UP Crime News : बहन के प्यार का साइड इफेक्ट

UP Crime News : गगन उर्फ गौतम नहीं चाहता था कि उस की सौतेली बहन नंदिनी मोहल्ले के दूसरी बिरादरी के युवक से प्यार करे. लेकिन नंदिनी भी जिद्दी थी. अपनी जिद पूरी करने के लिए उस ने भाई गगन की पूर्व प्रेमिका ममता के साथ मिल कर भाई के खिलाफ ऐसी खूनी साजिश रची कि…

घर में सभी लोगों की लाडली नंदिनी की शादी को ले कर उस के पिता ओमप्रकाश चिंतित रहते थे. उस की शादी की उम्र हो चुकी थी. वह जितनी चंचल, उतनी ही हिम्मती और बातबात पर अड़ जाने वाली थी. जिद्दी इतनी कि एक बार जो मन में ठान लिया, उसे पूरा कर के ही छोड़ती थी. मुरादाबाद की एक एक्सपोर्ट कंपनी में काम करने वाले ओमप्रकाश के खातेपीते सुखीसंपन्न परिवार में पत्नी ओमवती के अलावा बेटी नंदिनी और बेटा गगन था.

मुरादाबाद की लालबाग रामगंगा कालोनी में रहने वाले इस परिवार के सभी सदस्य सौतेलेपन की कुंठा से ग्रसित थे. वहीं सौतेलापन नंदिनी को भी भीतर ही भीतर कुछ ज्यादा ही कुरेदता रहता था. उस की बड़ी बहन पूजा की शादी हो चुकी थी. वह अपने घर में खुश थी, लेकिन नंदिनी को पड़ोस में रहने वाले प्रदीप नाम के युवक से प्यार हो गया. लेकिन वह उस की बिरादरी का नहीं था. इस के अलावा वह बेरोजगार भी था. इसी बात को ले कर गगन उस के प्रेम में रोड़ा बन बैठा था. नंदिनी गगन की भले ही सौतेली बहन थी, लेकिन वह नहीं चाहता था कि नंदिनी प्रदीप से प्यार करे. गगन अपने मातापिता को इस बारे में उकसाता भी रहता था. पिता भी गगन का ही पक्ष लेते थे. सौतेली मां कलावती का निधन भी बीते साल कैंसर से हो चुका था.

घर में नंदिनी की एकमात्र हमदर्द गगन की पत्नी राधा बन सकती थी, लेकिन उस की घर में जरा भी नहीं चलती थी. गगन नंदिनी के साथसाथ उसे भी काफी डांटडपट कर रखता था. कई बार इस वजह से नंदिनी काफी दुखी हो जाती थी और गगन के विरोधी तेवर को अपने दिल पर लेती हुई बिफर भी पड़ती थी. उस के मुंह से निकल पड़ता था, ‘‘गगन उस का दुश्मन है, क्योंकि वह सौतेला भाई जो है, अपना होता तो…’’

अब नंदिनी को यह समझ नहीं आ रहा था कि वह अपने दिल की बात कहे तो किस से? अपनी समस्या का समाधान निकाले भी तो किस की मदद ले? यही सोच कर वह हमेशा तनाव में रहती थी. प्रेमी प्रदीप के साथ वह ज्यादा समय तक मिलबैठ भी नहीं सकती थी. क्योंकि गगन उस पर हमेशा पहरेदार की तरह तना रहता था. हर बात में मिर्चमसाला लगा कर पिता को बताता था और घर में बात का बतंगड़ बना डालता था. और तो और, उस के प्रेमी को नाकारा निकम्मा कहता हुआ घर में सभी के सामने उसे काफी जलील करता था. इस बात को ले कर नंदिनी परेशान रहने लगी थी. उस के मन में तरहतरह के खयाल आतेजाते रहते थे.

अपनी समस्याओं को ले कर उधेड़बुन में एक बार नंदिनी बाजार से गुजर रही थी. तभी अचानक उस की मुलाकात ममता से हो गई. उसी ने टोका, ‘‘अरे नंदिनी तुम! काफी परेशान दिख रही हो? क्या बात है?’’

‘‘अरे ममता! तुम तो पहचानने में ही नहीं आ रही हो. तुम्हारी शादी होने वाली है क्या? बहुत दिनों बाद मिली… कैसी हो तुम?’’ नंदिनी ने चौंकते हुए उसी की तरह एक साथ कई सवाल दाग दिए.

‘‘मैं तो बस अपने दिल को बहला रही हूं. खुद को दिलासा दे रही हूं. तुम्हारे भाई ने जब से मुझे धोखा दिया है, उस के बाद समझो आज ही मूड फ्रैश करने के लिए थोड़ा बनठन कर निकली हूं… अच्छी लग रही हूं न?’’ ममता ने भी नंदिनी के अंदाज में जवाब दिया.

‘‘बहुत ही अच्छी, ग्लैमरस. तुम्हारी सुंदरता का कोई जवाब नहीं. तुम कुछ भी पहन लो हीरोइन दिखती हो…’’ नंदिनी बोली.

‘‘बसबस, किसी की अधिक तारीफ नहीं करते. उस से उस की मुराद पूरी होने में अड़चन आ जाती है.’’ ममता बोली.

‘‘तुम्हारी मुराद क्या है?’’ नंदिनी तपाक से पूछ बैठी.

‘‘बदला,’’ नंदिनी के लहजे में ममता बोली.

‘‘एेंऽऽ बदला… यह कोई मुराद हुई? मगर किस से?’’ चौंकती हुई नंदिनी ने पूछा.

‘‘तुम्हारे उसी भाई से, जो मेरी जिंदगी उजाड़ कर तुम्हारी जिंदगी भी बरबाद करने पर तुला है.’’ ममता गुस्से में बोली.

‘‘कह तो तुम बिलकुल सही रही हो, मगर क्या कर सकती हूं, समझ नहीं पा रही हूं.’’ नंदिनी ने कहा.

वह मायूसी के साथ आगे कहने लगी, ‘‘गगन सौतेला भाई है न, इसलिए अपना सौतेलापन खुल कर दिखा रहा है. प्रदीप को मेरा और पूरे परिवार का दुश्मन बताता है. पापा को उस के खिलाफ काफी भड़का दिया है. पापा से बोलता है कि उन की जायदाद पर प्रदीप की नजर है. तुम तो जानती हो उसे, वह ऐसा बिलकुल ही नहीं है. वह मुझे बहुत प्यार करता है. मैं भी उसे बहुत चाहती हूं.’’

‘‘देखो, नंदिनी तुम्हारे चाहने और नहीं चाहने से क्या होता है. गगन कभी नहीं चाहता है कि तुम्हारी प्रदीप के साथ शादी हो. इस के पीछे छिपा हुआ उस का मकसद समझो. वह जानता है कि तुम्हारी प्रदीप से शादी होने पर तुम इसी मोहल्ले में रहने लगोगी… और फिर अपने पिता की संपत्ति पर हक जताने लगोगी. इसलिए वह तुम्हारी शादी कहीं दूर करवाना चाहता है.’’ ममता ने समझाया.

इसी के साथ उस ने यह भी कह दिया कि उन दोनों का एक ही दुश्मन है गगन. गगन की प्रेमिका थी ममता यह बात नंदिनी के दिमाग में घर कर गई. उस वक्त तो ममता और नंदिनी अपनीअपनी उलझनों का बोझ एकदूसरे पर उतार कर विदा हो लिए, लेकन दोनों के दिमाग में गगन के विरोध की ज्वाला धधकने लगी. ऐसा होना भी स्वाभाविक था. नंदिनी को गगन हमेशा कहता रहता था कि प्रदीप उस का हितैषी नहीं दुश्मन है, वह उस के साथ प्रेम का नाटक कर रहा है और उस की मंशा जमीनजायदाद हथियाने की है. एक समय में लालबाग रामगंगा कालोनी निवासी रमेश कुमार की बेटी ममता गगन की प्रेमिका हुआ करती थी. गगन उस पर जान छिड़कता था. गगन भी ममता से बेइंतहा मोहब्बत करता था. उस का दीवाना था.

वह बेहद सुंदर और मांसलता के दैहिक आकर्षण से भरी हुई थी, अपनी खूबसूरती को आधुनिक पहनावे और स्टाइल से और भी ग्लैमर बना देती थी. बौडी लैंग्वेज से ले कर बोलचाल तक से किसी को भी पलक झपकते ही अपनी ओर आकर्षित कर लेती थी. उस के स्वच्छंद विचार और आधुनिक पहनावे से निखरे रूपरंग का कई लोग गलत अर्थ भी निकालते थे. दबी जुबान में उसे बदचलन तक कह देते थे. ऐसी धारणा रखने वालों में गगन के पिता ओमप्रकाश भी थे. उन्होंने ममता को ले कर गगन को एक बार खूब डांटा था. उस से दूर रहने की चेतावनी दी. यहां तक कि उन्होंने भी उसे बदचलन करार दे दिया था. दुर्भाग्य से 2018 में गगन की मां कलावती का कैंसर से निधन हो गया.

करीब 25 साल पहले ही ओमप्रकाश ने अमरोहा निवासी विवाहिता कलावती से दूसरा विवाह तब किया था, जब उन की पहली पत्नी का आकस्मिक निधन हो गया था. विवाह के वक्त कलावती की गोद में 3 साल का गगन भी था. नंदिनी का बचपन उसी सौतेले भाई के साथ गुजरा, जो अब 28 साल का हो चुका था. ओमप्रकाश की पहली पत्नी से उन के 2 बच्चे पूजा और नंदिनी थी. वे पूजा की शादी कर चुके थे और नंदिनी की शादी के प्रयास में थे. कलावती के निधन के बाद ओमप्रकाश घर को संभालने के लिए गगन की शादी की योजना बनाने लगे थे. इसी सिलसिले में ममता के साथ उस के प्रेम संबंध का मामला सामने आ गया था. उन्होंने ममता से शादी करना सिरे से मना कर दिया था.

इस पर गगन न तो पिता का विरोध कर पाया, और न ही ममता की भावनाओं की कद्र. और फिर गगन की शादी 6 जुलाई 2018 को मुरादाबाद में ही बलदेवपुरी थाना कटघर निवासी कुंदन कुमार की बेटी राधा से हो गई. गगन का राधा के साथ शादी होना ममता को अच्छा नहीं लगा. वह खुल कर विरोध नहीं कर पाई, लेकिन भीतर ही भीतर नफरत की आग में जल उठी. इस का जिक्र उस ने कई बार अपने दूसरे दोस्तों से भी किया, वह अकसर महीने-2 महीने के लिए दूसरे शहर चली जाया करती थी और लोगों को कभी बरेली तो कभी लखनऊ में नौकरी लगने की बातें बताती रहती थी.

यहां तक कि वह अपने मातापिता से अलग किराए का कमरा ले कर रहने लगी थी. वह जिगर कालोनी में स्थित एक्सपोर्ट फर्म में काम करती थी. वह प्रदीप को भी ताने मारती थी, जो उस के दूर का रिश्तेदार था. ममता ने प्रदीप को एक बार तो साफसाफ कह दिया था कि जब तक गगन रहेगा तब तक उस की नंदिनी से शादी नहीं हो पाएगी.

यही बात वह नंदिनी को भी ताना देते हुए अकसर कहती थी कि गगन उसे उस के प्रेमी प्रदीप से कभी मिलने नहीं देगा. गगन भले ही उस का सौतेला भाई है, लेकिन उस की पिता की संपत्ति का वारिस वही बनेगा. उस दिन बाजार में ममता ने नंदिनी को एक बार फिर उस के हरे जख्म को कुरेद दिया था. ममता से बात कर के नंदिनी विचलित हो गई थी. गगन चाहता था कि उस की बहन की शादी किसी रोजगारशुदा व्यक्ति से ही हो. इस में उसे सौतेले पिता का भी समर्थन मिला हुआ था. नंदिनी के पिता हमेशा गगन का पक्ष ले कर नंदिनी को समझाते थे कि प्रदीप न तो बिरादरी का है, और न ही बराबरी का. जबकि इस की नंदिनी के कानों पर जूं तक नहीं रेंगती थी. वह मस्ती में रहती हुई अपनी जिद पर अड़ी थी.

कबाड़ी का कारोबार करने वाले गगन का यही सोचना था कि प्रदीप की निगाह उस के पिता की प्रौपर्टी पर टिकी है. ओमप्रकाश एक्सपोर्ट फर्म में काम करते थे. उन के लाड़प्यार में पली नंदिनी ही घर की देखभाल और खर्च की पूरी जिम्मेदारी संभाले हुई थी. बाजार और बैंक आदि का हिसाबकिताब नंदिनी के जिम्मे था. फिर भी घर में गगन की ही मनमानी चलती थी. वह पत्नी राधा को इस से दूर रखता था. नंदिनी नहीं चाहती थी कि उस की शादी किसी दूसरे शहर में हो. वह हमेशा पिता के मकान में ही रहना चाहती थी. प्रदीप को ले कर गगन के साथ नंदिनी का हमेशा झगड़ा होता रहता था.

बात जून 2021 की है. जब एक दिन नंदिनी के साथ गगन का झगड़ा काफी बढ़ गया था. इस कारण गगन अपनी ससुराल जा कर रहने लगा था. तब उस की पत्नी राधा भी अपने मायके में ही थी. एक तरफ नंदिनी थी, और दूसरी तरफ ममता. दोनों के दिल में गगन को ले कर विरोध की सुलगती चिंगारी जबतब भड़क उठती थी. नंदिनी अपने प्रेमी से शादी में आई बाधा को ले कर परेशान थी तो ममता को गगन से शादी नहीं हो पाने का मलाल था. कारण ममता ने गगन के साथ कई साल साथ गुजारे थे और विवाह होने के कसमेवादे किए थे. उन पलों को याद करके हुए ममता भावुक हो जाती थी. ममता ने प्रण कर लिया था कि वह गगन को जरूर सबक सिखाएगी. ममता को बस समय का इंतजार था.

नंदिनी से मिलने के बाद ममता ने अपने दिल की भड़ास निकाल दी थी. तभी ममता को मालूम हुआ था कि गगन 2 महीने से अपनी ससुराल बलदेवपुरी में रह रहा है. नंदिनी से मुलाकात से कुछ दिन पहले ही ममता की मुलाकात प्रदीप से भी हुई थी. उस ने नंदिनी की परेशानी के बारे में उसे जानकारी दे दी थी. उस ने भी बदले की आग में जलती ममता और नंदिनी की पीड़ा गहराई से महसूस की. जल्द ही तीनों ने गगन को लक्ष्य बना कर एक मीटिंग की. विशेषकर नंदिनी और ममता ने प्रदीप को अपनी योजना में शामिल कर लिया.

योजना के मुताबिक प्रदीप ने अपने एक दोस्त वीरू उर्फ हरीश को भी साथ ले लिया. वीरू मुरादाबाद में थाना मझोला के गांव जयंतीपुर का रहने वाला एक बदमाश किस्म का युवक था. तीनों ने वीरू से गगन को ठिकाने लगाने की बात कही. उन्होंने बदले में उसे 50 हजार रुपए दिए. दरअसल, नंदिनी और ममता ने मिल कर प्रदीप के माध्यम से गगन को रास्ते से हमेशा के लिए हटाने की योजना बनाई थी.

योजना के अनुसार नंदिनी ने ममता को गगन का मोबाइल नंबर दिया. ममता ने अपने पूर्व प्रेमी गगन को काल की, ‘‘हैलो गगन.’’

‘‘हां, कौन?’’ गगन ने पूछा

‘‘अरे मुझे पहचाना नहीं, मैं तुम्हारी ममता बोल रही हूं.’’

ममता ने उलझाया मीठी बातों में गगन अचानक ममता की आवाज सुन कर एकदम से भौचक्का रह गया. भले ही ममता से उस की शादी नहीं हुई थी, किंतु उस के दिल में ममता अभी भी बसी हुई थी. न चाहते हुए भी अचरज से बोला, ‘‘चलो, तुम्हें मेरी याद तो आई.’’

‘‘मुझ से मिलोगे नहीं? तुम्हें तो पता ही होगा कि अब मेरा घर वालों से कोई वास्ता नहीं रहा. मैं बंगला गांव में रह रही हूं किराए पर. पास ही जिगर कालोनी में जौब करती हूं, फोन में तुम्हारा नंबर अचानक दिख गया तो तुम्हारी याद आ गई. फिर मैं ने फोन कर लिया.’’ ममता बोली.

गगन अभी कुछ बोलता इस से पहले ही ममता बोली, ‘‘मैं हर्बल पार्क घूमने आई थी. पार्क की सुंदरता देख कर तुम्हारे साथ यहां गुजारे पुराने दिन याद आ गए. आ जाओ यहीं पार्क के रेस्तरां में एक बार फिर मिलते हैं. साथ बैठते हैं…’’

बीते दिनों की कई पुरानी बातें बता कर ममता ने गगन को काफी भावुक कर दिया था. वह ममता की बातें सुन कर पुराने दिनों के हसीन लम्हों में खो गया. ममता गगन का पहला प्यार थी. गगन को ममता के साथ बिताए पल अचानक झिलमिलाने लगे थे. वह ममता से बोला,‘‘तुम बुलाओ और हम न आएं, ऐसा नहीं हो सकता.’’

थोड़ी देर में ही गगन हर्बल पार्क पहुंच गया. ममता जींस टौप पहने बेसब्री से उस का इंतजार कर रही थी. गगन ने आते ही ममता को बाहों में भर लिया. ममता उस से छूटते ही बोली, ‘‘तुम अभी भी वही पुराने वाले गगन, जरा भी नहीं बदले…लेकिन अब तुम शादीशुदा हो आगे से ध्यान रखना हां. …अच्छा चलो पार्क के बाहर झाडि़यों की ओर चलते हैं. वहीं बैठ कर कुछ बातें करेंगे, आराम से.’’

गगन को झाडि़यों में ले गई ममता गगन ने महसूस किया कि ममता में कोई बदलाव नहीं आया है, वही पहले की तरह चंचल अदाएं, कसक और अपनापन….

‘‘ थोड़ा रुको यार, बहुत दिनों बाद मिले हो तुम्हारे लिए कोल्ड ड्रिंक्स और नमकीन लाती हूं. वहीं पार्क में बैठ कर साथसाथ पीएंगे.’’

ममता के बोलने पर गगन बोला, ‘‘हांहां क्यों नहीं.’’

‘‘ बस मैं कैंटीन गई और अभी आई.’’ बोलती हुई ममता कैंटीन की ओर जाने लगी.

तभी गगन हाथ खींचते हुआ बोला, ‘‘यह काम तुम्हारा नहीं मेरा है.’’

‘‘देखो मैं ने तुम्हें बुलाया है. समझो कि आज तुम हमारे मेहमान हो.’’ ममता कहती हुई गगन से हाथ छुड़ा कर तेजी से कैंटीन की ओर दौड़ी चली गई. गगन उसे देखता रह गया.

ममता यह सब योजना के मुताबिक कर रही थी. ममता की जिद के आगे गगन कुछ नहीं कर पाया. वह केवल ममता के साथ गुजारे पुराने लम्हों को ही याद करता रह गया.

‘‘ आओ चलें…’’ ममता बोली.

गगन एक बार फिर सपनों की दुनिया से बाहर आया. ममता के हाथ से कोल्ड ड्रिंक अपने हाथ में ले ली. ममता डिसपोजल गिलास और नमकीन का पैकेट संभालती हुई झाडि़यों की ओर बढ़ गई. कुछ पल में ही दोनों पार्क के मुख्य मार्ग से नजर नहीं आने वाली झाडि़यों के पीछे थे. गगन टायलेट का इशारा करते हुए उस ओर चला गया. ममता के लिए इस से अच्छा मौका और क्या हो सकता था. उस ने तुरंत दोनों डिसपोजल गिलास निकाले. उन में दोतिहाई कोल्ड ड्रिंक भरा और अपने साथ लाई नशीले पदार्थ की पुडि़या एक गिलास में डाल दी. गगन के आते ही उस ने अपने बाएं हाथ का गिलास उस की ओर बढ़ा दिया.

‘‘नहींनहीं, इस हाथ से नहीं दाएं हाथ वाला दो. तुम्हारी बाएं हाथ से किसी को सामन देने की आदत अभी तक गई नहीं है.’’ गगन बोला.

‘‘क्या करूं गगन, मेरा दायां हाथ चलता ही नहीं है. तुम्हारे साथ शादी हो जाती तब  शायद यह आदत छूट जाती. अच्छा लो इसे पकड़ो.’’ कहती हुई ममता ने अपने दाएं हाथ का कोल्ड ड्रिंक भरा गिलास आगे कर दिया. गगन ने गिलास हाथ में ले लिया. उस से एक घूंट पीने के बाद ममता मंदमंद मुसकराई. उस की मुसकान में कुटिलता छिपी थी, कारण वह अपनी योजना में कामयाब हो रही थी. नशीला पदार्थ मिला कोल्ड ड्रिंक का गिलास गगन के हाथ में था और वह नमकीन के साथसाथ घूंटघूंट कर चुस्की लेने लगा था.

कुछ समय में ही गगन बोला. ‘‘ममता… म… ममता,  मुझे तुम्हारा चेहरा साफ क्यों नहीं दिख रहा.’’ गगन की आवाज में लड़खड़ाहट थी. ममता समझ गई कि उस पर नशा हावी हो रहा है. ममता ने प्रेम भरी हमदर्दी दर्शाते हुए उस का सिर अपनी गोद में ले लिया. उस के बालों में अंगुलियां घुमाने लगी. कुछ पल में ही गगन पूरी तरह से बेहोश हो चुका था. ममता ने तुरंत थोड़ी दूर दूसरी झाड़ी के पीछे छिपे वीरू को इशारा किया. इशारा पाते ही ताक में बैठा वीरू ममता के पास आ गया. ममता वहां से उठती हुई बोली, ‘‘शिकार को संभालो, मैं ने अपना काम कर दिया, आगे का काम तुम्हारा.’’

उस के बाद नंदिनी और प्रदीप को भी इस की जानकारी दे दी कि उस का काम पूरा हो चुका है. हालांकि तब तक गगन के मुंह से केवल एक ही बड़बड़ाने की आवाज निकल रही थी, ‘‘ममता क्या हुआ है मुझे…’’

‘‘कुछ नहीं तुम्हें थोड़ा चक्कर आ गया है, अभी तुम्हें डाक्टर के यहां ले जाने का इंतजाम करवाती हूं.’’ ममता बोली. ममता उसे सहारा देते हुए वीरू के साथ उस की मोटरसाइकिल तक ले गई. वहां प्रदीप पहले से मौजूद था.

गगन को प्रदीप और वीरू ने पकड़ कर मोटरसाइकिल पर बिठा दिया. वीरू मोटरसाइकिल चलाने के लिए बैठ गया, जबकि प्रदीप गगन को गिरने से थामे हुए था. वीरू और प्रदीप गगन को जयंतीपुर ले गए. वहां एक खाली प्लौट में उन दोनों ने गगन को जबरदस्ती शराब पिलाई. फिर गगन के गले में पड़े गमछे से गला घोंट कर उस की हत्या कर दी. इस के बाद उन्होंने उस के पैर गमछे से बांध दिए. फिर वीरू जयंतीपुर स्थित अपने घर से एक कंबल ले आया. उस कंबल में उन्होंने गगन की लाश लपेट दी. कंबल में उन्होंने कुछ ईंटें भी रख दी थीं. वह लाश को पास में बह रहे गहरे नाले में डुबोना चाहते थे, इसलिए 2 कट्टों में उन्होंने ईंटें भर कर वे कट्टे कंबल से बांधने के बाद लाश नाले में डाल दी. ईंटों की वजह से लाश नाले में डूब गई. यह बात 13 जुलाई, 2021 की है.

लाश ठिकाने लगाने के बाद वीरू ने रात करीब 10 बजे नंदिनी को फोन कर के गगन की लाश ठिकाने लगाने की जानकारी दी. उस समय गगन की पत्नी राधा तो अपने मायके गई हुई थी. पहली अगस्त को वह अपनी ससुराल  गई. उसे अपने मायके में होने वाले एक कार्यक्रम का निमंत्रण देना था. वहां पति नहीं दिखा तो राधा ने नंदिनी से पूछा. नंदिनी ने उसे बताया कि जब से गगन तुम्हारे घर पर रह रहा था. तब से यहां आया ही नहीं है. राधा ने पति को फोन मिलाया तो उस का फोन भी बंद मिला. उस ने सभी रिश्तेदारियों में फोन कर के पति के बारे में पूछा. लेकिन पता चला कि गगन किसी रिश्तेदारी में गया ही नहीं था.

जब कहीं से जानकारी नहीं मिली तो नंदिनी भी राधा के साथ गगन को ढूंढने का नाटक करती रही. जब गगन कहीं नहीं मिला तो पिता ओमप्रकाश ने मुरादाबाद शहर के थाना मुगलपुरा में गगन की गुमशुदगी दर्ज करा दी. थानाप्रभारी अमित कुमार ने गगन के लापता होने की सूचना उच्चाधिकारियों को भी दे दी. मुरादाबाद का मुसलिम बाहुल्य लालबाग क्षेत्र बहुत संवेदनशील है. क्षेत्र में लापता युवक को ले कर वहां अशांति न हो जाए, इसलिए एसएसपी पवन कुमार ने एएसपी अनिल यादव के नेतृत्व में एक पुलिस टीम बनाई. टीम में मुगलपुरा के थानाप्रभारी अमित कुमार, एसआई नितेश सहरावत, ताजवर सिंह, जगजीत सिंह, राजवंदर कौर, कांस्टेबल संगम कसाना, नीरज कुमार, समीर आदि को शामिल किया.

टीम अपने स्तर से केस की छानबीन में जुट गई. इस के अलावा लालबाग क्षेत्र में भारी मात्रा में पुलिस फोर्स भी तैयार कर दी. पुलिस टीम ने सब से पहले गगन के घर वालों से पूछताछ करने के बाद गगन के फोन की काल डिटेल्स निकलवाई. काल डिटेल्स से पता चला कि 13 जुलाई को शाम 5 बजे गगन की एक फोन नंबर पर बात हुई थी. जांच में वह नंबर बंगला गांव मोहल्ले की रहने वाली ममता का निकला. पुलिस ममता के घर पहुंची तो उस का कमरा बंद मिला. पुलिस को पता चला कि ममता जिगर कालोनी स्थित एक एक्सपोर्ट फर्म में नौकरी करती है. पुलिस उस फर्म में पहुंची तो ममता वहां मिल गई. पूछताछ के लिए पुलिस उसे मुगलपुरा थाने ले आई.

पुलिस ने ममता से पूछताछ की तो वह खुद को बेकुसूर बताती रही. उस ने कहा कि गगन से उस के प्रेम संबंध जरूर थे लेकिन जब से गगन की शादी हुई है, वह संबंध खत्म हो गए.

‘‘जब तुम्हारे संबंध खत्म हो गए तो तुम ने 1 जुलाई को गगन को फोन क्यों किया?’’ थानाप्रभारी अमित कुमार ने उस से पूछा.

‘‘सर, उस का नंबर मेरे फोन में सेव था, जो गलती से लग गया.’’ ममता ने बताया.

थानाप्रभारी को लग रहा था कि ममता कुछ छिपा रही है, इसलिए उन्होंने पास में बैठी एसआई राजवेंदर कौर को इशारा किया. राजवेंदर कौन ने ममता से पूछताछ करते हुए एक थप्पड़ उस के गाल पर जड़ा. थप्पड़ लगते ही ममता हाथ जोड़ते हुए बोली, ‘‘मुझे मत मारो, मैं सब कुछ बताती हूं.’’

इस के बाद ममता ने गगन से उस का प्यार होने से ले कर अब तक की सारी कहानी बताते हुए कहा कि गगन ने उस की सारी जिंदगी खराब कर दी. उसी का बदला लेने के लिए उस की सौतेली बहन नंदिनी और दीपक के साथ मिल कर उस की हत्या करनी पड़ी. उस ने बताया कि दीपक उस का रिश्तेदार है. अब पुलिस को लाश बरामद करनी थी लिहाजा पुलिस ने 5 घंटे तक गगन की लाश नाले में तलाश कराई, लेकिन लाश बरामद नहीं हो सकी. इसी दौरान पुलिस ने हरीश उर्फ वीरू को उस के घर से गिरफ्तार कर लिया.

वीरू ने बताया कि उस की लाश के साथ ईंटें बंधी थीं. उस की निशानदेही पर पुलिस ने 3 अगस्त, 2021 को नाले से गगन की सड़ीगली लाश बरामद कर ली. उधर पुलिस ने नंदिनी और प्रदीप को तलाशा तो दोनों फरार मिले. उन के फोन की लोकेशन के आधार पर पुलिस ने उन्हें नोएडा से गिरफ्तार कर लिया. उन्होंने बताया कि उन्होंने 3 अगस्त को ही नोएडा के मंदिर में शादी कर ली थी. उन से भी पूछताछ की गई तो उन्होंने भी अपना जुर्म कुबूल कर लिया. पुलिस ने हत्यारोपी हरीश उर्फ वीरू, प्रदीप, नंदिनी और ममता को गिरफ्तार कर मुरादाबाद की कोर्ट में पेश किया, जहां से उन्हें जिला जेल भेज दिया गया. मामले की जांच थानाप्रभारी अमित कुमार कर रहे थे. UP Crime News

—कथा पुलिस सूत्रों पर आधारित

 

Bihar Crime : पत्नी पर बेवजह शक करना ठीक नहीं

Bihar Crime : समस्तीपुर से दुबई काम करने गए उदय कुमार राय को जब पत्नी रीना राय के अवैध संबंधों की खबर मिली तो वह दुबई से घर लौट आया. फिर वह मन में बैठ चुके शक को ले कर पत्नी से रोजाना झगडऩे लगा. इसी शक के चलते घर में ऐसा खून बहा कि…

बिहार के समस्तीपुर जिले की तहसील ताजपुर के हरिपुर भिंडी गांव का रहने वाला उदय कुमार राय काम करने के लिए दुबई गया हुआ था. इसी साल वह फरवरी में होली से पहले गांव आ गया था. उस के आने से परिवार में खुशी का माहौल बना हुआ था. बच्चे खुश थे. उदय की मम्मी भी खुश थीं. पापा का निधन हो चुका था. विधवा मम्मी उस के आते ही बोलीं, ”बेटा, अब दुबई मत जाना, यहीं गांव में कुछ कामधंधा कर लो. उसी से परिवार का गुजारा हो जाएगा. ’ ’

”ठीकी कह हीं माई…अब हम एहिजे रह के कुछ करबै! ’ ’ उदय ने भी मम्मी की हां में हां मिला दी. उस वक्त उस की पत्नी रीना भी वहीं थी. वह तुरंत आंचल को दांतों तले दबाती हुई ‘हुंह! ’ कह कर से चली गई.

”हम्मे कुछ गलत कहलिया, जे तू मुंह चमका के चल गेलहू! हियां के खेतपथार कौन देखतय…अब हमरा ताकत है…बाबूजी जिंदा रहथुन हल तब कोनो बात नय हलै! उन कर पीछे में उदइये ने हय देखेभाले वाला. गोतिया खेत पर नजर लगैले है, से अलगे समस्या है. ’ ’

पत्नी के मुंह बिदका कर अचानक चले जाने पर उदय को भी बुरा लगा था. वह उस के चेहरे के भाव को देख कर उस के दिलोदिमाग में क्या है, समझने की कोशिश करने लगा था. मम्मी से बातें करते वक्त वह पत्नी को घूरता हुआ ऐसे देख रहा था, जैसे उस के मन में छिपी बात को जानना चाहता हो. शाम हुई. सालों बाद पूरे परिवार ने एक साथ बैठ कर खाना खाया. बच्चों के चेहरे खिले हुए थे. उस रोज कुछ खास पकवान खीर भी पकाई थी. खाना खाते वक्त अपने बच्चों को पुचकारते वक्त भी उस की नजर पत्नी के चेहरे पर ही जमी हुई थी. उस ने महसूस किया कि पत्नी के चेहरे पर खुशी की वह चमक नहीं है, जो उस के आने पर होनी चाहिए थी.

दरअसल, उदय के मन में भी शंका का कीड़ा कुलबुला रहा था. जब तक उसे खत्म नहीं कर लेता, तब तक उस के मन को चैन नहीं मिलने वाला था.

रात हुई. लंबे अरसे बाद वह देर रात को पत्नी के साथ बिस्तर पर था. रीना उसे परे धकेलती हुई बोली, ”दारू पी कर आए हो? ’ ’

”अरे का बताएं…विनोदवा जबरदस्ती पिला दिया. ’ ’

”दुन्हो जेल जैबा…हिंया दारू बंद है… जानत हो न कि..? ’ ’ रीना बोली.

”कोय पुलिस में बतयते तबे न! ’ ’ उदय बोला.

”हम्हीं बता देवो तब? ’ ’ मुसकराती हुई रीना बोली.

”सुबह से अब तुम्हारे चेहरे पर मुसकान दिखी है! ’ ’ चहकता हुआ उदय बोला और उसे अपनी ओर खींचने लगा.

”चलो हटो, दारूबाज से कोई समझौता नहीं! ’ ’ रीना तीखेपन के साथ बोली और वहां से बच्चों के कमरे में चली गई.

उस के जाने के बाद उदय कशमकश में आ गया. दारू का नशा कमजोर पडऩे लगा था. जब तक उस के दिमाग में कई बातें अचानक घूम गई थीं. वे बातें जो विनोद ने दारू पीते वक्त बताई थीं… और वे बातें भी जो उस के दुबई में रहते हुए उसी ने फोन पर बताई थीं… उन के तार रीना के पूरे दिन उस के साथ किए गए बरताव के साथ जोडऩे लगा… बुदबुदाया, ”…तो इस के सच का पता लगाना ही होगा? ’ ’

कब उसे नींद आ गई, इस का उसे पता ही नहीं चला. उस की नींद तब खुली, जब खिड़की से आने वाली सूरज की रोशनी उस की आंखों पर पड़ी. बच्चों ने उसे झकझोरते हुए उठाया था. उस के कानों में विनोद की भी आवाज सुनाई दी, ”का रे उदयवा…खेत पर चले के ना हव का! ’ ’

”हांहां, जाय के है कि…चल न कोय काम दिला दीहे. ’ ’

इस तरह दुबई से आने के बाद उदय की नई दिनचर्या शुरू हो गई थी. उस का हमउम्र चचेरा भाई विनोद दोस्त की तरह जो मिल गया था.

दोनों के बीच खुल कर बातें होती थीं. शराब की ललक दोनों को बनी रहती थी. ब्लैक में ही सही, लेकिन इस का इंतजाम विनोद करता था, लेकिन जेब ढीली उदय की होती थी. वह दुबई से कमा कर लाए पैसे दारू पर उड़ाने लगा था. आए दिन शराब पी कर ही घर आता था. इस पर उस की पत्नी रीना के साथ हमेशा तकरार होने लगी थी. रीना उदय को शराब पीने से रोकती थी, जबकि वह पत्नी की बात को अनसुनी कर देता था. रीना उस पर शराब में पैसे उड़ाने का आरोप लगा कर खूब खरीखोटी भी सुनाने लगी थी.

उस दिन 21 अगस्त की रात को तो हद ही हो गई थी. बरसात का मौसम था, लेकिन दिन में तेज धूप निकली थी, जिस से उस रात उमस भरी गरमी थी. रीना ने छत पर ही सोने का इंतजाम किया हुआ था. घर के नीचे बरामदे में बच्चे अपनी दादी के साथ सोए हुए थे. उसी घर के बरामदे में उदय का चाचा रामपुकार राय भी सोया हुआ था. उस की अपने बेटे विनोद राय और बहू से नहीं बनती थी, इस कारण वह उदय के परिवार के साथ ही रहता था. उदय के पापा की मृत्यु हो चुकी थी, इस कारण वह अपने चाचा को परिवार में एक सहारे के नजरिए से देखता था.

उसी के बारे में विनोद ने उदय को काफी अनापशनाप कान भर रखे थे. उस का कहना था कि उस के पापा रामपुकार के साथ उस की बीवी रीना राय के अवैध संबंध हैं. हालांकि इस में कितनी सच्चाई थी, इस का सबूत किसी के पास नहीं था, किंतु उदय के मन में इस बात का संदेह घर कर चुका था. उस रोज भी उदय नशे में जरूर था, लेकिन पूरी तरह से होशोहवास में बातें कर रहा था. रीना को प्यार से पुचकारते हुए अभद्र हरकत करने लगा था तो रीना ने उसे झिड़क दिया. फिर भी उस ने रीना की मरजी के बगैर उस से संबंध बनाए थे. इस में पत्नी ने बेमन से साथ दिया था और वह चिढ़ गई थी. चिढ़ती हुई गुस्से में बोल पड़ी, ”तुम्हारा यहां रहने से अच्छा है कि तुम फिर से दुबई ही चले जाओ. ’ ’

”हांहां, तुम तो चाहोगी ही…कि मैं यहां से चला जाऊं और तुम यहां बिना किसी रोकटोक के गुलछर्रे उड़ाओ! ’ ’

”मैं यहां गुलछर्रे उड़ाती हूं…और तुम क्या करते हो? दारू में पैसे कौन उड़ा रहा है? मैं या तुम? ’ ’

”मुझे सब पता है, तुम मेरे पीछे यहां क्या गुल खिला रही हो?…किस का बिस्तर गरम करती हो? मैं सब कुछ जान गया हूं! ’ ’ उदय बोला.

यह सुन कर रीना अवाक हो गई थी. उसे गुस्से में देखने लगी थी.

”मुझे क्या घूर रही हो…खा जाओगी? ’ ’

”तुम क्या सब गलतसलत बोले जा रहे हो नशे में…कोई सुनेगा, तब क्या कहेगा? ’ ’

दोनों के बीच बहस का दौर चलता रहा. काफी देर तक दोनों एकदूसरे पर कीचड़ उछालते रहे. थोड़े समय में उदय छत से नीचे आ कर अपने कमरे में सो गया. वैसे तो 22 अगस्त, 2025 की सुबह पिछली कुछ दिनों की सुबह जैसी ही थी. आसमान में बारिश के आसार नजर आ रहे थे, लेकिन सूर्योदय की धूप निकल चुकी थी. उदय अपने कमरे में अधूरे बिस्तर पर सोया हुआ था, लेकिन घर में रीना नजर नहीं आ रही थी. बच्चे अभी सो रहे थे, लेकिन उदय की मम्मी थारा देवी जाग चुकी थीं.

उन्होंने बहू को आवाज लगाई. उस की आवाज का कोई जवाब नहीं मिला…रीना को बच्चों को स्कूल जाने के लिए तैयारी करनी थी. वह बड़बड़ाती हुई धीरेधीरे सीढिय़ां चढ़ कर छत पर चली गईं. वहां उस ने जो देखा, उन की आंखों पर भरोसा नहीं हुआ. कुछ पल में ही उन की चीख निकल गई. तेजी से उलटे पैर नीचे चली आईं और उदय को झकझोर कर जगाया. दरअसल, छत पर उन की 25 वर्षीय बहू रीना राय मृत पड़ी थी… उस के बिस्तर पर खून ही खून था, जो सूख चुका था. उस की किसी ने गरदन रेत कर हत्या कर दी थी.

रोती हुई थारा देवी छत पर बहू रीना का गला कटा देख कर विचलित हो गईं. उलटे पैर भागीभागी उदय के पास आईं. उसे झिंझोड़ कर जगाया. छत पर मृत पड़ी रीना के बारे में बताया. हड़बड़ाता हुआ उदय छत पर दौड़ता हुआ गया. वहीं से चिल्लाने लगा, ”माई रे! विनोदवा मरिये देल को! गरदन काटिए देल को रीनवा के! ’ ’

छत से नीचे आया. चीखनेचिल्लाने लगा. घर में चीखपुकार मच गई. पड़ोसियों की भीड़ जुट गई. रक्तरंजित लाश जिस ने भी देखी, दांतों तले अंगुली दबा ली. कुछ देर में पुलिस भी आ गई. काफी संख्या में लोग वहां जुट गए. साथ ही ताजपुर, हलई, मुसरीघरारी, सरायरंजन, वैनी, सहित अन्य कई थानों की पुलिस पहुंच गई.

ताजपुर थाने के एसएचओ शंकर शरण दास ने जांच के लिए पुलिस टीम को आवश्यक निर्देश दिए. एफएसएल की टीम ने मामले की जांच में स्पष्ट किया कि रीना की गला काट कर हत्या की गई है. मौके का मुआयना करने के बाद मृतका के पति उदय और उस की सास से पूछताछ की गई. उदय ने पत्नी की हत्या का आरोप सीधेसीधे अपने चचेरे भाई विनोद राय पर लगा दिया. मृतका के पापा अखिलेश कुमार, जो वैशाली में रहते थे, खबर सुन कर वहां आ चुके थे. पुलिस ने उन से भी पूछताछ की.

उन्होंने बताया कि 2018 में उन की बेटी रीना की शादी उदय कुमार राय से हुई थी. सब कुछ ठीक चल रहा था. सुबह उन्हें जानकारी मिली कि उन की बेटी की छत पर ही किसी ने गला काट कर हत्या कर दी. उन्होंने बताया कि उदय के साथ चचेरे भाई का जमीनी विवाद चल रहा था. इसलिए हो सकता है कि इसी कारण इस घटना को अंजाम दिया गया हो. छत बिलकुल सटी होने के कारण कोई भी उस छत से इस छत पर कूद सकता है.

रीना के 4-5 साल के 2 छोटेछोटे बच्चे हैं. शक के आधार पर पुलिस ने पूछताछ के लिए चचेरे देवर विनोद राय को हिरासत में लिया. पति उदय राय ने बताया कि गरमी के चलते रीना रात में छत पर सोई हुई थी. देर रात मैं शौच के लिए नीचे आया था. मोबाइल चार्ज भी नहीं था. इस वजह से मोबाइल चार्ज लगा कर नीचे ही सो गया था. सुबह पत्नी काफी देर तक नीचे नहीं उतरी. तब उस की मम्मी रीना को उठाने के लिए छत पर गई थीं, जहां उन्होंने उसे मृत पाया था. उस का गला रेता हुआ और आसपास खून पसरा हुआ था.

पुलिस ने उदय और विनोद राय के घर का मुआयना किया. पता चला कि उदय का चचेरे भाई विनोद राय से दरवाजे पर चारदीवारी  को ले कर झगड़ा चल रहा था. एक सप्ताह पहले भी मारपीट की घटना हुई थी. विनोद की रीना के साथ भी मारपीट हुई थी. इस संबंध में थाने में शिकायत भी दी गई थी, लेकिन पुलिस ने कोई काररवाई नहीं की थी. इस आधार पर ही उदय ने दावा किया कि विनोद ने ही पत्नी को मारा है.

पुलिस को यह मालूम हुआ कि विनोद राय के पापा रामपुकार राय अपने बेटे और बहू को छोड़ कर उदय राय के साथ रहते थे. जब इस बारे में तहकीकात की गई, तब मालूम हुआ कि विनोद इस बात को ले कर भी अपने पापा से नाराज रहता था. कई बार इसे ले कर पंचायत भी हुई. इस के बाद भी रामपुकार राय अपने भतीजे उदय के साथ ही रह रहा था. पुलिस इस एंगल से भी हत्याकांड की छानबीन करने लगी. हालांकि पुलिस को कई अहम सुराग जल्द ही मिल गए थे. हत्याकांड में इस्तेमाल किया गया तेज धारदार चाकू बरामद कर लिया गया, जो लाश के पास ही बिस्तर के नीचे था.

इस मामले की रिपोर्ट रीना राय (25) के पिता अखिलेश कुमार राय द्वारा 22 अगस्त, 2025 को लिखवाई गई थी. मामले का पहला अभियुक्त विनोद राय (48) के अलावा उस के पापा रामपुकार राय (65), विनोद की पत्नी पानवती देवी (45) और उस की 18 वर्षीया बेटी सुष्मिता कुमारी को बनाया गया. उन्हें बीएनएस की धारा 103 (1) 3(5) के तहत आरोपी बनाया गया था.

रीना के शव को पोस्टमार्टम के बाद उदय को सौंप दिया गया था, जिस के अंतिम संस्कार के बाद 13 दिनों के श्रद्मद्धकर्म का अनुष्ठान किया गया था. हालांकि इस बीच पुलिस की छानबीन चलती रही. पुलिस ने विनोद को इसी शक के आधार पर हिरासत में ले रखा था कि उस का पहले उदय से विवाद हुआ था. इस संबंध में पुलिस ने विनोद से पूछताछ की. उस ने जो बयान दिया, उस से पूरी जांच की दिशा ही बदल गई. पुलिस ने खोजबीन की तो उदय पर ही शक गहरा गया.

उदय तो खुद को बेकसूर साबित करने में लगा था. लेकिन पुलिस ने रीना की तेरहवीं तक का इंतजार किया, क्योंकि वही सारे क्रियाकर्म कर रहा था. पुलिस चुपचाप घर के पास डेरा डाले रही और कर्मकांड पूरे होने का इंतजार करने लगी. जैसे ही तेरहवीं का काम पूरा हुआ, पुलिस ने उदय को गिरफ्तार कर पूछताछ की तो उदय कुमार राय ने आखिरकार अपनी पत्नी की हत्या करने का जुर्म कुबूल कर लिया और कहा कि शक और शराब के नशे में उस ने यह कर डाला.

उदय ने बताया कि 21 अगस्त की रात वह शराब पी कर घर लौटा और पत्नी को सोने के बहाने छत पर ले गया. उस ने फिर पत्नी से चाचा और उस के अवैध संबंधों के बारे में पूछा, लेकिन पत्नी से फिर वही जवाब मिला. इस के बाद उस ने पत्नी संग जबरन शारीरिक संबंध बनाए. जब पत्नी सो गई तो उस ने तकिए के नीचे से चाकू निकाला और पत्नी रीना का गला रेत दिया. रीना तड़पती रही तो उस ने उस का मुंह बंद कर दिया और हाथपैर जकड़ लिए.

हत्या को अंजाम देने के बाद वह चुपचाप छत से नीचे आ कर सो गया. सुबह जब उस की मम्मी छत पर गईं तो रीना की खून से सनी लाश दिखी. चीखपुकार सुन कर वह भी ऊपर पहुंचा और रोने का नाटक करने लगा. बाद में उस ने पत्नी के मर्डर का आरोप चचेरे भाई विनोद पर लगा दिया. वह खुद को मासूम साबित करने में लगा था, लेकिन पुलिस जांच में उस की सारी चालाकी धरी की धरी रह गई. पुलिस ने जांच पूरी कर पत्नी की हत्या के आरोपी उदय कुमार राय को मजिस्ट्रैट के सामने पेश किया. वहां से उसे न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया. पुलिस ने विनोद राय, उस के पापा रामपुकार राय, पत्नी पानवती देवी और बेटी सुष्मिता कुमारी को बेकसूर मानते हुए छोड़ दिया था. Bihar Crime

 

 

Family Crime : पैसों की लालच में बेटी बनी पिता की दुश्मन

Family Crime : सुबह 6 बजे का समय था और तारीख थी 20 जुलाई, 2021. उत्तर प्रदश के जिला संभल के मुटेना गांव के पास दक्षिण की ओर खेत के बीचोबीच पेड़ से लाश लटकी हुई थी. उस के नीचे एक औरत और 2 लड़कियां विलाप कर रही थीं. उन के अलावा गांव के कुछ लोग भी मौजूद थे.

उसी गांव के ही एक व्यक्ति ने पुलिस को इस की सूचना दी थी. वहां मौजूद सभी को पुलिस के आने का इंतजार था, लेकिन वे आपस में कानाफूसी करते हुए अचरज भी जता रहे थे कि 60 साल से अधिक उम्र के इस सीधेसादे बुजुर्ग ने आखिर फांसी क्यों लगाई होगी? कैसे फंदा बनाया होगा? कैसे फांसी लगाई होगी? कुछ देर में ही चौकी इंचार्ज 2 कांस्टेबलों के साथ वहां पहुंच गए थे. उन्होंने पहले आसपास के लोगों को वहां से हटाया. फिर पेड़ से लटकी लाश का गहराई से मुआयना किया. प्राथमिक छानबीन की और इस की सूचना रजपुरा के थानाप्रभारी को भी दे दी.

सूचना पाते ही थानाप्रभारी विद्युत गोयल उच्च अधिकारियों को सूचना भेज कर घटनास्थल पर पहुंच गए. उन्होंने लाश नीचे उतरवाई और पंचनामा भर कर पोस्टमार्टम के लिए संभल जिला मुख्यालय भेज दी. मृतक की पहचान मुटेना के हरपाल यादव के रूप में हुई. पुलिस की निगाह में मामला आत्महत्या का लग रहा था. इसलिए पुलिस ने इसे गंभीरता से नहीं लिया. हालांकि वहां मौजूद कुछ लोगों ने हत्या किए जाने की आशंका जरूर जताई, लेकिन मृतक के घर वालों में से किसी ने भी किसी पर कोई आरोप नहीं लगाया.

हरपाल यादव के पास 30 बीघा खेती की जमीन थी. वह खेती कर अपने परिवार का गुजरबसर करते आ रहे थे. उन की 3 बेटियां नीतू, प्रीति व कविता थीं, जिन की परवरिश में उन्होंने कोई कसर नहीं छोड़ी थी. हालांकि उन को बेटे की कमी भी खलती रहती थी. बेटा नहीं होने की टीस के चलते उन की एक आदत शराब पीने की भी लग गई थी. जबकि पत्नी लाजवंती उन से शराब छोड़ने को कहती रहती थी.

उन्होंने बड़ी बेटी नीतू की शादी कई साल पहले कर दी थी. कुछ समय से दूसरी बेटी प्रीति की शादी की चिंता सताने लगी थी. लाजवंती प्रीति के विवाह को ले कर कुछ ज्यादा चिंतित रहती थी, इस की वजह यह थी कि वह बाकी 2 बेटियों से अलग जिद्दी स्वभाव की थी. अपनी बात चाहे जैसे हो, मनवा कर ही दम लेती थी. शादी की चिंता में घुले जा रहे मातापिता की समस्या का समाधान प्रीति ने खुद ही निकाल दिया था. उस ने अपनी मां को बताया कि वह अपनी ही जाति के बदायूं के रहने वाले धर्मेंद्र यादव नाम के लड़के को जानती है. उस ने उसे एक शादी में देखा था. उसे वह पसंद करती है.

प्रीति को उस के बारे जो जानकारी थी, मां को बता दी. मां लाजवंती ने यह जानकारी अपने पति को दे कर बताया कि धर्मेंद्र बदायूं जिले की इसलामनगर तहसील के पतीसा गांव का रहने वाला है. उस के 4 भाई और एक बहन है. जल्द ही प्रीति के मातापिता ने धर्मेंद्र के परिवार वालों से मिल कर कोरोना काल में ही शादी तय कर दी, किंतु शादी की तारीख कोरोना की वजह से तय नहीं हो पाई थी. प्रीति और धर्मेंद्र की शादी तय हो जाने के बाद वे मिलने को बेचैन हो गए थे, किंतु सामाजिक और पारिवारिक मानमर्यादा के चलते मिल नहीं पा रहे थे. दूसरा कोरोना काल की वजह से कहीं आनाजाना भी मुश्किल था.

दोनों की फोन पर बातें होने लगी थीं. उस के बाद उन की मिलने की इच्छा और प्रबल हो गई. एक दिन धर्मेंद्र ने प्रीति से मुलाकात करने का आग्रह किया. प्रीति भी इसी का इंतजार कर रही थी. धर्मेंद्र ने मिलने की जगह और समय बताया. धर्मेंद्र से मिलने के बाद प्रीति उस पर फिदा हो गई. उसे अपने सपनों का शहजादा मिल गया था. इकहरे बदन के मजबूत कदकाठी वाले धर्मेंद्र के चेहरे पर गजब का आकर्षण धा. उस से बातें कर प्रीति बहुत प्रभावित हो गई. धर्मेंद्र भी प्रीति को देख कर लट्टू हो गया. जवानी से मदमस्त प्रीति को देखा तो एकटक से देखता ही रह गया.

उस की सुंदर काया, झलकती जवानी, इतरानेइठलाने की अदाएं धर्मेंद्र को बहुत पसंद आईं. उस रोज उन की छोटी से मुलाकात हुई, लेकिन बाद में दोनों ने मिलनेजुलने का सिलसिला बना लिया. धीरेधीरे धर्मेंद्र का प्रीति के घर भी आनाजाना हो गया. प्रीति भी अपने होने वाले ससुराल घूम आई. धर्मेंद्र ने प्रीति से कहा कि वह काफी धूमधाम से पूरे जश्न के साथ शादी करना चाहता है. जबकि कोरोना काल में शादी में लगी बंदिशों के चलते शादी की तारीखें टलती जा रही थीं. इस बीच उन के बीच वह सब भी हो गया, जो विवाह बाद होना चाहिए था.

उन की शादी अब महज विशेष औपचारिकता भर रह गई थी. दोनों  एकदूसरे के दीवाने हो गए थे. उन्होंने साथ जीनेमरने की कसमें भी खाई थीं. शादी के इंतजार में 2 महीने और निकल गए. जून का महीना भी जाने वाला था. उन दिनों धर्मेंद्र प्रीति के पास आया हुआ था. प्रीति के घरवालों को उन के मिलनेजुलने से कोई आपत्ति नहीं थी. वह अकसर शाम तक ठहरता और फिर अपने घर चला जाता था.

उस दिन धर्मेंद्र ने प्रीति से अचानक कहा कि उसे कुछ खास बात करनी है. उस के साथ ही वह पूछ बैठा, ‘‘अच्छा प्रीति, एक बात बताओ…’’

‘‘क्या?’’ प्रीति उत्सुकता से बोली.

‘‘तुम्हारे पिताजी हमारी शादी में कितना रुपया खर्च करेंगे?’’

प्रीति याद करती हुई बोली, ‘‘नीतू दीदी की शादी में 3 लाख रुपया खर्च हुआ था. मेरी शादी में भी लगभग इतना तो खर्च करेंगे ही.’’

‘‘इतना पैसा जमा कर लिया होगा पिताजी ने?’’ धर्मेंद्र चिंता जताते हुए बोला.

‘‘इतनी रकम की व्यवस्था नहीं है,  फिर भी कुछ रिश्तेदारों से और कुछ खेती की जमीन पर बैंक से लोन लेने की तैयारी कर रहे हैं.’’ प्रीति बोली.

तभी धर्मेंद्र बोला, ‘‘3 लाख रुपए में क्या होगा. देखो मुझे अपना कोई कारोबार करने के लिए कम से कम 5 लाख रुपए चाहिए. बारात की अच्छी खातिरदारी होनी चाहिए. दहेज के जरूरी सामान के लिए भी 3 लाख रुपए कम पड़ जाएंगे. शादी के बाद कोई किसी का साथ नहीं देता. हम दोनों जो खुशहाल जिंदगी का तानाबाना बुन रहे हैं, सुनहरे सपने देख रहे हैं, वे सब पूरे नहीं हो सकेंगे.’’

‘‘इतना पैसा कहां से आएगा?’’ प्रीति चिंतित हो गई.

‘‘चिंता करने की जरूरत नहीं है. मेरे पास उस का समाधान है.’’ धर्मेंद्र बोला.

‘‘वह क्या?’’ प्रीति ने पूछा.

‘‘देखो पिताजी के पास 30 बीघा जमीन है. 3 बेटियां हैं. बेटा कोई है नहीं. हमारे हिस्से में भी 10 बीघा जमीन आएगी. उन्हें सिर्फ इतना करना है कि हमारे हिस्से की जमीन बेच कर रकम हमें दे दें.’’

धर्मेंद्र की बात प्रीति की समझ में तो आ गई पर दुविधा के साथ बोली, ‘‘लेकिन यह बात उन को कौन समझाएगा?’’

‘‘तुम, और कौन?’’

‘‘नहीं माने तो?’’

‘‘नहीं कैसे मानेंगे, तुम कोई गलत थोड़े कहोगी. ऐसा करने से उन के सिर पर कर्ज का कोई बोझ भी नहीं पड़ेगा. और वह अपनी तीसरी बेटी की भी शादी अच्छी तरह से कर लेंगे.’’

कुछ सोचती हुई प्रीति बोली, ‘‘अच्छा चलो, मैं आज ही उन से बात करूंगी.’’

थोड़ी देर रुक कर धर्मेंद्र चला गया. रात में पिता को खाना खिलाने के बाद प्रीति ने धर्मेंद्र ने जैसे कहा था, पिता को वैसे ही कह दिया.

संयोग से मां भी वहां मौजूद थी. हरपाल प्रीति की बात सुन कर अवाक रह गए.

उन्होंने तुरंत कहा, ‘‘देखो प्रीति, मैं तुम्हारी हर बात मान लेता हूं, लेकिन यह बात मुझे जरा भी पसंद नहीं है.’’

प्रीति ने पिता को समझाने की कोशिश की, ‘‘धर्मेंद्र कह रहे हैं कि 10 बीघा जमीन बेच ली जाए तो शादी ठीकठाक हो जाएगी. धर्मेंद्र को भी कोई कामधंधा करने के लिए रकम मिल जाएगी. वैसे भी तीनों बहनों के नाम 10 -10 बीघा जमीन तो आनी ही है.’’

दोबारा जमीन की बात सुन कर हरपाल आगबबूला हो गए. गुस्से में बोले, ‘‘जमीन मेरी मां है, तुम लोगों के कहने पर मैं अपनी मां को बेच दूं. ऐसा आज तक खानदान में न हुआ है और न आगे होगा.’’

इतना कह कर वह वहां से उठ कर चले गए. जातेजाते कह गए, ‘‘आइंदा अब इधर मत आना, मुझ से बात मत करना. तुम्हारी शादी तो मैं किसी तरह करवा ही दूंगा. उस के बाद समझो हमारा रिश्ता खत्म हो जाएगा.’’

प्रीति पिता की इस नाराजगी से काफी दुखी हो गई. उस ने पूरी बात अगले रोज धर्मेंद्र को फोन पर बताई. वह समझ नहीं पा रही थी क्या करे कि उस के पिता जमीन बेचने को तैयार हो जाएं. एक हफ्ते तक बापबेटी के बीच कोई बातचीत नहीं हुई. धर्मेंद्र ने भी प्रीति की इस बीच कोई खोजखबर नहीं ली. आखिरकार प्रीति ने ही फोन कर धर्मेंद्र से हालचाल पूछा. फोन पर धर्मेंद्र काफी उखड़ाउखड़ा सा लगा. वह लापरवाही से बातें करता रहा.

प्रीति ने महसूस किया कि जैसे उस के मंगेतर धर्मेंद्र को उस से कोई लगाव नहीं रहा. किसी तरह से प्रीति अपने प्रेम और अंतरंग संबंधों का हवाला देते हुए धर्मेंद्र को मनाने में कामयाब रही. वह धर्मेंद्र के प्रेम जाल में बुरी तरह फंस चुकी थी. धर्मेंद्र को अपना सब कुछ सुपुर्द कर चुकी थी. उस ने धर्मेंद्र को आश्वासन दिया कि वह कोई न कोई रास्ता निकाल लेगी, जिस से पिता उस के हिस्से की जमीन देने के लिए राजी हो जाएंगे. इसी के साथ उस ने धर्मेंद्र को किसी जगह बैठ कर समस्या का समाधान निकालने का सुझाव दिया.

धर्मेंद्र प्रीति की बात मानते हुए उस से मिला. मिलते ही प्रीति उस के गले लग कर बोली, ‘‘गुस्सा थूक दो, आओ कोई तरीका निकालते हैं.’’

‘‘बुड्ढे ने तो सारा खेल बिगाड़ दिया. और ऐसा ही हाल रहा तो हम दोनों को वह जीते जी सुखी जीवन शुरू करने नहीं देगा.’’ धर्मेंद्र गुस्से में बोला.

‘‘तो फिर उन्हें रास्ते से ही हटा देते हैं.’’ प्रीति तुरंत बोली.

धर्मेंद्र अवाक रह गया, ‘‘यह तुम क्या कह रही हो? वो तुम्हारे पिता हैं.’’

‘‘पिता हैं तो क्या हुआ, तुम सही कह रहे हो, उन के जीते जी हमें सुखी जीवन नहीं नसीब होगा.’’

‘‘एक बार फिर समझाते हैं, मैं भी तुम्हारे साथ रहूंगा.’’ धर्मेंद्र बोला.

‘‘तुम इस में साथ मत दो, मैं ने जो योजना बनाई है उस में मेरी मदद करो.’’

उस के बाद प्रीति ने धर्मेंद्र को अपनी योजना बताई और दोनों ही उसे अंजाम देने की तैयारी में जुट गए.

योजना के मुताबिक दोनों ने मिल कर हरपाल को ठिकाने लगाने की पूरी तैयारी कर ली थी. उस के बाद जो घटित हुआ, उस का खुलासा पोस्टमार्टम रिपोर्ट और पुलिस की गहन तफ्तीश से सामने आ गया. वह इस प्रकार है—

19 अगस्त, 2021 को हरपाल खेतों पर काम करने के बाद घर आ रहे थे. रास्ते में  गांव का ही एक दोस्त मिल गया. वह शराब पीनेपिलाने वाला दोस्त था. दोनों ने एकांत में बैठ कर शराब पी. फिर हरपाल घर आ गए. तभी प्रीति ने बताया कि अभी उन से कोई मिलना चाहता है. प्रीति अपने पिता को घर से दूर खड़े धर्मेंद्र के पास ले गई. वह बाइक ले कर खड़ा था. प्रीति अपने पिताजी को धर्मेंद्र के हवाले कर घर आ गई. धर्मेंद्र हरपाल को उन के खेतों की तरफ ले गया, जहां उस का साथी गौरव मौजूद था. वहां बैठ कर हरपाल को और दारू पिलाई गई. जब वह नशे में काफी धुत हो गए, तब उन के सिर पर रौड मार कर हत्या कर दी.

हरपाल की मौत के बाद धर्मेंद्र ने पूरी बात फोन से प्रीति को बता दी. उन के द्वारा ही गले में फंदा डाले हरपाल के पेड़ पर लटके होने की खबर घर पहुंचा दी गई. प्रीति इस से पहले ही घटनास्थल पर पहुंच चुकी थी. फिर उन्होंने लाश पेड़ से इस तरह लटका दी जिस से मामला आत्महत्या का लगे. हरपाल की लाश को पेड़ से लटकाने में काफी समय लग गया, लेकिन सुबह होने से पहले ही प्रीति ने सभी परिचितों को इस घटना की सूचना दे दी और वे आननफानन में घटनास्थल पर जा पहुंचे.

हत्या के इस मामले को आत्महत्या बनाने की कोशिश तो की गई थी, लेकिन धर्मेंद्र और उस के दोस्त इस में सफल नहीं हो पाए. पोस्टमार्टम रिपोर्ट से ही इस का खुलासा हो गया. फिर पुलिस ने शक के आधार पर परिजनों से पूछताछ की, जिस में प्रीति का व्यवहार ही संदिग्ध दिखा. उस के बयान के आधार पर पुलिस ने धर्मेंद्र को गिरफ्तार कर लिया. हरपाल के मर्डर केस का परदाफाश एसपी (संभल) चक्रेश मिश्रा द्वारा पत्रकार वार्ता में किया गया. पूरे हत्याकांड में प्रीति की साजिश होने के कारण 120बी आईपीसी के तहत प्रीति को भी नामजद किया गया है. तीनों आरोपियों से पूछताछ के बाद उन्हें कोर्ट में पेश कर जेल भेज दिया. Family Crime

—कथा पुलिस सूत्रों पर आधारित

Family Crime : अवैध संबंधों में ली बेटी की जान

Family Crime : दादी के जिस कमरे में अभिरोज सोया करती थी, उसी कमरे में ज्योति ने पहले तकिए से अभिरोजप्रीत का गला दबा दिया. जब वह मरणासन्न अवस्था में हो गई तो उस ने रसोई से नमक कूटने वाली वजनी चीज से उस के सिर, मुंह, पांव, हाथ और अंगुलियों पर वार किए. उस ने उस बच्ची के हाथों और दोनों पांवों को भी तोड़ दिया. जब अभिरोज की मृत्यु हो गई तो उस की लाश को बड़ी बाल्टी में डाल कर स्कूल के पास एक वीरान छप्पर के अंदर फेंक आई. हत्या की इस खबर से गांव रामपुराफूल में सनसनी फैल गई.

पंजाब के अमृतसर के गांव रामपुराफूल से 15 मई, 2023 की रात 10 बजे अमृतसर पुलिस को सूचना मिली कि उन के गांव की 7 साल की अभिरोजप्रीत कौर, जो गांव के ही सरकारी स्कूल में कक्षा 2 की छात्रा थी, 15 मई, 2023 की शाम 4 बजे ट्यूशन पढऩे घर से निकली थी, लेकिन वह अपनी ट्यूशन टीचर के पास नहीं पहुंची. वह रास्ते में ही गायब हो गई थी. जब रात के 10 बजे तक भी उस का कोई पता नहीं चला तो उस के घर वालों ने थाने में आ कर उस की गुमशुदगी दर्ज करा दी.

गुमशुदगी दर्ज हो जाने के बाद पुलिस हरकत में आ गई. पुलिस ने गांव में घरों के बाहर लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज चैक की तो उस में एक नया ऐंगल सामने आया. पुलिस को पता चला कि एक आदमी बाइक चला रहा था. बीच में एक बच्ची बैठी थी और बच्ची के पीछे एक औरत थी, जिस ने बच्ची को पकड़ रखा था.

इस बीच पुलिस ने अगवा हुई बच्ची के बारे में और जानकारी जुटानी शुरू की तो पता चला कि अगवा हुई बच्ची अभिरोजप्रीत कौर के पिता का नाम अजीत सिंह था. अजीत सिंह ने 2 विवाह किए थे. उन का पहला विवाह हरजीत कौर से हुआ था. उन की एक बेटी हुई, जिस का नाम अभिजोतप्रीत कौर रखा गया था. शादी के 2 साल के बाद दोनों में आपस में मनमुटाव होने लगा. दिन प्रतिदिन दोनों के आपसी संबंध बद से बदतर होते जा रहे थे. तब दोनों ने आपसी रजामंदी से संबंध विच्छेद कर दिए. अजीत सिंह ने अपनी पहली पत्नी हरजीत कौर को तलाक दे दिया और बेटी अपने पास रख ली.

उस के बाद अजीत सिंह के घर वालों ने अजीत का दूसरा विवाह ज्योति के साथ कर दिया. सब ने यही सोचा था कि बेटी अभिजोतप्रीत कौर को एक नई मां मिल जाएगी और अजीत सिंह का जीवन पटरी पर आ जाएगा. ज्योति की एक बेटी हुई जो अभी 3 माह की थी.

मां पर हुआ बेटी की हत्या का शक

पुलिस छानबीन में जब सीसीटीवी फुटेज में एक आदमी और औरत के बीच एक छोटी बच्ची दिखाई दी तो सभी का शक अजीत सिंह की पहली पत्नी हरजीत कौर पर गया, क्योंकि अभिजीतप्रीत कौर उस की बेटी थी. पुलिस पूछताछ में यह सामने आया कि जब से अभिजोतप्रीत कौर घर से गायब हुई थी, इस की खबर उस की सगी मां को मिली थी तो वह भी बहुत चिंतित थी. पुलिस ने हरजीत कौर से पूछताछ की तो वह निर्दोष पाई गई.

इधर 7 वर्षीय अभिजोतप्रीत कौर के अचानक गायब होने के बाद यह मामला सोशल मीडिया में सुर्खियों में छाता जा रहा था. अभिजोतप्रीत कौर की सौतेली मां बार बार मीडिया से अपनी बेटी को खोजने की रोरो कर गुहार लगा रही थी. ग्रामीणों और जनप्रतिनिधियों की ओर से पुलिस पर दबाव बनाया जा रहा था. पुलिस की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए जाने लगे थे.

इस के बाद पुलिस इस केस में पूरी मुस्तैदी से जुट गई और अपने मुखबिरों को भी काम पर लगा दिया. इधर अभिजोतप्रीत कौर की सौतेली मां ज्योति उस की फोटो मीडिया के सामने प्रस्तुत कर के रोरो कर अपनी बेटी को तलाशने का गुहार लगा रही थी.

सीसीटीवी कैमरे से पुलिस के हाथ लगा एक अहम सुराग

पुलिस ने पूरे गांव को सील कर के घरघर सघन तलाशी का अभियान चलाया. पूरे शहर भर में अभिजोत प्रीत कौर को ढूंढा गया, मगर पुलिस के पास हाथ अब तक कोई भी सुराग नहीं लग पाया था. लेकिन बाद में पुलिस के हाथ एक अहम सुराग लग गया. ज्योति के घर के सामने लगे सीसीटीवी कैमरे में सौतेली मां ज्योति एक बाल्टी में बच्ची के शव को ले जाते हुए दिखाई दी. उस के करीब 20 मिनट बाद वह खाली बाल्टी ले कर अपने घर पर आती दिखाई दी. सीसीटीवी फुटेज देखने के के बाद यह स्पष्ट हो गया था कि अभिजोतप्रीत कौर के गायब होने में उस की सौतेली मां की भूमिका है.

कत्ल का सबूत हाथ में आते ही अमृतसर पुलिस ने हत्यारी मां ज्योति को हिरासत में ले कर उस से कड़ी पूछताछ की तो सारा मामला उजागर हो गया. उस ने अभिजोतप्रीत कौर की हत्या करने की बात स्वीकार कर ली. पुलिस ने उस की निशानदेही पर गांव के स्कूल के पास से बच्ची की लाश बरामद कर ली. इस के बाद एसएसपी सतिंदर सिंह ने प्रैस कौन्फ्रैंस कर पत्रकारों को अभिजोतप्रीत की हत्या का खुलासा कर दिया.

सौतेली मां देती थी यातनाएं

मृतका अभिरोजप्रीत कौर की नृशंस हत्या की खबर जब लोगों के सामने आई तो लोगों के दिल दहल उठे थे. इस संबंध में जानकारी देते हुए मृतका अभिरोजप्रीत कौर की ट्यूशन टीचर जगमोहन कौर ने बताया कि अभिरोजप्रीत कौर 15 मई को उस के पास ट्ïयूशन के लिए नहीं आई थी. वह गांव के सरकारी स्कूल में कक्षा 2 में पढ़ती थी. पढ़ाई में वह काफी होशियार थी और स्कूल की हर गतिविधि में हमेशा सब से आगे रहती थी.

जगमोहन कौर ने बताया कि अभिरोजप्रीत कौर की सगी मां उसे छोड़ कर चली गई तो उस के पिता अजीत सिंह ने दूसरा विवाह ज्योति के साथ कर लिया था. इस के बाद तो उस मासूम बच्ची के ऊपर दुखों और यातनाओं का पहाड़ ही टूट पड़ा था. सौतेली मां ज्योति उसे यातनाएं दिया करती थी. इस के बारे में जब अभिरोजप्रीत कौर की दादी को पता चला तो वह हर रोज उसे स्कूल में छोडऩे और छुट्टी के वक्त घर लाया करती थीं. दादी का उस के प्रति काफी लगाव था. दादी स्कूल में दिन में भी उसे देखने आती रहती थी. उस की हर बात का, उस के हर सामान, कौपीकिताब, ड्रेस, खानेपीने का दादी विशेष ख्याल रखती थीं.

इस बीच दादी की तबीयत काफी खराब हो गई और उन्हें अस्पताल में भरती कराना पड़ा. क्योंकि उन के स्टेंट पडऩे थे, इसलिए वह पिछले 10 दिनों से आईसीयू में वेंटिलेटर पर थीं. इसी बात का फायदा उठाते हुए सौतेली मां ज्योति ने अभिरोजप्रीत कौर की हत्या कर डाली. बेटी की मौत पर गमगीन पिता अजीत सिंह को गहरा सदमा लगा. उन्होंने बताया कि यह सोच कर ज्योति से विवाह किया था कि बेटी को भी एक मां मिल जाएगी, जो उस का सही तरह से लालनपालन कर सकेगी. लेकिन ज्योति ने शुरू से ही अभिरोजप्रीत को सच्चा प्यार नहीं दिया. बातबात पर उस से वह नाराज हो जाया करती थी. हर समय वह उसे डांटतीफटकारती रहती थी, इसलिए मेरी बेटी अपनी दादी के कमरे में ही सोया करती थी. दादी उसे बहुत प्यार करती थीं.

मां अवैध संबंधों पर डालना चाहती थी परदा

पुलिस द्वारा पूछताछ करने पर पता चला कि ज्योति की मौसी की बेटी प्रिया (काल्पनिक नाम) गांव के किसी युवक के साथ प्रेम करती थी. उन दोनों प्रेमियों को अभिरोजप्रीत ने एक दिन आपत्तिजनक हालत में देख लिया था. तब बहन ने यह बात ज्योति को बता दी थी. इस पर ज्योति अभिरोज को यह बात किसी को न बताने की हर समय चेतावनी देती रहती थी. बाद में ज्योति ने यह सोचा कि कहीं अभिरोजप्रीत ने अवैध संबंधों की यह बात घर वालों या गांव के किसी व्यक्ति को बता दी तो उस की बहन और उस के परिवार की सारे गांव में बदनामी हो सकती है. इसलिए उस ने अभिरोजप्रीत कौर का मर्डर करने का फैसला कर लिया.

पता चला कि दादी के जिस कमरे में अभिरोज सोया करती थी, उसी कमरे में ज्योति ने पहले तकिए से अभिरोजप्रीत का गला दबा दिया. जब वह मरणासन्न अवस्था में हो गई तो उस ने रसोई से नमक कूटने वाली वजन चीज से उस के सिर, मुंह, पांव, हाथ और अंगुलियों पर वार किए. उस ने उस बच्ची के हाथों और दोनों पांवों को भी तोड़ दिया. जब अभिरोज की मृत्यु हो गई तो उस की लाश को बड़ी बाल्टी में डाल कर स्कूल के पास एक वीरान छप्पर के अंदर फेंक आई. हत्या की इस खबर से गांव रामपुराफूल में सनसनी फैल गई.

ज्योति से पूछताछ करने के बाद पुलिस ने उसे कोर्ट में पश कर जेल भेज दिया. ज्योति की मौसेरी बहन का हत्या में कोई सहयोग था या नहीं, इस बारे में पुलिस की जांच की जारी थी. Family Crime

—कथा पुलिस सूत्रों व जनचर्चा पर आधारित है.

Punjab News : मजबूरी ने मां को कातिल बना दिया

Punjab News : पंजाब के जिला तरनतारन के थाना सरहाली का एक गांव है शेरों. इसी गांव की रहने वाली मनजीत  कौर के पति बलवंत सिंह की मृत्यु बहुत पहले हो गई थी. बलवंत सिंह की गांव में खेती की थोड़ी सी जमीन और रहने का अपना मकान था. कुल इतनी जायदाद मनजीत कौर को पति से मिली थी. इस के अलावा वह उसे 2 बेटे और 1 बेटी भी दे गया था.

जब बलवंत सिंह की मौत हुई थी, मनजीत कौर के तीनों बच्चे काफी छोटे थे. पति की मौत के बाद बड़ी मुश्किलों से उस ने तीनों बच्चों को पालपोस कर बड़ा किया. उस का भविष्य और उम्मीदें इन्हीं बच्चों पर टिकी थीं. उस ने सोचा था कि बच्चे बड़े हो कर उस का सहारा बनेंगे. बच्चे किसी लायक हो जाएंगे तो उस के दिन बदल जाएंगे. लेकिन ऐसा हो नहीं सका.

क्योंकि एक चीज चुपके से खलनायक की तरह मनजीत कौर के घर में दाखिल हो गई, जो उस के घरपरिवार को तबाही के रास्ते पर ले गई. वह चीज कुछ और नहीं, नशा था, हेरोइन, स्मैक और कैप्सूलों का. यह घातक नशा वैसे भी पंजाब के गांवों में कहर बरपा रहा है. मनजीत कौर के दोनों बेटे बड़े हुए तो उन्हें मेहनत और मशक्कत कर के कमाई करने का नशा लगने के बजाय घर को बरबाद करने वाला नशा लग गया.

इसी नशे की वजह से मनजीत कौर का एक बेटा बेवक्त काल के गाल में समा गया. बेटे की बेवक्त मौत ने मनजीत कौर को तोड़ कर रख दिया. एक जवान बेटे की बेवक्त मौत से डरी और घबराई मनजीत कौर को दूसरे बेटे निरमैल सिंह की चिंता सताने लगी. क्योंकि निरमैल सिंह भी नशे का आदी था. चिंतित मनजीत कौर को अचानक खयाल आया कि अगर वह बेटे की शादी कर दे तो शायद उस की नशा करने की आदत छूट जाए.

यह खयाल आते ही मनजीत कौर बेटे की शादी के लिए दौड़धूप करने लगी. उस की दौड़धूप का नतीजा यह निकला कि नशेड़ी निरमैल सिंह की गुरप्रीत कौर से शादी हो गई. शादी के बाद निरमैल सिंह में कुछ सुधार नजर आया तो मनजीत कौर को लगा कि धीरेधीरे बेटा सुधर जाएगा. वह नशे के बजाय अपनी शादीशुदा जिंदगी का आनंद लेता दिखाई दिया.

यह देख कर मनजीत कौर ने काफी राहत महसूस की. मगर इस राहत की उम्र बहुत लंबी नहीं थी. शादी के कुछ दिनों बाद तक बीवी के जिस्म की गर्मी में डूबे रहने के बाद निरमैल सिंह फिर से नशे की ओर मुड़ा तो पहले से भी ज्यादा शिद्दत के साथ. इस से घर में जबरदस्त कलहक्लेश रहने लगा.

मनजीत कौर की जान आफत में पड़ गई. पहले तो वह अकेली किसी तरह नशेड़ी बेटे से निपट लेती थी, लेकिन घर में बहू के आने से वह कुछ कमजोर सी पड़ गई थी. घर का खर्चा वैसे ही बढ़ गया था, इस के बावजूद अपनी जिम्मेदारियों से लापरवाह निरमैल सिंह जो भी कमाता था, अपने नशे में उड़ा देता था. इस से घर में अशांति और कलह का माहौल बनना स्वाभाविक था. घर के लगातार बिगड़ते माहौल से परेशान मनजीत कौर ने किसी तरह अपनी एकलौती बेटी राज कौर के हाथ पीले कर के उसे विदा कर दिया.

राज कौर की शादी से घर के हालात सुधरने के बजाय और खराब हो गए. उसी बीच नशेड़ी निरमैल एकएक कर के 2 बच्चों का बाप बन गया. बच्चों की जिम्मेदारी कंधों पर आने के बाद भी निरमैल में कोई बदलाव नहीं आया. उस की नशा करने की आदत वैसी की वैसी ही बनी रही. ऐसी हालत में घर का खर्चा कैसे चल सकता था?

घर को आर्थिक तंगी से उबारने के लिए चिंतित मनजीत कौर ने घर के एक हिस्से को रविंद्र सिंह को किराए दे दिया.

मां का यह कदम नशेड़ी निरमैल को बिलकुल पसंद नहीं आया. नाराज हो कर उस ने घर में जबरदस्त क्लेश किया. लेकिन जब मनजीत कौर ने किराएदार रखने का अपना फैसला नहीं बदला तो वह खामोश हो गया. अब उस की गिद्धदृष्टि किराए की रकम पर जम गई. किराए से आने वाले पैसे जहां मनजीत कौर का सहारा बन गए थे, वहीं यह बात निरमैल को बरदाश्त नहीं हो रही थी.

वह किराएदार रविंद्र सिंह से भी इस बात को ले कर झगड़ा करने लगा. वह किराया खुद लेना चाहता था, जबकि रविंद्र किराया मनजीत कौर को देता था. निरमैल की नशे की लत से वाकिफ रविंद्र सिंह किसी भी कीमत पर किराया उसे देने को तैयार नहीं था.

दूसरी ओर नशे में डूबे रहने वाले निरमैल का दिमाग इस तरह खराब रहने लगा था कि वह रिश्तों की मर्यादा तक भूल गया था. वह खीझ और हताशा में किराएदार रविंद्र सिंह और अपनी मां को ले कर उन के चरित्र पर अंगुली उठाने लगा था. मनजीत कौर के लिए यह जीतेजी मरने वाली बात थी. वह एक विधवा औरत थी और उस की उम्र 60 साल के ऊपर हो गई थी. अब इस उम्र में अगर मनजीत कौर के चरित्र पर उस की कोख से जन्मा बेटा ही अंगुली उठाए तो उस के लिए मरने वाली बात थी.

बेटे द्वारा चरित्र पर अंगुली उठाने से मनजीत कौर इतनी आहत हुई कि उस ने गुस्से में कहा, ‘‘दुनिया से डर बेटा, इतना भी हद से मत गुजर कि एक दिन मैं यह भी भूल जाऊं कि मैं तेरी मां हूं.’’

मनजीत कौर की इस चेतावनी को निरमैल समझ नहीं सका. नशे ने निरमैल को पूरी तरह नकारा बना दिया था. उस ने कामधंधा करना लगभग बंद कर दिया था. उसे नशे की तलब लगती तो उस की हालत पागलों जैसी हो जाती. वह नशे के लिए मां और पत्नी से पैसे मांगता. पैसे न मिलते तो वह उन दोनों से झगड़ा और मारपीट करता. यही नहीं, अंत में वह घर का कोई कीमती सामान उठा ले जाता और बाजार में बेच कर नशे का सामान खरीद लेता. इस हालत में मनजीत कौर के दिल से बेटे के लिए बददुआएं ही निकलतीं.

निरमैल के साथ रहना मनजीत कौर की मजबूरी थी. वह न तो अपना घर छोड़ सकती थी और न अपने नशेड़ी बेटे को. उस से घर से निकलने के लिए जरूर कहती थी. जबकि निरमैल से 2 बच्चों की मां बन चुकी गुरप्रीत कौर के लिए ऐसी कोई मजबूरी नहीं थी. नशेड़ी और निखट्टू पति के दुर्व्यवहार और मारपीट से परेशान हो कर गुरप्रीत कौर एक दिन दोनों बच्चों को ले कर मायके चली गई.

मनजीत कौर ने बहू को रोकने की बहुत कोशिश की, लेकिन वह नहीं मानी. उस ने कहा, ‘‘आप का बेटा इंसान नहीं, जानवर है. मुझे अपने बच्चों के भविष्य को देखना है. इस नरक में एक जानवर की बीवी बन कर रहने से कहीं अच्छा होगा कि मैं खुद को बेवा मान कर मायके में ही रहूं.’’

गुरप्रीत कौर चली गई. उस के बाद घर में रह गई मनजीत कौर, निरमैल सिंह और किराएदार रविंद्र सिंह. पत्नी और बच्चों के घर छोड़ कर चले जाने की हताशा में नशेड़ी निरमैल सिंह हिंसक हो उठा. अब उस के निशाने पर सीधे मनजीत कौर और रविंद्र सिंह थे.

मनजीत कौर के चरित्र पर एक बार फिर अंगुली उठा कर निरमैल सिंह किराएदार रविंद्र सिंह को घर से निकालने के लिए कहने लगा. इस पर मनजीत कौर ने बेटे को खरीखोटी सुनाते हुए कहा, ‘‘तुझ जैसे निखट्टू और ऐबी को जोरू तो पहले ही छोड़ कर चली गई. अब किराएदार को भी निकाल दिया तो गुजारा कैसे होगा? 2 वक्त की रूखीसूखी रोटी से भी जाएंगे.’’

‘‘अगर किरादार को नहीं निकालना तो जमीन बेच दो.’’ निरमैल ने कहा.

निरमैल की बात सुन कर मनजीत कौर के शरीर में जैसे आग लग गई. उस ने कहा, ‘‘पुरखों की मेहनत से बनाई गई जमीन तेरे नशे के लिए बेच दूं? ऐसा किसी भी कीमत पर नहीं होगा. अब कभी मुझ से जमीन के बारे में बात मत करना. मैं तुझे बेच दूंगी, पर जमीन नहीं बेचूंगी’’

‘‘लगता है, यह जमीन अपने किराएदार यार के लिए रखेगी.’’ निरमैल ने कहा.

बेटे के मुंह से निकले इन शब्दों से मां का कलेजा छलनी हो गया. वह एक तरह से इंत्तहा थी. जिस हृदय में बेटे के लिए लबालब ममता होती है, मां के उसी हृदय में भयानक नफरत पैदा हो गई. ऐसी भयानक नफरत, जिस के चलते मां वह सब सोचने को मजबूर हो गई, शायद ही कोई विरली जन्म देने वाली मां सोचती है. बेटे के प्रति नफरत से भरी मनजीत कौर के मन में जो सोच पैदा हुई, उसे परिपक्व हो कर इरादे में बदलने में थोड़ा समय लगा. इस बीच वह खुद से ही लड़ती रही. वह जो कुछ करने की सोच रही थी, एक मां के लिए वैसा करना असान नहीं था.

दूसरी ओर मां के अंदर चल रहे अंतर्द्वंद्व से अनजान निरमैल उसे सताने से बाज नहीं आ रहा था. मां पर हाथ उठाना और उसे गालियां देना उस के लिए आम बात हो गई थी. घर की ऐसी कोई चीज नहीं बची थी, जिसे निरमैल ने अपनी नशे की भट्ठी में स्वाहा नहीं कर दिया था. निरमैल की कोशिश अब यही थी कि किसी भी तरह मनजीत कौर गांव में मौजूद पुरखों की जमीन बेच दे. ऐसा करने के लिए वह उसे मजबूर भी कर रहा था. इस के लिए वह कुछ भी करने को अमादा दिखता था. मनजीत कौर को लगने लगा कि जमीन की खातिर किसी दिन नशेड़ी बेटा उस का गला घोंट देगा.

ऐसा खयाल आते ही वह सोच उस पर हावी होने लगी, जिस से वह पिछले काफी दिनों से लड़ रही थी. रिश्ते का मोह टूटते ही मनजीत कौर का दिमाग एक अपराधी की तरह काम करने लगा. जब उस के दिमाग में योजना का एक अस्पष्ट खाका तैयार हो गया तो उस ने अपनी उस योजना में शामिल करने के लिए बेटी राज कौर और दामाद किशन सिंह को अपने घर बुला लिया.

अपने भयानक इरादे से बेटी और दामाद को अवगत करा कर मनजीत कौर ने कहा, ‘‘मेरी कोख ही मेरी सब से बड़ी दुश्मन बन गई है. इस ने न केवल मुझे सताया है, बल्कि मेरी ममता को भी जलील किया है. नशे ने इसे इंसान से हैवान बना दिया है. लगता है नशे की ही वजह से यह किसी दिन मेरी जान लेने से भी परहेज नहीं करेगा.

लेकिन मैं इस के हाथों से मरना नहीं चाहती. जबकि मैं इस की नौबत ही नहीं आने देना चाहती. ऐसे बेटे के होने और न होने से क्या फर्क पड़ता है. मैं ने तुम लोगों को इसलिए  बुलाया है कि अगर मेरा इंसान से हैवान बना बेटा नहीं रहेगा तो मेरे बाद मेरी जमीन और घर के मालिक तुम लोग होगे. अब तुम लोगों को इस बात पर विचार करना है कि मैं जो करने जा रही हूं, उस में मेरा साथ देना है या नहीं?’’

मनजीत कौर क्या चाहती है, यह बेटी और दामाद को समझते देर नहीं लगी. उन्होंने मनजीत कौर का साथ देने की हामी भर दी. बेटे को खत्म करने की अपनी योजना में मनजीत कौर ने बेटी और दामाद को ही नहीं, किराएदार रविंद्र सिंह को भी शामिल कर लिया. इस के बाद में निरमैल को खत्म करने की पूरी योजना बन गई.

हमेशा की तरह 5 सितंबर की रात निरमैल सिंह नशे में डूबा घर आया और रोज की तरह मां से झगड़ा करने के घर के बाहर खुले आंगन में बेसुध सो गया. जब मनजीत कौर को यकीन हो गया कि निरमैल सिंह गहरी नींद सो गया है तो उस ने बड़ी ही खामोशी से बेटी राज कौर, दामाद किशन सिंह और किराएदार रविंद्र सिंह की मदद से गला घोंट कर अपने ही बेटे की हत्या कर दी. अपने इस बेटे से वह इस तरह परेशान और दुखी थी कि उसे मारते हुए उस के हाथ बिलकुल नहीं कांपे.

निरमैल की हत्या कर सब ने आंगन की कच्ची जमीन में गड्ढा खोद कर उसी में उस की लाश को गाड़ दिया.

जब कई दिनों तक निरमैल सिंह दिखाई नहीं दिया तो गांव वाले उस के बारे में पूछने लगे. इस तरह निरमैल सिंह का एकाएक गायब हो जाना गांव में चर्चा का विषय बन गया. जितने मुंह उतनी बातें होने लगीं. कोई कहता था कि निरमैल मां से झगड़ा कर के घर छोड़ चला गया है तो कोई कहता कि वह कामधंधे के सिलसिले में कहीं बाहर गया है. लेकिन कुछ लोग दबी जुबान से कुछ दूसरा ही कह रहे थे.

जब निरमैल के बारे में कोई सही बात सामने नहीं आई तो गांव के ही किसी मुखबिर ने थाना सरहाली पुलिस को खबर कर दी कि निरमैल का कत्ल हो चुका है और उस के कत्ल में किसी बाहरी व्यक्ति का नहीं, बल्कि उस के घर वालों का ही हाथ है.

मुखबिर की इस खबर पर थाना सरहाली के थानाप्रभारी सर्वजीत सिंह मामले की तफ्तीश में जुट गए. तफ्तीश की शुरुआत में ही उन्हें लगा कि मुखबिर की खबर में दम है. उन्होंने शक के आधार पर 7 सितंबर को मनजीत कौर को हिरासत में ले लिया और थाने ला कर पूछताछ शुरू कर दी.

पहले तो मनजीत कौर झूठ बोल कर पुलिस को गुमराह करने की कोशिश करती रही, लेकिन जब पुलिस ने थोड़ी सी सख्ती की तो उस ने अपने बेटे के कत्ल की बात स्वीकार कर ली. उस ने कहा, ‘‘हां, मैं ने ही अपने बेटे को मारा है और मुझे इस का जरा भी अफसोस नहीं है. क्या करती, नशे ने उसे आदमी से हैवान बना दिया था. उस का मर जाना ही बेहतर था.’’

इस के बाद मनजीत कौर ने निरमैल की हत्या की पूरी कहानी सुना दी. पूरी कहानी सुनने के बाद पुलिस ने मजिस्ट्रेट सुखदेव सिंह की मौजूदगी में आंगन की खुदाई कर के निरमैल सिंह की लाश बरामद कर के पोस्टमार्टम के लिए भिजवा दी. हत्या में सहयोग करने वाली राज कौर, उस के पति किशन सिंह, किराएदार रविंद्र सिंह को भी गिरफ्तार कर लिया गया. पुलिस ने सभी को अदालत में पेश किया, जहां से उन्हें न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया. Punjab News

— कथा पुलिस सूत्रों पर आधारित

Crime Kahani : आधी-अधूरी प्रेम कहानी – दोस्त ही निकला हत्यारा

Crime Kahani : 7 फरवरी, 2020 की बात है. उस दिन दिल्ली में सुरक्षा व्यवस्था पूरी तरह से चाकचौबंद थी. इस की वजह यह थी कि अगले दिन यानी 8 फरवरी को दिल्ली में विधानसभा चुनाव होने थे. पूर्वी दिल्ली के पटपड़गंज इंडस्ट्रियल एरिया थाने में तैनात महिला एसआई प्रीति अहलावत भी अपनी ड्यूटी पूरी कर के घर चली गई थीं. वह दिल्ली के रोहिणी इलाके में किराए के मकान में रहती थीं. ड्यूटी पर वह मैट्रो से आतीजाती थीं. उस दिन भी वह मैट्रो से रोहिणी जाने के लिए निकल गईं.

करीब साढ़े 9 बजे वह रोहिणी (पूर्व) मैट्रो स्टेशन पर उतरीं. वहां से वह पैदल ही अपने घर की ओर चल दीं. अभी वह 50 मीटर ही चल पाई थीं कि किसी ने उन के बराबर में आ कर उन पर गोलियां चला दीं. प्रीति को सोचनेसमझने का मौका तक नहीं मिला. हमलावर ने उन पर 3 गोलियां चलाई थीं, जिन में से 2 गोलियां प्रीति को लगीं और एक गोली बराबर से गुजर रही कार के पिछले शीशे में जा लगी. एक गोली प्रीति के सिर में लगी थी, जिस से वह नीचे गिर गईं और तत्काल उन की मौत हो गई.

उधर से गुजर रहे लोगों ने जब यह देखा तो किसी ने 100 नंबर पर दिल्ली पुलिस कंट्रोल रूम में फोन कर के सूचना दे दी. कुछ ही देर में पुलिस वहां पहुंच गई. पुलिस को जब पता चला कि वह युवती दिल्ली पुलिस में सबइंसपेक्टर है तो पुलिस कंट्रोल रूम की टीम आश्चर्यचकित रह गई.

सूचना रोहिणी जिले के डीसीपी और अन्य पुलिस अधिकारियों को दे दी गई. जिस युवती को गोली मारी गई थी, उस के आईडी कार्ड से पता चला कि उस का नाम प्रीति अहलावत है. उस के सिर में गोली लगी थी. देखने में लग रहा था कि उस की मौत हो चुकी है. फिर भी पुलिसकर्मी आननफानन में नजदीकी डा. अंबेडकर अस्पताल ले गए, जहां डाक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया. अगले दिन दिल्ली में विधानसभा चुनाव होने थे. ऐसे में दिल्ली पुलिस की एक अफसर की गोली मार कर हत्या कर देना एक बड़ी बात थी. कुछ ही देर में दिल्ली पुलिस के वरिष्ठ अधिकारी अस्पताल पहुंचने लगे.

अधिकारियों ने घटनास्थल का निरीक्षण किया. क्राइम इनवैस्टीगेशन टीम ने भी घटनास्थल पहुंच कर आवश्यक सबूत जुटाए. मौके से गोली के 3 खाली खोखे बरामद हुए. पता चला कि मृत महिला पुलिस अफसर की ड्यूटी पूर्वी दिल्ली के थाना पटपड़गंज क्षेत्र में थी और वह मूलरूप से हरियाणा के रोहतक जिले की रहने वाली थीं. पुलिस के सीनियर अधिकारियों ने इस घटना को बहुत गंभीरता से लिया. फोन द्वारा हत्या की सूचना मृतका के घर वालों को दे दी गई थी. इस केस को खोलने के लिए तेजतर्रार पुलिस अधिकारियों को लगा दिया गया.

जिस जगह पर एसआई प्रीति को गोली मारी गई थी, पुलिस ने रात में ही उस क्षेत्र में सीसीटीवी कैमरों की फुटेज निकलवाई. फुटेज को गौर से देखा गया तो उस में एक युवक संदिग्ध अवस्था में दिखाई दिया.

अज्ञात हत्यारे ने मारी गोली

पता चला कि प्रीति जब रोहिणी (पूर्व) मैट्रो स्टेशन से उतर कर अपने घर जाने के लिए पैदल निकली तो उस युवक ने उन का पीछा करना शुरू कर दिया था. कुछ दूर चल कर वह युवक तेज कदमों से प्रीति के पास आया और नजदीक जा कर उस पर गोली चला दी. इस के बाद वह तेजी से पैदल चल कर कुछ दूर खड़ी कार के नजदीक पहुंचा और फरार हो गया. युवक कौन था, पुलिस इस का पता लगाने में जुट गई. प्रीति जिस थाने में तैनात थीं, जांच टीम ने वहां के पुलिसकर्मियों और प्रीति के मातापिता से बात कर कुछ क्लू तलाशने की कोशिश की.

टीम को जानकारी मिली कि प्रीति और दिल्ली पुलिस के ही एक एसआई दीपांशु राठी के बीच बहुत अच्छी दोस्ती थी, लेकिन पिछले कुछ दिनों से प्रीति ने दीपांशु से दूरियां बना ली थीं. यह दूरियां क्यों बनीं, इस की जानकारी पुलिस टीम को नहीं मिल सकी. 26 वर्षीय एसआई प्रीति अहलावत की हत्या की वजह कहीं दीपांशु ही तो नहीं है, यह पता लगाना जरूरी था. पुलिस ने दीपांशु के बारे में रात में ही छानबीन की तो पता चला उस की पोस्टिंग उत्तरपूर्वी दिल्ली के थाना भजनपुरा में है.

एसआई दीपांशु के फोन को पुलिस ने सर्विलांस पर लगा दिया. उस के फोन की लोकेशन दिल्ली से सोनीपत होते हुए आगे बढ़ रही थी. पुलिस जांच टीम एसआई दीपांशु के फोन के आधार पर उन का पीछा करने लगी. क्योंकि दीपांशु से पूछताछ करने के बाद ही जांच टीम अगला कदम उठा सकती थी. रोहिणी जिले के डीसीपी एस.डी. मिश्रा अलगअलग दिशा में काम कर रही पुलिस टीमों के संपर्क में थे. उन के निर्देशन में ही टीमें काम कर रही थीं.

एसआई दीपांशु के फोन की लोकेशन मुरथल के पास जा कर स्थिर हो गई. वैसे वह रहने वाले सोनीपत के थे. इस से पुलिस ने अंदाजा लगाया कि वह भजनपुरा थाने से अपनी ड्यूटी खत्म करने के बाद शायद अपने घर चला गया होगा. फिर भी पुलिस को दीपांशु से मिल कर पूछताछ करना जरूरी था. लिहाजा 8 फरवरी को सुबह पुलिस टीम उस स्थान पर पहुंच गई, जहां दीपांशु के फोन की लोकेशन मिल रही थी. लोकेशन ट्रेस करते हुए जांच टीम मुरथल के पास सड़क किनारे खड़ी एक कार के पास पहुंची. उस कार में ध्यान से देखा तो दीपांशु ड्राइविंग सीट पर मृत पड़ा था. उस के हाथ में सरकारी रिवौल्वर थी और उस की कनपटी से खून निकल रहा था. साफ दिखाई दे रहा था कि उस ने गोली मार कर आत्महत्या की थी.

28 वर्षीय एसआई दीपांशु राठी के सुसाइड करने की जानकारी टीम ने डीसीपी एस.डी. मिश्रा को दे दी. इस के बाद तो विभाग में हड़कंप मच गया. क्योंकि एक ही दिन में 2 युवा पुलिस अफसरों की मौत हुई थी. दीपांशु के सुसाइड करने के बाद यह बात स्पष्ट हो गई थी कि दीपांशु राठी ने ही प्रीति अहलावत को गोली मारने के बाद खुद की जीवनलीला खत्म कर ली थी.

सूचना मिलने पर दिल्ली पुलिस के अधिकारी भी सकते में आ गए कि ऐसा क्या हुआ जो दीपांशु ने इतना बड़ा कदम उठाया. फोन कर के यह सूचना दीपांशु के घर वालों को दे दी गई. दीपांशु का घर सोनीपत की शास्त्री कालोनी में था. यह दुखद समाचार सुन कर उस के पिता दयानंद राठी परिवार के अन्य लोगों के साथ घटनास्थल पर पहुंच गए.

अपने जवान बेटे की इस दुखद मौत पर वह बिलखबिलख कर रोते हुए कह रहे थे कि दीपांशु तो बहुत हिम्मत वाला था. उस ने ऐसा कदम क्यों उठा लिया. दयानंद राठी और अन्य लोगों से कुछ जरूरी पूछताछ करने के बाद पुलिस टीम दिल्ली लौट आई. सुबह होने पर प्रीति के पिता और घर के अन्य लोग भी दिल्ली पहुंच गए थे. प्रीति की हत्या से सभी गहरे सदमे में थे. उन्हें पता चला कि प्रीति को गोली किसी और ने नहीं बल्कि दिल्ली पुलिस के ही एसआई दीपांशु राठी ने मारी थी. इस के बाद उस ने खुद को भी गोली मार कर आत्महत्या कर ली थी.

करीबी फ्रैंड निकला हत्यारा

यह खबर मिलते ही मृतका के पिता बोले कि दीपांशु काफी दिनों से उन की बेटी को परेशान कर रहा था. इस की शिकायत उन्होंने उस के घर वालों से भी की थी, इस के बावजूद उस ने अपनी हरकतें बंद नहीं कीं और हमारी बेटी की जान ले ली. मृतका के घर के सभी लोगों का रोरो कर बुरा हाल था. किसी तरह पुलिस अधिकारियों ने उन्हें ढांढस बंधाया. फिर टीम ने उन से भी जरूरी पूछताछ की.

मृतकों के घर वालों और घनिष्ठ दोस्तों से पूछताछ करने के बाद जांच टीम ने यह पता लगाने की कोशिश की कि आखिर युवा एसआई दीपांशु राठी ने एसआई प्रीति की हत्या क्यों की और उन की हत्या कर के खुद सुसाइड क्यों कर लिया? इस जांच में पुलिस को पता चला कि दोनों पुलिस अफसरों के बीच प्रेम प्रसंग चला था. इन के प्रेम प्रसंग के बीच आखिर ऐसा क्या हो गया, दीपांशु को इतना खतरनाक कदम उठाना पड़ा. इस के पीछे की जो कहानी निकल कर सामने आई, वह हैरान कर देने वाली थी—

दीपांशु राठी हरियाणा के सोनीपत शहर की शास्त्री कालोनी के रहने वाले दयानंद राठी का बेटा था. दयानंद राठी भी हरियाणा पुलिस में थे. करीब 4 महीने पहले वह एसआई के पद से रिटायर हुए थे. दीपांशु के अलावा उन की एक बेटी थी, जिस की शादी हो चुकी थी. सन 2018 में दीपांशु का चयन दिल्ली पुलिस में एसआई पद पर हो गया था. ट्रेनिंग के दौरान ही दीपांशु की मुलाकात एसआई की ट्रेनिंग कर रही प्रीति अहलावत से हुई थी. दोनों एक ही बैच के थे. प्रीति अहलावत मूलरूप से हरियाणा के जिला रोहतक की रहने वाली थी.

प्रीति के पिता सीमा सुरक्षा बल में थे जोकि रिटायर हो चुके थे. प्रीति की मां और बड़ी बहन टीचर हैं जबकि भाई न्यूजीलैंड में कंप्यूटर इंजीनियर है. कुल मिला कर वह एक अच्छे परिवार से थी. ट्रेनिंग पूरी होने के बाद प्रीति ने दिल्ली के रोहिणी में किराए का फ्लैट ले कर रहना शुरू कर दिया था. ट्रेनिंग के दौरान हुई प्रीति और दीपांशु की मुलाकात धीरेधीरे दोस्ती में बदलती गई. जून 2019 तक दोनों गहरे दोस्त बन गए. दोनों ही पुलिस अफसर बन चुके थे और अपने भविष्य के बारे में अच्छी सोचसमझ रखते थे. धीरेधीरे इन युवा पुलिस अफसरों के दिलों में एकदूसरे के प्रति चाहत पैदा हो गई यानी एकदूसरे को प्यार करने लगे. दीपांशु ने तो तय कर लिया था कि वह शादी करेगा तो प्रीति से.

अपनीअपनी ड्यूटी से फारिग हो कर दोनों प्यार की बातें करने के लिए रेस्टोरेंट व अन्य जगहों पर जाने लगे. प्रीति को भी दीपांशु अपना हमसफर लगने लगा था. दोनों के दोस्त भी उन की इस गहरी दोस्ती की सच्चाई जानते थे. दोनों का कई महीनों तक प्रेम प्रसंग चलता रहा. उन्होंने शादी करने का फैसला कर लिया था. लेकिन दोनों ही इस बात के पक्ष में थे कि शादी घर वालों की सहमति के बाद सामाजिक रीतिरिवाज से ही हो. लिहाजा दोनों ने अपने मन की बात अपनेअपने घर वालों को भी बता दी.

दोनों के परिवार पढ़ेलिखे, समझदार और खातेपीते थे. उन दोनों के प्रेम को देख कर दोनों पक्षों ने शादी के लिए सहमति दे दी. घर वालों की इजाजत मिल जाने से दीपांशु और प्रीति खूब खुश थे. अपनी हदों में रह कर दोनों एकदूसरे को प्यार करते रहे. इस के बाद उन के मिलने का सिलसिला बढ़ गया. दीपांशु के बात करने का लहजा भी पहले से बदल गया था. वह अभी से प्रीति पर पति जैसा अधिकार जताने वाली बातें करने लगा था. कुछ दिनों तक प्रीति उस के इस व्यवहार को नजरअंदाज करती रही, लेकिन जब उस की यह आदत कम होने के बजाए बढ़ने लगी तो प्रीति को उस का इस तरह का व्यवहार चुभने लगा.

बदल गई प्रीति की सोच

प्रीति ने सोचा कि अभी तो शादी भी नहीं हुई है और दीपांशु इस तरह की बातें करता है. अगर साथ शादी हो गई तब तो वह उस का जीना हराम कर देगा. दीपांशु की यही बातें प्रीति को अखरने लगीं और उस ने तय कर लिया कि वह दीपांशु से शादी हरगिज नहीं करेगी. अपने इस फैसले से प्रीति ने अपने मातापिता को भी अवगत करा दिया. मांबाप ने भी फैसला बेटी पर छोड़ दिया कि उसे जो अच्छा लगे, करे. इतना ही नहीं, प्रीति के पिता ने दीपांशु से शादी न करने वाली बात दीपांशु के पिता को भी बता दी.

उधर दीपांशु को जब प्रीति के फैसले की जानकारी हुई तो उस ने प्रीति को समझाने की कोशिश की, लेकिन उस ने साफ कह दिया कि वह उसे हमेशा के लिए भूल जाए. प्रीति ने दीपांशु का फोन नंबर अपने फोन में विकीपीडिया के नाम से सेव कर रखा था. अब उस ने उस से मिलना तो दूर फोन पर बात करनी भी बंद कर दी. यह बात दिसंबर 2019 की है. उधर दीपांशु तो प्रीति के प्यार में दीवाना बन गया था. प्रीति को भुला देना उस के लिए आसान नहीं था. प्रीति द्वारा उस का फोन तक रिसीव न करने पर वह बहुत परेशान रहने लगा. वह कोशिश करता कि किसी तरह प्रीति गुस्सा थूक कर मान जाए और संबंध पहले की तरह सामान्य हो जाएं. लेकिन प्रीति अपने फैसले पर अटल रही.

3 जनवरी, 2020 को दीपांशु ने मैसेज भेज कर प्रीति को मिलने के लिए बुलाया. लेकिन प्रीति ने उस से मिलने से न सिर्फ इनकार कर दिया बल्कि दीपांशु का फोन नंबर ही ब्लौक कर दिया. प्रीति की पोस्टिंग पटपड़गंज इंडस्ट्रियल एरिया थाने में थी’दीपांशु थाना भजनपुरा में तैनात था. दीपांशु ने एकदो बार प्रीति के थाने जा कर उस से मिलने की कोशिश की लेकिन प्रीति ने मिलने से इनकार कर दिया. दीपांशु प्रीति से मिल कर किसी भी तरह प्रीति को मनाना चाहता था, लेकिन उस की कोशिश कामयाब नहीं हो सकी. इस से वह बुरी तरह टूट गया. अचानक प्रीति उस से इतनी दूरी बना लेगी, ऐसा उस ने कभी सोचा भी नहीं था.

ऐसे में उस की समझ में नहीं आ रहा था कि वह क्या करे. क्योंकि प्रीति ने उस के लिए अपने दिल का दरवाजा हमेशा के लिए बंद कर लिया था. ऐसे में उस के मन में नकारात्मक विचार पनपने लगे. इसी बीच उस ने एक ऐसा फैसला ले लिया, जिस का दुख न सिर्फ उस के घर वालों को बल्कि प्रीति के घर वालों को भी जिंदगी भर तक सालता रहेगा.

दीपांशु को इस बात की तो जानकारी थी कि प्रीति ड्यूटी पूरी करने के बाद रोहिणी स्थित अपने फ्लैट पर किस रास्ते से जाती है. घटना से 2 दिन पहले दीपांशु किसी केस के सिलसिले में उत्तर प्रदेश गया था. तब वह थाने से सरकारी पिस्टल ले गया था. वहां से लौटने के बाद उस ने वह पिस्टल और गोलियां जमा नहीं कराई थीं. इस की वजह यह थी कि उसे इस पिस्टल से अपनी योजना को अंजाम देना था. 7 फरवरी को अपनी ड्यूटी पूरी कर के दीपांशु अपनी कार से रोहिणी (पूर्व) मैट्रो स्टेशन पहुंचा. वहां उस ने कार एक जगह सड़क किनारे खड़ी कर दी. इस के बाद वह एक जगह खड़े हो कर प्रीति के आने का इंतजार करने लगा. उसे पता था कि प्रीति अपनी ड्यूटी के बाद 9 साढ़े 9 तक मैट्रो स्टेशन पहुंच जाती है.

साढ़े 9 बजे के करीब प्रीति मैट्रो स्टेशन से उतरने के बाद जैसे ही अपने फ्लैट की तरफ पैदल चली, तभी दीपांशु ने उस का पीछा करना शुरू कर दिया और फिर उस के नजदीक पहुंच कर प्रीति पर अपनी सरकारी पिस्टल से 3 फायर किए, जिस में एक गोली उधर से गुजर रही कार के पिछले शीशे में जा कर लगी. प्रीति के सिर में जो गोली लगी थी, उसी से उस की मौत हो गई. वारदात को अंजाम देने के बाद दीपांशु अपनी कार के पास पहुंचा और वहां से अपने घर की तरफ (सोनीपत) चल दिया. मुरथल के पास पहुंच कर उस ने उसी पिस्टल से खुद को भी गोली मार ली. पुलिस को दीपांशु की कार से कोई सुसाइड नोट नहीं मिला था.

पोस्टमार्टम रिपोर्ट से भी इस बात की पुष्टि हो गई कि दीपांशु और प्रीति की मौत दीपांशु को थाने से इश्यू की गई सरकारी पिस्टल से चलाई गई गोलियां से हुई थी. चूंकि हत्यारे ने खुद भी आत्महत्या कर ली थी, इसलिए पुलिस इस मामले में फाइनल रिपोर्ट लगा दी. बहरहाल, थोड़ी सी नासमझी के कारण दोनों युवा पुलिस अफसरों को न सिर्फ अपनी जान गंवानी पड़ी, बल्कि घर वालों को भी ऐसा दुख दे दिया, जिसे वे जिंदगी भर नहीं भुला पाएंगे. Crime Kahani

—कथा पुलिस सूत्रों पर आधारित

Romance Kahani : पारुल और विकास की आड़ी-तिरछी प्रेम कहानी

Romance Kahani : पारुल और विकास के बीच नईनई जानपहचान हुई थी. दोनों ही ठाकुरगंज के होम्योपैथी अस्पताल में साफसफाई का काम करते थे. वैसे तो दोनों की मुलाकात कम ही होती थी, क्योंकि दोनों के काम करने का समय अलगअलग था. जब से दोनों के बीच एकदूसरे के प्रति लगाव बढ़ा था, समय निकाल कर दोनों मिलने और बातचीत करने की कोशिश करते थे. पारुल ने विकास को अपने बारे में सच बता दिया था. विकास के साथ उस का ऐसा लगाव था कि वह उस से कोई बात छिपाना नहीं चाहती थी.

एक दिन पारुल अपने बारे में बता रही थी और विकास उस की बातें सुन रहा था. पारुल बोली, ‘‘मेरी शादी को 14 साल हो गए. कम उम्र में शादी हो गई थी. मेरे 3 बच्चे भी हैं. मैं सोचती हूं कि जब हम दोस्ती कर रहे हैं तो एकदूसरे की हर बात को समझ लें.

‘‘मेरे पति तो जेल में हैं. ससुराल वालों से मेरा कोई संपर्क नहीं रह गया है. मैं अपने 3 बच्चों का पालनपोषण अपनी मां के पास रह कर करती हूं.’’

शाम का समय था. विकास और पारुल ठाकुरगंज से कुछ दूर गुलालाघाट के पास गोमती के किनारे बैठे थे. दोनों ही एकदूसरे से बहुत सारी बातें करने के मूड में थे. दोनों को कई दिनों बाद आपस में बात करने का मौका मिला था.

‘‘तुम्हारी शादी हो चुकी है तो मैं भी कुंवारा नहीं हूं. मैं बरेली से यहां नौकरी करने आया था. मेरी शादी 8-9 महीने पहले हुई है. शादी के कुछ महीने बाद से ही पत्नी के साथ मेरे संबंध ठीक नहीं रहे. मैं 5 महीने से अलग रह रहा हूं.

‘‘मेरी पत्नी की भी मेरे साथ रहने की कोई इच्छा नहीं है. ऐसे में मैं उस के साथ रहूं या नहीं, कोई फर्क नहीं पड़ता.’’ पारुल की बातें सुन कर विकास ने कहा.

‘‘आप की शादी तो पिछले साल ही हुई है, फिर भी आप पत्नी को छोड़ मुझे पसंद करते हैं. ऐसा क्यों?’’ पारुल ने विकास से पूछा.

‘‘शादी के बाद से ही पत्नी से मेरे आत्मिक संबंध नहीं रह सके. पतिपत्नी होते हुए भी ऐसा लगता था जैसे हम एकदूसरे से अनजान हैं. जब से आप मिलीं, आप से अपनापन लगने लगा. मैं अपनी पत्नी के साथ खुश नहीं हूं. हम दोनों ही अलग हो जाना चाहते हैं.’’ विकास ने पारुल की बात का जबाव दिया.

विकास बरेली जिले के प्रेम नगर का रहने वाला था. वह नौकरी करने लखनऊ आया था. रश्मि के साथ उस की शादी 2018 के जून में हुई थी. 4-5 महीने दोनों साथ रहे, पर इस के बाद वह पत्नी से अलग रहने लगा. पारुल और विकास की मुलाकात साल 2019 के जून में हुई थी. शुरुआती कई महीनों तक दोनों में बातचीत नहीं होती थी. दोनों बस एकदूसरे को देखते रहते थे. जब बातचीत होने लगी और एकदूसरे की पंसद नापसंद पर बात हुई तो पहले पारुल ने खुद को शादीशुदा बताया. तब विकास ने हंसते हुए कहा, ‘‘शादीशुदा तो मैं भी हूं. लेकिन बच्चे नहीं हैं. हमारी शादी पिछले साल हुई थी.’’

जब पता चला कि दोनों ही शादीशुदा हैं तो वे निकट आने लगे. दोनों ही अपनेअपने जीवनसाथी के साथ खुश नहीं थे. पारुल का पति रिंकू आटोरिक्शा चलाता था. शादी के 7 साल बाद परिवार में हुई हत्या में रिंकू को जेल हो गई. उस समय तक पारुल के 3 बच्चे मुसकान, पवन और गगन हो चुके थे. पति के जेल जाने के बाद उस की सुसराल वालों ने उस से संबंध नहीं रखे. पारुल अपने बच्चों को ले कर अपनी मां सुषमा के साथ रहने लगी. वहीं पर पारुल ने अपने बच्चों का स्कूल में एडमिशन करा दिया. अब पारुल पर मां का दबाव रहता था. वह उस की एकएक गतिविधि पर पूरी नजर रखती थी.

इधर धीरेधीरे पारुल और विकास के बीच नजदीकियां बढ़ने लगीं. सही मायनों में दोनों ही एकदूसरे की जरूरतों को पूरा करने लगे थे. एकदूसरे के साथ दोनों का पूरी तरह से तालमेल बैठ गया था. कभी साथ घूमने जाते तो कभी एक साथ फिल्म देखते. जब पारुल की मां को जानकारी मिली तो उस ने पारुल को समझाया और ऐसे संबंधों से दूर रहने को कहा. पर पारुल मानने को तैयार नहीं थी. कुछ दिन बाद दोनों फिर मिलने लगे. पारुल की मां सुषमा को लग रहा था कि विकास उन की बेटी को बहका कर अपने साथ रखता है. पारुल और विकास के संबंधों को ले कर मोहल्ले के लोगों और नातेरिश्तेदारों में भी चर्चा होने लगी थी.

दूसरी ओर पारुल को विकास के साथ संबंधों की लत लग चुकी थी. वह किसी भी स्थिति में विकास से दूर नहीं रहना चाहती थी. विकास भी पूरी तरह पारुल का दीवाना हो चुका था. जब पारुल की मां और करीबी रिश्तेदारों का दबाव पड़ने लगा तो दोनों ने लखनऊ छोड़ने का फैसला कर लिया. पारुल के सामने सब से बड़ी परेशानी उस के बच्चे थे. प्यार के लिए पारुल ने उन का मोह भी छोड़ दिया. उस ने विकास से कहा, ‘‘अब हम साथ रहेंगे. हमारे बच्चे भी हमारे बीच में नहीं आएंगे. हम लोग यहां से कहीं दूर चलेंगे. बच्चे यहीं रहेंगे. जब समय ठीक होगा, तब हम वापस आ कर बच्चों को अपने साथ रख लेंगे.’’

विकास ने फैसला किया कि वह पारुल को ले कर अपने घर बरेली चला जाएगा. दिसंबर, 2019 की बात है. पारुल और विकास लखनऊ छोड़ कर बरेली चले आए. यहां दोनों साथ रहने लगे. पारुल के लखनऊ छोड़ने का सारा ठीकरा उस की मां सुषमा ने विकास के ऊपर फोड़ दिया. सुषमा ने लखनऊ की कृष्णानगर कोतवाली में जा कर एक प्रार्थनापत्र दिया और विकास पर अपनी बेटी पारुल को बहलाफुसला कर भगा ले जाने का आरोप लगाया. पुलिस ने प्रार्थनापत्र रख लिया.

पुलिस ने रिपोर्ट लिखने की जगह एनसीआर दर्ज की. पुलिस का मानना था कि पारुल बालिग है, 3 बच्चों की मां है और अपना भलाबुरा समझती है. वह जहां भी गई होगी, अपनी मरजी से गई होगी. कई माह बीत जाने के बाद भी जब पुलिस ने कोई काररवाई नहीं की तो पारुल की मां सुषमा ने कोर्ट की शरण ली. 14 अगस्त, 2020 को कोर्ट ने पुलिस को धारा 498 और 506 के तहत मुकदमा कायम करने का आदेश दिया.

पुलिस ऐसे मामलों की विवेचना 155 (2) के तहत करती है. इस में किसी तरह का कोई वारंट जारी नहीं होता. पुलिस दोनों को कोर्ट के सामने पेश करती है, जहां दोनों कोर्ट के सामने बयान देते हैं. कोर्ट अपने विवेक से फैसला देती है. 20 सितंबर, 2020 की रात लखनऊ के थाना कृष्णानगर के दरोगा भरत पाठक एक सिपाही और विकास व पारुल के 2 रिश्तेदारों को साथ ले कर बरेली गए. पुलिस रात में ही पारुल और विकास को कार से ले कर लखनऊ वापस लौटने लगी.

पुलिस द्वारा लखनऊ लाए जाने की बात पारुल और विकास को पता चल चुकी थी. उन के मन में भय था कि लखनऊ ले जा कर पुलिस दोनों को अलग कर देगी, जेल भी भेज सकती है. पारुल ने अपने पति को देखा था. हत्या के आरोप में 8 साल बाद भी वह जेल से बाहर नहीं आ सका था. विकास सीधासादा था, उसे भी पुलिस, जेल और कचहरी के चक्कर से डर लग रहा था. ऐसे में दोनों ने फैसला किया कि वे साथ रह नहीं सकते तो साथ मर तो सकते हैं.

रात के समय जब पुलिस ने लखनऊ चलने के लिए कहा तो दोनों ने तैयार होने का समय मांगा. पारुल ने अपने पास कीटनाशक दवा की 4 गोली वाला पैकेट रख रखा था. दोनों कपड़े पहन कर वापस आए तो पुलिस ने पारुल की तलाशी नहीं ली. पुलिस की दिक्कत यह थी कि वह अपने साथ कोई महिला सिपाही ले कर नहीं आई थी, जिस से उस की तलाशी नहीं ली जा सकी. पुलिस ने पारुल विकास को अर्टिगा गाड़ी में बैठाया और बरेली से लखनऊ के लिए निकल गई. आगे की सीट पर दारोगा भरत पाठक और एक सिपाही बैठा था. पीछे वाली सीट पर विकास और पारुल को बैठाया गया था, जबकि बीच की सीट पर दोनों के रिश्तेदार बैठे थे.

गाड़ी बरेली से चली तो रात का समय था. ड्राइवर को छोड़ कर सभी लोग सो गए. अपनी योजना के मुताबिक पारुल और विकास ने कीटनाशक की 2-2 गोलियां खा लीं. कुछ ही देर में दोनों को उल्टी होने लगी. पुलिस वालों को लगा कि गाड़ी में बैठ कर अकसर कई लोगों को उल्टी होेने लगती है, शायद वैसा ही कुछ होगा. जब गाड़ी सीतापुर पहुंची तो सो रहे लोगों की नींद खुली. पीछे की सीट से उल्टी की बदबू आ रही थी. आगे की सीट पर बैठे लोगों ने पारुल और विकास को आवाज दी, पर दोनों में से कोई नहीं बोला. पास से देखने पर पता चला दोनों बेसुध हैं. दोनों की तलाशी ली गई. उन के पास कीटनाशक दवा का एक पैकेट मिला, जिस में 2 गोलियां शेष बची थीं.

इस से पता चल गया कि दोनों ने वही दवा खाई है. लखनऊ पहुंच कर पुलिस दोनों को ले कर लखनऊ मैडिकल कालेज के ट्रामा सेंटर पहुंची, जहां डाक्टरों ने दोनों को मृत घोषित कर दिया. दो प्रेमियों के आत्महत्या करने का मसला पूरे लखनऊ में चर्चा का विषय बन गया. शुरुआत में विकास और पारुल के घर वालों ने पुलिस पर लापरवाही का आरोप लगाया. बाद में उन्हें भी लगा कि पुलिस, कचहरी और कानून के डर से पारुल और विकास ने आत्महत्या की है.

विकास और पारुल दोनों ही बालिग थे. अपना भलाबुरा समझते थे. परिवार वालों ने अगर आपसी सहमति से समझाबुझा कर फैसला लिया होता तो दोनों को यह कदम नहीं उठाना पड़ता. इस तरह की घटनाएं नई नहीं हैं. ऐसे मामलों में पुलिस की प्रताड़ना प्रेमीजनों के मन में भय पैदा कर देती है. पुलिस, समाज और कचहरी के भय से प्रेमी युगल ऐसे कदम उठा लेते हैं. ऐसे में समाज और कानून दोनों को संवेदनशीलता से काम लेना चाहिए. Romance Kahani

—कथा पुलिस सूत्रों पर आधारित

Agra Crime News : बंद बोरे का खुला राज

Agra Crime News : अवैध संबंध अकसर अपराध को जन्म देते हैं. इतना सब जानते हुए भी सुनीता उर्फ सुषमा ने पति के रहते हुए मान सिंह से नाजायज संबंध बना लिए. इस के बाद जो हुआ, वह..

8 जून, 2021 की बात है. आगरा के थाना सदर के सेवला में रात के 11 बजे एक आदमी कंधे पर बोरा ले कर जा रहा था. अचानक बोरे के वजन के कारण उस का पैर फिसला और वह बोरे सहित  गिर पड़ा. इस पर वहां से निकल रहे लोगों की नजरें उस आदमी की तरफ गईं. वह किसी तरह उठा और बोरे को उठाने का प्रयास करने लगा. उसी समय बोरा खुल गया और उस में से एक हाथ बाहर निकल आया. यह देखते ही लोग उस की ओर दौड़े और उसे पकड़ लिया. बोरे को खुलवा कर देखा तो उस में एक युवक का शव था जिसे देख कर सभी के होश उड़ गए. बोरे में युवक की लाश मिलने से वहां सनसनी फैल गई. इस घटना की सूचना तुरंत पुलिस को दे दी गई.

सूचना मिलते ही थाना सदर के थानाप्रभारी अजय कौशल अपनी टीम के साथ घटनास्थल पर पहुंच गए. वहां लोग एक व्यक्ति को पकड़े हुए थे. यह माजरा देखते ही उन्होंने वहां मौजूद लोगों से जानकारी ली. लोगों ने बताया कि यही व्यक्ति कंधे पर बोरे में किसी की लाश ले कर जा रहा था. वजन के कारण वह बोरे सहित गिर गया. बोरा खुलने से लाश के बारे में पता चला. पुलिस ने देखा बोरे में एक युवक की लाश थी. शव की पहचान 40 वर्षीय जूता कारीगर संजय के रूप में हुई. पुलिस ने शव की पहचान होने के बाद उस के घरवालों को सूचना दी. जानकारी होते ही परिवार में कोहराम मच गया.

इस बीच घटना की जानकारी थानाप्रभारी द्वारा अपने उच्च अधिकारियों को दी गई. सूचना मिलते ही एसपी (सिटी) रोहन प्रमोद बोत्रे वहां पहुंच गए. उन्होंने लाश का निरीक्षण किया. युवक के गले  पर चोट के निशान दिखाई दे रहे थे. मौके की जरूरी काररवाई निपटा कर पुलिस ने शव को मोर्चरी भिजवा दिया. प्रेमी हुआ गिरफ्तार पुलिस पकड़े गए युवक मान सिंह को हिरासत में ले कर थाने लाई. थाने पर उस से पूछताछ की गई. जानकारी देने पर पुलिस ने रात में ही मृतक संजय के घर पहुंच कर उस की 35 वर्षीय पत्नी सुनीता उर्फ सुषमा से पूछताछ की.

सुनीता ने बताया कि वह दवा लेने गई हुई थी. जब लौट कर आई तो पति संजय घर पर नहीं मिले. उस ने सोचा कि कहीं गए होंगे. जब देर हो गई तो उस ने पति की तलाश शुरू की. बाद में पता चला कि उस के जाने के बाद पति की किसी ने हत्या कर दी थी. उधर हिरासत में लिए गए युवक ने बिना कुछ छिपाए पुलिस को सच्चाई बता दी. उस ने हत्या का जुर्म कुबूल कर लिया. उस ने बताया कि मृतक संजय की पत्नी से उस के प्रेम संबंध हैं. पति विरोध करता था.  हम दोनों के प्यार के बीच संजय रोड़ा बना हुआ था. वह अपनी पत्नी के साथ मारपीट करता था. मुझे भी घर आने से मना करता था. इसलिए हम दोनों ने मिल कर उस की हत्या कर दी.

वह शव को बोरे में बंद कर ठिकाने लगाने ले जा रहा था. लेकिन बोरे के गिर जाने से भेद खुल गया. पुलिस समझ गई कि मृतक की पत्नी सुनीता इस हत्याकांड में शामिल होने के बावजूद अपने को निर्दोष बता रही है. जबकि उस के प्रेमी मान सिंह ने पुलिस को सारी हकीकत बता दी थी. पुलिस ने सुनीता को भी गिरफ्तार कर लिया और फोरैंसिक टीम को बुला लिया. टीम ने मृतक के घर से कई साक्ष्य जुटाए. 9 जून, 2021 को प्रैस कौन्फ्रैंस में एसएसपी मुनिराज जी. ने इस हत्याकांड का खुलासा करते हुए हत्या में शामिल मृतक की पत्नी सुनीता उर्फ सुषमा व उस के 38 वर्षीय प्रेमी मान सिंह की गिरफ्तारी की जानकारी दी. संजय की हत्या के पीछे जो कहानी निकल कर आई वह 4 प्रेमियों के प्यार के बीच कांटा बनने की इस प्रकार निकली—

मृतक संजय आगरा की एक जूता फैक्ट्री में कारीगर था. वह मूलरूप से निबोहरा के मूसे का पुरा का रहने वाला है. देवरी रोड पर मकान ले कर वह परिवार सहित रहता था. उस के परिवार में पत्नी सुनीता सुषमा के अलावा 3 बच्चे भी हैं. कुछ समय पहले संजय ने अपना मकान बेच दिया. मकान बेचने के बाद वह सेवला में किराए का मकान ले कर रहने लगा. संजय शराब पीने का शौकीन था. वह शराब पी कर अकसर सुनीता से झगड़ा करता और उस के साथ मारपीट करता था. सुनीता की दोस्ती थाना सदर के ही टुंडपुरा के रहने वाले मान सिंह से थी. दोनों की मुलाकात कुछ महीने पहले हुई थी. दोस्ती गहरी हो गई. एकदूसरे को पसंद करने लगे.

धीरेधीरे दोनों का प्यार परवान चढ़ने लगा. सुनीता मान सिंह के साथ कई बार पति की गैरमौजूदगी में घूमने जा चुकी थी. संजय को यह जानकारी हो गई. वह पत्नी को भलाबुरा कहता था. उस के पास कोई सबूत नहीं था. इसलिए वह मौके की तलाश में रहता था. जब संजय पत्नी के साथ मारपीट करता तो मानसिंह बीच में पड़ कर मामला शांत करा देता. कई बार उस ने सुनीता को बचाया भी था. संजय शराब पी कर सुनीता से अभद्रता करता था. मान सिंह ने इसी बात का फायदा उठाया. सुनीता के प्रति सहानुभूति दिखाते हुए उसे अपनी बातों के जाल में फंसा लिया.

पति संजय को पत्नी की मान सिंह से दोस्ती पसंद नहीं थी. वह इस का विरोध करता था. जबकि मान सिंह व सुनीता के बीच प्रेम संबंध दिनप्रतिदिन पुख्ता होते जा रहे थे. दोनों एकदूसरे के बिना रह नहीं पाते थे. पति की आदतों से अब सुनीता को वह अपना दुश्मन दिखाई देता था. प्रेमी संग पकड़ी गई सुनीता सुनीता और मान सिंह को जब भी मौका मिलता दोनों तनमन की प्यास बुझा लेते थे. संजय को दोनों पर शक हो गया. एक दिन संजय ने दोनों को घर में आपत्तिजनक स्थिति में देख लिया. इस से मान सिंह तिलमिला कर रह गया. लेकिन वक्त की नजाकत को देखते हुए मान सिंह बिना कुछ बोले उस दिन वहां से चला गया. मान सिंह के जाने के बाद संजय ने सुनीता की पिटाई कर दी.

वह दोनों के संबंधों का विरोध करने लगा. सुनीता खून का घूंट पी कर रह गई थी. रंगेहाथों पकड़े जाने से वह विरोध की स्थिति में भी नहीं थी. संजय ने सुनीता को चेतावनी दी कि यदि मान सिंह से उस ने बात करते भी देख लिया तो दोनों को जान से मार देगा. सुनीता ने दूसरे दिन प्रेमी मान सिंह से पति द्वारा की गई पिटाई और धमकी के बारे में मोबाइल पर बताया. यह सुन कर मान सिंह का खून खौलने लगा. तब एक दिन सुनीता और मान सिंह ने अपने प्यार की राह के रोड़े को हटाने की योजना बनाई. सुनीता ने प्रेमी का प्यार पाने के लिए पति की हत्या की साजिश रची.

घटना वाले दिन सोमवार की शाम प्रेमी मान सिंह सुनीता से मिलने उस के घर गया. उस समय संजय भी घर पर मौजूद था. मान सिंह को देखते ही उस ने कहा, ‘‘जब मना कर दिया था फिर भी तू आ गया?’’

इस पर मानसिंह ने हंसते हुए कहा, ‘‘मैं तुम्हारे लिए तुम्हारी पसंद की चीज लाया हूं.’’ यह कहते हुए उस ने साथ लाई शराब की बोतल उसे दिखाई. मान सिंह जानता था कि संजय की कमजोरी शराब है. इसलिए वह बेधड़क घर आ गया था. मान सिंह और सुनीता ने  संजय को जम कर शराब पिलाई. जब वह नशे में बेसुध हो गया तब दोनों ने उस के गले में दुपट्टा डाल कर कस दिया. दोनों ने गला घोट कर उस की हत्या कर दी. इस से पहले सुनीता ने बच्चों को खाना खिलाया और उन्हें कमरे में टीवी चला कर बैठा दिया. कमरे की बाहर से कुंडी लगा दी थी. हत्या के बाद दोनों ने शव को बोरे में बंद कर दिया. सुनीता ने प्रेमी मान सिंह से पति की लाश इलाके से दूर ले जा कर किसी तालाब में फेंकने को कहा. ताकि लोगों को लगे कि पानी में डूबने से उस की मौत हुई है.

तब मान सिंह शव को बोरे में भर कर कंधे पर रख उसे फेंकने के लिए रात में ही चल पड़ा. जब वह शव को ठिकाने लगाने जा रहा था तभी रास्ते में पैर फिसलने से बोरा गिर गया और हत्या का भेद खुल गया. प्रेमी मान सिंह द्वारा लाश फेंकने से पहले ही लोगों ने उसे रंगेहाथों दबोच लिया. आशिकी में पत्नी ने पति की हत्या करा दी थी. सुनीता को अपने पति की हत्या का कोई अफसोस नहीं था. अपने प्यार की खातिर प्रेमी के साथ मिल कर पति की हत्या करने वाली सुनीता के चेहरे पर गिरफ्तारी के बाद भी पछतावे के भाव नहीं दिखाई दिए.

इतना ही नहीं, पति की हत्या के मामले में पकड़े जाने पर बच्चों का क्या होगा? उस ने इस बारे में भी नहीं सोचा. मगर जब उसे पता चला कि अब उस की और प्रेमी दोनों की बाकी जिंदगी जेल में कटेगी तो वह रोने लगी. सुनीता की शादी को 10 साल से अधिक हो गए थे. 3 बच्चों में सब से बड़ा बेटा 9 साल का है. लोगों की सतर्कता के चलते पुलिस ने एक हत्या का परदाफाश घटना के कुछ घंटे बाद ही कर दिया था. पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से फंदा लगाने वाला दुपट्टा, मृतक का मोबाइल फोन और आधार कार्ड बरामद कर दोनों को न्यायालय के समक्ष पेश किया, जहां से दोनों को जेल भेज दिया गया. Agra Crime News

—कथा पुलिस सूत्रों पर आधारित

 

UP Crime News : बेवफा बीवी बरदास्त नहीं

UP Crime News : दीक्षा की खूबसूरती पर फिदा हो कर ही हरेंद्र ने उस से विवाह किया था. लेकिन शादी के कुछ दिनों बाद ही हरेंद्र को शक हो गया कि पत्नी के अन्य कई लोगों के साथ संबंध हैं. इस की पुष्टि उसे पत्नी के फोन के काल रिकौर्डर की बातों से हो गई. फिर क्या था, उस ने बेवफा पत्नी को बीच सड़क पर ऐसी सजा दी कि…

हरेंद्र और दीक्षा की शादी के 2 साल हो चुके थे, मगर उन के बीच अटूट रिश्ता नहीं बन पाया था. वे पतिपत्नी जरूर थे, लेकिन यह कहना गलत होगा कि वे एकदूसरे को बेइंतहा मोहब्बत करते थे. कारण हरेंद्र की कई आदतें दीक्षा को पसंद नहीं थीं और हरेंद्र को भी दीक्षा का बारबार मायके जाने की जिद करना अच्छा नहीं लगता था. एक तरफ दीक्षा की 17-18 साल की कच्ची उम्र थी तो वहीं दूसरी तरफ कामधंधे से बेफिक्र हरेंद्र को अपनी पुश्तैनी धनसंपत्ति पर बहुत ही गुमान था. रक्षाबंधन के एक सप्ताह पहले से ही दीक्षा मायके जाने की जिद करने लगी थी, जबकि हरेंद्र उस की बात को टालने लगा था. वह दीक्षा के मायके जाने का कारण जान गया था. उस के मोबाइल फोन में रिकौर्ड बातों से उस का संदेह और भी गहरा हो गया था.

‘‘मुझे मायके जाना है तो जाना है… मैं और कोई बहाना नहीं सुनूंगी.’’ दीक्षा अपनी बात पर अड़ती हुई बोली.

‘‘पिछले महीने ही तो तुम मायके गई थी…’’ हरेंद्र ने कहा.

‘‘गई थी, लेकिन 4 दिन बाद रक्षाबंधन है…राखी पर घर जाना है…सभी जाते हैं,’’ दीक्षा विफरती हुई बोली.

‘‘सभी जाते हैं तो क्या हुआ? आनेजाने में खर्च भी तो होगा.’’ हरेंद्र ने कहा.

‘‘तो मैं क्या करूं? कोई काम क्यों नहीं करते हो? कमातेधमाते क्यों नहीं हो?’’ दीक्षा बोली.

‘‘नहीं कमाता हूं तो क्या तुम्हें भूखा रखता हूं? खानेपहनने के लिए नहीं देता हूं? 2 महीने पहले ही तुम्हें 10 हजार रुपए का स्मार्टफोन खरीद कर दिया है.’’

‘‘वो तो तुम्हारा फर्ज बनता है पत्नी को खुश रखना और उस की अच्छी देखभाल करना,’’ दीक्षा बोली.

‘‘तुम हो तो पांचवीं फेल, पर बातें पढ़़ेलिखों जैसी करती हो. मुझे ही अधिकार और फर्ज का पाठ पढ़ा रही हो. तुम्हारा क्या कर्तव्य है, कभी समझा है?’’ हरेंद्र ने जवाबी हमला बोलते हुए ताना मारा.

‘‘तुम ने भी हमारी बात कभी नहीं मानी, जब देखो तब शराब के नशे में धुत रहते हो. बापदादा की कमाई पर गुजारा कर रहे हो, आवारा दोस्तों के साथ घूमतेफिरते रहते हो और कितने ऐब गिनवाऊं, बताओ…’’ दीक्षा लगातार बोलती जा रही थी. उस की एकएक बात हरेंद्र को चुभ रही थी. गुस्से में उस ने हाथ उठाया और एक थप्पड़ उस के गाल पर जड़ दिया. थप्पड़ खा कर दीक्षा तिलमिला गई. तन कर बोलने लगी, ‘‘ऐंऽऽ तुम ने मुझे थप्पड़ मारा. अब तो मैं यहां एक पल भी रुकने वाली नहीं हूं. अभी के अभी मायके जाऊंगी. देखती हूं कि तुम कैसे रोकते हो मुझे.’’ यह कहती हुई दीक्षा अपने कमरे से बाहर जा कर सूखने के लिए फैले कपड़े समेटने लगी.

हरेंद्र भी गुस्से से कमरे से बाहर निकल आया. बाइक स्टार्ट की और कहीं चला गया. कहां गया, इस की जानकारी केवल उस के यारों को ही थी. 2 घंटे बाद घर लौटा तो देखा, दीक्षा मायके जाने के लिए अपने सामान के साथ तैयार बैठी थी. हरेंद्र के हाथ में एक थैला था. उस का गुस्सा शांत हो चुका था. उस ने थैला उसे देते हुए सौरी बोला. फिर कहा, ‘‘इस में तुम्हारी छोटी बहन शीतल और तुम्हारे लिए सलवारसूट के कपड़े हैं, मायके में सिलवा लेना.’’

इसी के साथ उस के चेहरे को दोनों हाथों से पकड़ कर अगले दिन सुबहसुबह मायके छोड़ आने का वादा किया. सलवारसूट का कपड़ा देख कर दीक्षा पति का थप्पड़ भूल गई. खुश हो कर बोली, ‘‘बहुत सुंदर है, तुम्हारे लिए चाय बना कर लाती हूं.’’

दीक्षा चली गई मायके अगले रोज वह अपने मायके चली गई. दीक्षा का मायका मुरादाबाद जिले की तहसील बिलारी के गांव मुडि़या राजा का था. वह अरविंद कुमार की बेटी थी. अरविंद कुमार के 2 बेटियों दीक्षा व शीतल के अलावा 2 बेटे अभिषेक व आयुष थे. दीक्षा बड़ी बेटी थी. उन्होंने दीक्षा का विवाह 28 नवंबर, 2019 को पास के ही गांव ढकिया नरू निवासी भागीरथ के बेटे हरेंद्र के साथ किया था. बात 18 अगस्त, 2021 की है. रात के समय करीब साढ़े 9 बजे थे. अरविंद  कुमार के पिता अतर सिंह अपनी पोतियों शीतल और दीक्षा के साथ घर पर थे.

उन दिनों उन का बड़ा बेटा अपने परिवार के साथ हिमाचल के सोलन में रह रहा था. उस की रोजीरोटी वहीं से चलती थी. और छोटा बेटा राजकुमार अपनी रिश्तेदारी में गया हुआ था और रक्षाबंधन की वजह से उस की पत्नी अपने मायके गई हुई थी. इस तरह से उस समय घर में केवल दीक्षा और उस की छोटी बहन शीतल ही थी. रात को दरवाजा खटखटाने की आवाज सुन कर अतर सिंह ने अपनी पोती को आवाज दी, ‘‘शीतल बेटा, देखो तो इस वक्त कौन आया है?’’

शीतल दादा की आवाज सुन कर नीचे गई. दरवाजा खोला. देखा उस के जीजा हरेंद्र थे. शीतल वहीं से बोली, ‘‘दादाजी, जीजाजी आए हैं.’’

हरेंद्र सीढि़यां चढ़ता हुआ सीधे अतर सिंह के कमरे में जा पहुंचा. बोला, ‘‘रामराम बाबा, कैसे हैं?’’

‘‘रामराम बेटा, आओ बैठो. अच्छा हुआ तुम आ गए मैं घर में अकेला बैठा ऊब रहा था.’’ कहते हुए उन्होंने फिर शीतल को आवाज लगाई, ‘‘बेटा शीतल, दीक्षा को बोलो हरेंद्र के लिए पानी और कुछ खाने को ले कर आए.’’

‘‘अरे नहीं बाबाजी, मैं तो बस समझिए आप का हालचाल लेने आया हूं. कल रक्षाबंधन है. सुबहसुबह चला जाऊंगा.’’

अतर सिंह ने हरेंद्र को सम्मान के साथ बैठाया. वैसे भी दीक्षा रक्षाबंधन के त्यौहार की वजह से आई हुई थी. किसी तरह की कोई शिकायत नहीं थी.

‘‘बाइक से आए हो?’’ अतर सिंह ने पूछा.

‘‘नहीं कार से आया हूं.’’ थोड़ी देर में ही हरेंद्र ने अंग्रेजी शराब का एक अद्धा अपनी जेब से निकालते हुए बोला, ‘‘बाबाजी, गिलास मंगाओ. आज आप के साथ हो जाए एकएक पैग.’’

अतर सिंह हरेंद्र के इस व्यवहार को देख कर हतप्रभ रह गए.

फिर भी शांति से कहा, ‘‘बेटा तुम्हारी शादी को करीब 2 साल होने जा रहे हैं, आज तक तो तुम ने मेरे सामने कभी शराब नहीं पी. तो फिर आज तुम ऐसा कैसे कह रहे हो?’’

‘‘बाबाजी, यूं ही मूड हो आया. सोचा कि अपने दोस्तों के साथ तो पीता ही रहता हूं, क्यों न आप के साथ पी कर कुछ गिलेशिकवे दूर कर लिए जाएं.’’ हरेंद्र बोला.

‘‘लेकिन बेटा मेरी तबीयत ठीक नहीं है. ये देखो मेरी दवाई.’’ अतर सिंह ने जेब से दवाई निकाल कर दिखाते हुए कहा, ‘‘मैं शराब नहीं पीऊंगा.’’

उसी वक्त दीक्षा भी कमरे में पानी का गिलास और खाने की थाली ले कर आ गई. सामने शराब देख कर गुस्से भरी नजरों से हरेंद्र को घूरा. बोली कुछ नहीं. खाने की थाली सामने रखी और गिलास को रख कर तेजी से जाने लगी. गिलास का पानी छलक कर वहीं छोटे से स्टूल पर फैल गया.

‘‘दिखता नहीं है, यहीं मोबाइल रखा हुआ है, गीला हो गया तो..?’’ हरेंद्र की बात पूरी भी नहीं हुई कि उस के मोबाइल की रिंगटोन बजने लगी. उस ने काल रिसीव की, ‘‘हैलो…’’

उधर से जो आवाज आई, उसे सुन कर दीक्षा को आवाज लगाई, ‘‘…ये लो सुनो, तुम्हारा ही फोन है, मेरे जीजाजी हैं, तुम से ही बात करना चाहते हैं.’’

ननदोई की उस के लिए आई काल जान कर दीक्षा ने तुरंत हरेंद्र के हाथों से फोन ले लिया और नीचे सीढि़यों से उतरने लगी. हरेंद्र भी उस के पीछेपीछे आया और चुपके से दीक्षा और अपने बहनोई के बीच फोन पर हो रही बातों का अनुमान लगाने लगा. हरेंद्र ने दीक्षा को यह कहते हुए सुना, ‘‘मैं ने पहले मना किया है हरेंद्र के फोन पर मेरे लिए फोन नहीं   करें, क्योंकि उसे हम पर अब शक है.’’

वास्तव में हरेंद्र अपनी पत्नी को हमेशा ही शक की निगाह से देखता था. यहां तक कि उस ने दीक्षा को जो मोबाइल दिया था, उस में आटोमैटिक वायस रिकौर्डिंग का ऐप डाउनलोड कर दिया था. दीक्षा की गैरमौजूदगी में वह उस के सभी काल की रिकौर्डिंग सुनता था. उसी से उसे इस बात का पता चल गया था कि उस के कई चाहने वाले हैं. उन्हीं में एक उस का बहनोई भी था. उस की लच्छेदार बातों से हरेंद्र को अनुमान हो गया था कि दीक्षा उस के साथ बेवफाई कर रही है. यही नहीं हरेंद्र को यह भी शक था कि उस के मायके में भी कई प्रेमी हैं. ऐसा होना भी स्वाभाविक था. क्योंकि दीक्षा बला की खूबसूरत थी, उसे देख कर कोई भी उस पर मोहित हुए बिना नहीं रह सकता था. हरेंद्र भी उस की खूबसूरती को देख कर ही शादी करने के लिए राजी हुआ था.

दूसरी बात दीक्षा के बातें करने का लहजा और मजाक का जवाब मजाक में देने का अंदाज किसी को भी पसंद आ जाता था. वीडियो कालिंग की दीवानी थी. उस के कई वीडियो कालिंग की क्लिपिंग्स हरेंद्र भी देख चुका था. उसे देखते हुए हरेंद्र के सीने पर सांप लोटने लगते थे कि दीक्षा उस के साथ प्रेम से क्यों नहीं पेश आती है? वह उस से हमेशा रूखी बातें क्यों करती है. जबकि दूसरों के साथ वह दिल की बातें उड़ेल कर रख देती  थी. वीडियो कालिंग, फ्लाइंग किस तो ऐसे देती थी जैसै वह प्रेमी नहीं पति हो. यह सब बातें हरेंद्र को भीतर से खाए जा रही थीं. उस के वैवाहिक संबंध में मधुरता कम कड़वाहट अधिक भर गई थी.

ऊपर से दीक्षा द्वारा बारबार शराबीकबाबी कहना, नाकारा, नालायक मर्द कहते हुए ताने मारना हरेंद्र को काफी दुखी कर देता था. बातबात पर उस की दीक्षा से बहस हो जाती थी. ऐसी बहस रक्षाबंधन के कुछ रोज पहले भी हो गई थी. दीक्षा को मारी गोली कुछ समय बाद दीक्षा हरेंद्र के कमरे में आ कर उस का मोबाइल लौटाने आई. खाना स्टूल पर पड़ा देख कर बोली, ‘‘आप ने कुछ खाया नहीं?’’

‘‘अरे बेटी, इसे अपने कमरे में ले जा, वहीं तुम दोनों खाना खा लेना. और हां, शीतल को एक गिलास गर्म दूध ले कर भेज देना. सोने से पहले वाली दवाई खानी है.’’ अतर सिंह बोले.

उस के बाद दीक्षा और हरेंद्र नीचे के अपने कमरे में आ गए. अगले दिन अतर सिंह को जो सूचना मिली उस से पूरा परिवार सदमे में आ गया. बात ही कुछ ऐसी हुई कि अतर सिंह के परिवार से ले कर भागीरथ के परिवार में खलबली मच गई. हरेंद्र भागीरथ का सब से छोटा बेटा था. उन का पुश्तैनी मकान बिलारी से सिरसी जाने वाले मार्ग के किनारे ग्राम ढकिया नरू में है. भागीरथ का परिवार वहीं सालों से रहते आए हैं. सिरसी मार्ग पर सड़क के किनारे उन की अच्छी खेतीबाड़ी भी है. अतर सिंह की नींद सुबह देर से तब खुली, जब नीचे घर में कोई हलचल सुनाई दी. शीतल से कुछ लोग तेज आवाज में बातें कर रहे थे. आवाज सुन कर अतर सिंह भी नीचे गए. घर पर आए एक सिपाही को देख कर वह अचंभित हो गए.

जल्द ही उन्हें मालूम हो गया कि दीक्षा को गोली लगी है. वह मुरादाबाद अस्पताल में है. अतर सिंह अभी पूरा मामला समझ पाते इस से पहले ही सिपाही ने बताया कि दीक्षा की मौत हो चुकी है. वह बेहद घायलावस्था में थाना कुंदरकी क्षेत्र के बाईपास के किनारे पैट्रोलिंग पुलिस को मिली थी. वह खून से लथपथ तड़प रही थी. पुलिस ने इस की सूचना थानाप्रभारी संदीप कुमार को देने के बाद उसे निकट के अस्पताल पहुंचा दिया था. डाक्टर ने उस के सिर में गोली लगने की जानकारी दी और प्राथमिक उपचार के बाद जिला मुख्यालय रेफर कर दिया, परंतु उस ने रास्ते में ही दम तोड़ दिया.

थाना कुंदरकी पुलिस मृतका की शिनाख्त में जुट गई. अभी वह इस केस की कागजी काररवाई कर ही रहे थे. तभी उन्हें कोतवाली बिलारी से सूचना मिली कि कुंदरकी बाईपास के किनारे घायलावस्था में जो युवती मिली थी, उस के हमलावर ने कोतवाली में सरेंडर कर दिया है. वह हमलावर कोई और नहीं बल्कि दीक्षा का पति हरेंद्र ही था. हरेंद्र ने ही अपनी पत्नी दीक्षा की हत्या की सूचना कोतवाली बिलारी को दे दी थी. बिलारी कोतवाली के प्रभारी आर.पी. सिंह  ने हरेंद्र से मामले की पूछताछ की. हरेंद्र ने अपना अपराध स्वीकारते हुए बताया कि उस का वैवाहिक जीवन तनावपूर्ण था. विवाह के 2 महीने बाद ही उसे मालूम हो गया था कि उस की पत्नी के और भी प्रेमी हैं. इस कारण वह हमेशा मायके जाती रहती थी.

हरेंद्र ने अपनी मृतक बीवी पर यह भी आरोप लगाया कि वह किसी की चिकनीचुपड़ी बातों में तुरंत आ जाती थी और पति को छोड़ कर उस के ही प्रेम इजहार को महत्त्व देती थी. हरेंद्र का कहना था कि दीक्षा ही प्रेमी को फंसा कर रखती थी. इस कारण वह हमेशा पत्नी से नाराज रहता था. इस की वजह से घर में कलह काफी बढ़ गई थी. घटना के दिन भी रात को उस की ननदोई से फोन पर हुई बात को ले कर काफी बहस हो गई थी. उस रात बात इतनी बिगड़ गई कि जबरन रात को ही घर से बाहर उसे ले कर निकल पड़ा. उसे अपनी गाड़ी में बिठाया और बाईपास पर नीचे उतार कर उस के सिर में गोली मार दी.

उस के बाद कुछ दूर जा कर सोच में पड़ गया कि उसे अब क्या करना चाहिए. हालांकि गोली लगने से दीक्षा तड़पती हुई गिर पड़ी थी. पुलिस के आने तक उस की सांसें चल रही थीं. हरेंद्र के बयानों के आधार पर उस से पूछताछ थाना कुंदरकी में भी हुई. वहां उस ने पुलिस को घटनास्थल पर ले जा कर हत्या में इस्तेमाल तमंचा बरामद करा दिया, जो उस ने जंगल में फेंक दिया था. उस की बताई हुई जगह पर तलाशी के बाद एक बाइक भी कब्जे में ली गई. पुलिस ने दीक्षा के पिता अरविंद कुमार की तहरीर पर रिपोर्ट दर्ज कर ली. हरेंद्र से पूछताछ के बाद उसे न्यायालय में पेश किया, जहां से उसे जेल भेज दिया गया.

पुलिस का कहना है कि घटनास्थल पर मोटरसाइकिल बरामद हुई है. यह सवाल बना रहा कि जब हरेंद्र अपनी ससुराल कार से आया था तब मोटरसाइकिल कहां से आ गई? क्या हत्या में हरेंद्र के साथ कोई और भी शामिल था? इस बारे में पुलिस कोई जवाब नहीं दे सकी थी. बहरहाल, थानाप्रभारी संदीप कुमार चार्जशीट तैयार करने से पहले इस बात की जांच कर रहे हैं कि मृतका के पति हरेंद्र ने पत्नी पर जो आरोप लगाए थे, उन में कितनी सच्चाई है? UP Crime News

—कथा पुलिस सूत्रों पर आधारित

Extramarital Affair : पति की सेज पर यार का धमाल

Extramarital Affair : औरत कब और कहां बहक जाए, कहा नहीं जा सकता. सब कुछ ठीकठाक होते हुए भी मालती ने पति फेरन के दोस्त रामऔतार  से अवैध संबंध बना लिए थे. इसी दौरान ऐसा क्या हुआ कि मालती ने पति की सेज पर धमाल मचाने वाले यार रामऔतार के साथ मिल कर पति को कंकाल में बदल दिया…

माना कि शराब की लत बुरी होती है, लेकिन उस से भी बुरा होता है वासना का नशा. अगर पति और पत्नी दोनों इन आदतों के शिकार हो जाएं तब तो उन की जिंदगी की गाड़ी को पटरी से उतरने से कोई नहीं रोक सकता. ऐसा ही हुआ मालती और उस के पति फेरन के साथ. पति को नशे की लत थी और पत्नी अनैतिकता की मस्ती में ऐसी डूबी कि उस ने पतिपत्नी के रिश्ते को वासना की आग में झोंक दिया था. एक दिन बाजार से घर के कुछ जरूरी सामान की खरीदारी कर मालती तेज कदमों से अपने घर लौट रही थी. पीछे से साइकिल चला कर आते रामऔतार ने उसे रोका, ‘‘पैदल क्यों चल रही हो, पीछे कैरियर पर बैठ जाओ.’’ रामऔतार उस के गांव का ही रहने वाला युवक था.

‘‘अरे, नहींनहीं, तुम जाओ. गांव वाले देखेंगे तो गलत समझेंगे.’’ मालती ने उस से कहा.

‘‘गलत समझेंगे तो क्या हुआ. हम कौन भला सच्चे हैं.’’ रामऔतार बोला.

‘‘सब की नजरों में तो अच्छे हैं. पति घर आ चुका होगा. 2 हफ्ते बाद काम पर गया है.’’ मालती बोली.

‘‘अच्छा कोई बात नहीं. अपना थैला मुझे दे दो. और हां, फेरन को बोलना कि मैं शाम के 7 बजे तक आऊंगा. मैं ने उस के लिए एक बोतल खरीदी है.’’ कहते हुए रामऔतार ने मालती के हाथ से सब्जी और सामान का थैला ले लिया. उसे कैरियर पर एक हाथ से बांधने लगा, क्योंकि एक हाथ से वह विकलांग था.

‘‘तुम एक हाथ से कैसे सब काम कर लेते हो, मुझे देख कर हैरत होती है,’’ देख कर मालती बोली.

‘‘इस में हैरानी की क्या बात है, यह तो तुम्हारा प्यार है, जो तुम्हें देख कर हिम्मत आ जाती है.’’ रामऔतार उस के गाल को छूते हुए बोला.

मालती शरमा गई. बोली, ‘‘बसबस, मैं चलती हूं तुम कितना खयाल रखते हो मेरा.’’

‘‘मैं तुम्हारा सामान दरवाजे की बगल में रख कर टोकरी से ढंक कर रख दूंगा,’’ कह कर रामऔतार वहां से चला गया.

मालती खाली हाथ सड़क किनारे चलती हुई पैडल मारते रामऔतार को देखती रही. निश्चित तौर पर वह रामऔतार के बारे में ही सोचने लगी थी. मालती उसे पिछले 7 सालों से जानती थी. वह उस के पति फेरन का जिगरी दोस्त था. उस के घर से कुछ मकान छोड़ कर वह दूसरे टोले में रहता था. एक हाथ से विकलांग होने के बावजूद वह खेतीकिसानी से ले कर घर का सारा कामकाज खुद करता था. उस की शादी नहीं हुई थी. परिवार में वह अकेला था. उस की दूसरे रिश्तेदारों से जरा भी नहीं पटती थी. यही कारण था कि उस का दोस्त फेरन के घर निर्बाध रूप से आनाजाना लगा रहता था. मालती भी उस के घर बेरोकटोक आतीजाती थी. उस के यहां वह झाड़ू और साफसफाई जैसे घरेलू काम को अपने घर का कामकाज समझ निपटा दिया करती थी.

फेरन को इस का जरा भी बुरा नहीं लगता था. रामऔतार की एक ही लत थी शराब पीने की. कहते हैं कि यह लत फेरन ने ही उसे लगाई थी. हालांकि सालों से शराब का इंतजाम करने का काम रामऔतार ही करता आ रहा था. उस रोज भी वह अपने दोस्त के लिए एक बोतल शराब खरीद लाया था. मालती अंधेरा होने से पहले अपने घर पहुंच गई थी, उस का पति भी काम से लौट आया था.

‘‘कितने दिनों का काम मिला है?’’ मालती ने सामान का थैला उठाते हुए पति ने पूछा.

‘‘2 हफ्ते का है, लेकिन ठेकेदार पैसा कम दे रहा है. कहता है लौकडाउन में काम कम हो गया है.’’ फेरन ने बताया.

‘‘कोई बात नहीं, घर में कुछ तो आएगा, बैठे रहने से तो अच्छा है.’’ मालती लंबी सांस लेते हुई बोली.

‘‘आज कुछ अच्छा मसालेदार खाना पकाओ.’’ फेरन ने कहा.

‘‘हांहां, क्यों नहीं! तुम्हारा दोस्त भी आने वाला होगा, काम मिलने की खुशी में उस के साथ जश्न मनाना.’’ मालती ने चुटकी ली.

इसी बीच रामऔतार ने दरवाजे पर आवाज दी.

‘‘लो, आ गया तुम्हार यार!’’ मालती कह कर हंसने लगी.

रामऔतार के आने के बाद कुछ देर में ही घर के आंगन में फेरन और रामऔतार की दारू की महफिल सज गई थी. खाने को 3 तरह के नमकीन थे. बड़ी बोतल के साथ रखे 2 गिलासों में शराब खाली होने का नाम ही नहीं ले रहा था. जैसे ही फेरन का गिलास खाली होता, रामऔतार उस में और शराब डाल देता था. मक्के की मोटी रोटी के एक टुकड़े के साथ चटखारेदार सब्जी का आनंद लेते हुए सहज बोल पड़ता कि मीट होती तो और भी मजा आ जाता. मालती भी पति रामऔतार के गिलास से ही फेरन की नजर बचा कर एकदो घूंट पी लेती थी. धीरेधीरे दोनों दोस्त नशे में झूमने लगे थे, लेकिन फेरन पर नशा अधिक चढ़ गया था. वह एक ओर मुंह नीचे कर बड़बड़ाने लगा,

‘‘रामऔतार तू मेरा बहुत अच्छा यार है, इस कड़की में भी तूने मुझे अच्छी दारू पिलाई. मजा आ गया.’’

‘‘तू पैसे और काम की चिंता मत कर, जब तक तेरा दोस्त है तब तक दारू पिलाएगा. और अच्छीअच्छी विदेशी दारू भी पिलाएगा.’’ रामऔतार यह कहते हुए बगल में खड़ी मालती का हाथ खींच कर बिठा लिया. मालती के बैठने के धम्म की आवाज सुन कर फेरन बोला, ‘‘कौन मालती है? जरा मुझे पकड़ कर उठाना, पैर भर गया है. पेशाब करने जाना है.’’

मालती ने बैठेबैठे फेरन को हाथ का सहारा दिया. वह उठ कर कुछ पल खड़ा रह कर बोला, ‘‘अब ठीक है, मैं अभी आया.’’

यह कहता हुआ पेशाब करने के लिए घर से बाहर नाले के पास चला गया. उस के जाते ही रामऔतार ने ममता के कमर में हाथ डाल दिया. इस अंदेशे से बेखबर मालती बोल उठी, ‘‘अरे, क्या करते हो?’’

‘‘कुछ नहीं, थोड़ा प्यार करने का मन हो आया है. ये लो एक घूंट और पी लो.’’ रामऔतार ने कमर से हाथ निकाल कर अपने शराब का गिलास उस की होंठ से लगा दिया. मालती भी बिना किसी झिझक के घूंट पीने लगी. रामऔतार ने तुरंत उस का गाल को चूम लिया. मालती थोड़ी असहज हो गई.

‘‘इतना बेचैन क्यों हो रहे हो. 2 दिन पहले ही तो तुम ने…’’ मालती की बात पूरी करने से पहले ही फेरन ने आवाज दी. उस ने कहा कि वह सोने जा रहा है, अब और दारू नहीं पिएगा.

उस के बाद फेरन अपने कमरे की ओर चला गया. मालती उठी और बाहर का दरवाजा बंद कर लिया. रामऔतार ने अपने गिलास में कुछ और शराब डाली. ममता भी वहीं आ कर खाने के लिए रोटियां तोड़ने लगी. रामऔतार ने उस का हाथ पकड़ कर अपनी और खींच लिया. बगैर विरोध किए मालती उस की ओर खिसक आई. दूसरे हाथ से उस ने पास जल रही लालटेन की लौ धीमी कर दी. अगले पल मालती का सिर रामऔतार की गोद में था और रामऔतार के हाथ उस के नाजुक शरीर पर रेंगने लगे थे. जल्द ही दोनों बेकाबू हो गए. वासना की आग में जल उठे.

कुछ समय में वे एकदूसरे की कामाग्नि शांत कर निढाल हो चुके थे. मालती को होश तब आया जब फेरन ने उसे लात मारी. हड़बड़ा कर उठी. कपड़े समेटने लगी. कुछ कपड़ों पर रामऔतार बेसुध लेटा हुआ था, ब्लाउज और ब्रा उस ने खींच कर निकाला. फेरन यह सब देख कर गुस्से में तमतमा रहा था, उस के उठते ही फेरन ने पत्नी मालती के बाल पकड़ लिए. गुस्से में बदजात, बेहया, बदलचन बोलता हुआ भद्दीभद्दी गालियां देने लगा. आधी रात का समय था. फेरन को गुस्से में देख कर रामऔतार मामला समझ गया. कुछ कहेसुने बगैर वह चुपके से निकल गया. उस के जाते ही फेरन ने लातघूंसों से मालती की जम कर पिटाई कर दी. उसे तब तक पीटता रहा जब तक वह थक नहीं गया.

अगले दिन सुबह मालती चुपचाप आंगन में पड़ी रात की गंदगी को साफ करने लगी. थोड़ी देर में रामऔतार भी आ गया. वह आते ही चुपचाप दातून करते फेरन के पैरों पर गिर पड़ा. फेरन ने उसे झटक दिया. गुस्से में बोला, ‘‘तूने मेरी पीठ में खंजर घोंपा. बहुत बुरा किया. अब देखना मैं तुम्हारे साथ क्या करता हूं.’’

रामऔतार ने मालती की ओर देखा. इस से पहले कि वह कुछ बोलता, मालती ने उसे चुप रहने और चले जाने का इशारा किया. थोड़ी देर में फेरन बिना कुछ खाएपिए घर से निकल पड़ा. भारत की आजादी के जश्न का दिन था. कोरोना काल की वजह से भितरवार थाने में सादगी के साथ 15 अगस्त 2020 का झंडा फहराने का कार्यक्रम संपन्न हो चुका था. दोपहर का समय था. थानाप्रभारी पंकज त्यागी रोजाना की तरह ड्यूटी पर मौजूद थे. मालती बदहवास घबराई हुई थाने आई. आते ही फफकफफक कर रोने लगी. पूछने पर उस ने बताया कि पिछले 9 दिन से उस के पति का कुछ पता नहीं चल पा रहा है, वह 6 अगस्त से ही लापता है. उस की कई जगहों पर  तलाश की जा चुकी है, लेकिन कोई पता नहीं चल पा रहा है.

उस ने बताया कि वह 6 अगस्त को काम पर निकले थे. उस के बाद वह घर नहीं लौटे. उस ने बताया कि उन के पास पुराना मोबाइल फोन था, लेकिन वह बंद आ रहा है. हो सकता है खराब हो गया हो. इसी के साथ मालती किसी अनहोनी की आशंका जताते हुए थाने में रोने लगी. थाना प्रभारी ने उसे ढांढस बंधाते हुए जल्द ही पता लगाने का आश्वासन दिया. उन्होंने उस के लापता होने की रिपोर्ट दर्ज कर ली. इसी के साथ उसे भी कहा कि पति के बारे में जो भी बात मालूम हो, वह थाने में तुरंत बताए. उस के बाद हर दूसरे दिन मालती थाने आती और अपने पति के बारे में पूछती थी.

एक दिन थाने में मालती पति को ले कर जोरजोर से हायहाय कर रोने लगी. देर तक थाने में हंगामा होता रहा. महिला पुलिसकर्मी ने उसे चुप कराया, खाना खिलाया. थानाप्रभारी ने उसे बताया कि उन्होंने उस के पति की तलाश के लिए कई लोगों से पूछताछ की है. काम देने वाले ठेकेदार से भी फेरन के बारे में पूछा गया है, उस के एक खास दोस्त रामऔतार से पूछताछ बाकी थी. पुलिस ने तय कर लिया था कि कोई संदिग्ध सुराग हाथ लगते ही रामऔतार को भी थाने बुला कर उस से पूछताछ की जाएगी. इस काम के लिए थानाप्रभारी ने कई भरोसेमंद मुखबिर भी लगा दिए.

कई महीने बीतने पर भी फेरन का कुछ पता नहीं चला. धीरेधीरे उस की गुमशुदगी की फाइल पर धूल जम गई. उस के ऊपर कई दूसरी फाइलें रख दी गईं. किंतु मालती चुप नहीं बैठी. उस ने 14 सितंबर, 2020 को पुलिस पर पति को नहीं ढूंढने का आरोप लगाते हुए हाईकोर्ट में बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका लगा दी. इस पर कोर्ट ने ग्वालियर एसपी अमित सांघी को जांच के आदेश दिए. सांघी ने फेरन की गुमशुदगी के मामले को गंभीरता से लेते हुए एएसपी (देहात) जयराज कुबेर के नेतृत्व में टीम गठित कर दी. इस के अलावा उन्होंने भितरवार एसडीओपी अभिनव बारंगे को भी इस केस को खोलने में लगा दिया.

यह मामला पुलिस के लिए किसी अबूझ पहेली से कम नहीं था, क्योंकि पिछली तफ्तीश में पुलिस के हाथ कोई ऐसा तथ्य नहीं लग पाया था, जिस से पुलिस को कोई मदद मिल सके.  एसडीओपी  बारंगे ने इस सनसनीखेज मामले की 7 जुलाई, 2021 को नए सिरे से बारीकी से अध्ययन करते हुए जांच शुरू की. जांच की शुरुआत उस के अजीज दोस्त रामऔतार से हुई. थानाप्रभारी पंकज त्यागी को अपने साथ ले कर फेरन के गांव मोहनगढ़ गए. वहीं उस से फेरन के बारे में हर छोटीछोटी बातें पूछी गईं. उस से मिली कई जानकारियां काफी चौंकाने वाली थीं. उसी सिलसिले में मालूम हुआ कि फेरन की पत्नी मालती का चालचलन ठीक नहीं है.

फेरन के लापता होने वाले दिन से ही वह रामऔतार के घर पर रह रही है. जबकि इस बात का मालती ने पुलिस से जरा भी जिक्र तक नहीं किया था. यहां तक कि उस ने फेरन और रामऔतार के जिगरी दोस्त होने की बात तक नहीं बताई थी. पुलिस के लिए यह जानकारी महत्त्वपूर्ण थी. पंकज त्यागी ने 26 जुलाई, 2021 को रामऔतार को पूछताछ के लिए थाने बुलाया. उस ने न तो फेरन के बारे में कोई खास नई जानकरी दी और न ही मालती से संबंध के बारे में कुछ बताया. उस ने अपने दोस्त के लापता होने पर काफी दुख भी जताया. मालती भी रामऔतार के फेरन का परम मित्र होने का वास्ता देती रही. दोनों की बातों पर भरोसा कर एसडीओपी ने उस दिन उन्हें छोड़ दिया, लेकिन टीआई भितरवार को दोनों पर चौकस नजर रखने को कहा.

दूसरे दिन एसडीओपी ने बिना वक्त गंवाए दूसरे राउंड की पूछताछ के लिए मालती और रामऔतार को फिर से बुलवा लिया. उन्होंने पूछताछ के लिए सब से पहले मालती को अपने कक्ष में बुलाया. उस से फेरन और रामऔतार के बारे में कई कोणों से पूछताछ की. हर सवाल का जवाब उस ने अपने सुहाग का हवाला दे कर कसम के साथ दिया. बातोंबातों में उस ने बोल दिया कि मैं अपने सुहाग को क्यों मिटाऊंगी? यही बात पुलिस के गले नहीं उतरी कि आखिर मालती के दिमाग में अपने सुहाग को मिटाने की बात क्यों आई? कहीं उस ने सच में ऐसा तो नहीं किया है? जरूर कुछ बात है, जो वह छिपा रही है.

2 दिनों बाद पुलिस ने मालती को फिर थाने बुलाया. वहां पहले से रामऔतार को देख कर वह चौंक पड़ी. उस के आते ही टीआई ने कड़कदार आवाज में कहा, ‘‘मुझे तुम्हारे बारे में बहुत कुछ मालूम हो चुका है. अब तुम सब कुछ सचसच बता दो, वरना मुझे सच्चाई पता करने के लिए दूसरा रास्ता अख्तियार करना पडे़गा. और हां, तुम्हारे पति का सुराग मिल गया है.’’

‘‘क्या कहते हैं साहब, मेरा पति कहां है?’’ मालती खुद को संभालती हुई बोली. जब तक दूसरे पुलिसकर्मी ने रामऔतार को दूसरे कमरे में बुला लिया.

‘‘तुम्हारे बारे में रामऔतार ने बहुत सारी बातें बताई हैं.’’ यह कहते हुए जांच अधिकारी ने अंधेरे में तीर चलाया, जो निशाने पर जा लगा. मालती के चेहरे का रंग उड़ गया था.

‘‘क्या बोला साहब मेरे बारे में?’’ मालती डरती हुई बोली.

‘‘यह कि तुम पति से हमेशा झगड़ती रहती थी और वह उस की मारपीट से तुम्हें बचाया करता था.’’

‘‘किस मियांबीवी के बीच झगड़ा नहीं होता है, साहब?’’ मालती बोली.

‘‘तुम बातें मत बनाओ, सहीसही बताओ कि 6 अगस्त को तुम्हारा पति से झगड़ा हुआ था या नहीं?’’ जांच आधिकारी ने पूछा.

उसी वक्त एक पुलिसकर्मी आ कर बोला, ‘‘साब, रामऔतार ने अपना जुर्म कुबूल कर लिया है.’’

‘‘क्याऽऽ कैसा जुर्म?’’ मालती अचानक बोल पड़ी.

जांच अधिकारी बोले, ‘‘जुर्म कुबूला है रामऔतार ने तो तुम क्यों चौंक रही हो?’’ उस के बाद वह रामऔतार से पूछताछ करने चले गए. इधर मालती सिर झुकाए बैठी रही. एसडीओपी थोड़ी देर बाद रामऔतार को ले कर मालती के पास आए. उन्होंने मालती से कहा तुम्हारा सारा राज खुल गया है. उस का सबूत कुछ मिनटों में मिल जाएगा. इसलिए भलाई इसी में है कि तुम दोनों सब कुछ सचसच बता दो. कुछ देर में ही 2 पुलिसकर्मी एक ग्रामीण को ले कर आए. उसे देखते ही रामऔतार चौंक गया, लेकिन खुद को काबू में रखते चुप रहा. एसडीओपी रामऔतार से बोले, ‘‘इसे तो तुम पहचानते ही हो. शिवराज है. इस की एक गलती ने तुम्हारा भेद खोल दिया है.’’

मालती और रामऔतार चुप रहे. अब जांच अधिकारी ने कुछ बातें विस्तार से बताते हुए कहा, ‘‘इस के पास जो मोबाइल है, उस में तुम्हारे दोस्त और मालती के पति फेरन के मोबाइल का खास नंबर आ चुका है.  शिवराज का कहना है कि उस ने रामऔतार के साथ मिल कर फेरन की हत्या कर दी है. उस के बाद उस के मोबाइल के सिम को फेंक कर अपना नया सिम लगा लिया था, जिस से फेरन के मोबाइल का आईएमईआई नंबर एक्टिवेट हो गया और हमारी पहुंच उस तक हो गई.’’

इतना बताने के बाद जांच अधिकारी ने रामऔतार से कहा, ‘‘अब तुम सच बताओगे या मुझे कुछ और सख्ती दिखानी होगी.’’

‘‘तो फिर रामऔतार ने अभी तक जुर्म नहीं कुबूला था, आप लोगों ने मुझ से झूठ बोला.’’ मालती सहसा बोल पड़ी.

‘‘एक जुर्म करने वाला तुम्हारे सामने आ चुका है, दूसरा तुम्हारा प्रेमी रामऔतार है, जो अपनी सच्चाई बताएगा.’’

‘‘यदि पता होता तो मैं आप को अवश्य बता देता साहब. हम दोनों तो रोज मजदूरी करने साथ जाते थे. मेरी तो उस से खूब पटती थी.’’

रामऔतार का यह बोलना था कि थानाप्रभारी पंकज त्यागी का झन्नाटेदार थप्पड़ उस के गाल पर पड़ा. वह अपना गाल पकड़ कर बैठ गया. अभी बैठाबैठा कुछ सोच ही रहा था कि एसडीओपी अभिनव बारंगे बोले, ‘‘तुम्हारा इश्क किस से और किस हद तक है, यह सब मुझे जांच के दौरान पता चल चुका है. तुम ने फेरन को क्यों और किसलिए मारा, वह भी तुम्हारे सामने है.’’ उन्होंने मालती की ओर इशारा करते हुए कहा. यह सुन कर मालती ने शर्म से नजरें झुका लीं. उसे इस बात का जरा भी अंदेशा नहीं था कि टीवी पर क्राइम सीरियल देख कर बनाई कहानी का अंत इतनी आसानी से हो जाएगा और पुलिस उस से सच उगलवा लेगी.

तीर निशाने पर लगता देख एसडीओपी  ने बिना विलंब किए तपाक से कहा कि अब तुम्हारी भलाई इसी में है कि तुम दोनों साफसाफ बता दो कि फेरन की हत्या क्यों की? मुझे तुम्हारे मुंह से सच जानना है. मालती और रामऔतार लगातार पुलिस अधिकारियों द्वारा फेरन को ले कर पूछे जा रहे सवालों के जवाब देने में इस कदर उलझ गए कि उन्होंने उस की हत्या का अपना अपराध स्वीकार करने में ही अपनी भलाई समझा. फेरन की हत्या की जो कहानी उभर कर सामने आई, वह पराए मर्द की चाहत में निर्दयता की पराकाष्ठा की कहानी बयां करती है. कोई सोच भी नहीं सकता था कि पत्नी अपने ही पति का अपने प्रेमी के साथ मिल कर कत्ल कर देगी. वह भी तब जब वह अपनी पत्नी को हर सुखसुविधाएं उपलब्ध कराता हो.

रामऔतार ने अपना गुनाह कुबूल करते हुए बताया कि उस ने अपनी प्रेमिका मालती के कहने पर अपने दोस्त शिवराज के साथ मिल कर  फेरन की हत्या की थी. पूछताछ में मालती ने बताया कि उस के और रामऔतार के बीच संबंध थे. पति ने उसे एक बार रंगेहाथों पकड़ लिया था. उस के बाद से उस के फेरन के साथ संबंध बिगड़ गए थे. इसे देख कर ही फेरन को रास्ते से हटाने के लिए उस की हत्या की योजना बनाई. योजना के तहत रामऔतार ने अपने दोस्त शिवराज को भी शामिल कर लिया. इस के लिए उस ने शिवराज को 5 हजार रुपए और शराब भी उपलब्ध कराई.

6 अगस्त, 2020 को फेरन अपने मामा के गांव निमाई गया हुआ था. वहां से उस के लौट कर घर आते समय रामऔतार और शिवराज ने उसे रास्ते में ही रोक लिया. फिर शराब पिलाने के बहाने से हस्तिनापुर क्षेत्र के चपरोली गांव के बाहर खेत में ले गए. वहीं तीनों ने शराब पी. रामऔतार और उस के दोस्त शिवराज ने जानबूझ कर फेरन को कुछ ज्यादा ही शराब पिला दी. जब उसे अधिक नशा हो गया, तब उन्होंने उस के सिर पर पत्थर और लोहे के पाइप से वार कर मौत के घाट उतार दिया. फिर उस की लाश शिवराज की बाइक पर ले जा कर कृपालपुर गांव में स्थित एक सूखे कुएं में फेंक दी. बाद में उस कुएं पर मिट्टी डाल कर पौधे लगा दिए गए.

तीनों को भरोसा था कि अब वे कभी भी फेरन की हत्या के मामले में पकडे़ नहीं जाएंगे. लेकिन इस बीच शिवराज ने यह गलती कर दी कि फेरन के मोबाइल में डाली सिम निकाल कर फेंक दी और उस में अपनी सिम डाल ली. मालती और रामऔतार की निशानदेही पर पुलिस द्वारा 26 जुलाई, 2021 को कुएं से फेरन का कंकाल बरामद कर लिया गया. बाद में वह डीएनए टेस्ट के लिए प्रयोगशाला भेज दिया. थाना हस्तिनापुर में हत्यारोपियों मालती, रामऔतार और शिवराज के खिलाफ भादंवि की धारा 302, 201, 120बी के तहत रिपोर्ट दर्ज कर तीनों अभियुक्तों को जेल भेज दिया गया. Extramarital Affair