Hindi Crime Story: पति की मौत का फरमान

Hindi Crime Story: कामिनी गांव के ही रहने वाले मार्तंड यादव से शादी करना चाहती थी. लेकिन घर वालों ने उस की शादी पवन से कर दी. इस का परिणाम यह निकला कि निर्दोष पवन मारा गया.

गांव में भागवत कथा होने की वजह से काफी चहलपहल थी. कथा में जाने के लिए हर कोई उत्साहित था, क्योंकि वहां बहुत ही सुंदर कथा होती थी. उस के बाद हवन होता था. कामिनी भी वहां रोजाना अपनी सहेली मीना के साथ कथा सुनने जाती थी. उस दिन वह मीना के साथ कथा सुनने पहुंची तो वहां का नजारा ही कुछ और था. गांव के कई लोग पंडितों द्वारा किए जाने वाले मंत्रोच्चारण के साथ हवन कर रहे थे. उस से जो धुआं उठ रहा था, वातावरण सुगंधित हो रहा था. कामिनी और मीना ने हाथ जोड़ कर सिर झुकाया और वहां बिछी दरी पर बैठ गईं. अचानक कामिनी की नजर दूसरी ओर बैठे एक युवक पर पड़ी, जो एकटक उसी को ताक रहा था. वह कोई और नहीं, उसी के गांव का मार्तंड यादव उर्फ पिंकू था.

कामिनी उम्र के उस दौर में पहुंच गई थी, जब लड़कों का इस तरह ताकना लड़कियों को अच्छा लगता है. यही वजह थी कि कामिनी ने भी उस की ओर उसी तरह ताका. नजरें मिलीं तो मार्तंड मुसकराया, लेकिन कामिनी ने नजरें झुका लीं. लेकिन यह भी सच है कि इस स्थिति में लड़की पहली बार भले ही नजरें झुका ले, लेकिन पलट कर जरूर देखती है. और कहते हैं कि अगर पलट कर देख लिया तो समझो मामला फिट है यानी वह भी चाहती है. कामिनी से रहा नहीं गया, उस ने नजरें उठाईं तो मार्तंड को अपनी ओर ताकते पाया. उसे उस तरह ताकते देख कामिनी को हंसी आ गई.

बस, फिर क्या था, कामिनी की इस हंसी पर मार्तंड मर मिटा. एक तो कामिनी ने पलट कर देखा था, दूसरे हंसी थी, इसलिए मार्तंड को लगा, अब मामला फिट है. अब वह सबकुछ भूल कर सिर्फ कामिनी को ही देख रहा था. कामिनी का भी कुछ ऐसा ही हाल था. उसे इस तरह बारबार उधर देखते देख कर मीना ने पूछा, ‘‘क्या बात है, जो तू बारबार उधर लड़कों की ओर देख रही है?’’

कामिनी इस तरह सिटपिटा गई, जैसे उस की चोरी पकड़ी गई हो. उसे जवाब तो देना ही था, इसलिए उस ने मीना को प्यार से झिड़कते हुए कहा, ‘‘यार, तुम भी न जाने क्याक्या सोचती रहती हो? इस तरह की जगहों पर कोई क्या देखेगा? तुम्हारे दिमाग में हमेशा खुराफात ही चलता रहता है.’’

अब तक हवन खत्म हो गया था. प्रसाद ले कर कामिनी मंडप से बाहर आई तो मार्तंड भी उस के पीछेपीछे बाहर आ गया. वह उस से थोड़ी दूरी बना कर चल रहा था. उसे अपने पीछे आते देख कामिनी का दिल तेजी से धड़कने लगा कि मीना के सामने ही वह उसे कुछ कह न दे. अब वह उसे अपना सा लग रहा था. कुछ ऐसा ही मार्तंड को भी महसूस हो रहा था. वह उस से अपने दिल की बेचैनी कहना तो चाहता था, लेकिन मीना की उपस्थिति उसे ऐसा करने से रोक रही थी. कुछ भी रहा हो, मार्तंड की नजरें उसी पर टिकी थीं. कामिनी भी बारबार पलट कर उसे देख रही थी. आखिर मीना ने उस की चोरी पकड़ ही ली. उस ने मुसकराते हुए कहा, ‘‘अच्छा तो यह बात है, अब समझ में आया, यह महाशय हमारे पीछेपीछे क्यों चले आ रहे हैं?’’

‘‘क्या बकवास कर रही है? कोई पीछेपीछे आ रहा है तो इस का मतलब यह तो नहीं हुआ कि मैं उस पर मर मिटी हूं. चलो, घर चलो, नहीं तो तुम इसी तरह बकवास करती रहोगी.’’ कामिनी ने कहा.

‘‘मैं कहां कह रही हूं कि तुम यहीं रुको. चलो न घर.’’ मीना ने कामिनी का हाथ पकड़ कर कहा और तेजी से घर की ओर चल पड़ी.

मार्तंड कामिनी को तब तक देखता रहा, जब तक वह उस की आंखों से ओझल नहीं हो गई. घर पहुंच कर कामिनी मार्तंड के खयालों में डूब गई. पता नहीं क्यों वह उस के दिल में बस गया था, जबकि वह बहुत खूबसूरत भी नहीं था. गांव में उस से भी खूबसूरत लड़के थे, जो उस पर मरते थे. लेकिन उस ने कभी किसी को भाव नहीं दिया था. दूसरी ओर मार्तंड भी कामिनी के खयालों में डूबा था. उस ने सपने में भी नहीं सोचा था कि कामिनी जैसी खूबसूरत लड़की का दिल उस के लिए धड़क सकता है. इसलिए अगले दिन के इंतजार में उसे नींद नहीं आई. वह जानता था कि कामिनी रोज कथा सुनने आती है. इसलिए उस ने तय कर लिया था कि अगर अगले दिन कामिनी मिल गई तो कैसे भी वह उस से अपने दिल की बात जरूर कह देगा.

संयोग से अगले दिन कामिनी अकेली ही वहां आई. शायद उसे विश्वास था कि उस के सपनों का राजकुमार मार्तंड अवश्य वहां आएगा और उस से बात करने की कोशिश भी करेगा. उसे बात करने में कोई संकोच न हो, यही सोच कर वह मीना को साथ नहीं लाई थी. जब वह वहां पहुंची तो उसे यह देख कर हैरानी हुई कि मार्तंड वहीं बैठा था, जहां कामिनी एक दिन पहले बैठी थी. शायद वह उसी का इंतजार कर रहा था. मार्तंड की नजरें उस से मिलीं तो दोनों के होठों पर मुसकान तैर उठी. कामिनी आ कर उस से थोड़ी दूरी पर महिलाओं के झुंड में बैठ गई. दोनों बैठे तो भागवत कथा सुनने थे, लेकिन दोनों के मन में तो कुछ और ही चल रहा था.

आखिर  नहीं रहा गया तो मार्तंड ने कुछ इशरा किया. उस के बाद कामिनी उठ कर चल पड़ी. लोगों की नजरें बचा कर मार्तंड भी उस के पीछेपीछे चल पड़ा. सुरक्षित स्थान पर आ कर जरा भी संकोच किए मार्तंड ने कामिनी का हाथ पकड़ कर कहा, ‘‘कामिनी, अब मुझे यह कहने की जरूरत नहीं है कि मैं तुम से प्यार करता हूं. तुम्हारे हावभाव से ही मुझे पता चल गया है कि तुम भी मुझे प्यार करती हो, इसलिए चलो एकांत में कहीं बैठ कर बातें करते हैं.’’

गांवों में एकांत कहां होता है, बागों या खेतों के बीच. दोनों गेहूं के खेतों के बीच बैठ कर बातें करने लगे. मार्तंड ने उस एकांत में कामिनी के कंधे पर हाथ रख कर कहा, ‘‘कामिनी, यह जिंदगी हमारी है, इसलिए इस के बारे में सिर्फ हमें ही निर्णय लेने का हक है. तुम मुझ से मिलने के लिए रोज यहीं आना. यहां लोगों की नजर हम पर नहीं पड़ेगी. बोलो, आओगी न?’’

‘‘मैं जरूर आऊंगी मार्तंड. तुम मेरा इंतजार करना.’’ कामिनी ने कहा और अपने घर चली गई.

मनचाहा प्रेमी मिल जाने से कामिनी खुश थी. वह मार्तंड की यादों में खोई रहने लगी. अब उसे हमेशा उस समय का बेसब्री से इंतजार रहता, जब उसे मार्तंड से मिलने जाना होता. मार्तंड उस से जब भी रोमांटिक बातें करता, वह शरमा जाती. वह उस की सुंदरता की तारीफें करते हुए कहता, ‘‘तुम्हारी इसी सुंदरता ने मेरा दिल चुरा लिया है. अब मेरे इस दिल को तुम संभाल कर रखना, इसे कभी तोड़ना मत.’’

कामिनी कहती, ‘‘तुम भी कैसी बातें करते हो, मैं भला तुमरे दिल को क्यों तोड़ूंगी, अब तो वह हमारा हो चुका है.’’

‘‘मैं कितना भाग्यशाली हूं, जो तुम जैसी प्यार करने वाली मिल गई. शायद तुम मेरे भाग्य में लिखी थी.’’

ऐसी ही बातें कर के मार्तंड ने कामिनी को लुभा कर उस से शारीरिक संबंध भी बना लिए. दोनों मन से तो एक थे ही, तन से भी एक हो गए. उत्तर प्रदेश के जिला रायबरेली के थाना शिवगढ़ के निमडवल गांव में रहते थे रामेश्वर प्रसाद. वह खेती कर के अपना गुजरबसर करते थे. उन के परिवार में पत्नी रमा और 2 बेटियां तथा 2 बेटे थे. कामिनी उन के बच्चों में सब से छोटी थी. उन के बाकी बच्चों का विवाह हो चुका था. कामिनी ने जवानी की दहलीज पर कदम रखा ही था कि उसे मार्तंड से प्यार हो गया.

कामिनी ने गांव के ही सरकारी स्कूल से आठवीं तक पढ़ाई की थी. वह खूबसूरत थी, इसलिए जवान होते ही गांव के मनचले लड़के उसे अपनी ओर आकर्षित करने की कोशिश करने लगे थे. उन्हीं में मार्तंड भी था. आखिर में उसी ने बाजी मार ली थी. वह प्रभाकर यादव का बेटा था. वह नल वगैरह ठीक करने का काम करता था. गांवों में इस तरह की बातें ज्यादा दिनों तक छिपी नहीं रह पातीं, इसलिए मार्तंड और कामिनी के संबंध भी उजागर हो गए. जब बेटी की करतूत का पता रामेश्वर प्रसाद को चला तो उन्होंने कामिनी की खूब पिटाई की और सख्त हिदायत दी कि अब वह मार्तंड से बिलकुल नहीं मिलेगी. उस के घर से बाहर निकलने पर भी पाबंदी लगा दी गई.

इस हालत में रामेश्वर जल्द से जल्द कामिनी की शादी के बारे में सोचने लगा. क्योंकि उस की वजह से उन की गांव में बदनामी हो रही थी. रामेश्वर का एक रिश्तेदार हरभजन लखनऊ के थाना नगराम के गांव सेंधूमऊ में रहता था. सेंधूमऊ के बगल में ही एक गांव है बघौली. उसी गांव में ललई प्रसाद अपने परिवार के साथ रहता था. वह भी खेती करता था. उस के परिवार में पत्नी रामकली के अलावा 2 बेटियां और एकलौता बेटा पवन था. उस ने दोनों बेटियों की शादी कर दी थी. बेटे की अभी शादी नहीं हुई थी. वह गोसाईगंज के दयाल इंस्टीट्यूट से बीबीए कर रहा था.

हरभजन पवन से परिचित था. वह जानता था कि पवन बहुत ही नेक और पढ़ालिखा लड़का है. इसलिए उस ने उस से कामिनी से रिश्ते की बात चलाई तो वह बात आगे बढ़ाने को राजी हो गया. उस ने अपने पिता से बात की तो उन की सहमति मिलने के बाद सभी कामिनी को देखने गए. कामिनी के घर वालों को भी पवन और उस का घरपरिवार पसंद था, इसलिए बातचीत के बाद शादी तय हो गई. कामिनी ने पवन के सामने ही विवाह से मना कर दिया था, लेकिन रामेश्वर प्रसाद ने किसी तरह बात संभाल ली थी. 20 मई, 2015 को कामिनी और पवन का विवाह धूमधाम से हो गया. कामिनी को न चाहते हुए भी पवन से विवाह करना पड़ा. जबकि वह मार्तंड से शादी करना चाहती थी.

शादी के बाद भी वह उसे एक पल के लिए नहीं भूल पा रही थी. क्योंकि उस ने उसी के साथ जिंदगी गुजारने का सपना जो देखा था. लेकिन घर वालों ने उस के सपनों को तोड़ दिया था. पग फेरा में कामिनी मायके आई तो मार्तंड से मिली. तब वह उस से गले मिल कर बिलखबिलख कर रोई. मार्तंड की भी आंखें नम हो गईं. कामिनी की हालत देख कर वह बेचैन हो उठा. उस ने कामिनी को ढांढ़स बंधा कर कहा, ‘‘कामिनी हम कभी अलग नहीं होंगे, कोई भी हमें जुदा नहीं कर सकता. हम हमेशा इसी तरह मिलते रहेंगे.’’

इस के बाद मार्तंड ने एक सस्ता सा मोबाइल फोन खरीद कर कामिनी को दे दिया, जिस से उन में बराबर बातें हो सकें. कामिनी जब तक मायके में रही, मार्तंड से बराबर मिलती रही. ससुराल आने पर मिलना तो बंद हो गया, लेकिन मोबाइल से सब की चोरी वह उस से बातें कर लेती थी. 12 अगस्त, 2015 की शाम साढ़े 6 बजे पवन घर लौटा और कपड़े बदल कर आराम करने लगा. रात 8 बजे कामिनी ने उसे सौ रुपए का नोट देते हुए कहा कि उसे कोल्ड ड्रिंक पीनी है, जा कर ला दे. पवन उन्हीं कपड़ों में दहेज में मिली हीरो पैशन प्रो बाइक से कोल्ड ड्रिंक लेने चला गया.

कोल्ड ड्रिंक की दुकान उस के घर से लगभग 3 सौ मीटर की दूरी पर थी. थोड़ी देर बाद पवन का फोन आया कि गांव के बाहर उस की बाइक खड़ी है, किसी से मंगवा लें. वह किसी जरूरी काम से जा रहा है. इस के बाद पवन के पिता वहां गए और गांव के एक लड़के से कह कर बाइक ले आए. सुबह गांव के कुछ बच्चे गांव के बाहर तालाब पर शौच के लिए गए तो उन्होंने वहां झाडि़यों में पवन की लाश पड़ी देखी. बच्चों ने यह बात तुरंत पवन के घर वालों को बताई तो घर वाले रोतेबिलखते वहां पहुंचे. पवन के पिता ललई प्रसाद ने इस घटना की सूचना थाना नगराम पुलिस को दे दी.

सूचना मिलने के थोड़ी देर बाद थाना नगराम के थानाप्रभारी सुधीर कुमार सिंह पुलिस बल के साथ घटनास्थल पर पहुंच गए. मृतक पवन ने नीले रंग पर सफेद धारी वाली कैपरी और सफेद शर्ट पहन रखी थी. उस के गले और मुंह पर किसी तेज धारदार हथियरा के घाव थे. सुधीर कुमार सिंह घटनास्थल और लाश का निरीक्षण कर रहे थे कि सीओ राकेश नायक भी आ गए. पुलिस ने लाश को पोस्टमार्टम के लिए लखनऊ मैडिकल कालेज भिजवा कर पूछताछ शुरू की. इस के बाद थाने आ कर सुधीर कुमार सिंह ने मृतक के पिता ललई प्रसाद की ओर से अज्ञात के खिलाफ पवन की हत्या का मुकदमा दर्ज करा दिया. थानाप्रभारी मामले की जांच के लिए बघौली गांव जाने की तैयारी कर रहे थे कि किसी ने फोन कर के उन्हें बताया कि मृतक पवन की पत्नी कामिनी अपना सामान बांध कर कहीं जाने की तैयारी कर रही है.

यह सुन कर सुधीर कुमार सिंह को हैरानी हुई. जिस औरत के पति की हत्या हुई हो, अभी उस की लाश भी न दफनाई गई हो, इस दुख की घड़ी में ससुराल वालों का साथ देने के बजाय वह घर से जाने की तैयारी कर रही है. उन्हें लगा, कहीं ऐसा तो नहीं कि इस घटना के पीछे उसी का हाथ हो. सीओ राकेश नायक भी थाने में मौजूद थे. कामिनी के बारे में सीओ साहब को बताया तो उन्होंने भी कामिनी पर शक जाहिर किया. फिर क्या था, थानाप्रभारी ललई प्रसाद के घर जा पहुंचे. उन्हें जो सूचना मिली थी, वह सही थी. कामिनी अपना बैग तैयार कर के बैठी थी. शक के आधार पर सुधीर कुमार सिंह ने बैग की तलाशी ली तो उस में से कपड़ों और व्यक्तिगत सामान के अलावा 1 हजार रुपए, एक सिम और एक युवक की फोटो बरामद हुई. उन्होंने बैग में नीचे लगे पैड के अंदर हाथ डाला तो उस में से एक मोबाइल फोन बरामद हुआ.

घर वालों से उस मोबाइल के बारे में पूछा गया तो उन्होंने कहा कि इस के बारे में उन्हें कोई जानकारी नहीं है. इस के पास जो मोबाइल था, उसे तो पवन ने पहले ही ले लिया था.

सुधीर कुमार सिंह ने जब कामिनी से उस के पास मिले फोटो के बारे में पूछा तो वह काफी देर तक उस फोटो को देखती रही, उस के बाद बोली, ‘‘यह युवक उस के गांव का रहने वाला है.’’

पुलिस कामिनी को हिरासत में ले कर थाने आ गई. थाने में महिला कांस्टेबल के जरिए उस से सख्ती से पूछताछ की गई तो उस ने कई नाम बताए. उन सभी को पुलिस ने थाने ला कर पूछताछ की तो पता चला कि वे निर्दोष थे. कामिनी ने जो नाम बताए थे, वे उस के पुराने आशिक थे, जिन्हें वह फंसाना चाहती थी. सुधीर कुमार सिंह ने कामिनी का मोबाइल खंगाला तो उस में सिर्फ एक ही नंबर मिला, जिस से उस में लगभग रोज ही फोन आए थे. घटना वाले दिन भी उस नंबर से अंतिम बार रात 11 बजे फोन आया था. जब उस नंबर के बारे में कामिनी से सख्ती से पूछा गया तो उस ने बताया कि उस नंबर से फोन करने वाला और फोटो वाला युवक एक ही है. उस का नाम मार्तंड यादव उर्फ पिंकू है, जो उस के मायके निमडवल में रहता है.

सुधीर कुमार सिंह ने उसी मोबाइल से उस नंबर पर स्पीकर औन कर  के कामिनी से बात करने को कहा. कामिनी ने उस नंबर पर फोन किया तो दूसरी ओर से फोन रिसीव करने वाले ने कहा, ‘‘सब ठीक कर दिया मैं ने, किसी को शक भी नहीं हुआ.’’

‘‘क्या कह…’’ कामिनी इतना ही कह पाई थी कि सुधीर कुमार सिंह ने उसे कुछ भी बताने से मना कर दिया.

‘‘मैं ने अपने दोस्तों के साथ सब कुछ बहुत सही ढंग से कर दिया है. अब हम एक साथ रह सकेंगे.’’ दूसरी ओर से कहा गया.

‘‘लेकिन यह सब कर के तुम ने मुझे फंसा दिया. पुलिस मुझ पर शक कर रही है. तुम आ कर मुझे बचाओ. तुम कहां हो?’’ कामिनी इतना ही कह पाई थी कि मार्तंड को शायद शक हो गया. उस ने तुरंत फोन काट दिया. दोबारा फोन किया गया तो फोन बंद हो चुका था. इस के बाद मार्तंड के घर छापा मारा गया, लेकिन वह घर पर नहीं मिला. तब उस के पिता को हिरासत में ले कर थाने लाया गया. लेकिन वह भी मार्तंड के बारे में कुछ नहीं बता सका. उसी दिन यानी 14 अगस्त को एक मुखबिर की सूचना पर दोपहर साढे़ 12 बजे सुधीर कुमार सिंह ने मार्तंड यादव और उस के दोस्त विक्रम यादव को समेसी के पास एक नहर के किनारे से गिरफ्तार कर लिया. पूछताछ के बाद 15 अगस्त को पुलिस ने मार्तंड के एक अन्य दोस्त सूरजलाल को छतौनी से गिरफ्तार कर लिया. मार्तंड से की गई पूछताछ में पवन की हत्या की जो कहानी सामने आई, वह इस प्रकार थी.

मार्तंड द्वारा दिए गए मोबाइल से कामिनी चोरीछिपे उस से बात कर लिया करती थी, लेकिन किसी दिन पवन ने कामिनी को मोबाइल पर बात करते देख लिया. फिर तो उसे समझते देर नहीं लगी कि कामिनी का किसी के साथ चक्कर चल रहा है. उसी ने यह मोबाइल कामिनी को दिया है. पवन ने कामिनी को मारापीटा ही नहीं, उस का मोबाइल भी छीन लिया. कामिनी वैसे ही मार्तंड से दूर हो कर तड़प रही थी. ऐसे में बात करने का जरिया मोबाइल भी छिन गया तो वह गुस्से से भर उठी. आग में घी का काम किया पवन की पिटाई ने. कामिनी ने किसी तरह मार्तंड तक मोबाइल छिन जाने की बात पहुंचा दी.

इसी के साथ यह भी कहा कि अगर वह किसी तरह पवन को ठिकाने लगा दे तो वह हमेशाहमेशा के लिए उस की हो जाएगी. उस के बाद उन्हें मिलने से कोई नहीं रोक पाएगा. मार्तंड तो हर हाल में कामिनी को अपनी बनाना चाहता था. उस ने कामिनी से कहा, ‘‘तुम चिंता मत करो, मैं जल्द ही उसे ठिकाने लगा दूंगा.’’

मार्तंड ने अपने 2 दोस्तों, विक्रम और सूरजलाल को दोस्ती का वास्ता दे कर पवन की हत्या में साथ देने को कहा तो वे तैयार हो गए. इस के बाद योजना भी बन गई. अपनी उसी योजना के अनुसार, मार्तंड अपने दोस्तों के साथ 2 मोटरसाइकिलों से कामिनी की ससुराल उस समय पहुंचा, जब पवन घर पर नहीं था. यह बात कामिनी ने मार्तंड को पहले ही बता दी थी. जब तीनों वहां पहुंचे तो कामिनी ने अपनी सास रामकली को बताया कि तीनों उस की सगी मौसी के बेटे हैं. रामकली के हटते ही मार्तंड ने एक मोबाइल फोन कामिनी को दे दिया और पूरी योजना बता दी. इस के बाद वह दोस्तों के साथ चला आया.

13 अगस्त की शाम मार्तंड ने कामिनी को फोन किया कि वह रात 8 बजे तक दोस्तों के साथ उस के गांव के बाहर पहुंच जाएगा. शाम साढ़े 6 बजे तक पवन घर आ जाता था. रात 8 बजे जब मार्तंड गांव के बाहर आ गया तो उस ने कामिनी को फोन कर के पवन को भेजने को कहा. इस के बाद कामिनी ने पवन को कोल्डड्रिंक लाने के बहाने बाहर भेज दिया. पवन मोटरसाइकिल से कोल्डड्रिंक ले कर लौट रहा था तो रास्ते मे दोस्तों के साथ मार्तंड ने उसे हाथ दे कर रोक कर कहा, ‘‘भाई मेरी मोटरसाइकिल खराब हो गई है. जरा देख लीजिए.’’

पवन ने अपनी मोटरसाइकिल खड़ी कर के जेब में पड़ी टौर्च निकाली. उस ने टौर्च जलाई तो मार्तंड के चेहरे पर पड़ी. उस का चेहरा देख कर पवन ने कहा, ‘‘मैं तुम्हें पहचानता हूं, तुम तो मेरी ससुराल के हो, यहां कैसे, कामिनी से मिलने आए थे क्या?’’

‘‘नहीं, यहीं पास में मेरी एक रिश्तेदारी है, वहीं आया था. लेकिन यहां पहुंचते ही मेरी मोटरसाइकिल खराब हो गई.’’

इस के बाद उन में बातें होने लगीं. उसी बीच मार्तंड ने शौच जाने की बात कही तो पवन उसे तालाब की तरफ टौर्च की रोशनी में ले जाने लगा. इस के पहले उस ने फोन कर के अपनी मोटरसाइकिल मंगवा लेने के लिए घर वालों को कह दिया था. मार्तंड पवन से बातें करते हुए तालाब की ओर जा रहा था, तभी पीछेपीछे चल रहे विक्रम ने कपड़ों में छिपा हंसिया निकाल कर पवन की गरदन पर पूरी ताकत से प्रहार कर दिया. अचानक हुए इस हमले से पवन लड़खड़ा कर गिर पड़ा. वह संभल पाता, उस के पहले ही मार्तंड ने विक्रम से हंसिया ले कर पवन पर ताबड़तोड़ कई वार कर दिए.

पवन तड़पने लगा. और फिर बिना चीखेचिल्लाए मौत के मुंह में समा गया. इस के बाद तीनों उसे घसीट कर झाडि़यों में ले गए. वहां उस की जेब से दोनों मोबाइल निकाल कर तालाब में फेंक दिए. हत्या में प्रयुक्त हंसिया भी वहीं झाडि़यों में फेंक दिया. इस के बाद वे मोटरसाइकिल से चले गए. उन्होंने सोचा था कि वे पकड़े नहीं जाएंगे, लेकिन पुलिस ने उन्हें पकड़ ही लिया. सुधीर कुमार सिंह ने उन की निशानदेही पर हत्या में प्रयुक्त हंसिया, तीनों मोबाइल, दोनों मोटरसाइकिलें बरामद कर ली थीं. इस के बाद पुलिस ने मुकदमे में धारा 120बी तथा 34 के अलावा एससी/एसटी की धारा 3(2)5 भी बढ़ा दी थी.

पुलिस ने पूछताछ के बाद सभी अभियुक्तों को अदालत में पेश किया, जहां से उन्हें न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया. Hindi Crime Story

—कथा पुलिस सूत्रों पर आधारित

 

Love Crime: छलिया आशिक को कैसे पहचानें

Love Crime: 4 बच्चों की मां बनने के बावजूद 52 वर्षीय रानी सोमवंशी की हसरतें जवान थीं. वह बनसंवर कर रहती और इंस्टाग्राम पर अपने फोटो शेयर करती. यहीं पर 25 वर्षीय अरुण सिंह राजपूत उसे दिल दे बैठा. बाद में दोनों होटलों में भी मिलने लगे. शादीशुदा होते हुए भी रानी अरुण से शादी करने का ख्वाब संजोने लगी, लेकिन अरुण ऐसा छलिया आशिक निकला कि…

रानी सोमवंशी की धमकी से अरुण डर गया. उस की रातों की नींद व दिन का चैन छिन गया. आखिर उस ने रानी को खत्म करने का निश्चय कर लिया. उस ने रानी को विश्वास में ले कर उस की हत्या का तानाबाना बुन लिया. 8 अगस्त, 2025 को रानी सोमवंशी ने फोन पर अरुण से बात की और उसे धमकाया कि जल्द शादी करो या फिर पैसे वापस करो. इस पर अरुण ने उस से कहा कि वह उस से प्यार करता है और शादी को तैयार है. तुम 10 अगस्त को मैनपुरी आ जाओ और भांवत चौराहे पर मिलो. उस के बाद हम शादी करने का प्लान बनाएंगे.

रानी 9 अगस्त को अपनी ससुराल के गांव जिठौली से फर्रुखाबाद जिले के गांव खेड़ा में रहने वाली अपनी बहन के यहां आई थी. प्रेमी अरुण से बात होने के बाद वह 10 अगस्त को ही ससुराल जाने की बात कह कर वह मैनपुरी चली आई. प्रेमी की इस बात पर रानी खुश हो गई और 10 अगस्त, 2025 की दोपहर साढ़े 12 बजे वह मैनपुरी के भांवत चौराहे पहुंच गई. वहां अरुण पहले से ही रानी का इंतजार कर रहा था. रानी को देख कर वह मुसकरा उठा. रानी ने भी मुसकान बिखेरी. इस के बाद दोनों ने साथ बैठ कर एक रेस्टोरेंट में चायनाश्ता किया. फिर दोनों खरपरी बंबा के पास पहुंचे और सुनसान स्थान देख कर पेड़ के नीचे बैठ कर बतियाने लगे.

बातचीत के दौरान रानी ने शादी की जिद की और दिनतारीख बताने को कहा. यह सुनते ही अरुण को गुस्सा आ गया. उस ने रानी की चुन्नी को उसी के गले में लपेटा और गला कसने लगा. चुन्नी को वह तब तक कसता रहा, जब तक उस की मौत नहीं हो गई. रानी सोमवंशी की हत्या के बाद अरुण ने रानी के शव को झाडिय़ों में छिपा दिया. रानी के मोबाइल फोन का सिम निकाल क र तोड़ दिया और बंबा में फेंक दिया. मोबाइल कूच कर झाडिय़ों में छिपा दिया. चुनरी को पत्तों के नीचे छिपा दिया. उस के बाद वह फरार हो गया.

इधर रानी जब देर शाम तक घर नहीं पहुंची तो उस के पति राजपाल को चिंता हुई. उस ने रानी को कौल लगाई, लेकिन उस का फोन बंद था. वह रात भर चहलकदमी करता रहा. सुबह उस ने कुछ लोगों को रानी के लापता होने की जानकारी दी. उस के बाद वह कई दिनों तक पत्नी की खोज में भटकता रहा. जब कुछ पता नहीं चला, तब उस ने जिठौली थाने में पत्नी की गुमशुदगी की सूचना दर्ज करा दी. 11 अगस्त, 2025 की सुबह मैनपुरी कोतवाली के गांव खरपरी के कुछ किसान अपने खेतों की ओर गए तो उन्होंने बंबा के पास झाडिय़ों के बीच एक महिला की लाश देखी. लाश देख कर उन के होश उड़ गए. खबर गांव तक पहुंची तो वहां भीड़ जुट गई. इसी बीच किसी ग्रामीण ने इस लाश की सूचना थाना मैनपुरी कोतवाली को दे दी.

सूचना मिलते ही एसएसआई राजेंद्र सिंह कुछ पुलिसकर्मियों के साथ खरपरी बंबा के पास पहुंच गए, जहां झाडिय़ों के बीच महिला की लाश पड़ी थी. उस समय वहां लोगों की भीड़ थी. चूंकि मामला एक महिला की हत्या का था, अत: एसएसआई राजेंद्र सिंह ने सूचना पुलिस अधिकारियों को दी. कुछ देर बाद ही एसपी (सिटी) अरुण कुमार तथा डीएसपी संतोष कुमार सिंह घटनास्थल आ पहुंचे. पुलिस अधिकारियों ने मौके पर फोरैंसिक व डौग स्क्वायड को भी बुलवा लिया. इस के बाद पुलिस अधिकारियों ने बड़ी बारीकी से घटनास्थल का निरीक्षण शुरू किया. मृतक महिला की उम्र 50-52 वर्ष थी. वह लाल रंग का कुरता व पीले रंग की सलवार पहने थी. गले में पर्स लटका था. हाथ के पास रुमाल पड़ा था और हाथ में लाल रंग का धागा बंधा था.

मृतका के शरीर पर चोट आदि के निशान नहीं थे. देखने से ऐसा लग रहा था कि महिला की हत्या गला घोंट कर की गई थी. शरीर पर कोई आभूषण भी नहीं था. डौग स्क्वायड का खोजी कुत्ता महिला के शव को सूंघ कर झाडिय़ों के इर्दगिर्द घूमता रहा, फिर भौकता हुआ बंबा की पटरी पर आया. वह नगला गहियर जाने वाले मार्ग पर कुछ दूर तक गया, उस के बाद वापस आ गया. फोरैंसिक टीम ने भी जांच की, कुछ फोटो खींचे और सबूत जुटाए. अब तक महिला के शव को सैकड़ों लोग देख चुके थे, लेकिन कोई भी शव को पहचान नहीं पाया था. इस से स्पष्ट था कि महिला पासपड़ोस के गांव की नहीं थी. दूरदराज से बुला कर उस की यहां हत्या की गई थी. हत्या किसी खास परिचित ने ही की थी.

जब शव की पहचान नहीं हो पाई, तब पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम हेतु जिला अस्पताल मैनपुरी भिजवा दिया. लेकिन 72 घंटे बीत जाने के बाद भी जब शव की पहचान नहीं हुई, तब नियम के मुताबिक पोस्टमार्टम करा कर पुलिस ने अज्ञात में महिला के शव का दाह संस्कार कर दिया. एसपी अरुण कुमार ने इस ब्लाइंड मर्डर को बड़ी ही गंभीरता से लिया. उन्होंने महिला की शिनाख्त व हत्याकांड के खुलासे के लिए 2 टीमें गठित कीं. साथ ही हत्यारों की धरपकड़ के लिए एक पुलिस टीम डीएसपी संतोष कुमार सिंह की देखरेख में गठित की और दूसरी स्वाट प्रभारी जितेंद्र चंदेल के नेतृत्व में बनाई गई.

पुलिस टीमों ने महिला की खोज मैनपुरी के अलावा पड़ोसी जिला फर्रुखाबाद व इटावा में शुरू की. इन जिलों के थानों में महिला की हुलिया सहित फोटो चस्पा कराई गईं. गुमशुदा अधेड़ महिलाओं की सूचना भेजने को कहा गया. डीएसपी संतोष कुमार सिंह ने सुरागसी के लिए अपनी विशेष टीम तथा मुखबिरों को भी लगा दिया. धीरेधीरे 10 दिन बीत गए, लेकिन पुलिस की टीमें महिला के शव की पहचान न कर पाई. मुखबिरों ने भी पसीना बहाया, लेकिन वह भी नाकाम रहे. अखबारों में ब्लाइंड मर्डर की खबरें सुर्खियों में छप रही थीं, साथ ही पुलिस की नाकामी पर भी सवाल उठाए जा रहे थे. खबरों से पुलिस अधिकारी चिंतित थे.

23 अगस्त, 2025 को मैनपुरी कोतवाली के एसएसआई राजेंद्र सिंह को फर्रुखाबाद जिले के थाना राजेपुर से सूचना मिली कि उन के यहां रानी सोमवंशी नाम की महिला की गुमशुदगी दर्ज है. गुमशुदगी उस के पति राजपाल सिंह ने दर्ज कराई थी, जो जिठौली गांव का रहने वाला है. रानी 4 बच्चों की मां है. उस की उम्र 52 वर्ष है. इस सूचना पर पुलिस टीम गांव जिठौली पहुंची और राजपाल सिंह सोमवंशी को महिला की पहचान हेतु मैनपुरी कोतवाली ले आई. एसएसआई ने महिला के शव की फोटो राजपाल सिंह को दिखाई तो वह फफक पड़ा और बोला, ”साहबजी, यह फोटो उस की पत्नी रानी की है. वह 10 अगस्त की सुबह 9 बजे दवा लाने के लिए घर से निकली थी, उस के बाद घर वापस नहीं आई. तब से वह उस की खोज में जुटा था.’’

”क्या तुम बता सकते हो कि तुम्हारी पत्नी की हत्या किस ने की है?’’ एसएसआई राजेंद्र सिंह ने पूछा.

”नहीं साहब, मुझे पता नहीं कि रानी की हत्या किस ने और क्यों की है?’’ राजपाल ने जवाब दिया.

”गांव में तुम्हारी किसी से दुश्मनी या लेनदेन का झगड़ा तो नहीं था?’’

”साहब, मैं उम्रदराज सीधासादा किसान हूं. हमारा न तो किसी से झगड़ा है और न ही लेनदेन.’’

”कोई खास या बाहरी व्यक्ति घर में आता था, जिस से रानी का लगाव रहा हो.’’

”ऐसा कोई व्यक्ति घर में नहीं आता था, जिस से रानी का लगाव हो.’’

”रानी के पास मोबाइल फोन था?’’ राजेंद्र सिंह ने पूछा.

”हां साहब, था, लेकिन उस का फोन बंद है. मैं ने कई बार बात करने की कोशिश की थी.’’

राजपाल सोमवंशी से पूछताछ के बाद एसएसआई ने उस से मृतका रानी का मोबाइल फोन नंबर लिया और फिर उस नंबर की कौल डिटेल्स निकलवाई. कौल डिटेल्स से पता चला कि रानी एक खास नंबर पर अकसर बातें करती थी. आखिरी कौल उसी नंबर से उस के मोबाइल पर आई थी. रानी सोमवंशी के मोबाइल पर जो आखिरी कौल आई थी, पुलिस ने उस नंबर को ट्रेस किया तो पता चला कि वह नंबर जनपद मैनपुरी के थाना एलाऊ के किशोरपुर गांव निवासी अरुण सिंह राजपूत के नाम दर्ज है.

यह पता चलते ही पुलिस टीम ने किशोरपुर गांव निवासी अरुण के घर छापा मारा, लेकिन वह घर पर नहीं था. अरुण के पापा मुन्ना राजपूत ने बताया कि अरुण गुरुग्राम (हरियाणा) में रहता है. वह टैंकर चलाता है. इस के बाद पुलिस टीम सर्विलांस की मदद से गुरुग्राम पहुंची और पहली सितंबर 2025 की रात अरुण को गिरफ्तार कर लिया. अरुण को थाना मैनपुरी कोतवाली लाया गया. थाने में अरुण राजपूत से रानी सोमवंशी की हत्या के बारे में पूछा गया तो वह पुलिस को गुमराह करने की कोशिश करने लगा, लेकिन सख्ती करने पर वह टूट गया और हत्या का जुर्म स्वीकार कर लिया.

यही नहीं, पुलिस ने अरुण की निशानदेही पर मृतका रानी का टूटा हुआ मोबाइल फोन भी बरामद कर लिया, जिस का सिम तोड़ कर अरुण ने बंबा में फेंक दिया था और टूटा हुआ मोबाइल झाडिय़ों में डाल दिया था. पुलिस ने वह चुनरी भी बरामद कर ली, जिस से अरुण ने रानी का गला घोंटा था. चुनरी उस ने पेड़ के पत्तों में छिपा कर ईंट से दबा दी थी. एसएसआई राजेंद्र सिंह ने ब्लाइंड मर्डर का खुलासा करने तथा कातिल को गिरफ्तार करने की जानकारी पुलिस अधिकारियों को दी तो एसपी (सिटी) अरुण कुमार व डीएसपी संतोष कुमार सिंह ने पुलिस सभागार में प्रैसवार्ता कर रानी मर्डर केस का खुलासा कर दिया.

चूंकि अरुण कुमार राजपूत ने हत्या का जुर्म कुबूल कर लिया था और हत्या में प्रयुक्त चुनरी भी बरामद करा दी थी, अत: बीएनएस की धारा 103(1), 228(4) के तहत अरुण राजपूत के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कर उसे विधिसम्मत गिरफ्तार कर लिया. पुलिस जांच में प्यार में छल की जो सनसनीखेज घटना प्रकाश में आई, इस प्रकार थी—

उत्तर प्रदेश का फर्रुखाबाद जिला कई मायनों में अपनी पहचान बनाए हुए है. यहां पर बीड़ी और तंबाकू का कारोबार बड़े पैमाने पर होता है. आलू का उत्पादन भी भारी मात्रा में होता है. यहां की नमकीन पूरे उत्तर प्रदेश में मशहूर है. इसी फर्रुखाबाद जिले के राजेपुर थाना अंतर्गत एक गांव है जिठौली. राजपाल सिंह सोमवंशी इसी गांव का निवासी था. उस की पत्नी का नाम रानी सोमवंशी था. उस के 4 बच्चों में 2 बेटे व 2 बेटियां थीं. राजपाल सिंह किसान था. उस के पास 10 बीघा उपजाऊ भूमि थी, जिस में आलू, मूंगफली, मक्का और गेहंू की अच्छी उपज होती थी.

राजपाल व रानी अपने बच्चों से बेहद प्यार करते थे. बेटेबेटी में वह भेद भी नहीं करते थे. दोनों उन की हर जिद पूरी करते थे. पढ़ाईलिखाई का भी खूब खयाल रखते थे. उन के दोनों बेटे पढ़लिख कर टीचर बनना चाहते थे, जबकि बेटियां डाक्टर बनना चाहती थीं. राजपाल सीधासादा और कम पढ़ालिखा था. उस के रहनसहन और बोलचाल की भाषा भी साधारण थी. इस के विपरीत उस की पत्नी रानी पढ़ीलिखी थी. वह तेजतर्रार थी. सजसंवर कर रहती थी. जैसा उस का नाम था, वैसे ही वह रानी बन कर घर में रहती थी. राजपाल जो कमाता था, वह सब रानी के हाथ पर रख देता था. घर में उस की हैसियत कोल्हू के बैल की तरह थी. घर चलाने की जिम्मेदारी रानी की थी. बच्चों की पढ़ाई का खर्चा, खेत में बीजखाद का खर्चा, मजदूरों का खर्चा, सब रानी की जिम्मेदारी थी. राजपाल को तो बीड़ीतंबाकू का ही पैसा मिलता था.

राजपाल का पत्नी रानी पर कोई कंट्रोल नहीं था. वह उस की किसी बात का विरोध नहीं कर पाता था. रानी स्वच्छंद विचारों वाली थी. वह सामान खरीदने बाजारहाट भी जाती थी. घमंडी भी थी. इसी कारण अड़ोसपड़ोस के घरों से उस की दूरी बनी रहती थी. पड़ोस की महिलाएं उस से कम ही बातें करती थीं. समय बीतता रहा. समय के साथसाथ राजपाल उम्र के उस पड़ाव पर पहुंच गया, जहां सारी इच्छाएं समाप्त हो जाती हैं. वह सारा दिन फसल की रखवाली में व्यतीत करता और रात को खाना खा कर चारपाई पर पसर जाता. दूसरी तरफ रानी सोमवंशी जो 4 बच्चों की मां थी, वह अब भी अपने को जवान समझती थी और खूब सजसंवर कर रहती थी. उसे घर में सब सुख था, लेकिन पति सुख से वंचित रहती थी.

उस के मन में प्रबल इच्छा होती कि कोई उस की जिंदगी में आए और उस के अरमानों की अलख जगाए. कभीकभी तो वह सोचती कि वह दूसरा विवाह कर ले. पर किस से? यह सोच कर दुखी हो जाती. रानी खाली समय मोबाइल फोन पर व्यतीत करती थी. उसे इंस्टाग्राम चलाने का शौक था. इंस्टाग्राम पर वह अपने एडिट किए हुए फोटो लगाती थी, ताकि वह कम उम्र की और खूबसूरत दिखे. वह चाहती थी कि कोई युवक उस की फोटो देख कर उसे पसंद करे और फ्रेंडशिप रिक्वेस्ट भेजे. रानी को यकीन था कि एक न एक दिन उस की तमन्ना जरूर पूरी होगी. वह इंतजार में दिन गुजारती रही.

एक रोज अरुण राजपूत ने इंस्टाग्राम पर रानी सोमवंशी की फोटो देखी तो वह उसे पसंद आ गई. उसे लगा कि यही उस के सपनों की रानी है. अत: उस ने फालो कर उसे फ्रेंडशिप रिक्वेस्ट भेज दी. रानी ने उस की रिक्वेस्ट स्वीकार कर ली. इस के बाद दोनों की इंस्टाग्राम के जरिए दोस्ती हो गई और उन के बीच चैटिंग होने लगी. अरुण राजपूत उत्तर प्रदेश के ही मैनपुरी जिले के थाना एलाऊ के गांव किशोरपुर का रहने वाला था. उस के पिता मुन्ना राजपूत किसान थे. 3 भाईबहनों में अरुण सब से छोटा था. उस का मन न पढ़ाई में लगा और न किसानी में. अत: उस ने ड्राइवरी सीख ली और ड्राइवर बन गया. कुछ समय बाद वह गांव छोड़ कर गुडग़ांव (हरियाणा) चला गया और वहां टैंकर चलाने लगा.

अरुण राजपूत और रानी सोमवंशी की दोस्ती धीरेधीरे प्यार में बदल गई. दोनों एकदूसरे को मन ही मन चाहने लगे. इंस्टाग्राम पर दोनों हर रोज चैटिंग करते थे. रानी अपनी उम्र छिपाने के लिए फिल्टर ऐप का प्रयोग कर अरुण से बात करती थी. लगभग एक साल तक दोनों के बीच चैटिंग चलती रही. फिर चैटिंग के दौरान ही दोनों ने एकदूसरे के मोबाइल फोन नंबर शेयर कर लिए. अब इंस्टाग्राम पर चैटिंग के साथसाथ मोबाइल फोन पर भी उन की रसभरी बातें होने लगीं. रानी देर रात अरुण को कौल करती थी.

समय बीतते दोनों का प्यार परवान चढ़ा तो उन के बीच एकदूसरे से रूबरू होने की तमन्ना जागी. एक रोज अरुण ने फोन पर बातचीत के दौरान रानी से कहा कि वह उस से मिलना चाहता है और आमनेसामने बैठ कर बात करना चाहता है. इस पर रानी ने जवाब दिया कि वह स्वयं भी उत्सुुक है. जब चाहो, तब आ जाओ. अरुण रानी से मिलने को उतावला था, अत: तीसरे रोज ही वह मैनपुरी से फर्रुखाबाद आ गया. उस के बाद उस ने रानी से फोन पर बात की और बताया कि वह फर्रुखाबाद आ गया है और यात्री होटल में ठहरा है. तुम कल मिलने आ जाना. मैं तुम्हारा बेसब्री से इंतजार करूंगा. जवाब में रानी ने कहा कि वह कल सुबह 10 बजे तक होटल पहुंच जाएगी. नाश्ता व लंच साथसाथ करेंगे.

वादे के तहत रानी सुबह 9 बजे ही फर्रुखाबाद स्थित यात्री होटल पहुंच गई. होटल रूम में जब पहली बार अरुण ने रानी को देखा तो वह ठगा सा रह गया. इंस्टाग्राम पर जिस रानी की फोटो को उस ने देखा था, सामने बैठी रानी वैसी नहीं थी. वह उस की उम्र से दोगुनी दिख रही थी. हालांकि रानी ने मेकअप कर उम्र छिपाने की भरसक कोशिश की थी, लेकिन चेहरे की झुर्रियां उस की उम्र की चुगली कर रही थीं.

अरुण समझ गया कि रानी ने प्यार में उस के साथ छल किया है. इंस्टाग्राम पर एडिट फोटो लगा कर उस ने उसे छला है. उस के मन में रानी के प्रति नफरत भर गई, लेकिन उस ने अपनी नफरत को दबाए रखा और रानी से प्यार भरी बातें करता रहा. उस ने रानी को आभास नहीं होने दिया कि उस के मन में नफरत का कितना बड़ा तूफान उठ रहा है. अरुण जहां रानी को देख कर मायूस हुआ, वहीं रानी 25 वर्षीय युवक अरुण को देख कर गदगद हो उठी थी. वह सोचने लगी कि अरुण जैसे गबरू जवान से शादी कर वह अपने सारे अरमान पूरे कर लेगी. उस के नीरस जीवन में एक बार फिर बहार आ जाएगी.

उस रोज रानी ने अरुण से खूब बातें कीं, फिर उस के साथ शारीरिक भूख मिटाई. चंद घंटे होटल में रुकने के बाद रानी वापस घर आ गई. उस दिन वह बेहद खुश थी. रात में भी वह अरुण के बारे में सोचती रही और उस के साथ बिताए खुशी के पलों को याद करती रही. इधर अरुण घर आया तो उसे लगा कि जैसे उस का सब कुछ लुट गया है. रानी जैसी अधेड़ उम्र की महिला से वह शादी कभी नहीं कर सकता. रानी ने प्यार में उस के साथ छल किया था. अत: उस ने भी उस के साथ छल करने का निश्चय किया. प्यार के बदले वह उस से पैसा वसूल करेगा. इंकार किया तो दूरियां बना लेगा.

इस के बाद अरुण जब दोबारा होटल में रानी से मिला तो उस ने रानी से दिखावे के रूप में खूब प्यारभरी बातें कीं. शारीरिक संबंध भी बनाए, फिर जरूरत बता कर रानी से पैसे मांगे. शादी के लालच में रानी ने उसे पैसे दे दिए. इस के बाद तो यह सिलसिला ही चल पड़ा. जब भी अरुण आता, होटल रूम मेें रानी से संबंध बनाता और फिर पैसा मांगता. इस तरह रानी से वह लगभग 2 लाख रुपए ले चुका था. इधर कुछ दिनों से रानी अरुण पर शादी करने का दबाव बनाने लगी थी, लेकिन अरुण कोई न कोई बहाना बना कर टाल देता था.

रानी को उस पर शक हुआ तो उस ने अरुण को धमकाना शुरू कर दिया कि वह या तो उस से शादी करे या फिर पैसे वापस करे, अन्यथा वह पुलिस में रिपोर्ट दर्ज करा कर उसे परिवार सहित जेल भिजवा देगी. रानी सोमवंशी की धमकी से अरुण राजपूत डर गया और बोला, ”रानी, यह तुम क्या कह रही हो? तुम जैसा कहोगी, वैसा ही मैं करूंगा. थोड़ा समय दो. मैं तुम से शादी कर लूंगा.’’

”तब ठीक है, मुझे तुम से यही उम्मीद थी. वैसे भी मैं तुम से मजाक कर रही थी.’’ रानी बोली.

अरुण ने घबरा कर रानी से कह तो दिया कि वह उस से शादी रचा लेगा, लेकिन वह ऐसा कर नहीं सकता था, क्योंकि रानी अधेड़ उम्र की थी. भला वह उस से शादी कैसे कर लेता. उस के पेरेंट्स भी रानी को बहू के रूप में स्वीकार नहीं करते. इज्जत उछलती सो अलग से.

इस तरह रानी की शादी की जिद, रुपया वापस करने की मांग तथा जेल भिजवाने की धमकी से अरुण बेचैन हो उठा. आखिर इस समस्या से निपटने के लिए अरुण ने रानी की हत्या की योजना बनाई. उस ने इस की भनक किसी के कानों में नहीं पडऩे दी. आरोपी अरुण सिंह राजपूत से पूछताछ करने के बाद पुलिस ने उसे 3 सितंबर, 2025 को मैनपुरी कोर्ट में पेश किया, जहां से उसे जिला जेल भेज दिया गया. Love Crime

 

 

Aligarh News: एक जुर्म दीवाने की खातिर

Aligarh News: पति यूसुफ के घर से निकलते ही तबस्सुम ने योजनानुसार प्रेमी दानिश को फोन कर दिया था. इस बात की जानकारी किसी को नहीं हो सकी. यूसुफ जब शाम को काम से वापस घर नहीं आया, तब फेमिली वालों को चिंता हुई. यूसुफ के साथ फिर क्या हुआ? पढि़ए, इस सनसनीखेज कहानी में…

दानिश और तबस्सुम का 4 सालों तक प्यार परवान चढ़ता रहा, लेकिन अब यूसुफ की दखलंदाजी से दोनों परेशान रहने लगे. फोन पर भी अब तबस्सुम दानिश से डरडर कर कम ही बात कर पाती थी. प्रेमी और प्रेमिका दोनों ही बिन पानी की मछली की तरह तड़पने लगे. जब दोनों को एकदूसरे की जुदाई बरदाश्त नहीं हुई तो यूसुफ से छुटकारा पाने के लिए उस की हत्या करने का प्लान बनाया. 29 जुलाई, 2025 को यूसुफ घर से टिफिन ले कर मंडी जाने के लिए घर से निकला था, रास्ते में उसे दानिश ने रोक कर कहा, ”यूसुफ यहां पर सारे दिन काम करने पर भी मिलने वाले पैसों से तुम्हारा काम नहीं चलेगा. मेरे साथ चलो, कासगंज में मेरी जानपहचान है. वहां पर अच्छा काम दिलवा दूंगा.’’

अपने दोस्त दानिश की बातों में आ कर यूसुफ उस की स्कूटी पर बैठ गया. दानिश यूसुफ को अपनी स्कूटी पर बैठा कर कासगंज की ओर ले गया. रास्ते में टिफिन से खाना खाने के बहाने दानिश यूसुफ को विलराम क्षेत्र में स्थित बंद पड़े एक ईंट भट्ठे पर ले गया. दानिश ने अपने लिए खाना पहले ही एक होटल से ले लिया था. भट्ठे पर पहुंच कर दोनों ने वहां बैठ कर अपनाअपना खाना खाया. खाना खाने के बाद दोनों वहीं आराम करने लगे. खाना खाने के कुछ देर बाद ही यूसुफ बेहोश हो गया. तब दानिश ने उस के दोनों हाथ पीछे बांध दिए और अपने साथ लाए छुरे को स्कूटी से निकाल कर यूसुफ के पेट में वार कर उस की हत्या कर दी.

इस के बाद भी उसे तसल्ली नहीं हुई और अपने साथ लाए तेजाब से उस का चेहरा जला कर शव को वहां उगी झाडिय़ों में फेंक कर अपनी स्कूटी से भाग गया. यूसुफ की हत्या करने के बाद दानिश ने काम होने की पूरी जानकारी मोबाइल से अपनी प्रेमिका तबस्सुम को दे दी. इस के बाद दानिश अपने घर आ गया. यूसुफ की हत्या करने के बाद दानिश और तबस्सुम खुश थे. दोनों की फोन पर बातें होती रहती थीं. दोनों साथ रहने का प्लान बना रहे थे, लेकिन पुलिस ने उन्हें गिरफ्तार कर लिया.

2 अगस्त, 2025 की शाम को कासगंज जिले की बिलराम पुलिस चौकी के गांव नगला छत्ता में बंद पड़े एक ईंट भट्ठे के पास झाड़ी में एक अज्ञात व्यक्ति का अधजला हुआ शव मिला. युवक का शव मिलने की जानकारी जंगल की आग की तरह फैल गई और देखते ही देखते सैकड़ों की संख्या में महिलाओं व पुरुषों की भीड़ एकत्र हो गई. कुछ लोग कह रहे थे कि यह आशिकी के चक्कर में मारा गया है, जबकि कुछ का कहना था कि पैसों के लेनदेन के पीछे हत्या हुई है. जितने मुंह उतनी बातें वहां होने लगी.

लोगों ने इस की सूचना पुलिस को दी, पुलिस घटनास्थल पर पहुंच गई. शव कई दिन पुराना होने के चलते उस में कीड़े पनप गए थे.  मृतक के दोनों हाथ पीछे रस्सी से बंधे हुए थे. शव को देखने से प्रतीत हो रहा था कि पेट में किसी धारदार हथियार से वार कर के मौत के घाट उतारा गया था. शव को पेट्रोल या तेजाब से जला दिया गया था, ताकि उस की शिनाख्त न हो सके. सूचना मिलने पर एसपी (देहात) अमृत जैन भी फोरैंसिक टीम के साथ घटनास्थल पर पहुंच गए. फोरैंसिक टीम ने मौके से साक्ष्य जुटाए. शव की पहचान कराने का प्रयास किया गया, लेकिन शव की पहचान न होने पर पुलिस समझ गई कि युवक कहीं बाहर का है और उस की हत्या यहां ला कर की गई है.

पुलिस ने मौके की काररवाई निपटाने के बाद शव को मोर्चरी भिजवा दिया. इस के बाद आसपास  के थानों व जिलों से लापता लोगों के बारे में जानकारी की गई. पुलिस को पता चला कि थाना छर्रा के धनसारी गांव का यूसुफ पिछले कई दिनों से लापता है. इस पर पुलिस ने बिना देर किए यूसुफ के फेमिली वालों से संपर्क किया. यूसुफ के फेमिली वाले जब थाने पहुंचे तो उन्होंने कपड़ों और चप्पलों के आधार पर शव की शिनाख्त यूसुफ के रूप में की. 29 जुलाई, 2025 की शाम के 6 बज चुके थे और 27 वर्षीय यूसुफ अभी तक गल्ला मंडी से वापस नहीं लौटा था. यूसुफ गल्ला मंडी में काम करता था. दोनों बच्चे शाम होते ही बेसब्री से अपने पापा का इंतजार करने लगते थे, क्योंकि यूसुफ बच्चों के लिए खानेपीने और कभीकभी कोई खिलौना ले कर जरूर आता था.

सुबह से शाम हो गई और जब रात घिरने लगी तो बड़े बेटे असलान ने अपनी मम्मी तबस्सुम से पूछा, ”मम्मी, पापा अब तक क्यों नहीं आए हैं? वैसे तो वो शाम तक आ जाते थे.’’

”बेटा, पापा को आज ज्यादा काम मिल गया होगा, इसलिए उन्हें आने में देर हो गई है.’’ तबस्सुम ने कहा.

जब रात के 9 बज गए, तब यूसुफ के पिता भूरे खां ने बहू तबस्सुम से पूछा, ”बहू, यूसुफ सुबह जाते समय क्या कह गया था कि वह देर से घर आएगा?’’

इस पर तबस्सुम ने जबाव दिया, ”नहीं पापाजी, वह मुझ से तो कुछ कह नहीं गए थे. मैं ने फोन किया था, लेकिन उन का फोन स्विच्ड औफ मिला. मुझे लगा कि कहीं काम में फंस गए होंगे. उन्होंने वापस कौल भी नहीं की.’’

यह सुन कर भूरे खां को चिंता हुई. यूसुफ सुबह गल्ला मंडी जा कर शाम को घर लौट आता था, लेकिन आज उस ने फोन कर के भी नहीं बताया कि वह देरी से आएगा. उन्होंने सोचा कि इस समय तो गल्ला मंडी भी बंद हो चुकी होगी. बेटे को तलाशें तो तलाशें कहां? फिर भी उन्होंने स्वजनों के साथ यूसुफ को ढंूढा, लेकिन उस का कुछ पता नहीं चला. अलीगढ़ के थाना छर्रा के गांव धनसारी निवासी भूरे खां व उन के फेमिली वालों ने यूसुफ के इंतजार में पूरी रात आंखों में काटी. सुबह होते ही भूरे खां ने फेमिली वालों के साथ गल्ला मंडी जा कर बेटे की तलाश की. साथ ही उस के साथ काम करने वाले अन्य लोगों से बेटे यूसुफ के बारे में जानकारी की. लोगों ने बताया कि यूसुफ कल तो मंडी आया ही नहीं था.

यह सुनते ही भूरे खां के पैरों तले से जैसे जमीन खिसक गई. उन के मन में तरह तरह के विचार आने लगे कि कहीं बेटे के साथ कोई अनहोनी तो नहींं हो गई. कल से उस का कोई हालचाल नहीं मिला था. बेटे की तलाश में भूरे खां ने जहां भी संभव हो सकता था, वहां उस की तलाश की. दूसरे दिन यानी 30 जुलाई को भूरे खां ने थाना छर्रा में बेटे की गुमशुदगी दर्ज करा दी. गुमशुदगी दर्ज होने के बाद  पुलिस और यूसुफ के फेमिली वाले उस की तलाश करते रहे, लेकिन 4 दिन तलाशने के बाद भी यूसुफ का कोई पता नहीं चला.

यूसुफ की नृशंस हत्या से घर में कोहराम मच गया. यूसुफ  के बच्चों के फूल से खिले चेहरे पिता की मौत से मुरझा से गए. पुलिस ने फेमिली वालों को ढांढस बंधाते हुए उन से हत्यारों की तलाश में मदद करने को कहा. कासगंज में यूसुफ के शव का पोस्टमार्टम होने के बाद शव फेमिली वालों को सौंप दिया गया. 3 अगस्त को डैडबौडी शाम 5 बजे गांव पहुंची. परिजनों और ग्रामीणों ने घटना का खुलासा करने और सभी आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए छर्राकासगंज मार्ग पर जाम लगाने की कोशिश की. तब पुलिस ने उन्हें समझा कर सड़क से हटा दिया, इस के बाद गांव में शव का अंतिम संस्कार कर दिया गया.

अपने पति की हत्या से यूसुफ की पत्नी तबस्सुम का रोरो कर बुरा हाल था. वह कभी अपने को संभालती तो कभी बच्चों को.  पुलिस ने मृतक यूसुफ की पत्नी के साथ ही घर के अन्य सदस्यों से गहनता से पूछताछ की. बच्चों से भी पुलिस ने जानकारी जुटाई. तबस्सुम ने बताया कि उस ने पति के वापस न आने पर उस ने फोन किया था, लेकिन उन का फोन स्विच औफ आ रहा था. तब उस ने पति के दोस्त दानिश को फोन कर पति के बारे में पूछा था. दानिश ने पति यूसफ के बारे में कोई जानकारी न होने की बात कही थी. इस पर मामले की गुत्थी सुलझाने के लिए पुलिस ने सीसीटीवी फुटेज और मृतक की पत्नी तबस्सुम के मोबाइल की काल डिटेल्स की जांच की. इस के अच्छे परिणाम शीघ्र ही सामने आ गए.

पुलिस ने गहनता से जांच कर इस हत्या की गुुत्थी सुलझा कर इस हत्याकांड का परदाफाश कर दिया. जो सच्चाई सामने आई है, वो बेहद हैरान करने वाली थी. यूसुफ की दर्दनांक हत्या के पीछे जो कहानी सामने आई, उस ने सब को चौंका दिया. यूसुफ की पत्नी तबस्सुम ने अपने गांव में रहने वाले 28 वर्षीय प्रेमी दानिश के साथ मिल कर इस हत्या की साजिश रची थी. दोनों के प्रेम प्रसंग की जानकारी होने पर जब यूसुफ ने इस का विरोध किया तो दोनों ने मिल कर अपने प्यार के रास्ते से हटाने की ठान ली.

पुलिस ने 3 अगस्त, 2025 को मृतक के पिता भूरे खां की तहरीर पर हत्या की रिपोर्ट  तबस्सुम, उस के प्रेमी दानिश व दानिश के  अज्ञात साथियों के खिलाफ दर्ज कर ली गई. कौल डिटेल्स में तबस्सुम और प्रेमी दानिश के बीच लंबेलंबे समय तक बातचीत के साक्ष्य मिले. इस के बाद तबस्सुम को हिरासत में ले कर पूछताछ की गई. पोस्टमार्टम रिपोर्ट से खुलासा हुआ कि यूसुफ को बड़ी बेरहमी से मारा गया था. बेहोश होने के बाद पहले उस के हाथ पीछे बांधे गए. फिर धारदार हथियार से पेट पर वार किए गए. हत्या के बाद पहचान मिटाने के लिए उस के शरीर पर तेजाब डाला गया.

जांच के बाद पुलिस ने 3 अगस्त को ही तबस्सुम को गिरफ्तार कर लिया. उस ने पूछताछ में सारा राज उगल दिया. प्रेम और वासना में अंधी हो कर तबस्सुम ने अपने पति से छुटकारा पाने के लिए उसे मौत के घाट उतारने की साजिश यूसुफ के दोस्त और अपने आशिक दानिश के साथ मिल कर रची और उसे अंजाम तक पहुंचाया. पुलिस ने पूछताछ के बाद उसे न्यायालय में पेश किया, जहां से उसे जेल भेज दिया गया. पुलिस को 6 अगस्त, 2025 की शाम मुखबिर से सूचना मिली कि यूसूफ की हत्या का आरोपी दानिश जो कि यूसुफ का दोस्त भी है, रामपुर बंबा के निकट कहीं जाने की फिराक में है. सूचना मिलते ही पुलिस एलर्ट हो गई और बंबा के पास से दानिश को गिरफ्तार कर लिया.

दानिश को थाने ला कर उस से यूसुफ की हत्या के बारे में पूछताछ की गई. उस ने बताया कि गांव में उस का और यूसुफ का घर थोड़ी दूरी पर ही है. हम दोनों में दोस्ती थी. यूसुफ के घर आनाजाना रहता था. करीब 4 साल पहले एक दिन जब वह यूसुफ के घर गया था, उस की यूसुफ की पत्नी तबस्सुम से आंखें चार हो गईं. तबस्सुम बला की खूबसूरत थी. दानिश भी कसे शरीर का सुंदर युवक था. पहली ही मुलाकात में दोनों ने आंखों ही आखों में एकदूसरे के दिल पर मोहब्बत की दस्तक दे दी थी.

अब दानिश अकसर यूसुफ के घर आ जाता था. वह बच्चों के लिए कोई न कोई गिफ्ट या उन के पसंद की खानेपीने की चीजें ले कर आता. इस बीच दानिश ने यूसुफ की गैरमौजूदगी में तबस्सुम से उस का मोबाइल नंबर ले लिया. यूसुफ के काम पर जाने के बाद दोनों प्रेमी प्रेमिका फोन पर घंटों बातें करते थे. पति यूसुफ के मंडी जाने के बाद वह बाजार जाने के बहाने घर से निकल जाती और अपने प्रेमी दानिश से मिलती. इस बीच दोनों के बीच जिस्मानी रिश्ते भी बन गए थे. जब भी तबस्सुम को मौका मिलता वह दानिश से मिल आती. तबस्सुम के खयालों में हरदम अपने प्रेमी दानिश की तसवीर रहती थी. वह चाहती थी कि उस का दीवाना हर पल उस की आंखों के सामने ही रहे.

पत्नी के बदलते व्यवहार पर यूसुफ को शक हुआ. फिर उसे दोस्त दानिश और पत्नी तबस्सुम के प्रेम प्रसंग की भनक लगी तो उस ने तबस्सुम का विरोध किया. दानिश को ले कर आए दिन उन के घर में कलह भी होने लगी. पूछताछ में पत्नी तबस्सुम ने पुलिस को बताया, वह अपने प्रेमी दानिश के साथ जाना चाहती थी. पति यूसुुफ इस का विरोध करता था. वह दानिश से बात करने और घर पर उस के सामने आने को मना करता था. पति यूसुफ मंडी के काम से इतना कमा नहीं पाता था, जिस से घर में तंगी बनी रहती थी. जबकि दानिश उस पर खूब खर्च करता था और उस की हर बात का खयाल रखता था.

योजना के अनुसार 29 जुलाई, 2025 को उस ने यूसुफ के खाने में नींद की गोलियां पीस कर मिला दी थीं. ये गोलियां दानिश ने ला कर दी थीं. इस के साथ ही पति के घर से गल्ला मंडी के लिए निकलते ही दानिश को फोन कर दिया था. बताते चलें कि भट्ठे पर जब यूसुफ ने टिफिन से खाना खाया तो नींद की गोलियों की मात्रा खाने में अधिक मिली होने से वह खाना खाने के कुछ समय बाद ही बेहोश हो गया. इस का फायदा उठाते हुए दानिश ने उस की नृशंस तरीके से हत्या कर दी. भूरे खां ने बताया कि बेटे यूसुफ की 7 साल पहले मडराक निवासी तबस्सुम से शादी हुई थी. यूसुफ के 6 साल और 4 साल के 2 बेटे हैं.

सब कुछ ठीक चल रहा था. 4 साल पहले जब से दानिश से यूसुफ की दोस्ती हुई तब से तबस्सुम फोन पर दानिश से बात किया करती थी. इस का यूसुफ विरोध किया करता था. इसी के चलते तबस्सुम ने दानिश के साथ मिल कर यूसुफ की बेहरमी से हत्या कर दी. उस ने अपने छोटे बेटों की भी चिंता नहीं की. थानाप्रभारी राजेश कुमार के अनुसार, जहां तबस्सुम और दानिश के फोन नंबरों की काल डिटेल्स निकाली गई, वहीं घटना में सीसीटीवी फुटेज की भी मदद ली गई.

घटना वाले दिन दानिश अपनी सफेद स्कूटी पर यूसुफ को बैठा कर अपने साथ ले जाता हुआ नजर आया. सभी सबूत एकत्रित कर घटना का परदाफाश किया गया है. आरोपी दानिश की निशानदेही पर घटना में प्रयुक्त छुरा भी बरामद कर लिया गया है. सीओ (छर्रा) धनजंय सिंह के अनुसार, प्रेमिका ने ही प्रेमी के साथ मिल कर घटना का अंजाम दिया. दोनों जेल भेज दिए गए हैं. मृतक का चेहरा भी जलाया गया था. शिनाख्त कपड़ों व चप्पल से हुई. शव 4-5 दिन पुराना भी लग रहा था. अवैध संबंधों के चलते यूसुफ की हत्या की गई है.

पुलिस को इस मामले का परदाफाश करने में ज्यादा टाइम नहीं लगा. पत्नी को हिरासत में ले कर पूछताछ की तो उस ने पति की हत्या का जुर्म स्वीकार कर लिया. लेकिन उस की बात पूरी तरह पुलिस के गले नहीं उतर रही थी. तब उस के मोबाइल की काल डिटेल्स जांची तो पड़ोस में रहने वाला दानिश पुलिस के रडार पर आया. लव अफेयर के चलते पत्नी ने प्रेमी के साथ साजिश रच कर अपने ही जीवनसाथी को मार डाला. अब पत्नी तबस्सुम और प्रेमी दानिश अपने किए का फल भोगेंगे. Aligarh News

 

 

Crime Story: जब बोझिल लगने लगा सुहाग

Crime Story: 2 बच्चों की मां बनने के बाद दिव्या की सोच में बदलाव आया और वह पति की जगह चचेरे देवर को पसंद करने लगी. दोनों के बीच अनैतिक संबंध भी बन गए. जब यह बात उस के पति राजेश को पता चली तो घर में कलह रहने लगी. किसे पता था कि यह कलह एक मौत की आहट है.

सुबहसुबह बहू के रोने की आवाज सुन कर अजय वर्मा का माथा ठनका. वह मन ही मन सोचने लगे कि ऐसी कौन सी आफत आ गई कि बहू छाती पीटपीट कर रो रही है. वजह जानने के लिए वह तेज कदमों से उस के कमरे की तरफ बढ़े. कमरे का दरवाजा भिड़ा हुआ था, जो दस्तक देने पर खुल गया. ससुर को सामने देख कर दिव्या और जोरों से चीखने लगी, ‘‘मैं तो लुट गई, बरबाद हो गई. अब मैं कहां जाऊंगी, मेरा और मेरे बच्चों का क्या होगा?’’

‘‘बहू आखिर हुआ क्या, यह तो बताओ?’’ अजय वर्मा ने दिव्या से पूछा.

‘‘पिताजी, ये मेरा साथ छोड़ गए.’’ वह रोते हुए बोली.

बेटे के मरने की बात सुनते ही अजय वर्मा को धक्का सा लगा, वह बोले, ‘‘यह तू क्या कह रही है, ऐसा कैसे हो गया? कल रात भलाचंगा था, उसे कोई बीमारी भी नहीं थी.’’

‘‘पता नहीं, यह सब कैसे हुआ? रात में इन्होंने शराब पी, फिर खाना खा कर सो गए. सुबह देखा तो यह इस हालत में मिले. मुझे तो लग रहा है, ज्यादा शराब पीने से इन की मौत हो गई.’’ बहू रोते हुए बोली.

जवान बेटे की लाश देख कर अजय वर्मा भी रोने लगे. लेकिन उन की समझ में नहीं आ रहा था कि अचानक यह सब कैसे हो गया. जरा सी देर में पूरे मोहल्ले में राजेश की मौत की खबर फैल गई. तमाम लोग अजय वर्मा के घर पहुंच गए. वहां पर जितने मुंह, उतनी तरह की बातें हो रही थीं. इसी बीच किसी ने थाना उमरदा में फोन कर के खबर दे दी कि उमरदा में ही राजेश की रहस्यमय परिस्थिति में मौत हो गई है. यह बात 13 अगस्त, 2015 की थी. सुबह 8 बजे के करीब जब उमरदा थाने के थानाप्रभारी श्रीप्रकाश यादव को यह खबर मिली, तब रिमझिम बारिश हो रही थी. फिर भी जल्दी से वह अपने अधीनस्थों के साथ राजेश के घर की तरफ रवाना हो गए.

जब वह उस के घर पहुंचे तो उस की पत्नी दिव्या पति की लाश से लिपट कर विलाप कर रही थी. पुलिस को देख कर वह और ज्यादा जोर से रोने लगी. थानाप्रभारी की आंखें ताड़ गईं कि यह जानबूझ कर लोगों को दिखाने के लिए जरूरत से ज्यादा रोनेधोने का नाटक कर रही है. थानाप्रभारी ने कमरे में तख्त पर पड़ी राजेश की लाश का मुआयना किया तो उस के शरीर पर कोई जख्म नहीं था. हां, गले को ध्यान से देखने पर गरदन के चारों तरफ रगड़ के निशान जरूर नजर आए. ऐसा लग रहा था, जैसे उस की हत्या गला घोंट कर की गई थी. मुंह से झाग भी निकला हुआ था. जिस से जहर देने की आशंका हो रही थी.

कमरे में शराब की 2 खाली बोतलें पड़ी थीं. थानाप्रभारी ने राजेश के पिता अजय वर्मा से बात की तो उन्होंने बताया कि कल रात राजेश ठीकठाक था, पता नहीं रात को उस के साथ यह क्या हो गया? इस के बाद उन्होंने दिव्या से बात की तो उस ने भी यही बात बताई. उस समय मामला गमगीन था, इसलिए उन्होंने उन लोगों से बहुत ज्यादा बात नहीं की और घटनास्थल की औपचारिकताएं पूरी कर के लाश पोस्टमार्टम के लिए भेज दी. मृतक के पिता अजय वर्मा ने श्रीप्रकाश यादव को बताया कि अजय की मौत शराब पीने से नहीं हुई, बल्कि उस की किसी ने हत्या की है. मृतक के पिता अजय वर्मा की तहरीर पर उन्होंने अज्ञात लोगों के खिलाफ हत्या का मुकदमा दर्ज कर लिया.

इस मामले की जांच श्रीप्रकाश यादव ने खुद अपने हाथों में ली. उन्हें लगा कि जब हत्या उसी के कमरे में हुई है तो यह काम कोई बाहर वाला तब तक नहीं कर सकता, जब तक घर का कोई व्यक्ति इस में शामिल न रहा हो. राजेश और उस के घर वालों के बारे में और ज्यादा जानकारी लेने के लिए वह उस के पड़ोसियों से मिले. उन से उन्हें महत्त्वपूर्ण जानकारी यह मिली कि राजेश की पत्नी दिव्या के अवैधसंबंध उस के घर के सामने रहने वाले चचेरे देवर रवि वर्मा के साथ थे.

यह जानकारी मिलने के बाद श्रीप्रकाश अजय वर्मा के घर पहुंचे. वहां दिव्या का रोनाधोना अभी भी जारी था. पुलिस को देख कर उस ने और जोरजोर से रोना शुरू कर दिया. उन्होंने उसे सांत्वना दे कर चुप कराया. उस के शांत होने के बाद उन्होंने उस से पूछा, ‘‘अब बताओ कि रात में क्या हुआ था, क्या तुम अपने पति के हत्यारे के बारे में कुछ जानती हो?’’

‘‘साहब, रात को वह 10 बजे घर आए थे. उस समय नशे में चूर होने के बाद भी उन्होंने घर में बैठ कर शराब पी, फिर खाना खाया. उन्हें खाना खिलाने के बाद मैं दूसरे कमरे में जा कर बच्चों के साथ सो गई. सुबह जब मैं उन के कमरे में गई तो वह तख्त पर मृत पड़े थे. उन की मौत कैसे हुई, मैं नहीं जानती.’’

श्रीप्रकाश को दिव्या की बात पर जरा भी विश्वास नहीं हुआ. उन्हें लगा कि वह आसानी से सही बात नहीं बताएगी. इसलिए वह दिव्या को थाने ले आए. अब तक पुलिस के पास पोस्टमार्टम रिपोर्ट भी आ गई थी. रिपोर्ट में बताया गया था कि राजेश की मौत गला कसने से हुई थी. जहर की आशंका को देखते हुए उस का बिसरा सुरक्षित कर लिया गया था. पोस्टमार्टम रिपोर्ट पढ़ने के बाद श्रीप्रकाश यादव ने दिव्या से सख्ती से पूछताछ की तो वह टूट गई. उस ने अपना जुर्म कबूल कर लिया. उस ने पति की हत्या की जो कहानी बताई, वह इस प्रकार निकली.

उत्तर प्रदेश के जनपद कन्नौज के इंदरगढ़ थाने के अंतर्गत एक गांव पड़ता है असैनी. रामस्वरूप वर्मा इसी गांव में अपने परिवार के साथ रहता था. उस के परिवार में पत्नी रजनी के अलावा 3 बेटे व 2 बेटियां थीं. दिव्या उसी की छोटी बेटी थी. रामस्वरूप वर्मा अपनी बड़ी बेटी का विवाह करने के बाद दिव्या के लिए भी लड़का देखने लगे. इसी भागदौड़ में एक रिश्तेदार ने उन्हें राजेश वर्मा के बारे में बताया. राजेश कन्नौज जनपद मुख्यालय से लगभग 30 किलोमीटर दूर स्थित उमरदा कस्बे के अजय वर्मा का बेटा था.

अजय वर्मा के 2 ही बच्चे थे. एक बेटी और एक बेटा. बेटी का वह विवाह कर चुके थे. राजेश टैंपो चलाता था. वह उस की शादी कर के निश्चित होना चाहते थे. इसलिए जब दिव्या का रिश्ता राजेश के लिए आया तो अजय वर्मा ने इस रिश्ते को स्वीकार कर लिया. जल्दी ही दोनों की शादी हो गई. दिव्या से शादी कर के राजेश खुश था, पर दिव्या राजेश से खुश नहीं थी. चूंकि वह दिव्या की कल्पना के अनुरूप नहीं था, इसलिए उस के अरमान चकनाचूर हो गए थे. पर अब वह कर भी क्या सकती थी. आखिरकार वह इसे ही अपना नसीब समझ कर गृहस्थी में रम गई. विवाह के लगभग 2 सालों बाद उस ने एक बेटे को जन्म दिया, जिस का नाम पंकज रखा गया.

पंकज के जन्म के बाद दिव्या के यौवन का निखार और बढ़ गया. स्वभाव से चंचल दिव्या का मन अब गृहस्थी से उचटने लगा था. इस की वजह यह थी कि राजेश ने शराब पीनी शुरू कर दी थी. एक तरफ वह उदास रहती थी तो दूसरी तरफ उस का मन भटकता रहता था. इसी बीच दिव्या ने एक बच्ची को जन्म दिया. राजेश के घर के सामने उस का चचेरा भाई रवि वर्मा रहता था. रवि की परचून की दुकान थी. राजेश अपने घर का सामान रवि की दुकान से ही खरीदता था. कभीकभी रवि खुद सामान पहुंचाने उस के घर चला जाता तो उस की मुलाकात दिव्या से हो जाती. दिव्या मन ही मन रवि को चाहती थी. लेकिन वह पहल नहीं कर पा रही थी.

राजेश को शराब पीने की लत थी. रवि भी शराब पीता था, इसलिए वह राजेश के साथ शराब पीने के लिए अकसर उस के यहां आने लगा. रवि और दिव्या के बीच देवर भाभी का रिश्ता था. उस रिश्ते का फायदा उठाते हुए दिव्या उस के साथ हंसीमजाक करती. रवि भी जवान था. इसलिए भाभी के मजाक का वह उसी के अंदाज में जवाब देता. इस से दोनों का हौसला बढ़ता गया. इस का नतीजा यह हुआ कि एक दिन मौका मिलने पर दोनों ने हदें लांघ कर अपनी हसरतें पूरी कर लीं.

इस के बाद रवि मौका ढूंढ़ कर जबतब दिव्या के यहां जाने लगा. रवि का सान्निध्य पा कर दिव्या भी खुश रहने लगी. अब वह खिलीखिली सी रहती थी. उस ने पति की परवाह करनी छोड़ दी थी. उसे वह बातबात पर झिड़क देती थी. एक घर में रहने के बावजूद दोनों नदी के दो किनारों की तरह थे. राजेश पत्नी में आए इस बदलाव को महसूस तो कर रहा था, लेकिन समझ नहीं पा रहा था कि वह उस की इतनी उपेक्षा क्यों करने लगी है. माजरा उसे उस दिन समझ में आया, जब उस ने उसे अपने चचेरे भाई रवि के साथ आपत्तिजनक स्थिति में देख लिया. फिर तो घर में कोहराम मच गया. उस रोज राजेश ने दिव्या की जम कर पिटाई की. ससुर अजय वर्मा ने भी दिव्या को खूब खरीखोटी सुनाई.

रंगेहाथों पकड़े जाने के बाद दिव्या सतर्क हो गई. अब चूंकि पति और ससुर उस की निगरानी करने लगे थे, इसलिए उस का रवि से मिलना मुश्किल हो गया. लेकिन सख्त पाबंदी के बावजूद दोनों किसी न किसी तरह मिल ही लेते थे. धीरेधीरे देवरभाभी के नाजायज संबंधों की बात पूरे मोहल्ले में फैल गई थी. महिलाएं जहां भी बैठतीं, चटकारे ले कर उन के संबंधों की चर्चा करतीं. ज्योंज्यों समय बीतता गया, घर में कलह बढ़ती गई. दिव्या रवि के बिना रह नहीं पा रही थी. इसलिए शराब पीने के बाद राजेश उस की पिटाई करता था. दिव्या भले ही राजेश के 2 बच्चों की मां बन गई थी, लेकिन उसे पसंद नहीं करती थी. आखिर आजिज आ कर उस ने एक भयानक योजना बना डाली.

इस फैसले से उस ने अपने प्रेमी रवि को भी अवगत करा दिया. रवि उस का साथ देने को तैयार हो गया. इस के बाद दोनों ने राजेश को रास्ते से हटाने की उस योजना पर काम शुरू कर दिया. योजना के अनुसार रवि ने बाजार से एक कीटनाशक दवा ला कर दिव्या को दे दी. 12 अगस्त, 2015 को रात 10 बजे राजेश घर लौटा और रोज की तरह शराब की बोतल ले कर बैठ गया. शराब पीने के दौरान जब वह उठ कर लघुशंका के लिए गया तो दिव्या ने मौका देख कर कीटनाशक दवा जल्दी से उस के शराब के गिलास में मिला दी.

लौट कर राजेश ने दवा मिली शराब का गिलास एक ही बार में अपने गले से नीचे उतार लिया. दवा मिली शराब ने राजेश के ऊपर जल्दी ही असर करना शुरू कर दिया. थोड़ी ही देर में वह तख्त पर बेहोश हो कर लुढ़क गया. इसी बीच घर में रवि आ गया. दिव्या ने अपना दुपट्टा राजेश के गले में लपेटा. दुपट्टे का एक छोर खुद पकड़ा और दूसरा रवि ने. वे दुपट्टे को तब तक खींचते रहे, जब तक राजेश का दम नहीं घुट गया. पति की हत्या के बाद दिव्या ने शराब की बोतल तख्त के नीचे लुढ़का दी और गिलास साफ कर के रसोई में रख दिया. कीटनाशक दवा की शीशी उस ने कूड़ेदान में फेंक दी और दुपट्टा घर में छिपा दिया. राजेश की मौत के बाद रवि अपने घर चला गया.

खुद को बचाने के लिए दिव्या ने सुबह होते ही छाती पीटपीट कर रोना शुरू कर दिया. उस के रोने की आवाज सुन कर अजय वर्मा आ गए. उस के बाद घर में कोहराम मच गया. राजेश की हत्या में दिव्या का प्रेमी रवि वर्मा भी शामिल था. इसलिए पुलिस ने उसे गिरफ्तार करने के लिए उस के घर दविश दी, लेकिन वह घर से फरार हो चुका था पुलिस ने उस के मिलने के संभावित ठिकानों पर छापे मारे. तब वह तिर्वा में अपनी बहन की ससुराल में मिल गया. उसे गिरफ्तार कर के पुलिस थाने ले आई. उस ने भी पूछताछ में राजेश वर्मा की हत्या करने की बात कबूल कर ली.

14 अगस्त, 2015 को पुलिस ने अभियुक्त रवि वर्मा और दिव्या वर्मा को कन्नौज कोर्ट में रिमांड मजिस्ट्रेट के समक्ष पेश किया, जहां से उन्हें जिला जेल भेज दिया गया. कथा संकलन तक दोनों जेल में बंद थे. Crime Story

—कथा पुलिस सूत्रों पर आधारित

UP News: चीटर कौन दरोगा या उस की बीवी

UP News: यूपी पुलिस के दरोगा आदित्य कुमार लोचन अपनी पत्नी दिव्यांशी चौधरी को लुटेरी दुलहन बता रहे हैं, जबकि दिव्यांशी ने भी पति पर कई तरह के गंभीर आरोप लगाए हैं. यह हाईप्रोफाइल मामला अब कोर्ट में जा चुका है. कोर्ट के फैसले के बाद ही पता लगेगा कि दोनों में से चीटर कौन?

उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर जिले के बी.बी. नगर का रहने वाला आदित्य कुमार लोचन यूपी पुलिस में दरोगा था. गांव के ही ताऊजी दिव्यांशी चौधरी नाम की युवती का रिश्ता आदित्य कुमार के लिए ले कर आए थे. जब आदित्य कुमार को पता चला कि उसे दहेज में स्कौर्पियो और लाखों के जेवर मिलने वाले हैं तो उस ने शादी के लिए हां कर दी. पर कहते हैं न कि लालच बुरी बला है और इसी बला ने दरोगाजी को घेर लिया.

फरवरी, 2024 की शाम थी. दिन में तेज धूप, शाम को मौसम सामान्य और रात में गुलाबी सर्दी. मौसम का यह मिजाज यहां अकसर देखने को मिलता है. 17 फरवरी, 2024 को भी ऐसा ही मौसम था, जब बुलंदशहर के बी.बी. नगर निवासी दरोगा आदित्य कुमार ने जीवनसाथी के रूप में दिव्यांशी का हाथ थामा था. यह 17 फरवरी,  2024 का वही दिन था, जब आदित्य ने दिव्यांशी से शादी की थी. वह मुसकराती हुई, हल्दी व मेहंदी की खुशबू और कंगनों की खनक के साथ उस के घर आई थी. आदित्य को लगा था कि उस की जिंदगी अब पटरी पर आ जाएगी.

पहली नजर में यह रिश्ता परिवारों के सपनों से सजा लगता था, लेकिन किसी ने भी नहीं सोचा था कि यह रिश्ता कुछ महीनों में सुर्खियों में बदल जाएगा. कुछ ही समय में इस रिश्ते की परतें खुलने लगीं. आदित्य का कहना है कि दिव्यांशी कभी घर रुकती नहीं थी, आए दिन पैसों की मांग करती थी. महीना बीता नहीं था कि तसवीर बदलने लगी. दिव्यांशी का मूड हर दिन कुछ नया बहाना ढूंढता. वह कहती कि यह घर ठीक नहीं, तुम मुझे समझते नहीं, मुझे मायके जाना है, पैसे भेज दो वगैरहवगैरह. आदित्य पहले समझने की कोशिश करता, फिर उसे समझाने की और आखिर में वह थक चुका था.

यूं शुरू हुई दोनों में अनबन

2019 बैच के सबइंसपेक्टर आदित्य कुमार लोचन के पापा ऋषिपाल किसान थे और मम्मी राजेश देवी घरेलू महिला थीं. पापा की मौत के बाद कैंसर से मम्मी की भी मौत हो गई थी. घर में एक भाई है. वह भी दिव्यांग है. यानी एक तरीके से कहें कि सिर्फ दरोगा आदित्य ही घर थे और वही परिवार. एक रिश्ते के ताऊ आदित्य के लिए 29 साल की दिव्यांशी का रिश्ता ले कर आए थे. बताया कि दिव्यांशी की कोठी आदित्य के घर से 50 किलोमीटर दूर मेरठ के मवाना में स्थित है. दहेज में स्कौर्पियो कार, लाखों के जेवर और धूमधाम से शादी की बात ताऊ ने कही. खूबसूरत दिव्यांशी को देख कर दरोगा आदित्य कुमार लोचन और उन के फेमिली वालों ने भी हामी भर दी थी.

शादी को अभी 4 महीने ही हुए थे, पर आदित्य के मन में कुछ खटकने लगा था. दिव्यांशी अकसर कहती, ”मैं बीएड और सीटेट की तैयारी कर रही हूं, मायके में पढ़ाई में ध्यान ज्यादा लगता है. मेरे मायके का घर में बना एक स्टडीरूम मुझे पहचानता है और मैं स्टडीरूम को जानती हूं. मुझे उस में पढऩे की आदत बनी हुई है.’’

पहले आदित्य ने भरोसा किया, फिर धीरेधीरे आदतें शक पैदा करने लगीं. वह मायके में रह कर औनलाइन पैसों की मांग करती, कभी कोचिंग की फीस, कभी किताबें तो कभी फार्म भरने के नाम पर. आदित्य बिना सवाल किए रुपए भेज देता, क्योंकि वह उस की पत्नी थी और भरोसा करना उस के संस्कारों का हिस्सा था, लेकिन हर बार जब वह ससुराल आती, कुछ अजीब करती. अपने मोबाइल से सारे यूपीआई ऐप डिलीट कर देती.

‘इतना क्यों छिपाती है? आखिर क्या है, जो दिखाना नहीं चाहती?’ यह सवाल आदित्य को हर दिन परेशान करता रहा.

एक दिन आदित्य ने उस से कहा, ”दिव्यांशी, अपना मोबाइल दिखाना जरा.’’

बस इतना कहना था कि दिव्यांशी के चेहरे की रंगत उड़ गई. उस ने मोबाइल पकड़ाया. आदित्य ने उस से फोन का पासवर्ड पूछ कर स्क्रीन खोली. जैसे ही उस ने चैक किया, उन की भौंहें सिकुड़ गईं. मोबाइल में एक भी यूपीआई ऐप नहीं था, सब डिलीट. वह धीरे से बोला, ”तैयारी करती हो तो फीस किस से भरी? फार्म किस से जमा किया? किताबें कैसे खरीदीं? इस मोबाइल में यूपीआई या बैंक से संबंधित कोई ऐप डाउनलोड है ही नहीं. जबकि तुम ने जितने भी रुपए मुझ से लिए हैं, सब औनलाइन ही लिए हैं, वो भी अपने फोन नंबर के जरिए.’’

दिव्यांशी कुछ बोल न पाई, बस बारबार होंठ भींचती रही. आदित्य की सारी शंकाएं अचानक आकार लेने लगीं. उस दिन से घर का माहौल ही बदल गया. विश्वास में दरारें साफ दिखने लगीं और दिव्यांशी के झूठ की परतें एकएक कर के खुलती चली गईं.

कमिश्नर औफिस में क्यों किया हंगामा

पिछले साल 25 नवंबर को कानपुर कमिश्नरी कार्यालय में दिव्यांशी ने हाईवोल्टेज ड्रामा किया था. वह एक ठंडी सुबह थी. कमिश्नरी कार्यालय के बाहर भीड़ जमा थी. आरोप है कि वह अपने साथ कई लोगों को ले कर आई थी. भीतर से आवाजें गूंज रही थीं. किसी के रोने की, किसी के समझाने की और किसी के गुस्से से कांपती आवाज थी. यही दिन था, जब दिव्यांशी ने अपने पति आदित्य के खिलाफ आरोपों की झड़ी लगा दी थी. सब के सामने सच उजागर करने का दावा किया था. वह इस समय कमिश्नर के दफ्तर में थी और आदित्य कुमार की शिकायत कर रही थी. रोरो कर अपना दुखड़ा सुना रही थी. चेहरे पर आंसू और आंखों में आग लिए वह पुलिस अधिकारी के सामने बोली, ”इस आदमी ने मेरा सब कुछ बरबाद कर दिया.’’

उस के शब्द हवा में तीर की तरह गूंजे. दिव्यांशी का आरोप था कि पति आदित्य ने उसे महीनों तक मानसिक रूप से परेशान किया और उस की मेहनत की कमाई के 14 लाख 50 हजार रुपए हड़प लिए. लेकिन यह केवल पैसों का मामला नहीं था. दिव्यांशी ने और भी गंभीर आरोप लगाए. उस ने कहा कि आदित्य सोशल मीडिया पर लड़कियों से दोस्ती करता है, मीठी बातें कर उन का भरोसा जीतता है, फिर उन्हें अपने जाल में फंसा लेता है. बाद में उन्हीं की तसवीरें और वीडियो का इस्तेमाल कर उन्हें धमकाता और ब्लैकमेल करता है.

मामला पुलिस के एक दरोगा आदित्य से जुड़ा होने के कारण पत्रकारों की भीड़ कमिश्नरी के बाहर जमा हो गई. कमिश्नर कार्यालय से बाहर निकलते ही यूट्यूबर और चैनलों के पत्रकारों ने भी दिव्यांशी को घेर लिया. दिव्यांशी ने रोरो कर वो सारी बातें पत्रकारों को बताईं, जो शिकायत उस ने कमिश्नर साहब से लिखित में की थी. 14 लाख 50 हजार रुपए दिए जाने के मोबाइल ऐप गूगलपे व सबूत के तौर पर बैंक के लेनदेन के कागज भी पत्रकारों को दिखा रही थी. कमिश्नरी के गलियारों में यह मामला गूंजने लगा.

इस बीच दरोगा आदित्य कुमार भी अपनी सफाई देने कमिश्नर के पास पहुंच गया. यह देख कर मीडियाकर्मी वहीं रुक गए, जिस से कि उस का भी इंटरव्यू लिया जा सके. आदित्य कुमार भी पूरी तैयारी के साथ आया था. एक मोटी फाइल उस के हाथ में थी.

दरोगा ने कमिश्नर को बताई सच्चाई

आदित्य कुमार ने कमिश्नर साहब को सबूत के साथ पूरी जानकारी दी. उस ने कहा, ”मैं ने अपनी खुफिया जांच पत्नी दिव्यांशी घर के आसपास के लोगों से पूछताछ शुरू की थी. पता चला कि वह पहले से ही शादीशुदा है. पहले जिस से शादी हुई थी, दिव्यांशी ने उन लोगों पर मुकदमा दर्ज करा रखा है. इस के बाद मैं ने ई कोर्ट ऐप पर दिव्यांशी की डिटेल डाली तो एक मुकदमा दिव्यांशी वर्सेज प्रेमराज पुष्कर का सामने आ गया.

”मैं ने इस के दस्तावेज निकलवाए. पता चला कि दिव्यांशी ने मेरठ के थाना पल्लवपुर में दरोगा प्रेमराज पुष्कर और उस के भाई भूपेंद्र पुष्कर के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई थी. फिर मैं ने मेरठ न्यायालय से इस मुकदमे के दस्तावेज निकलवाए. दिव्यांशी ने दरोगा प्रेमराज पुष्कर और उस के भाई भूपेंद्र पर एफआईआर दर्ज करवाई थी.

”कोर्ट में मजिस्ट्रैट के सामने बयान देते समय पलट गई. उस ने कहा था कि मेरा प्रेमराज पुष्कर से 3 जुलाई, 2019 को प्रेम विवाह हुआ था. मुझे इस के खिलाफ मेरठ के हस्तिनापुर थाने से भी एक रेप की एफआईआर मिली. इस में दिव्यांशी ने पंजाब नैशनल बैंक, हस्तिनापुर के मैनेजर आशीष राज और मवाना मेरठ के बैंक मैनेजर अमित गुप्ता पर भी एफआईआर दर्ज कराई थी. मुकदमे से अमित का नाम निकाल दिया गया था. नाम निकलवाने में भी मोटी रकम वसूले जाने की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता. इस मामले में भी दिव्यांशी कोर्ट में अपने ही बयान से पलट गई. यहां पर बैंक मैनेजर से लाखों रुपए वसूला गया होगा.’’

दरोगा आदित्य कुमार लोचन ने आगे कहा कि मैं ने रेप के आरोप में जेल जा चुके प्रेमराज पुष्कर से बात की तो पता चला कि वह दिव्यांशी के अभी भी संपर्क में है. दिव्यांशी को उस ने मेरी गोपनीय जांच के बारे में बता दिया. इस से दिव्यांशी समझ गई कि अब उस की दाल नहीं गलने वाली है. इस के बाद दिव्यांशी अपने लाखों के जेवरात और कीमती सामान समेट कर मायके चली गई. कुछ दिनों बाद वह मेरे घर पहुंची और मेन गेट का ताला तोड़ कर घर में घुस गई. मकान पर कब्जा कर वहीं रहने लगी. जब मैं वहां नहीं गया तो उस ने संबंधित थाने में तहरीर दी, लेकिन जांच में उस के सभी आरोप झूठे पाए गए.

 

इस के बाद एक करोड़ रुपए की मांग करने लगी, पूरी नहीं होने पर पूरे परिवार को जेल भिजवाने की धमकी दी. इस के बाद भी कुछ नहीं हुआ तो आज 25 नवंबर को दिव्यांशी कानपुर पहुंची और पुलिस कमिश्नर अखिल कुमार को मेरे खिलाफ तहरीर दी. मैं ने दस्तावेज पेश किए तो वह भाग गई. आदित्य ने बताया कि जब मैं ने दिव्यांशी के फोन में डिलीट हो चुके सभी यूपीआई ऐप डाउनलोड कराए तो मेरे होश उड़ गए. ट्रांजैक्शन हिस्ट्री में 10 से ज्यादा खातों में करोड़ों का ट्रांजैक्शन किया गया था. खातों के बारे में पूछने के बाद दिव्यांशी मुझ से झगड़ा कर के सब ज्वैलरी व कीमती सामान ले कर मायके चली गई.

पुलिस कमिश्नर ने एडीसीपी को सौंपी जांच

उधर तत्कालीन पुलिस कमिश्नर अखिल कुमार ने तुरंत एडिशनल डीसीपी (महिला अपराध) को जांच सौंपी. इस के बाद पुलिस ने दिव्यांशी की जांच शुरू की. पुलिस ने जब दिव्यांशी के खाते की जांच की तो कई चौंकाने वाले सच सामने आए. उस के बैंक खातों में करोड़ों का ट्रांजैक्शन मिला. शक हुआ कि इस के गैंग में कई पुलिसकर्मी भी शामिल हैं. दिव्यांशी के सनसनीखेज आरोपों के बाद मामले की जिम्मेदारी एडिशनल डीसीपी (महिला अपराध) को सौंपी गई थी.

यह एक जटिल जांच थी, क्योंकि इस में न केवल वित्तीय धोखाधड़ी शामिल थी, बल्कि ब्लैकमेलिंग और डिजिटल सबूतों का एक जाल भी था. सब से पहले, दिव्यांशी का विस्तृत बयान दर्ज किया गया. इस में 14.50 लाख रुपए के लेनदेन का ब्यौरा (बैंक रिकौर्ड, हस्तांतरित दस्तावेज) और पति आदित्य द्वारा किए गए कथित ब्लैकमेलिंग की पूरी जानकारी शामिल थी. उस ने उन सोशल मीडिया अकाउंट्स और चैट हिस्ट्री के स्क्रीनशौट्स भी उपलब्ध कराए, जिन से आदित्य कथित तौर पर अन्य युवतियों को फंसाता था.

पुलिस ने आदित्य के बैंक खातों और संपत्ति के रिकौर्ड की जांच शुरू की, ताकि यह पता लगाया जा सके कि 14.50 लाख रुपए कहां गए? क्या वे किसी अन्य खाते में स्थानांतरित किए गए या किसी संपत्ति की खरीद में इस्तेमाल हुए? पुलिस ने आदित्य को पूछताछ के लिए बुलाया तो उस ने सभी आरोपों से इनकार किया. आदित्य के मोबाइल फोन, लैपटाप और अन्य डिजिटल उपकरणों को जब्त कर लिया गया. फोरैंसिक टीम ने डिलीट की गई चैट्स, वीडियो और फोटो को रिकवर करने का प्रयास किया.

पुलिस ने आदित्य के सोशल मीडिया प्रोफाइल की जांच की और उन युवतियों को तलाश किया. यह जांच का सब से नाजुक हिस्सा था, क्योंकि कई पीडि़त बदनामी के डर से सामने आने को तैयार नहीं होते हैं. असली झटका तब लगा था, जब आदित्य कुमार ने ग्वालटोली थाने में दिव्यांशी के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज करने के लिए तहरीर देने की हिम्मत जुटाई. यह बात नवंबर 2024 की है. करीब एक साल तक पुलिस काररवाई में ढील देती रही. कभी दोनों का पारिवारिक मामला आपसी समझौते से ही तय हो जाए. मामला उलझता ही जा रहा था.

17 नवंबर, 2025 की बात है. आदित्य थाने में अपने औफिस में बैठा था. पत्नी दिव्यांशी की फाइल उन के सामने रखी थी. कागज पर लिखे शब्द जैसे उस के सपनों को चीरते जा रहे थे. उस का दिमाग अभी भी उस दिन की यादों में ही उलझा था कि तभी गेट पर जोरजोर से बातें होने लगीं. ड्यूटी पर मौजूद सिपाही ने आ कर बताया, ”सर, दिव्यांशी को गिरफ्तार कर लिया गया है.’’

यह सुन कर आदित्य का दिल एक धड़कन के लिए रुक गया. पुलिस जीप के पीछे से उतारी गई दिव्यांशी का चेहरा वैसा ही शांत था, मानो उसे पता ही हो कि ये सब होने वाला है, पर असली तूफान वो नहीं था. तूफान था उस की फाइल. दिव्यांशी उस से पहले 2 बैंक मैनेजरों से शादी कर चुकी थी, एक दरोगा को भी अपने जाल में फंसा चुकी थी और उन तीनों पर बलात्कार जैसे संगीन मामलों के फरजी मुकदमे लिखा कर मोटी रकम ऐंठ चुकी थी. औफिस के बाहर मीडिया का शोर बढ़ता जा रहा था. कितने लोग फंसे इस में? कौन है इस खेल का असली मास्टरमाइंड? क्या दिव्यांशी अकेली है या किसी और के इशारों पर चल रही है? और सब से बड़ा सवाल कि क्या अगला शिकार आदित्य ही था?

दिव्यांशी को सुरक्षित करते हुए पत्रकारों को पूरी जानकारी डीसीपी (सेंट्रल) श्रवण कुमार सिंह ने दी. डीसीपी श्रवण कुमार सिंह ने प्रैसवार्ता में पत्रकारों को बताया कि आरोपी महिला को गिरफ्तार कर लिया गया है. यह बात सोमवार 17 नवंबर, 2025 की है. उस को मंगलवार को कोर्ट में पेश किया जाएगा. इस से पहले थाने आने पर आदित्य ने दिव्यांशी की ओर देखा. वह शांत खड़ी थी, जैसे किसी बात का इंतजार कर रही हो. फिर उस ने हलकी मुसकान दी. ऐसी मुसकान, जिस में डर नहीं, बल्कि रहस्य छिपे थे.

पर सवाल अभी भी हवा में लटका था कि क्या यह उस की आखिरी शादी थी या सिर्फ आखिरी गिरफ्तारी? दरोगा के साथ हुए हैरेसमेंट का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि उस ने 2 बार सुसाइड करने का भी प्रयास किया था. यह पुलिसकर्मी दिव्यांशी के गिरफ्तार हो जाने के बाद दरोगा आदित्य पर समझौते का दबाव बना रहे थे. कहानी कुछ ऐसी निकली कि पुलिस अफसरों तक के होश उड़ गए. यह हैरानी की बात नहीं सच है, क्योंकि यहां पकड़ी गई दिव्यांशी 8 करोड़ के गेम को अकेले खेलने वाली ऐसी खिलाड़ी निकली, जिस ने कोई 1-2 नहीं बल्कि  4-4 शादियां कीं.

थाने का माहौल उस दिन बेहद तनावपूर्ण था. पुलिस दिव्यांशी को सीधे थाने ले आई, यह जानते हुए कि मामला हाईप्रोफाइल है और हंगामे की पूरी संभावना है.

दिव्यांशी के पक्ष में वकील पहुंचे थाने में

दिव्यांशी चौधरी, जिसे कुछ दिन पहले तक लोग एक सम्माननीय घर की बहू समझ रहे थे, अब सलाखों के पीछे खड़ी थी. उस की गिरफ्तारी के कुछ ही देर बाद, थाने के बाहर अचानक भीड़ जुटने लगी. यह भीड़ थी वकीलों की, जो दिव्यांशी का पक्ष लेने के लिए वहां पहुंचे थे. वकीलों का एक समूह थाने के गेट पर पहुंचा. उन के चेहरे पर गुस्सा और आत्मविश्वास झलक रहा था. उन्होंने दिव्यांशी से मिलने की कोशिश की, लेकिन एसएचओ ने उन से कोर्ट में मिलने को कहा. यह सुन कर वकील एकएक कर लौट गए. थाने के बाहर सन्नाटा छा गया.

अंदर लौकअप में दिव्यांशी चौधरी चुपचाप दीवार से सिर टिकाए बैठी थी. उस के चेहरे पर अब वो मुसकान भी नहीं थी. शादी के नाम पर ठगी करने के आरोप में मेरठ के बड़ा मवाना से गिरफ्तार कर लाई गई दिव्यांशी चौधरी के खिलाफ ग्वालटोली पुलिस ने 18 नवंबर, 2025 दिन मंगलवार को एसीजेएम-7 अमित सिंह की कोर्ट में पेश किया. पुलिस कोर्ट में कोई ठोस साक्ष्य पेश नहीं कर सकी. पुलिस की रिमांड शीट में कई कमियां थीं, जिन का दिव्यांशी के वकील ने विरोध किया. कानपुर पुलिस ने दिव्यांशी चौधरी के खिलाफ बीएनएस की 12 धाराओं में मुकदमा दर्ज किया था और आगे की पूछताछ के लिए 8 धाराओं में रिमांड की प्रशस्ति मांगी थी, लेकिन अदालत ने स्पष्ट किया कि रिमांड देने के लिए पर्याप्त आधार मौजूद नहीं हैं.

सुनवाई के दौरान अदालत ने कहा कि रिमांड जैसी कठोर प्रक्रिया के लिए आवश्यक साक्ष्य और आधार पुलिस द्वारा प्रस्तुत नहीं किए गए. कोर्ट ने दिव्यांशी को अरेस्ट करने में सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइंस का उल्लंघन पाया. इस के बाद दिव्यांशी को रिहा कर दिया गया. अदालत ने अपनी टिप्पणी में कहा कि ‘मात्र आरोप और अनुमानों’ के आधार पर रिमांड नहीं दी जा सकती. रिमांड खारिज करते हुए अदालत ने दिव्यांशी चौधरी को व्यक्तिगत बंधपत्र पर रिहा करने का आदेश जारी किया. साथ ही निर्देश दिया गया कि आरोपी जांच में सहयोग करेगी और किसी भी प्रकार का दबाव या प्रभाव नहीं डालेगी.

पुलिस की किरकिरी होने पर फौरन डीसीपी (सेंट्रल) श्रवण कुमार सिंह ने अपने औफिस में एक मीटिंग बुलाई. इस में डीसीपी (सेंट्रल), एडीसीपी अर्चना सिंह, विवेचक शुभम सिंह और शिकायत करने वाले दरोगा आदित्य लोचन को बुलाया गया. कानपुर में दरोगा की लापरवाही की वजह से दिव्यांशी चौधरी कोर्ट से रिहा हो गई. इस वजह से आरोपी दिव्यांशी को कोर्ट ने छोड़ दिया. जांच में पता चला कि एक रिटायर सीओ दिव्यांशी की पैरवी में कानपुर पहुंचे थे. वह शुभम के साथ कई घंटे तक रहे.

जौइंट पुलिस कमिश्नर आशुतोष कुमार ने दरोगा शुभम पर विभागीय जांच के आदेश दिए हैं. साथ ही दिव्यांशी के पूरे सिंडिकेट का परदाफाश करने के लिए एक जांच कमेटी बनाई है.

आईओ शुभम से उच्चाधिकारी हुए नाराज

जौइंट सीपी आशुतोष कुमार ने विवेचक शुभम से पूछा कि जब इतने पुलिसकर्मियों का दिव्यांशी से संबंध है तो इन लोगों के बयान क्यों नहीं लिए गए? इन पुलिसकर्मियों और बैंक अफसर की भूमिका की जांच क्यों नहीं की गई? आखिर दिव्यांशी से इन सभी का क्या कनेक्शन है, जो लाखों का ट्रांजैक्शन है? दरोगा शुभम कोई जवाब नहीं दे सका? इस पर जौइंट सीपी ने शुभम को जम कर फटकार लगाई.

जौइंट पुलिस कमिश्नर ने पूरे मामले की जांच में अब एक इंसपेक्टर को भी शामिल किया है. उन्होंने कहा है कि अब इस पूरे सिंडिकेट का खुलासा होना चाहिए. जिन पुलिस अफसरों और बैंक अफसर समेत अन्य की कौल डिटेल्स और लाखों का ट्रांजैक्शन मिला है, एकएक व्यक्ति की जांच होगी. जांच के बाद सिंडिकेट में शामिल सभी के खिलाफ काररवाई की जाएगी. डीसीपी (सेंट्रल) श्रवण कुमार सिंह ने बताया कि अब डीजे कोर्ट में दोबारा सभी साक्ष्यों के साथ अपील करेंगे, ताकि आरोपी को दोबारा अरेस्ट कर के जेल भेजा जाए. पुलिस टीम अब नए सिरे से दोबारा जांच कर के एकएक साक्ष्य जुटा रही है. जल्द ही पूरे सिंडिकेट के खिलाफ पुलिस कड़ी काररवाई करेगी.

दिव्यांशी चौधरी ने रिहा होने के बाद इसे सच्चाई की जीत बताया. कहा, ”मुझे मीडिया में बदनाम किया कि मैं लुटेरी दुलहन हूं. मेरे हसबैंड, जो उसी थाने में पोस्टेड है और जो आईओ है, वो उन का दोस्त है, कहां से फेयर इनवेस्टिगेशन हो जाएगी.’’

दिव्यांशी ने कहा कि मैं थाने खुद गई थी. यह कहने कि आप मेरा भी पक्ष सुनिए, लेकिन उन्होंने उस चीज का फायदा उठाया और मेरे को वहीं से अरेस्ट कर लिया. कौन सी लुटेरी दुलहन शादी में स्कौर्पियो गाड़ी देती है. कौन सी लुटेरी दुलहन 25 लाख की एफडी देगी? मुझ पर सब मनगढ़ंत आरोप हैं. आप शादी से डेढ़ साल पहले से मेरे को जानते हैं.

उस ने बताया कि दरोगाजी मेरे साथ डेढ़ साल से रिलेशन में थे. आप ने मुझ से 14 लाख 50 हजार औनलाइन लिया है. औफलाइन तो जितना लिया है, उस को छोडि़ए. शादी के बाद भी वसूली का रवैय्या खत्म नहीं हुआ. आप की डिमांड खत्म नहीं होती है. आप दरोगा हैं तो इस का मतलब ये थोड़ी न है कि आप कुछ भी करेंगे. अपनी पत्नी को आप ने इस हद तक पहुंचा दिया था कि शायद सुसाइड ही एकमात्र रास्ता रह गया था. अगर मुझे सच्चे वकील वरुण सर न मिलते तो शायद मैं तो मर ही गई होती.

एडवोकेट वरुण ने कहा कि दिव्यांशी पर उस के दरोगा पति ने पैसे के लेनदेन का आरोप लगाया था, उन के ऊपर भी जांच होनी चाहिए. 58 हजार की तनख्वाह है, एक दरोगा की एवरेज महीने की. ढाई-3 करोड़ का दरोगा आदित्य के अकाउंट में ट्रांजैक्शन हुआ है. यह कैसे संभव है? इस की जांच जरूर होनी चाहिए. अदालत के दरवाजे पर सच्चाई और साजिश का दावा करने वाले दोनों पक्ष खड़े हैं, दोनों अपनी बात पर अडिग हैं. कहानी अभी खत्म नहीं हुई, बल्कि न्याय की तलाश में आगे बढ़ चुकी है. अपील की फाइल तैयार हो रही है, साक्ष्य जुटाए जा रहे हैं. एक तरफ दिव्यांशी का दावा, फंसाई गई हूं. उन के वकील साहब का विश्वास है कि दिव्यांशी मासूम है, निर्दोष है. वकील को उम्मीद है कि सच्चाई की जीत होगी.

दूसरी तरफ पुलिस का दावा दुलहन लुटेरी है, सबूत मजबूत हैं, अपील मंजूर होगी, दिव्यांशी जेल जाएगी. न्याय की जीत होगी. अब यह जंग कोर्ट के फैसले पर टिकी है. क्या दिव्यांशी का जाल फिर बचेगा या सिंडिकेट ढह जाएगा?

उत्तर प्रदेश की यह कहानी अभी अधूरी है. सच्चाई का इंतजार है, कानून का इम्तिहान है. लेकिन एक बात साफ है, प्यार के नाम पर ठगी का खेल अब लंबा नहीं चलेगा. न्याय की घंटी बजनी बाकी है. इस समय न कोई विजेता, न कोई स्पष्ट दोषी है. बस 2 सच, 2 दावे और एक ऐसी लड़ाई जिस का फैसला अब कोर्ट करेगी न कि भावनाएं.

कहानी यहीं खत्म नहीं होती, बल्कि वहीं से शुरू होती है, जहां कानून आखिरी शब्द बोलता है और सच अपनी अगली परत खोलता है. UP News

 

Crime News: ठगी का फरजी दूतावास

Crime News: नटवर लाल को गुजरे हुए जमाना हो गया, लेकिन उस के जैसी कहानी को आगे बढ़ाने वालों की अब भी कमी नहीं है. ऐसी ही महाठगी की कहानी सामने आई है गाजियाबाद से. दिल्ली में करीब डेढ़ सौ से ज्यादा देशों के दूतावास या उच्चायोग मौजूद हैं, लेकिन हर्षवर्धन जैन नाम के एक नटवर लाल ने गाजियाबाद में एक नहीं, बल्कि 4-4 फरजी दूतावास खोल डाले. इन फरजी दूतावासों के जरिए उस ने ऐसेऐसे गैरकानूनी कार्य किए कि…

राजधानी दिल्ली में दुनिया भर की करीब डेढ़ सौ एंबेसी, दूतावास या उच्चायोग मौजूद हैं. राजधानी दिल्ली की सीमा से सटा है यूपी का गाजियाबाद शहर. इसी शहर के पौश इलाके कविनगर में एक नहीं, बल्कि 4 देशों की एंबेसी खुली है और वहां हाई कमिश्नर साहब भी रहते हैं, कुछ समय पहले तक ये किसी को नहीं पता था.सलेकिन 22 जुलाई, 2025 की दोपहर कविनगर के केबी ब्लौक की 45 नंबर की आलीशान कोठी में अचानक पुलिस की गाडिय़ों का काफिला देख कर हड़कंप मच गया. शुरुआत में लोगों ने समझा कि यहां कोई वीआईपी आया है या कोई बड़ा राजनयिक. क्योंकि वह कोठी किसी आम इंसान की नहीं थी, बल्कि वहां एक नहीं 4 देशों का कांसुलेट था और वहां बाकायदा एक दूतावास चलता था.

क्योंकि कोठी के बाहर हाईप्रोफाइल नंबर प्लेट्स और बोनट के कोने पर अलगअलग देशों के झंडे लगी एक से बढ़ कर एक चमचमाती हुई लग्जरी गाडिय़ां खड़ी होती थीं. जबकि कोठी में अकसर सूटेडबूटेड लोगों आनाजाना भी लगा रहता था. और तो और कोठी की दीवार पर बाकायदा एंबेसी औफ वेस्ट आर्कटिक का ब्रास बोर्ड लगा हुआ था. ऐसे में हर किसी को लगता था कि शायद इस कोठी में किसी देश का दूतावास है, जहां से डिप्लोमेटिक एक्टिविटीज चलती हैं.

पुलिस की गाडिय़ों के आने के थोड़ी देर बाद ही पता चल गया कि इस कोठी में हर्षवर्धन जैन नाम का व्यक्ति 4-4 फरजी दूतावास चला रहा था. यूपी एसटीएफ की नोएडा टीम ने उस कोठी में चलने वाले नकली दूतावास का भंडाफोड कर दिया. जिस किराए की कोटी में हर्षवर्धन जैन दूतावास चला रहा था, उस की नेमप्लेट पर सुशील अनूप सिंह का नाम लिखा था. जांच से पता चला कि जैन का रैकेट विदेश में व्यापार और नौकरी के अवसरों में मदद का वादा कर के लोगों और कंपनियों को ठगने में शामिल था. वह फरजी कंपनियों के जरिए हवाला नेटवर्क भी चलाता था.

एसटीएफ का शिकंजा

कोठी के बाहर दूसरी नेमप्लेट, जो सुनहरे रंग की थी, उस पर एच.वी. जैन का नाम लिखा था और उस के आगे अंगरेजी में ‘ही’ लिखा था. ‘ही’ का मतलब ‘महामहिम’ होता है, जो एक औपचारिक सम्मानसूचक शब्द है, जो आमतौर पर राष्ट्रमंडल देशों में राजदूतों या उच्चायुक्तों जैसे उच्च पदस्थ अधिकारियों के लिए आरक्षित होता है. हर्षवर्धन जैन खुद को वेस्ट आर्कटिका का डिप्लोमैट बताता था. हालांकि दिल्ली का चाणक्यपुरी इलाका और दक्षिणी दिल्ली के कुछ इलाके में डिप्लोमैटिक एरिया है, जहां बहुत सारे देशों के दूतावास हैं और कांसुलेट रहते हैं. लेकिन दिल्ली से सटे गाजियाबाद के कविनगर में पिछले कई सालों से ये दूतावास चल रहा था और प्रशासन को भनक तक नहीं लगी, ये जान कर लोग दांतों तले अंगुलियां दबा रहे थे.

असल में हुआ यूं कि उत्तर प्रदेश के डीजीपी को एक बहुत प्रभावशाली व्यक्ति ने मिल कर शिकायत की थी कि गाजियाबाद के कविनगर में केबी 45 नंबर की 2 मंजिला किराए की आलीशान कोठी में वेस्ट आर्कटिका, पौल्विया, सबोर्गा और लोडोनिया  जैसे काल्पनिक या माइक्रो नेशंस यानी स्वघोषित देशों का एक दूतावास चल रहा है. जहां का तामझाम तो दूतावासों जैसा ही है, लेकिन असल में काम लोगों को नौकरी के नाम पर विदेश भेजने और विदेश में व्यापार और नौकरी के अवसरों में मदद का होता था.

 

वह फरजी कंपनियों के जरिए हवाला नेटवर्क भी चलाता था. शिकायत करने वाले के किसी परिचित को विदेश में नौकरी दिलाने के नाम पर लाखों रुपए ले कर इस कथित अंबेसडर हर्षवर्धन जैन ने ठग लिया था. शिकायत चूंकि गंभीर थी, इसलिए डीजीपी ने इस मामले की जांच एसटीएफ को सौंपते हुए एसएसपी सुशील घुले से अपनी निगरानी में जांच कराने को कहा.

बस, उसी दिन से जांच का सिलसिला शुरू हो गया. पहले कविनगर में बने इस कथित दूतावास के बारे में जानकारियां जुटाई गईं.  इस के बाद मिनिस्ट्री औफ एक्सटर्नल अफेयर्स में जांच हुई, जहां पता लगा वेस्ट आर्कटिका नाम से कोई देश लिस्ट में है ही नहीं. न ही भारत सरकार ने देश के किसी हिस्से में इस तथाकथित देश को दूतावास खोलने की मंजूरी दी है.

बस फिर क्या था, एसटीएफ ने हर छोटीबड़ी जानकारी एकत्र करनी शुरू कर दी. एसटीएफ के एसएसपी घुले के नेतृत्व में नोएडा एसटीएफ के डिप्टी एसपी राजकुमार मिश्रा ने 22 जुलाई, 2025 को एक बड़ी टीम बना कर स्थानीय पुलिस की मदद से कविनगर की कोठी नंबर 45 की घेराबंदी कर दी. तब लोगों को वहां हुई छापेमारी में बाकी जानकारियां सामने आईं. बाद में पता चला कि हर्षवर्धन जैन का ठगी का ये पहला मामला नहीं था. इस से पहले भी वह ऐसा कर चुका है. कितने हैरत की बात थी कि फरजी दूतावास न सिर्फ खुला, बल्कि सालों तक बेरोकटोक चलता रहा. उसे पहचानने में जांच एजेंसियों को सालोंसाल लग गए.

दूतावास की आड़ में ठगी के इस पूरे औपरेशन के पीछे हर्षवर्धन जैन यानी कथित महामहिम का मुख्य उद्देश्य विदेशों में फरजी नौकरियों का झांसा दे कर लोगों से पैसे वसूलना, शेल कंपनियों के माध्यम से हवाला कारोबार और नकली पासपोर्ट और विदेशी मुद्रा का अवैध व्यापार के साथ निजी कंपनियों को विदेशी कनेक्शन दिलाने के नाम पर दलाली करना था. हैरान करने वाली बात यह है कि आरोपी हर्षवर्धन खुद को वेस्ट आर्कटिका, पौल्विया, सबोर्गा और लोडोनिया जैसे काल्पनिक या माइक्रो नेशंस यानी स्वघोषित देशों का राजदूत  बता कर पिछले 3 सालों से 4 देशों का फरजी दूतावास चला रहा था.

इस फरजी दूतावास से एक नहीं, बल्कि 4-4 ऐसे देशों के राजनयिक औफिसों का संचालन किया जा रहा था. उदाहरण के लिए वेस्ट आर्कटिका नाम के इस देश को ही लीजिए, जिस की एंबेंसी होने का बोर्ड इस कोठी की दीवार पर लगा था. जब इस नाम को गूगल पर सर्च किया गया तो पता चला कि ये वेस्ट आर्कटिका दरअसल एक ऐसा एनजीओ है, जो पर्यावरण सुरक्षा के लिए काम करता है. लेकिन कमाल ये है कि यहां एनजीओ को ही मुल्क का नाम दे कर उस का दूतावास खोल कर ठगी का धंधा बदस्तूर चल रहा था.

उस ने सुरक्षा और खुफिया एजेंसियों को भी चौंका दिया. वो खुद को ऐसे देशों का राजदूत बताता था, जो असल में दुनिया के नक्शे पर अस्तित्व ही नहीं रखते. अगर गूगल पर सबोर्गा सर्च करें तो पता चलेगा कि ऐसा कोई देश ही नहीं है, बल्कि एक गांव और माइक्रो नेशन है, जिसे देश का दरजा नहीं मिला है. दूसरा नाम था पौल्विया जिसे सर्च करने पर कुछ लोगों के नाम का टाइटल मिलता है. इसी तरह जब लोडोनिया सर्च किया जाता है तो ये एक लैब का नाम निकला.

हर्षवर्धन जैन खुद को ऐसे ही ‘माइक्रो नेशन’ या फरजी देशों का राजदूत बताता था. हर्षवर्धन ने पूरा सेटअप कविनगर स्थित किराए की कोठी में खड़ा कर रखा था, जिस की बनावट और साजसज्जा किसी असली दूतावास से कम नहीं थी. सफेद रंग की इमारत, नीली नंबर प्लेट वाली लग्जरी गाडिय़ां और आलीशन घर के बाहर लगे अलगअलग देशों के झंडे देख कर कोई भी धोखा खा सकता था कि यह कोई वैध विदेशी दूतावास है. 47 साल का हर्षवर्धन जैन कोई मालूमी आदमी नहीं है. वह काम बेशक ठगी का कर रहा था, लेकिन उस का ताल्लुक एक अच्छे परिवार से है. उस के पिता जे.डी. जैन एक जानेमाने इंडस्ट्रियलिस्ट रहे हैं, जो गाजियाबाद के जैन रोलिंग मिल के मालिक थे.

जैन परिवार का राजस्थान समेत कई राज्यों में मार्बल और माइनिंग का भी काम था. उन की अचानक मौत होने से बिजनैस को काफी नुकसान हुआ और आर्थिक स्थिति खराब हो गई. हर्षवर्धन जैन का ट्रैक तब चेंज हो गया, जब उस की मुलाकात विवादास्पद तांत्रिक चंद्रास्वामी से हुई. वो चंद्रास्वामी से साल 2000 में मिला, जिस ने उस की मुलाकात आम्र्स डीलर अदनान खशोगी और लंदन के रहने वाले एहसान अली सैयद से करवाई.

जिस के साथ मिल कर हर्षवर्धन जैन ने लंदन में 12 फरजी कंपनियां बनाईं और लाइजनिंग यानी दलाली का काम शुरू कर दिया. वह चंद्रास्वामी के काले धन को ठिकाने लगाने लगा. वहीं चंद्रास्वामी की मौत के बाद हर्षवर्धन टूट गया. इस के बाद गाजियाबाद लौट आया. इस के बाद वह ऐसे ही संदिग्ध लोगों के साथ मिलताजुलता रहा और दलाली के जरिए पैसे कमाता रहा. साल 2012 में उस के पास से पुलिस ने एक सैटेलाइट फोन बरामद किया था. तब भी उस ने खुद को एक सबोर्गा नाम के फरजी देश का एडवाइजर और वेस्ट आर्कटिक समेत कई ऐसे ही काल्पनिक देशों का एंबेसेडर बताया था.

ऐसे हुआ ट्रैक चेंज

हर्षवर्धन जैन की शुरुआती पढ़ाई और निजी जिंदगी के बारे में पुलिस को ज्यादा जानकारी नहीं है, लेकिन उस ने पुलिस को बताया कि गाजियाबाद के इंस्टीट्यूट औफ टेक्नोलौजी ऐंड साइंस (आईटीएस) से उस ने एमबीए किया. इस के अलावा लंदन के कालेज औफ अप्लाइड साइंस से भी उस ने एमबीए किया है. उस ने फ्रांस से पीएचडी की डिग्री हासिल की है. हर्षवर्धन जैन ने अपनी एक मायावी दुनिया बना ली थी. वह खुद को वेस्ट आर्कटिका का कांसुलेट जनरल बताता था. छापा पडऩे से कुछ दिन पहले ही सोशल मीडिया अकाउंट पर क्लेम किया गया कि वह साल 2017 से कांसुलेट चला रहा है और लगातार चैरिटी करता है.

हकीकत यह थी कि हर्षवर्धन एक उच्चश्रेणी का नटवर लाल ठग था, जिस ने ठगी के लिए ही फरजी दूतावास खोला और खुद को राजनयिक घोषित किया. वह महंगी कारों पर फेक डिप्लोमेटिक नंबरों की वजह से वह लगातार सिक्योरिटी चैक से बचता रहा. उस के ठगी और हवाला कारोबार के काले धंधे की मौडस आपरेंडी भी गजब थी. फरजी दूतावास के बाहर खड़ी गाडिय़ां और गाडिय़ों में लगी डिप्लोमैटिक नंबर प्लेट अपनी कहानी खुद बयान करते थे. गाडिय़ों में जो जेनुइन नंबर प्लेट थी, वो तो थी हीं, लेकिन उस के साथसाथ एक दूतावासनुमा नंबर प्लेट भी लगा दी गई थी. जबकि सचमुच के नंबर को प्रौपर प्लेट की जगह ब्लू कलर की प्लेट पर लिखा गया,  ताकि लोगों को देखते ही ये गुमान हो जाए कि ये गाडिय़ां किसी दूतावास की हैं.

और तो और, प्रभाव जमाने के लिए गाडिय़ों पर अलगअलग फरजी देशों के झंडे भी लगा दिए गए. एक बार जब शिकार हर्षवर्धन जैन की इन्हीं तामझाम को देख कर उस के झांसे में फंस जाता था तो फिर उसे लूटना उस के लिए आसान हो जाता था.

हस्तियों के साथ फर्जी फोटो

हर्षवर्धन के पास से 4 डिप्लोमैटिक नंबर प्लेट लगी लग्जरी गाडिय़ां, 12 फरजी डिप्लोमैटिक पासपोर्ट और विदेश मंत्रालय की नकली मोहरें बरामद की गईं. यही नहीं, उस के पास 34 अलगअलग विदेशी कंपनियों और देशों की मोहरें, फरजी प्रैस कार्ड, पैन कार्ड मिले हैं. इस के अलावा कई फारेन करेंसी और कुल 18 डिप्लोमैटिक नंबर प्लेट भी बरामद की गईं. हर्षवर्धन के घर की एक अलमारी से यूपी एसटीएफ को 5 करोड़ रुपए की 12 घडिय़ां मिली हैं. घर के बाहर जो 4 लग्जरी कारें खड़ी हुई थीं, उन में मर्सिडीज, हुंडई की सोनाटा कारें शामिल थीं. उस के पास से 44 लाख रुपए की नकदी भी बरामद हुई.

हर्षवर्धन लोगों को झांसे में लेने के लिए प्रधानमंत्री, राष्ट्रपति और अन्य वीआईपी हस्तियों के साथ मार्फ की हुई तसवीरों का इस्तेमाल करता था. ये तसवीरें उस ने दीवारों पर और अलबम में लगा रखी थीं. सोशल मीडिया और वेबसाइट्स पर इन्हीं फरजी फोटोज के जरिए लोगों को बातों में फंसाता था और उन्हें झांसे में ले कर विदेशों में काम दिलाने के नाम पर बड़ी दलाली करता था. हर्षवर्धन ने फरजी दूतावास वाली इस कोठी को किराए पर ले रखा था, जबकि वो इसी कविनगर इलाके में थोड़ी ही दूरी पर एक दूसरी कोठी में रहता था. पुलिस को छापेमारी के दौरान अंदर से जो चीजें मिलीं, उस ने इस का इशारा दे दिया कि आखिर वो यहां से कर क्या रहा था.

कोठी से जो 20 जोड़ी फरजी डिप्लोमैटिक नंबर प्लेट मिले, उस से साबित होता है कि वो इन नंबर प्लेट्स को जरूरत के मुताबिक किसी भी गाड़ी में लगा कर उस का इस्तेमाल लोगों पर प्रभाव डालने के लिए करता था. ठीक इसी तरह जब जहां जैसी जरूरत होती, फरजी काड्र्स, दस्तावेज और मार्फ की गई तसवीरों के जरिए वैसे ही लोगों को प्रभाव में ले लिया जाता था. यानी साफसीधे शब्दों में कहें तो ये ठगी की वो प्राइवेट लिमिडेट कंपनी थी, जिस में हर्षवर्धन जैन जब जैसा जी चाहे, करता था.

एसटीएफ के अनुसार, आरोपी हर्षवर्धन का मुख्य काम विदेश में नौकरी के नाम पर दलाली, फरजी दस्तावेज बनवाना और शेल कंपनियों के माध्यम से हवाला ट्रांजैक्शन करना है. एसटीएफ की काररवाई के बाद कविनगर थाने में आरोपी हर्षवर्धन के खिलाफ बीएनएस की ठगी की धाराओं में मामला दर्ज कर लिया गया है. और यह पता लगाने के लिए पूछताछ शुरू हुई कि उस का नेटवर्क कहां तक फैला हुआ है और अब तक कितने लोगों को वह अपने जाल में फंसा चुका है.

पुलिस और जांच एजेंसियां अब इस पूरे नेटवर्क को खंगालने में जुट गई हैं. यूपी एसटीएफ की नोएडा यूनिट यह पता लगाने में जुटी है कि यह पूरा रैकेट अकेले हर्षवर्धन जैन चला रहा था या इस के पीछे कोई संगठित गैंग भी शामिल है. एसटीएफ के छापे के दौरान फरजी दूतावास से टीम को एक डायरी बरामद हुई है, जिस में आरोपी हर्षवर्धन के जीवन का लेखाजोखा मिला. उस में कई देशों के लोगों के नाम और फोन नंबर भी लिखे हैं. विदेशों में कितनी कंपनियां हैं और कितने बैंक खाते हैं, पैसों का लेनदेन और निजी जानकारी भी इस डायरी में हर्षवर्धन ने लिख रखी है.

इस डायरी में 2 दरजन से अधिक स्थानीय लोगों के नाम और नंबर हैं. इन में से कुछ सफेदपोश और कुछ ऐसे आपराधिक प्रवृत्ति के लोग हैं, जो धोखाधाड़ी के मामले में जेल जा चुके हैं. डायरी में हर्षवर्धन जैन और उस की पत्नी डिंपल जैन के बैंक अकाउंट की भी जानकारी मिली है.

विदेशों से मिला फंड

साथ ही विदेशियों के नाम, नंबर, देश, पता आदि भी दर्ज हैं. इस में मिली तमाम जानकारी खुद हर्षवर्धन ने लिखी है. पुलिस की मानें तो हर्षवर्धन द्वारा विदेशों में धोखाधड़ी करने और कुछ आपराधिक प्रवृत्ति के लोगों से भी संबंध उजागर हुए हैं. बैंक अकाउंट से कौन से देश से कितनी धनराशि आई, किस ने भेजी इस का भी हवाला इस डायरी में है. डायरी में किराए की कोठी का भी उल्लेख है. पुलिस जांच के मुताबिक 5 महीने पहले सुशील अनूप सिंह से 1000 गज की कोठी का किराया 80 हजार रुपए प्रतिमाह तय है. इस एग्रीमेंट में हर्षवर्धन के साले और शहर के एक नामचीन व्यक्ति के हस्ताक्षर हैं. पत्नी डिंपल जैन के खाते से सुशील अनूप सिंह को किए गए किराए के भुगतान का भी विवरण दर्ज है.

हर्षवर्धन की पत्नी डिंपल जैन दिल्ली के चांदनी चौक में चांदी और उस की ज्वैलरी का कारोबार करती है. इस डायरी में इस का भी उल्लेख किया गया है. डिंपल जैन के बैंक खाते और लेनदेन का ब्यौरा भी दर्ज है. कविनगर पुलिस अब पत्नी के कारोबार की भी जांच करेगी. कविनगर में स्थित यह कोठी रालोद से 2 बार विधानसभा का चुनाव लड़ चुके स्वतंत्रता संग्राम सेनानी अनूप सिंह के बेटे सुशील की है. शहर के धनाढ्य लोगों में शामिल समाजसेवी सुशील कुमार ने एसटीएफ को बताया कि जैन ने कोठी को किराए पर एग्रीमेंट से लिया था.

हर्षवर्धन जैन ने खुद को अंतरराष्ट्रीय मंच पर स्थापित करने और प्रभाव जमाने के लिए माइक्रो नेशंस (स्वघोषित देशों) का सहारा लिया. असल में माइक्रो नेशन देश एक फलसफा, जिस में असल कुछ भी नहीं होता. साल 2001 में एक अमेरिकी नागरिक ने अंटार्कटिका के एक कोने को अपना देश बनाने का दावा किया और नाम दिया वेस्ट आर्कटिका. लेकिन यूनाइटेड नेशंस समेत भारत के लिए ये कोई देश नहीं. जैन ने इसी क्लेम का फायदा उठाते हुए खुद को वेस्ट आर्कटिका का राजनयिक घोषित कर दिया.

परतदरपरत ऐसे खुले राज

वर्ष 2012 में सबोर्गा नामक एक माइक्रो नेशन यानी स्वघोषित देश ने हर्षवर्धन को भारत में अपना एडवाइजर नियुक्त किया था. इस के बाद 2016 में ऐसे तथाकथित देश वेस्ट आर्टिका ने भी हर्षवर्धन को अवैतनिक एंबेसडर बनाया. इसी तरह पौल्बिया और लोडोनिया नामक अन्य माइक्रो नेशंस ने भी उसे राजनयिक पद दिया. इन तथाकथित पदों का इस्तेमाल कर हर्षवर्धन ने लोगों को विदेशों में काम दिलाने का झांसा दे कर मोटी रकम वसूली के लिए शुरू कर दिया.

कुल मिला कर कहें तो वह फरजी दूतावास की आड़ में हवाला कारोबार और दलाली का रैकेट चला रहा था. एसटीएफ के इंसपेक्टर सचिन कुमार, जो इस मामले की जांच कर रहे हैं, ने बताया कि जैन के फरजी दूतावास में लगे कई देशों के झंडे सिर्फ कल्पना लोक में है. उन्हें किसी देश या यूएन से कोई मान्यता नहीं मिली हुई है. हां, स्वघोषित देश ने जरूर इसे अपना फ्लैग घोषित किया हुआ है. असली वाणिज्य दूतावास का आभास देने के लिए परिसर में नियमित रूप से इन झंडों को फहराया जाता था.

एसटीएफ को अब तक उस की 25 शेल  कंपनियों और बैंक खातों की जानकारी मिल चुकी है. इन कंपनियों का संबध एहसान अली सैयद से भी है, जो हैदराबाद का निवासी है. इस ने तुर्किश नागरिकता ले ली है. चंद्रास्वामी ने हर्षवर्धन जैन को एहसान अली सैयद के पास ही लंदन भेजा था. हर्षवर्धन ने इस के साथ मिल कर लंदन में कई शेल कंपनियां बनाईं. एसटीएफ को इस मामले की जांच के दौरान मिले दस्तावेजों से अब तक उस की 25 से अधिक कंपनियों के बारे में

जानकारी मिली है, जिन का डाटा हर्षवर्धन के पास था. जिस में यूके में स्टेट ट्रेडिंग कारपोरेशन लिमिटेड, ईस्ट इंडिया कंपनी यूके लिमिटेड तथा यूएई आईसलैंड जनरल ट्रेडिंग कंपनी एलएलसी तथा मारिशस में इंदिरा ओवरसीज लिमिटेड, अफ्रीकी देश कैमरून में कैमरून इस्पात सरल होना ज्ञात हुआ है. हर्षवर्धन जैन के दुबई (यूएई) में 6, मारिशस में एक तथा यूके में 3 तथा भारत में एक बैंक खातों की भी जानकारी मिली है. इन बैंक खातों में हुए लेनदेन के संबंध में भी जानकारी जुटाई जा रही है.

हर्षवर्धन जैन के 2 पैन कार्ड भी संज्ञान में आए हैं, जिन के आधार पर खोले गए बैंक खातों एवं विदेशों में जो खाते प्रकाश में आए हैं, उन के संबंध में भी जांच की जा रही है. पासपोर्ट से मिले रिकौर्ड के अनुसार, खुलासा हुआ है कि उस ने वर्ष 2005 से 2015 के बीच 10 सालों में 162 बार विदेश की यात्रा की. इस दौरान वह 19 देशों में गया. वह सब से अधिक 54 बार यूएई गया. इस के अलावा 22 बार यूके की यात्रा की. इस के साथ ही उस ने मारीशस, फ्रांस, कैमरून, पोलैंड, श्रीलंका, टर्की, इटली, सबोर्गा, इंडोनेशिया, सऊदी अरब, सिंगापुर, मलेशिया, जर्मनी और थाइलैंड आदि देशों की यात्रा की.

इस जानकारी के बाद पासपोर्ट और उस के बाद हुई विदेश यात्राओं का डाटा जुटाने में एसटीएफ की टीमें लगी हैं. एसटीएफ की टीमें 300 करोड़ से अधिक के एक घोटाले की भी जांच कर रही हैं, जिस में हर्षवर्धन की संलिप्तता रही है. यह घोटाला विदेश में लोन दिलाने के नाम पर किया गया. इस के अलावा भी कुछ अन्य घोटालों को ले कर जांच चल रही हैं.

एसटीएफ के डीएसपी राजकुमार मिश्रा ने बताया कि हर्षवर्धन जैन के खिलाफ उन्होंने इंटरपोल को ब्लू कार्नर नोटिस जमा कराया है. इसके जरिए किसी भी व्यक्ति के खिलाफ पूरी दुनिया में कहीं भी दर्ज आपराधिक मामलों की जानकारी हासिल की जाती है. उसी आधार पर उससे आगे जांच और पूछताछ भी की जानी है. फिलहाल दूतावास के नाम पर ठगी का मास्टरमाइंड हर्षवर्धन जैन डासना जेल में बंद है.

फरजी दूतावास चलाने में स्थानीय  प्रशासन की मिलीभगत या लापरवाही 

लंबे समय तक किसी देश में फरजी दूतावास चलाना वाकई गंभीर बात है. लेकिन सवाल है कि ऐसा क्यों हो जाता है. क्या सिस्टम को बायपास कर दूतावास जैसी संस्था भी बनाई जा सकती है? क्या किसी देश में दूतावास खोलने के कोई नियम नहीं या फिर खुलने के बाद उस की जांच नहीं होती? और जब नकली पासपोर्ट जैसी चीजें पकड़ में आ जाती हैं तो पूरा का पूरा फरजी दूतावास कैसे टिका रह गया?

दरअसल, दूतावास किसी देश की तरफ से दूसरे देश में खोला गया आधिकारिक दफ्तर होता है, जहां गेस्ट नेशन के प्रतिनिधि काम करते हैं. यह एक बेहद औपचारिक प्रक्रिया होती है, जिसमें दोनों देशों के विदेश मंत्रालय शामिल होते हैं.  दूतावास के मुख्य अधिकारी राजनयिक कहलाते हैं, जिन्हें डिप्लोमेटिक इम्युनिटी मिली होती है. एंबेसी 2 देशों के बीच पुल का काम करता है. यहीं से वीजा जारी होता है. इस के अलावा अगर होस्ट देश में कोई समस्या आ जाए तो दूतावास अपने नागरिकों को मदद करता है.

अगर कोई फरजी देश के नाम पर एंबेसी बना ले तो क्या वो तुरंत शक में नहीं आएगा? असल में दूतावास के लिए जो तामझाम चाहिए, अगर शख्स वो सब जुटा सके तो तुरंत किसी को शक नहीं होगा. जैसे एंबेसी हमेशा पौश इलाके में होती है. नकली झंडा चाहिए होता है, जो असल जैसा लगे. नकली आईडी, डिप्लोमैटिक नंबर वाली गाडिय़ां और कुछ स्टाफ, जो कनविंसिंग लगे. कई बार लोग नकली देश के डिप्लोमैट बन जाते हैं तो कई बार असल देश के नाम पर भी झांसा देने लगते हैं.

ऐसा एक बेहद चर्चित केस घाना में आया था. लगभग एक दशक पहले राजधानी अक्रा में फरजी अमेरिकी दूतावास चल रहा था. ये कुछ दिन या महीनों नहीं, बल्कि पूरे दस सालों तक चलता रहा. यहां से नकली वीजा जारी किए जाते थे. ठगी का काम एक इंटरनैशनल गिरोह कर रहा था, जिस में वकील और जाली दस्तावेज बनाने वाले भी शामिल थे. मजेदार बात ये है कि गिरोह ने असली वीजा भी जारी किए थे, मतलब असल अमेरिकी दूतावास में भी उन के कुछ लोग थे.

भारत में भी 2022 में कोलकाता के पास एक नकली बांग्लादेशी एंबेसी का पता लगा था. खुद को कांसुलेट जनरल बताने वाला एक स्थानीय शख्स बांग्लादेश से भारत और भारत से बांग्लादेश भेजने के लिए नकली दस्तावेज बनाता और आर्थिक घपले भी करता था. वैसे एंबेसी नकली है या असली, इस की जांच 2 स्तरों पर होती है. एक तो खुद होस्ट देश की जिम्मेदारी है कि वो अपने यहां काम कर रहे सभी दूतावासों और मिशनों पर नजर रखे.

मिनिस्ट्री औफ एक्सटर्नल अफेयर्स और इंटरनेशनल सिस्टम जैसे यूएन या वीजा वैरिफिकेशन सिस्टम के पास भी वैलिड दूतावासों की लिस्ट होती है. इस के बाद भी फरजी एंबेसी लंबे समय तक इसलिए बची रहती है, जब लोकल स्तर पर कुछ भ्रष्ट अधिकारी उस के साथ हों. कई बार अधिकारियों या स्थानीय पुलिस को भी खास जानकारी नहीं होती कि दूतावासों का सिस्टम कैसे काम करता है. इसके अलावा नकली दस्तावेज भी इतने असली लगते हैं कि पहली नजर में शक की गुंजाइश कम ही रहती है.

दूतावास का क्लेम करने वाले लोग बात करते हुए बड़े नाम लेते हैं, बड़े संपर्कों का हवाला देते हैं. यह सब इतना पेशवेर लगता है कि लोग इन पर आसानी से हाथ नहीं डालते और फरजी एंबेसी भी सालों टिक जाती है. विएना कन्वेंशन आन डिप्लोमेटिक रिलेशंस 1961 के मुताबिक, कोई भी दूतावास तभी वैध माना जाएगा, जब होस्ट देश की सहमति से खोला गया हो. इसी तरह से किसी को डिप्लोमैट या कांसुलेट जनरल तब माना जाता है, जब उसे गेस्ट देश ने खुद अधिकृत किया हो.

ऐसे में अगर कोई खुद ही दूतावास खोल ले तो ये गंभीर अपराध है. इस पर जालसाजी की धाराएं तो लगेंगी ही, साथ ही अगर वो लोगों को धोखे से विदेश भेज रहा हो तो मानव तस्करी का आरोप भी लग सकता है. अगर शख्स के साथ विदेशी लोग मिले हों तो देश की सुरक्षा पर खतरा भी माना जा सकता है. Crime News

 

 

Illicit Relationship: मामी से मोहब्बत

Illicit Relationship: लखनऊ के रेल कर्मचारी की हत्या का कारण उस का शराबी होना, गुस्सैल बने रहना या चालचलन था या फिर मामीभांजे के बीच नाजायज रिश्ते की नादानी. इन सब के अलावा एक सच्चाई यह भी थी कि मंजू अपने पति की बुरी आदतों से इतनी परेशान रहती थी कि…

मई, 2025 के अंतिम सप्ताह में मंजू की रिश्तेदारी में शादी थी. उस के सासससुर 24 मई, 2025 की रात को उसी शादी के लिए गए थे. पति ड्यूटी पर था. मंजू घर पर अकेली थी. शाम का वक्त था. इसी बीच एक कौल आ गई. स्क्रीन पर प्रेमी का नाम पढ़ कर उस के होंठों पर मुसकान बिखर गई. उस ने तुरंत कौल रिसीव कर ली. कौल उस के प्रेमी आकाश वर्मा की थी, जो रिश्ते में उस का भांजा लगता था.

”हैलो! मैं कब से तुम्हारे फोन का इंतजार कर रही हूं. तुम उस का काम तमाम कर दो, बहुत दिन हो गए,’’ मंजू शिकायती लहजे में उस से बोली.

”मैं ने फोन किया न! …मुझे तुम से अधिक बेचैनी है…मैं चाहता हूं कि जितना जल्द हो, काम निपटा लिया जाए. मुझे तुम्हारे पति सिद्धि प्रसाद का काम तमाम हर हालत में करना है.’’ आकाश बोला.

”अब यह बताओ कि तुम कितनी देर में आ रहे हो?’’ मंजू का सीधा सवाल था.

”पहले यह बताओ कि घर का क्या हाल है?’’ उस ने सवाल का जवाब सवाल से ही किया.

”अकेली हूं. सभी लोग रिश्तेदार की शादी में गए हैं. तुम्हारा मामा ड्यूटी पर है… आधी रात को आएगा.’’ मंजू बोली.

”चलो ठीक है, मैं आ जाऊंगा, तुम दरवाजा खुला रखना,’’ कह कर आकाश ने कौल डिसकनेक्ट कर दी.

रात गहराई. आकाश अपने दोस्त के साथ पूरी तैयारी के साथ प्रेमिका मंजू के घर आ गया. चुपके से घर में घुसने का इंतजाम मंजू पहले से ही कर चुकी थी. मंजू अपने कमरे में पति सिद्धि प्रसाद लोधी के साथ लेटी हुई थी, जबकि वह गहरी नींद में था. मंजू के घर में आने पर आकाश ने उस के इशारे पर अपने दोस्त के साथ कमरे में रखी प्लास्टिक की रस्सी से एक फंदा बना लिया. मंजू की मदद से फंदा गहरी नींद में सो रहे सिद्धि के गले में डाल दिया. दोनों ने मिल कर उस फंदे को कस दिया. थोड़ी देर सिद्धि प्रसाद छटपटाया, फिर शांत हो गया.

कुछ देर के बाद जब सिद्धि प्रसाद मरणासन्न हालत में पहुंच गया. वह जिंदा न बच जाए, इसलिए आकाश ने अपने दोस्त संजय के साथ उस के सिर पर हथौड़े से हमला कर दिया. उस वार से सिद्धि रक्तरंजित हो गया. लोहे के पाइप से भी उस के सिर पर कई हमले करने के बाद जब उस की मौत हो गई, तब आकाश ने अपने दोस्त की मदद से रात के अंधेरे में घर के पीछे एक तालाब के निकट सूखे गड्ïढे में उस की लाश फेंक दी. वह गड्ïढा झाडिय़ों की ओट में था. सिद्धि प्रसाद का मोबाइल, खून सने कपड़े भी वहीं झाडिय़ों में फेंक दिए.

25 मई, 2025 की सुबह लखनऊ-कानपुर रोड पर थाना बंथरा के एसएचओ राजेश कुमार सिंह को उसी थाने की पुलिस चौकी हरौनी के इंचार्ज एसआई अर्जुन राजपूत ने कौल कर बताया कि बीती रात सिद्धि प्रसाद लोधी नामक एक रेलकर्मी की हत्या हो गई है. उस की लाश उस के घर के ठीक पीछे तालाब के पास गड्ढे में पड़ी है. सिद्धि प्रसाद लोधी का घर दरियापुर मझरा गढ़ी चुनौटी में है. उस की लाश मिलने की सूचना पर चौकी इंचार्ज अरविंद कुमार एसआई श्यामजी मिश्रा, कांस्टेबल देवेंद्र कुमार के अलावा एसएचओ भी घटनास्थल पर पहुंच गए. साथ ही इस की सूचना कृष्णा नगर के एसीपी विकास पांडेय को भी दे दी गई.

घटनास्थल पर उन के साथ एडिशनल डीसीपी अमित कुमावत भी घटनास्थल पर पहुंच गए. दोनों अधिकारियों ने सघन जांच के आदेश दिए. घटनास्थल पर मृतक की पत्नी मंजू देवी भी मौजूद थी. उसी ने अपने पति की हत्या की सूचना पुलिस को दी थी. मंजू रोरो कर पुलिस अधिकारियों को घटना के बारे में बताया, ”साहब, सुबह 6 बजे के करीब जब मैं सो कर उठी, तब पाया कि पति कमरे में नहीं हैं. इन्हें ढूंढते हुए मकान के बाहर निकल गई. घर के पीछे लगभग 50 मीटर दूर तालाब के पास झाडिय़ों में मुझे पति के कपड़े दिखाई दिए. पैंट और शर्ट वही थे, जो उन्होंने रात में पहने थे. पास ही पति औंधे मुंह पड़े थे.

”पास जा कर देखा तो देखते ही मेरे होश उड़ गए. मुझे ऐसा लगा, जैसे मेरे पैरों तले की जमीन खिसक गई हो. पति के सिर पर गहरी चोट थी. काफी खून बह चुका था. वह एकदम से बेजान से थे. पति को इस हालत में देख कर ऐसा लगा, जैसे मेरी दुनिया ही उजड़ गई.’’

घटनास्थल पर नहीं मिली खून की एक भी बूंद

पुलिस ने मंजू से प्रारंभिक पूछताछ के बाद शव की जांचपड़ताल की. एसएचओ के साथ आई पुलिस टीम ने उस की चप्पल, मोबाइल, शर्ट और पैंट पास से ही बरामद कर ली. जांच में घटनास्थल पर खून की एक बूंद भी नहीं थी, जबकि मृतक के सिर से काफी खून बह चुका था. इस से पुलिस ने सहज अनुमान लगा लिया कि इस की हत्या किसी दूसरी जगह पर करने के बाद हत्यारों ने लाश यहां ला कर फेंकी है. उन्होंने अनुमान लगाया कि हत्या करने वाले 2-3 लोग हो सकते हैं. शव की हालत देख कर पुलिस ने रात 2 और 3 बजे हत्या होने का अनुमान लगाया.

शव को ध्यान से देखने पर उस के सिर से खून बहने और गले में किसी चीज से कसाव के निशान का पता चला. एसीपी विकास पांडेय के सामने बंथरा थाना पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजने की औपचारिकताएं पूरी कीं. आगे की प्रक्रिया के लिए मृतक की पत्नी मंजू देवी को थाने बुलाया गया. उस की तहरीर पर अज्ञात के खिलाफ सिद्धि प्रसाद लोधी की हत्या का मुकदमा धारा-103 बीएनएस के तहत दर्ज कर लिया गया. मंजू देवी से जांच टीम की कांस्टेबल मनीषा रावत और सावित्री देवी ने पूछताछ की. साथ ही उस के घर जा कर भी तहकीकात की गई.

हरौनी के चौकीप्रभारी अर्जुन राजपूत, एसआई श्याम मिश्रा, अरविंद कुमार, संदीप सिंह और कांस्टेबल देवेंद्र के साथ देर रात तक ग्रामीणों से पूछताछ करते रहे. इस पूछताछ में हत्याकांड के संबंध में चौंकाने वाली बात सामने आई. पुलिस को विशेष सूत्रों से पता चला कि मंजू ने ही योजना बना कर अपने प्रेमी की मदद से पति की हत्या करवाई है. उस का प्रेमी आकाश वर्मा उर्फ लकी 25 साल का नवयुवक है और रिश्ते में उस के पति का भांजा है. वह जनपद लखनऊ के नरपतखेड़ा गांव का निवासी है. यह भी पता चला कि इस हत्याकांड में उस का दोस्त भी शामिल था.

आकाश वर्मा के संदिग्ध आरोपी होने की जानकारी मिलने पर पुलिस उसे घटना के एक हफ्ते बाद ही गिरफ्त में ले लिया. उसे बंथारा थाने लाया गया. खासकर उस के बारे में मंजू देवी को भनक तक नहीं लगने दी गई. पुलिस ने उस से सिद्धि प्रसाद की हत्या के बारे में कड़ाई से पूछताछ की. काफी समय तक आकाश वर्मा पुलिस को गुमराह करता रहा. सच उगलवाने के लिए आखिरकार पुलिस टीम ने उस पर थोड़ी सख्ती की. पुलिस के दबाव और पूछताछ के तरीके के आगे उस ने हार मान ली और सिद्धि प्रसाद की हत्या करने की बात कुबूल कर ली. उस ने यह भी बताया कि यह हत्या सिद्धि प्रसाद की पत्नी  मंजू देवी की शह पर की थी.

आकाश से पूछताछ पूरी होने के अगले दिन सुबहसुबह पुलिस मंजू देवी को थाने ले आई. जैसे ही उस की नजर थाने के हवालात में बंद आकाश वर्मा पर गई तो वह चौंक गई. उस के चेहरे का रंग फीका पड़ गया. महिला कांस्टेबल मनीषा रावत और सावित्री देवी उसे पकड़ कर एक कोने में ले गईं. जोरदार लहजे में उस से सवाल किया, ”सचसच बता, तूने ही अपने पति की हत्या की है न?’’

दूसरी सिपाही उस की आंखों के आगे बेंत घुमाने लगी. मंजू सिपाहियों के तेवर देख कर सहम गई. उस की जुबान खुल ही नहीं रही थी. वह एकदम से निस्तब्ध थी. तभी डंडे घुमाती सिपाही कड़कती हुई बोली, ”मंजू, तू सचसच सब कुछ बताती है या मुझे कोई दूसरा रास्ता अपनाना पड़ेगा..?’’

मंजू फिर भी कुछ नहीं बोली. दूसरी महिला सिपाही ने उस के ऊपर बेंत उठाया ही था कि मंजू बोल पड़ी, ”मुझे मारिए मत, मैं सारा सच बता दूंगी.’’

उस के बाद मंजू ने जो कहानी बताई, वह और भी चौंकाने वाली थी. उस की कहानी में पति की हत्या ही नहीं, बल्कि रिश्तों की मर्यादा को लांघने की भी बात थी. उस का प्रेमी रिश्ते में पति का भांजा था. इस नाते उस के साथ मांबेटा समान मामीभांजे का रिश्ता था. आकाश और मंजू देवी के बीच लव अफेयर के साथ हत्याकांड की जो कहानी सामने आई, वह इस प्रकार निकली—

सिद्धि प्रसाद कैसे बना शराब का लती

उत्तर प्रदेश के लखनऊ शहर के कानपुर रोड पर थाना बंथरा के अंतर्गत पुलिस चौकी हरौनी है. थाने से लगभग 12 किलोमीटर दूर बीहड़ जंगल का यह सुनसान इलाका भी है. यहीं दरियापुर गढ़ी चुनौटी नाम का गांव बसा हुआ है. सिद्धि प्रसाद लोधी अपनी फेमिली के साथ यहीं रहता था. सिद्धि प्रसाद की उम्र लगभग 40 वर्ष की हो चुकी थी. उस का विवाह मंजू देवी के साथ करीब 8 साल पहले हुआ था. मंजू खूबसूरत थी. सिद्धि प्रसाद मंजूू देवी को पा कर बहुत खुश था. वह उस की सुंदरता और यौवन का दीवाना बना हुआ था.

वह रेलवे विभाग में सम्पार (गेट कीपर) के पद पर नौकरी करता था. उसे अच्छी सैलरी मिलती थी. उस की संगत कुछ गलत लोगों के साथ थी, जिस से वह मांसाहारी होने के साथसाथ शराबी भी बन गया था. ड्यूटी पूरी करने के बाद वह जब थकामांदा लौट कर घर वापस आता था, तब अपनी थकान मिटाने के बहाने शराब पीता था. साथ में खूब मटन और चिकन उड़ाता था. उस के बाद बिस्तर पर जाते ही अपनी जिस्मानी भूख मिटाने के लिए मंजू को बांहों में दबोच लेता था. इस का वह जरा भी खयाल नहीं करता था कि पत्नी की इच्छा है भी या नहीं! कई बार वह उस की इच्छा के खिलाफ जिस्मानी भूख मिटाता था. ऐसा वह मंजू के साथ आए दिन करता था. उस की इस आदत से मंजू परेशान हो गई थी.

उस के 2 बच्चों में से एक की असामयिक मौत होने से एकमात्र बेटी ही बची थी. दूसरे बच्चे की चाहत में वह मंजू को अपनी हवस का शिकार बनाता था. जबकि मंजू पति के वहशी व्यवहार से तंग आ गई थी. उस से घृणा करने लगी थी. सिद्धि प्रसाद  की फिजूलखर्ची बढ़ती जा रही थी. मंजू देवी इस का विरोध करती थी. विरोध करने पर सिद्धि उसे प्रताडि़त करता था. मंजू कुछ समझ नहीं पा रही थी कि वह अपने पति की बढ़ती शराब की लत को कैसे रोके.

मंजू और आकाश ऐसे आए करीब

जनवरी, 2025 का महीना था. सिद्धि प्रसाद खाना खा कर ड्यूटी पर चला गया था. उस के जाने के बाद मंजू अपने कमरे में लेटी थी. अपनी मुसीबतों के बारे में सोच रही थी. उस के कपड़े अस्तव्यस्त थे. वह करवट लिए लेटी हुई थी. सिर पर हाथ रखे तकिए में मुंह छिपाए काफी समय तक सिसकती रही.  दिन के 11 बजने को आए थे. चारपाई पर लेटेलेटे उस की कब आंख लग गई, पता ही नहीं चला. जब आंखें खुलीं, तब उस ने अपने बगल में बैठे आकाश को पाया.

वह हड़बडाती हुई उठी और कपड़े संभालने लगी. उस ने महसूस किया कि आकाश की नजर उस की मांसल शरीर पर टिकी है. थोड़ी देर के लिए वह शरमा गई. फिर भी बोली, ”अरे आकाश, तू कब आया? …आ न! बैठ यहीं, तू कोई गैर थोड़े है.’’

”मैं अभीअभी आया मामी, तुम उदास दिख रही हो? क्या बात है फिर मामा से बहस हुई क्या?’’ आकाश ने हमदर्दी जताई.

”अच्छा, तुम्हें याद भी कर रही थी.’’

”सौरी मामी, मैं तुम्हें कुछ और नजरों से देख रहा था.’’

”अरे कुछ नहीं, तुम जैसा गबरू जवान मेरी जवानी को नहीं देखेगा तो और कौन..?’’ मंजू बोली.

”अच्छा! …तो आप ने मुझे माफ कर दिया.’’ झेंपता हुआ आकाश बोला.

उस के बाद दोनों के बीच हंसीमजाक और इधरउधर की बातें होती रहीं. बातोंबातों में मंजू ने अपनी पीड़ा भांजे आकाश वर्मा के सामने उड़ेल कर रख दीं. इस से उस ने महसूस किया कि गम थोड़ा हलका हो गया. फिर उस के कंधे पर अपना सिर टिका कर सिसकती हुई बोली, ”आकाश, तुम ही कोई तरीका निकालो!’’

”हां मामी, मैं कुछ करता हूं आप के लिए. थोड़ा वक्त दो… अभी चलता हूं. जब भी कोई जरूरत हो तो फोन कर देना.’’ आकाश बोला और वहां से चला गया.

आकाश वर्मा सिद्धि प्रसाद का रिश्ते में भांजा लगता था. वह मूलरूप से लखनऊ के ही थाना पारा के अंतर्गत नरपत खेड़ा गांव का रहने वाला था. अकसर खाली समय में अपने मामा सिद्धि प्रसाद के यहां मिलने आताजाता रहता था. मौका मिलने पर मंजू से आंखें छिपा कर अपने मामा सिद्धि प्रसाद के साथ शराब पीने का मौका भी निकाल लेता था. शराब के नशे में दोनों काफी देर तक गपशप किया करते थे. आकाश सरोजनी नगर के नादरगंज की एक नमकीन बनाने वाली कंपनी में काम करता था और समय मिलने पर सिद्धि प्रसाद के घर चला आता था.

हसरतों में बह गया रिश्ता

25 वर्षीय आकाश वर्मा मंजू देवी को बहुत प्यार करता था, किंतु उस ने अपने मन की बात का इजहार करने के लिए मंजू के सामने कभी पेशकश नहीं की थी. आकाश मंजू के सामने जब भी आता तो बैठ कर उसे हसरत भरी नजरों से देखा करता था. वह मंजूू से अपने दिल की बात उजागर करने का कोई अवसर भी नहीं ढूंढ पाया. मंजू को अपने दिल में बसाने के बाद उस की रातों की नींद उड़ चुकी थी. चाहत छिपती नहीं है, जब 2 प्रेमी सामने हों तो आंखों में समाई प्यार की भाषा को समझते देर भी नहीं लगती.

आकाश के अकसर घर आने के बाद मंजू भी उसे चाहत की नजरों से देखा करती थी, किंतु वह विवाहिता थी. उस के सामने समाज की कुछ मर्यादाएं भी थीं. आकाश को मन ही मन में चाहने के बाद मंजू भी अपने मन की भावना व्यक्त नहीं कर पा रही थी. धीरेधीरे मंजू के मन में आकाश के प्रति सम्मान व प्यार का दीप जल उठा था. दोनों उचित अवसर की तलाश में थे. जनवरी माह में उस दिन आकाश के समक्ष उस ने अपनी दुखती रग को व दर्द को बयान किया तो आकाश के मन में दया व प्यार का सागर उमड़ पड़ा, लेकिन समझदारी व अवसर की तलाश में उस दिन मंजू नेे अपनी आंखों की मूक भाषा से सब कुछ समझा दिया कि वह भी इस नरक से उसे छुटकारा दिला दे.

मार्च 2025 के अंतिम सप्ताह में मंजू ने फोन पर आकाश के पूछने पर बताया कि उस दिन सिद्धि प्रसाद रात की ड्यूटी पर घर से गया हुआ है, इसलिए वह घर पर आ जाए, कुछ जरूरी बात करनी है.   आकाश ड्यूटी की छुटटी के बाद मंजू के घर देर रात पहुंच गया. उस ने धीरेधीरे आहट पा कर जानने की कोशिश की कि घर की बगल की दूसरी कोठरी में मंजू के सासससुर अपने कमरे में लिहाफ ओड़े सो रहे हैं. मंजू ने आकाश को घर आया देख कर राहत की सांस ली और चुपके से अपनी कोठरी में आकाश को एकांत में बुला लिया. कमरे में पहुंचने के बाद आकाश ने जाते ही मंजूू को अपनी बाहों में भर लिया. जी भर गालों को चूमने व प्यार करने के बाद वह खाना खाने बैठ गया.

उस दिन आकाश मंजू को पाने को आतुर हो गया था. पति द्वारा प्रताडि़त करने की बात कहते हुए मंजू ने उसे अपनी पीठ पर चोट के निशान दिखाए. पीठ पर पिटाई के निशान देख कर आकाश ने हमदर्दी जताई. इसी हमदर्दी में दोनों प्रेम और सहानुभूति की भावना में बह गए थे. वे कब एकदूसरे की बाहों में आ गए, इस का उन्हें पता ही नहीं चला. फिर दोनों ने अपनी हसरतें पूरी कीं. थोड़ी देर में जब आकाश जाने लगा, तब मंजू उस का हाथ पकड़ कर बोली, ”आकाश, जल्द कुछ उपाय करो… अब छिपछिप कर रहना सहन नहीं होता…और उस का जुल्म भी बढ़ता जा रहा है.’’

”जल्द ही कुछ करूंगा. चिंता मत करो.’’

आकाश जब भी आता था, तब मंजू घर में अकेले होती थी. उसे नहीं पता था कि उस की गतिविधियों पर पासपड़ोस की नजर बनी हुई है. कई बार वह रात के अंधेरे में भी आने लगा था. उस का मंजू के साथ बेमेल ही सही, लेकिन नाजायज रिश्ता बन चुका था. आकाश उस से उम्र में करीब 10 साल छोटा था. मंजू के मन का दर्द आकाश के लिए भी असहनीय हो गया था. सिद्धि प्रसाद की हत्या के 2 दिन पहले जब आकाश आया था, तब घर में बिखरे हुए सामान को देख कर समझ लिया था कि सिद्धि ने उस पर किस तरह का जुल्म ढाया होगा. घर में चारपाई के नीचे शराब की खाली बोतलें पड़ी थीं.

अभी आकाश घर के चारों ओर नजरें दौड़ा ही रहा था कि उस ने मंजू की सिसकती आवाज सुनी, ”जी तो करता है कि मैं कहीं जा कर डूब मरूं और अपनी जान दे दूं.’’

आकाश तेजी से मंजू की ओर मुड़ा और उस के पास जा कर कान में कुछ फुसफुसाया. मंजू उस की बात सुन कर चौंकती हुई बोली, ”ऐसा हो सकता है तो जल्दी करो, मैं तुम्हारा साथ दूंगी. जितना भी खर्च आएगा, उस का भी इंतजाम करूंगी.’’

”मैं तुम्हें 24 मई को फोन करूंगा.’’ आकाश बोल कर वहां से जाने लगा. आकाश को जाता देख मंजू बड़ी हसरत भरी निगाहों से उसे देखने लगी. घर से निकलने से पहले आकाश ने एक बार फिर आश्वासन देते हुए कहा, ”मामी, आप को सब्र से काम लेना होगा. मुझे पूरी प्लानिंग बनाने का मौका दो. काम बहुत जोखिम भरा है.’’

प्रेमी के साथ मिल कर बनाया हत्या का प्लान

23 मई, 2025 की रात को आकाश और मंजू जब फोन पर बातें कर रहे थे, तभी  अचानक रात की ड्यूटी समाप्त कर सिद्धि प्रसाद घर लौट आया था. अचानक पति को घर आया देख कर मंजू सहम गई थी. तुरंत फोन कट कर दिया था. किंतु सिद्धि प्रसाद समझ गया था कि मंजू जरूर अपने प्रेमी से बात कर रही है. इस बारे में पड़ोसियों द्वारा उस के कान पहले से ही भरे जा चुके थे. उस ने तुरंत मंजू की जम कर पिटाई कर डाली. वह कहती रही कि उस की बात सहेली से हो रही थी, लेकिन सिद्धि ने पीटना नहीं छोड़ा.

राज खुलने के डर से मंजू एकाएक वह घबरा गई. परेशान सी हो उठी. किसी तरह उस ने दर्द से कराहते हुए रात बिताई. अगले रोज पति के ड्यूटी पर जाने के बाद आकाश को बीती रात की पूरी बात बता दी. अगले रोज 24 मई को उस का पति सो गया, तब आकाश का फोन आया. उस के बाद उस ने पहले तय प्लान के मुताबिक सिद्धि प्रसाद की प्लास्टिक की रस्सी के फंदे से पहले गला घोंट दिया, फिर उस के सिर पर भारी चीज से हमला कर मार डाला. इस काम में आकाश ने अपने दोस्त संजय निषाद की भी मदद ली थी.

अगले दिन ही मंजू द्वारा की गई पुलिस में शिकायत के बाद सिद्धि प्रसाद की लाश बरामद कर ली गई. इस की हफ्ते भर चली जांच में हत्या का न केवल खुलासा हो गया, बल्कि इस में शामिल आरोपियों में मंजू देवी, आकाश वर्मा और उस के दोस्त संजय निषाद की गिरफ्तारी भी हो गई. उत्तर प्रदेश के जिला गोंडा के रहने वाले संजय निषाद को 40 हजार रुपए देने का वादा किया था, उसे मात्र 5 हजार रुपए एडवांस में दिए थे. मंजू देवी ने पुलिस के सामने अपने पति की क्रूरता का जिक्र करते हुए पति की प्रताडऩा से परेशान रहने की बात कही.

 

उस ने पति पर अय्याशी करने का आरोप लगाया. उस ने यह भी बताया कि सिद्धि प्रसाद के गांव की एक विधवा महिला से कई सालों से  अवैध संबंध बने हुए थे. पुलिस ने आकाश से संजय निषाद का फोन नंबर ले कर उसे सर्विलांस पर लगा दिया. तकनीकी जांच से  वह 10 जुलाई, 2025 को उत्तर पूर्व दिल्ली के सोनिया विहार से पकड़ा गया. संजय वारदात के बाद लखनऊ से फरार हो कर दिल्ली चला गया था. वहां वह एक दुकान पर नौकरी करने लगा था. फोन की लोकेशन के आधार पर वह भी पुलिस की पकड़ में आ गया.

पुलिस ने आरोपी मंजू देवी, उस के प्रेमी आकाश वर्मा और संजय निषाद को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया. Illicit Relationship

 

Love Story in Hindi: प्यार में न बनें बौयफ्रेंड का खिलौना

Love Story in Hindi: एक निजी अस्पताल में नर्स 24 वर्षीय समरीन की दिनचर्या भले ही व्यस्त थी, लेकिन उस के दिल का कोना खाली था. अपने सपनों के राजकुमार की उसे भी तलाश थी. इंस्टाग्राम के जरिए उस की जिंदगी में 25 वर्षीय गौसे आलम ने एंट्री तो की, लेकिन उस ने समरीन को एक ऐसा खिलौना समझा कि…

समरीन ने इंस्टाग्राम पर अपनी जो फोटो पोस्ट की थी, उस में उस का चेहरा आधा दिखता, आधा छिपा हुआ था. उस का हिजाब उस की पहचान बन चुका था. लोग यही समझते थे कि वह एक शरीफ मुसलिम लड़की है, परदे में रहती है. वह जनपद मुरादाबाद के गांव रुस्तम नगर सहसपुर में स्थित अपने घर से करीब 12 किलोमीटर दूर सेफनी कस्बे के एक अस्पताल में नर्स थी. समरीन अस्पताल की लंबी शिफ्ट से थक जाती थी, लेकिन मरीजों की देखभाल में अपना सारा दर्द भूल जाती थी, परंतु रात में अकेलापन उसे घेर लेता.

वह अस्पताल में हर दिन मौत और जिंदगी की जंग देखती थी. रोजाना घर से अस्पताल जाना और वापस घर आना सफर की थकान, साथ में अस्पताल के काम की थकान यह सब समरीन की जिंदगी का हिस्सा था. फिर भी उस के दिल में प्यार की गहराई, भावनाओं का सैलाब, दर्द, तड़प सब कुछ अनुभव करने की अपार क्षमता थी. अपने सपनों के राजकुमार की उसे भी तलाश थी. समरीन को इंस्टाग्राम पर नएनए लोगों से दोस्ती करना अच्छा लगता था. वह फोटोग्राफी और किताबों की तसवीरें डालती, छोटेछोटे कैप्शन में अपने दिल की बातें लिखती.

एक दिन उसे एक युवक का मैसेज मिला. उस की प्रोफाइल खंगाली तो वहां थोड़ेबहुत सुंदर फोटो थे, गौसे आलम नाम था उस का. नाम ऐसा था जो सुनने में सुकून दे रहा था. शुरुआत में तो बस सामान्य ‘हाय’ लिखा मैसेज देखा तो नसरीन ने भी उस का उत्तर ‘हाय’ में ही दे दिया. गौसे आलम एक 25 साल का ट्रक ड्राइवर था, जो लंबी दूरी की सड़कों पर जीवन बिताता था. अकेलापन, परिवार की जिम्मेदारी और जीवन की कठोर सच्चाइयां उस की साथी थीं. गौसे आलम की जिंदगी ट्रक की स्टीयरिंग और राजमार्गों पर लंबीलंबी दूरी तक माल ढोते हुए ही गुजर रही थी. कहीं वह रात में विश्राम करता तो वह रातों में खुद को अकेला महसूस करता. परिवार के लिए पैसा कमाता, लेकिन दिल खाली था. रात में मोबाइल की स्क्रीन पर दुनिया घूमना उस का शौक था.

वह जनपद मुरादाबाद के ही थाना कुंदरकी के चकफाजलपुर गांव का निवासी था. उस का इंस्टाग्राम अकाउंट जैसे उस की छोटी सी दुनिया था. तसवीरें, शायरी और कभीकभी दिल की बातें. हर रात वह अपनी किसी पोस्ट के नीचे लिखता, ‘कोई तो होगी, जो मेरे दिल की बात समझेगी’. वह चाहता था कोई ऐसी लड़की, जो उस की पोस्टों में छिपे जज्बात को महसूस कर सके, उस की अकेली जिंदगी में रंग भर सके. धीरेधीरे उसे समझ आया कि तमाम लड़के आजकल इंस्टाग्राम पर किस तरह की मोहब्बत ढूंढते हैं. कभी लाइक के जरिए, कभी कमेंट से बात शुरू कर के तो कभी किसी की स्टोरी पर रिप्लाई दे कर. गौसे आलम भी वही करने लगा. हर नई तसवीर पर मुसकराहट के साथ एक दिल भेज देता, कभी किसी शायरी पर ‘वाह!’ लिख देता.

एक रात ट्रक सड़क किनारे खड़ा कर के  उस ने इंस्टाग्राम ओपन किया. उस की निगाहें हिजाब पहने हुए एक फोटो पर टिक गईं. उस का नाम था समरीन. वह काफी देर चेहरे को देखता रहा. उस की एक पोस्ट ने गौसे आलम का ध्यान खींचा. अस्पताल की बालकनी से ली गई तसवीर, जहां वह मास्क लगाए एक बच्चे को गोद में ले कर मुसकरा रही थी. यह पोस्ट उस की भावनात्मक थकान दिखाती थी. नर्स की जिम्मेदारी में छिपा दर्द उस की आंखों से छलक रहा था. फिर उस ने समरीन की प्रोफाइल देखी. उस की प्रोफाइल की तसवीर में हल्की मुसकान थी और बायो में लिखा था, ‘दिल चीज क्या है आप मेरी जान लीजिए.’

गौसे आलम ने हिम्मत की और उस की  शायरी पर कमेंट किया, ‘लफ्ज तो बहुत लोग लिखते हैं, पर एहसास सिर्फ तुम लाती हो.’ समरीन ने भी उसे ‘शुक्रिया’ लिखा, लेकिन बात यहीं खत्म नहीं हुई. धीरेधीरे चैट शुरू हुई, फिर देर रात तक चलने लगी. दोनों अपनीअपनी जिंदगी की खाली जगहों को एकदूसरे के शब्दों से भरने लगे. गौसे आलम अब हर सुबह उस की ‘गुड मार्निंग’ का इंतजार करता. समरीन उसे अपने कालेज की बातें बताती और गौसे आलम अपने लंबे सफर की दास्तान सुनाता. अपनी दिन भर की थकान के बीच उस की हंसी में सुकून ढूंढता. उस दिन के बाद से इंस्टाग्राम अब सिर्फ एक ऐप नहीं रहा, वो उन की मोहब्बत की गवाही देने वाला आईना बन गया.

गौसे आलम अब रोज नई तसवीर नहीं डालता, बस एक ही कैप्शन लिखता है ‘मिल गई वो, जिस से जिंदगी रंगीन हो गई.’ इस तरह दोनों तरफ से मैसेज का सिलसिला शुरू हो गया. समरीन हर रोज सुबहशाम 1-2 लाइनें हंसीमजाक, मजहबी और कभी गहराई की बातें पोस्ट किया करती थी. जैसे कोई साथी मिल गया हो. गौसे आलम ने एक दिन दिल  की गहराई से एक पोस्ट लिखी, ‘तुम्हारी मुसकराहट तो मेरी रातों की थकान मिटा देती है. तुम्हारे जैसे लोगों को सलाम, जो दूसरों के लिए हर वक्त लगे रहते हैं. मैं एक ट्रक ड्राइवर हूं, इसलिए मेरी सड़कें भी बहुत तनहा होती हैं.’

गौसे आलम की यह पोस्ट समरीन के दिल में उतर गई. गौसे आलम एक आम युवक था. उम्र बस 25 की, पर सपने बहुत बड़े. समरीन और गौसे आलम एकदूसरे के मोबाइल फोन नंबर ले ही चुके थे. इसलिए दिल खोल कर प्यारमोहब्बत की बातें होने लगीं. जिंदगी भर साथ निभाने की कसमें भी खाई जाने लगीं. गौसे आलम का कहना था कि जल्दी एक मुलाकात हो जाए तो हमारा प्यार और भी परवान चढऩे लगेगा.

समरीन ने महसूस किया कि गौसे आलम उस के लिए बेहद समझदार है और सहानुभूति दिखाने लगा है. उस की बातों पर समरीन का दिल खोयाखोया सा रहने लगा. वह सोचती कि कोई तो है, जो उस की बात ध्यान से सुनता है, उस की परेशानी पर संवेदना दिखाता है और मुश्किल में साथ देने का वादा करता है. वह कहता कि समरीन मैं तुम से शादी करूंगा. तुम मेरी जिंदगी हो. समरीन भी उस की बातों पर गहरा विश्वास करने लगी थी. वह सोचती कि गौसे आलम दिल का सच्चा है. भले ही वह एक ट्रक ड्राइवर है, लेकिन दिल का अच्छा है.

 

इन दोनों की कहानी में पहला मोड़ तब आया, जब वह अकसर ‘सिर्फ तुम्हारे लिए’ जैसी बातें करता. वह कहता कि समरीन मेरा साथ कभी मत छोडऩा, मेरा इस दुनिया में तुम्हारे अलावा कोई नहीं है. मैं तुम्हें दिल से प्यार करता हूं. मुझे कभी किसी से कोई प्यार नहीं मिला. यदि तुम ने मेरा दिल तोड़ दिया तो मैं कहीं का नहीं रहूंगा. इसलिए समरीन को यह अहसास होता कि उन दोनों का यह रिश्ता कुछ खास है. उस ने अपनी सब से करीबी सहेली को ये सारी बातें बताईं.

तब सहेली ने कहा, ”तेरी बातों से तो ऐसा लगता है कि वह तुझ से सच्चा प्यार करता है.’’

कुछ दिनों में उन का रिश्ता इंस्टाग्राम की स्क्रीन से निकल कर असल जिंदगी में उतरने लगा. उन का प्यार परवान चढऩे लगा.

पहली मुलाकात में जब गौसे आलम ने समरीन को देखा तो कहा, ”समरीन, तुम तो तसवीरों से ज्यादा हसीन हो और हकीकत में ज्यादा सच्ची भी.’’

समरीन भी मुसकराती हुई बोली, ”और तुम इंस्टाग्राम से ज्यादा शरमीले हो.’’

फिर दोनों हंस पड़े.

गौसे आलम को जब यकीन हो गया कि समरीन अब उस के फरेबी प्यार के जाल में फंस चुकी है तो  एक दिन वह अपने असली रूप में आ गया. उस ने ‘ओयो होटल’ में एक कमरा बुक किया. फोन कर के उस ने होटल में समरीन को भी बुला लिया.

जनपद मुरादाबाद में ‘ओयो’ जैसे और भी बहुत से केंद्र काफी चर्चित हो चुके हैं, जहां प्रेमी युगल दिन में 2-4 घंटे के लिए कमरा बुक करते हैं और मौजमस्ती कर के चले जाते हैं. होटल में पहुंच कर समरीन को जब गौसे आलम के इरादे का पता चले तो उस ने साफ इनकार किया. उस ने कहा कि शादी से पहले प्यार की अंतिम चरम सीमा पर नहीं पहुंचना चाहिए. तब गौसे आलम ने कहा, ”प्यार में सब जायज है. शादी तो होगी ही. जब हमें जिंदगी भर साथ ही रहना है तो फिर हम दोनों के बीच में किसी भी तरह की यह दूरी क्यों?’’

इस तरह हमबिस्तरी के पक्ष और विपक्ष में दोनों के बीच काफी चर्चा हुई और अंत में वह सब कुछ हो गया, जो सिर्फ सुहागरात को होना चाहिए था. समय बीतता रहा, समरीन ने महसूस किया कि गौसे आलम पहले की तरह प्यारमोहब्बत के लिए नहीं मिलता है. वह तो सिर्फ अंतिम प्यार का मौका देखता है. बस अपनी हवस मिटा लेता है. जब उसे शक हुआ तो समरीन ने उस से शादी के लिए कहा. शादी की बात सुनते ही गौसे आलम का तो नजरिया बदल गया. वैसे तो इन दोनों के प्यार के किस्से दोनों के फेमिली वालों और रिश्तेदारियों में आम हो चुके थे. समरीन ने उस के फेमिली वालों से भी कहा कि उस की शादी अब जल्द करा दी जाए. उन दोनों के प्यार को अब कई महीने बीत चुके हैं.

चारों तरफ से घिरता देख 25 वर्षीय गौसे आलम अब प्रेमिका समरीन से पीछा छुड़ाने के तरीके सोचने लगा. इस का एक कारण दोनों की जातियों का अलगअलग होना भी था. गौसे आलम की जाति के लोग इस क्षेत्र में अपने आप को उच्च जाति का समझते हैं. जबकि समरीन सलमानी यानी पिछड़ी जाति की थी.

 

‘एक ही सफ में खड़े हो गए महमूद ओ अयाज, न कोई बंदा रहा, न कोई बंदा नवाज.’ यह कहावत यहां शादीविवाह में लागू नहीं होती. खासकर तो तुर्क बिरादरी के लोगों के लड़के तो अपनी बिरादरी में ही शादी करते हैं.

सलमानी बिरादरी के लोग भी जनपद में निवास करते हैं. ये लोग अभी तक अपने पारंपरिक कार्य को अंजाम दे रहे हैं. दूसरों के सिर के बाल, दाढ़ी और मूंछें संभालना इन का पेशा है. इन्हें अभी समानता का दरजा इस क्षेत्र में नहीं मिला है. जाति को ले कर भी गौसे आलम के फेमिली वाले समरीन से शादी करने के लिए राजी नहीं थे. समरीन को ले कर गौसे आलम की चिंता अब बढ़ती जा रही थी. इसलिए उसे लगा कि अब इसे ठिकाने लगा कर ही वह पीछा छुड़ा सकता है.

गौसे आलम को समरीन के व्यवहार से ऐसा लग रहा था कि वह शादी न करने पर उसे कानूनी पेंच में फंसा कर जेल भिजवा सकती है. समरीन पढ़ीलिखी थी. एक नर्स का काम करती है. समाज में अच्छेबुरे सभी तरह के लोगों से उस की डीलिंग अस्पताल में रहती है. इसलिए वह भी बड़ी दिलेरी से शादी  करने  के लिए अड़ी हुई थी. अधिकतर ड्राइवरों के चेहरे पर हमेशा एक मुसकान, लेकिन आंखों में हवस की चमक छिपी होती है. ऐसा ही गौसे आलम था. वह खुद को प्यार का पुजारी कहता, लेकिन सच तो यह थी कि वह हवस का गुलाम था.

छोटेछोटे गांवों और शहरों में उस की कई कहानियां बिखरी पड़ी थीं. लड़कियां जो उस के मीठे व झूठे वादों में फंसतीं और फिर छोड़ दी जातीं. लेकिन समरीन की कहानी अलग थी. यह कहानी प्यार की नहीं, बेवफाई की थी, जो दिल को छलनी कर देती है. इस से पहले कि समरीन नाम की फांस गौसे आलम के लिए नासूर बन जाए, उस ने एक दिन अपने इरादे को अंजाम दे दिया. यह काम गौसे आलम ने इतनी चालाकी और प्लानिंग के साथ किया कि पुलिस के हाथ उस की गरदन तक न पहुंचें. समय बलवान होता है. अपराधी कोई न कोई सबूत छोड़ जाता है. अब तो डिजिटल युग है. कोई न कोई सबूत कहीं न कहीं से मिल ही जाता है. आखिरकार वही हुआ यह सब उस ने कैसे किया? यह घटना बहुत ही दिल दहलाने वाली है.

उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद जिला मुख्यालय से करीब 25 किलोमीटर दूर स्थित है तहसील बिलारी. इसी तहसील का एक गांव रुस्तम नगर सहसपुर है. यह बिलारी से मात्र एक किलोमीटर की दूरी पर है. बिलारी और सहसपुर के बीच की इस दूरी में भी मकान बन रहे हैं. आबादी इतनी तेजी से बढ़ रही है कि कुछ ही सालों में गांव सहसपुर भी बिलारी का एक मोहल्ला जैसा हो जाएगा. रुस्तम नगर सहसपुर तहसील क्षेत्र का सब से बड़ा गांव है. इस को नगर पंचायत बनाने की बात भी चल रही है. इस का प्रस्ताव सरकार को भेजा जा चुका है. इसी गांव के मोहल्ला साहूकारा में रियासत हुसैन का परिवार निवास करता है. नर्स समरीन इन्हीं की बेटी थी. अपने 4 भाईबहनों में वह सब से छोटी थी. इस की बड़ी बहन फरहा की शादी हो चुकी है. जबकि 2 बड़े भाई सुहेल और रिजवान दिल्ली में सैलून पर काम करते हैं. उस की अम्मी शाहिदा परवीन की 10 साल पहले मौत हो चुकी है.

रियासत हुसैन शादीविवाह में कौफी मशीन चलाते हैं. सर्दियों में अधिकांश समारोह में कौफी की व्यवस्था मेहमानों के लिए की जाती है. कौफी का स्टाल लगाने वाले अलग लोग होते हैं. इन का हलवाइयों के स्टाल से कोई मतलब नहीं होता है. एक तरह की मजदूरी का काम है. रियासत हुसैन ने भी एक कौफी मशीन ले रखी है. सर्दियों में अधिकांशत: रात में ही बुकिंग मिलती है. यह अपनी कौफी मशीन ले जा कर अपनी स्टाल सजा कर शादी समारोह में बैठ जाते हैं. दूध और काफी बाकी सामान की व्यवस्था समारोह के आयोजकों द्वारा की जाती है. इन की तो सिर्फ मशीन और खुद की मेहनत होती है.

रियासत हुसैन की बेटी समरीन रामपुर जिले के सेफनी कस्बे में स्थित इनाया हेल्थकेयर क्लीनिक में नर्स का काम करती थी. उस से परिवार को बहुत सारी उम्मीदें थीं. सेफनी जिला रामपुर की तहसील शाहबाद के अंतर्गत एक नगर पंचायत है, यानी सेफनी जिला मुरादाबाद की सीमा से एकदम सटा हुआ है. 22 वर्षीय समरीन 24 अगस्त, 2025 की सुबह 10 बजे रोजाना की तरह घर से नर्सिंग होम जाने की बात कह कर निकली थी, लेकिन देर शाम तक वह वापस नहीं लौटी. रियासत हुसैन ने उस के क्लीनिक पर कौल की तो पता चला कि समरीन क्लीनिक पर आज नहीं पहुंची थी.

यह जानकारी मिलने पर फेमिली वालों के होश उड़ गए. इस के बाद परिजन उस की तलाश में जुट गए. अपने सभी रिश्तेदारों और परिचितों को मोबाइल फोन पर संपर्क कर के समरीन के बारे में पूछा गया, लेकिन कहीं से भी यह जवाब नहीं मिला कि समरीन को उन्होंने कहीं देखा है या उन के घर आई है. तब रियासत हुसैन ने दिल्ली में रह रहे अपने दोनों बेटों को फोन से सूचना दी कि समरीन आज सुबह से लापता है. दोनों बेटे भी रात में ही दिल्ली से घर के लिए रवाना हो गए. सुबह रियासत हुसैन और उन के बेटों ने अपने सभी रिश्तेदारों और परिचितों से राय ली. सब की सहमति के बाद उन्होंने 25 अगस्त, 2025 को बिलारी कोतवाली में उस की गुमशुदगी दर्ज करा दी.

समरीन के मोबाइल की पुलिस ने कौल डिटेल्स निकलवाई तो पता चला कि वह बिलारी से 7 किलोमीटर दूर थाना कुंदरकी क्षेत्र के रहने वाले गौसे आलम नाम के युवक से बात करती थी. पुलिस गौसे आलम की तलाश में जुट गई. गौसे आलम ट्रक ले कर कहीं गया हुआ था. उस की लोकेशन पुलिस लगातार ट्रेस कर रही थी. पुलिस की कई टीमें इस मामले की गुत्थी सुलझाने के लिए लगाई गईं. आखिरकार 30 अगस्त, 2025 दिन शनिवार को गौसे आलम पुलिस के हत्थे चढ़ गया. पुलिस ने उसे हिरासत में ले लिया. चूंकि घटना थाना कुंदरकी क्षेत्र की थी, इसलिए गौसे आलम से कुंदरकी पुलिस ने पूछताछ शुरू की. पहले तो वह पुलिस को गुमराह करता रहा. यह साबित करने की कोशिश करता रहा कि उसे समरीन के बारे में कोई जानकारी नहीं है. वह ट्रक ले कर बाहर गया हुआ था, लेकिन पुलिस द्वारा थोड़ी सख्ती करने पर गौसे आलम टूट गया. उस ने समरीन की हत्या करना कुबूल कर लिया.

इस के बाद गौसे आलम की निशानदेही पर पुलिस ने 30-31 अगस्त की रात को थाना कुंदरकी क्षेत्र के चकफजालपुर गांव के गन्ने के खेत से समरीन का सड़ागला शव बरामद कर लिया. समरीन की लाश मिलने की सूचना पर उस के अब्बू, भाई और रिश्तेदार भी घटनास्थल पर पहुंच गए. घटना की सूचना जंगल की आग की तरह आसपास के गांवों में फैल गई. बड़ी संख्या में लोग घटनास्थल पर जमा हो गए. थाना कुंदरकी के एसएचओ प्रदीप सहरावत मय फोर्स के घटना स्थल पर मौजूद थे. सूचना पर एसपी (देहात) कुंवर आकाश सिंह भी घटनास्थल का मुआयना करने पहुंच गए. गौसे आलम को थाने भेज दिया गया. फोरैंसिक टीम भी वहां पहुंच गई. उस ने मौके पर जांच कर के साक्ष्य जुटाए.

मौके की जरूरी काररवाई पूरी करने के बाद पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए जिला मुख्यालय मुरादाबाद भेज दिया. थाना कुंदरकी के एसएचओ प्रदीप सहरावत की गहन पूछताछ के बाद हत्या का एक दिल दहलाने वाला खुलासा हुआ. समरीन का यह कोई पहला मौका नहीं था, जो उस ने किसी युवक पर भरोसा किया था. पहले भी एक युवक उस की जिंदगी में आया था. उस ने भी उस से कहा था, ”चेहरा क्या है, मैं तुम्हारे दिल से प्यार करता हूं.’’ जब शादी की बात आई तो वही आशिक उस के चेहरे व गले पर स्पष्ट दिखाई देने वाले जलने के निशान देख कर पीछे हट गया.

समरीन ने उस से लाख कहा कि इन दागों के नीचे भी मैं वही लड़की हूं. पर उस युवक और उस के फेमिली वालों ने उसे ‘अधूरी’ कह दिया. इसी तरह गौसे आलम ने उसे स्वीकार नहीं किया तो वह टूट गई. उस ने जिद की कि तुम शादी नहीं करोगे तो मैं खुद को खत्म कर दूंगी. इन बातों का समरीन के प्रेमी पर कोई असर नहीं हुआ. उस के फेमिली वालों ने भी समरीन की विनती को ठुकरा दिया. मामला पुलिस तक भी पहुंचा. मगर नतीजा ढाक के तीन पात ही निकला. मजबूरन समरीन और उस के परिवार को समझौता करना पड़ा.

दरअसल, कुछ साल पहले समरीन ने किसी कलह के चलते खुद को आग लगा दी थी. आग की चपेट में आ जाने से वह काफी झुलस गई थी. उस के चेहरे पर आग से जले हुए निशान अब भी स्पष्ट दिखाई देते थे. उस की गरदन पर भी जले हुए के निशान थे. शरीर के और भी हिस्सों पर निशान थे, जो कपड़ों से दब जाया करते थे. जबकि गरदन और चेहरे के निशान ढकने के लिए वह अकसर हिजाब पहना करती थी. समरीन की जले हुए की घटना की जिन्हें जानकारी नहीं थी, वो यही समझते थे कि बहुत ही मजहबी लड़की है. इसलाम और शरीयत की रोशनी में घर से हिजाब पहन कर ही निकलती है. बाहर के लोगों ने कभी उसे बिना हिजाब के नहीं देखा.

गौसे आलम ने जब पहली मर्तबा समरीन के चेहरे और गरदन के जले हुए निशान देखे थे, तब एकदम उस के चेहरे की रंगत बदल गई थी. वह उदास हो गया था. समरीन उस की हालत देख कर घबरा गई थी. वह रोने लगी थी. कहने लगी कि शायद मेरे चेहरे के निशान देख कर आप मायूस हो रहे हैं. निराश हो रहे हैं. आप मुझ से नहीं मेरे चेहरे से मोहब्बत करते हैं. गौसे आलम ने कहा कि ऐसी बात नहीं है. उस ने एकदम अपने चेहरे की रंगत बदली. चेहरे पर शगुफ्तगी लाने की कोशिश की और कहा कि मैं तुम्हें दिल से चाहता हूं. ऐसा कभी मत सोचना. मैं तुम्हारा जिंदगी भर साथ निभाऊंगा.

कस्बा बिलारी से करीब 7 किलोमीटर दूर बिलारी तहसील का ही एक कस्बा कुंदरकी है. गौसे आलम  कुंदरकी कस्बे से करीब डेढ़ किलोमीटर दूर स्थित चकफाजलपुर गांव का निवासी है. यह 3 भाई और 2 बहनें हैं. गौसे आलम बीच का है. एक बहन की शादी हो चुकी है. एक बहन मानसिक रूप से विकलांग है. गौसे आलम के चेहरे पर मासूमियत और बातों में जादू होता था. गांव में उसे सब ‘आशिक आलम’ कह कर चिढ़ाते थे. असली दुनिया उस की इंस्टाग्राम थी. हर शाम हाथ में मोबाइल आता और फिर शुरू होती उस की औनलाइन मोहब्बत की दुनिया.

गौसे आलम का अंदाज ऐसा कि कोई भी लड़की उस की बातों में जल्दी बहक जाती. सिर्फ दोस्ती के नाम पर शुरू होने वाली बातें धीरेधीरे रोमांस में बदल जातीं. शेर ओ शायरी लिखता और हर चैट के अंत में दिल का इमोजी डाल देता. वह कई लड़कियों से चैट करता था. हर किसी से वही बातें ‘तुम बहुत अलग हो’, ‘काश तुम मेरे शहर में होतीं’, ‘तुम्हारी मुसकान दिल में उतर जाती है’.

उस के चेहरे पर एक ऐसी मासूमियत थी, जो किसी भी इंसान के दिल में भरोसा जगा दे. बड़ीबड़ी आंखों में अजीब सी शांति थी, जैसे उस में कभी तूफान उठा ही न हो. चेहरे की वो हलकी मुसकान, मानो किसी दर्द को छिपाने का हुनर हो. कोई पहली नजर में उसे देखे तो कहेगा ‘इतना सादा, इतना खूबसूरत चेहरा कैसे किसी का खून कर सकता है?’ लेकिन वही चेहरा था, जिस ने मोहब्बत की आड़ में मौत की कहानी लिखी थी.

एक दिन गलती से उस ने सना को वही मैसेज भेज दिया जो किसी और को भेजना था. ‘कह दो न, तुम भी मुझ से प्यार करती हो, शाइस्ता?’

मैसेज पड़ कर सना चौंक गई, ”शाइस्ता..? मैं तो सना हूं!’’

गौसे आलम की पोल खुल गई. उस दिन के बाद सना ने उसे ब्लौक कर दिया, उस के बाद से गौसे आलम ने बड़ी ऐहतियात बरतनी शुरू कर दी. इस तरह समरीन उस के प्यार के जाल में तो फंस गई, लेकिन बाद में गले की हड्ïडी भी बन गई. गौसे आलम ने यह एहसास समरीन को होने नहीं दिया. हमेशा की तरह उस ने समरीन को फोन कर के कहा कि बह बिलारी के महाराणा प्रताप चौक पर आ जाए. गौसे आलम बाइक ले कर वहीं खड़ा था. बिलारी का यह वही स्थान था, जहां से अकसर गौसे आलम अपनी बाइक पर बैठा कर समरीन को ले जाया करता था.

उस समय सुबह के लगभग 10 बजे थे. यही वह समय था, जब समरीन अपनी ड्यूटी करने जाया करती थी. अपने गांव रुस्तम नगर सहसपुर से समरीन बैटरी रिक्शा में बैठ कर आई थी. बैटरी रिक्शा से उतर कर समरीन गौसे आलम की बाइक पर बैठ गई और दोनों मौजमस्ती करने मुरादाबाद चले गए. गौसे आलम ने वादा किया था कि आज घर वालों से मिल कर शादी की बात करेंगे और जल्दी ही तारीख भी तय कर लेंगे. समरीन भी चाहती थी कि फेमिली वालों की मंजूरी व सामाजिक नियमकानून के अनुसार शादी होगी तो समाज में दोनों के फेमिली वालों की इज्जत बनी रहेगी.

गौसे आलम की योजना के अनुसार रास्ते में एक निश्चित स्थान पर उस का दोस्त मिल गया, जो जवानी की दहलीज पर कदम रखने  वाला था, लेकिन अभी नाबालिग था. गौसे आलम ने अपने मित्र से ऐसे अनजान बन कर बात की जैसे पहले से कोई प्लानिंग न हो. समरीन ने पूछा कौन है तो उस ने बताया कि यह मेरा कजिन है. उसे भी बाइक पर बैठा लिया. अपने गांव चकफाजलपुर और रूपपुर के बीच रेलवे ट्रैक के पास बाइक रोकी. उस की आंखों में वही मोहब्बत थी, वही भरोसा, जो समरीन को इस जंगल तक लाया था.

अभी तक समरीन को गौसे आलम पर किसी तरह का कोई शक नहीं था. वो नहीं जानती थी कि उसी के साथ में उस का कातिल भी है. गौसे आलम के मन में कुछ और ही तूफान उमड़ रहा था. विश्वास की नींव पर खड़ी उन की कहानी, अब धोखे की चट्टानों से टकराने वाली थी. समरीन बाइक से नीचे उतर गई. गौसे आलम ने मुसकरा कर उस की ओर देखा. वह उसे यहां लाया था, प्रेम की मिठास का वादा कर के.

नीचे उतर कर समरीन ने पूछा, ”क्या हुआ?’’

गौसे आलम ने कहा, ”कुछ नहीं, बस हलका होना है.’’

इस से पहले कि समरीन कुछ समझ पाती गौसे आलम ने उसे वहीं गिरा लिया. उस के साथी ने दबोच लिया. फिर उन्होंने उस की हत्या कर दी. उस की चीख सुनने वाला भी वहां कोई नहीं था. दोनों ने लाश को उठा कर गन्ने के खेत में डाल दिया. प्यार के वादों से शुरू हुई कहानी, उस शाम विश्वासघात की आग में जल कर राख हो गई. गौसे आलम की दास्तान सुन कर पुलिस भी दंग रह गई. पुलिस ने दोनों को अदालत में पेश किया. अदालत ने गौसे आलम को जेल भेज दिया और उस के नाबालिग दोस्त को बाल सुधार गृह के हवाले कर दिया.

पुलिस ने घटना में इस्तेमाल की गई बाइक भी बरामद कर ली. समरीन के मोबाइल को गौसे आलम ने तोड़ कर फेंक दिया था, जो कहानी लिखने तक पुलिस बरामद नहीं कर सकी. Love Story in Hindi

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MP News: बेटी के स्केच में छिपा मां की हत्या का राज

MP News: सोनाली बुधौलिया की मौत को पुलिस भी आत्महत्या ही मान रही थी, लेकिन उस की 5 वर्षीय बेटी रिंकी ने अपनी आंखों देखी का एक स्केच बनाया तो पुलिस समझ गई कि यह मामला कुछ गंभीर है. स्केच के आधार पर पुलिस ने मृतका के पति संदीप बुधौलिया से पूछताछ की तो उस ने पत्नी की हत्या का ऐसा राज खोला कि…

मध्य प्रदेश के जिला निवाड़ी के गांव लिधौरा निवासी संजीव त्रिपाठी की बेटी सोनाली त्रिपाठी 14 फरवरी को अपनी 5 साल की बेटी के साथ ममेरे भाई की शादी में गई हुई थी. उस की ससुराल उत्तर प्रदेश में स्थित झांसी के शिव परिवार कालोनी में थी. पति संदीप बुधौलिया विवाह में शामिल नहीं हो पाया था. हालांकि वह बारात के दिन आने वाला था. परिवार के लोग सभी रिश्तेदार शादी के माहौल का आनंद ले रहे थे. वे एकदूसरे से मिलतेजुलते हुए अपनीअपनी बातें कर रहे थे. कइयों का तो पहली बार मिलनाजुलना हुआ था तो कुछ रिश्तेदारों ने सोनाली की बेटी रिंकी को पहली बार देखा था. वे उस की चंचलता, मासूमियत, सुंदरता और बातूनी व्यवहार से बहुत प्रभावित हो रहे थे.

रिंकी की एक और आदत लोगों की निगाह में बसी हुई थी. असल में कहीं से उसे रंगीन पेंसिलों का पैकेट हाथ लग गया था. वह उसी से दीवारों पर जहांतहां आड़ीतिरछी रेखाएं खींच कर कुछ रेखाचित्र बनाती रहती थी. उन रेखांकनों के बारे में जब कोई पूछता कि यह किन की हैं? तब वह चंचलता के साथ बताती कि ये नाना की हैं, ये नानी की हैं. ये हलवाई की है. ये मौसी की है. वगैरहवगैरह. उस की बातें सुन कर लोग और भी हैरान हो जाते और उन रेखाचित्रों से परिवार में मौजूद लोगों को जोडऩे लगते. फिर कहते थे, ”मेरी भी एक फोटो बना दो.’’

इस पर मचलती हुई वह कहती, ‘ऐसे नहीं, पहले मेरे सामने कोई काम करो… या फिर डांस करो.’

वह शादी के माहौल में लोगों का अलग तरह से दिल बहला रही थी. सभी का  मनोरंजन हो रहा था. बदले में लोग उसे भी प्यार से खानेपीने की चीजें दे रहे थे. उस की मांगें तुरंत पूरी कर देते थे. सब कुछ ठीक चल रहा था. सोनाली भी अपनी बेटी रिंकी को खुश देख कर काफी संतुष्ट थी. उस ने रिंकी को इस तरह चहकतेफुदकते अपनी ससुराल में शायद ही कभी देखा था. वहां उसे लोग अकसर डांटतेडपटते रहते थे, जबकि उसे यहां काफी दुलारप्यार मिल रहा था. वह सोचने लगी थी कि कितना अच्छा होता, जो उसे ऐसी और शादियों में जाने का मौका मिले.

 

रात को सोते समय रिंकी को मिल रहे लोगों के प्यार के बारे में काफी देर तक सोचती रही थी. अगले रोज 16 फरवरी, 2025 को उस की आंखें मोबाइल की घंटी से खुलीं. रिंकी ही मोबाइल हाथ में लिए उस के पास खड़ी थी. वह बोली, ”मम्मीमम्मी, पापा का फोन आ रहा है.’’

”ला देखती हूं…सुबहसुबह क्यों फोन किए, आज तो यहां आना था उन को.’’ बोलती हुई सोनाली ने अपने पति का फोन रिसीव कर लिया.

मुश्किल से 15-20 सेकेंड ही बात हुई. पति संदीप बुधौलिया का फोन सुन कर वह कुछ पल के लिए स्तब्ध रह गई. फोन कट किया और एक ओर रख दिया. वह एकदम से शांत हो गई और अपना सिर ऊपर उठा लिया.

”क्या हुआ मम्मी, पापा ने फोन पर डांटा क्या?’’ रिंकी मासूमियत से बोली.

”अरे नहीं रे!’’ सोनाली बोली और अपनी दोनों हथेलियों से उस के चेहरे पर आ गए बालों को हटाने लगी.

”क्या बोले पापा! मेरे बारे में कुछ बोले?’’ रिंकी फिर बोली.

”तुम्हारे कपड़े कहांकहां हैं, सब इकट्ठा करो, हमें आज यहां से जाना होगा.’’

”क्यों मम्मी? हमें मामा की बारात में जाना है.’’

”कहीं नहीं जाना है. हमें इसी वक्त अपने घर जाना है. वहां तेरी चाची की तबियत खराब है, पापा ने तुरंत आने को कहा है.’’

”मम्मी!’’ रिंकी ठुनकती हुई बोली और मायूस हो गई.

सोनाली अपना सामान समेटने लगी. सोनाली की मम्मी ने उसे कपड़े समेटते देखा तो वह चाह कर भी कुछ नहीं बोली, क्योंकि तबियत खराब की खबर पा कर उस का ससुराल जाना भी जरूरी था. मामामामी सभी स्तब्ध थे. सभी उसे कैसे रुकने के लिए कहते. सोनाली ने अपनी बेटी को गोद में उठाया और दूसरे हाथ से ट्रौली बैग खींचती हुई अपने मामा के घर से विदा हो गई. शाम होने से पहले वह अपनी ससुराल पहुंच गई थी. वहां एकदम शांति का माहौल था. उस वक्त पति भी घर पर नहीं था. परिवार में लोगों से हालचाल पूछा. बीमारी के बारे में पूछा. सभी ने कहा, ”यहां तो कोई बीमार नहीं है!’’

सोनाली को समझने में देर नहीं हुई. वह गुमसुम अपने बैडरूम में गई और औंधे मुंह गिर कर रोने लगी. पीछेपीछे रिंकी भी आ गई. बोली, ”क्या हुआ मम्मी? पापा कहां हैं?’’

रिंकी की मासूमियत भरी बातें सुन कर वह बैड पर उठ बैठी. उसे बांहों में भर लिया. सुबकती हुई बोली, ”कुछ नहीं, मेरी बच्ची! यहां कोई बीमार नहीं है. हमें बहाने से बुलाया गया है.’’

सोनाली उसे मामा के घर से ले कर आई कुछ मिठाई और नमकीन रिंकी को खाने के लिए दी. रिंकी का मन खाने को नहीं हुआ. वह बैड पर चली गई. कब उसे नींद आ गई, सोनाली को भी नहीं पता चला. सोनाली उदास मन से घर में बिखरी चीजों को सहजने लगी. इस बीच उस की पति से फोन पर बात हो गई. उस की पसंद का खाना पकाने के बाद अपने कमरे में चली गई. सो रही रिंकी के सिर को सहलाया और उस की बगल में बैठ गई. रात को संदीप देर से आया. आते ही सोनाली बिफर पड़ी. गुस्से में बहाने से बुलाने का कारण पूछा. उस का गुस्सा देख कर संदीप भी उसी लहजे में बातें करने लगा. डपटते हुए उस पर ही मनमरजी करने का आरोप मढ़ दिया.

सोनाली ने जब घरपरिवार और समाज का हवाला दिया तो संदीप और भी आक्रोश से भर गया. मांबाप और मायके वालों पर अधिक ध्यान देने का आरोप लगा दिया. गुस्से में सोनाली भी जवाबी आरोप लगाते हुई बोली कि वह अपनी बेटी पर ध्यान नहीं देता है. बेटी की बात आते ही संदीप बोला, ”तुम्हारा बाप कौन अपनी बेटीदामाद पर ध्यान दे रहा है? 2 साल हो गए गाड़ी देने के वादे से मुकर गया.’’

”जो दहेज में 20 लाख मिले, वह कम था क्या?’’

”मैं उतने के काबिल हूं?’’

”तो करोड़पति खानदान के हो? तुम ने तो मेरे पिता को धोखा दिया. बताया डाक्टरी पढ़ रहे हो. जब यहां आई, तब पता लगा कि दवाई बेचने का काम करते हो.’’

सोनाली का जवाबी हमला सुनते ही संदीप आगबबूला हो गया. उस ने गुस्से में उस पर हाथ उठा लिया. सोनाली उस का हाथ पकड़ती हुई बोली, ”खबरदार! जरा भी कुछ हुआ तो मैं अभी थाने चली जाऊंगी. भूल जाऊंगी कि तुम मेरे पति हो.’’

दोनों के बीच जबरदस्त तूतूमैंमैं होने लगी. उन की तेज आवाज से रिंकी की अचानक आंखें खुल गईं. बोली,”क्या हुआ मम्मी? पापा आ गए?’’

”कुछ नहीं रिंकी, सो जाओ.’’ सोनाली प्यार से बोली.

जबकि संदीप डपटता हुआ बोला, ”चुपचाप सोई रह, वरना एक झापड़ दूंगा!’’

डांट सुन कर रिंकी कंबल में दुबक गई. मम्मीपापा की बातें साफ सुनाई दे रही थीं. कंबल के भीतर से ही झांक कर मालूम करने की कोशिश करने लगी कि बाहर क्या हो रहा है.

…लेकिन यह क्या? कमरे में उस के मम्मीपापा के बीच जबरदस्त लड़ाई हो रही थी. उस के पापा ने मम्मी के दोनों हाथ पीछे की ओर पकड़ रखे थे. मम्मी हाथ छुड़ाने की कोशिश कर रही थी. कुछ पल में ही पापा का एक हाथ मम्मी की गरदन पर था. वह एक हाथ से मम्मी के दोनों हाथ पकड़े हुए थे और दूसरे हाथ से गरदन दबाए जा रहे थे. मम्मी बचने की कोशिश कर रही थी, लेकिन वह कमजोर बनती जा रही थी. उस की आवाज भी कम होने लगी थी. वह औंधे मुंह बैड पर गिर गई. पापा उस की पीठ पर जम कर बैठ गए और दोनों हाथों से मम्मी का गला दबाते रहे. मम्मी छटपटाती रही. कुछ समय में ही छटपटाहट बंद हो गई. पापा वहां से उठ कर कमरे से बाहर चले गए.

रिंकी यह सब देख कर सहम गई थी. वह समझ नहीं पा रही थी कि मम्मी को क्या हुआ? वह डर से मम्मी को आवाज भी नहीं दे पा रही थी. रिंकी ने देखा कि थोड़ी देर में उस के पापा एक रस्सी ले कर कमरे में आए. पापा को कमरे में आया देख कर उस ने कंबल में खुद को छिपा लिया. डर गई कि कहीं वह उस की पिटाई न कर दें. उस ने महसूस किया कि बैड पर कुछ हलचल हो रही है, लेकिन क्या हो रहा है, देखने की हिम्मत नहीं हुई. जब हलचल शांत हो गई, तब रिंकी ने डरते हुए कंबल के भीतर से झांक कर देखने लगी. बैड पर कोई नहीं था. सोचने लगी कि मम्मी कहां गई? पापा भी नहीं नजर आए, वह कहां गए?

यह जानने की जिज्ञासा में उस ने कंबल से अपना चेहरा निकाला. उस ने चारों ओर अपनी नजर दौड़ाई. जैसे ही रिंकी की नजर ऊपर की ओर गई, उस की चीख निकल गई. उठ बैठी. अपने दोनों हाथों से मुंह ढंक लिया. उस की मम्मी कमरे में पंखे से झूल रही थी. वहां उस के अलावा और कोई नहीं था. अगले रोज 17 फरवरी, 2025 को संदीप ने अपनी ससुराल में फोन कर सूचना दी कि सोनाली ने बीती रात फांसी लगा ली है. सोनाली के फेमिली वाले भागेभागे मौके पर पहुंचे. रोतीबिलखती बच्ची रिंकी को संभाला. वह अपने नानानानी की गोद में दुबक गई. धीमी आवाज में बोली, ”पापा ने मम्मी को मार दिया है.’’

यह सुनते ही उन के कान खड़े हो गए. उन्होंने शहर कोतवाली पुलिस को यह बात बताई. पुलिस को यह सुन कर हैरानी हुई. वह जिसे आत्महत्या समझ रही थी, उस की हत्या की बात सामने आने पर रिंकी से पूछताछ की गई. उस के बाद रिंकी ने अपनी कौपी और पेंसिल मंगवाई. उस ने आड़ीतिरछी लकीरें खींच कर एक रेखांकन बना दिया. पहली नजर में उस में कोई खास बात का अनुमान नहीं लगा, किंतु सरसरी निगाह से देखने पर वह अलग तरह की लगी. रेखांकन में रिंकी ने अपनी मम्मी के दोनों हाथ बराबर बनाए. लेकिन मम्मी की गरदन की दाईं तरफ उस ने एक और हाथ बनाया. इस तीसरे हाथ के साथ कोई चेहरा नहीं था. रिंकी ने बताया कि तीसरा हाथ उस के पापा का है. उस हाथ को उस ने मम्मी की गरदन के काफी करीब से बनाया.

इस रेखांकन को बनाने के बाद रिंकी ने वारदात की पूरी बातें बता दीं. इस जानकारी के बाद सोनाली के शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया. मौके पर पहुंची पुलिस ने हंगामा कर रहे लोगों को शांत कराया और एकमात्र चश्मदीद गवाह रिंकी के बयान के आधार पर आरोपी पति संदीप बुधौलिया, मां विनीता, भाई कृष्णकांत और उस की पत्नी मनीषा के खिलाफ केस दर्ज करने के बाद आरोपी पति को हिरासत में ले कर आगे की काररवाई शुरू कर दी है. पोस्टमार्टम रिपोर्ट से स्पष्ट हो गया कि सोनाली की मौत गला घोंट कर की गई थी. मध्य प्रदेश के टीकमगढ़ निवासी मृत महिला सोनाली के पिता संजीव त्रिपाठी ने पुलिस को बताया कि उन्होंने वर्ष 2019 में अपनी बेटी की शादी झांसी के शिव परिवार कालोनी में संदीप बुधौलिया से की थी.

संदीप मैडिकल रिप्रेजेंटेटिव है. शादी के बाद से ही दामाद और उस के फेमिली वाले बेटी को प्रताडि़त करने लगे थे. सोनाली ने 5 साल पहले बेटी (रिंकी) को जन्म दिया था. तभी उस को ताने मारने के साथ अस्पताल में अकेला छोड़ कर भाग गए थे, जिस पर वह बेटी को अपने साथ घर ले गए. करीब एक साल बाद ससुराल वाले सोनाली को साथ ले गए और फिर उत्पीडऩ करने लगे, जिस पर बेटी ने मुकदमा दर्ज कराया था. हालांकि घटना के 6 माह पहले ही समझौता हो गया था. सोनाली के मामा के बेटे की शादी थी. सोनाली अपनी मासूम बेटी रिंकी को ले कर 12 फरवरी को शादी में गई थी. शादी कार्यक्रम के दौरान ही पति ने फोन कर उसे घर बुला लिया था. तब उस ने कहा था, ‘अभी नहीं आई, तब कभी मत आना.’

सोनाली की ससुराल से 17 फरवरी की सुबहसुबह फोन आया कि सोनाली की तबीयत खराब है. फिर फोन आया कि उस ने फांसी लगा ली. वे मैडिकल कालेज पहुंचे. वहां नातिन (रिंकी) ने बताया कि पापा ने मम्मी को मारा और फिर गला दबा दिया. इस पूरे मामले की तहकीकात करने वाले सीओ (सिटी) रामवीर सिंह ने मुकदमा दर्ज कर मामले की जांच शुरू कर दी. पतिपत्नी के बीच चल रहे विवाद के बारे में सोनाली के पिता संजीव त्रिपाठी ने बताया कि 2 साल तक पतिपत्नी का विवाद चलता रहा. कोर्ट से राजीनामा कर उन की बेटी को घर ले गए. उस के बाद पूरी प्लानिंग के साथ उन की बेटी को बीती रात फांसी के फंदे पर लटका दिया और मौत के बाद मैडिकल कालेज में भरती कर दिया.

जैसे ही मायके वाले पहुंचे तो उन्हें देख कर ससुराल वाले भाग गए. इस के बाद मृतका के परिजनों ने मैडिकल कालेज में ही हंगामा किया. उन्होंने कहा कि पहले बेटी की मारपीट की, फिर फांसी लगाई गई है, उस के चेहरे और पैर पर चोट के निशान दिखाई दे रहे थे. कथा लिखे जाने तक आरोपी संदीप बुधौलिया न्यायिक हिरासत में था. पुलिस द्वारा सुलझाया गया यह अनोखा केस था, जिसे में एक 5 साल की बच्ची के रेखांकन के आधार पर मामला जल्द सुलझा लिया गया था. सोनाली का पोस्टमार्टम होने के बाद अंतिम संस्कार में उस की बेटी ने ही मुखाग्नि दी थी. MP News

—कथा में रिंकी परिवर्तित नाम है

 

 

Love Story in Hindi: औनलाइन इश्क जरा सोचसमझ के

Love Story in Hindi: पांचवीं पास मसजिद का इमाम और 3 बच्चों का बाप शहजाद बहुत चालबाज था. उस ने उच्चशिक्षित असमिया युवती नईमा यासमीन से औनलाइन दोस्ती कर उसे न सिर्फ फरेबी इश्क के जाल में फांसा, बल्कि उस से औनलाइन निकाह भी कर लिया. एक दिन नईमा ने जब अपना मुंह खोला तो उसे ऐसी सजा दी गई कि…

असम की रहने वाली नईमा यासमीन पिछले 2 दिनों से नोएडा के वन बीएचके फ्लैट में उदास बैठी थी. उस की उदासी के कई कारण थे. उस ने मोबाइल से बैंक बैलेंस चैक किया था, जो जीरो पर आ गया था. कहीं भी कोई सेविंग्स नहीं बची थी. सारे पैसे खत्म हो गए थे. उसे अपना मेट्रो कार्ड रिचार्ज करवाने के लिए पैसे की जरूरत थी. मोबाइल का रिचार्ज भी 2 दिनों में खत्म होने वाला था. इस बारे में अपनी बहन को बताए भी काफी समय बीत चुका था. उस से कुछ पैसे अकाउंट में ट्रांसफर करने की उस ने मदद मांगी थी. यह बात सितंबर महीने की 16 तारीख दोपहर की है.

उसे जल्द ही कोई दूसरी नौकरी तलाशनी थी. दिल्ली के एनसीआर गुरुग्राम की नौकरी छोड़े 2 हफ्ते हो गए थे. वह कई दूसरी कंपनियों में अपना रिज्यूम दे चुकी थी, लेकिन कहीं से बुलावे का मेल नहीं आया था. वह पिछले साल 2024 में शादी के बाद गुरुग्राम के पीजी से शिफ्ट हो कर नोएडा में अपने पति शहजाद के साथ रह रही थी. कई बातें दिमाग में उमड़घुमड़ रही थीं. तभी कौल बेल बजने पर उस का ध्यान भंग हो गया. वह बेमन से दरवाजा खोलने के लिए उठ रही थी. तब तक 2-3 बार कौल बेल बज चुकी थी.

दरवाजे की कुंडी खोल कर अपने कमरे में जाने को मुड़ी ही थी कि पीछे से प्यार भरी आवाज आई, ”क्या बात है बेगम साहिबा!  पूछे बगैर कुंडी खोल दी! दरवाजे पर कोई और होता तो..? ऐसी भूल मत किया करो.’’

यह उस के पति शहजाद की आवाज थी, जिस का नईमा ने कोई जवाब नहीं दिया था और कमरे में चली गई थी. पीछेपीछे शहजाद भी आ गया. उस ने पूछा, ”नौकरी का कहीं से बुलावा आया?’’

”अभी नहीं,’’ नईमा उदासी से बोली.

”कोई बात नहीं, चलो जब तक कहीं से कोई बुलावा नहीं आता, तब तक तुम्हें सैर करवाने ले चलता हूं.’’ शहजाद बोला.

”मैं टेंशन में हूं और तुम्हें सैर की सूझ रही है.’’

”थोड़ा घूमोगी तभी तो तुम्हारा मन हलका होगा. आज नहीं तो कल नौकरी मिल ही जाएगी, चिंता क्यों करती हो?’’ शहजाद बोला.

नईमा को पति के बदले रूप पर हैरानी हुई. कुछ देर पहले वह उस से काफी झगड़ कर निकला था. फिर अचानक उस से प्यार जताने लगा, सैर पर जाने के लिए कह रहा है. वह बोली, ”पैसे कहां हैं?’’

”इस की चिंता मत करो…’’ शहजाद के आगे कुछ बोलने से पहले ही पास रखे नईमा के मोबाइल पर मैसेज आने की टोन सुनाई दी. वह यूपीआई द्वारा पैसे आने का मैसेज था.

टोन सुन कर शहजाद फोन की तरफ देखने लगा. वह बोला, ”यह लो, पैसे भी आ गए!’’

”नहींनहीं! इस पर नजर मत डालो. बड़ी मिन्नतों के बाद दीदी ने पैसे भेजे हैं. मेट्रो कार्ड और फोन रिचार्ज करवाना है.’’ नईमा तुनकती हुई बोली और पैसा ट्रांसफर का मैसेज पढऩे लगी.

उस में शहजाद भी झांकने लगा. अंगरेजी में लिखा मैसेज आसानी से नहीं समझ पाया. बैलेंस अमाउंट देखने से पहले ही नईमा ने मोबाइल बंद कर दिया.

”ठीक है मत बताओ, मेरी जेब में पैसे हैं. यह देखो.’’ कहते हुए शहजाद ने जेब से 500 रुपए के नोटों की एक गड्डी निकाल कर दिखा दी.

”इस में पूरे 30 हजार रुपए हैं. चलो, तुम्हें मेरठ घुमा लाता हूं. वहीं कुछ शौपिंग भी करवा दूंगा. बचे पैसे तुम रख लेना.’’

”इतने पैसे कहां से आए. अभी तो तुम्हारे पास एक रुपया नहीं था…सचसच बताना किस से कर्ज लिया है?’’ नईमा बोली.

”तुम बेकार की बातों में मत उलझो. तैयार हो जाओ, हमें जल्दी निकलना है.’’ शहजाद बोला और अपना सामान पैक करने के लिए बैग निकाल लिया.

नईमा शहजाद के इस रूप को देख कर हैरान थी. बातबात पर गालियां बकने और हाथ उठाने वाले में यह बदलाव कैसे आ गया. इस पर अधिक बात न करना ही उस ने मुनासिब समझा. उस की दिली तमन्ना को पूरा करने के लिए वह भी उस के साथ चलने की तैयारी करने लगी.

कुछ घंटे बाद शहजाद और नईम मेरठ के भीड़भाड़ वाले बाजार में थे. वहीं दोनों ने कुछ शौपिंग की. नईमा ने झिझकते हुए अपनी पसंद की एक ड्रैस ली, लेकिन नईम ने उस के लिए एक बुरका भी खरीद लिया. फिर दोनों ने एक साधारण से रेस्टोरेंट में खाना खाया.

वहीं शहजाद की मुलाकात नदीम से हुई. उस का परिचय नईमा से करवाया, ”यह मेरा खास दोस्त है. मुसीबत में मेरा साथ देता है.’’

”अच्छा!’’ नईमा इस से अधिक और कुछ नहीं बोली.

शहजाद उसे रेस्टोरेंट के बाहर तक छोड़ आया.

तब तक शाम घिरने लगी थी. नईम वापस दिल्ली लौटने को बोली. इस पर शहजाद ने अगले रोज लौटने के बारे में बोल कर अपने दोस्त नदीम घर ठहरने का आग्रह किया.

नईमा थकान महसूस कर रही थी. शहजाद के आग्रह को मान लिया. दोनों नदीम के घर की ओर चल पड़े. रास्ते में एक जूस की दुकान दिखी. शहजाद बोला, ”क्यों न एकएक गिलास जूस पी लिया जाए! जूस की यह बहुत फेमस दुकान है. तुम्हारे लिए कौन सा जूस बनवाऊं?’’

”अनार का बनवा लो,’’ वह बोली.

”ठीक है, मैं तो अनानास का लूंगा!’’ शहजाद बोला और जूस की दुकान की ओर चल पड़ा. नईमा थोड़ी दूरी पर खड़ी रही. कुछ मिनटों में ही शहजाद 2 गिलास जूस ले कर नईमा के पास आ गया. दोनों ने अपनीअपनी पसंद का जूस पीया और फिर वहां से चल पड़े. अगले रोज 17 सितंबर, 2025 को मेरठ में जानी थाने की पुलिस को सिवालखास जंगली इलाके में एक महिला की रक्तरंजित लाश मिली. लाश बुरके में थी. पुलिस लावारिस लाश की पहचान के लिए तहकीकात में जुट गई. महिला का गला रेता हुआ था.

इस की स्थिति देख कर पहली नजर में पुलिस ने अनुमान लगाया कि महिला की मौत गला रेतने से हुई होगी. किंतु हो सकता है उस की मौत के और भी कुछ कारण रहे हों. हो सकता है उस का गला घोंटा गया हो या फिर उसे जहर खिलाने के बाद मृत देह का गला रेता गया हो. कारण जो भी हो, वो तो पोस्टमार्टम के बाद ही पता चल सकेगा.  शक्ल और कदकाठी से महिला उत्तर पूर्व की लग रही थी, जिस की उम्र लगभग 35-36 साल थी.

मौत के कारण की जांच के लिए लाश को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया. उस की रिपोर्ट में गला रेतने से मौत की पुष्टि हुई. किंतु उस की हफ्तों तक पहचान नहीं हो पाई. पुलिस को कोई सुराग भी हाथ नहीं लग रहा था. मेरठ की पुलिस तफ्तीश में जुटी हुई थी.

अचानक 8 अक्तूबर, 2025 को मेरठ पुलिस को एक गुमशुदा की रिपोर्ट पर ध्यान गया. दरअसल, वह रिपोर्ट मुजफ्फरनगर के चरथावल थाने में दर्ज की गई थी. करीब 35 वर्षीया नईमा यासमीन नामक महिला के बारे में बताया गया था कि वह 16 सितंबर से लापता है. गुमशुदमी दर्ज होते ही नईमा यासमीन का फोटो और पूरी डिटेल्स पुलिस के औनलाइन रिकौर्ड पर फीड हो गई. मेरठ पुलिस की नजर जब इस पर गई, तब वह चौंक गई. कारण गुमशुदा महिला की तसवीर 17 सितंबर को बरामद हुई लाश से मिलतीजुलती थी.

मेरठ पुलिस को गुमशुदा की रिपोर्ट से ही शिकायत दर्ज करवाने वाले के बारे में मालूम हो गया. वह पहले चरथावल थाने गई. वहां से रिपोर्ट दर्ज करवाने वाले का पूरा विवरण ले लिया, जो उस लापता महिला नई यासमीन का पति शहजाद है. उस के ग्राम सैद नगला मुजफ्फरनगर का रहने की पुष्टि हुई. मेरठ पुलिस तुरंत शहजाद के घर गई. पुलिस को देखते ही शहजाद घबरा गया. उस की बौडी लैंग्वेज से पुलिस समझ गई कि जरूर दाल में कुछ काला है. पुलिस ने उसे उस की लापता पत्नी की लाश मिलने की जानकारी दी.

यह सुन कर शहजाद घडिय़ाली आंसू बहाने लगा. फिर पुलिस उसे पूछताछ के लिए थाने ले गई. थाने में उस से यासमीन की हत्या के संबंध में पूछताछ की तो शहजाद पुलिस के सवालों के सही जवाब देने से कतराता रहा, किंतु जब पुलिस ने सख्त रुख अख्तियार किया, तब  उस ने नईम की हत्या करना कुबूल कर लिया. उस ने यह भी बताया कि इस वारदात को अंजाम देने में उस ने अपने साथी नदीम अंसारी की मदद ली थी. दोनों ने मिल कर यासमीन की हत्या की थी. इस से पहले उस ने यासमीन को जूस में नींद की गोलियां मिला कर दी थीं. उस के बेहोश हो जाने के बाद दोनों उसे घटनास्थल तक ले गए थे.

हत्या के बाद किसी को शक नहीं हो, इसलिए उस ने गुमशुदगी की रिपोर्ट थाना चरथावल में दर्ज करवाई थी. यह उस तक पुलिस के पहुंचने का कारण बन गया. जांचपड़ताल के बाद जानी थाने की पुलिस ने शहजाद और नदीम को गिरफ्तार कर वारदात का खुलासा कर दिया. पुलिस ने उस की निशानदेही पर हत्या में प्रयुक्त छुरी व रस्सी भी बरामद कर ली. इस खुलासे पर एसएसपी डा. विपिन ताडा ने पुलिस टीम को 25 हजार रुपए का इनाम दे कर पुरस्कृत किया. शहजाद ने नईम की हत्या करने का जो कारण बताया, इस में उस की मक्कारी, हैवानियत, अपनी पहली बीवी और इसलाम धर्म तक के साथ बेवफाई की हैरान करने वाली दर्दनाक दास्तान थी.

हत्या की शिकार होने वाली नईमा यासमीन और शहजाद एक बेमेल जोड़ा था. उन के बीच कुछ समय के लिए वैचारिक तालमेल बन गए थे और यही उन के बीच प्रेम संबंध और निकाह का कारण भी था. नईम यासमीन जितनी सच्ची और प्रतिभावान और पढ़ीलिखी थी, शहजाद उतना ही उस के उलट था. असम के शहर गुवाहाटी की रहने वाली नईमा ग्रैजुएट थी और दिल्ली एनसीआर में स्थित मल्टीनैशनल कंपनी में नौकरी करती थी. दूसरी तरफ 5वीं तक पढ़ाई करने वाला शहजाद मेरठ की एक मसजिद में इमाम की छोटी से नौकरी करता है. वह शादीशुदा है और 3 बच्चों का बाप भी था. वह सोशल मीडिया का दीवाना था.

साल 2024 में उस की नईमा से औनलाइन जानपहचान हो गई थी. नईमा एनिमल वेलफेयर एनजीओ से भी जुड़ी थी. जानवरों से उसे बेहद लगाव था. साथ ही उस के पास 5-6 बिल्लियां भी थीं. इसी एनजीओ के जरिए साल 2024 में उस की मुलाकात शहजाद से हुई थी. सोशल मीडिया के जरिए दोनों के बीच बातचीत शुरू हुई और फिर धीरेधीरे दोस्ती आगे बढ़ी. शहजाद ने खुद को दिल्ली विश्वविद्यालय (डीयू) का ग्रैजुएट और कारोबारी बता कर नईमा का दिल जीत लिया था. साथ ही उस ने कहा था कि उसे भी बिल्लियों से बहुत प्यार है. उस ने नईमा से वही बातें कीं, जो उसे पसंद थीं.

कैट लवर बन कर शहजाद ने धीरेधीरे नईमा का भरोसा जीत लिया था और फिर प्यार का सिलसिला शुरू हो गया था. सितंबर 2024 में दोनों ने औनलाइन निकाह भी कर लिया. निकाह के बाद दोनों दिल्ली में साथ रहने लगे, जिस की जानकारी नईमा की बहन को भी थी. नईमा खुश थी और अपने नए जीवन की बातें सिर्फ अपनी बहन के साथ साझा करती थी. निकाह के करीब 3 महीने बाद शहजाद ने नईमा से मुजफ्फरनगर में स्थित अपना पुश्तैनी घर दिखाने के लिए कहा. उस के कहने पर नईमा मुजफ्फरनगर पति के घर पहुंची. वहां उस के सपने टूट गए. खुद को बिजनैसमैन बताने वाला शहजाद बेहद साधारण परिवार से था और एक इमाम की नौकरी करता था. खुद मसजिद के राशन पर पलता था. उस का कोई कारोबार या व्यापार नहीं था. उस ने नईमा को झूठ बताया था.

सब से बड़ा झूठ तो उस ने अपनी शादी को ले कर कहा था. नईमा से उस ने बात छिपा ली थी कि वह पहले से विवाहित और 3 बच्चों का बाप भी है. नईमा को समझते देर नहीं लगी कि शहजाद ने उस से निकाह उस की नौकरी और सैलरी, सेविंग्स के लालच में किया था. इस सच्चाई के खुलते ही नईमा ने शहजाद का विरोध किया. बदले में शहजाद उस के साथ गालीगलौज और मारपीट  पर उतर आया. शहजाद की हकीकत जान कर नईमा यासमीन पूरी तरह टूट गई. उस ने अपना दुखड़ा बहन को सुनाया. अपनी सच्चाई का परदाफाश होते  ही शहजाद का चेहरा भी बदल गया. वह नईमा की सैलरी हड़पने लगा. उस की सारी सेविंग्स भी खत्म कर दी.

नईमा परेशान हो गई. उस ने शहजाद से पहली पत्नी और बच्चों से मिलने से मना किया. यह बात शहजाद को नागवार गुजरी. तब उस ने नईमा को ही रास्ते से हटाने का प्लान बना लिया.  जिस के लिए उस ने अपने दोस्त नदीम को 12 हजार रुपए दे कर योजना में शामिल कर लिया. योजना के मुताबिक शहजाद 16 सितंबर, 2025 को शौपिंग के बहाने नईमा को मेरठ ले कर आया और रास्ते में उसे जूस में नींद की गोलियां दे कर बेहोश कर दिया. फिर दोनों उसे जंगली इलाके के एक खेत में ले गए. जहां नदीम ने रस्सी से उस का गला दबाया और शहजाद ने छुरे से गले को रेत दिया. फिर दोनों ने लाश को एक बुरके में लपेट कर फेंक दिया. फिर वापस घर लौट आए.

हफ्तों तक वे चुप्पी साधे रहे, लेकिन भीतरभीतर डरे हुए भी थे कि कहीं वे पकड़े न जाएं. इसी भय से शहजाद ने 8 अक्तूबर, 2025 को मुजफ्फरनगर में नईमा यासमीन की गुमशुदगी भी दर्ज करवा दी थी. पुलिस ने आरोपी शहजाद और उस के साथी नदीम से पूछताछ करने के बाद कोर्ट में पेश किया, जहां से दोनों को जेल भेज दिया गया. Love Story in Hindi