Love story : लव इज ब्यूटीफुल

Love story : अद्वित ऐसा हैंडसम युवक था, जिस पर कालेज की तमाम लड़कियां फिदा थीं, लेकिन वह उन सभी को केवल फ्रेंड ही मानता था. फिर एक दिन कालेज की ही शरमीले स्वभाव की सिंगर नैंसी की शालीनता का उस पर ऐसा असर हुआ कि वह उस का दीवाना हो गया. एकदूसरे को करीब से जानने के बाद उन दोनों के मुंह से यही निकला कि लव इज ब्यूटीफुल.

स्वभाव से शरमीली नैंसी को किसी से भी ज्यादा बातचीत करना पसंद नहीं था. पर आम आदमी जिस माहौल में रहता है, उसी तरह रहना उसे अच्छा लगता है. नैंसी के घर का माहौल भी कुछ ऐसा ही था. उस के घर में बाहर के लोगों से बातचीत करने की छूट नहीं थी. खासकर लड़कों से बात करना उस की फेमिली को बिलकुल पसंद नहीं था. नैंसी को सादी सिंपल रहना पसंद था. वह कपड़े भी उसी तरह पहनती थी. वैसे तो उस की तमाम फ्रेंड थीं, पर बेस्ट फ्रेंड कहा जा सके, इस तरह की कोई नहीं थी. 

नैंसी कालेज पहुंच चुकी थी और उस दिन कालेज में उस का पहला दिन था, इसलिए पलक उसे बुलाने आई थी. पलक स्कूल से ही उस के साथ पढ़ रही थी. उन की 2 सहेलियां रास्ते में उन का इंतजार कर रही थीं. इस तरह चारों सहेलियां कालेज पहुंच गईं. गेट के अंदर एंटर करते ही नैंसी की नजर कालेज के ग्राउंड की ओर चली गई. पूरा ग्राउंड लड़केलड़कियों से भरा था. नैंसी ने इस तरह का दृश्य पहली बार देखा था, क्योंकि इस से पहले उस ने केवल लड़कियों के साथ ही पढ़ाई की थी. अब उसे लड़कों के साथ भी पढऩा पड़ेगा, यह सोच कर वह काफी नरवस हो गई थी. 

उसे नरवस देख कर पलक ने उस का हाथ पकड़ कर आगे की ओर खींचा. इस के बाद इशारा कर के अपनी सहेलियों से कहा, ”यार, जरा सामने तो देखो, उस लड़के के आसपास कितनी भीड़ है. आखिर यह कौन है?’’

सब के साथ नैंसी भी उसी ओर देखने लगी. उस की नजर उस लड़के पर जम कर रह गई. उस की सहेली कुमुद ने कहा, ”यार, लड़का कितना क्यूट है.’’

हां, है तो यार बहुत क्यूट,”माधवी ने कहा, ”मैं इसे जानती हूं. इस का नाम अद्वित है. यह मेरे घर के सामने ही रहता है. मेरे भाई का फ्रेंड है. यह अपने कालेज का हीरो है. न जाने कितनी लड़कियां इस पर फिदा हैं.’’

वाह भई, तेरे तो घर के सामने ही रहता है,’’ पलक ने कहा, ”भई, तेरी तो हायहैलो में बात बन सकती है.’’

मेरा ऐसा नसीब कहां. उस की तो पहले से ही सेटिंग है सेकेंड ईयर की काव्या के साथ.’’ माधवी ने आह भरते हुए कहा.

माधवी की बात पूरी होते ही कुमुद बोली, ”यह कह कर यार तूने तो मूड ही खराब कर दिया.’’

चलो, आज कालेज का पहला दिन है. हमें लेट नहीं होना चाहिए.’’ नैंसी बोली.

इस के बाद सभी क्लास की ओर चल पड़ीं. क्लास में नए लोग, नए चेहरे देख कर नैंसी थोड़ा बेचैन थी तो थोड़ा एक्साइटेड भी. इस तरह वह कालेज का पहला दिन एंजौय कर रही थी. जल्दी ही कालेज में भी नैंसी की कुछ फ्रेंड बन गई थीं. पर नैंसी की अभी भी किसी लड़के से बातचीत नहीं होती थी. अपने काम से काम रखने वाली नैंसी को कभीकभी अद्वित का चेहरा जरूर याद आ जाता था, लेकिन उस ने तय कर रखा था कि वह किसी लड़के से दोस्ती नहीं करेगी. 

अपने विचारों को इसी तरह इग्नोर करते हुए नैंसी ने कालेज के 6 महीने निकाल दिए. 6 महीने पर कालेज में मिड फंक्शन होता था, जिसे ले कर कालेज के छात्र और छात्राएं बहुत उत्साहित थे. उस दिन नैंसी अपनी सहेलियों के कालेज पहुंची तो लेक्चर शुरू हो चुका था. पलक ने कहा, ”यार, आज तो लेक्चर शुरू हो चुका है. जेडी सर का लेक्चर है. अगर क्लास में गई तो वह भरी क्लास में बेइज्जत कर देंगे.’’

बेइज्जत होने से अच्छा है चलो आज लेक्चर छोड़ देते हैं.’’ कुमुद ने कहा.

भई, मैं तो लेक्चर नहीं छोड़ सकती. मेरा भाई यहीं कहीं घूम रहा होगा. देख लिया तो बहुत नाराज होगा.’’ माधवी ने कहा.

तो तुम दोनों जाओ. मैं और नैंसी तो मिड फंक्शन के रिहर्सल में जा रही हैं.’’ नैंसी का हाथ पकड़ कर कुमुद ने कहा, ”चल नैंसी, मुझे क्लास नहीं लेना.’’

मैं भी तुम लोगों के साथ चल रही हूं.’’ पलक ने कहा.

पलक, तू तो मेरे साथ क्लास लेने चलेगी, क्योंकि तेरी वजह से ही हम लेट हुए हैं.’’ माधवी ने कहा.

माधवी पलक को ले कर क्लास में चली गई तो कुमुद और नैंसी रिहर्सल हाल की ओर बढ़ गईं. नैंसी ने कुमुद के साथ जैसे ही रिहर्सल हाल में कदम रखा, कोई नैंसी से इतने जोर से टकराया कि अगर टकराने वाले ने उसे पकड़ न लिया होता तो हंड्रेड परसेंट वह गिर जाती. डर के मारे उस ने आंखें बंद कर ली थीं. उस ने आंखें खोलीं तो देखा, दोनों हाथों से अद्वित उसे पकड़े हुए था. अद्वित ने कहा, ”सौरी, मैं थोड़ा जल्दी में था.’’

अद्वित तो उसे संभाल कर चला गया, पर नैंसी की समझ में नहीं आया था कि आखिर हुआ क्या था. थोड़ी देर वह पूरे घटनाक्रम को समझने की कोशिश करती रही. तभी कुमुद ने उसे झकझोर कर कहा, ”यार, तेरे बजाय वह मुझ से टकराया होता और मुझे पकड़ कर गिरने न देता. कैसा फिल्मी सीन था.’’

नैंसी मन ही मन खुश थी. पर कुमुद को दिखाने के लिए उस ने अपनी मुखमुद्रा गंभीर बना कर कहा, ”कैसा फिल्मी सीन, कितने जोर से लगा, तुझे कुछ पता भी है. चलो अंदर चलते हैं, नहीं तो फिर कोई टकरा जाएगा.’’

हाल में डांस की प्रैक्टिस चल रही थी. वहां की स्थिति देख कर नैंसी और कुमुद खुश हो गईं. कुमुद ने तो नैंसी से डांस में भाग लेने के लिए भी कहा, पर शरमीली स्वभाव की होने की वजह से नैंसी ने साफ मना कर दिया. तभी उस की नजर अद्वित पर पड़ी, जो सभी को डांस सिखा रहा था. उस के साथ एक लड़की भी थी, जो डांस स्टेप कर रही थी. नैंसी को लगा, यही काव्या है. 

बड़ी तन्मयता से वह अद्वित और काव्या को देख रही थी. तभी उस का ध्यान भंग करते हुए कुमुद ने कहा, ”नैंसी, तुझे नहीं जाना तो कोई बात नहीं. तू मेरा बैग संभाल, मैं मैडम से बात कर के आती हूं.’’

कुमुद का बैग थामते हुए नैंसी ने कहा, ”ठीक है, तुम जाओ.’’

नैंसी अद्वित के ऊपर से नजरें हटा कर दूसरे रिहर्सल देखने लगी. पर उस की नजरें बारबार अद्वित की ओर ही घूम जाती थीं. कुमुद वापस आई तो उसे गौर से देखते हुए नैंसी ने कहा, ”क्या हुआ? मुंह क्यों लटका कर आ रही है?’’

मैम ने मना कर दिया. उन्होंने कहा कि अब तो औडिशन हो चुके हैं.’’

तो फिर..?’’

तो फिर क्या. चलो, अब चलते हैं.’’ कुमुद ने कहा.

नैंसी और कुमुद बाहर जाने के लिए जैसे ही गेट पर पहुंचीं, सामने आ कर अद्वित खड़ा हो गया, ”वेट… वेट… दरअसल डांस के लिए हमें एक मेंबर की जरूरत है. मैं ने मैम से बात की तो उन्होंने कहा कि आप लोग डांस के लिए पूछ रही थीं. सो यू कैन जौइन अस.’’

एक्साइटेड हो कर कुमुद ने कहा, ”या… या…औफकोर्स, चल नैंसी.’’

मैं चल कर क्या करूंगी. तू जा कर रिहर्सल कर. मैं कैंटीन में जा कर बैठती हूं.’’ नैंसी ने कहा.

इट्स ओके. आप यहां भी बैठ सकती हैं.’’ अद्वित ने शिष्टता से कहा. 

कुमुद ने नैंसी का हाथ पकड़ा और वहां पड़ी कुरसियों में से एक पर बैठा दिया. वह जाने लगी तो नैंसी ने कहा, ”यार, मैं यहां बैठ कर क्या करूंगी.’’

कुमुद ने अपना मुंह उस के कान के पास ले जा कर कहा, ”थोड़ी देर बैठ न यार यहां. तू रहेगी तो अकेलापन नहीं महसूस होगा. अभी चलते हैं थोड़ी देर में.’’

ठीक है, बैठती हूं थोड़ी देर.’’

नैंसी बैठ कर रिहर्सल देखने लगी. पर उस की नजरें तो अद्वित पर ही जमी थीं. नैंसी रोजाना कुमुद के साथ रिहर्सल देखने के बहाने अद्वित को देखने आती. उस दिन भी नैंसी कुमुद के साथ रिहर्सल देखने पहुंची तो देखा, अद्वित काव्या के साथ कपल डांस कर रहा था. दोनों को साथ डांस करते देख नैंसी का चेहरा उतर गया. वह तुरंत रिहर्सल हाल से बाहर निकल गई. कुमुद ने पलट कर देखा तो नैंसी हाल में नहीं थी. वह इधरउधर नैंसी को देखने लगी. वह सोचने लगी कि नैंसी कहां चली गई, तभी अद्वित ने उसे बुला लिया.

नैंसी बाथरूम में जा कर खूब रोई और सोचने लगी कि उसे यह क्या हो रहा है. अद्वित कालेज का हीरो है और वह एक साधारण सी लड़की. उस की ओर वह कभी नहीं देखने वाला. फिर उस का तो काव्या के साथ पहले से ही अफेयर चल रहा है. ऐसे में वह उस के बारे में क्यों इतना सोच रही है. किसी के भी बारे में सोचने के बजाय उसे अपनी पढ़ाई पर ध्यान देना चाहिए. 

कुमुद अद्वित के पास पहुंची तो उस ने पूछा, ”आज तुम्हारी फ्रेंड नहीं दिखाई दे रही है?’’

इधरउधर देखते हुए कुमुद ने कहा, ”मैं भी उसे ही खोज रही हूं. साथ आई तो थी, पर दिखाई नहीं दे रही है.’’

तुम कह रही थी कि वह गाती बहुत अच्छा है?’’

हां, गाती तो अच्छा है.’’ कुमुद ने कहा.

हमें एक सिंगर की जरूरत है. अपने डांस में रीमा नाम की जो सिंगर थी, उस की आज तबीयत खराब हो गई है.’’

पर वह गाने के लिए तैयार नहीं होगी,’’ कुमुद ने कहा, ”वह बहुत शरमीली है.’’

एक बार तुम उस से बात कर के तो देखो.’’

ठीक है, आज बात कर के कल बताती हूं.’’

ओके, पर बात जरूर कर लेना.’’

लेक्चर पूरा होने के बाद पलक, माधवी और नैंसी बातें करते हुए बाहर निकलीं तो कुमुद भी रिहर्सल कर के उन के पास पहुंच गई. उसे देख कर पलक ने पूछा, ”आज तू रिहर्सल से जल्दी आ गई?’’

इस नैंसी को खोजने आई हूं.’’ कुमुद ने कहा, ”मुझे लगा पता नहीं कहां चली गई.’’

यह तो आज हमारे साथ लेक्चर में थी.’’ माधवी ने कहा.

तू तो मेरे साथ रिहर्सल में गई थी. बिना बताए क्यों चली आई?’’ कुमुद ने नैंसी से पूछा.

भई तू तो डांस में है, इसलिए लेक्चर में नहीं आती. मैं तो बेकार में ही वहां अपना समय खराब करती हूं. उस से अच्छा है क्लास में आ कर बैठूं. एग्जाम में आसानी रहेगी.’’ नैंसी ने कहा.

कह तो ठीक रही है. पर तू भी पार्टीसिपेट कर न.’’

पर मुझे कहां डांस आता है.

डांस के लिए नहीं, गाने के लिए.’’ कुमुद ने कहा.

पर गाने के लिए तो रीमा है न.’’ पलक ने कहा.

उस की तबीयत खराब हो गई है. इसलिए एक सिंगर चाहिए.’’ कुमुद ने कहा.

पर मैं इतने लोगों के सामने नहीं गा सकती.’’ नैंसी ने कहा.

यह तो मुझे पता है. वह तो अद्वित ने कहा था, इसलिए मैं ने कहा.’’ कुमुद ने कहा.

क्या, अद्वित ने कहा नैंसी को गाने के लिए? पर उसे कैसे पता चला कि नैंसी गाती है?’’ माधवी ने पूछा.

वह तो मैं ने ही बताया था. एक दिन वह कह रहा था कि तुम्हारी फ्रेंड बोलती नहीं. तब मैं ने कहा था कि वह बहुत शरमीली है. कभी गाती है, तभी हम लोगों के सामने खुलती है. शायद यह बात उसे याद थी, इसलिए आज जरूरत पडऩे पर उस ने मुझ से कह दिया.’’

वाह कितना अच्छा लड़का है. काश, मुझे गाना आता होता तो मैं अद्वित के साथ टाइम स्पेंड कर सकती.’’ पलक ने आह भरते हुए कहा.

नहीं आता गाना तो सपने मत देख.’’ माधवी बोली.

यार कुमुद कभी मुझे भी मिला अद्वित से.’’ पलक बोली.

इस में क्या, रिहर्सल हाल में आ जाना, मिला दूंगी.’’ कुमुद ने कहा, ”वह जरा भी एटीट्यूड वाला नहीं है. पर अद्वित का किसी से बात करना काव्या को पसंद नहीं है. फिर भी अद्वित किसी को मना नहीं करता. नैंसी तू मना कर रही है?’’

हां, मैं नहीं गा सकती.’’ नैंसी बोली.

भई, हमें तो भूख लगी है. चलो 

कैंटीन में चल कर कुछ खाते हैं.’’ पलक ने कहा.

सभी कैंटीन में पहुंचीं तो अद्वित का ग्रुप वहां पहले से ही बैठा था. कैंटीन में घुसते ही नैंसी की नजर सीधे अद्वित पर ही पड़ी. क्योंकि वह सामने ही बैठा था. संयोग से वह दरवाजे की ओर ही ताक रहा था, इसलिए दोनों की नजरें मिल गईं. अद्वित के सामने वाली ही खाली मेज पर सभी बैठ गईं. बैठते ही 

पलक ने कहा, ”किसे क्या खाना है, जल्दी बोलो.’’

कुमुद ने सैंडविच कहा तो माधवी ने बर्गर और नैंसी ने कहा कि वह केवल कोल्डड्रिंक पीएगी. सभी ने अपनीअपनी इच्छा जाहिर कर दी तो पलक ने कहा, ”चल नैंसी, आर्डर कर आते हैं.’’

अद्वित ने कुमुद से इशारे से नैंसी के बारे में पूछा तो कुमुद ने इशारे में ही बताया कि उस ने मना कर दिया है. पलक और नैंसी आर्डर दे कर जैसे ही वापस आईं, अद्वित ने उन लोगों के पास आ कर कहा, ”हाय गाइस, कैन आई जौइन यू?’’

हां… हां, क्यों नहीं. आज ही मेरी फ्रेंड तुम से मिलने के लिए कह रही थी.’’ कुमुद ने अद्वित को सब से मिलाते हुए कहा, ”नैंसी को तो तुम पहचानते ही हो.’’

हां क्यों नहीं, मैं उसी से बात करने आया हूं.’’ अद्वित ने कहा.

मुझ से?’’ नैंसी चौंकी.

हां, मैं ने कुमुद से तुम से गाने के लिए बात करने को कहा था. पर तुम ने मना कर दिया.’’ अद्वित ने कहा.

मैं इतने लोगों के बीच नहीं गा सकती.’’

यह तो तुम्हें लगता है. तुम ट्राई तो करो.’’

मुझे अपने बारे में पता है. मैं किसी से बात तक नहीं कर सकती, गाने की तो बात दूर रही.’’ नैंसी ने कहा.

तुम ने मेरे मन को बांध लिया है, इसलिए मैं चाहता हूं तुम गाओ. क्यों गाइस, तुम लोगों को क्या लगता है?’’ अद्वित ने कहा.

सभी ने अद्वित की बात पर हामी भर दी तो नैंसी नरवस हो गई. उसे नरवस देख कर अद्वित ने कहा, ”ओके, जैसी तुम्हारी मरजी. मैं कल तक तुम्हारे जवाब का वेट करूंगा. उस के बाद किसी दूसरे से बात करूंगा. पर एक बात याद रखना, जिंदगी में चांस बारबार नहीं मिलता.’’

इतना कह कर अद्वित सभी को बाय कह कर चला गया. रात को नैंसी को नींद नहीं आ रही थी. वह यही सोच रही थी कि अद्वित ठीक ही कह रहा था कि जिंदगी में बारबार चांस नहीं मिलता. अब उसे मिल रहा है तो उसे उस का उपयोग करना चाहिए. पर उसे डर लग रहा था. क्योंकि उस ने कभी किसी कार्यक्रम में पार्टीसिपेट नहीं किया था. फिर रोजाना अद्वित को काव्या के साथ देख कर भी उसे अच्छा नहीं लगेगा. वह क्या करे, उस की कुछ समझ में नहीं आ रहा था. यही सब सोचतेसोचते उसे कब नींद आ गई, वह जान नहीं पाई.

सुबह नैंसी थोड़ा देर से जागी. उस दिन उस के चेहरे पर स्माइल थी. सुबहसुबह उस के चेहरे पर स्माइल देख कर उस की मम्मी ने पूछा, ”पहली बार हंसते हुए उठी हो. सपने में ऐसा क्या देखा है?’’

आप को कैसे पता चला कि मैं ने सपना देखा है?’’

तुम्हारे हंसने से पता चल रहा है.’’

हां मम्मी, सपना तो देखा है,’’ नैंसी ने कहा, ”हमारे कालेज का फंक्शन था. उस में मैं ने गाना गाया. मेरे गाने पर सभी तालियां बजा रहे थे. पर मम्मी, पापा पार्टीसिपेट करने देंगे?’’

उन से कहने की जरूरत ही क्या है. तुम पार्टीसिपेट करो. जा, जल्दी तैयार हो जा, तेरी सहेलियां तुझे लेने आ रही होंगी.’’ नैंसी की मम्मी ने कहा.

कुमुद ने जैसे ही रिहर्सल हाल में प्रवेश किया, अद्वित ने उस के पास आ कर पूछा, ”नैंसी नहीं आई?’’

तभी पीछे से नैंसी को आते देख अद्वित खुश हो गया. उस ने कहा, ”मुझे विश्वास था कि तुम यह चांस मिस नहीं करोगी.’’

मैं ने पहली बार इस तरह की हिम्मत की है अद्वित. पता नहीं मैं यह काम कर भी पाऊंगी या नहीं?’’ नैंसी ने कहा.

तुम ने हिम्मत की, यह अच्छी बात है. निश्चित तुम यह काम कर लोगी. चलो अब, हमारे पास ज्यादा समय नहीं है.’’

उस दिन पहली बार नैंसी स्टेज पर चढ़ी. उसे जो गाना गाने के लिए दिया गया, उस के लिए गिटार बजने लगा. पर वह वहां उतने लोगों को देख कर नरवस हो गई. अद्वित ने स्टेज पर जा कर उसे संभाला. उस ने कहा, ”तुम यह सोच कर गाओ कि तुम्हारे सामने कोई नहीं है.’’

अद्वित मुझे डर लग रहा है. जब मैं इतने लोगों के सामने नहीं गा सकती तो फंक्शन में तो और न जाने कितने लोग होंगे?’’ नैंसी ने रुआंसी हो कर कहा.

तुम गा सकती हो नैंसी.’’ अद्वित ने कहा.

नैंसी जैसे ही स्टेज की ओर बढ़ी, तभी स्टेज के नीचे से कुछ लड़के कहने लगे कि अद्वित यह किसे गाने के लिए ले आया है. लगता है, इसे कुछ आताजाता नहीं है. इस तरह की बातें सभी जोरजोर से कर रहे थे. नैंसी घबरा गई और भाग कर बाहर निकल गई. अद्वित उस के पीछेपीछे दौड़ा.

बाहर आ कर नैंसी रोने लगी थी. तभी एक हाथ उस के सामने आया पानी का गिलास लिए हुए. वह हाथ किसी और का नहीं, अद्वित का था. पानी पी कर नैंसी ने कहा, ”अद्वित, मैं ने कहा था न कि मैं नहीं गा पाऊंगी.’’

और मैं अब भी कह रहा हूं कि तुम गा लोगी. तुम्हारा जो डर है, उसे दूर करने का यही समय है. अगर आज तुम ने उन लोगों को जवाब नहीं दिया तो फिर कभी जवाब नहीं दे पाओगी.’’ अद्वित ने कहा.

मुझे बहुत डर लग रहा है.’’ 

एक बार मेरे ऊपर भरोसा कर के देखो. मुझे पूरा विश्वास है कि तुम बहुत अच्छा गा लोगी.’’ अद्वित बोला.

थोड़ा सोच कर नैंसी बोली, ”ओके.’’

अद्वित के साथ नैंसी रिहर्सल हाल में वापस आ गई. अद्वित के साथ नैंसी को देख कर काव्या को अच्छा नहीं लगा. नैंसी स्टेज पर चढ़ी तो उस के साथ अद्वित भी स्टेज पर आ गया. नैंसी ने एक बार अद्वित की ओर देखा और आंखें बंद कर के गाना शुरू कर दिया. उस का गाना सुन कर रिहर्सल हाल में शांति छा गई. सभी केवल उसी को सुन रहे थे. उसे गाते देख अद्वित खुश हो गया. नैंसी का गाना पूरा हुआ. इस बात से चिढ़ कर काव्या रिहर्सल हाल से बाहर निकल गई. रिहर्सल हाल तालियों की गडग़ड़ाहट से गूंज उठा. नैंसी ने आंखें खोलीं. अपनी इस सफलता पर वह बहुत खुश थी. उस ने अद्वित की ओर देख कर कहा, ”थैंक्स.’’

अभी इस थैंक्स को संभाल कर रखो. बहुत लोगों को कहना पड़ेगा.’’ अद्वित ने कहा, ”कल इसी समय पर रिहर्सल हाल में मिलना, बाय.’’

नैंसी काफी सुकून महसूस कर रही थी. उस ने जिस बात की कल्पना भी नहीं की थी, एक के बाद एक लोग आ कर उस के गाने की तारीफ करते हुए उसे बधाई दे रहे थे. कुमुद ने पास आ कर कहा, ”यार तूने तो कमाल ही कर दिया.’’

थैंक्स.’’ नैंसी ने कहा.

ओह मैडम तो छा गईं. पूरे कालेज में इन्हीं के गाने की तारीफ चल रही है.’’ पलक बोली.

माधवी ने कहा, ”यार, इस ने तो गजब ही कर दिया, इतने लोगों के बीच स्टेज पर गा कर.’’

हां यार, मुझे भी यकीन नहीं हो रहा. थैंक्स टू अद्वित. उस ने मुझे बहुत एनकरेज किया.’’ नैंसी बोली.

नैंसी की इस बात पर पलक मुसकरा कर रह गई. पर कुमुद चुप नहीं रह सकी. उस ने कहा, ”लगता नहीं है कि अद्वित तुझे कुछ ज्यादा ही भाव दे रहा है?’’

ऐसा कुछ भी नहीं है. मुझे पता है कि काव्या उस की गर्लफ्रेंड है. वह मुझे एक फ्रेंड की ही तरह एनकरेज कर रहा है. और वैसे भी कहां अद्वित और कहां मैं. पर उस ने मेरे अंदर का डर निकालने में मेरी बड़ी मदद की, यह बात मैं कभी नहीं भूलूंगी.’’

रिहर्सल हाल से सीधे अद्वित कैंटीन में पहुंचा तो वहां उसे काव्या बैठी दिखाई दे गई. उस के पास जा कर उस के बगल बैठते हुए अद्वित ने कहा, ”आज रिहर्सल नहीं करना क्या?’’

तुम्हें उस बहनजी से फुरसत मिले, तब न.’’ काव्या तुनक कर बोली.

उस का नाम नैंसी है. आखिर तुम उस से इतना चिढ़ क्यों रही हो? उसे कौन्फिडेंस की जरूरत थी, इसलिए मैं ने थोड़ा एनकरेज कर दिया.’’ अद्वित ने कहा.

अद्वित तुम्हें तो पता है, मैं तुम्हारे लिए क्या फील करती हूं?’’

काव्या प्लीज, मैं ने तुम्हें कितनी बार समझाया कि तुम केवल मेरी दोस्त हो. इस से ज्यादा तुम मुझ से कुछ अपेक्षा मत रखना.’’ इतना कह कर अद्वित कैंटीन से बाहर निकल गया. अद्वित की इस बात से काव्या की आंखों में आंसू आ गए.

रिहर्सल हाल में डांस की प्रैक्टिस चल रही थी, तभी अद्वित ने 5 मिनट के ब्रेक की घोषणा कर दी. उस के बाद कुमुद के पास जा कर बोला, ”तुम ने नैंसी को समय बता दिया था न? क्योंकि रिहर्सल कंटीन्यू चलता रहेगा.’’

हां, वह आती ही होगी.’’ कुमुद ने कहा. 

तभी काव्या आ कर उस के पास खड़ी हो गई. उसे देख कर कुमुद बोली, ”मैं पानी पी कर आती हूं.’’

काव्या एकटक अद्वित को ही ताक रही थी. जबकि अद्वित कहीं और ही देख रहा था. काव्या धीरे से बोली, ”कल की बात के लिए सौरी अद्वित. तुम हमेशा वह बात करने के लिए मना करते हो, पर मैं हमेशा वही बात करती हूं.’’

सौरी यार, मैं भी कल कुछ ज्यादा ही गुस्सा हो गया था.’’

छोड़ो न उस बात को. चलो कौफी पीते हैं.’’

नहीं काव्या, नैंसी आती होगी. हम सब को गाने के साथ प्रैक्टिस करनी है.’’ अद्वित ने कहा.

अद्वित की बात पूरी भी नहीं हुई थी कि नैंसी आ कर खड़ी हो गई. नैंसी उस दिन जींस और टौप पहन कर आई थी. उस के बाल खुले हुए थे. उस दिन वह रोजाना से कुछ अलग ही लग रही थी. अद्वित उसे देखता ही रह गया. यह काव्या को जरा भी नहीं अच्छा लगा. अद्वित ने उस अपलक निहारते हुए कहा, ”यू लुक नाइस नैंसी.’’

नैंसी ने मुसकराते हुए कहा, ”थैंक्यू.’’

इस के बाद सभी स्टेज की ओर बढ़ गए. थोड़ी ही देर में ड्रम्स, गिटार बजने लगा. नैंसी ने गाना शुरू कर दिया. डांस की भी प्रैक्टिस शुरू हो गई. प्रैक्टिस पूरी होते ही अद्वित ने माइक ले कर कहा, ”ओके गाइस, अब आज यहीं तक. कल 10 बजे सभी लोग तैयार रहना. अब अपने पास बहुत कम समय बचा है.’’

इस के बाद सभी रिहर्सल हाल से निकलने लगे. नैंसी और कुमुद भी निकल रही थीं. गेट के पास उन्हें अद्वित मिल गया. कुमुद ने कहा, ”नैंसी मुझे कुछ काम है, मैं जा रही हूं. तुम पलक के साथ आ जाना.’’

ओके.’’ नैंसी ने कहा.

कुमुद के जाते ही अद्वित ने कहा, ”कैसा लग रहा है? लग रहा है आज कौन्फिडेंस कुछ इनक्रीज हुआ है?’’

हां, कल मोटीवेशनल गुरु ने स्पीच दी थी न, उसी का असर था.’’ नैंसी ने कहा.

दोनों हंस पड़े. इसी तरह एकएक दिन बीत रहा था. अद्वित रोजाना नैंसी को मोटीवेट कर रहा था, साथ ही उस के साथ हंसीठिठोली भी कर लेता था. दोनों के बीच अच्छा संबंध बन गया था. अब अद्वित काव्या की अपेक्षा नैंसी के साथ ज्यादा समय बिताने लगा था. नैंसी भी अब अपनी लाइफ को इंजौय कर रही थी.  रोजाना नैंसी की सहेलियां अद्वित को ले कर उसे चिढ़ातीं, पर नैंसी पर उन की बातों का कोई असर नहीं पड़ रहा था. वह अद्वित की दोस्त बन कर खुश थी. काव्या को भी लगने लगा था कि अद्वित को नैंसी से कुछ ज्यादा ही भावनात्मक लगाव हो गया है. पर वह अद्वित की दोस्ती को खोना नहीं चाहती थी, इसलिए कुछ कहती नहीं थी. इसी तरह दिन कट रहे थे. मिड फंक्शन के अब 6 दिन बाकी रह गए थे.

उस दिन रिहर्सल शुरू होने में कुछ समय बाकी था. कुमुद ने कहा, ”चल नैंसी, कहीं नाश्ता कर लेते हैं. रिहर्सल शुरू हो गया तो टाइम नहीं मिलेगा.’’

यार, तुम पलक के साथ नाश्ता कर लो. मैं रिहर्सल हाल में जा रही हूं.’’

कोई बात नहीं, तेरी इच्छा नहीं है तो तू जा.’’ कुमुद बोली.

नैंसी रिहर्सल हाल में पहुंची तो वहां कोई नहीं था. उसे लगा कि अभी कोई नहीं आया है. वह स्टेज पर जा कर रियाज करने लगी. उसी बीच दबे पांव आ कर अद्वित उस के सामने बैठ गया. वह नैंसी को एकटक ताक रहा था. 

नैंसी ने आंखें खोलीं तो सामने अद्वित को पा कर स्तब्ध रह गई. अद्वित भी चकित रह गया. नैंसी ने कहा, ”अरे अद्वित, तुम कब आए? तुम्हारे आने का तो मुझे पता ही नहीं चला.’’

जब तुम आंखें बंद कर के रियाज कर रही थी तब. एक बात कहूं, अगर तुम उलटा न समझो तो?’’ 

कहो… कहो, इस में उलटा क्या समझना.’’ नैंसी बोली.

तुम आंख बंद कर के रियाज करती हो तो बहुत सुंदर लगती हो.’’

पहली बार किसी ने इस तरह की तारीफ की है.’’ नैंसी ने हंस कर कहा. 

क्यों, आज तक किसी ने तुम से यह बात नहीं कही?’’ हैरानी से अद्वित ने कहा.

जब किसी से इतनी बात ही नहीं की तो तारीफ कैसे करेगा. इतने सालों में पहली बार अगर किसी से हिलीमिली हूं तो वह तुम से. किसी को बेस्ट फ्रेंड कह सकूं, अभी तक कोई मिला ही नहीं था.’’

अच्छा तो तुम मुझे बेस्ट फ्रेंड मानती हो?’’

हां, एक बेस्ट फ्रेंड जो कर सकते हैं, वह तुम ने कर दिखाया है. मेरा कौन्फिडेंस इनक्रीज कर के.’’

हां, यह बात तो सच है. अब तुम ने बेस्ट फ्रेंड कहा है तो एक बात पूछ लूं?’’

हां , पूछो.’’ नैंसी ने कहा.

तुम्हें कैसा लड़का अच्छा लगता है? अद्वित ने पूछा.

मतलब?’’ नैंसी ने अद्वित की आंखों में देखा.

मैडम, मतलब यह कि जिसे आप परफेक्ट बौयफ्रेंड बना सको, उस लड़के में कैसी खूबियां देखना चाहती हो तुम?’’ अद्वित ने पूछा.

छि… बौयफ्रेंड. मैं कभी बौयफ्रेंड नहीं बनाऊंगी.’’

क्यों, बौयफ्रेंड बनाने में क्या दिक्कत है?’’

बस, मुझे नहीं पसंद है यह सब.’’ नैंसी ने कहा, ”बाय द वे, तुम यह सब क्यों पूछ रहे हो. तुम्हारी तो आलरेडी एक गर्लफ्रेंड है.’’

कौन?’’ अद्वित ने पूछा.

काव्या और कौन.’’

तुम से किस ने कहा कि काव्या मेरी गर्लफ्रेंड है?’’

क्यों नहीं,’’ नैंसी बोली, ”कालेज में तो सभी कहते हैं कि काव्या तुम्हारी गर्लफ्रेंड है.’’

वह मेरी बेस्ट फ्रेंड है, गर्लफ्रेंड नहीं.’’ अद्वित ने कहा.

ओह, तुम जैसे लड़के की गर्लफ्रेंड न हो, कोई विश्वास नहीं करेगा.’’

अद्वित ने पूछा, ”मेरे जैसा मतलब?’’

तुम्हारे जैसा डैशिंग, हैंडसम, काइंड हार्ट.’’

बस… बस, अब रहने दो. मैं आकाश में उडऩे लगूंगा.’’ अद्वित ने कहा.

अद्वित की बात पर नैंसी हंसी तो अद्वित भी उस के साथ हंसने लगा. अब तक रिहर्सल का समय हो गया था, इसलिए सभी रिहर्सल हाल में आ गए. अद्वित और नैंसी को साथ हंसते देख काव्या को गुस्सा आ गया. वह अद्वित के पास आई तो उस ने कहा, ”हाय काव्या.’’

हाय, तुम्हें प्रिंसिपल मैम बुला रही हैं अद्वित.’’ काव्या ने कहा.

ओके, काव्या, तुम सभी को सेट करो, मैं आ रहा हूं. नैंसी, तुम कुमुद को फोन कर के बुला लो.’’ कहते हुए अद्वित चला गया.

नैंसी कुमुद को फोन कर के अपनी जगह पर आई तो वहां काव्या पहले से बैठी थी. नैंसी के आते ही उस ने कहा, ”तो हो गई तुम्हारी और अद्वित की सेटिंग?’’

क्या?’’ नैंसी चौंकी.

हां, तुम दोनों जिस तरह एकदूसरे के साथ टाइम स्पेंड कर रहे हो, उस से तो सब को यही लग रहा है कि तुम दोनों के बीच कुछ चल रहा है. पर डोंट वरी, तुम टेंशन मत लो, यह अद्वित की पुरानी आदत है. उसे जो अच्छा लगता है, वह बहुत अच्छा लगता है और फिर जब वह उसे छोड़ देता है तो उस की ओर देखता तक नहीं. 

और फिर तुम तो एक भी एंगल से ऐसी नहीं हो कि उसे अच्छी लगो. फिर भी वह तुम्हें भाव दे रहा है, यह बहुत बड़ी बात है. पर उस ने जब भी गर्लफ्रेंड बदली है, मुझे बताया है. क्योंकि सभी जानते हैं कि आज नहीं तो कल उसे मेरे पास ही आना है. यह मैं तुम्हें इसलिए बता रही हूं, क्योंकि तुम बड़ेबड़े सपने न देखने लगो.’’ काव्या ने कहा.

यह सब तुम मुझे क्यों बता रही हो? और तुम चिंता मत करो, मेरे और अद्वित के बीच ऐसा कुछ भी नहीं है. मुझे अच्छी तरह पता है कि अद्वित मेरी जैसी लड़की को कभी पसंद नहीं करेगा. सो डोंट वरी.’’ कह कर नैंसी उठी और रुआंसा चेहरा ले कर बाहर निकल गई. 

रास्ते में उसे कुमुद मिली. उस ने उसे रोका भी, पर नैंसी चली गई. बाहर आ कर नैंसी खूब रोई. रोते हुए वह सोच रही थी कि काव्या सच ही कह रही थी, एक भी एंगल से वह अद्वित के लायक नहीं है. अद्वित ने आज भी उसे गर्लफ्रेंड नहीं कहा था, पर वह बौयफ्रेंड के बारे में जरूर पूछ रहा था. आखिर क्या चल रहा है उस के मन में? क्या वह उसे भी अपनी अन्य गर्लफ्रेंड की ही तरह समझ रहा है? अब उस का अद्वित से दूर रहना ही ठीक हैं.

अद्वित रिहर्सल हाल में वापस आया तो नैंसी उसे दिखाई नहीं दी. वह उस के बारे में कुमुद से पूछ रहा था कि नैंसी आती दिखाई दे गई. कुमुद ने कहा, ”वह देखो, आ रही है नैंसी.’’

नैंसी को आते देख कुमुद उस की ओर बढ़ी तो पीछेपीछे अद्वित भी चल पड़ा. पास पहुंच कर कुमुद ने पूछा, ”नैंसी, तुम रोते हुए बाहर क्यों गई थी?’’

अद्वित नैंसी की ही ओर देख रहा था. नैंसी ने कहा, ”नहीं तो, मैं रो कहां रही थी. वह तो आंख में कुछ पड़ गया था.’’

इतना कह कर नैंसी वहां से चली गई. नैंसी का यह व्यवहार अद्वित को कुछ अजीब लगा. पर वह पूरे मन से रिहर्सल में लग गया. नैंसी भी मन लगा कर रिहर्सल कर रही थी. रिहर्सल पूरा होने पर अद्वित नैंसी की ओर बढ़ा, पर कुछ कहे बगैर नैंसी चली गई. 

शाम हो गई थी. उस दिन अद्वित का मन काफी खिन्न था. उस की समझ में नहीं आ रहा था कि नैंसी का व्यवहार अचानक बदल क्यों गया था. नैंसी क्यों रो रही थी और उसे इग्नोर क्यों कर रही थी? क्या उस से कोई गलती हो गई थी? कहीं गर्लफ्रेंड वाली बात उसे बुरी तो नहीं लग गई थी? तरहतरह की बातें उस के दिमाग में आ रही थीं. उस ने नैंसी को फोन किया, पर नैंसी ने फोन नहीं उठाया. नैंसी सोने की तैयारी कर रही थी, तभी उस के मोबाइल की नोटिफिकेशन की टोन बजी. उस ने देखा तो अद्वित का मैसेज था— ‘रिहर्सल टाइम 8 एएम.नैंसी सोचने लगी कि इतनी जल्दी तो रिहर्सल कभी हुआ नहीं. फिर उस के मन में आया कि अब फंक्शन में बहुत कम दिन रह गए हैं, इसलिए ज्यादा से ज्यादा प्रैक्टिस करनी होगी. वह काव्या की कही बात को सोचतेसोचते सो गई.

अगले दिन नैंसी ने कुमुद को फोन किया. उस ने फोन नहीं उठाया तो नैंसी को लगा कि वह निकल गई. नैंसी भी बैग ले कर कालेज के लिए निकल गई. वह रिहर्सल हाल में पहुंची तो उसे वहां कोई दिखाई नहीं दिया. वह जाने के लिए पलटी तो सामने अद्वित खड़ा था. नैंसी ने पूछा, ”अभी और कोई नहीं आया क्या? कोई दिखाई नहीं दे रहा?’’

किसी और को यह टाइम दिया ही नहीं तो दिखाई कहां से देगा.’’

तो फिर मुझे क्यों बुला लिया?

तुम से कुछ बात करनी थी.’’

अभी नहीं, बाद में बात करेंगे.’’ कह कर नैंसी जाने के लिए मुड़ी तो अद्वित ने उस का हाथ पकड़ लिया. नैंसी गुस्से में बोली, ”अद्वित यह क्या है?’’

मैं भी तुम से यही पूछना चाहता हूं कि यह सब क्या है? तुम मेरा फोन नहीं उठाती, मुझे इग्नोर करती हो. आखिर तुम्हें हो क्या गया है?’’ अद्वित ने पूछा.

अपना हाथ छुड़ाते हुए नैंसी ने कहा, ”तुम मेरा हाथ छोड़ो, मुझे कुछ नहीं हुआ है.’’

नैंसी का हाथ छोड़ कर अद्वित ने कहा, ”सौरी, मुझे नहीं पता कि तुम्हारा व्यवहार अचानक क्यों बदल गया है. पर काफी समय से मैं तुम से कुछ कहना चाहता हूं.’’

नैंसी ने वापस लौट कर कहा, ”तुम्हें जो कहना है, जल्दी कहो. मुझे जाना है.’’

मैं तुम से कल बौयफ्रेंड के बारे में पूछ रहा था. उस का पूछने का मुख्य मतलब यह था कि मैं जानना चाहता था कि तुम्हें कैसा बौयफ्रेंड पसंद है. मैं उसी के हिसाब से खुद में बदलाव लाना चाहता हूं. पर तुम तो बौयफ्रेंड की बात सुन कर ही चिढ़ गई. इसलिए मैं ने तुम से कुछ कहा नहीं. सच बात तो यह है कि मेरी बहुत सारी गर्लफ्रेंड रह चुकी हैं. पर पिछले  6 महीने से मैं ने कोई नई गर्लफ्रेंड नहीं बनाई है. 

इधर एक महीने से मेरे मन और मस्तिष्क पर तुम ने कब्जा जमा लिया है. मैं ने अपनी सभी गर्लफ्रेंड की ब्यूटी देख कर डेट की है. पर तुम्हारी इनर ब्यूटी मुझे स्पर्श कर गई. तुम्हारा भोलापन और तुम्हारी सादगी ने मुझे तुम्हारा दीवाना बना दिया है. तुम्हारे लिए जो फीलिंग्स हुई हैं, वह आज तक किसी के लिए नहीं हुई है नैंसी. मैं तुम्हारा रिसपेक्ट करता हूं. कल से तुम्हारा यह जो ब्यवहार बदल गया है, वह मुझ से सहन नहीं हो रहा है. इसलिए मैं जो तुम से फंक्शन के बाद कहना चाहता था, वह आज ही कह रहा हूं. आई लव यू नैंसी.’’

नैंसी की आंखों में खुशी के आंसू आ गए थे. पर तभी काव्या की कही बात कि तू अद्वित के लायक नहीं है. कहां अद्वित और कहां तू. याद आ गई थी. 

उस ने आंखों के आंसू पोंछ कर अद्वित की ओर पलट कर कहा, ”पर मैं तुम से प्यार नहीं करती.’’ कह कर नैंसी चली गई. 

नैंसी की इस बात से अद्वित की आंखों में आंसू आ गए. वह नैंसी को जाते देखता रहा. नैंसी का व्यवहार अद्वित की समझ में नहीं आ रहा था. वाशरूम में मुंह धोते हुए वह सोच रहा था कि अब वह नैंसी को कनविंस नहीं करेगा. शायद वह नैंसी के लायक ही नहीं है. अब वह नैंसी को टेंशन न दे कर एक अच्छे दोस्त की तरह सपोर्ट करेगा. रिहर्सल हाल में जा कर वह नैंसी को खोजने लगा. नैंसी उसे दिखाई नहीं दी तो उसे लगा कि शायद आज नैंसी नहीं आएगी, पर थोड़ी देर में नैंसी आ कर स्टेज पर बैठ गई. दोनों ने एकदूसरे की ओर देखा. उस के बाद दोनों की नजरें झुक गईं. अद्वित ने रिहर्सल शुरू किया. उस दिन रिहर्सल शाम तक चलता रहा. 

उस दिन डांस का फाइनल हिस्सा हो गया. सभी आराम करने के लिए बैठ गए. अद्वित ने माइक से बताया कि डांस की फाइनल प्रैक्टिस हो चुकी है. कल हम सब का अंतिम दिन है, इसलिए कल फुल डांस की प्रैक्टिस होगी. उस के बाद लास्ट प्रैक्टिस फंक्शन वाले दिन होगी. अगले दिन मिलने की बात कह कर वह चल पड़ा तो सभी उठ कर उस के पीछेपीछे चल पड़े. अगले दिन सभी रिहर्सल हाल में प्रैक्टिस कर रहे थे. पर उस दिन अद्वित का मन नहीं लग रहा था, क्योंकि वह प्रैक्टिस का अंतिम दिन था. नैंसी से रोजाना मिलने का वह अंतिम दिन था. उस के बाद वह फंक्शन के दिन ही मिलने वाली थी, इसलिए अद्वित उसे जी भर कर देख लेना चाहता था. नैंसी के मन में भी कुछ ऐसा ही चल रहा था. पर वह जाहिर नहीं होने देना चाहती थी. 

दोनों एकदूसरे की ओर देख कर भी एकदूसरे को नहीं देख रहे थे. दोनों को एकदूसरे से बात करनी थी, पर नैंसी दिल दबाए बैठी थी और अद्वित नैंसी की नाराजगी की वजह से बात करने नहीं जा रहा था. प्रैक्टिस करतेकरते कब शाम हो गई, पता ही नहीं चला. सभी एकदूसरे को फंक्शन के लिए बेस्ट औफ लक कह कर घर जाने के लिए निकले. अद्वित ने नैंसी को भी बेस्ट औफ लक कह कर कहा कि उस ने उस से जो भी कहा, वह सब वह भूल कर उसे एक अच्छा दोस्त समझे. नैंसी हांकह कर चली गई. 

सभी 2 दिन फंक्शन की व्यवस्था करने में लगे रहे. इस बीच दोनों आमनेसामने पड़ते तो मुसकराते और अपने काम में लग जाते. पलक और माधवी इस पर नजर रख रही थीं. पलक, माधवी, कुमुद और नैंसी काफी दिनों बाद उस दिन कैंटीन में शांति से बैठी थीं. उसी बीच पलक ने पूछा, ”नैंसी, तुम्हारे और अद्वित के बीच कुछ हुआ है क्या?’’

नीचे देखते हुए नैंसी ने कहा, ”नहींकुछ नहीं हुआ.’’

तो सामने पडऩे पर भी बात क्यों नहीं करती?’’ माधवी ने कहा.

सब की ओर देखते हुए नैंसी ने कहा, ”यार, तुम सब भी न. चलो अच्छा, अब देर हो रही है.’’ कह कर नैंसी उठ खड़ी हुई. 

नैंसी का हाथ पकड़ कर बैठाते हुए कुमुद ने कहा, ”इधर कुछ दिनों से मैं देख रही हूं कि जो अद्वित कालेज की जान था, अब वह चुपचुप रहता है. शायद इस का कारण तुम हो. इधर 4-5 दिनों में ऐसा क्या हो गया, जो तुम ने उस से बात करनी बंद कर दी?’’

रोते हुए नैंसी ने पूरी बात बता कर कहा, ”अद्वित को तो तमाम अच्छी लड़कियां मिल जाएंगी, मेरी जैसी डरपोक, बहनजी जैसी लड़की उस के लायक नहीं.’’

यू नो नैंसी, अभी तुम ने अद्वित की लाइफ देखी नहीं. उस के साथ पल भर बिताने के लिए लड़कियां मरती हैं और मुझे लगता है कि वह तुम्हारे साथ समय बिताना चाहता है. अद्वित के लिए तुम जितना स्पैशल हो, कोई दूसरी नहीं. उस की लाइफ मैं ने नजदीक से देखी है, इसलिए कह रही हूं.’’

इतना समझाने के बाद भी अगर तुम्हारी समझ में नहीं आ रहा तो नैंसी यू आर डेफिनेटली फूल. चलो फ्रेंड्स…’’ कह कर पलक खड़ी हो गई.

आंखों में आंसू भरे नैंसी सब को जाते देखती रही.

आखिर वह दिन आ गया, जिस का पूरा कालेज बेसब्री से इंतजार कर रहा था. सभी फंक्शन की तैयारी में व्यस्त थे. नैंसी तैयार हो रही थी, पर वह काफी नरवस लग रही थी. इधरउधर देखते हुए वह अद्वित को खोज रही थी. उस ने कुमुद से भी अद्वित के बारे में पूछा, पर उस ने कोई जवाब नहीं दिया. एक के बाद एक परफारमेंस हो रहे थे. नैंसी तथा उस के ग्रुप के परफारमेंस का समय नजदीक आ रहा था. फिर भी अद्वित का कुछ पता नहीं था. ग्रुप के सभी लोग एकदूसरे से अद्वित के बारे में पूछ रहे थे. नैंसी अद्वित को खोजने नीचे जा रही थी कि तभी सामने से आ रहे अद्वित ने कहा, ”अरे नैंसी, कहां जा रही हो. परफारमेंस का समय हो गया है.’’

तुम कहां थे? तुम्हें कब से खोज रही हूं.’’

अद्वित ने हंस कर कहा, ”मैं तो यहीं था. शायद तुम्हें खोजने में देर हो गई.’’

अद्वित का व्यंग्य नैंसी समझ गई. नीचे देखते हुए उस ने कहा, ”अद्वित, मैं तुम से कुछ कहना चाहती हूं.’’

अद्वित जैसे उस की बात का इंतजार कर रहा हो, इस तरह उतावलेपन में बोला, ”बोलो… बोलो, मैं सुन रहा हूं.’’

अद्वित… अद्वित मैं… आई मीन… तुम… यानी मैं… मैं… आई… आई…’’

नैंसी अपनी बात कह पाती, तभी अद्वित और नैंसी के ग्रुप के परफारमेंस का एनाउंसमेंट हो गया. नैंसी और अद्वित स्टेज की ओर भागे. भागते हुए ही अद्वित ने कहा, ”नैंसी, तुम्हें गाने की शुरुआत करनी है, तुम आगे चलो.’’

अद्वित, मुझे डर लग रहा है.’’

नैंसी का हाथ पकड़ कर अद्वित ने कहा, ”डोंट वरी बी योर बेस्ट, बेस्ट औफ लक.’’

नैंसी स्टेज पर जा कर खड़ी हो गई. आडिएंस उस के गाने की राह देख रहे थे और नैंसी अद्वित की ओर देख रही थी. अद्वित ने उस की ओर देखा तो उस ने गाना स्टार्ट कर दिया. उस के बाद अद्वित के ग्रुप का डांस होने लगा. गाना और डांस के पूरा होते ही हाल तालियों की गडग़ड़ाहट से गूंज उठा. जिसे देखो वही, नैंसी के गाने की तारीफ कर रहा था. जबकि वह अद्वित को खोज रही थी. भीड़ कम होते ही वह अद्वित की खोज में निकल पड़ी. अंत में खोजतेखोजते वह रिहर्सल हाल के पास पहुंची तो देखा, अद्वित वहां बैठा था. वह भी जा कर उस के पास बैठ गई. अद्वित ने कहा, ”अब बोलो, तुम क्या कहना चाहती थी?’’

अद्वित, आज स्टेज पर जो नैंसी थी, वह एकदम अलग नैंसी थी. तुम ने मुझे पूरी तरह बदल दिया अद्वित. मेरे आत्मविश्वास की एकमात्र वजह तुम हो. तुम्हारा यह उपकार शायद मैं कभी न भूल पाऊं.’’

धीरे से हंसते हुए अद्वित ने कहा, ”तुम ने कैसे मेरा उपकार मान लिया, तुम मुझ से यही कहने आई थी?’’

नहीं, मैं केवल यह कहने नहीं आई थी.’’ मैं तो तुम जो सुनना चाहते हो, वह कहने आई थी. तुम्हें इतने दिनों से परेशान कर रही हूं, उस के लिए सौरी. अद्वित, जो बात आज तक नहीं कह सकी, वह आज कह रही हूं. मैं तुम्हें प्यार करती हूं. जब से पहली बार कालेज में देखा है, तब से करती हूं. पहली नजर में ही मुझे तुम से प्यार हो गया था.’’ नैंसी ने कहा.

नैंसी की ओर देखते हुए अद्वित ने कहा, ”तो फिर उस दिन तुम ने क्यों मना कर दिया था?’’

खड़ी होते हुए नैंसी ने कहा, ”क्योंकि मैं तुम्हारे लायक नहीं.’’

अद्वित ने उसे अपनी ओर घुमा कर कहा, ”तुम यह कैसे डिसाइड कर सकती हो कि तुम मेरे लायक हो या नहीं. तुम्हें पता नहीं, मैं तुम्हारे लिए कितना तड़पा हूं. आज तक किसी ने मुझे रुलाया नहीं, पर तुम ने मुझे रुलाया है.’’ इतना कहतेकहते अद्वित की आंखों में आंसू आ गए.

अद्वित के आंसू पोंछते हुए नैंसी ने कहा, ”आई एम सौरी. पर मैं भी तुम्हारे लिए कम नहीं रोई.’’

नैंसी को सीने से लगा कर अद्वित ने कहा, ”तो अब कह दो न, जिसे सुनने के लिए मैं तड़प रहा हूं.’’

घुटनों पर बैठ कर नैंसी ने कहा, ”सो मी अद्वित, मैं अपनी पूरी जिंदगी तुम्हारे साथ गुजारना चाहती हूं. बताओ, तुम्हारा क्या विचार है?’’

अद्वित ने भी नैंसी के सामने घुटनों पर बैठ कर कहा, ”आई लव यू.’’

लव यू फारवेयर.’’ नैंसी ने भी कहा.

इस के बाद तो नैंसी और अद्वित की लव स्टोरी कालेज में फेमस हो गई. नैंसी को अब किसी का डर नहीं था. उस ने अद्वित को खुले दिल से स्वीकार कर लिया था. अद्वित ने भी कभी उसे अनकंफर्टेबल फील नहीं होने दिया था. नैंसी अद्वित के साथ रह कर जिंदगी का एकएक पल जीना सीख रही थी. जब भी इस तरह के लवबड्र्स के बारे में सुनने को मिलता है, तब वह कहावत सार्थक लगती है. हम खुशी से कह सकते हैं— ‘लव इज रियली ब्यूटीफुल.

Murder story : बेटी ने ही सुपारी देकर कराई मां की हत्‍या

Murder story : पैसा और जमीनजायदाद इंसान को अपनों से अलग कर के ऐसे मुकाम तक ले जाते हैं, जहां उन्हें अपराध करने में भी कोई संकोच नहीं होता. तभी तो इंदरराज कौर उर्फ विक्की को अपनी मां का कत्ल करवाते हुए जरा भी दर्द नहीं हुआ…   

दिन अमृतसर के जिला एवं सत्र न्यायाधीश कर्मजीत सिंह की अदालात में सुबह से ही बहुत गहमागहमी थी. वकील और मीडियाकर्मियों के अलावा तमाम लोग भी वहां मौजूद थे. सभी के दिमाग में एक ही सवाल घूम रहा था कि पता नहीं अदालत आज विक्की और उस के प्रेमी गणेश को क्या सजा सुनाएगी. इन दोनों पर आरोप यह था कि विक्की ने अपने प्रेमी गणेश से अपनी मां राजिंदर कौर की हत्या कराई थी. दोनों पर यह केस करीब 3 साल से चल रहा था. पूरा मामला क्या था, जानने के लिए हमें 3 साल पीछे जाना पड़ेगा.

21 जनवरी, 2015 की बात है. नरेश नाम के एक व्यक्ति ने अमृतसर के थाना मकबूलपुरा में फोन द्वारा सूचना दी थी कि दीदार गैस एजेंसी की मालकिन 67 वर्षीय राजिंदर कौर की किसी से उन की गोल्डन एवेन्यू स्थित कोठी नंबर 5 में हत्या कर दी है. सूचना मिलते ही थानाप्रभारी अमरीक सिंह, एसआई कुलदीप सिंह, एएसआई बलजिंदर सिंह, सुरजीत सिंह, हवलदार प्रेम सिंह, मुख्तियार सिंह और लेडी हवलदार गुरविंदर कौर को साथ ले कर घटनास्थल पर पहुंच गएपता चला कि घटना वाली रात राजिंदर कौर अपनी कोठी में अकेली थीं. उन का बेटा तजिंदर सिंह 2 दिन पहले ही डलहौजी गया था और बेटी इंदरराज कौर उर्फ विक्की किसी रिश्तेदारी में दिल्ली गई हुई थी.

राजिंदर कौर की हत्या बहुत ही सुनियोजित तरीके से की गई थी. हत्या के वक्त वे शायद कोठी की दूसरी मंजिल पर थीं, क्योंकि उन का खून दूसरी मंजिल से बह कर घर की पहली मंजिल पर वहां तक गया था, जहां खून से लथपथ उन की लाश पड़ी थी. घटनास्थल को देख कर यह साफ लग रहा था कि हत्यारों को इस बात की पूरी जानकारी रही होगी कि राजिंदर कौर घर में अकेली हैं. इतना ही नहीं वो इस घर के चप्पेचप्पे से वाकिफ रहे होंगे. क्योंकि हत्यारे गेट के पास लगे सीसीटीवी कैमरों को तोड़ कर बड़ी सावधानी से घर में घुसे थे और अपना काम कर के चुपचाप वहां से निकल गए थे.

मौका वारदात पर बिखरा हुआ सामान इस बात की गवाही दे रहा था कि मरने से पहले मृतका की हत्यारों से काफी हाथापाई हुई होगी. प्राथमिक तफ्तीश में पता चला कि राजिंदर कौर की नौकरानी सुबह के लगभग 11 बजे घर में काम करने के लिए आई थी. उस ने देखा कि घर की मालकिन राजिंदर कौर की लाश जमीन पर खून से लथपथ पड़ी थी. उस ने घबरा कर गैस एजेंसी फोन कर के यह बात नरेश को बताई और नरेश ने कर पुलिस के अलावा इस घटना की सूचना राजिंदर कौर की बेटी इंदरराज कौर उर्फ विक्की को भी दी जो किसी रिश्तेदारी में दिल्ली गई हुई थी

मां की मौत की खबर मिलते ही विक्की भी उसी दिन पंजाब लौट आई. नरेश ने पुलिस को बताया कि गैस एजेंसी का 2 दिन का कैश कोठी में ही था. छुट्टी होने के कारण कैश बैंक में जमा नहीं करवाया गया था. पुलिस को यह मामला लूट और हत्या का लग रहा था. घटना की सूचना मिलने पर डीसीपी विक्रमपाल भट्टी, डीसीपी (क्राइम) जगजीत सिंह वालिया, एडीसीपी परमपाल सिंह, एसीपी बालकिशन सिंगला, एसीपी गौरव गर्ग, फोरैंसिक टीम सहित घटनास्थल पर पहुंच गए. फोरेंसिक टीम ने घटनास्थल से फिंगरप्रिंट और खून के सैंपल लिए.

हत्यारे कोठी से कितना कैश और जेवर ले गए थे इस बात का कोई पता नहीं लग सका. बहरहाल पुलिस ने 21 जनवरी, 2015 इंदरराज कौर उर्फ विक्की के बयान पर राजिंदर कौर की हत्या का मुकदमा अज्ञात हत्यारों के खिलाफ दर्ज कर के लाश पोस्टमार्टम के लिए सिविल अस्पताल भेज दी. अमृतसर के न्यू गोल्डन एवेन्यू की कोठी नंबर-5 में मेजर दीदार सिंह औजला का परिवार रहता था. उन के परिवार में पत्नी राजिंदर कौर के अलावा बेटी इंदरराज कौर उर्फ विक्की और बेटा तजिंदर सिंह उर्फ लाली थे. सन 1981 में मेजर साहब की मौत के बाद सरकार ने अनुकंपा के आधार पर फौजियों की विधवाओं को पेट्रौल पंप और गैस एजेंसियां वितरित की थीं. तभी राजिंदर कौर को भी एक गैस एजेंसी आवंटित हुई थी

राजिंदर कौर ने गैस एजेंसी का गोदाम और शोरूम सुल्तानभिंड रोड के अजीत नगर में खोला था. गैस एजेंसी को वह स्वयं ही संभालती थीं. कालेज की पढ़ाई पूरी करने के बाद बेटी विक्की भी एजेंसी पर जाने लगी थी. लाली अभी पढ़ रहा था. पोस्टमार्टम रिपोर्ट के अनुसार राजिंदर कौर की हत्या दम घुटने से हुई थी. हालांकि उन के सिर पर चोटों के गहरे घाव थे पर उन की मौत गला घोंटे जाने के कारण ही हुई थी

2 दिन तक पुलिस को इस केस का कोई सिरा हाथ नहीं आया था. पुलिस इस बात को मान कर चल रही थी कि हत्यारा राजिंदर कौर के परिवार का परिचित रहा होगा. लेकिन 2 दिन बाद पुलिस ने अपनी जांच की दिशा बदल दीपुलिस ने राजिंदर कौर, उन के बेटे तजिंदर उर्फ लाली, इंदरराज कौर उर्फ विक्की के मोबाइल नंबरों की काल डिटेल्स निकलवाई तो विक्की की काल डिटेल से पुलिस को कई चौंकाने वाली बातें पता चलीं. विक्की की काल डिटेल्स में एक ऐसा नंबर आया जिस पर विक्की की दिनरात कईकई घंटे बातें होती थीं. वह नंबर किसी गणेश नाम के व्यक्ति का था.

इस बार पुलिस के हाथ कुछ ऐसा क्लू लगा था, जिस के सहारे वह अपनी जांच को आगे बढ़ा सकती थी. इस के पहले पुलिस अंधेरी गलियों में ही भटक रही थी. पुलिस ने राजिंदर कौर के पड़ोसियों और गैस एजेंसी पर काम करने वालों से भी पूछताछ की थी.  इस पूछताछ में पुलिस को कई अहम सुराग हाथ लगे थे, यह बात तय थी कि जो कुछ भी हुआ था. वह कोठी के अंदर से ही हुआ था. बाहर के किसी व्यक्ति का इस हत्याकांड से कोई लेनादेना नहीं था. हत्यारे एक रहे हों या 2 इस से अभी कोई फर्क नहीं पड़ना था. समझने वाली बात यह थी कि आखिर राजिंदर कौर की ही हत्या क्यों की गई थी. उन की हत्या से किसे फायदा पहुंचने वाला था. आखिर घटना के चौथे दिन 2 ऐसे गवाह खुद पुलिस के सामने आए, जिन्होंने इस केस का रुख पलट कर हत्यारों का चेहरा पुलिस के सामने रख दिया था.

28 जनवरी, 2015 को पुलिस ने राजिंदर कौर की हत्या के आरोप में 2 लोगों को गिरफ्तार कर लिया. उन में से एक खुद मृतका की बेटी इंदरराज कौर उर्फ विक्की थी और दूसरा उस का प्रेमी गणेश था, जो स्थानीय भुल्लर अस्पताल में कंपाउंडर थागणेश गुंदली चौगान, नूरपुर, हिमाचल प्रदेश का निवासी था और पिछले कई सालों से उस के विक्की के साथ नाजायज संबंध थे. गणेश विक्की के बीमार भाई तजिंदर की देखभाल के लिए उस के घर आता था और इसी बीच विक्की के साथ उस के अवैध संबंध बन गए थे. बेटी ने ही सुपारी दे कर अपनी मां की हत्या करवाई थी यह बात सुन कर सभी रिश्तेदारों के होश उड़ गए. विक्की को उस के मांबाप ने बड़े लाड़प्यार से पाला था. अपनी मां की मौत का दिल दहलाने वाला मंजर देख कर उस ने घडि़याली आंसू भी बहाए थे.

इतना ही नहीं पुलिस को भी इस असमंजस में डाले रखा था कि उसे अपनी मां की मौत का बहुत दुख है. जबकि हकीकत यह थी कि विक्की शुरू से ही पुलिस को झूठ बोल कर गुमराह करती रही थी. जब असलियत का खुलासा हुआ तो पुलिस के साथ उस के सगे संबंधियों के भी होश उड़ गए. अकसर देखा गया है कि जायदाद की खातिर इंसान अपने सभी रिश्ते भुला कर आपराधिक घटनाओं को अंजाम दे देता है, मगर विक्की ने तो दरिंदगी की सारी हदें पार कर दी थीं. उस ने अपने प्रेमी को 5 लाख की सुपारी दे कर जन्म देने वाली मां को ही मरवा डाला था. पुलिस ने दोनों को अदालत में पेश कर रिमांड पर लिया. रिमांड के दौरान पुलिस ने गणेश की निशानदेही पर लोहे की रौड, खून सने कपड़े आदि बरामद कर लिए. बाद में दोनों को जेल भेज दिया गया.

पुलिस को राजिंदर कौर की हत्या की जो कहानी पता चली और जिस के आधार पर उस ने अदालत में चार्जशीट दाखिल की, उस में बताया गया था कि इस हत्याकांड की मूल वजह वो जायदाद थी जो मृतका राजिंदर कौर ने विक्की के नाम कर के अपने बेटे तजिंदर उर्फ लाली के नाम कर दी थीदरअसल लाड़प्यार से पली विक्की बचपन से ही अपनी मनमरजी करने वाली जिद्दी और अडि़यल स्वभाव की लड़की थी. उम्र के साथ उस का यह पागलपन और भी बढ़ता गया था. पिता की मृत्यु के समय वह मात्र 4-5 साल की रही होगी. पिता की मृत्यु के बाद मां राजिंदर कौर का सारा वक्त गैस एजेंसी संभालने में गुजरता था. ऐसे में विक्की बेलगाम होती चली गई.

यहां यह कहना भी गलत होगा कि बच्चों को सुविधाओं के साथ मातापिता के दिशानिर्देशों की भी सख्त जरूरत होती है. अन्यथा परिणाम भयानक ही निकलते हैं. इस मामले में भी यही हुआ था. कालेज तक पहुंचतेपहुंचते वह दिशाहीन, भटकी हुई युवती बन चुकी थी. शराब के नशे और क्लबों में खुशी तलाशना उस की आदत बन चुकी थी. दूसरे सहपाठियों को नीचा दिखाना उस का मनपसंद शौक था. मां के द्वारा मेहनत से कमाया पैसा वह पानी की तरह बहाने लगी थी. उस के दोस्तों में लड़कियां कम लड़के अधिक थे. कपड़ों की तरह बौयफ्रैंड बदलना उस का स्वभाव बन गया था

मां की किसी बात का जवाब देना, आधीआधी रात को घर लौटना विक्की की आदतों में शुमार हो गया था. पढ़ाई पूरी कर उस ने मां के साथ गैस एजेंसी पर बैठना शुरू कर दिया, वह भी अपने स्वार्थ की खातिर. गैस एजेंसी से पैसे उड़ा कर वह अपनी अय्याशियों में उड़ा देती थी. उस की इन हरकतों से राजिंदर कौर बहुत दुखी थीं. वह मन ही मन घुटती रहती थीं. वे यह सोच कर मन पर पत्थर रख लेती थीं कि शादी के बाद जब वह अपनी ससुराल चली जाएगी. तभी वह चैन की सांस ले पाएंगी. पर यह उन की भूल थी. 37 साल की हो जाने के बाद भी विक्की शादी करने को तैयार नहीं थी. ऐसे में आपसी रिश्तों में जहर घुल गया था

राजिंदर कौर विक्की को समझासमझा कर हार चुकी थीं. लेकिन विक्की की नादानियां दिन पर दिन बढ़ती जा रही थीं. इसी बीच उस के गणेश से संबंध बन गए थे. राजिंदर कौर को जब इस बात का पता चला तो उन्होंने हंगामा करते हुए विक्की को बहुत कुछ समझाया पर विक्की ने इस सब की जरा भी परवाह नहीं की. वह घर में ही गणेश के साथ अय्याशी करती रही. घटना से कुछ दिन पहले विक्की और राजिंदर कौर के बीच पैसों को ले कर जबरदस्त झगड़ा हुआ था. विक्की को सुधरता देख राजिंदर कौर ने उस का गैस एजेंसी पर आना बंद करवा दिया. साथ ही उस के जेब खर्च पर भी पाबंदी लगा दी थी. यह सब देख विक्की तिलमिला उठी थी

उस ने मां से इस विषय में बात की तो उन्होंने कहा कि जब तक वह अपने आप को नहीं सुधारती और घर में एक शरीफ घर की बच्ची की तरह पेश नहीं आती तब तक उस का उन से कोई संबंध नहीं रहेगा. राजिंदर कौर ने यह कदम उठाया था विक्की को सुधारने के लिए, मगर इस का उलटा ही परिणाम निकला. विक्की यारदोस्तों और अपनी जानपहचान वालों से पैसे उधार ले कर अपने शौक पूरे करने लगी. इस बात का राजिंदर कौर को और ज्यादा दुख पहुंचा. बेटी के कर्ज को ले कर उन की बड़ी बदनामी भी हो रही थी.

अंत में राजिंदर कौर ने एक और सख्त कदम उठाया जो आगे चल कर उन की जान का दुश्मन बन गया. राजिंदर कौर ने अपनी सारी चलअचल संपत्ति, बिजनैस आदि अपने बेटे तजिंदर सिंह के नाम कर दिया. विक्की के नाम उन्होंने एक पैसा भी नहीं छोड़ा थाइस बात का पता लगने पर विक्की आगबबूला हो उठी. उसे यह उम्मीद नहीं थी कि उस की मां ऐसा भी कुछ कर सकती है. घटना से कुछ दिन पहले इसी बात को ले कर मांबेटी में जम कर झगड़ा भी हुआ था. राजिंदर कौर अब किसी भी कीमत पर विक्की को आजादी नहीं देना चाहती थीं  गणेश और विक्की के बीच लगभग ढाई सालों से अवैध संबंध थे. गणेश पूरी तरह से विक्की के चंगुल में फंस कर उस का गुलाम बना हुआ था. दोनों को ही पैसों की सख्त जरूरत थी

विक्की इतनी शातिर दिमाग थी कि जहां वह खुद अपनी जरूरतें पूरी करने के लिए गणेश का इस्तेमाल कर रही थी, वहीं उस का खुराफाती दिमाग गणेश के हाथों अपनी ही मां की हत्या करवाने की साजिश रचने में लगा था. जब से विक्की को पता चला था कि मां ने करोड़ों की जायदाद छोटे भाई तजिंदर सिंह के नाम कर दी है, उसी दिन से विक्की ने राजिंदर कौर की हत्या करने का मन बना लिया था. अपनी मां के खिलाफ उस के मन में जहर भर गया था. योजना बनाने के बाद उस ने अपने प्रेमी गणेश शर्मा को 5 लाख रुपए की सुपारी दे कर मां का कत्ल कराने के लिए तैयार कर लिया.

अपनी योजना के तहत विक्की ने सब से पहले अपने भाई तजिंदर को 3 दिन पहले घूमनेफिरने के लिए मनाली डलहौजी भेज दिया. इस के बाद 21 जनवरी को वह खुद भी दिल्ली जाने का बहाना कर के घर से निकल गई. इस से गणेश का रास्ता साफ हो गया था. तसल्ली करने के लिए हत्या से एक दिन पहले विक्की ने भाई को फोन कर के पूछा कि वह घर वापस कब लौट रहा है. तजिंदर ने बताया था कि वह अभी कुछ दिन और मनाली में रहेगा. गणेश के लिए राजिंदर कौर की हत्या करने के लिए रास्ता साफ था. 20-21 जनवरी की आधी रात को वह सीसीटीवी कैमरों को तोड़ कर कोठी में दाखिल हुआ और उस ने कमरे में सो रही राजिंदर कौर के सिर पर पहले लोहे की रौड से वार कर के उन्हें गंभीर रूप से घायल कर दिया

उस के बाद गणेश ने बिजली की तार से उन का गला घोंट कर मौत के घाट उतार दिया. चुपचाप अपना काम खत्म कर के वह वहां से कुछ दूरी पर स्थित अपने कमरे पर लौट गया और फोन कर के विक्की को काम हो जाने की खबर दे दी. राजिंदर कौर की हत्या के समय विक्की ने पुलिस को गुमराह करने के लिए यह बयान दिया था कि उस का भाई मनाली गया हुआ था और वह किसी काम से दिल्ली गई थी. जबकि वह अमृतसर के ही एक होटल में ठहरी हुई थी. हत्या के 2 दिन बाद गणेश शर्मा गायब हो गया थाविक्की और गणेश की काल डिटेल्स देखने के बाद और गणेश के गायब हो जाने के बाद हत्या की सीधी सुई इन दोनों पर चली गई थी. इस बीच वहां के पूर्व पार्षद तरसेम भोला ने मामले को नया मोड़ दे दिया था.

हत्या के इस मामले की तहकीकात के बीच पुलिस को पूर्व पार्षद तरसेम सिंह भोला ने 27 जनवरी, 2015 को यह जानकारी दी थी कि इंदरराज कौर उर्फ विक्की उस के पास आई थी और उस ने बताया था कि उस की मम्मी ने अपनी सारी जायदाद की वसीयत उस के भाई तेजिंदर सिंह लाली के नाम कर दी है. उस की मम्मी द्वारा उसे कोई भी जायदाद दिए जाने के कारण वह बहुत ही गुस्से में थीइसलिए उस ने भुल्लर अस्पताल में काम करने वाले गणेश कुमार को 5 लाख रुपए का लालच दे कर अपनी मम्मी राजिंदर कौर की हत्या करवा दी है. उस से बहुत बड़ी गलती हो गई है. किसी किसी तरह वह उस का बचाव करवा दें.

इसी तरह मकबूलपुरा निवासी एक स्वतंत्र गवाह कश्मीर सिंह ने भी उसी दिन पुलिस को जानकारी दी थी कि भुल्लर अस्पताल में काम करने वाले गणेश कुमार ने उसे बताया था कि वह अपनी प्रेमिका इंदरराज उर्फ विक्की के कहने पर उस की मां राजिंदर कौर की हत्या कर बैठा हैइस मामले में पुलिस उसे कभी भी गिरफ्तार कर सकती है. इसलिए वह किसी भी तरह उस का बचाव करवा दे. इन दोनों गवाहों के सामने आने पर हत्या डकैती माने जा रहे इस मामले में एकदम नया मोड़ गया था. इस केस में पुलिस ने जितने भी गवाह बनाए थे उन में से अहम गवाह पूर्व पार्षद तरसेम सिंह भोला और एक अन्य व्यक्ति था. पुलिस ने इस केस की तफ्तीश में अपनी तरफ से कोई कोरकसर नहीं छोड़ी थी और पुख्ता सबूतों के आधार पर चार्जशीट बना कर अदालत में पेश की थी.

लेकिन गवाहियों के दौरान इस केस में काफी उठापटक हुई थी. जिस कारण कई गवाह अपनी बात से मुकर गए थे. फिर भी पुलिस के पास गणेश शर्मा के खिलाफ पक्के सबूत थे, जिसे लाख कोशिशों के बाद भी अदालत में झुठलाया नहीं जा सकता था. गवाहों के बयान और मौके से मिले साक्ष्यों के आधार पर माननीय जिला एवं सत्र न्यायाधीश कर्मजीत सिंह की अदालत ने 25 मई, 2018 को मृतका की जिस बेटी इंदरराज कौर उर्फ विक्की पर सुपारी दे कर अपनी मां की हत्या करवाने के आरोप लगाए गए थे, अदालत ने उसे साक्ष्यों के अभाव में संदेह का लाभ दे कर बरी कर दिया था

लेकिन हत्यारोपी गणेश शर्मा पर लगाए गए आरोप सही पाए जाने पर अदालत ने उसे भादंवि की धारा 302 के तहत उम्रकैद की सजा के साथसाथ 10 हजार रुपए जुरमाने की भी सजा सुनाई.

 

Kanpur crime : देवर को मोहरा बनाकर कराया बड़ी बहन का मर्डर

Kanpur crime : कभीकभी इंसान इश्क में इतना अंधा हो जाता है कि वह अच्छेबुरे का फर्क भी नहीं समझता. बबीता ने बड़ी बहन बबली के सुहाग पर डाका डाल कर उसे अपने कब्जे में कर लिया था. इस का अंजाम इतना खतरनाक निकला कि…   

11 सितंबर, 2018 की सुबह करीब 8 बजे कानपुर शहर के थाना कैंट के थानाप्रभारी ललितमणि त्रिपाठी थाने में पहुंचे ही थे कि उसी समय एक व्यक्ति बदहवास हालत में उन के पास पहुंचा. उस ने थानाप्रभारी को सैल्यूट किया फिर बताया, ‘‘सर, मेरा नाम दिलीप कुमार है. मैं सिपाही पद पर पुलिस लाइन में तैनात हूं और कैंट थाने के पुलिस आवास ब्लौक 3, कालोनी नंबर 29 में रहता हूं. बीती रात मेरी दूसरी पत्नी बबीता ने पंखे से फांसी लगा कर आत्महत्या कर ली है. आप को सूचना देने थाने आया हूं.’’

चूंकि विभागीय मामला था. अत: थानाप्रभारी ललितमणि त्रिपाठी ने दिलीप की सूचना से अपने वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों को अवगत कराया फिर सहयोगियों के साथ घटनास्थल पर पहुंच गए. पुलिस टीम जब दिलीप के आवास पर पहुंची तो बबीता का शव पलंग पर पड़ा था. उस की उम्र करीब 23 साल थी. उस के गले में खरोंच का निशान था. वहां एक दुपट्टा भी पड़ा था. शायद उस ने दुपट्टे से फांसी का फंदा बनाया था. थानाप्रभारी अभी जांच कर ही रहे थे कि एसएसपी अनंत देव, एसपी राजेश कुमार यादव तथा सीओ (कैंट) अजीत प्रताप सिंह फोरैंसिक टीम के साथ वहां गए. पुलिस अधिकारियों ने बारीकी से घटनास्थल का निरीक्षण किया फिर सिपाही दिलीप कुमार उस की पत्नी बबली से पूछताछ की.

 दिलीप ने बताया कि उस की ब्याहता पत्नी बबली है. बाद में उस ने साली बबीता से दूसरा ब्याह रचा लिया था. दोनों पत्नियां साथ रहती थीं. बीती रात बबीता ने पंखे से लटक कर आत्महत्या कर ली जबकि बबली ने बताया कि बबीता को मिरगी का दौरा पड़ता था. वह बीमार रहती थी, जिस से परेशान हो कर उस ने आत्महत्या कर ली. पुलिस अधिकारियों ने पूछताछ के बाद मृतका के परिवार वालों को भी सूचना भिजवा दी. फोरैंसिक टीम ने जांच की तो पंखे, छत के कुंडे रौड पर धूल लगी थी. अगर पंखे से लटक कर बबीता ने जान दी होती तो धूल हटनी चाहिए थी. मौके से बरामद दुपट्टे पर भी किसी तरह की धूल नहीं लगी थी

गले पर मिला निशान भी फांसी के फंदे जैसा नहीं था. टीम को यह मामला आत्महत्या जैसा नहीं लगा. फोरैंसिक टीम ने वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों को अपने शक से अवगत कराया और शव का पोस्टमार्टम डाक्टरों के पैनल से कराने का अनुरोध किया. इस के बाद लाश पोस्टमार्टम के लिए लाला लाजपतराय चिकित्सालय भिजवा दी. एसएसपी अनंत देव ने तब मृतका बबीता के शव का पोस्टमार्टम डाक्टरों के पैनल से कराने को कहा. डाक्टरों के पैनल ने बबीता का पोस्टमार्टम किया और अपनी रिपोर्ट पुलिस अधिकारियों को भेज दी.

पोस्टमार्टम रिपोर्ट को पढ़ कर थानाप्रभारी चौंक पड़े, क्योंकि उस में साफ कहा गया था कि बबीता की मौत गला दबा कर हुई थी. यानी वह आत्महत्या नहीं बल्कि हत्या का मामला निकला. श्री त्रिपाठी ने अपने अधिकारियों को भी बबीता की हत्या के बारे में अवगत करा दिया. फिर उन के आदेश पर सिपाही दिलीप कुमार को पूछताछ के लिए हिरासत में ले लिया. अब तक मृतका बबीता के मातापिता भी कानपुर गए थे. आते ही बबीता के पिता डा. बृजपाल सिंह ने थानाप्रभारी ललितमणि त्रिपाठी सीओ अजीत प्रताप सिंह चौहान से मुलाकात की. उन्होंने आरोप लगाया कि सिपाही दिलीप उस के परिवार वालों ने दहेज के लिए उन की बेटी बबीता को मार डाला. उन्होंने रिपोर्ट दर्ज कर आरोपियों को तुरंत गिरफ्तार करने की मांग की.

चूंकि बबीता की मौत गला घोंटने से हुई थी और सिपाही दिलीप कुमार शक के घेरे में था. अत: थानाप्रभारी ललितमणि त्रिपाठी ने मृतका के पिता डा. बृजपाल सिंह की तहरीर पर सिपाही दिलीप कुमार उस के पिता सोनेलाल मां मालती के खिलाफ दहेज उत्पीड़न गैर इरादतन हत्या की रिपोर्ट दर्ज कर के जांच शुरू कर दी. बबीता की मौत की बारीकी से जांच शुरू की तो उन्होंने सब से पहले हिरासत में लिए गए सिपाही दिलीप कुमार से पूछताछ की. दिलीप कुमार ने हत्या से साफ इनकार कर दिया. उस की ब्याहता बबली से पूछताछ की गई तो वह भी साफ मुकर गई. पासपड़ोस के लोगों से भी जानकारी जुटाई गई, पर हत्या का कोई क्लू नहीं मिला.

सिपाही दिलीप के पिता सोनेलाल भी यूपी पुलिस में एसआई हैं. वह पुलिस लाइन कानपुर में तैनात हैं. सोनेलाल भी इस केस में आरोपी थे. फिर भी उन्होंने पुलिस अधिकारियों से मुलाकात की और बताया कि बबीता की हत्या उन के बेटे दिलीप ने नहीं की है. उन्होंने कहा कि बबीता के पिता बृजपाल ने झूठा आरोप लगा कर पूरे परिवार को फंसाया है. पुलिस जिस तरह चाहे जांच कर ले, वह जांच में पूरा सहयोग करने को तैयार हैं. उन्होंने यहां तक कहा कि यदि जांच में मेरा बेटा और मैं दोषी पाया जाऊं तो कतई बख्शा जाए. एसपी राजेश कुमार यादव सीओ प्रताप सिंह भी चाहते थे कि हत्या जैसे गंभीर मामले में कोई निर्दोष व्यक्ति जेल जाए, अत: उन्होंने एसआई सोनेलाल की बात को गंभीरता से लिया और थानाप्रभारी ललितमणि त्रिपाठी को आदेश दिया कि वह निष्पक्ष जांच कर जल्द से जल्द हत्या का खुलासा कर दोषी के खिलाफ काररवाई करें.

अधिकारियों के आदेश पर थानाप्रभारी ने केस की सिरे से जांच शुरू की. उन्होंने मामले का क्राइम सीन दोहराया. इस से एक बात तो स्पष्ट हो गई कि बबीता का हत्यारा कोई अपना ही है. क्योंकि घर में उस रात 4 सदस्य थे. सिपाही दिलीप कुमार, उस की ब्याहता बबली, 3 वर्षीय बेटा और दूसरी पत्नी बबीता. अब रात में बबीता की हत्या या तो दिलीप ने की या फिर बबली ने या फिर दोनों ने मिल कर की या किसी को सुपारी दे कर कराई. दिलीप कुमार बबीता की हत्या से साफ मुकर रहा था. उस का दरोगा पिता सोनेलाल भी उस की बात का समर्थन कर रहा था. यदि दिलीप ने हत्या नहीं की तो बबली जरूर हत्या के राज से वाकिफ होगी. अब तक कई राउंड में पुलिस अधिकारी दिलीप तथा उस की ब्याहता बबली से पूछताछ कर चुके थे. पर किसी ने मुंह नहीं खोला था.

इस पूछताछ में बबली शक के घेरे में रही थी. पुष्टि करने के लिए पुलिस ने बबली के मोबाइल फोन की काल डिटेल्स निकलवाई. उस से पता चला कि उस ने घटना वाली शाम को अपने देवर शिवम से बात की थी. अत: 14 सितंबर को बबली को पूछताछ के लिए थाने बुलवा लियामहिला पुलिसकर्मियों ने जब उस से उस की छोटी बहन बबीता की हत्या के संबंध में पूछा तो वह साफ मुकर गई. लेकिन मनोवैज्ञानिक तरीके से की गई पूछताछ से बबली टूट गई. उस ने बबीता की हत्या का जुर्म कबूल कर लिया. बबली ने बताया कि उस की सगी छोटी बहन बबीता उस की सौतन बन गई थी. पति बबीता के चक्कर में उस की उपेक्षा करने लगा था. इतना ही नहीं, वह शारीरिक और मानसिक रूप से भी उसे प्रताडि़त करता था. पति की उपेक्षा से उस का झुकाव सगे देवर शिवम की तरफ हो गया. फिर शिवम की मदद से ही रात में बबीता की रस्सी से गला कस कर हत्या कर दी.

बबली के बयानों के आधार पर पुलिस ने शिवम को चकेरी से गिरफ्तार कर लिया. शिवम चकेरी में कमरा ले कर रह रहा था और पढ़ाई तथा प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी कर रहा था. थाने में भाभी बबली को देख कर उस के चेहरे का रंग उड़ गया. फिर उस ने भी हत्या का जुर्म कबूल कर लिया. शिवम ने बताया कि बबली भाभी उस के बीच प्रेम संबंध थे. भाभी उस से मिलने चकेरी आती थी. किसी तरह बबीता को यह बात पता लग गई थी तो वह शिकायत दिलीप भैया से कर देती थी. फिर दिलीप भैया हम दोनों को पीटते थे. इसी खुन्नस में हम दोनों ने गला घोट कर बबीता को मार डाला. शिवम ने हत्या में प्रयुक्त रस्सी भी पुलिस को बरामद करा दी जो उस ने झाडि़यों में फेंक दी थी.

चूंकि बबीता की हत्या की वजह साफ हो गई थी, इसलिए थानाप्रभारी ललितमणि त्रिपाठी ने दहेज हत्या की रिपोर्ट को खारिज कर बबली शिवम के खिलाफ भादंवि की धारा 302 के तहत रिपोर्ट दर्ज कर ली और दोनों को गिरफ्तार कर सिपाही दिलीप उस के मातापिता को क्लीन चिट दे दी. पुलिस द्वारा की गई जांच, आरोपियों के बयानों और अन्य सूत्रों से मिली जानकारी के आधार पर नाजायज रिश्तों एवं सौतिया डाह की जो कहानी सामने आई, वह इस प्रकार निकली

उत्तर प्रदेश के हरदोई जिले का एक छोटा सा गांव है रूपापुर. इसी गांव में डा. बृजपाल सिंह अपने परिवार के साथ रहते थे. उन के परिवार में पत्नी ममता के अलावा 2 बेटियां बबली और बबीता थीं. बृजपाल सिंह गांव के सम्मानित व्यक्ति थे. वह डाक्टरी पेशे से जुड़े थे. उन के पास उपजाऊ जमीन भी थी. कुल मिला कर वह हर तरह से साधनसंपन्न और प्रतिष्ठित व्यक्ति थे. उन्होंने बड़ी बेटी बबली की शादी फर्रुखाबाद जिले के गंज (फतेहगढ़) निवासी सोनेलाल के बेटे दिलीप कुमार के साथ तय कर दी. दिलीप कुमार उत्तर प्रदेश पुलिस में सिपाही था. सोनेलाल भी उत्तर प्रदेश पुलिस में एसआई थे. उन का छोटा बेटा शिवम पढ़ रहा था. सोनेलाल का परिवार भी खुशहाल था.

दोनों ही परिवार पढ़ेलिखे थे, इसलिए सगाई से पहले ही परिजनों ने एकांत में बबली और दिलीप की मुलाकात करा दी थी. क्योंकि जिंदगी भर दोनों को साथ रहना है तो वे पहले ही एकदूसरे को देखसमझ लें. दोनों ने एकदूसरे को पसंद कर लिया तो 11 दिसंबर, 2012 को सामाजिक रीतिरिवाज से दोनों की शादी हो गई. शादी के बाद बबली कुछ महीने ससुराल में रही फिर दिलीप को कानपुर के कैंट थाने में क्वार्टर मिल गया. क्वार्टर आवंटित होने के बाद दिलीप अपनी पत्नी को भी गांव से ले आया. वहां दोनों हंसीखुशी से जिंदगी व्यतीत करने लगे.

दिलीप जब ससुराल जाता तो उस की निगाहें अपनी खूबसूरत साली बबीता पर ही टिकी रहती थीं. वह महसूस करने लगा कि बबली से शादी कर के उस ने गलती की. उस की शादी तो बबीता से होनी चाहिए थी. ऐसा नहीं था कि बबली में किसी तरह की कमी थी. वह सुंदर, सुशील के साथ घर के सभी कामों में दक्ष थी. लेकिन बबीता अपनी बड़ी बहन से ज्यादा सुंदर और चंचल थी, इसलिए दिलीप का मन साली पर इतना डोल गया कि उस ने फैसला कर लिया कि वह बबीता को अपने प्यार के जाल में फंसा कर उस से दूसरा विवाह करने की कोशिश करेगा.

रिश्ता जीजासाली का था सो दिलीप और बबीता के बीच हंसीमजाक होता रहता था. एक दिन दिलीप ससुराल में सोफे पर बैठा था तभी बबीता उसी के पास सोफे पर बैठ कर उस की शादी का एलबम देखने लगी. दोनों के बीच बातों के साथ हंसीमजाक हो रहा था. अचानक दिलीप ने एलबम में लगे एक फोटो की ओर संकेत किया, ‘‘देखो बबीता, मेरे बुरे वक्त में कितने लोग साथ खड़े हैं.’’

बबीता ने गौर से उस फोटो को देखा, जिस में दिलीप दूल्हा बना हुआ था और कई लोग उस के साथ खड़े थे. फिर वह खिलखिला कर हंसने लगी, ‘‘शादी और आप का बुरा वक्त. जीजाजी, बहुत अच्छा मजाक कर लेते हैं आप.’’

‘‘बबीता, मैं मजाक नहीं कर रहा हूं सच बोल रहा हूं.’’ चौंकन्नी निगाहों से इधरउधर देखने के बाद दिलीप फुसफुसा कर बोला, ‘‘बबली से शादी कर के मैं तो फंस गया यार.’’

‘‘पापा ने दहेज में कोई कसर छोड़ी है और दीदी में किसी तरह की कमी है.’’ हंसतेहंसते बबीता गंभीर हो गई, ‘‘फिर आप दिल दुखाने वाली ऐसी बात क्यों कर रहे हैं.’’

‘‘बबली को जीवनसाथी चुन कर मैं ने गलती की थी.’’ कह कर दिलीप बबीता की आंखों में देखने लगा फिर बोला, ‘‘सच कहूं, मेरी पत्नी के काबिल तो तुम थी.’’

गंभीरता का मुखौटा उतार कर बबीता फिर खिलखिलाने लगी, ‘‘जीजाजी, आप भी खूब हैं.’’

‘‘अच्छा, एक बात बताओ. अगर बबली से मेरा रिश्ता हुआ होता और मैं तुम्हें प्रपोज करता तो क्या तुम मुझ से शादी करने को राजी हो जाती.’’ कह कर दिलीप ने उस के मन की टोह लेनी चाही.

बबीता से कोई जवाब देते बना, वह गहरी सोच में डूब गई.

‘‘सच बोलूं?’’ बबीता ने कहा, ‘‘आप बुरा तो नहीं मानेंगे.’’

दिलीप का दिल डूबने सा लगा, ‘‘बिलकुल नहीं, लेकिन सच बोलना.’’

‘‘सच ही बोलूंगी जीजाजी,’’ शर्म से बबीता के गालों पर गुलाबी छा गई, ‘‘और सच यह है कि मैं आप से शादी करने को फौरन राजी हो जाती.’’

यह सुन कर दिलीप का दिल बल्लियों उछलने लगा किंतु मन में एक संशय भी था, सो उस ने तुरंत पूछ लिया, ‘‘कहीं मेरा मन रखने के लिए तो तुम यह जवाब नहीं दे रही.’’

‘‘हरगिज नहीं, बहुत सोचसमझ कर ही मैं ने आप को यह जवाब दिया है.’’ बबीता आहिस्ता से निगाहें उठा कर बोली, ‘‘आप हैं ही इतने हैंडसम और स्मार्ट कि किसी भी लड़की के आइडियल हो सकते हैं.’’

दिलीप ने अपनी आंखें उस की आंखों में डाल दीं, ‘‘तुम्हारा भी…’’

‘‘मैं कैसे शामिल हो सकती हूं.’’ बबीता बौखलाई सी थी, ‘‘आप तो मेरे जीजाजी हैं.’’

बबीता ने मुंह खोला ही था कि तभी उस की मां ममता वहां गईं. अत: दोनों की बातों पर वहीं विराम लग गया. दिलीप से हुई बातों को बबीता ने सामान्य रूप से लिया, मगर दिलीप का दिमाग दूसरी ही दिशा में सोच रहा था. उसे विश्वास हो गया कि बबीता भी उस पर फिदा है. लिहाजा वह बबीता पर डोरे डालने लगा. शादी के ढाई साल बाद बबली गर्भवती हुई तो उस की खुशी का ठिकाना रहा. दिलीप को भी बाप बनने की खुशी थी. एक रोज बबली ने पति से कहा कि उसे अब घरेलू काम खाना बनाने में दिक्कत होने लगी है. अत: वह बबीता को घर की देखरेख के लिए लिवा लाए. कम से कम वह घर का काम तो कर लिया करेगी.

पत्नी की बात सुन कर दिलीप खुशी से झूम उठा. उस ने बबली से कहा कि वह अपने मातापिता से बबीता को भेजने की बात कर ले. कहीं ऐसा हो कि वह उसे भेजने से इनकार कर देंबबली ने मां से बात की तो वह बबीता को दिलीप के साथ भेजने को राजी हो गईं. इस के बाद दिलीप ससुराल गया और बबीता को साथ ले आया. बबीता ने आते ही घर का कामकाज संभाल लिया. साली घर गई तो दिलीप के जीवन में भी बहार गई. वह उसे रिझाने के लिए उस पर डोरे डालने लगा. पहले दोनों में मौखिक छेड़छाड़ शुरू हुई. फिर धीरेधीरे मगर चालाकी से दिलीप ने उस से शारीरिक छेड़छाड़ भी शुरू कर दी.

उन दिनों बबीता की उम्र 19-20 साल थी. उस के तनमन में यौवन का हाहाकारी सैलाब थमा हुआ था. दिलीप की कामुक हरकतों से उसे भी आनंद की अनुभूति होने लगी. दिलीप को छेड़ने पर वह उस का विरोध करने के बजाय मुसकरा देती. इस से दिलीप का हौसला बढ़ता गया. बबीता भी दिलीप में रुचि लेने लगी. फिर एक दिन मौका मिलने पर दोनों ने अपनी हसरतें भी पूरी कर लीं. साली के शरीर को पा कर जहां दिलीप की प्रसन्नता का पारावार था, वहीं बबीता को प्रसन्नता के साथ ग्लानि भी थी. उस ने कहा, ‘‘जीजाजी, यह अच्छा नहीं हुआ. तुम्हारे साथ मैं भी बहक गई.’’

‘‘तो इस में बुरा क्या है?’’

‘‘बुरा यह है कि मैं ने बड़ी बहन के हक पर अपना हक जमा लिया. यह पाप है.’’ वह बोली.

‘‘प्यार में पापपुण्य नहीं देखा जाता. भूल जाओ कि तुम ने कुछ गलत किया है. बबली का जो हक है, वह उसे मिलता रहेगा.’’ कहते हुए दिलीप ने बबीता को फिर से बांहों में समेटा तो वह भी अच्छाबुरा भूल कर उस से लिपट गईउसी दिन से दोनों के पतन की राह खुल गई. देर रात जब बबली सो जाती तो बबीता दिलीप के बिस्तर पर पहुंच जाती फिर दोनों हसरतें पूरी करते. बबली ने बेटे को जन्म दिया तो घर में खुशी छा गई. पति के अलावा सासससुर सभी खुश थे. कुछ समय बाद बबली ने महसूस किया कि छोटी बहन बबीता उस के पति से कुछ ज्यादा ही नजदीकियां बढ़ा रही है. उस ने उस पर नजर रखनी शुरू की तो सच सामने गया

उस ने नाजायज रिश्तों का विरोध किया तो दिलीप बबीता दोनों ही उस पर हावी हो गए. तब बबली ने बबीता को घर वापस भेजने का प्रयास किया लेकिन दिलीप ने उसे नहीं जाने दिया. एक रात जब बबली ने पति को छोटी बहन के साथ बिस्तर पर रंगेहाथ पकड़ा तो दिलीप बोला कि वे एकदूसरे को प्यार करते हैं और जल्द ही शादी भी कर लेंगे. यदि उस ने विरोध किया तो वह उसे घर से निकाल देगाइस धमकी से बबली डर गई. अब वह डरसहमी रहने लगी. बबली का विरोध कम हुआ तो दिलीप और बबीता खुल्लमखुल्ला रासलीला रचाने लगे. इसी बीच चोरीछिपे दिलीप ने बबीता के साथ आर्यसमाज मंदिर में शादी कर ली और उसे पत्नी का दरजा दे दिया.

डा. बृजलाल सिंह को जब दामाद की इस नापाक हरकत का पता चला तो वह किसी तरह बबीता को घर ले आए. घर पर मां ने उसे समझाया और बहन का घर उजाड़ने की नसीहत दी. लेकिन बबीता जीजा के प्यार में इस कदर डूब चुकी थी कि उसे मां की नसीहत अच्छी नहीं लगी. उस ने मां से साफ कह दिया कि चाहे कुछ भी हो जाए, वह दिलीप का साथ नहीं छोड़ेगी. डा. बृजपाल सिंह ने बड़ी बेटी बबली का घर टूटने से बचाने के लिए पुलिस में दिलीप की शिकायत की. जांच के दौरान पुलिस ने बबीता का बयान दर्ज किया

बबीता ने तब हलफनामा दे कर कहा कि उस ने दिलीप से आर्यसमाज में शादी कर ली है. अब वह उस की पत्नी है और उसी के साथ रहना चाहती है. मांबाप उसे बंधक बनाए हैं. बबीता के इस बयान के बाद डा. बृजपाल मायूस हो गए. इस के बाद बबीता दिलीप के साथ चली गई. दिलीप ने अब बबीता को पत्नी का दरजा दे दिया था और उसे सुखपूर्वक रखने लगा था. बबली और बबीता दोनों सगी बहनें अब एक ही छत के नीचे रहने लगी थींबबीता ने बहन के सुहाग पर कब्जा भले ही कर लिया था लेकिन बबली ने मन से बबीता को स्वीकार नहीं किया था. बल्कि यह उस की मजबूरी थी. दोनों एकदूसरे से मन ही मन जलती थीं लेकिन दिखावे में साथ रहती थीं और हंसतीबतियाती थीं.

बबीता सौतन बन कर घर में रहने लगी तो दिलीप बबली की उपेक्षा करने लगा. वह बबीता की हर बात सुनता था, जबकि बबली को झिड़क देता था. ब्याहता की उपेक्षा कर वह बबीता के साथ घूमने और शौपिंग के लिए जाता. कभीकभी किसी बात को ले कर दोनों बहनों में झगड़ा हो जाता तो दिलीप बबीता का पक्ष ले कर बबली को ही बेइज्जत कर देता. बिस्तर पर भी बबीता ही दिलीप के साथ होती, जबकि बबली रात भर करवटें बदलती रहती थी. बबली का एक देवर था शिवम. शिवम चकेरी में रहता था और पढ़ाई के साथ प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी कर रहा था. शिवम बबली भाभी से मिलने आताजाता रहता था. शिवम को बबली से तो लगाव था लेकिन बबीता उसे फूटी आंख भी नहीं सुहाती थी

उस का मानना था कि बबीता ने दिलीप से शादी कर के अपनी बड़ी बहन के हक को छीन लिया है. उसे बहन की सौतन बन कर नहीं आना चाहिए था. बबली की उपेक्षा जब घर में होने लगी तो उस की नजर अपने देवर शिवम पर पड़ी. उस ने अपने हावभाव से शिवम से दोस्ती कर ली. दोस्ती प्यार में बदली और फिर उन के बीच शारीरिक संबंध भी बन गए. बबली अकसर देवर शिवम से मिलने जाने लगी. देवरभाभी के मिलन की शिकायत बबीता ने बढ़ाचढ़ा कर दिलीप से कर दीदिलीप ने निगरानी शुरू की तो बबली को छोटे भाई शिवम के साथ घूमते पकड़ लिया. इस के बाद उस ने बीच सड़क पर गिरा कर शिवम को पीटा तथा बबली की पिटाई घर पहुंच कर की. फिर तो यह सिलसिला ही चल पड़ा. बबीता की शिकायत पर बबली शिवम की जबतब पिटाई होती रहती थी.

देवरभाभी के मिलन में बबीता बाधक बनने लगी तो बबली ने शिवम के साथ मिल कर उसे रास्ते से हटाने का फैसला ले लिया. बबली जानती थी कि जब तक बबीता जिंदा है, वह उस की छाती पर मूंग दलती रहेगी और तब तक उसे तो घर में इज्जत मिलेगी और ही पति का प्यार.  उसे यह भी शक था कि बबीता ने उस से उस का पति तो छीन ही लिया है, अब वह धन और गहने भी छीन लेगी इसलिए उस ने शिवम को अपनी चिकनीचुपड़ी बातों के जाल में उलझा कर ऐसा उकसाया कि वह बबीता की हत्या करने को राजी हो गया. 10 सितंबर, 2018 की शाम बबली बबीता में किसी बात को ले कर झगड़ा हुआ. इस झगड़े ने बबली के मन में नफरत की आग भड़का दी.

उस ने एकांत में जा कर शिवम से बात की और उसे घर बुला लिया. शिवम घर आया तो बबली ने उसे बाहर वाले कमरे में पलंग के नीचे छिपने को कहा. शिवम तब पलंग के नीचे छिप गया. बबीता को शिवम के आने की भनक नहीं लगी. देर शाम दिलीप जब घर आया तो बबीता ने उस के साथ खाना खाया फिर दोनों कमरे में कूलर चला कर पलंग पर लेट गए. आधी रात के बाद बबीता लघुशंका के लिए कमरे से निकली तभी घात लगाए बैठे शिवम बबली ने उसे दबोच लिया और घसीट कर वह उसे कमरे में ले आए इस के बाद शिवम ने बबीता का मुंह दबोच लिया ताकि वह चिल्ला सके और बबली ने रस्सी से उस का गला घोट दिया. हत्या करने के बाद शिवम रस्सी का टुकड़ा ले कर भाग गया और बबली अपने मासूम बच्चे के साथ कर कमरे में लेट गई.

इधर सुबह को दिलीप की आंखें खुलीं तो बिस्तर पर बबीता को पा कर कमरे से बाहर निकला. दूसरे कमरे में बबली बच्चे के साथ पलंग पर लेटी थी. बबीता को खोजते हुए दिलीप जब बाहर वाले कमरे में पहुंचा तो पलंग पर बबीता की लाश पड़ी थी. लाश देख कर दिलीप चीखा तो बबली भी कमरे से बाहर गई. बबीता की लाश देख कर बबली रोने लगी. उस के रोने की आवाज सुन कर पासपड़ोस के लोग गए. फिर तो पुलिस कालोनी में हड़कंप मच गया. इसी बीच दिलीप कुमार थाने पहुंचा और पुलिस को पत्नी बबीता द्वारा आत्महत्या करने की सूचना दी. सूचना पा कर थानाप्रभारी ललितमणि त्रिपाठी पुलिस बल के साथ पहुंचे और फिर आगे की काररवाई हुई.

15 सितंबर, 2018 को पुलिस ने अभियुक्त शिवम और बबली को कानपुर कोर्ट में रिमांड मजिस्ट्रैट की अदालत में पेश किया, जहां से दोनों को जेल भेज दिया गया. कथा संकलन तक उन की जमानत नहीं हुई थी.   

   —कथा पुलिस सूत्रों पर आधारित

Uttar Pradesh Crime : दरोगा ने 2 लाख देकर बेटे की प्रेमिका की हत्या कराई

Uttar Pradesh Crime : उत्तर प्रदेश पुलिस में दरोगा बच्चू सिंह के बेटे तरुण की दोस्ती प्रियंका से हो गई थी. दोनों शादी करना चाहते थे, लेकिन जब पिता के कहने पर तरुण ने शादी से इनकार कर दिया तो प्रियंका ने अपने हक की लड़ाई लड़ने की सोची. उसे क्या पता था कि इस लड़ाई में…   

प्रियंका को जल्दीजल्दी तैयार होता देख उस की मां चित्रा ने पूछा, ‘‘क्या बात है, आज कहीं जल्दी जाना है क्या, जो इतनी जल्दी उठ कर तैयार हो गई?’’

‘‘हां मम्मी, परसों जो मैडम आई थीं, जिन्हें मैं ने अपने फोटो, आई कार्ड और सीवी दिया था, उन्होंने बुलाया है. कह रही थीं कि उन्होंने अपने अखबार में मेरी नौकरी की बात कर रखी है. इसलिए मुझे टाइम से पहुंचना है.’’ 

प्रियंका ने कहा तो चित्रा ने टिफिन में खाना पैक कर के उसे दे दिया. प्रियंका ने टिफिन अपने बैग में रखा और शाम को जल्दी लौट आने की बात कह कर बाहर निकल गई. कुछ देर बाद प्रियंका के पापा जगवीर भी अपने क्लीनिक पर चले गए तो चित्रा घर के कामों में व्यस्त हो गई. उस दिन शाम को करीब साढ़े 5 बजे जगवीर सिंह के मोबाइल पर उन के साले ओमदत्त का फोन आयाओमदत्त ने उन्हें बताया, ‘‘जीजाजी, मेरे फोन पर कुछ देर पहले प्रियंका का फोन आया था. वह कह रही थी कि बच्चू सिंह ने अपने बेटे राहुल और कुछ बदमाशों की मदद से उस का अपहरण करवा लिया है और वह अलीगढ़ के पास खैर इलाके के वरौला गांव में है.’’

ओमदत्त की बात सुन कर जगवीर सिंह की आंखों के आगे अंधेरा छा गया. उन्होंने जैसेतैसे अपने आप को संभाला और क्लीनिक बंद कर के घर गए. तब तक उन का साला ओमदत्त भी उन के घर पहुंच गया था. मामला गंभीर था. विचारविमर्श के बाद दोनों गाजियाबाद के थाना कविनगर पहुंचे और लिखित तहरीर दे कर 25 वर्षीया प्रियंका के अपहरण की नामजद रिपोर्ट दर्ज करा दी. जगवीर सिंह सपरिवार गोविंदपुरम गाजियाबाद में किराए के मकान में रहते थे. उन के परिवार में पत्नी चित्रा के अलावा 3 बच्चे थेबेटी प्रियंका और 2 बेटे पंकज तितेंद्र. उन का बड़ा बेटा पंकज एक टूर ऐंड ट्रैवल कंपनी की गाड़ी चलाता था, जबकि छोटा तितेंद्र सरकारी स्कूल में 10वीं कक्षा में पढ़ाई कर रहा था

जगवीर सिंह ने 7 साल पहले प्रियंका की शादी गुलावठी के धर्मेंद्र चौधरी के साथ कर दी थी. धर्मेंद्र एक ट्रैवल एजेंसी में काम करता था. शादी के 1 साल बाद प्रियंका एक बेटे की मां बन गई थी, जो अब 6 साल का है. आर्थिक स्थिति कमजोर होने की वजह से जगवीर अपने बच्चों को अधिक पढ़ालिखा नहीं सके. उन का छोटा सा क्लीनिक था, जहां वह बतौर आरएमपी प्रैक्टिस करते थे. यही क्लीनिक उन की आय का एकमात्र साधन थाप्रियंका शहर में पलीबढ़ी महत्त्वाकांक्षी लड़की थी. शादी के बाद गांव उसे कभी भी अच्छा नहीं लगा.

इसी को ले कर जब पतिपत्नी में अनबन रहने लगी तो प्रियंका ने पति से अलग रहने का निर्णय ले लिया और बेटे सहित धर्मेंद्र का घर छोड़ कर मातापिता के पास गाजियाबाद गई. जगवीर सिंह की आर्थिक स्थिति पहले से ही खराब थी. बेटे सहित प्रियंका के मायके जाने से उन के पारिवारिक खर्चे और भी बढ़ गएकिसी भी मांबाप के लिए यह किसी विडंबना से कम नहीं होता कि उन की बेटी शादी के बाद भी उन के साथ रहे. इस बात को प्रियंका अच्छी तरह समझती थी. इसलिए वह अपने स्तर पर नौकरी की तलाश में लग गई. काफी खोजबीन के बाद भी जब उसे कोई अच्छी नौकरी नहीं मिली तो उस ने एक मोबाइल शौप पर सेल्सगर्ल की नौकरी कर ली.

मोबाइल शौप पर काम करते हुए प्रियंका की मुलाकात तरुण से हुई. तरुण चढ़ती उम्र का अच्छे परिवार का लड़का था. पहली ही मुलाकात में तरुण आंखों के रास्ते प्रियंका के दिल में उतर गया. बातचीत हुई तो दोनों ने अपनाअपना मोबाइल नंबर एकदूसरे को दे दिया. इस के बाद दोनों प्राय: रोज ही एकदूसरे से फोन पर बातें करने लगेजल्दी ही मिलनेमिलाने का सिलसिला भी शुरू हो गया. दोनों एकदूसरे को दिन में कई बार फोन और एसएमएस करने लगे. जब समय मिलता तो दोनों साथसाथ घूमते और रेस्टोरेंट वगैरह में जाते. धीरेधीरे दोनों के बीच नजदीकियां बढ़ती गईं

तरुण के पिता बच्चू सिंह उत्तर प्रदेश पुलिस में सबइंसपेक्टर थे और गाजियाबाद के थाना मसूरी में तैनात थे. जब तरुण और प्रियंका के संबंध गहराए तो उन दोनों की प्रेम कहानी का पता बच्चू सिंह को भी लग गया. उन्होंने जब इस बारे में तरुण से पूछा तो उस ने बेहिचक सारी बातें पिता को बता दीं. प्रियंका के बारे में भी सब कुछ और यह भी कि वह उस से शादी की इच्छा रखता है. उधर प्रियंका भी तरुण से शादी का सपना देखने लगी थी. बेटे की प्रेमकहानी सुन कर बच्चू सिंह बहुत नाराज हुए. उन्होंने तरुण से साफसाफ कह दिया कि वह प्रियंका से दूर रहे, क्योंकि एक तलाकशुदा और एक बच्चे की मां कभी भी उन के परिवार की बहू नहीं बन सकती. इतना ही नहीं, उन्होंने प्रियंका को भी आगे बढ़ने की सख्त चेतावनी दी. प्रियंका और अपने बेटे की प्रेम कहानी को ले कर वह तनाव में रहने लगे.

बच्चू सिंह ने प्रियंका और तरुण को चेतावनी भले ही दे दी थी, पर वे जानते थे कि ऐसी स्थिति में लड़का समझेगा लड़की. इसी वजह से उन्हें इस समस्या का कोई आसान हल नहीं सूझ रहा था. आखिर काफी सोचविचार कर उन्होंने प्रियंका को समझाने का फैसला किया. बच्चू सिंह ने प्रियंका को समझाया भी, लेकिन वह शादी की जिद पर अड़ी रही. इतना ही नहीं, ऐसा होने पर उस ने बच्चू सिंह को परिवार सहित अंजाम भुगतने की धमकी तक दे डाली. अपनी इस धमकी को उस ने सच भी कर दिखाया

1 मार्च, 2013 को उस ने थाना कविनगर में बच्चू सिंह, उन की पत्नी, बेटे राहुल, नरेंद्र, प्रशांत और रोबिन के खिलाफ धारा 376, 452, 323, 506 406 के तहत मुकदमा दर्ज करा दिया, जिस में उस ने घर में घुस कर मारपीट, बलात्कार और 70 हजार रुपए लूटने का आरोप लगायाबलात्कार का आरोप लगने से बच्चू सिंह के परिवार की बड़ी बदनामी हुई. इस मामले में बच्चू सिंह का नाम आने पर उन का तबादला मेरठ के जिला बागपत कर दिया गया. मामला चूंकि एक पुलिसकर्मी से संबंधित था, सो इस सिलसिले में गंभीर जांच करने के बजाय विभागीय जांच के नाम पर इसे लंबे समय तक लटकाए रखा गया

जबकि दूसरे आरोपियों के खिलाफ कानूनी काररवाई की गई. उधर बच्चू सिंह के खिलाफ कोई विशेष काररवाई होते देख प्रियंका ने उन के बड़े बेटे राहुल और उस के दोस्त के खिलाफ 17 जून, 2013 को छेड़खानी मारपीट का एक और मुकदमा दर्ज करा दिया. इस से बच्चू सिंह का परिवार काफी दबाव में गया. 2-2 मुकदमों में फंसने से बच्चू सिंह और उन के परिवार को रोजरोज कोर्ट के चक्कर लगाने पड़ रहे थे. इसी सब के चलते 31 नवंबर, 2013 को प्रियंका घर से गायब हो गई.

प्रियंका के अपहरण की रिपोर्ट दर्ज होने पर थानाप्रभारी कविनगर ने इस मामले की जांच की जिम्मेदारी सबइंसपेक्टर शिवराज सिंह को सौंप दी. शिवराज सिंह प्रियंका द्वारा दर्ज कराए गए पिछले 2 केसों की भी जांच कर रहे थे. उन्होंने पिछले दोनों केसों की तरह इस मामले में भी कोई विशेष दिलचस्पी नहीं ली. दूसरी ओर प्रियंका के मातापिता लगातार थाने के चक्कर लगाते रहे. उन्होंने डीआईजी, आईजी और गाजियाबाद के एसपी, एसएसपी तक सभी अधिकारियों को अपनी परेशानी बताई . लेकिन किसी भी स्तर पर उन की कोई सुनवाई नहीं हुई. इसी बीच अचानक थानाप्रभारी कविनगर का तबादला हो गया. उन की जगह नए थानाप्रभारी आए अरुण कुमार सिंह.

अरुण कुमार सिंह ने प्रियंका के अपहरण के मामले में विशेष दिलचस्पी लेते हुए इस की जांच का जिम्मा बरेली से तबादला हो कर आए तेजतर्रार एसएसआई पवन चौधरी को सौंप कर कड़ी जांच के आदेश दिए. पवन चौधरी ने जांच में तेजी लाते हुए इस मामले में उस अज्ञात नामजद महिला पत्रकार के बारे में पता किया, जिस ने लापता होने वाले दिन प्रियंका को नौकरी दिलाने के लिए बुलाया था. छानबीन में यह भी पता चला कि उस महिला का नाम रश्मि है और वह अपने पति के साथ केशवपुरम में किराए के मकान में रहती है. यह भी पता चला कि वह खुद को किसी अखबार की पत्रकार बताती है.

पवन चौधरी ने रश्मि का मोबाइल नंबर हासिल कर के उस की काल डिटेल्स निकलवाई. काल डिटेल्स से यह बात साफ हो गई कि 31 नवंबर को उसी ने प्रियंका को फोन किया था. यह जानकारी मिलते ही पुलिस ने 18 फरवरी, 2014 को रात साढ़े 12 बजे रश्मि और उस के पति अमरपाल को उन के घर से गिरफ्तार कर लिया. थाने पर जब दोनों से पूछताछ की गई तो पहले तो पतिपत्नी ने पुलिस को बरगलाने की कोशिश की, लेकिन जब उन के साथ थोड़ी सख्ती की गई तो वे टूट गए. मजबूर हो कर उन दोनों ने सारा राज खोल दिया. पता चला कि प्रियंका की हत्या हो चुकी है.

रश्मि और उस के पति अमरपाल के बयानों के आधार पर 19 फरवरी को सब से पहले सिपाही विनेश कुमार को गाजियाबाद पुलिस लाइन से गिरफ्तार किया गया. इस के बाद उसी दिन इस हत्याकांड के मास्टरमाइंड बच्चू सिंह को टटीरी पुलिस चौकी, बागपत से गिरफ्तार कर गाजियाबाद लाया गया. थाने पर जब सब से पूछताछ की गई तो पता चला कि बच्चू सिंह प्रियंका द्वारा दर्ज कराए गए मुकदमों से बहुत परेशान रहने लगे थे. इसी चक्कर में उन का तबादला भी बागपत कर दिया गया था. यहीं पर बच्चू सिंह की मुलाकात उन के साथ काम करने वाले सिपाही राहुल से हुई

राहुल अलीगढ़ का रहने वाला था. बच्चू सिंह ने अपनी समस्या के बारे में उसे बताया. राहुल पर भी अलीगढ़ में एक मुकदमा चल रहा था, जिस के सिलसिले में वह पेशी पर अलीगढ़ आताजाता रहता था. राहुल का एक दोस्त विनेश कुमार भी पुलिस में था और गाजियाबाद में तैनात था. विनेश जब एक मामले में अलीगढ़ जेल में था तो उस की मुलाकात एक बदमाश अमरपाल से हुई थी. विनेश ने अमरपाल की जमानत में मदद की थी. इस के लिए वह विनेश का एहसान मानता था. बच्चू सिंह ने राहुल और विनेश कुमार के माध्यम से अमरपाल से प्रियंका की हत्या का सौदा 2 लाख रुपए में तय कर लिया. योजना के अनुसार अमरपाल ने इस काम के लिए अपनी पत्नी रश्मि की मदद ली. उस ने रश्मि को प्रियंका से दोस्ती करने को कहाउस ने प्रियंका से दोस्ती गांठ कर उसे विश्वास में ले लिया

रश्मि को जब यह पता चला कि प्रियंका को नौकरी की जरूरत है तो उस ने खुद को एक अखबार की पत्रकार बता कर प्रियंका को 30 नवंबर, 2013 की सुबह फोन कर के घर से बाहर बुलाया और बसअड्डे ले जा कर उसे अमरपाल को यह कह कर सौंप दिया कि वह अखबार का सीनियर रिपोर्टर है और अब आगे उस की मदद वही करेगा. अमरपाल प्रियंका को बस से लालकुआं तक लाया, जहां पर रितेश नाम का एक और व्यक्ति मोटरसाइकिल लिए उस का इंतजार कर रहा था. तीनों उसी बाइक से ले कर देर शाम अलीगढ़ पहुंचेवहां से वे लोग खैर के पास गांव बरौला गए. तब तक प्रियंका को शक हो गया था कि वह गलत हाथों में पहुंच गई है. जब एक जगह बाइक रुकी तो प्रियंका ने बाथरूम जाने के बहाने अलग जा कर अपने मामा को फोन कर के अपनी स्थिति बता दी.

बाद में जब इन लोगों ने एक नहर के पास बाइक रोकी तो प्रियंका ने भागने की कोशिश भी की. लेकिन वह गिर पड़ी. यह देख अमरपाल और रितेश ने उसे पकड़ लिया और उस की गला घोंट कर हत्या कर दी. हत्या के बाद इन लोगों ने प्रियंका की लाश नहर में फेंक दी और अलीगढ़ स्थित अपने घर चले गए. इस हत्याकांड में बच्चू सिंह के बेटे राहुल की भी संलिप्तता पाए जाने पर पुलिस ने अगले दिन उसे भी गिरफ्तार कर लियाइस हत्याकांड में नाम आने पर सिपाही राहुल फरार हो गया था, जिसे पुलिस गिरफ्तार करने की कोशिश कर रही थी. पूछताछ के बाद सभी गिरफ्तार अभियुक्तों को अगले दिन गाजियाबाद अदालत में पेश किया गया, जहां से रश्मि, बच्चू सिंह, विनेश कुमार और तरुण को जेल भेज दिया गया. जबकि अमरपाल को रिमांड पर ले कर प्रियंका की लाश की तलाश में खैर इलाके का चक्कर लगाया गया

लेकिन वहां पर लाश का कोई अवशेष नहीं मिला. पुलिस ने उस इलाके की पूरी नहर छान मारी, लेकिन कोई नतीजा नहीं निकला. रिमांड अवधि पूरी होने पर अमरपाल को भी डासना जेल भेज दिया गया. फिलहाल सभी अभियुक्त डासना जेल में बंद हैं.

   —कथा पुलिस सूत्रों पर आधारित

                                               

Punjab Crime : चचेरी बहन से संबंध बनाता और ब्लैकमेल करके पैसे वसूलता

Punjab Crime : आस्ट्रेलिया जाते समय राहुल ने अपने चाचा के बेटे रिशु ग्रोवर पर विश्वास कर के अपनी मां ऊषा और बहन हिना की देखभाल की जिम्मेदारी उसे सौंप दी थी. रिशु इतना बदकार निकलेगा, राहुल ने सोचा तक नहीं था. उस का विश्वास तो टूटा ही, मां और बहन भी…  

10 सितंबर, 2018 को लुधियाना के जिला एडिशनल सेशन जज अरुणवीर वशिष्ठ की अदालत में अन्य दिनों की अपेक्षा कुछ ज्यादा भीड़ थी. वजह यह थी कि उस दिन लुधियाना शहर के एक ऐसे दोहरे मर्डर केस का फैसला सुनाया जाना था, जिस ने पूरे शहर में सनसनी फैला दी थी. इस में हतप्रभ कर देने वाली बात यह थी कि आरोपी रिशु ग्रोवर मृतकों के परिवार का ही सदस्य था और उस परिवार की हर तरह से देखरेख करता थाइस के बावजूद उस ने मां और बेटी की इतनी वीभत्स तरीके से हत्या की थी कि उन की लाशें देख कर पुलिस तक का कलेजा कांप उठा था. यह केस लगभग 5 सालों तक न्यायालय में चला, जिस में 23 गवाहों ने अपने बयान दर्ज कराए.

इन गवाहों में एक गवाह ऐसा भी था, जिस ने आरोपी को घटनास्थल से फरार होते देखा था. अभियोजन पक्ष ने इस केस में पुलिस वालों, फोटोग्राफर, फिंगरप्रिंट एक्सर्ट्स, पोस्टमार्टम करने वाले डाक्टरों आदि के बयान भी अदालत में दर्ज कराए थे. निर्धारित समय पर जिला एडिशनल सेशन जज अरुणवीर वशिष्ठ के अदालत में बैठने के बाद जिला अटौर्नी रविंदर कुमार अबरोल ने कहा कि आरोपी रिशु ग्रोवर ने अपनी ताई और उन की बेटी की खंजर से बेहद क्रूरतम तरीके से हत्या की थी. लिहाजा ऐसे आरोपी को फांसी की सजा मिलनी चाहिए. वहीं बचाव पक्ष के वकील ने कहा कि ये दोनों मर्डर किसी और ने किए हैं. हत्याएं करने के बाद हत्यारा खून से दीवार पर एक नाम भी लिख कर गया था.

खून से दीवार पर जिस का नाम लिखा गया था, पुलिस को उस शख्स से सख्ती से पूछताछ करनी चाहिए थी. लेकिन पुलिस ने उस शख्स को बचा कर सीधेसादे रिशु ग्रोवर को फंसा कर जेल में डाल दिया. रिशु पर लगाए गए सारे आरोप निराधार हैं. लिहाजा उसे इस केस से बाइज्जत बरी किया जाना चाहिए. जिला एडिशनल सेशन जज ने तमाम गवाहों के बयान, सबूतों और वकीलों की जिरह के बाद आरोपी रिशु ग्रोवर को दोषी करार दिया और सजा सुनाने के लिए 13 सितंबर, 2018 का दिन नियत कर दिया. आखिर ऐसा क्या हुआ था कि इस हत्याकांड के फैसले पर लुधियाना के लोगों के अलावा वकीलों और मीडिया तक की निगाहें जमी थीं. सनसनी फैला देने वाले इस केस को समझने के लिए हमें घटना की पृष्ठभूमि में जाना होगा.

लुधियाना के बाबा थानसिंह चौक के निकट मोहल्ला फतेहगंज में बलदेव राज अपने परिवार के साथ रहते थे. उन के परिवार में पत्नी ऊषा के अलावा 2 बेटियां आशना हिना के अलावा एक बेटा राहुल था. बड़ी बेटी आशना की वह शादी कर चुके थे. शादी के लिए 2 बच्चे और बचे थे. वह उन की शादी की भी तैयारी कर रहे थे, लेकिन इस से पहले ही उन की मृत्यु हो गई. बलदेव राज की मृत्यु के बाद घर की जिम्मेदारी ऊषा के ऊपर गई थी. खेती की जमीन से वह परिवार का गुजरबसर करने लगीं. पंजाब के तमाम लोग विदेशों में काम कर के अच्छा पैसा कमा रहे हैं. ज्यादा पैसे कमाने की चाह में राहुल भी अपने एक जानकार की मदद से आस्ट्रेलिया चला गया. वहां उसे अच्छा काम मिल गया था.

राहुल समझ नहीं पाया चचेरे भाई को  राहुल के आस्ट्रेलिया जाने के बाद लुधियाना में उस के घर में 55 वर्षीय मां ऊषा और 21 वर्षीय बहन हिना ही रह गई थीं. उन का ध्यान रखने के लिए राहुल अपनी बहन आशना और बहनोई विकास मल्होत्रा को कह गया था. इस के अलावा उस ने अपने चाचा के बेटे रिशु ग्रोवर से भी मांबहन का ध्यान रखने को कहा थारिशु टिब्बा रोड के इकबाल नगर में रहता था. वैसे भी ऊषा का घर बाबा थानसिंह चौक पर ऐसी जगह रास्ते में था कि रिशु आतेजाते अपनी ताई ऊषा का हालचाल जान लिया करता था. जब रिशु ऊषा के यहां आनेजाने लगा तो ऊषा उस से घर के छोटेमोटे काम करा लिया करती थीं.

इस में रिशु के मातापिता को भी कोई ऐतराज नहीं था. कुछ समय और बीता तो ताई के कहने पर रिशु कभीकभी रात को भी उन के घर रुकने लगा था. इसी बीच एक यह परेशानी सामने आई कि बाबू नाम का एक लड़का हिना के पीछे पड़ गया. बाबू का सेनेटरी का काम था. हिना जब भी घर से बाहर निकलती, बाबू उस का रास्ता रोक कर उस से छेड़छाड़ करता था. इस से परेशान हो कर हिना ने इस की शिकायत पहले रिशु से की और बाद में यह बात अपनी बहन और जीजा को भी बता दीरिशु ने अपने तरीके से बाबू को समझाने की कोशिश की, लेकिन वह नहीं माना.

कोई हल निकलता देख हिना के बहनोई विकास ने इस की शिकायत थाना डिवीजन नंबर-3 में कर दी. पुलिस ने बाबू को थाने बुला कर धमका दिया. इस के बावजूद वह अपनी हरकतों से बाज नहीं आया. यह सन 2012 की बात है. इस बीच राहुल आस्ट्रेलिया से लुधियाना लौटा तो यह बात उसे भी पता चली. लगभग 2 महीने लुधियाना में रहने के बाद जब वह वापस आस्ट्रेलिया लौटा तो अपनी मां ऊषा और बहन हिना की जिम्मेदारी वह रिशु को सौंप गया. आगे चल कर यही राहुल की सब से बड़ी भूल साबित हुई. रिशु एक आवारा, बदचलन और बेहद गिरा हुआ इंसान था. सिगरेट, शराब, जुए से ले कर कोई ऐसा गलत ऐब नहीं बचा था, जो रिशु में नहीं था.

ऊषा और हिना का ध्यान रखने की आड़ में वह ऊषा के घर पर ही अपना डेरा जमाए बैठा था. दरअसल, रिशु के खुराफाती दिमाग में एक भयानक षड्यंत्र ने जन्म ले लिया था. उस का सीधा निशाना हिना थी जो इस बात से बिलकुल अनजान थी. नाजायज रिश्ते, नाजायज तरीके. कब किसी इंसान को गुनाह के रास्ते पर ला कर खड़ा कर दें, कोई अंदाजा नहीं लगाया जा सकता. जिस भाई को राहुल मां और बहन की देखभाल की जिम्मेदारी सौंप गया था, उसी भाई के मन में एक अपराध ने जन्म ले लिया था.

अपने स्वार्थ की पूर्ति के लिए रिशु ने अपनी ताई की बेटी हिना को अपने जाल में फंसाना शुरू कर दिया. जल्दी ही वह अपने मकसद में कामयाब भी हो गया. उस ने हिना के साथ नाजायज रिश्ता कायम कर लिया. बाद में वह इसी नाजायज रिश्ते की आड़ ले कर उसे ब्लैकमेल कर पैसे ऐंठने लगा. उस से मिले पैसों का इस्तेमाल वह अपने सपने पूरे करने में खर्च करता था. ताज्जुब की बात यह थी कि उसी घर में रहते हुए भी ऊषा को इस सब की भनक तक नहीं लग पाई थी. इस की वजह यह थी कि रिशु अपनी ताई को खाने में नींद की गोलियां दे देता था. गोलियों के नशे को ऊषा अपनी उम्र का रोग समझती थीं.

शुरूशुरू में तो हिना रिशु के आकर्षण में फंस गई थी पर जब तक उसे उस की नीयत का पता चला, तब तक बहुत देर हो चुकी थी. लेकिन अब पछताने से कोई फायदा नहीं था. क्योंकि वह सिर से ले कर पांव तक रिशु के चंगुल में फंसी हुई थी, जहां से अकेले बाहर निकलना उस के बूते की बात नहीं थी. अंत में हार कर हिना ने अपने भाई राहुल को आस्ट्रेलिया में फोन कर के यह बात बता दिया. यहां हिना ने एक बार फिर बड़ी गलती की. वह राहुल से अपने और रिशु के शारीरिक संबंधों और रिशु द्वारा ब्लैकमेल करने की बात छिपा गई थी. यह बात फरवरी 2013 की है.

अपनी बहन की बात सुन राहुल आस्ट्रेलिया से लुधियाना आया और उस ने रिशु को आड़े हाथों लिया. रिशु के मातापिता ने भी उस की अच्छी खबर ली. आखिर अपनी करनी से शर्मिंदा हो कर रिशु ने राहुल के अलावा अन्य सभी रिश्तेदारों से माफी मांग ली थी. रिशु बुनता रहा तानाबाना  बात तो यहीं खत्म हो गई थी पर राहुल कोई रिस्क नहीं लेना चाहता था. उस ने हिना की शादी करने के लिए लड़के की तलाश शुरू कर दी और लुधियाना के पखोवाल रोड निवासी सौरव के साथ हिना की मंगनी कर के शादी पक्की कर दी. शादी की तारीख 20 नवंबर, 2013 तय कर दी गई. इस बार राहुल ने बहन की शादी की जिम्मेदारी अपनी बहन आशमा और जीजा विकास मल्होत्रा को सौंपी

यह सब कर के वह 24 अप्रैल, 2013 को आस्ट्रेलिया लौट गया. आस्ट्रेलिया जा कर उस ने वहां से 4 लाख रुपए और करीब 100 डौलर अपनी मां को भेजे. मां ने शादी की तैयारियां शुरू कर दी थीं. राहुल समयसमय पर अपनी मां को फोन कर के बात करता रहता था. 21 मई, 2013 को राहुल ने आस्ट्रेलिया से अपनी मां को फोन कर के हालचाल पूछना चाहा तो मां का फोन बंद मिला. उस ने 2-3 बार मां को फोन मिलाया, पर हर बार फोन बंद ही मिला. उस ने 22 मई को फिर से मां को फोन किया. उस दिन भी उन का फोन स्विच्ड औफ था. बहन हिना का फोन भी बंद रहा था. राहुल परेशान था कि दोनों के फोन क्यों नहीं मिल रहे.

फिर उस ने अपने जीजा विकास मल्होत्रा को फोन कर कहा, ‘‘जीजाजी, पता नहीं क्यों मां और हिना का फोन नहीं मिल रहा है. मैं कल से कोशिश कर रहा हूं. आप वहां जा कर पता तो करें, क्या बात है?’’

‘‘ऐसी तो कोई बात नहीं है. मैं और आशमा कल रात को वहीं थे. हो सकता है वे लोग सो रहे हों या कोई सामान खरीदने बाजार गए हों. फिर भी मैं जा कर देखता हूं.’’ विकास ने कहा. उस के बाद विकास अपनी पत्नी आशमा को ले कर ससुराल गया. दोनों ने वहां जा कर देखा तो मकान का मुख्य दरवाजा बंद जरूर था पर उस में कुंडी नहीं लगी थी. असमंजस की हालत में विकास ने अंदर जा कर देखा तो नीचे वाले कमरे में बैड पर सास ऊषा की खून से लथपथ लाश पड़ी थीमां की लाश देख कर आशमा की चीख निकल गई. विकास भी घबरा गया और सोचने लगा कि हिना कहां है. इस के बाद उस ने ऊपर के फ्लोर पर जा कर देखा तो बाथरूम के बाहर हिना की भी खून सनी लाश पड़ी थी. उस की लाश के पास दीवार पर खून सेबाबलिखा हुआ था. बाब यानी बाबू.

शक के दायरे में आया बाबू विकास को यह समझते देर नहीं लगी थी कि ये दोनों हत्याएं बाबू सेनेटरी वाले ने ही की है. क्योंकि वह हिना को अकसर परेशान करता था. विकास ने इस की सूचना थाना डिवीजन-3 को दे दी. साथ ही उस ने फोन द्वारा राहुल को भी बता दिया. सूचना मिलते ही इंसपेक्टर बृजमोहन, एसआई प्रीतपाल सिंह, एएसआई राजवंत पाल, हवलदार वरिंदर पाल सिंह, सरजीत सिंह और सिपाही राजिंदर सिंह के साथ बताए गए पते की तरफ रवाना हो गएघटनास्थल पर पहुंच कर उन्होंने लाशों का मुआयना किया तो पता चला कि उन की हत्या किसी धारदार हथियार से की गई थी. मौके पर उन्होंने क्राइम टीम को बुलवाया. कई जगह से फिंगरप्रिंट और खून के सैंपल लिए और दोनों लाशों को पोस्टमार्टम के लिए सिविल अस्पताल भेज दिया.

प्राथमिक पूछताछ में विकास मल्होत्रा से यह बात भी पता चली थी कि वारदात को अंजाम देने के बाद हत्यारे घर में रखे 4 लाख रुपए, 100 डौलर और सोने की एक चेन भी ले गए थे. विकास के बयानों के आधार पर पुलिस ने इस दोहरे हत्याकांड का मुकदमा आईपीसी की धारा 302, 460 के तहत दर्ज कर के तफ्तीश शुरू कर दी. विकास ने इस हत्याकांड का शक बाबू पर जाहिर किया था और दीवार पर भी खून सेबाबलिखा हुआ था, इसलिए इंसपेक्टर बृजमोहन ने बाबू को हिरासत में ले कर पूछताछ शुरू कर दी.

सख्ती से पूछताछ करने पर भी बाबू इस हत्याकांड के बारे में कुछ नहीं बता पाया था. उस का कहना था कि वह हिना का पीछा जरूर करता था पर इन हत्याओं में दूरदूर तक भी उस का कोई हाथ नहीं है. अचानक पुलिस को यह शक हुआ कि कहीं पैसों के लालच में विकास ने ही तो इस घटना को अंजाम नहीं दिया क्योंकि उसे भी पता था कि घर में इतना कैश रखा है. फोरेंसिक रिपोर्ट में यह बताया गया था कि घटनास्थल से मिले खून के सैंपल के साथ एक किसी तीसरे आदमी का भी खून था, जो शायद हत्यारे का थाइन्हीं आशंकाओं को देखते हुए पुलिस ने विकास से पूछताछ की. विकास ने भी खुद को बेकसूर बताया. उस से की गई पूछताछ के बाद भी पुलिस को हत्यारों से संबंधित कोई सुराग नहीं मिला.

संभावनाओं का पिटारा पुलिस के सामने खुला हुआ था. लेकिन अभी तक कोई ठोस लीड नहीं मिल रही थी. तफ्तीश के दौरान पुलिस को एक ऐसा शख्स मिला, जिस ने हत्यारे को घर से निकलते देखा था और वह उसे अच्छी तरह से पहचानता भी थाइस के बाद पुलिस ने अन्य सबूत जुटाने के लिए हिना के मोबाइल फोन की काल डिटेल्स निकलवा कर खंगाली. उस में कई संदिग्ध नंबर थे. उन सभी नंबरों में एक नंबर ऐसा भी था जिस पर हिना की सब से ज्यादा बातें होती थीं. वह नंबर हिना के चचेरे भाई रिशु ग्रोवर का थाफोन की काल डिटेल्स से सामने आया रिशु का नाम इस हत्याकांड के 2 दिन बाद राहुल भी आस्ट्रेलिया से गया.

25 मई को ही वह इंसपेक्टर बृजमोहन से मिला. राहुल ने बताया कि रिशु ने उस की बहन हिना से नाजायज संबंध बना लिए थे. इतना ही नहीं वह हिना को ब्लैकमेल कर उस से पैसे भी ऐंठता रहता था. राहुल के बयानों ने इस केस का पासा पलट दिया और कातिल सामने गया. पता चला कि हिना और ऊषा का हत्यारा कोई और नहीं बल्कि रिशु ग्रोवर था. पुलिस ने रिशु को हिरासत में ले लिया. रिशु के खून की जांच कराई गई तो वह उसी खून से मैच कर गया जो घटनास्थल पर मृतकों के अलावा मिला था. रिशु से सख्ती से पूछताछ की गई तो उस ने अपना जुर्म कबूल कर लिया. उस की निशानदेही पर इंसपेक्टर बृजमोहन ने नाले से हत्या में इस्तेमाल खंजर, प्लास्टिक के दस्ताने और एक रूमाल बरामद किया.

पुलिस ने हत्या के बाद लूटे हुए पैसों में से 2 लाख 11 हजार रुपए और 100 डौलर भी बरामद कर लिए. काररवाई पूरी करने के बाद रिशु को न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया था. तफ्तीश पूरी करने के बाद इंसपेक्टर बृजमोहन ने एक महीने बाद इस केस की चार्जशीट अदालत में दाखिल कर दी थी. पुलिस ने अदालत में तमाम गवाह पेश किए. उन में एक ऐसी महिला गवाह थी जिस ने इस हत्याकांड को अंजाम देने के बाद रिशु को घटनास्थल से फरार होते देखा था. दरअसल वह महिला रोज तड़के ढाई बजे सेवा करने के लिए गुरुद्वारा साहिब जाती थी. उसी समय उस ने रिशु को ऊषा के घर से निकलते देखा था.

अदालत ने उस महिला की गवाही को अहम माना. तमाम गवाहों और सबूतों के आधार पर एडिशनल सेशन जज अरुणवीर वशिष्ठ ने रिशु ग्रोवर को दोषी ठहरायारिशु को दोषी ठहराने के बाद लोगों के जेहन में एक ही सवाल घूम रहा था कि पता नहीं 13 सितंबर को जज साहब उसे कौन सी सजा सुनाएंगे. लोगों के 3 दिन इसी ऊहापोह की स्थिति में गुजरे. आखिर वो दिन भी गया जो माननीय जज ने सजा सुनाने के लिए मुकर्रर किया थाआखिर गया फैसले का दिन13 सितंबर को तमाम लोग बड़ी बेताबी के साथ कोर्टरूम में पहुंच गए थे. सुबह ठीक 10 बजे माननीय जज अदालत में बैठे.

उन्होंने केस फाइल पर नजर डालते हुए कहा कि जिला अटौर्नी रविंदर कुमार अबरोल की दलीलों, गवाहों के बयानों और मौके पर मिले अन्य साक्ष्यों से यह बात पूरी तरह साबित हो जाती है कि रिशु ग्रोवर ने अपनी ताई और हिना को खंजर से ताबड़तोड़ वार कर के बेरहमी से मार डाला थारिशु चचेरी बहन से अवैध संबंध बना कर उसे ब्लैकमेल कर पैसे वसूलता था, जबकि 6 महीने बाद उस की शादी तय थी. लिहाजा ब्लैकमेलिंग का धंधा पैसा मिलना बंद होने की रंजिश में ही उस ने दोहरे हत्याकांड को अंजाम दिया था और हिना की शादी के लिए घर में रखा सारा पैसा लूट लिया था.

रिशु इतना शातिरदिमाग था कि दोहरे हत्याकांड को अंजाम देने के बाद उस ने पुलिस को गुमराह करने के लिए घर में रखे गहने कैश भी गायब कर दिए थे. साथ ही दीवार पर खून सेबाबलिख दिया था, जिस से पुलिस उस तक पहुंच सके. दोषी की घृणित मानसिकता से यह बात भी स्पष्ट हो जाती है कि उस ने जघन्यतम अपराध किया है. ऐसे आदमी को समाज में रहने का कोई अधिकार नहीं है. अभियोजन पक्ष ने अपनी चार्जशीट में आरोपी पर जो आरोप लगाए हैं, वह उन्हें पूरी तरह से साबित करने में सक्षम रहा है.

आरोपी का दोष पूरी तरह से साबित होता है, लिहाजा भारतीय दंड संहिता की धारा 302 के अंतर्गत दोषी रिशु ग्रोवर को अदालत मृत्युदंड की सजा सुनाती है. अपना फैसला सुनाने के बाद न्यायाधीश अरुणवीर वशिष्ठ ने अपनी कलम की निब तोड़ दी और उठ कर अपने चैंबर में चले गए. रिशु ग्रोवर को फांसी की सजा सुनाए जाने पर आशमा और उस के पति विकास ने संतोष व्यक्त किया.

  

Telangana crime : लव मैरिज से नाराज भाइयों ने किया जीजा का कत्ल, शव देख मुसकराई दादी

Telangana crime :  तेलंगाना के सूर्यपेट जिले में एक बहुत ही खौफनाक वारदात सामने आई है. बहन के लव मैरिज करने से गुस्साए भाइयों ने जीजा की बेरहमी से हत्या करने के बाद उस का शव नहर में ठिकाने लगा दिया. इस घटना के बाद क्षेत्र में सनसनी फैल गई है।

पुलिस ने इस मामले में केस दर्ज कर 6 आरोपियों को अरेस्ट कर लिया है. गिरफ्तार आरोपियों में लड़की के 2 भाई, पिता और दादी भी शामिल हैं.

पुलिस अधिकारी के अनुसार, सूर्यपेट जिले में ऑनर किलिंग के मामले में अनुसूचित जाति के 32 वर्षीय युवक कृष्णा की हत्या के आरोप में उस की पत्नी की फैमिली के 6 सदस्य को बुधवार को गिरफ्तार कर लिया गया है. कृष्णा ने अंतरजातीय प्रेम विवाह किया था. जिस के कारण लड़की के फेमिली वाले इस प्रेम विवाह से खुश नहीं थे.

इसी कारण लड़की के 2 भाइयों ने कृष्णा की हत्या की साजिश रच डाली. दोनों भाइयों ने अपने एक दोस्त को भी हत्या की योजना में शामिल कर लिया. प्लान के अनुसार उस दोस्त ने पहले कृष्णा से जानपहचान बढ़ा कर उस से दोस्ती कर ली. फिर 26 जनवरी, 2025 की को शाम कृष्णा को पार्टी के बहाने गांव के बाहरी इलाके में बुलाया.

योजना से अनभिज्ञ कृष्णा उस के विश्वास में आ गया और उस के बताए गए स्थान पर पहुंच गया. वहां पहले से झाड़ियों के बीच लड़की के दोनों भाई घात लगाए हुए बैठे थे. पार्टी करने के बाद कृष्णा पर दोनों भाइयों ने हमला कर दिया और उस की पिटाई करने लगे. फिर उन्होंने कृष्णा का गला रेत कर हत्या कर दी.
हत्या कर ने के बाद वह उस के शव को एक बैग में रख कर अपनी दादी के पास ले गए. उन्होंने वह शव दादी को दिखाया. शव देख कर दादी बहुत खुश हुई और उस ने अपने पोतों को शाबासी दी. बेटी की लव

मैरिज से नाराज पिता भी कृष्णा की हत्या की खबर सुनकर खुश हुआ. इस के बाद दोनों भाई अपनी बहन के पति कृष्णा का शव नहर में फेंक आए. पुलिस ने शव बरामद कर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया.
आरोपियों से पूछताछ करने के बाद पुलिस ने उन्हें कोर्ट में पेश कर जेल भेज दिया. पुलिस मामले की तफ्तीश कर रही है.

Moradabad crime : ट्यूशन टीचर ने बच्ची का किड़नैप करके घोंटा गला

Moradabad crime : आसिफा से बेपनाह मोहब्बत करने वाले अजीम ने उसे अपनी बनाने के लिए एक ऐसी योजना बनाई, जिस के सफल होने पर खुद ही उस में इस तरह फंस गया कि…  

हमजा और अयान पास की ही कनफैक्शनरी की दुकान से केक लेने गए थे. काफी देर होने के बाद भी वे घर नहीं लौटे तो मां आसिफा परेशान हो उठीं. घर से दुकान ज्यादा दूर नहीं थी. उतनी देर में बच्चों को जाना चाहिए था. वे कहीं खेलने तो नहीं लगे, यह सोच कर वह कनफैक्शनरी की दुकान की ओर चल पड़ी. उसे रास्ते में ही नहीं, दुकान पर भी बच्चे दिखाई नहीं दिए. उस ने दुकानदार से बच्चों के बारे में पूछा तो उस ने बताया कि उस के बच्चे तो दुकान पर आए ही नहीं थे. यह सुन कर आसिफा के पैरों तले से जमीन खिसक गई. क्योंकि बच्चे घर से शाम सवा 5 बजे निकले थे और उस समय 6 बज रहे थे. उसे बताए बगैर उस के बच्चे कहीं नहीं जाते थे. वह परेशान हो गई कि बच्चे कहां चले गए

आसिफा के पति सऊदी अरब में थे. घर पर वह अकेली ही थी. इसलिए बच्चों के मिलने से वह परेशान थी. उस ने बच्चों को इधरउधर गलियों में ढूंढ़ने के अलावा रिश्तेदारों और जानकारों को फोन कर के पूछा. लेकिन कहीं से भी उसे बच्चों के बारे में कोई जानकारी नहीं मिली. यह 24 नवंबर, 2013 की बात है. आसिफा के बच्चों के लापता होने की बात थोड़ी ही देर में मोहल्ले भर में फैल गई. हमदर्दी में सभी लोग अपनेअपने स्तर से बच्चों को इधरउधर ढूंढ़ने लगे. लेकिन तमाम कोशिश के बावजूद किसी को भी पता नहीं चल सका कि दुकान तक गए बच्चे आखिर कहां चले गए. बच्चों की तलाश कर के थक हार कर आसिफा मोहल्ले के लोगों के साथ रात 8 बजे के आसपास मुरादाबाद शहर की कोतवाली जा पहुंची. क्योंकि वह रेती स्ट्रीट मोहल्ले में रहती थी और यह मोहल्ला कोतवाली के अंतर्गत आता था.

आसिफा ने बच्चों के गायब होने की बात कोतवाली प्रभारी को बताई तो उन्होंने इस बात को गंभीरता से नहीं लिया. दोनों बच्चों के गायब होने से आसिफा के दिल पर क्या बीत रही थी, इस बात को कोतवाली प्रभारी ने समझने के बजाए सीधा सा जवाब दे दिया कि बच्चे इधरउधर कहीं खेलने चले गए होंगे, 2-4 घंटे में खुद ही लौट जाएंगे.  कोतवाली प्रभारी की यह बात आसिफा को ही नहीं, उस के साथ आए लोगों को भी अच्छी नहीं लगी. लिहाजा सभी वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक आशुतोष कुमार के पास जा पहुंचे. जब उन लोगों ने 11 साल की हमजा और 6 साल के अयान के गायब होने की जानकारी उन्हें दी तो उन्होंने इस बात को गंभीरता से लिया. इस के बाद उन के आदेश पर कोतवाली में बच्चों की गुमशुदगी दर्ज कर के मामले की जांच शुरू कर दी गई.

जिस दुकान से बच्चे केक खरीदने गए थे, पुलिस उस दुकान के मालिक को पूछताछ के लिए कोतवाली ले आई. दुकानदार ने पुलिस को बताया कि वह सुबह से दुकान पर ही बैठा था, शाम तक उस के यहां कोई भी बच्चा केक खरीदने नहीं आया थाबच्चों के पिता मोहम्मद शमीम सऊदी अरब में कोई बिजनैस करते थे, इसलिए पुलिस को इस बात की भी आशंका थी कि कहीं फिरौती के लिए तो नहीं बच्चों को उठा लिया गया. लेकिन अगर ऐसी बात होती तो अब तक फिरौती के लिए फोन गया होता. बच्चों की चिंता में आसिफा का रोरो कर बुरा हाल था. उस के निकट संबंधी उसे समझाने की कोशिश कर रहे थे. लेकिन आसिफा की चिंता कम नहीं हो रही थी.

एसएसपी आशुतोष कुमार भी कोतवाली पहुंच गए थे. वहीं पर उन्होंने एसपी सिटी महेंद्र सिंह यादव, क्षेत्राधिकारी रफीक अहमद को बुला कर कोतवाली प्रभारी के साथ मीटिंग की. रेती स्ट्रीट मोहल्ला अतिसंवेदनशील माना जाता है, इसलिए एसएसपी ने इस मामले को जल्द ही खोलने के निर्देश दिए, ताकि मोहल्ले के लोग किसी तरह का हंगामा खड़ा करें. क्षेत्राधिकारी रफीक अहमद ने आसिफा से किसी से दुश्मनी या रंजिश के बारे में पूछा तो उस ने कहा कि इस तरह की उस के साथ कोई बात नहीं है. घूमफिर कर पुलिस को यही लग रहा था कि बच्चों का अपहरण शायद फिरौती के लिए किया गया है.

इसीलिए पुलिस ने आसिफा से भी कह दिया था कि अगर किसी का फिरौती की बाबत फोन आता है तो वह फोन करने वाले से विनम्रता से बात करेगी और इस की जानकारी पुलिस को अवश्य देगी. रात के 10 बज चुके थे. लेकिन हमजा और अयान का कुछ पता नहीं चला था. बच्चों को ले कर आसिफा के दिमाग में तरहतरह के विचार रहे थे, जिस से वह काफी परेशान हो रही थी. अपहरण की आशंका की वजह से पुलिस इलाके के आपराधिक प्रवृत्ति के लोगों को उठाउठा कर पूछताछ करने लगी. उन से भी बच्चों के बारे में कोई जानकारी नहीं मिल सकी.

24 नवंबर की रात 11 बजे के आसपास एसएसपी आशुतोष कुमार को हरिद्वार के एसपी सिटी सुरजीत सिंह पंवार द्वारा मिली सूचना से काफी राहत मिली. सुरजीत सिंह पंवार ने उन्हें बताया था कि थाना श्यामपुर के रसिया जंगल में 11 साल की एक लड़की हमजा मिली है. उस के शरीर पर कुछ चोट के निशान हैं, लेकिन वह सकुशल है. पूछताछ में उस ने बताया है कि वह मुरादाबाद के मोहल्ला रेती स्ट्रीट की रहने वाली है. एसएसपी ने यह खबर आसिफा को दी तो वह घर वालों के साथ कोतवाली पहुंच गई. हमजा हरिद्वार कैसे पहुंची, यह बात उस से बात कर के ही पता चल सकती थी. कोतवाली पुलिस रात में ही हरिद्वार के लिए रवाना हो गई और रात दो, ढाई बजे थाना श्यामपुर पहुंच गई.

हमजा को अपनी सुपुर्दगी में ले कर पुलिस ने उस से पूछताछ की तो पता चला कि उसे और उस के भाई अयान को उन्हें ट्यूशन पढ़ाने वाला अजीम मोटरसाइकिल से ले गया था. हमजा की बातों से साफ हो गया कि बच्चों का अपहरण करने वाला कोई और नहीं, उन्हें ट्यूशन पढ़ाने वाला अजीम था. हमजा तो सकुशल मिल गई थी, लेकिन उस का भाई अयान अभी भी अजीम के कब्जे में था. पुलिस को आसिफा से अजीम की मोटरसाइकिल का नंबर मिल गया था, इसलिए हरिद्वार पुलिस ने कंट्रोलरूम द्वारा उस की मोटरसाइकिल का नंबर फ्लैश करा कर जगहजगह बैरिकेड्स लगा कर वाहनों की चैकिंग शुरू करा दी. कोतवाली पुलिस हमजा को ले कर मुरादाबाद लौट आई. हमजा के गले हाथ की अंगुलियों पर चोट के निशान थे, इसलिए पुलिस पहले उसे इलाज के लिए जिला चिकित्सालय ले गई. वहां से लौट कर उस से विस्तार से पूछताछ की गई.

चूंकि अयान अभी भी अजीम के कब्जे में था, इसलिए पुलिस को इस बात का डर सता रहा था कि कहीं वह उस के साथ कुछ बुरा कर दे. मुरादाबाद पुलिस के आग्रह पर हरिद्वार पुलिस अपने स्तर से उस की तलाश कर रही थी. संभावना यह भी थी कि कहीं वह अयान को ले कर देहरादून चला गया हो. इसलिए हरिद्वार पुलिस ने इस बात की सूचना देहरादून पुलिस को भी दे दी थी. मामला एक मासूम की जान का था, इसलिए देहरादून पुलिस ने भी वाहनों की चैकिंग शुरू करा दी. पुलिस की इस मुस्तैदी का नतीजा यह निकला कि 25 नवंबर की सुबह यही कोई 9 बजे देहरादून की आईएसबीटी पुलिस चौकी के पास पुलिस ने एक बच्चे को बरामद किया, जिस ने अपना नाम अयान बताया. पूछताछ में उस ने बताया कि वह मुरादाबाद का रहने वाला है.

बच्चा बहुत घबराया हुआ था. देहरादून के पुलिस अधिकारियों ने अयान से पूछताछ के बाद मुरादाबाद पुलिस को सूचना दे दी. इस के बाद मुरादाबाद पुलिस देहरादून पहुंची और अयान को ले आई. बेटे को सहीसलामत पा कर आसिफा सारे दुख भूल गई. बच्चों को सकुशल बरामद कर के पुलिस का आधा काम खत्म हो चुका था. अब उसे बच्चों का अपहरण करने वाले अजीम को गिरफ्तार करना था. वह मुरादाबाद के बंगला गांव में रहता था, जबकि मूलरूप से वह बिजनौर के स्योहरा का रहने वाला था. एक पुलिस टीम स्योहरा भेजी गई तो दूसरी ने बंगला गांव वाले कमरे पर भी दबिश दी. लेकिन वह दोनों जगहों पर नहीं मिला.

पुलिस को अजीम का मोबाइल नंबर मिल गया था. उस की लोकेशन का पता किया गया तो वह दिल्ली की मिली. एक पुलिस टीम दिल्ली रवाना कर दी गई. दबाव बनाने के लिए पुलिस ने अजीम के भाई हफीज को कोतवाली में बैठा लिया था. उस से अजीम के ठिकानों के बारे में पूछताछ की जा रही थी. अजीम को जब पता चला कि पुलिस ने उस के भाई को उठा लिया है तो उस ने 26 नवंबर की सुबह साढ़े 10 बजे आसिफा को फोन कर के अपने भाई को पुलिस से छुड़वाने के लिए कहा. इस बातचीत में आसिफा ने उसे आश्वासन दिया कि वह मुरादाबाद जाए. अगर वह कहेगा तो वह मुकदमा भी वापस ले लेगी.

दिल्ली पहुंची पुलिस टीम को अजीम तो नहीं मिला, लेकिन उस का मोबाइल फोन जरूर मिल गया. जिस आदमी के पास वह मोबाइल फोन मिला, उस आदमी से पूछताछ की गई तो उस ने बताया कि अजीम वह मोबाइल उसे बेच गया था. फोन बेच कर वह कहां गया, यह उसे पता नहीं था. पुलिस टीम दिल्ली से मुरादाबाद लौट आई. अजीम के खिलाफ गैरजमानती वारंट जारी हो चुका था. पुलिस कुर्की की तैयारी कर रही थी. इस के अलावा एसएसपी ने उस की गिरफ्तारी पर ढाई हजार रुपए का इनाम घोषित कर दिया था. इस तरह उसे घेरने की पूरी काररवाई कर ली गई थी.

आखिर एक मुखबिर की सूचना पर 12 दिसंबर, 2013 को पुलिस ने आरोपी अजीम को अजमेर से गिरफ्तार कर लिया. कोतवाली ला कर अजीम उर्फ अजमल से पूछताछ की गई तो बच्चों के अपहरण की जो कहानी सामने आई, वह बड़ी ही दिलचस्प निकली. अजीम अहमद उर्फ अजमल स्योहरा, बिजनौर के रहने वाले अब्दुल हमीद का बेटा था. उस के पिता और भाई सऊदी अरब में नौकरी करते थे. वह भी पढ़लिख कर कोई सरकारी नौकरी करना चाहता थादेहरादून के डीएवी कालेज से एमए करने के बाद वह नौकरी की तैयारी करने के लिए मुरादाबाद गया. यहां वह बंगला गांव में किराए पर रहने लगा. अपना खर्च चलाने के लिए वह मुरादाबाद के सिविललाइंस स्थित एस.एस. चिल्ड्रन एकेडमी में क्लर्क के रूप में काम करने लगा. यह करीब 5 साल पहले की बात है.

अपनी लच्छेदार बातों से वह स्कूल के प्रिंसिपल और टीचरों का प्रिय बन गया. अगर किसी वजह से स्कूल में पढ़ने वाले किसी बच्चे का रिक्शे वाला नहीं पाता तो वह अपनी मोटरसाइकिल से उस बच्चे को उस के घर तक छोड़ आता था. इस तरह अभिभावकों की नजरों में भी वह भलामानस बन गया था. पिछले साल मुरादाबाद के ही रेती स्ट्रीट की रहने वाली आसिफा अपनी बेटी हमजा का छठी क्लास में दाखिला कराने के लिए एस.एस. चिल्ड्रन एकेडमी गई तो किसी वजह से वहां बेटी का एडमिशन नहीं हो रहा था. बाद में अजीम अहमद की मदद से हमजा का दाखिला उस स्कूल में हो गया. बेटी के एडमिशन के बाद आसिफा उस की अहसानमंद हो गई.

3, साढ़े 3 महीने पहले की बात है. एक दिन स्कूल की छुट्टी के बाद अजीम गेट की तरफ जा रहा था तो वहां हमजा खड़ी दिखाई दी. स्कूल के ज्यादातर बच्चे जा चुके थे. उसे अकेली देख कर अजीम ने उस से वहां खड़ी होने की वजह पूछी तो उस ने बताया कि उस का रिक्शे वाला अभी तक नहीं आया है. स्कूल का काम निपटाने के बाद अजीम मोटरसाइकिल से हमजा को ले कर उस के घर पहुंच गया. अजीम अहमद की इस नेकी से आसिफा बहुत प्रभावित हुई. उस ने उसे चाय पिए बगैर नहीं जाने दिया. आसिफा से उस की यह दूसरी मुलाकात थी. बातचीत में आसिफा ने बताया कि वह मोहम्मद शमीम की दूसरी बीवी है. हमजा और अयान उस की पहली बीवी के बच्चे हैं. पहली बीवी की मौत के बाद मोहम्मद शमीम ने उस से निकाह किया था. जवान बीवी को यहां अकेली छोड़ कर वह सऊदी अरब में कोई बिजनैस कर रहा है.

आसिफा ने बताया था कि ये दोनों बच्चे उस की बहन के हैं. आसिफा बेहद खूबसूरत थी. अजीम को जब पता चला कि अभी उस के बच्चे नहीं हुए हैं तो उस का झुकाव आसिफा की तरफ हो गया. वह मन ही मन उसे चाहने लगा. वक्तजरूरत के लिए दोनों ने एकदूसरे को अपनेअपने फोन नंबर भी दे दिए थे.  इस के बाद अजीम जबतब आसिफा से फोन पर बातें करने लगा था. किसी किसी बहाने वह उस के घर भी जाने लगा. आसिफा से नजदीकी बढ़ाने के लिए उस ने उस के दोनों बच्चों को ट्यूशन पढ़ाने की पेशकश की. आसिफा ने हामी भर दी तो वह स्कूल से छुट्टी के बाद हमजा और अयान को ट्यूशन पढ़ाने उन के घर जाने लगा. अयान पास के ही एक स्कूल में यूकेजी में पढ़ता था.

अजीम का कहना था कि घर आनेजाने से आसिफा और उस के बीच नजदीकियां बढ़ने लगी थीं. आसिफा भी उस से प्यार करने लगी थी. बात आगे बढ़ी तो दोनों ने शादी करने का फैसला कर लिया. अजीम के अनुसार दोनों ने साथ रहने की ठान ली थी. बच्चों को भी साथ रखने की बात तय हो गई थी. आसिफा से बात होने के बाद ही वह बच्चों को ले गया था. जैसे ही बच्चे कनफैक्शनरी की दुकान के नजदीक पहुंचे थे, उस ने हमजा और अयान को चीज दिलाने के बहाने बाइक पर बैठा लिया था. आसिफा को भी आना था, लेकिन बाद में उस ने आने से मना कर दिया था.

आसिफा का मना करना अजीम को अच्छा नहीं लगा. दबाव बनाने के लिए उस ने आसिफा को धमकी दी कि अगर आसिफा नहीं आएगी तो वह बच्चों को जान से मार देगा. लेकिन आसिफा उस की धमकी में नहीं आई. तब वह बच्चों को ले कर हरिद्वार के लिए रवाना हो गया. श्यामपुर के नजदीक उसे जंगल दिखाई दिया तो उस ने हमजा को वहीं खत्म करने की योजना बना डाली. मोटरसाइकिल को सड़क के किनारे खड़ी कर के वह हमजा को जंगल में ले गया और जिस जंजीर से उस की बाइक की चाबी बंधी थी, उसी जंजीर से उस का गला घोंटने लगा. हमजा जमीन पर औंधी पड़ी थी. उस ने गले पर जंजीर के नीचे 2 अंगुलियां लगा ली थीं, जिस से उस का गला घुट नहीं सका और वह बेहोश हो कर रह गई. अजीम को लगा कि वह मर चुकी है, इसलिए वह अयान को ले कर हरिद्वार के अपने एक दोस्त के घर चला गया.

थोड़ी देर बाद हमजा को होश आया तो वह जंगल में खुद को अकेली पा कर डर के मारे रोने लगी. वह ऐसा जंगल था, जहां जंगली जानवर घूमते रहते थे. वनकर्मी भी उधर बंद गाड़ी ले कर जाते थे. लेकिन इत्तफाक से उस समय कोई जंगली जानवर उधर नहीं आया थासंयोग से उधर कुछ वनकर्मी आए तो अकेली लड़की को देख कर वे चौंके. हमजा ने उन्हें सारी बात बताई तो वनकर्मी हमजा को थाना श्यामपुर ले गए. थानाप्रभारी चंदन सिंह ने मुरादाबाद की 11 साल की लड़की हमजा के बरामद होने की सूचना एसपी सिटी सुरजीत सिंह पंवार को दी तो उन्होंने यह खबर मुरादाबाद के एसएसपी को दे दी.

अगली सुबह यानी 26 नवंबर, 2013 को अजीम अयान को मोटरसाइकिल से ले कर निकला. वह उसे भी ठिकाने लगाना चाहता था. इस के लिए वह देहरादून की तरफ चल दिया. बच्चे को मोटरसाइकिल से अपहरण कर के ले जाने की खबर देहरादून के पुलिस कंट्रोलरूम से फ्लैश होने के बाद पूरे शहर में वाहनों की चैकिंग शुरू हो गई थी. इसलिए सुबह 9 बजे के करीब अजीम ने आईएसबीटी पुलिस चौकी के नजदीक चैकिंग होती देखी तो डर की वजह से अयान को वहीं उतार कर भाग गया

अकेले पड़ने पर अयान रोने लगा तो पुलिस उस के पास पहुंच गई, जिस से वह भी सकुशल मिल गया. अजीम अब कहीं दूर भाग जाना चाहता था, इसलिए उस ने अपनी मोटरसाइकिल देहरादून रेलवे स्टेशन की पार्किंग में खड़ी कर दी और ट्रेन से दिल्ली में रहने वाले अपने दोस्त जुबैर के पास चला गया. जुबैर कपड़ों की सिलाई करता था. दूसरी ओर मुरादाबाद पुलिस उस के मोबाइल फोन के जरिए उस के पास पहुंचने की कोशिश कर रही थी. इस से पहले मुरादाबाद पुलिस जुबैर के पास पहुंचती, वह वहां से मांडवा में रहने वाले अपने दोस्त अनमोल के यहां चला गया. लेकिन वहां अनमोल नहीं मिला.

अजीम को पैसों की जरूरत थी. तब वह अपना सैमसंग का मोबाइल फोन 2 हजार रुपए में बेच कर बंगलुरु चला गया. इस बीच वह एसटीडी बूथ से घर वालों को फोन करता रहता था. जब उसे पता लगा कि उस के खिलाफ गैरजमानती वारंट जारी हो चुका है और पुलिस कुर्की की काररवाई कर रही है तो वह अजमेर गया. वह मुरादाबाद पहुंच कर पुलिस के सामने हाजिर होना चाहता था, लेकिन मुखबिर की सूचना पर पुलिस ने उसे अजमेर से गिरफ्तार कर लिया. अजीम के फोन की काल डिटेल्स से पुलिस को यह भी पता चल गया था कि अजीम की आसिफा से अकसर बात होती रहती थी. कभीकभी ये बातें काफी लंबी होती थीं. पुलिस यह जानने की कोशिश कर रही है कि उन दोनों के बीच किस तरह के संबंध थे. बहरहाल, पुलिस ने अजीम उर्फ अजमल से पूछताछ कर के उसे न्यायालय में पेश कर दिया था, जहां से उसे जेल भेज दिया गया था.

   —कथा पुलिस सूत्रों पर आधारित

  

Crime story : जेठानी का कुल्हाड़ी मारकर किया कत्ल

Crime story : राजकुमारी ने पति को ही नहीं, जेठानी को भी समझाया कि अब दोनों अपने संबंध खत्म कर दें, लेकिन वे नहीं माने. तब राजकुमारी ने जो किया उस से 2 घर बरबाद हो गए. उत्तर प्रदेश के जिला मैनपुरी के रहने वाले शिवराज सिंह और देशराज सिंह में काफी प्यार था. दोनों भाई मकान बनवाने का ठेका लेते थे. उन का संयुक्त परिवार था. देशराज अविवाहित और शिवराज शादीशुदा. शादी के बाद शिवराज की पत्नी प्रियंका ने एक बेटी को जन्म दिया. जिस का नाम सुजाता रखा गया.

देशराज की अपनी भाभी प्रियंका से खूब पटती थी. देवरभाभी में हलकीफुलकी मजाक भी होती रहती थी. भाभी होने के नाते प्रियंका उस की बातों का बुरा भी नहीं मानती थी. शिवराज सीधासादा था, जबकि देशराज तेजतर्रार और दबंग था. वह बनठन कर रहता था, इसलिए प्रियंका को अच्छा लगता था. प्रियंका को जब कभी बाजार या और कहीं जाना होता तो वह अपने साथ देशराज को ही ले जाती थी. देवरभाभी के इस तरह साथ रहने से कभीकभी शिवराज को शक होता तो मजाकिया लहजे में वह कह देती, ‘‘बड़े ईर्ष्यालु हो तुम. छोटे भाई की खुशी बरदाश्त नहीं होती? अरे, जैसे वह तुम्हारा छोटा भाई है, वैसे ही मेरा भी छोटा भाई है.’’

शिवराज सोचता कि शायद प्रियंका सही कह रही है. उसे क्या पता था कि उस का यह विश्वास आगे चल कर कोई बड़ी मुसीबत बन जाएगा. देशराज का भाभी के प्रति झुकाव दिनोंदिन बढ़ता जा रहा था. इस बात को प्रियंका महसूस कर रही थी. भाभी को लुभाने के लिए देशराज आए दिन उस की पसंद की खानेपीने की चीजें और उपहार भी लाने लगा. प्रियंका ने मना किया तो देशराज ने हंसते हुए जवाब दिया, ‘‘भाभी ये तो मामूली बातें हैं, मैं तो तुम्हारे लिए जान भी दे सकता हूं. किसी दिन कह कर तो देखो.’’ 

इस पर प्रियंका ने उसे चौंक कर देखा. तभी देशराज ने ठंडी आह भरते हुए कहा, ‘‘भाभी क्या कहूं, तुम तो मेरी ओर ध्यान ही नहीं देती हो.’’

‘‘अरे मेरे ऊपर तुम यह कैसा इलजाम लगा रहे हो. देखो मैं तुम्हें खाना बना कर देती हूं, तुम्हारे कपड़े धोती हूं, अब और क्या चाहिए तुम्हें.’’

देशराज ने प्रियंका के पास कर उस का हाथ पकड़ लिया. उस के द्वारा अकेले में हाथ पकड़ने से प्रियंका सिहर उठी. वह अपना हाथ छुड़ाते हुए बोली, ‘‘यह क्या कर रहे हो? क्या चाहते हो?’’

‘‘भाभी, तुम्हारी चंचलता और खूबसूरती ने मुझे बेचैन कर रखा है. मैं तुम्हारे करीब आना चाहता हूं.’’

‘‘देखो देशराज, अब तुम जाओ. मुझे घर के और भी काम करने हैं.’’ 

‘‘मैं जा तो रहा हूं लेकिन सीधेसीधे पूछना चाहता हूं कि तुम मुझ से प्यार करती हो या नहीं?’’

देशराज वहां से चला तो गया, लेकिन उस की बातों और अहसासों ने प्रियंका को सोचने के लिए मजबूर कर दिया. देशराज ने भी जज्बातों में कर प्रियंका को अपने प्यार का अहसास करा दिया था, लेकिन बाद में उसे इस बात का डर लगा था कि कहीं भाभी यह बात भैया से कह दे. रात को प्रियंका और देशराज अपनेअपने कमरे में सोने के लिए चले गए लेकिन दोनों की ही आंखों में नींद नहीं थी. देशराज को डर सता रहा था तो प्रियंका के दिमाग में देवर की कही बातें घूम रही थीं. लेटे ही लेटे वह पति की तुलना देवर से करने लगी. उस का पति शिवराज काम से थकामांदा घर लौटता और खाना खा कर जल्दी ही खर्राटे लेने लगता. उस की तरफ अब वह पहले की तरह बहुत ध्यान नहीं दे रहा था.

अकसर भाभी से चुहलबाजी करने वाला देशराज अगले दिन उस से नजरें नहीं मिला पा रहा था. इस बात को प्रियंका महसूस भी कर रही थी. शिवराज के जाने के बाद देशराज भी जाने लगा तो प्रियंका ने कहा, ‘‘तुम रुको देशराज, आज मेरी तबीयत कुछ ठीक नहीं है, तुम मेरे साथ डाक्टर के यहां चलना.’’

‘‘भाभी, आज मुझे भी जल्दी जाना है, इसलिए तुम अकेली ही चली जाओ,’’ कह कर देशराज जब घर से निकलने लगा तो प्रियंका उस का हाथ पकड़ कर कमरे में ले आई. देशराज डर रहा था कि भाभी अकेले में अब उसे डांटेगी. उस ने अपना चेहरा नीचे कर रखा था. प्रियंका बोली, ‘‘कल तुम बड़ीबड़ी बातें कर रहे थे, लेकिन तुम तो बहुत डरपोक निकले. प्यार करने वाले अंजाम की चिंता नहीं करते.’’

यह सुन कर देशराज का डर थोड़ा कम हुआ. वह अचंभे से भाभी की तरफ देखने लगा. प्रियंका आगे बोली, ‘‘देशराज, तुम्हारी बातों ने मेरे ऊपर ऐसा असर किया है कि रात भर मैं तुम्हारे ही खयालों में बेचैन रही. मुझे भी तुम से प्यार हो गया है. लेकिन मेरे सामने एक समस्या है. मैं शादीशुदा हूं, इसलिए इस बात से डर रही हूं कि अगर तुम्हारे भैया को पता चल गया तो क्या होगा? वह तो मुझे घर से ही निकाल देंगे.’’

‘‘भाभी, मैं हूं . मेरे होते हुए तुम्हें कोई कुछ नहीं कह सकता.’’ देशराज ने उसे विश्वास दिलाते हुए कहा तो प्रियंका ने उस के भरेपूरे जिस्म को गौर से देखा और सीने से लग गई. देशराज ने भी उसे अपनी मजबूत बांहों में भर लिया. उन के कदम गुनाह की तरफ बढ़ गए और उन्होंने अपनी हसरतें पूरी कर लीं. उस दिन के बाद सब कुछ बदल गया. शिवराज के काम पर जाने के बाद देशराज किसी किसी बहाने घर पर रुक जाता और भाभी के साथ मौजमस्ती करता. देशराज अकसर घर में भाभी के साथ रहने लगा तो पड़ोसियों को शक होने लगा. सब सोचने लगे कि दाल में कुछ काला जरूर है.

गलत काम की खबरें जल्दी फैलती हैं, इसलिए मोहल्ले भर में यह खबर फैल गई कि प्रियंका का अपने देवर के साथ चक्कर चल रहा है. मगर शिवराज को इस बात की भनक तक लगी. वह तो कमाई में ही लगा रहता था. एक दिन एक शुभचिंतक ने शिवराज से कहा, ‘‘शिवराज, तुम कभी अपने घर की तरफ भी ध्यान दे दिया करो. तुम्हें पता नहीं कि तुम्हारे घर में क्या चल रहा है? अब बेहतर यही होगा कि तुम देशराज की शादी कर दो.’’

यह सुन कर शिवराज सन्न रह गया. वह अपने भाई को सीधासादा समझता था. और तो और देशराज उस के सामने ऊंची आवाज में बात तक नहीं करता था. एक बार तो उसे भाई के बारे में कही बात पर विश्वास नहीं हुआ. वह घर पहुंचा तो देशराज घर पर ही मिला. छूटते ही उस ने कहा, ‘‘दिनभर घर में चारपाई तोड़ना अच्छा लगता है क्या? कल से मेरे साथ ही काम पर चलना. चार पैसे कमाएगा तो तेरी शादी में ही काम आएंगे. मैं तेरी जल्दी ही शादी कराना चाहता हूं.’’

पति के मुंह से देवर की शादी की बात सुन कर प्रियंका को कुछ खटका सा हुआ. लेकिन वह बोली कुछ नहीं. उधर शिवराज ने पत्नी से कुछ कहने के बजाए नजर रखने लगा. प्रियंका को इस बात का अहसास हो गया तो उस ने भी देवर से मिलने में एहतियात बरतनी शुरू कर दी. रात को पति के सो जाने के बाद वह देशराज के पास जाती और मौजमस्ती करती. देशराज अपनी सारी कमाई प्रियंका के हाथ पर ही रखता था. शिवराज भाई के लिए अच्छा रिश्ता देखने लगाएक दिन प्रियंका ने देशराज से कहा, ‘‘जल्दी ही तुम्हारी शादी हो जाएगी, तब तुम मुझे भूल जाओगे?’’

‘‘यह कैसी बातें कर रही हो भाभी? मेरी शादी भले ही हो जाए, लेकिन तुम से मैं वादा करता हूं कि मैं हमेशा तुम्हारा ही रहूंगा.’’

उसी बीच देशराज की शादी के लिए जिला मैनपुरी के गांव चितायन से एक रिश्ता आया. चितायन के रहने वाले रामअवतार ने अपनी सब से छोटी बेटी राजकुमारी की शादी देशराज से करने की बात शिवराज से की. राजकुमारी हाईस्कूल पास कर चुकी थी. शिवराज को रिश्ता पसंद आया और दोनों तरफ से बात होने के बाद निश्चित तिथि पर राजकुमारी और देशराज की शादी हो गई. यह वर्ष 2007 की बात है. शादी के बाद राजकुमारी ससुराल गई, लेकिन सुहागरात को खुशी की बजाय उस की आंखों से आंसू ही बहे. हुआ यह कि सुहागसेज पर बैठी राजकुमारी पति के कमरे में आने का इंतजार करती रही, लेकिन देशराज अपनी नईनवेली दुलहन के पास पहुंचा नहीं. सुबह 4-5 बजे राजकुमारी की नींद टूटी तो भी उसे कमरे में पति दिखाई दिया. उसी दौरान उसे जेठानी के कमरे से पति और जेठानी की हंसीठिठोली की आवाज सुनाई दी.

राजकुमारी भी कोई नादान नहीं थी. वह समझ गई कि पति का भाभी के साथ चक्कर है. तभी तो सुहागरात को भी पत्नी के बजाय वह भाभी के साथ मौजमस्ती कर रहा है. थोड़ी देर बाद देशराज जब अपने कमरे में पहुंचा तो उस ने पत्नी को सुबकते हुए देखा. वह बोला, ‘‘तुम रो रही हो? क्या हुआ?’’

‘‘तुम यह बताओ कि रात भर कहां थे?’’ राजकुमारी ने पूछा.

‘‘मैं यहीं भाभी से बातें कर रहा था. जब मैं कमरे में आया तो तुम सो रही थी. मैं ने सोचा कि तुम थक गई होगी, इसलिए जगाया नहीं.’’ कह कर देशराज ने तौलिया उठाई और गुसलखाने में घुस गया.

राजकुमारी को पति का रवैया कुछ अजीब सा लगा. वह पति से बहस कर के बात को बढ़ाना नहीं चाहती थी, इसलिए उस ने खुद को समझाया और मन को शांत किया. दिन धीरेधीरे गुजरा. घर पर जो नजदीकी मेहमान थे, वे भी घर से विदा हो गएशाम का खाना खा कर राजकुमारी अपने कमरे में थी, तभी प्रियंका और देशराज भी वहां पहुंच गए. प्रियंका देर तक राजकुमारी के पास बैठी रही. आखिर तंग कर राजकुमारी ने कहा, ‘‘भाभी मुझे नींद रही है.’’

राजकुमारी 4 दिनों तक ससुराल में रही. इन 4 दिनों में उस ने महसूस किया कि कहीं कुछ गड़बड़ जरूर है. फिर पिता उसे विदा करा कर ले गए. मायके आने पर उस ने मां को जब सारी बात बताई तो मां ने कहा, ‘‘बेटा, तुझे कुछ वहम हो गया है. देवरभाभी में प्यार होना कोई हैरानी की बात नहीं है. तू एक समझदार और पढ़ीलिखी लड़की है. अपने परिवार को बिखरने देना.’’

कुछ दिनों बाद वह पति के साथ फिर ससुराल गई. इस बार उस ने तय किया कि वह सच्चाई का पता लगा कर रहेगी. इसलिए उस ने पति और जेठानी पर नजर रखनी शुरू कर दी. काम से आने के बाद देशराज सीधा भाभी के कमरे में जाता और सारी कमाई उस के हाथ पर रख देता था. राजकुमारी को यह सब अच्छा नहीं लगा. उस ने पति से कहा, ‘‘तुम्हारी कमाई पर मेरा हक है, किसी और का नहीं. अब जो भी कमा कर लाओगे मुझे देना, किसी और को नहीं.’’

प्रियंका ने देवरानी की यह बात सुन ली थी. लेकिन कुछ कहने की हिम्मत नहीं हुई.

‘‘लेकिन भाभी क्या सोचेंगी?’’ देशराज ने कहा.

‘‘वह जो भी सोचती हैं, सोचती रहें. हमारा परिवार बढ़ेगा, खर्चे बढ़ेंगे तो हम किस से मांगेंगे?’’

प्रियंका समझ गई कि राजकुमारी तेज दिमाग की है. उस के सामने उस की दाल अब नहीं गलेगी. इसलिए उस ने देशराज को समझा दिया कि अब मिलने में होशियारी बरती जाए. राजकुमारी अब काफी सतर्क हो गई थी. जिस से देशराज और प्रियंका परेशान से रहने लगे. घर में भी तनाव रहने लगा. देशराज गुस्से में कभीकभी राजकुमारी की पिटाई करने लगा. राजकुमारी गर्भवती हो गई तो देशराज और प्रियंका को मिलने का मौका मिल गया. लेकिन राजकुमारी ने पति और जेठानी को रंगेहाथों पकड़ लिया. पोल खुलने पर देशराज और प्रियंका के होश उड़ गए. देशराज ने पत्नी से माफी मांगी और उसे भरोसा दिलाया कि आइंदा ऐसी गलती नहीं होगी

प्रियंका ने भी उस से अनुरोध किया कि यह बात वह किसी को बताए. राजकुमारी का शक सही साबित हुआ. उस समय समझदारी दिखाते हुए उस ने कोई शोरशराबा नहीं किया, शाम को शिवराज घर लौटा तो उस ने उस से कहा, ‘‘जेठजी, मैं अब इस घर में नहीं रह सकती. आप हमें अलग कर दें.’’

‘‘यह क्या कह रही हो तुम, यहां तुम्हें कोई परेशानी है?’’ शिवराज ने कहा तो राजकुमारी बोली, ‘‘आप को तो पता नहीं कि घर में क्या हो रहा है? पर जो मैं देख रही हूं, उस का अंजाम अच्छा नहीं हो सकता. इसलिए मैं अलग होना चाहती हूं.’’

शिवराज राजकुमारी का इशारा समझ गया. इस के बाद उस ने घर का बंटवारा कर दिया. राजकुमारी ने राहत की सांस ली. उस ने सोचा कि अब देशराज का भाभी के पास आनाजाना बंद हो जाएगा. उस के पेट में पल रहा बच्चा 8 महीने का हो चुका था. ऐसे में राजकुमारी को देखभाल की ज्यादा जरूरत थी, लेकिन ससुराल में अब वह अकेली थी. घर के काम करने में उसे परेशानी हुई तो वह मायके चली गई. उस ने पति और जेठानी के अवैध संबंधों की बात मां से भी बता दी.

मां ने उसे फिर समझाया कि वह देशराज को समझाए. लेकिन राजकुमारी के मन में जेठानी के प्रति नफरत भर चुकी थी. राजकुमारी ने मायके में ही बेटे को जन्म दिया. वहां कुछ दिन रहने के बाद वह ससुराल चली आई. वह बड़ी जेठानी अविता से मिली और उन्हें प्रियंका की बदचलनी की बात बताई. अविता ने भी प्रियंका को काफी समझाया, लेकिन उस ने देशराज से मिलना बंद नहीं किया. राजकुमारी धीरेधीरे निराश होने लगी. अपने वैवाहिक जीवन में उस ने जिस सुख की कल्पना की थी, वह पति और जेठानी की वासना की ज्वालामुखी में खाक हो चुका था. तो उसे अपने मायके से कोई राहत मिल रही थी और ही ससुराल से. देशराज भाभी के खिलाफ एक शब्द सुनने को तैयार नहीं था.

नतीजतन आए दिन घर में झगड़ा होने लगा. रोजाना के झगड़े को देख कर मोहल्ले के लोग यही सोचने लगे कि राजकुमारी एक तेजतर्रार और लड़ाकू औरत है. आखिर एक दिन राजकुमारी ने तय किया कि वह पति को प्यार से समझाने की कोशिश करेगी. उस दिन उस ने अपने पति की पसंद का खाना बनाया. शाम को जब देशराज घर लौटा तो उस ने कहा, ‘‘हाथमुंह धो लो और खाना खा लो. आज मुझे तुम से कुछ बात करनी है.’’

देशराज गुसलखाने में घुस गया. नहाधो कर बाहर आते ही बोला, ‘‘मैं आज खाना नहीं खाऊंगा. मुझे कहीं जाना है.’’

‘‘लेकिन तुम ने यह बात मुझे सुबह तो बताई नहीं. मैं ने जब खाना बना लिया तो तुम खाने से मना कर रहे हो.’’

‘‘बनाया है तो तुम्हीं खा लो.’’ कह कर देशराज घर से बाहर निकल गया. पति की इस उपेक्षा ने राजकुमारी को तोड़ कर रख दिया. वह देर तक रोती रही. देशराज रात भर घर से बाहर रहा. राजकुमारी चारपाई पर पड़ी करवटें बदतली रही और रोती रही. उसे अपनी बेचारगी का अहसास भी हो रहा था. उसी दौरान दरवाजे पर दस्तक हुई. उस ने कुंडी खोली तो सामने पति खड़ा था. उसे देखते ही वह बोली, ‘‘रात भर भाभी के पास रहे होगे?’’

‘‘हां, मैं वहीं था. अब बता तू क्या कर लेगी मेरा.’’ देशराज ने गुस्से में कहा. कड़वा सच सुन कर राजकुमारी कुछ बोली, क्योंकि अगर वह कुछ कहती तो देशराज उस की पिटाई कर देता. दोपहर के समय वह बड़ी जेठानी अविता के घर गई तो उसे पता चला कि दोनों जेठ अवधेश और शिवराज पड़ोस के किसी गांव गए हुए थेराजकुमारी की समझ में गया कि भाई की गैरमौजूदगी में देशराज रात भर भाभी के साथ रहा होगा. यह जान कर उस का खून खौलने लगा. तभी उसे एक झटका और लगा, जब अविता ने बताया कि प्रियंका गर्भवती है. राजकुमारी को अब पक्का यकीन हो गया कि प्रियंका के गर्भ में देशराज का ही बच्चा है. यह बात उसे बरछी की तरह चुभी. उस ने मन ही मन तय कर लिया कि अब उसे कुछ नहीं सहना, चाहे इस के लिए उसे कितनी ही बड़ी कीमत क्यों चुकानी पड़े और मन ही मन उस ने एक योजना बना ली.

अपनी योजना को साकार करने के लिए प्रियंका का विश्वास हासिल करना जरूरी था. अत: एक दिन वह प्रियंका के घर जा पहुंची. उसे देख कर प्रियंका चौंकी. उस ने पूछा, ‘‘तुम यहां कैसे?’’

‘‘अरे दीदी मुझे पता चला कि तुम्हें बच्चा होने वाला है तो सोचा कि तुम्हारी कुछ मदद कर दिया करूं.’’

प्रियंका को राजकुमारी के इस व्यवहार पर हैरानी हुई. वह बोली, ‘‘तुम परेशान मत हो. सब ठीक है, तुम मेरी छोटी बहन की तरह हो. मैं तो पहले ही कहती थी कि तुम्हें गुस्सा नहीं करना चाहिए.’’

‘‘हां दीदी, मैं ही गलत थी. बेकार ही अलग हो गई. हम साथसाथ रहते तो अच्छा होता. खैर अब अलग तो हो ही गए हैं, पर आपस में मिलजुल कर रहने में हर्ज ही क्या है.’’ कह कर राजकुमारी ने खूनी नजरों से प्रियंका को देखा. राजकुमारी वहां थोड़ी देर बैठ कर चली गई.

10 जुलाई, 2013 को गांव में एक गमी हो गई. अवधेश और शिवराज वहीं गए हुए थे. देशराज काम पर गया हुआ था. उसी समय राजकुमारी प्रियंका के घर गई और बातों ही बातों में वह उसे अपने घर बुला लाई. वह प्रियंका से बातें करने लगी. प्रियंका राजकुमारी के मन से अनजान थी. उसे मौत की दस्तक भी सुनाई नहीं दी. बातें करतेकरते उस ने पास रखी कुल्हाड़ी उठाई और प्रियंका के सिर पर दे मारी. सिर पर कुल्हाड़ी का वार होते ही प्रियंका लुढ़क गई. सिर से खून का फव्वारा फूट पड़ा. कुछ देर तड़पने के बाद प्रियंका का शरीर शांत हो गया. राजकुमारी को जब विश्वास हो गया कि वह मर चुकी है तो उसे तसल्ली हुई. फिर सारे कमरे को लीप कर खून के निशान मिटा दिए.

शाम के समय देशराज घर लौटा तो उस ने कहा, ‘‘बेटा ऊपर है, उसे जगाओ मैं खाना वहीं लाती हूं. देशराज चुपचाप ऊपर चला गया. राजकुमारी भी वहीं खाना ले कर पहुंच गई. खाना खाने के बाद वह सोने की तैयारी करने लगे, तभी शिवराज ने आवाज दी. राजकुमारी ने दरवाजा खोला. शिवराज ने पूछा, ‘‘यहां प्रियंका आई है क्या?’’

‘‘नहीं, वह तो शाम को थैले में कपड़े डाल कर कहीं जा रही थीं.’’ राजकुमारी की बात सुन कर शिवराज परेशान हो गया कि बेटी को घर में छोड़ कर वह कहां चली गई? ऐसे तो कहीं नहीं जाती थी. उस ने उसी समय अपनी ससुराल फोन किया. पता चला कि वहां भी नहीं पहुंची थी. रात में कुछ नहीं हो सकता, यह सोच कर शिवराज घर चला गया. पूरी रात चिंता में कटी. लेकिन सुबह उठते ही गांव में होहल्ला हो गया. शिवराज के घर से कुछ दूरी पर गड्ढे में एक औरत के पैर दिखाई दे रहे थे. शिवराज का दिल धड़कने लगा, कहीं प्रियंका तो नहींदेशराज भी वहां पहुंचा. तब तक किसी ने पुलिस को फोन कर दिया था

कुछ ही देर में थाना किशनी के थानाप्रभारी भूपेंद्र शर्मा पुलिस टीम के साथ वहां पहुंचे. कुछ ही देर में पुलिस क्षेत्राधिकारी रामानंद कुशवाहा भी वहां पहुंच गए. पुलिस के आदेश पर गड्ढे की मिट्टी हटाई गई तो उस में प्रियंका की लाश निकली. बीवी की लाश देख कर शिवराज दहाड़े मार कर रोने लगा और देशराज डरासहमा एक ओर जा खड़ा हुआ. देशराज ने कुछ सोचा और घर की तरफ गया. लेकिन घर से राजकुमारी गायब थी. अब उस की समझ में सब कुछ गया. वह वापस शिवराज के पास गया और उसे बताया कि राजकुमारी गायब है. पुलिस ने शिवराज से पूछताछ की तो उस ने बताया कि उस की पत्नी की हत्या उस के छोटे भाई की बीवी राजकुमारी ने की है और वह फरार हो गई है.

पुलिस देशराज के घर पहुंची. वहां ताला लगा हुआ था. वहां खून के निशान साफ दिखाई दे रहे थे. लाश की शिनाख्त हो चुकी थी. पुलिस ने आवश्यक काररवाई कर के लाश को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया. दोनों भाइयों को पुलिस पूछताछ के लिए थाने ले आई. इस बीच प्रियंका का पिता वीरेंद्र भी थाने पहुंचा. उस ने भादंवि की धारा 302, 316, 201 के तहत राजकुमारी के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज करा दी. पुलिस ने तफ्तीश की तो पता चला कि देशराज और प्रियंका के बीच लंबे समय से अवैध संबंध थे. लेकिन यह बात गले नहीं उतर रही थी कि अकेली औरत हत्या कर के प्रियंका को गड्ढे तक कैसे ले आई और उस ने अकेले ही कैसे दफना दिया? पुलिस की एक टीम राजकुमारी की तलाश में उस के मायके के लिए रवाना हुई. लेकिन राजकुमारी रास्ते में ही मिल गई तो पुलिस उसे गिरफ्तार कर के थाने ले आई.

पूछताछ के दौरान राजकुमारी ने कुबूल किया कि प्रियंका की हत्या उस ने ही की थी. प्रियंका ने उस के वैवाहिक जीवन को उजाड़ कर रख दिया था. इसी मजबूरी के चलते उस ने इस खतरनाक योजना को अंजाम दिया. पोस्टमार्टम रिपोर्ट में पता चला कि प्रियंका 7 माह की गर्भवती थी. पूछताछ के बाद पुलिस ने राजकुमारी को न्यायालय में पेश कर के जेल भेज दिया.

   —कथा पुलिस सूत्रों पर आधारित

                                                       

Mumbai : सैक्स करने से मना किया तो प्रेमिका का रस्सी से घोंट डाला गला

Mumbai : तमाम लड़केलड़कियों की तरह आंखों में फिल्मी दुनिया के सपने सजा कर मानसी दीक्षित मुंबई गई थी. उसे काम मिलने भी लगा था, लेकिन मुजम्मिल उस के सपनों को ही नहीं उसे भी निगल गया…   

15  अक्तूबर, 2018 की दोपहर के करीब ढाई बजे मुंबई के मार्गों और बाजारों में अच्छीभली भीड़ थीउसी वक्त मुंबई (Mumbai) के अंधेरी इलाके के मिल्लत नगर से एक ओला कैब निकली, जिस में एक युवक बैठा था. 19-20 साल का वह युवक घबराया हुआ सा लग रहा था. उस ने कैब सांताक्रुज एयरपोर्ट के लिए बुक कराई थी, लेकिन वहां जाने के बजाय वह जोगेश्वरी, गोरेगांव और मलाड की सड़कों पर घूमता रहा. आखिर में उस ने मलाड केमाइंडस्पेसके सामने कैब रुकवाई.

उस ने ड्राइवर को यह कह कर बिल चुकता कर दिया कि वह माइंडस्पेश में बैठ कर दोस्त का इंतजार करेगा और फिर दोनों आटोरिक्शा से एयरपोर्ट जाएंगे. उस युवक का सूटकेस डिक्की में रखा था. उस ने ड्राइवर को कह कर अपना सूटकेस निकलवाया, जो काफी भारी था. करीब 3 साल से कैब चला रहे ड्राइवर ने महसूस किया कि सूटकेस में उस युवक के वजन से भी ज्यादा वजन है. किराए के पैसे ले कर ड्राइवर आगे बढ़ गया, लेकिन लगभग 500 मीटर जाते ही उस के दिमाग को झटका लगा. टैक्सी में आए युवक के उसे तो हावभाव सामान्य लगे और ही एयरपोर्ट के लिए कैब बुक कर के इधरउधर भटकना.

साथ में भारी वजन का सूटकेस और माइंडस्पेस के सामने मैंग्रोव की झाडि़यों के पास उतरना. सब कुछ संदिग्ध लग रहा था. कुछ गड़बड़ लगी तो कैब ड्राइवर यू टर्न ले कर वापस आया. लेकिन तब तक वह युवक सूटकेस मैंग्रोव की झाडि़यों में फेंक कर जा चुका था. कैब ड्राइवर ने 4-5 लोगों को बुला कर सारी बात बताई और पुलिस कंट्रोल रूम को फोन कर दिया. मलाड का वह इलाका थाना बांगुर नगर में आता था. कंट्रोल रूम से यह खबर उच्चाधिकारियों और थाना बांगुर नगर थाने को दे दी गई. गश्त पर निकली थाने की पुलिस जिप्सी को तत्काल वहां पहुंचने को कहा गया.

सूचना पा कर थाना बांगुर नगर के थाना इंचार्ज विजय वाने ने ड्यूटी अफसर से इस मामले को डायरी में दर्ज करने को कहा और इंसपेक्टर अरविंद चंदन शिवे, सबइंसपेक्टर विनीत कदम, दिलीप काले, सिपाही राजू जाधव और संतोष देसाई को साथ ले कर मौके पर पहुंच गए. उन्होंने टैक्सी ड्राइवर से मोटीमोटी बातें पूछने के बाद सूटकेस को मैंग्रोव की झाडि़यों से बाहर निकलवाया. सूटकेस में निकला सनसनी का सामान  पुलिस ने वहां मौजूद लोगों की उपस्थिति में सूटकेस को खुलवाया तो सभी हैरान रह गए. सूटकेस में एक युवती की लाश थी. करीब 20-21 साल की वह युवती देखने में काफी सुंदर थी और अच्छे परिवार की लग रही थी. कपड़े भी उस ने ब्रांडेड पहन रखे थे.

मृतका के सिर पर गहरा घाव था, जिस से साफ पता चल रहा था कि उस के सिर पर किसी भारी चीज से वार किया गया था. उस के गले पर भी गोलाई में डार्क कलर का निशान था, जिसे देख कर ऐसा लग रहा था जैसे गले में रस्सी डाल कर खींची गई हो. थानाप्रभारी विजय वाने ने शव का निरीक्षण किया और लाश को पोस्टमार्टम के लिए अस्पताल भेज दिया. सूटकेस और रस्सी को पुलिस ने जाब्ते की काररवाई में शामिल कर लिया. काररवाई निपटा कर पुलिस थाने लौट आईकैब ड्राइवर को पुलिस अपने साथ ले आई थी. उस से डीसीपी संग्राम सिंह निशानदार के समक्ष पूछताछ की गई. पूछताछ के बाद डीसीपी संग्राम सिंह निशानदार ने इस मामले की जांच इंसपेक्टर अरविंद चंदन शिवे को सौंप दी.

इंसपेक्टर अरविंद चंदन शिवे ने सीनियर अधिकारियों के निर्देश पर केस की जांच के लिए एक पुलिस टीम गठित की, जिस में उन्होंने असिस्टेंट इंसपेक्टर विनीत कदम, दिलीप काले, सिपाही राजू जाधव और संतोष देसाई को शामिल किया गया. पुलिस टीम के सामने सब से बड़ी चुनौती यह थी कि मुंबई जैसे महानगर में हत्यारे को कहां और कैसे खोजे, जबकि अभी तक यह ही पता नहीं था कि मृतक युवती रहती कहां थी और उस का नाम क्या था? इस काम में कैब ड्राइवर मदद कर सकता था, इसलिए पुलिस ने उसे साथ रखा.

स्कौटलैंड के बाद दूसरे नंबर पर आने वाली मुंबई पुलिस ने इस मर्डर मिस्ट्री को ओला कंपनी के बुकिंग नंबर और मौकाएवारदात से मिले सीसीटीवी कैमरों की फुटेज के आधार पर 4 घंटों में सुलझा लिया. ओला को बुकिंग नंबर से हत्यारे का पता और फोन नंबर मिल गए थे, जिस से पुलिस को उस तक पहुंचने में कोई परेशानी नहीं हुई. पुलिस टीम ने जिस समय अभियुक्त के घर पर छापा मारा, उस समय वह घर के अंदर अकेला था और अपने गुनाह के साक्ष्यों को मिटाने की कोशिश कर रहा था. पुलिस टीम ने उस घर को सील कर के उसे अपनी गिरफ्त में ले लिया. घटनास्थल से सबूत जुटा कर पुलिस उसे अपने साथ थाने ले आई. पूछताछ में उस ने अपना नाम मुजम्मिल इब्राहिम सईद बताया और मृतका का नाम मानसी दीक्षित.

इस के पहले कि पुलिस पूछताछ के लिए अभियुक्त को रिमांड पर ले पाती, यह खबर मीडिया में लीक हो गई. इस के बाद तो इलैक्ट्रौनिक और सोशल मीडिया ने इस खबर को देश भर में फैला दियाघर वाले पहुंचे मुंबई (Mumbai) मानसी दीक्षित के घर वालों ने जब यह खबर टीवी पर देखी तो उन के होश उड़ गए. उस के घर में कोहराम मच गया. मानसी दीक्षित राजस्थान के कोटा शहर की स्टेशन रोड पर स्थित मंगलायन अपार्टमेंट के फ्लैट नंबर 602 की रहने वाली थीउस के पिता का नाम ऋषि दीक्षित था, जो कोटा के रेलवे वर्कशाप में सर्विस करते थे. उन के परिवार में पत्नी पद्मा के अलावा 2 बेटियां थीं. बड़ी बेटी का नाम दीक्षा था और छोटी का नाम मानसी

जैसेतैसे खुद को संभाल कर मानसी के घर वाले मुंबई के लिए रवाना हो गए. ऋषि दीक्षित की दोनों बेटियां पढ़ाईलिखाई में होशियार और महत्त्वाकांक्षी थीं. ऋषि दीक्षित दोनों बेटियों को पढ़ालिखा कर अच्छा जीवन देना चाहते थे. उन की मृत्यु के बाद उन का यह सपना उन की पत्नी पद्मा दीक्षित ने पूरा किया. बड़ी बेटी दीक्षा को उन के ही विभाग के डीआरएम औफिस में नौकरी मिल गई थी. जबकि छोटी बेटी मानसी दीक्षित कई साल के संघर्ष के बाद उस मुकाम पर पहुंची, जो उस के सपनों में था. मानसी बचपन से ही मौडलिंग और फिल्मों की दीवानी थी. जब कभी वह किसी मैगजीन या विज्ञापनों में किसी मौडल की तसवीर देखती तो उस की आंखों में भी वैसे ही सपने तैरने लगते थे.

उस की मां ब्यूटीशियन होने के नाते मानसी के मन और सपनों को आसानी से जान लेती थीं. उन्हें जब भी मौका मिलता, मानसी को अपने साथ पार्लर ले जातीं. बेटी को वह सुंदरता के सारे गुण सिखाया करती थीं. शुरू हुई मानसी के सपनों की उड़ान मां का सहयोग पा कर मानसी ने पूरी तरह अपना ध्यान मौडलिंग और फिल्मों की तरफ लगा दिया था. वह अपने स्कूल से ले कर कालेजों तक वहां होने वाले हर छोटेबड़े कल्चरल प्रोग्रामों में भाग लेती रही. कालेज की पढ़ाई खत्म होने के बाद मानसी पूरी तरह से मौडलिंग और बौलीवुड में कूद गई. उस ने फेसबुक और इंस्टाग्राम पर अपनी काफी तसवीरें डाल रखी थीं. मानसी ने अपनी फेसबुक प्रोफाइल में बैकग्राउंड इमेज लगाई थी, जिस में उस ने लिखा थाआई एम मी यानी मैं, मैं हूं. यह तुम कभी नहीं हो सकते.

जाहिर है मानसी ने यह शब्द किसी को चैलेंज करने के लिए लिखा था. यह बात 4 साल पहले की थी, जब वह महज 16 साल की थी. सोशल मीडिया में मानसी की एक से बढ़ कर एक ग्लैमरस तसवीरें पड़ी थींमिस कोटा की हैसियत से मानसी को मौडलिंग के छोटेमोटे काम भी मिलने लगे थे. लेकिन मानसी इस से खुश नहीं थी. उस का सपना मौडलिंग और बौलीवुड में ऊंचे स्थान तक जाने का था. उस का यह सपना मुंबई में ही पूरा हो सकता था. बहरहाल, मार्च 2018 में मानसी का मुंबई में रहने का सपना भी पूरा हो गया. उसे मुंबई की एक प्राइवेट कंपनी .के. टावर्स फाइनैंस ने बुलाया था. मुंबई में मानसी ने अंधेरी के शास्त्रीनगर में किराए का एक कमरा ले लिया और वहीं रहने लगी. खाली समय में मानसी सोशल मीडिया में बिजी रहती थी.

मानसी दीक्षित एक खूबसूरत, कमसिन और बोल्ड युवती थी. शायद यही वजह थी कि मुंबई के ग्लैमरस वर्ल्ड ने उसे हाथोंहाथ लिया. मौडलिंग, टीवी सीरियल, क्राइम पेट्रोल और कई म्यूजिक एलबमों के साथसाथ उसे बौलीवुड की शार्ट फिल्मों में भी काम मिलना शुरू हो गयामानसी की खूबसूरती और बोल्डनैस उस की सफलता का राज थे. वह कई धारावाहिकों और एलबमों में नजर आई और यही वजह शायद उस की हत्या का कारण बनी. उस की मौत के बाद पुलिस ने जब उस का सोशल मीडिया एकाउंट खंगाला तो कई चौंका देने वाली बातें सामने आईं. पता चला कि इसी साल वह यूएई और थाईलैंड की सैर कर चुकी थी. अपने फेसबुक पेज पर उस ने एक जगह लिखा था, ‘मैं जब लोगों की जिंदगी से जाती हूं तो अपना निशान छोड़ जाती हूं. अच्छा हो या बुरा, कम से कम मुझे हमेशा याद तो रखेंगे.’

इस के साथ ही वह अपनी कमियां भी स्वीकार करती थी. उस ने अपने एक पुराने पोस्ट के लिए क्षमा मांगी थी और लिखा भी था, ‘मैं तुम्हारी तरह परफेक्ट नहीं हूं. मुझ में भी कमियां हैं. मुझे जिंदगी से अभी बहुत कुछ सीखना है लेकिन मैं अपने जीवन, अपने सफर का आनंद ले रही हूं. जीवन ने जो दिया, उसे स्वीकार कर रही हूं और भगवान की बहुत शुक्रगुजार हूं.’

इस से यह बात साफ थी कि मानसी एक खुले दिमाग की दिलखुश युवती थी. उसे दोस्ती करना और दोस्तों के साथ घूमनेफिरने, मस्ती करने में मजा आता था. साथ ही उसे अपने कैरियर से भी लगाव था. वह अपने परिवार से बहुत प्यार करती थी और उस की अहमियत भी अच्छी तरह समझती थी

जहां एक तरफ मानसी अपनी मंजिल की ओर बढ़ रही थी, वहीं दूसरी तरफ मुजम्मिल इब्राहिम सईद के रूप में एक नाग उसे निकलने के लिए तैयार बैठा था. 19 वर्षीय मुजम्मिल इब्राहिम सईद हैदराबाद का रहने वाला था. उस के पिता सिराजु हसन सईद काफी समय पहले मर्चेंट नेवी में इंजीनियर थे. वहां से रिटायर होने के बाद उन्होंने मुंबई के जोगेश्वरी इलाके में मिल्लतनगर स्थित अल अहद इमारत की दूसरी मंजिल पर एक फ्लैट खरीद लिया था. अपने परिवार के साथ वह इसी फ्लैट में रहते थेसिराजु हसन का संबंध हैदराबाद के एक रईस खानदान से था. इस खानदान की काफी बड़ी हवेली और जमीनें थीं. मुजम्मिल परिवार का एकलौता बेटा था, जिसे बड़े लाडप्यार से पाला गया था. सिराजु हसन उसे पढ़ालिखा कर अपनी तरह इंजीनियर बनाना चाहते थे. जबकि मुजम्मिल की पढ़ाईलिखाई में कोई रुचि नहीं थी

परेशान हो कर सिराजु ने 5वीं कक्षा के बाद उसे आगे पढ़ने के लिए हैदराबाद में रह रहीं उस की नानी के पास भेज दिया. नानी की छत्रछाया में रह कर वह अपना ग्रैजुएशन पूरा कर पाता, इस के पहले ही उस के सिर से नानी का साया उठ गया. सोशल मीडिया के माध्यम से मिले मुजम्मिल और मानसी मानसी दीक्षित की तरह ही मुजम्मिल इब्राहिम भी सोशल मीडिया और बौलीवुड का दीवाना था. फेसबुक के माध्यम से उस ने जब मौडल मानसी को देखा तो उस के दिल में हलचल मचने लगी. उस ने मानसी से नजदीकियां बढ़ाने और दोस्ती के लिए अपना एक बढि़या प्रोफाइल तैयार कर के फेसबुक और इंस्टाग्राम पर डाला दिया. साथ ही मानसी को फ्रेंड रिक्वेस्ट भी भेज दी. मानसी उस से प्रभावित हो गई और उस ने मुजम्मिल की दोस्ती स्वीकार कर ली.

सोशल मीडिया पर काफी समय तक दोनों की दोस्ती चलती रही. मुजम्मिल ने मानसी से खुद को मौडलिंग में कामयाब युवक बताया था. सोशल मीडिया पर जब दोनों की दोस्ती गहरा गई तो वह अपनी मां के साथ घूमने के बहाने मुंबई गया और अपने एक कौमन दोस्त के साथ मानसी से मिला.  इस के बाद जबतब दोनों मिलने लगे. कभी किसी रेस्तरां तो कभी किसी बिजनैस सेंटर पर इस बीच दोनों एकदूसरे से काफी घुलमिल गए थे. घटना के दिन 11 बजे जब मां अपनी एक सहेली से मिलने घर से बाहर गई तो मुजम्मिल ने मानसी को एक मौडलिंग कंपनी के लिए फोटो शूट करने के बहाने अपने फ्लैट पर बुला लिया.

जब मानसी उस के फ्लैट पर पहुंची तो मुजम्मिल ने इधरउधर की बातों के बाद उस के साथ सैक्स की इच्छा जताई और उस से अश्लील हरकतें करने लगा. मानसी ने इस सब का जम कर विरोध किया. जब वह फ्लैट से बाहर निकलने के लिए दरवाजे की तरफ बढ़ी तो मुजम्मिल ने डर कर पास पड़ा स्टूल उठा कर मानसी के सिर पर दे मारा, जिस से उस के सिर से खून बहने लगा. वह बेहोश हो कर फर्श पर गिर पड़ी. एक पल के लिए तो मुजम्मिल के दिल में मानसी के प्रति हमदर्दी जागीवह मानसी को होश में लाने के लिए उस के मुंह पर पानी के छींटे मारने लगा. लेकिन जब मानसी को होश आने लगा तो उस के मन में बुरेबुरे खयाल खलबली मचाने लगे.

उस ने सोचा कि मानसी अगर पुलिस के पास चली गई तो वह कहीं का नहीं रहेगा. पुलिस, जेल और हथकड़ी की कल्पना करते हुए उस ने एक खतरनाक फैसला ले लिया. अपने आप को बचाने के लिए वह घर के अंदर रखी कपड़े सुखाने वाली रस्सी ले आया और उस से मानसी का गला घोंट दिया. सहेली के घर गई उस की मां कभी भी लौट कर सकती थीं. इस के पहले कि मां घर आएं, मुजम्मिल ने घर में रखे ट्रैवल सूटकेस में रस्सी सहित मानसी की लाश डाल दी और ठिकाने लगाने के लिए सांताकु्रज एयरपोर्ट जाने के लिए ओला कंपनी की एक कैब बुक कर ली. कैब गई तो उस ने ड्राइवर की मदद से ट्रैवल सूटकेस को कैब की डिक्की में रखवा लिया. फिर वह ओला कैब में बैठ कर सांताक्रुज एयरपोर्ट जाने के बजाए किसी सुनसान जगह तलाशने लगा

कुछ समय इधरउधर भटकने के बाद उसे मलाड स्थित माइंडस्पेस के सामने वह जगह मिल गई. सूटकेस को वहां ठिकाने लगाने के बाद वह अपने घर लौट आया. घर कर उस ने फर्श पर फैले मानसी के खून की साफसफाई कर दी, गिराफ्तारी के बाद पूछताछ में मुजम्मिल पुलिस को सहयोग नहीं कर रहा था. वह अपने आप को निर्दोष बता कर बारबार अपना बयान बदल रहा था. लेकिन जब पुलिस ने थोड़ी सख्ती दिखाई तो वह टूट गया और उस ने अपना गुनाह कबूल कर लिया.

विस्तृत पूछताछ के बाद जांच अधिकारी इंसपेक्टर अरविंद चंदन शिवे ने उस के खिलाफ भादंवि की धारा 302, 201 के तहत मुकदमा दर्ज कर के उसे न्यायिक हिरासत में आर्थर रोड जेल भेज दिया.

   —कथा पुलिस सूत्रों पर आधारित

Lakhimpur Kheri : प्रेमिका को खेत में बुलाकर चाकू से किया कत्ल

Lakhimpur Kheri Crime News :  राजू और साबिया खातून आपस में रिश्तेदार थे. उन की मोहब्बत इतनी जुनूनी थी कि राजू ने उसे अंगूठी तक पहना दी थी. फिर बाद में उन के प्यार का धागा ऐसा टूटा कि…  

श्चिमी उत्तर प्रदेश के जिला लखीमपुरखीरी (Lakhimpur Kheri Crime News) के हैदराबाद थाने का एक गांव है सरकारगढ़. इसी गांव में शराफत खां अपने परिवार के साथ रहते थे. वह खेतीकिसानी का काम करते थे. उन के परिवार में पत्नी नजमा के अलावा 6 बेटे और 3 बेटियां थीं. उन के 2 विवाहित बेटे शब्बन और चमन सऊदी अरब में काम करते थे. बाकी बेटे गांव में ही मेहनतमजदूरी करते थे. उन की सब से छोटी बेटी साबिया खातून काफी सुंदर थी. वह गोला गोकरननाथ कस्बे के एक कालेज से बीए कर रही थी. थाना कोतवाली गोला के अंतर्गत गांव बहारगंज में लड्डन खां रहते थे, खेतीकिसानी करने वाले लड्डन के परिवार में पत्नी रजिया के अलावा 3 बेटे 2 बेटियां थीं.

लड्डन खां शराफत खां के बेटे शब्बन के ससुर थे. शब्बन की शादी लड्डन की बेटी से हुई थी. रिश्तेदारी होने की वजह से शब्बन का साला राजू उस के यहां आताजाता रहता था. इसी आनेजाने में उस की नजर शब्बन की बहन साबिया पर टिकी रहती थी. वह साबिया को चाहने लगा था. इसलिए वह उस से खूब बातें किया करता थाधीरेधीरे साबिया का भी झुकाव उस की तरफ होने लगा था. साबिया के स्कूल जाने के टाइम पर वह गांव से बाहर मोटरसाइकिल लिए खड़ा रहता. साबिया के वहां पहुंचने पर वह उसे अपनी बाइक पर बैठा कर कालेज छोड़ने जाता और छुट्टी होने पर उसे गांव के बाहर छोड़ देता. इसी दरमियान दोनों और करीब आते गए. दोनों एक साथ घूमते और मस्ती करते थे.

एक दिन एक पार्क में बैठे हुए दोनों बतिया रहे थे, तभी राजू ने अपनी जेब से पैक की हुई एक छोटी सी डिब्बी निकाल कर साबिया के हाथ पर रख दी. साबिया के होंठ लरज उठे. उस की आंखें भी मासूमियत से राजू को निहार रही थीं. वह आहिस्ता से बोली, ‘‘क्या है इस में.’’

तभी राजू ने कहा, ‘‘खोलो तो सही, अभी मालूम पड़ जाएगा कि इस में क्या है.’’ साबिया ने पैक किया रैपर हटा कर डिब्बी का ढक्कन खोला तो डिब्बी में चांदी की एक अंगूठी दिखाई दी. उस अंगूठी में 2 छोटेछोटे दिल बने हुए थे, जो एकदूसरे से जुड़े हुए थेउन जुडे़ दिलों के अंदर छोटेछोटे नगीने भी जड़े हुए थे. अंगूठी देखने के बाद साबिया ने राजू की ओर निहारा. चेहरे पर प्रसन्नता के भाव साफ झलक रहे थे. राजू उस के मनोभावों को समझ चुका था, ‘‘साबिया, कैसा लगा मेरा यह पहला तोहफा?’’

‘‘बहुत अच्छा है.’’ वह बोली

राजू कहां चूकने वाला था. उस ने पूछा, ‘‘और मैं?’’

साबिया के कपोल पर हया के भाव उभरे. वह खामोश ही रही. साबिया को खामोश देख कर राजू ने उसे पुन: कुरेदा, ‘‘तुम ने बताया नहीं?’’

साबिया सकुचाती और शरमाती हुई बोली, ‘‘मालूम नहीं.’’

तभी राजू ने साबिया के हाथ से अंगूठी ले ली. इस के बाद उस ने साबिया के बाएं हाथ की कलाई अपने हाथ में ले कर उस समय अंगुली में अंगूठी पहना दी. साबिया खातून के लिए यह पहला अवसर था, जब किसी चाहने वाले युवक ने प्यार भरे अंदाज में उसे छुआ था. वह आनंद से सिहर उठी. साबिया को घर जाने को काफी देर हो गई थी. वह आहिस्ता से बोली, ‘‘राजू, अब चलो. घर वाले परेशान हो रहे होंगे.’’

‘‘ठीक है, तुम्हें घर तक छोड़ दूं.’’ राजू ने कहा.

‘‘नहीं, तुम मुझे रोज की तरह गांव के बाहर ही छोड़ देना. मैं नहीं चाहती कि घर वालों और गांव वालों को हमारे प्यार की भनक लगे.’’ साबिया ने कहा.

राजू उसे बाइक पर बैठा कर चल दिया. बाइक चलाते हुए राजू बोला, ‘‘साबिया, शायद तुम्हें पता नहीं कि सूर्य को बादल चाहे जितना भी ढक लें, प्रकृति और लोगों को सूर्य के निकलने का अहसास हो ही जाता है. इसी तरह हम जितना भी चाहें कोशिश कर लें, प्यार को बहुत दिनों तक छिपा नहीं सकते.’’

‘‘हां, इतना तो मैं भी जानती हूं, राजू. लेकिन मैं नहीं चाहती कि शुरुआत में ही हमारे प्यार को ले कर कोई समस्या खड़ी हो.’’ इसी तरह बातचीत करतेकराते वह गांव के बाहर तक पहुंच गए. साबिया बाइक से उतरी और अपने घर की ओर चल दी

वह घर पहुंची तो उसे घर का माहौल रोज की तरह ही सामान्य लगा. इस से उस ने राहत की सांस ली. समय ने साथसाथ उन दोनों का प्यार और प्रगाढ़ होता चला गया. घर और परिवार से दोनों छिपछिप कर मिल लिया करते थे. किसी चाहने वाले को मुलाकात के लिए चाहे कितना भी समय मिल जाए, इस के बावजूद भी उन की यही चाहत होती है कि काश, इस मुलाकात के समय यह घड़ी की सुइयां भी ठहर जाया करें2 दिन बाद राजू साबिया से फिर मिला. तब राजू ने शिकायत की कि वह उसे जितना समय देती है, उतना उस के लिए कम पड़ता है. साबिया ने उसे अपनी मजबूरी बताई और कहा कि वह और ज्यादा देर तक घर के बाहर नहीं रह सकती. फिर भी उस ने प्रेमी की बेचैनी को काफी हद तक दूर करने का रास्ता निकाल लिया

उस ने कहा कि रात को वह जब फ्री हो कर अपने कमरे में होगी, तब उस के मोबाइल पर मिस काल दे दिया करेगी. इस के बाद वह उसे फोन मिला लिया करे. साबिया ने उसे यह भी हिदायत दी कि जब तक वह उसे मिस्ड काल किया करे, वह उसे फोन करे, वरना भेद खुल सकता है. राजू ने खुशीखुशी उस की बात मान ली. इस के बाद दोनों के बीच मोबाइल पर भी बातें होने लगीं, लेकिन मोबाइल पर उन के द्वारा बातें करने वाली बात परिवार वालों से ज्यादा दिन तक नहीं छिप सकी. एक रात सबीना अपने कमरे में बिस्तर पर लेटी चादर सिर पर तान कर मोबाइल पर राजू से बात कर रह थी

उसी दौरान उस के पिता शराफत लघुशंका के लिए उठे तो उन्हें साबिया के कमरे से दबीदबी सी आवाज सुनाई दी. साथ ही हल्की हंसी की आवाज से वह ठिठक गए. उन्होंने दरवाजे को धकेला तो वह खुल गया. साबिया चादर के अंदर मुंह छिपाए फोन पर बात करने में व्यस्त थी. उसे इस बात का जरा भी भान नहीं हुआ कि कब उस के पिता उस के सिरहाने कर खड़े हो गए. शराफत ने कान लगा कर उस की कुछ बातें सुनीं. जितना कुछ शराफत ने सुना, उस से ज्यादा वह समझ गए. इस के बाद शराफत ने एक झटके में साबिया के ऊपर से चादर हटा दी.

चादर हटते ही साबिया चौंक पड़ी. अपने सिर के पास पिता को खड़ा देख कर वह एक झटके से बिस्तर से उठी और उस के मुंह से हकलाहट भरी आवाज निकली, ‘‘अब्बू.’’

वह शराफत के सामने खड़ी कांप रही थी. शराफत ने सवाल नहीं गोले दागे. उन्होंने पूछा, ‘‘किस से बातें कर रही थी?’’

साबिया खामोश रही. शराफत दहाड़ा, ‘‘बोलती क्यों नहीं?’’

साबिया सिसकती हुई संक्षेप में सब बताती चली गई. शराफत ने गुस्से में उफनते हुए कहा, ‘‘आइंदा उस लुच्चे से हरगिज बात मत करना और अगर की तो तेरी खैर नहीं.’’ इतना कह कर शराफत ने उस के हाथ से मोबाइल छीन लिया ओर अपने साथ ले गए. अगले दिन साबिया राजू से मिली और पूरी बात बता दी. साबिया का मोबाइल छिन जाने के कारण बात नहीं हो सकती थी. इसलिए उसे राजू ने अपना एक मोबाइल देना चाहा, लेकिन साबिया ने लेने से इनकार कर दिया. तब राजू ने गुस्सा जाहिर करते हुए कहा, ‘‘इस का मतलब साबिया तुम मुझ से प्यार नहीं करोगी?’’

वह रुआंसी, सी हो कर बोली, ‘‘राजू, मैं ने ऐसा तो नहीं कहा.’’

‘‘फिर मोबाइल क्यों नहीं ले रही हो?’’

‘‘नहीं, अब मुझे मोबाइल नहीं लेना.’’ कहते हुए उस ने अनामिका से अंगूठी निकाल कर राजू की हथेली पर रख दी. इस के बाद वह वहां नहीं ठहरी. तेजी से घर की ओर रुख कर गई. राजू उसे देखता ही रह गया. उस ने कई बार उसे पुकारा, ‘‘साबियासाबिया…’’ लेकिन साबिया को रुकना था और वह रुकी. राजू ठगा सा, अपमानित सा खुद को महसूस कर रहा था. उस के अंदाज में प्यार नहीं, बदले की भावना घर कर गई. उस ने पुन: साबिया को आवाज देनी चाही, लेकिन कुछ सोच कर उस ने आवाज नहीं दीसाबिया के पास मोबाइल फोन भी नहीं था जिस से वह बात कर सके. लिहाजा उन के बीच होने वाली बातचीत बंद हो गई. राजू अब यह सोचने लगा कि यदि साबिया एक बार फिर उस से अकेले में मिले तो वह उसे मना लेगा.

4 दिन बाद दोनों की किसी तरह 10 मिनट के लिए मुलाकात हुई. राजू ने पुन: अपने सोए हुए प्यार को जागृत करना चाहा किंतु साबिया ने साफसाफ मना कर दियाराजू के काफी दबाव बनाने पर साबिया ने यहां तक कह दिया, ‘‘राजू, मेरे घर वाले नहीं चाहते कि मैं तुम से किसी तरह का संबंध रखूं इसलिए तुम से मिलना मेरी मजबूरी है.’’

राजू ने गहरी सांस लेते हुए कहा, ‘‘मैं तुम्हारे घर वालों की बातों को समझता हूं. वे लोग ऐसा चाहते हैं कि तुम मुझ से मिलो और बात करो. अब तुम मुझे यह बताओ कि क्या तुम भी अपने घर वालों की बात से पूरी तरह सहमत हो.’’

साबिया थोड़ा झल्ला कर बोली, ‘‘राजू कितनी बार कहूं कि तुम मुझ से जो उम्मीद बांधे हो, वह कभी पूरी नहीं होगी. मैं अपने घरपरिवार से अलग नहीं हो सकूंगी.’’

राजू व्यंग्य से मुसकराते हुए बोला, ‘‘इन सब बातों के बारे में तो तुम्हें बहुत पहले सोचना था. मैं तुम से बहुत प्यार करता हूं, साबिया. लेकिन तुम मुझ से दूर होने की कोशिश कर रही हो, मैं ऐसा नहीं कर सकता.’’

‘‘तुम कहना क्या चाहते हो, राजू.’’

‘‘मैं कोई दूसरी भाषा में बात नहीं कर रहा हूं, जिसे तुम समझ नहीं पा रही हो.’’

‘‘मैं तुम्हारी कोई बात नहीं सुनना चाहती.’’ कहते हुए साबिया अपने घर की ओर बढ़ चली.

राजू ने सपने में भी नहीं सोचा था कि एक साल चलने वाला उस का प्यार एक मिनट में यूं टूट जाएगा. उसे क्या मालूम था कि प्यार का घरौंदा बनाने में पूरी उम्र लग जाती है और बिखरने में पल भर लगता है. प्यार चाहे एक साल का हो या 40 साल का, टूटने का दर्द होना लाजिमी है. कहीं ऐसा तो नहीं कि साबिया की लाइफ में कोई और गया है, तभी तो साबिया एकदम से बदल गई. यह बात राजू के दिमाग में अच्छी तरह से बैठ गई. साबिया उस की नहीं हो सकी, राजू को इस का दुख था. पर वह किसी और की हो जाए, इस बात को वह कतई बरदाश्त नहीं कर सकता था. इसे संयोग कहें या साबिया की बदनसीबी कि एक रोज राजू ने एक लड़के से साबिया को बातचीत करते देख लिया

साबिया हंसतीमुसकराती उस से बतिया रही थी. यह देख कर राजू के कलेजे पर सांप लोट गया. फिर कोई एक बार नहीं, बल्कि उस ने उसे उसी लड़के से 2-3 बार बात करते देखा था. राजू मौके की फिराक में रहने लगा था कि कब साबिया उसे अकेली मिले और उस के मुंह से सच्चाई जाने. सच्चाई जानने के लिए 2-3 मौके हाथ भी आए. उस का साबिया से आमनासामना भी हुआ, लेकिन राजू के कुछ कहने से पहले ही साबिया कन्नी काट कर निकल जातीसाबिया के इस व्यवहर से राजू छटपटा उठा. सच्चाई जानने के लिए वह राजू व्याकुल रहने लगा. सच्चाई तो वह साबिया के मुंह से ही सुनना चाहता था. वह उपयुक्त समय के इंतजार में था. लेकिन उस के लाख चाहने पर भी उसे मौका नहीं मिल रहा था. उसे यह भी पता चला कि साबिया के पास एक मोबाइल फोन रहता है. उस का नंबर भी उसे मिल गया.

9 जून की रात साढ़े 3 बजे बाइक से राजू  साबिया के गांव पहुंचा. फिर साबिया को फोन कर के उस के घर के पास एक खेत में बुलाया. पहले साबिया मना करती रही लेकिन राजू के बारबार कहने पर परेशान हो कर वह उस से मिलने को तैयार हो गई. उस समय साबिया के घर के सभी लोग सो रहे थे. साबिया चुपके से अपने बिस्तर से उठी और मेन गेट खोल कर राजू की बताई जगह पर पहुंच गई. वहां उसे राजू मिला. वह साहस बटोर कर बोली, ‘‘राजू, मैं कई बार बोल चुकी हूं कि तुम से किसी प्रकार का संबंध नहीं रखना चाहती, इस के बावजूद भी तुम मुझे परेशान कर रहे हो.’’

राजू गहरी नजरों से साबिया की ओर देखते हुए बोला, ‘‘साबिया, क्या तुम उस लड़के से प्यार करती हो?’’

साबिया उस की बातों को नजरअंदाज करती हुई बोली, ‘‘तुम्हारा क्या मतलब है. मेरी कुछ समझ में नहीं रहा.’’

‘‘बनो मत साबिया, तुम्हारी बेरुखी मुझे जीने नहीं दे रही है. मुझे यह पता चला है कि तुम्हारा उस लड़के से…’’

‘‘राजू, तुम्हारा यह आरोप गलत और बेबुनियाद है.’’

‘‘मैं ने तुम्हें उस के साथ बातें करते देखा है.’’

साबिया ने आश्चर्य से राजू की ओर देखा, ‘‘तुम क्या कह रहे हो, मेरी तो कुछ समझ में नहीं रहा है. किस से बात की, कब बात की और यदि मैं ने किसी से बात कर भी ली तो तुम उस का नाम क्यों नहीं बता रहे हो.’’ साबिया ने नाम जानने को उसे उकसाया.

राजू बोला, ‘‘मुझे नाम बताने की कोई जरूरत नहीं. तुम खुद अच्छी तरह से समझ रही हो. साबिया, अब भी वक्त है, तुम उसे भूल जाओ नहीं तो…’’

उस की बातों पर साबिया को गुस्सा गया. वह बोली, ‘‘सुनो राजू, मैं तुम्हारी जागीर नहीं हूं, जिस पर तुम हुकुम चलाओ. मेरी जो मरजी होगी, मैं वही करूंगी. तुम कौन होते हो मुझे रोकने वाले.’’

‘‘जानना चाहती हो, ठहरो बताता हूं.’’ इतना कह कर उस ने अपनी जेब में रखे चाकू को निकाला और साबिया पर वार कर दिया, ‘‘दिल दिया है तो जान भी ले लूंगा.’’

साबिया ने अपने आप को बचाने का भरसक प्रयास किया, लेकिन असफल रही. राजू ने ताबड़तोड़ कई प्रहार साबिया के शरीर पर किए साबिया खून से लथपथ जमीन पर गिर पड़ी. राजू ने फिर उस के गले पर चाकू से कई वार किए. जिस से उस की मृत्यु हो गई. इस के बाद राजू वहां से फरार हो गया. सुबह होने पर घर वालों ने साबिया को गायब देखा तो वे सभी हैरान रह गए कि वह रात में घर में से कहां चली गई. सभी उसे तलाशने लगे लेकिन कुछ पता नहीं चला. इसी बीच गांव के किसी व्यक्ति ने खेत में पड़ी साबिया की लाश देखी तो साबिया के पिता शराफत अली खां को यह खबर दे दी. वह घर के अन्य सदस्यों के साथ तुरंत मौके पर पहुंच गए. साबिया की लाश देख कर सब फफक कर रो पड़े.

7 बजे के करीब शराफत ने स्थानीय थाना हैदराबाद में फोन कर के घटना की सूचना दी. सूचना पा कर थानाप्रभारी सत्येंद्र कुमार सिंह हमराहियों के साथ घटनास्थल पर पहुंच गए. लाश का निरीक्षण करने के बाद उन्होंने लाश पोस्टमार्टम के लिए मोर्चरी भेज दी. थानाप्रभारी ने शराफत से पूछताछ की तो उन्होंने बताया कि रात में सहरी खाने के बाद  सब सो गए थे. सुबह उठे तो साबिया अपने बिस्तर से गायब थी. इस का मतलब यह है कि रात में किसी के बुलावे पर वह मिलने गई. यह काम उस के बेटे शब्बन का साला राजू ही कर सकता है. वही साबिया के पीछे हाथ धो कर पड़ा था. साबिया उस से मिलना  पसंद नहीं करती थी.

यह जानकारी मिलने के बाद थानाप्रभारी ने गांव वालों से पूछताछ की तो पता चला कि राजू और साबिया के बीच प्रेमसंबंध थे. उन को कई बार एक साथ देखा गया था. मगर सवाल यह खड़ा था कि राजू ने आखिर साबिया की हत्या क्यों की. थानाप्रभारी सत्येंद्र सिंह ने शराफत की तहरीर के आधार पर राजू अज्ञात लोगों के खिलाफ भादंवि की धारा 302 के तहत मुकदमा दर्ज करा दिया. चूंकि राजू पहले से ही घर से फरार था, इसलिए उस की सुरागरसी के लिए उन्होंने अपने विश्वस्त मुखबिरों को लगा दिया. 11 जून, 2018 को सुबह सवा 5 बजे पुलिस ने राजू को केशवपुर तिराहे से एक मुखबिर की सूचना पर गिरफ्तार कर लिया

राजू से सख्ती से पूछताछ की तो उस ने अपना जुर्म स्वीकार कर लिया. राजू की निशानदेही पर पुलिस ने आलाकत्ल चाकू, खून से सनी उस की टीशर्ट, पैंट और बाइक बरामद कर ली. इस के बाद उसे न्यायालय में पेश करने के बाद जेल भेज दिया.

   — कथा पुलिस सूत्रों पर आधारि