पूजा सुहेल को जितना प्यार करती थी उस से कहीं ज्यादा उस पर विश्वास भी करती थी.
सुहेल ने रूम में पड़ी टेबल पर रखी मेनू कार्ड उठाया और फिर पूजा से बोला, ‘‘जो तुम्हें पसंद हो आर्डर करो. आज मैं अपनी पसंद का नहीं, बल्कि तुम्हारी पसंद का ही नाश्ता करूंगा.’’
उस दिन पूजा की पसंद का नाश्ता आया. नाश्ता करने के बाद पूजा ने चलने के लिए कहा. इस पर सुहेल ने कहा, ‘‘पूजा, अब इतनी जल्दी भी क्या है. पहली बार तो हम दोनों एकांत में मिले हैं. फिर एकांत पलों का क्यों न फायदा उठाया जाए.’’ कहते हुए पूजा को अपनी आगोश में समा लिया.
सुहेल की यह हरकत शायद पूजा को अच्छी नहीं लगी. उस ने सुहेल को अपने से अलग करते हुए कहा, ‘‘मुझे यह हरकतें पसंद नहीं. ठीक है, मैं तुम्हें प्यार करती हूं, लेकिन यह सब शादी से पहले मैं शायद बरदाश्त नहीं कर पाऊंगी.’’
सुहेल ने पूजा के साथ होटल में की मनमरजी
पूजा की ऐसी प्रतिक्रिया देख सुहेल ने कहा, ‘‘लगता है तुम मुझे दिल से प्यार नहीं करती. वरना ऐसा व्यवहार नहीं करती. पूजा मैं तुम्हें दिलोजान से प्यार करता हूं और एक पल भी तुम्हारे बिना नहीं रह सकता. अगर तुम्हें अभी भी ऐसा लगता है कि मैं तुम्हारे साथ प्यार का दिखावा कर रहा हूं तो तुम इसी वक्त जा सकती हो.’’ यह कहते ही सुहेल का चेहरा उतर गया.
उस वक्त पूजा उस के प्यार में इतना आगे बढ़ चुकी थी कि वह उस की जुदाई भी बरदाश्त नहीं कर सकती थी. उस के उतरे चेहरे को देखते ही पूजा ने सुहेल के सामने आत्मसमर्पण कर दिया. वह प्यार की भावनाओं में बह गई.
उस ने सामने खड़े सुहेल को अपनी बाहों में भर लिया. फिर पूजा ने कहा कि तुम मुझे कैसे भी प्यार करो, लेकिन एक लिमिट में ही रहना. मैं अभी तुम्हारे साथ वह सब कुछ नहीं कर सकती जो शादी के बाद होता है.
सुहेल पूजा की बात सुनता रहा. फिर बोला, ‘‘फिर हमारे होटल आने का क्या फायदा? यह बात मुझे मालूम नहीं थी कि तुम मेरे साथ केवल प्यार का दिखावा ही कर रही हो.’’
पूजा भले ही काफी समय से सुहेल के संपर्क में थी. लेकिन इस से पहले उस ने कभी भी ऐसा नहीं किया था. लेकिन उस दिन उसे सुहेल की जिद के आगे हार मानने पर मजबूर होना पड़ा. उस दिन होटल में सुहेल ने प्यार की सीमाएं लांघते हुए वह सब कुछ कर डाला, जिस की पूजा ने शादी से पहले करने की कल्पना भी नहीं की थी.
पूजा उस सब के लिए तैयार नहीं थी, लेकिन सुहेल ने अपनी जिद पकड़ कर उस के साथ बलात्कार ही कर डाला था. उस दिन सुहेल ने पूजा के साथ अपनी मनमानी कर डाली थी. लेकिन पूजा को उस दिन पहली बार एहसास हुआ कि सुहेल ने जो आज उस के साथ किया, वह अच्छा नहीं किया.
सुहेल पूजा से करने लगा किनारा
पूजा ने एक बार सुहेल के साथ अपने को समर्पित किया तो फिर दोनों के बीच सैक्स संबंध बनते रहे. पूजा को उम्मीद थी कि कुछ ही समय बाद वह सुहेल की संगिनी बनेगी, लेकिन हुआ इस का उलटा. कुछ समय बाद सुहेल का उस के प्रति व्यवहार बदलने लगा.
स्टेशनरी की दुकान पर आने के बाद वह पूजा से पहले की तरह बात नहीं करता था. दुकान के बाद वह अपने घर जाती तो वह उस की काल रिसीव नहीं करता था. पूजा झुंझला कर उस का कारण पूछती तो वह हर वक्त कोई न कोेई बहाना तैयार रखता था. दुकान पर आने के बाद भी वह अकसर अपने फोन पर व्यस्त रहता.
सुहेल के बदले व्यवहार को देखते ही उस का दिमाग घूमने लगा. फिर उसे शक हुआ कि कहीं ऐसा तो नहीं कि वह किसी और लड़की से बात करता हो. यह बात दिमाग में आते ही उस का ध्यान सुहेल के मोबाइल पर केंद्रित हो गया.
एक दिन की बात है सुहेल किसी काम से शहर गया तो भूल से उस का मोबाइल दुकान पर ही रह गया. उस के जाने के बाद ही उस के मोबाइल पर किसी की मिस्ड काल आई. उस के कुछ समय बाद फिर से उसी नंबर से मिस्ड काल आई.
लगातार कई मिस्ड काल आने के बाद पूजा ने उस नंबर को देखा तो वह किसी लड़की के नाम से सेव था. लड़की की मिस्ड काल आने के बाद पूजा समझ गई कि सुहेल उस के साथ प्यार का खेल खेल रहा था.
सुहेल के आते ही उस ने उस के मोबाइल पर किसी की मिस्ड काल आने वाली बात बताई तो वह उस पर ही आगबबूला हो गया, ‘‘तुम्हें मेरा फोन देखने की क्या जरूरत थी? मेरा दुकानदारी का काम है किसी को माल देना होता है और किसी से पेमेंट लेनी होती है. आज के बाद मेरे फोन को हाथ लगाने की जरूरत नहीं.’’
पूजा को हो गया छले जाने का अहसास
उस दिन खून के आंसू बहाती हुई पूजा घर पहुंची तो उस के भाई भरत ने उस से पूछा, ‘‘पूजा दीदी, क्या हुआ? आज लगता है कि तुम्हारी तबियत सही नहीं है.’’
‘‘नहीं, ऐसी कोई बात नहीं है भाई, थोड़ा थक गई हूं. इसीलिए तुम्हें ऐसा लग रहा है.’’
उस से अगले दिन पूजा दुकान पर भी नहीं गई. उसे उम्मीद थी कि सुहेल उसे जरूर फोन करेगा. लेकिन उस का कोई फोन नहीं आया तो उसे बहुत ही दुख हुआ. उसे लगा कि वह प्यार में छली गई.
उस के बाद भी उस का मन नहीं माना तो उस ने सुहेल को फोन किया. लेकिन उस ने उस की काल रिसीव नहीं की. उस ने कई बार उसे वाट्सऐप मैसेज किया, लेकिन उस ने उस का कोई जवाब नहीं दिया. उस के अगले दिन भी वह काम पर नहीं गई. उस दिन भी उसे सुहेल का फोन आने का इंतजार था.
दोपहर तक पूजा ने कई बार उस के नंबर पर काल की. लेकिन उस की तरफ से कोई उत्तर न मिलने पर वह दुकान पर पहुंची तो वह दुकान पर नहीं मिला. उस के बाद वह अपने घर आ गई.
तीसरे दिन पूजा अपने काम के वक्त पर ही उस की दुकान पर पहुंची तो उस वक्त वह दुकान पर बैठा किसी से वाट्सऐप पर चैटिंग कर रहा था. यह देख कर वह समझ गई कि उस ने किसी दूसरी लड़की को अपने प्यार में फंसा लिया है.
पूजा को देखते ही उस के चेहरे का रंग उड़ गया, ‘‘बोलो, तुम क्या कहना चाहती हो?’’
‘‘तुम ने मेरा फोन उठाना क्यों बंद कर दिया?’’ पूजा ने उस से पूछा.
‘‘देखो पूजा, तुम बुरा मत मानना. दरअसल, मेरे घर वालों को किसी ने तुम्हारे और मेरे संबंधों के बारे में बता दिया है, जिस के कारण घर में फसाद चल रहा है. इसलिए हम दोनों के लिए बेहतर यही होगा कि हम समय से पहले ही अलगअलग हो जाएं.’’
‘‘क्या मतलब? लेकिन तुम ने मेरे साथ शादी का जो वायदा किया था, वह सब तुम्हारा ढोंग दिखावा था.’’ पूजा सुहेल की बात सुन कर हतप्रभ रह गई.
‘‘पूजा, ऐसी कोई बात नहीं. लेकिन मैं अपने घर वालों के सामने बेबस हो गया हूं. इस में मैं कुछ नहीं कर सकता.’’
सुहेल ने उस का पहले से ही हिसाब बना रखा था. उस ने यह बात कहते हुए उस की पेमेंट भी देने की कोशिश की. लेकिन उस की बात सुनते ही पूजा पर जैसे बिजली गिर गई थी. उस की मीठीमीठी बातों में आ कर उस ने अपनी इज्जत भी तारतार कर डाली थी.