर तरह से खयाल रखता था. इस के बावजूद भी उस के पैर अपने भतीजे सोमपाल की तरफ बहक गए. इन बहके कदमों का जो अंजाम हुआ, वो…

शाम के 5 बज रहे थे. सुशीला ने घड़ी देखी तो वह खाना बनाने की तैयारी करने लगी. उस का पति वीर सिंह 6 बजे तक काम से लौट आता था. यह रोज की दिनचर्या थी. उस ने सब्जी काटी और उसे पकाने के लिए गैस चूल्हा जलाना चाहा तो माचिस ही नहीं मिली. उसे याद आया कि माचिस तो आज सुबह ही खत्म हो गई थी. वह घर के मेनगेट पर जा कर खड़ी हो गई. उस ने सोचा कि वह किसी को बुला कर  दुकान से माचिस मंगवा लेगी. तभी उसे सोमपाल दिखा. सोमपाल उस के पति का भतीजा था. इस नाते वह उस का भी भतीजा हुआ. वह भी उसी गांव में रहता था.

सुशीला ने उसे आवाज दे कर पुकारा, ‘‘सोम, जरा इधर आओ.’’

सोमपाल फौरन उस के पास आ गया, ‘‘हां चाची, बोलो मुझे क्यों पुकार रही थीं?’’

‘‘सोम, जरा जल्दी जा कर दुकान से एक माचिस खरीद कर ले आओ. तुम्हारे चाचा आते होंगे, उन के लिए खाना बनाना है.’’

‘‘चाची, माचिस तो मैं ला दूंगा, पर इस के बदले में तुम्हें भी मेरा एक काम करना होगा.’’

‘‘कर दूंगी,’’ सुशीला ने उस की बात को गंभीरता से नहीं लिया, सोचा चाय पीने को मांगेगा, बना कर दे देगी. इसीलिए वह लापरवाही से बोली, ‘‘लेकिन पहले जा कर माचिस ले आओ, नहीं तो देर हो जाएगी.’’

‘‘चाची, मेरे रहते हुए तुम्हें चिंता करने की जरूरत नहीं है, माचिस ले कर अभी आया.’’ कह कर सोमपाल तेजी से वहां से चला गया. 5 मिनट में ही उस ने माचिस ला कर सुशीला के हाथ पर रख दी. सुशीला का पूरा ध्यान खाना बनाने पर था, इसलिए माचिस ले कर वह किचन में चली गई. किचन में सुशीला ने चूल्हा जला कर उस पर कड़ाही रख दी. उस के बाद तेल का डिब्बा उठाने के लिए घूमी तो उस ने अपने पीछे सोमपाल को खड़े पाया. सुशीला को आश्चर्य हुआ, ‘‘अरे, तुम यहां क्या कर रहे हो, जा कर कमरे में बैठो.’’

‘‘चाची, माचिस लाने लाने से पहले मैं ने तुम से कुछ कहा था…’’ सोमपाल ने सुशीला को गौर से देखा.

सुशीला की भी नजरें सोमपाल के चेहरे पर जम गईं, ‘‘मुझ से ऐसा कौन सा काम है तुम्हें?’’

‘‘मैं वही तो बताने जा रहा हूं.’’ सोमपाल ने फिर सुशीला की आंखोें में आंखें डाल दीं, ‘‘मैं ने इस शर्त पर माचिस ला कर दी थी कि तुम्हें भी मेरा एक काम करना होगा. अपने वादे से मुकरो मत. मैं ने तुम्हारा काम कर दिया, अब तुम मेरा काम करो.’’

सोमपाल अकसर सुशीला से चाय की फरमाइश करता था. लिहाजा सुशीला के मन में यही बात थी कि वह चाय के लिए कहेगा. सुशीला खाना पकाने की जल्दी में थी, इसलिए वह सोमपाल के कुछ बोलने से पहले ही वह बोल पड़ी, ‘‘तुम्हारा काम मैं अच्छी तरह जानती हूं, लेकिन मुझे अभी खाना पकाना है, इसलिए तुम्हें चाय बना कर नहीं दे सकती. खाना बन जाए तो मैं खुद तुम्हें बुला कर चाय पिला दूंगी.’’

सोमपाल मुसकराया, ‘‘चाची, चाय के अलावा दूसरा काम भी तो हो सकता है.’’

‘‘तुम देख रहे हो न,’’ डिब्बे से कड़ाही में तेल उड़ेलते हुए सुशीला बोली, ‘‘मैं बिजी हूं, जो बात करनी हो, बाद में कर लेना.’’

‘‘मेरी बात तुम सब्जी पकाते हुए भी तो सुन सकती हो!’’ सोमपाल ने कहा.

‘‘अच्छा जल्दी बोलो, क्या बात है?’’ वह बोली.

सोमपाल अर्थपूर्ण अंदाज से मुसकराते हुए बोला, ‘‘चाची तुम अकसर कहती हो न कि सोमपाल तुम बड़े हो गए हो.’’

सुशीला ने प्रश्नवाचक दृष्टि से उस की तरफ देखा, ‘‘हां, कह देती हूं तो?’’

‘‘चाची, तुम्हारी बातों से मुझे भी लग रहा है कि मैं अब बच्चा नहीं रहा, वास्तव में बड़ा हो गया हूं.’’

सुशीला हंसने लगी, ‘‘यही तुम्हारा वह जरूरी काम था.’’

‘‘नहीं, यह तो उस की भूमिका थी, असली बात तो बाकी है.’’

कड़ाही में गरम होते तेल पर नजरें जमाए हुए सुशीला बोली, ‘‘हां, चलो अच्छा हुआ कि तुम ने भी मान लिया कि तुम बड़े हो गए हो.’’

‘‘इसीलिए मैं ने सोचा कि बड़ा हो गया हूं तो बड़ों वाले काम भी करने चाहिए.’’

सुशीला को उस की बातों में रस आने लगा, ‘‘अब यह तो बता दो कि बड़ों वाला कौन सा काम करने जा रहे हो?’’

सोमपाल ने नजरें झुका लीं, मानो शरमा रहा हो.

सुशीला ने उस का हौसला बढ़ाया, ‘‘शरमाओ मत, बता दो.’’

‘‘चाची, डांटोगी तो नहीं?’’

‘‘बिलकुल नहीं डांटूंगी, बोलो.’’

‘‘किसी से मेरी शिकायत भी नहीं करोगी?’’ वह झिझकते हुए बोला.

‘‘नहीं करूंगी बाबा,’’ सुशीला के होंठों पर गहरी मुसकान पसर गई, ‘‘काम बताओ, समय बरबाद मत करो.’’

‘‘अच्छा तो सुनो,’’ सोमपाल सुशीला के और नजदीक आ गया. उस के बाद अपने लहजे को रहस्यमय बना कर बोला, ‘‘मुझे प्यार हो गया है.’’

‘‘वाह क्या बात है.’’ सुशीला की आंखें आश्चर्य से फैल गईं, ‘‘यानी कि तुम इतने बड़े हो गए हो कि खुद को प्यार के लायक समझने लगे.’’

‘‘और नहीं तो क्या, अब मैं बच्चा थोड़े ही हूं, 22 साल का जवान हो गया हूं. इस उम्र में तो गांव के आम लड़के 2 बच्चों के बाप बन जाते हैं. मेरे भी कुछ दोस्त 2 बच्चों के बाप बन गए हैं. इस उम्र के लोग जब बाप बन जाते हैं तो मैं तो केवल प्यार करने की बात कर रहा हूं.’’ सोमपाल ने एक ही सांस में अपनी बात कह दी. सुशीला दिलचस्पी से उस की आंखों में देखने लगी, ‘‘किस से दिल लगा बैठे हो, जरा मुझे भी तो बताओ.’’

‘‘बता दूंगा, फिलहाल राज को राज रहने दो.’’

‘‘अच्छा सोम, यह बताओ, जिस से तुम प्यार करते हो, वह भी तुम्हें चाहती है न?’’

‘‘पता नहीं.’’

‘‘यह क्या बात हुई,’’ कड़ाही में कटी हुई सब्जी डालते हुए  सुशीला बोली, ‘‘दिल लगा बैठे और यह तक पता नहीं कि उस के दिल में तुम्हारे लिए प्यार है या नहीं.’’

‘‘मैं कहूंगा, तब तो उसे पता चल जाएगा और तभी वह अपने दिल की बात मुझ तक पहुंचा देगी.’’

‘‘तो कह दो न.’’

‘‘चाची, कहने की हिम्मत नहीं है,’’ सोमपाल ने बेचैनी से पहलू बदला, ‘‘इसलिए अपनी बात कहने के लिए यह प्रेम पत्र लिखा है.’’

सोमपाल ने जेब से एक पत्र निकाल कर सुशीला की ओर बढ़ाया, ‘‘लो, खुद ही पढ़ लो.’’

सुशीला ने तह किया हुआ पत्र खोल कर पढ़ा. बिना किसी को संबोधित करते हुए उस में लिखा था—

प्रिय प्राणेश्वरी,  मुझे तुम से प्यार हो गया है. दिन हो या रात, तुम्हारे ही खयालों में खोया रहता हूं. मुश्किल से नींद आती है तो तुम्हारे ही सपने देखता रहता हूं. सपने में तुम आती हो तो मैं अपने पर काबू नहीं रख पाता और तुम्हारे साथ अंतरंग क्षणों में खो जाता हूं. उस समय का प्यार मुझे भूले नहीं भूलता. इस पत्र के जरिए अपने दिल की हालत तो मैं ने बयान कर दी. कह दो न कि तुम भी मुझे प्यार करती हो. —तुम्हारा सोम

पत्र पढ़ कर सुशीला मुसकराई, ‘‘सोम, प्यार का इजहार करने के साथसाथ तुम ने अंतरंग क्षणों का जिक्र कर दिया.’’

‘‘चाची, जो सच है, मैं ने वही लिखा है. सच यह है कि मैं उस के साथ अंतरंग क्षणों का दीवाना हूं.’’

सुशीला का विवाह हुए केवल 12 साल हुए थे और वह 2 बच्चों की मां थी. वह जानती  थी कि अंतरंग क्षणों में इंसान कैसे पेश आता है. इस पर सुशीला उस की हिम्मत बढ़ाने के उद्देश्य से बोली, ‘‘हिचको मत, जिस के लिए पत्र लिखा है उसे दे आओ.’’

सोमपाल मुसकराया, ‘‘मेरी बात उस के दिल पर असर तो करेगी?’’

‘‘जरूर असर करेगी.’’

‘‘वह प्यार का जबाव प्यार से देगी न, सिर पर जूते पड़ने की नौबत तो नहीं आएगी?’’

‘‘इस बारे में तुम बेहतर बता सकते हो कि प्यार मिलेगा या फटकार!’’

‘‘चाची, तुम बताओ क्या मिलेगा?’’

‘‘सोम, तुम दिमाग बहुत चाट चुके, अब तुम जाओ, मुझे खाना पकाना है. तुम्हारे चाचा आते ही होंगे, आते ही वह खाना मांगेंगे.’’

‘‘चला जाऊंगा, बस तुम एक सवाल का जबाव दे दो…’’ सोमपाल उस की आंखों में झांकते हुए बोला, ‘‘मुझे प्यार ही मिलेगा न?’’

सुशीला ने पीछा छुड़ाने के उद्देश्य से कहा, ‘‘हां, प्यार ही मिलेगा.’’

‘‘तो प्यार दो न चाची!’’ सोमपाल फंसी हुई सी आवाज में बोला, ‘‘मुझे तुम से प्यार हो गया है और यह पत्र मैं ने तुम्हारे लिए ही लिखा था.’’

पलक झपकते ही सुशीला सन्नाटे से घिर गई. ऐसा सन्नाटा जिस में वह अपना अस्तित्व शून्य जैसा महसूस कर रही थी. जनपद बिजनौर के थाना रेहड़ के अंतर्गत ग्राम फाजलपुर निवासी वीर सिंह से सुशीला का विवाह 12 साल पहले हुआ था. कालांतर में सुशीला ने एक बेटी सोनम (7 वर्ष) और एक बेटा मनीष (5 वर्ष) को जन्म दिया. वीर सिंह पशुओं के पैरों में नाल लगाने का काम करता था. फाजलपुर गांव में ही सोमपाल रहता था. वह भी चाचा वीर सिंह की तरह पशुओं के पैरों में नाल लगाने का काम करता था. सोमपाल की उम्र 22 साल थी और वह अविवाहित था. उस के 2 बहन और एक भाई था. वह तीनों से छोटा था. उम्र के जिस पड़ाव पर सोमपाल था, वह सपने देखने और उन में नित नएनए रंग भरने की होती है.

सोमपाल का मन भी रंगीन कल्पना किया करता था और आंखें तन को रोमांचित करने वाले सपने देखा करती थीं. सोमपाल सुशीला से उम्र में 11 साल छोटा था. गोरे रंग की सुशीला का बदन उम्र बढ़ने के साथ ही और खिलता जा रहा था. 2 बच्चों की मां बनने के बाद भी उस के यौवन में कोई कमी नहीं आई थी. सुशीला का बिंदास बोलना और उठनाबैठना सोमपाल के दिल में घर कर गया. सुशीला कब उस के सपनों की शहजादी बन गई, स्वयं उसे भी पता नहीं चला. सोमपाल के मन में सुशीला एक बार बसी तो वह चाह कर भी उसे दिल से निकाल नहीं सका. सुशीला को वह चाची कहता था, इस के बावजूद वह उस के सपनों की रानी बनी हुई थी.

मन ही मन सोमपाल उसे चाहता ही नहीं था, बल्कि उस से शादी करने के सपने भी देखा करता था. बहुत दिनों से सोमपाल इस जुगत में था कि सुशीला को वह अपने मन की बात बता सके. लेकिन उसे कभी मौका नहीं मिलता तो कभी उस की हिम्मत उस का साथ नहीं देती थी. लिहाजा उस ने एक प्रेमपत्र लिख कर यह सोच कर अपनी जेब में रख लिया था कि मौका मिलते ही चाची को दे देगा. उस दिन मौका मिला तो सोमपाल ने प्रेमपत्र देने के बाद अपने मन की बात भी उसे बता दी, ‘‘सुशीला चाची, मैं तुम्हें बहुत प्यार करता हूं.’’

सोमपाल का प्रेम निवेदन सुन कर सुशीला सन्नाटे में आ गई. उस की तंद्रा तब टूटी, जब कड़ाही की तली में सब्जी जलने की बदबू आई. सुशीला तुरंत सब्जी चलाने लगी. सोमपाल के प्रेम निवेदन से सुशीला को गुस्सा नहीं आया, अपितु उस की सोच को नई दिशा मिल गई. दरअसल वीर सिंह के साथ वह खुश तो थी लेकिन वह उस के सपनों का राजकुमार नहीं था. विवाह से पहले सुशीला ने कल्पना की तूलिका से अपने मन में अपने जीवनसाथी की जो छवि बनाई थी, वह वीर सिंह जैसी नहीं, बल्कि सोमपाल जैसी थी. सुशीला भी उसे बहुत पसंद करती थी. पहली बार सोमपाल को उस ने देखा था तो मन में यही खयाल आया था, ‘सोमपाल इस दुनिया में पहले क्यों नहीं आया.

यदि पहले आ जाता तो सोमपाल से मेरी शादी हो जाती, कसम से मजा आ जाता. जीवन में फिर कोई तमन्ना नहीं रह जाती.’

अब सोमपाल ने अपने प्रेम का इजहार किया तो वह सोचने लगी, ‘शायद नियति ने मेरे मन की बात सुन ली है और वह इसे पूरी करना भी चाहता है. इसलिए उस ने सोमपाल का दिल मेरी चाहत से रोशन कर दिया है. देर से ही सही, लेकिन सोमपाल से इश्क लड़ा कर देखा जाए कि मोहब्बत कैसा मजा देती है.’

उस दिन सुशीला का मन किसी काम में नहीं लगा. उस का दिमाग बस सोमपाल के बारे में सोचता रहा. उस का दिया प्रेम पत्र उस ने कई बार पढ़ा और फिर मुसकरा कर चूम लिया. कोई उस के चरित्र पर अंगुली उठाए, ऐसा सुबूत वह अपने पास रखना नहीं चाहती थी, इसलिए सोमपाल का वह प्रेम पत्र चूल्हे की आग में जला दिया. वीर सिंह के घर आने के बाद उस ने उसे खाना परोसा. वीर सिंह ने जैसे ही पहला निवाला मुंह में डाला, उस के बाद उस ने सुशीला को अजीब नजरों से देखा और बोला, ‘‘सुशीला, आज तुम ने खाना पकाया है या मजाक किया है. सब्जी में नमक नहीं है और जलने की गंध आ रही है. रोटी भी कहीं कच्ची है तो कहीं जली है. खाना पकाते समय ध्यान कहां था तुम्हारा.’’

सुशीला कैसे बताती कि वह सोमपाल के खयालों में खोई रही थी, इसलिए उस ने बेमन से खाना पकाया था. अपनी बात संभालने के लिए उस ने सिर भारी होने और चक्कर आने का बहाना किया और उस के सामने से थाली खींचने लगी, ‘‘तबियत ठीक न होने की वजह से खाना खराब हो गया. आधा घंटा लगेगा, अभी दूसरी रोटीसब्जी पका लाती हूं.’’

‘‘रहने दो. जैसा है, भोजन है और भोजन का अपमान नहीं करना चाहिए. रोज अच्छा खाता था, आज थोड़ा खराब खा लूंगा. बस थोड़ा नमक दे दो.’’ इस पर सुशीला ने उसे नमक दे दिया. सब्जी में नमक मिला कर वीर सिंह ने वही खाना खा लिया. रात को सभी लोग सो गए लेकिन सुशीला सोमपाल के खयालों में ही खोई रही. सोमपाल और अपने बारे में सोचतेसोचते सुशीला ने अंतत: निर्णय कर लिया कि वह सोमपाल के प्यार का जबाव प्यार से देगी. बस, उस के मन का तनाव जाता रहा और वह चैन से सो गई. दूसरी तरफ कहने को सोमपाल सो रहा था, जबकि वह जाग रहा था और इसी सोच में था कि सुशीला उस के प्यार को स्वीकार करेगी कि नहीं.

अगले दिन सुबह वीर सिंह काम पर चला गया. सोमपाल काम पर नहीं गया, अपने घर पर ही रहा. असल में वह सहमा भी था कि कहीं सुशीला चाची का जबाव उस के मन के विपरीत हुआ तो सब गुड़ गोबर हो जाएगा. जब वह सुशीला के सामने पहुंचा तो सुशीला ने उस की आंखों में आंखें डाल कर पूछा, ‘‘कल मैं खाना पकाने की उलझन में थी, इसलिए तुम्हारी बातों पर तवज्जो नहीं दे पाई. अब बोलो, कल क्या कह रहे थे?’’

सोमपाल के भीतर के भय ने और भी लंबे पांव पसार लिए. नजरें झुका कर वह धीरे से बोला, ‘‘मुझे जो कहना था, कल ही कह दिया था.’’

‘‘क्या यह सच है कि तुम्हें मुझ से प्यार हो गया है?’’ वह बोली.

सोमपाल ने नजरें झुकाए हुए ही धीरे से सिर हिला दिया, ‘‘हां.’’

‘‘प्यार भी करते हो और डरते भी हो,’’ सुशीला ने अपनी बांहें उस के गले में डाल दी, ‘‘बुद्धू, प्यार करने वाले डरा नहीं करते.’’

सोमपाल हैरान रह गया. सुशीला प्यार का जबाव इस शिद्दत से देगी, यह उस की सोच से परे बात थी.

‘‘विश्वास नहीं हो रहा है!’’ सुशीला मुसकराई, ‘‘अच्छा, मैं तुम्हारा मुंह मीठा करा देती हूं, तब यकीन होगा कि यह सुशीला भी तुम्हें चाहती है.’’

इस के बाद वह अपना मुंह सोमपाल के मुंह के पास ले गई. इतने पास कि सांसें सांसों से टकराने लगीं. सोमपाल ने उस के होंठों से अपने होंठों का मिलाप करा कर उस के होंठों को चूम लिया.

कुछ देर चूमने के बाद सुशीला ने अपना मुंह हटा लिया और उस की आंखों में देखते हुए पूछा, ‘‘हुआ मुंह मीठा?’’

सोमपाल ने होंठों पर अपनी जीभ फेरी, उस के बाद सुशीला की कमर को अपनी बांहों में समेट लिया, मुसकरा कर बोला, ‘‘मुंह भी मीठा हुआ और यकीन भी हो गया. जिस तरह मुंह मीठा किया है, उसी तरह पूरा बदन मीठा कर दो तो मजा आ जाए.’’

सुशीला ने बांकी चितवन से उसे देखा, ‘‘सब कुछ आज ही कर गुजरने का इरादा है क्या?’’

‘‘प्यार में जो होना है, वह फौरन हो जाना चाहिए.’’ कह कर सोमपाल ने सुशीला के होंठों को चूम लिया.

सुशीला के मन में अनार की आतिशबाजी सी होने लगी. उस का मन भी सोमपाल के जोश और जवानी को परखने का हो गया, मुसकरा कर बोली, ‘‘सोम, तुम भी क्या याद करोगे. प्यार के इजहार के बाद पहली मुलाकात में ही तुम्हें सब कुछ मिल जाएगा, जोकि आम प्रेमियों को महीनों बाद मिलता है और कइयों को तो मिलता ही नहीं है.’’

सोमपाल ने बांहों का घेरा और तंग कर लिया, ‘‘थैंक यू चाची.’’

‘‘चाची, दूसरों के सामने बोलना, अकेले में मुझे मेरे नाम से पुकारा करो,’’ सुशीला इठला कर बोली, ‘‘अब कमर छोड़ो, तो मैं दरवाजा बंद कर आऊं.’’

सोमपाल ने सुशीला की कमर को बांहों की गिरफ्त से आजाद कर दिया. सुशीला ने झट से दरवाजा बंद कर दिया और सोमपाल की बांहों में समा गई. फिर उन के जिस्म मर्यादाओं की दीवार तोड़ कर एक हो गए. कुछ देर बाद दोनों अलग हुए तो दोनों ही आनंद से अभिभूत थे. सोमपाल को पहली बार नारी देह का सुख मिला था, यह सर्वथा अनूठा और आनंददायक अनुभव था. सुशीला इसलिए आनंद के महासागर में डुबकियां लगा रही थी क्योंकि उस का पति वीर सिंह उसे ऐसा कभी सुख नहीं दे पाया था. बस, उस दिन से दोनों एकदूसरे के पूरक बन गए. 13 जनवरी, 2021 को वीर सिंह अपनी बाइक से सुआवाला बाजार गया लेकिन देर शाम तक वह वापस नहीं लौटा तो घर वालों ने उस की तलाश की लेकिन कहीं पता नहीं चला.

इस पर वीर सिंह के छोटे भाई रामगोपाल सिंह ने रेहड़ थाने में वीर सिंह की गुमशुदगी दर्ज करा दी. सुबह वीर सिंह के घर वालों और गांव के लोगों ने फिर से वीर सिंह की तलाश शुरू की तो सुआवाला और मच्छमार मार्ग के बीच हरहरपुर गांव के पास वीर सिंह की लाश पड़ी मिली. लाश मिलते ही वीर सिंह के घर वाले रोनेचिल्लाने लगे. घटनास्थल अफजलगढ़ थाना क्षेत्र में आता था, इसलिए घटना की सूचना अफजलगढ़ थाने को दे दी गई. सूचना पा कर इंसपेक्टर नरेश कुमार पुलिस टीम के साथ घटनास्थल पर पहुंच गए. मृतक वीर सिंह के सिर पर घाव के निशान थे, जिस से अंदाजा यह लगाया गया कि किसी ठोस वस्तु से सिर पर प्रहार कर के वीर सिंह को मौत के घाट उतारा गया है.

इंसपेक्टर नरेश कुमार ने लाश का निरीक्षण करने के बाद घटनास्थल का निरीक्षण किया, लेकिन घटना से संबंधित कोई सुबूत हाथ नहीं लगा. उस के घर वालों से पूछताछ की तो वीर सिंह के छोटे भाई रामगोपाल ने थानाप्रभारी को बताया कि 2 जनवरी को वीर सिंह का गांव के ही अंकुश, रवि, शकील और ब्रह्मपाल से पैसों के लेनदेन को ले कर विवाद हुआ था. पूछताछ के बाद इंसपेक्टर कुमार ने लाश पोस्टमार्टम के लिए मोर्चरी भिजवा दी. थाने आ कर इंसपेक्टर कुमार ने रामगोपाल की तरफ से अंकुश, रवि, शकील और ब्रह्मपाल के खिलाफ भादंवि की धारा 304 के तहत मुकदमा दर्ज करा दिया. केस की जांच शुरू हुई तो नामजद आरोपियों की लोकेशन घटनास्थल पर या उस के आसपास नहीं मिली. सभी आरोपी अपनेअपने घरों में ही मौजूद थे.

वह सवालों के जवाब भी बेखटक दे रहे थे. किसी तरह का शक न होने पर इंसपेक्टर कुमार ने अपनी जांच की दिशा को मोड़ा. उन की समझ में आ गया था कि घटना में नामजदगी गलत है, घटना किसी और ने अंजाम दी है. सर्विलांस टीम का सहारा लिया गया. घटना वाली शाम घटनास्थल पर मौजूद नंबरों की जांचपड़ताल की गई, तो उस में से 3 नंबर संदिग्ध लगे. एक नंबर सोमपाल का था. सोमपाल के बारे में इंसपेक्टर कुमार ने पता किया तो वह मृतक का भतीजा निकला. सोमपाल के साथ 2 फोन नंबर और भी एक्टिव थे. उन नंबरों की लोकेशन भी काफी समय तक एक साथ रही थी. वह नंबर ऊधमसिंह नगर के जसपुर थाना क्षेत्र के रायपुर गांव के 2 युवकों के थे. उन की लोकेशन घटना वाली शाम घटनास्थल से रायपुर तक रही थी.

इस के बाद इंसपेक्टर कुमार ने 16 जनवरी की रात सोमपाल और उस के साथियों लवकुश और सलीम (परिवर्तित नाम) को गिरफ्तार कर लिया. उन्होंने वीर सिंह की हत्या करने की बात स्वीकार कर ली. थाने में उन से पूछताछ के बाद 17 जनवरी को उन्होंने सुशीला को भी गिरफ्तार कर लिया. पुलिसिया पूछताछ के बाद हत्या की जो वजह निकल कर सामने आई, वह कुछ इस तरह थी—

सोमपाल और सुशीला के संबंध बने महीनों बीत गए. इस दौरान सुशीला और सोमपाल का प्यार बेहद बढ़ गया था. अलग होने की कल्पना से ही दोनों का कलेजा मुंह को आने लगता था. सोमपाल शादी करने की बात करता तो सुशीला उस की हां में हां मिलाने लगती थी. असल में सुशीला ने पति वीर सिंह को दिल से निकाल दिया था और मन से सोमपाल को अपना पति मान चुकी थी. वह उस के साथ ही अपना जीवन बिताने की इच्छुक थी. लेकिन घटना से करीब 2 महीने पहले उन के इस नाजायज रिश्ते का भेद खुल गया. एक दिन रात में सोते समय वीर सिंह की आंखें खुलीं तो वह लघुशंका के लिए उठा तो उस ने सुशीला को अपने बिस्तर से गायब पाया.

वह कमरे से बाहर निकला तो रसोई से उसे कुछ आवाजें आती सुनाई दीं,वह उस तरफ बढ़ गया. जैसे ही वह रसोई के अंदर पहुंचा तो अंदर का दृश्य देख कर उस की आंखें हैरत से फट गईं. सुशीला भतीजे सोमपाल के साथ आपत्तिजनक हालत में थी. उसे एकबारगी तो विश्वास नहीं हुआ, पर अगले ही पल वह चिल्लाया, ‘‘सुशीला…’’

वीर सिंह की आवाज सुन कर दोनों हड़बड़ा कर अलग हो गए और मुजरिम की भांति नजरें झुका कर खड़े हो गए. वीर सिंह ने दोनों को काफी लताड़ा और सुशीला के साथ मारपीट की. लेकिन तब तक सोमपाल वहां से खिसक लिया था. सुशीला को वीर सिंह ने हिदायत दी कि आगे से ऐसी हरकत न करे, नहीं तो अच्छा नहीं होगा. लेकिन कहते हैं कि ये ऐसी चाहत है, जिस का नशा इंसान के सिर चढ़ कर बोलता है, तमाम पाबंदियों के बावजूद इंसान बेचैन हो कर फिर उसी नशे की तरफ भागता है. ऐसा ही सोमपाल और सुशीला के साथ हुआ. वह भी इस चाहत के नशे के आदी हो गए थे.

जब पाबंदी लगी तो बरदाश्त नहीं कर सके और बेचैन हो कर फिर दोनों एकदूसरे के नशे की चाहत में डूबने लगे. लेकिन बंदिशों के कारण खुल कर न मिल पाने की कसक दोनों को सालती थी. वैसे भी दोनों एक साथ रहने का मन बना चुके थे, इसलिए वीर सिंह को अपने रास्ते से हटाने की सोचने लगे, उस को हटाए बिना दोनों एक नहीं हो सकते थे. इसलिए सोमपाल ने अपने 2 साथियों ऊधमसिंह नगर के थाना जसपुर के रायपुर गांव निवासी लवकुश और सलीम (परिवर्तित नाम) से हत्या में साथ देने के लिए बात की. दोनों सोमपाल का साथ देने को तैयार हो गए. लवकुश तो बालिग था, उस की उम्र 22 साल थी, लेकिन सलीम नाबालिग था उस की उम्र 16 वर्ष थी.

वीर सिंह की हत्या की योजना बनी, योजना से सुशीला को भी अवगत कराया गया. 13 जनवरी, 2021 को वीर सिंह सुआवाला बाजार जाने के लिए बाइक से निकला. उस के निकलने से पहले ही सुशीला ने फोन कर के सोमपाल को बता दिया था. सोमपाल लवकुश और सलीम के साथ सुआवाला मच्छमार मार्ग के रास्ते में जा कर खड़ा हो गया. जैसे ही वीर सिंह बाइक पर बैठ कर उधर आया, तो उस ने डंडा मार कर उसे बाइक से गिरा दिया. वीर सिंह के गिरते ही तीनों ने उसे दबोच लिया और सिर पर डंडा मारमार कर उस की हत्या कर दी. इस के बाद नहर के दोनों तरफ बनी पक्की दीवारों के बीच में लाश डाल दी. डंडे को एक गन्ने के खेत में छिपा दिया तथा वीर सिंह का मोबाइल मय सिम तालाब में फेंक दिया.

इस के बाद वीर सिंह की बाइक से सोमपाल लवकुश और सलीम को रायपुर तक छोड़ने गया. वहां से वापस आ कर एक जगह बाइक छिपा दी और घर चला गया. लेकिन गुनाह कभी किसी का छिपता नहीं तो इन का कैसे छिप जाता. चारों आरोपी पुलिस की गिरफ्त में आ गए. इंसपेक्टर कुमार ने आईपीसी की धारा 304 को धारा 302/120बी में तरमीम कर दिया. फिर कानूनी औपचारिकताएं पूरी कर चारों आरोपियों को न्यायालय में पेश करने के बाद जेल दिया गया.

—कथा पुलिस सूत्रों पर आधारित

 

UP Crime News : कैंची से कत्ल – दूसरे प्रेमी से करवाया पहले का मर्डर

UP Crime News : सोनू जानती थी कि अमीन के पद पर कार्यरत आशीष शुक्ला शादीशुदा ही नहीं बल्कि 2 बच्चों का पिता है. इस के बावजूद लालची सोनू ने उसे अपने प्यार के जाल में फांस लिया. इसी दौरान महत्त्वाकांक्षी सोनू ने ऐसी चाल चली कि…

नवंबर 2020 माह की 28 तारीख थी. जनपद अंबेडकरनगर के मालीपुर थाना क्षेत्र में मझुई नदी के नेमपुर घाट पर किसी अज्ञात व्यक्ति की लाश पड़ी हुई थी. सुबहसवेरे घाट पर पहुंचे लोगों ने लाश देखी तो कुछ देर में वहां देखने वालों का तांता लग गया. उसी दौरान किसी ने इस की सूचना मालीपुर थाने में फोन कर के दे दी. सूचना पा कर थानाप्रभारी विवेक वर्मा पुलिस टीम के साथ मौके पर पहुंच गए. लाश पौलिथिन में लिपटी हुई थी. मृतक की उम्र लगभग 43-44 साल थी. उस के गले पर किसी तेज धारदार हथियार से वार किए जाने के निशान मौजूद थे. आसपास का निरीक्षण करने पर कोई सुबूत हाथ नहीं लगा. अनुमान लगाया गया कि हत्या कहीं और कर के लाश वहां फेंकी गई है.

वहां मौजूद लोगों में से कोई भी लाश की शिनाख्त नहीं कर सका. मौके की काररवाई निपटाने के बाद थानाप्रभारी वर्मा ने लाश पोस्टमार्टम के लिए मोर्चरी भेज दी. यह बात 28 नवंबर, 2020 की है. थाने आ कर थानाप्रभारी विवेक वर्मा ने जिले के समस्त थानों में दर्ज गुमशुदगी के बारे में पता किया तो अकबरपुर थाने में 45 वर्षीय आशीष शुक्ला नाम के व्यक्ति की गुमशुदगी दर्ज होने की बात पता चली. गुमशुदगी आशीष के साथ लिवइन में रहने वाली सोनू नाम की युवती ने दर्ज कराई थी. सोनू को बुला कर लाश की शिनाख्त कराई गई तो उस ने उस की शिनाख्त आशीष के रूप में की. सोनू ने पूछताछ में बताया कि एक दिन पहले देर रात किसी का फोन आया था, जिस के बाद आशीष घर से चले गए थे. आज उन की लाश मिली.

पता चला कि आशीष लखीमपुर जिले की कोतवाली सदर अंतर्गत कनौजिया कालोनी में रहता था. आशीष अंबेडकरनगर में अमीन पद पर कार्यरत था और कोतवाली शहर के मुरादाबाद मोहल्ले में किराए के मकान में रहता था. उस के साथ उस की कथित पत्नी सोनू शुक्ला रहती थी. लखीमपुर में आशीष की पत्नी राखी और बच्चे रहते थे. राखी को पति की लाश मिलने की सूचना मिली तो वह तुरंत अंबेडकरनगर पहुंच गई. मालीपुर थाने में उस ने दी तहरीर में पति की हत्या का आरोप सोनू शुक्ला और उस के 3 साथियों विवेक, विकास पर लगाया. राखी की तहरीर के आधार पर थानाप्रभारी विवेक वर्मा ने सोनू और उस के साथियों के खिलाफ भादंवि की धारा 302/201 के तहत मुकदमा दर्ज कर लिया.

30 नवंबर को थानाप्रभारी ने सोनू को हिरासत में ले कर पूछताछ की तो थोड़ी सख्ती करने पर वह टूट गई और आशीष की हत्या का जुर्म स्वीकार कर लिया. उस ने बताया कि आशीष की हत्या में उस के प्रेमी आनंद तिवारी, उस के साथी मूलसजीवन पांडेय और राजीव कुमार तिवारी उर्फ राजू ने साथ दिया था. पूछताछ के बाद पुलिस ने उसी दिन आनंद और मूल सजीवन को गिरफ्तार कर लिया गया.  उन सभी से पूछताछ के बाद आशीष की हत्या की जो कहानी सामने आई, इस प्रकार थी—

आशीष शुक्ला लखीमपुर खीरी क्षेत्र में एलआरपी रोड पर स्थित कनौजिया कालोनी में रहते थे. 18 वर्ष पहले उन का विवाह राखी से हुआ था. राखी काफी सरल स्वभाव की थी. उस ने आते ही आशीष की जिंदगी को महका दिया था. आशीष भी सरल स्वभाव की राखी को हमसफर के रूप में पा कर काफी खुश हुआ. कालांतर में राखी ने एक बेटे आयुष (17 वर्ष) और बेटी अर्चिता (12 वर्ष) को जन्म दे दिया. आयुष के जन्म के बाद 2006 में आशीष की नौकरी अमीन के पद पर लग गई. वह अंबेडकरनगर में ही कोतवाली शहर के मुरादाबाद मोहल्ले में किराए पर कमरा ले कर रह रहा था. जब सब कुछ अच्छा चल रहा होता है, कभीकभी तभी अचानक से जिंदगी में ऐसा खतरनाक मोड़ आ जाता है कि इंसान न संभले तो सब कुछ तहसनहस हो जाता है.

आशीष की जिंदगी में भी सब कुछ अच्छा चल रहा था कि जिंदगी में एक ऐसा मोड़ आया कि उस की जिंदगी दूसरे रास्ते पर चल पड़ी. वह रास्ता उस के और उस के परिवार के लिए कितना खतरनाक होने वाला था, आशीष को इस का बिलकुल आभास नहीं था. अंबेडकरनगर में काम के दौरान उस की मुलाकात सोनू नाम की युवती से हुई. 27 वर्षीय सोनू इब्राहिमपुर थाना क्षेत्र के बड़ा गांव की रहने वाली थी. उस के पिता विजय कुमार तिवारी की मृत्यु हो चुकी थी. सोनू 2 भाई व 3 बहनें थीं. सोनू काफी महत्त्वाकांक्षी थी. पिता के न रहने पर उस के विवाह होने में भी अड़चन आ रही थी. इसलिए उस ने अपने लिए खुद ही अच्छा हमसफर तलाश करने की ठान ली. इसी तलाश ने उसे आशीष शुक्ला तक पहुंचा दिया. आशीष एक तो सरकारी नौकरी करता था, साथ ही काफी स्मार्ट भी था.

सोनू ने उस की तरफ अपने कदम बढ़ाने शुरू कर दिए. सोनू ने आशीष के बारे में पूरी जानकारी जुटा ली. उसे यह भी पता था कि आशीष शादीशुदा है और 2 बच्चों का पिता है. लेकिन सोनू के लिए अच्छी बात यह थी कि उस की पत्नी और बच्चे लखीमपुर में रहते थे. आशीष को सोनू ने अपने रूपजाल में फांसना शुरू कर दिया. आशीष के साथ वह अधिक से अधिक समय बिताने लगी. उस के लिए खाना बना देती. घर में बना उस के हाथ का खाना खा कर आशीष को बड़ा अच्छा लगता था. वैसे आशीष कभी खुद खाना बना लेता था या होटल पर खा लेता था. सोनू अच्छी तरह जानती थी कि किसी भी मर्द के दिल तक पहुंचने का रास्ता उस के पेट से हो कर जाता है. भरपेट मनपसंद खाना मिलता तो आशीष सोनू की जम कर तारीफ करता. समय के साथ दोनों काफी नजदीक आने लगे.

आशीष अपनी पत्नी राखी को धोखा नहीं देना चाहता था, लेकिन सोनू का साथ पा कर वह दिल के हाथों ऐसा मजबूर हुआ कि वह अपने आप को रोक नहीं पाया और अपनी जिंदगी को दूसरे रास्ते पर ले गया. उस रास्ते पर सोनू बांहें फैलाए उस का इंतजार कर रही थी. अब सोनू हर दूसरेतीसरे दिन आशीष के कमरे पर ही रुकने लगी. रुकती तो खाना बनाने के साथ ही बाकी काम भी वह कर देती थी. सोनू उस के साथ ऐसा व्यवहार करती जैसे उस की पत्नी हो. आशीष को यह सब काफी अच्छा लगता. एक रात जब दोनों बैठे बातें कर रहे थे तो आशीष ने उस से कह दिया, ‘‘सोनू तुम मेरा बहुत खयाल रखती हो. इतना खयाल तो सिर्फ पत्नी ही रख सकती है. तुम मेरी पत्नी न होते हुए भी पत्नी जैसा खयाल रख रही हो.’’

‘‘तारीफ के लिए शुक्रिया जनाब. आप को इस बात का पता तो चला कि मैं आप का कितना खयाल रखती हूं. मैं तो अभी तक यही सोचती थी कि न जाने कब आप को पता चलेगा और कब मैं अपने दिल का हाल बयां कर पाऊंगी.’’ कह कर सोनू ने अपनी नजरें झुका लीं.

‘‘क्या मतलब…’’ आशीष ने उस के चेहरे पर नजरें गड़ा कर पूछा, ‘‘कहना क्या चाहती हो?’’

‘‘अब इतने भी अंजान नहीं हो तुम कि इस का क्या मतलब ही न जानते हो. जो मैं तुम्हारा हर समय हरदम खयाल रखती हूं, वह भी एक पत्नी की तरह, तो क्यों रखती हूं.’’

‘‘तो तुम ही खुल कर बता दो कि तुम्हें मेरा इतना खयाल क्यों है.’’ उस ने पूछा.

‘‘मैं तुम को पसंद करती हूं तुम से प्यार करती हूं, इसीलिए मुझे तुम्हारा इतना खयाल रहता है. मुझे तुम्हारा साथ पसंद है इसीलिए हमेशा तुम्हारे पास ही बनी रहती हूं, लेकिन तुम हो कि मेरे जज्बातों की फिक्र ही नहीं है.’’ सोनू ने यह कह कर एक बार फिर अपनी नजरें झुका लीं और मायूसी का लबादा ओढ़ लिया. आशीष उस की बात पर मंदमंद मुसकराते हुए बोला, ‘‘मैं जानता था लेकिन जानबूझ कर अंजान बना था. तुम्हारे इतना सब करने पर कोई मूर्ख व्यक्ति भी समझ जाएगा कि तुम्हारे दिल में क्या है तो मैं तो पढ़ालिखा हूं. तुम्हारी जुबां से सुनना चाहता था, इसलिए अंजान बनने का नाटक कर रहा था.’’

यह सुनते ही सोनू की खुशी का पारावार न रहा, ‘‘मतलब मुझे इतने दिनों से बना रहे थे कि कुछ नहीं जानते हो. मुझे बता तो देते मैं तो वैसे भी तुम पर वारी जा रही थी.’’ कह कर सोनू आशीष के सीने से लग गई. उस की आंखों में अपनी जीत की खुशी चमक रही थी.

‘‘तुम पत्नी जैसे सब काम कर रही थीं लेकिन एक काम छोड़ कर…’’ शरारती अंदाज में तिरछी नजरों से आशीष ने सोनू को देख कर कहा. सोनू ने एक पल के लिए दिमाग पर जोर दे कर सोचा, फिर अगले ही पल आशीष की बात का मतलब समझते ही वह शरमा गई और उस के सीने में अपना मुंह छिपा लिया. उस के बाद उन के बीच शारीरिक रिश्ता भी कायम हो गया. आशीष और सोनू के बीच उम्र में 18 साल का अंतर था. सोनू 27 साल की थी तो आशीष 45 वर्ष का. सोनू आशीष के साथ उस की पत्नी बन कर रहने लगी. अपने नाम के आगे शुक्ला लगाने लगी. जिस से भी मिलती, बातें करती तो अपने आप को आशीष की पत्नी ही बताती. समय के साथ ब्याहता राखी को पता चल गया कि उस का पति आशीष सोनू नाम की किसी महिला के साथ रह रहा है.

पति आशीष से राखी ने बात की तो उस ने कह दिया कि जैसा वह सोच रही है वैसा कुछ नहीं है. काम के सिलसिले में वह उस के पास रह रही है. आशीष के साथ रहते सोनू उसे अपने वश में करने की पूरी कोशिश करती थी. मसलन किसी भी कागज/दस्तावेज में पत्नी के नाम की जगह आशीष उस का ही नाम डाले. कोई संपत्ति खरीदे तो उस के नाम से ही खरीदे. इस के लिए वह आशीष पर दबाव बनाती थी. आशीष उस की बात को नजरअंदाज कर देता था. सोनू के कहने पर ऐसा वह कर भी नहीं सकता था. लेकिन आशीष को अपनी बात न मानते देख कर सोनू नाराज हो जाती थी. अब उन दोनों में अकसर विवाद होने लगा. सोनू अपने भविष्य को ले कर चिंतित रहने लगी. आशीष से उस ने जिस वजह से रिश्ता बनाया, वह वजह उसे पूरी होती नहीं दिख रही थी.

आशीष का एक दोस्त था 23 वर्षीय आनंद तिवारी. आनंद अकबरपुर थाना क्षेत्र के सिंहमई कारीरात गांव में रहता था. उस के पिता रमेश तिवारी किसान थे. 3 भाइयों में वह सब से बड़ा था और अविवाहित था. आनंद तिवारी आशीष से मिलने उस के कमरे पर आता रहता था. आनंद भी काफी स्मार्ट और जवान था. सोनू से 4 साल छोटा था. आशीष तो दोनों से उम्र में काफी बड़ा था. आनंद से कुछ छिपा नहीं था, वह जानता था कि सोनू आशीष की पत्नी नहीं है, उसे केवल अपने पास रखे हुए है. उस से अपना स्वार्थ सिद्ध कर रहा है. ऐसे में वह भी सोनू के नजदीक आने की जुगत में लग गया.

सोनू आशीष के द्वारा बात न मानने पर तनाव में रहती थी. ऐसे में आनंद उस के पास आता, उस से बातें करता, बातों के दौरान ही हलकाफुलका मजाक भी कर देता तो सोनू का मन बहल जाता. कुछ समय के लिए वह अपना सारा तनाव भूल जाती थी. सोनू भी उस से घुलनेमिलने लगी. दोनों एकदूसरे की चाहत को अपने प्रति समझ रहे थे. चाहत दिल में पैदा हुई तो अधिक समय साथ बिताने लगे. एक दिन आनंद आया तो सोनू चाय बनाने लगी. आनंद को शरारत सूझी तो वह चुपके से सोनू के पीछे पहुंच गया और अचानक चिल्ला दिया. सोनू हड़बड़ा गई. हड़बड़ाहट में वह पीछे मुड़ी तो आनंद को खडे़ पाया, वह मुसकरा रहा था.

सोनू उस की शरारत समझ गई. वह उसे मारने दौड़ी तो वह वापस हुआ तो आगे पलंग था. वह उस से टकराने से बचने के लिए रुका तो पीछे भागी सोनू उस से टकरा गई. दोनों आपस में टकराए तो एक साथ पलंग पर गिर गए. दोनों की सांसें एकदूसरे के चेहरे से टकरा रही थी तो दिल भी आपस में मिल गए. उस समय दोनों के दिल की धड़कनें काफी तेज थीं. तन सटे होने के कारण एकदूसरे के दिल की तेज धड़कनों को दोनों ही महसूस कर रहे थे. दोनों जुबां से तो कुछ नहीं कह रहे थे लेकिन आंखें बहुत कुछ कह रही थीं. आनंद सोनू को इतने नजदीक पा कर खुशी से भर उठा और बेसाख्ता बोला, ‘‘आई लव यू…आई लव यू, सोनू.’’

आनंद के इन मीठे बोलों ने सोनू के कानों को सुखद अनुभूति कराई. उस ने आंखें बंद कीं तो होंठ थिरक उठे, ‘‘आई लव यू टू आनंद.’’

इस के बाद उन के बीच शारीरिक रिश्ता कायम हो गया. सोनू को आनंद के साथ आनंद का सुखद एहसास हुआ. उस दिन के बाद उन के बीच संबंधों का सिलसिला अनवरत चलने लगा. अब सोनू आनंद के साथ जिंदगी बिताने के सपने देखने लगी थी. क्योंकि आशीष से अब उसे किसी प्रकार की उम्मीद नहीं रह गई थी. लेकिन आशीष की सरकारी नौकरी और संपत्ति का लालच उसे जरूर था. आनंद के साथ जिंदगी बिताने के लिए उसे आशीष की नौकरी और संपत्ति की जरूरत थी. वैसे भी इन चीजों को पाने के लिए सोनू ने काफी प्रयास किया था और समय भी बर्बाद किया था. वह ऐसे आसानी से सब छोड़ नहीं छोड़ सकती थी.

इसलिए उस ने आनंद से बात की तो आनंद के मन में भी लालच पैदा हो गया. सरकारी नौकरी और संपत्ति तभी हाथ लग सकती थी, जब आशीष जिंदा न रहे. इसलिए दोनों ने आशीष की हत्या करने का फैसला कर लिया. आशीष की हत्या में साथ देने के लिए आनंद तिवारी ने अपने 2 साथियों मूलसजीवन पांडेय निवासी गांव गंगापुर भुलिया जिला सुलतानपुर और राजीव कुमार तिवारी उर्फ राजू निवासी गांव भारीडीहा अंबेडकरनगर को तैयार कर लिया. मूलसजीवन और राजू दोनों ही अकबरपुर के आरडी लौज में काम करते थे और इस समय वहीं रह रहे थे.  27 नवंबर की रात 11 बजे के करीब सोनू और आशीष का विवाद हुआ. विवाद के बाद आशीष सो गया. सोनू ने आनंद को उस के साथियों के साथ बुला लिया.

आनंद अपनी बजाज पल्सर बाइक से दोनों साथियों को ले कर आशीष के कमरे पर पहुंचा. उन लोगों को आया देख कर सोनू ने धीरे से दरवाजा खोल दिया. तीनों अंदर आ गए. सोते समय आशीष के गले पर तेज धारदार चाकू व कैंची से कई प्रहार किए गए. आशीष चीख भी न सका और उस की सांसों की डोर टूट गई. आशीष को मारने के बाद उन्होंने उस की लाश एक पौलिथिन में लपेट कर उस की ही हुंडई इयान इरा कार में डाल दी और उसे मालीपुर थाना क्षेत्र में मझुई नदी के नेमपुर घाट पर फेंक आए. आने के बाद कार सुलतानपुर के दोस्तपुर थाना क्षेत्र में लावारिस हालत में छोड़ दी. अगले दिन सोनू ने अकबरपुर थाने जा कर आशीष की गुमशुदगी लिखाई.

लेकिन चारों का गुनाह छिप न सका. गिरफ्तार तीनों अभियुक्तों की निशानदेही पर हत्या में प्रयुक्त चाकू, कैंची, 5 मोबाइल फोन, पल्सर बाइक और आशीष की इयान कार बरामद कर ली. कानूनी औपचारिकताएं पूरी करने के बाद तीनों को न्यायालय में पेश कर जेल भेज दिया गया. कथा लिखे जाने तक 23 दिसंबर को थानाप्रभारी विवेक वर्मा ने चौथे अभियुक्त राजीव तिवारी उर्फ राजू को भी गिरफ्तार कर लिया.

—कथा पुलिस सूत्रों पर आधारित

MP Crime News : हत्यारे ने पहचान छिपाने के लिए शव के साथ कौन सी घिनौनी करतूत की

MP Crime News : ममता तोमर एक साथ 2 प्रेमियों सुरेश उइके और सईद के साथ प्यार की पींगें बढ़ा रही थी. बाद में उस ने सुरेश के साथ लवमैरिज कर ली. लेकिन शादी के बाद भी उस का सईद के साथ चक्कर चलता रहा. इस का नतीजा…

30 सितंबर, 2020 की सुबह का वक्त था. होशंगाबाद जिले के थाना पथरोड़ा की थानाप्रभारी सुश्री प्रज्ञा शर्मा पुराने मामलों की फाइल पलट रही थीं. तभी डंडे का सहारा ले कर लगभग 90 वर्षीय एक बुजुर्ग धीरेधीरे उन के औफिस में दाखिल हुए. थानाप्रभारी ने बुजुर्ग को कुरसी पर बैठने का इशारा किया. बुजुर्ग ने अपना नाम रामदास बताते हुए कहा कि वह डोव गांव में रहता है और उस का 40 साल का बेटा सुरेश उइके गांव नानपुरा पंडरी में पत्नी ममता और 2 बच्चों के साथ रहता है. सुरेश रेलवे में वेल्डर है. वह रोज सुबह नौकरी पर अपनी मोटरसाइकिल से भौरा स्टेशन आताजाता था. लेकिन कल रात में वह काम से वापस नहीं लौटा और उस का मोबाइल भी बंद था.

वह उसे खोजने के लिए जब भौरा जा रहा था तो जंगल के रास्ते में उसे अपने बेटे की मोटरसाइकिल पड़ी दिखाई दी. जिस के पास कुछ दूरी पर एक पेड़ के नीचे उस की लाश पड़ी है. रामदास ने बताया कि किसी ने उन के बेटे का सिर कुचल कर उस की हत्या कर दी है. थानाप्रभारी प्रज्ञा शर्मा के सामने कई ऐसे सवाल थे जिन के उत्तर रामदास दे सकता था. लेकिन पहली जरूरत मौके पर पहुंचने की थी. इसलिए उन्होंने सब से पहले एसपी होशंगाबाद संतोष सिंह गौर और एसडीपीओ महेंद्र मालवीय को घटना की जानकारी दी. फिर वह पुलिस टीम ले कर मौके पर पहुंच गई. भौरा मार्ग से कुछ हट कर जंगल के अंदर सागौन के पेड़ के नीचे सुरेश की सिर कुचली लाश पड़ी थी.

लाश के पास ही खून से सना भारी पत्थर पड़ा था, जिस से जाहिर था कि उसी पत्थर को सुरेश के सिर पर मारा गया था, जिस से उस का पूरा भेजा बाहर निकल कर चारों तरफ बिखर गया था. सड़क पर पड़ी मोटरसाइकिल के पास भी खून के निशान थे. इस से पुलिस ने अनुमान लगाया कि संभवत: मोटरसाइकिल से घर लौट रहे सुरेश को हमलावरों ने पहले चलती बाइक पर हमला कर रोका होगा और फिर बाद में अंदर जंगल में ले जा कर उस की हत्या कर दी होगी. पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजने के साथ ही रामदास की रिपोर्ट पर हत्या का केस दर्ज कर जांच शुरू कर दी. दूसरी तरफ मामले की गंभीरता देखते हुए एसपी संतोष सिंह गौर ने एसडीपीओ महेंद्र मालवीय के निर्देशन और पथरोड़ा थानाप्रभारी प्रज्ञा शर्मा के नेतृत्व में एक टीम गठित कर दी.

टीम में एएसआई भोजरात बरबडे, हेडकांस्टेबल सुरेंद्र मालवीय, अनिल ठाकुर, कांस्टेबल हेमंत, टिल्लू, विनोद, संजय आदि को शामिल किया गया. इस टीम ने मृतक सुरेश के बारे में गहन छानबीन की, जिस में पता चला कि सुरेश ने करीब 13 साल पहले कांदई कलां की रहने वाली ममता तोमर से प्रेम विवाह किया था. जबकि ममता के बारे में जानकारी मिली कि वह अपने एक रिश्तेदार के घर ड्राइवर की नौकरी करने वाले सईद खां से प्यार करती थी. मृतक सुरेश के पिता रामदास आर्डिनैंस फैक्ट्री में गार्ड की नौकरी करते थे. शादी के कुछ समय बाद सुरेश को रेलवे में वेल्डर की नौकरी मिल गई, जिस के बाद वह अपनी पत्नी ममता के साथ नानपुरा पंडरी में मकान बना कर रहने लगा था.

सुरेश की ड्यूटी भौरा और कीरतगढ़ रेल सेक्शन के बीच रहती थी, इसलिए वह रोज मोटरसाइकिल से भौरा आ कर रात लगभग 8 बजे ड्यूटी खत्म कर के घर लौट जाता था. सुरेश के साथियों से भी पूछताछ की गई, लेकिन उन्होंने बताया कि सुरेश सीधासच्चा आदमी था और उस की किसी से कोई रंजिश भी नहीं थी. कहानी में मोड़ तब आया, जब पुलिस ने मृतक के पिता रामदास से पूछताछ की. उन्होंने उस की हत्या का शक अपने बेटे की पत्नी ममता पर जाहिर किया. ससुर अपनी ही बहू पर खुद उसी के पति की हत्या करने का आरोप लगा रहा था. इसलिए उन के आरोप को हलके में नहीं लिया जा सकता था. थानाप्रभारी प्रज्ञा शर्मा ने मृतक की पत्नी ममता को पूछताछ के लिए थाने बुलाने के बजाए खुद गांव जा कर उस के बयान दर्ज करने की सोची.

दरअसल इस के पीछे थानाप्रभारी का इरादा गांव में ममता के बारे में लोगों से और जानकारी हासिल करना था. इस के लिए जब वह ममता के घर पहुंचीं तो वहां पहुंचते ही यह देख कर चौंकी कि ममता के घर के मुख्य दरवाजे के अलावा घर में कई जगहों पर सीसीटीवी कैमरे लगे थे. सुरेश रेलवे मे मामूली सी नौकरी करता था. उस के पास करोड़ों की पुश्तैनी संपत्ति भी नहीं थी और न ही उस की किसी से कोई रंजिश की बात सामने आई थी. तो उस ने घर में कई सीसीटीवी कैमरे क्यों लगवाए. उन्होंने सोचा कि कहीं ऐसा तो नहीं कि सुरेश की हत्या का संबंध उस के घर में लगाए गए सीसीटीवी कैमरों से जुड़ा हो.

उन का यह शक उस वक्त और भी गहरा गया, जब उन्हें पता चला कि सुरेश ने ये कैमरे 10-12 दिन पहले ही लगवाए थे. इसलिए ममता के बयान दर्ज करने के बाद थानाप्रभारी प्रज्ञा शर्मा ने टीम के कुछ सदस्यों को गांव में ममता के बारे में जानकारी जुटाने की जिम्मेदारी दे दी. पता चला कि ममता के मायके में रहने वाला सईद अक्सर उस समय ममता के घर आता था, जब सुरेश घर पर नहीं होता था. पुलिस को यह जानकारी भी मिली कि सुरेश के घर में कैमरे लगने के बाद से सईद को गांव में नहीं देखा गया. दूसरी जो सब से बड़ी बात सुनने में आई, वह यह कि कोई 4 महीने पहले ममता अचानक घर से लापता हो गई थी. वह करीब एक महीने बाद घर लौटी थी, जिस के कुछ दिन बाद सुरेश ने अपने घर में कैमरे लगवाए थे.

सुनने में आया था कि लापता रहने के दौरान ममता सईद खान के साथ सिवनी मालवा में रही थी. इस जानकारी के बाद ममता के साथ सईद भी शक के घेरे में आ गया, जो ममता के मायके का रहने वाला था. पुलिस टीम ने कांदई कलां में सईद की तलाश की तो वह गांव से गायब मिला. जब सईद के मोबाइल की काल डिटेल्स निकाली गई तो पता चला कि मृतक सुरेश की पत्नी ममता के साथ उस की लगातार लंबी बातें होती थीं. जिस दिन सुरेश की हत्या हुई उस दिन भी उस ने कई बार ममता से बात की थी.

दूसरी सब से बड़ी बात जो उस की काल डिटेल्स में निकल कर सामने आई, वह यह कि जिस समय सुरेश का कत्ल हुआ उस समय तक सईद का मोबाइल उसी लोकेशन पर था, जहां सुरेश की लाश मिली थी. इस से थानाप्रभारी प्रज्ञा शर्मा के सामने पूरी कहानी साफ हो गई. सईद की काल डिटेल्स से यह भी पता चला कि घटना के पहले कुछ दिनों तक सईद ने लगातार नया बस स्टैंड नंदूबाड़ा रोड सिवनी मालवा निवासी आशू उर्फ हसरत और अरबाज के साथ न केवल कई बार फोन पर बात की थी, बल्कि घटना के समय इन दोनों के मोबाइल भी सईद के साथ घटनास्थल पर ही मौजूद थे. इसलिए एसडीपीओ महेंद्र मालवीय के निर्देश पर पुलिस टीम ने इन तीनों की तलाश शुरू कर दी.

आरोपी फंसे शिकंजे में जिस से जल्द ही सईद को बैतूल के चिचोली थाना इलाके के मउपानी से और अरबाज आशू को सिवनी मालवा से हिरासत में ले लिया. पुलिस ने इन तीनों से सख्ती से पूछताछ की. पूछताछ में तीनों ने न केवल सुरेश की हत्या की बात स्वीकार की बल्कि इस में उस की पत्नी ममता के भी शामिल होने की बात बताई. पुलिस ने उन की निशानदेही पर घटना के समय पहने तीनों के रक्तरंजित कपड़े तथा उपयोग में लाई गई कुदाल, गला घोंटने में प्रयुक्त तार आदि भी बरामद कर सुरेश की पत्नी ममता को भी उस के गांव से गिरफ्तार कर लिया. इस के बाद प्रेमी और पति को एक साथ खुश रखने वाली ममता द्वारा सुरेश की हत्या करवा देने की कहानी इस प्रकार सामने आई—

कांदई कला में रहने वाली ममता बचपन से ही अपने चंचल स्वभाव के लिए जानी जाती थी. बताते हैं कि मिडिल में पढ़ते समय ही उस का रंगरूप कुछ ऐसा निखार आया था कि देखने वाले उसे देख रीझ जाते थे. ममता के साथ स्कूल में गांव का रहने वाला सईद भी पढ़ता था. सईद ममता का दीवाना था. वह उस से दोस्ती कर उसे पाने के सपने देखता था. फिर नादान उम्र में ही ममता सईद के साथ प्रेम और देह के पाठ पढ़ने लगी थी. स्कूली पढ़ाई के बाद ममता ने आगे की पढ़ाई बंद कर दी. वह घर पर ही रहने लगी. उसी दौरान सुरेश उइके से उस के प्रेम संबंध हो गए. यह जानकारी जब सईद को हुई तो उसे झटका लगा. ममता के पिता गांव के बडे़ किसान थे.

गांव में रहने वाले ममता के रिश्ते के एक भाई ने खेतीकिसानी के काम के लिए सईद को बतौर टै्रक्टर ड्राइवर नौकरी पर रख लिया था. इस से सईद को ममता के आसपास रहने का मौका मिलने लगा. सईद बहुत शातिर था. उस का मकसद नौकरी के बहाने ममता से नजदीकियां बढ़ाना था, क्योंकि ममता उन दिनों सुरेश उइके से प्रेम की पींगें बढ़ा रही थी. सईद ने तिकड़म से जल्द ही ममता के पूरे परिवार का दिल जीत लिया. जिस से उस का उस के घर में बेरोकटोक आनाजाना शुरू हो गया. जब ममता को पता चला कि सईद उस की दीवानगी के चलते ही ड्राइवर की नौकरी करने आया है तो उस ने सईद की दीवानगी को भी हवा देनी शुरू कर दी.

वह पहले से ही प्यार के मामले में काफी अनुभवी थी. उस ने सईद को पूरी तरह से अपना दीवाना बना लिया. ममता एक ही समय में 2 प्रेमियों सईद और सुरेश को अपनी बांहों में प्रेम का झूला झुलाने लगी. इतना ही नहीं, उस ने सईद के संग निकाह और सुरेश के संग शादी करने का वादा भी कर रखा था जबकि वह जानती थी कि ये दोनों काम एक साथ नहीं हो सकते. बहरहाल, सईद के साथ उस का निकाह होना सुरेश के साथ शादी होने से ज्यादा मुश्किल था. इसलिए उस ने सईद को छोड़ कर सुरेश के साथ लवमैरिज कर ली.

संयोग से शादी के ठीक बाद सुरेश को रेलवे में नौकरी मिल गई, जिस के बाद वह नानपुर पंडरी में मकान बना कर अपनी पत्नी के साथ रहने लगा. बाद में ममता 2 बेटियों की मां बनी. उस की घरगृहस्थी ठीकठाक चल रही थी. सुरेश की ड्यूटी भौंरा और कीरतगढ़ के बीच थी, इसलिए वह गांव से रोज सुबह मोटरसाइकिल से आ कर शाम को वापस घर लौट आता था. दिन भर ममता घर में अकेली रहती थी. उस ने अपने इस खाली समय का उपयोग पुराने प्रेमी सईद को खुश करने के लिए करना शुरू कर दिया. वह पति के काम पर चले जाने के बाद सईद को अपने घर बुलाने लगी, जहां दोनों दिन भर वासना का खेल खेलते.

शाम को सुरेश के आने से पहले सईद अपने घर चला जाता. इस दौरान सईद ममता से किसी न किसी बहाने पैसा भी लेता रहता था. ममता ने रची गहरी साजिश ममता को सईद का आना अच्छा लगता था, इसलिए सईद के आते ही वह घर का दरवाजा बंद कर उस के साथ कमरे में कैद हो जाती थी. जल्द ही इस बात की चर्चा गांव में होने से बात सुरेश तक भी पहुंच गई. सुरेश ने एकाध बार इशारे में ममता से  इस बारे में बात की, जिस से ममता समझ गई कि अब सईद को घर बुलाने में खतरा है. इसलिए जब उस ने इस बारे में सईद से बात की तो उस ने उसे साथ भाग चलने को कहा. ममता सईद के साथ भागने को तैयार हो गई.

फिर 8 अगस्त, 2020 के दिन ममता को ले कर सईद सिवनी मालवा आ गया, जहां उस के दोस्त और रिश्तेदार अरबाज तथा आशू ने दोनों के रहने की व्यवस्था पहले से ही कर दी थी. ममता के भाग जाने से सुरेश पागल सा हो गया. उसे जरा भी भरोसा नहीं था कि उस के साथ प्रेम विवाह करने वाली ममता उसे और बच्चों को इस तरह से धोखा देगी. इस से सुरेश का दिल टूट गया. इधर एक महीने तक ममता द्वारा घर से लाए गए पैसों पर ऐश करने के बाद सईद ने उसे वापस सुरेश के पास भेज दिया. एक महीने बाद घर लौटी पत्नी को सुरेश अपनाना तो नहीं चाहता था, लेकिन बच्चों की खातिर उस ने ममता को माफ कर दिया. आगे ऐसा न हो, इसलिए सुरेश ने घर में कई सीसीटीवी कैमरे लगवा दिए. वह ड्यूटी पर रहते हुए मोबाइल के माध्यम से घर पर नजर रखने लगा.

इस से सईद और ममता समझ गए कि अब उन का वासना का खेल खत्म हो गया है. इसलिए उन्होंने फोन पर चर्चा कर सुरेश का ही खेल खत्म करने की योजना बना ली, जिस में सईद ने अपने दोनों दोस्त अरबाज और आशू को भी शामिल कर लिया. फिर तीनों ने मिल कर 30 सितंबर, 2020 की रात ड्यूटी से लौट रहे सुरेश को रोक लिया और साथ लाए तार से गला घोंट दिया. फिर भारी पत्थर से उस का सिर कुचल दिया. सईद और उस की प्रेमिका ममता का सोचना था कि मामला शांत हो जाने के बाद वे दोनों फिर पहले की तरह अय्याशी कर सकेंगे. लेकिन पथरोड़ा थानाप्रभारी प्रज्ञा शर्मा ने 4 दिन में ही सभी आरोपियों को सलाखों के पीछे पहुंचा दिया.

Bihar News : प्यार की सजा – प्रेमिका के भाइयों ने ले ली बहन के प्रेमी की जान

Bihar News : अंशू साहनी उर्फ लक्की किंग और खुशबू एकदूसरे को दिलोजान से प्यार करते थे. वे शादी भी करना चाहते थे. उन की शादी तो नहीं हो सकी लेकिन इसी दौरान ऐसा कुछ हुआ कि खुशबू को अपने भाइयों के साथ जेल की सलाखों के पीछे जाना पड़ा..

‘‘मां आज खाने में क्याक्या है?’’ किचन में मां आरती देवी से लिपटते हुए बेटे अंशू साहनी उर्फ लक्की ने पूछा.

‘‘तेरे पसंद की मछली करी और भात बनाया है.’’ बेटे के सिर पर हाथ फेरते हुए मां ने कहा.

‘‘वाह! मछली करी और भात.’’ कह कर लक्की चहक उठा और लंबी सांसें भरते हुए बोला, ‘‘कढ़ाई में से कितनी अच्छी खुशबू आ रही है. आज तो खाने में मजा आ जाएगा मां.’’

‘‘पगला कहीं का, ऐसा क्यों कह रहा है जैसे आज के पहले तूने कभी मछली करी और भात खाया ही नहीं.’’

‘‘नहीं, मां. बस ऐसे ही… अब तो खाना परोस दो. बड़े जोरों की भूख लगी है.’’ पेट पर हाथ फेरते हुए लक्की बोला.

‘‘ठीक है, बाबा ठीक है, हाथमुंह धो कर कमरे में बैठो, तब तक मैं खाना परोस कर लाती हूं.’’ कह कर आरती देवी ने 3 कटोरीदार थालियां निकालीं. तीनों थालियों में खाना परोस कर कमरे में ले गईं, जहां लक्की के साथसाथ उस के 2 भाई रीतेश और पिशु बैठे खाने का इंतजार कर रहे थे. खाना खाने के बाद लक्की अपने कमरे में सोने चला गया और दोनों भाई भी वहीं कमरे में चौकी पर ही सो गए. उस के बाद आरती भी अपने कमरे में सोने चली गईं. उस समय रात के करीब 11 बज रहे थे. ये बात 12 दिसंबर, 2020 की थी. रोजमर्रा की तरह अगली सुबह भी आरती देवी करीब 6 बजे उठ गईं. रोज की तरह वह मझले बेटे लक्की के कमरे में झाड़ू लगाने पहुंचीं तो देखा लक्की अपने बिस्तर पर नहीं था.

यह देख कर उन्हें बड़ा अजीब लगा कि इतनी सुबह वह कहां गया होगा? जबकि वह इतनी जल्दी सो कर उठता ही नहीं था. तभी उन्हें याद आया कि वह अकसर बिना किसी को बताए अपने दोस्त जीतू के यहां चला जाता था सोने के लिए. हो सकता है बिना बताए रात वहीं सोने चला गया हो. यह सोच कर आरती देवी लापरवाह हो गईं और अपने कामों में जुट गईं. घर की साफसफाई से जब वह फारिग हुईं और दीवार घड़ी पर नजर डाली तो घड़ी में 8 बज रहे थे. पता नहीं क्यों लक्की को ले कर उस के मन में एक संशय सा उठ रहा था. आरती के दोनों बेटे रीतेश और पिशु भी सो कर उठ चुके थे. बेटों के उठते ही आरती ने बड़े बेटे रीतेश से कहा,

‘‘देखो न, लक्की अपने कमरे में नहीं है. उस का फोन भी बंद आ रहा है. पता नहीं क्यों उसे ले कर मेरे मन में अजीब सा कुछ हो रहा है. देखो न कहां है?’’

‘‘मां, उसे ले कर तुम खामखा परेशान हो रही हो, उस की आदत को तरह जानती तो हो कि कितना लापरवाह है. कितनी बार बिना बताए घर से चला जाता है. और तो और अपना फोन भी बंद रखता है. कहांकहां तलाशता फिरूं? आ जाएगा घर. तुम उस की फिक्र मत करो.’’ रीतेश बोला. आरती देवी समझ रही थीं कि रीतेश जो कह रहा है वह सच है. क्योंकि लक्की कई बार ऐसा कर चुका था. इसलिए घर वाले यही सोच कर निश्ंिचत हो गए कि लक्की रात भी वहीं गया होगा. घड़ी में 9 बज गए, उस का फोन अभी भी बंद आ रहा था और वह घर भी नहीं लौटा तो आरती परेशान हो गई और रीतेश को उस के बारे में पता करने को कहा. मां को परेशान देख रीतेश ने लक्की के फोन पर काल की लेकिन फोन बंद था.

यह देख कर रीतेश भी परेशान हो गया. उस ने लक्की के दोस्त जीतू को फोन कर के लक्की के बारे में पूछा तो जीतेश ने बताया कि लक्की तो उस के पास आया ही नहीं था. जीतू की बात सुन रीतेश के पैरों तले से जैसे जमीन खिसक गई. उस ने जीतू से पूछा, ‘‘अगर लक्की तुम्हारे पास नहीं आया तो वह कहां गया?’’

‘‘मुझे नहीं पता वह कहां गया भैया,’’ जीतू ने सामान्य तरीके से जबाव दिया, ‘‘यहां आया होता तो मैं जरूर बताता. मैं और दोस्तों को फोन कर के पता करता हूं कि वह कहीं किसी और के पास तो नहीं रुका है?’’

‘‘ठीक, जल्द पता कर के बताओ तब तक मैं उसे तलाशता हूं.’’ कह कर रीतेश ने फोन काट दिया. रीतेश ने मां को लक्की के जीतू के घर न पहुंचने की बात बताई. तब वह और ज्यादा परेशान हो गईं और उन्होंने उसे उस का पता लगाने के लिए भेज दिया. रीतेश सीधा अपने चाचा कृष्णदेव साहनी के घर पहुंच गया. उस के चाचा 2 घर छोड़ कर अपने परिवार के साथ नए घर में रहते थे. उस ने चाचा से पूरी बात बता दी. लक्की के गायब होने की बात सुन कर कृष्णदेव भी चौंके. लक्की की खोज में वह उस के साथ हो लिए. चाचाभतीजा घर से जैसे ही थोड़ी दूर पहुंचे तभी मछली बेचने वाले कुछ दुकानदार उन के पास पहुंचे और उन्होंने जो बताया उसे सुन कर दोनों के होश उड़ गए.

दुखद खबर से उड़े होश दरअसल, पिशु की वजह से मछली दुकानदार उन्हें अच्छी तरह पहचानते थे. पिशु भी मछली बेचने का धंधा करता था. बहरहाल, दुकानदारों ने बताया कि इसी इलाके की अजीमाबाद सड़क के किनारे लक्की की खून सनी लाश पड़ी है. किसी ने गला रेत कर उस की हत्या कर दी है. भाई की हत्या की बात सुनते ही रीतेश एकदम से बदहवास सा हो गया. ऐसा लगा जैसे गश खा कर वहीं गिर जाएगा. उसे कुछ समझ नहीं आ रहा था कि क्या करे? बदहवास और दौड़ता हुआ वह उस जगह पहुंचा, जहां लक्की की लाश पड़ी थी. खून से सनी लक्की की लाश देख कर रीतेश दहाड़ मार कर रोने लगा. चाचा कृष्णदेव साहनी भी भावुक हो काठ बन गए थे. जैसे काटो तो खून नहीं. इन्होंने भतीजे को संभालते हुए जमीन पर बैठा दिया. थोड़ी देर में लक्की की हत्या की खबर घर तक पहुंच गई.

बेटे की हत्या की खबर मिलते ही आरती देवी गश खा कर गिर पड़ीं. घर में मौजूद पिशु ने मां को संभाला. भाई की मौत की खबर सुन कर वह भी हतप्रभ था. देखते ही देखते लक्की की मौत की खबर पूरे मोहल्ले में फैल गई थी. मोहल्ले के सैकड़ों लोग आरती के घर के बाहर जमा हो गए. आरती और उन के दोनों बेटों को शक था कि लक्की की हत्या फिरोज मलिक और उस के घरवालों ने ही की होगी. यह बात आरती ने मोहल्ले वालों को भी बता दी. इंतकाम की आग में जलते हुए मोहल्ले के लोग घटनास्थल पहुंच गए थे. हत्यारों ने बड़ी बेरहमी से चाकू से गला रेत कर लक्की की हत्या की थी. लाश देख कर लोग गुस्से से भर गए.

गुस्साए लोग लाश वहीं छोड़ कर आरोपियों के घर की ओर चल दिए. इस बीच मौके की स्थिति को भांप कर किसी ने बहादुरपुर थाने में फोन कर घटना के बारे में जानकारी दे दी थी. सूचना मिलते ही बहादुरपुर थाने के थानाप्रभारी सनोवर खान फोर्स के साथ अजीमाबाद पहुंच गए जहां लक्की की लाश पड़ी हुई थी. वह घटना की जांच में जुट गए. आरोपी घटनास्थल से थोड़ी दूरी पर स्थित सेक्टर-डी, अजीमाबाद कालोनी में रहते थे. गुस्साए लोगों ने आरोपियों के घर पर पत्थरबाजी शुरू कर दी. यह जानकारी थानाप्रभारी को मिली तो वह घटनास्थल से अजीमाबाद कालोनी पहुंच गए. उन्होंने भीड़ को समझाने की कोशिश की. लेकिन भीड़ नियंत्रित नहीं हो पा रही थी. यह देख उन्होंने उच्चाधिकारियों को सूचित कर दिया.

घटना की सूचना पा कर डीएसपी अमित शरण और एसपी (सिटी पूर्वी) जितेंद्र कुमार बगैर समय गंवाए मौके पर पहुंच गए. फिर फोर्स ने मोर्चा संभाल लिया. लोगों ने की आगजनी पुलिस सेक्टर-डी में आक्रोशित लोगों को संभालने में जुटी हुई थी, तभी घटनास्थल से करीब 3 किलोमीटर दूर कुम्हरार बाईपास के पास गुस्साए लोगों की भीड़ भड़क उठी. हत्या से नाराज भीड़ बाईपास पर आगजनी कर बवाल कर रही थी और हत्यारों को फांसी देने तथा मृतक की मां आरती देवी की आर्थिक सहायता करने की मांग कर रही थी. धीरेधीरे घटना दंगे का रूप ले रही थी. एसपी जितेंद्र कुमार ने हालात की संवेदनशीलता को देखते हुए थानाप्रभारी (सुल्तानगंज) शेर सिंह राणा, थानाप्रभारी (आलमगंज) सुधीर कुमार और बीएमपी के जवानों को कुम्हरार बाईपास पर तैनात कर दिया ताकि हिंसा को काबू किया जा सके क्योंकि मामला 2 समुदायों से जुड़ा हुआ था और धीरेधीरे दंगे का रूप ले चुका था.

घंटों चला उपद्रव एसपी जितेंद्र कुमार के आने और समझाने के बाद समाप्त हो सका. एसपी के निर्देश पर डीएसपी अमित शरण ने आरोपी अरमान मलिक, उस की बहन खुशबू और फुफेरे भाई अजहर को गिरफ्तार कर लिया. आरोपितों के गिरफ्तार होने के बाद हालात पर काबू पा लिया गया था. गिरफ्तार किए तीनों आरोपितों को थाने ला कर उन से अलगअलग पूछताछ की गई. पूछताछ के दौरान खुशबू ने सच कबूल लिया. उस ने बताया कि लक्की से उस के प्रेम संबंध थे. लेकिन इन संबंधों की वजह से उसे थाने आना पड़ेगा, इस की उस ने कल्पना तक नहीं की थी. इस के बाद पुलिस ने अरमान और अजहर से पूछताछ की तो लक्की हत्याकांड की कहानी कुछ इस तरह सामने आई—

19 वर्षीय अंशु साहनी उर्फ लक्की किंग मूलरूप से पटना के बहादुरपुर थाने के अजीमाबाद संदलपुर का रहने वाला था. 3 भाइयों रीतेश, लक्की और पिशु में वह दूसरे नंबर का था. पिता संजय साहनी की बीमारी से मौत हो चुकी थी. पिता की मौत के बाद मां आरती देवी ने तीनों बेटों का पालनपोषण किया. आरती देवी का साथ दिया उन के देवर कृष्णदेव साहनी ने, सच्चा सारथी बन कर. भाई की मौत के बाद उन्होंने भाभी को कभी भी अकेला नहीं छोड़ा. उन की मदद के लिए वह हमेशा तत्पर रहे एक देवर की तरह नहीं, बल्कि एक बेटे की तरह. रीतेश, लक्की और पिशु तीनों चाचा कृष्णदेव का दिल से सम्मान करते थे. चाचा का एकएक शब्द उन के लिए पत्थर की लकीर होती थी, वह जो कहते थे तीनों उन की बात मानते थे.

ठाटबाट से रहता था लक्की तीनों भाई धीरेधीरे बड़े हो चले थे. तीनों भाइयों में से लक्की सब से अलग सोच का था. शरीर से चुस्तदुरुस्त और दिमाग से चंचल लक्की खुद को किसी राजा से कम नहीं समझता था. इसीलिए वह अपने नाम के आगे किंग लगाता था. लक्की औनलाइन कंपनी अमेजन का डिलीवर बौय था. हालांकि उस का सपना, सिर्फ सपना ही था. सपने को हकीकत में बदलने के लिए ढेर सारे पैसे चाहिए थे जो उस के पास नहीं थे. बड़ा भाई रीतेश मोटर मैकेनिक था, वह खुद डिलीवरी बौय का काम करता था जबकि छोटा भाई पिशु मछली बेचता था. अपनी कमाई का सारा पैसा वह खुद पर खर्च करता था.

अपनी कमाई के पैसे से महंगे और अच्छे कपड़े खरीदना, महंगा मोबाइल फोन रखना, काम से निपटने के बाद दोस्तों के साथ पार्टी करना लक्की की दिनचर्या में शामिल था. बात करीब एक साल पहले की है. एक दिन अरमान मलिक के नाम से अमेजान कंपनी से एक पार्सल आया. लक्की दोपहर करीब एक बजे डिलीवरी देने अरमान के घर पहुंचा. उस दिन अरमान घर पर नहीं था. वह किसी काम से बाहर गया हुआ था. उस की छोटी बहन खुशबू डिलीवरी लेने घर से बाहर निकली. 16 साल की खुशबू बला की खूबसूरत थी. खुशबू को देख कर वह अपलक उसे निहारता रह गया. उसे देख कर लक्की पहली ही नजर में उस पर लट्टू हो गया था.

खुशबू पार्सल रिसीव कर के बलखाती हुई घर के भीतर चली गई. लक्की उसे निहारता रह गया. रात ड्यूटी से घर लौटने के बाद जब लक्की खाना खाने बैठा तो उस की आंखों के सामने खुशबू की खूबसूरती थिरकने लगी. खाना खातेखाते उस के खयालों में खो गया. दोनों भाई खाना खा कर कब उठ गए, उसे पता ही नहीं चला. उस रात जब घर के सभी लोग सोने के लिए अपनेअपने कमरे में चले गए तो लक्की बिना घर वालों को बताए चुपके से रात 12 बजे के करीब अपने जिगरी दोस्त जीतू के घर जा पहुंचा. जीतू किराए का कमरा ले कर अकेला ही रहता था. पूरी रात लक्की उस से खुशबू के बारे में बातें करता रहा. दिल में बसा ली थी खुशबू अगले दिन लक्की जब डिलीवरी के लिए सामान ले कर घर से निकला तो वह सीधे ग्राहक के घर न जा कर अरमान के घर के रास्ते हो कर निकला ताकि खुशबू का दीदार हो जाए.

लेकिन वह कहीं नहीं दिखी तो लक्की काम पर निकल गया. रात में घर लौटते समय भी वह उसी के घर के सामने से हो कर निकला ताकि खुशबू को एक नजर देख सके. लेकिन निराशा ही हाथ लगी. मायूस हो कर लक्की घर लौट आया. अगले दिन काम पर जाते हुए लक्की फिर उसी के घर के सामने से निकला तो दरवाजे पर खुशबू खड़ी मिल गई. उसे देखते ही लक्की के चेहरे पर खुशी उमड़ पड़ी. उसे देख वह मुसकराता हुआ बाइक से आगे बढ़ गया. लक्की खुशबू से बात करना चाहता था लेकिन उसे इस का जरिया नहीं मिला. इसी दौरान उसे उस फोन नंबर का ध्यान आया जो खुशबू ने पार्सल रिसीव करते समय लिखा था. उसी फोन नंबर पर बात कर के लक्की खुशबू के करीब पहुंच ही गया.

खुशबू के भी दिल में लक्की के लिए चाहत पैदा होने लगी थी. वह भी लक्की से प्यार करने लगी थी. दो जवां दिलों में एकदूजे के लिए प्यार की इबारत लिखी जा रही थी. मौका मिलने पर वे घर से बाहर भी मुलाकातें करने लगे. मोहब्बत का इजहार और इकरार करने के बाद दोनों चोरीछिपे यहांवहां मिलते और प्यार की बातें करते. लक्की खुशबू को खुश रखने के लिए खूब पैसे खर्च करता और मंहगे तोहफे देता था. लक्की से प्यार होने के बाद खुशबू के पांव जमीन पर नहीं पड़ रहे थे. पहली बार घर वालों ने खुशबू के बदले हावभाव देखे तो उन्हें उस पर शक हो गया कि मामला कुछ गड़बड़ है. उस दिन के बाद से उस का बड़ा भाई अरमान बहन पर नजर रखने लगा. वैसे भी अरमान को कहीं से उड़ती हुई खबर मिल चुकी थी कि खुशबू का किसी अंजान लड़के के साथ चक्कर चल रहा है.

अरमान ने धमकाया लक्की को उस दिन के बाद से अरमान बहन के प्रेमी को ढूंढने में जुट गया. आखिरकार अरमान ने एक दिन लक्की को बहन से बातें करते देखा तो उसे धमकाया, ‘‘2 टके के डिलीवरी बौय, तेरी हिम्मत कैसे हुई मेरी बहन पर बुरी नजर डालने की. आज के बाद तूने फिर से उस की तरफ नजर उठा कर देखा तो तेरी आंखें निकाल लूंगा.’’

लक्की को धमकाने के बाद अरमान खुशबू को ले कर घर चला गया और लक्की अपने काम पर निकल गया. घर पहुंच कर अरमान ने खुशबू की करतूतें मांबाप से बताईं. घर वाले बेटी की करतूत जान क र शर्मसार हो गए और उन्हें उस पर गुस्सा भी खूब आया. उन्होंने बेटी पर हाथ भर नहीं उठाया, पर उसे खूब जलील किया. मां ने उसे समझाया, ‘‘बेटी, जो किया सो किया. कम से कम घर की इज्जत तो बाजार में मत उछाल. तू पढ़लिख. वक्त आने पर तेरे अब्बू अच्छा लड़का देख कर तेरा निकाह धूमधाम से कर देंगे. तू ऐसे छिछोरों के साथ गलबहियां जोड़ कर घर की इज्जत मत बेच. समझी.’’

सिर झुकाए खुशबू मां की बातें चुपचाप सुन रही थी. उस समय उस ने मां से झूठ बोल कर मामला वहीं खत्म कर दिया और वादा किया कि अब वह लक्की से कभी नहीं मिलेगी और न ही बात करेगी. बेटी के किए वादे पर उन्हें यकीन हो गया था कि अब वह कोई ऐसी हरकत नहीं करेगी, जिस से घर वालों को शर्मिंदा होना पड़े. पर बात यहीं खत्म नहीं हुई. अरमान ने फुफेरे भाई अजहर के साथ मिल कर लक्की के घर का पता लगा लिया था. एक दिन वह उस के घर पहुंच गया. उस ने उस की मां को धमकी भरे अंदाज में कहा, ‘‘आंटी, तू अपने बेटे लक्की को समझा देना, वह मेरी बहन से दूर ही रहे तो उस के लिए अच्छा है, नहीं तो इस का नतीजा बहुत बुरा होगा.’’

अरमान और अजहर चले गए. लेकिन आरती देवी एकदम से सन्न रह गई थीं. बेटे को ले कर उन्हें चिंता सताने लगी थी कि कहीं उस के साथ कोई ऊंचनीच न हो जाए. वह लक्की के घर लौटने की राह देखने लगी. रात में जब लक्की ड्यूटी से घर लौटा तो खाना खिलाने के बाद मां ने उसे समझाया और बताया कि दूसरों की इज्जत से खेलने का अंजाम बहुत बुरा होता है. तू संभल जा बेटा. आज 2 लड़के घर आ कर मुझे धमका गए हैं. बेटा, मेरे जीने का तुम्हीं सब सहारा हो, अगर तुम्हें कुछ हुआ तो मैं किस के सहारे जीऊंगी? मेरी बात मान बेटा, तू उस लड़की का चक्कर छोड़ कर अपने काम में मन लगा. समय आने पर अच्छी लड़की देख कर तेरी शादी करा दूंगी.

मां की बात सुन कर लक्की सकपका गया कि उस के प्यार का राज खुल गया है. वह उलटा मां को ही समझाने लगा, ‘‘मां, खुशबू बहुत अच्छी लड़की है. मैं उसे बहुत प्यार करता हूं, वह भी मुझे बहुत चाहती है. हम दोनों शादी करना चाहते हैं, मां. हमें बस तुम्हारे आशीर्वाद की जरूरत है.’’

लक्की मां के सामने फिल्मी डायलौग मारने लगा. बेटे की बात आरती को तनिक भी अच्छी नहीं लगी. तभी उस ने उस के कान के नीचे एक झन्नाटेदार थप्पड़ रसीद किया. वह तिलमिला कर रह गया. आरती को बेटे की चिंता सताने लगी थी क्योंकि उन्होंने उन दोनों लड़कों के तेवर देखे थे. कितने गुस्से में थे वे. फिलहाल मां के समझाने का लक्की पर कोई असर नहीं हुआ. वह खुशबू से अब भी छिपछिप कर मिल रहा था. लक्की के बिना जी पाना खुशबू के लिए भी मुश्किल होता जा रहा था. दोनों ने फैसला किया कि चाहे जो कुछ हो जाए, वे कभी जुदा नहीं होंगे. जमाने से लड़ कर अपने प्यार को हासिल करेंगे. इधर, भले ही खुशबू मांबाप को यकीन दिलाने में कामयाब हो गई थी लेकिन भाई अरमान की नजर बहन पर ही टिकी थी.

उसे पता चल गया था कि खुशबू मांबाप की आंखों में धूल झोंक कर छिपछिप कर लक्की से मिलती है. उस के दिमाग में एक खतरनाक प्लान ने जन्म लिया. उस ने अपनी योजना में फुफेरे भाई अजहर को भी शामिल कर लिया था. लिख डाली खूनी इबारत अजहर कोई छोटामोटा आदमी नहीं था. वह बहादुरपुर थाने का हिस्ट्रीशीटर था. उस पर कई आपराधिक मुकदमे दर्ज थे. अजहर के षडयंत्र में शामिल होने से अरमान को बल मिल गया था. योजना को अंजाम देने के लिए अरमान और अजहर ने खुशबू को धमका कर अपने षडयंत्र में शामिल कर लिया था. क्योंकि खुशबू के बिना उन की यह योजना पूरी नहीं हो सकती थी. प्लान के मुताबिक 12/13 दिसंबर, 2020 की रात एक बजे खुशबू ने लक्की को फोन किया और उसे मिलने के लिए उसी समय घर के पीछे बुलाया.

खुशबू का फोन आते ही लक्की कपड़े पहन कर मोबाइल साथ ले कर चुपके से घर से निकल गया. उस समय घर के सभी लोग गहरी नींद में सो रहे थे. वह घर से थोड़ी दूर पहुंचा तो रास्ते में उसे अरमान और अजहर मिल गए. दोनों को देखते ही लक्की समझ गया था कि खुशबू ने धोखे से उसे यहां बुलाया है. इन से बचना कठिन है. वह खतरे को भांप चुका था. जैसे ही उस ने वहां से भागने की कोशिश की दोनों ने दौड़ कर उसे पकड़ लिया. कसरती बदन वाले अजहर ने अपना मजबूत हाथ लक्की के मुंह पर रख दिया ताकि वह चिल्ला न सके. उस के हाथों के दबाव से लक्की की आवाज गले में घुट कर रह गई.

तब तक दोनों ने उसे जमीन पर पटक दिया. अरमान ने लक्की के दोनों पैर पकड़ लिए. अजहर ने कमर में खोंसा धारदार चाकू निकाला और लक्की का गला रेत दिया. थोड़ी देर में लक्की की मौत हो गई. इतने पर भी उसे यकीन नहीं हुआ तो उस के सीने पर चाकू से ताबड़तोड़ वार किए. फिर दोनों वहां से फरार हो गए और साथ में उस का फोन भी ले गए. भागते हुए उन्होंने खून से सना चाकू झाड़ी में फेंक दिया ताकि पुलिस उन तक कभी न पहुंच पाए. लेकिन कातिल कितना ही चालाक क्यों न हो, कानून की गिरफ्त से ज्यादा दिन दूर नहीं रह सकता.

मृतक की मां आरती देवी की नामजद तहरीर पर लक्की की हत्या के आरोप में पुलिस ने खुशबू, अरमान मलिक और अजहर को गिरफ्तार कर लिया. आरती देवी ने अरमान के पिता फिरोज मलिक को भी नामजद किया था, लेकिन मुकदमा दर्ज होने के बाद वह घर से फरार हो गया था. पुलिस ने आरोपियों की निशानदेही पर लक्की की हत्या में प्रयुक्त चाकू भी बरामद कर लिया. कथा लिखे जाने तक 3 आरोपी जेल में बंद थे. काश! लक्की ने अपनी मां का कहना मान लिया होता तो आज वह जिंदा रहता.

—कथा में खुशबू परिवर्तित नाम है. कथा पुलिस सूत्रों पर आधारित

अवैध संबंध का नतीजा : भांजे संग मिलकर कर डाला पति का कत्ल

Rajasthan Crime News :  कभीकभी औरतें मौजमजे के चक्कर में अपनी गृहस्थी खुद ही उजाड़ लेती हैं. 4 बच्चों की मां किरण की घरगृहस्थी अच्छीखासी चल रही थी, लेकिन उस ने 18 वर्षीय भांजे शंभूदास को अपने प्रेमजाल में फांस लिया. इस का जो नतीजा निकला वह…

मंगलवार, 5 जनवरी 2021 का सूरज उदय ही हुआ था कि मूंडवा थाने में फोन द्वारा सूचना मिली के मूंडवा गांव के सरोवर के पास मंदिर से सटे घर में चारपाई पर सुरेश की लाश पड़ी है. सुरेश की रात में अज्ञात हत्यारों ने सोते समय धारदार हथियार से हत्या कर दी है. सूचना मिलते ही मूंडवा थानाप्रभारी बलदेवराम पुलिस टीम के साथ घटनास्थल पर जा पहुंचे. घटनास्थल पास में ही था, इसलिए वह वहां 10 मिनट में ही पहुंच गए. वहां आसपास के लोगों की भीड़ जमा हो गई थी. उन्हें हटा कर पुलिस मकान के अंदर पहुंची, जहां चारपाई पर मृतक सुरेश साद (35 वर्ष) की खून से लथपथ लाश पड़ी थी. मृतक पुजारी परिवार से था.

खून के छींटे फर्श और दीवारों पर भी लगे थे. थानाप्रभारी बलदेवराम ने जांचपड़ताल और मौकामुआयना किया. घर की दीवारें काफी ऊंची थीं, इस कारण प्रथमदृष्टया ऐसा लग रहा था कि जिस ने भी हत्या की थी, वह दीवार फांद कर घर में नहीं आया था. तो क्या हत्या में घर के किसी सदस्य का हाथ है? अगर हाथ है तो वह कौन है और उस ने हत्या क्यों की? ये तमाम सवाल थानाप्रभारी के जेहन में आजा रहे थे. थानाप्रभारी बलदेवराम ने सुरेश साद हत्याकांड की जानकारी अपने उच्चाधिकारियों को दी. मामला मंदिर के पुजारी से जुड़ा था. ऐसे मामले में राजनीति बहुत जल्द शुरू हो जाती है.

इस कारण घटना की खबर मिलते ही एएसपी राजेश मीणा, सीओ विजय कुमार सांखला और एसपी (नागौर) श्वेता धनखड़ घटनास्थल पर आ पहुंचे. घटनास्थल पर पुलिस अधिकारियों ने मौकामुआयना किया और नागौर से एफएसएल की टीम और एमओबी टीम को मौके पर बुला कर साक्ष्य इकट्ठा किए. पुलिस टीम ने मृतक के घर वालों से पूछताछ की. पूछताछ में घर वालों ने बताया कि सुरेश रात में पशुओं को चारा खिलाने गया था. रात में वह चारा खिलाने के बाद बरामदे में चारपाई पर आ कर सो गया. अगली सुबह 5 जनवरी को जब मृतक सुरेश की पत्नी किरण ने आ कर पति को आवाज दी तो कोई जवाब नहीं मिला.

फिर वह किरण बरामदे में आई और जैसे ही चारपाई पर खून से लथपथ पति की लाश देखी तो वह रोनेचिल्लाने लगी. तब घर के अन्य सदस्य दौड़ कर आए. उन्होंने देखा कि सुरेश की खून से लथपथ लाश बिस्तर पर पड़ी थी. तब उन्होंने थाना मूंडवा में फोन कर खबर दी. इस के बाद मूंडवा थाना पुलिस घटनास्थल पर आई और जांच शुरू की. मृतक मंदिर में बने घर में रहता था. सुरेश के परिवार में उस की पत्नी किरण (30 साल) के अलावा 4 बच्चे थे. घटना वाली रात किरण कमरे में बच्चों के साथ सो रही थी जबकि सुरेश बाहर बरामदे में ही सोता था. एसपी श्वेता धनखड़ ने मृतक की पत्नी किरण से पूछा, ‘‘आप ने रात में क्या कोई चीख सुनी थी?’’

‘‘नहीं, मैं ने कुछ भी नहीं सुना.’’ किरण बोली.

मृतक के अन्य परिजनों से भी पूछताछ की गई. मगर सभी ने यही कहा कि उन्होंने कोई आवाज या खटका वगैरह नहीं सुना था. तब एसपी श्वेता धनखड़ ने पूछा, ‘‘किसी से कोई दुश्मनी थी क्या सुरेश की? किसी से कोई लड़ाईझगड़ा हुआ हो या किसी पर शक हो तो बताएं.’’

मृतक के परिजनों ने कहा कि मृतक शांत स्वभाव का था. उस की किसी से दुश्मनी नहीं थी. न ही किसी से उस का लड़ाईझगड़ा हुआ था. मृतक के परिजनों का कहना था कि उन्हें किसी पर शक नहीं है. कोई घर में आ कर सोते व्यक्ति को धारदार हथियार से मार कर चला गया और मृतक के बीवीबच्चे और भाई तथा अन्य सदस्यों को भनक तक नहीं लगी. घर की दीवार इतनी ऊंची थी कि उस पर चढ़ कर अंदर आना संभव नहीं था. न ही घर के चारों ओर की दीवारों के पास किसी के पैरों के निशान थे. अगर कोई दीवार पर चढ़ता तो उस के पदचिह्न जरूर होते. मगर पैरों के निशान नहीं थे. ऐसे में पुलिस अधिकारियों को मृतक के परिवार के लोगों पर शक हुआ कि हो न हो इस हत्याकांड में परिवार का कोई व्यक्ति शामिल है.

पुलिस टीम ने शव पोस्टमार्टम के लिए अस्पताल भिजवा दिया. एफएसएल टीम ने साक्ष्य एकत्र किए. शव पर धारदार हथियार के 3-4 गहरे जख्म थे. हालांकि पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने तक का इंतजार करना था. पुलिस टीम ने मृतक के परिजनों सहित ग्रामीणों से भी पूछताछ की. हालांकि उस समय तक इस मामले में कोई सुराग हाथ नहीं लगा था. फिर भी पुलिस अधिकारी हत्याकांड के परदाफाश के लिए जीजान से जुटे थे. एसपी श्वेता धनखड़ ने एएसपी राजेश मीणा, डिप्टी विजय कुमार सांखला और मूंडवा थानाप्रभारी बलदेवराम को दिशानिर्देश दे कर कहा कि जल्द से जल्द हत्याकांड का परदाफाश कर हत्यारों को गिरफ्तार किया जाए.

एसपी श्वेता धनखड़ दिशानिर्देश दे कर नागौर लौट गईं. पुलिस अधिकारियों का शक मृतक की पत्नी किरण पर था. इस का कारण था कि बरामदे के पास के कमरे में वह अपने चारों बच्चों के साथ सोई थी. सुरेश का मकान सुनसान इलाके में था, जहां शोरशराबा नहीं था. ऐसे में कोई आ कर हत्या कर दे और बरामदे से सटे कमरे में पता नहीं चले, यह असंभव था. इस कारण एकबार किरण पुलिस की निगाहों में आई तो उस की कुंडली खंगाली जाने लगी. सुरेश का शव पोस्टमार्टम के बाद उस के परिजनों को सौंप दिया गया. परिजनों ने उस का अंतिम संस्कार कर दिया. एसपी के निर्देश पर सुरेश साद हत्याकांड का परदाफाश करने के लिए एएसपी राजेश मीणा, सीओ विजय कुमार सांखला के नेतृत्व में थानाप्रभारी बलदेवराम सहित अन्य पुलिसकर्मियों ने जांच शुरू की.

मृतक की पत्नी किरण साद के मोबाइल की काल डिटेल्स निकलवाई गई. साथ ही पुलिस ने अपने मुखबिरों को भी सक्रिय कर दिया. काल डिटेल्स से पता चला कि जोधपुर जिले के बनाड़ थाने के गांव दईकड़ा निवासी शंभूदास साद से किरण की दिन में कईकई बार घंटों तक बातें होती थीं. शंभूदास मृतक का भांजा था. पुलिस अधिकारियों को मुखबिर से भी सूचना मिल चुकी थी कि शंभूदास और किरण के अवैध संबंध हैं. बस फिर क्या था, पुलिस ने मृतक सुरेश के 21 साल के भांजे शंभूदास को पूछताछ के लिए दबोच लिया. पुलिस ने उस से पूछताछ की तो पहले तो वह टालमटोल करता रहा मगर पुलिस ने सख्ती की तो वह टूट गया और अपना जुर्म कबूल कर लिया कि मामी किरण से उस के अवैध संबंध हैं.

मामा सुरेश को उन के संबंधों पर शक हो गया था. इस कारण वह मामीभांजे के संबंधों के बीच रोड़ा बनने लगा था. इस कारण उन दोनों ने योजनानुसार उस की हत्या कर दी. जुर्म कबूल करते ही पुलिस ने किरण को भी हिरासत में ले लिया और पूछताछ की. किरण पहले तो मना करती रही मगर जब उसे बताया गया कि शंभूदास ने सब कुछ बता दिया है तो वह टूट गई और उस ने भी अपना जुर्म कबूल लिया कि नाणदे (भांजे) के साथ उस के अवैध संबंध थे. तब पुलिस ने मृतक सुरेश साद के भाई की रिपोर्ट पर सुरेश की हत्या का मुकदमा दर्ज कर लिया और हत्यारोपी शंभूदास और किरण को गिरफ्तार कर लिया. पुलिस टीम ने शंभूदास और किरण को 8 जनवरी, 2020 को कोर्ट में पेश कर रिमांड पर लिया और कड़ी पूछताछ की. पूछताछ में जो कहानी प्रकाश में आई वह इस प्रकार से है—

राजस्थान के नागौर जिले के अंतर्गत एक कस्बा मूंडवा आता है. मूंडवा के छोर पर तालाब है, जहां मंदिर बना है. इस मंदिर के पुजारी साद परिवार के लोग हैं. इस साद परिवार में सुरेश साद थे. सुरेश साद की शादी करीब 12 साल पहले किरण से हुई थी. सुरेश मंदिर में पुजारी का काम करने के अलावा पशुधन भी रखता था. पशुधन के अलावा वह गांव में यजमानों के घर से अनाज व आटा भी लाता था. इस से उस के परिवार की गुजरबसर आराम से होती थी. सुरेश साद सीधासादा व सरल स्वभाव का व्यक्ति था. वह अपनी पूजापाठ व गृहस्थी में मस्त था. समय के साथ सुरेश की पत्नी किरण 4 बच्चों की मां बन गई थी. 4 बच्चे पैदा करने के बाद भी 30 साल की किरण की आकांक्षाएं अब भी जवान थीं.

सुरेश की उम्र 35 साल के आसपास थी. वह दिन भर पूजापाठ के अलावा पशुओं में खटता था और थकामांदा रात को आ कर बिस्तर पर सो जाता और खर्राटे भरने लगता. जबकि किरण शारीरिक सुख के लिए तड़प कर रह जाती थी. ऐसे में करीब ढाईतीन साल पहले जब शंभूदास अपनी ननिहाल मूंडवा आया तो वह मामी किरण की आंखों को भा गया. शंभूदास भी 18 साल का था. वह इंटरनेट पर अश्लील फिल्में देख कर औरत का सामीप्य पाने को आतुर था. ऐसे में जब उस की निगाह सांवलीसलोनी मामी किरण पर पड़ी तो वह उस का दीवाना हो गया. वह मामी पर लार टपकाने लगा.

मामी भी कोई नादान नहीं थी कि नाणदा (भांजे) के व्यवहार को न समझती. शंभूदास मामी के शरीर को छूने की कोशिश करता. सुरेश एक रोज बाहर गया था. उस रोज रात में एक ही कमरे में सो रहे शंभूदास और किरण मामी के बीच शारीरिक संबंधों की नींव पड़ गई. उस रात शंभूदास और किरण ने जी भर कर हसरतें पूरी कीं. किरण को कई साल बाद उस रात शारीरिक सुख की तृप्ति मिली थी. वह शंभूदास के पौरुष की कायल हो गई. वे दोनों अपना मामीभांजे का पवित्र रिश्ता शर्मसार कर बैठे थे. एक बार वासना के गर्त में डूबे तो उस में वक्त के साथ डूबते ही चले गए. शंभूदास अकसर ननिहाल के चक्कर काटने लगा. ननिहाल आने का मकसद सिर्फ मामी किरण थी. दोनों मौका मिलते ही हसरतें पूरी कर लेते.

शंभूदास का ननिहाल था. मगर जब वह महीने में 3-4 बार आने लगा तो सुरेश को थोड़ा अजीब लगा. एक दिन उस ने कहा, ‘‘शंभू, कुछ कामधंधा करो. अब तुम बच्चे नहीं हो, जो गाहेबगाहे यहां चले आते हो. बहन और बहनोई सा को कुछ कमा कर दो. वे कितने दिन तक तुम सब का पेट भरेंगे.’’ मामा सुरेश की बात शंभू को कांटे की तरह चुभ गई. मगर वह कुछ बोला नहीं. इस के बाद शंभूदास महीने में एक बार आने लगा. किरण उसे फोन कर के कहती कि मामा की बात का बुरा नहीं मानो, वह ऐसे ही हैं. तुम्हारे बगैर मैं जल बिन मछली की तरह तड़पती हूं. आ कर मेरी तड़प शांत तो किया करो. यह तनमन सब तुम्हारा है. ऐसे में शंभूदास को आना ही पड़ता था. उस का मन तो मामी को छोड़ने का होता ही नहीं था. मगर बिछुड़ने की मजबूरी थी.

इस कारण मन मार कर दोनों को जुदाई सहनी पड़ती थी. सुरेश सीधासादा जरूर था मगर वह नासमझ नहीं था. वह अपने भांजे शंभू के आने पर पत्नी के चेहरे पर खुशी की लकीरें देखता था. शंभू के जाने पर किरण का चेहरा मुरझा जाता था. तब सुरेश को इन के संबंधों पर शक होने लगा. अगली बार जब शंभूदास ननिहाल आया तो सुरेश साद ने वह सब अपनी आंखों से देख लिया जिस का उसे शक था. सुरेश ने किरण और भांजे शंभूदास को रंगरलियां मनाते देख लिया. पत्नी के इस रूप को देख कर सुरेश हतप्रभ रह गया. शंभू के आने पर पत्नी के चेहरे की खुशी का यह राज है, जान कर वह परेशान हो गया. वह करे तो क्या? अगर बात खुली तो जगहंसाई होगी.

सोचविचार कर सुरेश ने किरण से एकांत में कहा, ‘‘अपने जैसा शंभू को भी बना दिया. वह तेरे बेटे जैसा है. उस के साथ रंगरलियां मनाने से पहले तू मर क्यों नहीं गई. अगर आज के बाद तू शंभू से मिली तो मैं तुझे जान से मार दूंगा.’’

सुन कर किरण के पैरों तले से जमीन सरक गई. वह नजरें नीची किए जमीन कुरेदती रही. उस ने पति से अपने किए की माफी मांगी और कहा कि वह अब शंभू से कभी नहीं मिलेगी. उस का यहां आना बंद करा देगी. किरण ने त्रियाचरित्र दिखाया तो भोलाभाला सुरेश समझा कि वह सुधर जाएगी. उस ने बीवी को माफ कर दिया. मगर यह सुरेश की गलतफहमी थी. किरण ने शंभू को बता दिया कि उस के मामा ने उन दोनों को आपत्तिजनक स्थिति में देख लिया है. वह सचेत रहे. शंभू और किरण एकदूसरे के सामीप्य को तरस उठे. सुरेश उन्हें राह का कांटा लगा. उसे हटाए बिना वे मिल नहीं सकते थे. ऐसे में दोनों ने योजना बना ली. योजना यह थी कि शंभूदास छिप कर कुल्हाड़ी ले कर किरण के घर आ कर नीचे वाले कमरे में छिप जाएगा.

रात में सुरेश बरामदे में ही सोता था. सुरेश को नींद आने पर किरण खाली गिलास जमीन पर गिराएगी. यह इशारा मिलते ही शंभूदास सो रहे मामा सुरेश साद को कुल्हाड़ी से मार देगा और रात के अंधेरे में वापस चला जाएगा. मामा के रास्ते से हटने के बाद उन दोनों का मिलन रोकने वाला कोई नहीं होगा. साजिश के तहत शंभूदास 4 जनवरी, 2021 को शाम होते ही कुल्हाड़ी ले कर किरण के घर पहुंच गया. किरण ने उसे सारी योजना समझा कर नीचे कमरे में छिपा दिया. उस समय सुरेश पशुओं को चारा डालने गया हुआ था. चारा डाल कर सुरेश घर लौटा और फिर खाना खा कर फिर से पशु देखने गया. उस के बाद आ कर बरामदे में सो गया.

रात के 12 बजे किरण ने खाली गिलास नीचे पटका. शंभूदास के लिए यह एक इशारा था. इशारा मिलते ही सधे कदमों से शंभू कमरे से निकला और बरामदे में आ गया. उस समय सुरेश गहरी नींद में था. पलक झपकने की देर में शंभूदास ने कुल्हाड़ी का वार सो रहे मामा सुरेश पर किया. उस ने एक के बाद एक 4 वार सुरेश पर किए. खून का फव्वारा फूट पड़ा. वह मौत की नींद सो गया. शंभूदास अपना काम कर के चला गया. सुबह होने पर किरण ने योजना के अनुसार उठ कर बरामदे में जा कर रोनाधोना शुरू किया. तब घर के अन्य लोग वहां आए. फिर मूंडवा थाने में सूचना दी गई. पुलिस घटनास्थल पर पहुंची व मौका मुआयना किया.

रिमांड अवधि के दौरान शंभूदास से हत्या में प्रयुक्त कुल्हाड़ी, खून सने कपड़े और मोबाइल भी बरामद कर लिया गया. एसपी श्वेता धनखड़ ने सुरेश साद हत्याकांड का खुलासा करते हुए प्रैसवार्ता की. रिमांड अवधि पूरी होने पर शंभूदास व किरण को पुलिस ने कोर्ट में पेश कर न्यायिक हिरासत में भेज दिया.