एक जुर्म से बड़ा दूसरा जुर्म : बहन का कातिल भाई

8 फरवरी, 2021 की बात है सुबह के करीब 10 बजे थे. नासिर नाम का एक कबाड़ी जोया रोड के किनारे हिल्टन कौन्वेंट स्कूल के पास से गुजर रहा था, तभी उस की नजर स्कूल के पास पड़े खाली प्लौट में चली गई.

प्लौट में एक युवती की लाश पड़ी थी. लाश देखते ही नासिर ने शोर मचा दिया. उस की आवाज सुन कर तमाम लोग जमा हो गए. नासिर ने फोन कर के इस की सूचना अमरोहा देहात थाने में दे दी.

युवती की लाश की सूचना मिलते ही थानाप्रभारी सुरेशचंद्र गौतम अपनी टीम के साथ घटनास्थल की ओर रवाना हो गए. वह जोया रोड स्थित हिल्टन कौन्वेंट स्कूल के पास पहुंचे तो वहां एक प्लौट में काफी लोग जमा थे.

वहीं पर युवती की लाश पड़ी थी, जो खून से लथपथ थी. उस का सिर और मुंह कुचला हुआ था. लाश के पास ही खून से सनी एक ईंट पड़ी थी. पुलिस ने अनुमान लगाया कि हत्यारे ने इसी ईंट से युवती की हत्या की होगी.

मृतका की उम्र लगभग 25 साल  थी. काले रंग की जींस, नारंगी टौप और सफेद जूते पहने वह युवती किसी अच्छे परिवार की लग रही थी. उस के गले पर भी चोट के निशान थे.

लाश के पास 2 मोबाइल फोन और 2 पर्स भी पड़े थे. पुलिस ने उस के पर्स की तलाशी ली तो उस में एक आधार कार्ड मिला. आधार कार्ड पर नाम नेहा चौधरी लिखा था.

आधार कार्ड के फोटो से इस बात की पुष्टि हो गई कि लाश नेहा चौधरी की ही है. कार्ड पर लिखे एड्रैस के अनुसार, नेहा अमरोहा देहात थाने के पचोखरा गांव निवासी दिनेश चौधरी की बेटी थी.

थानाप्रभारी ने एक कांस्टेबल को भेज कर यह खबर मृतका के घर तक पहुंचवा दी. सूचना पा कर एसपी सुनीति, एएसपी अजय प्रताप सिंह और सीओ विजय कुमार राणा भी घटनास्थल पर पहुंच गए. उन्होंने भी लाश और घटनास्थल का निरीक्षण करने के बाद वहां मौजूद लोगों से पूछताछ की.

उधर खबर मिलते ही मृतका नेहा चौधरी की मां वीना चौधरी, छोटा भाई अंकित और  चाचा कमल सिंह गांव के कुछ लोगों के साथ घटनास्थल पर पहुंच गए. लाश देखते ही वीना चौधरी ने उस की शिनाख्त अपनी बेटी नेहा के रूप में कर दी. घर के सभी लोगों का रोरो कर बुरा हाल था. गांव वाले उन्हें सांत्वना दे कर चुप कराने की कोशिश कर रहे थे.

पुलिस ने मृतका के घर वालों से पूछा कि उन की किसी से कोई रंजिश वगैरह तो नहीं है. इस पर वीना चौधरी ने कहा कि हमारी गांव में क्या कहीं भी किसी से कोई रंजिश नहीं है.

मौके पर पहुंची फोरैंसिक टीम ने भी घटनास्थल से सुबूत जुटाए. इस के बाद पुलिस ने जरूरी लिखापढ़ी के बाद उस का शव पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया. एसपी सुनीति ने इस हत्याकांड को सुलझाने के लिए 3 पुलिस टीमों का गठन किया.

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पुलिस ने वीना चौधरी से पूछताछ की तो उन्होंने बताया कि नेहा मेरठ की सुभारती यूनिवर्सिटी से एमबीए  कर रही थी. इस साल वह फाइनल की छात्रा थी. इस के अलावा वह पिछले 4 साल से नोएडा स्थित एक निजी बैंक में नौकरी भी कर रही थी और दिल्ली के लक्ष्मी नगर में किराए के मकान में रहती थी.

7 फरवरी यानी कल वह घर अमरोहा लौटने वाली थी. उस ने नोएडा से चलने के बाद अपने चाचा कमल सिंह को फोन कर के बता दिया था कि वह शाम तक अमरोहा पहुंच जाएगी. लेकिन वह घर नहीं पहुंची.

पुलिस ने मृतका के चाचा कमल सिंह की तरफ से अज्ञात लोगों के खिलाफ हत्या का मामला दर्ज कर लिया. पोस्टमार्टम के बाद घर वाले लाश ले कर चले गए.

पुलिस की सभी टीमें जांच में जुट गईं. जिस जगह पर नेहा चौधरी की लाश मिली थी, पुलिस ने उस के आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली.

एक फुटेज में 7 फरवरी को रात करीब 8 बजे नेहा चौधरी के साथ एक युवक भी दिखाई दिया. दूसरे दिन पुलिस ने वह फुटेज नेहा के घर वालों को दिखाई तो वीना चौधरी और देवर कमल सिंह ने युवक को पहचानते हुए बताया कि यह तो  नेहा का छोटा भाई अंकित है.

यह सुन कर पुलिस हतप्रभ रह गई. वीना चौधरी के साथ अंकित भी घटनास्थल पर आया था और फूटफूट कर रो रहा था, जबकि उस की हत्या से कुछ घंटे पहले तक वह उस के साथ था. सोचने वाली बात यह थी कि हत्या से पहले आखिर वह उस के साथ क्या कर रहा था.

अब पुलिस का मकसद अंकित से पूछताछ करना था, लेकिन वह घर से गायब था. पुलिस उस की तलाश में जुट गई. अगले दिन यानी 9 फरवरी की रात 9 बजे अंकित को पुलिस ने उस समय गिरफ्तार कर लिया, जब वह दिल्ली भागने की फिराक में था. थाने में पुलिस ने अंकित से सख्ती से पूछताछ की तो वह टूट गया.

अंकित ने स्वीकार कर लिया कि उस ने ही अपनी बड़ी बहन नेहा की हत्या की थी. आखिर छोटे भाई ने अपनी सगी बहन की  हत्या क्यों की, इस बारे में पुलिस ने जब अंकित से पूछा तो नेहा चौधरी की हत्या की जो कहानी सामने आई, वह चौंकाने वाली थी—

25 वर्षीय नेहा चौधरी उत्तर प्रदेश के जिला अमरोहा के गांव पचोखरा के रहने वाले दिनेश चौधरी की बेटी थी. पत्नी वीना चौधरी के अलावा दिनेश चौधरी के 2 बच्चे थे, बड़ी बेटी नेहा और छोटा अंकित चौधरी.

करीब 20 साल पहले दिनेश चौधरी अचानक गायब हो गए थे. उन्हें बहुत तलाशा गया, लेकिन कहीं पता नहीं चला. उस समय नेहा की उम्र 5 साल और अंकित की 3 साल थी.

पति के गायब हो जाने पर वीना चौधरी पर जैसे दुखों का पहाड़ टूट पड़ा. दुख की इस घड़ी में उन का साथ दिया उन के देवर कमल सिंह ने. वह अमरोहा शहर के मोहल्ला पीरगढ़ में रहते थे.

भाई के गायब हो जाने के बाद वह अपनी भाभी और दोनों बच्चों को अपने साथ ले आए और अपने घर पर ही रख कर न सिर्फ उन की परवरिश की, बल्कि पढ़ाईलिखाई भी पूरी कराई.

अंकित चौधरी की ननिहाल अमरोहा जिले के ही गांव सलामतपुर में थी. वह अकसर अपनी ननिहाल जाता रहता था. बताया जाता है कि उस ने अपने ममेरे भाई अक्षय के साथ मिल कर अपनी ननिहाल के गांव की रहने वाली एक नाबालिग लड़की का अपहरण कर उस के साथ बलात्कार किया था.

लड़की के पिता ने 18 जनवरी, 2021 को थाना डिडौली में अंकित और अक्षय के खिलाफ भारतीय दंड विधान की धारा 363 376डी, 342, 516 पोक्सो ऐक्ट तथा एससी/एसटी ऐक्ट के तहत रिपोर्ट दर्ज कराई.

अमरोहा की अदालत में नाबालिग लड़की के बयान भी दर्ज कराए गए. जिस में उस ने साफ कहा कि अंकित और अक्षय ने उस का अपहरण करने के बाद उस के साथ दुष्कर्म किया था.

इस केस से बचने के लिए अंकित चौधरी ने अमरोहा के कई बड़े वकीलों से राय ली. उन्होंने अंकित को बताया कि मामला बहुत गंभीर है. इस में तुम बच नहीं सकते, जेल तो जाना ही पड़ेगा. तब शातिर दिमाग अंकित चौधरी ने अपने आप को बचाने के लिए एक खौफनाक योजना तैयार की.

योजना यह थी कि वह अपनी बड़ी बहन नेहा चौधरी की हत्या करने के बाद इस का आरोप उस लड़की के पिता पर लगा देगा, जिस ने उस के खिलाफ बेटी के अपहरण व बलात्कार की रिपोर्ट दर्ज कराई थी.

ऐसा करने से क्रौस केस बन जाएगा. इस के बाद केस को रफादफा करने के लिए समझौते की बात चलेगी. समझौता हो जाने पर वह जेल जाने से बच जाएगा.

उसे बहन की हत्या कैसे करनी है, इस की भी उस ने पूरी योजना बना ली थी. योजना के अनुसार 7 फरवरी, 2021 को अंकित चौधरी ने अपनी बहन नेहा चौधरी को किसी परिचित के मोबाइल से फोन किया. उस समय नेहा नोएडा में अपनी ड्यूटी पर थी.

अंकित ने उस से  कहा कि बहन मेरे ऊपर जो मुकदमा चल रहा है उस में नाबालिग लड़की के पिता से बात हो गई है. वह फैसला करने को राजी है. लेकिन फैसले के समय तुम्हारा वहां रहना जरूरी है. इसलिए मैं अमरोहा से टैक्सी ले कर तुम्हें लेने के लिए नोएडा आ रहा हूं. नेहा ने सोचा कि एकलौता भाई है, फैसला हो जाए तो अच्छा है. यही सोच कर उस ने अमरोहा आने की हामी भर दी.

योजना के अनुसार 7 फरवरी, 2021 को अमरोहा के गांधी मूर्ति चौराहे के पास स्थित टैक्सी स्टैंड से एक गाड़ी बुक करा कर अंकित नोएडा के लिए रवाना हो गया. वह उस जगह पहुंच गया, जहां उस की बहन नेहा नौकरी करती थी. नेहा अंकित के साथ नोएडा से अमरोहा के लिए चल दी.

रास्ते में नेहा ने अपने चाचा कमल सिंह को फोन कर के बता दिया था कि वह अमरोहा आ रही है और शाम 6 बजे तक घर पहुंच जाएगी.

वापसी में अंकित टैक्सी ले कर अमरोहा से थोड़ा पहले स्थित जोया रोड पर पहुंचा तो उस ने अमरोहा ग्रीन से थोड़ा पहले टैक्सी रुकवा ली. नेहा ने टैक्सी रोकने की वजह पूछी तो अंकित ने बताया कि पुलिस मेरे पीछे पड़ी है. ऐसे में टैक्सी से घर जाना सही नहीं है. हम लोग यहां से किसी दूसरे रास्ते से चलेंगे. उस ने टैक्सी वाले को पैसे दे कर वहां से भेज दिया.

इस के बाद वह नेहा को हिल्टन कौन्वेंट स्कूल के पास खाली पड़े प्लौट की तरफ ले गया. नेहा ने उस से पूछा भी कि मुझे इस अनजान, सुनसान जगह से कहां ले जा रहे हो. तब अंकित ने कहा कि इधर से शौर्टकट रास्ता है. मेनरोड पर पुलिस मुझे पकड़ सकती है इसलिए मैं शौर्टकट से जा रहा हूं. नेहा ने भाई की बात पर विश्वास कर लिया और उस के साथ चलने लगी.

नेहा को क्या पता था कि जिस भाई की कलाई पर वह हर साल अपनी रक्षा के लिए राखी बांधती है, वही भाई उस की हत्या करने वाला है.

वह कुछ ही दूर चली थी कि अंकित रुक गया. वह नेहा से बोला कि मैं बाथरूम कर लूं, तुम पीछे मुंह कर के खड़ी हो जाओ.

जैसे ही नेहा पीछे मुंह कर के खड़ी हुई, अंकित ने अपनी जेब से एक फीता निकाला और बड़ी फुरती से नेहा के गले में डाल कर कस दिया. नेहा बस इतना ही कह पाई कि भाई यह तुम क्या कर रहे हो? इस के बाद वह मूर्छित हो कर जमीन पर गिर गई. तभी अंकित ने पास पड़ी ईंट से बहन के सिर व चेहरे पर तमाम वार किए और वह उसे ईंट से तब तक कूटता रहा, जब तक कि उस की मौत न हो गई.

अपनी सगी बहन की हत्या के बाद वह वहां से चला गया. वह सीधा अमरोहा की आवास विकास कालोनी में रहने वाले अपने एक रिश्तेदार के घर गया. फिर वहां से अगली सुबह 5 बजे उठ कर चला गया.

उस के कपड़ों, जूतों आदि पर खून लगा था. इसलिए उस ने अपने कपड़े, जैकेट, जूते, टोपा और गला घोंटने वाला फीता कल्याणपुर बाईपास के पास हमीदपुरा गांव के जंगल की झाडि़यों में छिपा दिए. इस के बाद वह अपने घर चला गया.

सुबह होने पर एक सिपाही जब नेहा की हत्या की खबर देने उस के घर गया, तब वह अपनी मां और चाचा के साथ घटनास्थल पर पहुंचा और वहां फूटफूट कर रोने का नाटक करने लगा.

अंकित से पूछताछ करने के बाद पुलिस ने उस की निशानदेही पर हमीदपुरा गांव के जंगल की झाडि़यों में छिपा कर रखे गए कपड़े, जैकेट, जूते, टोपा और फीता बरामद कर लिया.

अंकित चौधरी की गिरफ्तारी के बाद सारे सबूत पुलिस ने अपने कब्जे में ले लिए. 10 फरवरी, 2021 को अमरोहा की एसपी सुनीति ने प्रैस कौन्फ्रैंस कर इस हत्याकांड का खुलासा कर दिया. इस पूरे मामले में एसपी सुनीति को डिडौली थाने के दरोगा मुजम्मिल की लापरवाही नजर आई. मुजम्मिल ने नाबालिग लड़की के अपहरण और बलात्कार के आरोपी अंकित और उस के ममेरे भाई अक्षय को गिरफ्तार करने में लापरवाही दिखाई थी.

यदि वह इन दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर लेते तो शायद नेहा की हत्या नहीं होती. इसलिए एसपी सुनीति ने लापरवाही के आरोप में एसआई मुजम्मिल को लाइन हाजिर कर दिया. अंकित चौधरी से विस्तार से पूछताछ करने के बाद पुलिस ने उसे न्यायालय में पेश किया, जहां से उसे जेल भेज दिया गया.

—कथा पुलिस सूत्रों पर आधारित

2 गज जमीन के नीचे : प्रेमियों का प्यार हुआ दफन

साल 2020 समाप्त होने में गिनती के दिन बचे थे. नया साल शीत लहर की चौखट पर खड़ा था. ऐसे में खरगोन जिला मुख्यालय से कुछ दूरी पर स्थित भीकनगांव के टीआई जगदीश प्रसाद गोयल पुलिस टीम के साथ गांव में रहने वाली छायाबाई के पिता को ले कर मोहनखेड़ी पहुंचे. पुलिस को देख कर गांव वालों की भीड़ भी संतोष गोलकर के नए बने मकान के सामने जमा हो गई.

दरअसल 2 दिन पहले गांव में अपने पिता के घर पर रहने वाली 25 वर्षीय छायाबाई अचानक लापता हो गई थी. जिस दिन छायाबाई लापता हुई, उसी रोज संतोष भी गांव से गायब था. दोनों का पे्रम प्रंसग पूरे गांव के लोगों की जुबान पर था, इसलिए गांव वालों का मानना था कि संतोष ही छायाबाई को ले कर भाग गया.

लेकिन छायाबाई के पिता को शक था कि उस की बेटी को संतोष ने अपने नए मकान में छिपा रखा है. इसी बात की जांच करने के लिए पुलिस मोहनखेड़ी आई थी.

संतोष के मकान में ताला पड़ा था. गांव में रहने वाले उस के मातापिता भी गायब थे. इसलिए पुलिस ने ताला तोड़ कर पूरे घर की तलाशी ली, लेकिन वहां केवल छिपकली और मकडि़यों के अलावा कोई तीसरा जीव दिखाई  नहीं दिया. इसलिए पुलिस टीम वापस लौट आई.  गांव वाले तो पहले ही मान चुके थे कि छायाबाई संतोष के साथ कहीं भाग गई है. अब पुलिस ने भी ऐसा ही मान लिया, लेकिन ऐसा मानने वालों के बीच केवल छायाबाई का परिवार ही ऐसा था, जो इस बात को मानने को राजी नहीं हो रहा था.

इसलिए  उन के बारबार कहने पर संतोष के मकान में एक कमरे के फर्श की खुदाई भी कर के देखी गई, लेकिन कुछ हाथ नहीं आया. धीरेधीरे गांव के लोग छायाबाई और संतोष को भूलने लगे और अपने कामों में जुट गए थे.

लेकिन छायाबाई के पिता लगातार बेटी की खोज में लगे हुए थे. कोई महीने भर बाद संतोष के बंद पडे़ मकान से आने वाली अजीब सी बदबू से लोग परेशान होने लगे. पहले तो लोगों ने इस पर ध्यान नहीं दिया, लेकिन बदबू लगातार बढ़ने से पड़ोसियों का ध्यान संतोष के बंद मकान पर गया.

इस बात की खबर छायाबाई के पिता को लगी तो वह दौड़ेदौड़े अपने समाज के नेता के पास पहुंचे और उन्हेें सारी बात बताई. वह नेता छायाबाई के पिता को खंडवा एसपी के पास ले गया और एसपी को सारी कहानी से अवगत कराया. संतोष छायाबाई के लापता होने के मामले में संदिग्ध तो था ही, इसलिए उस के मकान से आने वाली बदबू की जानकारी को खंडवा एसपी शैलेंद्र सिंह चौहान ने गंभीरता से लिया.

उन के निर्देश पर एएसपी (ग्रामीण) जितेंद्र पंवार ने एसडीपीओ प्रवीण कुमार उइके के नेतृत्व में एक पुलिस टीम प्रशासनिक अधिकारियों के साथ 27 जनवरी, 2021 को एक बार फिर मोहनखेड़ी भेजी.

संतोष गोलकर का मकान खोलते ही बदबू का तेज झोंका आने से पुलिस समझ गई की यह मांस सड़ने की बदबू है. इसलिए पूरे मकान की बारीकी से जांच की गई. जिस से पता चला कि तीसरे कमरे के फर्श में ताजा सीमेंट लगाया गया है.

इसलिए शक के आधार पर पुलिस ने उस जगह की खुदाई करवाई तो डेढ़ फुट नीचे एक कान की बाली और लगभग ढाई फुट नीचे एक लेडीज चप्पल मिली. जिन के बारे में बताया कि ये दोनों ही चीजें छायाबाई की हैं.

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खुदाई की गहराई बढ़ने के साथ बदबू भी बढ़ती जा रही थी. वास्तव में पुलिस का शक उस समय सही साबित हुआ, जब कोई 4 फुट की गहराई पर छायाबाई का सड़ागला शव बरामद हो गया.

इस के बाद जांच के लिए एफएसएल अधिकारी सुनील मकवाना भी पहुंच गए. जांच के बाद उन्होंने शव को लगभग एक महीने पुराना बताया. जिस के बाद उसे पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया. लेकिन शव की हालत अत्यधिक खराब होने की वजह से उस का पोस्टमार्टम इंदौर के एमवाई अस्पताल में किया गया.

जाहिर सी बात है कि अब तक पुलिस का मानना था कि संतोष छायाबाई को ले कर भाग गया है. लेकिन अब छायाबाई की लाश संतोष के मकान में दफन मिल चुकी थी. जबकि संतोष और उस का परिवार गायब था. इसलिए पुलिस का सीधा शक यही था की संतोष ने ही छायाबाई की हत्या की है.

चूंकि उस के परिवार के सभी सदस्य गायब थे, इसलिए वे भी शक के घेरे में थे. एसपी शैलेंद्र सिंह चौहान ने आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए एक टीम गठित कर दी, जिस ने मुखबिरों से मिली सूचना के आधार पर 6 फरवरी, 2021 को संतोष की मां सकुबाई, भाई सुनील एवं बुआ के बेटे अनिल को गिरफ्तार कर लिया.

संतोष की तलाश पुलिस तत्परता से कर रही थी. जिस के चलते टीआई जगदीश प्रसाद गोयल की टीम में शामिल एसआई अंतिमवाला भूरिया, एएसआई लक्ष्मीनारायण पाल, प्रधान आरक्षक नंदकिशोर राय, आरक्षक अभिलाष डोंगरे, जितेंद्र, कांस्टेबल अंजली रिछारिया एवं कमलेश की टीम ने सूचना मिलने पर उसे बैतूल से गिरफ्तार कर लिया. इस के बाद यह कहानी कुछ इस तरह सामने आई—

16 साल की उम्र में छायाबाई की शादी पास के ही गांव एकतासा में रहने वाले युवक  के साथ हुई थी. दोनों के 3 बच्चे भी हुए किंतु दोनों के बीच रिश्ता कुछ यूं बिगड़ा कि छायाबाई अपने पति का घर छोड़ कर मोहनखेड़ी में पिता के घर आ कर रहने लगी.

मोहनखेड़ी में ही संतोष भी रहता था. संतोष छायाबाई की उम्र का था और छायाबाई की शादी से पहले वह उस की गली में चक्कर लगाया करता था. संतोष की दीवानगी की जानकारी छायाबाई को भी थी, लेकिन उन का इश्क परवान चढ़ पाता, उस से पहले ही छायाबाई की शादी हो गई थी. इस के बाद यह कहानी वहीं खत्म हो गई थी.

कुछ दिन बाद संतोष की भी शादी हो गई. लेकिन करीब 3 साल पहले ही उस की पत्नी भी उसे छोड़ कर अपने मायके में जा कर रहने लगी. संतोष ने कुछ दिनों तक तो ध्यान नहीं दिया, लेकिन पत्नी की गैरमौजूदगी में शारीरिक जरूरतें परेशान करने लगीं तो उसे छायाबाई का ध्यान आया जो खुद भी अपने पति को छोड़ कर बैठी थी. इसलिए उस ने अगले दिन ही छायाबाई की खातिर उस की गली में चक्कर लगाने शुरू कर दिए.

छायाबाई भी कई साल से पति से अलग रह रही थी. जैसे ही उस ने संतोष को देखा तो उसे अपने किशोर उम्र की याद आ गई, जब संतोष उस के लिए गली में चक्कर लगाया करता था.

इसलिए एक दिन छायाबाई ने भी मौका देख कर उसे सकारात्मक संदेश दे दिया. जिस के 4 दिन बाद ही दोनों गांव के बाहर एकांत में मिले और अपनी हसरतें पूरी कर प्यार के बंधन में बंध गए.

छायाबाई मायके में रहते हुए अपने मातापिता के ऊपर बोझ नहीं बनना चाहती थी. इसलिए वह गांव के कुछ घरों में झाड़ूपोंछा करने लगी थी. वह सुबह घर से निकल कर पहले अपना काम करती थी फिर सीधे संतोष के पास पहुंच जाती थी, जहां दोनों एकदूसरे के तन की प्यास पूरी करते थे. फिर छायाबाई वापस घर चली जाती थी.

दोनों एकांत में रोज मिला करते थे, इसलिए इस बात की जानकारी गांव वालों को हो गई थी. छायाबाई के परिवार तक भी यह खबर पहुंच चुकी थी. पिता ने अपनी बेटी को समझाने की कोशिश की, लेकिन मामला हाथ से निकल चुका था.

इधर छायाबाई के साथ घर बसाने की ठान चुके संतोष ने अपना खेत बेच कर छायाबाई के लिए सपनों का घर बनवा दिया था. कुछ दिनों में संतोष का मकान बन कर तैयार हो गया तो वह छायाबाई को इस मकान में ला कर अय्याशी करने लगा.

बताया जाता है कि इसी दौरान छायाबाई की नजरें गांव के ही एक दूसरे युवक से लड़ गई थीं. वह संतोष की तुलना में रईस और जवान था. इसलिए छायाबाई संतोष से दूर जाने की कोशिश करने लगी.

इस बात की जानकारी लगने पर संतोष काफी खफा था. बताया जाता है कि उस ने छायाबाई की हत्या की योजना पहले से ही बना रखी थी. इसलिए उस ने पानी का एक अंडरग्राउंड टैंक बनाने के नाम पर एक कमरे में गहरा गड्ढा खुदवा लिया था. जिस के बाद उस ने 24 दिसंबर की रात को छायाबाई को अपने घर बुला कर पहले तो उस के साथ संबंध बनाए और फिर इसी दौरान मौका पा कर उस का गला दबा कर हत्या कर के शव को गड्ढे में डाल कर उस के ऊपर मिट्टी डाल दी और फरार हो गया.

उस ने सोचा था कि घर के अंदर लाश की खबर पुलिस को कभी नहीं मिल पाएगी. लेकिन एक महीने के बाद मकान से आ रही बदबू के बाद शक होने पर पुलिस ने लाश बरामद कर हत्या में सहयोग करने वाली संतोष की मां, भाई और अन्य 2 को गिरफ्तार कर लिया.

छायाबाई के लापता होने पर उस के पिता को उस की हत्या का शक हो गया था. इसलिए पिता के कहने पर पुलिस ने पहले भी एक बार संतोष के घर नए पर बने फर्श की खुदाई लाश की तलाश करने के लिए की थी. लेकिन उस समय कुछ नहीं मिला था. लेकिन बदबू आने पर जब दूसरे कमरे में खुदाई की गई तो वहां से छायाबाई का शव बरामद हुआ. गिरफ्तार किए मुख्य आरोपी संतोष के भाई ने बताया कि छायाबाई की हत्या कर लाश को गड्ढे में दबाने वाली बात संतोष ने सुबह घर आ कर बताई थी. इस के बाद वह घर से भाग गया था. संतोष के भाग जाने के बाद घर वालों ने पुलिस से बचने के लिए खुदाई वाली जगह पर फर्श बनवा दिया और घर का ताला लगा कर फरार हो गए.

पुलिस ने सभी आरोपियों से पूछताछ के बाद उन्हें कोर्ट में पेश कर जेल भेज दिया.

सुलेखा की खूनी स्क्रिप्ट : पति हुआ मौत का शिकार

उत्तर प्रदेश के फतेहपुर शहर का एक मोहल्ला है मिश्रामऊ. इसी मोहल्ले में राजेश साहू अपने परिवार के साथ रहता था. उस के परिवार में पत्नी के अलावा 2 बेटे और एक बेटी सुलेखा थी. राजेश घी का कारोबार करता था. वह फतेहपुर शहर के आसपास के गांवगांव जा कर लोगों के यहां से घी खरीदता और फतेहपुर शहर में बेचता. इस से उसे जो फायदा होता, उसी से उस के परिवार की गुजरबसर होती थी.

राजेश साहू की बेटी सुलेखा सुंदर होने के साथसाथ थोड़ी चंचल भी थी. इसलिए सयानी होने पर मोहल्ले के कई युवक उस पर डोरे डालने की कोशिश करने लगे. यह भनक राजेश को लगी तो उसे चिंता होने लगी. तब उस ने बेटी के लिए वर की तलाश शुरू कर दी. थोड़ी भागदौड़ के बाद उसे सदर कोतवाली के मोहल्ला बक्सपुर राधा नगर में एक लड़का मिल गया.

लड़के का नाम राजू प्रसाद साहू था. उस के पिता भगवानदीन साहू के पास 5 बीघा उपजाऊ भूमि थी. भगवानदीन के 2 बेटे रामबाबू तथा राजू प्रसाद थे. रामबाबू का विवाह हो चुका था. वह परिवार सहित अलग रहता था. राजू पिता के साथ खेतीकिसानी करता था.

बातचीत शुरू हुई तो राजू और सुलेखा का रिश्ता पक्का हो गया. फिर जल्द ही दोनों की शादी हो गई.

राजू सुंदर पत्नी पा कर खुश था, जबकि सुलेखा अपने सांवले व दुबलेपतले पति से खुश नहीं थी. शादी से पहले उस के मन में पति की जो छवि थी, राजू उस में कहीं भी फिट नहीं बैठता था. लेकिन अब विवाह हो गया था, इसलिए मजबूरी में उस के साथ तो रहना ही था. शादी के 3 साल बाद सुलेखा एक बेटी अर्पिता की मां बन गई थी.

अर्पिता के जन्म के बाद राजू ने पत्नी की भावनाओं की उपेक्षा करनी शुरू कर दी. जबकि बेटी जनने के बाद सुलेखा का रूप और निखर आया था और वह हर रात पति का साथ चाहती थी. राजू थकाहारा शाम को लौटता और खाना खा कर सो जाता.

सुलेखा कभी पहल करती, तो राजू झल्ला उठता, ‘‘आज बहुत थक गया हूं. अभी सोने दो.’’

पति की बात सुन कर सुलेखा मायूस हो जाती. राजू की कमाई से घर का खर्चा तो किसी तरह चल जाता था. लेकिन सुलेखा अपनी हसरतें पूरी नहीं कर पाती थी.

एक तो शारीरिक इच्छाएं, दूसरी अधूरी तमन्नाएं. ऐसे में औरत बहकने लगती है. सुलेखा भी बहकने लगी थी. उस ने पति को दिल से निकाल दिया था और तमन्नाएं पूरी करने के लिए किसी नए मीत की तलाश में जुट गई थी.

इन्हीं दिनों राजू प्रसाद साहू के घर रामराज का आनाजाना शुरू हुआ. रामराज बांदा जिले के करौली गांव का रहने वाला था. रिश्ते में रामराज राजू का मौसेरा भाई था. रामराज साहू ट्रक ड्राइवर था. वह खूब पैसा कमाता था. वह स्वयं तो पीता ही था, उस ने राजू को भी शराबी बना दिया था.

सुलेखा की सुंदरता और चंचलता की वजह से रामराज का दिल उस पर आ गया था. वह जब भी सुलेखा के घर आता, मौका मिलने पर उस से हंसीमजाक करने से नहीं चूकता. सुलेखा भी उस से खुल कर हंसीमजाक करती थी. वह भी उसे मन ही मन चाहने लगी थी और अपनी तमन्नाएं पूरी करने को लालायित थी. रामराज गबरू जवान था.

एक दिन रामराज आया तो राजू प्रसाद घर में नहीं था. सुलेखा को अकेली पा कर उस के दिल की धड़कनें बढ़ गईं. वैसा ही कुछ हाल सुलेखा का भी था. उस ने इठलाते हुए कहा, ‘‘आओ देवरजी, कैसे आना हुआ.’’

‘‘भाभी, ट्रक ले कर प्रयागराज जा रहा था. फतेहपुर के ढाबे पर रुका, तो अचानक तुम्हारी याद आई तो मन मचल उठा. मैं ने पहले तो मन को मनाने की कोशिश की, जब मन नहीं माना तो यह सोच कर चला आया कि चल कर प्यारी भाभी के दीदार कर लूं. कभीकभी सोचता हूं कि इतनी सुंदर भाभी कालेकलूटे राजू भैया के पल्ले कैसे पड़ गई?’’

‘‘अपनाअपना नसीब है देवरजी, मेरी तकदीर में यही लिखा था.’’ सुलेखा ने लंबी सांस ले कर कहा.

सुलेखा के इस जवाब से रामराज को लगा कि उस का तीर सही निशाने पर लगा है. वह उस के एकदम करीब आ कर बोला, ‘‘नसीब अपने हाथ में होता है भाभी, मैं आप से प्यार करता हूं. मैं कोई पराया तो हूं नहीं. वैसे भी मैं न जाने कब से तुम्हारी खूबसूरती का दीवाना हूं.’’

‘‘देवरजी, यह दीवानापन छोड़ो और अब चुपचाप चले जाओ. कहीं वह आ गए तो पता नहीं क्या सोचेंगे.’’ सुलेखा ने उस की आंखों में झांकते हुए कहा.

रामराज ने उसे बांहों में भर कर कहा, ‘‘भाभी, मैं चला तो जाऊंगा, पर खाली हाथ नहीं जाऊंगा. आज तो तुम्हारा प्यार ले कर ही जाऊंगा.’’

सुलेखा को बांहों में भरते ही उस ने उस के साथ छेड़छाड़ शुरू कर दी थी. सुलेखा ने उस की इस हरकत का कोई विरोध नहीं किया. इस की वजह यह थी कि वह भी यही चाहती थी. उस ने मुसकराते हुए कहा, ‘‘भूखे भेडि़ए की तरह क्यों टूट पड़ रहे हो. थोड़ा सब्र से काम लो. दरवाजा खुला है. वैसे भी तुम जो कर रहे हो, वह ठीक नहीं है.’’

रामराज समझ गया कि सुलेखा को कोई आपत्ति नहीं है. इस का उस ने पूरा फायदा उठाया और अपने तथा सुलेखा के बीच की दूरियां मिटा दीं. इस तरह सुलेखा के कदम एक बार बहके तो बहकते ही चले गए. मौका मिलते ही रामराज सुलेखा के घर आ जाता. सुलेखा भी उस का हर तरह से सहयोग कर रही थी. इस की वजह यह थी कि वह उस के पति से हर मायने में इक्कीस था.

सुलेखा ने रामराज से अवैध रिश्ता बनाया तो वह उस की हर तमन्ना पूरी करने लगा. वह उस की आर्थिक मदद तो करता ही था, उस के लिए नई साडि़यां तथा अन्य सामान भी लाता था. राजू उस के आने पर कोई टोकाटाकी न करे, इस के लिए वह उसे मुफ्त में शराब पिलाता था.

सुलेखा और रामराज का यह अवैध संबंध चोरीछिपे सालों तक चलता रहा. आखिर कब तक उन का यह गलत संबंध छिपा रहता. वे समय के साथ लापरवाह होते गए. परिणामस्वरूप एक दिन राजू प्रसाद ने दोनों को आपत्तिजनक स्थिति में देख लिया. फिर तो उसे समझते देर नहीं लगी कि उन के बीच यह खेल काफी दिनों से चल रहा है.

रामराज चूंकि उस का मौसेरा भाई था और उस से ज्यादा ताकतवर भी था, अत: राजू प्रसाद ने उस से सीधे टकराना उचित नहीं समझा. उस के जाने के बाद उस ने सुलेखा को आड़े हाथों लेते हुए कहा, ‘‘शर्म आनी चाहिए तुम्हें यह सब करते हुए. एक बच्ची की मां होने के बाद तुम नीचता पर उतर आई हो.’’

इस के बाद जब दोनों में तूतूमैंमैं शुरू हुई तो बात बढ़ती गई. राजू को गुस्सा आ गया तो उस ने सुलेखा की जम कर पिटाई की. लेकिन इस पिटाई के बाद भी सुलेखा ने रामराज को नहीं छोड़ा. वह रामराज की इतनी दीवानी हो चुकी थी कि जब उसे घर में उस से मिलने का मौका नहीं मिलता तो वह किसी न किसी बहाने बाहर जा कर उस से मिलन कर लेती. जब इस का पता राजू प्रसाद को चलता तो वह शराब पी कर सुलेखा और रामराज को खूब गालियां बकता.

25 मार्च, 2021 की रात राजू प्रसाद ने एक बार फिर सुलेखा और रामराज को आपत्तिजनक स्थिति में देख लिया. रामराज तो भाग गया, लेकिन सुलेखा कहां जाती. राजू ने सुलेखा को बेतहाशा पीटा और जम कर गालियां सुनाईं.

होली के एक दिन पहले यानी 27 मार्च को भी राजू ने सुलेखा को बहुत पीटा. पीटने के बाद वह घर के बाहर शराब पीने चला गया. उस के जाने के बाद सुलेखा ने अपने प्रेमी रामराज से मोबाइल फोन पर बात की और उसे दुम दबा कर भाग जाने का उलाहना दिया. उस ने यह भी बताया कि राजू ने पीटपीट कर उस की देह स्याह कर दी है. अब वह उस का जुल्म और बरदाश्त नहीं करेगी. जल्द ही कोई रास्ता निकालो. अब वह उस से तभी मिलेगी, जब रास्ते का कांटा साफ हो जाएगा.

28 मार्च, 2021 को होली थी. रामराज बाइक से दोपहर 12 बजे राजू प्रसाद के घर जा पहुंचा. उस के मन में तो नफरत थी. लेकिन उस ने दिखावे के तौर पर राजू के पैर छुए और बोला, ‘‘भैया आज होली है. गले मिलने आया हूं. अपनी गलतियों की माफी भी मांग रहा हूं. हो सके तो मुझे माफ कर दो.’’

राजू प्रसाद ने एक नजर रामराज के चेहरे पर डाली और फिर उसे गले लगा लिया. इस के बाद दोनों बातचीत करने लगे. बातचीत में उलझा कर रामराज ने उसे शराब पीने के लिए राजी कर लिया. इस बीच रामराज ने सुलेखा को इस बात की जानकारी दे दी कि आज वह चुभने वाला कांटा निकाल फेंकेगा. इस के बाद रामराज ने राजू को अपनी बाइक पर बिठाया और निकल गया.

दूसरे दिन सुलेखा रोते हुए जेठ रामबाबू के घर पहुंची और उसे बताया कि राजू कल दोपहर से घर से गायब हैं, पता नहीं कहां चले गए. रात भर वह उन के लौटने का इंतजार करती रही. उन का पता लगाओ. उस का जी घबरा रहा है.

रामबाबू ने सुलेखा को शक की नजर से देखा, लेकिन उस ने आश्वासन दिया कि वह राजू को ढूंढेगा. इस के बाद रामबाबू ने राजू प्रसाद की खोज शराब के ठेकों, बस अड्डा व टैंपो स्टैंड पर की, पर उस का कुछ पता नहीं चला. नातेदारों के यहां भी वह नहीं गया था.

30 मार्च की सुबह 10 बजे रामबाबू को पता चला कि थरियांव थाने के हंसवा गांव के पास स्थित पीएनसी प्लांट के पीछे झाडि़यों में किसी युवक की लाश पड़ी है. यह पता चलते ही रामबाबू वहां पहुंचा. उस ने लाश देखी तो वह फफक पड़ा.

उस समय मौके पर थरियांव थानाप्रभारी नंद लाल, एसपी सतपाल, एडिशनल एसपी राजेश कुमार तथा डीएसपी अनिल कुमार मौजूद थे. पुलिस अधिकारी घटनास्थल का बारीकी से निरीक्षण कर रहे थे. रामबाबू ने सुबकते हुए बताया कि लाश उस के छोटे भाई राजू प्रसाद साहू की है. वह होली वाले दिन से गायब था.

शव की शिनाख्त होने के बाद पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम हेतु फतेहपुर भिजवा दिया. इस के बाद एसपी सतपाल ने हत्या का परदाफाश करने तथा कातिलों को पकड़ने की जिम्मेदारी एएसपी राजेश कुमार को सौंपी. उन्होंने तब पुलिस टीम का गठन किया. इस टीम में इंसपेक्टर नंदलाल, एसआई उपदेश कुमार, ललित कुमार, महिला सिपाही प्रियंका, सरोज तथा सर्विलांस प्रभारी सुनील कुमार को शामिल किया गया.

पुलिस टीम ने मृतक के भाई रामबाबू से पूछताछ की तो उस ने बताया कि उस के भाई राजू प्रसाद की हत्या उस के मौसेरे भाई रामराज ने की है. वह बांदा जनपद के मर्का थाने के करौली गांव का रहने वाला है. हत्या में मृतक भाई की पत्नी सुलेखा का भी हाथ है. रामराज और सुलेखा के बीच नाजायज रिश्ता बन गया था. इस रिश्ते का विरोध राजू करता था.

यह जानकारी मिलते ही पुलिस टीम ने रामराज के मोबाइल फोन को सर्विलांस पर लगा दिया, जिस से उस की लोकेशन मलाका कस्बे की मिली. जांच से पता चला कि मलाका में रामराज का दोस्त नीरज पासवान रहता है. लोकेशन मिलते ही पुलिस टीम ने 2 अप्रैल, 2021 की सुबह करीब 5 बजे नीरज पासवान के घर छापा मारा और रामराज तथा नीरज को गिरफ्तार कर लिया.

इस के बाद टीम ने सुबह 10 बजे सुलेखा को भी उस के घर से गिरफ्तार कर लिया. तीनों को थाना थरियांव लाया गया. पूछताछ में तीनों ने राजू की हत्या का जुर्म कबूल किया. यही नहीं, रामराज ने हत्या में प्रयुक्त मोटरसाइकिल तथा खून सना पत्थर भी बरामद करा दिया.

रामराज ने पुलिस को बताया कि उस के और सुलेखा के बीच नाजायज रिश्ता था, जिस का विरोध राजू प्रसाद करता था और सुलेखा को मारतापीटता था. होली के एक दिन पहले भी राजू प्रसाद ने सुलेखा को जम कर पीटा था, जिस की शिकायत उस ने मोबाइल फोन पर की थी और बाधक बन रहे पति को मिटाने की बात कही थी.

इसी के बाद उस ने राजू प्रसाद की हत्या की योजना बनाई और अपनी योजना में दोस्त नीरज पासवान को भी शामिल कर लिया. नीरज फतेहपुर जनपद के गाजीपुर थाने के मलाका का रहने वाला था.

योजना के तहत वह होली वाले दिन बाइक से राजू प्रसाद के घर पहुंचा और उसे शराब पिलाने का लालच दे कर अपने दोस्त नीरज पासवान के घर मलाका लाया. यहां पर उन्होंने शराब पी और खाना खाया. मलाका में शराब पीने के बाद वह, नीरज और राजू प्रसाद मोटरसाइकिल से घूमने निकले.

वह बाइक से हुसैनगंज, छिविलहा, हथगाम होते हुए पीएनसी प्लांट पहुंचे. प्लांट के पीछे बैठ कर उस ने राजू प्रसाद को फिर शराब पिलाई. इस के बाद राजू प्रसाद जब नशे में अर्धबेहोश हो गया तो उस ने नीरज की मदद से पत्थर से सिर कूंच कर राजू प्रसाद की हत्या कर दी और वापस मलाका आ गए, जहां से पुलिस ने उन दोनों को गिरफ्तार कर लिया.

थानाप्रभारी नंदलाल ने बयान दर्ज करने के बाद मृतक के भाई रामबाबू की तहरीर पर भादंवि की धारा 302/201 के तहत सुलेखा, रामराज व नीरज के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कर ली तथा उन्हें गिरफ्तार कर लिया.

3 अप्रैल, 2021 को थाना थरियांव पुलिस ने अभियुक्त रामराज, नीरज व सुलेखा को फतेहपुर की कोर्ट में पेश किया, जहां से उन तीनों को जिला जेल भेज दिया गया.

—कथा पुलिस सूत्रों पर आधारित

चरित्र की कच्ची कंचन : अवैध सम्बन्ध ने बनाया कातिल

रामकुमार की जानकारी में अपनी पत्नी कंचन की कुछ ऐसी बातें आई थीं, जिस के बाद कंचन उस के लिए अविश्वसनीय हो गई थी. बताने वाले ने रामकुमार को यह तक कह दिया, ‘‘कैसे पति हो तुम, घर वाली पर तुम्हारा जरा भी अकुंश नहीं. इधर तुम काम पर निकले, उधर कंचन सजधज कर घर से निकल जाती है. दिन भर अपने यार के साथ ऐश करती है और शाम को तुम्हारे आने से पहले घर पहुंच जाती है.’’

रामकुमार कंचन पर अगाध भरोसा करता था. पति अगर पत्नी पर भरोसा न करे तो किस पर करे. यही कारण था कि रामकुमार को उस व्यक्ति की बात पर विश्वास नहीं हुआ. वह बोला, ‘‘हमारी तुम्हारी कोई नाराजगी या आपसी रंजिश नहीं है, मैं ने कभी तुम्हारा बुरा नहीं किया. इस के बावजूद तुम मेरी पत्नी को किसलिए बदनाम कर रहे हो, मैं नहीं जानता. हां, इतना जरूर जानता हूं कि कंचन मेकअपबाज नहीं है. शाम को जब मैं घर पहुंचता हूं तो वह सजीधजी कतई नहीं मिलती.’’

‘‘कंचन जैसी औरतें पति की आंखों में धूल झोंकने का हुनर बहुत अच्छी तरह जानती हैं.’’ उस व्यक्ति ने बताया, ‘‘तुम्हें शक न हो, इसलिए वह मेकअप धो कर घर के कपड़े पहन लेती होगी.’’

रामकुमार को तब भी उस व्यक्ति की बातों पर विश्वास नहीं हुआ. वह उस का करीबी था, इसलिए उस ने उसे थोड़ा डांट दिया.

रामकुमार ने उस शख्स को डांट जरूर दिया था, लेकिन उस के मन में यह भी खयाल आया कि कोई इतनी बड़ी बात कह रहा है तो वह हवा में तो कह नहीं रहा होगा. उस ने खुद देखा होगा या उस के पास कोई ठोस सबूत या गवाह होगा. वैसे भी धुंआ वहीं उठता है, जहां आग लगी होती है. लिहाजा वह बेचैन हो गया. उस ने सोचा कि अपनी तसल्ली के लिए वह इस बारे में कंचन से बात जरूर करेगा.

घर पहुंचतेपहुंचते रामकुमार ने कंचन से उक्त संदर्भ में बात करने का इरादा बदल दिया. इस के पीछे कारण यह था कि कोई भी औरत अपनी बदचलनी स्वीकार नहीं करती तो कंचन कैसे कर लेगी. इसीलिए उस ने स्वयं मामले की असलियत का पता लगाने का फैसला कर लिया.

पत्नी के चरित्र को ले कर रामकुमार तनाव में था. उस का वह तनाव चेहरे और आंखों से साफ झलक रहा था. एक दिन कंचन ने उस से पूछा भी, लेकिन रामकुमार ने टाल दिया, बोला, ‘‘मन ठीक नहीं है.’’

‘‘तुम्हारी दवा घर में रखी तो है, पी लो. जी भी ठीक हो जाएगा और चैन की नींद भी सो जाओगे.’’ वह बोली.

तनाव की अधिकता से रामकुमार का सिर फट रहा था. सिर हलका करने और चैन से सोने के लिए उसे स्वयं भी शराब की तलब महसूस हो रही थी. इसलिए वह कंचन से बोला, ‘‘ले आओ.’’

कंचन ने शराब की बोतल, पानी, नमकीन और एक गिलास ला कर पति के सामने रख दिया. रामकुमार ने एक बड़ा पैग बना कर हलक में उड़ेला और सोचने लगा कि कल उसे क्या करना चाहिए.

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उत्तर प्रदेश के जनपद जौनपुर के गांव गोहानी में रहता था शंभू सिंह. शंभू सिंह के परिवार में पत्नी पार्वती के अलावा एक बेटा कुलदीप और एक बेटी कंचन थी. कुलदीप पंजाब में रह कर काम करता था. उस की पत्नी गांव में रहती थी.

शंभू सिंह खेतिहर मजदूर था. कमाई कम थी, इसलिए घरपरिवार में किसी न किसी चीज का सदैव अभाव बना रहता था. सुंदर व चुलबुली कंचन मामूली चीजों तक को तरसती रहती थी.

पिता की कमाई कम थी और खर्च अधिक, इसलिए निजी जरूरतें और शौक पूरा करने के लिए कंचन को घर से वांछित रुपए मिल नहीं  सकते थे. इसीलिए वह कभी कोई चीज खाने को तरसती, कभी किसी को अच्छे कपड़े पहने देख ललचाती तो कभी सोचती कि सजनेसंवरने का सामान कैसे खरीदे.

किशोर उम्र की लड़कियों की मानसिकता समझने और उन से लाभ उठाने वालों की दुनिया में कोई कमी नहीं है. गोहानी गांव में भी कुछ ऐसे ठरकी थे. उन्होंने कंचन का लालच समझा तो वह उसे रिझाने लगे. खिलानेपिलाने या कुछ सामान दिलाने के नाम पर वह कंचन के साथ अश्लील हरकत करते.

कुछ समय में ही कंचन समझ गई कि कोई यूं मेहरबान नहीं होता. जो पैसा खर्च करता है, उस के एवज में कुछ चाहता भी है. वह अपनी जरूरतें पूरी करने के लिए लोगों की इच्छाएं पूरी करने लगी. परिणाम यह हुआ कि कंचन कुछ ही दिनों में पूरे गांव में बदनाम हो गई.

बात पिता शंभू सिंह और मां पार्वती तक पहुंची तो उन्होंने अपना सिर पीट लिया कि बेटी है या आफत की परकाला. छोटी सी उम्र में इतने बड़े गुल खिला रही है. दोनों ने कंचन को खूब मारापीटा, मगर कंचन ने अपनी राह नहीं बदली.

शंभू सिंह और पार्वती जब सारी कोशिश कर के हार गए तब उन्होंने सोचा कि कंचन की जल्द शादी कर के उसे ससुराल भेज दिया जाए, तभी थोड़ीबहुत इज्जत बची रह सकती है.

इस फैसले के बादशंभू सिंह ने कंचन के लिए वर की तलाश शुरू कर दी. जल्द ही एक अच्छा रिश्ता मिल गया. प्रतापगढ़ जनपद के गांव धर्मपुर निवासी राजेश पटेल से कंचन का रिश्ता तय हो गया. 12 वर्ष पूर्व कंचन का विवाह राजेश पटेल से हो गया.

कंचन को अपनी जरूरतों को पूरा करने के लिए अब किसी और की जरूरत नहीं थी. पति राजेश उस की हर जरूरत पूरी करता था. कालांतर में कंचन ने 2 बेटियों को जन्म दिया.

धीरेधीरे कंचन और राजेश में मतभेद रहने लगे, जिस वजह से उन के बीच वादविवाद होता था. यह वादविवाद कभीकभी विकराल रूप धारण कर लेता था. कंचन को अब अपनी ससुराल काटने को दौड़ती थी. उस का वहां मन नहीं लगता था.

इसी बीच कंचन की मुलाकात रामकुमार दुबे से हो गई. रामकुमार दुबे कन्नौज के गुरसहायगंज का रहने वाला था. 10 सालों से वह हरदोई जिले में रहने वाली अपनी बहन मिथलेश की ससुराल में रहता था. काम की तलाश में वह प्रतापगढ़ आ गया. यहीं पर उसे कंचन मिल गई.

पहली मुलाकात हुई तो उन के बीच बातें हुईं. दोनों की यह मुलाकात काफी अच्छी रही. दोनों ने एकदूसरे को अपना नंबर दे दिया. इस के बाद तो उन की मुलाकातों का सिलसिला चल निकला. फोन पर भी बातें होने लगीं. कुछ ही दिनों में दोनों इतने करीब आ गए कि शादी कर के साथ रहने की सोचने लगे.

दोनों ने साथ रहने का फैसला लिया तो कंचन अपनी ससुराल छोड़ कर उस के पास आ गई. रामकुमार ने साथ रहने के लिए कंचन के कहने पर पहले ही जौनपुर के भुईधरा गांव में जमीन ले कर 2 कमरों का मकान बनवा लिया था. दोनों शादी कर के यहीं रहने लगे. यह 8 साल पहले की बात है. 4 साल पहले कंचन ने एक बेटे को जन्म दिया.

लेकिन अभावों ने कंचन का यहां भी पीछा न छोड़ा. रामकुमार की भी कमाई अधिक नहीं थी. घर का खर्च बड़ी मुश्किल से चलता था. कंचन की मुश्किलें बढ़ने लगीं तो उस ने इधरउधर देखना शुरू कर दिया. उसे ऐसे व्यक्ति की तलाश थी जो उस की जरूरतों पर पैसा खर्च कर सके. इस खेल की तो वह पुरानी खिलाड़ी थी.

उस की तलाश रामाश्रय पटेल पर जा कर खत्म हुई. रामाश्रय जौनपुर के मुगरा बादशाहपुर थाना क्षेत्र के बेरमाव गांव का निवासी था. बेरमाव पंवारा थाना क्षेत्र की सीमा से सटा गांव था. रामाश्रय दिल्ली में रह कर किसी फैक्ट्री में काम करता था. कुछ दिनों बाद वह घर आता रहता था. रामाश्रय विवाहित था और उस के 3 बच्चे भी थे. लेकिन उस की अपनी पत्नी से नहीं बनती थी.

रामाश्रय भुईधरा गांव आता रहता था. इसी आनेजाने में उस की मुलाकात कंचन से हो गई थी. कंचन जान गई थी कि रामाश्रय आर्थिक रूप से काफी मजबूत है. कंचन और रामाश्रय की मुलाकातें होने लगीं. इन मुलाकातों में कंचन ने रामाश्रय के बारे में काफी कुछ जान लिया.

वह यह भी जान गई कि रामाश्रय की अपनी पत्नी से नहीं बनती. यह जान कर वह काफी खुश हुई, उस का काम आसान जो हो गया था. पत्नी से परेशान मर्द को बहला कर अपने पहलू में लाना आसान होता है, यह कंचन बखूबी जानती थी.

कंचन ने अब रामाश्रय को अपने लटकेझटके दिखाने शुरू कर दिए. रामाश्रय भी कंचन के नजदीक आ कर उसे पाने की चाहत रखता था. कंचन के लटकेझटके देख कर वह भी समझ गया कि मछली खुद शिकार होने को आतुर है. वह भी कंचन पर अपना प्रभाव जमाने के लिए खुल कर उस पर अपना पैसा लुटाने लगा.

कंचन की रामाश्रय से नजदीकी क्या हुई, कंचन के अंदर की अभिलाषा जाग गई. कंचन ने अपनी कामकलाओं का ऐसा जादू बिखेरा कि रामाश्रय सौसौ जान से उस पर न्यौछावर हो गया.

रामकुमार के काम पर जाते ही कंचन सजधज कर घर से निकल जाती और रामाश्रय के साथ घूमती और मटरगश्ती करती. रामाश्रय पर कंचन के रूप का जबरदस्त नशा चढ़ा हुआ था. रामकुमार के घर आने से पहले कंचन घर आ जाती थी. घर आने के बाद अपना मेकअप धो कर साफ कर लेती. घर के कपड़े पहन कर घर का काम करने लगती.

कंचन समझती थी कि किसी को उस की रंगरलियों की खबर नहीं है. जबकि वास्तविकता सब जान रहे थे.

एक दिन किसी शुभचिंतक ने रामकुमार को उस की पत्नी की रंगरलियों की दास्तान बयां कर दी.

रामकुमार ने इस बाबत कंचन से कोई सवाल नहीं किया. बल्कि उस ने अपने सारे पैग पीतेपीते सोच लिया कि हकीकत का पता करने के लिए उसे क्या करना है.

दूसरे दिन रामकुमार काम पर जाने के लिए घर से तो निकला, पर गया नहीं. कुछ दूरी पर एक जगह छिप कर बैठ गया. उस की नजर घर की ओर से आने वाले रास्ते पर जमी थी.

मुश्किल से आधा घंटा बीता होगा कि कंचन आती दिखाई दी. अच्छे कपड़े, आंखों में काजल, होठों पर लिपस्टिक, कलाइयों में खनकती चूडि़यां उस की खूबसूरती बढ़ा रही थी.

कंचन जैसे ही नजदीक आई. रामकुमार एकदम से छिपे हुए स्थान से निकल कर उस के सामने आ खड़ा हुआ. पति को अचानक सामने देख कर कंचन भौचक्की रह गई. वह रामकुमार से पूछना चाहती थी कि वह यहां कैसे, काम पर गए नहीं या लौट आए. मगर मानो वह गूंगी हो गई. चाह कर भी आवाज उस के गले से नहीं निकली.

रामकुमार ने कंचन की आंखों में देख कर भौंहें उचकाईं, ‘‘छमिया बन कर कहां चलीं… यार से मिलने? अपना मुंह काला करने और मेरी इज्जत की धज्जियां उड़ाने.’’

कंचन घबराई, लेकिन जल्दी ही खुद को संभालते हुए बोली, ‘‘नहाधो कर घर से निकलना भी अब जुल्म हो गया. दुखी हो गई हूं मैं तुम से.’’

‘‘घर चल, तब मैं बताता हूं कि कौन किस से दुखी है.’’

दोनों घर आए तो उन के बीच जम कर झगड़ा हुआ. कंचन अपनी गलती मानने को तैयार नहीं थी. उस का कहना था कि वह रामाश्रय से मिलने नहीं, अपनी सहेली से मिलने जा रही थी.

रामकुमार ने कंचन पर अंकुश लगाने का हरसंभव प्रयास किया, मगर वह नाकाम रहा.

14 मई को गांव रामपुर हरगिर के पास शारदा नहर के किनारे लोगों ने एक लाश देखी. देखते ही देखते वहां काफी संख्या में लोग जमा हो गए. लाश को ले कर लोग तरहतरह की चर्चाएं करने लगे. इसी बीच रामपुर हरगिर गांव के अजय कुमार नाम के व्यक्ति ने संबंधित थाना पंवारा को लाश मिलने की सूचना दे दी.

सूचना पा कर थानाप्रभारी सेतांशु शेखर पंकज अपनी टीम के साथ घटनास्थल की ओर रवाना हो गए. वहां पहुंच कर उन्होंने लाश का निरीक्षण किया. मृतक की उम्र लगभग 35-36 वर्ष रही होगी. मृतक के शरीर की खाल पानी में रहने से गल गई थी. लाश देखने में 2-3 दिन पुरानी लग रही थी. मृतक के दाएं हाथ पर रामकुमार पटेल और कंचन गुदा हुआ था.

थानाप्रभारी सेतांशु शेखर ने लाश के कई कोणों से फोटो खींचने के साथ नाम का जो टैटू था, उस की भी फोटो खींच ली. घटनास्थल का निरीक्षण किया गया तो पास से चाकू, रस्सी और कपड़े बरामद हुए.

वहां मौजूद लोगों से लाश की शिनाख्त कराने की कोशिश की गई, लेकिन कोई भी लाश को नहीं पहचान सका. थानाप्रभारी सेतांशु शेखर ने लाश पोस्टमार्टम हेतु भेज दी. फिर अजय कुमार को साथ ले कर थाने आ गए.

अजय कुमार की लिखित तहरीर पर थानाप्रभारी ने अज्ञात के खिलाफ भादंवि की धारा 302 के तहत थाने में मुकदमा दर्ज करा दिया. थाने के सिपाहियों को लाश पर मिले टैटू की फोटो दे कर अपने थाना क्षेत्र और आसपास के थाना क्षेत्र में भेजा, जिस से मृतक के बारे में कोई जानकारी मिल सके. उन का यह प्रयास सफल भी हुआ.

गोहानी गांव में टैटू देख कर लोगों ने पहचाना कि कंचन तो उसी गांव की बेटी है, रामकुमार उस का पति है. वह टैटू देख कर यह लगा कि वह लाश रामकुमार की थी.

जानकारी मिली तो थानाप्रभारी सेतांशु शेखर गोहानी गांव पहुंच गए. रामकुमार की ससुराल गोहानी में थी. वहां रामकुमार की पत्नी कंचन मौजूद थी. उस के साथ में रामाश्रय था. रामाश्रय का पता पूछा तो उस का गांव बेरमाव था जोकि घटनास्थल से काफी करीब था.

रामकुमार की हत्या होना, उस समय उस की पत्नी कंचन का मायके में होना और उस के साथ जो व्यक्ति रामाश्रय मिला उस के गांव के नजदीक रामकुमार की लाश मिलना, यह सब इत्तिफाक नहीं था. सुनियोजित साजिश के तहत घटना को अंजाम देने की ओर इशारा कर रहा था.

इस बात को थानाप्रभारी बखूबी समझ गए थे. इसलिए उन्होंने शक के आधार पर पूछताछ हेतु दोनों को हिरासत में ले लिया और थाने वापस आ गए.

थाने ला कर उन दोनों से पहले अलगअलग फिर आमनेसामने बैठा कर कड़ाई से पूछताछ की गई तो वे दोनों टूट गए और हत्या के पीछे की वजह बयान कर दी.

कंचन और रामाश्रय दोनों के संबंधों को ले कर हर रोज घर में रामकुमार झगड़ा करने लगा. वह उन के मिलने में अड़चनें पैदा करने लगा तो कंचन ने रामाश्रय से रामकुमार को हमेशा के लिए अपने रास्ते से हटाने के लिए कह दिया. यह घटना से करीब एक हफ्ते पहले की बात है. दोनों ने पूरी योजना बना ली.

योजनानुसार कंचन अपने मायके गोहानी चली गई. 11/12 मई की रात रामाश्रय रामकुमार के पास गया. उस से कंचन से संबंध खत्म करने की बात कही. फिर एक नई शुरुआत करने के बहाने उसे अपने साथ ले गया. रामकुमार को उस ने जम कर शराब पिलाई. देर रात एक बजे रामाश्रय रामकुमार को रामपुर हरगिर गांव के पास ले गया. उस समय रामकुमार नशे में धुत था.

रामाश्रय ने साथ लाए चाकू से गला काट कर रामकुमार की हत्या कर दी. उस के बाद उस के हाथपैर रस्सी और कपड़े से बांध कर लाश नहर में डाल दी लेकिन लाश नदी में स्थित बिजली के आरसीसी के बने खंभों में फंस कर रह गई. नदी के बहाव में वह नहीं बह सकी. रामाश्रय यह नहीं देख पाया.

वह तो चाकू वहीं फेंक कर घर चला गया. अगले दिन वह कंचन के पास उस के मायके पहुंच गया. वहां वह कंचन के साथ पुलिस के हत्थे चढ़ गया.

मुकदमे में भादंवि की धारा 201/120बी/34 और जोड़ दी गईं. कानूनी लिखापढ़ी करने के बाद दोनों को न्यायालय में पेश किया, जहां से उन्हें जेल भेज दिया गया.

—कथा पुलिस सूत्रों पर आधारित

पति और कातिल, दोनों में से कौन बड़ा हैवान – भाग 3

मौसी ने पूछा तो उस ने शराब के नशे में बताया कि उस से एक बड़ा गुनाह हो गया है. उस ने किसी औरत को मार दिया है. मौसी ने पुलिस को बताया कि यह सुन कर वह बहुत डर गई थी, इसलिए उस ने रामवीर से कह दिया कि वह तुरंत यहां से चला जाए. क्योंकि वह किसी पचड़े में नहीं पड़ना चाहती.

रामवीर तक पहुंचने के लिए उस की मौसी अंतिम सिरा थी, जहां से उस के मिलने की उम्मीद थी, लेकिन इस के बाद पुलिस को उस की कोई खबर नहीं मिली.

रामवीर तक पहुंचने का कोई रास्ता नहीं बचा था, लिहाजा एसीपी अंकिता शर्मा ने क्राइम ब्रांच की साइबर टीम को जांच के काम में साथ जोड़ कर रामवीर के मोबाइल को ट्रैक करने के काम पर लगा दिया.

रामवीर के मोबाइल की ट्रैकिंग के दौरान पुलिस को पता चला कि रामवीर लगातार सोनी के पति संदीप के साथ बातचीत कर उस के साथ संपर्क में बना हुआ था. पुलिस ने जब संदीप से पूछा कि क्या रामवीर साहू ने उस के साथ संपर्क किया है तो वह साफ मुकर गया कि रामवीर ने उस के साथ कोई संपर्क किया है.

पुलिस टीम समझ गई कि दाल में कुछ काला है जिस कारण संदीप सफेद झूठ बोल रहा है. पुलिस ने संदीप को बिना कुछ बताए उस के और रामवीर के मोबाइल की मौनिटरिंग और उस पर नजर रखनी शुरू कर दी.

7 फरवरी, 2022 को दोपहर में मोबाइल ट्रैकिंग से पता चला कि वे दोनों महामाया फ्लाईओवर के नीचे आपस में मिलने वाले हैं. इस सूचना के बाद थानाप्रभारी बी.एस. राठी ने अपनी टीम के साथ सादा कपड़ों में आसपास छिप कर निगरानी शुरू कर दी.

दोपहर करीब 3 बजे रामवीर साहू पहचान छिपाने के लिए सिर पर कपड़े का साफा बांध कर संदीप से मिलने पहुंचा तो पुलिस ने उन दोनों को हिरासत में ले लिया.

पुलिस की टीम दोनों को ले कर थाने पहुंची और उन से पूछताछ हुई तो मामूली पूछताछ के बाद ही सोनी यादव की हत्या का खुलासा हो गया.

दरअसल, संदीप ने बताया कि उसी ने अपनी पत्नी सोनी की हत्या रामवीर साहू के द्वारा पैसा दे कर करवाई थी.

संदीप की जब सोनी से शादी हुई तब दोनों की जिंदगी बेहद खुशहाल थी और संदीप सोनी को प्यार भी बहुत करता था. लेकिन एक दिन सोनी जब बाथरूम में नहा रही थी तो संदीप ने वैसे ही उस का मोबाइल चैक कर लिया.

उस दिन संदीप यह देख कर हैरान रह गया कि उस की बीवी सोनी उसे धोखा दे रही थी. शादी से पहले से ही उस के अपने गांव के अजय से संबंध थे. संदीप ने सोनी की सच्चाई उस पर उजागर नहीं होने दी, लेकिन इस दिन के बाद से वह सोनी से छुटकारा पाने की तरकीब सोचने लगा.

सोनी से छुटकारा पाने की सोच के पीछे एक दूसरी वजह यह भी थी कि अपनी ससुराल कासगंज में आतेजाते संदीप अपनी सब से छोटी साली रानी, जो सभी बहनों में सब से ज्यादा सुंदर थी, को पसंद करने लगा था.

सोनी से छुटकारा पाने की एक वजह यह भी थी कि डेढ़ साल होने को आया लेकिन अभी तक सोनी के मां बनने की कोई गुंजाइश नहीं बनी तो संदीप ने डाक्टरों को दिखाया तो उन्होंने बताया कि सोनी के मां बनने की संभावना बहुत कम है.

संदीप के पास सोनी से छुटकारा पाने की 3 वजह हो गई थीं. अब वह किसी भी हालत में सोनी से छुटकारा पा कर अपनी साली से शादी करने का फैसला कर चुका था.

संदीप ने फैसला किया कि अगर सही योजना बना कर सोनी की हत्या करवा दी जाए तो रानी से शादी का रास्ता साफ हो सकता है.

इस काम को कैसे अंजाम दिया जाए, यह बात सोच ही रहा था कि 19 जनवरी को अचानक उस की कालोनी में रहने वाला रामवीर जो उस का दोस्त भी बन चुका था, शाम को हमेशा की तरह दारू पीने के बाद उस के पास कचौरी खाने आया.

काम खत्म करने की तैयारी कर रहे संदीप से अचानक रामवीर ने अपनी आर्थिक तंगी का रोना रोते हुए कह दिया कि जिंदगी में पैसा बहुत बड़ी चीज है. इस को हासिल करने के लिए किसी का खून भी करना पड़े तो कर देना चाहिए.

रामवीर के मुंह से यह बात सुनते ही संदीप के दिमाग की बत्ती जलने लगी, उसे लगा कि अगर बात बढ़ाई जाए तो रामवीर उस का काम कर सकता है.

‘‘तो भाई कर दे तू भी खून. कमा ले पैसा.’’ संदीप ने अपनी तरफ से रामवीर को परखने के लिए पत्ता फेंका.

‘‘अरे भाई ऐसे ही किसी का खून कैसे कर दूं. कोई काम बताए, माल दे तभी तो करूं ये काम भी.’’

‘‘अगर मैं कोई काम बताऊं तो करेगा?’’ संदीप ने लोहा गरम होते देख तुरंत पूछ लिया.

‘‘तुझे किस का काम कराना है और तू पैसा कहां से देगा,’’ रामवीर की पुतलियां भी सोच में सिकुड़ गईं.

‘‘वो छोड़, तुझे तेरे काम का पैसा मिलेगा. पहले ये बता काम करेगा,’’ संदीप ने पूछा.

‘‘हां भाई, माल देगा तो काम क्यों नहीं करूंगा.’’ रामवीर ने उत्साहित होते हुए कहा.

‘‘तो ठीक है, मेरी बीवी को मार दे, पूरे 70 हजार रुपए दूंगा.’’

‘‘अबे पागल हो गया है क्या तू, जो अपनी बीवी को मरवाना चाहता है?’’ रामवीर ने फटी आंखों से पूछा.

‘‘वजह एक नहीं कई हैं भाई. एक तो कमीनी का शादी के पहले से ही गांव में किसी यार से चक्कर चल रहा है. दूसरा वह मां नहीं बन सकती और तीसरा मुझे उस की छोटी बहन बहुत पसंद है. इस का काम तमाम हो जाए तो मैं उस से शादी कर लूंगा.’’ संदीप ने इस दिन अपने मन की बात रामवीर को बताई तो उस ने कहा कि अभी शराब बहुत पी ली है. वह काम करेगा या नहीं, इस बारे में सोच कर कल बताएगा.

मामला बनता देख संदीप ने चलते समय रामवीर को 3 हजार रुपए दे दिए. रामवीर फिर से शराब के ठेके पर गया और फिर शराब पी और रात को घर चला गया. रामवीर ने सुबह शराब का नशा उतर जाने पर संदीप की कही बातों पर विचार किया तो काफी सोचविचार कर दोपहर एक बजे फिर से महामाया फ्लाईओवर के नीचे संदीप के ठिकाने पर पहुंच गया.

संदीप ने उस से पूछा, ‘‘क्या इरादा किया भाई?’’

‘‘इरादा तो ठीक है भाई, लेकिन तूने अपनी बीवी के मौत की कीमत बहुत कम लगाई है.’’

‘‘क्यों, तुझे कितना चाहिए?’’ संदीप ने पूछा.

‘‘देख, तू अपना दोस्त है तेरी परेशानी भी जायज है. लेकिन भी अगर कम से कम डेढ़ लाख खर्च करे तो काम किया जा सकता है.’’

थोड़ी देर तक संदीप और रामवीर के बीच कत्ल करने के लिए दी जाने वाली रकम को ले कर सौदेबाजी होती रही.

जब संदीप ने देखा कि रामवीर इस से कम पैसा लेने के लिए टस से मस नहीं हो रहा तो उस ने कहा, ‘‘ठीक है भाई, तुझे इतने ही पैसे मिलेंगे लेकिन काम बड़ी सफाई से होना चाहिए. काम होते ही सुबह पैसे दे दूंगा.’’ कहते हुए संदीप ने जेब से 2 हजार रुपए और निकाले और रामवीर की तरफ बढ़ाते हुए कहा, ‘‘हो सके तो आज ही काम कर दे. शाम तक कालोनी में वैसे भी सन्नाटा रहेगा, मैं यहां हूं और सोनी घर में अकेली है. बस, जा कर ठिकाने लगा दे.’’

सारी बात तय हो गई तो डेढ़ लाख में सोनी को मारने की बात कह कर रामवीर वहां से निकल गया. उस ने उसी समय अपना मोबाइल भी बंद कर दिया. क्योंकि उस ने टीवी सीरियलों में देखा था कि मोबाइल की लोकेशन से पुलिस कातिल को खोज लेती है.

सब से पहले वह निकट के शराब ठेके पर पहुंचा. जम कर शराब पी. उस के बाद करीब 4 बजे संदीप के घर पहुंच कर दरवाजा खटखटाया.

उस वक्त पूरी कालोनी में सन्नाटा पसरा हुआ था. सोनी ने अंदर से ही पूछा, ‘‘कौन है?’’ तो उस ने बता दिया, ‘‘भाभीजी, मैं हूं साहू. संदीप ने आप को देने के लिए पैसे भेजे हैं.’’ रामवीर ने बात ही ऐसी की थी कि सोनी ने दरवाजा खोल दिया. वैसे भी वह साहू को जानती थी.

लेकिन जैसे ही सोनी ने दरवाजा खोला रामवीर ने उस के चेहरे पर एक जोरदार घूंसा मारा. सोनी की नाक पर घूंसा लगते ही उस की आंखों के सामने अंधेरा छा गया. वह चीखते हुए कमरे के बीचोंबीच फर्श पर गिर पड़ी.

इतना मौका काफी था रामवीर के लिए. वह झट से कमरे में घुसा और दरवाजा भीतर से बंद कर जमीन पर पड़ी सोनी की तरफ पलटा. लेकिन कुछ पलों के लिए अचेत हुई सोनी पर निगाह पड़ते ही शराब के नशे में धुत रामवीर की आंखों में वासना के डोरे तैरने लगे.

दरअसल, चेहरे पर वार होने से संतुलन खो कर गिरने वाली सोनी के कपड़े इस कदर अस्तव्यस्त हो गए कि जांघों तक दिख रही सोनी की नग्न गोरी देह को देख कर रामवीर के शरीर के रोंगटे खड़े हो गए.

उस ने सोचा कि सोनी को मारना तो है ही, क्यों न उस से पहले वह अपनी वासना की आग बुझा ले. यही सोच कर उस ने उस के साथ जमीन पर ही शारीरिक संबंध बनाने शुरू कर दिए.

लेकिन अपनी उत्तेजना के अतिरेक में वह कुछ करता, उस से पहले ही सोनी की चेतना लौट आई और वह शोर मचाने को कोशिश करते हुए विरोध करने लगी.

एक तो शराब का नशा, ऊपर से वासना का जुनून, सोनी रामवीर के लंबेचौड़े शरीर के नीचे दबी पड़ी थी. उस को शांत करने के लिए रामवीर ने सोनी के सिर को दोनों कनपटी से पकड़ कर 3-4 बार फर्श पर पटक दिया. सोनी कुछ पल छटपटाई, फिर उस का शरीर शांत हो गया.

लेकिन सोनी के शांत होते ही रामवीर के भीतर वासना का उफान आ गया. इस बात से अनजान कि सोनी की मौत हो चुकी है, रामवीर उस के जिस्म से खेलते हुए अपनी कामवासना शांत करता रहा.

जब वासना का भूत उतरा तो देखा कि अचेत पड़ी सोनी के सिर से काफी खून बह चुका था और वह मर चुकी थी. उस ने सोनी की साड़ी को घुटनों से नीचे कर दिया. कई बार उस के शव को हिला कर देखा कि उस में जान तो नहीं बाकी है.

करीब 5 बजे रामवीर ने घर का दरवाजा खोल कर देखा कि बाहर कोई है तो नहीं और उस के बाद रास्ता साफ देख कर वह कमरे का दरवाजा बंद कर के वहां से फरार हो गया. वारदात को अंजाम देने के बाद वह इतना सहम गया कि संदीप से भी संपर्क नहीं किया.

रामवीर ने 2 दिन तक अपना मोबाइल फोन भी औन नहीं किया. जब संदीप को बाद में पुलिस ने यह बात बताई कि उस के कातिल ने मौत के बाद इस के साथ संबंध बनाए थे तो उस को रामवीर पर बहुत गुस्सा आया.

कुछ दिन बाद गिरफ्तारी के डर से इधरउधर भागते फिर रहे रामवीर ने जब पैसे मांगने के लिए संदीप से फोन पर बात करते हुए संपर्क करना शुरू किया, तभी पुलिस को मोबाइल सर्विलांस के जरिए संदीप पर भी शक होना शुरू हो गया.

इस मामले में न तो मोबाइल फोन की काल डिटेल्स से कोई मदद मिली. क्योंकि कातिल और साजिश रचने वाले के बीच कोई फोन संपर्क रिकौर्ड ही नहीं था. न ही रामवीर अपने फोन को औन कर के घटनास्थल पर गया था. न ही घटना का कोई चश्मदीद था, न ही रामवीर को घटनास्थल पर जाते किसी सीसीटीवी ने कैद किया था. इसलिए पुलिस अंधेरे में हाथपांव मार रही थी.

लेकिन अपने डर के कारण अगर रामवीर अपना घर छोड़ कर गायब नहीं होता और बाद में वह फोन पर संदीप से संपर्क नहीं करता तो शायद पुलिस कभी सोनी के हत्यारों तक पहुंच ही नहीं पाती.

अपनी साली को पाने की चाहत में संदीप ने अपनी बेवफा बीवी को मरवाने की साजिश रच कर जो घिनौना अपराध किया वो तो गलत था ही, लेकिन रामवीर ने सोनी की हत्या कर उस के मृत शरीर से वासना की जो भूख शांत की, वह हैवानियत की सभी सीमाओं से परे थी.

संदीप और रामवीर से पूछताछ के बाद पुलिस ने हत्या के इस मामले में साजिश की धारा 120बी जोड़ कर दोनों आरोपियों को अदालत में पेश कर दिया, जहां से उन्हें न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया.

—कथा पुलिस की जांच व आरोपियों से पूछताछ पर आधारित

लव ट्रायंगल की लाइफ : पति का किया किनारा – भाग 3

एक दिन उस ने पुलिस में शिकायत दर्ज करवाने की सोची. फिर बीवी और अपनी बदनामी के डर से चुप रहा. उसे विश्वास था कि सुधा को उस का प्रेम एक न एक दिन खींच लाएगा.

इसी उधेड़बुन में चौथे दिन उसे सागर के भोपाल में ही नए ठिकाने का पता चल गया. वह तुरंत उस के किराए के मकान में गया. सागर मिल गया. सुधा और बच्चे को देखने की इच्छा जताई. उस वक्त सुधा और बच्चे घर में नहीं थे. शायद उन्हें सागर ने कहीं और छिपा रखा था.

सागर ने उस से मिलवाने से साफसाफ इनकार कर दिया. उस ने सख्ती से कहा, अब सुधा उस की बीवी बनने वाली है. शादी से पहले उस का परिचय और मुलाकात किसी से नहीं करवाएगा.

सागर की इस सख्ती वाले तेवर से अक्षय सहम गया. वह नरमी के साथ सागर से विनती करने लगा. उस के सामने गिड़गिड़ाया. हाथ जोड़े. यहां तक कि उस के पैर तक छू कर सुधा और बच्चे को मिलवाने के लिए कहा. फिर भी उसे उस की स्थिति पर तरस नहीं आया.

अक्षय निराशहताश अपने टीटी नगर स्थित कमरे पर लौट आया. करीब 2 हफ्ते बीतने को आए. सागर ड्यूटी पर नहीं आता था. उस ने समझ लिया कि सागर जरूर सुधा के साथ शादी करने के लिए गांव चला गया होगा.

इस बीच सागर के नए ठिकाने पर भी गया. वहां ताला लगा था. अक्षय अब बेहद टूट चुका था. शरीर से भी काफी कमजोर हो गया था.

उस दिन गुरुवार का दिन था. तारीख 21 अक्तूबर 2021 थी. अक्षय का सुबह से ही किसी भी काम में मन नहीं लग रहा था. उस के मन में बहुत कुछ उलटपलट हो रहा था. विचारों का ऐसा घालमेल हो गया था कि जबरदस्त भूख होने के बावजूद कुछ भी खाने की इच्छा नहीं हो रही थी.

सुधा की बेवफाई और उस के द्वारा शादी के समय लिए साथसाथ जीने के कसमेवादे को ध्यान कर वह बेहद तिलमिला गया था. उस रोज वह ड्यूटी पर भी नहीं गया था. सुधा और बच्चे के बारे में सोचतेसोचते उस की कब आंखें लग गईं, पता ही नहीं चला.

शाम को करीब 8 बजे जब उस की नींद खुली, तब उस ने खुद को बेहद कमजोर महसूस किया. किसी तरह से फिर अपने लिए सुबह की पकाई खिचड़ी खा ली, जो कुकर में सुबह से ही बंद थी. सुबह उस ने खिचड़ी पकाई जरूर थी, लेकिन वह ज्यों की त्यों पड़ी थी.

सुबह टीटी नगर की पुलिस को अक्षय के फांसी पर झूलने की सूचना मिली, जो उस के पड़ोसी ने दी थी. पड़ोस के ही एक बच्चे ने खिड़की से अक्षय को फांसी पर झूलते तब देखा था, जब वह बाजार जा रहा था.

दरअसल, अक्षय ने उसे कह रखा था कि वह जब भी सुबह में दूध लाने बाजार जाए, तब उस के लिए भी दूध लाने के लिए मिल ले. इस कारण वह लड़का सुबह अक्षय के घर आया था. कुछ समय तक पीटने पर भी दरवाजा नहीं खुला, तब उस ने खिड़की के पास जा कर आवाज लगाई.

उस का भी कोई जवाब नहीं मिलने पर उस ने भिड़े हुए खिड़की के दरवाजे को धकेल दिया था. तभी उस की नजर फांसी पर लटके अक्षय पर गई थी और भाग कर इस की जानकारी उस ने अपने पिता को दी. उस के पिता ने तुरंत पुलिस को इस की सूचना दे दी.

पुलिस टीम घटनास्थल पर आ गई. उस ने देखा कि अक्षय ने साड़ी का फंदा बना कर फांसी लगा ली थी. तुरंत उस के घर वालों को भी इस की जानकारी दी गई. उस की मां कुसुम बाई और उस के भाई निलेश पड़ोसियों की मदद से उसे जेपी अस्पताल ले कर गए. लेकिन डाक्टर ने अक्षय को मृत घोषित कर दिया.

अक्षय की मौत की खबर तेजी से फैल गई. लोकल चैनल पर उस की मौत की खबर प्रसारित होने लगी. उस के जरिए सुधा और सागर को भी अक्षय के आत्महत्या की जानकारी मिल गई. सुधा भाग कर अक्षय के घर जा पहुंची. घर पर कोई नहीं था. आसपास सन्नाटा पसरा था. सभी अक्षय की लाश को ले कर अस्पताल जा चुके थे.

सुधा विचलित हो गई थी. उस ने फटाफट पास खड़ी मोटरसाइकिल से पैट्रोल निकाला और कमरे में जा कर खुद पर उड़ेल लिया. तुरंत उस ने खुद को आग लगा दी. इसी बीच बच्चा ‘मम्मीमम्मी’ पुकारता कमरे में आया और उसे पकड़ना चाहा, लेकिन बच्चा डर कर भाग गया.

आग के तेजी से फैले धुएं को देख कर पासपड़ोस के लोग आए. उन्होंने किसी तरह से आग बुझाई, लेकिन तब तक वह काफी जल चुकी थी. उसे भी जिला अस्पताल ले जाया गया, जहां इलाज के दौरान उस की मौत हो गई.

अक्षय की मौत को ले कर उस के भाई निलेश ने पुलिस से सागर पर मुकदमा चलाने के लिए कहा. उस का कहना था कि सागर ने अक्षय को धोखा दिया था.

उस ने उस की पत्नी सुधा को प्रेम जाल में फंसाया. और फिर सुधा अक्षय को छोड़ कर उसी दोस्त के साथ उस के घर पर रहने लगी. साथ में बेटे को भी ले गई. इस बात से अक्षय बहुत दुखी था.

पुलिस को अक्षय के पास से सुसाइड नोट बरामद हुआ है. इस सुसाइड नोट में उस ने लिखा है कि पत्नीबच्चे से मिलाने के लिए सागर के पैर तक छुए, लेकिन उस ने पत्नीबेटे से मिलने नहीं दिया. सागर ने मेरा जीवन तबाह कर दिया. मैं पत्नी और सागर की वजह से जान दे रहा हूं.

पुलिस ने सागर को गिरफ्तार कर कोर्ट में पेश करने के बाद जेल भेज दिया. सुधा के बहके कदमों ने उसी के हंसतेखेलते परिवार को उजाड़ दिया.

पराई मोहब्बत में दी जान : धोकेबाज प्रेमी – भाग 3

‘‘क्या तुम प्यार की जगह अपने तन का सौदा करना चाहती हो?’’ दलबीर ने पूछा.

‘‘जब प्यार की जगह स्वार्थ पनप गया हो तो समझ लो कि मैं भी तन का सौदा करना चाहती हूं. अब तुम मेरे शरीर से तभी खेल पाओगे, जब एक लाख रुपया मेरे हाथ में थमाओगे.’’

‘‘यदि रुपयों का इंतजाम न हो पाया तो..?’’ दलबीर ने पूछा.

‘‘…तो मुझे भूल जाना.’’

दलबीर को सपने में भी उम्मीद न थी कि सरिता तन के सौदे की बात करेगी. उसे उम्मीद थी कि वह उस से माफी मांग कर तथा कुछ आर्थिक मदद कर उसे मना लेगा. पर ऐसा नहीं हुआ बल्कि सरिता ने उस से बड़ी रकम की मांग कर दी.

इस के बाद सरिता और दलबीर में दूरियां और बढ़ गईं. जब कभी दोनों का आमनासामना होता और दलबीर सरिता को मनाने की कोशिश करता तो वह एक ही जवाब देती, ‘‘मुझे तन के बदले धन चाहिए.’’

13 जनवरी, 2021 की सुबह 5 बजे दलबीर सिंह ने सरिता को फोन कर के अपने प्लौट में बनी झोपड़ी में बुलाया. सरिता को लगा कि शायद दलबीर ने रुपयों का इंतजाम कर लिया है. सो वह वहां जा पहुंच गई.

सरिता के वहां पहुंचते ही दलबीर उस के शरीर से छेड़छाड़ तथा प्रणय निवेदन करने लगा. सरिता ने छेड़छाड़ का विरोध किया और कहा कि वह तभी राजी होगी, जब उस के हाथ पर एक लाख रुपया होगा.

सरिता के इनकार पर दलबीर सिंह जबरदस्ती करने लगा. सरिता ने तब गुस्से में उस की नाक पर घूंसा जड़ दिया. नाक पर घूंसा पड़ते ही दलबीर तिलमिला उठा. उस ने पास पड़ी ईंट उठाई और सरिता के सिर पर दे मारी.

सरिता का सिर फट गया और खून की धार बह निकली. इस के बाद उस ने उस के सिर पर ईंट से कई प्रहार किए. कुछ देर छटपटाने के बाद सरिता ने दम तोड़ दिया. सरिता की हत्या के बाद दलबीर सिंह फरार हो गया.

इधर कुछ देर बाद सरिता की देवरानी आरती किसी काम से प्लौट पर गई तो वहां उस ने झोपड़ी में सरिता की खून से सनी लाश देखी. वह वहां से चीखती हुई घर आई और जानकारी अपने पति मुकुंद तथा जेठ अरविंद को दी.

दोनों भाई प्लौट पर पहुंचे और सरिता का शव देख कर अवाक रह गए. इस के बाद तो पूरे गांव में सनसनी फैल गई और मौके पर भीड़ जुटने लगी.

इसी बीच परिवार के किसी सदस्य ने थाना फफूंद पुलिस को सरिता की हत्या की सूचना दे दी. सूचना पाते ही थानाप्रभारी राजेश कुमार सिंह पुलिस फोर्स के साथ लालपुर गांव की ओर रवाना हो लिए. रवाना होने से पहले उन्होंने पुलिस अधिकारियों को भी सूचित कर दिया था. कुछ देर बाद ही एसपी अपर्णा गौतम, एएसपी कमलेश कुमार दीक्षित तथा सीओ (अजीतमल) कमलेश नारायण पांडेय भी लालपुर गांव पहुंच गए.

पुलिस अधिकारियों ने मौके पर फोरैंसिक टीम को भी बुलवा लिया. पुलिस अधिकारियों ने घटनास्थल का बारीकी से निरीक्षण किया तथा मृतका सरिता के पति अरविंद दोहरे तथा अन्य लोगों से पूछताछ की. फोरैंसिक टीम ने भी जांच कर साक्ष्य जुटाए तथा फिंगरप्रिंट लिए.

एसपी अपर्णा गौतम ने जब मृतका के पति अरविंद दोहरे से हत्या के संबंध में पूछताछ की तो उस ने बताया कि उस की पत्नी सरिता के दलबीर सिंह से नाजायज संबंध थे, जिस का वह विरोध करता था. इसी नाजायज रिश्तों की वजह से सरिता की हत्या उस के प्रेमी दलबीर सिंह ने की है. दलबीर और सरिता के बीच किसी बात को ले कर मनमुटाव चल रहा था.

अवैध रिश्तों में हुई हत्या का पता चलते ही एसपी अपर्णा गौतम ने थानाप्रभारी राजेश कुमार सिंह को आदेश दिया कि वह आरोपी के विरुद्ध मुकदमा दर्ज कर उसे गिरफ्तार करें.

आदेश पाते ही राजेश कुमार सिंह ने मृतका के पति अरविंद दोहरे की तहरीर पर भादंवि की धारा 302 तथा (3) (2) अ, एससी/एसटी ऐक्ट के तहत दलबीर सिंह के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया तथा उस की तलाश में जुट गए.  15 जनवरी, 2021 की शाम चैकिंग के दौरान थानाप्रभारी राजेश कुमार सिंह को मुखबिर से सूचना मिली कि हत्यारोपी दलबीर सिंह आरटीओ औफिस की नई बिल्डिंग के अंदर मौजूद है.

मुखबिर की सूचना पर थानाप्रभारी ने आरटीओ औफिस की नई बिल्डिंग से दलबीर सिंह को गिरफ्तार कर लिया. उस की निशानदेही पर पुलिस ने हत्या में प्रयुक्त खून सनी ईंट तथा खून सने कपड़े बरामद कर लिए.

दलबीर सिंह ने बताया कि सरिता से उस का नाजायज रिश्ता था. सरिता उस से एक लाख रुपए मांग रही थी. इसी विवाद में उस ने सरिता की हत्या कर दी.

राजेश कुमार सिंह ने सरिता की हत्या का खुलासा करने तथा आरोपी दलबीर सिंह को गिरफ्तार करने की जानकारी एसपी अपर्णा गौतम को दी, तो उन्होंने पुलिस लाइन सभागार में प्रैसवार्ता की और आरोपी दलबीर सिंह को मीडिया के समक्ष पेश कर हत्या का खुलासा किया.

16 जनवरी, 2021 को पुलिस ने अभियुक्त दलबीर सिंह को औरैया कोर्ट में पेश किया, जहां से उसे जिला जेल भेज दिया गया.

—कथा पुलिस सूत्रों पर आधारित

मृतक पहुंचा सलाखों के पीछे – भाग 3

यह आइडिया आते ही सुदेश ने दिमाग लगाना शुरू कर दिया कि वह खुद को इसी तरह जेल जाने से बचा सकता है. सुदेश ने जब अपनी पत्नी को दिल की बात बताई तो थोड़ी नानुकुर के बाद अनुपमा को भी यह बात पसंद आ गई. वैसे भी कौन पत्नी नहीं चाहेगी कि उस का पति जेल जाने से बच जाए.

काफी विचारविमर्श के बाद सुदेश व अनुपमा ने इस काम के लिए एक मजदूर का इंतजाम करने के लिए अपनी छत को ठीक कराने का बहाना बनाया. इस के लिए सुदेश 18 नवंबर, 2021 को लेबर चौक गया और अपनी कदकाठी के एक मजदूर, जिस का नाम दोमन रविदास था और वह बिहार के गया जिले के अतरी का रहने वाला था, को ले आया.

18 नवंबर को सुदेश ने पहले दिन अपनी छत की स्लैब डलवाई. मजदूर रविदास के कपडे़ काफी पुराने व फटी हालत में थे लिहाजा सुदेश ने उसे अपना ट्रैकसूट पहनने के लिए दे दिया जिस की जर्सी कौफी कलर की थी और लोअर नीले रंग का था.

अगले दिन भी काम होना था, इसलिए सुदेश ने रविदास को अगले दिन फिर आने के लिए कहा.

19 नवंबर को दोमन रविदास उसी के कपड़े पहन कर फिर काम पर आया. शाम होतेहोते जब काम खत्म हो गया तो शाम को दारू पार्टी के बहाने रोक लिया. दोनों ने शराब पीनी शुरू कर दी. इस दौरान सुदेश खुद कम शराब पीता रहा जबकि उस ने रविदास को बड़ेबड़े पैग पिलाने शुरू कर दिए.

रात करीब 9 बजे रविदास को खूब नशा हो गया. इस दौरान सुदेश और उस अनुपमा ने पहले ही तय कर लिया था कि उन्हें क्या करना है. इस दौरान उन्होंने चारपाई के पाये से रविदास के सिर पर ताबड़तोड़ वार कर हत्या कर दी.

यह बात बेटे सुनील को पता नहीं चले इसलिए उस ने सुनील को अपनी परचून की दुकान पर बैठने के लिए भेज दिया था.

सुदेश ने पहले ही तय कर लिया था कि वे रविदास की हत्या कर उसे सुदेश के रूप में अपनी पहचान देगा. इसीलिए एक दिन पहले उस ने अपना ट्रैकसूट रविदास को पहनने के लिए दिया था. खुद को वह दुनिया की निगाहों में मुर्दा करार दे सके, इस के लिए भी उस ने पूरी प्लानिंग कर ली थी.

सुदेश व अनुपमा को जब इत्मीनान हो गया कि रविदास की मौत हो चुकी है तो कमरे को पानी से साफ कर उस के शव को पहले एक पन्नी में लपेटा. उस के बाद उसे बोरी में भर दिया.

रात को करीब 11 बजे जब इलाके में सन्नाटा पसर गया और उस का बेटा भी सो गया तो सुदेश बोरे में भरे रविदास के शव को साइकिल पर रख कर लोनी बौर्डर थाना क्षेत्र की इंद्रापुरी कालोनी में खाली प्लौट में ले गया.

वहां शव को बोरी से निकाल कर उस के चेहरे और शरीर के ऊपरी हिस्से पर अखबार के कागज व टाट की बोरी रख कर जला दिया ताकि शव की पहचान न हो सके.

शव की पहचान सुदेश के रूप में कराने के लिए उस ने अपना आधार कार्ड रविदास की जेब में रख दिया था. पहले से तय योजना के मुताबिक सुदेश अपने घर गया और पत्नी को आ कर बताया कि जब पुलिस उस से रविदास के शव की शिनाख्त कराए तो वह उस की पहचान कर ले.

सुदेश की पूरी प्लानिंग थी कि वह रविदास को सुदेश साबित कर दे, इसलिए पत्नी के साथ बनी योजना के तहत वह इस के बाद चोरीछिपे देर रात में ही घर आता और इस के अलावा इधरउधर छिप कर अपना वक्त बिताता था.

10 दिसंबर को सुदेश ने अपनी पत्नी को फोन कर के कहा कि वह रात को घर आएगा घर की लाइट जला कर रखना. यदि सब कुछ ठीक हो तो गेट पर सफेद कपड़ा डाल देना. यह बात पुलिस ने सर्विलांस के दौरान सुन ली और पुलिस पहले से आरोपी की तलाश में उस के घर पहुंच गई और लाइट जला कर गेट पर सफेद कपड़ा डाल दिया.

सुदेश के पहुंचते ही पुलिस ने आरोपी व उस की पत्नी को दबोच लिया.

पूछताछ में सुदेश ने बताया कि जेल और सजा से बचने के लिए उस ने खौफनाक घटना को अंजाम दिया था. जेल जाने से बचने के लिए उस ने अपनी पत्नी के साथ मिल कर यह साजिश रची थी. लेकिन उस ने पहली भूल यह कर दी कि काफी प्रयास के बाद भी अपने ही कदकाठी के मजदूर को नहीं तलाश सका था.

सुदेश और अनुपमा की साजिश यह थी कि इस साजिश के पूरा होने पर वे दिल्ली छोड़ कर चले जाएंगे, लेकिन आखिरकार उस के बिना जले आधार कार्ड, सीसीटीवी कैमरे की तसवीरों और दूसरे सबूतों ने उस की खौफनाक साजिश का खुलासा कर दिया.

इस दौरान पुलिस ने करावल नगर थाने और मंडोली जेल से रिकौर्ड निकलवा कर पता कर लिया था कि सुदेश की हाइट 5 फुट 6 इंच है जबकि इंद्रापुरी इलाके में जो शव मिला था, उस की हाइट 5 फुट 3 इंच थी यानी 3 इंच कम.

इसी के बाद पुलिस ने सुदेश के घर की निगरानी शुरू की. उस की पत्नी के फोन को सर्विलांस पर लगाया और वह पुलिस की गिरफ्त में आ गया.

पुलिस ने सुदेश के साथ उस की पत्नी को भी डोमन रविदास की हत्या के आरोप में गिरफ्तार कर हत्या में प्रयुक्त चारपाई का पाया व शव को ठिकाने लगाने वाली साइकिल बरामद कर ली.

सुदेश व अनुपमा की गिरफ्तारी के बाद मुकदमे में भादंवि की धारा 201, 419, 420 व 120बी जोड़ कर उन्हें अदालत में पेश कर दिया, जहां से दोनों को जेल भेज दिया गया.

दूसरी तरफ लोनी बौर्डर पुलिस ने मृतक मजूदर डोमन रविदास की करावल नगर थाने में दर्ज गुमशुदगी को अपने यहां ट्रांसफर करवा ली. रविदास के साथियों के साथ जा कर रविदास के बेटे ने थाना करावल नगर दिल्ली में जा कर घटना के 3 दिन बाद गुमशुदगी दर्ज कराई थी.

—कथा पुलिस की जांच और आरोपियों तथा पीडि़त परिवार से बातचीत पर आधारित