MP News : शिवसेना नेता अनुपमा का जिस्मफरोशी के धंधे का पर्दाफाश

MP News : शिवसेना नेत्री अनुपमा तिवारी की इलाके में एक समाजसेवी, साहित्यकार और पत्रकार के रूप में पहचान थी. लेकिन जब पुलिस ने उसे जिस्मफरोशी का धंधा करने के आरोप में गिरफ्तार किया तो उस भगवाधारी की ऐसी कलई खुली कि…

मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल के सब से नजदीकी जिले सीहोर की दूरी महज 35 किलोमीटर है. इंदौरभोपाल रोड पर हाईवे बन जाने के बाद से यह दूरी महज आधे घंटे में तय हो जाती है. एक तरह से सीहोर भोपाल का ही हिस्सा बनता जा रहा है क्योंकि ये दोनों शहर तेजी से एकदूसरे की तरफ बढ़ रहे हैं.  शहरीकरण का असर ही इसे कहेंगे कि छोटे और घनी बसाहट वाले कसबे सीहोर में भी कालोनियों और अपार्टमेंटों की बाढ़ सी आती जा रही है, जो सारे के सारे बाहर की तरफ बन रहे हैं.

लेकिन सीहोर की पहचान पुराने शहर से ही है खासतौर से बसस्टैंड से, जो शहर को चारों तरफ से जोड़ता है. इस बसस्टैंड पर देर रात तक चहलपहल रहती है. बसस्टैंड के आसपास कई पुराने मोहल्लों में से एक है हाउसिंग बोर्ड कालोनी, जहां आधे पक्के और आधे कच्चे मकान बने हुए हैं. यहीं से आधा किलोमीटर दूर स्थित है सिटी कोतवाली, जो कोतवाली चौराहे पर स्थित है. आमतौर पर बसस्टैंड के आसपास के मोहल्लों में पुश्तों से रह रहे लोग ही ज्यादा हैं और सभी एकदूसरे को जानते हैं. इसी बसस्टैंड के पास एक मकान या योग आश्रम, कुछ भी कह लें, अनुपमा तिवारी का भी है. जिन के बारे में लोग ज्यादा कुछ नहीं जानते सिवाय इस के कि वह शिवसेना की नेत्री हैं.

साल 2015 में वह नगर पालिका अध्यक्ष का चुनाव भी इसी पार्टी से लड़ी थीं, जिस के राष्ट्रीय मुखिया कभी बालासाहेब ठाकरे जैसे आक्रामक और कट्टरवादी हिंदू नेता हुआ करते थे और आजकल उन के बेटे उद्धव ठाकरे इन दिनों कांग्रेस और एनसीपी के सहयोग से महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री हैं. शिवसेना की कोई खास पूछपरख सीहोर ही क्या पूरे मध्यप्रदेश में नहीं है. शायद इसीलिए अनुपमा तिवारी को 700 वोट भी नहीं मिले थे और उस की जमानत जब्त हो गई थी. छोटे शहरों में जो स्थानीय निकाय का चुनाव लड़ लेता है उसे पूरा शहर जानने लगता है, यही अनुपमा के साथ हुआ था कि सीहोर के लोग उस के नाम से परिचित हो गए थे. चुनाव हार चुकी अनुपमा ने हिम्मत नहीं हारी और वह समाज सेवा के क्षेत्र में सक्रिय हो गई.

छोटेमोटे जुलूस और धरनेप्रदर्शनों में शिवसेना की अधेड़ और सामान्य दिखने वाली नेत्री अनुपमा तिवारी के इर्दगिर्द कुछ महिलाएं भी नजर आने लगीं तो लोग और मीडिया उस का नोटिस भी लेने लगे और शायद यही वह चाहती थी. कुछ कर गुजरने की कशिश के चलते महत्त्वाकांक्षी अनुपमा ने सन 2017 में शहर के व्यस्ततम कोतवाली चौराहे पर शराब के विरोध में धरना दिया था और शराब को प्रतिबंधित करने की उस की मांग न माने जाने पर हाहाकारी आंदोलन की चेतावनी दी थी. उस वक्त उस के साथ महिलाओं की संख्या पहले के मुकाबले कुछ ज्यादा थी.

यह धरना शिवसेना गौजन कल्याण संघ के बैनर तले दिया गया था, जिस की प्रमुख अनुपमा तिवारी खुद थी और उस का साथ दे रही महिलाओं को महिला बिग्रेड कहा गया था. इस धरने से भी कुछ हासिल नहीं हुआ, लेकिन अनुपमा को लोग अब अच्छे से पहचानने लगे थे. धीरेधीरे अनुपमा फुलटाइम समाजसेवी होती गई और कई छोटेबड़े समारोहों में नजर आने लगी. महिला हितों की बात करते रहने से फायदा यह हुआ कि उस के आसपास दुखियारी पीडि़त महिलाएं इकट्ठा होने लगीं जिन्हें बड़ी उम्मीद रहती थी कि कोई और उन की बात सुने न सुने, लेकिन अनुपमा दीदी जरूर सुनेंगी और जरूरत पड़ी तो उन के हक में लड़ेंगी भी.

इस सक्रियता का ही नतीजा था कि उसे 21 जून, 2018 को नेहरू युवा केंद्र सीहोर के एक कार्यक्रम में अपर कलेक्टर द्वारा सम्मानित किया गया था. सम्मान की वजह थी उस का योगाचार्य होना. इस समारोह में वह राजनीति में सक्रिय और सफल साध्वियों जैसी भगवा ड्रेस पहन कर गई थी, इसलिए भी आकर्षण का केंद्र रही थी. एक चेहरे पर लगाए कई चेहरे अनुपमा अब तक योगाचार्य ही नहीं रह गई थी, बल्कि नेत्री और समाजसेवी के अलावा वह एक पत्रकार व साहित्यकार के रूप में भी प्रचारित हो चुकी थी. बसस्टैंड वाले मकान में अब अनुपमा का छोटामोटा दरबार भी लगने लगा था, जहां हैरानपरेशान औरतें अपना दुखड़ा ले कर आती थीं और अनुपमा से मदद की गुहार लगाती थीं.

राजनीति और समाजसेवा के इस नए मठ को सीहोर के लोग अब उत्सुकता से देखने लगे थे, जो आश्रम कहलाता हुआ एक शक्ति केंद्र भी बनता जा रहा था. अनुपमा अब औरतों से ताल्लुक रखते राष्ट्रीय मुद्दों पर भी बोलने लगी थी. अपनी आवाज में दम लाने के लिए उस ने सोशल मीडिया पर भी सक्रिय रहना शुरू कर दिया था और तमाम प्लेटफार्मों पर वह दिग्गज सियासी हस्तियों के साथ अपने फोटो व उपलब्धियां भी शेयर करने लगी थी. यह और बात थी कि उसे न तो ज्यादा फालोअर्स कभी मिले और न ही उस का अपना बड़ा प्रशंसक वर्ग बन पाया. लेकिन कुछ महिलाएं जरूर उस की मुरीद हो गई थीं, जिन से वह औफलाइन भी बड़ीबड़ी क्रांतिकारी बातें शेयर करने लगी थी.

ऐसी ही एक पोस्ट उस ने 8 नवंबर, 2017 को शेयर की थी जिस में लिखा था— प्रदेश में महिलाएं सुरक्षित नहीं, बच्चियां वहशी दरिंदों का शिकार हो रही हैं. इत्तफाक से ठीक 4 साल बाद 8 नवंबर, 2021 को ही अनुपमा तिवारी पुलिस की गिरफ्त में आ गई. आरोप था महिलाओं से देह व्यापार करवाना. इन 4 सालों में सीहोर की पार्वती नदी का पानी बहुत बह चुका था और यह अनुपमा अब सैक्स रैकेट की सरगना के तौर पर भी जानी गई, जिस की सीहोर वासियों को कोई खास हैरानी नहीं हुई. क्योंकि जो वह कर रही थी, उस से पूरा शहर वाकिफ हो चुका था.

छापे के बाद लोग हुए हैरान सीहोर के युवा एसपी मयंक अवस्थी को सीहोर आए अभी 2 महीने ही पूरे हुए थे. पदभार संभालते ही उन्हें शिकायतें मिलने लगी थीं कि बसस्टैंड के नजदीक धड़ल्ले से देह व्यापार का अड्डा संचालित हो रहा है जिस की कर्ताधर्ता एक पहुंच वाली और रसूखदार नेत्री है. मुखबिर भी लगातार खबर दे रहे थे कि यह अड्डा कौन संचालित करता है और कैसे काम करता है. इतना ही नहीं, मोहल्ले के लोग भी नाम से और गुमनाम शिकायतें पुलिस को कर चुके थे कि इस मकान में सैक्स रैकेट के चलते उन का वहां रहना मुहाल हो रहा है लिहाजा पुलिस सख्त काररवाई करे.

मयंक अवस्थी ने अनुपमा की कुंडली खंगाली तो उन्हें आरोप व शिकायतें सच और अनुपमा की गतिविधियां संदिग्ध लगीं. लिहाजा उन्होंने सीएसपी समीर यादव की अगुवाई में एक टीम गठित कर दी, जिन के निर्देशन में थानाप्रभारी कोतवाली अर्चना अहीर और उन के साथियों ने 8 नवंबर, 2021 को योजनाबद्ध तरीके से अनुपमा के घर पर छापा मार दिया. जैसे ही पुलिस टीम मकान के अंदर पहुंची तो तीनों कमरों में योगासनों की जगह वात्स्यायन के कामसूत्र में वर्णित कामासनों और अय्याशी का खुला खेल चल रहा था. शबाब के साथसाथ शराब भी थी, कंडोम भी थे और उत्तेजक अश्लील सामग्री भी थी, जो इस तरह के हर छापे में आमतौर पर मिलती ही हैं.

एक कमरे में मसाज बैड भी था और बड़ी स्क्रीन वाला टीवी भी दीवार पर टंगा था. जब पुलिस टीम बाहर टोह ले रही थी, तब इस मकान से तेज आवाज में संगीत की भी आवाज आ रही थी. जाहिर है मौजमस्ती के शौकीन गुलाबी सर्दी को पूरी तरह एंजौय कर रहे थे, जिन की सारी खुमारी पुलिस टीम को सामने खड़ा देख हवा हो गई थी. कमरों की मुकम्मल तलाशी के बाद जब आरोपियों को लाइन में खड़ा किया गया तो उन के चेहरों पर हवाइयां उड़ रही थीं. रंगेहाथों पकड़े जाने के कारण किसी के पास अपनी सफाई में कहने को कुछ नहीं था. शुरुआती पूछताछ में यह बात साफ हो गई कि चारों महिलाएं भोपाल की उपनगरी बैरगढ़ से धंधा करने आईं थीं, जिन का अपना एक वाट्सऐप ग्रुप भी था. ग्राहकों और कालगर्ल्स को इंदुलता नाम की एक महिला मैनेज करती थी.

पकड़े गए चारों ग्राहक सीहोर के ही थे जिन के हावभाव देख साफ लग रहा था कि वे इस अड्डे से अच्छी तरह वाकिफ थे, लेकिन इस बार गच्चा खा गए थे. क्योंकि पुलिस ने अनुपमा मैडम के नाम और रसूख का कोई लिहाज नहीं किया था. कानूनी खानापूर्ति के बाद आरोपियों को थाने लाया गया, लेकिन उस के पहले ही इस छापे की खबर जंगल की आग की तरह सीहोर से भोपाल होती हुई पूरे मध्य प्रदेश और देश में फैल गई थी, जिस की इकलौती वजह यह थी कि इस गिरोह की सरगना शिवसेना की नेत्री थी, जो नगर पालिका अध्यक्ष पद का चुनाव भी लड़ चुकी थी.

पुलिस टीम ने मौके से 10 मोबाइल फोन और 28 हजार रुपए नगद भी जब्त किए. 2 लग्जरी कारें भी मकान के बाहर से बरामद की गईं. सभी आरोपियों के खिलाफ थाना कोतवाली सीहोर में अनैतिक देह व्यापार निवारण अधिनियम की धाराओं के तहत काररवाई की गई. पुलिस टीम में एसआई प्रिया परते और पूजा राजपूत के अलावा कांस्टेबल कुलदीप, चंद्रभान व विक्रम शामिल थे. बदनामी के डर से कांप रहे आरोपियों और महिलाओं ने उस वक्त चैन की सांस ली, जब उन्हें देर रात थाने से ही बांड भरवा कर जमानत दे दी गई.

गलत क्या कर रही थी अनुपमा अनुपमा ने देह व्यापार की बात स्वीकारी क्योंकि यह तो छापे में ही साबित हो चुका था कि ग्राहकों ने कालगर्ल्स को 500-500 रुपए के हिसाब से भुगतान किया था और ये महिलाएं बैरागढ़ से आई थीं. अनुपमा के पति की मौत कोई 3 साल पहले हो चुकी थी. इस के बाद उसे पैसों की किल्लत होने लगी थी. कुछ दिन मायके होशंगाबाद में रहने के बाद वह ससुराल सीहोर वापस आई और समाजसेवा के काम में जुट गई. लेकिन इस के बाद वह इंदौर चली गई थी. इस दौरान वह सीहोर कभीकभार आती रही लेकिन उस की गतिविधियां और सक्रियता कम हो रही थीं.

आजकल समाजसेवा भी मुफ्त में नहीं होती फिर अनुपमा के खर्चे तो अनापशनाप थे. विधवा होने की त्रासदी भुगत रही अनुपमा ने देखा कि उस के जैसी कई विधवाएं और परित्यक्ताएं बदहाल जिंदगी जी रही हैं. कइयों के पति निकम्मे और शराबी हैं तो कुछ का चक्कर इधरउधर चल रहा है. ऐसी औरतों को कमानेखाने और बच्चे अगर हों तो उन की परवरिश और स्कूलिंग के लिए पैसों के लाले पड़े रहते हैं और उन की कोई सगे वाला तो दूर की बात है दूर वाला भी मदद नहीं करता और जो करता है वह उन से कुछ न कुछ चाहता जरूर है. अनुपमा ने कुछ सोचा और फिर इन बेसहाराओं और जरूरतमंदों की मदद करने की गरज से उन से देहव्यापार करवाना शुरू कर दिया, जिस से उसे भी दलाली के जरिए खासी आमदनी होने लगी.

अनुपमा के संपर्क में लगभग 15 महिलाएं थीं और एकदो को छोड़ कर सभी अधेड़ सी थीं, जिन की अपने पतियों से पटरी नहीं बैठती थी या पतियों ने उन्हें छोड़ रखा था यानी वह इस धंधे में शादीशुदाओं को ही लाती थी. क्योंकि ग्राहक से ज्यादा वे राज उजागर होने से डरती थीं. पैसों के लिए देह व्यापार का शार्टकट अपनाने के लिए अनुपमा ने उन्हें उकसाया और समझाया था, कोई जोरजबरदस्ती की होगी, जैसा कि पुलिस और मीडिया वाले कह रहे हैं, ऐसा लग नहीं रहा. जिस का खुलासा अदालत में हो जाएगा. सीहोर में पकड़े गए रैकेट में सभी महिलाएं अधेड़ और वक्त की मारी थीं, जिन का इकलौता आर्थिक और सामाजिक सहित भावनात्मक सहारा भी अनुपमा ही थी.

अनुपमा ने कानूनन जरूर जुर्म किया है जो अगर साबित हो पाया तो उसे सजा भी मिलेगी. लेकिन देखा जाए तो उस ने बेसहारा औरतों को होने वाले मुफ्त के शारीरिक शोषण को सशुल्क कर दिया था, जिस से उन्हें किसी के आगे हाथ नहीं पसारना पड़ता था. अनुपमा के पास बड़ा मकान था और उस का अपना एक अलग रुतबा भी था, जिस का फायदा उठा कर उस ने देह व्यापार का आदिम धंधा शुरू कर दिया. यह भी सोलह आने सच है कि पुलिस उस पर हाथ डालने से कतरा रही थी क्योंकि उस के तार कई दिग्गजों से जुड़े थे. लेकिन गिरफ्तारी के बाद चर्चा के मुताबिक कोई बड़ा नाम सामने नहीं आया तो तमाम अटकलों पर विराम लग गया और अनुपमा को भी समझ आ गया कि लोग लुत्फ और फायदा तो उठाने में पीछे नहीं रहते, लेकिन कीचड़ को भी माथे से नहीं लगाते. हर कोई पाकसाफ दिखना चाहता है.

यह भी हर्ज या ऐतराज की बात नहीं, पर सीहोर का यह छापा सोचने को मजबूर करता ही है कि हैरानपरेशान और जरूरतमंद औरतें देह व्यापार में क्यों आती हैं और इन्हें सजा देने से अब तक किस को क्या हासिल हुआ है. देह व्यापार जब कानून से बंद नहीं हो सकता तो इसे कानूनी मान्यता देने में हर्ज क्या है. MP News

 

Hindi Story : बुरखे वाली बदनसीब

Hindi Story : अफगानिस्तान में तालिबान के दोबारा आ जाने के बाद वे यौनकर्मियां भी भयभीत हैं, जो छिपे तौर पर देह व्यापार में लिप्त रहती थीं. इस बारे में एक यौनकर्मी जैनब ने अपनी जो पीड़ा सुनाई वह…

जैनब जब 2 साल पहले अपने ग्राहक से मिली थी, तब वह नशे में थी. उस ने उस के साथ सैक्स करना शुरू किया. सैक्स क्या था, उसे बलात्कार कहना ही ज्यादा सही होगा, क्योंकि उस पीड़ा से वह कराह भी नहीं पा रही थी. कुछ समय में वह मरणासन्न जैसी हो गई थी. उस ने पहले कभी शराब को छुआ तक नहीं था, लेकिन कहा गया था कि वह बेहोश हो जाएगी. यह करने के लिए उसे भयभीत किया गया था और उस ने ऐसा करने के लिए अनिच्छा से सहमत हुई थी. तब उस की उम्र महज 18 वर्ष थी. वह आदमी चला गया था. जब वह जागी तब उस का शरीर दर्द से कराह रहा था. उस के मन में क्षोभ भर चुका था. यह बताते हुए वह कहती है कि उस के बाद सैक्स जारी रखने के अलावा उस के पास कोई विकल्प नहीं था.

अफगानिस्तान में सैक्स वर्क पूरी तरह से गैरकानूनी रहा है, लेकिन जैसेजैसे युद्ध के बाद अराजकता का माहौल बना और लाखों की संख्या में लोग व्यापक गरीबी की चपेट में आ गए. तब बहुत सारी औरतें और पुरुषों ने देह व्यापार को अपनी आजीविका का जरिया बना लिया. सैक्स वर्क गैरकानूनी होने के बावजूद अफगानिस्तान में दंड संहिता के तहत किसी सजा का उल्लेख नहीं है, लेकिन पकड़े जाने पर जेल की सजा का जोखिम बना रहता है. इस संबंध में बताते हैं कि अफगानिस्तान में गरीबी और अशिक्षा वेश्यावृत्ति के मुख्य कारण रहे हैं. खास कर गरीब युवा महिलाओं में यौनाचार के ज्ञान के समझ की कमी होती है. वे मर्दों के झांसे में आ जाती हैं. कभी डर से तो कभी बेहतर जिंदगी के लालच में इस पेशे को धोखे से अपना लेती हैं.

जैनब के साथ भी ऐसा ही कुछ हुआ था. काफी मिन्नतों के बाद 21 साल की जैनब अमेरिका के गार्जियन अखबार के पत्रकार को इंटरव्यू देने के लिए तैयार हुई थी. उस ने अपना नाम नहीं छापने की शर्त रखी थी. उस ने बताया कि अपने पिता की मृत्यु के बाद वह 5 छोटे भाईबहनों की देखभाल की जिम्मेदारी के बोझ तले दब गई थी. उस वक्त वह 13 साल की थी. मां भी लंबे समय से बीमार चल रही थी. इस के लिए उसे पहले तो स्कूल छोड़ना पड़ा. फिर वह घरेलू नौकरानी के रूप में काम करने लगी. एक बार उस का छोटा भाई बीमार हो गया. उसे अस्पताल में देखभाल और दवा की जरूरत पड़ी. अस्पताल में एडवांस में पैसे जमा करने को कहा. उस के पास पैसे तो थे नहीं, इसलिए वह अपनी मालकिन के पास गई तो उस ने कहा

‘‘मेरे पास पैसे नहीं हैं, लेकिन मैं तुम्हारे लिए एक आदमी ला सकती हूं. तुम कुंवारी हो, तुम बहुत पैसा कमा सकोगी.’’

दरअसल, वह जिस औरत के यहां हाउसकीपिंग का काम करती थी वह एक अंडरग्राउंड वेश्यालय की मालकिन थी. जैनब ने बताया कि तब उसे नहीं पता था कि वह आदमी उस के साथ क्या करने वाला है. उसे यह कहते हुए शराब पिलाई गई कि उस के साथ जो कुछ होगा, उस का उसे पता नहीं चलेगा. थोड़े समय में उस की बेहोशी दूर हो जाएगी. तब तक उस के बीमार भाई का इलाज चलता रहेगा. यह जैनब को इस धंधे में धकेले जाने की शुरुआत थी. उस के भाई का इलाज तो हो गया, लेकिन वह खुद बीमार हो गई, तन से भी और मन से भी. उस ने महसूस किया कि उस के साथ कुछ गलत हुआ है. उस गलती को सुधारा नहीं जा सकता है सिवाय छिपाने के.

जैनब ने आगे बताया कि उस के बाद उसे हर हफ्ते 2 से 3 पुरुषों के मनोरंजन का साधन बनना पड़ा. उन के दिल बहलाने से ले कर देह की भूख मिटाने तक का काम करना पड़ा. हमबिस्तर होना पड़ा. उन में से प्रत्येक से 2,000 अफगानी मुद्रा में पैसे मिले, जो भारतीय मुद्रा से थोड़े कम थे. सैक्स वर्क के बारे में जैनब ने बताया कि इस काम के लिए उन्हें 10 मिनट का समय देना होता था, लेकिन कभीकभी 20 मिनट का समय भी देना पड़ता था. इस दौरान कुछ ग्राहक कंडोम का उपयोग करते थे, लेकिन अधिकतर कंडोम से परहेज करते थे. उस ने बताया कि यह उस के लिए जान के जोखिम से कम नहीं था.

जब वह अपने काम के बारे में बताती है, तब हाथों को बांध कर बैठ जाती है. केवल उस की आंखें खुली रहती हैं और फिर धाराप्रवाह बोलती चली जाती है. उन्होंने अफगानिस्तान की राजधानी काबुल में सैक्स बेचने वाले पुरुष और महिलाओं के बारे में जिक्र करते हुए उन के ठिकानों के बारे में भी बताया. काबुल में अधिकतर ऐसे अड्डे दोस्तों के घर, कौफी शौप और ब्यूटीपार्लर से जुड़े होते हैं. ग्राहकों में अधिकतर पुरुष युवा होते हैं, जिन की आयु 25 से 30 वर्ष के बीच होती है. उन में से ज्यादातर विवाहित हैं. वे सैक्सवर्कर के दलालों को जानते हैं और अपौइंटमेंट की व्यवस्था करने के लिए उन्हें फोन करते हैं.

कुछ पुरुष कई लड़कियों में से चुनने का अनुरोध करते हैं. वे कइयों के साथ सैक्स कर चुके होते हैं, इस कारण नई लड़की चुनने की कोशिश करते हैं. कुछ से वे नफरत भी करते हैं, जिन से उन्हें संतुष्टि नहीं मिलती. जैनब बताती है कि हर बार जब वह एक आदमी के साथ कमरे में अकेली होती है तो डरी रहती है. उस के बारे में न तो दोस्तों और न ही परिवार को पता है कि वह किस तरह से कमाई कर रही है. इस कारण वह अभी भी एक हाउसकीपर के रूप में काम करती है. जैनब ने बताया कि उसे ग्राहक तक पहुंचाने वाले पुरुष और औरत दोनों रहे हैं. वह जानती है कि काबुल में भी कई पुरुष यौनकर्मी का काम करते हैं, लेकिन उन का कहना है कि वह उन में से किसी से भी नहीं मिली हैं.

हालांकि जैनब की तरह ही 28 वर्षीय जावेद भी पुरुष सैक्स वर्कर हैं, जिन्हें पुरुष सैक्सवर्कर कहा जा सकता है. 3 बच्चों के पिता हैं. उन के काम के बारे में न तो उन की पत्नी को कुछ मालूम है और न ही बच्चे इस बारे में कुछ जानते हैं. जावेद बताते हैं कि वह दोहरी जिंदगी जीते हैं. उन्होंने बताया, ‘‘मैं ने महसूस किया कि बहुत से पुरुष मेरे साथ सोना चाहते थे और मुझे पैसे की जरूरत थी. मैं ने लोगों के साथ घर जाना शुरू किया और उस में दिलचस्पी पैदा हुई. कुछ अब मेरे ग्राहक हैं और मुझे भुगतान करते हैं. दूसरे ऐसे दोस्त हैं जिन के साथ मैं यौन संबंध बनाने का फैसला करता हूं.’’

उन का कहना है कि यह पैसा उन के बच्चों को खिलाने, अच्छी परवरिश और उन्हें स्कूल भेजने का खर्च पूरा करने के काम आता है.  जैनब और जावेद परिवर्तित नाम हैं. Hindi Story

वेबसीरीज : CRIME BEAT

Web Series : इस वेब सीरीज (Web Series) की कहानी जर्नलिस्ट अभिषेक सिन्हा की क्राइम बीट के इर्दगिर्द घूमती नजर आती है. इस में जर्नलिस्ट एक गैंगस्टर और पुलिस की पड़ताल करता नजर आता है. बीचबीच में राजनीति का तड़का लगाने की असफल कोशिश भी की गई है. इसे देख कर दर्शक खुद को ठगा सा महसूस करता है.

कलाकार:  साकिब सलीम, सबा आजाद, राहुल भट, राजेश तैलंग, आदिनाथ कोठारे, मुस्तफा बर्मावाला, दानिश हुसैन, अनिल धवन, साई तम्हणकर आदि

लेखक: संजीव कौल, सोमनाथ बटाब्याल, करण राणा, अश्विन बर्मन और दिलीप केशव मखरिया.

निर्देशक: सुधीर मिश्रा और संजीव कौल. निर्माता: राजीव अग्रवाल, अरविंद अग्रवाल और मंजू अग्रवाल

ओटीटी: जी5

वेब सीरीज ‘क्राइम बीट’ सोमनाथ बटाब्याल की किताब ‘द प्राइस यू पे’ पर आधारित है, लेकिन जब किताब ही लोकप्रिय नहीं हो सकी तो उस पर आधारित बनी वेब सीरीज के बारे में किसी को क्या उत्सुकता हो सकती है. इस का निर्देशन भले ही दिग्गज निर्देशक सुधीर मिश्रा ने किया है, लेकिन सीरीज देख कर कहीं से भी नहीं लगता कि इस का निर्देशन उन्होंने किया है. क्योंकि डायरेक्शन बहुत खराब है. सीरीज कहीं से भी एंटरटेन नहीं करती.

कथा, संवाद भी बहुत कमजोर हैं. पुलिसिया भाषा का जिस तरह इस्तेमाल किया गया है, उस का उपयोग किए बिना भी अच्छी सीरीज बनाई जा सकती थी. अपराध कहानियां छापने वाली पत्रिका ‘मनोहर कहानियां’ और ‘सत्यकथा’ शिष्ट  भाषा का उपयोग कर के भी काफी लोकप्रिय रही हैं, उन्हीं की लोकप्रियता को देख कर लोग आपराधिक पृष्ठभूमि पर सीरीज बना रहे हैं, पर वे क्यों लोकप्रिय हैं, इस सच्चाई को कोई नहीं समझ पा रहा है.

सीरीज (Web Series) की हालत यह है कि पता ही नहीं चलता कि यह बनाई ही क्यों गई है. आज इतने और तरहतरह के घोटाले हो रहे हैं, फिर भी इस में पुराने कौमनवेल्थ गेम्स घोटाले को दिखाया गया है, जिस का कोई तुक नहीं है. रही बात ऐक्टिंग की तो कोई भी ऐक्टर ऐसा नहीं है, जिस की ऐक्टिंग इंप्रेस कर सके.

एपीसोड नंबर 1

सीरीज की शुरुआत में बिन्नी नाम का एक व्यक्ति दिखाई देता है, जो इंदिरापुरम का रहने वाला था. वह बहुत बड़ा गैंगस्टर था. सीरीज में बिन्नी की भूमिका राहुल भट ने निभाई है. इंदिरापुरम के लोग बिन्नी को बहुत चाहते थे, इसलिए उसे गिरफ्तार करने आई पुलिस के खिलाफ नारे लगाते हुए वह उस की गिरफ्तारी का विरोध कर रहे थे. इस की वजह यह थी कि उस ने इंदिरापुरम वालों के लिए बहुत कुछ किया था. अचानक बिन्नी विरोध कर रहे लोगों के बीच आता है तो उसे कोई गोली मार देता है, जिस से उस की मौत हो जाती है.

इस के बाद सीरीज अतीत में चली जाती है. अर्चना पांडे और शिव बिन्नी के कहने पर लोगों का किडनैप करते थे. जबकि खबर यह थी कि बिन्नी देश छोड़ कर भाग गया है. रावत नाम का एक नेता बिन्नी के इस गैरकानूनी कामों में उस की मदद करता था, लेकिन उसे हमेशा इस बात का डर सताता रहता था कि कहीं बिन्नी के अपराधों की पुलिस को जानकारी न हो जाए. उसी दौरान रावत के पास एक वीडियो आता है, जिस में बिन्नी ने निशा नाम की एक महिला का किडनैप किया था. वह रोते हुए अपने पति से कह रही थी कि किडनैपर्स को पैसा दे कर उसे बचा लें.

रावत को पता था कि यह किडनैप किस ने किया है? तब रावत को लगता है कि बिन्नी को रास्ते से हटाना होगा, क्योंकि उसे दिल्ली का मुख्यमंत्री बनना है. इसलिए वह अपने लोगों से बिन्नी को तलाश कर मारने के लिए कहता है. इस के बाद बिन्नी अफगानिस्तान के एक शहर में दिखाई देता है, जहां वह पुलिस से बचने के लिए छिपा था. इस के बाद शिव और अर्चना अपनी कार से निशा को एक सुनसान सड़क पर ला कर छोड़ कर उसे घर जाने के लिए कहते हैं. यहां पता चलता है कि निशा का किडनैप शिव और अर्चना ने किया था. घबराई निशा जल्दी से एक टैक्सी में बैठ कर वहां से चली जाती है.

आगे पुलिस को बिन्नी की लोकेशन पता चल जाती है. पर पुलिस के वहां पहुंचने से पहले ही बिन्नी निकल जाता है. बिन्नी रावत को फोन करता है कि उसे कैसे भी दिल्ली आना है. आखिर कब तक वह इस तरह भागता रहेगा. रावत उस से कहता है कि वह सरेंडर कर दे. दिल्ली का सीएम बनते ही वह उसे जेल से निकाल लेगा, पर बिन्नी को रावत पर भरोसा नहीं था, इसलिए वह सरेंडर करने से मना कर देता है. आगे अभिषेक सिन्हा नाम का एक रिपोर्टर, जिस का रोल साकिब सलीम ने निभाया है. साकिब क्राइम रिपोर्टर की भूमिका अच्छे से नहीं कर सका.

अभिषेक उस टैक्सी ड्राइवर से मिलता है, जिस ने निशा को उस के घर तक छोड़ा था. टैक्सी ड्राइवर अशोक ने अभिषेक को बताया कि जब उस ने निशा को उस के घर छोड़ा था तो वहां कुछ पुलिस अधिकारी आए थे. उन्होंने उस से भी पूछताछ की थी. यही नहीं, उन अधिकारियों ने उसे पेड़ से उलटा लटकाया था. अभिषेक यह पूरी खबर अपने अखबार में छापता है तो यह समाचार पढ़ कर डीसीपी उदय अपने जूनियर मयंक को फोन कर के पूछते हैं कि उन्होंने उस टैक्सी ड्राइवर को उलटा क्यों लटकाया था?

डीसीपी उदय की भूमिका राजेश तैलंग ने की है तो उन के जूनियर एसीपी मयंक की भूमिका आदिनाथ कोठारे ने निभाई है. उन की वजह से पुलिस डिपार्टमेंट की काफी बदनामी हो रही है. मयंक उस समाचार को पढ़ कर काफी हैरान था. वह डीसीपी उदय से अभिषेक से मिलने की बात कह कर उसे थाने भेजने को कहता है. इस के बाद अभिषेक दिखाई देता है, जो अपने दोस्त रघु के साथ रह रहा था, क्योंकि उस की अपने पिता से बिलकुल नहीं बनती थी. अभिषेक के पिता नहीं चाहते थे कि वह रिपोर्टर बने. पुलिस अभिषेक को फोन कर के थाने बुलाती है तो वह मयंक से मिलने थाने पहुंच जाता है. मयंक उसे धमकाते हुए कहता है कि उस की हिम्मत कैसे हुई यह खबर छापने की. उसे इस के बारे में कुछ पता भी है.

इस पर अभिषेक कहता है कि वही पूरी बात बता दे. यहां पता चलता है कि अभिषेक अपनी खबर को कवर पेज पर लाने के लिए कुछ भी करने को तैयार था. अभिषेक के माफी मांगने पर मयंक उसे चेतावनी दे कर जाने के लिए कहता है. पता चलता है कि मयंक काफी ईमानदार अधिकारी है, जिस की वजह से उसे गलत बातों से सख्त नफरत थी. अभिषेक ‘द एक्सप्रैस’ अखबार में इंटरव्यू देने जाता है, जहां उस की मुलाकात माया कपूर से होती है, जो काफी समय से वहां नौकरी कर रही थी. माया कपूर का रोल सबा आजाद ने किया है. उस ने सीरीज में ऐसा कुछ नहीं किया, जिस की तारीफ की जा सके.

‘द एक्सप्रैस’ का मालिक आमिर अख्तर था. अभिषेक उस से मिलता है. उस ने अभिषेक का टैक्सी ड्राइवर वाला समाचार देखा था, इसलिए वह उसे अपने यहां नौकरी पर रख लेता है. इसी के साथ वह अभिषेक को अपने एक पत्रकार पशुपतिनाथ के साथ दिल्ली पुलिस की एक प्रैस कौन्फ्रैंस में भेजता है, लेकिन अभिषेक ने रास्ते में छोलेभटूरे खा लिए थे, जिस की वजह से उसे प्रैस कौन्फ्रैंस को बीच में ही छोड़ कर वाशरूम जाना पड़ा था.

आगे उदय मयंक से उस टैक्सी ड्राइवर के बारे में पता लगाने को कहता है, जिस से उस महिला के किडनैपर्स के बारे में पता चल सके. इतना कह कर मयंक और उदय कमरे से बाहर चले जाते हैं. उन के कमरे से बाहर जाते ही अभिषेक कमरे के वाशरूम से बाहर निकलता है. वह उन दोनों की बातें सुन लेता है. इस तरह उसे एक न्यूज और मिल गई थी. इस के बाद वह पशुपतिनाथ के साथ आ कर आमिर से मिलता है. पशुपतिनाथ आमिर को बताता है कि अभिषेक कौन्फ्रैंस के समय वाशरूम चला गया था, जिस से आमिर नाराज हो कर उसे निकाल देता है और कहता है कि उसे काम करने में लगन ही नहीं है.

आमिर घर जा रहा था, तभी अभिषेक उस से कहता है कि बिन्नी को ले कर उस के पास एक बहुत ही महत्त्वपूर्ण न्यूज है, जो उस के अखबार को आगे बढ़ा सकती है. इस तरह अभिषेक के रिक्वेस्ट करने पर आमिर उसे दोबारा काम पर रख लेता है. यहां पता चलता है कि आमिर बिन्नी को बहुत पहले से जानता था. दोनों के बीच बहुत बड़ी दुश्मनी थी. आगे हम देखते हैं कि आमिर डीसीपी उदय को फोन कर के कहता है कि वह उस से कल मिलना चाहता है. दूसरी ओर बिन्नी ट्रक पर बैठ कर अफगानिस्तान की सीमा पार कर लेता है. बिन्नी जब सीमा पार कर रहा था, तब पुलिस का एक मुखबिर नूर को बताता है कि बिन्नी सीमा पार कर रहा है. नूर बिन्नी की तलाश में सीमा पर पहुंच जाती है, लेकिन बिन्नी उसे नहीं मिलता.

बिन्नी अर्चना को फोन कर के बताता है कि कल का दिन इंदिरापुरम वालों के लिए खुशी का दिन होगा. इस का मतलब वह कल इंदिरापुरम वालों के लिए कुछ करेगा. अगले दिन इंदिरापुरम में हेलीकौप्टर से नोटों की बारिश होने लगती है, जिसे देख कर सभी हैरान रह जाते हैं. हालांकि यह रुपयों की बारिश किसी और ने नहीं, बिन्नी ने ही करवाई थी.

एपीसोड नंबर 2

दूसरे एपीसोड के शुरू में आमिर उदय से मिल कर कहता है कि वह बिन्नी की पूरी सच्चाई उसे बताए, जिसे वह अपने अखबार में छाप कर दिल्ली वालों को उस की सच्चाई बताएगा. लेकिन उदय बिन्नी की कोई भी बात बताने से मना कर देता है, क्योंकि रावत ने उस से कहा था कि उस की बात कहीं किसी के सामने नहीं आनी चाहिए. हालांकि आमिर जानता था कि उदय रावत का चमचा है.

आगे अभिषेक आ कर पशुपतिनाथ को बताता है कि आज इंदिरापुरम में रुपयों की बरसात हुई है. शायद इस के पीछे बिन्नी का हाथ है. इस के बाद पशुपतिनाथ अभिषेक को बिन्नी और अर्चना के बारे में बताता है. उस ने बताया कि कई साल पहले अर्चना ऐक्टर बनने के लिए दिल्ली आई थी, लेकिन जब वह ऐक्टर नहीं बन पाई तो बिन्नी के गैंग में शामिल हो गई. अर्चना पांडे की भूमिका में साई तम्हणकर है.

इस के बाद दोनों मिल कर लोगों का किडनैप कर फिरौती वसूलने लगते हैं. इस तरह धीरेधीरे बिन्नी बहुत बड़ा गैंगस्टर बन जाता है. आगे माया अपने मैनेजर से जा कर कहती है कि वह इतने दिनों से क्राइम रिपोर्टर बनने का प्रयास कर रही थी, लेकिन उन लोगों ने उसे क्राइम रिपोर्टर बनाने के बजाय अभिषेक को क्राइम रिपोर्टर बना दिया. इस पर मैनेजर कहता है कि वह चिंता न करे. उस के बारे में वह आमिर सर से बात करेगा. उसी दौरान अभिषेक आमिर से जा कर कहता है कि वह बिन्नी के बारे में काफी ज्यादा जानकारी निकाल सकता है, लेकिन आमिर उसे बिन्नी पर रिपोर्टिंग करने से मना कर देता है.

आगे नूर को एक आदमी रुपए ले कर बिन्नी की लोकेशन बताता है. आगे लंच टाइम में माया अभिषेक से कहती है कि वह काफी समय से यहां काम कर रही है, जबकि उस ने आ कर उस का ड्रीम जौब छीन लिया. इस पर अभिषेक हंसने लगता है. यहीं दोनों में दोस्ती हो जाती है. इस के बाद टैक्सी ड्राइवर अशोक से मयंक मिलता है और उस महिला के बारे में पूछता है. अशोक बताता है कि वह महिला उस की टैक्सी से उतर कर येलो कलर की एक कार में बैठ गई थी, जिस पर किसी न्यूज चैनल का स्टिकर लगा था.

दूसरी ओर आमिर के औफिस में सभी रिपोर्टर अपनीअपनी खबर सुना रहे थे. अभिषेक भी अपनी खबर सुनाता है, लेकिन आमिर को अभिषेक की खबर में कोई दम नहीं दिखाई देता. वह अभिषेक से कहता है कि जब उस की खबर में दम होगा, तब उसे वह फ्रंट पेज पर छापेगा. अगले दिन आमिर मोटेरा नाम के आदमी से मिलने जाता है. मोटेरा को दिल्ली में होने वाले अवैध कामों की जानकारी होती थी. वह मोटेरा से पूछता है कि बिन्नी के हवाला के काम को कौन संभालता है? मोटेरा बताता है कि बिन्नी के हवाला कारोबार को सलीम देखता है. तब आमिर मोटेरा से सलीम और अर्चना के बारे में और जानकारी निकालने को कहता है.

शाम को अभिषेक आमिर को अपनी न्यूज सुनाता है, जो आमिर को पसंद नहीं आती. तब आमिर कहता है कि उस ने उसे क्राइम रिपोर्टर बना कर गलती की है. आगे मयंक को पीले रंग की कार के बारे में पता चलता है कि वह निशा बंसल की थी. फिर मयंक उदय को बताता है कि बिन्नी ने रितेश बंसल की पत्नी निशा बंसल का किडनैप किया था. रितेश कौमनवेल्थ गेम्स का ठेकेदार भी था. तब उदय मयंक से रितेश और निशा को थाने बुलाने को कहता है. आगे अर्चना और शिव एक बिजनैसमैन के बेटे अमित के किडनैप का प्लान बनाते दिखाई देते हैं. इस के बाद दोनों अमित के पीछे लग जाते हैं.

उधर औफिस में पशुपतिनाथ अभिषेक से कहता है कि क्राइम रिपोर्टर बनना बहुत मुश्किल काम है. अगर उस ने जल्दी कुछ अच्छा नहीं किया तो उसे यहां से निकाला जा सकता है. यह सुन कर अभिषेक टेंशन में आ जाता है. अपनी न्यूज फ्रंट पेज पर छपवाने के लिए रात को वह रघु से कहता है कि वह रात को बिन्नी के घर जा कर रिपोर्टिंग करेगा, ताकि उस की न्यूज फ्रट पेज पर आ जाए. लेकिन यह इतना आसान नहीं था. अगली सुबह अभिषेक और रघु इंदिरापुरम स्थित बिन्नी के घर पहुंच जाते हैं, जो काफी समय से बंद पड़ा था.

एपीसोड नंबर 3

जब अभिषेक और रघु बिन्नी के घर में घुसने लगते हैं तो एक आदमी उन्हें पकडऩे की कोशिश करता है. तब दोनों वहां से बच कर भाग निकलते हैं. उधर अर्चना अमित का पीछा करते हुए पब में आ जाती है और अमित के साथ डांस करने लगती है.

अमित भी उस के साथ इंजौय करने लगता है. दूसरी ओर अभिषेक रात को (Web Series) बिन्नी के घर में घुस जाता है तो वहीं बिन्नी को पुलिस उस के अड्ïडे पर छापा मार कर पकड़ लेती है. अभिषेक जब बिन्नी के घर में तलाशी ले रहा था, तभी एक आदमी उसे मार कर बेहोश कर देता है. अभिषेक की आंखें खुलती हैं तो सलीम नाम का आदमी उस से पूछता है कि वह इस घर में क्यों आया था?

तब अभिषेक कहता है कि वह इस घर में गलती से आ गया था. यह कह कर वह सलीम से जान की भीख मांगने लगता है. सलीम उसे धमका कर भगा देता है. आगे पुलिस बिन्नी को थाने ले जा रही थी तो बिन्नी के आदमी पुलिस पर हमला कर के उसे छुड़ा ले जाते हैं.

अभिषेक घर आता है तो रघु उसे खूब खरीखोटी सुनाता है. क्योंकि उसे आभास हो गया था कि बिन्नी का पीछा करने से उस की जान भी जा सकती थी. जबकि अभिषेक कहता है कि यह न्यूज उस के जीवन की सब से बड़ी न्यूज होगी, इसलिए वह इस मौके को बिलकुल नहीं छोड़ेगा. मयंक उदय के पास जा कर अर्चना की फोटो दिखाते हुए कहता है कि उसे अर्चना की यह फोटो मिली है. इसे वह पोस्टर बनवा कर पूरे शहर में लगवा देगा, जिस से उस का काम आसान हो जाएगा. लेकिन उदय मना कर देता है, क्योंकि वह नहीं चाहता था कि अर्चना को यह पता चले कि पुलिस उसे ढूंढ रही है.

आगे अभिषेक माया से मिलता है तो वह उसे पूरा शहर घुमाती है. यहां अभिषेक को पता चलता है कि माया अमीर बाप की औलाद है, जो केवल अपना शौक पूरा कर रही है. तभी सलीम के पास अर्चना और शिव आते हैं तो सलीम के घर के सामने खड़ा मोटेरा चुपके से अर्चना की फोटो खींच लेता है. अभिषेक पुलिस कमिश्नर से मिल कर कहता है कि वह पुलिस के बारे में एक न्यूज छापना चाहता है. तब कमिश्नर उसे डीसीपी उदय के पास भेज देते हैं. आगे थाने में मयंक निशा और रितेश से पूछताछ करता दिखाई देता है. रितेश कहता है कि उस की पत्नी का किडनैप नहीं हुआ था. निशा भी कहती है कि कुछ दिनों के लिए वह बाहर गई थी.

तभी टैक्सी ड्राइवर अशोक आ जाता है. तब निशा को न चाहते हुए भी बताना पड़ता है कि अर्चना नाम की महिला ने उस का किडनैप किया था और उस के पति से फिरौती ले कर उसे छोड़ा था. इस के बाद रितेश भी सारी सच्चाई बता देता है. अभिषेक उदय के पास आता है और कहता है कि वह पुलिस पर एक अच्छी न्यूज छापना चाहता है. तब उदय मयंक से कहता है कि इसे अपने साथ रखो, जिस से यह पुलिस पर एक अच्छा आर्टिकल छाप सके. मयंक अभिषेक को साथ ले जाता है. दोनों एक जगह बैठे होते हैं, तब अभिषेक मयंक से पूछता है कि इतना काम करते हुए वह अपने परिवार को कैसे संभालते हैं?

तब मयंक कहता है कि पुलिस वालों की जिंदगी बड़ी अजीब होती है. उन की आधी जिंदगी देश की सेवा में बीत जाती है तो आधी जिंदगी परिवार संभालने में. आगे मयंक अभिषेक को अर्चना की फोटो दिखाते हुए कहता है कि यह बिन्नी की साथी है, इसलिए उसे यह लड़की कहीं भी दिखाई दे तो वह उसे बताए. आगे बिन्नी दिल्ली जाने की तैयारी करता दिखाई देता है. वह पेशेंट बन कर दिल्ली जाना चाहता था, लेकिन इस बात की जानकारी नूर को हो जाती है तो वह यह बात रावत को बता देती है. रावत इस बात से हैरान रह जाता है. वह नहीं चाहता था कि बिन्नी दिल्ली आए, क्योंकि वह उस के लिए परेशानी बन सकता था.

फिर आमिर उदय को एक फोटो दिखाता नजर आता है, जिस में अर्चना और सलीम एक साथ थे. यह फोटो आमिर को मोटेरा ने दी थी, लेकिन उदय सलीम को गिरफ्तार करने से मना कर देता है. तभी रावत उदय को फोन कर के बताता है कि बिन्नी प्लेन से दिल्ली आ रहा है. वह एयरपोर्ट पर जा कर उसे गिरफ्तार कर ले. रावत की बात मान कर उदय एयरपोर्ट जाता है, पर उसे वहां बिन्नी नहीं मिलता. वह रावत को फोन कर के यह बात बताता है तो रावत कहता है कि वह किसी भी तरह बिन्नी को गिरफ्तार करे, वरना वह भी नहीं बचेगा. इस से उदय टेंशन में आ जाता है.

एपीसोड नंबर 4

चौथे एपीसोड (Web Series) में बिन्नी मुंबई एयरपोर्ट पर उतर कर दिल्ली के लिए निकलता दिखाई देता है. पुलिस उसे पकड़ नहीं पाती.जब इस बात की जानकारी रावत को होती है तो वह उदय से कहता है कि बिन्नी हमारे लिए बहुत बड़ा सिर दर्द बनता जा रहा है, उसे किसी भी तरह खत्म करना होगा. औफिस में अभिषेक आमिर को अपनी न्यूज बता रहा था, जो आमिर को पसंद भी आती है, लेकिन तभी एक महिला रिपोर्टर आ जाती है और वह एक बच्चे के मर्डर की न्यूज बताती है. आमिर उस न्यूज को फ्रंट पेज पर छाप देता है. अभिषेक की न्यूज नहीं छपती तो उसे बहुत गुस्सा आता है.

दूसरी ओर अर्चना बिन्नी से कहती है कि उसे दिल्ली नहीं आना चाहिए था. पुलिस के साथसाथ अभिषेक नाम का रिपोर्टर भी उस के पीछे पड़ा है. बिन्नी कहता है कि उसे किसी से डर नहीं लगता. वह इंदिरापुरम वालों को छोड़ कर ज्यादा दिनों तक बाहर नहीं रह सकता. आमिर अपने एक दोस्त किशोर के बेटे के बर्थडे पर जाता है, लेकिन वह मन ही मन बहुत उदास था, क्योंकि उस के बेटे को मरे कई साल हो गए थे, फिर भी वह बेटे का बर्थडे बड़ी धूमधाम से मनाता था.

दरअसल, कई साल पहले बिन्नी के लोगों ने फिरौती के लिए किशोर के बेटे का किडनैप कर लिया था, लेकिन आमिर ने उस से कहा था कि वह चिंता न करे, उस के बेटे को वह वापस ले आएगा. लेकिन पुलिस मुठभेड़ में किशोर का बेटा मारा गया था, इसलिए किशोर के बेटे की मौत का जिम्मेदार आमिर खुद को मानता था और हर हालत में वह बिन्नी को सजा दिलवाना चाहता था. रात को औफिस के सभी लोग अभिषेक के घर पार्टी करने आते हैं, जिन्हें माया ले कर आई थी. जब सभी लोग पार्टी कर रहे थे, तब अभिषेक बाहर उदास बैठा था. माया बाहर आ कर उस से उदासी का कारण पूछती है और उस से कहती है कि एक न एक दिन उस की न्यूज फ्रंट पेज पर अवश्य छपेगी. अभिषेक को यह अच्छा लगता है.

अगले दिन अभिषेक औफिस जाता है तो उसे पशुपतिनाथ की केबिन में बिन्नी की फोटो लगी दिखाई देती है. पशुपतिनाथ उस से कहता है वह आमिर को बिना बताए बिन्नी की खबर निकाल रहा है. इस पर अभिषेक कहता है कि उसे विश्वास है कि बिन्नी की खबर उस के अखबार को आगे ले जाएगी, लेकिन यह बात वह आमिर सर को न बताए, वरना वह उस पर गुस्सा करेंगे. आगे अर्चना अमित को मिलने के लिए फोन करती है. अमित उस के जाल में फंस कर उस से मिलने चला जाता है. अभिषेक धीरज नाम के व्यक्ति से मिलता है और बिन्नी के बारे में पूछता है.

धीरज कहता है कि अगर वह बिन्नी को देखना चाहता है तो उसे करुणाजी से मिलना होगा, क्योंकि वह अपना हर काम करुणाजी से आशीर्वाद ले कर ही करता है. करुणाजी आहना की दादी थी. अभिषेक यह सोचने लगता है कि वह आहना से कैसे मिले. दूसरी ओर अमित अर्चना को रघु के घर रोमांस करने के लिए ले जाता है, क्योंकि रघु और अमित अच्छे दोस्त थे. जब अर्चना और अमित शारीरिक संबंध बनाने लगते हैं, तभी रघु और अभिषेक आ जाते हैं. अर्चना को देख कर अभिषेक दंग रह जाता है, पर वह कहता कुछ नहीं है.

अमित मजे करने के लिए अर्चना को ले कर अपने घर चला जाता है. हालांकि अभिषेक समझ गया था कि अर्चना का अगला टारगेट अमित है. यह बात वह मयंक को बताता है तो मयंक टीम के साथ अमित के घर के लिए निकल पड़ता है. उधर अमित और अर्चना रोमांस कर रहे थे, तभी अमित के पिता महाजन आ जाते हैं. वह कुछ कहते, तभी बिन्नी अर्चना को फोन कर के कहता है कि वह जल्दी से महाजन को ले कर निकले, क्योंकि पुलिस आ रही है.

एपीसोड नंबर 5

पांचवें एपीसोड की शुरुआत में अर्चना महाजन को ले कर निकल रही थी, तभी मयंक अपनी टीम के साथ पहुंच जाता है. दोनों ओर से गोलियां चलती हैं. 4 पुलिस वाले मारे जाते हैं, लेकिन अर्चना महाजन को ले कर निकल जाती है. मयंक उदास हो जाता है, क्योंकि वह अर्चना को पकड़ नहीं सका था. अभिषेक भी वहां पहुंच गया था और पूरी घटना की रिकौर्डिंग करने लगा था. अंत में मयंक ने उस से कहा कि उसे यहां नहीं आना चाहिए था, ऐसे में उस की जान जा सकती थी. तब अभिषेक कहता है कि जब वे अपने काम के लिए जान की परवाह नहीं करते तो वह अपने काम के लिए जान की परवाह कैसे कर सकता है.

आगे उदय मयंक से मिलने जाता है. उसे पता चल गया था कि मयंक अर्चना को पकडऩे गया था. उदय मयंक पर बहुत गुस्सा होता है कि उस की लापरवाही की वजह से 4 पुलिसवालों की जान चली गई. मयंक कहता है कि उस के पास समय बहुत कम था, इसलिए उस की परमीशन के बगैर ही वह वहां चला गया था. तब इमोशनल हो कर मयंक कहता है कि वह किसी भी हालत में बिन्नी को पकडऩा चाहता है, क्योंकि उस ने उस के पिता को मारा था.

तब उदय गुस्से में कहता है कि उस के पिता एक गद्ïदार आदमी थे, उन्हीं की वजह से आज बिन्नी आजाद घूम रहा है. यह सुन कर मयंक के पैरों तले से जमीन खिसक जाती है, क्योंकि वह अपने पिता की बहुत इज्जत करता था. इस के बाद अतीत में दिखाया जाता है कि आमिर आ कर उदय को बताता है कि बिन्नी ने उस के दोस्त किशोर के बेटे का किडनैप किया है. उदय और रावत चाहते थे कि बिन्नी को मार दिया जाए, क्योंकि रावत नहीं चाहता था कि आगे चल कर बिन्नी उस का भांडा फोड़ दे.

उदय बिन्नी को मारने जाता है तो उस के पहले ही मयंक के पिता बिन्नी को पुलिस के आने की सूचना दे देते हैं. बिन्नी भाग जाता है और मारे जाने से बच जाता है. जब उदय को पता चलता है कि मयंक के पिता बिन्नी के लिए काम करते हैं तो वह गुस्से में मयंक के पिता को गोली मार देता है. यह बात केवल एक आदमी को पता थी, जिस के बारे में आगे चल कर पता चलेगा.

अभिषेक आमिर को एक वीडियो दिखाता है, जिस में अर्चना पुलिस वालों पर गोलियां चला रही थी. अभिषेक आमिर से कहता है कि अगर यह न्यूज फ्रंट पेज पर आ गई तो उस का अखबार आगे बढ़ जाएगा. आमिर को उस की यह न्यूज पसंद आ गई थी. वह उसे फ्रंट पेज पर छापने के लिए राजी हो जाता है. अभिषेक बहुत खुश होता है. जा कर माया के साथ पार्टी करता है. इतना ही नहीं, दोनों शारीरिक संबंध भी बनाते हैं.

अगले दिन सुबह अभिषेक अपनी न्यूज देखने के लिए बड़ी बेसब्री से अखबार का इंतजार कर रहा था, लेकिन जब अखबार आता है तो न्यूज तो उस की छपी थी, लेकिन उस के नीचे आमिर का नाम छपा था. यह बात उस की समझ में नहीं आती. वह औफिस जा कर जब यह बात आमिर से पूछता है तो आमिर कहता है कि यह न्यूज उस की नहीं थी. वह काफी समय से बिन्नी पर नजर रख रहा था. लेकिन अभिषेक उस पर गुस्सा था, क्योंकि आमिर ने उस का क्रेडिट चुरा लिया था.

एपीसोड नंबर 6

छठें एपीसोड (Web Series) के शुरू में नाराज अभिषेक आमिर को खरीखोटी सुना कर नौकरी छोड़ कर चला जाता है. दूसरी ओर महाजन के किडनैप की खबर पूरी दिल्ली में फैल गई थी. तब बिन्नी अर्चना से कहता है कि ये अखबार वाले अपने फायदे के लिए किसी को भी बदनाम कर सकते हैं. उस की बातों से पता चलता है कि बिन्नी के दिमाग में कुछ और ही चल रहा था.

अभिषेक ‘द एक्सप्रैस’ की नौकरी छोड़ कर दूसरी जगह नौकरी खोजता है, पर उसे कहीं नौकरी नहीं मिलती, क्योंकि उस ने आमिर से पंगा जो ले लिया था. अभिषेक एक रेस्टोरेंट में पशुपतिनाथ के साथ बैठा था तो पशुपतिनाथ कहता है कि उस ने आमिर से पंगा ले कर ठीक नहीं किया. अब शायद ही उसे कहीं काम मिल सके. यह सुन कर अभिषेक सोच में पड़ जाता है कि अब वह क्या करेगा.

दूसरी ओर मयंक अपने पिता की सच्चाई जानने के लिए उन के दोस्त कृपाल से मिलता है तो वह बताते हैं कि उस के पिता ने बिन्नी को पुलिस के आने की सूचना दे दी थी, जिस से वह बच कर भाग गया था. तब मयंक पूछता है कि तब उस के पिता को मारा किस ने? कृपाल सच्चाई बता देता है. तब मयंक निर्णय लेता है कि वह अपने सीनियर से उदय की सच्चाई बता देगा. आगे पशुपतिनाथ अभिषेक को एक न्यूज चैनल में ले जाता है. पशुपतिनाथ ने अभिषेक की मदद इसलिए की थी, क्योंकि बहुत पहले आमिर ने पशुपतिनाथ की न्यूज की भी क्रेडिट चोरी कर ली थी. अभिषेक को वहां नौकरी मिल जाती है.

दूसरी ओर माया से आमिर कह रहा था कि अब वह बिन्नी के बारे में जानकारी निकालने का काम करेगी, लेकिन माया यह काम नहीं करना चाहती थी, क्योंकि उसे पता था कि इस पर अभिषेक काम कर रहा है. तब आमिर उस से कहता है कि उसे बहुत बड़ा क्राइम रिपोर्टर बनना है. यही मौका है उसे खुद को साबित करने का. इस पर माया मान जाती है.

अभिषेक अपने न्यूज चैनल की ओनर सुमेरा को बताता है कि बिन्नी ने जिन का किडनैप किया था, वे कौमनवेल्थ गेम्स के कौन्ट्रैक्टर थे. इस का मतलब बिन्नी का इस से जरूर कोई लेनादेना है. तब सुमेरा पूछती है कि वह आमिर से पहले बिन्नी तक पहुंच सकता है? तब अभिषेक कहता है कि वह चिंता न करें. वह आमिर से पहले बिन्नी तक पहुंच जाएगा. इस के बाद वह प्रोड्यूसर के रूप में आहना से फोन पर बात करता है और कहता है कि वह उस की दादी से मिलना चाहता है. उस के बाद वह उसे अपनी फिल्म में ले लेगा. इस पर आहना मान जाती है.

बिन्नी विपक्ष के नेता शर्मा से मिलता है और उस से कहता है कि वह उस की सरकार बनाने में मदद कर सकता है, क्योंकि उस के कहने पर महाजन कौमनवेल्थ गेम्स में हुए सारे घोटालों के बारे में बता देगा, जिस से रावत की सारी पोल खुल जाएगी. फिर दिल्ली में उस की सरकार राज करेगी. इस पर शर्मा मान जाता है और उस की मदद करने को राजी हो जाता है. बिन्नी की शर्त यह थी कि वह सरेंडर करेगा तो उस की सजा कम करवा दी जाए और चुनाव लडऩे में उस की मदद की जाए. शर्मा इस के लिए भी राजी हो जाता है. आगे उदय रावत से मिलने जाता है तो रावत उस से कहता है कि वह बिन्नी को अब तक पकड़ नहीं सका. किसी भी हालत में वह उसे पकड़े और मार डाले.

दूसरी ओर अभिषेक अपने घर पर काम कर रहा था, तभी आहना का फोन आता है और वह अपनी दादी से मिलने के लिए घर बुला लेती है. अभिषेक वहां पहुंचता है तो वहां कमरे में बिन्नी बैठा था. बिन्नी को देख कर उस की हालत खराब हो जाती है. पहले तो बिन्नी अभिषेक को डराता है और कहता है कि उस के परिवार के बारे में उसे सब पता है. उस की भी उस पर नजर है. यह सुन कर अभिषेक डर जाता है. आगे माया किशोर का इंटरव्यू लेने जाती है. किशोर अपने बेटे के बारे में सोच कर काफी दुखी था.

तब माया कहती है कि वह उस के बेटे के किडनैप की कहानी अपने अखबार में छापेगी, जिस से इंदिरापुरम वालों के सामने बिन्नी का असली चेहरा आएगा और वे उस से नफरत करने लगेंगे. तब किशोर अपने बेटे के किडनैप की कहानी माया को सुनाने लगता है. दूसरी ओर बिन्नी अभिषेक से कहता है कि वह उस के पीछे क्यों पड़ा है? अभिषेक कहता है कि वह सभी को उस के बारे में बताना चाहता है. तब बिन्नी उसे अपने खुफिया घर में ले जाता है और कहता है कि उस से पहले उसे एक आदमी  की सच्चाई बाहर लानी होगी.

एपीसोड नंबर 7

इस के बाद महाजन को दिखाते हैं. वह अभिषेक को कौमनवेल्थ गेम्स घोटाले के बारे में बताता है कि उसे जो टिश्यू पेपर बांटने को मिला था, उस की कीमत 30 रुपए थी, जिसे उन्होंने 75 रुपए में दिया था. इस तरह उन्होंने साढ़े 3 सौ करोड़ का घोटाला किया था. अभिषेक ने यह पूरा मामला रिकौर्ड कर लिया था, जिसे उस ने सुमेरा को दिखाया तो उस के भी होश उड़ गए थे. उस ने अभिषेक से पूछा कि बिन्नी ने उसे मारा क्यों नहीं? अभिषेक ने कहा कि बिन्नी को अपनी बात रखने के लिए एक प्लेटफार्म चाहिए. इसलिए बिन्नी अपना इंटरव्यू उसे देने को तैयार है, लेकिन सुमेरा इतनी बड़ी न्यूज दिखाने से घबरा रही थी, क्योंकि इस घोटाले में बड़ेबड़े लोग शामिल थे.

तब अभिषेक कहता है कि अगर वह इस रिकौर्डिंग को नहीं चलाना चलाती तो वह इसे किसी दूसरे चैनल को दे देगा. सुमेरा भी इतना अच्छा मौका नहीं गंवाना चाहती थी, इसलिए वह अपने चैनल के हैड से बात कर के इसे चलाने के लिए कहती है. मयंक पुलिस कमिश्नर से मिल कर बताता है कि उस के पिता बिन्नी के लिए काम करते थे, इसलिए उदय ने उन्हें गोली मार दी थी. तब पुलिस कमिश्नर ने कहा कि अपराध करने वाला कोई भी हो, उसे उस के अपराध की सजा अवश्य मिलेगी. वह उदय को नौकरी से निकाल देंगे.

दूसरी ओर महाजन की वीडियो शर्मा के पास आ जाती है, जिसे देख कर वह बहुत खुश होता है, क्योंकि उसे पता था कि महाजन के साथ इस घोटाले में रावत भी शामिल है और रावत की सरकार गिराने के लिए कुछ भी कर सकता था. उदय रावत से मिलने उस के घर जाता है और कहता है कि उसे नौकरी से निकाल दिया गया है. कैसे भी कर के वह उस की नौकरी दिला दें.

तब रावत कहता है कि अगर वह बिन्नी को मार देता है तो वह उसे नौकरी दिलवा देगा. माया अभिषेक के घर आती है तो वह उसे महाजन की वीडियो दिखा कर कहता है कि कल यह वीडियो उस के चैनल पर दिखाई जाएगी. इस के बाद वह फेमस हो जाएगा. माया को इस बात से जलन होती है. वह अभिषेक से शारीरिक संबंध बनाती है और फिर उस के सो जाने पर वह वीडियो चुरा कर भाग जाती है.

वह वीडियो ले जा कर आमिर को देती है तो वह बहुत खुश होता है, लेकिन सही समय पर पशुपतिनाथ अभिषेक को बता देता है कि उस की वीडियो माया चुरा लाई है. इसलिए आमिर वह वीडियो अपने चैनल पर चलाए, उस के पहले वह वीडियो अपने चैनल पर चलवा दे. अभिषेक सुमेरा से बात करता है तो वह वीडियो चलवा देती है. दूसरी ओर आमिर और माया वीडियो चलवाने की तैयारी कर रहे थे कि वे देखते हैं कि अभिषेक टीवी पर महाजन के घोटाले के बारे में बता रहा था.

एपीसोड नंबर 8

आठवें एपीसोड (Web Series) के शुरू में रात को अभिषेक माया को खरीखोटी सुनाने के लिए फोन करता है. माया जैसे ही फोन उठाती है, कुछ लोग उसे किडनैप कर ले जाते हैं. अभिषेक उस की आवाज सुन कर घबरा जाता है. वह पशुपतिनाथ को फोन करता है तो वह बताता है कि कुछ देर पहले माया का किडनैप हुआ है और उस का फोन एक पार्किंग से मिला है.

अभिषेक को लगता है कि माया का किडनैप बिन्नी ने ही करवाया है. तब वह बिन्नी को फोन कर के पूछता है कि उस ने माया का किडनैप क्यों किया है? बिन्नी कहता है कि माया का भी इस घोटाले से संबंध है. वह यहां आएगा तो उसे सब पता चल जाएगा. इस के बाद बिन्नी महाजन से कहता है कि उसे सब के सामने बयान देना होगा, लेकिन महाजन बयान देने से मना करता है तो बिन्नी धमकाता है कि वह बयान नहीं देगा तो उस की पत्नी बयान देगी, वरना वह उस के बेटे को मार देगा. इस से महाजन डर जाता है.

उदय बिन्नी को मारने के लिए उस के बगल वाले घर में पहचान बदल कर रहने लगता है. अभिषेक बिन्नी के घर जाता है. सीबीआई को भी बिन्नी के इंदिरापुरम में रहने का पता चल गया था.

बिन्नी के घर से महाजन की पत्नी का लाइव टेलीकास्ट हो रहा था. वह अपने बयान में बताती है कि कौमनवेल्थ गेम्स में करीब 2 हजार करोड़ का घोटाला हुआ था, जिस में विक्की कपूर की मुख्य भूमिका थी. विककी माया के पिता थे. माया को इस बात पर विश्वास ही नहीं होता. विक्की यह समाचार देख कर परेशान हो जाता है. माया बिन्नी से कहती है कि उसे क्या लगता है, वह यह सब कर के हीरो बन जाएगा. उस के पापा ने ऐसा कुछ भी नहीं किया है.

बिन्नी कहता कि उसे सभी लोग दुश्मन मानते हैं, लेकिन असली गुनहगार तो उस के पापा हैं. सब के सामने वह अपना अपराध स्वीकार करेंगे. उधर विक्की रावत के घर जा कर कहता है कि उस ने उसे कितने पैसे दिए थे, फिर भी उसे यह दिन देखना पड़ रहा है. रावत कहता है कि वह चिंता न करे. वह सिर्फ अपनी बेटी के बारे में सोचे, बाकी वह सब ठीक कर देगा. तभी दिखाई देता है कि बहुत सारी पुलिस और सीबीआई बिन्नी को पकडऩे उस के घर के सामने आ जाती है, लेकिन इंदिरापुरम के लोग उन्हें अंदर जाने ही नहीं दे रहे थे. तभी उदय दिखाई देता है, जो बिन्नी को मारने के लिए एक आदमी से गन मंगाता है.

अभिषेक माया से मिलता है तो माया कहती है कि आज वह बहुत खुश होगा, क्योंकि उस ने एक सही आदमी को गलत साबित कर दिया है. तब अभिषेक कहता है कि उस के पापा ने जनता को लूटा है. धोखा देना तो उस के खून में है. उस ने भी तो धोखा दे कर उस की वीडियो चुराई थी. तभी टीवी पर आमिर दिखाई देता है, जो कह रहा था कि बिन्नी एक किडनैपर है. उस ने कई लोगों का किडनैप कर के हत्या की है. इस के बावजूद जनता बिन्नी को अपना हीरो मान रही थी. अभिषेक बिन्नी का इंटरव्यू ले रहा था. वह उस से पूछता है कि उस ने इतने किडनैप और हत्याएं की हैं तो वह सरेंडर क्यों नहीं कर देता?

बिन्नी कहता कि वह उस दिन सरेंडर कर देगा, जिस दिन इस घोटाले में शामिल सभी लोगों के नाम सामने आ जाएंगे. उधर विक्की को अपनी बेटी की चिंता सता रही थी. रावत कहता है कि अगर उसे अपनी बेटी चाहिए तो वह अपनी गलती मान ले. एक बार बिन्नी पुलिस के हाथ लग जाए, उस के बाद वह सब ठीक कर देगा. विक्की रावत की बात मान कर बिन्नी के घर चला जाता है, जहां अभिषेक को इंटरव्यू देते हुए वह कहता है कि उस के इस घोटाले में रावत भी बराबर का हिस्सेदार था. इस समाचार के बाद शर्मा कहता है कि जिस देश में रावत जैसे नेता होंगे, उस देश का कभी भला नहीं हो सकता, इसलिए उसे इस्तीफा देना होगा.

यह देख कर बिन्नी खुश हो कर अर्चना से कहता है कि वह यहां से कहीं दूर चली जाए, क्योंकि अब वह सरेंडर करने जा रहा है. अर्चना उसे रोकती है, पर वह नहीं मानता. वह सरेंडर करने जा रहा था, तभी उदय उसे मारने की कोशिश करता है, पर मयंक उसे पकड़ लेता है. लेकिन भीड़ में शामिल किशोर उसे मार कर बेटे की मौत का बदला ले लेता है. इस के बाद घोटाले में शामिल सभी लोगों को जेल हो जाती है और घोटाले का खुलासा करने की वजह से अभिषेक फेमस हो जाता है.

साकिब सलीम

सीरीज में जर्नलिस्ट अभिषेक सिन्हा की भूमिका निभाने वाले साकिब सलीम कुरैशी का जन्म दिल्ल्ी में हुआ था. इस के पिता 10 भोजनालय चलाते हैं, जो पूरे दिल्ली में फैले हैं. इस की एक बहन हुमा कुरैशी और 2 भाई नईम कुरैशी और हुसैन कुरैशी हैं. पढ़ाई पूरी करने के बाद साकिब पिता की भोजनालय चलाने में मदद करने लगा था, लेकिन उसे यह काम पसंद नहीं था, इसलिए वह मौडलिंग करने लगा.

कुछ दिनों बाद उसे टीवी के विज्ञापन मिलने लगे. तब उसे फिल्मों में काम करने की इच्छा होने लगी. अपने करीबी दोस्त वरुण बहल की मदद से साकिब ने यशराज फिल्म्स में औडीशन दिया. जिस के 8 महीने बाद एक हास्यप्रेम वाली फिल्म ‘मुझ से फ्रेंडशिप करोगे’ में मुख्य भूमिका के लिए चुना गया. इस फिल्म की कहानी फेसबुक पर आधारित प्रेम की थी. जिस में गलत परिचय के साथ प्रेम शुरू हुआ था

इस के बाद साकिब ने ‘मेरे डैड की मारुति’, ‘बौंबे टौकीज’, ‘हवाहवाई’, ‘ढिशुम’, ‘दोबारा:  सी योर एविल’, ‘दिल जंगली’ और ‘रेस 3’ में भी काम किया है.

सबा आजाद

‘क्राइम बीट’ सीरीज में माया कपूर की भूमिका निभाने वाली सबा आजाद का पूरा नाम सबा सिंह ग्रेवाल है. सबा थिएटर कलाकार सफदर हाशमी की भतीजी है. एक थिएटर परिवार में पैदा होने की वजह से बहुत कम उम्र में सबा सफदर हाशमी के थिएटर ग्रुप ‘जन नाट्य मंच’ के साथ प्रदर्शन करने लगी, जहां उस ने हबीब तनवीर, कृष्ण रैना, गोविंद पुरुषोत्तम देशपांडे और एन.के. शर्मा के साथ काम किया. उस ने ओडिसी, शास्त्रीय बैले, जैज, लैटिन के साथसाथ समकालीन नृत्यों में प्रशिक्षण भी लिया. अपने ओडिसी गुरु किरण सहगल के साथ उस ने इंगलैंड, कनाडा, नेपाल आदि देशों की यात्रा कर के नृत्य का प्रदर्शन भी किया है.

फिल्मों (Web Series) में वह पढ़ाई के बाद आई, जब उस ने निर्देशक ईशान नायर की लघुफिल्म ‘गुरूर’ में मुख्य भूमिका निभाई थी. बौलीवुड में अपने करिअर की शुरुआत राहुल बोस के साथ फिल्म ‘दिल कबड्ïडी’ से की, इस के बाद वह फिल्म ‘मुझ से फ्रेंडशिप करोगे’ में प्रीति सेन के रूप में नवागंतुक अभिनेता निशांत दहिया और साकिब सलीम के साथ प्रमुख भूमिका में दिखाई दी. इन के अलावा उस ने फिल्म ‘शुद्ध शाकाहारी’, ‘जुड़े हुए’, ‘इश्क लगता है’ और ‘राकेट बौयज’ में काम किया है.

सबा भारतीय इंडी संगीत की एक लोकप्रिय संगीतकार और गायिका भी है. लोकप्रिय इलैक्ट्रानिक बैंड मैकबौय/मिक की पार्टनर है. इस की शुरुआत उस ने साल 2012 में अभिनेता और संगीतकार इमाद शाह के साथ की थी. सबा की अपनी थिएटर कंपनी ‘द स्किंस’ है. उस ने कैडबरी, पांड्स, मैगी, टाटा स्काई, गूगल, किटकैट, वोडाफोन, सनसिल्क, नेस्कैफे, भारती एयरटेल के विज्ञापनों के साथसाथ क्लीन एंड क्लियर, ट्रेट (वेस्टसाइड), एमवे के अलावा कई अन्य ब्रांडों के लिए प्रिंट अभियानों में काम किया है.

 

 

Crime Stories : पत्रकारिता की आड़ में चल रहा था देह व्यापार का धंधा

Crime Stories : मुगलों के समय से चला आ रहा देह व्यापार थमा कभी नहीं. हां, वक्त और जरूरत के हिसाब से इस के रंगरूप और ठिकाने जरूर बदलते रहे. अब यह व्यापार ऐसा बन गया है, जिस की जड़ें हर शहर तक फैली हैं. कानपुर में…

एस एसपी अनंत देव तिवारी को पिछले कुछ दिनों से जानकारी मिल रही थी कि  कानपुर शहर में कुछ फरजीपत्रकार सैक्स रैकेट का संचालन कर रहे हैं. इस देह व्यापार से मोटी कमाई होती है. यह भी पता चला कि पत्रकारिता की आड़ में ये लोग स्थानीय थाना और चौकी पुलिस पर भी रौब गांठते हैं. दिन में ये लोग पुलिस के साथ उठतेबैठते हैं और रात में देह व्यापार का धंधा चलाते हैं. पौश इलाकों में महंगा मकान या फ्लैट किराए पर ले कर ये लोग कालगर्लों को बुलाते हैं और उन की बुकिंग करते हैं. चूंकि उन का उठना बैठना पुलिस वालों के साथ होता है, इसलिए पासपड़ोस के लोग उन के गलत धंधों की जानकारी पुलिस को देने में कतराते हैं.

पत्रकारों को देश का चौथा स्तंभ माना जाता है. लेकिन कुछ कथित पत्रकार गलत कामधंधे कर गौरवपूर्ण पत्रकारिता को बदनाम करने पर तुले हुए थे. ऐसे कथित पत्रकारों के खिलाफ एसएसपी अनंत देव ने कड़ी कारवाई करने का निश्चय किया. इस के लिए उन्होंने पुलिस अधिकारियों की बैठक बुलाई. इस बैठक में एसपी (पूर्वी) राजकुमार अग्रवाल, एसपी (साउथ) अपर्णा गुप्ता, एसपी (पश्चिम) डा. अनिल कुमार, सीओ (कलक्टरगंज) श्वेता सिंह यादव और सीओ (स्वरूप नगर) अजीत सिंह चौहान ने भाग लिया. एसएसपी अनंत देव ने पुलिस अधिकारियों को जानकारी दी कि कानपुर शहर में देह व्यापार का धंधा फैल रहा है. इस धंधे का संचालन कुछ फरजी पत्रकार कर रहे हैं.

आप लोग इस बात को गंभीरता से ले कर मुखबिरों के जरिए पता लगाएं कि देह व्यापार का धंधा शहर के किन क्षेत्रों में हो रहा है. फरजी पत्रकार निर्बाध रूप से किस के संरक्षण में धंधा कर रहे हैं. एसएसपी साहब ने स्पष्ट रूप से कहा कि अगर स्थानीय थाना या चौकी पुलिस की संलिप्तता पाई जाए तो उन के खिलाफ भी काररवाई करें. फरजी पत्रकारों की गिरफ्तारी में कोई सफेदपोश नेता बाधा डाले तो उसे गिरफ्तार कर लें. जितना जल्दी हो सके सैक्स रैकेट का भंडाफोड़ करें और फरजी पत्रकारों को गिरफ्तार कर लें. एसएसपी के आदेश पर एसपी (पूर्वी) राजकुमार अग्रवाल ने थाना नवाबगंज, कोहना, कर्नलगंज तथा स्वरूपनगर के थाना प्रभारियों से सख्त लहजे में कहा कि वे अपनेअपने थाना क्षेत्रों में खबरियों के जरिए पता लगाएं कि देह व्यापार का धंधा कहां चल रहा है.

उस का संचालक कौन है और कब से इस धंधे में लिप्त है. आदेश के मुताबिक सभी ने अपनेअपने क्षेत्र में मुखबिरों का जाल फैला दिया. इसी तरह एसपी (साउथ) अपर्णा गुप्ता ने भी थाना गोविंद नगर, नौबस्ता तथा बर्रा के थाना प्रभारियों के साथ मीटिंग की और क्षेत्र में चल रहे देह व्यापार के धंधे के संबंध में मुखबिरों के जरिए जानकारी जुटाने का आदेश दिया. आदेश पाते ही थाना प्रभारियों ने मुखबिरों को सतर्क किया और खुद भी पता लगाने में जुट गए. 28 मई, 2020 की शाम 5 बजे कोहना थानाप्रभारी प्रभुकांत क्षेत्रीय गश्त पर निकलने वाले थे, तभी उन के खास मुखबिर ने उन के कक्ष में प्रवेश किया. उस के चेहरे पर मुसकान थी, जिस से उन्हें समझते देर नहीं लगी कि वह कोई खास खबर लाया है. फिर भी उन्होंने पूछा, ‘‘कोई खास बात?’’

‘‘हां हुजूर, खास बात ही है. तभी तो आप के सामने हाजिर हुआ हूं.’’

‘‘तो फिर बताओ, क्या बात है?’’

‘‘हुजूर, आर्य नगर मोहल्ले के मकान नंबर 8/58 में देह व्यापार का धंधा फलफूल रहा है. रैकेट चलाने वाला कथित पत्रकार है मोहम्मद यूनुस. उस ने यह मकान किराए पर ले रखा है. विगत एक साल से वह इसी जगह धंधा चला रहा है.’’

मुखबिर की बात सुन कर थानाप्रभारी प्रभुकांत चौंके. उन्हें यह जान कर आश्चर्य हुआ कि उन के थाना क्षेत्र में एक साल से देहव्यापार का धंधा चल रहा और उन्हें कानोंकान खबर नहीं लगी. प्रभुकांत एसपी (पूर्वी) कार्यालय पहुंचे और मुखबिर की जानकारी से राजकुमार अग्रवाल को अवगत कराया. अग्रवाल ने सैक्स रैकेट का भंडाफोड़ करने के लिए एक पुलिस टीम गठित की. इस टीम में सीओ (कलक्टरगंज) श्वेता सिंह यादव, सीओ (स्वरूप नगर) अजीत सिंह चौहान, प्रभारी निरीक्षक (नवाबगंज) रमाकांत पचौरी, प्रभारी निरीक्षक (स्वरूप नगर) अश्वनी पांडेय तथा प्रभारी निरीक्षक (कोहना) प्रभुकांत को शामिल किया गया.

29 मई, 2020 की रात 8 बजे गठित पुलिस टीम आर्यनगर स्थित मकान नंबर 8/58 पर पहुंची. सीओ श्वेता सिंह यादव ने दरवाजा खटखटाया तो एक अधेड़ व्यक्ति ने दरवाजा खोला. सामने पुलिस को देख वह घबरा गया. फिर अपने को संभालते हुए बोला, ‘‘सर, आप लोग… आने की वजह?’’

‘‘मुझे खबर मिली है कि इस मकान में देह व्यापार होता है. आप कौन?’’ श्वेता सिंह यादव ने पूछा.

‘‘मैडम, मेरा नाम मोहम्मद यूनुस है. मैं पत्रकार हूं. इस मकान में किराए पर रहता हूं. आप लोग गलतफहमी के शिकार हुए हैं.’’

इंसपेक्टर प्रभुकांत ने मोहम्मद यूनुस को हिरासत में ले लिया. फिर बोले, ‘‘गलतसही का पता जल्द ही चल जाएगा.’’

पुलिस टीम ने मकान के अंदर प्रवेश किया. घर के अंदर का नजारा बड़ा ही शर्मसार कर देने वाला था. 2 अलगअलग कमरों में युवक और युवतियां जिस्म की प्यास बुझा रहे थे. पुलिस को देख कर उन्होंने भागने का प्रयास किया, लेकिन पुलिस ने उन्हें अर्धनग्न अवस्था में ही दबोच लिया. सीओ (कलक्टरगंज) श्वेता यादव ने दोनों युवतियों को तथा सीओ (स्वरूप नगर) अजीत सिंह चौहान ने दोनों युवकों को हिरासत में ले लिया. थानाप्रभारी रमाकांत पचौरी ने कमरों की तलाशी ली तो वहां से कई आपत्तिजनक चीजें बरामद हुईं. इन में कंडोम, कामोत्तेजना बढ़ाने वाले कैप्सूल तथा स्प्रे आदि थे. घर के बाहर एक अय्याश की कार भी खड़ी थी.

स्वरूपनगर थाना प्रभारी अश्वनी पांडेय ने उस कार को कब्जे में ले लिया. कथित पत्रकार मोहम्मद यूनुस से सीओ अजीत सिंह ने 36,100 रुपए भी बरामद किए. यह रुपया ग्राहकों से वसूला गया था. पुलिस ने इन रुपयों को कब्जे में ले लिया. रुपयों के अलावा पकड़े गए युवकयुवतियों के पास से 6 मोबाइल फोन भी बरामद हुए. मोबाइल फोन को पुलिस टीम ने अपने कब्जे मे ले लिया. सैक्स रैकेट संचालक कथित पत्रकार मोहम्मद यूनुस के पास से पुलिस टीम को एक प्रैस कार्ड बरामद हुआ. यह प्रैस कार्ड ‘दैनिक सहारा टुडे’ हिंदी समाचार पत्र का था. इस प्रैस कार्ड के संबंध में पुलिस टीम ने सहारा टुडे कार्यालय से जानकारी की तो पता चला कि कार्ड फरजी है. कानपुर में मोहम्मद यूनुस नाम का उन का कोई संवाददाता नहीं है.

यह बात पूरी तरह साफ हो चुकी थी कि मोहम्मद यूनुस फरजी पत्रकार है. पत्रकारिता की आड़ में वह देह व्यापार का धंधा कर रहा था. संचालक सहित पकड़े गए दोनों युवक व युवतियों, बरामद सामान तथा कार सहित सभी को थाना कोहना लाया गया. बरामद सामान और बरामद आपत्तिजनक वस्तुओं को पुलिस ने लिखापढ़ी कर सील कर दिया. कार थाना परिसर में खड़ी कर दी गई. अड्डे से बरामद 36,100 रुपए की भी लिखापढ़ी की गई. थानाप्रभारी प्रभुकांत ने फरजी पत्रकार के सैक्स रैकेट के पकड़े जाने की जानकारी एसपी (पूर्वी) राजकुमार अग्रवाल को दी तो वह थाना कोहना आ गए और पूछताछ की. पकड़े गए युवकों में से एक ने अपना नाम मोहम्मद यूनुस निवासी कर्नलगंज (कानपुर शहर) बताया. दूसरे युवक ने अपना नाम विशाल तथा तीसरे ने गौरव बताया. ये दोनों औरैया के रहने वाले थे.

पकड़ी गई युवतियों में से एक ने अपना नाम रेहाना निवासी कर्नलगंज तथा दूसरी ने अपना नाम रिंकी निवासी बजरिया (कानपुर शहर) बताया. इन में मोहम्मद यूनुस संचालक था. चूंकि पुलिस टीम द्वारा सभी रंगेहाथ पकड़े गए थे, अत: सीओ (कलक्टरगंज) श्वेता सिंह यादव ने स्वयं वादी बन कर देह व्यापार निवारण अधिनियम 1956 की धारा 3, 4, 5, 6 के तहत मोहम्मद यूनुस, गौरव, विशाल, रेहाना तथा रिंकी के विरुद्ध रिपोर्ट दर्ज करा दी. सभी को विधिसम्मत बंदी बना लिया गया. चूंकि देह व्यापार संचालक मोहम्मद यूनुस के पास से फरजी प्रैस कार्ड बरामद हुआ था. अत: पुलिस ने उस के विरुद्ध 420 आईपीसी के तहत एक अन्य मुकदमा दर्ज किया.

इधर एसपी (साउथ) अपर्णा गुप्ता को मुखबिर के जरिए पता चला कि बर्रा थाना क्षेत्र के मेहरबान सिंह पुरवा में अतुल के मकान में ‘न्यूज पोर्टल’ की आड़ में सैक्स का धंधा चल रहा है. इस जानकारी पर उन्होंने बर्रा पुलिस तथा सीओ (गोविंद नगर) मनोज कुमार गुप्ता के सहयोग से उक्त मकान पर छापा मारा और 4 युवक तथा 2 युवतियों को गिरफ्तार किया. पकड़े गए चारों युवक खुद को पत्रकार बता रहे थे, जबकि युवतियां आगरा से बुलाई गई थीं. मकान के अंदर से आपत्तिजनक सामग्री भी बरामद हुई. युवकयुवतियों के पास से 8 मोबाइल फोन मिले थे. जिन्हें पुलिस ने अपने कब्जे में ले लिया. सभी को थाना बर्रा लाया गया. बरामद सामान तथा मोबाइल फोन को साक्ष्य के तौर पर सुरक्षित कर लिया गया.

पूछताछ में पकड़े गए युवकों में से एक ने अपना नाम मंगल प्रसाद पासवान निवासी नई बस्ती नौबस्ता कानपुर, दूसरे ने अपना नाम विमलेश तिवारी निवासी बर्रा-8 कानपुर, तीसरे ने अपना नाम मुन्ना सिंह निवासी दादा नगर कानपुर और चौथे ने अपना नाम नीरेंद्र सिंह निवासी हंसपुरम, नौबस्ता कानपुर बताया. पकड़ी गई 2 कालगर्ल रीना कश्यप व पिंकी जाटव थी. दोनों आगरा की रहने वाली थीं. ये 3 दिन पहले ही बुकिंग पर आई थीं. पकड़े गये युवकों के पास से 2 प्रैस आईडी कार्ड बरामद हुए. एक ‘भारत एक्सप्रैस न्यूज चैनल’ का था, जिस में मुन्ना सिंह चौहान को हैड स्टेट दर्शाया गया था. दूसरा प्रैस कार्ड भी इसी चैनल का था, जिस में विमलेश तिवारी को मंडल प्रभारी दर्शाया गया था. पुलिस ने जब इन प्रैस कार्डों की जानकारी जुटाई तो पता चला कि वे फरजी थे. मतलब पकड़े गए सभी फरजी पत्रकार थे और न्यूज पोर्टल की आड़ में वह सब सैक्स रैकेट चला रहे थे.

एसपी (साउथ) अपर्णा गुप्ता ने जब पकड़े गए युवकों से पूछताछ की तो उन्होंने स्वीकार किया कि वे फरजी पत्रकार हैं और न्यूज पोर्टल की आड़ में जिस्मफरोशी का धंधा करते थे. संचालक मंगल प्रसाद पासवान ने बताया कि उस ने अतुल कुमार का मकान न्यूज चैनल का औफिस बनाने के नाम पर 15000 रुपए मासिक किराए पर लिया था. उस के सहयोगी मुन्ना सिंह, विमलेश तिवारी तथा नीरेंद्र सिंह ग्राहक खोजते थे. इस के एवज में उन्हें कमीशन दिया जाता था. मंगल प्रसाद ने बताया कि फेसबुक पर फेक आईडी बना कर वह लोगों को जोड़ता था. फिर नंबरों का आदानप्रदान कर के डील करता था. यह डील ढाई हजार से 10 हजार रुपए तक में होती थी. इस में कालगर्ल के आनेजाने का खर्च भी जोड़ा जाता था.

डिमांड पर युवतियोें को बाहर से भी बुलाते थे. पूरी रात 10 हजार में बुक करते थे. पिछले 8 महीने से वे इस मकान में देह व्यापार करा रहे थे. पकड़ी गई रीना कश्यप व पिंकी जाटव को डिमांड पर आगरा से बुलाया गया था. चूंकि सभी आरोपियों ने जुर्म कबूल कर लिया था, अत: सीओ मनोज कुमार गुप्ता ने स्वयं वादी बन कर बर्रा थाने में धारा 3, 4, 5, 6, 7, 8 (देह व्यापार निवारण अधिनियम 1956 की धारा) के तहत मंगल प्रसाद पासवान, मुन्ना सिंह चौहान, विमलेश तिवारी, नीरेंद्र सिंह, पिंकी जाटव तथा रीना कश्यप के विरुद्व रिपोर्ट दर्ज करा दी. फिर उन्हें विधि सम्मत गिरफ्तार कर लिया गया. चूंकि युवकों के पास से फरजी प्रैस कार्ड बरामद हुए थे, अत: उन के विरुद्व धारा 420 आईपीसी के तहत एक अन्य मुकदमा दर्ज किया गया.

पकड़ी गई युवतियों ने इस धंधे में आने की अपनी अलगअलग मजबूरी बताई. रीना कश्यप ने बताया कि वह मूलरूप से फिरोजाबाद की रहने वाली है. 3 भाईबहनों में वह सब से बड़ी थी. उस के पिता दयाराम कश्यप कांच फैक्ट्री में काम करते थे, जहां मामूली वेतन मिलता था. बड़ी मुश्किल से परिवार का भरणपोषण होता था. जब वह सयानी हुई तो उस के पिता को उस के ब्याह की चिंता सताने लगी. लेकिन गरीबी की वजह से उस का ब्याह न हो सका. कुछ समय बाद एक खास रिश्तेदार के माध्यम से उस का विवाह किनारी बाजार (आगरा) निवासी राजेश कश्यप के साथ हो गया. राजेश एक कपड़े की दुकान पर काम करता था. वह आगरा की बाह तहसील का रहने वाला था. कुछ समय वह गांव में रही, उस के बाद पति के साथ आगरा शहर मे रहने लगी.

उस का पति राजेश उसे बेहद प्यार करता था और उस की हर ख्वाहिश पूरी करने की कोशिश करता था. शादी के कई साल तक उस की कोख सूनी रही. उस के बाद उस ने एक बेटे को जन्म दिया. जिस का नाम सूरज था. सूरज हम दोनों की आंखों का तारा था. राजेश उस का बर्थडे बड़े धूमधाम से मनाता था. बर्थडे पर वह अपने यारदोस्तों को भी बुलाता था. सब कुछ हंसीखुशी से चल रहा था. पर कुदरत को यह खुशी अच्छी नहीं लगी. सूरज एक रोज बीमार हुआ तो राजेश उसे चैकअप कराने डाक्टर के पास ले गया. डाक्टर ने चैकअप के बाद सूरज को दिल की बीमारी बताई. इलाज थोड़ा महंगा था, पर राजेश ने हिम्मत नहीं हारी. धीरेधीरे इलाज में जमापूंजी खर्च हो गई और 50 हजार का कर्ज भी हो गया. इस कर्ज को चुकाने के लिए राजेश परेशान रहने लगा.

पति को परेशान देख मैं ने भी नौकरी करने का निश्चय किया. मैं ने कई जगह कोशिश की, लेकिन नौकरी नहीं मिली. सौंदर्य प्रसाधन की एक दुकान पर नौकरी मिली भी, लेकिन मालिक की नीयत खराब थी. एक रोज एकांत में उस ने छेड़खानी की तो मैं ने नौकरी छोड़ दी. एक माह का वेतन लेने भी नहीं गई. उन्हीं दिनों उस की मुलाकात एक खूबसूरत महिला से हुई. वह सब्जी मंडी के पास रहती थी. मैं ने उसे अपनी व्यथा बताई तो वह खिलखिला कर हंसी फिर बोली, ‘‘कभी मैं भी तुम्हारी तरह परेशान थी. लेकिन अब मैं ऐसी जौब कर रही हूं जिस में काम कम और दाम अधिक है. अब मैं खुश हूं. मुझे किसी तरह की कोई परेशानी नही है.’’

‘‘आप ऐसा कौन सा जौब करती हैं, जिस में कम समय में अधिक दाम मिलता है?‘‘रीना कश्यप ने पूछा.

‘‘मैं तन बेचने का जौब करती हूं. घंटे भर में हजार 2 हजार कमा लेती हूं.’’

‘‘यानी देह व्यापार का धंधा.‘‘रीना ने विस्मय से पूछा.

‘‘हां, देह व्यापार. तुम भी खूबसूरत हो, जवान हो. चाहो तो मेरे साथ यह धंधा कर के अपनी सारी परेशानियां दूर कर सकती हो.’’

उस रोज मैं रात भर परेशान रही और उस महिला की बातों पर विचार करती रही. आखिर मैं ने भी परेशानी दूर करने के लिए देह व्यापार का धंधा करने का निश्चय कर लिया. उस के बाद मैं ने उस महिला से संपर्क किया. फिर उस के साथ जिस्म बेचने लगी. शुरुआत में मुझे झिझक हुई, फिर अभ्यस्त हो गई. आगरा की कई कालगर्ल सरगनाओं से मेरे संबंध बन गए. वे डिमांड पर मुझे आगरा के अलावा दूसरे शहरों में भी भेजने लगी. 3 दिन पहले मैं पिंकी के साथ कानपुर आई थी, यहां पुलिस छापे में पकड़ी गई.  पिंकी जाटव ने पूछताछ में बताया कि वह आगरा में जमुना किनारे स्थित कच्ची बस्ती की रहने वाली है. उस के पिता राजाराम जाटव जूता बनाने का काम करते हैं.

5 भाईबहनों में वह सब से छोटी है. जब वह 14 साल की थी, तभी मां की मौत हो गई थी. उसे सैरसपाटा करने तथा अच्छा खानेपहनने का शौक था. बाप की कमाई से घर का खर्च ही चल पाता था. उस के अपने शौक थे, जो पूरे नहीं हो पाते थे. पैसा मांगने पर पिताजी डांटतेफटकारते थे और आवारा कहते थे. पर उस पर जवानी का रंग चढ़ने लगा था. मन करता था कि कोई बांहों में ले कर प्यार का इजहार करे. उस के खर्चे उठाए और उसे घुमाने ले जाए. वह खूबसूरत तो थी ही, उस ने नैनों के बाण चलाने शुरू किए तो कई युवक घायल हो गए. वह उन के साथ मौजमस्ती करने लगी, शौक व खर्चे पूरे होने लगे. इन्हीं प्रेमियों में एक था राजन.

राजन गीता कालोनी में रहता था और उस पर जान छिड़कता था. वह भी उसे मन ही मन चाहती थी. एक रोज राजन उसे होटल में ले गया. वहां उस ने उस के शरीर को भोगा और 5 सौ रुपए दिए. इस के बाद उसे अपने दोस्तों को भी परोसने लगा. मैं समझ गई कि राजन का प्यार दिखावा है. वह केवल उस के शरीर से प्यार करता हैं. उसे यह जान कर आश्चर्य हुआ कि राजन उस की देह की दलाली भी करने लगा है. दोस्त उसे जो पैसा देते हैं, उस का आधा वह खुद रख लेता है. यह देख उस ने निश्चय किया कि जब शरीर ही बेचना है, तो राजन का साथ क्यों पकड़े. इस के बाद वह खुल कर देह व्यापार करने लगी. उस ने आगरा के कुख्यात कालगर्ल सरगनाओं से तार जोड़ लिए और आगरा के अलावा अन्य बड़े शहरों में जाने लगी. कम उम्र की थी, सो डिमांड अधिक होती थी.

कानपुर में वह 5 दिन के लिए 30 हजार रुपए में आई थी. लेकिन तीसरे रोज ही पुलिस छापे में पकड़ी गई. फरजी पत्रकार मोहम्मद यूनुस के आर्य नगर के अड्डे से पकड़ी गई रेहाना घरेलू महिला थी. वह कर्नलगंज में अपने शौहर के साथ रहती थी. उस का शौहर शराबी और  औरतखोर था, जो कमाता था सब खर्च कर देता था. रेहाना कुछ कहती तो उसे बेरहमी से पीटता था. आजिज आ कर उस ने शौहर का साथ छोड़ दिया और अलग रहने लगी. कुछ समय बाद वह मोहम्मद यूनुस के संपर्क में आ गई. उस ने रेहाना पर डोरे डालने शुरू किए तो वह उस के जाल में फंस गई. बाद में मोहम्मद यूनुस ने उसे देह धंधे में उतार दिया. घटना वाली रात जब पुलिस का छापा पड़ा, तब वह ग्राहक के साथ हमबिस्तर थी ग्राहक के साथ वह भी पकड़ी गई.

रिंकी बजरिया की रहने वाली थी. जब वह 5 साल की थी, तभी उस की मां की मौत हो गई थी. मां की मौत के बाद पिता लक्ष्मण ने दूसरी शादी कर ली थी. सौतेली मां ने आते ही उस पर कहर बरपाना शुरू कर दिया. वह दिन भर उस से घर का काम करवाती, फिर भी शाम को बाप के घर आते ही वह उस पर कामचोर का आरोप लगा देती. बाप भी उसे मारतापीटता और खरीखोटी सुनाता. आजिज आ कर वह मौसी के घर सीसामऊ चली गई. लेकिन दुर्भाग्य ने यहां भी पीछा नहीं छोड़ा. एक रोज अधेड़ मौसा ने उसे जबरदस्ती हवस का शिकार बना डाला और जुबान बंद रखने की धमकी दी. परेशान हो कर उस ने मौसा का घर छोड़ दिया और अपने घर आ गई.

अब वह नौकरी कर अपने पैरों पर खड़ा होना चाहती थी. एक दिन नौकरी की तलाश में घर से निकली तो नगर निगम के गेट पर एक समाजसेवी महिला से मुलाकात हो गई. वह उसे अपने घर ले गई. उस ने उस की खूब आवभगत की. बाद में पता चला कि महिला समाजसेवी नहीं, बल्कि सैक्स वर्कर है. उस ने उस क ी परेशानियों का फायदा उठा कर उसे भी देह के धंधे में धकेल दिया. तब से वह उसी के घर में रहती है. उस ने उसे पूरा संरक्षण दे रखा है. उसी के मार्फत वह घटना वाली रात मोहम्मद यूनुस के अड्डे पर पहुंची थी. वह ग्राहक के साथ कमरे में हमबिस्तर थी, तभी पुलिस का छापा पड़ा और वह पकड़ी गई.

पुलिस द्वारा पकड़ा गया अय्याश विशाल औरैया का रहने वाला था. वह टायर व्यवसाई था. अपनी कार से वह कानपुर शहर आया था. उसे गड़रियन पुरवा में टायर खरीदने थे. सौदा ठीक से नहीं पटा तो उस का मूड खराब हो गया. मूड ठीक करने के लिए विशाल ने सैक्स रैकेट संचालक मोहम्मद यूनुस को फोन किया. विशाल उस का पुराना ग्राहक था और पहले भी 2 बार अड्डे पर जा चुका था. सौदा पटते ही विशाल अपने दोस्त गौरव के साथ अड्डे पर पहुंच गया. गौरव विशाल का दोस्त था और वह औरैया से उस के साथ ही आया था. गौरव और विशाल अलगअलग कमरों में कालगर्ल्स के साथ मौजमस्ती कर रहे थे तभी पुलिस का छापा पड़ा और वे दोनों भी पकड़े गए.

सैक्स रैकेट संचालक मोहम्मद यूनुस बड़ा शातिर दिमाग था. उस की अपने घरवालों से नहीं पटती थी. शुरू में उस ने कई छोटेमोटे धंधे किए, पर कमाई नहीं हुई. मोहम्मद यूनुस महत्त्वाकांक्षी था. वह कम समय में लखपति बनना चाहता था. इस के लिए उस ने सैक्स का धंधा चुना. पर इस में पुलिस का भय था. इस भय को कम करने के लिए उस ने पत्रकारिता का लबादा ओढ़ा. उस का एक मित्र अखलाक था. उस ने उसी की मार्फत एक दैनिक समाचार पत्र का प्रैस कार्ड बनवा लिया. फरजी प्रैस कार्ड के माध्यम से मोहम्मद यूनुस पुलिस के संपर्क में रहने लगा. शहर में जहां भी सैक्स रैकेट पकड़ा जाता, वह वहां पहुंच जाता और पूछताछ के बहाने कालगर्ल और सरगना से मिलता. इस तरह संपर्क बढ़ा कर वह खुद सैक्स रैकेट चलाने लगा.

उस ने एक साल पहले आर्यनगर में यह मकान 10 हजार रुपए प्रति महीने के किराए पर लिया और पत्रकारिता की आड़ में देह व्यापार करने लगा. उस का भांडा तब फूटा जब पासपड़ोस वालों ने उस की शिकायत गुप्तरूप से एसएसपी से कर दी. एसएसपी ने जांच का आदेश दिया तो वह फंस गया और पकड़ा गया. थाना कोहना तथा थाना बर्रा पुलिस ने सभी आरोपियों को कानपुर न्यायालय में पेश किया, जहां से उन्हें जिला जेल भेज दिया गया.

—कथा पुलिस सूत्रों पर आधारित

 

Honeytrap Gang में शामिल पत्रकार और वकील

Honeytrap Gang बलोदा बाजार भाटापारा के इस हनीट्रैप गैंग में एडवोकेट से ले कर पत्रकार तक शामिल थे. ये लोग शहर के नामी व्यक्तियों को अपने जाल में इतनी आसानी से फांस लेते थे कि शिकार को लाखों रुपए ढीले करने पर मजबूर होना पड़ता था. जैसे ही यह बात पुलिस तक पहुंची तो…

रघुवीर सहाय की जब से कोमल से फेसबुक पर फ्रेंडशिप हुई थी, वह बहुत बेचैन हुए जा रहा था. वह उस से मिलने के लिए लालायित था. रघुवीर सहाय ने आखिर एक दिन कोमल से रिक्वेस्ट करते हुए कह दिया, ”हां तो कोमलजी, हम लोग कब मिल रहे हैं?’’

”मिलेंगे, मगर आप इतना जल्दी क्यों कर रहे हैं?’’ दूसरी तरफ से इठला कर कोमल ने कहा.

”देखो भाई, आज हम मिलें या फिर कल, मिलना तो है. ऐसे में आज के काम को आज ही क्यों न निपटा लें.’’

”वाह! आप का तो कोई जवाब नहीं. आप से बातों में मैं भला कहां जीत पाऊंगी.’’ कोमल ने कहा तो रघुवीर सहाय हंसते हुए बोला, ”तो फिर ठीक है, बताओ कहां आऊं?’’

”ठीक है, मैं आप को एक घंटे में बताती हूं कि हम को कहां मिलना चाहिए.’’

”ओके… जरा जल्दी बताना. मैं तुम से मिलने को बेताब हूं.’’

यह सुन कर कोमल हंसने लगी फिर बोली, ”अभी 4 दिन ही तो हुए हैं हमें फेसबुक पर मुलाकात किए हुए और आप इतनी जल्दी मिलना चाहते हैं. सच कहूं तो मैं भी आप से मिलने को आतुर हूं. मगर…’’ यह बात कर के कोमल चुप हो गई.

”कहो न क्या बात है, तुम्हारी

यही अदा मुझे बहुत अच्छी लगती

है. बातोंबातों में एक ऐसा रहस्य खड़ा कर देती हो कि बस पूछो मत.’’

”दरअसल , मेरा पति मुझे परेशान करता है, मैं उसे जल्द छोड़ दूंगी.’’

”ठीक है. अच्छा मिल कर बात करेंगे, तुम मुझे बताना मैं अपना कुछ काम भी निपटा लेता हूं तब तक.’’

आखिरकार रात को 10 बजे कोमल ने अपने घर पर ही मिलने का मैसेज रघुवीर सहाय को भेज दिया. उस ने बताया कि पति महाशय रायपुर गए हुए हैं और अब अगले दिन ही लौटेंगे, इसलिए हम यहां बड़े आराम से मिल सकते हैं. रघुवीर सहाय कोमल के यहां पहुंच गया और उसे वहां पहुंचे हुए अभी 15 मिनट ही हुए थे कि बाहर होहल्ला मचने लगा. वह कुछ करते, एक व्यक्ति और 2 वरदीधारी पुलिस वाले भीतर आ गए और एक शख्स रघुवीर सहाय को गालियां देते हुए मारने लगा. उस व्यक्ति ने कहा, ”मैं इस का पति हूं और मुझे इस हरामजादी पर पहले से शक था.’’

फिर उस ने मोबाइल निकाल कर के वीडियो बनानी शुरू कर दी और चिल्ला कर बोला, ”तुम को तो मैं जेल भिजवाऊंगा.’’

एक पुलिस वाले ने घुड़क कर कहा, ”चलो थाने! वहां तुम्हारी ठीक से खातिरदारी करेंगे.’’

यह सुन कर रघुवीर सहाय घबरा गया और हाथ जोड़ कर माफी मांगने लगा. एक पुलिस वाले ने कोमल के पति को शांत करते हुए कहा, ”देखो, यह इज्जतदार आदमी लगता है और थाने पुलिस से तुम्हारी भी इज्जत मिट्टी में मिल जाएगी.’’

”हांहां, यह सच है…’’ रघुवीर सहाय ने कहा.

”इसे यहीं दंड दो और भगा दो.’’ दूसरे पुलिस वाले ने सलाह देते हुए कहा.

”चलो ठीक है, मुझे 10 लाख रुपए तुम अभी के अभी दो.’’

”मैं…मैं दे दूंगा.’’ रुपए देने का वादा कर रघुवीर सहाय घिघियाते हुए किसी तरह जान बचा कर वहां से नौ दो ग्यारह हो गया. यह बात छत्तीसगढ़ के बलौदा बाजार भाटापारा जिले की है.

पीडि़त ने एसपी को सुनाई आपबीती

दोपहर के यही कोई 12 बजे थे. बलौदा बाजार भाटापारा के एसपी सदानंद कुमार अपने औफिस में रोजमर्रा के काम निपटाते हुए फाइलों पर दस्तखत कर रहे थे और मिलनेजुलने वालों से बातें भी कर रहे थे कि तभी रघुवीर सहाय उन के समक्ष हाथ जोड़ कर खड़ा हुआ और बोला, ”सर, मैं आप से कुछ अकेले में कुछ बात करना चाहता हूं?’’

एसपी सदानंद कुमार ने एक नजर उस शख्स पर डाली फिर मामले की गंभीरता को समझते हुए उन्होंने कुछ देर में वहां मौजूद अन्य लोगों को बाहर भेज कर उस से रूबरू हुए तो रघुवीर सहाय रुआंसा होते हुए बोला, ”सर, मैं बरबाद हो गया हूं. दरअसल, मुझ से 20 लाख रुपए कुछ लोगों ने डराधमका कर ले लिए हैं.’’

यह सुन कर के सदानंद कुमार उस की ओर गौर से देखने लगे और बैठा कर पानी पीने को कहा और फिर कहा, ”अपनी बात को विस्तार से बताओ.’’

इस के बाद रघुवीर सहाय ने जो बातें पुलिस कप्तान के समक्ष रखीं तो उन के मुंह से बरबस निकला, ”ओह, तो यह सब (Honeytrap) हनीट्रैप का मामला है.’’

‘हनीट्रैप’ शब्द सुनते ही वह आश्चर्यचकित हो कर एसपी साहब का मुंह ताकता रह गया.

”देखो, तुम निश्चिंत रहो, इस के पीछे जो लोग भी हैं, पुलिस और कानून से बच नहीं सकते.’’ सदानंद कुमार ने उसे आश्वस्त कर के वहां से भेज दिया.

 इस के बाद उन्होंने अपने तरीके से जब जिला बलौदा बाजार भाटापारा के कुछ अन्य महत्त्वपूर्ण लोगों और सूत्रों से बातचीत की तो यह बातें सामने आ गईं कि शहर में ऐसी  लगभग 10 घटनाएं घटित हो चुकी हैं और नगर के गणमान्य लोग इस में अपनी इज्जत बचाने के चक्कर में पुलिस के समक्ष शिकायत करने नहीं आ रहे हैं. एसपी सदानंद कुमार ने मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस की 5 टीमें बनाईं. उन्होंने सभी टीमों को निर्देश दिए कि वह जल्द से जल्द इस मामले को सौल्व कर हनीट्रैप के आरोपियों को गिरफ्तार कर उन्हें जेल भेजें.

कोतवाली, बलौदा बाजार के टीआई अजय झा और पुलिस की टीमों ने एसपी के निर्देशन में जांच शुरू कर दी और बहुत जल्द आरोपियों को सबूत के साथ गिरफ्त में भी ले लिया. एसडीओपी निधि नाग ने 31 मार्च, 2024 को मामले का खुलासा करते हुए पत्रकारों को बताया कि मामले की जांच में मुख्य आरोपी प्रत्यूष मरैया उर्फ मोंटी, कनक टंडन, पूर्व विधायक प्रतिनिधि शिरीष पांडेय, एडवोकेट महान मिश्रा समेत दूसरे आरोपियों के नाम सामने आए हैं.

ये सभी आरोपी गैंग की महिलाओं को जाल में फांसे गए लोगों के घर भेजते थे, जहां महिलाएं जा कर संबंधित शख्स को झूठे मामले में फंसाने की धमकी देती थीं. धमकी के बाद बदनामी के डर से आरोपी पीडि़त से मोटी रकम की उगाही करते थे. इस के बाद सर्च वारंट जारी कर पुलिस ने आरोपियों के निवास और दूसरे ठिकानों में सर्च अभियान चलाया. मुख्य आरोपी कनक टंडन, मोंटी उर्फ प्रत्यूष मरैया, शिरीष पांडेय फरार थे. कनक टंडन के घर के बाहर पुलिस बल लगाया गया और सरगना की तलाश के लिए पुलिस की टीमें लगातार पतासाजी करने लगीं.

पुलिस लगातार छापेमारी करती रही. शहर के नामी लोगों को टारगेट बना कर गिरोह लगातार ब्लैकमेल करता रहा.

मंत्री की दखल से तेज हुई पुलिस काररवाई

यह चर्चित सैक्स स्कैंडल जब कुछ समय तक ठंडे बस्ते में चला गया और आरोपी नहीं पकड़े गए तो शहर में इस की चर्चा होने लगी. समाचार पत्रों में यह मामला सुर्खियां बटोरने लगा. ऐसे में छत्तीसगढ़ में सत्ता परिवर्तन के बाद नई सरकार मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में बनी थी. हनीट्रैप मामले की जानकारी स्थानीय विधायक और राज्य सरकार में खेल और युवा कल्याण मंत्री टंकराम वर्मा को हुई तो उन्होंने एसपी को शीघ्र काररवाई के लिए कहा. आखिरकार कोतवाली पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर ली.

बलौदा बाजार के इस सैक्स स्कैंडल मामले में टारगेट को फंसा कर रकम वसूल करने में जनप्रतिनिधि, पुलिस और कथित पत्रकार की भी भूमिका सामने आई. मंगलवार 9 जुलाई, 2024 को आखिरकार  लंबे समय से चर्चा में रहे हनीट्रैप मामले में एक महिला आरोपी को पुलिस ने बड़ी मशक्कत के बाद कोर्ट के पास गिरफ्तार कर लिया तो यह मामला फिर सुर्खियों में आ गया. पकड़ी गई महिला विनीता (27 वर्ष) शिव मंदिर, बलौदा बाजार की रहने वाली थी.

पूछताछ में विनीता ने पुलिस के सामने आखिर हथियार डाल दिए और सारेघटनाक्रम को सिलसिलेवार बयान किया. एसपी सदानंद कुमार के निर्देश पर पुलिस ने 3 युवतियों और एक युवक को पहले गिरफ्तार किया था. आरोपियों में कई नामचीन लोग शामिल थे. ये सभी एक रैकेट बना कर धनवान, शासकीय एवं प्राइवेट नौकरी से रिटायर्ड लोगों को हनीट्रैप में फंसा रहे थे. फिर उन्हें बदनाम करने की धमकी दे कर उन से मोटी रकम वसूल रहे थे.

जांच के दौरान पुलिस ने अनेक पीडि़तों से विस्तार से पूछताछ की गई, जिस में यह तथ्य सामने आया कि मुख्य सरगना शिरीष पांडे, गीतांजलि फेकर, मोंटी उर्फ प्रत्यूष मरैया, कनक टंडन, महान मिश्रा व अन्य इस सैक्स स्कैंडल में शामिल थे. पुलिस ने 5 आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया था. उन्होंने हनीट्रैप (Honeytrap) के जरिए 41 लाख रुपए की वसूली करने की बात कुबूल कर ली.

गैंग में वकील और पत्रकार भी शामिल

यह गिरोह बड़े ही शातिर तरीके से अपने काम को अंजाम दिया करता था तथा गिरोह के सभी सदस्यों के काम अलगअलग थे. गिरोह का मुख्य सरगना एवं मास्टरमाइंड शिरीष पांडे एवं विनीता थे. शिरीष पांडे एवं विनीता द्वारा बलौदा बाजार नगर में मोटे पैसे वाले लोगों को चिह्निïत किया जाता था. उस के बाद शिरीष पांडे द्वारा खुद की पहुंच अपनी राजनीतिक दखल एवं पहचान का प्रभाव दिखाते हुए टारगेट से मेलजोल बढ़ा कर उन को लड़की उपलब्ध करने का झांसा दिया जाता था.

दोनों मुख्य आरोपी स्थानीय बलौदा बाजार के निवासी हैं. ये दोनों ही लड़कियों के शहर में रहने, खानेपीने एवं अन्य सुविधाओं का इंतजाम करते थे. इस के बाद उन लड़कियों को अपने टारगेट के पास भेजते थे. लड़की के जाने के थोड़ी देर बाद खुद दोनों आरोपी मौके पर पहुंच कर स्वयं को लड़की के परिजन बता कर टारगेट को ब्लैकमेल कर पैसे की मांग करते थे. इस दौरान पीडि़त उन से डर कर पैसे देने के लिए तैयार हो जाता था. इन में दीप्ति बंजारे नाम की महिला टारगेट को फंसाने के लिए लड़कियों का इंतजाम करती थी.

यही गिरोह से संपर्क के माध्यम से लड़कियों को बुला कर टारगेट के पास भी भेजती थी. खुद को पत्रकार बताने वाला आशीष शुक्ला पत्रकारिता की आड़ में हनीट्रैप (Honeytrap) में फंसे व्यक्ति को धमकाने का काम करता था. आरोपी शुक्ला धमकी देता था कि यह अपराध प्रैस के माध्यम से लोगों तक प्रसारित कर दिया जाएगा. इस प्रकार डर दिखा कर वसूली करने का काम चल रहा था. आशीष शुक्ला द्वारा एक टारगेट से सवा लाख रुपए की मांग की गई थी, जिस में पीडि़त व्यक्ति ने 75 हजार रुपए का भुगतान आरोपी आशीष शुक्ला की दुकान में जा कर किया था.

बताया जाता है कि एक आरोपी महान मिश्रा पेशे से वकील है. यह अपनी पहुंच एवं पहचान का रौब दिखा कर उगाही की गई रकम को संभालने एवं आपस में बंटवारा करने का काम करता था. पुलिस द्वारा आरोपियों को गिरफ्तार कर जुडिशियल रिमांड पर भेजा गया तथा अन्य फरार आरोपी दीप्ति बंजारे, आशीष शुक्ला, शिरीष पांडे की तलाश की जा रही थी.

पुलिस ने यह कथा लिखे जाने तक आरोपी कनक टंडन (30 साल), उस के पति प्रत्यूष उर्फ मोंटी मरैया (28 साल), डा. अब्दुल कलाम बलोदा बाजार, साकिन अब्दुल कलाम बलौदा बाजार, प्रत्यूषा (22 साल) निवासी बिल्हा जिला बिलासपुर सहित एक अन्य आरोपी महान मिश्रा को गिरफ्तार किया था.

—कथा पुलिस सूत्रों पर आधारित. कथा में पात्रों के नाम परिवर्तित है.

 

 

खामोश हुआ विद्रोही तेवर

खामोश हुआ विद्रोही तेवर – भाग 3

जमीन की लीज कराने के बाद दोनों भूमाफियाओं ने इंडियन बैंक की राजोपट्टी शाखा से कई करोड़ का कर्ज भी ले लिया. अजय विद्रोही को उन की यह पूरी कहानी मालूम हो चुकी थी. यही नहीं, अजय यह भी मांग करने लगे थे. इन दोनों भूमाफियाओं ने गैरकानूनी तरीकों से जो अकूत संपत्ति अॢजत की है, उस की जांच आॢथक अपराध शाखा से कराई जाए.

अशोक सिंह और जयप्रकाश अग्रवाल को पता था कि सिटीजन फोरम के महासचिव और स्वतंत्र पत्रकार अजय विद्रोही की पहुंच बड़ेबड़े अधिकारियों तक है. इसलिए उन्हें इस बात की आशंका थी कि अगर आरटीआई के माध्यम से दस्तावेज अजय के हाथ लग गए तो मठ की अरबों की जिस जमीन पर उन का कब्जा है, वह तो उन के हाथों से निकल ही जाएगी, जालसाजी कर के बैंक से उन्होंने जो लोन लिया है, वह भी लौटाना पड़ सकता है. इस से उन की बदनामी तो होगी ही, जेल भी जाना पड़ेगा.

अजय विद्रोही की वजह से अशोक सिंह और जयप्रकाश अग्रवाल की परेशानी बढ़ गई थी. पहले तो उन्होंने अजय को खरीदने की कोशिश की, लेकिन वह बिकने को तैयार नहीं हुए. अशोक सिंह अजय के जिद्दी स्वभाव को जानते थे. उसे लगा कि अजय की जिद उस के लिए नुकसानदायक साबित हो सकती है, इसलिए उस ने अजय को हमेशाहमेशा के लिए रास्ते से हटाने का फैसला कर लिया.

यह काम अशोक सिंह के लिए कोई बड़ी बात नहीं थी, क्योंकि उस के यहां बड़े और नामचीन अपराधियों का आनाजाना था. इस योजना में उस ने जयप्रकाश अग्रवाल और भांजे दीपक सिंह को भी शामिल कर लिया. अशोक सिंह ने सुपारी किलर रामबाबू सिंह से बात की. वह जिले की पुलिस के लिए सिरदर्द बना था. जिले के विभिन्न थानों में उस के खिलाफ कई गंभीर और संगीन मामले दर्ज थे. वह कई बार जेल भी जा चुका था.

घटना से सप्ताह भर पहले शूटर रामबाबू सिंह ने अपने साथियों अजय, लोकेश, हरेंद्र बैठा और महेसी सिंह महेसिया के साथ मिल कर पत्रकार अजय विद्रोही के घर से चौक स्थित मठ तक की रेकी की. उन्होंने इस बात की अच्छी तरह से जांचपरख कर ली कि अजय विद्रोही घर से कितने बजे और किन रास्तों से निकलते हैं.

27 सितंबर, 2015 को शूटर रामबाबू सिंह अपने साथियों अजय, लोकेश, हरेंद्र बैठा और महेसी सिंह महेसिया के साथ सीतामढ़ी पहुंचा. अशोक सिंह ने शहर के एक नामी होटल में उन के ठहरने का इंतजाम कर दिखाया. बदमाशों ने 2 दिनों बाद घटना को अंजाम का फैसला किया दीपक सिंह को अजय विद्रोही की मुखबिरी पर लगा दिया.

दीपक जानता था कि अजय रात में खाना खाने के बाद कुछ देर टहलते हैं. 29 सितंबर, 2015 की रात भी ऐसा ही हुआ. खाना खाने के बाद अजय विद्रोही बाहर टहलने के लिए निकले तो दीपक घर के बाहर टहलता मिल गया. वह पहले से ही बाहर खड़ा उन के निकलने का इंतजार कर रहा था. जेसे ही वह बाहर निकले, मुसकराता हुआ दीपक उन के पास पहुंच गया. थोड़ी देर वह इधरउधर की बातें करता रहा. उस समय उस का हावभाव बड़ा अजीब था.

उसी समय अजय विद्रोही के मोबाइल पर अशोक सिंह का फोन आया. उस समय उन का मोबाइल कमरे में था, जिसे ले जा कर उन्हें बेटे ने दिया. चूंकि अशोक सिंह का फोन काफी दिनों बाद आया था, इसलिए वह चौंके. अशोक ने पिछली बातों को भूल कर फिर से दास्ती का हाथ बढ़ाने की पेशकश की. अजय विद्रोही उस से मिलने चल पड़े.

उधर दीपक ने अपने मामा अशोक को फोन कर के बता दिया कि अजय घर से निकल चुके हैं. अशोक ने यह सूचना शूटर रामबाबू सिंह को दे दी. रामबाबू ने यह सूचना अपने साथी अजय को दे दी. अजय लोकेश के साथ विद्रोही के घर पर पहले से ही नजर रखे हुए था. हरेंद्र बैठा और महेसी सिंह महेसिया साथियों की सुरक्षा के लिए दूसरी मोटरसाइकिल लिए चौक पर खड़े थे.

इशारा मिलते ही अजय मोटरसाइकिल ले कर विद्रोही के पीछे चल पड़े. उस की मोटरसाइकिल पर पीछे लोकेश बैठा था. वह अजय विद्रोही पर घात लगाए था. अजय विद्रोही का पीछा करता हुआ अजय चौक के पास पहुंच गया. उस के पीछेपीछे हरेंद्र और महेसी सिंह भी गाड़ी ले कर चल रहे थे.

रात काफी हो चुकी थी. बाजार लगभग बंद हो चुका था. वारदात को अंजाम देने का उन के लिए यह अच्छा मौका था. अजय की मोटरसाइकिल जैसे ही अजय विद्रोही के करीब पहुंची, लोकेश ने 2 गोलियां उन के सीने में उतार दीं. गोली लगते ही वह सडक़ पर गिर कर तड़पने लगे. इस के बाद चारों बदमाश फरार हो गए.

गोली चलने की आवाज सुन कर दुकानदारों ने शटर गिराने शुरू कर दिए. कुछ सहानुभूति दिखाने के लिए पत्रकार अजय विद्रोही के पास पहुंच गए. वे अजय को टैंपो द्वारा जिला चिकित्सालय ले गए, जहां डाक्टरों ने उन्हें घोषित कर दिया.

कथा लिखे जाने तक पुलिस ने हत्याकांड में शामिल अभियुक्तों में दीपक सिंह, अशोक सिंह, लोकेश सिंह और जग्गा को गिरफ्तार कर के जेल भेज दिया था. पुलिस दबाव के कारण 8 जनवरी, 2016 को अभियुक्त हरेंद्र बैठा ने कोर्ट में आत्मसमर्पण कर दिया था.

इस के ठीक 2 दिनों बाद 10 जनवरी को महेसी सिंह महेशिया को पुसिल ने सीतामढ़ी से ही गिरफ्तार कर लिया था. उस ने भी अजय विद्रोही हत्याकांड में शामिल होने की बात स्वीकार कर ली थी. भूमाफिया जयप्रकाश अग्रवाल फरार चल रहा था. कथा लिखे जाने तक वह पुलिस की पकड़ से दूर था. इस मामले में राजस्व विभाग के एक अधिकारी को दोषी पाए जाने पर उसे निलंबित कर दिया गय था. कथा लिखे जाने तक किसी भी आरोपी की जमानत नहीं हुई थी.

कलम की बदौलत सच उगलने पर अपनी जान गंवाने वाले अजय विद्रोही पहले पत्रकार नहीं थे. ऐसे न जाने कितने विद्रोहियों को मौत के मुंह में जाना पड़ा है.

—कथा पुलिस सूत्रों पर आधारित

खामोश हुआ विद्रोही तेवर – भाग 2

चूंकि अशोक सिंह एक रसूखदार आदमी थे, इसलिए सिर्फ काल डिटेल्स के आधार पर उन पर हाथ नहीं डाला जा सकता था. लेकिन वह शक के घेरे में आ गए थे. थानाप्रभारी ने यह बात वरिष्ठ अधिकारियों को भी बता दी थी. वह अधिकारियों के निर्देश पर काररवाई करना चाहते थे. अधिकारियों ने कहा कि हत्यारा चाहे कितनी भी ऊंची रसूख वाला क्यों न हो, अगर उस के खिलाफ सबूत मिलते हैं तो उसे तुरंत गिरफ्तार कर लिया जाए. इस के बाद आशीष कांति अशोक सिंह के खिलाफ सबूत जुटाने लगे.

आशीष कांति को मुखबिर से सूचना मिली कि घटना से कुछ देर पहले अशोक सिंह का भांजा दीपक सिंह अजय विद्रोही से बातें करते हुए देखा गया था. उस समय उस के हावभाव ठीक नहीं लग रहे थे, वह घबराया हुआ भी था. इस बात की तसदीक मृतक के बेटे शुभम ने भी की थी. पुलिस के शक के दायरे में दीपक भी आ गया. फिर क्या था, पुलिस ने 4 अक्तूबर, 2015 को दीपक को पूछताछ के लिए उस के घर से दबोच लिया.

एएसपी (अभियान) संजीव कुमार सिंह के सामने दीपक से मनोवैज्ञानिक तरीके से पूछताछ शुरू हुई. पहले तो वह उन्हें इधरउधर घुमाता रहा, लेकिन जब उन्होंने कुछ खास सबूत उस के सामने रखे तो उस के चेहरे का रंग फीका पड़ गया. दीपक को अपना जुर्म कबूल करने के अलावा कोई दूसरा रास्ता नहीं दिखाई दिया तो उस ने अजय विद्रोही की हत्या की साजिश में खुद के शामिल होने की बात स्वीकार कर ली.

दीपक से पूछताछ के बाद इस इस्टू हाउस के मालिक अशोक सिंह, भूमाफिया जयप्रकाश अग्रवाल, जग्गा, शूटर रामबाबू सिंह, अजय सिंह, लोकेश सिंह, महेसी सिंह महेसिया और हरेंद्र बैठा के नाम सामने आए. केस का पूरी तरह से खुलासा हो चुका था. हत्या के इस मामले में शहर के रसूखदार लोगों के शामिल होने से पुलिस हैरान थी कि इन लोगों ने एक पत्रकार की हत्या क्यों की? यह अन्य अभियुक्तों के गिरफ्तार होने के बाद ही पता चल सकता था.

पूछताछ के बाद उसी दिन पुलिस ने आरोपी दीपक को न्यायालय में पेश किया, जहां से उसे जेल भेज दिया, इस के 2 दिनों बाद 6 अक्तूबर को पुलिस ने योजनाबद्ध तरीके से इस्टू हाऊस के मालिक अशोक सिंह, जग्गा, रामबाबू सिंह, अजय सिंह और लोकेश को गिरफ्तार कर लिया.

बाकी के 3 अरोपी जयप्रकाश अग्रवाल, महेसी सिंह महेसिया और हरेंद्र बैठा फरार हो गए थे. गिरफ्तार आरोपियों से पत्रकार अजय विद्रोही की हत्या के बारे में पूछताछ की गई तो उन्होंने सिलसिलेवार हत्या की जो कहानी पुलिस को बताई, वह इस प्रकार थी—

55 वर्षीय अजय शर्मा ‘विद्रोही’ के पूर्वज मूलरूप से राजस्थान के सीकर जिले के खाटू गांव के रहने वाले थे. करीब डेढ़ सौ साल पहले उन के परदादा रामदेव शर्मा किसी काम से सीतामढ़ी आए तो यहां की सभ्यता और संस्कृति उन्हें इतनी भा गई कि वह यहीं के हो कर रह गए. उन की 2 पीढिय़ां यहीं जन्मीं और पलीबढ़ीं. पढ़लिख अजय कुमार ने सरकारी सेवा के बजाय पत्रकारिता को अपने जीवन का लक्ष्य चुना.

अजय ने सीतामढ़ी में ही स्थानीय समाचार पत्रों में नौकरी की. नौकरी के बाद उन्होंने अपने नाम के आगे तखल्लुख ‘विद्रोही’ जोड़ लिया. इस के बाद वह स्वतंत्र पत्रकार के रूप में काम करने लगे. वह अपनी लेखनी से भ्रष्टाचारियों की करतूतों को समाज के समाने उजागर करने लगे. जिस की वजह से शहर और समाज में उन की पहचान बनती गई. बाद में वह हिंदी अखबार दैनिक जागरण से जुड़ गए.

आखिरी दिनों में ‘विद्रोही’सीतामढ़ी के दैनिक जागरण यूनिट के प्रभारी थे. यूनिट में अजय के मन के मुताबिक काम नहीं हुआ तो उन्होंने त्यागपत्र दे दिया. इस के बाद उन्होंने हिंदी साप्ताहिक अखबार ‘सिटी संदेश’ निकाला. इस अखबार के माध्यम से उन्होंने बड़ेबड़े धन्नासेठों, मठाधीशों, माफियाओं, नौकरशाहों और सफेदपोशों की कलई खोलनी शुरू कर दी, जिस की वजह से यह इन लोगों की आंखों की किरकिरी बन गए. लेकिन शहर में उन की लोकप्रियता बढ़ गई.

2 साल बाद वित्तीय संकट की वजह से उन का अखबार बंद हो गया. शहर में हर वर्ग के लोगों से उन का जुड़ाव हो गया था. चाहे नौकरशाह हो या राजनेता, चिकित्सक हो या व्यवसाई, अमीर हो या गरीब. सभी के बीच उन की एक अलग पहचान बन गई थी. शहर में होने वाले अधिकांश कार्यक्रमों में उन की सहभागिता देखी जाती थी. उन्हें सिटीजन फोरम का महासचिव भी बना दिया गया था.

यह जिम्मेदारी मिलने के बाद अजय ‘विद्रोही’ के कंधों पर सामाजिक दायित्वों का बोझ आ गया था. फोरम के माध्यम से उन्होंने जनसूचना अधिकार अधिनियम के तहत विभिन्न विभागों में 150 आरटीआई लगाईं. सीतामढ़ी शहर में थाना नगर के चौक बाजार स्थित मठ की 101 डिस्मिल जमीन पर भूमाफियाओं की नजरें टिकी थीं.

अजय को सूचना मिली कि भूमाफिया अशोक सिंह और जयप्रकाश अग्रवाल द्वारा फरजी तरीके से मठ की वह जमीन लीज करा ली गई है. जमीन से संबंधित जानकारी जुटाने के लिए उन्होंने थाना बथनाहा के मझौलिया गांव के रवि कुमार सिंह द्वारा संबंधित विभाग में आरटीआई लगवा कर सूचना मांगी.

जानेमाने व्यवसाई अशोक सिंह की शहर में नूतन सिनेमा रोड स्थित चौक बाजार में इस्टू हाऊस नाम की मशहूर दुकान थी. इस्टू हाऊस में शराब और कबाब खुलेआम बिकता था. इस के अलावा यहां कई तरह के अनैतिक और गैरकानूनी धंधे चलते थे. शहर के बड़ेबड़े धन्नासेठों, माफियाओं, पत्रकारों, सफेदपोशों, अपराधियों और खाकी वर्दीधारियों का वहां बराबर उठनाबैठना था.

इसी वजह से अशोक सिंह पर किसी की भी हाथ डालने की हिम्मत नहीं होती थी. अजय विद्रोही भी कभीकभार वहां जाते थे. मालिक अशोक सिंह से उन का परिचय था. वह उस के कई काले धंधों के बारे में जानते थे. इन्हीं बातों को ले कर अशोक सिंह और अजय के बीच मतभेद पैदा हुए, तो अजय ने इस्टू हाऊस जाना बंद कर दिया. यही नहीं उन्होंने अशोक सिंह से बात करनी भी बंद कर दी.

अजय विद्रोही ने पता कर लिया था कि मठ की 101 डिस्मिल जमीन मठ के महंथ दुखियादास के नाम थी. महंथ दुखियादास ने जीवित अवस्था में ही अपना उत्तराधिकारी बलवंतदास को बना दिया था, लेकिन अरबों रुपए की यह जमीन बलवंतदास के नाम स्थानांतरित नहीं की थी. महंथ बलवंतदास की मौत हो चुकी थी.

उन की मौत के बाद वह जमीन ऐसे ही पड़ी थी. उस जमीन पर अशोक सिंह की नजर गड़ी हुई थी. अरबों की जमीन हथियाने के लिए उस ने बाजपट्टी के भूमाफिया जयप्रकाश अग्रवाल को अपनी योजना में शामिल किया. दोनों ने साजिश रच कर उस जमीन को हड़पने की योजना बना डाली.

इस्टू हाऊस में जग्गा राउत कई सालों से नौकरी करता था. वह अशोक सिंह का बहुत वफादार आदमी था. इन लोगों ने बरियापुर के बीएलओ से साठगांठ कर के जग्गा राउत का फोटो लगवा कर मृत महंत दुखियादास के नाम से मतदाता पहचान पत्र बनवा लिया. मतदाता पहचान पत्र बनने के बाद दोनों ने उसी के आधार पर जग्गा राउत का फोटो लगा कर मृत महंथ दुखियादास के नाम से पैनकार्ड भी बनवा लिया.

एक तरह से इन लोगों ने फरजी तरीके से महंथ दुखियादास को जीवित कर दिया था. जाली दस्तावेजों के आधार पर महंत दुखियादास के नाम से अन्य कागजात भी तैयार करा लिए थे. इन्हीं कागजों के आधार पर 23 जून, 2014 को दोनों भूमाफियाओं ने जग्गा राउत को कथित महंत दुखियादास बना कर मठ की जमीन अपने नाम पर 61 सालों के लिए लीज पर करा ली.

खामोश हुआ विद्रोही तेवर – भाग 1

29 सितंबर, 2015 की रात साढ़े 9 बजे के बाद पत्रकार अजय विद्रोही खाना खाने के बाद टहलने के लिए जैसे ही घर से बाहर सडक़ पर आए, पड़ोस में रहने वाला दीपक सिंह मिल गया. सडक़ पर खड़े हो कर वह उस से बातें करने लगे. तभी उन का बेटा शुभम फोन ले कर उन के पास आ कर बोला, ‘‘कोई अशोक अंकल हैं, वह आप से बात करना चाहते हैं.’’

बेटे से फोन ले कर जैसे ही अजय विद्रोही ने हैलो कहा, दूसरी तरफ से आवाज आई, ‘‘भाई अजय, मैं अशोक सिंह…’’

‘‘हां भाई अशोक, बताएं… इतने दिनों बाद कैसे मेरी याद आई, जरूर कोई खास काम होगा तभी याद किया है?’’ अजय विद्रोही ने व्यंग्यात्मक अंदाज में कहा.

‘‘हां, जरूरी काम है.’’ अशोक सिंह ने कहा.

‘‘बताओ, कहो तो अभी आ जाऊं?’’ अजय विद्रोही ने कहा.

‘‘नेकी और पूछपूछ. आ जाते तो काम हो जाता. हम सोच रहे हैं कि जिस मामले को ले कर हमारे बीच मतभेद चल रहे हैं, उस पर बैठ कर बातचीत कर लेें, शायद बीच का कोई रास्ता निकल ही आए.’’ अशोक सिंह ने कहा.

‘‘ठीक है, मैं आ रहा हूं. मैं भी चाहता हूं कि मामला सुलझ जाए.’’ कह कर अजय ने फोन काट दिया. इस के बाद बेटे शुभम को आवाज दे कर कहा कि वह एक आदमी से मिलने जा रहे हैं. अभी थोड़ी देर में लौट आएंगे. बेटे से कह कर वह पैदल ही चल पड़े. उन्हें मठ के पास अशोक सिंह से मिलने जाना था, जो उन के घर से थोड़ी ही दूरी पर था.

वह तेज कदमों से बेफिक्री से चले जा रहे थे. अपने घर से वह कुछ दूर ही गए होंगे कि एक मोटरसाइकिल पीछे से आ कर धीरेधीरे उन के बराबर पर चलने लगी. उस पर 2 युवक सवार थे. बराबरी पर चल रही मोटरसाइकिल देख कर अजय कुमार ठिठके और जैसे ही उन्होंने उन की ओर देखा तो पीछे बैठा युवक उन्हें देख कर मुसकराया.

उन्होंने उस पर ज्यादा ध्यान नहीं दिया और पहले से भी ज्यादा तेज गति से चल पड़े. मोटरसाइकिल सवार वहीं रुक गए. अजय भीड़भाड़ वाली चौक बाजार स्थित शराब की दुकान के पास पहुंचे थे कि मोटरसाइकिल सवार पीछे से आए और पीछे बैठे युवक ने अजय विद्रोही पर 2 गोलियां चला दीं. लोग कुछ समझ पाते, वे तेजी से चले गए. अजय विद्रोही गिर कर छटपटाने लगे थे.

गोलियों की आवाज सुन कर दुकानदारों ने दुकानों के शटर गिरा कर भाग लिए. पल भर में वहां गहरा सन्नाटा पसर गया. भागते हुए कुछ दुकानदारों ने देखा कि गोली किसी आदमी को मारी गई है और वह आदमी सडक़ पर पड़ा तड़प रहा है तो वे उस के पास पहुंचे.

पत्रकार अजय विद्रोही को बाजार के सभी दुकानदार जानते थे, इसलिए उन्होंने उन्हें पहचान लिया. इस के बाद अपना फर्ज समझते हुए लहूलुहान अजय कुमार को एक टैंपो में लादा और जिला चिकित्सालय ले गए. इस बीच उन के शरीर से काफी खून बह चुका था, जिस से रास्ते में ही उन्होंने दम तोड़ दिया.

चूंकि अजय विद्रोही को शहर के ज्यादातर लोग जानते थे, इसलिए कुछ ही देर में पूरे शहर में उन्हें गोली मारे जाने की खबर फैल गई. अजय के घर वाले भी खबर पा कर अस्पताल पहुंच गए. वहां जब उन्हें उन की मौत की जानकारी मिली तो वे रोनेबिलखने लगे. इस के बाद जैसेजैसे शहर के लोगों को पत्रकार अजय विद्रोही की हत्या की जानकारी होती गई, लोग अस्पताल पहुंचने लगे. कुछ ही देर में अस्पताल में भीड़ लग गई.

किसी ने पुलिस को फोन द्वारा सूचना तो दे दी थी, लेकिन थाना सीतामढ़ी के थानाप्रभारी भुनेश्वर प्रसाद सिंह घंटों बाद अस्पताल पहुंचे. तब नाराज स्थानीय नेताओं और नागरिकों ने थानाप्रभारी को अस्पताल के अंदर नहीं जाने दिया. रात काफी होने के बावजूद माहौल पूरी तरह से गरम और विस्फोटक था. भुवनेश्वर प्रसाद सिंह ने इस की सूचना वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों को दी तो कुछ ही देर में डीआईजी प्रदीप कुमार श्रीवास्तव, एसपी हरिप्रसाद यश, एएसपी (अभियान) संजीव कुमार, डीएसपी राजीव रंजन भी जिला अस्पताल पहुंच गए थे.

काफी देर तक नेताओं और पुलिस अधिकारियों के बीच नोकझोंक होती रही. जनता अजय विद्रोही की लाश पुलिस को सौंपने को तैयार नहीं थी. वह हत्यारों को 24 घंटे के अंदर गिरफ्तार करने की मांग कर रही थी. पुलिस अधिकारियों ने जब उन्हें आश्वासन दिया कि अजय के हत्यारे जल्द से जल्द गिरफ्तार किए जाएंगे, तब कहीं लाश पुलिस को सौंपी गई.

लाश कब्जे में ले कर पुलिस ने उसी रात आवश्यक काररवाई कर के उसे पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया. यह घटना 29 सितंबर, 2015 की थी. पुलिस ने रात में ही घटनास्थल का निरीक्षण कर के वहां से 9 एमएम पिस्टल के 2 खोखे बरामद किए.

55 वर्षीय पत्रकार अजय कुमार विद्रोही बिहार के जिला सीतामढ़ी के मोहल्ला कोर्ट बाजार में अपने परिवार के साथ रहते थे. उन के परिवार में पत्नी शोभा शर्मा के अलावा 3 बच्चे थे. वह एक खोजी पत्रकार थे और जनहित के मुद्दों पर अननी कलम चलाते थे. यही वजह थी कि अगले दिन उन की हत्या के विरोध में नेताओं ने स्थानीय लोगों के साथ विरोध प्रदर्शन करते हुए मेन रोड जाम कर दिया. दुकानदारों ने भी अपनी दुकानें बंद कर लीं. भीड़ ने कई दुपहिया वाहनों में आग भी लगा दी थी.

शहर का माहौल पूरी तरह विस्फोटक बन गया था. पुलिस ने तुरंत मृतक के बड़े बेटे शुभम शर्मा की ओर से अज्ञात हत्यारों के खिलाफ भादंवि की धारा 302/120बी/364/34 के तहत मुकदमा दर्ज कर के आगे की काररवाई शुरू कर दी थी. शहर की स्थिति को देखते हुए एसपी हरिप्रसाद यश ने शहर में आसपास के थानों की पुलिस और पीएसी बुला ली. शहर पुलिस छावनी में तब्दील हो चुका था.

एएसपी (अभियान) संजीव कुमार और डीएसपी (सदर) राजीव रंजन स्थिति पर नजर रखे हुए थे. प्रदर्शनकारी सीतामढ़ी नगर थाने के प्रभारी भुवनेश्वर प्रसाद सिंह को जिम्मेदार ठहराते हुए उन्हें तत्काल निलंबित करने की जिद पर अड़े थे. आखिरकार एसपी को उन की मांग स्वीकार करनी पड़ी. उन्होंने तत्काल प्रभाव से भुवनेश्वर प्रसाद सिंह को लाइन हाजिर कर दिया.

उन के स्थान पर आशीष कांति को थाने का चार्ज दिया गया. चार्ज मिलते ही आशीष कांति ने सब से पहले घटनास्थल की जांच की. उन्होंने आसपास के लोगों से भी पूछताछ की. इसके बाद वह मृतक अजय विद्रोही के घर वालों से मिले. अजय की पत्नी शोभा शर्मा ने किसी से दुश्मनी होने की बात से इंकार किया. उस समय उन के घर का माहौल काफी गमगीन था,

इसलिए वह ज्यादा कुछ नहीं पूछ सके. अब तक की जांच में हत्यारों के बारे में पता नहीं चला तो आशीष कांति ने अजय विद्रोही के मोबाइल फोन की काल डिटेल्स निकलवाई. एकएक नंबर की उन्होंने गहनता से जांच की तो पता चला कि उन के मोबाइल पर आखिरी फोन जिस नंबर से आया था, वह शहर में ऊंची पहुंच रखने वाले इस्टू हाऊस के मालिक अशोक सिंह का था. अशोक के फोन आने के बाद ही अजय विद्रोही उन से मिलने चौक बाजार स्थित मठ की ओर जा रहे थे. इस बात की पुष्टि उन के बेटे शुभम ने भी की थी.

इंतकाम की आग में खाक हुआ पत्रकार