Bihar Crime : पत्नी पर बेवजह शक करना ठीक नहीं

Bihar Crime : समस्तीपुर से दुबई काम करने गए उदय कुमार राय को जब पत्नी रीना राय के अवैध संबंधों की खबर मिली तो वह दुबई से घर लौट आया. फिर वह मन में बैठ चुके शक को ले कर पत्नी से रोजाना झगडऩे लगा. इसी शक के चलते घर में ऐसा खून बहा कि…

बिहार के समस्तीपुर जिले की तहसील ताजपुर के हरिपुर भिंडी गांव का रहने वाला उदय कुमार राय काम करने के लिए दुबई गया हुआ था. इसी साल वह फरवरी में होली से पहले गांव आ गया था. उस के आने से परिवार में खुशी का माहौल बना हुआ था. बच्चे खुश थे. उदय की मम्मी भी खुश थीं. पापा का निधन हो चुका था. विधवा मम्मी उस के आते ही बोलीं, ”बेटा, अब दुबई मत जाना, यहीं गांव में कुछ कामधंधा कर लो. उसी से परिवार का गुजारा हो जाएगा. ’ ’

”ठीकी कह हीं माई…अब हम एहिजे रह के कुछ करबै! ’ ’ उदय ने भी मम्मी की हां में हां मिला दी. उस वक्त उस की पत्नी रीना भी वहीं थी. वह तुरंत आंचल को दांतों तले दबाती हुई ‘हुंह! ’ कह कर से चली गई.

”हम्मे कुछ गलत कहलिया, जे तू मुंह चमका के चल गेलहू! हियां के खेतपथार कौन देखतय…अब हमरा ताकत है…बाबूजी जिंदा रहथुन हल तब कोनो बात नय हलै! उन कर पीछे में उदइये ने हय देखेभाले वाला. गोतिया खेत पर नजर लगैले है, से अलगे समस्या है. ’ ’

पत्नी के मुंह बिदका कर अचानक चले जाने पर उदय को भी बुरा लगा था. वह उस के चेहरे के भाव को देख कर उस के दिलोदिमाग में क्या है, समझने की कोशिश करने लगा था. मम्मी से बातें करते वक्त वह पत्नी को घूरता हुआ ऐसे देख रहा था, जैसे उस के मन में छिपी बात को जानना चाहता हो. शाम हुई. सालों बाद पूरे परिवार ने एक साथ बैठ कर खाना खाया. बच्चों के चेहरे खिले हुए थे. उस रोज कुछ खास पकवान खीर भी पकाई थी. खाना खाते वक्त अपने बच्चों को पुचकारते वक्त भी उस की नजर पत्नी के चेहरे पर ही जमी हुई थी. उस ने महसूस किया कि पत्नी के चेहरे पर खुशी की वह चमक नहीं है, जो उस के आने पर होनी चाहिए थी.

दरअसल, उदय के मन में भी शंका का कीड़ा कुलबुला रहा था. जब तक उसे खत्म नहीं कर लेता, तब तक उस के मन को चैन नहीं मिलने वाला था.

रात हुई. लंबे अरसे बाद वह देर रात को पत्नी के साथ बिस्तर पर था. रीना उसे परे धकेलती हुई बोली, ”दारू पी कर आए हो? ’ ’

”अरे का बताएं…विनोदवा जबरदस्ती पिला दिया. ’ ’

”दुन्हो जेल जैबा…हिंया दारू बंद है… जानत हो न कि..? ’ ’ रीना बोली.

”कोय पुलिस में बतयते तबे न! ’ ’ उदय बोला.

”हम्हीं बता देवो तब? ’ ’ मुसकराती हुई रीना बोली.

”सुबह से अब तुम्हारे चेहरे पर मुसकान दिखी है! ’ ’ चहकता हुआ उदय बोला और उसे अपनी ओर खींचने लगा.

”चलो हटो, दारूबाज से कोई समझौता नहीं! ’ ’ रीना तीखेपन के साथ बोली और वहां से बच्चों के कमरे में चली गई.

उस के जाने के बाद उदय कशमकश में आ गया. दारू का नशा कमजोर पडऩे लगा था. जब तक उस के दिमाग में कई बातें अचानक घूम गई थीं. वे बातें जो विनोद ने दारू पीते वक्त बताई थीं… और वे बातें भी जो उस के दुबई में रहते हुए उसी ने फोन पर बताई थीं… उन के तार रीना के पूरे दिन उस के साथ किए गए बरताव के साथ जोडऩे लगा… बुदबुदाया, ”…तो इस के सच का पता लगाना ही होगा? ’ ’

कब उसे नींद आ गई, इस का उसे पता ही नहीं चला. उस की नींद तब खुली, जब खिड़की से आने वाली सूरज की रोशनी उस की आंखों पर पड़ी. बच्चों ने उसे झकझोरते हुए उठाया था. उस के कानों में विनोद की भी आवाज सुनाई दी, ”का रे उदयवा…खेत पर चले के ना हव का! ’ ’

”हांहां, जाय के है कि…चल न कोय काम दिला दीहे. ’ ’

इस तरह दुबई से आने के बाद उदय की नई दिनचर्या शुरू हो गई थी. उस का हमउम्र चचेरा भाई विनोद दोस्त की तरह जो मिल गया था.

दोनों के बीच खुल कर बातें होती थीं. शराब की ललक दोनों को बनी रहती थी. ब्लैक में ही सही, लेकिन इस का इंतजाम विनोद करता था, लेकिन जेब ढीली उदय की होती थी. वह दुबई से कमा कर लाए पैसे दारू पर उड़ाने लगा था. आए दिन शराब पी कर ही घर आता था. इस पर उस की पत्नी रीना के साथ हमेशा तकरार होने लगी थी. रीना उदय को शराब पीने से रोकती थी, जबकि वह पत्नी की बात को अनसुनी कर देता था. रीना उस पर शराब में पैसे उड़ाने का आरोप लगा कर खूब खरीखोटी भी सुनाने लगी थी.

उस दिन 21 अगस्त की रात को तो हद ही हो गई थी. बरसात का मौसम था, लेकिन दिन में तेज धूप निकली थी, जिस से उस रात उमस भरी गरमी थी. रीना ने छत पर ही सोने का इंतजाम किया हुआ था. घर के नीचे बरामदे में बच्चे अपनी दादी के साथ सोए हुए थे. उसी घर के बरामदे में उदय का चाचा रामपुकार राय भी सोया हुआ था. उस की अपने बेटे विनोद राय और बहू से नहीं बनती थी, इस कारण वह उदय के परिवार के साथ ही रहता था. उदय के पापा की मृत्यु हो चुकी थी, इस कारण वह अपने चाचा को परिवार में एक सहारे के नजरिए से देखता था.

उसी के बारे में विनोद ने उदय को काफी अनापशनाप कान भर रखे थे. उस का कहना था कि उस के पापा रामपुकार के साथ उस की बीवी रीना राय के अवैध संबंध हैं. हालांकि इस में कितनी सच्चाई थी, इस का सबूत किसी के पास नहीं था, किंतु उदय के मन में इस बात का संदेह घर कर चुका था. उस रोज भी उदय नशे में जरूर था, लेकिन पूरी तरह से होशोहवास में बातें कर रहा था. रीना को प्यार से पुचकारते हुए अभद्र हरकत करने लगा था तो रीना ने उसे झिड़क दिया. फिर भी उस ने रीना की मरजी के बगैर उस से संबंध बनाए थे. इस में पत्नी ने बेमन से साथ दिया था और वह चिढ़ गई थी. चिढ़ती हुई गुस्से में बोल पड़ी, ”तुम्हारा यहां रहने से अच्छा है कि तुम फिर से दुबई ही चले जाओ. ’ ’

”हांहां, तुम तो चाहोगी ही…कि मैं यहां से चला जाऊं और तुम यहां बिना किसी रोकटोक के गुलछर्रे उड़ाओ! ’ ’

”मैं यहां गुलछर्रे उड़ाती हूं…और तुम क्या करते हो? दारू में पैसे कौन उड़ा रहा है? मैं या तुम? ’ ’

”मुझे सब पता है, तुम मेरे पीछे यहां क्या गुल खिला रही हो?…किस का बिस्तर गरम करती हो? मैं सब कुछ जान गया हूं! ’ ’ उदय बोला.

यह सुन कर रीना अवाक हो गई थी. उसे गुस्से में देखने लगी थी.

”मुझे क्या घूर रही हो…खा जाओगी? ’ ’

”तुम क्या सब गलतसलत बोले जा रहे हो नशे में…कोई सुनेगा, तब क्या कहेगा? ’ ’

दोनों के बीच बहस का दौर चलता रहा. काफी देर तक दोनों एकदूसरे पर कीचड़ उछालते रहे. थोड़े समय में उदय छत से नीचे आ कर अपने कमरे में सो गया. वैसे तो 22 अगस्त, 2025 की सुबह पिछली कुछ दिनों की सुबह जैसी ही थी. आसमान में बारिश के आसार नजर आ रहे थे, लेकिन सूर्योदय की धूप निकल चुकी थी. उदय अपने कमरे में अधूरे बिस्तर पर सोया हुआ था, लेकिन घर में रीना नजर नहीं आ रही थी. बच्चे अभी सो रहे थे, लेकिन उदय की मम्मी थारा देवी जाग चुकी थीं.

उन्होंने बहू को आवाज लगाई. उस की आवाज का कोई जवाब नहीं मिला…रीना को बच्चों को स्कूल जाने के लिए तैयारी करनी थी. वह बड़बड़ाती हुई धीरेधीरे सीढिय़ां चढ़ कर छत पर चली गईं. वहां उस ने जो देखा, उन की आंखों पर भरोसा नहीं हुआ. कुछ पल में ही उन की चीख निकल गई. तेजी से उलटे पैर नीचे चली आईं और उदय को झकझोर कर जगाया. दरअसल, छत पर उन की 25 वर्षीय बहू रीना राय मृत पड़ी थी… उस के बिस्तर पर खून ही खून था, जो सूख चुका था. उस की किसी ने गरदन रेत कर हत्या कर दी थी.

रोती हुई थारा देवी छत पर बहू रीना का गला कटा देख कर विचलित हो गईं. उलटे पैर भागीभागी उदय के पास आईं. उसे झिंझोड़ कर जगाया. छत पर मृत पड़ी रीना के बारे में बताया. हड़बड़ाता हुआ उदय छत पर दौड़ता हुआ गया. वहीं से चिल्लाने लगा, ”माई रे! विनोदवा मरिये देल को! गरदन काटिए देल को रीनवा के! ’ ’

छत से नीचे आया. चीखनेचिल्लाने लगा. घर में चीखपुकार मच गई. पड़ोसियों की भीड़ जुट गई. रक्तरंजित लाश जिस ने भी देखी, दांतों तले अंगुली दबा ली. कुछ देर में पुलिस भी आ गई. काफी संख्या में लोग वहां जुट गए. साथ ही ताजपुर, हलई, मुसरीघरारी, सरायरंजन, वैनी, सहित अन्य कई थानों की पुलिस पहुंच गई.

ताजपुर थाने के एसएचओ शंकर शरण दास ने जांच के लिए पुलिस टीम को आवश्यक निर्देश दिए. एफएसएल की टीम ने मामले की जांच में स्पष्ट किया कि रीना की गला काट कर हत्या की गई है. मौके का मुआयना करने के बाद मृतका के पति उदय और उस की सास से पूछताछ की गई. उदय ने पत्नी की हत्या का आरोप सीधेसीधे अपने चचेरे भाई विनोद राय पर लगा दिया. मृतका के पापा अखिलेश कुमार, जो वैशाली में रहते थे, खबर सुन कर वहां आ चुके थे. पुलिस ने उन से भी पूछताछ की.

उन्होंने बताया कि 2018 में उन की बेटी रीना की शादी उदय कुमार राय से हुई थी. सब कुछ ठीक चल रहा था. सुबह उन्हें जानकारी मिली कि उन की बेटी की छत पर ही किसी ने गला काट कर हत्या कर दी. उन्होंने बताया कि उदय के साथ चचेरे भाई का जमीनी विवाद चल रहा था. इसलिए हो सकता है कि इसी कारण इस घटना को अंजाम दिया गया हो. छत बिलकुल सटी होने के कारण कोई भी उस छत से इस छत पर कूद सकता है.

रीना के 4-5 साल के 2 छोटेछोटे बच्चे हैं. शक के आधार पर पुलिस ने पूछताछ के लिए चचेरे देवर विनोद राय को हिरासत में लिया. पति उदय राय ने बताया कि गरमी के चलते रीना रात में छत पर सोई हुई थी. देर रात मैं शौच के लिए नीचे आया था. मोबाइल चार्ज भी नहीं था. इस वजह से मोबाइल चार्ज लगा कर नीचे ही सो गया था. सुबह पत्नी काफी देर तक नीचे नहीं उतरी. तब उस की मम्मी रीना को उठाने के लिए छत पर गई थीं, जहां उन्होंने उसे मृत पाया था. उस का गला रेता हुआ और आसपास खून पसरा हुआ था.

पुलिस ने उदय और विनोद राय के घर का मुआयना किया. पता चला कि उदय का चचेरे भाई विनोद राय से दरवाजे पर चारदीवारी  को ले कर झगड़ा चल रहा था. एक सप्ताह पहले भी मारपीट की घटना हुई थी. विनोद की रीना के साथ भी मारपीट हुई थी. इस संबंध में थाने में शिकायत भी दी गई थी, लेकिन पुलिस ने कोई काररवाई नहीं की थी. इस आधार पर ही उदय ने दावा किया कि विनोद ने ही पत्नी को मारा है.

पुलिस को यह मालूम हुआ कि विनोद राय के पापा रामपुकार राय अपने बेटे और बहू को छोड़ कर उदय राय के साथ रहते थे. जब इस बारे में तहकीकात की गई, तब मालूम हुआ कि विनोद इस बात को ले कर भी अपने पापा से नाराज रहता था. कई बार इसे ले कर पंचायत भी हुई. इस के बाद भी रामपुकार राय अपने भतीजे उदय के साथ ही रह रहा था. पुलिस इस एंगल से भी हत्याकांड की छानबीन करने लगी. हालांकि पुलिस को कई अहम सुराग जल्द ही मिल गए थे. हत्याकांड में इस्तेमाल किया गया तेज धारदार चाकू बरामद कर लिया गया, जो लाश के पास ही बिस्तर के नीचे था.

इस मामले की रिपोर्ट रीना राय (25) के पिता अखिलेश कुमार राय द्वारा 22 अगस्त, 2025 को लिखवाई गई थी. मामले का पहला अभियुक्त विनोद राय (48) के अलावा उस के पापा रामपुकार राय (65), विनोद की पत्नी पानवती देवी (45) और उस की 18 वर्षीया बेटी सुष्मिता कुमारी को बनाया गया. उन्हें बीएनएस की धारा 103 (1) 3(5) के तहत आरोपी बनाया गया था.

रीना के शव को पोस्टमार्टम के बाद उदय को सौंप दिया गया था, जिस के अंतिम संस्कार के बाद 13 दिनों के श्रद्मद्धकर्म का अनुष्ठान किया गया था. हालांकि इस बीच पुलिस की छानबीन चलती रही. पुलिस ने विनोद को इसी शक के आधार पर हिरासत में ले रखा था कि उस का पहले उदय से विवाद हुआ था. इस संबंध में पुलिस ने विनोद से पूछताछ की. उस ने जो बयान दिया, उस से पूरी जांच की दिशा ही बदल गई. पुलिस ने खोजबीन की तो उदय पर ही शक गहरा गया.

उदय तो खुद को बेकसूर साबित करने में लगा था. लेकिन पुलिस ने रीना की तेरहवीं तक का इंतजार किया, क्योंकि वही सारे क्रियाकर्म कर रहा था. पुलिस चुपचाप घर के पास डेरा डाले रही और कर्मकांड पूरे होने का इंतजार करने लगी. जैसे ही तेरहवीं का काम पूरा हुआ, पुलिस ने उदय को गिरफ्तार कर पूछताछ की तो उदय कुमार राय ने आखिरकार अपनी पत्नी की हत्या करने का जुर्म कुबूल कर लिया और कहा कि शक और शराब के नशे में उस ने यह कर डाला.

उदय ने बताया कि 21 अगस्त की रात वह शराब पी कर घर लौटा और पत्नी को सोने के बहाने छत पर ले गया. उस ने फिर पत्नी से चाचा और उस के अवैध संबंधों के बारे में पूछा, लेकिन पत्नी से फिर वही जवाब मिला. इस के बाद उस ने पत्नी संग जबरन शारीरिक संबंध बनाए. जब पत्नी सो गई तो उस ने तकिए के नीचे से चाकू निकाला और पत्नी रीना का गला रेत दिया. रीना तड़पती रही तो उस ने उस का मुंह बंद कर दिया और हाथपैर जकड़ लिए.

हत्या को अंजाम देने के बाद वह चुपचाप छत से नीचे आ कर सो गया. सुबह जब उस की मम्मी छत पर गईं तो रीना की खून से सनी लाश दिखी. चीखपुकार सुन कर वह भी ऊपर पहुंचा और रोने का नाटक करने लगा. बाद में उस ने पत्नी के मर्डर का आरोप चचेरे भाई विनोद पर लगा दिया. वह खुद को मासूम साबित करने में लगा था, लेकिन पुलिस जांच में उस की सारी चालाकी धरी की धरी रह गई. पुलिस ने जांच पूरी कर पत्नी की हत्या के आरोपी उदय कुमार राय को मजिस्ट्रैट के सामने पेश किया. वहां से उसे न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया. पुलिस ने विनोद राय, उस के पापा रामपुकार राय, पत्नी पानवती देवी और बेटी सुष्मिता कुमारी को बेकसूर मानते हुए छोड़ दिया था. Bihar Crime

 

 

Chhattisgarh Crime News : बीमा रकम पाने को भाई ने भाई की ली जान

Chhattisgarh Crime News : 11 मई, 2024 को सुबह घाघरा जंगल की सड़क पर 24 वर्षीय उत्तम जंघेल का शव क्षतविक्षत स्थिति में पड़ा हुआ था. लोगों ने देखा तो किसी ने यह खबर पुलिस को दे दी. कुछ लोगों ने लाश के फोटो खींच कर वाट्सऐप ग्रुप में डाल दिए.

एसपी (खैरागढ़) त्रिलोक बंसल के निर्देश पर सुश्री प्रतिभा लहरे (प्रशिक्षु एसपी) घटनास्थल पर पहुंच गईं. थाना पुलिस ने काररवाई शुरू कर दी. मौके पर डौग स्क्वायड को बुलवाया गया. युवक के शव को एकबारगी देखने के बाद प्रशिक्षु एसपी प्रतिभा लहरे ने यह पाया कि मृतक के गले पर निशान हैं, जिस से यह अनुमान लगाया गया कि शायद मृतक का गला दबा कर हत्या की गई है.

एसपी त्रिलोक बंसल को घटना के संदर्भ में जानकारी दी और उन से निर्देश मिलने के बाद मामले पर से परदा उठाने के लिए छुई खदान खैरागढ़ पुलिस मुस्तैदी से लग गई.

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उत्तम जंघेल घर पर ही बैठा था कि उस के मोबाइल पर गोंदिया (महाराष्ट्र) में रहने वाले उस के मामा के बेटे हेमंत ढेकवार की काल आई, ”अरे भाई उत्तम, तुम कहां हो, बुआजी कैसी हैं, सब ठीकठाक है न! सुनो, मैं डोंगरगढ़ पहुंच रहा हूं, बहुत जरूरी काम है, तुम भी आ जाना.’’

”भैया, यहां पर सब ठीकठाक है और मैं तो आज घर पर ही हूं. कहेंगे तो आ जाऊंगा, वैसे क्या खास बात हो गई?’’ उत्तम बोला.

”मिलोगे तो सब बताऊंगा, सच कहूं तो तुम मिलोगे तो खुश हो जाओगे.’’ हेमंत ने कहा.

”फिर भी कुछ तो बताओ भैया, आखिर बात क्या है?’’ उत्तम जंघेल ने हंसते हुए ममेरे भाई हेमंत से कहा.

”अरे भाई, तुम्हारे लिए एक गाड़ी लेनी है, यह एक जो ली है उसे तो मैं चला रहा हूं, सोच रहा हूं कि एक स्कौर्पियो तुम्हारे लिए भी खरीदवा दूं. बस, कुछ ऐसी ही प्लानिंग है. इसलिए तुम शनिवार को सुबह डोंगरगढ़ पहुंच जाना.’’

”ठीक है, मैं राजन से बात करता हूं, हम दोनों कल सुबह जल्दी पहुंच जाएंगे.’’ उत्तम ने कहा.

”अरे भाई, तुम किसी और को मत लाना, अकेले आओ, हर बात हर किसी को नहीं बताई जाती…’’ हेमंत ढेकवार ने कहा, ”हार्वेस्टर और स्कौर्पियो के बारे में भी किसी को नहीं बताना कि ये मैं ने तुम्हारे नाम पर लिए हैं. यह दुनिया बड़ी अजीब है भाई, किसी की तरक्की पसंद नहीं करती.’’

”कोई बात नहीं भैया, मैं अकेला ही सुबह डोंगरगढ़ पहुंच जाऊंगा.’’ उत्तम जंघेल ने हंसते हुए कहा.

हेमंत ढेकवार महाराष्ट्र के गोंदिया जिले का निवासी था और उत्तम जंघेल का रिश्ते में वह ममेरा भाई था. दोनों ममेरे फुफेरे भाई थे. दोनों में उम्र का फासला था, मगर उन में अच्छी बनती थी. वे अपने दुखसुख की बातें एकदूसरे से खुल कर करते थे.

दूसरे दिन शनिवार को हेमंत के कहे अनुसार उत्तम जंघेल ने आननफानन में डोंगरगढ़ जाने की तैयारी कर बाइक से निकल पड़ा.

उत्तम जंघेल पुत्र अमृत लाल उर्फ बल्ला वर्मा निवासी आमापारा, खैरागढ़ का बेटा था. अमृत लाल सरपंच रहे हैं, मां रेखा वर्मा भी उदयपुर क्षेत्र से जिला पंचायत की सदस्य रह चुकी थीं. कांग्रेस पार्टी की राजनीति में होने के कारण शहर की राजनीति में अच्छा खासा दबदबा था. उसे डोंगरगढ़ पहुंचते पहुंचते शाम के 5 बज गए थे.

निर्धारित होटल में जब वह पहुंचा तो ममेरा भाई हेमंत ढेकवार 2 अनजान लोगों के साथ वहां मौजूद था. सामने शराब की बोतल खुली हुई थी. उस ने दोनों से परिचय करवाया, ”इन से मिलो, यह है सुरेश मच्छिरके और प्रेमचंद लिलहारे मेरे खास दोस्त.’’

उत्तम जंघेल ने दोनों से हाथ मिलाया और सामने की कुरसी पर बैठ कर शराब पीने लग गया.

”भाई उत्तम, तुम्हारे नाम पर एक स्कौर्पियो लेनी है, मैं ने सारी व्यवस्था कर ली है.’’ आगे हेमंत ढेकवार ने मानो रहस्य पर से परदा उठाते हुए कहा, ”चलो, जल्दी चलते हैं और औपचारिकताएं पूरी कर लेंगे.’’

फिर थोड़ा रुक कर हेमंत ढेकवार ने कहा, ”मगर सुनो, यह जो तुम मोबाइल ले कर आए हो, उसे कहीं छोड़ देते हैं.’’

”क्यों भला?’’ उत्तम चौंकते हुए बोला.

”अरे! थोड़ा समझा करो, जिस शोरूम से हम गाड़ी लेंगे, वहां तुम्हारे पास मोबाइल नहीं होना चाहिए, ताकि सारी फौर्मेलिटी मेरे मोबाइल नंबर से हो जाए.’’

”अच्छा यह बात है,’’ उत्तम मुसकरा कर  बोला, ”यहां पास ही पिताजी के दोस्त रहते हैं, उन के पास मोबाइल छोड़ देता हूं.’’

”हां, यह ठीक रहेगा, तुम अकेले चले जाओ और कुछ भी बोल कर मोबाइल छोड़ कर आ जाओ.’’ हेमंत ढेकवार ने कहा.

शराब पी कर चारों वहां से झूमते हुए स्कौर्पियो गाड़ी से रवाना हो गए.

आगे थाने के पास से स्कौर्पियो गतापारा घाघरा मार्ग पर आगे बढ़ गई. जबकि एजेंसी तो राजनांदगांव में थी. उधर गाड़ी मुड़ते ही उत्तम बोला, ”अरे, किधर जा रहे हो?’’

”अरे भाई चलते हैं चिंता मत करो.’’ कह कर हेमंत ने उत्तम के कंधे पर धीरे से हाथ मारा.

जब गाड़ी दूसरी दिशा में आगे बढऩे लगी तो उत्तम जंघेल परेशान हो गया. उसे समझ नहीं आ रहा था कि जब स्कौर्पियो लेनी है तो ये लोग राजनांदगांव के बजाय इधर जंगल में क्यों जा रहे हैं.

थोड़ा आगे जा कर के उन्होंने गाड़ी रोक दी. जैसे ही उत्तम नीचे आया, हेमंत ढेकवार ने तत्काल अपना गमछा उस के गले में डाल दिया और गला दबाने लगा. यह सब अचानक से घटित हो गया और उत्तम एकदम घबरा गया. उस के मुंह से कोई आवाज तक नहीं निकली.

इसी बीच हेमंत के दोनों साथी सुरेश और प्रेमचंद ने उसे जोर से पकड़ लिया. हेमंत उस का गला दबाता चला गया और थोड़ी ही देर में उत्तम जंघेल की मौत हो गई. इस के बाद उन्होंने उत्तम को स्कौर्पियो में ही डाल दिया फिर वे घाघरा जंगल की ओर आगे बढ़ गए.

आगे जा कर के सुनसान जगह पर तीनों ने उत्तम के शव को सड़क पर डाल दिया और किसी को यह पता न चले कि इसे गला दबा मारा है, इसलिए उत्तम के शरीर पर स्कौर्पियो 2-3 बार चढ़ा दी, ताकि देखने वाले को ऐसा लगे कि सड़क दुर्घटना से उत्तम जंघेल की मौत हुई है.

लाश की कैसे हुई शिनाख्त

दोपहर होतेहोते यह स्पष्ट हो गया कि घाघरा कुम्हीं रोड पर मिला शव उत्तम जंघेल पुत्र अमृतलाल वर्मा (उम्र 24 साल) का है.

शहर में लोग तरहतरह के कयास लगा रहे थे कि आखिरकार उत्तम जंघेल खैरागढ़ से डोंगरगढ़ कैसे पहुंच गया. यह बात भी चर्चा का विषय बन गई कि यह एक्सीडेंट नहीं हत्या का मामला हो सकता है.

पुलिस ने मृतक के पिता और पूर्व सरपंच अमृत वर्मा से पूछताछ की तो उन्होंने बताया कि उत्तम एक दिन पहले 10 मई, 2024 की सुबह घर से निकला था. घर से निकलने के बाद कहां गया, उस की जानकारी परिवार के किसी भी सदस्य को नहीं थी.

वह अपने गांव और घर से लगभग 40 किलोमीटर दूर किस के साथ और क्यों गया होगा, यह सवाल भी खड़ा था. मृतक उत्तम की मौत को ले कर कई सवाल खड़े हो गए थे और स्थानीय मीडिया में कई तरह की बातें प्रकाशित हो रही थीं, जो पुलिस के लिए चिंता का सबब थी.

पुलिस को घटनास्थल के आसपास कोई भी वाहन नहीं मिला था और न ही ऐसी कोई वजह सामने आ रही थी जिस से कि इसे सड़क दुर्घटना या कोई हादसा माना जा सके. इसी के चलते लोगों में चर्चा थी कि मृतक उत्तम जंघेल की लाश यहां कैसे और कहां से आई और उस की मौत कैसे हुई.

पुलिस के सामने चुनौती यह थी कि इस केस को कैसे सौल्व करे.

बहरहाल, पुलिस ने मौके की काररवाई पूरी कर के शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया. शव का पोस्टमार्टम जिला सिविल अस्पताल के वरिष्ठ डा. पी.एस. परिहार ने किया था. पोस्टमार्टम रिपोर्ट आई तो पुलिस के शक की पुष्टि हो गई और स्पष्ट हो गया किसी ने गला दबा कर उत्तम की हत्या की थी.

पोस्टमार्टम रिपोर्ट मिलने के बाद एसडीपीओ सुश्री प्रतिभा लहरे ने उसी दिन एक पुलिस टीम बना कर जांच शुरू कर दी.

टीम में एसडीओपी सुश्री प्रतिभा लहरे, साइबर सेल प्रभारी अनिल शर्मा,  इंसपेक्टर शक्ति सिंह, एसआई बिलकीस खान, वीरेंद्र चंद्राकर, एएसआई टैलेश सिंह,  हैडकांस्टेबल कमलेश श्रीवास्तव, कांस्टेबल चंद्रविजय सिंह, त्रिभुवन यदु, जयपाल कैवर्त, कमलकांत साहू, सत्यनारायण साहू, अख्तर मिर्जा की टीम बनाई.

सब से पहले उत्तम जंघेल के घर वालों से फिर से पूछताछ कर उन के बयान लिए गए. एकएक कड़ी मिलने से स्पष्ट होता चला गया कि उत्तम जघेल के नाम पर हेमंत ढेकवार ने गोंदिया शहर की एक बैंक से लोन लिया है और उत्तम जंघेल का मोटी धनराशि का जीवन बीमा भी करवा रखा है.

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         आरोपी हेमंत ढेकवार

इस के बाद शक की सूई ममेरे भाई हेमंत की ओर घूमती चली गई. पुलिस ने जाल बिछा कर के हेमंत के बारे में जानकारी निकालनी शुरू कर दी. पता चला कि हेमंत एक अपराधी किस्म का व्यक्ति है.

बैंक और बीमा कंपनी से भी पुलिस ने सारी जानकारी निकाली तो यह स्पष्ट होता चला गया कि 80 लाख रुपए का खेल उत्तम जंघेल के नाम से हेमंत ढेकवार कर चुका है.

अब पुलिस को यह समझते देर नहीं लगी कि रुपयों की खातिर ही हेमंत ने अपराध किया है. जांचपड़ताल कर के आखिर 13 मई, 2024 को खैरागढ़ पुलिस टीम ने हेमंत  ढेकवार को उस के घर से गिरफ्तार कर लिया और उस से पूछताछ की.

पहले तो वह रोने लगा जैसे कि उत्तम जंघेल की मौत से उसे काफी दुख हुआ है. वह कुछ भी बताने से आनाकानी करता रहा, मगर कड़ी पूछताछ से पुलिस को सफलता मिलती चली गई.

एसडीपीओ प्रतिभा लहरे ने हेमंत से दोटूक शब्दों में पूछा, ”आखिर तुम ने स्कौर्पियो और हार्वेस्टर उत्तम जंघेल के नाम पर क्यों लिया? अपने नाम पर या अपने किसी स्थानीय रिश्तेदार के नाम पर क्यों नहीं लिया?’’

इस बात का हेमंत गोलमोल जवाब देने लगा. पुलिस ने फिर पूछा, ”स्कौर्पियो और हार्वेस्टर का बीमा करवा कर तुम ने उत्तम की हत्या की योजना क्यों बनाई थी?’’

और जब पुलिस ने यह पूछा कि तुम शनिवार को 10 मई को कहां थे? तो हेमंत ढेकवार की पोल खुलती चली गई. कुछ सीसीटीवी कैमरों में चारों डोंगरगढ़ में दिखाई दिए थे. इस सच्चाई के खुलासे के बाद हेमंत असहाय हो गया और उस ने आखिरकार पुलिस के सामने सारा सच स्वीकार कर लिया. उस ने जो कुछ बताया, वह इस तरह था—

10 मई को सुरेश और प्रेमचंद के साथ डोंगरगढ़ आ कर के तीनों ने उत्तम के साथ शराब पी और उसे जाल में फंसाया. फिर जंगल में ले जा कर गमछे से उस की हत्या कर के सड़क पर डाल उस के ऊपर स्कौर्पियो चढ़ा दी, ताकि देखने वाले यह समझें कि उत्तम जंघेल की दुर्घटना में मौत हुई है.

जांच अधिकारी सुश्री प्रतिभा लहरे और सायबर टीम प्रभारी अनिल शर्मा ने जांच के दौरान सैकड़ों सीसीटीवी फुटेज चैक किए और तकनीकी साक्ष्य के आधार पर जानकारी हासिल कर ली. पता चला कि मृतक के नाम पर कुछ माह पहले हार्वेस्टर और एक स्कौर्पियो खरीदी और बीमा की राशि हत्या का कारण थी.

आखिरकार, हेमंत ढेकवार टूट गया और बताता चला गया कि उस ने लाखों रुपए के लालच में सुनियोजित योजना के तहत अपनी सगे बुआ के बेटे उत्तम जंघेल के नाम पर एक स्कौर्पियो जनवरी 2024 में एवं एक हार्वेस्टर फरवरी 2024 में खरीद कर दोनों गाडिय़ों का करीब 30 लाख रुपए का फाइनेंस करवा लिया था.

साथ ही उसे यह भी पता लग गया था कि यदि फाइनेंस अवधि में उत्तम जंघेल की सामान्य या किसी दुर्घटना में मौत हो जाती है तो उस के नाम पर लिए गए संपूर्ण ऋण की रकम इंश्योरेंस कंपनी द्वारा भुगतान की जाएगी.

यह जानकारी होने के बाद उस के मन में लालच आ गया था. उस ने इसी लालच में  उत्तम जंघेल का भारतीय जीवन बीमा निगम से 40 लाख रुपए का दुर्घटना बीमा एवं एक्सिस बैंक आमगांव से 40 लाख का दुर्घटना बीमा करा दिया था, जिस की किस्तों का भुगतान भी हेमंत स्वयं करता था.

हेमंत घर का रहा न घाट का

उक्त रकम के लालच में आ कर 10 मई, 2024 को हेमंत ने योजना के मुताबिक उत्तम को कार दिलाने के नाम पर फोन कर डोगरगढ़ बुलाया और अपने साथी सुरेश मच्छिरके निवासी कंवराबंध एवं प्रेमचंद लिल्हारे निवासी खेड़ेपार दोनों को पैसों का लालच दे कर उत्तम की हत्या की योजना में शामिल कर लिया.

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                    आरोपी सुरेश एवं प्रेमचंद

फिर तीनों योजना के मुताबिक उत्तम के नाम पर ली गई स्कौर्पियो में बैठ कर आए और डोंगरगढ़ में उत्तम को साथ में गाड़ी में बैठा कर होटल में चारों ने शराब पी. फिर तीनों आरोपियों ने मृतक को गाड़ी में बैठा कर खैरागढ़ होते गातापार थाने से आगे ले जा कर सुनसान सड़क किनारे उत्तम की गला घोंट कर हत्या कर दी और महाराष्ट्र लौट गए.

आरोपियों की निशानदेही पर पुलिस ने हत्या में प्रयुक्त गमछा घाघरा पुल से एवं घटना में प्रयुक्त स्कौर्पियो हेमंत के यहां से बरामद कर ली.

छुई खदान पुलिस ने भादंवि की धारा 302 के तहत मामला दर्ज कर के आरोपी हेमंत ढेकवार (38 साल) और सुरेश कुमार मच्छिरके (55 साल), प्रेमचंद लिलहरे (52 साल) को गिरफ्तार कर के मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी के समक्ष प्रस्तुत किया गया, जहां से उन्हें जेल भेज दिया गया. ­­Chhattisgarh Crime News

—कथा पुलिस सूत्रों पर आधारित

Family Dispute : हैवानियत की हद पार करने वाला बाप

Family Dispute : 25 वर्षीय राधा गुप्ता पता नहीं क्यों सुबह से बेचैन सी थी. घर के किसी काम में उस का मन नहीं लग रहा था. रहरह कर वह कभी कमरे से किचन में जाती और कभी किचन से कमरे में. उस ने यह क्रिया कई बार दोहराई तो कमरे में बैठे पति सुनील से रहा नहीं गया.

उस ने पूछा, ‘‘क्या बात है राधा, मैं काफी देर से देख रहा हूं कि तुम किचन और कमरे के बारबार चक्कर लगा रही हो. आखिर बात क्या है?’’

‘‘आप को क्या बताऊं. मैं खुद भी नहीं समझ पा रही हूं कि मैं ऐसा क्यों कर रही हूं.’’ राधा ने झिझकते हुए उत्तर दिया, ‘‘पता नहीं सुबह से ही मेरा मन किसी काम में नहीं लग रहा. जी भी बहुत घबरा रहा है.’’

‘‘तबीयत तो ठीक है न तुम्हारी?’’ पति ने पूछा.

‘‘हां, तबीयत ठीक है.’’

‘‘तो फिर क्या बात है, मन क्यों घबरा रहा है? कहो तो तुम्हें किसी डाक्टर को दिखा दूं?’’

‘‘अरे नहीं, आप परेशान मत होइए, डाक्टर की कोई जरूरत नहीं है. अभी थोड़ी देर में भलीचंगी हो जाऊंगी.’’

‘‘मैं तो इसलिए कह रहा था कि मैं ड्यूटी पर चला जाऊंगा, फिर रात में ही घर लौटूंगा. इस बीच कुछ हो गया तो…’’

‘‘अरे बाबा, मैं कहती हूं मुझे कुछ नहीं होने वाला. मेरी फिक्र मत करिए, आप आराम से ड्यूटी जाइए. वैसे भी कोई बात होती है तो घर वाले हैं न मुझे संभालने के लिए.’’ कह कर राधा कमरे से किचन की ओर चली गई.

इस बार किचन से वह पूरा काम निपटा कर निकली थी. पति को खाना खिला कर ड्यूटी भी भेज दिया.

काम निपटा कर वह बिस्तर पर लेटी ही थी कि तभी उस के फोन की घंटी बज उठी. फोन उठा कर उस ने देखा तो स्क्रीन पर उस के पापा जयप्रकाश गुप्ता का नंबर था. राधा ने झट से चहकते हुए काल रिसीव की.

उस दिन राधा को अपने पिता की बातों से मायूसी महसूस हुई तो उस ने उन से इस की वजह जाननी चाही. जयप्रकाश ने कहा, ‘‘क्या बताऊं बेटी, मुझ से एक अनर्थ हो गया.’’

‘‘अनर्थ? कैसा अनर्थ?’’ राधा ने पूछा.

‘‘बेटी, आवेश में आ कर मैं ने अपने ही हाथों फूल सी छोटी बेटी प्रिया को मौत के घाट उतार दिया.’’

‘‘क्याऽऽ! प्रिया को आप ने मार डाला?’’ राधा चीखती हुई बोली.

‘‘हां बेटी, उस की चरित्रहीनता ने मुझे हत्यारा बना दिया. मैं ने उसे सुधरने के कई मौके दिए लेकिन वह अपनी हरकतों से बाज नहीं आ रही थी और मेरे हाथों यह अनर्थ हो गया.’’

‘‘ये क्या किया आप ने पापा? मेरी बहन को मार डाला.’’ इतना कह कर राधा ने फोन डिसकनेक्ट कर दिया और निढाल हो कर दहाड़ मारने लगी.

अचानक बहू के रोने की आवाज सुन कर उस के सासससुर घबरा गए कि अभी तो भलीचंगी किचन से अपने कमरे में गई है, फिर अचानक उसे हो क्या गया कि दहाड़ मार कर रोने लगी. वे दौड़े भागे बहू के कमरे में पहुंचे तो देखा कि बहू बिस्तर पर लेटी सिसकियां ले रही थी.

उस के ससुर ने जब बहू से रोने की वजह पूछी तो उस ने पूरी बात उन्हें बता दी. बहू की बात सुन कर ससुर भी चौंक गए कि समधी ने ये क्या कर दिया.

थोड़ी देर बाद जब राधा थोड़ी सामान्य हुई तो उस ने पति को फोन कर के सारी बातें बता दीं. सुनील भी आश्चर्यचकित रह गए. उन्होंने पत्नी के तहेरे भाई विनोद को फोन कर के यह बात बता कर उस से पूछा कि ऐसे हालात में क्या करना चाहिए.

काफी सोचविचार के बाद विनोद इस नतीजे पर पहुंचे कि बात पुलिस को बता देनी चाहिए क्योंकि यह मामला हत्या से जुड़ा है. आज नहीं तो कल यह राज खुल ही जाएगा. विनोद ने सुनील से कहा कि वह एसएसपी को फोन कर के इस की सूचना दे रहा है. उस के बाद गोला थाना जा कर वहां के एसओ से मिल लेंगे.

विनोद ने उसी समय एसएसपी डा. सुनील गुप्ता को अपना परिचय देते हुए पूरी घटना की जानकारी दे दी. मामला हत्या का था, इसलिए उन्होंने थाना गोला के एसओ संजय कुमार को तुरंत मौके पर पहुंच कर काररवाई करने के आदेश दिए.

कप्तान के आदेश पर एसओ संजय कुमार 17 अगस्त को ही जयप्रकाश गुप्ता के विशुनपुर स्थित घर पहुंचे. जयप्रकाश उस समय घर पर ही था. सुबहसुबह दरवाजे पर पुलिस को देख कर जयप्रकाश की जान हलक में फंस गई. उसे हिरासत में ले कर पुलिस थाने लौट आई.

एसओ संजय कुमार ने जयप्रकाश से उस की बेटी प्रिया के बारे में सख्ती से पूछताछ की तो उस ने बताया कि उस ने 27 जुलाई, 2019 को बेटी की गला घोंट कर हत्या कर दी, फिर उस की गरदन धड़ से अलग कर दी थी. बाद में सिर को प्लास्टिक के एक बोरे में भर कर उरुवा थाना क्षेत्र में फेंक दिया और धड़ वाले हिस्से और उस के पहने कपड़े दूसरे प्लास्टिक बोरे में भर कर गोला थाना क्षेत्र के चेनवा नाले में फेंक दिए थे.

प्रिया का सिर और धड़ बरामद करने के लिए पुलिस उसे मौके पर ले गई. उस की निशानदेही पर चेनवा नाले से धड़ बरामद कर लिया. 22 दिनों से धड़ पानी में पड़े रहने की वजह से सड़ कर कंकाल में तब्दील हो चुका था. पुलिस ने कंकाल को अपने कब्जे में ले कर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया. लेकिन उस के सिर का कहीं पता नहीं चला.

एसओ संजय ने जब उस से पूछा कि तुम ने अपनी ही बेटी की हत्या क्यों की, तो दबी जुबान में जयप्रकाश गुप्ता ने जो जवाब दिया, उसे सुन कर वही नहीं, वहां मौजूद सभी ने अपने दांतों तले अंगुलियां दबा लीं. कलयुगी पिता जयप्रकाश ने रिश्तों की मर्यादा का खून किया था.

कंकाल बरामद होने से करीब 22 दिनों से रहस्य बनी प्रिया के राज से परदा उठ चुका था. बहन की हत्या से राधा बहुत दुखी थी. उसे पिता की घिनौनी करतूत पर गुस्सा आ रहा था. राधा ने साहस का परिचय देते हुए पिता जयप्रकाश के खिलाफ धारा 302, 201, 120बी भादंसं के तहत रिपोर्ट दर्ज करा दी.

जयप्रकाश गुप्ता से पूछताछ के बाद इस मामले की जो घिनौनी कहानी सामने आई, उसे सुन कर सभी हैरान रह गए.

करीब 55 वर्षीय जयप्रकाश गुप्ता मूलरूप से उत्तर प्रदेश के गोरखपुर जिले के गोला थाना क्षेत्र के विशुनपुर राजा बुजुर्ग गांव का रहने वाला था. वह गल्ले का कारोबार करता था. करीब 15 साल पहले उस ने विशुनपुर राजा बुजुर्ग गांव में मकान बनवा लिया और परिवार के साथ रहने लगा था.

उस के परिवार में पत्नी और 2 बेटियां राधा और प्रिया थीं. जयप्रकाश को बेटे की चाहत थी लेकिन बेटा नहीं हुआ. तब उस ने बेटियों की परवरिश बेटों की तरह की. वह छोटे से खुशहाल परिवार के साथ जीवनयापन कर रहा था. दुकान से भी उसे अच्छी कमाई हो जाया करती थी.

जयप्रकाश गुप्ता की गृहस्थी की गाड़ी बड़े खुशहाल तरीके से चल रही थी. पता नहीं उस की गृहस्थी को किस की नजर लगी कि सब कुछ छिन्नभिन्न हो गया. बात साल 2009 की है. अचानक उस की पत्नी की मौत हो गई.

उस समय उस की दोनों बेटियां 10-12 साल के बीच की थीं. बेटियों की परवरिश की जिम्मेदारी जयप्रकाश पर आ गई थी. जयप्रकाश के बड़े भाई राधा और प्रिया को दिल से अपनी बेटी मानते थे और उन्हें उसी तरह दुलारते भी थे. प्रिया को तो वह बहुत ज्यादा लाड़प्यार करते थे. इसी तरह दोनों बेटियों की परवरिश होती रही.

बड़ी बेटी राधा शादी योग्य हो चुकी थी. राधा के सयानी होते ही जयप्रकाश के माथे पर चिंता की लकीरें उभर आईं. वह बेटी की जल्द से जल्द शादी कर देना चाहता था. उस के लिए वह लड़का देखने लगा. गोला इलाके में ही उसे एक लड़का पसंद आ गया तो जयप्रकाश ने साथ सन 2015 उस के में राधा की शादी कर दी. राधा की विदाई के बाद घर में जयप्रकाश और उस की छोटी बेटी प्रिया ही रह गए. धीरेधीरे प्रिया भी सयानी हो चुकी थी.

बात 2 साल पहले की है. प्रिया बाथरूम से नहा कर बाहर निकल रही थी. गीले बदन से उस के कपड़े चिपक गए थे. इत्तफाक से उसी समय जयप्रकाश किसी काम से घर में आया.

उस की नजर बेटी प्रिया पर पड़ी तो उस की आंखों में एक अजीब सी चमक जाग उठी और उस के शरीर में वासना के कीड़े कुलबुलाने लगे. उस वक्त उसे प्रिया बेटी नहीं, एक औरत लगी. वह उस के तन को नोचने की सोचने लगा.

इस के बाद जयप्रकाश यही सोचता रहा कि प्रिया को कब और कैसे अपनी हवस का शिकार बनाए. इसी तरह एक सप्ताह बीत गया. एक रात प्रिया जब अपने कमरे में गहरी नींद में सो रही थी, तभी जयप्रकाश दबेपांव उस के कमरे में पहुंचा और सो रही बेटी को अपनी हवस का शिकार बना लिया. पिता के कुकृत्य से प्रिया बिलबिला उठी.

हवस पूरी कर के जयप्रकाश ने प्रिया को धमकाया कि अगर उस ने किसी से कुछ भी कहा तो अपनी जान से हाथ धो बैठेगी. पिता की धमकियों से वह बुरी तरह डर गई और अपना मुंह बंद कर लिया. उस दिन के बाद से जयप्रकाश प्रिया को अपना शिकार बनाता रहा.

पिता की घिनौनी हरकतों से प्रिया बहुत दुखी थी. वह समझ नहीं पा रही थी कि अपनी पीड़ा किस से कहे. जयप्रकाश ने उस पर इतना कड़ा पहरा बैठा दिया था कि वह किसी से बात तक नहीं कर सकती थी. पिता के अत्याचार से बचने के लिए उस ने घर छोड़ने का फैसला कर लिया.

इंटरमीडिएट की पढ़ाई पूरी करने के बाद प्रिया गोरखपुर में अपने एक रिश्तेदार के पास रहने लगी. वहां रहते हुए वह एक मौल में सेल्सगर्ल की नौकरी करने लगी ताकि  किसी पर बोझ न बन सके और उस की जरूरतें भी पूरी होती रहें.

बेटी तो बेटी होती है. भले ही वह कुकर्मी पिता से दूर रह रही थी लेकिन उसे पिता की यादें बराबर सताती रहती थीं इसलिए वह बीचबीच में घर आ जाती थी. वह जब भी घर आती थी, पिता उसे अपनी हवस का शिकार बनाता था.

26 जुलाई, 2019 को प्रिया घर गई थी. इस से अगली रात 27 जुलाई को जयप्रकाश ने उस से संबंध बनाने की कोशिश की. प्रिया ने इस बार पिता की मनमानी नहीं चलने दी और विरोध करने लगी. कामाग्नि में जलते पिता जयप्रकाश ने आव देखा न ताव, उस का गला घोंट कर हत्या कर दी.

पिता से हैवान और हैवान से दरिंदा बना जयप्रकाश पूरी नीचता पर उतर आया था. उस ने बेटी की मौत के बाद उस की लाश के साथ अपना मुंह काला किया. जब उस की कामाग्नि शांत हुई तो उसे होश आया. उस की आंखों के सामने फांसी का फंदा झूल रहा था. वह सोचने लगा कि प्रिया की लाश से कैसे छुटकारा पाए.

काफी देर सोचने के बाद उस के दिमाग में एक योजना ने जन्म लिया. वह कमरे में गया और वहां से तेजधार वाला चाकू ले आया. चाकू से प्रिया का उस ने सिर और धड़ अलग कर दिया. सिर उस की इस करतूत से फर्श पर खून ही खून फैल गया.

फिर उस ने बेटी के शरीर से उस के सारे कपड़े उतार दिए और उन्हीं कपड़ों से फर्श पर फैले खून को साफ किया ताकि पुलिस को उस के खिलाफ कोई सबूत न मिल सके. इस के बाद वह कमरे के अंदर से प्लास्टिक के सफेद रंग के 3 बोरे ले आया. उस ने एक बोरे में सिर, दूसरे में धड़ और तीसरे में प्रिया के खून से सने कपड़े रखे.

रात 2 बजे के करीब जयप्रकाश ने अपनी मोपेड पर तीनों बोरे लाद दिए और उन्हें ठिकाने लगाने के लिए निकल गया. सिर को उस ने उरुवा थाने के अंतर्गत आने वाली एक जगह की झाड़ी में फेंक दिया.

फिर धड़ और कपड़े वाले बोरों को ले कर वह वहां से गोला के चेनवा नाला पहुंचा. नाले में उस ने दोनों बोरे ठिकाने लगा दिए. इस के बाद वह घर लौट आया और हाथमुंह धो कर इत्मीनान से सो गया. पते की बात यह रही कि प्रिया के अकसर गोरखपुर में रहने की वजह से उस के अचानक गायब होने पर किसी को शक नहीं हुआ.

अब जयप्रकाश को एक बात की चिंता खाए जा रही थी कि भले ही लोग यह समझते हों कि प्रिया गोरखपुर में नौकरी कर रही है, लेकिन यह बात ज्यादा दिनों तक राज नहीं रह सकेगी. एक न एक दिन पुलिस इस हत्या से परदा हटा ही देगी तो वह उम्र भर जेल की चक्की पीसेगा. उस ने सोचा कि क्यों न ऐसी चाल चली जाए कि सांप भी मर जाए और लाठी भी न टूटे.

काफी सोचविचार करने के बाद उस ने अपने दामाद पर ही साली यानी प्रिया के अपहरण का आरोप लगाने की योजना बनाई. इस से जयप्रकाश का फायदा ही फायदा था. भविष्य में वह न तो कभी प्रिया की तलाश कर सकता था और न ही उस की हत्या का राज खुल सकता था. वक्त जयप्रकाश का बराबर साथ दे रहा था.

कुछ दिन बाद जयप्रकाश ने दामाद सुनील के पिता को फोन कर प्रिया के गायब होने की सूचना दी. बातचीत में उस ने बेटी के गायब होने के पीछे सुनील का हाथ होने का आरोप लगाया. सुनील के पिता समधी का आरोप सुन कर चौंके.

उन्होंने इस बारे में बेटे सुनील से बात की तो साली के अपहरण का आरोप खुद पर लगने से सुनील सन्न रह गया. उस ने यह बात पत्नी राधा को बताई. राधा भी पति की बात सुन कर हैरान थी.

राधा ने उसी समय पिता को फोन किया तो जयप्रकाश ने सुनील पर बेटी के अपहरण का आरोप लगाते हुए मुकदमा दर्ज कराने की धमकी देनी शुरू कर दी. पिता की बात सुन कर राधा और सुनील एकदम परेशान हो गए. जबकि वे खुद भी कई दिनों से प्रिया के मोबाइल पर संपर्क करना चाहते थे. लेकिन उस का फोन स्विच्ड औफ था.

फिर 17 अगस्त, 2019 को जयप्रकाश ने खुद ही बेटी राधा को फोन कर के प्रिया की हत्या करने की जानकारी दे दी.

बहरहाल, घटना की जानकारी होने पर राधा पति सुनील के साथ 17 अगस्त को ही गांव पहुंच गई. पूछताछ में उन्होेंने पुलिस को बताया कि पहले प्रिया उन से फोन पर बातें करती रहती थी, लेकिन बाद में पिता के दबाव में उस ने उन से बात करनी बंद कर दी थी.

बीते 29 मई को एक रिश्तेदार के यहां शादी समारोह में राधा और सुनील भी गए थे. उस समारोह में प्रिया भी आई थी. राधा ने वहीं पर प्रिया से मुलाकात के दौरान उस से पूछा कि वह उसे फोन क्यों नहीं करती, तो प्रिया ने पिता के दबाव की वजह से फोन न करने की बात कही थी.

जब उस ने वह वजह पूछी तो उस ने कुछ नहीं बताया. इस के बाद से वह कभीकभार बहन और जीजा को फोन कर लेती थी लेकिन पिता की हरकत के बारे में उस ने उन से कभी कोई चर्चा नहीं की थी.

अगर प्रिया ने थोड़ी हिम्मत दिखाई होती तो उसे असमय मौत के आगोश में यूं ही नहीं समाना पड़ता. वह भी जिंदा होती और खुशहाल जीवन जीती.

यही नहीं, मर्यादा की सारी सीमाएं लांघ चुके कलयुगी पिता को भी सलाखों के पीछे पहुंचवा सकती थी, लेकिन सामाजिक लोकलाज और डर के चलते उस ने ऐसा नहीं किया, जिस की कीमत उसे अपनी जान दे कर चुकानी पड़ी.

पुलिस ने जयप्रकाश गुप्ता से पूछताछ के बाद उसे कोर्ट में पेश किया, जहां से उसे जेल भेज दिया गया. कथा लिखे जाने तक जयप्रकाश जेल की सलाखों के पीछे कैद था. उस की निशानदेही पर पुलिस हत्या में इस्तेमाल मोपेड, चाकू आदि बरामद कर चुकी थी. Family Dispute

—कथा पुलिस सूत्रों पर आधारित

Crime News : कंकाल से आखिर किस तरह सामने आया हत्या का सच

Crime News : कोतवाल नरेंद्र बिष्ट ने सब से पहले कंकाल का निरीक्षण किया. इस के बाद उन्होंने आसपास की झाडिय़ों पर नजर दौड़ाई. पास में एक फटा सलवारसूट पड़ा था, जिसे देख कर लग रहा था कि यह कंकाल किसी युवती का रहा होगा. इस के बाद उन्होंने आसपास पड़ी किसी अन्य वस्तु को भी खोजना शुरू किया जिस से उन्हें इस कंकाल के बारे में और जानकारी प्राप्त हो सके.

3 दिन बीत गए थे. मगर युवती के कंकाल की शिनाख्त नहीं हो सकी थी. इस के बाद एसएसपी अजय सिंह ने इस कंकाल की शिनाख्त के लिए एसओजी प्रभारी विजय सिंह तथा थाना सिडकुल के एसएचओ नरेश राठौर को लगा दिया था. साथ ही पुलिस टीम कंकाल मिलने वाली जगह के आसपास चलने वाले मोबाइल फोनों की डिटेल भी जुटा रही थी.

हरिद्वार के रानीपुर क्षेत्र में स्थित शिवालिक पर्वत की निचली सतह की ओर घनी झाडिय़ां फैली हुई थीं. कई दिनों से क्षेत्र में हो रही मूसलाधार बारिश के कारण ये झाडिय़ां काफी घनी हो गई थीं. इन्हीं झाडिय़ों के पास से हो कर गांवों से एक रास्ता जिला मुख्यालय की ओर जाता है. सैकड़ों लोग अकसर सुबहशाम इसी रास्ते से हो कर अपने घर आतेजाते थे.

कई दिनों से कुछ लोग यह महसूस कर रहे थे कि झाडिय़ों के एक कोने से काफी बदबू आ रही है. पहले तो लोगों को यह लग रहा था कि यह बदबू किसी कुत्ते या बिल्ली की लाश से आ रही होगी, मगर जब यह बदबू ज्यादा हो गई थी और इसे सहन करना भी असहनीय हो गया था तो कुछ लोगों ने नाक पर रुमाल रख इसे देखने का फैसला किया था.

उधर से गुजरने वाले कई लोग उत्सुकता से जब झाडिय़ों से लगभग 100 मीटर अंदर की ओर पहुंचे तो वहां का दृश्य देख कर उन सब की चीख निकल गई थी. वहां पर एक मानव कंकाल पड़ा हुआ था.

कंकाल के पास ही किसी युवती के कपड़े भी पड़े थे, जो बारिश के कारण भीगे हुए थे. तब सभी लोग सहम कर वापस सड़क पर आ गए थे और उन्होंने झाडिय़ों में कंकाल पड़ा होने की जानकारी पुलिस को देने का विचार बनाया था.

यह स्थान उत्तराखंड के हरिद्वार जिले के रोशनाबाद मुख्यालय के निकट कोतवाली रानीपुर के क्षेत्र टिबड़ी में पड़ता है. घटनास्थल कोतवाली रानीपुर से मात्र 3 किलोमीटर तथा एसएसपी कार्यालय से केवल 5 किलोमीटर दूर है. इस के बाद राहगीरों ने टिबड़ी क्षेत्र में कंकाल पड़े होने की सूचना कोतवाल रानीपुर नरेंद्र बिष्ट को दे दी. अपने क्षेत्र में कंकाल मिलने की सूचना पा कर नरेंद्र बिष्ट चौंक पड़े थे.

सब से पहले उन्होंने यह सूचना एसपी (क्राइम) रेखा यादव, सीओ (ज्वालापुर) निहारिका सेमवाल व एसएसपी अजय सिंह को दी. इस के बाद नरेंद्र बिष्ट अपने साथ कोतवाली के एसएसआई नितिन चौहान तथा अन्य पुलिसकर्मियों को ले कर घटनास्थल की ओर चल पड़े. घटनास्थल वहां से ज्यादा दूर नहीं था, इसलिए पुलिस टीम 10 मिनट में ही मौके पर पहुंच गई थी.

जब पुलिस टीम मौके पर पहुंची थी तो उस वक्त कुछ लोग उस कंकाल के आसपास खड़े थे. जिस स्थान पर कंकाल मिला था, वह स्थान सुनसान होने के साथसाथ वन्य क्षेत्र से लगा हुआ है. हिंसक पशु गुलदार व जंगली हाथी अकसर इस क्षेत्र में घूमते हुए देखे जा सकते हैं.

आखिर किस का था वह कंकाल

कोतवाल नरेंद्र बिष्ट अभी घटनास्थल का बारीकी से निरीक्षण कर ही रहे थे कि तभी वहां एसएसपी अजय सिंह, एसपी (क्राइम) रेखा यादव तथा (सीओ) ज्वालापुर निहारिका सेमवाल सहित कुछ मीडियाकर्मी भी पहुंच गए थे. इस के बाद पुलिसकर्मियों ने कंकाल के अलगअलग कोणों से फोटो लिए थे.

कंकाल की शिनाख्त करने के लिए अजय सिंह ने कोतवाल नरेंद्र बिष्ट को निर्देश दिए कि वह आसपास के पुलिस स्टेशनों से यह जानकारी करे कि इस हुलिए की कोई युवती उन के क्षेत्र से कहीं लापता तो नहीं है. शिनाख्त न होने पर इस बाबत अखबारों में कंकाल के इश्तहार छपवाने को कहा था. यह बात 26 जुलाई, 2023 की है.

पुलिस ने कंकाल का पंचनामा भर कर उसे पोस्टमार्टम के लिए हरमिलापी अस्पताल हरिद्वार भेज दिया था. अब सब से पहले कोतवाल नरेंद्र बिष्ट के सामने युवती की शिनाख्त न होने की समस्या थी. यदि युवती की शिनाख्त हो जाती तो पुलिस उस की काल डिटेल्स आदि के आधार पर जांच में जुट जाती. अगले दिन जब कंकाल के फोटो अखबारों में छपे तो कोई भी व्यक्ति उसे पहचानने वाला पुलिस के पास नहीं आया था.

इस के अलावा पुलिस स्टेशनों से भी कोई खास जानकारी नहीं मिली. एक बार तो नरेंद्र बिष्ट के दिमाग में यह भी आया कि युवती को कहीं किसी नरभक्षी गुलदार ने निवाला न बना लिया हो. मगर बाद में उन्हें ऐसा नहीं लगा था.

युवती के कंकाल की पोस्टमार्टम रिपोर्ट में भी पुलिस को ऐसी कोई जानकारी नहीं मिली जिस से कि पुलिस कातिल तक पहुंच पाती.

वह 30 जुलाई, 2023 का दिन था. थाना सिडकुल के एसएचओ नरेश राठौर के पास करीब 55 वर्षीय राम प्रसाद निवासी कस्बा किरतपुर बिजनौर उत्तर प्रदेश अपनी बेटी प्रवीना के साथ वहां पहुंचा था. राम प्रसाद ने नरेश राठौर को बताया कि उस की 21 वर्षीया बेटी रवीना इसी महीने की 11 जुलाई से लापता है.

राम प्रसाद ने बताया कि रवीना सिडकुल की एक कंपनी में नौकरी करती थी तथा उस के बाद से ही वह लापता हो गई थी.

इस के बाद राठौर ने राम प्रसाद को कोतवाली रानीपुर भेज दिया था. राम प्रसाद व उन की बेटी रवीना कोतवाल नरेंद्र बिष्ट से मिले और उन्हें 11 जुलाई से रवीना के लापता होने की बात बता दी. जब बिष्ट ने राम प्रसाद को गत 26 जुलाई को उन के क्षेत्र में रवीना जैसी युवती का कंकाल मिलने की जानकारी दी थी तो राम प्रसाद ने कंकाल के पास मिले कपड़े देखने की इच्छा जताई.

जब कोतवाल ने कंकाल के पास मिले कपड़े ला कर दिखाने को कहा तो मुंशी कपड़े ले आया. राम प्रसाद व उन की बेटी प्रवीना उन कपड़ों को देखते ही फफक कर रो पड़े थे.

इस से पुष्टि हो गई कि टिबड़ी क्षेत्र में मिला कंकाल रवीना का ही था. खैर, किसी तरह बिष्ट ने दोनों बापबेटी को चुप कराया था और उन से रवीना के बारे में जानकारी हासिल की.

पुनीत से रवीना की कैसे हुई दोस्ती

राम प्रसाद ने बिष्ट को बताया कि पिछले 2 साल से रवीना की धामपुर बिजनौर निवासी पुनीत धीमान से खासी दोस्ती थी तथा उन की आपस में शादी करने की योजना भी थी. मगर बीच में कुछ गड़बड़ हो गई थी. कुछ समय पहले पुनीत ने किसी अन्य युवती से शादी कर ली थी. पुनीत व रवीना सिडकुल की कंपनी ऋषिवेदा में साथसाथ काम करते थे. पुनीत कंपनी में सुपरवाइजर था.

यह जानकारी मिलते ही नरेंद्र बिष्ट ने तुरंत पुनीत धीमान व रवीना के मोबाइल की काल डिटेल्स खंगालने के लिए एसओजी प्रभारी विजय सिंह को कहा था. उसी दिन शाम को ही पुलिस को दोनों के नंबरों की काल डिटेल्स मिल गई थी.

दोनों की काल डिटेल्स जब पुलिस ने देखी तो उस से पुनीत खुद ही संदेह के दायरे में आ गया. इस के बाद पुलिस ने पुनीत से पूछताछ करने की योजना बनाई.

उसी दिन रात को ही पुलिस टीम ने पुनीत को पूछताछ के लिए सिडकुल से हिरासत में ले लिया था. इस के बाद पुलिस उसे पूछताछ करने के लिए कोतवाली रानीपुर ले आई. पुनीत से पूछताछ करने के लिए एसपी (क्राइम) रेखा यादव व एसएसपी अजय सिंह भी वहां पहुंच गए.

पहले तो पुलिस ने पुनीत से रवीना के उस के साथ प्रेम संबंधों व उस की हत्या की बाबत पूछताछ की थी, मगर पुनीत पुलिस को गच्चा देते हुए बोला कि मेरा तो रवीना से या उस की हत्या से कोई लेनादेना नहीं है.

पुनीत के मुंह से यह बात सुन कर वहां खड़े कोतवाल नरेंद्र बिष्ट को गुस्सा आ गया और उन्होंने पुनीत को डांटते हुए कहा, ”पुनीत, या तो तुम सीधी तरह से रवीना की मौत का सच बता दो अन्यथा याद रखो, पुलिस के सामने मुर्दे भी सच बोलने लगते हैं.’’

बिष्ट के इस वाक्य का पुनीत पर जादू की तरह असर हुआ था. पुनीत ने रवीना की हत्या की बात कुबूल करते हुए पुलिस को जो जानकारी दी, वह इस प्रकार है—

क्यों नहीं हो सकी प्रेमी युगल की शादी

बात 4 साल पुरानी है. पुनीत और रवीना सिडकुल की कंपनी ऋषिवेदा में साथसाथ काम करते थे. हम दोनों में पहले दोस्ती हुई थी, जो बाद में प्यार में बदल गई थी. फिर दोनों ने भविष्य में शादी करने की भी योजना बना ली थी. यह अंतरजातीय प्यार गहरा हो गया. इस बाबत जब पुनीत ने अपने घर वालों से बात की तो दोनों की जातियां अलगअलग होने के कारण घर वालों ने शादी करने से साफ मना कर दिया था.

इस के बाद पुनीत के घर वाले किसी और सजातीय लड़की से उस की शादी कराने के प्रयास में जुट गए. उन्होंने फरवरी 2023 में उस की शादी कर दी थी. दूसरी ओर रवीना के पिता राम प्रसाद ने भी उस की सगाई कहीं और कर दी थी. इस के बाद पुनीत ने रवीना पर अपनी सगाई तोडऩे के लिए दबाव बनाना शुरू कर दिया. रवीना ने ऐसा करने से साफ मना कर दिया.

रवीना के मना करने से पुनीत तिलमिला गया. इस के बाद रवीना ने उस का फोन अटैंड करना भी बंद कर दिया था और अपना फोन नंबर भी बदल लिया. यह बात पुनीत को बहुत बुरी लगी. वह गुस्से में पागल हो गया था. तभी उस ने रवीना की हत्या की योजना बनाई.

योजना के अनुसार, पुनीत 11 जुलाई, 2023 को रवीना से मिला था और उसे घुमाने के लिए टिबड़ी रोड पर ले गया था. वहां सुनसान होने के कारण उस ने रवीना की गला घोंट कर हत्या कर दी और धामपुर आ कर रहने लगा था.

इस के बाद कोतवाल नरेंद्र बिष्ट ने पुनीत के ये बयान दर्ज कर लिए थे. फिर बिष्ट ने रवीना की गुमशुदगी को हत्या की धाराओं 302 व 201 में तरमीम कर दिया था. अगले दिन रोशनाबाद स्थित पुलिस कार्यालय में एसएसपी अजय सिंह ने प्रैसवार्ता का आयोजन कर के इस ब्लाइंड मर्डर केस का परदाफाश कर दिया.

अजय सिंह ने इस केस को सुलझाने वाली पुलिस टीम में शामिल कोतवाल नरेंद्र बिष्ट, एसओजी प्रभारी विजय सिंह, एसएचओ (सिडकुल) नरेश राठौर की पीठ थपथपाई.

इस के बाद पुलिस ने हत्या के आरोपी पुनीत धीमान को कोर्ट में पेश कर के जेल भेज दिया. इस हत्याकांड की विवेचना कोतवाल नरेंद्र बिष्ट द्वारा की जा रही थी. वह शीघ्र ही इस केस की विवेचना पूरी कर के पुनीत के खिलाफ चार्जशीट अदालत में भेजने की तैयारी कर रहे थे. Crime News

—कथा पुलिस सूत्रों पर आधारित

Crime Story : सोते हुए पिता के मुंह में ठूंसा कपड़ा फिर पत्थर से वार कर दी हत्या

Crime Story : जगदेव को इस बात का शक था कि उस के 70 वर्षीय पिता के गायत्री से गलत संबंध हैं. इसी बात को ले कर घर में उपजे विवाद ने ऐसा खतरनाक रूप धारण कर लिया कि…

आजकल के बच्चे यह नहीं समझते कि पिता केवल बच्चों का जन्मदाता ही नहीं होता, बल्कि उन का पालनहार होता है. ऐसे में अगर बेटा पिता का बेरहमी से कत्ल करने के साथ ही साथ उस के गुप्तांगों को भी कुचल दे तो बेरहमी की सीमा का पता लगता है. यह एक बाप का नहीं, बापबेटे के रिश्ते और भरोेसे का भी कत्ल होता है. ऐसी घटनाएं आजकल तेजी से बढ़ने लगी हैं. लखनऊ जिले के निगोंहा थाना क्षेत्र के रंजीत खेड़ा गांव में ऐसी ही घटना ने दिल को झकझोर कर रख दिया है.

‘‘यह खेती और जमीन मेरी है. इस का मैं मालिक हूं. मैं जिसे चाहूंगा, उसे दूंगा. तुम्हारे कहने से मैं इस को तुम्हें हरगिज नहीं दूंगा.’’ 70 साल के महादेव ने अपने बेटे जगदेव के साथ रोजरोज की लड़ाई से तंग आ कर यह इसलिए कहा कि ऐसी धमकी से बेटे जगदेव के मन में डर बैठेगा. वह पिता की बात मानेगा.

‘‘हमें पता है, तुम ने जमीन बेचने का बयाना ले लिया है. लेकिन इतना सुन लो कि उस में से मेरा हिस्सा मुझे भी चाहिए.’’ महादेव के बडे़ बेटे जगदेव ने पिता को अपना फैसला सुनाते हुए कहा. बयाना वह पैसा होता है, जो जमीन बेचने के लिए अग्रिम धनराशि होती है. इस के बाद जब जमीन खरीदने वाला पूरा पैसा चुका देता है तो जमीन की लिखतपढ़त की जाती है. जगदेव को यह लग रहा था कि जब बयाने में ही उस का हिस्सा नहीं मिलेगा तो जमीन बिकने पर मिलने वाली रकम में भी उसे हिस्सा नहीं मिलेगा. ऐसे में वह बयाने की रकम में ही हिस्सा लेने की जिद करने लगा. जबकि महादेव जगदेव को हिस्सा नहीं देना चाहता था.

जगदेव का अपने पिता के साथ मतभेद रहता था. उसे बारबार यह लगता था कि उस के पिता उस के बजाए छोटे भाईबहनों को अधिक चाहते हैं. इस के अलावा उसे इस बात की नाराजगी रहती थी कि उस के पिता के संबंध उन्नाव में रहने वाली गायत्री नाम की महिला के साथ थे. जबकि गायत्री और महादेव के ऐेसे कोई संबंध नहीं थे. हमउम्र होेने के कारण दोनों एकदूसरे के साथ खुल कर बातें कर लेते थे. एकदूसरे का सुखदुख बांट लेते थे. बेटा जगदेव यह नहीं समझ पा रहा था कि 70 साल की उम्र में उस के पिता से क्या संबंध हो सकते हैं. उसे इस उम्र में भी पिता का किसी औरत से बात करना खराब ही लगता था. उसे सब चरित्रहीन ही दिखते थे.

महादेव सारे पैसे अपने पास रखना चाहते थे. कारण यह था कि उन्हें लगता था कि अगर उन के पास पैसे नहीं होंगे तो कोई भी बुढ़ापे में सहारा नहीं देगा. वैसे महादेव ने अपनी जमीन का ज्यादातर हिस्सा अपने बेटों को दे दिया था. कुछ जमीन ही उस ने अपने पास रखी थी. इस के अलावा थोड़ी सी जमीन वह बेचने की सोच रहा था. इसी जमीन के टुकड़े के बिकने पर मिले पैसों के कारण विवाद बढ़ गया था. गांव में रहने वाले बूढे़ लोगों के पास जमीन का ही सहारा होता है. आमतौर पर बूढ़े होते मांबाप की जमीन पर बेटों का कब्जा हो जाता है और बूढे़ बिना किसी आश्रय के जीवन गुजारने को मजबूर हो जाते हैं. जब तक मातापिता जीवित रहते हैं तब तक तो थोड़ाबहुत काम चल भी जाता है, पर दोनों में से कोई एक बचता है तो उस का जीवन कठिन हो जाता है.

घर में बेटे के साथ रोजरोज के झगड़े से तंग आ कर महादेव ने सोचा कि अब वह अपने ही बनाए घर में नहीं रहेगा. महादेव ने अपने खेत में एक कमरा बना रखा था, जहां ट्यूबवैल था. बेटे से रोज के झगडे़ को खत्म करने के लिए वह खेत में बने कमरे में रहने लगा. यह गांव से बाहर सुनसान जगह पर था. उसे यहां मच्छर और जंगली जानवरों का डर रहता था. पर घर में बेटे की गाली और मार खाने से यहां जंगल में अकेले रहने में उन्हें सुकून महसूस होता था. महादेव का दूसरा बेटा गया प्रसाद गांव में कम ही रहता था. वह मजदूरी करने शहर ही जाता था. ऐसे में उस का घर के मामलों में दखल कम रहता था. महादेव की दोनों बेटियां श्वेता और बिटाना अपने मांबाप के करीब रहती थीं. उन की भी भाइयों से कम ही बनती थी. ऐसे में परिवार में आपस में कोई सामंजस्य नहीं था.

महादेव लखनऊ जिले के निगोहां थानाक्षेत्र के रंजीत खेड़ा गांव में रहता था. उस की उम्र 70 साल के करीब थी. हादेव के 2 बेटे जगदेव  प्रसाद और गया प्रसाद और 2 बेटियां श्वेता और बिटाना थीं. सभी बच्चों की शादी हो चुकी थी. महादेव का उन्नाव आनाजाना था. वहां रहने वाली गायत्री (बदला हुआ नाम) से उस के नजदीकी रिश्ते थे. यह बात बेटे जगदेव को नागवार लगती थी. वह इस बात को ले कर अकसर अपने पिता को ताना मारता रहता था. इस बात से नाखुश पिता महादेव घर की जगह खेत पर बने कमरे में रहते थे. वहीं उन की पत्नी शांति देवी भी रहती थी.

26 अगस्त की रात शांति देवी और महादेव अगलबगल सो रहे थे. शांति देवी को ठीक से नींद नहीं आती थी तो डाक्टर की सलाह पर वह नींद की गोली खा कर सोती थी. ऐसे में उसे अपने आसपास का पता नहीं होता था. 27 अगस्त की सुबह जब वह उठी तो देखा कि उस के बगल में सो रहे महादेव की किसी ने हत्या कर दी है. खून से लथपथ पति का शव देख कर शांति देवी चीख पड़ी. उस के चिल्लाने की आवाज सुन कर गांव के लोग वहां पहुंच गए. घटना की सूचना गांव के लोगों ने निगोहां थाने की पुलिस को दी. पुलिस ने महादेव के शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया. इस के बाद महादेव के बेटे जगदेव की लिखित तहरीर पर भादंवि की धारा 302 के तहत अज्ञात लोगों के खिलाफ हत्या का मुकदमा दर्ज कर लिया.

मामले की सूचना मिलने के बाद एसपी (ग्रामीण) हृदेश कुमार और सीओ निगोहां नईमुल हसन ने हत्या की गुत्थी को सुलझाने के लिए थानाप्रभारी जितेंद्र प्रताप सिंह को एसआई राम समुझ यादव की अगुवाई में पुलिस टीम का गठन किया. थानाप्रभारी जितेंद्र प्रताप सिंह हत्या के कुछ दिन पहले ही निगोहां थाने में नई पोस्टिंग पर आए थे. ऐसे में आते ही हत्या की गुत्थी सुलझाने का दायित्व संभालना पड़ा. महादेव की दोनों बेटियों श्वेता और बिटाना का शक छोटे भाई के साथ रहने वाली महिला पर था. क्योंकि पिता को बिना शादी के उस का साथ रहना पसंद नहीं था.

पुलिस की टीम ने जब गांव के लोगों और महादेव के घर वालों से अलगअलग बातचीत की तो मामले का हैरतअंगेज खुलासा हुआ. घरपरिवार की शंका से अलग आरोपी सामने आया. पुलिस ने जब गहरी छानबीन की तो पता चला कि महादेव की हत्या उस के बेटे जगदेव ने की है. पुलिस की पूछताछ में जगदेव ने बताया कि जब पिता ने उसे जमीन में हिस्सा देने से मना किया और जमीन बेचने के लिए जो बयाना लिया था, उस में भी हिस्सा नहीं दिया था. उसे लगता था कि ऐसा वह किसी के बहकावे में आ कर कर रहे थे. जिस से वह तनाव में रहने लगा. 32 साल के जगदेव ने सोचा कि क्यों न वह अपने पिता का कत्ल कर दे, जिस से रोजरोज का झंझट ही खत्म हो जाए.

जगदेव यह जानता था कि उस की मां नींद की दवा खा कर सो जाती है. उसे अपने आसपास का कुछ पता नहीं रहता था. रात करीब ढाई बजे जगदेव अपने पिता के कमरे तक पहुंच गया. वहां मां सो रही थी. पास में ही अलग चारपाई पर पिता महादेव भी सो रहे थे. जगदेव ने सब से पहले पिता के मुंह में कपड़ा ठूंस दिया, जिस से वह आवाज न कर सके. इस के बाद पत्थर से प्रहार कर के सिर को फोड़ दिया. पिता जीवित न रह जाएं, इस कारण उस ने पिता के निजी अंगों पर भी प्रहार कर के उन की हत्या कर दी. इस के बाद वह चुपचाप वहां से भाग गया.

सुबह जब उस की मां ने शोर मचाया और गांव के लोग जमा हो गए तो जगदेव भी वहां पंहुचा और उस ने पुलिस को अपने पिता की हत्या की तहरीर दी. उस समय किसी को भी यह शंका नहीं थी कि उस ने ही पिता के साथ ऐसा किया होगा. जगदेव को गिरफ्तार करने के बाद पुलिस ने उसे जेल भेज दिया. Crime Story

Crime News : Driver के साथ मिलकर किया आम आदमी पार्टी के नेता कत्ल

Crime News : किरनदीप कौर का पति हरविंदर कबड्डी का राष्ट्रीय स्तर का खिलाड़ी ही नहीं, बल्कि आम आदमी पार्टी का नेता भी था. हर तरह से साधनसंपन्न होने के बाद भी उस की पत्नी किरनदीप कौर को जाने क्या सूझा कि उस ने अपने ड्राइवर (Driver) संदीप कुमार के साथ अवैध संबंध बना लिए. इस के बाद…

जिला परिषद चुनाव में बठिंडा के जोन गिल कलां से आम आदमी पार्टी के प्रत्याशी हरविंदर सिंह उर्फ हिंदा की हत्या ने पूरे राजनीतिक क्षेत्र में तहलका मचा दिया था. हिंदा की हत्या उसी के घर पर की गई थी. 10 सितंबर की सुबह जो खबर आई थी, वह यह थी कि हिंदा की हत्या किन्हीं अज्ञात व्यक्तियों ने गोली मार कर कर दी है. पर बाद में पुलिस ने स्पष्ट किया कि हिंदा की हत्या गोली से नहीं, बल्कि तेजधार हथियार से की गई थी. पंजाब में जिला परिषद और पंचायत समितियों के चुनाव 19 सितंबर, 2018 को कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच होने थे. मतदान सुबह 8 बजे शुरू हो कर शाम 4 बजे तक चलना था. जबकि मतगणना 22 सितंबर, 2018 को होनी थी.

Aam Aadmi Party leader was murdered with the help of the driver

पूरे राज्य में कड़ी सुरक्षा व्यवस्था थी. इस के बावजूद दिनांक 9-10 सितंबर की आधी रात को सदर रामपुर क्षेत्र के गांव जेठूके में हिंदा को उसी के घर पर मौत के घाट उतार दिया गया था. हिंदा की लाश सब से पहले उस की पत्नी किरनदीप कौर ने सुबह 6 बजे उस समय देखी थी, जब वह उठ कर पति के कमरे की तरफ आई थी. उस की खून से लथपथ लाश उस के कमरे में बैड पर पड़ी थी. लाश देखते ही किरनदीप ने अपने देवर जसविंदर सिंह और पड़ोस में रहने वाले गांव के सरपंच धर्म सिंह को बुलाया, फिर उन्होंने ही पुलिस को सूचना दी.

सूचना मिलते ही थाना सदर रामपुर प्रभारी निर्मल सिंह, एएसआई अमृतपाल सिंह, मनजिंदर सिंह, हवलदार शेर सिंह, गुरसेवक सिंह, सिपाही गुरप्रीत और गुरप्रीत सिंह तथा लेडी सिपाही अमनदीप कौर के साथ घटनास्थल पर पहुंच गए थे. चुनाव से मात्र 10 दिन पहले किसी प्रत्याशी की हत्या होने से बहुत बड़ा बवाल मच सकता था, इसलिए प्रभारी निर्मल सिंह ने इस घटना की सूचना तुरंत अपने उच्चाधिकारियों को दे दी. सूचना मिलते ही आईजी (बठिंडा जोन) एम.एफ. फारुकी, एसएसपी डा. नानक सिंह और कई आला अफसर मौके पर पहुंच गए.

मामले की जांच के दौरान पुलिस को हरविंदर सिंह के बैड के पास से शराब की एक बोतल बरामद हुई थी. मृतक की पत्नी किरनदीप कौर ने पुलिस को बताया कि हरविंदर सिंह रात 3 लोगों के साथ सफेद कार में बैठ कर कहीं गए थे. वे सभी लोग देर रात घर लौटे. चारों ने शराब पी हुई थी. पहले तीनों युवक हरविंदर को घर छोड़ कर चले गए थे, लेकिन रात 11 बजे वे लोग दोबारा वापस आए थे. पति ने उसे और बेटे मनदीप सिंह को ऊपर वाले कमरे में भेज दिया था. यह उन का रोज का ही काम था और इन दिनों तो चुनाव की तैयारियां चल रही थीं, सो नएनए लोगों का घर में आनाजाना लगा रहता था. इसलिए उस ने अधिक ध्यान नहीं दिया.

वह ऊपर के कमरे में जा कर बेटे के साथ सो गई थी. फिर उन चारों ने मिल कर दोबारा शराब पी थी. अगली सुबह हरविंदर का शव खून से लथपथ हालत में बैड पर मिला था. वे 3 लोग कौन थे, कहां से आए थे, इस बारे में किरनदीप कौर कुछ नहीं बता सकी थी. कौन थे वो 3 लोग किरन ने बताया था कि इस के पहले उस ने उन युवकों को कभी नहीं देखा था. दोबारा सामने आने पर वह उन्हें पहचान सकती है. पुलिस ने इस मामले में 3 अज्ञात लोगों के खिलाफ हत्या की धारा 302 के तहत केस दर्ज कर लिया. फिर लाश कब्जे में ले कर पोस्टमार्टम के लिए जिला अस्पताल भेज दी.

पोस्टमार्टम रिपोर्ट में हरविंदर सिंह उर्फ हिंदा की हत्या का कारण दम घुटना बताया गया था. हरविंदर की हत्या गला दबाने से हुई थी. हालांकि उस के सिर पर चोटों के गहरे जख्म थे, पर हत्या दम घुटने से हुई थी. इस का मतलब यह था कि हत्यारों ने पहले उस की गला घोंट कर हत्या की होगी और बाद में किसी तेजधार हथियार से उस पर वार किए होंगे. इस वारदात की सूचना मिलते ही मृतक के घर आम आदमी पार्टी के वरिष्ठ नेताओं का जमावड़ा लग गया. हरविंदर की हत्या से गुस्साए आम आदमी पार्टी के नेताओं और ग्रामीणों ने बठिंडा-बरनाला नैशनल हाईवे पर धरना दे कर जाम लगा दिया. प्रदर्शनकारियों का कहना था कि हरविंदर की हत्या के तीनों आरोपियों को जल्द से जल्द गिरफ्तार किया जाए. जब तक आरोपियों को गिरफ्तार नहीं किया जाएगा, शव का अंतिम संस्कार नहीं होगा.

बता दें कि गिल कलां जोन आप के गढ़ मौड़ विधानसभा क्षेत्र में पड़ता है. यह सीट आप विधायक जगदेव सिंह कमालू ने जीती थी. राजनीतिक दलों के लिए यह क्षेत्र काफी महत्त्वपूर्ण माना जाता है. इसलिए चुनाव से ठीक पहले हुई हरविंदर की हत्या ने राजनीतिज्ञों को हिला कर रख दिया. धरनेप्रदर्शनों में बेकाबू होती जनता को देख कर पुलिस की अतिरिक्त टुकडि़यां बुलाई गईं. जब आईजी (बठिंडा जोन) एम.एफ. फारुकी ने भीड़ को आश्वासन दिया कि हत्यारों को जल्दी ही पकड़ लिया जाएगा, तब जा कर भीड़ का आक्रोश कम हुआ. पुलिस पर हरविंदर की हत्या का दबाव था, इसलिए वह फूंकफूंक कर कदम रख रही थी. जरा सी लापरवाही कोई बड़ा बवाल खड़ा कर सकती थी. पुलिस ने इस मामले को सुलझाने के लिए अपनी पूरी ताकत झोंक दी थी. पूरे इलाके में खबरियों का जाल फैला दिया गया था.

क्राइम सीन किया रीक्रिएट क्राइम सीन को कई बार रीक्रिएट किया गया. हरविंदर के परिवार में मात्र 4 लोग थे. खुद हरविंदर, पत्नी किरनदीप कौर, 14 वर्षीय बेटा मनदीप सिंह और 76 वर्षीय पिता कुलदीप सिंह. पिता कुलदीप सिंह को कम सुनाई और कम दिखाई देता था. हरविंदर सिंह का छोटा भाई जसविंदर सिंह कोठी के पीछे बने पशुओं के बाड़े में रहता था. घर का कोई भी सदस्य हरविंदर के काम और उस की बातों में दखलंदाजी नहीं करता था. पुलिस ने हरविंदर के फोन की काल डिटेल्स भी खंगाली, पर उस में कोई संदिग्ध बात दिखाई नहीं दी. क्षेत्र के हिस्ट्रीशीटरों और सुपारी किलर्स से भी पूछताछ की गई, पर इस हत्याकांड के 2 दिन गुजर जाने के बाद भी पुलिस के हाथ कोई सुराग नहीं लगा.

ज्योंज्यों चुनाव के दिन नजदीक आ रहे थे, पुलिस पर जनता और राजनैतिक पार्टियों का आक्रोश बढ़ता जा रहा था. पुलिस अभी तक यह पता नहीं लगा पाई थी कि हरविंदर के साथ शराब पीने वाले 3 लोग कौन थे. पुलिस बारबार किरनदीप कौर के बयानों में सचझूठ तलाशने में लगी हुई थी. किरनदीप के बयान पुलिस को संदेहास्पद लग रहे थे. लेकिन समय की नजाकत को देखते हुए पुलिस उस पर कोई सख्ती नहीं कर सकती थी. हरविंदर की हत्या का मामला पुलिस के लिए बड़ी चुनौती बन गया था. इस केस को ट्रेस करने के लिए पुलिस की 12 टीमें लगी हुई थीं. एसएसपी डा. नानक सिंह खुद इस केस का सुपरविजन कर रहे थे. अचानक पुलिस को आशा की एक किरण दिखाई दी.

दरअसल, पुलिस को पता चला कि मृतक हरविंदर की पत्नी किरनदीप और मानसा निवासी संदीप के पिछले कई सालों से अवैध संबंध हैं. वैसे भी पुलिस को शुरू से ही यह मामला राजनीति से अलग लग रहा था. संदीप का नाम सामने आने से अब यह बात भी स्पष्ट हो गई कि हरविंदर की हत्या में कहीं न कहीं उसी की पत्नी का हाथ होना संभव है. किरनदीप ने अपने एक बयान में कहा था कि 3 लोग उस के घर आए थे और हरविंदर उन के साथ शराब पीने ढाबे पर गया था. लेकिन सीसीटीवी फुटेज में ऐसी कोई बात सामने नहीं आई थी. यहीं से यह बयान संदेह के दायरे में आ गया था. वैसे भी किरनदीप के बयानों में काफी झोल था और वह बारबार अपना बयान बदल भी रही थी.

किरनदीप ने खोला हत्या का राज आखिर 13 सितंबर को पुलिस ने किरनदीप कौर को हिरासत में ले कर जब सख्ती से पूछताछ की तो उस ने हत्या का खुलासा करते हुए बताया कि उस ने अपने प्रेमी संदीप के साथ मिल कर अपने पति हरविंदर की हत्या को अंजाम दिया था. किरनदीप के अपराध स्वीकार करने के बाद पुलिस ने आननफानन में उसी दिन उसे अदालत में पेश कर आगामी पूछताछ के लिए रिमांड पर ले लिया. किरनदीप की निशानदेही पर पुलिस ने मारी गांव से 37 वर्षीय माखन राम, 26 वर्षीय चमकौर सिंह और भैनी गांव से 26 वर्षीय जेमल सिंह को गिरफ्तार कर लिया.

इस हत्याकांड का मुख्य आरोपी यानी किरनदीप कौर का प्रेमी संदीप पुलिस से बच निकला था. उसे किरनदीप और बाकी लोगों के पकड़े जाने की खबर लग गई थी. 4 लोगों की गिरफ्तारी के बाद आईजी एम.एफ. फारुकी और एसएसपी डा. नानक सिंह ने एक प्रैसवार्ता कर इस बात को स्पष्ट किया कि हरविंदर हत्याकांड में कोई भी राजनीतिक ऐंगल नहीं था. बता दें कि सीनियर आप नेताओं ने हिंदा की हत्या के मामले में पुलिस पर सवालिया निशान लगाते हुए कहा था कि यह सोचीसमझी राजनीतिक साजिश के तहत की गई हत्या है. आप ने इसी के साथ राज्य में निकाय चुनाव रद्द कराने की मांग भी की थी और धरनेप्रदर्शन कर के माहौल खराब करने का भी प्रयास किया था.

पुलिस ने यह भी खुलासा किया कि किरनदीप ने 6 महीने पहले भी अपने पति की हत्या की कोशिश की थी. लेकिन जिन लोगों से उस ने मदद मांगी थी, उन्होंने हत्या करने से इनकार कर दिया था. पुलिस ने इस बात का भी खुलासा किया था कि किरनदीप के ड्राइवर संदीप कुमार के साथ अवैध संबंध थे और वह उस से शादी करना चाहती थी, इसलिए उस ने 3 कौन्ट्रैक्ट किलर्स को पति की हत्या के लिए 50-50 हजार रुपए दिए थे. तांत्रिक से भी बनाए संबंध किरनदीप ने बताया कि पति को उस के अवैध संबंधों के बारे में पता चल गया था. जिस की वजह से घर में झगड़ा रहने लगा था. घर में क्लेश दूर करने के लिए वह माड़ी निवासी तांत्रिक बाबा मक्खन राम के पास जाने लगी थी. इस दौरान उस के बाबा मक्खन राम से भी संबंध बन गए थे.

उस ने संदीप के कहने पर मक्खन बाबा से हरविंदर को मरवाने की बात की थी. बाबा ने अपने चेले चमकौर सिंह कोरी, निवासी माड़ी व जैमल सिंह, निवासी भैणी को 50-50 हजार रुपए का लालच दे कर हरविंदर की हत्या करने के लिए तैयार कर लिया था. साजिश के तहत किरनदीप कौर ने पति को अंडे के आमलेट में नशीली दवा मिला कर खिला दी थी. खाना खाने के बाद शराब और गोलियों के नशे से वह बेसुध हो गया था. उस के बेहोश होने पर किरनदीप कौर ने तीनों को फोन कर के घर बुला लिया था. उन्होंने तकिए से मुंह बंद कर के हरविंदर की हत्या कर दी और बाद में हौकी स्टिक से वार कर के उसे घायल कर दिया था.

हत्या करने के बाद तीनों हत्यारे चुपचाप घर से निकल गए थे. योजना के अनुसार सुबह उठ कर किरनदीप ने पति की हत्या की बात कह कर शोर मचा दिया था. आरोपियों की निशानदेही पर मोटरसाइकिल व हौकी भी पुलिस ने बरामद कर ली थी. प्रैसवार्ता के दौरान ही एसएसपी डा. नानक सिंह ने बताया था कि पुलिस को शुरू से ही यह बात हजम नहीं हो रही थी कि मात्र 3 लोगों ने हरविंदर जैसे आदमी की हत्या की होगी. क्योंकि हरविंदर कबड्डी का नैशनल लेवल का खिलाड़ी था, इसलिए वह आधा दरजन लोगों पर भी भारी पड़ सकता था. पुलिस को गुमराह करने के लिए उस की पत्नी ने पुलिस को झूठा बयान दिया और पुलिस ने प्रत्येक ऐंगल से इस की जांच शुरू कर दी. इसी दौरान पुलिस के हाथ कुछ ऐसे ठोस सुराग मिले, जिस से शक की सुई पूरी तरह से उस की पत्नी किरनदीप कौर की ओर घूम गई थी.

किरनदीप और उस के प्रेमी संदीप ने हरविंदर की हत्या के लिए बड़ा उचित समय चुना था. उन्हें इस बात की पूरी उम्मीद थी कि चुनाव के दिनों में हरविंदर की हत्या को राजनीतिक हत्या कहा जाएगा और उन की ओर किसी का ध्यान नहीं जा पाएगा. पर किरनदीप के बारबार बयान बदलने से पूरा मामला सामने आ गया. रिमांड अवधि समाप्त होने के बाद इस हत्याकांड से जुड़े चारों आरोपियों को अदालत में पेश किया गया, जहां से अदालत के आदेश पर सभी को जिला जेल भेज दिया गया.

कथा लिखे जाने तक इस हत्याकांड का मुख्य आरोपी और किरनदीप कौर का प्रेमी ड्राइवर संदीप कुमार गिरफ्तार नहीं हो सका था. पुलिस उसे बड़ी सरगर्मी से तलाश कर रही थी. Crime News

—कथा पुलिस सूत्रों पर आधारित

 

Bihar Crime News : स्कूली प्रेमी कातिल बना

Bihar Crime News : 19 वर्षीय पूजा कुमारी और 21 वर्षीय अमित कुमार की दोस्ती उस समय से थी, जब वे स्कूल में साथसाथ पढ़ते थे. बाद में यह दोस्ती प्यार में बदल गई, दोनों शादी करना चाहते थे. न चाहते हुए भी पूजा के पेरेंट्स बेटी की शादी अमित से कराने को राजी हो गए. इसी बीच एक दिन पूजा की रक्तरंजिश लाश मिली. कौन था पूजा का हत्यारा? उस की हत्या क्यों की गई? पढ़ें, लव क्राइम की यह स्टोरी.

25 वर्षीय अमित कुमार बिहार में नालंदा जिले के नगर थानाक्षेत्र स्थित कागजी मोहल्ले के विजय कुशवाहा के मकान में किराए पर अकेला ही रहता था. यहां रह कर वह एक प्राइवेट फर्म में नौकरी करता था. वह कई दिनों से बुरी तरह से परेशान दिख रहा था, इस की वजह से नौकरी पर जा नहीं रहा था और वह इस से हमेशाहमेशा के लिए निजात पाना चाहता था, इसीलिए उस ने अपने दोस्त विशाल को कमरे पर बुलाया था. यह 10 जून, 2025 की बात है.

जैसे ही विशाल कमरे पर पहुंचा तो अमित बोला, ”यार, तू मेरा कैसा दोस्त है, जो मुसीबत में मेरा साथ नहीं दे सकता? यदि तेरी जगह मैं ने किसी और से मदद की गुहार लगाई होती तो वो अपना कलेजा निकाल कर अब तक मेरी हथेलियों पर रख दिया होता. और एक तू है कि मेरी मदद करने की बजाए मेरी खिल्ली उड़ा रहा है.’’

”नहीं यार, मैं खिल्ली नहीं उड़ा रहा हूं, बल्कि यह सोच रहा हूं कि मैं तेरी मदद कैसे करूं…’’ विशाल ने सोचने वाली मुद्रा में जवाब दिया.

”मैं कुछ नहीं जानता, बस तू इस मुसीबत की घड़ी में मेरा साथ देगा या नहीं?’’

”मैं साथ देने के लिए तैयार हूं, तू बता मुझे करना क्या होगा?’’

”देख भाई, तू जानता है कि पूजा से मैं कितना प्यार करता हूं, उस के बिना जी नहीं सकता.’’

”हुआ क्या यह तो बता..?’’ विशाल ने हैरानी से पूछा.

”उसे मेरे दूसरे प्यार वाली बात पता चल गई है. जब से उसे ये पता चला है कि मेरा अफेयर कंचन से भी था और मैं ने उसे यूज कर के छोड़ दिया, तब से वह विद्रोह पर उतर आई है. अगर उस ने कुछ ऐसावैसा कर दिया तो मैं अपने फेमिली वालों और कालेज में क्या मुंह दिखाऊंगा. जिस कालेज में मैं ने प्रोफेसरों के सामने अच्छी रेपुटेशन बनाई है, सब खत्म हो जाएगी. यही सोच कर मैं बहुत परेशान हूं. तभी मैं ने तुझ से हेल्प मांगी है.’’

”हंू तो यह बात है.’’ विशाल ने सिर हिलाते हुए कहा.

”हां, यह मुसीबत मेरे गले की हड्डी बनती जा रही है. इसे रास्ते से हटाया नहीं तो मैं बरबाद हो जाऊंगा. इसलिए अपनी सेफ्टी के लिए उसे मारना होगा. इस के अलावा और कोई दूसरा रास्ता बचा नहीं है.’’ अमित ने विशाल से मदद करने की रिक्वेस्ट की.

”जो करना है तुझे करना है, मैं तो तेरे साथ परछाई बन कर खड़ा रहूंगा. अब तू ही बता, उसे कैसे रास्ते से हटाएगा.’’ विशाल ने अमित के सवाल का जवाब सवाल में दिया.

”देख भाई, इस में कोई शक नहीं, आज भी पूजा मुझ से उतना ही प्यार करती है जितना कल करती थी. लेकिन यह सच है कि उस के यकीन का बांध थोड़ा डगमगा सा गया है, पर कोई बात नहीं. मैं उसे विश्वास में ले कर मजबूती से अपने प्यार के धागे से बांधने की कोशिश करूंगा. जब उसे मुझ पर पक्का यकीन हो जाएगा कि अमित मिस्टर फ्लर्ट नहीं रहा, वह सचमुच बदल गया है, तब मैं अपनी चाल चल दूंगा यानी उसे खलास कर दूंगा.’’ उत्साहित हो कर विशाल ने अपना प्लान समझाया.

”कह तो ठीक ही रहा है, लेकिन पूजा तेरी बातों पर यकीन करेगी, इस की गारंटी क्या है?’’

”वह तू मुझ पर छोड़ दो, मैं जानता हूं उसे कैसे यकीन दिलाना है. अब आगे सुन.’’

”बोल, सुन रहा हूं मैं.’’

”मेरा प्लान यह है कि उसे मौत के घाट उतारने के बाद लाश बोरे में भर सूटकेस में डाल कर किसी ऐसी जगह फेंक देंगे, जहां उस के फरिश्ते भी नहीं पहुंच पाएंगे.’’

20 वर्षीया पूजा कुमारी अमित के बगल वाले कमरे में किराए पर रहती थी. यहीं रह कर वह नर्सिंग की पढ़ाई करती थी. ये दोनों कालेज के दिनों से एकदूसरे को जानते थे. पहले दोनों के बीच में दोस्ती थी. दोस्ती ने कब उन के बीच प्यार का रूप ले लिया था, उन्हें पता नहीं चला.

धीरेधीरे 4 साल हो गए थे उन के प्यार को. पूजा के फेमिली वालों को बेटी के प्यार वाली बात पता चल चुकी थी. वे उसे अमित से मिलने से मना करते थे, लेकिन अमित के प्यार में अंधी और बहरी पूजा के कानों पर जूं तक नहीं रेंगती थी.

पेरेंट्स की बातों का उस पर कोई असर नहीं हो रहा था. यहां तक कि उस ने अपना जीवनसाथी बनाने का फैसला कर लिया था. बेटी जब फेमिली वालों की बातें सुनने के लिए तैयार नहीं हुई तो उन्होंने उसे उस के हाल पर छोड़ दिया. पूजा यह नहीं जानती थी कि जिस प्यार के लिए वह अपनी फेमिली से बगावत पर उतर चुकी थी, जिस प्यार के लिए जेठ के महीने की तपती धूप में सावन की हरियाली देख रही थी, वह उस का आशिक नहीं, रसिकलाल है.

पूजा की हत्या करने के परफैक्ट प्लान को अमित ने पहले ही अंतिम रूप दे दिया था. बाजार से एक धारदार चापड़, जूट वाली 2 बड़ी बोरियां और लाश को ठिकाने लगाने के लिए एक बड़े साइज का नया मैरून कलर का सूटकेस खरीद कर कमरे में ला कर उसे तख्त के नीचे छिपा दिया, ताकि किसी को उस पर कोई संदेह न हो. उस ने जब पूरी तैयारी कर ली तो पूजा को उस के मोबाइल फोन पर काल की और घडिय़ाली आंसू बहाते हुए माफी मांगने का नाटक किया, ताकि उस का खतरनाक मकसद पूरा हो जाए, ”हैलो पूजा, मेरी पूरी बात सुने बगैर फोन मत काटना, प्लीज.’’

फोन पर अमित गिड़गिड़ाया. वह आगे कुछ और कहता, उस की बात सुने बगैर पूजा ने काल डिसकनेक्ट कर दी और अपने कामों में लगी रही. उस समय सुबह के साढ़े 10 बज रहे थे. पूजा अमित की बेवफाई और धोखेबाजी को भुला नहीं पाई थी. कैसे उस ने धोखा दिया था. वह कभी उस की बातों पर शायद यकीन नहीं करेगी, यही अमित सोच रहा था, लेकिन अमित अपनी योजना पर यूं ही पानी फिरने नहीं देना चाहता था. किसी भी हद तक जा कर पूजा को मनाने की अपनी जिद पर अड़ा रहा और 10-10 मिनट के अंतराल पर करीब 8 बार उसे फोन किया.

बारबार काल आने से पूजा परेशान हो गई थी. वह उस से बात करना नहीं चाहती थी. परेशान हो कर उसने काल रिसीव किया आर उसे झाड़ते हुए कहा, ”बारबार क्यों काल कर के मुझे परेशान कर रहे हो? जबकि मुझे तुम से कोई बात नहीं करनी है.’’

”मैं जानता हूं कि तुम मुझ से बहुत नाराज हो, ऐसा काम ही मैं ने किया है, लेकिन मैं उस के लिए तुम से सौरी बोलता हूं. बस, एक बार मेरी पूरी बात सुन लो, फिर तुम्हें जो सही लगे वो करना. तब मैं तुम्हें कभी न ही रोकूंगा और न ही टोकूंगा, बस एक बार मेरी बात सुन लो, प्लीज.’’

अमित ने मीठी और चिकनीचुपड़ी बातों का ऐसा तीर फेंका, जो सीधा उस के दिल के पार हो गया और एक पल के लिए पूजा विचलित हो गई थी.

न चाहते हुए भी उस ने उस की बातों को दिल पर लेते हुए कहा, ”यह मत समझना कि मैं ने तुम्हें माफ कर दिया.’’ एक लंबीगहरी सांस लेती हुई फिर आगे बोली, ”बताओ, क्या कहना चाहते हो?’’

”बात कुछ ऐसी है, जो मैं फोन पर नहीं कह सकता, एक बार आ कर मिल लो तो सारी बातें क्लीयर हो जाएंगी.’’ अमित अपने होंठों पर जहरीली मुसकान लिए बोला.

”ठीक है, तुम इतना जिद कर ही रहे हो तो तुम से मिलना ही पड़ेगा.’’ पूजा ने जवाब दिया तो अमित की आंखों में शैतानी चमक जाग उठी. मतलब उस ने अंधेरे में जो तीर चलाया था, वह ठीक निशाने पर जा कर लगा था.

पूजा के मुंह से हां सुन कर अमित की खुशी का कोई ठिकाना नहीं था. दूसरी तरफ किसी अनहोनी से बेखबर पूजा अमित के किए को भुला कर उस से मिलने के लिए तैयार हो गई थी. उसी ने फोन पर 3 दिनों बाद यानी 17 जून, 2025 को मिलने के लिए कही. पूजा ने प्रेमी अमित से मिलने का वायदा कर दिया था. फेमिली वालों ने उस के घर से बाहर जाने पर सख्त पाबंदी लगा दी थी. यह कदम उन्होंने तब उठाया था, जब अमित के साथ उन्हें बेटी के अफेयर की जानकारी हुई थी.

बात 17 जून की है. पूजा जानती थी फेमिली वाले उसे आसानी से घर से बाहर अकेले निकलने नहीं देंगे. तब उस ने इस का एक आसान सा रास्ता निकाला. फेमिली वालों से उस ने झूठ बोला कि कल यानी 18 जून को उस की नर्सिंग की परीक्षा है, उस की ड्रेस कमरे पर है, बगैर ड्रेस के कालेज में एंट्री नहीं मिलेगी. उसे लेने कमरे पर जा रही है. फेमिली वालों ने पूजा की बातों पर यकीन कर लिया और उसे घर से अकेले जाने की परमिशन दे दी. जातेजाते उसे सख्त हिदायत भी दी कि ड्रेस ले कर जल्द से जल्द घर वापस लौट आना, वरना कभी घर से बाहर निकलने नहीं देंगे.

उस समय सुबह के करीब साढ़े 10 बज रहे थे. पूजा अपना मोबाइल साथ में ले कर निकली और फेमिली वालों को यकीन दिलाया था कि वह जल्दी घर वापस लौट आएगी. दोपहर करीब डेढ़ बजे पूजा अपने कमरे पर पहुंची, जहां अमित उस के आने का बेसब्री से इंतजार कर रहा था. उस ने पूजा को आते हुए जैसे देखा तो उस के चेहरे पर एक कुटिल मुसकान थिरक उठी. उस वक्त कमरे में पूजा और अमित के सिवाय कोई और नहीं था. मकान मालिक विजय कुशवाहा भी ड्यूटी जा चुका था.

धूप की तपन से जली और थकी हुई पूजा कमरे में पहुंची तो उस के आवभगत में अमित जुट गया था. चाय और नाश्ता कर के जब दोनों फारिग हुए तो अमित पूजा की ओर मुखातिब हुआ और अपनी बातों में उलझा कर बड़ी चालाकी से उस का मोबाइल फोन स्विच औफ कर दिया. इस के बाद उस ने कहा, ”मुझे माफ कर दो पूजा. मैं तुम्हारा गुनहगार हूं. मैं ने तुम्हें धोखा दिया, फिर भी तुम मेरी बात सुन कर मुझ से मिलने आ गई. मैं कैसे बताऊं कि मैं कितना खुश हूं. हनुमान होता तो सीना चीर कर दिखा देता कि किस कदर तुम्हारी तसवीर अपने दिल में बसा रखी है.’’

”ठीक है अमित. बीती बातों को कुरेद कर जख्मों को हरा मत करो तो ही अच्छा होगा.’’ पूजा तड़प कर बोली, ”बड़ी मुश्किल से मैं उन बातों भुला पाई हूं और घर वालों से झूठ बोल कर यहां तक आई हूं. मुझे घर जल्दी पहुंचना भी है. जो बात हो फटाफट बताओ.’’

”इतनी जल्दी भी क्या है. अभी तो आई हो, अभी जाने की बात कर रही हो, इस का मतलब तुम ने मुझे माफ नहीं किया है.’’

”नहीं…नहीं…ऐसी बात नहीं है. मैं ने तुम्हें माफ नहीं किया होता तो यहां आती नहीं. बस मम्मीपापा तुम्हारे खिलाफ हैं. उन्हें पता न चले इसीलिए जल्द घर पहुंचना है, वरना वो मुझे कभी घर से बाहर निकलने नहीं देंगे.’’

”ठीक है, जब तुम इतनी जिद कर रही हो तो थोड़ी देर बाद चली जाना, रोकूंगा नहीं मैं. बस, तुम ने मेरी बात का मान रख लिया और मुझे माफ कर दिया तो समझो मेरे सीने से एक बड़ा बोझ उतर गया.’’

जिस पल का अमित को बेसब्री से इंतजार था, वह समय आ गया था. अमित ने अपनी भावनाओं के भंवर में पूजा को पूरी तरह से उतार लिया था. पूजा से बात करतेकरते वह तख्त के नीचे झुका और चुपके से धारदार चापड़ निकाला. उस के हाथ में चापड़ देख कर पूजा डर गई तो अमित के चेहरे पर शैतानियत साफ झलकने लगी थी. गुस्से से उस की आंखें लाल हो गईं और जबड़ा भिंच गया था. पूरी तरह दैत्य दिख रहा था वह. पूजा समझ गई थी कि अमित ने उसे धोखा दिया है.

पूजा कुछ कर पाती, इस से पहले ही अमित ने चापड़ से उस की गरदन पर जोरदार प्रहार किया. एक ही प्रहार से पूजा की गरदन धड़ से कट कर लटक गई और वह फर्श पर गिर कर अपने ही खून में लथपथ हो कर छटपटाने लगी. उसे छटपटाता देख अमित ने नफरत भरी हुंकार ली और होंठों पर बुदबुदाया, ”चली थी हरामजादी मेरा करिअर बरबाद करने, मुझे नंगा करने. अब ऊपर जा कर मेरे नाम की माला जपना. हुंह..’’

पूजा की हत्या करने के बाद अमित जब होश में आया तो उस की आखों के सामने जेल की सलाखें नजर आने लगी थीं. फटाफट उस ने लाश को बोरी में भरी और पूजा के मोबाइल को उसी बोरी में डाल दिया, ताकि कोई सबूत न बचे और पुलिस किसी कीमत पर उस तक न पहुंच सके. लाश बोरी में भरने के बाद उस ने लाल सूटकेस में बोरी को डाल कर अच्छी तरह बंद कर दिया. फिर फर्श पर फैले खून को साफ कर दिया. इस के बाद उस ने वाशरूम में जा कर अपने शरीर और कपड़ों को अच्छी तरह साफ किया. यह सब करतेकरते शाम के 5 बज गए थे.

सारी तैयारी करने के बाद उस ने विशाल को फोन कर के उस की कार मांगी. विशाल के पास उस के पापा की कार थी. उस ने कह भी रखा था कि जब भी कहीं घूमने जाना हो तो वह उस की कार बेझिझक ले जा सकता है. लेकिन विशाल के फेमिली वालों ने उसे कार देने से साफतौर पर मना कर दिया. इस से उस की योजना पर पानी फिर गया. समझ नहीं पा रहा था कि अब वह लाश का क्या करे. वह डरने लगा कि लाश ठिकाने नहीं लगाई तो वह बुरी तरह फंस सकता था. जब कुछ समझ नहीं आया तो शहर के बाहर स्थित नाला याद आया. उसी नाले में लाश को ठिकाने लगाने की योजना बनाई.

जब उस बिल्डिंग के सभी लोग सो गए तो अमित दबे पांव अपने कमरे से बाहर निकला. घर का मुख्य दरवाजा आहिस्ता से खोला और चुपके से बाहर निकल गया. उस समय रात के करीब 11 बज रहे थे. फिर वह भाड़े पर एक टोटो (टैंपो) ले आया और सूटकेस को उस में रख दिया. टोटो चालक से शहर से बाहर की ओर चलने को कहा. वह जब बड़े नाले के पास पहुंचा तो उस ने टोटो वहीं रोकवा दिया और सूटकेस ले कर उतर गया. टोटो वाले को तय भाड़े से कुछ ज्यादा पैसे दे कर उसे छोड़ दिया. ज्यादा पैसे पा कर टोटो चालक बहुत खुश हुआ और दूसरी ओर चला गया.

चारों ओर गहरा सन्नाटा पसरा हुआ था. अमित ने इधरउधर चारों ओर देखा. वहां कोई आजा नहीं रहा था. जल्दीजल्दी उस ने सूटकेस खोला और बोरे में भरी लाश बाहर निकाली और बोरी कंधे पर उठा कर नाले में फेंक दी. सूटकेस वहीं सड़क पर ही छोड़ दिया था. फिर वहां से कमरे में आ कर सो गया, ताकि किसी को उस पर कोई शक न हो. इधर पूजा के फेमिली वाले उस के देर शाम तक घर वापस न लौटने पर परेशान हो गए थे. उस ने घर से निकलते वक्त उन से दोपहर तक वापस लौट आने को कहा था, लेकिन शाम के 6 बजे तक जब वह घर नहीं लौटी तो फेमिली वाले जवान बेटी को ले कर काफी परेशान थे.

उन के माथे पर चिंता की लकीरें तब और उभरी थीं, जब उस का मोबाइल लगातार स्विच्ड औफ आ रहा था. अपनी तरफ से उन्होंने हर जानपहचान वालों के पास फोन कर के पूछा, लेकिन उस का कहीं भी पता नहीं चला. सभी ने एक ही जवाब दिया था कि वह हमारे यहां नहीं आई थी. रात जैसेतैसे फेमिली वालों की आंखों में कटी. सुबह होते ही वे गांव के कुछ लोगों को ले कर अस्थावा थाने पहुंच गए. उस समय थाने के औफिस में हैडकांस्टेबल दयाराम मौजूद थे. पूजा के पापा संजय कुमार ने बताया कि उन की बेटी कल सुबह शहर गई थी, लेकिन अभी तक वह घर नहीं लौटी है. उस का मोबाइल फोन भी लगातार बंद आ रहा है.

हैडकांस्टेबल दयाराम ने यह बात एसएचओ सुशील कुमार को दी. इस के बाद संजय कुमार ने एसएचओ को बेटी पूजा के घर न लौटने की पूरी बात बता दी. तब एसएचओ ने पूजा की गुमशुदगी दर्ज करने के बाद आगे की काररवाई शुरू कर दी. एसएचओ सुशील ने संजय कुमार से किसी पर शक होने की बात पूछी तो उन्होंने बेटी के प्रेमी अमित पर शक जताया और पूरी बात विस्तार से बताई. पुलिस ने उस का मोबाइल नंबर ले कर जांच की तो संजय की बात सच निकली.

जांच में पता चला कि 17 जून, 2025 को सुबह के समय पूजा से अमित की आखिरी बार बात हुई थी और दोपहर बाद पूजा का फोन स्विच्ड औफ हो गया था. इस के बाद एक पुलिस टीम अमित की तलाश में भेज दी. वह कागजी मोहल्ले में स्थित अपने कमरे पर मिल गया. उसे हिरासत में ले कर पुलिस टीम थाने लौट आई. उस से सख्ती से पूछताछ शुरू की तो जल्द ही पुलिस के सामने उस ने घुटने टेक दिए और पूजा की हत्या का जुर्म आसानी से स्वीकार कर लिया.

एसएचओ ने यह जानकारी डीएसपी नुरुलहक को दी तो वह भी थाने में आ गए. डीएसपी ने भी पूजा की हत्या के बारे में कई सवाल किए. तब अमित ने घटना के बारे में तफसील से सारी जानकारी दे दी और जिस नाले में पूजा की लाश फेंकी थी, वहां ले कर गया. उस की निशानदेही पर पुलिस ने नाले में से मृतका की लाश बरामद कर उसे पोस्टमार्टम के लिए जिला अस्पताल भेज दिया. आरोपी अमित की निशानदेही पर उस के कमरे से हत्या में प्रयुक्त धारदार चापड़ और खून सने कपड़े बरामद कर लिए. जिस सूटकेस में लाश भर कर ले गया था, वह वहां नहीं मिला. उस टोटो (टैंपो) वाले की तलाश में जुटी थी, जिस में लाश ले कर वह गया था. पुलिस द्वारा की गई पूछताछ में पूजा कुमारी के मर्डर के पीछे की जो सस्पेंस स्टोरी सामने आई, इस प्रकार निकली—

बिहार के नालंदा जिले के ओडा गांव के मूल निवासी संजय कुमार सरकारी प्राइमरी स्कूल के टीचर हैं. कुल 5 सदस्यों वाला उन का भरापूरा परिवार था, जिन में पतिपत्नी के अलावा 3 बेटियां थीं. 19 वर्षीय पूजा सब से बड़ी और समझदार थी. देखने में वह साधारण शक्लसूरत की थी, लेकिन उस की बोली में जैसे मिश्री घुली हुई थी. अपनी बातों से वह अपरिचितों को भी अपनी ओर खींच लेती थी. वह पढऩे में भी अव्वल थी. पढ़लिख कर वह डाक्टर बनना चाहती थी. जब वह डाक्टरों को सफेद पोशाक में देखती थी तो उस का रोमरोम खिल उठता था. वह यही सोचती थी कि एक दिन उस के भी बदन पर यह पोशाक झलकेगी.

बात साल 2022 के आसपास की है. हंसमुख और चंचल स्वभाव वाली पूजा जिस स्कूल में पढ़ती थी, उसी स्कूल में अमित भी पढ़ता था. पूजा 10वीं कक्षा की छात्रा थी. तब उस की उम्र 16 साल के आसपास रही होगी. उस समय 18 वर्षीय अमित भी इंटरमीडिएट में पढ़ रहा था. दोनों किशोरावस्था से जवानी की दहलीज की ओर कदम बढ़ा रहे थे. दोनों ही पैदल एक ही रास्ते से हो कर स्कूल जातेआते थे. अमित इसी नालंदा जिले के शेखपुरा गांव का रहने वाला था. 4 भाईबहनों में वह दूसरे नंबर पर था. उस के पापा रामबरन कुमार एक किसान थे.

खैर, उम्र के जिस पड़ाव पर पूजा और अमित खड़े थे, उस दौरान कइयों के कदम बहकने लगते थे. ऐसे में पूजा और अमित कहां अछूते रहने वाले थे यानी उन के भी कदम बहकने लगे थे. स्कूल से घर आतेजाते दोनों एकदूसरे को दिल दे बैठे. धीरेधीरे उन का प्यार समय के रथ पर सवार हो कर आगे बढ़ता रहा. बड़़े जतन से दोनों 3 सालों तक अपने प्यार को परदे के पीछे छिपाने में कामयाब रहे. आखिरकार बेटी पूजा की करतूतों की सच्चाई उस के पापा संजय कुमार के कानों तक पहुंची तो उन के पैरों तले की जमीन खिसक गई. वह आगबबूला हो उठे. उन्होंने बेटी को खूब खरीखोटी सुनाई और पत्नी को भी आड़ेहाथों लिया. उन्होंने पूजा का घर से निकलना बंद कर दिया.

पूजा ने थोड़ी चालाकी और समझदारी से काम लिया. उस ने फेमिली वालों के सामने पैंतरा खेला और झूठ बोलते हुए मम्मी से कहा, ”मम्मी, मुझ से गलती हो गई थी. इस गलती के लिए सब से माफी मांग रही हूं. मुझे माफ कर दो. अमित से अब मैं कभी नहीं मिलूंगी और न बात करूंगी.’’

बेटी की बातों पर फेमिली वालों को विश्वास हो गया और उन्होंने उसे माफ कर दिया. फिर अपना ध्यान उस की ओर से हटा लिया. पूजा यही चाहती थी. फेमिली वालों की तरफ से पूजा एक तरह से आजाद हो गई थी. अब कोई रोकटोक करने वाला नहीं था. इंटरमीडियट पास करने के बाद उस ने मैडिकल कालेज में दाखिला लिया और एएनएम की पढ़ाई शुरू की. वहीं दूसरी ओर अमित प्राइवेट जौब करते हुए बीएड की पढ़ाई कर रहा था. उस ने कागजी कालोनी में विजय कुशवाहा के मकान में एक किराए का कमरा ले लिया था. चूंकि पूजा को गांव से शहर आ कर क्लास लेने आने में बहुत दिक्कत उठानी पड़ती थी तो पापा से परमिशन ले कर अमित के बगल में किराए का एक कमरा ले कर रहने लगी.

पेरेंट्स की नजरों में पूजा ने यह साबित कर दिया था कि अब अमित से उस का कोई संबंध नहीं है और न ही उस से कभी मिलती है. जबकि हकीकत में मामला इस के विपरीत था. अब दोनों खुल्लमखुल्ला आपस में मिलते थे और टूट कर एकदूसरे से प्यार करते थे. धीरेधीरे यह बात फिर से संजय कुमार को पता चल गई तो उन के दिल को बहुत ठेस पहुंचा और बेटी को वापस घर बुलाया और समाज के ऊंचनीच रीतिरिवाजों को समझाया. संजय कुमार एक सुलझे हुए इंसान थे. उन्होंने बेटी को अपने पास बैठा कर समझाया कि वह अपने करिअर पर ध्यान दे, समय आने पर अच्छा घरवर देख कर धूमधाम से उस की शादी कर देंगे.

इस पर पूजा ने खुले शब्दों में जबाव दिया कि वह अमित से प्यार करती है उसी से शादी करेगी. चाहे जो हो जाए, वह अपने फैसले पर अडिग है और कोई भी कुरबानी देने के लिए तैयार है. फेमिली वालों ने पूजा को बहुत समझाया, लेकिन उस पर कोई असर नहीं हुआ तो वो चुप हो गए, मगर विचलित नहीं हुए. आखिरकार संजय कुमार को भी बेटी की जिद के सामने झुकना पड़ा, लेकिन कोई फैसला लेने से पहले वह अमित के बारे में खूब जांचपरख लेना चाहते थे. आखिर बेटी के जीवन का सवाल था. इस बात को उन्होंने सिर्फ अपने तक ही सीमित रखा था.

संजय ने अमित के बारे में पड़ताल शुरू की तो वह हैरान रह गए. जानकारी मिली कि कई लड़कियों के साथ अमित के संबंध हैं. उस आवारा ने कंचन नाम की एक लड़की का जीवन बरबाद कर दिया था. यह बात महीनों तक सुर्खियों में छाई रही. अमित की यह सच्चाई सामने आने के बाद संजय ने बेटी का रिश्ता अमित से जोडऩे का अपना इरादा बदल दिया. और फिर बेटी के सामने उस के प्रेमी की कलई खोल दी. पापा के मुुंह से अमित की सच्चाई सुन कर पूजा को धक्का लगा था.

पूजा ने सपने में भी कभी नहीं सोचा होगा कि जिस अमित से वह अंधा प्यार करती थी, जिस के लिए अपनी फेमिली से बगावत पर उतर आई थी, वह इतना बड़ा दगाबाज निकलेगा. उस के सारे सपने चूर हो गए थे. उस दिन के बाद से पूजा ने अमित से बात करनी बंद कर दी थी. उसे देखते ही अपना रास्ता बदल लेती थी. उसे उस से नफरत हो गई थी. पूजा अमित से इतनी नफरत करने लगी थी कि उस की शक्ल तक नहीं देखना चाहती थी. उस ने अमित को किसी माध्यम से संदेश भिजवाया था कि जैसे उस ने उस की जिंदगी के साथ खेला है, उसे धोखा दे कर खून के आंसू रुलाया है, वह भी उसी तरह उस की जिंदगी तबाह और बरबाद कर के दम लेगी. किसी कीमत पर उसे नहीं छोड़ेगी.

आखिर अमित को पता चल ही गया था कि पूजा को उस के और लड़कियों के साथ चक्कर वाली बात पता चल गई थी, इसलिए उस ने उस से दूरी बना ली. वह यह भी जानता था कि पूजा बहुत जिद्दी किस्म की है, एक बार जो ठान लेती है, उसे पूरा कर के ही दम लेती है. अमित को लगने लगा कि पूजा उस के भविष्य के लिए खतरा बन सकती है. इस से पहले कि वह उस के लिए खतरा बने, इस खतरे को मिटा देगा. उसे जान से मार देगा. न रहेगा बांस न बजेगी बांसुरी. इस के बाद अमित पूजा को मनाने में लग गया. आखिरकार अमित ने अपनी खतरनाक साजिश में फांसने के बाद 17 जून, 2025 को पूजा की हत्या कर दी.

पूजा की हत्या करने के बाद वह भी कानून के लंबे हाथों से बच नहीं सका और अपने असल ठिकाने तक पहुंच गया. पुलिस आरोपी अमित कुमार को गिरफ्तार कर उस की निशानदेही पर हत्या में प्रयुक्त धारदार चापड़, फर्श पर फैले खून को साफ करने वाला कपड़ा बरामद कर उसे साक्ष्य के तौर पर अपने पास सुरक्षित कर लिया. मौके से गायब सूटकेस 2 दिन बाद उसी जगह से बरामद हो गया था, जहां से गायब हुआ था. जिस टोटो (टैंपो) से लाश ले जाई गई थी, 10 दिनों बाद उसे भी पुलिस ने जब्त कर लिया. Bihar Crime News

 

 

UP Crime News : प्यार को कायदों से बांधोगे तो अति होगी

UP Crime News : गुलफ्शां ने अपने निकाह से पहले ही प्रेमी संग मिल कर साजिश रची और मंगेतर निहाल को भरोसे में ले कर उस के साथ वही किया, जो पिछले दिनों सोनम ने हनीमून के दरम्यान अपने पति के साथ किया था. पढ़ें, इस कहानी में क्या प्रेम खून मांगता है? गुलफ्शां की शादी महीनों पहले तय हो गई थी. जबकि वह गांव के ही सद्दाम से मोहब्बत करती थी. सद्दाम भी उस से बेइंतहा मोहब्बत करता था. दोनों के परिवार गांवसमाज और परिवार के कायदेकानून में बंधे थे, लेकिन उन 2 प्रेमियों का दिल आजाद हो कर भी अपनेअपने परिवार के संस्कारों जुड़ा था.

जैसेजैसे विवाह की तारीख 15 जून नजदीक आ रही थी, वैसेवैसे सद्दाम की बेचैनी बढ़ती जा रही थी. यही हाल गुलफ्शां का भी था. सद्दाम तो अपनी बेचैनी और मोहब्बत की दास्तां दोस्तों से शेयर कर लेता था, लेकिन गुल की तमाम प्यारमोहब्बत की बातें सिसकियां बन कर चारदीवारी से टकराती रहती थीं. सिर्फ एकमात्र सहारा मोबाइल का वाट्सऐप था. मन बहलाने के लिए मनोरंजक रील्स, फिल्मों के शार्ट वीडियो और छिटपुट खबरें थीं. पिछले दिनों सोनम और राजा रघुवंशी की खबरों से इंटरनेट मीडिया अटा पड़ा था. बारबार गुल के दिमाग पर वह घटना चोट पर चोट किए जा रहा था.

गुल परेशान हो गई थी. कभी सोनम के बारे में सोचने लगती तो कभी उस के गरीब प्रेमी के बारे में…जब नतीजे पर पहुंचती, तब उस के दिमाग में सद्दाम का चेहरा घूमने लगता. उस ने महसूस किया कि शायद सोनम भी उस की तरह मजबूर रही होगी. उस के बारे में सोचतेसोचते जब दिमाग खाली हो जाता, तब खुद के बारे में सोचने लगती. खयाल आता, ‘क्यों न वह अपनी लव स्टोरी को कायम रखने के लिए निकाह से पहले ही कोई तरीका अपनाए.’ अगले पल ही मन में सवाल आता, ‘कौन सा तरीका? सोनम वाला? नहींनहीं! वैसा नहीं कर सकती!…तो फिर क्या किया जाए?’

कुछ ऐसी ही ऊलजुलूल की उधेड़बुन में खोई थी. निकाह के सिर्फ 2 दिन बचे थे. अपने कमरे में दीवार की तरफ टकटकी लगाए हुए थी. उस वक्त कमरे में और कोई नहीं था. सामने अलमारी के बगल में मोबाइल चार्ज में लगा था. अचानक उस का स्क्रीन चमक उठा. छोटी सी कुछ सेकेंड का काल रिंग बजी. मोबाइल हाथ में ले कर पह देखने लगी. उस के मंगेतर निहाल का फोन था. वह चिढ़ गई, ‘निकाह हुआ नहीं…और अभी से ही बेचैन है!’

वह मोबाइल फिर से चार्ज के लिए लगाने ही वाली थी कि फिर से काल रिंग बजी. इस बार जो नंबर उभरा, उसे देख कर गुल की आंखों में चमक आ गई. चेहरा खिल उठा. काल उस के प्रेमी सद्दाम की थी, जिसे उस ने सलमान के नाम से सेव कर रखा था.

उस ने तुरंत काल रिसीव करते हुए कहा, ”हां बोलो.’’

”अब क्या बोलना बचा है… तुम ने मेरा वाट्सऐप नहीं देखा!’’ सद्दाम ने कहा.

”हां देखा, सलमान खान का फोटो है. क्यों भेजा, समझी नहीं.’’ गुल बोली.

”तुम नहीं मिलीं तो मेरी भी उसी जैसी हालत होगी!’’ सद्दाम बोला.

”ऐसा क्या? मेरे बिना कुंवारे बैठे रहोगे?’’ गुल हैरानी के साथ बोली.

”तुम मेरे बिना रह पाओगी…उस बावर्ची के साथ?’’ सद्दाम ने चुटकी ली.

”अब क्या करूं मेरी जान? किस से कहूं दिल की बात? यहां घर में कोई मेरी नहीं सुनने वाला.’’ गुल की आवाज में निराशा थी.

”मैं समझता हूं तुम्हारी मजबूरी. तुम से कुछ नहीं हो पाएगा. अब जो कुछ करूंगा, मैं ही करूंगा. तुम को सिर्फ मेरा साथ देना है.’’ सद्दाम समझाते हुए बोला.

”मुझे क्या करना होगा?’’ गुल का सवाल था.

”तुम्हें निहाल को अपने विश्वास में लेना है. आगे का काम मैं करूंगा.’’ सद्दाम बोला.

”ठीक है, तुम से पहले उस की ही काल आई थी.’’ गुल बोली.

”अभी उसे काल बैक करो. सब कुछ अच्छा रहा तो सब हमारी मरजी का होगा.’’ सद्दाम ने जैसा बोला वैसा ही गुल ने किया.

निहाल को काल बैक कर उस से प्यार भरी बातें कीं. उसे बताया कि अगले रोज उस का कोई रिश्तेदार काल करेगा. विवाह की रस्म का कुछ काम है. वह जैसा कहे, वैसा करना. उत्तर प्रदेश के जिला रामपुर में भोट थाना क्षेत्र के धनुपुरा गांव की निवासी गुलफ्शां की शादी निहाल के साथ 6 महीने पहले ही तय हो गई  थी. वह थाना गंज क्षेत्र का रहने वाला था. बावर्ची का काम करता था. निहाल अपने परिवार में सब से छोटा था. उस के 2 भाई और 2 बहनें हैं, जिन में से एक भाई और एक बहन की शादी हो चुकी है.

दोनों के घरों में शादी की तैयारियां चल रही थीं. 14 जून, 2025 को दिन में ही निहाल के पास फोन आया. फोन करने वाले ने बताया कि वह उस का चचेरा साला लगेगा. कपड़े खरीदवाने के लिए उस के साथ बाजार चलना होगा. इस बारे में उस की गुलफ्शां से बीती रात बात हुई होगी. निहाल ने इस की हामी भरी, क्योंकि गुल ने उस की पसंद के कपड़े खरीदवाने के लिए रिक्वेस्ट किया था. निहाल घर से निकला. उसे लेने के लिए बाइक से 2 युवक आए थे. वह उन के साथ बीच में बैठ कर चला गया. देर शाम होने तक निहाल घर नहीं लौटा तो फेमिली वालों को चिंता होने लगी. उस के बड़े भाई नायब ने उस की खोजबीन के लिए कई जगह काल की.

सभी जगह से एक ही जवाब आया कि उन के पास निहाल आया ही नहीं था. काफी खोजबीन के बाद जब कुछ पता नहीं चला तो फेमिली वालों ने गंज थाने में उस की गुमशुदगी की सूचना दर्ज करवा दी. निहाल के अचानक दिनदिन में ही लापता हो जाने की सूचना नायब ने गुलफ्शां के फेमिली वालों को भी दे दी. पुलिस ने निहाल की तलाशी के लिए सीसीटीवी फुटेज का सहारा लिया. तब पुलिस को बाइक पर 3 लोग बैठ कर जाते हुए दिख गए. सीसीटीवी के जरिए पुलिस को निहाल के अपहरण की पुष्टि हुई थी. फुटेज में 2 बाइक सवार युवक निहाल को बीच में बैठाए हुए कहीं ले जाते दिखे थे.

बाइक चला रहे युवक ने हेलमेट पहन रखा था, जबकि दूसरे ने चेहरा गमछे से ढक रखा था. हालांकि बाइक नंबर सीसीटीवी कैमरे में कैद हो गया. इस की मदद से ही पुलिस आरोपियों तक पहुंच पाई थी. बाइक चलाने वाले की पहचान सद्दाम के रूप में हो गई. उस के साथ बैठा युवक सद्दाम का साथी फरमान था. तकनीकी सबूत के आधार पर सद्दाम और फरमान 15 जून, 2025 को गिरफ्तार कर लिए गए. पुलिस ने दोनों से निहाल के बारे में सख्ती से पूछताछ की. दोनों ने मार पडऩे के डर से स्वीकार कर लिया कि उन्होंने निहाल की हत्या कर दी है. उन के द्वारा अपराध कुबूल कर लेने के बाद पुलिस सद्दाम को हत्या वाली जगह पर ले गई. तभी उस ने एक कांस्टेबल की पिस्टल छीन कर भागने की कोशिश की.

सद्दाम ने छीनी गई पिस्टल से पुलिस पर फायरिंग शुरू कर दी, जिस के जवाब में पुलिस ने भी गोली चलाई. इस मुठभेड़ में सद्दाम के पैर में गोली लगी और उसे घायल अवस्था में जिला अस्पताल में भरती कराया गया. निहाल के परिजनों में उस के भाई नयाब की तहरीर पर सद्दाम, फरमान, अनीस और युवती यानी होने वाली दुलहन गुलफ्शां निवासी धनुपुरा रामपुर के खिलाफ अपहरण कर हत्या करने की रिपोर्ट लिखी गई. पुलिस ने फरमान को गिरफ्तार कर लिया. उस ने बताया कि निहाल का अपहरण कर गला घोंट कर हत्या की गई और शव को जंगल में एक मक्के के खेत में छिपा दिया था. उस का मोबाइल तोड़ दिया था.

दोनों आरोपियों की निशानदेही पर 16 जून, 2025 को अजीमनगर थाना क्षेत्र के रतनपुरा जंगल से निहाल का शव बरामद कर लिया गया. पूछताछ में सद्दाम ने निहाल की मंगेतर गुलफ्शां का भी नाम लिया. उस ने बताया कि उस के कहने पर ही उन्होंने निहाल की हत्या की है. सद्दाम ने यह भी स्वीकार किया कि वह गुलफ्शां से मोहब्बत करता है. पुलिस ने प्रेमी सद्दाम और फरमान को गिरफ्तार कर लिया तो गुलफ्शां और अनीस फरार हो गए थे. गुलफ्शां पर निहाल की हत्या की क्राइम स्टोरी की साजिश रचने का आरोप था. उस की भूमिका की पुलिस बारीकी से जांच में जुटी थी. इस के लिए सुबूत भी जुटाने के लिए उस की काल डिटेल्स भी खंगाली गई.

इस वारदात से 2 घरों में मातम का माहौल बन गया था. जबकि 6 महीने पहले रिश्ता तय होने के बाद से ही गूजर टोला स्थित फकीरों वाली मसजिद निवासी निहाल के घर में शादी की तैयारियां चल रही थीं. निहाल ने निकाह के लिए खास ड्रेस बनवाई थी. घर मेहमानों से भरा था. निहाल की शादी को ले कर सभी खुश थे. 15 जून, 2025 रविवार को बारात जानी थी, लेकिन खुशियों को न जाने किस की नजर लग गई. शादी से महज एक दिन पहले ही निहाल का अपहरण कर उसे मौत के घाट उतार दिया गया. दूल्हे की ड्रेस में निहाल को देखने के लिए आतुर अब्बूअम्मी ने जब उस का कफन में लिपटा शव देखा तो वे बेसुध हो गए. अन्य परिजनों का भी रोरो कर बुरा हाल हो गया.

फेमिली वालों ने गमगीन माहौल में 16 जून की देर रात उसे सुपुर्द ए खाक कर दिया. रामपुर के एसपी विद्यासागर मिश्र के अनुसार लिखे जाने तक गुलफ्शां से पूछताछ की जानी थी. वह अपने 32 वर्षीय पड़ोसी सद्दाम से एक साल से प्रेम संबंध कायम किए हुए थी. गुलफ्शां की शादी तय होने के बाद से वह नाराज था. इसे ले कर वह गुलफ्शां के घर जा कर झगड़ा भी कर चुका था. निहाल की हत्या की साजिश रचने के आरोप में घिरी गुलफ्शां के घर भी मातम छा गया. गुलफ्शां के अब्बू आशिक अली ने पुलिस से उसे बचाने की गुहार लगाई है. उन का कहना था कि वह बहुत गरीब हैं. उन के 9 बच्चे हैं. उधार ले कर बेटी की शादी कर रहे थे.

उन्होंने पुलिस को बताया कि हत्यारोपी सद्दाम अकसर उन की बेटी को शादी न करने के लिए धमकी देता था. उस ने परिवार तक को खत्म करने की धमकी दी थी.  सद्दाम से पुलिस द्वारा पूछताछ में जो क्राइम स्टोरी सामने आई, उस से पता चला कि दोनों एकदूसरे से प्यार करते थे. सद्दाम ने पुलिस को बताया है कि उस के और गुलफ्शां के बीच लव अफेयर चल रहा था. उस ने गुलफ्शां से शादी की इच्छा भी जताई थी, लेकिन गुलफ्शां के परिजनों ने उस का निकाह निहाल से तय कर दिया था.

गुलफ्शां के साथ ही उस की बहन की भी शादी थी. गुलफ्शां की बारात तो नहीं आई, लेकिन उस की बहन की बारात आई. गुलफ्शां की बहन का निकाह संपन्न हुआ, लेकिन गुलफ्शां व उस के फेमिली वाले दूसरी बारात का इंतजार ही करते रहे. देर रात जब पुलिस यहां पहुंची, तब उन्हें जानकारी हुई कि गुलफ्शां के होने वाले शौहर की हत्या हो चुकी है. UP Crime News

 

 

Greater Noida News : पत्नी को जिंदा जलाने वाले पति को पुलिस ने मारी गोली

Greater Noida News : अकसर ऐसी घटनाएं सामने आया करती हैं, जहां महिलाओं को दहेज के लिए प्रताड़ित किया जाता रहा है. जब महिला ससुराल वालों की उम्मीदों पर खरी नहीं उतर पाती तो उस के साथ अत्याचार किया जाता है. ऐसा ही एक हैरान कर देने वाला मामला ग्रेटर नोएडा से सामने आया है, जिस ने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया. जहां एक महिला को जिंदा जला दिया गया. सवाल यह उठता है आखिर क्या उस महिला को इंसाफ मिल पाया या नहीं? महिला की हत्या के पीछे कौनकौन लोग शामिल थे? आइए विस्तार से जानते हैं, इस क्राइम से जुड़ी पूरी सच्चाई को-

यह घटना दिल्ली से सटे ग्रेटर नोएडा की है, जहां  विपिन ने बेटे के सामने पत्नी निक्की को जिंदा जला डाला. विपिन की शादी 9 साल पहले हुई थी. इसी शादी के बाद से निक्की को दहेज के लिए लगातार प्रताड़िंत किया जा रहा था. ससुराल वाले निक्की पर 35 लाख रुपए मांगने का दबाव बना रहे थे. जबकि निक्की ने ससुराल वालों की मांग मानने से इंकार कर दिया था. इसी बात को ले कर विपिन और सास ने निक्की को लात घूसों से पीटा और पेट्रोल डालकर जिंदा जला डाला.

दहेज में स्कार्पियो और बुलेट देने के बाद भी पति व ससुरालवालों का लालच खत्म नहीं हुआ. लगातार निक्की प्रताड़ना झेलती रही.

निक्की पति के सामने गिड़गिड़ाती रही, पर किसी ने उस की एक बात न सुनी. जब निक्की की बहन ने उसे बचाने और वीडियो बनाने की कोशिश की तो उसे भी पीटा गया. निक्की जान बचाने के लिए सीढ़ियों से नीचे की ओर भागी तो पड़ोसियों ने चीख सुन कर उस के ऊपर कंबल डाला आग बुझाई और अस्पताल ले गए.

गंभीर हालत को देखते हुए डौक्टरों ने निक्की को दिल्ली रेफर कर दिया, लेकिन 22 अगस्त को उस की मौत हो गई.

बहन ने की शिकायत

निक्की की बहन ने जीजा विपिन के खिलाफ बहन की हत्या का केस दर्ज कराया. जिस से अगले दिन पुलिस ने विपिन को अरेस्ट कर लिया. पुलिस विपिन को जिला अस्तपात के लिए ले जा रही थी, तभी आरोपी एक दरोगा कि पिस्टल ले कर भागने लगा. पुलिस ने आरोपी का पीछा करते हुए उस के पैर में गोली मारकर काबू किया. घायल होने पर पुलिस ने विपिन को जिला अस्तपाल में भरती कराया है. कोर्ट के द्वारा आरोपी को 14 दिन की न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया है.

रविवार 24 अगस्त, 2025 को पुलिस ने सास को भी अरेस्ट कर लिया और जेठ और ससुर की अरेस्ट के लिए 8 टीमें गठित कर दी हैं.

विपिन ने कहा निक्की खुद मरी

विपिन ने पुलिस को बयान देते हुए बताया कि उस ने न तो अपनी पत्नी को मारा है न मझे कोई गलती का पछतावा हो रहा है. विपिन का कहना था कि निक्की खुद मरी है और पतिपत्नी में अकसर झगड़ा होना एक आम बात है. एडीसीपी सुधीर कुमार का कहना है कि आरोपी के पास से वही थिनर बरामद हुआ, जिस का इस्तेमाल निक्की को जलाने के लिए किया गया था. पुलिस अब विपिन से विस्तार से पूछताछ कर रही है और उस के खिलाफ ज्यादा से ज्यादा सबूत इकट्ठा कर रही है, ताकि उसे कोर्ट में उस के अपराध की उचित सजा मिल सके. Greater Noida News

Crime News in Hindi : सोनल की जान ली लिवइन पार्टनर ने

Crime News in Hindi : बर्थडे पार्टी में सोनल और निखिल कुमार की नजरें ऐसी मिलीं कि दोनों एकदूसरे के दिल में उतर गए. फेमिली वालों से विद्रोह कर सोनल निखिल के साथ लिवइन रिलेशन में रहने लगी. इसी दौरान एक दिन निखिल ने न सिर्फ सोनल बल्कि उस की सहेली की 6 महीने की बेटी की गला रेत कर हत्या कर दी. आखिर निखिल ने जान से ज्यादा प्यार करने वाली प्रेमिका सोनल का कत्ल क्यों कियाï?

वह पार्टी में सब से अलग नजर आ रही थी. निखिल की नजरें उस खूबसूरत हसीन युवती से हट ही नहीं रही थी, वह अपलक उसे ही देखे जा रहा था. पतलीदुबली छरहरी काया, पतले संतरे की फांक जैसे होंठ, कसा हुआ बदन और गोरा रंग. सब कुछ उस युवती की सब से अलग पहचान बना रहा था. निखिल अपने दोस्त के बेटे की बर्थडे पार्टी में शामिल होने आया था. पहली ही नजर में वह युवती उस के दिल में उतर गई थी और निखिल उसे पागलों की तरह घूरे जा रहा था.

केक काटने की घोषणा होने का उसे पता ही नहीं चला. वह तब चौंका, जब उस के दोस्त अभय ने उसे कंधे से पकड़ कर हिलाया, ”खाना शुरू हो गया है निखिल, तुम कहां खो गए हो?’’

”अं…’’ वह चौंक कर बोला, ”कहीं भी तो नहीं अभय. अरे हां, क्या तुम्हारे बेटे का केक कट गया?’’

अभय मुसकराया, ”लगता है, तुम किसी दूसरी दुनिया में पहुंच गए हो, केक कटे तो आधा घंटा हो गया है.’’

”ओह,’’ निखिल झेंप गया, ”भाभीजी कहां हैं, मैं बेटे यश के लिए एक गिफ्ट लाया हूं.’’

”हेमा वहां स्टेज पर है,’’ अभय हंस कर बोला.

निखिल तेजी से स्टेज की तरफ बढ़ गया. उस ने अपने हाथ का गिफ्ट हेमा के पास बैठे यश को थमा कर हेमा को हाथ जोड़ कर नमस्ते कहा और फिर अभय के पास लौट आया.

अभय किसी अन्य मित्र से बतिया रहा था. निखिल उसे इशारे से बुला कर एक तरफ ले गया. अभय को आश्चर्य हुआ, वह हैरानी से बोला, ”क्या हुआ, तुम मुझे महफिल से अलग क्यों ले कर आए हो निखिल?’’

”अभय, यार तुम्हारी इस महफिल में एक खूबसूरत फूल मुझे पसंद आ गया है. तुम बताओगे, वह गुलाबी सूट वाली युवती कौन है?’’

”अरे वह!’’ अभय ने उस युवती की तरफ देख कर मुसकराते हुए कहा, ”वह मेरी मेहमान है. मेरी पत्नी हेमा की फ्रेंड है, नैनीताल से यहां हल्द्वानी आई है.’’

”नाम क्या है इस का?’’

”सोनल.’’ अभय ने बताया, ”वैसे इसे पटाना तेरे वश की बात नहीं है. वह बहुत नकचढ़ी है.’’

”देखता हूं.’’ निखिल मुसकराया और उस ओर बढ़ गया, जिधर वह युवती खाना खा रही थी.

निखिल ने अपने लिए खाने की प्लेट ली और उसे ले कर सोनल की तरफ आ गया. वह सोनल के पास खड़ा हो कर खाना खाने लगा. कनखियों से वह अभी भी सोनल को देख रहा था.

अचानक वह घबरा गया. सोनल उस के करीब आ रही थी. वह बगलें झांकने लगा तो सोनल की मीठी हंसी उस के कान में पड़ी, ”बस, हो गए अरमान ठंडे. मैं बहुत देर से देख रही हूं, तुम मुझे घूर रहे हो.’’

”नहीं तो.’’ निखिल जल्दी से बोला, ”मैं क्यों तुम्हें घूरूंगा मिस सोनल.’’

सोनल को हैरानी हुई, ”वाह! तुम ने तो मेरा नाम भी मालूम कर लिया. क्या इरादे हैं जनाब के?’’

निखिल ने हिम्मत जुटाई, ”तुम खूबसूरत हो सोनल. इस पार्टी में तुम ही तुम नजर आ रही हो, मेरा दिल तुम पर आ गया है.’’

सोनल के गालों पर लालिमा दौड़ गई. वह नीचे देखते हुए बोली, ”तुम भी हैंडसम हो, क्या नाम है तुम्हारा?’’

”निखिल कुमार. मैं यहीं हल्द्वानी में रहता हूं.’’ अपनी बात खत्म कर के उस ने पूछा, ”नैनीताल में तुम कहां रहती हो सोनल?’’

सोनल को गहरा आश्चर्य हुआ, ”मान गई तुम्हें. तुम ने तो यह भी जान लिया कि मैं नैनीताल में रहती हूं.’’

”क्या करता, तुम अच्छी लगी तो तुम्हारे बारे में जानना जरूरी हो गया. अब बताओ, नैनीताल में कहां रहती हो, घर में कौनकौन हैं?’’

सोनल कुछ कहती, तभी हेमा को अपनी तरफ आता देख कर वह जल्दी से बोली, ”खाना खा लो, मैं 2 दिन यहीं हूं. जाओगे तो मेरा मोबाइल नंबर लेते जाना.’’

”ठीक है.’’ निखिल ने कहा और खाना खाने लगा. सोनल अपनी प्लेट थामे दूसरी तरफ चली गई.

पार्टी खत्म कर के जब निखिल निकला तो उस की जेब में सोनल का मोबाइल नंबर था, जो सोनल ने चुपचाप एक कागज पर लिख कर उसे थमा दिया था.

8 जुलाई, 2025 को दिन के डेढ़ बजे थाना सिविल लाइंस में आए एक फोन ने खलबली मचा दी. फोन एक महिला की ओर से किया गया था, ”साहब, मैं मजनू का टीला से रश्मि बोल रही हूं. यहां मेरी सहेली और मेरी 6 महीने की बेटी की किसी से हत्या कर दी है, आप जल्दी से यहां आ जाइए.’’ महिला का स्वर भर्राया हुआ था. फोन थाने में मौजूद एसआई नितिन शर्मा ने अटेंड किया था. 2 कत्ल की वारदात से वह थोड़ा विचलित हो गए. उन्होंने गंभीर स्वर में पूछा, ”तुम मजनू का टीला में कहां से बोल रही हो रश्मि?’’

”मैं एफ-54 के सेकेंड फ्लोर पर रहती हूं. वारदात मेरे इसी घर में हुई है साहब.’’ रश्मि इस बार बताते हुए रोने लगी थी.

”हम आ रहेहैं. तुम वहां किसी भी सामान को नहीं छुओगी. जिस कमरे में ये कत्ल हुए हैं, उस से बाहर ही रहना है.’’ एसआई नितिन शर्मा ने रश्मि को हिदायत दी और फोन रख कर उन्होंने अपने कक्ष में मौजूद एसएचओ हनुमंत सिंह को जा कर इस दोहरे हत्याकांड की सूचना दी. एसएचओ हनुमंत सिंह अपने साथ एसआई रंजीत कुमार, नितिन शर्मा, हैडकांस्टेबल रनवीर, विकास कुमार और कांस्टेबल सीताराम को ले कर तुरंत घटनास्थाल के लिए निकल पड़े. रास्ते से उन्होंने फोरैंसिक टीम को भी वारदात वाले स्थान पर पहुंचने के लिए कह दिया.

घटनास्थल थाने से ज्यादा दूर नहीं था. पुलिस जब एफ-54 के पते पर पहुंची तो वहां आसपास के लोगों की अच्छीखासी भीड़ जमा हो गई थी. हैडकांस्टेबल विकास कुमार और कांस्टेबल सीताराम ने भीड़ को वहां से हटाया. एसएसओ हनुमंत सिंह और एसआई नितिन कुमार वैन से उतर कर आगे बढ़े तो एक व्यक्ति उन के पास आ गया. वह रो रहा था, ”साहब, मेरी बेटी की हत्या हुई है, उस के साथ सोनल भी मृत पड़ी है.’’

”चलो, हम देखते हैं.’’ एसएचओ हनुमंत सिंह गंभीर स्वर में बोले. वह उस व्यक्ति के साथ एफ-54 के सेकेंड फ्लोर पर आ गए. सामने ही वह कमरा था, जिस में एक युवती और 6 महीने की बच्ची की रक्तरंजित लाश पड़ी हुई थी.

एसएचओ हनुमंत सिंह ने देखा. युवती और उस मासूम बच्ची का बड़ी बेरहमी से गला रेता गया था. बच्ची की लाश पलंग पर थी, जबकि युवती की लाश फर्श पर पड़ी हुई थी. पूरे कमरे में नजर दौड़ाने पर यह स्पष्ट हो गया कि युवती और हत्यारे में पहले जम कर संघर्ष हुआ है. इस के बाद हत्यारा उस का गला काटने में सफल हुआ. हत्यारे ने इस 6 माह की बच्ची की हत्या क्यों की, यह बात एसएचओ हनुमंत सिंह की समझ में नहीं आई.

उन्होंने दोनों लाशों का बारीकी से निरीक्षण किया. चूंकि फोरैंसिक टीम वहां आ गई थी. उन्होंने टीम को बारीक से बारीक सबूत उठाने के लिए कहा और कमरे से बाहर आ गए. इस दोहरे हत्याकांड की सूचना उन्होंने उत्तरी दिल्ली के डीसीपी राजा बांटिया और एसीपी विनीता त्यागी को दे दी. फिर वह मृत बच्ची के पिता के पास बाहर आ गए.

”रश्मि कहां है, जिस ने हमें फोन किया था?’’ उन्होंने प्रश्न किया.

उस व्यक्ति ने औरतों से घिरी अपनी पत्नी रश्मि को इशारे से पास बुला लिया. रश्मि का रोरो कर बुरा हाल था.

”यहां एक जवान युवती की लाश भी है, वह कौन है?’’ एसएचओ ने रश्मि से सवाल किया.

”साहब, इस युवती का नाम सोनल है. यह ए ब्लौक में रहती है, लेकिन कुछ दिनों से इस का अपने लिवइन पार्टनर से झगड़ा चल रहा था. चूंकि मेरी इस के साथ गहरी जानपहचान बन गई थी, मैं इसे अपनी सहेली मानने लगी थी. पार्टनर से झगड़े के चलते सोनल 4-5 दिन से हमारे घर में आ कर रह रही थी. यह लाश सोनल की है.’’

”इस की हत्या कैसे हुई, मेरे कहने का मतलब है कि जब यह वारदात हुई, तुम और तुम्हारे पति क्या घर पर ही थे?’’

”नहीं साहब, मेरे पति दुर्गेश अपनी दुकान चले गए थे सुबह. उन की मजनू का टीला में ही मोबाइल रिपेयरिंग की शौप है. मेरी 2 बेटियां हैं, बड़ी बेटी का नाम दीया है, वह स्कूल जाती है. छोटी अभी 6 माह की ही थी. हम ने प्यार से इस का नाम यशिका रखा था. आज मैं दीया को लाने के लिए दोपहर में स्कूल गई तो सोनल को उस की देखभाल का जिम्मा सौंप गई थी. मैं जब दीया को स्कूल से ले कर घर आई तो घर का दरवाजा बंद था. मैं ने धक्का दिया तो वह खुल गया.

”कमरे में खून से सनी मुझे सोनल की लाश दिखी तो मेरे मुंह से चीख निकल गई. मैं घबरा कर उसे देखने अंदर घुसी तो मुझे पलंग पर यशिका भी खून से तर हालत में पड़ी मिली. यशिका और सोनल का गला किसी ने काट डाला था. मैं बदहवास हालत में बाहर भागी और चिल्ला कर मैं ने पड़ोसियों को इकट्ठा किया, फिर किसी के कहने पर थाने में फोन कर दिया. मैं ने फोन कर के पति दुर्गेश को भी घर बुला लिया.’’

एसएचओ हनुमंत सिंह ने पूछा, ”यह माना जा सकता है कि सोनल की किसी के साथ रंजिश रही होगी, वह मौका देख कर यहां आया और उस ने सोनल का गला काट दिया. लेकिन तुम्हारी बेटी तो अभी 6 महीने की ही थी, उस की हत्या भला कोई क्यों करेगा.’’

”मैं क्या कहूं साहब,’’ रश्मि रोते हुए बोली, ”इस छोटी सी बच्ची ने किसी का क्या बिगाड़ा था, वह इतनी समझदार भी नहीं थी कि हत्यारे द्वारा सोनल की हत्या करने की बात किसी को बता देती.’’

”यही तो मैं भी सोच रहा हूं.’’ हनुमंत सिंह गंभीर स्वर में बोले, ”अगर हत्यारे को यह डर हो कि उसे हत्या करते हुए जिस ने देखा है, वह यह भेद किसी को बता देगा, हत्यारा ऐसी सूरत में उस प्रत्यक्षदर्शी की हत्या करता है. यहां ऐसी बात नहीं है, फिर यशिका की हत्या क्यों की गई?’’

”दुर्गेश, क्या तुम्हारी किसी से दुश्मनी वगैरह तो नहीं थी? संभव है तुम्हारा कोई दुश्मन तुम से बदला लेने घर में घुसा, तुम नहीं मिले तो उस ने तुम्हारी बेटी का कत्ल कर दिया. सोनल की हत्या इसलिए हो गई कि वह तुम्हारी बेटी के हत्यारे से भिड़ गई…’’

”नहीं साहब. मैं ने जिंदगी में दोस्त बनाए हैं, दुश्मन नहीं. मैं सीधासादा जीवन जीने वाला व्यक्ति हूं साहब.’’ दुर्गेश रुंधे स्वर में बोला, ”मेरी फूल सी बेटी का कातिल बचना नहीं चाहिए साहब, उसे गिरफ्तार कर के आप फांसी पर चढ़ा दीजिए.’’

”कातिल कोई भी हो दुर्गेश, उसे शीघ्र ही गिरफ्तार कर लिया जाएगा.’’ हनुमंत सिंह ने कहा.

डीसीपी राजा बांटिया और एसीपी विनीता त्यागी वहां आ पहुंचे थे. उन्हें हनुमंत सिंह ने दोनों लाशें दिखाईं. डीसीपी श्री बांटिया ने वहां निरीक्षण करने के बाद एसएचओ हनुमंत सिंह से पूछा, ”आप ने कुछ मालूम किया, ये दोनों लाशें किस की हैं?’’

एसएचओ हनुमंत सिंह ने दोनों अधिकारियों को सारी जानकारी संक्षिप्त में दे दी.

एसीपी विनीता त्यागी पूरी बात सुनने के बाद बोलीं, ”मुझे ऐसा लगता है, यह हत्या सोनल के बौयफ्रेंड ने की है. चूंकि सोनल उस से नाराज हो कर अपनी सहेली रश्मि के घर आ कर रह रही थी, यह बात उसे अच्छी नहीं लगी. वह गुस्से में रश्मि की गैरमौजूदगी में यहां आया. सोनल और उस में झगड़ा हुआ. इसी झगड़े में उस ने सोनल की जान ले ली.’’

”लेकिन मैडम, इस 6 माह की बच्ची को उस ने क्यों मारा?’’ हनुमंत सिंह ने प्रश्न कर दिया.

”कातिल को पकडि़ए, इस का जवाब आप को उस से मिल जाएगा. आप यहां के सीसीटीवी फुटेज चैक करिए. सोनल के लिवइन पार्टनर को चैक कीजिए. इन दोनों हत्याओं का रहस्य इन्हीं में छिपा मिलेगा.’’ एसीपी विनीता त्यागी ने गंभीर स्वर में निर्देश दिया.

”ठीक है मैडम!’’ एसएचओ हनुमंत सिंह सिर हिला कर बोले.

फोरैंसिक टीम वहां के साक्ष्य जुटा कर अपना काम खत्म कर चुकी थी. पुलिस टीम ने वहां की जरूरी कागजी काररवाई पूरी कर के दोनों लाशें पोस्टमार्टम हेतु भिजवा दीं, फिर रश्मि और उस के पति से सोनल के लिवइन पार्टनर का पूरा एड्रैस ले कर उन्होंने एसआई नितिन शर्मा को सोनल के बौयफ्रैंड की जांच का कार्य सौंप कर वह थाने लौट गए. एसीपी विनीता त्यागी का अनुमान गलत नहीं था. उन्हें सोनल के लिवइन पार्टनर पर शक हुआ था. एसआई नितिन शर्मा ने जब ए ब्लौक में जा कर वह कमरा देखा, जिस में सोनल कई महीनों से अपने लिवइन पार्टनर के साथ रह रही थी तो वहां दरवाजे पर ताला लटका मिला.

उन्होंने फोन से यह जानकारी सिविल लाइंस थाने में दी तो थाने से उन की मदद के लिए एडिशनल एसएचओ रंधीर कुमार को मजनू का टीला भेज दिया गया. दोनों ने वहीं के पड़ोसियों से उस लिवइन पार्टनर का नाम और उस के व्यवहार के बारे में पूरी जानकारी जुटा ली. उस का नाम निखिल कुमार था. वह कुछ महीनों से यहां कमरा ले कर सोनल के साथ रह रहा था.  पड़ोसियों के अनुसार निखिल शराबी था और वह वक्तबेवक्त सोनल से लड़ताझगड़ता भी रहता था. उन में मारपीट भी होती रहती थी.

एक खास बात यह भी मालूम हुई कि सोनल हालफिलहाल गर्भवती थी. निखिल बच्चा चाहता था, किंतु सोनल ने उस की मरजी के खिलाफ वह बच्चा गिरा दिया था. निखिल इस बात से बहुत नाराज था. 4 दिन पहले उन में जबरदस्त झगड़ा हुआ था, तब सोनल अपना बैग ले कर अपनी सहेली रश्मि के यहां रहने चली गई थी. निखिल के पिता, 2 भाई और बहन भी मजनू का टीला में ही रहते थे. दोनों पुलिस अधिकारी उन का पता ले कर उन तक पहुंच गए. निखिल के विषय में पूछने पर उस की बहन मीनाक्षी (12 वर्ष) ने उपेक्षित स्वर में कहा, ”सर, हम उस के रवैए से उस के साथ कोई वास्ता नहीं रखते. वह हमारे लिए मर गया है.’’

”वह घर से लापता है, हमें केवल यह बताओ कि इस समय वह कहां छिपा हो सकता है?’’ एडिशनल एसएचओ रंधीर कुमार बोले.

”क्या उस ने कोई गुनाह किया है साहब?’’ निखिल के पिता मोहन राम ने पूछा.

”वह जिस लड़की के साथ लिवइन पार्टनर के रूप में रह रहा था, उस लड़की का आज दोपहर में कत्ल हो गया है. निखिल पर हमें शक है, इसलिए उस के बारे में हमें जानकारी चाहिए.’’ एडिशनल एसएचओ रंधीर कुमार ने कहा.

इस बार निखिल के बड़े भाई करण (25 वर्ष) ने कहा, ”सर, हमारा पैतृक घर उत्तराखंड के हल्द्वानी में है. वह वहां जा सकता है.’’ करण ने हल्द्वानी का पता लिखवा दिया.

”देखो, यदि निखिल आप लोगों से फोन से बात करे तो तुरंत हमें आप लोग वह फोन नंबर और वह कहां से बात कर रहा है, बताएंगे.’’ एसआई नितिन शर्मा ने कहने के बाद अपना मोबाइल नंबर उन्हें नोट करवा दिया.

इधर एसएचओ हनुमंत सिंह ने रश्मि-दुर्गेश के घर के आसपास के कई सीसीटीवी कैमरों की फुटेज चैक किए थे. उन्हें एक सीसीटीवी की फुटेज में निखिल रश्मि के घर चोरों की तरह जाता हुआ दिखाई दे गया. यह इस बात का पुख्ता सबूत था कि निखिल ही आज दोपहर में रश्मि के घर में आया था.

एडिशनल एसएचओ रंधीर कुमार और एसआई नितिन शर्मा ने थाने पहुंच कर निखिल के लापता होने की और उस के हल्द्वानी भाग जाने की जानकारी दी तो डीसीपी राजा बांटिया के कहने पर पुलिस की 2 टीमें उत्तराखंड के हल्द्वानी और टनकपुर के बनबसा बौर्डर के लिए भेज दी गईं. पुलिस अधिकारियों को संदेह था कि निखिल नेपाल भाग कर खुद को सुरक्षित महसूस कर सकता है. इसलिए बनबसा बौर्डर के लिए एक टीम भेजी गई थी. पुलिस की तत्परता की वजह से लव क्राइम के आरोपी निखिल को 24 घंटे में ही हल्द्वानी से गिरफ्तार कर लिया गया. निखिल ने गलती यह कर दी थी. उस ने 8 जुलाई की रात को अपनी बहन मीनाक्षी को फोन कर के बता था कि वह हल्द्वानी में है और पैसा इकट्ठा कर के नेपाल भागने की तैयारी कर रहा है.

मीनाक्षी ने उस का यह फोन नंबर पुलिस को भेज दिया था. उसे ट्रैस कर के ही पुलिस ने निखिल को हल्द्वानी दबोच लिया था. उसे 9 जुलाई, 2025 को दिल्ली लाया गया.

सिविल लाइंस थाने में डीसीपी राजा बांटिया, एसीपी विनीता त्यागी और थाने की पुलिस टीम द्वारा निखिल से पूछताछ की गई तो उस ने कुबूल कर लिया कि सोनल और रश्मि की बेटी की हत्या उस ने की थी.

”तुम ने अपनी प्रेमिका सोनल का कत्ल क्यों किया? इस क्राइम स्टोरी की सच्चाई क्या है?’’ एसएचओ हनुमंत सिंह ने निखिल से प्रश्न किया.

”साहब, वह मुझ से लड़ कर रश्मि के घर रहने चली गई थी. मैं उसे बहुत प्यार करता था, उस के बगैर रह नहीं सकता था. मैं दोपहर रश्मि के घर उस वक्त गया, जब वह अपनी बेटी दीया को लाने स्कूल गई थी. मैं ने सोनल से कहा कि वह घर चले. सोनल ने मना कर दिया कि अब वह मुझ से कोई वास्ता नहीं रखेगी, वह घर नहीं आएगी, यहीं रहेगी तो मैं ने बहुत समझाया, लेकिन वह मुझ से झगडऩे लगी. मुझे गुस्सा आ गया तो मैं ने चाकू से सोनल का गला काट डाला.’’

”तुम ने रश्मि की बेटी की हत्या किस वजह से की? उस से तो तुम्हारा कोई झगड़ा नहीं था.’’ हनुमंत सिंह ने पूछा.

”साहब, मुझे शक था कि सोनल का रश्मि के पति दुर्गेश से नाजायज रिश्ता है. कुछ महीने पहले ही सोनल गर्भवती हुई थी, इस की सब से ज्यादा खुशी मुझे हुई थी. मैं सोनल से कहता था कि हम इस बच्चे को दुनिया में लाएंगे. हम शादी कर के घर बसा लें, लेकिन सोनल ने वह बच्चा गिरवा दिया.

”मुझे संदेह था यह बच्चा दुर्गेश का था और दुर्गेश बच्चा नहीं चाहता था, इसलिए उस के कहने पर सोनल ने एबौर्शन करवाया था. मुझे दुर्गेश दुश्मन नजर आता था. सोनल उसी के चक्कर मे फंसी थी, तभी मुझ से झगड़ कर के वह बारबार उस के घर चली जाती थी. सोनल की हत्या के बाद मुझे पलंग पर दुर्गेश की बेटी सोती दिखाई दी. दुर्गेश से बदला लेने के लिए मैं ने उस का भी गला काट डाला और घर भाग आया.

”मैं सोनल को मार कर पछता रहा था, मैं खुद मरना चाहता था, लेकिन फिर मैं ने विचार बदल दिया और घर पर ताला लगा कर बैग ले कर हल्द्वानी चला गया, वहां से मैं नेपाल भाग जाना चाहता था. इस के लिए मुझे पैसे चाहिए थे.

”मैं रिश्तेदारों, दोस्तों से फोन कर के पैसे इकट्ठे कर रहा था, मैं ने इसीलिए अपनी बहन मीनाक्षी को भी फोन किया था और पैसे मांगे थे. मीनाक्षी ने मना कर दिया. मैं कहीं और से पैसों का इंतजाम कर के नेपाल भाग पाता, उस से पहले ही पुलिस ने मुझे पकड़ लिया और दिल्ली ले आई. सोनल और रश्मि की बेटी यशिका की हत्या मेरे हाथ से हो गई. इस का मुझे दुख है. मैं सोनल से बहुत प्यार करता था साहब.’’

”सोनल से तुम्हारी मुलाकात कैसे हुई थी, तुम तो शराबी आवारा और निकम्मे व्यक्ति हो.’’

”साहब, मैं शराब पीता हूं, निकम्मा नहीं हूं. मैं हल्द्वानी में था, तब भी काम करता था. यहां भी मैं तिमारपुर के एक होटल में काम करता हूं. सोनल मुझे 4 साल पहले मेरे हल्द्वानी वाले दोस्त अभय के बेटे की जन्मदिन पार्टी में मिली थी. अभय की पत्नी उस की सहेली थी. वह उसी के कहने पर नैनीताल से हल्द्वानी आई थी. नैनीताल में उस के परिजन रहते हैं. मैं ने सोनल को पार्टी में देखा तो उसे दिल दे बैठा. सोनल ने भी मेरा प्यार स्वीकार कर लिया.

”वह हल्द्वानी में 2-3 दिन के लिए आई थी, लेकिन मुझ से मुलाकात होने पर वह वापस नैनीताल नहीं गई. मैं ने हल्द्वानी में सोनल को खूब सैरसपाटा करवाया. वह वहां मेरे साथ रहने लगी. हमारे अनैतिक संबंध इस बीच बन गए थे, जिस से सोनल गर्भवती हो गई.

”हम एबौर्शन करवाना चाहते थे, किंतु समय अधिक हो जाने से सोनल का एबार्शन नहीं हो सका. समय पर सोनल को एक बेटा हुआ. चूंकि हम अविवाहित थे, इसलिए हम ने अल्मोड़ा में वह बच्चा 2 लाख रुपए में एक जरूरतमंद दंपति को बेच दिया. हम 2 लाख रुपया ले कर दिल्ली आ गए.

”पहले हम वजीरपुर गांव में एक किराए का कमरा ले कर रहते रहे. फिर वहां से हम मजनू का टीला में रहने आ गए. तब से हम यहां ही रह रहे थे. मैं चाहता था कि मैं सोनल से शादी कर के घर बसा लूं, लेकिन सोनल पता नहीं क्यों मुझ से शादी नहीं करना चाहती थी.

”अब उस की मौत के बाद मैं सोचता हूं, सोनल ठीक ही सोचती थी. मैं तिमारपुर में वेटर का काम करने लगा था तो मुझे शराब की गंदी आदत पड़ गई थी. मैं बातबात पर सोनल से लड़ता भी था, इसलिए वह मेरे साथ गृहस्थी नहीं बसाना चाहती थी. आज मेरे हाथों ही वह मारी गई है साहब. मैं अच्छा प्रेमी साबित नहीं हो सका.’’ एकाएक निखिल फफकफफक कर रोने लगा.

एसएचओ हनुमंत सिंह ने रश्मि और दुर्गेश को थाने बुलाया और रश्मि को वादी बना कर निखिल के खिलाफ सोनल और यशिका की हत्या का केस बीएनएस की धारा 103(1) के तहत केस दर्ज कर लिया. दूसरे दिन निखिल को कोर्ट मे पेश कर के 5 दिन की पुलिस रिमांड पर ले लिया गया. उस से हत्या में प्रयुक्त चाकू और सोनल का मोबाइल नंबर पुलिस ने जब्त कर लिया.

सोनल के घर नैनीताल में उस की हत्या की सूचना भेज दी गई थी. उस के पापा गिरीश चंद आर्या अपनी बेटी से मुंह मोड़ चुके थे, लेकिन जब उन्हें सिविल लाइंस थाना, दिल्ली से सोनल की हत्या की सूचना दी गई तो परिवार सहित वह दिल्ली आ गए. पुलिस ने सोनल की लाश पोस्टमार्टम के बाद उन के हवाले कर दी. रश्मि और दुर्गेश की बेटी की डैडबौडी पुलिस ने उन्हें सौंपी तो वह फूटफूट कर रोने लगे. उन के रुदन ने पुलिस वालों की भी आंखें नम कर दीं. एक अधूरे प्रेम कहानी का यह बहुत दुखद अंत था. Crime News in Hindi