Hindi Crime Story: रंगीन धोखा

Hindi Crime Story: मोहब्बत में तकलीफ तो होती है पर बेवफाई ऐसा घाव देती है जो सारी उम्र नहीं भरता. जमाल ने भी मोहब्बत के नाम पर एक साजिश में फंस कर इतना बड़ा धोखा खाया कि जिंदगी बरबाद हो गई. महबूबा की मदद के चक्कर में वह खुद ही जेल पहुंच गया.

‘‘ज माल, क्या तुम मुझ से मोहब्बत करते हो?’’ सोनिया की प्यार भरी आवाज में हकीकत जानने की उत्सुकता थी. उस की बड़ीबड़ी खूबसूरत आंखें मेरे चेहरे पर टिकी थीं. उस का सिर मेरे कंधे पर रखा था. मैं ने गरदन घुमा कर उस के हसीन चेहरे पर नजरें जमाते हुए कहा, ‘‘सोनिया तुम अच्छी तरह जानती हो कि मैं तुम से कितना प्यार करता हूं. देखो, मैं कसम खा कर यकीन दिलाने के पक्ष में नहीं हूं.’’

सोनिया इठला कर बोली, ‘‘मैं कैसे यकीन कर लूं कि तुम मुझ से इतनी मोहब्बत करते हो?’’ उस के इस सवाल ने मुझे बेचैन कर दिया. मैं शायर तो था नहीं जो उस के हुस्न और चाहत में शेर सुनाता या गजलें गाता.

‘‘क्या तुम मेरे लिए जान दे सकते हो?’’ उस ने अचानक प्रश्न किया तो मैं ने अपने प्यार के मद्देनजर कह दिया, ‘‘यकीनी तौर पर जान दे सकता हूं.’’

यह सुन कर सोनिया मुसकरा दी, फिर तुनक कर बोली, ‘‘तुम पुलिस अफसर हो. फर्ज की बात हो तो तुम किसी अनजान आदमी के लिए भी जान दे सकते हो.’’

‘‘मेरा खयाल है, अपना फर्ज पूरा करते हुए मैं जान भी दे सकता हूं. निस्संदेह मैं एक कर्त्तव्यनिष्ठ अफसर हूं. तुम यह बात अच्छी तरह जानती थीं कि मैं पुलिस वाला हूं, फिर भी तुम ने मुझ से मोहब्बत की, इस की कोई खास वजह थी क्या?’’

‘‘ये तो दिल का मामला है बस, तुम पर दिल आ गया.’’

‘‘अच्छा ये बताओ कि तुम कैसे कह सकती हो कि तुम्हें भी मुझ से मोहब्बत है?’’ मैं ने पूछा.

सोनिया ने मेरी आंखों में झांका और दिल पर हाथ रख कर बड़े मीठे स्वर में बोली ‘‘तुम से मिल कर यहां खुशी होती है और तुम्हारी जुदाई के खयाल से यहां तकलीफ होती है. तुम से अलग हो कर जब भी मैं अपने डैडी को देखती हूं, और मन में ये खयाल आता है कि वह कभी भी तुम्हें कुबूल नहीं करेंगे, तो दिल डूबने लगता है. बड़ी तकलीफ होती है, मन बेचैन हो जाता है. इस बिना पर मैं कह सकती हूं कि मैं तुम से मोहब्बत करती हूं.’’

चांद की सफेद चांदनी में सोनिया की आंखें चमक रही थीं, चेहरे पर प्यार के रंग थे.

‘‘ठीक है जानम, आई एम सौरी. मुझे तुम्हारी मोहब्बत पर यकीन हो गया. तुम्हारी यह बात सही है कि मैं पुलिस अफसर हूं और किसी अनजान शख्स के लिए भी जान दे सकता हूं, लेकिन तुम्हारे लिए मैं एक काम कर सकता हूं. ऐसा काम जो मैं किसी और के लिए हरगिज नहीं करूंगा.’’ मैं ने पूरे विश्वास से कहा.

यह सुन कर सोनिया मेरे कंधे से सिर उठा कर बोली, ‘‘कौन सा काम?’’

‘‘मैं तुम्हारी खातिर कत्ल कर सकता हूं.’’ मैं ने धमाका सा किया. मेरी बात सुन कर सोनिया का मुंह खुला का खुला रह गया, जैसे उसे अपने कानों पर यकीन न हुआ हो.

‘‘तुम मजाक कर रहे हो जमाल.’’

‘‘नहीं, मैं सचमुच तुम्हारे लिए किसी का भी कत्ल कर सकता हूं.’’ मैं ने गंभीरता से कहा.

सोनिया एकदम उठ कर पार्क के गेट की तरफ बढ़ी.

‘‘सुनो, तुम कहां जा रही हो?’’ मैं ने उसे टोका.

‘‘तुम्हें इस तरह की बात नहीं करनी चाहिए.’’ इतना कह कर वह अपनी कार का दरवाजा खोल कर ड्राइविंग सीट पर बैठ गई. मैं ने झुक कर उस का हाथ पकड़ कर बाहर निकाला. इसी बीच मेरा सर्विस रिवाल्वर नीचे गिर पड़ा. उसे उठा कर मैं ने सोनिया का हाथ पकड़ा और उसे प्यार करते हुए बोला, ‘‘तुम यूं अचानक बिना कुछ कहे जा रही थीं, क्यों? क्या हुआ तुम्हें?’’

‘‘मुझे कुछ समझ में नहीं आया कि क्या करूं. मैं एकदम शौक्ड रह गई थी. दरअसल, मैं खुद भी कत्ल का ही सोच रही थी.’’

‘‘क्या मतलब है तुम्हारा?’’ मैं ने चौंक कर पूछा.

वह मुझ से अलग होते हुए बोली, ‘‘मेरा यही मतलब है, सचमुच मैं कत्ल के बारे में ही सोच रही थी. तुम जानते हो, मैं कभी भी तुम्हारी नहीं हो सकती. मेरे डैडी तुम से मेरी शादी करने के लिए कभी भी राजी नहीं होंगे, यह बात मुझे अंदर ही अंदर खाए जा रही है.’’ उस ने उदास स्वर में कहा.

‘‘तुम्हारे डैडी अभी तक मुझ से मिले नहीं हैं, फिर तुम यह बात इतने यकीन से कैसे कह सकती हो कि वह मुझे पसंद नहीं करेंगे?’’ मैं ने पूछा.

‘‘मैं उन्हें अच्छी तरह समझती हूं, जानती हूं इसलिए.’’

‘‘तुम्हारी उम्र 23 साल है. तुम बालिग हो, समझदार हो, वह जो भी कहते हैं उसे भाड़ में डालो. तुम वहां से चली आओ, हम शादी कर के आराम से अलग रहेंगे. अगर वह तुम्हें कुछ देना चाहे तो दें, वरना हमें कुछ नहीं चाहिए.’’ मैं ने उसे समझाना चाहा.

‘‘ये सब इतना आसान नहीं है.’’ वह परेशान सी हालत में बोली.

‘‘इतना मुश्किल भी नहीं है, क्योंकि शादी के बाद तुम मेरी जिम्मेदारी होगी.’’ मैं ने उसे यकीन दिलाते हुए कहा.

‘‘क्या तुम मेरी इस महंगी कार की किस्तें भर सकोगे? मेरे क्रेडिट कार्ड के बिल पे कर सकोगे? ऊपर से मेरी पढ़ाई का खर्चा, क्या ये सब कर सकोगे?’’

‘‘नहीं.’’ मैं ने होंठ भींच लिए.

‘‘तो फिर इंतजार करो. मेरी कालेज की पढ़ाई पूरी होने में अभी 3 साल बाकी हैं. जब मुझे डिग्री मिल जाएगी तो अच्छी जौब मिलने में आसानी होगी. फिर मैं वहां से निकल आऊंगी और हम एक हो जाएंगे.’’ उस ने सोच कर कहा.

‘‘और तब तक?’’ मैं ने बेचैनी से पूछा.

सोनिया की आंखों में आंसू भर आए. उस ने रोनी आवाज में कहा, ‘‘बेहतर यही होगा तब तब हम एकदूसरे से मिलना छोड़ दें.’’

मैं एक झटके से पीछे हट गया, मेरे दिल में दर्द सा उठा, पेशानी पर पसीना आ गया. मुझे उस से बहुत मोहब्बत थी, न मिलने के खयाल से ही मुझे तकलीफ होने लगी. मैं उस की परेशानी को भी समझ रहा था.

‘‘इतनी लंबी जुदाई मुझ से बरदाश्त नहीं होगी. इस का कोई न कोई हल तो होगा?’’ मैं ने मायूसी से कहा.

‘‘नहीं इस का कोई हल नहीं है.’’ वह बोली.

मेरी आंख से गिरने वाला हर आंसू मेरे गुरूर को मिटा रहा था. मैं ने सोनिया को देखे बगैर कहा, ‘‘अगर इस बारे में मैं तुम्हारे डैडी से बात करूं तो?’’

‘‘ऐसा हरगिज न करना, अगर उन्हें पता चल गया कि मेरा कोई बौयफ्रैंड है तो वह मुझे कत्ल कर देंगे. इस मामले में वह बहुत ज्यादा स्ट्रिक्ट हैं.’’ वह सिहर कर बोली.

‘‘तुम ने मुझे बताया था कि वह मुझे इसलिए नापसंद करते हैं क्योंकि मेरा ताल्लुक पुलिस से है.’’

‘‘हां.’’ सोनिया ने सिर हिलाया.

‘‘तब वह तुम्हें सिर्फ इस बात पर क्यों कत्ल कर देंगे कि तुम्हारा कोई बौयफ्रैंड है?’’

इस सवाल पर सोनिया ने एक गहरी सांस ले कर कहा, ‘‘ये एक उलझा हुआ मसला है.’’

‘‘मुझे बता कर देखो, शायद कोई हल निकल आए?’’

‘‘मैं नहीं बता सकती, वह सच में मुझे कत्ल कर देंगे और कोई भी कुछ नहीं कर सकेगा. वह बहुत पावरफुल और रसूख वाले आदमी हैं.’’

‘‘ठीक है, उन का अपना बिजनैस है, बहुत पैसा है पर इस से क्या होता है? ये बातें उन्हें कानून से ऊपर तो नहीं कर सकती.’’

‘‘उन का करोड़ों का कारोबार है, जो विदेशों तक फैला हुआ है. तुम अच्छी तरह जानते हो, पैसा कानून को भी खरीद सकता है.’’

मैं ने जज्बाती हो कर उस का चेहरा दोनों हाथों में थाम लिया और पूछा, ‘‘क्या तुम सचमुच ये चाहती हो कि हम अपनी मोहब्बत को भूल जाएं.’’

‘‘हां, पर अगर…’’ वह कहतेकहते रुक गई.

‘‘अगर क्या? बोलो, तुम्हें मेरी कसम?’’

‘‘जमाल, मैं ने कई रातें जाग कर गुजारी हैं. जब भी नींद लगी, मैं ने उन्हें जहर देने का ख्वाब देखा है.’’ सोनिया ने धीमे से कहा.

‘‘तुम्हारा मतलब उन के कत्ल से है?’’

सोनिया ने हां में सिर हिलाया.

‘‘लेकिन वह तुम्हारे डैडी हैं.’’

‘‘नहीं, वह मेरे डैडी नहीं, बल्कि एक वहशी दरिंदा है.’’ सोनिया गुस्से से फट पड़ी. फिर मेरे कंधे पर सिर रख कर फूटफूट कर रो पड़ी.

उस की खूबसूरत आंखों से आंसू मोतियों की तरह झड़ रहे थे. उस की हालत ने मुझे परेशान कर दिया. मैं ने प्यार से उस का सिर सहलाया, तो वह मुझ से लिपटते हुए हलकी चीख भरी रोंआसी आवाज में बोली, ‘‘वो मेरे साथ जबरदस्ती करता है, मुझ से गलत संबंध बनाता है.’’ उस की सिसकियां तेज हो गईं.

मेरे दिल की धड़कन जैसे थम सी गई. मेरी रगों में दौड़ता खून जैसे बरफ बन गया.

‘‘ये क्या कह रही हो, मुझे सबकुछ ठीक से बताओ.’’ मेरे दुलारने पर वह थोड़ा संभली, फिर एक आह भर कर बोली, ‘‘वह मेरे साथ उस वक्त से ज्यादती कर रहा है, जब मैं सिर्फ 14 साल की थी. मम्मी के मरने के बाद से ही उस ने ये घिनौना काम शुरू कर दिया था.’’

‘‘तुम ने किसी को बताया क्यों नहीं?’’ अगर मैं ऐसा करती तो वह मुझे मार डालता. वैसे भी इतने बड़े आदमी के सामने मेरी बात पर कौन यकीन करता? सोनिया ने एक झुरझुरी ले कर कहा.

‘‘यकीन तो कोई तब करता जब तुम बतातीं.’’

‘‘उस ने मुझे पूरी तरह अपने चंगुल में फंसा लिया था. जब मैं 15 साल की थी तभी उस ने जोड़ जुगत कर के मेरे दिमागी मरीज होने की पूरी हिस्ट्री बनवा ली थी. मेरे पागल होने के कागज, डाक्टर के सर्टिफिकेट सब कुछ था उस हिस्ट्री में. मेरे हलफिया बयान के बाद भी जज और अदालत उसे मुजरिम करार नहीं देती, हां मुझे पागलखाने जरूर भेज दिया जाता. अब मेरे पास दो ही रास्ते बचे हैं. या तो मैं ये सब बरदाश्त करती रहूं या उसे जहर दे दूं.’’

‘‘तुम उसे जहर नहीं दे सकती, ऐसा करने से सब को पता चल जाएगा कि जहर तुम ने दिया है. तब यकीनी तौर पर तुम्हें जेल जाना पड़ेगा और हम एकदूसरे से कभी नहीं मिल सकेंगे.’’ मैं ने उसे समझाया.

‘‘उस के सैंकड़ों दुश्मन हैं, कोई भी ये काम कर सकता है. फिर मुझ पर ही शक क्यों जाएगा?’’ सोनिया ने कहा.

‘‘उस के दुश्मनों में कुछ ऐसे लोग हैं, जो इतना बड़ा खतरा उठा सकते हैं?’’ मैं ने कुछ सोचते हुए सोनिया से पूछा.

सोनिया ने एक आह भर कर कहा, ‘‘हां, हैं तो लेकिन मेरा खयाल है मुझे ये सब बरदाश्त करना ही पड़ेगा.’’

मेरा खून खौल उठा. नफरत के तेजाब ने मेरे दिल को जला कर रख दिया. मेरी नजर उस लड़की पर टिकी हुई थी जिसे मैं ने जीजान से प्यार किया था. उस की इज्जत की धज्जियां उड़ाने वाले उस के बाप के बारे में जान कर, दिल दिमाग नफरत से जल उठा. चांदनी रात में चांदनी से भीगा उस का उदास चेहरा मेरे दिल की गहराई में उतर आया था. मैं ने उसे प्यार करते हुए कहा, ‘‘तुम घबराओ मत, जल्द ही ये डरावना ख्वाब खत्म हो जाएगा और वह दरिंदा अपने अंजाम पर जरूर पहुंचेगा.’’ मेरी आवाज में जहर घुला हुआ था. उसी वक्त मैं ने सोनिया से कुछ जरूरी बातें पूछी. उस से जानकारी लेने के बाद मैं ने एक योजना बनाई और उसे बता दिया कि उसे क्या करना है.

उसी योजना के अनुसार 2 हफ्तों बाद सोनिया पार्क में फिर मुझ से मिली. हम दोनों एक बेंच पर बैठ गए. उस ने मुझे एक पेपर थमाते हुए कहा, ‘‘ये मकान का पूरा नक्शा है, जो मैं ने बड़ी सावधानी से बनाया है.’’

मैं ने नक्शे को ध्यान से देखा. वाकई उसे बड़े कायदे से बनाया गया था. मैं ने उस से कहा, ‘‘ये तो ठीक है, अलार्म वगैरह और सुरक्षा के इंतजाम कैसे हैं?’’

सोनिया ने मुसकरा कर कहा, ‘‘उसे अपनी ताकत और पहुंच पर बड़ा घमंड है. उसे लगता है कि कोई उस का बाल भी बांका नहीं कर सकता. इसलिए उस ने न तो पहरेदार रखे हैं, न अलार्म लगवाए हैं.’’

‘‘तुम उस की आयरन गोल्फ स्टिक लाई हो.’’ मैं ने पूछा.

सोनिया ने ‘हां’ में सिर हिलाया.

‘‘उस वक्त वो कहां होगा?’’

‘‘सोफे पर मदहोश पड़ा होगा.’’

‘‘क्या तुम्हें यकीन है कि आज रात को भी वह पोकर खेलेगा?’’

‘‘हर थर्सडे की रात वो देर तक पोकर खेलता है.’’ उस की बात सुन कर मैं ने एक बार फिर गौर से नक्शा देखा.

‘‘वह घर कब तक वापिस आता है?’’

‘‘आधी रात के वक्त, कभीकभी जल्दी भी आ जाता है.’’

‘‘क्या वो नशे में होगा?’’

‘‘एक बात तो पक्की है, एक बार पीने के बाद जब वह मदहोश हो कर सोता है, तो फिर उसे कोई तूफान भी नहीं उठा सकता.’’

‘‘ओके, क्या तुम ने रिपोर्ट दर्ज करा दी?’’ मैं ने नक्शा जेब में रखते हुए पूछा.

‘‘हां, मेरी इंसपेक्टर दुर्रानी से बात हुई थी.’’

‘‘वह बड़ा तेज व कर्मठ इंसपेक्टर है, उसे कोई शक तो नहीं हुआ?’’

‘‘मेरे खयाल से तो नहीं, क्यों?’’

‘‘वह और उस का असिस्टेंट कामरान बड़े काबिल और तेज तर्रार पुलिस अफसरों में गिने जाते हैं. खैर छोड़ो, ये बताओ तुम ने उसे क्या बताया?’’

‘‘मैं ने उसे कहा कालेज में कोई मेरा पीछा करता है और मुझे शक है कि उस ने मेरे घर का पता लगा लिया है.’’

‘‘इस के अलावा और कुछ?’’

‘‘हां, मैं ने ये भी बताया कि 2 दिन पहले मैं ने एक अजीब से आदमी को अपने घर के पास देखा था, ये वही हो सकता है जो कालेज में मेरा पीछा करता है.’’

तुम ने उस का हुलिया क्या बताया है?

‘‘मैं ने एक ऐसे आदमी का हुलिया बयान कर दिया जो एक टैक्सी से जा रहा था.’’

‘‘फिर इंसपेक्टर दुर्रानी ने क्या कहा?’’

उन्होंने सब कुछ लिख लिया और कहा कि 2 से ज्यादा पुलिस वालों को पेट्रोलिंग ड्यूटी पर लगा देगा. मैं ने संतुष्ट हो कर सिर हिलाया. उस रात मेरी ड्यूटी नाइट शिफ्ट में थी और सोनिया का बंगला मेरी पेट्रोलिंग की हद में आता था.

‘‘और कुछ तो नहीं पूछना है?’’ सोनिया ने कहा.

सोनिया के साथ होने वाली ज्यादती और जुल्म ने मुझे बुरी तरह तड़पा दिया था और मैं ने उसे उस शैतान से निजात दिलाने का इरादा कर लिया था. यह सारी प्लानिंग सोनिया की ही थी. मैं ने सोनिया को तसल्ली दे कर कहा, ‘‘आज की रात तुम घर पर नहीं रहोगी.’’

‘‘आज रात मेरी सहेली की मेहंदी का फंक्शन है. हम सारी फ्रैंड्स रात वहीं गुजारेंगी, खूब हल्लागुल्ला होगा, डांसपार्टी भी है. मेरी वहां मौजूदगी के कई गवाह मिल जाएंगे.’’

‘‘ओके.’’ मुझे तसल्ली हो गई. फिर हम दोनों वहां से उठ गए. मैं ने सोनिया का हाथ मजबूती से थामते हुए कहा, ‘‘अगली बार जब हम मिलेंगे तो तुम उस वहशी दरिंदे के चंगुल से आजाद होगी.’’

सोनिया ने मेरी आंखों में झांका और बोली, ‘‘जानते हो, मुझे तुम्हारी बात पर यकीन नहीं आया था.’’

‘‘कौन सी बात पर?’’ मैं ने चौंकते हुए पूछा, तो वह बोली, ‘‘जब तुम ने मुझ से कहा था कि तुम मुझ से इस हद तक मोहब्बत करते हो कि मेरी खातिर किसी का कत्ल भी कर सकते हो.’’

‘‘यकीनन करूंगा, लेकिन इस कत्ल के पीछे एक अच्छा मकसद होगा.’’ मैं ने जोश से कहा. बातचीत के बाद वह चली गई.

मैं मन ही मन आगे की प्लानिंग के बारे में सोचते हुए लौट आया. उस रात जब मैं ड्यूटी पर था तो मैं ने घड़ी पर नजर डाली, रात का 1 बज रहा था. यह मेरे काम के लिए सही वक्त था. मैं ने अपना वाकीटाकी औन किया, ‘‘वन थ्री सिक्स, हेड क्वार्टर.’’

वाकीटाकी में कुछ देर खड़खड़ हुई फिर डिसपैचर की आवाज उभरी. ‘‘गो अहेड, वन थ्री सिक्स.’’

‘‘टेन फोर सेवेन – टेन फोर टू,’’ मैं ने कहा ताकि वह यह समझे कि मैं घर पर खाना खा रहा हूं.

‘‘टेन फोर वन थ्री सिक्स.’’

मैं अपनी पेट्रोल कार से नीचे उतर आया. वाकीटाकी की आवाज कम कर दी. अब मेरे पास एक घंटे का वक्त था. मैं ने खास टोपी, एक लबादा (ढीले ओवर कोट जैसा) दस्ताने व नरम जूते पहन लिए. फिर सीट के नीचे से गोल्फ आयरन स्टिक निकाल कर एक गहरी लंबी सांस ली. मेरे काम का वक्त हो गया था. मैं दौड़ता हुआ सोनिया के फादर मुबारक डायमंड की कोठी तक जा पहुंचा. एक नजर मैं ने अपनी पुलिस पेट्रोलिंग वाली कार पर डाली जो कोठी से दूर झाड़ों की आड़ में खड़ी थी और नजरों से ओझल थी. जोशोजुनून में मैं ने कत्ल का इरादा कर लिया था. मुझ पर सोनिया की मोहब्बत भले ही हावी थी. पर यह एक संगीन जुर्म था.

मैं कोठी के पिछले दरवाजे के पास पहुंच कर रुक गया. मेरा दिल बुरी तरह धड़क रहा था, हाथ कांप रहे थे. मैं ने आज तक किसी का कत्ल नहीं किया था. बेशक मैं ने कत्ल के बारे में, उस के अंजाम के बारे में जरूर सोचा था और प्लानिंग पूरी सावधानी से की थी. मैं ने कत्ल के मंजर को बारबार दिमाग में लाने की कोशिश की पर मेरा दिमाग खाली स्लेट की तरह हो गया था. पता नहीं मुझे क्या हुआ, मैं वापसी के लिए पलटा, लेकिन फिर सोचा सोनिया को क्या जवाब दूंगा, मैं ठिठक कर रुक गया. अचानक मेरी आंखों के आगे सोनिया की इज्जत लुटने का, उस के बाप की ज्यादती और जुल्म का दृश्य उभर आया. मुझे याद आई सोनिया की मजबूरी और बेबसी.

मेरा खून खौलने लगा और मैं अचानक पलटा और कोठी के दरवाजे पर पहुंच गया. मैं ने दरवाजे पर जोर की एक लात मारी, तो दरवाजा खुल गया. मैं तेज कदमों से अंदर दाखिल हो कर नक्शे के मुताबिक लिविंगरूम की तरफ बढ़ा, तो मुझे टीवी की आवाज सुनाई दी. मतलब सोनिया ने नक्शा सही बनाया था, टीवी चलने की वजह से कमरे में खासी रोशनी थी. मैं आयरन स्टिक संभाल कर सोफे की तरफ बढ़ा, मेरी सांस सीने में अटक सी गई. वह सोफे पर मौजूद नहीं था. सोफा खाली पड़ा था.

तभी एक आवाज गूंजी, ‘‘कौन हो तुम? मेरे घर में क्या कर रहे हो?’’

मैं तेजी से आवाज की तरफ घूम गया. मुबारक डायमंड एक हाथ में शराब की बोतल और दूसरे हाथ में टीवी का रिमोट लिए मुझे घूर रहा था. मैं वहीं जम कर रह गया. मेरे सामने वह शैतान खड़ा था, जिस ने मेरी महबूबा की इज्जत तारतार की थी.

‘‘मैं ने तुम से पूछा कि तुम कौन हो और क्यों आए हो?’’

उस ने पूछा तो मैं ने एक कदम आगे बढ़ाया और स्टिक को बेस बाल के बैट की तरह पूरी ताकत से घुमाया. इस के साथ ही एड़ी पर जोर डालते हुए मैं ने उस पर जोरदार वार किया. वार इतना जोरदार था कि जब स्टिक उस के सिर से टकराई, तो मेरा हाथ झनझना गया. उस के सिर से खून बहने लगा और वह जमीन पर ढेर हो गया. शराब की बोतल जमीन पर गिर कर टूट गई. मैं ने चारों तरफ नजर दौड़ाई, सबकुछ ठीक दिखाई दे रहा था. मैं ने एक गहरी सांस ले कर एक बार फिर आयरन स्टिक मुबारक डायमंड के सिर पर दे मारी और फिर मारता ही चला गया. उस ने एक झुरझुरी ली और उस का जिस्म स्थिर हो गया. मैं ने झुक कर उस की नब्ज देखी तो वह बंद हो चुकी थी. मैं ने तेजी से उस का पर्स और ज्वेलरी समेटी और बाहर निकल गया.

मैं बाहर निकला तो ठंडी हवा मेरे चेहरे से टकराई. मुझे उबकाई सी आ रही थी. मैं लड़खड़ाता हुआ दौड़ पड़ा. मैं ने वहां कोई सुबूत नहीं छोड़ा था. उस वक्त मेरा गला सूख रहा था. कुछ अजीब सी हालत हो रही थी. मैं ने अपनी पुलिस कार के पास पहुंच कर दस्ताने, जूते, लबादा उतारा और मुबारक डायमंड की ज्वैलरी, मनीपर्स एक प्लास्टिक बैग में ठूंस दिए. मेरी सांसें अभी भी तेजतेज चल रही थीं. मैं ने लंबीलंबी सांसें लीं तो कुछ अच्छा लगा. प्लास्टिक बैग कार की डिक्की में डाल कर मैं ने कार स्टार्ट की और वहां से रवाना हो गया. रास्ते में एक वीराने में मैं ने चीजों सहित प्लास्टिक बैग एक गड्ढे में रख कर जला दिया. गड्ढा मैं ने बंद कर दिया. यह जगह मैं ने पहले से देख रखी थी. घर पहुंच कर मैं ने शावर ले कर कपड़े बदले, फिर डिस्पैचर को बताया कि मुझे आने में थोड़ी देर हो सकती है. उस ने कहा, ‘‘मैं संभाल लूंगा, पर मेरे लिए बर्गर ले कर आना.’’

मैं रात के ढाई बजे औफिस पहुंचा. वहां से फिर अपनी पेट्रोलिंग कार में लौट आया. मैं ने कुछ देर अपने आगे के प्लान के बारे में सोचा. मेरे पेट में अजीब सी गुड़गुड़ हो रही थी. दिल भी घबरा रहा था. कुछ देर मैं यूं ही बैठा रहा. फिर सीधा मुबारक डायमंड की कोठी की तरफ रवाना हो गया. उस का नाम तो मुबारक था पर शायद डायमंड पहनने की वजह से उस के नाम के साथ डायमंड जुड़ गया था. मैं ने गाड़ी उस की कोठी के पास ले जा कर रोक दी. फिर वाकीटाकी पर कहा, ‘‘वन थ्री सिक्स हेडक्वार्टर.’’

‘‘यस.’’

‘‘मैं मुबारक डायमंड के बंगले के पास हूं. रूटीन निरीक्षण करने जा रहा हूं.’’ उधर से आवाज आई. ‘‘टेन फोर.’’

मैं गाड़ी से नीचे उतर कर बंगले के पीछे वाले दरवाजे पर पहुंच गया. फिर एक गहरी सांस ले कर वाकीटाकी चालू कर के कहा, ‘‘मुझे बंगले का एक दरवाजा खुला दिख रहा है, लगता है नकब लगी है. मैं अंदर देखने जा रहा हूं. हेलो हेडक्वार्टर, मुझे मदद की जरूरत पड़ सकती है.’’

‘‘ओ.के.’’

मैं सीधा अंदर पहुंचा. मुबारक डायमंड जमीन पर अपने ही खून में भीगा पड़ा था. यकीनन वह मर चुका था. मैं ने एक झटके से वाकीटाकी औन किया, ‘‘हैलो हेडर्क्वाटर, अंदर एक लाश पड़ी है. जल्दी से मैडिकल स्टाफ भेजो. पुलिस वायरलैस में जिंदगी दौड़ गई, धड़ाधड़ संदेश और आदेश शुरू हो गए.’’

मैं ने झुक कर मुबारक की गरदन को छुआ और जानबूझ कर अपनी उंगलियों के निशान यहांवहां छोड़ दिए ताकि बाद में निशान मिलने पर कोई सवाल न उठे. फिर मैं ने मुलजिम की तलाश के बहाने पूरे बंगले का चक्कर लगाया. साथ ही लाश के आसपास खास किस्म का टेप लगा दिया और बरामदे में रुक कर टीम के आने का इंतजार करने लगा. थोड़ी देर बाद मैडिकल स्टाफ और फोर्स आ गई.

‘‘जब तुम्हें इस वारदात का पता चला, उस वक्त क्या बजा था?’’ इंसपेक्टर दुर्रानी ने घटनास्थल का मुआयना करने के बाद पूछा. मैं ने खुद को सामान्य रखते हुए कहा, ‘‘पौने 3 बजे होंगे.’’

फ्लैश लाइट की रोशनी में उस की ब्राउन रंग की चालाक आंखें एकएक चीज को ध्यान से देख रही थीं.

‘‘तुम्हें इस इलाके में एक्सट्रा पेट्रोलिंग के बारे में मेरे आर्डर मिल गए थे?’’ दुर्रानी ने जानना चाहा.

‘‘जी हां, मिल गए थे. इसलिए मैं हर एक घंटे के बाद यहां की गश्त लगा रहा था.’’ मैं ने बताया.

‘‘हर बार, वक्त नोट करवा रहे थे?’’

‘‘जी हां.’’

‘‘कोई शक की बात दिखाई दी थी?’’

‘‘जी नहीं, हर तरफ सन्नाटा था.’’ मैं ने जवाब दिया.

इंसपेक्टर दुर्रानी हर बात नोट कर रहा था.

‘‘अजीब बात है, खुद की गोल्फ स्टिक से खुद की मौत.’’ मैं ने सवाल उठाया.

‘‘वह मुबारक डायमंड की स्टिक नहीं थी, उस की अपनी गोल्फ आयरन स्टिक्स गिनी जा चुकी हैं, सब अपनी जगह पर मौजूद हैं.’’

‘‘ओह, मैं समझा लाश के पास पड़ी है, उसी की होगी.’’ मैं ने अपनी हैरानी छुपाते हुए कहा.

‘‘वह कमीना बड़ा दीदादिलेर और शातिर था, तुम हर एक घंटे में गश्त लगा रहे थे. फिर भी उस ने अपना काम कर दिखाया. क्या तुम ने खाने के बे्रक की खबर दी थी?’’ दुर्रानी का लहजा अजीब सा था.

‘‘मैं हमेशा पैगाम दर्ज करा देता हूं.’’ मैं ने गौर से उस का चेहरा देखा. वह सोच में डूबा हुआ था. मैं ने फिर पूछा, ‘‘क्या सोच रहे हो?’’

‘‘हां, वह मर चुका है.’’ वह फोन ले कर टहलते हुए बाहर निकल गया. इतना मैं ने इतना जरूर सुना, ‘‘मामला डकैती का लगता है, पर कोई चीज मुझे खटक रही है. कहीं न कहीं कोई गड़बड़ है. हमें इस की बेटी को ढूंढ़ना है, वह पहले ही एक रिपोर्ट दर्ज करा चुकी है.’’

दुर्रानी पलट कर अंदर की जांच करने आया और कमरे की तरफ बढ़ गया. मैं ने अपनी ड्यूटी संभाल ली. प्राथमिक काररवाई के बाद लाश को पोस्टमार्टम के लिए भेज कर सब थाने लौट आए. मैं ने लौगबुक में उस वक्त की सारी बातें दर्ज कर दीं, जब मेरा रिलीवर आ गया तो मैं ने लौग बुक उसे सौंपते हुए कहा, ‘‘अंदर इंसपेक्टर दुर्रानी जांच में लगे हैं, मैं चलता हूं.’’

सुबह 6 बजे मैं पुलिस कार में घर के लिए निकल गया. घर पहुंच कर कपड़े बदल कर मैं गहरी नींद सो गया. अचानक मैं एक झटके से बिस्तर पर उठ बैठा. मुझे समझने में 2-3 सेकेंड लगे कि मैं कहां हूं? मुझे सब याद आ गया. ये मैं ने क्या कर दिया? एक पुलिस वाला हो कर प्यार में ये क्या कर बैठा? अभी मैं सोच में था कि दरवाजा धड़धड़ बजने लगा. आवाजें भी आ रही थीं.

‘‘इंसपेक्टर जमाल दरवाजा खोलो मैं इंसपेक्टर कामरान हूं.’’

मेरा दिल तेजी से धड़कने लगा, मैं बड़बड़ाया, ‘‘ये कमबख्त यहां क्या लेने आ गया. इसे मेरी क्या जरूरत पड़ गई.’’ मैं ने जल्दी से शर्ट पहन कर दरवाजा खोला तो मेरे होश उड़ गए. कामरान के साथ 5-6 सिपाही घेरा बना कर खड़े थे. इंसपेक्टर कामरान ने मेरी कलाई खींच कर एक झटके से मुझे बाहर घसीट लिया. मैं ने हाथ छुड़ाने की कोशिश की तो उस ने मेरा बाजू मरोड़ कर मेरा हाथ पीठ से लगा दिया. फिर एक झटके से मेरे दोनों हाथों में हथकडि़यां लगा दीं. मैं लड़खड़ाया.

‘‘ये सब क्या हो रहा है?’’ मैं ने पूछा, तो इंसपेक्टर र्दुरानी ने आगे आ कर कहा, ‘‘जमाल, तुम्हें चुप रहने का हक हासिल है, तुम जो कहोगे वह तुम्हारे खिलाफ भी जा सकता है.’’

मुझे घबराहट होने लगी, सिर चकराने लगा. मुझे मेरे अधिकार बता कर पुलिस कार में धकेल दिया गया. मैं ने जाली में से सामने लगे आइने पर नजर डाली. एसपी सुहेल मुझे घूर रहा था, ‘‘ये तुम ने क्या कर डाला? पुलिस वाले हो कर ऐसा जुर्म?’’

मैं ने बेबसी से कहा, ‘‘सर, ये मेरे साथ क्या हो रहा है?’’

‘‘जमाल, बेवकूफों जैसी बातें न करो, न ही हमें उल्लू बनाओ. इन लोगों ने तुम्हें रंगे हाथों पकड़ा है. इन से बात कर के मामला तय करो, शायद सजा में कुछ कमी हो जाए.’’

‘‘सर, सच में मैं ने कुछ नहीं किया है.’’

‘‘इन के पास बतौर सुबूत तुम्हारी वीडियो मौजूद है.’’

‘‘ऐसा कैसे हो सकता है सर.’’

‘‘लगता है डायमंड ने अपने बंगले के अंदर बाहर खुफिया कैमरे लगा रखे थे. मैं ने वह वीडियो टेप खुद देखी है, जिस में सफेद लबादे, ब्राउन टोपी में तुम सारी हरकतें कर रहे हो. तुम्हारे एक्शन और फोटो एकदम साफ आए हैं. लबादे से भी तुम्हारी पहचान छिप न सकी, क्योंकि चेहरा बिलकुल साफ नजर आ रहा था. पहचानने में कोई मुश्किल नहीं हुई, अब झूठ मत बोलो.’’

सदमे और हैरत से मेरी हालत खराब हो गई. मैं आंखें गाड़े आतीजाती गाडि़यों को देख रहा था.

मुझे अपने पकड़े जाने का यकीन ही नहीं हो रहा था. ये कैसे हो गया? मुझे लग रहा था ये एक डरावना सपना है, जल्द ही मेरी आंख खुल जाएंगी, फिर मैं इस ख्वाब पर खूब हंसूंगा. हेड क्वार्टर पहुंच कर एसपी सुहेल ने उतरने में मेरी मदद की. वह शुरू से मुझ पर मेहरबान था. हां, कामरान और र्दुरानी से जरूर मेरी तनातनी चलती रहती थी. पर इस में कोई शक नहीं कि दोनों ही बेहद जमीन और अपने काम और ड्यूटी में परफेक्ट थे. मैं शर्मसार सा सीढि़यां चढ़ कर औफिस में आया. मेरी नजरें जमीन पर गड़ी हुई थीं. मेरे साथियों की नजरें मेरे चेहरे पर तीर सी चुभ रही थीं. मैं हैरान था कि वह…

‘‘ये वही है, वही है, ओ माय गाड.’’ एक जानीपहचानी आवाज सुन कर मुझे झटका सा लगा. मेरी निगाहें कमरे में घूम गईं. ‘वह’ वहां मौजूद थी. एक सिपाही उस की हिफाजत के लिए तैनात था.

वह सोनिया थी और हाथ उठा कर मेरी तरफ इशारा कर रही थी, साथ ही उस की आंखों से आंसू भी बह रहे थे. वह रोतेरोते कह रही थी, ‘‘यही है वह आदमी. जो मेरा पीछा करता था.’’ फिर एकदम मेरी तरफ देख कर चीखते हुए मुझ पर झपटी, ‘‘तुम कमीने हो, तुम ने मेरे बाप को कत्ल किया है. मेरे बाप को कत्ल कर के तुम ने मुझे अनाथ कर दिया, तुम खुद भी मौत के पंजे से नहीं बच सकोगे. तुम्हारा अंत भी बुरा होगा.’’

मैं ने अपनी आंखें खोल दीं. मेरे हाथ में हथकड़ी थी. सुहेल मेरे सामने था, मैं ने एकदम घबरा कर पूछा, ‘‘मुझे क्या हो गया था?’’

‘‘तुम बेहोश हो कर गिर पड़े थे.’’

मैं ने अपना बदन समेटा और उठते हुए कराह कर कहा, ‘‘ये सब क्या हो रहा है, ये कैसा मजाक है?’’

‘‘अगर ये मजाक है तो इस में सब से ज्यादा मजा सामने खड़ी लड़की उठा रही है, जिस ने तुम पर इल्जाम लगाया है.’’ एसपी सुहेल ने कहा.

‘‘सोनिया.’’ मैं ने हैरान हो कर कहा.

‘‘तुम इसे जानते हो?’’ उस ने पूछा.

‘‘इस के साथ मेरा इश्क चल रहा है.’’ मैं ने कहा.

‘‘सुहेल ने सिर को झटका दिया और हंस पड़ा.’’

‘‘यह बात जज को बताना शायद वह कुछ करे.’’

‘‘ये सच है.’’ मैं ने गंभीरता से कहा.

‘‘किसी का पीछा करना, फिर उस से इश्क करना एक ही बात नहीं हो सकती जमाल. सोनिया अभी बहुत दुखी है, बाप के मरने का सदमा है. पर जब उसे पता लगेगा कि उसे पूरी जिंदगी कुछ करने की जरूरत नहीं है. तो उस के आंसू सूख जाएंगे. वह करोड़ों की एकलौती वारिस है. पता चला है कि उस का बाप फालतू खर्चों के लिए उसे ज्यादा पैसे नहीं देता था. पर एक अच्छा बाप था. अब इतना छोड़ गया है कि दोनों हाथों से लुटाएगी तो भी कम नहीं पड़ेगा.’’

एसपी सुहेल ने पूरी बात बताई. मैं मुंह फाड़े उस की सूरत ताकने लगा. उस ने आगे कहा, ‘‘जमाल तुम ने उस की तकदीर बना दी, कहां वह थोड़े से पैसों के लिए तरसती थी, अब बेशुमार दौलत की अकेली मालिक है. और ये दौलत तुम ने अपने हाथों से उस की झोली में डाली है, उस के बाप को कत्ल कर के. उस की राह का रोड़ा हटा कर. क्या खूब काम किया तुम ने.’’

मेरा मुंह खुला का खुला रह गया. मेरे दिमाग में वह सारी बातें घूमने लगीं जो सोनिया ने मुझ से कही थीं अब सब कुछ साफसाफ मेरी समझ में आ गया. कितनी आसानी से उस ने मोहब्बत का नाटक कर मुझे उल्लू बनाया. उस का बाप उसे मनमाना खर्च नहीं देता था. कितनी चालाकी से उस पर झूठा घिनौना इल्जाम लगा कर उस ने मुझे उस के कत्ल के लिए उकसाया. उस ने जो कुछ मुझ से कहा था, सब झूठ था. इस झूठ में उस ने अपने बाप को भी नहीं छोड़ा. उस ने अपना मकसद हासिल करने के लिए मुझे बेवकूफ बनाया. उस ने बाप पर घिनौना इलजाम लगा कर उसे एक शैतान एक दरिंदा बना कर मेरे सामने पेश किया, जिस बात ने मुझे जुनूनी बना दिया और मैं एक जघन्य अपराध कर बैठा.

सोनिया ने अपने बाप के साथसाथ मुझे भी रास्ते से हटा दिया था ताकि उस के गुनाह का कोई सुबूत, कोई गवाह न रहे. उस ने वीडियो कैमरे के बारे में मुझे न बता कर मेरी मौत का सामान कर दिया. कितनी चालाकी से उस ने मेरे खिलाफ साजिश की और मैं एक पुलिस वाला होने के बावजूद उस की मोहब्बत की खातिर उस के इशारों पर नाचता रहा और अपने आप को बरबाद कर बैठा. उस की सारी बातें झूठ थीं सिवाय एक बात के कि मोहब्बत तकलीफ देती है. उस की झूठी मोहब्बत और बेवफाई ने मुझे बेमौत मार दिया. Hindi Crime Story

Romantic Story: खिड़की मोहब्बत वाली

लेखक – सलोनी खान, Romantic Story: नीचे खड़े हो कर फरजान रोजाना बारबार मेरे बेडरूम की खिड़की की ओर देखा करता था. धीरेधीरे मैं उसे प्यार करने लगी. लेकिन मेरी मनोदशा भांप कर जब पापा ने उस से बात की तो पता चला कि वह मुझे नहीं देखता था बल्कि मेरे घर में लगे वाईफाई से अपने फोन की कनेक्टिविटी मिलाया करता था. फिर भी जो हुआ, अच्छा ही हुआ.  शा म का समय था. मैं ने देखा कि एक लड़का मेरे घर के सामने खड़ा था. मैं खिड़की के पास गई, बाहर झांक  कर देखा. वह ऊपर खिड़की की ओर ही देख रहा था. मैं वहां से हट गई. अगले दिन से उस लड़के की यह

रोजाना की आदत सी बन गई. वह वहां आता और घंटों खड़ा रहता. कभीकभी वह मुंह उठा कर मेरे बैडरूम की खिड़की की ओर देख लेता तो कभी अपने मोबाइल पर लगा रहता. मुझे लगता कि शायद वह मुझे फोन करने की कोशिश कर रहा है. मैं नहीं जानती थी कि उस के पास मेरा फोन नंबर है भी या नहीं वह बहुत ही सुंदर सजीला जवान था. मुझे लगता था कि उस का संबंध किसी बहुत अच्छे परिवार से रहा होगा. 10 दिन तक ऐसा ही चलता रहा.

मेरी समझ में कुछ नहीं आ रहा था, कुछ भी नहीं. मैं जानना चाहती थी कि आखिर यह मामला क्या है. सच कहूं तो उसे ले कर मेरे दिल में कुछ भावनाएं उभर रही थीं. मैं मन ही मन सोचती थी कि कहीं मुझे उस से प्यार तो नहीं हो गया है?

‘हां…हां…, मुझे उस से प्यार हो गया है.’ मेरे दिल से आवाज उठती.

‘लेकिन क्या वह भी मुझ से प्यार करता है? शायद नहीं…’ मेरे अंदर कई तरह के अंदेशे जन्म लेते.

यही सब सोचतेसोचते मेरे मन में कई तरह की आशंकाएं पैदा हो जातीं.

अपनी सोच, अपने अस्तित्व को समेट कर मैं ने साहस बटोरा और फैसला किया कि इस बारे में मुझे अपनी मां से बात करनी चाहिए. और मैं ने ऐसा ही किया भी.

‘‘अम्मी…अम्मी… आप कहां हैं? जरा जल्दी से यहां आइए. मैं आप को एक बहुत मजेदार दृश्य दिखाना चाहती हूं. सच में बहुत मजेदार.’’ एक दिन उसे बाहर खड़ा देख कर मैं ने बेसब्री से अपनी मां को पुकारा.

‘‘अच्छा, मैं आ रही हूं.’’ कहते हुए कुछ मिनट में ही मां मेरे पास आ गईं. आते ही मां ने पूछा, ‘‘हां, अब बताओ क्या दिखाना चाह रही थी तुम मुझे?’’

मैं अपनी अम्मी को खिड़की के पास ले गई और उन्हें बाहर नीचे खड़े लड़के को दिखाया. मैं ने अपनी अम्मी को सारा किस्सा सुनाया कि वह लड़का कैसे घंटों यहां खड़ा रहता है और ऊपर खिड़की की ओर देखता रहता है.

मां ने मेरी आंखों में झांका. फिर मुसकराकर कहा, ‘‘तो, इस में खास बात क्या है?’’ मम्मी की मुसकराहट में एक रहस्य सा छिपा था.

‘‘अम्मी, मैं यही आप को दिखाना चाहती थी. अब सोचें और बताएं कि हमें क्या करना चाहिए?’’ मैं ने अपने दिल की बात उन के सामने रखी.

अम्मी मुसकरा कर बोलीं, ‘‘इस में करना क्या है?’’ बड़ी लापरवाही से अपनी बात कह कर वह चली गईं. अगली सुबह सूरज में कुछ तेजी थी, खिड़की से धूप आ रही थी. पेड़ों पर चिडि़या चहचहा रही थीं. मैं बिस्तर पर बैठी थी और मेरे हाथ में कौफी का मग था. मेरे बाल खुले हुए थे. अचानक अम्मी ने मुझे आवाज दी. वह मुझे बुला रही थीं. नीचे जाने से पहले मैं ने खिड़की से बाहर झांक कर देखा कि वह लड़का वहां खड़ा है या नहीं? वह वहीं खड़ा था. मुझे शर्म सी आ गई और मैं नीचे भाग गई. मुझे लगता था कि मैं उस के प्यार में गिरफ्तार हो चुकी हूं.

मेरी अम्मी और पापा नीचे ड्राइंगरूम में खड़े थे और उन के चेहरों पर मुसकराहट फैली थी, रहस्यमय मुसकराहट.

‘‘हां अम्मी, बोलो क्या हुआ? मुझे क्यों बुलाया?’’  मैं ने पूछा.

‘‘हां बेटी,’’ अम्मी बोलीं, ‘‘मैं ने तुम्हें एक जरूरी काम से बुलाया है.’’

‘‘तो बताइए?’’

‘‘दरअसल, मैं ने तुम्हारे पापा से उस लड़के का जिक्र किया था, इसलिए आज सुबह वह बाहर जा कर उस से मिले. उस के बारे में पूरी जानकारी प्राप्त की. कुछ बातें कहीं भी.’’

‘‘क्या?’’ मैं बहुत जोर से बोल पड़ी.

‘‘हां, यह सही है मेरी बच्ची. उस का नाम फरजान है और वह एक बहुत ही अच्छे परिवार से संबंध रखता है. उस के पिता अब इस दुनिया में नहीं हैं और इस वक्त वह नौकरी की तलाश में है. फरजान तुम्हारे लिए बहुत ही सही लड़का है.’’ पापा ने गंभीरता से कहा.

शादी के मुद्दे पर मेरे दिल में तुरंत यह बात आई कि मैं उस लड़के से प्यार करने लगी हूं. मैं मन ही मन सोचने लगी कि या खुदा अब मुझे क्या करना चाहिए.

‘‘मैं बाहर जा कर उसे अंदर बुला लाता हूं. उस के साथ बैठ कर कौफी पिएंगे. तब ही बातोंबातों में हम उस से अपनी बेटी की शादी के बारे मे ंबात कर लेंगे.’’ कह कर पापा बाहर चले गए. मैं शांत खड़ी देखती रही. थोड़ी देर बाद पापा उसे अंदर ले आए. उस ने हम सब को बड़े अदब के साथ सलाम किया. पापा ने उसे ड्राइंगरूम में बैठा कर अम्मी से कौफी लाने को कहा. वे दोनों मुसकराते हुए बातें कर रहे थे. घर में सेल फोन पर वाईफाई लगा हुआ था. कुछ देर बाद उस के चेहरे पर एक अजीब सा सुकून महसूस होने लगा. वहां बैठेबैठे भी वह मोबाइल पर लगा रहा. साथ ही कौफी पीतेपीते बातें भी करता रहा. लेकिन जल्दी ही उस के चेहरे पर जाने की बेचैनी नजर आने लगी. वह ऐसा दिखाने की कोशिश कर रहा था, जैसे कि वह बहुत व्यस्त हो और उसे टे्रन पकड़ने की जल्दी हो.

उस ने जल्दीजल्दी कौफी के घूंट लेने शुरू किए.

‘‘कौफी के लिए धन्यवाद अंकल.’’ फरजान ने कहा.

‘‘धन्यवाद किस लिए?’’ पापा ने पूछा.

‘‘आप ने मुझे घर के अंदर बुलाया, क्योंकि…’’ फरजान बोला.

‘‘यह भी कोई बात है.’’ हम सब हंसने लगे.

‘‘अच्छा, यह बताओ कि हम तुम्हारी अम्मी से इस बारे में बात कर सकते हैं?’’ पापा ने अपनी खुशी का इजहार करते हुए पूछा.

‘‘किस बारे में?’’ उस ने आश्चर्य से पूछा.

‘‘तुम रोज हमारे घर के सामने आ कर खड़े होते हो और लैला को देखते हो इसलिए…’’ पापा के चेहरे पर कुछ चिंता सी झलकने लगी थी.

फरजान के हाथ में कौफी का मग कांपा और उस की कौफी छलक पड़ी. वह घबरा कर जल्दी से उठ खड़ा हुआ.

‘‘नहीं, नहीं प्लीज, मेरी अम्मी से कुछ मत कहना अंकल,’’ उस ने डरते हुए कहा.

‘‘लेकिन क्यों बेटा?’’

‘‘वह मुझ पर नाराज होंगी.’’

‘‘वह क्यों नाराज होंगी? उन्हें तो यह सुन कर बहुत खुशी होगी कि उन के बेटे ने शादी के लिए लड़की पसंद कर ली है.’’

‘‘क्या?’’

‘‘हां, क्या तुम्हें मेरी बेटी पसंद नहीं है? मैं लैला की बात कर रहा हूं. यह मेरी बेटी लैला.’’ पापा ने मेरी ओर इशारा कर के कहा.

‘‘क्या मजाक कर रहे हैं अंकल. मैं लैला नाम की किसी लड़की को नहीं जानता. आप की बेटी को भी नहीं, न यह कि इन का नाम लैला है.’’

‘‘क्या?’’ पापा भी आश्चर्य से उछल पडे़.

‘‘हां, यही सच है. मुझे इस बारे में कुछ नहीं पता है.’’ फरजान ने जोर दे कर कहा.

‘‘तो फिर मेरे घर के पास आ कर क्या करते थे और ऊपर लैला की खिड़की में क्या देखते रहते थे?’’

फरजान कुछ देर सोचता रहा. फिर बोला, ‘‘ओह! अब समझ में आया. मैं आप को सच बताता हूं. दरअसल, बात यह है कि मैं वहां खड़े हो कर वाईफाई कनेक्शन का इस्तेमाल करता था और जब भी मेरा फोन हिलता था, कनेक्टीविटी टूट जाती थी. तब स्थिति ठीक करने के लिए मैं ऊपर की ओर देखता था. कभीकभी कनेक्टीविटी आती थी और कभीकभी गायब हो जाती थी. इसी चक्कर में मैं ऊपर देखा करता था. लेकिन लैला की खिड़की की ओर नहीं, यहां खड़े हो कर मैं बहुराष्ट्रीय कंपनियों को अपना सीवी भेजता था.’’ फरजान ने विस्तार से अपनी बात बताई.

‘‘तो फिर मेरे बुलाने पर तुम अंदर क्यों आ गए और यहां आ कर तुम ने धन्यवाद भी किया?’’ मेरे पापा ने एक और सवाल दाग दिया.

‘‘दरअसल, आज मुझे सही तरह से कनेक्टीविटी नहीं मिल रही थी. मैं परेशान था और उसी समय आप ने मुझे घर के अंदर आने को कहा तो मुझे बहुत खुशी हुई. क्योंकि यहां अंदर मुझे बेहतर कनेक्टीविटी मिल सकती थी.’’

‘‘और तुम यहां पर बैठ कर अपना सीवी भेजने में व्यस्त थे, क्यों क्या मैं सही कह रहा हूं?’’

‘‘हां.’’

‘‘ओह! मेरे खुदाया.’’ हम में से हर एक के मुंह से बस यही निकला.

इतनी देर में इतने उतारचढ़ाव आ गए थे. हम पता नहीं कहां से कहां तक की सोचने लगे थे.

‘‘तो… अंकल, अब मैं जाऊं? मेरी मम्मी मेरा इंतजार कर रही होंगी.’’

‘‘हां, हां बेटा, क्यों नहीं.’’

मैं अभी भी आश्चर्यचकित थी. मुझे बहुत गहरी चोट पहुंची थी, मेरी आंखों से आंसू बहने लगे. मैं ने उसे प्यार करना शुरू कर दिया था. मैं सोचती थी कि शायद वह भी मुझ से प्यार करता है. लेकिन वह मेरे लिए नहीं, बल्कि केवल वाईफाई कनेक्टीविटी उपयोग करने के लिए मेरी खिड़की के पास आता था. उस की इस हरकत ने मेरे दिल के टुकड़े कर दिए थे. लगभग 6 महीने बाद एक महिला हमारे घर आई और हमें आश्चर्य में डालते हुए उस ने अपना परिचय फरजान की मां के रूप में दिया. फरजान को एक मल्टीनेशनल कंपनी में अच्छी नौकरी मिल गई थी और वह उस दिन की बात नहीं भूल पाया था.

उस ने अपने दिल के किसी कोने में मुझे भी जगह दे दी थी. हां, यह सच है कि उसे भी मुझ से प्यार हो गया था. और अब हम दोनों की शादी हो चुकी है और हम एक सुखद और सुंदर जीवन गुजार रहे हैं. मैं जब भी जिंदगी के उस नाटकीय मोड़ को याद करती हूं तो सोचती हूं कि कोई जरूरी नहीं कि दिल के अरमान दिल में ही घुट कर रह जाएं. Romantic Story

True Love Story: मोहब्बत की यह कैसी शर्त

True Love Story: सोनू ने विजय से प्यार करने की एक ऐसी शर्त रखी, जिसे पूरा करने के लिए विजय को सोनू सहित जेल जाना पड़ा. क्या इसे प्यार कह सकते हैं?  दोपहर के खाने का सायरन बजा तो राम सिंह अपनी मशीन बंद कर के फैक्ट्री के बाहर ढाबे पर आ गया. राम सिंह आर.एस. टूल्स नाम की फैक्ट्री में काम करता था. खाना खाने के बाद वह लघुशंका के लिए फैक्ट्री के पीछे खाली प्लौट की ओर बढ़ गया. खाली प्लौट फैक्ट्री के ठीक पीछे था, जिस में केवल झाडि़यां उगी थीं.

वह जैसे ही झाडि़यों के पास पहुंचा, उसे झाडि़यों में एक इंसानी पैर झांकता दिखाई दिया. बाकी सारा शरीर झाडि़यों के भीतर था. पैर देख कर राम सिंह को लगा कि शायद कोई शराबी नशे में धुत हो कर झाड़ी में पड़ा है. लेकिन अचानक उस के दिमाग को झटका सा लगा. उस ने सोचा कि शराब पी कर भला कोई झाडि़यों और गंदगी में क्यों लेटेगा? उस के मन में शंका हुई तो उस ने आगे बढ़ कर झाडि़यों में झांक कर देखा. खून से लथपथ एक लड़की की लाश देख कर उस का पूरा शरीर कांप उठा. वह तुरंत उल्टे पांव भागा.

ढाबे पर आ कर उस ने ढाबा मालिक और वहां खड़े अन्य कर्मचारियों को इस बारे में बताया और फोन कर के पुलिस कंट्रोल रूम को भी इस बात की सूचना दी. पुलिस कंट्रोल रूम से यह सूचना घटनास्थल से संबंधित थाना फोकल प्वाइंट के थानाप्रभारी इंसपेक्टर गुरतेज सिंह और ढंडारी पुलिस चौकीप्रभारी गुरबख्शीश सिंह को मिली तो दोनों ही पुलिस टीम के साथ घटनास्थल पर पहुंच गए. एक 20-22 साल की खूबसूरत लड़की की लाश झाडि़यों के बीच पड़ी थी. उस के सिर, पेट व गर्दन पर किसी तेज धार वाले हथियार के काफी गहरे घाव थे. लाश के पास व झाडि़यों से थोड़ा पहले कई जगह काफी खून बिखरा हुआ था. जाहिर था, लड़की की हत्या उसी जगह की गई थी.

प्रथम दृष्टया ऐसा लगता था, जैसे कोई युवक शारीरिक संबंध बनाने के लिए लड़की को बहाने से वहां लाया था और लड़की के इनकार करने पर या किसी दूसरी वजह से उस की हत्या कर दी थी. लेकिन ऐसी संभावना कम थी. बहरहाल यह तय था कि वह लड़की जो भी रही हो, अपनी मरजी से वहां आई थी. चौकीप्रभारी गुरबख्शीश सिंह अभी घटनास्थल का मुआयना कर रहे थे कि एसीपी गुरप्रीत सिंह और क्राइम टीम घटनास्थल पर पहुंच गई. मृतका पर तेज धार हथियार से बड़ी बुरी तरह से वार किए गए थे. उस के शरीर से निकला खून जम कर काला पड़ गया था. इस का मतलब यह था कि हत्या आधी रात के आसपास किसी वक्त की गई थी.

घटनास्थल का निरीक्षण करने के बाद एसीपी गुरप्रीत सिंह और इंसपेक्टर गुरतेज सिंह, चौकीप्रभारी गुरबख्शीश सिंह को दिशानिर्देश दे कर लौट गए. गुरबख्शीश सिंह ने मृतका की लाश कब्जे में ले कर पंचनामा किया और शिनाख्त के लिए उसे 72 घंटे के लिए सिविल अस्पताल की मोर्चरी में रखवा दिया. शाम को प्रेस कौन्फ्रैंस कर के उन्होंने पत्रकारों से रिक्वेस्ट की कि मृतका की शिनाख्त में उन की मदद करें. इस के अलावा लाश की फोटो और हुलिया अखबारों में छपवा कर जनता से भी पहचान की अपील की.

इस मामले में आगे की जांच के लिए एक स्पैशल टीम बनाई गई, जिस में उन्होंने एएसआई राजेंद्र सिंह, हेडकांस्टेबल योगराज सिंह, रूपेंद्र सिंह, राजेंद्र सिंह, रणधीर सिंह, कांस्टेबल बलविंदर तथा महिला हवलदार गुरमीत कौर को शामिल किया. घटना 1-2 जनवरी, 2015 की मध्यरात्रि की थी. चौकीप्रभारी गुरबख्शीश सिंह ने इस मामले में अज्ञात हत्यारों के खिलाफ मुकदमा दर्ज करवा कर इस की जांच शुरू कर दी थी. इस समाचार को चूंकि अखबारों ने प्रमुखता से प्रकाशित किया था, इसलिए लाखों लोगों ने पढ़ा.

इस समाचार के छपने के बाद पालाराम नाम के एक व्यक्ति ने चौकीप्रभारी गुरबख्शीश सिंह के पास पहुंच कर संदेह व्यक्त किया कि अखबार में छपी लाश की फोटो का हुलिया काफी हद तक उस की बेटी सोनिया से मिलताजुलता है. उस ने यह भी बताया कि उस की बेटी सोनिया हरगोविंदनगर, लुधियाना स्थित एस.डी. इंडस्ट्रीज में काम करती थी, पर बीते दिन काम पर जाने के बाद वह घर नहीं लौटी थी.  चौकीप्रभारी गुरबख्शीश ने पालाराम को मोर्चरी ले जा कर लाश दिखाई तो उस ने लाश को पहचान कर बताया कि यह उस की बेटी सोनिया की लाश है.

गुरबख्शीश के सिर से आधा बोझ उतर गया, क्योंकि ब्लाइंड मर्डर केस को हल करने के लिए मरने वाले की पहचान होना जरूरी होता है. लाश की शिनाख्त होने के बाद पोस्टमार्टम करवा कर उसी दिन लाश पालाराम को सौंप दी गई. सोनिया के अंतिम संस्कार के अगले दिन गुरबख्शीश सिंह ने पालाराम से पूछताछ की तो उस ने बताया, ‘‘सोनिया हरगोविंद नगर की एस.डी. इंडस्ट्रीज में काम करती थी और अपनी सहेली सोनू के साथ काम पर आतीजाती थी. कल रात सोनू का जन्मदिन था, जिस में उस ने सोनिया को भी बुला रखा था.

‘‘फैक्ट्री से छुट्टी होने के बाद सोनिया सोनू के घर जाने वाली थी. रात को जब सोनिया घर नहीं लौटी तो हम ने सोचा कि रात को वह सोनू के घर पर रुक गई होगी.’’

गुरबख्शीश ने फैक्ट्री मैनेजर से पूछताछ की तो उस ने बताया कि कल लंच टाइम में सोनू सोनिया की छुट्टी करवा कर अपने साथ ले गई थी. अब तक की तफतीश से यह बात स्पष्ट हो गई थी कि सोनिया की हत्या में सोनू की किसी न किसी रूप में भूमिका जरूर थी. अब सवाल यह था कि सोनू कौन थी और कहां रहती थी? बहरहाल, युद्धस्तर पर सोनू की तलाश शुरू कर दी गई. साथ ही गुरबख्शीश सिंह ने मृतका से बरामद मोबाइल फोन की काल डिटेल्स निकलवा ली. काल डिटेल्स में 3 ऐसे फोन नंबर सामने आए, जिन से पिछले 2 दिनों में मृतका की सब से अधिक बातें हुई थीं. उन तीनों नंबरों को खंगाला गया तो उन में एक नंबर सोनू का निकला. उसी के आधार पर पता चला कि सोनू पीर वाली गली स्थित सिंगार दा वेहड़ा निवासी नरेश शर्मा की बेटी थी और बीयरिंग बनाने वाली फैक्ट्री में काम करती थी.

नरेश शर्मा मूलत: अंबाला के रहने वाले थे. काम के सिलसिले में वह काफी समय पहले लुधियाना आ कर बस गए थे. बहरहाल सोनू का पता मिलते ही गुरबख्शीश सिंह ने पूछताछ के लिए उसे चौकी बुलवा लिया. पूछताछ के दौरान पहले तो वह सोनिया के बारे में अंजान बनती रही. उस का कहना था कि वह किसी सोनिया को नहीं जानती. चौकीप्रभारी गुरबख्शीश सिंह ने जब उसे सोनिया की काल डिटेल्स दिखाई तो सोनू ने बताया कि वह सोनिया को जानती ही नहीं थी, बल्कि उस की हत्या के षडयंत्र में शामिल भी थी. सोनिया की हत्या विजय, सुमित, संदीप और सोनू ने मिल कर की थी. इस के बाद गुरबख्शीश सिंह ने सोनू की निशानदेही पर पीर वाली गली में छापा मार कर विजय को गिरफ्तार कर लिया. सोनू और विजय की गिरफ्तारी की खबर सुन कर संदीप और सुमित फरार हो गए.

चौकीप्रभारी गुरबख्शीश सिंह ने सोनू और विजय को 5 जनवरी, 2015 को ड्यूटी मजिस्ट्रेट पुष्पा रानी की अदालत में पेश कर के पूछताछ के लिए 2 दिनों के पुलिस रिमांड पर लिया. रिमांड अवधि के दौरान गुरबख्शीश सिंह ने सोनू और विजय की निशानदेही पर हत्या में प्रयुक्त खंजर और बाइक बरामद कर ली. उन से की गई पूछताछ में सोनिया की हत्या की जो कहानी प्रकाश में आई, उस की जड़ में ईर्ष्या भी थी और पश्चिमी सभ्यता भी.

विजय, सुमित, संदीप, सोनू और सोनिया सभी लुधियाना के फोकल प्वाइंट क्षेत्र में आसपास रहते थे और आसपास की ही फैक्ट्रियों में काम करते थे. विजय गांव बगाहा, जिला रायबरेली का रहने वाला था और लुधियाना के फोकल प्वाइंट, पीर वाली गली में रहता था. सोनू भी इसी गली के सिंगार का वेहड़ा में रहती थी. संदीप उर्फ मोनू भी इसी क्षेत्र में ज्वाला का वेहड़ा में रहता था. मृतका सोनिया गली नंबर साढ़े 6, गुरु रामदास कालोनी, सतनाम का वेहड़ा में रहती थी.

आसपास घर और फैक्ट्रियां होने की वजह से ये सभी काम पर साथसाथ आतेजाते थे. खानापीना भी साथसाथ होता था. 19 वर्षीया सोनिया खूबसूरत लड़की थी. उस के शरीर का एकएक अंग सांचे में ढला प्रतीत होता था. उस के कई सहकर्मी उस की सुंदरता के दीवाने थे और उसे पाने का सपना देखते थे. लेकिन सोनिया विजय की दीवानी थी. वैसे तो सोनिया के कई लड़कों से संबंध थे, लेकिन मन से वह विजय पर फिदा थी और उसी से शादी करना चाहती थी. सोनिया जहां साधारण सी दिखने वाली लड़की थी, वहीं सोनू बौबकट बालों वाली, टौप जींस पहनने वाली फैशनपरस्त लड़की थी. विजय उस की ओर आकर्षित था. सोनू लड़कों की तरह सिगरेट और शराब आदि का भी सेवन कर लेती थी. जबकि सोनिया इन चीजों से कोसों दूर रहती थी.

सोनिया जहां विजय की दीवानी थी, वहीं सोनू भी इस दौड़ में शामिल थी. एक दिन सेनिया ने अचानक विजय का रास्ता रोक कर उस के सामने अपने प्यार का इजहार कर डाला. विजय ने सोनिया का प्यार स्वीकार कर लिया. इस के बाद विजय और सोनिया में दोस्ती हो गई. फैक्ट्री की छुट्टी के बाद अकसर दोनों रंगरलियां मनाने लगे. यह देख कर सोनू के कलेजे पर सांप लोटने लगा. चाह कर भी वह सोनिया का कुछ नहीं बिगाड़ पा रही थी. वह समझ गई कि वक्त अभी उस के साथ नहीं है. यह अलग बात थी कि विजय के सोनिया के साथ संबंध बन गए थे, पर मन ही मन वह चाहता सोनू को ही था. वह सोनू के खुले विचारों पर फिदा था. सोनू उस की पहली पसंद थी.

लेकिन जब से विजय के सोनिया के साथ संबंध बने थे, सोनू उस से दूर होती चली गई थी. कई बार विजय मन ही मन सोचता था कि सोनिया से संबंध बना कर उस ने बहुत बड़ी गलती की है. बहरहाल, यह सिलसिला ऐसे ही चलता रहा. सोनू सही मौके की तलाश में थी. सोनिया और विजय के बीच लगभग 2 साल पहले तक संबंध बने रहे. इस बीच जब सोनिया से विजय का मन पूरी तरह से भर गया तो वह सोनू की ओर आकर्षित होने लगा. लेकिन सोनू जल्दबाजी कर के कोई रिस्क नहीं लेना चाहती थी. वह बहुत फूंकफूंक कर कदम रख रही थी.

दिखावे के तौर पर सोनू जहां अपनी अदाओं से विजय को घायल कर रही थी, वहीं उस से दूरी बना कर भी चल रही थी. दूसरी ओर सोनिया विजय पर शादी के लिए दबाव डाल रही थी. एक दिन सोनिया ने विजय को घेर कर पूछा, ‘‘आखिर तुम कब तक यूं ही मेरे शरीर से खेलते रहोगे? शादी क्यों नहीं करते, मैं बदनाम हो रही हूं.’’

‘‘मैं ने तुम से कब कहा था कि मैं तुम से शादी करूंगा.’’ विजय ने गुस्से से सोनिया का हाथ झटकते हुए कहा, ‘‘तुम्हारी तो कई लड़कों से यारी है तो क्या वे सब तुम से शादी करेंगे?’’

‘‘मेरी उन से सिर्फ दोस्ती है. अपना शरीर तुम्हारे सिवाय मैं ने किसी और को नहीं सौपा है समझे.’’ सोनिया ने चिल्लाते हुए कहा.

बीच सड़क में बात बढ़ती देख विजय ने सोनिया को समझाते हुए कहा, ‘‘फिलहाल तुम शादीब्याह की बातों को यहीं खत्म करो और वक्त का इंतजार करो.’’

उस समय सोनिया ने भी बात खत्म करना ही उचित समझा. लेकिन यह बात वह अच्छी तरह समझ चुकी थी कि विजय उस से कभी शादी नहीं करेगा. उधर उसी दिन विजय सोनू से मिल कर अपने प्यार की दुहाई देने लगा. उस ने सोनू को यह भी बताया कि सोनिया उस पर शादी के लिए दबाव डाल रही है, जबकि वह उस से शादी नहीं करना चाहता. विजय की बात सुन कर सोनू ने बड़ी अदा से कहा, ‘‘यह सब तुम मुझ से क्यों बता रहे हो? तुम तो सोनिया के दीवाने थे, उस से प्यार करने का दावा करते थे. अब शादी करने से क्यों भाग रहे हो?’’

यह सुन कर विजय फट पड़ा, ‘‘यह तुम से किस ने कह दिया कि मैं सोनिया से प्यार करता हूं. प्यार तो मैं तुम से करता था और करता हूं. तुम्हीं हवा में उड़ रही थीं तो मैं क्या करता? मैं ने टाइम पास के लिए सोनिया से दोस्ती कर ली थी. मुझे क्या पता था कि वह मेरे गले की हड्डी बन जाएगी.’’

विजय की बात सुन कर सोनू मन ही मन बहुत खुश हुई. वह सोचने लगी कि अब ऊंट पहाड़ के नीचे आया है. बहरहाल सोनू ने अपने कंधे उचका कर लापरवाही से कहा, ‘‘मैं इस में क्या कर सकती हूं. यह तुम्हारा मामला है, तुम ही इसे अपने तरीके से सुलटो तो अच्छा रहेगा.’’

‘‘लेकिन सोनू तुम समझती क्यों नहीं, मैं सोनियां से नहीं, तुम से प्यार करता हूं.’’

‘‘मुझ से प्यर करते हो तो अपने प्यार का प्रमाण दो. ऐसे कहने से क्या होता है. मैं कैसे विश्वास कर लूं कि तुम जो कह रहे हो, वह सच है?’’

‘‘ठीक है, तुम ही बताओ मैं क्या करूं?’’ विजय ने कहा, ‘‘तुम जैसे भी चाहो, मेरा इम्तिहान ले सकती हो.’’

विजय की बात सुन कर कुछ देर खामोश रहने के बाद सोनू ने कहा, ‘‘ठीक है, मैं शाम तक तुम्हें सोच कर बताऊंगी.’’

शाम को जब सोनू विजय से मिली तो उसे अपनी अदाएं और नखरे दिखाने लगी. यह देख कर विजय सोनू के आगे गिड़गिड़ाने लगा. लोहा गरम देख सोनू ने चोट करते हुए बड़े नाजनखरे से कहा, ‘‘विजय, तुम्हारे लिए अपना प्रेम और मेरे प्रति वफादारी साबित करने का एक तरीका है. अगर तुम मेरे इस इम्तिहान में पास हो गए तो मैं जीवनभर तुम्हारी गुलाम बन कर रह सकती हूं. अगर तुम वाकई मुझ से प्यार करते हो तो तुम मेरी यह बात जरूर मानोगे.’’

‘‘तुम एक बार आजमा कर तो देखो. मुझे बताओ कि मुझे क्या करना है. तुम्हारे लिए मैं अपनी जान भी दे सकता हूं.’’ विजय ने बड़े विश्वास से कहा.

‘‘तो सुनो, सोनिया को रास्ते से हटा दो. तुम्हारे और मेरे बीच यही सब से बड़ा कांटा है.’’

सोनू की बात सुन कर विजय का मुंह आश्चर्य से खुला रह गया. उस ने सपने में भी नहीं सोचा था कि सोनू सोनिया की हत्या की बात कर सकती है. उस ने हकलाते हुए कहा, ‘‘यह तुम क्या कह रही हो सोनू?’’

‘‘क्यों, मैं ने क्या गलत कह दिया.’’ सोनू ने विजय के कंधे पर हाथ रखते हुए कहा, ‘‘अभीअभी तो तुम अपनी जान देने की बात कर रहे थे. अपनी जान दे कर मेरे शरीर को कैसे पाओगे. मैं तुम्हें सोनिया की जान लेने और अपने साथ ऐश करने के लिए कह रही हूं. फिर मुझे जो कहना था, सो कह दिया. अब आगे तुम जानो, तुम्हारा काम जाने.’’

‘‘लेकिन सोनू, हमारे प्यार के लिए सोनिया की हत्या करने की क्या जरूरत है. मैं तुम से वादा करता हूं कि मैं उस से बिलकुल संबंध तोड़ दूंगा. वह कभी हमारे रास्ते की रुकावट नहीं बनेगी.’’

सोनू ने विजय से सटते हुए कहा, ‘‘विजय, हमारे अच्छे भविष्य के लिए उस का मरना जरूरी है. अगर तुम इस काम के लिए तैयार हो तो मुझे अपनी बांहों में ले कर मेरे होंठों को चूम लो, वरना मैं चली.’’

सोनू से इस तरह खुला निमंत्रण पा कर विजय की उत्तेजना चरम पर पहुंच गई. उस ने आगे बढ़ कर सोनू को अपनी बांहों में जकड़ लिया और उस के तपते होंठों पर अपने होंठ रख दिए. एक तरह से यह विजय द्वारा सोनिया की हत्या किए जाने की स्वीकृति थी. उसी दिन विजय और सोनू ने मिल कर सोनिया की हत्या की योजना बना डाली. अपनी इस योजना में विजय ने अपने दोस्तों, सुमित और संदीप को भी शामिल कर लिया. सुमित और संदीप ने विजय के सामने सोनिया की हत्या करने में साथ देने के लिए शर्त रखी थी कि सोनिया की हत्या के बाद वह उन दोनों को सोनू के साथ हमबिस्तर होने देगा. सोनू और विजय ने यह शर्त स्वीकार कर ली तो उसी दिन विजय, सोनू, संदीप और सुमित ने मिल कर सोनिया की हत्या करने की पूरी तैयारी कर ली.

योजनानुसार घटना वाले दिन सब ने अपनेअपने काम से छुट्टी कर ली. दोपहर को लंच टाइम में सोनिया की फैक्ट्री जा कर सोनू ने उसे बताया कि आज उस का जन्मदिन है. अत: वह फैक्ट्री से छुट्टी ले कर उस के साथ चले. शाम को पार्टी का प्रोग्राम है और तैयारी के लिए उसे उस की मदद की जरूरत है. सोनिया सोनू की चाल से अंजान थी, इसलिए सोनू के साथ बेहिचक चली आई. सोनिया के आ जाने के बाद सभी लोग गली पीर वाली स्थित विजय के घर पर एकत्र हुए. उस दिन विजय के घर वाले कहीं गए हुए थे. सुमित और संदीप ने वहां खानेपीने का इंतजाम पहले से ही कर रखा था. सोनू और सोनिया के वहां पहुंचते ही गिलासों में शराब डाली गई और जाम से जाम टकराने लगे.

सभी लोग अपनीअपनी रंगीन बातों और शराब की मस्ती में डूबे थे. तीनों बारीबारी से सोनू और सोनिया को चूम रहे थे. सोनू और सोनिया ने भी जम कर शराब पी. जब सब को नशा हो गया तो विजय और सोनिया किसी बात पर आपस में उलझ पड़े. दोनों के बीच आपस में तकरार होने लगी. कमरे में शोर मचते देख सोनू ने बीचबचाव करते हुए विजय से चुप रहने को कहा. सोनू की बात मान कर विजय चुप हो गया तो संदीप ने बोतल की बची शराब थोड़ीथोड़ी सब के गिलासों में डाल दी.

तब तक रात के लगभग 11 बज चुके थे. सर्दियों का मौसम होने की वजह से चारों ओर सन्नाटा पसरा हुआ था. अपनेअपने गिलासों की शराब खत्म करने के बाद सभी योजनानुसार उठ खड़े हुए और एक ही बाइक पर सवार हो कर फोकल प्वाइंट के सुनसान इलाके की ओर चल पड़े. आईसीडी कंपनीज के पीछे वाला इलाका बिलकुल सुनसान और झाडि़यों से भरा हुआ था. उस वक्त बाइक संदीप चला रहा था. झाडि़यों के पास पहुंच कर उस ने बाइक रोक दी. बाइक रुकते ही विजय ने सोनिया को खींच कर नीचे उतारा और सुमित की मदद से खींच कर झाडि़यों में ले गया. नशे में धुत होने के कारण वह कुछ नहीं समझ पाई. उस ने सोचा कि शायद उस से प्यार करने के लिए उसे झाडि़यों के बीच ले जाया जा रहा है.

झाडि़यों में पहुंच कर सुमित ने पीछे से सोनिया के बाजू पकड़ लिए तो विजय ने साथ लाए खंजर से उस पर ताबड़तोड़ वार करने शुरू कर दिए. सोनिया ने चीखना चाहा तो सोनू ने आगे बढ़ कर उस का मुंह दबोच लिया. सोनिया के शरीर से खून के फव्वारे फूट पड़े. कुछ ही देर में वह बेजान हो कर जमीन पर गिर पड़ी. सोनिया की हत्या कर के उस की लाश वहीं झाडि़यों में छोड़ कर सभी अपनेअपने घर चले गए. किसी को उन पर संदेह न हो, इसलिए अगले दिन से सभी अपनेअपने कामों पर जाने लगे.

चौकीप्रभारी गुरबख्शीश सिंह ने विजय और सोनू की रिमांड के दौरान ही इस हत्याकांड से जुड़े संदीप और सुमित को भी गिरफ्तार कर लिया था. इस के बाद रिमांड अवधि समाप्त होने पर सभी अभियुक्तों को 7 जनवरी को अदालत में पेश किया, जहां से उन्हें न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया. अगर मृतका सोनिया का मोबाइल फोन पुलिस के हाथ न लगा होता तो उस के हत्यारों को पकड़ना संभव. True Love Story

Hindi love Stories : रगों में समाया प्यार

Hindi love Stories : जिस तरह प्यार अंधा होता है, उसी तरह प्यार होने के बाद प्रेमी भी अंधे ही नहीं, विचारशून्य भी हो जाते हैं. वह अपने प्यार को अंजाम तक पहुंचाने के लिए कुछ भी करने को तैयार हो जाते हैं, चाहे वह हत्या जैसा अपराध ही क्यों न हो. नरिंदर और राजन ने भी कुछ ऐसा ही किया. जिन दिनों मैं पंजाब के जिला पटियाला के थाना खरड़ का थानाप्रभारी था, एक दिन सुबह के करीब साढ़े 7 बजे मुझे अपने

मोबाइल फोन पर सूचना मिली कि लांडरा रोड के साथ लगे धोबिया मोहल्ले में अज्ञात हत्यारे एक लड़की के हाथपैर बांध कर एक महिला की हत्या कर गए हैं. मैं एक सबइंसपेक्टर और 2 सिपाहियों को ले कर सूचना में बताए गए पते पर पहुंच गया. जिस वक्त मैं घटनास्थल पर पहुंचा, सिटी चौकीइंचार्ज हरजिंदर सिंह वहां मौजूद थे. हरजिंदर सिंह ने मुझे बताया कि इस घटना की सूचना मिलते ही वह पुलिसपार्टी के साथ वहां आ गए थे. उन्होंने गेट के अंदर लड़की (नरिंदर कौर) को हाथ बंधे पड़ी देखा तो एक महिला सिपाही को गेट के ऊपर से दूसरी तरफ उतारा.

महिला सिपाही ने नरिंदर कौर के रस्सी से बंधे हाथ खोले तो उस ने कमरे से चाबी ला कर गेट का ताला खोला. बदमाशों ने इसी की मां का कत्ल किया है. मैं ने नरिंदर कौर के चेहरे को गौर से देखते हुए घटना के बारे में पूछा तो उस ने कहा, ‘‘सर, नकाबपोश बदमाशों ने मेरी मां की हत्या कर दी और मुझे रस्सियों से बांध कर मुंह में कपड़ा ठूंस कर एक कोने में फेंक दिया. किस्मत अच्छी थी कि सांस घुटने से पहले मैं अपने मुंह का कपड़ा निकालने में सफल हो गई और किसी तरह घिसटघिसट कर बाहर आ गई.’’

इस के बाद उस ने एक लंबी सांस ली. सांस लेने के बाद वह कुछ ज्यादा ही जोश में आ गई, ‘‘कौन कहता है कि हमारी पुलिस अच्छी नहीं है. मैं तो यही कहूंगी कि दुनिया में सब से अच्छी हमारी पुलिस है.’’

मैं ने फिलहाल लड़की की बातों पर ध्यान देना जरूरी नहीं समझा. मगर ऐसे हालात में भी जब वह बेबाकी के साथ बोलती ही गई तो मुझे अपने पुलिसिया अनुभव के हिसाब से उसे दूसरी दृष्टि से परखना पड़ा. लेकिन मैं ने अपना शक किसी भी तरह से जाहिर नहीं होने दिया. उसे जैसेतैसे आश्वस्त कर के मैं चौकीइंचार्ज हरजिंदर सिंह और अन्य पुलिसकर्मियों के साथ घर के भीतर चला गया. घर का नक्शा कुछ इस तरह से सामने आया. मुख्य गेट के बाद खुला दालान था. दालान के बाद बरामदा. जो बीच वाला कमरा था, उसी में बिछे डबलबैड पर एक किनारे नरिंदर कौर की मां सुरजीत कौर की लाश पड़ी थी.

सुरजीत कौर का शव सीधी अवस्था में था. उन का बायां हाथ कमर के साथ चिपका था तो दायां हाथ ऊपर उठा था. दोनों कलाइयों की नसें काट दी गई थीं, जहां से खून बह रहा था. एक अजीब बात वहां यह सामने आई कि शव के नथुनों में रुई के फाहे फंसे हुए थे. मृतका के हाथों में सोने की चूडि़यां और कानों में सोने की बालियां साफ नजर आ रही थीं. उन्हें देख कर यही लग रहा था कि नकाबपोश लुटेरों ने यह हत्या लूटपाट के लिए नहीं की. अगर यदि ऐसा होता तो वे मृतका के गहने भला छोड़ कर क्यों जाते? दूसरे कमरे का सामान बिखरा हुआ था. ऐसा बदमाशों ने शायद घटना को लूटपाट का रूप देने के लिए किया था.

वहां की हालत से पूरी तरह साफ हो गया था कि नरिंदर कौर जो बता रही थी, वह सच नहीं था. उस का झूठ पकड़ने के लिए हम ने एक चाल चली. मैं बगल में खड़े सबइंसपेक्टर से बात कर रहा था, तभी वहां एक आदमी आया. उस का नाम देवेंद्र सिंह था. उस ने खुद को नरिंदर कौर का फूफा बताया. वह लांडरा रोड, पर सेक्टर-10 में रहता था. उस ने बताया, ‘‘सर, मृतका सुरजीत कौर ने बीती रात मुझे अपने घर बुलाया था. उस के बुलाने पर मैं यहां पहुंचा तो उस ने नाराज हो कर मुझ से कहा था कि नरिंदर अपने खानदान का बेड़ा गर्क कर रही है. वह पड़ोस में रहने वाले राजन के साथ मुंह काला करती घूम रही है. लाख समझाने पर भी नहीं मान रही है. उस ने मुझ से इस बारे में नरिंदर से बात करने को कहा था.

‘‘तब मैं ने जैसेतैसे सुरजीत को आश्वस्त किया था. चूंकि उस समय नरिंदर घर पर नहीं थी, इसलिए मैं ने सोचा कि कल आ कर नरिंदर को समझा दूंगा. मैं अपने घर जा रहा था तो लांडरा रोड पर मुझे सामने से नरिंदर आती दिखाई दी. मैं ने उसे रोक कर राजन के बारे में बात की तो उस ने कहा कि मां उस के बारे में झूठी अफवाहें उड़ा रही है. जबकि वह दिनरात मां का खयाल रख रही है और इस वक्त वह मां के लिए दवा ले कर आ रही है. उस ने मुझे अपने हाथ में पकड़ा लिफाफा भी दिखाया था, जिस में किसी दवा की स्ट्रिप थी.

‘‘इस के बाद मैं अपने घर चला गया था. मगर आज अभी कुछ देर पहले मुझे पता चला कि सुरजीत का किसी ने कत्ल कर दिया है. जानकारी मिलते ही मैं यहां चला आया. मुझे लगता है, हो न हो सुरजीत कौर का कत्ल नरिंदर ने ही अपने प्रेमी राजन के साथ मिल कर किया है.’’

मैं ने भी इस सिलसिले में ज्यादा सोचाविचारा नहीं और देवेंद्र सिंह की तहरीर पर कत्ल का मामला जरूर दर्ज करा दिया, मगर इस बात की जानकारी नरिंदर को नहीं होने दी. मेरे साथी पंचनामा आदि की काररवाई कर रहे थे, तभी मैं नरिंदर को पूछताछ के लिए एक किनारे ले गया. मैं ने उस से सवाल किया कि जब नकाबपोश लुटेरों ने घर में लूटपाट की और उस की मां का कत्ल किया तो क्या उस वक्त उन लोगों ने हाथपैर बांध कर उस के मुंह में कपड़ा ठूंस रखा था? मैं ने यह भी पूछा कि उस की मां के नथुनों में जो रुई के फाहे मिले हैं, क्या वे भी नकाबपोशों ने ही ठूंसे थे? यह घटना कितने बजे हुई थी?

उस ने बताया, ‘‘घटना शायद रात डेढ़ बजे या फिर दो-ढाई बजे के आसपास घटी थी. नकाबपोश लुटेरों ने जो भी किया, सब मेरी आंखों के सामने किया. मैं उन का भारी विरोध करने लगी थी, इसी से चिढ़ कर उन्होंने मेरे हाथपैर बांध कर मुंह में कपड़ा ठूंस दिया था. इस के बाद मां के हाथों की नसें काट कर उन्हें मौत के घाट उतार दिया था. उन के नथुनों में रुई क्यों ठूंसी, यह बात मेरी समझ में नहीं आ रही है.’’

यह सब बताते हुए वह हकला रही थी. उस के चेहरे की भंगिमाएं इस बात की साफ चुगली करने लगी थीं कि वह भीतर से डरी हुई है. मुझे उस पर पूरा शक होने लगा था. उसी समय जिले के अन्य पुलिस अधिकारी भी वहां पहुंच गए. मैं ने उन्हें पूरी जानकारी दे दी. सुरजीत कौर की लाश पोस्टमार्टम के लिए भिजवाने के बाद नरिंदर पर अपना मनोवैज्ञानिक दबाव बनाने के लिए हम सभी पुलिस अधिकारी एक कमरे में चले गए. कमरा बंद कर के आधे घंटे तक गुप्त मीटिंग करने का नाटक किया. इस के बाद बाहर निकल कर बारीबारी से सब ने नरिंदर को कुछ इस तरह से घूरना शुरू किया, जैसे उसे इस बात का यकीन हो जाए कि पुलिस को उसी पर शक है.

हमारा यह सोचना था कि इस सब से अगर वह खुद ही आत्मसमर्पण को तैयार हो जाए तो केस की तफ्तीश का सिलसिला हमारे लिए आसान हो जाएगा. अपनी यह मनोवैज्ञानिक काररवाई करने के बाद हम लोग थाने आ गए. जैसा हम ने सोचा था, वैसा ही हुआ. हमारे थाने पहुंचने के थोड़ी देर बाद नरिंदर कौर का एक करीबी रिश्तेदार उसे आत्मसमर्पण करवाने के लिए थाने आ पहुंचा. उस ने आते ही नरिंदर कौर को मेरे सामने खड़ी कर के कहा, ‘‘इस ने और इस के प्रेमी राजन ने ही सुरजीत कौर का कत्ल किया है.’’

‘‘राजन कहां है?’’ मैं ने उतावलेपन से पूछा.

वह बोला, ‘‘सर, वह भी आया है. बाहर खड़ा है, अभी बुलाए देता हूं.’’

इस के बाद जरा ही देर में काले रंग की लैदर जैकेट पहने 1 नवयुवक अंदर आ गया. खुद को नरिंदर का नजदीकी रिश्तेदार कहने वाला आदमी मेरे नजदीक आ कर बोला, ‘‘सर, जब आप लोग मौके पर तफ्तीश कर रहे थे, तब मैं भी वहीं था. आप सब के जाते ही नरिंदर कौर ने मुझ से कहा कि वह बहुत घबरा रही है. उस ने कुछ सिपाहियों को आपस में बातें करते सुना था कि अपराधी अगर अपनी मरजी से आत्मसमर्पण कर देता है तो पुलिस उस से कुछ नहीं कहती, वरना पुलिस की कोशिशों से पकड़े जाने पर उस से बहुत बुरा सुलूक किया जाता है.’’

इस के बाद नरिंदर कौर ने मुझे बता दिया कि उस ने ही अपने प्रेमी राजन के साथ मिल कर मां का कत्ल किया था. पुलिस की पिटाई से बचने के लिए वह आत्मसमर्पण करना चाहती थी. नरिंदर कौर ने उसी समय फोन कर के राजन को भी बुलवा लिया था. उसे भी उस ने आत्मसमर्पण करने के लिए राजी कर लिया था. दोनों की सहमति पर वह आदमी उन्हें मेरे पास ले कर आया था. मैं ने नरिंदर कौर और राजन से पूछताछ की तो उन्होंने अपना अपराध स्वीकार कर लिया. मैं ने दोनों को सुरजीत कौर की हत्या के आरोप में गिरफ्तार कर के अदालत में पेश कर के 5 दिनों के पुलिस रिमांड पर लिया. रिमांड अवधि में की गई पूछताछ में प्रेम अपराध की जो लोमहर्षक दास्तान सामने आई, वह कुछ इस तरह से थी.

पटियाला के खरड़ निवासी मोहिंद्र सिंह मोहाली स्थित पंजाब स्कूल एजुकेशन बोर्ड में नौकरी करते थे. उन के घर से मोहाली कोई 10 किलोमीटर दूर था, इसलिए वह घर से ही स्कूटर से औफिस आतेजाते थे. कई सालों पहले सड़क दुर्घटना में उन की मौत हो गई थी. तब उन की जगह पत्नी सुरजीत कौर को नौकरी मिल गई थी. उस वक्त उन के बच्चे काफी छोटे थे. नरिंदर उस समय 10 साल की थी और उस का भाई हरनेक 4 साल का. सुरजीत कौर पढ़ीलिखी महिला थीं. उन्होंने तय किया कि वह अपने दोनों बच्चों को खूब पढ़ालिखा कर बढि़या नौकरियों पर लगवाएंगी.

इसी तरह वक्त आगे बढ़ता गया. हरनेक 12वीं में पढ़ रहा था और नरिंदर बीए फाइनल में. वह चंडीगढ़ के जिस महिला कालेज में पढ़ रही थी, बस से ही अकेली आयाजाया करती थी. सुरजीत के घर से 4 घरों की दूरी पर सुरेश कुमार का घर था. वह बैंड मास्टर था. उस के बच्चों में एक बेटी और 3 बेटे थे. तीनों बेटे भी पिता के साथ बैंड बजाते थे. इन में मंझला बेटा राजन कुछ ज्यादा ही महत्त्वाकांक्षी था. 12वीं तक पढ़ाई करने के बाद उस ने अपने आप को एक कलाकार के रूप में स्थापित करने का प्रयास किया. उस की मेहनत रंग लाई और वह उभरते हुए कलाकार के रूप में स्टेज शोज करने लगा.

किसी स्टेज शो में अपने पड़ोसी राजन की कला देख कर नरिंदर उस पर मर मिटी. शो खत्म होने पर उस ने राजन का हाथ अपने हाथों में ले कर न केवल उसे मुबारकबाद दी, बल्कि उस की कला की भी जम कर तारीफ की. यहीं से दोनों के प्रेम की शुरुआत हुई. इस के बाद दोनों अकसर मिलने लगे. जून, 2003 में किसी बहाने से दोनों हिमाचल प्रदेश के नगर कसौली जा कर होटल में रुके. वहीं दोनों के बीच जिस्मानी ताल्लुकात भी बन गए. इस के बाद तो इन के लिए एकदूसरे के बिना रहना मुश्किल हो गया. सुरजीत कौर ने नरिंदर व हरनेक को अलगअलग कमरे दे रखे थे, ताकि वे अपनी पढ़ाई ठीक से कर सकें. नरिंदर रात में अपने कमरे की कुंडी लगा कर काफी देर तक पढ़ती थी.

पूरे मोहल्ले में वह पढ़ाकू लड़की के रूप में मशहूर थी. राजन से संबंध बनाने के बाद वह रात में उसे अपने कमरे पर बुलाने लगी. राजन आधी रात में छतों से होता हुआ पिछवाड़े की तरफ से घर में दाखिल हो कर उस के कमरे में चला आता. रंगरलियां मनाने के बाद वह उसी तरह वापस अपने घर लौट जाता. कई महीने यह सिलसिला चलता रहा. मगर एक रात लघुशंका के लिए सुरजीत कौर अपने कमरे से निकलीं तो ठीक उसी समय राजन उन की बेटी के कमरे से निकल कर सीढि़यों की ओर जा रहा था. उसे देख कर सुरजीत कौर को समझते देर नहीं लगी कि मामला क्या हो सकता है. शोर मचाने से अपनी ही बदनामी होती. लिहाजा उन्होंने चुप रहते हुए समस्या का समाधान निकालने की सोची.

इस के बाद सुरजीत कौर बेटी से बेरुखी से पेश आने ही लगीं. वह रातरात भर जाग कर उस की निगरानी करने लगीं. इस से नरिंदर कौर समझ गई कि मां को शायद उस के प्यार की भनक लग गई है. वह खुद भी सतर्क हो गई. इस से राजन को रात में अपने पास बुलाना नरिंदर के लिए मुश्किल हो गया. किसी दिन सुरजीत कौर ने गुस्से में कह भी दिया ‘‘अच्छे खानदानी घर की लड़की हो कर भी तुझे उस दो टके के लड़के के साथ रासलीला रचाने में शर्म नहीं आई. आगे मैं ने उसे कभी तेरे साथ देख लिया तो दोनों की बोटीबोटी कर के कुत्तों को खिला दूंगी.’’

मां के ये शब्द सुन कर नरिंदर कौर ने जवाब तो कोई नहीं दिया, लेकिन उस के लिए अब उस की मां सब से बड़ी दुश्मन नजर आने लगी. क्योंकि उस के रहते वह अपने प्रेमी से नहीं मिल सकती थी. इसलिए उस ने अपनी मां को दुनिया से विदा करने का फैसला ले लिया. नरिंदर ने इस बारे में अपने प्रेमी राजन से बात की तो उस ने उसे सलाह दी, ‘‘अपनी मां से नफरत करने के बजाय तुम उन का विश्वास जीतने की कोशिश करो. उन्हें समझाओ कि हम दोनों आपस में सच्चा प्यार करते हैं और उन के आशीर्वाद से एकदूसरे से शादी करना चाहते हैं.’’

राजन की बात नरिंदर को जंच गई. एक दिन नरिंदर कौर ने मां के पैर छूते हुए पहले अपनी गलती की माफी मांगी, फिर नजरें झुका कर बोली, ‘‘मम्मी, मैं और राजन एकदूसरे को बहुत प्यार करते हैं. न मैं राजन के बिना रह सकती हूं और न ही वह मेरे बिना. वह किसी और से शादी भी नहीं करेगा. इसलिए आप मेरी उस से शादी करवा दो. मम्मी शादी में मुझे आप के आशीर्वाद के अलावा और कुछ नहीं चाहिए.’’

नरिंदर ने हिम्मत कर के यह बात कह तो दी, मगर उसे इस बात का डर भी था कि ये सब सुनते ही मां एक बार उस पर भड़केगी जरूर. लेकिन सुरजीत कौर ने नाराज होने के बजाय अपना स्नेहिल हाथ उस के सिर पर रख कर प्यार से कहा, ‘‘तू बहुत भोली है बेटी, नादान है अभी. तू नहीं जानती कि दुनिया मक्कार लोगों से भरी पड़ी है. मैं ने रिश्तेदारी में कुछेक जगह तेरी शादी की बात चलाई है. सही लड़का मिलते ही ऐसा धूमधाम से शादी करूंगी कि सारा शहर देखता रह जाएगा. एकएक चीज दूंगी तुझे दहेज में. कार बोल कौन सी लेगी?’’

‘‘नहीं मां, न मुझे कार चाहिए, न कुछ और. शादी में दहेज का तुम मुझे एक रुपया भी मत देना. बस, मेरा ब्याह राजन से करवा दो, तुम्हारा यह एहसान मैं सारी जिंदगी नहीं भूलूंगी.’’

इतना सुनते ही सुरजीत कौर ने पास पड़ी लकड़ी की छड़ी उठा ली. यह देख कर नरिंदर डर गई कि इस छड़ी से अब उस की पिटाई होने वाली है, लेकिन ऐसा नहीं हुआ. सुरजीत कौर वह छड़ी अपने सिर पर मारते हुए बुक्का फाड़ कर चीखने लगीं, ‘‘औलाद की बदौलत यह दिन देखने से पहले मुझे मौत आ जाती तो अच्छा था.’’

मां को चुप करवाने को नरिंदर कौर उन की ओर बढ़ी तो सुरजीत कौर ने उस छड़ी से उस को भी धुन दिया. नरिंदर कौर के जिस्म का कोई अंग ऐसा न बचा, जहां छड़ी की मार न पड़ी हो. काफी देर तक नरिंदर कौर सुबकसुबक कर रोती रही. इस के बाद उस के मन में यह बात बैठ गई कि मां किसी भी कीमत पर उस की शादी राजन से करने के लिए तैयार नहीं होगी. एकबारगी उसे यह भी डर लगा कि मां किसी रोज कहीं उसे मौत के घाट न उतार दे. लिहाजा, नरिंदर ने मन ही मन निर्णय ले लिया कि अब मां को मौत के घाट उतार कर ही दम लेगी. बाद में जब उस ने राजन को इस बारे में विस्तार से बताया तो वह भी उस के फैसले से सहमत हो गया. इस के बाद उन्होंने सुरजीत कौर को ठिकाने लगाने की योजना बना ली.

उधर बेटी को ले कर सुरजीत काफी तनाव में रहने लगी थी. उन का ब्लडप्रैशर अक्सर बढ़ने लगा. वह दवा वगैरह भी नरिंदर कौर से ही मंगवाया करती थीं. नरिंदर ने इसी बात का फायदा उठाया. 28 फरवरी, 2005 की रात में उस ने मां को खाना परोसते वक्त उन के साग में नींद की 6 गोलियों का पाउडर मिला दिया. उस दिन उस का भाई हरनेक रिश्तेदारी में गया हुआ था. खाना खाने के बाद सुरजीत कौर पर गोलियों का ऐसा असर हुआ कि वह जल्द ही गहरी नींद में चली गईं. नरिंदर को अपना काम आधी रात के बाद करना था, इसलिए मोबाइल फोन पर डेढ़ बजे का अलार्म लगा कर वह भी सो गई. डेढ़ बजे अलार्म की आवाज पर उठ कर उस ने राजन को फोन कर के आने को कहा. वह छत के रास्ते नरिंदर के घर आ गया.

नरिंदर के इशारा करने पर राजन ने गहरी नींद में सो रही सुरजीत कौर के मुंह पर तकिया रख कर दबा दिया. सुरजीत कौर छटपटाने लगीं तो नरिंदर ने अपने दुपट्टे से उन की बांहें व टांगें बांध दीं. अब तक सुरजीत की नींद पूरी तरह टूट चुकी थी. वह खुद को छुड़ाने की कोशिश करने लगीं. इस प्रयास में वह नीचे गिर गईं तो उन्होंने उन्हें उठा कर फिर से बैड पर पटक दिया. वह फिर बेहोशी में चली गईं. राजन ने नरिंदर से रुई मंगवा कर फाहे उन के नथुनों में घुसेड़ दिए. इस के बाद उन के पास ही उसी बैड पर मौजमस्ती करने लगे. उन्हें भरोसा हो गया था कि सुरजीत कौर मर चुकी है. मगर प्रेमालाप के दौरान उन्होंने उन की एक बाजू फड़फड़ाते देखी तो नरिंदर ने नब्ज टटोली, वह चल रही थी.

वह रसोई से 2 चाकू उठा लाई. एक चाकू से उस ने मां की दाईं कलाई की नस काटी तो दूसरे चाकू से राजन ने उन के बाएं हाथ की कलाई की नस काट दी. नसों से खून बह कर बिस्तर पर फैलने लगा. ज्यादा खून निकलने से थोड़ी देर में सुरजीत कौर की मौत हो गई. मां की हत्या करने के बाद उन की लाश के पास ही नरिंदर सुबह के 5 बजे तक राजन के साथ वासना का खेल खेलती रही. इस के बाद घर में रखे 3,300 रुपए, कुछ गहने उस ने राजन को सौंप दिए. इसी के साथ कुछ आलमारियों में से कपड़े वगैरह निकाल कर इधरउधर फेंक दिए, ताकि मामला लूटपाट का लगे.

घर से जाते वक्त राजन ने सुरजीत कौर के हाथों में बंधा दुपट्टा खोल कर नरिंदर के मुंह में घुसेड़ा और रस्सी से उस के हाथपैर बांध कर जमीन पर लिटा दिया. नींद की गोली का खाली पत्ता और दोनों चाकू बाहर कहीं फेंकने के लिए राजन ने अपने पास रख लिए. इस के बाद वह वहां से चला गया. सुबह 7 बजे तक नरिंदर उसी तरह लेटी रही. फिर सरकसरक कर बाहर गेट के पास आई और बचाव के लिए चिल्लाने लगी. नरिंदर और राजन द्वारा अपना अपराध स्वीकार करने के बाद हम ने राजन की निशानदेही पर गहने, नींद की गोलियों का खाली पत्ता, दोनों चाकू और 3,300 रुपए बरामद कर लिए. पुलिस रिमांड खत्म होने पर दोनों को अदालत में पेश किया, जहां से उन्हें न्यायिक हिरासत में पटियाला की सेंट्रल जेल भेज दिया गया.

तय समय सीमा के अंदर ही मैं ने दोनों अभियुक्तों के विरुद्ध आरोप पत्र तैयार कर के अदालत में पेश कर दिया. सेशन कमिट होने के बाद पटियाला की जिला अदालत में यह केस विधिवत चला. 31 अगस्त, 2007 को केस का फैसला सुनाते हुए रोपड़ की तत्कालीन जिला एवं सत्र न्यायाधीश रेखा मित्तल ने नरिंदर और राजन को दोषी मानते हुए उम्रकैद व 2 हजार रुपए जुरमाने की सजा सुनाई. ऊपरी अदालतों द्वारा अपील खारिज होने के बाद आज दोनों जेल की सलाखों के पीछे अपनी उम्रकैद की सजा भुगत रहे हैं. बताया जा रहा है कि सजा पूरी होने के बाद जेल से बाहर आने पर नरिंदर कौर और राजन शादी करेंगे. किसी ने सच ही कहा है कि इश्क जब किसी की रगों में समा जाए तो इस का भयानक अंजाम सामने आने पर भी उस का महबूब ही उस के लिए सर्वोपरि होता है. Hindi love Stories

—कथा पुलिस रिकार्ड व अदाल

Love Story : एकतरफा प्यार की कहानी

Love Story : 20 जनवरी, 2018 की बात है. मध्य प्रदेश के सीहोर जिले के थाना आष्टा के थानाप्रभारी बी.डी. वीरा थाने में बैठे पुराने मामलों की फाइल देख रहे थे, तभी उन्हें इलाके के समरदा गांव के पास मिट्टी की खदान में किसी युवक की लाश पड़ी होने की खबर मिली. मामला हत्या का था, इसलिए उन्होंने उसी समय घटना की जानकारी अपने एसडीओपी और एसपी को दे दी और खुद अपनी टीम के साथ मौके लिए रवाना हो गए. समरदा गांव के पास स्थित मिट्टी की वह खदान कुछ दिनों से बंद पड़ी थी.

थानाप्रभारी जब मौके पर पहुंचे तो वहां एक युवक की लाश मिली. उस युवक की उम्र यही कोई 20 साल थी. उस का सिर कुचला हुआ था. वहीं पर खून लगा पत्थर पड़ा था. लग रहा था कि शायद उसी पत्थर से उस की हत्या की गई थी. वहीं पर बीयर की खाली बोतलें भी पड़ी थीं. मौके के हालात देख कर थानाप्रभारी यह भी समझ गए कि उस की हत्या किसी दोस्त ने ही की होगी. बहरहाल, पहली जरूरत लाश की पहचान की थी. पुलिस ने थोड़ा प्रयास किया तो लाश की पहचान भी हो गई. पता चला कि मृतक का नाम रितिक मेहता था और वह आष्टा में राठौर मंदिर के पास रहता था.

खबर मिलने पर रितिक के घर वाले भी घटनास्थल पर पहुंच गए. उन्होंने बताया कि रितिक 19 जनवरी की सुबह लगभग 10 बजे अपने दोस्त क्लिंटन उर्फ लखन मालवीय के साथ कालेज जाने को बोल कर निकला था, जिस के बाद वह घर वापस नहीं आया.

संदेह के दायरे में आया लखन

थानाप्रभारी को पहले ही मामले में यारीदोस्ती के बीच हुई हत्या का शक था. घर वालों से पूछताछ के बाद थानाप्रभारी ने घटनास्थल की काररवाई निपटाई और लाश को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया. साथ ही थाने में हत्या का केस भी दर्ज करवा दिया गया. चूंकि रितिक लखन के साथ गया था, इसलिए थानाप्रभारी ने तत्काल एकटीम लखन के घर बरखेड़ा गांव भेज दी. लेकिन लखन घर पर नहीं मिला और न ही उस के बारे में कोई जानकारी मिली. इस से पुलिस का शक लखन पर और भी गहरा गया. लिहाजा पुलिस टीम संभावित जगहों पर लखन को तलाशने लगी.

थानाप्रभारी बी.डी. वीरा के निर्देश पर पुलिस की दूसरी टीम आष्टा से समरदा खदान के बीच रास्ते में लगे सीसीटीवी कैमरे के फुटेज जमा करने, लखन और मृतक के मोबाइल की काल डिटेल्स तथा उन की लोकेशन निकालने के काम में जुट गई. इस छानबीन में पुलिस ने पाया कि लखन 19 जनवरी को रितिक को उस के घर के बाहर से अपनी मोटरसाइकिल पर बैठा कर शराब की दुकान पर गया था. शराब की दुकान पर लगे सीसीटीवी कैमरे में लखन बीयर खरीदते दिख गया. उस के मोबाइल की लोकेशन भी समरदा में उसी समय पर पाई गई, जिस समय रितिक का मोबाइल स्विच्ड औफ हुआ था.

अब आष्टा थानाप्रभारी बी.डी. वीरा के सामने आरोपी की तसवीर साफ हो चुकी थी, इसलिए उन्होंने टीम के साथ अपने मुखबिरों को भी सक्रिय कर दिया. इस का नतीजा यह निकला कि 2 दिन बाद ही लखन मालवीय पुलिस के हाथ लग गया. पकडे़ जाने पर पहले तो वह अपने आप को बेकसूर बताता रहा, लेकिन जब थानाप्रभारी ने उस से मनोवैज्ञानिक ढंग से पूछताछ की तो वह अपने ही बयानों में उलझने लगा. जिस के बाद उस ने स्वीकार कर लिया कि उस ने ही रितिक की हत्या की थी. उस ने मृतक का मोबाइल फोन और पर्स भी बरामद करा दिया.

अपने भाई की जिस मोटरसाइकिल पर वह रितिक को बैठा कर ले गया था, वह भी पुलिस ने बरामद कर ली. पूछताछ के बाद लखन ने अपने दोस्त की हत्या करने की जो कहानी बताई, वह प्यार को हाईजैक करने वाली कहानी थी—

साल भर पहले रितिक मेहता  और लखन मालवीय स्थानीय मौडल स्कूल में एक साथ पढ़ते थे. दोनों में गहरी दोस्ती थी. दोनों ही एकदूसरे के लिए कुछ भी करने को तैयार रहते थे. जब वे 10वीं कक्षा में थे, उस समय लखन का दिल साथ में पढ़ने वाली एक खूबसूरत लड़की बीना पर आ गया था. लखन ने यह बात अपने दोस्त रितिक को बताई. रितिक ने दोनों की प्रेमकहानी को आगे बढ़वाने में काफी मदद की. लखन और बीना की प्रेम कहानी शुरू हो गई, जिस में रितिक उन दोनों की पूरी मदद करता था, इसलिए बीना की रितिक से भी अच्छी बनती थी. रितिक दोनों के एकांत में मिलने की व्यवस्था के साथसाथ उस दौरान उन की चौकीदारी भी करता था.

बताया जाता है कि कई बार तो स्कूल में खाली पड़े क्लासरूम में लखन और उस की प्रेमिका के मिलन कार्यक्रम के दौरान रितिक क्लास के बाहर खड़े हो कर पहरेदारी करता था. इसी बीच रितिक भी बीना को एकतरफा चाहने लगा था. पर उस ने अपनी चाहत कभी जाहिर नहीं होने दी. रितिक ने अपने जन्मदिन पर दोस्त लखन और उस की प्रेमिका बीना को भी बुलाया था. तब बीना ने रितिक से कहा, ‘‘रितिक, तुम हमारे लिए कितना करते हो, क्या स्कूल में कोई लड़की तुम्हारी दोस्त नहीं है?’’

‘‘नहीं, मैं ने किसी लड़की को अभी तक दोस्त नहीं बनाया.’’ रितिक बोला.

‘‘रितिक, इस स्कूल में जो भी लड़की तुम्हें पसंद हो, तुम मुझे बता दो. उस से मैं तुम्हारी दोस्ती करा दूंगी.’’ बीना ने विश्वास दिलाते हुए कहा.

एक लड़की 2 दीवाने

एकतरफा ही सही, रितिक को बीना पसंद थी. भला यह बात वह उसे कैसे बता सकता था. अगर वह अपने मन की बात उसे बता देता तो उस के दोस्त लखन का दिल टूट जाता. लिहाजा उस ने अपने दिल की बात उसे नहीं बताई. बहरहाल, लखन और बीना की प्रेम कहानी और रितिक की उन से दोस्ती लगातार चलती रही. लेकिन किसी को यह पता नहीं था कि प्रेम कहानी वाली दोस्ती एक दिन 3 में से एक दोस्त की हत्या का कारण बनेगी. कहानी में मोड़ उस समय आया, जब 12वीं की परीक्षा में बीना और रितिक तो पास हो गए, लेकिन लखन फेल हो गया.

इस से त्रिकोण का एक कोण पीछे रह गया जबकि रितिक और बीना ने एक स्थानीय कालेज में एडमिशन ले लिया. अब रितिक और बीना की मुलाकातें कालेज में ही होने लगीं. जबकि लखन का रितिक से तो बराबर मिलनाजुलना बना रहा, पर बीना से वह नहीं मिल पाता था. प्यार भले ही एकतरफा हो, उस की तड़प दीदार के लिए बेचैन करती है. यही लखन के साथ हुआ. वह बीना से मिलने के लिए उस के कालेज के चक्कर लगाने लगा. लेकिन यह रोजरोज संभव नहीं था. इधर लखन की गैरमौजूदगी में बीना और रितिक की दोस्ती कुछ ज्यादा ही गहराने लगी.

बीना के प्रति उस के दिल में जो प्यार दबा हुआ था, वह अंगड़ाइयां लेने लगा. पर बीना तो अब भी लखन को चाहती थी और उस के बारे में अकसर रितिक से बातें भी करती रहती थी. जबकि रितिक चाहता था कि किसी तरह बीना के दिल में लखन के प्रति नफरत पैदा हो जाए. जब वह उस से बात करनी बंद कर देगी तो वह बीना पर अपना प्रभाव जमाना शुरू कर देगा. इस के लिए रितिक ने योजनाबद्ध तरीके से बीना से लखन की बुराइयां करनी शुरू कर दीं. वह कहता कि लखन शराब पीता है, दूसरी लड़कियों पर भी नजर रखता है.

ये सब बातें सुन कर बीना को लखन से नफरत हो गई. उस के दिमाग में लखन की जो छवि बनी हुई थी, वह बदल गई. वह सोचने लगी कि लखन भी आम लड़कों की तरह ही है. उस ने लखन से मिलना तो दूर, फोन पर बात करनी भी बंद कर दी. रितिक इस से बहुत खुश हुआ. उस ने इस नाराजगी का फायदा उठाते हुए बीना से नजदीकियां बढ़ा लीं. धीरेधीरे वह रितिक को इतना चाहने लगी कि उस ने लखन से एक तरह से किनारा कर लिया.

नफरत के बीजों की फसल

लखन हमेशा की तरह रितिक से मिलने के बहाने कालेज आ कर बीना से मिलने की कोशिश करता तो रितिक भी कोई न कोई बहाना बना देता. यानी रितिक ने लखन से भी मिलना बंद कर दिया. रितिक से नजदीकी बन जाने के बाद बीना ने उस से फोन पर भी बात करनी बंद कर दी थी.

लखन कोई दूध पीता बच्चा तो था नहीं, सो धीरेधीरे उस की समझ में आने लगा कि बीना और रितिक दोनों बदल गए हैं. इस से उसे शक हुआ कि कहीं ऐसा तो नहीं, उस की गैरमौजूदगी में दोनों के अवैध संबंध बन गए हों. कालेज में कई ऐसे लड़के पढ़ते थे, जो 12वीं कक्षा में लखन के साथ पढ़े थे. इसलिए लखन ने कुछ लड़कों से मिल कर सच्चाई का पता लगाया तो उसे जल्द ही यह बात पता चल गई कि रितिक ने उस के प्यार को हाईजैक कर लिया है.

लखन को इस बात की जरा भी उम्मीद नहीं थी कि बीना के साथसाथ रितिक भी उस के साथ इतना बड़ा धोखा करेगा. इस के लिए वह रितिक को ही कसूरवार मानने लगा. उस ने सोचा कि रितिक ने ही उस की प्रेमिका को बरगलाया होगा. इसलिए उस ने रितिक से ऐसा बदला लेने की सोची, जिस की रितिक और बीना ने कभी कल्पना भी नहीं की थी.

बन गई हत्या की योजना

आष्टा थानाप्रभारी बी.डी. वीरा के अनुसार, लखन गुस्से में था. उस ने रितिक की हत्या कर के उसे हमेशा के लिए अपने और बीना के बीच से हटाने की योजना बना ली. इस योजना के तहत 19 जनवरी, 2018 को रितिक को बीयर पिलाने का लालच दे कर वह उसे अपने साथ समरदा खदान पर ले गया. समरदा में लखन की बहन की शादी हुई थी, इसलिए वह उधर के सुनसान इलाकों के बारे में जानता था. लखन की चाल को रितिक समझ नहीं सका था, इसलिए वह उस के साथ आसानी से समरदा खदान की तरफ चला गया. खदान में बैठ कर दोनों ने बीयर पी, जिस के बाद नशा हो जाने पर लखन ने रितिक के साथ अपनी प्रेमिका बीना को ले कर विवाद करना शुरू कर दिया.

चूंकि रितिक को बीयर का नशा चढ़ गया था, इसलिए वह वहीं खदान में लेट गया. मौका देख कर लखन ने पास पड़े भारी पत्थर से कई वार कर के उस का सिर कुचल कर हत्या कर दी. इस के बाद वह उस का पर्स और मोबाइल ले कर वहां से भाग गया. बाद में उस ने सिमकार्ड तोड़ने के बाद रितिक का मोबाइल फोन पौलीथिन में रख कर अपने खेत में गाड़ दिया, जिसे बाद में पुलिस ने बरामद कर लिया. लखन मालवीय से पूछताछ करने के बाद पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश किया, जहां से उसे न्यायिक हिरासत में भेज दिया. Love Story

 

Hindi Stories : पुलिस अफसर रूपा तिर्की की मौत बनी रहस्य, सुसाइड या साजिश थी

Hindi Stories : रूपा तिर्की एक तेजतर्रार पुलिस अधिकारी थी. बैचमेट एसआई शिव कुमार से वह प्यार करती थी, लेकिन शिव कुमार उस से शादी करने से कतरा रहा था. उस की वादाखिलाफी से वह इस कदर तनाव में आ गई कि…

बात 3 मई, 2021 की है. शाम को करीब 7 बजे का समय रहा होगा. सबइंसपेक्टर मनीषा कुमारी ड्यूटी पूरी करने के बाद अपने क्वार्टर पर पहुंची. उस का क्वार्टर अपनी बैचमेट एसआई रूपा तिर्की के क्वार्टर के सामने था. रूपा तिर्की झारखंड के साहिबगंज जिला मुख्यालय पर महिला थानाप्रभारी थीं और मनीषा साहिबगंज में ही नगर थाने में तैनात थी. मनीषा जब क्वार्टर पर पहुंची, तो रूपा का कमरा अंदर से बंद था. इस का मतलब था कि रूपा अपनी ड्यूटी से आ चुकी थी. रूपा का हालचाल पूछने के लिए मनीषा ने उस के रूम का दरवाजा खटखटाया, लेकिन अंदर से कोई जवाब नहीं मिला.

कई बार की कोशिशों के बाद भी जब रूपा ने कमरा नहीं खोला तो मनीषा सोच में पड़ गई. वैसे भी शाम के करीब 7 ही बजे थे. इसलिए सोने का समय भी नहीं हुआ था. मनीषा ने आसपास के लोगों को बुला कर एक बार फिर रूपा को आवाज देते हुए जोर से दरवाजा खटखटाया, लेकिन इस बार भी कमरे के अंदर से कोई हलचल नहीं हुई. आखिर मनीषा ने दरवाजा तोड़ने का फैसला किया. लोगों की मदद से दरवाजा तोड़ कर मनीषा जब कमरे के अंदर घुसी तो रूपा पंखे के एंगल से एक रस्सी के सहारे लटकी हुई थी. यह देख कर मनीषा हैरान रह गई. उस ने एक पुलिस अफसर के तौर पर रूपा की नब्ज टटोल कर देखी, लेकिन उस में जीवन के कोई लक्षण नजर नहीं आए.

एकबारगी तो वह सोच में पड़ गई कि क्या करे और क्या नहीं करे? फिर उस ने सब से पहले एसपी साहब को सूचना देना उचित समझा. सूचना मिलने पर साहिबगंज एसपी अनुरंजन किस्पोट्टा, एसडीपीओ राजेंद्र दुबे और दूसरे पुलिस अफसर मौके पर पहुंच गए. पुलिस अफसरों ने मौकामुआयना किया. रूपा ने फांसी लगा कर खुदकुशी कर ली थी. अफसरों ने कमरे की तलाशी ली. चीजों को उलटपुलट कर देखा, ताकि कुछ पता चल सके कि रूपा ने यह कदम क्यों उठाया, लेकिन न तो कोई सुसाइड नोट मिला और न ही ऐसी कोई बात पता चली, जिस से रूपा के आत्महत्या करने के कारणों पर कोई रोशनी पड़ती.

पुलिस अफसर समझ नहीं पाए कि ऐसा क्या कारण रहा कि रूपा ने खुदकुशी कर ली? अविवाहित रूपा 2018 बैच की तेजतर्रार महिला सबइंसपेक्टर थी. अफसरों ने रूपा के परिवार वालों को फोन कर के इस घटना की सूचना दी. रूपा के परिजन झारखंड की राजधानी रांची के पास रातू गांव के कांटीटांड में रहते थे. रूपा के फांसी लगाने की बात सुन कर उस के मातापिता अवाक रह गए. रात ज्यादा हो गई थी. पुलिस ने रूपा का शव फांसी के फंदे से उतरवा कर पोस्टमार्टम के लिए सदर अस्पताल भिजवा दिया. दूसरे दिन 4 मई को रूपा के परिवार वाले साहिबगंज पहुंच गए. रूपा की मां पद्मावती उराइन ने पुलिस को बताया कि 3 मई को दोपहर करीब 3 बजे रूपा से उन की बात हुई थी.

तब रूपा ने कहा था कि वह जो पानी पी रही है, वह दवा जैसा कड़वा लग रहा है. बेटी की इस बात पर मां ने उस से तबीयत के बारे में पूछा. रूपा ने मां को बताया कि उस की तबीयत ठीक है. इस पर मां ने उसे आराम करने की सलाह दी थी. महिला थानाप्रभारी बनने पर रूपा को जब पुलिस की सरकारी गाड़ी मिली तो दोनों उसे ज्यादा टार्चर करने लगी थीं. दोनों ने कुछ दिन पहले रूपा को किसी हाईप्रोफाइल केस को मैनेज करने के लिए एक नेता पंकज मिश्रा के पास भी भेजा था. पंकज मिश्रा मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन का नजदीकी रहा है. परिवार वालों ने कहा कि रूपा ने आत्महत्या नहीं की, बल्कि उस की हत्या की गई है. मां ने बेटी की हत्या का आरोप लगाते हुए साहिबगंज एसपी को तहरीर दी.

उन्होंने इस मामले में कमेटी गठित कर पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की. उन्होंने कहा कि उस की बेटी के क्वार्टर के सामने रहने वाली एसआई मनीषा कुमारी और ज्योत्सना महतो हमेशा रूपा को टार्चर करती थीं. वे उस से जलती थीं और हमेशा उसे नीचा दिखाने की कोशिश करती थीं. मां ने लगाया हत्या का आरोप मां पद्मावती ने मौके पर मौजूद रहे लोगों से पूछताछ के बाद रूपा की हत्या करने का आरोप लगाते हुए कहा कि उस के शव को पंखे से लटकाया गया था. पंखे और पलंग की दूरी काफी कम थी. शव पंखे से तो लटका था, लेकिन घुटने पलंग पर मुड़े हुए थे. गले में रस्सी के 2 निशान थे. शरीर के कुछ अंगों पर जगहजगह दाग भी थे.

शव ध्यान से देखने से लग रहा था कि उस के हाथों को पकड़ा गया था. घुटने पर भी मारने के निशान थे. उस के कपड़े भी आधेअधूरे थे. रूपा की मौत के मामले में साहिबगंज के जिरवाबाड़ी ओपी थाने के एसआई सतीश सोनी के बयान के आधार पर केस दर्ज कर लिया गया. पुलिस ने जांचपड़ताल के लिए रूपा का क्वार्टर भी सील कर दिया.  मामला एक पुलिस अधिकारी की मौत का था. दूसरे यह संदिग्ध भी था. इसलिए साहिबगंज के उपायुक्त ने कार्यपालक दंडाधिकारी संजय कुमार और परिजनों की मौजूदगी में शव का मैडिकल बोर्ड से पोस्टमार्टम कराने और इस की वीडियोग्राफी कराने के आदेश दिए. उपायुक्त के आदेश पर पुलिस ने 3 डाक्टरों के मैडिकल बोर्ड से रूपा के शव का पोस्टमार्टम कराया.

पोस्टमार्टम कराने के बाद पुलिस की ओर से साहिबगंज के पुलिस लाइन मैदान में रूपा तिर्की को अंतिम विदाई दी गई. सशस्त्र पुलिस की टुकड़ी ने उन्हें सलामी दी. एसपी अनुरंजन किस्पोट्टा, साहिबगंज के एसडीपीओ राजेंद्र दुबे, बरहरवा के एसडीपीओ प्रमोद कुमार मिश्रा और राजमहल के एसडीपीओ अरविंद कुमार के अलावा अनेक थानाप्रभारियों तथा पुलिस जवानों ने फूलमालाएं अर्पित कर रूपा को श्रद्धांजलि दी. बाद में रूपा का शव परिवार वालों को सौंप दिया गया. रूपा का शव 5 मई की सुबह रूपा के पैतृक गांव रातू के काठीटांड पहुंचा. उसी दिन रूपा का अंतिम संस्कार कर दिया गया. शवयात्रा में गांव के लोगों के साथ राज्यसभा सांसद समीर उरांव, विधायक बंधु तिर्की, रांची की महापौर आशा लकड़ा, महिला आयोग की आरती कुजूर, प्रमुख सुरेश मुंडा सहित अनेक जनप्रतिनिधि भी शामिल हुए, लेकिन पुलिस और प्रशासन का कोई बड़ा अधिकारी वहां नहीं पहुंचा.

सीबीआई जांच की उठी मांग एक तेजतर्रार पुलिस अफसर के तथाकथित रूप से आत्महत्या करने की बात रूपा के गांव में किसी के गले नहीं उतर रही थी. उस के पिता सीआईएसएफ जवान देवानंद उरांव और मां पद्मावती सहित सभी घर वालों का आरोप था कि रूपा की हत्या किसी साजिश के तहत की गई है और इसे आत्महत्या का नाम दिया जा रहा है. रूपा 2018 में पुलिस एसआई बनने से पहले बैंक औफ इंडिया में काम करती थी. उस ने रांची के सेंट जेवियर कालेज से पढ़ाई पूरी की थी. उसे नवंबर 2020 में ही साहिबगंज में महिला थानाप्रभारी बनाया गया था. उस ने यह जिम्मेदारी संभालने के बाद महिला उत्पीड़न रोकने के लिए कई महत्त्वपूर्ण कदम उठाए थे.

मामला गंभीर था. रूपा की 2 बैचमेट महिला सबइंसपेक्टरों और मुख्यमंत्री के करीबी नेता पंकज मिश्रा पर आरोप लग रहे थे. रूपा की मौत को हत्या मानते हुए लोगों ने सोशल मीडिया पर ‘जस्टिस फौर रूपा’ शुरू कर दिया. रूपा के परिजनों को न्याय दिलाने के लिए झारखंड के कई प्रमुख नेता भी आगे आ गए. भाजपा विधायक दल के नेता बाबूलाल मरांडी ने रूपा की मौत को मर्डर मिस्ट्री बताते हुए इस की सीबीआई से जांच कराने की मांग की. उन्होंने कहा कि रूपा के परिवार वालों के आरोप से यह मामला संदेहास्पद है. मरांडी ने कहा कि ऐसे राजनीतिक प्रभावशाली व्यक्ति पर आरोप लगे हैं, जो मौजूदा सरकार में कुख्यात रहा है.

प्रदेश भाजपा महिला मोर्चा ने भी सीबीआई जांच की मांग करते हुए राज्यपाल को औनलाइन ज्ञापन भेजा. मांडर के विधायक बंधु तिर्की ने मुख्यमंत्री को पत्र लिख कर कहा कि रूपा किसी बड़ी साजिश की शिकार हुई है. इसलिए इस मामले की उच्चस्तरीय जांच कराई जाए. बोरियो से सत्तारूढ़ गठबंधन के झारखंड मुक्ति मोर्चा के विधायक लोबिन हेंब्रम ने भी इस मामले की सीबीआई से जांच कराने की मांग उठाई. राज्यसभा सांसद समीर उरांव ने कहा कि मामले में आरोपी पंकज मिश्रा पर मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन का हाथ है. मिश्रा साहिबगंज में सब तरह के वैधअवैध काम करता है.

एसआईटी को सौंपी जांच मामला तूल पकड़ता जा रहा था. जिस पंकज मिश्रा पर आरोप लगाए गए, वह मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन का साहिबगंज में प्रतिनिधि है. आरोपों से घिरने पर सफाई देते हुए मिश्रा ने कहा कि वह पिछले महीने मधुपुर चुनाव में व्यस्त था. इस के बाद कोरोना पौजिटिव होने पर रांची के मेदांता अस्पताल में भरती थे. घटना से एकदो दिन पहले ही अस्पताल से डिस्चार्ज हुए थे. रूपा तिर्की से मुलाकात की बातें सरासर गलत हैं. पुलिस चाहे तो काल डिटेल निकलवा कर जांच करा सकती है. भारी राजनैतिक दबाव पड़ने पर पुलिस ने मामले की तेज गति से जांच शुरू कर दी. एसपी ने इस के लिए डीएसपी (मुख्यालय) संजय कुमार के नेतृत्व में एसआईटी का गठन किया.

एसआईटी में बरहड़वा एसडीपीओ पी.के. मिश्रा, इंसपेक्टर (राजमहल ) राजेश कुमार और 2 महिला पुलिस अधिकारियों को शामिल किया गया. जांच अधिकारी जिरवाबाड़ी थाने की एसआई स्नेहलता सुरीन को बनाया गया. मौके के हालात देख कर पुलिस इसे आत्महत्या मान रही थी, लेकिन रूपा के परिवार वाले इसे हत्या बता रहे थे. सोशल मीडिया पर भी मामला बढ़ रहा था. 2 महिला सबइंसपेक्टरों और एक नेता पर लगे आरोपों को देखते हुए सभी बिंदुओं पर जांच करना जरूरी थी. फोरैंसिक टीम ने 5 मई, 2021 को साहिबगंज पहुंच कर रूपा के क्वार्टर की जांचपड़ताल की और साक्ष्य जुटाए. मौके पर मिली पानी से भरी बोतल व गिलास से अंगुलियों के निशान लिए. कई दूसरी जगहों से भी फिंगरप्रिंट लिए.

पुलिस जांचपड़ताल में जुटी थी, इसी बीच एक औडियो वायरल हो गया. चर्चा रही कि इस औडियो में रूपा तिर्की के पिता और एक युवक की बातचीत थी. यह कोई और नहीं रूपा का बैचमेट एसआई शिवकुमार कनौजिया बताया गया. यह औडियो सामने आने से पता चला कि रूपा का शिवकुमार से अफेयर चल रहा था. औडियो में रूपा के पिता उस युवक से रूपा की शादी के संबंध में बात कर रहे थे. युवक बाचतीत में रूपा को समझाने की बात कह रहा था ताकि वह कोई गलत कदम न उठा ले. औडियो सामने आने के बाद यह मामला ज्यादा उलझ गया. एक पुलिस एसआई की संदिग्ध मौत का मामला होने के कारण झारखंड पुलिस एसोसिएशन ने भी इस की जांच शुरू कर दी.

रांची से एसोसिएशन के प्रांतीय उपाध्यक्ष अरविंद्र प्रसाद यादव, संताल परगना प्रक्षेत्र मंत्री हरेंद्र कुमार, रविंद्र कुमार, पप्पू सिंह, जिला उपाध्यक्ष सुखदेव महतो, सचिव सहमंत्री शमशाद अहमद आदि ने साहिबगंज पहुंच कर मामले की जांच की. इन पदाधिकारियों ने प्रताड़ना के आरोपों से घिरी रूपा की बैचमेट एसआई मनीषा कुमारी और ज्योत्सना से भी कई घंटे तक पूछताछ की. सामने आया बौयफ्रैंड का नाम पुलिस ने मामले की तह में जाने के लिए रूपा के मोबाइल फोन की जांच कर काल डिटेल्स निकलवाई और उस के वाट्सऐप मैसेज, चैटिंग, एसएमएस और वीडियो वगैरह देखे. इस में पता चला कि उस ने आखिरी बातचीत अपने बौयफ्रैंड शिवकुमार कनौजिया से की थी.

रूपा ने शिवकुमार को कई मैसेज भी भेजे थे. शिवकुमार झारखंड के चाइबासा जिले में टोकलो पुलिस थाने में तैनात था. शिवकुमार से पूछताछ करनी जरूरी थी. इसलिए एसआईटी ने उसे साहिबगंज बुलाया. इस बीच, रूपा के परिवार वालों की मांग पर जांच अधिकारी स्नेहलता सुरीन को बदल कर राजमहल इंसपेक्टर राजेश कुमार को इस मामले की जांच सौंप दी गई. आदिवासी समाज की प्रतिभाशाली महिला पुलिस एसआई रूपा तिर्की की संदिग्ध मौत की उच्चस्तरीय जांच की मांग को ले कर पूरे झारखंड में लोग आंदोलन करने लगे. छात्र संगठन, महिला संगठन और आदिवासी संगठनों के अलावा सत्ताधारी दल कांग्रेस सहित विपक्षी दल भाजपा, जनता दल (यू) आजसू आदि ने इस मामले की सीबीआई जांच कराने की मांग सरकार से की.

सत्ताधारी विधायकों ने कहा कि इस घटना से आदिवासी समुदाय में आक्रोश है. सोशल मीडिया पर रूपा को इंसाफ दिलाने के लिए अभियान चल रहे हैं. इस से सरकार की छवि धूमिल हो रही है. लोग हम से सवाल पूछ रहे हैं कि इस की जांच होगी या नहीं. ऐसी हालत में सरकार को सीबीआई जांच से पीछे नहीं हटना चाहिए. झारखंड प्रदेश भाजपा अध्यक्ष और राज्यसभा सांसद दीपक प्रकाश ने रांची के पास रातू गांव में रूपा के घर पहुंच कर पूरे मामले की जानकारी ली. बाद में उन्होंने कहा कि यह हाईप्रोफाइल मामला है. इस में मुख्यमंत्री के संरक्षण प्राप्त लोगों का हाथ है. इसलिए झारखंड पुलिस से न्याय की उम्मीद नहीं है.

रूपा होनहार लड़की थी, उसे धोखे में रख कर मार डाला गया. झारखंड में आगे किसी आदिवासी बेटी के साथ ऐसी घटना नहीं हो, इसलिए इस घटना से परदा उठना जरूरी है. आंदोलन बढ़ते जा रहे थे. रूपा को न्याय दिलाने के लिए महिलाएं प्रदर्शन कर रही थीं. कैंडल मार्च निकाल रही थीं. वहीं, पुलिस की जांच में नईनई बातें सामने आने से मामला उलझता जा रहा था. साहिबगंज पुलिस और झारखंड सरकार की बदनामी हो रही थी.  रूपा के बौयफ्रैंड शिवकुमार कनौजिया को 8 मई को साहिबगंज थाने बुला कर एसआईटी में शामिल अफसरों ने पूछताछ की. उस से रूपा से मुलाकात होने से ले कर अफेयर और शादी की बातों के बारे में सवाल पूछे. उस से रूपा से मुलाकातों और मोबाइल पर चैटिंग वगैरह के संबंध में भी पूछताछ की गई.

करीब 8 घंटे तक पुलिस अधिकारी उस से लगातार पूछताछ करते रहे. बौयफ्रैंड एसआई को भेजा जेल शिवकुमार से पूछताछ के बाद एसआईटी ने अपनी जांच रिपोर्ट एसपी को सौंप दी. इस रिपोर्ट के आधार पर साहिबगंज पुलिस ने 9 मई को एसआई शिवकुमार कनौजिया को रूपा की खुदकुशी का जिम्मेदार मानते हुए गिरफ्तार कर लिया. जांच में सामने आए तथ्यों के आधार पर पुलिस ने पहले दर्ज किए केस को आत्महत्या के लिए उकसाने में परिवर्तित कर शिवकुमार कनौजिया के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया. बाद में शिवकुमार को पुलिस ने उसी दिन अदालत के समक्ष पेश कर जेल भेज दिया. एसपी अनुरंजन किस्पोट्टा का कहना था कि एसआईटी ने जो जांच रिपोर्ट सौंपी, उस में कहा गया कि शिवकुमार ने रूपा की भावनाओं को आहत किया.

इस कारण रूपा ने खुदकुशी की. जांच में पुलिस को एक औडियो भी मिला था. इस औडियो में रूपा तिर्की और उस के प्रेमी एसआई शिवकुमार कनौजिया के बीच बातचीत थी. इस में शिव बातचीत के दौरान रूपा से कई तरह की आपत्तिजनक बातें भी कह रहा था. शिव की इन बातों पर रूपा ने कहा था कि सही से बात करो शिव, नहीं तो हम सुसाइड कर लेंगे. पुलिस ने रूपा को प्रताडि़त करने का आधार बना कर ही शिवकुमार को गिरफ्तार किया.  कहा जाता है कि 2018 बैच के पुलिस एसआई रूपा और शिव कुमार की मुलाकात ट्रैनिंग के दौरान हुई थी. यह मुलाकात धीरेधीरे प्यार में बदल गई. रूपा को शिव पर भरोसा था. वह उस से शादी करना चाहती थी. यह बात भी सामने आई है कि शिव कुमार रूपा से प्यार का नाटक करता था. वह अकसर उस से पैसे मांगता रहता था.

एक बार उस ने मोटरसाइकिल भी मांगी थी. केवल यूज करना चाहता था बौयफ्रैंड वह रूपा से आपत्तिजनक स्थिति में वीडियो काल करने का भी दबाव बनाता था. वह रांची में जमीन खरीदने के लिए रूपा पर दबाव बना रहा था. कहता था कि रांची में आदिवासी की जमीन वह अपने नाम से नहीं खरीद सकता. रूपा जब शिव पर शादी करने का दबाव बनाती, तो वह कोई न कोई बहाना बना देता था. वायरल वीडियो में वह रूपा के पिता से कह रहा था कि वह अंतरजातीय विवाह नहीं करना चाहता. इसलिए अपनी बेटी को समझाएं. पुलिस का दावा है कि रूपा ने आत्महत्या करने से पहले शिव से बात की थी. यह बात भी सामने आई है कि रूपा और शिव कुमार कभीकभार धनबाद में मिलते थे.

इस के लिए रूपा साहिबगंज से अपने ड्राइवर के साथ धनबाद जाती थी और शिवकुमार चाईबासा से आता था. फिर दोनों किसी तय स्थान पर मिलते थे. पुलिस के अनुसार, रूपा की पोस्टमार्टम रिपोर्ट में भी आत्महत्या किए जाने की बात ही सामने आई है. एसपी का कहना है कि रूपा के परिवार वालों ने एसआई मनीषा कुमारी और ज्योत्सना के अलावा पंकज कुमार मिश्रा पर जो आरोप लगाए, उस के संबंध में कोई साक्ष्य नहीं मिले. जांच में इन लोगों की संलिप्तता या षडयंत्र के कोई सबूत नहीं मिले. भले ही पुलिस ने इस मामले का खुलासा कर रूपा के बौयफ्रैंड शिव कुमार को गिरफ्तार कर लिया, लेकिन रूपा के परिवार वाले इस से संतुष्ट नहीं हैं.

साहिबगंज से एसआईटी के पुलिस अधिकारी 10 मई को रूपा के मातापिता के बयान दर्ज करने रांची के रातू गांव पहुंचे तो लोगों ने उन का विरोध कर नारेबाजी की. लोगों ने कहा कि पुलिस की ओर से इस मामले को दूसरी दिशा में ले जाने की कोशिश की जा रही है. रूपा के पिता देवानंद उरांव और मां पद्मावती ने पुलिस अधिकारियों से सवालजवाब किए और कहा कि एसआईटी की जांच धोखा है. लोगों ने इस मामले की जांच सीबीआई से ही कराने की मांग की. बाद में पुलिस अधिकारियों ने लोगों को समझाबुझा कर रूपा के परिवार वालों के बयान दर्ज किए.  साहिबगंज पुलिस का कहना है कि अभी इस मामले की जांच चल रही है. रूपा के साहिबगंज स्थित सरकारी क्वार्टर के बगल में रहने वाले पुलिसकर्मी और उस के परिवार से भी पूछताछ की गई है.

अभी विसरा रिपोर्ट का भी इंतजार है, क्योंकि रूपा ने घटना वाले दिन दोपहर में अपनी मां से बात करते हुए कहा था कि उसे पानी पीने में कड़वा लग रहा है. बहरहाल, साहिबगंज पुलिस की जांच से न तो रूपा के परिवार वाले संतुष्ट हैं और न ही गांव वाले. आदिवासी संगठन भी इसे छलावा बता रहे हैं. रूपा के रातू स्थित आवास पर 11 मई को विभिन्न सामाजिक संगठनों की बैठक हुई. इस में सर्वसम्मति से कहा गया कि पुलिस प्रशासन रूपा के चैट को वायरल कर उस के चरित्र हनन का प्रयास कर रहा है. मामले में असली अपराधियों को बचा कर लीपापोती का प्रयास किया जा रहा है. साहिबगंज एसपी की रिपोर्ट के आधार पर चाईबासा जिले में टोकलो पुलिस थाने में तैनात रहे एसआई शिवकुमार को 11 मई को निलंबित कर दिया गया था.

अभी यह मामला सुलग रहा है और राजनीतिक रूप से भी गरमाया हुआ है. सवाल यही रह गया कि रूपा की मर्डर मिस्ट्री का राज खुलेगा या नहीं? क्या यह मामला प्रेम प्रसंग तक ही सिमट कर रह जाएगा? क्या पुलिस रूपा की मां पद्मावती के आरोपों की तह तक पहुंचेगी? Hindi Stories

 

Murder story : पूर्व प्रेमी के लिए पति का मर्डर

Murder story : सुमित श्रीवास्तव से मुलाकात हो जाने के बाद मानसी ने प्रेमी गणेश को छोड़ सुमित से लव मैरिज कर ली. इस दौरान ऐसा क्या हुआ कि कुछ दिनों बाद ही वह फिर से गणेश की बांहों में आने के लिए छटपटाने लगी. इस के लिए मानसी और गणेश ने जो प्लान बनाया, क्या उस में उन्हें कामयाबी मिली? पढ़ें, लव क्राइम की यह कहानी.

गणेश सुमित श्रीवास्तव को ले कर बहुत परेशान था, लेकिन वह समझ नहीं पा रहा था कि क्या करे. एक दिन वह अपने जिगरी दोस्तों दीपक कोली, शिवम गोविंदा और शिव के साथ बैठा था. ये सभी लंगोटिया यार थे. चारों हर शाम एक साथ बैठ कर खातेपीते और मौजमस्ती करते थे. उसी दौरान गणेश ने अपने दिल का दर्द अपने दोस्तों को सुनाया, ”यारो, एक बात को ले कर मैं बहुत परेशान हूं. तुम्हें तो पता ही है कि मैं मानसी को दिलोजान से चाहता हूं. उस से शादी भी करना चाहता हूं. लेकिन इस वक्त सुमित उस के दिलोदिमाग पर राज कर रहा है. यह मुझ से बरदाश्त नहीं होता.’’

अभी गणेश की बात पूरी भी नहीं हो पाई थी, तभी दीपक कोली बोला, ”अरे यार, इतनी छोटी सी बात के लिए परेशान क्यों हो रहा है. तू चाहे तो तेरे दर्द के कांटे को आज ही सफा कर डालते हैं.’’

”नहीं यार, ये काम इतनी जल्दबाजी के नहीं होते.’’

”अबे यार, तू कैसा प्रेमी है, प्रेम भी करता है और उसे पाने से डरता भी है.’’ गणेश की बात सुनते ही उस के सामने बैठे शिवम ने जबाव दिया.

”नहीं यार, ऐसा कुछ नहीं, बल्कि मैं चाहता हूं कि सांप भी मर जाए और लाठी भी न टूटे. मैं मानसी को हर तरह से समझाबुझा कर हार चुका हूं. लेकिन वह सुमित के होते मुझ से शादी करने को तैयार नहीं.’’ गणेश ने कहा.

गणेश की बात सुनते ही उस के सामने बैठा गोविंदा बोला, ”अबे यार, तू भी निरा गोबर गणेश ही है. कोई भी प्यार करने वाली लड़की अपना मुंह नहीं खोलना चाहती. उस का तो एक ही इलाज है, सुमित को ही तुम दोनों के बीच से हटा देते हैं. न रहेगा बांस, न बजेगी बांसुरी.’’ शिवम बोला.

तभी गणेश बोला, ”यार, यह काम इतना ईजी भी तो नहीं है, जितना तुम समझ रहे हो.’’

”अरे यार क्या बात करता है, यह काम तू हम पर छोड़ दे. तू तो केवल मुरगा पार्टी का इंतजाम कर. बाकी सब हम पर छोड़ दे.’’ शिवम ने अपनी बात रखी.

उसी शाम पांचों दोस्तों ने सुमित को मौत की नींद सुलाने का प्लान बनाया. गोविंदा ने गणेश को समझाया, ”तू तो किसी भी तरह से सुमित को पार्टी के बहाने बुला लेना. जब सुमित आ जाएगा तो उसे शराब पिलाने के बाद बाकी काम हम कर देंगे. इस के बाद Murder story लाश को नदी में फेंक देंगे. किसी को कुछ पता भी नहीं चलेगा.’’

यह प्लान बनाते ही पांचों ने उस के मर्डर का दिन 14 नबंवर (गुरु पूर्णिमा) के दिन निश्चित कर दिया था. सुमित की मौत की प्लानिंग करने के बाद 13 नबंवर, 2024 को गणेश प्रेमिका मानसी से जा कर मिला. मानसी के पास जाते ही उस ने फिर से उसे समझाने की कोशिश की, ”मानसी, मैं तुम्हें बहुत प्यार करता हूं. मैं तुम से शादी कर तुम्हें अपनी बीवी बनाना चाहता हूं.’’

लेकिन मानसी ने उस की बात का एक ही जबाव दिया, ”गणेश, सुमित के रहते तुम्हारा यह सपना पूरा होने वाला नहीं.’’

”मानसी, अगर तुम्हें पाने के लिए मुझे सुमित के खून से हाथ भी रंगने पड़े तो मैं पीछे नहीं हटूंगा.’’ गणेश ने अपना अटूट प्यार दिखाते हुए कहा.

”ठीक है, जो तुम्हें करना है करो, इस में मैं कुछ नहीं बोलूंगी.’’ मानसी ने भी अपने मन की बात गणेश के सामने रख दी थी.

मानसी ने पति को क्यों भेजा मौत के मुंह में

मानसी की बात सुनते ही गणेश समझ गया कि वह भी यही चाहती है. तभी गणेश ने मानसी को बताया, ”14 नवंबर के दिन हम सुमित को एक शानदार पार्टी देंगे और यह पार्टी उस की जिंदगी की आखिरी पार्टी होगी.’’

यह बात मानसी को बता कर गणेश वहां से चला गया. 14 नवंबर, 2024 की शाम को अपने प्लान के मुताबिक गणेश ने मानसी से मुरगा बनाने को कहा. गणेश ने मानसी को समझा दिया था कि जैसे ही सुमित घर आए, उसे मीट ले कर हमारे पास भेज देना. शाम होते ही गणेश ने सुमित श्रीवास्तव को फोन कर बता दिया कि आज रात तुम्हारी पार्टी है. तुम जल्द ही प्रीत विहार (कल्याणी नदी) पहुंचो. लेकिन ज्यादा देर हो जाने के कारण सुमित ने जाने से मना कर दिया. उस वक्त मानसी भी उस के पास ही बैठी थी. तभी मानसी ने सुमित की बात सुनते ही कहा, ”आज शाम गणेश का फोन आया था. कह रहा था कि भाभीजी आज तो तुम्हारे हाथ का बना मुरगा खाने का मन है. हो सके तो शाम को मुरगा बना कर सुमित भैया के हाथ भिजवा देना. शायद तुम्हारे इंतजार में आज उस ने खाना भी न खाया हो.’’

मानसी की बात सुनते ही सुमित उस के बारे में सोचने पर मजबूर हो गया. फिर वह गणेश के पास जाने को तैयार भी हो गया. तब मानसी ने एक टिफिन में मुरगे का मीट और रोटियां भी रख दीं. टिफिन ले कर सुमित प्रीत विहार में कल्याणी नदी के किनारे पहुंच गया. वहां पर गणेश अपने दोस्तों के साथ उस का ही इंतजार कर रहा था. सुमित के पहुंचते ही सभी ने वहीं पर एक साथ बैठ कर शराब पी और मीट भी खाया. शराब पीने के बाद जब सुमित पर नशा हावी हो गया तो पांचों ने मौका पाते ही जूतों के फीते निकाल कर सुमित का गला घोंट दिया. जिस के थोड़ी देर बाद ही उस की मौत हो गई.

उस के बाद भी उन्होंने उस के सिर पर बियर की कई बोतलें फोड़ डालीं, ताकि वह जिंदा न बचे. उस के बाद उन्होंने उस की लाश को नदी में फेंक दिया. फिर पांचों अपनेअपने घर चले गए.

मानसी ने पति की हत्या कराने के बाद क्यों दर्ज कराई रिपोर्ट

उस रात जब सुमित घर वापस नहीं आया तो मानसी समझ गई कि गणेश ने अपना काम पूरा कर दिया है. उस ने उसे फोन इसलिए नहीं किया, क्योंकि वह उसी काल से फंस सकती थी. अगले दिन 15 नवंबर को मानसी ने अपने ससुर को फोन कर बताया कि रात सुमित घर वापस नहीं आया. उन का कहीं अतापता नहीं. मानसी के जरिए से यह बात चारों ओर फैली तो उस के फैमिली वालों ने पड़ोसियों को साथ ले कर सुमित को हर जगह ढूंढा, लेकिन उस का कहीं भी पता न चल सका.

16 नवंबर, 2024 को मानसी रोतीधोती रमपुरा पुलिस चौकी पहुंची, जहां पर उस ने सुमित के गायब होने की तहरीर दी. उस वक्त गणेश भी उस के साथ था. तभी गणेश ने शिवम को फोन कर एक बार सुमित की लाश को देखने को कहा, ताकि वे किसी भी तरह से पकड़ में न आएं. उसी शाम शिवम ने 50 किलोग्राम का नमक का कट्टा खरीदा. फिर शिवम अपने दोस्त शिव और दीपक कोली को साथ ले कर कल्याणी नदी पर पहुंचा. वहां पर पहुंचते ही उन्होंने सुमित की डैडबौडी को उस जगह से उठा कर कुछ दूरी पर ले जा कर गड्ढा खोद कर नमक डालने के बाद दफन कर दिया था.

मानसी की लिखित तहरीर के आधार पर पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर उस की जांच शुरू की. सब से पहले पुलिस ने सुमित के घर के आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज चैक की तो उस में वह उस रात अकेला ही घर से निकलता नजर आया. उस के बाद भी पुलिस ने अन्य रास्तों पर भी लगे सीसीटीवी कैमरे चैक किए, लेकिन पुलिस के हाथ कोई सफलता हाथ नहीं लगी. 22 नवंबर को रुद्रपुर के प्रीत विहार के कुछ स्थानीय व्यक्तियों ने नदी के किनारे से तेज स्मैल आने की पुलिस से शिकायत की. लोगों की शिकायत पर पुलिस वहां पर इनवैस्टीगेशन के लिए पहुंची तो नदी किनारे एक ताजा खुदे गड्ढे से स्मैल आने का शक हुआ.

शक के आधार पर पुलिस ने उस गड्ढे को खुदवाना शुरू किया. गड्ढे से थोड़ी मिट्टी हटाने के बाद ही उस में एक इंसान का हाथ नजर आया. उस के बाद गड्ढे को और गहरा खोदा गया तो उस में से नमक निकलनी शुरू हुई. गड्ढे को कोई 5-6 फीट गहरा खोदने पर एक डैडबौडी निकली. गड्ढे से एक व्यक्ति की डैडबौडी मिलने की सूचना से पूरे क्षेत्र में सनसनी फैल गई थी. देखते ही देखते घटनास्थल पर भारी भीड़ जमा हो गई थी. पुलिस ने उस डैडबौडी को बाहर निकाल कर उस की जांचपड़ताल की तो उस के एक हाथ पर सुमित श्रीवास्तव नाम गुदा हुआ मिला. सुमित श्रीवास्तव नाम सामने आते ही पुलिस समझ गई थी कि यह वही सुमित है, जिस की गुमशुदगी की रिपोर्ट मानसी नामक युवती ने 16 नवंबर को रमपुरा पुलिस चौकी में दर्ज कराई थी.

गायब सुमित श्रीवास्तव की लाश मिलते ही पुलिस ने फोन द्वारा उस की वाइफ मानसी को इस की सूचना दी. सुमित की लाश मिलने की सूचना पर उस के फैमिली वाले रोतेबिलखते घटनास्थल पर पहुंचे. इस घटना की जानकारी मिलते ही एसपी (सिटी) मनोज कत्याल, सीओ निहारिका तोमर, कोतवाल मनोज रतूड़ी भी घटनास्थल पर पहुंचे. सभी अफसरों ने मौके पर पहुंच कर घटना का जायजा लिया. सुमित के शव की शिनाख्त होते ही पुलिस ने उसे पोस्टमार्टम के लिए भिजवा दिया था. घटना की जानकारी मिलते ही पूर्व एमएलए राजकुमार ठुकराल, समाजसेवी संजय ठुकराल, ललित बिष्ट सहित बड़ी संख्या में लोग इकट्ठा हो गए. उन्होंने मृतकों के घर वालों को ढांढस बंधाया और पुलिस की काररवाई पर तरहतरह के सवाल भी उठाए.

एसएसपी मणिकांत मिश्रा ने इस केस को सुलझाने के लिए सीओ (सिटी) निहारिका तोमर के निर्देशन में एक पुलिस टीम बनाई. टीम में कोतवाल मनोज रतूड़ी, एसएसआई ललित मोहन रावल, एसआई नवनी बुधानी, गणेश भट्ट, जितेंद्र कुमार, होशियार सिंह, चंदन बिष्ट, चंद्र सिंह, नेहा राणा, कांस्टेबल महेंद्र कुमार, महेश राम, ताजबीर सिंह, रमेशचंद्र, दलीप कुमार आदि को शामिल किया.

पुलिस को ऐसे मिला हत्या का क्लू

पुलिस टीम ने सुमित की डैडबौडी मिलने के बाद सीसीटीवी कैमरों और सर्विलांस की मदद ली तो गणेश के साथ अन्य व्यक्ति भी जाते नजर आए. उसी दौरान पुलिस को जानकारी मिली कि गणेश का सुमित के घर पहले से आनाजाना था. इस जानकारी के मिलते ही पुलिस ने गणेश को पूछताछ के लिए उठा लिया. पुलिस ने गणेश से इस मामले में सख्ती से पूछताछ की तो उस ने अपना मुंह तक नहीं खोला. जबकि पुलिस पहले ही उस के मोबाइल को सर्विलांस पर लगा कर उस की हकीकत जान चुकी थी. पुलिस को मानसी और उस के मोबाइल पर काफी समय तक बात होने के सबूत Murder story भी मिले. इस से साफ हो गया था कि मानसी और उस के बीच जरूर पहले से ही कुछ खिचड़ी पक रही थी.

जब काफी पूछताछ के बाद भी गणेश सच्चाई बताने को तैयार नहीं हुआ तो पुलिस ने सख्ती से पूछताछ की. जिस के तुरंत बाद ही वह लाइन पर आ गया. उस ने स्वीकार किया कि मानसी और उस के बीच काफी समय से अवैध संबंध चले आ रहे थे. उसी ने मानसी को एक मोबाइल भी खरीद कर दिया था, ताकि दोनों के बीच बातचीत होती रहे. गणेश ने स्वीकार किया कि मानसी उस की पहली मोहब्बत थी. इसीलिए वह उस पर काफी पैसा लुटा चुका था. वह उस से शादी करना चाहता था. उस की चाहत में उस ने अपने दोस्तों के साथ मिल कर सुमित को मौत के घाट उतार दिया था.

यह इनफार्मेशन मिलते ही पुलिस ने उस के दोस्तों में से दीपक कोली, शिवम और शिव को भी गिरफ्तार कर लिया. अभियुक्तों व सुमित के फैमिली वालों से पूछताछ के बाद इस केस की जो स्टोरी सामने उभर कर आई, वह इस प्रकार थी. बहुत समय पहले मानसी और गणेश की फैमिली उत्तराखंड के शहर रुद्रपुर के रमपुरा में पासपास ही रहती थीं. यही कारण था कि मानसी और गणेश बचपन से ही एक साथ खेलेकूदे थे. उन की शिक्षा भी एक ही स्कूल में हुई थी. मानसी और गणेश दोनों ही साथसाथ स्कूल आतेजाते थे. कक्षा एक से कक्षा 5 तक दोनों एक साथ पढ़े थे. इसी कारण दोनों में गहरी दोस्ती थी.

कक्षा 5 तक आतेआते दोनों के बीच प्रेम प्रसंग भी हो गया था. उस के बाद दोनों के स्कूल अलगअलग हो गए थे, लेकिन स्कूल से लौटने के बाद दोनों एक साथ ही खेलते और पढ़ाई भी करते थे. उसी दौरान मानसी की मुलाकात सुमित श्रीवास्तव से हुई. सुमित उत्तर प्रदेश के बरेली जिले के गांव मसवासी मानपुर के राजू श्रीवास्तव का बेटा था. अब से लगभग 15 साल पहले राजू श्रीवास्तव की पत्नी का किसी बीमारी के चलते देहांत हो गया था. पत्नी की डैथ के बाद राजू श्रीवास्तव ने ही अपने पांचों बच्चों की परवरिश की थी.

3 भाई और 2 बहनों में सुमित सब से बड़ा था. राजू श्रीवास्तव की एक बहन उत्तराखंड के शहर रुद्रपुर की रमपुरा कालोनी में रहती थी. अब से कई साल पहले सुमित अपनी बुआ के साथ रुद्रपुर घूमने आया था. उस के बाद उस का मन यहीं पर लग गया. जिस के बाद वह बुआ के पास ही रहने लगा था. घर के आसपास रहते हुए जल्दी ही उस की दोस्ती मानसी से हो गई थी. कुछ समय तक तक मानसी, गणेश और सुमित एक साथ ही खेले. उसी दौरान मानसी का लगाव सुमित श्रीवास्तव की और बढऩे लगा था. जिस के बाद वह गणेश में कम दिलचस्पी लेने लगी थी.

उस समय तक मानसी जवानी की दहलीज पर आ खड़ी हुई थी. वह जन्म से ही भरे बदन की युवती थी. वक्त बदलते सुमित का मन भी मचल उठा. दोनों के दिलों में एकदूसरे के प्रति चाहत बढ़ी तो दोनों एकदूसरे के साथ अपनी दुनिया बसाने के सपने संजोने लगे थे. समय की चाल बढ़ते ही दोनों प्यार की दीवार को लांघ कर हदों को पार करने लगे थे. नतीजा यह निकला कि कुछ ही दिनों में दोनों के प्यार के चर्चे समाज के सामने आ गए.जब इस बात की जानकारी मानसी के फैमिली वालों को हुई तो उन्हें बहुत बड़ा झटका लगा. पहले तो उन्होंने उसे समझाने की कोशिश की, उस के बाद सुमित की बुआ से भी उस की शिकायत की. सुमित की बुआ ने भी उसे समझाने की कोशिश की. लेकिन दोनों पर किसी की बात का कोई असर नहीं पड़ा. दोनों छिपछिप कर मिलने लगे.

उसी वक्त मानसी ने एक मुलाकात में सुमित के सामने अपने दिल की बात रखते हुए कहा, ”सुमित, क्यों न हम कहीं बाहर जा कर शादी कर लें. उस के बाद हम दोनों आजादी से साथसाथ रहेंगे.’’

जब एक मोड़ पर मिला पुराना प्रेमी

चाहता तो सुमित भी यही था, लेकिन वह अपनी तरफ से हिम्मत नहीं जुटा पा रहा था. यही सोचते एक दिन दोनों ने आखिरी निर्णय लिया. अब से लगभग 8 साल पहले दोनों ने घर से भाग कर शादी कर ली. शादी करने के बाद दोनों ही मुरादाबाद शहर में रहने लगे थे. सुमित वहीं पर एक कारखाने में नौकरी करने लगा था. कुछ दिन मुरादाबाद में रहने के बाद सुमित मानसी को साथ ले कर रामपुर चला गया. कुछ वक्त दोनों का रामपुर में गुजरा. फिर सुमित मानसी को ले कर रुद्रपुर के ट्रांजिट कैंप कालोनी रमपुरा में आ कर रहने लगा. रुद्रपुर में मानसी ने एक बेटे को जन्म दिया.

उसी समय सुमित ने एक आटोरिक्शा खरीद लिया था और उसी को चला कर वह अपनी रोजीरोटी चलाने लगा था. आटो चलाने के दौरान सुमित को शराब की लत लग गई थी, जिस के बाद वह अपनी आधी से ज्यादा कमाई शराब में ही खर्च कर डालता था. मानसी ने उसे कई बार समझाने की कोशिश की, लेकिन वह उस की एक भी बात मानने को तैयार नहीं था. बात बढऩे पर वह मानसी के साथ गालीगलौज करते हुए उसे मारनेपीटने भी लगा था. सुमित की हरकतों से आजिज आ कर मानसी का उस के प्रति पनपा प्यार भी फीका पडऩे लगा था. वह उसे खर्च के लिए पैसे देने में भी आनाकानी करने लगा था. जिस के कारण वह हमेशा ही अपने दिल के अरमानों को मसोस कर रह जाती थी. उसी समय एक दिन उस की फिर से मुलाकात गणेश से हो गई.

शाम का वक्त था. गणेश बाजार से अपने घर की ओर जा रहा था. उसी समय रास्ते के चौराहे पर उस की नजर एक युवती पर पड़ी. जैसे ही उस की बाइक उस युवती के पास से गुजरी, उस ने एक तिरछी नजर उस युवती पर डाली. उसे देखते ही वह सकपका गया, ”मानसी यहां!’’

उस ने अपनी बाइक साइड में लगा कर रोक दी. जैसे ही वह युवती उस के पास पहुंची, गणेश बोला, ”मानसी, तुम यहां कैसे? इस वक्त तुम कहां जा रही हो?’’

यूं अचानक गणेश को सामने खड़ा देख जैसे मानसी का रोमरोम खिल उठा था.

”अरे गणेश, तुम कैसे हो?’’

मेरी छोड़ो, तुम अपनी सुनाओ. तुम तो सुमित से शादी करने के बाद शहर छोड़ कर चली गई थी. फिर अचानक यहां कैसे?’’

”अब सारी राम कहानी यहीं पर सुनोगे, आगे नहीं बढ़ोगे.’’

गणेश ने अपनी बाइक सड़क के किनारे खड़ी कर दी. तभी मानसी ने गणेश से सवाल किया, ”अब इस वक्त तुम कहां रह रहे हो?’’

”मैं तो अभी भी रमपुरा में ही रह रहा हूं, मुझे यह शहर छोड़ कर कहां जाना है.’’

”अच्छा, मैं भी तो उसी कालोनी में रह रही हूं. आओ, तुम्हें अपना कमरा दिखाती हूं. वही बैठ कर कुछ बातचीत करेंगे.’’

मानसी को पाने के लिए गणेश ने क्यों चुना खतरनाक रास्ता

मानसी की बात सुनते ही उस का मन हिचकोले लेने लगा था. उस के बाद मानसी उसे सीधे अपने कमरे पर ले गई. गणेश उस दिन खुशी से फूला नहीं समा रहा था. जब बरसों बाद दोनों एक साथ बैठे तो बातों का सिलसिला चालू हुआ. मानसी की कहानी सुन कर गणेश समझ गया था कि वह अपने पति सुमित के साथ खुश नहीं है. शादी के इतने साल बाद भी वह उस की महत्त्वाकांक्षाओं को समझ नहीं पाया था. यही कारण था कि इतने साल बाद भी गणेश से मिलने के बाद उस की चाहत की घंटी फिर से बज उठी थी. गणेश को देखते ही उसे लगने लगा था कि वही उस के ख्वाबों को हकीकत में बदल सकता है. तभी मानसी ने गणेश को प्यार की हरी झंडी भी दिखा दी थी.

उसी वक्त मानसी ने गणेश को बता दिया था कि उस का पति सुमित आटोरिक्शा चलाता है, जो देर रात ही घर पहुंचता है. गणेश के जाने से पहले मानसी ने उसे अपना मोबाइल नंबर देने के बाद उस का नंबर भी अपने मोबाइल में सेव कर लिया था. मानसी को देखते ही उस के मन में ऐसा भूचाल आया कि उस ने घर पहुंचते ही उसे फोन कर दिया था. शायद वह भी जैसे उस के फोन का ही इंतजार कर रही थी. कुछ देर इधरउधर की बातें करने के बाद मानसी ने अपने दिल की बात गणेश के सामने रख दी थी. गणेश के मन में भी वही सब खिचड़ी पक रही थी. मानसी से बात कर के उस का मन बहुत ही हलका महसूस हो रहा था. उसे लगा कि उस का पहला प्यार फिर से उस की झोली में आ पड़ा है.

उस दिन के बाद दोनों ही फोन पर एकदूसरे से बात करने लगे थे. सुमित के घर से निकलते ही मानसी फोन कर के उसे अपने कमरे पर बुला लेती थी. उस के बाद दोनों शहर में मौजमस्ती करने निकल जाते. यह सिलसिला दोनों के बीच काफी समय तक चलता रहा. एक दिन मानसी ने उस की मुलाकात सुमित से भी करा दी थी. सुमित पहले से जानता था कि गणेश उन के पड़ोस में रहता है. सुमित और गणेश दोनों ही शराब के शौकीन थे. यही कारण रहा कि जल्दी ही दोनों के बीच गहरी दोस्ती भी हो गई थी.

गणेश रेनू का बचपन का दोस्त था. उसी कारण दोनों के बीच जल्दी संबंध हो गए थे. उस के बाद गणेश ने ही उस का सारा खर्च उठाना शुरू कर दिया था.

इस केस के खुलते ही पुलिस ने मानसी, उस के प्रेमी गणेश चंद्रा, वंश, दीपक कोली और शिवम निवासी रमपुरा को गिरफ्तार करने के बाद कोर्ट में पेश कर जेल भेज दिया था. जबकि एक आरोपी गोविंदा घर से फरार हो गया था, जिस की पुलिस तलाश कर रही थी.

—कथा पुलिस सूत्रों पर आधारित. कथा में मानसी परिवर्तित नाम है.

कीवर्ड (लव क्राइम)

 

Crime story : आशिक ने माशूका के चेहरे को चाकू से गोद डाला

Crime story : मार्निंग वौक पर निकले कुछ लोगों ने हाईवे के किनारे एक महिला की लाश पड़ी देखी तो उन्होंने  इस बात की सूचना थाना नौबस्ता पुलिस को दे दी. सूचना मिलते ही थानाप्रभारी अरुण कुमार सिंह सहयोगियों के साथ घटनास्थल पर पहुंच गए. वहां काफी लोग इकट्ठा थे, लेकिन उन में से कोई भी महिला की शिनाख्त नहीं कर सका. मृतका की उम्र 35 साल के आसपास थी. वह साड़ीब्लाउज और पेटीकोट पहने थी. उस के सिर पर गंभीर चोट लगी थी, चेहरा किसी नुकीली चीज से Crime story गोदा गया था. गले में भी साड़ी का फंदा पड़ा था.

लाश की शिनाख्त नहीं हो सकी तो पुलिस ने घटनास्थल की काररवाई कर के उसे पोस्टमार्टम के लिए कानपुर स्थित लाला लाजपत राय चिकित्सालय भिजवा दिया. लेकिन घटनास्थल की काररवाई में पुलिस ने काफी समय बरबाद कर दिया था, इसलिए देर हो जाने की वजह से उस दिन लाश का पोस्टमार्टम नहीं हो सका. यह 5 जुलाई, 2014 की बात थी.

अगले दिन यानी 6 जुलाई को कानपुर से निकलने वाले समाचार पत्रों में जब एक महिला का शव नौबस्ता में हाईवे पर मिलने का समाचार छपा तो थाना चकेरी के मोहल्ला रामपुर (श्यामनगर) के रहने वाले शिवचरन सिंह भदौरिया को चिंता हुई. इस की वजह यह थी कि उस की पत्नी नीलम उर्फ पिंकी पिछले 2 दिनों से गायब थी. इस बीच उस ने अपने हिसाब से उस की काफी खोजबीन की थी, लेकिन उस का कुछ पता नहीं चला था. अखबार में समाचार पढ़ने के बाद शिवचरन सिंह अपने दोनों बेटों, सचिन और शिवम को साथ ले कर थाना नौबस्ता पहुंचा और थानाप्रभारी अरुण कुमार सिंह को बताया कि उस की पत्नी परसों से गायब है. वह हाईवे के किनारे मिली महिला की लाश को देखना चाहता है.

चूंकि शव पोस्टमार्टम हाऊस में रखा था, इसलिए थानाप्रभारी ने उन लोगों को एक सिपाही के साथ वहां भेज दिया. शिवचरन सिंह बेटों के साथ वहां पहुंचा तो लाश देखते ही वह फूटफूट कर रो पड़ा. क्योंकि वह लाश उस की पत्नी नीलम की थी. उस के दोनों बेटे सचिन और शिवम भी मां की लाश देख कर रोने लगे थे. इस तरह हाईवे के किनारे मिले महिला के शव की शिनाख्त हो गई थी. लाश की शिनाख्त कर शिवचरन सिंह बेटों के साथ थाने आ गए. थानाप्रभारी अरुण कुमार सिंह ने शिवचरन से पूछताछ की तो उस ने बताया कि उस की पत्नी नीलम 4 जुलाई की शाम 4 बजे से गायब है. घर से निकलते समय उस ने बच्चों से कहा था कि वह उन की स्कूली ड्रेस लेने दर्जी के यहां जा रही है. उधर से ही वह घर का सामान भी ले आएगी. लेकिन वह गई तो लौट कर नहीं आई.

आज सुबह उस ने अखबार में महिला के शव मिलने की खबर पढ़ी तो वह थाने आया और पोस्टमार्टम हाउस जा कर देखी तो पता चला कि उस की तो हत्या हो चुकी है.

‘‘हत्या किस ने की होगी, इस बारे में तुम कुछ बता सकते हो?’’ थानाप्रभारी अरुण कुमार सिंह ने पूछा.

‘‘साहब, हमें संदेह नहीं, पूरा विश्वास है कि नीलम की हत्या सबइंसपेक्टर जगराम सिंह ने की है. वह हमारे बड़े भाई का चचेरा साला है. उस का हमारे घर बहुत ज्यादा आनाजाना था. उस के नीलम से अवैध संबंध थे. पीछा छुड़ाने के लिए उसी ने उस की हत्या की है. वह अपने परिवार के साथ बर्रा में रहता है. इन दिनों उस की तैनाती लखनऊ में है.’’

शिवचरन सिंह ने जैसे ही कहा कि नीलम की हत्या सबइंसपेक्टर जगराम सिंह ने की है, थानाप्रभारी अरुण कुमार सिंह ने उसे डांटा, ‘‘तुम्हारा दिमाग खराब है. नीलम की हत्या नहीं हुई है. मुझे लगता है, उस की मौत एक्सीडेंट से हुई है. पोस्टमार्टम रिपोर्ट आएगी तो पता चल जाएगा कि वह कैसे मरी है.’’

पोस्टमार्टम रिपोर्ट के अनुसार, नीलम की हत्या बड़ी ही बेरहमी से की गई थी. उस की मौत सिर की हड्डी टूटने से हुई थी. उस के चेहरे को चाकू की नोक से गोदा गया था. गला भी साड़ी से कसा गया था. पोस्टमार्टम रिपोर्ट से साफ हो गया था कि नीलम की हत्या हुई थी. इस के बावजूद थानाप्रभारी अरुण कुमार सिंह ने हत्या की रिपोर्ट दर्ज नहीं की. इस का मतलब था कि जगराम सिंह ने सिफारिश कर दी थी. विभागीय मामला था, इसलिए थानाप्रभारी अरुण कुमार सिंह उस का पक्ष ले रहे थे.

हत्या के इस मामले को दबाने की खबर जब स्थानीय अखबारों में छपी तो आईजी आशुतोष पांडेय ने इसे गंभीरता से लिया. उन्होंने इस मामले को ले कर थानाप्रभारी अरुण कुमार सिंह से 2 बार बात की, लेकिन उस ने उन्हें कोई उचित जवाब नहीं दिया. इस के बाद उन्होंने क्षेत्राधिकारी ओमप्रकाश को इस मामले की जांच कर के तुरंत रिपोर्ट देने को कहा.

क्षेत्राधिकारी ओमप्रकाश ने उन्हें जो रिपोर्ट दी, उस में सबइंसपेक्टर जगराम सिंह पर हत्या का संदेह व्यक्त किया गया था. थानाप्रभारी अरुण कुमार सिंह ने जो किया था, उस से पुलिस की छवि धूमिल हुई थी, इसलिए आईजी आशुतोष पांडेय ने उन्हें लाइनहाजिर कर दिया और खुद 10 जुलाई को थाना नौबस्ता जा पहुंचे. उन्होंने सबइंसपेक्टर जगराम सिंह को थाने बुला कर पूछताछ की और उसे साथ ले कर घटनास्थल का निरीक्षण भी किया.

मृतका नीलम और जगराम सिंह के मोबाइल फोन की काल डिटेल्स निकलवाई गई तो उस में नीलम के मोबाइल फोन पर अंतिम फोन जगराम सिंह का ही आया था. दोनों के बीच बात भी हुई थी. इस के बाद नीलम का फोन बंद हो गया था. नीलम के मोबाइल फोन की अंतिम लोकेशन थाना चकेरी क्षेत्र के श्यामनगर की थी. काल डिटेल्स से पता चला कि जगराम और नीलम की रोजाना दिन में कई बार बात होती थी. कभीकभी दोनों की घंटों बातें होती थीं.

सारे सुबूत जुटा कर आईजी आशुतोष पांडेय ने सबइंसपेक्टर जगराम सिंह से नीलम की हत्या के बारे में पूछा तो उसने स्वीकार कर लिया कि साले की मदद से उसी ने नीलम की Crime story हत्या की थी और लाश ले जा कर नौबस्ता में हाईवे के किनारे फेंक दी थी. जगराम सिंह ने अपना अपराध स्वीकार कर लिया तो थाना नौबस्ता पुलिस ने शिवचरन सिंह भदौरिया की ओर से नीलम की हत्या का मुकदमा सबइंसपेक्टर जगराम सिंह और उस के साले लक्ष्मण सिंह के खिलाफ दर्ज कर लिया. इस के बाद जगराम सिंह ने नीलम की हत्या की जो कहानी सुनाई, वह जिस्म के नाजायज रिश्तों में जिंदगी लेने वाली थी.

उत्तर प्रदेश के जिला फतेहपुर के कस्बा खागा के रहने वाले राम सिंह के परिवार में पत्नी चंदा के अलावा 2 बेटे पप्पू, बब्बू और बेटी नीलम उर्फ पिंकी थी. राम सिंह पक्का शराबी था. अपनी कमाई का ज्यादा हिस्सा वह शराब में उड़ा देता था. बाप की देखा देखी बड़े बेटे पप्पू को भी शराब का शौक लग गया. जैसा बाप, वैसा बेटा. पप्पू कुछ करता भी नहीं था.

नीलम उर्फ पिंकी राम सिंह की दूसरे नंबर की संतान थी. वह सयानी हुई तो राम सिंह को उस की शादी की चिंता हुई. उस के पास कोई खास जमापूंजी तो थी नहीं, इसलिए वह इस तरह का लड़का चाहता था, जहां ज्यादा दानदहेज न देना पड़े. उस ने तलाश शुरू की तो जल्दी ही उसे कानपुर शहर के थाना चकेरी के श्यामनगर (रामपुर) में किराए पर रहने वाला शिवचरन सिंह भदौरिया मिल गया. शिवचरन सिंह शहर के मशहूर होटल लिटिल में चीफ वेटर था. राम सिंह को शिवचरन पसंद आ गया. उस के बाद अपनी हैसियत के हिसाब से लेनदेन कर के उस ने नीलम की शादी शिवचरन सिंह के साथ कर दी.

नीलम जैसी खूबसूरत पत्नी पा कर शिवचरन बेहद खुश था.  से समय गुजरने लगा. समय के साथ नीलम 2 बेटों सचिन और शिवम की मां बनी. बच्चे होने के बाद खर्च तो बढ़ गया, जबकि आमदनी वही रही. शिवचरन को 5 हजार रुपए वेतन मिलता था, जिस में से 2 हजार रुपए किराए के निकल जाते थे, हजार, डेढ़ हजार रुपए नीलम के फैशन पर खर्च हो जाते थे. बाकी बचे रुपयों में घर चलाना मुश्किल हो जाता था. इसलिए घर में हमेशा तंगी बनी रहती थी.

पैसों को ले कर अक्सर शिवचरन और नीलम में लड़ाईझगड़ा होता रहता था. रोजरोज की लड़ाई और अधिक कमाई के चक्कर में शिवचरन ने नीलम की ओर ध्यान देना बंद कर दिया. पत्नी की किचकिच की वजह से वह तनाव में भी रहने लगा. इस सब से छुटकारा पाने के लिए वह शराब पीने लगा. संयोग से उसी बीच शिवचरन के घर उस के बड़े भाई के चचेरे साले यानी नीलम की जेठानी प्रीति के चचेरे भाई जगराम सिंह का आनाजाना शुरू हुआ.

जगराम सिंह अपने परिवार के साथ बर्रा कालोनी में रहता था. वह हेडकांस्टेबल था, लेकिन इधर प्रमोशन से सबइंस्पेक्टर हो गया था. उस की ड्यूटी लखनऊ में दर्जा प्राप्त राज्य मंत्री सुदीप रंजन सेन के यहां थी. नीलम जगराम सिंह की मीठीमीठी बातों और अच्छे व्यवहार से काफी प्रभावित थी. एक तरह से नीलम उस की बहन थी, लेकिन 2 बच्चों की मां होने के बावजूद नीलम की देहयष्टि और सुंदरता ऐसी थी कि किसी भी पुरुष की नीयत खराब हो सकती थी. शायद यही वजह थी कि भाई लगने के बावजूद जगराम सिंह की भी नीयत उस पर खराब हो गई थी.

घर आनेजाने से जगराम सिंह को नीलम की परेशानियों का पता चल ही गया था, इसलिए उस तक पहुंचने के लिए वह उस की परेशानियों का फायदा उठाते हुए हर तरह से मदद करने लगा. नीलम जब भी उस से पैसा मांगती, वह बिना नानुकुर किए दे देता. अगर कभी शिवचरन पैसे मांग लेता तो वह उसे भी दे देता. शिवचरन भले ही जगराम की मन की बात से अंजान था, लेकिन नीलम सब जानती थी. वह जान गई थी कि जगराम उस पर इतना क्यों मेहरबान है. उस की नजरों से उस ने उस के दिल की बात जान ली थी. एक तो नीलम को पति का सुख उस तरह नहीं मिल रहा था, जिस तरह मिलना चाहिए था, दूसरे जगराम अब उस की जरूरत बन गया था.

इसलिए उसे जाल में फंसाए रखने के लिए नीलम उस से हंसी मजाक ही नहीं करने लगी, बल्कि उस के करीब भी आने लगी थी. आसपड़ोस में सभी लोगों को उस ने यही बता रहा था कि यह उस के जेठानी का भाई है. इसलिए नीलम को लगता था कि उस के आने जाने पर कोई शक नहीं करेगा. नीलम की मौन सहमति पा कर एक दिन उसे घर में अकेली पा कर जगराम सिंह ने उस का हाथ पकड़ लिया. बनावटी नानुकुर के बाद उस ने जगराम को अपना शरीर सौंप दिया. जगराम से उसे जो सुख मिला, उस ने रिश्तों की मर्यादा को भुला दिया.

इस के बाद नीलम और जगराम जब भी मौका पाते, एक हो जाते. नीलम को जगराम सिंह के साथ शारीरिक सुख में कुछ ज्यादा ही आनंद आता था, इसलिए वह उस का भरपूर सहयोग करने लगी थी. कभीकभी तो जगराम से मिलने वाले सुख के लिए वह बच्चों को बहाने से घर के बाहर भी भेज देती थी. कुछ सालों तक तो उन का यह संबंध लोगों की नजरों से छिपा रहा, लेकिन जगराम सिंह का शिवचरन के घर अक्सर आना और घंटो पड़े रहना, लोगों को खटकने लगा. नीलम और उस के सबइंसपेक्टर भाई के हावभाव और कार्यशैली से लोगों को विश्वास हो गया कि उन के बीच गलत संबंध है.

जगराम सिंह बेहद चालाकी से काम ले रहा था. वह जब भी शिवचरन की मौजूदगी में आता, काफी गंभीर बना रहता. वह इस बात का आभास तक न होने देता कि उस के और नीलम के बीच कुछ चल रहा है. तब वह पूरी तरह से रिश्तेदार बना रहता. लेकिन एकांत मिलते ही वह रिश्तेदार के बजाय नीलम का प्रेमी बन जाता. जब मामला कुछ ज्यादा ही बढ़ गया तो पड़ोसियों ने शिवचरन के कान भरने शुरू किए. उसने अतीत में झांका तो उसे भी संदेह हुआ. फिर एक दिन जगराम घर आया तो वह होटल जाने की बात कह कर घर से निकला जरूर, लेकिन आधे घंटे बाद ही वापस आ गया. उस ने देखा कि दोनों बेटे बाहर खेल रहे हैं और कमरे की अंदर से सिटकनी बंद है.

उस ने सचिन से पूछा, ‘‘क्या बात है, कमरे का दरवाजा क्यों बंद है, तुम्हारी मम्मी कहां हैं.?’’

‘‘मम्मी और मामा कमरे में हैं. हम कब से उन्हें बुला रहे हैं, वे दरवाजा खोल ही नहीं रहे हैं.’’ सचिन ने कहा.

शिवचरन को संदेह तो था ही, अब विश्वास हो गया. वह नीलम को आवाज दे कर दरवाजा पीटने लगा. अचानक शिवचरन की आवाज सुन कर दोनों घबरा गए. वे जल्दी से उठे और अपने अपने कपड़े ठीक किए. इस के बाद नीलम ने आ कर दरवाजा खोला. नीलम की हालत देख कर शिवचरन सारा माजरा समझ गया. उसे कुछ कहे बगैर वह कमरे के अंदर आया तो देखा जगराम सोने का नाटक किए चारपाई पर लेटा था. शिवचरन खून का घूंट पी कर रह गया. उस समय उस ने न तो नीलम से कुछ कहा और न ही जगराम सिंह से. लेकिन उस के हावभाव से नीलम समझ गई कि उस के मन में क्या चल रहा है. उस ने अपने भयभीत चेहरे पर मुसकान लाने की कोशिश तो बहुत की, लेकिन तनाव में होने की वजह से सफल नहीं हो पाई.

शिवचरन सोच ही रहा था कि वह क्या करे, तभी जगराम जम्हुआई लेते हुए उठा और शिवचरन को देख कर बोला, ‘‘अरे तुम इतनी जल्दी कैसे आ गए, तबीयत तो ठीक है?’’

शिवचरन ने जगराम सिंह के चेहरे पर नजरें जमा कर दबे स्वर में कहा, ‘‘तबीयत तो ठीक है, लेकिन दिमाग ठीक नहीं है.’’

इतना कह कर ही शिवचरन बाहर चला गया. उस ने जिस तरह यह बात कही थी, उसे सुन कर जगराम ने वहां रुकना उचित नहीं समझा और चुपचाप बाहर निकल गया. उस के जाते ही शिवचरन वापस लौटा और नीलम की चोटी पकड़ कर बोला, ‘‘बदलचन औरत, इस उम्र में तुझे यह सब करते शरम भी नहीं आई? वह भी उस आदमी के साथ जो तेरा भाई लगता है.’’

नीलम की चोरी पकड़ी गई थी, इसलिए वह कुछ बोल नहीं पाई. गुस्से में तप रहे शिवचरन ने नीलम को जमीन पर पटक दिया और लात घूसों से पिटाई करने लगा. नीलम चीखतीचिल्लाती रही, लेकिन शिवचरन ने उसे तभी छोड़ा, जब वह उसे मारते मारते थक गया. इस के बाद शिवचरन नीलम पर नजर रखने लगा था. उस ने बेटों से भी कह दिया था कि जब भी मामा घर आए, वे उस से बताएं. जिस दिन शिवचरन को पता चलता कि जगराम आया था, उस दिन शिवचरन नीलम पर कहर बन कर टूटता था. अब जगराम और नीलम काफी सावधानी बरतने लगे थे. वह तभी नीलम से मिलने आता था, जब उसे पता चलता था कि घर पर न बेटे हैं और न शिवचरन.

इसी बात की जानकारी के लिए जगराम सिंह ने नीलम को एक मोबाइल फोन खरीद कर दे दिया था. इस से दोनों की रोजाना बातें तो होती ही रहती थीं, इसी से मिलने का समय भी तय होता था. एक दिन शिवचरन ने नीलम को जगराम से बातचीत करते पकड़ लिया तो मोबाइल फोन छीन कर पटक दिया. लेकिन अगले ही दिन जगराम ने उसे दूसरा मोबाइल फोन खरीद कर दे दिया. काफी प्रयास के बाद भी शिवचरन नीलम और जगराम को अलग नहीं कर सका तो उस ने जगराम के घर जा कर उस की पत्नी लक्ष्मी से सारी बात बता दी. इस के बाद जगराम के घर कलह शुरू हो गई. यह कलह इतनी ज्यादा बढ़ गई कि लक्ष्मी ने बच्चों के साथ आत्मदाह करने की धमकी दे डाली.

पत्नी की इस धमकी से जगराम डर गया. उस ने पत्नी से वादा किया कि अब वह नीलम से संबंध तोड़ लेगा. उस ने नीलम से मिलना कम कर दिया तो इस से नीलम नाराज हो गई. इधर उस ने पैसों की मांग भी अधिक कर दी थी, जिस से जगराम को परेशानी होने लगी थी. एक ओर जगराम सिंह अपनी पत्नी और बच्चों को छोड़ नहीं सकता था. दूसरी ओर अब नीलम से भी पीछा छुड़ाना आसान नहीं रह गया था. वह बदनाम करने की धमकी देने लगी थी. उस की धमकी और मांगों से तंग आ कर जगराम सिंह ने नीलम से पीछा छुड़ाने के लिए अपने साले लक्ष्मण के साथ मिल कर उसे खत्म करने की योजना बना डाली.

संयोग से उसी बीच नीलम ने बच्चों की ड्रेस, फीस, कापीकिताब और घर के खर्च के लिए जगराम से 10 हजार रुपए मांगे. जगराम ने कहा कि पैसों का इंतजाम होने पर वह उसे फोन से बता देगा. 24 जुलाई, 2014 की शाम 4 बजे जगराम सिंह ने नीलम को फोन किया कि पैसों का इंतजाम हो गया है, वह श्यामनगर चौराहे पर आ कर पैसे ले ले. फोन पर बात होने के बाद नीलम ने बेटों से कहा कि वह उन की ड्रेस लेने दर्जी के पास जा रही है और उधर से ही वह घर का सामान भी लेती आएगी.

नीलम श्यामनगर चौराहे पर पहुंची तो जगराम अपने साले लक्ष्मण सिंह के साथ कार में बैठा था. नीलम को भी उस ने कार में बैठा लिया. कार चल पड़ी तो नीलम ने जगराम से पैसे मांगे. लेकिन उस ने पैसे देने से मना कर दिया. तब नीलम नाराज हो कर उसे बदनाम करने की धमकी देने लगी. नीलम की बातों से जगराम को भी गुस्सा आ गया. वह उस से छुटकारा तो पाना ही चाहता था, इसलिए पैरों के नीचे रखी लोहे की रौड निकाली और नीलम के सिर पर पूरी ताकत से दे मारा. उसी एक वार में नीलम लुढ़क गई. इस के बाद जगराम ने नीलम की साड़ी गले में लपेट Crime story कर कस दी. नीलम मर गई तो चाकू से उस के चेहरे को गोद दिया.

जगराम अपना काम करता रहा और लक्ष्मण कार चलाता रहा. चलती कार में नीलम की बेरहमी से हत्या कर के जगराम और लक्ष्मण ने देर रात उस की लाश को नौबस्ता ले जा कर हाईवे के किनारे फेंक दिया और खुद कार ले कर अपने घर चले गए.

पूछताछ के बाद 10 जुलाई, 2014 को थाना नौबस्ता पुलिस ने अभियुक्त सबइंसपेक्टर जगराम सिंह को कानपुर की अदालत में पेश किया, जहां से उसे जेल भेज दिया गया. कथा लिखे जाने तक उस की जमानत नहीं हुई थी. उस का साला लक्ष्मण फरार था. पुलिस उस की तलाश में जगहजगह छापे मार रही थी.

— कथा पुलिस सूत्रों पर आधारित

Family Story : 17 महीने तक लाश को जीवीत मानकर सफाई की

Family Story : कभी कभी कुछ ऐसी घटनाएं घटित हो जाती हैं, जिन पर विश्वास कर पाना बहुत ही कठिन होता है. ऐसी अविश्वसनीय घटनाएं या तो अंधविश्वास में घटित होती हैं या फिर मनोरोग विकार में. उत्तर प्रदेश के कानपुर शहर में भी ऐसी ही एक अविश्वसनीय घटना घटित हुई, जिस ने देश ही नहीं बल्कि पूरी दुनिया को झकझोर कर रख दिया.

कानपुर शहर का एक मिश्रित आबादी वाला मोहल्ला रोशन नगर है. इसी मोहल्ले के कृष्णापुरी के मकान नं. 7/401 में रामऔतार गौतम अपने परिवार के साथ रहते थे. उन के परिवार में पत्नी रामदुलारी के अलावा 3 बेटे दिनेश, सुनील व विमलेश थे. रामऔतार गौतम फील्डगन फैक्ट्री में मशीनिष्ट के पद पर कार्यरत थे. उन की आर्थिक स्थिति मजबूत थी. उन का अपना तीनमंजिला मकान था, जिस में सभी भौतिक सुखसुविधाएं मौजूद थीं.

रामऔतार गौतम के तीनों बेटे होनहार थे. बड़ा बेटा दिनेश सिंचाई विभाग में है और वह कानपुर के फूलबाग कार्यालय में तैनात है. जबकि सुनील बिजली उपकरणों की ठेकेदारी करता है. दिनेश व सुनील शादीशुदा हैं. दिनेश की शादी अर्चना से तथा सुनील की गुडि़या से हुई थी. दिनेश व सुनील अपने परिवार के साथ पिता के मकान में ही रहते हैं. रामऔतार गौतम का सब से छोटा बेटा विमलेश कुमार था. वह अपने अन्य भाइयों से ज्यादा तेज दिमाग का था. विमलेश ने इंटरमीडिएट तक की पढ़ाई रामलला स्कूल से की, फिर बीकौम व एमकौम की पढ़ाई छत्रपति शाहूजी महाराज महाविद्यालय से पूरी की.

उस के बाद विमलेश की नौकरी आयकर विभाग में लग गई. वर्तमान में वह अहमदाबाद में आयकर विभाग में असिस्टेंट एकाउंट औफिसर के पद पर कार्यरत था. विमलेश कुमार की शादी मिताली दीक्षित के साथ हुई थी. यह अंतरजातीय प्रेम विवाह था. विमलेश अनुसूचित जाति के थे, जबकि मिताली दीक्षित ब्राह्मण थी. दरअसल, विमलेश कुमार मिताली को उन के किदवई नगर स्थित घर पर ट्यूशन पढ़ाने जाते थे. ट्यूशन पढ़ाने के दौरान ही दोनों एकदूसरे के प्रति आकर्षित हुए और उन के बीच प्यार पनपने लगा.

मोहब्बत परवान चढ़ी तो दोनों ने शादी का निश्चय किया. विमलेश के घरवाले शादी को राजी थे, लेकिन मिताली के घर वाले राजी नहीं थे. लेकिन घरवालों के विरोध के बावजूद मिताली दीक्षित ने वर्ष 2015 में विमलेश कुमार के साथ विवाह रचा लिया और विमलेश की दुलहन बन कर रोशन नगर स्थित ससुराल आ गई. ससुराल में मिताली को सासससुर व पति का भरपूर प्यार मिला, जिस से वह अपने भाग्य पर इतरा उठी. शादी के 2 साल बाद मिताली ने एक बेटे को जन्म दिया, जिस का नाम उस ने संभव रखा. संभव के जन्म से परिवार की खुशियां और बढ़ गईं. मिताली संयुक्त परिवार में जरूर रहती थी, लेकिन कभी उसे किसी तरह की परेशानी नहीं हुई.

मिताली दीक्षित पढ़ीलिखी सभ्य महिला थी. वह किदवई नगर स्थित कोऔपरेटिव बैंक में असिस्टेंट मैनेजर के पद पर कार्यरत थी. सुबह वह सास व जेठानियों के साथ घर का काम निपटाती फिर बैंक जाती. बैंक से वापस आ कर वह फिर घरेलू काम निपटाती. यही उन की दिनचर्या बन गई थी. वह हर तरह से खुशहाल थी. वर्ष 2019 में विमलेश का ट्रांसफर अहमदाबाद (गुजरात) हो गया. पति के बाहर जाने से मिताली विचलित नहीं हुई और अपने कर्तव्य का पालन करती रही. पति का आनाजाना लगा रहता था. वह अपने बेटे संभव से बहुत प्यार करते थे. बेटे के अलावा उन्हें अपने मातापिता व भाइयों से भी बेहद लगाव था. मां से उन्हें कुछ ज्यादा ही लगाव था.

इस बीच मिताली दोबारा गर्भवती हुई और उस ने मार्च 2021 में एक बेटी कोे जन्म दिया. इस का नाम उस ने दृष्टि रखा. नवजात की देखभाल हेतु मिताली ने 6 महीने की छुट्टी बैंक से ले ली.

22 अप्रैल, 2021 को हुई थी मौत

इधर आयकर अधिकारी विमलेश कुमार गौतम 16 अप्रैल, 2021 को विभागीय कार्य हेतु अहमदाबाद स्थित आयकर कार्यालय से निकले तो वह बीमार हो गए. उन्हें सांस लेने में दिक्कत महसूस हो रही थी. उन दिनों कोरोना काल की दूसरी भयंकर लहर चल रही थी और लोग कीड़ेमकोड़ों की तरह मर रहे थे. अत: घबरा कर विमलेश कुमार ने अहमदाबाद से लखनऊ की फ्लाइट पकड़ी, फिर Family Story लखनऊ से अपने घर कानपुर आ गए.

19 अप्रैल, 2021 को घर वालों ने विमलेश कुमार को बिरहाना रोड के मोती हौस्पिटल में भरती करा दिया. अस्पताल में विमलेश का महंगा इलाज शुरू हुआ. लेकिन डाक्टर काल के हाथों से विमलेश कुमार को बचा न सके. 22 अप्रैल, 2021 की सुबह 4 बजे विमलेश ने दम तोड़ दिया. विमलेश के शव को निजी वाहन से रोशन नगर स्थित घर लाया गया. अस्पताल में लगभग 9 लाख रुपया खर्च हुआ तथा अस्पताल की तरफ से घर वालों को मौत का सर्टिफिकेट भी थमा दिया. आयकर अधिकारी विमलेश कुमार की मौत से गौतम परिवार में हाहाकार मच गया. नातेरिश्तेदारों का जमावड़ा शुरू हो गया. मातापिता जहां बेटे की मौत पर आंसू बहा रहे थे, वहीं मिताली की आंखों से भी आंसू रुकने का नाम नहीं ले रहे थे. भाई सुनील व दिनेश भी बेहाल थे.

इसी बीच एक रिश्तेदार महिला ने रोते हुए विमलेश के सीने पर सिर रखा तो उसे विमलेश के सीने से धड़कन महसूस हुई. वह आंसू पोंछते हुए रामदुलारी से बोली, ‘‘बहना, तुम्हारा बिटवा जीवित है.’’

फिर तो बारीबारी से रामदुलारी व दिनेश ने भी धड़कन महसूस की. इस के बाद अंतिम संस्कार की तैयारी रोक दी गई और पड़ोस में रहने वाले एक डाक्टर को बुलाया गया. उस ने विमलेश की मृत देह की अंगुली में पल्स औक्सीमीटर लगाया तो औक्सीजन 77 और पल्स 62 आने लगी. उसे देख मौत का सर्टिफिकेट हाथ में थामने के बावजूद घर वालों ने विमलेश को जीवित मान लिया. इस के बाद सभी अपने घरों को चले गए.

जीवित मान कर शव की करते रहे साफसफाई

परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत थी, इसलिए परिवार के लोग विमलेश कुमार को तुरंत पनेशिया, केएमसी, फार्च्यून व सिटी हौस्पिटल ले गए. लेकिन सभी आरटीपीसीआर रिपोर्ट मांग रहे थे. रिपोर्ट उन के पास नहीं थी. इसलिए शहर के किसी भी अस्पताल ने विमलेश को भरती नहीं किया. घर वालों को लाश में आस नजर आ रही थी. इसलिए उन्होंने अपने घर को ही अस्पताल बना दिया. उन्होंने विमलेश को घर के एसी रूम में तख्त पर लिटा दिया और इलाज शुरू कर दिया. इस इलाज पर उन्होंने करीब 30 लाख रुपए भी खर्च कर दिए. विमलेश की मां रामदुलारी गंगाजल छिड़क कर उस के शरीर को पोछतीं फिर साफसुथरे कपड़े पहनातीं. इस काम में उन का पति रामऔतार भी मदद करते. रामदुलारी चम्मच से 2-4 बूंद गंगाजल उस के मुंह में भी डालतीं.

किसी तरह की बदबू न आए. इस के लिए कमरे में सुगंधित अगरबत्ती, धूपबत्ती भी जलाई जाती. गुप्तरूप से झोलाछाप डाक्टर व कथित तांत्रिक भी आते व पूजापाठ व तंत्रमंत्र करते. अब तक रामदुलारी व उन का पूरा परिवार अंधविश्वास व मनोरोग विकार का शिकार बन गया था. सभी मानने लगे थे कि विमलेश कुमार कोमा में है और एक दिन जीवित हो जाएगा. पढ़ीलिखी तथा बैंक मैनेजर मिताली दीक्षित भी मनोरोगी बन गई थी. उसने भी मान लिया था कि पति कोमा में है और एक दिन वह जीवित हो जाएंगे.

वह रोज बैंक जाने से पहले पति का माथा छू कर बतियाती थी. सिरहाने बैठ कर उसे निहारती थी, उन के सिर पर हाथ फेरती थी और उसे बोल कर जाती थी कि जल्दी ही औफिस से लौट कर मिलती हूं. भाई दिनेश व सुनील जब काम से लौटते थे तो विमलेश से उस का हालचाल पूछते थे. विमलेश की खामोशी के बावजूद वे उन्हें जीवित मान रहे थे.

मिताली को कचोट रही थी आत्मा

मिताली दीक्षित परिवार के प्रभाव में थी. इसलिए वह उन की हां में हां मिला रही थी. लेकिन उस की अंतरात्मा उसे कचोट रही थी. यही कारण था कि उस ने पति की मौत के 5 दिन बाद ही एक पत्र अहमदाबाद स्थित आयकर विभाग को भेज दिया था. पत्र में उस ने लिखा था कि विमलेश कुमार की मौत कोरोना से हो गई है. पेंशन संबंधी औपचारिकताओं का जल्दी से जल्दी निपटारा किया जाए.

आयकर विभाग ने पत्र के आधार पर प्रक्रिया शुरू कर दी थी कि तभी मिताली का एक और पत्र अहमदाबाद आयकर विभाग को प्राप्त हुआ. उस में लिखा था कि औक्सीमीटर से जांच में पति विमलेश की पल्स चलती हुई पाई गई है और वह जीवित है. इसलिए पेंशन व फंड भुगतान की प्रक्रिया को रोक दिया जाए. विभाग ने तब विमलेश की पेंशन, फंड समेत अन्य भुगतान की प्रक्रिया रोक दी. इस के बाद आयकर विभाग ने विमलेश कुमार के मैडिकल बिल और सैलरी भुगतान संबंधी 7 पत्र पत्नी मिताली को भेजे. लेकिन मिताली ने कोई जवाब नहीं दिया.

दरअसल, जैसेजैसे समय बीतता गया वैसेवैसे विमलेश का शरीर काला पड़ता गया. शरीर जब पूरी तरह से सूख गया तो मिताली को यकीन हो गया कि अब शरीर में कुछ नहीं बचा. मिताली ने सासससुर को समझाने का प्रयास किया तो वे उस से झगड़ने लगे. परेशान हो कर मिताली ने एक गुमनाम पत्र अहमदाबाद स्थित आयकर औफिस को भेजा, जिस में उस ने विमलेश की लाश घर पर होने की सनसनीखेज जानकारी दी. इस पत्र के मिलने के बाद आयकर विभाग में खलबली मच गई.

इस के बाद अहमदाबाद से जोनल एकाउंट्स की एक टीम विमलेश के कानपुर स्थित घर पहुंची. लेकिन परिजनों ने टीम को घर के अंदर घुसने नहीं दिया और न ही टीम को कोई जानकारी दी. अहमदाबाद से आई टीम वापस लौट गई और फिर कानपुर आयकर विभाग को पत्र लिख कर शक जताया कि आयकर अधिकारी विमलेश कुमार की मौत हो चुकी है. कानपुर सीएमओ के जरिए इस की Family Story पुष्टि कराएं और जांच रिपोर्ट अहमदाबाद औफिस भिजवाएं.

इस पत्र के बाद कानपुर के आयकर अधिकारियों ने डीएम विशाख जी को सारी जानकारी दी और सीएमओ से विमलेश की जांच कराने का अनुरोध किया. चूंकि मामला पेचीदा था, सो डीएम ने सीएमओ को जांच का आदेश दिया.

डीएम के आदेश पर सीएमओ ने कराई जांच

कानपुर के सीएमओ आलोक रंजन ने तब 3 डाक्टरों की एक टीम जांच हेतु बनाई. इस टीम में डा. ए.वी. गौतम, डा. आशीष तथा डा. अविनाश को शामिल किया गया. सीएमओ ने टीम को निर्देशित किया कि विमलेश कुमार के जीवित या मृत्यु होने की जांच हैलट अस्पताल में ही होगी. अत: उन्हें अस्पताल ही लाया जाए. 23 सितंबर, 2022 की सुबह 11 बजे डाक्टरों की टीम विमलेश कुमार गौतम के घर पहुंची. टीम की मुलाकात विमलेश की मां रामदुलारी व पिता रामऔतार गौतम से हुई. लेकिन उन्होंने जांच कराने से साफ मना कर दिया और कहा कि उन के बेटे विमलेश की धड़कनें चल रही हैं. वह जिंदा है. इसी के साथ उन्होंने मिताली को भी सूचित कर दिया तो वह भी बैंक से घर आ गई.

डाक्टरों की टीम को जब विमलेश के घरवालों ने रोका तो उन्होंने जानकारी सीएमओ आलोक रंजन को दी. आलोक रंजन ने तब पुलिस कमिश्नर वी.पी. जोगदंड को जानकारी दी. उस के बाद जौइंट सीपी आनंद प्रकाश तिवारी, एडिशनल सीपी (वेस्ट) लाखन सिंह यादव तथा प्रभारी निरीक्षक संजय शुक्ला विमलेश के आवास पहुंच गए. पुलिस अधिकारियों ने घर के मुखिया रामऔतार गौतम तथा उन की पत्नी रामदुलारी से बात की और बेटे विमलेश का स्वास्थ परीक्षण कराने को कहा.

विमलेश की पत्नी मिताली तो पति का स्वास्थ परीक्षण कराने को राजी थी, लेकिन बाकी सदस्य टालमटोल कर रहे थे. काफी कहासुनी व पुलिस से झड़प के बाद सभी राजी हो गए. पुलिस के साथ डाक्टरों की टीम ने उस कमरे में प्रवेश किया, जहां विमलेश तख्त पर लेटा था. विमलेश को देख कर पुलिस अफसर व डाक्टर हैरान रह गए. विमलेश का शरीर पूरी तरह से सूख चुका था और काला पड़ गया था. मांस हड्डियों में चिपक गया था. लेकिन डाक्टर व पुलिस अफसर इस बात से हैरान थे कि कमरे से किसी प्रकार की बदबू नहीं आ रही थी और न ही उस के शव से.

डाक्टरों ने कर दिया मृत घोषित

डाक्टरों की टीम ने जांच कर घर वालों को बताया कि विमलेश की मौत हो चुकी है. वह भ्रम न पालें कि वह जिंदा है. इस पर परिवार वाले डाक्टरों से भिड़ गए और जांच को गलत ठहराने लगे. उस के बाद विमलेश कुमार के शव को हैलट अस्पताल लाया गया और परिवार वालों के सामने ईसीजी किया गया. रिपोर्ट में सीधी लकीर दिख रही थी, फिर भी परिवार के लोग संदेह जताते रहे. परिवार के लोग विमलेश के शव का पोस्टमार्टम नहीं कराना चाहते थे. उन्होंने लिख कर भी दे दिया. पुलिस भी बला टालना चाहती थी. और वैसे भी कोई आपराधिक मामला नहीं बनता था सो पुलिस ने लिखित में ले कर घर वालों को शव सौंप दिया. इस के बाद घर वालों ने शव का अंतिम संस्कार भैरवघाट पर कर दिया.

17 माह तक घर में अफसर बेटे का शव रखने का मामला अखबारों में प्रकाशित हुआ तो लोग अवाक रह गए. उन्हें यकीन ही नहीं हो रहा था कि मृत व्यक्ति का शव इतने दिनों तक रखा जा सकता है. टीवी चैनलों के माध्यम से यह मामला देशदुनिया में कई दिनों तक सुर्खियां बटोरता रहा. कानपुर पुलिस भी हैरान थी कि ऐसी क्या वजह थी कि शव 17 महीने तक घर में रखा रहा. कहीं परिवार किसी तांत्रिक के चक्कर में तो नहीं फंसा था. कहीं अफसर का वेतन तो परिवार वाले नहीं हड़पना चाहते थे. कहीं पूरा परिवार अंधविश्वास या मनोरोग का शिकार तो नहीं हो गया था.

इन्हीं सब बिंदुओं की जांच के लिए जौइंट सीपी आनंद प्रकाश तिवारी ने जांच एडिशनल डीसीपी (वेस्ट) लाखन सिंह यादव को सौंपी. लाखन सिंह यादव ने इस प्रकरण की बड़ी बारीकी से जांच की और परिवार के मुख्य सदस्यों से अलगअलग बात की. जांच में यही तथ्य निकला कि मां के अंधविश्वास में 17 माह तक विमलेश का शव घर में रखा रहा.

खराब औक्सीमीटर से हुई थी गलतफहमी

मातापिता के इस अंधविश्वास को पूरे घर ने अपना विश्वास बना लिया और उसी तरह से विमलेश की सेवा करने लगे. श्री यादव ने घर के सामान की जांच की पर कोई लेप नहीं मिला. औक्सीजन सिलेंडर तथा तख्त की भी जांच की. जांच में यह बात सामने आई कि जो औक्सीमीटर विमलेश को लगाया गया था, वह खराब था. खराबी के कारण ही वह गलत रीडिंग बता रहा था. जांच से यह भी पता चला कि परिवार ने विमलेश का वेतन नहीं लिया था.

एडिशनल डीसीपी (वेस्ट) लाखन सिंह यादव ने मृतक विमलेश के मातापिता से पूछताछ की और कई सवाल दागे. इन सवालों का जवाब देते हुए उन्होंने बताया कि उन्होंने कभी कोई कैमिकल विमलेश की बौडी पर नहीं लगाया. वह गंगाजल के पानी से उस का शरीर पोछते थे और कपड़ा बदलते थे. सफाई का विशेष ध्यान रखते थे. उन्होंने बताया कि वह तो अंतिम क्रिया की तैयारी कर रहे थे लेकिन एक रिश्तेदार महिला ने धड़कन महसूस की, तब पता चला कि बेटा जिंदा है. पुलिस अफसर लाखन सिंह यादव ने मृतक विमलेश कुमार की पत्नी मिताली से भी पूछताछ की तो उस का दर्द उभर पड़ा. उस ने हर सवाल का जवाब बड़ी तत्परता से दिया.

मृतक विमलेश के घर वालों की मनोदशा समझने के लिए एडीसीपी (वेस्ट) लाखन सिंह यादव ने जीएसवीएम मैडिकल कालेज के मनोचिकित्सा विभाग के सहायक प्रोफेसर गणेश शंकर से बातचीत की. उन्होंने कहा कि यह अपने आप में एक अनोखा मामला है. इस तरह के बहुत कम मामले देखे गए हैं. प्रथमदृष्टया यह मामला शेयर्ड डिलीवरी डिसऔर्डर नाम की बीमारी का प्रतीत होता है. यह एक ऐसी बीमारी है, जो बहुत कम लोगों को होती है. इस बीमारी में एक व्यक्ति अपनी मानसिक स्थिति से नियंत्रण खो देता है. वह अन्य लोगों को भी इस के प्रभाव में ले लेता है, जिस से वे लोग भी उसी बात पर भरोसा कर लेते हैं, जिस का सच्चाई से दूरदूर तक नाता नहीं होता है. उन का मानना है कि मृतक विमलेश का परिवार भी इसी बीमारी से ग्रसित था.

बहरहाल कथा संकलन तक एडिशनल डीसीपी (वेस्ट) ने अपनी जांच रिपोर्ट जौइंट सीपी आनंद प्रकाश तिवारी को सौंप दी थी. इस के अलावा सीएमओ आलोक रंजन ने भी विमलेश की मौत हो जाने की जांच रिपोर्ट अहमदाबाद के आयकर विभाग को भेज दी. मृतक विमलेश के परिवार वालों ने भी सच्चाई को स्वीकार कर लिया है. फिर भी स्वास्थ विभाग की टीम परिवार की निगरानी में जुटी है.

 

 

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Murder Story : हाथपांव बांधकर काटा प्रेमिका का गला

उमा शुक्ला कुछ पूछना चाहती थीं, लेकिन रचना बिना मौका दिए अपनी स्कूटी ले कर बाहर निकल गई. बड़ी बेटी निशा पहले ही कालेज जा चुकी थी. थोड़ी देर में लौटने को कह कर रचना जब 2 घंटे तक नहीं लौटी तो उमा शुक्ला को चिंता हुई. उन्होंने फोन लगाया तो वह स्विच्ड औफ मिला. इस के बाद तो उमा का फोन बारबार रिडायल होने लगा. उन्होंने रचना के कालेज फ्रैंड्स को भी फोन किए, लेकिन कोई नतीजा नहीं निकला.

Murder Story

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Bathroom में संबंध बनाने के बाद विधवा को तीन टुकड़ों में काटा

प्रभाकर को लगता था कि अगर उस ने विधवा कांता से शादी की तो मांबाप की इज्जत बरबाद हो जाएगी. इस इज्जत को बचाने के लिए उस ने जो किया, उस से इज्जत तो बरबाद हुई ही, वह सलाखों के पीछे भी पहुंच गया. महानगर मुंबई के उपनगर चेंबूर की हेमू कालोनी रोड पर स्थित चरई तालाब घूमनेटहलने के लिए ठीक उसी तरह मशहूर है, जिस तरह दक्षिण मुंबई का मरीन ड्राइव यानी समुद्र किनारे की चौपाटी और उत्तर मुंबई का सांताकुंज-विलेपार्ले का जुहू. ये ऐसे स्थान हैं,

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