प्यार में धोखा न सह सकी पूजा – भाग 3

पूजा सुहेल को जितना प्यार करती थी उस से कहीं ज्यादा उस पर विश्वास भी करती थी.

सुहेल ने रूम में पड़ी टेबल पर रखी मेनू कार्ड उठाया और फिर पूजा से बोला, ‘‘जो तुम्हें पसंद हो आर्डर करो. आज मैं अपनी पसंद का नहीं, बल्कि तुम्हारी पसंद का ही नाश्ता करूंगा.’’

उस दिन पूजा की पसंद का नाश्ता आया. नाश्ता करने के बाद पूजा ने चलने के लिए कहा. इस पर सुहेल ने कहा, ‘‘पूजा, अब इतनी जल्दी भी क्या है. पहली बार तो हम दोनों एकांत में मिले हैं. फिर एकांत पलों का क्यों न फायदा उठाया जाए.’’ कहते हुए पूजा को अपनी आगोश में समा लिया.

सुहेल की यह हरकत शायद पूजा को अच्छी नहीं लगी. उस ने सुहेल को अपने से अलग करते हुए कहा, ‘‘मुझे यह हरकतें पसंद नहीं. ठीक है, मैं तुम्हें प्यार करती हूं, लेकिन यह सब शादी से पहले मैं शायद बरदाश्त नहीं कर पाऊंगी.’’

सुहेल ने पूजा के साथ होटल में की मनमरजी

पूजा की ऐसी प्रतिक्रिया देख सुहेल ने कहा, ‘‘लगता है तुम मुझे दिल से प्यार नहीं करती. वरना ऐसा व्यवहार नहीं करती. पूजा मैं तुम्हें दिलोजान से प्यार करता हूं और एक पल भी तुम्हारे बिना नहीं रह सकता. अगर तुम्हें अभी भी ऐसा लगता है कि मैं तुम्हारे साथ प्यार का दिखावा कर रहा हूं तो तुम इसी वक्त जा सकती हो.’’ यह कहते ही सुहेल का चेहरा उतर गया.

उस वक्त पूजा उस के प्यार में इतना आगे बढ़ चुकी थी कि वह उस की जुदाई भी बरदाश्त नहीं कर सकती थी. उस के उतरे चेहरे को देखते ही पूजा ने सुहेल के सामने आत्मसमर्पण कर दिया. वह प्यार की भावनाओं में बह गई.

उस ने सामने खड़े सुहेल को अपनी बाहों में भर लिया. फिर पूजा ने कहा कि तुम मुझे कैसे भी प्यार करो, लेकिन एक लिमिट में ही रहना. मैं अभी तुम्हारे साथ वह सब कुछ नहीं कर सकती जो शादी के बाद होता है.

सुहेल पूजा की बात सुनता रहा. फिर बोला, ‘‘फिर हमारे होटल आने का क्या फायदा? यह बात मुझे मालूम नहीं थी कि तुम मेरे साथ केवल प्यार का दिखावा ही कर रही हो.’’

पूजा भले ही काफी समय से सुहेल के संपर्क में थी. लेकिन इस से पहले उस ने कभी भी ऐसा नहीं किया था. लेकिन उस दिन उसे सुहेल की जिद के आगे हार मानने पर मजबूर होना पड़ा. उस दिन होटल में सुहेल ने प्यार की सीमाएं लांघते हुए वह सब कुछ कर डाला, जिस की पूजा ने शादी से पहले करने की कल्पना भी नहीं की थी.

पूजा उस सब के लिए तैयार नहीं थी, लेकिन सुहेल ने अपनी जिद पकड़ कर उस के साथ बलात्कार ही कर डाला था. उस दिन सुहेल ने पूजा के साथ अपनी मनमानी कर डाली थी. लेकिन पूजा को उस दिन पहली बार एहसास हुआ कि सुहेल ने जो आज उस के साथ किया, वह अच्छा नहीं किया.

सुहेल पूजा से करने लगा किनारा

पूजा ने एक बार सुहेल के साथ अपने को समर्पित किया तो फिर दोनों के बीच सैक्स संबंध बनते रहे. पूजा को उम्मीद थी कि कुछ ही समय बाद वह सुहेल की संगिनी बनेगी, लेकिन हुआ इस का उलटा. कुछ समय बाद सुहेल का उस के प्रति व्यवहार बदलने लगा.

स्टेशनरी की दुकान पर आने के बाद वह पूजा से पहले की तरह बात नहीं करता था. दुकान के बाद वह अपने घर जाती तो वह उस की काल रिसीव नहीं करता था. पूजा झुंझला कर उस का कारण पूछती तो वह हर वक्त कोई न कोेई बहाना तैयार रखता था. दुकान पर आने के बाद भी वह अकसर अपने फोन पर व्यस्त रहता.

सुहेल के बदले व्यवहार को देखते ही उस का दिमाग घूमने लगा. फिर उसे शक हुआ कि कहीं ऐसा तो नहीं कि वह किसी और लड़की से बात करता हो. यह बात दिमाग में आते ही उस का ध्यान सुहेल के मोबाइल पर केंद्रित हो गया.

एक दिन की बात है सुहेल किसी काम से शहर गया तो भूल से उस का मोबाइल दुकान पर ही रह गया. उस के जाने के बाद ही उस के मोबाइल पर किसी की मिस्ड काल आई. उस के कुछ समय बाद फिर से उसी नंबर से मिस्ड काल आई.

लगातार कई मिस्ड काल आने के बाद पूजा ने उस नंबर को देखा तो वह किसी लड़की के नाम से सेव था. लड़की की मिस्ड काल आने के बाद पूजा समझ गई कि सुहेल उस के साथ प्यार का खेल खेल रहा था.

सुहेल के आते ही उस ने उस के मोबाइल पर किसी की मिस्ड काल आने वाली बात बताई तो वह उस पर ही आगबबूला हो गया, ‘‘तुम्हें मेरा फोन देखने की क्या जरूरत थी? मेरा दुकानदारी का काम है किसी को माल देना होता है और किसी से पेमेंट लेनी होती है. आज के बाद मेरे फोन को हाथ लगाने की जरूरत नहीं.’’

पूजा को हो गया छले जाने का अहसास

उस दिन खून के आंसू बहाती हुई पूजा घर पहुंची तो उस के भाई भरत ने उस से पूछा, ‘‘पूजा दीदी, क्या हुआ? आज लगता है कि तुम्हारी तबियत सही नहीं है.’’

‘‘नहीं, ऐसी कोई बात नहीं है भाई, थोड़ा थक गई हूं. इसीलिए तुम्हें ऐसा लग रहा है.’’

उस से अगले दिन पूजा दुकान पर भी नहीं गई. उसे उम्मीद थी कि सुहेल उसे जरूर फोन करेगा. लेकिन उस का कोई फोन नहीं आया तो उसे बहुत ही दुख हुआ. उसे लगा कि वह प्यार में छली गई.

उस के बाद भी उस का मन नहीं माना तो उस ने सुहेल को फोन किया. लेकिन उस ने उस की काल रिसीव नहीं की. उस ने कई बार उसे वाट्सऐप मैसेज किया, लेकिन उस ने उस का कोई जवाब नहीं दिया. उस के अगले दिन भी वह काम पर नहीं गई. उस दिन भी उसे सुहेल का फोन आने का इंतजार था.

दोपहर तक पूजा ने कई बार उस के नंबर पर काल की. लेकिन उस की तरफ से कोई उत्तर न मिलने पर वह दुकान पर पहुंची तो वह दुकान पर नहीं मिला. उस के बाद वह अपने घर आ गई.

तीसरे दिन पूजा अपने काम के वक्त पर ही उस की दुकान पर पहुंची तो उस वक्त वह दुकान पर बैठा किसी से वाट्सऐप पर चैटिंग कर रहा था. यह देख कर वह समझ गई कि उस ने किसी दूसरी लड़की को अपने प्यार में फंसा लिया है.

पूजा को देखते ही उस के चेहरे का रंग उड़ गया, ‘‘बोलो, तुम क्या कहना चाहती हो?’’

‘‘तुम ने मेरा फोन उठाना क्यों बंद कर दिया?’’ पूजा ने उस से पूछा.

‘‘देखो पूजा, तुम बुरा मत मानना. दरअसल, मेरे घर वालों को किसी ने तुम्हारे और मेरे संबंधों के बारे में बता दिया है, जिस के कारण घर में फसाद चल रहा है. इसलिए हम दोनों के लिए बेहतर यही होगा कि हम समय से पहले ही अलगअलग हो जाएं.’’

‘‘क्या मतलब? लेकिन तुम ने मेरे साथ शादी का जो वायदा किया था, वह सब तुम्हारा ढोंग दिखावा था.’’ पूजा सुहेल की बात सुन कर हतप्रभ रह गई.

‘‘पूजा, ऐसी कोई बात नहीं. लेकिन मैं अपने घर वालों के सामने बेबस हो गया हूं. इस में मैं कुछ नहीं कर सकता.’’

सुहेल ने उस का पहले से ही हिसाब बना रखा था. उस ने यह बात कहते हुए उस की पेमेंट भी देने की कोशिश की. लेकिन उस की बात सुनते ही पूजा पर जैसे बिजली गिर गई थी. उस की मीठीमीठी बातों में आ कर उस ने अपनी इज्जत भी तारतार कर डाली थी.

मोहब्बत पर भारी पड़ी सियासत – भाग 3

‘‘जाओ यहां से, मरने का शौक है तो सुसाइड का सामान भेज दूंगी. जो भी करना लाइव करना मैं अपने मायके से देखूंगी तुम्हारा तमाशा.’’ वंदना की बोली गई इस बात से विशाल भीतर से छिल गया. उस रोज चुपचाप घर आ गया, लेकिन दिमाग में खलबली मची रही.

खाना खाने के बाद विशाल अपने कमरे में आ गया था. रोज की तरह कंप्यूटर औन कर लिया था. कुछ समय काम करता रहा, लेकिन मन को एकाग्र नहीं कर पाया. फिर इंटरनेट पर देश दुनिया की खबरें पढ़ने लगा. उस में भी मन नहीं लग रहा था. इसी तरह आधी रात बीत चुकी थी.

अब नींद आने लगी थी. सोने की तैयारी करने लगा. कंप्यूटर शटडाउन करने के दौरान उस का ध्यान उस पौलीथिन में पर गया, जो वंदना का आदमी दे गया था.

उस ने पैकेट खोला. बड़ी मजबूती से पैक किया हुआ था. जैसे ही पैकेट का आखिरी आवरण हटा, वह चौंक गया. उस में रिवौल्वर था. वह भी गोलियों से भरा हुआ. रिवौल्वर देखते ही उस का माथा एक बार फिर भन्ना गया. उसे वंदना की वह बात याद आ गई. उस ने कहा था, ‘‘घर पर लाइसैंसी रिवौल्वर छोड़ कर आई हूं. दम है तो खुदकुशी कर के दिखाओ. मैं मां के घर टीवी के सामने बैठी हूं. सभी के साथ बैठ कर तुम्हारी मौत की खबर देखूंगी.’’

लोडेड रिवौल्वर देखने के बाद विशाल ने बेचैनी के साथ वंदना को कई काल किए. उस वक्त रात के 2 बज रहे थे. वंदना ने कोई काल रिसीव नहीं की. वह और भी बेचैन हो गया.

वह समझ नहीं पा रहा था कि क्या करे और क्या नहीं. रिवौल्वर को पौलीथिन में रख कर सोने की कोशिश करने लगा. मन में कई तरह के खयाल आते रहे. एक खयाल सुबहसुबह वंदना के घर जा कर रिवौल्वर लौटाने का था जबकि दूसरा खयाल उस के ताने देने और किसी और के साथ चल रहे अफेयर का था. इन्हीं विचारों में कब नींद आ गई, पता ही नहीं चला.

सुबह देर तक सोया रहा. कमरे का दरवाजा भिड़ा हुआ था. कमरे के बाहर चहलपहल शुरू हो चुकी थी. सभी अपनेअपने रोजमर्रा के काम से निपट कर पूजापाठ तक कर चुके थे. रसोई में सुबह का नाश्ता भी बनने लगा था.

मां ने वैशाली से कहा कि विशाल को जगा दे 10 बजने वाले हैं. इस पर वैशाली ने कहा जाग जाएंगे भैया. मां कुछ और बोलने ही वाली थी कि विशाल के कमरे से गोली चलने की आवाज आई.

सभी भागेभागे विशाल के कमरे में गए. उस ने कनपटी से रिवौल्वर सटा कर गोली मार ली थी. पिता अनूपम कुमार सिन्हा, मां शारदा सिन्हा व छोटी बहन वैशाली सिन्हा कमरे का दृश्य देख कर दहल गए. विशाल बैड पर खून से लथपथ पड़ा था. पास में एक रिवौल्वर पड़ी थी.

बुरी तरह से जख्मी विशाल को उस की छोटी बहन वैशाली तुरंत सगुना मोड़ स्थित एक प्राइवेट अस्पताल ले कर गई. उस की गंभीर हालत देख कर वहां के डाक्टर ने राजाबाजार स्थित इंदिरा गांधी आयुर्विज्ञान संस्थान जाने को कहा. वहां देर शाम तक विशाल का इलाज हुआ, लेकिन उसे बचाया नहीं जा सका.

इतने समय में पूरे शहर में पत्रकार विशाल द्वारा गोली मार कर आत्महत्या की खबर फैल गई. खगौल थाने की पुलिस ने मामले की रिपोर्ट दर्ज कर ली. थानाप्रभारी फूलदेव चौधरी ने घटनास्थल का मुआयना किया. विशाल के सभी घर वालों के बयान लिए. उन में बहन वैशाली के बयान को प्रमुखता से रिपोर्ट में दर्ज किया गया.

वैशाली ने बताया कि घटना के बाद उस ने जब अपना मोबाइल देखा तब उस में विशाल का मैसेज था. मैसेज में विशाल ने खुदकुशी करने की बात लिखी थी. वह एक तरह से उस का सुसाइड नोट था.

इस के अलावा थानाप्रभारी फूलदेव चौधरी ने विशाल के कमरे से लाइसैंसी रिवौल्वर और एक मोबाइल फोन अपने कब्जे में ले कर कमरे को सील कर दिया. इस से पहले फोरैंसिक जांच टीम ने नमूने इकट्ठा कर जांच के लिए प्रयोगशाला भेज दिए थे.

विशाल का सुसाइड नोट कंप्यूटर के टेबल पर मिला था. उसे ही विशाल ने वैशाली को वाट्सऐप किया था. इस में विशाल ने लिखा था, ‘मुझे सुसाइड के लिए वंदना और उस के बच्चों ने उकसाया है. वंदना ने इस के लिए मुझ से कहा था… दम है तो खुदकुशी कर के दिखाओ. मैं ने वंदना को कई फोन किए, लेकिन उस ने नहीं उठाया.’

विशाल ने सुसाइड नोट में यह भी लिखा कि वंदना और उस ने 2 अक्तूबर, 2020 को शादी कर ली थी.

वैशाली ने पुलिस को दिए बयान में साफतौर पर उस की खुदकुशी का आरोप वंदना पर लगाते हुए कहा कि वह भैया को मानसिक व शारीरिक रूप से प्रताडि़त कर रही थी. शादी को सामाजिक रूप से उजागर नहीं करना चाहती थी.

इस बयान और सुसाइड नोट के आधार पर 32 वर्षीय पत्रकार विशाल कुमार सिन्हा की मौत को ले कर 30 जुलाई, 2022 को खगौल थाने में 4 लोगों के खिलाफ नामजद मामला दर्ज कर लिया गया. इस में वंदना सिंह, उस के भाई मिथिलेश सिंह, अभिषेक सिंह और वंदना के नाबालिग बेटे को घटना का आरोपी बनाया गया. पुलिस इन के खिलाफ भादंवि की धारा 306, 34 आईपीसी, 25 (1-बी)/26/30 आर्म्स ऐक्ट के तहत मामला दर्ज किया.

पुलिस का मानना है कि जिस रिवौल्वर से विशाल ने खुद को गोली मारी थी, वह गैरलाइसेंसी है. घटना के बाद पुलिस ने विशाल के घर पर 9 एमएम का एक पिस्टल, जिस से विशाल ने खुद को गोली मारी थी, के साथ ही एक राइफल व 13 गोलियां भी बरामद कीं.

कथा लिखे जाने तक आरोपी पुलिस की गिरफ्त में नहीं आ सके थे. पुलिस उन की गिरफ्तारी के लए संभावित ठिकानों पर दबिशें डाल रही थी.     द्य

कहीं पे निगाहें, कही पे निशाना – भाग 3

दोनों के बीच प्यार की राह खुली तो दोनों एक साथ जीनेमरने की कसमें खाने लगे थे. फायजा को हसन के प्यार में किसी भी तरह से हल्कापन नजर नहीं आया था. उस के बाद दोनों के बीच विश्वास बढ़ा तो हसन भी उस पर पैसा लुटाने लगा था.

हसन ने कई बार फायजा को उस की पसंद का मोबाइल भी ले कर दिया, ताकि वह उस के संपर्क में बनी रहे. हसन कुछ ही समय में उस का इतना दीवाना बन बैठा कि उस ने एक दिन अपने सीने पर फायजा का नाम ही गुदवा लिया था.

फायजा भी उसे दिलोजान से प्यार करती थी. इंस्टाग्राम पर वह कभीकभार अपनी फोटो शेयर करती तो हमेशा ही उसे नाजिम नाम के युवक की तरफ से जरूर लाइक और कमेंट मिलता था. नाजिम से जुड़ते ही उस ने फेसबुक और इंस्टाग्राम पर उस की कुंडली खंगाली.

पता चला कि नाजिम लखनऊ शहर से था और एक प्राइवेट कंपनी में जौब करता था. नाजिम देखने में सुंदर था. यही कारण था कि कुछ ही दिनों में नाजिम और फायजा के बीच वाट्सऐप, फेसबुक और इंस्टाग्राम पर हायहैलो होने लगी. धीरेधीरे नाजिम के प्रति उस की उत्सुकता बढ़ी और बात दोस्ती तक जा पहुंची.

नाजिम से दोस्ती का हाथ बढ़ाते ही उस ने हसन से बात करनी कुछ कम कर दी थी. हसन जब कभी भी फायजा को फोन मिलाता तो उस का फोन व्यस्त मिलता था. उस के बाद वह कई बार उस से मिलने उस के घर पर भी गया. लेकिन उस ने देखा कि उस का व्यवहार उस के प्रति काफी बदल गया है.

खाली वक्त में फायजा सोशल मीडिया पर समय गुजारने लगी थी. कुछ ही समय में उस ने वाट्सऐप व फेसबुक पर ढेरों दोस्त बना लिए थे. वाट्सऐप व फेसबुक पर उसे बोरियत होने लगी तो उस ने इंस्टाग्राम पर भी अपना एकाउंट बना लिया था. उस के बाद वह इंस्टाग्राम पर भी अपने फोटो शेयर करने लगी.

हसन उस के गांव से काफी दूर का रहने वाला था, जिस के कारण वह उस पर हर वक्त तो नजर रख नहीं सकता था. फिर भी उस की नजर फायजा के फेसबुक और इंस्टाग्राम पर जरूर जमी रहती थी. जिस के कारण ही उसे उस की हकीकत का पता चल सका कि वह नाजिम की ओर फिसलती जा रही है.

उस के बदले हालात देखते ही हसन के तनबदन में आग लग गई. उसे सब से ज्यादा अफसोस इस बात का था कि उस ने फायजा पर विश्वास कर के उस पर अपनी गाढ़ी कमाई के 6-7 लाख रुपए बरबाद कर दिए थे. फिर भी उसे बेवफाई ही हाथ लगी थी.

पहली अगस्त, 2022 को हसन ने कई बार उस के मोबाइल पर फोन मिलाया, लेकिन हर बार उस का मोबाइल व्यस्त ही आया. जिस के कारण उस के दिमाग में एक शैतान जाग उठा.

उस ने उसी दिन तय कर लिया कि आज आर या पार. आज वह फायजा से फैसला कर के ही रहेगा कि उसे उस के साथ रहना है या फिर किसी और के साथ.

यही सोच कर वह शाम के कोई 5 बजे उस के घर पहुंच गया था. फायजा के घर पहुंचते ही उस ने प्रश्न किया, ‘‘फायजा, तुम्हारे दिल में क्या चल रहा है, आज मुझे साफसाफ बताओ? आज सुबह से ही मैं तुम्हें कई बार फोन मिला चुका हूं लेकिन तुम ने एक बार भी मेरा फोन रिसीव नहीं किया. मैं ने कई बार वाट्सऐप पर मैसेज भी भेजा, लेकिन तुम ने उस का भी कोई जवाब नहीं दिया. मुझे आज साफसाफ बताओ कि तुम मुझ से क्या चाहती हो?’’

इस से पहले कि फायजा उस के सवालों का कोई जबाव दे पाती, उस की अम्मी आ गई. आसिफा के आते ही हसन शांत हो गया. मां आते ही फायजा हसन को साथ ले कर दूसरी मंजिल पर चली गई. हसन का गुस्सा देख कर उस ने उसे समझाते हुए कहा, ‘‘हसन, जैसा तुम सोच रहे हो वैसा कुछ भी नहीं है. मैं कल भी तुम्हें प्यार करती थी और आज भी करती हूं. लेकिन किसी काम के चलते मैं तुम्हारा फोन रिसीव नहीं कर सकी. इस में परेशान होने वाली क्या बात है?’’

फायजा की बात सुनते ही हसन का गुस्सा शांत हो गया. उस के बाद उसे लगा कि कहीं न कहीं उस के मन का ही वहम है. उस के बाद दोनों छत से नीचे चले आए.

छत से आने के बाद दोनों ने एक साथ बैठ कर चाय पी. उसी समय उस ने फायजा को खर्च के लिए 3 हजार रुपए भी दिए. काफी देर हो जाने के कारण हसन अपने घर के लिए निकलने ही वाला था, तभी फायजा के मोबाइल पर किसी की काल आई. स्क्रीन पर उभर रहे नाम को देखते ही फायजा ने काल डिसकनेक्ट कर दी. उस के बाद वह उसे विदा करने के लिए घर के दरवाजे पर आ गई.

हसन अभी उस के घर से निकला भी नहीं था कि उसी समय फिर से फायजा के मोबाइल पर फिर से फोन आ गया. उस ने सोचा हसन चला गया होगा. यही सोच कर उस ने नाजिम को फोन मिला दिया. फिर वह उस से बात करने लगी.

हसन को इसी पल का इंतजार था. वह चुपके से दबे पांव गेट के पास आया और उस की बात सुनने लगा. उस की बातों से हसन को लगने लगा था कि वह वाकई उस के साथ प्यार का खेल खेल रही है. उस वक्त दोनों के बीच जो बातें उस ने सुनीं, उन्हें सुन कर उस के तनबदन में आग लग गई.

उस ने उसी समय अपने बैग में रखा चाकू निकाला और सामने फोन पर बात कर रही फायजा पर अनगिनत वार कर डाले. लहूलुहान होने के बावजूद भी फायजा चीखतीचिल्लाती अपने बचाव के लिए घर के अंदर भागी.

लेकिन कुछ ही पलों में वह बेहोश हो कर नीचे गिर पड़ी. उस की चीखपुकार सुन कर उस की अम्मी आसिफा नीचे आ गई थी. उस के बाद हसन आसिफा को धक्का मार कर वहां से भाग गया.

आरोपी हसन से पूछताछ करने के बाद पुलिस ने उसे आईपीसी की धारा 452, 302 के तहत गिरफ्तार कर कोर्ट में पेश किया, जहां से उसे जेल भेज दिया गया.  द्य

—कहानी में कुछ पात्रों के नाम काल्पनिक हैं.

प्रेमिका का छलिया प्रेमी से इंतकाम – भाग 3

पुलिस पूछताछ में प्यार, धोखा और प्रतिशोध की सनसनीखेज कहानी प्रकाश में आई.

बिहार के सीवान जिले में एक छोटा सा गांव है-बड़वा खुर्द. इसी गांव में भृगुनाथ सैनी अपने परिवार के साथ रहता था. उस के परिवार में पत्नी भूरी के अलावा एक बेटा और 2 बेटियां मनसा और लालसा थीं. भृगुनाथ सीधासादा किसान था. मेहनत कर वह अपने परिवार का भरणपोषण करता था.

भाईबहनों में लालसा सब से छोटी थी. घर के लोग उसे लाली कह कर पुकारते थे. लालसा उर्फ लाली बेहद खूबसूरत थी. उस की सुंदरता सब की निगाहों की केंद्र बन गई थी. गांव की जिस गली से वह गुजरती, लोग उसे देखते रह जाते. गांव के कई लड़के उस की सुंदरता का बखान करते थे. लेकिन लालसा उन को पास न फटकने देती थी.

लालसा उर्फ लाली पढ़ने में तेज थी. उस ने बसंतपुर के कालेज से हाईस्कूल की परीक्षा पास कर ली थी और इंटरमीडिएट की पढ़ाई में जुट गई थी. लालसा को मोबाइल का शौक था. वह फेसबुक व इंस्टाग्राम पर अपने वीडियो बना कर डालती थी, जिसे युवक खूब लाइक करते थे. लालसा दूसरों के वीडियो भी देखती और लाइक भी करती थी.

लालसा और देशदीपक की दोस्ती एकदूसरे के वीडियो देख कर ही हुई. दरअसल, देशदीपक को भी फेसबुक और इंस्टाग्राम पर अपने वीडियो डालने का शौक था. दोनों के बीच दोस्ती हुई तो दोनों ने एकदूसरे का मोबाइल नंबर ले लिया.

इस के बाद उन की मोबाइल फोन पर बात होने लगी. कभी लालसा देशदीपक को फोन करती तो कभी देशदीपक लालसा को. उन के बीच अब रसभरी बातें भी होने लगी थीं.

प्यारमोहब्बत का दायरा बढ़ा तो दोनों फेस टू फेस मिलने को लालायित हो उठे. देशदीपक ने एक रोज बातचीत के दौरान अपने पास बुलाने का आमंत्रण लालसा को दिया तो वह राजी हो गई.

देशदीपक ने तब उसे बताया कि मैं बिल्हौर (कानपुर) थाने में सिपाही पद पर तैनात हूं और कस्बा के ब्रह्मनगर मोहल्ले में रमेशचंद्र प्रजापति के मकान में किराए पर रहता हूं. तुम कानपुर आ जाओ, मैं तुम्हें कानपुर सेंट्रल स्टेशन पर मिल जाऊंगा.

‘‘लेकिन मैं तो सीवान (बिहार) की रहने वाली हूं. बसंतपुर थाने का बड़वा खुर्द मेरा गांव है. हम दोनों के बीच दूरी बहुत है. इतनी दूर आना संभव कैसे होगा?’’ लालसा ने मजबूरी जाहिर की.

‘‘जब दिल की दूरियां मिट गईं तो जमीनी दूरी कोई मायने नहीं रखती. तुम ट्रेन से कानपुर आ जाओ. मैं तुम्हारा बेसब्री से इंतजार कर रहा हूं,’’ देशदीपक ने लालसा को समझाया.

इस बातचीत के लगभग एक सप्ताह बाद एक रोज लालसा उर्फ लाली कानपुर आ गई. उस ने फोन पर आने की जानकारी दी तो देशदीपक मोटरसाइकिल से कानपुर सेंट्रल स्टेशन पहुंच गया.

लालसा प्रथम श्रेणी वेटिंग रूम में उस का इंतजार कर रही थी. देशदीपक वेटिंगरूम पहुंचा और खूबसूरत लालसा को देखा तो पहली ही नजर में वह उस के दिल में रचबस गई. लालसा भी हैंडसम देशदीपक को देख कर खुश हुई.

उस रोज देशदीपक लालसा को अपने किराए वाले रूम में ले गया. वहां दोनों के बीच खूब प्यारभरी बातें हुईं. देशदीपक ने लालसा से शादी करने का वादा किया और कभी न साथ छोड़ने की कसम खाई. रात में दोनों बंद कमरे में एक ही चारपाई पर लेटे तो वे अपने पर काबू न रख सके और दोनों के बीच शारीरिक रिश्ते बन गए. लालसा 3-4 दिन देशदीपक के साथ रही और दिनरात मस्ती में डूबी रही.

अवैध रिश्ता एक बार कायम हुआ तो समय के साथ बढ़ता ही गया. देशदीपक जब भी लालसा को बुलाता, वह दौड़ी चली आती. शारीरिक मिलन के दौरान लालसा शादी करने की बात कहती तो देशदीपक कोई न कोई बहाना बना देता.

इसी बीच देशदीपक ने मिलन के दौरान की अश्लील फिल्म मोबाइल फोन द्वारा बना ली, जिस की जानकारी लालसा को नहीं हुई. लालसा महीने में एक बार जरूर उस से मिलने बिल्हौर आती थी. फिर 2-3 दिन मौजमस्ती कर चली जाती थी.

लालसा को आनेजाने का खर्चा देशदीपक ही देता था. वह प्रतियोगी परीक्षा का बहाना बना कर घर से निकलती थी. जिस से घरवालों को शक नहीं होता था.

एक रोज शादी को ले कर लालसा और देशदीपक में तूतूमैंमैं हुई तो लालसा ने शारीरिक मिलन से इंकार कर दिया. तब देशदीपक ने उसे धमकाया कि उस के पास उस की अश्लील फिल्म है. मिलन से इंकार करोगी तो अश्लील फिल्म को सार्वजनिक कर देगा.

यह सुन कर लालसा घबरा गई और फिल्म डिलीट करने की मनुहार करने लगी. देशदीपक ने ब्लैकमेलिंग कर लालसा से शारीरिक भूख तो मिटा ली लेकिन अश्लील फिल्म डिलीट नहीं की. इस के बाद तो यह सिलसिला ही बन गया. ब्लैकमेलिंग कर वह लालसा को बुलाता और उस के साथ संबंध बनाता.

इधर 22 अप्रैल, 2022 को घरवालों ने देशदीपक की शादी दिव्या उर्फ अंजलि से कर दी. शादी की जानकारी लालसा को नहीं हुई. उसे तो तब पता चला, जब वह मई के पहले हफ्ते में देशदीपक से मिलने आई.

उसे देशदीपक तो नहीं मिला, लेकिन उस की शादी हो जाने की खबर मिल गई. शादी की जानकारी मिली तो उसे गहरी चोट पहुंची. वह समझ गई कि प्रेमी ने उस के साथ छल किया है. देशदीपक छलिया प्रेमी निकला.

गुस्से से भरी लालसा ने उसी समय देशदीपक से फोन पर बात की, ‘‘मैं ने सुना है कि तुम ने शादी कर ली है और नईनवेली दुलहन के साथ खुशियों में डूबे हो.’’

‘‘हां लालसा, तुम ने सच सुना है,’’ देशदीपक ने जवाब दिया.

‘‘लेकिन शादी का वादा तो तुम ने मुझ से किया था,’’ लालसा ने पूछा.

‘‘हां, किया था. लेकिन मजबूरी में शादी करनी पड़ी,’’ देशदीपक ने जवाब दिया.

‘‘कैसी मजबूरी?’’ लालसा ने पूछा.

‘‘घरवालों की. उन्होंने मेरी शादी कर दी. मैं उन्हें मना नहीं कर सका.’’

‘‘तुम ने मेरी जिंदगी बरबाद कर अच्छा नहीं किया,’’ लालसा गुस्से से उबल पड़ी.

 

दूसरे रोज लालसा अपने गांव लौट आई. अब वह प्यार के प्रतिशोध में रातदिन जलने लगी. आखिर उस ने निश्चय किया कि वह देशदीपक को मिटा कर ही चैन की सांस लेगी. पर इतना बड़ा काम वह अकेले नहीं कर सकती थी. अत: उस ने अभिषेक की मदद लेना उचित समझा.

जब प्यार में आया ट्विस्ट – भाग 2

थाने में जब उस से अरुण के बारे में पूछा गया तो वह साफ मुकर गया. उस ने अरुण को जाननेपहचानने से ही इंकार कर दिया. लेकिन जब उस पर सख्ती की गई तो वह टूट गया. उस के बाद अमित उर्फ गुड्डू ने जो कुछ पुलिस को बताया, उसे सुन कर पुलिस चकित रह गई.

अमित ने बताया कि अरुण कुमार अब इस दुनिया में नहीं है. संदीप व उस के भाई पवन ने 16 जुलाई, 2022 की शाम ही गोली मार कर उस की हत्या कर दी और शव को गंगरौली गांव के बाहर नदी किनारे खेत में दफन कर दिया था. किसी को शक न हो इसलिए खेत को ट्रैक्टर से जोत दिया था.

19 जुलाई, 2022 की सुबह 10 बजे एसएचओ अंजन कुमार सिंह पुलिस दल के साथ गंगरौली गांव स्थित उस खेत पर पहुंचे, जहां अरुण के शव को दफनाया गया था. अब तक युवक की हत्या कर शव को दफनाए जाने की खबर सपई व गंगरौली गांव में फैल गई थी, जिस से सैकड़ों लोग वहां आ गए थे. पुलिस की सूचना पर अरुण की पत्नी नीतू, भाई कुलदीप व पिता रामकुमार भी खेत पर मौजूद थे.

लगभग 12 बजे अमित कुमार उर्फ गुड्डू को पुलिस कस्टडी में खेत पर लाया गया. फिर उस की निशानदेही पर मिट्टी हटा कर शव को गड्ढे से बाहर निकाला गया. शव को देख कर कुलदीप व रामकुमार फूटफूट कर रोने लगे.

कुलदीप ने पुलिस को बताया कि शव उस के भाई अरुण कुमार का है. पति का शव देख कर नीतू भी दहाड़ मार कर रोने लगी. पुलिस ने किसी तरह उसे शव से दूर किया.

एसएचओ अंजन कुमार सिंह ने अरुण कुमार की हत्या किए जाने तथा शव को खेत से बरामद करने की जानकारी पुलिस अधिकारियों को दी तो एसीपी दिनेश कुमार शुक्ला, डीसीपी (क्राइम) सलमान ताज पाटिल तथा एसपी (कानपुर आउटर) तेजस्वरूप सिंह मौका ए वारदात आ गए.

पुलिस अधिकारियों ने बारीकी से शव का निरीक्षण किया. अरुण की उम्र 28 वर्ष के आसपास थी. उस की हत्या सीने पर गोली मार कर की गई थी. पुलिस अधिकारियों ने मृतक के घर वालों तथा हत्या के आरोप में पकड़े गए युवक अमित उर्फ गुड्डू से भी हत्या के संबंध में पूछताछ की.

शव निरीक्षण व पूछताछ के बाद पुलिस अधिकारियों ने एसएचओ अंजन कुमार सिंह को आदेश दिया कि वह शव को पोस्टमार्टम हाउस भेजें तथा रिपोर्ट दर्ज कर अन्य आरोपियों को गिरफ्तार करें. गिरफ्तारी में कोई प्रभावशाली व्यक्ति बाधा पहुंचाए तो उसे भी कानून की गिरफ्त में ले लें. किसी कीमत पर उसे बख्शा न जाए.

अधिकारियों का आदेश पाते ही अंजन कुमार सिंह ने शव को पोस्टमार्टम हेतु माती भेज दिया. इस के बाद थाने वापस आ कर मृतक की पत्नी नीतू की तहरीर पर आईपीसी की धारा 302/201 के तहत संदीप, अमित कुमार व पवन के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कर ली.

अमित की गिरफ्तारी के बाद पुलिस ने ताबड़तोड़ काररवाई कर संदीप को भी गिरफ्तार कर लिया. संदीप की निशानदेही पर पुलिस ने हत्या में प्रयुक्त तमंचा भी बरामद कर लिया. जिसे उस ने नदी किनारे झाडि़यों में छिपा दिया था. तीसरा आरोपी पवन पुलिस के हाथ नहीं आया.

चूंकि संदीप और अमित कुमार ने अरुण की हत्या का जुर्म कुबूल कर लिया था और संदीप ने हत्या में इस्तेमाल तमंचा भी बरामद करा दिया था, अत: एसएचओ अंजन कुमार सिंह ने उन दोनों को गिरफ्तार कर लिया. संदीप और अमित से की गई पूछताछ में त्रिकोण प्रेम की सनसनीखेज कहानी सामने आई.

उत्तर प्रदेश के कानपुर शहर से करीब 20 किलोमीटर दूर एक कस्बा है-चौबेपुर. यह कस्बा गल्ला और पशु व्यवसाय के लिए जाना जाता है. यहां का पशु मेला दूरदराज के गांवों तक मशहूर है.

इसी चौबेपुर कस्बे से 5 किलोमीटर दूर बेला-बिधुना रोड पर एक गांव बसा है पसेन. हरेभरे पेड़ों के बीच बसा यह गांव अपनी अलग ही छटा बिखेरता है. इसी पसेन गांव में रामकुमार कुरील अपने परिवार के साथ रहते थे.

उन के परिवार में पत्नी कमला के अलावा 2 बेटे कुलदीप तथा अरुण थे. रामकुमार कुरील अपने खेत में सब्जियां उगाते थे और कस्बे में ले जा कर बेचते थे. सब्जी के इस व्यवसाय में उन्हें जो आमदनी होती थी, उसी से अपने परिवार का भरणपोषण करते थे.

रामकुमार कुरील चाहते थे कि उन के दोनों बेटे पढ़लिख कर सरकारी नौकरी करें. लेकिन उन की यह तमन्ना पूरी न हो सकी. कारण उन के दोनों बेटों का मन पढ़ाई में नहीं लगा और वे 10वीं कक्षा भी पास नहीं कर पाए.

पढ़ाई बंद करने के बाद कुलदीप तो पिता के काम में हाथ बंटाने लगा, लेकिन अरुण का मन गांव में नहीं लगा. वह गांव छोड़ कर कानपुर शहर आ गया. यहां वह मेहनतमजदूरी करने लगा. एक रोज अरुण की मुलाकात राजमिस्त्री राम अचल से हुई. वह उसी की जाति का था सो दोनों में खूब पटने लगी. राम अचल ने उसे राजमिस्त्री का काम सिखाया और उसे मजदूर से राजमिस्त्री बना दिया.

अरुण तेजतर्रार नौजवान था. उस ने राजमिस्त्री के साथसाथ मकान बनाने के ठेके भी लेने लगा. उस काम में उसे अच्छी आमदनी होने लगी.

कुछ समय बाद अरुण ने अपने भाई कुलदीप को भी गांव से बुला लिया. अब दोनों भाई कानपुर शहर के पनकी कलां मोहल्ले में किराए पर रहने लगे. अरुण ने 8-10 लोगों का एक समूह बना लिया. वे सभी उस के साथ काम करते थे.

अरुण कुमार अच्छा कमाने लगा तो उस का रहनसहन भी बदल गया. अब वह ठाटबाट से रहता और पिता के हाथों पर भी चार पैसा रखता.

अरुण की रिश्तेदारी कानपुर देहात जिले के सपई गांव में थी. वहां उस की बुआ ब्याही थी. बुआ के घर अरुण का आनाजाना लगा रहता था. बुआ उस की खूब आवभगत करती थी, सो वह उन से प्रभावित था.

बुआ के घर आतेजाते एक रोज अरुण की मुलाकात सीमा से हुई. सीमा का घर उस की बुआ के घर से कुछ दूरी पर था. उस के पिता रजोल किसान थे. 3 भाईबहनों में सीमा सब से बड़ी थी.

डर के शिकंजे में : विनीता को क्यों देनी पड़ी जान – भाग 2

महाराष्ट्र की सामाजिक प्रथा के अनुसार लड़के वाले वर ढूंढने नहीं जाते, बल्कि वरपक्ष लड़की की तलाश करता है. ऐसे में जब वनिता के लिए ज्ञानेश्वर चव्हाण का रिश्ता आया तो वनिता के परिवार वालों ने उसे सहर्ष स्वीकार कर लिया था.

24 वर्षीय ज्ञानेश्वर चव्हाण सेना में था. उस की पोस्टिंग दिल्ली में थी. वह भी वनिता के गृह जनपद बीड़ का रहने वाला था. उस का परिवार संपन्न और संभ्रांत था. किसी चीज की कोई कमी नहीं थी. ज्ञानेश्वर के पिता गांव के बड़े किसान थे.

सब कुछ तय होने के बाद वनिता के परिवार वालों ने अपने पुश्तैनी गांव पहुंच कर वनिता और ज्ञानेश्वर की सगाई कर जल्द ही शादी भी कर दी.

शादी के बाद जब ज्ञानेश्वर अपनी ड्यूटी पर लौटा तो वह कुछ दिनों के लिए पत्नी वनिता को भी अपने साथ ले गया. शुरुआती दौर का उन का दांपत्य जीवन काफी सुखमय रहा. जिस तरह ज्ञानेश्वर वनिता जैसी सुंदर पत्नी पा कर खुश था, उसी तरह वनिता भी ज्ञानेश्वर से शादी कर के खुद को भाग्यशाली समझ रही थी.

ज्ञानेश्वर सुबह अपनी ड्यूटी पर चला जाता था और वनिता अपने घर के कामों में व्यस्त हो जाती थी. देखतेदेखते 2-3 साल कैसे निकल गए, पता ही नहीं चला. इस बीच वनिता एक बेटी और एक बेटे की मां बन गई.

समय अपनी गति से चल रहा था. दोनों बच्चे धीरेधीरे बड़े हो रहे थे. इस के पहले कि वे अपने बच्चों का दाखिला स्कूल में करवा पाते, अचानक ज्ञानेश्वर का ट्रांसफर हो गया. ज्ञानेश्वर के ट्रांसफर की वजह से वनिता को दिल्ली से मुंबई आना पड़ा.

वनिता मुंबई आ कर अपने भाई और मां के साथ रहने लगी थी. उस ने वहीं पास के एक अच्छे स्कूल में बच्चों का दाखिला करा दिया. समयसमय पर ज्ञानेश्वर वनिता और बच्चों से मिलने मुंबई आता रहता था.

सब कुछ ठीकठाक चल रहा था. दोनों अपनी जिंदगी में खुश थे कि अचानक उन की जिंदगी में एक ऐसा तूफान आया जिस ने वनिता और ज्ञानेश्वर के जीवन को तहसनहस कर दिया. वनिता की जिंदगी में रावसाहेब दुसिंग नाम के एक व्यक्ति की एंट्री हो गई. रावसाहेब से वनिता की मुलाकात सन 2010 में हुई थी.

45-46 साल का रावसाहेब दुसिंग आशिकमिजाज रंगीन तबीयत का आदमी था. वह अपनी पत्नी और 3 बच्चों के साथ मुंबई के सायन कोलीवाड़ा के प्रतीक्षानगर में रहता था. उस का पुरानी कारों को खरीदनेबेचने का कारोबार था. इस धंधे में उसे अच्छी कमाई होती थी.

अपराधी प्रवृत्ति के रावसाहेब दुसिंग का रहनसहन उस की सारी बुराइयों को दबा कर रखता था. वह ब्रांडेड कपड़ों के साथ हाथ में सोने का मोटा ब्रेसलेट, गले में वजनदार चेन पहने रहता था.

वनिता और रावसाहेब की मुलाकात वनिता की एक सहेली महानंदा के साथ राशन की दुकान पर हुई थी. उसी समय दोनों ने एकदूसरे को अपने मोबाइल नंबर दे दिए थे. रावसाहेब तो वैसे भी आशिकमिजाज था. पहली मुलाकात में ही उस ने वनिता को अपने दिल में बसा लिया था, इसलिए उस ने नजदीकियां बढ़ाने के लिए वनिता से फोन पर बात करनी शुरू कर दी.

दोनों तरफ से बातों का सिलसिला शुरू हुआ तो दायरा बढ़ता गया. फोन पर दोनों हंसीमजाक भी करने लगे.

एक दिन रावसाहेब ने उस से कहा, ‘‘वनिताजी, अगर आप को सेकेंडहैंड कार की जरूरत हो तो मुझे बता देना, मेरे पास बढि़या पुरानी कारें आती हैं. मैं आप को सस्ते दाम में दे दूंगा.’’

‘‘जी नहीं, मैं सेकेंडहैंड चीजों को यूज नहीं करती. मुझे नई चीजों में मजा आता है.’’ वनिता ने भी उसी के अंदाज में जवाब दिया.

वनिता की बातों के पीछे छिपे व्यंग्य को रावसाहेब अच्छी तरह समझ गया था. वह बोला, ‘‘अरे मैडम, एक बार सेकेंडहैंड को यूज कर के तो देखो. मैं वादा करता हूं कि आप नई चीजों को भूल जाओगी.’’

रावसाहेब की बात ने वनिता के मन को रोमांचित कर दिया. उस ने कहा, ‘‘अगर ऐसी बात है तो मैं उस का ट्रायल लूंगी. बोलो, कब आना है ट्रायल लेने.’’

‘‘जब आप चाहो,’’ रावसाहेब ने हंस कर कहा और मिलने की जगह भी बता दी.

तय समय के अनुसार रावसाहेब अपनी कार ले कर वनिता से मिला. वनिता के साथ कार से वह इधरउधर की सैर करता रहा. हंसीमजाक के साथ उन के 2-3 घंटे कब गुजर गए, पता नहीं चला. फिर वह वनिता को अपने एक दोस्त के खाली पड़े फ्लैट में ले कर गया.

फ्लैट के बैडरूम का माहौल देख कर वनिता को अपनी सुहागरात याद आ गई. वहां के माहौल में वह अपने आप को संभाल नहीं पाई. वैसे भी वह कई महीनों से पति के मिलन से दूर थी.

रावसाहेब तो वैसे ही मंझा हुआ खिलाड़ी था. वनिता उस से इतनी प्रभावित हो चुकी थी कि उस ने उस समय रावसाहेब की किसी बात को नहीं टाला. इस तरह उस दिन दोनों ने अपनी हसरतें पूरी कर लीं.

उन के बीच एक बार जब मर्यादा की सीमा टूटी तो वह टूटती ही चली गई. इस के बाद तो जब भी मौका मिलता था, दोनों एकांत में मिल लेते थे.

पति ज्ञानेश्वर चव्हाण की अनुपस्थिति में वनिता और रावसाहेब के बीच यह खेल काफी दिनों तक चलता रहा. लेकिन ऐसी बातें ज्यादा दिनों तक छिपी नहीं रहतीं. एक दिन किसी तरह ज्ञानेश्वर चव्हाण को यह जानकारी मिली तो उस ने रावसाहेब को आड़े हाथों लिया और उसे वनिता से दूर रहने की चेतावनी दी.

लेकिन रावसाहेब तो अपराधी प्रवृत्ति का था, इसलिए वह ज्ञानेश्वर की धमकी से नहीं डरा बल्कि ज्ञानेश्वर चव्हाण से उलझ बैठा.

जिस का नतीजा यह हुआ कि मामला थाने तक पहुंच गया. पुलिस ने दोनों को समझाया और चेतावनी दे कर छोड़ दिया.

इस के बाद भी उन का झगड़ा खत्म नहीं हुआ. कई बार लड़ाईझगड़ा होने के बाद भी रावसाहेब ने वनिता का पीछा नहीं छोड़ा, जबकि पति के समझाने के बाद वनिता ने प्रेमी से दूरी बना ली थी. वह उस से मिलना तो दूर फोन पर बात तक नहीं करती थी. पर रावसाहेब उसे छोड़ना नहीं चाहता था.

अफसाना एक दीपा का – भाग 2

दीपा ने किशोरावस्था में कदम रखा ही था कि उस के दीवाने भंवरों की तरह ज्ञान टेकरी और जेल रोड पर मंडराने लगे थे. खूबसूरत होने के साथसाथ दीपा अल्हड़ भी थे, इसलिए मांबाप और चिंतित रहने लगे थे. दीपा के 2 छोटे भाई भी घर में थे. लड़की मांबाप की इज्जत समझी जाती है. इस से पहले कि बेटी की वजह से मांबाप की इज्जत पर कोई आंच आए, मांबाप उस की शादी के लिए लड़का ढूंढने लगे.

अभी दीपा की उम्र महज 14 साल थी. मांबाप ने उस की शादी के लिए देवास जिले के गांव जलालखेड़ी में एक लड़का देख लिया, जिस का नाम राकेश वर्मा था. बात पक्की हो जाने पर उन्होंने राकेश वर्मा से दीपा की शादी कर दी. वह दीपा से 5 साल बड़ा था.

शादी के बाद राकेश की रातें गुलजार हो उठीं. वह दिनरात पत्नी के खिलते यौवन में डूबा रहता था. आमतौर पर भले ही शादी कम उम्र में हो जाए, फिर भी युवक जिम्मेदारी उठानी सीख जाते हैं. लेकिन राकेश के साथ उलटा हुआ. वह दिनरात बिस्तर पर पड़ा दीपा के जिस्म से खेला करता था.

शुरूशुरू में तो राकेश के घर वालों ने यह सोच कर कुछ नहीं कहा कि अभी बच्चा है, जब घरगृहस्थी के माने समझने लगेगा तो रास्ते पर आ जाएगा. लेकिन जब 5-6 साल गुजर गए और राकेश ने खुद कमानेखाने की कोई पहल नहीं की तो घर वाले उसे टोकने लगे.

सुधरने के बजाय राकेश और बिगड़ता चला गया और जल्द ही उसे शराब की लत लग गई. वह रोज शराब पीने लगा था. घर वालों ने उसे घर से तो नहीं निकाला लेकिन घर में ही रखते हुए उस का बहिष्कार सा कर दिया.

चारों तरफ से हैरानपरेशान राकेश अपनी नाकामी और निकम्मेपन की खीझ दीपा पर उतारने लगा. दीपा के जिस संगमरमरी जिस्म को सहलातेचूमते वह कभी थकता नहीं था, उस पर अब राकेश की पिटाई के निशान बनने लगे. दीपा भी कम हैरानपरेशान नहीं थी, पर उस के पास रोज की इस मारपिटाई से बचने का एक ही रास्ता था मायका, क्योंकि राकेश अब उस पर चरित्रहीनता का आरोप भी लगाने लगा था.

10 साल यानी 24 साल की उम्र तक दीपा पति के पास रही, फिर एक दिन अपने मायके आ गई. जिस से दीपा के मांबाप के सिर पर बोझ और बढ़ गया था. लेकिन थोड़ा सुकून उन्हें उस वक्त मिला, जब दीपा ने फ्रीगंज में साड़ी पर फाल लगाने और पीको करने की दुकान खोल ली.

दुकान चल निकली तो दीपा खुद के खर्चे उठाने लगी. पर जैसे ही लोगों को यह पता चला कि वह पति को छोड़ कर मायके में रह रही है तो फिर उस के दीवाने दुकान और घर के आसपास मंडराने लगे.

दिलीप बन गया पार्टटाइम पति

शुरुआत में उस ने कोशिश की कि वह किसी के चक्कर में न पड़े, लेकिन शरीर की मांग के आगे वह बेबस थी. कई लोगों ने प्रत्यक्षअप्रत्यक्ष तरीके से उसे प्रपोज किया, लेकिन अब तक दीपा काफी सयानी और समझदार हो चुकी थी.

दीपा को एक ऐसे पुरुष की जरूरत थी, जो शारीरिक के साथसाथ भावनात्मक और आर्थिक सहारा और सुरक्षा भी दे सके. आसपास मंडराते लोगों को देख वह समझ जाती थी कि उन का मकसद क्या है.

इसी ऊहापोह में उलझी दीपा की मुलाकात एक दिन दिलीप शर्मा से हुई तो वह उसे हर तरह उपयुक्त लगा. शादीशुदा दिलीप दीपा की खूबसूरती और अदाओं पर मर मिटा था. उस की पत्नी गांव में रहती थी, इसलिए उज्जैन में किसी महिला से मिलनेजुलने पर उसे कोई अड़ंगा या पाबंदी नहीं थी.

दोनों की मेलमुलाकातें बड़े सधे ढंग से आगे बढ़ीं. दोनों ने एकदूसरे की जरूरतों को समझा और दोनों के बीच मौखिक अनुबंध यह हुआ कि दिलीप दीपा का पूरा खर्च उठाएगा, उसे अलग घर दिलाएगा और ज्यादा से ज्यादा वक्त भी देगा. एवज में दीपा उस के लिए हर तरह से समर्पित रहेगी.

दिलीप ने दीपा को किराए के मकान में शिफ्ट करा कर घरगृहस्थी का सारा सामान जुटा दिया और पार्टटाइम पति की हैसियत से रहने भी लगा. दिलीप के पास पैसों की कमी नहीं थी. वह उन लोगों में से था, जो एक पत्नी गांव में और एक शहर में रखना अफोर्ड कर सकते हैं. दीपा के साथ दूसरा फायदा उसे यह था कि उस से उस की पारिवारिक और सामाजिक जिंदगी और प्रतिष्ठा पर कोई आंच नहीं आ रही थी.

लिवइन के ये 8 साल अच्छे से कटे, लेकिन जैसा कि आमतौर पर ऐसे मामलों में होता है, इन दोनों के साथ भी हुआ. दिलीप का दिल दीपा से भरने लगा तो उस ने उस के पास आनाजाना कम कर दिया. पर अपने इस वादे पर वह कायम रहा कि जिंदगी भर दीपा का खर्च उठाएगा.

दीपा समझ रही थी कि प्रेमी का मन उस से भर चला है लेकिन अभी पूरी तरह उचटा नहीं है. पर दिक्क्त यह थी कि 14 साल की उम्र से ही सैक्स की आदी हो जाने के कारण वह अकसर रोजाना ही सैक्स चाहती थी, जो दिलीप के लिए संभव नहीं था.

इसी साल जनवरी में दिलीप ने उसे माधवनगर इलाके के वल्लभनगर में किराए के मकान में शिफ्ट कर दिया. मकान मालिक लक्ष्मणदास पमनानी को उस ने यही बताया कि दीपा उस की पत्नी है और वह खेतीबाड़ी के सिलसिले में गांव जाता रहता है. पर पड़ोसियों का माथा उस वक्त ठनका, जब कई अंजान युवक दीपा के पास दिलीप की गैरमौजूदगी में आनेजाने लगे. आजकल बिना वजह कोई किसी के फटे में टांग नहीं अड़ाना चाहता, इसलिए लोगों ने दीपा से कहा कुछ नहीं, बस देखते रहते.

दिलीप को इस बात की भनक थी, इसलिए उस ने दीपा को समझाया कि वह फालतू लोगों का अपने यहां आनाजाना बंद करे. लेकिन दीपा नहीं मानी. दिलीप ने भी उस से कोई जबरदस्ती नहीं की. दिलीप को अब दीपा से ज्यादा अपनी इज्जत की चिंता होने लगी थी.

ये सारी बातें जब धर्मेंद्र को पता चलीं तो वह बहुत ज्यादा दिनों तक नहीं तिलमिलाया. दिलीप दीपा का पति नहीं है, यह जान कर उसे खुशी ही हुई. हैरतअंगेज तरीके से जल्द ही धर्मेंद्र और दिलीप में दोस्ती हो गई और दोनों दीपा के साथ बैठ कर दारूचिकन की दावत उड़ाने लगे.

अब दीपा 2 आशिकों की हो गई थी, जो उसे ले कर बजाय आपस में झगड़ने के उसे साझा कर रहे थे. पर वह यह नहीं समझ पा रही थी कि दोनों उस के शरीर और जवानी को भोग रहे हैं. दोनों में से कोई उसे प्यार नहीं करता. धर्मेंद्र और दिलीप को सहूलियत यह थी कि दीपा अब किसी एक पर भार नहीं थी.

चाहत का वो अंधेरा मोड़ – भाग 2

इश्क और मुश्क कभी छिपाए नहीं रखे जा सकते. यही उन दोनों प्रेमियों के साथ हुआ था. किसी ने गोपी के पति धोलू तक बात पहुंचा दी थी. शांतिप्रिय व खुद में मस्त रहने वाले धोलू के लिए यह खबर विचलित करने वाली साबित हुई.

कोई राह नहीं सूझी तो उस ने अपने बड़े साले इंद्रपाल, जो दबंग प्रवृत्ति का था, के साथ यह बात साझा कर ली. अगले दिन इंद्रपाल माणकथेड़ी पहुंच गया.

उस ने अपनी बहन गोपी को समझाया और राजेंद्र की दुकान पर पहुंच गया. उस ने राजेंद्र को ओछी हरकत से बाज आने व भविष्य में देख लेने की धमकी दे डाली. वहां से लौटते समय इंद्रपाल गोपी का मोबाइल फोन भी छीन ले गया.

दोनों प्रेमियों के बीच कई महीने तक बात होनी तो दूर दर्शन तक दुर्लभ हो गए. होली के दिन रंग में सराबोर हुआ राजेंद्र गोपी तक एक मोबाइल फोन पहुंचाने में सफल हो गया था. अब सावधानी के साथ दोनों प्रेमी 3-4 दिनों के अंतराल से बात करने लगे थे. लेकिन यह बात किसी तरह इंद्रपाल को पता चल गई.

24 जून को इंद्रपाल के ममेरे भाई की शादी थी. बारात में इंद्रपाल, राधेश्याम, मांगीलाल, सोनू आदि दोस्तों की ड्राइवरों के साथ लड़ाई हो गई. उक्त सभी पुलिस से बचने के लिए अपने जीजा धोलू के पास जा पहुंचे. वहां पर बहन और राजेंद्र की हकीकत जान कर इंद्रपाल का खून खौल उठा. पर धोलू ने कोई लफड़ा नहीं करने की हिदायत दे डाली थी.

2 महीने गुजर चुके थे. राजेंद्र की गुस्ताखी उसे अशांत किए हुए थी. पर उसे कोई राह नहीं सूझ रही थी. उस की योजना थी कि राजेंद्र को किसी अज्ञात स्थान पर बुला कर उस की जबरदस्त पिटाई की जाए, पर राजेंद्र को बुलाने की कोई तरकीब नहीं सूझ रही थी.

अगले ही पल उस की आंखें चमक उठीं. संगरिया में उस की एक महिला दोस्त संजू धानक रहती थी. संजू इंद्रपाल के लिए शरीर तो क्या जान देने को भी तैयार रहती थी. उस ने उसी समय संजू को राजेंद्र का मोबाइल नंबर दे कर राजेंद्र को प्रेम जाल में फांसने को कह दिया.

इंद्रपाल ने संजू को यह भी समझा दिया कि वह राजेंद्र को यह विश्वास दिला दे कि गोपी उस की पक्की सहेली है और वह उसी के कहने पर खुद को राजेंद्र को सौंप रही है.

संजू ने उसी समय राजेंद्र को फोन किया. राजेंद्र ने काल रिसीव कर कहा, ‘‘हैलो, कौन बोल रहे हैं? किस से बात करनी है?’’

सामने नारी कंठ की मीठी व आकर्षक आवाज में जवाब मिला, ‘‘प्यारे जीजाजी, घबराओ मत. हम भी आप को चाहने वाले हैं.’’ राजेंद्र की घबराहट भांप कर उस ने खुलासा कर दिया, ‘‘देख यार जीजा, मैं संजू और गोपी 2 बदन एक जान हैं. उसी ने आप का नंबर मुझे दिया है. वह कई दिन आप से संपर्क नहीं कर पाएगी,’’ संजू ने कहा.

‘‘संजू, मैं तो डर गया था. गोपी मेरा कितना खयाल रखती है.’’

‘‘देखो जीजाजी, जब भी आप को महिला बदन की तलब लगे, मुझे घंटी मार देना. लेकिन याद रखना, मैं 10-12 दिन में एक बार ही मिल सकूंगी. मेरी मजबूरी है.’’ संजू ने राजेंद्र को फांसने के लिए पासा फेंक दिया था.

प्रणय निवेदन का पासा फेंकने में संजू वास्तव में गोल्ड मैडलिस्ट थी. हकीकत यह थी कि विवाहिता संजू जो एक बच्चे की मां थी, पति से खटपट होने के कारण 2 साल से संगरिया स्थित पीहर में रह रही थी. गुजरबसर के लिए वह एक कपड़े की दुकान पर सेल्सगर्ल के रूप में काम कर रही थी.

इंद्रपाल के प्लान के मुताबिक, संजू अपने फोन में रिकौर्ड हर बातचीत इंद्रपाल तक पहुंचा देती थी. अब राजेंद्र संजू की सैक्सी बातों से प्रभावित हो कर उस का गुलाम बन चुका था.

इंद्रपाल का प्लान अब सही राह पकड़ चुका था. वह अपनी बहन गोपी का बचाव करने के लिए संजू को मोहरे के रूप में इस्तेमाल कर रहा था. 16 जुलाई, 2022 को इंद्रपाल ने अपने दोस्तों राधेश्याम जीतराम, सोनू, मांगीलाल व एक नाबालिग प्रेम को अपनी ढाणी में बुला लिया.

इंद्रपाल ने संजू से कह दिया कि वह राजेंद्र को किसी तरह 17 जुलाई को रावतसर स्थित खेतरपाल मंदिर बुला ले. संजू ने ऐसा ही किया. उस ने 17 जुलाई की सुबह ही राजेंद्र को फोन कर कहा, ‘‘यार, आज मिलन का मूड है. मैं फ्री हूं. दोपहर तक रावतसर के खेतरपाल मंदिर पहुंच जाओ. वहां होटल में मौजमस्ती के लिए कमरा आराम से मिल जाता है.’’

हालांकि उस दिन राजेंद्र की शाम के समय एक समारोह की बुकिंग थी पर संजू से मिलने की चाहत में उस ने हां कर दी.