Best Crime Story : स्मार्टवाच में छिपा हत्या का राज

Best Crime Story : हत्यारा अपने गुनाह के सबूत को मिटाने की चाहे जितनी भी कोशिशें कर ले, उस से कोई न कोई सुराग छूट ही जाता है. ब्रिटिश युवती कैरोलिन क्राउच की हत्या का राज खोलने में बायोमैट्रिक घड़ी पुलिस के लिए ऐसी मददगार साबित हुई कि…

ग्रीस में 20 वर्षीया युवती कैरोलिन क्राउच की हत्या हुई थी. उस के 33 वर्षीय पति बाबिस एनाग्नोस्टोपोलोस, जोकि हेलीकौप्टर पायलट था, ने 11 मई को पुलिस को फोन द्वारा सूचना दी थी कि उस की पत्नी की हत्या अज्ञात लुटेरों ने ग्लयका नेरा स्थित उस के ही घर के बैडरूम में कर दी है. सूचना पा कर ग्रीक पुलिस मौके पर पहुंच गई. पुलिस ने देखा कि घर में बाबिस की पत्नी कैरोलिन की लाश के अलावा एक कुत्ता भी मरा पड़ा था. घर का सामान भी बिखरा पड़ा था. पुलिस को मामला लूट का ही लग रहा था. बाबिस ने पुलिस को बताया कि उन्हें लुटेरों ने बांध दिया था. वे 3 थे. उन्होंने घर से पैसे लूटने के बाद उस की पत्नी का गला घोंट डाला था. उस ने लुटेरों से अपने परिवार को नुकसान नहीं पहुंचाने की गुहार भी लगाई थी.

पुलिस ने घटनास्थल से सारे सबूत इकट्ठे कर जांच शुरू कर दी. इतना ही नहीं, पुलिस ने इस हाईप्रोफाइल अपराध की जानकारी देने वाले को 2,57,000 पाउंड स्टर्लिंग (करीब 2 करोड़ 65 लाख रुपए) ईनाम देने की भी घोषणा कर दी. इस ईनाम की घोषणा एथेंस की पुलिस औफिसर्स एसोसिएशन के डिप्टी चेयरमैन निकोस रिगास ने की थी. उन्होंने मीडिया को भी जांच में अपनाई जाने वाली तमाम लेटेस्ट सिस्टम इस्तेमाल करने की बात कहते हुए दावा किया कि बहुत जल्द ही वे इस मामले का पता लगा लेंगे. इस पर मीडिया ने उन्हें निशाने पर ले लिया था. कारण कोरोना वायरस संक्रमण के कारण हुए लौकडाउन के बाद से महिलाओं की हत्या और घरेलू अपराध की घटनाएं वहां काफी बढ़ गई थीं.

इसे देखते हुए रिगास ने घटनास्थल से मोबाइल उपकरणों, एक स्मार्टवाच और कैमरों की जांच करने के लिए एक समयरेखा भी निर्धारित कर दी. घटनास्थल की सीसीटीवी फुटेज की जांच के बाद एथेंस पुलिस  की क्राइम इनवैस्टीगेशन टीम इस नतीजे पर पहुंची थी कि युवती की हत्या जिन 3 लुटेरों ने की, उन्हें दबोचा जाना बाकी है. क्योंकि पुलिस को वहां से काफी सबूत मिल चुके थे. इसी बीच पुलिस के अधिकारी ने अपने सहकर्मियों से सवाल किया, ‘‘तुम यह कैसे कह सकते हो कि हत्या प्रोफैशनल लुटेरों ने ही की है?’’

‘‘सर घटनास्थल पर मिले सारे प्रमाण तो यही बताते हैं. इस के अलावा, लुटेरों ने युवती के हाथपांव बांध दिए थे, और…’’ एक सहकर्मी पुलिस ने कहा.

‘‘… और उस ने पालतू कुत्ते को भी मार डाला था. तुम तो यही कहोगे न?’’ अधिकारी ने दूसरे सहकर्मी को देखते हुए सवाल किया.

‘‘ यस सर! ’’

‘‘वाट यस सर..? लुटेरों ने घर से जो रुपए लूटे, वे कहां रखे थे? तुम लोगों को तो केवल 13 हजार पाउंड अमाउंट के बारे पता चला है.’’

‘‘उस की डिटेल्स नहीं मिली सर. कोई निशान नहीं मिल पाया.’’ फोरैंसिक जांच वाले ने सफाई दी.

‘‘तुम्हें तो यह भी पता नहीं चला है कि लुटेरों के गिरोह ने युवती को कैसे बांधा, उस की मौत दम घुटने से हुई या फिर कोई और वजह थी.’’ अधिकारी ने सभी को जबरदस्त डांट पिलाई.

‘‘सर, सीसीटीवी कैमरे घटना के समय बंद थे,’’ तकनीकी जांच करने वाले ने बताया.

‘‘अब तुम लोग मुझे यह समझाओ कि मृत युवती की बगल में सिरहाने 11 माह की बच्ची चुपचाप कैसे लेटी थी?’’ जांच अधिकारी ने सख्ती के साथ पूछा. ग्रीक जांच अधिकारी की बात सुन कर सभी चुप हो गए थे. क्योंकि यह मामला साधारण नहीं था. मृतका के पति पायलट बाबिस द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार पुलिस ने जांच शुरू की, जिस में कई विरोधाभास देखने को मिले. बाबिस ने मीडिया को बताया था कि वह घटना के समय लुटेरों से घिरा हुआ था. जबकि पुलिस जांच में पता चला कि उस दौरान वह घर के बाहर चारों ओर घूम रहा था. उस का आवागमन बेसमेंट से ले कर बालकनी तक हुआ था. इस विरोधाभास पर पुलिस को बाबिस पर ही शक हो गया.

डेटा एनालिस्ट की ली मदद इस आधार पर पुलिस औफिसर निकोस रिगास ने अपने सहकर्मियों को नए सिरे से जांच करने का आदेश दिया. उन्होंने जांच टीम से कहा, ‘‘संदिग्ध युवती का पति भी हो सकता है. यह भी हो सकता है कि क्राइम सीन उस के द्वारा बनाया गया हो. वह खुद को बचाने की कोशिश में हो.’’

‘‘…लेकिन सर, इस पालतू कुत्ते को किस ने मारा होगा?और सर वह छोटी बच्ची..?’’ एक सहकर्मी ने जिज्ञासा जताई.

‘‘यही तो समझने की बात है, जिस ओर तुम लोगों का ध्यान ही नहीं गया?’’ निकोस रिगास बोले.

‘‘वह कैसे सर?’’ फोरैंसिक जांचकर्ता ने सवाल किया.

‘‘मैं दावे के साथ कह सकता हूं कि पालतू कुत्ते को संदिग्ध ने ही मारा होगा और हत्या को सही ठहराने के लिए बच्ची को उस की मां के मृत शरीर के बगल में रख दिया. हैरत की बात है कि उसे कोई चोट नहीं आई. यह भी हो सकता है उस वक्त बच्ची कहीं और सो रही हो.’’ रिगास ने समझाया.

‘‘तो सर, हमें अब क्या करना चाहिए?’’

‘‘आप लोग इस में अब कुछ अधिक नहीं कर पाएंगे. इस केस को डेटा एनलिस्ट की मदद से हैंडल किया जाएगा.’’

‘‘वह कैसे सर?’’ सभी चौंक पड़े.

‘‘बस आप सभी देखते जाइए और अपनीअपनी रिपोर्ट का डेटा सौफ्ट कौपी के साथ हार्ड कौपी में 12 घंटे के भीतर उपलब्ध करवाइए.’’ रिगास ने आदेश दिया.

‘‘यस सर!’’ सभी सहकर्मियों ने एक साथ कहा.

‘‘और हां, आईटी के क्राइम सेल के साथ अभी घंटे भर के अंदर मीटिंग तय करवाइए.’’ यह आदेश उन्होंने अपने पीए को दिया.

इसी दौरान एक सहकर्मी ने उत्सुकता के साथ बताया, ‘‘सर, क्या मृतका के पति बाबिस एनाग्नोस्टोपोलास से पूछताछ की जाए?’’

‘‘अभी उस पर नजर रखिए. मुझे जानकारी मिली है कि वह इस समय ग्रीस में नहीं है, लेकिन इंस्टाग्राम पर सक्रिय है. उस ने पुर्तगाल यात्रा के दौरान अपनी पत्नी के साथ एक तसवीर पोस्ट की है.’’

‘‘जी सर, मैं ने वह तसवीर देखी है. उस में उस ने लिखा है— हमेशा एक साथ! विदाई, मेरे प्यार!’’ महिला सहकर्मी तपाक से बोल पड़ी.

‘‘तुम उस पर नजर रखो. उस के डेटा का कलेक्शन करो. हर तरह की डिटेल्स जुटाओ… जैसे उन के आपसी संबंध, शादीब्याह, अफेयर, डेटिंग, चैटिंग, डिनर, साथसाथ ट्रैवलिंग, फैमिली बैकग्राउंड, हौबी, उन के फ्रैंड सर्कल, प्रोफेशन इत्यादिइत्यादि. इंस्टाग्राम के अतिरिक्त दूसरे सोशल साइट्स और डेटिंग ऐप को भी खंगालो.’’

जांच दल की महिला सहकर्मी के द्वारा हेलीकौप्टर पायलट बाबिस और कैरोलिन के बारे में जुटाई गई जानकारी के बाद पता चला कि कैरोलिन क्राउच और बाबिस का प्रेम विवाह हुआ था. उन की शादी जुलाई, 2019 में अलगार्वे में हुई थी. सोशल साइट पर उस की शादी की कई यादगार तसवीरें देखने को मिलीं. उन में एक मार्मिक तसवीर उस की शादी के लिए तैयार होने की है, जिस में उस के बाल और मेकअप 2 स्थानीय स्टाइलिस्टों द्वारा किया गया था. इस तसवीर को उतारने वाले फोटोग्राफर को जब कैरोलिन की हत्या की जानकारी मिली तो वह स्तब्ध हो गया था, क्योंकि उसे मिला वह पहला असाइनमेंट था.

कैरोलिन जब 15 साल की थी, तभी उस की मुलाकात बाबिस से हुई थी. उन के बीच प्यार हो गया. उन की शादी एथेंस के उसी अपमार्केट इलाके में हुई थी, जहां कैरोलिन मृत पाई गई. शादी के समय वह 18 साल की थी. बाबिस के मातापिता एथेंस में रहते हैं, जबकि कैरोलिन के मातापिता एलोनिसोस द्वीप पर वहां से 6 घंटे की दूरी पर रहते हैं. हालांकि कैरोलिन का जन्म यूके में हुआ था, जिस से वह ब्रिटिश नागरिक बन गई थी. शादी के बाद वह अपने पति और बच्ची के साथ ग्लाइका नेरा में रह रही थी. इसी तरह से पुलिस ने उन के बारे में कई जानकारियां जुटाईं, जिन में कैरोलिन द्वारा लिखी गई डायरी भी थी. डायरी में उस ने अपने से करीब दोगुनी उम्र के पति के साथ संबंधों की अंतरंगता के बारे में लिखा था.

कैरोलिन की हत्या की जांच ग्रीक पुलिस ने नए सिरे से शुरू की. उन्होंने तमाम तकनीकी उपकरणों को अपने कब्जे में ले लिया और उन में दर्ज डेटा का विश्लेषण किया. इसी क्रम में पुलिस अधिकारी को वह सुराग मिल गया, जिस की उन्हें तलाश थी. वह सुराग कैरोलिन के स्मार्टवाच में छिपा था.  खास तरह की उस बायोमैट्रिक घड़ी में उन की मौत का दिन और उन की नाड़ी के जीवित रहने तक चलने की रीडिंग दर्ज थी. उस के साथ बाबिस के मोबाइल की काल डिटेल्स आदि का मिलान किया गया. इस काम के लिए पुलिस ने गूगल के सर्विलांस सिस्टम का उपयोग किया.

इस तरह से की गई तकनीकी जांच में संदिग्ध के तौर पर कैरोलिन के पति बाबिस के होने का शक पुख्ता हो गया. बाबिस ने भले ही कहा कि उसे लुटेरों ने बांध दिया था, लेकिन जांच में इस बात का पुष्टि हो गई कि उस दौरान उस का फोन इस्तेमाल में था. उस का डेटा उस की पत्नी के स्मार्टवाच के डेटा से मेल नहीं खा रहा था. कैरोलिन की स्मार्टवाच से पता चला कि कैरोलिन का दिल उस वक्त भी धड़क रहा था, जिस वक्त उस के पति द्वारा हत्या किए जाने का दावा किया गया था. उस के फोन पर गतिविधि ट्रैकर ने उसे घर के चारों ओर घूमते हुए दिखाया, जबकि उस ने कहा कि वह बंधा हुआ था. इस तरह से रिकौर्ड किए गए समय, जिस पर घर के सीसीटीवी कैमरे से डेटा कार्ड निकाल लिए गए थे, से घटना की अलग ही कहानी सामने आई.

बाबिस ने पुलिस को बताया था कि 11 मई, 2021 की सुबह 5 बजे के आसपास लुटेरों ने उस के घर में दरवाजा तोड़ कर प्रवेश किया और उस के साथ कैरोलिन को बांध दिया. घर में लूटपाट की और कैरोलिन की गला घोंट कर हत्या कर दी. सुबह 6 बजे पुलिस को बुलाने पर लुटेरे भाग गए. दिल की धड़कनें घड़ी में हुईं कैद इस के विपरीत जांच में पाया गया कि आधी रात को 12 बज कर 35 मिनट पर दंपति की ग्राउंड फ्लोर पर लगी सीसीटीवी कैमरे ने आखिरी तसवीर उतारी थी. उस में बाबिस सोफे पर बैठा दिखा था. उस की गोद में बेटी बैठी थी, उस के हाथ में फोन था. उस समय उस की कैरोलिन से बातचीत चल रही थी, जो किसी बात को ले कर कड़वी बहस में बदल गई थी.

रात 1.20 बजे कैमरे की डिवाइस में स्टोर डेटा के अनुसार उस में से मेमोरी कार्ड हटा दिया गया था. पुलिस का कहना है कि ऐसा कैरोलिन द्वारा स्टूपिड कहने के बाद किया गया. पुलिस ने पाया कि मेमोरी कार्ड को आधा काट कर शौचालय में बहा दिया गया था. इसे अधिकारी ने पूर्वनियोजित हत्या की योजना बताया. रात 12.35 बजे से सुबह 4 बजे तक बाबिस और कैरोलिन के बीच टेक्स्ट मैसेज के साथ बहस होती रही. उस दौरान कैरोलिन ने अपने एक दोस्त को भी मैसेज किया, जिस में उस ने लिखा कि वह अपने पति को छोड़ रही है और अभी रात में ही घर से किसी होटल में चली जाएगी. उसी बहस में बात इतनी बिगड़ गई कि कैरोलिन ने बाबिस से तलाक लेने तक के लिए कह दिया.

कैरोलिन की कलाई से जुड़े फिटनैस ट्रैकर से पुलिस को पता लग गया कि उस दिन सुबह 4 बजे कैरोलिन के दिल की धड़कनें बढ़ गई थीं. अचानक दिल की बदली हुई गतिविधि से पता चला कि इस से दंपति के बीच लड़ाई बढ़ गई थी. बाबिस ने इस बारे में पूछने पर बताया कि कैरोलिन ने उसे मारा, जिस से उसे भी उस पर गुस्सा आ गया और उसे बिस्तर पर धकेल दिया. उस के बाद उस ने तकिए से चेहरा दबा दिया. कैरोलिन के फिटनैस ट्रैकर से ही पता चला कि 4.11 बजे उस के दिल की धड़कनें रुक गईं. उस समय वह मर चुकी थी. पुलिस जांच में पता चला कि बाबिस ने उस के मुंह में रुई भर दी थी और फिर उस का गला घोंट दिया था.

इस के बाद बाबिस ने ठंडे दिमाग से हत्या को नाटकीय रूप देने की योजना बनाई. पुलिस जांच के अनुसार, उस ने खिड़की के नीचे की कुंडी तोड़ी और अलमारी में थोड़ी तोड़फोड़ की. घर में लूटपाट का सीन बनाया. इसी तरह से उस ने अपने पालतू कुत्ते को मार कर सीढ़ी के डब्बे में लटका दिया. उसे दिखा कर ही पुलिस को बताया लुटेरों ने उसे रास्ते में ही मार डाला होगा. फिर उस ने अपनी आंखों पर पट्टी बांध ली और खुद को बिस्तर से बांध लिया. उस के बाद पड़ोसी को फोन कर लुटेरों के बारे में बताया.  इस डेटा ट्रेल के आगे बाबिस की एक नहीं चली. हालांकि उसे दबोचने में भी पुलिस को काफी मशक्कत करनी पड़ी. कारण जब तक पुलिस को उस के आरोपी होने का प्रमाण मिला था, तब तक वह दूसरे देश में जा छिपा था. इस तरह से स्मार्टवाच ने कैरोलिन के अंतिम क्षण की जानकारी दे कर इस केस को खोलने में मदद की.

बाद में पुलिस ने बाबिस को गिरफ्तार करने में सफलता हासिल कर ली. उसे ग्रीक की बड़ी जेल कोरयाडालोस में रखा गया. उस की गिरफ्तारी एक बहुचर्चित घटना थी. मीडिया जगत से ले कर सोशल एक्टिविस्टों में उन की घोर निंदा हुई. सामाजिक संस्थाओं ने उसे सख्त सजा देने की मांग के साथ प्रदर्शन किए. पुलिस के सामने बाबिस को जेल से कोर्ट तक ले जाने की समस्या थी. इस की वजह यह थी कि प्रदर्शनकारी बाबिस को अपने हाथों से सजा देने की मांग कर रहे थे. रास्ते में बाबिस की जान को खतरा भी था, इसलिए भारी पुलिस सुरक्षा के बीच बाबिस को बुलेटपू्रफ जैकेट पहना कर जेल ले जाया गया और जज के सामने पेश किया.

वकीलों की शुरू हुई बहस में वह जल्द ही टूट गया और उस ने अपना जुर्म कुबूल कर लिया. उस ने 17 जून, 2021 को अपनी पत्नी को गला घोंट कर मारने की बात स्वीकार कर ली. साथ ही भावुकता के साथ कहा कि वह उस दौर के 6 मिनट का समय कभी नहीं भूल सकता है. क्योंकि पत्नी का गला घोंटते वक्त उस की बेटी लिडिया का चेहरा उस के सामने ही था. हालांकि उस ने हत्या का नाटक रचने के बारे में बताया कि ऐसा उस ने इसलिए किया, क्योंकि वह जेल नहीं जाना चाहता था और अपनी बेटी की परवरिश करना चाहता था. पूछताछ में बाबिस ने अपने पालतू कुत्ते का गला घोंटने की भी बात स्वीकार ली. उस ने कहा कि उस ने ऐसा बनावटी घटना को प्रभावशाली दिखाने के लिए किया.

हैलीकौप्टर पायलट बाबिस एनाग्नोस्टोपोलोस के अपना जुर्म स्वीकार करने के बाद अदालत ने 17 जून, 2021 को उसे कैरोलिन क्राउच और पालतू कुत्ते की हत्या का दोषी ठहराते हुए 15 साल जेल की सजा सुनाई. खूबसूरत पत्नी की हत्या के बाद बाबिस को अब पछतावा हो रहा है, जबकि उस की बेटी लिडिया के पालनपोषण की जिम्मेदारी कैरोलिन क्राउच के ब्रिटिश पिता ने उठा ली है. हालांकि बाबिस चाहता है कि सजा काटने के बाद वही अपनी बेटी की देखभाल करे, लेकिन लिडिया के नानानानी नहीं चाहते कि वह अपनी ही मां के हत्यारे पिता की बेटी कहलाए.

 

Crime Story in Hindi : ऊधम सिंह नगर में धंधा पुराना लेकिन तरीके नए

Crime Story in Hindi : देशदुनिया की शायद ही कोई औरत हो, जो अपनी इच्छा से देहव्यापार को पेशा बनाना चाहती है. किसी भी स्त्री की देह वह बेशकीमती दौलत है, जिस का मूल्यांकन नहीं किया जा सकता, फिर भी इस की बोली लगाने वाले बाजारों की कमी नहीं है. ऐसा ही उत्तराखंड के काशीपुर में एक बाजार है, जो राजारजवाड़ों के जमाने से काफी विख्यात रहा है.

सदियों पहले उस दौर की बात है, जब देश में राजेरजवाड़ों का अपना साम्राज्य हुआ करता था. समूचे इलाके में उन की तूती बोलती थी. उन के मनोरंजन के 2 ही मुख्य साधन हुआ करते थे. एक, जंगली जानवरों का शिकार करना और दूसरा, सुंदर स्त्री की लुभावनी अदाओं के नाचगाने का आनंद उठाने के अलावा यौनाचार में लिप्त हो जाना. ऐसा ही कुछ आज के उत्तराखंड स्थित ऊधमसिंह नगर के काशीपुर में था. तब काशीपुर के कई मोहल्ले तो इस के लिए दूरदूर तक विख्यात थे. उस मोहल्ले की मुख्य सड़क के दोनों ओर वेश्याएं रहती थीं.

देह व्यापार में लिप्त ऐसी औरतें अब वैश्या कहलाना पसंद नहीं करतीं, उन्हें सैक्स वर्कर कहा जाता है. यहां पर कई छोटेबड़े नगरों के लोग अपनी कामपिपासा शांत करने आते थे. बाद में ऐसी औरतों की संख्या बढ़ने पर उन के धंधे को जबरन बंद करवाना पड़ा. सामाजिक दबाव और प्रशासन की सख्ती के आगे इन वेश्याओं को नगर छोड़ कर जाने पर मजबूर होना पड़ा था. उस के बाद उन्होंने मेरठ शहर के लिए पलायन कर लिया था. उन्हीं में कुछ वेश्याएं ऐसी भी थीं, जिन्होंने नगर के आसपास रह कर गुप्तरूप से चोरीछिपे धंधे में लिप्त रहीं. वही सिलसिला बदस्तूर आज भी जारी है.

पुलिस समयसमय पर उन के ठिकानों पर छापामारी करती रहती है. उन्हें हिरासत में ले कर नारी सुधार गृह या जेल भेज दिया जाता है. बात 30 जुलाई की है. पुलिस को जानकारी मिली थी कि काशीपुर के ढकिया गुलाबो मोहल्ले का एक दोमंजिला मकान काफी समय से देह व्यापार का ठिकाना बना हुआ है. इस जानकारी को ध्यान में रखते हुए सीओ अक्षय प्रह्लाद कोंडे के निर्देश पर एक पुलिस टीम गठित की गई. टीम में महिला इंसपेक्टर धना देवी, कोतवाली एसएसआई देवेंद्र गौरव, टांडा चौकी इंचार्ज जितेंद्र कुमार, कांस्टेबल भूपेंद्र जीना, देवानंद, कांस्टेबल गिरीश कांडपाल, दीपक, मुकेश कुमार शामिल थे.

पुलिस टीम ने काफी सावधानी से छापेमारी को अंजाम दिया. सभी पुलिसकर्मी सादे कपड़ों में थे. छापेमारी में उन्हें बताए गए ठिकाने से 4 महिलाएं और 2 पुरुषों को धर दबोचने में सफलता मिली. वे मकान के अलगअलग कमरों में आपत्तिजनक स्थिति में पाए गए थे. देह व्यापार मामले में आरोपी को रंगेहाथों पकड़ना जरूरी होता है. वरना वे संदेह के आधार पर आसानी से छूट जाते हैं. इस छापेमारी में देहव्यापार की सरगना फरार हो गई. पकड़े गए आरोपियों को पूछताछ के बाद जेल भेज दिया गया. वैसे काशीपुर में इस तरह की छापेमारी पहली बार नहीं हुई थी. पहले भी कई बार इलाके में देह व्यापार के ठिकानों पर छापेमारी हो चुकी थी. देह के गंदे धंधे में लगे लोग हमेशा अड्डा बदलते रहते हैं.

देह व्यापार के धंधे में आधुनिकता और बदलाव कई रूपों में सामने आया है, जिस का एक मामला हल्द्वानी पुलिस के सामने 3 अगस्त को आया. पुलिस को सूचना मिली कि हाइडिल गेट स्थित स्पा सेंटर में काफी समय से देह व्यापार का खुला खेल चल रहा है. इस सूचना के आधार पर हल्द्वानी सीओ शांतनु पराशर ने एंटी ह्यूमन ट्रैफिकिंग यूनिट की टीम को साथ ले कर स्पा सेंटर पर छापा मारा. छापेमारी के दौरान एक युवक को युवती के साथ आपत्तिजनक स्थिति में पकड़ा गया. स्पा सेंटर में पुलिस की रेड पड़ते ही हलचल मच गई. सेंटर की संचालिका दिल्ली निवासी सुमन और स्वाति वर्मा फरार हो गईं. जबकि सेंटर के मैनेजर पश्चिम बंगाल के वरुणपारा वारूईपुरा, निवासी नादिया पकड़े गए.

छापेमारी के दौरान स्पा सेंटर से देह व्यापार से संबंधित कई आपत्तिजनक वस्तुएं भी बरामद हुईं. यहां तक कि उस के बेसमेंट से 9 लड़कियां निकाली गईं. उन में 2 उत्तर प्रदेश, एक मध्य प्रदेश, एक मणिपुर, 2 पश्चिम बंगाल और 3 हरियाणा की थीं. पकड़ा गया युवक आशीष उनियाल काठगोदाम का रहने वाला निकला. वह एक निजी कंपनी में काम करता था. स्पा सेंटर में सुनियोजित तरीके से देह व्यापार का धंधा चलाया जा रहा था. धंधेबाजों ने बड़े पैमाने पर मसाज की आड़ में यौनाचार के सारे इंतजाम कर रखे थे. वहां से पकड़ी गई सभी युवतियों के रहने की व्यवस्था सेंटर के बेसमेंट में की गई थी. उन के खानेपीने की पूरी सुविधाएं वहीं की गई थीं.

ग्राहक को स्पा सेंटर आने से पहले ही वाट्सऐप पर युवती की फोटो दिखा कर उस का सौदा कर लिया जाता था. ग्राहक को युवतियों के टाइम के हिसाब से अपौइंटमेंट तय किया जाता था. स्पा सेंटर आते ही ग्राहक को रिसैप्शन पर बाकायदा बिल चुकाना होता था, जो स्पा से संबंधित होते थे. उस के बाद उसे कमरे में बने केबिन में जाने की इजाजत मिलती थी. अपने फिक्स टाइम पर ग्राहक स्पा सेंटर पहुंच जाता था. उन्हें स्पीकर पर आवाज लगाई जाती थी. उस के साथ फिक्स युवती को इस की सूचना पहले होती थी और कुछ समय में ही अपने ग्राहक के पास चली जाती थी. एक युवती को एक दिन में 3 सर्विस देनी होती थी.

सेंटर में आने वाले ग्राहकों का कोई आंकड़ा मौजूद नहीं था. जबकि उन की बिलिंग होती थी. उसे किसी रजिस्टर में दर्ज नहीं किया जाता था. फिर भी पुलिस ने जांच में पता लगाया कि सेंटर को प्रतिदिन 50 हजार की कमाई होती थी. स्पा सेंटर से बरामद सभी युवतियों ने स्वीकार किया कि वे किसी न किसी मजबूरी की वजह से मसाज की आड़ में देह बेचने का काम करती हैं. इसी के साथ उन्होंने सेंटर के मालिक पर आरोप भी लगाया कि उन्हें बहुत कम पैसा मिलने के कारण मजबूरी के चलते बेसमेंट में रहना होता है, जहां काफी मुश्किल होती है. पुलिस पूछताछ के बाद सीओ के निर्देश पर सभी युवतियों को मुखानी स्थित वन स्टौप सेंटर में भेज दिया गया. उसी दौरान 7 अगस्त, 2021 को पुलिस को पता चला कि स्पा सेंटर की आड़ में कई जगहों पर देह व्यापार चल रहा है.

इस सूचना के आधार पर एंटी ह्यूमन ट्रैफिकिंग यूनिट प्रभारी ने सीओ अमित कुमार के साथ मीटिंग कर इस अपराध को जड़ से मिटाने का निर्णय लिया. इस की जानकारी एसएसपी दलीप सिंह को दे कर अनुमति मांगी गई. अनुमति मिलते ही अमित कुमार ने ठोस कदम उठाए. उस योजना को अंजाम देने के लिए पुलिस ने नगर में चल रहे स्पा सेंटरों पर मुखबिरों का जाल बिछा दिया. पुलिस को जहां से भी जानकारी मिलती, वहां तुरंत छापेमारी की जाने लगी. इस सिलसिले में मैट्रोपोलिस सिटी बिग बाजार स्थित सेवेन स्काई स्पा सेंटर में कुछ संदिग्ध युवकयुवतियां दबोचे गए. एक कमरे के केबिन से 2 युवकों को 3 युवतियों के साथ, जबकि दूसरे कमरे में बने केबिनों में 2-2 युवकयुवतियां मसाज में तल्लीन पकड़े जाने पर दबोचा गया. सभी अर्धनग्नावस्था में थे.

सेंटर की गहन छानबीन में प्रयोग किए गए और नए महंगे कंडोम बरामद हुए. रिसैप्शन काउंटर से भी कंडोम बरामद किए गए. कस्टमर एंट्री रजिस्टर से पुलिस को ग्राहकों के एंट्री की तारीख और समय का पता चला. सेंटर की संचालिका सोनू थी. उस ने पुलिस को पूछताछ में बताया कि स्पा सेंटर का मालिक हरमिंदर सिंह हैं, उन के निर्देश पर ही सेंटर में सब कुछ होता रहा है. सेंटर से बरामद 5 युवतियों ने स्वीकार किया कि उन्हें एक ग्राहक के साथ हमबिस्तर होने पर 500 रुपए मिलते थे. इस मामले को पंतनगर थाने में दर्ज किया गया. गिरफ्तार युवकयुवतियों और सेंटर के मालिक हरमिंदर सिंह के खिलाफ रिपोर्ट लिख ली गई. बिलासपुर जिला रामपुर निवासी हरमिंदर सिंह फरार था.

पुलिस उस की तलाश में लगा दी गई थी. इसी तरह ऊधमसिंह नगर में चल रहे स्पा सेंटर पर भी 13 अगस्त को छापेमारी की गई. उस के बाद वहां बसंती आर्या ने सभी स्पा सेंटरों व होटल मालिकों को आवश्यक दिशानिर्देश जारी किए. उन से कहा गया कि सभी ठहरने वाले ग्राहकों के आईडी की फोटो कौपी रखें और उन के नाम व पते रिसैप्शन सेंटर पर जरूर दर्ज करें. साथ ही होटल में सभी जगह पर सीसीटीवी कैमरे चालू हालत में रखने अनिवार्य कर दिए गए. कहते हैं, जहां चाह वहां राह, तो इस धंधे को स्मार्टफोन से नई राह मिल गई है. देह व्यापार में लिप्त काशीपुर की सैक्स वर्करों ने स्मार्टफोन को ग्राहक तलाशने का जरिया बना लिया है. पुरुष भी धंधेबाज औरतों की तलाश आसानी से करने लगे हैं.

देह व्यापार में लिप्त महिलाएं मोबाइल पर चंद अश्लील बातें कर अपने ग्राहकों को फंसा लेती हैं. पैसे का लेनदेन भी उसी के जरिए हो जाता है. वाट्सऐप और वीडियो कालिंग तो इस धंधे के लिए वरदान साबित हो रहा है. इस पर वे अपनी अश्लील फोटो या वीडियो भेज कर उन को लुभा लेती हैं. फिर वह ग्राहक की सुविधानुसार कुछ समय के लिए किराए पर ले रखे कमरे पर ही उसे बुला लेती हैं या उस के बताए ठिकाने पर पहुंच जाती हैं. जो महिलाएं कल तक मंडी से जुड़ी हुई थीं, वे अब इसी तरीके से अपना धंधा चला रही हैं, यही उन की रोजीरोटी का साधन बन चुका है.

जांच में यह भी पता चला कि काशीपुर में कुछ ऐसी बस्तियां हैं, जहां पर कई औरतें अपना धंधा चला कर मोटी कमाई कर रही हैं. उन में कुछ औरतें अधेड़ उम्र की हैं, वे  नई लड़कियों के लिए ग्राहक ढूंढने के साथसाथ उन की सुरक्षा की जिम्मेदारी भी निभाती हैं. ऐसी औरतें ही किराए का मकान या कमरा ले कर रखती हैं. उन में वह खुद रहती हैं. किसी ग्राहक की मांग आते ही वह उन से सौदा तय कर आगे के काम में लग जाती हैं. उन्हें थोड़े समय के लिए अपना घर उपलब्ध करवा देती हैं. ग्राहक को 15 मिनट से ले कर आधे घंटे तक का समय मिलता है. इसी समय के लिए 300 से 500 रुपए वसूले जाते हैं.  इस आय में आधा हिस्सा लड़की को मिलता है. कभीकभी लड़की को ज्यादा भी मिलता है.

यह ग्राहक की संतुष्टि और उस से मिलने वाले अतिरिक्त बख्शीश पर निर्भर करता है. इस गिरोह में घरेलू किस्म की औरतें, स्टूडेंट या पति से प्रताडि़त या उपेक्षित सफेदपोश संभ्रांत किस्म की महिलाएं शामिल होती हैं, जिन के बारे में कोई सोच भी नहीं सकता कि उस पर भी गंदे धंधे के दाग लगे हुए हैं. उन की पब्लिसिटी पोर्न वेबसाइटों के जरिए भी होती रहती है. इस तरह के देह व्यापार का धंधा काशीपुर ही नहीं, बल्कि पूरे उत्तराखंड में अपने पैर पसारता जा रहा है. बताते हैं कि यहां लड़कियां तस्करी के माध्यम से उपलब्ध करवाई जाती हैं, जिन में अधिकतर मजबूर महिलाएं और युवतियां ही होती हैं.

इसी साल जुलाई माह की भी ऐसी एक घटना 21 तारीख को रुद्रपुर में सामने आई. एंटी ह्यूमन टै्रफिकिंग यूनिट के प्रभारी को ट्रांजिट कैंप गंगापुर रोड के पास मोदी मैदान में खड़ी एक संदिग्ध कार के बारे में सूचना मिली. मुखबिर ने एक कार यूके06एए3844 में कुछ पुरुष और महिलाओं के द्वारा अश्लील हरकतें करने की जानकारी दी. इस सूचना पर काररवाई करते हुए इंसपेक्टर बसंती आर्या अपनी टीम के साथ मौके पर पहुंचीं. अपनी टीम के साथ चारों तरफ से कार को घेरते हुए उस कार से 3 लोगों को पकड़ा गया. उन में एक आदमी और 2 औरतें थीं. जब वे पकड़े गए, तब उन की हरकतें बेहद आपत्तिजनक थीं. तीनों को अपनी कस्टडी में ले कर पूछताछ के लिए थाने लाया गया.

आदमी की पहचान उत्तर प्रदेश में बरेली जिले के बहेड़ी थाना के रहने वाले 29 वर्षीय भगवान दास उर्फ अर्जुन के रूप में हुई. महिला की पहचान 32 वर्षीया भारती के रूप में हुई. उस ने बताया कि वह उत्तर प्रदेश में रामपुर जिले के अंतर्गत दिनकरी की रहने वाली है, लेकिन अब वह ऊधमसिंह नगर जिला में  सिडकुल ढाल ट्रांजिट कैंप में रहती है. इसी तरह से दूसरी 21 वर्षीया युवती ने अपना नाम पूजा यादव बताया. उस ने कहा कि उस का पति उत्तर प्रदेश में बाराबंकी जिले के गांव सनसडा में रहता है. तीनों से गहन पूछताछ के बाद उन की तलाशी ली गई. तलाशी में उन के पास से 2 स्मार्टफोन बरामद हुए. मोबाइलों में तमाम अश्लील फोटो, वीडियो के साथ ही अनेक अश्लील मैसेज भी भरे हुए थे.

उन्हीं मैसेज से मालूम हुआ कि ये दोनों महिलाएं एक रात के 1000 से 1500 रुपए लेकर ग्राहकों की रातें रंगीन करती थीं. उन के साथ पकड़ा गया भगवान दास का काम ग्राहक तलाशना होता था. वह उन्हें ग्राहकों तक पहुंचाने का काम करता था. बदले में 500 रुपए वसूलता था. दास ने बताया कि वह ग्राहक की जानकारी होटलों में ठहरने वालों से जुटाता था. इस के लिए अपने संपर्क में आई युवतियों को किसी एकांत जगह पर कार में बैठा कर रखता था और फिर वहीं से ग्राहकों के फोन का इंतजार करता था. जैसे ही किसी ग्राहक का फोन आता वह 10 से 15 मिनट में उस के बताए स्थान पर लड़की को पहुंचा देता था.

तीनों 21 जुलाई को ग्राहक का फोन आने का ही इंतजार कर रहे थे. उन की कोई सूचना नहीं मिल पाने के कारण वे आपस में ही हंसीमजाक करते हुए टाइमपास कर रहे थे. ऐसा करते हुए वे बीचबीच में अश्लील हरकतें भी करने लगे थे. उस दिन भगवान दास ने दोनों को 1500-1500 रुपयों में तय किया था. लेकिन जब काफी समय गुजर जाने के बाद भी उसे कोई ग्राहक नहीं आया था. पुलिस मुखबिर की निगाह उन पर गई और उन्होंने पुलिस को इस की सूचना दे दी. पूछताछ में भगवान दास ने कई मोबाइल नंबर दिए, जो देहव्यापार करने वाली महिलाओं के थे.

वे अपनी बुकिंग एक दिन पहले करवा लेती थीं. बुकिंग के आधार पर ही उन्हें होटल या किसी निजी घर पर ले जाया जाता था. उन्हें ले जाने वाला ही उन का सौदा पक्का कर देता था. औनलाइन पेमेंट आने के बाद ही बताए जगह पर पहुंचती थीं. इस मामले को थाना ट्रांजिट कैंप में दर्ज किया गया. पकड़े गए व्यक्तियों पर  सार्वजनिक स्थान पर अश्लील हरकतें कर अनैतिक देह व्यापार करने के संबंध में रिपोर्ट दर्ज की गई. उन पर आईपीसी की धारा 294/34 लगाई गईं. इसी के साथ उन्हें अनैतिक देह व्यापार निवारण अधिनियम की धारा 5/7/8 के तहत काररवाई की गई. Crime Story in Hindi

Social Story in Hindi : होटल बना देह व्यापार का ठिकाना, पुलिस ने किया पर्दाफाश

Social Story in Hindi : कोरोना लौकडाउन के बाद धंधेबाजों ने देह व्यापार के तरीके जरूर बदल दिए हैं, लेकिन उन का मकसद एक ही होता है, लड़कियों के साथ एंजौय करना. फरीदाबाद के होटल श्री बालाजी और इंपीरियल पैलेस में पुलिस ने दबिश दे कर करीब 6-7 दरजन युवकयुवतियों को जिस तरह आपत्तिजनक स्थिति में गिरफ्तार किया, उस से यही पता चलता है कि…

कोरोना वायरस का असर कम होते ही देह कारोबार के अड्डे आबाद होने लगे. लोगों का आवागमन शुरू हुआ नहीं कि सेक्स वर्कर लड़कियां, उन के दलाल और मानव तसकरी जैसे धंधे में लगे लोगों की सक्रियता बढ़ गई. दिल्ली से सटे फरीदाबाद में ऐसे मामलों की सूचना मिलते ही पुलिस बल ने भी मुस्तैदी दिखाते हुए देह के धंधेबाजों को धर दबोचा. मौके से महीने भर में दर्जनों लड़कियां भी पकड़ी गईं. फरीदाबाद में नीलम बाटा रोड से करीब 8 किलोमीटर दूर बल्लभगढ़ के रहने वाले 48 वर्षीय आलोक को उन के जन्मदिन के बारे मे खास दोस्त प्रदीप ने याद दिलाया. वे तो भूल ही गए थे कि 4 दिनों बाद उन का जन्मदिन आने वाला है. वह फरीदाबाद के बाटा की मार्किट एसोसिएशन के प्रेसिडेंट (प्रधान) हैं.

अपना रोज का काम निपटा कर 25 जुलाई, 2021 की रात को अपनी गाड़ी में घर की ओर निकले थे. कान में इयरबड्स लगाए म्यूजिक का आनंद ले रहे थे और गाड़ी भी ड्राइव कर रहे थे. तभी उन के कान में किसी के फोन की रिंग सुनाई दी. उन्होंने सामने रखे मोबाइल पर नजर डाली. काल उन के खास दोस्त प्रदीप की थी.

‘‘हैलो भाई, कैसा है तू? 2 हफ्ते हो गए, कोई खबर नहीं मिल रही है. कहां बिजी है आजकल?’’ आलोक शिकायती लहजे में बोले.

‘‘मैं ठीक हूं. बता तू कैसा है? और सुन लौकडाउन खत्म होने के बाद लगता है बिजी मैं नहीं तू हो गया है’’ प्रदीप भी उसी अंदाज में बोले.

‘‘बस कर यार! कुछ दिनों से मार्केट में काम थोड़ा बढ़ गया था, इसीलिए फोन करने का मौका नहीं मिला. तू बता घरपरिवार में बाकि सब कैसे हैं?’’ आलोक ने पूछा.

प्रदीप जवाब देते हुए बोले, ‘‘मैं बिलकुल ठीक हूं. घर पर भी सब ठीक है. तू ये बता कि 29 को क्या कर रहा है?’’

‘‘क्यों 29 को क्या है?’’ प्रदीप ने सस्पेंस के साथ कहा, ‘‘भाई, 29 को तेरा जन्मदिन है. भूल गया है क्या?’’

प्रदीप की बात सुन कर आलोक के दिमाग में अचानक बत्ती जल उठी. उसे अपने जन्मदिन की न केवल तारीख याद आ गई, बल्कि इस मौके पर दोस्तों के साथ मौजमस्ती की पुरानी यादें ताजा हो गईं. बोला, ‘‘अरे हां! भाई सच कहूं तो अगर तू याद नहीं दिलाता तो मुझे याद ही नहीं था. पिछले साल भी कोरोना के चलते इस मौके पर कुछ ज्यादा नहीं कर पाया, लेकिन इस बार सारी कसर निकाल दूंगा. बड़ी पार्टी दूंगा, पार्टी.’’

प्रदीप और आलोक दोनों स्कूल के दिनों के दोस्त थे. वे काफी गहरे दोस्त थे. लेकिन शादी के बाद दोनों अपनीअपनी घरगृहस्थी में व्यस्त हो गए थे. हालांकि उन के बीच फोन पर बातें होती रहती थीं. फिर भी जब कभी वे किसी विशेष मौके पर मिलते थे, तब एकदूसरे की खैरखबर लेने के साथसाथ खूब जम कर मस्ती करते थे. उस रोज भी दोनों ने फोन पर ही जन्मदिन सेलिब्रेशन के मौके को यादगार बनाने की योजना बना ली थी. बाटा टूल मार्केट में आलोक की तूती बोलती थी. हर दुकानदार के लिए वह बहुत ही खास और प्रिय थे. सभी उन की काफी इज्जत करते थे. मार्केट में यदि किसी को कोई भी औजार क्यों न खरीदना हो, प्रधान आलोक के रहते ही संभव हो पाता था.

इलाके के नेताओं से भी आलोक की अच्छी जानपहचान थी. एसोसिएशन का प्रधान होने की वजह से उन का अच्छा खासा पौलिटिकल कनेक्शन भी था. अगले रोज 26 जुलाई को सुबह करीब 10 बाजे आलोक एसोसिएशन के औफिस पहुंच गए. उन्होंने सब से पहले प्रदीप को फोन कर आने का समय पूछा. उस के बाद वे छोटेमोटे काम निपटाने लगे. आधे घंटे में ही प्रदीप आ गया. आलोक ने उस की खातिरदारी चायनमकीन से की. उस के द्वारा जन्मदिन की बात छेड़ने पर कुछ अलग करने की भी योजना बताई.

‘‘रात भर में तूने कुछ और प्लानिंग कर ली क्या?’’ प्रदीप ने उत्सुकता से पूछा.

‘‘हां यार, सोच रहा हूं इस बार की बर्थडे पार्टी यादगार हो, पहले के मुकाबले सब से अलग रहे.’’ आलोक बोले.

यह सुन कर प्रदीप चौंक गया. पूछा, ‘‘क्या मतलब? कैसी अलग होगी पार्टी, जरा मुझे भी तो बताओ’’

आलोक इत्मीनान से दबी आवाज में बोले, ‘‘यार सोच रहा हूं इस बार पार्टी में नाचगाने वाली कुछ लड़कियों को भी बुलाया जाए. उन से ही शराब की पैग सर्व करवाई जाए.’’

‘‘लड़कियां! क्या कह रहा है तू?’’ प्रदीप चौंकता हुआ बोला.

‘‘लड़कियों को बुलाने से पार्टी की रौनक और मजा ही कुछ और होगा. मैं ने प्लानिंग कर ली है. कोरोना के चलते जिंदगी के सारे मजे खत्म से हो गए थे. इसलिए मैं ने सोचा है कि अपने सारे दोस्तों और जिन के साथ बिजनैस करता हूं सभी को इस पार्टी में इनवाइट करूं. इसी बहाने सब से मुलाकात भी हो जाएगी और इसी के साथ बिजनैस में हुए घाटे की भरपाई करने के लिए कुछ टाइम भी मिल जाएगा.’’

यह सुन कर प्रदीप के मन में मानो खुशी के बुलबुले फूटने लगे. वह आलोक से बोला, ‘‘अरे यार, मैं ने तो यह सोचा ही नहीं था. लेकिन पार्टी के लिए आएंगी कहां से? कोई जुगाड़ है?’’

प्रदीप के इस सवाल का जवाब आलोक ने बड़ी बेफिक्री के साथ दिया. भरे अंदाज में दिया और कहा, ‘‘अरे मैं ने सारी प्लानिंग अपने दिमाग में कर के रखी है. दिल्ली वाली निशा के बारे में याद नहीं है क्या तुझे? वही जिस के पास हम शादी के बाद अकसर जाते थे? अब वो लड़कियां सप्लाई करती है. दलाल बन गई है. अच्छी जानपहचान है उस से मेरी. मैं आज ही लड़कियों के लिए फोन कर के कह दूंगा.’’

आलोक और प्रदीप ने औफिस में घंटों बैठ कर 29 जुलाई के लिए प्लानिंग कर ली. नीलम बाटा रोड पर ऐसा कोई भी दुकानदार नहीं था, जो आलोक को नहीं जानता हो. इसी का फायदा उठाते हुए आलोक ने उसी रोड पर मौजूद ‘द अर्बन होटल’ के मालिक को फोन कर 28 और 29 जुलाई के लिए होटल बुक कर लिया. होटल के मालिक की आलोक से अच्छी जानपहचान थी. होटल में कमरे समेत पार्टी के लिए बने खास किस्म के हौल की भी बुकिंग हो गई. अब बारी थी खास दोस्तों के लिस्ट बनाने की, जिन्हें आलोक बुलाना चाहता था. लिस्ट बनाने में प्रदीप ने मदद की. सभी दोस्तों को फोन से 28 जुलाई के लिए मैसेज भी कर दिया.

आलोक ने अपने जरुरी बिजनैस क्लाइंट्स को भी इस पार्टी में शामिल होने का न्यौता दे दिया. उस ने निशा को फोन कर के 15 लड़कियों को पार्टी में भेजने के लिए कहा. इस तैयारी के साथसाथ होटल मैनेजमेंट को ही कैटरिंग के इंतजाम की जिम्मेदारी दे दी. प्रदीप के मन में अभी भी ऊहापोह की स्थिति बनी हुई थी. उस से रहा नहीं गया तो उस ने उस के कान के पास मुंह सटा कर कहा,‘‘इस का मोटा खर्चा तू अकेले कैसे उठाएगा?’

आलोक मुसकराया, सिर्फ इतना ही कहा, ‘‘तू आगेआगे देखता जा मैं क्या करता हूं. इसी पार्टी से तुम्हारी झोली भी भर दूंगा.’’

‘‘वो कैसे?’’ प्रदीप बोला.

‘‘मैं ने कमरे यूं ही नहीं बुक करवाए हैं? तुम सिर्फ मेरे इशारे पर नजर रखना.’’ आलोक ने बताया.

इस तरह से 28 जुलाई की शाम भी आ गई. जन्मदिन की पूर्व संध्या पर मेहमानों के लिए विशेष आयोजन किया गया था. पार्टी का इंतजाम था, जो आधी रात तक चलना था. रात के 12 बजे के बाद आलोक ने जन्मदिन का केक काटने का इंतजाम किया था. आमंत्रित मेहमान धीरेधीरे कर हौल के किनारे लगे सोफों पर आ गए. सभी पूरी तैयारी के साथ आए थे, उन के चेहरे पर मास्क जरूर लगे थे, लेकिन वे पहचाने जा रहे थे. आलोक और प्रदीप दोस्तों से मिलने में व्यस्त हो गए. वे अच्छे सजावटी कपड़े में एकदम अलग दिख रहे थे. वे कभी रिसैप्शन पर जाते तो कभी हौल में आमंत्रित दोस्तों से बातें करने लगते. दूसरी तरफ प्रदीप उन के बताए इशारे पर अपना काम करने में लगा हुआ था.

हौल में जगहजगह गोल टेबल और कुरसियां लगी थीं. दीवारों को तरहतरह के सजावटी फूलों, सामानों से सजाया गया था. मध्यम रोशनी माहौल को खुशनुमा बनाने के लिए काफी था. देखते ही देखते रात के 8 बज गए. तभी एक काल को देख कर आलोक हौल के एक कोने में चले गए. काल निशा की थी. उस ने बताया कि उस की भेजी सभी लड़कियां 2 गाडि़यों में 5 मिनट के भीतर पहुंचने वाली हैं. आलोक ने निशा को कहा कि वे लड़कियों को पीछे के दरवाजे से आने के लिए बोले. तुरंत वे रिसैप्शन पर गए. होटल के मैनेजर से इशारे में बात की और उन के साथ प्रदीप को लगा दिया. थोडी देर में प्रदीप ने आलोक को आ कर बताया कि उस ने सभी लड़कियों को उन के कमरे में ठहरा दिया है.

उस ने वहां के इंतजाम के बारे में जानकारी देने के साथसाथ आलोक को बैग दिखाया. ‘थम्स अप’ करता हुआ जाने लगा. आलोक ने टोका, ‘‘उधर नहीं, गाड़ी के पार्क में जा. बैग वहीं गाड़ी में छोड़ कर आना.’’

निशा ने अपने साथ ले कर आई सभी लड़कियों को कुछ खास हिदायतें दीं. उन्हें उन के कमरे में भेज कर मेकअप आदि कर तैयार होने को कह दिया. कब किसे हौल में आना है और किसे किस कमरे में ठहरना है. इस बारे में निशा ने लड़कियों को अलगअलग समझाया. उन्हें लोगों के साथ शालीनता के साथ पेश आने को भी कहा. साढ़े 9 बजे के आसपास हौल का माहौल और भी रंगीन हो चुका था. कुछ लड़कियां हौल में आ चुकी थीं. अतिथियों में कोई भी महिला नहीं थीं. लड़कियों को देखते ही बड़ेबड़े स्पीकर पर तेज और पार्टी वाले गाने बजने के साथ सीटियों की आवाजें भी सुनाई देने लगीं. हर टेबल पर शराब परोसने की शुरुआत हुई. कुछ लोग नशे में डांसिंग प्लेटफार्म की ओर बढ़ गए.

जल्द ही लड़कियों को जिस काम के लिए बुलाया गया था, वे काम में लग गईं. नशे में चूर अतिथियों ने जिस किसी लड़की को अपनी ओर खींचना चाहा उस ने जरा भी विरोध नहीं किया. पसंद की लड़की का हाथ पकड़ा. जेब से 2000 वाले गुलाबी नोट निकाले और उस के लोकट कपड़े में डाल दिए. लड़की झट से नोट निकालती, अंगुलियों में दबाती और सीढि़यों की ओर बढ़ जाती. पीछे से अतिथि महोदय झूमतेमटकते रह जाते. लड़की सीढि़यों पर बैठी निशा को अंगुलियों में फंसे नोट थमाती और अतिथि के साथ होटल के कमरे की ओर बढ़ जाती. इस दृश्य से इतना तो साफ हो गया था कि जन्मदिन के बहाने से बुलाए गए अतिथियों का स्वागत लड़कियों के साथ यौन संतुष्टि से किया जा रहा था. इस मौके के इंतजार में न केवल ग्राहक बने अतिथि थे, बल्कि वे लड़कियां भी थीं, जिन का धंधा पिछले कुछ समय से मंदा पड़ गया था.

इस पूरी पार्टी में आलोक और प्रदीप दोनों कहां गायब हो गए थे किसी को भी कोई खबर नहीं थी. संभवत: दोनों ने अपनी पसंद की लड़की के साथ अलगअगल कमरे में खुद को बंद कर लिया हो. यानी देह व्यापार का धंधा पूरे शबाब पर था. इस की भनक फरीदाबाद में पुलिस को भी लग गई. अनलौक के नियमों के उल्लंघन करने वालों पर नजर रखने के लिए कोतवाली पुलिस स्टेशन द्वारा फैलाए गए मुखबिरों ने इस की सूचना अधिकारियों तक पहुंचा दी थी. रात के करीब एक बजे अश्लील पार्टी के बारे में जानकारी मिलते ही थानाप्रभारी अर्जुन राठी ने एसीपी रमेशचंद्र को सूचना दे कर बिना किसी देरी के जल्द से जल्द होटल में रेड मारने की तैयारी कर दी. सभी आरोपियों को रंगे हाथों पकड़ने के लिए थाने में एक टीम का गठन किया.

जल्द से जल्द प्लान के मुताबिक टीम बिना सादा कपड़ों में होटल के बाहर पहुंची. होटल के बाहर से ही तेज गानों की आवाज आ रही थी. प्लानिंग के मुताबिक थानाप्रभारी अर्जुन राठी ने हैडकांस्टेबल मनोज के साथ एक और कांस्टेबल को सादे कपड़ों में होटल के अंदर जाने को कहा. उन के अंदर जाने से पहले राठी ने अपनी जेब से 2000 का नोट निकाला और नोट के एक किनारे पर छोटे अक्षरों में अपने हस्ताक्षर कर के उन्हें दिया. यह सारा काम प्लान के अनुसार ही था. वे दोनों पुलिस कर्मचारी बिना किसी झिझक के होटल के अंदर पहुंचे. होटल के रिसेप्शन पर बैठे व्यक्ति को उन पर किसी तरह का शक नहीं हुआ. वे दोनों सीधे होटल के हौल में जा पहुंचे.

सीढि़यों से उतरते हुए उन्होंने एक युवती को सीढि़यों के पास बैठे देखा. बाद में पता चला कि वह निशा थी. वह भी उस की बगल से एक खाली टेबल और कुरसियों पर जा कर बैठ गए. उस समय हौल में बहुत कम लोग थे. हर टेबल पर शराब के ग्लास थे. प्लेटों में स्नैक्स बिखरे पडे़ थे. हौल के एक किनारे पर 2-4 लड़कियां आपस में बातें कर रही थीं, कुछ लोग डीजे पर बजते हुए गाने पर डांस कर रहे थे. थोड़ी देर बाद हैडकांस्टेबल मनोज ने प्लान के अनुसार साइन किया हुआ 2000 का नोट हवा में लहराया तो लड़कियों के झुंड में से एक लड़की पैसे लेने के लिए उन के टेबल पर पहुंच गई.

मनोज ने इशारे से लड़की को कमरे में ले जाने का इशारा किया. लड़की ने भी इशारे से उन्हें रुकने को कहा और निशा के पास चली गई. साइन किया हुआ नोट उस ने निशा के हाथों में थमा दिया, फिर लड़की ने मनोज को वहीं से आने का इशारा किया. हेड कांस्टेबल ने कान में लगे ब्लूटूथ संचालित बड्स और बटन में छिपे मोबाइल माइक को औन कर दिया. उस के औन होते ही बाहर खड़ी पुलिस फोर्स को सूचना मिल गई. देखते ही देखते हेड कांस्टेबल के लड़की के साथ कमरे तक पहुंचने से पहले ही पुलिस की छापेमारी शुरू हो गई. थानाप्रभारी अर्जुन राठी ने होटल में रेड के दौरान सब से पहले हौल में बजने वाले तेज गानों को बंद करवाया और वहां मौजूद सभी लोगों को हिरासत में ले लिया. उसी दौरान होटल के कमरों से कई लड़कियां और अतिथि अर्धनग्नावस्था में दबोच लिए गए.

रात के 12 बजे तक चली छापेमारी की इस काररवाई में करीब 4 दरजन लोगों को हिरासत में लिया गया.  उन्हें 7 जिप्सियों में भर कर थाने लाया गया. उन से पूछताछ में ही खुलासा हुआ कि यह सैक्स रैकेट एक पार्टी में शमिल होने के नाम पर चलाया गया था. इस में होटल के मालिक की भी मिलीभगत थी. पुलिस ने उसे भी गिरफ्तार कर लिया.  पुलिस की रेड की बात जब तक आलोक तक पहुंची तब तक काफी देर हो चुकी थी. उसे भी एक कमरे से एक लड़की के साथ पकड़ लिया गया. उसे कमरे का दरवाजा तोड़ कर बाहर निकाला गया था. प्रदीप भी उस के बगल वाले कमरे से पकड़ा गया. पुलिस सभी आरोपियों को थाने ले गई. उन्होंने पुलिस को बताया कि वह होटल में कमेटी के ड्रा का आयोजन कर रहे थे. सभी से पूछताछ के बाद उन्हें कोर्ट में पेश कर जेल भेज दिया गया.

इस के अलावा कोतवाली पुलिस ने 2 अगस्त को क्षेत्र के ही श्री बालाजी होटल में दबिश दे कर 13 लड़कियों सहित 37 लोगों को गिरफ्तार किया. यहां की गेट टुगेदर पार्टी के बहाने एंजौय का कार्यक्रम था. Social Story in Hindi

 

 

Crime News Hindi : बेवफाई का बदनाम वीडियो

Crime News Hindi : इंट्रो : सोनू जिस तरह अंतरंग क्षण के वीडियो से अपनी प्रेमिका मधु को ब्लैकमेल कर रहा था, उस से वह बहुत परेशान हो गई थी. बेवफा प्रेमी से उस ने जिस तरीके से बदला लिया, ऐसा शायद किसी ने सोचा तक नही होगा. अनैतिक यौन संबंध बनाने की मनमरजी करने वाले प्रेमियों के लिए यह एक सबक

‘‘ देरी के लिए क्षमा चाहता हूं सर… कोरोना कर्फ्यू की चेकिंग पर बस पांच मिनट में निकलता हूं …. दोनों कास्टेबल लंच खत्म करने ही वाले हैं…. लेडी कांस्टेबल कोरोना सेफ्टी किट पहनने गई है…‘‘टीआई ने एसडीपीओ को बताया.

‘‘…ठीक है, जल्दी करो…. और हां, सुनो…’ एसडीपीओ साहब ने जबलपुर के थाना खितौली के टीआई से कहा.

‘‘ जी सर…’’ उसी समय टीआई के फोन पर कोई दूसरी काल आ रही थी.उन्होंने अपने अधिकारी से विनम्र अनुरोध करते हुए कहा, ‘‘सर! प्लीज, एक मिनट होल्ड करें, एक अनजान काल आ रही है… लगता है कोई मुसीबत में है. उस की बारबार काल आ रही है ?’’ कहते हुए टीआई जगोतिन मसराम ने उन का फोन होल्ड कर दिया. वह दूसरी काल रिसीव करते हुए बोले, ‘‘हैलो, कौन बोल रहे हैं? बताएं क्या समस्या है?’’

‘‘ सर…सर! जंगल में लाश पड़ी है…जल्दी आ जाइए.’’ काल करने वाले ने बताया.

‘‘ कहां…? किस जंगल में ? ’’ टीआई ने उस से पूछा.

‘‘ ह…ह….हरग? जंगल में सर! ’’ हड़बड़ाहट से भरी आवाज में उस ने बताया. ‘‘ घबराओ नहीं, आराम से

पूरी बात बताओ… पहले 2 सकेंड के लिए होल्ड करो, लाइन पर ही रहना, फोन मत काटना.’’ यह कहते हुए टीआई ने पहले से होल्ड अपने अधिकारी की काल औन कर उन्हें बताया, ‘‘ सर, अभीअभी हरगढ़ जंगल में एक लाश होने की सूचना मिली है. वहां जाना पड़ेगा’’

‘‘ हरगढ़ जंगल तो शहर से करीब 40 किलोमीटर दूर है. ऐसा करो कोरोना कर्फ्यू चेकिंग के लिए किसी और को भेज दो. तुम वहां क्राइम जांच टीम के साथ तुरंत निकलो. पर दिन रहते पहुंचना होगा. कैमरा, फोरैंसिक जांच टीम, एंबुलेंस आदि ले कर जाना. कोरोना किट जरूर पहन लेना…पता नहीं कोई अज्ञात व्यक्ति इसी बीमारी से ही मरा पड़ा हो.’’ उन्होंने कहा.

‘‘ यस सर!’’ कहते हुए टीआई ने अनजान काल को औन किया.

‘‘ हां भाई, अब बताओ,… लेकिन पहले अपना नामपता बताओ.’’

‘‘ सर, मेरा नाम नारायण पटेल है. सिहोरा थान में गुरजी गांव का रहने वाला हूं. मेरे पिता प्रेमनारायण पटेल के मोबाइल पर किसी ने सूचना दी थी कि पान उमरिया रोड किनारे उस की मोटरसाइकिल पड़ी है. उस के थोड़ी दूरी पर ही एक लाश से दुर्गंध आ रही है.’’ अनजान व्यक्ति ने बताया.

‘‘ ठीक है, तुम हरगढ़ जंगल पहुंचो, मैं एक घंटे में पहुंच रहा हूं.’’ टीआई बोले.

‘‘…मुझे डर लग रहा है सर, क्योंकि मेरा छोटा भाई सोनू 16 मई से ही लापता है.’’ कांपती आवाज में नारायण बोला.

‘‘ डरो मत. घबराने की बात नहीं है.’’ यह कहते हुए टीआई जगोतिन मसराम ने काल डिसकनेक्ट कर दी. यह बात 24 मई, की दोपहर करीब सवा बजे की थी. थानाप्रभारी अपनी जांच टीम के साथ साढ़े 3 बजे हरगढ़ जंगल में उसी झुरमुट से घिरे महुए के पेड़ के पास पहुंच गए, जहां लाश होने की सूचना मिली थी. वहां तक पहुंचने के लिए ऊंची झाडि़यों से हो कर आना पड़ा. पगडंडीनुमा रास्ते से वह जगह थोडी हट कर थी. एक कांस्टेबल गिरी हुई मोटरसाइकिल की तहकीकात में जुट गया, जबकि थानाप्रभारी 3 सहकर्मियों के साथ लाश के पास जा कर  मुआयना करने लगे.

सभी कोरोना किट में थे. वहां तेज दुर्गंध भी फैल रही थी. घटनास्थल से जांच टीम ने अधनंगी सड़ीगली लाश के पास से जूट की एकएक मीटर की 2 रस्सियां, नीले रंग का लोअर, टीशर्ट, बनियान, चमड़े के चप्पल और 2 मास्क बरामद किए. लाश और बरामद सामान पेड़ों की सूखी पत्तियों से ढंक से गए.  एक ही जगह पर अधिक संख्या में जमा कीड़ेमकोड़ों को देख कर उस जगह किसी लाश के होने का अंदाजा लगाया जा सकता था. जांचपड़ताल चल ही रही थी कि तभी नारायण भी भागता हुआ आया, ‘‘ सर…सर, वही मेरे पापा की मोटरसाइकिल है. आगे की नंबर प्लेट किसी ने निकाल दी है. पीछे वाला भी तोड़ी है.

… मैं अपनी मोटरसाइकिल अच्छे से पहचानता हूं. सर…..’’ वह बोला.

‘‘ सर जी, ये देखिए मोटरसाइकिल  की टूटी हुई नंबर प्लेट मिली है. ’’ अधूरी नंबर प्लेट को दिखाता हुआ कांस्टेबल बीच में ही टीआई से बोल पड़ा.

अभी टीआई कुछ बोलते कि इससे पहले ही नारायण तपाक से बोल पड़ा, ‘‘ सर, यह तो मेरी ही मोटरसाइकिल की नंबर है.’’

‘‘ ठीक है, ठीक है. इसे भी बरामद सामान के साथ रख लो.’’ थानाप्रभारी ने कांस्टेबल को निर्देश दिया.

लाश पर से जब सड़ेगले और सूखे पत्ते हटाए गए तब उस से और भी तेज दुर्गंध आने लगी. लाश बुरी तरह से सड़गल चुकी थी. चेहरा तो बिलकुल ही पहचान में नहीं आ रहा था. मांस से बाहर निकली कुछ हड्डियां दिख रही थीं. खून तो सूख कर काला पड़ चुका था. आंखों का पता नहीं चल रहा था. लगता था वह बुरी तरह से कुचल दी गई हों. पास में ही करीब 10-15 किलो का एक  पत्थर दिखा. उस पर चिपकी मिट्टी का नमूना ले लिया गया. उस पर भी कीड़े चल रहे थे और पास में मक्खियां भिनभिना रही थीं. जांचकर्मियों ने अनुमान लगाया कि इसी पत्थर से चेहरे पर कई बार हमला किया गया होगा. नारायण ने बरामद सामानों में कपड़े और चप्पल के आधार पर चेहरा कुचले जाने के बावजूद लाश की पहचान कर दी, जो उस के छोटे भाई सोनू की ही थी. सारे कपड़े वही थे, जो उसे शादी में मिले थे.

यहां तक कि उन पर लगे हल्दी के दाग भी वैसे के वैसे थे, जिसे नारायण ने ही उन पर मात्र एक सप्ताह पहले लगाए थे दागधब्बे काले अवश्य हो गए थे, लेकिन स्वास्तिक का निशान देख कर नारायण ने कपड़े सोनू के होने की पुष्टि कर दी. थोड़ी देर में ही जबलपुर के एडिशनल एसपी शिवेश सिंह बघेल, एसडीपीओ (सिहोरा) श्रूतिकीर्ति सोमवंशी और फोरैंसिक जांच टीम घटनास्थल पर पहुंच गई. वहां से बरामद सारी सामग्री को जब्त कर मेडिको लीगल इंस्टीट्यूट, भोपाल भेजने के निर्देश दे दिए गए. लाश बड़ी मुश्किल से सील पैक कर पोस्टमार्टम के लिए भेज दी गई.

टीआई मसराम अपने साथ नारायण को ले कर थाने पहुंचे. उन्होंने घर वालों को भी थाने बुलवा लिया. शाम 7 बजे के करीब घरवालों में उस के पिता और पत्नी गायत्री से मसराम ने पूछताछ की. शुरुआती जांच की पूरी रिपोर्ट तैयार कर आगे की जांच और काररवाई के लिए फाइल तैयार कर दी गई. उस में सोनू के गुमशुदगी की शिकायत को भी दर्ज कर लिया गया, जिस की तहकीकत जबलपुर जिले के एसपी सिद्धार्थ बहुगुणा के दिशानिर्देश पर की जा जारी थी. सोनू के गुमशुदगी की शिकायत 17 मई, 2021 को सिहोरा थाने में तुलसीराम के बड़े बेटे नारायण पटेल ने अपने भाई के लापता होने की लिखवाई थी.

उस शिकायत के अनुसार सोनू 16 मई की सुबह 10 बजे घर से अपनी नवविवाहिता पत्नी का मोबाइल ठीक कराने को कह कर सिहोरा गया था. उस के देर रात तक वापस नहीं लौटने पर रिश्तेदारों और दोस्तों के यहां फोन कर के पूछताछ की गई, लेकिन जब उस का कोई पता नहीं चला, तब थाने में उस की गुमशुदगी दर्ज की गई. सोनू की 4 दिन पहले ही 12 मई, 2021 को कटनी जिले में बहोरीबंद थानांतर्गत बासन गांव की गायत्री के साथ शादी हुई थी. इस बारे में पुलिस ने गायत्री से पूछताछ की तो गायत्री ने पुलिस को बताया कि पति के शाम तक वापस नहीं आने पर उस ने  पति के मोबाइल पर काल की थी, लेकिन फोन आउट औफ कवरेज मिला था.

उसे लगा कि वह रात तक वापस आ जाएंगे, लेकिन नहीं आए. उन के न आने पर मन कई तरह की आशंकाओं से घिर गया और फिर उस ने ही अगले दिन सुबह नारायण को गुमशुदगी की रिपर्ट लिखवाने के लिए कहा. जांच और दूसरे किस्म की तहकीकाती पूछताछ से यह साफ हो गया था कि बरामद लाश सोनू की ही थी, लेकिन अहम सवाल उस की मौत को ले कर बना हुआ था. पहला और ठोस कारण हत्या का ही सामने आ रहा था. यानी हत्या हुई थी तो क्यों और कैसे के सवालों के जवाब तलाशने बाकी थे. साथ ही जल्द से जल्द हत्यारे तक पहुंचने और उसे सजा दिलवानी भी जरूरी थी.10 दिन बाद ही मैंडिको लीगल इंस्टीट्यूट, भोपाल की रिपोर्ट भी आ गई थी.उस रिपोर्ट ने पुलिस को हैरत में डाल दिया.

रिपोर्ट के अनुसार गुरजी गांव से 15 किलोमीटर दूर हरगढ़ की बरामद लाश के गले में जूट की एक पतली रस्सी भी लिपटी थी, जो भीतर की ओर धंस गई थी. इस आधार पर ही उस की मौत को पहले आत्महत्या कहा गया था. हालांकि उसके दोनों हाथों की कलाइयां और पैरों को घुटने के ठीक ऊपर रस्सियों से बांधने के निशान पाए गए थे. ये सबूत सोनू की हत्या की ओर इशारा कर रहे थे, जिस में एक ही व्यक्ति के शामिल होने की भी बात कही गई थी. अब पुलिस के सामने सवाल था कि कोई एक व्यक्ति कैसे एक हष्टपुष्ठ नौजवान की रस्सियों से गला घोंट कर हत्या कर सकता है? किस तरह से उसने उस के हाथ और पैर बांधे होंगे?

इस मामले को खितौला पुलिस थाने में 10 जून को दर्ज किया गया. सिहोरा तहसील के एसडीपीओ की कमान संभाले 2018 बैच के आईपीएस श्रूतिकीर्ति सोमवंशी ने इसे गंभीरता से लिया. उन्होंने सोनू के मोबाइल कौल की पूरी डिटेल्स निकलवाई. उस में पता चला कि सोनू के मोबाइल नंबर से 16 मई को किसी मधु पटेल नाम की लड़की से 4-5 बार बात हुई थी. उन के बीच बातचीत का समय सोनू के घर से निकलने के ठीक बाद साढ़े 10 और 12 बजे के बीच का था. उस के अलावा सोनू की किसी और से बात नहीं हुई थी.  पोस्टमार्टम रिपोर्ट के मुताबिक सोनू की मौत दिन में 2 बजकर 32 मिनट पर हो चुकी थी. मधु के बारे में नारायण और गायत्री से अलगअलग पूछताछ की गई.

नारायण ने मधु के संबंध में इतना बताया कि वह उस की बहन की 20 वर्षीया अविवाहित ननद है. वह फिलहाल सिहोरा तहसील के ही मढ़ई गांव में अपने मातापिता और भाईबहनों के साथ रहती है. गायत्री से पूछने पर उस ने मधु के बारे में जो बताया उससे जांच को आगे बढ़ाते हुए मामले को सुलझाने की खास कड़ी मिल गई. हालांकि गायत्री ने बताया कि उस के पति और मधु के बीच प्रेमसंबंध थे. जबकि उस बारे में पति ने यह भी कहा था कि अब उन के बीच के सारे संबंध खत्म हो चुके हैं और मधु की भी शादी तय हो चुकी है.

पुलिस द्वारा बारबार गायत्री से सोनू के बारे में सवाल पूछे जा रहे थे. पुलिस को लग रहा था कि गायत्री कुछ बातें छिपा रही है. अंतत: वह अपनी पीड़ा ज्यादा समय तक छिपा नहीं पाई. एक बार पुलिस से गायत्री ने पूछ लिया, आखिर इस में उस की क्या गलती है? उन्होंने पुलिस से कहा कि वह बेहद दुखी है. एक तरफ उस की उजड़ी हुई जिंदगी है, दूसरी तरफ घरपरिवार वाले उसे अपशकुन, कुलच्छनी और न जाने क्याक्या कह कर दोषी ठहरा रहे हैं. उस ने अपने पति को मोबाइल ठीक करवाने को क्या कहा, वह सब के निशाने पर आ गई है. जबकि सच तो यह था उस ने ही मोबाइल ठीक कराने की जिद की थी. कुछ लोग तो उसे भी पति की हत्या में शामिल बता रहे थे. गायत्री ने बेहद दुखी हो कर पुलिस को पूछताछ में बताया कि उस की भावनाओं और दु:ख को समझने वाला कोई नहीं है.

दरअसल, गायत्री दुखी होने के साथसाथ अज्ञात आशंका को ले कर बेचैन हो गई थी. उस के मन पर एक बोझ बना हुआ था, जो सोनू ही लाद गया था. अब उस के लिए उस राज को मन में दबाए रखना मुश्किल हो रहा था, जो सोनू ने बताए थे. इसे ले कर शादी के दूसरे दिन ही सोनू से उस की तब कहासूनी हो गई थी. जब उस ने मधु के बारे में पूछ लिया था. जवाब में सोनू ने गुस्से में कह दिया था, ‘‘घर में आए एक दिन भी नहीं हुआ और जासूसी करने लगी हो?’’

इस का जवाब गायत्री ने सहजता से दिया था, ‘‘मधु कुछ देर पहले ही सबकुछ बता गई है.’’

‘‘ क्या कहा उस ने?… और, और…! तुम ने उसे अपने पास आने कैसे दिया?’’ वह बोला.

‘‘ क्यों? मैं उसे कैसे रोकती. वह आप की बहन की ननद है. हमारी रिश्तेदार है. उसे अपने पास नहीं बैठने देती तो परिवार वाले क्या कहते? ’’ गायत्री ने सफाई दी.

‘‘ खैर, बताओ उस ने क्या कहा?’’ सोनू अब थोड़ा नरम पड़ गया था.

‘‘ वह बहुत तेवर में मेरे साथ पेश आई थी. बातें गुस्से में करती हुई तुम से प्रेम करने की बात कह डाली.’’

यह सुन कर सोनू सन्न रह गया. गायत्री ने उसे बताया कि मधु उस के साथ किस तरह झगड़ा कर धमकियां देती हुई अपने घर गई. उस ने सोनू को यह भी बताया उसे हमारी शादी से उसे बेहद नाराजगी है. उस ने तुम पर बेवफाई का आरोप लगाया है. तुम्हें उस ने धोखेबाज प्रेमी कहा है. उस का कहना था कि तुम ने उस से शादी का वादा किया था. तुम ने मुझ से शादी की इसलिए मैं भी अब उस की दुश्मन हूं. सोनू और गायत्री की शादी के दूसरे दिन मधु को ले कर उन के बीच काफी नोकझोंक हुई. गायत्री ने सोनू को यहां तक कहा कि वह उस के बहन की ननद होने कारण चुप रही. उस के हर इलजाम को नजरंदाज किया.

खैर, सोनू ने गायत्री पर गुस्सा होने और मामले को आगे बढ़ने से रोकने के बजाय उस से माफी मांग ली. मधु से तमाम संबंध तोड़ने का वादा भी किया. बातोंबातों में सोनू ने बताया कि अब वह उस की ब्लैकमेल का शिकार हो रहा है. कुछ चीज मधु के पास है, जिस की वजह से उस के तेवर बदले हुए हैं. काफी पूछ ने पर भी सोनू ने उस राज के बारे में नहीं बताया और इसे अपने तक सीमित रखने की कसम खिलाई. ये सारी बातें गायत्री ने पूछताछ में पुलिस को भी बताईं.

पुलिस के लिए गायत्री द्वारा सोनू के साथ मधु के प्रेम संबंध की जानकारी हत्या की गुत्थी सुलझाने में काफी महत्वपूर्ण साबित हुई. हालांकि एक तरफ गायत्री के हाथों में लगी मेहंदी का रंग कम नहीं हुआ था कि उस की मांग का सिंदूर उजड़ गया था. उस के लिए सुहाग का जोड़ा 4 दिन की चांदनी बन कर रह गया था. शादी से पहले उस ने जो सपने देखे थे, वह रेत के महल साबित हुए. एक पल में शादी की खुशियां और विवाहित जीवन के सभी अरमान चकनाचूर हो गए. जिस घर में कल तक ढोलक की थाप पर वैवाहिक गीत गूंज रहे थे, वहां चीखपुकार और  सिसकियां पसरी हुई थीं.

पति को खो चुकी गायत्री अपनी पीड़ा और परिजनों के ताने से काफी तनाव में थी. दूसरी तरफ पुलिस ने संदेह के आधार पर 12वीं तक पढ़ी मधु पटेल को भी पूछताछ के लिए थाने बुलावा लिया. उस से महिला पुलिस ने पहले बातों से अपने जाल में उलझाया और अलग अंदाज में पूछताछ की.

‘‘ तुम सोनू को कब से जानती हो? ’’

‘‘ जब से उस की बहन की शादी मेरे भाई से हुई. 2 साल हो गए.’’ मधु बोली.

‘‘ तुम सोनू से प्रेम करती हो?’’ पुलिस ने पूछा.

‘‘ जी नही.’’ वह बोली.

‘‘ लेकिन तुम उस से शादी करना चाहती थी.’’ पुलिस ने अगले सवाल किया.

‘‘ किस ने बताया कि मैं उस से शादी करना चाहती थी?’’

‘‘ तुम ने ही तो कहा है.’’ यह कहते हुए पूछताछ करने वाली महिला पुलिस अधिकारी ने उसे एक आडियो सुनाया. आडियो में मधु तेज आवाज में बोल रही थी ‘तुम ने मुझ से शादी नहीं की तो मैं सब को बरबाद कर दूंगी. देख लेना…! तुम्हें भी नहीं छोडूंगी.’

‘‘यह धमकी तुम ने किसे दी थी, यह तुम बताओगी या मैं ही बताऊं.’’ पुलिस अधिकारी ने कहा.

‘‘ बताती हूं, बताती हूं! लेकिन सोनू को मैं ने नहीं मारा.’’

‘‘ अरे, मैं ने तो सोनू की हत्या के बारे में तुम से कुछ पूछा ही नहीं.’’

‘‘ गलती हो गई मैडम.’’

‘‘अच्छा चलो, उस की हत्या के बारे में ही कुछ बता दो, जो तुम जानती हो. किस ने मारा उसे?’’

‘‘ मुझे नहीं मालूम? मैं कुछ नहीं जानती.’’

‘‘ उस की मौत का तुम्हें तो जरा भी दुख नहीं हुआ. तुम उस की विधवा पत्नी को ढांढस बंधाने भी नहीं गई.’’

‘‘ मुझे कुछ नहीं मालूम… एक बार गायत्री से फोन पर बात करने की कोशिश की थी. बात नहीं हो पाई.’’

‘‘  जिस दिन सोनू की हत्या हुई उस के 2 घंटे पहले उस ने केवल तुम से ही फोन पर बात की थी.’’

‘‘ जी..जी….? मैं कुछ नहीं जानती…’’

‘‘ तुम सब जानती हो, उस का भी मेरे पास सबूत हैं.’’ यह कहते हुए पुलिस ने जब उस की टूटी हुई कलाई घड़ी का फीता दिखाया, तब वह सकपका गई. उस का चेहरा पसीने से भीग गया. उस ने पीने के लिए पानी मांगा.

‘‘ देखो तुम्हारी शादी होने वाली है. तुम सचसच बताओगी तब तुम्हे कुछ नहीं होगा. पुलिस जांच, सोनू की हत्या आदि के बारे में किसी को कुछ नहीं पता चलेगा. अभी मैं अकेले में सवाल कर रही हूं. कल को वकील भरी अदालत में सब के सामने करेंगे.’’

मधु पुलिस की बातों में आ गई और उस ने सोनू की हत्या करने की बात मान ली. उस ने जो बताया उस के अनुसार मधु और सोनू की प्रेम कहानी में पवित्र प्रेम की बुनियाद अनैतिक संबंध और बदले की आग पर टिकी हुई थी. मधु द्वारा बताई गई जानकारी के अनुसार सोनू की हत्या का पूरा मामला इस तरह से सामने आया—

मधु पटेल मढ़ई गांव के रहने वाले नारायण पटेल की बेटी थी. उन के बेटे साहिल की शादी प्रेमनारायण पटेल की बेटी निधि से 2019 में हुई थी. दोनों परिवारों की खेतीबाड़ी में काफी आपसी तालेमल था. वे एकदूसरे की मदद करने को हमेशा तैयार रहते थे. सरकारी अनाज खरीद केंद्र पर धान और गेंहू की बिक्री के सिलसिले में सोनू अकसर मधु के घर आताजाता रहता था. सोनू निधि का छोटा भाई था. इस कारण उस का बहन की ससुराल में आनाजाना शुरू हो गया था. साहिल की छोटी बहन मधु चंचल स्वभाव की खूबसूरत  लड़की थी. वह जितनी बातून थी, उतनी ही शरारत और आकर्षक. मजाक तो बातबात पर करती थी.

कुछ भी बोलने में वह नहीं हिचकती थी. सोनू जब भी अपनी बहन की ससुराल आता, मधु उस की खातिरदारी करती. मजाक का रिश्ता होने के कारण उन के बीच खूब हंसीमजाक चलता रहता था. इस सिलसिले में कब उन के बीच प्रेम का अंकुर फूट पड़ा उन्हें पता ही नहीं चला. एक बार मधु अपनी भाभी के साथ सोनू के घर आई हुई थी. संयोग से उस के आने के कुछ दिन बाद ही कोरोना वायरस संक्रमण के चलते लौकडाउन हो गया. आवागमन के सारे साधन बंद हो गए. इस कारण मधु को अपनी भाभी के घर ही रुकना पड़ा. इस दौरान सोनू और मधु के बीच प्रेम की मधुरता और गहरी हो गई. उन पर घर के दूसरे लोगों की भी नजर बनी रहती थी, जिस से वे एकांत की ताक में रहने लगे. जब भी मौका मिलता खेतों की ओर साथ में निकल पढ़ते या फिर पास के जंगल की और चले जाते थे.

एक दिन दोपहर का समय था. घर के लोग पास के गांव में अपने रिश्तेदार की शादी में गए हुए थे. निधि खाना बनाने में लगी थी. सोनू और मधु कमरे में बैठ कर टीवी देख रहे थे. उन के बीच हंसीमजाक का दौर भी चल रहा था. वे कोरोना काल में शादी को ले कर चर्चा कर रहे थे. उन के बीच विवाहित जोड़े द्वारा सोशल डिस्टेंसिंग के पालन पर बहस हो रही थी. बातोंबातों में सोनू रोमांटिक मूड में आ गया था. मौका देख कर सोनू मधु के गाल और होंठ छूते हुआ बोला, ‘‘ अभी शादी करने वालों को सिर्फ इस से काम चलना होगा.’’

मधु उस की हरकत से शर्मसार हो गई. उस ने उस के हाथ को झटक दिया.

सोनू बोल पड़ा, ‘‘मैं तुम से प्यार करता हूं, मधु.’’

‘‘ मैं भी तुम्हें दिलोजान से चाहती हूं.’’ इतना कहना था कि सोनू ने मधु को गले लगा लिया. मधु भी खुद को नहीं रोक पाई. सोनू के गाल चूम लिए और उस की आगोश से छूट ने की कोशिश करने लगी.

‘‘ मधु मैं तुम से शादी करना चाहता हूं.’’ कहते हुए सोनू ने आंख पर आ चुकी उस की बालों की लट को हटाया.

‘‘ चलो हटो भी, बड़े आए शादी करने वाले. पहले अपने परिवार को तो राजी कर लो. वह रीतिरिवाज के पक्के हैं. बातबात में गोत्र, संस्कार और समाज की बात करते हैं.’’ कहते हुए मधु ने धीरे से सोनू के गालों पर थपकी दी.

‘‘ वह तो मैं कर लूंगा, तुम्हें पाने के लिए सारे रीतिरीवाज तोड़ दूंगा. तुम भी अपने मांपापा से बात करना.’’ अब सोनू ने भावावेश में मधु के होंठ चूम लिए. फिर अपनी महत्वाकांक्षा व्यक्त की, ‘‘तुम मेरा साथ दो तो हम दोनों शादी कर जीवन भर साथ रहेंगे.’’

इसी बीच सोनू की बहन ने आवाज लगाई, ‘‘सोनू देखना बाहर दरवाजे पर कौन है. और हां, बाथरूम में मेरे लिए 2 बाल्टी पानी भी रख देना.’’

अच्छा दीदी, बोलता हुआ सोनू चला गया और मधु उस की खयालों में खो गई. कहते हैं न कि इश्क का रोग लाख छिपाने पर भी नहीं छिपता है. सोनू और मधु के साथ भी ऐसा ही हुआ. उन के प्रेम की पहली भनक निधि को लगी. उस ने दोनों को शादी करने से मना कर दिया. साफसाफ लहजे में कहा कि ऐसा नहीं हो सकता है. इस से 2 परिवारों की इज्जत समाज में गिर जाएगी. तुम दोनों की शादी गौत्र के नियम के अनुसार गलत होगी. जिस से भविष्य में परिवार के बीच कलह पैदा हो सकती है और मेरी शादीशुदा जिंदगी भी प्रभावित हो जाएगी.

उन के प्रेम संबंध और शादी की बात परिवार के सभी बड़े लोगों को हो गई. सब से पहले निधि  मधु को लेकर अपनी ससुराल चली गई. बदनामी के डर से उन्हें मिलनेजुलने पर रोक लगा दी गई. जब प्यार पर पाबंदी बढ़ने लगी तो दोनों ने मोबाइल फोन की वीडियो काल को अपने प्यार के इजहार का जरिया बना लिया. दूसरी तरफ दोनों के परिजन उन की अलगअलग शादी करने के इंतजाम में लग गए. जल्द ही मधु का रिश्ता पाटी गांव के विजय पटेल के साथ तय हो गया था. उस की सगाई भी हो गई. मधु की सगाई की रस्म होते ही सोनू गिरगिट की तरह रंग बदलने लगा. वह मधु से मिलनेजुलना तो दूर उस से बात करने तक से कतराने लगा. जबकि उस की शादी भी कटनी जिले के गांव बासना की रहने वाली गायत्री पटेल से तय हो गई थी.

मधु सोनू द्वारा उपेक्षा किए जाने से परेशान रहने लगी थी. उसे बहुत बुरा लग रहा था. कारण सोनू ने उस के साथ प्यारमोहब्बत की कसमें खाई थीं. खैर, किसी तरह से मधु ने अपने मन को समझा लिया था और सोनू के प्यार को भूल कर अपने नए रिश्ते के लिए खुद को तैयार करने लगी थी. विजय के साथ अपनी शादी के सपने सजाने लगी थी, लेकिन मधु के लिए सोनू को भूलना आसान नहीं था. उस की लुभावनी बातें, वीडियो कौलिंग में की गई ख्वाहिशें, मीठे चुंबनों की यादें, आगोश के चंद लमहों में लिपटा यौनसुख आदि को मधु चाह कर भी नहीं भूल पा रही थी.

हत्या की घटना के करीब 4 महीने पहले सोनू मधु के घर गया था. दोनों की शादी अलगअलग जगहों पर तय हो जाने के बाद उन के मिलनेजुलने पर पहले जैसी पाबंदी में थोड़ी ढील मिल गई थी. उन के बीच पहले की तरह मुलाकातें और बातें होने लगी थीं. एक दिन सोनू ने मौके का फायदा उठा कर मधु के साथ एक बार फिर शरीरिक संबंध बना लिए थे. यही नहीं इस का उस ने एक वीडियो भी बना लिया था, जो उस ने उस के वाट्सएप पर भेज दिया था. मधु सोनू की इस हरकत से दुखी हो गई. उस ने वीडियो हमेशा के लिए डिलीट करने की उस से विनती की, लेकिन सोनू के मन में तो कुछ और ही चल रहा था.

उस ने मधु के साथ अंतरंग रिश्ते की वीडियो को ब्लैकमेल का औजार बना लिया. वह उस वीडियो की आड़ में मधु से साथ लगातार यौन संबंध बनाने का दबाव बनाने लगा था. मधु बारबार समझाती थी कि उस की शादी होने वाली है इसलिए ऐसा नहीं करे. वह सोनू की शादी तय होने का भी हवाला देती थी. वह सोनू से बोली, ‘‘क्यों न हम अपनेअपने नए जीवन की शुरुआत करें.’’

उस के जवाब में सोनू धमकियां देने लगा. यह सब चलता रहा और सोनू की शादी 12 मई, 2021 को हो गई. दोबारा लौकउाउन लगने की वजह से मधु की शादी की तारीख पक्की नहीं हो पाई थी. मधु से अकेले में मिलने के लिए सोनू ने 14 और 15 मई को लगातार कई फोन किए. उस ने फोन पर ही कहा, ‘‘ तुम्हारी तो शादी होने वाली है, आखिरी बार मुझ से मिल लो.’’

‘‘ ठीक है, मैं तुम्हारे साथ आखिरी बार संबंध बना लूंगी, लेकिन वह मेरे अनुसार होगा. उस के लिए जगह भी मैं तय करूंगी और तरीका भी मेरे कहे का अपनाना होगा.’’ मधु ने शर्त रखी.

‘‘ कौन सी जगह? कैसा तरीका?’’ सोनू ने जिज्ञासवश पूछा.

‘‘ वह सब मैं 16 तारीख को बताउंगी. मैं चाहती हूं कि हमारी आखिरी मुलाकता यादगार बने.  दिन में साढ़े 10 बजे फोन करना, मिलने की जगह बता दूंगी. मेरे कहे अनुसार संबंध बनाने होंगे. जैसजैसा मैं कहूंगी, वैसावैसा करना होगा. और हां, पहले मेरे सामने ही पुराने सभी वीडियो डिलीट करने होंगे.’’ मधु ने चुहलबाजी के साथ आकर्षक अंदाज में कहा.  मधु का प्रस्ताव सुन कर सोनू काफी रोमांचित हो गया. उस ने झट से हां कह दी.

अगले रोज 16 मई, 2021 को ठीक 10 बजे सोनू अपने पिता की मोटरसाइकिल ले कर मधु द्वारा बताए गई जगह सिद्धम मंदिर के पास पहुंच गया. वहीं से उस ने मधु को फोन किया. 3 काल उस ने रिसीव नहीं किए. सोनू खीज उठा. उस ने फिर काल की. इस बार मधु ने काल रिसीव करते हुए कहा कि वह 8-10 मिनट में पहुंचने वाली है.

थोड़ी देर में ही मधु अपनी बुआ की 16 वर्षीया बेटी निमिषा ( बदला नाम) के साथ आ गई. सोनू ने पूछा, ‘‘कहां चलना है?’’

मधु बोली, ‘‘वहीं जहां पहले भी कई बार मिलते रहे हैं. हरगढ़ जंगल.’’इस के बाद तीनों मोटरसाइकिल पर आधे घंटे में ही हरगढ़ जंगल के पास पहुंच गए. सोनू ने सड़क के किनारे मोटरसाइकिल लगा दी और निमिषा को वहीं रुकने के लिए कहा. फिर वह मधु के साथ भीतर जंगल में चला गया. झाडि़यों के एक झुरमुट के बीच थोड़ी सी जगह पर दोनों बैठ गए. मधु ने अपने हैंडबैग में रखा दुपट्टे की तरह इस्तेमाल किया जाने वाला वही स्टाल निकाला और बिछा दिया, जिस पर बैठ कर वह अकसर रोमांटिक बातें किया करते थे. सोनू उसपर लेट गया. मधु ने रोमांटिक अंदाज में कहा, ‘‘आज मैं तुम्हारे हाथोंपैरों को रस्सी से बांधूंगी. आंखों पर भी पट्टी बांध दूंगी. उस के बाद हम संबंध बनाएंगे.’’

यह सुनकर सोनू को अजीब तो लगा, लेकिन वासना की आग में जलता हुआ मधु के कहे अनुसार पेट के बल लेट गया. इस से पहले मधु ने साथ लाई रस्सी से उस के हाथ और पैर बांध दिए थे. सोनू के लेटते ही मधु उस की पीठ पर सवार हो गई और पास पड़े एक वजनी पत्थर सिर पर दे मारा. सोनू अभी संभलता इस से पहले मधु ने पत्थर से 3-4 वार कर दिए. हाथपैर बंधे होने और आंखों पर पट्टी होने के कारण सोनू अपना बचाव नहीं कर पाया. मधु ने उस के गले को भी एक रस्सी से कस दिया. कुछ समय में ही सोनू के शरीर से हलचल बंद हो गई. उसे लात से पीठ के बल उलट दिया. मृत सोनू की आंखों की पट्टी खोली. हाथपैर की रस्सियां भी खोल दीं. गले की रस्सी लिपटी छोड़ दी.

बिछाया स्टाल निकाल कर अपने बैग में रख लिया. फिर उस ने पत्थर से उस के चेहरे पर जोर से कई वार किए. उस की जेब से एटीएम कार्ड, आधार कार्ड और मोबाइल निकाल कर अपने बैग में रख लिया. सोनू को मौत के घाट उतारने के बाद मधु ने निमिषा को आवाज दे कर बुला कर कहा, ‘‘सोनू को हम ने मार दिया. आज मैं ने उस की बेवफाई और ब्लैकमेलिंग का बदला ले लिया है. हमेशा के लिए कांटा निकाल दिया है. इस बारे में तुम किसी से कुछ नहीं कहना.’’

दोनों जंगल से बाहर निकल आईं और मोटरसाइकिल की नंबर प्लेट को पत्थर मारमार कर तोड़ डाला. ऐसा करते हुए मधु की कलाई घड़ी का फीता टूट गया उस ने घड़ी तो उठा कर अपने बैग में रख ली और टूटा हुआ फीता वहीं झाडि़यों में फेंक दिया. इस जुर्म को कबूलने  के बाद मधु ने पुलिस को बताया कि वह सोनू द्वारा बनाई गई उस की अश्लील वीडियो को ले कर परेशान थी. उस से बच ने का एक ही तरीका उस के दिमाग में आया कि उसे हमेशा के लिए मौत की नींद सुला दिया जाए. इस खुलासे के बाद मधु पटेल पर सोनू की हत्या के आरोप में आइपीसी की धाराएं 302 और 201 लगाई गई.

पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश किया. निमिषा पर भी साक्ष्य छिपाने के जुर्म में आइपीसी की धारा 201 लगाकर उसे बाल कारागार गृह शहडोल भेज दिया गया, जबकि मधु पटेल को महिला जेल जबलपुर भेज दिया गया. Crime News Hindi

(कथा पुलिस सूत्रों पर आधारित)

 

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छोटे शहरों से बड़े सपने ले कर सैकड़ों लड़कियां आए दिन सपनों की नगरी मुंबई पहुंचती हैं. लेकिन इन में से गिनीचुनी लड़कियों को ही कामयाबी मिलती है. दरअसल, फिल्म इंडस्ट्री भूलभुलैया 3 Top Bollywood Actress की तरह है, जहां प्रवेश करना तो आसान है, लेकिन बाहर निकलना बहुत मुश्किल. क्योंकि यहां कदमकदम पर दिगभ्रमित करने वाले मोड़ों पर गलत राह बताने वाले मौजूद रहते हैं, जिन के अपनेअपने स्वार्थ होते हैं.

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फिल्म हीर रांझा की Actress प्रिया राजवंश : महंगी पड़ी शादीशुदा से प्यार

Actress – दमदार अभिनय और संवाद से दर्शकों में मशहूर रहे अभिनेता राजकुमार की फिल्म ‘हीर रांझा’ को लोग आज भी याद करते हैं. इस फिल्म में जितनी हसीन ऐक्ट्रैस Actress थी, उस की लाइफ उतनी ही मुश्किलभरी थी. इस ऐक्ट्रैस की रियल लाइफ स्टोरी सुन कर आज भी लोगों की रूह कांप जाती है.

यह हीरोइन थी बौलीवुड की प्रिया राजवंश जो उस समय खूबसूरत हीरोइनों में शामिल थी. यही नहीं, प्रिया ने 70 के दशक में अपनी बेहतरीन अदाकारी से बौलीवुड फिल्मों पर खूब राज किया था.

अंदाज से बनाया दीवाना

फिल्म ‘हीर रांझा’ का एक गाना ‘मिले न तुम तो हम घबराएं…’ में अपने अंदाज से लोगों के दिलों प्रिया ने खूब जगह बना ली थी.

अपने समय की इस मशहूर ऐक्ट्रैस Actress ने अपनी पढ़ाई इंगलैंड में की थी. इसलिए भी उन के लाइफस्टाइल का अंदाज देखने लायक हुआ करता था.

प्रिया राजवंश ने अपनी लाइफ में लगभग 7 फिल्मों में काम किया था. ये सारी फिल्में भी प्रिया ने चेतन आंनद के साथ की थीं. फिल्मों में साथ काम करने के दौरान दोनों के बीच पहले दोस्ती हुई फिर प्यार हो गया.

शादी बगैर बनी दुलहन

चेतन और प्रिया राजवंश के बीच प्यार इतना गहरा हुआ कि दोनों ने एकसाथ रहने का फैसला कर लिया था, लेकिन कभी शादी नहीं की.

चेतन शादी इसलिए नहीं करना चाहते थे, क्योंकि वे पहले से ही शादीशुदा और 2 बच्चों के पिता थे. फिर भी वे अपनी पत्नी से अलग रहा करते थे. चेतन 82 साल के हुए तो इस दुनिया को अलविदा कह दिया. उन के मरने के बाद घर में मनमुटाव होने लग गया था. मनमुटाव इतना हुआ कि एक वसीयत की वजह से प्रिया और सौतेले बेटों में तनाव बढ़ता ही चला गया क्योंकि चेतन ने मरने के बाद अधिकतर प्रौपर्टी प्रिया के नाम कर दी थी जिसे उन के सौतेले बेटों ने नकार दिया था और यही वजह थी कि वे अपने पिता की प्रौपर्टी किसी भी हाल में प्रिया को देना नहीं चाहते थे।

खौफनाक साजिश

बात नहीं बनी तो चेतन के बेटों ने प्रिया राजवंश के खिलाफ खौफनाक साजिश रचने का फैसला कर डाला. बताया जाता है कि चेतन के दोनों बेटों ने 27 मार्च, 2000 में कुछ लोगों को अपने साथ मिला कर प्रिया की हत्या कर डाली. प्रिया की मौत का राज सालों तक छिपा रहा. किसी को नहीं पता था कि उस की हत्या हो चुकी है.

पुलिस के द्वारा इस हत्या की जांच की गई तो उस में एक खुलासा हुआ था जिस में चेतना की मेड माला और उस के कजिन भी शामिल थे. इस के बाद दोनों को सजा मिली और चेतना के बेटों केतन और विवेक को साजिश के आरोप में अरैस्ट कर लिया गया था.

रहस्य ही है

चेतन के दोनों बेटों ने कोर्ट में अपील की तो दोनों को सुबूत के अभाव में छोड़ दिया गया. आज भी देखा जाए तो प्रिया के कातिलों को सजा नहीं मिली है, यह एक रहस्य ही है।

फाइवस्टार Hotel में अधिकारी के साथ किया बलात्कार

Hotel  वाणिज्यिक कर विभाग के बड़े अधिकारी पंकज सिंह ने फाइवस्टार होटल में नीलिमा के साथ बलात्कार किया था या फिर उन के बीच आपसी सहमति से संबंध बने थे, यह बात तो जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी. लेकिन यह तय है कि इस मामले ने पुलिस की उलझनें जरूर बढ़ा दी हैं.

5 अगस्त, 2018 की शाम के करीब साढ़े 7 बजे थे. भोपाल के प्रेमपुरा इलाके स्थित नामी जहांनुमा रिट्रीट की रौनक शवाब पर थी. लोग आजा रहे थे और कुछ लोग वहां इत्मीनान से बैठे बतिया रहे थे. जहांनुमा रिट्रीट फाइवस्टार होटल है, लिहाजा वहां ऐरेगैरे तो ठहरने की सोच भी नहीं पाते. जिन की जेब में खासा पैसा होता है, वही इस शानदार होटल का लुत्फ उठाते हैं. होटल के लौन में साइकिलिंग करते एक अधेड़ पुरुष और उस के साथ बेहद अंतरंगता से हंसतीबतियाती महिला को साइकिल पर पैडल मारते देख कोई भी यही अंदाजा लगाता कि वे पतिपत्नी हैं और नए जोड़ों की तरह अठखेलियां कर रहे हैं.

इस के पहले दोनों एक साथ कैरम खेलते दिखे थे. इस पर भी होटल स्टाफ को कोई हैरानी नहीं हुई थी क्योंकि सर्वसुविधायुक्त इस लग्जरी होटल में ऐशोआराम के सारे साधन और सहूलियतें मौजूद हैं.  वह पुरुष भरेपूरे चेहरे वाला था और रुआब उस के हावभाव से साफ झलक रहा था. उस की साथी महिला उम्रदराज होते हुए भी युवा लग रही थी. बेइंतहा खूबसूरत और स्मार्ट दिख रही वह महिला पुरुष से बेतकल्लुफी से पेश आ रही थी. साइकिलिंग करतेकरते पुरुष गिर पड़ा तो महिला ने तुरंत स्टाफ से फर्स्टएड बौक्स मंगाया और उस की मरहमपट्टी खुद अपने हाथों से की. नजारा देख कर ऐसा लग रहा था कि अगर दूसरे के घाव या चोट अपने ऊपर लेने का कोई प्रावधान होता तो वह महिला उस पुरुष की चोट ले लेती.

उस के चेहरे से चिंता साफ झलक रही थी जबकि पुरुष को कोई खास चोटें नहीं आई थीं. उन की ये नजदीकियां युवा दंपतियों को भी मात कर रही थीं, देखने वाले जिन का पूरा लुत्फ उठा रहे थे. इस के उलट एकदूसरे की बातों में डूबे इन दोनों को मानो किसी की परवाह ही नहीं थी. लगभग 5 घंटे दोनों ने इसी तरह से साथ गुजारे. दरअसल ये दोनों जहांनुमा रिट्रीट में रुकने के लिए आए थे, लेकिन उस समय कोई कमरा खाली नहीं होने की वजह से वक्त गुजार रहे थे. रात 12 बजे के बाद इन्हें रूम नंबर 14 आवंटित हुआ तो दोनों एकदूसरे से सट कर कमरे की तरफ बढ़ गए.

एंट्री रजिस्टर में पुरुष ने अपना नाम पंकज कुमार सिंह, उम्र 42 वर्ष, पता नोएडा, उत्तर प्रदेश और पेशा सरकारी अधिकारी लिखा और साथ आई महिला का नाम नीलिमा (परिवर्तित नाम) दर्ज किया गया लेकिन इन दोनों के बीच का रिश्ता नहीं लिखा गया था. इस की वजह यह थी कि होटल के एंट्री रजिस्टर में रिलेशन वाला कौलम ही नहीं था. आमतौर पर यह कौलम अब अनिवार्य है लेकिन जहांनुमा रिट्रीट के रजिस्टर में नहीं था तो नहीं था. पंकज ने भारत सरकार द्वारा जारी किया गया पहचान पत्र दिया था तो नीलिमा ने पैन कार्ड दिया था. दोनों रिसैप्शन की खानापूर्ति कर के कमरे में बंद हो गए. अब तक होटल में आनेजाने वालों की तादाद इक्कादुक्का ही रह गई थी और स्टाफ के लोग भी ऊंघते हुए सोने की तैयारी करने लगे थे. रात को होटल के बंद कमरों में ठहरे लोग क्या करते हैं, इस से होटल स्टाफ कोई मतलब नहीं रखता और मतलब रखने के कोई माने या वजह है भी नहीं.

ऐसा ही पंकज और नीलिमा के मामले में हुआ था जो तकरीबन 5 घंटे तक होटल परिसर में घूमतेफिरते और बतियाते रहे थे. दोनों ने खाना भी साथ खाया था. दोनों की ही बौडी लैंग्वेज शाही थी तो इस की वजह भी थी कि पंकज उत्तर प्रदेश के वाणिज्य कर विभाग में डिप्टी कमिश्नर थे और नीलिमा इसी विभाग में असिस्टेंट कमिश्नर के पद पर थे. बंद कमरे की अजब कहानी रात लगभग साढ़े 3 बजे नीलिमा कमरे से बाहर आई तो परेशानी और बदहवासी उस के चेहरे से साफ झलक रही थी. हालांकि उस के कपड़े अस्तव्यस्त नहीं थे और न ही बाल बिखरे हुए थे, जैसा कि आमतौर पर बलात्कार के मामलों में पीडि़ता के साथ होता है.

बाहर आ कर नीलिमा ने रिसैप्शन पर बैठे कर्मचारी को तुरंत कैब बुलाने को कहा लेकिन वजह पूरी तरह नहीं बताई. टैक्सी आई तो वह बाहर जा कर उस में बैठ गई और ड्राइवर को थाने चलने को कहा. टैक्सी ड्राइवर हैरानी से इस संभ्रांत महिला को देखते हुए उन्हें नजदीकी कमलानगर थाने ले गया जो कोटरा इलाके में है. जहांनुमा रिट्रीट होटल इसी थाने के अंतर्गत आता है. नीलिमा सीधे थाने के अंदर गई और मौजूद पुलिसकर्मी से रिपोर्ट लिखने को कहा. इतनी रात गए कोई अभिजात्य व सभ्य सी दिखने वाली महिला बलात्कार (Hotel)  की रिपोर्ट लिखाने आए तो थाने में खलबली मचना स्वाभाविक सी बात थी. नीलिमा का परिचय जान कर तो पुलिसकर्मी और भी हैरान रह गए. उन्होंने तुरंत उच्चाधिकारियों को इस हाईप्रोफाइल बलात्कार मामले की खबर दी.

सुबह की रोशनी होने से पहले कमला नगर थाने के टीआई मदनमोहन मालवीय और एसपी (नौर्थ भोपाल) राहुल कुमार लोढ़ा ने विस्तार से नीलिमा से जानकारी ली तो इस अनूठे बलात्कार की कहानी कुछ इस तरह सामने आई. नीलिमा मूलत: भोपाल की ही रहने वाली है. दरअसल भोपाल के जिस नामी मिशनरी स्कूल में वह पढ़ी थी, उस के पूर्व छात्रों के सम्मेलन में हिस्सा लेने के लिए 3 दिन पहले भोपाल आई थी. तब वह होटल जहांनुमा पैलेस के कमरा नंबर 104 में ठहरी थी. स्कूल का जलसा शानदार रहा था. कार्यक्रम के दौरान वह ऐसे कई सहपाठियों से मिली थी, जिन से बिछुड़े मुद्दत हो चुकी थी. सालों बाद जब पुराने दोस्त मिलते हैं तो पुरानी कई यादें ताजा हो उठती हैं. तब लोग अपनी नौकरी और पेशे की परेशानियां व तनाव भूल जाते हैं.

पुराना याराना नया फसाद ऐसा ही नीलिमा के साथ हुआ था. नीलिमा के लिए भोपाल नया नहीं था, क्योंकि यहां उस का बचपन गुजरा था. तयशुदा कार्यक्रम के मुताबिक 5 अगस्त को नीलिमा को दिल्ली जाना था. दिल्ली रवाना होने के लिए जब वह एयरपोर्ट पहुंची तो एकाएक तभी पंकज का फोन आ गया. पंकज और नीलिमा पुराने परिचित थे. साल 2009 में नीलिमा का चयन वाणिज्यिक कर विभाग में हुआ था, जबकि इसी विभाग में पंकज की नियुक्ति सन 2010 में हुई थी लेकिन पद पंकज का ऊंचा था. एक ही विभाग में होने के कारण दोनों में परिचय हुआ और जल्द ही अच्छी जानपहचान में बदल गया. शादी की बात या चर्चा हुई या नहीं, यह तो नीलिमा ने पुलिस को नहीं बताया लेकिन चौंका देने वाली बात यह जरूर बताई कि पंकज ने पहले भी उस के साथ न केवल दुष्कर्म किया था बल्कि उस का वीडियो बना कर उसे ब्लैकमेल भी कर रहा था.

हुआ यूं था कि अब से कोई 7 साल पहले पंकज नीलिमा को अपनी मां से मिलाने के बहाने अपने घर ले गया था लेकिन वहां मां नहीं थी, घर खाली था. पंकज की नीयत में खोट था. एकांत का फायदा उठा कर उस ने नीलिमा के साथ जबरदस्ती की और वीडियो भी बना लिया. नीलिमा कभी इस बाबत मुंह न खोले, इसलिए उस ने वीडियो वायरल करने की धमकी दी थी. उस की यह धमकी कारगर साबित हुई. दोनों ही उच्चाधिकारी शादीशुदा हैं 5 अगस्त को पंकज ने फोन पर अपने किए की माफी मांगने की बात कही. इस पर नीलिमा ने ध्यान नहीं दिया तो उस ने फिर पुराना वीडियो वायरल करने की धमकी दी. नीलिमा की शादी एक बैंककर्मी से हो चुकी थी, जिस से उसे एक बेटी भी थी.

शादी तो पंकज की भी हो चुकी थी लेकिन उस का अपनी पत्नी से तलाक हो चुका था. अगर वाकई पंकज अपनी धमकी पर अमल कर बैठता तो नीलिमा के लिए कई झंझट खड़े हो जाते. इसलिए नीलिमा ने रुकने में कोई बुराई नहीं समझी. नीलिमा के भोपाल में मौजूद रहने की बात पंकज को पता लग गई थी. पर यह खबर पंकज को कैसे लगी थी, यह खुलासा तो कहानी लिखे जाने तक नहीं हुआ था. (Hotel)  होटल में न जाने कैसे पंकज ने नीलिमा के साथ नजदीकियां हासिल करने में सफलता हासिल कर ली. फिर जो हुआ, वह ऊपर बताया जा चुका है. मामले पर लीपापोती की कैसीकैसी कोशिशें की गईं, यह पुलिस काररवाई से भी समझ आता है कि पुलिस का एक बयान यह भी सुर्खियों में रहा था कि नीलिमा पहले से जहांनुमा रिट्रीट में ठहरी हुई थी और पंकज भी उसी होटल में रुका था.

हादसे की रात 12 बजे पंकज दरवाजा खुलवा कर जबरन नीलिमा के कमरे में घुस गया और उस ने नीलिमा के साथ बलात्कार किया. सुबह कोई 3 बजे जैसेतैसे कर के नीलिमा कमरे से बाहर आई और होटल प्रबंधन को अपने साथ हुए हादसे से अवगत कराया. खबर मिलने पर पुलिस आई और नीलिमा की रिपोर्ट दर्ज की. इस विरोधाभास पर पुलिस की ओर से कोई स्पष्टीकरण जारी न होना भी हैरत की बात थी. पूछताछ में पुलिस के उड़े होश नीलिमा ने बताया कि पंकज ने उस के साथ दुष्कर्म के अलावा मारपीट और गालीगलौज भी की और उस की बेटी को अगवा करने की भी धमकी दी थी.

नीलिमा की शिकायत पर पुलिस ने पंकज के खिलाफ भादंवि की धाराओं 376, 294 और 323 के तहत मामला दर्ज कर के उसे गिरफ्तार कर लिया और मजिस्ट्रैट के सामने पेश किया, जहां से उसे जमानत मिल गई. इस के पहले उस का मैडिकल भी कराया गया था. यह मामला उतना सहज नहीं है जितना लग रहा है. इस की वजह यह है कि रिपोर्ट लिखाते वक्त नीलिमा ने 3 बार अपने बयान बदले थे. अलावा इस के इतने बड़े पद पर होने के बाद भी उस ने ऐसे आदमी पर भरोसा क्यों किया जो उस के साथ पहले भी ज्यादती कर चुका था. तब उस ने उस की रिपोर्ट क्यों दर्ज नहीं कराई. इस के बावजूद भी वह आधी रात को उस के साथ एक कमरे में रुकने और सोने भी चली गई. यह बात भी समझ से परे है.

ऐसे कई झोल इस हाईप्रोफाइल बलात्कार केस में हैं, जो अब शायद ही सामने आएं. वजह पुलिस इस बारे में ज्यादा जानकारियां नहीं दे रही. चर्चा यह भी रही कि दोनों भोपाल में रहते हुए कई अधिकारियों और एक रसूखदार भाजपा नेता से भी मिले थे. पंकज सिंह से पूछताछ की गई तो पुलिस वालों के रहेसहे होश भी तब उड़ गए. जब यह पता चला कि उस के पिता रिटायर्ड आईपीएस अधिकारी हैं और एक भाई कलेक्टर और दूसरा भाई आईपीएस अधिकारी है. आरोपी और पीडि़ता दोनों रसूखदार और पहुंच वाले हों तो पुलिस वालों के लिए एक तरफ कुआं और दूसरी तरफ खाई जैसी स्थिति हो जाती है, इसलिए पुलिस ने मामले को ज्यादा तूल नहीं दिया और बलात्कार का यह मामला आयागया हो गया.

वैसे भी इसे बलात्कार मानने और कहने में हिचकने की अपनी वजहें हैं जिन्हें पंकज सिंह का वकील अदालत में गिनाएगा कि यह सब पीडि़ता की सहमति से हुआ था. क्योंकि वह अपनी मरजी से उस के मुवक्किल के साथ कमरे में ठहरी थी और बलात्कार से बचने के लिए चिल्लाई नहीं थी, फिर इसे बलात्कार कैसे कहा जा सकता है. रही बात पहले किए गए दुष्कर्म की तो भोपाल पुलिस इस बात को पचाने में कामयाब रही कि ऐसा कोई वीडियो उसे नहीं मिला था.

इस हाईप्रोफाइल बलात्कार केस के चर्चे भोपाल के राजनैतिक और प्रशासनिक गलियारों में है कि देखें कोई नया गुल खिलता है या फिर दोनों पक्षों में अदालत से बाहर समझौता हो जाएगा, जिस की उम्मीद ज्यादा है.

Aarushi Murder case : तलवार दंपति पर क्यों हुआ बेटी की हत्या का शक

अदालत ने परिस्थितिजन्य साक्ष्यों को आधार मान कर भारत की सब से बड़ी मर्डर मिस्ट्री माने जाने वाले आरुषि और हेमराज मर्डर केस में डा. राजेश तलवार और उन की पत्नी डा. नूपुर तलवार को सजा तो सुना दी है, लेकिन अभी भी कई सवाल ऐसे हैं जिन का जवाब किसी के पास नहीं है.

25 नवंबर, 2013 को गाजियाबाद की कचहरी में कुछ ज्यादा ही गहमागहमी थी. अदालत के बाहर और अंदर भारी संख्या में पुलिस तैनात की गई थी. इस की वजह यह थी कि उस दिन कचहरी परिसर स्थित सीबीआई की विशेष अदालत में देश के सब से चर्चित आरुषि मर्डर केस का फैसला सुनाया जाना था. यह ऐसा मामला था, जिस पर पूरे देश की निगाहें लगी हुई थीं. आरुषि मर्डर केस विशेष सीबीआई अदालत के विशेष न्यायाधीश श्याम लाल की अदालत में चल रहा था. उन की अदालत के बाहर भी सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए थे. वकीलों और आरोपी तलवार दंपति के परिजनों के अलावा किसी अन्य को विशेष सीबीआई कोर्ट में नहीं जाने दिया जा रहा था. मीडियाकर्मियों को भी अदालत में जाने की मनाही थी. फिर भी अदालत खचाखच भरी थी. माननीय न्यायाधीश श्याम लाल जब अदालत में आ कर अपनी कुरसी पर बैठे तो माहौल एकदम शांत हो गया.

इस अदालत में आरुषि मर्डर केस की सुनवाई 5 साल 6 महीने 10 दिन चली थी और केस की 212 तारीखें पड़ी थीं. केस से जुड़े 46 लोगों ने कोर्ट में पेश हो कर गवाहियां दी थीं, जिस में 7 गवाहियां बचाव पक्ष की थीं. सीबीआई ने कोर्ट में जो चार्जशीट दाखिल की थी, उस में आरुषि की हत्या का इशारा डा. राजेश तलवार और उन की पत्नी नूपुर तलवार की ओर था. कोर्ट में अभियोजन पक्ष और बचाव पक्ष के वकीलों की जिरह पूरी होने के बाद माननीय न्यायाधीश ने 25 नवंबर को केस का फैसला सुनाने का दिन मुकर्रर किया. अदालत में मौजूद सभी लोगों की निगाहें जज साहब की तरफ लगी हुई थीं. अदालत में मौजूद आरोपी डा. राजेश तलवार और उन की पत्नी डा. नूपुर तलवार भी थे. माननीय न्यायाधीश श्याम लाल ने जब फैसला सुनाना शुरू किया तो लोगों की उत्सुकता और भी बढ़ गई.

माननीय न्यायाधीश ने अपने फैसले में कहा कि मांबाप अपने बच्चों के सब से बड़े रक्षक होते हैं. किसी की जिंदगी से किसी को भी खिलवाड़ करने का हक नहीं है. सीबीआई की जांच और परिस्थितिजन्य साक्ष्यों से यह साबित हो चुका है कि तलवार दंपति ने ही अपनी उस बेटी की जिंदगी छीन ली, जिस ने बमुश्किल 14 बसंत देखे थे. इतना ही नहीं, उन्होंने नौकर को भी मार डाला. ऐसा कर के इन्होंने धर्म और कानून दोनों का उल्लंघन किया है. माननीय न्यायाधीश ने 204 पेज के अपने आदेश में डा. तलवार दंपति को दोषी ठहराने की 26 वजहें बताई थीं. उन्होंने धर्मग्रंथों का भी जिक्र किया. कुरान का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि अल्लाह ने जो पवित्र जिंदगी बख्शी है, उसे छीना नहीं जाना चाहिए. अगर हम धर्म की रक्षा करेंगे तो धर्म हमारी रक्षा करेगा. इसी तरह अगर हम कानून की हिफाजत करेंगे तो कानून हमारी हिफाजत करेगा. दोनों ही आरोपियों ने देश के कानून का उल्लंघन किया है.

जज ने डा. राजेश और नूपुर को अपनी बेटी और नौकर हेमराज की हत्या के साथसाथ सुबूत नष्ट करने का भी दोषी माना. पतिपत्नी को दोषी करार देने के बाद उन्होंने सजा सुनाने के लिए अगला दिन यानी 26 नवंबर तय कर दिया. फैसला सुनते ही अदालत में मौजूद डा. राजेश तलवार और डा. नूपुर तलवार के चेहरों पर मुर्दनी छा गई. डा. नूपुर की आंखों में आंसू छलक आए. कोर्ट के आदेश पर पुलिस ने डा. राजेश और डा. नूपुर को हिरासत में ले लिया. दोपहर बाद 3 बज कर 25 मिनट पर जज द्वारा सुनाए गए फैसले की खबर न्यूज चैनलों पर प्रसारित होने लगी. जरा सी देर में पूरी दुनिया को पता चल गया कि डा. तलवार दंपति ने ही अपनी एकलौती बेटी आरुषि और नौकर हेमराज की हत्या की थी.

आरुषि की हत्या के बाद से ही इस केस में कई उतारचढ़ाव आए थे. उत्तर प्रदेश पुलिस से जांच सीबीआई तक पहुंची. कई जांच अधिकारी बदले. आरुषि मर्डर केस आखिर शुरू से ही इतना पेचीदा क्यों रहा, यह जानने के लिए इस केस की थोड़ी पृष्ठभूमि जान लेना जरूरी है. उत्तर प्रदेश के गौतमबुद्धनगर (नोएडा) के सेक्टर-25, जलवायु विहार के फ्लैट नंबर एल-32 में रहने वाले डा. राजेश तलवार के परिवार में पत्नी डा. नूपुर तलवार के अलवा एक ही बेटी थी आरुषि. तलवार दंपति जानेमाने दंत चिकित्सक थे. आरुषि उन की शादी के 8 साल बाद 24 मई, 1993 को टेस्टट्यूब तकनीक से पैदा हुई थी, इसलिए वह मांबाप की बहुत लाडली थी.

दिल्ली पब्लिक स्कूल की छात्रा आरुषि का जन्मदिन हालांकि 24 मई को था, लेकिन वह अपना जन्मदिन 15 मई को मनाती थी. इस की वजह यह थी कि 15 मई को उस के स्कूल की गरमी की छुट्टियां शुरू हो जाती थीं और उस के ज्यादातर दोस्त जन्मदिन के कार्यक्रम में शामिल होने के लिए आ जाते थे. सन 2008 में आरुषि के स्कूल की छुट्टियां 16 मई से हुईं तो उस ने डा. तलवार से 16 मई को ही जन्मदिन मनाने की बात कही. वह इस के लिए तैयार हो गए. डा. तलवार जन्मदिन के मौके पर बेटी को कोई न कोई महंगा गिफ्ट जरूर देते थे. जिज्ञासावश आरुषि ने इस बारे में उन से पूछा तो उन्होंने एक डिजिटल कैमरा दिखाते हुए कहा कि यही तुम्हारा बर्थडे गिफ्ट है.

कैमरा देख कर आरुषि बहुत खुश हुई. उस ने उसी समय उस से कई फोटो खींचे. डा. राजेश तलवार ने भी उसी कैमरे से आरुषि के कई फोटो लिए. 15 मई, 2008 की देर शाम बर्थडे कार्यक्रम की प्लानिंग के बाद डा. राजेश तलवार अपने कमरे में चले गए. आरुषि भी अपने कमरे में जा कर सो गई. अगले दिन 16 मई की सुबह डा. तलवार दंपति को पता लगा कि उन की 14 साल की बेटी आरुषि की हत्या हो गई है. डा. राजेश तलवार ने बेटी की हत्या की खबर पड़ोसियों को दी तो वे हैरान रह गए. पौश कालोनी में फ्लैट के अंदर हत्या हो जाना चौंकाने वाली बात थी. तलवार दंपति का रोरो कर बुरा हाल था. लोग उन्हें ढांढस बंधा रहे थे. बहरहाल, डा. राजेश तलवार ने थाना सैक्टर-20 को फोन कर के बेटी की हत्या की खबर दी. उस समय थानाप्रभारी दाताराम नौनेरिया थे.

डा. राजेश तलवार का फ्लैट सेकेंड फ्लोर पर था. पुलिस जब घटनास्थल पर पहुंची तो देखा आरुषि की लाश कमरे में उस के बेड पर पड़ी थी. उस का गला किसी तेज धारदार हथियार से कटा हुआ था. साथ ही उस के सिर पर भी गहरा घाव था. आरुषि के बगल वाले कमरे में डा. राजेश तलवार और डा. नूपुर तलवार सोते थे. जबकि दूसरे कमरे में नौकर हेमराज सोता था. तलवार दंपति ने बताया कि उन्हें बेटी के चीखने की कोई आवाज नहीं सुनाई दी. हेमराज अपने कमरे में नहीं था. उस के कमरे में बीयर की खाली बोतल और 3 गिलास रखे थे. जांच के दौरान पुलिस ने पाया कि फ्लैट के अंदर एंट्री जबरदस्ती नहीं हुई थी. वैसे भी किसी बाहरी व्यक्ति को आरुषि के कमरे तक पहुंचने के लिए 3 दरवाजों से गुजरना पड़ता. फ्लैट में आरुषि, उस के मातापिता के अलावा नौकर हेमराज रहता था.

जबकि डा. तलवार के अनुसार हेमराज फरार था. फरार होने की वजह से उस पर शक स्वाभाविक ही था. वैसे भी वह डा. तलवार के यहां 6-7 महीने से ही काम कर रहा था. शक की एक वजह यह भी थी कि दिल्ली और एनसीआर में घरेलू नौकरों द्वारा तमाम घटनाओं को अंजाम दिया गया था. घर का सारा सामान अपनी जगह था अलावा आरुषि के मोबाइल फोन के. हेमराज ने सिर्फ मोबाइल के लिए कत्ल किया होगा, यह बात गले उतरने वाली नहीं थी. हत्या की दूसरी वजह क्या हो सकती है, यह बात पोस्टमार्टम के बाद ही पता चल सकती थी. इस बीच मौके पर जिले के सभी बड़े पुलिस अधिकारी पहुंच गए थे. आवश्यक काररवाई के बाद पुलिस ने आरुषि की लाश पोस्टमार्टम के लिए भेज दी.

डा. राजेश तलवार ने हेमराज के खिलाफ आरुषि की हत्या की रिपोर्ट दर्ज कराते हुए कहा कि वह मर्डर कर के नेपाल भाग गया है. उस की गिरफ्तारी के लिए पुलिस टीम नेपाल रवाना हो गई. इस के अलावा संभावित स्थानों पर भी उस की खोज की जाने लगी. पुलिस ने उस की गिरफ्तारी पर 20 हजार रुपए का इनाम भी घोषित कर दिया था. चूंकि डा. राजेश तलवार मैडिकल क्षेत्र से थे, इसलिए उन्होंने अपने ताल्लुकात का फायदा उठाते हुए 16 मई को दोपहर 12 बजे ही डा. सुनील डोगरे से लाश का पोस्टमार्टम करा कर आरुषि का अंतिम संस्कार करा दिया और अगले दिन अस्थियां विसर्जित करने के लिए हरिद्वार चले गए. उत्तर प्रदेश पुलिस के पूर्व उपाधीक्षक के.के. गौतम नोएडा में ही रहते थे. वह डा. राजेश तलवार के भाई डा. दिनेश तलवार के मित्र थे. 17 मई, 2008 को वह भी डा. राजेश तलवार के यहां पहुंचे तो अचानक उन की नजर जीने पर पड़ी.

वहां उन्हें कुछ खून के धब्बे दिखाई दिए तो उन्होंने जीने के पास आ कर देखा. खून के धब्बे उन्हें ऊपर तक दिखाई दिए. लेकिन जीने के दरवाजे पर ताला लगा हुआ था. के. के. गौतम तेजतर्रार पुलिस अधिकारी रहे थे. उन का पुलिसिया दिमाग घूमने लगा. वहां नोएडा पुलिस भी थी. पुलिस ने डा. नूपुर तलवार से जीने का दरवाजा खोलने को कहा तो उन्होंने बताया कि उन के पास चाबी नहीं है. जब काफी खोजने के बाद भी जीने की चाबी नहीं मिली तो पुलिस ने दरवाजे पर लगा ताला तोड़ दिया. पुलिस छत पर पहुंची तो वहां भी खून के धब्बे मिले. खोजबीन में पुलिस की नजर कूलर के पास पहुंची तो वहां एक आदमी की लाश पड़ी थी. उस के ऊपर कूलर की जाली रखी हुई थी. डा. नूपुर तलवार से जब उस लाश के बारे में पूछा गया तो उन्होंने उसे पहचानने से इनकार कर दिया. बाद में दूसरे लोगों ने लाश की शिनाख्त तलवार दंपति के नौकर हेमराज के रूप में की.

आरुषि की तरह हेमराज की हत्या भी सांस की नली काट कर की गई थी. पुलिस ने डा. राजेश तलवार को हेमराज की हत्या की सूचना दे कर जल्द लौटने को कहा. उस समय वह हरिद्वार के रास्ते में थे. पुलिस के बुलाने के बाद भी वह वापस नहीं लौटे. हेमराज की लाश मिलने से आरुषि की हत्या के मामले ने नया मोड़ ले लिया. हेमराज की लाश चूंकि दूसरे दिन मिली थी, इसलिए पुलिस पर अंगुलियां उठना स्वाभाविक था. इस की गाज गिरी इस केस के जांच अधिकारी दाताराम नौनेरिया और एसपी सिटी महेश कुमार मिश्रा पर. 18 मई, 2008 को दोनों का तबादला कर दिया गया.

दाताराम की जगह नए थानाप्रभारी संतराम यादव ने इस दोहरे हत्याकांड की जांच करनी शुरू की. आरुषि की पोस्टमार्टम रिपोर्ट में बताया गया कि उस का गला सर्जिकल इक्विपमेंट से काटा गया था. उस के सिर पर भी किसी नुकीली चीज का जख्म था. रिपोर्ट में यह भी बताया गया था कि उस की हत्या करीब 12 घंटे पहले हुई थी. इस का मतलब यह था कि आरुषि का कत्ल 15-16 मई की रात को 12-1 बजे के बीच हुआ था. रिपोर्ट में दुष्कर्म की बात से इनकार किया गया था. हेमराज की पोस्टमार्टम रिपोर्ट से पता चला कि उस की हत्या भी सांस की नली काट कर की गई थी. उस के सिर पर भी पीछे से किसी भारी चीज से वार किया गया था. पोस्टमार्टम रिपोर्ट से यह बात साफ हो गई थी कि आरुषि और हेमराज की हत्या एक ही तरीके से की गई थी और हत्यारा भी संभवत: एक ही था.

जांच अधिकारी ने डा. राजेश तलवार से पूछताछ की तो उन्होंने बताया कि वह सोते समय आरुषि के कमरे में बाहर से ताला लगा कर अपने कमरे में सोते थे, लेकिन 15 मई की रात को वह ताला लगाना भूल गए थे. वहीं उन की पत्नी डा. नूपुर तलवार ने बताया कि बेटी की लाश देखने के बाद वह सीधे हेमराज के कमरे में गईं. जब वह कमरे में नहीं मिला तो उन्होंने घर के लैंडलाइन फोन से उस के मोबाइल का नंबर ट्राई किया. उस समय सुबह को 6 बज रहे थे. फोन किसी ने रिसीव तो किया, पर बात किए बिना ही काट दिया. पुलिस ने हेमराज के फोन की काल डिटेल्स निकलवाई तो वास्तव में 16 मई को सुबह 6 बज कर 3 मिनट पर काल रिसीव हुई थी और उस समय उस का फोन जलवायु विहार स्थित मोबाइल फोन टावर के संपर्क में था. पुलिस की समझ में नहीं आ रहा था कि जब हेमराज की हत्या हो गई थी तो उस का फोन किस ने रिसीव किया?

पुलिस यह मान कर चल रही थी कि हत्यारा चाहे जो भी रहा हो, वह तलवार परिवार का करीबी रहा होगा. पुलिस ने डा. राजेश तलवार के कंपाउंडर किशन उर्फ कृष्णा से पूछताछ की और उस के मोबाइल की काल डिटेल्स भी निकलवाई. लेकिन कोई नतीजा हासिल नहीं हुआ. तलवार दंपति के यहां 4 लोग रहते थे. उन में से 2 का मर्डर हो गया था. वह भी उस स्थिति में जबकि कोई बाहरी आदमी फ्लैट में नहीं आया था. ऐसी स्थिति में पुलिस को डा. तलवार दंपति पर ही शक हो रहा था. इसी बीच इस केस की जांच संतराम यादव की जगह थाना सेक्टर-20 के इंचार्ज जगवीर सिंह को सौंप दी गई. उन्होंने केस की फाइल का अध्ययन करने के बाद घटनास्थल का मुआयना किया. केवल शक के आधार पर डा. राजेश तलवार को गिरफ्तार नहीं किया जा सकता था, इसलिए पुलिस उन के खिलाफ सुबूत जुटाने की कोशिश करने लगी. इस के लिए पुलिस ने उन के क्लीनिक, फ्लैट, कार, गैरेज आदि की जांच की, लेकिन कोई सुबूत नहीं मिला.

पुलिस ने डा. राजेश तलवार का मोबाइल फोन भी इलैक्ट्रौनिक सर्विलांस पर लगा दिया, ताकि फोन पर होने वाली उन की बात सुनी जा सके. पुलिस द्वारा बारबार पूछताछ के बाद डा. राजेश तलवार को लगने लगा था कि पुलिस हत्या के आरोप में कहीं उन्हें ही गिरफ्तार न कर ले. इसलिए उन्होंने अपने दोस्त वकील को फोन कर के अपनी अग्रिम जमानत के बारे में बात की. पुलिस डा. राजेश तलवार की फोन पर हो रही बातचीत को सुन रही थी. अग्रिम जमानत की बात सुन कर पुलिस को यकीन हो गया कि दोनों की हत्या में डा. राजेश तलवार का हाथ रहा होगा, इसलिए उन्होंने अपनी अग्रिम जमानत के बारे में बात की. फिर क्या था, पुलिस ने आननफानन में डा. राजेश तलवार को उठा लिया.

उन से पूछताछ करने के बाद मेरठ जोन के तत्कालीन पुलिस महानिरीक्षक ने एक प्रैस कौन्फ्रैंस आयोजित कर खुलासा किया कि आरुषि और हेमराज की हत्या और किसी ने नहीं, बल्कि डा. राजेश तलवार ने ही की थी. वजह थी आरुषि और हेमराज के बीच अवैध संबंध. डा. राजेश तलवार ने उन्हें आपत्तिजनक हालत में देख लिया था. परिस्थितिजन्य साक्ष्यों के आधार पर पुलिस ने डा. राजेश तलवार को दोहरे मर्डर केस में गिरफ्तार कर के कोर्ट में पेश किया और 3 दिनों के पुलिस रिमांड पर ले लिया. लेकिन रिमांड की अवधि में नोएडा पुलिस डा. राजेश तलवार से कत्ल में इस्तेमाल किए गए हथियार, खून सने कपड़े व आरुषि और हेमराज के मोबाइल फोन वगैरह बरामद नहीं कर सकी. पुलिस यह भी पता नहीं लगा सकी कि जीने पर खून के जो धब्बे मिले थे, वे कैसे लगे थे.

डा. राजेश तलवार चीखचीख कर कह रहे थे कि उन्होंने आरुषि और हेमराज की हत्याएं नहीं कीं, लेकिन नोएडा पुलिस ने उन की एक नहीं सुनी. उन के परिवार वाले भी उन की गिरफ्तारी का विरोध कर रहे थे. उन का कहना था कि पुलिस ने डा. राजेश तलवार को झूठा फंसाया है. इसलिए वह इस मामले की सीबीआई जांच कराने की मांग कर रहे थे. चूंकि पुलिस ने हत्या से संबंधित एक भी सुबूत बरामद नहीं किया था, इसलिए कई राजनैतिक पार्टियों के नेताओं और सामाजिक संगठनों ने भी पुलिस के खुलासे पर अंगुली उठानी शुरू कर दी थी. वे भी सीबीआई जांच की मांग कर रहे थे. यह आवाज प्रदेश की तत्कालीन मुख्यमंत्री मायावती के कानों तक पहुंची तो उन्होंने इस दोहरे हत्याकांड की जांच सीबीआई से कराने की सिफारिश कर दी.

इस के अलावा उन्होंने मेरठ जोन के पुलिस महानिरीक्षक गुरुदर्शन सिंह, पुलिस उपमहानिरीक्षक पी.सी. मीणा, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक ए. सतीश गणेश के भी ट्रांसफर के आदेश दिए, ताकि वे जांच को प्रभावित न कर सकें. 1 जून, 2008 को जांच का आदेश मिलते ही सीबीआई जांच में जुट गई. सीबीआई की 25 सदस्यीय टीम फोरेंसिक एक्सपर्ट्स के साथ जलवायु विहार पहुंच गई. चूंकि सब से पहले घटनास्थल पर पहुंची नोएडा पुलिस ने वहां से सुबूत इकट्ठे नहीं किए थे, इसलिए तब तक सारे सुबूत नष्ट हो चुके थे. सीबीआई टीम ने आरुषि की मां डा. नूपुर तलवार, डा. राजेश तलवार के कंपाउंडर कृष्णा, डा. अनीता दुर्रानी, हेमराज के दामाद जीवन शर्मा, डा. दुर्रानी के नौकर राजकुमार, एक अन्य नौकर विजय मंडल, ट्रांसफर हुए एसपी सिटी महेश मिश्रा, पूर्व डीएसपी के.के. गौतम, डा. तलवार की नौकरानी भारती के अलावा सब्जी बेचने वालों, गार्डों और पड़ोसियों तक से पूछताछ की.

फोरेंसिक टीम ने इन्फ्रारेड कैमिकल इमेजिंग के जरिए खून के कुछ नमूने भी उठाए.  इन्फ्रारेड कैमिकल इमेजिंग एक ऐसी तकनीक है, जिस से किसी जगह या कपड़े पर पड़ा खून का पुराने से पुराना धब्बा भी खोजा जा सकता है. सीबीआई टीम ने छत पर जा कर भी कई बार जांच की. सीबीआई ने डा. राजेश तलवार का 2 बार लाई डिटेक्टर टेस्ट, साइको एनालिसिस टेस्ट व नारको एनालिसिस टेस्ट कराया. इस के अलावा उन की पत्नी डा. नूपुर तलवार का भी लाई डिटेक्टर टेस्ट व साइको एनालिसिस टेस्ट कराया गया. इस के अलावा सीबीआई ने डा. दुर्रानी के नौकर राजकुमार और डा. राजेश तलवार के पड़ोस में काम करने वाले नौकर विजय मंडल के भी पौलीग्राफिक टेस्ट कराए. इन सब टेस्ट रिपोर्टों और तफ्तीश के बाद सीबीआई ने कहा कि आरुषि और नौकर हेमराज की हत्या डा. राजेश तलवार ने नहीं, बल्कि उन के कंपाउंडर किशन उर्फ कृष्णा, डा. अनीता दुर्रानी के नौकर राजकुमार और एक अन्य नौकर विजय मंडल ने मिल कर की थी. सीबीआई के खुलासे के बाद डा. राजेश तलवार के परिजन और समर्थक खुश हुए.

सीबीआई की जांच ने नोएडा पुलिस द्वारा किए गए खुलासे की हवा निकाल दी थी और 50 दिन डासना जेल में रहने के बाद डा. राजेश तलवार घर आ गए थे. एक तरह से सीबीआई ने उन के ऊपर लगे हत्या के दाग को धो दिया था. लेकिन सीबीआई की यह थ्यौरी और पेश किए गए सुबूत अदालत के सामने टिक नहीं सके और गाजियाबाद की विशेष सीबीआई अदालत ने तीनों नौकरों, कृष्णा, राजकुमार और विजय मंडल को 12 सितंबर, 2008 को रिहा करने के आदेश दे दिए. नौकरों की रिहाई के बाद मीडिया में इस हत्याकांड को ले कर फिर से सवाल उठने लगे. न्यूज चैनलों पर फिर से इस मर्डर मिस्ट्री की कथाएं प्रसारित की जाने लगीं. जनमानस के भीतर फिर वही सवाल हिलोरें मारने लगा कि आखिर आरुषि और हेमराज का हत्यारा कौन है?

कोर्ट के आदेश पर सीबीआई ने फिर से मामले की गहनता से जांच शुरू कर दी. पोस्टमार्टम करने वाले डाक्टर, फोरेंसिक जांच रिपोर्ट देने वाले अधिकारियों आदि के अलावा डा. तलवार दंपति से फिर से पूछताछ की गई. घूमफिर कर जांच एजेंसी को तलवार दंपति पर ही शक हो रहा था, लेकिन हत्या का कोई सुबूत नहीं मिल रहा था. जांच में जब कोई नतीजा नहीं निकला तो सीबीआई ने 29 दिसंबर, 2010 को विशेष सीबीआई अदालत में क्लोजर रिपोर्ट दाखिल करते हुए कहा, ‘‘अब तक की जांच के बाद आरुषि और हेमराज की हत्या का पूरा शक डा. राजेश तलवार और डा. नूपुर तलवार पर ही जाता है. लेकिन उन के खिलाफ हमारे पास पर्याप्त और पुख्ता सुबूत नहीं हैं. लिहाजा इस केस को बंद करने की अनुमति दी जाए.’’

लेकिन अदालत ने इसे स्वीकार करने के बजाए क्लोजर रिपोर्ट को ही चार्जशीट मान कर तलवार दंपति को इस हत्याकांड में आरोपी बनाया. इस के बाद 9 फरवरी, 2011 से इस मामले की फिर से सुनवाई शुरू हो गई. इस मामले के विवेचनाधिकारी ए.जी.एल. कौल ने अपनी गवाही में कोर्ट के सामने साफ तौर पर कहा कि डा. राजेश तलवार हेमराज और आरुषि को आपत्तिजनक स्थिति में देख कर आपा खो बैठे थे और उन्होंने अपनी गोल्फ स्टिक से उन की हत्या कर दी थी. जबकि बचाव पक्ष ने दुनिया के जानेमाने डीएनए विशेष डा. आंद्रे सेमीखोस्की के अलावा एम्स के पूर्व फोरेंसिक एक्सपर्ट डा. आर.के. शर्मा सहित 7 लोगों की गवाही कराई. डा. सेमीखोस्की ने सीबीआई द्वारा पेश डीएनए रिपोर्ट को आधाअधूरा बताते हुए डीएनए जांच रिपोर्ट का रा डाटा मांगा.

उन्होंने कहा कि खुखरी और दीवार के टुकड़े जिस पर सीबीआई ने खून के दाग बरामद किए, उन की लंदन में दोबारा डीएनए जांच होनी चाहिए. लेकिन अदालत ने उन की इस मांग को खारिज कर दिया. अप्रैल, 2013 में सीबीआई की तरफ से इंस्टीट्यूट औफ फोरेंसिक साइंस के उपनिदेशक महेंद्र दहिया को कोर्ट में बतौर गवाह पेश किया गया. डा. दहिया ने अदालत से कहा कि आरुषि और हेमराज दोनों पर हमला आरुषि के कमरे में ही हुआ था. दोनों को आपत्तिजनक स्थिति में देख लिया गया था. हेमराज की लाश को हत्या के बाद छत पर ले जाया गया था. उन्होंने अदालत से यह भी कहा कि 9 अक्तूबर, 2009 को वह सीबीआई की टीम के साथ घटनास्थल पर गए थे तो फ्लैट का नजारा देख कर लग रहा था कि उस वक्त फ्लैट की पुताई कर दी गई थी.

मकान की स्थिति देख कर जांच में पता चला कि आरुषि-हेमराज की हत्या एक ही समय पर और एक ही जगह पर की गई थी. उन की हत्या में डा. राजेश तलवार ने अपनी गोल्फ स्टिक का इस्तेमाल किया था. बाद में दोनों के गले सर्जिकल औजार से काटे गए थे. उन्होंने आगे बताया कि जांच में यह भी पता चला कि हेमराज को मारने के बाद लाश को छत पर ले जाया गया. उस का गला छत पर ही काटा गया था. हत्यारे का पैर जीने के दरवाजे के पास पडे़ पाइप में उलझ गया था, इसलिए उस का खूनी पंजा दीवार पर लग गया था. दोनों के गले एक कान से दूसरे कान तक काटे गए थे और यह काम उन के लेटे होने की अवस्था में किया गया था. आरुषि के सिर में प्रेशर से चोट पहुंचाई गई थी, इसलिए उस के खून के छींटे दीवार पर आए. सभी तथ्यों और परिस्थितियों को देखते हुए डा. दहिया ने स्पष्ट किया था कि घटना में कोई बाहरी व्यक्ति शामिल नहीं था.

तमाम गवाहों और परिस्थितिजन्य सुबूतों के आधार पर विद्वान न्यायाधीश श्याम लाल ने 25 नवंबर, 2013 को सुनाए गए 204 पेज के अपने आदेश में डा. राजेश तलवार और उन की पत्नी डा. नूपुर तलवार को आरुषि और हेमराज की हत्या का दोषी ठहराया. सजा के लिए उन्होंने 26 नवंबर का दिन मुकर्रर कर दिया. चूंकि अदालत ने डा. तलवार दंपति को दोहरे हत्याकांड का दोषी ठहराया गया था, इसलिए लोगों में इस बात की चर्चा होने लगी थी कि उन्हें फांसी दी जाएगी या फिर उम्रकैद. 26 नवंबर को दोपहर 2 बज कर 20 मिनट पर सीबीआई के वकील आर.के. सैनी व बी.के. सिंह और बचाव पक्ष के वकील तनवीर अहमद, मनोज सिसौदिया व सत्यकेतु सिंह के बीच सजा के बिंदु पर 10 मिनट तक बहस हुई. सीबीआई के वकीलों ने हत्याकांड को रेयरेस्ट औफ रेयर करार देते हुए दोनों दोषियों को सजाएमौत देने की मांग की. जबकि बचाव पक्ष के वकीलों ने कहा कि दोनों ही चिकित्सक हैं, इन का कोई पुराना आपराधिक रिकौर्ड भी नहीं है, लिहाजा उन्हें कम से कम सजा दी जाए.

दोनों पक्षों की बहस सुनने के बाद न्यायाधीश ने डा. राजेश तलवार व डा. नूपुर तलवार पर आईपीसी की धारा 302, 201 (समान मकसद से हत्या करने) पर आजीवन कारावास और 10 हजार रुपए का जुर्माना, आईपीसी की धारा 201 (साक्ष्यों को मिटाना) पर 5 साल की सजा और 5 हजार रुपए का जुर्माना तथा डा. राजेश तलवार पर आईपीसी की धारा 203 (झूठी रिपोर्ट दर्ज करा कर पुलिस को गुमराह करना) पर 1 साल की सजा और 2 हजार रुपए जुर्माने की सजा सुनाई. उन्होंने यह भी आदेश दिया कि सभी सजाएं एक साथ चलेंगी. सजा सुनने के बाद डा. तलवार दंपति को डासना जेल भेज दिया गया. अब जेल में डा. नूपुर तलवार का नया पता कैदी नंबर 9343 और बैरक नंबर 13 है, जबकि डा. राजेश तलवार को बैरक नंबर 11 के कैदी नंबर 9342 के रूप में जाना जाएगा.

हालांकि इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने आरुषि-हेमराज हत्याकांड मामले में गुरुवार को एक महत्वपूर्ण फैसले में सीबीआई की विशेष अदालत का निर्णय रद्द करते हुए राजेश राजेश तलवार और नुपुर तलवार को निर्दोष करार दिया. अदालत ने इस तरह से दोनों अपीलकर्ताओं को संदेह का लाभ देते हुए विशेष सीबीआई अदालत का 26 नवंबर, 2013 का फैसला निरस्त कर दिया.  अदालत ने तलवार दंपति की अपील स्वीकार करते हुए उन्हें तत्काल रिहा करने का निर्देश दिया

मां ने बेटे की हत्या कर आंगन में दफनाया

नशेड़ी निरमैल सिंह मां को मारतापीटता ही नहीं था, बल्कि सीधेसीधे कहता था कि उस के अपने ही किराएदार रविंद्र सिंह से नाजायज संबंध हैं. बेटे की इन्हीं हरकतों से एक ममतामयी मां मजबूर हो कर हत्यारिन बन गई पंजाब के जिला तरनतारन के थाना सरहाली का एक गांव है शेरों. इसी गांव की रहने वाली मनजीत कौर के पति बलवंत सिंह की मृत्यु बहुत पहले हो गई थी. बलवंत सिंह की गांव में खेती की थोड़ी सी जमीन और रहने का अपना मकान था. कुल इतनी जायदाद मनजीत कौर को पति से मिली थी. इस के अलावा वह उसे 2 बेटे और 1 बेटी भी दे गया था.

जब बलवंत सिंह की मौत हुई थी, मनजीत कौर के तीनों बच्चे काफी छोटे थे. पति की मौत के बाद बड़ी मुश्किलों से उस ने तीनों बच्चों को पालपोस कर बड़ा किया. उस का भविष्य और उम्मीदें इन्हीं बच्चों पर टिकी थीं. उस ने सोचा था कि बच्चे बड़े हो कर उस का सहारा बनेंगे. बच्चे किसी लायक हो जाएंगे तो उस के दिन बदल जाएंगे. लेकिन ऐसा हो नहीं सका. क्योंकि एक चीज चुपके से खलनायक की तरह मनजीत कौर के घर में दाखिल हो गई, जो उस के घरपरिवार को तबाही के रास्ते पर ले गई. वह चीज कुछ और नहीं, नशा था, हेरोइन, स्मैक और कैप्सूलों का. यह घातक नशा वैसे भी पंजाब के गांवों में कहर बरपा रहा है. मनजीत कौर के दोनों बेटे बड़े हुए तो उन्हें मेहनत और मशक्कत कर के कमाई करने का नशा लगने के बजाय घर को बरबाद करने वाला नशा लग गया

इसी नशे की वजह से मनजीत कौर का एक बेटा बेवक्त काल के गाल में समा गया. बेटे की बेवक्त मौत ने मनजीत कौर को तोड़ कर रख दिया. एक जवान बेटे की बेवक्त मौत से डरी और घबराई मनजीत कौर को दूसरे बेटे निरमैल सिंह की चिंता सताने लगी. क्योंकि निरमैल सिंह भी नशे का आदी था. चिंतित मनजीत कौर को अचानक खयाल आया कि अगर वह बेटे की शादी कर दे तो शायद उस की नशा करने की आदत छूट जाए. यह खयाल आते ही मनजीत कौर बेटे की शादी के लिए दौड़धूप करने लगी. उस की दौड़धूप का नतीजा यह निकला कि नशेड़ी निरमैल सिंह की गुरप्रीत कौर से शादी हो गई. शादी के बाद निरमैल सिंह में कुछ सुधार नजर आया तो मनजीत कौर को लगा कि धीरेधीरे बेटा सुधर जाएगा. वह नशे के बजाय अपनी शादीशुदा जिंदगी का आनंद लेता दिखाई दिया.

यह देख कर मनजीत कौर ने काफी राहत महसूस की. मगर इस राहत की उम्र बहुत लंबी नहीं थी. शादी के कुछ दिनों बाद तक बीवी के जिस्म की गर्मी में डूबे रहने के बाद निरमैल सिंह फिर से नशे की ओर मुड़ा तो पहले से भी ज्यादा शिद्दत के साथ. इस से घर में जबरदस्त कलहक्लेश रहने लगा. मनजीत कौर की जान आफत में पड़ गई. पहले तो वह अकेली किसी तरह नशेड़ी बेटे से निपट लेती थी, लेकिन घर में बहू के आने से वह कुछ कमजोर सी पड़ गई थी. घर का खर्चा वैसे ही बढ़ गया था, इस के बावजूद अपनी जिम्मेदारियों से लापरवाह निरमैल सिंह जो भी कमाता था, अपने नशे में उड़ा देता था. इस से घर में अशांति और कलह का माहौल बनना स्वाभाविक था. घर के लगातार बिगड़ते माहौल से परेशान मनजीत कौर ने किसी तरह अपनी एकलौती बेटी राज कौर के हाथ पीले कर के उसे विदा कर दिया.

राज कौर की शादी से घर के हालात सुधरने के बजाय और खराब हो गए. उसी बीच नशेड़ी निरमैल एकएक कर के 2 बच्चों का बाप बन गया. बच्चों की जिम्मेदारी कंधों पर आने के बाद भी निरमैल में कोई बदलाव नहीं आया. उस की नशा करने की आदत वैसी की वैसी ही बनी रही. ऐसी हालत में घर का खर्चा कैसे चल सकता था. घर को आर्थिक तंगी से उबारने के लिए चिंतित मनजीत कौर ने घर के एक हिस्से को रविंद्र सिंह को किराए दे दिया.

मां का यह कदम नशेड़ी निरमैल को बिलकुल पसंद नहीं आया. नाराज हो कर उस ने घर में जबरदस्त क्लेश किया. लेकिन जब मनजीत कौर ने किराएदार रखने का अपना फैसला नहीं बदला तो वह खामोश हो गया. अब उस की गिद्धदृष्टि किराए की रकम पर जम गई. किराए से आने वाले पैसे जहां मनजीत कौर का सहारा बन गए थे, वहीं यह बात निरमैल को बरदाश्त नहीं हो रही थीवह किराएदार रविंद्र सिंह से भी इस बात को ले कर झगड़ा करने लगा. वह किराया खुद लेना चाहता था, जबकि रविंद्र किराया मनजीत कौर को देता था. निरमैल की नशे की लत से वाकिफ रविंद्र सिंह किसी भी कीमत पर किराया उसे देने को तैयार नहीं था.

दूसरी ओर नशे में डूबे रहने वाले निरमैल का दिमाग इस तरह खराब रहने लगा था कि वह रिश्तों की मर्यादा तक भूल गया था. वह खीझ और हताशा में किराएदार रविंद्र सिंह और अपनी मां को ले कर उन के चरित्र पर अंगुली उठाने लगा था. मनजीत कौर के लिए यह जीतेजी मरने वाली बात थी. वह एक विधवा औरत थी और उस की उम्र 60 साल के ऊपर हो गई थी. अब इस उम्र में अगर मनजीत कौर के चरित्र पर उस की कोख से जन्मा बेटा ही अंगुली उठाए तो उस के लिए मरने वाली बात थी. बेटे द्वारा चरित्र पर अंगुली उठाने से मनजीत कौर इतनी आहत हुई कि उस ने गुस्से में कहा, ‘‘दुनिया से डर बेटा, इतना भी हद से मत गुजर कि एक दिन मैं यह भी भूल जाऊं कि मैं तेरी मां हूं.’’

मनजीत कौर की इस चेतावनी को निरमैल समझ नहीं सका. नशे ने निरमैल को पूरी तरह नकारा बना दिया था. उस ने कामधंधा करना लगभग बंद कर दिया था. उसे नशे की तलब लगती तो उस की हालत पागलों जैसी हो जाती. वह नशे के लिए मां और पत्नी से पैसे मांगता. पैसे मिलते तो वह उन दोनों से झगड़ा और मारपीट करता. यही नहीं, अंत में वह घर का कोई कीमती सामान उठा ले जाता और बाजार में बेच कर नशे का सामान खरीद लेता. इस हालत में मनजीत कौर के दिल से बेटे के लिए बददुआएं ही निकलतीं. निरमैल के साथ रहना मनजीत कौर की मजबूरी थी. वह तो अपना घर छोड़ सकती थी और अपने नशेड़ी बेटे को. उस से घर से निकलने के लिए जरूर कहती थी. जबकि निरमैल से 2 बच्चों की मां बन चुकी गुरप्रीत कौर के लिए ऐसी कोई मजबूरी नहीं थी. नशेड़ी और निखट्टू पति के दुर्व्यवहार और मारपीट से परेशान हो कर गुरप्रीत कौर एक दिन दोनों बच्चों को ले कर मायके चली गई

मनजीत कौर ने बहू को रोकने की बहुत कोशिश की, लेकिन वह नहीं मानी. उस ने कहा, ‘‘आप का बेटा इंसान नहीं, जानवर है. मुझे अपने बच्चों के भविष्य को देखना है. इस नरक में एक जानवर की बीवी बन कर रहने से कहीं अच्छा होगा कि मैं खुद को बेवा मान कर मायके में ही रहूं.’’ गुरप्रीत कौर चली गई. उस के बाद घर में रह गई मनजीत कौर, निरमैल सिंह और किराएदार रविंद्र सिंह. पत्नी और बच्चों के घर छोड़ कर चले जाने की हताशा में नशेड़ी निरमैल सिंह हिंसक हो उठा. अब उस के निशाने पर सीधे मनजीत कौर और रविंद्र सिंह थे.

मनजीत कौर के चरित्र पर एक बार फिर अंगुली उठा कर निरमैल सिंह किराएदार रविंद्र सिंह को घर से निकालने के लिए कहने लगा. इस पर मनजीत कौर ने बेटे को खरीखोटी सुनाते हुए कहा, ‘‘तुझ जैसे निखट्टू और ऐबी को जोरू तो पहले ही छोड़ कर चली गई. अब किराएदार को भी निकाल दिया तो गुजारा कैसे होगा? 2 वक्त की रूखीसूखी रोटी से भी जाएंगे.’’

‘‘अगर किरादार को नहीं निकालना तो जमीन बेच दो.’’ निरमैल ने कहा.

निरमैल की बात सुन कर मनजीत कौर के शरीर में जैसे आग लग गई. उस ने कहा, ‘‘पुरखों की मेहनत से बनाई गई जमीन तेरे नशे के लिए बेच दूं? ऐसा किसी भी कीमत पर नहीं होगा. अब कभी मुझ से जमीन के बारे में बात मत करना. मैं तुझे बेच दूंगी, पर जमीन नहीं बेचूंगी’’

‘‘लगता है, यह जमीन अपने किराएदार यार के लिए रखेगी.’’ निरमैल ने कहा.

बेटे के मुंह से निकले इन शब्दों से मां का कलेजा छलनी हो गया. वह एक तरह से इंत्तहा थी. जिस हृदय में बेटे के लिए लबालब ममता होती है, मां के उसी हृदय में भयानक नफरत पैदा हो गई. ऐसी भयानक नफरत, जिस के चलते मां वह सब सोचने को मजबूर हो गई, शायद ही कोई विरली जन्म देने वाली मां सोचती है. बेटे के प्रति नफरत से भरी मनजीत कौर के मन में जो सोच पैदा हुई, उसे परिपक्व हो कर इरादे में बदलने में थोड़ा समय लगा. इस बीच वह खुद से ही लड़ती रही. वह जो कुछ करने की सोच रही थी, एक मां के लिए वैसा करना असान नहीं था.

दूसरी ओर मां के अंदर चल रहे अंतर्द्वंद्व से अनजान निरमैल उसे सताने से बाज नहीं रहा था. मां पर हाथ उठाना और उसे गालियां देना उस के लिए आम बात हो गई थी. घर की ऐसी कोई चीज नहीं बची थी, जिसे निरमैल ने अपनी नशे की भट्ठी में स्वाहा नहीं कर दिया था. निरमैल की कोशिश अब यही थी कि किसी भी तरह मनजीत कौर गांव में मौजूद पुरखों की जमीन बेच दे. ऐसा करने के लिए वह उसे मजबूर भी कर रहा था. इस के लिए वह कुछ भी करने को अमादा दिखता था. मनजीत कौर को लगने लगा कि जमीन की खातिर किसी दिन नशेड़ी बेटा उस का गला घोंट देगा

ऐसा खयाल आते ही वह सोच उस पर हावी होने लगी, जिस से वह पिछले काफी दिनों से लड़ रही थी. रिश्ते का मोह टूटते ही मनजीत कौर का दिमाग एक अपराधी की तरह काम करने लगा. जब उस के दिमाग में योजना का एक अस्पष्ट खाका तैयार हो गया तो उस ने अपनी उस योजना में शामिल करने के लिए बेटी राज कौर और दामाद किशन सिंह को अपने घर बुला लिया. अपने भयानक इरादे से बेटी और दामाद को अवगत करा कर मनजीत कौर ने कहा, ‘‘मेरी कोख ही मेरी सब से बड़ी दुश्मन बन गई है. इस ने केवल मुझे सताया है, बल्कि मेरी ममता को भी जलील किया है. नशे ने इसे इंसान से हैवान बना दिया है. लगता है नशे की ही वजह से यह किसी दिन मेरी जान लेने से भी परहेज नहीं करेगा. लेकिन मैं इस के हाथों से मरना नहीं चाहती. जबकि मैं इस की नौबत ही नहीं आने देना चाहती.

ऐसे बेटे के होने और होने से क्या फर्क पड़ता है. मैं ने तुम लोगों को इसलिए  बुलाया है कि अगर मेरा इंसान से हैवान बना बेटा नहीं रहेगा तो मेरे बाद मेरी जमीन और घर के मालिक तुम लोग होगे. अब तुम लोगों को इस बात पर विचार करना है कि मैं जो करने जा रही हूं, उस में मेरा साथ देना है या नहीं?’’ मनजीत कौर क्या चाहती है, यह बेटी और दामाद को समझते देर नहीं लगी. उन्होंने मनजीत कौर का साथ देने की हामी भर दी. बेटे को खत्म करने की अपनी योजना में मनजीत कौर ने बेटी और दामाद को ही नहीं, किराएदार रविंद्र सिंह को भी शामिल कर लिया. इस के बाद में निरमैल को खत्म करने की पूरी योजना बन गई.

हमेशा की तरह 5 सितंबर की रात निरमैल सिंह नशे में डूबा घर आया और रोज की तरह मां से झगड़ा करने के घर के बाहर खुले आंगन में बेसुध सो गया. जब मनजीत कौर को यकीन हो गया कि निरमैल सिंह गहरी नींद सो गया है तो उस ने बड़ी ही खामोशी से बेटी राज कौर, दामाद किशन सिंह और किराएदार रविंद्र सिंह की मदद से गला घोंट कर अपने ही बेटे की हत्या कर दी. अपने इस बेटे से वह इस तरह परेशान और दुखी थी कि उसे मारते हुए उस के हाथ बिलकुल नहीं कांपे. निरमैल की हत्या कर सब ने आंगन की कच्ची जमीन में गड्ढा खोद कर उसी में उस की लाश को गाड़ दिया.

जब कई दिनों तक निरमैल सिंह दिखाई नहीं दिया तो गांव वाले उस के बारे में पूछने लगे. इस तरह निरमैल सिंह का एकाएक गायब हो जाना गांव में चर्चा का विषय बन गया. जितने मुंह उतनी बातें होने लगीं. कोई कहता था कि निरमैल मां से झगड़ा कर के घर छोड़ चला गया है तो कोई कहता कि वह कामधंधे के सिलसिले में कहीं बाहर गया है. लेकिन कुछ लोग दबी जुबान से कुछ दूसरा ही कह रहे थे. जब निरमैल के बारे में कोई सही बात सामने नहीं आई तो गांव के ही किसी मुखबिर ने थाना सरहाली पुलिस को खबर कर दी कि निरमैल का कत्ल हो चुका है और उस के कत्ल में किसी बाहरी व्यक्ति का नहीं, बल्कि उस के घर वालों का ही हाथ है.

मुखबिर की इस खबर पर थाना सरहाली के थानाप्रभारी सर्वजीत सिंह मामले की तफ्तीश में जुट गए. तफ्तीश की शुरुआत में ही उन्हें लगा कि मुखबिर की खबर में दम है. उन्होंने शक के आधार पर 7 सितंबर को मनजीत कौर को हिरासत में ले लिया और थाने ला कर पूछताछ शुरू कर दी. पहले तो मनजीत कौर झूठ बोल कर पुलिस को गुमराह करने की कोशिश करती रही, लेकिन जब पुलिस ने थोड़ी सी सख्ती की तो उस ने अपने बेटे के कत्ल की बात स्वीकार कर ली. उस ने कहा, ‘‘हां, मैं ने ही अपने बेटे को मारा है और मुझे इस का जरा भी अफसोस नहीं है. क्या करती, नशे ने उसे आदमी से हैवान बना दिया था. उस का मर जाना ही बेहतर था.’’

इस के बाद मनजीत कौर ने निरमैल की हत्या की पूरी कहानी सुना दी. पूरी कहानी सुनने के बाद पुलिस ने मजिस्ट्रेट सुखदेव सिंह की मौजूदगी में आंगन की खुदाई कर के निरमैल सिंह की लाश बरामद कर के पोस्टमार्टम के लिए भिजवा दी. हत्या में सहयोग करने वाली राज कौर, उस के पति किशन सिंह, किराएदार रविंद्र सिंह को भी गिरफ्तार कर लिया गया. पुलिस ने सभी को अदालत में पेश किया, जहां से उन्हें न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया.

   — कथा पुलिस सूत्रों पर आधारित