कातिल हसीना : लांघी रिश्तों की सीमा – भाग 1

उस दिन फरवरी 2020 की 7 तारीख थी. सुबह के 8 बजे थे. घना कोहरा छाया हुआ था, जिस से सूरज अपनी चमक नहीं बिखेर पा रहा था. उत्तर प्रदेश के श्रावस्ती जिले के तेंदुआ बरांव गांव का रहने वाला सुंदर सिंह अपने खेतों की ओर जा रहा था.

जब वह प्राथमिक विद्यालय के पूर्वी छोर पर अपने खेतों के पास पहुंचा तो वहां एक युवक की लाश देख कर वह ठिठक गया. फिर वह उल्टे पैर गांव की ओर दौड़ पड़ा. गांव पहुंच कर उस ने लाश पड़ी होने की जानकारी गांव वालों को दी. उस के बाद तो गांव में कोहराम मच गया. कुछ ही देर में लाश के पास ग्रामीणों की भीड़ जुट गई.

लाश पड़ी होने की खबर जब इसी गांव के रहने वाले वकील सिंह को लगी तो उस का माथा ठनका. क्योंकि उस का भाई कंधई सिंह बीती रात से घर से गायब था. पूरा परिवार रात भर उस की तलाश में जुटा रहा, परंतु उस का कुछ पता नहीं चल पाया था. अत: वह बदहवास हालत में घटना स्थल पर पहुंचा.

शव औंधे मुंह पड़ा था. उस ने जैसे ही शव को पलटा वैसे ही उस की चीख निकल पड़ी. क्योंकि वह शव उस के भाई कंधई सिंह का ही था. किसी ने बड़ी बेहरमी से की थी. इस के बाद बड़ी उस के परिवार में कोहराम मच गया. मृतक की मां कमला देवी और पत्नी राधा भी मौके पर आ गईं और शव से लिपट कर दोनों रोने लगीं.

इसी दौरान किसी ने फोन कर के शव मिलने की सूचना थाना मल्हीपुर में दे दी. हत्या की खबर पाते ही थानाप्रभारी देवेंद्र पांडेय पुलिस टीम के साथ ले तेंदुआ बरांव गांव की तरफ चल दिए. इस बीच उन्होंने यह सूचना अपने वरिष्ठ अधिकारियों को भी दे दी थी.

जब पुलिस घटनास्थल पर पहुंची तब तक वहां ग्रामीणों की भीड़ जुट गई थी. थानाप्रभारी देवेंद्र पांडेय घटनास्थल का बारीकी से निरीक्षण करने में जुट गए. कंधई सिंह के सिर पर किसी भारी चीज से प्रहार कर के उसे मौत के घाट उतारा था. चेहरे पर भी प्रहार कर उस की पहचान मिलाने की कोशिश की गई थी.

सिर व चेहरे पर गहरी चोट के निशान थे. कपड़े, खून से तरबतर थे. जमीन पर भी खून फैला था, जिसे मिट्टी ने सोख लिया था. हत्यारे ने मृतक के गुप्तांग को भी कुचला था. उसे देख कर ऐसा लग रहा था कि हत्या अवैध रिश्तों के चलते की गई है. मृतक की उम्र यही कोई 30 वर्ष के आसपास थी और वह शरीर से हृष्टपुष्ट था.

थानाप्रभारी देवेंद्र पांडेय अभी घटनास्थल का निरीक्षण कर ही रहे थे कि सूचना पा कर एसपी अनूप कुमार सिंह, एएसपी वी.सी. दूबे तथा सीओ हौसला प्रसाद घटनास्थल पर पहुंच गए. पुलिस अधिकारियों ने मौके पर फोरैंसिक टीम को भी बुलवा लिया. पुलिस अधिकारियों ने जहां घटनास्थल का बारीकी से निरीक्षण किया, वहीं फोरैंसिक टीम ने भी वहां से साक्ष्य जुटाए. घटनास्थल पर एक टूटा हुआ मोबाइल भी पड़ा मिला था जिसे थानाप्रभारी ने जाब्ते की काररवाई में शामिल कर लिया.

पुलिस अधिकारियों ने मृतक की पत्नी राधा को सांत्वना देने के बाद उस से पूछताछ की. राधा ने बताया कि बीती रात 8 बजे उस ने पति के साथ खाना खाया. उस के बाद वह बरतन साफ करने लगी, तभी पति के मोबाइल फोन पर किसी का फोन आया. नंबर देख कर वह घर के बाहर निकले और बात करने के बाद वापस आए. फिर बोले कि जरूरी काम से जा रहे हैं, कुछ देर में आ जाएंगे, पर वह वापस नहीं आए.

खोजने पर नहीं मिला

तब रात 11 बजे राधा ने अपनी सास कमला को जगा कर यह जानकारी दी. कमला ने भी कंधई का फोन मिलाया, लेकिन उस का मोबाइल बंद था. उस के बाद घर वाले उसे रात भर खोजते रहे, पर उस का पता नहीं चला. सुबह मालूम हुआ कि किसी ने उसे मार डाला है.

‘‘तुम्हें किसी पर शक है?’’ एएसपी वी.सी. दूबे ने मृतक की मां कमला देवी से पूछा.

‘‘नहीं, साहब, हमें किसी पर शक नहीं है. हमारा न किसी से लेनदेन का झगड़ा है और न ही जमीन जायदाद का. मैं तो खुद हैरान हूं कि मेरे बेटे को किस ने और क्यों मार डाला?’’ कमला ने बताया.

परिवारजनों से पूछताछ के बाद एसपी अनूप कुमार सिंह ने हत्या का परदाफाश करने तथा कातिलों को पकड़ने के लिए एक पुलिस टीम का गठन किया. इस टीम में मल्हीपुर थानाप्रभारी देवेंद्र पांडेय, सीओ (जमुनिहा) हौसला प्रसाद, सीओ (भिनगा), जंग बहादुर सिंह, एसआई किसलय मिश्र, ए.के. सिंह (क्राइम ब्रांच) आदि को शामिल किया गया. टीम की कमान एएसपी वी.सी. दूबे को सौंपी गई.

पुलिस टीम ने सब से पहले घटनास्थल का निरीक्षण किया, फिर तेंदुआ बरांव गांव के विभिन्न वर्गों के लोगों से घटना के संबंध में पूछताछ की. इस पूछताछ से पता चला कि मृतक कंधई सिंह रंगीनमिजाज था. घर में खूबसूरत पत्नी होने के बावजूद वह बाहर ताकझांक करता था. इसी बात को ले कर कई साल पहले उस की कहासुनी गांव के ही भीखू से हुई थी. कंधई सिंह भीखू की बेटी मुनकी से छेड़छाड़ करता था. भीखू ने बेटी की शादी कर दी, इस के बाद भी कंधई सिंह ने उस का पीछा नहीं छोड़ा और उस की ससुराल आनेजाने लगा था.

पुलिस टीम को लाश के पास से जो टूटा हुआ मोबाइल मिला था, उस का सिम सहीसलामत था, पुलिस ने उस फोन नंबर की काल डिटेल्स निकलवाई. उस से पता चला कि वह फोन मृतक का ही था. काल डिटेल्स से जानकारी मिली कि 7 फरवरी की रात 8.58 बजे कंधई सिंह के मोबाइल पर आखिरी काल जिस मोबाइल नंबर से आई थी वह नंबर राजेश पुत्र धनीराम निवासी बालकरामपुरवा, मजरा रामपुर, थाना मल्हीपुर जिला श्रावस्ती का था. राजेश भीखू का दामाद था, उस समय उस की कंधई से एक मिनट बात हुई थी.

अब पुलिस को राजेश से बात करना जरूरी हो गया. लिहाजा पुलिस टीम राजेश के घर पहुंची, लेकिन उस के घर पर ताला लगा था. राजेश और उस के घर वालों के फरार होने से पुलिस का शक और पुख्ता हो गया. इस के बाद पुलिस ने राजेश के ससुर भीखू सिंह के घर पर छापा मारा. भीखू भी परिवार सहित फरार था.

उन दोनों की तलाश में पुलिस टीम ने कई संभावित ठिकानों पर छापे मारे लेकिन उन का पता नहीं चला. आखिर में पुलिस टीम ने राजेश व अन्य की टोह में अपने खास मुखबिर लगा दिए.

तीनों हुए गिरफ्तार

पुलिस ने मुखबिर की सूचना पर नासिर गंज चौराहे से भीखू, राजेश और उस की पत्नी मुनका देवी को हिरासत में ले लिया. थाने में पुलिस जब राजेश, भीखू तथा मुनकी देवी से कंधई सिंह की हत्या के संबंध में पूछताछ की तो वे तीनों एक सुर हो कर मुकर गए, लेकिन जब उन पर सख्ती बरती गई तो वह तीनों टूट गए और कंधई सिंह की हत्या का जुर्म कबूल कर लिया. पुलिस ने उन की निशानदेही पर हत्या में प्रयुक्त लोहे की रौड भी बरामद कर ली, जो राजेश ने अपने घर में छिपा दी थी.

पुलिस टीम ने कंधई सिंह की हत्या का खुलासा करने तथा कातिलों को पकड़ने की जानकारी एसपी अनूप कुमार सिंह को दी. जानकारी पाते ही वह थाना मल्हीपुर आ गए. उन्होंने अभियुक्तों से विस्तृत पूछताछ की. फिर खुलासा करने वाली पुलिस टीम की पीठ थपथपाई और 15 हजार रुपए ईनाम देने की घोषणा की.

इस के बाद उन्होंने पुलिस सभागार में प्रैस वार्ता की और हत्यारोपियों को मीडिया के समक्ष पेश कर घटना का खुलासा किया.

चूंकि उन तीनों ने हत्या का जुर्म कबूल कर लिया था और हत्या में प्रयुक्त आलाकत्ल भी बरामद करा दिया था, इसलिए थानाप्रभारी देवेंद्र पांडेय ने मृतक के भाई वकील सिंह को वादी बना कर भादंवि की धारा 302 के तहत भीखू, राजेश तथा मुनकी के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कर ली. इस के बाद उन लोगों से विस्तार से पूछताछ की गई तो एक हसीना की कातिल चाल का सनसनीखेज खुलासा हुआ.

उत्तर प्रदेश में श्रावस्ती जिले के मल्हीपुर थाने के अंतर्गत एक गांव है तेंदुआ बरांव. भीखू अपने परिवार के साथ इसी गांव में रहता था. उस के परिवार में पत्नी सोमवती के अलावा 2 बेटियां थीं, जानकी और मुनकी. भीखू मेहनतमजदूरी कर अपने परिवार का पालनपोषण करता था. बड़ी बेटी जानकी जवान हुई तो उस ने उस का विवाह कर दिया. वह अपनी ससुराल में खुशहाल थी.

जानें आगे क्या हुआ अगले भाग में…

आनंद का आनंद लोक : किरण बनी शिकार – भाग 1

जो शादीशुदा जवान घर और पत्नी से दूर रहते हैं, उन में कई ऐसे भी होते हैं, जो घरवाली को भूल बाहर वाली ढूंढने लगते हैं. कुछ इस में कामयाब भी हो जाते हैं. लेकिन कभीकभी यह गलती इतनी भारी पड़ती है कि जान के लाले पड़ जाते हैं. किरन और आनंद के मामले में भी…

ताजनगरी आगरा. आगरा ताजमहल के लिए ही प्रसिद्ध नहीं है. बस लोगों के देखने का अपनाअपना नजरिया है, क्योंकि ऐसे लोगों की कमी नहीं है जो आगरा को जूतों के लिए भी जानते हैं. बड़ी कंपनियां अपने ब्रांड के जूते यहीं बनवाती हैं. रामसिंह एक बड़ी जूता कंपनी में काम करते थे. उन का घर आगरा प्रकाश नगर पथवारी बस्ती में था. रामसिंह के परिवार में उन की पत्नी सरोज, 3 बेटियां थीं. बेटा एक ही था सागर.

2007 में राम सिंह ने बड़ी बेटी लता का विवाह फिरोजाबाद के गांव हिमायूं पुर निवासी शशि पंडित से कर दिया. एकलौता बेटा सागर जूता फैक्टरी में जूतों के लिए चमडे़ की कटिंग का काम करता था. विवाह की उम्र हो गई तो 2012 में रामसिंह ने सागर का विवाह कर दिया. विवाह के बाद उस के 2 बच्चे हुए.

2014 में सागर का बाइक से एक्सीडेंट हो गया, जिस में उस की दांई आंख में चोट लगी, जिस से उस की आंख खराब हो गई, उसे नकली आंख लगवानी पड़ी.

अपने एकलौते बेटे सागर की ऐसी हालत देख कर राम सिंह भी  बीमार पड़ गए. वह तनाव में रहने लगे. नतीजा यह निकला कि वह हारपरटेंशन के मरीज हो गए और उन्हें घर में रहने को मजबूर होना पड़ा.

दूसरी ओर सागर ठीक हो कर काम पर जाने लगा. लेकिन बड़े परिवार में अकेले उस की आय से क्या होता. घर के खर्चे, किरन की पढ़ाई का खर्च, पिता की दवाई का खर्च अलग, ऐसे में वह धीरेधीरे कर्ज में डूबने लगा. इसी बीच राम सिंह की मृत्यु हो गई.

राम सिंह की मौत के बाद एक समय वह भी आया जब सागर को अपना घर बेचने की सोचनी पड़ी. सागर ने मकान बेच कर कर्जे चुकाए. 8 माह किराए पर रहने के बाद उस ने अपने पहले मकान के पास ही मकान ले लिया. उस मकान में 2 ही कमरे थे. जगह की कमी की वजह से सागर ने देवनगर नगला छउआ में किराए का एक और कमरा ले लिया. वहां वह अपनी पत्नी व बच्चों के साथ रहने लगा.

सागर की मां सरोज घरों में झाड़ूपोछे का काम कर के घर का खर्च चलाने लगी.

सागर की बहन किरन ने जीजान से पढ़ाई की. बीए करने के बाद उस ने बीएड भी कर लिया.

आनंद उर्फ अतुल किरन की बड़ी बहन लता की ससुराल के पास रहता था. 35 वर्षीय अतुल न केवल शादीशुदा था बल्कि उस के 3 बच्चे भी थे. बीएससी पास आनंद खुराफाती दिमाग का था. उस ने फिरोजाबाद में फाइनेंस कंपनी खोली और लोगों को लालच दे कर खूब लूटा. जब लोग उसे तलाशने लगे तो वह आगरा भाग आया था.

आनंद ने लता के पति शशि से कहा कि उसे कहीं नौकरी पर लगवा दे. शशि उसे अच्छी तरह जानता था कि वह किस तरह का इंसान है, फिर भी उस की मदद की.

शशि ने उसे आगरा के एक डाक्टर के यहां नौकरी पर लगवा दिया. इस के बाद आनंद ने बदलबदल कर 2-3 जगह और नौकरी की. फिर वह थाना जगदीशपुरा के गढ़ी भदौरिया स्थित ‘खुशी नेत्रालय’ में बतौर कंपाउंडर काम करने लगा. नेत्रालय में बने कमरे में ही वह रहता भी था.

आनंद की तलाश में घर में घुस  आनंद ने शशि पंडित की ससुराल यानी किरन के घर आनाजाना शुरू कर दिया. वहां वह किरन से मिलने आता था.

सांवले रंग की किरन आकर्षक नयननक्श वाली नवयुवती थी. सांचे में ढला उस का बदन किसी मूर्तिकार के हाथों का अद्भुत नमूना जान पड़ता था.

25 वर्षीय किरन पूरी तरह जवान हो गई थी. उस का पूरा यौवन खिल कर महकने लगा था. उस के ख्यालों में भी सपनों का राजकुमार दस्तक देने लगा था.

अकेले बिस्तर पर पड़ी वह उसके ख्यालों में ही खोई रहती थी. सोचतेसोचते कभी हंसने लगती थी तो कभी लजा जाती थी. वह उम्र के उस पायदान पर खड़ी थी, जहां ऐसा होना स्वाभाविक था.

आनंद की नजर किरन पर पड़ी तो वह उस पर आसक्त हो गया. किरन के परिवार के बारे में वह सब कुछ जान गया था. ऐसे में वह किरन को अपने प्रेमजाल में फंसाने के जतन करने लगा. यह सब जानते हुए भी कि वह विवाहित है और किरन अविवाहित. आनंद ने अपने विवाहित होने की बात किरन और उस के घरवालों को नहीं बताई थी.

जब भी वह किरन के पास आता तो उस के आगे पीछे मंडराता रहता. उस की यह हरकत किरन से छिपी न रह सकी. किरन उस का विरोध नहीं कर सकी, क्योंकि कहीं न कहीं आनंद भी उसे पसंद आ गया था.

दोनों के दिलों में प्रेम की भावना जन्म ले रही थी. लेकिन दोनों ने अपनी भावनाओं को जाहिर नहीं होने दिया था. एक दिन किरन जब बाजार जाने के लिए बाहर निकली तो आनंद ने रास्ते में रोक कर उस की तरफ दोस्ती का हाथ बढ़ाया.

किरन ने उस की दोस्ती सहर्ष स्वीकार कर ली. दोनों की दोस्ती परवान चढ़ने लगी. दोनों साथ घूमते और मटरगश्ती करते. इस से दोनों में हद से ज्यादा अपनापन और घनिष्ठता आ गई.

दोनों में से अगर कोई एक न मिलता तो दूसरे को अच्छा नहीं लगता था. चेहरे से जैसे खुशी की रेखाएं ही मिट जाती थीं. दोनों की आंखें एकदूसरे को अहसास कराने लगीं कि वे एकदूसरे से प्यार करने लगे हैं. लेकिन इस अहसास के बावजूद दोनों यह दर्शाते थे जैसे उन को कुछ पता ही नहीं है. दोनों को एकदूसरे की बहुत चिंता रहती थी. अब जरूरत थी तो इस प्यार को शब्दों में पिरो कर इजहार कर देने की.

आनंद ने अपने प्यार का इजहार करने के लिए प्रेमपत्र लिखने की सोची. वह किरन के सामने कहने से बचना चाह रहा था और मोबाइल पर प्रेम की बात कहने में मजा नहीं आता. इसलिए प्रेमपत्र में वह अपने जज्बातों को शब्दों में पिरो कर किरन तक पहुंचाना चाहता था, जिस से किरन उस के लिखे एकएक शब्द में छिपे प्रेम को दिल से समझ सके.

प्रेमिका की हत्या कर सुहागरात की तैयारी

‘‘रानी, यह दूरदूर की मुलाकात में मजा नहीं आता, चल कहीं बाहर चलते हैं’’ पप्पू राव ने अपनी आवाज में शहद घोल कर फोन पर प्रेमिका रानी से कहा.

‘‘रोज ही तो मिलती हूं तुझ से, दूर कहां हूं,’’ रानी ने भी उतनी ही मोहब्बत से पप्पू से सवाल कर डाला.

‘‘नहीं, अभी तू मुझ से बहुत दूर है. अगर तू सचमुच मुझ से प्यार करती है तो मेरे से बाहर मिल. मैं तुझे बहुत सारा प्यार करना चाहता हूं. बहुत सारी बातें करना चाहता हूं.’’ पप्पू बेसब्री से बोला.

अपने प्रेमी की इतनी रोमांटिक बातें सुन कर रानी फोन पर शरमा गई. कुछ पल तो मुंह से बोल ही नहीं फूटे. पप्पू ने सोचा कि शायद वह नाराज हो गई. वह बेचैनी से बोला, ‘‘क्या तू मुझ से प्यार नहीं करती रानी? तुझे मुझ पर भरोसा नहीं है?’’

‘‘बहुत प्यार करती हूं पप्पू, पूरा भरोसा है तुझ पर. बता, कहां आना है?’’

पप्पू राव के चेहरे पर विजयी मुसकान तैर उठी. वह रानी को अपने जाल में फंसाने में कामयाब हो गया. उस की मेहनत सफल हो गई. रानी उस के साथ बाहर जाने को तैयार हो गई. अब वह अपनी सारी हसरतें पूरी करेगा.

दूसरे दिन पप्पू अपनी प्रेमिका रानी को मोटरसाइकिल पर बिठा कर शहर की तरफ उड़ा जा रहा था. शहर पहुंच कर उस ने एक सस्ते से होटल में कमरा लिया और दोनों दिन भर के लिए उस में बंद हो गए.

शुरू में रानी ने पप्पू को रोकने की बड़ी कोशिशें कीं, मगर जब पप्पू ने शादी का वादा किया और साथ जीनेमरने की कसमें खाईं तो रानी का सारा ऐतराज समर्पण में बदल गया.

होटल के कमरे में दोनों के बीच की सारी दूरियां मिट गईं. वे दो जिस्म एक जान हो गए. ऐसा एक बार नहीं, कई बार हुआ. महीनों तक हुआ.

बीते एक साल में पप्पू रानी को ले कर गांव के आसपास के कई शहरों में गया. बगहा से ले कर गोरखपुर तक. वहां कई होटलों में अपनी रातें गुलजार कीं. वह रानी को शादी के सपने दिखाता और हसरतें पूरी करता.

रानी शादी की कल्पनाओं में डूबी पप्पू के हाथों तब तक लुटती रही, जब तक उसे यह सूचना नहीं मिली कि पप्पू की शादी तो कहीं और तय हो गई है.

पप्पू मैट्रिक फेल मगर चलतापुरजा था. वैसे तो फिलहाल घर पर रह कर खेतीबाड़ी देख रहा था, मगर पाइप फिटर के काम के लिए वह ठेके पर कई बार विदेश जा चुका था.

बाहर की दुनिया उस ने खूब देखी थी, जेब में पैसा भी था, इसलिए लड़कियों के साथ धोखाधड़ी और अय्याशी उस की फितरत बन गई थी.

उधर रानी 8वीं पास गरीब परिवार की लड़की थी. रानी के घर की माली हालत अच्छी नहीं थी. उस के पिता बीमार रहते थे. घर में खाने वाले ज्यादा थे और कमाई कम. रानी के 6 भाई और एक बहन थी. इसलिए रानी आगे नहीं पढ़ पाई और स्कूल छोड़ कर घरगृहस्थी और खेती के काम में मां का हाथ बंटाने लगी.

उस के परिवार को जब उस के और पप्पू के रिश्ते के बारे में पता चला तो पहले तो मांबाप ने जातपांत, ऊंचनीच समझाई, मगर रानी को पप्पू पर इतना विश्वास था कि उस के आगे सभी हार मान गए.

इधर काफी दिनों से पप्पू रानी से नहीं मिला. वह उस का फोन भी इग्नोर कर रहा था. वाट्सऐप मैसेज का जवाब भी नहीं दे रहा था. तब रानी के दिमाग में शक पैदा हुआ.

उस ने पता लगवाया तो मालूम हुआ कि पप्पू की शादी दूसरे गांव में तय हो गई है, जहां से उसे मोटा दहेज मिल रहा है. इतना पता चलते ही रानी के तो पैरों तले से जैसे जमीन खिसक गई.

रानी पप्पू के हाथों अपना सब कुछ लुटा बैठी थी. बस उस के इसी वादे पर कि वह उस से शादी करेगा. दुलहन बना कर अपने घर ले जाएगा. मगर यह क्या, वह तो किसी और लड़की को अपनी दुलहन बनाने की फिराक में था.

रानी इतना बड़ा धोखा कैसे बरदाश्त कर सकती थी. उस ने पप्पू की बेवफाई की कहानी रोरो कर अपने घर वालों से बयां कर डाली.

रानी और पप्पू की प्रेम लीला घर वालों से छिपी तो थी नहीं, मगर जब पप्पू की करतूत उन को पता चली तो पहले तो मांबाप ने रानी को ही खूब बुराभला कहा. मगर बाद में बेटी के गम में वे भी शरीक हो गए.

रानी हार मानने वाली नहीं थी. कहते हैं कि प्यार में धोखा खाने वाली औरत चोट खाई नागिन की तरह बन जाती है. रानी का भी हाल कुछ ऐसा ही था. वह फुंफकारते हुए सीधे पप्पू के घर पर धमक पड़ी. वहां 13 फरवरी, 2022 को पप्पू की सगाई हो चुकी थी. अब उसे शादी कर के दुलहन लाने और उस के साथ सुहागरात मनाने का इंतजार था. उस का पूरा घर नातेरिश्तेदारों से भरा हुआ था. दूरदूर से रिश्तेदार आए हुए थे.

उन सब के बीच पहुंच कर रानी ने हंगामा खड़ा कर दिया. वह दनदनाती हुई घर में दाखिल हुई और एक कमरे में कब्जा कर के बैठ गई. पीछे उस के घर वाले भी थे. इस के बाद वहां पर खूब हाईवोल्टेज ड्रामा चला. दोनों पक्षों में जम कर कहासुनी हुई.

रानी ने साफ कह दिया कि पप्पू राव की बीवी सिर्फ और सिर्फ वह है. और पप्पू की शादी सिर्फ और सिर्फ उस से ही होगी. वह अब इस घर को छोड़ कर नहीं जाएगी. रानी के घर वालों ने भी उस का सपोर्ट किया. वह रानी को पप्पू के घर छोड़ कर चले गए, मगर उस से फोन पर लगातार संपर्क में रहे.

यह 15 फरवरी, 2022 की बात है. पप्पू के घर में घुसने से पहले रानी ने महिला थाने में जा कर पप्पू और उस के घरवालों के खिलाफ रिपोर्ट भी करवाई थी. पुलिस ने उसे काररवाई का आश्वासन भी दिया था.

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मामला प्यार में धोखाधड़ी का था. शादी का सपना दिखा कर एक लड़की की इज्जत लूटी गई थी. रानी को उम्मीद थी कि पप्पू के घर में उस के होने से उस की शादी टूट जाएगी, मगर ऐसा हुआ नहीं. पप्पू के घर वाले 16 फरवरी को बारात ले जाने की तैयारियों में जुटे रहे. रानी के रोनेधोने का उन पर कोई असर नहीं हुआ.

बिहार के बगहा जिले में में भैरोगंज थाना क्षेत्र  के सिरिसिया गांव में अपने बेवफा प्रेमी के घर में धरने पर बैठी रानी का फोन 16 फरवरी को रात 10 बजे अचानक बंद हो गया. उस के भाई ने बड़ी कोशिश की, मगर रानी से कोई संपर्क नहीं हो पाया.

घर वाले भागेभागे पप्पू के घर पहुंचे. मगर रानी वहां भी नहीं थी. जिस कमरे में वह धरना दे रही थी, उस कमरे के दरवाजे पर ताला लटका हुआ था. पप्पू के घर वाले ठीक से जवाब नहीं दे रहे थे. कोई कह रहा था, ‘वो चली गई. कहां गई यह हमें क्या पता.’

रानी के घर वाले पूरे गांव में उसे ढूंढते रहे. मगर उस का कुछ अतापता नहीं चला. घर वालों को उस की हत्या का शक हुआ तो उन्होंने फिर भैरोसिंह थाने में जा कर गुहार लगाई. पुलिसकर्मी तब भी उन्हें आश्वासन देते रहे कि हम काररवाई करेंगे.

कोई काररवाई न होते देख रानी के घर वालों ने बगहा के एसडीपीओ कैलाश प्रसाद से गुहार लगाई. मामला जब एसडीपीओ के कान में पड़ा तो उन्होंने भैरोगंज थाने के प्रभारी लालबाबू प्रसाद से जवाब तलब किया.

लालबाबू प्रसाद ने कहा कि मुझे घटना की कोई सूचना नहीं है. लालबाबू ने बड़े ठंडे लहजे में कहा कि 15 फरवरी को उन्हें सूचना मिली थी कि प्रेम प्रसंग को ले कर युवती द्वारा विवाद किया जा रहा है. इस मामले की जांच चल रही है.

एसडीपीओ कैलाश प्रसाद ने डांट पिलाई तो थानाप्रभारी एक्शन में आए और रानी के गायब होने के 3 दिन बाद टीम बना कर पप्पू के घर पर दबिश दी गई, जहां पप्पू शादी कर के दुलहनिया घर ले आया था और बस सुहागरात मनाने की तैयारी में था.

पुलिस पप्पू को गिरफ्तार कर के थाने ले आई. उस के साथ उस की मां और चचेरे भाई को भी गिरफ्तार किया गया. पहले तो तीनों जवाब देने में आनाकानी करते रहे, मगर जब हवालात में तीनों से सख्ती की गई तो उन की जुबान खुल गई.

आरोपियों ने बताया कि रानी को वे जबरन एक बोलेरो गाड़ी में बिठा कर सुदूर वाल्मीकि टाइगर रिजर्व के चिउटहां के जंगल में ले गए थे, जहां गला घोट कर उस की हत्या करने के बाद उस के शव को एक जगह गड्ढा खोद कर उन्होंने दफना दिया है.

पप्पू की निशानदेही पर पुलिस उस स्थान पर पहुंची, जहां रानी की लाश गाड़े जाने की बात आरोपियों ने कही थी. पुलिस ने उस जगह की खुदाई करवाई तो कुछ ही देर में तेज बदबू के साथ रानी का शव दिख गया.

गड्ढे के अंदर और शव के चारों ओर काफी मात्रा में नमक डाला गया था ताकि शव जल्दी गल जाए. इस से यह पता चला कि रानी की हत्या से पहले पूरी प्लानिंग की गई थी.

जंगल में जगह तलाशना, वहां गहरा गड्ढा खोदना, नमक की बोरियां ला कर उस में डालना आदि बताता है कि पूरे कांड को कई लोगों की मदद से अंजाम दिया गया होगा.

पूछताछ में पता चला कि रानी की हत्या में पप्पू के परिवार के उदय प्रताप राव, सुशील राव, बलदेव राव के अलावा कुछ और लोग शामिल थे. मगर पुलिस सिर्फ 3 लोगों को ही गिरफ्तार कर सकी थी.

पुलिस ने वह बोलेरो गाड़ी भी जब्त कर ली, जिसे रानी को जंगल ले जाने में इस्तेमाल किया गया था.

गांव वालों ने बताया कि शादी के झांसे में ले कर पप्पू ने इस से पहले भी 3 लड़कियों के साथ संबंध बनाए थे. जिस में से एक मामले में शिकायत भी हुई थी.

मगर उस की फितरत नहीं बदली और उस ने रानी के साथ फिर वही हरकत की. लेकिन रानी ने जब हंगामा किया और उस के घर में घुस कर बैठ गई तो वह गुस्से से भर गया. अगले दिन उस की शादी भी होनी थी. इसलिए रानी से मुक्ति पाने के लिए उस ने हमेशा के लिए उसे सुला दिया.

इस पूरे मामले में पुलिस की हीलाहवाली और महिला थाने में रिपोर्ट दर्ज होने के बाद तुरंत कोई काररवाई न होने से पीडि़त लड़की की हत्या हो गई.

अगर महिला थाने में केस दर्ज होने के तुरंत बाद पुलिस ने काररवाई की होती और आरोपियों को थाने बुला कर पूछताछ शुरू कर दी गई होती तो पप्पू और उस के घर वालों का हौसला इतना न बढ़ता कि लड़की को कार में डाल कर जंगल ले जाएं और मार कर दफना दें. जबकि रानी के घर वाले और पूरा गांव जानता था कि रानी पप्पू के घर में है.

पूरा गांव वहां हुए तमाशे का साक्षी था, बावजूद इस के गांवदेहातों में पुलिस की निष्क्रियता इतनी ज्यादा है कि किसी के मन में कानून को ले कर कोई डर नहीं है.

ऊंची जाति के लड़के नीची जाति की लड़कियों का शारीरिक शोषण करते हैं, उन्हें बरगलाते हैं, भगा ले जाते हैं और कुछ दिन के मनोरंजन के बाद छोड़ देते हैं. अधिकांश मामलों में तो शिकायत ही दर्ज नहीं होती. मगर जब कोई

लड़की हिम्मत कर के शिकायत दर्ज करवाती भी है तो पुलिस की उदासीनता के चलते उस का अंजाम यही होता है जो रानी का हुआ.

आरोपियों से पूछताछ के बाद पुलिस ने उन्हें न्यायालय में पेश किया, जहां से उन्हें जेल भेज दिया गया.

लव और सेक्स के लिए कुछ भी करेगा

कहते हैं कि अपराधी कितना भी शातिर क्यों न हो, एक न एक दिन कानून की गिरफ्त में आता जरूर है, हालांकि हत्या जैसा जघन्य अपराध जब भी कोई अपराधी करता है, तो निश्चित ही वह यही सोचता है कि उस ने जो अपराध किया है, उसे करते किसी ने देखा नहीं है, अत: वह साफ बच निकलेगा.

इस कहानी में आरोपी का अगला शिकार बनने वाली उस की दूसरी पत्नी के साहस ने उस की असलियत पुलिस के सामने ला दी. गजब के चतुर आरोपी ने इस सनसनीखेज हत्याकांड को कैसे अंजाम दिया, इस में कौनकौन शामिल रहा? उस का इरादा क्या था? इतने लंबे समय तक वह कैसे पुलिस को छकाता रहा? ऐसे तमाम सवालों के जवाब सिलसिलेवार विस्तार से जानते हैं.

इस की शुरुआत मारपीट की शिकायत से हुई. 14 मार्च, 2022 की दोपहर अनामिका नाम की एक महिला बदहवास हालत में ग्वालियर शहर के झांसी रोड थाने पहुंची. वह काफी घबराई हुई थी. थाने के गेट पर राइफल ले कर खड़े संतरी से जब उस ने थानाप्रभारी के बारे में पूछा तो संतरी ने उन के कक्ष की ओर इशारा करते हुए कहा, ‘‘साहब अंदर बैठे हैं, आप चली जाइए.’’

अनामिका तेज कदमों से सीधे थानाप्रभारी के कक्ष में दाखिल हुई. उस वक्त थानाप्रभारी अपने मातहतों के साथ किसी अहम मसले पर चर्चा कर रहे थे. अनजान महिला को अपने कक्ष में आया देख कर उन्होंने उस से पूछा, ‘‘कहिए क्या काम है?’’

घबराई हुई अनामिका ने कहा, ‘‘साहब, मुझे अपने पति राजेंद्र यादव के जुर्म के संबंध में कुछ महत्त्वपूर्ण जानकारी मय दस्तावेज और फोटो के आप को देनी है और उस के खिलाफ रिपोर्ट भी दर्ज करवानी है.’’

थानाप्रभारी ने महिला को कुरसी पर बैठने का इशारा करते हुए कहा, ‘‘आप आराम से बैठ कर पूरी बात बताइए. आखिरकार आप के साथ क्या हुआ?’’

थानाप्रभारी के कहने पर अनामिका कुरसी पर बैठ गई, लेकिन पता नहीं क्यों, उस के मुंह से आवाज नहीं निकल रही थी. उस की जुबान सूख गई थी. उस की हालत देख कर थानाप्रभारी ने उसे पानी पिलवाया तो उस ने कहा, ‘‘साहब, मेरा नाम अनामिका है.’’

तसल्ली देते हुए थानाप्रभारी ने कहा, ‘‘आप के साथ क्या और कैसे हुआ, विस्तार से बताइए. मैं आप को भरोसा दिलाता हूं कि पुलिस आप की हरसंभव मदद करेगी.’’

थानाप्रभारी के भरोसा देने पर अनामिका के अंदर थोड़ी हिम्मत आई. उस ने उन से कहा, मेरे पति राजेश मेहरा (36) द्वारा मेरे साथ मारपीट और गालीगलौज करने की शिकायत दर्ज कराने के साथ ही उस की असलियत से भी आप को अवगत कराना है.

अनामिका ने बताया कि उस के पिता ग्वालियर के बड़े ट्रांसपोर्टर हैं. उन्होंने बड़ी शानोशौकत से उस की शादी राजेश के साथ की थी.

इस के बाद अनामिका के साथ जो हुआ, उस की कहानी इस तरह सामने आई. समय अपनी गति से गुजरता रहा. शादी के कुछ दिनों बाद ही पति उसे परेशान करने लगा था. पति के व्यवहार में काफी बदलाव आ गया था, वह बातबात में उस से झगड़ा करने लगा था. यही नहीं, उस के साथ मारपीट भी करने लगा था.

अनामिका पति के बदले व्यवहार से काफी खफा रहती थी. उस की समझ में नहीं आ रहा था कि वह क्या करे. अनामिका जब भी कभी उस के बदले व्यवहार की शिकायत करती तो वह कोई न कोई बहाना बना देता.

यही नहीं, इस के बाद जब देखो तब राजेश मेहरा अनामिका की पिटाई कर उसे घर से निकल जाने को भी कहता. यहां तक कि उस ने घर खर्च के लिए पैसे देने भी बंद कर दिए थे. जब राजेश के अत्याचारों की हद हो गई, तब अनामिका ने अपने पिता को सारी बातें बता दीं.

राजेश ने अनामिका के सामने इस तरह के हालात खड़े कर दिए कि अनामिका परेशान हो कर खुदबखुद अपने पति का घर छोड़ कर अपने मायके में आ कर रहने लगी. 6 महीने पहल॒े पति की सच्चाई सामने आने के बाद वह अपने पति से अलग हो गई.

दरअसल, 6 महीने पहले इत्तफाक से कुछ कागजात अनामिका के हाथ लगे, जिस से उसे पता चला कि उस के पति का असली नाम राजेश मेहरा नहीं बल्कि राजेंद्र कमरिया है, राजेश मेहरा तो उस का बोगस नाम है. वह धोखाधड़ी और हत्या जैसे अपराधों में शामिल होने की वजह से फरार चल रहा है.

इस के बाद ही अनामिका पति से अलग हो कर अपने पिता के पास चेतकपुरी में रहने लगी थी. पति राजेश मेहरा उर्फ राजेंद्र कमरिया ने उसे फोन कर उस के पास लौटने को कहा. अनामिका ने जब लौटने को मना कर दिया तो राजेंद्र अनामिका को फोन पर जान से मारने की धमकी देने लगा,

एक दिन तो हद ही हो गई. 12 मार्च, 2022 को अनामिका अपने पिता से थोड़ी देर में आने को कह कर घर से निकली ही थी कि रास्ते में राजेंद्र अपने साथियों निक्की, प्रमोद और राजा के साथ खड़ा मिल गया.

वह अनामिका को जबरन अपनी गाड़ी में डाल कर सुनसान स्थान पर ले गया और उस के साथ जम कर मारपीट की.

इस मारपीट में अनामिका की आंख पर भी चोट लगी. अनामिका ने बताया कि उस दिन पति राजेंद्र उसे जान से मारने की फिराक में था, लेकिन वह जैसेतैसे उस के चंगुल से छूट कर भाग आई.

इस के बाद अनामिका सीधी ग्वालियर के झांसी रोड थाने पहुंची और पुलिस को अपने पति की असलियत बताने के साथ ही कई अहम दस्तावेज भी सौंपे.

जैसेजैसे जांच आगे बढ़ रही थी, पुलिस को नित नईनई जानकारी मिल रही थी. पुलिस ने अपना रिकौर्ड खंगाला तो इसी थाने में राजेंद्र मारपीट के एक मामले में फरार निकला. राजेंद्र को दबोचने के लिए बिलौआ पुलिस से संपर्क किया गया तो पता चला कि 2014 में हुई 36 लाख रुपए की धोखाधड़ी और मारपीट के मामले में वह वहां से भी फरार चल रहा है.

राजेंद्र यादव को गिरफ्तार करने के लिए एक पुलिस टीम बनाई गई. टीम में क्राइम ब्रांच के टीआई दामोदर गुप्ता, थानाप्रभारी (बिलौआ) रमेश साख्य, क्राइम ब्रांच के एएसआई राजीव सोलंकी, हैडकांस्टेबल रामबाबू सिंह, कांस्टेबल आशीष शर्मा व सोनू परिहार तथा बिलौआ थाने में पदस्थ एएसआई जीत बहादुर, कांस्टेबल सुशांत पांडे, धरमवीर और महेश आदि को शामिल किया गया.

इस के बाद मुखबिर की सूचना पर 16 मार्च, 2022 को पुलिस ने उसे बिलौआ क्षेत्र स्थित उस के फार्महाउस से हिरासत में लिया.

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पुलिस ने थाने ला कर उस से पूछताछ की तो उस ने एक ऐसे सनसनीखेज अपराध का खुलासा कर दिया, जिस के बारे में सुनते ही पुलिस वालों के पैरों तले से जैसे जमीन खिसक गई.

पकड़े गए युवक का असली नाम राजेंद्र यादव था. राजेंद्र ने पूछताछ में जो कुछ बताया, उसे सुन कर पुलिस असमंजस में पड़ गई. वजह यह थी कि वह एक संगीन अपराध था और वह आज जिन 4 हत्याओं के बारे में पुलिस को बता रहा था, उस से ग्वालियर पुलिस अभी तक पूरी तरह अनभिज्ञ थी.

पूछताछ में राजेश मेहरा उर्फ राजेंद्र मेहरा उर्फ राजेंद्र यादव उर्फ राजेंद्र कमरिया से पता चला कि वह सिर्फ 12वीं कक्षा तक ही पढ़ा है. ग्वालियर के बालाबाई के बाजार में उस का एक दोस्त मनोज गहलोत परिवार के साथ रहता था.

राजेंद्र यादव भी उस के पड़ोस में ही रहता था. दोनों में गहरी दोस्ती थी. राजेंद्र ने अपने से 10 साल बड़ी मनोज की पत्नी गीता को अपने प्रेम जाल में फांस लिया था. दोनों के बीच अवैध संबंध हो गए थे.

31 दिसंबर, 2011 को राजेंद्र ने अपनी प्रेमिका गीता के साथ मिल कर उस के पति मनोज गहलोत को बियर में नशे की गोली मिला कर पिला दी.

इस के बाद उस का गला दबा कर मौत के घाट उतार दिया और फिर मनोज की लाश झांसी के पास बेतवा नदी में फेंक दी थी. उधर मनोज के परिवार वालों ने कोतवाली थाने में मनोज की गुमशुदगी दर्ज करा दी थी.

मनोज की हत्या के बाद राजेंद्र और गीता ने शादी कर ली थी. शादी के बाद गीता और राजेंद्र मऊरानीपुर रहने चले गए, यहां पर गीता का मकान था.

तकरीबन 2 साल बाद जब गीता से राजेंद्र का मन ऊब गया तो सन 2013 में राजेंद्र ने बड़े ही सुनियोजित ढंग से गीता का मकान हड़प लिया. उस के बाद राजेंद्र ने रहस्यों से भरी किसी फिल्म की तरह गीता, उस के बेटे निक्की और भतीजे सूरज को भी चाकू से गोद कर मार डाला.

उस के इस अपराध में राजेंद्र के भाई कालू और उस के जीजा के भाई राहुल ने भी उस की मदद की थी. इस वारदात के बाद राजेंद्र मऊरानीपुर से फरार हो गया.

तिहरे हत्याकांड से मऊरानीपुर क्षेत्र में सनसनी फैल गई थी. इस के बाद पुलिस किसी तरह इस हत्याकांड के आरोपियों का पता लगाने में सफल हो गई.

इतना ही नहीं, पुलिस ने हत्याकांड में शामिल रहे कालू और राहुल को गिरफ्तार करने में सफलता हासिल कर ली. लेकिन राजेंद्र यादव नाम और हुलिया बदल कर इधरउधर छिपता रहा. पुलिस ने उस के ऊपर ईनाम तक घोषित कर दिया.

खुद को कुंवारा बता कर राजेश उर्फ राजेंद्र ने अनामिका को सन 2014 में अपने प्रेम जाल में फांस लिया. अनामिका ने पुलिस को बताया कि राजेश से उस की दोस्ती सन 2014 में ट्रेन के सफर में हुई थी.

दोस्ती बढ़ने पर राजेश ने दिल्ली में अनामिका की नौकरी लगवाने में काफी मदद की थी, इस वजह से दोनों के बीच गहरी दोस्ती हो गई, जो बाद में प्यार में बदल गई. बाद में दोनों ने आपसी सहमति से शादी कर ली थी.

शादी के वक्त राजेश उर्फ राजेंद्र ने अपने को कुंवारा बताया था. राजेंद्र ने अनामिका से एक नहीं, बल्कि कई झूठ बोले थे.

उन में सब से बड़ा तो यही था कि उस ने अपनी पत्नी से मकान मालिक कुलदीप मेहरा का परिचय अपने पिता के रूप में करवाया था. राजेंद्र ने अपना नाम भी अनामिका को राजेश मेहरा बताया था. बाद में अनामिका को पता चला कि कुलदीप मेहरा राजेश उर्फ राजेंद्र का पिता नहीं बल्कि मकान मालिक है.

बाद में पता चला कि राजेश ने कुलदीप मेहरा की तकरीबन 5 करोड़ रुपए की जमीन भी ठग ली थी. शादी के बाद राजेंद्र ने अपनी पत्नी को बहन के घर रखा था. राजेंद्र और अनामिका के एक बेटा भी है.

पिछले 10 सालों से राजेंद्र अपना नाम और भेष बदल कर रहता रहा. कभी पगड़ी लगा लेता तो कभी क्लीन शेव रहता. कभी दाढ़ी बढ़ा लेता था, कभी राजेंद्र यादव बन जाता तो कभी राजेश मेहरा. वह लग्जरी कारों का भी शौकीन है. साथ ही वह अय्याश प्रवृत्ति का तो है ही.

पहले वह लड़की से दोस्ती करता है, उस के बाद उन की प्रौपर्टी पर सुनियोजित ढंग से कब्जा कर खुर्दबुर्द कर देता. बात करने में हाजिरजवाब राजेंद्र यादव के अपराधों का कच्चा चिट्ठा खोलते हुए ग्वालियर के एसपी अमित सांघी, एडिशनल एसपी (क्राइम) राजेश दंडोतिया ने संयुक्त रूप से पत्रकार सम्मेलन में पत्रकारों को जानकारी दी.

2011 में खास दोस्त मनोज गहलोत की हत्या, 2012 में ग्वालियर में पीडब्ल्यूडी के इंजीनियर के मकान में भाड़े पर रहा. उस की पत्नी को फांस कर 60 लाख की ठगी की. चैक बाउंस मामले में गिरफ्तारी वारंट 18 जून, 2013 में धारा 420, 467, 468, 471, 120 भादंवि का केस उस के खिलाफ दर्ज हुआ.

2013 में अपने भाई और जीजा के छोटे भाई के साथ मिल कर अपनी प्रेमिका गीता और उस के बेटे और भतीजे की निर्मम हत्या कर दी.

कड़वा सच तो यह है कि अनामिका का कई मर्तबा मन हुआ कि वह अपने पति के बारे में पुलिस को सब कुछ सचसच बता दे, लेकिन राजेंद्र के खिलाफ मुंह खोलने का साहस नहीं जुटा पाई.

जब अति हो गई तो वह पति के खिलाफ पक्के सबूतों के साथ थाने में जा कर खड़ी हो गई, वैसे भी पति के खिलाफ खड़ी होने में ही अनामिका की भलाई थी.

पति की कारगुजारियों से अनामिका को गहरा झटका लगा है. इस से उबरने में फिलहाल उसे वक्त लगेगा.

पूछताछ के बाद राजेंद्र को न्यायालय में पेश किया गया, जहां से उसे जेल भेज दिया गया.

—कथा पुलिस सूत्रों पर आधारित

प्यार पर प्रहार : आशिक बना कातिल – भाग 3

कृष्णा घर का बिगड़ैल लड़का था. आवारागर्दी और घरपरिवार से बेहतर संबंध नहीं होने के कारण पिता ने एक तरह से उसे घर से निकाल दिया था. कृष्णा किराए का मकान ले कर रहता था. उस मकान में पढ़ाई करने वाले और भी लड़के रहते थे. उस के पास एक बुलेट थी. अपने खर्चे पूरे करने के लिए वह पार्टटाइम कार वाशिंग का काम करता था.

काफी समय बाद भी प्रियंका कृष्णा के कमरे पर नहीं पहुंची तो वह परेशान हो गया. वह झल्ला कर कमरे से निकला और प्रियंका को फोन किया. प्रियंका ने उसे बताया कि वह अपनी फ्रैंड के साथ है और उस के पास पहुंचने में कुछ समय लगेगा.

कृष्णा उस से मिलने के लिए उतावला था. काफी देर बाद भी जब वह नहीं पहुंची तो उस ने प्रियंका को फिर फोन किया. प्रियंका बोली, ‘‘आ रही हूं यार. मैं अशोक नगर पहुंच चुकी हूं.’’

इस पर कृष्णा ने झल्ला कर कहा, ‘‘मैं वहीं आ रहा हूं. तुम रुको, मैं पास में ही हूं’’

कृष्णा थोड़ी ही देर में अशोक नगर जा पहुंचा. प्रियंका वहां 2 सहेलियों के साथ खड़ी थी.

प्रियंका की बातों से कृष्णा को लगा कि आज उस का रंग कुछ बदलाबदला सा है. मगर उस ने धैर्य से काम लिया. प्रियंका को देख वह स्वाभाविक रूप से मुसकराते हुए बोला, ‘‘प्रियंका, तुम मुझे मार डालोगी क्या? तुम से मिलने के लिए सुबह से बेताब हूं और तुम कह रही हो कि आ रही हूं…आ रही हूं.’’

‘‘तो क्या कालेज भी न जाऊं? पढ़ाई छोड़ दूं, जिस के लिए मैं गांव से यहां आई हूं?’’ प्रियंका ने तल्ख स्वर में कहा.

‘‘मैं ऐसा कहां कह रहा हूं, मगर कालेज से सीधे आना था. 2 घंटे हो गए तुम्हारा इंतजार करते हुए. कम से कम मेरी हालत पर तो तरस खाना चाहिए तुम्हें.’’

‘‘और तुम्हें मेरे घर जा कर हंगामा करना चाहिए. पापा से क्या कहा है तुम ने, तुम ऐसा कैसे कह सकते हो?’’ प्रियंका ने रोष भरे स्वर में कहा.

प्रियंका को गुस्से में देख कर कृष्णा को भी गुस्सा आ गया. दोनों की अशोक नगर चौक पर ही नोकझोंक होने लगी, जिस से वहां लोगों का हुजूम जमा हो गया. तभी एक स्थानीय नेता प्रशांत तिवारी जो कृष्णा और प्रियंका से वाकिफ थे, वहां पहुंचे और उन्होंने दोनों को समझाबुझा कर शांत कराया.

कृष्णा प्रियंका को ले आया अपने कमरे पर

दोनों शांत हो गए. कृष्णा ने प्रियंका को बुलेट पर बिठाया और अपने कमरे की ओर चल दिया. रास्ते में दोनों ही सामान्य रहे. अपने कमरे पर पहुंच कर कृष्णा ने कहा, ‘‘प्रियंका, अब दिमाग शांत करो. मैं तुम्हारे लिए बढि़या चाय बनाता हूं.’’

यह सुन कर प्रियंका मुसकराई, ‘‘यार, मुझे भूख लग रही है और तुम बस चाय बना रहे हो.’’

इस के बाद कृष्णा पास के एक होटल से नाश्ता ले आया. दोनों प्रेम भाव से बातचीत करतेकरते कब फिर से तनाव में आ गए, पता ही नहीं चला. कृष्णा ने कहा, ‘‘तुम मुझ से शादी करोगी कि नहीं, आज मुझे साफसाफ बता दो.’’

प्रियंका ने स्पष्ट शब्दों में कहा, ‘‘नहीं, मैं शादी घर वालों की मरजी से ही करूंगी.’’

हत्या कर कृष्णा हो गया फरार

दोनों में बहस होने लगी. उसी दौरान बात बढ़ने पर कृष्णा ने चाकू निकाला और प्रियंका पर कई वार कर उसे गंभीर रूप से घायल कर दिया. खून से लथपथ प्रियंका को मरणासन्न छोड़ कर वह वहां से भाग खड़ा हुआ. घायल प्रियंका कराहती रही और वहीं बेहोश हो गई.

हौस्टल के राकेश वर्मा नाम के एक लड़के ने प्रियंका के कराहने की आवाज सुनी तो वह कमरे में आ गया. उस ने गंभीर रूप से घायल प्रियंका को बिस्तर पर पड़े देखा तो तुरंत स्थानीय सरकंडा थाने में फोन कर के यह जानकारी थानाप्रभारी जयप्रकाश गुप्ता को दे दी.

जानकारी मिलते ही थानाप्रभारी जयप्रकाश गुप्ता कुछ पुलिसकर्मियों को साथ ले कर राजस्व कालोनी के हौस्टल पहुंच गए. उन्होंने कमरे के बिस्तर पर खून से लथपथ एक युवती देखी, जिस की मौत हो चुकी थी.

थानाप्रभारी ने यह जानकारी अपने उच्चाधिकारियों को भी दे दी. एडीशनल एसपी ओ.पी. शर्मा एवं एसपी (सिटी) विश्वदीपक त्रिपाठी भी मौके पर पहुंच गए. दोनों पुलिस अधिकारियों ने मौकामुआयना करने के बाद उस की लाश पोस्टमार्टम के लिए भेजने के आदेश दिए.

अधिकारियों के जाने के बाद थानाप्रभारी ने प्रियंका की लाश पोस्टमार्टम के लिए भेज दी. हौस्टल के लड़कों से पता चला कि जिस कमरे में प्रियंका की हत्या हुई थी, वह कृष्णा का है. प्रियंका के फोन से पुलिस को उस की मौसी व पिता के फोन नंबर मिल गए थे, लिहाजा पुलिस ने फोन कर के उन्हें अस्पताल में बुला लिया.

प्रियंका के मौसामौसी और मातापिता ने अस्पताल पहुंच कर लाश की शिनाख्त प्रियंका के रूप में कर दी. उन्होंने हत्या का आरोप बिलासपुर निवासी कृष्णा उर्फ डब्बू पर लगाया. पुलिस ने कृष्णा के खिलाफ हत्या की रिपोर्ट दर्ज कर उस की खोजबीन शुरू कर दी. उस का मोबाइल फोन स्विच्ड औफ था. पुलिस को पता चला कि वह रायपुर से नागपुर भाग गया है.

पकड़ा गया कृष्णा

थानाप्रभारी जयप्रकाश गुप्ता व महिला एसआई गायत्री सिंह की टीम आरोपी को संभावित स्थानों पर तलाशने लगी. पुलिस ने कृष्णा के फोटो नजदीकी जिलों के सभी थानों में भी भेज दिए थे.

सरकंडा से करीब 25 किलोमीटर दूर स्थित मुंगेली जिले के थाना सरगांव के एक सिपाही को 23 अगस्त, 2019 को कृष्णा तिवारी सरगांव चौक पर दिख गया. उस सिपाही का गांव आरोपी कृष्णा तिवारी के गांव के नजदीक ही था. इसलिए सिपाही को यह जानकारी थी कि कृष्णा मर्डर का आरोपी है और पुलिस से छिपा घूम रहा है.

लिहाजा वह सिपाही कृष्णा तिवारी को हिरासत में ले कर थाना सरगांव ले आया. सरगांव पुलिस ने कृष्णा तिवारी को गिरफ्तार करने की जानकारी सरकंडा के थानाप्रभारी जयप्रकाश गुप्ता को दे दी.

उसी शाम सरकंडा थानाप्रभारी कृष्णा तिवारी को सरगांव से सरकंडा ले आए. उस से पूछताछ की गई तो उस ने प्रियंका की हत्या करने का अपराध स्वीकार कर लिया. उस की निशानदेही पर पुलिस ने घटनास्थल से एक चाकू भी बरामद किया, जो 3 टुकड़ों में था.

कृष्णा ने बताया कि हत्या करने के बाद वह बुलेट से सीधा रेलवे स्टेशन की तरफ गया. उस समय उस के कपड़ों पर खून के धब्बे लगे थे. उस के पास पैसे भी नहीं थे. स्टेशन के पास अनुराग मानिकपुरी नाम के दोस्त से उस ने 500 रुपए उधार लिए और रायपुर की तरफ निकल गया.

कृष्णा तिवारी उर्फ दब्बू से पूछताछ कर पुलिस ने उसे 24 अगस्त, 2019 को मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी, बिलासपुर के समक्ष पेश किया, जहां से उसे जेल भेज दिया गया.

कथा पुलिस सूत्रों पर आधारित

गुनाह बन गया भूला बिसरा प्यार

12 जनवरी, 2022 सुबह के करीब 11 बजे का वक्त था. जबलपुर जिले के चरगवां पुलिस थाने के टीआई विनोद पाठक बाहर धूप में बैठे टेबल पर रखी कुछ फाइलें उलटपलट कर देख रहे थे, तभी उन के मोबाइल पर बजी घंटी ने उन का ध्यान फाइलों से हटा दिया. जैसे ही काल रिसीव की, दूसरी तरफ से आवाज आई, ‘‘सर मैं घुघरी गांव का सरपंच राजाराम करपेती बोल रहा हूं.‘‘

‘‘हां सरपंचजी, बोलिए आज कैसे फोन किया?’’ टीआई ने कहा.

‘‘सर सुबह गांव के कुछ लोगों ने घुघरी कैनाल में एक लाश तैरती देखी है. आप पुलिस टीम ले कर जल्दी गांव आ जाइए, गांव में दहशत का माहौल है.’’

‘‘ठीक है सरपंचजी, चिंता मत कीजिए, मैं जल्द ही वहां पहुंच रहा हूं.’’ टीआई विनोद पाठक ने सरपंच से कहा और घटना की जानकारी अपने वरिष्ठ अधिकारियों को देने के बाद पुलिस टीम के साथ वे घटनास्थल की ओर रवाना हो गए.

जबलपुर जिले का चरगवां पुलिस थाना क्षेत्र नरसिंहपुर जिले की सीमा से लगा हुआ है. पूरे इलाके में नर्मदा नदी पर बने वरगी डैम का पानी नहर (कैनाल) के माध्यम से खेतों में जाता है, जिस से सिंचाई का काम होता है.

चरगवां से करीब 10 किलोमीटर दूर घुघरी गांव में कुछ ही देर में पुलिस टीम घटनास्थल पर पहुंच चुकी थी. घुघरी कैनाल में जहां लाश तैर रही थी, वहां नहर के दूसरी तरफ सोमती गांव है.

नहर पार करने के लिए एक पुल बना हुआ था, जिस पर रैलिंग नहीं थी. पुलिस का अंदाजा था कि हो सकता है कि किसी दुर्घटना की वजह से कोई नहर में गिर गया होगा.

सरपंच और गांव वालों की मदद से काफी मशक्कत के बाद पानी में तैरती लाश रस्सी से बांध कर बाहर निकाला गया. तब तक बरगी जबलपुर की सीएसपी अपूर्वा किलेदार और फोरैंसिक टीम की डा. नीता जैन भी वहां पर पहुंच चुकी थीं. लाश काफी फूल चुकी थी.

मृतक के गले में एक मफलर लिपटा मिला था. मृतक काली पैंट, चैक वाली शर्ट और नीले रंग की जरकिन और पांव में जूते पहने हुए था. गले में लिपटे मफलर को हटाने पर मफलर के निशान साफ दिखाई दे रहे थे.

वहां मौजूद लोगों में से कोई भी लाश की शिनाख्त नहीं कर पाया था. तब पुलिस ने मृतक की शिनाख्त के लिए सोशल मीडिया पर उस की फोटो प्रचारित कर दी. वायरल हुई फोटो के आधार पर ही कुछ ही घंटों में पुलिस को पता चल गया कि नहर में मिली लाश जबलपुर के गोरखपुर थाना क्षेत्र के कैलाशपुरी में रहने वाले 41 साल के संदीप वगारे की है.

पुलिस की जांच में पता चला कि संदीप 9 जनवरी, 2022 की शाम करीब 7 बजे से अपने घर से निकला था, जिस की तलाश उस के घर के लोगों द्वारा की जा रही थी.

सूचना पा कर संदीप वगारे के घर वाले मौके पर पहुंच गए और उन्होंने लाश की शिनाख्त संदीप वगारे के रूप में कर ली. उस के बाद पुलिस ने लाश पोस्टमार्टम के लिए भेज दी.

2 दिन बाद आई पोस्टमार्टम रिपोर्ट में इस बात का खुलासा हुआ कि संदीप की गला घोट कर हत्या कर उसे नहर में फेंका गया था. पोस्टमार्टम रिपोर्ट मिलने के बाद पुलिस ने अज्ञात के खिलाफ संदीप वगारे की हत्या कर लाश छिपाने का मामला दर्ज कर लिया.

जबलपुर जिले के एसपी सिद्धार्थ बहुगुणा, एडीशनल एसपी शिवेश सिंह बघेल और सीएसपी अपूर्वा किलेदार के निर्देश पर टीआई विनोद पाठक के नेतृत्व में थाना पुलिस और क्राइम ब्रांच की संयुक्त टीम गठित की गई.

टीम में एएसआई एस.आर. पटेल, उषा गुप्ता, हैडकांस्टेबल प्रदीप पटेल, कांस्टेबल रोशनलाल, लेडी कांस्टेबल भारती, क्राइम ब्रांच के एसआई राम सनेही शर्मा, हैडकांस्टेबल अरविंद श्रीवास्तव, साइबर सेल के अमित पटेल आदि को शामिल किया गया.

पुलिस के लिए संदीप वगारे की हत्या की गुत्थी सुलझाना किसी चुनौती से कम नहीं था. संदीप के घर वालों से पूछताछ में पता चला कि वह शराब पीने का आदी था. इसी वजह से कुछ महीने पहले उस की पत्नी उसे छोड़ कर मायके चली गई थी.

संदीप का मोबाइल भी घटनास्थल पर नहीं मिला था. पुलिस टीम ने उस के घर वालों से उस का मोबाइल नंबर ले कर काल डिटेल्स निकलवाई. काल डिटेल्स में पता चला कि उस की आखिरी बात 9 जनवरी, 2022 को शाम करीब 6 बजे किसी लक्ष्मी शिवहरे से हुई थी.

पुलिस लक्ष्मी शिवहरे तक पहुंच गई. 44 साल की लक्ष्मी शिवहरे नाम की महिला मूलरूप से मध्यप्रदेश के सिवनी जिले के धूमा की रहने वाली थी, जो अपने पति शरद शिवहरे के साथ जबलपुर की हाथीताल कालोनी में रहती थी.

पुलिस ने जब लक्ष्मी से संदीप वगारे के संबंध में पूछताछ की तो पहले तो वह पूरे घटनाक्रम से अंजान बनी रही. बाद में महिला पुलिसकर्मियों ने उस से सख्ती से पूछताछ की तो संदीप के मर्डर की गुत्थी सुलझती चली गई.

लक्ष्मी ने पुलिस को बताया कि उस ने अपनी बहन के बेटे कपिल राय के द्वारा संदीप की हत्या कराई थी.

अब पुलिस टीम कपिल राय की खोज में जी जान से जुट गई. लक्ष्मी की बड़ी बहन का विवाह कंदेली नरसिंहपुर के संतोष राय से हुआ था. कपिल राय उन्हीं का बेटा था. पुलिस ने कपिल को भी हिरासत में ले लिया. उस ने पूछताछ में बताया कि मौसी लक्ष्मी के कहने पर ही उस ने वारदात को अंजाम दिया था.

कपिल राय और लक्ष्मी के इकबालिया बयान के आधार पर संदीप वगारे की हत्या की जो कहानी सामने आई, वह शादी के पहले के प्रेम प्रसंग से जुड़ी निकली, जो इस प्रकार है—

लक्ष्मी शिवहरे का परिवार मध्य प्रदेश के शहर जबलपुर के गुप्तेश्वर इलाके में रहता था. 2 बहनों में सब से छोटी लक्ष्मी तीखे नाकनक्श की खूबसूरत लड़की थी. स्कूल की पढ़ाई के दौरान ही लक्ष्मी अपने मोहलले में रहने वाले संदीप वागरे को दिल दे बैठी.

संदीप के पिता उस समय जबलपुर कलेक्ट्रेट में सरकारी मुलाजिम थे. संदीप और लक्ष्मी का प्यार परवान चढ़ रहा था. वह अकसर स्कूल की क्लास बंक कर के शहर के पार्क में घूमने निकल जाते. दोनों शादी करना चाहते थे, मगर जाति की दीवार उन की शादी के रास्ते में सब से बड़ी रुकावट थी.

एक दिन जबलपुर के रौक गार्डन में दोनों भविष्य के सपने बुन रहे थे. संदीप की बाहों में बाहें डाले लक्ष्मी बोली, ‘‘मेरे घर वाले शादी के लिए लड़का देखने लगे हैं, मगर मैं तो तुम्हें चाहती हूं.’’

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‘‘लक्ष्मी, मैं भी तुम्हारे बिना जी नहीं सकता. यदि घर वाले हमारी शादी के लिए राजी नहीं हुए तो हम दोनों घर से भाग कर शादी कर लेंगे.’’ प्यार के रंग में डूबे संदीप ने लक्ष्मी से कहा.

‘‘नहीं संदीप, इस से परिवार की बदनामी होगी, थोड़ा इंतजार करो हो सकता है हम घर वालों को राजी कर लें.’’ लक्ष्मी ने दिलासा दी.

संदीप और लक्ष्मी को जब भी मौका मिलता, वे एकांत में घूमतेफिरते. उन्होंने शहर के फोटो स्टूडियो जा कर एकदूसरे की बाहों में बाहें डाल कर जो फोटो खिंचवाई थी, वह संदीप के पर्स में हमेशा रहती थी.

जब लक्ष्मी के घर वालों को दोनों के प्रेम प्रसंग का पता चला तो समाज में बदनामी के डर से उन्होंने जुलाई 2006 में लक्ष्मी की शादी मध्य प्रदेश के सिवनी जिले के धूमा में शरद शिवहरे से कर दी.

शरद ने उस समय धूमा में ठेकेदारी का काम शुरू किया था. लक्ष्मी की शादी होते ही वह ससुराल में रहने लगी, मगर संदीप जुदाई के गम में शराब पीने लगा. संदीप पेशे से पेंटर था. वह शहर में बनने वाले मकानों में पुट्टी और पुताई करने का काम करता था. अपनी कमाई का बड़ा हिस्सा वह शराबखोरी में खर्च कर देता था.

जब भी लक्ष्मी अपने मायके जबलपुर आती, संदीप उस से मिलने की कोशिश करता तो लक्ष्मी उसे समझा कर कहती, ‘‘देखो संदीप, शादी के पहले जो भी हुआ उसे भूल कर तुम भी शादी कर के अपना घर बसा लो.’’

मगर संदीप तो लक्ष्मी को भूलने तैयार नहीं था. संदीप के सिर पर तो प्यार का नशा चढ़ कर बोल रहा था. संदीप के मातापिता ने यह सोच कर उस की शादी बालाघाट जिले में कर दी कि धीरेधीरे वह लक्ष्मी को भूल कर अपनी नई जिंदगी शुरू कर देगा.

संदीप की शादी के बाद भी उस की शराब पीने की आदत नहीं छूटी, जिस का नतीजा यह हुआ कि उस की पत्नी उसे छोड़ कर मायके चली गई.

वक्त गुजरने के साथ लक्ष्मी एक बेटे और एक बेटी की मां बन चुकी थी. अपनी मेहनत के बलबूते लक्ष्मी का पति अब माइनिंग क्षेत्र का नामी ठेकेदार बन चुका था. लक्ष्मी के पति शरद शिवहरे के पास हाईक्लास एक्सप्लोजन का लाइसैंस था. वह बड़ीबड़ी पहाडि़यों पर विस्फोटक लगा कर ब्लास्टिंग कर के अच्छीखासी आमदनी कर लेता था.

2020 में शरद अपनी पत्नी लक्ष्मी और बच्चों के साथ धूमा से आ कर जबलपुर के हाथीताल इलाके में रहने लगा था. उन का जीवन खुशहाल चल रहा था, लेकिन इस बीच लक्ष्मी के पूर्वप्रेमी संदीप वगारे को लक्ष्मी के जबलपुर आने की भनक लग गई.

हाथीताल में संदीप वगारे उस के घर के आसपास मंडराने लगा. वह अकसर पति की गैरमौजूदगी में आ कर लक्ष्मी से मिलनेजुलने लगा. पहले प्यार का नशा संदीप पर इस कदर छाया हुआ था कि आज भी वह लक्ष्मी की एक झलक पाने बेताब था.

संदीप जब भी लक्ष्मी से मिलता एक ही बात की रट लगा कर कहता, ‘‘लक्ष्मी, मैं 16 साल के बाद भी तुम्हें भुला नहीं पाया हूं.’’

इस बात को ले कर लक्ष्मी परेशान रहने लगी. लक्ष्मी भी उसे झूठमूठ की दिलासा दे कर कहती, ‘‘मेरे मनमंदिर में तो तुम्हारे नाम का ही दीया जल रहा है. मगर अपने बच्चों की खातिर अब मैं अपना परिवार नहीं छोड़ सकती.’’

संदीप उस से नजदीकियां बनाने की कोशिश करता, मगर लक्ष्मी उस से दूरी बनाने में ही अपनी भलाई समझती. संदीप अपनी हरकतों से बाज नहीं आ रहा था. लक्ष्मी से मिल कर उस का पुराना प्रेम फिर से कुलांचे भरने लगा था.

एक दिन संदीप ने एक फोटो दिखा कर धमकी देते हुए कहा, ‘‘अगर तुम ने मेरी बात नहीं मानी तो ये फोटो मैं सोशल मीडिया पर वायरल कर तुम्हें बदनाम कर दूंगा.’’

लक्ष्मी ने गौर से उस फोटो को देखा तो उसे याद आ गया कि यह वही फोटो है जिसे शादी के पहले उस ने संदीप के गले में हाथ डाल कर जबलपुर के फोटो स्टूडियो में खिंचाया था.

फोटो देख कर लक्ष्मी बुरी तरह डर गई थी. उस ने संदीप से मिन्नतें करते हुए कहा, ‘‘प्लीज संदीप तुम्हें मेरे प्यार का वास्ता, ये फोटो तुम किसी को नहीं दिखाना.’’

संदीप के हाथ जब से लक्ष्मी ने अपने प्यार की फोटो देखी थी, तभी से उस का हर लम्हा डर और दहशत के साए में बीतने लगा था. लक्ष्मी को लगा कि यदि उस के पति शरद को पता चल गया तो उस की तो बसीबसाई गृहस्थी पलभर में ही रेत के महल की तरह बरबाद हो जाएगी.

उस ने कई बार संदीप को समझाने की कोशिश भी की, मगर संदीप उस का पीछा छोड़ने तैयार नहीं था. चूंकि संदीप की पत्नी उसे छोड़ कर चली गई थी, वह अकसर लक्ष्मी का पीछा करता. उस के घर के सामने खड़ा हो जाता. उस के घर में घुसने का प्रयास करता था. जब लक्ष्मी संदीप की हरकतों से परेशान हो गई तो इस बात की जानकारी उस ने नरसिंहपुर में रहने वाली अपनी बड़ी बहन को दे दी.

लक्ष्मी की समस्या हल करने के लिए बड़ी बहन ने यह सोच कर अपने बेटे कपिल को लक्ष्मी के पास भेज दिया कि कपिल संदीप को डराधमका कर मामले को शांत करा देगा.

नरसिंहपुर के गांधी वार्ड कंदेली में रहने वाला 25 साल का कपिल ड्राइवर होने के साथसाथ शातिर बदमाश था.

7 जनवरी, 2022 को कपिल जैसे ही अपनी मौसी के घर हाथीताल, जबलपुर पहुंचा तो लक्ष्मी ने संदीप की हरकतों से परेशान रहने की दास्तान सुनाते कहा, ‘‘कपिल, संदीप ने मेरा जीना मुश्किल कर दिया है. किसी भी तरह इसे मेरे रास्ते से हटा दो. यदि तुम्हारे मौसाजी को ये सब पता चल गया तो मैं किसी को मुंह दिखाने के काबिल नहीं रहूंगी.’’

‘‘मौसी तुम चिंता मत करो, मैं हूं न. मैं उसे हमेशा के लिए आप के रास्ते से हटा दूंगा.’’ कपिल ने मौसी को भरोसा दिलाते हुए कहा.

पति शरद अपने काम के सिलसिले में घर से बाहर फील्ड पर रहता तो रात 9 बजे के बाद ही घर आता था. इसी समय मौसी के साथ मिल कर कपिल राय संदीप की हत्या की प्लानिंग बनाता.

कपिल राय भी अपने नाना के घर गुप्तेश्वर, जबलपुर आताजाता रहता था, इसलिए संदीप को वह अच्छी तरह से जानता था. कपिल उसे मामा कह कर बुलाता था. उसे पता था कि संदीप शराब का शौकीन है. कपिल ने मौसी को बताया कि उसे शराब पिला कर ही ठिकाने लगाना बेहतर होगा.

योजना के मुताबिक, 9 जनवरी को कपिल ने मौसी लक्ष्मी के मोबाइल से संदीप को काल कर के कहा, ‘‘हैलो मामा मैं कपिल बोल रहा हूं, नरसिंहपुर से आज ही मौसी के पास जबलपुर आया हूं. सोचा आज मामा के साथ महफिल जमा लूं.’’

इस तरह शराब पीने का न्यौता मिलने से संदीप की बांछे खिल उठीं. उस ने कपिल को सहमति देते हुए पूछा, ‘‘कहां पर आना है कपिल.’’

‘‘मामा कृपाल चौक आ जाओ. मैं स्कूटी ले कर आता हूं,’’ कपिल बोला.

शराब संदीप की बहुत बड़ी कमजोरी थी, वह शाम 7 बजे कपिल के बताए स्थान कृपाल चौक चला आया. कपिल अपनी मौसी की स्कूटी ले कर उसी का इंतजार कर रहा था. कपिल वहां से संदीप को ले कर तिलवारा के रास्ते चरगवां ले गया.

तब तक रात का अंधेरा हो चुका था, रास्ते में दोनों ने शराब पी कर इधरउधर की बातें की. कपिल ने बड़ी चालाकी से संदीप वगारे को अधिक शराब पिला दी.

जब वह नशे में धुत हो गया तो उसे बरगी कैनाल पर बने घुघरी सोमती पुल के ऊपर ले जा कर अपने मफलर से संदीप का गला घोट दिया. थोड़ी ही देर में नशे में धुत संदीप की मौत हो गई.

कपिल शातिरदिमाग था, उस ने पहचान छिपाने के उद्देश्य से संदीप की जेब से उस का मोबाइल फोन और पर्स निकाल कर अपने पास रख लिया और अंधेरे का फायदा उठा कर संदीप को पुल के ऊपर से नहर में फेंक दिया.

घटना को अंजाम दे कर वह स्कूटी ले कर लक्ष्मी मौसी के घर आ गया. मौसी को पूरे घटनाक्रम की जानकारी दे कर वह अपने घर नरसिंहपुर चला गया.

एडीशनल एसपी शिवेश सिंह बघेल ने प्रैस कौन्फ्रैंस कर मामले का खुलासा कर मीडिया को जानकारी दी. संदीप की हत्या के आरोप में लक्ष्मी और कपिल को गिरफ्तार कर उन्हें कोर्ट में पेश किया, जहां से उन्हें जेल भेज दिया गया.

पुलिस ने संदीप व लक्ष्मी की निशानदेही पर संदीप का मोबाइल फोन, पर्स और वारदात में प्रयुक्त उस की स्कूटी को जब्त कर ली.

केस की जांच टीआई विनोद पाठक कर रहे थे.

—कथा पुलिस सूत्रों और मीडिया रिपोर्ट पर आधारित

भोगनाथ का भोग : क्या पूरे हो पाए भोगनाथ के अरमान – भाग 3

13 मई की शाम साढ़े 7 बजे भोगनाथ घर में बैठा खाना खा रहा था कि तभी उस के मोबाइल पर किसी की काल आई. वह पूरा खाना खाए बिना घर से चला गया. काफी रात होने पर भी वह नहीं लौटा तो घर वाले चिंता में पड़ गए. सुबह होने पर उस की काफी तलाश की गई लेकिन उस का कहीं पता नहीं चला.

16 मई की सुबह किसी राहगीर ने पिसावां थाने में डीह कबीरा बाबा के जंगल में किसी अज्ञात युवक की लाश पड़ी होने की सूचना दी. सूचना पा कर थानाप्रभारी दिनेश सिंह पुलिस टीम के साथ घटनास्थल पर पहुंच गए.

मृतक की उम्र 24-25 वर्ष रही होगी. उस के मुंह व गले पर कस कर अंगौछा बांधा गया था, जिस से दम घुटने से उस की मृत्यु हो गई थी. घटनास्थल पर काफी भीड़ एकत्र थी. थानाप्रभारी दिनेश सिंह ने उस की शिनाख्त कराई तो पता चला वह गांव सरवाडीह का भोगनाथ है.

घटनास्थल सरवाडीह गांव के बाहर ही था. इसलिए गांव के लोग भी वहां पहुंच गए थे. उन्होंने ही लाश की शिनाख्त की थी. पता चलते ही भोगनाथ का पिता केदार भी घर के अन्य सदस्यों के साथ वहां आ गया. भोगनाथ की लाश देख कर सब रोनेबिलखने लगे.

थानाप्रभारी दिनेश सिंह ने केदार से कुछ आवश्यक पूछताछ की और फिर लाश पोस्टमार्टम के लिए मोर्चरी भिजवा दी. केदार को साथ ले कर वह थाने आ गए. केदार की लिखित तहरीर पर उन्होंने अज्ञात के विरुद्ध भादंवि की धारा 302, 201 के तहत मुकदमा दर्ज करा दिया.

भोगनाथ के पास मोबाइल था, जो उस के पास से नहीं मिला था. केदार से भोगनाथ का मोबाइल नंबर ले कर थानाप्रभारी दिनेश सिंह ने उसे सर्विलांस पर लगा दिया. इस के अलावा भोगनाथ के मोबाइल नंबर की काल डिटेल्स भी निकलवाई.

भोगनाथ को बुलाने के लिए जिस नंबर से काल की गई थी, उस नंबर की जब विस्तृत जानकारी जुटाई गई तो वह नंबर सरवाडीह निवासी बिट्टू का निकला.

इस के बाद थानाप्रभारी दिनेश सिंह ने बिट्टू को हिरासत में ले कर महिला सिपाही की उपस्थिति में उस से सख्ती से पूछताछ की. उस ने भोगनाथ की हत्या का जुर्म स्वीकार करते हुए अपने 3 साथियों के नाम भी बता दिए.

इस के बाद बिट्टू के प्रेमी अनस को गिरफ्तार कर लिया गया. अनस के 2 दोस्त गोपामऊ निवासी विपिन और मोनू भी इस अपराध में शामिल थे. इस के बाद एसपी महेंद्र चौहान ने प्रैसवार्ता कर बिट्टू और अनस को मीडिया के सामने पेश किया.

जब भोगनाथ ने बिट्टू को अपने से दूरी बनाते देखा तो उस ने पता किया. जल्द ही उसे पता चल गया कि बिट्टू उस से किए गए सारे वादे, रिश्तेनाते तोड़ कर उस से दूर होना चाहती है तो वह तिलमिला गया. ऐसे मौके के लिए ही उस ने अपने मोबाइल से बिट्टू के साथ अंतरंग पलों के फोटो खींच रखे थे.

भोगनाथ ने बिट्टू से मिल कर उसे धमकाया कि वह उस से दूर हुई तो उस के अश्लील फोटो सब को भेज देगा. फोटो के बल पर भोगनाथ उसे ब्लैकमेल कर के उस के साथ संबंध बनाने लगा. बिट्टू उस के हाथ का खिलौना बनने के लिए मजबूर थी. इसी बीच उस के घर वालों ने हरदोई जनपद के पिहानी थाना क्षेत्र के एक युवक से उस की शादी तय कर दी. शादी 29 जून को होनी थी.

भोगनाथ की हरकतों से आजिज आ कर बिट्टू ने अनस से बात की. उस से कहा कि उस की जिंदगी में आने से पहले उस का एक दोस्त भोगनाथ था. भोगनाथ के पास उस के कुछ अश्लील फोटो हैं, जिन के सहारे वह उसे ब्लैकमेल करता है.

वैसे भी उस की शादी तय हो गई है. वह उस की शादी में अड़चन डाल सकता है. बिट्टू ने अनस से कहा कि भोगनाथ को ठिकाने लगाना पड़ेगा. इस के लिए मैं तुम्हारी हर बात मानने को तैयार हूं.

बिट्टू ने अनस से यह भी कहा कि भले ही उस की शादी हो रही हो, लेकिन उस के साथ संबंध हमेशा बने रहेंगे. अनस ने बिट्टू की परेशानी को हमेशा के लिए खत्म करने का फैसला कर लिया. उस ने अपने जिगरी दोस्तों विपिन और मोनू से मदद मांगी तो दोस्ती की खातिर दोनों अनस का साथ देने को तैयार हो गए. इस के बाद भोगनाथ को मारने की योजना बनाई गई.

योजनानुसार 13 मई को अनस ने एक मारुति वैगनआर कार बुक की. कार मालिक को उस ने बताया कि उसे दोस्तों के साथ एक तिलक समारोह में जाना है. कार में बैठ कर अनस अपने दोस्तों के साथ चल दिया.

दूसरी ओर बिट्टू ने शाम साढ़े 7 बजे के करीब भोगनाथ को मिलने के लिए डीह कबीरा बाबा के जंगल में बुलाया. भोगनाथ उस समय खाना खा रहा था, लेकिन अपनी प्रेमिका के बुलाने पर वह खाना बीच में छोड़ कर तुरंत वहां पहुंच गया. वहां उसे बिट्टू मिली. योजना के अनुसार बिट्टू उसे अपनी प्यार भरी बातों में उलझाए रही.

दूसरी ओर अनस ने चुनी गई जगह से कुछ पहले हडियापुर गांव के पास ड्राइवर से यह कह कर कार रुकवा दी कि आगे का रास्ता खराब है. वह वहीं खड़ा हो कर उन के आने का इंतजार करे. इस के बाद अनस और उस के दोस्त पैदल ही कबीरा बाबा के जंगल पहुंचे. वहां पहुंच कर उन्होंने बिट्टू के साथ मौजूद भोगनाथ को दबोच लिया.

फिर उस के गले में पड़े अंगौछे को रस्सी की तरह बना कर उस के मुंह में दबाते हुए उस के गले में फंदा बना कर कस दिया, इस से भोगनाथ चिल्ला न सका और गले पर कसाव बढ़ते ही उस का दम घुटने लगा. वह कुछ देर छटपटाया, फिर उस का शरीर शिथिल पड़ गया.

भोगनाथ को मौत के घाट उतारने के बाद बिट्टू छिपतेछिपाते हुए घर चली गई. अनस भी दोनों दोस्तों के साथ भागते हुए कार तक पहुंचा और ड्राइवर से बोला कि वह तेजी से कार चलाए जहां वह लोग गए थे, वहां उन का झगड़ा हो गया है. ड्राइवर ने यह सुन कर कार की गति बढ़ा दी. गोपामऊ पहुंच कर सब लोग अपने घर चले गए.

लेकिन अपने आप को ये लोग कानून की गिरफ्त में आने से नहीं बचा सके. उन के पास से भोगनाथ का मोबाइल और हत्या की साजिश में प्रयुक्त 2 मोबाइल फोन पुलिस ने उन से बरामद कर लिए.

29 मई, 2018 को पुलिस ने विपिन और मोनू को भी गिरफ्तार कर लिया. सभी अभियुक्तों को न्यायालय में पेश करने के बाद जेल भेज दिया गया.

साथ में मोहित शुक्ला

वासना की बयार में बिजली का करंट – भाग 3

मामला हत्या का ही लग रहा था. इस की जानकारी दोनों सिपाहियों ने थानाप्रभारी ऋषिपाल सिंह को दी. यह जानकारी मिलते ही थानाप्रभारी भी घटनास्थल पर पहुंच गए.

टीम में महिला पुलिसकर्मी भी थीं. ऋषिपाल सिंह ने बारीकी से घटनास्थल का मुआयना किया. आसपास के लोगों से पूछताछ की. महिला पुलिस शबनम पर नजर रखे हुए थी. थानाप्रभारी को शबनम के बयानों में साजिश की बू आ रही थी.

पुलिस ने मौके की काररवाई निपटाने के बाद शव पोस्टमार्टम के लिए बदायूं जिला मुख्यालय भेज दिया. यह बात 4 जुलाई, 2022 की सुबह 10 बजे की है. शबनम लगातार बिजली का करंट लगने की रट लगाए हुए थी. वह पति के गम में विलाप कर रही थी. तीनों बच्चों का रोनाधोना देख मौके पर उपस्थित अन्य लोगों की भी आंखें नम हो गई थीं.

जांच में पुलिस को शबनम और सलीम के अवैध संबंधों की जानकारी मिल गई. पुलिस ने पोस्टमार्टम के लिए शव जाने के बाद शबनम को पूछताछ के लिए हिरासत में ले लिया.

थाने ले जा कर उस से पूछताछ की, तब वह पुलिस के सवालों में उलझ गई. सलीम के साथ संबंध के सवालों के आधेअधूरे जवाब ही दे पाई.

आखिर में वह टूट गई और उस ने पति की हत्या का जुर्म स्वीकार लिया. हत्या का जुर्म कुबूल करते हुए उस ने घटना की जो कहानी सुनाई, वह इस प्रकार है—

शबनम उत्तर प्रदेश के बदायूं जिले के थाना जरीफनगर के अंतर्गत गांव परड़वा की रहने वाली थी. करीब 10 साल पहले उस का निकाह इसलामनगर से 4 किलोमीटर दूर मऊकलां गांव के रहने वाले शरीफ के साथ हुआ था. शरीफ बढ़ई था जो दिल्ली में काम करता था.

ससुराल में शबनम के दिन हंसीखुशी से बीत रहे थे. वह एक के बाद एक 2 बेटों और एक बेटी की मां बन गई. 3 बच्चों का बाप बन जाने के बाद शरीफ पर पैसा कमाने की धुन सवार हो गई.

काम के कारण शरीफ का अधिकतर समय दिल्ली में ही बीतता था. वह 1-2 माह में ही घर आता था. शबनम में भी उस की रुचि कम होती जा रही थी. कभीकभार ही वह दिल्ली से घर आता था. शबनम जवान थी. पति की दूरी उसे बहुत अखरती थी. उस का दिन तो कट जाता था लेकिन रातें करवटें बदलते कटती थीं.

30 साल की शबनम अपनी वासना को काबू में नहीं रख पाई. पति का प्रेम नहीं मिला तो उस की नजदीकियां सलीम से बढ़ गईं, जो उस के घर के पास ही रहता था. सलीम के साथ अब उस की हर रात सुहागरात जैसी होने लगी थी.

जिंदगी में सलीम के आने से वह खुश रहने लगी, लेकिन ज्यादा दिनों तक उन दोनों के संबंध छिपे नहीं रह सके. उस के पति शरीफ को इस बारे में मालूम हो गया. यह बात शरीफ को बहुत बुरी लगी. तब गुस्से में वह बीवी की पिटाई करने लगा. ऐसे में शबनम की जिंदगी नरक हो गई. एक तरफ सैक्स की भूख थी, दूसरी तरफ पति का अत्याचार और उपेक्षा. इसी कारण शबनम ने एक दिन पति को ही रास्ते से हटाने की तरकीब निकाली.

इस काम में शबनम ने अपने प्रेमी सलीम की मदद ली. सलीम ने गूगल और यूट्यूब से वीडियो देख कर बिजली के करंट से शरीफ को मारने का उपाय सुझाया. उस ने बताया कि इस तरह से किसी की मौत होती है, तब उसे दुर्घटना समझा जाता है. पति को रास्ते से हटाने का शबनम को यह तरीका सही लगा. फिर उसे दिल्ली से घर बुला लिया. उस से प्रेम का नाटक किया.

पति के आने पर शबनम ने सेवइयां पकाईं. पति की सेवइयों में उस ने नशे की गोलियां पीस कर मिला दीं. ये गोलियां उसे सलीम ने ला कर दी थीं. सेवइयां खा कर शरीफ कुछ देर बाद लेट गया.

जैसे ही वह बेहोश हुआ, शबनम ने चैक करने के लिए हाथ पर एक डंडा मारा. डंडा लगने के बावजूद शरीफ ने कोई हरकत नहीं की, तब उस ने प्रेमी सलीम को फोन कर के बुलाया.

सलीम पीछे के दरवाजे से दीवार पर चढ़ कर घर में उतर आया. उस समय रात के लगभग 11 बजे थे. पहले तो शबनम और सलीम ने वासना का खेल खेला. फिर दोनों ने शरीफ को चारपाई से उतार कर इनवर्टर के पास जमीन पर लिटा दिया.

सलीम अपने साथ बिजली का तार भी लाया था. उसे शरीफ के शरीर पर लपेट कर करंट लगा दिया. उस की जीभ बाहर निकल आई. तब शबनम ने छुरी से उस की जीभ काटी और फिर उस का मुंह क्विक फिक्स से चिपका दिया.

बाद में डंडे मार कर चैक किया कि शरीफ की जान निकली है या नहीं. इसी बीच उस के छोटे बेटे की आंखें खुल गईं. सलीम को देखते ही वह बोल पड़ा, ‘‘चाचा कैसे आए?’’

सलीम ने कहा, ‘‘तेरे पापा को करंट लग गया है.’’

दरअसल, उस रात शबनम बच्चों को नशे की गोलियां देना भूल गई थी. तब तक आधी रात हो चुकी थी. काम हो जाने के बाद शबनम ने सलीम के लिए मुख्य दरवाजा खोल दिया और वह चला गया.

इस के बाद शबनम ने सब से पहले अपने जेवरात व नकदी की अलगअलग पोटली बना कर संदूक में ऊपर ही हिफाजत से रख लीं. उस के बाद सब से पहले अपनी एक ननद को डरतेडरते फोन किया. कुछ ही देर में सभी रिश्तेदार एकत्र हो गए.

शबनम ने अपने मायके भी फोन कर दिया. सुबह ही उस के मांपिता, चारों भाईबहन और 2 बहनोई आ गए. मौका लगते ही उस ने जेवर व नकदी दोनों पोटलियां पूरी बात समझा कर अपनी बहन को सौंप दीं.

शबनम से पूछताछ करने के बाद पुलिस ने शबनम के प्रेमी सलीम को भी हिरासत में ले लिया. उस ने भी अपना जुर्म कुबूल कर लिया. थानाप्रभारी ऋषिपाल सिंह ने घटना की पूरी जानकारी अपने उच्चाधिकारियों को भी दे दी.

एसपी (देहात) सिद्धार्थ वर्मा ने भी थाने आ कर दोनों से अलगअलग पूछताछ की. उन्होंने जिला मुख्यालय पर प्रैस कौन्फ्रैंस बुला कर पत्रकारों के सामने केस का खुलासा कर दिया.

पुलिस ने मृतक के भाई इरफान की तहरीर पर शबनम और सलीम के खिलाफ 4 जुलाई, 2022 को भादंवि की धारा 302 के तहत मुकदमा दर्ज कर लिया.

दोनों को 5 जुलाई, 2022 को अदालत में पेश किया गया, जहां से उन्हें जिला जेल भेज दिया गया.

—कथा पुलिस सूत्रों पर आधारित