Crime Kahani : बूढ़े आशिक संग रहने की खातिर मां ने बेटी का मुंह दबाकर मार डाला

Crime Kahani : वासना की आग में सुलगने वाली औरत बड़े से बड़ा गुनाह कर जाती है. नंदिनी हत्याकांड इस का उदाहरण है. टीना अपने बूढ़े आशिक प्रह्लाद सहाय के प्यार में ऐसी अंधी हुई कि उस ने पति और उस का घर तो छोड़ा ही, अपनी बेटी के खून से भी हाथ रंग दिए.

राजस्थान के कोटा जिले के थाना बुढ़ादीव के गांव बोरखेड़ा में सुमित पुत्र हरदेव यादव अपनी पत्नी पुष्पा यादव उर्फ टीना (25 वर्ष) और इकलौती बेटी नंदिनी (4 साल) के साथ रहता था. सुमित सीधासादा इंसान था. वहीं उस की पत्नी टीना उर्फ पुष्पा रंगीनमिजाज युवती थी. सुमित का दिन जहां मेहनतमजदूरी करने में बीतता था, वहीं टीना का दिन मोबाइल देख कर गुजरता था. सुमित और टीना की शादी को करीब 6 साल हो चुके थे. इन 6 सालों में टीना एक बेटी नंदिनी की मां बन गई थी. उस का बदन कसा था और हसरतें उफान पर थीं. वह चाहती थी कि सुमित उसे सारी रात बांहों में भर कर जन्नत की सैर कराए.

मगर इस के उलट सुमित दिन भर कामधंधे में खपने के कारण इतना थक जाता था कि शाम को घर लौट कर खाना खा कर बिस्तर पर जा पड़ता था. टीना जब रसोई का काम निपटा कर पति के पास आती तो वह नींद में खर्राटे भरता मिलता था. यह देख कर टीना का मन कसैला हो जाता था. वह दिन भर इसी सोच में रहती कि आज पति उसे शारीरिक सुख देगा. मगर रात में थकामांदा पति उसे सोता मिलता. वह कभीकभी सोचा करती कि कैसे मर्द से ब्याह किया जो घोड़े बेच कर हर रात सो जाता है. उसे तनिक भी बीवी को प्यार करने की इच्छा नहीं होती. औरत भूखी रह सकती है मगर वह बिना शारीरिक प्यार के नहीं रह सकती.

सुमित कभीकभार ही टीना से शारीरिक संबंध बनाता था. मगर टीना चाहती थी कि उसे पति हर रात प्यार करे. वह पति से शर्म के मारे कह नहीं पाती थी. समय का पहिया घूमता रहा. एक दिन टीना किसी रिश्तेदार को मोबाइल पर फोन लगा रही थी. 3-4 बार घंटी बजने के बाद फोन उठा कर कोई शख्स बोला, ‘‘हैलो.’’

‘‘हां जी, आप कौन बोल रहे हैं?’’ टीना ने कहा तो फोन उठाने वाला बोला, ‘‘आप कौन हैं?’’

‘‘मैं तो टीना बोल रही हूं बोरखेड़ा, कोटा से.’’

‘‘टीना जी, मैं प्रह्लाद सहाय जयपुर से बोल रहा हूं. कहिए मैं आप की क्या सेवा करूं. फोन कैसे किया?’’ उस शख्स ने कहा.

सुन कर टीना बोली, ‘‘सौरी, आप को रौंग नंबर लग गया. मैं कहीं और फोन लगा रही थी.’’

‘‘रौंग नंबर लगा तो कोई बात नहीं. हम दोस्त तो बन ही सकते हैं. फोन पर बात कर के अच्छा लगा. वैसे आप की आवाज बड़ी मीठी और प्यारी है.’’ प्रह्लाद बोला.

‘‘तारीफ के लिए शुक्रिया. वैसे बातें आप भी बड़ी प्यारी करते हैं. मैं नंबर सेव कर लेती हूं. फुरसत में बात करते हैं.’’

‘‘ओके, मैं भी आप का नंबर सेव कर लेता हूं.’’ प्रह्लाद सहाय बोला. टीना ने काल डिसकनेक्ट कर दी. दोनों ने एकदूसरे के नंबर सेव कर लिए. रौंग नंबर से शुरू हुई इस बातचीत के बाद वह दोनों अकसर फोन पर करने लगे. बात नहीं करने पर उन्हें कुछ भी अच्छा नहीं लगता था. एक दिन दोनों ने फोन पर बातों ही बातों में प्यार का इजहार कर दिया और टीना ने प्रेम आमंत्रण स्वीकार भी कर लिया. प्रह्लाद को टीना ने बता दिया था कि वह एक 6 साल की बेटी नंदिनी की मां है. प्रह्लाद ने टीना से कहा कि वह नंदिनी को अपनी बेटी बना लेगा और पालनपोषण करेगा. टीना यादव यह जान कर बहुत खुश हुई कि उस का प्रेमी उस की बेटी को अपना रहा है. वह उस की प्यार भरी बातों के जाल में उलझती चली गई. वह भूल गई कि वह शादीशुदा और एक बेटी की मां है.

टीना भूल गई कि उस के मातापिता ने उसे डोली में बिठा कर विदा करते हुए कहा था, ‘‘बेटी, सुखदुख, अमीरीगरीबी आतेजाते रहेंगे. मगर ससुराल के घर से तेरी अर्थी ही उठनी चाहिए. इस के अलावा ससुराल के घर से कभी कदम बाहर नहीं रखना.’’

टीना प्रह्लाद पर इतना विश्वास करने लगी कि वह पति का घर छोड़ कर उस के पास जाने को तैयार हो गई थी. पति के साथ अग्नि के समक्ष सात फेरे ले कर जन्मों तक साथ निभाने की कसमें खाने वाली टीना शादी के मात्र 6 साल बाद ही पति की पीठ में खंजर घोंप कर प्रेमी का घर आबाद करने को उतावली हो रही थी.  सुमित को तो अपने कामधंधे से ही फुरसत नहीं थी. उसे पता नहीं था कि जिस की खुशी के लिए वह मेहनतमजदूरी करता है कि उसे किसी तरह की परेशानी नहीं हो. लेकिन वही बीवी किसी गैरमर्द को अपना बना चुकी है और वह घर से फुर्र होने वाली है. सुमित तो सोचता था कि टीना उस के साथ खुश है. वह उस की खुशी के लिए क्या कुछ नहीं करता था.

11 नवंबर, 2020 को भी हर रोज की तरह सुमित काम पर निकल गया. शाम को घर लौटा तो उस की बीवी टीना और बेटी नंदिनी घर पर नहीं थी. आसपड़ोस में सुमित ने बीवी और बेटी की खोजबीन की मगर वे नहीं मिलीं. सुमित ने टीना के मोबाइल पर भी फोन किया. मगर मोबाइल स्विच्ड औफ था. सुमित कई दिन तक अपने स्तर पर बीवी और बेटी की खोजबीन करता रहा. जब उन की कोई खोजखबर नहीं मिली तो थकहार कर वह 16 दिसंबर, 2020 को बुढ़ादीत थाने पहुंचा. सुमित ने थानाप्रभारी अविनाश कुमार को सारी बात बता कर पत्नी और बेटी नंदिनी की गुमशुदगी लिखा दी. गुमशुदगी दर्ज होने के बाद पुलिस की बहुत दिन तक नींद नहीं खुली.

जब सुमित थाने के चक्कर पर चक्कर काटने लगा तो पुलिस हरकत में आई. इस के बाद इटावा डीएसपी विजयशंकर शर्मा के निर्देशन व थाना बुढ़ादीत थानाप्रभारी  अविनाश कुमार के नेतृत्व में एक पुलिस टीम गठित की गई. इस पुलिस टीम में थानाप्रभारी अविनाश कुमार के अलावा हैडकांस्टेबल सुरेशचंद्र वर्मा, सतपाल, प्रह्लाद, पूरन सिंह, महिला कांस्टेबल माली को शामिल किया गया. पुलिस टीम ने मामले की जांच शुरू की. तकनीकी जांच और मुखबिर से पता चला कि सुमित की पत्नी टीना उर्फ पुष्पा जयपुर जिले के थाना मनोहरपुर के गांव उदावाला में प्रेमी प्रह्लाद सहाय के साथ रह रही है.

पुलिस टीम ने 13 मई, 2021 को सुमित की पत्नी टीना और उस के प्रेमी प्रह्लाद सहाय को हिरासत में ले लिया. लेकिन टीना के साथ उस की बेटी नंदिनी नहीं थी. टीना और प्रह्लाद से पुलिस टीम ने नंदिनी के बारे में पूछताछ की. टीना ने बताया कि नंदिनी अपने दादादादी के पास है. पुलिस ने पता किया. दादादादी के पास नंदिनी नहीं थी. तब पुलिस ने प्रह्लाद सहाय से और टीना से अलगअलग पूछताछ की. टीना ने बताया कि नंदिनी को बसस्टैंड पर अकेली छोड़ दिया था. पुलिस को उस की बातों पर यकीन नहीं था. इस कारण पुलिस ने गुमराह कर रहे प्रह्लाद व टीना से कड़ी पूछताछ की तो दोनों ने नंदिनी की हत्या की बात कबूल ली.

टीना को जब पता चला कि उस के प्रेमी ने नंदिनी की हत्या की स्वीकारोक्ति कर ली है, तब टीना भी टूट गई. उस ने भी बेटी की हत्या का गुनाह कबूल कर लिया. प्यार की खातिर मासूम बेटी की हत्या की बात सुन कर पुलिस भी आश्चर्यचकित रह गई. पूछताछ करने पर टीना की एक ऐसी कुमाता वाली छवि उभर कर सामने आई, जिस ने अपने से 20 बरस बड़े प्रेमी प्रह्लाद की खातिर इकलौती बेटी की हत्या कर उस का शव सरिस्का जंगल में फेंक दिया. दोनों आरोपियों से की गई पूछताछ के बाद प्यार में अंधी एक औरत की जो कहानी प्रकाश में आई, इस प्रकार है—

राजस्थान के कोटा जिले के बुढ़ादीत थानांतर्गत बोरखेड़ा गांव निवासी सुमित यादव से टीना उर्फ पुष्पा की शादी हो जरूर गई थी, लेकिन वह उस से खुश नहीं थी. क्योंकि वह उस की शारीरिक जरूरत को नहीं समझता था. इसीलिए वह अपने पति को पसंद नहीं करती थी. मगर लोकलाज के कारण वह उसे ढो रही थी. टीना की हसरतें उफान मारती थीं. मगर सुमित को इस की परवाह नहीं थी. टीना 4 साल की बेटी की मां हो गई थी, लेकिन वह इतनी खूबसूरत थी कि उस का गदराया बदन देख कर कोई भी मर्द उसे पाने को बेताब हो उठता था.

ऐसे में जयपुर के गांव उदावाला, निवासी प्रह्लाद सहाय से रौंग काल के जरिए उस की बात हुई तो उसे लगा कि प्रह्लाद उस के लिए ही बना है. इसलिए उस ने उस से नजदीकी बढ़ा ली. बातोंबातों में दोनों इतने खुल गए कि फोन पर प्यार का इजहार हो गया. इतना ही नहीं, दोनों ने जीवन भर साथ निभाने का फैसला भी ले लिया. एक दिन उस से प्रह्लाद ने कहा, ‘‘मैं तुम्हारी बेटी को अपनी बेटी के रूप में स्वीकार कर लूंगा. तुम उसे ले कर जयपुर के लिए निकल जाओ. मैं तुम दोनों को घर ले आऊंगा.’’

यह सुन कर टीना खुश हो गई. फिर वह 11 नवंबर, 2020 को पति सुमित के काम पर जाने के बाद अपनी बेटी नंदिनी को ले कर बोरखेड़ा से जयपुर आ गई, जहां से प्रह्लाद टीना और नंदिनी को ले कर अपने गांव उदावाला आ गया. टीना और प्रह्लाद पतिपत्नी की तरह रहने लगे. प्रह्लाद ने आसपड़ोस में कहा कि उस ने टीना से लव मैरिज की है. प्रह्लाद अधेड़ उम्र का था वहीं टीना जवान थी. टीना जैसी सुंदर प्रेमिका पा कर प्रह्लाद निहाल हो गया था. प्रह्लाद ने टीना को तनमनधन से सुख दिया. टीना अपने प्रेमी की दीवानी हो गई. प्रह्लाद भी स्त्री सुख से वंचित था. अधेड़ उम्र में जब जवान प्रेमिका मिली तो वह रोजाना अपनी हसरतें पूरी करता.

दोनों मौजमस्ती से दिन गुजार रहे थे. 9 जनवरी, 2021 की शाम नंदिनी सीढि़यों से गिर कर घायल हो गई. अगले दिन 10 जनवरी को नंदिनी को प्रह्लाद और टीना शाहपुरा अस्पताल ले गए. डाक्टर ने नंदिनी को देख कर कहा कि उसे जयपुर ले जाओ. इस पर प्रह्लाद व टीना नंदिनी को उदावाला घर ले आए. प्रह्लाद ने टीना से कहा, ‘‘टीना, अगर नंदिनी को जयपुर ले जाएंगे तो लाखों रुपए इलाज में खर्च होंगे. इस के बाद भी क्या पता नंदिनी बचे कि नहीं. ऐसा करते हैं कि पैसा बचाने के लिए नंदिनी को ही मार डालते हैं.’’

सुन कर मां की ममता पसीजने के बजाय बोली, ‘‘सही कह रहे हैं, आप. वैसे सुमित के खून को हमतुम क्यों पालेंपोसें.’’

उसी रात नंदिनी को सोते हुए शाल मुंह पर दबा कर टीना और प्रह्लाद ने मार डाला. रात भर लाश वहीं पड़ी रही. अगले दिन 11 जनवरी, 2021 को नंदिनी का शव ले कर प्रह्लाद और टीना अलवर जिले के सरिस्का जंगल में पहुंचे और सुनसान जगह पर डाल कर वापस उदावला लौट आए. शाम को उदावला आने पर प्रह्लाद के आसपड़ोस के लोगों ने जब नंदिनी के बारे में पूछा. तब उन से कहा कि नंदिनी को दादादादी के पास छोड़ आए हैं. टीना ने अपनी 4 बरस की बेटी को मारने के बावजूद टीना सामान्य बनी रही. उस के चेहरे पर शिकन तक नहीं थी. उलटे वह तो अपने को आजाद महसूस कर रही थी. उधर टीना और नंदिनी के 11 नवंबर, 2020 को घर से गायब होने पर टीना का पति सुमित यादव दोनों की रिश्तेदारी में एक महीने से ज्यादा समय तक खोजबीन करता रहा.

जब कहीं भी बीवी और बेटी का पता नहीं चला तब वह थकहार कर 16 दिसंबर, 2020 को थाना बुढ़ादीत पहुंच कर बीवी टीना उर्फ पुष्पा और बेटी नंदिनी की गुमशुदगी दर्ज कराई. यानी गुमशुदगी दर्ज कराने से पहले ही नंदिनी की हत्या कर दी गई थी. गुमशुदगी के बाद भी पुलिस की नींद देर से खुली. टीना और नंदिनी के गायब होने के तुरंत बाद अगर सुमित पुलिस थाने में गुमशुदगी की प्राथमिकी दर्ज करा देता और पुलिस समय पर काररवाई करती तो नंदिनी जिंदा होती. प्रह्लाद सहाय और टीना उर्फ पुष्पा से पूछताछ के बाद पुलिस ने उन्हें कोर्ट में पेश किया, जहां से उन्हें न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया. Crime Kahani

—कथा पुलिस सूत्रों पर आधारित

 

Crime ki Kahani : प्रेमी का अपहरण कर पेचकस से फोड़ डालीं दोनों आंखे

Crime ki Kahani : लोक जनशक्ति पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष अनिल उरांग जिस प्रियंका उर्फ दुलारी से प्यार करते थे, उस से पूर्णिया का शार्प शूटर अंकित यादव भी बेपनाह मोहब्बत करता था. इसी बीच ऐसा क्या हुआ कि यह हाथ ऐसा जुर्म कर बैठे कि…

लोक जनशक्ति पार्टी के आदिवासी प्रकोष्ठ के युवा प्रदेश अध्यक्ष 35 वर्षीय अनिल उरांव रोजाना की तरह उस दिन भी नाश्ता कर के क्षेत्र में भ्रमण के लिए तैयार हो कर ड्राइंगरूम में बैठे अपने भतीजे के आने का इंतजार कर रहे थे. तभी उन के मोबाइल फोन की घंटी बजी. अपनी शर्ट की जेब से मोबाइल निकाल कर डिसप्ले पर उभर रहे नंबर पर नजर डाली तो वह नंबर जानापहचाना निकला. स्क्रीन पर डिसप्ले हो रहे नंबर को देख कर अनिल उरांव का चेहरा खुशियों से खिल उठा था. उन्होंने काल रिसीव करते हुए कहा, ‘‘हैलो!’’

‘‘नेताजी, प्रणाम.’’ दूसरी ओर से एक महिला की मीठी सी आवाज अनिल उरांव के कानों से टकराई.

‘‘प्रणाम…प्रणाम.’’ उन्होंने जबाव दिया, ‘‘कैसी हो प्रियंकाजी?’’ उस महिला का नाम प्रियंका उर्फ दुलारी था.

‘‘ठीक हूं, नेताजी.’’ प्रियंका जबाव देते हुए बोली, ‘‘मैं क्या कह रही थी कि जनता की खैरियत पूछने जब क्षेत्र में निकलिएगा तो मेरे गरीबखाने पर जरूर पधारिएगा. मैं आप की राह तकूंगी.’’

‘‘सुबह….सुबह क्यों मेरी टांग खींच रही हैं प्रियंकाजी. कोई और नहीं मिला था क्या आप को टांग खींचने के लिए? आलीशान और शानदार महल कब से गरीबखाना बन गया?’’ अनिल ने कहा.

‘‘क्या नेताजी? क्यों मजाक उड़ा रहे हैं इस नाचीज का. काहे का शानदार महल. सिर ढंकने के लिए ईंटों की छत ही तो है. बहुत मजाक करते हैं आप मुझ से. अच्छा, अब मजाक छोडि़ए और सीरियस हो जाइए. ये बताइए कि दोपहर तक आ रहे हैं न मेरी कुटिया में, मुझ से मिलने. कुछ जरूरी मशविरा करना है आप से.’’ वह बोली.

‘‘ऐसा कभी हुआ है प्रियंकाजी कि आप बुलाएं और हम न आएं. फिर जब आप इतना प्रेशर मुझ पर बना ही रही हैं तो भला मैं कैसे कह दूं कि मैं आप की कुटिया पर नहीं पधारूंगा, मैं जरूर आऊंगा. मुझे तो सरकार के दरबार में हाजिरी लगानी ही होगी.’’

नेता अनिल उरांव की दिलचस्प बातें सुन कर प्रियंका खिलखिला कर हंस पड़ी तो वह भी अपनी हंसी रोक नहीं पाए और ठहाका मार कर हंसने लगे. उस के बाद दोनों के बीच कुछ देर तक हंसीमजाक होती रही. फिर प्रियंका ने अपनी ओर से फोन डिसकनेक्ट कर दिया तो अनिल उरांव ने भी मोबाइल वापस अपनी जेब के हवाले किया. फिर भतीजे राजन के साथ मोटरसाइकिल पर सवार हो कर वह मनिहारी क्षेत्र की ओर निकल पड़े. वह खुद मोटरसाइकिल चला रहे थे और भतीजा पीछे बैठा था. यह 29 अप्रैल, 2021 की सुबह साढ़े 10 बजे की बात है. अनिल उरांव को क्षेत्र भ्रमण में निकले तकरीबन 10 घंटे बीत चुके थे. वह अभी तक घर वापस नहीं लौटे थे और न ही उन का फोन ही लग रहा था. घर वालों ने साथ गए जब भतीजे से पूछा कि दोनों बाहर साथ निकले थे तो तुम उन्हें कहां छोड़ कर आए?

इस पर उस ने जबाव दिया, ‘‘चाचा को रेलवे लाइन के उस पार छोड़ कर आया था. उन्होंने कहा था कि वह प्रियंका के यहां जा रहे हैं, बुलाया है, मीटिंग करनी है. थोड़ी देर वहां रुक कर वापस घर लौट आऊंगा, तब मैं बाइक ले कर घर लौट आया था.’’

नेताजी अचानक हुए लापता भतीजे राजन के बताए अनुसार अनिल प्रियंका से मिलने उस के घर गए थे. राजन उस के घर के पास छोड़ कर आया था तो फिर वह कहां चले गए? अनिल के घर वालों ने प्रियंका को फोन कर के अनिल के बारे में पूछा तो उस ने यह कहते हुए अपना पल्ला झाड़ लिया कि नेताजी तो उस के यहां आए ही नहीं. यह सुन कर सभी के पैरों तले से जमीन खिसक गई थी. वह प्रियंका के यहां नहीं गए तो फिर कहां गए? लोजपा नेता अनिल उरांव और प्रियंका काफी सालों से एकदूसरे को जानते थे. दोनों के बीच संबंध काफी मधुर थे. यह बात अनिल के घर वाले और प्रियंका के पति राजा भी जानते थे. बावजूद इस के किसी ने कभी कोई विरोध नहीं जताया था.

अनिल को ले कर घर वाले परेशान हो गए थे. उन के परिचितों के पास भी फोन कर के पता लगाया गया, लेकिन उन का कहीं पता नहीं चला. घर वालों को अंदेशा हुआ कि कहीं उन के साथ कोई अनहोनी तो नहीं हो गई. उसी दिन रात में नेता अनिल उरांव की पत्नी पिंकी कुछ लोगों को साथ ले कर हाट थाने पहुंची और पति की गुमशुदगी की एक तहरीर थानाप्रभारी सुनील कुमार मंडल को सौंप दी. तहरीर लेने के बाद थानाप्रभारी सुनील कुमार ने पिंकी को भरोसा दिलाया कि पुलिस नेताजी को ढूंढने का हरसंभव प्रयास करेगी. आप निश्चिंत हो कर घर जाएं. उस के बाद पिंकी वापस घर लौट आई.

मामला हाईप्रोफाइल था. लोक जनशक्ति पार्टी (लोजपा) के आदिवासी प्रकोष्ठ के प्रदेश अध्यक्ष अनिल उरांव की गुमशुदगी से  जुड़ा हुआ मामला था. उन्होंने अनिल उरांव की गुमशुदगी की सूचना दर्ज कर ली और आवश्यक काररवाई में जुट गए. चूंकि यह मामला राज्य के एक बड़े नेता की गुमशुदगी से जुड़ा हुआ था, इसलिए उन्होंने इस बाबत एसपी दया शंकर को जानकारी दे दी थी. वह जानते थे कि अनिल उरांव कोई छोटीमोटी हस्ती नहीं है. उन के गुम होने की जानकारी जैसे ही समर्थकों तक पहुंचेगी, वो कानून को अपने हाथ में लेने से कभी नहीं हिचकिचाएंगे. इस से शहर की कानूनव्यवस्था बिगड़ सकती है, इसलिए किसी भी स्थिति से निबटने के लिए उन्हें मुस्तैद रहना होगा.

इधर पति के घर लौटने की राह देखती पिंकी ने पूरी रात आंखों में काट दी थी. लेकिन अनिल घर नहीं लौटे. पति की चिंता में रोरो कर उस का हाल बुरा था. दोनों बेटे प्रांजल (7 साल) और मोनू (2 साल) भी मां को रोता देख रोते रहे. रोरो कर सभी की आंखें सूज गई थीं. फिरौती की आई काल बात अगले दिन यानी 30 अप्रैल की सुबह की है. पति की चिंता में रात भर की जागी पिंकी की आंखें कब लग गईं, उसे पता ही नहीं चला. उस की आंखें तब खुलीं जब उस के फोन की घंटी की आवाज कानों से टकराई.  स्क्रीन पर डिसप्ले हो रहे नंबर को देख कर हड़बड़ा कर वह नींद से उठ कर बैठ गई. क्योंकि वह फोन नंबर उस के पति का ही था. वह जल्दी से फोन रिसीव करते हुए बोली,

‘‘हैलो! कहां हो आप? एक फोन कर के बताना भी जरूरी नहीं समझा और पूरी रात बाहर बिता दी. जानते हो कि हम सब आप को ले कर कितने परेशान थे रात भर. और आप हैं कि…’’

पिंकी पति का नंबर देख कर एक सांस में बोले जा रही थी. तभी बीच में किसी ने उस की बात काट दी और रौबदार आवाज में बोला, ‘‘तू मेरी बात सुन. तेरा पति अनिल मेरे कब्जे में है. मैं ने उस का अपहरण कर लिया है.’’

‘‘अपहरण किया है?’’ चौंक कर पिंकी बोली.

‘‘तूने सुना नहीं, क्या कहा मैं ने? तेरे पति का अपहरण किया है, अपहरण.’’

‘‘तुम कौन हो भाई.’’ बिना घबराए, हिम्मत जुटा कर पिंकी आगे बोली, ‘‘तुम ने ऐसा क्यों किया? मेरे पति से तुम्हारी क्या दुश्मनी है, जो उन का अपहरण किया?’’

‘‘ज्यादा सवाल मत कर. जो मैं कहता हूं चुपचाप सुन. फिरौती के 10 लाख रुपयों का बंदोबस्त कर के रखना. मेरे दोबारा फोन का इंतजार करना. मैं दोबारा फोन करूंगा. रुपए कब और कहां पहुंचाने हैं, बताऊंगा. हां, ज्यादा चूंचपड़ करने या होशियारी दिखाने की कोशिश मत करना और न ही पुलिस को बताना. नहीं तो तेरे पति के टुकड़ेटुकड़े कर के कौओं को खिला दूंगा, समझी.’’ फोन करने वाले ने पिंकी को धमकाया.

‘‘नहीं…नहीं उन्हें कुछ मत करना.’’ पिंकी फोन पर गिड़गिड़ाने लगी, ‘‘तुम जो कहोगे, मैं वही करूंगी. मैं तुम्हारे आगे हाथ जोड़ती हूं. मैं पुलिस को कुछ नहीं बताऊंगी. प्लीज, उन्हें छोड़ दो. पैसे कहां पहुंचाने हैं, बता दो. तुम्हारे पैसे समय पर पहुंच जाएंगे.

‘‘तुम बहुत समझदार हो. बहुत जल्द मेरी बात समझ गई. रुपए का इंतजाम कर के रखना, जल्द ही फोन कर के बताऊंगा कि पैसे कब और कहां पहुंचाने हैं.’’ इस के बाद दूसरी ओर से फोन कट गया. अपहर्त्ताओं को दिए 10 लाख रुपए स्क्रीन पर जिस नंबर को देख कर पिंकी की आंखों में चमक जागी थी, वह नंबर उस के पति का था. बदमाशों ने अनिल के फोन से काल कर के फिरौती की रकम मांगी थी. ताकि पुलिस उन तक पहुंच न सके. खैर, पति के अपहरण की जानकारी पिंकी ने जैसे ही घर वालों को दी, उस की बातें सुन कर सभी स्तब्ध रह गए. किंतु उन्हें इस बात से थोड़ी तसल्ली हुई थी कि अनिल जिंदा हैं और बदमाशों के कब्जे में हैं. अगर उन्हें फिरौती की रकम दे दी जाए तो उन की सहीसलामत वापसी हो सकती है.

अनिल उरांव की मिली लाश बदमाशों की धमकी सुन कर पिंकी और उस की ससुराल वालों ने पुलिस को बिना कुछ बताए 10 लाख रुपए का इंतजाम कर लिया और शाम होतेहोते बदमाशों के बताए अड्डे पर फिरौती के 10 लाख रुपए पहुंचा दिए गए. बदमाशों ने रुपए लेने के बाद देर रात तक अनिल को छोड़ देने का भरोसा दिया था. पूरी रात बीत गई, लेकिन अनिल उरांव लौट कर घर नहीं पहुंचे तो घर वाले परेशान हो गए. अनिल उरांव के फोन पर घर वालों ने काल की तो वह बंद आ रहा था. जिन दूसरे नंबरों से बदमाशों ने 3 बार काल की थी, वे नंबर भी बंद आ रहे थे. इस का मतलब साफ था कि फिरौती की रकम वसूलने के बाद भी बदमाशों ने अनिल उरांव को छोड़ा नहीं था. बदमाशों ने उन के साथ गद्दारी की थी. यह सोच कर घर वाले परेशान थे.

बात 2 मई, 2021 की सुबह की है. के. नगर थाने के झुन्नी इस्तबरार के डंगराहा गांव की महिलाएं सुबहसुबह गांव के बाहर खेतों में आई थीं. तभी उन्होंने खेत में जो दृश्य देखा, वह दंग रह गईं. किसी आदमी का एक हाथ जमीन के बाहर झांक रहा था. जमीन के बाहर हाथ देख कर महिलाएं उलटे पांव गांव की ओर भागीं और गांव पहुंच कर पूरी बात गांव के लोगों को बताई. खेत में लाश गड़ी होने की सूचना मिलते ही गांव वाले मौके पर पहुंच गए और इस की सूचना के. नगर थाने को दे दी. सूचना मिलते ही थानाप्रभारी डंगराहा पहुंच गए और गड्ढे से लाश बाहर निकलवाई. शव का निरीक्षण करने पर पता चला कि हत्यारों ने मृतक के साथ मानवता की सारी हदें पार कर दी थीं.

उन्होंने किसी नुकीली चीज से मृतक की दोनों आंखें फोड़ दी थीं और शरीर पर चोट के कई जगह निशान थे. डंगराहा में एक अज्ञात शव मिलने की सूचना जैसे ही अनिल के घर वालों को मिली, वे भी मौके पर जा पहुंचे थे. उन्होंने लाश देखते ही पहचान ली. घर वाले चीखचीख कर प्रियंका उर्फ दुलारी के ऊपर हत्या का आरोप लगा रहे थे. लोजपा नेता की लाश मिलते ही क्षेत्र में सनसनी फैल गई थी. घर वालों का रोरो कर बुरा हाल था. अपहर्त्ताओं ने धोखा किया था. रुपए लेने के बाद भी उन्होंने हत्या कर दी थी. जैसे ही नेताजी की हत्या की सूचना लोजपा कार्यकर्ताओं को मिली, वे उग्र हो गए और शहर के हर खास चौराहों को जाम कर आग के हवाले झोंक दिया तथा पुलिस के खिलाफ नारेबाजी करने लगे.

इधर पुलिस ने लाश अपने कब्जे में ले कर वह पोस्टमार्टम के लिए जिला अस्पताल भिजवा दी और आगे की काररवाई में जुट गए. पुलिस ने मृतक के घर वालों के बयान के आधार पर उसी दिन दोपहर के समय मृतक की प्रेमिका प्रियंका उर्फ दुलारी को उस के घर से हिरासत में ले लिया और पूछताछ के लिए के. हाट थाने ले आई. प्रियंका ने पहले तो पुलिस को खूब इधरउधर घुमाया, किंतु जब उस की दाल नहीं गली तो उस ने पुलिस के सामने अपने घुटने टेक दिए. प्रेमिका प्रियंका ने उगला हत्या का राज अपना जुर्म कबूल करते हुए प्रियंका ने कहा,

‘‘इस कांड को अंजाम देने में मैं अकेली नहीं थी. 4 और लोग शामिल थे. घटना का मास्टरमांइड अंकित यादव है और उसी ने योजना के तहत इस घटना को अंजाम दिया था.’’

प्रियंका के बयान के बाद उस की निशानदेही पर पुलिस ने 2 बदमाशों मोहम्मद सादिक उर्फ राहुल और चुनमुन झा उर्फ बटेसर को धर दबोचा और थाने ले आई. घटना का मास्टरमाइंड अंकित यादव और उस का भांजा मिट्ठू कुमार यादव उर्फ मिट्ठू फरार थे. आरोपी मोहम्मद सादिक और चुनमुन झा ने भी अपने जुर्म कबूल कर लिए थे. पुलिस ने अज्ञात हत्यारों के स्थान पर उपर्युक्त सभी को नामजद करते हुए भादंवि की धारा 302, 120बी, 364ए और एससी/एसटी ऐक्ट भी लगाया. पुलिस ने गिरफ्तार तीनों आरोपियों प्रियंका उर्फ दुलारी, मोहम्मद सादिक उर्फ राहुल और चुनमुन झा उर्फ बटेसर को अदालत में पेश कर उन्हें जेल भेज दिया और फरार आरोपियों अंकित यादव और मिट्ठू कुमार यादव की तलाश में सरगर्मी से जुट गई थी.

पुलिस द्वारा की गई पूछताछ में आरोपितों के बयान के आधार पर कहानी कुछ ऐसे सामने आई—

35 वर्षीय अनिल उरांव मूलरूप से बिहार के पूर्णिया जिले के के. हाट थाना क्षेत्र स्थित जेपी नगर के रहने वाले थे. पिता जयप्रकाश उरांव के 2 बच्चे थे. बड़ी बेटी सीमा और छोटा बेटा अनिल. जयप्रकाश एक रिहायशी एस्टेट के मालिक थे. विरासत में मिली अरबों की संपत्ति पुरखों की जमींदारी थी. उन्हें अरबों रुपए की यह चलअचल संपत्ति विरासत में मिली थी. आगे चल कर यही संपत्ति उन के बेटे अनिल उरांव के नाम हो गई थी. क्योंकि पिता के बाद वही इस संपत्ति का इकलौता वारिस था.

जयप्रकाश एक बड़ी प्रौपर्टी के मालिक थे. उन का समाज में बड़ा नाम था. उन के घर से कोई गरीब दुखिया कभी खाली हाथ नहीं जाता था. गरीब तबके की बेटियों की शादियों में वह दिल खोल कर दान करते थे. गरीबों की दुआओं का असर था कि कभी घर में धन की कमी नहीं हुई. अगर यह कहें कि लक्ष्मी घर के कोनेकोने में वास करती थी तो गलत नहीं होगा. यही नहीं, उन्होंने अपनी बिरादरी के लिए बहुत कुछ किया था, इसलिए लोग उन का सम्मान करते थे. बाद के दिनों में जब जयप्रकाश का स्वर्गवास हुआ तो उन्हीं के नाम पर उस कालोनी का नाम जेपी नगर रख दिया गया था.

बहरहाल, अनिल को यह संपत्ति विरासत में मिली थी, इसलिए उस की कीमत वह नहीं समझ रहे थे. पुरखों की यह दौलत अपने दोनों हाथों से यारदोस्तों पर पानी की तरह बहाने में जरा भी नहीं हिचकिचाते थे.  समय के साथ अनिल की पिंकी के साथ शादी हो गई. गृहस्थी बसते ही वह 2 बच्चों प्रांजल और मोनू के पिता बने. अनिल की जिंदगी मजे से कट रही थी. खाने को अच्छा भोजन था, पहनने के लिए महंगे कपड़े थे और सिर ढकने के लिए शानदार और आलीशान मकान था. कहते हैं, जब इंसान के पास बिना मेहनत किए दौलत आ जाए तो उस के पांव दलदल की ओर बढ़ने में देरी नहीं लगती है. अनिल के साथ भी कुछ ऐसा ही हुआ था.

जमींदार घर का वारिस तो थे ही वह. अरबों की अचल संपत्ति तो थी ही उन के पास. धीरेधीरे उन्होंने उन जमीनों को बेचना शुरू किया. बेशकीमती जमीनों के सौदों से उन के पास रुपए आते रहे. जब उन के पास रुपए आए तो राजनीति की चकाचौंध से आंखें चौधियां गई थीं. उन के रिश्ते के मामा राधा उरांव राजनीति के पुराने खिलाड़ी थे. राजनीति का ककहरा अनिल ने उसी मामा से सीखा और किस्मत आजमाने रामविलास पासवान के पास पहुंच गए. उन्होंने आशीर्वाद स्वरूप अपना हाथ अनिल के सिर पर रख दिया और उन्हें आदिवासी प्रकोष्ठ का प्रदेश अध्यक्ष बना दिया. खद्दर का सफेद कुरता पायजामा पहन कर अनिल उरांव ताकतवर हो गए थे. यह घटना से 7 साल पहले की बात है.

अमीरों की तरह ठाठबाट थे प्रियंका के अनिल के पास अब पैसों के साथ साथ सत्ता की पावर थी और बड़ेबड़े माननीयों के बीच में उठनाबैठना भी. पहली बार अनिल ने सत्ता के गलियारे का मीठा स्वाद चखा था. माननीयों के सामने जब नौकरशाह सैल्यूट मारते थे, यह देख कर अनिल का दिल बागबाग हो जाता था. यहीं से प्रियंका उर्फ दुलारी नाम की महिला अनिल उरांव की किस्मत में दुर्भाग्य की कुंडली मार कर बैठ गई थी. तब कोई नहीं जानता था कि यही प्रियंका एक दिन नागिन बन कर अनिल को डस लेगी. 36 वर्षीया प्रियंका हाट थानाक्षेत्र में स्थित केसी नगर कालोनी में दूसरे पति राजा के साथ रहती थी. पहला पति उसे बहुत पहले तलाक दे चुका था. उस के कोई संतान नहीं थी लेकिन दोनों बड़े ठाठबाट से रहते थे, अमीरों की तरह.

कई कमरों वाले उस के शानदार और आलीशान मकान में सुखसुविधाओं की सारी चीजें मौजूद थीं. घर में कमाने वाला सिर्फ उस का पति था. एक आदमी की कमाई में ऐसी शानोशौकत देख कर मोहल्ले वाले दंग रहते थे. प्रियंका की शानोशौकत देख कर मोहल्ले वालों का दंग रहना जायज था. उस का पति राजा पूर्णिया विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर राजनाथ यादव का एक मामूली सा कार ड्राइवर था. उस की इतनी आमदनी भी नहीं थी कि वह घर खर्च के अलावा नवाबों जैसी जिंदगी जिए. ये ऐशोआराम तो प्रियंका की खूबसूरती की देन थी. गोरीचिट्टी और तीखे नयननक्श वाली प्रियंका की मोहल्ले में बदनाम औरतों में गिनती होती थी. शहर के बड़ेबड़े धन्नासेठों, भूमाफियाओं और नेताओं का उस के घर पर उठनाबैठना था. उस में लोजपा का युवा नेता अनिल उरांव का नाम भी शामिल था.

शादीशुदा होते हुए भी अनिल उरांव प्रियंका की गोरी चमड़ी के इस कदर दीवाने हुए कि उसे देखे बिना रह नहीं पाते थे. लेकिन प्रियंका उन से तनिक भी प्यार नहीं करती थी. वह तो केवल उन की दौलत से प्यार करती थी. वह जानती थी कि अनिल एक एटीएम मशीन है. बस, उस से दौलत निकालते जाओ, निकालते जाओ और ऐश करते जाओ. प्रियंका ने बनाई योजना अनिल उरांव जिस प्रियंका के प्यार में दीवाने थे, पूर्णिया का शूटर अंकित यादव उर्फ अनंत भी उसी प्रियंका को बेपनाह चाहता था. अनिल का उस की प्रेमिका प्रियंका की ओर आकर्षित होना, अंकित के सीने पर सांप लोटने जैसा था.

उस ने प्रियंका से कह दिया था ‘‘तू अपने आशिक से कह देना कि मेरी चीज पर नजर न डाले, वरना जिस दिन मेरा भेजा गरम हो गया तो उस की खोपड़ी में रिवौल्वर की सारी गोलियां डाल दूंगा.’’

फिर उस ने अपने प्रेमी अंकित को समझाया, ‘‘देखो अंकित, तुम ठहरे गरम खून के इंसान. जब देखो गोली, कट्टा और बंदूक की बातें करते हो, कभी ठंडे दिमाग से काम नहीं लेते. जिस दिन से ठंडे दिमाग से सोचना शुरू कर दोगे, उस दिन बिना गोली, कट्टे के सारे काम बन जाएंगे. क्यों बेवजह परेशान हो कर अपना ब्लड प्रैशर बढ़ाते हो. मैं क्या कहती हूं, उसे ध्यान से सुनो. मेरे पास एक नायाब तरीका है. जिस से सांप भी मर जाएगा और लाठी भी नहीं टूटेगी.’’

‘‘बता क्या कहना चाहती है तू.’’ अंकित ने पूछा.

‘‘यही कि अनिल उरांव का अपहरण कर लेते हैं और बदले में उस के घर वालों से फिरौती की एवज में मोटी रकम ऐंठ लेते हैं. नेताजी की जान के बदले उस के घर वालों के लिए 10-20 लाख देना कोई बहुत बड़ी बात नहीं होगी. बोलो क्या कहते हो?’’ प्रियंका ने प्लान बनाया.

‘‘ठीक है जो करना हो, जल्दी करना. उस गैंडे को तेरे नजदीक देख कर मेरे तनबदन में आग सी लग जाती है, कहीं ऐसा न हो कि मैं अपना आपा खो दूं और तू भी स्वाहा हो जाए. जो करना है, जल्दी करना, समझी.’’ अंकित बोला.

‘‘ठीक है, बाबा ठीक है. क्यों बिना मतलब के अपना खून जलाते हो. समझो कि काम हो गया और तुम्हारी राह का कांटा भी हट गया.’’ प्रियंका ने कहा.

प्रियंका और अंकित ने मिल कर अनिल के अपहरण की योजना बना ली. योजना के मुताबिक, 29 अप्रैल, 2021 की सुबह प्रियंका ने अनिल उरांव को फोन कर के अपने घर आने को कहा. अनिल भतीजे राजन को साथ ले कर मोटरसाइकिल से निकले और बीच रास्ते में खुद मोटरसाइकिल से नीचे उतर कर कहा प्रियंका के यहां जा रहा हूं. जब फोन करूं तो बाइक ले कर चले आना. फिरौती ले कर बदल गई नीयत अनिल प्रियंका के यहां पहुंचे तो उस के घर पर पहले से शूटर अंकित यादव उर्फ अनंत, उस का भांजा मिट्ठू कुमार यादव उर्फ मिट्ठू, मोहम्मद सादिक उर्फ राहुल और चुनमुन झा उर्फ बटेसर मौजूद थे.

अंकित को देख कर अनिल घबरा गए और वापस लौटने लगे तो चारों ने लपक कर उन्हें पकड़ लिया. अनिल ने बदमाशों के चंगुल से बचने के लिए खूब संघर्ष किया. कब्जे में लेने के लिए बदमाशों ने अनिल को लातघूंसों से खूब मारा और कपड़े वाली मोटी रस्सी से उन के हाथपैर बांध कर उन्हें कमरे में बंद कर दिया और उन का फोन भी अपने कब्जे में ले लिया ताकि वह किसी से बात न कर सकें. फिर उन्हीं के फोन से अंकित ने अनिल के घर वालों को फोन कर के अपहरण होने की जानकारी देते हुए फिरौती के 10 लाख रुपए की मांग की. उस के बाद मोबाइल फोन से सिम निकाल कर तोड़ कर फेंक दिया ताकि पुलिस उन तक पहुंच न पाए.

30 अप्रैल, 2021 को फिरौती की रकम मिलने के बाद बदमाशों की नीयत बदल गई. चारों ने प्रियंका के घर पर ही अनिल की गला दबा कर हत्या कर दी और पेचकस जैसे नुकीले हथियार से अंकित ने अनिल की दोनों आंखें फोड़ दीं. फिर उसी रात अनिल की लाश के. नगर थाने के डंगराहा के एक खेत में गड्ढा खोद कर दफना दी. जल्दबाजी में लाश दफन करते समय मृतक का एक हाथ बाहर निकला रह गया और वे कानून के शिकंजे में फंस गए. कथा लिखे जाने तक फरार चल रहा मुख्य आरोपी अंकित यादव उर्फ अनंत और उस का भांजा मिट्ठू कुमार यादव दोनों दरभंगा जिले से नाटकीय ढंग से गिरफ्तार कर लिए गए थे. दोनों आरोपियों ने लोजपा नेता अनिल उरांव के अपहरण और हत्या  करने का जुर्म स्वीकार लिया था.

जांचपड़ताल में प्रियंका के असम में करोड़ों रुपए संपत्ति का पता चला है, जो अपराध से कमाई गई थी. पुलिस ने संपत्ति जब्त करने की प्रक्रिया शुरू कर दी थी. कथा लिखे जाने तक पुलिस पांचों आरोपियों प्रियंका उर्फ दुलारी, अंकित यादव, मिट्ठू कुमार यादव, मोहम्मद सादिक और चुनमुन झा के खिलाफ अदालत में आरोप पत्र दाखिल करने की तैयारी कर रही थी. पांचों आरोपी जेल की सलाखों के पीछे अपने किए की सजा भुगत रहे थे. Crime ki Kahani

—कथा मृतक के रिश्तेदारों और पुलिस सूत्रों पर आधारित

 

Delhi News : प्रेमिका की हत्या के आरोपी ने अस्पताल में की आत्महत्या

Delhi News : एक चौंकाने वाले मामले में 22 अप्रैल, 2025 को प्रेमिका की हत्या के आरोप में पकड़े गए एक सख्स ने अस्तपाल में फांसी लगाकर खुदखुशी कर ली. पुलिस जब अस्पताल में पहुंची तो वह  फंदे पर लटका हुआ था. पुलिस भी उसे देख कर दंग रह गई. सवाल उठता है आखिर इस शख्स ने खुदखुशी अस्पताल में ही क्यों की? पढ़ते हैं पूरी घटना विस्तार से-

यह घटना 13 जुलाई, 2025 को दिल्ली के तिहाड़ जेल की है, जहां रमेश करमाकर नामक एक मुलजिम ने जेल के अस्पताल की खिड़की पर लटक कर आत्महत्या कर ली. बताया गया कि 28 मई से रमेश करमाकर जेल नंबर 4 में बंद था.  उसे तिहाड़ की जेल नम्बर 3  में स्थित अस्पताल में इलाज के लिए लाया गया था. कर्मचारी जब 14 जुलाई को सुबह अस्पताल के कमरे में पहुंचे तो देखा कि कैदी फंदे पर लटका हुआ था. लटके हुए शव को देख पुलिस भी हैरान थी.

पुलिस ने तुंरत रमेश के शव को खिड़की से नीचे उतारा. घटना की जानकारी जब पुलिस प्रशासन को मिली तो पूरे जेल परिसर में हड़कंप मंच गया. पुलिस ने बताया कि मृतक का नाम रमेश  करमाकर था, जो होटल में साफ सफाई का काम किया करता था. उसे अपनी प्रेमिका की हत्या के आरोप में  तिहाड़ की 4 नम्बर की जेल लाया गया था.  जेल में रमेश को चक्कर आने की शिकायत होने लगी और उस के दाएं कान में दर्द होने लगा था. उस की सुनने की क्षमता कम होने के कारण उसे 28 मई, 2025 को तिहाड़ जेल के अस्पताल मे इलाज के लिए भरती कराया गया. जहां उस का इलाज चल रहा था, लेकिन 13 जलाई की सुबह पुलिस ने देखा कि रमेश ने सुसाइड कर लिया है.

पुलिस ने बताया कि रमेश को 22 अप्रैल को अपनी पार्टनर की हत्या के आरोप में अरेस्ट किया गया था. जांच में सामने आया रमेश की पार्टनर यानि उस की प्रेमिका उसे बारबार धमकी दे रही थी कि वह उन के रिश्ते की सच्चाई उस की पत्नी को बता देगी. इसी डर के कारण रमेश ने अपनी प्रेमिका की हत्या कर दी थी.

प्रशासन पर उठे सवाल

तिहाड़ जेल में सख्त सुरक्षा और सीसीटीवी कैमरे होने के बावजूद भी रमेश के सुसाइड ने पुलिस प्रशासन पर अब सवाल खड़े कर दिए हैं. पुलिस अब हर पहलू पर जांच की कर रही है, लेकिन अभी तक यह स्पष्ट नहीं कर पा रही है कि रमेश को खुदखुशी क्यों  करनी पड़ी. पुलिस अधिकारी अब यह भी जानने की कोशिश कर रहे हैं कि ऐसी कौन सी वजह थी, जिस ने रमेश को आत्महत्या करने के लिए मजबूर  कर दिया था. पुलिस इस मामले की  गहराई से जांच कर रही है. Delhi News

UP Crime News : 6 साल की बेटी के पेट पर मां हो गई खड़ी और प्रेमी ने दबाया मुंह

UP Crime News : एक ऐसी शर्मनाक घटना सामने आई है, जिस ने लोगों का दिल दहला कर रख दिया है. जहां एक मां ने अपनी 7 साल की बेटी की हत्या कर दी. फिर शव को बेड के नीचे छिपा कर वह प्रेमी के साथ सो गई. जब बदबू फैली तो परफ्यूम छिड़क दिया. आखिर क्यों किया मां ने अपनी ही बेटी का कत्ल? क्या राज है इस खौफनाक मर्डर मिस्ट्री के पीछे का? चलिए जानते हैं मां का क्रूर चेहरा सामने लाने वाली  इस घटना को विस्तार से-

यह घटना उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ की है, जहां रोशनी नाम की एक युवती ने 14-15 जुलाई, 2025 की रात करीब 3 बजे अपनी 7 साल की बेटी सायनारा की हत्या अपने प्रेमी उदित जायसवाल के साथ मिल कर की. वह प्रेमी के प्यार में इतनी अंधी हो चुकी थी कि बेटी सायनारा उर्फ सोना के पेट पर खड़ी हो गई और फिर उस के इशारे पर उदित जायसवाल ने बच्ची का मुंह दबा दिया. थोड़ी ही देर में सायनारा ने छटपटाकर दम तोड़ दिया.

इस के बाद दोनों ने बेटी का शव बेड के बौक्स में छिपा दिया. बेटी को ठिकाने लगाने के बाद रोशनी इतनी खुश हुई कि उस ने प्रेमी के साथ शराब पी फिर दोनों साथ सो गए. बाद में जब इन दोनों को लगा कि बच्ची के शव से दुर्गंध  आनी शुरू हो गई है तो इन्होंने शव को एसी के सामने रख कर उस पर काफी परफ्यूम छिड़क दिया. इस के बाद रोशनी ने प्रेमी के साथ मिल कर इस मामले में अपने पति शाहरुख को फंसाने का प्लान बनाया.  प्लान के अनुसार रोशनी ने पुलिस को सूचित कर दिया कि पति ने बेटी को मार डाला.

रोशनी एक डांसर थी. उस की शादी करीब 10 साल पहले लखनऊ के कैसरबाग क्षेत्र के खंदारी बाजार निवासी शाहरूख से हुई थी. इन के एक बेटी पैदा हुई, जिस का नाम सायनारा उर्फ सोना रखा गया. करीब 4 साल से  उदित जायसवाल नाम के एक युवक के साथ रोशनी के अवैध सम्बंध चले रहे हैं. उदित के साथ रहने की चाह में रोशनी ने अपने जेठ, सास और 2 ननदो पर झूठा आरोप लगाकर जेल  भिजवा दिया था. इन सभी को झूठे मामले में जेल भिजवाने के बाद रोशनी को किसी का कोई डर नही रह गया था.

इस के बाद वह प्रेमी उदित जायसवाल के साथ ससुराल में ही लिवइन रिलेशन में रहने लगी. अब वह पति को भी जेल भिजवाना चाहती थी, इसीलिए उस ने योजना बनाकर 7 वर्षीय बेटी का मर्डर किया था. जब रोशनी ने पुलिस को सूचित कर बताया कि पति उस के साथ झगड़ा कर ने के बाद बेटी सायनारा का कत्ल कर फरार हो गया है, तब पुलिस ने सब से पहले सायनारा के शव की जांच की तो मामला कुछ और ही निकला.

शव से तेज बदबू आ रही थी और कीड़े भी पड़ चुके थे. जिस से साफ हुआ कि बेटी की हत्या उस दिन नही बल्कि एक से 2-3 दिन पहले की गई होगी. तभी डेडबौडी डेमेज हो रही है. पुलिस को बेटी की मां रोशनी और उस के प्रेमी उदित जायसवाल  पर शक हुआ. दोनों को  हिरासत में लेने के बाद पुलिस ने उन से सख्ती से पूछताछ की तो उदित जायसवाल ने जुर्म कुबूल कर किया और बताया कि बेटी सायनारा ने दोनों को आपत्तिजनक हालत में देख लिया था. इसी कारण डर था कि वह अपने पापा को दोनों की सच्चाई न बता दे, इसलिए उस की हत्या की साजिश रची.

पूछताछ में पता चला कि सायनारा का गला घोंटते समय उदित ने बच्ची का मुंह दबाए रखा ताकि वह चीख न सके और रोशनी उस के पेट पर खड़ी हो गई, जिस से  बच्ची के मुंह से  खून तक निकल आया था. पुलिस ने दोनों को अरेस्ट कर लिया है और मामले की जांच पड़ताल जारी है. UP Crime News

Crime News : पिता ने प्रेमी संग बेटी को रंगेहाथों पकड़ा और कुल्हाड़ी से काट डाला

Crime News : सपना पड़ोस में रहने वाले शालू को न सिर्फ प्यार करती थी, बल्कि वह शादी भी करना चाहती थी. लेकिन इसे अपनी नाक का सवाल मान कर सपना के पिता शिवआसरे ने ऐसा नहीं होने दिया. इस के बाद ऐसा क्या हुआ कि सपना का प्यार बस अधूरा सपना बन कर रह गया. कानपुर जिले के घाटमपुर थाना अंतर्गत एक गांव है बिहारिनपुर. इसी गांव में शिवआसरे परिवार सहित रहता था. उस के परिवार में पत्नी मीना के अलावा 2 बेटियां सपना, रत्ना तथा 2 बेटे कमल व विमल थे. शिवआसरे ट्रक ड्राइवर था. उस के 2 अन्य भाई रामआसरे व दीपक थे, जो अलग रहते थे और खेतीबाड़ी से घर खर्च चलाते थे.

शिवआसरे की बेटी सपना भाईबहनों में सब से बड़ी थी. वह जैसेजैसे सयानी होने लगी, उस के रूपलावण्य में निखार आता गया. 16 साल की होतेहोते सपना की सुंदरता में चारचांद लग गए. मतवाली चाल से जब वह चलती, तो लोगों की आंखें बरबस उस की ओर निहारने को मजबूर हो जाती थीं. सपना जितनी सुंदर थी, उतनी ही पढ़नेलिखने में भी तेज थी. उस ने पतारा स्थित सुखदेव इंटर कालेज में 9वीं कक्षा में एडमिशन ले लिया था. जबकि उस की मां मीना उसे मिडिल कक्षा से आगे नहीं पढ़ाना चाहती थी, लेकिन सपना की जिद के आगे उसे झुकना पड़ा. सपना के घर से कुछ दूरी पर शालू रहता था. शालू के पिता बैजनाथ किसान थे. उन के 3 बच्चों में शालू सब से बड़ा था.

17 वर्षीय शालू हाईस्कूल की परीक्षा पास कर चुका था और इंटरमीडिएट की पढ़ाई घाटमपुर के राजकीय इंटर कालेज से कर रहा था. शालू के पिता बैजनाथ और सपना के पिता शिवआसरे एक ही बिरादरी के थे, सो उन में गहरी दोस्ती थी. दोनों एकदूसरे का दुखदर्द समझते थे. किसी एक को तकलीफ हो तो दूसरे को दर्द खुद होने लगता. बैजनाथ और शिवआसरे बीते एक दशक से गांव में बटाई पर खेत ले कर खेती करते थे. हालांकि शिवआसरे ट्रक चालक था और खेतीबाड़ी में कम समय देता था. इस के बावजूद दोनों की पार्टनरशिप चलती रही. दोनों परिवारों में घरेलू संबंध भी थे. लिहाजा उन के बच्चों का भी एकदूसरे के घर आनाजाना लगा रहता था.

शालू सपना को चाहता था. सपना भी उस की आंखों की भाषा समझती थी. सपना के लिए शालू की आंखों में प्यार का सागर हिलोरें मारता था. सपना भी उस की दीवानी होने लगी. धीरेधीरे उस के मन में भी शालू के प्रति आकर्षण पैदा हो गया. सपना शालू के मन को भाई तो वह उस का दीवाना बन गया. सपना के स्कूल जाने के समय वह बाहर खड़ा उस का इंतजार करता रहता. सपना उसे दिखाई पड़ती तो वह उसे चाहत भरी नजरों से तब तक देखता रहता, जब तक वह उस की आंखों से ओझल नहीं हो जाती. अब वह सपना के लिए तड़पने लगा था. हर पल उस के मन में सपना ही समाई रहती थी. न उस का मन काम में लगता था, न ही पढ़ाई में.

शालू का शिवआसरे के घर जबतब आनाजाना लगा ही रहता था. घर आनाजाना काम से ही होता था. लेकिन जब से सपना शालू के मन में बसी, शालू अकसर उस के घर ज्यादा जाने लगा. इस के लिए उस के पास बहाने भी अनेक थे. शिवआसरे के घर पहुंच कर वह बातें भले ही दूसरे से करता, लेकिन उस की नजरें सपना पर ही जमी रहती थीं. शालू की अपने प्रति चाहत देख कर उस का मन भी विचलित हो उठा. अब वह भी शालू के आने का इंतजार करने लगी. दोनों ही अब एकदूसरे का सामीप्य पाने को बेचैन रहने लगे थे. लेकिन यह सब अभी नजरों ही नजरों में था. शालू की चाहत भरी नजरें सपना के सुंदर मुखड़े पर पड़तीं तो सपना मुसकराए बिना न रह पाती.

वह भी उसे तिरछी निगाहों से घूरते हुए उस के आगेपीछे चक्कर लगाती रहती. अब शालू अपने दिल की बात सपना से कहने के लिए बेचैन रहने लगा. शालू अब ऐसे अवसर की तलाश में रहने लगा, जब वह अपने दिल की बात सपना से कह सके. कोशिश करने पर चाह को राह मिल ही जाती है. एक दिन शालू को मौका मिल ही गया. उस दिन सपना के भाईबहन मां मीणा के साथ ननिहाल चले गए थे और शिवआसरे ट्रक ले कर बाहर गया था. सपना को घर में अकेला पा कर शालू बोला, ‘‘सपना, यदि तुम बुरा न मानो तो मैं तुम से कुछ कहना चाहता हूं.’’

सपना जानती थी कि शालू उस से क्या कहेगा. इसलिए उस का दिल जोरजोर धड़कने लगा. घबराई सी वह शालू की ओर प्रश्नवाचक निगाहों से देखने लगी. शालू ने हकलाते हुए कहा, ‘‘सपना वो क्या है कि मैं तुम्हारे बारे में कुछ…’’

‘‘मेरे बारे में…’’ चौंकने का नाटक करते हुए सपना बोली, ‘‘जो भी कहना है, जल्दी कहिए.’’ शायद वह भी शालू से प्यार के शब्द सुनने के लिए बेकरार थी.

‘‘कहीं तुम मेरी बात सुन कर नाराज न हो जाओ…’’ शालू ने थोड़ा झेंपते हुए कहा.

‘‘अरे नहीं…’’ मुसकराते हुए सपना बोली, ‘‘नाराज क्यों हो जाऊंगी. तुम मुझे गालियां तो दोगे नहीं. जो भी कहना है, तुम दिल खोल कर कहो, मैं तुम्हारी बातों का बुरा नहीं मानूंगी.’’

सपना जानबूझ कर अंजान बनी थी. जब शालू को सपना की ओर से कुछ भी कहने की छूट मिल गई तो उस ने कहा, ‘‘सपना, मैं तुम से बहुत प्यार करता हूं. मुझे तुम्हारे अलावा कुछ अच्छा नहीं लगता. हर पल तुम्हारी ही सूरत मेरी नजरों के सामने घूमती रहती है.’’

शालू की बातें सुन कर सपना मन ही मन खुश हुई, फिर बोली, ‘‘शालू, प्यार तो मैं भी तुम से करती हूं, लेकिन मुझे डर लग रहा है.’’

‘‘कैसा डर सपना?’’ शालू ने आश्चर्य से पूछा.

‘‘यही कि हमारेतुम्हारे प्यार को घर वाले स्वीकार करेगें क्या?’’

‘‘हम एक ही जाति के हैं. दोनों परिवारों के बीच संबंध भी अच्छे हैं. हम दोनों अपनेअपने घर वालों को मनाएंगे तो वे जरूर मान जाएंगे.’’

उस दिन दोनों के बीच प्यार का इजहार हुआ, तो मानो उन की दुनिया ही बदल गई. फिर वे अकसर ही मिलने लगे. सपना और शालू के दिलोदिमाग पर प्यार का ऐसा जादू चढ़ा कि उन्हें एकदूजे के बिना सब कुछ सूना लगने लगा. जब भी मौका मिलता, दोनों एकांत में एक साथ बैठते और अपने ख्वाबों की दुनिया में खो जाते. प्यार में वे इस कदर खो गए कि उन्होंने जीवन भर एकदूसरे का साथ निभाने की कसमें भी खा लीं. एक बार मन से मन मिला तो फिर दोनों के तन मिलने में भी देर नहीं लगी. सपना और शालू ने लाख कोशिश की कि उन के संबंधों की जानकारी किसी को न हो. लेकिन प्यार की महक को भला कोई रोक सका है. एक दिन पतारा बाजार से लौटते समय गांव में ही रहने वाले उन्हीं की जाति के युवक मोहन ने उन दोनों को रास्ते में हंसीठिठोली करते देख लिया.

घर आते ही उस ने सारी बात शिवआसरे को बता दी. कुछ देर बाद जब सपना घर लौटी तो शिवआसरे ने सपना को डांटाफटकारा और पिटाई करते हुए हिदायत दी कि भविष्य में वह शालू से न मिले. सपना की मां मीना ने भी इज्जत का हवाला दे कर बेटी को खूब समझाया. सपना पर लगाम कसने के लिए मां ने उस का घर से बाहर निकलना बंद कर दिया. साथ ही उस पर कड़ी निगरानी रखने लगी. मीना ने शालू के घर जा कर उस के मांबाप से शिकायत की कि वह अपने बेटे को समझाएं कि वह उस की इज्जत से खिलवाड़ न करे. लेकिन कहावत है कि लाख पहरे बिठाने के बाद भी प्यार कभी कैद नहीं होता. सपना के साथ भी ऐसा ही हुआ. मां की निगरानी के बावजूद सपना और शालू का मिलन बंद नहीं हुआ. किसी न किसी बहाने वह शालू से मिलने का मौका ढूंढ ही लेती थी.

कभी दोनों नहीं मिल पाते तो वे मोबाइल फोन पर बतिया लेते और दिल की लगी बुझा लेते. सपना को मोबाइल फोन शालू ने ही खरीद कर दिया था. इस तरह बंदिशों के बावजूद उन का प्यार बढ़ता ही जा रहा था. दबी जुबान से पूरे गांव में उन के प्यार के चर्चे होने लगे थे. एक शाम सहेली के घर जाने का बहाना बना कर सपना घर से निकली और शालू से मिलने गांव के बाहर बगीचे में पहुंच गई. इस की जानकारी मीना को हुई तो सपना के घर लौटने पर मां का गुस्सा फट पड़ा, ‘‘बदजात, कुलच्छिनी, मेरे मना करने के बावजूद तू शालू से मिलने क्यों गई थी. क्या मेरी इज्जत का कतई खयाल नहीं?’’

‘‘मां, मैं शालू से प्यार करती हूं. वह भी मुझे चाहता है.’’

‘‘आने दे तेरे बाप को. प्यार का भूत न उतरवाया तो मेरा नाम मीना नहीं.’’ मीना गुस्से से बोली.

‘‘आखिर शालू में बुराई क्या है मां? अपनी बिरादरी का है. पढ़ालिखा स्मार्ट भी है.’’ सपना ने मां को समझाया.

‘‘बुराई यह है कि शालू तुम्हारे चाचा का लड़का है. जातिबिरादरी के नाते तुम दोनों का रिश्ता चचेरे भाईबहन का है. अत: उस से नाता जोड़ना संभव नहीं है.’’ मां ने समझाया.

मांबेटी में नोकझोंक हो ही रही थी कि शिवआसरे घर आ गया. उस ने पत्नी का तमतमाया चेहरा देखा तो पूछा, ‘‘मीना, क्या बात है, तुम गुस्से से लाल क्यों हो?’’

‘‘तुम्हारी लाडली बेटी सपना के कारण. लगता है कि यह बिरादरी में हमारी नाक कटवा कर ही रहेगी. मना करने के बावजूद भी यह कुछ देर पहले शालू से मिल कर आई है और उस की तरफदारी कर जुबान लड़ा रही है.’’ मीना ने कहा.

पत्नी की बात सुन कर शिवआसरे का गुस्सा बेकाबू हो गया. उस ने सपना की जम कर पिटाई की और कमरा बंद कर दिया. गुस्से में उस ने खाना भी नहीं खाया और चारपाई पर जा कर लेट गया. रात भर वह यही सोचता रहा कि इज्जत को कैसे बचाया जाए. सुबह होते ही शिवआसरे शालू के पिता बैजनाथ के घर जा पहुंचा, ‘‘तुम शालू को समझाओ कि वह सपना से दूर रहे. अन्यथा अंजाम अच्छा नहीं होगा. अपनी इज्जत के लिए वह किसी हद तक जा सकता है.’’

इस घटना के बाद दोनों परिवारों के बीच दरार पड़ गई. शिवआसरे और बैजनाथ के बीच साझेदारी भी टूट गई. इधर चौकसी बढ़ने पर शालू और सपना का मिलनाजुलना लगभग बंद हो गया था. जिस से दोनों परेशान रहने लगे थे. अब दोनों की बात चोरीछिपे मोबाइल फोन पर ही हो पाती थी. 14 मई, 2021 को शिवआसरे के साले मनोज की शादी थी. शिवआसरे ने घर की देखभाल की जिम्मेदारी भाई दीपक को सौंपी और सुबह ही पत्नी मीना व 2 बच्चों के साथ बांदा के बरुआ गांव चला गया. घर में रह गई सपना और सब से छोटा बेटा विमल. दिन भर सपना घर के काम में व्यस्त रही फिर शाम होते ही उसे प्रेमी शालू की याद सताने लगी. लेकिन चाचा दीपक की निगरानी से वह सहमी हुई थी.

रात 12 बजे जब पूरा गांव सो गया, तो सपना ने सोचा कि उस का चाचा भी सो गया होगा. अत: उस ने शालू से मोबाइल फोन पर बात की और मिलने के लिए उसे घर बुलाया. शालू चोरीछिपे सपना के घर आ गया. लेकिन उसे घर में घुसते हुए दीपक ने देख लिया. वह समझ गया कि वह सपना से मिलने आया है. उस ने तब दरवाजा बाहर से बंद कर ताला लगा दिया और बड़े भाई शिवआसरे को फोन कर के सूचना दे दी. शिवआसरे को जब यह सूचना मिली तो वह साले की शादी बीच में ही छोड़ कर अकेले ही बरुआ गांव से चल दिया. 15 मई की सुबह 7 बजे वह अपने घर पहुंच गया. तब तक शालू के मातापिता सीमा और बैजनाथ को भी पता चल चुका था कि उन के बेटे शालू को बंधक बना लिया गया है.

वे लोग शिवआसरे के घर पहले से मौजूद थे. शिवआसरे घर के अंदर जाने लगा तो बैजनाथ ने पीछे से आवाज लगाई. इस पर शिवआसरे ने कहा कि वह बस बात कर मामला हल कर देगा और घर के अंदर चला गया. पीछे से बैजनाथ और सीमा भी घर के अंदर दाखिल हुए. लेकिन वे अपने बेटे शालू तक पहुंच पाते, उस के पहले ही शिवआसरे शालू और सपना को ले कर एक कमरे में चला गया और उस में लगा लोहे का गेट बंद कर लिया. शालू के पिता बैजनाथ व मां सीमा खिड़की पर खड़े हो गए, जहां से वे अंदर देख सकते थे. बैजनाथ ने एक बार फिर शिवआसरे से मामला सुलझाने की बात कही. इस पर उस का जवाब यही था कि बस 10 मिनट बात कर के मामला सुलझा देगा.

इधर पिता का रौद्र रूप देख कर सपना कांप उठी. शिवआसरे ने दोनों से सवालजवाब किए तो सपना पिता से उलझ गई. इस पर उसे गुस्सा आ गया. शिवआसरे ने डंडे से सपना को पीटा. उस ने शालू की भी डंडे से पिटाई की. लेकिन पिटने के बाद भी सपना का प्यार कम नहीं हुआ. वह बोली, ‘‘पिताजी, मारपीट कर मेरी जान भले ही ले लो, पर मेरा प्यार कम न होगा. आखिरी सांस तक मेरी जुबान पर शालू का नाम ही होगा.’’ बेटी की ढिठाई पर शिवआसरे आपा खो बैठा. उस ने कमरे में रखी कुल्हाड़ी उठाई और सपना के सिर व गरदन पर कई वार किए. जिस से उस की गरदन कट गई और मौत हो गई. इस के बाद उस ने कुल्हाड़ी से वार कर शालू को भी वहीं मौत के घाट उतार दिया.

यह खौफनाक मंजर देख कर शालू की मां सीमा की चीख निकल गई. सीमा और बैजनाथ जोरजोर से चिल्लाने लगे. सीमा ने मदद के लिए कई घरों के दरवाजे खटखटाए लेकिन कोई मदद को नहीं आया. प्रधान पति राजेश कुमार को गांव में डबल मर्डर की जानकारी हुई तो उन्होंने थाना घाटमपुर पुलिस तथा बड़े पुलिस अधिकारियों को फोन द्वारा सूचना दी. सूचना पाते ही थानाप्रभारी धनेश प्रसाद, एसपी (आउटर) अष्टभुजा प्रताप सिंह, एएसपी आदित्य कुमार शुक्ला तथा डीएसपी पवन गौतम पहुंच गए. शिवआसरे 2 लाशों के बीच कमरे में बैठा था. थानाप्रभारी धनेश प्रसाद ने उसे हिरासत में ले लिया. आलाकत्ल कुल्हाड़ी भी कमरे में पड़ी थी. पुलिस ने उसे भी सुरक्षित कर लिया. जबकि शिवआसरे के अन्य भाई दीपक व रामआसरे पुलिस के आने से पहले ही फरार हो गए थे.

पुलिस अधिकारियों ने शिवआसरे से पूछताछ की तो उस ने सहज ही जुर्म कबूल कर लिया और कहा कि उसे दोनों को मारने का कोई गम नहीं है. पुलिस अधिकारियों ने गांव वालों तथा मृतक शालू के पिता बैजनाथ से पूछताछ की. बैजनाथ ने बताया कि वह और उस की पत्नी सीमा बराबर शिवआसरे से हाथ जोड़ कर कह रहे थे कि बेटे को बख्श दे. लेकिन वह नहीं माना और आंखों के सामने बेटे पर कुल्हाड़ी से वार कर उस की जान ले ली. पूछताछ के बाद पुलिस अधिकारियों ने मृतक शालू व सपना के शवों को पोस्टमार्टम हेतु हैलट अस्पताल, कानपुर भिजवा दिया.

चूंकि शिवआसरे ने डबल मर्डर का जुर्म कबूल कर लिया था और आलाकत्ल कुल्हाड़ी भी बरामद हो गई थी, अत: थानाप्रभारी धनेश प्रसाद ने बैजनाथ की तरफ से भादंवि की धारा 302 के तहत शिवआसरे के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कर ली और उसे गिरफ्तार कर लिया. 16 मई, 2021 को पुलिस ने अभियुक्त शिवआसरे को कानपुर कोर्ट में पेश किया, जहां से उसे जिला जेल भेज दिया गया. Crime News

—कथा पुलिस सूत्रों पर आधारित

Chhattisgarh News : पिकनिक पर ले जाकर पति ने पत्नी को बाल पकड़ कर पीटा फिर गला घोंटा

Chhattisgarh News : जय कुमार सिदार ने अपने घर वालों को बताए बिना सरस्वती मरांडी से प्रेम विवाह कर तो लिया, लेकिन सामाजिक रूढि़यों की वजह से उस के घर वाले उसे अपनी बहू के रूप में स्वीकार नहीं कर पाए. इस से बचने के लिए जय कुमार ने जो किया वह…

छत्तीसगढ़ का रायगढ़ जिला आदिवासी बाहुल्य है. यहां का लैलूंगा शहर जिला मुख्यालय से लगभग 85 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है. लैलूंगा घोर जनजातीय आदिवासी बाहुल्य विकास खंड है. धीरेधीरे यहां का मिश्रित माहौल अपने आप में एक आकर्षण का माहौल पैदा करने लगा है, क्योंकि यहां पर अब भले ही बहुतेरे मारवाड़ी, ब्राह्मण, कायस्थ समाज के लोग आ कर रचबस रहे हैं, लेकिन आदिवासी सभ्यता और संस्कृति की महक यहां आज भी स्वाभाविक रूप से महसूस की जा सकती है. लैलूंगा थाना अंतर्गत एक छोटे से गांव कमरगा में शदाराम सिदार एक सामान्य काश्तकार हैं. वह 2 बेटे और एक बेटी वाले छोटे से परिवार का बमुश्किल पालनपोषण कर रहे  थे.

शदाराम का बड़ा बेटा जय कुमार सिदार प्राइमरी तक पढ़ने के बाद पिता के साथ खेतीबाड़ी में हाथ बंटा रहा था. गरीबी और परिवार की दयनीय हालत देख कर के एक दिन 21 वर्ष की उम्र में वह अपने एक दोस्त रमेश के साथ छत्तीसगढ़ से सटे झारखंड राज्य के बोकारो शहर में रोजगार  के लिए चला गया. जल्द ही जय कुमार को स्थानीय राजू टिंबर ट्यूनिंग प्लांट में क्लीनर मशीन चलाने का काम मिल गया और जय का मित्र रमेश भी वहीं काम करने लगा. फिर उन्होंने बोकारो के एक मोहल्ले में कमरा किराए पर ले लिया. समय अपनी गति से बीत रहा था कि एक दिन जय और रमेश सुबह घर से अपनी ड्यूटी पर जा रहे थे कि जय को साइकिल के साथ खड़ी एक परेशान सी लड़की दिख गई.

जय कुमार और रमेश थोड़ा आगे बढ़े तो जय ने रुक कर कहा, ‘‘यार, लगता है इस लड़की को कुछ मदद की जरूरत है.’’

दोनों  मुड़ कर वापस आए. तब युवती की ओर मुखातिब हो कर जय  ने कहा, ‘‘क्या बात है, आप क्यों परेशान खड़ी हो?’’

युवती थोड़ा सकुचाई  फिर बोली, ‘‘देखो न, साइकिल में पता नहीं क्या हो गया है, आगे ही नहीं बढ़ रही.’’

जय ने कहा, ‘‘लगता है साइकिल की चैन फंस गई है, किसी मिस्त्री को दिखानी होगी.’’

और नीचे बैठ कर वह साइकिल को ठीक करने की असफल कोशिश करने लगा. मगर चैन बुरी तरह फंस गई थी. थोड़ी देर तक प्रयास करने के बाद जय ने रमेश की ओर देखते हुए कहा, ‘‘चलो, इस की थोड़ी मदद कर देते हैं.’’

इस पर रमेश ने कहा, ‘‘यार, देर हो जाएगी, काम पर न पहुंचे तो प्रसादजी नाराज हो जाते हैं, तुम को तो पता ही है कि काम पर समय पर पहुंचना बहुत जरूरी है.’’

इस पर सहज रूप से जय सिदार ने कहा, ‘‘बात तो सही है, ऐसा करते हैं, तुम काम पर चले जाओ और उन से बता देना कि आज मैं छुट्टी पर रहूंगा… मैं इन की साइकिल ठीक करा देता हूं.’’

जय को रमेश आश्चर्य से देखता हुआ ड्यूटी पर चला गया. इधर जय ने युवती की मदद के लिए साइकिल अपने कंधे पर उठा ली और धीरेधीरे साइकिल मिस्त्री के पास पहुंचा. थोड़ी ही देर में मिस्त्री ने साइकिल ठीक कर दी. युवती जय के व्यवहार और हमदर्दी को देख कर बहुत प्रभावित हुई. फिर दोनों ने बातचीत में एकदूसरे का नाम और परिचय पूछा. युवती ने अपना नाम सरस्वती मरांडी बताया. जब जय वहां से जाने लगा तो सरस्वती ने उसे अचानक रोक कर कहा, ‘‘आप ने मेरे कारण आज अपना बहुत नुकसान कर लिया है बुरा न मानें तो क्या आप मेरे साथ एक कप चाय पी सकते हैं?’’

जय सिदार 19 वर्षीय सरस्वती की बातें सुन कर हंसता हुआ राजी हो गया. अब वह उसे अच्छी लगने लगी थी. मंत्रमुग्ध सा जय उस के साथ एक रेस्टोरेंट में चला गया. बातोंबातों में सरस्वती ने उसे बताया कि वह अपने गांव ढांगी करतस, जिला धनबाद की रहने वाली है और यहां स्थानीय प्रौढ़ शिक्षा केंद्र में शिक्षिका है. इस बीच जय ने सरस्वती का मोबाइल नंबर ले लिया और अपने बारे में सब कुछ बताता चला गया. अब अकसर जय सिदार सरस्वती से बातें करता. सरस्वती भी उसे पसंद करती और दोनों के बीच प्रेम की बेलें फूट पड़ीं. जल्द ही एक दिन जय कुमार ने सरस्वती से झिझकते हुए कहा, ‘‘सरस्वती, मैं तुम्हें चाहने लगा हूं. तुम प्लीज मना मत करना, नहीं तो मैं मर ही जाऊंगा.’’

इस पर सरस्वती मुसकराते हुए बोली, ‘‘अच्छा, बताओ तो इस का तुम्हारे पास क्या सबूत है.’’

‘‘सरस्वती, तुम्हारे लिए मैं सब कुछ करने को तैयार हूं. बताओ, मुझे क्या करना है.’’ जय सिदार ने हिचकते हुए कहा.

‘‘मैं तो मजाक कर रही थी, मैं जानती हूं कि तुम मुझे बहुत पसंद करते हो.’’ सरस्वती बोली.

यह सुन कर जय की हिम्मत बढ़ गई. वह बोला, ‘‘…और मैं.’’

सरस्वती ने धीरे से  कहा, ‘‘लगता है तुम तो प्यार के खेल में अनाड़ी हो. अरे बुद्धू, अगर कोई लड़की मुसकराए, बात करे, इस का मतलब तुम नहीं समझते…’’

यह सुन कर जय खुशी से उछल पड़ा. इस के बाद उन का प्यार परवान चढ़ता गया. फिर एक दिन सरस्वती और जय ने एक मंदिर में विवाह कर लिया. सन 2017 से ले कर मार्च, 2020 अर्थात कोरोना काल से पहले तक दोनों ही प्रेमपूर्वक झारखंड में एक छत के नीचे रह रहे थे. इस बीच दोनों ने मंदिर में विवाह कर लिया और पतिपत्नी के रूप में आनंदपूर्वक रहने लगे. मार्च 2020 में जब कोविड 19 का संक्रमण फैलने लगा तो जय का काम छूट गया. घर में खाली बैठेबैठे जय को अपने गांव और मातापिता की याद आने लगी. एक दिन जय ने सरस्वती से कहा,

‘‘चलो, हम गांव चलते हैं, वहां इस समय रहना ठीक रहेगा, पता नहीं ये हालात कब तक सुधरेंगे. और जहां तक रोजीरोटी का सवाल है तो हम गांव में ही कमा लेंगे. फिर आज सवाल तो जान बचाने का है.’’

सरस्वती को बात पसंद आ गई. उस समय गांव जाने के लिए कोई साधन नहीं था. तब जय कुमार पत्नी सरस्वती को अपनी साइकिल पर बैठा कर जिला रायगढ़ के गांव कामरगा में स्थित अपने घर की ओर चल दिया. लगभग 300 किलोमीटर की दूरी तय कर के जय कुमार अपने घर पहुंच गया. घर में पिता शदाराम और परिजनों ने जब जय को देखा, सभी की खुशी का ठिकाना नहीं रहा. साथ में सरस्वती को देखा तो पिता शदाराम ने पूछा, ‘‘यह कौन है?’’

जय ने सकुचाते हुए सरस्वती का परिचय पत्नी के रूप में परिजनों को करा दिया. उस समय किसी ने भी कुछ नहीं कहा. लौकडाउन का यह समय सभी को चिंतित किए हुए था. मगर स्थितियां सुधरने लगीं तो जय कुमार से सवालजवाब होने लगा. एक दिन पिता शदाराम ने कहा, ‘‘बेटा जय, गांव के लोग पूछ रहे हैं कि तुम्हारी बहू कहां की है किस जाति की है? जब मैं ने बताया तो समाज के लोगों ने नाराजगी प्रकट की है. इस से शादी कर के तुम ने बहुत बड़ी भूल की है बेटा.’’

‘‘पिताजी, अब मैं क्या करूं, जो होना था, वह तो हो चुका है.’’ यह सुन कर जय बोला.

‘‘बेटा, हम को भी समाज में रहना है, यहीं जीना है. यह हाल रहेगा तो हम, हमारा परिवार भारी मुसीबत में पड़ जाएगा. कोई हम से रोटीबेटी का रिश्ता तक नहीं रखेगा. ऐसे में हो सके तो तुम लोग कहीं और जा कर के जीवन बसर करो, ताकि समाज के लोग अंगुली न उठा सकें.’’

जय ने कहा, ‘‘पिताजी, अब क्या हो सकता है, मैं क्या करूं मुझे कुछ समझ में नहीं आ रहा.’’

एक दिन एक निकट के परिजन ने जय से कहा, ‘‘अब देख लो, सोचसमझ के कुछ निर्णय लो. वैसे, पास के गांव के हमारे परिचित रामसाय ने अपनी बेटी के साथ तुम्हारे विवाह का प्रस्ताव भेजा था. वह पैसे वाले लोग भी हैं और हमारे समाज के भी हैं. ऐसा करो, सरस्वती को तुम छोड़ दो. फिर हम बात आगे बढ़ाते हैं.’’

यह सुन कर जय का मन भी बदल गया. क्योंकि सुमन को वह बचपन में पसंद करता था. वह सोचने लगा कि काश! वह सरस्वती के चक्कर में नहीं पड़ता तो आज सुमन उस की होती. इसी दरमियान जय गांव में ही तेजराम के यहां ट्रैक्टर चलाने लगा था. नौसिखिए जय सिदार से एक दिन अचानक दुर्घटना हो गई तो तेजराम ने उस की पिटाई कर दी और उस से नुकसान की भरपाई मांगने लगा. परिस्थितियों को देख कर जय पत्नी सरस्वती को ले कर पास के दूसरे गांव सरकेदा में अपने जीजा रवि के यहां गुजरबसर करने आ गया. जय का रवि के साथ अच्छा याराना था. बातोंबातों में एक दिन रवि ने कहा, ‘‘भैया, यह तुम्हारे गले कैसे पड़ गई, इस से कितनी सुंदर लड़कियां हमारे समाज में हैं.’’

यह सुन कर के जय मानो फट पड़ा. बोला, ‘‘भाटो (जीजा), बस यह भूल मुझ से हो गई है, अब मैं क्या करूं, मुझे तो लगता है कि सरस्वती से शादी कर के मैं फंस गया हूं.’’

रवि ने जय कुमार को बताया कि परिवार में चर्चा हुई थी कि सुमन के पिता तुम्हारे लिए 2-3 बार आ चुके हैं. अब क्या हो.’’

‘‘क्या करूं, क्या इसे बोकारो छोड़ आऊं?’’ विवशता जताता जय कुमार बोला.

‘‘…और अगर कहीं फिर वापस आ गई तो..?’’  रवि कुमार ने चिंता जताई.

जय कुमार असहाय भाव से जीजा रवि की ओर देखने लगा.

रवि मुसकराते हुए बोला, ‘‘एक रास्ता है…’’

और दोनों ने बातचीत कर के एक ऐसी योजना बनाई, जिस ने आगे चल कर दोनों को जेल की सलाखों के पीछे पहुंचा दिया. वह 7 जनवरी, 2021 का दिन था. एक दिन पहले ही जय और रवि ने सरस्वती से बात कर के पिकनिक के लिए झरन डैम चलने की योजना बना ली थी. एक बाइक पर तीनों सुबहसुबह पिकनिक के लिए निकल गए. लैलूंगा शहर घूमने, खरीदारी के बाद 7 किलोमीटर आगे खम्हार जंगल के पास झरन डैम में पहुंच कर तीनों ने खूब मस्ती की. मोबाइल से फोटो खींचे और खायापीया. इस बीच सरस्वती ने एक दफा सहजता से कहा, ‘‘कितना अच्छा होता, आज सारे परिवार वाले भी हमारे साथ होते तो पिकनिक यादगार हो जाती.’’

इस पर रवि ने बात बनाते हुए कहा, ‘‘भाभी, आएंगे आगे सब को ले कर के आएंगे. आज तो हम लोगों ने सोचा कि चलो देखें, यहां का कैसा माहौल है अगली बार  सब को ले कर के पिकनिक मनाएंगे.’’

आज जय सिदार कुछ उखड़ाउखड़ा भी दिखाई दे रहा था. इस पर सरस्वती ने कहा था, ‘‘पिकनिक मनाने आए हो या फिर किसी और काम से…’’

यह सुन कर अचकचाए जय कुमार ने मुसकरा कर कहा, ‘‘ऐसीवैसी कोई बात होती तो मैं भला क्यों आता. तुम गलत समझ रही हो. क्या है सारे कामधंधे रुके पड़े हैं. पैसा कहीं से तो आ नहीं पा रहा है, बस इसी बात की टेंशन है सरस्वती.’’

सरस्वती को लगा कि जय जायज बात कर रहा है. थोड़ी देर बाद जब वापस चलने का समय हुआ तो एक जगह रवि कुमार रुक गया और छोटी अंगुली दिखा कर बोला, ‘‘मैं अभी फारिग हो कर आता हूं.’’

रवि झाडि़यों के अंदर चला गया. सही मौका देख कर के जय ने अचानक सरस्वती पर हमला कर दिया और उस के बाल पकड़ कर उसे मारने लगा और एक रस्सी निकाल कर के गला घोंटने लगा. वह वहीं गिर पड़ी और फटी आंखों से उसे देखती रह गई. जय आखिरी तक सरस्वती पर प्राणघातक हमला भी करता रहा. इतनी देर में रवि भी दौड़ कर आ गया और जय का साथ देने लगा.  देखते ही देखते सरस्वती के प्राणपखेरू उड़ गए. सरस्वती की मौत के बाद रवि ने उस के गले में एक नीली रस्सी बांधी और झाडि़यों में घसीट कर सरस्वती की लाश छिपा दी. 12 जनवरी, मंगलवार को शाम लगभग 5 बजे थाना लैलूंगा मैं अपने कक्ष में थानाप्रभारी एल.पी. पटेल रोजमर्रा के कामों को निपटा रहे थे कि दरवाजे पर आहट सुनाई दी.

उन्होंने देखा 3-4 ग्रामीणों के साथ खम्हार गांव के सरपंच शिवप्रसाद खड़े हैं. थानाप्रभारी ने उन सभी को अंदर बुला लिया. तभी सरपंच ने उन से कहा, ‘‘सर, जंगल में एक महिला की लाश मिली है. कुछ लोगों ने देखा तो मैं सूचना देने के लिए आया हूं. मामले की गंभीरता को देखते हुए एसआई व 2 कांस्टेबलों को थानाप्रभारी पटेल ने घटनास्थल की ओर रवाना किया और अपने काम में लग गए. लगभग एक घंटे बाद उन्हें सूचना मिली कि लाश किसी महिला की है. उन्होंने एसआई को स्थिति को देखते हुए सारे सबूतों को इकट्ठा करने और फोटोग्राफ लेने के निर्देश दिए और कहा कि वह स्वयं घटनास्थल पर आ रहे हैं.

थाने से निकलने से पहले एल.पी. पटेल ने एसपी (रायगढ़) संतोष सिंह और एएसपी अभिषेक वर्मा को महिला की लाश मिलने की जानकारी दी और घटनास्थल की ओर रवाना हो गए. जब वह वहां पहुंचे तो थोड़ी देर में ही जिला मुख्यालय से डौग स्क्वायड टीम भी आ गई  और महिला की लाश को देख कर के उन्हें समझने में देर नहीं लगी कि यह सीधेसीधे एक ब्लाइंड मर्डर का मामला है. पुलिस विवेचना में जांच अधिकारी एल. पी. पटेल के सामने शुरुआती परेशानी मृतका की पहचान की थी, जिस के लिए मशक्कत शुरू कर दी गई. इस कड़ी में रायगढ़ जिले के सभी थानों के गुम इंसानों के हुलिया से मृतका का मिलान किया गया.

जब सफलता नहीं मिली तो छत्तीसगढ़ राज्य पुलिस पोर्टल पर राज्य के लगभग सभी जिलों के गुम इंसानों से हुलिया का मिलान कराया गया. सभी सोशल मीडिया ग्रुप में मृतका के फोटो वायरल किया जाने लगा. मगर सुराग नहीं मिल रहा था. आखिरकार एक दिन पुलिस को अच्छे नतीजे मिले. सोशल मीडिया में वायरल की गई तसवीर के जरिए मृतका की शिनाख्त सरस्वती मरांडी, पुत्री सुजीत मरांडी, उम्र 23 वर्ष निवासी ढांगी करतस, जिला धनबाद (झारखंड) के रूप में हुई. मृतका की शिनाख्त के बाद मामले में नया पहलू सामने आया, जिस से अनसुलझे हत्याकांड की गुत्थी सुलझती चली गई. लैलूंगा पुलिस को हत्याकांड में कमरगा गांव, थाना लैलूंगा के जयकुमार सिदार के मृतका का कथित पति होने की जानकारी भी मिली.

लैलूंगा पुलिस द्वारा गोपनीय तरीके से जयकुमार सिदार का उस के गांव में पता लगाया गया तो जानकारी मिली कि वह तथा उस का जीजा रवि कुमार सिदार दोनों ही अपनेअपने गांव से गायब हैं. हत्या के इस गंभीर मामले में एसपी संतोष सिंह द्वारा अज्ञात महिला के वारिसों और संदिग्धों की तलाश के लिए थाना लैलूंगा, धरमजयगढ़, चौकी बकारूमा की 3 अलगअलग टीमें बनाई गईं. एक टीम में एसडीपीओ सुशील नायक, एसआई प्रवीण मिंज, हैडकांस्टेबल सोमेश गोस्वामी, कांस्टेबल प्रदीप जौन, राजेंद्र राठिया, दूसरी टीम में थानाप्रभारी लैलूंगा इंसपेक्टर लक्ष्मण प्रसाद पटेल, कांस्टेबल मायाराम राठिया, धनुर्जय बेहरा, जुगित राठिया, अमरदीप एक्का और तीसरी टीम में एसआई बी.एस. पैकरा, एएसआई माधवराम साहू, हैडकांस्टेबल संजय यादव, कांस्टेबल इलियास केरकेट्टा को शामिल किया गया.

पहली टीम को किलकिला, फरसाबहार, बागबाहर और तपकरा तथा दूसरी टीम को पत्थलगांव, घरघोड़ा, लारीपानी, चिमटीपानी एवं टीम नंबर 3 को बागबाहर, कांसाबेल, कापू, दरिमा, अंबिकापुर की ओर जांच के लिए लगाया गया था. तीनों टीमों के अथक प्रयास पर आरोपियों को जिला जशपुर के गांव रजौरी से 20 जनवरी को हिरासत में ले कर थाने लाया गया. दोनों आरोपी पुलिस से लुकछिप कर रजौरी के जंगल में लकड़ी काटने का काम कर रहे थे. दोनों ने कड़ी पूछताछ में अंतत: सरस्वती मरांडी की हत्या करने का अपना अपराध स्वीकार लिया. रोजगार के सिलसिले में वह बोकारो, झारखंड गया था. वहां राजू टिंबर ट्यूनिंग प्लांट में क्लीनर मशीन चलाता था और किराए के मकान में रहा करता था. वहीं सरस्वती मरांडी से उस की जानपहचान हुई.

जय कुमार परेशान था और उस ने अपने जीजा रवि के साथ सरस्वती की हत्या का प्लान बनाया और उसी प्लान के तहत 7 जनवरी, 2021 को पिकनिक का बहाना कर सरस्वती को मोटरसाइकिल पर बिठा कर लैलूंगा ले कर आए. लैलूंगा बसस्टैंड पर खानेपीने के सामान व सरस्वती ने कपड़े खरीदे. तीनों फिर खम्हार के झरन डैम गए, जहां सरस्वती ने वही पीले रंग की सलवारकुरती पहनी, जो उस ने गांव कमरगा की सुनीता सिदार (टेलर) से बनवाई थी. वहां उन्होंने मोबाइल पर खूब सेल्फी ली. शाम करीब 5 बजे भेलवाटोली एवं खम्हार के बीच पगडंडी के रास्ते में रवि सिदार पेशाब करने का बहाना कर रुका. उसी समय जयकुमार सिदार ने सरस्वती के बाल पकड़ कर उसे जमीन पर पटक दिया और गला दबा कर उस की हत्या कर दी.

इस के बाद रवि और जयकुमार सिदार ने सरस्वती के गले में चुनरी से गांठ बांध कर खींचा और लाश सरई झाडि़यों के बीच छिपा दी. दोनों आरोपी भागने की हड़बड़ी में अपनी चप्पलें, गमछा भी घटनास्थल के पास छोड़ आए. लैलूंगा पुलिस ने आरोपी जय कुमार सिदार (25 साल) और रवि सिदार ( 30 वर्ष) को गिरफ्तार कर घरघोड़ा की कोर्ट में पेश किया, जहां से उन्हें जेल भेज दिया. Chhattisgarh News

Crime Story Real : प्रेमिका के इशारे पर बच्चे का किडनैप करके मार डाला

Crime Story Real : कभीकभी कुछ लोग मामूली खुन्नस में एक बड़ा अपराध कर बैठते हैं. पार्वती और उस के प्रेमी संदीप चौहान ने अगर संयम से काम लिया होता तो शायद उन्हें…

मई महीने की 15 तारीख की सुबह करीब 10 बजे प्रेमा का ढाई साल का बड़ा बेटा रितेश चौहान अपने घर के बाहर खेल रहा था. प्रेमा जब घर से बाहर निकली तो उसे रितेश दिखाई न दिया. तब उस ने बेटे को आवाज लगाई, ‘‘रितेश, बेटा कहां हो?’’

लेकिन रितेश घर के आसपास कहीं न मिला. प्रेमा रितेश को घर के बाहर न पा कर घबरा गई. वह उसी समय अपने ससुर जगराम के पास गई, क्योंकि प्रेमा का पति जवाहर लाल एक दिन पहले ही गांव से दिल्ली गया था. प्रेमा रोते हुए ससुर जगराम से बोली, ‘‘बाबूजी, रितेश अभी कुछ देर पहले घर से बाहर खेल रहा था. लेकिन अब वह कहीं दिखाई नहीं दे रहा है.’’

बहू प्रेमा की बात सुन कर जगराम भी घबरा गए और उन्होंने घर के आसपास अपने ढाई वर्षीय पोते रितेश को आवाज देनी शुरू कर दी, लेकिन रितेश का कहीं पता नहीं चला. इस के बाद प्रेमा देवी, ससुर जगराम और प्रेमा देवी के 2 देवर सहित परिवार के सभी सदस्य बदहवासी की अवस्था में उसे इधरउधर ढूंढने लगे. लेकिन रितेश का कहीं नहीं मिला. परिवार वालों ने उसे आसपास के खेतों, बागबगीचों में हर जगह ढूंढा, पर उस के बारे में कहीं कोई जानकारी नहीं मिली. रितेश के गायब होने की खबर एक दिन पहले दिल्ली गए उस के पिता जवाहरलाल को भी फोन द्वारा दे दी गई. बेटे के गायब होने की खबर पा कर जवाहर भी घबरा गया और वह उसी दिन दिल्ली से अपने घर के लिए चल पड़ा. इधर प्रेमा का रोरो कर बुरा हाल हो गया था.

रितेश के गायब होने की सूचना जंगल में आग की तरह आसपास के गांवों में भी फैल चुकी थी. लोग जी जान से रितेश को खोजने में लगे थे. तभी किसी ने रितेश के दादा जगराम को बताया कि चचेरा भाई संदीप चौहान रितेश को साइकिल पर बैठा कर कहीं ले जा रहा था. रितेश के परिजनों ने संदीप को पकड़ कर उस से कड़ाई से पूछा कि रितेश के साथ उस ने क्या किया है तो संदीप बोला, ‘‘मुझे नहीं पता और न ही मैं ने रितेश को देखा है.’’

लोग बारबार संदीप से रितेश के बारे में पूछते रहे लेकिन संदीप रितेश के बारे में अनभिज्ञता ही जाहिर करता रहा. इस के बाद लोगों के कहने पर जगराम ने स्थानीय थाने सोनहा पहुंच कर पोते के गायब होने की जानकारी देते हुए संदीप पर उसे गायब करने का आरोप लगाया. जगराम की शिकायत को थानाप्रभारी अशोक कुमार सिंह ने गंभीरता से लिया. उन्होंने अपने उच्चाधिकारियों को भी घटना की सूचना दे दी. सूचना पा कर एसपी आशीष श्रीवास्तव, सीओ (रुधौली) धनंजय सिंह कुशवाहा, स्वाट, एसओजी और सर्विलांस और डौग स्क्वायड टीम के साथ पहुंच गए. इस के अलावा रुधौली सर्किल के सभी थानों को भी रितेश की खोज में लगा दिया गया.

पुलिस स्वाट और डौग स्क्वायड टीम के साथ रितेश को खोजने में लगी हुई थी, लेकिन उस का कहीं पता नहीं चल रहा था और उधर पुलिस जगराम की शिकायत पर आरोपी संदीप के घर पहुंची तो वह भी घर पर नहीं मिला. अगले दिन 16 मई की सुबह पुलिस ने संदीप को गांव के पास से धर दबोचा. जब पुलिस ने उस से रितेश के बारे में पूछताछ की तो उस ने बताया कि वह रितेश को बिसकुट टौफी दिलाने ले गया था. जिस के बाद उस ने रितेश को उस के घर पर छोड़ दिया था. पुलिस को संदीप के बातचीत के लहजे से कुछ शक हुआ, फिर पुलिस ने उस से सख्ती से पूछताछ शुरू कर दी, जिस से संदीप टूट गया. इस के बाद उस ने अपने रिश्ते के भतीजे ढाई वर्षीय रितेश की हत्या किए जाने की बात कबूल कर ली.

उस ने बताया कि रितेश की हत्या उस ने गांव की ही महिला पार्वती के कहने पर की थी. पार्वती उस की प्रेमिका है. उस ने पुलिस को बताया कि हत्या करने के बाद रितेश की लाश खाजेपुर के जंगल में छिपा दी थी. पुलिस ने हत्यारोपी महिला पार्वती को भी उस के घर से गिरफ्तार कर लिया. उस के घर से पुलिस को रितेश की चप्पलें और वारदात में प्रयुक्त साइकिल भी बरामद हो गई. रितेश की लाश बरामद करने के लिए पुलिस दोनों आरोपियों को खाजेपुर के जंगल में ले गई. वहां एक गड्ढे से रितेश की लाश बरामद कर ली गई. रितेश की हत्या और उस की लाश मिलने की जानकारी जैसे ही उस की मां प्रेमा को मिली तो वह बेसुध हो कर गिर पड़ी, उधर बाकी परिजनों का भी रोरो कर बुरा हाल था.

रितेश की लाश की बरामदगी के बाद पुलिस ने जरूरी काररवाई कर लाश पोस्टमार्टम के लिए भेज दी. संदीप और पार्वती से विस्तार से पूछताछ की गई तो उन्होंने ढाई वर्षीय रितेश की हत्या की जो कहानी बताई, वह इस प्रकार थी—

उत्तर प्रदेश के जिला बस्ती के सोनहा थाना क्षेत्र के दरियापुर जंगल टोला उकड़हवा की रहने वाली पार्वती देवी का पति अहमदाबाद में रह कर नौकरी करता था. पार्वती कुछ दिनों गांव में रहती तो कुछ दिनों अहमदाबाद में अपने पति के साथ गुजारती थी. शादी के बाद पार्वती 4 बेटियों और एक बेटे की मां बन चुकी थी. इस के बावजूद भी वह अपने पति से संतुष्ट नहीं थी. इसलिए वह किसी ऐसे साथी की तलाश में थी, जो उस की ख्वाहिशें पूरी कर सके. पार्वती अहमदाबाद से जब अपने गांव आती तो हरिराम का लड़का संदीप चौहान कभीकभार उस के घर आ जाता था. पार्वती जब हृष्टपुष्ट संदीप को देखती तो उस के दिल में चाहत की हिलारें उठ जाती थीं. उसे अपने जाल में फांसने के लिए वह उस से अश्लील मजाक करने लगती.

संदीप बच्चा तो था नहीं, इसलिए वह पार्वती के इशारों को समझने लगा था. आखिर एक दिन पार्वती ने मौका पा कर संदीप से अपने दिल की बात कह दी, ‘‘संदीप, तुम मुझे बहुत अच्छे लगते हो. तुम्हें देख कर मुझे कुछकुछ होने लगता है.’’

पार्वती की तरफ से खुला आमंत्रण पा कर संदीप भी खुद पर काबू नहीं रख सका. इस के बाद दोनों ने अपनी हसरतें पूरी कीं. फिर तो उन्हें जब भी मौका मिलता, अपनी हसरतें पूरी कर लेते. इधर जब पार्वती गांव से अपने पति के पास अहमदाबाद चली जाती तो फिर उसे संदीप की याद सताती थी. इसलिए वह फिर से गांव भाग आती थी. कहा जाता है कि इश्क और मुश्क छिपाए नहीं छिपता है, उसी तरह से पार्वती और संदीप के अवैध संबंध की बात धीरेधीरे आसपड़ोस में भी फैलने लगी थी. लोग जब भी दोनों को देखते तो कानाफूसी करने लगते थे. यह बात धीरेधीरे संदीप के घर वालों को भी पता चल चुकी थी. जिस के बाद संदीप के घर वालों ने उसे समझाया भी, लेकिन पार्वती पर कोई असर नहीं पड़ा.

रितेश की हत्या के लगभग 2 महीने पहले एक दिन संदीप चौहान के रिश्ते की भाभी प्रेमा की पार्वती के साथ किसी बात को ले कर कहासुनी हो गई. इसी दौरान तूतूमैंमैं के दौरान प्रेमा ने पार्वती और संदीप के संबंधों को ले कर कटाक्ष कर दिया. बात बढ़ी तो प्रेमा ने इस की शिकायत सोनहा थाने में कर दी, जहां पुलिस ने दोनों को बुला कर समझायाबुझाया. पार्वती को प्रेमा द्वारा थाने में बुलाया जाना नागवार लगा. उसे लगा कि उस ने कोई गलती नहीं की, उस के बावजूद भी उसे थाने बुला कर नीचा दिखाया गया. यह बात पार्वती के मन में गांठ कर गई और वह प्रेमा से बदला लेने की फिराक में लग गई.

थाने से आने के बाद पार्वती प्रेमा से बदले की फिराक में लगी रही. बदले की आग में झुलस रही पार्वती ने एक छोटी सी वजह से एक खौफनाक फैसला ले लिया था. उस ने इस के लिए अपने प्रेमी संदीप चौहान को मोहरा बनाने की चाल चली और संदीप के साथ मिल कर मासूम रितेश की हत्या की खौफनाक साजिश तैयार कर डाली. संदीप चौहान पार्वती के साथ मिल कर पूरी प्लानिंग के साथ इस घटना को अंजाम देना चाहता था. इस के लिए उस ने प्रेमा के घर आनाजाना शुरू कर दिया और वह रोज रितेश के साथ खेलता और साइकिल पर बैठा कर अकसर उसे टौफी, बिसकुट दिलाने दुकान तक ले जाता था. जब उसे लगा कि कोई उस पर शक नहीं करेगा तो पार्वती के साथ मिल कर रितेश की हत्या की साजिश को अंजाम तक पहुंचाने का फैसला कर लिया.

संदीप ने पुलिस पूछताछ में बताया कि वह हर रोज की तरह 15 मई, 2021 की सुबह करीब 10 बजे प्रेमा के घर पहुंचा, जहां रितेश को बाहर अकेले खेलते देख मौका पा कर उसे टौफी और बिसकुट दिलाने के बहाने  साइकिल पर बैठा कर ले गया. अपनी प्रेमिका पार्वती के कहने पर वह उसे गांव से दूर खाजेपुर के जंगल में ले गया और वहीं उस की गला दबा कर हत्या कर दी. उस के शव को उस ने वहीं पर एक छोटे से गड्ढे में डाल कर पत्तियों से छिपा दिया. ढाई वर्षीय रितेश के गायब होने के बाद खोजबीन में लगे परिजनों को जब यह पता चला कि आखिरी बार रितेश को संदीप के साथ साइकिल पर बैठे देखा गया था तो लोगों के शक की सुई संदीप पर टिक गई. जिस के बाद पुलिस के हिरासत में आने के बाद संदीप ने सब कुछ सचसच बता दिया.

जब लोगों को यह बात पता चली कि पार्वती और उस के प्रेमी संदीप ने जघन्य तरीके से मासूम रितेश की हत्या की है तो लोगों का गुस्सा बढ़ने लगा. पुलिस के उच्चाधिकारियों ने स्थिति को बिगड़ने से बचाने के लिए कुछ दिनों के लिए गांव में पीएसी की प्लाटून के साथ पुलिस बल तैनात कर दिया था. पुलिस ने 24 घंटे के भीतर घटना का परदाफाश कर हत्यारोपी पार्वती और संदीप चौहान के खिलाफ आईपीसी की धारा 364 (अपहरण), 302 (हत्या), 201 (हत्या के बाद शव छिपाना), 120बी (वारदात की साजिश में सम्मिलित होने) का मुकदमा दर्ज कर आरोपियों को कोर्ट में पेश कर जेल भेज दिया. आरोपी पार्वती के गुनाहों के चलते जब उस की डेढ़ साल की बेटी को भी अपना समय जेल में बिताना होगा. Crime Story Real

Hindi love Stories : एक्ट्रेस शनाया काटवे के प्यार में रोड़ा बना भाई तो करा दी हत्या

Hindi love Stories : शनाया काटवे एक उभरती हुई अभिनेत्री थी. उसे नियाज अहमद से मोहब्बत हो गई. उस की मोहब्बत में उस का भाई राकेश काटवे कांटा बना तो शनाया ने अपनी फिल्म की प्रमोशन वाले दिन ऐसी खूनी साजिश रची कि…

वह वर्गाकार बड़ा हाल था. हाल में मुख्यद्वार से सटे 3×6 के 2 मेज एकदूसरे को आपस में सटा कर बिछाए गए थे. नया और रंगीन कवर उन पर बिछाया गया था. मेज से सटी 4 कुरसियां थीं. कुरसियों पर कन्नड़ फिल्म इंडस्ट्री की उभरती हुई अभिनेत्री शनाया काटवे, फिल्म के डायरेक्टर राघवंका प्रभु और 2 अन्य मेहमान बैठे हुए थे. मेज के सामने करीब 4 फीट की दूरी पर कुछ और कुरसियां रखी हुई थीं. उन पर शहर के नामचीन, वीआईपी, रिश्तेदार, दोस्त और स्थानीय समाचारपत्रों के खबरनवीस बैठे हुए थे. हाल का कोनाकोना दुलहन की तरह सजा था. रंगीन और दूधिया रौशनी के सामंजस्य से पूरा हाल नहा उठा था. खूबसूरत और शानदार सजावट से किसी की आंखें हट ही नहीं रही थीं.

अभिनेत्री शनाया काटवे की ओर से यह शानदार पार्टी उस के फिल्म प्रमोशन ‘ओंडू घंटेया काठे’ के अवसर पर आयोजित की गई थी. पार्टी देर रात तक चलती रही. घूमघूम कर शनाया मेहमानों का खयाल रख रही थी. पार्टी में शामिल आगंतुकों ने वहां जम कर लुत्फ उठाया था. पार्टी खत्म हुई तो देर रात शनाया काटवे अपने मांबाप के साथ घर पहुंची. वह बहुत थक गई थी. कपड़े वगैरह बदल कर हाथमुंह धो कर अपने कमरे में बिस्तर पर लेटी तो दिन भर की थकान के चलते लेटते ही सो गई. उस के मांबाप अपने कमरे में जा कर सो गए थे. यह बात 9 अप्रैल, 2021 की है. अगली सुबह जब शनाया और उस के मांबाप की नींद खुली और वे फ्रैश हो कर डायनिंग हाल में नाश्ता करने बैठे तो उन्हें अपने इर्दगिर्द एक कमी का एहसास हुआ.

जब वे देर रात घर वापस लौटे थे तो भी घर पर उन का बेटा राकेश काटवे कहीं नजर नहीं आया था. जब सुबह नाश्ता करने के लिए सभी एक साथ डायनिंग हाल में बैठे तो भी राकेश वहां भी मौजूद नहीं था. यह देख कर शनाया के पापा बलदेव काटवे थोड़ा परेशान हो गए कि आखिर वह कहां है, घर में कहीं दिख भी नहीं रहा है. ऐसा पहली बार हुआ था जब वह घर से कहीं बाहर गया और हमें नहीं बताया, लेकिन वह जा कहां सकता है. यह तो हैरान करने वाली बात हुई. बलदेव काटवे और उन की पत्नी सोनिया का नाश्ता करने का मन नहीं हो रहा था. दोनों एकएक प्याली चाय पी कर वहां से उठ गए. मांबाप को उठ कर जाते देख शनाया भी नाश्ता छोड़ कर उठ गई और उन के कमरे में जा पहुंची, जहां वे बेटे को ले कर परेशान और चिंतित थे.

बात चिंता करने वाली थी ही. जो इंसान घर छोड़ कर कहीं न जाता हो और फिर वह अचानक से गायब हो जाए तो यह चिंता वाली बात ही है. बलदेव, सोनिया और शनाया ने अपनेअपने स्तर से परिचितों और दोस्तों को फोन कर के राकेश के बारे में पता किया, लेकिन वह न तो किसी परिचित के वहां गया था और न ही किसी दोस्त के वहां ही. उस का कहीं पता नहीं चला. राकेश का जब कहीं पता नहीं चला तो बलदेव काटवे ने बेटे की गुमशुदगी की सूचना हुबली थाने में दे दी. एक जवान युवक के गायब होने की सूचना मिलते ही थानाप्रभारी एस. शंकराचार्य हरकत में आए और राकेश की खोजबीन में अपने खबरियों को लगा दिया. यह 10 अप्रैल, 2021 की बात है.

राकेश काटवे कोई छोटामोटा आदमी नहीं था. उस के नाम के पीछे अभिनेत्री शनाया काटवे का नाम जुड़ा था, इसलिए यह मामला हाईप्रोफाइल बन गया था. मुकदमा दर्ज कर लेने के बाद पुलिस राकेश काटवे का पता लगाने में जुटी हुई थी. 5 टुकड़ों में मिली लाश इसी दिन शाम के समय हुबली थाना क्षेत्र के देवरागुडीहल के जंगल में एक कटा हुआ सिर बरामद हुआ तो इसी थाना क्षेत्र के गदर रोड से एक कुएं में गरदन से पैर तक शरीर के कई टुकड़े पानी पर तैरते बरामद हुए. टुकड़ों में मिली इंसानी लाश से इलाके में दहशत फैल गई थी. जैसे ही कटा सिर और टुकड़ों में बंटे शरीर के अंग पाए जाने की सूचना थानाप्रभारी एस. शंकराचार्य को मिली, वह चौंक गए. वह तुरंत टीम ले कर देवरागुडीहल जंगल की तरफ रवाना हो गए थे.

चूंकि राकेश काटवे की गुमशुदगी की सूचना थाने में दर्ज थी, घर वालों ने उस की एक रंगीन तसवीर थाने में दी थी. कटा हुआ सिर तसवीर से काफी हद तक मेल खा रहा था, इसलिए थानाप्रभारी ने घटनास्थल पर बलदेव काटवे को भी बुलवा लिया, जिस से उस की शिनाख्त हो जाए. छानबीन के दौरान संदिग्ध अवस्था में घटनास्थल से कुछ दूरी पर एक मारुति रिट्ज और एक हुंडई कार बरामद की थी. दोनों कारों की पिछली सीटों पर खून के धब्बे लगे थे, जो सूख चुके थे. पुलिस का अनुमान था कि हत्यारों ने कार को लाश ठिकाने लगाने के लिए इस्तेमाल किया होगा. पुलिस ने दोनों कारों को अपने कब्जे में ले लिया.

दोनों कारों को कब्जे में लेने के बाद उन्होंने इस की सूचना एसपी (ग्रामीण) पी. कृष्णकांत और पुलिस कमिश्नर लभु राम को दे दी थी. दिल दहला देने वाली घटना की सूचना मिलते ही पुलिस अधिकारी मौके पर पहुंच गए थे. उन्होंने घटनास्थल और कटे हुए अंगों का निरीक्षण किया. शरीर के अंगों को देखने से ऐसा लगता था जैसे हत्यारों ने बड़े इत्मीनान से किसी  धारदार हथियार से उसे छोटेछोटे टुकड़ों में काटा होगा. पुलिस उन तक पहुंच न पाए, इसलिए लाश जंगल में ले जा कर अलगअलग जगहों पर फेंक दी, ताकि लाश की शिनाख्त न हो सके. बहरहाल, थानाप्रभारी की यह तरकीब वाकई काम कर गई. उन्होंने जब बलदेव काटवे को सिर के फोटो दिखाए तो फोटो देखते ही बलदेव काटवे पछाड़ मार कर जमीन पर गिर गए.

यह देख कर पुलिस वालों को समझते देर न लगी कि कटे हुए सिर की पहचान उन्होंने कर ली है. थोड़ी देर बाद जब वह सामान्य हुए तो वह दहाड़ मारमार कर रोने लगे. वह कटा हुआ सिर उन के लाडले बेटे राकेश काटवे का था. पुलिस यह जान कर और भी हैरान थी कि कहीं गदग रोड स्थित कुएं से बरामद कटे अंग राकेश के तो नहीं हैं. लेकिन पुलिस की यह आशंका भी जल्द ही दूर हो गई थी. बलदेव काटवे ने हाथ और पैर की अंगुलियों से लाश की पहचान अपने बेटे के रूप में कर ली थी. 24 घंटे के अंदर पुलिस ने राकेश काटवे की गुमशुदगी के रहस्य से परदा उठा दिया था. हत्यारों ने बड़ी बेरहमी से उसे मौत के घाट उतारा था.

पुलिस ने लाश का पंचनामा भर कर उसे पोस्टमार्टम के लिए जिला अस्पताल भिजवा दिया. लेकिन एक बात से राकेश के मांबाप और पुलिस हैरान थे कि राकेश की जब किसी से दुश्मनी नहीं थी तो उस की हत्या किस ने और क्यों की? इस का जबाव न तो पुलिस के पास था और न ही उस के मांबाप के पास. दोनों ही इस सवाल से निरुत्तर थे. किस ने और क्यों, का जबाव तो पुलिस को ढूंढना था. राकेश की हत्या की गुत्थी सुलझाने के लिए पुलिस ने वैज्ञानिक साक्ष्यों को अपना हथियार बनाया. पुलिस ने सब से पहले राकेश काटवे के फोन की काल डिटेल्स निकलवाई. काल डिटेल्स से पुलिस यह पता लगाने की कोशिश में जुट गई कि आखिरी बार राकेश से किस की और कब बात हुई थी?

जांचपड़ताल में आखिरी बार उस की बहन शनाया से बातचीत के प्रमाण मिले थे. रात में 7 और 8 बजे के बीच में शनाया और राकेश के बीच लंबी बातचीत हुई थी. उस के बाद उस के फोन पर किसी और का फोन नहीं आया था. इस का मतलब आईने की तरह साफ था कि राकेश की हत्या रात 8 बजे के बाद की गई थी. पुलिस के सामने एक और हैरानपरेशान कर देने वाली सच्चाई सामने आई थी. घटना वाले दिन शनाया ने अपने फिल्म के प्रमोशन पर एक पार्टी रखी थी. उस पार्टी में राकेश को छोड़ घर के घर सभी सदस्य शमिल थे तो उस का भाई राकेश पार्टी में शामिल क्यों नहीं हुआ? वह कहां था?

इंसपेक्टर एस. शंकराचार्य के दिमाग में यह बात बारबार उमड़ रही थी कि जब घर के सभी सदस्य पार्टी में शमिल थे तो राकेश किस वजह से घर पर रुका रहा? इस ‘क्यों’ का जबाव मिलते ही हत्या की गुत्थी सुलझ सकती थी. आखिरकार पुलिस की मेहनत रंग लाई. घटनास्थल से बरामद हुई दोनों कारों में से एक मारुति रिट्ज कार मृतक राकेश काटवे की बहन शनाया काटवे के नाम पर रजिस्टर्ड थी. दूसरी हुंडई कार किसी अमन नाम के व्यक्ति के नाम पर थी. यह जान कर पुलिस के पैरों तले से जैसे जमीन खिसक गई कि शनाया काटवे की कार घटनास्थल पर कैसे पहुंची? राकेश के मर्डर से शनाया का क्या संबंध हो सकता है? क्या शनाया का हत्यारों के साथ कोई संबंध है? ऐसे तमाम सवालों ने पुलिस कमिश्नर लभु राम, एसपी (ग्रामीण) पी. कृष्णकांत और थानाप्रभारी को हिला कर रख दिया था.

एसपी (ग्रामीण) पी. कृष्णकांत के नेतृत्व में राकेश काटवे हत्याकांड की बिखरी कडि़यों को जोड़ने के लिए थानाप्रभारी बेताब थे. उन्होंने घटना का परदाफाश करने के लिए मुखबिरों को लगा दिया था. घटना के 4 दिनों बाद 14 अप्रैल को मुखबिर ने जो सूचना दी, उसे सुन कर थानाप्रभारी को मामले में प्रगति नजर आई. मुखबिर ने उन्हें बताया था कि भाईबहन शनाया और राकेश के बीच में अच्छे रिश्ते नहीं थे. बरसों से उन के बीच में छत्तीस का आंकड़ा बना हुआ था. मुखबिर की यह सूचना पुलिस के लिए काम की थी. पुलिस ने दोनों के बिखरे रिश्तों का सच तलाशना शुरू किया तो जल्द ही सारा सच सामने आ गया. दरअसल, राकेश शनाया के प्रेम की राह में एक कांटा बना हुआ था. शनाया का नियाज अहमद काटिगार के साथ प्रेम संबंध था. इसी बात को ले कर अकसर दोनों भाईबहन के बीच में झगड़ा हुआ करता था.

राकेश को बहन का नियाज से मेलजोल अच्छा नहीं लगता था, जबकि शनाया को भाई की टोकाटोकी सुहाती नहीं थी. यही दोनों के बीच खटास की वजह थी. घटना के खुलासे के लिए इतनी रौशनी काफी थी. सबूतों के आधार पर 17 अप्रैल को हुबली पुलिस ने नियाज अहमद काटिगार को उस के घर से गिरफ्तार कर लिया और पूछताछ के लिए थाने ले आई. अपराधी चढ़े पुलिस के हत्थेथाने में कड़ाई से हुई पूछताछ में नियाज अहमद पुलिस के सामने टूट गया और राकेश की हत्या का अपना जुर्म कबूल कर लिया. आगे की पूछताछ में उस ने यह भी बताया कि इस घटना में उस के साथ उस के 3 साथी तौसीफ चन्नापुर, अलताफ तैजुद्दीन मुल्ला और अमन गिरनीवाला शमिल थे. उस के बयान के आधार पर उसी दिन तीनों आरोपी गिरफ्तार कर लिए गए.

पुलिस पूछताछ के दौरान नियाज अहमद ने प्रेमिका शनाया काटवे के कहने पर राकेश की हत्या करना कबूल किया था. 5 दिनों बाद 22 अप्रैल, 2021 को राकेश हत्याकांड की मास्टरमाइंड शनाया काटवे को हुबली पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया. शनाया ने बड़ी आसानी से पुलिस के सामने घुटने टेक दिए. उस ने भाई राकेश की हत्या कराने का अपना जुर्म मान लिया था. पुलिस पूछताछ में राकेश काटवे हत्याकांड की कहानी ऐसे सामने आई—

25 वर्षीया शनाया काटवे मूलरूप से उत्तरी कर्नाटक के धारवाड़ जिले की हुबली की रहने वाली थी. वह मां सोनिया काटवे और पिता बलदेव की इकलौती संतान थी. इस के अलावा काटवे दंपति की कोई और संतान नहीं थी. एक ही संतान को पा कर दोनों खुश थे और खुशहाल जीवन जी रहे थे. लेकिन बेटे की चाहत कहीं न कहीं पतिपत्नी के मन में बाकी थी. पतिपत्नी जब भी अकेले में होते तो एक बेटे की अपनी लालसा जरूर उजागर करते. आखिरकार उन्होंने फैसला किया कि वे एक बेटे को गोद लेंगे, अपनी कोख से नहीं जनेंगे. जल्द ही काटवे दंपति की वह मंशा पूरी हो गई. गोद लिया भाई था राकेश उन्होंने अपने एक रिश्तेदार के बेटे को कानूनी तौर पर गोद ले लिया और पालपोस कर उसे बड़ा किया. तब राकेश साल भर का रहा होगा. काटवे दंपति के गोद में राकेश पल कर बड़ा हुआ.

उन की अंगुलियां पकड़ कर चलना सीखा. सयाना और समझदार हुआ तो मांबाप के रूप में उन्हें ही सामने पाया. वही उस के मांबाप थे, राकेश यही जानता था. उन्होंंने भी शनाया और राकेश के बीच कभी फर्क नहीं किया. लेकिन शनाया जानती थी कि राकेश उस का सगा भाई नहीं है, उसे मांबाप ने गोद लिया है. बचपन से ही शनाया राकेश से नफरत करती थी, उस से चिढ़ती थी. चिढ़ उसे इस बात से हुई थी कि उस के हिस्से की आधी खुशियां और सुख राकेश की झोली में जा रहे थे. शनाया फुरसत में जब भी होती, यही सोचती कि वह नहीं होता तो जो सारी खुशियां, लाड़प्यार राकेश को मिलता है, उसे ही नसीब होता. लेकिन उस के हिस्से के प्यार पर डाका डालने न जाने वह कहां से आ गया.

यही वह खास वजह थी जब शनाया बचपन से ले कर जवानी तक राकेश को फूटी आंख देखना नहीं चाहती थी. उस से नफरत करती थी. लेकिन इस से राकेश को कोई फर्क नहीं पड़ता था कि शनाया उसे प्यार करती थी या नफरत. वह तो उस की परछाईं को अपना समझ कर उस के पीछे भागता था, उसे बहन के रूप में प्यार करता था. क्योंकि उस के मांबाप ने उसे यही बताया था. खैर, शनाया और राकेश बचपन की गलियों को पीछे छोड़ अब जवानी की दहलीज पर खड़े थे. जिस प्यार को मांबाप ने दोनों में बराबर बांटा था, दोनों के अपने रास्ते अलगअलग थे. हुबली से ही स्नातक की डिग्री हासिल कर शनाया काटवे की बचपन से रुपहले परदे पर स्टार बन कर चमकने की दिली ख्वाहिश थी.

अपने सपने पूरे करने के लिए वह दिनरात मेहनत करती थी. इस के लिए उस ने मौडलिंग की दुनिया को सीढ़ी बना कर आगे बढ़ना शुरू किया. शनाया बला की खूबसूरत और बिंदास लड़की थी. अपनी सुंदरता पर उसे बहुत नाज था. आदमकद आईने के सामने घंटों खड़ी हो कर खुद को निहारना उस के दिल को सुकून देता था. यही नहीं, जीने की हसरत उस में कूटकूट कर भरी थी. उस के खयालों में नियाज अहमद काटिगार सुनहरे रंग भर रहा था. अमीर बाप की बिगड़ी औलाद था नियाज हुबली का रहने वाला 22 वर्षीय नियाज अहमद अमीर मांबाप की बिगड़ी हुई औलाद था. बाप के खूनपसीने से कमाई दौलत यारदोस्तों में दोनों हाथों से पानी की तरह बहा रहा था. उन यारदोस्तों में एक नाम शनाया काटवे का भी था.

नियाज के दिल की धड़कन थी शनाया. उस के रगों में बहने वाला खून थी शनाया. शनाया के बिना जीने की वह कभी कल्पना नहीं कर सकता था. शनाया और नियाज एकदूसरे से बेपनाह मोहब्बत करते थे. दोनों की मुलाकात एक पार्टी में हुई थी. शनाया की खूबसूरती देख कर नियाज घायल हो गया था. वह पहली नजर में ही शनाया को दिल दे बैठा था. उठतेबैठते, सोतेजागते, खातेपीते हर जगह उसे शनाया ही नजर आती थी. ऐसा नहीं था कि मोहब्बत की आग एक ही तरफ लगी हो. शनाया भी उसी मोहब्बत की आग में जल रही थी. मोहब्बत की आग दोनों ओर बराबर लगी थी. एकदूसरे के साथ जीनेमरने की कसमें दोनों ने खाईं और भविष्य को ले कर सपने देख रहे थे.

खुले आसमान के नीचे अपनी बांहें फैलाए नियाज और शनाया भूल गए थे कि उन का प्यार ज्यादा दिनों तक चारदीवारी में कैद नहीं रह सकता. वह फिजाओं में खुशबू की तरह फैल जाता है. शनाया और नियाज की मोहब्बत भी ज्यादा दिनों तक छिपी नहीं रही. शनाया के भाई राकेश काटवे को बहन के प्रेम की सूचना मिली तो वह आगबबूला हो गया था. उस ने अपनी तरफ से सच्चाई का पता लगाया तो बात सच निकली. बहन को हिदायत दी थी राकेश ने शनाया एक मुसलिम युवक नियाज अहमद से प्यार करती थी. उस ने बड़े प्यार से एक दिन बहन से पूछा, ‘‘यह मैं क्या सुन रहा हूं शनाया?’’

‘‘क्या सुन रहे हो भाई, मुझे भी तो बताओ.’’ शनाया ने पूछा.

‘‘क्या तुम सचमुच नहीं जानती कि मैं क्या कहना चाहता हूं?’’ वह बोला.

‘‘नहीं, सचमुच मैं नहीं जानती, आप क्या कहना चाहते हो और मेरे बारे में आप ने क्या सुना है?’’ शनाया ने सहज भाव से कहा.

‘‘उस नियाज से तुम दूरी बना लो, यही तुम्हारी सेहत के अच्छा होगा. मैं अपने जीते जी खानदान की नाक कटने नहीं दूंगा. अगर  तुम ने मेरी बात नहीं सुनी या नहीं मानी तो यह नियाज मियां के सेहत के लिए अच्छा नहीं होगा.’’ भाई के मुंह से नियाज का नाम सुनते ही शनाया के होश उड़ गए.

‘‘जैसा तुम सोच रहे हो भाई, हमारे बीच में ऐसी कोई बात नहीं है. हम दोनों एक अच्छे दोस्त भर हैं.’’ शनाया ने सफाई देने की कोशिश की, लेकिन वह घबराई हुई थी.

‘‘मेरी आंखों में धूल झोंकने की कोशिश मत करना. तुम दोनों के बारे में मुझे सब पता है. कई बार मैं ने खुद तुम दोनों को एक साथ बांहों में बांहें डाले देखा है. जी तो चाहा कि तुम्हें वहीं जान से मार दूं, लेकिन मम्मीपापा के बारे में सोच कर मेरे हाथ रुक गए. तुम अब भी संभल जाओ. तुम्हारी सेहत के लिए यही अच्छा होगा. नहीं तो इस का अंजाम बहुत बुरा हो सकता है, जो न मैं जानता हूं और न ही तुम, समझी.’’

‘‘प्लीज भाई, मम्मीपापा से कुछ मत कहना,’’ शनाया भाई के सामने गिड़गिड़ाई, ‘‘नहीं तो उन के दिल को बहुत ठेस लगेगी. वे मेरे बारे में क्या सोचेंगे. मेरी उन की नजरों में सारी इज्जत खत्म हो जाएगी. प्लीज…प्लीज… प्लीज, मम्मीपापा से कुछ मत कहना, मेरे अच्छे भाई.’’

‘‘ठीक है, ठीक है, सोचूंगा. मुझे क्या करना होगा लेकिन तुम ने अपनी आदत में बदलाव नहीं लाया तो सोचना कि मैं तुम्हारे लिए कितना खतरनाक बन जाऊंगा, मैं खुद भी नहीं जानता.’’

राकेश ने शनाया को प्यार से समझाया भी और धमकाया भी. उस के बाद उस ने मम्मीपापा से बहन की पूरी हकीकत कह सुनाई. बेटी की करतूत सुन कर वे शर्मसार हो गए. मांबाप ने भी बेटी को समझाया और नियाज से दूर रहने की सलाह दी. वैसे भी शनाया भाई से छत्तीस का आंकड़ा रखती थी. उस के मना करने के बावजूद राकेश ने उस के प्यार वाली बात मांबाप से बता दी थी.  यह सुन कर उस के सीने में भाई के प्रति नफरत की आग धधक उठी थी. प्यार की राह का कांटा बना राकेश राकेश बहन के प्रेम की राह का कांटा बना हुआ था. राकेश के कई बार समझाने के बावजूद शनाया ने नियाज से मिलना बंद नहीं किया था. इसे ले कर दोनों में अकसर झगड़े होते रहते थे.

रोजरोज की किचकिच से शनाया ऊब चुकी थी. वह नहीं चाहती थी कि उस के और उस के प्यार के बीच में कोई कांटा बने. भाई की टोकाटोकी से तंग आ कर शनाया ने उसे रास्ते से हटाने की खतरनाक योजना बना ली. शनाया ने अपनी अदाओं से प्रेमी नियाज अहमद को उकसाया कि अगर मुझे प्यार करते हो तो हमारे प्यार के बीच कांटा बने भाई राकेश को रास्ते से हटा दो, नहीं तो मुझे हमेशा के लिए भूल जाओ. नियाज अहमद शनाया से दूर हो कर जीने की कल्पना भी कर नहीं सकता था. उस ने प्रेमिका का दिल जीतने के लिए राकेश को रास्ते से हटाने के लिए हामी भर दी. इस खतरनाक योजना को अंजाम देने के लिए उस ने अपने 3 साथियों तौसीफ चन्नापुर, अलताफ तैजुद्दीन मुल्ला और अमन गिरनीवाला को शमिल कर लिया.

इस के बाद राकेश को रास्ते से हटाने की योजना बनी. खतरनाक योजना खुद शनाया ने ही बनाई. इसे 9 अप्रैल, 2021 को अंजाम देने की तारीख तय की गई. उस दिन उस ने अपनी नई फिल्म ‘आेंडू घंटेया काठे’ की प्रमोशन रखवाई थी. चतुर शनाया ने इसलिए यह तारीख निर्धारित की थी ताकि उस पर किसी का शक न जाए और रास्ते का कांटा सदा के लिए हट भी जाए. यानी सांप भी मर जाए, लाठी भी न टूटे. योजना के मुताबिक, 9 अप्रैल, 2021 को शनाया काटवे फिल्म प्रमोशन के लिए जब पार्टी में पहुंची, तभी उस ने नियाज अहमद को फोन कर के बता दिया कि राकेश पार्टी में नहीं आएगा, वह घर पर अकेला है. मांबाप भी पार्टी में आए हुए हैं. यही सही वक्त है, काम को अंजाम दे दो.

घर पर ही किए थे राकेश के टुकड़े शनाया की ओर से हरी झंडी मिलते ही नियाज अहमद, साथियों के साथ अमन गिरनीवाला की हुंडई कार ले कर पार्टी वाली जगह पहुंचा. वहां से शनाया की मारुति रिट्ज कार ले कर रात साढ़े 8 बजे उस के घर पहुंचा. उस की कार नियाज अहमद खुद ड्राइव कर रहा था. उस कार में नियाज के साथ तौसीफ चन्नापुर बैठा था जबकि अमन गिरनीवाला की हुंडई कार में अलताफ तैजुद्दीन मुल्ला सवार था. खैर, रात साढ़े 8 बजे जब नियाज शनाया के घर पहुंचा तो राकेश काटवे घर पर ही था. नियाज ने कालबैल बजाई तो राकेश ने दरवाजा खोल दिया. सामने नियाज को देख कर वह चौंक गया. इस से पहले कि वह सावधान हो पाता, नियाज और उस के साथी अचानक उस पर टूट पड़े.

नियाज ने गला दबा कर उसे मौत के घाट उतार दिया. फिर लाश को ठिकाने लगाने के लिए नियाज ने अपने साथ लाए धारदार चाकू से राकेश के शरीर को 5 टुकड़ों में काट दिया और फर्श पर पड़े खून को एक कपड़े से साफ कर साक्ष्य मिटा दिए. फिर एक पैकेट में सिर और दूसरे पैकेट में बाकी अंग रख कर चारों लोग 2 गाडि़यों में सवार हो कर देवरागुडीहल जंगल की तरफ रवाना हो गए. नियाज ने राकेश का कटा सिर जंगल में फेंक दिया और दोनों कार वहीं छोड़ कर चारों गदग रोड जा पहुंचे. वहां एक कुएं में कटे अंग डाल कर सभी फरार हो गए.

शनाया काटवे ने मौत की परफैक्ट प्लानिंग की थी. लेकिन वह यह भूल गई थी कि अपराधी कितना ही चालाक क्यों न हो, कोई न कोई सुराग छोड़ ही जाता है. शनाया ने भी वैसा ही किया. वह कानून के लंबे हाथों से बच नहीं पाई और पुलिस के हत्थे चढ़ गई. सभी अभियुक्तों से विस्तार से पूछताछ करने के बाद पुलिस ने उन्हें न्यायालय में पेश कर जेल भेज दिया. Hindi love Stories

—कथा पुलिस सूत्रों पर आधारित

UP Crime : तकिए से मुंह तब तक दबाया जब तक पत्नी की सांसें थम नहीं जाएं

UP Crime : सरकारी स्कूल की शिक्षिका चंदा अय्याश पति संजय लूथरा को अपनी आदतें सुधारने के लिए समझाती थी, लेकिन संजय अपने दोस्त डा. रजत भारद्वाज के साथ घर में ही बाहरी लड़कियों को बुला कर अय्याशी करता था. एक दिन चंदा ने उन्हें रंगेहाथ पकड़ लिया. फिर…

उस समय सुबह के करीब 4 बज रहे थे. इतनी सुबह मोबाइल की घंटी बजने पर मोहित ने काल रिसीव करने से पहले सोचा कि सुबहसुबह किस का फोन आ गया? उस ने काल रिसीव कर जैसे ही हैलो कहा. दूसरी ओर से उस के जीजा संजय लूथरा की भर्राई आवाज सुनाई दी, ‘‘रात को चंदा का कोलेस्ट्राल बढ़ने से अटैक पड़ गया, जिस से उस की मौत हो गई.’’ चंदा मोहित की बहन थी. यह सुनते ही मोहित के मुंह से चीख निकल गई. मोहित की चीख सुन कर घर वालों की नींद टूट गई. पता नहीं सुबहसुबह मोहित क्यों रो रहा है, यह जानने के लिए सभी उस के कमरे की ओर दौड़े.

मोहित ने उन्हें बताया कि बहन चंदा की मौत हो गई है. संजय का फोन आया था. यह सुनते ही घर में कोहराम मच गया. यह बात 21 फरवरी, 2021 की है. यह दुखद खबर मिलने के बाद चंदा के पिता ओमप्रकाश अरोड़ा घर के अन्य लोगों के साथ सुबह ही खतौली से मेरठ के शास्त्रीगनर स्थित चंदा की ससुराल जा पहुंचे. वहां घर के बाहर टेंट लगा था और बैठने के लिए कुरसियां लगी थीं. 38 वर्षीय शिक्षिका चंदा का शव बैड पर पड़ा था. लाडली बेटी के शव को देखते ही मां सुनीता, पिता ओमप्रकाश, बहन ज्योति व भाई मोहित बिलखने लगे. मायके वालों ने शव को गौर से देखा. शव पर चोटों के निशान देखते ही घर वालों ने हंगामा कर दिया.

पति संजय पर चंदा की हत्या का आरोप लगाते हुए मोहित ने पुलिस को सूचना दे दी. कुछ देर में थाना नौचंदी पुलिस शास्त्रीनगर थानाप्रभारी प्रेमचंद्र शर्मा ने हंगामा कर रहे मृतका के घर वालों को शांत कराया. हंगामे की जानकारी होने पर सीओ (सिविल लाइंस) देवेश सिंह फोरैंसिक टीम के साथ  घटनास्थल पर पहुंच गए. उन्होंने घटनास्थल का निरीक्षण किया. इस बीच वहां काफी भीड़ जमा हो गई. चंदा के मायके वालों ने आरोप लगाया कि चंदा की उस के पति संजय ने पीटपीट कर हत्या की है. उस के शरीर पर चोट के निशान भी हैं. मायके वालों ने बताया कि पति संजय की गंदी आदतों का चंदा विरोध करती थी. इस बात को ले कर दोनों के बीच झगड़ा रहता था.

पुलिस ने किसी तरह समझाबुझा कर शव को पोस्टमार्टम के लिए भिजवा दिया. पुलिस संजय को हिरासत में ले कर थाने लौट आई. चूंकि मृतका एक शिक्षिका थी, इसलिए सूचना मिलने पर मुजफ्फरनगर शिक्षक संघ के अध्यक्ष बालेंद्र सिंह अपने साथियों संजीव, ओमप्रकाश, अभिषेक, सुमित, नीतू, रजनीश, अशोक, मनीष आदि के साथ थाने पहुंच गए और दोषी के खिलाफ काररवाई की मांग की. पूछताछ में संजय ने पुलिस को बताया, ‘‘रात करीब ढाई बजे चंदा को हार्ट अटैक आया था. इस के चलते वह बैड से नीचे गिर गई और उस की मौके पर ही मौत हो गई.’’

पुलिस को मृतका की जो पोस्टमार्टम रिपोर्ट मिली, उस में हत्या का कारण स्पष्ट नहीं था. तब पुलिस ने संजय को निर्दोष मानते हुए क्लीन चिट दे दी और थाने से छोड़ दिया. पोस्टमार्टम रिपोर्ट आई संदिग्ध  पोस्टमार्टम रिपोर्ट में मृतका के शरीर की चोटों का कोई उल्लेख ही नहीं किया गया था. वहीं हत्या का कारण जानने के लिए मृतका के विसरा को सुरक्षित रखवा दिया गया. इस से नौचंदी पुलिस की भूमिका पर सवाल उठने लगे. मृतका के मायके वालों का आरोप था कि चंदा के शरीर पर चोट के निशान थे. उन का जिक्र पोस्टमार्टम रिपोर्ट में क्यों नहीं किया गया. और पूरी जांच किए बिना ही नौचंदी पुलिस ने उस के पति संजय को क्लीन चिट कैसे दे दी?

मृतका के पिता ओमप्रकाश अरोड़ा का आरोप था कि मर्डर प्रीप्लान हुआ है. क्योंकि चंदा की मौत होने के बाद उस का जल्दी अंतिम संस्कार करने की पूरी तैयारी संजय ने पहले से ही कर ली थी. यहां तक कि श्मशान घाट तक शव ले जाने के लिए शव वाहन भी मंगा लिया था. मायके वालों की शिकायत पर एसएसपी अजय साहनी ने मामला अपने हाथ में ले कर जांच शुरू कराई. उन्होंने संजय के जब्त किए गए मोबाइल की जांच की जिम्मेदारी नौचंदी थाने के इंसपेक्टर (क्राइम) राम सजीवन को सौंपी. उन्होंने इस मोबाइल को जांच के लिए फोरैंसिक लैब भेज दिया. फोरैंसिक जांच में खुलासा हुआ कि मोबाइल से फोटो घटना वाली रात ही डिलीट किए गए थे.

वह फोटो पुलिस ने रिकवर कराए तो पुलिस के पांव तले जमीन खिसक गई. उन फोटो से पूरे केस का परदाफाश हो गया. उन में से एक फोटो में एक व्यक्ति बैड पर लेटी चंदा का तकिए से मुंह दबाता हुआ नजर आ रहा था. इस के बाद एसएसपी ने चंदा के पति संजय को दोबारा हिरासत में ले कर उस से गहनता से पूछताछ की. संजय खुद को निर्दोष बताता रहा. वह एक ही राग अलापता रहा कि चंदा की मौत हार्ट अटैक से हुई थी. पुलिस ने संजय को मोबाइल से रिकवर फोटो दिखाया, जिस में चंदा की तकिए से मुंह दबा कर हत्या की जा रही थी. फोटो देखते ही संजय के चेहरे की हवाइयां उड़ गईं. पूछताछ के दौरान वह सवालों में घिर गया. आखिर में उस ने पत्नी चंदा की

हत्या का आरोप अपने दोस्त डा. रजत भारद्वाज पर लगाते हुए चंदा की हत्या की सच्चाई उगल दी. एसएसपी अजय साहनी ने इस सनसनीखेज हत्याकांड का परदाफाश 24 फरवरी, 2021 को आयोजित प्रैस कौन्फ्रैंस में कर दिया. एसएसपी ने 2 हत्यारोपियों की गिरफ्तारी की जानकारी दी. पुलिस ने दोनों की निशानदेही पर तकिया, नशीली गोलियां और कपड़े बरामद कर लिए. दोनों से चंदा हत्याकांड के बारे में पूछताछ की गई तो उन्होंने चंदा की हत्या करने का जुर्म कबूल कर लिया. हत्याकांड के पीछे अपनी अय्याशी के रास्ते की कांटा बनी पत्नी चंदा को हटाने और उस के बीमे की धनराशि हड़पने की योजना थी.

इस षडयंत्र में जागृति विहार निवासी दोस्त डा. रजत भारद्वाज भी शामिल था. उसी ने हत्या की सुपारी ली थी.  इस हत्याकांड के पीछे की जो कहानी सामने आई, वह इस तरह निकली—

टेंट कारोबारी संजय लूथरा की शादी करीब 9 साल पहले 2012 में खतौली के अशोक मार्केट निवासी ओमप्रकाश अरोड़ा की बेटी चंदा के साथ हुई थी. चंदा खतौली के लौहड्डा स्थित प्राथमिक विद्यालय में सहायक अध्यापिका के पद पर तैनात थी. चंदा और संजय लूथरा के दांपत्य जीवन में काफी पहले खटास आ चुकी थी. वर्ष 2015 में दोनों के बीच संबंध काफी बिगड़ गए, तब दोनों के बीच तलाक भी हो गया था. तलाक के बाद चंदा अपने 3 साल के बेटे को ले कर मायके चली गई थी. 6 महीने तक दोनों अलग रहे. परिवार की पंचायत में समझौता होने और संजय द्वारा माफी मांगे जाने के बाद  फिर से दोनों ने कोर्ट मैरिज की और साथ रहने लगे.

कुछ दिन सब ठीकठाक रहा. इस के बाद संजय अपनी बुरी आदतों से बाज नहीं आया. वह अपने बचपन के दोस्त डा. रजत भारद्वाज के साथ घर पर फिर से बाहरी युवतियों को लाने लगा. एक दिन चंदा स्कूल से लौटी तो घर का नजारा देख कर शर्म से पानीपानी हो गई. घर में एक बाहरी युवती के साथ संजय और उस का दोस्त डा. रजत मौजूद था. उस ने दोनों को घर में अय्याशी करते रंगेहाथों पकड़ लिया. चंदा ने दोनों को जम कर खरीखोटी सुनाई. उस ने कहा, वह पहले भी इस गलत काम के लिए मना कर चुकी है लेकिन तुम लोगों पर इस का कोई असर नहीं हुआ.

चंदा बनी अय्याशी में रोड़ा उस समय तो संजय खून का घूंट पी कर रह गया, पर रात में उस ने चंदा की बेरहमी से पिटाई की. यह बात घटना से लगभग डेढ़ महीने पहले की थी. अपनी अय्याशी में रोड़ा बनने वाली पत्नी को उस ने रास्ते से हटाने का फैसला ले लिया. संजय ने चंदा की हत्या की योजना बनाने के बाद उस का 50 लाख रुपए का जीवन बीमा भी करा दिया था, ताकि उस की हत्या के बाद ऐश की जिंदगी जी सके. पत्नी को रास्ते से हटाने के लिए संजय ने पूरी प्लानिंग की. संजय की अपने पड़ोसी और बचपन के दोस्त डा. रजत भारद्वाज पर 1.35 लाख की रकम उधार थी, जिसे माफ करने की एवज में संजय ने रजत को अपनी पत्नी चंदा की हत्या के लिए राजी कर लिया.

कुछ दिनों से चंदा बीमार चल रही थी. संजय डा. रजत से ही उस का इलाज करा रहा था. इस का फायदा उठाते हुए 20 फरवरी, 2021 को डा. रजत ने संजय को नशीली गोलियां देते हुए रात को दवा के बहाने खिलाने की सलाह दी. घटना वाली रात पौने 2 बजे डा. रजत उस के घर पहुंच गया. इस से पहले ही संजय अपनी पत्नी को नशीली गोलियां खिला कर सुला चुका था. डा. रजत ने बैड पर सो रही चंदा के मुंह पर तकिया रखा और फिर जान निकलने तक दबाए रखा. नींद व नशे में होने के कारण वह विरोध भी नहीं कर सकी. इस दौरान संजय ने घटना के फोटो खींच लिए थे. लेकिन जानकारी होने पर डाक्टर ने वे फोटो तत्काल डिलीट करा दिए. संजय को उम्मीद थी कि कत्ल का उस का मास्टर प्लान राज ही रहेगा. लेकिन कहते हैं न कि गुनाह कभी छिपता नहीं और गुनहगार कभी बचता नहीं. आखिर कत्ल

का राज उस की जेब में रखे मोबाइल में ही मिल गया. पुलिस ने दोनों हत्यारोपियों संजय लूथरा और डा. रजत भारद्वाज को कोर्ट में पेश किया, जहां से दोनों को जेल भेज दिया गया. इसी के साथ इस मामले में आननफानन में मृतका के पति को क्लीन चिट देने वाले इंसपेक्टर नौचंदी प्रेमचंद्र शर्मा की भी एसएसपी द्वारा जांच कराई जा रही थी. कथा लिखने तक चंदा का 8 वर्षीय बेटा अपनी नानी के पास रह रहा था. UP Crime

—कथा पुलिस सूत्रों पर आधारित