Love Crime : गर्लफ्रेंड ने लोहे की रौड से किया बॉयफ्रेंड का कत्ल

Love Crime : कहा जाता है कि कई रोगों में कड़वी दवाई ज्यादा असरकारक होती है. रूमाना और अफजल को भी अपनी शादीशुदा जिंदगी को पटरी पर लाने के लिए कड़वा घूंट पीना पड़ा, मुझे भी. पढ़ें कैसे…

उस दिन जो क्लायंट मुझ से मिला, वह कुछ अजब किस्म का था. उस ने अपना नाम अफजल बताया. वह फ्रूट का धंधा करता था. उस की परेशानी यह थी कि वह अपनी बीवी रूमाना को तलाक दे चुका था और उस की एकलौती बेटी को उस की बीवी रूमाना साथ ले गई थी. वह अपनी बेटी को वापस लेना चाहता था. मांबेटी अपने घर में रह रहे थे. अफजल को घर से निकलना पड़ा, क्योंकि घर रूमाना के नाम पर था. यह मकान महमूदाबाद बाजार के सिरे पर था. मकान के बाहरी हिस्से में एक दुकान थी, मकान का रास्ता बाजू वाली गली से था. 3 कमरों के इस घर में अफजल की छोटी सी फैमिली आराम से रह रही थी कि फरीद की नजर लग गई.

फरीद हसन 45 साल का हैंडसम आदमी था, लेकिन बेहद चालाक. वह इन लोगों का किराएदार था. बाहरी हिस्से वाली दुकान में उस ने एस्टेट एजेंसी खोल रखी थी. मकान रूमाना के नाम था इसलिए उस ने फरीद को अपनी मरजी से दुकान दी थी, जबकि अफजल इस के खिलाफ था. रूमाना सरकारी नौकरी में थी, ऊपर की आमदनी भी अच्छी थी. यह घर उसी ने बनाया था. थोड़ा पैसा अफजल का भी लगा था. वैसे उस की ज्यादा आमदनी नहीं थी. वह मंडी से माल उठाता और घरों में पहुंचा देता. ज्यादातर ग्राहक फिल्म इंडस्ट्री के थे और अफजल को जुनून की हद तक फिल्मों में काम करने का शौक था. कोई छोटा एक्टर भी उसे फिल्मों में काम दिलाने की उम्मीद दिखाता, तो उसे वह फ्री में फल सब्जी पहुंचा कर फिल्म में काम मिलने की उम्मीद में उस की खिदमत करता रहता.

अभी तक उसे कोई चांस नहीं मिला था, क्योंकि अफजल के पास न हुनर था न कोई सोर्स और न किसी डायरेक्टर से पहचान. अफजल के इस शौक से उस की बीवी रूमाना नाराज रहती थी क्योंकि फायदा कुछ नहीं था, उलटा नुकसान होता था. इस बात पर दोनों में तकरार भी होती. वह समझाता, ‘‘देखना रूमाना, मैं जल्द टीवी के ड्रामों में नजर आऊंगा. फिर मेरे पास कार बंगला सब कुछ होगा.’’

इस लड़ाई में कभी बेटी फरजाना मां का साथ देती थी. 16-17 साल की फरजाना मैट्रिक की स्टूडेंट थी. कभी झुंझला कर कह देती, ‘‘आप दोनों कभी नहीं सुधरेंगे. इसी तरह लड़तेलड़ते जिंदगी गुजर जाएगी.’’

बेटी को बहलाने के लिए अफजल ने वादा किया, ‘‘अब ये सब छोड़ कर मैं काम में दिल लगाऊंगा.’’

कुछ दिन तो सुकून से गुजरे. फिर एक नया किस्सा शुरू हो गया. दुकान का किराएदार फरीद अकसर रूमाना से मिलने आने लगा. पहले तो वह महीने में 2-4 बार आता था, अब उस की आमद बढ़ गई थी. अफजल को उस का आनाजाना पसंद नहीं था. उस की आवाजाही बढ़ी तो अफजल ने ऐतराज किया, जिस से मेलमुलाकात रुक गई थी, फिर वह अफजल की गैरमौजूदगी में भी आने लगा. अब रूमाना ने बाहर मिलना भी शुरू कर दिया. यह बात भी अफजल को पता चल गई. अभी तकरार चल ही रही थी कि अचानक एक दिन अफजल बेटाइम घर पहुंच गया, उस ने दोनों को घर में ही रंगेहाथों पकड़ लिया.

अफजल गुस्से से पागल हो गया. फरीद भाग निकला. पतिपत्नी की जोरदार लड़ाई हुई. अफजल बोला, ‘‘बेगैरती और बेशर्मी की हद हो गई, एक जवान लड़की के होते हुए पराए मर्द से ताल्लुक रखती हो. ये मैं बरदाश्त नहीं कर सकता.’’

रूमाना भी चीख कर बोली, ‘‘बेगैरत तुम हो, तुम अपनी बीवी पर इलजाम लगा रहे हो मेरी उस की दोस्ती है, हम अपना दुखसुख बांट लेते हैं.’’

तकरार गालीगलौज पर पहुंच गई और तलाक पर खत्म हुई. घर रूमाना के नाम पर था. अफजल को बोरियाबिस्तर बांध कर घर छोड़ना पड़ा. बेटी फरजाना मां के पास रह गई. अब अफजल कोर्ट में केस करने के लिए मेरे पास आया था कि मैं मुकदमा लड़ कर उस की बेटी उस के हवाले कर दूं. मैं ने उसे कहा, ‘‘देखो अफजल, तुम ने रूमाना को तलाक दे दी है. अगर तुम तलाक न देते तो वह खुला (औरत तलाक मांग लेती है) ले लेती. तुम्हारे साथ हरगिज न रहती. अब तुम चाहते हो कि कोर्ट के जरिए फरजाना को रूमाना की कस्टडी से निकाल कर तुम्हारे हवाले कर दूं.’’

‘‘हां वकील साहब, मैं हर कीमत पर अपनी बेटी को अपने पास लाना चाहता हूं. उस बेशर्म औरत की संगत में वह बिगड़ जाएगी. आप सारी बातें छोड़ें और मुकदमा लड़ कर मुझे मेरी बेटी दिला दें, मैं उस से बहुत प्यार करता हूं. मैं महीने में एक बार मिलने पर तसल्ली नहीं कर सकता. आप केस लड़ें.’’

‘‘केस लड़ने के लिए 3 बातों पर गौर करना जरूरी है, तभी मैं आप का केस ले सकता हूं.’’

‘‘कौन सी 3 बातें…जल्द बताइए.’’

‘‘पहली बात तो यह कि क्या आप के पास अपना घर है?’’

‘‘नहीं, मेरे पास अपनी रिहाइश नहीं है. मेरे दोस्त बशीर का एक होटल है, उस की ऊपरी मंजिल पर स्टाफ की रिहाइश के लिए कुछ कमरे बने हैं, उन्हीं में से एक में मैं रहता हूं.’’

‘‘अगर आप के पास घर नहीं है तो यह पौइंट आप के मुखालिफ जाता है. कोर्ट लड़की को होटल में स्टाफ के लिए बने कमरों में रखने की इजाजत नहीं देगी, जबकि मां के पास खुद का घर है. दूसरा मुद्दा यह है कि क्या आप इतना कमा लेते हैं कि बेटी व उस के महंगे स्कूल का खर्च उठा सकें?’’

‘‘मैं कमा तो लेता हूं पर आमदनी रेग्युलर नहीं है. उस का स्कूल काफी महंगा है.’’

‘‘तीसरा सवाल जो सब से जरूरी है, आप की बेटी मैट्रिक में पढ़ रही है, समझदार है. क्या वह आप के पास रहने को राजी है या मां के पास रहना चाहती है?’’

‘‘ये तो जाहिर सी बात है कि वह अपनी मां के साथ रहना पसंद करती है.’’

‘‘देखिए अफजल साहब, कोर्ट औलाद की कस्टडी के लिए इन्हीं 3 बातों पर गौर करती है. इन 3 खास मुद्दों पर आप का जवाब नेगेटिव है, कोर्ट कभी भी आप को लड़की की कस्टडी नहीं देगी और आप को साफ बात बता दूं, मैं भी आप का केस नहीं लड़ सकता. मैं बेवजह आप से पैसे झटकना नहीं चाहता. हकीकत में आप का केस बहुत कमजोर है. जीतने का कोई चांस नहीं है.’’

उस दिन अफजल मेरे पास से बेहद मायूस हो कर गया. अब दोबारा आने की उम्मीद नहीं थी, पर कुछ दिनों बाद होटल के मालिक बशीर भाई मेरे सामने आ खड़े हुए. पहले मैं उन का एक केस लड़ चुका था और वह मुकदमा जीत गए थे. उन्होंने ही अफजल को मेरे पास भेजा था. आज वह फिर मेरे सामने खड़े थे. बोले, ‘‘बेग साहब, अफजल बड़ी मुसीबत में फंस गया है. वह जेल में बंद है. पुलिस ने उसे फरीद के कत्ल के इलजाम में गिरफ्तार किया है.’’

‘‘फरीद वही न, एस्टेट एजेंट, जिस की वजह से अफजल ने अपनी बीवी को तलाक दी थी.’’

‘‘जी हां, वही अफजल और वही एस्टेट एजेंट फरीद. उसी के कत्ल के इलजाम में पुलिस ने कल सुबह उसे अदालत में पेश किया और 7 दिन का रिमांड हासिल कर लिया.’’

‘‘कब हुआ ये कत्ल?’’

‘‘कत्ल 15 मई को हुआ था. उसी दिन दोपहर को मेरे होटल से उसे गिरफ्तार कर लिया गया. वह सीधा, कुछ बेवकूफ जरूर है पर वह कत्ल नहीं कर सकता. बहुत डरपोक आदमी है. मैं उसे सालों से जानता हूं, उस के खिलाफ साजिश की गई है. मेरा शक तो रूमाना पर जाता है.’’

‘‘ठीक है, मैं आज थाने जा कर अफजल से मिलता हूं. आप को पक्का यकीन है न कि वह बेकुसूर है? आप केस के बारे में और मालूमात करें. उस ने मेरी फीस अदा कर दी.’’

उसी दिन शाम को मैं उस थाने पहुंच गया, जहां अफजल बंद था. मुझे देख कर उस के चेहरे पर रौनक आ गई. वह दुखी हो कर बोला, ‘‘देखिए सर, मुझे बेवजह इस केस में फंसा दिया गया है.’’

‘‘इसीलिए तो मैं ने तुम्हारा केस हाथ में लिया है. चलो, मुझे सब कुछ सचसच बता दो.’’

वह बोला, ‘‘आप पूरी कोशिश कर के मुझे मौत से बचा लीजिए, भले ही मुझे थोड़ी सजा हो जाए. मैं फरजाना की शादी अपने हाथों से करना चाहता हूं.’’

मुझे थोड़ा ताज्जुब हुआ. मैं ने उसे तसल्ली दी, ‘‘तुम जल्द रिहा हो जाओगे, पर सच बोलना.’’

उस ने जो किस्सा सुनाया, उस का खुलासा यह है कि वह मेरा पहला मुलजिम था, जो थोड़ी सजा पर राजी था. जेहन में खयाल भी आया कि कहीं ये मुजरिम तो नहीं है जो कुछ उस ने कहा, मैं आप को बताता रहूंगा. रिमांड पूरी होने पर पुलिस ने अदालत में चालान पेश कर दिया. इस मौके पर मैं ने जमानत की कोशिश की पर मंजूर नहीं हुई. उसे जेल भेज दिया गया. पोस्टमार्टम की रिपोर्ट के मुताबिक कत्ल 15 मई को दिन के 11 बजे हुआ था. एक लोहे की रौड फरीद के सिर पर मारी गई थी, जिस से खोपड़ी चटक गई थी. मौत की जगह रूमाना का ड्राइंगरूम था. दूसरी पेशी 15 दिन बाद थी. मेरे पास तैयारी के लिए काफी टाइम था. बशीर जानकारी जुटाने में लगा था. वह अफजल का पक्का दोस्त था.

जब अदालत शुरू हुई तो जज ने अफजल को उस का जुर्म बताया. उस ने कत्ल से साफ इनकार कर दिया. इस्तगासा की तरफ से 6 गवाहों को पेश किया गया था, जिस में अफजल की एक्स वाइफ रूमाना भी थी. अफजल का बयान नोट कराया गया जो काफी सटीक था. अदालत की इजाजत से इस्तगासा के वकील ने पूछताछ शुरू की. उस ने पूछा, ‘‘क्या तुम इस बात से इनकार करते हो कि तुम मकतूल से नफरत करते थे और उसी नफरत में तुम ने फरीद का खून कर दिया?’’

‘‘मैं ने फरीद का कत्ल नहीं किया.’’ उस ने दोटूक कहा.

‘‘आलाए कत्ल पर तुम्हारे फिंगरप्रिंट्स मिले हैं.’’

‘‘मुझे नहीं मालूम रौड पर मेरे फिंगरप्रिंट्स कैसे आए?’’

‘‘क्या फरीद तुम्हारा किराएदार रहा था?’’

‘‘नहीं, वह मेरा नहीं मेरी एक्स वाइफ का किराएदार था.’’

‘‘क्या तुम ने फरीद की वजह से रूमाना को तलाक नहीं दी थी, तुम उस पर झूठा शक करते थे?’’

‘‘मैं ने कोई झूठा शक नहीं किया, जो हकीकत थी वह बरदाश्त से बाहर थी. मुझे तलाक देनी पड़ी.’’

वकील इस्तगासा कोई खास बात मालूम नहीं कर सका. बारी आने पर मैं ने बौक्स में खड़े हो कर पूछा, ‘‘इस्तगासा के 3 गवाहों ने दावा किया है कि तुम्हें कत्ल के दिन मौकाएवारदात पर देखा गया. तुम 15 मई को वहां क्या कर रहे थे?’’

वह मुझे हवालात में बता चुका था. बात मेरे पक्ष में थी, इसलिए मैं ने पूछा तो अफजल ने जवाब दिया, ‘‘मैं अपनी बेटी फरजाना से मिलने गया था.’’

‘‘तुम्हारी मुलाकात पार्क या बाहर होती थी, उस दिन तुम घर क्यों गए थे?’’

‘‘यह चेंज रूमाना के कहने पर हुआ था. हर महीने की 15 तारीख को मैं अपनी बेटी से पार्क में मिलता था. रूमाना उसे ले कर आती थी. पर इस बार 14 मई की शाम उस ने मुझे कहलवाया कि फरजाना की तबीयत ठीक नहीं है. वह पार्क नहीं आएगी. इस बार साढ़े 11 बजे उस से मिलने घर आ जाओ. फरजाना घर पर अकेली होगी, मुझे शौपिंग के लिए बाहर जाना है. वापसी लगभग एक बजे होगी. इस बीच मैं अपनी बेटी से मिल सकता हूं. मेरी कोई गलती नहीं, उस के कहने पर मैं घर गया था.’’

‘‘अच्छा, सोच कर बताओ, तुम कितने बजे रूमाना के घर पहुंचे थे?’’

‘‘मैं ठीक 12 बजे उस के घर पहुंचा था.’’

मैं ने जज से कहा, ‘‘जनाबेआली, पोस्टमार्टम रिपोर्ट के अनुसार कत्ल 10 से 11 बजे के बीच हुआ. मुलजिम वहां 12 बजे पहुंचा था. यह पौइंट नोट किया जाए.’’

जज ने सिर हिला कर सहमति जताई. वकील इस्तगासा बोला, ‘‘टाइम गलत भी बताया जा सकता है, जान बचाने की खातिर. मिसेज रूमाना ने भी इस बात से इनकार किया है कि उस ने अफजल को ऐसा कोई मैसेज दे कर 12 बजे घर बुलाया था. ये बनाई हुई कहानी है.’’

‘‘यह बात मिसेज रूमाना से गवाही के समय पूछी जा सकती है.’’

‘‘जनाबेआली सब से बड़ा सबूत यह है कि आलाए कत्ल पर मुलजिम की अंगुलियों के निशान पाए गए. जब वह 12 बजे पहुंचा था तो आलाए कत्ल पर उस की अंगुलियों के निशान क्यों पाए गए?’’

‘‘आप परेशान न हों, इस का जवाब भी मिल जाएगा. हां, अफजल जब तुम रूमाना के घर पहुंचे तो तुम ने वहां क्या देखा?’’

‘‘मुझ से कहा गया था कि फरजाना घर पर अकेली होगी.’’

‘‘तो क्या फरजाना से तुम्हारी मुलाकात हुई?’’

‘‘दरवाजे के दोनों पट भिड़े हुए थे. मैं अंदर पहुंचा तो फरजाना नहीं, वहां फरीद की लाश पड़ी थी. वह सोफे पर उलटा पड़ा था और उस की खोपड़ी चटकी हुई थी. खून से कपड़े व सोफा गीला हो गया था. मैं वहां से उलटे पांव निकल गया, पर दोपहर को मुझे पुलिस ने होटल के कमरे से गिरफ्तार कर लिया. बशीर भाई ने लाख दलीलें दीं पर कुछ नहीं हुआ.’’

‘‘क्या तुम ने मौकाएवारदात पर लोहे की रौड को पकड़ा था?’’

‘‘वकील साहब, मैं ने किसी चीज को हाथ नहीं लगाया. इतना भी बेवकूफ नहीं हूं मैं.’’

‘‘पर आलाए कत्ल पर तुम्हारी अंगुलियों के निशान हैं.’’

‘‘यह बात मेरी समझ से बाहर है, ये कैसे हुआ?’’

‘‘उस आदमी का नाम क्या है जो 14 मई को रूमाना का संदेश ले कर तुम्हारे पास आया था?’’

‘‘वकील साहब, मैं उस बंदे के नाम से वाकिफ नहीं हूं. उस दिन मैं ने उसे पहली बार देखा था.’’

फिर उस दिन अदालत का वक्त खत्म हो गया. जिस तरह अफजल ने अदालत में जवाब दिए, उस से वह जरा भी नर्वस नहीं लग रहा था. ऐेसे केस लड़ने का एक अलग ही मजा है. अगली 2 पेशियों में इस्तगासा के 5 गवाह पेश हुए, उन में से एक खुरशीद था, अख्तर कालोनी में रहता था. उस ने हलफ ले कर अपना बयान दिया. वकील ने उस से अफजल के बारे में पूछा तो उस ने कहा, ‘‘जब अफजल और रूमाना का तलाक नहीं हुआ था, मैं भी उन का किराएदार था. अफजल अकसर दुकान पर आता था पर तलाक के बाद उसे घर छोड़ना पड़ा.’’

‘‘उस के बाद तुम्हारी उस से कभी मुलाकात हुई थी?’’

‘‘एकदो बार राह चलते सलामदुआ हुई. 15 मई को वाकए के दिन वह मेरी दुकान के सामने वाली गली में गया था, जिस के अंदर रूमाना का घर है.’’

‘‘अफजल तुम से रूमाना के बारे में क्या कहता था?’’

‘‘वह रूमाना के बारे में कुछ नहीं कहता था, इधरउधर की बातें होती थीं. उस की बातों से पता लगता था कि वह फरीद को पसंद नहीं करता. वह बहुत चालाक व फितना आदमी था, जो हुआ अच्छा हुआ. अफजल उस से परेशान था.’’

‘‘अफजल उस से किस वजह से नफरत करता था कि उस की बातें सुन कर तुम भी फरीद को नापसंद करने लगे.’’

‘‘जनाब, उस ने एक हंसताखेलता घर तोड़ डाला. दोनों के बीच फरीद ने ही आग लगाई थी.’’

‘‘क्या आप को लगता है कि तलाक का जिम्मेदार फरीद था? क्या अफजल का रूमाना पर शक सही था?’’

‘‘ये मुझे नहीं मालूम पर अफजल ने जो कुछ कहा, उस से यही लगता है कि वह फरीद से नफरत करता था.’’

वकील ने कहा, ‘‘जनाबेआली, 15 मई को उसे अपनी नफरत निकालने का मौका मिल गया. उस ने फरीद को ठिकाने लगा दिया.’’

उस की जिरह खत्म होने पर मैं खड़ा हुआ, ‘‘खुरशीद साहब, आप किस चीज का बिजनैस करते हैं? आप की टाइमिंग क्या है?’’

‘‘मैं कपड़े का कारोबार करता हूं. साढ़े 12 बजे तक अपनी दुकान खोलता हूं. 15 मई को मैं ने 12 बजे दुकान खोली थी.’’

‘‘आप ने 15 मई को मुलजिम को रूमाना के घर वाली गली में जाते देखा था?’’

‘‘जनाब उस वक्त 12 बजे थे. अफजल मेरी दुकान के सामने से निकल कर उस के घर वाली गली में गया था.’’

मैं जज से मुखातिब हुआ, ‘‘सर, पोस्टमार्टम की रिपोर्ट में मौत का टाइम 10 से 11 बजे है, मुलजिम 12 बजे उस तरफ जाते देखा गया, इसलिए कातिल कोई और है.’’

वकील इस्तगासा जल्दी से बोला, ‘‘हो सकता है उस दिन खुरशीद भाई ने दुकान जल्दी खोल ली हो.’’

‘‘होने को तो बहुत कुछ हो सकता है. खुरशीद भाई झूठ क्यों बोलेंगे? और फिर उन्होंने मुलजिम को गली की तरफ जाते देखा है, घर में घुसते हुए नहीं देखा.’’

इस के बाद पड़ोसन जकिया आपा की गवाही हुई. जकिया आपा को हर आएगए पर निगाह रखने का शौक था. जकिया आपा से पूछताछ में वकीले इस्तगासा नहीं मिसेज रूमाना का तलाक का मामला भी उठा. उस की गवाही से यह साबित हुआ कि अफजल 15 मई को 12 बजे के आसपास मिसेज रूमाना के घर गया था. मेरी बारी आने पर मैं ने कहा, ‘‘जकिया, आप की क्या हर आनेजाने वाले पर नजर रहती है?’’

‘‘मेरा घर रूमाना के घर के सामने है. गली का रास्ता साफ दिखता है. मैं ने अफजल को जाते देखा था. तलाक के पहले फरीद को भी आतेजाते देखती थी. उसे मैं ने समझाया भी था कि पराए मर्द से मेलजोल रखना गलत है पर उस पर असर नहीं हुआ. मैं ने तो तलाक के बाद भी रूमाना को समझाने का फैसला किया था, पर एक ऐसी बात सुनने में आई कि मैं पीछे हट गई.’’

‘‘आप ने ऐसी क्या बात सुन ली कि रूमाना को सही राह पर लाने का इरादा ही छोड़ दिया?’’

जकिया आपा मायूसी से बोली, ‘‘मैं ने सुना कि रूमाना ने फरीद से निकाह कर लिया है, अब समझाने को कुछ नहीं बचा था.’’

‘‘दैट्स आल योर औनर,’’ कह कर मैं ने जिरह खत्म कर दी. अगली पेशी पर मेरे सामने मिसेज रूमाना खड़ी थी. मैं ने इस पेशी के लिए अच्छाखासा होमवर्क किया था. यह खास गवाह थी. उसे पछाड़ने के लिए मैं ने 2-3 लोग तैयार कर रखे थे. रूमाना 35-40 साल की होगी. काफी खूबसूरत, कपड़े भी मौडर्न और कीमती पहने थी. मैं ने एक खास अंदाज में अपनी जिरह शुरू की, ‘‘मिसेज रूमाना, मैं आप की नाखुश जिंदगी के बारे में कुछ नहीं पूछूंगा, वह सब को मालूम है पर इतना जरूर कहूंगा कि अफजल बदकिस्मत है कि उस ने आप जैसा नायाब हीरा खो दिया.’’

मेरी बात सुन कर वह गुरूर से मुसकराई, फिर कहा, ‘‘मैं यह सोच कर परेशान थी कि माज़ी व अफजल की बातें कर के मुझे बोर किया जाएगा.’’

‘‘जहां जरूरी है वहां तो कहना पड़ेगा. आप ये बताइए कि मेरे क्लायंट अफजल का दावा है कि आप ने उसे 15 मई को 12 बजे फरजाना से मिलने अपने घर बुलाया था. आप का इस बारे में क्या कहना है?’’

‘‘फरजाना 8 बजे स्कूल जाती है और 2 बजे वापस आती है. क्या मैं पागल हूं जो खाली घर में उसे बेटी से मिलने बुलाऊंगी. मैं ने उसे नहीं बुलाया था.’’

‘‘यानी आप ने 14 मई को उसे कोई मैसेज नहीं भेजा था?’’

‘‘जी हां, मैं ने उसे कोई मैसेज नहीं भेजा था. उसे अदाकारी का बहुत शौक है, ये सारी ड्रामेबाजी है.’’

मैं ने आलाए कत्ल उठा लिया और उस से पूछा, ‘‘क्या आप इसे पहचानती हैं?’’

लोहे की रौड को देखते हुए वह ऐतेमाद से बोली, ‘‘ये वही रौड है, जिस से आप के क्लायंट ने फरीद का खून किया था. इस के एक सिरे पर खून व बाल चिपके हुए हैं. दूसरे सिरे पर अफजल के फिंगरप्रिंट्स हैं. स्टोरी इज वेरी क्लियर.. आप अपने क्लायंट को बहुत मासूम समझते हैं. एम आई राइट?’’

‘‘राइट. पर अगर मेरी नजर में क्लायंट खूनी होता तो मैं ये केस ही नहीं लेता. खैर, ये बताइए आप ने ये खतरनाक रौड अपने घर में क्यों रख रखा था?’’

‘‘इस रौड से मेरा कोई ताल्लुक नहीं है. हो सकता है आप का क्लायंट ही इसे छिपा कर साथ लाया हो.’’

‘‘क्या वह मकतूल को भी अपने साथ लाया था?’’

‘‘हो सकता है लाया हो, बहलानेफुसलाने में वह एक्सपर्ट है. संभव है, ड्रामेबाजी कर के ले आया हो.’’

‘‘पर मुझे तो पता लगा है कि फरीद आप से मिलने आप के घर आता था.’’

‘‘सौ फीसदी सच. वह मुझ से मिलने आता था.’’

‘‘मैं ने सुना है आप ने उस से निकाह कर लिया था,’’ मैं ने उस के सिर पर बम गिराते हुए पूछा.

वह टस से मस न हुई. ऐतमाद से बोली, ‘‘ये गंदे जहनों की गंदी सोच है. दरअसल मैं घर बदलना चाहती थी. फरीद की एस्टेट एजेंसी थी. मैं उस से सलाह कर के डिफेंस में एक फ्लैट लेना चाह रही थी, इसलिए वह मेरे पास आता रहता था. यह बात इसलिए बता रही हूं कि गंदे जहनों की गंदगी भी साफ हो जाए.’’ वह ताने के अंदाज में बोली.

‘‘यह भी तो हकीकत है कि वह हमेशा आप की बेटी की गैरमौजूदगी में आता था. जब आप अकेली होती थीं.’’

‘‘ये सच है. उसे मैं फरजाना की गैरमौजूदगी में बुलाती थी, क्योंकि उसे फरीद का घर आना कतई पसंद न था और वह अपने घर से बहुत मोहब्बत करती थी.

‘‘इसे बेचने के लिए राजी नहीं थी. इसलिए फरीद को मैं उस की गैरमौजूदगी में ही बुलाती थी. मैं ने सोचा था कि उस की जानकारी में लाए बिना डिफेंस में घर फाइनल कर लूं, बाद में उसे मना लूंगी. अब तो आप को व अदालत दोनों को तसल्ली हो गई होगी.’’

वह अल्लाह की बंदी मेरे हर बाउंसर को बड़ी खूबसूरती से हुक कर के बाउंडरी के बाहर फेंक रही थी. पर मैं भी हथियार फेंकने को राजी न था, मैं ने पूछा, ‘‘क्या 15 मई को सुबह भी मकतूल को आप से मिलने आना था?’’

‘‘नहीं, ऐसा कोई प्रोग्राम नहीं था. अगर उसे आना होता तो मैं घर पर होती.’’

‘‘वाकए के दिन आप कितने बजे घर से निकली थीं?’’

‘‘मैं करीब साढ़े 9 बजे घर से रवाना हुई थी और करीब साढ़े 12 बजे वापसी हुई थी. उस दिन मुझे टेलर के पास जाना था और किचन के लिए ग्रोसरी लेनी थी.’’ उस ने तीखे लहजे में कहा.

‘‘अगर मैं गलत नहीं हूं तो आप के टेलर का नाम तारिक है. उस की दुकान मेन रोड पर है जबकि आप ग्रोसरी बड़े बाजार के अलीबख्श से खरीदती हैं.’’

‘‘हां, आप सही फरमा रहे हैं.’’ वह अचरज से बोली. पहली बार उस के चेहरे पर उलझन नजर आई. पर लहजे का ऐतमाद वैसा ही था.

‘‘मिसेज रूमाना, वारदात के दिन पहले आप टेलर के पास गई थीं फिर ग्रोसरी लेने गई थीं?’’

‘‘मैं पहले टेलर के पास गई थी,’’ वह सोच कर बोली.

‘‘मैडम, पहले आप सामान लेने गई थीं, आप भूल रही हैं.’’ मैं ने सिक्सर मारते हुए कहा.

वह चौंक कर बोली, ‘‘आप यह बात इतने विश्वास से कैसे कह सकते हैं?’’

‘‘मेनरोड की कोई भी दुकान 12-साढे़ 12 बजे से पहले नहीं खुलती, जबकि बड़ा बाजार में 9 बजे से रौनक लग जाती है.’’

‘‘वकील साहब, आप काफी स्मार्ट और इंटेलिजेंट हैं. मैं आप की इस बात को मानती हूं कि मैं पहले बड़ा बाजार अलीबख्श की दुकान पर गई थी, उस के बाद टेलर के पास गई थी.’’

‘‘मैडम, आखिरी सवाल. क्या 15 मई को आप अलीबख्श से ग्रोसरी ले कर अपने टेलर से अपना काम करवाने में कामयाब हो गई थीं?’’

‘‘हां, हंडरेड परसेंट.’’ वह ढिठाई से बोली.

‘‘एकदम बकवास. एकदम गलत. तुम झूठ बोल रही हो. अदालत की आंख में धूल झोंक रही हो.’’ मैं ने तेज लहजे में कहा.

‘‘योर ओनर,’’ इस्तगासा के वकील ने आवाज उठाई, ‘‘वकील साहब मेरे क्लायंट से बदतमीजी कर रहे हैं. ये ज्यादती है.’’

जज ने मुझ से कहा, ‘‘ये क्या है बेग साहब?’’

मैं ने ठहरे हुए लहजे में कहा, ‘‘जनाबे आली, ये तो कुछ भी नहीं है. असल माल तो बाहर इंतजार कर रहा है. मैं अदालत की इजाजत से 2 गवाह किराना मर्चेंट अलीबख्श और टेलर तारिक को गवाही के लिए बुलाना चाहता हूं.

‘‘टेलर तारिक आप को बताएंगे कि 15 मई के दिन उन की शौप सारा दिन बंद रही थी, क्योंकि किसी की मौत की वजह से वह अपने गांव गए थे और दूसरे दिन आए. साथ ही अलीबख्श सबूत के साथ अदालत को हकीकत बताएंगे कि मैडम रूमाना ने 14 मई को उन की दुकान से ग्रोसरी खरीदी थी. बिल बुक में रसीद मौजूद है.’’

मेरे दोनों गवाहों ने सबूत के साथ गवाही दे कर यह साबित कर दिया कि रूमाना सरासर झूठ बोल रही थी. इस के बाद अदालत में जो कुछ हुआ, आप अंदाजा नहीं लगा सकते. इस गवाही से रूमाना को बुरी तरह बौखला जाना चाहिए था, पर ऐसा नहीं हुआ. वह आराम से विटनेस बौक्स में खड़ी रही. जज ने कड़े लहजे में रूमाना से कहा, ‘‘मिसेज रूमाना आप ने अदालत से झूठ क्यों बोला?’’

रूमाना के बजाए अफजल ने हथकड़ी वाला हाथ ऊपर कर के कहा, ‘‘जनाबेआली, मैं कुछ कहना चाहता हूं.’’

जज ने इजाजत दे दी. मेरा क्लायंट बोला और ऐसा बोला कि उस ने मेरी मेहनत की धज्जियां बिखेर दीं. मैं उस कलाकार की अदाकारी देखता रह गया. वह बड़े भावुक अंदाज में बोल रहा था, ‘‘जनाबेआली, मेरा जमीर मुझ पर थूक रहा था, अब मैं खामोश नहीं रह सकता. मैं लगातार अदालत से, वकील साहब से और अपने दोस्त बशीर भाई से झूठ बोलता रहा. हकीकत यह है कि मैं काफी दिनों से मकतूल का पीछा कर रहा था.

‘‘वारदात के दिन मैं उसे बहलाफुसला कर अपनी एक्स वाइफ के घर ले कर गया. उस दिन रूमाना घर पर मौजूद नहीं थी. मकतूल मेरी चाल में आ गया. ड्राइंग रूम में मैं ने उसे मौत के घाट उतारा लेकिन मेरे जाने के पहले रूमाना आ गई.

‘‘फिर हम ने मिल कर एक स्कीम बनाई, जिस में फरीद के कत्ल का इलजाम मुझ पर आए. रूमाना पर किसी का शक न जाए, फिर सब कुछ वैसा ही होता चला गया जैसा हम ने चाहा था. पर मेरे होशियार वकील ने मुझे शक के दायरे से निकाल कर रूमाना के लिए फांसी का फंदा तैयार कर दिया. हालांकि मैं ने अपने वकील साहब से कहा था कि भले ही अगर बाइजज्जत बरी न करा सकें तो कोई बात नहीं, मुझे थोड़ी सजा दिलवा दें, पर जहीन वकील ने हकीकत खोल दी. जैसा मैं ने सोचा था उस का उलटा हो गया.

‘‘मजबूरन अपने जमीर की आवाज पर मुझे अपनी जुबान खोलनी पड़ी. मैं खुदा को हाजिरनाजिर जान कर इस बात का इकरार करता हूं कि मैं मुजरिम हूं, खून मैं ने किया है. उम्मीद है मेरे इकबाली बयान के एवज में अदालत मुझ पर रहम खा कर कम से कम सजा देगी. फरीद ने मेरा घर उजाड़ दिया था, मुझे दरबदर कर दिया था.’’

जज ने मेरी तरफ देखते हुए पूछा, ‘‘बेग साहब, अब आप क्या कहते हैं?’’

मेरे क्लायंट ने मुझे कुछ कहने लायक नहीं छोड़ा था. मैं तल्खी से बोला, ‘‘सबूतों के व गवाहों के बयान की रोशनी में मैं ने अपनी पेशेवराना जिम्मेदारी बहुत अच्छे से निभाई. आगे जो इस का नसीब. मेरे क्लायंट के इकबाले बयान के बाद और जुर्म मान लेने के बाद जाहिर है इस केस से मेरा कोई ताल्लुक नहीं रहा. मैं इसे एक कड़वा घूंट समझ कर हलक से उतार लूंगा.’’

जज हां में गरदन हिला कर रह गया. लेकिन कहानी यहां खत्म नहीं होती. अफजल ने अपने फन की जो अदाकारी दिखाई थी, उसे मैं भूल न सका. लगभग 6 साल बाद अफजल और रूमाना मेरे पास आए और एक कार्ड मेरी तरफ बढ़ाते हुए कहा, ‘‘अगले थर्सडे को हमारी बेटी फरजाना की शादी है. आप जरूर तशरीफ लाएं, हमें बहुत खुशी होगी.’’

‘‘क्या मैं ये समझूं कि आप दोनों फिर से एक बंधन में बंधन गए हैं? अफजल से शादी कर के एक नई जिंदगी शुरू कर दी है? शायद मैं गलत कह गया…’’

‘‘आप बिलकुल ठीक समझे, वकील साहब.’’

‘‘फिर तो मैडम रूमाना फरीद की बेवा कहने के बजाए फरीद की कातिल कहना ज्यादा ठीक है. है न?’’

वह सिर झुका कर बोली, ‘‘बेग साहब, इस के अलावा मेरे पास कोई और रास्ता नहीं था. मैं ने फरीद की खातिर अफजल की जिंदगी खराब की. अपनी बेटी का दिल दुखाया और फरीद से शादी कर ली. पर वह कमीना बेहद घटिया इंसान था. उस की नीयत मेरी मासूम बच्ची पर खराब हो गई, उस की इज्जत लूटने की फिराक में रहने लगा था. उस का यही इलाज था.’’

पता नहीं रूमाना और क्या कहती रही, पर मैं सोच रहा था, ‘रूमाना ने मेरे मुकाबले कहीं बड़ा कड़वा घूंट हलक से उतारा था.’

 

 

 

Crime News : डाक्टर ने की हैवानियत की हद पार

Crime News : गोरखपुर पुलिस लाइंस स्थित मनोरंजन कक्ष खबर नवीसों से खचाखच भरा हुआ था. सामने कुरसी पर स्पैशल  टास्क फोर्स (एसटीएफ) के आईजी अमिताभ यश और एसएसपी डा. सुनील गुप्ता बैठे हुए थे. चूंकि पत्रकार वार्ता का आयोजन आईजी यश ने किया था, इसलिए ये वार्ता और भी खास लग रही थी. पत्रकारों के मन में एक अजीब सा कौतूहल था. ऐसा लग रहा था जैसे एसटीएफ के हाथ कोई बड़ा मामला लगा है और उसी के खुलासे के लिए लखनऊ से आए अमिताभ यश ने प्रैस वार्ता आयोजित की हो.

थोड़ी देर बाद पत्रकारों के मन से कौतूहल के बादल छंट गए, जब उन के सामने 3 आरोपियों को कतारबद्ध खड़ा किया गया. उन में से एक आरोपी गोरखपुर शहर का जाना माना डाक्टर और आर्यन हौस्पिटल का संचालक डा. डी.पी. सिंह उर्फ धीरेंद्र प्रताप सिंह था.

वार्ता शुरू करते हुए एसटीएफ आईजी अमिताभ यश ने सनसनीखेज खुलासा करते हुए कहा, ‘‘यह पत्रकारवार्ता 6 महीने पहले 2 जून, 2018 को नेपाल के पोखरा से रहस्यमय तरीके से गायब हुई गोरखपुर की सरस्वतीपुरम कालोनी निवासी राजेश्वरी उर्फ राखी श्रीवास्तव केस से जुड़ी हुई है, जिस की लाश 4 जून, 2018 को पोखरा की एक गहरी खाई से बरामद की गई थी.’’

नेपाल पुलिस ने मृतका का पोस्टमार्टम करवाया था. पोस्टमार्टम रिपोर्ट में उस का पेट फटने के कारण मौत की पुष्टि हुई थी. इधर 4 जून, 2018 को राखी के भाई अमर प्रकाश श्रीवास्तव ने बिहार के गया निवासी अपने बहनोई मनीष सिन्हा पर गोरखपुर के शाहपुर थाने में राखी के अपहरण और जान से मारने की धमकी का मुकदमा दर्ज करवाया था. मनीष सिन्हा ने खुद को बेगुनाह बताते हुए मामले की जांच एसटीएफ से कराए जाने की मांग की थी.

मुकदमे से संबंधित विवेचना की फाइल एसटीएफ के पास आई तो जांच शुरू की गई. नेपाल पुलिस ने भारतीय पुलिस से मृतका के फोटो साझा करते हुए केस का खुलासा करने में मदद मांगी थी. फोटो को एसटीएफ के तेजतर्रार सिपाही शुक्ला ने पहचान लिया. वह राखी श्रीवास्तव की तसवीर थी.

जांचपड़ताल में पता चला कि राखी श्रीवास्तव आर्यन हौस्पिटल के संचालक डा. डी.पी. सिंह की दूसरी पत्नी थी. 7 साल पहले दोनों ने आर्यसमाज मंदिर में शादी की थी. शादी के बारे में डाक्टर की पहली पत्नी ऊषा सिंह को जानकारी नहीं थी. जब जानकारी हुई तो परिवार में हड़कंप मच गया.

आगे चल कर डा. डी.पी. सिंह और राखी के बीच संबंधों को ले कर टकराव पैदा हो गया. राखी की उम्मीदें और डिमांड लगातार बढ़ती जा रही थीं. इस सब के चलते डाक्टर राखी से पीछा छुड़ाना चाह रहा था.

आईजी ने आगे बताया, ‘‘राखी ने शहर के कैंट थाने में डी.पी. सिंह के खिलाफ रेप और धमकी देने का मुकदमा भी दर्ज कराया था. हालांकि बाद में दोनों ने सुलह कर लिया था. फरवरी 2018 में राखी ने मनीष सिन्हा से दूसरी शादी कर ली थी, लेकिन इस के बावजूद डा. डी.पी. सिंह और राखी श्रीवास्तव के बीच रिश्ता बना रहा. इस के बावजूद राखी की डिमांड बढ़ती जा रही थी.

‘‘राखी की डिमांड से तंग आ कर डा. डी.पी. सिंह ने राखी की हत्या की साजिश रच डाली. बीते 4 जून, 2018 को राखी नेपाल के पोखरा घूमने गई थी. इस की जानकारी मिलने पर डा. डी.पी. सिंह अपने 2 कर्मचारियों देशदीपक निषाद और प्रमोद सिंह के साथ किराए की स्कौर्पियो से नेपाल गया. जहां उस ने राखी से मुलाकात कर उसे अपने झांसे में ले लिया.

‘‘डा. डी.पी. सिंह ने राखी को शराब पिलाई और नशे की गोली दे कर बेहोश कर दिया. बेहोशी की हालत में डी.पी. सिंह ने राखी को अपने दोनों कर्मचारियों के साथ पहाड़ी से नीचे खाई में फेंक दिया, जहां सिर और पेट में चोट आने से उस की मौत हो गई. बाद में डी.पी. सिंह अपने दोनों साथियों के साथ फरार हो गया. इस हाईप्रोफाइल मामले की जांच में स्थानीय पुलिस के साथ एसटीएफ भी लगी थी. ऐसे में गहराई से मामले की जांच किए जाने पर डा. डी.पी. सिंह और राखी के पहले के संबंधों की तह तक जाने पर हत्याकांड का खुलासा हो पाया.’’

पत्रकारों के पूछे जाने पर डा. डी.पी. सिंह और दोनों कर्मचारियों देशदीपक निषाद तथा प्रमोद सिंह ने अपना अपना जुर्म कबूल करते हुए राखी श्रीवास्तव हत्या में संलिप्तता स्वीकार ली. पत्रकारवार्ता के बाद पुलिस ने तीनों आरोपियों को अदालत में पेश किया. अदालत ने तीनों आरोपियों को जेल भेजने का आदेश दिया. तब पुलिस ने तीनों को गोरखपुर जिला जेल भेज दिया. यह 21 दिसंबर, 2018 की बात है.

आरोपियों के इकबालिया बयान और पुलिस जांचपड़ताल के बाद इस केस की हाईप्रोफाइल प्रेम कहानी कुछ ऐसे सामने आई—

गोरखपुर के कैंट थाना क्षेत्र की पौश कालोनी बिलंदपुर में विद्युत विभाग से सेवानिवृत्त इंजीनियर हरेराम श्रीवास्तव अपने परिवार के साथ रहते थे. उन के परिवार में कुल जमा 6 सदस्य थे, जिन में 2 बेटे और 2 बेटियां थीं. उन के चारों बच्चों में राजेश्वरी सब से छोटी थी. सब उसे प्यार से राखी कहते थे.

चारों भाईबहनों में राखी सब से अलग थी. उस के काम करने का तरीका, उठनेबैठने और पढ़नेलिखने का सलीका, बातचीत करने का अंदाज सब कुछ अलग था. परिवार में सब से छोटी होने की वजह से घर वाले उसे प्यार भी बहुत करते थे.

राखी मांबाप की दुलारी तो थी ही, बड़ा भाई अमर प्रकाश भी उसे बहुत चाहता था. बहन में जान बसती थी बड़े भाई अमर की. जिद्दी स्वभाव की राखी लाड़प्यार में भाई से जो मांगती थी, अमर कभी इनकार नहीं करता था.

राखी पर मोहित हो गया था डा. डी.पी. सिंह

सन 2006 की बात है. राखी के पिता हरेराम श्रीवास्तव बीमार थे. उन्हें इलाज के लिए आर्यन हौस्पिटल में इलाज के लिए भरती कराया गया था. यह हौस्पिटल घर के पास तो था ही, पूर्वांचल का जानामाना भी था. बेहतर इलाज और नजदीक समझते हुए अमर प्रकाश ने पिता को डा. डी.पी. सिंह के हौस्पिटल में भरती करा दिया. पिता की तीमारदारी के लिए घर वाले अस्पताल आतेजाते रहते थे. राखी भी आतीजाती थी.

करीब साढ़े 5 फीट लंबी राखी छरहरी तो थी ही ऊपर से गठीला बदन, गोरा रंग, गोलमटोल चेहरा, नागिन सी लहराती चोटी, झील सी गहरी आंखों से वह बला की खूबसूरत दिखती थी. डा. डी.पी. सिंह उर्फ डा. धीरेंद्र प्रताप सिंह की नजर जब राखी पर पड़ी तो उस का मन राखी में ही उलझ कर रह गया. एक तरह से वह उस के दिल में समा गई.

राखी प्राय: रोज ही पिता को देखने जाती थी. जब भी वह अस्पताल में होती तो डा. डी.पी. सिंह ज्यादा से ज्यादा समय उस के पिता के बैड के आसपास चक्कर लगाता रहता. राखी को यह देख कर खुशी होती कि डाक्टर उस के पिता के इलाज को ले कर गंभीर हैं. वह उन का कितना ध्यान रख रहा है.

2-3 दिन में ही राखी समझ गई कि डा. डी.पी. सिंह जब भी चैकअप के लिए पिता के बैड के आता है तो उस की नजरें पिता पर कम, उस पर ज्यादा टिकती हैं. उस की नजरों में आशिकी झलकती थी. डी.पी. सिंह भी गबरू जवान था. साथ ही स्मार्ट भी. पिता की तीमारदारी में डी.पी. सिंह की सहानुभूति देख कर राखी भी उस के आकर्षक व्यक्तित्व पर फिदा हो गई. वह भी डी.पी. सिंह को कनखियों से देखा करती थी. जब दोनों की नजरें आपस में टकरातीं तो दोनों ही मुसकरा देते.

राखी ने भी खोल दिया दिल का दरवाजा

कह सकते हैं कि राखी और डी.पी. सिंह दोनों के दिल एकदूसरे की चाहत में धड़कने लगे. अंतत: मौका देख कर एक दिन दोनों ने अपने अपने प्यार का इजहार कर दिया. बाली उमर की कमसिन राखी डी.पी. सिंह को दिल से मोहब्बत करने लगी जबकि डी.पी. सिंह राखी को दिल से नहीं, बल्कि उस की खूबसूरती से प्यार करता था.

कई दिनों के इलाज से हरेराम श्रीवास्तव स्वस्थ हो कर अपने घर लौट गए. पिता के हौस्पिटल से डिस्चार्ज होने के बाद राखी किसी न किसी बहाने हौस्पिटल आ कर डी.पी. सिंह से मिलने लगी. सालों तक दोनों एक दूसरे की बाहों में बाहें डाले प्यार के झूले पर पेंग बढ़ाते रहे. आलम यह हो गया कि एकदूसरे को देखे बिना दोनों को चैन नहीं मिलता था.

डा. डी.पी. सिंह के दिल के पिंजरे में कैद हुई राखी ने उस के अतीत में झांका तो उसे ऐसा लगा जैसे उस के पैरों तले जमीन खिसक गई हो. राखी के सपनों का महल रेत की दीवार की तरह भरभरा कर ढह गया. क्योंकि डी.पी. सिंह पहले से शादीशुदा था. उस ने यह बात छिपा कर रखी थी. राखी को जब यह सच्चाई दूसरों से पता चली तो उसे गहरा धक्का लगा. वह डाक्टर से नाराज हो कर गोंडा चली गई. वहां वह बीएड की पढ़ाई करने लगी.

डा. डी.पी. सिंह राखी के अचानक मुंह मोड़ लेने से तड़प कर रह गया. वह समझ नहीं पा रहा था कि अचानक राखी उस से रूठ क्यों गई. डी.पी. सिंह से जब राखी की जुदाई बरदाश्त नहीं हुई तो उस ने राखी से बात की, ‘‘क्या बात है राखी, तुम अचानक रूठ कर क्यों गईं? जाने अनजाने में मुझ से कोई भूल हो गई हो तो मुझे माफ कर दो.’’

‘‘मैं माफी देने वाली कौन होती हूं,’’ राखी तुनक कर बोली.

‘‘अरे बाप रे बाप, इतना गुस्सा!’’ मुसकराते हुए डी.पी. सिंह ने कहा.

‘‘ये गुस्सा नहीं दिल की टीस है, जो आप ने दी है डाक्टर साहब.’’ राखी के चेहरे पर दिल का दर्द छलक आया.

आश्चर्य से डा. डी.पी. सिंह ने कहा, ‘‘मैं ने तुम्हारे दिल को ऐसी कौन सी टीस दे दी कि तुम मुझ से रूठ गईं और शहर छोड़ कर चली गईं. तुम अच्छी तरह जानती हो कि मैं तुम से कितना प्यार करता हूं.’’

‘‘डाक्टर साहब, आप इतनी बड़ी बड़ी बातें कर रहे हो. ये बताओ, आप ने अपनी जिंदगी की इतनी बड़ी सच्चाई मुझ से क्यों छिपाई? आप ने मुझे यह क्यों नहीं बताया कि आप शादीशुदा हो.’’

‘‘हां, यह सच है कि मैं शादीशुदा हूं. यह भी सच है कि मुझे तुम्हें यह सच्चाई पहले बता देनी चाहिए थी लेकिन…’’

‘‘लेकिन क्या?’’ बीच में बात काटते हुए राखी बोली.

‘‘बताने का मौका ही नहीं मिला,’’ डा. सिंह ने सफाई दी, ‘‘मैं तुम्हें अपने जीवन की यह सच्चाई बताने वाला था, लेकिन बताने का मौका नहीं मिला. इस बात का मुझे दुख है.’’

‘‘तो फिर अब यहां क्या लेने आए हैं?’’

‘‘अपने प्यार की भीख. मैं तुम से अपने प्यार की भीख मांगता हूं राखी. तुम मेरा प्यार मुझे लौटा दो. मैं तुम्हारे बिना जी नहीं सकता. फिर मैं यहां से चला जाऊंगा.’’

‘‘ठीक है, लेकिन मेरी भी एक शर्त है.’’ राखी बोली.

‘‘क्या शर्त है तुम्हारी?’’

‘‘यही कि आप को मुझ से शादी करनी होगी. मेरी यह शर्त मंजूर है तो बताओ?’’

‘‘मुझे तुम्हारी यह शर्त मंजूर है. मैं तुम से शादी करने के लिए तैयार हूं. शादी के बाद तुम्हें पत्नी की नजरों से बचा कर ऐसी जगह रखूंगा, जहां तुम पर किसी की नजर न पड़ सके.’’

राखी ने सभी गिलेशिकवे भुला दिए.

राखी बन गई डाक्टर की दूसरी पत्नी

सन 2011 के फरवरी में राखी और डा. डी.पी. सिंह ने परिवार वालों से छिप कर गोंडा जिले के आर्यसमाज मंदिर में प्रेम विवाह कर लिया. प्रेमी प्रेमिका दोनों पतिपत्नी बन गए. लेकिन यह बात राखी के परिवार वालों से ज्यादा दिनों तक छिपी नहीं रही.

राखी के पिता हरेराम श्रीवास्तव को बेटी द्वारा एक शादीशुदा आदमी से शादी करने की बात पता चली तो उन्हें गहरा सदमा पहुंचा. वह इस सदमे को सहन नहीं कर सके और उन की मौत हो गई. उस के बाद राखी के परिवार वालों ने उस से हमेशा हमेशा के लिए रिश्ता तोड़ लिया.

शादी के बाद डी.पी. सिंह ने दूसरी पत्नी राखी के रहने के लिए गोरखपुर के शाहपुर क्षेत्र की पौश कालोनी सरस्वतीपुरम में एक आलीशान मकान खरीद दिया. राखी इसी मकान में रहती थी. हौस्पिटल से खाली होने के बाद डी.पी. सिंह राखी से मिलने उस के पास आता था. घंटों साथ बिता कर वह पहली पत्नी ऊषा सिंह के पास चला जाता था. उस के साथ कुछ समय बिता कर रात में राखी के पास आ जाता.

पहली पत्नी को पता चल गई डाक्टर की हकीकत 

डी.पी. सिंह की पहली पत्नी ऊषा सिंह देख समझ रही थी कि उस के पति के स्वभाव और रहनसहन में काफी तब्दीलियां आ गई हैं. वह उस में पहले की अपेक्षा कम दिलचस्पी ले रहा था. रात रात भर घर से गायब रहता था. वह रात में कहां जाता था, उसे कुछ भी नहीं बताता था. वह बताता भी तो क्या.

हालांकि वह जानता था कि जिस दिन यह सच पहली पत्नी ऊषा को पता चलेगा तो उस की खैर नहीं. आखिरकार डी.पी. सिंह का अंदेशा सच साबित हुआ. ऊषा को पति पर शक हो गया और उस ने पति की दिनचर्या की खोजबीन शुरू कर दी.

ऊषा से पति की सच्चाई ज्यादा दिनों नहीं छिप पाई. आखिर पूरा सच उस के सामने खुल कर आ गया. उस ने भी तय कर लिया कि अपने जीते जी वह अपने सिंदूर का बंटवारा हरगिज नहीं करेगी. या तो सौतन को मार देगी या खुद मर जाएगी.

इस बात को ले कर पतिपत्नी के बीच विवाद खड़ा हो गया. दूसरी औरत राखी को  ले कर ऊषा ने पति को आड़े हाथों लिया तो डी.पी. सिंह की बोलती बंद हो गई. वह हैरान था कि उस की सच्चाई पत्नी तक कैसे पहुंची, जबकि उस ने इस राज को काफी गहराई तक छिपा रखा था.

पत्नी के सामने सच्चाई आने के बाद डी.पी. सिंह की स्थिति बड़ी विचित्र हो गई. वह न तो पत्नी को छोड़ सकता था और न प्रेमिका से पत्नी बनी राखी के बिना रह सकता था. उस की हालत 2 नावों के सवार जैसी थी. इस के बावजूद वह दोनों नावों को डूबने नहीं देना चाहता था. डी.पी. सिंह किसी निष्कर्ष पर पहुंचता, इस से पहले ही पहली पत्नी ऊषा ने डी.पी. सिंह के खिलाफ कैंट थाने में मुकदमा दर्ज करा दिया.

भले ही ऊषा ने उस के खिलाफ मुकदमा दर्ज करा दिया था, डी.पी. सिंह ने इस की कोई परवाह नहीं की. वजह यह थी कि राखी मां बनने वाली थी. राखी और डी.पी. सिंह दोनों इसे ले कर काफी खुश थे. आने वाले बच्चे के भविष्य को ले कर संजीदा थे. समय आने पर राखी ने हौस्पिटल में बेटी को जन्म दिया. लेकिन वह मां की गोद तक जाने से पहले ही दुनिया छोड़ गई. बेटी की मौत ने राखी को झकझोर कर रख दिया. नवजात शिशु की मौत का असर डी.पी. सिंह पर भी पड़ा.

डाक्टर को होने लगा गलती का पछतावा

डी.पी. सिंह को अपने किए का पश्चाताप होने लगा था. वक्त के साथ स्थितियां बदल गईं. उसे लगने लगा कि राखी की खूबसूरती महज एक छलावा था. असल जीवनसाथी तो ऊषा है. अब डा. डी.पी. सिंह अपनी भूल सुधारने के लिए पत्नी की ओर आकर्षित होने लगा. उस ने अपनी भूल सुधारने के लिए ऊषा से एक मौका मांगा, साथ ही वादा किया कि अब ऐसा कभी नहीं होगा.

पति के वादे पर ऊषा को भरोसा नहीं था. सालों तक वह उस की पीठ पीछे रंगरलियां मनाता रहा था. यहां तक कि उसे भनक तक नहीं लगने दी थी. यही सब सोच कर ऊषा ने उसे माफ नहीं किया बल्कि फैसला पति पर छोड़ दिया.

दूसरी ओर डी.पी. सिंह ने राखी से बिलकुल ही मुंह मोड़ लिया. डी.पी. सिंह में पहले से काफी बदलाव आ गया था. लेकिन राखी को यह मंजूर नहीं था कि उस का पति उसे छोड़ कर पहली पत्नी के पास जाए.

राखी ने डी.पी. सिंह को चेतावनी दे दी कि अगर वह उसे छोड़ कर पहली पत्नी के पास गया तो इस का परिणाम भुगतने को तैयार रहे. जब उस ने प्यार के लिए अपना घरबार सब छोड़ दिया तो वह रिश्ता तोड़ने से पहले अच्छी तरह सोच ले.

राखी की चेतावनी ने डा. डी.पी. सिंह के संपूर्ण अस्तित्व को हिला कर रख दिया. वह जानता था कि राखी जिद्दी स्वभाव की है, जो ठान लेती है, कर के रहती है. घरगृहस्थी को बचाने के लिए डी.पी. सिंह धीरेधीरे राखी से किनारा करने लगा.

राखी समझ गई थी कि डी.पी. सिंह उस से बचने के लिए किनारा कर रहा है. डी.पी. सिंह ने भले ही राखी से दूरी बनानी शुरू कर दी थी, लेकिन उस के खर्चे में कमी नहीं की थी. उसे वह उस की मुंहमांगी रकम देता था.

राखी मांगने लगी अपना हक

यह अलग बात है कि राखी रुपए नहीं, अपना पूरा हक चाहती थी. उसे दूसरी औरत बन कर रहना मंजूर नहीं था. वह पत्नी का पूरा अधिकार चाहती थी. जबकि डी.पी. सिंह पहली पत्नी ऊषा को छोड़ने के लिए तैयार नहीं था. राखी उस पर दबाव बनाने लगी थी कि वह ऊषा को हमेशा हमेशा के लिए छोड़ कर उस के पास आ जाए. लेकिन डी.पी. सिंह ने ऐसा करने से साफ मना कर दिया था.

राखी ने सोच लिया था कि वह तो बरबाद हो गई है, पर उसे भी इतनी आसानी से मुक्ति नहीं देगी. डाक्टर को सबक सिखाने के लिए साल 2017 के शुरुआती महीने में राखी ने राजधानी लखनऊ के चिनहट थाने में डा. डी.पी. सिंह के खिलाफ अपहरण और गैंगरेप का मुकदमा दर्ज करा दिया.

यही नहीं उस ने गोरखपुर के महिला थाने में भी डा. सिंह के खिलाफ महिला उत्पीड़न का मुकदमा दर्ज कराया. एक साथ 2-2 मुकदमे दर्ज होते ही डा. सिंह के होश उड़ गए. गैंगरेप का मुकदमा दर्ज होते ही डी.पी. सिंह की शहर ही नहीं, पूर्वांचल भर में थूथू होने लगी. इस के चलते हौस्पिटल बुरी तरह प्रभावित हो गया. मरीज उस के क्लीनिक पर आने से कतराने लगे.

गैंगरेप केस ने डी.पी. सिंह की इज्जत पर बदनुमा दाग लगा दिया था. लोग उसे हिकारत भरी नजरों से देखने लगे और उस पर अंगुलियां उठने लगीं. इस से उस की सामाजिक प्रतिष्ठा की खूब छिछालेदर हुई. अपनी प्रतिष्ठा बचाने के लिए डी.पी. सिंह ने राखी से केस वापस लेने को कहा और उसे मुंहमांगी रकम देने का औफर दिया.

राखी ने उस के सामने सरस्वतीपुरम कालोनी की उस आलीशान कोठी की रजिस्ट्री अपने नाम कराने की शर्त रखी, जिस में वह रह रही थी. वह कोठी करोड़ों की थी. इस के लिए डी.पी. सिंह तैयार नहीं हुआ. उस ने बात टाल दी.

धी रेधीरे डा. डी.पी. सिंह का राखी से मोह खत्म हो गया. दोनों के बीच का प्यार टकराव में बदल गया. कल तक जिस राखी की गंध डी.पी. सिंह की रगों में खून के साथ बहती थी, अब वह दुर्गंध बन गई थी. टकराव की स्थिति में डी.पी. सिंह का जीना मुश्किल हो गया था. उस की पलपल की खुशियां छिन गई थीं. राखी द्वारा पैदा की गई दुश्वारियों से डी.पी. सिंह बौखला गया और उसे रास्ते से हटाने की योजना बनाने लगा.

राखी को हो गया फौजी मनीष से प्यार

इस बीच राखी के जीवन में एक नई कहानी की कड़ी जुड़ गई थी. सरस्वतीपुरम कालोनी में जहां राखी रहती थी, उसी के पड़ोस में मनीष कुमार श्रीवास्तव नाम का एक खूबसूरत और स्मार्ट युवक रहता था. वह आर्मी का जवान था और अपने एक रिश्तेदार के घर अकसर जाताआता था. वह मूलरूप से बिहार के गया जिले का रहने वाला था.

डी.पी. सिंह से रिश्ते खराब होने के बाद राखी अकेलापन दूर करने के लिए मनीष से नजदीकियां बढ़ाने लगी. मनीष भी राखी की खूबसूरती पर फिदा हो गया. थोड़ी मुलाकातों के बाद दोनों एकदूसरे के करीब आ गए. अंतत: फरवरी 2018 में राखी और मनीष ने कोर्टमैरिज कर ली.

शादी के बाद राखी मनीष के साथ गया चली गई. उस ने मनीष से अपने अतीत की सारी बातें बता दीं. मनीष समझदार और सुलझा हुआ इंसान था. वह राखी को समझाता रहता था. मनीष को पत्नी की अतीत की कहानी सुन कर उस के साथ सहानुभूति हो गई. उस ने राखी को समझाया कि जो बीत गया, उसे याद करने से कोई फायदा नहीं है. उसे बुरा सपना समझ कर भुला दो.

राखी ने भले ही मनीष से शादी कर ली थी, लेकिन अपने पहले प्यार डी.पी. सिंह को अपने दिल से निकाल नहीं पाई थी. डा. डी.पी. सिंह जान चुका था कि राखी ने दूसरी शादी कर ली है. डी.पी. सिंह ही नहीं वरन राखी का बड़ा भाई अमर प्रकाश भी इस बात को जान चुका था कि राखी ने दूसरी शादी कर ली है. राखी के इस कृत्य पर उस ने बहन को काफी डांटाफटकारा भी था और समझाया भी था.

दरअसल परिवार वालों ने राखी से संबंध तोड़ लिए थे. एक अमर ही था जिसे राखी की परवाह थी. वह उसे अकसर फोन कर के उस का हालचाल पूछ लेता था. राखी के इस बार के कृत्य से वह दुखी था और उस ने राखी से बात करनी बंद कर दी थी.

इधर राखी डी.पी. सिंह को बारबार फोन कर के मकान की रजिस्ट्री अपने नाम कराने का दबाव बना रही थी. राखी के दबाव बनाने से डी.पी. सिंह परेशान हो गया था. उस का दिन का चैन और रात की नींद उड़ चुकी थी. इस मुसीबत से निजात पाने के लिए वह राखी को रास्ते से हटाने की योजना बनाने लगा.

इस के लिए उस ने 5 बार योजना बनाई, लेकिन पांचों बार अपने मकसद में असफल रहा. अब आगे वह अपने मकसद में असफल नहीं होना चाहता था, इसलिए इस बार उस ने अपने हौस्पिटल के 2 कर्मचारियों देशदीपक निषाद और प्रमोद कुमार सिंह को पैसों का लालच दे कर साथ मिला लिया.

सब कुछ डा. डी.पी. सिंह की योजना के अनुसार चल रहा था. डी.पी. सिंह ने भले ही राखी से कन्नी काट ली थी, लेकिन राखी से फोन पर बात करनी बंद नहीं की थी. ऐसा वह राखी को विश्वास में लेने के लिए कर रहा था. राखी समझ रही थी कि डी.पी. सिंह अभी भी उस से प्यार करता है. राखी डी.पी. सिंह की इस योजना को समझ नहीं पाई. वह उस पर पहले जैसा ही यकीन करती रही.

31 मई, 2018 की बात है. राखी पति मनीष के साथ नेपाल के भैरहवा घूमने गई थी. 2 जून की सुबह पति से नजरें बचा कर उस ने डी.पी. सिंह को फोन कर के बता दिया कि वह भैरहवा घूमने आई है.

यह जान कर डी.पी. सिंह को लगा जैसे खुदबखुद उस की मुराद पूरी हो गई हो. वह जो चाह रहा था, वैसी स्थिति खुदबखुद बन गई. उस ने राखी से कहा कि वह भैरहवा में रुकी रहे. वह भी उस से मिलने आ रहा है. दूसरी ओर भैरहवा घूमने के बाद मनीष ने राखी से घर वापस चलने को कहा तो उस ने कुछ जरूरी काम होने की बात कह कर मनीष को अकेले ही घर वापस भेज दिया. मनीष अकेला ही गोरखपुर वापस लौट आया. वह कुछ दिनों की छुट्टी पर आया हुआ था.

डाक्टर ने रच ली थी खूनी साजिश

2 जून, 2018 को डा. डी.पी. सिंह, देशदीपक निषाद और प्रमोद कुमार सिंह के साथ स्कौर्पियो से नेपाल गया. नेपाल जाते हुए प्रमोद कुमार गाड़ी चला रहा था, जबकि देशदीपक निषाद ड्राइवर के बगल वाली सीट पर बैठा था और डा. सिंह पिछली सीट पर.

दोपहर के समय ये लोग सोनौली (भारत-नेपाल सीमा) होते हुए नेपाल पहुंचे. प्रमोद कुमार ने सोनौली बौर्डर पार करते हुए भंसार बनवाया था. भंसार बनवाने के लिए प्रमोद के ड्राइविंग लाइसेंस की कौपी लगाई गई थी. भंसार नेपाल द्वारा लगाया जाने वाला एक टैक्स होता है जो भारत से नेपाल सीमा में आने वाले वाहनों पर लगता है.

नेपाल के भैरहवा में राखी सड़क पर बैग लिए खड़ी इंतजार करती मिली. राखी से डी.पी. सिंह की बात नेपाल के नंबर से हुई थी. डी.पी. सिंह ने अपना मोबाइल जानबूझ कर घर पर छोड़ दिया था, ताकि जांचपड़ताल के दौरान पुलिस उस पर शक न कर सके.

राखी ने बताया कि वह भैरहवा में सड़क किनारे अकेली खड़ी है. राखी डी.पी. सिंह के पास गाड़ी में बैठ गई. वहां से चारों लोग पोखरा के लिए निकले. इन लोगों ने बुटवल से थोड़ा आगे और पालपा से पहले नाश्ता किया.

सभी लोग बुटवल से लगभग 100 किलोमीटर आगे मुलंग में एक छोटे होटल में रुके. इन लोगों ने होटल में 2 रूम बुक किए थे. डी.पी. सिंह और राखी एक कमरे में ठहरे थे. इस के बाद सुबह लगभग 11 बजे ये लोग खाना खा कर पोखरा के लिए निकले.

शाम को लगभग 4-5 बजे सभी पोखरा पहुंचे और डेविस फाल घूमे. इस के बाद राखी ने शौपिंग की, फिर सभी ने पोखरा में ही नाश्ता किया. इस के बाद ये लोग पहाड़ के ऊपर सारंगकोट नामक जगह पर होटल में रुके. इस होटल में सीसीटीवी कैमरे नहीं लगे थे. डा. डी.पी. सिंह ने खुद इस होटल का चुनाव किया था. होटल में इन लोगों ने पहले चाय पी और बाद में शराब. राखी की चाय में डी.पी. सिंह ने एल्प्रैक्स का पाउडर मिला दिया था.

रात के लगभग 11 बजे दवा ने अपना असर दिखाया तो राखी की तबीयत खराब होने लगी. यह देख डा. डी.पी. सिंह ने इंसानियत की सारी हदें पार कर दीं. उस ने राखी को लातघूंसों से जम कर मारापीटा. मारपिटाई में एक लात राखी के पेट में ऐसी लगी कि वह अर्द्धचेतना में चली गई. थोड़ी देर में उस की सांसें भी बंद हो गईं.

उस की मौत के बाद तीनों राखी की लाश को ले कर उसी रात पोखरा के लिए निकल गए. लाश की शिनाख्त न हो सके, तीनों शातिरों ने राखी का मतदाता पहचानपत्र, मोबाइल फोन, नेपाल रिचार्ज कार्ड कीमत 100 रुपए, सहित कई सामान अपने पास रख लिए थे.

इस के बाद इन लोगों ने राखी को गाड़ी से निकाला और पहाड़ से नीचे धक्का दे दिया और फिर नेपाल से वापस घर लौट आए.

3 जून, 2018 को झाड़ी से नेपाल पुलिस ने राखी की लाश बरामद की. लेकिन उस की शिनाख्त नहीं हुई. नेपाल पुलिस ने लाश का पोस्टमार्टम कराया तो राखी की मौत का कारण पेट फटना सामने आया. पोखरा पुलिस ने अज्ञात के खिलाफ हत्या का मुकदमा दर्ज कर के जांच शुरू कर दी.

इधर मनीष पत्नी को ले कर परेशान था कि उस ने काम निपटा कर शाम तक घर वापस लौटने को कहा था, लेकिन न तो वह घर आई और न ही उस का फोन काम कर रहा था.

मनीष पर ही किया गया शक

मनीष फिर नेपाल के भैरहवा पहुंचा, जहां वह पत्नी के साथ रुका था. वहां जाने पर उसे पता चला कि राखी 2 जून को यहां से चली गई थी. इस के बाद वह कहां गई, किसी को पता नहीं था. 2 दिनों तक मनीष राखी को भैरहवा में खोजता रहा. जब वह नहीं मिली तो 4 जून को मनीष ने फोन कर के इस की सूचना राखी के बड़े भाई अमर प्रकाश श्रीवास्तव को दे दी.

अमर प्रकाश श्रीवास्तव ने राखी के पति मनीष कुमार श्रीवास्तव पर शक जताते हुए गोरखपुर के शाहपुर थाने में मनीष के खिलाफ बहन के अपहरण और जान से मारने की धमकी का मुकदमा दर्ज करा दिया. पुलिस ने काररवाई करते हुए मनीष को गिरफ्तार कर लिया.

जांचपड़ताल में वह कहीं भी दोषी नहीं पाया गया. अंतत: पुलिस ने उसे हिदायत दे कर छोड़ दिया. उधर नेपाल पुलिस ने लाश की शिनाख्त के लिए लाश की कुछ तसवीरें गोरखपुर आईजी जोन जयप्रकाश सिंह के कार्यालय भिजवा दीं. आईजी जोन ने इस की जिम्मेदारी आईजी एसटीएफ अमिताभ यश को सौंप दी. अमिताभ यश ने एसएसपी एसटीएफ अभिषेक सिंह को जांच सौंप दी.

मनीष ने खुद किया जांच में सहयोग

इस बीच मनीष ने आईजी से मिल कर राखी के लापता होने की जांच की मांग की और खुद को निर्दोष बताते हुए मुकदमे से बरी करने की गुहार लगाई. मनीष के आवेदन पर एसटीएफ ने अपने विभाग के तेजतर्रार सिपाहियों यशवंत सिंह, अनूप राय, धनंजय सिंह, संतोष सिंह, महेंद्र सिंह आदि को लगाया.

एसटीएफ की जांचपड़ताल में राखी के मोबाइल की लोकेशन गुवाहाटी में मिली. फिर एक दिन अचानक राखी की डेडबौडी की फोटो सिपाही राजीव शुक्ला के सामने आई तो वह पहचान गया. इस क्लू ने डा. डी.पी. सिंह की साजिश का परदाफाश कर दिया. पुलिस ने जब डा. डी.पी. सिंह को गिरफ्तार कर के पूछताछ की तो सारी सच्चाई सामने आ गई.

डी.पी. सिंह के बयान के बाद उस के दोनों कर्मचारी देशदीपक निषाद और प्रमोद कुमार सिंह को भी गिरफ्तार कर लिया गया. दोनों ने राखी की हत्या करने और डी.पी. सिंह का साथ देने का अपना जुर्म कबूल कर लिया. पुलिस को गुमराह करने के लिए डी.पी. सिंह ने राखी के मोबाइल को गुवाहाटी भिजवा दिया था, ताकि पुलिस को लगे कि राखी जिंदा है और वह गुवाहाटी में है. लेकिन पुलिस ने उस के गुनाहों को बेपरदा कर दिया.

घटना के बाद डी.पी. सिंह ने राखी के दूसरे प्रेमी को फंसाने की योजना बनाई थी. लेकिन उस की यह योजना धरी का धरी रह गई. एसटीएफ ने डी.पी. सिंह और उस के साथियों के पास से राखी का मतदाता पहचान पत्र, मोबाइल फोन, 100 रुपए का नेपाल रिचार्ज कार्ड व अन्य सामान बरामद कर लिया. नेपाल पुलिस ने अपने यहां हत्या का मुकदमा दर्ज कर लिया था. डी.पी. सिंह और उस के दोनों साथियों पर दोनों देशों में एक साथ मुकदमा चलाया जाएगा. Crime News

—कथा पुलिस सूत्रों पर आधारित

Love Crime : गर्लफ्रेड ने ली बॉयफ़्रेंड की जान

Love Crime :  एसचओ ने ग्रामीणों की मदद से शव को तालाब से बाहर निकलवाया. शव पूरी तरह नग्न अवस्था में था. शव का बारीकी से निरीक्षण किया तो पाया कि मृतक की उम्र लगभग 30 साल थी और उस के शरीर पर धारदार हथियार से गोदे जाने के कई निशान थे.

उसी दौरान एक युवक ने लाश की शिनाख्त पिडरुआ निवासी तुलसीराम प्रजापति के रूप में की. उस की हत्या किस ने और क्यों की, यह बात कोई भी व्यक्ति नहीं समझ पा रहा था. 26 वर्षीय सविता और 28 वर्षीय तुलसीराम पहली मुलाकात में ही एकदूसरे को दिल दे बैठे थे, सविता को पाने की अभिलाषा तुलसीराम के दिल में हिलोरें मारने लगी थी, इसलिए वह किसी न किसी बहाने से सविता से मिलने उस के खेत पर बनी टपरिया में अकसर आने लगा था.

तुलसीराम प्रजापति के टपरिया में आने पर सविता गर्मजोशी से उस की खातिरदारी करती, चायपानी के दौरान तुलसीराम जानबूझ कर बड़ी होशियारी के साथ सविता के गठीले जिस्म का स्पर्श कर लेता तो वह नानुकुर करने के बजाय मुसकरा देती. इस से तुलसीराम की हिम्मत बढ़ती चली गई और वह सविता के खूबसूरत जिस्म को जल्द से जल्द पाने की जुगत में लग गया. एक दिन दोपहर के समय तुलसीराम सविता की टपरिया में आया तो इत्तफाक से सविता उस वक्त अकेली चक्की से दलिया बनाने में मशगूल थी. उस का पति पुन्नूलाल कहीं गया हुआ था. इसी दौरान तुलसीराम को देखा तो उस ने साड़ी के पल्लू से अपने आंचल को करीने से ढंका.

तुलसीराम ने उस का हाथ पकड़ कर कहा, ”सविता, तुम यह आंचल क्यों ढंक रही हो? ऊपर वाले ने तुम्हारी देह देखने के लिए बनाई है. मेरा बस चले तो तुम को कभी आंचल साड़ी के पल्लू से ढंकने ही न दूं.’’

”तुम्हें तो हमेशा शरारत सूझती रहती है, किसी दिन तुम्हें मेरे टपरिया में किसी ने देख लिया तो मेरी बदनामी हो जाएगी.’’

”ठीक है, आगे से जब भी तेरे से मिलने तेरी टपरिया में आऊंगा तो इस बात का खासतौर पर ध्यान रखूंगा.’’

सविता मुसकराते हुए बोली, ”अच्छा एक बात बताओ, कहीं तुम चिकनीचुपड़ी बातें कर के मुझ पर डोरे डालने की कोशिश तो नहीं कर रहे?’’

”लगता है, तुम ने मेरे दिल की बात जान ली. मैं तुम्हें दिलोजान से चाहता हूं, अब तो जानेमन मेरी हालत ऐसी हो गई है कि जब तक दिन में एक बार तुम्हें देख नहीं लेता, तब तक चैन नहीं मिलता है. बेचैनी महसूस होती रहती है, इसलिए किसी न किसी बहाने से यहां चला आता हूं. तुम्हारी चाहत कहीं मुझे पागल न कर दे…’’

तुलसीराम प्रजापति की बात अभी खत्म भी नहीं हुई थी कि सविता बोली, ”पागल तो तुम हो चुके हो, तुम ने कभी मेरी आंखों में झांक कर देखा है कि उन में तुम्हारे लिए कितनी चाहत है. मुझे तो ऐसा लगता है कि दिल की भाषा को आंखों से पढऩे में भी तुम अनाड़ी हो.’’

”सच कहा तुम ने, लेकिन आज यह अनाड़ी तुम से बहुत कुछ सीखना चाहता है. क्या तुम मुझे सिखाना चाहोगी?’’ इतना कह कर तुलसीराम ने सविता के चेहरे को अपनी हथेलियों में भर लिया.

सविता ने भी अपनी आंखें बंद कर के अपना सिर तुलसीराम के सीने से टिका दिया. दोनों के जिस्म एकदूसरे से चिपके तो सर्दी के मौसम में भी उन के शरीर दहकने लगे. जब उन के जिस्म मिले तो हाथों ने भी हरकतें करनी शुरू कर दीं और कुछ ही देर में उन्होंने अपनी हसरतें पूरी कर लीं.

सविता के पति पुन्नूलाल के शरीर में वह बात नहीं थी, जो उसे तुलसीराम से मिली. इसलिए उस के कदम तुलसीराम की तरफ बढ़ते चले गए. इस तरह उन का अनैतिकता का खेल चलता रहा.

सविता के क्यों बहके कदम

मध्य प्रदेश के सागर जिले में एक गांव है पिडरुआ. इसी गांव में 26 वर्षीय सविता आदिवासी अपने पति पुन्नूलाल के साथ रहती थी. पुन्नूलाल किसी विश्वकर्मा नाम के व्यक्ति की 10 बीघा जमीन बंटाई पर ले कर खेत पर ही टपरिया बना कर अपनी पत्नी सविता के साथ रहता था. उसी खेत पर खेती कर के वह अपने परिवार की गुजरबसर करता था. उस की गृहस्थी ठीकठाक चल रही थी.

उस के पड़ोस में ही तुलसीराम प्रजापति का भी खेत था, इस वजह से कभीकभार वह सविता के पति से खेतीबाड़ी के गुर सीखने आ जाया करता था. करीब डेढ़ साल पहले तुलसीराम ने ओडिशा की एक युवती से शादी की थी, लेकिन वह उस के साथ कुछ समय तक साथ रहने के बाद अचानक उसे छोड़ कर चली गई थी.

सविता को देख कर तुलसीराम की नीयत डोल गई. उस की चाहतभरी नजरें सविता के गदराए जिस्म पर टिक गईं.  उसी क्षण सविता भी उस की नजरों को भांप गई थी. तुलसीराम हट्टाकट्टा नौजवान था. सविता पहली नजर में ही उस की आंखों के रास्ते दिल में उतर गई. सविता के पति से बातचीत करते वक्त उस की नजरें अकसर सविता के जिस्म पर टिक जाती थीं.

सविता को भी तुलसीराम अच्छा लगा. उस की प्यासी नजरों की चुभन उस की देह को सुकून पहुंचाती थी. उधर अपनी लच्छेदार बातों से तुलसीराम ने सविता के पति से दोस्ती कर ली. तुलसीराम को जब भी मौका मिलता, वह सविता के सौंदर्य की तारीफ करने में लग जाता. सविता को भी तुलसीराम के मुंह से अपनी तारीफ सुनना अच्छा लगता था. वह पति की मौजूदगी में जब कभी भी उसे चायपानी देने आती, मौका देख कर वह उस के हाथों को छू लेता. इस का सविता ने जब विरोध नहीं किया तो तुलसीराम की हिम्मत बढ़ती चली गई.

धीरेधीरे उस की सविता से होने वाली बातों का दायरा भी बढऩे लगा. सविता का भी तुलसीराम की तरफ झुकाव होने लगा था. तुलसीराम को पता था कि सविता अपने पति से संतुष्ट नहीं है. कहते हैं कि जहां चाह होती है, वहां राह निकल ही आती है. आखिर एक दिन तुलसीराम को सविता के सामने अपने दिल की बात कहने का मौका मिल गया और उस के बाद दोनों के बीच वह रिश्ता बन गया, जो दुनिया की नजरों में अनैतिक कहलाता है. दोनों ने इस रास्ते पर कदम बढ़ा तो दिए, लेकिन सविता ने इस बात पर गौर नहीं किया कि वह अपने पति के साथ कितना बड़ा विश्वासघात कर रही है.

जिस्म से जिस्म का रिश्ता कायम हो जाने के बाद सविता और तुलसीराम उसे बारबार बिना किसी हिचकिचाहट के दोहराने लगे. सविता का पति जब भी गांव से बाहर जाने के लिए निकलता, तभी सविता तुलसीराम को काल कर अपने पास बुला लेती थी. अनैतिक संबंधों को कोई लाख छिपाने की कोशिश करे, एक न एक दिन उस की असलियत सब के सामने आ ही जाती है. एक दिन ऐसा ही हुआ. सविता का पति पुन्नूलाल शहर जाने के लिए घर से जैसे ही निकला, वैसे ही सविता ने अपने प्रेमी तुलसीराम को फोन कर दिया.

अवैध संबंधों का सच आया सामने

सविता जानती थी कि शहर से घर का सामान लेने के लिए गया पति शाम तक ही लौटेगा, इस दौरान वह गबरू जवान प्रेमी के साथ मौजमस्ती कर लेगी. सविता की काल आते ही तुलसीराम बाइक से सविता के टपरेनुमा घर पर पहुंच गया. उस ने आते ही सविता के गले में अपनी बाहों का हार डाल दिया, तभी सविता इठलाते हुए बोली, ”अरे, यह क्या कर रहे हो, थोड़ी तसल्ली तो रखो.’’

”कुआं जब सामने हो तो प्यासे व्यक्ति को कतई धैर्य नहीं होता है,’’ इतना कहते हुए तुलसीराम ने सविता का गाल चूम लिया.

”तुम्हारी इन नशीली बातों ने ही तो मुझे दीवाना बना रखा है. न दिन को चैन मिलता है और न रात को. सच कहूं जब मैं अपने पति के साथ होती हूं तो सिर्फ तुम्हारा ही चेहरा मेरे सामने होता है,’’ सविता ने भी इतना कह कर तुलसी के गालों को चूम लिया.

तुलसीराम से भी रहा नहीं गया. वह सविता को बाहों में उठा कर चारपाई पर ले गया. इस से पहले कि वे दोनों कुछ कर पाते, दरवाजा खटखटाने की आवाज आई. इस आवाज को सुनते ही दोनों के दिमाग से वासना का बुखार उतर गया. सविता ने जल्दी से अपने अस्तव्यस्त कपड़ों को ठीक किया और दरवाजा खोलने भागी. जैसे ही उस ने दरवाजा खोला, सामने पति को देख कर उस के चेहरे का रंग उड़ गया, ”तुम तो घर से शहर से सौदा लाने के लिए निकले थे, फिर इतनी जल्दी कैसे लौट आए?’’ सविता हकलाते हुए बोली.

”क्यों? क्या मुझे अब अपने घर आने के लिए भी तुम से परमिशन लेनी पड़ेगी? तुम दरवाजे पर ही खड़ी रहोगी या मुझे भीतर भी आने दोगी,’’ कहते हुए पुन्नूलाल ने सविता को एक तरफ किया और जैसे ही वह भीतर घुसा तो सामने तुलसीराम को देख कर उस का माथा ठनका.

”अरे, आप कब आए?’’ तुलसीराम ने पूछा तो पुन्नूलाल ने कहा, ”बस, अभीअभी आया हूं.’’

सविता के हावभाव पुन्नूलाल को कुछ अजीब से लगे, उस ने सविता की तरफ देखा, वह बुरी तरह से घबरा रही थी. उस के बाल बिखरे हुए थे. माथे की बिंदिया उस के हाथ पर चिपकी हुई थी.

यह सब देख कर पुन्नूलाल को शक होना लाजिमी था. डर के मारे तुलसीराम भी उस से ठीक से नजरें नहीं मिला पा रहा था. ठंड के मौसम में भी उस के माथे पर पसीना छलक रहा था. पुन्नूलाल तुलसीराम से कुछ कहता, उस से पहले ही वह अपनी बाइक पर सवार हो कर वहां से भाग गया.

उस के जाते ही पुन्नूलाल ने सविता से पूछा, ”तुलसीराम तुम्हारे पास क्यों आया था और तुम दोनों दरवाजा बंद कर क्या गुल खिला रहे थे?’’

”वह तो तुम से मिलने आया था और कुंडी इसलिए लगाई थी कि आज पड़ोसी की बिल्ली बहुत परेशान कर रही थी.’’ असहज होते हुए सविता बोली.

”लेकिन मेरे अचानक आ जाने से तुम दोनों की घबराहट क्यों बढ़ गई थी?’’

”अब मैं क्या जानूं, यह तो तुम्हें ही पता होगा.’’ सविता ने कहा तो पुन्नूलाल तिलमिला कर रह गया. उस के मन में पत्नी को ले कर संदेह पैदा हो गया था.

पुन्नूलाल ने कड़ा रुख अख्तियार करते हुए पति पर निगाह रखनी शुरू कर दी और हिदायत दे दी कि तुलसीराम से वह आइंदा से मेलमिलाप न करे. पति की सख्ती के बावजूद सविता मौका मिलते ही तुलसीराम से मिलती रहती थी.

सविता और उस के प्रेमी को चोरीछिपे मिलना अच्छा नहीं लगता था. उधर तुलसीराम चाहता था कि सविता जीवन भर उस के साथ रहे, लेकिन सविता के लिए यह संभव नहीं था.

सविता क्यों बनी प्रेमी की कातिल

वैसे भी जब से पुन्नूलाल और गांव वालों को सविता और तुलसीराम प्रजापति के अवैध संबंधों का पता लगा था, तब से सविता घर टूटने के डर से तुलसीराम से छुटकारा पाना चाह रही थी, लेकिन समझाने के बावजूद तुलसीराम उस का पीछा नहीं छोड़ रहा था. तब अंत में सविता ने अपने छोटे भाई हल्के आदिवासी के साथ मिल कर अपने प्रेमी तुलसीराम को मौत के घाट उतारने की योजना बना डाली.

अपनी योजना को अमलीजामा पहनाने के लिए 8 जनवरी, 2024 को सविता अपने मायके साईंखेडा चली गई, जिस से किसी को उस पर शक न हो. वहां से वह 11 जनवरी की दोपहर अपनी ससुराल पिडरुआ वापस लौट आई. उसी दिन शाम के वक्त उस ने तुलसीराम को फोन करके मिलने के लिए मोतियाहार के जंगल में बुला लिया.

अपनी प्रेमिका के बुलावे पर उस की योजना से अनजान तुलसीराम खुशी खुशी मोतियाहार के जंगल में पहुंचा. तभी मौका मिलते ही सविता ने अपने मायके से साथ लाए चाकू का पूरी ताकत के साथ तुलसीराम के गले पर वार कर दिया. अपनी जान बचाने के लिए खून से लथपथ तुलसीराम ने वहां से बच कर भाग निकलने की कोशिश की तो सविता ने चाकू उस के पेट में घोंप दिया. पेट में चाकू घोंपे जाने से उस की आंतें तक बाहर निकल आईं. कुछ देर छटपटाने के बाद ही उस के शरीर में हलचल बंद हो गई.

इस के बाद सविता के भाई हल्के आदिवासी ने तुलसीराम की पहचान मिटाने के लिए उस के सिर को पत्थर से बुरी तरह से कुचल दिया. फिर सविता ने अपने प्रेमी की नाक के पास अपनी हथेली ले जा कर चैक किया कि कहीं वह जिंदा तो नहीं है. दोनों को पूरी तरह तसल्ली हो गई कि तुलसीराम मर चुका है, तब उन्होंने तुलसीराम के सारे कपड़े उतार कर उस के कपड़े, जूते एक थैले में रख कर तालाब में फेंक दिए. लाश को ठिकाने लगाने के लिए सविता और उस का भाई हल्के तुलसी की लाश को कंधे पर रख कर हरा वाले तालाब के करीब ले गए. वहां बोरी में पत्थर भर कर रस्सी को उस की कमर में बांध कर शव को तालाब में फेंक दिया.

नग्नावस्था में मिली थी तुलसी की लाश

12 जनवरी, 2024 की सुबह उजाला फैला तो पिडरुआ गांव के लोगों ने तालाब में युवक की लाश तैरती देखी. थोड़ी देर में वहां लोगों की भीड़ जुट गई. भीड़ में से किसी ने तालाब में लाश पड़ी होने की सूचना बहरोल थाने के एसएचओ सेवनराज पिल्लई को दी.

सूचना मिलते ही एसएचओ कुछ पुलिसकर्मियों को ले कर मौके पर पहुंच गए. लाश तालाब से बाहर निकलवाने के बाद उन्होंने उस की जांच की. उस की शिनाख्त पिडरुआ निवासी तुलसीराम प्रजापति के रूप में की. वहीं पर पुलिस को यह भी पता चला कि तुलसीराम के पिछले डेढ़ साल से गांव की शादीशुदा महिला सविता आदिवासी से अवैध संबंध थे. इसी बात को ले कर पतिपत्नी में तकरार होती रहती थी.

लेकिन तुलसीराम की हत्या इस तरह गोद कर क्यों की गई, यह बात पुलिस और लोगों को अचंभे में डाल रही थी. मामला गंभीर था. एसएचओ ने घटना की सूचना एसडीओपी (बंडा) शिखा सोनी को भी दे दी थी. वह भी मौके पर आ गईं. इस के बाद उन्होंने भी लाश का निरीक्षण कर एसएचओ को सारी काररवाई कर लाश को पोस्टमार्टम के लिए भेजने के निर्देश दिए. एसएचओ पिल्लई ने सारी काररवाई निपटा कर लाश को पोस्टमार्टम के लिए भिजवा दिया. फिर थाने लौट कर हत्या का मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू कर दी.

एसडीओपी शिखा सोनी ने इस केस को सुलझाने के लिए एक पुलिस टीम गठित की. टीम में बहरोल थाने के एसएचओ सेवनराज पिल्लई, बरायथा थाने के एसएचओ मकसूद खान, एएसआई नाथूराम दोहरे, हैडकांस्टेबल जयपाल सिंह, तूफान सिंह, वीरेंद्र कुर्मी, कांस्टेबल देवेंद्र रैकवार, नीरज पटेल, अमित शुक्ला, सौरभ रैकवार, महिला कांस्टेबल प्राची त्रिपाठी आदि को शामिल किया गया.

चूंकि पुलिस को सविता आदिवासी और मृतक की लव स्टोरी की जानकारी पहले ही मिल चुकी थी, इसलिए पुलिस टीम ने गांव के अन्य लोगों से जानकारी जुटाने के बाद सविता आदिवासी को पूछताछ के लिए थाने बुला लिया.

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सविता से तुलसीराम की हत्या के बारे में जब सख्ती से पूछताछ की गई तो उस ने पुलिस को गुमराह करने की भरसक कोशिश की, लेकिन एसएचओ सेवनराज पिल्लई के आगे उस की एक न चली और उसे सच बताना ही पड़ा. सविता के खुलासे के बाद पुलिस ने सविता के भाई हल्के आदिवासी को भी साईंखेड़ा गांव से गिरफ्तार कर लिया. उस ने भी अपना जुर्म कुबूल कर लिया सविता और उस के भाई हल्के आदिवसी से पूछताछ करने के बाद पुलिस ने दोनों अभियुक्तों को कोर्ट में पेश किया, जहां से उन्हें जेल भेज दिया गया.

सविता और उस के भाई हल्के ने सोचा था कि तुलसीराम को मौत के घाट उतार देने से बदनामी से छुटकारा और बसा बसाया घर टूटने से बच जाएगा, लेकिन पुलिस ने उन के मंसूबों पर पानी फेर कर उन्हें जेल की सलाखों के पीछे पहुंचा दिया. तुलसीराम की हत्या कर के सविता और उस का भाई हल्के आदिवासी जेल चले गए. सविता ने अपनी आपराधिक योजना में भाई को भी शामिल कर के अपने साथ भाई का भी घर बरबाद कर दिया. Love Crime

Stories in Hindi : वो काली मनहूस रात

Stories in Hindi : युवा उद्योगपति रोहित अग्रवाल हर अमावस की रात को फाइवस्टार होटल से एक लड़की ले कर अपने बंगले पर लौटता था. फिर उस लड़की को निर्वस्त्र कर हाथपैर बांध कर घुटने के बल बैठा देता था. इस के बाद चाकू की नोक से उस की पीठ पर लिख देता था ‘बेवफा’. आखिर वह ऐसा क्यों करता था?

एक पेशेंट के चेहरे की ड्राफ्टिंग तैयार कर के मैं वार्ड में आया तो वार्डबौय विनोद ने मुझे एक लिफाफा ला कर दिया. यह डाक से मेरे नाम आया एक पत्र था. पत्र लंदन से भेजा गया था. मुझे बेहद हैरानी हुई, लंदन में मेरा कोई पहचान वाला नहीं रहता था. पत्र किस ने भेजा है? सोचते हुए मैं ने भेजने वाले का नाम पढ़ा तो खुशी के कारण मेरे मुंह से चीख निकल गई. वार्ड में मौजूद पेशेंट और स्टाफ के लोग मेरी चीख सुन कर मुझे आश्चर्य से देखने लगे तो मैं झेंप गया. मैं तुरंत वहां से अपने रेस्टरूम में आ गया. यह पत्र लंदन से रोहित ने भेजा था. रोहित अग्रवाल! मेरा दोस्त रोहित, जिसे मैं एक साल से पागलों की तरह तलाश कर रहा था.

रोहित मुंबई से अचानक ही गायब हो गया था. मैं ने उसे हर संभावित जगह पर ढूंढा था, उस के लिए मुंबई के हर छोटेबड़े अखबारों में उस की गुमशुदगी का इश्तहार छपवाए थे, लेकिन उस का कोई अतापता नहीं चला था. चलता भी कैसे, वह तो भारत से सैकड़ों मील दूर लंदन में बैठा हुआ था. आज उसे मेरी याद आई थी. मैं ने आराम कुरसी पर बैठने के बाद पत्र लिफाफे से बाहर निकाला और पढऩे लगा—

‘प्रिय दोस्त अभय! लंदन के होटल शार्क में एक हिंदुस्तानी व्यक्ति के पास मुंबई से निकलने वाले न्यूजपेपर ‘लोकमत’ में अपनी गुमशुदगी का इश्तहार देख कर दिल को बहुत सुकून मिला कि तुम आज भी मुझे अपना मानते हो. मेरी तलाश में भटक रहे हो और तुम ने मेरी दोस्ती को भुलाया नहीं है.

‘दोस्त, मैं भी तुम्हें नहीं भूला हूं. किसी मजबूरीवश मुझे अचानक मुंबई छोडऩी पड़ी थी. अब में लंदन में हूं. यहां मैं ने ‘अग्रवाल फेब्रिक इंडिया’ नाम से एक कंपनी खोल ली है. तुम्हें हर रोज याद करता हूं. तुम पत्र पाते ही तुरंत लंदन चले आओ, फिर बैठ कर ढेर सारी बातें करेंगे. आने से पहले मेरे मोबाइल पर सूचना देना, मेरा मोबाइल नंबर यह है 993333333 तुम्हारा दोस्त रोहित अग्रवाल.’

रोहित का पत्र पढ़ कर मैं उस की यादों में खो गया. रोहित मुंबई के मशहूर उद्योगपति धीरेन अग्रवाल का इकलौता बेटा था. धीरेन अग्रवाल की मुंबई में कपड़ा मिल थी, जिस में सैकड़ों मजदूर काम करते थे. धीरज अग्रवाल की पत्नी की असमय ही कैंसर से मृत्यु हो गई थी, उस वक्त रोहित 11 साल का था. धीरेन अग्रवाल ने मां और बाप की जिम्मेदारी निभाते हुए रोहित की परवरिश की थी. उन के पास धनदौलत की कोई कमी नहीं थी. उन के बाद सब कुछ रोहित का ही था, फिर भी उन्होंने रोहित को पढ़ानेलिखाने में कोई कंजूसी नहीं की.

रोहित की पहचान मुझ से सेंट पीटर्स स्कूल में हुई थी. यहां मैं दसवीं कक्षा में पढ़ रहा था. रोहित भी इसी स्कूल में मेरी क्लास का छात्र था. यहां ऊंचे घराने के बच्चे पढ़ते थे. चूंकि मेरे पापा का एक रोड एक्सीडेंट में निधन हो गया था, मैं अपने चाचाचाची के पास रह कर जीवनयापन कर रहा था. मेरे चाचाजी इसी स्कूल में चपरासी थे, उन्होंने स्कूल प्रशासन के हाथपैर जोड़ कर मेरा एडमिशन इस स्कूल में करवा दिया था. रोहित अमीर बाप का बेटा था, लेकिन उस में इस बात का जरा सा भी घमंड नहीं था. उस ने मुझे अपना दोस्त बनाया तो अपनी खानेपीने की चीजें मुझ से शेयर करने लगा. मेरी छोटीमोटी जरूरतों का वह पूरा खयाल रखने लगा था. हम ने हाईस्कूल इसी स्कूल से पास किया. बाद में रोहित ने अपना एडमिशन सोमैय्या आर्ट ऐंड कमर्शियल कालेज में करवा लिया था.

मेरी रुचि साइंस में थी, लेकिन इस की पढ़ाई के लिए मेरे चाचा के पास पैसे नहीं थे. रोहित ने मेरी इच्छा को देखते हुए मेरा एडमिशन सेंट जेवियर्स कालेज में अपने खर्चे से करवा दिया. उस दिन मैं रोहित के गले लग कर खूब रोया. रोहित मेरी पीठ सहलाता रहा, जब मैं ढेरों आंसू बहा लेने के बाद उस के कंधे से हटा तो रोहित ने मुसकरा कर कहा था, ”तुम बड़े डाक्टर बन कर मुंबई में अपना हौस्पिटल खोलो, मेरी यही इच्छा है अभय.’’

मैं ने सिर हिला कर उसे आश्वासन दिया कि तुम्हारी इच्छा का मैं खयाल रखूंगा मेरे दोस्त. यहां से हम दोस्त अलग हुए थे. रोहित अपने कालेज जाता, मैं अपने. यहां की पढ़ाई पूरी कर के मैं प्लास्टिक सर्जरी का कोर्स करने के लिए अमरीका चला गया. इस का भी पूरा खर्च रोहित ने ही उठाया था. अब हम दोनों के बीच बातचीत का जरिया फोन ही था. मैं रोहित का सपना साकार करने के लिए जी जान से मेहनत कर रहा था, अभी मेरे कोर्स का एक साल और बचा था कि रोहित के डैडी वीरेन अग्रवाल का हार्ट अटैक से देहांत हो गया. रोहित को अपना कालेज छोड़ कर डैडी का कारोबार संभालना पड़ा. वह मेरी मदद करने में तब भी पीछे नहीं हटा.

मैं अमरीका में था, रोहित मुंबई में. हमारे बीच फोन से बातें होती थीं. रोहित रोज शाम को मुझ से फोन पर बातें करता था. अचानक रोहित के फोन आने बंद हो गए. मैं ने बहुत कोशिश की थी कि किसी तरह रोहित से संपर्क हो जाए, लेकिन रोहित का नंबर नाट रिचेबल आता रहा. मैं रोहित के बगैर छटपटाता रहा. मजबूर था, मैं पढ़ाई छोड़ कर मुंबई नहीं लौट सकता था. एक साल बाद मैं प्लास्टिक सर्जन बन कर भारत लौटा. मुंबई एयरपोर्ट से मैं सीधा टैक्सी ले कर धीरेन अग्रवाल के बंगले पर गया तो मुझे जबरदस्त धक्का लगा. रोहित वह बंगला और अपना मिल मैनेजर को सौंप कर कहीं चला गया था. वह कहां गया, यह बात मैनेजर भी नहीं जानता था.

मैं समझ नहीं पाया कि अचानक रोहित को यह क्या सूझी कि वह अपने डैडी की जमीनजायदाद मैनेजर के हवाले कर के मुंबई से क्यों चला गया. ऐसी क्या समस्या आ गई उस के जीवन में. मैं ने उसे हर मुमकिन जगह तलाश किया. इस दौरान मैं ने स्मार्ट ब्यूटीकेयर हौस्पिटल में हैड प्लास्टिक सर्जन की जौब जौइन कर ली थी. रोहित को तलाश करने के लिए मैं ने अखबारों में इश्तहार भी छपवाए, लेकिन उस का कुछ पता नहीं चला. आज अचानक ही रोहित का मेरे नाम से पत्र आया तो मैं ने चैन की सांस ली. वह लंदन में था और मैं उस से मिलने लंदन जाने को उतावला हो उठा था. मैं ने हौस्पिटल से 15 दिन की छुट्टी ली और दूसरे दिन ही लंदन के लिए हवाई जहाज में बैठ गया.

लंदन के हीथ्रो एयरपोर्ट पर मैं सुबह उतरा तो पीली चटक धूप खिली हुई थी. मैं ने रोहित के मोबाइल पर लंदन आने की पहले ही सूचना दे दी थी. वह एयरपोर्ट पर मुझे लेने आया था. मुझे देख कर उस ने गैलरी से हाथ हिलाया तो मैं दौड़ कर उस के गले से जा लगा. उस वक्त उस में पहले जैसा ही जोश और उत्साह मैं ने महसूस किया. एकदूसरे के गले लग कर हम यूं मिले, जैसे बरसों से बिछुड़े हुए अब जुदा नहीं होंगे. हमारी आंखों में आंसू थे.

”तुम ने अचानक से मुंबई छोड़ दी रोहित और यहां इतनी दूर आ कर बसेरा कर लिया, जान सकता हूं तुम ने ऐसा क्यों किया?’’

”लंबी कहानी है अभय, वक्त आएगा तो बता दूंगा. आओ घर चलें.’’ एक हलकी सी मुसकराहट चेहरे पर ला कर रोहित बोला और मुझे ले कर कार पार्किंग में आ गया.

पार्किंग में उस की शानदार कार खड़ी थी. मुझे अपने पास सीट पर बिठा कर उस ने खुद ड्राइविंग सीट संभाल ली. हमारा सफर शुरू हुआ. भव्य ऊंची इमारतों को पीछे छोड़ती हुई कार उस ओर बढ़ी, जिधर वीरान जंगल और पहाड़ों की लंबी शृंखला फैली हुई थी. शहर से दूर पहाड़ों के बीच में एक अकेला बंगला खड़ा था. कार उसी बंगले के पोर्च में आ कर रुकी. एक बूढ़ा नौकर दौड़ कर कार के पास आ गया.

”यह डेविड अंकल हैं. मेरे साथ यहीं रहते हैं. हम इस बंगले में सिर्फ 2 ही लोग हैं अभय. अब तुम आ गए हो तो हम 3 हो गए.’’ रोहित ने हंसते हुए कहा और कार से नीचे उतर गया.

”मैं यहां हमेशा थोड़ी रहूंगा दोस्त, तुम्हारे लिए 15 दिन की छुट्टी ले कर आया हूं.’’ मैं ने कहा और अपना सूटकेस उठाने लगा.

”रहने दो, यह सूटकेस डेविड अंकल तुम्हारे कमरे में पहुंचा देंगे.’’

मैं रोहित के साथ अंदर ड्राइंगरूम में आया तो वह बोला, ”अभय, तुम फ्रेश हो जाओ. हम साथ में बैठ कर नाश्ता करेंगे.’’

फे्रश होने के बाद मैं ने रोहित के साथ बैठ कर नाश्ता किया. नाश्ते के दौरान रोहित ने बताया, ”मैं ने अचानक मुंबई छोड़ी थी अभय, उस वक्त तुम अमरीका में थे, मैं तुम से संपर्क नहीं कर पाया, यहां आने के बाद मैं काम में उलझ गया. एक दिन जब शार्क होटल में एक हिंदुस्तानी के पास ‘लोकमत’ न्यूजपेपर में अपनी गुमशुदगी का तुम्हारी ओर से छपवाया गया इश्तहार पढ़ा तो मुझे तुम्हारी याद हो आई.

”मुझे मालूम था तुम कोर्स पूरा कर के मुंबई लौट आए होगे और किसी बड़े हौस्पिटल में प्लास्टिक सर्जन का पद जौइन कर लिया होगा तो मैं ने मुंबई के हर बड़े हौस्पिटल में तुम्हारे बारे में मालूम किया. मुझे स्मार्ट ब्यूटी केयर हौस्पिटल में तुम्हारे बड़ा सर्जन होने की जानकारी मिली तो मैं ने तुम्हारे नाम पत्र लिखा. इस प्रकार आज फिर मैं अपने अजीज दोस्त से मिल पाया हूं. अच्छा अभय, तुम अपना हौस्पिटल कब खोलने वाले हो?’’ रोहित ने पूछा.

”बहुत जल्द रोहित, मैं उस के लिए पैसा इकट्ठा कर रहा हूं.’’ मैं ने मुसकरा कर बताया, ”और हां, मैं अपने हौस्पिटल का नाम ‘पार्थ ब्यूटी होम’ रखने वाला हूं.’’

”पार्थ क्यों?’’

”तुम्हारी बदौलत ही मैं इस मुकाम पर पहुंचा हूं दोस्त, तुम मेरे लिए सब कुछ हो और मैं तुम्हारा पार्थ यानी सेवक हूं.’’

मैं ने नाश्ता खत्म किया और डेविड अंकल के साथ एक रूम में चला आया. मेरा सामान डेविड ने इसी कमरे में ला कर रख दिया था. इस में बैडरूम कम स्टडीरूम जैसी सुविधा थी. मैं नर्म बिस्तर पर लेटा तो जल्दी ही मुझे नींद ने अपनी आगोश में ले लिया.

मेरी नींद खुली तो शाम ढलने को आ गई थी. मैं खूब सोया था. मुझे जगा देख कर डेविड मेरे लिए कड़क चाय और बिसकुट ले कर आए. मैं ने उन से रोहित के विषय में पूछा तो वह गंभीर स्वर में बोले, ”आज अमावस है न बेटा, रोहित हर अमावस को शहर जाता है.’’

”क्यों?’’ मैं ने हैरानी से पूछा.

”जाता होगा क्लबों और बार में, जब रात को लौटता है तो उस के साथ एक जवान और सुंदर लड़की होती है.’’

रोहित के विषय में यह जानकारी काफी चौंकाने वाली थी. मैं उसे अच्छे से जानता था, उसे न बार, क्लबों में जाने का शौक था, न कभी उस ने किसी लड़की के साथ दोस्ती की थी. वह लड़कियों से दस कदम दूर रहता था. फिर यहां लंदन में आ कर उस ने यह शौक कैसे पाल लिए. मेरी समझ में नहीं आ रहा था.

”मैं अपने मालिक के लिए झूठ क्यों बोलूंगा. फिर रोहित तो मेरे बेटे जैसा है, मैं उसे बदनाम क्यों करूंगा. मैं ने 3 अमावस की रातों को रोहित को नशे में लडख़ड़ाते देखा है. उस के साथ लड़की भी यहां आते देखी है. लेकिन…’’

”लेकिन क्या अंकल?’’

”जो लड़की रोहित के साथ यहां आईं, वह मैं ने वापस जाते नहीं देखीं. तलाश करने पर वह लड़की मुझे बंगले में नहीं मिली.’’

मैं चाय पी कर टहलने के इरादे से बंगले के लौन में आ गया. रोहित का एक नया रूप मेरे सामने उजागर हुआ था. मैं यह मानने को तैयार नहीं था कि मेरा दोस्त एक ऐसा नकाब पहने हुए है, जिस के पीछे एक बुरा इंसान छिपा हुआ है. मैं इस की असलियत खुद जानने को उत्सुक हो गया. लौन में रंगबिरंगे फूल लगे हुए थे. उन्हें निहारते हुए मैं लौन को पार कर के बंगले के पीछे निकल आया. पीछे एक बड़ा सा तालाब था. वह शांत दिखाई दे रहा था, लेकिन मैं जैसे ही उस तालाब के किनारे गया, उस में से बड़ीबड़ी मछलियां उछलती हुई किनारे पर आ गईं. शाम पूरी तरह ढल गई थी. मैं बंगले में लौट आया और अपने कमरे में आ कर लेट गया. रोहित अभी तक शहर से वापस नहीं लौटा था.

8 बजे डेविड अंकल ने मुझे आ कर बताया कि रोहित ने फोन कर के कहा है कि मैं खाना खा लूं, वह देर से लौटेगा. मैं ने डेविड अंकल से खाना अपने कमरे में ही मंगवा लिया. खाना खा लेने के बाद मैं फिर से बिस्तर पर लेटा तो मेरी आंख लग गई. अचानक मेरी नींद किसी आहट से टूटी. मैं ने देखा रात के 12 बज रहे थे. आहट मेरे दरवाजे पर हुई थी. मैं उठ कर दबेपांव दरवाजे पर आया और दरवाजे से कान लगा दिए. बाहर बरामदे में कोई खड़ा था. मैं ने कीहोल से आंख लगा कर देखा तो मुझे रोहित नजर आया. शायद मेरे दरवाजे पर मेरी स्थिति भांपने आया था.

कुछ क्षण बाद वह मेरे दरवाजे से हट कर बरामदे में जाता नजर आया तो मैं ने धीरे से दरवाजा खोल दिया. रोहित बंगले के पीछे के भाग की तरफ जा रहा था. कुछ सोच कर मैं दबे कदम रोहित के पीछे लग गया. रोहित गैलरी पार कर के बंगले के अंतिम छोर पर आ कर रुक गया, यहां से आगे रास्ता नहीं था, समतल दीवार थी. रोहित ने दीवार पर लगी एक खूंटी को पकड़ कर घुमाया तो दीवार में एक दरवाजा खुल गया. मैं हैरान रह गया. इस दीवार में बड़ी सफाई से चोर दरवाजा भी बनाया जा सकता है, यह आश्चर्य की बात थी. रोहित उस दरवाजे से अंदर चला गया तो दरवाजा बंद हो गया. मैं लपक कर वहां आया और मैं ने वही खूंटी घुमा कर दरवाजा खोल लिया और अंदर घुस गया. सामने शीशे का हाल था. उस हाल में नजर पड़ते ही मैं बुरी तरह चौंक गया.

हाल में एक खूबसूरत लड़की घुटने के बल बैठी हुई थी. उस लड़की के हाथपांव पीछे की तरफ रस्सियों से बांध दिए गए थे. उस के तन पर एक भी कपड़ा नहीं था. वह बेहद डरी हुई दिखाई दे रही थी. रोहित उस के सामने खड़ा था. चूंकि रोहित की पीठ मेरी तरफ थी, वह मुझे नहीं देख पाया था. रोहित के हाथ में चाकू था. वह क्या करने वाला था, मैं नहीं समझ पाया. मैं दम साधे देख रहा था. रोहित उस भय से सहमी लड़की से कुछ कह रहा था. क्या, यह मैं नहीं सुन सकता था. शायद शीशे का वह हाल साउंडप्रूफ था. मैं उस के बाहर था, इसलिए मुझे कोई भी आवाज सुनाई नहीं दे रही थी.

इस लड़की से कुछ कहने के बाद रोहित उस की तरफ बढ़ा तो मैं ने महसूस किया कि लड़की उस से दया की भीख मांग रही है, किंतु रोहित पूरा वहशी बना हुआ था. उस ने आगे बढ़ कर लड़की के बाल मुट्ठी में पकड़े और लड़की की पीठ पर चाकू से खुरचखुरच कर कुछ लिखने लगा. लड़की को मैं ने तड़पते और गला फाड़ कर चीखता महसूस किया तो मेरी आंखों में आंसू छलक आए. मेरा दोस्त, जिसे मैं क्या समझता था, आज मुझे किसी राक्षस से कम नहीं लग रहा था. लड़की असहनीय पीड़ा से चीखती हुई फर्श पर औंधी गिरी तो मैं ने पढ़ा, रोहित ने उस की पीठ पर चाकू से ‘बेवफा’ शब्द खुरचा था.

‘उफ!’ मैं ने आंखें बंद कर लीं. रोहित ने अब उस लड़की को सीधा कर के उस के सीने में चाकू उतार दिया था. लड़की बुरी तरह तड़प रही थी, उस के शरीर से खून निकल कर फर्श को लाल करने लगा था. रोहित ने उसे उसी हालत में उठाया और शीशे की दीवार के पास ले आया. वहां कोई लीवर था, उसे दबाने से शीशे में बड़ी सी खिड़की खुल गई. रोहित ने तड़पती हुई लड़की को उस खिड़की से बाहर उछाल दिया. अब मेरी समझ में आ गया था कि वह लड़की वापस क्यों नहीं जाती. रोहित उस का बेरहमी से कत्ल कर उस की लाश तालाब में फेंक देता है, मछलियां लड़की को चट कर हैं. मेरा मन रोहित के प्रति उस वक्त घृणा से भर गया. मैं चुपचाप वहां से बाहर निकला और भारी कदमों से अपने कमरे में आ गया. मुझे रात भर नींद नहीं आई. मैं बिस्तर पर पड़ा रोहित के विषय में सोचता रहा.

सुबह मैं फ्रेश हुआ तो डेविड अंकल ने आ कर कहा, ”मालिक तुम्हारा ब्रेकफास्ट के लिए इंतजार कर रहे हैं बेटा अभय.’’

”हां. चलता हूं अंकल.’’ मैं ने पैरों में स्लीपर पहनते हुए कहा.

मैं डेविड अंकल के साथ ड्राइंगरूम की तरफ बढ़ा तो रोहित ने मुसकरा कर मेरा स्वागत किया, ”माफ करना अभय, कल मुझे अचानक एक जरूरी काम से शहर जाना पड़ गया था. मैं तुम्हें पहाड़ पर नहीं ले जा सका. आज…’’

मैं ने बात काट दी, ”आज नहीं रोहित, फिर किसी रोज चलेंगे.’’

”जैसा तुम्हें ठीक लगे, हम बाद में चल लेंगे.’’ रोहित ने कहा और मेरे लिए टोस्ट पर मक्खन लगाने लगा.

”रोहित, मैं ने कल तुम से पूछा था कि तुम ने अचानक से मुंबई क्यों छोड़ दी? तुम ने कहा कि लंबी कहानी है, बाद में बताऊंगा. आज तुम्हें बताना होगा कि ऐसी क्या बात हुई कि तुम मुंबई छोड़ कर लंदन में आ बसे?’’

”तुम जानने की जिद कर रहे हो तो सुनो,’’ रोहित ने गहरी सांस ले कर बताना शुरू किया, ”तुम डाक्टरी कोर्स करने अमरीका चले गए तो मेरे साथ बहुत कुछ घटा. दिल का दौरा पडऩे से अचानक डैडी चल बसे. मुझे अपनी पढ़ाई बीच में छोड़ कर डैडी का कारोबार संभालना पड़ा. मैं अब रोज कंपनी के औफिस में जाने लगा था.

”एक दिन मेरे औफिस में एक लड़की आई. वह जवान और खूबसूरत थी. बहुत गरीब घर से थी. उस के बाप का साया सिर पर नहीं था, मां थी, लेकिन बीमार रहती थी. घर में

कोई कमाने वाला नहीं था. 12 क्लास पढ़ी हुई थी, उसे काम चाहिए था. मुझे उस पर न जाने क्यों तरस आ गया. मैं ने उसे स्टेनो के पद पर रख लिया.

”मैं धीरेधीरे उस की तरफ आकर्षित होने लगा. वक्तबेवक्त मैं उस की खुले मन से मदद करने लगा. वह मेरे दिल की आवाज को पहचान गई. उस ने मेरी तरफ दोस्ती का हाथ बढ़ाते हुए एक बात कही थी, ‘रोहित बाबू, मैं बेशक गरीब घर की हूं, लेकिन एक इज्जतदार बाप की बेटी हूं. मुझ से प्यार के नाम पर ऐसा छल मत करना कि मुझे शर्मिंदा हो कर किसी कुएंतालाब में जगह ढूंढनी पड़े.’

”मैं ने उसे विश्वास दिलाया कि मैं मर जाऊंगा, लेकिन तुम्हारे साथ कभी छल नहीं करूंगा.’’ एक क्षण को रोहित रुका, फिर कहने लगा, ”अभय, मैं ने उसे दिल से चाहा, वह यह मेरा पहला और आखिरी प्यार थी. उस के कहने पर मैं ने उस के साथ सात फेरे लेने का मन बना लिया था. इस के लिए मैं ने 15 मई का दिन तय किया.

”उस दिन अमावस थी. मुझे कुछ लोगों ने कहा कि अमावस की रात को दुलहन के साथ फेरे लेना शुभ नहीं होते, लेकिन मैं इन बातों पर विश्वास नहीं करता था. मैं ने लोगों से कहा कि मेरी होने वाली दुलहन पूनम का चांद है, उस की रोशनी से अमावस का अंधेरा भी जगमगा उठेगा.

”कार्ड छपे. शादी की तैयारियां जोरशोर से शुरू हुईं और फिर वह अमावस की रात भी आ गई, जिस दिन मुझे मेरी प्रियतमा के साथ अग्नि के सात फेरे लेने थे.

”मुंबई के वरसोवा वाले बंगले को दुलहन की तरह सजाया गया था. मुंबई शहर के जानेमाने उद्योगपति, मेरे मित्र और अन्य प्रतिष्ठित

व्यक्ति हमारी एंगेजमेंट और शादी में शामिल होने के लिए बंगले में आने शुरू हो गए थे. एंगेजमेट और शादी का समय रात 11 बजे रखा गया था.

”मैं दूल्हा बन कर मित्र मंडली में बैठा हंसीठिठोली कर रहा था. मेरी दुलहन, जिसे मैं पूनम के नाम से पुकार रहा हूं, वह भी एक कमरे में दुलहन के लिबास में सजसंवर रही होगी, मैं यही सोचे बैठा था, लेकिन मुहूर्त पर जब वह स्टेज पर नहीं आई तो मैं उसे बुलाने उस कमरे में गया, जहां वह मेकअप करवा रही थी. वह कमरा खाली था. मैं हैरानपरेशान पूनम को बंगले में तलाश करने लगा.

”मुझे टूटे हुए गजरे के फूल नीचे बेसमेंट में जाने वाली सीढिय़ों पर दिखाई दिए तो मैं बेसमेंट में उतर राया. उफ!’’ रोहित के मुंह से सर्द आह निकली. वह थके से स्वर में बोला, ”अभय, मेरी पूनम कपड़ा उद्योगपति पीयूष गिडवानी की बांहों में मुझे मिली तो मेरे सारे अरमान ताश के पत्तों की तरह बिखर गए. मैं पूनम की बेवफाई पर रो पड़ा. क्या नहीं था मेरे पास कि उस बेवफा ने मुझे पीयूष की नजरों में बौना बना दिया. उस ने मुझे धोखा दिया था अभय. मेरे दिल पर उस ने गहरी चोट की थी.’’ रोहित कहतेकहते बच्चों की तरह रोने लगा.

मुझे रोहित के ऊपर तरस हो आया, मैं ने रोहित का कंधा थपथपा कर उसे ढांढस बंधाने के बाद कहा, ”मुझे उस का सही नाम बताओ रोहित, मैं उस से मिलूंगा और…’’

”अब कोई जरूरत नहीं है अभय. मैं ने उस बेवफा को भुला दिया है. मेरे लिए वह उसी दिन मर गई थी, जब उस ने मुझ से शादी वाले दिन बेवफाई की थी. मैं ने उसे और मुंबई शहर को भुला देने के लिए वहां से दूरी बना ली. फिर मैं लंदन आ गया. अब मैं उसे याद नहीं करता.’’

मुझे रोहित के दिलोदिमाग से लड़की जात के प्रति पैदा हुई नफरत को समाप्त करना था. सब से पहले मुझे उस नागिन का पता लगाना था, जिस ने रोहित को डसा था और इस अंजाम तक पहुंचाया था. उस का पता मुझे रोहित के कमरे से चल सकता था. मैं रोहित के बैडरूम में घुस गया और उस की अलमारियों की तलाशी लेने लगा. मैं ने वहां रखे सामान को उलटपलट डाला. मेज की ड्राअर, सेफ आदि देख लेने के बाद मैं ने रोहित के पलंग का बिस्तर पलटा तो मुझे गद्दे के नीचे एक लड़की की तसवीर नजर आ गई. मैं ने जैसे ही वह तसवीर उठा कर देखी, मुझे जबरदस्त झटका लगा. यह तसवीर शालू की थी.

शालू, जो रजनी बन चुकी थी. वह अब मेरी प्रेमिका थी, मैं उसे बहुत प्यार करता था. मेरी आंखों के आगे शालू से हुई पहली मुलाकात का एकएक दृश्य उजागर होने लगा.

मैं ने अमरीका से लौट कर मुंबई में स्मार्ट ब्यूटीकेयर हौस्पिटल में प्लास्टिक सर्जन का पद जौइन कर लिया था और मुझे रहने के लिए हौस्पिटल की तरफ से एक फ्लैट मिल गया था. एक दिन मेरे फ्लैट पर एक लड़की साफसफाई का काम मांगने आई. मैं ने देखा उस ने अपना चेहरा दुपट्टे से छिपा रखा था. वह 2 दिन से भूखी थी, उस की आंखों में याचना थी, वह बहुत मायूस और मजबूर लगी मुझे. मैं ने उस पर तरस खा कर उसे काम पर रख लिया. 2-3 दिन में ही मैं ने पहचान लिया कि वह मेहनती है. मैं ने उस से 3 दिन बाद उस के बारे में पूछा तो उस ने बताया कि वह दुनिया में अकेली है. वह 2 वक्त की रोटी के लिए दरदर भटक रही थी, उस के सिर पर छत भी नहीं थी. आप के यहां मुझे काम मिला है तो अब मैं पेट भर कर खा लेती हूं और फ्लैट के बाहर सो जाती हूं.

”आज से तुम बाहर नहीं सोओगी, स्टोर रूम खाली है, उस में अपना बिस्तर लगा लो. और हां, तुम यह अपना चेहरा क्यों छिपा कर रखती हो?’’

उस ने गहरी सांस भर कर उदास स्वर में कहा, ”मेरी भी हसरतें जवान हुई थीं साहब, मैं ने भी एक स्मार्ट युवक से दिल लगा लिया था. वह अमीर घर से था, उस ने मुझे अपने दिल की रानी बना कर महलों में रखने की कसमें खाई थीं, लेकिन न जाने क्यों उस ने मुझे ‘बेवफा’ घोषित कर दिया और मेरे चेहरे पर तेजाब डाल कर इस शहर से ही गायब हो गया. अब मैं अपना झुलसा हुआ यह कुरूप चेहरा किसी को नहीं दिखा सकती, इसलिए ढक कर रखती हूं.’’

”ओह!’’ मैं ने तड़प कर कहा, ”मुझे अपना चेहरा दिखाओ, मैं प्लास्टिक सर्जन हूं, तुम्हारे चेहरे की कुरूपता खत्म कर सकता हूं.’’

उस ने अपना चेहरा मुझे दिखाया. उस के बाएं चेहरे को तेजाब ने बुरी तरह झुलसा दिया था. जख्म सूख चुका था, लेकिन जला हुआ वह हिस्सा इस लड़की को बहुत बदसूरत बना रहा था.

मैं ने उसे आश्वासन दिया कि मैं इस जले हुए चेहरे को नई सुंदरता दूंगा.

वादे के मुताबिक मैं ने शालू के चेहरे की प्लास्टिक सर्जरी की और उस के कहने पर उस को एक नया चेहरा और नया नाम दे दिया रजनी. रजनी मेरे अहसान तले दब गई थी, लेकिन मैं ने इस का कोई गलत फायदा नहीं उठाया. मैं उसे दिल की गहराई से प्यार करने लगा. वह भी मुझे चाहने लगी. हमारे प्यार में निर्मलता थी, पवित्रता थी. उस अमावस की मनहूस रात की सच्चाई क्या थी, मुझे अब यह मालूम करना था. इस के लिए मुझे मुंबई लौटना जरूरी था.

मैं ने अचानक अपना सामान पैक किया. रोहित औफिस से नहीं लौटा था. मैं ने डेविड अंकल से झूठ बोला कि मुंबई से काल आई है, मेरा एक पेशेंट बहुत सीरियस है, मुझे तुरंत बुलाया गया है. रोहित से मैं फोन पर बात कर लूंगा. मैं चुपचाप एयरपोर्ट आया और मुंबई जाने वाली फ्लाइट ले कर मुंबई के लिए रवाना हो गया.

मुंबई में आ कर मैं ने एक होटल में कमरा लिया. शालू से पहले मैं पीयूष गिडवानी को टटोलना चाहता था. शालू मेरे साथ एक साल से रह रही थी, मुझे उस के प्यार में कोई मदारी और फरेब जैसी बात देखने को नहीं मिली थी. एक कपड़ा उद्योगपति मेरा मित्र था. उस से मुझे पीयूष गिडवानी का पता मिल गया. मुझे मालूम हुआ कि रईस उद्योगपति पीयूष अब लोखंडवाला की झुग्गी बस्ती में रहता है. हैरानी की बात थी, मैं उसे ढूंढता हुआ लोखंडवाला की झुग्गी बस्ती में उस के पास पहुंच गया.

पिता हरीश गिडवानी की गिनती उद्योग जगत में रईसों में होती थी, उस का बेटा पीयूष एक छोटी सी झुग्गी में रह रहा था. उस ने मुझे हैरत भरी नजरों से देखा और बोला, ”यदि मैं भूला नहीं हूं तो आप रोहित अग्रवाल के दोस्त अभय वर्मा हैं.’’

”ठीक पहचान रहे हो पीयूष.’’ उस के पास स्टूल पर बैठते हुए मैं विषभरे स्वर में बोला, ”फिर तो तुम यह भी समझ गए होगे कि मैं तुम्हें तलाश करता हुआ इस झुग्गी तक क्यों आया हूं.’’

”आप बताइए, मैं भला बगैर बताए कैसे समझ सकता हूं?’’

”पीयूष, तुम ने रोहित और शालू की एंगेजमेट और मैरिज पार्टी में शालू के साथ जो हरकत की थी, क्या उस में शालू की रजामंदी थी?’’

”नहीं.’’ गहरी सांस भर कर पीयूष बोला, ”शालू बेचारी तो बिलकुल बेकुसूर थी. वह सिर्फ मेरी हरकत थी, उसी की सजा मैं आज भुगत रहा हूं. मैं ने पिता की मौत के बाद उन की सारी संपत्ति जुए और शराब की भेंट चढ़ा दी और मैं इस झुग्गी में आ गया. आज मैं किडनी रोगी हूं, जिंदगी की अंतिम घडिय़ां गिन रहा हूं. यह शालू के दिल से निकली बददुआ का असर हो सकता है. मैं ने ओछी हरकत कर के रोहित और शालू को जुदा कर दिया था. वह बेदाग और बेगुनाह थी. मैं आप को उस की बेगुनाही का सबूत देता हूं.’’

पीयूष उठा और कोने में रखे टूटे से संदूक में से एक कैसेट निकाल कर उस ने वह कैसेट मुझे दे दी.

”इस वीडियो कैसेट में मेरी वह तमाम हरकतें कैद हैं, जो उस अमावस की रात को पार्टी में मैं ने शालू के साथ की थीं.’’ पीयूष ने रुक कर लंबी सांस ली, ”मैं और रोहित एक ही बिजनैस कपड़ा उद्योग से जुड़े हुए थे, रोहित अकसर मुझ से आगे रहता था, इसलिए मैं उसे अपना प्रतिद्वंदी मानने लगा था. मैं ने उस से दोस्ती जरूर कर रखी थी, लेकिन मन ही मन में उस से जलता था.

”जब मुझे रोहित का एंगेजमेंट और मैरिज का कार्ड मिला तो मैं ने मन ही मन रोहित से बदला लेने का प्लान बना लिया. मैं ने पार्टी में पहुंच कर शालू को तलाश किया. वह तैयार हो कर कमरे से निकल रही थी. मैं ने उसे कोल्ड ड्रिंक औफर की. उस में मैं ने बेहोशी का पाउडर मिला दिया था. शालू ने वह ड्रिंक पी ली.

”वह बेहोश हो कर गिरने को हुई तो मैं उसे कमर से थाम कर बेसमेंट में ले आया. मैं ने एक वीडियोग्राफर को इस काम के लिए बुक कर रखा था कि वह मेरी और शालू की गंदी वीडियो बनाएगा. उस ने यह काम किया, लेकिन उस बेवकूफ ने वह दृश्य भी कैमरे में कैद कर लिए, जब मैं शालू के लिए कोल्ड ड्रिंक में बेहोशी का पाउडर डाल रहा था.

”मैं ने बेहोश शालू को बेसमेंट में लाने के बाद उस के साथ ऐसे पोज बनाया, जैसे शालू मुझे चिपक कर प्यार कर रही हो. मैं कोई हरकत करता कि शालू को तलाश करता हुआ रोहित बेसमेंट में आ गया. मैं वहां से भाग निकला. यदि कैसेट मेरे हिसाब से बनती तो मैं जिंदगी भर रोहित को ब्लैकमेल करता, लेकिन मेरा खेल बिगड़ गया था.’’ पीयूष खामोश हो कर हांफने लगा था. मैं ने अब वहां रुकना बेकार समझा. मैं वीडियो कैसेट ले कर उस की झुग्गी से बाहर निकल आया.

होटल छोड़ कर मैं अपने फ्लैट पर पहुंचा तो शालू उर्फ रजनी ने उठ कर मुझे अभिवादन किया. मैं ने उस के सामने बैठ कर बहुत गंभीर स्वर में कहा, ”रजनी, मैं 10 दिन बाद फिर लंदन जाऊंगा, इस बार तुम भी मेरे साथ चलोगी.’’

उस ने मुझे हैरानी से देखा और तरहतरह के सवाल करने लगी. मैं ने उस की किसी बात का उत्तर नहीं दिया. मैं उठ कर हौस्पिटल चला गया. दसवें दिन मैं ने रजनी को साथ लिया और रात को लंदन को लिए फ्लाइट पकड़ ली. दूसरे दिन जब मैं उसे ले कर एयरपोर्ट पर उतरा तो रजनी ने मेरी कलाई कस कर पकड़ ली और गंभीर स्वर में बोली, ”यदि आप मुझे रोहित के पास ले कर जा रहे हैं तो सुन लीजिए. मेरे मन में अब रोहित के लिए कोई जगह नहीं है, मैं अब आप से प्यार करती हूं. यदि आप मुझे सहारा नहीं दे सकते तो हाथ छुड़ा लीजिए. मैं यहां की भीड़ में खो जाऊंगी.’’

”ऐसा मत कहो रजनी, मुझ से पहले

तुम रोहित का प्यार थी, उसे आज तुम्हारी जरूरत है.’’

”रोहित कभी मेरा प्यार था डाक्टर बाबू, उस ने मुझ पर शक कर के अपने प्यार का अधिकार खो दिया है.’’

”रजनी, मेरी बात को समझो. रोहित उस रात धोखे का शिकार हुआ था, वह तुम्हें सच्चा प्यार करता था. तुम्हें पीयूष की बांहों में देख कर वह होश खो बैठा था, उस ने इसीलिए तुम्हारे चेहरे पर तेजाब फेंका था और मुंबई छोड़ कर यहां वीराने में आ बसा. अमावस की रात को वह शहर से एक लड़की बहलाफुसला कर लाता है और अपने बंगले में बड़ी बेरहमी से उस का कत्ल कर देता है. वह मानसिक रोगी बन चुका है रजनी. मैं उसे इस मानसिक विकृति से बाहर निकालना चाहता हूं, तुम मेरी मदद करोगी तो रोहित की जान बच जाएगी, वरना किसी दिन वह खुद अपनी जान ले लेगा.’’

शालू उर्फ रजनी ने गहरी सांस ली, ”अपने से जुदा करने के अलावा आप मुझ से जो कहेंगे, मैं करूंगी डाक्टर बाबू. कहिए, मुझे क्या करना है?’’

मैं ने रजनी को अपनी योजना समझा दी. मैं जो कुछ करने जा रहा था, वह बहुत जोखिम भरा था, लेकिन रोहित को मानसिक रोग से बाहर लाने के लिए इस के अलावा कोई दूसरी राह मुझे दिखाई नहीं दे रही थी.

सुबह जब रोहित अपने औफिस के लिए चला गया, मैं उस के बंगले पर पहुंच गया. मुझे अचानक सामने देख कर डेविड अंकल हैरान रह गए, ”अरे तुम डाक्टर बेटा, तुम अचानक गए और आज अचानक से आ गए, सब ठीक तो है न?’’

मैं ने डेविड अंकल का प्यार से हाथ पकड़ कर कहा, ”आप मुझे बेटा मानते हैं न?’’

”हां,’’ डेविड अंकल ने आत्मीयता से कहा, ”जैसे रोहित मेरा बेटा है, वैसे तुम भी मेरे बेटे ही हो.’’

मैं ने डेविड अंकल को कुरसी पर बिठाया और वह सब कुछ सस्पेंस उन्हें बता दिया, जो मैं ने पिछली अमावस वाली रात को उस साउंडप्रूफ हाल में देखा था. मेरे कहने पर डेविड अंकल रोहित की इस मानसिक विकृति से उसे बाहर लाने के लिए मेरा साथ देने को तैयार हो गए थे.

उन की मदद से मैं ने साउंडप्रूफ हाल के कोने में एक एलईडी स्क्रीन लगा कर उस में एक पैन ड्राइव सैट कर दिया. मुंबई में ही मैं ने पीयूष से मिली विडियो कैसेट को पैनड्राइव में ट्रांसफर कर ली थी. यह काम कर के मैं शहर के लिए निकल गया. मैं ने शालू उर्फ रजनी को शहर के उस शार्क होटल में ठहरा दिया, जहां रोहित अपना शिकार तलाश करने हर अमावस की रात जाता था. कल अमावस की रात थी. मैं होटल पहुंच कर शालू से मिला और पूरी रात और दूसरे दिन शाम तक शालू के साथ कमरे में रहा. मैं उसे समझाता रहा कि उसे रोहित का सामना कैसे करना है और उसे कैसे अपनी मीठी बातों में फंसा कर उस के फ्लैट तक पहुंचना है.

शाम को शार्क होटल के बार ऐंड डांसिंग फ्लोर पर अमीर लोगों का आना शुरू हुआ. मैं ने शालू उर्फ रजनी को तैयार कर के नीचे भेज दिया. मैं खुद बड़ा सा हैट सिर पर रख कर अपने को छिपाता हुआ नीचे बार रूम में एक टेबल पर आ कर बैठ गया. शालू क्रिश्चियन परिवेश में थी. शार्ट टौप, जींस और सिर पर सफेद दुपट्टा. दुपट्टे से उस ने अपना आधा चेहरा ढक लिया था. वह इस ड्रेस में बड़ी आकर्षक लग रही थी. वह एक टेबल पर बैठ गई. 7 बजे जब बार की महफिल जवां हुई, रोहित ने बार में कदम रखा. उस ने पूरे हाल में नजरें दौड़ाईं. फिर अकेली बैठी शालू की तरफ बढ़ गया. शालू संभल कर बैठ गई.

”हैलो हसीना!’’ वह शालू के पास झुक कर मुसकराया, ”आप अकेली हैं, क्या मैं आप का पार्टनर बन सकता हूं?’’

”मैं आप जैसे हैंडसम साथी की तलाश में थी. बैठिए.’’ शालू अदा से मुसकरा कर उस की तरफ हाथ बढ़ाया.

रोहित ने जैसे ही उस का हाथ थामा तो वह एक क्षण को चौंका और शालू को देखने लगा.

”क्या हुआ?’’ शालू ने चौंक कर पूछा.

”मुझे ऐसा लगा जैसे यह हाथ मैं ने पहले भी थामा है.’’ रोहित डूबती आवाज में बोला. फिर सिर झटक कर उस ने शालू की कमर में हाथ डाल दिया, ”चलो.’’

वह शालू को ले कर बार से निकला तो मैं उस के पीछे झपटा. रोहित मुझे शालू के साथ अपनी कार में नजर आया. मैं ने एक टैक्सी रुकवाई और टैक्सी वाले को समझा दिया कि वह सावधानी से रेड रंग की उस कार का पीछा करे. आगे पीछे रोहित की कार और टैक्सी उस वीराने में स्थित फ्लैट तक पहुंच गई. मैं ने दूर ही टैक्सी रुकवा कर किराया दिया और पैदल ही फ्लैट तक पहुंच गया. आधी रात से पहले ही मैं डेविड अंकल को ले कर साउंडप्रूफ हाल में आ गया. रोहित ने शालू को उसी तरह रस्सियों से बांध कर घुटने के बल बिठा दिया था, जैसा वह दूसरी लड़कियों के साथ करता था.

मुझे ताज्जुब हुआ कि उस ने शालू को निर्वस्त्र नहीं किया था. शालू बुरी तरह डरी हुई थी. मैं ने पास पहुंच कर उस का गाल थपथपाया, ”हिम्मत रखो रजनी, तुम्हें मैं कुछ नहीं होने दूंगा. मैं और डेविड अंकल उधर एलईडी स्क्रीन के पीछे छिप रहे हैं.’’

शालू ने फीकी मुसकान के साथ सिर हिलाया. मैं डेविड अंकल को ले कर एलईडी स्क्रीन के पीछे छिप कर बैठ गया.

ठीक 12 बजे रोहित ने हाल में कदम रखा. मैं और डेविड अंकल सावधान हो गए. रोहित लडख़ड़ाती चाल से शालू की तरफ बढ़ा और उस के सामने आ कर रुक गया. वह शालू को घूरते हुए बोला, ”ऐ हसीन बला, तुम पहली लड़की हो, जिसे निर्वस्त्र करने में मेरे हाथों ने इंकार किया है. पता नहीं मुझे ऐसा क्यों लग रहा है कि तुम्हारी इन शरबती आंखों को मैं ने पहले भी कहीं देखा है, तुम्हारी दिल को मोह लेने वाली मधुर आवाज मेरे कानों ने पहले भी सुनी है. कौन हो तुम?’’

”मैं शालू हूं मिस्टर रोहित अग्रवाल.’’ शालू बड़ी लापरवाह अंदाज में बोली, ”वही शालू जिसे तुम बेइंतहा प्यार करते थे.’’

”नहींऽऽ’’ रोहित गला फाड़ कर गुस्से से चीख पड़ा, ”तुम शालू नहीं हो, उस बेवफा का तो मैं ने तेजाब से चेहरा बिगाड़ दिया था. यह चेहरा शालू का नहीं है.’’

”यह शालू का ही चेहरा है मिस्टर रोहित. डा. अभय ने तेजाब से जले इस चेहरे को नया लुक दिया है अब मैं शालू नहीं, रजनी बन गई हूं.’’ शालू शुष्क स्वर में बोली.

”ओह!’’ रोहित एकाएक हिंसक हो गया, ”अब मैं समझ गया, तुम शालू ही हो… तुम बेवफा हो. उस दिन मैं ने तुम्हारा चेहरा जलाया था. तुझे आज मैं तेरी बेवफाई की इतनी भयानक सजा दूंगा कि देखने वालों की रुह भी कांप जाएगी.’’ रोहित ने जेब से चमचमाता हुआ चाकू निकाला.

उस की आंखों में नफरत के शोले दहकने लगे. चेहरा क्रोध के कारण भयानक हो गया.

जैसे ही उस ने चाकू वाला हाथ ऊपर उठाया, मेरे इशारे पर डेविड अंकल ने हाल की बत्ती बुझा दी.

मैं ने तुरंत एलईडी स्क्रीन औन कर दी. स्क्रीन पर रोहित और शालू की एंगेजमेंट ऐंड मैरिज फंक्शन के दृश्य उभरने लगे. पार्टी इंजौय कर रहे मेहमानों से होता हुआ कैमरा उस दरवाजे पर आ कर रुका, जहां से शालू दुलहन के लिबास में सजीधजी बाहर निकल रही थी. फिर कैमरे में पीयूष गिडवानी नजर आया. वह एक कोल्ड ड्रिंक का गिलास टेबल पर रख कर उस में एक पुडिय़ा का पाउडर डाल रहा था. कोल्ड ड्रिंक चम्मच से हिला कर वह गिलास ले कर शालू के पास आता नजर आया, फिर उस ने मुसकरा कर कहा, ”हाय! शालूजी, आप बहुत खूबसूरत लग रही हैं, लीजिए मेरे हाथ से यह कोल्ड ड्रिंक पीएं, मुझे अच्छा लगेगा.’’

शालू ने मुसकरा कर कोल्ड ड्रिंक लिया और पीने लगी. कुछ ही देर बाद वह लडख़ड़ाती नजर आई. पीयूष गिडवानी ने उसे कमर से थाम लिया और बेसमेंट की तरफ बढ़ गया. बेसमेंट में ला कर उस ने उसे सोफे पर लिटा दिया और उस की साड़ी उतारने लगा. अद्र्धमूर्छित शालू उस का विरोध करती नजर आ रही थी. साड़ी उतारने के बाद उस ने शालू को जैसे ही बांहों में भरा, वहां रोहित आता दिखा. पीयूष उसे देख कर घबराया हुआ उठा और सीढिय़ों की तरफ भागा. इस के बाद स्क्रीन से वीडियो गायब हो गई.

”देख लिया रोहित शालू की बेगुनाही का सबूत.’’ मैं ने ऊंची आवाज में कहा और डेविड अंकल से बोला, ”लाइट्स जला दीजिए अंकल.’’

डेविड अंकल ने लाइट्स औन की तो हाल का दृश्य देख कर हमारे मुंह से चीखें निकल गईं. रोहित ने अपने दोनों कलाइयों की नसें काट ली थीं. वह बुत बना स्क्रीन को देख रहा था. उस की कलाइयों से निकले खून ने फर्श को रंग दिया था.

मैं घबरा कर रोहित की तरफ झपटा. डेविड ने शायद अंधेरे में ही शालू को बंधनमुक्त कर दिया था. वह भी रोहित की तरफ दौड़ी. डेविड अपनी जगह जड़ बना खड़ा रह गया था, उसे कुछ सूझ नहीं रहा था.

”यह तुम ने क्या किया रोहित?’’ रोहित को बाहों में ले कर मैं चीख पड़ा.

”अंकल एंबुलेंस बुलाओ.’’

”नहीं दोस्त.’’ रोहित हाथ उठा कर शुष्क स्वर में बोला, ”मैं ने अपने प्यार पर शक कर के उस का अपमान किया है. मुझे सजा मिलनी चाहिए. वैसे भी मैं शालू को बेवफा मान कर इतने गुनाह कर चुका हूं कि कानून मुझे मौत की ही सजा देगा.

मैं कानून और शालू का गुनहगार हूं. मेरे मरने से भी इन गुनाहों का प्रायश्चित नहीं हो सकता, मुझे माफ कर देना शालू.’’ रोहित की आवाज अब डूबने लगी थी. मैं डाक्टर था, किंतु उस वक्त बेबस था. रोहित को कटी हुई कलाइयों से तेजी से खून बह कर रोहित को मौत की तरफ धकेल रहा था. मैं रोने लगा.

”नहीं अभय, मेरे दोस्त, मुझे रो कर विदा मत कर. तू तो मेरा सब से अच्छा दोस्त है, मेरे मरने के बाद तू शालू से शादी कर लेना, मेरी प्रौपर्टी का तू नौमिनी है. इस में शालू को भी भागीदार बनाना. इस फ्लैट में डेविड अंकल रहेंगे. शालू, प्लीज मेरे दोस्त अभय का खयाल रखना…’’ अंतिम शब्द बहुत मुश्किल से कह पाया था रोहित. उस की गरदन एक तरफ लुढ़क गई. मैं और शालू फूटफूट कर रोने लगे. डेविड अंकल फर्श पर बैठ कर सुबकने लगे. सुबह तक हम तीनों रोहित की लाश के पास बैठ कर रोते रहे. हम ने सुबह बड़ी सावधानी से रोहित का अंतिम संस्कार कर दिया. मैं नहीं चाहता था कि रोहित मरने के बाद किसी कानूनी लफड़े में फंस कर इस बात के लिए बदनाम हो कि उस ने कई लड़कियों को मौत के घाट उतारा है.

दूसरे दिन डेविड अंकल से हम ने विदा ली. हम अपने साथ रोहित की अस्थियां ले कर मुंबई आए. यहां से हम ने हरिद्वार आ कर रोहित की अस्थियों को गंगा में प्रवाहित कर दिया. मैं ने एक महीने बाद शालू उर्फ रजनी के साथ शादी कर ली और रोहित की लंदन वाली संपत्ति बेच कर मुंबई में ‘पार्थ ब्यूटी केयर’ नाम से हौस्पिटल खोल लिया. डेविड अंकल उस वीराने में बने फ्लैट में रह कर रोहित की यादों के सहारे जी रहे थे. Stories in Hindi

 

 

Crime Story : प्रेमिका की हत्या कर पिता को फंसाने की रची चाल

Crime Story : कृष्णा कुमारी की हत्या के बाद पुलिस को जांच में जो सबूत मिल रहे थे, उस से मामला औनर किलिंग का लग रहा था, लेकिन कृष्णा कुमारी के पिता और भाई खुद को बेकसूर ही बताते रहे. इसी दौरान कृष्णा कुमारी के प्रेमी संजय चौहान से पूछताछ की तो न सिर्फ केस का खुलासा हो गया बल्कि इस की कहानी भी प्यार के इर्दगिर्द की निकली…

30 मई, 2021 की सुबह छत्तीसगढ़ के कोरबा जिले के गांव तुमान में दिगपाल सिंह वैष्णव जब अपनी कोरा बाड़ी की ओर हमेशा की तरह दातून कर के चहलकदमी करते हुए पहुंचा था तो उस ने देखा कि उस की बेटी कृष्णा बेसुध पड़ी हुई है. गले में साड़ी का फंदा फंसा हुआ है. दिगपाल यह देखते ही घबरा गया. उस ने दातून एक तरफ फेंकी और तेजी से बेटी कृष्णा के पास पहुंच गया. उस ने सब से पहले उस के गले में पड़ी साड़ी की गांठ खोल दी. उस ने अपनी बेटी को खूब हिलायाडुलाया. लेकिन उस में कोई हरकत नहीं हुई तो वह घबरा गया. उस के आंसू टपकने लगे. उसे लगा कि कहीं कृष्णा ने आत्महत्या तो नहीं कर ली है या फिर उस की यह हालत किस ने की है.

वह समझ गया कि कृष्णा की सांसें थम चुकी हैं. दिगपाल चिल्लाता हुआ अपने घर की ओर भागा, ‘‘कृष्णा की मां… कृष्णा की मां, देखो यह कैसा अनर्थ हो गया है. किसी ने हमारी बेटी को मार कर घर के पिछवाड़े बाड़ी में फेंक दिया है.’’

यह सुन कर दिगपाल की पत्नी भी रोने लगी. कहने लगी कि किस ने मार दिया बेटी को. थोड़ी ही देर में यह खबर तुमान गांव में फैल गई. इस के बाद तो दिगपाल के घर के बाहर लोगों की भीड़ जुटने लगी. उसी समय गांव के सरपंच सचिन मिंज ने कटघोरा थाने फोन कर के घटना की जानकारी थानाप्रभारी अविनाश सिंह को दे दी. थानाप्रभारी अविनाश सिंह पुलिस टीम के साथ घटनास्थल की ओर रवाना हुए और सुबह लगभग 8 बजे तुमान गांव पहुंच कर घटनास्थल का मुआयना करने में जुट गए. थानाप्रभारी ने घटनास्थल से ही अनुविभागीय अधिकारी (पुलिस) रामगोपाल कारियारे, एसपी अभिषेक सिंह मीणा को घटना की जानकारी दे दी.

कुछ ही देर में कोरबा से डौग स्क्वायड टीम वहां पहुंच गई. जांच के लिए खोजी कुत्ता बाघा को मृत शरीर के पास ले जा कर अपराधी को पकड़ने के लिए छोड़ दिया गया. यह अजूबा पहली बार गांव वालों ने देखा. जब खोजी कुत्ता अपराधी को पकड़ने के लिए शव को सूंघ रहा था तो लोग यह मान रहे थे कि अब जल्द ही वह आरोपी को पकड़ लेगा. मगर लोगों ने आश्चर्य से देखा कुत्ता इधरउधर घूमते हुए मृतका कृष्णा कुमारी के पिता दिगपाल वैष्णव और भाई राजेश के आसपास मंडराने लगा. यह देखते ही थानाप्रभारी अविनाश सिंह ने कृष्णा के पिता दिगपाल और राजेश को हिरासत में लेने का निर्देश दिए.

दिगपाल वैष्णव स्थानीय प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में कंपाउंडर था. क्षेत्र में उस की अच्छी इज्जत थी. इसलिए वह थानाप्रभारी से गिड़गिड़ाते हुए बोला, ‘‘साहब, मैं भला क्यों अपनी ही बेटी को मारूंगा. आप यकीन मानिए, मैं ने कृष्णा को नहीं मारा है.’’

वह बारबार कह रहा था, मगर 2 सिपाहियों ने उसे हिरासत में ले लिया और एक कमरे में ले जा कर के उस से इकबालिया बयान देने को कहा. तब वह आंसू बहाते हुए हाथ जोड़ कर बोला, ‘‘साहब, मैं बिलकुल सच कह रहा हूं कि मैं ने कृष्णा को नहीं मारा है, कृष्णा मुझे जान से भी ज्यादा प्यारी थी, मैं उसे नहीं मार सकता.’’

इस पर अविनाश सिंह ने कहा, ‘‘देखो, पुलिस के सामने सचसच बता दो, जितना हो सकेगा हम तुम्हारे साथ रियायत करेंगे. खोजी डौग गलत नहीं हो सकता, यह जान लो.’’

इस पर आंसू बहाते हुए दिगपाल वैष्णव ने कहा, ‘‘साहब, मेरा यकीन मानिए मैं ने कृष्णा को नहीं मारा है. मैं तो  सुबह जब गया तो उसे मृत अवस्था में देखा था और उसे अपनी गोद में ले कर के रोता रहा था.’’

दिगपाल को याद आया कि यही कारण हो सकता है कि कुत्ते ने उसे आरोपी माना है. जब यह बात उस ने जांच अधिकारी अविनाश सिंह को बताई तो उन्हें समझ में आया. उन्होंने गंभीर स्वर में कहा, ‘‘तुम्हारी बात सही हो सकती है, मगर यह जान लो कि कानून के हाथ बहुत लंबे होते हैं. हमारी जांच में और भी बहुत सारे ऐसे सबूत हमें आखिर मिल ही जाएंगे, जिस से यह सिद्ध हो जाएगा कि आरोपी कौन है. अच्छा है कि अभी भी अपना अपराध कबूल कर लो.’’

‘‘नहींनहीं साहब, मैं ने यह कर्म नहीं किया है.’’ दिगपाल ने कहा.

विवेचना अधिकारी और अन्य पुलिस जो जांच कार्य में लगी हुई थी, ने यह निष्कर्ष निकाला कि हो सकता है सुबह जब कृष्णा की लाश दिगपाल ने देखी तो उसे स्पर्श किया होगा. शायद यही कारण है कि खोजी कुत्ता उसे आरोपी मान रहा है. इस तरह जांच आगे एक नई दिशा में आगे बढ़ने लगी. जांच में पता चला कि पिछले लंबे समय से कृष्णा कुमारी का प्रेमसंबंध पास के गांव पुटुंवा निवासी संजय चौहान (23 साल) नामक युवक से था और उन के संबंध इतने मजबूत थे कि कृष्णा कुमारी ने संजय चौहान को एक बाइक और मोबाइल भी गिफ्ट किया था. जांच अधिकारी अविनाश सिंह ने गौर किया. जब संजय चौहान घटनास्थल पर पहुंचा था तो उस समय उस का चेहरा उतरा हुआ था और आंखें लाल थीं, ऐसा लग रहा था कि वह बहुत रोया हो.

अविनाश सिंह ने जब उस से पूछताछ की तो उस ने उन के सामने अपना मोबाइल रख दिया, जिसे देख कर थानाप्रभारी चौंक गए. उस मैसेज से यह बात स्पष्ट थी कि हत्यारा दिगपाल वैष्णव ही है. संजय चौहान के मोबाइल में कृष्णा कुमारी का  मैसेज था, जिस में लिखा था, ‘आज की रात मैं नहीं बच पाऊंगी, मेरे पिता मुझे मार डालेंगे, मुझे बचा लो…’

यह मैसेज यह बता रहा था कि हत्या दिगपाल ने ही की है. इस सबूत के बाद अविनाश सिंह ने दिगपाल को फिर तलब किया और उसे मैसेज दिखाते हुए कठोर शब्दों में कहा, ‘‘दिगपाल, अब तुम सचसच बता दो, अब हमारे हाथ में सबूत आ गया है. यह देखो, तुम्हारी बेटी ने कल रात संजय को यह मैसेज किया था. बताओ, रात को क्याक्या हुआ था.’’

यह सुन कर दिगपाल भयभीत होते हुए बोला, ‘‘साहब, क्या मैसेज लिखा है मुझे बताया जाए.’’

इस पर थानाप्रभारी ने संजय के मोबाइल में लिखा हुआ मैसेज उसे पढ़ कर सुना दिया. उसे सुन कर वह आंसू बहाने लगा और सिर पकड़ कर बैठ गया. थानाप्रभारी ने थोड़ी देर बाद उस से कहा, ‘‘अब बताओ, तुम स्वीकार करते हो कि कृष्णा की हत्या तुम्हीं ने की है. हमें यह जानकारी भी मिली है कि तुम उस का विवाह दूसरी जगह करने वाले थे, जिस से वह बारबार मना भी कर रही थी. मगर इस बात पर घर में विवाद भी चल रहा था. इन सब बातों को देखते हुए स्पष्ट है कि हत्या कर के तुम्हीं लोगों ने की है.’’

दिगपालरोआंसा हो गया. उस ने कहा, ‘‘साहबजी, मैं फिर हाथ जोड़ कर बोल रहा हूं कि कृष्णा मेरी जान से भी प्यारी थी. मैं ने उसे नहीं मारा है.’’

यह सुन कर जांच अधिकारी अविनाश सिंह ने कहा, ‘‘तुम चाहे जितना भी कहो, सारे सबूत चीखचीख कर तुम्हें हत्यारा बता रहे हैं. साक्ष्य तुम्हारे खिलाफ हो चुके हैं. तुम बताओ, तुम्हारे पास ऐसा क्या सबूत है, जिस से यह सिद्ध हो सके कि तुम ने बेटी की हत्या नहीं की.’’

यह सुन कर दिगपाल बोला, ‘‘मैं क्या बताऊं मेरे पास कहने के लिए कुछ भी नहीं है. मगर मैं यही कहूंगा कि मैं ने अपनी बेटी को नहीं मारा है.’’

इस पर अविनाश सिंह ने गुस्से में कहा, ‘‘तुम पुलिस को चाहे कितना ही चक्कर पर चक्कर लगवाओ, मैं यह जान चुका हूं कि कृष्णा का मर्डर तुम्हारे ही हाथों से हुआ है. तुम बड़े ही शातिर और चालाक हत्यारे हो.’’

थानाप्रभारी अविनाश सिंह ने वहां मौजूद अपने स्टाफ से कहा, ‘‘इसे हिरासत में ले कर  थाने ले चलो, बापबेटे से आगे की पूछताछ वहीं पुलिसिया अंदाज में करेंगे.’’

छत्तीसगढ़ का औद्योगिक जिला कोरबा ऊर्जा राजधानी के रूप में जाना जाता है. इस के अलावा यह कोयला खदानों के कारण एशिया भर में विख्यात है. कोरबा जिला मुख्यालय से लगभग 60 किलोमीटर दूर तुमान गांव स्थित है. यह ऐतिहासिक तथ्य है कि तुमान छत्तीसगढ़ यानी दक्षिण कौशल की प्रथम राजधानी हुआ करती थी. यहां का एक रोमांचक इतिहास अभी भी लोगों को पर्यटनस्थल के रूप में तुमान की ओर आकर्षित करता है. इतिहास के अनुसार, सन 850-1015 के मध्य कलचुरी राजाओं का शासन था. वर्तमान जिला बिलासपुर की रतनपुर नगरी  राजा रत्नसेन प्रथम का प्राचीन काल में यहां शासन था और हैहय वंश ने यहां अपनी राजधानी बनाई थी. यहीं से पूरे छत्तीसगढ़ का राजकाज संभाला जाता था.

थाना कटघोरा में जब दिगपाल और उन के बेटे राजेश से पूछताछ की गई तो वह एक ही बात कहते रहे कि उन्होंने कृष्णा को नहीं मारा है… नहीं मारा है. मगर विवेचना के बाद सारे सबूत यही कह रहे थे कि मामला सीधेसीधे औनर किलिंग का है. पुलिस यह मान कर चल रही थी कि कृष्णा कुमारी की हत्या पिता दिगपाल और भाई राजेश ने ही की है. जांच अधिकारी अविनाश सिंह यही सब सोचते हुए अपने कक्ष में बैठे कुछ दस्तावेजों को देख रहे थे कि थोड़ी देर में एक एसआई ने उन के सामने मृतका कृष्णा के एक दूसरे प्रेमी नेवेंद्र देवांगन को सामने ला कर खड़ा कर दिया.

कटघोरा निवासी नेवेंद्र देवांगन जोकि रायपुर से मैकेनिकल इंजीनियरिंग की पढ़ाई कर चुका था. कृष्णा उस से भी कुछ समय से वाट्सऐप पर चैट यानी बातचीत करती थी. नेवेंद घबराया हुआ सामने खड़ा था. अविनाश सिंह ने उस की आंखों में देखते हुए  कहा, ‘‘कृष्णा कुमारी को तुम कब से जानते हो? सब कुछ सचसच बताओ, कोई भी बात छिपाना नहीं. देखो तुम पढ़ेलिखे नौजवान हो और मामला हत्या का है.’’

यह सुन कर उस ने डरतेडरते कहा, ‘‘सर, लगभग एक महीने से एक लूडो गेम में खेलते हुए कृष्णा से मेरा परिचय हुआ था. इस के बाद हमारी अकसर मोबाइल पर ही बात होती थी. मैं कभी उस से आमनेसामने नहीं मिला हूं. मगर हां, बीती रात उस का यह मैसेज आया था.’’ कह कर उस ने अपना मोबाइल अविनाश सिंह के समक्ष रख दिया. थानाप्रभारी अविनाश सिंह ने देखा, मैसेज जैसा संजय चौहान के मोबाइल में था, ठीक वैसा ही नेवेंद्र के मोबाइल में भी आया था. सब कुछ साफ था. अब तो अविनाश सिंह के सामने पूरा चित्र स्पष्ट था कि हत्या औनर किलिंग में दिगपाल और उस के बेटे ने ही की है.

उन्होंने नेवेंद्र का पूरा बयान रिकौर्ड किया. उच्च अधिकारियों को सारी जानकारी से अवगत कराते हुए बताया कि मामला लगभग स्पष्ट हो चुका है हत्या बाप और बेटे ने ही की है. दिगपाल और राजेश को कृष्णा कुमारी के हत्या के आरोप में पुलिस न्यायालय में पेश करने की तैयारी कर रही थी कि इस बीच अविनाश सिंह के दिमाग में एक आइडिया कौंध गया. उन्होंने दिगपाल और राजेश को फिर से अपने कक्ष में बुलाया और सामने बैठा कर के पानी और चाय पिलवाई और फिर धीरे से कहा, ‘‘देखो दिगपाल, तुम जिन परिस्थितियों में थे, वैसे में कोई भी बेटी की करतूत को बरदाश्त नहीं कर सकता. मैं जानता हूं, गलती तुम से हो गई है.

यह मैं भलीभांति समझ रहा हूं. अच्छा है कि पुलिस को सहयोग करो और सारी परिस्थितियों को हमारे सामने साझा करो, ताकि मैं तुम्हारी ज्यादा से ज्यादा मदद कर सकूं.’’

यह एक पुलिसिया पासा था. मगर इस के बाद भी दिगपाल ने भीगी पलकों से कहा, ‘‘साहब, मैं अपनी बेटियों की कसम खा कर कहता हूं कि मैं ने कृष्णा को नहीं मारा है. अगर यह काम मुझ से हुआ होता तो मैं अवश्य आप को बता देता.’’

कृष्णा कुमारी के भाई राजेश से भी अलग से पूछताछ की गई. उस ने भी साफसाफ यही कहा कि उस ने कृष्णा को नहीं मारा है. अब अविनाश सिंह के सामने एक ऐसा मोड़ था, जहां से रास्ता दिखाई नहीं दे रहा था. उन्हें बापबेटे की बातों में सच्चाई का एहसास हो रहा था. मगर लाख टके का सवाल यह था कि आखिर जब इन लोगों ने हत्या नहीं की तो फिर हत्यारा कौन है? कृष्णा की हत्या में सारे साक्ष्य साफ कह रहे थे कि हत्या पिता और पुत्र ने ही की है. वह कुछ समय तक अपने कक्ष में सिर पर हाथ रख कर आंख मूंद कर बैठ गए और सोचते रहे कि आखिर क्या हो सकता है, आखिर कृष्णा की हत्या कौन कर सकता है?

जांच अधिकारी के दिमाग में अब एक ही संदिग्ध सामने था और वह था कृष्णा का प्रेमी संजय चौहान. अगर कोई हत्या कर सकता था तो वह संजय हो सकता था. मगर उस के खिलाफ कोई भी सबूत पुलिस के पास नहीं था. इस के बावजूद संजय चौहान को उन्होंने तलब किया और उस से एक बार फिर पूछताछ शुरू की गई. 23 वर्षीय संजय चौहान ने बताया कि लगभग 8 साल से उस के कृष्णा के साथ शारीरिक संबंध हैं. लेकिन अलगअलग जाति के होने के कारण उन का विवाह नहीं हो पाया था. मगर जल्द ही वे आर्यसमाज मंदिर, बिलासपुर में विवाह भी करने वाले थे. उस ने जोर दे कर यह भी कहा कि हमारे विवाह में सब से बड़ी बाधा कृष्णा के पिता दिगपाल वैष्णव थे, जो उस का विवाह कहीं दूसरी जगह करने के लिए अकसर कृष्णा पर दबाव डालते थे, उस से झगड़ा करते थे.

पुलिस के सामने एक बार फिर यह तथ्य भी सामने आ गए कि हत्या दिगपाल और उस के भाई राजेश ने ही की है. अविनाश सिंह के समक्ष दिगपाल का मासूम चेहरा घूम रहा था, जो बड़े ही दुख के साथ यह कह रहा था कि उस ने हत्या नहीं की है. अविनाश सिंह ने अंतिम जांच प्रक्रिया के तहत मनोवैज्ञानिक तरीके से संजय चौहान से पूछताछ करने का निर्णय किया और 3 अलगअलग अधीनस्थ अधिकारियों को कहा कि इस से थोड़ीथोड़ी देर में मिलना है और इस के बयान लेना है. हमें देखना है यह बयान में क्या कहता है. संजय चौहान ने एक एसआई से जांच के दौरान कहा, ‘‘कृष्णा और उस का बहुत पुराना प्रेम संबंध है.’’

एसआई ने जब उस से पूछा कि उस ने घटना के दिन अपना फोन बंद क्यों रखा था. इस के जवाब में उस ने कहा, ‘‘सर, मेरी उस रात तबीयत ठीक नहीं थी.’’

एक एएसआई से जब संजय का अलग से सामना हुआ तो बातोंबातों में उस ने कहा, ‘‘साहब, उस दिन मोबाइल की बैटरी लो हो गई थी. इसलिए मोबाइल बंद हो गया था.’’

जबकि तीसरे अधिकारी को उस ने अपने बयान में कहा, ‘‘सर, मोहल्ले में झगड़ा होने के कारण मैं ने अपना मोबाइल बंद कर दिया था.’’

तीनों अधिकारियों ने संजय के तीनों अलगअलग बयानों के बारे में बताया तो वह खुशी से उछल पड़े और बोले कि अब बहुत कुछ स्पष्ट हो चुका है. कृष्णा की हत्या किसी और ने नहीं, बल्कि संजय ने ही की है. उन्होंने संजय को बुला कर बातचीत की तो उन्होंने यह नोट किया कि बात करते समय वह उन से आंखें चुरा लेता. जांच अधिकारी अविनाश सिंह ने उस से पूछा, ‘‘मैं ने गौर किया कि जब तुम सुबह घटनास्थल पर आए थे तो तुम्हारी आंखें लाल थीं. इस का क्या कारण है?’’

इस पर संजय ने कहा, ‘‘साहब मेरी तबीयत ठीक नहीं थी. रात को मैं सो भी नहीं पाया था.’’

अविनाश सिंह ने कहा, ‘‘हम ने तुम्हारे मोबाइल फोन की जांच करवाई है और यह जानकारी सामने आई है कि तुम कभी भी अपना मोबाइल रात को बंद नहीं करते थे. फिर उस रात आखिर मोबाइल क्यों बंद किया.

‘‘अगर मोबाइल बंद भी कर दिया तो फिर सुबह उस में सारे मैसेज को तुम ने डिलीट क्यों किया था? हमें अब विश्वास है कि हत्या तुम ने ही की है. सबूत हमें मिल चुका है, तुम सचसच बताओ. इसी में तुम्हारी भलाई है.’’

इस पर संजय चौहान गिड़गिड़ाते हुए बोला, ‘‘साहब, कृष्णा की हत्या की बात सुन कर मैं घबरा गया था, इसलिए अपने मोबाइल का सारा मैसेज डिलीट कर दिया था.’’

संजय चौहान को घूरते हुए उन्होंने कहा, ‘‘जब तुम घर में थे तो तुम्हें कैसे पता चल गया कि कृष्णा की हत्या हुई है, बिना देखे जाने?’’

संजय चौहान ने घबरा कर आंखें चुराते हुए कहा, ‘‘मैं ने सुना तो मुझे लगा कि जरूर परिवार वालों ने उसे मार कर फेंक दिया है.’’

‘‘देखो, तुम पुलिस को धोखा नहीं दे सकते, तुम ने बारबार अपना बयान बदला है और तीनों बातें सही नहीं हो सकतीं. अब साफसाफ बता दो, हम ने तुम्हारे मोबाइल की काल डिटेल्स भी चैक करवाई है.’’ थानाप्रभारी ने कहा. अब संजय चौहान टूट गया और बोला, ‘‘सर…गलती मुझ से हुई है. मैं बताता हूं उस रात क्या हुआ था.’’

और उस ने जो कहानी बताई, उस के अनुसार कृष्णा कुमारी और वह दोनों आर्यसमाज मंदिर, बिलासपुर में जल्द ही शादी करने वाले थे कि नेवेंद्र की उन के बीच एंट्री हुई. अकसर कृष्णा नेवेंद्र से मोबाइल पर बात करती थी, एक दिन जब वह रात को कृष्णा से मिलने गया तो मोबाइल मैं उस ने नेवेंद्र का चैट पढ़ लिया. चैट पढ़ कर उस का दिमाग घूमने लगा. उस ने उसी समय स्वयं कृष्णा के रूम में रात को जब वाट्सऐप पर नेवेंद्र से बातें की तो उस के सामने खुलासा हो गया कि कृष्णा का उस से कुछ ज्यादा ही गहरा संबंध हो चुका है. दोनों आपस में अश्लील बातें भी किया करते थे.

इस पर एक दिन कृष्णा से झगड़ा कर के संजय चौहान ने कहा, ‘‘सारी सच्चाई मैं जान गया हूं. तुम अगर अब आगे उस के साथ बात करोगी तो ठीक नहीं होगा.’’

इस पर कृष्णा कुमारी ने तुनक कर कहा, ‘‘मैं किसी की जायजाद नहीं हूं. ऐसा है तो अभी से संबंध खत्म समझो.’’

संजय को भी गुस्सा आ गया. उस ने गुस्से में कहा, ‘‘कृष्णा, अगर तुम मेरी नहीं होगी तो मैं किसी की तुम्हें नहीं होने दूंगा, मैं तुम्हें मार दूंगा.’’

संजय ने बताया कि एक टीवी सीरियल में उस ने ऐसी ही कहानी देखी थी, वही सीरियल देख कर उस ने प्रेमिका कृष्णा की हत्या कर उस के पिता को फंसाने की योजना बनाई. योजनानुसार, 29 मई 2021 की रात को जब संजय चौहान कृष्णा से  मिलने गया तो अपनी बाइक को दूर झाडि़यों के पास खड़ी कर गया था और पैदल बिना चप्पल के धीरेधीरे उस के घर की ओर गया. रात को लगभग 12 बजे उस ने एक पत्थर इशारे के रूप में कृष्णा की छत पर फेंका. बाद में थोड़ी देर में कृष्णा आई और दोनों एक कमरे में बैठ कर के आपस में बातचीत कर रहे थे. इसी तरह से वह पहले भी कृष्णा से मिलता था.

संजय ने उसे फुसला कर कहा, ‘‘कृष्णा, तुम एक मैसेज लिखो कि मुझे मेरे पिता मार डालेंगे, मुझे बचा लो. और यह मैसेज मुझे और नेवेंद्र को भेज दो.’’

कृष्णा ने विश्वास में आ कर ऐसा ही किया. बाद में कृष्णा ने वह मैसेज अपने फोन से डिलीट कर दिया. आगे बातों ही बातों में जब उसे यह समझ में आया कि कृष्णा अब उस के हाथ से पूरी तरह निकल चुकी है तो उस ने वहीं पास में रखी हुई एक साड़ी उस के गले में डाल कर उस का गला घोंट दिया फिर लाश उठा कर के बाड़ी में फेंक कर अपने घर चला गया. पुलिस ने संजय चौहान के इकबालिया बयान के बाद उसे कृष्णा कुमारी वैष्णव की हत्या के आरोप में 31 मई, 2021 को भादंवि की धारा 302, 120बी के तहत गिरफ्तार कर लिया. फिर उसे प्रथम न्यायिक दंडाधिकारी, कटघोरा की अदालत में पेश किया, जहां से उसे जेल भेज दिया गया. Crime Story

 

 

Real Crime Story in Hindi : सीरियल किलर महिलाओं के साथ दुष्कर्म कर गला दबाकर करता था हत्या

Real Crime Story in Hindi : माइना रामुलु अपनी पत्नी रेखा को बहुत प्यार करता था. लेकिन आर्थिक अभाव के चलते रेखा किसी के साथ भाग गई. इस से माइना के मन में महिलाओं के प्रति ऐसी नफरत पैदा हो गई कि उस ने एकएक कर के 18 महिलाओं की हत्या कर दी. हत्या करने का उस का ऐसा तरीका था कि…

हैदराबाद के जुबली हिल्स थाने के इंसपेक्टर राजशेखर रेड्डी अपने औफिस में बैठे आगंतुकों से मुखातिब हो रहे थे. उन के बीच एक 55 वर्षीय व्यक्ति चिंतित और परेशान सा बैठा हुआ था. इंसपेक्टर रेड्डी ने उस से पूछा, ‘‘हां बताइए, यहां कैसे आना हुआ?’’

‘‘सर, मेरा नाम कावला अनाथैया है.’’ उस व्यक्ति ने अपना परिचत देते हुए कहा, ‘‘मैं यूसुफगुड़ा का रहने वाला हूं.’’

‘‘हूं.’’

‘‘सर, मेरी पत्नी कमला बैंकटम्मा 2 दिनों से लापता है. मैं ने उसे अपने स्तर पर हर जगह खोजने की कोशिश की, लेकिन कहीं पता नहीं चला. मैं बहुत परेशान हूं. मेरी पत्नी को ढूंढने में मेरी मदद कीजिए, सर. मैं आप का जीवन भर आभारी रहूंगा.’’

‘‘क्या उम्र होगी आप की पत्नी की?’’ कुछ सोचते हुए इंसपेक्टर रेड्डी ने कावला से सवाल किया.

‘‘यही कोई 50 साल.’’

‘‘50 साल!’’ जबाव सुन कर वह चौंक गए, ‘‘फिर कहां गायब हो सकती हैं? कहीं ऐसा तो नहीं कि आप दोनों के बीच झगड़ा हुआ हो और वह नाराज हो कर घर छोड़ कर चली गई हों?’’

‘‘नहीं साहब, हमारे बीच कोई झगड़ा नहीं हुआ.’’ कावला अनाथैया दोनों हाथ जोड़ बोला, ‘‘कह रही थी काम से जा रही हूं शाम तक लौट आऊंगी. शाम होने के बाद भी जब घर नहीं लौटी तो चिंता हुई. मैं ने अपनी जानपहचान वालों के वहां फोन कर के पता किया लेकिन वह कहीं नहीं मिली.’’

‘‘ठीक है, एक एप्लीकेशन लिख कर दे दीजिए. उन्हें खोजने की हरसंभव कोशिश करेंगे.’’

‘‘ठीक है, साहब. मैं अभी लिख कर देता हूं.’’ उस के बाद कावला अनाथैया कक्ष से बाहर निकला और एक तहरीर थानाप्रभारी रेड्डी को दे दी. इंसपेक्टर राजशेखर रेड्डी ने गुमशुदगी की सूचना दर्ज कर के जांचपड़ताल शुरू कर दी. यह बात पहली जनवरी, 2021 की थी. पुलिस बैंकटम्मा की तलाश में जुट गई थी. 3 दिनों की तलाश के बाद भी बैंकटम्मा का कहीं पता नहीं चला तो पुलिस ने जिले के सभी थानों में उस की गुमशुदगी के पोस्टर चस्पा करा दिए और पता बताने वाले को उचित ईनाम देने की घोषणा भी की. बात 4 जनवरी, 2021 की है. इसी जिले के घाटकेसर थानाक्षेत्र के अंकुशपुर गांव के निकट रेलवे ट्रैक के पास एक 50 वर्षीय महिला की लाश पाई गई. लाश की सूचना पा कर घाटकेसर पुलिस मौके पर पहुंच गई और आवश्यक काररवाई में जुट गई.

महिला के शरीर पर किसी प्रकार का कोई चोट का निशान नहीं था. लाश की पुलिस ने सूक्ष्मता से पड़ताल की तो उस के गले पर किसी चौड़े चीज से गला घोंट कर हत्या किए जाने का प्रमाण मिला था. यह देख कर पुलिस दंग रह गई थी. दरअसल, 25 दिन पहले 10 दिसंबर, 2020 को साइबराबाद थानाक्षेत्र के बालानगर के एक कैंपस के पास 40-45 साल की एक महिला की लाश पाई गई थी. हत्यारे ने उस महिला की भी इसी तरह गला घोंट कर हत्या की थी और उस की लाश सुनसान कैंपस में फेंककर फरार हो गया था. दोनों महिलाओं की हत्या करने का तरीका एक जैसा था. लाश को देख कर यही अनुमान लगाया जा रहा था कि दोनों महिलाओं का हत्यारा एक ही है.

बहरहाल, पुलिस यही मान कर चल रही थी कि हत्यारे ने महिला की हत्या कहीं और कर के लाश छिपाने के लिए यहां फेंक दी होगी. चूंकि जुबली हिल्स पुलिस ने कावला अनाथैया की पत्नी कमला बैंकटम्मा की गुमशुदगी के पोस्टर जिले के सभी थानों में चस्पा कराए थे. उस पोस्टर वाली महिला की तसवीर से काफी हद तक इस महिला का चेहरा मिल रहा था तो साइबराबाद पुलिस ने जुबली हिल्स पुलिस को फोन कर के मौके पर बुला लिया, ताकि लाश की शिनाख्त आसानी से कराई जा सके. सूचना मिलने के कुछ ही देर बाद जुबली हिल्स पुलिस घटनास्थल पर पहुंच गई. लाश की पहचान के लिए पुलिस अपने साथ कावला अनाथैया को भी साथ लेती आई थी.

लाश देखते ही कावला अनाथैया की चीख निकल गई. उन्होंने उस लाश की पहचान अपनी पत्नी कमला बैंकटम्मा के रूप में की. लाश की शिनाख्त होने के बाद पुलिस ने उसे पोस्टमार्टम के लिए अस्पताल भेजवा दिया और गुमशुदगी को हत्या की धारा 302 में तरमीम कर अज्ञात हत्यारे के खिलाफ मुकदमा पंजीकृत कर लिया. कमला बैंकटम्मा की पोस्टमार्टम रिपोर्ट अगले दिन यानी 5 जनवरी, 2021 को आ गई थी. रिपोर्ट पढ़ कर इंसपेक्टर राजशेखर रेड्डी चौंक गए थे. रिपोर्ट में बैंकटम्मा की मौत का कारण दम घुटना बताया गया. इस के अलावा उन के साथ दुष्कर्म होने का उल्लेख भी किया गया था. घटना से 25 दिनों पहले बालानगर क्षेत्र में पाई गई महिला के साथ भी हत्यारे ने दुष्कर्म किया था.

दोनों हत्याओं में काफी समानताएं पाई गई थीं. जांचपड़ताल से पुलिस ने पाया कि दोनों हत्याएं एक ही हत्यारे ने की थीं. इस घटना ने तकरीबन 7-8 साल पुरानी घटना की यादें ताजा कर दी थीं. उस समय हैदराबाद के विभिन्न इलाकों में ऐसी ही महिलाओं की लाशें पाई जा रही थीं, जिस में हत्यारा महिला के साथ दुष्कर्म करने के बाद उस की गला घोंट कर हत्या कर देता था. काफी खोजबीन के बाद पुलिस ने उस सिरफिरे हत्यारे को ढूंढ निकाला था. उस किलर का नाम माइना रामुलु के रूप में सामने आया था, जो संगारेड्डी जिले के बोरामंडा इलाके के कंडी मंडल का रहने वाला था. कई सालों तक जेल में बंद रहने के बाद वह हैदराबाद हाईकोर्ट से साल 2018 में जमानत पर रिहा हुआ था. उस के बाद वह भूमिगत हो गया था.

पिछली घटनाओं की कडि़यों को पुलिस ने इन घटनाओं से जोड़ कर देखा तो आईने की तरह तसवीर साफ हो गई. सभी हत्याओं की कडि़यां चीखचीख कर कह रही थीं कि सिरफिरा हत्यारा माइना रामुलु ही इन हत्याओं को अंजाम दे रहा है. पुलिस कमिश्नर अंजनी कुमार ने हैदराबाद टास्क फोर्स, जुबली हिल्स पुलिस और घाटकेसर पुलिस को खूंखार किलर माइना रामुलु को गिरफ्तार करने के लिए लगा दिया. पुलिस की तीनों टीमें दिनरात रामुलु के ठिकानों पर छापा मार रही थीं, लेकिन उस का कहीं पता नहीं चल रहा था. आखिरकार पुलिस की मेहनत रंग लाई. 22 दिनों बाद यानी 26 जनवरी, 2021 को पुलिस खूंखार सीरियल किलर माइना रामुलु को जुबली हिल्स इलाके से गिरफ्तार करने में कामयाब हो गई.

माइना रामुलु को गिरफ्तार कर के पुलिस टीम जुबली हिल्स थाने ले आई. इंसपेक्टर राजशेखर रेड्डी ने इस की सूचना पुलिस कमिश्नर अंजनी कुमार को दे दी. महिलाओं के दुश्मन सिरफिरे कातिल माइना रामुलु की गिरफ्तारी की सूचना मिलते ही सीपी अंजनी कुमार पूछताछ करने थाने पहुंच गए थे. पुलिस अधिकारियों ने हत्यारे रामुलु से 3-4 घंटों तक कड़ाई से पूछताछ की. चूंकि रामुलु पहले भी ऐसे ही कई मामलों में पकड़ा जा चुका था, इसलिए वह सच बताने में ही अपनी भलाई समझता था. सो उस ने पुलिस के सामने अपना जुर्म कबूल कर लिया कि उसी ने कमला बैंकटम्मा की हत्या की थी. हत्या करने के बाद उस की ज्वैलरी लूट ली थी. फिर उस ने सिलसिलेवार पूरी कहानी पुलिस अधिकारियों को बता दी.

अगले दिन 27 जनवरी को पुलिस कमिश्नर अंजनी कुमार ने पुलिस लाइंस में प्रैस कौन्फ्रैंस आयोजित की. पत्रकारों को जानकारी देते हुए उन्होंने बताया कि माइना रामुलु एक सीरियल किलर है. इस ने बोवेनपल्ली, चंदा नगर और डंडीगल थानाक्षेत्र में सर्वाधिक हत्याएं की थीं. उस पर विभिन्न मामलों के कुल 21 मुकदमे दर्ज हैं, जिन में 16 मामले महिलाओं की हत्याओं के और 4 चोरियों के हैं. वह कई बार जेल की हवा खा चुका है. हत्या के एक मामले में उसे आजीवन कारावास की सजा भी सुनाई जा चुकी है. साल 2018 में जेल से जमानत पर रिहा होने के बाद से वह फरार हो गया था. फरारी के दौरान इस ने 2 और महिलाओं को अपने नापाक इरादों का शिकार बना लिया और बड़ी बेरहमी से उन का कत्ल कर डाला.

घंटों चली वार्ता के दौरान पत्रकारों के सामने सीपी अंजनी कुमार ने किलर रामुलु की करतूतों की कुंडली खोलते रहे. उस के बाद पुलिस ने हत्यारोपी को अदालत में पेश किया, जहां से उसे 14 दिनों की न्यायिक हिरासत में जेल भेजने का आदेश दिया. पुलिस पूछताछ में 18 महिलाओं के कातिल माइना रामुलु ने दिल दहलाने वाला जो बयान दिया था, उसे सुन कर सभी पुलिस अधिकारियों के रोंगटे खड़े हो गए थे. नफरत की आग में जलते हुए माइना रामुलु एक गुनाह की दास्तान 18 बेगुनाह महिलाओं के खून से लिखेगा, किसी ने सोचा भी न था. आखिर उस के दिल में दबी नफरत की कौन सी चिंगारी सुलग रही थी, जिस में वह आहिस्ताआहिस्ता जल रहा था? आइए पढ़ते हैं यह कहानी.

45 वर्षीय माइना रामुलु मूलरूप से संगारेड्डी जिले के बोरामंडा इलाके के कंडी मंडल के रहने वाले चंद्रियाय का बेटा था. चंद्रियाय के 4 बेटों में माइना रामुलु सब से बड़ा था. 6 सदस्यीय परिवार में चंद्रियाय इकलौते कमाने वाले थे. उन की कमाई इतनी नहीं थी कि परिवार की जीविका चलाने के बाद उन्हें बेहतर जिंदगी दे सके. बड़े होने के नाते यह बात रामुलु समझता था. रामुलु गरीबी की चादर ओढ़तेओढ़ते ऊब चुका था. वह मुफलिसी वाली जिंदगी नहीं, बल्कि रईसजादों वाली ठाठबाट की जिंदगी जीना चाहता था. सड़कों पर चमचमाती कार देख कर उस का भी मन होता था कि वह भी ऐसी ही कार में आराम से घूमेफिरे. ऐश की जिंदगी जिए.

इन सब के लिए ढेर सारे पैसों की जरूरत होती है, वह पैसा न तो उस के पास था और न ही उस के मांबाप के पास. लिहाजा वह अपना मन मसोस कर रह जाता था. धीरेधीरे माइना रामुलु जवानी की दहलीज पर कदम रखता जा रहा था. 21 साल का हुआ तो उस के मांबाप ने यह सोच कर बेटे की गृहस्थी बसा दी कि जिम्मेदारी जब सिर पर पड़ेगी तो कमाने लगेगा. लेकिन हुआ इस का उल्टा. माइना रामुलु के कानों पर जूं तक नहीं रेंगी. रामुलु की पत्नी रेखा उस से 4 कदम आगे निकली. आंखों में जो रईसी का ख्वाब लिए ससुराल की दहलीज पर उतरी थी, उस का ख्वाब धरा का धरा रह गया. उस के अरमानों का महल रेत की तरह भरभराकर ढह गया था. आंसू आंखों से सूखने का नाम नहीं ले रहे थे.

रेखा की आंखों से निकले आंसुओं से रामुलु के घर की खुशियां बह गई थीं. आए दिन घर में कलह होती थी. रामुलु के मांबाप नई बहू के व्यवहार से परेशान थे. हर घड़ी वे यही सोचते रहते थे कि इस से अच्छा तो कुंवारा ही था. कम से कम बहू के रूप में यह मुसीबत तो नहीं आती, जो दिनरात का चैन छीन चुकी है. चंद्रियाय के घर से मुसीबत जाने का नाम ही नहीं ले रही थी. जैसेतैसे रामुलु की शादी का एक साल बीता. एक दिन अचानक रामुलु की पत्नी रेखा ससुराल पक्ष के एक परिचित के साथ भाग गई. घर से बहू के भाग जाने से पूरे गांव में रामुलु और उस के घर वालों की बड़ी बदनामी हुई. इस बदनामी को रामुलु के पिता सहन नहीं कर पाए और दिल का दौरा पड़ने से उन की मृत्यु हो गई.

पिता की मौत से रामुलु को गहरा झटका लगा. वह सोचता था कि उसी की वजह से पिता की मौत हुई थी. वह अपने आप को हर घड़ी कोसता रहता. उसी समय उस के दिल में औरत से घृणा हो गई. यह बात साल 2000 के करीब की है. पत्नी की बेवफाई से रामुलु अंदर तक टूट गया था. भले ही पत्नी से उस की पटती नहीं थी, लेकिन उसे दिल की गहराइयों से प्यार करता था. उस की खुशियों का खयाल रखता था. सपने में भी उस ने नहीं सोचा था कि उस की पत्नी इस तरह उस के प्यार को ठोकर मार कर पराए मर्द के साथ भाग जाएगी. उस का चेहरा आंखों के सामने आते ही क्रोध से पागल हो जाता था. गुस्से की ज्वाला में जलते रामुलु ने कसम खा ली कि जिस तरह उस की पत्नी उसे ठुकरा कर पराए मर्द के साथ भाग गई है, उसी तरह उस के किए की सजा हर औरत को भुगतनी होगी.

उसी दिन से माइला रामुलु के दिल में औरतों के लिए नफरत की विषबेल पनप गई. बदनामी की तपिश में जलता हुआ माइला रामुलु धीरेधीरे ताड़ी और शराब का आदी बन गया. हर समय वह शराब और ताड़ी के नशे में डूबा रहता. बात 2003 की है. रामुलु कच्ची दारू पीने तुरपान इलाके में गया. वहां उस की मुलाकात दामिनी से हुई. दामिनी दारू भट्ठी पर काम करती थी. उसे देखते ही रामुलु के जिस्म में वासना के कीड़े कुलबुलाने लगे. वह रोज ही दारू पीने दामिनी की भट्ठी पर आया करता था. धीरेधीरे उस ने दामिनी को अपने प्यार के जाल में फंसा लिया. एक दिन धोखे से वह दामिनी को जंगल में ले गया. वहां उस के साथ मुंह काला किया और उस की साड़ी के पल्लू से गला घोंट कर हत्या कर दी और लाश वहीं छोड़ कर फरार हो गया.

इस के बाद तो माइना रामुलु के जुर्म के रास्ते खुल गए. वह किसी औरत को अपना शिकार बनाता तो उस समय उस के शरीर पर जो भी गहने होते, उन्हें भी लूट लेता. साल 2003 से 2009 तक हैदराबाद के विभिन्न थानाक्षेत्रों तुरपान, रायदुर्गम, संगारेड्डी, डुंडीगल, नरसापुर, साइबराबाद और कोकाटपल्ली में करीब 7 औरतों की हत्या कर के पुलिस को उस ने सकते में डाल दिया था. सातों महिलाओं की एक ही तरीके से साड़ी के पल्लू से गला घोंट कर हत्या की गई थी. पुलिस की जांच में यह बात सामने आई कि हत्यारा कोई एक है और वह भी सिरफिरा, जो सिर्फ महिलाओं को ही अपना शिकार बनाता है. पुलिस ने पहली बार नरसंगी और कोकटपल्ली इलाकों में सन 2009 में हुई अलगअलग जगहों पर हुई हत्याओं को गंभीरता से लिया था.

कोकाटपल्ली के इंसपेक्टर राधाकृष्ण राव ने अपने 3 काबिल सिपाहियों की मदद से 20-25 दिनों की कड़ी मेहनत से हत्या की कड़ी सुलझा ली थी और आरोपी माइना रामुलु को गिरफ्तार करने में सफलता हासिल की. पुलिस ने पहली बार शातिर माइना रामुलु के खिलाफ न्यायालय में चार्जशीट दाखिल की थी. 2 साल बाद 2011 के फरवरी में अदालत ने आरोपी माइना रामुलु को दोषी ठहराया और उसे आजीवन कारावास की सजा सुनाई. साथ ही 50 हजार रुपए का जुरमाना भी भरने के आदेश दिए थे. जुरमाना न भरने की दशा में 6 महीने की अतिरिक्त सजा भी सुनाई. कुछ दिनों तक तो शातिर माइना रामुलु सलाखों के पीछे कैद रहा. इसी दौरान उस ने पूरी जिंदगी सलाखों के पीछे बिताने से बचने के लिए फिल्मी अंदाज में एक बेहद शार्प योजना बनाई.

उस ने मानसिक रोगी की तरह कैदियों से व्यवहार करना शुरू कर दिया. जुर्म की दुनिया के माहिर खिलाड़ी रामुलु ने ऐसा अभिनय किया कि लोगों को लगा कि वह वाकई में बीमार है. इस के बाद उसे जेल से निकाल कर एर्रागड्डा मेंटल हास्पिटल में भरती करा दिया गया. यह नवंबर, 2011 की बात है. एक महीने तक वहां रहने के बाद माइना रामुलु 30 दिसंबर, 2011 की रात पुलिस को चकमा दे कर अस्पताल से भाग गया. यही नहीं, अपने साथ वह 5 अन्य कैदियों को भी भगा ले गया, जो मानसिक बीमारी का इलाज करा रहे थे. उस के दुस्साहसिक कारनामों से पुलिस महकमे के होश उड़ गए. इस सिलसिले में एसआर नगर पुलिस स्टेशन में माइना रामुलु के खिलाफ मामला दर्ज किया गया.

पुलिस कस्टडी से फरार रामुलु फिर अपने शिकार में जुट गया था. सन 2012 में चंदानगर में 2 और 2013 में बोवेनपल्ली के डुंडीगल में 3 महिलाओं की हत्याएं कीं. पांचों महिलाओं की हत्याएं एक ही तरीके साड़ी के पल्लू से गला घोंट कर की गई थीं. पोस्टमार्टम रिपोर्ट में महिलाओं की हत्या से पहले दुष्कर्म किए जाने की बात भी सामने आई थी. पुलिस जांच में महिलाओं की हत्या एक ही तरीके से की गई थी. यह तरीका शातिर किलर माइना रामुलु का था. पुलिस को समझते देर न लगी कि इन हत्याओं के पीछे माइना रामुलु का हाथ है. पुलिस ने इन हत्याआें पर फिर से ध्यान देना शुरू किया. आखिरकार 13 मई, 2013 में बोवेनपल्ली पुलिस रामुलु को गिरफ्तार करने में कामयाब हो गई.

जुर्म के साथसाथ सचमुच माइना रामुलु कानून का एक माहिर खिलाड़ी था. उस के पास एक अच्छा वकील था या फिर उस के सिर पर किसी और ताकतवर व्यक्ति का हाथ, यह बात पुलिस के लिए भी पहेली बनी हुई है. 5 साल बाद उस ने 2018 में तेलंगाना हाईकोर्ट में अपनी सजा कम कराने के संबंध में अपील की. वह अपनी सजा को कम करवाने में कामयाब रहा. 2018 के अक्तूबर में माइना रामुलु के पक्ष में फैसला आया और उसे जेल से रिहा कर दिया गया. एक बार फिर उस ने कानून के मुंह पर तमाचा मार दिया था. जेल से रिहा होने के बाद रामुलु कुछ दिन शांत रहा और पत्थर काटने का काम करने लगा, ताकि लोगों को यकीन हो जाए कि वह सुधर गया है. यह उस का एक छलावा था. काम करना तो एक बहाना था, इस के पीछे उस की मंशा शिकार की तलाश करना था.

यह शिकार उसे यूसुफगुडा निवासी 50 वर्षीया कमला बैंकटम्मा के रूप में मिली. बैकटम्मा से रामुलु की मुलाकात दिसंबर, 2020 में एक शराब की भट्ठी पर हुई थी. सम्मोहन कला से उस ने बैंकटम्मा को अपनी ओर खींच लिया था. बस शिकार को अंतिम रूप देना शेष था. 30 दिसंबर, 2020 की शाम थी. यूसुफगुडा के अहाते में कुछ लोग ताड़ी पी रहे थे. बैंकटम्मा और रामुलु ने भी ताड़ी पी. दोनों पर जब हलका सुरूर चढ़ा तो रामुलु के जिस्म में वासना की आग धधक उठी और वह बैंकटम्मा को अपनी आगोश में लेने के लिए बेताब हो उठा. लेकिन वहां लोग थे, इसलिए वह अपने मकसद में कामयाब नहीं हुआ. इस बीच सूरज डूबने लगा था और रात की काली चादर फैला चुकी थी. रामुलु बैंकटम्मा को ले कर कंपाउंड से बाहर निकल गया.

वे दोनों शहर के बाहरी इलाके में किसी सुनसान जगह की तलाश में चल पड़े. यूसुफगुडा से ये दोनों घाटकेश्वर इलाके के अंकुशापुर पहुंचे. यह एक सुनसान जगह थी. दोनों ने यहां पहुंच कर थोड़ी और ताड़ी पी. इस के बाद रामुलु पूरी तरह बहक गया और बैंकटम्मा को अपनी हवस का शिकार बना डाला. फिर उस की साड़ी के पल्लू से गला घोंट कर उस की हत्या कर दी और लाश रेलवे लाइन के पास ठिकाने लगा कर फरार हो गया. हैदराबाद की तेजतर्रार पुलिस शातिर माइना रामुलु को वैज्ञानिक तथ्यों के आधार पर गिरफ्तार करने में कामयाब हो ही गई. शातिर दिमाग वाला माइना रामुलु शायद यह भूल गया था कि उसे जनम देने वाली भी तो एक औरत ही है.

अगर उस की पत्नी ने उस के साथ धोखा किया था, तो सजा उसे मिलनी चाहिए थी न कि बेकसूर उन 18 महिलाओं को, जिन का न तो कोई दोष था और न ही उन्होंने उस का कोई अहित किया था. रामुलु ने जो किया उस के किए की सजा सलाखों के पीछे काट रहा है. समाज के ऐसे दरिंदों की यही सजा होनी चाहिए. कथा लिखे जाने तक पुलिस ने उस के खिलाफ अदालत में आरोप पत्र दाखिल कर दिया था. Real Crime Story in Hindi

—कथा पुलिस सूत्रों पर आधारित

 

Hindi Stories : पुलिस अफसर रूपा तिर्की की मौत बनी रहस्य, सुसाइड या साजिश थी

Hindi Stories : रूपा तिर्की एक तेजतर्रार पुलिस अधिकारी थी. बैचमेट एसआई शिव कुमार से वह प्यार करती थी, लेकिन शिव कुमार उस से शादी करने से कतरा रहा था. उस की वादाखिलाफी से वह इस कदर तनाव में आ गई कि…

बात 3 मई, 2021 की है. शाम को करीब 7 बजे का समय रहा होगा. सबइंसपेक्टर मनीषा कुमारी ड्यूटी पूरी करने के बाद अपने क्वार्टर पर पहुंची. उस का क्वार्टर अपनी बैचमेट एसआई रूपा तिर्की के क्वार्टर के सामने था. रूपा तिर्की झारखंड के साहिबगंज जिला मुख्यालय पर महिला थानाप्रभारी थीं और मनीषा साहिबगंज में ही नगर थाने में तैनात थी. मनीषा जब क्वार्टर पर पहुंची, तो रूपा का कमरा अंदर से बंद था. इस का मतलब था कि रूपा अपनी ड्यूटी से आ चुकी थी. रूपा का हालचाल पूछने के लिए मनीषा ने उस के रूम का दरवाजा खटखटाया, लेकिन अंदर से कोई जवाब नहीं मिला.

कई बार की कोशिशों के बाद भी जब रूपा ने कमरा नहीं खोला तो मनीषा सोच में पड़ गई. वैसे भी शाम के करीब 7 ही बजे थे. इसलिए सोने का समय भी नहीं हुआ था. मनीषा ने आसपास के लोगों को बुला कर एक बार फिर रूपा को आवाज देते हुए जोर से दरवाजा खटखटाया, लेकिन इस बार भी कमरे के अंदर से कोई हलचल नहीं हुई. आखिर मनीषा ने दरवाजा तोड़ने का फैसला किया. लोगों की मदद से दरवाजा तोड़ कर मनीषा जब कमरे के अंदर घुसी तो रूपा पंखे के एंगल से एक रस्सी के सहारे लटकी हुई थी. यह देख कर मनीषा हैरान रह गई. उस ने एक पुलिस अफसर के तौर पर रूपा की नब्ज टटोल कर देखी, लेकिन उस में जीवन के कोई लक्षण नजर नहीं आए.

एकबारगी तो वह सोच में पड़ गई कि क्या करे और क्या नहीं करे? फिर उस ने सब से पहले एसपी साहब को सूचना देना उचित समझा. सूचना मिलने पर साहिबगंज एसपी अनुरंजन किस्पोट्टा, एसडीपीओ राजेंद्र दुबे और दूसरे पुलिस अफसर मौके पर पहुंच गए. पुलिस अफसरों ने मौकामुआयना किया. रूपा ने फांसी लगा कर खुदकुशी कर ली थी. अफसरों ने कमरे की तलाशी ली. चीजों को उलटपुलट कर देखा, ताकि कुछ पता चल सके कि रूपा ने यह कदम क्यों उठाया, लेकिन न तो कोई सुसाइड नोट मिला और न ही ऐसी कोई बात पता चली, जिस से रूपा के आत्महत्या करने के कारणों पर कोई रोशनी पड़ती.

पुलिस अफसर समझ नहीं पाए कि ऐसा क्या कारण रहा कि रूपा ने खुदकुशी कर ली? अविवाहित रूपा 2018 बैच की तेजतर्रार महिला सबइंसपेक्टर थी. अफसरों ने रूपा के परिवार वालों को फोन कर के इस घटना की सूचना दी. रूपा के परिजन झारखंड की राजधानी रांची के पास रातू गांव के कांटीटांड में रहते थे. रूपा के फांसी लगाने की बात सुन कर उस के मातापिता अवाक रह गए. रात ज्यादा हो गई थी. पुलिस ने रूपा का शव फांसी के फंदे से उतरवा कर पोस्टमार्टम के लिए सदर अस्पताल भिजवा दिया. दूसरे दिन 4 मई को रूपा के परिवार वाले साहिबगंज पहुंच गए. रूपा की मां पद्मावती उराइन ने पुलिस को बताया कि 3 मई को दोपहर करीब 3 बजे रूपा से उन की बात हुई थी.

तब रूपा ने कहा था कि वह जो पानी पी रही है, वह दवा जैसा कड़वा लग रहा है. बेटी की इस बात पर मां ने उस से तबीयत के बारे में पूछा. रूपा ने मां को बताया कि उस की तबीयत ठीक है. इस पर मां ने उसे आराम करने की सलाह दी थी. महिला थानाप्रभारी बनने पर रूपा को जब पुलिस की सरकारी गाड़ी मिली तो दोनों उसे ज्यादा टार्चर करने लगी थीं. दोनों ने कुछ दिन पहले रूपा को किसी हाईप्रोफाइल केस को मैनेज करने के लिए एक नेता पंकज मिश्रा के पास भी भेजा था. पंकज मिश्रा मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन का नजदीकी रहा है. परिवार वालों ने कहा कि रूपा ने आत्महत्या नहीं की, बल्कि उस की हत्या की गई है. मां ने बेटी की हत्या का आरोप लगाते हुए साहिबगंज एसपी को तहरीर दी.

उन्होंने इस मामले में कमेटी गठित कर पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की. उन्होंने कहा कि उस की बेटी के क्वार्टर के सामने रहने वाली एसआई मनीषा कुमारी और ज्योत्सना महतो हमेशा रूपा को टार्चर करती थीं. वे उस से जलती थीं और हमेशा उसे नीचा दिखाने की कोशिश करती थीं. मां ने लगाया हत्या का आरोप मां पद्मावती ने मौके पर मौजूद रहे लोगों से पूछताछ के बाद रूपा की हत्या करने का आरोप लगाते हुए कहा कि उस के शव को पंखे से लटकाया गया था. पंखे और पलंग की दूरी काफी कम थी. शव पंखे से तो लटका था, लेकिन घुटने पलंग पर मुड़े हुए थे. गले में रस्सी के 2 निशान थे. शरीर के कुछ अंगों पर जगहजगह दाग भी थे.

शव ध्यान से देखने से लग रहा था कि उस के हाथों को पकड़ा गया था. घुटने पर भी मारने के निशान थे. उस के कपड़े भी आधेअधूरे थे. रूपा की मौत के मामले में साहिबगंज के जिरवाबाड़ी ओपी थाने के एसआई सतीश सोनी के बयान के आधार पर केस दर्ज कर लिया गया. पुलिस ने जांचपड़ताल के लिए रूपा का क्वार्टर भी सील कर दिया.  मामला एक पुलिस अधिकारी की मौत का था. दूसरे यह संदिग्ध भी था. इसलिए साहिबगंज के उपायुक्त ने कार्यपालक दंडाधिकारी संजय कुमार और परिजनों की मौजूदगी में शव का मैडिकल बोर्ड से पोस्टमार्टम कराने और इस की वीडियोग्राफी कराने के आदेश दिए. उपायुक्त के आदेश पर पुलिस ने 3 डाक्टरों के मैडिकल बोर्ड से रूपा के शव का पोस्टमार्टम कराया.

पोस्टमार्टम कराने के बाद पुलिस की ओर से साहिबगंज के पुलिस लाइन मैदान में रूपा तिर्की को अंतिम विदाई दी गई. सशस्त्र पुलिस की टुकड़ी ने उन्हें सलामी दी. एसपी अनुरंजन किस्पोट्टा, साहिबगंज के एसडीपीओ राजेंद्र दुबे, बरहरवा के एसडीपीओ प्रमोद कुमार मिश्रा और राजमहल के एसडीपीओ अरविंद कुमार के अलावा अनेक थानाप्रभारियों तथा पुलिस जवानों ने फूलमालाएं अर्पित कर रूपा को श्रद्धांजलि दी. बाद में रूपा का शव परिवार वालों को सौंप दिया गया. रूपा का शव 5 मई की सुबह रूपा के पैतृक गांव रातू के काठीटांड पहुंचा. उसी दिन रूपा का अंतिम संस्कार कर दिया गया. शवयात्रा में गांव के लोगों के साथ राज्यसभा सांसद समीर उरांव, विधायक बंधु तिर्की, रांची की महापौर आशा लकड़ा, महिला आयोग की आरती कुजूर, प्रमुख सुरेश मुंडा सहित अनेक जनप्रतिनिधि भी शामिल हुए, लेकिन पुलिस और प्रशासन का कोई बड़ा अधिकारी वहां नहीं पहुंचा.

सीबीआई जांच की उठी मांग एक तेजतर्रार पुलिस अफसर के तथाकथित रूप से आत्महत्या करने की बात रूपा के गांव में किसी के गले नहीं उतर रही थी. उस के पिता सीआईएसएफ जवान देवानंद उरांव और मां पद्मावती सहित सभी घर वालों का आरोप था कि रूपा की हत्या किसी साजिश के तहत की गई है और इसे आत्महत्या का नाम दिया जा रहा है. रूपा 2018 में पुलिस एसआई बनने से पहले बैंक औफ इंडिया में काम करती थी. उस ने रांची के सेंट जेवियर कालेज से पढ़ाई पूरी की थी. उसे नवंबर 2020 में ही साहिबगंज में महिला थानाप्रभारी बनाया गया था. उस ने यह जिम्मेदारी संभालने के बाद महिला उत्पीड़न रोकने के लिए कई महत्त्वपूर्ण कदम उठाए थे.

मामला गंभीर था. रूपा की 2 बैचमेट महिला सबइंसपेक्टरों और मुख्यमंत्री के करीबी नेता पंकज मिश्रा पर आरोप लग रहे थे. रूपा की मौत को हत्या मानते हुए लोगों ने सोशल मीडिया पर ‘जस्टिस फौर रूपा’ शुरू कर दिया. रूपा के परिजनों को न्याय दिलाने के लिए झारखंड के कई प्रमुख नेता भी आगे आ गए. भाजपा विधायक दल के नेता बाबूलाल मरांडी ने रूपा की मौत को मर्डर मिस्ट्री बताते हुए इस की सीबीआई से जांच कराने की मांग की. उन्होंने कहा कि रूपा के परिवार वालों के आरोप से यह मामला संदेहास्पद है. मरांडी ने कहा कि ऐसे राजनीतिक प्रभावशाली व्यक्ति पर आरोप लगे हैं, जो मौजूदा सरकार में कुख्यात रहा है.

प्रदेश भाजपा महिला मोर्चा ने भी सीबीआई जांच की मांग करते हुए राज्यपाल को औनलाइन ज्ञापन भेजा. मांडर के विधायक बंधु तिर्की ने मुख्यमंत्री को पत्र लिख कर कहा कि रूपा किसी बड़ी साजिश की शिकार हुई है. इसलिए इस मामले की उच्चस्तरीय जांच कराई जाए. बोरियो से सत्तारूढ़ गठबंधन के झारखंड मुक्ति मोर्चा के विधायक लोबिन हेंब्रम ने भी इस मामले की सीबीआई से जांच कराने की मांग उठाई. राज्यसभा सांसद समीर उरांव ने कहा कि मामले में आरोपी पंकज मिश्रा पर मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन का हाथ है. मिश्रा साहिबगंज में सब तरह के वैधअवैध काम करता है.

एसआईटी को सौंपी जांच मामला तूल पकड़ता जा रहा था. जिस पंकज मिश्रा पर आरोप लगाए गए, वह मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन का साहिबगंज में प्रतिनिधि है. आरोपों से घिरने पर सफाई देते हुए मिश्रा ने कहा कि वह पिछले महीने मधुपुर चुनाव में व्यस्त था. इस के बाद कोरोना पौजिटिव होने पर रांची के मेदांता अस्पताल में भरती थे. घटना से एकदो दिन पहले ही अस्पताल से डिस्चार्ज हुए थे. रूपा तिर्की से मुलाकात की बातें सरासर गलत हैं. पुलिस चाहे तो काल डिटेल निकलवा कर जांच करा सकती है. भारी राजनैतिक दबाव पड़ने पर पुलिस ने मामले की तेज गति से जांच शुरू कर दी. एसपी ने इस के लिए डीएसपी (मुख्यालय) संजय कुमार के नेतृत्व में एसआईटी का गठन किया.

एसआईटी में बरहड़वा एसडीपीओ पी.के. मिश्रा, इंसपेक्टर (राजमहल ) राजेश कुमार और 2 महिला पुलिस अधिकारियों को शामिल किया गया. जांच अधिकारी जिरवाबाड़ी थाने की एसआई स्नेहलता सुरीन को बनाया गया. मौके के हालात देख कर पुलिस इसे आत्महत्या मान रही थी, लेकिन रूपा के परिवार वाले इसे हत्या बता रहे थे. सोशल मीडिया पर भी मामला बढ़ रहा था. 2 महिला सबइंसपेक्टरों और एक नेता पर लगे आरोपों को देखते हुए सभी बिंदुओं पर जांच करना जरूरी थी. फोरैंसिक टीम ने 5 मई, 2021 को साहिबगंज पहुंच कर रूपा के क्वार्टर की जांचपड़ताल की और साक्ष्य जुटाए. मौके पर मिली पानी से भरी बोतल व गिलास से अंगुलियों के निशान लिए. कई दूसरी जगहों से भी फिंगरप्रिंट लिए.

पुलिस जांचपड़ताल में जुटी थी, इसी बीच एक औडियो वायरल हो गया. चर्चा रही कि इस औडियो में रूपा तिर्की के पिता और एक युवक की बातचीत थी. यह कोई और नहीं रूपा का बैचमेट एसआई शिवकुमार कनौजिया बताया गया. यह औडियो सामने आने से पता चला कि रूपा का शिवकुमार से अफेयर चल रहा था. औडियो में रूपा के पिता उस युवक से रूपा की शादी के संबंध में बात कर रहे थे. युवक बाचतीत में रूपा को समझाने की बात कह रहा था ताकि वह कोई गलत कदम न उठा ले. औडियो सामने आने के बाद यह मामला ज्यादा उलझ गया. एक पुलिस एसआई की संदिग्ध मौत का मामला होने के कारण झारखंड पुलिस एसोसिएशन ने भी इस की जांच शुरू कर दी.

रांची से एसोसिएशन के प्रांतीय उपाध्यक्ष अरविंद्र प्रसाद यादव, संताल परगना प्रक्षेत्र मंत्री हरेंद्र कुमार, रविंद्र कुमार, पप्पू सिंह, जिला उपाध्यक्ष सुखदेव महतो, सचिव सहमंत्री शमशाद अहमद आदि ने साहिबगंज पहुंच कर मामले की जांच की. इन पदाधिकारियों ने प्रताड़ना के आरोपों से घिरी रूपा की बैचमेट एसआई मनीषा कुमारी और ज्योत्सना से भी कई घंटे तक पूछताछ की. सामने आया बौयफ्रैंड का नाम पुलिस ने मामले की तह में जाने के लिए रूपा के मोबाइल फोन की जांच कर काल डिटेल्स निकलवाई और उस के वाट्सऐप मैसेज, चैटिंग, एसएमएस और वीडियो वगैरह देखे. इस में पता चला कि उस ने आखिरी बातचीत अपने बौयफ्रैंड शिवकुमार कनौजिया से की थी.

रूपा ने शिवकुमार को कई मैसेज भी भेजे थे. शिवकुमार झारखंड के चाइबासा जिले में टोकलो पुलिस थाने में तैनात था. शिवकुमार से पूछताछ करनी जरूरी थी. इसलिए एसआईटी ने उसे साहिबगंज बुलाया. इस बीच, रूपा के परिवार वालों की मांग पर जांच अधिकारी स्नेहलता सुरीन को बदल कर राजमहल इंसपेक्टर राजेश कुमार को इस मामले की जांच सौंप दी गई. आदिवासी समाज की प्रतिभाशाली महिला पुलिस एसआई रूपा तिर्की की संदिग्ध मौत की उच्चस्तरीय जांच की मांग को ले कर पूरे झारखंड में लोग आंदोलन करने लगे. छात्र संगठन, महिला संगठन और आदिवासी संगठनों के अलावा सत्ताधारी दल कांग्रेस सहित विपक्षी दल भाजपा, जनता दल (यू) आजसू आदि ने इस मामले की सीबीआई जांच कराने की मांग सरकार से की.

सत्ताधारी विधायकों ने कहा कि इस घटना से आदिवासी समुदाय में आक्रोश है. सोशल मीडिया पर रूपा को इंसाफ दिलाने के लिए अभियान चल रहे हैं. इस से सरकार की छवि धूमिल हो रही है. लोग हम से सवाल पूछ रहे हैं कि इस की जांच होगी या नहीं. ऐसी हालत में सरकार को सीबीआई जांच से पीछे नहीं हटना चाहिए. झारखंड प्रदेश भाजपा अध्यक्ष और राज्यसभा सांसद दीपक प्रकाश ने रांची के पास रातू गांव में रूपा के घर पहुंच कर पूरे मामले की जानकारी ली. बाद में उन्होंने कहा कि यह हाईप्रोफाइल मामला है. इस में मुख्यमंत्री के संरक्षण प्राप्त लोगों का हाथ है. इसलिए झारखंड पुलिस से न्याय की उम्मीद नहीं है.

रूपा होनहार लड़की थी, उसे धोखे में रख कर मार डाला गया. झारखंड में आगे किसी आदिवासी बेटी के साथ ऐसी घटना नहीं हो, इसलिए इस घटना से परदा उठना जरूरी है. आंदोलन बढ़ते जा रहे थे. रूपा को न्याय दिलाने के लिए महिलाएं प्रदर्शन कर रही थीं. कैंडल मार्च निकाल रही थीं. वहीं, पुलिस की जांच में नईनई बातें सामने आने से मामला उलझता जा रहा था. साहिबगंज पुलिस और झारखंड सरकार की बदनामी हो रही थी.  रूपा के बौयफ्रैंड शिवकुमार कनौजिया को 8 मई को साहिबगंज थाने बुला कर एसआईटी में शामिल अफसरों ने पूछताछ की. उस से रूपा से मुलाकात होने से ले कर अफेयर और शादी की बातों के बारे में सवाल पूछे. उस से रूपा से मुलाकातों और मोबाइल पर चैटिंग वगैरह के संबंध में भी पूछताछ की गई.

करीब 8 घंटे तक पुलिस अधिकारी उस से लगातार पूछताछ करते रहे. बौयफ्रैंड एसआई को भेजा जेल शिवकुमार से पूछताछ के बाद एसआईटी ने अपनी जांच रिपोर्ट एसपी को सौंप दी. इस रिपोर्ट के आधार पर साहिबगंज पुलिस ने 9 मई को एसआई शिवकुमार कनौजिया को रूपा की खुदकुशी का जिम्मेदार मानते हुए गिरफ्तार कर लिया. जांच में सामने आए तथ्यों के आधार पर पुलिस ने पहले दर्ज किए केस को आत्महत्या के लिए उकसाने में परिवर्तित कर शिवकुमार कनौजिया के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया. बाद में शिवकुमार को पुलिस ने उसी दिन अदालत के समक्ष पेश कर जेल भेज दिया. एसपी अनुरंजन किस्पोट्टा का कहना था कि एसआईटी ने जो जांच रिपोर्ट सौंपी, उस में कहा गया कि शिवकुमार ने रूपा की भावनाओं को आहत किया.

इस कारण रूपा ने खुदकुशी की. जांच में पुलिस को एक औडियो भी मिला था. इस औडियो में रूपा तिर्की और उस के प्रेमी एसआई शिवकुमार कनौजिया के बीच बातचीत थी. इस में शिव बातचीत के दौरान रूपा से कई तरह की आपत्तिजनक बातें भी कह रहा था. शिव की इन बातों पर रूपा ने कहा था कि सही से बात करो शिव, नहीं तो हम सुसाइड कर लेंगे. पुलिस ने रूपा को प्रताडि़त करने का आधार बना कर ही शिवकुमार को गिरफ्तार किया.  कहा जाता है कि 2018 बैच के पुलिस एसआई रूपा और शिव कुमार की मुलाकात ट्रैनिंग के दौरान हुई थी. यह मुलाकात धीरेधीरे प्यार में बदल गई. रूपा को शिव पर भरोसा था. वह उस से शादी करना चाहती थी. यह बात भी सामने आई है कि शिव कुमार रूपा से प्यार का नाटक करता था. वह अकसर उस से पैसे मांगता रहता था.

एक बार उस ने मोटरसाइकिल भी मांगी थी. केवल यूज करना चाहता था बौयफ्रैंड वह रूपा से आपत्तिजनक स्थिति में वीडियो काल करने का भी दबाव बनाता था. वह रांची में जमीन खरीदने के लिए रूपा पर दबाव बना रहा था. कहता था कि रांची में आदिवासी की जमीन वह अपने नाम से नहीं खरीद सकता. रूपा जब शिव पर शादी करने का दबाव बनाती, तो वह कोई न कोई बहाना बना देता था. वायरल वीडियो में वह रूपा के पिता से कह रहा था कि वह अंतरजातीय विवाह नहीं करना चाहता. इसलिए अपनी बेटी को समझाएं. पुलिस का दावा है कि रूपा ने आत्महत्या करने से पहले शिव से बात की थी. यह बात भी सामने आई है कि रूपा और शिव कुमार कभीकभार धनबाद में मिलते थे.

इस के लिए रूपा साहिबगंज से अपने ड्राइवर के साथ धनबाद जाती थी और शिवकुमार चाईबासा से आता था. फिर दोनों किसी तय स्थान पर मिलते थे. पुलिस के अनुसार, रूपा की पोस्टमार्टम रिपोर्ट में भी आत्महत्या किए जाने की बात ही सामने आई है. एसपी का कहना है कि रूपा के परिवार वालों ने एसआई मनीषा कुमारी और ज्योत्सना के अलावा पंकज कुमार मिश्रा पर जो आरोप लगाए, उस के संबंध में कोई साक्ष्य नहीं मिले. जांच में इन लोगों की संलिप्तता या षडयंत्र के कोई सबूत नहीं मिले. भले ही पुलिस ने इस मामले का खुलासा कर रूपा के बौयफ्रैंड शिव कुमार को गिरफ्तार कर लिया, लेकिन रूपा के परिवार वाले इस से संतुष्ट नहीं हैं.

साहिबगंज से एसआईटी के पुलिस अधिकारी 10 मई को रूपा के मातापिता के बयान दर्ज करने रांची के रातू गांव पहुंचे तो लोगों ने उन का विरोध कर नारेबाजी की. लोगों ने कहा कि पुलिस की ओर से इस मामले को दूसरी दिशा में ले जाने की कोशिश की जा रही है. रूपा के पिता देवानंद उरांव और मां पद्मावती ने पुलिस अधिकारियों से सवालजवाब किए और कहा कि एसआईटी की जांच धोखा है. लोगों ने इस मामले की जांच सीबीआई से ही कराने की मांग की. बाद में पुलिस अधिकारियों ने लोगों को समझाबुझा कर रूपा के परिवार वालों के बयान दर्ज किए.  साहिबगंज पुलिस का कहना है कि अभी इस मामले की जांच चल रही है. रूपा के साहिबगंज स्थित सरकारी क्वार्टर के बगल में रहने वाले पुलिसकर्मी और उस के परिवार से भी पूछताछ की गई है.

अभी विसरा रिपोर्ट का भी इंतजार है, क्योंकि रूपा ने घटना वाले दिन दोपहर में अपनी मां से बात करते हुए कहा था कि उसे पानी पीने में कड़वा लग रहा है. बहरहाल, साहिबगंज पुलिस की जांच से न तो रूपा के परिवार वाले संतुष्ट हैं और न ही गांव वाले. आदिवासी संगठन भी इसे छलावा बता रहे हैं. रूपा के रातू स्थित आवास पर 11 मई को विभिन्न सामाजिक संगठनों की बैठक हुई. इस में सर्वसम्मति से कहा गया कि पुलिस प्रशासन रूपा के चैट को वायरल कर उस के चरित्र हनन का प्रयास कर रहा है. मामले में असली अपराधियों को बचा कर लीपापोती का प्रयास किया जा रहा है. साहिबगंज एसपी की रिपोर्ट के आधार पर चाईबासा जिले में टोकलो पुलिस थाने में तैनात रहे एसआई शिवकुमार को 11 मई को निलंबित कर दिया गया था.

अभी यह मामला सुलग रहा है और राजनीतिक रूप से भी गरमाया हुआ है. सवाल यही रह गया कि रूपा की मर्डर मिस्ट्री का राज खुलेगा या नहीं? क्या यह मामला प्रेम प्रसंग तक ही सिमट कर रह जाएगा? क्या पुलिस रूपा की मां पद्मावती के आरोपों की तह तक पहुंचेगी? Hindi Stories

 

Crime Story : पूर्व डिप्टी सीएम के बेटे, बहू और पोती की हत्या बड़े बेटे ने की, मां ने खोला राज

Crime Story : पूर्व उपमुख्यमंत्री प्यारेलाल कंवर ने कभी सोचा भी नहीं होगा कि जो करोड़ों रुपए की संपत्ति उन्होंने अपने बच्चों के लिए जुटाई है, वही उन के परिवार में खून बहाने का जरिया बनेगी. काश! अपने जीते जी वह संपत्ति का बंटवारा कर जाते तो शायद…

छत्तीसगढ़ के औद्योगिक कोरबा जिला मुख्यालय से 15 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है गांव भैंसमा. यह गांव छत्तीसगढ़ के पूर्व उपमुख्यमंत्री स्वर्गीय प्यारेलाल कंवर के गृहग्राम के रूप में जाना जाता है. कांग्रेस के महत्त्वपूर्ण आदिवासी क्षत्रप होने के कारण प्यारेलाल कंवर अविभाजित मध्य प्रदेश के दौरान सत्तर के दशक में पहली बार कांग्रेस सरकार में आदिम जाति कल्याण विभाग मंत्री बने. आगे राजस्व मंत्री के अलावा अस्सी के दशक में मध्य प्रदेश विधानसभा के उपाध्यक्ष और 90 के दशक में वह दिग्विजय सिंह मंत्रिमंडल में उपमुख्यमंत्री भी रहे. 21 अप्रैल, 2021 की सुबह की बात है. कोरबा के एसपी अभिषेक सिंह मीणा अभी सोए हुए ही थे कि उन का मोबाइल फोन बारबार बजने लगा.

उन्होंने फोन रिसीव किया तो देखा कोई अज्ञात नंबर था. उधर से आवाज आई, ‘‘सर, मैं गांव भैंसमा से बोल रहा हूं. यहां प्यारेलाल कंवर जी के बेटे और उन के परिवार के सदस्यों का मर्डर कर दिया गया है.’’

और फोन कट गया. एसपी अभिषेक सिंह मीणा को कोरबा जिले में पदस्थ हुए लगभग 2 साल हो चुके थे, इसलिए वह कोरबा के राजनीतिक और सामाजिक वातावरण को भलीभांति जानतेसमझते थे. वह जानते थे कि स्वर्गीय प्यारेलाल कंवर अविभाजित मध्य प्रदेश की राजनीति में एक बड़ा नाम हुआ करते थे. उन के परिवार में हत्या की बात सुन उन्होंने मामले की गंभीरता को समझ कर अधीनस्थ पुलिस अधिकारियों को फोन किया. सारी जानकारी ले कर तत्काल घटनास्थल पर पहुंचने की हिदायत देते हुए कहा कि वह स्वयं भी 15 मिनट में घटनास्थल पर पहुंच रहे हैं. देखते ही देखते कोरबा जिले से निकल कर संपूर्ण छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश  में यह खबर आग की तरह फैल गई कि प्रदेश में कांग्रेस के बड़े नेता प्यारेलाल कंवर के बेटे हरीश कंवर (36), उन की पत्नी सुमित्रा कंवर (32) और बेटी आशी (4 वर्ष) की अज्ञात लोगों ने नृशंस हत्या कर दी है.

पुलिस विभाग के अधिकारी घटनास्थल पर पहुंचे. इसी समय लोगों का हुजूम घटनास्थल के मकान के बाहर लगा हुआ था और लोग बड़े ही चिंतित घटना के संदर्भ में कयास लगा रहे थे. सूचना मिलते ही सुबह करीब 6 बजे राजनीति में प्यारेलाल कंवर के शिष्य रहे जय सिंह अग्रवाल,जो वर्तमान में कांग्रेस की भूपेश बघेल सरकार में राजस्व एवं आपदा कैबिनेट मंत्री हैं, घटनास्थल पर पहुंच गए. उन्होंने परिजनों से बातचीत कर के मामले की गंभीरता को समझने के बाद पुलिस अधिकारियों से बातचीत की. एसपी अभिषेक सिंह मीणा घटनास्थल पर आ चुके थे. उन्होंने तत्काल डौग स्क्वायड टीम बुलवाई और पुलिस टीम को निर्देश दिया  कि जितनी जल्दी हो सके इस संवेदनशील हत्याकांड के दोषियों को पकड़ कर कानून के हवाले करना होगा.

एडिशनल एसपी कीर्तन राठौड़ की अगुवाई में एक पुलिस टीम बनाई  गई, जो मामले की जांच में जुट गई.  मौके पर फोरैंसिक टीम को भी बुला लिया गया. पुलिस ने घटनास्थल का बारीकी से निरीक्षण किया. हत्यारों ने हरीश कंवर, उन की पत्नी सुमित्रा और बेटी आशी की हत्या किसी धारदार हथियार से की थी, इसलिए घर में खून ही खून बिखरा था. पुलिस अधिकारियों ने हरीश कंवर के भाइयों व परिवार के अन्य सदस्यों से बात की. परिवार के सभी लोग राजनीति में ऊंची पहुंच रखते थे और समाज में उन की प्रतिष्ठा थी, इसलिए पुलिस अधिकारियों को इस बात का भी अंदेशा था कि कहीं इस घटना को ले कर लोगों का आक्रोश न फूट जाए. इसलिए पुलिस अधिकारी बड़ी ही तत्परता से इस तिहरे हत्याकांड की जांच में जुट गए.

पुलिस ने मौके की काररवाई करनी शुरू की. एसपी अभिषेक सिंह मीणा के निर्देश पर कई पुलिस टीमें अलगअलग ऐंगल से इस मामले की जांच में जुट गईं. जांच के दौरान खोजी कुत्ता घटनास्थल से करीब 100 मीटर दूर भैंसमा बाजार स्थल पर मौजूद एक पेड़ के पास जा कर ठहरा और वहां से चीतापाली की ओर जाने वाले मार्ग की ओर आगे बढ़ा. सीसीटीवी से मिला सुराग इस संकेत का पुलिस ने पीछा किया और कुत्ते का पीछा करते हुए पुलिस गांव ढोंगदरहा होते हुए सलिहाभाठा-नोनबिर्रा मार्ग तक पहुंची. आगे सलिहाभाठा डैम के पास जले हुए कपड़ों के अवशेष के पास जा कर कुत्ता रुक गया. पुलिस ने वह अवशेष जब्त कर लिए. पुलिस की एक टीम घटनास्थल के बाहर लगे सीसीटीवी कैमरों को तलाशने लगी.

पड़ोसी के घर के बाहर लगे सीसीटीवी की फुटेज देखी तो उस में 2 संदिग्ध लोग हरीश कंवर के घर में घुसते दिखाई दिए. पुलिस की दूसरी टीम को जांच में यह भी पता चला कि आज ही किसी ने डायल 112 नंबर पर फोन कर के इस मार्ग पर सड़क दुर्घटना की सूचना दी थी. मौके पर पहुंची एंबुलेंस ने परमेश्वर कंवर नामक युवक को करतला अस्पताल में भरती कराया है. यह जानकारी मिलने पर पुलिस ने आसपास के लोगों से पूछताछ की तो पुलिस को वहां कोई सड़क हादसा न होने की जानकारी मिली. इस के बाद पुलिस अस्पताल में भरती परमेश्वर कंवर के पास पहुंची. पमेश्वर कंवर मृतक हरीश कंवर के बड़े भाई हरभजन कंवर का साला था, जो ग्रैजुएशन की पढ़ाई कर रहा था.

जांच में पुलिस को उस की आंख और चेहरे के आसपास जख्म दिखे, जो दुर्घटना के नहीं लग रहे थे. लग रहा था जैसे वह किसी धारदार हथियार के हों. पुलिस ने उस से पूछताछ की तो वह कोई संतोषजनक जवाब नहीं दे सका. इस से पुलिस को उस पर शक हो गया. उस से तिहरे हत्याकांड के बारे में पूछताछ की तो वह पुलिस को इधरउधर की बातें कर के खुद को बचाने की कोशिश करता रहा, मगर जब कड़ी पूछताछ हुई तो उस ने सच स्वीकार कर लिया. उस ने बताया कि अपने दोस्त सुरेंद्र कंवर की सलाह पर रामप्रसाद के साथ मिल कर उस ने यह वारदात की. उस से पूछताछ में पता चला कि यह कांड किसी और ने नहीं बल्कि हरीश कंवर के बड़े भाई हरभजन कंवर और उस की पत्नी धनकंवर ने कराया है.

पुलिस जांच में यह स्पष्ट हो गया कि हत्या हरीश के बड़े भाई हरभजन के सहयोग से  उस के साले मुख्य अभियुक्त परमेश्वर कंवर द्वारा अंजाम दी गई है. धीरेधीरे सारे तथ्य एकदूसरे से मिलते चले गए और उसी रोज शाम होतेहोते हरीश कंवर परिवार हत्याकांड से परदा उठ गया. परमेश्वर कंवर से पूछताछ करने के बाद पुलिस टीम ने उसी समय मृतक के भाई हरभजन कंवर, उस की पत्नी धनकंवर व नाबालिग बेटी रंजना को भी हिरासत में ले लिया. इन सभी से पूछताछ के बाद इस तिहरे हत्याकांड की जो कहानी सामने आई, इस प्रकार निकली—

स्वर्गीय प्यारेलाल कंवर के 4 बेटे और 3 बेटियां थीं. सब से बड़े बेटे हरबंश कंवर, दूसरे हरदयाल कंवर, तीसरे हरभजन कंवर और चौथे सब से छोटे थे हरीश कंवर. एक बेटी हरेश कंवर वर्तमान में जिला पंचायत, कोरबा की अध्यक्ष हैं. बाकी 2 बड़ी बेटियां शासकीय नौकरी में हैं. प्यारेलाल कंवर के दूसरे नंबर के पुत्र हरदयाल कंवर जो अधिवक्ता थे, का लगभग 5 साल पहले निधन हो चुका है. वर्तमान में हरवंश, हरभजन और हरीश कंवर प्यारेलाल के 3 बेटे जीवित थे. हरीश कंवर प्यारेलाल कंवर के रहते उन की विरासत को संभालते हुए कांग्रेस की राजनीति में सक्रिय हुए और सन 2010 में जिला पंचायत का चुनाव लड़ा मगर पराजित हो गए.

उन्होंने प्यारेलाल कंवर के संरक्षण में राजनीति की शुरुआत की. आगे पूर्व मुख्यमंत्री अजीत कुमार जोगी के साथ अपनी तालमेल बिठा ली. अजीत जोगी का हरीश को पुत्रवत स्नेह मिलता था और हरीश ने अपने रामपुर विधानसभा क्षेत्र में अजीत जोगी और उन के बेटे अमित जोगी को बुला कर कुछ राजनीतिक कार्यक्रम किए थे. उन्होंने एक बहुचर्चित लैंको पावर प्लांट के खिलाफ आंदोलन कर स्थानीय भूविस्थापितों के लिए बिगुल फूंका था. आगे स्थितियां ऐसी बनती चली गईं कि कांग्रेस में गुटबाजी चरम पर पहुंच गई थी. ऐसे में जहां अजीत जोगी ने अपना एक अलग खेमा पूरे प्रदेश में तैयार कर लिया था, वहीं उन के 36 के संबंध स्थानीय बड़े नेताओं के साथ बने हुए थे. कांग्रेस के वरिष्ठ नेता डा. चरणदास महंत, भूपेश बघेल, जयसिंह अग्रवाल वगैरह अपने एक अलग खेमे में थे.

ऐसे में कांग्रेस के इस खेमे से हरीश कंवर की दूरी बनती चली गई और हरीश कंवर खुल कर छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री रहे अजीत कुमार जोगी के स्थानीय झंडाबरदार बन गए. दूसरे खेमे ने हरीश कंवर को तवज्जो देनी बंद कर दी. आगे चल कर जब अजीत जोगी ने ‘जनता कांग्रेस जोगी’ पार्टी का गठन किया तो हरीश कंवर इस पार्टी में ग्रामीण अध्यक्ष, कोरबा बन कर शामिल हो गए और क्षेत्र में अपनी अलग पहचान बनाने लगे. पूरे परिवार की धमक थी राजनीति में दूसरी तरफ प्यारेलाल कंवर के अनुज श्यामलाल कंवर जो पुलिस में डीएसपी पद से सेवानिवृत्त हो चुके थे, वह कांग्रेस नेता डा. चरणदास महंत के क्षेत्रीय खेमे से जुड़ गए थे. इस तरह परिवार में भी खेमेबाजी सामने आ चुकी थी.

श्यामलाल कंवर सन 2013 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस पार्टी से विधायक निर्वाचित हुए थे. इधर हरीश कंवर अजीत जोगी के पक्ष में चले गए और उन्होंने उन का झंडा थाम लिया था. सन 2018 के विधानसभा चुनाव में श्यामलाल कंवर को फिर विधानसभा का प्रत्याशी कांग्रेस पार्टी ने बनाया. दूसरी तरफ अजीत प्रमोद कुमार जोगी ने भी अपना प्रत्याशी फूल सिंह राठिया को खड़ा कर दिया. कांग्रेस के इस झंझावात में श्यामलाल कंवर चारों खाने चित हो गए और तीसरे नंबर में आ कर ठहर गए. प्यारेलाल कंवर का परिवार राजनीति से अब दूर हो चुका था और सामान्य जीवन व्यतीत कर रहा था. अजीत कुमार जोगी की पार्टी के धराशाई होने के बाद हरीश कंवर राजनीति के हाशिए पर आ गए थे और अपने गांव भैंसमा में उन्होंने खाद, बीज की एक दुकान खोल ली थी.

मूलरूप से काश्तकार परिवार प्यारेलाल कंवर के वंशज अपना जीवनयापन शांतिपूर्वक कर रहे थे. इसी बीच भैंसमा में एक ऐसा नृशंस हत्याकांड हुआ, जिसे कोरबा के इतिहास में कभी भी भुलाया नहीं जा सकेगा. धनकंवर को थी धन की लालसा दरअसल, हरभजन कंवर की पत्नी धनकंवर ने जब सुना कि हरीश कंवर ने पैतृक संपत्ति पर लगभग अपना कब्जा स्थापित कर लिया है तो उस ने पति हरभजन के कान भरने शुरू कर दिए. एक दिन वह मौका देख कर बोली, ‘‘ऐसे कैसे चलेगा, तुम क्या सब कुछ छोटे (हरीश) को दे दोगे, क्या हमारा उस पर कोई हक नहीं है.’’

हरभजन ने हंसते हुए कहा, ‘‘तुम्हें किस बात की कमी है, मैं तो किसान हूं. हमें चाहिए क्या, 2 वक्त की रोटी मिल ही जाती है. हमारे 2 बेटे हैं, फिर हमें क्या चिंता है.’’

पत्नी ने यह सुन कर कहा, ‘‘आप बहुत भोलेभाले हो. भोपाल की, यहां की करोड़ों रुपए की संपत्ति क्या अकेले हरीश की हो जाएगी, हमारा भी तो उस पर अधिकार है.’’

हरभजन ने समझाया, ‘‘अभी संपत्ति का कोई बंटवारा तो पिताजी ने किया नहीं था, सब कुछ हरीश की देखरेख में है, कहां कुछ कोई ले जाएगा.’’

पत्नी धनकंवर तड़प कर बोली, ‘‘ सचमुच आप बहुत ही भोले हो. वह सारी धान की  पैदावार को भी बेच देता है. लाखों रुपए का बोनस अपनी तिजोरी में भर रहा है और तुम भोलेभंडारी बन कर बैठे रहो. एक दिन हम लोगों को यह हरीश धक्के मार के घर से भी निकाल देगा, तब तुम पछताओगे.’’

यह सुन कर हरभजन ने नाराज होते हुए कहा, ‘‘तो मैं क्या करूं, तुम ही बताओ, हम ने उसे गोद में खिलाया है, मेरा सगा भाई है वह. उसे मैं क्या बोलूं और कैसे बोलूं.’’

पत्नी धनकुंवर ने कहा, ‘‘पैसों और जमीन जायजाद के मामले में मैं ने देखा है कि कोई किसी का नहीं होता, बड़े भैया के निधन के बाद क्या उन के परिवार वालों को मानसम्मान की जिंदगी मिल रही है? तुम खुद देखो हरीश सिर्फ अपने बीवीबच्चों की खुशी में ही लगा रहता है. अगर उसे अपने भाई के परिवार के प्रति जरा भी संवेदना होती तो क्या उस के परिवार की हालत इतनी खराब होती? अभी भी समय है बंटवारा कर लो…’’

‘‘मैं क्या छोटे को बंटवारे के बारे में कहूंगा. उस का रंगढंग तो तुम जानती ही हो, वह किसी की बात कहां सुनता है और सुन कर दूसरे कान से निकाल देता है.’’ हरभजन कंवर ने कहा.

‘‘मगर यह कैसे चल सकता है, मैं यह सब बरदाश्त नहीं कर सकती,’’ उफनती नदी की धारा की तरह कहती धनकुंवर अपने रोजाना के कामकाज में लग गई.

इधर रोजरोज के वादविवाद से त्रस्त  अंतत: हरभजन कंवर ने हथियार डाल दिए और कहा, ‘‘ठीक है, तुम्हें जैसा अच्छा लगे बताओ.’’

धनकंवर ने अपने भाई परमेश्वर कंवर, जोकि पास ही के गांव फत्तेगंज में रहता था और अकसर भैंसमा आया करता था, से धीरेधीरे बातचीत कर के उसे अपने मन मुताबिक बना लिया. भाई के साथ रची साजिश  धनकंवर ने एक दिन उस से कहा, ‘‘भाई, तुम बहन की कोई मदद नहीं कर रहे, ऐसा भाई भी किस काम का.’’

इस पर परमेश्वर ने कहा, ‘‘बहन आखिर तुम क्या चाहती हो, मुझे बताओ.’’

परमेश्वर की जानकारी में जमीनजायदाद का विवाद पहले ही आ चुका था. उसे लगता था कि जरूर यही कोई बात होगी जो बहन कहने वाली है.

…और हुआ भी यही. बहन धनकुंवर ने कहा, ‘‘छोटे (हरीश) ने सारी संपत्ति पर अधिकार जमा लिया है. क्या कुछ ऐसा करें कि बात बन जाए. तुम कोई ऐसा वकील देखो, जो हमें न्याय दिला सके.’’

परमेश्वर ने कहा, ‘‘वकील और कोर्ट कचहरी के चक्कर में तो न जाने कितना समय लग जाएगा. क्यों न हम…’’ कह कर परमेश्वर चुप हो गया. बहन धनकंवर ने परमेश्वर के मौन होने पर कहा, ‘‘चुप क्यों हो गए? क्या कहना चाहते हो?’’

परमेश्वर ने धीरे से कहा, ‘‘क्यों न हम हरीश को ही रास्ते से हटा दें.’’

‘‘क्या मतलब… क्या कहना चाहते हो?’’ वह बोली.

‘‘सीधी सी बात है, मैं कहना चाहता हूं हरीश का खात्मा.’’ उस ने बात स्पष्ट की.

सोच कर के धनकंवर ने कहा, ‘‘वाह, यह तो बहुत अच्छा होगा, मगर यह कैसे संभव होगा?’’

‘‘उस की फिक्र मत करो. हां, कुछ पैसा लगेगा, मैं अपने एक दोस्त को तैयार करता हूं, उसे मैं जैसे कहूंगा वह करेगा. तुम बस जीजाजी को संभाल लेना.’’

बहन ने कहा, ‘‘भाई, तुम उन की चिंता मत करो, मैं उन्हें समझाने की कोशिश करती हूं. मैं तो बारबार उन्हें कहती रहती हूं. मगर वह मेरी सुनते ही नहीं, अब मैं कोशिश करूंगी कि ठीक से उन्हें मना ही लूं.’’

इस चर्चा और घटनाक्रम के बाद परमेश्वर और बहन धनकंवर दोनों ने मिल कर हरीश कंवर की कहानी का पटाक्षेप करने की योजना बनानी शुरू कर दी. हरीश कुंवर के परिवार को खत्म करने की जो योजना बनी, उसे 21 अप्रैल 2021  दिन बुधवार सुबहसवेरे 4 बजे अमलीजामा पहनाया गया. हरीश (36 वर्ष), पत्नी सुमित्रा ( 32 ) अपनी 4 वर्षीय बेटी आशी के साथ अभी नींद में ही थे कि भाई हरभजन परिवार सहित सुबह हमेशा की तरह अपने कमरे से सुबह की सैर के लिए निकल गया. पिता हरभजन के निकलते ही उस की 16 वर्षीय बेटी रंजना (काल्पनिक नाम) ने अपने मामा परमेश्वर कंवर को मोबाइल पर मैसेज किया कि पापा सैर पर निकल गए हैं.

यह मैसेज मिलते ही परमेश्वर ने अपने दोस्त रामप्रसाद मन्नेवार को फोन किया और दोनों थोड़ी ही देर में भैंसमा स्थित हरीश कंवर के पैतृक आवास के पास आ गए. बेरहमी से किए 3 कत्ल यहां उन्हें खबर नहीं थी कि चौराहे पर एक दुकान पर सीसीटीवी कैमरा लगा है, जिस में दोनों के आने का वीडियो फुटेज रिकौर्ड हो गया है. दोनों हरीश कंवर के कमरे में चले गए और बकरी को रेतने का हथियार (कत्ता) निकाल कर हरीश पर हमला कर दिया. दोनों के एक साथ धारदार हथियार से हमला करने से हरीश कंवर हड़बड़ा कर खून से लथपथ उठ खड़े हुए. उन्होंने अपना बचाव करने की कोशिश की, मगर दोनों ने उन पर लगातार हमले किए.

हरीश ने साहस के साथ अपने आप को बचाने का खूब प्रयास किया और हमलावरों से हथियार छीनने की कोशिश की, मगर सफल नहीं हो पाए. अंतत: दोनों ने मिल कर हरीश को वहीं मौत की नींद सुला दिया. होहल्ला सुन कर हरीश कंवर की पत्नी सुमित्रा उठ खड़ी हुई और पति का बचाव करने आगे बढ़ी कि उन्हें भी दोनों ने मिल कर धारदार हथियार से हमला कर मार डाला. 4 साल की आशी चिल्लाहट सुन कर के उठ कर रो रही थी. दोनों हत्यारों ने बच्ची आशी की भी वहीं नृशंस हत्या कर दी. इस के बाद वे कमरे से बाहर निकले तो शोरगुल सुन कर हरीश की 82 वर्षीय मां जीवनबाई वहां पहुंचीं. उन्हें बहुत कम दिखाई देता था. वह चिल्लाहट सुन कर ‘क्या है…क्या हो गया’ पूछने लगीं तो उन्हें कोई जवाब न दिया. दोनों ने उन्हें धक्का देते हुए नीचे गिरा दिया और वहां से भाग खड़े हुए.

हत्याकांड को अंजाम दे कर दोनों बाहर आए तो सुबह के लगभग साढ़े 4 बज रहे थे. अभी चारों ओर अंधेरा ही था. परमेश्वर और रामप्रसाद घर के बाहर आए और दोनों ने यह योजना बनाई कि जब तक मामला शांत नहीं हो जाता, दोनों अलगअलग हो जाएं और जब स्थितियां ठीक होंगी तो मुलाकात की जाएगी. परमेश्वर आगे बढ़ा तो उसे यह खयाल आया कि उस के कपड़े खून से सन गए हैं और उस के चेहरे पर चोट आई है, जहां से खून बह रहा है. मगर वह आगे गांव सलिहाभाठा की ओर बढ़ गया. आगे सिंचाई विभाग के डैम के पास  उस ने अपने रक्तरंजित कपड़ों को जला दिया और डैम में नहाधो कर उस ने डायल 112 नंबर पर फोन कर के खुद का एक्सीडेंट होने की सूचना दे दी. फिर वह करतला अस्पताल में भरती हो गया.

दूसरी तरफ रामप्रसाद कोरबा जिला के समीप जिला चांपा जांजगीर के एक गांव में अपने रिश्तेदार के यहां चला गया. जहां से नगरदा थाना पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर उरगा पुलिस के हवाले कर दिया. देर शाम को एसपी अभिषेक सिंह मीणा ने एसपी औफिस में एक पत्रकार वार्ता आयोजित कर सभी आरोपियों को प्रैस के समक्ष उपस्थित कर सारे घटनाक्रम से परदा उठा दिया. पुलिस ने हरीश कंवर, उन की सुमित्रा और बेटी आशी की हत्या के आरोप में आरोपियों हरभजन कंवर, पत्नी धनकंवर, बेटी रंजना, साले परमेश्वर कंवर और उस के दोस्त रामप्रसाद मन्नेवार और सुरेंद्र कंवर के खिलाफ भादंवि की धारा 302, 201, 120बी के तहत गिरफ्तार कर कोरबा के मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी के समक्ष पेश किया, जहां से रंजना के अलावा सभी आरोपियों को जेल भेज दिया गया. रंजना को बाल सुधार गृह भेजा गया. Crime Story

—कथा पुलिस सूत्रों पर आधारित

 

Jharkhand Crime News : पाताललोक वेबसीरीज देख कर किया दोस्त की पत्नी और बच्चों का कत्ल

Jharkhand Crime News : दूसरों की वजह से यदि उग्र स्वभाव का इंसान आंतरिक क्रोध के जाल में फंस जाए तो उसे बुरे करेक्टर याद आते हैं. दीपक के साथ भी कुछ ऐसा ही हुआ. ऐसे में उसे वेबसीरीज ‘पाताल लोक’ का करेक्टर हथौड़ा त्यागी याद आया और उस ने हथौड़ा उठा लिया. फिर तो उस ने…

पारसी व्यवसाई जमशेदजी नौशरवानजी टाटा द्वारा बसाया गया झारखंड का जमशेदपुर भारत के सब से प्रगतिशील औद्योगिक नगरों में एक है. इस शहर की बुनियाद सन 1907 में टाटा आयरन ऐंड स्टील कंपनी (टिस्को) की स्थापना से पड़ी. जमशेदपुर को टाटानगर भी कहते हैं. इस शहर में टिस्को के अलावा टेल्को, टायो, उषा मार्टिन, जेम्को, टेल्कान, बीओसी सहित आधुनिक स्टील ऐंड पावर के कई उद्योग और देश की नामी इकाइयां हैं. दीपक कुमार अपने परिवार के साथ इसी जमशेदपुर शहर में कदमा थाना इलाके में तीस्ता रोड पर क्वार्टर नंबर एन-97 में रहता था. परिवार में कुल 4 लोग थे.

दीपक, उस की पत्नी वीणा और 2 बेटियां. बड़ी बेटी श्रावणी 15 साल की थी और छोटी बेटी दिव्या 10 साल की. दीपक खुद करीब 40 साल का था और उस की पत्नी वीणा 36 साल की. मूलरूप से बिहार के खगडि़या जिले का रहने वाला दीपक टाटा स्टील कंपनी में फायर ब्रिगेड कर्मचारी था. पिछले कुछ सालों से नौकरी के सिलसिले में वह जमशेदपुर में रहता था, वेतन ठीकठाक था. साइड बिजनैस के रूप में वह ट्रांसपोर्ट का काम भी करता था. इसलिए घर में किसी तरह की कोई कमी नहीं थी. लेकिन दोस्तों के धोखा देने और लौकडाउन में ट्रांसपोर्ट से आमदनी घटने से वह आर्थिक संकट में आ गया था.

इसी 12 अप्रैल की बात है. दीपक ने अपने दोस्त रोशन और उस की पत्नी आराध्या को लंच पर घर बुलाया. सुबह करीब साढ़े 9 बजे जब दीपक का फोन आया था, तब रोशन ने तबीयत ठीक न होने की बात कह कर मना कर दिया था, लेकिन दीपक के काफी इसरार करने पर रोशन ने कह दिया कि तबीयत ठीक रही, तो वह दोपहर बारह-एक बजे तक आने या नहीं आने के बारे में बता देगा. रोशन और उस की बीवी आराध्या से दीपक के पारिवारिक संबंध थे. दरअसल, रोशन आराध्या से प्यार करता था, लेकिन दोनों के घर वाले इस रिश्ते के लिए राजी नहीं थे. तब दीपक ने दोनों परिवारों को रजामंद कर के रोशन और आराध्या की शादी कराई थी.

दीपक का छत्तीसगढ़ में ट्रांसपोर्ट का काम था. वहां रोशन का भी ट्रक चलता था. आराध्या दीपक को मामा कहती थी. रोशन और आराध्या कुछ महीने पहले ही जमशेदपुर में शिफ्ट हुए थे. आराध्या या रोशन का फोन नहीं आया, तो दीपक ने दोपहर करीब एक बजे पत्नी वीणा के मोबाइल से आराध्या को फोन कर लंच पर जरूर आने का आग्रह किया. आराध्या मना नहीं कर सकी. उस ने कहा, ‘‘ठीक है. हम जरूर आएंगे.’’

दोपहर करीब ढाई बजे रोशन अपनी पत्नी आराध्या और एक साल की बेटी के साथ कार से कदमा में दीपक के घर पहुंचे. उन के साथ रोशन का साला अंकित भी था. अंकित दिल्ली रहता था. वह बहनबहनोई से मिलने जमशेदपुर आया था. रोशन और आराध्या दीपक के घर लंच पर जा रहे थे, अंकित घर में अकेला बोर होगा. सोच कर वे उसे भी अपने साथ लेते गए. घर पहुंचने पर दीपक ने गेट खोला. उस ने रोशन और उस की बीवी का गर्मजोशी से स्वागत किया. उन के साथ तीसरे युवक को देख कर दीपक ने रोशन की तरफ सवालिया नजरों से देखा. उस की नजरों को भांप कर रोशन ने हंसते हुए कहा, ‘‘यार, ये मेरा साला और मेरी बेगम साहिबा का भाई है. नाम है अंकित. दिल्ली से आया है.’’

रोशन, उस की बीवी और अंकित को ड्राइमरूम में सोफे  पर बैठने का इशारा करते हुए दीपक ने कहा, ‘‘आप लोग बैठो, मैं फ्रिज से ठंडा पानी ले कर आता हूं.’’

दीपक पानी लाने के लिए जाने लगा, तो आराध्या चौंक कर बोली, ‘‘मामा, आप पानी क्यों ला रहे हो? वीणा मामी को कह दो, वह ले आएंगी.’’

‘‘अरे यार, मैं तुम्हें बताना भूल गया. वीणा कुछ देर पहले मेरे भाई के घर रांची चली गई. साथ में दोनों बच्चों को भी ले गई,’’ दीपक ने कुछ सोचते हुए कहा, ‘‘घर में अकेला मैं ही हूं. मुझे ही आप लोगों की आवभगत करनी पड़ेगी.’’

‘‘मामा, हमें शर्मिंदा मत कीजिए. आप ने हमें बेकार ही लंच पर बुलाया,’’ आराध्या ने नाराजगी भरे स्वर में कहा, ‘‘मामीजी घर पर नहीं हैं, तो हम लंच के लिए फिर कभी आ जाएंगे.’’

दीपक ने आराध्या को भरोसा दिलाते हुए कहा, ‘‘आप को लंच पर बुलाया है, तो बाजार से खाना ले आएंगे.’’

दीपक की इस बात पर आराध्या ने पति रोशन की ओर देखा. रोशन क्या कहता, उस ने फ्रिज से पानी लेने जा रहे दीपक को सोफे पर ही बैठा लिया और बातें करने लगे. घरपरिवार और बच्चों की बातें करते हुए वे ठहाके भी लगाते जा रहे थे. उन्हें बातें करते हुए 5-7 मिनट ही हुए थे कि आराध्या की बेटी ने पौटी कर दी. आराध्या बेटी को गोद में ले कर बाथरूम में चली गई. बाथरूम में उस ने बच्ची को साफ किया. पीछेपीछे रोशन भी बीवी की मदद के लिए बाथरूम में आ गया और उस ने बेटी का नैपकिन धोया. बाथरूम से ड्राइंगरूम में आते समय उन्हें चिल्लाने की आवाज सुनाई दी. वे तेज कदमों से ड्राइंगरूम में पहुंचे, तो दीपक हथौड़े से अंकित पर हमला कर रहा था.

रोशन कुछ समझ नहीं पाया कि अचानक ऐसी क्या बात हो गई, जो दीपक अंकित को मार रहा है. वह दीपक से पूछते हुएअंकित को बचाने लगा, तो दीपक ने उस की बच्ची को अपनी ओर खींचते हुए मारने की कोशिश की. रोशन बचाने लगा, तो दीपक ने उस पर भी हथौड़े से हमला कर दिया. इस से रोशन को भी चोटें लगीं. किसी तरह रोशन ने अपनी बेटी, पत्नी और साले को बचा कर वहां से बाहर निकाला. अंकित के सिर से खून बह रहा था. उस के सिर पर रुमाल बांध कर खून रोकने की कोशिश की गई. फिर वे कार से सीधे टाटा मैमोरियल हौस्पिटल पहुंचे. अंकित का तुरंत इलाज जरूरी था. उसे हौस्पिटल में भरती कराया गया. रोशन को भी डाक्टरों ने भरती कर लिया.

बाद में रोशन ने दीपक के साले विनोद को फोन कर पूरी बात बताई. विनोद को दाल में कुछ काला नजर आया. उस ने यह बात अपने छोटे भाई आनंद साहू को बताईं. दीपक की ससुराल जमशेदपुर के ही शास्त्रीनगर में थी. शाम करीब 4 बजे विनोद और उस के घर वाले दीपक के क्वार्टर पर पहुंचे. वहां गेट पर ताला लगा हुआ था, लेकिन अंदर एसी चल रहा था. विनोद और उस के घर वाले सोचविचार कर ही रहे थे कि इसी दौरान रिंकी को ढूंढते हुए उस की मां नीलिमा और मंझली बहन बिपाशा भी वहां पहुंच गईं. उन्होंने बताया कि रिंकी दीपक के बच्चों को ट्यूशन पढ़ाने आती थी. वह सुबह 11 बजे घर से निकली थी और अभी तक घर नहीं पहुंची.

रोजाना वह दोपहर एक बजे घर वापस आ जाती थी. बहनों की औनलाइन क्लास होने के कारण रिंकी उस दिन मोबाइल नहीं ले गई थी. जब रोजाना के समय पर रिंकी वापस घर नहीं पहुंची, तो घर वालों ने दीपक को फोन किया. दीपक ने कहा कि वह ट्यूशन पढ़ा कर जा चुकी है. इस के बाद भी दोपहर 3 बजे तक जब रिंकी घर नहीं पहुंची, तो नीलिमा और बिपाशा दीपक के क्वार्टर पर पहुंची थीं. चिंता में मांबेटी वहां से कदमा थाने पहुंचीं और पुलिस को पूरी बात बताई. पुलिस ने कोई घटना दुर्घटना होने की आशंका जताते हुए एक बार हौस्पिटल में देख आने की सलाह दी. वे टीएमएच गईं, लेकिन वहां कुछ पता नहीं चला, तो थकहार कर दोनों दोबारा दीपक के क्वार्टर पर आईं. यहां उन्हें विनोद और उस के घर वाले मिले.

विनोद ने रिंकी की मांबहन के साथ सोचविचार कर दीपक के क्वार्टर के दरवाजे पर लगा ताला तोड़ दिया. विनोद अंदर कमरे में गया और चिल्लाते हुए बाहर निकल आया. उस ने बताया कि वीणा और दोनों बेटियां मरी पड़ी हैं. यह सुन कर विनोद के साथ दूसरे लोग कमरे में गए. उन्होंने वीणा और दोनों बच्चियों को हिलायाडुलाया, लेकिन कोई हलचल नहीं हुई. उन की नब्ज भी ठंडी पड़ चुकी थी. वीणा और उस की दोनों बेटियों की लाश देख कर विनोद और उस के घर वाले रोने लगे. दीपक की पत्नी और बेटियों की लाश देख कर रिंकी की मां और बहन को शक हुआ. खोजबीन में रिंकी की एक चप्पल बाहर पड़ी मिल गई.

इस से संदेह और बढ़ गया. वे घर में रिंकी को तलाशने लगीं. उस की स्कूटी तो बालकनी में खड़ी मिली, लेकिन रिंकी नहीं मिली. मंझली बेटी बिपाशा मां को दिलासा देते हुए अलगअलग कमरों में बड़ी चीजें हटा कर देखने लगी. उस ने एक कमरे में पलंग का बौक्स खोला, तो उस में रिंकी की लाश पड़ी थी. उस के हाथ बंधे हुए और कपड़े अस्तव्यस्त थे. रिंकी की लाश देख कर नीलिमा और बिपाशा रोने लगीं. चारों हुईं हथौड़े का शिकार एक क्वार्टर में 4 लोगों की हत्या होने की बात पूरे शहर में फैल गई. सूचना मिलने पर कदमा थानाप्रभारी से ले कर डीएसपी, एसपी (सिटी) सुभाषचंद्र जाट और एसएसपी डा. एम. तमिलवाणन के अलावा फोरैंसिक टीम मौके पर पहुंच गई.

पुलिस अफसरों ने मौकामुआयना किया. एक कमरे की दीवार पर खून के छींटे मिले. तलाशी के दौरान कमरे में खून लगी हथौड़ी और खून से सना तकिया भी मिला. शराब की एक बोतल भी मिली. फोरैंसिक टीम ने फिंगरप्रिंट लिए और जरूरी सबूत जुटाए. मौके के हालात से लग रहा था कि वीणा और उस की दोनों बेटियों की हत्या कई घंटे पहले की गई थी. अनुमान लगाया गया कि सुबह करीब 11 बजे के बाद ट्यूशन टीचर रिंकी जब दीपक की बेटियों को पढ़ाने आई होगी, तो उस ने वीणा और दोनों बच्चियों की लाश देख ली होगी. इस पर दीपक ने भेद खुलने के डर से रिंकी को दूसरे कमरे में ले जा कर मार डाला होगा.

रिंकी की हत्या 11 से दोपहर 1 बजे के बीच की गई होगी, क्योंकि करीब एक बजे दीपक ने रोशन की पत्नी आराध्या को लंच पर बुलाने के लिए फोन किया था. 21 साल की रिंकी के अस्तव्यस्त कपड़े देख कर उस से दुष्कर्म किए जाने का अनुमान भी लगाया गया. पुलिस ने जरूरी जांचपड़ताल और लिखापढ़ी के बाद चारों शव पोस्टमार्टम के लिए अस्पताल भिजवा दिए. पुलिस की कार्रवाई में रात हो गई थी, इसलिए रात में पोस्टमार्टम नहीं हो सके. चारों हत्याओं में सीधा शक दीपक पर था और उस का कुछ अतापता नहीं था. अधिकारियों ने दीपक के ससुराल वालों से उस के बारे में पूछताछ की. पता चला कि वह उस दिन सुबह ही ससुराल गया था.

ससुर पारसनाथ साहू ने दामाद दीपक से जब बेटी और नातिनों के बारे में पूछा, तो उस ने कहा था कि वे रांची में उस के भाई के घर गई हैं. पारसनाथ ने पुलिस अफसरों को बताया कि कदमा तीस्ता रोड पर कुछ दिनों से चोरी की वारदातें हो रही थीं. इसलिए बेटी वीणा ने कुछ दिन पहले करीब 5 लाख रुपए के अपने कीमती जेवर सुरक्षा के लिहाज से उन के घर पर रख दिए थे. दीपक एक दिन पहले 11 अप्रैल की शाम को भी अपनी ससुराल गया था, तब वह बच्चों के साथ खेलता रहा फिर कुछ देर रुक कर चला गया था. इस के बाद दूसरे दिन सुबह वह दोबारा आया, तो उस ने अपने जेवर वापस मांगे. हम ने उसे जेवर दे दिए. जेवर ले कर वह चला गया.

पुलिस ने ससुराल वालों से दीपक का मोबाइल नंबर ले कर उस की लोकेशन पता कराई. करीब 3 बजे की उस की आखिरी लोकेशन जमशेदपुर में ही रमाडा होटल के पास बिष्टुपुर में मिली. फिर उस का मोबाइल बंद हो गया था. दीपक की बुलेट मोटरसाइकिल भी नहीं मिली. इसलिए अनुमान लगाया गया कि ससुराल से गहने ले कर वह बुलेट से फरार हो गया. जांचपड़ताल में पुलिस को रात के 10 बज गए. इसलिए क्वार्टर सील कर बाकी जांच अगले दिन करने का फैसला किया गया. 13 अप्रैल को सुबह से ही पुलिस इस मामले की जांचपड़ताल में जुट गई. दीपक के क्वार्टर की तलाशी में एक कमरे से सीमन लगा एक गमछा और रिंकी के कुछ कपड़े मिले. इसी कमरे में पलंग के बौक्स में रिंकी की लाश मिली थी.

जांचपड़ताल में यह भी पता चला कि 12 अप्रैल की सुबह दीपक ससुराल से जो जेवर ले कर आया था, वे जेवर उस ने सुबह करीब साढ़े 10 बजे कदमा उलियान स्थित आरके ज्वैलर्स पर बेच दिए थे. दीपक ज्वैलर का परिचित था. परिवार के जेवर वह इसी दुकान से बनवाता था. दुकानदार रमेश सोनी से उस ने जमीन खरीदने के लिए जेवर बेचने की बात कही थी. सारे जेवरों का वजन 109 ग्राम था. इन का सौदा 4 लाख 40 हजार रुपए में हुआ. रुपया देने के लिए दुकानदार ने 2-3 घंटे का समय मांगा. पुलिस ने अनुमान लगाया कि इस के बाद दीपक अपने क्वार्टर पर आ गया होगा. कुछ देर बाद ट्यूशन टीचर रिंकी घोष वहां पहुंची होगी. रिंकी ने कमरे में लाशें देख लीं, तो दीपक ने उस को पकड़ लिया होगा और दुष्कर्म करने के बाद उस की हत्या कर लाश पलंग के बौक्स में छिपा दी होगी.

रिंकी की लाश ठिकाने लगाने के बाद दोपहर करीब डेढ़ बजे दीपक वापस ज्वैलर के पास पहुंचा. ज्वैलर ने उसे 3 लाख रुपए नकद दिए. बाकी पैसे एकदो दिन में देने की बात कही, तो दीपक ने बाकी 1.40 लाख रुपए अपने भाई के बैंक खाते में ट्रांसफर करने को कहा. इस के लिए दुकानदार ने हामी भर ली. इस के बाद दीपक वापस अपने क्वार्टर पर आया होगा. कुछ देर बाद रोशन अपनी पत्नी, बेटी और साले के साथ लंच के लिए वहां पहुंच गया. वहां दीपक ने अंकित और रोशन पर जानलेवा हमला किया. इस से बच कर वे भाग गए, तो दीपक दोपहर 3 बजे अपने क्वार्टर पर ताला लगा कर बुलेट से फरार हो गया होगा.

शादी कराने वाला ही बना दुश्मन पुलिस को दीपक के ससुराल वालों से पूछताछ में पता चला कि दीपक का किसी ना किसी बात पर वीणा से झगड़ा होता रहता था. वह अपने पारिवारिक विवाद के लिए रोशन और उस की पत्नी आराध्या को दोषी मानता था. शायद इसीलिए दीपक ने पत्नी और दोनों बेटियों की हत्या करने के बाद रोशन और आराध्या को जान से मारने की नीयत से ही लंच पर बुलाया था, लेकिन रोशन के साथ उस का साला भी पहुंच गया. 2 पुरुषों के बीच दीपक का हमला कमजोर पड़ गया और रोशन के परिवार की जान बच गई. ससुराल वालों से ही पता चला कि दीपक अपने बड़े साले विनोद साहू को भी जान से मारने की फिराक में था.

उस ने फोन कर जमीन संबंधी कोई बात करने के लिए दोपहर में विनोद को अपने घर बुलाया था, लेकिन विनोद काम में व्यस्त होने के कारण नहीं जा सका था. विनोद ने कुछ साल पहले किसी लड़की से अफेयर के मामले में दीपक की पिटाई कर दी थी, तब से दीपक उस से रंजिश रखता था. दीपक के छोटे साले आनंद साहू के बयान पर कदमा थाने में दीपक के खिलाफ हत्या का मामला दर्ज कर लिया गया. रोशन ने पहले ही दीपक के खिलाफ जानलेवा हमला करने की शिकायत थाने में दे दी थी. कोल्हान के डीआईजी राजीव रंजन सिंह ने जमशेदपुर पहुंच कर मौकामुआयना किया और रोशन सहित दीपक के ससुराल वालों से पूछताछ की. दूसरी ओर, पुलिस ने पोस्टमार्टम कराने के बाद शव परिजनों को सौंप दिए.

सूचना देने और इतनी बड़ी घटना के बाद भी दीपक के परिवार से कोई भी जमशेदपुर नहीं आया. वीणा और उस की बेटियों के शवों का दाह संस्कार मायके वालों ने किया. रिंकी के शव की अंत्येष्टि उस के घर वालों ने की. पुलिस की जांच और पोस्टमार्टम रिपोर्ट से पता चला कि दीपक ने 12 अप्रैल की सुबह हथौड़े से वार कर पत्नी और बेटियों की हत्या की थी. उस ने वीणा के सिर में 2 जगह और चेहरे पर वार किए थे. फिर तकिए से उस का मुंह दबाया था. बड़ी बेटी श्रावणी के सिर में पीछे से चोट की गई थी. उस का भी गला दबाया गया था. दीपक सब से ज्यादा प्यार छोटी बेटी दिव्या को करता था. उस के सिर के पीछे तेज चोट मारी गई थी. इस से उस की कई हड्डियां टूट गई थीं.

दीपक को तलाशना जरूरी था. दोस्तों और ससुराल वालों से उस के छिपने के ठिकानों का पता लगा कर पुलिस ने अलगअलग टीमें बनाईं और जमशेदपुर व रांची के अलावा बिहार, छत्तीसगढ़ और पश्चिम बंगाल तक उस की तलाश शुरू कर दी. कई जगह छापे मारे गए. इस के साथ ही उस की मोटरसाइकिल की तलाश भी शुरू की गई. पुलिस ने दीपक के भाई और बहनों से बात की और उन के मोबाइल नंबरों की जांच की. ट्यूशन टीचर रिंकी घोष की हत्या के आरोपी को गिरफ्तार करने की मांग को ले कर टाइगर्स क्लब के संस्थापक सदस्य आलोक मुन्ना के नेतृत्व में 15 अप्रैल को कदमा रंकिणी मंदिर से गोल चक्कर तक कैंडल मार्च निकाला गया.

इन लोगों की मांग थी कि हत्यारे को पकड़ कर अदालत में स्पीडी ट्रायल चलाया जाए और उसे फांसी दी जाए. 4-5 दिन की भागदौड़ के बाद 16 अप्रैल को दीपक धनबाद में पकड़ा गया. वह 12 अप्रैल की दोपहर जमशेदपुर से बुलेट ले कर निकला और राउरकेला पहुंचा. बुलेट उस ने राउरकेला में छोड़ दी. वहां से टैक्सी ले कर वह पुरी व रांची हो कर 15 अप्रैल को धनबाद पहुंचा, जहां एक होटल में रुका. दीपक अपने पास रखे पैसों में से डेढ़ लाख रुपए भाई मृत्युंजय के खाते में जमा कराना चाहता था. इस के लिए वह 16 अप्रैल को धनबाद में एक प्राइवेट बैंक में पैसे जमा कराने गया. बैंक में पैसे जमा होते ही दीपक के भाई के मोबाइल पर मैसेज आया.

पुलिस ने दीपक और उस के भाई का मोबाइल पहले ही सर्विलांस पर लगा रखा था. मैसेज आते ही पुलिस को दीपक का सुराग मिल गया. जमशेदपुर पुलिस ने धनबाद पुलिस को सूचना दे दी. धनबाद पुलिस बैंक में पहुंची. इसी दौरान दीपक दोबारा बैंक पहुंचा, तो पुलिस ने उसे पकड़ लिया. पुलिस 16-17 अप्रैल की दरम्यानी रात उसे धनबाद से जमशेदपुर ले आई. जमशेदपुर में पुलिस ने दीपक से पूछताछ की तो उस के हथौड़ीमार नर पिशाच बनने की जो कहानी सामने आई, वह इस प्रकार है. पहले दीपक परसुडीह थाना इलाके के गांव सोपोडेरा में मातापिता के साथ रहता था. वहां उन का आलीशान पैतृक मकान था. प्रभु उस का जिगरी दोस्त था साल 2004 में दीपक की शादी वीणा से हो गई.

बाद में 2012 में दीपक की टाटा स्टील में फायरमैन के पद पर नौकरी लग गई. इस के बाद वह जमशेदपुर के कदमा इलाके में रहने लगा. परिवार बढ़ने के साथ जिम्मेदारियां और खर्च भी बढ़ गए थे. एक दिन दीपक ने दोस्त प्रभु से कोई साइड बिजनेस कराने की बात कही. इस पर प्रभु ने उसे ट्रांसपोर्ट का काम करने की सलाह दी. प्रभु ने उसे काम तो बता दिया लेकिन इतना पैसा दीपक के पास नहीं था. इस पर प्रभु ने उस से कहा कि वह सोपोडेरा का अपना पुश्तैनी मकान बेच दे और उस का पैसा ट्रांसपोर्ट में लगा दे, तो अच्छी आमदनी होगी. दीपक को यह बात जंच गई.

दोस्तों ने ही दिया धोखा उस ने अपना मकान 40 लाख रुपए में बेच दिया. इस में से 20 लाख रुपए उस ने अपने भाई मृत्युंजय को दे दिए. बाकी के 20 लाख रुपए दीपक के पास रहे. करीब दो साल पहले प्रभु ने उसे 17 लाख रुपए में एक हाइवा (मालवाहक ट्रक) और एक बुलेट दिलवा दी. यह हाइवा उस ने प्रभु के मार्फत जोजोबेड़ा में चलवा दिया. इस से उसे अच्छी आमदनी होने लगी. पिछले साल कोरोना के कारण लौकडाउन हो जाने से उस की आमदनी कम हो गई. इस बीच, दीपक को पता चला कि प्रभु ने जो ट्रक दिलवाया था, उस पर 5 लाख रुपए रोड टैक्स बकाया है.

परिवहन विभाग का नोटिस आने पर उस ने कर्ज ले कर टैक्स जमा कराया. इस के लिए उस ने टिस्का कोआपरेटिव सोसायटी से साढ़े चार लाख रुपए और अपने पीएफ अकाउंट से डेढ़ लाख रुपए का कर्ज लिया. दीपक की तनख्वाह 34 हजार रुपए महीना थी. सोसायटी से कर्ज लेने के बाद उसे केवल 8 हजार रुपए ही मिलने लगे. ट्रक से भी आमदनी कम हो गई थी. करीब छह महीने पहले प्रभु ने बताया कि उस का भांजा रोशन खुद का और उस का ट्रक पश्चिम बंगाल में खड़गपुर की एक स्टील कंपनी में चलवा रहा है. रोशन पहले से ही उस का दोस्त था.

उस की शादी भी उस ने ही कराई थी. कमाई की उम्मीद में दीपक ने भरोसा कर बिना किसी लिखापढ़ी के अपना ट्रक रोशन को सौंप दिया. रोशन ने दीपक का ट्रक तो कंपनी में लगवा दिया, लेकिन उसे कमाई का हिस्सा नहीं दिया. इस बीच, दीपक लगातार कर्जदार होता गया. दीपक अपनी इस बर्बादी के लिए प्रभु और रोशन को जिम्मेदार मानता था. उस ने उन से बदला लेने की योजना बनाई. दीपक अपने मोबाइल पर वेबसीरीज देखा करता था. पाताल लोक और असुर वेबसीरीज देख कर उस ने उन की हत्या करने का मन बनाया. वह एक वेबसीरीज पाताललोक के कैरेक्टर हथौड़ा त्यागी से काफी प्रभावित था.

इसीलिए उस ने हथौड़े से हत्या करने का फैसला किया. उस ने दोनों दोस्तों को मारने की तो योजना बना ली लेकिन इस बात से परेशान था कि वह पकड़ा गया और जेल चला गया, तो बीवीबच्चों का क्या होगा? काफी सोचविचार के बाद उस ने अपने परिवार को भी खत्म करने का निर्णय लिया. 12 अप्रैल को दीपक सुबह जल्दी उठ गया. देखा कि पत्नी वीणा पानी भर रही थी. वह बिस्तर पर ही बेचैनी से इधरउधर करवटें बदलता रहा. पानी भरने और छोटेमोटे घरेलू काम निपटाने के बाद सुबह करीब 8 बजे वीणा फिर बैड पर लेट गई. दीपक ने उसी दिन अपने परिवार और दोनों दोस्तों का काम तमाम करने का आखिरी फैसला कर लिया.

दीपक ने पहले से ही बैड के पास छिपा कर रखा हथौड़ा निकाला और वीणा के सिर में पीछे से वार कर दिया. वीणा चीखती, इस से पहले ही उस ने तकिए से उस का गला दबा दिया. वीणा की मौत हो गई. इस के बाद दीपक दूसरे कमरे में गया. वहां बैड पर दोनों बेटियां सो रही थीं. दीपक ने एक नजर उन्हें देखा. फिर बेरहमी से पहले बड़ी बेटी के सिर में हथौड़ी से वार कर के उसे मौत के घाट उतारा. फिर इसी तरह छोटी बेटी को भी मौत की नींद सुला दिया. पत्नी और दोनों बेटियों की हत्या के बाद उस ने रोशन को लंच पर आने के लिए फोन किया. इस के बाद दूसरे दोस्त प्रभु को फोन कर शाम 4 बजे जोजोबेड़ा में मिलने की बात कही.

दोनों दोस्तों से बात करने के बाद वह नहाधो कर ससुराल गया और अपने जेवर ले कर ज्वैलर्स के पास पहुंचा. जेवर बेच कर वह वापस घर आया. कुछ देर बाद ही रिंकी घोष उस के बच्चों को पढ़ाने आ गई. रिंकी ने वीणा और बच्चों की लाशें देख लीं, तो दीपक को भेद खुलने का डर हुआ. उस ने उस के भी सिर पर हथौड़ी से हमला कर उसे मार डाला. इस के बाद उस ने उस की लाश से दुष्कर्म किया और शव पलंग के बौक्स में छिपा दिया. रोशन की हत्या की योजना फेल हो जाने पर वह डर गया था. इसलिए अपने क्वार्टर पर ताला लगा कर बुलेट से भाग निकला. उस की प्रभु को मारने की योजना भी अधूरी रह गई.

जल्लाद बने दीपक की सनक में ट्यूशन टीचर रिंकी बेमौत मारी गई. वह जमशेदपुर में कदमा रामजनम नगर की रहने वाली नीलिमा घोष की 3 बेटियों में सब से बड़ी थी और जमशेदपुर वीमंस कालेज में बीए अंतिम वर्ष की छात्रा थी. मंझली बेटी बिपाशा केरला पब्लिक स्कूल में 10वीं और छोटी बेटी विशाखा 5वीं कक्षा में पढ़ती थी. दीपक की बड़ी बेटी श्रावणी बिपाशा की क्लासमेट थी. श्रावणी के कहने पर ही रिंकी 2 साल से दीपक के घर ट्यूशन पढ़ाने जाती थी. दीपक का भाई मृत्युंजय रांची में एसबीआई में ब्रांच मैनेजर था. बाद में वह एक निजी फाइनैंस कंपनी में क्रेडिट इंचार्ज के पद पर काम करने लगा था.

मृत्युंजय अब जमशेदपुर आना चाहता था. इस के लिए उस ने दीपक से कहा भी था. दीपक ने अपने ससुराल वालों को भी यह बात बताई थी. इस घटना से कुछ दिन पहले ही दीपक अपने परिवार के साथ पुरी घूम कर आया था. 11 अप्रैल की रात भी वह परिवार के साथ एक पार्टी में गया था और 10 बजे के बाद लौटा था. दीपक ने अपना परिवार उजाड़ दिया और रिंकी के परिवार की खुशियां छीन लीं. कानून उसे उस के किए की सजा देगा, लेकिन उस के ससुराल वाले और रिंकी के परिवार वाले जीवन भर इस दुख को नहीं भुला पाएंगे. दीपक ने पकड़े जाने पर पुलिस को बताया था कि उस का आत्महत्या करने का प्लान था. इसलिए जेल में अब उस पर कड़ी निगरानी रखी जा रही है. Jharkhand Crime News

 

Crime Story Hindi : ढाई करोड़ की चोरी का रहस्य

crime story hindi : अपने घरेलू नौकर ब्रजमोहन की हत्या पर रेलवे इंजीनियर पुनीत कुमार ने कहा कि चोरों ने उन के यहां से 15-20 लाख रुपए की चोरी कर नौकर को मार डाला. लेकिन केस खुला तो उन के यहां से ढाई करोड़ रुपए नकद व ज्वैलरी चोरी की बात सामने आई. आखिर इतनी रकम पुनीत कुमार के पास कहां से आई?

कुछ इंसानों की फितरत ही धोखे और फरेब की होती है. वह अपने साथ अच्छा करने वालों के साथ भी बुरा करने से नहीं चूकते. ऐसे लोगों को अपनी करनी का फल तो जरूर भुगतना पड़ता है. लेकिन अपनी फितरत से वे दूसरों के लिए भी खतरा बन जाते हैं. फिरोजाबाद का रहने वाला ब्रजमोहन भी इसी तरह का व्यक्ति था. उस ने रेलवे में 5 साल नौकरी की. जिस इंजीनियर पुनीत कुमार के घर पर वह काम करता था, जिन के कहने पर उस की नौकरी स्थाई हुई. उस ने उसी के घर चोरी करने की योजना बना ली. ब्रजमोहन लालची स्वभाव का था. उस ने पुनीत कुमार की मदद करने की नहीं सोची, बल्कि उस की नजर उन के घर में आ रहे रुपयों पर थी.

यह लालच ब्रजमोहन के लिए जानलेवा साबित हुआ. जिन लोगों को उस ने चोरी के लिए बुलाया. वे ही उस की जान के दुश्मन बन बैठे. 26 मार्च, 2021 को लखनऊ के कैंट थानाक्षेत्र के बंदरियाबाग में रहने वाले इंजीनियर पुनीत कुमार के सरकारी आवास पर सरकारी नौकर ब्रजमोहन की हत्या कर दी गई. पुलिस ने घटनास्थल पर पहुंच कर जांच की तो पता चला कि बिजली के तार से पहले उस के गले को कसा गया, बाद में चाकू से रेत दिया गया था. उस के हाथ और पांव बंधे थे. पुनीत के घर का सामान बिखरा हुआ था. पता चला कि पुनीत कुमार के बैडरूम से 15-20 लाख रुपए कैश और कुछ जेवरात गायब थे.

पहली नजर में मामला चोरी के लिए हत्या का लग रहा था. पुनीत ने अपने नौकर की हत्या का मुकदमा कैंट थाने में लिखाया. इंजीनियर का सरकारी आवास लखनऊ के बहुत ही सुरक्षित बंदरियाबाग इलाके में था. इसलिए इस केस को सुलझाना पुलिस के लिए ज्यादा चुनौती भरा काम था. लखनऊ पुलिस कमिश्नर डी.के. ठाकुर ने जौइंट पुलिस कमिश्नर (अपराध) निलब्जा चौधरी की अगुवाई में एक टीम का गठन किया. इस टीम में डीसीपी (पूर्वी) और एडीशनल डीसीपी (पूर्वी) को भी अहम जिम्मेदारी दी गई. इस के साथ ही कैंट थाने की इंसपेक्टर नीलम राणा, एसआई जनीश वर्मा को मामले के परदाफाश की जिम्मेदारी सौंपी गई.

इंजीनियर पुनीत के घर नौकर की हत्या के समय पुनीत के फूफा चंद्रभान घर के दूसरे कमरे में टीवी देख रहे थे. उन को किसी बात का पता नहीं था. ऐसे में पुलिस को लग रहा था कि हो न हो नौकर ब्रजमोहन इस चोरी में हिस्सेदार रहा हो. पुलिस को यह समझ नहीं आ रहा था कि अगर नौकर चोरी में शामिल था तो उस की हत्या क्यों हो गई? इस गुत्थी को सुलझाने के लिए पुलिस ने ब्रजमोहन के मोबाइल नंबर की काल डिटेल्स चैक करनी शुरू की. साथ ही पुलिस ने सीसीटीवी फुटेज भी देखे. पता चला कुछ लोग एक टैक्सी से आए थे. पुलिस ने छानबीन शुरू की. पुनीत कुमार 2008 बैच के भारतीय रेलवे इंजीनियरिंग सर्विस (आईआरएसई) के अधिकारी हैं. उत्तर रेलवे की चारबाग स्थित निर्माण इकाई में उन का दबदबा है.

उन के पास इस समय 800 करोड़ रुपए से अधिक के रेलवे के प्रोजेक्ट्स हैं. पहले वह इसी कार्यालय में अधीक्षण अभियंता थे, बाद में प्रमोशन पा कर यहीं पर उप मुख्य निर्माण अभियंता के रूप में काम करने लगे. नौकर ब्रजमोहन उन के घर के कामकाज देखता था. फिरोजाबाद के कोलामऊ महरौना का रहने वाला ब्रजमोहन करीब 5 साल से पुनीत के यहां काम कर रहा था. एक साल पहले पुनीत ने ही ब्रजमोहन की नौकरी स्थाई की थी. वह पुनीत के ही आवास में बने सर्वेंट क्वार्टर में रहता था. उस का अपने गांव से बराबर संपर्क बना हुआ था. वह अपने साहब के घर रुपयोंपैसों की आवाजाही होते देखा करता था. उसे यह भी पता होता था कि वहां कितना पैसा रखा रहता है. यह पैसा देख कर उस के मन में लालच आ गया.

ब्रजमोहन की डोली नीयत इंजीनियर पुनीत के घर नकद रुपए देख कर नौकर ब्रजमोहन की नीयत डोलने लगी. एक दिन उसने अपने भांजे बहादुर को इस बारे में जानकारी दी और कहा कि यदि उस के मालिक पुनीत के यहां चोरी की जाए तो भारी मात्रा में नकदी के अलावा अन्य कीमती सामान मिल सकता है. बहादुर भी फिरोजाबाद के कोलमाई मटसैना का रहने वाला था. उसे अपने मामा की सलाह अच्छी लगी. लिहाजा बहादुर ने अपने साथ मैनपुरी जिले के भोजपुरा के रहने वाले अजय उर्फ रिंकू, ऊंची कोठी निवासी मंजीत और एक अन्य दोस्त अनिकेत के साथ मिल कर चोरी की योजना तैयार की.

योजना के अनुसार, ये लोग किराए की गाड़ी ले कर 25 मार्च को इंजीनियर पुनीत के घर पहुंच गए. नौकर ब्रजमोहन की मिलीभगत से इन को चोरी के लिए घर में घुसने में कोई दिक्कत नहीं हुई. मंजीत घर के बाहर सीढि़यों पर खड़ा हो कर बाहर से आने वालों की निगरानी करने लगा. ब्रजमोहन, बहादुर और अजय घर के अंदर चले गए. इन लोगों ने जेवर और सारे पैसे एक जगह रख लिए. वहां पर नकदी और ज्वैलरी उम्मीद से ज्यादा मिली तो ब्रजमोहन ने अपने भांजे बहादुर से कहा, ‘‘देखो जितना हम ने बताया था, उस से अधिक पैसा मिल गया है. इसलिए जो ज्यादा पैसा मिला है, इस में कोई बंटवारा नहीं होगा. यह सब मेरा होगा. बाकी तुम सब बांट लेना.’’

‘‘जी मामाजी, जैसा आप कह रहे हो वैसा ही होगा. अब हम लोग जा रहे हैं. आप भी पुलिस को कुछ नहीं बताना,’’ बहादुर बोला.

‘‘हां ठीक है. पुलिस सब से पहले हम पर ही शक करेगी. इस से बचने के लिए तुम लोग मुझे कुरसी से बांध कर बेहोश कर दो. जिस से लगे कि चोरों ने नौकर को बांध कर चोरी की और बेहोश कर के भाग गए.’’ ब्रजमोहन ने सलाह दी. बहादुर और अजय ने ब्रजमोहन को कुरसी से बांध कर बेहोश कर दिया. इस के बाद दोनों जब रुपया रख रहे थे, तभी अजय बोला, ‘‘बहादुर, तू तो जानता है कि तेरे मामा डरपोक किस्म के हैं. कहीं ऐसा न हो कि पुलिस के आगे सब बक दे.’’

‘‘बात तो सही है, पर क्या किया जाए?’’ बहादुर ने कहा.

‘‘समय की मांग है कि हम अपने को बचाने के लिए मामा को ही रास्ते से हटा दें. इस से मामा को पैसा भी नहीं देना होगा और पुलिस हम तक भी नहीं पहुंच पाएगी.’’ अजय ने सलाह दी. दोनों ने मिल कर सब से पहले ब्रजमोहन का गला कस दिया. वह पहले से ही बेहोश था तो कोई विरोध नहीं कर पाया. न ही कोई आवाज हुई. दोनों को लगा कि कहीं वह जिंदा न बच जाए. इसलिए चाकू से उस का गला भी रेत दिया.

ब्रजमोहन को मारने के बाद तीनों वापस मैनपुरी चले गए. मैनपुरी में ये लोग बहादुर के जानने वाले उदयराज की दुकान पर पहुंचे. उदयराज की कपडे़ की दुकान थी. यहां सभी ने अपने कपडे़ बदले. वहीं पर इन लोगों से मोहन नाम का आदमी मिला, जिसे इन लोगों ने सारे रुपए दे दिए. वह रुपए ले कर अपने घर चला गया. इस के बाद चारों मोहन के घर गए और वहां पर रुपयों का बंटवारा हुआ. मंजीत रुपए ले कर अपने घर चला गया. उस ने रुपए अपनी पत्नी निशा को दिए और उसे इस बारे में बताया. निशा ने रुपए गमले और जमीन में दबा दिए, जिस से किसी को पता न चल सके.

पुलिस गंभीरता से केस की जांच में जुटी थी. सीसीटीवी फुटेज में जो टैक्सी दिखी थी, उसी के नंबर के सहारे वह टैक्सी चालक तक पहुंच गई. उस ने पुलिस को पूरी बात बताई. टैक्सी चालक से पूछताछ कर के पुलिस सब से पहले मंजीत के घर पहुंची. पुलिस ने मंजीत के पास से 40 लाख, उस की पत्नी निशा के पास से 16 लाख, उदयराज और मोहन के पास से 7-7 लाख रुपए बरामद किए. कहानी लिखे जाने तक मुख्य आरोपी बहादुर फरार था. पुलिस के लिए चौंकाने वाली बात यह थी कि इंजीनियर पुनीत कुमार ने अपने घर में चोरी के मामले में 15 से 20 लाख नकद और जेवर चोरी होने का जिक्र किया था. जबकि पुलिस आरोपियों के पास से 70 लाख बरामद कर चुकी थी. मुख्य आरोपी के पास अलग से पैसा बरामद होना था.

आरोपियों ने पुलिस को बताया कि उन्हें इंजीनियर पुनीत के यहां करीब ढाई करोड़ रुपए मिले थे. पुलिस इस बारे में छानबीन कर रही है. पुलिस अजय, बहादुर और उस के लंबे बाल वाले साथी को तलाश रही है.  पूरे मामले में जिस पुलिस टीम ने सब से महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाई, उस में इंसपेक्टर नीलम राणा. एसआई अजीत कुमार पांडेय, रजनीश वर्मा, संजीव कुमार, हैडकांस्टेबल संदीप शर्मा, रामनिवास शुक्ला, आनंदमणि सिंह, ब्रजेश बहादुर सिंह, अमित लखेड़ा, विनय कुमार, पूनम पांडेय, सोनिका देवी और चालक घनश्याम यादव प्रमुख थे.

पुलिस ने इंजीनियर पुनीत कुमार के घर ढाई करोड़ रुपयों की चोरी की सूचना रेलवे विभाग और आयकर विभाग को भी दे दी. पुलिस का कहना है कि घर में ढाई करोड़ नकद रखने के मामले की जांच होगी. इस बात का अंदेशा है कि यह रकम रिश्वत की रही होगी. इसीलिए हत्या की रिपोर्ट लिखाते समय इंजीनियर पुनीत कुमार ने चोरी की रकम को कम कर के लिखाया था. शुरुआत में पुनीत कुमार ने कहा था कि 15 से 20 लाख की चोरी हुई है. पुलिस ने जब चोरों से 70 लाख नकद बरामद कर लिया तो पता चला कि कुल रकम ढाई करोड़ थी.

ब्रजमोहन को भी यही पता था कि चोरी की बात पूरी तरह से पुलिस को बताई नहीं जाएगी. ऐसे में यह लोग पुलिस के घेरे में नहीं आएंगे. लेकिन ब्रजमोहन से भी ज्यादा लालची उस के साथी निकले जिन्होंने ब्रजमोहन की हत्या कर दी. हत्या की विवेचना में चोरी दब नहीं सकी और अपराध करने वाले पकडे़ गए. crime story hindi