Gujarat News: मालिक ने ही चुराए 32 करोड़ के हीरे

Gujarat News: 48 वर्षीय हीरा व्यापारी देवेंद्र चौधरी की कंपनी से 32 करोड़ के हीरे चोरी होने की सूचना पर सूरत पुलिस के हाथपैर फूल गए थे, लेकिन पुलिस ने घटना की कड़ी से कड़ी जोड़ी तो चोर कोई और नहीं बल्कि कंपनी मालिक देवेंद्र चौधरी ही निकला. पुलिस पूछताछ में उस ने इस चोरी के पीछे की जो कहानी बताई, सुन कर पुलिस भी हैरान रह गई. आखिर क्यों की उस ने अपनी ही कंपनी में करोड़ों की चोरी?

डायमंड और साडिय़ों के लिए मशहूर गुजरात के सूरत शहर के कापोद्रा इलाके के कपूरवाडी में स्वतंत्रता दिवस, जन्माष्टमी और रविवार की 3 दिनों की लगातार छुट्टी के बाद 18 अगस्त, 2025 को जब डी.के. संस के मालिक देवेंद्र कुमार चौधरी अपनी कंपनी पहुंचे तो गेट में लगा ताला खुला हुआ था. यह देख कर वह चौंके. जल्दीजल्दी सीढिय़ां चढ़ कर चौथी मंजिल पर पहुंचे तो वहां सब कुछ अस्तव्यस्त था. उन्हें लगा कि कुछ तो गड़बड़ है. वह सीधे वहां पहुंचे, जहां हीरे रखने वाली तिजोरी रखी थी.

तिजोरी की हालत देख कर देवेंद्र कुमार की धड़कनें बढ़ गईं. क्योंकि तिजोरी गैस कटर से कटी हुई थी और उस में रखे हीरे और नकद रकम गायब थी. उन्होंने तुरंत अपने बेटों को फोन किया. बड़ा बेटा भाग कर आया तो उसे साथ ले कर वह थाना कापोद्रा पहुंचे और अपनी कंपनी में हुई चोरी की सूचना दी. देवेंद्र कुमार चौधरी ने पुलिस को बताया कि 14 अगस्त की शाम को वह आखिरी बार अपनी कंपनी में आए थे. उस दिन वह तराशे और गैरतराशे हीरे तिजोरी में रख कर घर चले गए थे. चूंकि 15, 16 और 17 अगस्त को छुट्टी थी, इसलिए उन के परिवार या कर्मचारियों में से कोई भी कंपनी नहीं आया. 18 अगस्त की सुबह जब वह कंपनी पहुंचे तो चोरी की यह घटना देख कर दंग रह गए.

यह कोई छोटीमोटी चोरी नहीं थी. देवेंद्र कुमार चौधरी ने पुलिस को जो बताया था, उस के हिसाब से उन की कंपनी में लगभग 32.6 करोड़ के हीरों की चोरी हुई थी. इतनी बड़ी चोरी का मामला था, इसलिए थाना कापोद्रा के एसएचओ आर.एस. पटेल तुरंत हरकत में आ गए. उन्होंने तुरंत इस घटना की सूचना डीसीपी अशोक कुमार को देने के साथ पुलिस कमिश्नर अनुपम सिंह गहलोत को भी दे दी थी. सूचना पाने के साथ ही डीसीपी अशोक कुमार फोरैंसिक टीम और फोटोग्राफर के साथ कपोद्रा के कपूरवाडी स्थित डी.के. संस कंपनी आ पहुंचे थे. थाना पुलिस पहले ही वहां आ चुकी थी. डीसीपी के आते ही उन के नेतृत्व में घटनास्थल का निरीक्षण शुरू हुआ.

फोरैंसिक टीम और फोटोग्राफर अपना काम करने लगे थे. पता चला कि सब से पहले कंपनी के बाहर लगे फायर अलार्म को तोड़ा गया था, जिस से गैस कटर का उपयोग करते समय किसी तरह की आवाज न हो और अलार्म न बजे. कंपनी में लोहे के चैनल का गेट लगा था. उस में लगा ताला जमीन पर खुला पड़ा था. पुलिस ने ताला कब्जे में ले लिया था. इस के बाद जब पुलिस आगे बढ़ी तो कंपनी में प्रवेश के लिए जो दरवाजा था, उसे तोडऩे के बजाय उस का भी ताला खोला गया था. हैरानी की बात यह थी कि फस्र्ट फ्लोर पर कोई सीसीटीवी कैमरा नहीं था, जिस से चोरों के लिए अपना काम करने में और आसानी हो गई थी.

तिजोरी देख पुलिस के उड़े होश

 

इस के बाद पुलिस चौथी मंजिल स्थित कंपनी के औफिस पहुंची तो पता चला कि मुख्य औफिस में प्रवेश करने के लिए सब औफिस का चोरों ने कांच निकाल दिया था. वहां सारा सामान बिखरा पड़ा था. औफिस में ही वह तिजोरी रखी थी, जिस में तराशे और गैरतराशे हीरे तथा नकदी रखी जाती थी. पुलिस ने जब तिजोरी देखी तो उस के भी होश उड़ गए. चोरों ने 3 लेयर वाली तिजोरी खोलने के बजाय गैस कटर से काट कर हीरे चुराए थे. तिजोरी में 12×10 इंच की छत थी. यह सब दर्शाता था कि चोरों के पास गैस कटर जैसे आधुनिक चोरी के सामान थे.

जहां चोरी हुई थी, उस जगह के और औफिस के बाहर के सीसीटीवी कैमरों के साथ डिजिटल वीडियो रिकौर्डर (डीवीआर) भी चोर निकाल ले गए थे, जिस से चोरों की पहचान न हो सके. देखा जाए तो एक तरह से चोरों तक पहुंचने के सारे रास्ते बंद थे, लेकिन जब जांच आगे बढ़ी तो एकएक कर कई बातें चौंकाने वाली सामने आईं. पुलिस ने जब पूछा कि लगभग कितनी कीमत के हीरे चोरी हुए होंगे तो कंपनी के मालिक देवेंद्र कुमार चौधरी ने हिसाब कर के बताया कि लगभग 32.6 करोड़ के हीरे चोरी गए हैं. इस तरह देखा जाए तो कंपनी में 32.6 करोड़ की चोरी हुई थी. यह कोई छोटीमोटी चोरी नहीं थी. इसलिए घटना का निरीक्षण करने वाले पुलिस अधिकारियों ने एक बार फिर यह जानकारी पुलिस कमिश्नर अनुपम सिंह गहलोत को दी.

पुलिस को करीबियों पर क्यों हुआ शक

मामला गंभीर था. सब से बड़ी बात यह थी कि इस घटना से पुलिस की भी काफी बदनामी हो रही थी कि जब लगातार 3 दिनों की छुट्टी थी तो गश्त करने वाली पुलिस क्या कर रही थी?

इस बदनामी से बचने के लिए पुलिस कमिश्नर ने इस मामले की जांच के लिए थाना पुलिस के साथ लोकल क्राइम ब्रांच को भी लगा दिया. इस तरह क्राइम ब्रांच कई टीमें बना कर चोरों का पता लगाने में लग गई थी. जांच में पता चला कि 3 दिनों की छुट्टी होने के बावजूद कंपनी में कोई सिक्योरिटी गार्ड नहीं था. चोरों ने इसी बात का लाभ उठा कर इतनी बड़ी चोरी को अंजाम दे दिया था. चोर सीसीटीवी कैमरा तोडऩे के साथ डीवीआर भी उठा ले गए थे, जिस से पुलिस को कोई सबूत न मिले. इस से पुलिस को लगा कि चोरी करने वाले साधारण चोर नहीं थे. इस चोरी को बहुत ही सुनियोजित तरीके से अंजाम दिया गया था.

चोरों तक पहुंचने के लिए पुलिस उस पूरे इलाके के सीसीटीवी फुटेज की जांच कर रही थी. जिस डी.के. संस कंपनी में चोरी हुई थी, वह मेन रोड से 200 मीटर अंदर थी. घटनास्थल पर एक लाइटर , रजनीगंधा पान मसाला का रैपर मिला था. कंपनी गली में अंदर चौथी मंजिल पर थी, इस बात की जानकारी चोरों को पहले से ही थी. इस से पुलिस को लगा कि कोई जानकार इस चोरी में शामिल है. कहीं कंपनी के किसी आदमी ने ही तो यह चोरी नहीं कराई, पुलिस को इस बात की भी आशंका थी. इसलिए पुलिस ने कर्मचारियों को भी जांच में शामिल कर लिया था.

सब से पहले तो पुलिस ने यह नोटिस किया कि चोरों ने हीरे चुराने के लिए तिजोरी तो गैस कटर से काटी थी, लेकिन कंपनी के मेन गेट से ले कर बाकी के दरवाजों से अंदर आने के लिए न तो किसी औजार का उपयोग किया था और न किसी तरह के बल का प्रयोग किया था. दरवाजे पर लगा ताला भी चाभी से खोला गया था, क्योंकि उस में किसी भी तरह के बल प्रयोग का निशान नहीं था. इस तरह देखा जाए तो कंपनी में जबरन प्रवेश का कोई निशान नहीं था. तो क्या चोरों को कंपनी में आसानी से घुसने का रास्ता दिया गया था? इस से यही लग रहा था कि यह काम अंदर के ही किसी आदमी का है.

हैरानी की एक बात यह भी थी कि कंपनी में इतने कीमती हीरे रखे थे, लेकिन वहां कोई सिक्योरिटी गार्ड नहीं था. पूछताछ में पता चला कि कुछ दिनों पहले ही सिक्योरिटी गार्ड को नौकरी से निकाल दिया गया था. हैरान करने वाली बात यह भी थी कि कंपनी में तो कैमरे लगे थे, लेकिन बिल्डिंग में एक भी कैमरा नहीं लगा था. ताला भी एकदम नया था, जिसे एक सप्ताह पहले ही खरीदा गया था. एक बात हैरान करने वाली यह भी थी कि चोरी की यह वारदात होने के एक सप्ताह पहले ही कंपनी के मालिक ने हीरे का बड़ा स्टाक खरीदा था. ये सारी बातें साबित कर रही थीं कि इस वारदात में या तो कंपनी का कोई कर्मचारी शामिल था या फिर करीबी शामिल था.

चोरों का पता लगाने के लिए पुलिस ने 3 दिनों के आसपास के सीसीटीवी कैमरे खंगाले. इस में पुलिस को 2 आटो संदिग्ध लगे, जो 15-16 अगस्त की दरम्यानी रात डी.के. संस डायमंड कंपनी की ओर जाते दिखाई दिए थे. पुलिस ने जब उस फुटेज को गौर से देखा तो उस में एक ऐसी चीज नजर आई, जिसे देख कर पुलिस का दिमाग ही घूम गया. पुलिस को उस आटो में डायमंड कंपनी के मालिक देवेंद्र कुमार का बेटा बैठा दिखाई दिया था. यही नहीं, एक आटो में पुलिस को गैस कटर भी नजर आया था. स्थानीय पुलिस और क्राइम ब्रांच ने गहराई से की गई जांच में यह निष्कर्ष निकाला कि कंपनी में चोरी हुई ही नहीं थी. जैसेजैसे जांच आगे बढ़ रही थी, वैसेवैसे पुलिस की परेशानी बढ़ती जा रही थी, क्योंकि चोरों का जो चेहरा सामने आ रहा था, वह हैरान करने वाला था.

पता चला कि चोरी होने का मात्र षडयंत्र रचा गया था और इस षडयंत्र में 5 लोग शामिल थे. आगे की जांच में 2 और चौंकाने वाली बातें पता चलीं. पहली यह कि कंपनी के मालिक देवेंद्र कुमार ने 10 दिन पहले ही कंपनी का बीमा रिन्यू कराया था. यह एक इत्तफाक भी हो सकता था, पर यहां कुछ ज्यादा ही इत्तफाक नजर आ रहे थे. पुलिस को यह भी पता चला था कि साल 2018 में भी इस कंपनी में चोरी हुई थी. उस चोरी में कंपनी के मालिक देवेंद्र कुमार ने बीमा कंपनी से 8 लाख रुपए वसूल किए थे.

इस का मतलब यह था कि देवेंद्र कुमार के साथ पहले भी ऐसा हो चुका था. इस के अलावा तिजोरी में रखे 19 करोड़ के कटिंग के हीरे चोर नहीं ले गए थे. जबकि कोई भी चोर इतनी कीमत के हीरे क्यों छोड़ता. इस के बाद पुलिस उस बीमा एजेंट से मिली, जिस ने देवेंद्र कुमार की कंपनी का बीमा कराया था. चौधरी ने उस से चोरी से पहले बात की थी. तब उस ने चौधरी को बताया था कि ऐसी किसी अनहोनी में कंपनी नुकसान का 50 प्रतिशत भरपाई करती है.

मालिक ने अपनी ही कंपनी में क्यों की चोरी

इस के बाद पुलिस ने डी.के. संस के मालिक देवेंद्र कुमार चौधरी को हिरासत में ले कर पूछताछ करने का निर्णय लिया. देवेंद्र कुमार को थाने ला कर पूछताछ की गई तो इस चोरी की जो कहानी सामने आई, उसे सुन कर पुलिस भी चकरा गई. करोड़ों की इस चोरी की योजना किसी और ने नहीं, कंपनी के मालिक देवेंद्र कुमार चौधरी ने ही अपने दोनों बेटों और 2 कर्मचारियों के साथ मिल कर बनाई थी और अंजाम भी दिया था. जिस के लिए 25 लाख रुपए देने थे. जिस में से 5 लाख रुपए दे भी दिए गए थे. बाकी के 20 लाख रुपए अभी देने थे.

अब सवाल यह था कि 300 करोड़ की टर्नओवर वाली कंपनी, जिस का कारोबार मुंबई से ले कर विदेश तक फैला था. आखिर उस के मालिक को ऐसी गैरकानूनी और शातिराना हरकत क्यों करनी पड़ी? तो आइए जानते हैं, देवेंद्र कुमार के बारे में. जिस डी.के. संस कंपनी में चोरी हुई थी, उस के 48 साल के मालिक देवेंद्र कुमार चौधरी पुत्र गेनाराम चौधरी मूलरूप से राजस्थान के जिला बाड़मेर के गांव गुडामालाणी के रहने वाले थे. 35 साल से वह परिवार के साथ सूरत में रह रहे थे. सूरत के वराछा में वह खोडियारनगर रोड पर कपूरवाड़ी में डायमंड किंग तथा डी.के. ऐंड संस के नाम से हीरा की कंपनी चलाते थे.

डायमंड किंग कंपनी के प्रोप्राइटर देवेंद्र कुमार चौधरी थे तो डी.के. संस देवेंद्र कुमार, उन की पत्नी, दोनों बेटे पीयूष, ईशान और ईशान की पत्नी की हिस्सेदारी में चलती थी. जबकि दोनों ही कंपनियां चलती एक ही जगह पर थीं.

23 करोड़ का उधार

ये कंपनियां देवेंद्र कुमार अपने दोनों बेटों के साथ मिल कर संभालते थे. देवेंद्र कुमार सूरत में देवेंद्र कुमार मारवाड़ी के रूप में पहचाने जाते थे. वह काठियावाड़ी इलाके में काठियावाडिय़ों के बीच पिछले 20 सालों से कंपनी चला रहे थे. कभी देवेंद्र कुमार की कंपनी में 1500 से अधिक कर्मचारी काम करते थे. जबकि इस समय 15-20 ही रह गए थे. कोरोना काल में देवेंद्र कुमार की कंपनी को भारी क्षति पहुंची थी. इसी के साथ देवेंद्र कुमार पर कर्ज भी हो गया था, जो धीरेधीरे बढ़ता ही जा रहा था.

उन्होंने 13 करोड़ रुपए बैंक से लोन ले रखा था तो 10 करोड़ रुपए लोगों से उधार ले रखे थे, जिसे चुकाना फिलहाल देवेंद्र कुमार के लिए मुश्किल था. जब कोई राह नहीं सूझी तो उन्होंने बेटों के साथ मिल कर अपनी ही कंपनी में चोरी करने की योजना बनाई. उसी योजना के तहत कंपनी में लगे सीसीटीवी कैमरों की संख्या कम करने के साथ सिक्योरिटी गार्ड को भी हटा दिया था. नए ताले खरीदे और बीमा एजेंट से बात कर के कंपनी का बीमा रिन्यू करवाया. पहले खुद ही बेटों के साथ मिल कर कंपनी में चोरी करने की कोशिश की, लेकिन सफल नहीं हुए. इस के बाद अपने ड्राइवर और एक खास आदमी को योजना में शामिल किया, जिस के लिए 25 लाख रुपए देने की बात भी हुई. इस में से 5 लाख रुपए एडवांस के रूप में देवेंद्र कुमार ने तिजोरी में रख दिए थे, जिस से चोर चोरी करते समय 5 लाख की पहली किस्त ले कर चले जाएं.

देवेंद्र कुमार ने अपने ड्राइवर को बचाने के लिए उसे दुबई भेजने की भी योजना बना रखी थी. उस के लिए फ्लाइट की टिकट भी खरीद ली गई थी, लेकिन जाने से पहले ही सारा भेद खुल गया और दुबई जाने से पहले जेल पहुंच गया. बहरहाल, जिस बीमा की रकम को पाने के लिए देवेंद्र कुमार मारवाड़ी ने जो खेल खेला, उस में वह खुद ही फंस गए और उसी का नतीजा है कि अब वह बेटों के साथ जेल में हैं. Gujarat News

 

 

Crime Story : फिल्म इंडस्ट्री की आड़ में चल रहा था पोर्न फिल्मों का धंधा

Crime Story : बौलीवुड हो या साउथ की फिल्म इंडस्ट्री, फिल्मों में जाने के लिए तमाम युवक युवतियां प्रयास करते हैं. जो असफल रहते हैं, उन में से कई अभिनय के नाम पर पोर्न फिल्म बनाने वालों के चंगुल में फंस जाते हैं. फिल्म इंडस्ट्री की आड़ में पोर्न फिल्में अब भी बन रही हैं. यह भांडा तब फूटा जब..

कोरोना काल में मुसीबतों में फंसा रहा भारतीय फिल्म उद्योग अभी तक नहीं उभर पाया है. कुछ समय पहले अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत की मौत के मामले में ड्रग्स एंगल का खुलासा होने के बाद बौलीवुड हिल गया था. नामी अभिनेत्रियों सहित सहित कई दूसरे लोगों की गिरफ्तारी से बौलीवुड में नशीले पदार्थों का काला कारोबार छाया रहा. इसी दौरान सैंडलवुड कहे जाने वाले कन्नड़ फिल्म उद्योग में भी ड्रग्स का जाल फैला होने का मामला सामने आया. कन्नड़ फिल्म उद्योग में ड्रग्स के मामले में कई नामी अभिनेत्रियों सहित दूसरे लोगों की गिरफ्तारियां हुईं.

फिल्म उद्योग में ड्रग्स के मामले अभी ठंडे भी नहीं पड़े थे कि अब बौलीवुड में पोर्न फिल्मों का मामला सामने आ गया है. पोर्न फिल्मों के मामले ने फिल्म उद्योग में फैले काले धंधों को उजागर करने के साथ वेब सीरीज के नाम पर ऐक्टिंग के लिए संघर्षरत युवाओं के शोषण की भी पोल खोल दी है. इसी साल 4 फरवरी की बात है. मुंबई पुलिस की क्राइम ब्रांच के प्रौपर्टी सेल के प्रभारी सीनियर इंसपेक्टर केदारी पवार को पोर्न फिल्में बनाने के बारे में सूचनाएं मिलीं, तो वह चौंके. उन्होंने कोई भी काररवाई करने से पहले अपने उच्चाधिकारियों सहायक पुलिस आयुक्त मिलिंद भारंबे, अपर पुलिस आयुक्त विरेश प्रभु और पुलिस उपायुक्त शशांक सांडभोर को इस बारे में बताना मुनासिब समझा.

उच्चाधिकारियों के निर्देश पर सीनियर इंसपेक्टर केदारी पवार ने इंसपेक्टर धीरज कोली, एपीआई लक्ष्मीकांत सांलुखे, सुनील माने, अमित भोसले, योगेश खानुरे, महिला अधिकारी अर्चना पाटील और सोनाली भारते आदि के अलावा मातहत पुलिस वालों की टीम बनाई. इस पुलिस टीम ने 4 फरवरी की आधी रात मुंबई के मालवणी इलाके में मड आइलैंड स्थित ओल्ड फेरी मार्ग पर बने ग्रीन पार्क बंगले पर छापा मारा. पुलिस अधिकारी अपने वाहनों को बंगले से कुछ दूर खड़ा कर जब पैदल ही बंगले के बाहर पहुंचे, तो वहां न तो कोई सुरक्षा के इंतजाम नजर आए और न ही कोई चहलपहल दिखी. बंगले के कुछ कमरों में रोशनी जरूर थी. कुछ आवाजें भी आ रही थीं.

पुलिस अधिकारी बंगले के एक कमरे में पहुंचे, तो वहां का दृश्य देख कर सन्न रह गए. कमरे में कुल 5 लोग थे. 2 महिला और 3 पुरुष. बिस्तर पर एक महिला और एक पुरुष अर्धनग्न अवस्था में अश्लील हरकतें कर रहे थे. एक महिला उन का वीडियो बना रही थी. मौके के हालात देख कर साफ था कि वहां पोर्न फिल्म की शूटिंग हो रही थी. पुलिस ने मौके से दोनों महिलाओं और तीनों पुरुषों को हिरासत में लिया. इन महिलाओं में 40 साल की फोटोग्राफर यास्मीन खान और 33 साल की ग्राफिक डिजाइनर प्रतिभा नलावडे थी. पकड़े गए पुरुषों में भानु ठाकुर और मोहम्मद नासिर ऐसी फिल्मों में ऐक्टिंग करते थे. वहीं मोनू जोशी कैमरामैन और लाइटमैन का काम करता था.

मौके से पुलिस ने 6 मोबाइल हैंडसेट, एक लैपटौप, कैनन कंपनी का कैमरा, 2 मैमोरी कार्ड, कैमरे का लैंस, एलईडी हैलोजन, स्पौट लाइट स्टैंड, ट्रायपोड स्टैंड सहित करीब 5 लाख 68 हजार रुपए का सामान जब्त किया. इन के अलावा शूटिंग के लिए लिखे गए डायलौग्स और स्क्रिप्ट सहित कुछ इकरारनामे भी बरामद किए. कई केस हुए दर्ज पूछताछ के लिए पांचों लोगों को पुलिस मालवणी पुलिस थाने ले आई. एपीआई लक्ष्मीकांत सांलुखे ने इस मामले में पुलिस थाने में केस दर्ज कराया. पुलिस ने भारतीय दंड संहिता की धारा 292, 293, 420 और 34 के अलावा स्त्री असभ्य प्रतिरूपण प्रतिषेध अधिनियम की विभिन्न धाराओं आदि में 5 फरवरी को मुकदमा दर्ज कर पांचों लोगों को गिरफ्तार कर लिया.

पुलिस ने पांचों लोगों से पूछताछ की, तो चौंकाने वाली बातें सामने आईं. पता चला कि मुंबई में पोर्न फिल्में बनाने वाला रैकेट चल रहा है. इस में कुछ नामी अभिनेता और अभिनेत्री भी शामिल हैं. ये अभिनेता, अभिनेत्री बी और सी ग्रेड की बौलीवुड फिल्मों में काम कर चुके हैं. ऐसी फिल्म प्रोडक्शन कंपनियां ऐक्टिंग के लिए स्ट्रगल कर रही युवतियों को हीरोइन बनाने का ख्वाब दिखातीं और उन से शौर्ट फिल्म में काम करने का एग्रीमेंट करती थी. एग्रीमेंट के बाद शूटिंग के दौरान ये लोग न्यूड सीन देने का दबाव डालते थे. मना करने पर एग्रीमेंट के आधार पर केस करने की धमकी देते थे. पांचों लोगों से पूछताछ के आधार पर पुलिस ने पोर्न फिल्में बनाने और उन्हें ओटीटी प्लेटफार्म पर अपलोड करने के मामले में अभिनेत्री गहना वशिष्ठ को भी 6 फरवरी को गिरफ्तार कर लिया.

गहना वशिष्ठ की गिरफ्तारी से बौलीवुड भी सकते में आ गया. पुलिस का कहना था कि गहना वशिष्ठ के प्रोडक्शन हाउस में पोर्न फिल्मों की शूटिंग होती थी. गहना वशिष्ठ की गिरफ्तारी पर उस की लीगल टीम ने एक बयान में कहा कि वह निर्दोष हैं. बोल्ड फिल्मों और हार्डकोर पोर्न फिल्मों में अंतर होता है. मुंबई पुलिस ने इन दोनों को एक समझ लिया. हमें उम्मीद है कि अदालत दोनों फिल्मों में अंतर समझ कर गहना को न्याय देगी. गहना वशिष्ठ, यास्मीन खान, प्रतिभा नलावडे और बाकी तीनों गिरफ्तार पुरुष आरोपियों मोनू जोशी, भानु ठाकुर व मोहम्मद नासिर से पूछताछ के आधार पर पुलिस ने पोर्न फिल्मों से कमाई गई 36 लाख 60 हजार रुपए की रकम भी बरामद की.

इन सभी से पूछताछ में पता चला कि पोर्न फिल्मों की शूटिंग भारत में मुंबई और दूसरी जगहों पर होती थी, लेकिन कानून की गिरफ्त से बचने के लिए इन फिल्मों के वीडियो विदेश के आईपी एड्रेस और सर्वर से अपलोड किए जाते थे. गहना वशिष्ठ की प्रोडक्शन कंपनी की ओर से ये वीडियो उमेश कामत को वी ट्रांसफर के जरिए भेजे जाते थे. उमेश उस लिंक को लंदन भेजता था. वहां से इन फिल्मों के वीडियो ओटीटी प्लेटफार्म पर अपलोड होते थे. वी ट्रांसफर दुनियाभर में ई फाइल भेजने का सब से सरल तरीका है. इस के जरिए 2 जीबी तक की बड़ी फाइलें भी मुफ्त में भेजी या मंगाई जा सकती हैं. पुलिस जांच में सामने आया कि उमेश कामत इस काम का कोआर्डिनेटर है और उस के जरिए ही पेमेंट मिलता था.

क्राइम ब्रांच को करीब 3 दरजन ऐसी फिल्मों के सबूत मिले, जो उमेश के जरिए लंदन भेजी गईं और वहां से अपलोड की गईं. उमेश कामत बौलीवुड की एक टौप अभिनेत्री के पति की कंपनी में मैनेजिंग डायरेक्टर है. अभिनेत्री का पति इस कंपनी में चेयरमैन और नान एक्जीक्यूटिव डायरेक्टर है. गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ जरूरी सबूत जुटाने के बाद पुलिस ने इस मामले में 8 फरवरी को उमेश कामत को भी गिरफ्तार कर लिया. उमेश और दूसरे आरोपियों से पूछताछ में पता चला कि प्रत्येक ऐसे वीडियो के एवज में विदेशी अपलोडर्स से उन्हें 2 से ढाई लाख रुपए मिलते थे. इन में से करीब एक लाख रुपए कलाकारों, कैमरामैन और फिल्म एडिटर आदि को दिए जाते थे और बाकी एक से डेढ़ लाख रुपए का मुनाफा होता था.

विवादों की रानी गहना गहना वशिष्ठ से पूछताछ में पुलिस को पता चला कि ऐसी फिल्मों के लिए उस ने ओटीटी के दरजनों ऐप बनाए थे. पुलिस ने जांच की, तो इन में से एक ऐप पर ही उस के 67 हजार से ज्यादा सब्सक्राइबर निकले. कोरोना काल में उस ने 85 से ज्यादा ऐसी फिल्में ओटीटी प्लेटफौर्म पर चलाई थीं. फरवरी में ही उस का 5-6 ऐसी फिल्में रिलीज करने का विचार था. पुलिस जांच में सामने आया कि फिल्म प्रोडक्शन कंपनी ने हौटहिट मूवीज नाम का एक ऐप भी बना रखा है. इस पर वे अपनी पोर्न फिल्म को अपलोड करते थे. इस ऐप के लिए बाकायदा 2 हजार रुपए तक सब्सक्रिप्शन फीस ली जाती थी.

8 फरवरी की रात पुलिस ने इस मामले में एक फोटोग्राफर श्याम बनर्जी उर्फ दिवांकर खासनवीस को गिरफ्तार किया. पोर्न फिल्म केस में यह 8वीं गिरफ्तारी थी. पुलिस का कहना है कि हौटहिट ऐप का संचालन 5 फरवरी को ग्रीन पार्क बंगला से गिरफ्तार महिला फोटोग्राफर यास्मीन खान और बाद में पकड़ा गया उस का पति फोटोग्राफर श्याम बनर्जी मिल कर करते थे. पुलिस की जांचपड़ताल में पोर्न फिल्म रैकेट के तार मुंबई से गुजरात के सूरत तक पहुंच गए. बाद में 10 फरवरी को पुलिस ने इस मामले में बी और सी ग्रेड बौलीवुड फिल्मों के अभिनेता तनवीर हाशमी को सूरत से गिरफ्तार किया.

पोर्न फिल्मों के मामले में गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ में जो कहानी उभर कर सामने आई. वह पैसे कमाने की अंधी दौड़ में युवा पीढ़ी को पतन के रास्ते पर ले जाने की कहानी है. कोरोना काल में जब मार्च 2020 के चौथे सप्ताह में पूरे देश में लौकडाउन हो गया, तब देश की दोतिहाई आबादी अपने घरों में कैद हो कर रह गई.  इस दौरान लोगों के पास मनोरंजन के नाम पर केवल मोबाइल रह गए. मोबाइल पर इस दौरान पोर्न फिल्में देखने वालों की तादाद बढ़ गई. इस का फायदा उठा कर मुंबई के कुछ सी ग्रेड फिल्मकारों ने पोर्न फिल्में बनाने की योजना बनाई.

मई 2020 में जैसे ही अनलौक का पहला चरण शुरू हुआ, तो इन लोगों ने अपनी योजना को क्रियान्वित करने के लिए देसी पोर्न फिल्में बनाने का काम शुरू कर दिया. इन में अभिनेत्री गहना वशिष्ठ, अभिनेता तनवीर हाशमी और फोटोग्राफर यास्मीन खान आदि ने मुंबई में मलाड इलाके में मड आइलैंड के बंगलों को किराए पर लिया. उस समय फिल्मों व टीवी सीरियलों की शूटिंग बंद थी, तब इन बंद बंगलों में ऐसी फिल्मों की शूटिंग होने लगी. उस समय पुलिस और प्रशासन कोरोना से बचाव की जद्दोजहद में जुटा हुआ था. इसलिए पुलिस को इस सब की जानकारी नहीं मिली.

गहना वशिष्ठ पर 85 से ज्यादा पोर्न फिल्में पोर्न वेबसाइट या ऐप्स पर अपलोड करने का आरोप है. इन में कुछ नामी मौडल्स को भी शूट किया गया था. मौडल्स और खूबसूरत चेहरेमोहरे वाली युवतियों को शौर्ट फिल्मों के लिए बुला कर एग्रीमेंट किया जाता था. एग्रीमेंट कुछ सचाई कुछ कुछ मिनट की शूटिंग के बाद एक्टर्स को पोर्न सीन करने के लिए मजबूर किया जाता था. ऐसे सीन नहीं करने पर उन्हें कानूनी नोटिस भेजने की धमकी दी जाती थी. इस का कारण यह था कि 30-40 हजार रुपए मेहनताना का एग्रीमेंट करने वाली मौडल और युवतियां उस एग्रीमेंट को पढ़ती नहीं थी. उन से केवल एकदो दिन की शूटिंग होने के नाम पर जल्दी में दस्तख्त करा लिए जाते थे.

पेशे से फोटोग्राफर यास्मीन उर्फ रोवा खान ने भी 50 से ज्यादा पोर्न फिल्में बनाई हैं. ऐसी फिल्मों की शूटिंग आमतौर पर एक ही दिन में पूरी कर ली जाती थी. एडिटिंग में 2 से 3 दिन का समय लगता था. इस तरह करीब 20 से 30 मिनट की फिल्म तैयार हो जाती थी. इस के बाद ऐसी फिल्मों को विदेश के आईपी एड्रेस और सर्वर के जरिए ओटीटी प्लेटफार्म पर रिलीज कर दिया जाता था. पोर्न फिल्मों के इस मामले में कथा लिखे जाने तक पुलिस में 4 केस दर्ज हुए थे. इन में 2 युवतियों ने मालवणी पुलिस थाने में केस दर्ज कराया. एक ने वसई के अर्नाला पुलिस स्टेशन में शिकायत दी. यह शिकायत लोनावाला पुलिस स्टेशन को ट्रांसफर की गई है. एक केस महाराष्ट्र साइबर सेल में दर्ज हुआ है.

इन में एक मौडल ने शिकायत में कहा कि गहना के प्रोडक्शन हाउस की ओर से शूट किए वीडियो में उसे न्यूड पोज देने के लिए फोर्स किया गया. एक मौडल ने गहना के खिलाफ 3 पुरुषों के साथ सैक्स करने को मजबूर करने का आरोप लगाया है. झारखंड की एक युवती ने मालवणी पुलिस थाने में दी शिकायत में पोर्न फिल्म न करने पर 10 लाख रुपए का हर्जाना देने की धमकी देने का आरोप लगाया है. अभिनेत्री गहना वशिष्ठ को पैसों का लालच ही इस गंदे काम की तरफ खींच लाया. छत्तीसगढ़ के चिरमिरी की रहने वाली गहना का असली नाम वंदना तिवारी है.

16 जून, 1988 को जन्मी वंदना तिवारी ने भोपाल से कंप्यूटर साइंस में बीटेक किया था. सन 2012 में जब उस ने मिस एशिया बिकनी कांटेस्ट जीता, तब वह लोगों की नजर में आई थी. उस ने इस प्रतियोगिता में भारत का प्रतिनिधित्व करते हुए सब से ज्यादा अंक हासिल किए थे.  बाद में उस ने मौडलिंग करते हुए करीब 80 विज्ञापनों में अपने जलवे दिखाए. इन में मोंटे कार्लो, फिलिप्स एरेना, शेवरले क्रूज कार, ड्रीम स्टोन ज्वैलरी, पलक साड़ीज आदि मुख्य थे. बाद में वह स्टार प्लस के सीरियल ‘बहनें’ में लीड रोल में नजर आई. क्रिकेट वर्ल्ड कप 2015 के लिए उस ने योगराज सिंह और अतुल वासन के साथ एक न्यूज चैनल पर ऐंकरिंग भी की.

गहना वशिष्ठ ने अपना फिल्मी कैरियर ‘फिल्मी दुनिया’ नामक हिंदी फिल्म से शुरू किया. बौलीवुड फिल्म इंडियन नेवर अगेन निर्भया, दाल में कुछ काला है, लखनवी इश्क, सविता बार्बी, निर्भया, उन्माद और द प्रौमिस में उस ने अभिनय किया. इस के अलावा गहना ने करीब एक दरजन तेलुगू फिल्मों में भी महत्त्वपूर्ण रोल किए. एक स्पैनिश फिल्म में भी उस ने काम किया. वह साउथ के एक नामी अभिनेता की गर्लफ्रैंड भी रही है. वह अल्ट बालाजी की वेब सीरीज ‘गंदी बात’, उल्लू ऐप के ‘मी टू’, अमेजन प्राइम के ‘मिरर द बिटर’, प्राइम फ्लिक्स के भाभीजी घर पर हैं आदि के अलावा ओटीटी प्लेटफार्म न्यूफ्लिक्स आदि पर भी नजर आई. उस ने कई म्यूजिक वीडियो में भी काम किया.

तिरंगा लपेट कर फोटो शूट कराने और मैरीकाम के ओलिंपिक मैडल जीतने पर न्यूड फोटो खिंचवाने के कारण गहना वशिष्ठ विवादों में रह चुकी है. सन 2018 में वह तब भी चर्चा में आई थी, जब उन्होंने बिग बौस की प्रतिभागी अर्शी खान को ले कर दावा किया था कि वे अपनी उम्र कम बताती हैं. गहना ने दावा किया था कि अर्शी ने 50 साल के आदमी से शादी की है और उन के खिलाफ भारत व पाकिस्तान के झंडों के अपमान सहित 10 आपराधिक मामले दर्ज हैं. गहना की कंपनी जीवी स्टूडियों का खेल गहना वशिष्ठ ने जीवी स्टूडियोज के नाम से अपनी प्रोडक्शन कंपनी बना रखी है.

मुंबई पुलिस गहना वशिष्ठ की कंपनी के सामने आए वीडियो को पोर्न बता रही है. वहीं, गहना की कंपनी का कहना है कि जीवी स्टूडियोज की ओर से निर्मित और निर्देशित वीडियो को इरोटिका के रूप में क्लासीफाइड किया जा सकता है. कंपनी का कहना है कि उन्होंने केवल ऐसी फिल्में बनाई हैं, जो कानूनन बनाई जा सकती हैं. पुलिस ने भारत में हार्ड पोर्न और उन के मेकर्स की बनाई फिल्मों के साथ गहना की इरोटिका फिल्मों को मिक्स कर दिया है जबकि इरोटिका, कामुक या बोल्ड फिल्मों के बीच एक कानूनी अंतर है. बी और सी ग्रेड बौलीवुड फिल्मों का अभिनेता तनवीर हाशमी अब तक 40 से ज्यादा फिल्मों में अभिनय कर चुका है.

गुजरात के सूरत के रहने वाले 40 वर्षीय तनवीर ने 20 साल के अपने फिल्मी कैरियर में ‘रात की बात’, ‘जख्मी नागिन’, ‘द रीयल ड्रीम गर्ल’, ‘भीगा बदन’, ‘बेस्ट पार्टनर’, ‘परदा’, ‘गरम’, ‘नाइट लवर’, ‘रेडलाइट’, ‘कामवाली’, ‘रिक्शावाली’, ‘कुंआरा पेइंग गेस्ट’, ‘दूधवाली’ और  ‘की क्लब’ जैसी सैक्सी फिल्मों में काम किया है. तनवीर सूरत के बारदोली इलाके में बंगला किराए पर ले कर पोर्न फिल्में बनाता था. पिछले 20 साल से फिल्मी परदे पर नजर आने के कारण उस की एक खास दर्शक वर्ग में पहचान थी. अपनी इसी पहचान के दम पर वह वेब सीरीज बनाने के बहाने ऐक्टिंग के शौकीन युवकयुवतियों को अपने जाल में फांस कर पोर्न फिल्में बनाता था.

पहले उस ने मुंबई में ही ऐसी कुछ फिल्में बनाई, लेकिन मुंबई में शूटिंग के लिए बंगलों का किराया ज्यादा था. इसलिए वह सूरत और आसपास के इलाकों में कम किराए के बंगले ले कर ऐसी फिल्में बनाने लगा. इस के लिए वह मुंबई से मौडल और युवतियों को सूरत बुलाता था. तनवीर और गहना न्यूफ्लिक्स ओटीटी के लिए भी ऐसी फिल्में बनाते थे. इस के चार लाख से ज्यादा कस्टमर हैं. ओरल सैक्स का मामला तनवीर हाशमी सन 2015 में मुंबई के साकीनाका में हुए ओरल सैक्स कांड से भी जुड़ा हुआ रहा है. उस समय एक मौडल ने आरोप लगाया था कि उस के साथ साकीनाका पुलिस स्टेशन में एक पुलिस इंसपेक्टर ने ओरल सैक्स किया था.

उस समय इस मामले में तनवीर हाशमी सहित एक नामी टीवी सीरियल का प्रोड्यूसर भी पकड़ा गया था. तनवीर उस समय साकीनाका पुलिस स्टेशन के कुछ अधिकारियों का खबरी हुआ करता था. उस समय तनवीर के क्रेडिट कार्ड से ही अंधेरी के एक पांच सितारा होटल में कमरा बुक कराया गया था. होटल के इसी कमरे में पीडि़त मौडल को 2 लाख रुपए के साइनिंग अमाउंट के लिए बुलाया गया था. ऐन वक्त पर मौडल ने उस कमरे में जाने से इनकार कर दिया और अपने बौयफ्रैंड को फोन कर दिया. आरोप लगा कि मौडल को उस का बौयफ्रैंड जब होटल से बाइक पर ले जा रहा था, तो साकीनाका थाना पुलिस ने उन दोनों को अगवा कर लिया.

बाद में एक पुलिस इंसपेक्टर ने एक पुलिस चौकी में मौडल को ले जा कर ओरल सैक्स किया था. इस मामले में आरोपी पुलिस वालों की भी गिरफ्तारी हुई थी. पोर्न फिल्मों का मामला नया नहीं है. मुंबई पुलिस ने कुछ दिन पहले संदीप इंगले नामक एक कास्टिंग डायरेक्टर को गिरफ्तार किया था. वह खुद को फिल्म प्रोड्यूसर भी बताता था और प्रेम के नाम से सैक्स रैकेट भी चलाता था. उस ने सैक्स रैकेट चलाने के लिए कई वेबसाइट बनाई थीं. इन वेबसाइटों को सर्च करने पर लोग आरोपियों से संपर्क करते थे. इस मामले में मुंबई के पांच सितारा होटल से 8 युवतियां मुक्त कराई गई थीं. इन में कुछ युवतियां नामी मौडल थीं.

मध्य प्रदेश की आर्थिक राजधानी इंदौर में भी पिछले साल जुलाई में पोर्न फिल्में बनाने का मामला सामने आया था. इंदौर पुलिस ने मौडल युवतियों की शिकायत पर मिलिंद डावर, अंकित सिंह चावड़ा, रैकेट के सरगना ब्रजेंद्र सिंह गुर्जर, गजेंद्र उर्फ गज्जू उर्फ गोवर्धन चंद्रावत आदि को गिरफ्तार किया था. ये लोग भी बंगलों और फार्महाउसों में पोर्न फिल्में बनाते और युवतियों का देह शोषण करते थे. मुंबई पोर्न फिल्म मामले में गिरफ्तार अभिनेत्री गहना वशिष्ठ के मकान और प्रोडक्शन हाउस की तलाशी में 3 मोबाइल फोन, 2 लैपटौप, 2 हार्ड डिस्क, 5 मैमोरी कार्ड, एक एडाप्टर, एक पेनड्राइव, प्रोडक्शन हाउस की रबर स्टैंप और एक कंपनी व कुछ कलाकारों के साथ एग्रीमेंट से जुड़े 10 करार पत्र सहित कई दस्तावेज मिले हैं.

गहना के एक बैंक खाते में एक आरोपी की ओर से रकम भेजे जाने के सबूत भी मिले हैं. पुलिस की ओर से इस मामले में गिरफ्तार और फरार आरोपियों के 2019 के बाद के बैंक खातों के लेनदेन के अलावा ईमेल, मोबाइल काल, वाट्सऐप चैट आदि की पड़ताल की जा रही है. गहना वशिष्ठ के कारोबारी पति सहित कई मौडल भी पुलिस जांच के दायरे में हैं. इस मामले में कुछ और गिरफ्तारियां होने के साथ बौलीवुड के चौंकाने वाले नए खुलासे होने की संभावना है. crime story

 

 

 

 

Uttar Pradesh News : नईनवेली दुलहन प्रगति ने दी पति की मौत की सुपारी

Uttar Pradesh News : प्रगति की बड़ी बहन पारुल की शादी एक करोड़पति परिवार में हुई थी. फिर प्रगति ने भी बहन के 21 वर्षीय देवर दिलीप यादव को अपने प्यार के जाल में फांस कर उस से शादी कर ली. शादी के 2 हफ्ते बाद ही ऐसा क्या हुआ कि 19 वर्षीय नईनवेली दुलहन प्रगति ने मुंहदिखाई में मिले पैसों से सुपारी दे कर पति की हत्या करा दी?

शादी के बाद 5 दिन ससुराल में रह कर प्रगति यादव अपने मायके आ गई. उस का भाई आलोक चौथी चला कर ससुराल से उसे लाया था. वह ससुराल से आई तो बेहद खुश थी. ससुराल से कोई शिकायत भी नहीं आई थी, इसलिए प्रगति के फेमिली वाले भी खुश थे. लेकिन प्रगति के दिमाग में क्या बवंडर चल रहा है, उस की खुशी में कितना जहर घुला है, इस का अंदाजा फेमिली वाले नहीं लगा सके. मायके आने के दूसरे रोज ही प्रगति ने अपने प्रेमी अनुराग उर्फ मनुज से मोबाइल फोन पर बात की और उसे मिलने के लिए औरैया हाइवे स्थित होटल बांकेबिहारी बुलाया. कुछ ही देर बाद अनुराग होटल पहुंच गया. वहां प्रगति उस का बेसब्री से इंतजार कर रही थी. होटल में बैठ कर उन के बीच बातचीत शुरू हुई.

प्रगति बोली, ”मनुज, प्लान के मुताबिक मैं ने दिलीप से शादी कर ली और उस की दुलहन बन गई. किसी को शक न हो, इसलिए सुहागरात को भी किसी तरह का विरोध नहीं किया. हालांकि सुहाग सेज पर मुझे तुम्हारी याद सताती रही, लेकिन अब मैं अधिक दिनों तक इंतजार नहीं कर सकती. आगे का प्लान क्या है?’’

अनुराग उर्फ मनुज प्रगति का हाथ अपने हाथ में लेता हुआ बोला, ”प्रगति, तुम चिंता मत करो. तुम्हारे पति दिलीप को ठिकाने लगाने के लिए मैं ने अपने मौसेरे भाई दुर्लभ के जरिए सुपारी किलर को खोज लिया है, लेकिन समस्या रुपयों की है?’’

”रुपयों की चिंता तुम मत करो. उस का इंतजाम हो गया है. मुंहदिखाई रस्म में दिलीप के घरवालों और रिश्तेदारों ने लगभग 70 हजार रुपए मुझे दिए हैं. इस के अलावा 30 हजार रुपए दिलीप ने मुझे खर्च के लिए दिए हैं. इस तरह मेरे पास एक लाख रुपया नकद और 8 लाख रुपए कीमत के गहने हैं. तुम सुपारी किलर को बुला लो. आमनेसामने बैठ कर पति की मौत का सौदा हो जाएगा.’’

इस के बाद अनुराग उर्फ मनुज ने दुर्लभ यादव के माध्यम से औरैया जिले के थाना अछल्दा के गांव रामनगर निवासी कुख्यात अपराधी रामजी नागर उर्फ चौधरी से बात की. वह होली के 2 दिन पहले ही जेल से छूट कर आया था. उसे पैसों की सख्त जरूरत थी, इसलिए वह सुपारी लेने को राजी हो गया था. 17 मार्च, 2025 को अनुराग व प्रगति फिर से होटल बांकेबिहारी पहुंचे. वहां अनुराग ने दुर्लभ के माध्यम से सुपारी किलर रामजी नागर उर्फ चौधरी को भी बुलवा लिया. फिर आमनेसामने बैठ कर प्रगति ने पति की हत्या का सौदा तय करना शुरू किया.

रामजी नागर ने 3 लाख रुपए मांगे, लेकिन प्रगति अधिक रकम की बात कह कर राजी नहीं हुई. बाद में दुर्लभ के माध्यम से दिलीप की मौत का सौदा 2 लाख रुपए में तय हो गया. एडवांस के तौर पर प्रगति ने एक लाख रुपया नकद सुपारी किलर रामजी नागर को दे दिए तथा शेष काम होने के बाद देने का वादा किया. पति की मौत की सुपारी देने के बाद प्रगति पति दिलीप से रसभरी मीठीमीठी बातें करने लगी. कभी काल कर तो कभी वीडियो कालिंग के जरिए बात करती. दिलीप भी नईनवेली पत्नी की बातों में खूब दिलचस्पी लेता. दिलीप को महसूस नहीं हुआ कि पत्नी का प्यार छलावा है. उस की रसभरी बातों में जहर भरा है.

19 मार्च, 2025 की सुबह 10 बजे प्रगति ने दिलीप से मोबाइल फोन पर बात की तो उस ने बताया कि वह इस समय कन्नौज के उमर्दा कस्बे में है. पुल निर्माण का काम चल रहा है. वह भी हाइड्रा (क्रेन) ले कर आया था. उस का काम आज खत्म हो गया है. कुछ देर बाद वह घर के लिए निकलने वाला है.

हत्या होने तक किलर के संपर्क में रही प्रगति

प्रगति ने तत्काल इस की सूचना अपने प्रेमी अनुराग को दी. अनुराग ने सुपारी किलर रामजी नागर को सूचित किया. रामजी नागर अपने 2 साथियों शिवम व दुर्लभ के साथ बाइक से बेला चौराहे पर पहुंच गया. दोपहर लगभग डेढ़ बजे दिलीप ने बेला चौराहा पार किया और दिबियापुर की ओर रवाना हुआ. तभी रामजी नागर व उस के 2 साथियों शिवम और दुर्लभ ने उस का पीछा किया. पटना नहर पुल के आगे पहुंचने पर एक ढाबे पर खाना खाने के लिए दिलीप रुका. पीछे से रामजी नागर भी आ गया. खाना खाते समय दिलीप ने अपने बड़े भाई संदीप को फोन किया कि वह हाइड्रा (क्रेन) ले कर वापस आ रहा है. पटना नहर पुल के पास स्थित ढाबे पर खाना खा रहा है. एक घंटे में घर पहुंच जाएगा.

इधर खाना खाने के बाद दिलीप ढाबे के बाहर निकला तो रामजी नागर ने पूछा, ”भाईसाहब, यह हाइड्रा (क्रेन) आप की है?’’

”हमारी है. कुछ काम है?’’ दिलीप ने पूछा.

”हां, बहुत जरूरी काम है. दरअसल, हमारी कार बेकाबू हो कर नहर पटरी फांद कर नहर में गिर गई है. उसे निकालना है. आप मेरे साथ चल कर रास्ता देख लें. फिर क्रेन से उसे निकाल देना. आप जो पैसे कहेंगे, हम चुकता कर देंगे.’’

दिलीप यादव लालच में आ गया. उस ने सोचा छोटे से काम के हजार-2 हजार रुपए मिल जाएंगे. अत: वह उस के साथ जगह देखने को राजी हो गया. रामजी नागर व उस के साथी शिवम और दुर्लभ दिलीप को बाइक पर बीच में बिठा कर चल पड़े. लगभग 7 किलोमीटर का सफर तय कर उन की बाइक पलिया गांव के पास नहर पटरी पर रुकी. बाइक से उतरते ही रामजी नागर, शिवम और दुर्लभ ने दिलीप को दबोच लिया और उसे घसीटते हुए नहर पटरी से कुछ दूर गेहूं के खेत में ले गए. वहां मारपीट कर तथा धारदार हथियार से हमला कर दिलीप को लहूलुहान कर दिया. लेकिन अब भी दिलीप की सांसें चल रही थीं.

फिर रामजी नागर ने कमर में खोंसा तमंचा निकाल लिया और दिलीप की कनपटी से सटा कर फायर कर दिया. उस के बाद उसे मरा समझ कर तीनों बाइक से फरार हो गए. इस बीच प्रगति प्रेमी व सुपारी किलर से मोबाइल फोन के जरिए संपर्क में रही. शाम 4 बजे पलिया गांव के कुछ लोगों ने नहर किनारे गेहूं के खेत में एक युवक को मरणासन्न हालत में पड़े देखा तो सूचना डायल 112 पुलिस को दी. पुलिस मौके पर पहुंची और सूचना थाना सहार को दी. सूचना पाते ही थाना सहार के एसएचओ पंकज मिश्रा सहयोगी पुलिसकर्मियों के साथ घटनास्थल पर पहुंचे. उस समय युवक की सांसें चल रही थीं. अत: जान बचाने के लिए युवक को बिधूना ले गए और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) में भरती करा दिया.

इधर जब 2 घंटे तक दिलीप घर नहीं पहुंचा तो उस के भाई संदीप ने उसे काल लगाई. काल इंसपेक्टर पंकज मिश्रा ने रिसीव की. उन्होंने संदीप को बताया कि यह मोबाइल फोन जिस युवक का है, वह मरणासन्न हालत में सामुदायिक स्वास्थ केंद्र बिधूना में भरती है. यह सुनते ही संदीप घबरा गया. उस ने एसएचओ को बताया कि घायल युवक उस का भाई दिलीप है. वह जल्द ही बिधूना अस्पताल पहुंच रहा है. इस के बाद संदीप ने दिलीप के घायल होने की खबर अपने भाइयों, मम्मीपापा तथा दिलीप की ससुराल में दी. फिर भाई अक्षय के साथ बिधूना पहुंच गया. अस्पताल में उस ने भाई दिलीप की हालत देखी तो डाक्टरों से उस ने बात की. गंभीर हालत देख कर डाक्टरों ने दिलीप को मैडिकल कालेज सैफई रेफर कर दिया.

सैफई मैडिकल कालेज में जब दिलीप का इलाज शुरू हुआ और मस्तिष्क का सीटी स्कैन हुआ तो पता चला कि कनपटी में गोली फंसी है. अब तक दिलीप का पूरा परिवार मैडिकल कालेज आ पहुंचा था. दिलीप की पत्नी प्रगति भी अपने भाई आलोक के साथ आई थी. पति की हालत देख कर वह फफक पड़ी और बोली, ”अभी तो मेरे हाथों से मेहंदी का रंग भी नहीं छूटा और भगवान तूने ये क्या गजब ढा दिया. इन को कुछ हो गया तो मैं कैसे जिंदा रहूंगी.’’

भाई आलोक ने किसी तरह बहन को संभाला. हालांकि उसे सब पता था कि यह नाटक कर रही है.

करोड़पति बाप की औलाद निकला मृतक

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दिलीप को गोली लगने की सूचना पुलिस के आला अधिकारियों को लगी तो एसपी अभिजीत आर. शंकर, एएसपी आलोक मिश्रा, डीएसपी भरत पासवान तथा एसएचओ पंकज मिश्रा सैफई मैडिकल कालेज पहुंचे और घायल दिलीप यादव के फेमिली वालों से बातचीत की. वहीं अधिकारियों को पता चला कि दिलीप एक करोड़पति व्यापारी का बेटा है. उस की अभी हाल में ही शादी हुई थी. पर सवाल था कि दिलीप की जान कौन लेना चाहता था? इस का सही जवाब दिलीप के फेमिली वालों के पास भी नहीं था.

दूसरे रोज सैफई मैडिकल कालेज में दिलीप की हालत बिगड़ी तो घर वाले उसे ग्वालियर के अस्पताल ले गए. वहां मन नहीं भरा तो उसे आगरा ले गए. अंत में उन्होंने औरैया के चिचौली मैडिकल कालेज में भरती कराया. लेकिन 21 मार्च की सुबह दिलीप ने अंतिम सांस ली. मौत के बाद दिलीप के शव को पोस्टमार्टम के लिए जिला अस्पताल भेज दिया गया. पोस्टमार्टम के बाद शव को उस के घर वालों को सौंप दिया गया. पोस्टमार्टम रिपोर्ट के अनुसार दिलीप के शरीर में 9 गंभीर चोटों के निशान मिले, जो किसी धारदार हथियार के थे. सिर के पीछे 315 बोर की गोली निकली थी.

पोस्टमार्टम के बाद फेमिली वाले दिलीप का शव पैतृक गांव नगला दीपा ले गए. शव पहुंचते ही गांव में कोहराम मच गया. बेटे की लाश देख कर पापा सुमेर सिंह व मम्मी सुमन देवी बिलख पड़ीं. अन्य घर वालों की आंखों से भी आंसू बहने लगे. मृतक दिलीप की पत्नी प्रगति भी ससुराल में ही थी. प्रगति ने पति के शव पर इतने आंसू बहाए कि देखने वालों का कलेजा कांप उठा. किसी तरह उस की बहन पारुल ने उसे संभाला. फिर शव का अंतिम संस्कार कर दिया गया.

इधर सहार थाने के एसएचओ पंकज मिश्रा ने संदीप यादव की तहरीर पर पहले दिलीप पर जानलेवा हमले (बीएनएस की धारा 109) की रिपोर्ट दर्ज की, फिर मौत होने पर इस रिपोर्ट को हत्या (बीएनएस की धारा 103) में तरमीम कर दिया. चूंकि हत्या का यह मामला एक बड़े कारोबारी के बेटे का था, अत: औरैया के एसपी अभिजीत आर. शंकर ने इस मामले को बड़ी गंभीरता से लिया और इस ब्लाइंड मर्डर का रहस्य खोलने के लिए एएसपी आलोक मिश्रा तथा डीएसपी भरत पासवान की निगरानी में एक पुलिस टीम का गठन किया. इस टीम में इंसपेक्टर पंकज मिश्रा, स्वाट टीम प्रभारी राजीव कुमार, तेजतर्रार पुलिसकर्मियों तथा सर्विलांस टीम को शामिल किया गया.

पुलिस कप्तान द्वारा गठित इस पुलिस टीम ने बड़ी तेजी से काम शुरू किया. टीम ने सब से पहले घटनास्थल का निरीक्षण किया, फिर ढाबा मालिक व वहां के कर्मचारियों से पूछताछ की. उस के बाद पुलिस टीम ने ढाबा से पलिया गांव तक, जहां दिलीप गेहूं के खेत में मरणासन्न अवस्था में पड़ा था, बारीकी से निरीक्षण किया तथा लगभग 7 किलोमीटर की दूरी तक सड़क व नहर पटरी पर लगे सीसीटीवी कैमरों की जांच की. इसी जांच में पटना नहर पुल पर लगे सीसीटीवी कैमरे में एक सफेद रंग की बाइक पर 4 लोग पलिया गांव की ओर जाते दिखे, लेकिन वापसी में 3 लोग ही दिखे. इस फुटेज में एक का चेहरा साफसाफ दिख रहा था.

सुपारी किलर ऐसे चढ़ा पुलिस के हत्थे

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सीसीटीवी कैमरे की इस फुटेज को पुलिस टीम ने अन्य थानों से साझा किया तो अछल्दा थाने की पुलिस से महत्त्वपूर्ण जानकारी मिली. थाना अछल्दा पुलिस ने टीम को बताया कि फुटेज में बाइक चलाने वाला युवक कुख्यात अपराधी रामजी नागर उर्फ चौधरी है, जो अछल्दा थाने के ही गांव रामनगर का रहने वाला है. उस पर 10 मुकदमे दर्ज हैं. अभी एक सप्ताह पहले ही उसे गैंगस्टर एक्ट में जमानत मिली है. इस समय वह जेल से बाहर है.

पुलिस टीम समझ गई कि दिलीप की हत्या में गैंगस्टर रामजी नागर का हाथ जरूर है, अत: उसे पकडऩे के लिए पुलिस ने उस के गांव रामनगर में छापा मारा. लेकिन वह हाथ नहीं आया. इंसपेक्टर पंकज मिश्रा व स्वाट टीम प्रभारी राजीव कुमार ने तब रामजी नागर की टोह में अपने खास मुखबिरों को लगा दिया तथा खुद भी छापेमारी करते रहे. 24 मार्च, 2025 को दोपहर 12 बजे इंसपेक्टर पंकज मिश्रा को एक खास मुखबिर ने थाने आ कर खबर दी कि गैंगस्टर रामजी नागर इस समय हरपुरा मोड़ पर मौजूद है. वह किसी युवक से पैसे के लेनदेन को ले कर बहस कर रहा है. अगर तुरंत दबिश दी जाए तो उसे पकड़ा जा सकता है.

चूंकि सूचना अतिमहत्त्वपूर्ण थी, अत: एसएचओ पंकज मिश्रा पुलिस टीम के साथ हरपुरा मोड़ पहुंचे. पुलिस देख कर 2 युवक तेजी से भागे. लेकिन पुलिस टीम ने उन दोनों को दबोच लिया. उन्हें थाना सहार लाया गया. थाने में जब उन से पूछताछ की तो एक ने अपना नाम रामजी नागर उर्फ चौधरी पिता का नाम महेश नागर निवासी रामनगर, दूसरे युवक ने अपना नाम अनुराग उर्फ मनुज यादव पुत्र राम मनोहर यादव निवासी सियापुर हजियापुर थाना फफूंद, जिला औरैया बताया.

इंसपेक्टर पंकज मिश्रा ने जब रामजी नागर की जामातलाशी ली तो उस के पास से 315 बोर का एक तमंचा, 2 जीवित कारतूस, एक मोबाइल फोन, एक चाकू तथा 2 हजार रुपए नकद बरामद किए. अनुराग उर्फ मनुज की जामातलाशी में 315 बोर का एक तमंचा, 2 जीवित कारतूस, एक मोबाइल फोन तथा एक हजार रुपया नकद मिले. बरामद सामान को पुलिस ने सुरक्षित कर लिया. रामजी नागर ने हरपुरा मोड़ से वह बाइक भी बरामद करा दी, जिसे उस ने दिलीप की हत्या में प्रयोग किया था.

पुलिस टीम ने हाइड्रा चालक दिलीप यादव की हत्या के संबंध में रामजी नागर उर्फ चौधरी से पूछताछ की तो वह साफ मुकर गया. इंसपेक्टर पंकज मिश्रा समझ गए कि रामजी नागर आसानी से कुछ नहीं बताएगा, अत: उन्होंने उस पर सख्ती की. कुछ ही देर बाद रामजी नागर टूट गया और उस ने दिलीप की हत्या का जुर्म कुबूल कर लिया. उस ने बताया कि दिलीप की हत्या की सुपारी उस की नईनवेली पत्नी प्रगति यादव व उस के आशिक अनुराग उर्फ मनुज ने अपने मौसेरे भाई दुर्लभ के माध्यम से दी थी. सौदा 2 लाख में तय हुआ था और एक लाख रुपया एडवांस मिला था. बाकी के रुपए लेने के लिए आज उस ने अनुराग को बुलाया था, तभी पुलिस द्वारा पकड़ा गया.

पूछताछ के दौरान रामजी नागर की चीखें अनुराग के कानों से भी टकरा रही थीं, जिस से वह घबरा उठा था. अत: जब पुलिस टीम ने अनुराग उर्फ मनुज से पूछताछ की तो वह सहज ही टूट गया. उस ने बताया कि प्रगति और वह एकदूसरे से प्यार करते हैं. शादी के बाद दिलीप उस के प्यार में बाधक बनता, इसलिए उस ने व प्रगति ने सुपारी दे कर दिलीप की हत्या करवा दी. चूंकि दिलीप की हत्या उस की नईनवेली दुलहन प्रगति यादव ने ही सुपारी दे कर कराई थी, अत: उसे गिरफ्तार करने के लिए पुलिस टीम प्रगति के गांव सियापुर हजियापुर पहुंची, लेकिन वह मायके में नहीं थी. उस के भाई आलोक ने बताया कि प्रगति अपनी ससुराल नगला दीपा गांव में है.

उस के बाद पुलिस टीम नगला दीपा गांव पहुंची और प्रगति यादव को गिरफ्तार कर लिया. बहू की गिरफ्तारी का ससुराल वालों ने विरोध किया तो एसएचओ पंकज मिश्रा ने उन्हें बताया कि उन की बहू प्रगति ने ही सुपारी दे कर उन के बेटे दिलीप को मरवाया है. यह जान कर परिजन सन्न रह गए. उस के बाद प्रगति को थाना सहार लाया गया, जहां उस का सामना अपने प्रेमी अनुराग व सुपारी किलर रामजी नागर से हुआ तो वह समझ गई कि पति की हत्या का राज खुल गया है. उस ने बिना किसी हीलाहवाली के अपना जुर्म कुबूल कर लिया.

इंसपेक्टर पंकज मिश्रा ने दिलीप की हत्या का परदाफाश करने तथा हत्यारोपियों को पकडऩे की जानकारी पुलिस अधिकारियों को दी तो एसपी अभिजीत आर. शंकर ने एएसपी आलोक मिश्रा के साथ औरैया पुलिस लाइन में प्रैसवार्ता की और दिलीप की हत्या का खुलासा किया. चूंकि हत्यारोपियों ने जुर्म कुबूल कर लिया था, अत: पुलिस ने मृतक के बड़े भाई संदीप यादव को वादी बना कर बीएनएस की धारा 103(1) तथा 61(2) के तहत रामजी नागर, अनुराग उर्फ मनुज यादव तथा प्रगति यादव के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कर ली तथा उन्हें विधिसम्मत गिरफ्तार कर लिया.

चूंकि आरोपी रामजी नागर व अनुराग के पास से तमंचा व कारतूस भी बरामद हुए थे, अत: पुलिस ने धारा 3/25 के तहत भी उन दोनों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज की. पुलिस की जांच, आरोपियों के बयान तथा अन्य सूत्रों से मिली जानकारी के आधार पर एक ऐसी युवती की कहानी प्रकाश में आई, जिस ने प्रेमी के साथ जिंदगी बिताने के लिए शादी के 14 दिन बाद ही अपने पति को सुपारी दे कर मरवा दिया.

पिता के दुश्मन के बेटे को दिल दे बैठी थी प्रगति

उत्तर प्रदेश के औरैया जनपद के फफूंद थानांतर्गत एक गांव है-सियापुर हजियापुर. इसी गांव में हरिगोविंद सिंह यादव सपरिवार रहते थे. उन के परिवार में पत्नी कमला देवी के अलावा 3 बेटे आलोक, आशुतोष, संतोष तथा 2 बेटियां पारुल व प्रगति थीं. हरिगोविंद सिंह पहले औरैया के दिबियापुर कस्बे के संजय नगर मोहल्ले में रहते थे. बाद में वह गांव आ कर रहने लगे थे. वह प्राइवेट नौकरी कर परिवार का भरणपोषण करते थे. हरिगोविंद सिंह यादव के तीनों बेटे आलोक, आशुतोष व संतोष पढऩे में तेज थे. उन्होंने औरैया के तिलक कालेज से बीएससी पास की, फिर बाहर जौब करने लगे. आशुतोष उज्जैन में एक प्राइवेट स्कूल में शिक्षक था. तीनों विवाहित थे और परिवार सहित बाहर रहते थे. तीजत्योहारों या शादीविवाह में ही वे पैतृक गांव आते थे.

हरिगोविंद सिंह की बेटी पारुल व प्रगति भी पढऩे में तेज थीं. उन दोनों ने 8वीं कक्षा तक की पढ़ाई आदर्श शिक्षा निकेतन दिबियापुर से की, फिर इंटरमीडिएट की परीक्षा औरैया के कालेज से पास की. उस के बाद मम्मी कमला देवी ने दोनों की पढ़ाई बंद करा दी और घर के कामकाज में लगा लिया. पारुल अब तक 18 साल की हो चुकी थी, इसलिए हरिगोविंद सिंह को उस के हाथ पीले करने की चिंता सताने लगी थी. वह बेटी का विवाह ऐसे घर में करना चाहते थे, जहां संपन्नता हो और किसी चीज का अभाव न हो. काफी हाथपैर मारने के बाद उन्हें संदीप पसंद आ गया.

संदीप के पिता सुमेर सिंह यादव मैनपुरी जिले की तहसील भोगांव के अंतर्गत आने वाले गांव नगला दीपा के रहने वाले थे. उन के परिवार में पत्नी सुमन देवी के अलावा 4 बेटे संदीप, अक्षय, दिलीप व सचिन तथा एक बेटी प्रियंका थी. अभी तक उन के किसी भी बेटे की शादी नहीं हुई थी, अत: वह बड़े बेटे संदीप की शादी को लालायित थे. सुमेर सिंह यादव करोड़पति धनाढ्य व्यापारी थे. उन का हाइड्रा और क्रेन मशाीन का कारोबार था. उन के पास 10 हाइड्रा व 12 क्रेन मशीनें थीं. उन का बड़ा बेटा संदीप अपने भाइयों के साथ जेसीबी और हाइड्रा जैसे उपकरणों को किराए पर चलाता था. उस की ज्यादातर मशीनें सेतु निगम में लगी रहती थीं.

सुमेर सिंह यादव का एक मकान औरैया के दिबियापुर कस्बे में सेहुद मंदिर के पास है. संदीप यादव इसी मकान में भाइयों के साथ रह कर कारोबार चलाता था. उस ने मकान के भूतल पर ‘एसएस यादव क्रेन सर्विस’ के नाम से औफिस खोल रखा था. उस का यह व्यापार औरैया से लखनऊ तक फैला था. संदीप व उस के कारोबार को देख कर हरिगोविंद सिंह ने उसे अपनी बेटी पारुल के लिए पसंद कर लिया. फिर 9 फरवरी, 2019 को पारुल का विवाह संदीप के साथ धूमधाम से कर दिया. पारुल दुलहन बन कर ससुराल आ गई. आते ही उस ने घर संभाल लिया.

पारुल से छोटी प्रगति थी. वह अपनी बड़ी बहन से ज्यादा सुंदर थी. सत्रहवां बसंत पार करते ही उस की सुंदरता में और भी निखार आ गया था. गोरा रंग, बड़ीबड़ी कजरारी आंखें और चंचल चितवन किसी को भी अपनी ओर खींच लेती थी. प्रगति के घर से 100 कदम की दूरी पर अनुराग उर्फ मनुज रहता था. उस के पिता राममनोहर यादव प्राइवेट नौकरी व खेती करते थे. परिवार में बेटे अनुराग के अलावा 2 बेटियां पप्पी व बबली थीं. बबली की शादी हो चुकी थी. वह उमर्दा में पति के साथ रहती थी.

25 वर्षीय अनुराग उर्फ मनुज आकर्षक युवक था. बीएससी पास करने के बाद उस ने नौकरी का प्रयास किया. असफल होने पर वह ट्रैक्टर चलाने लगा. अनुराग ठाटबाट से रहता था और गांव में बाइक से घूमता था. पड़ोसी होने के नाते जब कभी प्रगति व अनुराग की आंखें चार होतीं तो उन की आंखों में प्यार का समंदर उमड़ पड़ता. लेकिन चाह कर भी दोनों आपस में बात न कर पाते. क्योंकि उन्हें घर वालों का डर सताता था. यह बात कोरोना काल की है.

दरअसल, हरिगोविंद सिंह व राममनोहर के बीच 5 बीघा जमीन को ले कर विवाद चल रहा था, जिस से दोनों परिवारों के बीच दुश्मनी थी. उन का हुक्कापानी भी बंद था. लेकिन प्रगति व अनुराग एकदूसरे को मन ही मन चाहने लगे थे. प्रगति मनुज के ठाटबाट से प्रभावित थी. मनुज भी प्रगति की खूबसूरती का दीवाना था. चाहत दोनों तरफ से थी. धीरेधीरे उन की चाहत बढ़ी तो उन का मिलन घर के बाहर होने लगा. प्रगति की मौसी का घर औरैया में था. प्रगति मौसी के घर जाती फिर साईं मंदिर जाने का बहाना कर घर से निकलती और बांकेबिहारी होटल पहुंच जाती. वहीं अनुराग भी आ जाता. फिर घंटों बैठ कर दोनों प्यार भरी बातें करते.

इसी होटल में एक रोज प्रगति और अनुराग ने अपने प्यार का इजहार किया और साथ जीनेमरने का वादा किया. दुश्मनी के कारण दोनों नेे प्यार की भनक घर वालों को नहीं लगने दी. प्रगति का आनाजाना अपनी बहन पारुल की ससुराल में लगा रहता था. वह बहन व उस के परिवार के वैभव से प्रभावित थी. उस का मन करता कि उस का प्रेमी अनुराग भी ऐसा ही अमीर होता तो वह भी उस से शादी कर खुशी से जीवन बिताती. इसी सोच में उस ने एक रोज खतरनाक प्लान बना लिया और अपने प्लान से प्रेमी अनुराग को भी अवगत करा दिया.

बहन के करोड़पति देवर को ऐसे फांसा जाल में

प्रगति का प्लान था कि वह अपनी दीदी पारुल के देवर दिलीप को अपने प्यार के जाल में फंसाएगी और शादी करने के बाद उस का मर्डर करा देगी. उस के बाद प्रौपर्टी में उसे उस का हिस्सा मिल जाएगा फिर वह दोबारा प्रेमी से शादी रचा लेगी और शानोशौकत से जिंदगी बिताएगी. अनुराग को प्रगति के इस प्लान पर पहले तो आश्चर्य हुआ, लेकिन दोहरा फायदा देख कर अनुराग भी प्रगति का साथ देने को राजी हो गया. इस प्लान के बाद प्रगति का पारुल की ससुराल आनाजाना बढ़ गया. वह दिलीप पर डोरे डालने लगी. 21 वर्षीय दिलीप भी प्रगति की ओर आकर्षित होने लगा. दिलीप हाइड्रा चलाता था और दिबियापुर में रहता था.

प्रगति किसी न किसी बहाने दिबियापुर पहुंच जाती और दिलीप के साथ घूमती. धीरेधीरे दोनों का प्यार परवान चढऩे लगा. फिर एक रोज ऐसा भी आया कि दोनों एकदूसरे से ब्याह करने को उतावले हो उठे. इसी बीच घर वालों ने दिलीप का विवाह कहीं और तय कर दिया. दिलीप को शादी की बात पता चली तो उस ने साफ इंकार कर दिया. दिलीप ने फेमिली वालों को साफ बता दिया कि वह और प्रगति एकदूसरे से प्यार करते हैं और शादी करना चाहते हैं. उस की शादी कहीं और की गई तो वह आत्महत्या कर लेगा.

दिलीप की इस धमकी से घर वाले डर गए. उस के बाद सुमेर सिंह यादव ने प्रगति व उस के पिता हरिगोविंद सिंह व भाई आलोक से शादी के संबंध में बात की. दोनों परिवारों की रजामंदी के बाद दिलीप का रिश्ता प्रगति के साथ तय हो गया. हालांकि इस शादी को पारुल राजी नहीं थी. शादी की तारीख तय हुई 5 मार्च 2025. इधर शादी तय होने की बात अनुराग उर्फ मनुज को मालूम हुई तो वह नाराज हुआ. इस पर प्रगति ने अनुराग से कहा कि वह ज्यादा दिनों तक ससुराल में नहीं रहेगी. आते ही वह प्लान को पूरा करेगी. वह तब तक सुपारी किलर का इंतजाम कर ले. प्रगति के इस आश्वासन पर मनुज मान गया.

5 मार्च, 2025 को दिबियापुर के ‘राधाकृष्ण मैरिज हाल’ में प्रगति का विवाह दिलीप के साथ बड़ी धूमधाम से हो गया. प्रगति दिलीप की दुलहन बन कर ससुराल नगला दीपा आ गई. यहां उस की खूब आवभगत हुई. मुंहदिखाई रस्म में उसे सोनेचांदी के उपहार के अलावा लगभग 70 हजार रुपए नकद मिले. सुहागरात को दिलीप ने भी उसे घूंघट उठाई पर सोने की अंगूठी व 30 हजार रुपए दिए. सामाजिक रीतिरिवाज के अनुसार नई दुलहन ससुराल में जलती होली नहीं देखती. अत: उस का भाई आलोक आया और 10 मार्च को प्रगति की चौथी रस्म अदा कर प्रगति को लिवा लाया. मायके आने के दूसरे रोज ही प्रगति ने अपने प्रेमी अनुराग उर्फ मनुज को होटल बुला कर बात की, फिर पति की हत्या की सुपारी 2 लाख में सुपारी किलर रामजी नागर को दे दी.

प्रगति के कुकृत्य से उस का भाई आलोक बेहद खफा है. मामला खुलने के बाद उस ने कहा कि प्रगति ने जो पाप किया है, उस की सजा उसे फांसी होनी चाहिए. जेल में वह व उस के परिवार का कोई सदस्य उस से मिलने नहीं जाएगा. न ही किसी तरह की पैरवी उसे जेल से रिहा कराने के लिए की जाएगी. पुलिस उस का एनकाउंटर कर दे तो वह उस के शव पर हाथ भी नहीं लगाएगा. मृतक दिलीप के मम्मीपापा व भाइयों ने भी प्रगति को फांसी की सजा देने की मांग की है. फांसी से कम सजा उन्हें मंजूर नहीं है. 25 मार्च, 2025 को पुलिस ने हत्यारोपी रामजी नागर, अनुराग उर्फ मनुज व प्रगति को इटावा कोर्ट में पेश किया, जहां से उन्हें जिला जेल भेज दिया गया.

27 मार्च, 2025 की रात इंसपेक्टर पंकज मिश्रा ने चेकिंग के दौरान सुपारी किलर रामजी नागर के साथी शिवम व दुर्लभ यादव को भी गिरफ्तार कर लिया. दोनों दिलीप हत्याकांड में वांछित थे. उन के पास से 2 तमंचे तथा 4 कारतूस बरामद हुए. उन दोनों को भी जेल भेज दिया गया.