UP Crime News : ज्योति के प्यार में छिपा मौत का खेल

UP Crime News : उत्तर प्रदेश के फिरोजाबाद जिले के गांव दिखतौली के पास प्रतापपुर रोड के किनारे खेतों में ग्रामीण अपने पशुओं को चरा रहे थे. दोपहर एक बजे का समय था. तभी एक ग्रामीण की नजर सड़क किनारे खंदी में पेड़ के नीचे पड़ी बोरी पर गई. पास जा कर देखा तो बोरी से खून रिस रहा था. उस ने आवाज दे कर अन्य साथियों को वहां बुला लिया. ग्रामीणों को यह समझते देर नहीं लगी कि बोरे में लाश है. इसी बीच किसी ने थाना शिकोहाबाद में फोन कर के पुलिस को सूचना दे दी.

सूचना पा कर कुछ ही देर में एसएचओ प्रदीप कुमार कुछ पुलिसकर्मियों को ले कर घटनास्थल पर पहुंच गए. उन्होंने घटनास्थल का निरीक्षण किया. शव को 2 बोरियों में भर कर यहां डाला गया था. एक बोरी सिर की ओर तथा दूसरी पैरों की ओर से पहनाई गई थी, जबकि शरीर का बीच का हिस्सा एक बैडशीट में लपेटा गया था. पुलिस ने दोनों बोरियों को हटा कर लाश को बाहर निकाला. वह लाश 32-33 साल के किसी हट्टेकट्टे युवक की थी. मृतक काले रंग की शर्ट व सफेद पैंट पहने हुए था. पहनावे से युवक किसी अच्छे परिवार का लग रहा था. उस के सिर पर गहरी चोट थी, जिस से खून रिस रहा था. ऐसा लग रहा था कि युवक की हत्या कुछ घंटे पहले ही की गई थी.

इस के अलावा भी शरीर पर चोटों के निशान दिखाई दे रहे थे. शव की बाईं कलाई में घड़ी बंधी थी, वहीं कलाई पर अंगरेजी में बबलू सिंह गुदा हुआ था. जबकि दाएं हाथ पर ‘ॐ’ गुदा था. साथ ही मौली व काला धागा बंधा हुआ था. मृतक के गले में काले मोतियों की माला थी. सूचना मिलते ही सीओ देवेंद्र सिंह भी घटनास्थल पर पहुंच गए. बोरी में लाश मिलने की खबर सुन कर वहां हड़कंप मच गया. बड़ी संख्या में ग्रामीण जमा हो गए. पुलिस ने उन से लाश की शिनाख्त कराने का प्रयास किया, लेकिन वहां मौजूद कोई भी व्यक्ति लाश को पहचान नहीं सका.

इस से पुलिस ने यही अनुमान लगाया कि युवक शायद कहीं बाहर का रहने वाला है और उस की हत्या कहीं और कर लाश किसी वाहन से रात के समय यहां ला कर फेंक दी गई है. अब सवाल यह था कि कत्ल का क्या मकसद हो सकता है? पुलिस ने मौके की काररवाई निपटाने के बाद लाश को मोर्चरी भेज दिया. यह घटना 14 नवंबर, 2022 की है.

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इस के बाद पुलिस ने यह पता करना शुरू कर दिया कि आसपास के थानों में इस उम्र का कोई युवक गायब तो नहीं है. लेकिन हाल के दिनों में इस तरह का कोई युवक लापता नहीं हुआ था. न ही जिले के किसी थाने में ऐसी कोई गुमशुदगी ही दर्ज थी.

हत्या के इस मामले की जांच का जिम्मा खुद एसएचओ प्रदीप कुमार ने अपने हाथ में लिया. युवक की हत्या की जानकारी मिलने पर एसएसपी आशीष तिवारी व एसपी (ग्रामीण) कुंवर रणविजय सिंह ने पूरे घटनाक्रम का ब्यौरा लिया. सीओ देवेंद्र सिंह के निर्देशन में मृतक के फोटो को सोशल मीडिया पर शिनाख्त के लिए शेयर किया गया. मृतक की फोटो को दूसरे जिले के थानों में भी भेजा गया.

पोस्टमार्टम रिपोर्ट में युवक की मौत का कारण सिर पर गंभीर चोटें आना व घावों से अत्यधिक खून बहना बताया गया. 72 घंटे बाद भी शव की शिनाख्त न होने पर शव का अंतिम संस्कार कर दिया गया. एसपी (ग्रामीण) कुंवर रणविजय सिंह ने युवक की शिनाख्त व हत्यारों की गिरफ्तारी के लिए पुलिस की एक टीम तैयार की. इसी बीच 19 नवंबर को थाना शिकोहाबाद में कुछ लोग पहुंचे और बताया कि सोशल मीडिया से उन्हें जानकारी मिली है कि 14 नवंबर को एक युवक का बोरी में बंद शव मिला है, जिस की कलाई पर बबलू सिंह गुदा हुआ था.

पुलिस ने वहां आए हुए लोगों को बरामद अज्ञात लाश के कपड़े, घड़ी आदि सामान दिखाया तो अभय सिंह नाम के युवक ने बताया कि यह सब तो उस के भाई बबलू के हैं. लाश की शिनाख्त हो जाने के बाद एसएचओ ने अभय सिंह निवासी मरैहिया, थाना लोरिया, जिला पश्चिमी चंपारण (बिहार) की तहरीर पर अज्ञात के खिलाफ भादंवि की धारा 302/201 के तहत रिपोर्ट दर्ज कर ली. रिपोर्ट दर्ज होने के बाद एसएसपी आशीष तिवारी ने एसएचओ प्रदीप कुमार को शीघ्र ही घटना के खुलासे का निर्देश दिया. इस के बाद पुलिस ने मृतक के मोबाइल नंबर की काल डिटेल्स निकलवाई. इस से पता चला कि बबलू का मोबाइल 13 नवंबर को शिकोहाबाद के मैनपुरी चौराहा स्थित मोहल्ला ओमनगर में आ कर बंद हुआ था.

मृतक के घर वालों से पूछताछ में पता चला कि बबलू वेल्डिंग का काम करता था. काम के सिलसिले में कभी शिकोहाबाद तो कभी इटावा भी आताजाता रहता था. यहां रहने वाली एक युवती से भी फोन पर बात करता था. काल डिटेल्स से यह भी पता चला कि बबलू की उस युवती से अकसर काफी देर तक बातें होती थीं. इस से पुलिस ने अंदाजा लगाया कि घटना  के पीछे इस युवती का ही हाथ हो सकता है. इसी आधार पर 19 नवंबर, 2022 को ही पुलिस टीम ने ओमनगर निवासी ज्योति नाम की उस युवती के यहां दबिश दी.

पुलिस टीम में एसएचओ प्रदीप कुमार, एसआई पुष्पेंद्र कुमार, अंकित मलिक, विक्रांत तोमर आदि शामिल थे. घर पर पता चला कि उस की शादी शिकोहाबाद के ही मोहल्ला कटरा मीरा निवासी बौबी के साथ 6 महीने पहले हुई थी. वह इस समय अपनी ससुराल में है. तब पुलिस ने ज्योति के भाई शेखर उर्फ बृजेश को हिरासत में ले लिया. पुलिस ने उस से बबलू और ज्योति के संबंधों के बारे में पूछताछ की तो वह अनभिज्ञता जाहिर करता रहा. तब पुलिस ने 25 वर्षीय ज्योति को उस की ससुराल से हिरासत में ले लिया.

पूछताछ करने पर ज्योति ने शुरू में नानुकुर की, लेकिन जब पुलिस ने काल डिटेल दिखाई तो वह टूट गई और बबलू की हत्या का जुर्म कुबूल कर लिया. इस हत्याकांड में ज्योति, पति बौबी व देवर राजकुमार के शामिल होने की बात भी बताई. इस पर पुलिस ने आननफानन में मोहल्ला कटरा मीरा में दबिश दे कर ज्योति, बौबी व राजकुमार को भी गिरफ्तार कर लिया. गिरफ्तार आरोपियों की निशानदेही पर पुलिस ने हत्या में प्रयुक्त लोहे की सरिया, पाइप, लाश को फेंकने के लिए प्रयोग में लाया गया टाटा मैजिक लोडर वाहन, बबलू का आधार कार्ड, मोबाइल फोन आदि बरामद किया.

एसपी (ग्रामीण) कुंवर रणविजय सिंह ने प्रैस कौन्फ्रैंस में बबलू की हत्या का परदाफाश करते हुए बताया कि मृतक बबलू का अपनी प्रेमिका ज्योति से पिछले 2 साल से प्रेम प्रसंग चल रहा था. बबलू शादी करने पर अड़ गया था. जबकि ज्योति की शादी 6 माह पहले ही हो चुकी थी. ज्योति ने अपने परिजनों के साथ षडयंत्र रच कर अपने प्यार की हत्या कर दी. बबलू की हत्या के पीछे जो कहानी निकली, वह चौंकाने वाली थी. फिरोजाबाद जिले के कस्बा शिकोहाबाद के मोहल्ला ओमनगर निवासी 25 वर्षीय ज्योति का कासगंज में मोहन (परिवर्तित नाम) नाम का रिश्तेदार रहता है. यह रिश्तेदार भिवाड़ी (राजस्थान) में पश्चिमी चंपारण निवासी बबलू के साथ काम करता था. हमउम्र मोहन ने बबलू को ज्योति का नंबर दे दिया. ज्योति का नंबर मिलने के बाद एक दिन बबलू ने उस नंबर को मिलाया.

दूसरी ओर से किसी युवती की आवाज आई. बबलू ने पूछा, ‘‘क्या आप ज्योति बोल रही हैं?’’

एक अनजान नंबर से आए फोन पर अपना नाम सुन कर ज्योति ने पूछा, ‘‘आप कौन बोल रहे हैं? आप को मेरा नंबर किस ने दिया?’’

इस पर बबलू ने कहा, ‘‘आप के रिश्तेदार मोहन ने ये नंबर दिया है. मोहन मेरे साथ ही काम करता है.’’

इस के बाद ज्योति और बबलू की बातें  होने लगीं. बातचीत के दौरान ज्योति ने बबलू को बताया कि वह फेसबुक पर भी है. मोबाइल पर होने वाली लंबी बातचीत धीरेधीरे दोस्ती और फिर प्यार में बदल गई. ज्योति फोन कर के बबलू को शिकोहाबाद बुला लेती. फिर दोनों की मुलाकातें भी होने लगीं. ये मुलाकातें नगर के एक गेस्टहाउस में होतीं. प्रेम प्रसंग के बीच अवैध संबंध भी बन गए. बबलू ने ज्योति की कुछ अश्लील वीडियो भी बना ली थीं. बबलू तो ज्योति की सुंदरता पर रीझ गया था. ऊपर से ज्योति की प्यार भरी मीठीमीठी बातें उसे बहुत अच्छी लगती थीं. ज्योति ने अपने रूप जाल में बबलू को इस तरह उलझाया कि वह पूरी तरह उस का दीवाना हो गया था. बबलू उस की हर फरमाइश पूरी करता.

बबलू हर हाल में ज्योति को पाना चाहता था. वह उस से जब भी शादी करने को कहता, ज्योति कोई न कोई बहाना बना कर टाल देती. क्योंकि उसे तो बबलू के रूप में एटीएम मिल गया था. ज्योति बबलू से रुपए भी ऐंठती रहती थी. उस ने अपने प्यार के जाल में बबलू को जिस तरह फंसाया था, वह चौंकाने वाला था. अपने प्रेमी को अपने मोहपाश में फंसाने के बाद उस की फरमाइशें पूरी हो रही थीं. बबलू शिकोहाबाद आता और ज्योति पर जम कर खर्च करता, उस के साथ मौजमस्ती कर 1-2 दिन में वापस चला जाता.

सब कुछ ठीकठाक चल रहा था. इसी बीच ज्योति के घरवालों ने उस की शादी शिकोहाबाद के कटरा मीरा में रहने वाले बौबी के साथ कर दी. शादी हो जाने के बाद भी बबलू और ज्योति के बीच प्रेम प्रसंग चलता रहा. ज्योति ने अपनी शादीशुदा जिंदगी को बबलू से छिपाए रखा. बबलू ज्योति से शादी करने को ले कर उस के पीछे हाथ धो कर पड़ गया था. जब ज्योति ने शादी से मना किया तो बबलू ने उसे ब्लैकमेल की धमकी दी. उस ने कहा, उस के साथ जो फोटो हैं उन्हें सोशल मीडिया पर डाल कर उसे बदनाम कर देगा.

बबलू को ज्योति के शादीशुदा होने के बारे में नहीं पता था. इसलिए वह ज्योति पर शादी का दबाव बनाने लगा था.  इस पर ज्योति ने बबलू से फोन पर बात करनी भी कम कर दी थी. शादी के लिए दबाव बनाने से प्रेमिका ज्योति परेशान हो गई. अब वह अपने किए पर पछता रही थी. उस के सामने अब प्रेमी बबलू से छुटकारा पाने का कोई रास्ता ही नहीं था. एक तरफ कुंआ तो दूसरी ओर खाई थी.

पोल खुलने के डर से ज्योति बुरी तरह डर गई थी. अंत में हिम्मत कर के ज्योति ने अपने पति बौबी को सच्चाई बताने का फैसला लिया. उस ने पति को बताया कि शादी से पहले उस की दोस्ती भिवाड़ी के एक युवक बबलू से हो गई थी. वह अब उस पर शादी के लिए दबाव बना रहा है. उस के पास उस के कुछ फोटो व वीडियो भी हैं, जिन्हें वह सोशल मीडिया पर डालने की धमकी दे रहा है. इस पर बौबी गुस्से से उबल पड़ा.

फिर एक षडयंत्र रचा गया. 13 नवंबर, 2022 को बबलू को ज्योति ने फोन किया और  झांसा दे कर शिकोहाबाद स्थित अपने घर पर बुला लिया. शाम तक बबलू ज्योति के घर ओमनगर आ गया. रात में उस की जम कर खातिरदारी की गई. खाना खाने के बाद डबलबैड पर ज्योति और बबलू बैठ कर प्यार भरी बातें करने लगे. ज्योति के आगोश में प्यार की बातों के दौरान ही थके हुए बबलू को नींद आ गई. रात गहराने लगी थी. ज्योति का पति और देवर ज्योति के सिगनल यानी फोन का इंतजार कर रहे थे. सिगनल मिलते ही वे आ गए. उस समय डबलबैड पर बबलू गहरी नींद में सो रहा था.

बबलू के सोते ही ज्योति, उस के पति बौबी, भाई शेखर उर्फ ब्रजेश ने बबलू के सिर पर लोहे के पाइप व सरिए से प्रहार करने शुरू कर दिए. अचानक हुए हमले से बबलू चीख भी नहीं सका. सिर पर हुए ताबड़तोड़ प्रहार से वह वहीं ढेर हो गया. खून से बैड की चादर लाल हो गई थी. हत्यारों ने बबलू की हत्या  करने के बाद उस की लाश को डबलबैड की चादर में ही लपेट दी. इस के बाद सिर और पैर की ओर से एकएक बोरी पहना दी गई.

देवर राजकुमार लाश को ठिकाने लगाने के लिए अपनी टाटा मैजिक लोडर गाड़ी लिए घर के बाहर तैयार खड़ा था. शव को लोडर में डाल कर बौबी, शेखर व राजकुमार दिखतौली रोड पहुंचे. उस समय रात के 2 बज रहे थे. पूरी सड़क सुनसान पड़ी थी. लोडर को सड़क किनारे एक स्थान पर रोक कर तीनों ने लाश को लोडर से उतारा और सड़क किनारे खंदी में फेंक दी. शव को ठिकाने लगाने के बाद तीनों वापस आ गए. ज्योति ने इस बीच घर में शव से टपका खून साफ कर दिया था. ज्योति अपने पति और देवर के साथ कटरा मीरा स्थित अपनी ससुराल चली गई. बबलू को ठिकाने लगाने के बाद सभी ने राहत की सांस ली. ज्योति को लगा कि अब रास्ते का कांटा निकल गया है. लेकिन यह उस की भूल थी. पुलिस ने चारों हत्यारोपियों को न्यायालय में पेश कर जेल भेज दिया.

दो नावों में पैर रख कर सवारी करना कितना खतरनाक होता है, यदि ज्योति ने शादी हो जाने के बाद इस बात को जान लिया होता तो उस की जिंदगी की नाव नहीं डगमगाती. लेकिन उस ने प्रेमी से सच्चाई छिपा कर अपने ही पैरों पर कुल्हाड़ी मार ली थी. ज्योति की जिंदगी के जब खुशहाली के दिन शुरू हुए ही थे, तब अफेयर और फरेब के चलते अपने साथ 3 अन्य को भी जेल की सलाखों के पीछे भिजवा दिया. UP Crime News

—कथा पुलिस सूत्रों पर आधारित

Love Crime : शराब में जहर मिलाकर बेटी के आशिक का किया कत्ल

Love Crime :  उत्तर प्रदेश के उन्नाव जनपद के औरास थाना क्षेत्र के टिकरा सामद गांव के रहने वाले परमेश्वर कनौजिया का नाम खुशहाल लोगों में गिना जाता था. इस के साथ ही उन की गांव में अच्छी धाक भी थी. इस का एक कारण यह भी था कि उन की पत्नी उर्मिला देवी टिकरा सामद गांव की पूर्व प्रधान रह चुकी थी.

जब तक परमेश्वर कनौजिया के परिवार में ग्राम प्रधानी रही, तब तक वह गांव वालों के हर सुखदुख में शुमार होते रहे लेकिन अगले चुनाव में हाथ से ग्राम प्रधानी चली जाने के बाद वह अपने 3 बेटों जिस में बड़े रिंकू, मझले जितेंद्र व 18 वर्षीय छोटे बेटे धर्मेंद्र के साथ मुंबई के बांद्रा रेलवे स्टेशन के पास रेलवे कालोनी में लौंड्री का काम करने लगे थे. यहां रहते हुए उन का छोटा बेटा धर्मेंद्र काम के साथ पढ़ाई भी करता रहा और साल 2020 में उस ने 12वीं की परीक्षा भी दी थी.

लेकिन साल 2020 लगते ही कोरोना के चलते देश के हालात खराब होने लगे तो सरकार ने देश भर में लौकडाउन लगाने का फैसला कर लिया तो लोग शहरों से वापस अपने गांव में पलायन करने लगे. चूंकि मुंबई में लौकडाउन होने से सारे कामधंधे बंद होने लगे थे, ऐसे में परमेश्वर कनौजिया को भी लौंड्री का बिजनैस अस्थाई रूप से बंद करना पड़ा. शुरू में परमेश्वर कनौजिया को लगा कि सरकार कुछ दिनों बाद लौकडाउन खोल देगी. लेकिन बाद में जब उन्हें लौकडाउन में ढील के कोई आसार नहीं दिखे तो उन्होंने अप्रैल 2020 में अपने तीनों बेटों के साथ गांव वापस आने का फैसला कर लिया और किसी तरह लौकडाउन के समय में ही मुंबई से गांव लौट आए.

मुंबई से गांव वापस आने के बाद लौकडाउन के चलते कोई कामधंधा करना संभव नहीं था. इसलिए परमेश्वर कनौजिया अपनी पत्नी और बच्चों के साथ पूरा दिन घर पर ही बिता रहे थे. लेकिन उन का छोटा बेटा धर्मेंद्र कनौजिया अकसर ही गांव में टहलने निकल जाता था. उधर जैसेजैसे देश में कोरोना के केस कम हुए तो सरकार ने भी लौकडाउन में छूट देनी शुरू कर दी थी, जिस से धीरेधीरे कामकाज भी पटरी पर आना शुरू हो चुका था. साल 2020 का जुलाई आतेआते तमाम लोग जो मुंबई, दिल्ली जैसे शहरों से वापस गांव आ गए थे, वे फिर से कामकाज की तलाश में वापस जाना शुरू कर चुके थे.

लेकिन परमेश्वर कनौजिया अभी भी गांव से वापस मुंबई नहीं गए थे. ऐसे में वह अपने बेटों के साथ घर के कामकाज निबटाते रहे.

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रोज की तरह परमेश्वर कनौजिया का छोटा बेटा धर्मेंद्र कनौजिया दोपहर का खाना खा कर 19 अगस्त, 2020 को भी घर से टहलने निकला था, लेकिन हर रोज की तरह वह जब शाम तक वापस न लौटा तो परिजन धर्मेंद्र के मोबाइल पर काल लगाने लगे. लेकिन उस का फोन भी स्विच्ड औफ बताया जा रहा था.

ऐसे में परमेश्वर कनौजिया अपने परिजनों के साथ धर्मेंद्र की तलाश में घर से निकल कर आसपास पता करने लगे, लेकिन धर्मेंद्र के बारे में किसी से कुछ भी पता नहीं चला. परमेश्वर कनौजिया को धर्मेंद्र के गायब होने का कोई कारण भी समझ नहीं आ रहा था, क्योंकि वह और उन के परिवार के सभी सदस्य धर्मेंद्र से बेहद प्यार करते थे, इसलिए कभी उसे डांटफटकार भी नहीं पड़ती थी.

वह ज्यादा परेशान हो उठे थे. वहीं उन की किसी से दुश्मनी भी नहीं थी जिस से लगे कि किसी ने दुश्मनी निकालने के लिए उन के बेटे को गायब कर दिया हो. रही बात कहीं जाने की तो वह हाल में ही लौकडाउन के चलते मुंबई से आया था. वह अपने घर के लोगों के साथ धर्मेंद्र के दोस्तों और परिचितों के यहां जब देर रात तक उसे खोजते रहे और उस का कोई पता नहीं चला तो उन्होंने पुलिस को बेटे की गुमशुदगी की सूचना देने का निर्णय लिया और 20 अगस्त की सुबह थाना औरास पहुंचे.

थानाप्रभारी राजबहादुर को घटना की जानकारी दे कर उस की गुमशुदगी दर्ज करने की मांग की. लेकिन थानाप्रभारी ने जांच की बात कह कर उन्हें लौटा दिया. थाने से पुलिस से अपेक्षित सहयोग न मिलने से निराश हो कर धर्मेंद्र के पिता गांव वापस लौट आए और फिर से आसपास तलाश करने लगे. परमेश्वर कनौजिया अपने दोनों बेटों के साथ धर्मेंद्र की तलाश कर ही रहे थे कि उन्हें अपने घर से करीब 300 मीटर दूर धर्मेंद्र की चप्पलें पड़ी हुई मिल गईं. धर्मेंद्र के चप्पल मिलने के बाद उस के घर वालों के मन में तमाम तरह की आशंकाएं जन्म लेने लगी थीं. घर वाले किसी अनहोनी के अंदेशे के साथ चप्पल मिलने वाली जगह से आगे बढ़े तो 200 मीटर दूर गिरिजाशंकर द्विवेदी के आम के बाग के पास से निकले सकरैला नाले में धर्मेंद्र का औंधे मुंह शव पड़ा देखा, जहां धर्मेंद्र का पूरा शरीर पानी में और सिर बाहर था. इसे देख कर सभी बदहवास हो रोने लगे.

इस के बाद रोतेबिलखते धर्मेंद्र  के पिता परमेश्वर कनौजिया ने औरास थानाप्रभारी राजबहादुर को घटना की सूचना दी. धर्मेंद्र की हत्या की सूचना पा कर थानाप्रभारी राजबहादुर ने इस की  सूचना अपने उच्चाधिकारियों को दी और वह अपनी टीम के साथ घटनास्थल पर पहुंच गए.

घटनास्थल पर पहुंचने के बाद थानाप्रभारी ने ग्रामीणों की मदद से धर्मेंद्र कनौजिया के शव को बाहर निकलवाया. उधर घटना की सूचना पा कर बांगरमऊ सीओ गौरव त्रिपाठी भी मौके पर पहुंच चुके थे. नाले से धर्मेंद्र की लाश बाहर निकालने के बाद पिता परमेश्वर व मां उर्मिला देवी का कहना था कि उन के बेटे की हत्या की गई है और शरीर में मारपीट जैसे चोट के निशान भी हैं क्योंकि धर्मेंद्र के चेहरे पर सूजन, पैंट की जेब में मिले मोबाइल में खून के निशान थे. जिस के आधार पर वे बारबार बेटे की हत्या किए जाने की बात दोहरा रहे थे.

वहीं दूसरी ओर पुलिस का कहना था कि मृतक धर्मेंद्र की लाश पर किसी तरह के चोट का निशान नहीं दिखाई पड़ रहा था. लिहाजा पोस्टमार्टम से पहले कहना मुश्किल था कि उस की हत्या की गई है. मौके की काररवाई निपटाने के बाद पुलिस ने लाश पोस्टमार्टम के लिए भिजवा दी. पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने तक पुलिस ने जांच शुरू कर दी थी और मृतक के पिता परमेश्वर कनौजिया से किसी से दुश्मनी होने की बात पूछी तो उन्होंने बताया कि उन का या उन के परिवार के किसी भी सदस्य का किसी से भी झगड़ा या दुश्मनी नहीं थी.

इधर पुलिस धर्मेंद्र की मौत के कारणों को ले कर छानबीन कर ही रही थी कि अगले दिन पोस्टमार्टम की रिपोर्ट पुलिस को मिल गई. लेकिन पोस्टमार्टम रिपोर्ट में धर्मेंद्र की मौत का कारण स्पष्ट नहीं था. इस वजह से धर्मेंद्र का विसरा सुरक्षित कर जांच के लिए भेज दिया गया. जिस के कुछ दिनों बाद ही विसरा की जांच रिपोर्ट भी आ गई. विसरा रिपोर्ट में धर्मेंद्र की मौत जहर से होनी बताई गई थी. विसरा रिपोर्ट मिलने के बाद यह तो साफ हो गया था कि धर्मेंद्र की हत्या की गई है. लेकिन पुलिस को हत्या का कोई कारण नजर नहीं आ रहा था जिस के आधार पर हत्यारों तक पहुंचा जा सके. इसलिए पुलिस के सामने हत्या के कारण और हत्यारों तक पहुंचना चुनौती बना हुआ था.

ऐसे में पुलिस ने सर्विलांस की मदद से धर्मेंद्र के हत्यारों तक पहुचने का प्रयास शुरू कर दिया और मृतक के मोबाइल नंबर की पिछले एक सप्ताह की काल डिटेल्स खंगालनी शुरू कर दी. धर्मेंद्र की हत्या के लगभग एक महीना बीतने को था, लेकिन पुलिस अभी भी हत्या के कारणों का पता लगाने व हत्यारों तक पहुंचने में नाकाम रही थी. धर्मेंद्र की काल डिटेल्स के आधार पर भी हत्यारों तक पहुंचना पुलिस को कठिन लग रहा था.

इधर पुलिस धर्मेंद्र की हत्या के मामले की जांच कर ही रही थी, इसी दौरान परमेश्वर कनौजिया को पता चला कि धर्मेंद्र के गायब होने वाले दिन आखिरी बार उसे गांव के ही रहने वाले लक्ष्मण, राहुल कनौजिया, संजीत कुमार, उस के भाई रंजीत कनौजिया के साथ देखा गया था. यह जानकारी मिलते ही परमेश्वर कनौजिया ने 17 सितंबर, 2020 को औरास थाने पहुंच कर संजीत व रंजीत, राहुल और लक्ष्मण के खिलाफ बेटे की हत्या में शामिल होने की नामजद रिपोर्ट दर्ज करा दी. जब पुलिस आरोपियों के घर पहुंची तो सभी हत्यारोपी घर से फरार मिले. इस के आधार पर आरोपियों पर पुलिस का शक और भी पुख्ता हो गया. पुलिस ने आरोपियों की धरपकड़ के लिए काफी प्रयास किए, लेकिन आरोपी हाथ नहीं आए.

धर्मेंद्र की हत्या के कई माह बीत चुके थे और पुलिस लगातार आरोपियों के घर और संभावित ठिकानों पर दबिश दे रही थी लेकिन इस मामले में पुलिस के हाथ अब भी खाली थे. इसे ले कर मृतक के घर वाले आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए कई बार एसपी सुरेशराव आनंद कुलकर्णी के साथसाथ उच्चाधिकारियों से गुहार भी लगा चुके थे. इसी बीच थानाप्रभारी राजबहादुर की जगह औरास थाने की कमान तेजतर्रार हरिप्रसाद अहिरवार को सौंप दी गई थी. चूंकि इस मामले का परदाफाश न होना पुलिस के लिए सिरदर्द बना हुआ था. ऐसे में एसपी सुरेशराव आनंद कुलकर्णी और एएसपी शशिशेखर ने खुद इस मामले पर नजर रखते हुए थानाप्रभारी हरिप्रसाद अहिरवार को केस का जल्द से जल्द खुलासा करने का निर्देश दिया.

अब नए थानाप्रभारी हरिप्रसाद अहिरवार  ने नए सिरे से आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए जाल बिछाना शुरू किया. इसी बीच उन्हें 20 मई, 2021 को मुखबिरों से खबर मिली कि लक्ष्मण, राहुल, संजीत रंजीत उन्नाव की मड़ैचा तिराहे के पास हैं और कहीं भागने की फिराक में हैं. इस सूचना के बाद थानाप्रभारी हरिप्रसाद अहिरवार ने हैडकांस्टेबल दिलीप सिंह, कांस्टेबल प्रशांत, हर्षदीप व आशीष के साथ जाल बिछा कर मड़ैचा तिराहे से चारों को गिरफ्तार कर लिया. पुलिस आरोपियों को पकड़ कर थाने ले आई और धर्मेंद्र कनौजिया की हत्या के बारे में पूछताछ करने लगी. लेकिन चारों ही धर्मेंद्र की हत्या में शामिल होने की बात से नकारते रहे.

जब पुलिस को लगा कि आरोपी आसानी से हत्या की बात कुबूलने वाले नहीं हैं तो कड़ाई से पूछताछ की गई. इस पूछताछ में चारों टूट गए और उन्होंने धर्मेंद्र की हत्या की बात कुबूल ली. आरोपी लक्ष्मण ने बताया कि उन लोगों ने वारदात वाले दिन राहुल, संजीत व रंजीत की मदद से धर्मेंद्र को गांव के बगीचे में बुला कर मछली के साथ शराब पार्टी रखी थी. जहां पहले से ही धर्मेंद्र की हत्या करने के लिए जहर खरीद कर रख लिया था. आरोपियों ने धर्मेंद्र को जम कर शराब पिलाई और जब वह नशे में धुत हो गया तो मौका देख राहुल ने उस के शराब के गिलास में जहर मिला दिया. जहर मिली शराब पीने के बाद धर्मेंद्र अचेत हो कर गिर पड़ा. इस के बाद धर्मेंद्र की मौत का इंतजार करते रहे और जब उस की मौत हो गई तो धर्मेंद्र की लाश सकरैला नाले में फेंक दी.

पुलिस ने जब आरोपियों से हत्या का कारण पूछा तो आरोपी लक्ष्मण ने बताया कि धर्मेंद्र कनौजिया उस की बेटी से प्रेम करता था और वह अकसर उस के घर उस की बेटी से मिलने आया करता था. लक्ष्मण ने बताया कि वह अकसर दोनों को समझाता रहता था. लेकिन धर्मेंद्र के सिर पर प्रेम का मानो भूत सवार था. धर्मेंद्र लगातार उस की बेटी के साथ नजदीकियां बढ़ाता जा रहा था. इसी बीच लक्ष्मण के घर पर गांव के ही राहुल का आनाजाना शुरू हो गया, उस ने भी जब पहली बार लक्ष्मण की बेटी को देखा तो उस की खूबसूरती और चढ़ती जवानी को देख उस पर लट्टू हो गया.

अब राहुल लक्ष्मण के बेटी को देखने अकसर बहाने से उस के घर आने लगा था. वह जब भी आता तो लक्ष्मण की बेटी को देख अपनी सुधबुध खो बैठता था. उस के मन में लक्ष्मण की बेटी को ले कर कब प्यार की कोपलें पनपने लगीं, उसे पता ही नहीं चला. लेकिन उस के सामने एक बड़ी समस्या धर्मेंद्र था. क्योंकि वह भी उसी के चक्कर में अकसर लक्ष्मण के घर आया करता था. इधर लगातार राहुल के घर आने से लक्ष्मण की बेटी का प्यार धर्मेंद्र से कम होता गया और वह राहुल की तरफ आकर्षित होने लगी. अब वह धर्मेंद्र की जगह राहुल से प्यार करने लगी और दोनों में काफी नजदीकियां भी बढ़ चुकी थीं. इस वजह से अब वह धर्मेंद्र से दूरी बनाने लगी थी. लेकिन धर्मेंद्र दूरी नहीं बनाना चाहता था क्योंकि वह उस से हद से ज्यादा प्यार करने लगा था.

लक्ष्मण ने बताया कि उस की बेटी राहुल से प्यार के चलते धर्मेंद्र से पीछा छुड़ाना चाहती थी, लेकिन धर्मेंद्र उस से दूर जाने के बजाय और करीब आने की कोशिश करने लगा था. कई बार मना करने के बावजूद भी धर्मेंद्र का रोजाना घर आना उसे बरदाश्त नहीं था. इसलिए उस ने धर्मेंद्र को रास्ते से हटाने का खौफनाक निर्णय ले लिया. इस के लिए लक्ष्मण ने बेटी के दूसरे प्रेमी राहुल के साथ ही संजीत कुमार, उस के भाई रंजीत को भी धर्मेंद्र की हत्या की साजिश में शामिल कर लिया. फिर तय प्लान के अनुसार धर्मेंद्र को विश्वास में ले कर उसे शराब और मछली की पार्टी के लिए गांव से सटे बगीचे में बुलाया, जहां 19 अगस्त, 2020 को पार्टी के दौरान उस के शराब के पैग में जहर मिला कर उस की हत्या कर दी और लाश पास के नाले में फेंक दी.

पुलिस ने धर्मेंद्र की हत्या के नौवें महीने में साजिश का परदाफाश कर दिया और आरोपियों के बयान दर्ज कर धारा 302, 201, 34 भादंवि के तहत न्यायलय में पेश कर जेल भेज दिया है. कथा लिखे जाने तक आरोपी जेल में ही थे. Love Crime

Love Story : रहस्यमयी प्यार की अनोखी दास्तान

Love Story : सुबह के ठीक 9 बजे थे. तारीख थी 7 मई, 2022. मध्य प्रदेश के जिला मुरैना थाना सिहोनिया के थानाप्रभारी पवन सिंह भदौरिया अपने कक्ष में आ कर बैठे ही थे कि तभी एक अधेड़ महिला उन की टेबल के सामने आ कर खड़ी हो गई. उस के साथ एक छोटी लड़की भी थी, वह उस का हाथ पकड़े  थी.

महिला परेशान और कमजोर दिख रही थी. उसे भदौरिया ने कुरसी पर बैठने का इशारा किया. एक कुरसी पर वह बैठ गई और बगल की दूसरी कुरसी पर साथ आई लड़की को बैठा दिया. उस ने जो बात बताई उसे सुन कर भदौरिया चौंक गए. परिचय देते हुए उस ने अपना नाम मीराबाई बताया. उस ने कहा कि वह स्व. रामजी लाल सखवार की विधवा है और पास के ही गांव छत्त का पुरा में रहती है.

उस ने चौंकाने वाली बात यह बताई कि उस का बेटा विश्वनाथ 23 नवंबर, 2020 से ही घर नहीं आया है, जबकि वह खेतों में काम करने को कह कर गया था. वह गायब करवा दिया गया है. उस की पत्नी राजकुमारी का कहना है कि वह काम के सिलसिले में गुजरात में रह रहा है, लेकिन मुझे पूरा शक है कि उस की हत्या की जा चुकी है. भदौरिया ने मीराबाई से उस के बेटे के बारे में कुछ और जानकारी मांगते हुए पूछा कि वह कैसे कह सकती है कि उस के बेटे की किसी ने हत्या कर दी होगी. या फिर वह इस का सिर्फ अंदेशा जता रही है?

इतना सुनते ही मीराबाई बिलखने लगी. भदौरिया ने उसे एक गिलास पानी पिलवाया और शांति से बेटे के बारे में बताने को कहा कि उस के बेटे से किस की दुश्मनी थी? वह कहां आताजाता था? पत्नी से उस के कैसे संबंध थे? उस के गायब करने के पीछे किस का हाथ हो सकता है? इत्यादि. मीराबाई 2-3 मिनटों तक शांत बैठी रही, फिर उस ने बताना शुरू किया कि आखिर उसे क्यों अपने बेटे की मौत हो जाने की आशंका है? इस के पीछे कौन हो सकता है? उसे किस तरह से 22 महीनों तक धोखे में रखा गया? उसे अपनी बहू पर क्यों संदेह है? मीराबाई ने भदौरिया को जो कुछ बताया वह इस प्रकार है—

साहबजी, मेरे बेटे का नाम विश्वनाथ संखवार है. वह खेतीकिसानी के पुश्तैनी काम से जुड़ा रहा है. इस काम से कई बार गांव से दूसरे शहरों में भी जाता रहा है. उसे मैं ने अखिरी बार 2 साल पहले नवंबर महीने में तब देखा था, जब कोरोना फैला हुआ था. तारीख अच्छी तरह से याद है. उस रोज की 23 नवंबर, 2020 थी. वह रोज की तरह उस दिन अपने खेत पर गया था, रात गहराने पर भी जब खेत से लौट कर नहीं आया, तब मैं ने अपनी बहू राजकुमारी से उस के बारे में पूछताछ की. बहू ने मुझे बताया कि गुजरात से उन के किसी दोस्त का फोन आया था, इसलिए उन्हें अचानक गुजरात जाना पड़ गया था. वह 4-5 दिनों में लौट आएंगे.

किंतु जब बेटा 5 दिन बाद भी लौट कर नहीं आया, तब मुझे चिंता हुई. मैं ने अपनी बहू से फिर उस के बारे में पूछताछ की. उस ने अपने मोबाइल से मेरे बेटे के स्थान पर किसी और को बेटा बता कर मेरी बात करा दी. मुझे आवाज सुन कर थोड़ा संदेह हुआ, लेकिन बहू ने दबाव डाल कर कहा कि उस की बात उस के बेटे से ही हुई है. उस की थोड़ी तबीयत ठीक नहीं होने से आवाज बदली हुई लगी होगी.

मुझे लगा कि हो सकता है सुनने में ऐसा हुआ हो. उस की बेटे से ही बात हुई होगी. उम्र अधिक होने और सुनने और देखने की समस्या है. जबकि सच तो यह था कि बहू मेरी इस कमजोरी का फायदा उठा कर बेटे की जगह किसी और से बात करवाती रही है. एक ही आवाज सुनसुन कर मैं ने उसे ही अपना बेटा समझ लिया.

यह तो भला हो बेटी वंदना का, जिस ने बहू के इस झांसे को पकड़ लिया. वह अपने मायके आई हुई थी. घर में अपने बड़े भाई को नहीं पा कर उस ने भी भाभी राजकुमारी से पूछताछ की. बहू ने अपनी ननद को भी बताया कि उस के भैया इन दिनों गुजरात में रह रहे हैं. किसी और को भाई बता कर मोबाइल फोन पर उस की बात करवाने लगी. बात शुरू करते ही वंदना ने कहा कि उस की बात विश्वनाथ भैया से नहीं हो रही है. कोई और आदमी उस के भाई की आवाज बना कर बात कर रहा है.

इस तरह वंदना ने भाभी के झूठ और जालसाजी को पकड़ लिया था. उस ने भाभी से पूछा कि वह भैया के बारे में सचसच बताए. इस समय वह कहां हैं? भाभी इस का सही तरह से जवाब नहीं दे पाई. इस के बाद ही बेटी वंदना ने मुझे थाने में भाई की गुमशुदगी की सूचना लिखवाने की सलाह दी. थानाप्रभारी पवन सिंह भदौरिया ने मीराबाई की जानकारी के आधार पर विश्वनाथ की गुमशुदगी की सूचना दर्ज कर ली. साथ ही उन्होंने इस पर काररवाई की शुरुआत करते हुए सब से पहले मुरैना के सभी थानों में विश्वनाथ के हुलिए आदि की जानकारी उपलब्ध करवा दी.

विश्वनाथ के गायब होने की सूचना भी प्रसारित करवा दी गई. मामला एक वैसे वयस्क पुरुष के 22 माह से गुमशुदा होने से संबंधित था, जो परिवार का मुखिया था. इसलिए सिहोनिया थानाप्रभारी ने इसे गंभीरता से ले कर अपने कुछ खास मुखबिर भी लगा दिए. मुखबिरों को सौंपे गए कार्यों में एक कार्य विश्वनाथ की पत्नी के चालचलन के बारे जानकारी जुटाने का भी था. जल्द ही उन से राजकुमारी के अरविंद सखवार नाम के व्यक्ति के साथ अवैध संबंध होने के एक राज का पता चल गया.

मुखबिर ने बताया कि वह विश्वनाथ की गैरमौजूदगी में राजकुमारी से मिलने घर पर आता रहता था. विश्वनाथ के बच्चे उसे चाचा कह कर बुलाते थे. इन दिनों भी उस का आनाजाना लगा हुआ है. भदौरिया के लिए यह बेहद महत्त्वपूर्ण जानकारी थी. उन की जांच की सुई राजकुमारी और अरविंद की ओर घूम गई. इस में उन्होंने अवैध संबंध होने के तार जोड़ लिए. अब उन्हें किसी तरह राजकुमारी और अरविंद के बीच अवैध संबंध के ठोस सबूत की जरूरत थी, ताकि उन की गतिविधियों में विश्वनाथ के शामिल होने का पता चल सके.

इस की तहकीकात में तेजी लाने के लिए उन्होंने अपने मातहतों को साइबर सेल की मदद लेने का निर्देश दिया. विश्वनाथ, राजकुमारी और अरविंद के मोबाइल फोन की काल डिटेल्स निकलवा कर जब उस का अध्ययन किया गया, तब पता चला कि बीते 22 महीनों में राजकुमारी और अरविंद सखवार के बीच सैकड़ों बार बातचीत हुई है. कई बार तो उन के बीच घंटों तक बातचीत हुई थी. इसी के साथ महत्त्वपूर्ण जानकारी 23 नवंबर, 2020 के शाम की थी. उसी दिन अचानक गायब हुए विश्वनाथ, राजकुमारी और अरविंद के मोबाइल फोन नंबरों की लोकेशन सिकरोदा नहर के किनारे की पाई गई.

यहां तक कि गुमशुदा विश्वनाथ और उस की पत्नी राजकुमारी एवं अरविंद सखवार का नंबर जिस मोबाइल फोन में चलाया जा रहा था, उस का आईएमईआई नंबर एक ही था. यह जानकारी थानाप्रभारी को एक महत्त्वपूर्ण कड़ी लगी. उन्होंने तुरंत सादे कपड़ों में महिला कांस्टेबल को राजकुमारी के घर उस वक्त भेजा, जिस वक्त वह घर पर नहीं थी. कांस्टेबल ने राजकुमारी के बेटे और बेटी से पूछताछ की.

उन से चौंकाने वाली जानकारी हाथ लगी. राजकुमारी के बेटे ने तो यहां तक बताया कि 23 नवंबर की शाम को उन के घर अरविंद चाचा आए थे. मम्मी ने पापा को बाजरे का लड्डू खिलाया था. उस के बाद वह सामान खरीदने की बात कह कर उन्हें अरविंद चाचा की बाइक पर बैठा कर ले गई थी. उस दिन के बाद से पापा वापस घर नहीं लौटे हैं.

इस जानकारी से विश्वनाथ के बारे में पुलिस को एक ठोस सबूत मिल गया था. उस के बाद ही थानाप्रभारी ने 10 अगस्त, 2022 को राजकुमारी और अरविंद को थाने बुलाया. उन से अलगअलग घंटों तक पूछताछ की गई. उन से पूछताछ में सामान्य सवाल पूछे गए, जिस में इधरउधर की बातचीत ही अधिक शामिल थी. इस तरह उन पर एक मनोवैज्ञानिक दबाव बनाया गया.

धीरेधीरे राजकुमारी पर पुलिस की सख्ती बढ़ती चली गई. आखिरकार पुलिस की सख्ती के आगे राजकुमारी टूट गई. उस ने अपना जुर्म कुबूल करते हुए जो कुछ बताया, उस से विश्वनाथ की हत्या की पूरी कहानी साफ हो गई. राजकुमारी ने बताया कि 23 नवंबर, 2020 को ही योजनाबद्ध तरीके से उस ने पति को बाजरे के आटे से बने लड्डू में नींद की गोलियां मिला दी थीं. उस के बाद बाजार से सामान खरीदने के बहाने साथ ले कर चली गई थी.

नींद की गोलियों के असर से पति को गहरी नींद आ जाने पर राजकुमारी ने अपने प्रेमी अरविंद से मिल कर उस के कपड़े उतार दिए थे. उस की जेब से मोबाइल फोन और पर्स निकालने के बाद उसी अवस्था में सिकरोदा की नहर में फेंक दिया. तब उन्होंने सोच लिया कि उसे ठिकाने लगा दिया गया है और उन के रास्ते का कांटा निकल गया है.

अगले दिन यानी 24 नवंबर, 2020 को थाना सरायछोला पुलिस द्बारा नहर में बह कर आए अज्ञात व्यक्ति के शव के बरामद किए जाने की जानकारी राजकुमारी को मिली. इस की पुष्टि के लिए उस ने अरविंद को खासतौर से थाने भेजा. अरविंद ने बताया कि उस शव की शिनाख्त किसी ने नहीं की. उसे अज्ञात समझ कर पुलिस ने अंतिम संस्कार करा दिया. विश्वनाथ को रास्ते से हटाने के बारे में राजकुमारी ने उस के अरविंद के साथ प्रेम संबंध का होना बताया, जिस के बारे में उसे जानकारी हो गई थी. राजकुमारी ने बताया कि उसे ले कर विश्वनाथ के साथ झगड़े होते रहते थे. उन के दांपत्य जीवन में कड़वाहट आ गई थी.

राजकुमारी ने बताया कि उस का पति विश्वनाथ खेतीकिसानी के काम के चलते घर काफी देर से लौटता था. फिर हाथपैर धो कर खाना खाने के बाद गांव की चौपाल पर ताश खेलने निकल जाता था. ताश खेलने के बाद वह आधी रात को ही घर लौटता था. घर आते ही गहरी नींद में सो जाता था. ऐसी स्थिति में वह देहसुख से वंचित रहती थी. अरविंद विश्वनाथ के ट्रैक्टर का ड्राइवर था. वह 3 साल पहले ही राजकुमारी के संपर्क में आया था. विश्वनाथ के घर पर नहीं होने पर भी वह बेधड़क घर आताजाता रहता था. बच्चों से भी काफी घुलमिल गया था.

राजकुमारी को पहले तो मालकिन कहता था, लेकिन उस के कहने पर ही उसे भाभी कहने लगा था. कभीकभार राजकुमारी से मजाक भी कर लिया करता था. उस की गदराई देह को वह तिरछी नजरों से देखता रहता था. राजकुमारी को भी अरविंद की चिकनीचुपड़ी बातें सुनने में मजा आता था और उस के मजाक का जवाब मजाक में देने लगी थी. बहुत जल्द ही वह उस के प्रभाव में आ गई थी. राजकुमारी ने बताया कि अरविंद ने उसे इतना प्रभावित कर दिया था कि जब तक दिन भर में एक बार उस का दीदार नहीं कर लेती थी, उसे चैन नहीं मिलता था.

बस फिर क्या था, अरविंद भी उसे चाहत भरी नजरों से ताकने लगा था. एक दिन उस ने मौका पा कर राजकुमारी को अपनी बाहों में जकड़ लिया था. वह पुरुष सुख से वंचित थी, इसलिए उसे अरविंद का रोमांस अच्छा लगा और फिर खुद को नहीं रोक पाई. राजकुमारी के अनुसार, अरविंद से उस रोज जो संतुष्टि मिली थी, वह पति के साथ कई सालों में नहीं मिली थी. वह गबरू जवान बलिष्ठ मर्द था. फिर तो दोनों ओर से जब भी चाहत जागती वे सैक्स करने का मौका निकाल लेते.

वह अकसर उस वक्त घर पर ट्रैक्टर लेने और पहुंचाने आता था, जब विश्वनाथ घर पर नहीं होता था. बूढ़ी सास को काफी कम सुनाई देता था. उस की आंखों की रोशनी भी धुंधली थी. राजकुमारी ने बताया कि एक दिन रात को अरविंद घर पर आया हुआ था. उस दौरान पति दोनों बच्चों को ले कर शादी में जयपुर गया हुआ था. घर में उस के अलावा सिर्फ सास ही थी. घर में सन्नाटा पा कर अरविंद वहीं रुक गया. उन की वह रात मौजमस्ती में गुजरी, लेकिन अलसुबह विश्वनाथ बच्चों समेत घर आ गया. उस रोज अरविंद और राजकुमारी रंगेहाथ पकड़े गए.

उस वक्त अरविंद तो विश्वनाथ की डांटडपट सुन कर चला गया, लेकिन राजकुमारी की नजर पर विश्वनाथ चढ़ गया था. उस घटना के बाद से विश्वनाथ दोनों पर नजर रखने लगा था. हालांकि उस के बाद उस ने अरविंद को नौकरी से निकाल दिया था. राजकुमारी को यह बात और बुरी लगी. उस ने अरविंद को अपनी एक योजना बताई. अरविंद साथ देने के लिए तैयार हो गया. अरविंद की वासना में अंधी राजकुमारी ने अपने सुहाग को ही दांव पर लगा दिया था.

इस तरह से विश्वनाथ की हत्या के बाद वह अपने बच्चों को गांव में बूढ़ी सास के सहारे छोड़ कर मुरैना में कमरा ले कर रहने लगी थी. हालांकि वह बीचबीच में बच्चों और सास से मिलने गांव आ जाती थी. सास को झांसा दिए रहती थी कि उस ने विश्वनाथ के गुजरात जाने के बाद घर की पूरी जिम्मेदारी अपने सिर पर उठा ली है. विश्वनाथ की गुमशुदगी के मामले में थाना सिहोनिया पुलिस ने राजकुमारी और उस के प्रेमी अरविंद को हत्या के आरोप में गिरफ्तार कर अदालत में पेश कर दिया, जहां दोनों ने अपना अपराध स्वीकार कर लिया. इस के बाद विश्वनाथ की पत्नी और उस के प्रेमी को जेल भेज दिया गया.

राजकुमारी ने जो सोचा था, वह पूरा नहीं हुआ. वह अपने पति की हत्या की अपराधी भी बन गई और उस के साथ उस का प्रेमी फंस गया. जो सोच कर उस ने पति की हत्या की, वह अब शायद ही पूरा हो. Love Story

(कथा पुलिस सूत्रों पर आधारित)

Crime Story Hindi : गर्लफ्रेंड के प्यार ठुकराने पर बॉयफ्रेंड ने तीन लोगों की ली जान

Crime Story Hindi : 30 अक्तूबर, 2016 को दिवाली का त्यौहार था, इसलिए सारे शहर की सड़कों पर ही नहीं, गलीगली में चहलपहल थी. हर कोई खुश नजर आ रहा था. सिर्फ हेमंत ही एक ऐसा आदमी था, जो ऊपर से भले ही खुश नजर आ रहा था, लेकिन अंदर ही अंदर वह सुलग रहा था. दोपहर बाद वह अपने दोस्त मनोज के मैडिकल स्टोर पर पहुंचा और उस से घूमने चलने को कहा. इस के बाद दोनों ने घूमने की योजना बनाई और एक अन्य दोस्त सलीम को बुला कर मोटरसाइकिल से घूमने निकल पड़े. तीनों दोस्त काफी देर तक बाजार में घूमते रहे. शाम हो गई तो हेमंत ने दोनों दोस्तों से कहा, ‘‘मोटरसाइकिल छप्परी गली की ओर ले चलो, मैं तुम लोगों को वहां एक तमाशा दिखाता हूं.’’

‘‘कौन सा तमाशा दिखाएगा भाई?’’ सलीम ने पूछा तो हेमंत ने गंभीर हो कर कहा, ‘‘पहले वहां चलो तो, खुद ही देख लेना वह तमाशा.’’

सलीम ने मोटरसाइकिल छप्परी गली की ओर मोड़ दी. गली के बाहर ही मोटरसाइकिल रुकवा कर हेमंत उतर गया तो सलीम भी उतर कर खड़ा हो गया. शाम का समय था. दिवाली का त्यौहार होने की वजह से लोग दीए जला रहे थे. गली में बच्चे पटाखे फोड़ रहे थे. हेमंत ने मनोज से उस की पिस्टल मांगी और गली में घुस गया. वह जिस घर के सामने जा कर रुका, वह भारती माहेश्वरी का था. उन की मौत हो चुकी थी. घर में पत्नी सुनीता, बेटा तुषार, बेटी प्रेरिका और छोटे भाई की पत्नी पूजा और बहन का बेटा रानू था.

प्रेरिका उस समय घर के बाहर दीए जला रही थी. हेमंत उसी के पास जा कर खड़ा हो गया. उसे देख कर प्रेरिका हड़बड़ा सी गई. उस ने हेमंत को घूरते हुए पूछा, ‘‘तुम यहां कैसे?’’

‘‘क्यों, मैं यहां नहीं आ सकता क्या?’’ कह कर हेमंत ने उस का हाथ पकड़ कर खींचा तो उस ने शोर मचा दिया. उस की चीखपुकार सुन कर उस की बुआ का बेटा रानू और छोटा भाई तुषार बाहर आ गया. उन्होंने प्रेरिका को छुड़ा कर हेमंत को घेर लिया.

खुद को घिरा पा कर हेमंत घबरा गया और उस ने मनोज की पिस्टल सीधी कर के प्रेरिका पर गोली चला दी, जो उस के पेट में लगी. गोली लगते ही वह गिर गई. इस के बाद उस ने रानू पर गोली चला दी, तो उस के भी पेट में गोली लगी. उस ने तीसरी गोली तुषार पर चलाई, जो उसे छूती हुई निकल गई.

अब तक चीखपुकार मच गई थी. गोलियों की आवाज सुन कर गली वाले इकट्ठा हो गए थे. हेमंत ने भागना चाहा, लेकिन तभी उसे अजीत ने घेर लिया. अजीत हेमंत पर भारी पड़ा तो पकड़े जाने के डर से उस ने अजीत पर भी गोली चला दी, जो सीधे उस के सीने में लगी. उस की तुरंत मौत हो गई. अजीत तातारपुर निवासी प्रेरिका के भाई राहुल की दुकान पर नौकरी करता था. वह शादीशुदा ही नहीं, एक बेटी का बाप भी था.

अजीत के गिरते ही गली में अफरातफरी मच गई, जिस का फायदा उठा कर हेमंत दोस्तों के साथ भाग निकला. किसी ने पुलिस कंट्रोल रूम को इस घटना की सूचना दे दी तो वहां से मिली सूचना के आधार पर एसपी सुनील कुमार, एडीएम सुरेंद्र कुमार, सीओ शबीह अहमद और थानाप्रभारी पदम सिंह पुलिस बल के साथ घटनास्थल पर आ पहुंचे.

पुलिस ने घायलों को तुरंत अस्पताल भिजवाया और मृतक अजीत के घर वालों को सूचना दी. सूचना मिलते ही कुछ ही देर में अजीत के मांबाप और पत्नी गीता रोतीबिलखती आ पहुंची. औपचारिक पूछताछ के बाद पुलिस ने घटनास्थल की काररवाई निपटा कर अजीत की लाश को पोस्टमार्टम के लिए भिजवा दिया और थाने लौट कर घायल प्रेमिका के घर वालों की ओर से गोली चलाने वाले हेमंत और उस के दोस्तों मनोज तथा सलीम के खिलाफ हत्या तथा हत्या के प्रयास का मुकदमा दर्ज कर लिया.

इस के बाद पुलिस हेमंत को गिरफ्तार करने उस के घर पहुंची तो वही नहीं, उस के दोनों साथी भी अपनेअपने घरों से फरार मिले. पुलिस ने तीनों की गिरफ्तारी के लिए जगहजगह छापे मारने शुरू किए. इस का नतीजा यह निकला कि घटना के तीसरे दिन यानी 2 नवंबर, 2016 को हेमंत पुलिस के हाथ लग गया.

पुलिस द्वारा की गई पूछताछ में हेमंत ने कहा कि वह वहां घूमने गया था. लोगों ने उसे घेर लिया तो गोलियां उस ने अपने बचाव में चलाई थीं. इस के बाद गोलियां चलाने की जो कहानी निकल कर सामने आई, वह इस प्रकार थी—

उत्तर प्रदेश के जिला कासगंज की छप्परी गली में रहते थे भारती माहेश्वरी. उन की मौत हो चुकी थी. उन के बाद घर में उन की पत्नी सुनीता के अलावा उन के भाई की पत्नी पूजा, बेटा तुषार, बेटी प्रेरिका और बहन का बेटा रानू रहता था. पिता की मौत के बाद तुषार ने उन की गहनों की दुकान संभाल ली थी. 12वीं पास करने के बाद प्रेरिका कोई प्रोफैशनल कोर्स करना चाहती थी. उस ने यह बात घर वालों से कही तो उन्होंने उस का दाखिला दिल्ली में एनआईआईटी में कंप्यूटर सीखने के लिए करा दिया.

घर में शायद किसी को मालूम नहीं था कि प्रेरिका के नजदीकी संबंध कासगंज की ही दुर्गा कालोनी के रहने वाले रूप सिंह यादव के बेटे हेमंत यादव से हैं. वह यूपी टैक्निकल यूनिवर्सिटी लखनऊ से एमसीए कर रहा था. कासगंज में पढ़ाई के दौरान हेमंत की मुलाकात प्रेरिका से हुई थी. कालेज में पढ़ते समय दोनों मिले तो कुछ ऐसी बातें हुईं कि एकदूसरे की ओर आकर्षित हो उठे.

इस का नतीजा यह निकला कि दोनों एकदूसरे से प्यार करने लगे. 12वीं करने के बाद हेमंत आगे की पढ़ाई के लिए जहां लखनऊ चला गया, वहीं प्रेरिका दिल्ली. दोनों भले ही दूरदूर हो गए थे, लेकिन मोबाइल के जरिए उन का संपर्क बना हुआ था. कंप्यूटर का कोर्स पूरा हो गया तो प्रेरिका ने बीकौम में दाखिला लेने के साथ बैंकिंग की कोचिंग में भी दाखिला ले लिया था. अब तक हेमंत की पढ़ाई पूरी हो गई थी. उसे दिल्ली की रिलैक्सो कंपनी में नौकरी मिल गई तो वह भी दिल्ली आ कर रहने लगा था.

दिल्ली में न प्रेरिका पर कोई नजर रखने वाला था और न हेमंत पर. दोनों खुलेआम मिलनेजुलने के साथसाथ घूमनेटहलने लगे. प्रेरिका भले ही हेमंत से मिलजुल रही थी और घूमफिर रही थी, लेकिन अपने इस प्रेम संबंध को वह वैवाहिक संबंध में तब्दील नहीं कर सकती थी. इस की वजह यह थी कि उस की और हेमंत की जाति अलगअलग थी. दोनों के ही घर वाले उन की शादी के लिए कतई तैयार न होते. हेमंत और प्रेरिका ने अपने प्रेम संबंधों को बहुत छिपाया, पर उन के घर वालों को उन के प्रेम संबंधों का पता चल ही गया. फिर तो दोनों के ही घर वाले परेशान हो उठे. न हेमंत के घर वाले दूसरी जाति की लड़की से शादी करने को तैयार थे और न प्रेरिका के घर वाले दूसरी जाति के लड़के से शादी करना चाहते थे. दोनों के ही घर वालों ने उन्हें समझाने का काफी प्रयास किया, लेकिन दोनों ने कोई उचित जवाब नहीं दिया.

कोई ऊंचनीच न हो जाए, यह सोच कर हेमंत के घर वाले उस के लिए लड़की ढूंढने लगे. यह जान कर हेमंत परेशान हो उठा. दूसरी ओर प्रेरिका भी कोई निर्णय नहीं ले पा रही थी, इसलिए हेमंत भ्रम में था. वैसे वह अपने पैरों पर खड़ा था, जिस से चाहता, उस से शादी कर सकता था.

आखिर रूप सिंह ने हेमंत के लिए अलीगढ़ की एक लड़की पसंद कर ली. जब इस बात की जानकारी हेमंत को हुई तो वह चिंतित हो उठा. उस ने प्रेरिका से कहा कि अब उसे जल्दी ही फैसला कर लेना चाहिए कि वह उस से शादी कर रही है या नहीं? इस पर प्रेरिका ने कहा कि वह किसी तरह इस शादी को कुछ समय के लिए टाल दे. उसे जैसे ही नौकरी मिल जाएगी, वह उस से शादी के बारे में विचार करेगी.

प्रेरिका का यह व्यवहार हेमंत की समझ में नहीं आ रहा था. वह तनाव में रहने लगा. प्रेरिका के कहने पर उस ने घर में शादी के लिए मना कर दिया. उस ने घर में कहा था कि अभी उस की नईनई नौकरी है, ऐसे में अभी शादीब्याह का झंझट ठीक नहीं है. लड़का बड़ा हो गया था, इसलिए मांबाप को उस की बात माननी पड़ी. उन्होंने विवाह के लिए मना कर दिया.

लेकिन जब समय बीतने के साथ प्रेरिका ने कोई निर्णय नहीं लिया तो हेमंत को लगने लगा कि प्रेरिका शादी को ले कर गंभीर नहीं है. उसे लगा कि शायद वह उस के साथ खेल खेल रही है.

यह बात उसे परेशान करने लगी थी, क्योंकि अब प्रेरिका उस से कटने लगी थी. वह जब भी उस से मिलने को कहता, वह कोई न कोई बहाना बना देती. उस का फोन भी रिसीव करना कम कर दिया था. कभीकभी तो बात करतेकरते ही फोन काट कर स्विच्ड औफ कर देती.

प्रेरिका की ये हरकतें हेमंत को अखरने लगी थीं. परेशान हो कर आखिर एक दिन उस ने पूछ ही लिया, ‘‘प्रेरिका, आखिर तुम चाहती क्या हो, साफसाफ क्यों नहीं बता देतीं?’’

प्रेरिका ने तुनक कर कहा, ‘‘मेरी मम्मी को हमारे प्यार के बारे में पता चल गया है. उन्होंने कसम दिलाई है कि मैं तुम से बिलकुल न मिलूं.’’

हेमंत अवाक रह गया. प्रेरिका यह क्या कह रही है. उसे तो वैसे भी लग रहा था कि प्रेरिका की जिंदगी में कोई और आ गया है, इसीलिए वह उस से दूर भाग रही है. उस ने यह बात प्रेरिका से कही तो उस ने कहा, ‘‘यह तुम क्या कह रहे हो हेमंत?’’

‘‘मैं तो वही कह रहा हूं, जो तुम्हारे बातव्यवहार से मुझे लग रहा है. लेकिन तुम्हारे लिए यह ठीक नहीं होगा प्रेरिका.’’

‘‘तो तुम मुझे धमकी दे रहे हो?’’

‘‘धमकी ही समझ लो. प्रेरिका अगर तुम ने खुद को सुधारा नहीं तो मैं तुम्हारे लिए कुछ भी कर सकता हूं.’’ कह कर हेमंत चला गया.

प्रेरिका प्रेमी की इन बातों से बुरी तरह डर गई. दूसरी ओर हेमंत का भी दिल टूट चुका था. प्रेरिका की दूरी उसे परेशान कर रही थी, इसलिए उसे उस पर गुस्सा आ रहा था. इसी गुस्से में उस ने प्रेरिका के साथ का अपना एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल कर दिया. प्रेरिका ने जब उस वीडियो को देखा तो परेशान हो उठी. हेमंत उसे इस तरह बदनाम करेगा, उस ने कभी सोचा भी नहीं था. जब इस बात की जानकारी प्रेरिका के घर वालों को हुई तो सब की नींद उड़ गई.

उन्होंने समाज के कुछ प्रतिष्ठित लोगों को अपनी परेशानी बताई तो उन्होंने हेमंत के घर वालों से बात की. इस के बाद दोनों ओर के कुछ प्रतिष्ठित लोग इकट्ठा हुए. सब ने हेमंत तथा प्रेरिका को बुला कर समझाया और अपनीअपनी जिंदगी जीने की सलाह दी. प्रेरिका ने जब कहा कि अब वह हेमंत से कोई संबंध नहीं रखना चाहती तो बड़ेबुजुर्गों ने हेमंत को सख्त हिदायत दी कि अब वह प्रेरिका से बिलकुल नहीं मिलेगा. हेमंत ने सब के सामने वादा कर लिया कि अब वह प्रेरिका से बिलकुल नहीं मिलेगा. वह उसे फोन भी नहीं करेगा.

बड़ेबुजुर्गों के सामने दबाव में हेमंत ने वादा तो कर लिया कि वह प्रेरिका से बिलकुल नहीं मिलेगा और उसे फोन भी नहीं करेगा. लेकिन शायद वह प्रेमिका के बिना रह नहीं सकता था. घर वालों को लग रहा था कि हेमंत सुधर गया है, इसलिए उन्होंने उस की शादी मैनपुरी में तय कर दी. लड़की सेवानिवृत्त फौजी की बेटी थी. रूप सिंह और उस की पत्नी को लगता था कि शादी के बाद सब ठीक हो जाएगा. बेटा प्रेरिका को भूल कर अपनी गृहस्थी को संभाल लेगा. अब तक प्रेरिका की पढ़ाई पूरी हो चुकी थी, इसलिए वह कासगंज आ कर रहने लगी थी. उसे भी पता चल गया था कि हेमंत की शादी हो रही है. उसे भी लगा कि शादी के बाद हेमंत उसे परेशान नहीं करेगा.

सन 2016 के अप्रैल महीने में हेमंत की शादी हो गई. घर वाले चाहते थे कि वह पत्नी को अपने साथ दिल्ली ले जाए, लेकिन हेमंत पत्नी को साथ नहीं ले गया. भले ही हेमंत की शादी हो गई थी, लेकिन वह प्रेरिका को भूल नहीं पा रहा था. उस के साथ गुजारे गए पल उसे बारबार याद आ रहे थे, जिस से उसे यह सोचसोच कर गुस्सा आ रहा था कि प्रेरिका ने उस के प्यार को मजाक बना कर रख दिया. हेमंत से रहा नहीं गया तो उस ने प्रेरिका को फोन कर के कहा कि वह उस से मिलना चाहता है. लेकिन प्रेरिका ने मिलने से मना कर दिया. उस ने कहा कि अब तो उस की शादी हो चुकी है, इसलिए अब वह उस से मिल कर क्या करेगा. उसे अपनी पत्नी में दिल लगाना चाहिए.

हेमंत गुस्से में उबल पड़ा. बस उस ने उसी समय तय कर लिया कि अब वह प्रेरिका के इस व्यवहार का बदला ले कर रहेगा. दूसरी ओर घबरा कर प्रेरिका ने अपना मोबाइल नंबर बदल दिया था, जिस से हेमंत की उस से बात नहीं हो पा रही थी. इस से उस का गुस्सा बढ़ता ही गया. बात न होने की वजह से उस का मन बेचैन रहता था. उस की पत्नी को भी उस का व्यवहार अजीब लगता था. उसे सच्चाई का पता नहीं था, फिर भी उसे लगता था कि कुछ गड़बड़ जरूर है.

दिवाली का त्यौहार आया तो हेमंत घर आया. लेकिन त्यौहार को ले कर उस के दिल में कोई उत्साह नहीं था. दिवाली के दिन वह अपने दोस्त मनोज की दुकान पर गया. उस की कमर पर लगी उस की लाइसैंसी पिस्टल देख कर एकदम से उसे प्रेरिका से बदला लेने की बात याद आ गई. इस के बाद बदला लेने के लिए उस ने उसे गोली जरूर मारी, पर वह बच गई. उस के बदले मारा गया निर्दोष अजीत.

पूछताछ के बाद पुलिस ने हेमंत को अदालत में पेश किया, जहां से उसे जेल भेज दिया गया. बाद में मनोज और सलीम ने अदालत में आत्मसमर्पण कर दिया था, जहां से उन्हें भी जेल भेज दिया गया था. इस मामले में निर्दोष मारे गए अजीत का परिवार अनाथ हो गया. जिलाधिकारी ने सहानुभूति जताते हुए प्रधानमंत्री फंड से सहायता दिलाने का वादा किया था. लेकिन उस के घर वालों को तो कभी न भुलाने वाला गम मिल ही गया है. Crime Story Hind

Love Stories in Hindi : प्रेमी जोड़े ने एक ही दुपट्टे से पेड़ पर लटककर दी जान

Love Stories in Hindi : उत्तर प्रदेश का एक शहर एवं जिला मुख्यालय है फिरोजाबाद. यह शहर कांच की चूडि़यों के लिए प्रसिद्ध है. इसी जिले के थाना बसई मोहम्मदपुर के गांव आलमपुर कनैटा में राजवीर सिंह लोधी अपने परिवार के साथ रहता था. उस की पत्नी की करीब 3 साल पहले मौत हो गई थी. राजवीर की गांव में आटा चक्की थी. उस के 2 बेटे बलजीत व जितेंद्र के अलावा 2 बेटियां राधा, ललिता उर्फ लता थीं. वह एक बेटे और एक बेटी की शादी कर चुका था. छोटा बेटा जितेंद्र पिता के साथ चक्की के काम में हाथ बंटाता था जबकि ललिता उर्फ लता गांव के ही स्कूल में पढ़ रही थी.

इसी गांव में रामवीर सिंह लोधी भी अपने परिवार के साथ रहता था. वह निजी तौर पर पशुओं का इलाज करने का काम करता था. उस के 4 बेटों में अनिल कुमार सब से छोटा था. वह बीएससी कर चुका था और नौकरी की तलाश में था. अनिल का बड़ा भाई जितेंद्र दिल्ली के एक होटल में नौकरी करता था. ललिता 11वीं कक्षा में पढ़ती थी. जब वह स्कूल जाती, तो रास्ते में अकसर उसे गांव का युवक अनिल मिल जाता था. वह उसे चाहत भरी नजरों से देखता था. उस की उम्र करीब 20 साल थी. लता ने भी उन्हीं दिनों जवानी की दहलीज पर कदम रखा था. अनिल लता की जाति का ही था. लता को भी अनिल अच्छा लगता था. उस का झुकाव भी अनिल की तरफ होने लगा. दोनों ही एकदूसरे को देख कर मुसकरा देते थे.

दोनों के बीच यह सिलसिला काफी दिनों तक चलता रहा. दोनों एकदूसरे से प्यार का इजहार करने में सकुचा रहे थे, क्योंकि उन का यह पहलापहला प्यार था. आखिर एक दिन अनिल ने हिम्मत कर के लता से पूछ ही लिया, ‘‘लता, तुम्हारी पढ़ाई कैसी चल रही है?’’

लता को तो जैसे इसी पल का ही इंतजार था. उस ने मुसकराते हुए कहा, ‘‘मेरी पढ़ाई तो ठीक चल रही है, पर तुम कैसे हो?’’

‘‘मैं अच्छा हूं,’’ अनिल ने जवाब दिया.

इस औपचारिक बातचीत के बाद दोनों ने एकदूसरे को अपनेअपने फोन नंबर भी दे दिए थे, जिस से उन के बीच फोन पर भी बातचीत होने लगी. रही बात मिलने की तो लता के स्कूल जातेआते समय अनिल पहुंच जाता था, जिस से वे एकदूसरे से मिल लेते थे. धीरेधीरे उन का प्यार परवान चढ़ने लगा. कभीकभी लता सहेली के पास जाने की बात कह कर घर से निकल जाती और अनिल से एक निश्चित जगह पर मिल लेती थी. उन के प्रेम संबंध यहां तक पहुंच गए थे कि दोनों ने शादी करने का फैसला कर लिया था.

उस समय अनिल बेरोजगार था. उस ने लता से वादा किया कि शादी के लिए हम तब तक इंतजार करेेंगे, जब तक वह अपने पैरों पर खड़ा नहीं हो जाता. नौकरी लगने के बाद वह उसे अपने साथ ले जाएगा. यह बात सुन कर ललिता बहुत खुश हुई. दोनों एक ही जाति के थे, इसलिए उन्हें पूरा विश्वास था कि दोनों के घर वालों को उन की शादी पर कोई ऐतराज नहीं होगा. पिछले डेढ़ साल से दोनों का प्रेम प्रसंग बिना किसी बाधा के चल रहा था.

मिलने और मोबाइल पर बात करने में दोनों पूरी सावधानी बरतते थे. लेकिन ऐसी बातें ज्यादा दिनों तक छिपी नहीं रहतीं. किसी तरह लता के परिजनों को उन के प्रेम संबंधों की भनक लग गई. लिहाजा उन्होंने लता को समझाया कि वह अनिल से मिलना बंद कर दे. इस से परिवार की बदनामी ही हो रही है. लता ने उस समय तो उन से वादा कर दिया कि वह घर की मानमर्यादा का ध्यान रखेगी. उस के वादे से घर वाले निश्चिंत हो गए. 2-4 दिनों तक तो लता ने अनिल से बात नहीं की. लेकिन इस के बाद प्रेमी की यादें उसे विचलित करने लगीं. उधर अनिल भी परेशान रहने लगा. दोनों की यह बेचैनी ज्यादा दिनों तक कायम नहीं रह सकी.

दिल की लगी नहीं छूटी

घर वालों की बातों को दरकिनार कर के लता ने अनिल से फोन पर बतियाना शुरू कर दिया. लेकिन अब वह सावधानी बरतने लगी ताकि घर वालों को पता न चले. लेकिन एक बार लता की मां ने रात में उसे मोबाइल पर बात करते देख लिया. उस ने यह बात पति राजवीर को बताई. उस ने जब लता का मोबाइल चैक किया तो पता चला कि वह अनिल से ही बात कर रही थी. यह जान कर राजवीर का खून खौल उठा. उस ने लता को बहुत लताड़ा और उस पर पहरा लगा दिया. इतना ही नहीं, राजवीर ने इसकी शिकायत अनिल के पिता रामवीर सिंह से भी कर दी. रामवीर ने भी अनिल को बहुत डांटा.

अब दोनों पर ही पाबंदियां लग गई थीं, जिस से वे बेचैन रहने लगे. लता का फोन भी उस के घर वालों ने अपने पास रख लिया था. लता किसी भी तरह अनिल से बात करना चाहती थी. एक दिन लता को यह मौका मिल गया. घर पर उस की सहेली मिलने आई थी. लता ने उस के मोबाइल फोन से अनिल से बात की और कहा कि यह दूरियां अब उस से सही नहीं जा रही हैं. तब अनिल ने उसे समझाते हुए कहा, ‘‘लता, कुछ दिनों के लिए मैं भाई के पास दिल्ली जा रहा हूं. जब मामला ठंडा पड़ जाएगा तो मैं गांव आ जाऊंगा.’’

लता को भी अनिल की बात सही लगी और उस ने न चाहते हुए भी दिल पर पत्थर रख कर उसे दिल्ली जाने की इजाजत दे दी. अनिल अपने भाई जितेंद्र के पास दिल्ली पहुंच गया. जितेंद्र ने अनिल की नौकरी एक निजी अस्पताल में लगवा दी. दिल्ली जा कर अनिल के नौकरी करने की जानकारी लता के पिता राजवीर को हुई तो उस ने राहत की सांस ली. उस ने निर्णय लिया कि मौका अच्छा है, क्यों न लता के हाथ पीले कर दिए जाएं. लिहाजा आननफानन में उस ने लता के लिए लड़का तलाशना शुरू कर दिया गया.

यह तलाश जल्द ही पूरी हो गई. एटा जिले के जलेसर नगर में सुनील नाम का लड़का पसंद कर लिया गया. शादी की बात भी पक्की कर दी गई. दोनों पक्षों ने इसी साल नवंबर महीने में देवउठान के पर्व पर शादी करने की बात तय कर ली. लता को जब अपनी शादी तय होने की बात पता चली, तो उस की नींद उड़ गई. क्योंकि वह तो अनिल की दुलहन बनने का सपना संजोए बैठी थी. लता ने अपनी शादी का विरोध किया लेकिन घर वालों के आगे उस की एक नहीं चली.

अनिल भी उस समय दिल्ली में था. लता ने उसे फोन कर के अपनी शादी तय होने की बात बता दी. यह बात सुन कर वह भी परेशान हो गया. उस की समझ में नहीं आ रहा था कि ऐसी स्थिति में क्या करे. जुलाई के पहले सप्ताह में गोदभराई की रस्म संपन्न हो गई. लता गोदभराई के दिन चाह कर भी किसी से कुछ नहीं कह सकी. वह उदास थी. उस का दिल रो रहा था. वह अनिल से मिलने के लिए तड़प रही थी.

15 अगस्त को रक्षाबंधन था. लता को पता था कि रक्षाबंधन पर अनिल गांव जरूर आएगा. उस ने सोचा तभी अनिल से मिल कर अपने मन की बात कहेगी. इतना ही नहीं, लता ने निर्णय ले लिया था कि अनिल के गांव आने पर वह अपने घर वालों की मरजी के खिलाफ अनिल के साथ शादी कर लेगी, चाहे इस के लिए उसे अपना घर छोड़ कर भागना ही क्यों न पड़े.

प्रेमी के लिए तड़प रही थी लता

लेकिन लता के अरमानों पर उस समय बिजली गिर गई, जब रक्षाबंधन के दिन भी अनिल गांव नहीं आया, इस से वह बहुत निराश हुई. घर वालों ने लता को उस का मोबाइल फोन लौटा दिया था. लता ने अनिल को फोन किया तो उस ने बताया कि छुट्टी नहीं मिलने की वजह से वह इस बार घर नहीं आ सका. लेकिन अगले महीने गांव जरूर आएगा. लता को अब तसल्ली नहीं हो रही थी. उस के घर वालों ने शादी की खरीदारी शुरू कर दी थी. उसे अपने ही घर में एकएक दिन काटना बड़ा मुश्किल हो रहा था. सारीसारी रात वह बिस्तर पर करवटें बदलती रहती. उस ने एक दिन रात में ही निर्णय लिया, जिस की भनक उस ने अपने परिजनों को नहीं लगने दी.

16-17 अगस्त, 2019 की रात को जब लता के घर वाले सोए हुए थे, सुबह 4 बजे वह घर से गायब हो गई. परिजन जब सो कर उठे तो ललिता घर में दिखाई नहीं दी. उन्होंने सोचा कि वह मंदिर गई होगी. जब काफी देर तक वह वापस नहीं आई तो उस की तलाश की गई. उस का मोबाइल भी बंद था. बदनामी के डर से इस की सूचना पुलिस को भी नहीं दी गई. सुबह के समय गांव के कुछ लोगों ने ललिता को बाइक पर किसी युवक के साथ जाते देखा था. यह जानकारी राजवीर सिंह को मिली तो उस ने बदनामी की वजह से यह बात भी पुलिस तक को बताना ठीक नहीं समझा.

राजवीर व उस के परिवार वालों को शक था कि ललिता अनिल के पास दिल्ली चली गई होगी. राजवीर ने रामवीर से दिल्ली में रह रहे उस के बेटे अनिल का मोबाइल नंबर ले कर उस से बात की. अनिल ने बताया कि लता उस के पास नहीं आई है. इस के बाद घर वाले लगातार लता के मोबाइल पर फोन करते रहे, लेकिन उस का फोन बंद मिला. 17 अगस्त की दोपहर में राजवीर ने जब लता को फोन मिलाया तो उस से बात हो गई.

19 अगस्त, 2019 की सुबह थाना मटसेना के आकलपुर गांव की कुछ महिलाएं जंगल की तरफ गईं तो उन्होंने गांव के बाहर बेर की बगिया में एक पेड़ से फंदों पर 2 शव लटके देखे. इन में एक शव युवक का था और दूसरा युवती का. यह देख कर महिलाएं भाग कर घर आईं और यह बात लोगों को बता दी. इस के बाद तो आकलपुर गांव में कोहराम मच गया. जिस ने सुना, वही बगिया की ओर दौड़ पड़ा. सूरज की पौ फटतेफटते वहां सैकड़ों की भीड़ जुट गई. गांव के लोगों ने पेड़ पर शव लटके देख पुलिस को सूचना दे दी. सूचना मिलते ही थानप्रभारी मोहम्मद उमर फारुक पुलिस टीम के साथ मौकाएवारदात पर पहुंच गए.

पुलिस ने फोटो खींचने के बाद दोनों शव नीचे उतरवाए. उन की तलाशी ली तो दोनों के पास आधार कार्ड मिले. पुलिस को पता चला कि मृतक युवक आलमपुर कनैटा निवासी रामवीर का 20 वर्षीय बेटा अनिल कुमार था, जबकि मृतका उसी गांव के रहने वाले राजवीर की बेटी ललिता उर्फ लता थी.

थानाप्रभारी ने घटना की जानकारी अपने आला अधिकारियों के साथ ही युवकयुवती के घर वालों को भी दे दी. सूचना मिलते ही दोनों परिवारों में कोहराम मच गया. आकलपुर गांव आलमपुर गांव की सीमा से सटा हुआ था, इसलिए घर वाले रोतेबिलखते वहां पहुंच गए. इसी दौरान सीओ (सदर) बलदेव सिंह खनेड़ा व एसपी (ग्रामीण) राजेश कुमार सिंह भी घटनास्थल पर पहुंच गए. अपने बच्चों की लाशें देख कर दोनों के परिजनों का रोरो कर बुरा हाल था.

पुलिस को दोनों के पास से सुसाइड नोट भी मिले. अनिल का सुसाइड नोट उस की पैंट की जेब से जबकि ललिता ने सुसाइड नोट अपनी कलाई में बंधे कलावे से बांध रखा था. आधार कार्ड, सुसाइड नोट के अलावा दोनों के मोबाइल फोन पुलिस ने अपने कब्जे में ले लिए. जरूरी काररवाई पूरी करने के बाद पुलिस ने दोनों शव पोस्टमार्टम के लिए जिला अस्पताल भिजवा दिए. पुलिस ने जब केस की जांच शुरू की तो पता चला कि अनिल और ललिता ने गांव लौटने का फैसला कर लिया था और यह बात घर वालों को बता दी थी. ऐसे में दोनों के शव पेड़ से लटके मिलने पर सवाल उठने लगे.

मिलन नहीं तो मौत ही सही

इस प्रेमी युगल की प्रेम कहानी की इबारत सुसाइड नोट में लिखी मिली. दोनों ने एक साथ जीनेमरने की कसम खाई और सुसाइड नोट लिखे. ललिता ने अपने सुसाइड नोट में अनिल के अलावा किसी और से शादी न करने की बात लिखी थी. एक पेज के सुसाइड नोट में उस ने लिखा था कि मैं अनिल के पास दिल्ली चली गई थी. मेरे घर वालों ने मेरी शादी तय कर दी थी, जबकि मैं किसी दूसरे से शादी नहीं कर सकती थी. अनिल मुझ से घर वापस जाने के लिए कह रहा था, लेकिन मैं घर नहीं जाना चाहती थी. मैं अनिल के बिना नहीं रह सकती. इसलिए अपनी मरजी से आत्महत्या कर रही हूं. इस के लिए किसी को परेशान न किया जाए.

वहीं अनिल ने अपने सुसाइड नोट में लिखा कि ललिता मेरे पास दिल्ली आ गई थी. 18 अगस्त को वह उसे गांव छोड़ने आया था, लेकिन लता ने अपने घर जाने से इनकार कर दिया. उस ने लिखा कि मम्मीपापा मुझे माफ कर देना. मैं लता के बिना नहीं रह सकता. मैं अपनी मरजी से आत्महत्या कर रहा हूं. पुलिस ने अनिल के घर मिले एक रजिस्टर से उस के सुसाइड नोट की राइटिंग का मिलान भी किया. प्रेम विवाह को ले कर परिवार के लोगों ने दोनों के बीच में दीवारें खड़ी कर दीं तो प्रेमी युगल ने मरने का फैसला ले लिया. प्रेमी जोड़े ने इतना बड़ा कदम उठा लिया कि एक पेड़ पर एक ही दुपट्टे से एक ही फंदे पर लटक कर मौत को गले लगा लिया.

इस प्रेम कहानी का अंत लता के घर वालों की जिद के कारण हुआ. 16 अगस्त को जब लता अचानक गांव से गायब हो गई थी, तब वह सीधे दिल्ली में रह रहे अपने प्रेमी अनिल के पास पहुंची थी. 17 अगस्त को लता के पिता की उस से मोबाइल पर बात भी हुई. लता ने परिजनों को सारी बात बताई और कहा कि उस ने अनिल के साथ शादी करने का फैसला कर लिया है. घर वालों ने इस रिश्ते को मानने से इनकार कर दिया और उसे ऊंचनीच समझाते हुए घर लौटने को कहा. इस के बाद प्रेमी युगल ने घर वालों से 18 अगस्त को गांव आने की बात कही थी. लेकिन 19 अगस्त को दोनों ने आत्महत्या कर ली.

चूंकि मृतकों के परिजनों ने पुलिस को कानूनी काररवाई करने की कोई तहरीर नहीं दी, इसलिए पुलिस ने कोई मामला दर्ज नहीं किया. इस के अलावा पोस्टमार्टम रिपोर्ट से भी स्पष्ट हो गया कि अनिल और लता ने आत्महत्या की थी. अत: पुलिस ने इस मामले की फाइल बंद कर दी. Love Stories in Hindi

-कथा पुलिस सूत्रों पर आधारित

Story Hindi : जिसे सबने मरा समझ लिया था, वह अचानक निकली जिन्दा

हरियाणा के जिला पानीपत के थाना नगर के मोहल्ला आजादनगर की रहने वाली 20 साल की सिमरन दुबे आर्य डिग्री कालेज में बीए के दूसरे साल में पढ़ रही थी. पढ़ाई के साथसाथ वह एनएसएस (नेशनल सर्विस स्कीम) यानी राष्ट्रीय सेवा योजना की सदस्य भी थी. यह संस्था अपने सदस्यों का कैंप लगवाती है, जिस में समाजसेवा कराई जाती है. इस में जिस लड़के या लड़की का काम अच्छा होता है, उसे कालेज की ओर से प्रमाण पत्र दिया जाता है.

एसडी कालेज का बीए फाइनल ईयर में पढ़ रहा कृष्ण देशवाल एनएसएस का अध्यक्ष था. इसी साल जनवरी महीने में एसडी कालेज का एनएसएस का कैंप आर्य डिग्री कालेज में लगा था. उसी दौरान सिमरन दुबे की मुलाकात कृष्ण देशवाल से हुई तो दोनों में अच्छी जानपहचान हो गई. थाना नगर के ही मोहल्ला बराना की रहने वाली ज्योति भी सिमरन के साथ आर्य डिग्री कालेज में पढ़ती थी. दोनों में पटती भी खूब थी. उस से भी कृष्ण की दोस्ती हो गई थी.

5 सितंबर, 2017 की शाम 4 बजे के करीब सिमरन के मोबाइल फोन की घंटी बजी. उस ने फोन रिसीव किया तो दूसरी ओर से कहा गया, ‘‘हैलो सिमरन, मैं एसडी कालेज से कृष्ण देशवाल बोल रहा हूं, तुम कैसी हो?’’

‘‘नमस्ते सर,’’ चहकते हुए सिमरन ने कहा, ‘‘मैं तो अच्छी हूं सर, आप बताइए आप कैसे हैं?’’

‘‘मैं भी ठीक हूं, यह बताओ कि तुम इस समय क्या कर रही हो?’’

‘‘घर पर हूं सर, कोई काम है क्या? अगर कोई काम हो तो कहिए, मैं आ जाती हूं.’’ सिमरन ने कहा.

‘‘दरअसल, मिलिट्री के कुछ अधिकारी शहर में आ रहे हैं. उन के लिए जीटी रोड पर स्थित गौशाला मंदिर परिसर में कैंप लगाना है. अगर तुम आ जाओ तो मेरा काम काफी आसान हो जाएगा. ज्योति भी आ रही है. कालेज के कुछ अन्य लड़के भी आ रहे हैं.’’

‘‘ठीक है सर, ऐसी बात है तो मैं भी आ जाती हूं.’’

‘‘ओके, मैं तुम्हारा इंतजार कर रहा हूं.’’ कृष्ण ने कहा और फोन काट दिया.

कृष्ण देशवाल से बात होने के बाद सिमरन जल्दी से तैयार हो कर घर वालों से कालेज जाने की बात कह कर निकल पड़ी. करीब घंटे भर बाद वह कृष्ण द्वारा बताए गौशाला मंदिर पहुंच गई. ज्योति वहां पहले से ही मौजूद थी. उसे देख कर सिमरन का चेहरा खिल उठा.

दोनों सहेलियां एकदूसरे के गले मिलीं और आपस में बातें करने लगीं. दोनों बातें कर रही थीं कि तभी कृष्ण सिमरन के लिए एक गिलास में कोल्डिड्रिंक ले आया. सिमरन ने उन्हें भी पीने को कहा तो दोनों ने एक साथ कहा कि उन्होंने अभीअभी पी है. इस के बाद सिमरन आराम से कोल्डड्रिंक पीने लगी.

crime

मंदिर के कमरे में लाश

कृष्ण देशवाल, सिमरन दुबे और ज्योति जिस कमरे में ठहरे थे, उस के बगल वाले कमरे में कंप्यूटर सिखाया जाता था. कंप्यूटर सिखाने का यह काम पशुपालन विभाग के उपनिदेशक डा. वाई.डी. त्यागी द्वारा चलाई जा रही एनजीओ के अंतर्गत होता था. कंप्यूटर सिखाने के लिए वंदना को रखा गया था.

जिस कमरे में कृष्ण, ज्योति और सिमरन ठहरे थे, वह अंदर से बंद था. इस से वंदना को थोड़ी हैरानी हो रही थी. उन से नहीं रहा गया तो उन्होंने दरवाजा खटखटाया. करीब 15 मिनट तक दरवाजा खटखटाने के बाद खुला तो उस में से एक लड़का और लड़की बैग लिए बाहर निकले.

दोनों बाहर से कमरा बंद करने लगे तो वंदना ने उन से उन के साथ की एक अन्य लड़की के बारे में पूछा. वे बिना कुछ कहे चले गए तो वंदना ने इस बात की सूचना मंदिर के पुजारी वेदप्रकाश तिवारी को दे दी. वेदप्रकाश को मामला गड़बड़ लगा तो उन्होंने अपने भतीजे अभिनव को हकीकत पता करने के लिए भेजा.

अभिनव हौल से होता हुआ उस कमरे पर पहुंचा, जिसे लड़का और लड़की बाहर से बंद कर गए थे. दरवाजा खोल कर जैसे ही वह अंदर पहुंचा, वहां की हालत देख कर वह चीखता हुआ बाहर आ गया. उस की चीख सुन कर वंदना भी घबरा गई. वह अभिनव के पास पहुंची. उस के पूछने पर अभिनव ने बताया कि कमरे में एक लड़की की लाश पड़ी है.

अब वंदना की समझ में सारा माजरा आ गया. अभिनव ने यह जानकारी पुजारी वेदप्रकाश तिवारी को दी तो उन्होंने पुलिस कंट्रोल रूम के 100 नंबर पर फोन कर दिया. पुलिस कंट्रोल रूम द्वारा यह सूचना थाना चांदनी बाग पुलिस को दे दी गई. सूचना मिलते ही थाना चांदनीबाग के थानाप्रभारी संदीप कुमार पुलिस बल के साथ गौशाला मंदिर पहुंच गए.

उन के पहुंचने से पहले पुलिस चौकी किशनपुरा के चौकीप्रभारी वीरेंद्र सिंह वहां पहुंच चुके थे. संदीप कुमार और वीरेंद्र सिंह ने घटनास्थल और लाश का निरीक्षण किया. मृतका के गले पर गला दबाने का स्पष्ट निशान था. इस का मतलब हत्या गला दबा कर की गई थी. उस के चेहरे को तेजाब डाल कर झुलसा दिया गया था. शायद हत्यारे ने पहचान मिटाने के लिए ऐसा किया था.

कमरे में एक लेडीज पर्स मिला.  पुलिस ने उस पर्स की तलाशी ली तो उस में से आर्य डिग्री कालेज का एक आईडी कार्ड मिला, जिस पर ज्योति लिखा था. उस पर पिता का नाम, पता और फोन नंबर भी लिखा था. पिता का नाम रामपाल था. वह थाना नगर के मोहल्ला बराना में रहते थे. एसआई वीरेंद्र सिंह ने फोन कर के रामपाल को वहीं बुला लिया.

रामपाल ने गौशाला मंदिर आ कर कमरे में मिली लाश को देखा तो फफकफफक कर रोने लगे. लाश उन की बेटी ज्योति की थी. शिनाख्त न हो सके, इस के लिए हत्यारों ने तेजाब डाल कर बड़ी बेरहमी से उस के चेहरे को झुलसा दिया था.

घटना की सूचना पा कर एसपी राहुल शर्मा, सीआईए-3 प्रवीण कुमार और डीएसपी जगदीश दूहन भी घटनास्थल पर आ गए थे. घटनास्थल के निरीक्षण के दौरान पुलिस ने देखा कि कमरे में पड़े डबल बैड का गद्दा उठा कर नीचे फर्श पर बिछाया गया था. लाश को उसी पर लिटा कर उस के चेहरे पर तेजाब डाला गया था. तेजाब से मृतका का चेहरा तो बुरी तरह झुलस ही गया था, गद्दा भी काफी दूर तक झुलस गया था.

मृतका की चुनरी और चप्पलें भी वहीं पड़ी थीं. बचाव के लिए मृतका ने हाथपांव चलाए थे, जिस से उस के चश्मे का एक शीशा टूट गया था. पुलिस ने कंप्यूटर की शिक्षा देने वाली वंदना से पूछताछ की तो उस ने बताया था कि शाम 4 बजे वह वहां आई तो कम्युनिटी हौल के दोनो दरवाजे अंदर से बंद थे. करीब 15 मिनट तक दरवाजा खटखटाने के बाद 19-20 साल की एक लड़की ने दरवाजा खोला.

लड़की के साथ एक लड़का भी था. वह हौल के कोने में बने कमरे का दरवाजा बंद कर रहा था. वंदना ने उस के साथ आई दूसरी लड़की के बारे में पूछा तो वह उसे धमका कर लड़की के साथ चला गया. लड़की सलवार सूट पहने थी, जबकि लड़का जींस और टीशर्ट पहने था.

फैल गई सनसनी

लड़के और लड़की के पास बैग थे. उन्होंने एकएक पौलीथीन भी ले रखी थी. लड़के के हाथ में ड्यू (कोल्डड्रिंक) की एक बोतल भी थी. वदंना को शक हुआ तो उस ने अपनी शंका पुजारी को बताई. इस के बाद पुजारी ने अपने भतीजे को भेजा तो कमरे में लाश होने का पता चला. इस तरह लाश बरामद होने से शहर में सनसनी फैल गई थी.

क्योंकि गौशाला मदिर अति सुरक्षित माना जाता था. हैरानी की बात यह थी कि दोनों लड़कियों और लड़के के वहां आने की जानकारी पुजारी को नहीं थी. मंदिर में सीसीटीवी कैमरे भी नहीं लगे थे कि उसी से लड़के और लड़की के बारे में कुछ पता चलता.

पुलिस ने कमरे में मिला सारा सामान जब्त कर के लाश को पोस्टमार्टम के लिए जिला अस्पताल भिजवा दिया था. इस के बाद रामपाल की ओर से हत्या का मुकदमा दर्ज कर के मामले की जांच शुरू कर दी गई थी. पोस्टमार्टम के बाद पुलिस ने ज्योति की लाश उस के पिता रामपाल को सौंप दी तो उन्होंने उस का अंतिम संस्कार कर दिया.

महिला आयोग भी सक्रिय

इस हत्याकांड की सूचना राष्ट्रीय महिला आयोग की सदस्य रेखा शर्मा को मिली तो उन्होंने भी घटनास्थल की दौरा किया. वह पुलिस अधिकारियों से भी मिलीं और ज्योति के घर वालों से भी. उन्होंने उन्हें आश्वासन दिया कि पुलिस ने 48 घंटे के अंदर हत्यारे को गिरफ्तार करने का भरोसा दिया है. इस मामले में तेजाब का उपयोग किया गया था. जबकि कोर्ट ने तेजाब की बिक्री पर रोक लगा रखी है. यह भी जांच का विषय था कि रोक के बावजूद हत्यारे को तेजाब मिला कहां से?

अगले दिन पुलिस ने मृतका ज्योति के मोबाइल नंबर की काल डिटेल्स निकलवाई तो उस के नंबर पर अंतिम फोन अटावला गांव के रहने वाले राजेंद्र देशवाल के बेटे कृष्ण का आया था. काल लिस्ट देख कर पुलिस हैरान थी. दरअसल, दोनों के बीच 14 से 15 हजार सैकेंड बात की गई थी.

पुलिस तुरंत ज्योति के घर पहुंची और रामपाल से कृष्ण् के बारे में पूछा. उस ने बताया कि कृष्ण ज्योति के कालेज में आताजाता था, दोनों एकदूसरे को जानतेपहचानते थे. उन में अच्छी दोस्ती भी थी.

पुलिस को इस बात पर हैरानी हुई कि कृष्ण ज्योति का अच्छा दोस्त था और उस के घर भी आताजाता था. लेकिन उस की हत्या की बात सुन कर उस के घर नहीं आया था. कहीं ऐसा तो नहीं कि उसी ने ज्योति की हत्या की हो और फरार हो गया हो.

पुलिस को कृष्ण देशवाल पर शक हुआ तो उस के बारे में पता करने उस के घर पहुंच गई. घर वालों से पता चला कि वह 5 सितंबर से ही घर से 1 लाख 35 हजार रुपए ले कर गायब है. इस बात से पुलिस का शक यकीन में बदल गया. पुलिस को लगा कि ज्योति की हत्या में कृष्ण का ही हाथ है. घर वालों से पुलिस को पता चला कि कृष्ण के घर वाले भैंसों के खरीदने और बेचने का व्यवसाय करते थे. वे पैसे उसी के थे, जिन्हें कृष्ण ले कर भागा था.

इस बीच पुलिस को पता चल गया कि उस दिन कृष्ण के साथ जो लड़की थी, वह सिमरन दुबे थी. पुलिस दोनों के फोटो ले कर गौशाला मंदिर पहुंची तो फोटो देख कर वंदना ने बताया कि उस दिन यही दोनों कमरे से निकले थे.

इस से साफ हो गया कि ज्योति की हत्या कृष्ण और सिमरन ने ही की थी. इस के बाद पुलिस ने उन के फोटो अखबारों में छपवा कर उन के बारे में बताने वाले को ईनाम की भी घोषणा कर दी.

पुलिस कृष्ण और सिमरन दुबे की तलाश में जीजान से जुटी थी कि सिमरन के पिता अतुल दुबे थाना नगर पहुंचे और उन्होंने कृष्ण देशवाल के खिलाफ सिमरन के अपहरण की तहरीर दे दी. उन का कहना था कि उन की बेटी के चरित्र पर जो लांछन लगाया गया है, वह सरासर गलत है. सिमरन ऐसी घिनौनी हरकत कतई नहीं कर सकती.

crime

उन का यह भी कहना था कि उस दिन कमरे में जो लाश मिली थी, वह ज्योति की नहीं, बल्कि सिमरन की थी. लेकिन उन की बात कोई मानने को तैयार नहीं था. उन का कहना था कि मृतका के कान की बाली और हाथ में बंधा धागा सिमरन का नहीं था. इस पर पुलिस का कहना था कि कृष्ण और सिमरन को साथ जाते वंदना ने देखा था, इसलिए उन की बात पर विश्वास नहीं किया जा सकता.

पुलिस पहुंची शिमला

पुलिस कृष्ण और सिमरन की लोकेशन पता कर रही थी. लेकिन फोन बंद होने से उन की लोकेशन नहीं मिल रही थी. जैसे ही फोन चालू हुआ, उन की लोकेशन शिमला की मिल गई. लोकेेशन मिलते ही सीआईए-3 प्रवीण कुमार टीम के साथ शिमला रवाना हो गए. स्थानीय पुलिस की मदद से उन्होंने होटलों की तलाशी शुरू कर दी. सैकड़ों होटल की तलाशी के बाद पुलिस टीम उस होटल तक पहुंच गई, जहां दोनों ठहरे थे.

लेकिन जब होटल की रजिस्टर चैक किया गया तो कृष्ण और सिमरन के नाम से यहां कोई नहीं ठहरा था. पुलिस की निगाह श्याम और राधा नाम के उन दो ग्राहकों पर टिक गई, जिन का पता पानीपत का था.

यहीं दोनों से चूक हो गई थी. उन्होंने होटल के रजिस्टर में नाम तो श्याम और राधा लिखाए थे, लेकिन पता नहीं बदला था. बस इसी से पुलिस को शक हुआ, इस के बाद पुलिस कमरे पर पहुंची तो पुलिस को देख कर दोनों सन्न रह गए. कृष्ण नीचे फर्श पर बैठा था, जबकि ज्योति बैड पर लेटी थी.

मरने वाली ज्योति नहीं सिमरन

जिस ज्योति को लोग मरा समझ रहे थे, दरअसल वह जिंदा थी. मंदिर के कमरे से जो लाश मिली थी, वह ज्योति की नहीं, बल्कि सिमरन दुबे की थी. पुलिस दोनों को गिरफ्तार कर के पानीपत ले आई. उन्हें जब एसपी राहुल शर्मा के सामने पेश किया गया तो वह भी हैरान रह गए.

राहुल शर्मा ने ज्योति के पिता रामपाल को बुला कर ज्योति को उन के सामने खड़ा किया तो बेटी को जिंदा देख कर वह सिर थाम कर बैठ गए. पुलिस द्वारा की गई पूछताछ में कृष्ण और ज्योति ने सिमरन की हत्या का अपना अपराध स्वीकार कर लिया. इस के बाद 8 तिसंबर को अदालत में पेश कर के विस्तारपूर्वक पूछताछ एवं सबूत जुटाने के लिए पुलिस ने उन्हें 4 दिनों के पुलिस रिमांड पर लिया. रिमांड के दौरान की गई पूछताछ में सिमरन की हत्या की जो कहानी सामने आई, वह इस प्रकार थी—

20 साल की सिमरन दुबे हरियाणा के जिला पानीपत के थाना नगर के मोहल्ला आजादनगर के रहने वाले आलोक दुबे की बेटी थी. वह 4 भाईबहनों में सब से बड़ी थी. वह आर्य डिग्री कालेज में बीए के दूसरे साल में पढ़ रही थी. उसी के साथ थाना नगर के ही बराना की रहने वाली ज्योति भी पढ़ती थी. दोनों पक्की सहेलियां तो थीं ही, एनएसएस की सदस्य भी थीं.

बात इसी साल जनवरी की है. एसडी डिग्री कालेज का एनएसएस का कैंप आर्य डिग्री कालेज में लगा था. कैंप का अध्यक्ष एसडी कालेज में पढ़ने वाला कृष्ण देशवाल था, जो बीए फाइनल ईयर में पढ़ रहा था. वह गांव अटावला का रहने वाला था. उस के पिता राजेंद्र देशवाल भैंसे खरीदनेबेचने का काम करते थे.

कृष्ण 2 बहनों का एकलौता भाई था. बहनें उस से छोटी थीं. घर में बड़ा और एकलौता बेटा होने के बावजूद वह जिम्मेदारी से काम नहीं करता था. पुलिस के अनुसार, जब कृष्ण स्कूल में पढता था, तब उस ने खुद के अपहरण का ड्रामा रचा था. वह दिन भर इधरउधर घूमा करता था. आर्य कालेज में लगे कैंप के दौरान ही उस की मुलाकात सिमरन और ज्योति से हुई थी. पहली ही नजर में ज्योति उस के मासूम चेहरे पर दिल दे बैठी.

कृष्ण ने ज्योति की आंखों से उस के दिल की बात पढ़ ली.  छरहरे बदन और तीखी नयननक्श वाली ज्योति भी उसे भा गई थी. इस के बाद अकसर दोनों की मुलाकातें होने लगीं. जल्दी ही उन की ये मुलाकातें प्यार में बदल गईं.

दोनों एकदूसरे से दीवानगी की हद तक प्यार करने लगे. जल्दी ही हालात यह हो गई कि अब वे एकदूसरे को देखे बिना नहीं रह सकते थे. अब इस का आसान तरीका था, वे शादी कर लें जिस से दोनों एकदूसरे की आंखों के सामने बने रहें.

ज्योति और कृष्ण की जातियां अलगअलग थीं. इसलिए ज्योति जानती थी कि उस के घर वाले कभी भी कृष्ण से उस की शादी नहीं करेंगे.

जबकि वह कृष्ण के बिना रह नहीं सकती थी. यही हाल कृष्ण का भी था. इसलिए उस ने ज्योति से भाग चलने को कहा. लेकिन ज्योति ने उस के साथ इसलिए भागने से मना कर दिया, क्योंकि इस से उस के घर वालों की बदनामी होती.

सहेली को बनाया शिकार

इस के बाद उन्होंने एक साथ रहने के बारे में सोचाविचारा तो उन के दिमाग में आया कि क्यों न वे अपनी कदकाठी के 2 लोगों की हत्या कर के उन के चेहरे तेजाब से इस तरह झुलसा दें कि कोई उन्हें पहचान न पाए. इस के बाद वे उन्हें अपने कपड़े पहना कर अपने आईकार्ड, फोन वगैरह वहां छोड़ देंगे, ताकि लोगों को लगे कि उन की हत्या हो चुकी है.

ज्योति की सहेली सिमरन दुबे उसी की कदकाठी की थी. वे उसे जहां बुलाते, वह वहां आ भी जाती. इसलिए सिमरन की हत्या की योजना बन गई. अब कृष्ण की कदकाठी के लड़के को ढूंढना था.

कृष्ण के लिए यह कोई मुश्किल काम नहीं था. 5 सितंबर को एनएसएस के कैंप के बहाने कृष्ण ने सिमरन और रमेश को फोन कर के गौशाला मंदिर के पहली मंजिल स्थित कमरे पर बुला लिया.

कृष्ण दाढ़ी नहीं रखे था, जबकि रमेश रखे था. इसलिए कृष्ण ने उस से दाढ़ी बनवा कर आने को कहा. लेकिन वह गोहाना मोड़ पर पहुंचा तो वहां कोई सैलून नहीं था, इसलिए उस ने फोन कर के कृष्ण को यह बात बताई तो उस ने उसे आने से मना कर दिया. रमेश वहीं से लौट गया. लेकिन सिमरन कृष्ण और ज्योति के जाल में फंस गई.

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सिमरन दुबे गौशाला मंदिर पहुंची तो कृष्ण और ज्योति वहां पहले से ही मौजूद थे. ज्योति को देख कर सिमरन बहुत खुश हुई. उस ने यह खुशी उस के गले मिल कर जाहिर की. गौशाला मंदिर पहुंचने से पहले ही कृष्ण ने कोल्डड्रिंक, नींद की गोलियां और तेजाब की व्यवस्था कर रखी थी. इन्हें वह अपने साथ लाए बैग में छिपा कर लाया था.

नींद की गोली मिली कोल्डड्रिंक पिलाई

कृष्ण ने सिमरन को नींद की गोलियां मिली कोल्डड्रिंक पीने को दी तो उस ने उन से भी कोल्डड्रिंक पीने को कहा. दोनों ने कहा कि उन्होंने अभीअभी पी है. कोल्डिड्रिंक पीने के कुछ देर बाद सिमरन की आंखें मुंदने लगीं. फिर वह बेहोश सी हो कर नीचे फर्श पर लेट गई. इस के बाद ज्योति ने उस के दोनों पैर पकड़ लिए तो कृष्ण ने उस का गला घोंट दिया.

इस तरह सिमरन को मौत के घाट उतार कर ज्योति ने उसे अपने कपड़े पहना दिए और उस के चेहरे पर तेजाब डाल कर झुलसा दिया. वह ज्योति है, यह साबित करने के लिए उस ने अपना आईकार्ड और मोबाइल फोन उस के पास छोड़ दिया, ताकि लोग इसे ज्योति समझें.

सिमरन की हत्या करने के बाद ज्योति और कृष्ण कमरे से बाहर आए और औटो से पानीपत रेलवे स्टेशन पहुंचे. उस समय वहां कोई टे्रन नहीं थी, इसलिए वे बसस्टैंड गए. वहां से चंडीगढ़ की बस पकड़ कर वे अगले दिन जीरकपुर पहुंच गए. अगले दिन अखबार में ज्योति की हत्या का समाचार छपा तो दोनों निश्चिंत हो गए कि हत्या का शक सिमरन पर किया जाएगा.

उन्होंने आराम से जीरकपुर के एक मौल में शौपिंग की और शिमला जा कर बसस्टैंड के नजदीक होटल रौयल में कमरा ले कर ठहर गए.

पुलिस उन के पीछे पड़ी है, इस का अंदाजा उन्हें बिलकुल नहीं था. पुलिस ने उन की तलाश में शिमला में 2 घंटे में सैकड़ों होटल छान मारे थे. जब पुलिस रौयल होटल में पहुंची तो पुलिस को देख कर सारा स्टाफ भाग गया. पुलिस को कमरा नंबर भी पता नहीं था. आखिर आधे घंटे की मशक्कत के बाद एक कमरे का दरवाजा तोड़ा गया तो अंदर कृष्ण और ज्योति मिले.

ज्योति के जिंदा बरामद होने के बाद सिमरन के घर वाले बेटी की हत्या के शोक में डूब गए थे. जबकि आलोक दुबे घटना वाले दिन से ही कह रहे थे कि मरने वाली ज्योति नहीं, उन की बेटी सिमरन है. लेकिन कोई उन की बात मानने को तैयार नहीं था.

ज्योति के जिंदा बरामद होने के बाद पुलिस आलोक दुबे और उन की पत्नी ऊषा को मधुबन ले गई, जहां डीएनए टेस्ट के लिए सैंपल लिए गए. रिपोर्ट आने के बाद निश्चित हो जाएगा कि गौशाला मंदिर के कमरे में मिली लाश सिमरन की ही थी.

पुलिस की लापरवाही

सिमरन हत्याकांड के आरोपियों को पकड़ कर पुलिस भले ही अपनी पीठ थपथपा रही हो, लेकिन इस में पुलिस की लापरवाही भी नजर आ रही है. शिमला के होटल में आईडी के रूप में कृष्ण और ज्योति ने अपने आधार कार्ड जमा कराए थे, वे आधार कार्ड श्याम और राधा के नाम से थे. साफ था कि वे फर्जी थे.

पुलिस ने जब कृष्ण से उन के बारे में पूछताछ की तो उस ने बताया कि आधार कार्ड उस के दोस्त देव कपूर ने जयपुर से बनवाए था. पुलिस ने उसे भी गिरफ्तार कर लिया है. अब पुलिस आधार कार्ड बनाने वाले को गिरफ्तार करना चाहती है.

पुलिस सिमरन का मोबाइल फोन बरामद करना चाहती है, जिस के बारे में कृष्ण और ज्योति कभी कहते हैं कि शिमला में झाडि़यों में फेंक दिया है तो कभी कहते हैं कि रास्ते में फेंक दिया था. इस के अलावा यह भी पता लगाया जा रहा है कि उन्होंने तेजाब और नींद की गोलियां कहां से खरीदी थीं.

इन के बारे में उन का कहना है कि तेजाब गुंड़मंडी से लिया था, जबकि नींद की गोलियां अपने एक रिश्तेदार के मैडिकल स्टोर से मंगवाई थीं.

रिमांड खत्म होने के बाद पुलिस ने दोनों को अदालत में पेश किया, जहां से उन्हें जेल भेज दिया गया.

प्रेम की अंधी गली में फंस कर ज्योति और कृष्ण ने जो कदम उठाया, आखिर उस से उन्हें क्या मिला. उन्होंने जो अपराध किया है, वे कानून की नजरों से बच नहीं पाएंगे. लेकिन अगर बच भी गए तो शायद ही समाज उन्हें सुकून से रहने दे. Story Hindi

Short love Story in Hindi : हर दिन के झगड़े बने मौत की वजह – प्रेमिका की ले ली जान

Short love Story in Hindi : वैलेंटाइन डे यानी 14 फरवरी, 2023 का दिन था. नालासोपारा इलाके में भी इस समय अच्छीखासी चहलपहल थी. लोग रोजमर्रा के कामों में व्यस्त थे. शाम के समय वहां के निवासियों को सीता सदन बिल्डिंग से बदबू आती हुई महसूस हुई तो किसी अनहोनी की आशंका से उन्होंने इस की सूचना इलाके के तुलिंज थाने में फोन कर के दे दी. यह सूचना सुन कर पुलिस सीता सदन बिल्डिंग की तरफ निकलने की तैयारी करने लगी. इसी दौरान कर्नाटक से एक महिला ने इसी थाने में फोन कर के सूचना दी कि सीता सदन में रहने वाली उस की भतीजी मेघा का कत्ल हो गया है. उसे यह बात स्वयं कातिल हार्दिक ने वाट्सऐप पर मैसेज कर के बताई है.

कुछ देर पहले पुलिस को सीता सदन में ही बदबू आने की काल मिली थी, अब उसी बिल्डिंग में हत्या किए जाने की काल मिलने पर इंसपेक्टर शैलेंद्र नगरकर समझ गए कि दोनों ही काल एक ही घटना की हो सकती हैं. इसलिए वह पुलिस टीम के साथ घटनास्थल की तरफ निकल गए. जब वह वहां पहुंचे तो देखा कि मुख्य दरवाजे पर ताला लगा था. उन्होंने ताला तुड़वा कर कमरे में प्रवेश किया तो कमरे में एक बैड पड़ा था, जिस के अंदर से भयंकर बदबू आ रही थी. बैड का बौक्स खोला गया तो उस के अंदर सड़ीगली हालत में एक महिला की लाश मिली. लाश की खराब हालत को देख कर ऐसा लगता था जैसे उस की हत्या लगभग 2 से 3 दिन पहले की गई होगी, क्योंकि शव सड़ने लगा था और उस से तेज बदबू बाहर निकल रही थी.

घर के अन्य कमरों की तलाशी लेने पर वहां घरगृहस्थी का कोई अन्य सामान नहीं मिला. लाश की सभी एंगल से फोटोग्राफी करवाने और फिंगरप्रिंट लेने के बाद उसे पोस्टमार्टम के लिए मोर्चरी भिजवा दिया गया. इंसपेक्टर शैलेंद्र नगरकर ने पड़ोसियों से घटना के बारे में पूछताछ कर मालूम करने की कोशिश की तो पता चला कि कोई एकाध महीने पहले एक दंपति यहां किराए पर रहने के लिए आया था. पड़ोसियों को इस मकान के अंदर से अकसर उन के लड़ने की भी आवाजें आती थीं, जिस से लगता था उन के आपसी संबंध ठीक नहीं रहे होंगे.

चूंकि पड़ोसियों को उन के व्यक्तिगत मामले से कुछ लेनादेना नहीं था, शायद इसलिए किसी ने उन के पर्सनल मामले में हस्तक्षेप करना ठीक नहीं समझा था. मृतक मेघा के साथ रहने वाला युवक हार्दिक गायब था. यह देख कर पुलिस ने अनुमान लगाया कि इस की हत्या उस के पति हार्दिक ने ही की होगी. क्योंकि उसी ने मेघा की चाची को वाट्सऐप पर मैसेज भेज कर मेघा का कत्ल करने की बात कही थी.

अब पुलिस को पूछताछ के लिए उस युवक की तलाश थी, लेकिन पड़ोसियों में से किसी ने भी उसे फरार होते हुए नहीं देखा था. आखिरकार, मकान मालिक और रियल स्टेट एजेंट को बुला कर इस में रहने वाले युवक के बारे में पूछताछ की गई. इस जांच में केवल इतना पता लगा कि युवक का नाम हार्दिक शाह और महिला का नाम मेघा धन सिंह थोरवी था. लेकिन पूछताछ में सब से अच्छी बात यह हुई कि पुलिस को मकान मालिक से हार्दिक का मोबाइल नंबर मिल गया.

सीता सदन को सील कर इंसपेक्टर शैलेंद्र नगरकर की टीम वापस थाने लौट गई. उसी रात यानी 14 फरवरी, 2023 को मेघा की हत्या का मामला दर्ज कर लिया गया.

मोबाइल फोन से मिला सुराग

मामला दर्ज करने के बाद पुलिस आरोपी हार्दिक की तलाश में जीजान से लग गई. इंसपेक्टर शैलेंद्र नगरकर ने अपनी टीम को घर के आसपास लगे सीसीटीवी की फुटेज खंगालने का आदेश दिया. साथ ही आरोपी हार्दिक के मोबाइल नंबर को सर्विलांस पर लगा कर उस की लोकेशन को ट्रेस करना शुरू किया तो 12 फरवरी को उस के ट्रेन द्वारा मुंबई से राजस्थान के लिए रवाना होने का पता चला. इस वक्त वह ट्रेन में सवार था.

इंसपेक्टर शैलेंद्र नगरकर ने मुंबई के मीरा भायंदर वसई विरार की अपराध शाखा और मध्य प्रदेश के नागदा स्थित आरपीएफ पुलिस को आरोपी के बारे में सूचित कर दिया. आरपीएफ की मदद से हार्दिक को यात्रा के दौरान ही मध्य प्रदेश के नागदा रेलवे स्टेशन से उस समय गिरफ्तार कर लिया गया, जब वह ट्रेन की बोगी में यात्रा कर रहा था. अपराध शाखा की टीम ने आरोपी हार्दिक को नागदा से ला कर तुलिंज थाने के इंसपेक्टर शैलेंद्र नगरकर को सौंप दिया.

इंसपेक्टर शैलेंद्र नगरकर ने हार्दिक से पूछताछ शुरू की तो हार्दिक ने मेघा की हत्या का जुर्म स्वीकार कर लिया. अपने इकबालिया बयान में आरोपी हार्दिक ने जो कुछ बताया, वह इस प्रकार है— हार्दिक शाह एक मौडर्न खयाल का युवक था. वह मुंबई में मलाड के एक नामचीन हीरा  व्यापारी संपत भाई का बेटा था. घर में दौलत की कमी नहीं थी, इसलिए उस का सारा दिन सैरसपाटे और मौजमस्ती में गुजर जाता था. जैसा कि आमतौर पर देखा गया है कि आजकल लड़के की कोई न कोई गर्लफ्रैंड जरूर होती है. हार्दिक शाह को भी सोशल मीडिया पर चलने वाले विभिन्न ऐप पर नई लड़कियों से दोस्ती कर उन के साथ चैटिंग करने में बड़ा मजा आता था.

बात सन 2018 की है. एक डेटिंग ऐप पर हार्दिक शाह की मुलाकात मेघा धन सिंह तोरवी से हुई. 34 वर्षीया मेघा तोरवी मूलरूप से केरल की निवासी थी, लेकिन इन दिनों नालासोपारा के एक अस्पताल में नर्स की नौकरी करती थी. इन दिनों लड़के हों या लड़कियां, अपने से बड़ी उम्र के पार्टनर के साथ इश्क करने से गुरेज नहीं करते. हार्दिक और मेघा तोरवी के साथ भी कुछ ऐसा ही हुआ. हार्दिक शाह की उम्र 24 साल थी, जबकि मेघा तोरवी 34 की थी. वह हार्दिक से लगभग 10 साल बड़ी थी. लेकिन प्रेमिका के बड़ी उम्र के होने से हार्दिक को कोई परेशानी नहीं थी.

कुछ दिनों तक आपस में चैटिंग करने के बाद उन का मिलनाजुलना शुरू हो गया. धीरेधीरे दोनों एकदूसरे के इतने करीब आ गए कि उन्हें अब एकदुसरे से दूर रह पाना मुश्किल लगने लगा. आखिरकार उन्होंने लिवइन रिलेशनशिप में रहने का फैसला कर लिया. हार्दिक मलाड स्थित अपने पैतृक घर से दूर आ कर विजय नगर में एक मकान ले कर मेघा के साथ रहने लगा. हार्दिक जैसे मालदार प्रेमी का साथ पा कर मेघा अपने जीवन को धन्य समझने लगी. हार्दिक ने मेघा के सामने अपने पिता की दौलत को ले कर ढेर सारे कसीदे पड़े थे, जिसे सुन कर मेघा सपनों की सतरंगी दुनिया में विचरने लगी थी. उसे लगता था कि हार्दिक के साथ उस की बाकी की जिंदगी बड़े आराम से गुजरेगी.

हार्दिक को खुश रखने के लिए वह अपनी सारी कमाई उस पर लुटाने लगी. उसे खुश रखने में मेघा कभी कोई कोरकसर बाकी नहीं छोड़ती थी.

मेघा के साथ लिवइन में रहने लगा हार्दिक

हालांकि हार्दिक भी मेघा को दिलोजान से चाहता था. वह मेघा के लिए नएनए तोहफे लाया करता और उस की हर सुखसुविधा का बहुत खयाल रखता था. मेघा जब नौकरी के लिए जाती तो वह उसे छोड़ने और छुट्टी के समय उसे लेने जाता था. हार्दिक के पिता उसे जेब खर्च के लिए हरेक महीने 20 हजार रुपए देते थे. दोनों की जिंदगी मजे में गुजर रही थी. तभी 2019 के मार्च महीने में कोरोना फैलने के डर से पूरे देश में लौकडाउन लगा दिया गया. इस लौकडाउन से लोगों के कामधंधे छूट गए. हार्दिक और मेघा भी इस से बच नहीं सके और उन की भी जिंदगी परेशानी में घिर गई.

कुछ दिनों के बाद हार्दिक ने फिर भी डेटा कलेक्शन का काम कर के घर की स्थिति को संभाल लिया. 2022 में जब देश में लौकडाउन हटाने की घोषणा हुई तो मुंबई का जनजीवन सामान्य होने लगा. इस के बाद जब हालात ठीक हो गए तो मेघा ने फिर से अपनी नौकरी पर जाना शुरू कर दिया. उन के घर में खुशियां पहले की बहाल हो गईं. सब कुछ ठीक ही चल रहा था. हार्दिक बीचबीच में मलाड स्थित अपने पिता के घर भी चला जाता था. अभी तक हार्दिक ने अपने घर में मेघा के साथ रहने की बात नहीं बताई थी. उसे मालूम था कि उस के पिता मेघा को अपने घर की बहू के रूप में कभी स्वीकार नहीं करेंगे.

एक बार किसी काम में हार्दिक ने पिता के 40 लाख रुपए गंवा दिए. इस से उस के पिता बहुत नाराज हुए थे. करीब 8 महीने बाद अगस्त में हार्दिक ने मेघा से शादी कर ली और विजय नगर से नालासोपारा के सीता सदन में रहने चला आया. यहां हार्दिक और मेघा ने लोगों को यही बताया कि वे पतिपत्नी हैं. अभी दोनों को यहां रहते हुए कुछ ही समय गुजरा था कि हार्दिक के पिता को बेटे के मेघा के साथ रहने की जानकारी हुई तो वह उस से इस कदर नाराज हुए कि उन्होंने हार्दिक को अपनी पूरी जायदाद से हमेशा के लिए बेदखल कर दिया. इस के साथ उन्होंने हार्दिक को महीने का मिलने वाला 20 हजार रुपए देना बंद कर दिया.

मेघा की कमाई पर करने लगा ऐश

पिता द्वारा उठाए इस सख्त कदम से हार्दिक की आर्थिक हालत खस्ता हो गई. दरअसल, अभी तक वह पिता की दौलत पर ही ऐश कर रहा था. लेकिन अब जब पिता ने उस की हरकतों से तंग आ कर उसे बेदखल किया तो अपने पैर पर खड़े होने की बजाय वह मेघा की कमाई पर ऐश करने लगा. उसे लगता था कि मेघा उस के बेरोजगार पड़े रहने पर कुछ नहीं कहेगी. पहले तो मेघा ने उसे समझाबुझा कर अपने योग्य कोई ढंग का काम या कोई नौकरी तलाशने का सुझाव दिया. पर मेघा की बात पर हार्दिक ने रत्ती भर भी ध्यान नहीं दिया.

वह मेघा की कमाई पर ऐश करने लगा, जिस से मेघा को घर का खर्च पूरा करने में परेशानी होने लगी. हार्दिक के हाथ पर हाथ रख कर बैठे रहने से घर चलाने की पूरी जिम्मेदारी मेघा के नाजुक कंधों पर आ गई. रुपएपैसे की किल्लत के कारण उन के घर में क्लेश रहने लगा. हार्दिक मामले की नजाकत को नहीं समझा और मेघा के पैसों पर ऐश करना जारी रखा. आखिर में 11 और 12 फरवरी, 2023 की रात हार्दिक के बेरोजगार रहने को ले कर बात बढ़ जाने पर हार्दिक अपना आपा खो बैठा और तौलिए से मेघा का गला घोट कर मार डाला. मेघा की लाश को छिपाने के लिए उस ने उस की लाश बिस्तर में लपेट कर बैड के बौक्स में रख दी.

पुलिस द्वारा पकड़े जाने से बचने के लिए वह यहां से बहुत दूर चला जाना चाहता था. लेकिन उस के पास पैसे नहीं थे, इसलिए अगले दिन उस ने घर के सभी महंगे सामान कम कीमत पर बेच कर कुछ रुपए इकट्ठा किए. 12 फरवरी को फरार होने से पहले हार्दिक ने कनार्टक में रहने वाली मेघा की चाची को फोन कर बता दिया कि रोजरोज के झगड़े तंग आ कर उस ने मेघा की हत्या कर दी है और उस की लाश बैड के बौक्स में छिपा दी है. अब वह आत्महत्या करने हरिद्वार जा रहा है.

इस के बाद वह घर के दरवाजे पर ताला लगा कर रेलवे स्टेशन पर पहुंच गया. वहां से उस ने राजस्थान जाने के लिए ट्रेन पकड़ी मगर पुलिस ने 15 फरवरी, 2023 को बीच रास्ते से ही उसे गिरफ्तार कर लिया.

उसे मुंबई के वसई की अदालत में पेश किया गया, जहां से उसे 21 फरवरी, 2023 तक के लिए पुलिस कस्टडी में भेज दिया गया है.  Short love Story in Hindi

Mumbai News : प्रेमी बना कातिल – 17 वार मंगेतर पर चाकूओं से बार कर किया कत्ल

Mumbai News: मुंबई के निकट जिला ठाणे के उपनगर मुंब्रा में एक सिनेमाघर है आलीशान. इस सिनेमाघर से थोड़ी दूरी पर एक बिल्डिंग है नूरानी. 45 वर्षीय उमर मोहम्मद शेख इसी इमारत की चौथी मंजिल के एक फ्लैट में अपने परिवार के साथ रहते थे. फ्लैट किराए का था. उमर शेख का मुंब्रा में अच्छा कारोबार था, साथ ही मानसम्मान भी. लोग उन्हें आदर से उमर भाईजान कह कर बुलाते थे.

उमर शेख के परिवार में उन की पत्नी जुबेरा शेख, 3 बेटियां और एक बेटे को मिला कर 6 सदस्य थे, जो अब 5 रह गए थे. उन का बेटा भरी जवानी में एक जानलेवा बीमारी का शिकार हो कर दुनिया को अलविदा कह गया था.

वक्त ने ऐसा कहर ढाया कि एक सड़क दुर्घटना में उमर मोहम्मद की कमर में भी चोटें आईं और वह बिस्तर पर पहुंच गए. अस्पताल के भारीभरकम खर्चे की वजह से वह अपनी कमर का औपरेशन भी न करवा पाए थे. लाचार हो कर उन्हें घर में बैठना पड़ा. घर बैठ जाने से उन के घर की आर्थिक स्थिति बिगड़ गई. कारोबार बंद होने से उन की आमदनी भी बंद हो चुकी थी.

घर में जब भूखों मरने की नौबत आई तो उन की बेटी नसरीन ने घर की जिम्मेदारियां उठाने का फैसला किया. सामाजिक रस्मोरिवाज के चलते नसरीन ने अपना बुरका उतार फेंका.

20 वर्षीय सुंदर स्वस्थ और महत्त्वाकांक्षी नसरीन उमर मोहम्मद की दूसरे नंबर की बेटी थी. नसरीन ने मुंब्रा के एक कालेज से 12वीं पास की थी. घरपरिवार की माली हालत देख नसरीन नौकरी की तलाश में लग गई. जल्दी ही उस की यह तलाश पूरी हो गई. उसे मुंबई के अंधेरी वेस्ट के ‘चाय पर चर्चा’ नाम के एक कौफी हाउस में नौकरी मिल गई.

अपनी मेहनत और विनम्र स्वभाव से नसरीन ने एक साल के अंदर कौफी हाउस के मैनेजमेंट का दिल जीत लिया. इस से प्रभावित हो कर कौफी हाउस के मैनेजमेंट ने उस का वेतन बढ़ा दिया. साथ ही उसे प्रमोशन दे कर उसे कोलाबा फोर्ट स्थित अपनी पौश इलाके की ब्रांच में नियुक्त कर दिया.

नसरीन को ‘चाय पर चर्चा’ कौफी हाउस की मैनेजर बन कर आए हुए अभी 6 महीने भी नहीं हुए थे कि नसरीन की विनम्रता और मेहनत से कौफी हाउस की आय काफी बढ़ गई थी. उस कौफी हाउस से कोई भी कस्टमर नाराज हो कर नहीं जाता था.

कौफी हाउस की क्वालिटी में सुधार तो आया ही, लोग उस की प्रशंसा भी करने लगे. ‘चाय पर चर्चा’ कौफी हाउस की नौकरी से घर की स्थिति सुधर गई तो नसरीन ने अपने पिता की कमर का औपरेशन करवाया. अब नसरीन का इरादा अपनी बड़ी बहन का निकाह करवाने का था, लेकिन वह ऐसा कर पाती, इस से पहले ही ऐसा कुछ हो गया कि उमर मोहम्मद का परिवार अधर में लटक कर रह गया.

31 जुलाई, 2018 की रात नसरीन के परिवार वालों पर बहुत भारी पड़ी. उस दिन सुबह के साढ़े 7 बजे नसरीन ने जल्दीजल्दी लंच का डिब्बा तैयार कर के बैग उठाया और मां से यह कह कर घर से बाहर निकल गई कि 8 बजे की लोकल ट्रेन छूट जाएगी. उस ने चाय तक नहीं पी थी.

नसरीन हुई लापता

दिन में उस ने 2-3 बार घर पर फोन भी किया, सब ठीक था. लेकिन घर वालों के दिलों की धड़कनें तब बढ़ने लगीं, जब रात 10 बजे तक न तो नसरीन घर लौटी और न उस ने फोन किया. नसरीन कभी घर आने में लेट होती थी तो फोन कर के इस की जानकारी अपने घर वालों को दे देती थी. घर वालों ने उस के मोबाइल पर फोन लगाया तो वह भी बंद मिला.

जब 11 बजे तक नसरीन की कोई जानकारी नहीं मिली तो उमर शेख को नसरीन की चिंता होने लगी. उन्होंने कैफे में फोन कर के पूछा तो पता चला कि नसरीन अपने समय पर निकल गई थी.

उमर मोहम्मद ने अपने सगेसंबंधियों के साथसाथ जानपहचान वालों को भी फोन कर के नसरीन के बारे में पूछा, लेकिन कहीं से कोई जानकारी नहीं मिली.

जैसेजैसे रात गहराती जा रही थी, उमर शेख के परिवार की चिंता बढ़ती जा रही थी. उन्होंने नसरीन के प्रेमी सलमान खान को भी फोन किया, लेकिन उस का फोन भी बंद था.

बारबार कोशिश करने के बाद आखिर सलमान खान का फोन मिल गया. उस ने बताया कि नसरीन उसे 7 बजे चर्चगेट के ओवल पार्क में मिली थी. वहां दोनों कुछ देर तक बैठे रहे और 8 बजे ओवल पार्क से बाहर आए थे.

वहां से नसरीन यह कहते हुए निकल गई थी कि वह वीटी रेलवे स्टेशन के पास वाले स्टालों से घर के लिए कुछ शौपिंग कर के घर जाएगी. इस के बाद का उसे कुछ पता नहीं है, क्योंकि वह घर लौट आया था. साथ ही उस ने यह भी पूछा कि परेशान क्यों हैं?

‘‘बेटा, नसरीन अभी तक घर नहीं पहुंची है.’’ उमर शेख ने भरे गले से बताया.

‘‘घबराओ नहीं चाचा, मैं आ रहा हूं.’’ कह कर सलमान ने फोन काट दिया.

रात के करीब 3 बजे सलमान जब नसरीन के घर पहुंचा तो घर में सभी दुखी बैठे थे. नसरीन की मां जुबेरा की हालत सब से ज्यादा खराब थी.

‘‘इतना लेट क्यों आए बेटा?’’ उमर शेख के पूछने पर सलमान ने अपनी बाइक खराब होने की बात बताई.

सलमान खान आधे घंटे तक उन के घर बैठा रहा. वह घर वालों को सांत्वना दे रहा था. इस के बाद वह उमर शेख और उन के साले को साथ ले कर नसरीन की तलाश में निकल पड़ा.

शुरू हुई नसरीन की तलाश

नसरीन की तलाश में निकले सलमान और उमर शेख पहले मुंब्रा पुलिस थाने गए. वहां उन्होंने ड्यूटी अफसर को नसरीन के बारे में सारी बातें बता कर शिकायत दर्ज करवाई. नसरीन की गुमशुदगी दर्ज करने के बाद ड्यूटी अफसर ने उन्हें वीटी रेलवे पुलिस और आजाद मैदान पुलिस थाने जाने का सुझाव दिया. वजह यह कि नसरीन जिस एरिया में काम करती थी, वह आजाद मैदान पुलिस थानाक्षेत्र में आता था.

मुंब्रा पुलिस के सुझाव पर सलमान खान ने नसरीन के पिता उमर शेख और उन के साले के साथ मुंब्रा से सुबह 4 बजे वीटी स्टेशन जाने वाली लोकल ट्रेन पकड़ी. रेलवे पुलिस थाने में पता करने के बाद वे लोग आजाद मैदान पुलिस थाने के लिए निकले. लेकिन वहां न जा कर तीनों आजाद मैदान पुलिस थाने के बजाय पास ही दैनिक नवभारत टाइम्स के सामने स्थित आजाद मैदान चौकी पहुंच गए.

चौकी में तैनात सिपाहियों ने उन्हें कोलाबा पुलिस थाने जाने को कहा. कोलाबा पुलिस थाने के पुलिस अफसरों ने उन्हें वापस आजाद मैदान भेज दिया. इस भागदौड़ में उमर शेख काफी थक गए थे. लेकिन बेटी का मामला था, इसलिए वह दौड़ते रहे.

‘‘बेटा सलमान, यहां से ओवल पार्क कितनी दूर है? हम चाहते हैं कि वह जगह भी देख लें, जहां तुम दोनों मिले थे.’’

उमर शेख के सवाल से सलमान के चेहरे का रंग उड़ गया. फिर भी उस ने खुद को संभाल कर कहा, ‘‘बस यहीं पास में ही है. वहां जाने के लिए हम टैक्सी कर लेते हैं.’’

‘‘नहीं, उस की कोई जरूरत नहीं है. जब पास में है तो पैदल ही चलते हैं.’’ कह कर उमर शेख ओवल पार्क की तरफ चल दिए.

बेटी की लाश मिलेगी, उमर शेख ने सोचा न था

तब तक सुबह के साढ़े 7 बज चुके थे. इस के पहले कि ये लोग ओवल पार्क पहुंचते, आजाद मैदान पुलिस थाने की पैट्रोलिंग टीम वहां पहुंची हुई थी. पुलिस एक युवती की लाश को घेरे खड़ी थी. वहां काफी लोग एकत्र थे. तभी एक व्यक्ति ने भीड़ से बाहर आ कर बताया कि एक युवती की लाश पड़ी है. उस की बात सुन कर उमर शेख के होश उड़ गए.

भीड़ को चीरते हुए जब वह शव के पास पहुंचे तो उन के मुंह से दर्दभरी चीख निकल गई. वह छाती पीटपीट कर रोने लगे. उन्हें रोतेबिलखते देख पुलिस टीम ने पहले उन्हें संभाला फिर पूछताछ की. उन्होंने बता दिया कि मृतका उन की बेटी नसरीन है. उस की पहचान उन्होंने कफन से बाहर निकली जूती से ही कर ली थी.

नसरीन की लाश वहां पड़ी होने की जानकारी सुबह ओवल पार्क में घूमने निकले लोगों ने पुलिस कंट्रोल रूम को दी थी. पुलिस कंट्रोल रूम ने यह जानकारी मुंबई के सभी पुलिस थानों के साथसाथ उच्चाधिकारियों को भी दे दी थी.

घटनास्थल ओवल पार्क था और यह जगह थाना आजाद मैदान के क्षेत्र में आती थी. थाना आजाद मैदान के ड्यूटी अफसर इंसपेक्टर प्रदीप झालाटे ने लाश मिलने की जानकारी थानाप्रभारी वसंत वाखारे के साथसाथ पुलिस पैट्रोलिंग टीम को भी दे दी थी.

जानकारी मिलते ही पैट्रोलिंग टीम घटनास्थल पर पहुंच गई. बाद में थाना आजाद मैदान के सीनियर इंसपेक्टर वसंत वाखारे अपने सहायक इंसपेक्टर बलवंत पाटील, सहायक इंसपेक्टर रविंद्र मोहिते और सबइंसपेक्टर प्रदीप झालाटे के साथ घटनास्थल पर पहुंच गए.

उन्होंने नसरीन की लाश का निरीक्षण कर के उसे वीटी स्थित जीटी अस्पताल भेज दिया. अस्पताल के डाक्टरों ने लाश देखने के बाद नसरीन को मृत घोषित कर दिया.

थानाप्रभारी वसंत वाखारे ने नसरीन की लाश को पोस्टमार्टम के लिए जे.जे. अस्पताल भेज दिया और मृतका के पिता उमर शेख, उन के साले और सलमान खान को थाने ले आए. पिता की ओर से शिकायत दर्ज करने के बाद थानाप्रभारी ने जांच शुरू कर दी.

पोस्टमार्टम रिपोर्ट के अनुसार, मृतका नसरीन के शरीर पर चाकू के 17 घाव थे. मतलब उसे बड़ी बेरहमी से मारा गया था. उस की मौत ज्यादा खून बहने से हुई थी.

पुलिस की प्रारंभिक जांच में नसरीन की हत्या के पीछे प्यार और धोखे की कहानी लग रही थी. हकीकत तक पहुंचने के लिए पहले नसरीन के व्यक्तिगत जीवन की हकीकत पता करनी जरूरी थी.

पुलिस की तफ्तीशी टीम ने सब से पहले नसरीन की कुंडली खंगालनी शुरू की. पुलिस टीम ने नसरीन की फ्रैंड्स और ‘चाय पर चर्चा’ कौफी हाउस के कर्मचारियों से गहराई से पूछताछ की. नसरीन के घर और ‘चाय पर चर्चा’ कौफी हाउस से शुरू की गई तफ्तीश ने पुलिस को जल्द ही सफलता दिला दी. पुलिस के राडार पर नसरीन का प्रेमी सलमान खान आ गया. सलमान खान वैसे भी पुलिस की नजर में संदिग्ध था.

जल्दी ही यह बात साफ हो गई कि नसरीन का हत्यारा सलमान खान ही है. सच्चाई जान कर नसरीन के घर वाले हैरत में रह गए. जिसे अपना समझा था, वही बेटी का हत्यारा निकला. वे लोग तो उस के साथ नसरीन का निकाह करने के लिए तैयार थे. पुलिस जांच और सलमान खान के बयान से नसरीन हत्याकांड की जो कहानी सामने आई, वह कुछ इस तरह थी-

गांव से मुंबई पहुंचे सलमान को मिली प्रेमिका

28 वर्षीय सलमान खान उत्तर प्रदेश के बस्ती जिले के एक गांव का रहने वाला था. उस के पिता का नाम मुश्ताक खान था, जो गांव के साधारण किसान थे. सलमान खान का निकाह हो चुका था. उस की पत्नी 2 बच्चों की मां बन चुकी थी. घर की आर्थिक स्थिति खराब होने की वजह से वह नौकरी की तलाश में मुंबई आ गया था.

मुंबई के भायखला क्षेत्र में उस के कई परिचित रहते थे. उन की मदद से उसे कोलाबा कोर्ट स्थित सन्नी फ्रूट ट्रांसपोर्ट में फ्रूट डिलीवरी की नौकरी मिल गई. फ्रूट ट्रांसपोर्ट का औफिस और ‘चाय पर चर्चा’ कौफी हाउस आसपास थे. नौकरी मिलने के बाद सलमान ने भायखला इलाके में किराए का एक कमरा ले लिया और अपनी बीवी और बच्चों को मुंबई ले आया.

औफिस में सलमान को कई काम करने होते थे. कभीकभी उसे अपने यहां के अफसरों के लिए कौफी का और्डर देने के लिए ‘चाय पर चर्चा’ कौफी हाउस जाना पड़ता था.

जब तक नसरीन फोर्ट स्थित कौफी हाउस में नहीं आई थी, तब तक सलमान का जीवन सामान्य रूप से चल रहा था, लेकिन नसरीन के वहां आने के बाद सलमान के दिल की धड़कनें बढ़ गईं. मनचले सलमान का दिल नसरीन पर आ गया. वह पहली ही नजर में नसरीन का दीवाना हो गया. अब औफिस की सारी चाय और कौफी का और्डर देने वही जाने लगा. जब वह ‘चाय पर चर्चा’ कौफी हाउस में जाता, तो उस की निगाहें नसरीन पर ही टिकी रहती थीं. पहले तो नसरीन ने इस ओर कोई ध्यान नहीं दिया. लेकिन धीरेधीरे नसरीन को उस की निगाहों की भाषा समझ में आने लगी. नतीजतन जल्दी ही दोनों में दोस्ती हो गई. दोनों एकदूसरे के बारे में सब कुछ जानसमझ कर घुलमिल गए.

सलमान खान का अपना छोटा सा परिवार था, जबकि नसरीन कुंवारी थी और उस के ऊपर अपने परिवार की पूरी जिम्मेदारी थी. सलमान शादीशुदा और 2 बच्चों का बाप है, यह जानते हुए भी नसरीन ने अपने संबंधों पर कोई विरोध या आपत्ति नहीं की. इस की जगह उस ने सलमान से निकाह करने के लिए भी हां कर दी थी.

उस की बस यह शर्त थी कि पहले वह अपने पिता उमर शेख की कमर का औपरेशन कराएगी. अब समस्या यह थी कि नसरीन के परिवार वाले क्या एक शादीशुदा से उस का निकाह करने को तैयार होंगे. लेकिन यह समस्या भी हल हो गई.

नसरीन ने अपने जानपहचान वालों से आर्थिक मदद ले कर अपने पिता को औपरेशन के लिए एक प्राइवेट अस्पताल में दाखिल करवा दिया. इस औपरेशन में सलमान ने नसरीन का दोस्त बन कर उमर शेख की काफी मदद की. इस से प्रभावित हो कर नसरीन के परिवार ने उस के और नसरीन के रिश्ते को मंजूरी दे दी थी.

नसरीन और सलमान दोनों ही राजी थे, ऐसे में किसी को क्या आपत्ति होती. परिवार की तरफ से सिगनल मिलने के बाद नसरीन और सलमान दोनों ड्यूटी के बाद खुल कर मिलने लगे. दोनों साथसाथ घूमते और मौजमस्ती करते.

लेकिन उस मासूम कली को निचोड़ लेने के बाद सलमान का असली चेहरा सामने आ गया. धीरेधीरे उसे नसरीन बोझ लगने लगी. यह जानते हुए भी कि नसरीन के कंधों पर उस की बहन के निकाह की जिम्मेदारी है, वह नसरीन पर निकाह का दबाव बनाने लगा. दरअसल, उस की सोच यह थी कि नसरीन उस की पत्नी बन गई तो उस का वेतन भी उस के घर आने लगेगा. समस्या यह थी कि नसरीन निकाह के लिए तैयार नहीं थी.

इसी को ले कर सलमान खान नसरीन पर संदेह करने लगा. इस बात पर दोनों में लड़ाईझगड़ा भी होता. वह चाहता था कि या तो नसरीन उसे छोड़ दे, फिर शादी करे. लेकिन यह नसरीन के लिए संभव नहीं था, वह सलमान को बहुत प्यार करती थी. दूसरी ओर जब सलमान को यकीन हो गया कि नसरीन उस की जिंदगी से जाने वाली नहीं है, तो उस ने नसरीन को अपनी जिंदगी से बाहर निकालने का एक क्रूर फैसला ले लिया.

प्रेमी बना हत्यारा

घटना के दिन सलमान ने नसरीन को चर्चगेट के ओवल पार्क में बुलाया. नसरीन अपनी ड्यूटी खत्म कर के जब ओवल पार्क पहुंची तो सलमान उस के लेट पहुंचने को ले कर खरीखोटी सुनाने लगा. इस पर नसरीन का चेहरा भी लाल हो गया.

उस ने कहा, ‘‘सलमान, आखिर तुम्हें मुझ से प्रौब्लम क्या है? आजकल तुम मुझ से सीधे मुंह बात नहीं करते. मुझे छोटीछोटी बातों पर टौर्चर करते हो.’’

‘‘टौर्चर मैं करता हूं या तुम…आज तुम अपने किस यार से मिल कर आ रही हो?’’ सलमान ने कुटिलता से मुसकराते हुए कहा.

‘‘सलमान, खुदा से डरो. मैं तुम्हारी होने वाली पत्नी हूं. तुम मर्यादा में रहो तो अच्छा है.’’ कह कर नसरीन घर जाने के लिए उठ खड़ी हुई.

लेकिन सलमान खान ने उस का हाथ पकड़ कर अपनी ओर खींच लिया, जिस से वह गिर गई. सलमान ने पूरे मैदान का जायजा ले कर अपनी जेब से चाकू निकाला और नसरीन पर हमला कर दिया.

चाकू के 17 वार करने के बाद सलमान वहां से भाग खड़ा हुआ. वह नसरीन का मोबाइल फोन भी अपने साथ ले गया. नसरीन को मौत की नींद सुलाने के 3 घंटे बाद उस ने नसरीन के घर वालों से संपर्क किया. बाद में वह नसरीन के घर गया और उन के साथ नसरीन को ढूंढने में उन की मदद करने लगा.

पुलिस ने सलमान से विस्तृत पूछताछ के बाद उस के खिलाफ भादंवि की धारा 302 के तहत केस दर्ज कर के उसे गिरफ्तार कर लिया. बाद में उसे अदालत में पेश किया गया, जहां से उसे मुंबई की आर्थर रोड जेल भेज दिया गया. Mumbai News

-कथा पुलिस सूत्रों पर आधारित

UP Crime News : इश्क ने तहसीलदार को बना दिया कातिल

UP Crime News : रुचि सिंह चौहान उत्तर प्रदेश पुलिस में सिपाही थी. उस का हाल ही में बाराबंकी से लखनऊ तबादला हुआ था. 13 फरवरी, 2022 को उस की ड्यूटी थी, लेकिन वह अपने औफिस ड्यूटी पर नहीं पहुंची. इस के बाद उस की तलाश की गई, उस का कोई पता नहीं चला. उस का मोबाइल भी बंद आ रहा था. रुचि के साथ काम करने वाली उस की सहेली ने सोशल मीडिया पर फोटो सहित उस के लापता होने की पोस्ट डाली तो पूरे विभाग में हड़कंप मच गया.

जब किसी तरह से रुचि का पता नहीं लगा तो विभाग के अनुभाग अधिकारी एम.पी. सिंह ने सुशांत गोल्फ सिटी थाने में रुचि की गुमशुदगी की सूचना दर्ज करा दी. पुलिस ने 3-4 दिनों तक उसे अपने स्तर से ढूंढा, लेकिन उस का कहीं पता नहीं चला.

उसी दौरान 17 फरवरी को पीजीआई थाना क्षेत्र के कल्ली माती स्थित नाले में एक युवती की लाश मिली है. पीजीआई थाने के प्रभारी धर्मपाल सिंह सूचना पर पुलिस टीम के साथ मौके पर पहुंच गए. उन्होंने लाश को नाले से निकलवा कर निरीक्षण किया गया.

मृतका का चेहरा काफी बिगड़ गया था. कपड़ों से ही उस की पहचान हो सकती थी. परंतु जब मौके पर उस की शिनाख्त न हो सकी तो इंसपेक्टर सिंह ने लाश को पोस्टमार्टम के लिए मोर्चरी भेज दिया.

इसी बीच थानाप्रभारी धर्मपाल सिंह सुशांत को गोल्फ सिटी में सिपाही रुचि सिंह की गुमशुदगी दर्ज होने की जानकारी मिली तो उन्होंने नाले से युवती की लाश बरामद करने की सूचना थाना गोल्फ सिटी को दे दी.

सूचना पा कर 19 फरवरी को रुचि के साथ काम करने वाली उस की सहेली थानाप्रभारी धर्मपाल सिंह के साथ मोर्चरी चली गई. उस ने कपड़ों के आधार पर ही लाश की पहचान रुचि के रूप में कर ली. जिस के बाद रुचि सिंह के घर घटना की सूचना दे दी गई. रुचि मूलरूप से उत्तर प्रदेश के बिजनौर जिले के नजीबाबाद थाने के महावतपुर बिलौच की रहने वाली थी. रुचि के घर वालों द्वारा भी लाश की पहचान कर ली गई.

इस के बाद पुलिस ने पीजीआई थाने में अज्ञात के खिलाफ हत्या का मुकदमा दर्ज कर केस की जांच शुरू कर दी. रुचि का मोबाइल नंबर भी सर्विलांस पर लगा दिया गया.

काल डिटेल्स में 12 फरवरी को उस के फोन की आखिरी लोकेशन पीजीआई, लखनऊ के पास मिली. उसी दिन उस की जिस नंबर से अंतिम बार बात हुई थी, वह नंबर पता किया गया. वह नंबर पद्मेश श्रीवास्तव के नाम पर था, जोकि प्रतापगढ़ के रानीगंज में नायब तहसीलदार के पद पर तैनात था.

20 फरवरी की सुबह साढे़ 5 बजे लखनऊ पुलिस प्रतापगढ़ पहुंच गई. स्थानीय पुलिस को साथ ले कर लखनऊ पुलिस रानीगंज में कंपनी बाग के पास स्थित ट्रांजिट हौस्टल पहुंची. इसी हौस्टल में पद्मेश रहता था.

पुलिस ने दरवाजा खटखटाया तो कुछ पलों में ही पद्मेश ने दरवाजा खोल दिया. पुलिस ने पद्मेश को हिरासत में लेने के बाद पूछताछ की तो उस ने अपना जुर्म स्वीकार कर लिया. पूछताछ में रुचि की हत्या में 2 और नाम सामने आए. एक नाम पद्मेश की पत्नी प्रगति श्रीवास्तव और दूसरा उन दोनों के परिचित नामवर सिंह का था.

पद्मेश की गिरफ्तारी के बाद पुलिस ने नामवर सिंह को रानीगंज से और पद्मेश की पत्नी प्रगति को प्रयागराज स्थित घर से गिरफ्तार कर लिया. तीनों को ले कर लखनऊ पुलिस वापस आ गई. यहां आ कर जब उन सभी से गहनता से पूछताछ की गई तो हत्या की पूरी वजह खुल कर सामने आ गई.

उत्तर प्रदेश के बिजनौर जिले के नजीबाबाद थाने के महावतपुर बिलौच में रहती थी 25 वर्षीय रुचि सिंह चौहान. उस के पिता का नाम योगेंद्र सिंह चौहान और माता का नाम रानी देवी था. पिता पेशे से किसान थे. रुचि का एक भाई था शुभम. वह अभी पढ़ रहा था.

रुचि शुरू से पढ़ाई में काफी तेज थी. उस ने नजीबाबाद के ही एक कालेज से इंटरमीडिएट तक पढ़ाई की थी. उस के बाद उस ने पुलिस की भरती के लिए तैयारियां करनी शुरू कर दीं.

उस का सेलेक्शन भी हो गया. पुलिस ट्रेनिंग के दौरान उस की मुलाकात नीरज सिंह से हुई. वह भी कांस्टेबल की ट्रेनिंग कर रहा था.

नीरज सिंह बरेली जिले का रहने वाला था. रुचि बेहद खूबसूरत और चंचल स्वभाव की थी. उस के तीखे नैननक्श उस की खूबसूरती में चार चांद लगा देते थे. जो उसे देखता, देखता ही रह जाता. नीरज भी उसे देख कर अपना दिल हार बैठा. उस की नजर ही रुचि पर से नहीं हटती थी.

नीरज ने उस की तरफ कदम बढ़ाए तो रुचि को भी इस का एहसास हो गया कि नीरज उसे चाहता है. नीरज भी गबरू जवान था. रुचि भी उस में रुचि लेने लगी. पहले दोनों में दोस्ती हुई, जब दोनों एकदूसरे को अच्छे से जानने लगे, चाहत की आग बढ़ी तो दोनों एकदूसरे से प्यार का इजहार कर बैठे.

जून, 2019 में रुचि ने नीरज से विवाह कर लिया. रुचि के घरवाले इस विवाह के सख्त खिलाफ थे, लेकिन रुचि नहीं मानी. इस पर रुचि के घरवालों ने उस से ज्यादा मतलब रखना बंद कर दिया.

विवाह के बाद जैसेजैसे समय आगे बढ़ता गया, दोनों के बीच और नजदीकियां आने के बजाय दूरियां आने लगीं. उन के बीच का प्यार कम होता गया. रोजरोज झगड़े होने लगे.

रुचि ने फेसबुक पर अपना एकाउंट बना रखा था. उस के जरिए वह परिचितों से तो जुड़ी ही थी, साथ ही साथ नए अंजान लोगों के संपर्क में भी आ गई थी. उन में से ही एक था पद्मेश श्रीवास्तव.

पद्मेश स्मार्ट तो था ही, उस की सब से बड़ी खूबी यह थी कि वह सरकारी नौकरी करता था. वह उस समय नायब तहसीलदार के पद पर कौशांबी में तैनात था. उस की पहली पोस्टिंग प्रतापगढ़ के कुंडा में थी. वह प्रयागराज का रहने वाला था. पद्मेश शादीशुदा था और उस की पत्नी प्रगति प्रयागराज में जौब करती थी. उन के 2 बच्चे थे.

फेसबुक के जरिए रुचि की मुलाकात पद्मेश से हुई. दोनों ने एकदूसरे को अपने बारे में बताया. उन के बीच हर रोज बातचीत होने लगी. मैसेंजर पर चैटिंग होने लगी. जिस की वजह से उन में गहरी दोस्ती हो गई. पद्मेश ने उसे यह नहीं बताया था कि वह विवाहित है.

रुचि तो उसे अविवाहित समझ कर उस के साथ जुड़ी थी. वह नीरज के बाद पद्मेश के साथ जिंदगी गुजारने के सपने देखने लगी थी.

वह समझती थी कि पद्मेश से अच्छा दूसरा उसे कोई जीवनसाथी नहीं मिलेगा. इसलिए उस ने नीरज से तलाक लेने की प्रक्रिया भी शुरू कर दी थी. नीरज इस समय कौशांबी में जीआरपी में तैनात था.

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समय के साथ दोनों ने अपने प्रेम का इजहार भी कर दिया. दोनों की मोबाइल पर बातें शुरू हो गईं. पहली मुलाकात दोनों की एक जमीन के मामले में हुई. उस के बाद उन के बीच मुलाकातों का सिलसिला चल निकला.

पद्मेश लखनऊ आता तो रुचि के साथ ही उस के किराए के मकान पर रुकता था. वह अकेली ही वहां रहती थी. रुचि भी रानीगंज जाती और पद्मेश के साथ उस के हौस्टल के कमरे में ही रुकती थी. सब अच्छा चलता देख कर रुचि पद्मेश पर जल्दी शादी कर लेने की बात करने लगी.

पद्मेश तो सिर्फ उस से संबंध बनाए रखना चाहता था. इसलिए उसे शादी करने का झूठा दिलासा देता रहता था. वह उस से कहता कि जल्द ही वह उस से शादी कर लेगा और लखनऊ में ही मकान बनवा कर उस के साथ रहेगा. यह सुन कर रुचि खुश हो जाती थी.

28 अगस्त, 2021 को रुचि का भाई शुभम उत्तर प्रदेश पुलिस में एसआई की परीक्षा देने लखनऊ आया तो वह अपनी बहन रुचि के मकान पर ही रुका. रुचि ने उसे भी बताया कि वह नीरज से तलाक ले रही है और तहसीलदार पद्मेश से शादी करने वाली है.

फोन पर शुभम की पत्नी शालिनी यानी अपनी भाभी को भी रुचि ने पद्मेश से शादी करने की बात बताई. वह शादी को ले कर बहुत खुश थी.

समय निकलता जा रहा था, लेकिन पद्मेश शादी की बात कहता जरूर था लेकिन करता कुछ नहीं था. इस पर रुचि पद्मेश पर जल्दी शादी करने का दबाव बनाने लगी.

उस के बारबार दबाव डालने से पद्मेश को एहसास हो गया कि रुचि अब ऐसे नहीं मानने वाली. अब वह उसे किसी तरह समझा कर बहलाफुसला नहीं सकता तो उस ने रुचि से अपने शादीशुदा होने की बात बता दी.

यह सुन कर रुचि हैरत में पड़ गई. इतना बड़ा झूठ पद्मेश ने उस से बोला, वह उसे ही सच मानती रही. उस झूठ को सच मान कर अपना तनमन उस पर लुटाती रही. लेकिन रुचि अब इतना आगे बढ़ चुकी थी कि वह वहां से पीछे नहीं लौट सकती थी. इसलिए वह पद्मेश के शादीशुदा होने के बाद भी उस से शादी करने को तैयार हो गई.

दूसरी ओर पद्मेश को उम्मीद थी कि उस के शादीशुदा होने की बात जान कर रुचि उस से शादी करने का इरादा छोड़ देगी, जिद नहीं करेगी. लेकिन ऐसा कुछ नहीं हुआ.

पद्मेश के लिए अब रुचि गले में फंसी हड्डी बन गई थी, न निगलते बन रहा था, न उगलते. वह उस से दूरी बनाने लगा. उस की काल आती तो वह उठाता नहीं था. अगर उठाता तो व्यस्त होने का बहाना बना कर काल काट देता.

एक दिन जब रुचि ने पद्मेश को फोन किया तो वह प्रयागराज में अपने घर पर था. मोबाइल की घंटी बजते देख कर पद्मेश की पत्नी ने काल रिसीव कर ली. इस के बाद दोनों में काफी नोकझोंक हुई.

प्रगति ने रुचि को हिदायत दी कि वह दोबारा काल न करे. अपने पति पद्मेश को भी रुचि से दूर रहने की हिदायत दी. बात न मानने पर देख लेने की धमकी दी. लेकिन रुचि कहां मानने वाली थी. वह पद्मेश से हर हाल में शादी करना चाहती थी.

रुचि की जिद से पद्मेश तो परेशान था ही, उस की पत्नी प्रगति को भी डर था कि कहीं रुचि अपने इरादों में न सफल हो जाए और उस की सौतन बन जाए. इसलिए रुचि को ठिकाने लगाने का फैसला उस ने पद्मेश के साथ बात कर के कर लिया.

नामवर सिंह लखनऊ के पीजीआई थाना क्षेत्र के कल्ली में रहता था. रानीगंज में उस की जमीन का कुछ मामला था. उसी संबंध में वह नायब तहसीलदार पद्मेश से मिलता रहता था. कई बार मुलाकात में एकदूसरे को जान गए थे.

प्रगति की तबियत कुछ ठीक नहीं रहती थी. पीजीआई में उसे दिखाने के लिए पद्मेश प्रगति को कार से ड्राइवर के साथ भेज देता था. वहां पीजीआई के पास रहने के कारण नामवर सिंह वहीं मिल जाता और प्रगति को आराम से डाक्टर को दिखवा देता था.

बारबार डाक्टर को दिखाने आने से प्रगति और नामवर सिंह की कई मुलाकातें हुईं तो उन मुलाकातों में दोनों एकदूसरे के करीब आ गए.

दूसरी ओर पद्मेश ने नामवर सिंह से कहा कि वह रुचि की हत्या करने में उस का साथ देगा तो वह उस की जमीन का दाखिल खारिज कर देगा. एक तो यह लालच और दूसरा प्रगति के कहने पर वह पद्मेश का साथ देने को तैयार हो गया.

12 फरवरी, 2022 को पद्मेश कार से पीजीआई के पास पहुंचा. नामवर सिंह उस के पास पहुंच गया. फिर योजनानुसार पद्मेश ने रुचि को फोन कर के पीजीआई आने को कहा.

रुचि कैब कर के अर्जुनगंज से पीजीआई के लिए निकल गई. वहां पहुंचने पर वह पद्मेश से मिलने के लिए उस की कार में बैठ गई. पहले तो पद्मेश और नामवर का इरादा रुचि का इलाज कराने के बहाने उसे जहरीला इंजेक्शन दे कर मार देने का था. हालांकि यह योजना सफल नहीं हुई.

फिर नींद की 10 गोलियां अनार के जूस मे मिला दीं. वह जूस रुचि को पीने को दे दिया. वह जूस पी कर रुचि को नींद आने लगी. इस के बाद पद्मेश और नामवर ने उस का पहले गला दबाया, फिर सिर पर प्रहार कर के उस की हत्या कर दी.

फिर नामवर ने रुचि की लाश को अपनी गाड़ी में शिफ्ट किया और कल्ली स्थित 5 फीट गहरे नाले में फेंक आया. इस के बाद प्रगति को रुचि की हत्या कर देने की बात बता दी. इस के बाद पद्मेश वापस लौट गया.

लेकिन उन के गुनाह की इबारत पुलिस से छिपी न रह सकी और तीनों पकड़े गए. कागजी खानापूर्ति करने के बाद पुलिस ने तीनों को न्यायालय में पेश करने के बाद जेल भेज दिया गया. UP Crime News

—कथा पुलिस सूत्रों और मीडिया रिपोर्ट्स पर आधारित

MP News : इश्क में धोखा खाकर आशिक बना खूनी दरिंदा

MP News : उदयन दास की कई माशूकाएं थीं. उन में से एक थी कोलकाता की रहने वाली 26 साला आकांक्षा शर्मा. उस के पिता शिवेंद्र शर्मा पश्चिम बंगाल के बांकुरा जिले के एक बैंक में चीफ मैनेजर थे. भोपाल, मध्य प्रदेश के तकरीबन 32 साला उदयन दास को ऐयाशी करने के लिए दौलत नहीं कमानी पड़ी थी, क्योंकि उस के मांबाप इतना कमा कर रख गए थे कि अगर वह कुछ काम नहीं करता, तो भी जिंदगी में कभी भूखा नहीं सोता.

उदयन दास की कई माशूकाएं थीं. उन में से एक थी कोलकाता की रहने वाली 26 साला आकांक्षा शर्मा, जो एमएससी पास थी. उस के पिता शिवेंद्र शर्मा पश्चिम बंगाल के बांकुरा जिले के एक बैंक में चीफ मैनेजर थे. अब से तकरीबन 8 साल पहले आकांक्षा शर्मा की दोस्ती फेसबुक के जरीए उदयन दास से हुई थी. फेसबुक चैटिंग में उदयन दास ने खुद को आईएफएस अफसर बताया था, जो अमेरिका में रहता है और अकसर भारत आया करता है.

अपने पिता बीके दास को उस ने भेल, भोपाल का अफसर बताया था, जो रिटायरमैंट के बाद रायपुर में खुद की फैक्टरी चला रहे हैं और मां इंद्राणी दास को पुलिस महकमे से रिटायर्ड डीएसपी बताया था. उस ने मां का भी अमेरिका में रहना बताया था.

उदयन दास ने आकांक्षा शर्मा को यह भी बताया था कि वह आईआईटी, दिल्ली से ग्रेजुएट है.

आजकल जैसा कि आमतौर पर फेसबुक चैटिंग में होता है, वह आकांक्षा शर्मा और उदयन दास के मामले में भी हुआ. पहले जानपहचान, फिर दोस्ती और उस के बाद प्यार. जल्द ही दोनों ने मिलनाजुलना शुरू कर दिया.

उदयन दास भले ही भोपाल में रह रहा था, पर आकांक्षा शर्मा के लिए तो वह अमेरिका में था, इसलिए जल्द ही उदयन दास ने उसे बताया कि वह दिल्ली आ रहा है.

दोनों दिल्ली में मिले और कुछ दिन साथ गुजारे. उदयन दास की रईसी का आकांक्षा शर्मा पर खासा असर पड़ा. वे दोनों एकसाथ हरिद्वार, मसूरी और देहरादून भी घूमने गए और एक ही होटल में एकसाथ एक कमरे में रुके. फिर उदयन दास अमेरिका यानी भोपाल लौट गया, इस वादे के साथ कि जल्द ही वह फिर भारत आएगा और अब वे दोनों भोपाल में मिलेंगे, जहां उस के 2 मकान हैं.

उदयन दास ने आकांक्षा शर्मा को बताया था कि उस का भोपाल वाला मकान काफी बड़ा है और उस का नीचे वाला हिस्सा किराए पर ब्रह्मकुमारी आश्रम को दे रखा है.

इन 2-3 मुलाकातों में आकांक्षा शर्मा सोचने लगी कि उदयन दास वैसा ही लड़का है, जैसा वह चाहती थी. वह तो शादी के बाद अमेरिका में नौकरी करने के सपने देखने लगी थी. लिहाजा, उन दोनों ने शादी करने का फैसला कर लिया.

शादी, कत्ल और कब्र

एक दिन उदयन दास ने आकांक्षा शर्मा को बताया कि उस का मन अब अमेरिका में नहीं लग रहा है और वह उस से शादी कर भोपाल में ही बस जाना चाहता है. इस से अमेरिका जा कर नौकरी करने की आकांक्षा शर्मा की ख्वाहिश मिट्टी में मिल गई, क्योंकि अब तक वह अपने घर वालों को बता चुकी थी कि वह नौकरी करने अमेरिका जा रही है.

आकांक्षा शर्मा उदयन दास को चाहने लगी थी, इसलिए राजी हो गई. आज नहीं तो कल उसे अमेरिका जाने का मौका मिल सकता है, इसलिए वह उदयन की बताई तारीख पर बीते साल जून महीने में भोपाल आ गई. मांबाप से हकीकत छिपाने के लिए उस ने यह झूठ बोला कि वह नौकरी करने न्यूयौर्क जा रही है.

आकांक्षा शर्मा ने भोपाल के ही पिपलानी के काली बाड़ी मंदिर में उदयन दास के साथ शादी भी कर ली. इस दौरान वह फोन पर घर वालों से भी बात करती रही, लेकिन खुद को अमेरिका में होने का झूठ बोलती रही. यह जून, 2016 की बात है.

कुछ दिन उदयन दास के साथ बीवी की तरह गुजारने के बाद आकांक्षा शर्मा को मालूम हुआ कि उस के शौहर ने उस से कई झूठ बोले हैं, क्योंकि न तो वह कभी अपने मांबाप से फोन पर बात करता था और न ही उन के बारे में पूछने पर कुछ बताता था.

हद तो उस वक्त हो गई, जब आकांक्षा शर्मा को यह पता चला कि उदयन दास अव्वल दर्जे का नशेड़ी है और दूसरी कई लड़कियों से उस के नाजायज ताल्लुकात हैं. जुलाई, 2016 तक तो आकांक्षा शर्मा ने अपने घर वालों से फोन पर बात की, लेकिन अब वह उन से कम ही बात करती थी. लेकिन फिर धीरेधीरे वह एसएमएस के जरीए उन से बात करने लगी थी.

14 जुलाई, 2016 का दिन आकांक्षा शर्मा पर कहर बन कर टूटा. अगर उदयन दास ने उस से कई झूठ बोले थे, तो एक झूठ उस ने भी उदयन से बोला था. दरअसल, आकांक्षा शर्मा का एक बौयफ्रैंड और था, जिस ने उस के कुछ फोटो, जो कम कपड़ों में थे, ह्वाट्सऐप पर डाल दिए थे. ये फोटो उदयन दास की निगाह में आए, तो वह भड़क उठा.

पूछने पर आकांक्षा ने कुछ सच्ची और कुछ झूठी बातें उसे बताईं, तो उदयन को लगा कि आकांक्षा ने उस से झूठ तो बोला ही है, साथ ही उस के नाजायज ताल्लुकात पुराने बौयफ्रैंड से हैं और वह उसे पैसे भी देती रहती है.

रात को लड़झगड़ कर आकांक्षा तो सो गई, पर उदयन की आंखों में नींद नहीं थी. साथ में सो रही बीवी उसे धोखेबाज लगने लगी थी. रातभर जाग कर उदयन दास आकांक्षा शर्मा के कत्ल की योजना बनाता रहा और सुबह के 5 बजतेबजते उस ने उस की हत्या भी कर डाली.

उदयन ने पहले गहरी नींद में सोती हुई आकांक्षा का चेहरा तकिए से दबाया. जब उस के मर जाने की पूरी तरह से तसल्ली हो गई, तब तकिया हटाया और उस का गला घोंट डाला, जिस से आकांक्षा के गले की हड्डी चटक गई.

अब समस्या आकांक्षा की लाश को ठिकाने लगाने की थी. सुबह नजदीक की दुकान से उदयन दास ने 14 बोरी सीमेंट खरीदा और आकांक्षा की लाश एक पुराने बक्से में डाल दी और तकरीबन 10 बोरी सीमेंट घोल कर उस में भर दिया, जिस से लाश जम जाए. बक्से से बदबू न आए, इसलिए उस के चारों तरफ उस ने सैलो टेप लगा दी.

दोपहर को उस ने अपने एक पहचान वाले मिस्त्री रवि को बुलाया और कमरे में चबूतरा बनाने की बात कही. इस बाबत उदयन ने बहाना यह बनाया कि वह मंदिर बनवाना चाहता है. रवि ने चबूतरा बनाने के लिए कमरा खोदा, पर चूंकि उस के सामने लाश वाला बक्सा नहीं रखा जा सकता था, इसलिए उदयन ने चतुराई से उसे बातों में उलझाया और तगड़ा मेहनताना दे कर चलता कर दिया.

इस के बाद उस ने बक्सा गड्ढे में डाला और उस पर चबूतरा बना दिया. खूबसूरती बढ़ाने के लिए उस पर मार्बल भी जड़ दिया.

यों पकड़ा गया

आकांक्षा शर्मा के मांबाप बांकुरा में परेशान थे, क्योंकि धीरेधीरे उन की बेटी ने एसएमएस के जरीए भी बात करना कम कर दिया था. कुछ दिनों तक तो उन्होंने सब्र रखा, लेकिन किसी अनहोनी का शक उन्हें हुआ, तो उन्होंने आकांक्षा की गुमशुदगी की रिपोर्ट पुलिस में दर्ज करा दी.

बांकुरा क्राइम ब्रांच ने जब आकांक्षा के मोबाइल फोन की लोकेशन ट्रेस की, तो वह साकेत नगर, भोपाल की निकली. आकांक्षा के पिता शिवेंद्र शर्मा भोपाल आए और उदयन से मिले, क्योंकि आकांक्षा उन्हें उस के बारे में पहले बता चुकी थी.

उदयन ने उन्हें गोलमोल बातें बनाते हुए चलता कर दिया कि आकांक्षा तो न्यूयौर्क में नौकरी कर रही है. शिवेंद्र शर्मा के हावभाव देख कर समझ तो गए कि दाल में कुछ काला जरूर है, पर कुछ कहने की हालत में नहीं थे.

बांकुरा जा कर उन्होंने फिर पुलिस पर दबाव बनाया, तो क्राइम ब्रांच के टीआई अमिताभ कुमार 30 जनवरी, 2017 को अपनी टीम समेत भोपाल आए और गोविंदपुरा इलाके के सीएसपी वीरेंद्र कुमार मिश्रा से मिल कर उन्हें सारी बात बताई. इस पुलिस टीम के साथ आकांक्षा का छोटा भाई आयुष सत्यम भी था, जो बहन की चिंता में घुला जा रहा था.

पुलिस वालों ने योजना बना कर उदयन की निगरानी की, तो उस की तमाम हरकतें रहस्यमय निकलीं. 31 जनवरी, 2017 और 1 फरवरी, 2017 को पुलिस उदयन की निगरानी करती रही. इस से ज्यादा कुछ और हासिल नहीं हुआ, तो उन्होंने 2 फरवरी को उदयन के घर एमआईजी 62, सैक्टर 3-ए, साकेत नगर पर दबिश डाल दी.

उस वक्त उदयन दरवाजे पर ताला लगा कर अंदर बैठा था. गोविंदपुरा थाने के एएसआई सत्येंद्र सिंह कुशवाह छत के रास्ते अंदर गए और उदयन से मेन गेट का ताला खुलवाया, फिर तमाम पुलिस वाले अंदर दाखिल हुए.

अंदर का नजारा अजीबोगरीब था. उदयन का सारा घर धूल और गंदगी से भरा पड़ा था. तीनों कमरों में तकरीबन 10 हजार सिगरेट के ठूंठ बिखरे पड़े थे और शराब की खाली बोतलें भी लुढ़की पड़ी थीं. खाने की बासी प्लेटें भी पाई गईं, जिन से बदबू आ रही थी.

पर सब से ज्यादा हैरान कर देने वाली बात दूसरे कमरे में बना एक चबूतरा था, जिस के ऊपर फांसी का फंदा लटक रहा था और कमरों की दीवारों पर जगहजगह प्यारभरी बातें लिखी हुई थीं.

चबूतरे के बाबत पुलिस वालों ने सवालजवाब शुरू किए, तो पहले तो उदयन खामोश रहा, पर थोड़ी देर बाद ही उस ने फिल्मी स्टाइल में कहा कि उस ने आकांक्षा का कत्ल कर दिया है और उस की लाश इस चबूतरे के नीचे दफन है.

इतना सुनते ही पुलिस वालों के होश फाख्ता हो गए. उन्होंने तुरंत चबूतरे की खुदाई के लिए मजदूर बुला लिए. चबूतरा इतना पक्का था कि मजदूरों से नहीं खुदा, तो पुलिस वालों ने उसे जेसीबी मशीनों से खुदवाया. थोड़ी खुदाई के बाद निकला वह बक्सा, जिस में आकांक्षा की लाश 2 महीनों से पड़ी थी.

बक्सा खोला गया, तो उस में से आकांक्षा की मुड़ीतुड़ी हड्डियां निकलीं, जिन्हें पहले पोस्टमार्टम और फिर डीएनए टैस्ट के लिए भेज दिया गया.

खुली एक और कहानी

उदयन दास के मांबाप कहां हैं, यह सवाल भी अहम हो चला था. पुलिस वालों ने जब उन के बारे में पूछा, तो पहले तो उस ने उन्हें टरकाने की कोशिश की, पर जैसे ही पुलिस ने उस पर थर्ड डिगरी का इस्तेमाल किया, तो उस ने पूरा सच उगल दिया कि उस ने अपने मांबाप की हत्या अब से तकरीबन 5 साल पहले रायपुर वाले मकान में की थी और उन्हें लान में दफना दिया था.

मामला कुछ यों था. भोपाल में जब उदयन दास 7वीं जमात में था, तब उस ने एक दोस्त का स्कूल की दीवार पर सिर मारमार कर फोड़ दिया था. रायपुर आ कर भी उस की बेजा हरकतें कम नहीं हुई थीं. पढ़ाईलिखाई में तो वह शुरू से ही फिसड्डी था, पर रायपुर आ कर नशा भी करने लगा था.

मांबाप चूंकि उसे पढ़ाईलिखाई के बाबत डांटते रहते थे, इसलिए वह उन से नफरत करने लगा था. जब कालेज की डिगरी पूरी होने का वक्त आया, तो उस ने मांबाप से झूठ बोल दिया कि वह पास हो गया है. इस पर मांबाप ने उसे नौकरी करने को कहा, तो उसे लगा कि झूठ पकड़ा जाने वाला है. लिहाजा, उस ने मांबाप को ही ठिकाने लगाने का फैसला ले डाला.

एक रात जब पिता चिकन लेने बाजार गए हुए थे और मां ऊपर की मंजिल पर कमरे में कपड़े रख रही थीं, तो उस ने गला घोंट कर उन का कत्ल कर डाला. पिता जब बाजार से आए, तो उन की चाय में उस ने नींद की गोलियां मिला दीं और उन के गहरी नींद में चले जाने पर उन का भी गला घोंट दिया.

मांबाप की लाशें ठिकाने लगाने से उस ने मजदूर बुला कर लान में 2 बड़े गड्ढे खुदवाए और देर रात लाशें घसीट कर उन में डाल दीं और सीमेंट से उन्हें चुन दिया. मांबाप की हत्या करने के बाद उदयन ने रायपुर वाला मकान 30 लाख रुपए में बेच दिया और भोपाल आ कर साकेत नगर वाले घर में ऐशोआराम की जिंदगी जीने लगा.

निकम्मा और ऐयाश उदयन चालाक भी कम नहीं था. उस ने इंदौर से पिता का और इटारसी नगरपालिका से मां की मौत का झूठा सर्टिफिकेट बनवाया और उन की बिना पर सारी जायदाद अपने नाम करा ली.

मां की पैंशन के लिए जरूरी था कि उन के जिंदा होने का सर्टिफिकेट बनवाया जाए, जो उस ने साल 2012 में दिल्ली की डिफैंस कालोनी के एक डाक्टर से बनवाया और बैंक मुलाजिमों को घूस दे कर हर महीने पैंशन निकालने लगा.

वैसे, उदयन दास के मामले से एक सबक लड़कियों को जरूर मिलता है कि फेसबुक की दोस्ती उस वक्त जानलेवा हो जाती है, जब वे उदयन दास जैसे जालसाज और फरेबियों के चंगुल में फंस कर घर वालों से झूठ बोलने लगती हैं और एक अनजान आदमी से चोरीछिपे शादी कर लेती हैं, इसलिए सोशल मीडिया का इस्तेमाल उन्हें सोचसमझ कर करना चाहिए.

सैक्स और सिर्फ सैक्स

गिरफ्तारी के बाद भोपाल से रायपुर और रायपुर से बांकुरा ले जाए गए उदयन दास को जब 20 फरवरी, 2017 को भोपाल लाया गया, तब पता चला कि शादी के बाद अपनी बीवी आकांक्षा शर्मा के साथ वह खानेपीने के अलावा सिर्फ सैक्स ही करता रहा था. लगता ऐसा है कि सैक्स उस के लिए जरूरत नहीं, बल्कि एक खास किस्म की बीमारी बन गई थी. लगातार सैक्स करने में वह थकता इसलिए नहीं था कि हमेशा नशे में रहता था.

मुमकिन है कि आकांक्षा शर्मा को उस की इस आदत पर भी शक हुआ हो और उस ने एतराज जताया हो, लेकिन चूंकि वह एक तरह से उस की कैदी सी हो कर रह गई थी, इसलिए जीतेजी किसी से इस बरताव का जिक्र नहीं कर पाई और पूछने पर उदयन ने पुलिस वालों को बताया कि वह जब 8वीं जमात में था, तब जेब में कंडोम रख कर चलता था कि क्या पता कब कोई लड़की सैक्स करने के लिए राजी हो जाए. MP News